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- Dec 5, 2013
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अगले दिन राजेश की दिनचर्या पहले की ही तरह जारी रहा। सुबह उठकर अखाड़ा जाता, वहा व्यायाम करता, पुलिस एवम फौजी भर्ती केंद्र के प्रशिक्षणार्थियों को लिखित परीक्षा का अभ्यास कराता। फिर घर आकर नहाता, नाश्ता करता, आईएएस की इंटरव्यू की तैयारी करता।
दोपहर में ज्योति और पूनम अपना दुध पिलाती, मूड बन जानें पर दोनों की ठुकाई भी करता। दोनो की दुध पीकर राजेश और ताकतवर बनता जा रहा था।
इधर मधु और आरती दोनों स्कूल में पढ़ाने के साथ साथ, प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कर रही थीं।
राजेश दोनो की मदद कर रहा था।
एक दिन मधु को राजेश से चुदाने की बहुत इच्छा हो रही थी।
संडे का दिन था, मधु के माता पिता दोनों घर पर नहीं थे। दोपहर का समय था।
मधु ने राजेश को फ़ोन किया।
राजेश _हा मधु बोलो कुछ काम था क्या?
मधु _हा भईया, कुछ टॉपिक पर समझ नही बन पा रही है, आप की मदद चाहिए।
राजेश _अच्छा ठीक है घर आ जाओ, जो भी समस्या है पूछ लेना।
मधु_भईया मां बाबू जी बाहर गए है, उन्हे आने में रात हो जायेगी। घर और मुन्ने की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। आप घर आ जाइए न ।
राजेश _ठीक है।
राजेश मधु के घर जा रहा था तभी,
पूनम _राजेश, इस समय कहा जा रहे हो।
राजेश _भाभी, मधु के घर जा रहा हूं। उसे परीक्षा की तैयारी में कुछ दिक्कतें है।
राजेश मधु के घर पहुंचा।
मधु _आओ भईया, बैठो, देखो ने इस सवाल को कैसे सॉल्व करना है मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है।
राजेश _दिखाओ मुझे, कहां दिक्कत हो रही है तुम्हे।
मधु _भईया आप बैठो न, मै चाय बना कर लाती हूं।
राजेश _मधु पहले दिक्कत कहां है उस पर बाते कर लेते।
मधु_, भईया बात तो होती रहेगी, पहले चाय चढ़ा देती हूं।
मधु चाय चढ़ाने चली गई।
राजेश घर के बैठक कमरा में रखे कुर्सी पर बैठ कर टॉपिक को देखने लगा।
मधु _चाय चढ़ा कर कमरे में आ गई।
राजेश _चलो बताओ, किस विषय पर तुम्हे दिक्कत हो रही है।
मधु ने कुछ टॉपिक को बताया जिसमे उसे कठिनाई महसूस हो रही थी।
राजेश उन टॉपिक को सरल तरीके से मधु को समझाने लगा।
कुछ देर बाद किचन में जाकर वह कप में चाय ले आई। दोनो चाय पीने लगे।
तभी बेडरूम में मुन्ने की रोने की आवाज सुनाई पड़ा।
मधु _भईया लगता है, मुन्ना उठ गया।
मधु अपने बेडरूम में गई और बच्चे को पुचकारते हुवे मेला मुन्ना उठ गया, आजा मेला राजा बेटा,,, वह बच्चे को गोद मे उठाई।
बच्चे को बैठक कक्ष में लाई, बच्चा अभी भी रो रहा था।
मधु _लगता है इसे भूख लगी है।
मधु अपनी दुपट्टा नीचे कर दी और अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।
उसकी बड़ीबड़ी दुध से भरी मस्त चूचियां, राजेश के आंखों के सामने आ गया।
मधु बिना आंचल ढके ही बच्चे को गोद मे लेकर दुध पिलाने लगी।
राजेश मधु की चुचियों को इग्नोर करना चाहा, पर उसकी चूचियां इतनी मस्त था की, राजेश की नजर जब चुचियों पर गया तो उसके शरीर में रक्त संचार बढ़ने लगा।
उसका लंद में तानव आने लगा।
तभी मधु के मुंह से उई मा निकला,,,
राजेश _क्या huwa मधु? क्यू चिखी।
मधु _मुन्ना बड़ा बदमाश हो गया है, बडा जोर से कांटा मेरे निप्पल को।
वह मुन्ने के मुंह से निप्पल निकाला, और राजेश को दिखाने लगा।
मधु _भईया देखो ना, काटने से कैसा लाल हो गया मेरा निप्पल।
राजेश मधु के निप्पल को देखने लगा।
मधु _भईया बडी जलन हो रही है, थोड़ा चांटकर निप्पल को आराम दो ना।
राजेश ने मधु के दूदू को हाथ में पकड़ लिया फिर उसके निप्पल को जीभ से चाटने लगा।
मधु _भईया, आप बहुत अच्छे कर रहे है? मुझे बडा आराम मिल रहा है।
निप्पल को मुंह में लेकर प्यार से चूस लो,
राजेश मधु के निप्पल को मुंह में डाल कर चूसना शुरु कर दिया।
एक निपल को मुन्ना चूस रहा था तो एक को राजेश।
मधु बहुत गर्म हो गई। उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगीं।
इधर राजेश का लंद भी अकड़ चुका था।
उसे chut मारने का मन करने लगा।
इधर मधु राजेश के पेंट के ऊपर से उसका लंद सहलाने लगी।
दोनों बहुत उत्तेजित हो गए।
मधु अपने कपकपाते लब्जो में कहा, भईया चलो बेड रूम में चलते है।
राजेश और मधु दोनों बेडरूम में चले गए।
मधु ने बच्चे को बेड में सुला कर दरवाजा बंद कर दिया।
इधर आरती भी अपने कमरे पढ़ाई कर रही थीं।
उसे भी राजेश से कुछ पूछना था, वह राजेश के कमरे में गई। राजेश उसे नही मिला।
आरती _ये राजेश भईया, कहा चला गया।
उसने अपनी भाभी से पूछा,,
भाभी तुम्हे पता है क्या राजेश भईया कहा है।
पूनम _हा वो मधु के घर गया है।
कह रहा था की मधु को उसकी पढाई में कुछ समस्या है, उसे समझाने गया है।
आरती _भाभी मै भी जा रही मधु के घर, मुझे भी भईया से कुछ पूछना है।
आरती पुस्तक लेकर मधु के घर गई l। बाहर का दरवाजा खुला था। आरती जब अन्दर गई तो राजेश और मधु दोनों कही नजर नहीं आए।
तभी उसने देखा, मधु के कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द है।
उसे लगा दोनों अन्दर होंगे उसने दरवाजा खटखटाना चाहा तभी, उसे मधु की सिसकने की आवाज सुनाई पढ़ी।
आह उन,, आई ई,, उई मां आह,,,,
आरती ने अन्दर क्या चल रहा है जानने के लिए दरवाजे पर छेद ढूंढी,,
पर उसे कोई छेद नही मिला।
वह कुछ देर तक मधु की मादक सिसकारी सुनती रही।
वह अन्दर क्या चल रहा है जानने को व्याकुल हो गई,तभी उसे याद आया की मधु के कमरे में वेंटीलेटर लगा है। बाड़ा के पीछे जाकर सीढ़ी चडकर वेंटिलेटर से अन्दर झांक सकती है, आखिर अंदर चल क्या रहा है?
