Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 13 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९७

अभी तब रमा तीनसे चार बार जड चुकीथी.. तो उनकी चुतमेभी जलन महेसुस होने लगी.. तकरीबन २५ मीनीटकी धका पैनी जबरदस्त चुदाइके बाद भानुके लंडने भी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर भानु रमाकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडने लगता हे.. तब रमाभी भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. तभी जडतेही भानु रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा उनकी पीठ सहेलाते भानुसे नजरे चुराने लगी.. ओर उसने राहतकी सांस ली.. तबतक भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइथी....अब आगे

आज देवायतकी हवेलीमे काम ओर रती स्यंम अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा रहे थे.. तो जाहीरसी बात हे आज पुरे गांवमे ओर आजु बाजु सब जगाहपे अपनी काम वासनाका असर दीखाता.. पुरे गांवमे कामोतेजनाकी लहेर छागइ.. जीतनेभी जवान ओर आधेड थे.. यहा तक सभी बुढेके तनमे भी हलचल तेज होगइ थी..

सबके तनमे अ‍ेक अलगही नसा छाने लगा.. सभी लोग वासनाकी आगमे जलते संमुदरमे डुबकीया लगाने लगे.. तभी नीचेकी ओर दया ओर रजीयाभी आपसमे नंगी होकर लेस्बीयनका खेल खेल रहीथी.. दोनोही सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाट रही थी..





आज पुरे गांवमे वासना इस कदर हावी हो रहीथी.. जैसे पुरे गांवमे कीसीने जादु करदीया हो.. कीसीको कुछ पताही नही थाकी ये सब क्यु हो रहा हे.. ज्यादातर गांव वालोका आपसमे ही कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. कोइ अपनी विधवा बुआके साथ.. तो कोइ अपनी भाभीके साथ.. तो कोइ अपनी चाचीको सेट करते चोदता था.. तो कोइ अपनी कामुक बडी अम्माको सेट करके चोद लेता..

ज्यादातर जवान लडकीया बदनामीके डरसे अपनेही घरमे आपसी रीस्तोमे यानी अपने सगे भाइके साथ अगर सगा भाइ नही होता तो चाचाका लडका या बुआके यातो मामाका या बडे ताउके लडकेके साथ अफेयर करके अपने तनकी प्यास बुजाती थी.. ताकी बहार वालोको उनपे सकभी ना पडे ओर अपने यारको घरमे ही बीन्दास्त मील सके.. ओर लडकेभी कीसी बहारकी लडकीके बजाये अपनी बहेनको सेट करते उनसे प्यारके खेलमे लगे रहेते थे..

अ‍ेक घरमे तो लडका सहेरमे नोकरी करताथा तो महीनो तक नही आताथा.. ओर आताभी तो महीनेमे सीर्फ अ‍ेक बार.. तो उनकी बीवीका अपने ससुरसेही अफैर होगया था.. जो आये दिन उनसेही अपनी प्यास बुजालेती थी.. तो कोइ विधवा अपने देवरसे या भतीजेसे तो कोइ अपने भांजेको सेट करके उनसे चुदवाकर अपनी प्यास बुजाती.. ज्यादातर घरमे कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. ओर इस बारेके कीसीको भनकभी नही थी की.. गांवमेभी अ‍ैसा हो सकता हे..





















ओर ज्यादातर कुआरे लडके अपनी सगी बहेन यातो रीस्तेकी कजीन बहेनको सेट करते उनसे अपने तनकी आग बुजा लेतेथे.. जो आये दीन मौका मीलतेही उसे चोद लेते थे.. लेकीन आज सबके रीस्ते खुलकर उजागर होनेकी कगारपे आगये.. आज सबपे काम ओर रतीकी मौजुदगीका अहेसास होने लगाथा.. सबपे काम हावी होने लगा.. सब पागल जैसे होने लगे.. ओर अपने साथीके साथ मीलन करनेको तडपने लगे..

















आज काम पुरी तराह सबपे हावी होने लगा तो कोइ अपनी बुआके रुममे चला गया तो कोइ अपनी भाभीको स्टोरेजके रुममे लेजाकर चोदने लगा.. तो कीसीने अपनी चाचीको अपनेही रुममे बुला लीया तो बहुने ससुरको इसारा करके बाथरुममेही बुला लीया ओर वो दोनो वहा खडे खडे चुदाइ करने लगे.. तो अ‍ेक लडकेने तो अपनी अम्माको देर रात कीचनमे पानी पीने आइ तबही दबोच लीया.. ओर पीछेसे लंड घुसाके उसे कीचनमेही चोदने लगा..

ओर मजेकी बात आज कोइ ओरत हो या लडकी कीसीको मना नही कर रही थी.. क्युकी आज सबके दिमागमे काम ओर रती हावी थे.. लडके या मर्द कीसीको चोदनेके लीये तडप रहेथे तो लडकीया ओर ओरते अपनी चुतमे अपने यारका लंड लेनेको तडप रहीथी.. ओर जीनके सेप्रेट रुम थे वो अपनी बहेनको वही बुलाकर चोदने लगे.. तो कइ लडके घरोकी छतमे टंकीके पीछे अपनी बहेनको बुलाकर चोदने लगा..

कीसीको कुछ पता नही थाकी आज सब क्या हो रहा हे.. सबके दिमागमे आज वासना हावी होकर तांडव मचा रहीथी.. आज पता चला की गांवमेभी अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. आज बाबाने कही हुइ भवीस्य वाणी सचमे साबीत होते दीख रही थी.. जो कुछही महीनोमे सबके रीस्ते सार्वजीक रुपसे उजागहर होनेकी कगारपे थे.. तब पता नही पुरे गांवमे कैसा तांडव मचेगा..

तभी रश्मी ओर चंपाभी अपनी चुतमे जोरोसे उंगली करते अपने आपको सांत करती रही.. तो आज गांवके डो. सुधीरभी अपनी बीवी नीशाको चोद रहाथा.. तब नीशाभी खुस होकर सुधीरसे चुदवाने लगी.. क्युकी सुधीर उनकी गलत आदतोकी वजहसे नीशाको बहुतही कम फीजीकल होताथा.. जीनकी वजहसे नीशाभी देवायतकी ओर ढलने लगी थी.. ओर जब आज उसे सुधीर चोद रहाथा तब नीशा सुधीरकी जगाह देवायतको इमेजींग करते चुदवा रहीथी..

ओर कुछही देरमे सुधीरके लंडने जवाब देदीया.. ओर नीशा सुधीरको मनही मन गालीया देने लगी.. ओर वही बेठकर अपनी चुतमे उगली करने लगी.. क्युकी नीशा बहुतही खुबसुरत ओर अ‍ेकदम गोरी पतली लडकीथी.. उनके लंबे बाल उनके घुटने तक लहेराते थे.. जीनकी वजहसे वो बहुतही खुबसुरत ओर आकर्सक दीख रहीथी.. जो नीशाके माबापने नीशाकी सादी सीर्फ सुधीरको डोक्टर होनेकी वजहसे करदी थी..

लेकीन नीशा इतनी खुबसुरतथी की सुधीर नीशाको देखतेही जड जाता था.. ओर नीशाको हमेसाकी तराह प्यासी रख देता था.. ओर इसी बातपे दोनोके बीच अक्सर काना सुनी होजाती.. तब नीशाको उंगलीसे अपने आपको सांत करना पडता था.. सुधीरका लंड बहुतही छोटा ओर पतलाथा.. नीशाने सुधीरको कइ बार अपना इलाज करवानेको कहा लेकीन सुधीर हर बार उनकी बातको बहेस करके टाल देता.. क्युकी उनका असली रीजन सीर्फ वोही जानता था.. वो देवायतके साथ कोलेजमे पढताथा तबसे ही वो गांडु था..

तब ना चाहते हुअ‍ेभी नीशा देवायतसे आकर्सीत होकर उनकी ओर ढलने लगी थी.. देवायत जबभी सुधीरको मीलने आता नीशा बस उनकोही देखती रहेती.. ओर उनसे बाते करनेकी कोसीस करती.. ओर मौका मीलतेही देवायतको कामुक इसारा भी करती.. इस बातको देवायतभी भली भांती जान चुकाथा.. की सुधीर नीशाको खुस नही रख पाता.. ओर देवायतभी उनका रीजन जानता था..

तो दुसरी ओर रमेशभी अपनी बीवी चारुकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. लेकीन वो ज्यादा देर टीक नही पाया.. ओर चारुकी चुतमे जल्दी खलास होकर उनके उपरसे उतर गया.. ओर चारुकी गालीया सुनकर सो गया.. तब चारु नंगीही उठकर फटाफट वंदनाके रुममे चली गइ तो वंदनाभी चदरके अंदर उंगली कर रहीथी.. ओर चारुने देख लीया.. तो वोभी दरवाजा बंध करके हसते हुअ‍े नंगीही उनके साथ सोते वंदनाकी चदरमे घुस गइ..

चारु : (हसते) वंदु अकेली अकेली क्या कर रही हे..? तु कीसीको सेट करके सादी करले.. कब तक अ‍ैसे उंगलीसे काम चलायेगी.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते हसते धीरेसे) मम्मी क्या हुआ..? क्या.. आजभी पापाने फीर आपको अधुरी छोड दीया..? मोम आपनेभी सादी करके क्या तीर मारलीया.. इनसेतो अच्छी मेरी उंगली हे.. हें..हें..हें..

चारु : (जुठा गुसा करते वंदनाको बाहोमे भरते) तु उस कमीनेका नाम ही मत ले.. अगर अ‍ैसा पती तुजे मीला होतातो तुजे पता चलता.. चल छोड ये सब बाते.. पहेले मुजे अ‍ेक बार ठंडी करदे.. फीर मे तुजे कर दुगी.. तेरे पापाने आजभी मुजे अधुरी छोड दीया.. पता नही तु मर्दके बीना कैसे रेह लेती हे.. मेतो अ‍ेक दिनभी लंडके बीना ना रहु.. ओर आज पता नही कैसी आग लगी हुइ हे.. क्या तुजे अ‍ेकबारभी इच्छा नही होतीकी कीसी मर्दका लंड अपनी चुतमे लेलु..?

वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते) मम्मी तु फीर सुरु होगइ..? तु हे ना.. हम दोनो मां बेटी अ‍ेक दुसरेका अ‍ैसेही खयालतो रखती हे.. तो फीर मुजे मर्दकी क्या जरुरत हे.. ओर तुमने भी मर्दसे सादी करली हे.. क्या हुआ..?

चारु : (होंठ चुमते) बेटी.. अभी तक तुमने मर्दका स्वाद चखा नही हे इसीलीये तु अ‍ैसे बोल रही हे.. बस अ‍ेक बार कीसी असली मर्द से पाला पड जायेगा तब तु उनके बीना रहे नही पायेगी.. मेरी मान तु देवायतको पकडले.. वोतो राजा हे वोतो कीतनी भी सादीया कर सकते हे.. मुजे पुरा यकीन हे वो तुजे अपना लेगा.. ओर तुजे बहोत खुस रखेगा.. बस अ‍ेक बार उनसे प्रपोज करते तो देख..

वंदना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी तुम फीर सुरु होगइ..? अरे बाबा उनकी सादी होगइ हे.. अब मुमकीन नही हे.. अगर तेरी बात मान भी लु तो क्या मंजुभाभी पुनो सब क्या सोचेगी..? ओर उसने मुजे युस करके सादी करनेसे मना करदीया तो..? तेरी ओर पापाकीही बदनामी होगी..

चारु : (कीस करते) बेटी जहा तक मे उसे जानती हु वो अ‍ैसा नही हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. वो तुजे खुस रखेगा.. वैसेभी इन तेरे पापा जैसे नामर्दसे तो अच्छा उनकी रखैल बनके रहे.. अगर तुजेभी मेरे जैसा पती मील गया तो हम दोनोकी जींदगी नर्क बन जायेगी.. इनसेतो अच्छा हे तु उनकी बीवी होजा.. अ‍ेक बार बात करके तो देख.. वरना मुजे मौका मीलातो मे बात करलुगी..





वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते उनके मनको टटोलने लगी) मम्मी.. अ‍ेक बार फीर सोचले.., अगर मे इस बारेमे आगे बढु.. तो क्या तुम सहेन कर पाओगी..? ओर मेरा साथ दोगी..? अगर उसने मुजे प्रेगनेन्ट करदीयातो पहेले तुमही मुजे घरसे नीकाल दोगी.. हम दुनीया वालोको क्या मुह दीखायेगे.. हमारी बहुत बदनामी होगी.. ओर वो पापाके खास दोस्तभी हे..

चारु : (सीरीयस होते) नही बेटी.. तुमने मेरे बारेमे अ‍ैसा सोचभी केसे लीयाकी मे तेरा साथ नही दुगी..? वंदु अगर तुम सचमे उनके साथ जींदगी बीताना चाहती हे.. तो मे तुम्हारे साथ हु.. बस अ‍ेक बार उनसे सादी करले.. फीर तु उनके साथ हवेलीपे रहे या फीर यही हमारे घरमे.. हमे कोइ फर्क नही पडता..

वैसेभी तु हमारी अ‍ैकलोती बेटी हे.. हमारे बाद तुजेही तो ये सब सम्हालना हे.. अबतो तेरी नोकरीभी लग जायेगी.. तो वोभी हमे चीन्ता नही हे की तु अकेली कैसे तेरा गुजारा करेगी.. बेटा.. मे हंमेसा तेरे साथ हु.. ओर तेरा साथ देती रहुगी.. ओर रही बात तेरे पापाकी तो उनकोतो मे समजा दुगी.. वो कुछ नही कहेगे..

वंदना : (खुसीसे जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. मम्मी आइ लव यु, मुजे पुरा यकीन थाकी तुम मेरा साथ जरुर दोगी, मम्मी इस बारेमे हम कल अकेले होगे तब बात करेगे, मुजे आपसे इस बारेमे कुछ बात करनी हे..

चारु : (हसते होंठ चुमते) अच्छा..? ठीक हे बेटा.. मुजे लगता हे इस बारेमे तुम कुछ आगे बढी हो.. हें..हें.. कोइ बात नही.. मे खुस हु.. बस तुम खुस रहेनी चाहीये.. मुजे तुम दोनोके रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही..

दोनोही मां बेटी अ‍ैसेही बाते करते गरम होने लगी ओर थोडी ही देरमे दोनो सीक्सनाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाटने लगी.. तब अचानक वंदना बेडसे उतर गइ ओर अलमारीसे बेल्ट वाला डील्डो नीकाल लीया ओर अपनी कमरपे बांधते चारुके उपर चड गइ ओर रबरका डील्डो चारुकी चुतमे घुसा दीया ओर अपनी मम्मीको अ‍ेक मर्दके भांती जोरोसे चोदने लगी.. तब चारु सातवे आसमानपे पहोंच गइ..





जब चारु जड गइ तब उनकी बेटी वंदनाके उपर चड गइ ओर वंदनाके होंठ चुमते अ‍ेक उंगली वंदनाकी चुतमे डालकर वंदनाको जडाके सांत करदीया.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेको चीपकके सोगइ.. दोनो अक्सर अ‍ेक दुसरेको अ‍ैसेही सांत करतीथी.. जब चारु बोम्बे गइथी तब वो वहासे अ‍ेक रबरका बेल्ट वाला डील्डो लेकर आयी थी.. लेकीन वंदना उसे इस्तेमाल नही करती ताकी वो अपनी वर्जीनीटी बेकरार रख सके.. क्युकी दिलके अ‍ेक कोनेमे उसे देवायतको मीलनेकी उमीद आज भी जींदा थी..

जो पुनमके साथ बातोसे उनकी उमीदभी बहुत जल्द पुरी होने वाली थी.. इसीलीयेतो आज उसने मौका मीलतेही चारुको कल अपने दिलकी बात बतानेको केह दीया.. जब पुरे गांवमे वासनाका खेल हो रहाथा.. तब लता ओर लखनभी कैसे दुर रेह सकते थे.... सब सोने चले गये तब लता ओर नीलम दोनोभी अ‍ेक बडे बेडपे सोनेकी तैयारीया कर रही थी.. दोनोने अपने नाइडके कपडे पहेन लीये.. तब नीलम ओर लता अ‍ेक दुसरेकी ओर मुह करते सोनेकी तैयारीया करने लगी.. तभी मौका मीलतेही लताने नीलमको कहा..

लता : (धीरेसे डांटते) नीलु.. ये सब क्या हे..? मेने देखा हे तुम ओर धिरेन कारमे बहुत कुछ मस्तीया कर रहे थे.. मे तुमसे केह देती हु.. तुम उस धिरेनसे दुर रहेना.. दोनो गाडीमे क्या हरकत कर रहेथे मुजे सब पता हे.. वो तेरे पीछे क्यु पडा हे..? तुने उनको कुछ कहा हे क्या..? देखना अभी उनकी सादी होने वाली हे..

नीलम : (सुनकर गभराते गांड फटने लगी तब धीरेसे) नही.. नही.. दीदी.. वो.. वो.. सीर्फ मेरी मस्ती कर रहे थे.. मैने उनको बहुत मना कीया.. लेकीन वो मानते ही नही थे.. उसमे मेरी कोइ गलती नही हे..

लता : (धीरेसे) नीलु.. मुजे पता हे.. मेने सब देखलीया हे.. वो तुने कहा कहा हाथ लगातेथे.. सच बताना.. तुजे मेरी कसम हे.. उसने तेरे बुब्सकोभी दबाया हेनां..? ओर वहा.. तेरे नीचेभी हाथ डाला थानां..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. आप ओर जीजु मस्ती करते प्यार कर रहेथेनां..? तो धिरेन जीजुने मुजे देखनेके लीये कहा.. ओर मे देखकर बहेक गइ.. तभी वो भी मेरे साथ ये सब करने लगे.. इसमे मेरी कोइ गलती नही हे.. मेने उनको बहुत मना कीया.. उनको बहुत रोकनेकी कोसीस की.. लेकीन वो नही माने.. मेरी अ‍ेकभी नही सुनते थे..

लता : (थोडी सांत होते) देख नीलु.. मेरी ओर तेरे लखनजीजु की तो सादी होने वाली हे.. वो मेरे मंगेतर हे.. अब तीन चार दीनमे ही धिरेनकी पुनो दीदीके साथ सादी होने वाली हे.. तुम उनसे दुर रहेना.. ओर वो बुलाये तोभी उनके पास अकेली मत जाना.. मुजे या पुनो दीदीको साथ रखके जाना.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. ओर वैसेभी इन सब चीजोके लीये तु अभी बहुत छोटी हे.. तेरी उमरही क्या हे..? कीतने साल हुअ‍े तुजे..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) दीदी.. वो.. १७ वा साल चल रहा हे.. आपकी सादीके अ‍ेक महीनेके बाद अठारवा लगेगा..

लता : (हसते धीरेसे) हंम.. मतलब तुजपे नइ नइ जवानी चड रही हे.. नीलु तुजे इस उमरमे ही अपने आपको सम्हालना हे.. तुजे बहुत खयाल रखना पडेगा.. वरना तेरे कदम कही बहेक गयेतो भाभी भैया.. हम सब कही मुह दीखाने लायक नही रहेगे.. तु अपने आपको सम्हालना.. ओर वहा सहेरमेभी तुजे बहुत सम्हालना हे.. बस अ‍ेक बार अच्छेसे पढाइ करले.. फीर मे जेठजीको कहेके तेरे लीये कोइ अच्छा पढा लीखा लडका ढुंढुगी.. ओर उनसे तेरी सादी करवाउगी.. समजी.. इन सब चीजोके लीये अभी तेरी उमर नही हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. धिरेन जीजुने मुजे कल फोन करनेको कहा हे.. मे क्या करु..?

लता : (चोंकते धीरेसे) क्या..? धिरेनने तुजे फोन करनेको कहा हे..? लेकीन क्युं..? बडा कमीना हे ये धिरेन.. पता नही पुनोदीदीका क्या होगा.. तुजे उसे फोन करनेकी कोइ जरुरत नही.. तु कल मेरे साथही रहेना फीर मे उसे फोनपे बात कर लुगी.. कमीना कहीका.. दिखनेमेतो कीतना भोला भाला लगता हे.. ठरकी कहीका.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. अब सोजा.. कल हमे जेठजीके साथ वापस गांव जाना हे.. हम वही बात करेगे.. सोजा..

कहा तो नीलमने राहतकी सांस ली.. ओर वो दुसरी ओर करवट लेकर सोगइ.. लेकीन उनके मनमे धिरेनको लेकर विचारोका घमासान युध्ध चलने लगा.. अब वो लताको कैसे कहेकी धिरेनने उनको कहा कहा हाथ लगाकर छेडाथा.. उनके गलेको गालको ओर उनके होठोको चुमलीया था.. ओर कइ बारतो उनके छोटे छोटे सतंरे जैसे बुब्सकोभी दबा लीया था.. तो दो बारतो उनकी चुतकोभी दबोच लीयाथा.. ओर उनके लंडको भी पकडा दीयाथा.. भलेही तब नीलम सरमाइ.. लेकीन इस खेलमे उनकोभी बहुत मजा आ रहाथा..

तब नीलम धिरेनकी हरकतके बारेमे सोचकर बहुतही सरमाइ ओर मुस्कराने लगी.. जीनकी वजहसे उनकी चुतमे पहेली बार हरकत हुइ.. उनको चुतमे मीठीसी खुजली होने लगी.. ओर उनकी चुत फडफडाने लगी.. आज नीलमको पहेली बार कीसीने इस तराह छेडाथा.. ओर नीलम इसे अपनी जींदगीका पहेला प्यार समजने लगी.. यही सब सोचते उनकी चुत आज फीरसे अ‍ेक बार फीर फडफडाने लगी.. क्युकी आज उनके उरप भी रतीजो हावी थी..

तब मंजुके अलावा कीसीको नही पताथाकी नीलमभी उन सबकी जींदगीका अ‍ेक महत्वका हिस्सा थी.. ओर नीलमका हाथ अनायसही उनकी नीकरमे होते चुतपे चला गया.. ओर नीलम धीरे धीरे चुतको सहेलाने लगी.. फीर वो चदरके अंदरही हाथसे अपनी चडीको थोडी नीचे करलेती हे.. ओर दोनो हाथोकी उंगलीयोसे अपनी चुतकी पंखडीयोके साथ खेलने लगती हे.. ओर खेलते खेलते आज पहेली बार धीरेसे अ‍ेक उंगलीसे अपनी चुतको सहेलाते धीरेसे चुतमे डाल देती हे.. तब वो आंख बंध करते स्वर्गकी सेर करने लगती हे..





तो दुसरी ओर नीलमसे बात करके लताभी काफी गरम हो चुकी थी.. क्युकी वो ओर लखनभी कारमे बहुत कुछ कर चुके थे.. ओर ये सब नीलमभी देख चुकीथी.. ओर उपरसे उसे लखनके वो इसारे याद आने लगे जो लखन उपर सोने जाते वक्त उसे करके गया था.. वो इसारोसे लताको अपने रुममे उपर आनेको केह रहाथा लेकीन लताने नीलमकी वजहसे उसे मना करदीया था.. अब वो मना करते बहुत पछता रही थी.. क्युकी उनकाभी मन लखनको मीलनेके लीये कर रहाथा..

तभी वो मुह घुमाकर अ‍ेक बार नीलमकी ओर देखकर चेक करने लगी की नीलम सोगइ की नही.. तब नीलमको दुसरी ओर मुह करते सोते देखकर वो धीरेसे बेडसे उतर गइ.. ओर वो हल्की रोसनी वाली लाइटभी बुजाकर वापस बेडपे आगइ.. ताकी उनकी कोइभी हरकत नीलम देखना सके.. ओर अपने नीकरमे हाथ डालकर लखनको याद करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. तभी उसे दरवाजेपे कुछ हल्की आहट सुनाइ दी.. तो लताने देखा कोइ साया उनके दरवाजेको खोलकर अंदर जांक रहाथा ओर वो देखती रही..

तो वो साया अंधेरेमे उनकी ओर बढता नजर आने लगा तो लता समज गइकी ये लखन हे.. तब वो सरमाती खुस होते गभरा गइ.. ओर जटसे नीलमकी ओर देखने लगीकी नीलम सोगइ हे की नही.. लेकीन नीलमकी ओरसे कोइ हलचल महेसुस नही हुइ.. तबतक तो लखन लताके बगलमे आकर लेट गया.. ओर लताको अपनी बाहोमे भरने लगा.. तब लता नीलमकी ओर देखते गभराते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर लखनने धीरेसे लताके कानमे कहा..

लखन : (धीरेसे) लता.. चलना बहार चलते हे.. क्या नीलु सोगइ..?

लता : (धीमी दबी आवाजमे) मुजे क्या पता.. आप चले जाओनां.. कही नीलु जाग ना जाये.. प्लीज..

लखन : (धीरेसे दबी आवाजमें) अरे सो गइ लगती हे.. चलना बहार कोइ नही हे.. हम सोफेके पीछे चले जायेगे.. कीसीको मालुम नही होगा.. सोफेकी पीठकी आडमे हमे कोइ नही देखेगा..

लता : (दबी आवाजमे) लखन आप समजते क्यु नही.. तीन चार दिनकी तो बात हे.. थोडा सबर करलोनां.. यहा कीसीको पता चलेगातो मेरे बारेमे क्या सोचेगा..? जानु.. थोडा सबर करलो.. प्लीज..

लखन : (धीरेसे कामुक आवाजमें) वही तो नही होता चलनां.. बस अ‍ेक बार.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर तु वापस यहा आकर सोजाना.. चलनां..

लता : (सहमती वाले अंदाजमें दबी आवाजमे) लखन.. प्लीज.. देखना कीसीको पता ना चले.. सीर्फ अ‍ेक बार करना.. फीर तुमतो मुजे छोडते ही नही हो..

लखन : (खुस होते धीरेसे) अरे हां बाबा अ‍ेक ही बार करुगा बस..? चल जल्दी..

कहेते लखनने लताके होंठ चुमलीया ओर बेडसे धीरेसे खडा होगया.. ओर लताका हाथ पकडके खीचने लगा.. तो लतानेभी हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीसकी ओर वो खेचतान करती तो नीलमके जाग जानेका डरभी था.. ओर वोभी नीलमकी ओर देखते लखनके पीछे पीछे खीची चलने लगी.. तब उनको पता नही थाकी नीलमभी लखनको आते देख रहीथी ओर उसे पहेचान चुकीथी..

ओर लखनने बहार नीकलतेही धीरेसे लताके रुमका दरवाजा खाली बंध करलीया ओर लताको दबे पांव लेकर सोफेपे चला गया.. दोनोही सटकर बैठ गये.. ओर लखनने लताको अपनी बाहोमे भरलीया दोनोके होंठ मील गये ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तभी लखनने लताको वही सोफेपे लीटाते खुद उनके उपर चडके लेट गया ओर लताके होंठ चुमने लगा.. तब लताने सरमाते हसते हुअ‍े कहा..

लता : (सरमाते) आप बहुत नोटी हो.. क्या तीन चार दिन नही ठहेर सकते? आखीर अपनी मनमानी कर ही ली.. देखना कोइ इधर ना आजाये.. जोभी करना हे आप फटाफट करलो.. कही नीलु इधरना आजाये..

