Incest यह क्या हुआ - Page 41 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

मंच पर भगत और उसके दोस्त पहुंचे। राजेश ने दिव्या से उनका परिचय कराया।

राजेश _दिव्या ये भगत है मेरा बेस्ट फ्रेंड

भगत _नमस्ते भाभी,,

दिव्या _जी, नमस्ते मुझे आप लोगो से मिलकर बड़ी खुशी हुई।

भगत _भाई भाभी बहुत सुंदर है, आप दोनो की जोडी बहुत अच्छी लग रही है।

उसके बाद मंच पर प्रिया और उसका पति पहुंचे।

समीर _अरे साले साहब शादी की आप दोनो को बहुत बहुंत शुभकामनाएं ।

राजेश _थैंक क्यू जीजू

दिव्या जी, ये मेरी बहन प्रिया और ये मेरे जीजा जी है। दोनो डॉक्टर है।

प्रिया _वैसे सुना है दिव्या भी तो एक डॉक्टर है न।

दिव्या _जी दीदी।

दिव्या और राजेश दोनो ने प्रिया समीर का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

प्रिया _तुम दोनो सदा खुश रहो। ये लो हमारी तरफ से तुम दोनो की तोहफा,,

राजेश _या क्या है दी?

प्रिया _ये एक घर की चाबी है। मैंने राजधानी में 10करोड़ में तुम्हारे लिए एक घर खरीदा है।

ये हम दोनो की तरफ से तुम दोनो को शादी का तोहफा।

राजेश _दीदी इतना महंगा गिफ्ट ,, दीदी इसकी क्या आवश्यकता थी?

दिव्या _दीदी हम ये गिफ्ट कैसे ले सकते हैं?

प्रिया _अपने भाई के लिए मैं इतना तो कर ही सकती हूं। राजेश क्या तुम अपनो दीदी को निराश करोगे?

समीर _अरे रख लो यार इसमें तुम्हारी दीदी का प्यार छुपा है।

दिव्या ने राजेश की आंखों में देखा।

राजेश ने हां में इशारा किया।

दिव्या ने वो चाबी ले ली।

दिव्या _थैंक यू दी।

प्रिया _वैसे तुम्हारी दुलहन बहुत सुंदर है।

राजेश _थैंक्स दी।

सभी मेहमानों ने दिव्या और राजेश को शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिए। सभी इधर डिनर कर रहे थे उधर स्वीटी और आरती, पूनम सुप्रिया सुहागरात के लिए सेज सजा रही थी।

पूनम _क्यू न हम राजेश के साथ एक खेल खेले।

स्वीटी _कैसा खेल भाभी?

हम दुलहन की सेज में दुलहन की जगह किसी और को बिठा दे। और राजेश की प्रतिक्रिया की मजा लेते हैं। बोलो तुम लोग कहते हो।

सुप्रिया _वाह, ये तो बहुत अच्छा सुझाव है, राजेश कैसा रिएक्ट करता है मजा आयेगा।

सुप्रिया _switi तुम क्या कहती हो।

स्वीटी _मां को पता चल गया न तो बहुत डांट पड़ेगी।

सुप्रिया _ये बात हम चारों के सिवा किसी को पता नहीं चलेगी। और बुआ को पता चल भी गया तो मैं सम्हाल लूंगी।

राजेश कैसा प्रतिक्रिया करता है देखकर मजा आ जायेगा। इतनी आसानी सी दिव्या की पास जाने नही देंगे।

स्वीति _, पार यू सब होगा कैसे?

पूनम _हम दो कमरों में सेज सजाते है। एक कमरे मे किसी और को बिठा देंगे, और राजेश को पहले उसी कमरे में भेजेंगे। फिर बाद में मजाक के लिए माफ़ी मांग कर उसे दिव्या के कमरे मे भेज देंगे।

पूनम _आइडिया तो अच्छा है पर दुलहन बनाकर किसे बिठाएंगे।

आरती _हम सेज पर किसी आंटी को दुलहन बनाकर बिठा देते है। आइडिया तो अच्छी है पर, इसके लिए कौने तैयार होगी।

पूनम _पर i

तभी वहां रीता पहूंच गई।

रीता _क्या फुसुर फुसुर हो रही है भई तुम लोगो के बीच। वैसे सेज तैयार huwa की नही। क्यों स्वीटी बेटा।

स्वीटी _मम्मी सेज तो तैयार हो गया है। पर हम लोह एक खेल खेलना चाहते है।

रीता _कैसा खेल बेटा?

Switi _मम्मी जी आप किसी को बताना मत नही तो सब मजा खराब हो जाएगा।

रीता _नही बताऊंगी बेटा अपनी होने वाली सासू मां पर भरोसा करो।

स्वीटी न सारी योजना के बारे में बता दिया।

रीता _या तो बड़ी अच्छी योजना है ।

राजेश के साथ फ्लर्ट करने में मजा आयेगा।

सुप्रिया _पर आंटी जी सेज पर किसे बिठाए, समझ नही आ रहा, आप ही कुछ बताइए न, कौन बैठने के लिए तैयार होगी। आंटी जी आप दुलहन बनकर बैठ जाओ न।

रीता _न बाबा, सबको पता चलेगा तो रोहन और उसके डैड क्या सोचेगा मेरे बारे में,,,

सुप्रिया _तो आप ही बताइए न किसे बिठाए,,,

रीता कुछ देर सोचने लगी,,

फिर बोली,,

मेरी नजर में है एक महिला , मुझे यकीन है वो मना नहीं करेगी,,

पूनम _आंटी जी जल्दी बताइए न कौन है वो।

रीता _वो देखो, एक महिला जो कुर्सी में बैठी है।

स्वीटी _वो महिला,,

वो तो सुजाता है निशा की मां,,, इस राज्य की सबसे अमीर महिला,,,

रीता _अरे उससे क्या मतलब, वो कोन है, हमे तो बस राजेश से फ्लर्ट करना है।

मुझे यकीन है वह दिव्या की जगह सेज पर दुलहन की जगह बैठ जाएगी।

उससे जाकर बात तो करो।

स्वीटी _, मुझे तो कुछ ठीक नहीं लग रहा, उसे दुलहन बनाना।

सुप्रिया _अरे यार बस एक खेल ही तो खेल रहे हैं,, मै अभी जाकर उससे बात करती हूं।

रीता _हा उसे न बताना की मैने कहा है।

स्वीती चलो हम लोग यहां से चलने है हमें देखेगी तो सुजाता नही मानेगी।

सुप्रियाऔर पूनम सुजाता के पास चली गईं,,,

सुप्रिया _नमस्ते मैम।

सुजाता _नमस्ते

माफ करना मै आप लोगो को पहचाना नहीं।

पूनम _मै राजेश की भाभी हूं।

सुप्रियां _और मै राजेश के दी।

सुजाता _ओह आप लोगो से मिलकर बड़ी खुशी हुई।

सुप्रीय_मैम हम लोग आपसे एक हेल्प चाहते हैं।

सुजाता _मै आप लोगो के क्या हेल्प कर सकती हूं।

पूनम _हम लोग राजेश के सुहागरात में एक उससे फ्लर्ट करना चाहते हैं।

सुजाता _कैसा फ्लर्ट

सुप्रिया _हम चाहते है कि राजेश के सुहागरात की सेज पर दिव्या की जगह किसी आंटी को बिठाना चाहते है। और हमें इसके लिए आपकी मदद चाहिए।

सुजाता _तो आप लोग चाहती है कि सुहागरात की सेज पर मै बैठू।

पूनम_जी मैम।

सुजाता _देखो राजेश के साथ ये फ्लर्ट करना ठीक नहीं है। मै तो तुम लोगो से यही कहूंगी की उससे इस तरह की मजाक मत करों।

सुप्रिया _हम तो आपसे मदद मांगने आए थे।

लगता है कि आप हमारी मदद नहीं करेंगी। पूनम चलो हम किसी दूसरे से मदद लेंगे।

दोनो जाने को हुवे तभी सुजाता ने दोनो को आवाज दी।

सुजाता _अच्छा रुको,,,

सुप्रिया _जी,,

सुजाता _अच्छा ठीक है मै आप लोगो की मदद करने तैयार हूं।

लेकिन अगर कुछ भी बवाल हुवा तो उसकी जिम्मेदारी तुम लोगो को उठानी पड़ेगी।

सुप्रिया _आप उसकी टेंशन मत लीजिए। अगर कुछ huwa तो हम लोग कह देंगे की यह आइडिया हम लोगो का था। हमने आपसे मदद मांगी थी, आपका कोई दोष नहीं।

सुजाता _ठीक है फिर चलिए।

सुजाता उन दोनो के साथ चली गई।

पूनम और सुप्रिया ने सुजाता को दुलहन की तरह तैयार कर दी।

सुप्रिया _वाह मै आप तो सच में नई नवेली दुलहन लग रही है। कही भईया राजेश आपको देख कर सच में फिसल न जाए। आरती और पूनम हंसने लगी।

पूनम _अच्छा आप सेज पर बैठ कर घूंघट डाल दीजिए। हम लोग राजेश को कमरे मे भेजते है।

इधर रीता, अपने आप से,,,

आज तो फिर मौका मिल गया सुजाता को बेइज्जत करने का, अब देखना मजा आयेगा।

इधर राजेश दोस्तों के साथ, गपसप कर रहा था। दोस्त उन्हे सुहागरात के लिए टिप्स बता रहे थे।

राजेश _अरे यार मुझे समझ नहीं आ रहा है मै दिव्या जी को सुहागरात में कैसा फेस करुंगा।

भगत _अरे भाई अब तक पता नहीं कितना किला फतह कर चुका है अपने औजार के दम और अब नर्वस हो रहे हो।

राजेश _पता नही यार, मुझे ऐसा क्यों लग रहा हैकि मै उसके साथ ,,,

भगत _अरे भईया आप फालतू नर्वस हो रहे हो रहे हो,, भाभी खुद सम्हाल लेगी सब,,,

तभी वहां पूनम पहुंची,,,

पूनम _अरे देवर जी,, आप यहां क्या कर रहे हों?

चलो तुम्हारी दुल्हन कमरे में तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

भगत _भाई, जाओ भाभी तुम्हारा इन्तजार कर रही है बेस्ट ऑफ लक

राजेश का हाथ पकड़ के पूनम उसे अपने साथ ले गया।

वहा सभी लड़कियां मौजुद थी।

सुप्रिया _जाओ राजेश क्या सोच रहे हो,,,

दुलहन तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

राजेश को धक्का देकर कमरे में भेज दिया और कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया।

इधर सुजाता की दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी।

राजेश देखा दिव्या घुघट डाल कर बेड पर बैठी है।

वह धीरे कदमों से बेड के पास गया। और आवाज निकाल कर दिव्या को कमरे में आने का अहसास कराया।

राजेश बेड पर बैठ गया।

राजेश को समझ नही आ रहा था क्या बोले,,

राजेश _दिव्या जी आप खामोश क्यों बैठी है कुछ बोलो न,,,

सुजाता चुप बैठी थी।

राजेश _क्या मै ये घूंघट,,,, उठा,,,, दू,,,

सुजाता ने कोई जवाब नही दिया,,,

तब राजेश ने उसका घूंघट हाथो में लेकर उठाने लगा।

सुजाता का दिल जोरो से धड़क रहा था।

जैसे ही घूंघट उठा। राजेश ने दिव्या की जगह सुजाता को देख कर चौंक गया।

राजेश _मैम आप ये कैसा मजाक है?

सुजाता _हां ये एक मजाक है।

राजेश बेड से उठ कर जाने को huwa

सुजाता _राजेश एक मिनट रुको,,,

राजेश _मैम आपको इस तरह का मजाक नहीं करना चाहिए था।

सुजाता _राजेश तुम्हारी बहनों ने मुझे यहां बिठाया, क्यों की वो तुमसे फ्लर्ट करना चाहते थे। मै नही बैठती यहां कोई और होती,,,

राजेश मै जानती हूं तुम मुझसे नाराज़ हों न उस दिन के लिए जब तुम मेरे ऑफिस आए थे मैने तुमसे बात नही की।

मै जानती हूं मेरे बुरा बर्ताव से आहत होकर दिव्या से शादी कर ली।

राजेश _नही ऐसी कोई बात नही है?

सुजाता को पीछे से पकड़ कर चिपक गई।

सुजाता _राजेश मुझे माफ कर दो प्लीज। मुझे नही पता था कि मेरे बुरे बर्ताव से तुम आहत होगे।

राजेश मै तुम्हारे से बिताए पल अब तक भूल नहीं पाई हूं। आज भी तुम मेरे सपनो में आते हो।

प्लीज राजेश मुझे एक बार अपने गले से लगा लो।

राजेश _मैम ये आप क्या कह रही है? मेरी शादी हो गई है। मै दिव्या का भरोसा नहीं तोड़ सकता

सुजाता _नही राजेश प्लीज मुझे अपने गले से लगा लो,,

सुजाता ने राजेश को घुमाया और उसे अपने ओर कर के उसके गले से लिपट गई।

राजेश _मैम ये आप क्या कर रही है। छोड़ों मुझे प्लीज, मै दिव्या का भरोसा नहीं तोड़ सकता। आप मुझे भूल जाओ, इसी में हम सबकी भलाई है।

सुजाता _नही राजेश मै तुमको नही भूल सकती, प्लीज मुझे अपनी बांहों में ले लो,,,

राजेश ने जोर लगाकार खुद से सुजाता से दुर किया और दरवाजा खोलो करके पीटने लगा।

सुजाता राजेश को फिर से जकड़ ली

सुजाता _नही मै तुम्हे नही जाने दूंगी,,,

प्लीज मुझे बाहों में ले लो,, सुजाता रोने लगी,,,

राजेश _दरवाज़ा खोलो प्लीज,,

इधर सभी लड़कियां मजे ले रहे थे,,,

दरवाज़ा पीटने की आवाज सुनकर सुनिता वहा पहुंची,,,

सुनीता _क्या हो रहा है यहां पर,,,

अंदर से दरवाज़ा कौन पीट रहा है,,

दरवाज़ा खोलो,,,

पूनम और सुप्रिया, सुनिता को देख कर सहम गई,,

सुनीता ने दरवाज़ा खोला अंदर का दृश्य देख कर उसकी आंख फटी की फटी रह गईं,

सुजाता राजेश को जकड़ी हुई थी, वह रो रही थी और राजेश को मैं तुम्हे नही जाने दूंगी बोल रही थी।

दरवाज़ा खुलते ही, राजेश और सुजाता ने सामने सुनिता को देखा तो उन दोनो के भी होश उड़ गए।

कुछ देर तक सुनिता राजेश और सुजाता को ही देख खड़ी रहीं,,

सुप्रिया _बुवा हमे माफ कर दीजिए प्लीज़, हम लोग तो राजेश के साथ मजाक कर रहे थे, उसने सारी बात बता दी,,

वहा पर रीता भी खड़ी थी उसे बहुत मजा आ रहा था

सुनीता_सविता तुम राजेश को ले जाओ बहु के कमरे में, और सभी लोग यहां से जाओ,,

सभी लोग वहां से चले गए,,,

अब सिर्फ सुनिता और सुजाता ही वहा पर थी।

सुनीता _सुजाता जी मुझे पहले ही डर था तुम कुछ ऐसी हरकत न कर दो जिससे राजेश की शादी में कोई बाधा पहुंचेऔर जब शादी हो गई तो ऐसी हरकत, तुम्हारे और तुम्हारी बेटी के कारण वह बिलकुल टूट चुका था। मै ही जानती हूं कितना मुश्किल से सम्हला है राजेशऔरआप फिर उसकी खुशियां छीनने चली आई।

मै आप से हाथ जोड़कर भीख मांगती हूं प्लीज मेरे बेटे की जिंदगी से दुर हो जाइए।

सुजाता _तुम ठीक कह रही हो सुजाता, मुझ्से गलती हो गई। मुझे माफ कर दीजिए। पता नहीं मुझे क्या हो गया था। मै भावनाओ में बह गई थी। पर मै आपसे वादा करती हूं। मै राजेश को अब कभी परेशान नहीं करूंगी।

सुनीता वहा से चली गईं।

सुजाता दरवाज़ा बंद कर फूट फुट कर रोने लगी।

इधर राजेश अभी हुई घटना से अपसेट हो गया था।

सविता _राजेश देखी अभी जो कुछ भी huwa उसे भूल जाओ। उसे समझा रही थी।

तभी सुनिता वहा पहुंची,,,

राजेश _मां, मुझे माफ कर दो,,,

सुनीता _बेटा, तुम क्यो माफी मांग रहे हो? इसमें तुम्हारी कोई गलती नही,,,

बेटा अपने मन को शांत रखो और बहु के पास जाओ वो तुम्हारा इन्तजार कर रही है। जो कुछ भी huwa उसके बारे ने बहु को कुछ न बताना नही तो पता नही वो क्या समझेगी।

तभी वहां रीता पहूंच गई।

रीता _ये सुजाता ने अच्छा नही किया,, चलो मानती हूं लडकियो ने राजेश के साथ फ्लर्ट करने के लिए ये सब किया, सुजाता को इसके लिए मना करना था, वो तो मना करने के बजाए खुद ही दुलहन बनकर सेज पर बैठ गई। अब बैठ गई तो बैठ गई वो तो राजेश के साथ जबरदस्ती करने लगी।छी,, उसे ज़रा भी शर्म नहीं आई, सब क्या सोचेंगे?

