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सूर्य ....... इसका अध्यन करो आवर इसमें लिखी गुप्त मायावी आसुरी विद्या का अभ्यास करो
निर्भया ...... जी ठीक है स्वामी
सूर्य .......ऐसे मुँह न लटकाओ बस कुछ दिन आवर फिर तुम असुरलोक जा कर नरकासुर को ऊँगली कर सकते हो मैं तुम्हे नहीं रोकूंगा बिलकुल भी पैर तब तक इस पुस्तक में लिखी सभी विधायक को अध्यन कर उनके पारंगत हो जाओ जब तुम सफल हो जाओ तो जा सकते हो
निर्भया ......... ठीक है मैं जल्द से जल्दी इन सभी विधयो में पारंगगत हो जाऊंगा आप चिंता न करे .................
अब आगे ..........
परीलोक ................ सकती आवर महिमा जी सूर्य आवर उनके परिवार को ड्रैगन लोक के लिया विदा कर अपनी सोच में सबसे नजरे बचा कर एकांत के लिया निकल गए थे
सकती आवर महिमा ने अपनी आवर से पूरी कोशिश की थी की वो किसी के सामने न आ जाये पैर क्या ये संभव था
वैद्यराज सकती आवर अपनी बेटी महिमा को सभी से बच कर जाते हुए देख लेते है आवर ये सब करते देख उनके चेहरे पे ख़ुशी थी
रानी पारी भी जल्दी हे उनकी ख़ुशी का कारन समाज गई आवर वो भी मुस्कुराने लगी
गुरुदेव ........ पुत्री रिद्धि पुत्री पारिजात आज से अभी से पुत्री विधि आवर गायत्री को शिक्षा देने का कार्य आप दोनों का है साथ हे साथ आप दोनों को भी अन्नंत आयाम में योध अभ्यास आवर अपनी ऊर्जा को अपनी सकती में परिवर्तित करने का अभ्यास आरम्भ कर देना चाइये पुत्री
रानी पारी ........ किन्तु गुरुदेव ये कार्य विवाह के पश्चात नहीं हो सकता क्या आपके द्वारा निर्धारित तिथि में केवल 6 सूर्यौदय शेष है आपके अनुसार पुत्री पारिजात आवर पुत्री जीनत का विवाह आज से थी 7 वे सूर्यौदय को है
गुरुदेव. ........ आपका कथन उचित है रानी पारी किन्तु पुत्री पारिजात आवर पुत्री जीनत का विवाह भी परीलोक के रीती रिवाज से होना है न की पृथ्वीलोक के नियम अनुसार
रानी पारी ........ जी गुरुदेव किन्तु क्या आपने इस विषय में प्रेतराज जी से चर्चा की गुरुदेव मन की प्रेतलोक के अपने कोई रीती रिवाज नहीं विवाह पढ़ती को ले कर के क्युकी वह सर सरीर केवल प्रेतराज आवर पुत्री जीनत हे है बाकि ......
गुरुदेव ........ हम समाज रहे है आपका मंतव्य रानी पारी किन्तु एक सत्य ये भी है की भले हे प्रेतराज आवर पुत्री जीनत के अलावा प्रेत लोक में सर सरीर निवेश नहीं कर सकता क्युकी प्रेतलोक प्रेत आत्माओ का लोक है किन्तु पुत्री जीनत प्रेतलोक की राजकुमारी भी है ऐसे में प्रेतलोक की आत्माये पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत के विवाह में शामिल होने की इच्छा अवश्य प्रेतराज के समक्ष रखेंगे जिन्हे वो भी नहीं नकार सकते है
रानी पारी ....... फिर तो ये बड़ी समस्या हो जाएगी गुरुदेव
गुरीदेव ........ हम इस विषय पे प्रेतराज से चर्चा करते है आप निश्चित रहे कोई न कोई मार्ग अवश्य निकल आएगा
रानी पारी ....... . जी गुरुदेव
गुरुदेव ......... वैध्य्राज हमें आपसे एकांत में आवशयक विषय पे चर्चा करनी है
वैद्यराज ........ जी गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा
गुरुदेव ....... चलिए हमारे साथ बचो को एकांत में कुछ समय वयतीत करने दीजिये पुत्री रिद्धि विधि पारिजात गायत्री आप लोग अन्नंत आयाम की आवर परस्थान करो
रिद्धि ....... जी पिता श्री
गुरुदेव वैद्यराज दोनों मंदिर के भीतर प्रवेश कर जाते है आवर मंदिर के अंदर की आवर से गुजरते हुए मंदिर के पीछे बने सरोवर को पार कर एक गुफा में प्रवेश करते है जिसका न कोई चोर नजर आ रहा था न कोई अंत नजर आ रहा था
वैद्यराज आवर गुरुदेव उस गुफा में कुछ आगे जाने के बाद उनके सामने एक पारदर्शी दिवार नजर आती है जो पास से भी बहुत गौर करने पे नजर आ रही थी उसने दूर से देखना तो संभव भी नहीं था
वैद्यराज ......... गुरुदेव ये तो आपका दिव्या जड़ी बूटी क्षेत्र है जहा आपके अलावा किसी अन्य को जाने का अदिकार नहीं है
गुरुदेव ......... उचित कहा वैद्यराज आपने आप वो दूसरे व्यक्ति है पुत्री रिद्धि के बाद जिसने इस क्षेत्र में प्रवेश किया है
कुछ आगे जाने के बाद गुफा की एक दिशा से बहुत हे प्यारी मन को प्रफुलित करने वाली ऊर्जा से भरपूर खुशबु वैद्यराज को सांसो से होते हुए उनके मन में उपजे सभी विचारों को संत कर रही थी
गुरुदेव गुफा की एक दिवार पे अपनी जादुई छड़ी से एक रौशनी डालते है रौशनी की वो किरण दिवार से टच होते हे वह की दिवार गायब हो जाती है आवर वह एक रास्ता नजर आने लगता है
