Incest यह क्या हुआ - Page 26 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

अगले दिन राजेश की दिनचर्या पहले की ही तरह जारी रहा। सुबह उठकर अखाड़ा जाता, वहा व्यायाम करता, पुलिस एवम फौजी भर्ती केंद्र के प्रशिक्षणार्थियों को लिखित परीक्षा का अभ्यास कराता। फिर घर आकर नहाता, नाश्ता करता, आईएएस की इंटरव्यू की तैयारी करता।

दोपहर में ज्योति और पूनम अपना दुध पिलाती, मूड बन जानें पर दोनों की ठुकाई भी करता। दोनो की दुध पीकर राजेश और ताकतवर बनता जा रहा था।

इधर मधु और आरती दोनों स्कूल में पढ़ाने के साथ साथ, प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कर रही थीं।

राजेश दोनो की मदद कर रहा था।

एक दिन मधु को राजेश से चुदाने की बहुत इच्छा हो रही थी।

संडे का दिन था, मधु के माता पिता दोनों घर पर नहीं थे। दोपहर का समय था।

मधु ने राजेश को फ़ोन किया।

राजेश _हा मधु बोलो कुछ काम था क्या?

मधु _हा भईया, कुछ टॉपिक पर समझ नही बन पा रही है, आप की मदद चाहिए।

राजेश _अच्छा ठीक है घर आ जाओ, जो भी समस्या है पूछ लेना।

मधु_भईया मां बाबू जी बाहर गए है, उन्हे आने में रात हो जायेगी। घर और मुन्ने की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। आप घर आ जाइए न ।

राजेश _ठीक है।

राजेश मधु के घर जा रहा था तभी,

पूनम _राजेश, इस समय कहा जा रहे हो।

राजेश _भाभी, मधु के घर जा रहा हूं। उसे परीक्षा की तैयारी में कुछ दिक्कतें है।

राजेश मधु के घर पहुंचा।

मधु _आओ भईया, बैठो, देखो ने इस सवाल को कैसे सॉल्व करना है मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है।

राजेश _दिखाओ मुझे, कहां दिक्कत हो रही है तुम्हे।

मधु _भईया आप बैठो न, मै चाय बना कर लाती हूं।

राजेश _मधु पहले दिक्कत कहां है उस पर बाते कर लेते।

मधु_, भईया बात तो होती रहेगी, पहले चाय चढ़ा देती हूं।

मधु चाय चढ़ाने चली गई।

राजेश घर के बैठक कमरा में रखे कुर्सी पर बैठ कर टॉपिक को देखने लगा।

मधु _चाय चढ़ा कर कमरे में आ गई।

राजेश _चलो बताओ, किस विषय पर तुम्हे दिक्कत हो रही है।

मधु ने कुछ टॉपिक को बताया जिसमे उसे कठिनाई महसूस हो रही थी।

राजेश उन टॉपिक को सरल तरीके से मधु को समझाने लगा।

कुछ देर बाद किचन में जाकर वह कप में चाय ले आई। दोनो चाय पीने लगे।

तभी बेडरूम में मुन्ने की रोने की आवाज सुनाई पड़ा।

मधु _भईया लगता है, मुन्ना उठ गया।

मधु अपने बेडरूम में गई और बच्चे को पुचकारते हुवे मेला मुन्ना उठ गया, आजा मेला राजा बेटा,,, वह बच्चे को गोद मे उठाई।

बच्चे को बैठक कक्ष में लाई, बच्चा अभी भी रो रहा था।

मधु _लगता है इसे भूख लगी है।

मधु अपनी दुपट्टा नीचे कर दी और अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।

उसकी बड़ीबड़ी दुध से भरी मस्त चूचियां, राजेश के आंखों के सामने आ गया।

मधु बिना आंचल ढके ही बच्चे को गोद मे लेकर दुध पिलाने लगी।

राजेश मधु की चुचियों को इग्नोर करना चाहा, पर उसकी चूचियां इतनी मस्त था की, राजेश की नजर जब चुचियों पर गया तो उसके शरीर में रक्त संचार बढ़ने लगा।

उसका लंद में तानव आने लगा।

तभी मधु के मुंह से उई मा निकला,,,

राजेश _क्या huwa मधु? क्यू चिखी।

मधु _मुन्ना बड़ा बदमाश हो गया है, बडा जोर से कांटा मेरे निप्पल को।

वह मुन्ने के मुंह से निप्पल निकाला, और राजेश को दिखाने लगा।

मधु _भईया देखो ना, काटने से कैसा लाल हो गया मेरा निप्पल।

राजेश मधु के निप्पल को देखने लगा।

मधु _भईया बडी जलन हो रही है, थोड़ा चांटकर निप्पल को आराम दो ना।

राजेश ने मधु के दूदू को हाथ में पकड़ लिया फिर उसके निप्पल को जीभ से चाटने लगा।

मधु _भईया, आप बहुत अच्छे कर रहे है? मुझे बडा आराम मिल रहा है।

निप्पल को मुंह में लेकर प्यार से चूस लो,

राजेश मधु के निप्पल को मुंह में डाल कर चूसना शुरु कर दिया।

एक निपल को मुन्ना चूस रहा था तो एक को राजेश।

मधु बहुत गर्म हो गई। उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगीं।

इधर राजेश का लंद भी अकड़ चुका था।

उसे chut मारने का मन करने लगा।

इधर मधु राजेश के पेंट के ऊपर से उसका लंद सहलाने लगी।

दोनों बहुत उत्तेजित हो गए।

मधु अपने कपकपाते लब्जो में कहा, भईया चलो बेड रूम में चलते है।

राजेश और मधु दोनों बेडरूम में चले गए।

मधु ने बच्चे को बेड में सुला कर दरवाजा बंद कर दिया।

इधर आरती भी अपने कमरे पढ़ाई कर रही थीं।

उसे भी राजेश से कुछ पूछना था, वह राजेश के कमरे में गई। राजेश उसे नही मिला।

आरती _ये राजेश भईया, कहा चला गया।

उसने अपनी भाभी से पूछा,,

भाभी तुम्हे पता है क्या राजेश भईया कहा है।

पूनम _हा वो मधु के घर गया है।

कह रहा था की मधु को उसकी पढाई में कुछ समस्या है, उसे समझाने गया है।

आरती _भाभी मै भी जा रही मधु के घर, मुझे भी भईया से कुछ पूछना है।

आरती पुस्तक लेकर मधु के घर गई l। बाहर का दरवाजा खुला था। आरती जब अन्दर गई तो राजेश और मधु दोनों कही नजर नहीं आए।

तभी उसने देखा, मधु के कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द है।

उसे लगा दोनों अन्दर होंगे उसने दरवाजा खटखटाना चाहा तभी, उसे मधु की सिसकने की आवाज सुनाई पढ़ी।

आह उन,, आई ई,, उई मां आह,,,,

आरती ने अन्दर क्या चल रहा है जानने के लिए दरवाजे पर छेद ढूंढी,,

पर उसे कोई छेद नही मिला।

वह कुछ देर तक मधु की मादक सिसकारी सुनती रही।

वह अन्दर क्या चल रहा है जानने को व्याकुल हो गई,तभी उसे याद आया की मधु के कमरे में वेंटीलेटर लगा है। बाड़ा के पीछे जाकर सीढ़ी चडकर वेंटिलेटर से अन्दर झांक सकती है, आखिर अंदर चल क्या रहा है?

वह घर के पीछे बाड़ा में चली गई। वहा बांस से बनी सीढ़ी रखी थीं।

उसे मधु के कमरे के दीवार पे लगा करऊपर चड़ गई, और वेंटीलेटर से अन्दर झांकने लगीं।

अन्दर का दृश्य देखकर उसकी होश उड़ गई।

राजेश और मधु दोनों बिल्कुल नंगे थे।

राजेश मधु को पलंग किनाने लिटा का, उसकी टांगे फैला कर।

गच गच चोद रहा था।

उसकी चूची दबा दबा कर दुध निचोड़ एवम पी रहा था।

मधु अपनी मुंह से कामुक सिसकारी निकाल रही थीं।

आरती की आंखे फटी की फटी रह गई।

वह बिना पलके झपकाए अन्दर का दृश्य देखने लगी।

वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं। की वह ऐसा भी किसी औरत के साथ कर सकता है।

इधर राजेश ने अपना लंद मधु की chut से बाहर निकाला, उसका मोटा लंबा लंद को आरती आश्चर्य से देखने लगीं।

राजेश ने मधु को लंद चूसने का इशारा किया।

मधु बेड से उठ कर राजेश के लंद के नीचे बैठ गई और राजेश का लंद पकड़ कर, मुंह में भर कर गप गप चूसने लगीं।

आरती ऐसा दृश्य कभी देखी नही थीं।

वह तो राजेश को भोला भाला समझता था। वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं।

वह आंखे गढ़ाए अन्दर के दृश्य को देखने लगी।

इधर राजेश ने मधु को पलंग पकड़ाकर झुका दिया, और पीछे से लंद को boor में डालकर, फ्च फ़च चोदना शुरु कर दिया।

मधु फिर जन्नत की सैर करने लगीं।

आह उन उई मा,, आई ई,,,,

आरती ने कभी ऐसा दृश्य की कल्पना भी नहीं की थी।

यह दृश्य देखकर उसके शरीर में खून दोगुने गति से बहने लगा।

इधर राजेश मधु को दना दन चोदे जा रहा था।

आरती दंग थी राजेश का इतना मोटा लंद आखिर मधु कैसे अंदर ले पा रही है। उसकी boor की छेद तो एकदम सकरी है।

इधर राजेश तेज तेज चोदने लगा, मधु जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने चोदना बंद कर दिया।

कुछ देर बाद राजेश ने मधु को अपने गोद में बिठा लिया। वह उसकी ओंठ चूसने लगा, चूची मसलने पीने लगा। उसकी chut सहलाने लगा।

जिससे मधु फिर गर्म हो गई। राजेश बेड पे लेट गया।

उसका लंद हवा में लहरा रहा था।

मधु बेड पर चढ़ गई, और लंद को पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर उस पर बैठ गई। लंद boor में समा गया।

अब मधु राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

आरती आश्चर्य से इन दृश्यों को देखने लगी। उसे अपनी योनि में गिला पन महसूस होने लगा।

इधर राजेश मधु की कमर चूतड पकड़ कर नीचे से कमर उचका ऊचका कर लंद को boor की गहराइयों में पहुंचाने लगा।

मधु और राजेश दोनों जन्नत की सैर करने लगें।

दोनों को chudai में बहुत मजा आ रहा था।

मधु की कामुक सिसकारी से कमरा गूंज रहा था।

इधर राजेश काफी जोश में आ गया था।

इधर मधु उछल उछल कर थक गई, तब राजेश ने मोर्चा सम्हाला।

राजेश ने मधु को नीचे लिटाया उसकी चूतड के नीचे तकिया लगा दिया फिर उसने उसकी टांगो को अपने कंधे पर रख दिया और लंद को boor में डालकर गच गच चोदने लगा। लंद मधु की बच्चे दानी को ठोकने लगा।

जिससे मधु का पूरा शरीर झनझनाने लगा।

उसके मुंह से अत्यंत मादक आवाजें निकलने लगी। कुछ ही देर में वह फिर से झड़ने लगीं। इधर राजेश भी झड़ने के करीब था, वह और जोर जोर से चोदने लगा, अपना लंद बाहर निकाला और मधु के मुंह में डाल कर,, आह,, आह आह मां,,,,

कराहते हुवे झड़ने लगा। कुछ वीर्य उसके चेहरे पर छोड़ दिया।

मधु का मुंह वीर्य से पूरा लबा लब भर गया।

वह गटक गटक कर पूरा वीर्य पी गई।

यह दृश्य देखकर आरती को चक्कर आने लगा, वह सीढ़ी से गिर न जाए। वह कापते हुवे पैरो से सीढ़ी से नीचे उतरी और सीधा अपना घर चली गई।

वह अपने कमरे में चली गईं, उसकी आंखों के सामने अभी भी वही सब दृश्य चलने लगा।

उसने अपनी चड्डी का मुआइना किया, जो पूरी तरह गीली हो चुकी थीं। उसके साथ ऐसा पहली बार huwa था।

इधर राजेश और मधु दोनों सुस्ता रहें थे।

कुछ देर बाद दोनों अपने कपडे पहने फिर राजेश घर आ गया।

अपने कमरे में आकर आराम करने लगा।

आरती पलंग पर लेट कर उन्ही दृस्यो को याद कर रहि थी।

मधु तो पूरी रण्डी निकली, कैसे भईया का के लंद का पानी पी गई।

और भईया तो रण्डी बाज निकला, कितना भोला भाला लगता है।

लोग कितना इज्जत और मान सम्मान करते है उसका, उसने राजेश का नया रूप देख कर अभी भी विश्वास नहीं कर पा रही थी।

वह भोजन के लिए कमरे से बाहर, भोजन करने का उसका मन नहीं था। थोड़ा सा भोजन कर कमरे में जाकर फिर लेट गई।

वह रात भर सो नहीं सकी, उसके आंखो के सामने अभी भी वही दृस्य चल रहा था।

वह रात में पहली बार अपनी boor में खुजली महसूस की और उसे अपनी उंगली से रगड़ने लगीं।

राजेश के लंद को याद कर दो बार झड़ी।

उसका शरीर गर्म हो चुका था। उसे बुखार चढ़ गया था।

जब वह देर तक सोई रही।

पदमा _अरे बहु ये आरती को क्या huwa है, अभी तक उठी क्यू नही है?

पूनम कमरे में आई।

अरे आरती आज क्या हो गया है तुमको, तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।

पूनम ने उसकी माथे को छू कर देखा।

पूनम _तुम्हे तो तेज बुखार है।

कही मासिक धर्म तो नही शुरू हो गया।

Ma जी पूछ रही है इतने देर तक सो क्यू रही हो। मै मां जी को बता कर आती हूं तुम्हे तेज बुखार है।

आरती _भाभी, रुको मैं उठ रही हूं, मुझे कुछ नहीं huwa है मै ठीक हूं।

मां को कुछ मत बताओ।

पूनम _पर क्यू?

आरती _कहा न मुझे कुछ नहीं huwa है? वो रात में मैं देर तक पढ़ती रहि न इसलीय है।

राजेश भईया उठ गए क्या?

पूनम _क्यू? राजेश को क्यों पूछ रही हो? वो अखाड़ा पे चला गया है।

आरती _वो राजेश भईया से कुछ पूछना था।

पुनम _तुम्हारी तबियत ठीक नहीं लग रहि है, तुम आराम करो, मै टैबलेट लाकर देती हूं उसे खा लो।

पुनम ने आरती को टैबलेट लाकर दिया।

आरती टैबलेट खाकर आराम करनेलगीं।

इस घटना के बाद आरती के अन्दर का औरत जाग चुका था।

अब वह राजेश के सामने जाता तो उसकी नजर उसके टांगो बीच जाता।

उसके लंद का याद करता कितना मोटा और लंबा है।

रात में अब राजेश के लंद को याद कर boor रगड़ती और झड़ने के बाद ही उसे नींद आता।

अब वह राजेश से चुदने की इच्छा रखने लगीं।

पर वह राजेश से कह नहीं सकती थीं, भईया मुझेचोदो, मै रोज तुम्हारे लंद को याद कर boor रगड़ती हूं।

उसे मधु पर गुस्सा आने लगा, वह भोले भाले भईया को बिगाड़ दी है, उसने राजेश भईया को फांस रखी है।

उसे समझ नही आ रहा था कि वह भईया से चुदने की इच्छा कैसे पूरी करे? समय ऐसा ही निकलता रहा।

आज राजेश बहुत खुश था, आज निशा का जन्म दिन था।

सुबह उठते ही उसने निशा को मेसेज किया, हैप्पी बर्थडे डे निशा जी, जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर आपको सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाए।

इधर लंदन में निशा न राजेश का मेसेज पढ़ा। पर कोई रिप्लाई नही दिया।

कालेज में उसके दोस्तो ने जन्म दिन की बधाई दिया और निशा के मना करने के बाद भी लंच के समय आर्यन ने कैंटीन में केक काट कर बर्थ डे सेलिब्रेट किया, पर निशा को उसमे कोई रूचि नहीं थी।

सीमा चाह रही थीं की किसी अच्छे से होटल में जाकर निशा का बर्थ डे सेलिब्रेट करे पर निशा नही मानी।

कालेज में छुट्टी के बाद, निशा अपनी फेक्ट्री जो निर्माणधीन था, वहा चली गई।

वहा एडम फेक्ट्री का काम देख रहा था।

निशा ने एडम से पूछा की production शुरू होने में और कितने दिन लग जायेंगे।

एडम _मैम बस एक दो माह में प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।

निशा _आर्यन हमे प्रोडक्शन शुरू होने से पहले ही, प्रचार प्रसार शुरू कर देना चाहिए।

तुम विज्ञापन बनानेवाले किसी अच्छी कंपनी से संपर्क करो।

आर्यन _निशा, ये काम मुझ पर छोड़ दो, एक अच्छी कंपनी के बारे में मै जानता हूं। मै आज ही वहा जाकर संपर्क करता हूं।

निशा _,, गुड

मैं चाहती हूं की प्रोडक्शन से पहले ही हमारे प्रोडक्ट की जानकारी, लोगो तक पहुंचे और उसकी खूबियों के बारे में लोगो को पता चले।

निशा को उसकी बुआ ने फोन किया, बेटा तुमसे मिलने कोई आया है?

निशा से कहा,,,

कौन है बुवा,,

ये तुम्हारे लिए सरप्राइज है,,

तुम जल्दी से घर आ जाओ,,

निशा और सीमा दोनों घर पहुंचे,,

निशा देखो उसकी मां सुजाता, इण्डिया से आई थी।

निशा _,, मां,,

सुजाता _,, बेटा,,,

दोनों एक दूसरे से लिपट गए,,

सुजाता _मेरी बच्ची कैसी है तू?

निशा _मै अच्छी हू मां।

आप कैसी है?

सुजाता _मुझे तो बस तुम्हारी ही चिंता लगीं रहती है मेरी बच्ची।

निशा _मां, आप मेरी चिंता न किया करो, यहां बुआ और फूफा जी मेरे अच्छे से ख्याल रखते है, और सीमा तो है न मेरे साथ।

मां आपने बताया नही आप आ रही है?

सुजाता _बेटा, मै तुम्हे सरप्राईज देना चाहतीं थी।

आज तुम्हारा जन्म दिन जो है।

सुजाता _चलो बेटा तुम तैयार हो जाओ, फिर केक काटना,,,

निशा _मां, मेरा मन नहीं कर रहा,,,

सीमा _निशा ये क्या कह रही हो? आंटी इंडिया से आई है तुम्हारे जन्म दिन सेलीब्रेट करने।

सुजाता _सीमा तुम अपने कालेज के दोस्तो को भी बुला लो,,

सीमा _ठीक, है आंटी।

सीमा ने अपने कालेज के दोस्तो को फ़ोन कर बुला लिया,,

इधर निशा न चाहते हुवे भी अपनी मां को निराश न हों इसलिए कमरे में जाकर तैयार होने लगीं।

इधर राजेश आज बहुत खुश था।

वह निशा के जन्म दिन को सेलीब्रेट करना चाहता था।

वह लक्षमण पुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचा।

दिव्या राजेश को देखकर सरप्राइज हो गई।

दिव्या _राजेश तुम यहां,, अचानक,,

राजेश _हा दिव्या जी, मै आपको कुछ बताने के लिए यहां आया था,,

दिव्या _बड़े खुश लग रहे हो, ऐसा क्या बात है मैं भी तो जानू?

राजेश _दिव्या जी आज निशा जी का जन्म दिन है।

दिव्या _ये तो बड़ी खुशी की बात है? तुमने उसे बधाई दिया की नही?

राजेश _मैंने उसे बधाई संदेश भेजा पर अभी तक कोई रिप्लाई नही आया।

दिव्या _ओह हो सकता है, उसने मेसेज पढ़ी न हो!

राजेश _दिव्या जी, मै निशा जी का जन्म दिन सेलीब्रेट करना चाहता हूं? आपके साथ, क्या आप मेरे साथ चलेंगी, किसी पार्क में।

दिव्या राजेश को नही कर सकता था, वह उसकी खुशी के लिए साथ चलने तैयार हो गई।

दोनों केक लेकर एक खूबसूरत पार्क में पहुंचे।

राजेश _दिव्या जी, निशा जी तो यहां है नही, आज आप ही निशा बन जाओ न,,,

दिव्या _अच्छा जो, हुकुम, बोलो क्या करना होगा।

राजेश _ये केक काटना होगा,और कोई अच्छी सी गीत सुनाना होगा, निशा जी बनकर, और क्या?

दिव्या _ठीक है पर एक शर्त पर,

राजेश _कैसी शर्त?

दिव्या _,, तुम्हे गीत में मेरा साथ देना होगा?

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

उसके बाद दिव्या ने, केक काटा,,

राजेश _, हैप्पी बर्थडे टू यू निशा जी,,,

दिव्या ने राजेश को केक का टुकड़ा खिलाया।

राजेश ने भी दिव्या को केक का टुकड़ा खिलाया।

राजेश _दिव्या जी अब कोई गीत सुनाओ।

दिव्या _तुम भी साथ देना, ये सोचना गाना मैं नहीं निशा गा रही है।

राजेश _ठीक है।

दिव्या ने गीत गाना शुरू किया,,

राजेश ने उसका साथ दिया,,

प्यार करते है हम तुम्हे इतना,,,

दो आंखे तो क्या , दो जहा में समाए न जितना,,

प्यार करते हैं हम तुम्हे इतना,,,,,

दोनो एक अच्छी से रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाए।

दिव्या का मन तो नही था,,,

वह अन्दर से दुखी थी,,

बीच बीच में उसकी आंखो से आंसू निकल आते थे, जिसे राजेश से छुपाकर पोंछ लेती थीं।

जब दिव्या घर पहुंची, तो रात हो चुकी थी।

रत्नवती और गीता दिव्या के लिए चिंतित थी पर वह फोन द्वारा बता दी थीं की वह राजेश के साथ है।

जब घर पहुंची तो,,

रत्नवती ने उसे भोजन के लिए बुलाया तो, दिव्या ने बताया की वह खाकर आई है।

इधर गीता को दिव्या की आंखों में उदासी नजर आया।

वह रात में उसके कमरे में गई,,,

दिव्या _दीदी तुम इस समय,,,

गीता _हू, क्या बात है? तुम इतनी उदास क्यों हो?

दिव्या _कुछ भी तो नहीं दी,,

मुझे क्या huwa?

गीता _तुम्हारे चेहरे की ये उदासी मूझसे छिपा नहीं सकती, बोलो क्या बात है?

दिव्या की आंखों से आंसू बहने लगीं।

दिव्या _दीदी, कुछ भी तो नहीं?

गीता _छोटी, मुझे मालूम है, तुम राजेश को लेकर उदास हो।

उसने तुमसे कुछ कहा?

दिव्या ने न में सिर हिलाया।

गीता _दिव्या, मै जानती हूं तुम, राजेश से बहुत प्यार करती हो?

तुम राजेश को इस बारे में अब तक बताई की नही।

दिव्या _नही दी, वो निशा से प्यार करता है मेरे लिए उसके दिल में कोई फीलिंग नही।

दिव्या, गीता के गले से लिपट कर रोने लगी।

गीता _क्या उसे पता है उस रात उसने तुम्हारे साथ क्या किया है?