वह घर के पीछे बाड़ा में चली गई। वहा बांस से बनी सीढ़ी रखी थीं।
उसे मधु के कमरे के दीवार पे लगा करऊपर चड़ गई, और वेंटीलेटर से अन्दर झांकने लगीं।
अन्दर का दृश्य देखकर उसकी होश उड़ गई।
राजेश और मधु दोनों बिल्कुल नंगे थे।
राजेश मधु को पलंग किनाने लिटा का, उसकी टांगे फैला कर।
गच गच चोद रहा था।
उसकी चूची दबा दबा कर दुध निचोड़ एवम पी रहा था।
मधु अपनी मुंह से कामुक सिसकारी निकाल रही थीं।
आरती की आंखे फटी की फटी रह गई।
वह बिना पलके झपकाए अन्दर का दृश्य देखने लगी।
वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं। की वह ऐसा भी किसी औरत के साथ कर सकता है।
इधर राजेश ने अपना लंद मधु की chut से बाहर निकाला, उसका मोटा लंबा लंद को आरती आश्चर्य से देखने लगीं।
राजेश ने मधु को लंद चूसने का इशारा किया।
मधु बेड से उठ कर राजेश के लंद के नीचे बैठ गई और राजेश का लंद पकड़ कर, मुंह में भर कर गप गप चूसने लगीं।
आरती ऐसा दृश्य कभी देखी नही थीं।
वह तो राजेश को भोला भाला समझता था। वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं।
वह आंखे गढ़ाए अन्दर के दृश्य को देखने लगी।
इधर राजेश ने मधु को पलंग पकड़ाकर झुका दिया, और पीछे से लंद को boor में डालकर, फ्च फ़च चोदना शुरु कर दिया।
मधु फिर जन्नत की सैर करने लगीं।
आह उन उई मा,, आई ई,,,,
आरती ने कभी ऐसा दृश्य की कल्पना भी नहीं की थी।
यह दृश्य देखकर उसके शरीर में खून दोगुने गति से बहने लगा।
इधर राजेश मधु को दना दन चोदे जा रहा था।
आरती दंग थी राजेश का इतना मोटा लंद आखिर मधु कैसे अंदर ले पा रही है। उसकी boor की छेद तो एकदम सकरी है।
इधर राजेश तेज तेज चोदने लगा, मधु जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।
राजेश ने चोदना बंद कर दिया।
कुछ देर बाद राजेश ने मधु को अपने गोद में बिठा लिया। वह उसकी ओंठ चूसने लगा, चूची मसलने पीने लगा। उसकी chut सहलाने लगा।
जिससे मधु फिर गर्म हो गई। राजेश बेड पे लेट गया।
उसका लंद हवा में लहरा रहा था।
मधु बेड पर चढ़ गई, और लंद को पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर उस पर बैठ गई। लंद boor में समा गया।
अब मधु राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।
आरती आश्चर्य से इन दृश्यों को देखने लगी। उसे अपनी योनि में गिला पन महसूस होने लगा।
इधर राजेश मधु की कमर चूतड पकड़ कर नीचे से कमर उचका ऊचका कर लंद को boor की गहराइयों में पहुंचाने लगा।
मधु और राजेश दोनों जन्नत की सैर करने लगें।
दोनों को chudai में बहुत मजा आ रहा था।
मधु की कामुक सिसकारी से कमरा गूंज रहा था।
इधर राजेश काफी जोश में आ गया था।
इधर मधु उछल उछल कर थक गई, तब राजेश ने मोर्चा सम्हाला।
राजेश ने मधु को नीचे लिटाया उसकी चूतड के नीचे तकिया लगा दिया फिर उसने उसकी टांगो को अपने कंधे पर रख दिया और लंद को boor में डालकर गच गच चोदने लगा। लंद मधु की बच्चे दानी को ठोकने लगा।
जिससे मधु का पूरा शरीर झनझनाने लगा।
उसके मुंह से अत्यंत मादक आवाजें निकलने लगी। कुछ ही देर में वह फिर से झड़ने लगीं। इधर राजेश भी झड़ने के करीब था, वह और जोर जोर से चोदने लगा, अपना लंद बाहर निकाला और मधु के मुंह में डाल कर,, आह,, आह आह मां,,,,
कराहते हुवे झड़ने लगा। कुछ वीर्य उसके चेहरे पर छोड़ दिया।
मधु का मुंह वीर्य से पूरा लबा लब भर गया।
वह गटक गटक कर पूरा वीर्य पी गई।
यह दृश्य देखकर आरती को चक्कर आने लगा, वह सीढ़ी से गिर न जाए। वह कापते हुवे पैरो से सीढ़ी से नीचे उतरी और सीधा अपना घर चली गई।
वह अपने कमरे में चली गईं, उसकी आंखों के सामने अभी भी वही सब दृश्य चलने लगा।
उसने अपनी चड्डी का मुआइना किया, जो पूरी तरह गीली हो चुकी थीं। उसके साथ ऐसा पहली बार huwa था।
इधर राजेश और मधु दोनों सुस्ता रहें थे।
कुछ देर बाद दोनों अपने कपडे पहने फिर राजेश घर आ गया।
अपने कमरे में आकर आराम करने लगा।
आरती पलंग पर लेट कर उन्ही दृस्यो को याद कर रहि थी।
मधु तो पूरी रण्डी निकली, कैसे भईया का के लंद का पानी पी गई।
और भईया तो रण्डी बाज निकला, कितना भोला भाला लगता है।
लोग कितना इज्जत और मान सम्मान करते है उसका, उसने राजेश का नया रूप देख कर अभी भी विश्वास नहीं कर पा रही थी।
वह भोजन के लिए कमरे से बाहर, भोजन करने का उसका मन नहीं था। थोड़ा सा भोजन कर कमरे में जाकर फिर लेट गई।
वह रात भर सो नहीं सकी, उसके आंखो के सामने अभी भी वही दृस्य चल रहा था।
वह रात में पहली बार अपनी boor में खुजली महसूस की और उसे अपनी उंगली से रगड़ने लगीं।
राजेश के लंद को याद कर दो बार झड़ी।
उसका शरीर गर्म हो चुका था। उसे बुखार चढ़ गया था।
जब वह देर तक सोई रही।
पदमा _अरे बहु ये आरती को क्या huwa है, अभी तक उठी क्यू नही है?