लखन : (गालको चुमते) अरे लता भाइतो अपनी सुहागरात मनानेमे बीजी होगे.. वोभी नइ भाभीको चोदते होगे.. ओर मंजु भाभी पुनो दीदीभी सो गइ होगी.. यहा कोइ नही आता.. चलना फटाफट कपडे नीकाल..

लता : (सरमाते हसते) अब आपही इधर लाये होतो आपकोही सब महेनत करनी होगी.. हें..हें..हें..

तब लखन लताके उपरसे उतर गया ओर लताके ओर खुदके कपडे नीकालने लगा ओर थोडीही देरमे दोनो बीलकुल नंगे होगये.. तब लता खुब सरमाइ ओर वो वापस सोफेपे लेट गइ.. तब लखनतो पहेलेसेही गरम था.. ओर वोभी लताके पैरके बीच बैठ गया तभी लताने अपने दोनो पैर थोडे फैला दीये ओर लखन लताकी चुतमे अपना लंड पकडकर सेट करने लगा.. तब लता सरमसे पानी पानी होने लगी..

दोनोही चुदाइके लीये बहार नीकल रहेथे तब अंधेरेकी वजहसे दोनोको नही पताथाकी नीलम चदरके अंदरसे दोनोको बहार जाते देख रही हे.. जब दोनोने खाली दरवाजा बंध करलीया तब नीलम फटाफट अपने बेडसे खडी होगइ ओर दरवाजेके पास चली गइ.. ओर हल्कासा दरवाजा खोलके वो अंदरसे ही बहारकी ओर देखने लगीकी दोनो क्या कर रहे हे.. तब लखन लताके ओर खुदके कपडे नीकाल रहाथा.. ओर नीलम दोनोको नंगा होते देखने लगी.. तब उनकी चुतमे अ‍ेक बार फीरसे तेज हलचल होने लगी..

ओर नीलम वही खडी रहेते बहारकी ओर देखते अपनी चुतको नीकरके उपरसेही सहेलाने लगी.. उसे अब इस खेलमे बहुत मजा आने लगाथा.. जब लखन नंगा होगया तब नीलमने आज पहेली बार कीसी मर्दका लंड अपनी आंखोसे देखा.. वो लखनके लंडको अ‍ेकनेरसे देखने लगी.. तब उनकी आंखोमेभी वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी लता ओर लखन दोनोही चुदाइकी तैयारीमे मसगुल थे..

लखन ओर लताको नही पताथाकी सीर्फ नीलमकी दो आंखे नही उसे अ‍ेक ओर दो आंखे देख रही थी.. वो थी रजीया.. जो देर रात लखनके रुममे जानेके लीये अपने रुमसे दबे पांव नीकल रही थी.. तब लखन लता ओर नीलमके रुमके आसपास चकर लगा रहाथा.. जो बार बार दरवाजेसे जांकते अंदरकी ओर देख रहाथा तब रजीया वही अपने दरवाजेके पास ही रुक गइ ओर लखनकी हरकते देखती रही..

जब लखन अंदर चला गया तो रजीया छुपकेसे लता वाले दरवाजेके पास आगइ.. ओर वो दरवाजेसे अंदर जाकने लगी.. तब लखन लता बहारकी ओर आने लगे तब वो वहासे जटसे हट गइ.. ओर दोडके कीचनमे चली गइ.. क्युकी कीचनकी सर्वीस विन्डोसे पुरा होल दीख रहाथा.. तब लखन लताको सोफेपे लेगया जो रजीया कीचनसे साफ देख रही थी.. ओर वो वही अंधेरेमे खडी होकर दोनोकी हरकत देखने लगी..

तबतक लताभी अपने सब कपडे नीकालकर सोफेपे लेट चुकीथी ओर लखन उनकी चुतमे अपना लंड घुसानेकी कोसीस कर रहाथा.. तभी इधर नीलमने पहेली बार लताकी कामुक आवाजमे सीसकारीया सुनी.. तो नीलम अपने आपको रोक नही पाइ.. ओर वो दरवाजेसे अपना सर नीकालकर बहार देखने लगी.. तो उसे सोफेपे लता ओर लखन नही दीखाइ दे रहेथे.. तब नीलमकी लखन लताको देखनेकी उत्सुक्ता बढ गइ..

वो धीरेसे दबे पांव बहारकी ओर नीकल गइ.. ओर डरते धीरेसे सोफेकी ओर बढने लगी.. तब रजीयाभी नीलमको अ‍ैसे जांकते देखकर चोंक गइ.. तबतक लखन लताकी चुतमे अपना लंड डाल चुकाथा.. ओर वो होले होले कमर हीलाते लताकी चुदाइ कर रहाथा.. तब लताकी आंहे.. ओर सीसकारीया साफ सुनाइ दे रहीथी.. दोनोही चुदाइमे मसगुल होगये.. लता आधी आंख चडाते मदहोसीमे लखनसे चुदवाने लगी..





तब उनको नही पताथाकी नीलम बहार नीकलके चुपकेसे दोनोकी चुदाइ देख रही हे.. ओर उन तीनोको रजीया कीचनसे देख रही हे.. नीलम लताकी कामुक सीसकारीया सुनकर अ‍ेकदम गरम होगइ.. ओर नीलमकी चुतभी गीली होने लगी.. आज वो पहेली बार कीसी लडके ओर लडकीको अपनी आंखोसे अपने सामने चुदाइ करते देख रही थी.. तब नीलमको ये सब देखते बरदास्त नही हुआ.. ओर उसने नीकरमे हाथ डालकर अपनी चुतमे उंगली घुसादी.. ओर दोनोकी चुदाइ देखते उंगली होसाने लगी.. जब उनकी बरदास्तसे बहार हो गया तब..

वो जटसे दबे पांव अपने रुममे चली गइ.. ओर सीधी बाथरुममे घुस गइ.. वही अपने नीकरमे हाथ डालके अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे ओर आंधी आंख बंध करते जोरोसे उंगली अंदर बहार करने लगी.. उसे नही पताथाकी हस्तमैथुन कैसे करना हे.. ओर वो थोडीही देरमे कांपने लगी उनके पुरे सरीरमे अ‍ेक तेज सुरसुराहट होने लगी जैसे हजारो चीटीया उनकी चुतकी ओर दोड रहीहो.. ओर वो आंधी आंख चडाते जडते हुअ‍े परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. ओर आज नीलमकी जींदगीमे ये सब पहेली बार था..





तब उनकी चुतसे अ‍ेक तेज धारका फवारा नीकल गया जो उनके पुरे नीकरको भीगो दीया.. तब नीलम पुरी तराह कांप गइ तभी उनको होंस आयाकी उन्होने क्या कीया.. तब वो खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हुअ‍े मुस्कराते अपने नीकरको नीकालने लगी.. फीर चुतको पानीसे साफ करने लगी.. ओर फटाफट अपनी पेन्ट पहेनकर हाथमे नीकर लेकर बहार आगइ ओर नीकरको अपनी बेगमे छुपालीया.. फीर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. आज उनकी जींदगीका ये पहेले ओर्गेजम था.. जीसे वो बेहद खुस थी..

तब बहारकी ओर लखन आज लताको बडेही जोरोसे चोद रहाथा.. तो लताभी लखनकी अ‍ैसी चुदाइसे खुस होने लगी.. लखनने उनको इतनी देरतक कभी नही चोदाथा.. ओर वो मनही मन खुस होते अपनी कमर उछाल उछालके लखनका साथ देने लगी.. आज लताको लखनसे चुदवाते लखनका अनाडी पन नही लगा.. लखन अब इस चुदाइके मामलेमे काफी अ‍ेक्सपर्ट हो गया था..

लखनकी अ‍ैसी दमदार चुदाइ देखकर आज लताभी खुस होने लगी.. ओर वो लखनसे अपनी कमर उछाल उछालके चुदवाती रही.. अबतक लताभी बीचमे अ‍ेब बार जड चुकी थी फीरभी लखन उसे चोदेही जा रहाथा.. ओर काफी धकापैनी चुदाइके बाद लखन लतासे चीपक गया तो लतानेभी लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखन कमरको जटका देते लताकी चुतको भरने लगा..





जब दोनो जड गये तब लता लखनकी पीठको सहेलाती रही.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. ओर लखन लताके उपरसे हट गया.. तब लता सोफेपे बेठकर अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर खडी होकर अपने कपडे पहेनने लगी.. जैसेही कपडे पहेनके चली.. उनके पेर डगमगाने लगे.. ओर लताने सोफेको पकडलीया.. ओर वो लखनकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. क्युकी उनकी इतनी जबरदस्त चुदाइ आज तक नही हुइ थी..

लता : (धीरेसे) जानु.. आपनेतो मेरी हालत खराब करदी.. अब मे अंदर कैसे जाउगी..? क्या कोइ गोली बोली खाकरतो नही आयेथे..?

लखन : (हसते) क्यु..? मेने तो कुछभी नही खाया अ‍ैसा क्यु पुछ रही हो..

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन आपने इतनी देरतक तो मुजे कभी नही चौदा.. इसीलीये पुछ रहीथी..

तभी लखन अपनी मर्दांगीपे गर्व करते लताको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर धीरेसे दरवाजा खोलकर लताको अपने बेडकी ओर लेजाता हे.. तब नीलम आंख खोलके दोनोको रजाइमेसे देखती रही.. ओर लखन लताको धीरेसे बेडपे सुलाके उनके होंठ चुमने लगता हे तो लतानेभी लखनको अ‍ेक बार जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोने कीस करली.. तब लखन लताके उपर चदर डालके बहार नीकल गया ओर दरवाजा बंध करके उपर अपने रुममे चला गया.. देखातो उनके बेडपे रजीया नंगी होकर लेटी हुइ थी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९८

तभी लखन अपनी मर्दांगीपे गर्व करते लताको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर धीरेसे दरवाजा खोलकर लताको अपने बेडकी ओर लेजाता हे.. तब नीलम आंख खोलके दोनोको रजाइमेसे देखती रही.. ओर लखन लताको धीरेसे बेडपे सुलाके उनके होंठ चुमने लगता हे तो लतानेभी लखनको अ‍ेक बार जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोने कीस करली.. तब लखन लताके उपर चदर डालके बहार नीकल गया ओर दरवाजा बंध करके उपर अपने रुममे चला गया.. देखातो उनके बेडपे रजीया नंगी होकर लेटी हुइ थी....अब आगे

लखन अपने रुम मे जातेही रजीयाको अ‍ैसे बेडपे नंगी लेटे हुअ‍े देखतेही खुसीसे सोक्ट होगया.. ओर वो मुस्कराने लगा.. क्युकी वहा उनके बेडपे रजीया अपने सब कपडे नीकालके लेटी हुइ थी.. ओर लखनका हसते हुअ‍े इन्तजार कर रहीथी.. जब लखन लताको उनके रुममे छोडने गया तब वो दबे पांव कीचनसे नीकलकर लखनके रुममे चली गइथी.. ओर अपने कपडे नीकालकर लखनका इन्तजार कर रहीथी.. लखनने हसते हुअ‍े फटाफट अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर वो जटसे बेडकी ओर चला गया..

लखन : (खुसीसे हसते) रजीया.. व्होट अ‍े सरप्राइज..? मेनेतो तुजे आज आनेको मना कीयाथा.. फीरभी..

रजीया : (लखनको हाथ पकडके अपने उपर खीचते) पतीदेव मुजे पता हे आज आप अपनी बीवीको मीलना चाहते थे.. अबतो मील लीयानां..? तो चलीये अब इस बीवीको भी खुस कर दीजीये.. में आपको छोडने वाली नही हु.. उस बीवीके चकरमे कभी इस बीवीको भुल मत जाना.. समजे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते रजीयाके उपर लेटते) तो क्या तुजे पता था मे लताको मीलने गया था..?

रजीया : (लखनके गलेमे हाथ डालते होंठ चुमते) हां.. मुजे सब पता हे आप अभी अभी मेरी सौतान यानीकी अपनी बीवीकी बजाके आये हो.. मे वही कीचनमे खडी थी.. ओर आप दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. आजतो बेचारीकी हालत पतली करदी आपने.. हें..हें..हें.. वोभी खुस हो गइ होगी..

लखन : (गाल चुमते हसते) हां.. डार्लींग तुम बहुत डेन्जर हो.. ये सब तुम्हारी ट्रेनींगका कमाल हे.. क्या दया सोगइ हे..? देखना वो कही जागते इधर ना आजाये.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाते हसते) सो गइ नही.., मेने उसे सुला दीया हे.. हें..हें..हें.. अबतो वो सुबह ही उठेगी.. हें..हें..हें..

लखन : (होंठ चुमते) डार्लींग तु बहोत डेन्जर होगइ हे.. क्या उसे नींदकी गोली पीलाकर आइ हो..?

रजीया : (लखनका लंड सहेलाते) हां.. अब मेरे इस पतीको मीलनेके लीये मुजे कुछतो करनाही पडेगा.. चलीये इस बीवीको ठंडी कर दीजीये फीर मुजे जानाभी हे.. सुबह जल्दी उठना हे..

लखन : (सरमाते होंठ चुमते) बेबी मे अभी अभी तेरी सौतनको चोदकर आया हु.. तो इतनी जल्दी..

रजीया : अरे हां.. तो क्या हुआ लाइअ‍े मे कीस कामकी हु.. अभी इसे फीरसे तैयार कर देती हु आप लेट जाइअ‍े.. मुजे सब पता हे इनको कैसे खडा करना हे.. चलीये यहा कपडे नीकालकर लेट जाइअ‍े..

तब लखन हसते हुअ‍े अपने सब कपडे नीकालकर लेट जाता हे ओर रजीया उनके पैरके बीच बैठ जाती हे फीर जुकतेही लखनका लंड अपने हाथोमे लेकर थोडी देर सहेलाती हे.. फीर अपने मुहमे लेकर चुसने लगती हे जैसे कोइ लोलीपोप चुस रही हो.. तब थोडीही देरमे लखनका लंड फीरसे खडा होने लगा.. ओर तनके जटके मारने लगा.. तब रजीया उसे मुठीमे कपडते होले होले सहेलाने लगी.. ओर अपनी जीभसे लंडको चाटने लगी..





तब लखनका लंड तनके लोहेकी माफीक सख्त होगया.. तभी रजीया बेडपे फटाफट पीठके बल लेट गइ.. ओर लखनको खीचके अपने उपर चडा लीया.. ओर उनका लंड पकडते अपनी चुतपे घीसने लगी.. तो उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. ओर रजीयाने लंडको गीला करदीया फीर लंडको मुठीमे पकडके अहीस्तासे चुतके लव होलमे फसाके सेट कर दीया.. ओर लखनके गलेमे दोनो हाथ डालकर अपने तनसे चीपका लीया..

रजीया : (लखनके गलेमे हाथ डालते) लखन अब आप पहेले इसे अंदर डाल दीजीये.. फीर मे आपको कुछ बताती हु.. पहेले मुजे चोदीये.. पता नही आज आपसे चुदवानेका बहुत मन कर रहा हे.. अब आपके बीना रहा नही जाता..

लखन : (बाहोमे कसते लंड घुसाते) मेरे बीना की मेरे लंडके बीना..? हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाते मुस्कराते) हां.. वोही.. आपके लंडके बीना.. अब डाल दीजीयेनां.. आज मुजे जीभरके चोद लीजीये.. चलीये.. जल्दी कीजीये.. आज आपका लंड चुतमे लेनेका बडा मन कर रहा हे..

लखन : अरे डार्लींग इतनी जल्दी क्या हे.. हम आरामसे करते हेना.. अबतो यहा कोइ आने वाला नही.. पहेले बता तुम मुजसे क्या बात करने वाली हो.. (कहेते जोरसे कमर दबाके पुरा लंड चुतमे घुसा देता हे)

रजीया : (कामुक आवाजमे) आह इइइइइइ... सीइइइइ.. बाबा आरामसे.. धीरे करोनां.. मे कही भागी नही जा रही.. पहेले मुजे अ‍ेक बार चोदकर ठंडी करदीजीये फीर हम आरामसे बात करेगे.. आपहीके फायदेकी बात हे हें..हें..हें..





तब लखन हाथके बल उचा होजाता हे ओर रजीयाको पुरा लंड अंदर बहार करते जोरोसे चोदने लगता हे.. तब रजीयाभी नीचेसे कमर उछालते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी.. ओर सीसकारीया करती रही.. दोनोके बीच धमासान चुदाइका युध्ध होने लगा जेसे दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समा जानेकी होडमे लगे हो.. तभी रजीया लखनके गलेके हाथ डालके लखनको अपने तनसे चीपका लेती हे.. दोनोके बीच काफी देरतक धमासान धका पैनी चुदाइ होती रही..





तो लखनभी रजीयाके गलेमे मुह डालते गलेको चुमने लगता हे ओर रजीया लखनको अपनी बाहोमे भीचते कमरको जटके देते जडने लगती हे.. तब लखनभी जोरोसे कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगता हे.. ओर पुरा लंड रजीयाकी चुतमे घुसाते कमरको जटके मारने लगता हे.. तब दोनोके होंठ लीपलोक होजाते हे..

तभी रजीया अपने गर्भासयपे लखनका गरम विर्य महेसुस करती हे.. ओर वो लखनकी पीठ सहेलाने लगती हे.. लखन जडतेही रजीयाके सीनेपे सर रखकर ढेर होजाता हे.. फीर दोनो सांत हो जाते हे.. दोनोकी तेज सांस चलनेकी आवाज अ‍ेक दुसरे कहेसुस करते हे.. तभी कुछ देरके बाद..

रजीया : (सरमाते सरको सहेलाते) लखन.. अब हटीये.. मेरीतो अ‍ेकही बारमे हालत खराब करदी आपने.. मेरी पुरी चुत लबालब भरदी आपने.. अब आप चुदाइमे मास्टर होगये हे.. देखो बेड गंदा हो रहा हे.. अब आपभी कीतना जडते हो.. कुछ दिन अ‍ैसेही चोदते रहे तो मे अ‍ेक दिन पका प्रेगनेन्ट होजाउगी..

लखन : (होंठ चुमते) हां.. तो करले पैदा मेरा अ‍ेक बच्चा.. रजीया ये सब तुम्हारा कमाल हे.. तुमने मुजे बहुत कुछ सीखाया हे.. चुदाइके मामलेमे तुम मेरी गुरु हो.. मे तुजे कभी नही भुलुगा.. क्या मेरे साथ रहेगी..? सादी करले मुजसे.. मे तुमसे बहुत प्यार करता हु.. जींदगीभर तेरा साथ नीभाउगा.. सच केह रहा हु.. मे तुमसे सादी करना चाहता हु..

रजीया : (प्यारसे गालको चुमते) लखन.. मेतो हमेसा आपके साथ हु.. अब सादीकी क्या जरुरत हे.. बस अ‍ेक बार आपकी लताभाभीसे सादी होजाये फीर हम कुछ सोचेगे.. अबतो मुजेभी आपकी आदत होगइ हे.. अबतो आपही मेरा पती हो मेरा सहारा हो.. मे हमेंसा आपसे अ‍ैसेही चुदवाती रहुगी.. मे आपको अपना पती मान चुकी हु.. लखन आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे..

लखन : (सरको चुमते) रजु.. आइ लव यु टु.. तुम मुजे कुछ बताने वाली थी..कहोना क्या बात करनी थी..

रजीया : (होंठ चुमते) हाये.. आपके मुहसे रजु.. सुनके कीतना प्यारा लगता हे.. आप मुजे रजु कहेके ही बुलाइअ‍े.. मुजे अ‍ैसा लगता हे मेरा पती मुजे प्यारसे बुला रहा हे.. हें..हें..हें.. सुनो आपको अ‍ेक बात कहेनी थी.. लेकीन ये बात सीर्फ आप तक ही सीमीत रखना.. कीसी ओरको पता नही हे.. ओर इसमे आगे बढना होतो मुजे कहीयेगा मे इसमे आपकी मदद करुगी में हमेसा आपका साथ दुगी.. कोइ जल्दबाजी मत करना..

लखन : (गाल चुमते) अरे बाबा.. पहेले बताओतो सही बात क्या हे.. कुछ सीरीयस मेटरतो नही..?

रजीया : (हसते) अरे नही नही.. लखन भाभीके साथ वो लडकी क्या नाम हे उनका..? हां.. नीलम.. आपकी साली हेनां..? आप ओर लताभाभी होलमे चुदाइ कर रहेथेनां..? तब वो सोफेके पीछेही खडी थी.. ओर आप दोनोकी चुदाइ देख रहीथी.. सीर्फ देखही नही रहीथी.. अपनी चुतमे उंगली करते सहेला रही थी..

लखन : (चोंकते धीरेसे) क्या नीलु..? लेकीन वोतो सो गइ थी.. तो फीर वहा कैसे..? क्या तुजे पुरा यकीन हे वो नीलु ही थी..? वो तो बहुत छोटी हे.. तो इस उमरमे ये सब..

रजीया : (हसते) लखन मुजेतो वो कोइ छोटी नही दीखती.. उसनेभी जवानीके दहेलीजपे कदम रखलीया हे.. वो टीनेजर लगती हे.. होगी कोइ १६ १७ सालकी.. यानी लंड खानेके लायक हो चुकी हे.. आपको नही पता इस उमरमेही लडकी आसानीसे फस जाती हे.. वैसेभी आपकीतो साली हे.. मतलब आधी घरवाली.. समज गयेनां..? अगर इनमे आपको मेरी कोइभी मदद की जरुरत होतो मुजे बेजीजक कहेना.. ओर आपतो राजा हो.. समज गयेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हलते) क्या रजीया तुमभी.. तेरी भाभीको देखा हे.. मार डालेगी मुजे.. हें..हें..हें.. पहेले मे तुम दोनोसे तो ठीकसे चोदलु.. फीर आगे देखते हे.. तब मे तुजे बता दुगा.. हें..हें..हें.. नीलु.. हें..हें..हें..

रजीया : (धीरेसे हसते) जानु.. आपको नही पता.. अगर आपने उसपे हाथ नही मारातो वो कही ओर चली जायेगी.. इनसे तो अच्छा हे आपही उनका काम तमाम करदो.. ओर दीखनेमे भी कडक माल लगती हे.. खुबसुरत हे.. जवान हे.. मेने कीचनसे मेरे फोनमे सुट करलीया हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) रजु तुम बहुत डेन्जर हो.. ठीक हे.. वो क्लीप मुजे मेरे फोनमे भेज देना.. मे देख लुंगा.. अब वो वापस आयेगी तब तुमही देखलेनां उसे.. अभी अ‍ेक दो दीनमे यही वापस सादीमे आजायेगी.. तब देखते हे..

दोनोही अ‍ैसी बात कर रहेथे.. तब लखन अभीभी रजीयाके उपर उनकी चुतमे लंड डालके पडाथा.. अब रजीया लखनको ही अपना पती मानके उनके साथ रात रातभर सोती लखनका बीस्तर गरम करती थी.. बीवीका हर फर्ज वो नीभाती थी.. लेकीन आज वो उठकर अपने कपडे पहेनकर दयाके पास चली गइ.. ओर सोगइ.. क्युकी आज लता घरपे थी तो वो कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी..

तो दुसरी ओर आज पुरे गांवमे वासनाका खेल चल रहाथा.. गांवकी हर ओरतो ओर लडकीयो की अपनी कहानी थी.. आज जीनकी बीवी कही महीनोसे नही चुदी थी.. वोभी अपने पतीके साथ संभोग कर रही थी.. ओर गांवमे ज्यादातर लडकीया ओर ओरते अपने पतीके बजाय नाजायज संबधो मे चुदवा रही थी.. गांवमे लगभग हर घरमे अ‍ेक नाजायज रीस्ता पनप रहा था.. लेकीन अ‍ेक दुसरेको इस बारेमे कीसीको कुछ भी पता नही था.. ओर अ‍ैसा आजसे ही नही.. कइ सालोसे चल रहा हे..

हर ओरत ओर लडकीके मनमे उनके स्वप्नका अ‍ेक राजकुमार होता हे.. फीर वो सादी कीसीसे भी करले.. लेकीन वो उनकी सादीसे पहेले यातो सादीके बाद अपने मनके राजकुमारको खोजकर उनसे मीलकर ही रहेती हे.. ओर सबसे छुपकर उनको समर्पीत होकर उनसे जानायज रीस्ता बना लेती हे.. ओर उसे अपना सब कुछ सोंप देती हे.. ओर ये सब सीर्फ आजही नही.. राजा महाराके कालमेभी होता रहा हे.. आज गांवमे ओर सहेरमे सब जगाह अ‍ैसा चल रहा हे.. तो आज इस गांवमे भी अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहेथे..

ओर ये सब आज काम ओर रतीकी महेरबानी से हो रहाथा.. अ‍ैसा नही थाकी आज देवायत ओर चंदाकी सुहागरातथी इसीलीये काम ओर रती पुरे गांवपे हावी थे.. उसने इसीलीये सबको अपने वसमे करलीया था ताकी आज हवेलीपे कुछ अ‍ैसा होने वाला था.. जीनकी वजहसे काम ओर रती.. खुद अपने चरमो पे थे.. ओर वो कीसीका वो रुप देखने आयेथे.. जो सब परीओ ओर अप्सराओकी जननी थी..

जीहां.. में मंजुकी बात कर रहा हु.. जो अप्सरालोकमे सबकी जननी ओर चहीती रानीथी.. ओर इस धरतीपे अ‍ेक खास मक्सदसे अपनेही अंसको जन्म देने आइ थी.. जीनकी पुर्व तैयारीके रुपमे आज अपने स्वामीकी अ‍ेक चहीती रानीको उनसे रुबरु करवाने आज खुदकी पहेचान पुनमसे करवा रहीथी..

ओर अपनी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत करने वालीथी.. ओर ये सब बाबाके आदेशके अनुसार हो रहाथा.. तब बाजुके रुममे देवायत ओर चंदा दोनोही चुदाइमे अ‍ेक बार साथमे जडके अ‍ेक दुसरेसे प्यार कर रहेथे.. देवायत अभीभी चंदाकी चुतमे लंड डालके उनके उपर लेटा हुआथा.. ओर दोनो प्यार भरी बाते कर रहेथे..





तब इधर मंजु विजयको दुध पीलाकर उसे जुलेमें सुला देती हे ओर पुनमको लेकर बाथरुममे चली जाती हे.. दोनोने साथमे नहालीया तब मंजुने पुनमको अ‍ैसेही बीना कपडोके साथ बहार आनेको केह दीया ओर खुदभी बीना कपडोके साथ बहार आगइ.. तब पुनमको मंजुका सब व्यवहार कुछ अजीब लगा.. दोनोही नंगी बहार आगइ तो पुनम बहुतही सरमा रहीथी.. तभी मंजु शीसेके सामने बैठकर अपना शींगार करने लगी.. तब पुनम उनको शींगार करते देखती रही.. उनकी समजमे कुछभी नही आरहा था.. की भाभी क्या करने वाली हे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी क्या मे नाइटके कपडे पहेनलु..?

मंजुला : (हसते) नही पुनो.. मेने तुजे कहाथाना की मे तुजे सब बताउगी.. तो सुन आज मे तुजे अनुभुतीके माध्यमसे सबकुछ ज्ञात करवाउगी.. ओर तुजे आज मेरी सब शक्तिओसे अवगत करवाउगी.. ताकी आगे जाकर तुजे सब सम्हालनेमे आसानी रहे.. आज मे मेरी सब शक्तिया तुजमे स्थापीत करदुगी.. ताकी मे दुबारा जन्म लेकर आउ तब मुजे वापस मील सके.. तबतक तुजे ओर सृतीकोही सब सम्हालना हे.. तो तुजे सब पता होना जरुरी हे.. तु बैठ मे अभी आती हु.. आज तुमसे बहुत कुछ बताना हे..