रीता _वैसे राजेश अब तुम इस घटना को भूल जाओ , और जाओ दिव्या के साथ नई जिंदगी की शुरूवात करो।

सुनीता _जाओ बेटा बहु तुम्हारी राह देख रही होगी।

सविता _चलो राजेश मै तुम्हे दिव्या के कमरे तक छोड़ देती हूं।

सविता ने राजेश को कमरे तक छोड़ आया।

राजेश ने देखा सेज पर दिव्या बैठी थी।

पर उसके मन में डर आ गया था कही फिर दिव्या जी के जगह कोई और तो नहीं बैठी है। वैसे घटना के बाद से वह अपसेट था।

चारों तरफ कमरे को फूल से सजाया गया था। पुरा कमरा फूलो की खुशबू से महक रहा था ।

वह बेड पर जा कर बैठा और काफी देर तक खामोश बैठा रहा।

दिव्या ने जब देखा कि राजेश खामोश।

दिव्या _क्या huwa जी, आप चुप क्यो हो?

राजेश चौंका,,,

राजेश _दिव्या जी, आप मुझे जी क्यों बोल रही हो।

दिव्या _आप मेरे पति हो तो नाम नही ले सकती न मां ने तो यही सिखाया हैएक संस्कारी पत्नी को अपने पति का नाम नही लेना चाहिए।

और ये क्या अब टू मै आपकी बीबी हूं फिर मुझे दिव्या जी क्यो बोल रहे हो। अब मुझे सिर्फ दिव्या कहा करे।

राजेश _नही नही, मुझसे नही हो पाएगा, मै आपको दिव्या की ही पुकारूंगा। और आप मुझे राजेश ही कहा करे। आपके मुंह से जी सुन कर मुझे अच्छा फिल नही होता।

दिव्या _पर मै आपको आपके नाम से नही बुला सकती न, सब मुझ पर हसेंगे।

राजेश _अच्छा ठीक है। जब हम अकेले हो टू नाम से बुलाना, और कोई दूसरा हो तो स्वामी जी।

दिव्या _ये ठीक रहेगा, स्वामी जी।

अच्छा आप मुझे घूंघट में ही रखेंगे क्या?

राजेश _ओह सॉरी,,

अच्छा अभी उठाता हूं।

राजेश ने दिव्या का घूंघट उठाया।

दिव्या ने अपनी नजरे झुका ली।

राजेश दिव्या की खूबसूरती को देखता रह गया।

राजेश _सच में आप बहुत सुंदर हो दिव्य जी।

निशा शर्मा गई।

पर ये क्या आप नजरे क्यू झुका ली हो। मेरे तरफ देखो न।

दिव्या _नही मुझे शर्म आ रही है।

राजेश ने दिव्या की ठोडी को हाथ से ऊपर उठाया ।

दिव्या की नजर जब राजेश से मिली तो वो शर्मा गई। वह शर्मा कर राजेश से लिपट गई।

दिव्या _मुझे तो अब भी यकीन नही हो रहा है कि हमारी शादी हो गई है।

मैने तुम्हे पाकर दुनिया की सारी खुशियां पा ली।

राजेश _मै भी किस्मत वाला हूं जो इतना प्यार करने वाला बीबी मिली।

दिव्या _वैसे हम यहां सिर्फ दोनो ही नहीं है। यहां कोई और भी है।

राजेश _मुझे तो यहां कोई तीसरा दिख नही रहा,,

दिव्या _वो यहां है दिव्या ने राजेश का हाथ अपने पेट पर रख दिया।

राजेश _ओह मै तो भूल ही गया था।

दिव्या _4माह का हो गया है। हमारा बच्चा, मै बहुत ही उत्साहित हूं उसे जन्म देने के लिए।

राजेश _दिव्या जी तुम्हारे घर वालों ने समझाया कि बच्चे को गिरा दो फिर तुमने उनकी बात क्यों नहीं मानी।

दिव्या_क्यों की मै तुमसे प्यार करती थी।

राजेश _ये बात आपने कभी मुझसे कहा क्यों नहीं कि तुम मुझसे प्यार करती हो।

दिव्या _वो इसलिए की तुम निशा से प्यार करते थे, और मुझे डर था की तुम मेरे प्यार को ठुकरा न दी, अगर ऐसा होता तो मैं जी नही पाती। इसलिए मैं तुमसे अपनी दिल की बात कह पाने की कभी हिम्मत नही जुटा पाई।

पर भगवान भी यही चाहता था कि हम मिले तभी उसने तुम्हारा अंश मेरे पेट में भेज दिया। जिसने हमें मिलाया।

राजेश तुम खुश तो हो न इस शादी से, कही मेरी इस स्थिति पर तरस खा कर तो मुझसे शादी नही किया न।

राजेश _नही दिव्या जी ये आप क्या कह रही है, निशा के बाद अगर कोई मेरे दिल के इतने करीब आया तो वो तुम हो आई लव यू दिव्या जी।

दिव्या _i लव यू टू राजेश।

राजेश और दिव्या दोनो एक दूसरे से लिपट गए। फिर

दिव्या राजेश की आंखो में देखने लगी।

दिव्या राजेश के ओंठो पर अपनी ओंठ रख कर चूसने लगी।

राजेश ने भी दिव्या का ओंठ चूसना शुरू कर दिया।

दिव्या की ओंठ चूसते हुवे जब वह गर्दन को चूमते हुवे नीचे बड़ा,,,

राजेश _उफ,,

दिव्या _क्या huwa

राजेश _तुम्हारे ये गहने,,,

दिव्या हस पड़ी,

दिव्या _उतार दो न इसे अपने हाथो से, मुझे भी बहुत भारी लग रहे हैं।

राजेश एक एक कर के दिव्या के सारे गहने उतारता चला गया।

राजेश ने गर्दन को चूमना शुरु किया और चूमते हुवे आगे बडा फिर रुक गया।

दिव्या _अब क्या huwa

राजेश ये कपड़े,,

दिव्या शर्मा गई,,

दिव्या _नही मै तुम्हारे सामने कपड़े उतार नही पाऊंगी, मुझे बड़ी शर्म आयेगी। प्लीज ऐसे ही प्यार कर लो न।

राजेश _अच्छा आप ही बताओ कैसे प्यार करू।

दिव्या _मुझे क्या पता मैने पहले थोड़े ही किया है। पर तुम्ह तो बड़ा अनुभव रखते हो।

राजेश _अच्छा काम से कम साड़ी तो उतार सकती हो।

दिव्या _न बाबा, तुम्हारे सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाऊज़ में रहूंगी तो बड़ी शर्म आयेगी।

राजेश _अच्छा गीता दी तो बता रहीं थी की ठंड से मेरी बचाने के लिए अपनी सारे कपड़े उतार के और मुझे भी नंगा करके साथ में सो गई।

दिव्या _चुप, मुझे बड़ी शर्म आती हैउसे याद करके, वो तो तुम्हारी जान बचाने के लिए कर गई। वरना कभी सपने में भी ऐसा करने की कभी सोंची नही थी।

राजेश _अच्छा ठीक है, तो हम एक दूसरे को बाहों में लेकर सो जाते हैं। हो गया हमारा सुहागरात ठीक है।

दिव्या _तुम तो नाराज हो रहे हो। अच्छा ठीक है मै सिर्फ साड़ी ही उतारूंगी।

पर पहले तुम अपना सेरवानी उतारो।

राजेश _अच्छा ठीक है, कहो तो पजामा भी उतार दूं।

दिव्या _ठीक है।

राजेश ने अपना ने सेरवानी और पजामा उतार कर चड्डी बनियान में आ गया।

दिव्या _राजेश को चढ़ी बनियान में देख कर हंसने लगी।

राजेश _हस क्यू रही हो चलो अब तुम अपना साड़ी उतारो।

दिव्या _ न, मै नही उतारूंगी।

राजेश _ये तो चीटिंग है।

,
 
राजेश _हस क्यों रही हो चलो अब तुम भी अपनी साडी उतारो।

दिव्या _न बाबा मै नही उतारूंगी।

राजेश _ये तो चीटिंग हैं।

प्लीज उतारो न मुझे आपको बिना कपड़ो में देखना है।

दिव्या _छी कितने गंदे हो तुम,,,

लगता औरतों को बिना कपड़ो में देख देख कर तुम्हारी आदत बिगड़ गई है। छी,,,

राजेश _देखो यदि तुमने कपड़े नही उतारे न तो,,,

दिव्या _तो,,,,

राजेश _तो,,

तो मैं,,

मै सो जाऊंगा,,,

फिर बाद में मत कहना सुहाग रात में कुछ किए नही,,,

दिव्या _ठीक है सो जाओ,,,

राजेश नाराज होकर दिव्या की ओर पीठ करके सोने लगता है।

दिव्या _लगता है मेरे भोले बलमा मुझसे नाराज़ हो गया। सॉरी , इधर देखो न

राजेश ने दिव्या की तरफ मुंह कर लिया।

अच्छा मै साड़ी उतारती हूं,,,

पर पहले लाईट बन्द कर दो न, मुझे बड़ी शर्म आयेगी।

राजेश _इसे अच्छा हम सो ही जाते है।

दिव्या _आज हमारी सुहागरात है ऐसे ही सो जाओगे। कल सब पूछेंगे, रात में क्या huwa तो क्या बताऊंगी।

राजेश _झूठ बोल देना, रात भर मैने तुम्हे सोने नहीं दिया।

दिव्या _न बाबा मै झूठ नहीं बोल पाऊंगी।

राजेश _तो फिर,, सच बता देना, मैने तुम्हे साड़ी उतारने कहा तुम नही मानी फिर मैं नाराज होकर सो गया।

दिव्या _सब मुझ पर हसेंगे।

राजेश _तो फिर,,,

दिव्या _अच्छा ठीक है मै साड़ी उतारती हूं,,, पहले तुम अपनी आंखें बंद कर लो,,

राजेश _लो मैने अपनी आंखें बंद कर लिया। राजेश अपनी दोनो हाथ अपनी आंखो पर रख लिया।

दिव्या बेड से उतरी और फिर अपनी साडी उतारने लगी,,

दिव्या _तुम देख तो नहीं रहे न,,,

राजेश _न,,,

दिव्या ने अपनी साडी उतार दी,,,

राजेश _अब मै आंखें खोलू?

दिव्या _हूं,,

राजेश ने अपनी आंखें खोला, सामने दिव्या पेटी कोट और ब्लाउज में थी।

अपने दोनो हाथ सीने में पर रखी थी और नजरे नीचे कर रखी थी।

राजेश हंसने लगा,,,

दिव्या _क्या huwa आप हंस क्यू रहे हैं?

राजेश _कुछ नही, बस ऐसे ही हसी आ गई,,

दिव्या जी आप बहुत सुंदर है।

दिव्या शर्मा गई।

राजेश बेड से उतर कर खडा हो गया।

राजेश दिव्या के पीछे गया और उसे अपनी बांहों में भर लिया।

दिव्या _क्या कर रहे हो, छोड़ों न,,,

राजेश _अपनी पत्नी को प्यार कर रहा हूं।

राजेश दिव्या के खुले पीठ के चूमने लगा।

दिव्या सिसकने लगीं।

राजेश दिव्या को जकड़ कर उसकी गर्दन को चूमने लगी।

दिव्या आंखें बंद कर सिसकने लगी।

राजेश ने दिव्या को घुमा कर अपनी ओर किया। दिव्या राजेश की आंखों में देखने लगा।

राजेश घुटने के बल नीचे बैठ गया।

फिर दिव्या की खूबसूरत नाभी को चूमने चाटने लगा।

दिव्या राजेश की बालो की सहलाते हुए आंखें बंद कर सिसकने लगी।

कुछ देर राजेश उसकी पेट और नाभि को चूमने के बाद खड़ा हो गया। फिर दिव्या को अपनी गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया।

राजेश बेड पर चढ़ गया।

वह दिव्या की पैर की उंगलियों को मुंह में लेकर चूसने लगा। । दिव्या के मुंह से सिसक निकलने लगी।

उसके बाद राजेश दिव्या की पैर चूमते हुए आगे बड़ा। अब पेटीकोट धीरे धीरे उठा करे उसके पैरो को चूमते चूमते उसकी जांघ तक जा पहुंचा।

उसकी जांघ को चूमने लगा। दिव्या आंखें बंद कर ली थी और सिसक रही थी।

राजेश जांघ की को चूमते हुए उसकी पेंटी तक । राजेश की हरकतों से पेंटी गीली हो चुकी थी।

राजेश ने दिव्या की पेंटी को सूंघा।

एक जनाना गंद,boor की पानी की गंध नाक में जाते ही वह मदहोश हो गया। राजेश ने पेंटी के ऊपर से ही boor को चूम लिया।

दिव्या सिसक उठी।

राजेश आगे बड़ा उसकी नाभी चाटने लगा। फिर आगे बड़ कर दिव्या की आंखो मे देखने लगा।

दिव्या भी राजेश की आंखों में देखने लगी वह तेज तेज सांस ले रही थी।

राजेश अचानक से उठ बैठा।

दिव्या चौंक गई।

दिव्या _क्या huwa?

राजेश _लगता है आपको अच्छा नहीं लग रहा है दिव्या जी।

अब बस करते हैं, आप सो जाइए।

दिव्या _मुझसे कोई गलती हो गई क्या?

राजेश _सिर्फ मै ही कर रहा हूं आप तो कुछ कर ही नही रही।

दिव्या उठ कर बैठ गई।

राजेश के सिर को पकड़ कर अपना ओंठ उसके ओंठ के पास ले गई फिर। राजेश का ओंठ अपने ओंठ में भर कर चूसने लगी।

राजेश की बनियान को उतार दी।

राजेश बेड पर लेट गया दिव्या उसके ऊपर आ गई।

राजेश के गर्दन को चूमने चाटने लगी उसके सीने को चूमते हुवे।

नीचे बड़ी।

राजेश का लंद खड़ा हो चुका था।

दिव्या को पता था राजेश का लंद बहुत बड़ा है।

वह पहले भी राजेश का लंद देख चुकी और अपने अंदर ले चुकी थी। उसे काफी दर्द huwa था।

दिव्या ने राजेश का चड्डी अपने हाथो से पकड़ कर टांगो से होते हुए अलग कर दिया।

राजेश का लंद हवा में लहराने लगा।

लंबा मोटा लण्ङ को कुछ देर दिव्या देखने लगी।

राजेश _क्या huwa दिव्या जी।

दिव्या _शर्म से,,,

कुछ नहीं,,

राजेश ने दिव्या का हाथ पकड़ कर अपने लंद पर रख दिया।

दिव्या राजेश के लंद को सहलाने लगी।

दिव्या _तुम्हारे घोड़े ने तो अच्छे अच्छे अनुभवी औरतों की चीखे निकाल देती होगी।

आपको नही लगता की तुम्हारा कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है।

राजेश _अब मै क्या कर सकता हूं दिव्या जी, ऊपर वाले ने यही दिया है तो।

कुंवारी लड़कियां तो देख के डर जाती है, और अनुभवी औरते एक बार लेने के बाद दीवानी हो जाती है।

दिव्या _अब मै तुम्हे किसी के पास जाने नही दूंगी।

राजेश _आपकी इजाजत के बिना किसी के पास नही जाऊंगा। वैसे मेरा घोड़ा आपको पसंद आया की नही।

दिव्या _हूं, अब तो इस घोड़े की सवारी सिर्फ मैं ही करूंगी।

इसकी सवारी करने से पहले इसे प्यार तो करो।

दिव्या _कैसे?