पूनम कमरे में आई।
अरे आरती आज क्या हो गया है तुमको, तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।
पूनम ने उसकी माथे को छू कर देखा।
पूनम _तुम्हे तो तेज बुखार है।
कही मासिक धर्म तो नही शुरू हो गया।
Ma जी पूछ रही है इतने देर तक सो क्यू रही हो। मै मां जी को बता कर आती हूं तुम्हे तेज बुखार है।
आरती _भाभी, रुको मैं उठ रही हूं, मुझे कुछ नहीं huwa है मै ठीक हूं।
मां को कुछ मत बताओ।
पूनम _पर क्यू?
आरती _कहा न मुझे कुछ नहीं huwa है? वो रात में मैं देर तक पढ़ती रहि न इसलीय है।
राजेश भईया उठ गए क्या?
पूनम _क्यू? राजेश को क्यों पूछ रही हो? वो अखाड़ा पे चला गया है।
आरती _वो राजेश भईया से कुछ पूछना था।
पुनम _तुम्हारी तबियत ठीक नहीं लग रहि है, तुम आराम करो, मै टैबलेट लाकर देती हूं उसे खा लो।
पुनम ने आरती को टैबलेट लाकर दिया।
आरती टैबलेट खाकर आराम करनेलगीं।
इस घटना के बाद आरती के अन्दर का औरत जाग चुका था।
अब वह राजेश के सामने जाता तो उसकी नजर उसके टांगो बीच जाता।
उसके लंद का याद करता कितना मोटा और लंबा है।
रात में अब राजेश के लंद को याद कर boor रगड़ती और झड़ने के बाद ही उसे नींद आता।
अब वह राजेश से चुदने की इच्छा रखने लगीं।
पर वह राजेश से कह नहीं सकती थीं, भईया मुझेचोदो, मै रोज तुम्हारे लंद को याद कर boor रगड़ती हूं।
उसे मधु पर गुस्सा आने लगा, वह भोले भाले भईया को बिगाड़ दी है, उसने राजेश भईया को फांस रखी है।
उसे समझ नही आ रहा था कि वह भईया से चुदने की इच्छा कैसे पूरी करे? समय ऐसा ही निकलता रहा।
आज राजेश बहुत खुश था, आज निशा का जन्म दिन था।
सुबह उठते ही उसने निशा को मेसेज किया, हैप्पी बर्थडे डे निशा जी, जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर आपको सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाए।
इधर लंदन में निशा न राजेश का मेसेज पढ़ा। पर कोई रिप्लाई नही दिया।
कालेज में उसके दोस्तो ने जन्म दिन की बधाई दिया और निशा के मना करने के बाद भी लंच के समय आर्यन ने कैंटीन में केक काट कर बर्थ डे सेलिब्रेट किया, पर निशा को उसमे कोई रूचि नहीं थी।
सीमा चाह रही थीं की किसी अच्छे से होटल में जाकर निशा का बर्थ डे सेलिब्रेट करे पर निशा नही मानी।
कालेज में छुट्टी के बाद, निशा अपनी फेक्ट्री जो निर्माणधीन था, वहा चली गई।
वहा एडम फेक्ट्री का काम देख रहा था।
निशा ने एडम से पूछा की production शुरू होने में और कितने दिन लग जायेंगे।
एडम _मैम बस एक दो माह में प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।
निशा _आर्यन हमे प्रोडक्शन शुरू होने से पहले ही, प्रचार प्रसार शुरू कर देना चाहिए।
तुम विज्ञापन बनानेवाले किसी अच्छी कंपनी से संपर्क करो।
आर्यन _निशा, ये काम मुझ पर छोड़ दो, एक अच्छी कंपनी के बारे में मै जानता हूं। मै आज ही वहा जाकर संपर्क करता हूं।
निशा _,, गुड
मैं चाहती हूं की प्रोडक्शन से पहले ही हमारे प्रोडक्ट की जानकारी, लोगो तक पहुंचे और उसकी खूबियों के बारे में लोगो को पता चले।
निशा को उसकी बुआ ने फोन किया, बेटा तुमसे मिलने कोई आया है?
निशा से कहा,,,
कौन है बुवा,,
ये तुम्हारे लिए सरप्राइज है,,
तुम जल्दी से घर आ जाओ,,
निशा और सीमा दोनों घर पहुंचे,,
निशा देखो उसकी मां सुजाता, इण्डिया से आई थी।
निशा _,, मां,,
सुजाता _,, बेटा,,,
दोनों एक दूसरे से लिपट गए,,
सुजाता _मेरी बच्ची कैसी है तू?