पुनम : (नंगीही बेडपे बेठते) क्या..? भाभी मुजे कुछ बैचेनी जेसा अजीब लग रहा हे कही कुछ होगातो नही..?..

मंजुला : पुनो वो तु चीन्ता मत कर.. मे तुजे अभी अ‍ेक गोली देती हु.. तु उसे खालेना.. तुजे कुछ नही होगा.. सब तेरी प्रेगनेन्सीकी वजहसे हो रहा हे.. बस अभी ये बात तु कीसीसे मत कहेना.. खास करके चंदा दीदीको.. उसे भी तुजे ओर सृतीकोही सम्हालना हे.. बस अ‍ेक बार वो हमारे राजा आजाये..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. क्या उनकी वजह कही धिरेनतो नही..? मुजे उनकी बहुत चीन्ता होती हे..

मंजुला : नही पुनो तुम उनकी चीन्ता मत करो.. मेरे बेटेके संपर्कमे आतीही वो फीरसे ठीक होजायेगी.. तबतक तुजे ओर सृतीकोही सब सम्हालना हे.. चल बेडके बीच ठीकसे बैठजा मे जल लेकर आती हु.. फीर हम सुरु करते हे.. ओर गभराना नही.. तुजे आज परम आनंदकी अनुभुती होगी.. तु आज सब अनुभुती करेगी..

कहेते मंजु दरवाजा अच्छेसे लोक करके सभी लाइट बुजा देती हे.. फीर अ‍ेक हल्कीसी रोसनीका बल्ब जलाते अ‍ेक छोटा टेबल बेडके पास खीचलीया ओर पानीका लोटा लेकर बेटपे आगइ.. उसने पुनमको बेडके बीच नंगी बीठा दीया.. फीर खुदभी नंगी पुनमके बीलकुल सामने उनसे नजदीक सटकर बेठ गइ.. दोनोके घुटने अ‍ेक दुसरेके साथ टच करने लगे.. तब पुनम सरमाते हसते हुअ‍े सीर्फ मंजुको देखती रही.. आज शींगार करते मंजु कोइ कादेवकी मुरत लग रहीथी.. जीनका रुप अ‍ेक बार चंदा देख चुकीथी..

अब मंजुको सब ज्ञात होने लगाथा.. उनको सब वीधीया पताथी की उनको क्या करना हे.. तभी पुनमभी सरमाते मंजुकी ओर देखती रही की ये क्या कर रही हे.. तभी मंजुने हाथमे जल लीया ओर आंख बंध करके कुछ मंत्र बोलने लगी.. ओर उसने जलको पुनमके उपर छीडक दीया.. तब जलको छीडकतेही पुनम अ‍ेक बार कांपते हुअ‍े हील गइ.. उनके सरीरमे कंपन फील होने लगा.. तब मंजुने दुबारा हाथमे जल लीया ओर उसी क्रियाको दुबारा दोहराया.. तब पुरे कमरेमे गुलाबकी खुस्बु आने लगी.. पुनमको कुज अजीब फील होने लगा..

ओर पुनमकी आंख बंध होगइ.. ओर वो अनायासही मंजुके सामने हाथ जोडके बैठ गइ.. उसे अ‍ैसा फील होने लगाकी वो हवामे उड रही हे.. ओर पुनम परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. उनका पुरा सरीर फुलके माफीक हल्का होने लगा.. हजारो चीटीया उनके सरीरमे रेदती महेसुस करने लगी.. ओर तीसरी बार जलके छीडकतेही पुनम बेहोसी जैसी ध्यानकी हालतमे चली गइ.. वो आंख बंध करके सुन होगइ.. तब मंजुने जलके लोटेको साइडमे रख दीया..

ओर खुद आंब बंध करते दोनो हाथोसे पुनमका चहेरा थामलीया.. ओर तब ना पुनमको होस रहा ओर नाही मंजुको.. सब अनायास ही अपने आप होने लगा.. मंजु मनमे होठ फडफडाते मंत्र बोलने लगी.. ओर पुनम परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. जैसे वो फुलोकी माफीक हल्की होकर हवामे उड रही हो.. दोनोकी चुत हरकतमे आगइ.. चुतके दोनो होठ फडफडाते अंदर बहार होने लगे.. तभी रतीने पुनमके सरीरमे प्रवेस करलीया.. तो कामभी मंजुके अंदर चला गया.. दोनोही उतेजीत होने लगी..

जैसे दोनोकी चुतमे लंड डालकर कोइ उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा हो.. वो परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. ओर अ‍ैसा मंजुके साथ भी होने लगा.. तब मंजुने पुनमके चहेरेपे हाथ घुमाते नीचेकी ओर लेगइ ओर पुनमके दोनो उरोजोको अपनी हथेलीमे थामलीया.. तब पुनम कांपने लगी.. फीरभी वो हीलनेकी स्थीतीमे नही थी.. तभी मंजु अ‍ेक हाथ घुमाते नीचेकी ओर लेगइ.. ओर दुसरा हाथ पुनमके सरपे रखदीया..

तभी पुनमको बेहोसीकी हालतमेही अपनी चुतपे कुछ महेसुस होने लगा.. तब मंजु नीचे हाथ लेजाते उनकी चुतपे रखदीया.. तभी मंजुकी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत होने लगी.. तब पुनम स्वर्गकी अनुभुती करने लगी.. ओर वो अपने आपको हवामे उडते हुअ‍े देखने लगी.. वो अपनी पीठमे पंखको महेसुस करने लगी.. जैसेकी वो कोइ परी हो.. तभी उसे हवामे ही अ‍ेक कपल उडते हुअ‍े अपनी ओर आते हुअ‍े दीखने लगा.. जो दोनोको पंख लगे हुअ‍े थे.. पुनाको बादलोके बीच सब धुंधलासा दीखने लगा..





तब उनमे से पुरुषथा वो आतेही पुनमको गले लगा लेता हे.. ओर अपनी बाहोमे भरलेता हे.. तब नीचेकी ओर पुनम ओर मंजुकी चुत जोरोसे फडफडाने लगी.. ओर गांवमे भी जीतने लोग जीस पोजीसनमे थे उसी पोजीसनमे मदहोसीकी हालतमे चले गये.. कोइ सो रहाथा तो कोइ देवायत चंदाकी तराह प्यार कर रहाथा.. सब परम आनंदकी अनुभुतीमे चले गये.. ओर जोभी पोजीसनमेथे वोही पोजीसनमे रेह गये.. तब ज्यादातर लोग अपनी मासुकाके साथ संभोग करनेमे लीप्त थे.. तो सब अ‍ैसेही संभोगकी पोजीसनमे रेह गये..

तभी बाजुके रुममे चंदाभी आंख बंध करते परम आनंदकी अनुभुतीमे चली गइ तो देवायतभी चंदाके सीनेमे सर रखते ढेर हो गयाथा.. दोनोको कुछ पता नही चलाकी ये सब क्या हो रहा हे.. लेकीन दोनोकी कमर जोरोसे हील रहीथी.. ओर दोनोही चुदाइमे लीप्त हो चुकेथे.. ओर अ‍ैसा गांवमेभी हो रहाथा.. जो भी लोग चुदाइ कर रहेथे सबका यही हालथा.. तभी पुनमकोभी वो पुरुषकी बाहोमे चुदाइकी अनुभुती होने लगी..

उसे महेसुस होने लगाकी वो पुरुषका बडा लंड उनकी चुतमे हे ओर वो परुष उसे बाहोमे भरके चोद रहा हे.. उनकी चुत जोरोसे फडफडा रहीथी.. ओर वो चुदाइकी अनुभुती करते उन स्त्रीकी ओर देखती हे.. तब वो चोंक जाती हे.. क्युकी उसी स्त्रीके चहेरेमे उसे उनकी भाभी मंजु नजर आइ जो पुरी तराह नीवस्त्र दोनोकी प्रेमलीला हसते हुअ‍े देख रहीथी..





जीनकी दस भुजाअ‍े थी.. जो खुद रतीका अवतार लग रहीथी.. ओर ये वहीथी.. सबकी जननी देवयानी जो अ‍ेक रानी अप्सराथी.. ओर अभी धरतीपे मंजुका जन्म लेकर आइथी.. वो बहुतही कामुक ओर आकर्सक लग रहीथी.. तब पुनमने जटसे अ‍ेक नजर उन पुरुषकी ओर डाली जो अभी भी उनको अपनी बाहोमे भरके हवामे उडते उनके साथ संभोगकी अनुभुती करवा रहाथा..

तो पुनम अ‍ेक बार फीरसे चोंक गइ.. क्युकी वो अ‍ेक बहुतही खुबसुरत पुरुष था.. जो देवायतकी सकलमे दीख रहाथा.. जो अ‍ेकदम जवान ओर कामकी माफीक आकर्सक दीख रहाथा.. तब उन पुरुषने पुनमको अपनी बाहोसे अलग कीया ओर उनका हाथ पकडते उसे वो स्त्रीके पास लेगया.. तब पुनम अनायासही उनके सामने हाथ जोडके खडी रेह गइ.. ओर उस स्त्रीने हसते हुअ‍े अ‍ेक हाथ पुनमके सरपे रख दीया..

तब नीचेकी ओर पुनमको सब ज्ञात होने लगा.. जो शक्तिया बाबाने मंजुके अंदर स्थापीत कीथी ओर उस समय मंजुने जोभी अनुभुती कीथी वोही अनुभुती आज पुनम कर रहीथी.. जो शक्तिया मंजुको समजनेमे इतनी देर लगी वोही सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत होने लगी.. ओर पुनम उसी पल सब समजने लगी.. पुनमके अंदर अ‍ेकही पलमे सब शक्तिया आगइ.. उसे सब ज्ञात होने लगा.. की वो वास्तवमे कौन हे..

तभी वो पुरुष दोनो स्त्रीओका हाथ पकडते हवामे उडने लगा तब पुनम ओर मंजु दोनोही हसती हुइ उनके साथ उडने लगी.. ओर तीनोही समुद्रकी ओर जाने लगे.. तब वो दोनोका हाथ पकडते समुद्रकी गहेराइओमे ले गया.. तब पुनम ओर मंजु दोनोही परम संभोगकी अनुभुती करने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानी नीकलने लगा.. दोनोही जडने लगी.. ओर फीर तोनोही उपर आगये.. फीर कुछ देरके बाद वापस समुद्गकी गहेराइओ मे चले गये ओर गोते लगाने लगे..

पुनम ओर मंजु जीतनी बार समुद्रकी गहेराइओमे गइ उतनी बार जडती रही.. तब देवायतसे चुदाइ करते चंदाभी जडती रही ओर गांवमेभी जीतने लोग चुदाइ कर रहेथे उनके नीचे लेटी हुइ ओरत ओर लडकीया के साथ सभी मर्दोभी जडते रहे ओर नीचे लेटी हुइ लडकी या ओरतोकी चुतको अपने विर्यसे भरते रहे.... कीसीको कुछ पता नही थाकी ये सब क्या हो रहा हे.. कोइ अपनी भाभीको तो कोइ अपनी बहेनको तो कोइ अपने भाइकी बीवीको चोद रहाथा.. तब चारु ओर वंदनाभी लेस्बीन खेल रही थी..

ओर आखीर वो पुरुष दोनोको परीलोकमे लेगया.. तब पुनमको वहा बहुत सारे चहेरे दीखनेको मीले.. तब कुछ चहेरेको देखके पुनम अ‍ेक बार फीरसे चोंक गइ.. उनमे सबका चहेरा था जो वो उसे जानती थी.. वहा उनको उनकी मां विमला उनकी दादी फीर चंदा सरला चारु वंदना भावना लता नीलम रमा रश्मी चंपा दया रजीया ओर नीशा के साथ उसने सृती ओर उनकी मां भुमीका का चहेराभी देखनेको मीला.. ओर अ‍ेक चहेरा नीर्मलाका भी देखा.. तब पुनमको समजनेमे जरासीभी देर नही लगीकी हम सब परीया हे..

पुनमको सब कुछ ज्ञात होने लगा.. वो सोचने लगी..की अगर यही सब परीया हे तो सबका जरुर उनके भाइ देवायतके साथ जीस्मानी रीस्ता होगा.. पुनमको सबसे थोडी ज्वेलेसी भी फील होने लगी.. सब चहेरेमे उनको अपनी सौतन दिखने लगी.. तब वो थोडी वीचलीत होगइ.. वो अचानक जाग गइ.. उनकी आंख खुल गइ.. ओर गभराकते चारो ओर देखने लगी.. तभी उसने खुदको अपने बेडपे पाया ओर सामने मंजु अभीभी आंख बंध करते हाथ जोडकर बेठी हुइ थी..





ओर पुनमने घडीकी ओर नजर डालीतो सुबह ४:३० बज चुके थे.. तब मंजुने भी धीरेसे आंखे खोलदी.. ओर पुनमकी ओर देखते मुस्कराने लगी.. वो पुनमकी सब मनोदसा जान गइथी.. तब पुनम सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर वो मंजुके चरणोमे जुक गइ.. आजवो मंजुको पुरी तराह पहेचान गइथी.. तब मंजुने पुनमके सरपे हाथ रख दीया.. ओर मुस्कुराते सरको सहेलाने लगी.. आज मंजुने उनकी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत कर दीथी.. क्युकी आने वाले समयमे पुनमही उनके देवायतकी देखभाल करने वाली थी..

उनको अपने बच्चे विजयकी कोइ चीन्ता नही थी.. क्युकी वो जानतीथी की चंदा उसे अपना बच्चा समजकर उनकी देखभाल करने वाली थी.. तब विजय सीर्फ चंदाकोही मा मानकर उनके लाड प्यारमे बीगड जायेगा.. वो पढाइमे होशीयार होनेके बावजुदभी अ‍ेक अयास आदमी बन जयेगा.. उनका कारणभी सीर्फ चंदाही होगी.. क्युकी तब वोभी अपने बेटेके प्यारमे अंधी होकर उनकी हर डीमांड पुरी करती होगी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप उनकोभी अपनी गलतीका खामयाजा भुगतना पडेगा..

तभी गांवमे भी सबको धीरे धीरे होंस आने लगा.. तब कइ लडकीया अपने भाइके नीचे तो कइ ओरत अपने देवर या जेठतो कोइ अपने ससुरके नीचे लेटी हुइ थी.. सब चुदाइ करते थकके चकनाचुर हो चुकेथे.. सभी ओरत ओर लडकीका चुदाइकी वजहसे बुरा हाल हो चुकाथा.. कीसीको हीलने तककी स्थीती नहीथी.. कीसीको कुछ समजमे नही आयाकी सब क्या हुआ.. सब पकड जानेके डरसे गभराइ हुइ थी..

























तब चंदाभी होंसमे आकर देवायतके नीचे लेटी उनकी पीठ सहेला रहीथी.. देवायत अभीभी चंदाकी चुतमे लंड डालके उनके उपर पडा था.. दोनोमेसे कीसको पताही नही थाकी वो कीतनी देरसे चुदाइ कर रहेथे..

सब अ‍ैसेही पडे रहे.. आज चुदाइके बावजुदभी सबको अ‍ेक अलगही आनंदकी अनुभुती फील हो रही थी.. तभी पुनमको अपने नीचे कुछ गीला गीला महेसुस होने लगा.. तो पुनमका ध्यान उनकी चदरपे चला गया तो वो चोंक गइ.. क्युकी आज दोनोकी चुतसे जडकर इतना पानी नीकल चुकाथा की पुरी चदर गीली हो चुकी थी.. उसने नीचेकी ओर देखातो उनकी चुतसे ओर मंजुकी चुतसे अभीभी हल्का पानी नीकल रहाथा.. ओर वो थोडी डर गइ.. ओर मंजुकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखने लगी..

मंजुला : (हसते) पुनो अनुभुतीमे ये सब आम बात हे.. इसे गभरानेकी जरुरत नही हे.. हमारे स्वामी अनुभुतीमे ही हम सबको संभोगकी फीलींग्स कराते हे.. परीलोक ओर अप्सरालोकमे वोही हमारे स्वामी हे.. जो उनका अ‍ेक अंस हमारे भाइ देवु हे.. जरा सोचो.. जब उनका अंसही हम सबको इतना खुस रख सकता हे तो जब वो स्वयंम आयेगे तब हम सबका क्या होगा..? ओर तु डर क्यु गइ..? क्या वहा कीसीको देख लीया..? जो तुम विचलीत होगइ थी.. अ‍ैसे डर मत..

पुनम : (सरमाते) हां भाभी.. मेने कुछ अ‍ैसे चहेरे देखे.. जो मुजे यकीन ही नही हो रहा.. की उनकाभी रीस्ता हमारे स्वामीके साथ होगा.. यहा अभीतो हमारे भाइ हे.. तो क्या उनकाभी रीस्ता भाइके साथ रहा होगा..? भाभी मुजे कुछ अजीब लगा.. मे भाइको कीसी ओरके साथ सेर नही कर सकती.. मुजे अ‍ैसा लगाकी हमारे भाइको सब हमसे छीनकर लेजायेगी..

मंजुला : (हसते) हां पुनो.. मत भुलो हमारे माता पीताजीभी वही थे.. ये सब पीछले तीन पीढीसे हो रहा हे.. तो जाहीरसी बात हे हमारे भाइभी वोही हे.. ओर उनकातो काम ही यही हे.. उनको अपनी सब रानीओको खुस रखना पडता हे.. वरना सोचो मे तुमारा रीस्ता तुम्हारे भाइके साथ कैसे अक्सेप्ट करती..? यहा पृथ्वीपे हम सब कीसीना कीसी रीस्तोसे बंधे हे इसीलीये हमे दुख होता हे.. लेकीन वहातो तुमने जीतनेभी चहेरे देखे सब उनकी रानीया हे.. तो यहा वो उनके स्वामीसे कैसे दुर रेह सकती हे..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. तो क्या अभी यहा भी भाइका सबके साथ रीलेशन हे.. आइ मीन.. आप समज गइनां..? क्युकी कुछ चहेरे.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा.. क्या आप उनके बारेमे भी सुरुसेही सब जानती थी..?

मंजुला : (हसते) नही.. पहेले नइ जानतीथी.. लेकीन मुजे सब ज्ञात होने लगा तब मे सबके बारेमे जान चुकी हु.. अ‍ेक पलतो मुजेभी सोक्ट लगा.. लेकीन दुसरे ही पल मेरी समजमे आयाकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे.. ओर यही सब मेरा अंस हे.. तो मे अपनी बच्चीओको हमारे स्वामीसे कैसे दुर रख सकती हु..

पुनम : (सरमाते हसते) हंम.. भाभी.. सीर्फ यहा हम दोनोही उनकी बहेन नही हे.. यहातो ओरभी हे.. जो मे आपको बता नही सकती.. कुछ रीस्ते तो अ‍ैसे हे जो मन उसे स्वीकार करनेको तैयार नही हे.. क्या आपको कुछ अजीब नही लगता..? आप सबके रीलेशन हमारे भाइके साथ कैसे अ‍ेक्सेप्ट कर सकती हे..?

मंजुला : (हसते) पुनो.. हमारी तराह सब अपनी भुमीका नीभाने इधर धरतीपे आइ हे.. जैसे हम दोनो उनकी बहेन बनके आइ हे.. तो बाकीकी सभी ओरतेभी कोइना कोइ भुमीका नीभाने आइ हे.. तो हम उसे अपने स्वामीसे प्यार करने कैसे मना कर सकती हे.. ओर तुम्हेतो आगे जाकर अ‍ैसे कइ रीस्तोको फेइस करना पडेगा.. बस हमे यही खयाल रखना हे की कीसी रीस्तेको सबके सामने उजागर नही करना.. सब अपने आप सामने आजायेगा तब हमे सब रीस्तेको सहजतासे स्वीकार करलेना हे.. समजी.. (हसते) क्या अबभी तुम मुजे भाभी कहेगी..?

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. मुजे आपको बडी दीदीके बजाये भाभी कहेनेमे बहुत अच्छा लगता हे.. ओर मे बीस्तरमेभी भाइसे बहेन बनकर ही रीलेशनमे आती हु.. ओर मुजे ये अच्छाभी लगता हे.. भाभी.. क्या हमारी दयाभी हमारी बहेन..

मंजुला : हां पुनो.. उन बेचारीको तो पता भी नही हे.. रामुकाका हमारे पीताके खास दोस्त थे.. ओर हमारे साथ कइ बरसोसे जुडे हुअ‍े हे.. उनको कोइ सन्तान नही हो रहाथा.. ओर उनकी बीवी हमारे बापुके साथ रीलेशनमे आगइ.. दया उन्हीकी संतान हे.. हमारी बहेन.. इसीलीये तो मेने उनको हमारी नौकरानी नही समजा.. ओर इस बातका रामुकाकाको भी नही पता.. ओर.. हमारी सृती..भी.. हमारी लताभी..

पुनम : (आस्चर्यसे हसते) क्या सृतीदीदी ओर लताभाभी भी..? भाभी.. अ‍ेक बात पुछु..? हमारे बापुतो भुमी आंटीको राखी बांधते थेनां..? ओर भुमी आटीभी उनको अपना बेस्ट भाइ मानती थी.. तो फीर वोभी.. बापुके साथ कैसे रीलेशनमे आगइ..? क्या इस बातका कीसीको पता हे..?

मंजुला : (हसते) नही पुनो.. ओर तुमभी ध्यान रखना.. इस बातका आज तक कीसीको पता नही हे.. जो कोइ कोइ होता हेना तेरी तराह.. हें..हें..हें.. तो क्या तुमभी अपने भाइको राखी नही बंधती..? ओर तुमने राखीके तोहफे के बदले तो हमारे भाइका प्यार मांगलीया.. क्या ये सच हेनां..?

पुनम : (सरमाते नजर जुकाते मुस्कराते) जी भाभी.. मे भाइसे सुरुसे पसंद करती थी.. मेने उनको अपना भाइ मानाही नही.. वो सुरुसेही मेरे सपनोका राजकुमार हे..

मंजुला : (हसते) हां बस.. भुमी आंटीनेभी वोही कीया.. अ‍ेक दिन राखीके तोहफे मे उनकी गोद भरनेको केह दीया.. क्युकी उनकी भी गोदभराइ नही हो रहीथी.. ओर हमारे बापुके लाख समजानेके बावजुद मजबुरन उसे सब करना पडा.. क्युकी बाबाने भुमी बुआसे सब सचाइ बता दीथी.. तो हमारे बापुजीको भुमीबुआके साथ रीलेशनमे आना पडा..

पुनम : (हसते) अच्छा ये सीर्फ बच्चे तक ही सीमीत था.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (हसते) नही पुनो.. वोभी कोलेजमे थी तब हमारे बापुको पसंद करतीथी.. लेकीन हमारे बापु मेरी मम्मीको प्यार करते थे.. हमारे बापुभी कामके अंस थे.. ओर हम सब परीया हे.. तो अ‍ेक बारमे कैसे संतोस मान लेती.. वोभी हमारी तराह हे.. बस अ‍ेक बार उनका स्वाद चख लीया.. फीरतो ये सीलसीला चलता रहा..

भुमी आंटी ओर हमारे बापुने कीसीको अपने रीस्तेके बारेमे आज तक पता चलने नही दीया.. जब नरेश अंकल गुजर गये तबतो दोनोको खुली छुट मील गइ थी.. दोनोने सबसे छुपकर सादी करली.. अकेलेमे दोनो ही मीया बीवीकी तराह रहेते.. ओर दुनीयाके सामने भाइ बहेन बनकर खुब प्यार करते रहे.. बीलकुल तेरी तराह.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी तो क्या आपको ये सब जानकर दुख नही होता..? आइ मीन आपकी मम्मी भी..

मंजुला : पुनो.. मे तेरा इसारा समज गइकी तु क्या कहेना चाहती हे.. अ‍ेक दो दिनमे तुजेभी सब ज्ञात होने लगेगा.. तब तु सबके बारेमे जान जायेगी.. तब आजकी तराह विचलीत मत होना.. तुजे अ‍ैसे कइ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. बस तुजे कीसीपे ज्यादा ध्यान नही देना.. तुम सीर्फ हमारे भाइको प्यार देती रहेना.. सायद बाबाने इसीलीये तेरा मौसीका ओर सृतीका चुनाव कीया हे..

पुनम : (हसते) भाभी मे आपकी तराह स्ट्रोंग नही हु.. हें..हें..हें.. मे भाइको दुसरी ओरतके साथ इमेजींग करती हुतो बुरा लगता हे..

मंजुला : (हसते) पुनो तुजे स्ट्रोंग बनना पडेगा.. जबभी तेरे सामने हमारे पतीके अ‍ैसे रीस्ते सामने आये तब यही सोचनाकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे ओर सभी हमारे पतीकी रानीया हे.. बस.. तुजे दुख नही होगा.. आज हमारे बापु इस दुनीयामे नही हे.. तो उनकी जगह हमारे भाइ देवुने लेली हे.. हम सभी परीया ओर अप्सराये आज हमारे देवुके साथ जुडी हुइ हे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) तो भाभी.. आप केह रहीथीकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे तो क्या इस वक्तभी वो सब हमारे भाइके साथ रीलेशनमे.. आइ मीन आप समज गइनां मे क्या कहेना चाहती हु..

मंजुला : (हसते) हां पुनो तुम जो सोच रहीहो अ‍ैसाही हे.. लेकीन हमे कीसीके रीस्तेको उजागर नही करना.. ओर जोभी हो रहा हे या होने वाला हे उसे होने देना हे.. फीर चाहे मेरी मम्मी हो या सरलाचाची या भुमीका बुआ.. तु सब समज गइनां..? सभी अपने तनकी प्यास अपने स्वामीसे फीजीकल होते बुजाती हे.. सब अपने स्वामीके प्यारमे पागल होजाती हे..

पुनम : (सरमाते हसते) हां भाभी.. समज गइ.. ओर मुजे अब कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. भाभी नीचे बहुत गीला लग रहा हे.. पहेले हम चदर चेन्ज करले..? फीर मुजे आपसे कुछ ओरभी जानना हे.. मेरे मनमे कइ सवाल आ रहे हे..

मंजुला : (हसते) हां चल उतर नीचे.. सुबह होनेको आइ हे.. सब आजही जानलेगी क्या..? हम अ‍ेक दो घंटा आराम करले फीर तुजे सुबह सब बताउगी.. लेकीन तब सीर्फ हम दोनोही होगी.. तभी मे तुजे बताउगी.. फीरतो तुम स्वयंम सब जानलेगी.. चल आजा..

कहेते दोनोही बेडसे उतर गइ फीर पुनमने चदरको चेन्ज करलीया ओर गीली चदर लेकर दोनोही बाथरुममे घुस गइ.. तब पुनमने चदरको वोसींगमे डाल दीया ओर दोनो नहाने लगी.. तब अचानक मंजु पुनमको लेकर बाथटबमे बैठ गइ ओर पानी चालु करदीया.. तब पुनम खुब सरमाने लगी.. ओर मंजु पैर फैलाकर पुनमके सामने बैठ गइ ओर पुनमकी कमरमे हाथ डालकर उसे अपनी ओर खीचलीया ओर पुनमके चहेरेको हाथमे थाम लीया.. फीर उनकी आंखोमे कामुक नजरोसे देखती रही..