राजेश _जैसे सभी औरते करती है। मुंह में लेकर

दिव्या _मै नही ले पाऊंगी। मुझे कोई अनुभव नहीं है।

राजेश _ठीक है आपको पसंद नही है तो मत लो।

दिव्या _नाराज तो नही होगे न।

राजेश_न।

दिव्या _अच्छा ठीक है मैं कोशिश करती हूं।

दिव्या ने राजेश का लंद का टोपा जीव से चांटा।

राजेश सिसक उठा।

राजेश को अच्छा फिल करता देख दिव्या टोपा को मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश _आह दिव्या जी बहुत अच्छा फिल हो रहा है। थोड़ा और अंदर ले लो,,

दिव्या ने लंद को मुंह और अंदर कर लिया और चूसने लगी।

राजेश प्यार से उसकी बालों को सहलाने लगा।

राजेश _आह, आह,,,

दिव्या अब लंद को तेजी से अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी।

दिव्या _मै अच्छे से कर रही हूं न,,

राजेश _हां, बहुत अच्छा कर रही हों,,,

दिव्या तेज तेज चूसने लगी।

राजेश _आह आह,,

कुछ देर बाद,, हो गया अब बस करो दिव्या जी,,

दिव्या ने लंद चूसना बंद कर दिया।

राजेश उठ कर बैठ गया।

दिव्या को अपनी गोद में बिठा लिया।

दिव्या की ओंठ चूसने लगा।

फिर दिव्या की ब्लाउज की बटन खोल कर उसे अलग कर दिया।

उसकी ब्रा भी उतार दिया।

दिव्या की मस्त सुडौल बड़ी बड़ी चूचियां देख राजेश के लंद और शख्त हो गया।

राजेश ने दिव्या की एक चूची मुंह में भर कर चूसने लगा दूसरी चुकी हाथ से मसलने लगा।

दिव्या की योनि पानी फेकने लगा।

कुछ देर तक चुकी से खेलने के बाद राजेश ने दिव्या को बेड पर लिटा दिया। फिर नाभी चूमते चाटते हुए नीचे गया ।

पेटीकोट का नाडा खोल दिया और उसकी पेटीकोट को टांगों से खीच कर अलग कर दिया।

राजेश ने हाथ से ही दिव्या की योनि को सहलाने लगा।

दिव्या की सांसे तेज चलने लगी।

राजेश ने उसकी पेंटी भी खीच कर अलग कर दिया।

दिव्या की मस्त फूली हुई चिकनी chut देखकर राजेश का लंद झटके मारने लगा।

राजेश _दिव्या जी सच में आप बहुत सुंदर हो, बाहर से भी और अंदर से भी।

राजेश ने दिव्या की योनि को अपनी हाथ से सहलाया।

उसकी टांग को फैला कर अपना मुंह योनि में घुसा दिया।

दिव्या बहुत अधिक उत्तेजित हो गई उसके पुरा शरीर कपकपाने लगी।

वह राजेश की बालो को सहलाने लगी।

राजेश अपनी जीभ से उसकी योनि की भग्नासा को कुरेदना लगा।

राजेश की हरकत से दिव्या इतनी अधिक उत्तेजित हो गई की वह खुद को रोक न सकी और चीखते हुए झड़ने लगी। यह उसका पहला झड़ने का अनुभव था। उसने कभी सोचा नहीं था की इतना आनंद दायक अनुभव होगा।

इधर कुछ देर तक राजेश रुका रहा फिर, राजेश ने योनि चाटना शुरु कर दिया कुछ ही देर में दिव्या फिर उत्तेजित हो गई,,

दिव्या कपकपाते आवाज में बोली राजेश अब रुक जाओ,,,,, प्लीज,,

नही तो,,,, मर,,,,,जा,, उंगी,,,, आह मां आई,,,,,

राजेश रूक गया।

राजेश अब दिया के टांगो के बीच बैठ गया।

अपना लंद का टोपा दिव्या की योनी द्वार पर रख दिया

फिर एक हल्का दबाव डाला। लंद का टोपा अंदर चला गया।

दिव्या सिसक उठी अब राजेश दिव्या के ऊपर लेट गया

उसकी ओंठ चूसते हुए।अपना लंद धीरे धीरे उसकी योनि में उतरता चला गया।

दिव्या को थोड़ा दर्द huwa पर राजेश ने अपना मुंह उसके मुंह पर दबा रखा था।

अब राजेश लंद अंदर बाहर करने लगा।

दिव्या को दर्द की जगह मजा आने लगा।

दिव्या आनंद में सिसकने लगीं।

अब राजेश अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

दिव्या को बहुत मजा आने लगा।

राजेश अब उकडू बैठ गया। और दिव्य की चुकी मसल मसल कर चोदना शुरू कर दिया।

दोनो काफी उत्तेजित हो गए दोनो स्वर्ग की सैर कर रहे थे।

राजेश को भी बहुत मजा आ रहा था। दिव्या तो संभोग की अलौकिक कामसुख प्राप्त कर रही थी।

राजेश जोश में आकर एक जोर का धक्का मार दिया।

दिव्या चीख उठी उसके पेट में दर्द होने लगा।

दिव्या _मां,,, आह,,,

राजेश _क्या huwa दिव्या जी,,,

दिव्या _पेट में दर्द हो रहा है राजेश,आह मां,

राजेश डर गया,,

वह लंद को बाहर निकाल लिया।

राजेश _अब ठीक हो,,।

दिव्या _आह मां,

बड़ा दर्द हो रहा है।

राजेश डर गया ये क्या हो गया?

दिव्या _राजेश किसी को बुलाओ,,,

मेरा पेट बड़ा दर्द कर रहा है?

राजेश तुरंत अपना पाजामा और बनियान पहना।

फिर वह दरवाज़ा खोल कर सुनिता के पास गया। वहा पदमा, कविता, प्रिया भी मौजुद थी वे सोए नही थे। बात चीत कर रहे थे।

सुनीता _क्या huwa बेटा तू घबराया हुआ क्यों है!

राजेश _मां दिव्या,,,

पदमा _क्या huwa बेटा बहु को,,

राजेश _उसे बहुत दर्द हो रहा,,,

सुनीता _क्या?

प्रिया _बुवा मै देखती हूं क्या बात है।

राजेश और प्रिया दोनो कमरे में गए।

प्रिया _दिव्य क्या बात है?

दिव्या _दी पेट में बड़ा दर्द हो रहा है आह मां,,,

प्रिया ने दिव्या को का चेक अप किया।

राजेश _क्या huwa दी दिव्या जी ठीक तो है न,,

प्रिया _राजेश, दिव्या की तुरंत हॉस्पिटल ले जाना होगा नही तो अनर्थ हो जायेगा।

वहा सुनिता भी पहूंच गई।

सुनीता _प्रिया बहु ठीक तो है न।

प्रिया _बुवा हमे दिव्या को तुरंत हॉस्पिटल ले जाना होगा।

नही तो अनर्थ हो जायेगा।

दिव्या को नाईटी पहनाया गया। राजेश ने दिव्या को गोद में उठाया और हॉस्पिटल की ओर भागा।हॉस्पिटल आश्रम के दूसरे छोर पर था।

हॉस्पिटल में दिव्या को एडमिट किया गया।

प्रिया ने मोर्चा संभाला।

आपातकालीन उपचार किया।

2घंटे बाद, प्रिया आपात कालीन रुम से बाहर आई

सभी उसी की इन्तजार कर रहे थे।रत्नवती गीता और राजवती को भी घटना की जानकारी हो चुकी थी वह भी हॉस्पिटल में मौजुद थी।

राजेश _दी दिव्या ठीक तो हैं न।

प्रिया _राजेश घबराने की बात नहीं है सब ठीक है।

राजेश _क्या मै दिव्या से मिल सकता हूं?

प्रिया _हां, जाओ मिल लो,,

सुनीता _प्रिया, क्या हूवा था, दिव्या को।

प्रिया _बुवा, लगता है राजेश दिव्या से संबंध बनाते समय इस बात का ध्यान नहीं रखा की वह गर्भ से है। अगर थोडा भी देर होता तो गर्भपात हो सकता था।

सुनीता _क्या हे भगवान,,

सभी महिलाएं काफी चिंतित हो गई।

प्रिया _अभी तो किसी तरह सब ठीक हो गया। लेकिन फिर आगे यह घटना huwa तो, संभाल पाना मुश्किल हो जाएगा।

दिव्या, जब तक बच्चे को जन्म नही दे देती, राजेश को दिव्या से दुर रहना पड़ेगा। जोश में आकर फिर से वही गलती कर सकते हैं।

सुनीता _मै राजेश को समझाऊंगी, वह बहु से दुर रहे।

आपातकालीनरूम से दिव्या को जनरल वार्ड में सिफ्ट किया गया।

राजेश _दिव्या जी आप ठीक तो हैं न।

दिव्या _हा में सिर हिलाया।

राजेश ने प्यार से उसकी माथे को चूम लिया।

सभी महिलाएं दिव्या से मिलकर उसकी स्वास्थ्य के बारे में बात चीत की।

सभी ने राहत की सांस ली।

सुनीता ने राजेश को अकेलेमें बुलाया ।

राजेश_क्या बात है मां?

सुनीता _ये सब तुम्हारे कारण हुआ है?

राजेश _मां मै समझा नही।

सुनीता _तुम्हे पता था न बहु पेट से है। फिर इसबात ध्यान नहीं रख सकता था। तू तो जोश में होश खो बैठता है।

तुम्हारे असावधानी के कारण बच्चे दिव्या का गर्भपात होते होते बचा।

राजेश _ओह, ये सब मेरे कारण huwa है?

मुझे माफ करना मां।

सुनीता _मुझसे क्यों माफी मांग रहा है। बहु से मांगना। और हा आज के बाद बहु जब तक बच्चे को जन्म नही दे देती। तुम उससे दूर ही रहना, तुम्हारा कोई भरोसा नहीं तू जोश में होश खो बैठता है।

राजेश _ठीक है मां,,

प्रिया दिव्या की चेकअप करने उसके कक्ष में गईं।

प्रिया _दिव्या अब कैसी महसूस कर रही हो।

दिव्या _ठीक हूं दी।

प्रिया _दिव्या तुम तो खुद ही एक डॉक्टर हो फिर, तुम प्रेगनेंट हो इस बात की सावधानी क्यों नही रखी। राजेश को समझा सकते थे।

प्रिया _मै इन डायरेक्टली उसे मना तो कर रही थी दी, पर उसका निराश चेहरा मुझसे देखा नही गया। फिर उसने जो जो कहा करती गई ताकि वह खुश रहे।

प्रिया _देखो अब भावनाओ में आकर ऐसी कोई गलती मत करना, ठीक है और डिलवरी तक राजेश से दूर ही रहना।

वैसे मैं राजेश को भी समझा दूंगी। वह तुम्हे फोर्स न करें। ओके

प्रिया _शुक्रिया दी।

अगले दिन सभी मेहमान वहा अपने अपने घर चलें गए।

आश्रम में केवल, रत्नवती, गीता, और राजेश के माता पिता चाचा ताई भाई भाभी ही रह गए।

रत्नवती _मां ऐसी हालात में दिव्या की देखभाल करना बहुत जरूरी मै दिव्या को अपने साथ ले जाना चाहती हूं।

राजवती _तुम ठीक कह रही हो बेटी।

सुनीता _समधीन जी, मै बहु को अपने साथ ले जाऊंगी। राजेश बेटा तुम भी चलो अब,, शादी के बाद बहु का मायका में रहने से लोग तरह तरह से बाते करेंगे।

राजेश _मां मै कुछ दिन और गांव में रहना चाहता हूं। कुछ काम अभी बांकि है।

सविता _मै तो कहती हुं। राजेश और दिव्या को हमारे घर में रहने दो। राजेश का मन अभी गांव में रहने का है। मै और पूनम और दीदी दिव्या का अच्छे से ख्याल रखेंगे।

पदमा _हां सुनिता, सविता ठीक कह रही है।

हम है न दिव्या की देखभाल करने और ठाकुराइन आप भी कभी भी दिव्या से मिलने आ सकेंगी।

तो सभी सहमत हुवे की राजेश और दिव्या सविता के घर रहेगी।
 
सुनिता, राजेश और दिव्या को लेकर अपने परिवार सहित सूरज पुर जाने के लिए निकल रहीं है।

राजेश और दिव्या दोनो राज बती से जाने के लिए इजाजत मांगने उसके पास जाते हैं।

दोनो उसकी पैर छूकर आशीर्वाद लेते है।

राजवती _दिव्या बेटी, मुझे तुमसे कुछ कहना है!

दिव्या _जी नानी,,,

राजवती _दिव्या बेटी मै तुम्हे जाने की इजाजत तो दे रही हूं, पर याद रखना, तुम इस आश्रम की वारिस हो, मेरे जाने के बाद इस आश्रम को तुम्ही को सम्हालना है।

दिव्या _जी नानी। अब हमें इजाजत दीजिए।

राजवती _तुम दोनो सदा खुश रहो।

सभी लोग सूरज पुर के लिए निकल गए।

जब वे सूरज पुर पहुंचे तो गांव वाले पहले से ही मंदिर में इकठ्ठा थे। दिव्या और राजेश मंदिर में भगवान का दर्शन कर, वहा के पुजारी बाबा से आशिर्वाद लिए।

लोगो ने राजेश और दिव्या को शादी की बधाई दिया। उसके बाद गांव वालों ने बैंड बाजा के साथ नाचते गाते हुए उसके घर तक पहुँचाया।

राजेश और दिव्या सविता के घर पर ठहरे, उसके साथ सुनिता शेखर और स्वीटी भी रुकी। पदमा और उसका परिवार कुछ देर रूक कर अपने घर चलें गए।

पदमा _अच्छा सुनिता हम लोग चलते हैं। हम लोग यहा आते जाते रहेंगे।

सुनिता _ठीक है दीदी।

सविता और सुनिता ने कीचन का काम सम्हाला।

राजेश अपने दोस्तों के साथ टहलने चला गया। जब वह लौटा ,सभी ने साथ में डिनर किया।

जब रात में सोने की बारी आई तो।

सविता _, दिव्या आज से ये कमरा तुम्हारा, जाओ तुम लोग आराम करो।

दिव्या _जी चाची।

दिव्या कमरे मे चली गई।

कुछ देर सभी लोग आपस मे बात चीत करते रहे जब काफी रात हो गई।

सुनिता _रात काफी हो गई है अब हमें भी आराम करना चाहिए, बाते कल कर लेंगे।

राजेश अपने कमरे में जाने लगा, तभी सुनिता ने उससे कहा,,

सुनिता _राजेश थोड़ा इधर आना।

राजेश _जी मां,,

सुनिता _बेटा तुम्हे याद है न, तुम्हे दिव्या से दुर ही रहना है। जब तक वह बच्चे को जन्म नही दे देती।

राजेश _हा मां, आप चिंता न करें।

सुनिता _ठीक है बेटा अब जाओ और अपने कमरे में आराम करो।

जब राजेश कमरे में गया।

दिव्या बेड पर लेटी थी, वह उठ कर बैठ गई।

राजेश _दिव्या जी आप उठ क्यों गई लेटी रहो, वैसे भी तुम्हारी तबियत ठीक नहीं।

तुम सो जाओ, रात बहुत हो गई है।

दिव्या _राजेश तुम मुझसे नाराज़ तो नही हो न।

राजेश _क्यों

दिव्या _हमारा सुहागरात अधूरा जो रह गया।

राजेश _माफी तो मुझे मांगना चाहिए दिव्या जी, मैने इस बात का ख्याल नही रखाकी आप गर्भ से है।

मेरी लापरवाही के कारण बड़ी घटना होते होते बची।

दिव्या जी मुझे माफ कर दीजिए।

दिव्या _राजेश गलती सिर्फ तुम्हारी ही नहीं मेरी भी है एक डॉक्टर होते हुए भी, मै तुम्हे रोक न सकी।

राजेश _दिव्या जी अब जो huwa उसे भूल जाते है, अब हम वह गलती नही करेंगे।

राजेश बेड पर लेट गया।

राजेश _अब तुम भी लेट जाओ दिव्या जी।

दिव्या भी राजेश के बाजू में लेट गई।

अगले दिन सुनिता शेखर और स्वीटी शहर के लिए निकल गए जाते समय सुनिता ने राजेश और दिव्या को आवश्यक सलाह दी।

अब घर मे दिव्या राजेश सविता और उसका पति ही रह गए।

सविता, दिव्या के स्वास्थ्य का ख्याल रखने लगी। वह घर का काम करने से दिव्या को मना कर दी, दिव्या सारा काम करती।

राजेश अब अपने चाचा के दुकान का काम भी देखता था। और गांव की समस्या का हल भी ढूढता था।

वह आर्मी प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा का तैयारी भी कराने लगा।

2दिन बाद राजेश जब अचानक से अपने कमरे में गया। दिव्या उसी समय नहाकर निकली थी। वह सिर्फ पेटीकोट में थी और ब्रा पहन रही थी।

राजेश अचानक से रूम में गया सामने दिव्या को इस अवस्था में देखा।

राजेश _ओह आई एम सॉरी दिव्या जी , मुझे दरवाज़ा खटखटा कर आना था। मुझसे गलती हो गई।

राजेश अपनी आंखें बंद कर जाने लगा।

दिव्या हसने लगी।

दिव्या _राजेश रुको, तुम मेरे पति हो मेरे कमर में कभी भी आ सकते ह, तुम्हे दरवाज़ा खटखटाने की जरूरत नहीं है।

अच्छा मेरी थोड़ी मदद कर दो, मेरी ब्रा की हूक लगा दो, प्लीज।

राजेश _नही दिव्या जी मै नही लगाऊंगा,

दिव्या _क्यों तुम मेरे पति हो, हूक लगाने में क्यों शर्मा रहे, चलो लगा दो।

राजेश _दिव्या जी मै जा रहा हूं प्लीज मेरा ज्यादा देर तक यहां रुकना ठीक नही।

दिव्या _राजेश, तुम क्या कह रहे हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, हूक लगाने से, मना कर रहे हो, प्लीज लगा दो न।

राजेश _अच्छा ठीक है, मै अपनी आंखें बंद कर लेता हूं, अब दिखाओ हूक कहा है।

दिव्या _ओ हो, आंखें बंद करने की क्या जरूरत है? आंखें खोलो,मै तुम्हारी बीवी हूं।

राजेश ने आंखें खोला,

दिव्या _अब चलो लगाओ जल्दी,,,

राजेश हूक लगाए दिव्या के पास गया, दिव्या की बदन की मादक खुशबू उसको महसूस हुआ। उसका गोरा बदन देखकर उसकी शरीर में रक्त संचार बढ़ गया। उसका लंद तन कर खड़ा हो गया था।

वह किसी तरह हूक लगाया और वहा से भागा।

दिव्या _पता नही क्या हो गया है राजेश को,,,

इधर सविता की नजर राजेश पर पड़ी,,

सविता _राजेश, क्या हुआ, इतनी हड़बड़ा क्यू रहे हो,, क्या हुआ?