गुरुदेव आवर वैद्यराज दोनों उस रस्ते से होते हुए गुफा से बहार निकल आते है जहा खुले आसमान के निचे रंग बिरंगी जड़ी बुटिया थी जिनसे मन मोहक ख़ुशी निकल रही थी
यहाँ की हवा में जैसे कुछ बहुत खाश था वैद्यराज जैसे खुद को सवरग के किसी दिव्या उद्यान में उपस्थित होने जैसा अनुभव कर प् रहे थे
वैद्यराज ........ गुरुदेव ये तो बहुत हे दिव्या स्थल है यहाँ तो दिव्या जड़ी बूटियों का भंडार है किन्तु मैं अभी भी समझने में असमर्थ हूँ की मेरा यहाँ होने का कारन क्या है गुरुदेव
गुरुदेव ......... हम चाहते है की तुम्हे इन सभी जड़ी बूटियों की पहचान आवर इनका ज्ञान प्राप्त हो ताकि भविष्य में हमारी अनुपस्थिति में तुम इन जड़ी बूटियों से विषम से विषम रोगो का उपचार कर सको
वैद्यराज ....... ये मेरा शोभाग्य होगा गुरुदेव आपकी कृपा के लिया कोटि कोटि धन्यवाद गुरुदेव
गुरुदेव ........ किन्तु इन सभी जड़ी बूटियों की पहचान आवर किस रोग में किस जड़ी बूटी का प्रयोग होगा इसकी पहचान तुम्हे सवयं करनी होगी तभी तुम आईएम जड़ी बूटियों का प्रयोग करने में सक्षम हो सकते हो अन्यथा तुम इन्हें स्पर्श भी नहीं कर पाओगे
गुरुदेव वैद्यराज को कुछ जरुरी तथ्य समजा कर एक दिशा में भाड़ जाते है
कुछ दूर जाने के बाद गुरुदेव एक स्थान पे रुकते है जहा का दृश्य बड़ा हे अद्भुत था सामने एक सरोवर था जिसमे अलग अलग प्रकार के पौधे जल स्तर पे तैर रहे थे
गुरुदेव कुछ मंत्र उच्चारण करते है देखते हे देखते वो मंत्र उच्चारण वह गूंजने लगते है आवर उन सभी पोधो में से कुछ फूल पाटिया उड़ते हुए गुरुदेव के हाथो में आ कर अपने आप हे एकत्रित होने लगती है
ड्रैगन लोक ............
सुबह सूर्य की जब आँखे खुली तो पैलेस के अपने कक्ष के बीएड पे अकेला पाया
सूर्य ........ ये स्वीटी इतनी सुबह सुबह उठ कर कहा चली गई
सूर्य बीएड से उठा आवर कक्ष में सब तरफ नजरे दौड़ने के बाद अपने सरीर पे एक सही लबादा दाल कर कक्ष से बहार निकला बहार पहरेदार बड़ी हे मुस्तैदी से पहरेदारी कर रहा था
सूर्य ........ क्या प्रिंसेस किरण बहार है
सैनिक .......... जी प्रिंस सूर्य प्रिंसेस किरण कुछ समय पूर्व हे कक्ष से बहार गई है अध्यन की आवर आपके लिया उनका सन्देश है
सूर्य ........ कैसा सन्देश
सैनिक .......... प्रिंसेस किरण का सन्देश है की आप जब अपनी निद्रा पूर्ण कर ले तब उत्तरी दिशा में िस्थित उद्यान में आ जाये प्रिंसेस किरण वही ध्यान करने गयी है
सूर्य ......... ठीक है सन्देश के लिया धन्यवाद
( सूर्य ....... आज ऐसा क्या हुआ की किरण इतनी जल्दी उठ कर त्यार भी हो गई आवर ध्यान भी करने चली गई आवर उसने मुझे उठाया भी नहीं )
सूर्य अपने मन में विचार करते हुए अध्यन में पहुंचा जहा पहले से हे किरण मानसी शालिनी जी जूलिया चारो ध्यान में लीं थी
सूर्य ....... क्या बात है माँ मानसी आवर जूलिया भी यही मौजूद है
सूर्य उन्हें परेशान न करके गुरुदेव द्वारा दी पुस्तक का प्रयोग कर अपना योध अभ्यास आरम्भ कर देता है काफी समय बाद सूर्य पुस्तक के आयाम से बहार निकलता है आवर कुछ देर आराम कर ध्यान करने लग जाता है
सूर्यौदय के बाद सूर्य सभी के साथ सुबह का स्वादिस्ट नास्ता कर देवसूफ़ी नियों जी से बात करता है आवर कुछ देर बाद किरण को साथ लिया गोल्डन ड्रैगन सिटी से वाइट ड्रैगन पे बेथ उतर दिशा की आवर भाड़ जाता है
किरण ........ कुंवर जी आपने किस स्थान से खोजबीन करने का सोचा है
सूर्य ........ हम लोग निर्वाण सिटी की आवर भाड़ रहे है वही से खोजबीन करते हुए ब्लैक ड्रैगन सिटी पहुंचेंगे मुझे यकीं है की हमें कुछ न कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिलेगी यहाँ से आगे का वह चल कर देखेंगे
किरण. ........... वैसे आपने एक बात पे ध्यान दिया क्या जब हम यहाँ पहली बार आये तब से अब तक यहाँ की हवा में भी अलग सा बदलाव मह्सुश हो रहा है
सूर्य ......... बिलकुल सही कहा स्वीटी तुमने पहले जब हम अपने ड्रैगन की खोज में यहाँ आये थे तब यहाँ की हवा में एक सुकून था ताजगी का पैर अब जैसे हवा में भी हलकी नकारत्मकता मह्सुश हो रही है क्युकी ये बहुत काम मात्रा में है इस लिया इसका अभी तक यहाँ के इंसानो में या जीवो में इसका असर नहीं हुआ है
किरण ........ वैसे हमें निर्वाण सिटी तक पहुंचने में कितना समय लगेगा
सूर्य ........ हम सीधा निर्वाण सिटी नहीं जा रहे है सिटी के आस पास के कसबे से हम निर्वाण सिटी जायेंगे तक़रीबन 1 हर में हम इस माध्यम गति से निर्वाण सिटी पहुंच जायेंगे
सूर्य किरण छोटे बड़े जंगल आवर नदिया पर करते हुए बड़ी तेजी से निर्वाण सिटी की तरफ बिना किसी परेशानी के आगे भाड़ रहे थे