निशा _मै अच्छी हू मां।
आप कैसी है?
सुजाता _मुझे तो बस तुम्हारी ही चिंता लगीं रहती है मेरी बच्ची।
निशा _मां, आप मेरी चिंता न किया करो, यहां बुआ और फूफा जी मेरे अच्छे से ख्याल रखते है, और सीमा तो है न मेरे साथ।
मां आपने बताया नही आप आ रही है?
सुजाता _बेटा, मै तुम्हे सरप्राईज देना चाहतीं थी।
आज तुम्हारा जन्म दिन जो है।
सुजाता _चलो बेटा तुम तैयार हो जाओ, फिर केक काटना,,,
निशा _मां, मेरा मन नहीं कर रहा,,,
सीमा _निशा ये क्या कह रही हो? आंटी इंडिया से आई है तुम्हारे जन्म दिन सेलीब्रेट करने।
सुजाता _सीमा तुम अपने कालेज के दोस्तो को भी बुला लो,,
सीमा _ठीक, है आंटी।
सीमा ने अपने कालेज के दोस्तो को फ़ोन कर बुला लिया,,
इधर निशा न चाहते हुवे भी अपनी मां को निराश न हों इसलिए कमरे में जाकर तैयार होने लगीं।
इधर राजेश आज बहुत खुश था।
वह निशा के जन्म दिन को सेलीब्रेट करना चाहता था।
वह लक्षमण पुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचा।
दिव्या राजेश को देखकर सरप्राइज हो गई।
दिव्या _राजेश तुम यहां,, अचानक,,
राजेश _हा दिव्या जी, मै आपको कुछ बताने के लिए यहां आया था,,
दिव्या _बड़े खुश लग रहे हो, ऐसा क्या बात है मैं भी तो जानू?
राजेश _दिव्या जी आज निशा जी का जन्म दिन है।
दिव्या _ये तो बड़ी खुशी की बात है? तुमने उसे बधाई दिया की नही?
राजेश _मैंने उसे बधाई संदेश भेजा पर अभी तक कोई रिप्लाई नही आया।
दिव्या _ओह हो सकता है, उसने मेसेज पढ़ी न हो!
राजेश _दिव्या जी, मै निशा जी का जन्म दिन सेलीब्रेट करना चाहता हूं? आपके साथ, क्या आप मेरे साथ चलेंगी, किसी पार्क में।
दिव्या राजेश को नही कर सकता था, वह उसकी खुशी के लिए साथ चलने तैयार हो गई।
दोनों केक लेकर एक खूबसूरत पार्क में पहुंचे।
राजेश _दिव्या जी, निशा जी तो यहां है नही, आज आप ही निशा बन जाओ न,,,
दिव्या _अच्छा जो, हुकुम, बोलो क्या करना होगा।
राजेश _ये केक काटना होगा,और कोई अच्छी सी गीत सुनाना होगा, निशा जी बनकर, और क्या?
दिव्या _ठीक है पर एक शर्त पर,
राजेश _कैसी शर्त?
दिव्या _,, तुम्हे गीत में मेरा साथ देना होगा?
राजेश _ठीक है दिव्या जी।
उसके बाद दिव्या ने, केक काटा,,
राजेश _, हैप्पी बर्थडे टू यू निशा जी,,,
दिव्या ने राजेश को केक का टुकड़ा खिलाया।
राजेश ने भी दिव्या को केक का टुकड़ा खिलाया।
राजेश _दिव्या जी अब कोई गीत सुनाओ।
दिव्या _तुम भी साथ देना, ये सोचना गाना मैं नहीं निशा गा रही है।
राजेश _ठीक है।
दिव्या ने गीत गाना शुरू किया,,
राजेश ने उसका साथ दिया,,
प्यार करते है हम तुम्हे इतना,,,
दो आंखे तो क्या , दो जहा में समाए न जितना,,
प्यार करते हैं हम तुम्हे इतना,,,,,
दोनो एक अच्छी से रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाए।
दिव्या का मन तो नही था,,,
वह अन्दर से दुखी थी,,
बीच बीच में उसकी आंखो से आंसू निकल आते थे, जिसे राजेश से छुपाकर पोंछ लेती थीं।
जब दिव्या घर पहुंची, तो रात हो चुकी थी।
रत्नवती और गीता दिव्या के लिए चिंतित थी पर वह फोन द्वारा बता दी थीं की वह राजेश के साथ है।
जब घर पहुंची तो,,
रत्नवती ने उसे भोजन के लिए बुलाया तो, दिव्या ने बताया की वह खाकर आई है।
इधर गीता को दिव्या की आंखों में उदासी नजर आया।
वह रात में उसके कमरे में गई,,,
दिव्या _दीदी तुम इस समय,,,
गीता _हू, क्या बात है? तुम इतनी उदास क्यों हो?
दिव्या _कुछ भी तो नहीं दी,,
मुझे क्या huwa?
गीता _तुम्हारे चेहरे की ये उदासी मूझसे छिपा नहीं सकती, बोलो क्या बात है?
दिव्या की आंखों से आंसू बहने लगीं।
दिव्या _दीदी, कुछ भी तो नहीं?
गीता _छोटी, मुझे मालूम है, तुम राजेश को लेकर उदास हो।
उसने तुमसे कुछ कहा?
दिव्या ने न में सिर हिलाया।
गीता _दिव्या, मै जानती हूं तुम, राजेश से बहुत प्यार करती हो?
तुम राजेश को इस बारे में अब तक बताई की नही।
दिव्या _नही दी, वो निशा से प्यार करता है मेरे लिए उसके दिल में कोई फीलिंग नही।
दिव्या, गीता के गले से लिपट कर रोने लगी।
गीता _क्या उसे पता है उस रात उसने तुम्हारे साथ क्या किया है?