पुनम : (अ‍ेकदा सर्मसार होते) भाभी.. प्लीज.. क्या कर रही हो.. मुजे नीचे कुछ हो रहा हे..

मंजुला : (सरमाते मुस्कराते) पुनो मे सीर्फ तेरी भाभी ही नही हु.. तेरी बडी बहेन भी हु.. मेरा भावुके साथ मौसीके साथ सृतीके साथ सबके साथ ये रीस्ता हे.. ओर आज मुजे मेरी इस बहेनपेभी बहुत प्यार आ रहा हे.. आज मेने मेरा सबकुछ तुजे सोंप दीया हे.. मेरा देवु भी.. तो आज मुजे मत रोको.. क्या वंदनाके साथभी तेरा रीस्ता हेनां..?

कहेते मंजु पुनमके चहेरेकी ओर अपना चहेरा लेजाती हे.. तब पुनम सरमके मारे अपनी आंख बंध कर लेती हे.. आज वो अपनी भाभीके साथ पहेलीबार अ‍ैसे रीस्तेमे आ रहीथी.. तभी उसे अपने होठोपे मंजुके होंठ महेसुस होने लगे.. जो मंजु उसे हल्कासा चुम रहीथी.. तब पुनमभी उतेजीत होने लगी.. ओर परंम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. सब सरम त्यागकर वो मंजुका साथ देने लगी.. मंजुके साथ वो आज अ‍ेक अलगही कसीस फील कर रहीथी.. तब उसे क्या पताथाकी मंजु उनके अंदर कीसके माध्यमसे क्या ज्ञान दे रहीहे..





दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठोके रसको पीने लगी.. तभी मंजुने अपने मुहके रसको पुनमके मुहमे उडेल दीया ओर पुनम उसे अपनी हलकमे उतारकर पी गइ.. तब वो अ‍ेकदम उतेजीत होगइ.. वासनाकी आगमे उनका तन कांपने लगा.. तभी दोनोही अ‍ेक दुसरेकी चुतको आपसमे रगडते अ‍ेक दुसरेके उरोजोके साथ खेलने लगी..

कुछ ही देरमे दोनोही जोरोसे सीसकारीया करते अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाने लगी.. दोनोही पुरी तराह कामुक हो चुकी थी.. तभी अचानक ही दोनो अ‍ेक दुसरेके तनसे चीपक गइ ओर दोनोने अपने होंठ लीपलोक करलीये..

फीर अपनी कमरको साथमे जटके देते साथमे जडने लगी.. तब दोनोने अपने होंठ छोड दीये.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंओमे देखती रही.. ओर मंजु पुनमकी ओर देखते कातील स्माइल करते हसने लगी.. तो पुनमभी सरमके मारे पानीपानी होते मुस्कराने लगी.. तभी पुनमको कुछ अजीब फील होने लगा ओर उनकी बैचैनी बढ गइ.. उसे उल्टी जैसा होने लगा.. तो वो जटसे टबसे बहार नीकल गइ.. ओर गेन्डीपे जाकर व्होमीट करने लगी.. तब मंजुने उनकी जटसे बाहर आते पुनमकी पीठको सहेलाया ओर पुनमको उल्टी होगइ..

पुनमने मुहको साफ करलीया.. ओर मंजुकी ओर देखने लगी.. तब मंजुने खुसीसे मुस्कराते पुनमको अपनी बाहोमे भरलीया.. फीर मंजुने अलग होकर पुनमके चहेरेको अपनी दोनो हथेलीमे थामलीया ओर उनकी आंखोमे देखकर मुस्कुराते हां मे सर हीलाने लगी.. तो पुनम खुसीके मारे फीरसे मंजुके गले लग गइ.. फीर दोनोही फटाफट नहाकर बहार आगइ.. तब मंजुने अपने पर्समेसे अ‍ेक गोली नीकालकर पुनमको खीलादी.. ओर अपने अपने नाइट गाउन पहेनकर बेडपे अ‍ेक दुसरेको चीपकर सोने लगी.. तब पुनमने सरमाते कहा..

मंजुला : पुनो.. अभी कीसीको ये उल्टीके बारेमे मत बताना.. ये प्रेगनन्सीकी वजहसे उल्टी हुइ हे.. हमारे भाइने मेरी तराह तुजेभी प्रेगनेन्ट करदीया हे.. ठीक नौ महिनेके बाद तु हमारे भाइकी बच्चीको जन्म देगी.. जो हमारी तराह परी होगी..

पुनम : (सरमाते हसते) जी. भाभी.. आज मे बहुत खुस हु.. भाभी आपको अचानक क्या होगया.. जो अ‍ैसा कीया.. मुजेतो आपके साथ बहुत मजा आया..

मंजुला : (हसते पुनमके बालको सहेलाते) पुनो.. मुजे हमारे भाइसे चुदाइकी आदत पड गइ हे.. मे उनसे चुदाइके बगैर नही रेह सकती.. इसीलये मे सृतीके साथ या चंदामौसीके साथ अ‍ैसा करती हु.. क्या तुम अब हमारे भाइके बगैर रेह सकती हो..?

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाभी.. मेभी नही रेह सकती.. तभीतो में कभी कभी वंदनाके साथ अ‍ैसा करती हु.. क्या.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? जब भाइ कीसी ओरके साथ करते हे तब आपको बुरा नही लगता..?

मंजुला : (हसते) नही.. क्युकी मुजे पता हे मेरा देवु मुजे बहोत प्यार करता हे.. ओर सामको मेरे पासही लोटकर आयेगा.. आगे जाकर तुजेही हमारे देवुको मेरी तराह सम्हालना होगा.. ओर अबतो मे सबको पहेचान गइ हु.. अबतो मुजेभी सब पता चल गया हे की उनकातो कामही यही हे.. पुनो.. देवुके साथ जीनका भी रीलेशन हे वो सभी हमारी तराह परीया हे.. आगे जाकर तुमको बहुत कुछ देखना हे.. ओर सबको सम्हालना हे.. तु मेरी स्ट्रोंग बेटी हे.. ओर हमाराभी कर्तव्य हे की हम हमारे स्वामीके सभी अंसको खुस रखे..

पुनम : (अचानक मंजुकी ओर आस्चर्यसे देखते) सभी अंसोको खुस रखे मतलब..?

मंजुला : पुनो तु अभी इतनी परीपकव नही हुइ हे की सब बात समज सके.. तुजे धीरे धीरे करते सब ज्ञात होजायेगा.. तब तु सबकुछ समज जायेगी..

पुनम : (हसते) भाभी.. क्या वाकइ हम सब आपकी संतान हे..?

मंजुला : हां पुनो.. वास्तवमे हमारे बापुजी उनके बापुजी हमारा देवु तुम सब मेरी ही संतान हो.. हमारे स्वामीकी सीर्फ कुछही रानीया हे.. बाकी सब उन्हीका अंस हे.. जबभी हमे धरतीपे आनाहो तब मुजेही हमारे स्वामीके अंसको जन्म देके उनके साथही मुजे सादी करनी पडती हे.. ओर उनकेही बच्चे पैदा करना होता हे..

पुनम : (हसते) भाभी येतो बहुतही अटपटा हे.. मेरी तो कुछ समजमेही नही आरहा.. बहुत बाते हे जो मुजे आपसे जाननी हे.. कुछ चहेरे मेने देखे जो उनके बारेमे सब जानना हे..

मंजुला : (होठोपे कीस करते) मुजे पता हे तुम कीसके बारेमे बात करना चाहती हे.. अब बहुत देर होगइ हे कुछ आराम करले..? तुजे सब कुछ कल बताउगी.. मुजे पता हे तुजे कीसके बारेमे जानना हे.. चल सोजा..

तब दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकते सो जाती हे.. तब बाजुके रुममे चंदाभी पुरी रात देवायतके नीचे लेटकर चुदवाते थककर चकनाचुर हो चुकीथी.. वो देवायतके बालो ओर पीठ सहेलाती कब नींदकी आगोसमे चली गइ उनको पताही नही चला.. तब देवायतभी अभी तक उनकी चुतमे लंड डालके चंदाके सीनेपे सर रखके सो चुकाथा.. दोनो अनुभुतीमे पुरी रात चुदाइ करते रहे.. जीनकी वजहसे दोनोही थकके सो चुकेथे.. तब गांवमेभी जब सबको होंस आया तब सब फटाफट अपनी जगाह जाकर सोने लगे.. तब ओरते ओर लडकीयाभी महा मुस्कीलसे चलके अपने रुममे जाकर सोगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९९

तब दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकते सो जाती हे.. तब बाजुके रुममे चंदाभी पुरी रात देवायतके नीचे लेटकर चुदवाते थककर चकनाचुर हो चुकीथी.. वो देवायतके बालो ओर पीठ सहेलाती कब नींदकी आगोसमे चली गइ उनको पताही नही चला.. तब देवायतभी अभी तक उनकी चुतमे लंड डालके चंदाके सीनेपे सर रखके सो चुकाथा.. दोनो अनुभुतीमे पुरी रात चुदाइ करते रहे.. जीनकी वजहसे दोनोही थकके सो चुकेथे.. तब गांवमेभी जब सबको होंस आया तब सब फटाफट अपनी जगाह जाकर सोने लगे.. तब ओरते ओर लडकीयाभी महा मुस्कीलसे चलके अपने रुममे जाकर सोगइ....अब आगे

आज सुबहका सुरज नीकला तब अ‍ेक नइ रोसनी ओर नइ उर्जा लेकर नीकला.. आज गांवमे सबकुछ बदल चुकाथा.. आज सभी बहुत देरसे उठे.. तब कीसीको नही पताथाकी आने वाले समयमे गांवमे रीस्तोकी अ‍ेक नइ परंपराकी नीव लग चुकी हे.. कीतनी ओरते ओर लडकीयोके उदर मे अपने यारका बीज स्थापीत हो चुका हे.. गांवमे पुरी रात चुदाइकी वजहसे कीसीको नही पताथा की वो अपने यारसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..

जब चंदाकी आंख देरसे खुली तब देवायत अभीभी उनकी चुतमे लंड डालके पडाथा.. तब चंदा खुब सरमाइ ओर देवायतको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी तब देवायतने आंख खोलकर देखाकी वो अभीभी चंदाके उपर कैसे सोया हुआ हे.. तब चंदाको देखतेही उनका लंड फीरसे तन गया.. ओर चुतके अंदरही जटके मारने लगा.. तब चंदा अपनी चुतमे लंडकी हलचल होतेही खुब सरमाइ ओर देवायतसे नजरे चुराने लगी.. ओर सरमाते धीरेसे कहेने लगी..





चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. बहुत वजन लग रहा हे.. अब उपरसे हटोना.. आप पुरी रात अ‍ैसेही पडे हे.. मुजेतो आज आपने थका दीया.. कुछ पताही नहीथा की आप कीतनी देर तक करते रहे.. मेतो बेहोसीकी हालतमे चली गइ थी.. जानु अ‍ैसा लगता हे आप पुरी रात अ‍ैसेही अंदर डालके मुजे चोदते रहे हो..

देवायत : (गाल चुमते) अरे.. चंदा अब तुम मेरी बीवी हो.. ओर कल हमारी सुहागरात थी.. तो क्या मे तुजे छोडता..? अबतो हमारी हर रात अ‍ैसेही होगी..

चंदा : (सर्मसार होते) देवु आप पुरी रात मेरी बजाते रहे.. अभी भी जी नही भरा..? देखोना अभीभी आपका अंदर उछल कुद कर रहा हे.. मुजेतो चोद चोदके थका दीया.. अब हटीयेना उपरसे.. मंजु जाग गइ होगी..

देवायत : (हसते) बस अ‍ेक बार मेरी इस खुबसुरत बीवीको अच्छेसे गुडमोर्नींग करलु.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते सीनेमे अ‍ेक मुका मारते) क्या गुड मोर्नींग करलु..? अरे बाबा नीचे बहुत दर्द कर रहा हे.. पुरी राततो मुजे चोदते रहे.. अब कीतनी चुदाइ करनी हे.. इतना तो आपने मुजे कभी नही चोदा.. सारी कशर अ‍ेकही रातमे पुरी करली.. क्या अभीभी आपका जी नही भरा..? अब मुजे हीलनेकी भी ताकात नही हे.. आप कीतना जोसमे चोदते हो.. हमारीतो हालतही खराब कर देते हो..

देवायत : (कमर हीलाते) अरे बस अ‍ेक बार.. फीर मे तुजे बाथरुममे ले चलता हु.. फीर आराम करती रहेनां..

कहेते देवायत चंदाको धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा तब चंदाभी समज गइकी उनका पती अब उसे चोदे बगैर मानने वाला नही हे.. तो वोभी देवायतकी पीठ सहेलाते फीरसे गरम होने लगी ओर देवायतका साथ देने लगी.. अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी..





तब देवायत हाथके बल उचा होकर चंदाको जोरोसे कमर हिलाते चोदता रहा.. ओर चंदाभी देवायतके हर धकेको आहे भरते जेलती रही.. देवायतने सुबहभी चंदाको दो बार जडा दीया.. ओर आखीर दोनोही अ‍ेक दुसरेसे चीपक गये ओर साथमे जड गये..





तब देवायत जटसे चंदाके उपरसे हट गया.. तो चंदा अ‍ैसेही बेसुध जैसी हालतमे पडी रही.. उनकी चुतसे दोनोका कामरस बहेते नीचे बेडपे गीरने लगा.. तब देवायतने उनकी कमरमे हाथ डालके चंदाको गोदमे उठालीया ओर बाथरुमकी ओर चल पडा.. ओर अंदर जातेही चंदाको कमोडपे बीठा दीया ओर पहेले उनकी चुतकी सीकाइ करदी.. फीर दोनोने नहालीया तब देवायत फीरसे चंदाको गोदमे बहार लेकर आ गया.. ओर चंदाको अ‍ेक खुरसीपे बीठाकर चदरको चेन्ज करलीया तबतक चंदा देवायतको देखती ही रही..

बादमे देवायतने चंदाको उठाकर बेडपे सुला दीया.. ओर उनके उपर चदर डालके जैसेही जानेके लीये पलटा चंदाने फोरन देवायतका हाथ पकडलीया ओर उसे खीचकर अपने सीनेसे लगा लीया.. ओर चंदा देवायतको सीनेसे लगाकर लगातार थेन्कयु थेन्कयु कहे जा रहीथी.. आखीर देवायत सीसेके सामने जाकर तैयार होने लगा.. तभी उनके रुमका दरवाजा कीसीने खटखटाया.. तब देवायत समज गया ओर स्माइल कते दरवाजा खोलता हे..

तब सामने मंजु तैयार होकर मुस्कराते खडीथी.. जैसेही देवायतने दरवाजा खोला वो देवायतको हसते हुअ‍े धका मारके अंदर चली गइ ओर बेडके पास जाकर चंदाकी हालत देखने लगी.. ओर जोरोसे हस पडी.. तब देवायतभी वापस दरवाजा बंध करते हसते हुअ‍े मंजुकी ओर देखता रहा.. तब चंदा आंख बंध करते बेहोसी जैसी हालतमे पडी थी..

तभी मंजु मुस्कराते अपने दांत पीसते जुठे गुसेसे देवायतको मारनेके लीये उनके पीछे दोडने लगी.. तो देवायतभी हसते हुअ‍े बेडके आस पास चकर लगाता रहा.. ओर आखीर हसते हुअ‍े रुक गया.. ओर मंजुको अपनी बाहोमे पकड लीया तब मंजु देवायतकी बाहोमे आतेही उनके सीनेमे मुके मारते हसने लगी.. तो देवायतनेभी मंजुको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तब मंजु आउच.. करते हसने लगी..





मंजुला : (हसते) जानु आपने मौसीकीतो हालतही खराब करदी.. दोनोने कीतनी बार कीया..? कहा तक जागे थे..? देखो बेचारी अभीभी बेहोस होकर पडी हे.. कुछतो उनपे रहेम करते.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते मंजुका सर चुमते) मंजु अभीतो हमने सीर्फ दो बारही कीयाथा.. फीर पता नही हमे क्या हो गया.. चुदाइ करते करते हम दोनोही नींदकी आगोसमे चले गये.. जैसे कोइ स्वर्गमे चले गये हो.. ओर मेने आज अ‍ेक अदभुत स्वप्न देखा.. जैसे मे अ‍ेक राजा हु ओर आप सभी मेरी रानीया हो.. फीरतो हम सुबह ही उठे तब अ‍ेक बार सुबह कीया.. ओर हमने नहालीया.. इनको सुलाके मे तैयार हो रहाथा तभी तुम आगइ.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मंजु देवायतको अनुभुतीकी बात अभी कहेना नही चाहतीथी) ठीक हे ठीक हे.. जानु आप फटाफट तैयार होजाओ आपको लता नीलुको उनके घर छोडने जाना हे.. फीर सरलामौसीसे सादीकी सब बात करके सीधेही मम्मीके घर चले जाना.. ओर मम्मी पापा आनेके लीये आनाकानी करे तो मुजसे फोनपे बात करवाना.. उन दोनोको यही लेकर आना हे.. अब सादी तक दोनो यही रहेगे..

देवायत : (हसते होठोपे कीस करते) हां मेरी डार्लींग अब तु जो कहेगी वोही करना हे.. ओर कोइ हुकुम..?

मंजुला : (हसते सीनेमे मुका मारते धीरेसे कानमे) देवु.. रातमे पुनोको उल्टी हुइ हे.. सी इस प्रेगनेन्ट.. बस इस बात अभी सबसे छुपाके रखनी हे.. फीर आप आओ तब हम आरामसे बाते करेगे.. अभी मौसी ओर पुनोको आराम करने दो.. चलो दयाने सब रेडी रखा हे ओर वो लता नीलु दोनो भी तैयार होकर बैठी हे.. चलीये.. मे आपको कपडे देती हु..

कहेते मंजु देवायतकी बाहोसे छुटकर अलमारीसे देवायतको कपडे नीकालकर देती हे ओर बहार चली जाती हे तब देवायत फटाफट तैयार होगया ओर बहार आकर डाइनींगपे बेठ गया.. तब दया देवायतकी ओर कामुक मुस्कान करते उसे चाइ नास्ता देती हे.. तब साथमे मंजु लता ओर नीलमभी चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तब लता चाइ नास्ता करते चोर नजरसे देवायतके पेन्टके उभारकी ओर देखती रहेती हे..

लता इस पेन्टके उभारमे छुपे हुअ‍े लंडको कइ बार अपनी आंखोसे देख चुकी हे.. जबभी देवायत अपनी मां सरलाकी चुदाइ करने आता.. वो छुपकेसे घरके आंगनसे होते कमरेके पीछे दबे पांव चली जाती.. ओर खीडकीसे दोनोकी चुदाइ देखती रहेती.. जब दोनोकी चुदाइ देखती तबतक वो वहा अपनी चुतको सहेलाती रहेती.. फीर चुदाइ खत्म होतेही वो जटसे बाथरुममे घुस जाती..





ओर देवायतको इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली डालकर अपने आपको सांत करती.. फीर आरामसे हसती हुइ वापस अपने रुममे आजाती.. वो अपने रुमसे दरवाजेके छेदसे अपने भाइ भाभीको चोदते देखकर भी भानुके लंडका दीदार कर चुकी थी.. जीनकी वजहसे लखनके साथ सगाइ होतेही वो लखनसे सादीसे पहेलेही चुदवानेका मन बना चुकी थी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप खुद लखनके लंडसे कइ बार चुदवा चुकी..

लताने तीन तीन लंडके दिदार कीयाथा.. इनमे सबसे ज्यादा दमदार ओर तगडा मोटा उसे देवायतका लंड लगा.. ओर तबसे उनका पसंदीदा लंड देवायतका लंड था.. जबभी देवायतके सामने जाती.. वो देवायतके पेन्टके उभारको देखे बगैर नही रेहती.. लेकीन अब देवायत उनके जेठजी थे.. फीरभी देवायतके सामने आतेही वो सबकुछ भुलकर देवायतके लंडकी ओर घुरते हुअ‍े देखती रहेती.. आजभी वो देवायतके पेन्टके उभारको देखती हे तब उसे नीलमने घुरते हुअ‍े देखलीया..

तब नीलमभी सरमाते लताकी ओर देखकर मुस्कराती रहेती हे.. सब चाइ नास्ता करते हे तब नास्ता करते मंजु लतासे बाते करती हे ओर सबको सादीके तीन दिन पहेलेही आनेकी बात करती हे.. ओर सबने चाइ नास्ता करलीया तब देवायत कारकी ओर चला गया.. तो लता ओर नीलम अपने सामानकी केरी बेग लेकर कारमे बेठने लगी.. दोनोही पीछे बेठ गइ तब मंजु उनको कार तक छोडने आइ ओर बाते करती रही..

तब देवायत कार लेकर नीकल गया.. तो मंजु फटाफट चंदाके पास रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करके बेडकी ओर चली गइ.. फीर बेडपे बैठकर धीरेसे चंदाका पेटीकोट उठाकर देखने लगी.. तो चंदाकी चुत सुजके पांव जैसी होगइ थी.. ओर पुरी लाल लाल दीख रहीथी तब मंजुको समजनेमे देर नही लगीकी देवु पुरी रात चंदाको चोद चुका हे.. ओर वो येभी जानतीथी की ये सब उस अनुभुतीकी वजहसे हुआ हे..

फीर मंजु चंदाके कपडे सही करके उनपे कंबल डाल देती हे ओर बहार आकर दरवाजा बंध कर देती हे फीर वो पुनमके पास चली जाती हे तब पुनमभी घोडे बेचकर सो रही थी.. ओर मंजु बच्चेको लेकर बेडके कोनेमे बेठ जाती हे ओर अपना ब्लाउस उचा करके विजयको दुध पीलाने लगती हे.. दया सब काम नीपटाने लगती हे तो रजीया जाडु पोछा लेकर उपरकी ओर जाने लगती हे तब दया उनके पास जाकर रोकती हे..

दया : (धीरेसे) रजीया.. जाडु पोछा लगाकर सीधी नीचे ही आजाना.. तु आगसे खेल रही हे.. आज कल तु जो खेल खेल रही हेनां.. मुजे सब पता हे.. याद रखना उनकी कुछ ही दिनोमे सादी होने वाली हे.. अगर तु फस गइतो कहीकी नही रहेगी.. कीतनोको नीदकी गोली पीलाती रहेगी..

रजीया : (गभराते गांड फटगइ) जी.. जी.. दया.. वो..वो.. मे..मे..तो जाडु पोछा लगाने जाती हु..

दया : (कातील मुस्कानसे धीरेसे) हां हां.. पता हे कहा जाडु पोछा लगाने जाती हे.. क्या तु हमारे बडे मालीकसे संतुस्ट नही हे..? वो हम दोनोका खयाल तो रखते हे.. ओर मेने मालीकसे हम दोनोके बारेमे बातभी करली हे.. तो फीर तुजे कीस बातकी जल्दी हे..? बस मुजे तुजे आगाह करना था करदीया.. बाकी तु जाने.. ओर तेरा काम.. जा.. फटाफट काम नीपटाले..

कहेते दया रजीयाकी ओर कातील मुस्कान करते कीचनमे चली गइ.. तब रजीया उनको मुह फाडके देखती ही रही.. मानो उनकी कोइ बडी चोरी पकडी गइ हो.. उनको पताही नही चलाकी उनके ओर लखनके नाजायज रीस्तोके बारेमे दयाको कैसे पता चल गया..? फीर वोभी भारी मनसे उपरकी ओर धीरे धीरे जाने लगी.. उनको लगताथा की उनके ओर लखनके बारेमे कीसीको पता नही हे.. लेकीन दयाको ये सब कैसे मालुम हुआ..?

मे पता लगाकर ही रहुगी यही सब सोचते वो उपरके सभी रुममे साफ सफाइ करने लगी.. ओर काम करते उनकी आंख गीली होने लगी.. उनको अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा.. ओर यहासे उसे नीकाल दियातो वो कहा जायेगी..? उनके मनमे यही सब सवालोका धमासान युध्ध हो रहाथा.. ओर वो आंसु बहाते काम करती रही.. जब लखनके रुममे जानेकी बारी आइ तब उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. आज पहेली बार लखनके रुममे जानेके लीये उनके पाव डग मगाने लगे..

जब कोइ रुममे होता हे तब आमतोरपे उनको रुममे जानेकी इजाजत नही थी.. लेकीन लखननेही रजीयाको अपने रुममे बीना परमीसन आनेकी छुट दे रखीथी.. तब आज पहेली बार वो डरते डरते लखनके रुममे चली गइ.. तब लखन बाथरुममे नहा रहाथा.. ओर रजीया चुपचाप जाडु पोछा लगाने लगी.. तभी लखन नहाकर बहार नीकला ओर उसने रजीयाको जाडु पोछा लगाते देख लीया..

तब उनके चहेरेपे कातील मु्सकान आगइ.. ओर वो दरवाजेकी ओर जाने लगा तब रजीया उनको भारी धडकनसे देखती रही.. तभी लखन दरवाजा बंध करके रजीयाकी ओर बढने लगा तब रजीया जाडु पोछा छोडके जटसे खडी होगइ ओर गभराते दो कदम पीछे हटते लखनकी ओर देखती रही.. आज पहेलीबार उसे लखनसे डर लगने लगा.. ओर लखनने आतेही रजीयाको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. लेकीन आज रजीया गभराते खीडकीकी ओर देखती यंत्रवत खडी रही..

लखन : (हसते) डार्लींग क्या हुआ.. अ‍ैसे क्यु गभरा रही हे..? कुछ हुआ क्या..?

रजीया : (आंसु बहाते लखनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करते धीरेसे) लखनभैया प्लीज.. छोडदो.. वो.. वो.. दया.. छोडदीजीये मुजे..

लखन : (उनको छोडके खीडकीकी ओर देखते) रजीया..? क्या हुआ तु इतनी क्यु गभराइ हुइ हे..? वहा खीडकीमे क्या देख रही हे..? कीसीने तुजे कुछ कहा क्या..? ओर दया.. क्या..?

रजीया : (सरमाते आंखमे आंसुके साथ धीरेसे) लखनभैया वो.. वो.. हमारे बारेमे दयाको सब पता चल गया हे.., मे कहीकी नही रहुगी.. प्लीज मुजे जानेदो.. दया अभी आती ही होगी.. मे बरबाद होजाउगी.. तो कहा जाउगी.. (आंसु बहाते रोने लगी)

लखन : (बाहोमे लेकर रजीयाके आंसु पोछते) रजीया तु मत गभरा मे तेरे साथ हु.. अगर तुजे कीसीने कुछ कहातो मेभी तुम्हारे साथ चलुगा.. मे तुजे सचमे प्यार करता हु.. हम दोनो सादी कर लेगे.. चुप होजा.. तु मेरी बीवी हे.. मेने तुजे सचे दीलसे अपनी पत्नी माना हे.. बस चुप होजा तुजे मेरी कसम हे..