इस बिच कुछ छोटे बड़े कसबे भी उनकी नजरो में आये पैर वो लोग आगे बढ़ते रहे
करीब 1 हर से कुछ पहले सूर्य वाइट ड्रैगन को एक बड़ी नाड़ी किनारे उतरता है
किरण ........ क्या हम पहुंच गए
सूर्य ......... यहाँ से हम लोग आगे का सफर आकाश मार्ग से नहीं बल्कि जमीनी मार्ग से करेंगे ताकि हम ज्यादा से ज्यादा जानकारी जूता पाए
सूर्य वाइट ड्रैगन को आगे की निगरानी करने का बोल कर उस हे भेज देता है आवर किरण का हाथ थामे नदी किनारे से होते हुए कसबे की आवर जाने लगते है
कुछ आगे जाने के बाद किरण की नजर नदी के दूसरे किनारे की तरफ पड़ती है जहा कुछ घोड़े जैसे करीब 30 जीवो का झुंड पानी पे रहा था तभी कुछ उतनी संख्या में डायनोसोराश जैसे जिव जंगल से निकल कर उनपे हमला करने लगते है
किरण ......... ये कोनसे जिव है दिखने में तो घोड़े के जैसे हे है पैर इनका सरीर कुछ अलग है आवर सर पे सींग भी है जैसे जंगली बारहसिंघा हो पैर ये दूसरे डायनोसोराश जैसे जानवर इनपे हमला क्यों कर रहे है
सूर्य ........ पता नहीं क्यों पर ये सब जंगली घोड़ो की किसी खाश नेसल के जैसा हे झुंड है आवर सायद ये डायनोसोराश उनको अपना सीकर बना रहे है उनके बिच जो सबसे बड़ा सुनहरे सींग वाला घोड़े जैसा जिव है वो इस झुंड का मुखिया लगता है वही इन सबकी रक्षा आवर नेतृत्व कर रहा है है इन्हे यहाँ के लोग .मरुत ..के नाम से जानते है
किरण ......... किरण इन सफ़ेद छोड़ो जैसे जीवो से किसी तरह की ऊर्जा निकल रही है क्या ये जादुई घोड़े है
सूर्य ......... ये तो मुझे भी पता नहीं है चलो चल कर पता करते है तुम यही रुको मैं इनकी सहायता करता हूँ
किरण. ....... मैं भी साथ चलती हूँ
सूर्य किरण का हाथ थामे एक हे छलांग में नदी पार कर उन मारूफ हॉर्स आवर डायनसोराश के झुंड के पास जा पहुंचते है
सूर्य आवर किरण को अचानक से वह आता देख दोनों झुंड के बाकि घोड़े वह डायनसोराश अपने अपने मुखिया के पीछे खड़े हो जाते है कुछ 4,5 मरुत अभी भी अपने मुखिया के बराबर में खड़े थे जैसे वो अपने मुखिया का योध में साथ देने के लिया खड़े उसके योद्धा हो
तभी उनका मुखिया हिनहिनाता आवर सूर्य के सामने आ खड़ा होता है आवर गौर से सूर्य को देखता है
सूर्य ....... जबरन की जरुरत नहीं है हम आप लोगो को कोई नुकसान पहुंचने नहीं आये है बल्कि इन डायनसोराश से तुम सबकी की रक्षा करने आये है
सूर्य की बात सुन कर मरुत सूर्य को देखता है आवर अपना हल्का सुनहरा सींग आगे कर देता है
ऐसा करते हे सूर्य के दिमाग में कुछ आवाज सुनाई देती है
आवाज ......... तुम कोण हो आवर हमारी सहायता क्यों करना चाहते हो क्या तुम भी हमें मर कर हमारी सकतिया पाना चाहते हो
सूर्य उस आवाज को सुन कर चौंक जाता है आवर उसे बड़ा अजीब भी लगता है की कोई जिव इस तरह से कैसे बात कर सकता है जैसे कोई इंसान किसी दूसरे इंसान से करता है
सूर्य ........ क्या तुम मुझसे टेलीफेटी के जरिये बात कर रहे हो खेर जो भी है पहले इन डायनसोराश को उनकी सजा तो दे दूँ
सूर्य कुछ अग्नि पुंज बना कर उन डायनसोराश के झुंड की आवर फेंक देता है कुछ हे देर में सभी डायनसोराश घायल हो जाते है आवर अपनी जान बचा कर वह से भागने लगते है
किरण ....... वो सभ भाग रहे है कुंवर जी
सूर्य ....... जाने दो वैसे भी मैं उन्हें मरना नहीं चाहता वो सीकरी जिव है उन्हें सीकर करने से तो रोक नहीं सकता जीवो को मार कर खाना उनकी परवर्ती ( आदत )जो है
( किरण ......... कुंवर जी इन सब घोड़ी के सींग देखिये इनमे से मुझे किसी तरह की ऊर्जा निकलती हुई मह्सुश हो रही है पैर पहले तो ऐसा नहीं था )
( सूर्य ....... इसके बारे में तो यही जिव बता सकते है )
सूर्य ........ क्या तुम सभी मरुत नेसल के घोड़े हो आवर तुम सभी से किस तरह की ऊर्जा निकल रही है
एक बार फिर से ुशी घोड़े की आवाज सूर्य किरण को एक साथ उनके दिमाग में सुनाई देती है
आवाज ........ मैं नहुष हूँ इन मरुत होश के झुंड का मुखिया आपने हमारी रक्षा की उसके लिया हम सभी मरुत आपके आभारी है
सूर्य ....... तो तुम्हारा नाम नहुष है आवर तुम इस मरुत झुंड के मुखिया हो पैर जहा तक मैं जनता हूँ तुम सभी तो पहाड़ो में रहने वाले जिव हो फिर यहाँ इस जंगल में क्या कर रहे हो
नहुष ........ हम सब अपनी जान बचा कर गोल्डन ड्रैगन सिटी की खोज में निकले है आवर वही जा रहे है
नहुष की बात सुन किरण आवर सूर्य दोनों एक दूसरे को देखते है
किरण ....... तुम सब वह क्यों जा रहे हो वह तो काफी दूर है यहाँ से आवर नहीं उसका कोई एक स्थान है वो कभी भी कही भी हो सकती है