दिव्या _नही दी, उसे कुछ मालूम नहीं।
गीता _उसे बता क्यू नही देती।
दिव्या _नही दी मै उसे कभी नहीं बताऊंगी।
गीता _छोटी मै तुम्हारे आंखो में आंसू नहीं देख सकती, अगर तुम्ह नही बताओगी तो मैं बताऊंगी।
दिव्या _नही दी, तुम्हे मेरी कसम है तुम राजेश को कुछ भी नहीं बताओगी।
दोपहर में ज्योति और पूनम अपना दुध पिलाती, मूड बन जानें पर दोनों की ठुकाई भी करता। दोनो की दुध पीकर राजेश और ताकतवर बनता जा रहा था।
इधर मधु और आरती दोनों स्कूल में पढ़ाने के साथ साथ, प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कर रही थीं।
राजेश दोनो की मदद कर रहा था।
एक दिन मधु को राजेश से चुदाने की बहुत इच्छा हो रही थी।
संडे का दिन था, मधु के माता पिता दोनों घर पर नहीं थे। दोपहर का समय था।
मधु ने राजेश को फ़ोन किया।
राजेश _हा मधु बोलो कुछ काम था क्या?
मधु _हा भईया, कुछ टॉपिक पर समझ नही बन पा रही है, आप की मदद चाहिए।
राजेश _अच्छा ठीक है घर आ जाओ, जो भी समस्या है पूछ लेना।
मधु_भईया मां बाबू जी बाहर गए है, उन्हे आने में रात हो जायेगी। घर और मुन्ने की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। आप घर आ जाइए न ।
राजेश _ठीक है।
राजेश मधु के घर जा रहा था तभी,
पूनम _राजेश, इस समय कहा जा रहे हो।
राजेश _भाभी, मधु के घर जा रहा हूं। उसे परीक्षा की तैयारी में कुछ दिक्कतें है।
राजेश मधु के घर पहुंचा।
मधु _आओ भईया, बैठो, देखो ने इस सवाल को कैसे सॉल्व करना है मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है।
राजेश _दिखाओ मुझे, कहां दिक्कत हो रही है तुम्हे।
मधु _भईया आप बैठो न, मै चाय बना कर लाती हूं।
राजेश _मधु पहले दिक्कत कहां है उस पर बाते कर लेते।
मधु_, भईया बात तो होती रहेगी, पहले चाय चढ़ा देती हूं।
मधु चाय चढ़ाने चली गई।
राजेश घर के बैठक कमरा में रखे कुर्सी पर बैठ कर टॉपिक को देखने लगा।
मधु _चाय चढ़ा कर कमरे में आ गई।
राजेश _चलो बताओ, किस विषय पर तुम्हे दिक्कत हो रही है।
मधु ने कुछ टॉपिक को बताया जिसमे उसे कठिनाई महसूस हो रही थी।
राजेश उन टॉपिक को सरल तरीके से मधु को समझाने लगा।
कुछ देर बाद किचन में जाकर वह कप में चाय ले आई। दोनो चाय पीने लगे।
तभी बेडरूम में मुन्ने की रोने की आवाज सुनाई पड़ा।
मधु _भईया लगता है, मुन्ना उठ गया।
मधु अपने बेडरूम में गई और बच्चे को पुचकारते हुवे मेला मुन्ना उठ गया, आजा मेला राजा बेटा,,, वह बच्चे को गोद मे उठाई।
बच्चे को बैठक कक्ष में लाई, बच्चा अभी भी रो रहा था।
मधु _लगता है इसे भूख लगी है।
मधु अपनी दुपट्टा नीचे कर दी और अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।
उसकी बड़ीबड़ी दुध से भरी मस्त चूचियां, राजेश के आंखों के सामने आ गया।
मधु बिना आंचल ढके ही बच्चे को गोद मे लेकर दुध पिलाने लगी।
राजेश मधु की चुचियों को इग्नोर करना चाहा, पर उसकी चूचियां इतनी मस्त था की, राजेश की नजर जब चुचियों पर गया तो उसके शरीर में रक्त संचार बढ़ने लगा।
उसका लंद में तानव आने लगा।
तभी मधु के मुंह से उई मा निकला,,,
राजेश _क्या huwa मधु? क्यू चिखी।
मधु _मुन्ना बड़ा बदमाश हो गया है, बडा जोर से कांटा मेरे निप्पल को।
वह मुन्ने के मुंह से निप्पल निकाला, और राजेश को दिखाने लगा।
मधु _भईया देखो ना, काटने से कैसा लाल हो गया मेरा निप्पल।
राजेश मधु के निप्पल को देखने लगा।
मधु _भईया बडी जलन हो रही है, थोड़ा चांटकर निप्पल को आराम दो ना।
राजेश ने मधु के दूदू को हाथ में पकड़ लिया फिर उसके निप्पल को जीभ से चाटने लगा।
मधु _भईया, आप बहुत अच्छे कर रहे है? मुझे बडा आराम मिल रहा है।
निप्पल को मुंह में लेकर प्यार से चूस लो,
राजेश मधु के निप्पल को मुंह में डाल कर चूसना शुरु कर दिया।
एक निपल को मुन्ना चूस रहा था तो एक को राजेश।
मधु बहुत गर्म हो गई। उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगीं।
इधर राजेश का लंद भी अकड़ चुका था।
उसे chut मारने का मन करने लगा।
इधर मधु राजेश के पेंट के ऊपर से उसका लंद सहलाने लगी।
दोनों बहुत उत्तेजित हो गए।
मधु अपने कपकपाते लब्जो में कहा, भईया चलो बेड रूम में चलते है।
राजेश और मधु दोनों बेडरूम में चले गए।
मधु ने बच्चे को बेड में सुला कर दरवाजा बंद कर दिया।
इधर आरती भी अपने कमरे पढ़ाई कर रही थीं।
उसे भी राजेश से कुछ पूछना था, वह राजेश के कमरे में गई। राजेश उसे नही मिला।
आरती _ये राजेश भईया, कहा चला गया।
उसने अपनी भाभी से पूछा,,
भाभी तुम्हे पता है क्या राजेश भईया कहा है।
पूनम _हा वो मधु के घर गया है।
कह रहा था की मधु को उसकी पढाई में कुछ समस्या है, उसे समझाने गया है।
आरती _भाभी मै भी जा रही मधु के घर, मुझे भी भईया से कुछ पूछना है।
आरती पुस्तक लेकर मधु के घर गई l। बाहर का दरवाजा खुला था। आरती जब अन्दर गई तो राजेश और मधु दोनों कही नजर नहीं आए।
तभी उसने देखा, मधु के कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द है।
उसे लगा दोनों अन्दर होंगे उसने दरवाजा खटखटाना चाहा तभी, उसे मधु की सिसकने की आवाज सुनाई पढ़ी।
आह उन,, आई ई,, उई मां आह,,,,
आरती ने अन्दर क्या चल रहा है जानने के लिए दरवाजे पर छेद ढूंढी,,
पर उसे कोई छेद नही मिला।
वह कुछ देर तक मधु की मादक सिसकारी सुनती रही।
वह अन्दर क्या चल रहा है जानने को व्याकुल हो गई,तभी उसे याद आया की मधु के कमरे में वेंटीलेटर लगा है। बाड़ा के पीछे जाकर सीढ़ी चडकर वेंटिलेटर से अन्दर झांक सकती है, आखिर अंदर चल क्या रहा है?