रजीया : नही लखनभैया.. अ‍ैसी गलती मत करना अभी आपकी सादी होनेवाली हे.. मे नही चाहती मेरी वजहसे इस हवेलीमे कोइ हंगामा हो.. वरना मुजे ये हवेली छोडके जाना पडेगा.. प्लीज.. मुजे छोडदो.. ओर मतदो अपनी कसम.. मेभी आपको सचा प्यार करती हु..

रजीया बहुतही गभराइ हुइथी.. ओर लखनकोभी उनपे दया आगइ ओर उसने रजीयाको छोड दीया.. तब रजीया फटाफट जाडु पोछा लेकर अपने आंसु पोछते नीचे चली गइ.. तब लखनकोभी रजीयापे तरस आने लगी.. ओर उसने इस बारेमे दयासे बात करनेका फैसला करलीया.. ओर वोभी तैयार होने लगा.. तब नीचेकी ओर रजीया जाडु पोछा रखकर सीधेही आंसु बहाते दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तब उनकी सब हरकत दो आंखे देख रही थी..

रजीया बेडपे पेटके बल लेटकर तकीयामे मुह छुपाकर जोरोसे रोने लगी.. तभी उनकी पीठपे कीसीका हाथ महेसुस हुआ तब रजीयाने आंख पोछते पीछे मुह घुमाते देखा तो दया उनके पास बेडपे बैठकर उनकी पीठ सहेला रहीथी तब रजीया बेडपे बैठ गइ ओर दयासे लीपटकर फीरसे रोने लगी.. दयाने उसे थोडी देर रोने दीया तबतक वो उनकी पीठ सहेलाती रही फीर रजीयाको बाहोसे अलग करदीया.. ओर उनका दोनो हाथ पकडके कहा..

दया : (धीरेसे) रजीया आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे नही पताथाकी तुम दोनो इतना आगे बढ चुके हो.. लेकीन सोच हम दोनो बहुत छोटे लोग हे.. हमतो मालीककी ओर हमारी जीस्मानी आगको ठंडी कर सकती हे.. हमारी क्या ओकात की हम मालीकसे प्यार करे..

रजीया : (आंसु बहाते धीरेसे) दया.. मे क्या करु..? पहेली बार उसने मेरे साथ जबरदस्तीसे कीया.. फीरतो आये दीन मुजे बुलाने लगे ओर मुजेभी अच्छा लगने लगा.. फीरतो पताही नही चला हम दोनोके बीच कब प्यार होगया.. वोभी मुजे बहुत चाहते हे.. ओर मुजसे सादी करनेकी बात करते हे तो मे क्या करु..? अब तुही बता.. मेभी उनको बहुत चाहने लगी हु.. मे उनके बगैर नही रेह सकती.. ओर वोभी मुजे बार बार सादीका फोर्स कर रहे हे.. मे क्या करु..? मे.. क्या.. करु....? (जोरोे रोने लगती हे..)

दया : (हाथ पकडके समजाते) रजीया.. हमतो यहा नौकरानी हे.. हमे प्यार करनेका कोइ हक नही हे.. येतो अच्छा हे बडे मालीक ओर मालकीन हमारी जरुरतको समजते हे.. ओर मालीक हमारे तनकी प्यास बुजाते हे.. वरना सोच हम क्या करती..? कीतने भेडीये इस गांवमे घुम रहे हे.. हमतो सबकी रंडी बनके रेह जाती.. अच्छा हे मालीककी वजहसे हमारी ओर कोइ आंख उठाके भी नही देखता.. वरना सोच में अ‍ेक विधवा ओर तु त्यक्ता.. हमारी हालत क्या होती.. हम कहा जाती..? तो हम मालीकको धोखा कैसे दे सकते हे..

रजीया : (धीरेसे) दया मुजे सब पता हे.. मालीकने हम दोनोका बहुत खयाल रखा हे.. तो क्या हमे कीसीसे प्यार करनेकाभी हक नही हे..? तो कमसे कम हम दोनोको अ‍ेक बच्चाही दे देते.. हम उसीके सहारे हमारी जींदगी जी लेते.. वो हमे बच्चा क्यु नही देते..? मुजे लखनभैयाने वादा कीया हे.. वो मुजे बच्चाभी देगे ओर उनका नामभी देगे.. तो मे क्या करती..? मे अपने आपको अब लखनभैयाको पुरी समर्पीत कर चुकी हु..

दया : (रजीयाके दोनो हाथ पकडते उनकी आंखोमे देखते धीरेसे) रजीया मुजे पुरी बात बताओ तुम दोनो कहा तक आगे बढे हो..?

रजीया : (नजर जुकाते धीरेसे) दया वो.. वो.. लखनभैया मेरी मांग भरचुके हे.. अ‍ेक दिन हवेलीमे कोइ नही था.. तब मे उनके कहेनेसे मेरे पास पडे सादीके जोडेमे चली गइ.. ओर उसी दीन मेरी मांग भरदी ओर हमने पुरी रात हमारी सुहागरात भी मनाइ.. तो अब तुही बता मे उनके बगैर कैसे रेह सकती हु.. बस मुजे उनकी सादी तक इन्तजार करनेको कहा हे.. फीर वो खुद बडे मालीकसे हम दोनोकी बात करने वाले हे..

दया : (सोक्ट होते धीरेसे) रजीया.. पागल होगइ हो क्या..? ये बात तु अभी सबसे छुपाले.. कीसीके सामने अपना मुह मत खोलना.. अभी लखनभैयाकी सादी हे तबतक तुम चुप रहेना.. अभी चल बहार.. सब काम पडा हे हम इस बारेमे रातमे आरामसे बात करेगे.. इसके बारेमे बाद मे सोचेगे.. तबतक कीसीको पता नही चलना चाहीये.. समजी..? तभी..

मंजुला : (दरवाजेके पास खडी रहेते) पता चलना नही चाहीये.. नही.. पता चल गया हे..

कहेते दरवाजा बंध करते दोनोकी ओर आती हे.. तब दया ओर रजीया मुह फाडके उनकी ओर गभराते हुअ‍े देखती ही रेह गइ.. दया ओर रजीया दोनोकी गांड फटने लगी.. उनको उमीद नही थी.. की मंजु कभी उनके रुममे आजायेगी.. तब मंजु धीरेसे बेडपे उन दोनोके पास आकर बेठ गइ.. ओर मुस्कुराते दोनोकी ओर देखती रही.. तो रजीया ओर दया दोनोही गभराते नजर जुकाते खामोस बैठी रही..

दया : (गांड फटते गभराते) दी..दी.. वो.. वो.. आ..प.. इधर..?

मंजुला : (हसते) हां.. तो मे इधर नही आ सकती..? ओर तुम दोनो इतनी गभराइ हुइ क्यु हो..? मे कोइ भुत नही हु.. मुजेतो तुमसे कामथा तो तुजे ढुंढते इधर आगइ.. ओर अच्छा हुआ में इधर आगइ.. ताकी मुजे पतातो चलाकी मेरे घरमे सब क्या हो रहा हे.. वरना मुजे कभीभी इस बातका पताही नही चलता..

दया : (गभरराते) दीदी.. वो.. वो.. में रजीयाको यही समजा रहीथी.. इसमे इनकी कोइ गलती नही हे..

मंजुला : (प्यारसे रजीयाके सरमे हाथ घुमाते) अरे इतना क्यु गभरा रहीहो.. मुजेतो पताही नही थाकी मेरी देवरानी हमारे घरमे नोकरानी बनके काम कर रही हे.. ओर हमने तो आप दोनोको कभी नौकर समजाही नही हे.. मेरे लखनको बहुत प्यार करती हे..?

रजीया : (सरमाते नजर जुकाते) मालकीन.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे बस अ‍ेक बार माफ करदो.. मे वादा करती हु आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही होगी.. वरना में कहीकी नही रहुगी.. (आंसु बहाते रोने लगी)

कहेते रजीया रोते हुअ‍े बेडसे उतरकर मंजुके पैर पडने लगती हे तब मंजु उसे हसते हुअ‍े कंधेसे पकडकर खडा कर देती हे ओर अपने पास बीठा देती हे.. फीर रजीयाके आंसु अपनी साडीके पलुसे पोछते प्यारसे रजीयाके सरको सहेलाती हे.. तब रजीया सरमके मारे नजरे जुकाते मंजुके पास बैठ जाती हे तो दयाभी मंजुकी ओर मुह फाडके देखती रहेती हे.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : रजीया तुम गभराओ नही तुजे कुछ भी होने वाला नही.. ओर मे तुमसे नाराज भी नही हु.. मेने तुम दोनोकी पुरी बात सुनली हे.. अगर लखनभैयाभी तुमको चाहता हेतो मे तुमको तुम्हारा हक दीलवाउगी.. बस अ‍ेक बार मेरे लखनकी सादी होजानेदो.. पता नही लताका स्वभाव कैसा होगा.. फीर मे खुद लखनसे इस बारेमे बात करुगी.. अगर वोभी तुजे प्यार करता हेतो मे खुद तुम दोनोकी सादी करवा दुगी..

दया : (धीरेसे) दीदी.. ये आप क्या केह रही हे..? क्या बडे मालीक इस बातके लीये मानेगे..? हमतो नौकरानी हे.. अ‍ेक नौकरानीसे सादी..?

मंजुला : (हसते) दया हमने आजतक तुम दोनोको अपनी नौकरानी कभी नही समजा.. ओर तुम दोनो क्यु अपने आपको छोटी जात समजती हो..? क्या तुमको प्यार करनेका हक नही हे..? ओर कमसे कम मेतो उच नीच जातको कभी नही मानती.. बस तुम दोनोको अ‍ेक ही बिनंती हे.. सादी तक जैसा चल रहा हे चलने दो..

रजीया : मालकीन आप यकीन कीजीये इस बातकी सुरुआत मैने नही कीथी.. बस अ‍ेक दिन लखनभैयाने मेरे साथ..

मंजुला : (हसते) रजीया मेने तुम दोनोकी पुरी बात सुनी हे.. ओर मुजे पता हे इनमे गलती तेरी नही हे.. बस ये साली आगही कुछ अ‍ैसी हे.. फीर चाहे वो पुरुषकी हो या हम स्त्रीओकी.. हम सब प्रकृतीसे बंधे हुअ‍े हे.. बस कीसीपे दिल आजाना चाहीये.. फीर चाहे आपसमे कोइभी रीस्ता क्यु ना हो.. दोनो मीलकरही रहेते हे.. ओर अब ये मुजे मालकीन कहेना बंध करदे.. अबतो तुम मेरी देवरानी हो.. मुजेही नही सबको दीदी कहेके बुला वरना खुब पीटुगी.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाते हसते) जी मालकी.. ओर सोरी सोरी.. दीदी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (खडी होते) चलो तुम दोनो अपने कामपे लग जाओ.. अब तुजे तेरा हक दीलवानेकी जीम्वेवारी मेरी.. इस बारेमे हम अब सादीके बाद ही बात करेगे.. ओर दया.. तुम कभी हमारी नौकरानी नही हो सकती.. इस बारेमे हम कभी फुरसतमे बात करेगे.. ओके..?

दया : (हसते) जी दीदी.. हमतो आपको यहा देखकर गभरा गइ थी.. हें..हें..हें..

तभी तीनोही हसते हुअ‍े बहार आगइ.. तब लखन डाइनींगपे बेठा चाइ नास्तेका इन्तजार कर रहाथा तब मंजु उनके सामने हसते हुअ‍े पुनमके पास चली गइ.. तो दयाभी लखनकी ओर हलती हुइ कीचनमे लगी गइ तब उनके पीछे रजीयाभी लखनको देखतेही सरमाते हसने लगी ओर वोभी नजर जुकाते कीचनमे चली गइ तब लखनको कुछ समजमे नही आयाकी सब उनके सामने देखकर क्यु हस रही हे.. सब क्या हो रहा हे..

दया : (हसते धीरेसे मजाकमें) रजु.. जा अपने पतीको चाइनास्ता करादे.. बेचारा भुखा होगा.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमसे पानीपानी होते) धत्.. दया तुजे अ‍ेक मारुगी.. मुजेतो सरम आरही हे.. तुही जाकर देदे..

दया : (हसते) अरी जाना.. इनमे काहेकी सरम.. रातमेतो बडी उछल उछलकर उनसे चुदवा रहीथी.. तब सरम नही आइ.. ओर अबतो दीदीने भी हा कहेदी हे.. जा.. देदे.. हें..हें..हें..

कहातो रजीया सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर दयाकी पीठमे अ‍ेक मुका जड दीया.. फीर चाइ नास्ता लेकर बहार चली गइ.. आज वो लखनसे नजरे नही मीला पा रहीथी.. नइ नवेली दुल्हनकी तराह बहुतही सरमा रहीथी.. जब चाइ नास्ता देने लगी तब लखन उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखता रहा तब रजीयाने सरमाते हसते हुअ‍े नांमे गरदन हिलाइ ओर वो फटाफट वापस कीचनमे चली गइ.. तब दया हस रहीथी.. तो रजीया अंदर जातेही उनसे लीपट गइ..

दया : (धीरेसे कानमे) रजु.. क्या बात हे आजतो अपने पतीसे बहुत सरमा रही हो.. हें..हें..हें..

रजीया : (आज पहेलीबार दीदी कहा) दीदी.. प्लीज.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. मत छेडो मुजे..

दया : (खुस होते धीरेसे) क्या..? दी..दी..? कमीनी अब मुजे दीदीही कहेना.. अब तु मेरी बहेन नही.. मेरी भाभी होने वाली हे.. ओर मत भुलो मे बडे मालीक ओर लखनभैयाको अपना भाइ मानती हु..

रजीया : (जोरोसे हसते धीरेसे) तो कमीनी तु क्या अपने बडेभैयासे चुदवाती हे..? बापरे.. उनका कीतना बडा लंड हे.. दया मेनेतो इतना बडा लंड कभी नही देखा.. जैसे कोइ गधेका लंड हो..

दया : (सरमाते हसते) रजु.. अ‍ेक बात पुछु.? तो क्या लखनभैयाका लंड इतना बडा नही हे..?

रजीया : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) नही.. दीदी उनकातो बडेभैयासे आधाभी नही हे.. फीरभी काम चल जाता हे.. हें..हें..हें.. तुजे पता हे वोतो इस मामलेमे बीलकुल अनाडी थे.. मेने ही उसे सब सीखाया.. तब जाकर अब ठीक ढंगसे चुदाइ कर पाते हे.. वरना लताभाभीतो गइथी कामसे.. बेचारी सुहागरातमेही दुखी होजाती.. हें..हें..हें..

दया : (मुहपे हाथ रखते धीरेसे) क्या बात कर रही हे..? तो फीर कमीनी तुम इतनी आगे क्यु बढी..?

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी अब आपसे क्या छुपाउ.. साली ये चुतकी आगही अ‍ैसी हे.. उसे अब रोज लंडकी आदत लग गइ हे.. उसे रोज लंड चाहीये.. तो मे कहासे नीकालु.. ओर अबतो बडेभैयाभी हमारे पास कम आते हे.. पहेलेतो कैसे हम दोनोको रात रात भर चोदते थे.. इसीलीये मेने लखनभैयाकी बात मानली..

अबतो वो काफी कुछ सीख गये हे.. पता हे अ‍ेक राततो हम दोनोही सुबह तक चुदाइ करते रहे.. वो गोली खाकर सुबह तक लगे रहे.. ओर अबतो मुजेभी उनसे प्यार होगया हे.. बस मुजेतो अ‍ेक बच्चा चाहीये.. फीर चाहे लखनभैया देदे या बडे भैया.. मुजे कोइ फर्क नही पडता.. कमसे कम अब मे सादीसुधातो कहेलवाउगी..

तभी बहारसे मंजुकी आवाज आइ तो दया बहार चली गइ.. ओर रजीया कीचनमे काम करने लगी.. आज दोनोही बहुत खुस थी.. तब लखनभी चाइनास्ता करके खेतोपे जा चुकाथा.. तो दया वहा डाइनींगपे सब बर्तन लेकर सब काम नीपटाने लगी.. तो दुसरी ओर पुनम ओर चंदा अभीभी गहेरी नींदमे सो रहीथी.. ओर मंजु विजयको लेकर होलमे सोफेपे बैठकर उनके साथ खेल रही थी.. अबतो विजयभी थोडा बडा हो चुकाथा ओर मंजु चंदा पुनम सबको पहेचान चुकाथा..

इधर देवायत चुपचाप कार चला रहाथा.. तब लता ओर नीलम दोनोही उनकी पीछेकी सीटमे बैठीथी.. तब अनायास ही लताका ध्यान कारमे सेन्टर मीररमे चला गया तब उसे देवायतका मुह साफ दीखाइ देने लगा तो वो मनही मन खुस होगइ ओर देवायतको मीररमे देखती रही.. वो ओर नीलम धीमी आवाजमे बात करने लगी.. लेकीन बात करते समयभी लता मीररमे देख रहीथी.. जैसे वो देवायतको लुभानेकी कोसीस करती हो..

नीलम : (धीरेसे कानमें) दीदी.. वो..वो.. धिरेनजीजुको फोन करके बात करलेना.. वरना वो नाराज होजायेगे.. उसने मुजे कसम दी हे..

लता : (नाराज होते मीररमे देखते) क्यु..? तुजे बहुत खुजली हो रहीहे.. क्या..? हंम.. तुजे बहुत चीन्ता हो रही हे धिरेन जीजुकी.. कही तेरा मनतो नही बहेक गया..?

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) नही.. दीदी.. उसने मुजे फोन करनेके लीये कसम दी हे.. तो..

लता : (तीरछी नजरोसे मीरमे देखते) ठीक हे.. ठीक हे.. कसम दीहे तो क्या हुआ..? मे बात करलुगी उसे.. कमीना कहीका..

तभी देवायतका ध्यान सीसेपे चला जाता हे.. तब उसने देखा लता सीर्फ उनकोही सीसेसे देख रही हे.. जैसेही दोनोकी नजर मीली लता उनके सामने सब सरम त्यागकर खुलकर मुस्कराने लगी.. तब देवायतभी मुस्कराने लगा.. फीरतो वोभी बार बार सीसेमे देखने लगा.. ओर जैसेही दोनोकी आंख मीलती लता सरमाकर अपने ओठोपे अपनी जीफ फीराते हसने लगती..

तब देवायतभी उनके सामने खुलकर हसने लगा.. ओर ये सीलसीला बार बार होने लगा.. अब लता बहुतही कामुक तरीकेसे देवायतको देखकर हस रहीथी.. तब अ‍ेक बारतो देवायतका मनभी डगमगा गया.. तब लताने हीमत करके देवायतसे बाते करना सुरु कीया..

लता : (सरमाते हसते) बडे भैया आप खाना खाकर ही जाना.. मे आपका मनपसंदका खाना बना दुगी.. कीतने दिन होगये आपने हमारे घर खाना नही खाया.. अबतो आप बहुतही कम आते हो.. भाभी भी आपको याद करती रहेती हे..

देवायत : (हसते) नही लता.. मुजे देर होजायेगी.. अब तु घर आयेगी तब तेरे हाथोका ही खाना खायेगे.. ओर तेरी भाभीको भी मील लुंगा.. हें..हें..हें..

लता : (मीररमे देखते हसते) भैया.. फीकर मत करो.. देखना मे आपके लीये बडीयासा खाना बनाउगी.. भैया अ‍ेक बात कहु..? अगर आप ससुरालपे जाही रहेहो तो आप भावु भाभीको भी साथ लेजाओनां.. वोभी उनके पीताजीको देख लेगी.. आपके साथ आनेमे उनकोभी अच्छा लगेगा.. कहोतो मे उनसे बात करलु..?

देवायत : (देवायत लताके कहेनेका मतलब समज जाता हे) नही.. लता अभी बच्चीभी छोटी हे ओर दिनभी कीतने हुअ‍े हे.. ओर वेसेभी मे उन दोनोको लेनेही जा रहा हु.. ओर आप सबकोभी तीन दिन पहेले हवेलीपे आजाना हेतो भावु वही उनको मील लेगी.. तुम दोनोभी सीर्फ अ‍ेक दो दिनके लीये इधर आइ वरना वही रुक जाती.. तुम दोनोके सब कपडे मे वापसीमे ले आता..

लता : (मीररमे देखते हसते) नही भैया.. बस अ‍ेक दो दिनही तो सबके साथ रहेना हे.. फीरतो मे उधर चली आउगी.. अबतो वोही मेरा घर होगा.. भैया.. ये नीलुका अ‍ेडमीशन होगया क्या..?

देवायत : नही.. जब सादी होजायेगी तब मे ओर भानु उनको लेकर जायेगे ओर तब वही पासमे होस्टेलमे जहा पुनो लखन थे.. मेने वहा बात करली हे.. वही जाकर दाखला दीलवा देगे.. बस अब तुम सबकी सादी होजाये.. तो गंगा नहाये.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) क्या भैया आपभी.. हमारी सादीमे कहा इतनी तामजाम करनी हे.. तो इतनी चीन्ता करते हो.. हें..हें..हें.. सीर्फ हम घरवाले तो हे.. भैया.. अ‍ेक बात कहु..? जबसे मेरी सगाइ हुइ हे तबसे आप कुछ कमही मुजसे बात करते हो.. पहेलेतो कैसे मेरे साथ मस्ती मजाक करते थे..

देवायत : (हसते) लता.. तब तुम मेरी बहेन थी.. ओर अब मेरी बहु हो.. आइमीन लखनकी पत्नी.. तो अब तुमसे कैसे मजाक करता.. क्या तुजे ये सब मजाक मस्ती अबभी पसंद हे..?

लता : (सरमाते हसते) तो फीर..? ओर नही तो क्या..? भैया भलेही मेरी सादी लखनसे हो जाये.. मेतो आपको अभीभी भाइही समजती हु.. मुजे अपसे बाते करना बहुत अच्छा लगता हे.. देखना मेतो वहा आकरभी आपकी अ‍ैसेही मस्ती करुगी.. हें..हें..हें.. बस अ‍ेक बार मेरी सादी होजाने दो..

देवायत : (हसते हुअ‍े हीमत करते केह देता हे) हां तभी तो.. लता मुजे तेरी सादीकी इतनी चीन्ता नही हे.. बस.. दुसरी चीन्ता हे.. हें..हें..हें.. तुम चारोने हम सबको बहुत परेसान करके रखा हे.. हें..हें..हें..

कहतो नीलम जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. तब लता सर्मसार होगइ ओर मीररमे तीरछी नजरसे देवातके सामने दखते हसती रही.. आज उनको देवायतसे बात करनेके कोइ सर्म नही आ रहीथी.. बल्के वोतो देवायतसे ओर खुलकर बात करना चाहती थी.. ओर देवायतभी आज लतासे खुलकर बाते कर रहाथा.. पता नही आज उसे लताके साथ बात करनेमे बहुत अच्छा लग रहा था.. लेकीन लताभी साथमे नीलमकी वजहसे ज्यादा खुलकर बात नही कर पा रहीथी..

वो देवायतसे बात करते लगातार मीररमे प्यासी नजरसे देख रहीथी तब देवायतभी उनकी कामुक नजरको पहेचान गया.. लेकीन लता उनके भाइकी होने वाली पत्नी थी.. वरना लताकी ओरसे इतनी हीन्ट मीलते ही देवायत लताके साथ काफी आगे बढ चुका होता.. ओर अबतो लता दीखनेकेभी बहुतही खुबसुरत ओर कामुक लग रहीथी.. उनकीभी नजर कीतने दिनोसे लताके उपर थी..

जबभी वो सरलाकी चुदाइ करता तब उन दोनोको लताको खीडकीसे देखते कइ बार देख चुकाथा.. तबसे वो लताको भी अपने नीचे लीटानेकी फीराकमे था.. ओर लताभी उनको कामुक नजरोसे घुरती रहेती.. लेकीन अबतो लखनकी बीवी होनेके साथ भावना ओर उनके बीचके प्यारकी अ‍ेकलौती साक्षी भी थी.. इसीलीये देवायतने अपने आपको बडी मुस्कीलसे सम्हाला.. तब उनकी नजर फीरसे लतासे मील गइ.. तो लता अभीभी मीररमे कामुक मुस्कानके साथ देवायतको देख कर हस रही थी..

तभी अचानक लताने देवायतकी ओर देखते अपने दोनो नैन नचाये.. ओर लताने देवायतकी ओर आंख मारदी.. तब दोनोही सर्मसार होते हसने लगे.. लता बाततो नीलमसे कर रहीथी लेकीन कारके सेन्ट्रल मीररसे देवायत ओर उनके बीच कुछ ओरही खेल चल रहाथा.. ओर तीनो घरपे पहोच गये.. तब आज पहेली बार लताको घरपे पहोच जानेसे अच्छा नही लगा.. वो अभी भी देवायतके साथ टाइम स्पेन्ड करना चाहती थी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १००

तभी अचानक लताने देवायतकी ओर देखते अपने दोनो नैन नचाये.. ओर लताने देवायतकी ओर आंख मारदी.. तब दोनोही सर्मसार होते हसने लगे.. लता बाततो नीलमसे कर रहीथी लेकीन कारके सेन्ट्रल मीररसे देवायत ओर उनके बीच कुछ ओरही खेल चल रहाथा.. ओर तीनो घरपे पहोच गये.. तब आज पहेली बार लताको घरपे पहोच जानेसे अच्छा नही लगा.. वो अभी भी देवायतके साथ टाइम स्पेन्ड करना चाहती थी....अब आगे

ओर वो भारी मनसे कारसे बेग लेकर उतर गइ.. तब उनके पीछे नीलमभी सभी केरी बेग लेकर उतर गइ.. आज लता देवायतसे बाते करते बहुतही कामुक ओर उतेजीत होगइ थी.. वो देवायतको छुना चाहती थी.. इसीलीये देवायतके पास जाकर उनके सटकर खडी होगइ..

ओर लताने धीरेसे सरमाते देवायतका हाथ पकडकर उनको अंदर आनेका आग्रह कीया.. देवायतभी लताका इरादा क्या हे समज गया.. तो अंदरकी ओर जाने लगा.. तो लताभी उनके साथ अंदरकी ओर चलने लगी.. ओर तीनोही दरवाजेके अंदर आगये.. तब भानु खेतोपे चला गयाथा.. ओर भावना सरला बहार आंगनमे खटीयापे बैठीथी..

बहारकी ओर भावना सरलाके पास बैठकर अपना ब्लाउस उचा करके अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी.. रमा कीचनमे काम कर रहीथी.. कल ही उनकी भानुके साथ सादी हुइथी.. कल पुरी रात भानुने उसे वियाग्रा खाकर जमकर चोदा था.. ओर रमाकी हालत पतली करदी थी.. जीनकी वजहसे आज उनकी चालही बदल गइथी.. वो महा मुस्कीलसे चल पारही थी.. शींगारकी चुडीया अबभी उनके हाथोमे पहेनी हुइ थी..

तो काम करते चुडीयोकी खनखनाहट बहार तक साफ सुनाइ दे रहीथी.. जैसेही तीनो अंदर आगये तब भावना देवायतको देखतेही सरमाते मुस्कुराने लगी.. ओर फटाफट अपना ब्लाउज सही करते अपना बुब्स छुपालीया ओर बच्चीको सरलाको देकर वो सरमाते देवायतकी ओर मुस्कराते अंदर जाने लगी.. तभी लता देवायतकी ओर तीरछी नजरोसे देखकर हसने लगी.. ओर तीनो अंदर आगये.. तब..