नहुष ......... हम हमारी प्रजाति के आखरी जिव है हमारा अंत हुआ तो हमारी प्रजाति हे ख़तम हो जाएगी सभी जानवर हमारी जादुई सक्तियो को पाने के लिया हमारा सीकर करना चाहते है अब हमारी आखरी उम्मीद गोल्डन ड्रैगन सिटी हे है
सूर्य ........ तो तुम सभी गोल्डन ड्रैगन सिटी अपनी सुरक्षा के लिया जाना चाहते हो इसमें मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ किन्तु
नहुष ........ अगर ऐसा हुआ तो हम सभी मरुत आपके जीवन भर आभारी रहेंगे
सूर्य ........ ठीक है मैं तुम सभी को वह पहुंचा दूंगा पैर उस से पहले मुझे आप सब से कुछ जानना है
नहुष ........ आप हमसे क्या जानना चाहते है आवर क्यों
सूर्य .......... मुझे जानना है की तुम किस क्षेत्र से यहाँ आये हो आवर आवर ऐसा क्या है वह जिसके चलते आपकी बाकि पद्धति मरी गई जबकि आप सभी जादुई मरुत है तो अवश्य सवयं की रक्षा कर सकते है
नहुष ......... हम उत्तर दिशा में िस्थित ब्लैक ड्रैगन सिटी के पुराने जंगल से यहाँ आये है हम जिस क्षेत्र की रक्षा करते थे वह कुछ समय से बहुत कुछ विचित्र घटना घाट रही है जिनने हम सब भी समाज नहीं प् रहे है अचानक से हमारा जल स्थार्थ दूषित हो कर कला पड़ने लग गया जो भी उस जल का पैन करता वो जिव बदलने लगता यहाँ तक की हम जादुई मरुत भी उस से बच नहीं पाए
किरण ......... तुम्हारा मतलब है की जो भी जानवर उस पानी को पिता है वो बदलने लगता है ऐसा कोनसा बदलाव देखा जो पहले से अलग हो
नहुष .......... जो भी जानवर उस पानी को पिता वो गुस्से में किसी पे भी हमला कर उसका अंत कर देता उन सभी से एक अलग हे तरह की ऊर्जा निकलती है उनकी आँखे आवर सरीर उस ऊर्जा के सम्पर्क में आने पर बदलने लगता है
सूर्य .......... ठीक है मैं आप सब को गोल्डन ड्रैगन सिटी पहुंचा देता हूँ पैर नहुष मुझे तुम्हारी मदद चाइये
नहुष .......... आप सवयं इतने सक्तिसाली है भला आपको हमारी मदद क्यों चाइये
सूर्य ........ क्युकी मुझे उस बदलाव के पीछे की वजह जानना है सायद तुम्हारी समस्या आवर हमारी मंजिल एक हे हो
नहुष ......... आपने हमारी जान बचाई है मैं अपने साथियो को सुरक्षित करने के बाद हे आप की सहायता कर पाउँगा
सूर्य अपनी टेलेपोर्टेशन सकती का उपयोग कर वह एक टेलेपोर्टेशन द्वार का निर्माण करता है
सूर्य ........ आप सभी इस जादुई द्वार से गोल्डन ड्रैगन सिटी के अंदर पहुंचने जाओगे मैंने तुम्हारे विषय में खबर कर दी है तुम अपने साथियो के साथ कुछ समय विश्राम करो रात में तुमसे आवर बात करूँगा
नहुष ......... आपका सुक्रिया क्या हम जान सकते है की आप है कोण
सूर्य ........ मेरा नाम सूर्य शिव ठाकुर है आवर ये मेरी पत्नी किरण सूर्य ठाकुर अब तुम सब जाओ वह तुम्हारी भेंट डेवलिन जी आवर उनकी पुत्री जूलिया से होगी मैंने उन्हें आपके विषय में बता दिया है
नहुष जो उनका मुखिया भी था सूर्य किरण का आभार प्रकार करते हुए उनके सामने जुखता है आवर सभी को लिया टेलेपोर्टेशन द्वार में चला जाता है
सभी मरुत के जाने के बाद किरण सूर्य से बोलती है
किरण ......... आपको क्या लगता है की नहुष ने हमें सब सच बताया है आवर वो हमसे क्या छुपा रहा था
सूर्य .......... है उसने जो भी बताया वो सच हे था पर पूरी बात उसने हमें नहीं बताई है भले हे हमने उन सबकी जान बचाई है पैर उनके मन में जो दर है वो पहले बार में हे किसी पे पूरा विश्वाश नहीं कर प् रहे है इसी लिया उसने हम से जो भी चुराया है वो खुद हे हमें बता देगा जब उसके मन में हमारे लिया पूर्ण विश्वाश हो जायेगा
किरण ......... उनका सोचना गलत भी तो नहीं है सब जानवर उन्हें मार कर उनकी सकतिया जो पाना चाहते है
सूर्य ....... है पैर ये अदा सच है स्वीटी सकतिया सभी मरुत में नहीं है केवल नहुष हे उनके से ऐसा है जिसके पास सकतिया है बाकि सभी को नहुष ने अपनी ऊर्जा सकती से जोड़ रखा था जिस से हमें लगे की वो सभी मरुत जादुई है नहुष के पास हे वो ऊर्जा स्थार्थ है खेर हमें आगे भढना चाइये आज नहीं तो कक हम जान हे जायेंगे
किरण ..... ठीक हज कुंवर जी हम लोग कसबे में पहुंच गए है हमें अपना रूप बदल लेना चाइये
सूर्य किरण अपना अपना भेष बदल कर उस कसबे में आगे भाड़ जाते है ...........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................
कल अपडेट न दे पाने के लिया सॉरी दोस्तों कल अचानक से थोड़ी तबियत ख़राब हो गयी थी दोपहर बाद इसी लिया अपडेट पूरा लिख नहीं पाया था अभी भी थोड़ा फीवर है ...........