दिव्या _नही दी, उसे कुछ मालूम नहीं।

गीता _उसे बता क्यू नही देती।

दिव्या _नही दी मै उसे कभी नहीं बताऊंगी।

गीता _छोटी मै तुम्हारे आंखो में आंसू नहीं देख सकती, अगर तुम्ह नही बताओगी तो मैं बताऊंगी।

दिव्या _नही दी, तुम्हे मेरी कसम है तुम राजेश को कुछ भी नहीं बताओगी।
 
अपनी मां का मन रखने के लिए, निशा बर्थ डे पार्टी के लिए तैयार होने लगी।

इधर सीमा अपने कालेज के सभी दोस्तो को फ़ोन लगाकर पार्टी में आने के लिए कह दिया।

निशा के फूफा ने पार्टी के लिए सारी व्यवस्था कर लिया था। और अपने कंपनी के प्रमुख कर्मचारियों को भी आमंत्रित किया था।

रात के आठ बजते, सभी लोग पार्टी के लिए अपनी उपस्थिति दे चुके थे।

निशा तैयार होकर पार्टी हाल में पहुंची, लोग ताली बजाने लगे।

सुजाता_ केक काटने का समय हो चुका है बेटा।

निशा ने केक कांटी, सभी उपस्थित मेहमानों नई निशा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।

उन्हे बर्थ डे गिफ्ट भेट किए।

सीमा ने अपने दोस्तों आर्यन, एडम को सुजाता से मिलाया।

उसके बाद नाचने गाने खाने पीने का प्रोग्राम शुरू huwa।

सीमा ने माइक सम्हाला,,,,

सीमा _दोस्तों, आप सभी को मैं यह बताना चाहूंगी कि निशा बहुत अच्छा गाती है, तो हम सब निशा से गुजारिश करते है कि आज जन्म दिन के अवसर पर हमे कुछ सुनाए।

निशा ने मना किया, माफ करना मूझसे गाना नहीं हो पाएगा।

सीमा, आर्यन _निशा प्लीज यार,,

हम सब का मन रखने के लिए कुछ सुना दो।

निशा _क्या सुनाऊं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

मुझे माफ कीजिए, प्लीज।

सीमा,_कुछ भी अपनी, दिल की बात ही कह दो।

सुजाता _सुना दो न बेटा, अपने दोस्तों का मन रखने के लिए,,,

निशा न चाहते हुवे भी, माइक अपने हाथ में थाम ली और कुछ देर सोचती रही,,

अपनी दिल की बात जुबा तक लाने लगी,,,

जीती थी जिसके लिए जिसके लिए मरती थी,,,

एक ऐसा लड़का था जिसे मैं प्यार करती थी,,,,

चाहा था जिसको खुद से भी ज्यादा,,,

उसने ही धोखा दिया,,,

उसने ही धोखा दिया,,,

बना के उसी ने बिगाड़ा मेरा आसिया,,,

एक ऐसा लड़का था जिसे मैं प्यार करती थी,,,,,

पार्टी खत्म होने के बाद, सभी मेहमान चले गए।

रात में सोने के समय,,,

सुजाता ने सीमा से कहा _सीमा बेटा आज मैं निशा के पास सोना चाहती हूं।

सीमा दूसरे कमरे में सोने चली गई,,,

निशा गुमसुम सी थी।

सुजता _बेटा तुम राजेश को अब तक भूले नहीं,,,

निशा _कोशिश तो कर रही हूं न मॉम,,,

सुजाता _बेटा, उसे तुम भूल जाओ उसी में तुम्हारी भलाई हैक्यों की उसमे कोई ईमान नहीं, वह धोखेबाज है। वह किसी एक के साथ नही रह सकता।

पता नही कितने लोगो के साथ वह अपनी राते रंगीन करता फिर रहा है।

वह आवारा बन चुका है।

उसने तुम्हे मेसेज किया था क्या?

निशा ने हा में सिर हिलाया,,,

सुजाता _, तुमने उसे रिप्लाइ दिया।

निशा ने न में सिर हिलाया,

सुजाता _ठीक किया, वो उसी लायक है।

अगले दिन फ्लाइट से सुजाता, इंडिया निकल गई।

निशा और सीमा उसे एयरपोर्ट छोड़ने गई।

सुजाता_बेटा तुम अपना ख्याल रखना, कोई भी बात हो तो मुझे फोन करना।

निशा ने हां में सिर हिलाई।

सुजाता _सीमा बेटा, तुम निशा का ख्याल रखना।

सीमा _आंटी आप चिन्ता न करो, मै हूं न।

निशा _लव यू मॉम

निशा सुजाता की गले लग कर बोली।

सुजाता _लव यू टू बेटा।

सुजाता फ्लाइट से इंडिया आ गई।

इधर आरती उस दिन राजेश और मधु को कामक्रीड़ा को देखने के बाद, उसकी अन्दर की औरत जाग चुकी थी।

अब वह खूब रगड़ रगड़ कर नहाती, सज धजने लगी। वह राजेश को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करने लगी।

उसे मधु पे गुस्सा भी आ रहा था। वह उससे ठीक से बात नही कर रही थी।

एक दिन मधु ने उससे कहा,,,

मधु _आरती मै देख रही हूं तुम कुछ दिनों से मूझसे ठीक से बात नही कर रही हो, कटी कटी सी रहती हो। आखिर बात क्या है?, बताओ मुझे।

आरती ने अनसुना कर दिया,,

मधु _मधु, मै तुमसे कुछ पूछ रही हूं, तुम मुझे इग्नोर कर रही हो, आखिर बात क्या है?

आरती _मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी।

मधु _क्यू क्या huwa?

मुझसे कोई गलती हुई है?

आरती _रहने दो, मेरा मुंह मत खुलवाओ।

मधु _आरती तुम ऐसी नही जा सकती। तुम्हे बताना होगा, आखिर बात क्या है?

आरती _मुझे तुम्हारी सब सच्चाई पता चल गई है?

मधु _कैसी सच्चाई?

आरती _बोला न रहने दो, मेरा मुंह मत खुलवाओ।

मधु _नही, तुम्हे बताना ही होगा।

आरती _मुझे पहले नही पता था तुम इतनी गिरी हुई हो। राजेश भईया को अपने घर में बुलाकर जो गंदा खेल खेलती हो न, ओ मैंने अपने आंखों से देखा है?

मधु _क्या?

आरती _मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी।

आरती जाने लगीं।

मधु _तुमने हमे संबंध बनाते देखा।

ये बात तुमने किसी को बताया तो नही।

आरती _तुम मेरी सहेली न होती तो तुम्हारी पिटाई कर देती।

अपने पति को छोड़कर, यहां गांव में बैठी हो और मेरे भोले भाले भईया को अपनी जाल में फसा ली हो।

मधु _हा हा मै कुल्टा हूं मारो मुझे,,

पर यह इल्जाम मत लगाओ की मैंने राजेश भईया को फसाया है।

तुम तो जानती हो न, गांवों की कितने लड़के मुझे बुरी नियत से देखते है।

मुझे पाना चाहते है।

अगर मैं कुल्टा होती तो, किसी भी लड़के के साथ अपनी प्यास बुझा सकती हूं।

लेकिन मैंने कभी दूसरे लड़के के बारे में ऐसा सोचा ही नहीं।

रहि बात राजेश भईया कि हां मैंने राजेश भईया के साथ संबंध बनाए।

क्यों कि वो मुझे पसंद है? वो मुझे प्यारा लगता है। मै अपने को खुश नसीब समझती हूं जो उसका मुझे सानिध्य मिला।

राजेश भईया को फसाने के बारे में मैंने कभी सोंचा ही नहीं।

मधु रोने लगी।

मधु _मै तुम्हे अपनी सबसे अच्छी सहेली समझती थी। पर तुमने मेरा दर्द कभी समझा ही नहीं। तुम समझोगी भी कैसे तुम्हारी तो अभी सादी नही हुई है न।

शरीर की भूख क्या होती है तुम नहीं समझोगी अभी।

जाओ चले जाओ, मै कुलटा हूं। मै अपनी पति को छोड़कर यहां बैठी हूं, यहां के लड़को को फसाने।

मधु को रोते देख,, आरती का दिल पसीज गया,,, आखिर वह उसकी बचपन की सहेली थी।

आरती _मधु मुझे माफ कर दो, मै कुछ ज्यादा ही बोल दी।

सच बात तो ये है कि जब से मैंने, तेरे और भईया के बीच में काम क्रीड़ा देखा है।

पता नही मुझे क्या हो गया है। मेरे अंदर का औरत जाग चुका है।

मैं रात में ठीक से सो नहीं पाती।

मधु _ओह, तब तो मैं सच मुच गुनहगार हूं।

मेरे कारण तुम्हारी ये हालत हुई है।

आरती _अब तुम्हे ही मेरी ईच्छा पूरी करने में मेरी मदद करनी होगी?

मधु _कैसी ईच्छा?

आरती _राजेश भईया को पाने की।

मधु _आरती, ये तुम क्या कह रही हो?

आरती _क्यू? जब तुम राजेश भईया के साथ सब कर सकती हो तो मैं क्यूं नही?

मधु _पर तुम उसकी बहन हो, क्या राजेश भईया इसके लिए तैयार होगा?

आरती _मै कुछ नहीं जानती? मुझे राजेश भईया के साथ करना है, मतलब करना है? अब क्या करना है ये तुम जानो।

मधु _ठीक है, मै राजेश भईया से बात करूंगी।

अबकी बार जब मैं राजेश भईया जब मेरे साथ संभोग कर रहें होंगे तब मैं यह बात राजेश भईया को बताऊंगी। की तुम उससे अपना सिल तुड़वाना चाहती हो, मधु ने आरती को छेड़ते हुए बोली,,,,

आरती _चुप बेशरम।

मधु _हां, तुम राजेश भईया और मेरे बीच में जो संबंध है उसके बारे में किसी को बताना मत, नही तो हम दोनों की बडी बदनामी हो जाएगी।

आरती _अरे मै पागल हूं क्या? जो राजेश भईया को बदनाम करूंगी।

मधु _पर क्या तुम राजेश भईया का ले पावोगी, तुमने तो देखा होगा उसका कितना बडा है।

आरती को छेड़ते हुवे बोली।

आरती _जब तू ले सकती है तो मैं क्यूं नहीं?

मधु _मैंने तो एक बच्चे को जन्म दिया है उसके बाद भी भईया का पहली बार लेने में बडा दर्द huwa था। कुछ दिनों तक ठीक से चल नहीं पाई थी।

तुमने तो देखा ही है, कैसे बुरी तरह चोदता है?, भईया।

सोच लो क्या हाल होगा तुम्हारा?

आरती _मैंने सोच लिया है, जो होगा देखा जाएगा? मुझे भईया के साथ करना है, मतलब करना है?

मधु _लगता है बहुत तड़प रही हो, राजेश भईया का लेने के लिए।

अब तो कुछ करना ही पड़ेगा,,,
 
कुछ दिन बाद, मधु ने अपने माता पिता के अनुपस्थिति में राजेश को फिर अपना घर बुलाया।

राजेश, मधु को घोड़ी बना कर चोदने लगा।

दोनों को chudai में बहुत मजा आ रहा था।

कमरे में मधु की मादक सिसकारी गूंज रही थी।

उसकी चूड़ियां मधुर ध्वनि उत्पन्न कर रहे थे।

राजेश मधु की कमर पकड़ कर लंद को boor में दनादन पेले जा रहा था।

तभी,,,

मधु _राजेश भईया,,,, उई मां,,, आह,,,

राजेश _क्या है मेरी जान,,,, जोर जोर से धक्का मारते हुए कहा,

मधु _मुझे आपको एक बात,, आह,,,, उन,,, आई,,, उई मां,,,,

राजेश _बोल मेरी जान,

क्या बात है,,,

उसकी एक चूची को मसलते एवम नंगी पीठ को चूमते हुए बोला।

मधु _आरती को सब पता,,,, आ,,, उन,,, आई,, उन,, आह मां आई,,,,

राजेश _राजेश ने एक जोर का धक्का मारा, लंद मधु की गर्भाशय से टकराया,, और धक्का मारना रोक दिया,,

आरती को क्या पता,

ठीक से बोल क्या कहना चाह रही?

राजेश ने लंद फिर बाहर खींचकर जोर से धक्का मारा,,

मधु _उई मां,,,

आरती को सब पता चल गया,,,,, आह

हमारे बारे,,, आई,,, उन,,,

राजेश ने चोदना रोक कर,,, उसकी चूची मसलते हुए पूछा,,

क्या पता चल गया?

मधु _यही की हम chudai करते हैं?

राजेश _क्या? ये तू क्या कह रही है?

मधु _हां,, ये सच है?

उसने हमे देख लिया,,,

राजेश _पर कैसे और कब?

मधु _पिछले बार जब हम chudai का खेल खेल रही थे।

राजेश _उसने किसी को बताया तो नही?

मधु की चुचियों को मसलते हुए पूछा।

मधु _नही,, उसने अब तक किसी को यह बात नहीं बताई है?

पर,,,

राजेश _पर क्या?

मधु _वह भी आपसे chudna चाहती है?

राजेश _ये तू क्या कह रही है?

मधु _ये सच है!

वो जब से chudai देखी है आपसे चुदने के लिय तड़प रही है।

राजेश ने अपना लंद उसकी boor से बाहर निकाल लिया।

मधु ने उसका लंद पकड़ कर चूसना शुरु कर दी।

मधु _वह आपके लंद से chudna चाहती है।

राजेश _नही, उसे मना कर देना

मैं उसे नही चोद सकता।

आरती प्लान के मुताबिक, पलंग के नीचे छुपी थी वह बाहर निकली,,,

आरती _क्यू? क्यू नही चोद सकते मुझे?, जब मधु को चोद सकते हो तो।

राजेश _आरती, तुम यहां?

राजेश चौंक गया?

आरती _हा मै?

राजेश _, तुम लोगो का ये कोई प्लान था?

आरती _भईया, मुझे आपसे chudna है बस? आगे मै कुछ नहीं जानती।

आरती, राजेश के लंद के नीचे मधु के बाजू घुटने के बल बैठ गई।

मधु ने राजेश का लंद अपने मुंह से निकाल ली।

आरती ने राजेश का लंद पकड़ कर उसके टोपे को मुंह में ले ली।

फिर अन्दर बाहर करना शुरू कर दी।

राजेश _आरती, ये तुम क्या कर रही छोड़ो उसे।

मधु _वाह आरती, ऐसा तो लग ही नहीं रहा है कि तुम पहली बार लंद चूस रही हो।

मधु राजेश के अंडकोष को अपने हाथो से सहलाते हुए बोली।

थोड़ा और अन्दर लेकर चूसो,,,

हा ऐसे ही,,,

अच्छी चूस रही हो,,,

राजेश _आरती छोड़ो उसे। ये तुम्हे नही करना चाहिए।

आरती _क्यों, भईया, मै क्यू नही,,,

राजेश _तुम अभी कुंवारी हो,,

ताई को पता चल गया न, तो मैं उसे क्या जवाब दूंगा?

तुम्हारी शादी नही हुई है, अभी तुम्हार शील भंग हो जायेगा।

तेरी शादी के बाद तेरे पति को पता चलने पर, प्रॉब्लम हो सकती है।

तुम्हे अभी शादी से पहले इन चीजों से दूर रहना चाहिए।

आरती _नही भईया, मैंने ठान ली है? मै शील आप ही से तुड़वाऊंगी।

राजेश _तू पागल हो गई हो क्या?

आरती _हा हां, मै आपके लंद के लिए पागल हो गई हूं।

मैं पिछले कुछ दिनों से ठीक से सो नहीं पा रही।

अगर आप मुझे चोद कर मेरी ईच्छा पूरी नहीं की न तो मैं सच में पागल हो जाऊंगी।

तभी मधु बेड पकड़ कर झुक गई,,,

मधु _आरती, भईया का लंद मेरे boor पे डाल दे।

आरती ने राजेश का लंद अपने मुंह से निकाल कर, मधु की योनि में सेट कर दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का लगा दिया, लंद boor चिर कर अन्दर समा गया।

अब राजेश मधु की कमर दोनों हाथो से पकड़ कर।

गच गच, चोदना शुरु कर दिया,,,

कमरे में मादक सिसकारी गूंजने लगा,,,

इधर आरती अपना कपड़ा उतार फेकी और पूरी नहीं हो गई।

आरती, काम के देवी लग रही थी, बडी बडी चूचे।

गोरा बदन, लंबी लंबी बाल। उसने अपनी boor की बाल को अच्छी तरह साफ कर दी थी।

मधु _आरती, आजा मेरे सामने बेड पर लेट जा, तेरी boor चाट दू।

आरती बेड पर चढ़ कर, मधु के सामने टांगे फैला कर बेड पर लेट गई।

मधु उसकी boor चाटना शुरू कर दी।

आरती को बहुत मजा आने लगा।

उसकी boor पानी फेकने लगा।

उसकी मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगीं।

इधर राजेश मधु की कमर पकड़ कर लंद को boor में अन्दर बाहर करने में लगा हुआ था।

मधु _भईया, थोड़ा और तेज चोदो मैं झड़ने वाली हूं।

मधु भी अपना कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगीं,,

राजेश और तेज तेज चोदने लगा,,,

कुछ ही देर में मधु, चीखते हुए झड़ने लगी,,

झड़ने के बाद,

मधु बेड में सुस्ताने लगी, राजेश अपना लंद बाहर खींच लिया। इधर आरती अपनी दोनों टांगे फैला रखी थी, उसकी मस्त चिकनी boor पानी टपका रही थी। राजेश ने आरती की योनी की ओर देखा।

उसकी योनि बहुत खूबसूरत थी। गोरी मस्त फूली हुई।

एक दम गीली।

आरती _भईया देख क्या रहे हो डाल दो अन्दर।

राजेश _न मै ऐसा नहीं कर सकता, ताई को क्या जवाब दूंगा।

आरती _भईया तुम्हे मेरी कसम हैं, अगर तुमने मेरी ईच्छा पूरी नहीं की तो मैं कभी आपसे बात नहीं करूंगी।

राजेश _पर आरती ये गलत है। तुम्हारे सील तोड़ने का हक तुम्हारे पति का है, मेरा नही।

आरती _ये chut मेरी है, मेरी मर्जी मै किससे इसकी सील तुड़वाऊ।

अगर अगर मेरी ईच्छा पूरी नहीं की तो मैं जान दे दूंगी।

मधु _राजेश भईया, आरती की इच्छा पूरी कर दो, नही तो ये कुछ भी कर सकती है ।

राजेश _पर,,, ताई को क्या जवाब दूंगा?

आरती _मां को कभी पता चले तो कह दूंगी की मैंने ही भईया को मजबूर किया, उसकी कोई गलती नही।

राजेश सोचने लगा,,,

आरती _भईया अब सोंचो मत,,,डाल दो अपना लंद मेरी योनि में, बुझा दो मेरी प्यास।

राजेश, आरती के टांगो के बीच आ गया।

मधु _भईया रुको, मै आरती के चूतड के नीचे कपड़ा बिछा दूं। खून बेड के चादर , पे लग जायेगा।

मधु कपडे ढूंढने लगीं।

इधर राजेश आरती की chut चाटना शुरू कर दिया।

आरती स्वर्ग में उड़ने लगी।

उसकी योनि से पानी झरने की तरह बहने लगा।

मधु कपड़ा को आरती के चूतड के नीचे बिछा दिया।

और राजेश के लंद को चूसने लगी।

फिर उसके लंद को पकड़ कर आरती की योनी के मुंह पे सेट कर दी।

मधु _फाड़ दो भईया आरती की chut को, तोड़ दो इसकी सील।

राजेश ने आरती की ओंठ को चूसा, उसकी मस्त चूचियां को पकड़ कर मसला जो काफी कड़क थे।

उसकी निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।

आरती के मुंह से सिसकारी निकलने लगीं।

फिर आरती के नाभी को चाटने लगा।

और आखिर लंद को पकड़ कर उसकी योनी की भगनाशा को घिसने लगा।

आरती सिसकने लगी।

राजेश ने लंद को योनि छेद में रखकर एक दबाव डाला।

लंद अन्दर नहीं जा पा रहा था।

इधर मधु आरती की बालो को सहला रही थी।

मधु _भईया जरा जोर लगाओ। आरती की chut टाइट है आसानी से अन्दर नहीं जाएगा।

राजेश ने एक जोर का दबाव डाला।

लंद का टोपा boor फाड़कर, अंदर चला गया।

आरती चीख उठी।

मधु ने उसके मुंह में उसकी पेंटी ठूस दी।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

योनि की झिल्ली फाड़कर लंद आधा अन्दर घुस गया।

आरती जोर से चीखी पर मुंह में कपड़ा ठूसे होने के कारण आवाज, निकाल न पाई।

Boor से खून टपकने लगा।

मधु, आरती की बालो को सहलाने लगीं।

राजेश, आरती की निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।

अब राजेश धीरे धीरे लंद को अन्दर बाहर सरकाने लगा।

धीरे धीर लंद योनि में जगह बनाने लगा।

कुछ देर बाद लंदयोनि को फैला कर पूरा योनि में समा गया।

अब राजेश आरती की चूची मसलते हुवे लंद को योनि में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

धीरे धीर आरती का दर्द कम होने लगा, अब उसे भी मज़ा आने लगा।

इधर टाइट योनि चोदने से राजेश को भी बहुत मजा आने लगा।

आरती की योनी में उसका लंद कसा कसा अन्दर बाहर होने लगा।

अब आरती को दर्द के साथ मजा भी आ रहा था। कभी दर्द से चीखती तो कभी मज़े में मादक सिसकारी निकालती।

उसकी योनि से खून निकलना बंद हो गया। अब उसकी योनि खूब पानी छोड़ने लगा।

उसकी योनि को लंद ने पूरी तरह फाड़ दिया।

लंद अब आसानी से अन्दर बाहर होने लगा।

अब आरती को बहुत मजा आने लगा।

मधु ने उसके मुंह से कपड़ा निकाल दी।

आरती अपने मुंह से कामुक सिसकारी निकालने लगीं।

मधु _आखिर फडवा ही ली अपनी boor राजेश भईया से।

आ रहा है न मजा,,,

आरती _हूं,,,, आह मां आई,,, बहुत मजा आ रहा,,,, आई ,,,

राजेश तेज तेज चोदने लगा,,,

आरती स्वर्ग में उड़ने लगीं, वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई,,,

और कुछ ही देर में राजेश की कमर को जकड़ कर झड़ने लगीं,,, आह मां आह,, वह बेहीश सी हो गई,

वह पहली बार झड़ी थी उसे इतना आनंद का अनुभव huwa जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी

राजेश ने चोदना बंद कर दिया।

अपना लंद बाहर निकाल दिया।

मधु राजेश के लंद को चूसने लगी।

मधु _भईया, आज आपको एक और सील तोड़नी है।

राजेश _मै कुछ समझा नही, और किसकी सील,,,

मधु _मेरी गाड़ की सील,,,

राजेश _तुम्हारी गाड़ की छेद सकरी है, झेल पाएगी।

मधु _ आपके लंद के लिए तो कुछ भी झेल सकती हूं।

राजेश _जाओ किचन से घी का डिब्बा ले आओ।

मधु, किचन में चली गईं।

इधर आरती होश में आई,,,

उसने देखा राजेश का लंद अभी भी खड़ा था। जो हवा में लहरा रहा था।

उसने अपनी योनि की ओर देखा जो फट चुकी थी। पूरी तरह फैल गई थी।

राजेश _आरती तुम ठीक तो हो न।

आरती _हूं,,

राजेश ने आरती की सिर को प्यार से सहलाने लगा।

इधर मधु किचन से घी का डिब्बा ले आई।

राजेश ने मधु का बेड के सहारे झुका दिया।

उसकी गाड़ पे सहलाया फिर उंगली में घी लगाया और उंगली गाड़ के अन्दर घुसा दिया।

उसे अन्दर बाहर करने लगा।

घी को उसकी गाड़ में पूरा भर दिया।

एक ऊंगली डालकर अन्दर बाहर करने के बाद दो ऊंगली डालने की कोशिश करने लगा।

मधु के मुंह में पेंटी ठूस दिया।

इधर आरती समझ नही पा रही थी की भईया क्या करने जा रहा है।

क्या इतना मोटा लंद गाड़ में घुसा देगा।

ये कैसा मुमकिन होगा? वह बेड में लेटे लेटे राजेश और मधु की हरकत देखने लगीं।

इधर राजेश ने दो ऊंगली डाल कर गाड़ को फैलाने की कोशिश करने लगा।

मधु को दर्द हो रहा था। पर मजा भी आ रहा था।

राजेश दो ऊंगली गाड़ में डाल कर अन्दर बाहर करने लगा। उसकी गाड़ फैलाने लगा।

फिर तीनो ऊंगली में घी लगा कर, उसे गाड़ में डालने की कोशिश करने लगा, धीरे धीरे तीन ऊंगली डालने में कामयाब हो गया।

मधु को दर्द हो रहा था, वह कभी चीख रही थी, तो कभी कराह रही थी, तो कभी आनद में सिसक भी रही थी।

राजेश ने सपना तीन ऊंगली डाल कर योनि चौड़ा करने लगा।

कुछ देर तक वह तीन ऊंगली योनि डाल कर गाड़ में अन्दर बाहर किया।

उसके बाद योनि में अच्छी तरह घी को भर दिया और अपने लंद में भी अच्छी तरह चुपड़ लिया।

राजेश _मधु क्या तुम, गाड़ में लंद लेने के लिए तैयार हो?