सरला : (खुस होकर हसते) अरे.. आओ.. आओ.. देवा.. होगइ सब खरीदारी..? (अंदरकी ओर देखते जोरोसे) अरी.. रमा.. देख कौन आया हे.. तेरा देवर.. ओर हमारे समधी.. हें..हें..हें.. उनके लीये कुछ चाइ पानी तो लेआ.. हें..हें..हें.. देख अब तु देवाकी भाभी होगइ हे.. हें..हें..हें..

रमा : (अंदरसे सरमाते) जी.. अभी लाइ माजी..

देवायत : (उनके पास सटकर बैठते हसते) क्या काकी आपभी.. मे कोइ थोडी पराया हु..? ओर नइ भाभी को क्यु सरमींदा कर रही हो.. हें..हें..हें.. (धीरेसे हसते कानमे) वो ठीक तो हेनां..?

सरला : (जोरोसे हसते धीरेसे) तुम खुदही देखलो.. हें..हें..हें..

तभी लता अपने रुमसे नीकलते देवायतकी ओर कामुक नजरसे देखते कातील स्माइल करते भावनाके रुमकी ओर जाने लगी.. तब देवायतको भी कुछ अजीब लगा.. वो लताकी नजरको पहेचान गया.. ओर उनकी कामुक स्माइलसे भली भांती जान गयाकी लताकी नीयत उनके प्रती ठीक नही हे..

वो अब उनके छोटे भाइकी होने वाली बीवी हे.. लेकीन उनके दिलकी धडकनभी बढ चुकी थी.. तब लताके पीछे नीलमभी चली गइ.. तभी रमा थोडा लंगडाते धीरेसे चलकर पानी लेकर आ रहीथी तब देवायतको उनको देखतेही जोरोसे हसी आगइ.. तो रमा बहुतही सर्मसार होगइ..

रमा : (सरमाते हसते) लीजीये देवरजी पानी पीजीये.. फीर मे चाइ बनाकर लाती हु.. ओर आपको कीस बातकी हसी आ रही हे..?

देवायत : (जोरोसे हसते) भाभी.. आप अ‍ैसे क्यु चल रही हो.. आपके पैरमे क्या हुआ..? कही मोच बोचतो नही आगइ.. हें..हें..हें..

कहातो रमा फीर अ‍ेक बार अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. उनको समजमेही नही आयाकी देवायतको क्या कहे.. अगर वहा सरला ना होतीतो देवायतको बीन्दास्त जवाब दे देती.. लेकीन सरलाकी वजहसे वो चुप रही.. ओर सकपकाते सरमींदा होकर जटसे दांत पीसते जुठा गुसा करते देवायतकी पीठमे मुका जड दीया ओर कीचनमे चली गइ.. तब देवायत ओर सरला दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर जोरोसे हसने लगे.. तब सरलाने धीरेसे देवायतके कानमे कहा..

सरला : क्यु बेचारीको तंग कर रहे हो.. अ‍ेकतो भानुने कल पुरी रात उसे सोने नही दिया ओर उपरसे तुम.. पता नही भानुने कल उसे कुछ गोली बोली खाकर पुरी रात ठोका हे.. बेचारीकी हालत खराब करदी.. हें..हें..हें..

देवायत : (धीरेसे कानमें) सरला.. क्या तुजे उनकी सुहागरात से कुछ नही हुआ..?

सरला : (सरमाते धीरेसे) हाये.. क्या कहु.. बहुत कुछ हो रहाथा.. लेकीन तेरी भी तो कल चंदा बीटीयाके साथ सुहागरात थी.. वरना तुजे ही बुला लेती.. कल तुजे बहुत याद कीया.. तुनेभी तो परसो मेरी हालत खराब करदी थी.. बडी मुस्कीलसे आज ठीक हुइ हु.. अबतो सादीके बादही कुछ हो सकता हे.. कभी मौका मीलेतो फुरसतमे इधर आजाना.. तु कहेतो मे यही रुक जाती हु.. फीर दोनोही मजे करके तेरे घर चले जायेगे..

देवायत : नही काकी.. कल नही तो परसो.. सब लोग वहा आजाओ.. मंजुने सबको बुलालीया हे.. अब जोभी करना हे ये चारोकी सादीके बाद.. तुम बहुतही ठरकी होगइ हो.. हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते हसते धीरेसे) तो तुमभी कुछ कम नही हो.. मौका मीलतेही हमारी हालत खराब कर देते हो.. मुजे ठोकनेका अ‍ेकभी मौका नही जाने देता.. फीरतो जबतक मुजे दो बार मुजे चोद नही लेता तबतक छोडते ही नही हो..ओर क्या मस्त चुदाइ करते हो.. मेतो तेरी सुरुसे ही दिवानी हु..

तभी रमा कीचनमेसे नीलमको आवाज लगाती हे तो नीलम देवायतकी ओर हसते कीचनमे चली जाती हे.. तब रमा उसे देवायतके लीये चाइ लेजानेको कहेती हे.. वो अब देवायतके सामने जानेमे बहुतही सरमा रहीथी.. तभी भावना लताभी वापस बहार आकर सरलाके पास बैठ गये..

तब भावना देवायतकी ओर दखते मुस्करा रहीथी.. वो देवायतसे अकेलेमे मीलकर उनसे ढेर सारी प्यारकी बाते करना चाहती थी.. लेकीन सबके होनेकी वजहसे उसे मौकाही नही मीलताथा.. तो दुसरी ओर लताभी अब लखनसे ज्यादा देवायतके बारेमे सोचने लगीथी.. ओर तभी नीलम सबके लीये चाइ लेकर आगइ.. ओर सबने मीलकर चाइ पीली..

तबतक रमा सरमके मारे कीचनसे बहार ही नही नीकली.. तभी देवायतने मंजुसे फोन करके सरला ओर भावुसे बात करवादी.. ओर मंजुने सबको परसोके दिन सादी तक वही आनेके लीये केह दीया फीर देवायत वहासे नीकलने लगा तब उनको बहार तक छोडने लता ओर भावु चली गइ.. तब भावनाने बहार नीकलतेही धीरेसे देवायतसे कुछ बात करने लगी.. तबतक लता देवायतके सामने देखकर कातीलाना स्माइलसे मुस्कराती रही..

भावना : (धीरेसे) जीजु.. अब बहुत होगया.. आपतो मुजे मीलतेही नही.. बहुत बीजी हो क्या..?

देवायत : (धीरेसे) हां भावु.. अभी मे मम्मी पापाको लेने जा रहा हु.. उन दोनोको हमारे घर लेकर आना हे.. तुम उनको वही मील लेना.. ओर हमभी वही बात करलेगे.. बस तबतक तु अपना खयाल रखना..

लता : (धीरेसे हसते) बडे भैया.. अब मेरी इस बडी दीदीको आपकोही सम्हालना हे.. बस अ‍ेक बार आप मुजे वहा आनेदो.. फीर मेही आप दोनोके लीये कुछ करती हु.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. बहुत बडी होगइ हे तु.. जबतक तुम मेरी भावुके साथ हो तो मुजे मेरी भावुकी चीन्ता नही हे.. बस इनका खयाल रखना..

भावना : (हसते आंख गीली करते) हां जीजु.. वैसेभी जबसे भानुने दुसरी सादी करली हे तबसे ये कीमीनी मेरा कुछ ज्यादा ही खयाल रखती हे.. मेरी छोटी बहेनके साथ मेरी बेस्ट सहेली भी होगइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. चलो ठीक हे मे नीकलता हु.. तुम दोनो ही अपना खयाल रखना.. बाय..

तब भावना देवायतका हाथ पकड लेती हे ओर मुस्कुराते बाय कहेती हे.. तो लताभी भावनाकी नजर बचाते देवायतकी ओर कातील स्माइल करते आंख मार देती हे ओर बाय केह देती हे.. तो देवायतकी भी हसी नीकल गइ.. ओर देवायत वहासे नीकल गया.. सीधेही हाइवेकी ओर अपने ससुरके गांवका रास्ता पकड लीया.. आज वो लताके उनके प्रती व्यहारसे बीलकुल समज गयाकी लताभी इनकी ओर ढल चुकी हे..

तो उधर आज नीर्मलाभी सुबह उठकर सजधजके तैयार होकर देवायतका इन्तजार करते बैठी थी.. वो आज अपने ससुराल जानेको उत्सुक हो रहीथी.. वो अब देवायतकोही अपना पती मानकर उनकी ओर पुरी तराह ढल चुकी थी.. जबसे हवेली छोडदी उनके बाद आज वो पहेली बार वापस उसी हवेलीपे जा रही थी.. तब आधे घंटेकी ड्राइवके बाद देवायतभी उनके घर पहोंच गया.. ओर सीधा कार पार्क करके अंदर चला गया..

देखा तो राजीव अपने रुममे आराम कर रहाथा ओर नीर्मला कीचनमे थी.. तो देवायतको देखतेही खुस होकर हसते हुअ‍े बहार जटसे आगइ.. ओर दोडकर देवायतके गले लग गइ.. तभी देवायतने नीर्मलाको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया तो उनके मुहसे हसते हुअ‍ेभी आउच.. की आवाज नीकल गइ.. ओर देवायतने उनके होठोपे अपने होठ रख दीये.. ओर चुमलीया तब नीर्मला सर्मसार होगइ ओर अलग होकर उनके सामने उनकी आंखोमे देखते हसती रही..





नीर्मला : (धीरेसे सरमाते) गंदे कहीके.. तुम बहुत नोटी हो.. अगर तुम्हारे पापाने देखलीया होता तो..?

देवायत : (हसते फीरसे कमरसे पकडके अपने तनसे सटाते) देखलीया होतातो क्या होता.. मे तुजे दुल्हन बनाकर घर लेजाता.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (बाहोमे खडी रहेते) अगर दुल्हन बनाके लेजाओगे तो मे रेडी हु.. चलो.. आज मेरा दुल्हा खुद मुजे लेने आया हे.. आप अपने पापाके पास बैठो मे पानी लेकर आती हु अभी खाना बन जायेगा.. फीर कुछ देर आराम करके आरामसे चलते हे.. आजतो मे आपके साथ आपकी दुल्हन बनकेही आउगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (धीरेसे कानमे) फीर देखना वहा मे सुहागरातभी मनाउगा.. तब मुकर मत जाना.. हें..हे..हें..

नीर्मला : (अ‍ेकदम सर्मसार होते जुठे गुसेसे) चलो चलो.. अंदर बैठो.. बडे आये सुुहागरात मनाने वाले.. सारा दिन यही सुजता हे.. दुसरा कोइ कामही नही हे.. क्या चंदाके साथ सुहागरात मनाकर जी नही भरा.. बेचारीकी हालत खराब करदी हे.. उठभी नही पा रही.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) क्या उनका फोन आया था..?

नीर्मला : (हसते धीरेसे) हां.. अभी कुछ देर पहेलेही चंदाने मुजसे बातकी.. फीर मंजुने भी मुजसे ओर अपने पापासे बातकी.. तभीतो हम दोनो रेडी होकर बैठे हे.. मेने तो केह दियाकी हम तीनो खाना खाकर सामको आरामसे आयेगे.. हें..हें..हें.. देवु.. मेरी चंदा बहुतही खुस लग रहीथी.. क्या दोनोने पुरी रात प्यार कीया..?

देवायत : (हसते) हंम..

राजीव : (अंदरसे आवाज लगाते) नीमु.. कोन आया हे वहा..? तुम कीससे बात कर रही हो..?

नीर्मला : (देवायतको अंदर धकेलते) जी.. कोइ नही आपका लाडला आया हे हमे लेने.. जाओ अंदर..

तब ना चाहते हुअ‍े भी देवायत नीर्मलाकी ओर देखते हसते हुअ‍े अंदर जाने लगा तभी नीर्मला सरारतसे उनके सामने मुह बीगाडते अपनी जीभ नीकालते देवायतको छेडने लगी.. ओर कीचनमे चली गइ.. तब देवायत राजीवके पास चला गया तो राजीव उनको देखकर खुसीसे हसने लगा ओर देवायत उनके पाव छुकर वही उनके पास अ‍ेक चेयर खीचकर उनपे बेठ गया..

देवायत : (हसते) पापा अब कैसी हे आपकी तबीयत.. लगता हे अब काफी सुधार दीख रहा हे..

राजीव : (हसते) अरे.. आओ आओ देवु.. अबतो बीलकुल ठीक हो गया हु.. आजतो मंजुसे ओर चंदासेभी बात होगइ.. उसने हमे वहा आनेका बहुत आग्रह कीया.. तो सोचा चलो सादीभी अ‍ेटेन्ड हो जायेगी.. ओर थोडा हवा पानीभी बदल जायेगा.. कब हे सादी..?

देवायत : (हसते) बस.. चार दिनके बाद.. वहा आपकी अ‍ेक दोस्तभी सादीमे आ रही हे.. हें..हें..हें..

राजीव : (आस्चर्यसे हसते) मेरी दोस्त..? कौन..?

देवायत : (हसते) भुमीका आंटी.. हें..हें..हें.. वो भी सीर्फ आपको मीलने.. हें..हें..हें..

राजीव : (जोरोसे हसते) ओह.. भुमी.. बडी चुलबुली लडकी थी.. तुम्हारे पापाको अपना भाइ मानती थी.. तुम्हारी बुआ हे वो.. उसे बुआ कहेकर बुलाना वो खुस होजायेगी.. हें..हें..हें.. क्या तुम्हे मीलती हे..?

देवायत : (हसते) हां पापा.. मेनेही उनकी प्रोपर्टी बीकवादी ओर नया बंगलो लेलीया.. दोनोही मां बेटी ये सब कहा बेचने खरीदने जायेगी.. तो उनका सब काम मेही देख रहा हु..

राजीय : (प्यारसे सरपे हाथ घुमाते) बहुत अच्छा कीया तुमने.. तुमभी बीलकुल अपने बापुकी तराह हो.. वोभी उनकी अ‍ैसेही मदद करते थे..

नीर्मला : (पानी लेकर आते) लीजीये पानी पीजीये.. अब चाइ बनादु की सीधा खाना ही खाना हे..?

राजीव : (हसते) अरे बादमे खा लेगे पहेले इसे थोडी चाइतो पीला.. हम दोनोके लीये लाना.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जुठा गुसा करते) हां.. आपकोतो चाइ पीनेका बहाना मील गया.. डोक्टरने ज्यादा चाइ पीनेको मना कीया हेनां..? (हसते) ठीक हे लाती हुं.. लेकीन थोडीही मीलेगी.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) अरे थीडी देना .. कुछ नही होता.. हें..हें..हें..

तभी नीर्मला हसती हुइ कीचनमे चली जाती हे तब राजीव ओर देवायतभी उनके सामने देखते हसते रहेते हे.. तभी राजीव देवायतका हाथ अपने हाथोमे थाम लेता हे.. ओर इमोस्नल होकर कहेता हे..

राजीव : (आंख गीली करते) बेटा.. थेन्कयु वेरी मच.. आपकी नीमुसे सब सुलाह होगइ.. तबसे वो बहुत खुस रहेने लगी हे.. वरना तो गुमसुम रहेती थी.. बस इसी तराह आप मेरी नीमुका खयाल रखीयेगा.. अब मेरा कोइ भरोसा नही.. मेरी नीमु अकेली हो जायेगी.. तो इनको वही लेजाना..

देवायत : पापा ये आप क्या केह रहे हे..? आपको कुछ नही होगा.. मे आपसे वादा करता हु.. मे मरते दम तक उनका अ‍ैसेही खयाल रखुगा.. बस.. आप खुस रहीये.. हमे ओर कुछ नही चाहीये.. ओर हो सकेतो आप दोनो वही हमारे साथही रहेने आजाइअ‍े.. आपतो जानते हे वहा बहुत जगाह हे..

राजीव : (हसते) थेन्कस बेटा.. मे वहा रेह चुका हु.. तब तुम्हारा जन्मभी नही हुआ था.. लेकीन बेटीके घर ज्यादा दिन नही रहेना चाहीये.. जबतक मे जींदा हु हम दोनो यही ठीक हे.. बस अब हम दोनो वहा आते जाते रहेगे..

देवायत : पापा.. आप अ‍ैसा क्यु कहेते हे..? आपसे अ‍ेक बात पुछु..? क्या आप सभी दोस्तो कभी बापुके साथ आश्रमपे गये हे..?

राजीव : (हसते) हां.. बहुत बार.. सभीतो दो तीन बारही गये होगे.. लेकीन मे ओर विरजी अक्सर तुम्हारे बापुके साथ आश्रमपे जाते रहेते थे.. लेकीन तुम ये सब क्यु पुछ रहे हो..?

देवायत : (हसते) तो क्या बाबाने या फीर मेरे बापुने आपसे कुछ नही कहा..? हमारे बारेमे.. हमारे गांवके बारेमे..

राजीव : (गहेरी सांस लेते) हां.. बाबासेभी ओर तुम्हारे बापुके मुहसेभी.. बहुत कुछ सुना हे हमने..

देवायत : (हसते) पापा.. तो फीर क्या इस बारेमे आप मुजे कुछ बता सकते हे..?

राजीव : (हसते) बेटा क्या करोगे जानकर.. सब उनके कहेनेके मुताबीक ही हो रहा हे.. इस बारेमे मेरी किशनसे अक्सर बाते होती थी.. ओर इसीलीयेतो तुम्हारे खानदानमे पीछली तीन पीढीसे सब अपनी बहेनसे ही सादी कर रहे हे.. ओर उनकी वजहसे मुजेभी मेरी बहेनसे सादी करनी पडी..

बहुत सारे रहस्य छुपा हे.. गांवमेभी बहुत बडा बदलाव आयेगा.. खैर छोडो ये सब बाते.. वो सबतो होकरही रहेगा.. अ‍ेक बार अपने पोतेको आने दो.. फीर देखना यहातो कोइ रीस्ताही नही बचेगा.. सब हमारी तराह आपसी रीस्तोसे बंधे होगे.. सभी प्रकृतीको मानते फीरसे उनके हिसाबसे जीने लगेगे..

देवायत : पापा तो फीर बापुने कभी बाबासे पुछा नही की ये सब हमारे खानदान मे ही क्यु..?

राजीव : (गहेरी सांस लेते) हां बेटा किशनने बाबाको कइ बार पुछा.. लेकीन बाबा अ‍ेक ही जवाब देते थे.. की ये सब अ‍ेक खास मक्सदकी वजाहसे हो रहा हे.. वो हिमाचलके राजा फीरसे पुर्न जन्म लेकर आपकेही खानदानमे आयेगे.. तब उनका मक्सदभी सामने आजायेगा.. ओर तब बहुत कुछ होगा.. बेटा जो भी होता हे होने दो.. हमे इस बारेमे ज्यादा सोचनेकी जरुरत नही हे.. ओर नाही हम उसे रोक सकते हे.. तो फीर ये सब सोचकर दुखी होना हे..

देवायत : पापा वो तो सब हो ही रहा हे.. लेकीन.. ये सब सुनके आपको बुरा नही लगता..?

राजीव : (हसते) बेटा मे आपका कहेनेका मतलब समज गया.. की आप मुजसे क्या पुछना चाहते हो.. यहीनां.. की मे सब जानते हुअ‍े भी मेरी मंजुकी सादी आपसे कैसे करदी..? तो सुनो.. मुजे ओर तुम्हारे बापुको सब पताथा की ये सब होने वाला हे.. मे पहेलेसे ही सब जानता था..

लेकीन मेने बाबाकी इस बातको नीमुसे छुपाया था.. इसीलीये आप दोनोके बीच कुछ अन्टर सेन्डींग होगइ.. लेकीन अब सब ठीक होगया.. जब ये सब होनेही वाला हे तो दुखी होनेका क्या फायदा..? वेसेभी आपके खानदानमे पीछली तीन पीढीसे सभी अपनी बहेनसे ही सादी करते आये हे..

नीर्मला : (अंदर चाइ लेकर आते) दोनो ससुर जमाइ क्या बाते कर रहे हो.. राजीव आप थोडा कम बोलना.. डोक्टरने मना कीया हेनां..?

राजीव : (हसते) अरे कुछ नही होता.. बस थोडी देवुके साथ पुरानी बाते कर रहाथा.. इनको कुछ जानकारीया चाहीये थी तो उसे सब बता रहा था.. ओर ये मेरा जमाइ नही हे.. बेटा हे मेरा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) ठीक हे.. ठीक हे.. लीजीये देवु चाइ पीजीये.. फीर मेरे साथ बहार चलीये.. वही हम बाते करगे वरना इधर बैठेतो आपके पापातो बोलते ही रहेगे.. अभी खाना बन जायेगा आप मुजे कीचनमे कंपनी दीजीये.. ओर राजीव आप थोडी देर आराम करलो.. फीर खाना खाकर हम सामको आरामसे चलेगे..

राजीव : (चाइ लेते हसते) ठीक हे बाबा.. पहेले हमे चाइतो पीनेदो फीर दोनो बाते करते रहेना.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही चाइ पीने लगे तब नीर्मला राजीवकी नजर बचाते देवायतको छुकर इसारा करती कीचनमे चली गइ.. ओर दोनो चाइ पीने लगे.. तब राजीवभी नीर्मला ओर देवायतको प्यारसे बाते करते देखकर खुस होने लगा.. लेकीन उनको नही पताथाकी अब उनकी बहेन नीर्मला अब उनकी पत्नी नही रही.. अब वो फीरसे अपने पीछले जन्मके पतीकी बीवी हो चुकी हे.. ओर उनसेही अपने तनकी प्यास बुजाती हे..

नीर्मला पीछले जन्मकी तराह इस जन्ममे भी सेक्सके मामलेमे बीन्दास्त थी.. इस जन्ममेभी उसने फीरसे वोही राजाके अंसको पा लीयाथा.. ओर अगले जन्ममेभी फीरसे दोनो मीलने वाले थे.. जब चाइ पीली तब देवायत दोनोके कप लेकर कीचनमे चला गया.. तो वहा नीर्मला रोटी बना रहीथी.. ओर देवायत खाली कप वोसमे रखतेही नीर्मलाके पीछे चला गया ओर उसे पीछेसे अपनी बाहोमे भरलीया.. उनके कंधेपे सर रखते दोनो आपसमे अपना गाल रगडने लगे..





नीर्मला : (मुस्कराते धीरेसे) क्यु पतीदेव.. अपने ससुरके साथ बहुत बाते करली.. इस बीवीकी याद नही आती..? दोनो क्या बाते कर रहेथे..?

देवायत : (उनके गालको चुमते) कुछ खास नही.. नीमु.. तुम आज इस सारीमे बहुतही खुबसुरत लग रही हो.. जी चाहता हे तुमसे फीरसे सादी करलु ओर अभीके अभी यही प्यार करलु.. क्या मस्त लग रही हे तु.. तुजे देखकर तो कंट्रोलही नही होता.. बीलकुल मेरी दुल्हन लग रही हो..

नीर्मला : (हसते) सबर कीजीये पतीदेव.. मेने ये सब शींगार आपहीके लीये कीया हे.. क्युकी आज मे मेरे रीयल ससुराल जा रही हु.. बस खाना खाकर आप आराम करने उपर आपकी बीवीके रुममे चले जाइअ‍े.. फीर मे राजीव सोजाये तब आती हु.. तब आप मुजे जीतना प्यार करना चाहे कर लीजीये.. फीर हमे वहा अ‍ैसा मौका नही मीलेगा.. बस थोडा राजीवसे ध्यान रखीयेगा.. बस उनको हमपे सक नही होना चाहीये..

कहेतेही नीर्मला पलट जाती हे तब देवायत उनको अपनी बाहोमे भीचलेता हे ओर दोनोके होंठ मील जाते हे काफी देर अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते रहे.. कुछही देरमे दोनोही गरम होकर उतेजीत होगये.. देवायत नीर्मलाको पीछेसे बाहोमे भरते उनके गलेको चुमने लगा ओर दोनो हाथोसे नीर्मलाके बुब्सको थाम लीया तब नीर्मला आंख बंध करते मदहोस होने लगी.. दोनो सबकुछ भुलकर अ‍ेक दुसरेसे प्यार करने लगे..

तभी देवायतने नीर्मलाको प्लेटफोर्मपे बीठा दीया ओर आगेसे सारी ओर पेटीकोट उचा करते अपने लंडको बहार नीकाल लीया.. तो लंडको देखतेही नीर्मलाकी आंखे लाल होजाती हे.. ओर वो सरमाते लंडको मुठीमे पकडकर सहेलाने लगी.. दोनोही वासनाकी आगमे जलने लगे.. तभी देवायत नीर्मलाके पैरोके बीच आगया ओर खडे खडेही लंडको नीर्मलाकी चुतमे उतार दीया.. तब नीर्मला बडे लंडको चुतमे घुसतेही तीलमीलाने लगी..





तभी देवायत अपनी कमरको आगे पीछे करते नीर्मलाको चोदने लगा.. तो नीर्मला मीठे दर्दके बावजुदभी मदहोस होते देवायतका साथ देने लगी.. तब कुछही देरकी धकापैनी चुदाइके बार देवायतने नीर्मलाकी चुतको अपने पानीसे भर दीया तो नीर्मलाभी साथमे जड गइ.. तभी उसे होस आयाकी दोनोने कीचनमे ही चुदाइ करली हे.. तब नीर्मला जटसे अपनी चुतको साफ करने लगी ओर प्लेटफोर्मसे उतरतेही अपने कपडे सही करने लगी..

फीर देवायतकी ओर देखकर हसते उसे कंधेपे मुका मार देती हे.. ओर जटसे बाथरुममे चली जाती हे.. फीर अपने आपको सही करते वापस कीचनमे आजाती हे.. तो देवायत नीर्मलाकी ओर देखते हसने लगता हे.. तो नीर्मला देवायतको वही प्लेटफोर्ममे बीठा देती हे ओर अपना काम करने लगती हे.. तब तक देवायतभी उनसे बाते करते उनका दिदार करता रहा..

नीर्मला : (तीरछी नजरसे देखते धीरेसे) देवु.. तुम बहुतही नोटी हो.. मुजे छेडनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडते.. करदीने मुजे गंदी..?

देवायत : (हसते) नीमु क्या करु.. तुजे देखतेही कंट्रोल नही होता.. बस अ‍ैसा लगता हे तुजे चोदताही रहु..

नीर्मला : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. इसीलीयेतो हमने सामको नीकलनेका तैय कीया हे.. आज मे सारी कशर पुरी करलेना चाहती हु.. फीर पता नही हमे अ‍ैसा मौका कब दुबारा मीले.. आप खाना खाकर उपर मंजुके रुममे आराम करने चले जाना.. मे राजीवको सुलाकर आपके पास आजाउगी.. तब जीतनी मरजी हो अपनी मनमानी करलेना.. अबतो मेभी आपके बगैर नही रेह सकती.. चलो अब खाना बनानेदो..

जब नीर्मलाने खाना बनालीया तो दोनोही बहार आगये तब नीर्मलाने राजीवकोभी जगा दीया ओर खानेके लीये केह दिया.. फीर तीनो मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तब नीर्मला जान बुजकर देवायतके पास राजीवके सामने बैठ गइ.. नीर्मला तीनोको खाना सर्व करने लगी तब देवायतने धीरेसे उनको जांगपे हाथ रख दीया ओर सहेलाने लगा..