सूर्य ....... इसका अध्यन करो आवर इसमें लिखी गुप्त मायावी आसुरी विद्या का अभ्यास करो
निर्भया ...... जी ठीक है स्वामी
सूर्य .......ऐसे मुँह न लटकाओ बस कुछ दिन आवर फिर तुम असुरलोक जा कर नरकासुर को ऊँगली कर सकते हो मैं तुम्हे नहीं रोकूंगा बिलकुल भी पैर तब तक इस पुस्तक में लिखी सभी विधायक को अध्यन कर उनके पारंगत हो जाओ जब तुम सफल हो जाओ तो जा सकते हो
निर्भया ......... ठीक है मैं जल्द से जल्दी इन सभी विधयो में पारंगगत हो जाऊंगा आप चिंता न करे .................
अब आगे ..........
परीलोक ................ सकती आवर महिमा जी सूर्य आवर उनके परिवार को ड्रैगन लोक के लिया विदा कर अपनी सोच में सबसे नजरे बचा कर एकांत के लिया निकल गए थे
सकती आवर महिमा ने अपनी आवर से पूरी कोशिश की थी की वो किसी के सामने न आ जाये पैर क्या ये संभव था
वैद्यराज सकती आवर अपनी बेटी महिमा को सभी से बच कर जाते हुए देख लेते है आवर ये सब करते देख उनके चेहरे पे ख़ुशी थी
रानी पारी भी जल्दी हे उनकी ख़ुशी का कारन समाज गई आवर वो भी मुस्कुराने लगी
गुरुदेव ........ पुत्री रिद्धि पुत्री पारिजात आज से अभी से पुत्री विधि आवर गायत्री को शिक्षा देने का कार्य आप दोनों का है साथ हे साथ आप दोनों को भी अन्नंत आयाम में योध अभ्यास आवर अपनी ऊर्जा को अपनी सकती में परिवर्तित करने का अभ्यास आरम्भ कर देना चाइये पुत्री
रानी पारी ........ किन्तु गुरुदेव ये कार्य विवाह के पश्चात नहीं हो सकता क्या आपके द्वारा निर्धारित तिथि में केवल 6 सूर्यौदय शेष है आपके अनुसार पुत्री पारिजात आवर पुत्री जीनत का विवाह आज से थी 7 वे सूर्यौदय को है
गुरुदेव. ........ आपका कथन उचित है रानी पारी किन्तु पुत्री पारिजात आवर पुत्री जीनत का विवाह भी परीलोक के रीती रिवाज से होना है न की पृथ्वीलोक के नियम अनुसार
रानी पारी ........ जी गुरुदेव किन्तु क्या आपने इस विषय में प्रेतराज जी से चर्चा की गुरुदेव मन की प्रेतलोक के अपने कोई रीती रिवाज नहीं विवाह पढ़ती को ले कर के क्युकी वह सर सरीर केवल प्रेतराज आवर पुत्री जीनत हे है बाकि ......
गुरुदेव ........ हम समाज रहे है आपका मंतव्य रानी पारी किन्तु एक सत्य ये भी है की भले हे प्रेतराज आवर पुत्री जीनत के अलावा प्रेत लोक में सर सरीर निवेश नहीं कर सकता क्युकी प्रेतलोक प्रेत आत्माओ का लोक है किन्तु पुत्री जीनत प्रेतलोक की राजकुमारी भी है ऐसे में प्रेतलोक की आत्माये पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत के विवाह में शामिल होने की इच्छा अवश्य प्रेतराज के समक्ष रखेंगे जिन्हे वो भी नहीं नकार सकते है
रानी पारी ....... फिर तो ये बड़ी समस्या हो जाएगी गुरुदेव
गुरीदेव ........ हम इस विषय पे प्रेतराज से चर्चा करते है आप निश्चित रहे कोई न कोई मार्ग अवश्य निकल आएगा
रानी पारी ....... . जी गुरुदेव
गुरुदेव ......... वैध्य्राज हमें आपसे एकांत में आवशयक विषय पे चर्चा करनी है
वैद्यराज ........ जी गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा
गुरुदेव ....... चलिए हमारे साथ बचो को एकांत में कुछ समय वयतीत करने दीजिये पुत्री रिद्धि विधि पारिजात गायत्री आप लोग अन्नंत आयाम की आवर परस्थान करो
रिद्धि ....... जी पिता श्री
गुरुदेव वैद्यराज दोनों मंदिर के भीतर प्रवेश कर जाते है आवर मंदिर के अंदर की आवर से गुजरते हुए मंदिर के पीछे बने सरोवर को पार कर एक गुफा में प्रवेश करते है जिसका न कोई चोर नजर आ रहा था न कोई अंत नजर आ रहा था
वैद्यराज आवर गुरुदेव उस गुफा में कुछ आगे जाने के बाद उनके सामने एक पारदर्शी दिवार नजर आती है जो पास से भी बहुत गौर करने पे नजर आ रही थी उसने दूर से देखना तो संभव भी नहीं था
वैद्यराज ......... गुरुदेव ये तो आपका दिव्या जड़ी बूटी क्षेत्र है जहा आपके अलावा किसी अन्य को जाने का अदिकार नहीं है
गुरुदेव ......... उचित कहा वैद्यराज आपने आप वो दूसरे व्यक्ति है पुत्री रिद्धि के बाद जिसने इस क्षेत्र में प्रवेश किया है
कुछ आगे जाने के बाद गुफा की एक दिशा से बहुत हे प्यारी मन को प्रफुलित करने वाली ऊर्जा से भरपूर खुशबु वैद्यराज को सांसो से होते हुए उनके मन में उपजे सभी विचारों को संत कर रही थी
गुरुदेव गुफा की एक दिवार पे अपनी जादुई छड़ी से एक रौशनी डालते है रौशनी की वो किरण दिवार से टच होते हे वह की दिवार गायब हो जाती है आवर वह एक रास्ता नजर आने लगता है
गुरुदेव आवर वैद्यराज दोनों उस रस्ते से होते हुए गुफा से बहार निकल आते है जहा खुले आसमान के निचे रंग बिरंगी जड़ी बुटिया थी जिनसे मन मोहक ख़ुशी निकल रही थी