राजेश _चाची कुछ नहीं,,,

सविता की नजर राजेश की लोवर पर गया। लोवर पर तंबू बना हुआ था।

राजेश ने जब देखा कि चाची की नजर लोवर की तरफ है वह अपने हाथ से उभार को छुपाने को कोशिश करने लगा।

सविता समझ गई, राजेश का खडा हो गया है। वह मुंह छिपाकर हंसने लगी।

राजेश शर्मिंदा होकर चला गया।

सविता दिव्या की कमरे में गई।

सविता _दिव्या, क्या huwa राजेश को वो बड़ी हड़बड़ाहट में तुम्हारे कमरे से बाहर निकला।

दिव्या _पता नही चाची राजेश को हवा

मैंने तो सिर्फ उससे अपनी ब्रा की हूक लगाने के लिए कहा था, पता नहीं क्या बात है वह हूक लगाने से मना कर रहा था।

सविता हसने लगीं।

दिव्या _चाची आप हस रही हो,,,

सविता _मै समझ गई,,,

राजेश तुम्हे बीना साड़ी के देख कर, खुद को काबू में नही रख पा रहा होगा, इसलिए वह हूक लगाने से आनाकानी कर रहा होगा।

वैसे भी डॉक्टर ने राजेश को तुमसे दुर रहने कहा है न, कही तुम्हे ऐसी अवस्था में देख के बहक गया तो

दिव्या _ओ तो वे बात है,,, तभी वो अपनी आंखें बंद कर रहा था।

सविता _देखो दिव्या तुम राजेश के सामने बिना कपड़ो के मत आया करना। नही तो खुद को नहीं सम्हाल पाएगा बेचारा।

कही उसका मूड बन गया तो बेचारा रात में सो नही पाएगा।

सविता मुस्कुराते हुए बोली।

दिव्या _चाची आप ठीक कह रही है।

सविता _अच्छा मै चलती हूं, कीचन में काम है।

दिव्या _ठीक है चाची। मै भी आती हूं तुम्हारी मदद करने।

रात में सविता ने अंडा करी बनाया था। दिव्या के बच्चे के लिए जरूरी था।

रमाधव _अरे यार राजेश तुम अंडा करी नही खा रहे पहले तो तुम्हारा फेवरेट था क्या huwa

सविता _खाने का मन तो है पर मुझे लगता है मुझे नही खाना चाहिए। मुझे लगता है मुझे अंडा खाना बंद करना होगा।

माधव _अरे यार अंडा नही खाओगे तो ताकत कैसे आएगी।

नै नई शादी हुई है। तुम्हे तो रोज अंडा खाना चाहिए।

माधव ने जिद करके राजेश को 2,_3अंडा खिला ही दिया।

रात में राजेश बेचैनी महसूस करने लगा। इसका 3कारण था। एक तो सुबह की घटना से गर्म था। दूसरा अंडा करी ने भी असर दिखाना सुरु कर दिया। तीसरा दिव्या उससे लिपट के सो गई थी।

न चाहते हुए भी राजेश का लंद खड़ा हो गया। लोवर में तंबू बन गया था। उसे नींद नहीं आ रही थी।

दिव्या तो गहरी नींद में थी। राजेश अपने हाथ से अपने लंद सहलाने लगा।

दिव्या की आंख खुली। उसने देखा राजेश अभी तक सोया नही है।

उसने चादर के अंदर कुछ हरकत भी महसूस की।

दिव्या सोने का नाटक करने लगी और अपना हाथ चादर के अंदर ही राजेश के हाथ पर रख दी। राजेश के हाथ अपना लंद सहला रहा था।

राजेश चौंका वह अपना हाथ वहा से हटा दिया।

दिव्या का हाथ राजेश के लोअर के उभार पर गया।

दिव्या _ओह राजेश का तो खड़ा है।

हूं इसलिए वह सो नही पा रहा है।

उसे सेक्स की जरूरत है।

दिव्या निराश हो गई।

वह राजेश की जरूरत को पूरा नहीं कर पा रही है।

वह करवट लेकर उदास होकर सो गई। राजेश भी अपना लंद सहलाते सहलाते सो गया।

दिव्या जब सुबह उठी तो देखी राजेश के लोअर में अब भी तंबू बना हुआ है।

अब जब भी राजेश दिव्या के सामने आता दिव्या की नजर राजेश के लोअर पर ही जाता।

अगले दिन भी राजेश की वही हालात रही, उसे ठीक से नींद नहीं आ रही थी। वह देर रात तक जगता रहा।

दिव्या भी उदास थी, वह राजेश की शारीरिक जरूरत को पूरा नहीं कर पा रही थी। पेग्नेंसी के कारण।

दिन भर उसे यही चिंता खाय जा रहीं थी। वह जानती थी कि पेट की भूख की तरह शरीर के भूख का भी शांत होना आवश्यक होता है नही तो व्यक्ति के तन और मन दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

दिव्या निराश होकर एक फैसले पर पहुंची।

रात में सोते समय जब उसने देखा राजेश अभी तक सोया नही है।

दिव्या _राजेश क्या बात है मैं कुछ दिनो से देख रही हूं तुम ठीक से सो नहीं पा रहे।

राजेश _दिव्या जी आप अभी तक सोई नहीं है, मै सो जाऊंगा मेरी चिंता मत करो, मुझे देर रात सोने की आदत हो गई है। तुम सो जाओ।

दिव्या _राजेश मेरी तरफ देखो।

राजेश दिव्या की आंखो में देखने लगा।

दिव्या _मै जानती हूं राजेश तुम्हे नींद क्यों नहीं आ रही है। तुम्हे सेक्स कि जरूरत है।

राजेश _नही दिव्या जी ऐसी कोई बात नही। अगर होगा भी तो मै अपने को सम्हाल लूंगा तुम मेरी चिन्ता न करो, तुम सो जाओ।

दिव्या _राजेश मुझे तुमसे कुछ कहना है ,, शादी के पहले तुम बताए थे न की तुम्हारे कई औरतों के साथ संबंध रहे हैं।

राजेश _दिव्या जी शादी के पहले जो भी था, उससे अब मुझे कोई लेना देना नहीं है। मै आपसे वादा करता हूं की अब मै सिर्फ तुम्हारा बनकर रहूंगा।

दिव्या _राजेश मै तुम्हे देर रात तक करवट बदलते नही देख सकती। तुम चाहो तो मेरी डिल्वरी तक तुम उन औरतों से संबंध बना सकते है।

राजेश _दिव्या जी ये आप क्या कह रही है! मै ठीक कह रही हूं राजेश । मैने काफी सोचा उसके बाद मैने ये निर्णय लिया है। मै शारीरिक सुख के लिए तुम्हे और तड़पता नही देख सकती।

राजेश _नही दिव्या जी अब ये मुझसे नही हो पाएगा। मै अपने को नियंत्रित कर लूंगा। आप मेरी चिंता न करें।

अगले दिन रात में भोजन बनाते समय किचन में।

दिव्या _चाची मुझे आपसे कुछ बात करनी है।

सविता _दिव्या इसमें पुछने की क्या बात है,, बोलो क्या बात है?

दिव्या _चाची राजेश ने बताया था कि शादी के पहले राजेश का कई औरतों के साथ संबंध रहे हैं। क्या ये बात आपको पता है, आप मुझे झूठ नहीं बोलना।

सविता _दिव्या, शादी के पहले क्या था क्या नही उसे जानना ठीक नहीं, मै तो ये जानती हूं की राजेश अब सिर्फ तुम्हारा है।

दिव्या _चाची ये मेरे प्रश्नों का उत्तर नही है।

कृपया मुझे बताइए क्या आपको पता था?

सविता ने दिव्या की ओर देखा।

सविता _क्या तुम सिरयस हो?

दिव्या _हा चाची।

सविता _हां, मुझे पता है, राजेश का शादी से पहले कई औरतों से संबंध है और ये भी जानती हूं कि अब राजेश सिर्फ तुम्हारा है।

दिव्या _क्या आप किसी औरत का नाम बता सकती है जिससे राजेश का संबंध रहा है।

सविता _देखो दिव्या शादी के पहले राजेश का अतीत जो भी था उसे भूल जाओ। इससे राजेश और तुम्हारे बीच रिश्ता बिगड़ सकता है।

दिव्या _नही चाची मै यह बात रिश्ता बिगाड़ने के लिए नही बनाने के लिए पूछ रही हूं।

सविता _ये तुम क्या कह रही हो दिव्या।

दिव्या _मै सही कह रही हूं चाची।

सविता _दिव्या आखिर बात क्या है मुझे सब सच बताओ।

दिव्या _चाची, राजेश कुछ दिनो से ठीक से सो नहीं पा रहा है। उसे शारीरिक सुख की जरूरत है। तुम तो जानती हो प्रेगनेंसी के कारण मैं अभी राजेश को शारीरिक सुख नही दे सकती। मै चाहती हूं कि राजेश ममेरी डिल्वरी तक अपना पुराना संबंध जारी रखे।

मै राजेश को रात भर करवट बदलते नही देख सकती।

सविता _ओह तो ये बात है, क्या तुमने राजेश से इस बारे में बात की।

दिव्या _हां, मैने बात की लेकिन वह नहीं मान रहा है, कहता है मै खुद को सम्हाल लूंगा, मेरी चिंता न करो।

सबिता _राजेश ने सही कहा। तुम उसकी चिंता मत करो, ओ खुद को सम्हाल लेगा।

दिव्या _नही चाची मै जानती हूं, पेट की भूख की तरह शरीर की भूख का भाई शांत होना जरूरी है। आदमी लाख कोशिश कर ले लेकिन मन का शांत तभी होगा जब, भूख शांत हो।

आप मुझे कृपा करके किसी एक औरत का नाम बता दीजिए जिससे राजेश का संबंध रहा है, प्लीज।

सविता _पर जानकर करोगी क्या?

मै उससे मिलूंगी।

दिव्या _चाची आप बुरा न माने तो एक बात पूछूं,

सविता _हां पूछो, मै बुरा नही मानूंगी।

दिव्या _आपको मैने कई बार राजेश के साथ फ्लर्ट करते देखा है। जो चाची और भतीजे के बीच सामान्य रिश्ते से कुछ ज्यादा लगता हैं। कही आप भी उन औरतों में से एक तो नही है, सच बताना,,,, तुझे मेरी कसम है, चाची,,

सविता, दिव्या की ओर देखती रही,,

दिव्या _चाची बोलो न खामोश क्यों हो।

सविता _हां, मै भी उनमें से एक हूं।

दिव्या _ओह चाची मै बहुत खुश हूं यह जानकार, समझो मेरी समस्या का समाधान हो गया ।

सविता _क्या सच में तुम यह जानकार खुश हो,,

दिव्या _हा मै बहुत खुश हूं।

चाची अब राजेश की परेशानी तुम्हे दूर करनी पड़ेगी।

रात में भोजन करने के बाद, निशा और राजेश दोनो सो रहे थे,,,

तभी अचानक कोई दरवाजा खटखटाया ,

राजेश _राजेश _इतनी रात को कौन होगा?

दिव्या _मै देखती हूं।

निशा ने दरवाज़ा खोला, सामने सविता खड़ी थी नाईटी पहने।

सविता अंदर गई, निशा ने दरवाज़ा बंद कर दिया।

राजेश _चाची आप इस समय कुछ काम था क्या?

दिव्या _राजेश चाची को मैने बुलाया था।

राजेश _पर क्यों।

दिव्या _राजेश कुछ दिनों से तुम्हे ठीक से नींद नहीं आ रही है न, चाची तुम्हारे शरीर की अच्छे से मालिश करेगी जिससे तुम्हे अच्छी नींद आएगी।

राजेश _मै कुछ समझी नहीं।

दिव्या _राजेश तुम चुप चाप सोए रहो और चाची को उनका काम करने दो,,,

सविता _राजेश, दिव्य ठीक कह रही है, मै तुम्हारे शरीर कीअच्छे से मालिश कर देती हूं।

तुम अपने लोअर और टी शर्ट बनियान उतार दो।

राजेश _दिव्या जी मुझे मालिश की आवश्यकता नहीं है।

दिव्या _ऐसे कैसे नही है। कई दिनो से मैं देख रही हूं तुम ठीक से सो नहीं पा रहे हो, राजेश क्या तुम मेरा कहना नही मानोगे।

राजेश_ठीक है दिव्या जी, आप यही चाहती हो तो।

राजेशने अपना टी शर्ट बनियान और लोवर उतार दिया अब वह केवल, अंडर वियर में था।

सविता_हंसने लगी।

राजेश_चाची हस क्यू रही हो।

सविता_बड़ी आज्ञा कारी पति हो।

सविता ने अपने हाथो में तेल लेकर लेकर राजेश के हाथो, सीने फिर टांगो में मालिश करने लगी।

सविता जब सीने का मालिश कर रही थी तो उसकी चूचे राजेश के आंखों के सामने झूलने लगा।

राजेश का लंद तन कर खड़ा हो गया।

सविता_राजेश तुम्हारा छोटू तो बड़ा हो गया है। लगता है इसकी भी मालिश करनी पड़ेगी।

दिव्यa _हा चाची इसका भी मालिश कर दो, कई दिनो से यह राजेश को परेशान कर रहा है।

सबita ने राजेश का अंडर वियर निकाल कर अलग कर दिया।

सबita ने राजेश का लंद मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश को बहुत अच्छा लगने लगा।

दिव्यa_chachi मुझे भी दिखाओ थोड़ा मै भी मालिश कर दू।

सवीta_ क्यों नहीं।

सविता ने लंद मुंह से बाहर निकाल लिया।

दिव्या ने राजेश का लंद मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश जन्नत में पहुंच गया। उसका लंद और शख्त हो गया। सविता अपना कपड़ा उतार दी और पूरी नंगी हो गई।

उसकी chut से पानी रिस रहा था।

दिव्या _लो चाची, अब इसकी मालिश दूसरे तरीके से कर दो।

सविता बेड पर चढ़ गई फिर नीचे झुक कर राजेश का लंद पकड़ ली और अपने chut के मुंह में सेट कर बैठ गई। लंद गप की आवाज करता huwa अंदर चला गया।

सविता सिसक उठी, अब वह राजेश के सीने पर अपना हाथ रख कर उछल उछल कर चुदाने लगी।

लंद bur में गप गप अदंर बाहर होने लगा।

राजेश और सविता दोनो को बहुत मजा आने लगा।

राजेश भी जोश में आ गया, सविता की कमर हाथ से पकड़ कर अपने लैंड पर पटक पटक कर चोद ने लगा।

सविता स्वर्ग में पहुंच गई।

अब राजेश सविता को नीचे लिटा कर खुद ऊपर आ गया और उसकी चूची मसलने लगा निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगा। दिव्या राजेश का लंद हाथ से पकड़ कर सविता की योनि में डाल दिया। अब राजेश जोर जोर से धक्का लगा कर चोदने लगा। सविता की सिसकारी कमरे मे गूंजने लगी।

राजेश अब अलगा अलग पोजीशन में सविता की जमकर ठुकाई करने लगा। वह कई दिनो से chudai नही किया था वह भूखा था।

अंत में राजेश ने सविता की जमकर गांड़ मारी, दिव्या तो देखकर दंग रह गई। इतना मोटा लण्ङ आसानी से गांड़ में अंदर बाहर हो रहा था।

राजेश_दिव्या जी, मै आने वाला हूं। और राजेश तेज तेज चोदने लगा। और आह आह करते हुए झड़ने लगा।

सवीटा की गाड़ से वीर्य बहने लगा।

राजेश अपने बेड में लुड़क गया।

दिव्यa उसके बाजू में लेट गई।

दिव्यa_rajes तुम ठीक तो हो।

राजेश_हा दिव्या जी। सविता भी राजेश के बाजू में लेट कर, सुस्ताने लगी। राजेश ने उसकी bur और गाड़ दोनो को सुजा दिया था। कुछ देर रुकने के बाद।

सबita_divya अब मैं चलती हूं, रात काफी हो गई है।

दीvya_ji चाची।

सबita वहा से चली गईं। राजेश भी गहरी नींद में सो गया।
 
आप सभी मित्रो का बहुत बहुत सक्रिय सपोर्ट करने के लिए, कल अपडेट देनी की कोशिश करुंगा।
 
अगले दिन लोक सेवा आयोग ने इस सत्र के सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। राजेश ने पहला स्थान प्राप्त किया था।

सारे टीवी चैनलों में एवम सोशल मीडिया में यह खबर दिखाया जा रहा था।

आज का ब्रेकिंग न्यूज़ लोग सेवा आयोग ने जारी किया सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परीक्षा परिणाम, राजेश कुमार बना नया आईएएस टॉपर,

खास बात यह है कि अभी तक इतना स्कोर किसी टॉपर ने नही किया था जितना राजेश कुमार ने किया है।

मीडिया वाले राजेश कुमार को ढूंढने लगे उनका इंटरव्यू लेने के लिए। समाचार चैनलों एवम सोसल मीडिया में माध्यम से राजेश के सभी दोस्तों सगे संबंधी को राजेश के उपलब्धि के बारे में पता चल गया था।

राजेश को सभी तरफ से बधाई संदेश आने लगे।

Switi कालेज गई थी, जैसे ही उसे पता चला वह कालेज से छूटी लेकर भागते हुए घर पहुंची।

स्वीटी _मां कहा हो आप,,,

सुनिता _क्या huwa स्वीटी? ततुम कालेज से जल्दी कैसे आ गई,,,

स्वीटी _खुश खबरी सुनाने मां , लो मुंह मीठा करो।

सुनिता _कैसी खुशखबरी?