वह घर के पीछे बाड़ा में चली गई। वहा बांस से बनी सीढ़ी रखी थीं।
उसे मधु के कमरे के दीवार पे लगा करऊपर चड़ गई, और वेंटीलेटर से अन्दर झांकने लगीं।
अन्दर का दृश्य देखकर उसकी होश उड़ गई।
राजेश और मधु दोनों बिल्कुल नंगे थे।
राजेश मधु को पलंग किनाने लिटा का, उसकी टांगे फैला कर।
गच गच चोद रहा था।
उसकी चूची दबा दबा कर दुध निचोड़ एवम पी रहा था।
मधु अपनी मुंह से कामुक सिसकारी निकाल रही थीं।
आरती की आंखे फटी की फटी रह गई।
वह बिना पलके झपकाए अन्दर का दृश्य देखने लगी।
वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं। की वह ऐसा भी किसी औरत के साथ कर सकता है।
इधर राजेश ने अपना लंद मधु की chut से बाहर निकाला, उसका मोटा लंबा लंद को आरती आश्चर्य से देखने लगीं।
राजेश ने मधु को लंद चूसने का इशारा किया।
मधु बेड से उठ कर राजेश के लंद के नीचे बैठ गई और राजेश का लंद पकड़ कर, मुंह में भर कर गप गप चूसने लगीं।
आरती ऐसा दृश्य कभी देखी नही थीं।
वह तो राजेश को भोला भाला समझता था। वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं।
वह आंखे गढ़ाए अन्दर के दृश्य को देखने लगी।
इधर राजेश ने मधु को पलंग पकड़ाकर झुका दिया, और पीछे से लंद को boor में डालकर, फ्च फ़च चोदना शुरु कर दिया।
मधु फिर जन्नत की सैर करने लगीं।
आह उन उई मा,, आई ई,,,,
आरती ने कभी ऐसा दृश्य की कल्पना भी नहीं की थी।
यह दृश्य देखकर उसके शरीर में खून दोगुने गति से बहने लगा।
इधर राजेश मधु को दना दन चोदे जा रहा था।
आरती दंग थी राजेश का इतना मोटा लंद आखिर मधु कैसे अंदर ले पा रही है। उसकी boor की छेद तो एकदम सकरी है।
इधर राजेश तेज तेज चोदने लगा, मधु जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।
राजेश ने चोदना बंद कर दिया।
कुछ देर बाद राजेश ने मधु को अपने गोद में बिठा लिया। वह उसकी ओंठ चूसने लगा, चूची मसलने पीने लगा। उसकी chut सहलाने लगा।
जिससे मधु फिर गर्म हो गई। राजेश बेड पे लेट गया।
उसका लंद हवा में लहरा रहा था।
मधु बेड पर चढ़ गई, और लंद को पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर उस पर बैठ गई। लंद boor में समा गया।
अब मधु राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।
आरती आश्चर्य से इन दृश्यों को देखने लगी। उसे अपनी योनि में गिला पन महसूस होने लगा।
इधर राजेश मधु की कमर चूतड पकड़ कर नीचे से कमर उचका ऊचका कर लंद को boor की गहराइयों में पहुंचाने लगा।
मधु और राजेश दोनों जन्नत की सैर करने लगें।
दोनों को chudai में बहुत मजा आ रहा था।
मधु की कामुक सिसकारी से कमरा गूंज रहा था।
इधर राजेश काफी जोश में आ गया था।
इधर मधु उछल उछल कर थक गई, तब राजेश ने मोर्चा सम्हाला।
राजेश ने मधु को नीचे लिटाया उसकी चूतड के नीचे तकिया लगा दिया फिर उसने उसकी टांगो को अपने कंधे पर रख दिया और लंद को boor में डालकर गच गच चोदने लगा। लंद मधु की बच्चे दानी को ठोकने लगा।
जिससे मधु का पूरा शरीर झनझनाने लगा।
उसके मुंह से अत्यंत मादक आवाजें निकलने लगी। कुछ ही देर में वह फिर से झड़ने लगीं। इधर राजेश भी झड़ने के करीब था, वह और जोर जोर से चोदने लगा, अपना लंद बाहर निकाला और मधु के मुंह में डाल कर,, आह,, आह आह मां,,,,
कराहते हुवे झड़ने लगा। कुछ वीर्य उसके चेहरे पर छोड़ दिया।
मधु का मुंह वीर्य से पूरा लबा लब भर गया।
वह गटक गटक कर पूरा वीर्य पी गई।
यह दृश्य देखकर आरती को चक्कर आने लगा, वह सीढ़ी से गिर न जाए। वह कापते हुवे पैरो से सीढ़ी से नीचे उतरी और सीधा अपना घर चली गई।
वह अपने कमरे में चली गईं, उसकी आंखों के सामने अभी भी वही सब दृश्य चलने लगा।
उसने अपनी चड्डी का मुआइना किया, जो पूरी तरह गीली हो चुकी थीं। उसके साथ ऐसा पहली बार huwa था।
इधर राजेश और मधु दोनों सुस्ता रहें थे।
कुछ देर बाद दोनों अपने कपडे पहने फिर राजेश घर आ गया।
अपने कमरे में आकर आराम करने लगा।
आरती पलंग पर लेट कर उन्ही दृस्यो को याद कर रहि थी।
मधु तो पूरी रण्डी निकली, कैसे भईया का के लंद का पानी पी गई।
और भईया तो रण्डी बाज निकला, कितना भोला भाला लगता है।
लोग कितना इज्जत और मान सम्मान करते है उसका, उसने राजेश का नया रूप देख कर अभी भी विश्वास नहीं कर पा रही थी।
वह भोजन के लिए कमरे से बाहर, भोजन करने का उसका मन नहीं था। थोड़ा सा भोजन कर कमरे में जाकर फिर लेट गई।
वह रात भर सो नहीं सकी, उसके आंखो के सामने अभी भी वही दृस्य चल रहा था।
वह रात में पहली बार अपनी boor में खुजली महसूस की और उसे अपनी उंगली से रगड़ने लगीं।
राजेश के लंद को याद कर दो बार झड़ी।
उसका शरीर गर्म हो चुका था। उसे बुखार चढ़ गया था।
जब वह देर तक सोई रही।
पदमा _अरे बहु ये आरती को क्या huwa है, अभी तक उठी क्यू नही है?