यहाँ की हवा में जैसे कुछ बहुत खाश था वैद्यराज जैसे खुद को सवरग के किसी दिव्या उद्यान में उपस्थित होने जैसा अनुभव कर प् रहे थे
वैद्यराज ........ गुरुदेव ये तो बहुत हे दिव्या स्थल है यहाँ तो दिव्या जड़ी बूटियों का भंडार है किन्तु मैं अभी भी समझने में असमर्थ हूँ की मेरा यहाँ होने का कारन क्या है गुरुदेव
गुरुदेव ......... हम चाहते है की तुम्हे इन सभी जड़ी बूटियों की पहचान आवर इनका ज्ञान प्राप्त हो ताकि भविष्य में हमारी अनुपस्थिति में तुम इन जड़ी बूटियों से विषम से विषम रोगो का उपचार कर सको
वैद्यराज ....... ये मेरा शोभाग्य होगा गुरुदेव आपकी कृपा के लिया कोटि कोटि धन्यवाद गुरुदेव
गुरुदेव ........ किन्तु इन सभी जड़ी बूटियों की पहचान आवर किस रोग में किस जड़ी बूटी का प्रयोग होगा इसकी पहचान तुम्हे सवयं करनी होगी तभी तुम आईएम जड़ी बूटियों का प्रयोग करने में सक्षम हो सकते हो अन्यथा तुम इन्हें स्पर्श भी नहीं कर पाओगे
गुरुदेव वैद्यराज को कुछ जरुरी तथ्य समजा कर एक दिशा में भाड़ जाते है
कुछ दूर जाने के बाद गुरुदेव एक स्थान पे रुकते है जहा का दृश्य बड़ा हे अद्भुत था सामने एक सरोवर था जिसमे अलग अलग प्रकार के पौधे जल स्तर पे तैर रहे थे
गुरुदेव कुछ मंत्र उच्चारण करते है देखते हे देखते वो मंत्र उच्चारण वह गूंजने लगते है आवर उन सभी पोधो में से कुछ फूल पाटिया उड़ते हुए गुरुदेव के हाथो में आ कर अपने आप हे एकत्रित होने लगती है
ड्रैगन लोक ............
सुबह सूर्य की जब आँखे खुली तो पैलेस के अपने कक्ष के बीएड पे अकेला पाया
सूर्य ........ ये स्वीटी इतनी सुबह सुबह उठ कर कहा चली गई
सूर्य बीएड से उठा आवर कक्ष में सब तरफ नजरे दौड़ने के बाद अपने सरीर पे एक सही लबादा दाल कर कक्ष से बहार निकला बहार पहरेदार बड़ी हे मुस्तैदी से पहरेदारी कर रहा था
सूर्य ........ क्या प्रिंसेस किरण बहार है
सैनिक .......... जी प्रिंस सूर्य प्रिंसेस किरण कुछ समय पूर्व हे कक्ष से बहार गई है अध्यन की आवर आपके लिया उनका सन्देश है
सूर्य ........ कैसा सन्देश
सैनिक .......... प्रिंसेस किरण का सन्देश है की आप जब अपनी निद्रा पूर्ण कर ले तब उत्तरी दिशा में िस्थित उद्यान में आ जाये प्रिंसेस किरण वही ध्यान करने गयी है
सूर्य ......... ठीक है सन्देश के लिया धन्यवाद
( सूर्य ....... आज ऐसा क्या हुआ की किरण इतनी जल्दी उठ कर त्यार भी हो गई आवर ध्यान भी करने चली गई आवर उसने मुझे उठाया भी नहीं )
सूर्य अपने मन में विचार करते हुए अध्यन में पहुंचा जहा पहले से हे किरण मानसी शालिनी जी जूलिया चारो ध्यान में लीं थी
सूर्य ....... क्या बात है माँ मानसी आवर जूलिया भी यही मौजूद है
सूर्य उन्हें परेशान न करके गुरुदेव द्वारा दी पुस्तक का प्रयोग कर अपना योध अभ्यास आरम्भ कर देता है काफी समय बाद सूर्य पुस्तक के आयाम से बहार निकलता है आवर कुछ देर आराम कर ध्यान करने लग जाता है
सूर्यौदय के बाद सूर्य सभी के साथ सुबह का स्वादिस्ट नास्ता कर देवसूफ़ी नियों जी से बात करता है आवर कुछ देर बाद किरण को साथ लिया गोल्डन ड्रैगन सिटी से वाइट ड्रैगन पे बेथ उतर दिशा की आवर भाड़ जाता है
किरण ........ कुंवर जी आपने किस स्थान से खोजबीन करने का सोचा है
सूर्य ........ हम लोग निर्वाण सिटी की आवर भाड़ रहे है वही से खोजबीन करते हुए ब्लैक ड्रैगन सिटी पहुंचेंगे मुझे यकीं है की हमें कुछ न कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिलेगी यहाँ से आगे का वह चल कर देखेंगे
किरण. ........... वैसे आपने एक बात पे ध्यान दिया क्या जब हम यहाँ पहली बार आये तब से अब तक यहाँ की हवा में भी अलग सा बदलाव मह्सुश हो रहा है
सूर्य ......... बिलकुल सही कहा स्वीटी तुमने पहले जब हम अपने ड्रैगन की खोज में यहाँ आये थे तब यहाँ की हवा में एक सुकून था ताजगी का पैर अब जैसे हवा में भी हलकी नकारत्मकता मह्सुश हो रही है क्युकी ये बहुत काम मात्रा में है इस लिया इसका अभी तक यहाँ के इंसानो में या जीवो में इसका असर नहीं हुआ है
किरण ........ वैसे हमें निर्वाण सिटी तक पहुंचने में कितना समय लगेगा
सूर्य ........ हम सीधा निर्वाण सिटी नहीं जा रहे है सिटी के आस पास के कसबे से हम निर्वाण सिटी जायेंगे तक़रीबन 1 हर में हम इस माध्यम गति से निर्वाण सिटी पहुंच जायेंगे
सूर्य किरण छोटे बड़े जंगल आवर नदिया पर करते हुए बड़ी तेजी से निर्वाण सिटी की तरफ बिना किसी परेशानी के आगे भाड़ रहे थे