मधु _हूं,,,

राजेश ने मधु की योनि में लंद एक ही झटके में डाल दिया और दनादन चोदने लगा।

मधु के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

लंद boor की पानी और घी से एकदम चिकना हो गया।

अब राजेश ने लंद boor से निकाल कर गाड़ के छेद में सेट किया और अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा।

काफी कोशिश के बाद लंद का टोपा, गाड़ में डालने में कामयाब हो गया।

मधु को दर्द होने लगा वह दर्द से कराहने लगीं।

राजेश उसकी चूंची मसलने लगा।

कुछ देर बाद दर्द थोड़ा कम होने पर राजेश ने लंद का दबाव गाड़ में बडा दिया।

लंद धीरे धीरे अन्दर सरकने लगा।

वह गाड़ को फैलाने लगा।

राजेश मधु की योनि की भगनाश को ऊंगली से छेड़ने लगा एक हाथ से उसकी चूची मसलने लगा।

मधु को मजा आने लगा।

राजेश धीरे धीर लंद को गाड़ में उतरता चला गया।

कुछ समय बाद लंद गाड़ को फाड़ कर आधा अन्दर घुस गया।

अब राजेश लंद को गाड़ में धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया।

मधु की चूची मसलते हुवे वह अपना लंद गाड़ में धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।

मधु दर्द से कराहने लगीं।

राजेश का लंद अन्दर घुसता चला गया। गाड़ को फैला कर लंद उसमे समाता चला गया।

अब राजेश मधु की दर्द का परवाह न करते हुए। सपना स्पीड बढ़ाने लगा।

लंद गाड़ में अब अन्दर बाहर होने लगा।

मधु दर्द से छटपटाने लगीं।

राजेश उसकी कमर को पूरी तरह जकड़ लिया और लंद को गाड़ में स्पीड के साथ अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद गाड़ को फैला कर, अन्दर बाहर होने लगा।

इधर मधु को दर्द के कारण आंसू निकल आए।

पर धीरे धीर उसे भी अब मजा आने लगा।

उसकी गाड़ पूरी तरह फैल गई।

अब लंद गाड़ में आसानी से अन्दर बाहर होने लगा।

आरती आंखें फाड़े आश्चर्य से देखने लगीं।

इतना मोटा लंद गाड़ में कैसे घुस गया?

इधर मधु कभी दर्द से कराहती, चीखती तो कभी मज़े से सिसकती।

उसे गाड़ मरवाने में एक अलग मजा आने लगा।

राजेश अब तेज तेज गाड़ चोदने लगा।

कुछ देर बाद लंद गाड़ से बाहर निकाल कर योनि में डाल दिया।

और फच फैच चोदने लगा।

मधु जन्नत में उड़ने लगी।

राजेश लंद योनि से निकाल कर गाड़ में डाल दिया फिर सर सर अन्दर बाहर करने लगता।

इस तरह कभी योनि तो कभी गाड़ में लंद डालकर, मधु को संभोग की परम सुख देने लगा।

राजेश को भी बहुत मजा आ रहा था।

गाड़ की कसावट के कारण वह भी झड़ने की स्थिति में पहुंचने लगा।

वह तेज तेज गाड़ मारने लगा।

मधु की गाड़ फट चुकी थी, उससे खून भी निकलने लगा।

राजेश का पूरा लंद गाड़ में समा चुका था।

वह तेज तेज गाड़ मारने लगा।

राजेश अब खुद को रोक न सका और कराहते हुवे लंद से वीर्य की पिचकारी गाड़ में छोड़ने लगा।

मधु की गाड़ को वीर्य से पूरी तरह भर दिया।

और बेड पर लुड़क गया।

इधर मधु ने राहत की सांस ली।

उसने अपनी योनि में गर्म गर्म वीर्य जाति हुई महसूस की।

और एक बार फिर झड़ गई।

उसकी गाड़ से वीर्य बहने लगा।

इधर आरती आश्चर्य से देखती रही।

तीनो बेड में सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद, राजेश उठा।

राजेश _चलो इससे पहले घर में काका काकी आ जाए। अपने कपडे पहन लो।

आरती बेड से उठी तो वह ठीक से चल नहीं पा रही थी।

उसकी योनि सूज गई थी।

अन्दर से छिल गया था।

राजेश _आरती क्या huwa?

आरती शर्मा गई।

राजेश _दर्द हो रहा है क्या?

आरती कुछ नहीं बोली। अपनी कपडे पहनने लगीं।

कुछ देर बाद मधु भी उठी, वह भी ठीक से चल नहीं पा रही थी। उसकी गाड़ फट चुकी थी।

अन्दर से छिल गया था।

उसे चलने में दर्द होने लगा।

आरती _मधु तुम ठीक तो हो न।

मधु _हूं,,

तीनो ने अपना कपड़ा पहन लिया।

राजेश _देखो, आज से chudai बंद अब दोनों, पढ़ाई में ध्यान दो। अब एग्जाम के पहले कोई chudai नही होगी।

राजेश _तुम दोनों समझ गए ना।

मधु _ठीक है राजेश भईया, वैसे भी अब 15, दिनों तक हम चुदने के लायक नहीं है।

क्यू आरती?

मधु हसने लगी।
 
शुक्रिया आप सभी मित्रो का।
 
मधु और आरती अब परीक्षा की तैयारी में ध्यान दे रही थी। एग्जाम नजदीक था। राजेश खुद की तैयारी करने के साथ साथ दोनो की मदद भी कर रहा था।

आखिर वह दिन आ ही गया जब प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के लिए प्रवेश परीक्षा होना था।

मधु और आरती को परीक्षा देने। धरम पुर जाना था।

परीक्षा का समय सुबह 10बजे से 1बजे था।

राजेश उन दोनों को अपने बाइक में बिठाकर सुबह 8बजे ही सूरज पुर से धरम पुर के लिए निकल गया।

वे आधा घंटा पहले ही परीक्षा केंद्र पहुंच गए।

सूचना फलक पर पता किए की कोन से कमरा में उनका रोल नंबर लिखा हुआ है।

घंटी बजते ही मधु आरती दोनों परीक्षा हाल में चले गए।

राजेश परीक्षा केंद्र के सामने गार्डन था, वहा जाकर पेड़ के नीचे बैठ गया। और अपना तैयारी करने लगा।

दोपहर 1बजे मधु और आरती एग्जाम सेंटर से बाहर आए। दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी।

दोनों राजेश के पास पहुंचे।

राजेश _कैसा गया तुम दोनों का एग्जाम?

आरती _बहुत अच्छा भईया।

राजेश _और मधु तुम्हारा।

मधु _मेरा भी बहुत अछा गया है भईया।

राजेश _ये तो बडी अछी बात है।

आरती _भईया भूख लगी है, चलो न किसी होटल या ढाबे पर जाकर भोजन करते है।

राजेश _भूख तो मुझे भी लगीं है। चलो किसी अच्छे से ढाबे में चलते हैं।

तीनो बाइक से ढाबे पे जा रहे थे की रास्ते में आरती की नजर पोस्टर पर पढ़ी।

आरती _भईया ये तो टाकीज है न ।

राजेश _हा,

आरती _भईया, मैंने अब तक कभी टाकीज में मूवी नही देखी है। चलो टाकीज में मूवी देखते हैं।

मधु _राजेश भईया, आरती ठीक कह रही है मैंने भी कभी टाकीज में मूवी नही देखी है, चलो न चलते है।

राजेश _तुम दोनों की इच्छा है तो ठीक है, पर मूवी 2बजे शुरू होगी, चलो पहले ढाबे में जाकर भोजन कर लेते हैं।

राजेश ने दोनो को एक अच्छे से ढाबे में ले गया।

आरती और मधु से पूछकर उनका पसंदीदा भोजन आर्डर किया।

तीनो भोजन किए।

भोजन तीनो को बहुत पसंद आया।

भोजन करने के बाद तीनों टाकीज पहुंचे।

रानी मुखर्जी की मर्दानी मूवी लगीं थी।

आरती _भईया ये हीरोइन तो रानी मुखर्जी है न।

राजेश _हा तुमने सही पहचाना।

राजेश ने तीन बालकनी का तीन टिकट लिया।

और तीनो टाकीज के अन्दर गए।

जब तीनो बालकनी में गए, तो वहां कोई नहीं था।

मधु _भईया यहां तो कोई दर्शक ही नहीं है।

राजेश _शायद लोगो को मूवी पसंद नही आ रही है।

राजेश ने बालकनी से नीचे झांका नीचे काफी कम दर्शक बैठे थे।

कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की बालकनी में आए शायद दोनों प्रेमी युगल थे।

वो दोनों कोने वाले सीट पर बैठ गए।

मूवी चालू हो गई।

हाल का लाइट ऑफ कर दिया गया।

पूरे सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।

आरती _भईया हाल में तो पूरा अंधेरा छा गया, मुझे तो डर लग रहा है।

राजेश _अरे मै हूं न फिर डरने की जरूरत नहीं मूवी पे ध्यान दो।

पहले मधु बैठी थी, फिर आरती उसके बाद राजेश।

तीनो मूवी देखने लगे।

कुछ देर बाद मधु को कुछ आवाजे सुनाई पड़ा, उसने कोने पर बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।

बीच बीच में पर्दे की रोशनी तेज होने पर मधु ने जो देखी उससे वह दंग रह गई।

लड़का ने लड़की को अपने गोद में बिठा लिया था।

और उसकी चुचियों से खेल रहा था।

लड़की सिसक रही थी।

मधु _ने आरती के कानो में फुसफुसाई। आरती उधर देखो, क्या कर रहे हैं दोनों लड़का और लड़की।

आरती ने भी गौर से उस ओर देखा।

जब स्क्रीन से तेज रोशनी आने पर जो उसने देखा, वह भी दंग रह गई।

मधु _ये दोनों कितने बेशर्म है, इन्हे कोई शर्म नही।

आरती _सिनेमा हाल में ये सब भी होता है। मैंने कभी सोंची ही नहीं थी।

राजेश _क्या बात है? तुम लोगो का ध्यान मूवी पर क्यू नही?

आरती _भईया उधर देखो, उधर, दोनों क्या कर रहे है।

राजेश ने _कोने में बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।

राजेश _ये लोग वही कर रहे है जो करने आए है। तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो, मूवी पर ध्यान दो।

आरती _भईया यहां ये सब भी होता है ।

राजेश _ये लोग मूवी देखने के बहाने मजा करने आए हैं। तुम लोग उस ओर ध्यान मत दो।

राजेश मूवी देखने लगा।

इधर मधु और आरती का ध्यान मूवी पर कम लड़का और लड़की पर ज्यादा था।

कुछ देर बाद,,,

मधु _आरती, क्यू न हम भी मजा करे,, फुसफुसाते हुए बोली।

आरती _मै समझी नहीं।

मधु _जो ये दोनों कर रहें है,,,

हम भी,,

आरती _पर कैसे?

मधु _तू, राजेश भईया के बाजू वाले सीट पर चली जा, मै तेरी सीट पर बैठती हूं।

फिर दोनों राजेश भईया को गरम करेंगे। अपने हाथ और मुंह से।

आरती _कही भईया भड़क न जाए,,

मधु _उसने कहा था न परीक्षा तक कुछ नहीं हमने उसका कहना माना,अब तो परीक्षा हो गई है। अब भईया को हमारा कहना मानना होगा।

आरती _ठीक है।

आरती अपने सीट से उठ कर राजेश के बाजू दूसरी सीट पर बैठ गई।

मधु आरती के सीट पर बैठ गई। राजेश बीच में बैठा था। आजू बाजू दोनो।

राजेश _तुम दोनो सीट क्यू चेंज कर रही।

मधु _भईया मेरी सीट ठीक नहीं है। इसकी फोम बैठ गई है।

कुछ देर आरती और मधु दोनों मूवी देखने का नाटक करने लगी उसके बाद वे अपने एक एक हाथ राजेश के पर रख दिए।

राजेश के जांग को सहलाने लगीं।

राजेश _ये क्या कर रहे हो तुम दोनों।

आरती _कुछ नही, मूवी में तो मजा नही आ रहा इसलिए हमने भी ये सोचा कि क्यूं न हम भी उन लड़का लड़की की तरह मजा करे।

राजेश _नही नही ये ठीक नहीं है।

मूवी अच्छी नहीं लग रही तो चलो घर चलते है।

मधु _भईया अब तो मजे करके ही घर जायेंगे।

आरती ने राजेश की ओंठ को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दी।

इधर मधु ने राजेश की पैंट का चैन खीच कर लंद बाहर निकाल कर मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी।

धीरे धीरे राजेश भी उत्तेजित होने लगा।

उसका लंद मधु के मुंह की रगड़ से शख्त हो गया।

मधु अपनी पेंटी निकाल दी और अपनी बैग में डाल दी।

फिर राजेश के लंद को पकड़ कर उसे अपनी योनि में सेट की और बैठ गई। सामने वाली कुर्सी को पकड़ कर उठक बैठक करना शुरू कर दी।

लंद लंद boor में अन्दर बाहर होने लगा।

मधु को बहुत मजा आने लगा, वह कुछ देर में ही झड़ने लगी।

वह उछलना बंद कर सुस्ताने लगी।

अब आरती ने अपनी पेंटी उतार दी और उसे राजेश के मुंह में ठूंस दी।

आरती _मधु, अब उठो भी, हो गया न तुम्हारा, अब मुझे बैठने दे।

मधु राजेश के लंद से उठ गई। राजेश का लंद मधु की boor का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था।

आरती ने राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut में सेट कर बैठ गई।

फिर लंद पर उछलने लगी।

लंद आरती की योनि में पूरी गहराई नाप रहा था।

आरती को बहुत मजा आने लगा। कुछ देर में वह भी झड़ने लगी।

इधर मधु फिर से गर्म हो चुकी थी।

मधु _आरती तुम्हारा हो गया न अब हटो।

आरती राजेश के गोद से हट गई।

अब मधु राजेश की ओर मुंह कर उसके लंद को chut में डाल कर बैठ गई।

राजेश के मुंह से पेंटी निकाल, उसके ओंठ को मुंह में भर कर चूसते हुए उछल उछल कर चुदाने लगी।

उसे फिर से बहुत मजा आने लगा।

इधर राजेश को भी मजा आने लगा।

वह मधु की कमर पकड़ कर अपने लंद पर पटकने लगा।

कुछ देर में ही मधु फिर से झड़ने लगी।

मधु लंद से उठी तो आरती लंद पर बैठ गई। और तब तक चुदती रही जब तक फिर से वह झड़ ना गई।

इंटर वेल होने वाला था।

राजेश _लाइट ऑन होने वाला है, चलो जल्दी अपने कपडे ठीक करो, तुम दोनों और तरीके से बैठ जाओ, अपनी कुर्सी पर ।

तीनो अपने कपडे ठीक किए।

कुछ देर में इंटरवेल huwa, हाल की लाइट ऑन हो गया।

आरती _भईया मूवी में मजा नहीं आ रहा चलो मार्केट चलते है, हमे कुछ जरूरत की चीजे खरीदनी है।

तीनो सिनेमा हाल से निकल कर मार्केट आ गए।

मधु और और आरती दोनों अपनी जरूरत की समान खरीदी।

उसके बाद तीनों घर के लिए निकल पड़े।

आरती _मधु, माधूरी मैम हमे अपने घर आने के लिए आमंत्रित करती है क्यू ना आज हम उनके घर चलें।

मधु _हा, कुछ समय रुक कर निकल जायेंगे।

अभी समय क्या huwa है?

आरती अपनी मोबाइल पर समय देखी। साढ़े पांच huwa है।

राजेश _देखो, हमे अभी घर चलना चाहिए फिर कभी आ जाना, माधूरी मैम का घर।

आरती _भईया, अब हम साथ कब आयेंगे, क्या पता चलो ना, मैम का घर चलते है।

मधु _हां भईया चलो ना।

राजेश _तुम लोग बडी जिद्दी हो,,,

राजेश गाड़ी को माधुरी के घर की ओर मोड़ दिया।

जब वे घर पहुंचे।

माधूरी ने दरवाजा खोला,,

राजेश _नमस्ते मैम।

माधूरी _अरे तुम लोग, अचानक,,, तुम लोगो का तो आज एग्जाम था न।

आरती _, मैम हम एग्जाम देकर घर जा रहें थे की हमने सोचा क्यूं ना हम मैम का घर चलें हम उनका घर भी देख लेंगे।

राजेश _ये दोनों बडी जिद्दी है, मैना कहा फिर कभी आ जाना, शाम हो गई है, पर माने नही, मुझे मजबूरी में लाना पड़ा।

माधूरी _अरे अच्छा किए, आ गए, पता नही कब फिर तुम लोगो को इकट्ठा आने का मौका मिले।

मुझे बड़ी खुशी हुई, आओ अन्दर आओ।

सभी ड्राइंग रूम में बैठे।

माधुरी _देखो जी कौन आए है।

माधूरी का पति मनोज बेडरूम से बाहर आया।

मनोज _कोन है भई।

माधूरी _ये राजेश है।

राजेश _नमस्ते सर।

मनोज _अच्छा तुम ही राजेश हो, भई तुम्हारी बडी तारीफ सुनी है। अच्छा huwa आज मुलाकात भी हो गया।

माधूरी _ये मधु और ये आरती है, मेरे स्कूल में पढ़ाती है।

मधु, आरती _नमस्ते सर।

मनोज _नमस्ते, नमस्ते।

आप लोगो से मिलकर बडी खुशी हुई।

माधूरी, मधु आरती सभी बातचीत करने लगे।

मनोज _भई बाते ही करते रहोगे या मेहमानों को चाय नाश्ता भी कराओगे।

माधूरी _ओ हो मै तो बातो में भूल ही गई।

आरती _मैम रहने दो न, आप क्यूं कष्ट उठा रही, हम बना देते है, हमे किचन दिखा दो।

आरती मधु और माधुरी तीनों किचन में चले गए।

मनोज _राजेश, माधूरी बता रही थी की तुम आईएएस की तैयारी कर रहे हो, मैन एग्जाम क्लियर कर चुके हो, अब इंटर व्यू की तैयारी कर रहे हो।

राजेश _हां सर, कुछ दिनों बाद इंटर व्यू होना है। तैयारी तो करनी पड़ेगी।

मनोज _भाई, तुम अफसर बन जाओ ge तो हमे भी बडी खुशी होगी।

राजेश और मनोज बात चीत ही कर रहे थे कि माधुरी दोनों के लिए नाश्ता ले आई।

मनोज _लो भाई राजेश गरम गरम प्याज पकोड़ा खाओ।

माधूरी तो बहुत अच्छा पकोड़ा बनाती है।

राजेश ने पकोड़ा टेस्ट किया।

राजेश _सच में पकोड़ा बहुत अच्छा बना है।

कुछ देर बाद माधुरी, चाय लेकर आई।

मनोज और राजेश चाय और पकोड़ा का आनंद लेने लगे।

मधु और आरती कीचन में ही नाश्ता करने लगीं।

माधूरी _, वैसे तुम दोनों का एग्जाम तो 10से 1बजे तक था न, फिर आने में शाम कैसे हो गई।

क्या क्या किए धरमपुर में।

मधु _मैम, एग्जाम होने के बाद ढाबे में खाना खाए।

हमने कभी टाकीज में मूवी नही देखी थी न तो भईया को बोले टाकीज में मूवी दिखाने, भईया हमे टाकीज ले गया।

माधूरी _अच्छा अच्छा, वैसे कोन सी मूवी लगीं है टाकीज में।

आरती _वो रानी मुखर्जी की मर्दानी।

माधूरी _मूवी देखने में तो बड़ा मजा आया होगा।

मधु और आरती दोनों एक दूसरे का मुंह देखने लगे।

माधूरी _तुम दोनों एक दूसरे का मुंह क्यू देख रहे।

आरती _मैम अब आपको क्या बताए, हमे तो बताने में ही शर्म आ रही है।

माधूरी _क्यू ऐसा क्या हो गया वहां।

मधु _मैम अब क्या बताए, जब हम सिनेमा हाल में गए तो वहां तो कोई दर्शक था ही नहीं।

भइया ने बालकनी का टिकट लिया था।

कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की आए, दोनों कोने में जाकर बैठ गए।

माधूरी _फिर, फिर क्या huwa?

आरती _मूवी चालू होते ही, सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।

माधूरी _वो तो होता ही है, मूवी चालू होने के बाद हाल की लाइट ऑफ कर देते है।

मधु _वो तो ठीक है , पर वो लड़का और लड़की, छी,, मुझे तो बताने में ही शर्म आ रही।

माधूरी _क्यू क्या किया उन दोनों ने,,

आरती _मैम अब कैसे बताए आपको, वो दोनों तो हम लोगो की कोई परवाह न करते हुए, छी,,,

माधूरी _अरे रुक क्यू गई, क्या किए उन दोनों ने।

मधु _लड़की, लड़का के गोद में बैठ गई, और उछलने लगी, मुंह से अजीब अजीब आवाजे निकालने लगी।

माधूरी _क्या?

आरती _हम लोग तो शर्म से गड़ी जा रहीं थी।

मूवी पे हमारा ध्यान ही नहीं रहा।

मधु _भइया को इस बारे में बताए तो बोले, तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो।

पर हमारा वहा और बैठ पाना मुश्किल हो रहा था।

माधूरी उनकी बाते सुनकर हसने लगी।

माधूरी _फिर क्या किए।

मधु _फिर क्या? शर्म के मारे हमारा वहा बैठ पाना मुश्किल हो गया। हम मूवी बीच में ही छोड़ आए।

माधूरी _हसने लगीं,,, लो पहली बार मूवी देखने टाकीज गए थे बीच में ही छोड़ आए।

आरती_अब क्या करते? लड़की की अजीब अजीब आवाजे अब तक मेरे कानो में गूंज रही है!