पूनम कमरे में आई।
अरे आरती आज क्या हो गया है तुमको, तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।
पूनम ने उसकी माथे को छू कर देखा।
पूनम _तुम्हे तो तेज बुखार है।
कही मासिक धर्म तो नही शुरू हो गया।
Ma जी पूछ रही है इतने देर तक सो क्यू रही हो। मै मां जी को बता कर आती हूं तुम्हे तेज बुखार है।
आरती _भाभी, रुको मैं उठ रही हूं, मुझे कुछ नहीं huwa है मै ठीक हूं।
मां को कुछ मत बताओ।
पूनम _पर क्यू?
आरती _कहा न मुझे कुछ नहीं huwa है? वो रात में मैं देर तक पढ़ती रहि न इसलीय है।
राजेश भईया उठ गए क्या?
पूनम _क्यू? राजेश को क्यों पूछ रही हो? वो अखाड़ा पे चला गया है।
आरती _वो राजेश भईया से कुछ पूछना था।
पुनम _तुम्हारी तबियत ठीक नहीं लग रहि है, तुम आराम करो, मै टैबलेट लाकर देती हूं उसे खा लो।
पुनम ने आरती को टैबलेट लाकर दिया।
आरती टैबलेट खाकर आराम करनेलगीं।
इस घटना के बाद आरती के अन्दर का औरत जाग चुका था।
अब वह राजेश के सामने जाता तो उसकी नजर उसके टांगो बीच जाता।
उसके लंद का याद करता कितना मोटा और लंबा है।
रात में अब राजेश के लंद को याद कर boor रगड़ती और झड़ने के बाद ही उसे नींद आता।
अब वह राजेश से चुदने की इच्छा रखने लगीं।
पर वह राजेश से कह नहीं सकती थीं, भईया मुझेचोदो, मै रोज तुम्हारे लंद को याद कर boor रगड़ती हूं।
उसे मधु पर गुस्सा आने लगा, वह भोले भाले भईया को बिगाड़ दी है, उसने राजेश भईया को फांस रखी है।
उसे समझ नही आ रहा था कि वह भईया से चुदने की इच्छा कैसे पूरी करे? समय ऐसा ही निकलता रहा।
आज राजेश बहुत खुश था, आज निशा का जन्म दिन था।
सुबह उठते ही उसने निशा को मेसेज किया, हैप्पी बर्थडे डे निशा जी, जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर आपको सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाए।
इधर लंदन में निशा न राजेश का मेसेज पढ़ा। पर कोई रिप्लाई नही दिया।
कालेज में उसके दोस्तो ने जन्म दिन की बधाई दिया और निशा के मना करने के बाद भी लंच के समय आर्यन ने कैंटीन में केक काट कर बर्थ डे सेलिब्रेट किया, पर निशा को उसमे कोई रूचि नहीं थी।
सीमा चाह रही थीं की किसी अच्छे से होटल में जाकर निशा का बर्थ डे सेलिब्रेट करे पर निशा नही मानी।
कालेज में छुट्टी के बाद, निशा अपनी फेक्ट्री जो निर्माणधीन था, वहा चली गई।
वहा एडम फेक्ट्री का काम देख रहा था।
निशा ने एडम से पूछा की production शुरू होने में और कितने दिन लग जायेंगे।
एडम _मैम बस एक दो माह में प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।
निशा _आर्यन हमे प्रोडक्शन शुरू होने से पहले ही, प्रचार प्रसार शुरू कर देना चाहिए।
तुम विज्ञापन बनानेवाले किसी अच्छी कंपनी से संपर्क करो।
आर्यन _निशा, ये काम मुझ पर छोड़ दो, एक अच्छी कंपनी के बारे में मै जानता हूं। मै आज ही वहा जाकर संपर्क करता हूं।
निशा _,, गुड
मैं चाहती हूं की प्रोडक्शन से पहले ही हमारे प्रोडक्ट की जानकारी, लोगो तक पहुंचे और उसकी खूबियों के बारे में लोगो को पता चले।
निशा को उसकी बुआ ने फोन किया, बेटा तुमसे मिलने कोई आया है?
निशा से कहा,,,
कौन है बुवा,,
ये तुम्हारे लिए सरप्राइज है,,
तुम जल्दी से घर आ जाओ,,
निशा और सीमा दोनों घर पहुंचे,,
निशा देखो उसकी मां सुजाता, इण्डिया से आई थी।
निशा _,, मां,,
सुजाता _,, बेटा,,,
दोनों एक दूसरे से लिपट गए,,
सुजाता _मेरी बच्ची कैसी है तू?
निशा _मै अच्छी हू मां।
आप कैसी है?