Switi_ सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम आ गया है मां, भाई ने टॉप किया है। भाई ने इतना स्कोर किया है, जो आज तक किसी टॉपर ने नही किया है।

सुनिता _हे भगवान, तुम्हारा लाख लाख शुक्र है। तूने मेरा सपना पुरा कर दिया।

स्वीटी _मां आज भईया यहां होते तो उसे खूब प्यार करती।

तभी सुनिता को शेखर का फोन आया।

शेखर _सुनिता बहुत बड़ी खुशखबरी है,,,

सुनिता _जानती हूं जी, राजेश आई ए एस परीक्षा में टॉप किया है। स्वीटी ने मुझे अभी बताया।

शेखर _मुबारखो सुनिता, तुम्हारा सपना था राजेश को आई ए एस अफसर बनाने का, आज वह पुरा।

सुनिता _हां,जी आज हमारे लिए बहुत बड़ी खुशी का दिन है। हमारा बेटा ने हमें गौरांवित किया है।

शेखर _हा सुनिता, दोनो के आंखों में खुशी के आंसू आ गए। तुमने राजेश से बात किया की नही।

सुनिता _नही जी, अभी करती हूं। आते समय मिठाई ले आना जी, पड़ोसियों में बाटूंगी।

शेखर _ठीक है, सुनिता।

सुनिता ने राजेश को काल किया,,,

सुनिता _बधाई हो बेटा, आखिर तूने मेरा सपना पूरा कर दिया।

राजेश _ये तो आपके आशिर्वाद का परिणाम है मां।

सुनिता _हम सब बहुत खुश है बेटा, तुम्हारी इस उपलब्धि पर।

राजेश _शुक्रिया मां।

वैसे आज मैं आपके पास होता तो आपके सपने को पुरा करने के बदले आपसे गिफ्ट लेता।

सुनिता _कैसा गिफ्ट बेटा।

राजेश _वही प्यार वाला।

सुनिता _धत बदमाश। वो गिफ्ट अब कभी नहीं मिलेगा।

राजेश _क्यू मां,

सुनिता _अब बहु जो आ गई है, अब ऐसा गिफ्ट तो तुम्हे बहु ही देगी।

राजेश _मां आपने ही तो मना किया है न, अपने बहू के पास जाने के लिए। फिर कैसी देगी वो मुझे प्यार वाला गिफ्ट।

सुनिता _ओह, मै तो भुल ही गई थी।

देखो बेटा ये बात उस दिन भी कही थी और आज भी कह रही हूं। तू बहू को धोखा मत देना। तू कैसे भी अपने पर संयम रख के 6_7 महिने कांट ले ।

राजेश _ मां अब उसकी आवश्यकता नही है।

सुनिता _मै समझी नहीं बेटा।

राजेश _मां, मैने दिव्या को शादी के पहले ही अपने पुराने अफेयर के बारे में सब सच बता दिया था।

मुझे सेक्स के लिए तड़फता देख दिव्या ने मुझे जब तक उसकी डिलीवरी नही हो जाती, दूसरी औरतों के साथ पुराने संबधो को जारी रखने की इजाजत दे दी है। और एक रात तो खुद चाची को हमारे कमरे मे बुलाई, मेरे मना करने के बाउजुद उसने चाची से ,मेरी शारीरिक भूख को शांत करने के लिए बोली।

सुनिता _क्या?

राजेश _हा मां ये सच है।

सुनिता _इसका मतलब है बेटा दिव्या सच में तुमको बहुत प्यार करती है, तभी तुम्हे वह सेक्स के लिए तड़फता नही देख पाई।

राजेश _मां, अगर आज हम साथ रहते तो आपसे वो गिफ्ट लेता, प्यार वाला।

सुनिता _बहू के सामने, धत पागल, मुझसे नही हो पाएगा।

राजेश _क्यो, दीदी, भाभी, ताई, इनके उपस्थित में तो किए हो फिर बहु के उपस्थित में क्यू नही कर सकती।

सुनिता _न बाबा कही बहू न यह बात अपनी मां को बता दी तो मेरी बहुत बदनामी हो जाएगी।

राजेश _अच्छा अकेले में तो दोगी न

सुनिता _क्या, शर्माते हुए बोली।

राजेश _गिफ्ट।

सुनिता _धत बदमाश,

दूसरी औरतों से तुम्हारा मन नही भरता क्या?

राजेश _आपके साथ एक अलग ही आनद आता है। आपसे मुझे एक मां का प्यार और पत्नी का प्यार दोनो जो मिलता है। बोलो न मां, दोगी न,,

सुनिता _अब तुमने मेरा सपना पुरा किया है तो मेरा भी फर्ज बनता है तुम्हे खुशी देने की,,, शर्माते हुवे बोली।

राजेश _ये हुई न बात। थैंक यू मां लव यू।

सुनिता _लव यू टू बेटा।

इधर गांव वालों को पता चला की राजेश ने आई ए एस परीक्षा में टॉप किया है तो, उसे बधाई देने के लिए घर आने लगें। ढोल नगाड़े बजने लगे।

दिव्या _राजेश, मुझे तुम पार गर्व है। मै खुबनशीब हूं की मै तुम्हरी पत्नी हूं।

धरम पुर जिले का पहली बार कोई युवा आई ए एस परीक्षा पास किया था। चारो तरफ रजेस का ही चर्चा होने लगी।

रत्नवती और गीता भी राजेश के इस उपलब्धि सी बड़े खुश हुवे। राजेश को बधाई देने घर पहुंचे।

मिडिया वाले भी पूछते पूछते सूरज पुर पहूंच गए, और राजेश का इंटर व्यू लेने लगे।

इधर लंदन में डिनर के समय निशा, सीमा और उसकी बुवा भोजन कर रहे थे। भोजन करते करते उन्हे टीवी पर न्यूज देखने की आदत थी।

आज तक चैनल बताया गया कि, राजेश कुमार बना आइए ए एस के नया टॉपर,

जी हां आपने सही सुना, लोक सेवा आयोग ने आज सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी कर दिया। राजेश कुमार बना नया टॉपर, राजेश ने अब तक हुई परीक्षा में सबसे अधिक स्कोर प्राप्त कर, इतिहास रच दिया। हमारी संवाद दाता ने उनका इंटरव्यू लिया है आइए देखते है राजेश कुमार न अपनी इस उपलब्धि पार क्या कहा?

यह न्यूज सुनकर सीमा और निशा खाना छोड़कर टीवी की ओर देखने लगे, उसकी बुआ भी सीमा और निशा के खाना छोड़कर टीवी पर ध्यान देने से, वह भी गौर से टीवी देखने लगी, आखिर टीवी पर दिखाया क्या जा रहा है?

संवाद दाता,,

राजेश सबसे पहले तो मैं आपको आपकी इस उपलब्धि पर हमारी दर्शकों की ओर से बधाई देता हूं।

राजेश _जी शुक्रिया।

हमारे आज तक,के दर्शक जानना चाहते है कि

आपने अपनी पहले ही प्रयास में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर लिया, आपके इस सफलता का मूल मंत्र क्या था।

राजेश _सफलता का यही मूलमंत्र है जो हर जगह लागू होता है।

1,स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना

2, उस दिशा में कठिन परिश्रम करना

3, समय का सदुपयोग

4, सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना।

जो युवा इन चारों मंत्र को लेकर आगे बढ़ता है उसे सफलता जरूर मिलेगी।

संवाद दाता _राजेश ने अभी अभी नई शादी की है, आई उसकी पत्नी से पूछते है की उसके पति के इज उपलब्धि पार वह कैसी महसूस कर रही है।

संवाद दाता _आप अपना परिचय दीजिए।

दिव्या _मेरा नाम दिव्या है मै राजेश की पत्नि हूं।

संवाददाता _अपने पति के इस उपलब्धि पर आप कैसी महसूस कर रही है।

दिव्या _मै उसकी पत्नि हूं, और मैं वैसे ही गौरांवित महसूस कर रही हूं जैसे हर भारतीय महिला अपनी पति की कामयाबी पर महसूस करती है।

संवाद दाता _क्या आपको पहले से उम्मीद थी कि राजेश यह उपलब्धि हासिल करेगा।

दिव्या _मेरा पति शुरू से ही प्रतिभा शाली रहा है। उसने पिछले वर्ष की स्नातक परीक्षा में भी उसने टॉप किया था। इसलिए उम्मीद थी की इस परीक्षा में भी अच्छा करेंगे।

इधर सिमा और निशा एक दूसरे को देखने लगे।

बुवा _निशा ये तो वहीं लडका न,, इसने शादी कर ली,,,,

निशा उठ कर जाने,,,

बुवा _अरे क्या हुआ भोजन तो कर लो,,,

निशा _मेरा हो गया,,,

सीमा भी डाइनिंग टेबल से उठ गई।

बुवा _सीमा तुम भी

सीमा _मेरा भी हो गया बुवा,,,

निशा अपने कमरे में गई और बेड पर लेट गई।

सीमा भी बेड पर जाकर निशा के बाजू लेट गई।

दोनो काफी देर तक खामोश थे।

कुछ देर बाद,,,

निशा _सीमा क्या तुम्हे मालूम था राजेश की शादी करने की बात।

सीमा _हूं,, सीमा दुखी मन से बोली।

कालेज के दोस्तों ने फोन करके बताया था कि,,, राजेश शादी कर रहा है,,

निशा _यह बात मुझे क्यू नही बताई?

सीमा _मुझे लगा की यह बात जानकार तुम दुखी हो जावेगी।

निशा _मै क्यों दुखी होती? अब मेरे दिल में उसके लिए कोई जगह नहीं है। आई क्या करता है मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

अब ईस बारे में कोई बात नही होगी, सो जाओ।

सीमा _, हूं,

आधी रात सीमा को किसी की सुबकने की आवाज सुनाई पढ़ी, वह आंखें खोल कर देखी, निशा सुबक रही थी।

सीमा _निशा तुम तो रही हो,,,

निशा _अपनी आंसू पोछते हुवे बोली,नही तो।

सीमा _मैने इसीलिए तुमसे यह बात तुमसे छिपाई थी। मुझे पता था तुम्हे इस बात से धक्का लगेगा।

निशा, सीमा की ओर मुंह करके बोली।

अब उस बेवफा, आवारा से कोई मतलब नही है। उसने सफलता के चार सूत्र बताए है न अब देखना, मै अब वो हासिल करूंगी जो आज तक किसी महिला ने हासिल नहीं किया है। और फिर मै इंडिया जाऊंगी और मै उसके आंखो के सामने किसी दूसरे लडके से शादी करूंगी ।

कुछ दिनो बाद,,

हवेली में,,,

ठाकुर नाश्ता कार रहा था तभी पार्टी अध्यक्ष का फोन आया।

ठ्ठाकुर _बोलिए अध्यक्ष जी, कैसे याद किए।

अध्यक्ष _ठाकुर साहब आपके लिए बुरी खबर है।

ठाकुर _कैसी बुरी खबर अध्यक्ष जी।

आपको तो पता है टिकट देने से पहले पार्टी प्रमुख ने इस बार आंतरिक सर्वे कराया है। जिसका रिपोर्ट अच्छा आयेगा उसी को टिकट दिया जाएगा।

ठाकुर _हा जानता हूं।

अध्यक्ष _वह रिपोर्ट पार्टी प्रमुख की पास पहूंच चुका है।

बहुत से मंत्रियों और विधायकों का टिकट इस बार कटने वाला है उसमे आपका भी नाम है।

ठाकुर _अध्यक्ष जी ये आप क्या कह दिया है?

मेरा टिकट कांट कर किसी और को दे दिया जाएगा।

ऐसा नहीं हो सकता।

अध्यक्ष _ठाकुर साहब मैने खुद आपकी रिपोर्ट पढ़ी, वआपके क्षेत्र के जनता आपके खिलाप है, लोग बदलाव चाह रहे हैं। इज लिए पार्टी हाई कमान ने आपका भी टिकट काटने का फैसला लिया है।

ठाकुर _मुझे टिकट नहीं मिलेगा तो और किसे दिया जाएगा।

अध्यक्ष _रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि, लॉग आपके खिलाप है, राजेश कुमार जो जो सिविल सेवा परीक्षा में टॉप किया है, वह उस क्षेत्र काफी लोकप्रिय है और आपने उस लडके को जान से मारने की कोशिश भी की है इस बात से उस क्षेत्र के लोग काफी नाराज हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस बार उस क्षेत्र में चुनाव वही जीतेगा जिसे राजेश का समर्थन होगा।

और तुम तो राजेश को अपना दुश्मन बना बैठे हो इसलिए तुम्हारा टिकट कांटा जा रहा है।

ठाकुर _अध्यक्ष ही अगर मेरा टिकट कटा तो मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जायेगी। प्लीज कुछ कीजिए। मुझे बेइज्जत होने से बचाइए।

अध्यक्ष _टिकट देना अब मेरे हाथ में नही है, फैसला रिपोर्ट देख कर हाई कमान द्वारा लिया गया है।

फिर भी मैं हाई कमान से मिलकर, आपका सिफारिस कर सकता हूं, लेकिन, तुम्हे कुछ काम करना होगा,,,

ठाकुर _कैसा काम अध्यक्ष जी?

अध्यक्ष _राजेश को अपने पक्ष में कर लो, सुना है वो आपका दामाद भी है, पर तुमने उसे दामाद स्वीकार नहीं किया है। अगर तुम उसे दामाद स्वीकार कर उसका समर्थन हासिल कर लिया तो तुम्हारी टिकट बच सकती है मै खुद पार्टी हाई कमान से मिलकर बात करुंगा।

ठाकुर _अध्यक्ष जी ये आप क्या कह रहे हैं उस दो टके के लडके को अपना दामाद मान लूं। मै ये नही कर सकता।

अध्यक्ष _देखो ठाकुर साहब वो लडका अब कोई साधारण लडका नही है वह आई ए एस टापर है। पुरे पूरे देश में उसकी चर्चा है उसे दामाद स्वीकार करने से तुम्हारी इज़्जत कम नहीं होगी। अब मैंने आपको रास्ता बता दिया है, अब आपकी मर्जी आप टिकट चाहते है या नहीं।

अध्यक्ष ने फोन रख दिया।

ठाकुर _मुनीम जी मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या करना चहिए ?

मुनीम _हुजूर मै तो कहता हुं कि आप राजेश को दामाद स्वीकार कर लीजिए।

ठाकुर क्रोधित होते हुए बोला,,

मुनीम _हुजूर आप मेरी पूरी बात तो सुनिए।

आप राजेश को दामाद स्वीकार कर उसे हवेली ले आईए। फिर आपको टिकट भी मिल जायेगा और आप चुनाव भी जीत जाओगे।

उसके बाद हम राजेश को किसी मामले में फसाकर सबकी नजरों में उसे गिरा देंगे। फिर वह खुद ही हवेली छोड़कर चला जायेगा। और दिव्या बेटा भाई हवेली में ही रह जायेगी।

ठाकुर _चाल तो अच्छी है पर वो साला बहुत चालाक है। हम्मेशा बच जाता है।

मुनीम _इस बार ऐसा चाल चलेंगे की वो तो क्या उसका बाप भी नही बच पाएगा।

मुनीम और ठाकुर दोनो हंसने लगे। हा हा हा हा,,,

रात्रि भोज के समय ठाकुर,,

रत्नवती_आप तो हम लोगो के साथ भोजन नही करते थे, आज क्या हुआ?

ठाकुर _गीता की मां मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है।

रत्नवती _मै कुछ समझी नहीं।

मैंने राजेश को अपना दामाद स्वीकार न करके बहुत बढी गलती कर दी है। मै राजेश से माफ़ी मांग कर अपनी गलती सुधारना चाहता हूं। मै खुद कल सूरजपुर जा कर उससे माफी मांगूंगा। मै चाहता हूं की वे दोनो हमारे साथ हवेली में रहे।

अब मेरा कहना तो वे मानेंगे नही, इसलिए तुम भी मेरे साथ चलोगी और उन्हे मनाओगी।

गीता _पिता जी ये तो बड़ी खुशी की बात है, राजेश और दिव्या दोनो हवेली में रहेंगे।

दिव्या हवेली में रहेगी तो हम उसकी स्वास्थ्य की देखभाल भी अच्छे से कर सकेंगे। वैसे भी सुना है राजेश 2माह बाद ट्रेनिंग में चला जायेगा। दिव्या वहा अकेली हो जायेगी।

रत्नवती_बेटी तुम ठीक कह रही हो। हम सब कल सूरजपुर चलेंगे, राजेश और गीता को मनाकर हवेली ले आयेंगे। मुझे भी उसकी स्वास्थ्य की चिंता रहती है ।

ठाकुर अपनी चाल में कामयाब होता देख मुस्कुराने लगा।

अगले दिन सुबह ही तैयार होकर तीनो सूरज पुर के लिए निकल पड़े।

दुकान में माधव बैठा था।

ठाकुर _कैसे हो माधव?

माधव _ठाकुर साहब आप ?