टाकीज से हम मार्केट चले गए, वहा हमने अपने लिए कुछ सामान खरीदे फिर, गांव के लिए निकल पड़े।

माधूरी _क्या खरीदे? हमे भी तो दिखाओ।

आरती और मधु, माधूरी को समान दिखाने लगी।

माधूरी, मधु और आरती तीनो किचन से हाल में आ गए।

माधूरी _, राजेश, आरती और मधु बता रही थी की तुम लोग टाकीज गए थे मूवी देखने।

मुझे भी अगर बताए होते की तुम लोग टाकीज जाओगे तो मैं भी चली जाती तुम लोगो के साथ, मुझे भी काफी दिन हो गए टाकीज गए।

राजेश, आरती की ओर देखने लगा, कही इन लोगो ने सब बता तो नही दिया, वहा क्या huwa?

राजेश _मैम वो क्या है न कि प्लान अचानक से बना।

अच्छा मैम अब हम लोग चलते है। घर वाले चिंतित हो रहे होंगे?

हमे इजाजत दीजिए सर।

मनोज _ठीक है राजेश, अच्छा लगा तुम लोग आए, आते रहा करो।

राजेश _ज़रूर सर।

तीनो इजाजत लेकर बाइक से घर के लिए निकल पड़े।

रास्ते में,

राजेश _कही तुम दोनों ने मैम को टाकीज में क्या huwa सब बता तो नही दी।

आरती _भईया, हमने सिर्फ उस लड़का और लड़की के बारे में बताया की वे टाकीज के अन्दर हमारे सामने ही क्या कर रहे थे। हमने क्या किया ये नही बताया।

मधु और आरती दोनों हसने लगी। जब वे घर पहुंचे तो 7बज चुके थे।

रात में भोजन करने के बाद, पदमा किचन में कुछ काम कर रही थी।

राजेश कीचन में गया और पदमा को पीछे से बाहों में भर लिया।

पदमा चौंक गई।

दरअसल आरती और मधु दोनों ने टाकीज में अपनी प्यास तो बुझा ली थी।

राजेश झड़ा नहीं था, उसे chut मारने का मन कर रहा था।

पदमा _क्या कर रहा है मुआ, छोड़ कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा।

राजेश उसकी चूंची मसलते हुवे कहा _ताई आज बडा मन कर रहा है?

पदमा _अरे रात में आ जाऊंगी तेरे कमरे में, कर लेना अपनी इच्छा पूरी, अभी छोड़, आरती या ज्योति आ गई तो मुसीबत हो जायेगी।

पदमा फुसफुसाते हुए बोली।

राजेश पदमा को छोड़ दिया, और अपने कमरे की ओर जाने लगा।

पदमा राजेश को जाता देख मुस्कुराने लगी।

राजेश की हरकत से वह भी गर्म हो गई।

जब पदमा अपने कमरे में गई, उसका पति सो रहा था। वह बाजू में जाकर लेट गई।

आज राजेश से वह चुदेगी यह सोचकर उसकी boor पानी बहाने लगी।

जब उसे लगा की सब लोग सो गए होंगे। वह चुपके से उठी और अपने कमरे से निकलकर राजेश के कमरे की ओर जाने लगी।

उसने सभी के कमरे का मुआइना किया।

सभी के दरवाजे बंद थे।

वह राजेश की कमरे की ओर चली गई।

हल्के से दरवाजा धकेल कर कमरे के अन्दर चली गई।

राजेश उसी के आने का इंतजार कर रहा था।

राजेश पहले से ही उत्तेजित था।

पदमा ने देखा राजेश पहले से ही नंगा होकर अपना लंद सहला रहा है।

वह देखकर मुस्कुराने लगीं।

राजेश _ताई, आने में काफी देर कर दी।

पदमा _क्यू रहा नही जा रहा है क्या?

पदमा अपनी साड़ी उतारने लगीं।

राजेश उसे देख कर लंद सहलाने लगा।

पदमा साड़ी निकालने के बाद, अपनी ब्लाउज भी निकाल दी।

राजेश का लंद उसकी चूची देखकर झटके मारने लगा।

राजेश _ताई पेटीकोट भी उतार दो।

पदमा _जानती हूं, तुम्हे औरतों को नंगी करके चोदने में मजा आता है।

पदमा ने अपना पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।

पेटीकोट उसकी पैरो में आ गई।

पदमा को नंगी देख राजेश का लंद और तन गया।

पदमा बेड के ऊपर आ गई।

और राजेश का लंद मुंह में भर कर चूसने लगीं।

राजेश उसकी बालो को सहलाने लगा।

पदमा _आज तो कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा है re तेरा, लगता है आज तू मेरा मूत ही निकाल देगा।

पदमा बेड पर खड़ी हो गईं और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut पे सेट की, उसके बाद उस पर बैठ गई।

लंद chut की चीरकर boor में समा गया।

पदमा के मुंह से आह निकल गया।

राजेश पदमा की चूची पकड़ कर मसलने लगा।

पदमा अब राजेश के लंद पर उछल उछल कर chudna सुरू कर दी।

उसकी योनि पहले से ही गीली थी।

लंद boor में आसानी सेफच फाच करता huwa अन्दर बाहर होने लगा।

राजेश और पदमा दोनों को बहुत मजा आने लगा।

पदमा के मुंह से कामुक सिसकारी निकलकर कमरे मे गूंजने लगी।

कुछ देर बाद

राजेश ने पदमा की कमर थाम लिया और नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल कर पदमा की साथ देने लगी।

दोनों को संभोग का अपार सुख प्राप्त होने लगा।

इधर आरती, अब तक सोई नहीं थी। वह टाकीज में राजेश से किस प्रकार chudi उसे याद कर गर्म हो गई थी और अपनी boor सहला रही थी।

जब उसे बर्दास्त नही huwa तो, उसने राजेश के कमरे में जानें का फैसला किया।

उसने देखा ज्योति गहरी नींद में सो रही है वह अपने बेड से उठी और चुपके से कमरे से बाहर निकली।

उसने इधर उधर देखा।

चारो ओर सन्नाटा था।

वह राजेश के कमरे की ओर आगे बडी, जैसे ही वह राजेश के कमरे के दरवाजे के पास पहुंची उसे अंदर से किसी के सिसकने की आवाज सुनाई दी।

वह चौंक गई।

वह ध्यान से आवाज को सुनने लगीं।

आरती _लगता है अंदर कोई भईया से chud रही है।

कौन हो सकता है।

भाभी की कमरे का दरवाजा तो अंदर से बंद है।

और ज्योति दीदी तो कमरे में है फिर और कौन हो सकता है।

कही मां,,,

नही नही ये मै क्या सोचने लगीं।

मां तो बडी संस्कारी और भोली है वो नही हो सकती।

आरती दरवाजे पर कान लगाकर सुनने लगी।

इधर राजेश पदमा को घोड़ी बना कर जोर जोर से चोद रहा था।

पदमा बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थी।

पदमा _बेटा और जोर से चोद मै झड़ने वाली हूं, चोद अपनी ताई को, और जोर से फाड़ दे अपनी ताई की chut

इन शब्दों को सुनकर आरती के होश उड़ गए।

हे भगवान अंदर तो सच में मां ही है। राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।

उसके हाथ पैर कपकपाने लगे।

उसने सपने में भी नहीं सोचा था उसकी संस्कारी मां, इस तरह अपने भतीजे से रंडियों की तरह चुदेगी।

वह अपने कमरे में आकर सोचने लगीं।

पता नही मां राजेश भइया से कब से chud रही है।

अब तक मुझे मां पर कोई शक भी नहीं huwa

कुछ देर बाद आरती ने सोचा की चलो अच्छा huwa की यह राज मुझे पता चल गया।

अब मुझे मां से डरने की कोई जरूरत नहीं। अगर मैं राजेश भइया के साथ पकड़ी गईं तो, मै उसका मुंह बंद करा सकूंगी।

आरती अब और अधिक उत्तेजना महसूस करने लगीं।

यह जानकर उसकी मां राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।

उसकी boor और पानी छोड़ने लगीं।

वह उंगलियों से अपनी भग्नासा रगड़ने लगी और कुछ ही देर में झड़ने लगी।

इधर राजेश पदमा की जमकर chudai कर रहा था।

पदमा को जन्नत की सैर करा रहा था।

वह पदमा को बेड किनारे लिटा कर उसकी टांगो को अपनी कंधे में डाल कर हाथ से उसकी चूची मसल मसल कर तेज तेज धक्के लगा लगा कर चोद रहा था।

राजेश झरने के करीब आ गया,,,

राजेश _ताई मेरा आने वाला है,,,

पदमा _आज अंदर ही छोड़ दे,,,

राजेश _क्यू, कही तुम पेट से हो गई तो,,,

राजेश जोर जोर से चोदते हुए कहा,,

पदमा _यहां आने से पहले गोली खा ली थी,,

राजेश और तेज तेज चोदने लगा,,,

कमरे में पदमा की सिसकारी चूड़ियों की खनक फाच फच की आवाज गूंज रहा था,,

राजेश अब खुद को और न रोक सका और आह मां आह,,,,

आह ह ह,,, आह,,

करा हते हुवे अपनी वीर्य की फुहारे से पदमा की गर्भाशय को सींचने लगा।

गर्म गर्म वीर्य को अपने गर्भसाय में अनुभव कर फिर से झड़ने लगीं।

दोनों काफी थक गए थे। बेड पर लेट कर सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद,,

पदमा उठी और अपने कपडे पहनने लगी।

राजेश देखकर मुस्कुराने लगा।

कपडे पहनने के बाद वह राजेश के बगल में बैठ गई।

पदमा _देखो बेटा, अब तेरा इंटर व्यू पास आ गया है।

अब तू सिर्फ अपनी पढाई पर ध्यान लगा।

इंटरव्यू से पहले अब ये सब बंद कर।

कही तू इंटरव्यू में फैल हो गया तो,,, सारा दोष मेरे ऊपर आ जायेगा। मैंने ये सब करने से रोका क्यू नही। मै सुनिता को जवाब नही दे पाऊंगी।

मूझसे वादा कर इंटर व्यू से पहले अब इन चीजों से दूर रहेगा।

मै पुनम को भी बोल दूंगी तुमसे दूर रहने के लिए।

राजेश _, ठीक है ताई, आपकी आज्ञा सिर आंखों पर।

जाने से पहले एक किस तो देदो।

पदमा _चल हट बदमाश इतना करने के बाद भी तेरा जी नही भरा है।

अब तेरा इंटर व्यू से पहले कुछ नहीं मिलेगा।

पदमा अपनी गाड़ मटकाते हुवे कमरे से बाहर चली गईं।

अगले दिन से राजेश इंटरव्यू की तैयारी में जी जान से जुट गया।

पुनम और आरती ने भी समय की नजाकत को देखकर, राजेश से दूर ही रही।

राजेश को इंटर व्यू के लिए दिल्ली जाना था।

उसके एक दिन पहले संडे था।

दिव्या ने राजेश को से मिलने सूरज पुर आया।

पुनम _देवर जी आपसे मिलने के लिए, राजकुमारी दिव्या आई है।

राजेश अपने कमरे में पढाई कर रहा था।

राजेश _दिव्या जी आई है, अचानक,, कहा है?

पुनम _आंगन में बैठी है मां जी के पास।

राजेश अपने कमरे से बाहर आया।

राजेश _दिव्या जी आप, यहां अचानक।

दिव्या _कैसे हो राजेश, कैसे चल रही है तुम्हारी तैयारी।

राजेश _मै ठीक हूं दिव्या जी आप कैसी है? यूं अचानक कुछ काम था क्या? मुझे फोन कर देती। मै आ जाता।

दिव्या _तुमने बताया था न कि कल तुम इंटर व्यू देने दिल्ली जाओगे।

तो मिलने चली आई।

कल कितने बजे की ट्रेन है?

राजेश _जी सुबह 10बजे की।

दिव्या _राजेश, 10बजे तो मेरा भी ड्यूटी जाने का समय रहती हैं। तुम चाहो तो मैं तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगी।

राजेश _शुक्रिया दिव्या जी।

वार्तालाप चल ही रहा था कि ज्योति चाय लेकर आई।

दिव्या _कैसी हो ज्योती दीदी? कोई समस्या तो नही।

ज्योती _जी मै बिल्कुल ठीक हूं।

दिव्या _आपका बच्चा कैसा है?

ज्योती _वो भी बिल्कुल ठीक है, छोटी राजकुमारी जी।

पदमा _लो बेटी, चाय लो।

सभी चाय पीने लगे।

ज्योति, अपने बच्चे को लेकर आई।

दिव्या ने उसे अपने गोद में ले लिया और दुलारने लगी।

कुछ देर रुकने के बाद,,,

दिव्या _अच्छा राजेश अब मैं चलती हूं, तुम्हे भी अपनी तैयारी करनी है। मै कल तुम्हे लेने 9बजे आ जाऊंगी।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

दिव्या अपनी घर चली गई।

अगले दिन दिव्या 9बजे कार लेकर सूरज पुर पहुंची।

राजेश दिल्ली जाने के लिए अपना बैग तैयार कर चुका था।

दिव्या के आने के बाद, राजेश ने अपनी ताई और ताऊ जी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

भुवन ने राजेश को गले लगाकर शुभकामनाएं दिया। और राजेश का बैग उठाकर कार के डिक्की में डाला।

राजेश और दिव्या कार से स्टेशन के लिए निकल पड़े रास्ते में चाचा का दुकान आया, राजेश ने कार रोकने कहा।

राजेश ने अपने चाचा चाची का आशीर्वाद लिया। सविता और माधव ने परीक्षा में कामयाब होने के लिए शुभकामनाएं दिए।

और जल्दी वापस लौटने को कहा।

रास्ते में दिव्या ने राजेश से पूछा,,,

दिव्या _राजेश तुम्हारी वापसी कब होगी।

राजेश _दिव्या जी दिल्ली पहुंचने में ही 36घंटे लगेंगे।

इंटरव्यू के बाद दिल्ली से अपना घर राजधानी जाऊंगा। वहा कुछ दिन रुकने के बाद, यहां वापसी होगी। सप्ताह 2सप्ताह तो लगेंगे ही।

समय पर वे स्टेशन पहुंचे।

ट्रेन के आने का इंतजार करने लगें।

कुछ देर में ट्रेन भी आ गई।

राजेश _अच्छा दिव्या जी, अब मैं चलता हूं।

दिव्या _राजेश तुम अपना खयाल रखना। मुझे फोन करना।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

राजेश ट्रेन पर बैठ गया।

कुछ देर में ट्रेन छूट गई।

दिव्या _हाथ हिलाकर उसे बाई करती रही जब तक ट्रेन दूर न चली गई।

दिव्या के आंख भर आई थी।

वह अपने आंखों के आंसू, रूमाल से पोछी फिर स्टेशन से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चली गई।

राजेश को 36घंटे तक ट्रेन में ही सफर करना था।

अगले दिन हवेली में सुबह 9बजे नाश्ता करने के लिए डायनिंग टेबल पर बैठी थी। परिवार के अन्य सदस्य, रत्नावति, ठाकुर, और गीता भी नाश्ता कर रही थी।

दिव्या, अपने मुंह में दो निवाला डालने के बाद जैसे ही तीसरा निवाला लेने को हुई, उसे उबकाई आने लगीं।

वह डायनिंग टेबल से उठ कर बाथरूम में गई। सभी दिव्या की ओर देखने लगे।

आखिर उसे huwa क्या है ?

गीता _मां मै देखती हूं, बात क्या है?

गीता, दिव्या के पीछे गई।

उसने देखा, दिव्या बाथरूम के वाश बेसिंग में उल्टी कर रही थी।

गीता बहुत चिंतित होने लगीं।

गीता _दिव्या, तुम ठीक तो हो,,,,

दिव्या _हा दी,,

गीता ने दिव्या की आंखों में आंसू देखा,,,

गीता _, दिव्या, तुम मूझसे कुछ छिपा रही हो,,,

बताओ बात क्या है?

कही तुम,,,

दिव्या, गीता के गले लग कर रोने लगी,,,
 
दिव्या, गीता के सीने से लग कर रोने लगी।

गीता _दिव्या, तुम्हे राजेश को इस बारे में सब कुछ बता देना चाहिए।

दिव्या _नही दीदी, मै राजेश को नही बता सकती।

गीता _पर क्यू, अब तुम्हारे पास और कोई चारा है नही । तुम्हे पता है तुम कितनी बडी मुसीबत में फस चूंकि हो।

मेरी बात मानो तुम राजेश को सच बता दो, अगर तुम नहीं बता सकती, तो मैं उससे बात करूंगी।

दिव्या _नही दीदी, तुम ऐसा नहीं करोगी तुम्हे मेरी कसम।

गीता _पर क्यू दिव्या क्यू?

दिव्या _दीदी तुम तो जानती हो न की राजेश किसी और से प्यार करता है। मै उस पर दबाव नही बना सकता। वैसे भी जो कुछ huwa उसमे उसकी कोई गलती नही है, वो होश में नहीं था, और अभी वो एग्जाम देने जा रहा है, मै नही चाहती की मेरे कारण उनका इन्टर व्यू खराब जाए।

गीता _तब तो एक ही चारा है इस मुसीबत से बचने का तुम्हारे पास,,

ये बच्चा गिरा दो,,,

दिव्या चौंकी, वह गीता से दूर हो गई,,

दिव्या _दीदी ये आप क्या कह रही हो?

मै बच्चा गिराने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकती,,

दिव्या रोती हुई अपने कमरे में चली गई।

गीता _दिव्या रुको , मेरी बात सुनो,,,

दिव्या अपने कमरे में गई और बेड पर लेट कर रोने लगीं।

गीता उसके बाजू में आकर बैठ गई,,

दिव्या की बालो को सहलाने लगीं,,,

गीता _फिर क्या करेगी तू ही बता,,

और कोई रास्ता है तुम्हारे पास।

मां और पिता जी जब पता चलेगा तब क्या करेगी? उन्हे क्या जवाब देगी।

हम उनसे ये बात ज्यादा दिन तक छुपा भी नहीं सकते।

हे भगवान मेरी बहन को ये कैसी मुसीबत में डाल दिया?

उधर रत्ना वती, ने देखा की दिव्या वाश रूम से निकलकर अपने कमरे में जा रही है और गीता भी उसके पीछे उसे रोकने की कोशिश कर रही है,को आखिर बात क्या है? वो चिंतित हुई।

रत्नवती _मै देखकर आती हूं जी आखिर बात क्या है?

ठाकुर _ठीक है।

रत्नवती दिव्या के कमरे में गई।

रत्नवती _गीता क्या huwa? दिव्या की तबियत तो ठीक है न।

गीता _मां, वो,,,,,,,सब्र ठीक,,, ही,,,

रत्नवती _क्या बात है, तुम्हारी जुबान क्यू लड़खड़ा रही है? आख़िर बात क्या है?

गीता _चुप रही,,,

रत्नवती _दिव्या बेटा, तुम रो क्यू रही हो, तुम ठीक तो हो न,,,

तुम दोनो कुछ बताती क्यू नही? आखिर बात क्या है? गीता बताओ, बात क्या है?

गीता _दिव्या,,, मां बनने,,, वाली,,,,,

रत्नावती _क्या? गीता तू समझ भी रही है तू क्या बोल रही है? रत्नवती की शरीर कपकपा गई।

वह दिव्या को बेड से उठाई,,

दिव्या बेटा कह दो की ये झूठ है!

दिव्या रत्नवती के सीने से लग कर रोने लगी।

रत्ना वती_दिव्या बेटा तू तो समझदार है फिर इतनी बडी गलती,,,,,

किसका बच्चा है?

दिव्या चुप रही।

रत्नवती _जवाब दो बेटा। आख़िर तुम्हारे पेट में किसका बच्चा है?

चुप क्यू हो बताओ मुझे,,

गीता _मां दिव्या तुम्हे कुछ नहीं बताएगी। मै बताती हूं आख़िर ये सब huwa कैसे?

गीता ने सारी घटना, रत्नवती को बता दी।

रत्नवती _ इतनी बडी घटाना हो गई और मुझे आज पता चल रहा है,,,,

रत्नवती _मेरी बच्ची, तो निर्दोष है, और उसे इतनी बडी सजा,,, नही नही,,,

रत्नवती _गीता तू अभी राजेश को फोन लगा,,,,

दिव्या _नही मां, तुम्हे मेरी कसम तुम राजेश को कुछ नही बोलोगी,,

रत्नवती _बेटा तू ये क्या बोल रही है? तुम्हारे पेट में ये बच्चा है?

दिव्या _इसमें राजेश का भी तो कोई दोष नहीं है न मां, वह जानबूझकर तो ऐसा नही किया न, उसे तो पता भी नहीं है, उस रात क्या huwa है?

वैसे भी राजेश एग्जाम देने दिल्ली जा रहा है! मै नही चाहती मेरी वजह से उसका इंटरव्यू खराब जाए।

रत्नवती _तो ठीक है? उसे इटरव्यू देकर आ जानें दो फिर उससे बात करूंगी।

दिव्या _नही मां, राजेश से इस बारे में कोई बात मत करना। क्यू की ओ किसी और से प्यार करता है। मै राजेश पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाना चाहती।

रत्नवती _अगर ऐसा है तो तुम्हारे पास सिर्फ एक ही विकल्प बचता है बेटा, इससे पहले तुम्हारे प्रेगनेंसी के बारे में किसी को कुछ पता चले ये बच्चा गिरा दो,,,

दिव्या _ने अपने पेट को पकड़ते और देखते हुए कहा,,

नही मां मैं ऐसा नहीं कर सकती।

रत्नवती _बेटी तू ये क्या कह रही है? न तू राजेश को इस बारे में बताना चाहती है और न ही बच्चा गिराना फिर, कुछ दिनों मै सबको पता चल जायेगा कि तू पेट से है, फिर हवेली की इज्जत मिट्टी में मिल जायेगी बेटा।

तुम्हारे पिता जी को इस बारे में पता चलेगा तो पता नही वो क्या करेगा?

इस बात को हम उनसे छिपा भी नहीं सकते।

मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा,,,

इधर ठाकुर भी चिंतित होने लगा, लो ठाकुराइन भी पता करने गई थी। वह भी वही रुक गई, पता नही आख़िर बात क्या हो गई?

कुछ देर बाद वह रत्नवती ठाकुर के पास आई।

ठाकुर _क्या huwa, तुम्हारा मुंह क्यूं लटका हुआ है। दिव्या ठीक तो है न।

रत्नवती _यहां मै आपको कुछ नहीं बता सकती?

आप मेरे कमरे मे आइए।

भोजन कक्ष में नौकर लोग मौजूद थे। रत्नवती नही चाहती थी कि किसी को भी इस बात की जानकारी हो।

ठाकुर _ऐसी क्या बात हो गई है जो यहां नही बता सकती।

ठाकुर, रत्नवती के पीछे पीछे उसके कमरे तक गई।

रत्नवती अपने बेड पर बैठ कर सुबकने लगी।

ठाकुर _ये क्या तमाशा है? मुझे अपने कमरे में बुलाकर बात क्या है? बताने के बजाय सुबकने लगी। बताओ क्या हो गया है दिव्या को,,,

रत्नवती अपनी आंसू पोछते हुवे कहा की, दिव्या मां बनने वाली,,,

ठाकुर _ठाकुराइन, जुबान सम्हाल कर बात करो, मेरा तुम तुम पर हाथ उठ जाएगा।

रत्नवती _ये सच है जी,,

ठाकुर _नही, दिव्या इतनी बडी गलती नहीं कर सकती? वो हमारी खानदान की इज्जत पर में नही मिला सकती! कह दो ये झूठ है,,,

ठाकुर ने चीखते हुए कहा।

रत्नवती _काश ये झूठ होता,, सुबकती हुई, बोली।

ठाकुर _उसके पेट में किसका बच्चा है बताओ मैं उस साले को गोलियों से भून डालूंगा,,,

रत्नवती चुप रही,,

ठाकुर _तुम चुप क्यू हो बोलती क्यूं नही?