फीरभी नीर्मला नोर्मल होते खाना परोसती रही.. फीर तीनोही खाना खाने लगे.. तब नीर्मला खाना खाते देवायतके पैरको अपने पेरसे सहेलाती रही.. आज देवायतकी हरकतसे फीरसे उनके तनकी आग भडकने लगी..





खाना खाते वक्तभी राजीव देवायत बाते करते रहे तभी नीर्मलाने साम चार बजे नीकलनेको कहा.. वो खाना खाकरभी नीकल सकते थे.. लेकीन नीर्मला आज देवायतसे जीभरके प्यार करना चाहती थी.. इसीलीये तो देवायतकी मस्तीया करते उसे प्यार करनेके लीये उक्सा रही थी..

नीर्मलाने राजीवको बाहर धुप ओर आरामका बहाना बताकर सामको चार बजे जानेका तैय कीया.. जब सबने खाना खालीया तब नीर्मलाने राजीवको दवाइ पीलादी.. तब राजीव कुछही मीनीटोमे अपने रुममे जाकर नींदकी आगोसमे चला गया..

तो देवायतभी उपरकी मंजीलमे मंजु भावु वाले रुममे आराम करने चला गया ओर नीर्मला अपना सब काम फटाफट नीपटाने लगी.. काम खतम करतेही हाथ मुह धोकर राजीवके पास चली गइ.. देखातो राजीव खर्राटे मारते सो रहाथा तब नीर्मलाने धीरेसे उनके रुमका दरवाजा बहारसे कडी लगाके बंध करदीया.. फीर होलका मेइन गेइट लोक करते धीरेसे दबे पांव उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर मंजुके रुममे जातेही उनकाभी दरवाजा बंध करदीया..

तभी दरवाजेकी आहट सुनकर देवायतने आंख खोलकर देखा तो नीर्मला धीरेसे अपने सब कपडे नीकालके अच्छेसे अ‍ेक टेबलपे रख रहीथी ताकी वो कपडे खराब ना हो ओर उसे दुबारा पहेन सके.. देवायत उनको कपडे नीकालते देखता रहा.. ओर नीर्मलाने सब कपडे नीकाल दीये.. अब वो केवल टु पीसमे रेह गइ ओर उसने तीरछी नजरसे देवायतकी ओर देखा.. तो देवायत सोनेका नाटक करने लगा.. ओर नीर्मलाने सरमाते धीरेसे अपनी ब्रा ओर पेन्टी भी नीकालदी..

वो अ‍ेकदम नंगी होकर धीरेसे देवायतके पास आकर लेट गइ ओर करवट लेकर देवायतकी ओर देखने लगी.. ओर आहीस्तासे देवायतके चहेरेपे जुकते अपने होंठ देवायतके होठोसे मीला दीया तभी अचानक देवायतने उसे कसके अपनी बाहोमे भीचलीया ओर नीर्मलाको खीचकर अपने उपर चडालीया.. तब नीर्मलाने अपने खुले बालोसे देवायतका चहेरा ढक दीया ओर उनकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते धीरे धीरे देवायतके होठोकी ओर अपने होंठ लेजाते देवायतके होंठोको अपनी गीरफ्तमे लेकर चुमने लगी..

आज नीर्मलापे वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. उनकी चुत अभीसे फडफडाते पानीका रीसाव करने लगीथी.. वो अब सीर्फ देवायतकोही अपना पती समजने लगी थी.. ओर अचानक देवायतके उपरसे उतर गइ ओर देवायतको हाथ खीचकर बेडपे बीठा दीया..

ओर नसीली नजरोसे उनकी आंखोमे देखते फटाफट देवायतके कपडे भी नीकालने लगी.. ओर देवायतको बीलकुल नंगा करदीया..

तब वो बीना कुछ कहे बेडपे पीठके बल अपना पैर फैलाकर लेट गइ.. ओर देवायतको खीचकर अपने उपर चडा लीया.. ओर उनको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. वो कुछही देर पहेले देवायतका तगडा ओर विसाल लंड अपनी चुतमे लेकर कीचनमे चुदवा चुकी थी.. उनको राजीव ओर किशनके लंडसेभी ज्यादा देवायतका लंड बहुतही पसंद आने लगाथा इसीलीये वापस जल्दसे जल्द देवायतका विसाल तगडा लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आज दुसरा कोइ प्यार नही बस मुजे तृप्त करदो.. डालदो अंदर अपना मुसल हथीयार मे इनके बीना नही रह सकती.. आज मेरी सारी कशर पुरी करदो.. डालदो प्लीज.. कीतने महीनोसे मे इनके बीना तडपी हु.. अब सीर्फ आपही मेरे पती हो.. मे सीर्फ आपकी हु.. ओर अब आपसेही चुदवाउगी..

तभी देवायत उनके उपर लेटकर नीर्मलाको कीस करने लगा ओर नीर्मलाने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतका बडा लंड अपनी मुठीमे भरलीया ओर अपनी चुतपे तीन चार बार घीसते लव होलमे सेट करने लगी.. ओर देवायतने उनके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया ओर कमरको अ‍ेक जटका दे दीया तब आधा लंड नीर्मलाकी चुत चीरते अंदर चला गया तो नीर्मला तीलमीलाते छटपटाने लगी..





वो कुछ सोच समज पाती उनसे पहेले देवायतने अ‍ेक ओर जटका मार दीया.. तब पुरा लंड नीर्मलाकी चुतमे समा गया ओर उनकी बच्चेदानीसे टकरा गया.. तब नीर्मलाकी अ‍ेक जोरदार चीख नीकल गइ जो देवायतके मुहमेही दब गइ.. नीर्मलाकी आंखसे आंसु नीकलने लगे छटपटाते अपना मुह इधर उधर करते बेडपे अपने दोनो पैर पटकने लगी.. देवायत नीर्मलाको कइ बार चोद चुका था.. ओर अभी अभी कीचनमेभी उनसे चुदवाकर आइथी.. फीरभी देवायतके लंडको जेलना उनके लीये आसान नहीथा..

लेकीन नीर्मलाको नही पताथाकी जडी बुटीकी वजहसे देवायतके अंदर काफी बदलाव होने लगे थे.. उनका लंड पहेलेसे ज्यादा मोटा ओर लंबा होगया था.. देवायतकी उमरभी वही थंभ गइथी.. वो आजभी अ‍ेक जवान लडकेकी तराह दीख रहाथा.. अबतो लखनभी उनकी उमरके बरोबर दीख रहाथा.. भानुभी देवायतसे उमरमे बडा दीखने लगाथा.. फीरभी देवायत ओर मंजु आजभी अ‍ैसेही जवान ओर पहेलेसेभी आकर्सक दीख रहेथे.. ओर वो सब काम ओर रतीकी बदौलत हो रहाथा..

नीर्मलाभी बहुतही कामुक ओरत थी.. वो तीन तीन लंडको खा चुकी थी.. लेकीन देवायतके लंडने उनको अपना कायल बना दीयाथा.. अब देवायत ओर उनका लंडही उनकी आखरी मंजील थी.. देवायतका व्यक्तीत्व ओर उनका आकर्सणही अ‍ैसाथा की ओरत हो या लडकी अ‍ेक बार उनका लंड अपनी चुतमे ले लेती तब हमेसाके लीये उनकी होकर रेह जाती..

यही हाल आज नीर्मलाकाभी था.. देवायत नीर्मलाके होंठ ओर उनके गलेको चुमते उसे कमरको आगे पीछे करते होले होले नीर्मलाको चोद रहाथा.. तो नीर्मलाभी मदहोस हो चुकीथी ओर देवायतको अपनी बाहोमे आहे भरते मजेसे चुदवाने लगी..





कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. नीर्मला जबभी जडनेकी कगारपे होती देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलेती.. ओर उनसे लीपलोक करते जडने लगती.. तब देवायत नीर्मलाको चोदते हुअ‍े उनके दोनो उरोजोका मर्दन करता तो कभी उनके गलेको चुमने लगता तो कभी बुब्सकी नीपलको चुसने लगता.. उनकी यही हरकत नीर्मलाको पागल करदेती.. ओर उसे बार बार जडनेको मजबुर कर देतीथी..

आखीर लंबी चुदाइके बाद देवायतके लंडनेभी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर देवायतके तनमे सुरसुराहट होने लगी.. उनको अपने तनमे हजारो चीटीया रेदते हुअ‍े नीचे लंडकी ओर जाते महेसुस होने लगी.. वो कांपने लगा.. ओर उसने नीर्मलाको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया.. अपना लंड नीर्मलाकी चुतमे जडतक घुसा दीया ओर रुक रुककर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी नीर्मलाने अपनी बच्चेदानीपे देवायतके गरम वीर्यकी बोछार होते महेसुस होने लगी.. ओर उनका भी पुरा सरीर कांपने लगा..





वोभी देवायतको अपनी बाहोमे कसके भीचते साथमे जडने लगी.. ओर जबरदस्त चुदाइका भवंडर जो तांडव मचा रहाथा वो सांत होगया.. दोनोही अपनी सांस दुरस्त करते अ‍ेक दुसरेसे चीपकते लेटे रहे.. नीर्मला देवायतकी पीठ सहेलाती रही ओर देवायत उनके बुब्सपे सर रखते ढेर होगया.. देवायत नीर्मलाकी चुतमे लंड डालकर अ‍ैसेही पडा रहा.. नीर्मला बीच बीचमे उनके कंधेको चुमती रही.. वो अभीभी लंड चुतमे होनेकी वजहसे मदहोसीकी हालतमे थी.. वो चाहतीथी की ये चुदाइ कभी खत्म ही नाहो.. तभी..





नीर्मला : (धीरेसे सरमाते) देवु..आप अ‍ेक असली मर्द ओर मेरे पती हो.. आज आपने मुजे तृप्त करदीया.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. अब मे आपके बगैर अकेली नही रेह सकती.. मे हमेसाके लीये आपके साथ रहेना चाहती हु.. बस मुजे यही सुख देते रहीये..

देवायत : (होंठ चुमते) आइ लव यु टु.. बेबी.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. आजतो पापानेभी कहा हे.. की मेरे जानेके बाद तुम नीर्मलाको अपने साथ हमेसाके लीये साथ रखना.. तुम मेरी पहेली बीवी हो.. ओर हमेसा रहोगी.. तुजे देखतेही तुमको चोदनेका मन होने लगता हे.. क्या जादु करदीया हे मुजपे.. अभीतो अ‍ेक बार ओर करना हे.. आज चोद चोदके तुजे पका मेरे बच्चेकी मां बना दुगा.. क्यु.. मेरे बच्चेकी मां बनेगीनां..?

नीर्मला : (सरमाते मुस्कराते) हां.. कीतना पानी छोडते हो आप.. मेंतो पका प्रेगनेन्ट होजाउगी.. लेकीन लगता हे अब मुमकीन नही हे.. मेरी उमरभी काफी होगइ हे.. वरना में पका आपका बच्चा पैदा करती.. अब मुजे कीसीकीभी परवाह नही हे.. मे सबको जवाब दे दुगी.. कास मे आपका बच्चा पैदा कर सकती..

देवायत : (आंखोमे देखते उनके बालोको सहेलाते) तो फीर पापाको क्या जवाब देती..? हंम..

नीर्मला (सरमाते हसते) बस.. उनकीही चीन्ता हे.. वरना मे सचमे आपका बच्चा पैदा करती.. देवु.. कास आप पहेले पैदा होते ओर मुजे मीलते.. तो आज मे मंजुकी जगाह आपकी बीवी होती.. आप मुजे बहुत अच्छे लगते हो.. मे आपकी दिवानी हो चुकी हु.. लेकीन अ‍ेक बात पुछु..? बुरातो नही मानोगे..?

देवायत : (मुस्कुराते) अब देरसे ही सही.. अब तु मेरी बीवी हे.. मेरी पहेली बीवी.. तुम कुछभी पुछ सकती हे.. अब तेरा क्या बुरा मानना.. बीन्दास्त बोल..

नीर्मला : (आंखोमे देखते) क्या.. आप भुमीसे भी बार बार मीलते होनां..? तो क्या वो कभी आपकी ओर आकर्सीत नही हुइ..? मेतो आपको देखतेही पागल होजाती हु.. तो फीर वो कैसे.. बच गइ.. हें..हें..हें.. वोभीतो मेरी उमरकी हे.. मतलब मुजसेभी काफी छोटी उमर हे.. आजभी जवान दीख रही हे.. खुबसुरतभी हे ओर विधवाभी हे.. कीतने सालोसे बीना पतीके रहेती हे.. इसीलीये पुछ रही हु.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते कुछ बाते छुपाना चाहता हे तो जुठ बोलते) नही.. मे उनको अपनी बुआ मानता हु.. ओर उस नजरीयेसे उनको कभी देखाभी नही हे.. क्या उनको हमारे बारेमे पता हे..? कही तुमने उसे कुछ कहातो नही..? देखना बाबा.. में हमारे रीस्तोको सबसे छुपाकर रखना चाहता हु..

नीर्मला : (सरमाते नजरे चुराते) सोरी.. देवु.. बुरा मत मानना.. हम दोनो पहेलेसेही पकी सहेली हे.. ओर अ‍ेक राजकी बात बताती हुं.. कोलेज लाइफमे हम दोनो लेसीबीयन थी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके साथ सब बाते सैर करती हे.. मुजे उनके बारेमे ओर उनको मेरे बारेमे सबकुछ पता हे.. हमने आपसमे अ‍ेक दुसरेसे कोइ राज नही छुपानेकी कसम खाइ हे..

जब मे उनको इतने सालोके बाद पहेली बार मीली.. तो मेने उसी दिन हमारे बारेमे सबकुछ बता दिया हे.. लेकीन आप फीकर मत करो.. मेने उसे मेरी कसम खीलाइ हे.. वो हमारे बारेमे कीसीको कुछ नही कहेगी.. मुजे भुमीपे पका विस्वास हे.. बस सीर्फ वोही हमारे बारेमे सब जानती हे.. ओर कमीनी हमारे बारेमे सुनकर बहुतही खुसभी होगइ थी.. हें..हें..हें..

देवायत : (उनकी आंखोमे देखते) क्या..? नीमु.. ये तुमने अच्छा नही कीया.. अब मे उनको कैसे नजरे मीलाउगा.. मेरे बारेमे वो क्या क्या सोचेगी.. मेरे बारेमे ओर क्या क्या बता दिया हे..? वो ये सब सुनकर कुछ बोली नही..?

नीर्मला : (सरमाते हसते) कमीनी क्या बोलेगी.. वोतो उलटा सुनकर खुस होगइ.. मेने उनको आपके हथीयारके बारेमे बता दिया.. तो कमीनी अ‍ेक्साइटेड होगइ.. ओर मेरे सामनेही अपनी चुत सहेलाने लगी.. वो भी काफी सालोसे बीना पतीके अकेली रेह रही हे.. वोभी मेरी तराह बहुतही प्यासी ओरत हे.. बहारसे बहुत सीधी सादी ओर धार्मीक दीख रहीहे लेकीन वो भी बहुतही गरम ओरत हे..

देवायत : (हसते) क्या भुमी बुआ ओर कामी..? दिखनेमेतो बहुत धार्मीक लगती हे.. हें..हें..हें.. सारा दिन कोइ ना कोइ कीताब पढती रहेती हे.. उसे दखकर लगतातो नही की तेरी तराह प्यासी हे.. मुजसेतो बहुत बाते करती रहेती हे..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे) देवु आप कीसीको मत कहेना.. मे इतने सालोके बाद जबसे उनको मीली हु वो आजभी हप्तेमे मुजे अ‍ेक बार घरपे बुला लेती हे.. आपकोतो पता हे वो घरपे अकेली होती हे.. तब हम दोनो वही पुराना लेस्बीयन खेल खेलती हे ओर वो अपनी प्यास बुजा लेती हे.. बस मेतो आपसे अ‍ैसेही पुछ रहीथी.. नरेशके गुजर जानेके बाद आपके बापुने उनका बहुत खयाल रखा.. सृतीको उन्होने ही पढाया हे.. मुजेतो कुछ आसंकाये होती हे.. कही सृतीभी तो आपकी बहेन नही..? हें..हें..हें..





देवायत : (हसते) नीमु तुम ये क्या बोल रही हो.. बापु उनको अपनी बहेन मानते थे.. ओर उनसे ही राखी बंधवाते थे.. बापु अ‍ैसा नही कर सकते.. हें..हें..हें.. सृती.. मेरी बहेन..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) देवु.. बुरा मत मानना.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? जब आपके बापुने उनकी सगी बहेनसे यानी आपकी मां से सादी करली.. तो येतो मुह बोली बहेन हे.. ओर अ‍ेक राजकी बात बताउ..? मे ओर आपके बापु जब कोलेजमे थे.. तब कइ बार भुमीके घरपे या कीसी होटेलमे मीले हे..

मे भुमीको लेकरही उनको मीलने जाती थी.. ताकी कीसीको मुजपे सक ना पडे.. ओर कइ बार जगाहकी प्रोबलेमकी वजहसे हम दोनो भुमीके सामने कइ बार सेक्स कर चुके हे.. तब वो आपके बापुकी ओर कामुक नजरोसे देखती रहेती.. अकेली हमसे दुर बेठकर अपनी चुत सहेलाती रहेती..

देवायत : (हसते) क्या भुमी आंटी आपके साथ रहेती..?

नीर्मला : (हसते) हां देवु.. अब आपही कहो.. क्या कोइ ओरत अपने पतीसे ज्यादा अपने भाइको तवजो क्यु देती हे..? ओर नरेशभी तो सृती १२ सालकीथी तबही गुजर गयाथा.. तबसे आपके बापुनेही उनका सब खयाल रखा हे.. वो सब मुजे भुमीने ही बताया.. इसीलीये मुजे उनपे आसंका रहेती हे.. मेरे पुछने परभी उन्होने मुजे आपके बापु ओर उनके रीस्तोके बारेमे ज्यादा कुछ नही बताया.. हर बार हसते हुअ‍े बातको टाल देती हे.. कहेती हे वो मेरा भाइ था.. कमीनी बहुतही सातीर दिमाग वाली हे..

देवायत : (नीर्मलाका मन टटोलते) नीमु.. अगर अ‍ैसा हेतो क्या तुजे बुरा नही लगता..?

नीर्मला : (होंठको चुमते) नही देवु.. वो मेरी सहेली हे.. ओर सहेलीसे पहेले वो अ‍ेक ओरत हे.. ओर मे ओरतोकी तकलीफ भलीभांती जानती हु.. इसी चकरमे मुजे अपने भाइसे सादी करनी पडी.. ओर जबसे हम दोनोके बीच मनमुटाव हो गया तबसे लेकर आज तक मे आपके बीना बहुतही तडपी हु..

तो फीर वो अगर इतने सालोसे बीना पतीके रहेती हे तो आपके बापुके साथ उनका रीलेशन होगा तो मुजे क्या अ‍ेतराज हो सकता हे.. ओर आपके बापुकी छोडो.. इनकी जगाह आपभी होते तोभी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. देवु.. अबतो आपके बापुभी नही हे.. ओर आपही उनका सब काम देख रहे हो.. तो फीर..

देवायत : (नीर्मलाकी आंओमे देखते) हां बोल.. बातको अधुरी क्यु छोडदी.. क्या कहेना चाहती हो तुम..

नीर्मला : (सरमाते नजर चुराते) देवु.. बुरा मत मानना.. आप भुमीके बारेमे कुछ सोचकर आगे बढना चाहो तो बढ सकते हो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रहेगी.. कहोतो मे भुमीसे बात करु..? इनमे हमारा ही फायदा हे..

देवायत : (गालको चुमते) कैसा फायदा..? नही.. नीमु.. तुम मेरी बीवी हो.. क्या तुम तेरी सौतनको बरदास्त करपाओगी..?

नीर्मला : (हसते प्यारसे गाल सहेलाते) देवु.. मेरीतो ओलरेडी दो सौतन आगइ हे.. हें..हें..हें.. मेरी मंजु ओर मेरी चंदा.. अगर तीसरीभी आगइ तो क्या फर्क पडता हे.. लेकीन चंदाको हमारे रीस्तेके बारेमे नही पता.. तो फीर भुमीमे क्या प्रोबलेम हे.. कमसे कम वो हम दोनोके रीस्तेके बारेमे जानती तो हे.. ओर हमेभी वहा मीलनेमे आसानी रहेगी.. हम दोनोही अ‍ेक साथ आपके बीस्तरको गरम करते हमारी प्यास बुजाती रहेगी.. क्या कहेते हो..?

देवायत : (भुमीसे इस बारेमे बात करते बगैर आगे बढना नही चाहताथा) नीमु.. बाततो तेरी सही हे.. लेकीन इस बारेमे हम ये चारोकी सादीके बाद सोचेगे.. चल अब दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजा.. तुनेतो बातोसेही गरम करदीया.. हें..हें..हें..

सुनतेही नीर्मला सरमाके हसने लगी.. दोनोही अ‍ैसी बाते करते फीरसे गरम होगये थे.. नीर्मला अभीभी देवायतका लंड अपनी चुतमे रखकर उनके नीचे लेटी उनसे बाते कर रहीथी.. उनको देवायतका लंड अपनी चुतमे रखकर बहुतही मजा आता था.. ओर वो फीरसे धीरे धीरे अपनी कमर हीलाकर देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच जबरदस्त घमासान चुदाइ होने लगी..

दोनोही भुमीकाकी बाते करते काफी गरम हो गयेथे.. ओर उछल उछलकर चुदाइमे मसगुल होगये.. इसी बीच नीर्मला फीरसे दो बार जड चुकी थी.. देवायत बीना नीचे उतरेही नीर्मलाको लगातार साडे तीन बजे तक चोदता रहा ओर आखीर उनकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरते फीरसे खलास होगया.. आज नीर्मला फीरसे पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी.. देवायत उनके उपरसे उतर गया फीरभी वो वैसेही पडी रही..





तब उनकी चुत अभीभी फडफडा रहीथी.. ओर चुतसे दोनोका कामरस बहारकी ओर नीकलने लगा.. नीर्मला अभीभी देवायतसे चुदवाना चाहती थी.. वोतो चाहतीथी की देवायत उसे दिन रात लगातार चोदताही रहे.. लेकीन वक्तकी पाबंदीने उसे चुदाइ करवानेसे रोक लीया.. ओर दोनो अ‍ेक साथ बाथरुममे नहाने चले गये.. तब देवायतने वहाभी नीर्मलाको खडे खडे पीछेसे लंड डालकर चोद लीया.. तब नीर्मला बहुतही खुस होगइ..





फीर दोनोही नहाकर फटाफट बहार आगये ओर तैयार होगये.. आज नीर्मला सजधजके पुरी दुल्हनकी तराह तैयार होकर बहुत खुस नजर आ रहीथी.. ओर नीचे आकर पहेले उसने चाइ नास्ता बना लीया.. तबतक देवायत बहार होलमे सोफेपे बेठकर भानुसे फीर रमेशसे फोनपे कामकी बात करता रहा..

ओर उसने रश्मीसेभी कुछ कामकी बाते करली.. ओर नीर्मलाने राजीवको जगाकर उसेभी तैयार करदीया ओर दोनो बहार आगये तब तीनोने साथमे मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. नीर्मलाने अपने सब कपडे सुबहही बेगमे पेक करलीये थे.. राजीव भी हवेलीपे जानेके लीये बहुत उत्सुक था..

देवायत : (हसते) पापा.. तो अब चले..?

राजीव : (हसते) हां भाइ.. हां.. अबतो आनाही पडेगा.. चलो.. चलो..

नीर्मला : (हसते) आप दोनो कारमे बैठी मे घरको ताला लगाकर आती हु..

राजीव : (हसते) हां बाबा सब अच्छेसे बंध करलेना.. लाइट बाइट सब अच्छेसे बंध करना..

तब नीर्मलाके हाथसे देवायतने बेगको लेलीया ओर तीनो बहार नीकल गये.. तब नीर्मलाने सब चेक करके घरको ताला लगादिया.. आज वो ये मानके अ‍ैसे खुस हो रहीथी जैसे अपनी बेटी मंजुके घर नही वो आज सचमे अपने ससुराल जा रही हो.. ओर तीनो कारमे बैठ गये.. राजीव देवायतके साथ आगे बैठ गया तो नीर्मला राजीवके पीछे बैठ गइ ओर सेन्ट्रल मीररसे देवायतका दिदार करती रही.. ओर दोनो मीरर से इसारोमे बाते करते रहे.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर दोड पडी..

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०१ / १

तब नीर्मलाके हाथसे देवायतने बेगको लेलीया ओर तीनो बहार नीकल गये.. तब नीर्मलाने सब चेक करके घरको ताला लगादिया.. आज वो ये मानके अ‍ैसे खुस हो रहीथी जैसे अपनी बेटी मंजुके घर नही वो आज सचमे अपने ससुराल जा रही हो.. ओर तीनो कारमे बैठ गये.. राजीव देवायतके साथ आगे बैठ गया तो नीर्मला राजीवके पीछे बैठ गइ ओर सेन्ट्रल मीररसे देवायतका दिदार करती रही.. ओर दोनो मीरर से इसारोमे बाते करते रहे.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर दोड पडी....अब आगे





उधर भानुके घरसे देवायतके जातेही भावना ओर लता आपसमे धीरेसे देवायतके बारेमें हस हसके बात करते घरके अंदर चली गइ.. भावना अपने रुममे चली गइतो पीछे रमाभी उनके साथ रुममें चली गइ.. तब लताभी सीधी बाथरुममे घुस गइ.. आज उसने हिमत करते दो बार देवायतके सामने आंख मारदी.. ओर जता दीयाकी मेभी आपसे प्यार करती हु.. ओर देवायतनेभी उनके सामने हसते ग्रीन सीग्नल देदीयाथा..





तबसे लता बहुतही अ‍ेक्साइटेड होगइ थी.. उनकी चुत अ‍ेक बार फीरसे हरकतमे आ गइ ओर बाथरुममे जमतेही देवायतको इमेजींग करते अपनी चुतमे उगली डालकर जोरोसे हीलाने लगी.. फीर अपने आपको सांत करके रुममे जा रहीथी तब साथमे नीलमभी चली गइ ओर उसने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. वो लताके साथ बेडपे बेठ गइ.. तब लताने उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखा तो नीलम कुछ परेसान दीख रहीथी.. तब.. लता सबकुछ समज गइ..

लता : नीलु.. क्या बात हे..? तुमने दरवाजा क्यु बंध कीया..? तुम कुछ परेसान दीख रही हो.. कही वो कमीनेका फोन बोनतो नही आगया..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेरे पास कहा फोन हे.. जो उनका फोन आयेगा.. वो..वो.. आप धिरेन जीजुसे बात करलो.. उसने मुजे कसम दी हे..

लता : (थोडा गुसेसे) क्यु..? तुजे बडी चीन्ता हो रहीहे धिरेन जीजुके कसमकी.. कमीना कहीका.. चल उनका नंबर लगादे.. पहेले तुम उनसे बात कर फीर मुजे फोन दे देना.. ओर फोन स्पीकरपे लगादे.. मे उसे बात करलेती हु.. अ‍ेक बार फीरसे सोचले.. कही तेरा मनतो नही हेनां..? हंममम.. तो अभीसे बोलदे.. बादमे मुजे मत कहीयो.. की दीदीने मोका नही दीयाथा.. चल लगा फोन..