ठाकुर _ओ बेटी और दामाद से मिलने आए हैं।

माधव _ओ हो ये तो खुशी की बात है आप लोग आइए न मै अभी सविता को बुलाता हूं।

माधव _अरे सविता

सविता _क्या huwa जी।

बहू के माता पिता और उसकी दीदी दिव्या से मिलने आए है।

सविता _ये तो खुशी की बात है,,

सविता ने दरवाज़ा खोली,,

नमस्ते समधन जी आइए न,,

रत्नवती ने हाथ जोड़कर सविता का अभिवादन स्वीकार किया,

हम लोग बेटी दामाद जी से मिलने आए हैं।

सविता_ये तो खुशी की बात है।

आप लोग आइए न,,,

सभी हाल में आकर बैठ गए।

सविता _मै अभी दोनो को बुलाकर लाती हूं दोनो अपने।कमरे में है।

सविता _राजेश

राजेश _क्या बात है चाची,,

सविता _दिव्या की माता पिता दोनो से मिलने आए है।

राजेश _ठाकुर साहब भी आए हैं?

सविता_हां।

दिव्या _पिता जी तो हमारी शादी से खुश नहीं थे फिर वो क्यों आए हैं?

राजेश _चलो देखते है बात क्या है?

राजेश और दिव्या दोनो हाल में आए।

दोनो ने सभी के पैर छुए,,

ठाकुर _मुझे पता है कि तुम दोनो मुझे यहां देख कर हैरान होगे। बेटा ,,

मै तुम दोनो से माफी मांगने आया हुं।

मैने राजेश को दामाद स्वीकार नहीं किया था। अब मुझे राजेश को दामाद स्वीकार करने में खुशी है, वह हर तरह से दिव्या के योग्य है।

मुझे तुम दोनो माफ कर दो,, मै जानता हूं मैं माफी के काबिल नहीं हूं। पर मुझे एक मौका दो बेटा मेरी गलती सुधारने का, मुझे माफ़ कर दो,,

रत्नवती_बेटा तुम दोनो, अपने अपने पिता जी को माफ़ कर दो उसे गलती का अहसास हो चुका है।

दिव्या _पिता जी आपको माफ करना न करना राजेश के हाथो में है। आप उसी के गुनहगार है। अगर राजेश ने आपको माफ कर दिया तो मैं भी पुरानी बातो को भुल जाऊंगी।

दिव्या और राजेश एक दूसरे की ओर देखने लगे।

ठाकुर _राजेश बेटा मुझे माफ़ करदो, तुमने हमारे परिवार के लिए कितना कुछ किया और मैंने तुम्हारा अपमान किया ओर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। प्लीज बेटा।

राजेश ने सविता की ओर देखा,,

सविता ने हा में सिर हिलाया,,,

राजेश _ठीक है ठाकुर साहब मैने तुम्हे माफ किया। उम्मीद है आप फिर से वही गलती नही दोहराएंगे ।

ठाकुर_नही बेटा अब मैं ऐसे कोई गलती नही करुंगा। पर बेटा तुमने मुझे माफ़ कर दिया है ये मै तभी मानूंगा, जब तुम दोनो हमारे साथ हवेली चलोगे।

दिव्या _मां ये पिता की क्या कह रहे है?

शादी के बाद तो पति का घर ही उसकी पत्नी का घर होता है न, मै तो आप लोगो के यहां सिर्फ मेहमान बनकर ही जा सकती हूं।

ठाकुर _नहीं बेटी मेरा सब कुछ तुम दोनो बेटियो के ही तो है, शादी होने से तुम हमारे लिए सिर्फ मेहमान नही हो बल्कि हवेली की आधा वारिस भी हो।

दिव्या की मां तुम भी समझाओ,

रत्नवती _बेटी तुम्हारे पिता जी ठिक कह रहे है, हम सभी चाहते है की तुम दोनो हवेली में रहो। वैसे भी मुझे तुम्हारी स्वास्थ्य की चिंता लगी रहती हैं। अभी तो राजेश है पर कुछ दिनो बाद वह भी ट्रेनिंग में चला जायेगा। इसलिए मैं भी चाहती हूं। तुम दोनो हमारे साथ हवेली में रहो।

गीता _दिव्या तुम दोनो हवेली में हमारे साथ रहोगे तो हवेली में फिर खुशियां आ जायेगी। तुमारे हवेली से जाने के बाद तो मां और मुझे हवेली काटने को दौड़ता है। वैसे भी जब तुम्हारा बच्चा हवेली में जन्म लेगा तो हवेली किलकारियों से गूंज उठेगी। चारों तरफ खुशियां ही खुशियां।

दिव्या _मां ,शादी के बाद राजेश ही मेरा सबकुछ है,, राजेश जहां मुझे रखेगा, मै खुश रहूंगी। हवेली में रहने या न रहने का फैसला मै राजेश पर छोड़ती हूं ।

रत्नवती _राजेश बेटा मान जाओ न।

राजेश _चाची आप क्या कहती हो!

सविता _राजेश, मुझे तो खुशी होगी पर तुम जो भी फैसला लोगे सोच समझ कर लोगे मुझे तुम पर पुरा भरोसा है।

राजेश _ठीक है ठाकुर साहब, हम हवेली में रहने तैयार हूं पर एक बात याद रखिए, हवेली में किसी ने भी दिव्या या या मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश किया तो मैं उसी पल हवेली छोड़ दूंगा।

रत्नवती _नही दामाद जी, ऐसा कभी नहीं होगा।

ठाकुर _हा , राजेश दिव्या की मां ठीक कह रही है।

सविता ने सबके लिए चाय नाश्ता का प्रबंध किया।

सभी खुश थे ठाकुर अपने चाल में कामयाब होने पर खुश था।

आखिर राजेश और दिव्या ने अपना सारा सामान पैक किया। पदमा, पूनम, भगत और पुरे गांव वाले इकठ्ठा हो गाए गए की राजेश हवेली में रहेगा।

राजेश ने कहा मै तो गांव में हमेशा आता जाता रहूंगा। हवेली में तो बहुत कम ही रहूंगा।

सभी लोग खुश हो गए।
 
राजेश और दिव्या दोनो के ठाकुर अपने साथ हवेली लेकर चले गए। वह ठाकुर खुश हो रहा था उसे लग रहा था कि उसका चाल कामयाब हों गया है।

अगले दिन ठाकुर नई हवेली में भव्य पार्टी का आयोजन किया।

पार्टी में अपने क्षेत्र के सभी प्रमुख लोगो को आमन्त्रित किया। ताकि सभी लोग यह जान सके की राजेश ठाकुर का दामाद है, और राजेश अब ठाकुर का समर्थन करेगा। उसके खिलाफ जो लोगो में नाराजगी है वह दूर हो जाएगी।

सभी मेहमान, राजेश और दिव्या को शादी की शुभकामनाएं दे रहे थे।

तभी मुनीम के पत्नी और उसकी बेटी भी पार्टी में पहुंची।

मुनीम की बेटी दिया बहुत ही खुबसूरत थी वह पोस्ट ग्रेजुएट की पढाई कार कुछ दिन पहले ही गांव पहुंची थी।

ठाकुर _अरे मुनीम जी ये लङकी कौन है?

मुनीम _ठाकुर साहब आप भी अच्छा मजाक कर लेते है आप क्या सच में इसे नही पहचान रहे।

ठाकुर _नही तो,

मुनीम _हुजूर या मेरी बेटी दिया है।

ठाकुर_ओह ये तुम्हारी बेटी दिया है, जब छोटी थी तब देखा थ, अब तो बहुत बड़ी और खुबसूरत हो गई है।

ठाकुर और मुनीम दोनो हंसने लगे।

मुनीम _,, दिया बेटा ठाकुर साहब का पैर छूकर प्रणाम करो।

दिया ने ठाकुर का पैर छूकर प्रणाम किया।

ठाकुर _अरे बेटी पैर नही, मेरे गले लगो तुम भी मेरी दिव्या और गीता बेटी जैसी हो। आओ गले लगो।

ठाकुर ने दिया को गले लगा लिया।

ठाकुर _क्या मस्त मॉल है, ये अब तक कैसे मुझसे बची रही। शाला मुनीम मुझसे छिपा कर रखा था।

इसका स्वाद तो चखना पड़ेगा। ठाकुर अपने मन में कहा।

इधर मुनीम के दिया का गले लगाना अच्छा नही लगा।

उसने अपने पत्नी से कहा अरे भाग्यवान, अब जाओ तुम दोनो दिव्या बेटी के शादी की बधाई दे दो।

इधर ठाकुर की नजर दिया पार ही अटका हुआ था।

दिया और उसकी मां दिव्या और राज को बधाई देने मंच पर पहुंचे।

दिया _दिव्या दीदी आपने मुझे पहचाना,

दिव्या _तुम,,, कुछ जानी पहचानी सी लग रही हो।

दिया _मै दिया हम बचपन में साथ में खेला करते थे आप भुल।

दिव्या _अरे दिया तुम, कितने दिनो बाद मिल रही हो। मुनीम काका तो बता रहे थे कि तुम पढ़ने के लिए शहर गई हो, कब आई शहर से।

दिया _कुछ दिन पहले ही ही आई हूं।

दिव्या _दिया इनसे मिलो, ये है मेरा पति राजेश।

दिया _इनको कौन नही जानता दी, भारत के हर युवा अच्छे से जानते हैं राजेश जीजू को, आई ए एस टापर, मै भी जीजू का बहुत बड़ा फैन बन गया हूं।

जीजू बहुत बहुत बधाई दिव्या दीदी के साथ शादी के लिए और आई ए एस परीक्षा में टॉप करने के लिए।

राजेश _ओह शुक्रिया दिया।

दिया _जीजू, मै भी आई ए एस अफसर बनना चाहतीं हूं। तैयारी के लिए मुझे आपका मार्गदर्शन चाहिए।

राजेश _अरे भाई आपने हमें जीजू कहा है, तुम हमारे शाली हुवे, हम तुम्हारी हर तरह से मदद करेंगे।

दिया _ओह थैंक यू जीजू।

इधर पार्टी में ठाकुर ने अपने पार्टी अध्यक्ष को भी आमन्त्रित किया था।

ठाकुर _अध्यक्ष जी, आप के कहने पर मैंने राजेश को अपना दामाद स्वीकार कर लिया। अब तो मेरा टिकट पक्का न।

अध्यक्ष _हा ठाकुर साहब अब तो मैं पार्टी हाई कमान से, आपके लिए जरूर बात करुंगा। टिकट पक्का समझो।

इधर बधाई कार्यक्रम संपन्न होने के बाद डांस प्रोग्राम शुरू हुआ। महिलाएं पुरुष लडके लडकियां अपनी अपनी जोड़े बनाकर नाचने लगे।

दिव्या, प्रेगनेंसी के कारण राजेश का साथ न दे सकी।

दिव्या _सॉरी राजेश मै आपका साथ नही दे पा रही।

दिया _अरे दी मै हूं न जीजू का साथ देने के लिए। चलो जीजू हम डांस करते हैं।

राजेश और दिया एक दूसरे का हाथ पकड़ कर डांस करने लगें।

इधर ठाकुर की नजर दिया पर ही टिकी हुई थी।

दिया उसके दिल में उतर गया था।

ठाकुर अब दिया को पाना चाहता था।

जब ठाकर ने देखा कि दिया राजेश के साथ उसके कमर और बाहों में हाथ डाल नाच रही है जल भुन सा गया। वह गुस्से में शराब पीने लगा।

पार्टी खतम हुआ। सभी मेहमान अपने अपने घर चलें गए।

ठाकुर अपने कमरे में बिंदिया के साथ था।

बिंदिया _हुजूर मुझे यह बात समझ नहीं आई, अपनी दुश्मन के बेटे को ही अपना दामाद स्वीकार कर लिया।

आप भुल गए राजेश की मां के कारण आपको सूरज पुर मे कितनी बेजजती झेलनी पड़ी थी। और आप उसी सुनिता के लडके को दामाद स्वीकार कर पार्टी दे रहे हो।

ठाकुर _बिंदिया ठाकुर अपने अपमान को कभी भूलता नहीं। यू सब दिखावा है।

बिंदिया _ये सब दिखावा है, ठाकर साहब मै कुछ समझी नहीं।

ठाकुर _बिंदिया मै राजेश को दामाद इसलिए बनाया ताकि अपने परिवार और गांव वालों का विश्वास जीत सकू, अभी मेरी बिटिया, पत्नी और गांव वाले मुझसे नाराज है। राजेश को दामाद स्वीकार कर लेने के बाद मेरे परिवार और गांव वालो की नाराजगी दूर हो जाएगी। मुझे टिकट मिल जायेगा और चुनाव जीत जाने के बाद राजेश को मैं दूध में पढ़ी मक्खी की तरह इस हवेली से निकाल कर बाहर फेक दूंगा।

बिंदिया _वो कैसे ठाकुर साहब?

ठाकुर _राजेश के चरित्र पर दाग लगाकार। मै उस पर बलात्कार का इल्जाम लगवाऊंगा। उसका वीडियो बनाकर वायरल करुंगा। फिर सब उस पर थू थू करेंगे।

बिंदिया इसके लिए तुम्हे मेरी मदद करनी पड़ेगी।

बिंदिया _कैसी मदद ठाकर साहब।

ठाकुर _तुम राजेश को अपनी जाल में फांसो।

बिंदिया _ठाकुर साहब अब तो मैं बूढ़ी हो गई हूं, राजेश मुझसे कहा फसेगा।राजेश को फसाने के लिए कोई जवान और खूबसूरत लङकी चाहिए। और मेरी नजर में एक लङकी है जो राजेश को फांस सकती है।

ठाकुर _कौन है वो,

बिंदिया_ मुनीम की बेटी दिया। पार्टी में देखा सबने कैसे दोनो एक दूसरे का कमर पकड़ कर डांस कर रहे थे। पर मुनीम जी इसके लिए मानेंगे।

ठाकुर _दिया तो मेरे भी दिल में उतर गई है बिंदिया, उसकी सील तो मैं तोड़ना चाहता हूं।

बिंदिया _हुजूर ये आप क्या कह रहे है, मुनीम जी को यह बात पता चली तो वो आपके खिलाफ बगावत पर उतर सकते हैं।

ठाकुर _मुनीम जी ने हमारा नमक खाया है, उसने हमारे सामने गांव की कई लडकियो और औरतों को हमारे सामने परोसा है। अब उसे अपनी बेटी को भी मेरे सामने परोसना होगा। बिंदिया का सील मै तोडूंगा और इल्जाम लगेगा राजेश पर, हा हा हा,,,

बिंदिया _पर हुजूर अगर मुनीम ने ऐसा नहीं किया तो।

ठाकुर _मेरे और दिया के बीच अब कोई भी आया तो उसे मै रास्ते से हटा दूंगा।

बिंदिया _लगता है इस ठाकुर का सर्वनाश का समय अब आ गया हैं, जिंदा रहना है तो फिर कुछ नया सोचना पड़ेगा। बिंदिया अपने मन में बोली।

इसके बाद ठाकुर दिया को इमेज कर बिंदिया की ठुकाई करने लगा।

जब झड़ने वाला था तो ठाकुर बोला,

आह मेरी जान दिया क्या मस्त मॉल है तू ले मेरी बीज अपनी कोख में,,, आह आह,,,,

ठाकुर झड़ने लगा।

दिव्या _ये ठाकुर तो सच में दिया के लिए पागल हो चूका है।

इधर राजेश और दिव्या अपने बेड रुम में सोने की कोशिश कर रहे थे।

दिव्या राजेश के सीने में अपना सिर रखी थी।

दिव्या _राजेश तुम खुश तो हो न।

राजेश _दिव्या जी आप खुश हो न।

दिव्या _तुम मेरे पास हो इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है।

राजेश _आप खुश तो मैं भी खुश।

दिव्या _राजेश आई सॉरी

राजेश _ओ किस लिए दिव्या की,

दिव्या _आज ऐसे खुशी के मौके पर तुम्हे पत्नि का सुख नही दे पा रही।

राजेश _दिव्या जी मै खुश हूं, इसकी आवश्यकता नही।

दिव्या _इसकी आवश्यकता कितनी है ये मै अच्छे से जानती हूं।

इसकी आवश्यकता नहीं होती न तो तुम अभी तक यू जागते नही थक कर गहरी नींद में सो जाते।

लगता है तुम्हारे लिए हवेली में भी कोई जुगाड करना पड़ेगा।

राजेश ये बताओ इस हवेली में तो बहुत सी सेविकाय है कोई तुम्हे पसंद है क्या बताओ मैं उससे बात करूंगी।

राजेश _दिव्या जी ये आप क्या कह रही है? कही सासू मां और गीता दी को इसके बारे में पता चल गया तो,,,

दिव्या _तुम उन लोगों की चिंता मत करो मैं उनको समझा lungi

तुम बताओ कोइ सेविका पसंद है क्या?

राजेश _दिव्याजी, वो बिंदिया काकी कैसी रहेगी।

दिव्या _हसने लगी।

राजेश _क्या huwa दिव्या जी,,

दिव्या _मानती हूं बिंदिया काकी खुबसूरत है पर वह 42की होगी लगता है तुम्हे बड़ी उम्र की औरते ज्यादा पसंद है।

राजेश _वो तो मैं इस लिए कह रहा था कि बिंदिया काकी अनुभवी है और तुम्हारी बातो के वो अच्छे से समझेंगी। और यह बात अपने तक ही रखेगी। किसी को बताएगी नही।

दिव्या _अच्छा ठीक है फिर मैं कल बिंदिया काकी से बात करूंगी।

राजेश ने बिंदिया को इस लिए चुना क्यों की बिंदिया ठाकुर के सारे राज जानता था, वह बिंदिया को अपने पक्ष में लाकर ठाकुर की खिलाफ इस्तमाल करना चाहता था।

अगले दिन ठाकुर उद्घाटन कार्यक्रम से बाहर चला गया। गीता भी धरमपुर चली गईं राजेश सूरज पुर चला गया। आर्मी एवम पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं का मार्गदर्शन करने।

दिव्या सेविकाओ से कहकर बिंदिया को अपने कमरे में बुलाई।

बंदिया _बिटिया तुमने मुझे बुलाया।

दिव्या _हा काकी, मुझे तुमसे कुछ बाते करनी थी।

बिंदिया _बोलो बिटिया क्या बात है?