दिव्या की पेट में किसका बच्चा है?

रत्नवती _जी,,, राजेश का,,

ठाकुर _मुझे उसी पर शक था !

मै उस साले को गोलियों से भून डालूंगा। हवेली की इज्जत को तार तार कर दिया है?

उस हरामि साले को दिल्ली से लौटने दे। उसे ऊपर न पहुंचाया न मेरा भी नाम बालेन्द्र सिंह नही।

रत्नवती _राजेश को तो पता ही नहीं जी कि उसने दिव्या के साथ कुछ किया है।

ठाकुर _ये तुम क्या बक रही हो?

रत्नवती ने जो घटना घटित हुआ उस्के बारे में ठाकुर को सब बात बताई।

ठाकुर _मै झोपड़ी के बाहर बैठा था और वो शाला मेरी बेटी के इज्जत से खेल रहा था।

ठाकुर गुस्से से आग बबूला हो रहा था।

मैंने दिव्या से कहा था, उस शाले को मत बचाओ।

पर वो नही मानी, देखा नेकी का फल। शाले ने हमारे घर की इज्जत को तार तार कर दिया।

मै उस साले को छोडूंगा नही।

दिव्या से बोलो, वह बच्चा गिरा दे,,,

रत्नवती _मैंने उन से कहा पर वो बच्चा नहीं गिराना चाहती।

ठाकुर _क्या बक रही हो? उसका दिमाक खराब है क्या?

रत्नवती _मैंने उसे समझाने की कोशिश की पर वह बात पर अडिग है? वो बच्चा नहीं गिराना चाहती।

ठाकुर _अगर बच्चा नही गिराना चाहती, तो उसे बोल दो इसी माह उसकी शादी खेल मंत्री के बेटे से होगी।

मंत्री जी कुछ दिन पहले ही शादी के बारे में बोल रहे थे मैंने ही उसे मना किया था, चुनाव हो जानें के बाद करने को बोला।

लेकिन अब मुझे इसी माह शादी के लिए बोलना होगा। तुम दिव्या से इस बारे में बात करो और उसे राजी करो।

ठाकुर वहा से चला गया।

रात में सोने के समय रत्नवती दिव्या के कमरे मे गई।

दिव्या _मां आप इस समय।

रत्नवती _बेटा मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

दिव्या के बेड पर बैठ कर बोली।

दिव्या _बोलो मां।

रत्नवती _बेटा तुम्हारे पिता जी तुम्हारी शादी मंत्री के बेटे से करना चाहते है इसी माह।

दिव्या _मां ये आप क्या कह रही है?

आप उन लोगो को धोखा में रख कर मेरी शादी करना चाहती हो। जब उन लोगो को सच्चाई पता चलेगा, तब क्या होगा इसके बारे में सोचें हो।

नही मां मैं ऐसा नहीं कर सकती।

बेटा तुम राजेश को भी नही बताना चाहती, और दूसरे से भी नही शादी करना चाहती। आख़िर चाहती क्या हो? जब लोगो को पता चलेगा तुम्हारी प्रेगनेंसी के बारे में तो सब थू थू करेंगे।

देखो बेटा, इस घर की मान मर्यादा को बनाए रखने के लिए, तुम्हे कुछ न कुछ तो फ़ैसला लेना ही होगा।

दिव्या _मैंने फैसला कर लिया है मां।

रत्नवती_कैसा फैसला बेटा?

दिव्या _मां मै इस बच्चे को जन्म दूंगी मां।

मां मैं मुंबई चली जाऊंगी, ताकि खानदान की इज्जत पर कोई ऊंगली न उठा सके, यही मेरा आखरी फैसला है मां।

रत्नवती _बेटी ये तू क्या कह रही हैं। तू मुंबई में अकेली रहेगी।

रत्नवती ने दिव्या को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी।

इधर ठाकुर रात भर शराब पीता रहा, उसे राजेश पर बहुत गुस्सा आया। रात में कोई भी ठीक से सो नहीं पाया।

सुबह ठाकुर ने रत्नवती से पूछा।

ठाकुर _तुमने दिव्या से बात की।

दिव्या शादी के लिए तैयार हुई?

रत्नवती ने दिव्या के फैसले के बारे में बताया।

ठाकुर _तुम अपनी बेटी को समझा भी नहीं सकी कैसी मां हो तुम।

रत्नवती _देखो जी, दिव्या एक पढ़ी लिखी सुलझी हुई लड़की है उस पर हम ज्यादा दबाव नहीं बना सकते। मैंने उससे समझाने की बहुत कोशिश की पर वह अपने फैसले पर अडिग है।

इधर राजेश दिल्ली पहुंच चुका था वह वहा एक होटल बुक कराया अगले दिन उसका इंटरव्यू था।

वह इंटरव्यू की तैयारी में लगा था।

इधर दिव्या ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर अपना इस्तीफा दे दिया।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के कर्मचारि काफी दुखी हुवे। उन लोगो ने जानने की कोशिश की।

पर उसने किसी को कुछ नही बताया।

अगले दिन राजेश का इंटरव्यू था।

वह इंटरव्यू के लिए निर्धारित स्थल और समय पर पहुंच गया।

इंटरव्यू लेने वाले के टीम ने राजेश से बारी बारी से कई प्रश्न पूछे, राजेश की ईमानदारी, निर्णय लेने की क्षमता, को परखने की कोशिश किया।

राजेश ने उनके सभी प्रश्नों का धैर्यता, स्पष्टता से जवाब दिया। सभी राजेश से काफ़ी प्रभावित हुवे, राजेश के सवालों के जवाब सुनकर ताली बजाने पर मजबूर हो गए।

करीब आधे घण्टे तक इंटरव्यू चला।

इंटरव्यू से बाहर आने पर , राजेश सीधा होटल आ गया।

उसे याद आया कि मां ने कहा था कि केमेस्ट्री टीचर सुमन दिल्ली में ही रहती हैं।

क्यू ना उनसे मुलाकात की जाए। कितने दिन हो गए मैम से मिले।

उसने सुमन को काल किया।

सुमन ने देखा राजेश का फोन, उसने आश्चर्य प्रकट की,

राजेश _हेलो मैम,,,

सुमन _राजेश कितने दिनों बाद मुझे याद किए, कैसे हो तुम।

राजेश _मै ठीक हूं मैम आप कैसी है?

सुमन _मै भी ठीक हूं, वैसे कहा हो तुम आजकल, अभी तो आईएएस की इंटरव्यू चल रही है न,,,

सुमन _हा मैम उसी सिलसिले में मै दिल्ली आया था।

इंटरव्यू हो जानें के बाद सोचा आपसे मिलता चलूं।

सुमन _क्या तुम दिल्ली में हो और अभी बता रहे हो,,

राजेश _हा मैम, इंटरव्यू का प्रेसर था न सोचा कि इंटरव्यू हो जानें के बाद आपसे मिलता चलूं।

सुमन _ओह राजेश कितने दिन हो गए तुमसे मिले हुए, तुम तो मुझे भूल ही गए थे।

तुम तुरंत मेरे घर आ जाओ। मै तुम्हारा इंतजार कर रही।

सुमन ने राजेश को अपना एड्रेस दिया।

इधर दिव्या अपना समान पैक करने लगी।

तभी रत्नवती, उसके कमरे में आई।

रत्नवती _क्या ये तुम्हारा अंतिम फैसला है मुंबई जानें का,

क्या तुम अपना फैसला नही बदल सकती। बेटा वहा तुम मुंबई में अकेली कैसे रहेगी?

तुम्हारी चिंता में मै जी नही सकूंगी। इससे अच्छा है बेटा तुम अपनी नानी के पास सेवा आश्रम चली जाओ।

वहा तुम्हारी देखभाल के लिए मां रहेगी तो मेरी चिंता कम हो जाएगी, बेटा।

दिव्या _पर क्या पिता जी इसके लिए तैयार होंगे?

रत्नवती _मै उसे मना लूंगी बेटा।

दरअसल रत्नवती के माता पिता भी राज घराने से थे।

उसकी मां राजवती और पिता ठाकुर मानसिंह दोनो धार्मिक प्रवृत्ति और सज्जन व्यक्तिव के थे। रत्नवती उनकी इकलौती संतान थी।

जब मानसिंह की मृत्यु हुई, उसके बाद राजवती अकेली हो गई।

राजवती ने एक आश्रम की स्थापना की। अपनी सारी जमीन जायदाद आश्रम के नाम कर दी, और वह आश्रम में रहने लगीं।

आश्रम हजारों एकड़ जमीन में बना huwa था। आश्रम, हजारों अनाथ बच्चे, त्यागी हुई महिलाए और वृद्ध लोगो का सहारा स्थल था।

आश्रम और उस क्षेत्र के लोग, राजवती को माता राजवती कहकर पुकारते थे।

रत्नवती ने दिव्या को अपनी मां के पास भेजने का फैसला किया।

दिव्या अपनी मां की चिन्ता को देखते हुए वहा जाने तैयार हो गई।

रत्नवती ने इस बारे में ठाकुर को बताया।

वह भी दिव्या को लेकर काफ़ी चिंतित और दुखी था। रत्नवती की बात पर वह भी राजी हो गया।

रत्नवती, दिव्या को लेकर अपनी मां के पास छोड़ आने के लिए वह भी तैयार हो गई।

जाते समय गीता, दिव्या की गले लगकर खूब रोई।

दिव्या ने जाते समय ठाकुर का पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाही, लेकिन ठाकुर ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया।

रत्नवती ने ड्राइयर से कार निकालने के लिए कह दिया था।

रत्नवती और दिव्या दोनों आश्रम के लिए निकल पड़े।

रत्नवती के पिता मानसिंह चंद्र पुर के जमीदार थे। चंद्र पुर एक जिला था, जो धरमपुर जिला से लगा हुआ था।

आश्रम नदी के किनारे एक गांव शिवपुर केपास बनाया गया था। भानपुर से लगभग 300km दूर था।

वे शाम होते तक आश्रम पहुंचे।

इधर राजेश सुमन के घर पहुंचा। सुमन राजेश को देखकर बहुत खुश हुई।

उसका पति सौरभ ड्यूटी पर गया था।

घर में नौकरानी, सुमन और उसका छोटा बच्चा ही था।

सुमन _आओ राजेश?

आओ बैठो? लाओ बैग को मुझे दो।

राजेश सोफे पर जाकर बैठ गया।

सुमन _कैसा गया तुम्हारा इंटरव्यू?

राजेश _उम्मीद से बेहतर?

सुमन _चलो, कुछ ही दिनों में आई ए एस बनने का तुम्हारा सपना पूरा हो जाएगा।

वैसे पहले से तुम और भी ज्यादा स्मार्ट हो गया है। बॉडी वाडी भी बहुत अच्छी बना रखी है।

चलो यहां आने के बाद कम से कम मुझे याद तो किया।

मुझे तो लगा था कि अब तुमसे कभी मुलाकात नहीं होगी? तुम तो मुझे बिल्कुल भूल ही गया था re

राजेश _नही मैम मै कैसे आपको भूल सकता हूं। मै तो हमेशा आपको याद करता था।

सुमन _चल झूठा कही का,,, अच्छा सुबह से तुमने कुछ खाया पिया है की नही।

एक काम करो तुम बाथरूम में जाकर फ्रेश हो जाओ और ये कपडे भी बदल लो, मै तुम्हारे लिए कुछ बना देती हूं। पता नही तुमने सुबह से कुछ खाया पिया है भी की नही।

राजेश को मेहमानों के कमरे में ले गया।

राजेश वहा कपड़ा चेंज कर फ्रेश होने लगा।

इधर रत्नवती और दिव्या आश्रम पहुंचने के बाद, अपनी मां राजवती से मिली। काफ़ी दिनो के बाद अपनी बेटी और नातिन को देखकर उसकी आंखें भर आई।

रत्नवती ने अपनी मां को दिव्या के बारे में सबकुछ बताया, ओर यहां आने का कारण भी बता कर रोने लगी।

राजवती _बेटी, तू दिव्या की चिन्ता मत कर अब वो मेरी जिम्मेदारी है।

भगवान पर विश्वास करो सब ठीक होगा, बेटा।

अगले दिन सुबह, रत्नवती अपनी मां से इजाजत लेकर और दिव्या को फोन करती रहना, कहकर वहा से भानगढ़ के लिए निकल गई।

अब दिव्या अनाथ बच्चों के संग अपना समय बिताने लगीं और बुजुर्गो की सेवा करने लगी।

उसकी अंतरात्मा यह गीत गाने लगी,,,

मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया,,,

इक हवा का झोका आया,,

टूटा डाली फूल टूटा डाली से फूल,,

,,,
 
राजेश बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगा। सुमन उसके लिए नाश्ता बनाने लगीं।

राजेश के फ्रेश होते तक नाश्ता भी तैयार हो गया।

सुमन _राजेश क्या तुम फ्रेस हो हो गए हो।

राजेश _जी मैम।

सुमन _चलो फिर नाश्ता कर लो।

राजेश, डायनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया।

सुमन राजेश के लिए नाश्ता लगाया।

राजेश _मैम आपका बेबी दिखाई नहीं दे रहा है।

सुमन _अभी सो रहा है। जब उठेगा तब मिलाऊंगी।

राजेश नाश्ता करने लगा।

राजेश का चाय नाश्ता हो जानें के बाद।

सुमन _राजेश आओ मैं तुम्हे बेबी से मिलाती हूं।

सुमन राजेश को बेडरूम में ले गई।

बच्चा अभी भी सो रहा था।

राजेश,_कितना प्यारा है ये।

सुमन हसने लगीं।

सुमन _हुं, बिल्कुल तुम पर गया है।

राजेश _कुछ कुछ आप भी गया है।

सुमन हसने लगीं।

सुमन _थैंक्स राजेश,,

राजेश _वो किसलिए

सुमन_तुमने मुझे जीवन का सबसे बडा तोहफा जो दिया। मेरे जीवन को खुशियों से भर दिया।

राजेश और सुमन पुराने यादों में खो गए।

कुछ देर बाद सुमन का पति सौरभ ऑफिस से घर आया। उसने बेल बजाया।

सुमन _लगता है, वो घर आ गए हैं।

सुमन ने दरवाजा खोला।

सुमन _आप आ गए। देखो जी कौन आया है।

सौरभ _कौन आया है भई, बड़ी खुश लग रही हो।

अरे राजेश, तुम,,

राजेश _नमस्ते सर,,

सौरभ _नमस्ते, ये तो सच में बड़ी सरप्राईज है भाई।

वैसे कब आया राजेश, वो भी बिना कोई खबर दिए।

राजेश _हा सर वो आई ए एस का इंटर व्यू था न, इस लिए दिल्ली आया था। घर जानें से पहले सोचा आप लोगो से मिलता चलूं।

सौरभ _बडा अच्छा किया जो हमसे मिलने चले आए,

वैसे कैसा गया तुम्हारा इंटर व्यू?

राजेश _बहुत अच्छा सर।

सौरभ _चलो अब तुम्हारा सपना भी पूरा होने वाला है। वैसे घर में सब ठीक तो है न मां और पापा

राजेश _हा सर वे दोनो ठीक।

सौरभ _यार अच्छा किया जो यहां आ गया, सुमन तुम्हे काफी मिस करती थी।

हम लोग तो सोच रहे थे की तुम हम लोगो को भूल ही गए, न कोई खोज खबर न कोई फोन।

राजेश _नही सर आप लोगो को भला कैसे भुल सकता हूं मैं वो क्या है न कि मैं अपने दादा जी का गांव चला गया था, वहा मोबाइल ठीक से काम ही नहीं करता। और वहां गांव में भी कुछ परीक्षा की तैयारी के साथ कुछ कामों में भी उलझा रहा।

सौरभ _ओह।

अब आय हो तो कुछ दिन रह के ही जाना।

राजेश _नही सर परसो मेरी ट्रेन है। मै परसो शाम को निकल जाऊंगा।

मां का भी फोन आया था। कह रही थी कब आ रहे हो, तुम्हारे मामा के घर जाना है।

सौरभ _ओह, कोई बात नही।

सौरभ सुमन और राजेश तीनों आपस में बात चीत कर रहे थे की,,,

नौकरानी _मैम साब खाने में क्या क्या बनाना है?

सौरभ _सुमन, आज राजेश आया है बाहर घूमने चलते है, वही किसी अच्छे से होटल में खायेंगे।

सुमन _ठीक है जी।

कुछ देर में तीनो अपने कमरे में जाकर तैयार हो गए, बाहर घूमने जानें के लिए।

सुमन ने

नौकरानी को छुट्टी दे दी।

तीनों कार में घूमने के लिए निकल पड़े, साथ में बच्चे को भी ले गए।

सौरभ _राजेश मेरे खयाल से दिल्ली तुम पहली बार आ ये हो।

राजेश _हा सर।

वैसे दिल्ली में आप लोग सेट हुवे कि नही।

सौरभ _दिल्ली एक अच्छा शहर है पर यहां की सबसे बड़ी समस्या है ट्रैफिक और प्रदूषण। यहां के लोग सुद्ध हवा के लिए तरसते हैं भई। मै तो कहता हूं। सारी पेट्रो गाड़ियों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए और सिर्फ एलिक्ट्रिक गाड़ियों को ही अलाउ करना चाहिए।

शायद तभी इस समस्या का समाधान हो।

राजेश _आपने बिल्कुल ठीक कहा सर।

वे दिल्ली के प्रमुख जगह पर घूमे फिर एक अच्छे से होटल में जाकर खाना खाए।

खाना खाकर जब वे घर लौटे तो रात के 10बज चुके थे।

इधर आश्रम में राजवती, दिव्या को अपने साथ ही सुलाती थी। ताकि उसे अकेलापन महसूस न हो,,,

दोनो बेड पर सोए हुवे थे।

राजवती _बेटी तू तो डॉक्टर है चाहती तो अनचाहे गर्भ को गिरा भी सकती थी पर तुमने ऐसा नहीं किया,,,

कही तुम उस लड़के से प्यार तो नही करती?

दिव्या _मेरे प्यार करने से क्या होता है नानी,,

वो तो किसी और को चाहता है न।

राजबती _पर बेटा, तुम्हे एक बार इस बारे में बात तो करनी चाहिए थी, उनके मन में क्या है पता चल जाता, तुम्हारे प्रति वह क्या सोच रखता है?

दिव्या _नानी वो मुझे अपना अच्छा दोस्त समझता है। मै जानती हूं जब उसे पता चलेगा मेरे बारे में उसे बहुत दुख होगा, और मेरे खुशी के लिए वह अपनी खुशी को त्याग देगा। पर मै नही चाहती मेरे कारण वह अपनी खुशियों का त्याग करे।

राजवती _ बेटी तुम्हारे इस त्याग की भावना देखकर मैं अभिभूत हूं। तू अपने को कभी अकेली न समझना मै तुम्हारे साथ हूं बेटी।

दिव्या _थैंक यू नानी।

राजवती _वैसे क्या नाम है उस लड़के का?

दिव्या _राजेश।

राजेश _क्या उसकी फोटो है तुम्हारे पास?

दिव्या ने अपनी मोबाइल से राजेश का फोटो राजवती को दिखाया।

राजवती _ऐसा लगता है मैंने इसे कही देखा है।

दिव्या _दादी ये कैसा हो सकता है, वो तो यहां कभी आया नही।

राजवती _इसके मां बाप कौन है, क्या करते हैं?

दिव्या _इनका गांव हमारे गांव से लगा huwa है, इसके पिता जी बैंक में मैनेजर है, इनके मा पापा शहर में रहते है। इनके ताऊ जी और चाचा जी गांव में रहते है।

राजेश अभी गांव आया huwa है।

अभी राजेश आई ए एस की तैयारी कर रहा था। वह इंटरव्यू देने दिल्ली गया huwa है।

कहते हैं की एक समय मेरे दादा जी और राजेश के दादा जी घनिष्ट मित्र huwa करते थे।

राजवती _क्या नाम था राजेश के दादा जी का।

दिव्या _मानव प्रसाद।

राजवती _ओह, अब समझी। मुझे ऐसा क्यो लगा की राजेश को मैं जानती हूं।

मानव प्रसाद की शकल राजेश से मिलती है।

दिव्या _क्या आप उनके दादा जी को जानती थी।

राजवती _रत्ना को देखने के लिए तुम्हारे दादा जी के साथ, राजेश के दादा जी भी आया था। काफ़ी सज्जन व्यक्ति था। वह तुम्हारे दादा जी के साथ 3_4बार चंद्रपुर आया था।

तुम्हारे नाना जी, राजेश के दादा जी के विचारो से काफ़ी प्रभावित हुए थे।

दिव्या _राजेश भी बहुत अच्छा लड़का है नानी, हमेशा दूसरों की मदद करता है। दूसरो की मदद करते समय अपनी जान की भी परवाह नहीं करता।

गांवों के लोग उसे बहुत मानते हैं।

राजवती _तब तो मुझे भी राजेश से मिलने की इच्छा हो रही है।

दिव्या _ओ आएगा नानी, वो ज़रूर आएगा जब उसे मेरे बारे में पता चलेगा। पर नानी आप मूझसे वादा करो। उसे मूझसे शादी के लिए नही बोलोगे।

मैं नहीं चाहती की कोई उस पर दबाव बनाए।

राजवती _ठीक है बेटी, मै तुम्हारी भावनाओं का ख्याल रखूंगी।

इधर दिल्ली में ,,,

होटल से लौटने के बाद,,

राजेश अपने कमरे में आराम करने लगा।

सौरभ भी अपने कमरे में आराम करने लगा।

सुमन बच्चे को सुलाने के बाद, एक बहुत ही खूबसूरत सेक्सी नाइटी पहन ली। हल्की सी ओंठो पर लिपिस्टिक भी लगा ली।

सौरभ _वाउ क्या बात है? इस नाइटी में तो कयामत ढा रही हो मेरी जान। आज किसी पे बिजली गिराने का इरादा है क्या?

सुमन, सौरभ के बाजू, बेड में जाकर बैठते हुए बोली।

हूं, आप पर, ओर कौन है कमरे में जिस पर बिजली गिराओंगी।

सौरभ _भई इस बिजली को झेल पाने की क्षमता हममें तो नही है।

कोई ताकतवर ही झेल पाएगा। हम तो कुछ ही देर में ढेर हो जायेंगे।

सुमन _मैने आपसे कभी शिकायत की है क्या?