सुजाता _मुझे तो बस तुम्हारी ही चिंता लगीं रहती है मेरी बच्ची।
निशा _मां, आप मेरी चिंता न किया करो, यहां बुआ और फूफा जी मेरे अच्छे से ख्याल रखते है, और सीमा तो है न मेरे साथ।
मां आपने बताया नही आप आ रही है?
सुजाता _बेटा, मै तुम्हे सरप्राईज देना चाहतीं थी।
आज तुम्हारा जन्म दिन जो है।
सुजाता _चलो बेटा तुम तैयार हो जाओ, फिर केक काटना,,,
निशा _मां, मेरा मन नहीं कर रहा,,,
सीमा _निशा ये क्या कह रही हो? आंटी इंडिया से आई है तुम्हारे जन्म दिन सेलीब्रेट करने।
सुजाता _सीमा तुम अपने कालेज के दोस्तो को भी बुला लो,,
सीमा _ठीक, है आंटी।
सीमा ने अपने कालेज के दोस्तो को फ़ोन कर बुला लिया,,
इधर निशा न चाहते हुवे भी अपनी मां को निराश न हों इसलिए कमरे में जाकर तैयार होने लगीं।
इधर राजेश आज बहुत खुश था।
वह निशा के जन्म दिन को सेलीब्रेट करना चाहता था।
वह लक्षमण पुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचा।
दिव्या राजेश को देखकर सरप्राइज हो गई।
दिव्या _राजेश तुम यहां,, अचानक,,
राजेश _हा दिव्या जी, मै आपको कुछ बताने के लिए यहां आया था,,
दिव्या _बड़े खुश लग रहे हो, ऐसा क्या बात है मैं भी तो जानू?
राजेश _दिव्या जी आज निशा जी का जन्म दिन है।
दिव्या _ये तो बड़ी खुशी की बात है? तुमने उसे बधाई दिया की नही?
राजेश _मैंने उसे बधाई संदेश भेजा पर अभी तक कोई रिप्लाई नही आया।
दिव्या _ओह हो सकता है, उसने मेसेज पढ़ी न हो!
राजेश _दिव्या जी, मै निशा जी का जन्म दिन सेलीब्रेट करना चाहता हूं? आपके साथ, क्या आप मेरे साथ चलेंगी, किसी पार्क में।
दिव्या राजेश को नही कर सकता था, वह उसकी खुशी के लिए साथ चलने तैयार हो गई।
दोनों केक लेकर एक खूबसूरत पार्क में पहुंचे।
राजेश _दिव्या जी, निशा जी तो यहां है नही, आज आप ही निशा बन जाओ न,,,
दिव्या _अच्छा जो, हुकुम, बोलो क्या करना होगा।
राजेश _ये केक काटना होगा,और कोई अच्छी सी गीत सुनाना होगा, निशा जी बनकर, और क्या?
दिव्या _ठीक है पर एक शर्त पर,
राजेश _कैसी शर्त?
दिव्या _,, तुम्हे गीत में मेरा साथ देना होगा?
राजेश _ठीक है दिव्या जी।
उसके बाद दिव्या ने, केक काटा,,
राजेश _, हैप्पी बर्थडे टू यू निशा जी,,,
दिव्या ने राजेश को केक का टुकड़ा खिलाया।
राजेश ने भी दिव्या को केक का टुकड़ा खिलाया।
राजेश _दिव्या जी अब कोई गीत सुनाओ।
दिव्या _तुम भी साथ देना, ये सोचना गाना मैं नहीं निशा गा रही है।
राजेश _ठीक है।
दिव्या ने गीत गाना शुरू किया,,
राजेश ने उसका साथ दिया,,
प्यार करते है हम तुम्हे इतना,,,
दो आंखे तो क्या , दो जहा में समाए न जितना,,
प्यार करते हैं हम तुम्हे इतना,,,,,
दोनो एक अच्छी से रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाए।
दिव्या का मन तो नही था,,,
वह अन्दर से दुखी थी,,
बीच बीच में उसकी आंखो से आंसू निकल आते थे, जिसे राजेश से छुपाकर पोंछ लेती थीं।
जब दिव्या घर पहुंची, तो रात हो चुकी थी।
रत्नवती और गीता दिव्या के लिए चिंतित थी पर वह फोन द्वारा बता दी थीं की वह राजेश के साथ है।
जब घर पहुंची तो,,
रत्नवती ने उसे भोजन के लिए बुलाया तो, दिव्या ने बताया की वह खाकर आई है।
इधर गीता को दिव्या की आंखों में उदासी नजर आया।
वह रात में उसके कमरे में गई,,,
दिव्या _दीदी तुम इस समय,,,
गीता _हू, क्या बात है? तुम इतनी उदास क्यों हो?
दिव्या _कुछ भी तो नहीं दी,,
मुझे क्या huwa?
गीता _तुम्हारे चेहरे की ये उदासी मूझसे छिपा नहीं सकती, बोलो क्या बात है?
दिव्या की आंखों से आंसू बहने लगीं।
दिव्या _दीदी, कुछ भी तो नहीं?
गीता _छोटी, मुझे मालूम है, तुम राजेश को लेकर उदास हो।
उसने तुमसे कुछ कहा?
दिव्या ने न में सिर हिलाया।
गीता _दिव्या, मै जानती हूं तुम, राजेश से बहुत प्यार करती हो?
तुम राजेश को इस बारे में अब तक बताई की नही।
दिव्या _नही दी, वो निशा से प्यार करता है मेरे लिए उसके दिल में कोई फीलिंग नही।
दिव्या, गीता के गले से लिपट कर रोने लगी।
गीता _क्या उसे पता है उस रात उसने तुम्हारे साथ क्या किया है?
दिव्या _नही दी, उसे कुछ मालूम नहीं।
गीता _उसे बता क्यू नही देती।
दिव्या _नही दी मै उसे कभी नहीं बताऊंगी।
गीता _छोटी मै तुम्हारे आंखो में आंसू नहीं देख सकती, अगर तुम्ह नही बताओगी तो मैं बताऊंगी।
दिव्या _नही दी, तुम्हे मेरी कसम है तुम राजेश को कुछ भी नहीं बताओगी।