दिव्या _काकी ये बताओ की अगर किसी युवक की नई नई शादी हुई हो और उसे शारीरिक सुख न मिले तो वो क्या करेगा? आप तो काफी अनुभवी है।

बिंदिया _वह इधर उधर मुंह मरेगा ओर क्या करेगा बिटिया।

दिव्या _आपने सही कहा काकी।

बिंदिया _पर ये बात मुझसे क्यों पूछ रही हो बिटिया।

दिव्या _ काकी मै ये बात इसलिए आपसे कह रही हूं कि मैं राजेश के किसी कारण से शारीरिक सुख नही दे पा रही हूं। इस लिए मुझे डर है कि वह कही इधर उधर न मुंह मारने लगे। इससे हवेली की काफी बदनामी होगी।

बिंदिया _ये बात तो है बिटिया, पर ये बात मुझे क्यू बता रही हो।

दिव्या _यह बात मै आपको इसलिए बता रही हूं। क्यों की आप मेरी मदद कर सकती हो।

बिंदिया _वो कैसे बिटिया

दिव्या _राजेश को शारीरिक सुख देकर

बिंदिया _पर बिटिया यहां तो बहुत सी जवान सेविकाएं है उससे मदद ले सकती हों फिर मुझ बुढ़िया को क्यू चुनी।

दिव्या _वो इसलिए की जवान सेविकाओं पर मुझे भारोसा नही कही यह बात गांवो में फैला दी तो बड़ी बदनामी हो जाएगी, मुझे आप पर पुरा भरोसा है तुम याह राज अपने तक ही रखोगी।

बोलो काकी मेरी मदद करोगी ना।

बिंदिया _अब बिटिया हवेली की इज्जत के लिए तो इतना कर ही सकती हूं।

दिव्या _धन्यवाद काकी, मुझे यकीन था आप मेरी बात को टालेंगी नही।

आज रात सबके सोने के बाद चुपके से हमारे कमरे में आ जाइयेगा।

बिंदिया _ठीक है बिटिया।

बिंदिया वहा से चली गई।

अपने कमरे में जाने के बाद,

ठाकुर ने तो राजेश को अपने जाल में फसाने कहा था। यहां तो खुद ही उसकी बेटी मुझे राजेश के साथ सोने के लिए कह रही है।

ठाकुर लगता हैं अब तुम्हारे बुरे दिन शुरू हो गए है।

आखिर रात का समय हो ही गया। रात्रि भोजन के बाद सभी अपने कमरे में सोने चले गए।

राजेश और दिव्या भी सोने की कोशिश कर रहे थे।

तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया ।

दिव्या _दरवाज़ा खोली।

काकी आप आ गए। मै आप ही के इन्तजार कर रही थी।

राजेश देखो कौन आई है।

राजेश ने देखा बिंदिया सज धज कर आई थी, काफी सेक्सी लग रही थी। पुरा बदन इत्र कि खुशबू से महक रहा था।

दिव्या _आओ काकी बैठो।

बिंदिया बेड किनारे बैठ गई।

काकी आज तो बहुत प्यारी लग रही हो।

बिंदिया राजेश से नजर नहीं मिला पा रही थी। खामोश बैठी थी।

राजेश _काकी अगर आपकी इच्छा नहीं है तो कोई जबरदस्ती नहीं है तुम जा सकती हों।

दिव्या _राजेश पहली बार है वो भी एक पत्नि के सामने कोई भी स्त्री संकोच तो करेगी ही।

तो शुरू करे।

राजेश चलो शुरू हो जाओ आज मैं सिर्फ देखूंगी। कुछ नहीं करूंगी।

चलो अब शुरू हो जाओ।

राजेश बेड से उतारा और बिंदिया का हाथ पकड़ कर खड़ा करा दिया।

बिंदिया सिर झुकाए खड़ी थी। राजेश पिछे से उसे बाहों में भर लिया। उसकी पीठ को चूमने लगा।

फिर उसकी गर्दन चूमने लगा।

उसकी मुंह को अपनी ओर कर बिंदिया की ओंठ चूसने लगा एक हाथ से उसकी चूची मसलने लगा।

उसकी ओंठ उसकी गाल गर्दन कान के नीचे भाग को चूमने लगा।

बिंदिया गर्म हो कर सिसकने लगीं।

राजेश उसकी साडी को धीरे धीरे उतार दिया।

राजेश खुद अपना कपड़ा उतार कर चड्डी बनियान में आ गया।

अब राजेश बिंदिया की ओंठ को अपनी ओंठ में भर कर जी भर कर चूसा।

फिर गर्दन चूमता huwa आगे बड़ा। उसकी ब्लाउज को उतार दिया। वह अब ब्रा और पेटीकोट में थी।

राजेश ने ब्रा भाई खोल दिया।

बिंदिया की मस्त बड़े बड़े गोरे गोरे सुडौल स्तन राजेश के आंखों के सामने आ गया।

बिंदिया का स्तन देख कर राजेश का लंद तन गया। झटके मारने लगा।

राजेश एक हाथ से चूची मसलने तो दूसरी चूची को पीने लगा। बिंदिया बहुत अधिक गर्म हो गई।

वह सिसकने लगीं।

राजेश नीचे गया और बिंदिया की सपाट पेट और खुबसूरत नाभी को चूमने चाटने लगा।

बिंदिया प्यार से राजेश की बालो को सहलाते हुए सिसकने लगीं।

अब राजेश बिंदिया की पेटीकोट का नाडा खीच दिया। पेटीकोट बिंदिया की पैरो में गिर गया।

दिव्या ने राजेश का बनियान उतार दिया।

अब राजेश बिंदिया को उठा कर अपने गोद में बिठा लिया।

और जी भर कर ओंठ चूसा चूची मसल मसल कर पीने लगा।

बिंदिया सिसकने लगीं।

राजेश अब बिंदिया को उठा कर बेड किनारे लिटा दिया।

उसकी पेंटी को उतार कर नंगी कर दिया।

उसकी खुबसूरत फूली हुई चिकनी chut राजेश के आंखों के सामने आ गया जिसे देखकर राजेश का लंद और लंबा मोटा हो गया।

राजेश ने अपने हाथ से बिंदिया की योनि सहलाया फिर फिर जीव से उसकी योनि चाटने लगा।

बिंदिया आनंद में अपनी सिर पटकने लगी छटपटाने लगी सिसकने लगीं।

उसे बहुत मज़ा आ रहा था।

बिंदिया _राजेश बेटा अब बस करो अब मुझसे और बर्दास्त नही हो रहा।

दिव्या ने राजेश का चड्डी उतार दिया उसका लंद हवा में लहराने लगा।

राजेश के लंद को बिंदिया फटी आंखों से देखने लगी।

दिव्या ने राजेश के लंद को चूस चूस कर और सख्त कर दिया।

फिर राजेश का लंद पकड़ कर बिंदिया की योनि में सेट कर दिया।

राजेश ने बिंदिया की चूची पकड़ कर एक जोर का धक्का मारा।

लड़ एक ही बार में boor चीरकर आधा अंदर चला गया।

बिंदिया सिसक उठी।

राजेश ने बिंदिया की ओंठो को चूसा चूची मसला फिर एक जोर का धक्का मारा। लंद जड़ तक अन्दर घुस गया। बिंदिया चीख उठी।

Rajes कुछ देर रुका फिर धीरे धीरे लंद को अंदर बाहर करना शुरू किया।

बिंदिया सिसकने लगी, राजेश धीरे धीरे अपना स्पीड बढ़ाने लगा। राजेश का लंद बिंदिया की bur la भग्नाशा ko अच्छी तरह रगड़ रहा था। लंद मोटा होने की कारण bur की दीवारों को अच्छी तरह रगड़ रहा था जिससे बिंदिया को एक बहुत आनन्ददेd रहा थ। बिंदिया जन्नत की सैर करने लगी।

राजेश अब स्पीड से लंद को bur में अंदर बाहर करने लगा। बिंदिया की bur से पानी झरने की तरह बहने लगा। लंद गप गप अंदर बाहर हो रहा था।

राजेश बिंदिया की चूची को मसल मसल कर दनादन चोद रहा था।

बिंदिया को अलौकिक सुख प्राप्त होने लगा जिसकी कल्पना तक उसने नही की थी। लंद का का टोपा बिंदिया की बच्चेदानी से टकराने के कारण उसके शरीर में एक अलग ही कंपन पैदा कर रहा था।

बिंदिया बहुत ही उत्तेजित हो गई वह इतनी अधिक गर्म हो चुकी थी की वह अपने मुंह से अनाप शनाप बकने लगी।

और मूतने लगी।

राजेश ने अपना लंद बाहर निकाल लिया। बिंदिया शर्म से पानी पानी होते लगी।

राजेश अब उसे घोड़ी बना दिया। दिव्या ने राजेश का लंद चूसा और उसे बिंदिया की bur में सेट कर दिया। राजेश अब एक ही धक्का में जड़ तक अन्दर घुसा दीया। बिंदिया चीख उठी।

अब राजेश फिर तेज तेज चोदने लगा।

बिंदिया की खुबसूरत चूतड पर thappad मार मार कर लाल कर दिया।

बिंदिया के bur में लंद सर सर अंदर बाहर होने लगा।

बिंदिया फिर से जन्नत में पहुंच गई। राजेश को भी बिंदिया की chudai me एक अलग मजा आने लगा।

राजेश लगातार ठोकता रहा। कमरे में बिंदिया की सिसकारी और चीखे गूंजती रही।

उसके बाद राजेश ने बिंदिया की bur से लंद निकाल दिया और उसे अपनी गोद में उठा कर अपना लंद उसकी bur में डाल कर हवा में उछाल उछाल कर चोदना सुरू कर दिया।

बिंदिया किसी बंदरिया की तरह हवा में उछल उछल कर chud रही थी। वह राजेश की मर्दाना ताकत देख कर दंग थी।

फाच फ़च आवाज करता huwa लंद bur फाड़कर अंदर बाहर हो रहा था। तभी बिंदिया फिर मूतने लगी।

राजेश ने लंद बाहर निकाल लिया।

राजेश ने बिंदिया को बेड में लिटा दिया। फिर अपना लंद उसकी bur में डाल कर गच गच चोदने लगा। राजेश के लंद bur की सफेद रस से लसलसा दिखाईदे रहाथा। उसकी योनिसे सफेद पानी लंद सी होता हुआ अंडकोष से टपकन लगा।

बिंदिया तो जन्नत में थी। ताभी राजेश ने लंद बाहर निकाल लिया और बेड पार लेट गया।

बिंदिया को ऊपर आने का इशारा किया। बिंदिया बेड के ऊपर चढ़ गई और राजेश के लंद के पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर बैठ गई।

बिंदिया राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी। राजेश बिंदिया की कमर पकड़ कर पीछे से कमर उचका उचका कर लंद को bur की गहराई में ठेलने लगा।

एक बार फिर सी दोनो आनंद के गोते लगाने लगे। बिंदिया इतनी गर्म हो गई की खुद को रोक न सकी और चीखते हुवे झड़ने लगी।

वह राजेश से लिपट कर सुस्ताने लगी।

कुछ देर बाद राजेश बिंदिया को नीचे कर लिया खुद ऊपर आ कर उसकी चूचियों पीने लगा। ओंठ चुसने लगा।

बिंदिया फिर गर्म हो गई।

अब राजेश ने बिंदिया को घोड़ी बना दिया।

और पीछे से लंद डाल कर चोदना शुरू कर दिया। एक ऊंगली उसकी गाड़ में घुसा दिया। बिंदिया चिहुंक उठी।

राजेश गाड़ में ऊंगली अन्दर बाहर करने लगा। दिव्या देख कर मजे ले रही थी। बीच बीच में राजेश का लंद योनि सी निकाल कर चूस लेती फिर उसे योनि में ठेल देती।

अब राजेश ने लंद को योनि से निकाल कर गाड़ में डालने की कोशिश करने लगा। बिंदिया छटपटाने लगी। राजेश अपना लंद गाड़ मे डालने में सफल हो गया।

लंद गाड़ फाड़कर आधे से ज्यादा अदंर घुस चुका था। राजेश अब धीरे धीरे गाड़ मारने लगा।

बिंदिया दर्द सी चीखने लगी।

लंद धीरे धीरे गाड़ में अपनी जगह बना लिया अब बिंदिया को दर्द के साथ मजा भी आने लगा।

राजेश अब अपना स्पीड बढ़ा दिया। लंद गाड़ में तेजी से अंदर बाहर होने लगा। लंद ने गाड़को पूरी तरह फैला दिया।

अब राजेश लंद के कभी गाड़ तो कभी bur में डाल कर दनादन चोदने लगा।

कमरे में बिंदिया की चीख तो कभी सिसकारी गूंजने लगी।

राजेश भी बहुत अधिक उत्तेजित हो गया वह झड़ने की स्थिति में आ गया।

वह दिव्या की ओंठ को चूसते हुवे बिंदिया को चोदने लगा।

आह आह बेबी मै आने वाला हूं, आई एम कमिंग बेबी आह मां आह,,, कराहते हुवे बिंदिया की योनि को अपनी वीर्य से पुरा भर दिया। गर्म गर्म वीर्य को अंदर महसूस कर बिंदिया भी एक बार फिर झड़ गई।

दोनो बेड पर ही लुड़क कर सुस्ताने लगे। बिंदिया ने राहत की सांस ली।

दिव्या ने अपने अलमारी से एक गोली निकाली और बिंदिया को खाने को दे दी।

दिव्या _काकी ये गोली खा लो, नही तो तुम पेट सी हो सकती हो।

बिंदिया ने गोली खा ली।

उसके बाद बिंदिया अपने कपड़े पहन कर वहा से चुपके से निकली और अपने कमरे में आ गई।

राजेश ने उसे चोद चोद कर उसका बुरा हाल कार दिया था।

राजेश से चुदाने में उसे इतना आनद मिला था जिसकी कल्पना भी उसने नही की थी।

सुबह उठी तो ठीक से चल नहीं पा रही थी। वह बाथरूम में जाकर अपनी bur और गाड़ की हालात देखी, जो बुरी तरह सूज गई थी।
 
बिंदिया राजेश से चुदने के बाद, राजेश की ओर उनका झुकाओ बढ़ गया।

राजेश जब किसी सेविका से कुछ मंगाती, बिंदिया उस सेविका की जगह खुद राजेश की सेवा में लग जाती। बिंदिया राजेश के आस पास ही दिखाई पड़ने लगीऔर यह बात रत्नवती को खटकने लगी।

रत्नवती _ये बिंदिया कभी रशोई के काम में रूचि नहीं लेती थी। हमेशा दूसरी सेविकाओं पर हुकुम चलाती थी। राजेश के आने के बाद इसे क्या हो गया है। ये राजेश की आवभगत करती रहती है। राजेश को क्या जरूरत है नही है, पूछती रहती है। कभी भोजन नही परोषती थी, अब तो हर चीज राजेश को ही पहले परोस रही है, ठाकुर के सामने ही।पहले तो ये ठाकुर का ही काम करती थी। आखिर इसके अंदर इतना बदलाव कैसा आया? क्यू आया, ये सब बाते रत्नवती सोचने लगी। वह बिंदिया की क्रिया कलापो पर नजरे रखने लगी। और अपनी खास सेविकाओं को भी बिंदिया पर नजर रखने के लिए कह दी।

इधर ठाकुर को भी लगने लगा की बिंदिया मुझे छोड़कर राजेश का ज्यादा ख्याल रखने लगी है वह बिंदिया को अपने कमरे में बुलाकर पूछा।

ठाकुर _बिंदिया ये मै क्या देख रहा हूं। तुम मुझे छोड़कर राजेश के आस पास ज्यादा मंडराने लगी हो। उसकी खातिर दारी कुछ ज्यादा ही कर रही हो। और कुछ ज्यादा ही बन ठन कर रहने लगी हो।

बिंदिया _हुजूर मै तो वहीं कर रही हूं जो आपने कहा था।

ठाकुर _मै कुछ समझा नही।

बिंदिया _हुजूर आपने ही तो कहा था कि राजेश को अपनी जाल में फसाओ। मै वही कर रही हूं। राजेश को फसाने की कोशिश, फिर आपका काम आसान हो जाएगा राजेश पर झूठा इल्जाम लगा कर उसे हवेली से निकलवाने का।

ठाकुर _ओह तो ये बात है, मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। मुझे लग रहा था कि कही मेरे बेटियो और पत्नि की की तरह उस लडके ने तुम पर भी तो कोई जादू नही कर दिया।

बिंदिया _हुजूर ये आप कैसी बाते कर रहे हैं, मै आपके सिवा भला और किसी के बारे में सोच सकती हूं। मै तो सिर्फ आपकी हूं और आपकी ही बनकर रहूंगी।