सौरभ _भई, वो पति ही क्या जो अपनी पत्नी की अरमानों को न जान सके।

आज राजेश आया huwa जाओ उसके पास अपनी अरमानों को पूरा कर लो।

सुमन _ये आप क्या कह रहे जी? आपके सामने ही मैं राजेश के कमरे में चला जाऊ। आपको बुरा नहीं लगेगा।

सौरभ _भई राजेश का भी तो तुम पर हक है, आख़िर उसने तुम्हे इतनी बडी खुशियां जो दी है। जाओ राजेश के पास, हो सकता है वो भी तुम्हारे लिए तड़फ रहा हो।

सुमन _नही जी, मै आपको यहां छोड़ कर उसके पास नहीं जा सकती।

सौरभ _ठीक है भई, फिर हम ही ले चलते है आपको, राजेश के पास।

सुमन _ये आप क्या कह रहे है जी? आप खुद ही राजेश के पास मुझे ले जायेंगे, मै शर्म से नजरे नही मिला पाऊंगी।

सौरभ _शर्म तो औरत की गहना है मेरी जान। शरमाओ खूब शरमाओ।

तभी तो सामने वाले का मजा डबल हो जाता है।

चलो मेरे साथ,,,

सौरभ, सुमन की हाथ पकड़ कर उसे राजेश के कमरे में ले गया।

राजेश आंख बंद कर सोने की कोशिश कर रहा था।

सौरभ _अरे यार राजेश, सो गया क्या?

राजेश _सर, मैम ,आप लोग, कुछ काम था क्या?

सुमन सिर झुकाए खड़ी थी।

सौरभ _ये क्या? इतने दिनो बाद मिलने आए हो अपनी सुमन से, और ऐसे ही सोने लगे।

राजेश _मै समझा नही सर।

सौरभ _भई, सुमन पर जितना हक हमारा है उतना हक तुम्हारा भी है। इतने दिनो बाद तुम दोनो मिले हो। इस हसीन रात को यादगार बनाओ भई। पता नही जिंदगी में फिर मौका मिले या न मिले दोबारा। दिल की कोई हसरत बांकी न रह जाए।

सुमन शर्म से गड़ी जा रही थी।

राजेश _सर ये आप क्या कह रहे है?

सौरभ _अरे यार मैं ठीक कह रहा हूं। आज और कल सुमन तुम्हारे साथ सोएगी। परसो तो तुम घर चलें जाओगे।

सुमन तो मूझसे कुछ कहती नही पर मै जानता हूं, मै सुमन को संतुष्ट नहीं कर पाता।

मै चाहता हूं इन दो दिनों, सुमन को जी भर कर प्यार दो।

अच्छा अब मैं चलता हूं, तुम दोनो इंज्वॉय करो।

राजेश _रुको सर,,,

सौरभ रुक गया,,

सौरभ _बोलो भई क्या बात कहनी है?

राजेश _सर आपने कहा, मैम को आप संतुष्ट नहीं कर पाते,,

पर मैं समझता हूं की, हर महीला को, हर व्यक्ति संतुष्ट कर सकता है। बस आदमी को तरीके पता हो और यह पता हो की स्त्री को क्या पसंद है।

आप इन दो दिनों हमारे साथ रहे तो मैं समझता हूं की आप मैम को अच्छे से संतुष्ट करना सीख पाएंगे।

सौरभ _ओह, ये तो बड़ी अच्छी बात है। मै अगर सुमन को संतुष्ट करना सीख जाऊ, तो इससे बड़ी खुशी मेरे लिए और कुछ नहीं होगी। पर मेरे रहने से तुम दोनो को खुलकर इंजॉय करने में दिक्कत तो नही होगी।

राजेश _नही सर ऐसा नही होगा, बल्कि आपके जुड़ जानें से मजा डबल हो जायेगा। क्यू मैम?

सुमन शर्म से पानी पानी होने लगीं।

उसके दिल धक धक करने लगा।

उसके पति के सामने ही राजेश उसे चोदेगा।

हे भगवान, मै शर्म से मर न जाऊ।

राजेश _चलो हम हाल में चलते है?

तीनों हाल में आ गए।

सर बेड का गद्दा निकलकर फर्श पर बिछा देते है।

सौरभ बेड से गद्दा निकालकर ले आया और हाल के फर्श पर बिछा दिया।

राजेश _सर आप देखते जाइए। मै मैम और मेरे बीच की कामक्रीड़ा। फिर आप भी मैम को संतुष कर सकेंगे।

सौरभ सोफे पर बैठ कर देखने लगा।

राजेश सुमन को पीछे से बाहों में भर लिया।

दोनो हाथो से नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूंची मसलने लगा।

उसके खुले हुवे पीठ को चूमने लगा।

राजेश की हरकत से सुमन अपनी आंखें बन्द कर ली।

राजेश, सुमन की कान के पीछे चाटने लगा।

गर्दन को चूमने चाटने लगा।

राजेश की हरकत से सुमन उत्तेजित होकर सिसकने लगीं।

सौरभ राजेश की गतिविधियों को एक टक देखने लगा।

राजेश अब सुमन की नाइटी को उपर कर निकाल दिया।

अब वह ब्रा और पैंटी में थी।

राजेश, सुमन को अपनी ओर घुमाया।

सुमन की आंखों में देखा।

दोनो की नजरे मिली।

राजेश सुमन की ओंठ को अपने मुंह में भरकर चूसने लगा।

सुमन के हाथ पैर कपकपने लगे।

वह उत्तेजित हो कर राजेश का ओंठ चूसने लगी।

राजेश अब नीचे बडा उसकी गर्दन को चूमने लगा।

सुमन सिसकने लगी।

राजेश अब अपने हाथ पीछे ले गया और सुमन की ब्रा की हूक खोल दिया।

और अपना टी शर्ट उतार दिया।

राजेश सुमन की मस्त दुध से भरी चूंची को मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दिया।

वह दुध को गटक गटक कर पीने लगा।

वह अपने हाथ से दुध को मसल मसल कर निचोड़ निचोड़ कर दुध पीने लगा।

सुमन सिसकने लगी। प्यार से राजेश की बालो को सहलाने लगी।

राजेश की गतिविधियों को देखकर सौरभ भी गर्म होने लगा।

राजेश कुछ देर चूची पीने के बाद।

नीचे बडा फिर उसकी खूबसूरत बदन को चूमने चाटने लगा। उसकी गहरी नाभी को चाटने लगा।

सुमन बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

वह मादक सिसकारी निकालने लगीं।

ऊ आह, उन,,,

राजेश अब सुमन को बाहों में उठा लिया और उसे गद्दे पे लिटा दिया।

उसकी पैर चूमते हुए आगे बडा।

उसकी एक टांग सहलाते हुवे दूसरे को चूमते हुए आगे बढ़ा।

सुमन सिसक रही थी।

राजेश अब सुमन की पेंटी के ऊपर से उसकी boor को सहलाया।

सुमन मादक सिसकारी निकालने लगी।

राजेश सुमन की पेंटी को पकड़ कर टांग से नीचे खींचते हुवे पैरो से अलग कर दिया।

फिर पेंटी को सूंघा, पेंटी गीली हो चुकी थी।chut रस की गंध से राजेश मदहोश हो गया।

वह पेंटी को सौरभ की ओर फेका।

सौरभ ने पेंटी कैच किया।

उसमे देखा सुमन की पेंटी एकदम गीली हो गई है। वह भी पेंटी को सूंघने लगा।

उसकी गंध से उसका शरीर भी मदहोश हो गया।

उसका लंद तन गया।

इधर राजेश ने सुमन के चूतड के नीचे तकिया लगा दिया। और टांग को फैला दिया।

सुमन के टांगो के बीच में अपना सिर ले जाकर chut चाटना शुरू कर दिया।

सुमन उत्तेजना में अपना सिर पटकने लगीं।

मादक सिसकारी निकालने लगीं।

ओह,, आह,, ओह मां,, आह,,,

राजेश जीभ से सुमन की भग्नाशा को रगड़ने लगा।

सुमन की उत्तेजना चरम पर पहुंच गया।

शौरभ आश्चर्य आंखें गड़ाए देखने लगा।

इधर सुमन बहुत अधिक उत्तेजित हो गई। वह खुद को ज्यादा देर तक न रोक सकी और चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने chut चाटना बंद कर दिया।

राजेश _सर देखा न औरत का झाड़ना कितना आसान है।

राजेश सौरभ के बाजू बैठ गया।

सौरभ _सच में यार तुमने तो कमाल कर दिया।

इधर सुमन अपने आंखें खोली।

वह राजेश की ओर देखने लगा।

राजेश _मैम आप ठीक तो हैं न।

सुमन शर्मा गई।

राजेश सोफे से खड़ा हो गया।

वह सुमन के पास गया।

सुमन उठ कर बैठ गई।

राजेश का लोवर और चड्डी उतार कर नंगा कर दिया।

राजेश की चड्डी उतरते ही उसका घोड़े जैसा लंद हवा में लहराने लगा।

उसके मोटे और लम्बे लंद को सौरभ आश्चर्य से देखने लगा।

सुमन राजेश के लंद को पकड़ कर हिलाने लगी। उसका अंडकोश चाटने लगी।

फिर उसके टोपा को मुंह में भर ली।

धीरे धीर पूरा लंद मुंह में भर कर अंदर बाहर करने लगी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा, उसका लंद और मोटा लंबा हो गया।

इधर सौरभ भी गर्म हो चुका था। वह अपने कपडे उतार कर नंगा हो गया। और अपना खड़ा लंद सहलाने लगा।

इधर राजेश ने सुमन को घोड़ी बना दिया।

राजेश _सर आप मैम का boor चांटिए।

सौरभ सोफे से उठा और सुमन के पीछे जाकर उसकी boor चाटने लगा।

सुमन राजेस का लंद चूसने लगी।

सौरभ के boor चाटने से सुमन फिर सिसकने लगी।

सुमन _राजेश अब और रहा नही जा रहा, चोदो मुझे।

राजेश अब सुमन के पीछे गया।

सौरभ आगे आ गया। और अपना लंद सुमन को पकड़ा दिया।

इधर राजेश ने अपना लंद सुमन के boor में सेट कर एक जोर का धक्का मारा लंद boor फाड़कर एक ही बार में फच की आवाज करता huwa अंदर चला गया।

सुमन चीख उठी।

इधर सुमन सौरभ का लंद हिला रही थी तो पीछे से राजेश, उसकी boor चोद रहा था।

लंद बड़ी तेजी से boor में अन्दर बाहर होने लगा।

सुमन को बहुत मजा आने लगा। उसकी मुंह से मादक सिसकारी निकल कर हाल में गूंजने लगा।

सौरभ भी काफ़ी गर्म हो चुका था। उसका लंद अकड़ गया था।

राजेश ने अपना लंद बाहर खींच लिया।

राजेश _सर अब आप chut मारो।

सौरभ पीछे आया और अपना लंद सुमन के chut में डालकर चोदने लगा।

राजेश सामने आ गया और अपना लंद सुमन के मुंह में डाल दिया।

कुछ देर तक सौरभ, सुमन की boor चोदता रहा। फिर लगा वो झड़ सकता है।

सौरभ _राजेश मै झड़ने की स्थिति में पहुंचने वाला हूं।

राजेश _सर अपनी सांस अंदर खींचो।

सौरभ चोदना बंद कर, अपनी सांस ऊपर खींचा। अपने पर नियंत्रण पाया।

इधर राजेश सोफे पर बैठ गया।

सुमन को अपने गोद में बिठा लिया।

सुमन लंद को boor में डालकर उठक बैठक करने लगी।

राजेश भी नीचे से अपनी कमर हिला हिला कर सुमन की मदद करने लगा।

लंद सुमन की boor में गपागप अंदर बाहर होने लगा।

दोनो को संभोग का अपार सुख प्राप्त होने लगा।

सुमन की मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगी।

सुमन खुद को ज्यादा देर और न रोक सकी और फिर से झड़ने लगी।

राजेश के लंद में बैठ कर सुस्ताने लगीं।

इधर सौरभ खड़ा था और लंद सहला रहा था।

सुमन कुछ देर बाद होश में आई।

राजेश ने सुमन को अपने गोद से हटाया।

और सोफे पर घोड़ी बना दिया।

सौरभ ने सुमन की chut चाटना शुरु कर दिया।

राजेश सोफे पर चढ़ गया और अपना लंद सुमन के मुंह में डाल दिया।

शौरब के chut चाटने से सुमन फिर से गर्म होने लगीं।

राजेश गद्दे पर जाकर पीठ के बल लेट गया।

सुमन ने सौरभ से chut चटवाना रोका और राजेश के ऊपर आकर अपना लंद boor में डालकर बैठ गई औरउछल उछल कर chudna सुरु कर दिया।

कुछ देर बाद वह राजेश के लंद से उठी और अपने पति के लंद पर बैठ गई।

उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश अपना लंद सुमन के मुंह में डाल दिया।

कुछ देर

सौरभ _आई एम कमिंग, आई एम कमिंग,,

सुमन तेजी से सौरभ के लंद से उठा।

सौरभ खुद को रोक नहीं सका और हवा में झड़ने लगा।

वीर्य उसके उसी के जांघ में गिरने लगा।

इधर गद्दे पे लेट गई।

राजेश सुमन को अपनी गोद में उठा लिया और लंद को boor में सेट कर सुमन को हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा।

इधर सौरभ आंखें बन्द कर झड़ने का आनंद लें रहा था।

उसने आंखें खोला। राजेश की ओर आश्चर्य से देखा। सुमन चीख रही थी।

राजेश उसे हवा में उछाल उछाल कर चोद रहा था।

सौरभ राजेश की मर्दानगी को सैल्यूट किया।

कुछ देर बाद राजेश ने सुमन को गद्दे में लिटा दिया।

उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया और टांगो को अपने कंधे में डाल दिए।

फिर अपने लंद को सुमन की boor में डाल कर गाच गच चोदने लगा।

लंद सुमन की boor की गहराई तक जाकर बच्चेदानी को ठोकने लगा।

कमरे में सुमन की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

आह मेरे राजा और चोदो मुझे, मेरी सारी प्यास बुझा दो,,, आह पूरा अंदर तक जा रहा है तेरा,,, आह उन और तेज आह,,

फाड़ दे मेरी boor

राजेश _ले मेरी रानी,, और ले ले, बुझा ले अपनो प्यास,,, ले एक और ले,,,

राजेश तेज तेज़ चोदने लगा,, सुमन खुद को न रोक सकी और चीखते हुवे झड़ने लगी,,

राजेश रुका नहीं और तेज तेज़ चोदता रहा और कुछ देर में वह भी सुमन के अंदर झड़ने लगा,,,

आह आह,, मां आह, ह ह,,,

सुमन ने राहत की सांस ली।

तीनों सुस्ताने लगे,,,

कुछ देर बाद तीनों नार्मल हुवे,,,

सौरभ _ यार मजा आ गया,,, तुम तो कमाल के खिलाड़ी हो,,,

इधर सुमन को बड़ी शर्म आ रही थी, पति के सामने ही निर्लज होकर राजेश से chud रही थी।

वह अपने कपडे लेकर अपने कमरे में भाग गई।

राजेश और सौरभ दोनो हसने लगे।

सौरभ _यार तुमने तो मुझे काफ़ी कुछ सीखा दिया। मुझे लगता है कि अब मैं भी सुमन को काफ़ी हद तक संतुष्ट कर पाऊंगा।

राजेश _कल देखेंगे सर आप कितना सीखे।

अब चलो हम भी आराम करते है, रात काफ़ी हो गई है।

दोनो अपने कमरे मे चले गए।

इधर आश्रम में,,,,

राजवती _दिव्या बेटा उठो, राजवती ने दिव्या को जगाया।

दिव्या आंखें खोली,,,

राजवती _दिव्या बेटा चलो नहाकर तैयार हो जाओ सुबह प्राथना सभा में जाना है न,,,

दिव्या _जी नानी,,

आश्रम में पतिदिन सुबह प्रार्थना सभा होता था और शाम को भजन संध्या, आश्रम में रहने वाले सभी लोगो को सभा में उपस्थित होना अनिवार्य था। आसपास के गांव वाले भी सभा में आते थे।

सभा में सभी लोग इकठ्ठा हो चुके थे।

माता राजवती के आने का लोग इंतजार कर रहे थे।

कुछ देर में राजवती और दिव्या दोनों प्रार्थना सभा पहुंचे।

पुजारी ने भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना किया उसके बाद राजवती ने दिव्या को प्रार्थना गीत गाने का आग्रह किया,,,

राजवती _बेटा तुम भी भगवान के सामने अपनी प्रार्थना गीत गाओ,,,

दिव्या ने गीत गाना शुरू किया,,,

सत्यम शिवम् सुंदरम,,,,

सत्यम शिवम सुंदरम,,,,

प्रार्थना गीत सुनकर वहा मौजूद सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए,,,

सभी लोग दिव्या के साथ गुनगुनाने लगे,,,

सभी लोगो को दिव्या को अपनी ओर आकर्षित किया,,,,

कौन है ये, बहुत अच्छा गाती है,,,,

ये माता राजवती की नातिन है,,

कल ही आश्रम आई है,,,,
 
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अगले दिन सौरभ, अपना ऑफिस चला गया। कार घर में छोड़ गया। सुमन को यह कह कर की, राजेश को आज दिल्ली घुमा देना।

राजेश और सुमन दिन भर दिल्ली के प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया।

रात में तीनो ने फिर से जमकर सेक्स का मजा लिया।

फिर अगले दिन राजेश अपने घर के लिए ट्रेन पकड़ा।

इधर आश्रम में एक दिव्या सुबह प्रार्थना सभा में गीत और शाम को भजन संध्या में भजन गाकर वहा रहने वालो का दिल जीत लिया।

आश्रम में न केवल स्कूल था बल्कि एक बडा hospital भी बनाया गया था जिसमे आश्रम के लोगो का इलाज तो होता ही था साथ में दुर दराज के गांव के लोग भी इलाज के लिए आते थे।

दिव्या हॉस्पिटल में अपनी सेवा देने लगी।

इधर 24घंटे की सफर के बाद राजेश जब अपना घर पहुंचा तो शाम हो चुका था।

जब वह घर पहुंचा तो स्वीटी ने दरवाजा खोली।

वह राजेश को देखकर उससे लिपट गई।

स्वीटी _भईया आप आ गए, हम कब से आपके आने का ही इंतजार कर रहे थे।

राजेश _ओह मेरी बहना कैसी है तू?

स्वीटी _मै ठीक हूं भईया।

सुनिता कीचन में काम कर रही थी।

स्वीटी _मां, भईया आ गया?

सुनिता कीचन से बाहर आई।

सुनिता _अरे बेटा तू आ,,

राजेश _हा मां,

राजेश ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनिता _जी ता रह बेटा।

राजेश _कैसी हो मां?

सुनिता_मै तो ठीक हूं बेटा, बस तुम्हारी ही चिंता सताती रहती है। कैसा गया तेरा इंटर व्यू।

राजेश _बहुत अच्छा मां।

स्वीटी _मां, अब भईया कुछ ही दिनों में आई ए एस अफसर बन जायेगा।

सुनिता _हा, मेरे बेटा ज़रूर मेरा नाम रौसन करेगा।

बेटा तू सफर से थक गया होगा। जा अपने कपडे उतार कर फ्रेस हो जा, मै तेरे लिए काफ़ी बनाती हूं।

, राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपने कमरे में चला गया। और अपने कपडे उतार कर फ्रेस हो गया।

वह हाल में आया।

राजेश _स्वीटी कैसी चल रही है तुम्हारी कालेज की पढाई।

स्वीटी _बहुत अच्छा भईया, कालेज के लड़के लड़किया तुम्हे अभी भी बहुत मिस करते है भइया।

राजेश _, अच्छा।

रोहन सुधर गया है कि वैसा ही है।

स्वीटी _रोहन तो अब अच्छा लड़का बन गया है।

इस साल बेस्ट स्टूडेंट की दौड़ में सबसे आगे है। वह तो आपको अपना आदर्श मानता है।

सुनिता _लो बेटा पहले नाश्ता कर लो, पता नही सुबह से कुछ खाया भी है कि नही।

सुनिता _अरे बेटा तुम्हारा इंटरव्यू तो दो दिन पहले ही हो चुका था, फिर दिल्ली में,,,

राजेश _मां, आपने बताया था न सुमन मैम दिल्ली में रहती है, तो मेने सोचा क्यूं न उससे मिल लूं, तो दो दिन उसी के यहां रुका था।

सुनिता _ओह, कैसी है सुमनऔर उसका बच्चा।

राजेश _दोनो अच्छे है मां।

सुनिता _और गांव में सब कैसे है?

राजेश _वहा भी सब मजे में हैं?

सुनिता _बेटा दो माह पहले ही न्यूज में दिखाया जा रहा था कि नक्सलियों ने वहा के नेताओ को मार डाला और ठाकुर की बेटी गीता और ठाकुर दोनो का अपहरण कर लिया है?

फिर अगले दिन पता चला की उसे रिहा करा लिया गया है।

पदमा दीदी बता रही थी की तुम भी दिव्या के साथ गणेश पुर गया था मेला देखने,।

हम तो बहुत घबरा गए थे।

राजेश _ओ हा मां, सैनिकों ने नक्सलियों से गीता और ठाकुर को छुड़ा लाए।

कुछ देर बाद, शेखर भी बैंक से घर आ गया।

वह राजेश को देखकर बहुत खुश huwa

शेखर ने इन्टर व्यू के बारे में पूछा।

राजेश ने कहा, इटरव्यू तो बहुत अच्छा गया है पापा पूरी उम्मीद है कि मेरा चयन हो जायेगा।

शेखर बहुत खुश हुआ।

रात्रि भोजन करने के बाद भी चारों आपस में बात चीत करते रहे,,

सुनिता _सुनोजी रात के 10बज गए हैं, अब बाते कल होती रहेगी । राजेश ट्रेन के सफर से थका होगा उसे आराम करने दो।

बेटा तुम जाओ अपने कमरे मे और आराम करो, स्वीटी तुम भी जाओ अपने कमरे में।

राजेश _ठीक है मां, गुड नाईट पापा, गुड नाईट मां।

राजेश अपने कमरे में चला गया।

वह ट्रेन की सफर से थका हुआ महसूस कर रहा था।

वह अपने बेड में जाकर गहरी नींद में सो गया।

कुछ देर बाद सुनिता उसके रूम , पानी बातल

लेकर आई।

उसने देखा राजेश गहरी नींद में सो गया है।

वह मुस्कुराई और चादर ओढ़ा कर, वहा से चली गईं।

अगले दिन सुबह,राजेश देर तक सोया huwa था।

सुनिता कमरे में आई।

सुनिता _अरे, राजेश बेटा कितने देर तक सोता रहेगा, तुम्हरी तबियत तो ठीक है ना, उसकी बालो को सहलाते हुए पूछा।

राजेश ने अपनी आंखें खोला।

राजेश _मां आप कब आई।

सुनिता _अरे बेटा, तू तो जल्दी उठ जाता था, आज देर तक सोया है तो मुझे तुम्हारी चिंता हुई, तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।

राजेश _मै बिल्कुल ठीक हूं मां।

सुनिता _पर मुझे तो कुछ ठीक नहीं लग रहा है?

राजेश _ऐसा क्यूं?

सुनिता _पहले तू जब आता था, सुबह उठ कर मुझे गुड मॉर्निंग बोलने कीचन में आता था।

पर मुझे लगता है तुम पहले जैसे नहीं रहे।

राजेश _अरे नही मां, मै तो पहले जैसा ही हूं, तुम्हारा राजेश बेटा,,,

सुनिता _चल अब उठ जा, नहाकर तैयार हो जाओ, मै नाश्ता बना रही हूं। तुम्हारे पापा और स्वीटी के साथ तुम भी नाश्ता कर लेना।

राजेश _ठीक है मां,,

राजेश उठ कर बैठ गया।

सुनिता _अच्छा, नहाकर आ जाना डायनिंग टेबल पर,,

सुनिता जाने को हुई तो, राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।

सुनिता ने पलट कर देखा।

सुनिता _अरे क्या कर रहा है छोड़ न।

राजेश ने उसे अपनी ओर खींच कर गोद में बिठा लिया।

सुनिता _अब छोड़ो भी दिखावा मत करो,,

राजेश _क्यू दिखावा क्यू लग रहा है?