इस बिच कुछ छोटे बड़े कसबे भी उनकी नजरो में आये पैर वो लोग आगे बढ़ते रहे
करीब 1 हर से कुछ पहले सूर्य वाइट ड्रैगन को एक बड़ी नाड़ी किनारे उतरता है
किरण ........ क्या हम पहुंच गए
सूर्य ......... यहाँ से हम लोग आगे का सफर आकाश मार्ग से नहीं बल्कि जमीनी मार्ग से करेंगे ताकि हम ज्यादा से ज्यादा जानकारी जूता पाए
सूर्य वाइट ड्रैगन को आगे की निगरानी करने का बोल कर उस हे भेज देता है आवर किरण का हाथ थामे नदी किनारे से होते हुए कसबे की आवर जाने लगते है
कुछ आगे जाने के बाद किरण की नजर नदी के दूसरे किनारे की तरफ पड़ती है जहा कुछ घोड़े जैसे करीब 30 जीवो का झुंड पानी पे रहा था तभी कुछ उतनी संख्या में डायनोसोराश जैसे जिव जंगल से निकल कर उनपे हमला करने लगते है
किरण ......... ये कोनसे जिव है दिखने में तो घोड़े के जैसे हे है पैर इनका सरीर कुछ अलग है आवर सर पे सींग भी है जैसे जंगली बारहसिंघा हो पैर ये दूसरे डायनोसोराश जैसे जानवर इनपे हमला क्यों कर रहे है
सूर्य ........ पता नहीं क्यों पर ये सब जंगली घोड़ो की किसी खाश नेसल के जैसा हे झुंड है आवर सायद ये डायनोसोराश उनको अपना सीकर बना रहे है उनके बिच जो सबसे बड़ा सुनहरे सींग वाला घोड़े जैसा जिव है वो इस झुंड का मुखिया लगता है वही इन सबकी रक्षा आवर नेतृत्व कर रहा है है इन्हे यहाँ के लोग .मरुत ..के नाम से जानते है
किरण ......... किरण इन सफ़ेद छोड़ो जैसे जीवो से किसी तरह की ऊर्जा निकल रही है क्या ये जादुई घोड़े है
सूर्य ......... ये तो मुझे भी पता नहीं है चलो चल कर पता करते है तुम यही रुको मैं इनकी सहायता करता हूँ
किरण. ....... मैं भी साथ चलती हूँ
सूर्य किरण का हाथ थामे एक हे छलांग में नदी पार कर उन मारूफ हॉर्स आवर डायनसोराश के झुंड के पास जा पहुंचते है
सूर्य आवर किरण को अचानक से वह आता देख दोनों झुंड के बाकि घोड़े वह डायनसोराश अपने अपने मुखिया के पीछे खड़े हो जाते है कुछ 4,5 मरुत अभी भी अपने मुखिया के बराबर में खड़े थे जैसे वो अपने मुखिया का योध में साथ देने के लिया खड़े उसके योद्धा हो
तभी उनका मुखिया हिनहिनाता आवर सूर्य के सामने आ खड़ा होता है आवर गौर से सूर्य को देखता है
सूर्य ....... जबरन की जरुरत नहीं है हम आप लोगो को कोई नुकसान पहुंचने नहीं आये है बल्कि इन डायनसोराश से तुम सबकी की रक्षा करने आये है
सूर्य की बात सुन कर मरुत सूर्य को देखता है आवर अपना हल्का सुनहरा सींग आगे कर देता है
ऐसा करते हे सूर्य के दिमाग में कुछ आवाज सुनाई देती है
आवाज ......... तुम कोण हो आवर हमारी सहायता क्यों करना चाहते हो क्या तुम भी हमें मर कर हमारी सकतिया पाना चाहते हो
सूर्य उस आवाज को सुन कर चौंक जाता है आवर उसे बड़ा अजीब भी लगता है की कोई जिव इस तरह से कैसे बात कर सकता है जैसे कोई इंसान किसी दूसरे इंसान से करता है
सूर्य ........ क्या तुम मुझसे टेलीफेटी के जरिये बात कर रहे हो खेर जो भी है पहले इन डायनसोराश को उनकी सजा तो दे दूँ
सूर्य कुछ अग्नि पुंज बना कर उन डायनसोराश के झुंड की आवर फेंक देता है कुछ हे देर में सभी डायनसोराश घायल हो जाते है आवर अपनी जान बचा कर वह से भागने लगते है
किरण ....... वो सभ भाग रहे है कुंवर जी
सूर्य ....... जाने दो वैसे भी मैं उन्हें मरना नहीं चाहता वो सीकरी जिव है उन्हें सीकर करने से तो रोक नहीं सकता जीवो को मार कर खाना उनकी परवर्ती ( आदत )जो है
( किरण ......... कुंवर जी इन सब घोड़ी के सींग देखिये इनमे से मुझे किसी तरह की ऊर्जा निकलती हुई मह्सुश हो रही है पैर पहले तो ऐसा नहीं था )
( सूर्य ....... इसके बारे में तो यही जिव बता सकते है )
सूर्य ........ क्या तुम सभी मरुत नेसल के घोड़े हो आवर तुम सभी से किस तरह की ऊर्जा निकल रही है
एक बार फिर से ुशी घोड़े की आवाज सूर्य किरण को एक साथ उनके दिमाग में सुनाई देती है
आवाज ........ मैं नहुष हूँ इन मरुत होश के झुंड का मुखिया आपने हमारी रक्षा की उसके लिया हम सभी मरुत आपके आभारी है
सूर्य ....... तो तुम्हारा नाम नहुष है आवर तुम इस मरुत झुंड के मुखिया हो पैर जहा तक मैं जनता हूँ तुम सभी तो पहाड़ो में रहने वाले जिव हो फिर यहाँ इस जंगल में क्या कर रहे हो
नहुष ........ हम सब अपनी जान बचा कर गोल्डन ड्रैगन सिटी की खोज में निकले है आवर वही जा रहे है
नहुष की बात सुन किरण आवर सूर्य दोनों एक दूसरे को देखते है
किरण ....... तुम सब वह क्यों जा रहे हो वह तो काफी दूर है यहाँ से आवर नहीं उसका कोई एक स्थान है वो कभी भी कही भी हो सकती है