ठाकुर _ये हुई न बात। चल काफी दिन हो गया, आज मुझे खुश करदे।

ठाकुर बिंदिया को चोदने लगा।

बिंदिया ठाकुर से बेमन से chud रही थी उसे मजा नही आ रहा था।

Chudai खत्म होने के बाद।

ठाकुर _बिंदिया तुम उस लड़के को जल्द से जल्द अपनी जाल में फसाओ। फिर साले को धक्का मार के उसे बाहर भगाएंगे।

बिंदिया _जी हुजूर मै इसी काम में लगी हूं।

ठाकुर _हा और मुनीम की बेटी दिया को भी मेरे बिस्तर तक लाने पर काम करो, साली क्या माल है जब से पार्टी में देखा है मेरे दिल में उतर गई है। क्या वो हवेली में आती है।

बिंदिया _जी हुजूर दिया तो हवेली आती रहती है। राजेश से कुछ परीक्षा की तैयारी के लिए, पुस्तक खोल कर, राजेश को समझाने कहती हैं, दोनो हस हस कर इधर उधर की बाते भी करते रहते हैं।हुजूर कही ऐसा न हो दिया, तुम्हारी तरह राजेश के दिल में उतर गया तो। आप हाथ मलते रह जायेंगे।

ठाकुर _ये तुम क्या बक रही हो।

बिंदिया _हुजूर जो कह रही हूं सच कह रही हूं।

ठाकुर _मुनीम जी को बताना पड़ेगा।

बिंदिया _जी हुजूर,इससे पहले की दोनो के बीच कोई चक्कर चल जाय। आप मुनीम जी को बोलिए, वह दिया को राजेश से दुर रहने को कहे।

एक दिन दोपहर में राजेश का दोपहर में ही chudai का मन बन गया। बिंदिया आज कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। राजेश से रहा न गया। वह सोफे पर बैठा था। बिंदिया पानी लेकर आई। राजेश ने उसे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।

और बिंदिया की चूची मसलने लगा।

बिंदिया _दामाद बाबू आज तो बड़े मूड में लग रहे हो।

छोड़ों कोई देख लेगा तो, तुम्हारी बदनामी हो जाएगी,,,

राजेश _आज तो बड़ी हॉट लग रही हो काकी,, छोड़ने का मन नही कर रहा है।

बिंदिया _अगर इतना ही मन कर रहा है तो चलो मेरे कमरे में, पर यहां नही,,, कही तुम्हारी सास को पता न चल जाए।

राजेश _अच्छा तो चलो फिर,,,

राजेश बिंदिया को अपने कमरे में ले गई और दरवाज़ा बंद कर दी।

इस सब घटना को रत्नवती की खास सेविका देख ली। इस बात की जानकारी उसने रत्नवती को दी।

रत्नवती_ये तुम क्या कह रही हो,

सेविका _रानी मां मैने जो भी बात बताई बिलकुल सच है आप खुद भी जाकर देख सकती हैं।

रत्ना vati सेविका के साथ बिंदिया की कमरे तक गई।

कमरे की दरवाज़ा पर कान लगाकार, सुनने की कोशिश की। कमरे के अंदर बिंदिया की सिसकारी और चीखे सुनकर उसे यकिन नही huwa

रत्नवती_हे भगवान आखिर वही huwa जिसका डर था। ये बिंदिया पहले तो ठाकुर को अपने जाल में फसाया और अब राजेश को। इस बात का पता दिव्या को चला तो पता नही उस पर क्या बीतेगी।

इस चुड़ैल ने मेरी जिंदगी खराब की तो की मै अपनी बेटी की जिंदगी को खराब होने नही दूंगी।

रत्नवती अपने कमरे में आई और सोचने लगी की उसे क्या करना चाहिए।

उसने सोचा क्या इस बात की जानकारी दिव्या को दू।

फिर सोचा की दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है अगर यह बात दिव्या को पता चला कि उसका पति अधेड़ महिला के साथ रंगरेलियां मना रहा है, उसकी क्या दशा होगी। उसके बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। नही मै दिव्या को यह बात नहीं बताऊंगी।

मुझे ही कुछ करना होगा। मुझे राजेश से बात करनी होगी।

राजेश जब बिंदिया की chudai करके, कही बाहर जा रहा था। तभी सेविका ने उससे कहा।

सेविका _राजेश भईया आपको रानी मां अपने कमरे में बुलाई है।

राजेश _क्या सासू मां मुझे,,,

सेविका _हां,,,

राजेश रत्नवती के कमरे में गया।

राजेश_रानी मां आपने मुझे बुलाया, कुछ काम था क्या?

रत्नवती_हां, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

राजेश _मां जी क्या huwa आप कुछ नाराज लग रही है। क्या बात है मुझसे कोई गलती हो गई क्या?

रत्नवती_दामाद जी ये जो तुम कर रहे हो न, ये बिलकुल गलत है।

राजेश _क्या मां जी, मै क्या गलत कर रहा हूं, मै समझा नही।

रत्नवती_तुम भोले मत बनो, मुझे सब पता चल गया है तुम्हारे और बिंदिया के बीच क्या चल रहा है।

राजेश _ओह तो आप इसलिए मुझसे नाराज हो।

रत्नवती_कभी सोचा है अगर यह बात दिव्या को पता चली तो उस पर क्या बीतेगी?

राजेश _मां जी आप दिव्या की चिंता न करो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

रत्नवती_मै दिव्या की मां हूं, मै उसकी चिंता नही करूंगी तो और कौन करेगा। वैसे तुम ये क्यो कह रहे हो कि दिव्या को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

राजेश _क्यों की दिव्या जी को यह बात पता है?

रत्नवती_क्या, दिव्या को यह बात पता है?

राजेश _हां, दिव्या ने ही मुझे यहां की सेविका के साथ संबंध रखने को कहा।

रत्नवती_ये तुम क्या कह रहे हो, मै कुछ समझी नहीं, दिव्या भला तुम्हे दूसरे औरतों से संबंध बनाने क्यों कहेगी।

राजेश _मां जी, आपको तो पता है सुहागरात के दिन की घटना। उस घटना के बाद डॉक्टर ने हमें संबंध बनाने से मना किया है। नही तो बच्चा गिर सकता है।

उस दिन के बाद हमने फिर संबंध नही बनाए।

लेकिन दिव्या को ये फिल होने लगा की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है।

कभीकभी मै दिव्या जी को अपने क़रीब पा कर उत्तेजित हो जाता था। मै रात में ठीक से सो नही पाता था।

दिव्या अपने को दोष देने लगी की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है। इसलिए उसने ही यह निर्णय लिया की जब तक उसकी डिलीवरी नही हो जाती, तुम इस हवेली की सेविका के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर सकते हो।

मैने उसे समझाया कीमेरी चिंता मत करों, मै खुद पर नियंत्रण रख लूंगा, लेकिन दिव्या नही मानी और वह खुद बिंदिया काकी से जाकर मेरी शारीरिक जरूरत को पुरा करने के लिए बोली तो काकी मान गई।

उसके बाद मैं और बिंदियां काकी संबंध बनाने लगे।

रत्नवती_, मुझे दिव्या ये बात बताई नही।

राजेश _मां जी आप उसकी मां है उसे लगा होगा की यह बात अगर आपको बताई तो आप इसके लिए साफ मना कर देंगी। इसलिए नही बताई होंगी।

रत्नवती_कोई मां ये कैसे स्वीकार करेगी की उसका दामाद उसकी बेटी को छोड़कर किसी पराई औरत से संबंध रखे।

और वो भी उस बिंदियां जैसी औरत से, तुम्हे पता भी है वो कैसी औरत है?

रत्नवती_देखो राजेश बेटा, वो बिंदियां अच्छी औरत नही है, वो तुम्हे बदनाम कर देगी। वो ठाकुर की रखैल है। वो तुम्हे मुसीबत में डाल देगी।

तुम्हे बिंदिया से दुर रहना होगा।

राजेश _ठीक है मां जी अगर आप चाहती है की मै बिंदियां काकी से दुर रहूं तो आपका आदेश का पालन होगा।

रत्नवती_क्या तुम सच कह रहे हो?

राजेश _हां मां जी,,, पर,,,

रत्नवती_पर क्या दामाद जी,,,

राजेश _मां जी आखिर मैं भी तो इंसान हूं न, दिव्या जी के डीलवरी तक खुद पर नियंत्रण रख पाना,,, आप तो समझ ही गई होगी,,,

रत्नवती_अच्छा ठीक है मेरी एक विश्वाश पात्र सेविका है, तुम उसके साथ अपनी जरूरतें पूरी कर लेना ।

राजेश _मां जी क्या वो सेविका जवान है?

रत्नवती_हां तो, ते तो तुम्हारे लिए अच्छा है न, उस बुढ़िया बिंदिया मे से तो अच्छी है।

राजेश _मां जी कही वह सेविका, किसी दूसरे से पेट से होकर मुझ पर इल्जाम डाल दी तो,,, वह जवान है तो किसी के साथ तो उसका संबंध होगा न।

रत्नवती_तो तुम क्या चाहते हो।

राजेश _मै तो यही चाहता हूं जो आप चाहती हो, हवेली की बदनामी न हो।

अच्छा आप इधर आईए मै आपसे कुछ सवाल पूछता हूं।

राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर उसे बेड में बिठा कर, उसके बाजू में बैठ गया।

राजेश _अच्छा ये बताओ आप दिव्या की मां हो न।

रत्नवती_ये भी कोई पुछने की बात है।

राजेश _जब दामाद की देखभाल बेटी न कर पाए तो बेटी का घर बचाने के लिए दामाद का ख्याल बेटी की मां रखे तो क्या ये गलत होगा।

रत्नवती_दामाद जी ये तुम क्या कह रहे हो?रत्नवती शर्म से पानी पानी होते हुए अपनी नजरे नीचे झुका ली।

राजेश _मां जी आप भी तो मेरी जरूरत पूरी कर सकती हों न, अगर आपको बिंदिया काकी पर भरोसा नहीं है तो।

दामाद का ख्याल सासू मां से अच्छा और कौन रख सकता है।

राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर चूम लिया।

अब बेटी का फर्ज तो मां को ही पुरा करना पड़ेगा।

बोलो न मां जी,,,

रत्नवती सोच में पड़ गई,,,

राजेश _मां जी क्या सोचने लगी आप,,,

रत्नवती बेड से खड़ा हो गई।

रत्नवती_दामाद जी ये आप क्या कह रहे है, ये गलत है।

राजेश भी बेड से उतर कर रत्नवती को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।

राजेश _मां जी कुछ गलत नहीं है।

रत्नवती का दिल जोरो से धड़कने लगा।

रत्नवती_बेटा छोड़ों न किसी के पता चल गया तो अनर्थ हो जायेगा।

राजेश _मां जी ये बात किसी जो पता नहीं चलेगा। और रही बात दिव्या की तो मुझे पता है दिव्या हमारे बीच नए संबंध को वो स्वीकार लेगी।

राजेश ने रत्नवती की खुली पीठ को चूम लिया।

रत्नवती सिसक उठी ।

रत्नवती_दामाद जी, यहां तो जवान और खूबसूरत सेविकाय है, मै तो बूढ़ी हो गई हूं।

राजेश रत्नवती को आईने के सामने ले गया।

राजेश _ मां जी,खुद को देखो आईने में, आप दिव्या और गीता जी की मां नही बड़ी बहन लगती है।

राजेश ने एक रत्नवती को जकड़ कर एक स्तन दबाते हुए कहा।

देखो कितनी कसावट है अब भी आपकी स्तनों में बिलकुल कुंवारी लड़कियो की तरह।

रत्नवती , सिसक उठी उसकी दिल की धड़कन बहुत बड़ गई। राजेश की हरकत से उसकी योनि में पानी भर गया।

रत्नवती_दामाद जी मुझे सोचने का वक्त दो।

राजेश ने रत्नवती को छोड़ दिया।

राजेश _ठीक है मां जी, कोई जबरदस्ती नही है, आपकी मर्जी, अगर राजी हो तो कल पिंक कलर की साड़ी पहनना मै समझ जाऊंगा आप तैयार है।

अब मैं चलू,,

रत्नवती ने अपना हा में सिर हिलाया।

राजेश काम से सूरज पुर चला गया।

रात में राजेश घर आया।

रात्रि में भोजन के समय रत्नवती राजेश के सामने ही डाइनिंग टेबल में भोजन करने बैठी थी पर उसे राजेश के सामने बहुत शर्म महसूस कर रही थी।

भोजन पश्चात रत्नवती अपने कमरे में चली गई। वह रात भर सोचती रही वह राजेश के साथ नया रिश्ता शुरू करे की नही।

उसने सोंचा की राजेश को अगर न कह दी तो वह नाराज न हो जाए और वह मेरा कहना भी नही मानेगा। वह उस बिंदिया की जाल में फस जायेगा। नही नही मैं अपनी बेटी की जिंदगी बरबाद होने नही दे सकती। मै उसकी मां हूं। मेरी बेटी दामाद जी की शारीरिक जरूरत पुरा नही नही कर पा रही है तो मेरा भी फर्ज बनता है अपनी बेटी का घर बचाने दामाद जी की ईच्छा पूरी करू।

रत्नवती सुबह उठी आज नहाने से पहले अपने शरीर की अनचाहे बालों को अच्छे से हटाईऔर खूब रगड़ रगड़ कर नहाई। ठाकुर ने रत्नवती को जब से दिव्या को पेट में थी चोदना बन्द कर दिया था। तब से रत्नवती ने chut की बाल साफ़ नही की थी।

नहाने के बाद रत्नवती,

गुलाबी साड़ी पहन कर सेविकाओं से श्रृंगार करवाई।

आज बहुत ही खुबसूरत लग रही थी।

उसने सेविकाओं से राजेश के बारे में पूछा वो कहा है ताकि वह राजेश को दिखा सके।

सेविकाओं ने कहा वो किसी काम से बाहर चला गया है।

दिव्या ने जब ने जब अपनी मां को इस रूप में देखा।

दिव्या _मां आज तो बड़ी कमाल की लग रही हो। कही जा रही हो क्या?

रत्नवती को समझ नही आ रहा था कि क्या कहे, उसने कह दी बेटी काफी दिन हो गए न हम मंदिर नही गए तो सोची चलो मंदिर चले जाते है जाओ तुम भी तैयार हो जाओ।

दिव्या _मां पहले बताती तो राजेश को बाहर जाने से रोक लेती वो भी चला जाता हमारे साथ।

कोई बात नही बेटी हम दोनों चलें जायेंगे। तुम राजेश को फोन कर देना वो मंदिर आ जायेगा।

दिव्या _ठीक है मां।

राजेश को दिव्या ने फोन कर मंदिर बुलाया।

राजेश जब रत्नवती को गुलाबी साड़ी में देखा तो। मुस्कुराने लगा।

रत्नवती शर्म से सिर झुका ली।

मंदिर में दर्शन के बाद। दिव्या और रत्नवती कार से घर आ गए।

राजेश को कुछ काम था वह सूरज पुर चला गया।

राजेश के लंद में अभी से हल चल होने लगा। राजेश नअपने लंद को सहलाते हुए कहा। शाला रात होने का इन्तजार तो कर सासू मां के अंदर जाने अभी से छटपटा रहा है।

रत्नवती हवेली आने के बाद राजेश के बारे e ही सोचने लगी पता नहीं राजेश क्या क्या करेगा उसके साथ। उसकी योनि गीली हो चुकी थी। पतानहीं राजेशके साथ वो सब कैसेकर पाएगी, उसे बड़ी शर्म महसूस हो रही थी।

वर्षो बाद उसकी शरीर की औरत जाग उठी थी। ठाकुर ने उसे आखिरी बार कब चोदा था। भुल गई थी।

राजेश हवेली लौटा।

रात में सभी लोग भोजन के लिए बैठे थे। ठाकुर भी बैठा था।

राजेश और रत्नवती आमने सामने बैठे थे।

रत्नवती राजेश से नजरे बचा रही थी।

राजेश को मजाक सूझा।

उसने अपने पैर से रत्नवती की पैर को रगड़ते लगा।

रत्नवती चौंकी, वह राजेश की ओर तिरछी नजरों से देखि।

सबकी नजरों से बचा कर न में सिर हिलाई।

पर राजेश नही माना, उसे मजा आ रहा था। वह रत्ना वटी की पैरो को अपने पैर से रगड़ने हुवे ऊपर ले जाने लगा।

रत्नवती सिसक उठी।

गीता _मां क्या हुआ?

राजेश _लगता है सासू मां को मिर्ची लग गई।

रत्नवती गुस्से से राजेश की ओर देखने लगा। राजेश ने उसे आंख मार दी।

रत्ना वटी का मुंह खुला का खुला रह गया।

वैसे रत्नवती को राजेश की छेड़ खानी अच्छा लग रहा था जब कि ठाकुर भी वहीं बैठा था उसे पता नही था सास और दामाद के बीच क्या चल रहा है।

राजेश को रत्नवती को छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था।

वह अपना पैर ऊपर रत्नवती के टांगो तक ले गया। और अपने अंगूठे से उसकी पैंटी को रगड़ दिया ।

रत्नवती फिर सिसक उठी।

गीता _मां लगता हैं आपको कुछ ज्यादा मिर्ची लगी है लो पानी पी लो।

रत्नवती _हूं,

रत्नवती चुपचाप पानी पीने लगी और राजेश को तिरछी नजरों से घूरने लगी।

राजेश मुस्कुराने लगा।

राजेश अपनी एक कान पकड़ लिया। और इशारे से माफ़ी मांगा ।

रत्नवती मुस्कुराने लगी।
 
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