सुनिता _तू बदल चुका है, गांव में तो तुम्हारी भाभी और ताई के कारण तो अपने मां को भी भूल गया। मेरे लिए तो फोन में बात करने का समय नहीं रहता तुम्हारे पास।

राजेश _ओह तो ये बात है, आओ आपकी नाराजगी अभी दूर कर देता हूं।

राजेश ने ने एक एक हाथ से उसकी चूची को मसला और फिर उसके गाल में किस कर दिया।

सुनिता _, न छोड़ो मुझे,,,

मुझे नई करना गंदा काम,,,

पाप पड़ता है।

वह राजेश के गोद से उठी और तेजी से वहा से भागी,,,

राजेश _अरे मां रुको न,,,

सुनिता शर्माते हुवे वहा से भाग कर किचन में चली गईं और नाश्ता बनाने लगी।

इधर राजेश नहाकर तैयार हुआ और हाल में आ गया। जहां शेखर पहले से मौजूद था।

स्वीटी भी पहुंच गई। तीनों ने नाश्ता किया।

नाश्ता करने के बाद शेखर अपना ऑफिस निकल गया। कुछ समय के बाद स्वीटी भी अपनी कालेज चली गईं।

राजेश, भी तैयार होकर अपने कमरे से बाहर निकला।

सुनिता _अरे राजेश बेटा तू कही जा रहा है।

राजेश _हा मां काफ़ी दिन हो गए दोस्तो से मिले।

सुनिता _ठीक है पर जल्दी आ जाना, दोपहर मे तुम्हारे लिए खाना बनाकर रखूंगी।

राजेश _, ठीक है मां।

राजेश बाइक लेकर भगत से मिलने उसके पार्टी कार्यालय पहुंचा।

वहा जाने पर पता चला की भगत किसी कार्य से बाहर गया है।

उसने भगत को काल किया।

भगत_अरे राजेश भाई, कैसे हो?

राजेश _मै बिल्कुल ठीक हूं। तुमसे मिलने आया था। पता चला की तुम किसी काम से बाहर गए हो।

भगत _हां भाई कुछ लोगो से मिलने आया था। आप कब आए दिल्ली से बताया नही।

राजेश _कल शाम को, सफर से थक गया था सोचा आज मिल लूंगा।

भगत _, भाई पहले बता दिया होता तो यहां नही आता। सारी भाई

राजेश _कोई बात नही, तुम अपना काम निपटाओ, शाम को मिलते हैं।

भगत _ठीक है भाई, मै वहां पहुंचते ही काल करूंगा।

राजेश _ठीक है।

राजेश सोचा कहां जाऊं?

क्यू न सुजाता से मिलु, पर वो तो मूझसे खफा हैं? पिछले बार आया था तो मिलने से मना कर दिया था।

फिर सोचा गलती तो मेरी ही है, पर इतने दिनो बाद हो सकता है उसका विचार बदल गया हो, वो भी मूझसे मिलना चाहती हो।

मुझे उससे मिलने जाना चाहिए।

वह उसके ऑफिस गया।

वहा पहुंचने पर पता चला मैडम अभी आई नही है।

वह वेटिंग रुम में इंतजार करने लगा।

कुछ देर बाद, सुजाता अपनी ऑफिस पहुंची।

उसके ऑफिस पहुंचने के बाद, कंपनी के सीईओ कुछ फाइल लेकर उसके रुम में आया। काफ़ी देर तक वे फाइल पे चर्चा करते है।

जब सीईओ उसके रुम से गया।

सुजाता की असिस्टेंट, उसके रुम में आई।

कई लोग वेटिंग रुम में बैठकर, सुजाता से मिलने के लिए इंतजार कर रहे थे।

सुजाता ने बताया की कौन कौन आपसे मिलना चाहते है?

असिस्टेंट ने सुजाता को बताया कि पिछले बार एक राजेश नाम का लड़का आपसे मिलने आया था, वह फिर आया है आपसे मिलना चाहता है। मैने उनसे कहा था मैडम से आप ऐसे नही मिल सकते मिलने से क्या अपॉयमेंट लेना पढ़ता है? पर मैनेजर ने कहा की वह राजेश को जानता है, उसे मिलवा दो।

सुजाता ने रुम में लगे स्क्रीन से,वेटिंग हाल पे बैठे राजेश को देखा।

सुजाता _कब से आया है।

असिस्टेंट _2घंटा हो गया।

सुजाता _उनसे पूछो क्या काम है मूझसे?

असिस्टेंट_ठीक है मैम।

असिस्टेंट राजेश के पास पहुंची।

असिस्टेंट _राजेश जी, मैम पूछ रही है की किस काम से उनसे मिलना चाहते हो, मैम बिना किसी काम के किसी से मिलती नहीं।

राजेश _जी,, काम तो कुछ था नही, बस मिलने का मन किया तो चला आया?

असिस्टेंट _क्या? बिना किसी काम के तुम मैम से मिलने चले आए? जानते हो जिससे तुम मिलने आए हो वो कौन है? तुम्हारा मिलने का मन किया तो मिलने चले आए, तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे वो तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?

देखो तुम यहां से चले जाओ। बड़े बड़े लोगो को भी मैम से मिलने के लिए काफ़ी इंतजार करना पड़ता है।

और तुम उनसे यू ही मिलने चले आए।

पता नही गार्ड तुम्हे अंदर कैसे आने दे देता है?

बेहतर होगा तुम यहां से चले जाओ।

इधर सुजाता स्क्रीन से सब देख रही थी।

राजेश, वहा से निराश होकर जाने लगा।

इधर असिस्टेंट, सुजाता के केबिन में आई।

असिस्टेंट _मैम मैने उस लड़के को भगा दिया। कह रहा था, आपसे मिलने का मन किया तो वह मिलने ऑफिस चला आया।

सुजाता ने असिस्टेंट की गाल पर एक जोर का तमाचा जड़ दिया।

असिस्टेंट आश्चर्य से अपनी गाल को पकड़े सुजाता की ओर देखने लगी।

सुजाता _, मैने तुम्हे, वो क्यू मिलना चाहता है ?ये जानने के लिए भेजा था। उससे बदतमीजी करने के लिए।

गार्ड को फोन करो, उसे लेकर आने कहो।

असिस्टेंट _ठीक है मैम।

असिस्टेंट ने गार्ड फोन लगाया। राजेश को जानें से रोकने और मैडम से मिलने के लिए कहना,,,

ये मैडम का आदेश है?

गार्ड ने देखा, राजेश तो अपने बाइक के पास पहुंच गया है वह दौड़ते हुए गया, और बोला की मैम बुला रही है।

राजेश गार्ड की बात सुनकर खुश हुआ, उसे लगने लगा की सुजाता उसे अब तक भूली नहीं है। वो मेरी गलतियों को माफ कर देगी। यह सोचकर वह फिर से सुजाता के केबिन के सामने पहुंचा।

असिस्टेंट _जाओ, मैम तुम्हे बुलाई है!

राजेश अंदर गया।

राजेश वहा जाकर चेयर पर बैठ गया।

सामने सुजाता पीछे मुंह कर बैठी थी।

दोनो कुछ बोल नहीं रहे थे। केबिन में खामोशी थी।

कुछ देर बाद, सुजाता ने अपना मुंह खोला?

सुजाता _यहां क्यू आए हो? क्या काम था मूझसे?

राजेश _बस मिलने का मन किया। काफ़ी दिन हो गए,,, आपसे ,,,

सुजाता _देखो राजेश, अच्छा यही होगा कि हमारे बीच जी भी संबंध था उसे भूल जाओ। अब सबकुछ खत्म हो गया है।मैंने खुद को बड़ी मुस्किल से संभाला है। मेरेपास और टूट कर बिखरने की हिम्मत नही है।

जानती हूं तुम्हारी वजह से ही ये कंपनी डूबने से बचा है। तुमने बड़ा अहसान किया है हम पर,,

तुम्हारे सामने चेक बुक रखा रखा है। तुम हम पर किए अहसान के बदले जितना रकम लिखना चाहते हो, लिख सकते हो।

या कंपनी में हिस्सेदारी चाहते हो तो वो भी मिल जायेगा।

पर पहले जो कुछ भी हमारे बीच था वो अब फिर से शुरू नही हो सकता।

सुजाता की बात सुनकर राजेश निराश हो गया। वह केबिन से बाहर चला गया।

इधर राजेश का कोई जवाब न आते सुन अपनी चेयर को घुमाया।

सामने देखा तो राजेश चला गया था।

उसने चेक बुक देखा, उसपर राजेश ने लिखा था, सारी मैम अब मैं आपको परेशान करने कभी अापके सामने नही आऊंगा।

उसे पढ़ते ही सुजाता की आंखों से आंसू बहने लगी।

वह स्क्रीन से राजेश को जाते हुए देखने लगी। जब राजेश चला गया।

वह चेयर पर बैठ कर रोने लगी।

इधर राजेश, उदास मन से घर पहुंचा।

सुनिता ने दरवाजा खोला।

सुनिता _अरे तू आ गया? जा कर कमरे में फ्रेस होकर आ जा। मै तेरे लिए खाना लगाती हूं।

राजेश _रहने दो मां, मुझे भूख नहीं है। तुम खा लो।

सुनिता _क्या huwa तुम्हारा मुंह क्यूं लटका हुआ है।

राजेश _कुछ नही मां।

राजेश अपने कमरे में जानें लगा।

सुनिता भी उसके पीछे पीछे कमरे में गई।

राजेश बेड में जाकर लेट गया।

सुनिता _क्या बात है बताओ मुझे?, तुम उदास क्यों हो? घर से जाते समय तो खुश थे।

राजेश ने कुछ नहीं बोला।

सुनिता _कही तुम सुजाता के पास तो नही गए थे?

राजेश खामोश रहा,

उसकी खामोशी देखकर सुनिता समझ गई।

सुनिता _ओह तो मेरे मना करने के बावजूद तुम उससे मिलने गए थे।

राजेश _बेटा मैने तुमसे कहा था न, बड़े लोग बड़े मतलबी होते है। जब तक काम रहता है। मीठी मीठी बातें करते है? मतलब निकल जानें पर दुध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देते हैं। उन्हे किसी की भावनाओ से कोई मतलब नहीं।

तुम तो मेरा कहना मानता ही नहीं, मेरा कहना मानता ही नहीं, मेरा मना करने के बाद भी उससे मिलने चला गया।

सुनिता सुबकने लगीं।

तुम्हे क्या पता तुम्हे उदास देखकर, मेरे दिल पर क्या बितती है, पर तुम्हे मेरी चिंता कहा।

राजेश _सारी मां, मैने उसे कह आया मां कि अब उसके सामने कभी नहीं आऊंगा।

सुनिता _ठीक किया बेटा, उन लोगो से दूर रहने में ही हमारी भलाई है।

सुनिता सुबकते हुए बोली।

राजेश _मां, बोला न अब नही जाऊंगा उसके सामने, अब चुप हो जाओ।

चलो मेरे लिए खाना लगाओ, बड़ी भूख लगी है। आज मैं आपके हाथो से खाना खाऊंगा।

राजेश ने अपनी मां को खुश करने के लिए कहा,,,

सुनिता अपनी आंखें पोछते हुए बोली।

सुनिता _चल हाथ मुंह धोकर आजा।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश हाथ मुंह धोकर डायनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया।

सुनिता उसके लिए खाना लगाई।

सुनिता ने अपने हाथो से राजेश को खाना खिलाई।

राजेश के खाने के बाद स्वयं भी भोजन की।

राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा था।

सुनिता उसके कमरे में गई।

राजेश _क्या बात है मां? कुछ काम था?

सुनिता _बेटा कल तुम्हारे मामा के यहां जाना है न, तुम्हारे मामी के बच्चे का नामकरण संस्कार कार्यक्रम रखा गया है, तो मार्केट से समान लेना था। चलो मार्केट चलते है। मै तैयार हो रही हूं तुम भी तैयार हो जाओ।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपना कपड़ा पहनकर तैयार हो कर हाल में आ गया।

वह सोफे पर बैठा था तभी, सुनिता ने राजेश को आवाज दी।

सुनिता _राजेश बेटा, जरा इधर आना।

राजेश _क्या है मां?

सुनिता इस समय पेटीकोट में थी।

ब्रा पहन रही थी।

सुनिता _बेटा देखो न ब्रा का हुक नही लग रहा, थोड़ी मदद कर दो।

राजेश सुनिता को पेटीकोट में देखकर, उसके शरीर के नसों में रक्त संचार बढ़ने लगा।

राजेश पीछे खड़ा होकर ब्रा की दोनो छोर अपनी हाथो से पकड़ लिया।

सुनिता _, बेटा, लगता है मैं मोटी हो गई हूं। ब्रा टाइट होने लगा है।

राजेश _नही मां तुम मोटी नहीं हो एकदम फिट हो।

सुनिता _चल झूठा कही का अपनो मां का मन रखने के लिए ऐसा बोल रहा है।

राजेश _सच में मां आज भी तुम बहुत खूबसूरत लगती हो। राजेश ने सुनिता की बैक को चूमते हुए कहा।

सुनिता सिसक उठी,

सुनिता _क्या कर रहा है?

राजेश _अपनी मां को प्यार,,

सुनिता_चल बदमाश कही का, ऐसा प्यार थोड़े ही करते हैं, कोई बेटा अपनी मां को।

राजेश _हम तो ऐसे ही प्यार करेंगे,,

राजेश ने सुनिता की ब्रा छोड़ कर उसकी चूची मसलते हुवे कहा।

सुनिता सिसकने लगीं।

अरे छोड़ न क्या कर रहा है?

राजेश ने का लंद खड़ा हो चुका था, वह लंद को सुनिता के गाड़ में धसा दिया।

राजेश ने सुनिता की ब्रा निकाल दिया और सुनिता को अपनी ओर घुमा कर उसकी चूची को मुंह में भर कर बारी बारी से चूसने लगा।

सुनिता प्यार से राजेश की बालो को सहलाते हुए सिसकने लगी।

राजेश की हरकत से सुनिता भी गर्म हो गई।

राजेश कुछ देर सुनिता की चूची से खेला फिर, सुनिता को घुमा कर आईने के सामने झुका दिया।

उसकी पेटी कोट ऊपर उठा कर उसकी योनी चाटने लगा।

सुनिता की सिसकारी कमरे में गूंजने लगी। उसकी chut से पानी बहने लगा।

राजेश अब अपना पैंट का चैन खीच कर लंद बाहर निकाल लिया।

फिर उसे सुनिता की योनी के छेद में सेट कर, गच से पेल दिया।

लंद एक ही बार में फुच की आवाज करता huwa chut चीरकर अंदर चला गया।

सुनिता _, उई मां,,,

राजेश एक और धक्का मारा, लंद chut में जड़ तक घुस गया।

अब राजेश सुनिता की की चूची पकड़ कर लंद को boor में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

सुनिता की मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगी।

आईने में राजेश को चोदता देख शर्माने लगी।

राजेश, सुनिता को तेज तेज चोदने लगा।

सुनिता, को बहुत मजा आने लगा।

वह कमर हिला हिला कर, राजेश का सहयोग करने लगी।

सुनिता _आह उन उई मां आह,,,, आई,,, ई,,

राजेश को भी बहुत मजा आ रहा था।

राजेश अब अपना लंद बाहर निकाल दिया

सुनिता राजेश की लंद को देखने लगी।

राजेश ने लंद चूसने का इशारा किया। सुनिता राजेश के लंद के नीचे बैठ गई और लंद को पकड़ कर चूसना शुरू कर दी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा।

राजेश सुनिता की बालो को सहलाते हुवे हल्के हल्के धक्का मारने लगा।

कुछ देर बाद, राजेश ने सुनिता को बेड किनारे लिटा दिया, और स्वयं उसके टांगो के बीच आ गया।

लंद को boor में सेट कर एक ही धक्का में पूरा अंदर कर दिया।

वह झुककर सुनिता की ओंठो को चूमते हुवे।

लंद को boor में अन्दर बाहर करने लगा।

सुनिता के फिर सिसकने लगी।

राजेश अब सुनिता की चूची को पकड़ कर मसलते हुवे boor को जोर जोर से चोदने लगा।

सुनिता जन्नत की सैर करने लगीं।

वह संभोग की परम सुख को प्राप्त करने लगी।

वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

कुछ ही देर में राजेश को जकड़ कर चीखते हुए झड़ने लगी।

आह मां आई,,,, आह,,,

राजेश ने चोदना बंद कर दिया।

सुनिता के ऊपर लेटा रहा।

कुछ देर में सुनिता होश में आई,,,

सुनिता _बेटा अब उठो,,,

राजेश _मां अभी मेरा huwa नही है।

सुनिता _जानती हूं, तुम्हे झड़ने में समय लगता है।

हमे मार्केट जाना है न, लेट हो रहे हैं। रात में कर लेना।

राजेश को न चाहते हुए भी, हटना पड़ा।

सुनिता, मुस्कुराने लगी।

सुनिता _अब तुम कमरे से जाओ मै साड़ी पहनकर जल्दी से आती हूं।

राजेश,सुनिता के कमरे से बहार आ गया। सोफे पर बैठ कर इंतजार करने लगा।

जब सुनिता तैयार होकर आई राजेश देखता ही रह गया।

सुनिता काफी खूबसूरत और हॉट लग रही थी।

राजेश, ने सुनिता को अपनी बाहों में भर लिया।

सुनिता _छोड़ो न क्या कर रहे फिर सुरू हो गए।हम लेट हो रहे हैं।

राजेश _मां इस साड़ी में बहुत खूबसूरत और हॉट लग रही हो, रहा नही जा रहा है। चलो न फिर करते हैं।

सुनिता _न बाबा अब जो करना है रात में करना।
 
,,

राजेश और सुनिता दोनो बाइक से मार्केट चले गए।

दोनो को सामान खरीदते खरीदते शाम को 6बज गए।

स्वीटी कालेज से आ चुकी थी, वह सुनिता को काल की।

सुनिता _हा बेटी बोलो,,,

स्वीटी _मां और कितना समय लगेगा मां,,,

सुनिता _कुछ समय और लग जायेगा बेटा।

Switi _तो क्या मैं खाना बनाने की तैयारी शुरू कर दू।

सुनिता _ठीक है बेटा।

स्वीटी _क्या क्या बनाना है बता दो?

सुनिता _दाल, चावल, रोटी, सब्जी,, और क्या बेटा वहीं जो रोज बनता है।

स्वीटी _मां सब्जी में क्या बनाऊं?

सुनिता _देखना फ्रिज में कौन सी सब्जी रखी है तुमको जो पसंद हो बना देना।

स्वीटी _ठीक है मां।

राजेश _मां, स्वीटी कब से खाना बनाने लगीं।

सुनिता _अरे बेटा, एक साल बाद उसे भी ब्याह के जाना है। एक महिला को घर के काम काज आनी चाहिए न, तो मैंने स्वीटी को काम सिखाना शुरू कर दी, अब तो वह बहुत कुछ सीख गई है।

खाना भी बहुत अच्छा बना लेती हैं।

राजेश _अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है मां।

अभी उसे फोन लगाता हूं।

राजेश ने स्वीटी को फोन किया,,,

स्वीटी _बोलो भईया कुछ काम था क्या?

राजेश _स्वीटी की बच्ची सुना है तुम बहुत अच्छा खाना बनाने लगी है, मेरे लिए अंडा कढ़ी बनाना, मै भी तो देखूं तू अंडा कढ़ी के कैसे बनाती है?

स्वीटी _ठीक है भईया।

स्वीटी _हूं, भईया मै जानती अंडा खाने के बाद तुम क्या करोगे?

मां कि लोगे,,

मां मुझे चुदने से मना कर के भइया से खुद मजा लेती हैं। आज मैं भी देखती हूं,,,

स्वीटी खाना बनाने की तैयारी करने लगीं।

इधर सुनिता और राजेश बाजार से खरीदी करके ढेर सारा सामान लेकर घर पहुंचे।

स्वीटी ने दरवाजा खोला,,

सुनिता _सारी बेटा आने में थोड़ी देर हो गई,,

स्वीटी _कोई बात नहीं मां,,,

राजेश _अरे स्वीटी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही हैं, क्या बना रही है?

Switi _वही तुम्हारा स्पेशल अंडा कढ़ी।

स्वीटी और सुनिता हसने लगीं।

राजेश _लगता है आज तो खाने में मजा आ जायेगा?

स्वीटी _हूं, और उसके बाद लेने में,,, फुसफुसाते हुए बोली। और हसने लगी।

राजेश _कुछ कहा तुमने?

स्वीटी _नहीं तो,,,

मैं ये कह रही थी कि आप दोनो थक गए होगे कमरे में जाकर फ्रेस हो जाओ फिर मैं काफ़ी लाती हूं।

राजेश _स्वीटी मेरे लिए अभी कॉफी मत लाना, भगत फोन किया था , वह मूझसे मिलने घर आ रहा है, जब वह आएगा तब साथ में काफ़ी पियेंगे।

स्वीटी _ठीक है भईया।

सुनिता और राजेश दोनो अपने कमरे में जाकर फ्रेस हो गए।

सुनिता कीचन में आकर स्वीटी की मदद करने लगी।

राजेश बेड में आराम करने लगा।

कुछ देर बाद भगत आया।

सुनिता ने दरवाज़ा खोला,,

भगत _नमस्ते मां।

सुनिता _नमस्ते भगत बेटा, कैसे हो?

भगत _मै अच्छा हूं मां जी, राजेश आया है तो उससे मिलने चला आया, कहां है राजेश?

सुनिता _राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा है बेटा। जाओ वह तुम्हारा ही राह देख रहा होगा।

मै कॉफी लेके आती हूं।

भगत _ठीक है मां जी।

भगत राजेश के कमरे में चला गया।

दोनो गले मिले।

राजेश _अरे यार कैसा है तू?

भगत _मै ठीक हूं भईया, बस आपकी कमी खलती है। आप कैसे हैं?

आपका इंटरव्यू कैसा गया?

राजेश _मै भी मजे में हूंऔर उम्मीद है आई ए एस में मेरा चयन हो जायेगा?

भगत _वो तो होना ही है भईया, मुझे पता है आप टॉप करोगे।

राजेश _और सुना कैसा चल रहा है तेरा पार्टी का काम।

भगत _भईया चुनाव आने वाला है, थोड़ा बीजी चल रहा हूं। थोड़ा टेंशन भी है।

राजेश _अरे तू टेंशन मत ले, मुझे यकीन है तुम्हारी पार्टी बहुत अच्छा करेगी।

भगत _भईया मुझे तुम्हारी सलाह की आवश्यकता पड़ेगी।

राजेश _अरे यार तुम्हे जब भी मेरी जरूरत महसूस हो तो मुझे काल करना, आख़िर दोस्त दोस्त का काम नही आयेगा तो, फिर कौन आयेगा।

भगत _शुक्रिया भईया।

दोनो आपस में बात चीत कर रहे थे तभी, सुनिता काफ़ी लेकर आई,,,

सुनिता _लो बेटा काफ़ी लो,,,

भगत _धन्यवाद मां जी,,

राजेश और भगत दोनो काफ़ी पीने लगे,,,

काफ़ी पीने के बाद,,,

राजेश _चलो यार बाहर थोडा टहल कर आते हैं।

दोनो कमरे से बाहर निकले,,,

सुनिता _अरे बेटा तुम दोनो कही जा रहे हो क्या?