नहुष ......... हम हमारी प्रजाति के आखरी जिव है हमारा अंत हुआ तो हमारी प्रजाति हे ख़तम हो जाएगी सभी जानवर हमारी जादुई सक्तियो को पाने के लिया हमारा सीकर करना चाहते है अब हमारी आखरी उम्मीद गोल्डन ड्रैगन सिटी हे है
सूर्य ........ तो तुम सभी गोल्डन ड्रैगन सिटी अपनी सुरक्षा के लिया जाना चाहते हो इसमें मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ किन्तु
नहुष ........ अगर ऐसा हुआ तो हम सभी मरुत आपके जीवन भर आभारी रहेंगे
सूर्य ........ ठीक है मैं तुम सभी को वह पहुंचा दूंगा पैर उस से पहले मुझे आप सब से कुछ जानना है
नहुष ........ आप हमसे क्या जानना चाहते है आवर क्यों
सूर्य .......... मुझे जानना है की तुम किस क्षेत्र से यहाँ आये हो आवर आवर ऐसा क्या है वह जिसके चलते आपकी बाकि पद्धति मरी गई जबकि आप सभी जादुई मरुत है तो अवश्य सवयं की रक्षा कर सकते है
नहुष ......... हम उत्तर दिशा में िस्थित ब्लैक ड्रैगन सिटी के पुराने जंगल से यहाँ आये है हम जिस क्षेत्र की रक्षा करते थे वह कुछ समय से बहुत कुछ विचित्र घटना घाट रही है जिनने हम सब भी समाज नहीं प् रहे है अचानक से हमारा जल स्थार्थ दूषित हो कर कला पड़ने लग गया जो भी उस जल का पैन करता वो जिव बदलने लगता यहाँ तक की हम जादुई मरुत भी उस से बच नहीं पाए
किरण ......... तुम्हारा मतलब है की जो भी जानवर उस पानी को पिता है वो बदलने लगता है ऐसा कोनसा बदलाव देखा जो पहले से अलग हो
नहुष .......... जो भी जानवर उस पानी को पिता वो गुस्से में किसी पे भी हमला कर उसका अंत कर देता उन सभी से एक अलग हे तरह की ऊर्जा निकलती है उनकी आँखे आवर सरीर उस ऊर्जा के सम्पर्क में आने पर बदलने लगता है
सूर्य .......... ठीक है मैं आप सब को गोल्डन ड्रैगन सिटी पहुंचा देता हूँ पैर नहुष मुझे तुम्हारी मदद चाइये
नहुष .......... आप सवयं इतने सक्तिसाली है भला आपको हमारी मदद क्यों चाइये
सूर्य ........ क्युकी मुझे उस बदलाव के पीछे की वजह जानना है सायद तुम्हारी समस्या आवर हमारी मंजिल एक हे हो
नहुष ......... आपने हमारी जान बचाई है मैं अपने साथियो को सुरक्षित करने के बाद हे आप की सहायता कर पाउँगा
सूर्य अपनी टेलेपोर्टेशन सकती का उपयोग कर वह एक टेलेपोर्टेशन द्वार का निर्माण करता है
सूर्य ........ आप सभी इस जादुई द्वार से गोल्डन ड्रैगन सिटी के अंदर पहुंचने जाओगे मैंने तुम्हारे विषय में खबर कर दी है तुम अपने साथियो के साथ कुछ समय विश्राम करो रात में तुमसे आवर बात करूँगा
नहुष ......... आपका सुक्रिया क्या हम जान सकते है की आप है कोण
सूर्य ........ मेरा नाम सूर्य शिव ठाकुर है आवर ये मेरी पत्नी किरण सूर्य ठाकुर अब तुम सब जाओ वह तुम्हारी भेंट डेवलिन जी आवर उनकी पुत्री जूलिया से होगी मैंने उन्हें आपके विषय में बता दिया है
नहुष जो उनका मुखिया भी था सूर्य किरण का आभार प्रकार करते हुए उनके सामने जुखता है आवर सभी को लिया टेलेपोर्टेशन द्वार में चला जाता है
सभी मरुत के जाने के बाद किरण सूर्य से बोलती है
किरण ......... आपको क्या लगता है की नहुष ने हमें सब सच बताया है आवर वो हमसे क्या छुपा रहा था
सूर्य .......... है उसने जो भी बताया वो सच हे था पर पूरी बात उसने हमें नहीं बताई है भले हे हमने उन सबकी जान बचाई है पैर उनके मन में जो दर है वो पहले बार में हे किसी पे पूरा विश्वाश नहीं कर प् रहे है इसी लिया उसने हम से जो भी चुराया है वो खुद हे हमें बता देगा जब उसके मन में हमारे लिया पूर्ण विश्वाश हो जायेगा
किरण ......... उनका सोचना गलत भी तो नहीं है सब जानवर उन्हें मार कर उनकी सकतिया जो पाना चाहते है
सूर्य ....... है पैर ये अदा सच है स्वीटी सकतिया सभी मरुत में नहीं है केवल नहुष हे उनके से ऐसा है जिसके पास सकतिया है बाकि सभी को नहुष ने अपनी ऊर्जा सकती से जोड़ रखा था जिस से हमें लगे की वो सभी मरुत जादुई है नहुष के पास हे वो ऊर्जा स्थार्थ है खेर हमें आगे भढना चाइये आज नहीं तो कक हम जान हे जायेंगे
किरण ..... ठीक हज कुंवर जी हम लोग कसबे में पहुंच गए है हमें अपना रूप बदल लेना चाइये
सूर्य किरण अपना अपना भेष बदल कर उस कसबे में आगे भाड़ जाते है ...........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................
कल अपडेट न दे पाने के लिया सॉरी दोस्तों कल अचानक से थोड़ी तबियत ख़राब हो गयी थी दोपहर बाद इसी लिया अपडेट पूरा लिख नहीं पाया था अभी भी थोड़ा फीवर है ...........