राजेश _मां हम थोडा टहल कर आते हैं?

सुनिता _भगत बेटा, तुम भी आज खाना यहीं खा लेना, तुम दोनो टहल कर जल्दी आ जाना।

भगत _ठीक है मां जी।

राजेश और भगत दोनो बाहर टहलने निकले,,,

भगत _भइया, निशा जी का कोई काल वगैरा आया था।

राजेश _नही यार, निशा जी तो मुझे भूल ही गई। सुजाता मैम भी मूझसे मिलना नही चाहती।

भगत _भईया आप कहे तो सुजाता मैम के घर चलें,

राजेश _मै सुबह उसकी आफिस गया था, पर अब उनके मन में पहले जैसी भावनाएं नही रही।

मैने उससे कह दिया है कि अब मैं उसके सामने कभी आऊंगा।

भगत _भईयाआप कहे तो, मै सुजाता मैम से बात करू।

राजेश _नही, भगत कोई फायदा नही, अब जो होगा वहीं होगा जो किमस्त में लिखा है।

दोनो एक दूसरे से बात चीत करते हुवे टहल रहे थे।

तभी सुनिता का फोन आया।

राजेश _हां मां

सुनिता _अरे बेटा तुम दोनो कहा रह गए, भोजन का समय हो गया है तुम्हारे पापा वेट कर रहे है जल्दी आ जाओ तुम दोनो।

राजेश _ठीक है मां,,

राजेश और भगत दोनो घर के लिए चलने लगे।

कुछ देर बाद घर पहुंचे।

सभी भोजन का आनंद लेने लगे।

राजेश _अरे स्वीटी तू तो सच में बहुत अच्छा खाना बना लेती हैं। अंडा कड़ी तो बडा स्वादिष्ट बना है।

भगत _हां, स्वीटी खा कर मजा आ गया।

स्वीटी _थैंक्यू भईया।

सभी ने स्वीटी की जम कर तारीफ की।

भोजन करने के बाद भगत अपने घर चला गया।

राजेश और शेखर दोनो अपने कमरे में।

स्वीटी और सुनिता भी भोजन करने लगी।

भोजन करने के बाद, स्वीटी बोली,,

मां आप जाकर आराम करो मै बर्तन साफ कर दूंगी।

आप मार्केट से खरीदे करते करते थक गई होगी।

सुनिता_अरे नही बेटा, तुम जाओ अपने कमरे में पढाई वगैरा तो भी करनी होगी तुमको।

मैं कर लूंगी।

स्वीटी अपने कमरे में आ गई।

राजेश अपने कमरे में सुनिता की आने का इंतजार करने लगा।

दोपहर में सुनिता ने कहा था, जो भी करना है रात में कर लेना।

इधर स्वीटी अपने कमरे में पढाई करने लगीं।

इधर राजेश के शरीर में अंडे ने असर दिखाना शुरू कर दिया था। साथ ही वह दोपहर में झड़ा नहीं था। जिसके कारण उसके लंद में तानव बढने लगा।

वह अपने हाथो से लंद को लोवर से बाहर निकाल कर सहलाने लगा।

वह अपनी मां के आने का बेसब्रीसे इंतजार करने लगा।

इधर सुनिता कीचन का काम निपटाकर अपने कमरे में चली गईं। वह थकान महसूस कर रही थी। वह सोने की कोशिश करने लगी।

राजेश ने जब देखा उसकी मां अब तक आई नही कही वह सो तो नही गई।

उसने सुनीता को मेसेज किया।

राजेश _मां, कहा हो, सो गई क्या?

सुनिता थकान के कारण आंखें बंद होने लगीं थी, उसने जब मोबाइल की मेसेज घंटी सुनी,,

अपनी मोबाइल को चेक की,, इतनी रात को कौन मेसेज कर रहा है,?

उसने देखा राजेश का मेसेज है।

सुनिता ने भी मेसेज किया।

सुनिता _अरे बेटा, तू अब तक सोया नही।

राजेश _क्या मां, आप भी न भूल गई क्या?

सुनिता _क्या, भूल गई? मै कुछ समझी नहीं।

राजेश _मां ओ दोपहर में आपने कहा था न जो करना है रात में कर लेना।

सुनिता _ओह, मैं आज थक गई हूं, मेरा मूड नहीं है, मुझे तेज नींद आ रही हैं।

आज सो जाओ। कल देखेंगे।

राजेश _पर मां आज मेरा बडा मूड है। दोपहर में भी आपने मुझे अधूरा छोड़ दिया था। ऊपर से आज अंडा कड़ी कुछ ज्यादा ही खा लिया।

मुझे नींद नहीं आएगी न।

राजेश _बेटा समझा कर मैं बड़ी थकान महसूस कर रही हूं। मुझे आराम की जरूरत है।

राजेश निराश हो गया। पर वह सोचा मां सच में थक गई होगी, उसे परेशान करना ठीक नहीं।

राजेश ने लिखा,,

राजेश _ठीक है मां, आप सो जाओ, मै खुद को किसी तरह नियंत्रित कर लूंगा।

राजेश ने मोबाइल रख दिया।

इधर सुनिता को भी अच्छा नहीं लगा, उसने राजेश को निराश कर दिया। पर वह सच बहुत थकान महसूस कर रही थी।

सुनिता कुछ सोचने के बाद। स्वीटी को मेसेज की।

सुनिता _स्वीटी, सो गई क्या?

स्वीटी, इस समय पढाई कर रही थी उसने देखा मोबाइल पे किसी का मेसेज आया है?

उसने चेक की।

उसने देखा मां ने मेसेज की है उसे आश्चर्य हुआ।

उसने अपनी मां को मेसेज की।

स्वीटी _क्या बात है मां, अभी सोई नहीं, पढाई कर रही थी।

सुनिता _अरे बेटा तुम्हे मुझसे। शिकायत रहता है न की मै खुद तुम्हारे भैया के साथ मजा करती हूं और तुम्हे उससे दूर रहने कहती हूं।

स्वीटी _हूं ,,

सुनिता _आज से मै तुम्हे कुछ छूट देना चाहतीं हूं।

स्वीटी _कैसी छूट मां, देखो आज से तुम अपने भाई के नुनु को तुम प्यार कर सकती हो उसे छू सकती हो पुचकार सकती हो।

स्वीटी खुश हो गई।

स्वीटी _सच मां।

सुनिता _पर हा, पर एक शर्त है। तुमअपने भाई के नुनु के साथ सब कुछ कर सकती हो, पर अपनी नूनी के अंदर नहीं लोगी।

बोलो शर्त मंजूर है।

स्वीटी _ओह थैंक यू मां, मुझे शर्त मंजूर है।

सुनिता _तो ठीक है, जाओ अपने भाई के कमरे में उसे तुम्हारी मदद की जरूरत है।

तुम्हारा बनाए अंडा कढ़ी खाने के कारण उसकी शरीर की गर्मी बड़ गई है। अब उसे तुम ही शांत करो।

स्वीटी खुश हो गई।

वह अपने बेड से उठी और अपने कपडे नाइटी उतार नंगी हो गई। फिर ओंठो पर लिपिस्टिक लगाई। पूरे शरीर में सुगंधित इत्र छिड़की, फिर एक सेक्सी नाइटी निकाल कर पहन ली और राजेश के कमरे में चली गईं।

राजेश सोने की कोशिश कर रहा था।

राजेश _अरे स्वीटी तुम इस समय।

स्वीटी _हां।

स्वीटी राजेश के बेड में बैठ गई।

राजेश _कुछ काम था क्या?

स्वीटी _मां ने भेजा है। बोल रही थी की तुम्हारे भैया को कुछ समस्या है, उसका समाधान कर दो।

राजेश _ये तुम क्या कह रही हो। मां तुम्हे मेरे कमरे में भेजेगी। ओ भी रात को।

स्वीटी _हा, मुझे पता था कि आप यकीन नहीं करोगे।

मैसेज खुद ही पड़ लो।

राजेश ने मोबाइल से सुनिता की चैटिंग पढ़ने लगा।

स्वीटी _अब तो यकीन huwa

राजेश _मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा,,

स्वीटी _यकीन तो मुझे भी नही हो रहा पर ये सच है।

चलो मैं तुम्हारी तकलीफ दूर कर देती हूं।

स्वीटी ने अपनी नाईटी उतार कर नंगी हो गई।

उसकी खूबसूरत संतरे, और मस्त फूली हुई चिकनी chut देखकर राजेश का लंद चादर के अंदर झटके मारने लगा।

स्वीटी ने राजेश के ऊपर का चादर हटा दिया। उसका विशाल लंद स्वीटी की आंखों के सामने आ गया। स्वीटी की boor पानी छोड़ने लगी।

स्वीटी मुस्कुराने लगी।

वह राजेश के टांगो के बीच में अपना। सिर झुका दी और लंद को चाटने लगी।

राजेश स्वीटी की हरकतों को देखने लगा।

स्वीटी कुछ देर तक राजेश की अंडकोष और सुपाड़े को चांटी फिर उसका सुपाड़ा मुंह में भर ली।

फिर लंद को मुंह में लेकर अंदर बाहर करना शुरू कर दी।

राजेश प्यार से स्वीटी की बालो को सहलाने लगा।

कुछ देर लंद चूसने के बाद,,

स्वीटी _भइया मुझे भी झड़ना है, मुझे पहले झाड़ दो न।

राजेश ने स्वीटी को अपनी ओर खींचा।

स्वीटी राजेश की ओंठ चूसने लगीं। राजेश भी उसकी ओंठ चूसने लगा।

उसके बाद राजेश ने स्वीटी को पलटा और खुद उसके ऊपर आ गया।

उसके ओंठ चूसने लगा।

उसकी गर्दन को चूमने लगा।

स्वीटी सिसकने लगी।

राजेश आगे बढ़ा और उसकी मस्त चूचियां को हाथ में थाम लिया। बारी बारी मसल मसल कर चूसने लगा।

स्वीटी मुंह से मादक सिसकारी निकालने लगीं।

वह प्यार से राजेश की बालो को सहलाने लगीं।

राजेश नीचे बडा और उसकी सपाट पेट को चाटने लगा। उसकी नाभी को जीभ से कुरेदने लगा।

स्वीटी बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

राजेश नीचे बढ़ा और उसकी खूबसूरत boor को निहारा जो पानी छोड़ रही थी।

राजेश ने boor चाटना शुरु कर दिया।

उसकी भगनाशा को जीव से कुरेदने लगा।

स्वीटी के मुंह से लगा तार कामुक सिसकारी निकलने लगी।

वह राजेश के सिर को अपने boor में दबाते हुवे छटपटाने लगी।

राजेश स्वीटी की boor को तेज तेज चाटने लगा।

स्वीटी अपना हाथ पैर छटपटाने लगीं। सिर पटकने लगी। उसे बहुत मजा आ रहा था।

राजेश लगातर boor चांटता रहा।

स्वीटी खुद को रोक न सकी और चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने boor चाटना बंद कर स्वीटी के बाजू लेट गया।

स्वीटी उससे लिपट गई।

कुछ देर बाद, स्वीटी उठी और राजेश के टांगो के बीच आ गई। और राजेश का लंद मुंह में लेकर फिर चूसना शुरू कर दी।

कुछ देर बाद,,,

स्वीटी _भइया, मां ने boor पे लंद लेने से मना किया है पर एक और आपसन है हमारे पास।

स्वीटी _आप मेरी गाड़ मारो।

राजेश _तू पागल हो गई है क्या?

इतना मोटा लंद तू, अपनी सकरी गाड़ में ले पाएगी।

स्वीटी _मेरी गाड़ सकरी नही है, वह लंद लेने लायक हो चुकी है।

राजेश _वो कैसे?

स्वीटी _मै अपनीगाड़ पे डिल्डो डालती हूं।

राजेश _ये तू क्या कह रही?

स्वीटी _हा ये सच है खुद ही देख लो।

स्वीटी उठी और अपनी चूतड को राजेश के मुंह के पास ले आई।

राजेश ने उसकी चूतड पकड़ कर गाड़ की छेद को देखा।

राजेश _तुम्हारी गाड़ तो सचमुच चौड़ी लग रही है। इसे मारने में तो सच में बहुत मजा आयेगा।

स्वीटी _फिर देर क्यू हो डाल दो मेरी गाड़ पे। मां ने सिर्फ chut पे लंद लेने से मना किया है गाड़ में नही।

राजेश _ये तो अच्छी बात है।

चलो पहले तुम्हारी गाड़ में क्रीम लगा दू नही तो तुम्हे बहुत दर्द होगा।

राजेश और स्वीटी दोनो बेड से उतरे।

उसके बाद राजेश ने अलमारी से चिकनाई वाला क्रीम निकाला। और स्वीटी को थमा दिया।

स्वीटी ने क्रीम अपने ऊंगली पे लगाई फिर झुक कर अपनी गाड़ में डाल दी।

फिर राजेश के लंद में अच्छे से लगा दी।

स्वीटी बेड पर चढ़ कर kutiya बन गई।

राजेश उसके पीछे आ गया।

उसकी चूतड को सहलाया। चूमा थप्पड़ मार मार कर लाल कर दिया।

स्वीटी सिसकने लगी।

स्वीटी _भईया अब डाल भी दो।

राजेश ने पहले एक ऊंगली गाड़ में डाला अंडर बाहर किया।

स्वीति सिसकने लगी।

कुछ देर बाद राजेश ने क्रीम लगाकर दो ऊंगली, गाड़ में डाल दिया। और गाड़ चौड़ा किया।

कुछ देर बाद, दो ऊंगली डाल कर अन्दर बाहर करने के बाद,

राजेश _क्या तुम तैयार हो,,,

स्वीटी _हा भइया डाल दो।

राजेश ने लंद का सुपाड़ा गाड़ के छेद में सेट किया फिर गाड़ पर दबाव डालने लगा।

कुछ देर बाद लंद का सुपाड़ा गाड़ के अन्दर चला गया।

स्वीटी _चीख उठी।

राजेश स्वीटी की चूची को सहलाने पीठ को चाटने लगा।

स्वीटी फिर सिसकने लगीं।

राजेश अब स्वीटी की कमर को पकड़ लिया और धीरे धीरे लंद का दबाव गाड़ में डालने लगा।

लंद सरक कर गाड़ में समाने लगा।

स्वीटी को दर्द से कराहने लगी।

राजेश इसकी चूची सहलाता उसे चूमता चाटता अब राजेश कमर पकड़ कर धीरे धीर लंद को गाड़ में अंडर बाहर करना शुरू किया।

स्वीती के मुंह से कराहने की आवाज निकलने लगी।

राजेश उसकी परवाह न करता huwa लंद को गाड़ में अंडर बाहर करता रहा।

लंद गाड़ में अपनी जगह बनाने लगा।switi की गाड़ फैल कर चौड़ी हो गई। अब राजेश के लंद का आधे से ज्यादा भाग अंदर बाहर होने लगा।

राजेश को बहुत मजा आने लगा।

धीरे धीर स्वीटी का दर्द भी कम होने लगा।

राजेश स्वीटी की भग्नाश को ऊंगली से छेड़ने लगा।

स्विति सिसकने लगीं। उसे दर्द और मजा दोनो आने लगा।

राजेश अब अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

अब लंद गाड़ में पूरी तरह जगह बना चुका था। लंद अब आसानी से गाड़ में अंडर बाहर होने लगा।

अब स्वीटी को भी मजा आने लगा।

अब राजेश स्वीटी की चूची मसलते हुवे गाड़ मारने लगा दोनो को मजा आने लगा।

तभी कमरे मे सुनिता आ गई,,,

राजेश ने गाड़ मारना रोक दिया।

राजेश _मां आप,

सुनिता _हां,

राजेश _आप तो आने से मना की थी।

सुनिता _हां, मैने मना की थी, पर मुझे लगा कही तुम लोग मेरी छूट का गलत फायदा तो नही उठा रहे।इस लिए देखने चली आई। पर मेरा डर सही था।

वह स्वीटी पर चीखी,,

स्वीटी मैंने तुम्हसे शर्त रखी थी न की अपनी boor में लंद नही लोगी। तुमने शर्त तोड़ी।

स्वीटी _नही मां मैने शर्त नहीं तोड़ी।

मैने अपनी boor में भइया का लंद नही लिया।

सुनिता _मेरे सामने लंद boor में डाली हुई है और झूठ बोल रही है तुम्हे शर्म नही आती, बेशर्म कही की।

राजेश _मां, स्वीटी ठीक कह रही है, उसने अपनी boor में लंद नही डलवाई है खुद ही देख लो।

सुनिता राजेश के पास गई।

राजेश _देखो मां, लंद कहा घुसा है।

सुनिता आंखें फाड़कर देखने लगी।

राजेश ने लंद को गाड़ से थोडा बाहर खींचा, फिर झटके से अंदर कर दिया।

राजेश _, देखो मां लंद किसमे जा रहा है।

सुनिता _, आश्चर्य से देखने लगीं।

इतना बडा लंद को स्वीटी गाड़ में कैसे ले सकती हैं।

स्वीटी _स्वीटी _कही तू, हमे धोखा तो नही दे रही है, तू किसी से अपनी गाड़ तो नही मरवाती है। इतना मोटा लंद आसानी से अपनी गाड़ में ले रही है।

स्वीटी _नही मां मैने आप लोगो को कोई धोखा नहीं दिया है।

सुनिता _फिर इतना मोटा लंद कैसे ले सकती हैं?

राजेश _मां स्वीटी बता रही थी की वह अपनी गाड़ में डिल्डो लेने की आदत है जिसके कारण इसकी गाड़ की छेद चौड़ी हो गई है।

स्वीटी _हां मां ये सच है।

राजेश _मां स्वीटी की गाड़ मारने में बडा मजा आ रहा है। बहुत मस्त गाड़ है।

राजेश तेज तेज गाड़ मारने लगा।

स्वीटी कभी आनंद में तो कभी दर्द से करांहने लगीं।

स्वीटी _भइया, रुको।

राजेश _क्या huwa स्वीटी।

स्वीटी _मुझे लंद की सवारी करनी है।

राजेश _ओह

राजेश ने गाड़ से लंद निकाल दिया।

और बेड पर पीठ के बल लेट गया।

स्वीटी बेड के ऊपर चढ़ गई और लंद को पकड़ कर अपनी गाड़ में सेट कर बैठ गई।

फिर कमर हिला हिला कर गाड़ में लंद लेने लगीं।

सुनिता आश्चर्य से देखने लगीं।

वह भी गर्म होने लगी। उसकी योनि में पानी भरने लगा।

स्वीटी को अपने मां के सामने गाड़ मरवाने में बडा मजा आ रहा था।

इधर सुनिता की पेंटी गीली होने लगीं। वह अपने पेंटी के गीलापन को अपनी हाथ ले जाकर कर छूकर देखी।

स्वीटी लंद पर उछल उछल कर थक गई। वह राजेश के एक ओर लुड़क कर सुस्ताने लगीं।

स्वीटी _मां, भईया को मैं अकेली नहीं सम्हाल सकती, अब तुम्हे भी मेरी मदद करनी पड़ेगी। नही तो भईया मेरी कबाड़ा कर देंगे।

स्वीटी कि बात सुनकर सुनिता मोर्चा सम्हालने तैयार हुई।

वह अपनी नाईटी उतार और पेंटी निकाल फेकी जो पूरी तरह chut रस से भीग चुकी थी। वह पूरी नंगी हो चुकी थी।

वह बेड पर चढ़ गई। और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी योनी पे सेट की और बैठ गई।

लंद फुच की आवाज करता huwa योनि में समा गया।

सुनिता सिसक उठी।

अब राजेश सुनिता की कमर पकड़ कर। अपनी कमर उठाकर लंद सुनिता की boor में ठेलने लगा। सुनिता भी उछल उछल कर राजेश की मदद करने लगीं।

लंद सुनिता की boor में फॉच फाक की आवाज करता huwa अंदर बाहर होने लगा।

सुनिता और राजेश दोनो को जन्नत का मजा आने लगा।

सुनिता को इतना मजा आने लगा की वह लंद पर तेज तेज उछल उछल कर चुदने लगी। और कुछ ही देर में चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश सुनिता को अपने नीचे ले आया और स्वयं उसके ऊपर।

वह उसकी ओंठ चूसने लगा। उसकी चूंची दबा दबा कर चूसने लगा।

जिससे सुनिता फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सुनिता के चूतड के नीचे तकिया लगा दिया। और अपना लंद एक ही बार में गच से पेल दिया।

लंद का टोपा सीधा सुनिता के बच्चेदानी से टकराया। सुनिता चिहुक उठी।

अब राजेश स्वीटी को उठाया और सुनिता के ऊपर घोड़ी बना दिया।

स्वीटी सुनिता की ओंठ चूसने लगी। सुनिता भी स्वीटी की साथ देने लगीं।

इधर राजेश सुनिता को जोर जोर से चोदने लगा। लंद उसके बच्चे दानी को रहा था जिससे सुनिता का पूरा शरीर गन गना रहा था। वह मादक सिसकारी निकाल रही थी।

कुछ देर सुनिता की chut खोदने के बाद राजेश अपना लंद बाहर निकाल कर स्वीटी की गाड़ में डाल दिया और स्वीटी की गाड़ मारने लगा। स्वीटी चीखने लगीं।

सुनिता उसकी ओंठ चूसने लगा।

राजेश बारी बारी से दोनो की chut और गाड़ मारने लगा।

तीनों को इस सामूहिक chudai मे बहुत मजा आ रहा था।

इधर सुनिता और स्वीटी फिर से एक बार झड़ गई।

राजेश दोनो को जन्नत की सैर करा रहा था। और खुद झड़ने की स्थिति में आ गया।

राजेश _आह मां, मै आने वाला हू,,, आह,,,

राजेश तेजी से बेड से उतरा उसके साथ ही सुनिता और स्वीटी भी तेजी से बेड से उतरी और दोनो राजेश के लंदके के नीचे चूची पकड़े बैठ गई।

राजेश कराहते हुवे वीर्य की पिचकारी दोनो की चेहरे और चूची में छोड़ने लगा।

आह मां,,, आह,,,, आह,,,

ढेर सारा वीर्य दोनो के मुंह और चुचियों में छोड़ा दोनो अपने वीर्य से नहला दिया।

राजेश थक चुका था, वह बेड पे लेट कर सुस्ताने लगा।

इधर दोनो मां बेटी राजेश की वीर्य को चखने लगी।

दोनो एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रही थी दोनो बाथरूम में गई और नहाने लगीं।

वहा से दोनो बाहर आई और टॉवल से अपने शरीर को पोछि फिर दोनो अपनी नाईटी पहन कर राजेश के आजू बाजू लिपट कर लेट गई।

राजेश दोनो की पीठ को प्यार से सहलाने लगा।

कुछ देर बाद,,,

सुनिता _स्वीटी आज जो कुछ भी huwa उसके बारे में भूलकर भी किसी से न कहना नही तो हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

स्वीटी _मां ऐसी बात भी किसी को बताने लायक है।

सुनिता _मुझे तुमसे यही उम्मीद है। चलो अब तुम अपने कमरे में जाओ। मै भी चलती हूं।

रात काफ़ी हो गई है।

स्वीटी _ठीक है मां, लव यू मां, कहकर स्वीटी सुनिता से लिपट गई।

सुनिता _लव यू टू बेटा।

स्वीटी और सुनिता राजेश को चादर ओढ़ा कर मुस्कुराते हुवे अपने अपने कमरे मे चली गईं।

राजेश का
 
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