नीलम : (मनतो था फीरभी नीरास होते सरमाते) नही.. दीदी.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. वो बस.. हम दोनो अ‍ैसेही.. मस्ती कर रहेथे.. तो उसने मुजे फोन करनेको केह दीया..

नंबर लगाते नीलम मायुस होगइ.. नीलमको सब पताथाकी कारमे धिरेनने उनके साथ क्या क्या कीयाथा.. धिरेनकी छेडखानीसे नीलमकोभी बहुत अच्छा लगाथा.. ओर वो धिरेनकी ओर काफी ढल चुकी थी.. उनकी जींदगीमे ये पहेली बारथा जो कीसी लडकेने उसे इस तराह छेडाथा.. जीनकी वजहसे वो उनकी ओर आकर्सीत होगइ थी..

ओर वो नादान उसे अपनी जींदगीका पहेला प्यार समजने लगी.. लेकीन उनको क्या पता थाकी ये महज अ‍ेक विपरीत लींगका केवल आकर्सण था.. धिरेनभी उनको अभीतो प्यारके नामपे युस करना चाहता था.. बादमे पता नही क्या होगा.. ओर नीलमने नंबर लगा दीया.. तो लताने खुद फोनको स्पीकर फोनमे करदीया.. सामने धिरेनकी आवाज सुनतेही नीलमकी गभराते दिलकी धडकन बढ गइ..

धिरेन : (सामनेसे फोन उठाते) हेलो.. कौन..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हेलो.. मे.. मे.. नीलम बोल रही हु.. कहीये जीजु.. क्या काम था मुजसे..?

धिरेन : (खुस होजाते) अरे नीलु तुम..? मुजेतो यकीनही नही हो रहाकी तुम मुजे फोन करोगी.. हें..हें..हें.. कहो.. कैसी हो तुम..? क्या मेरी कसमको मानलीया..? तुजे हमारी याद नही आती..?

नीलम : (गभराते लताकी ओर देखते) जी.. वो.. वो.. कहीयेना क्या काम हे मुजसे..? वरना में फोन रखती हु.. मुजे बहुत काम हे..

धिरेन : नीलु.. कारमे मुजे तेरे साथ कीतना मजा आया.. पता नही तुने मेरी रातोकी नींद चुराली हे.. मेने पुरी रात तेरी यादोमे करवट लेते काटी हे.. मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे.. आइ लव यु नीलु.. बस मेरा प्यार कबुल करलो.. यकीन मानो मे तुजे सचमे प्यार करने लगा हु.. प्लीज.. अबतो मुजे तुम आइ लव यु कहेदो..

कहातो नीलम प्याका नाम सुनतेही सकपका गइ.. ओर वो गभराते लताकी ओर देखने लगी.. आज वो अकेली धिरेनसे बात करतीतो पका उनका प्यार कबुल करलेती.. लेकीन अभी लताकी हाजरीकी वजहसे वो मायुस होगइ.. क्युकी तब लताभी फोनपे धिरेनकी सब बात सुन रहीथी.. ओर उसने फोन नीलमके हाथोसे अपने हाथोमे लेलीया.. ओर फोनको मुहके पास रखते धीरेसे धिरेनसे बात करने लगी..

तब अ‍ेक बारतो नीलमकी गांडभी फट गइ.. क्युकी आज पहेली बारथा जो नीलमको कीसी लडकेने प्यारका इजहार कीयाथा.. ओर उनका सारा भांडा लताके सामने फुट गयाथा.. वो भगवानको मनमे प्रार्थना करने लगीकी बात अच्छेसे सम्हल जाये.. नीलमपे नइ नइ जवानी छाइ हुइथी.. धिरेनने उसे क्या क्या सपने नही दीखायेथे.. जीनकी वजहसे वो धिरनको खोना नही चाहती थी.. तभी..

लता : (थोडा सख्तीसे धीरेसे) हेलो.. धिरेन मे लताभाभी बोल रही हु.. ये सब क्या हे..? तुमको सरम नही आइ.. अ‍ेक छोटी बच्चीसे इस तराहकी बाते कर रहे हो.. मत भुलो तुम्हारी तीन दिनके बाद पुनोदीदीके साथ सादी होने वाली हे.. अगर मेने उसे बता दियातो सोचो तुम्हारा क्या हसर होगा..

धिरेन : (सकपकाते गांड फटजाती हे) हेलो..कोन..? कोन बोल रहा हे..? ठीकसे आवाज नही आती..

लता : (थोडी उची आवाजमे सख्तीसे) धिरेन.. मे लताभाभी बोल रही हु.. तुम्हारे सालेकी बीवी.. देखो.. धिरेन.. तुम नीलमका ख्वाब देखना छोडदो.. वो अभी बच्ची हे.. अगर तुम चाहते होकी मे ये सब बाते लखनको या पुनोदीदीको नाी बतादु.. तो नीलमको छोडदो.. मे तुम्हारी जींदगी खराब करना नही चाहती.. समज गयेनां..? वरना कहीके नही रहोगे.. मुजे पता हे तुमने नीलुके साथ कारमे क्या क्या कीयाथा..

धिरेन : (गांड फटते) जी.. लताभाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजसे गलती होगइ.. आइन्दा मे उनसे बात नही करुगा.. सोरी.. सोरी.. बस अ‍ेक बार माफ करदो.. प्लीज.. वरना मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगा..

लता : (थोडी नरम आवाजमे) देखो.. धिरेन अब तुम्हारी पुनोदीदीके साथ सादी होने वाली हे.. क्या वो तुम्हे ओर तुम उनको प्यार नही करते..? तो फीर अ‍ैसी बचकानी हरकत क्यु करते हो..? पता नही पुनोदीदीने तुम्हारे साथ क्या क्या सपने सजाये होगे.. ओर तुम होकी..

धिरेन : (गभराते) वो.. वो.. लताभाभी.. बुरा मत मानना.. मुजे लगता हे.. पुनो मुजसे प्यार नही करती.. इसलीये मे बहेक गयाथा.. आपने देखा नही वो मुजसे कैसे दुर ही रहेती हे.. ओर मे नीलमको मीला तो उनका साथ मुजे अच्छा लगा.. इसीलीये फोन कीया.. अब नही करुगा सोरी..

लता : (नरमीसे समजाते) देखो धिरेन.. हम लडकीया आपकी तराह खुलकर प्यार नही कर सकती.. आपको कुछ गलत फहेमी होगइ हे.. पुनोदीदीभी आपसे उतनाही प्यार करती हे.. बस अ‍ेक बार आप दोनोकी सादी होजानेदो फीर देखना.. वो आपको कैसे प्यार करती हे.. हो सकता हे कभी कभी कोइ सरीफ लडकी सादीके बादही सबकुछ.. तुम समज गयेनां..? कहोतो मे इस बारेमे पुनोदीदीसे बात करलु..?

धिरेन : (जटसे) अरे नही नही.. वो सब मे देखलुगा.. भाभी.. अ‍ेक बार फीर सोरी.. आप ये बात कीसीको मत कहेना.. वरना मे वहा कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहुगा.. प्लीज.. मे पुनदकद खदना नही चाहता..

लता : (मनमे खुस होते) ठीक हे.. लेकीन ये आपके लीये आखरी मौका हे.. आइन्दा अ‍ैसी नादानी कीनां तो में सचमे सबको बता दुगी.. ओर हां.. अ‍ेक बात ओर.. आप नीलमसेतो दुरही रहेना.. समजे..

धिरेन : (राहतकी सास लेते) जी.. भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे फोन रखता हु..

कहेते धिरेनने फोन काट दीया.. ओर अपने सीनेपे दोनो हाथ रखते राहतकी सांस लेने लगा.. आज वो बाल बाल बच गयाथा.. लेकीन उनके दिलो दिमागमे नीलम हमेसाके लीये छा गइथी.. वो ना चाहते हुअ‍ेभी नीलमको अपने दिलसे नीकाल नही पा रहाथा.. ओर वो नीलमको पानेके लीये दुसरा रास्ता सोचने लगा.. लेकीन अभी उनकी सादी नही होजाती तबतकके लीये सबकुछ भुलकर वो काममे बीजी होगया..

तब दुसरी ओर लता ओर नीलम अपने रुममे बेठे थे तब फोन काटतेही लता तीरछी नजरसे नीलमको देखने लगी.. क्युकी नजरोके इस खेलमे लता महारत हासील कर चुकीथी.. वो अपनी माइ सरला - देवायतको ओर अपने भाइ भानु ओर भाभी भावनाके बीच कइ बार चुदाइ करते ओर दोनोके बीच कइ बार नजरोसे बाते करते देख चुकीथी.. खुद वो भी लखनसे सादीसे पहेले कइ बार नजरोसे बाते करते उनसे चुदवा चुकीथी..

उनको नीलमके चहेरेपे बहुत मायुसी नजर आइ.. ओर वो सबकुछ समज गइकी बात सीर्फ अ‍ेक तरफा नही हे.. नीलमके दिलमे भी धिरेनके लीये प्यारका बीज पलने लगा हे.. ओर वोभी धिरेनको प्यार करने लगी हे.. उसने नीलमको अभीके लीये अपनी नीगरानीमे रखनेकी ठानली.. वो जानतीथी अ‍ेक बार कोइ लडकी लंडका स्वाद चख लेती हे तो फीर वो उनके बगैर नही रेह सकती.. इसीलीये उसे अभी नीलमको इन सब चीजसे दुर रखना उचीत लगा.. ओर वो नीलमको समजाने लगी..

लता : (प्यारसे सरपे हाथ घुमाते) देख निलु.. अभी ये सब तेरे लीये ठीक नही हे.. अभी तेरी उमर ही क्या हे..? बस अ‍ेक बार अच्छेसे पढाइ लीखाइ करले.. फीर मे खुद जेठजीसे कहेकर तुम्हारे लीये अच्छा लडका ढुढुंगी.. समज गइनां.. ये धिरेन तेरे लीये ठीक नही हे.. मुजे वो अच्छा लडका नही दीखता.. कोइ अच्छा पढालीखा लडका मीले तब उनके साथ घर बसालेना.. वरना तेरी जींदगी खराब होजायेगी..

नीलम : (सरमाते नजर जुकाते) जी दीदी.. वो वहा सादीमे आयेगे ओर मेरी मस्ती करेगेतो में क्या करु..?

लता : (थोडी सख्तीसे) डफर.. तुम उनको अकेली मीलनाही नही.. तुम हमेसा मेरे साथही रहेना.. अब वो दुबारा अ‍ैसी हीमंत नही करेगे.. वरना इस बार मे उनको छोडने वाली नही हु.. समजी.?. ओर तुमभी खयाल रखना.. उनके सामने कोइ अ‍ैसी वैसी हरकत मत करना.. वरना तेरे साथ कुछ गलत करदीयानां.. तो तुम इस उमरमे अपना पेट फुलाकर घुमती रहेनां.. फीर देती रहेना सबको जवाब.. देख नीलु अभीभी वक्त हे तु समज जा.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. मुजे पता हे तुभी वही चाहती हे.. कमीनी..

नीलम : (सर जुकाते मायुसीसे धीरेसे) जी..दीदी.. मे आपके साथ रहुगी..

लता : (प्यारसे सरको सहेलाते) गुड गर्ल.. चल.. अब मुह लटकाना छोड.. ओर कीचनमे चल.. हें..हें..हें..

हसते हुअ‍े लता बेडसे खडी होगइ तब नीलमभी सरमाते हसने लगी.. ओर तीरछी नजरसे लताको देखते बहारकी ओर चलने लगी.. ओर दोनो कीचनमे खाना बनाने चली गइ.. तब लताको नही पताथा की नीलमके दिलमे अब धिरेन पुरी तराह छा चुका हे.. उसने धिरेनके फोन नंबरकी चीठी लतासे छुपकर अपने पास छुपाके रखली थी.. ओर दिनमे मौका मीलतेही रमाके फोनसे धिरेनसे फोनपे बात करनेकी ठानली थी..

तो दुसरी ओर देवायतके जातेही रमा भावनाके रुममे चली गइ.. ओर बहुतही सरमाते हसते हुअ‍े भावनाके पास जाकर बेडपे बैठ गइ.. जीस तराह देवायतने उनकी मस्ती की तबसे रमा.. बहुतही सर्मसार हो रहीथी.. ओर सचतो ये थाकी देवायतकी अ‍ैसी मस्ती उनको अच्छीभी लगने लगी थी.. वो अपने मनकी बात भावनासे करना चाहती थी.. भावनाने भी उनको देखकर हसते सवालीया नजरोसे रमाकी ओर देखा..

रमा : (बहुतही सरमाते हसते) दीदी.. देवरजीतो बहुत बीन्दास्त हे.. मेरी कैसे मस्ती करके गये.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) क्यु.. क्या हुआ..? उसने आपके साथ कैसी मस्तीकी..? कुछ कहा क्या..? कही आपके दुधु बुधु तो नही दबा लीये.. हें..हें..हें..

रमा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) धत्.. आपभी कैसी मस्ती करती हो..? मुजे अ‍ैसे चलते देखकर कहेते थे की आपके पैरमे क्या हुआ..? कही पैरमे मोचतो नही आगइ..? मुजेतो बहुत सर्म आइ.. अब मे उनको क्या जवाब दु.. वहा माजीभी बैठीथी.. वरना उनको मे आज जवाब दे देती.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) तो क्या हुआ केह देती उनको की अपने भाइसे ही पुछलो.. उन्होने ही मेरी अ‍ैसी हालत की हे.. हें..हें..हें..

रमा : (सर्मसार होते हसते पीठमे मुका मारते) दीदी क्या आपभी.. अ‍ैसी हालततो मेरी कभी नही हुइ.. पता नही कल वो क्या खाकर आयेथे.. पुरी रात मुजे सोने नही दिया.. क्या आपके साथभी अ‍ैसा करते हे..?

भावना : (सरमाते हसते) हां.. जब हम दीदीके घरथे तब दीदीनेही मुजे अ‍ेक गोली दीथी.. तब पहेली बार मेने उसे दुधमे मीलाकर पीलादी थी.. तभीतो इस बच्ची ठहेर गइ.. वरना उनमे अब इतना दम कहाकी हमे बच्चा दे सके.. दीदी.. अब भानुमे पहेले वाला जोस नही हे.. बस सादीके बाद मुजे अ‍ेक बच्चा ही दे पाया.. दीदी मुजे बच्चे बहुत अच्छे लगते हे.. मेने क्या क्या सपने देखे थे.. खैर जाने दीजीये सब..

रमा : (सीरीयस होते) दीदी.. बुरा मत मानना.. क्या आप अभी भी उनसे नाराज हे..? भानुके साथ मुजेतो कभी अ‍ैसा नही लगा.. भानु मुजे हर बार संतुस्ट करता हे.. तो फीर वो आपको संतुस्ट क्यु नही करपाया..?

भावना : (हसते) छोडीयेना दीदी.. अब मे कोइ उनसे नाराज नही हु.. लेकीन अब मे मेरी जींदगी अपने तरीकेसे जीना चाहती हु.. ओर अच्छा हे वो आपको संतुस्ट करपाता हे.. लेकीन उसने मुजे कभी संतुस्ट नही कीया.. इसीलीये मुजे उनको गोली खीलानी पडती थी.. सायद हो सकता हे वो मुजसे ज्यादा आपको पसंद करता हो.. ओर आप मेरीतो बीलकुल चीन्ता मत करना.. मुजे आपसे कोइ गीलासीकवा नही हे.. मे आपको आजभी अपनी दीदी मानती हु.. बस आप खुस रहीये.. ओर मुजे अपने तरीकेसे जीने दीजीये..

रमा : (प्यारसे गले लगाते) दीदी.. लगता हे आपने अपने दिलपे बहुत गहेरी चोट खाइ हे.. मेभी इस जखमको जेल चुकी हु.. जब जवानीकी दहेलीजपे कदम रखा.. तब छोटीही उमरमे मेरी सादी करदी गइ.. मानोनां मुजे पैसेके बदले बेचदी गइ.. तब प्यार क्या होताहे मुजेतो पताही नही था.. मुजे मेरे घरवालोने अ‍ेक बारभी नही जाना की मेरे दिलके क्या अरमान हे..

भावना : (हसते) दीदी तो फीर भानु ओर आप दोनोमे प्यार कब होगया..?

रमा : (सरमाते हसते) दीदी.. मेरा पती तब पुरुषमे नही था.. मेरे तो सारे अरमान मीटीमे मील गयेथे.. ओर मे प्यारके लीये बहुतही तरसी हु.. तभी मेरे जीवनमे भानु आगया.. जब मेरे पतीका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ ओर वो होस्पीटलमे थे.. तब में ओर भानु वही २० दिन साथमे रहे.. ओर पताही नही चलाकी हम दोनोकी कब आंख मील गइ.. मुजे भानुसे प्यार होगया..

तब उसी रात घरके मंदिरके सामने भानुने मुजसे गांधर्व विवाह करलीया ओर हम दोनोने अपनी सुहागरातभी मनाइ.. मे अपने आपको भानुको पुर्ण समर्पीत कर बेठी.. ओर मेरा सबकुछ भानुको सोप दिया.. मेरा कौमार्य भी.. मे सादी होनेके बादभी अ‍ेक कुआरीथी.. ओर मेरा कुआरापन मेने हमारी सुहागरातमे भानुको सोंप दीया.. भानुने मुजे कुआरी लडकीसे ओरत बना दीया.





भावना : (हसते) तो फीर ये नीलम..?

रमा : (सरमाते हसते) दीदी भानु वहा २० दिन रहा हे.. फीरतो हमने हर रात बीस्तरमे मीया बीवीकी तराह बीताइ.. हमने हर रात सुहागरातकी तराह रंगीन बनाइ.. भानुभी मेरे मेरे पीछे प्यारमे पागल था.. ओर इसके बादभी हम अक्सर मीलने लगे.. उसी नतीजेके फल स्वरुप भानुने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया.. ओर पुरे नौ महीनेके बाद हमारी नीलम आगइ.. हमारे प्यारकी पहेली नीसानी.. बस तबसे मे भानुको पुर्ण समर्पीत हु.. मे तबसे भानुको अपना पती मान चुकी हु..

भावना : (हसते) दीदी.. आप बहुत खुसनसीब हे.. आपको अपना प्यार सादीके बादभी मील गया.. लेकीन मेरे बदनसीबमे वो प्यारभी नही मील पाया जीसे मे चाहती थी.. ओर मुजे भानुसे सादी करनी पडी.. यही सोचके भानुसे सादी करली की चलो वो प्यार मुजे भानुसेही मील जायेगा.. लेकीन मुजे नही पताथाकी भानु आपको प्यार करता हे.. वरना मे आप दोनोके बीच कभी नही आती.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे माफ करदो..

रमा : (भावुको गले लगाते) नही दीदी.. आप माफी मंत मांगो.. गलती आपकी नही भानुकी हे.. उनकोही सादीसे पहेले आपको हमारे रीस्तेकी सब सचाइ बता देनी चाहीये थी..

भावना : (आंसु बहाते) दीदी मेरी किस्मतही खराब हे.. अ‍ेकतो मुजे मेरा प्यारभी नही मील पाया ओर सादी करली तो पतीका सुख.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? तंग आचुकी हु इस जींदगीसे..

कहेते भावनाकी आंखसे आंसु बहेने लगे तब रमाने खडा होकर भावनाको अपने सीनेसे लगा दीया.. ओर उनके आंसु बहेते रहे.. ओर रमा उनका सर अपने सीनेमे दबाते खडी रही.. फीर कुछ देरके बाद उनका सर सीनेसे अलग करते अपनी सारीके पलुसे भावनाके आंसु पोछने लगी.. तब भावनाके चहेरेपे फीकी मुस्कराहट आगइ.. ओर उसने अ‍ेक बार फीरसे रमाको हग करलीया.. ओर दोनो फीरसे बेडपे सटकर बैठ गइ..

रमा : (हसते) दीदी.. अपने आपको कभी अकेली मत समजना.. प्यारकी अहेमीत क्या होती हे.. वो भला हम दोनोके अलावा कौन जान सकती हे.. बस आपको बुरा ना लगेतो अ‍ेक बात कहु..? जबभी आपको अ‍ैसा लगेकी मुजे मेरा प्यार मील गया हे तब आप अपना प्यार पानेमें पीछेहट मत करना.. आपकी ये बडी दीदी आपके साथ हे.. मेनेभी सादीसुधा होनेके बावजुद अपना प्यार पालीया.. तो फीर आप क्यु नही..?

भावना : (हसते) क्या तो फीर आपको बुरा नही लगेगा..? अबतो हम सादीसुधा हे.. अब मेरा प्यार मीलभी गया तोभी क्या होगा..? में भानुको ओर इस परीवारको कैसे धोखा देदु..? आपकी बात अलग थी.. की आपके पती पुरुषमे नही थे.. पब भानु..?

रमा : (हसते) दीदी.. बुरा मत मानना.. अ‍ैसे घुट घुटकरतो तुम कैसे जीओगी..? मुजे पता हे तुम आजभी मेरे भानुको माफ नही करपाइ हो.. ओर उसे माफ करनाभी नही चाहीये.. क्युकी उसने तुमको सचमे हमारी बात ना बताकर तुम्हारे साथ धोखा कीया हे..

अगर आपकी जगह मे होती तो मेभी कभी भानुको माफ नही करती.. बस हमारे मा बापको हमारी फीलीग्सकी कुछ पडीही नही हे..

उनके लीये हम महज अ‍ेक जीम्वेवारी हे.. जो वो हमारी सादी करवाके उनमेसे वो मु्कत होजाना चाहते थे.. मेरे साथभी वही हुआ जो सायद आपके साथ हुआ हे.. पता नही आप इतनी पढी लीखी लडकी होकरभी भानुके साथ कैसे सादी करके आगइ.. कुछतो आपकी मजबुरी रही होगी.. जो भानुके पले पड गइ.. इसीलीये मे आपको कहेती हु.. की आपको अपना पुराना प्यार मीलेतो कभीभी पीछेहट मत करना.. ये कोइ धोखा नही हे.. में आपके साथ खडी हु..

भावना : (मुस्कुराते) थेन्क्स दीदी.. अब सायद मेरे दिलका बोज कुछ हल्का होगया.. कास सभी ओरते आपकी तराह सोचती.. अ‍ेक दुसरेका दर्द समजती.. लेकीन दीदी आप रातमे बहुत चीलाती थी.. क्या वाकइ उसने गोली खाइ थी.. हें..हें..हें..





रमा : (सर्मसार होते धीरेसे हसते) ओर नही तो क्या..? पता नही कोनसी गोली खाकर आयेथे मुजेभी नही पताथा.. दीदी उनका पहेलेसे बहुत बडा होगया था.. ओर मेरी अ‍ेकभी नही सुनतेथे.. बस कैसा जोस चडाथा बीना सुने कीये ही जा रहेथे.. मुजेतो बहुत दर्द हो रहाथा.. अभीभी नीचे बहुत सुजन हे.. अच्छा हुआ कल नीलु ओर लतादीदी नही थी.. वरना वोभी सब चीखे सुन लेती.. हें..हें..हें..

भावना : (हाथ पकडते बाथरुमकी ओर लेजाते) चलीये मे आपको सीकाय करके ठीक कर देती हु.. ताकी आज रात आप फीरसे दोनो मजे कर सके हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते साथ चलते धीरेसे) दीदी.. आज मे उसे कुछ करने नही दुगी.. आपभी ठीक नही हुइ.. वरना आज मे आपकोभी साथ लेजाती.. मुजेतो बहुत सरम आ रही हे.. हें..हें..हें.. अ‍ैसातो मुजे हमारी पहेली सुरागरातमे भी नही चौदाथा.. पुरी रात मुजे बस चोदतेही रहे.. चोद चोदके मेरी मुनीया सुजादी.. हें..हें..हें..





भावना : (बाथरुममे जाते दरवाजा बंध करते) दीदी.. अब सायद ही मे भानुके साथ फीरसे अ‍ेटेच हो पाउगी.. अब मुजे उनको अ‍ेकसेप्ट करते बहुत वक्त लगेगा.. ओर सायद उनसे अ‍ेटेच होभी ना पाउ.. बस मुजे मेरा खोया हुआ प्यार मील जाये.. मे यही भानुके साथ रहेकर ही अपना प्यार पालुगी.. यही उनकी सजा हे..

रमा : (कमोडपे बेठते) दीदी.. मे प्रार्थना करुगीकी आपके मनकी सब मुराद पुरी होजाये.. देखना अ‍ेक दिन आपको अपना प्यार जरुर मील जायेगा.. अब मुजसे सरमानेकी जरुरत नही हे.. आप चाहोतो मेरे सामनेही अपने प्यारको मील लेना.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी..

दोनोही रुमके बाथरुममे चली गइ तब भावना रमाको कमोडपे बीठाकर उनकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगती हे.. तब रमा सीर्फ भावनाकी ओर देखती रहेती हे.. आज उसे भावनापे बहुत तरस आ रहीथी.. लेकीन उनको नही पताथाकी भावनाके दिमागमे क्या चल रहा हे.. पहेले लता फीर सरला ओर अब रमाको अपनी ओर करनेमे कामयाब होगइ थी..

तो दुसरी ओर रमाभी भावनाकी बातोसे भानुको भावनासे अलग करते भानुके साथ अकेली जींदगी बीतानेका सपना देखने लगीथी.. दोनोही ओरते अपने अपने फायदेके लीये सोचती रही.. फीर सीकाइ करतेही रमाको काफी राहत महेसुस हुइ.. ओर दोनो हसती हुइ बहार आगइ.. तब लता ओर नीलम खाना बना रहीथी.. ओर खाना बनाते लता नीलमके मनको जाननेकी कोसीस करते उनको समजाती रही..

तो भावना ओर रमा सादीमे लेजानेके लीये अपना सब सामान पेक करने लगी.. वहा सबको सादी तक रहेनाथा तो सभीके चार दिनके कपडे.. फीर लताके दहेजका सामान.. सभीको अच्छेसे पेक करनाथा.. फीर दो पहोरका खाना खाकर कुछ देर आराम करके फीरसे घरके सभी लोगोके कपडे ओर लताका दहेजका सामान दोनो अलग अलग पेक करती रही.. अ‍ैसेही पैकींग करनेमे साम ढल गइ..

इसी बीच नीलमने मौका देखतेही सबके कामपे होनेका पुरा फायदा उठालीया.. जैसेही सरलाने उसे गांवके कीरानेकी दुकानपे पेकींगकी रसी लानेको कहा तो वो छुपकेसे रमाका फोन लेकर बहार नीकल गइ.. तब ना रमाको पताथा तो नाही भावु ओर लताको.. सब अपने काममे बीजी थे.. ओर नीलम बहार दुकानपे दोडके चली गइ ओर फटाफट रसी लेकर वही साइडमे सुमसान गलीमे खडी रहेते धिरेनको फोन लगा दीया..

धिरेन : (अन्जान नंबर देखतेही फोन उठाते) हेलो.. कौन..? मे धिरेन बोल रहा हु..

नीलम : (भारी सांसोसे धीरेसे) जीजु.. में.. नीलम.. अभी मम्मीका फोन लेकर बहार आइ हु.. ये मम्मीका फोन नंबर हे सेव कर लीजीयेगा.. अब इसी फोनसे मे आपसे बात करुगी.. आप फोन मत करना.. ओर आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे लतादीदीने आपको डांट दीया.. उनको हमारे बारेमे सब पता चल गया हे.. अब हम क्या करेगे..?

धिरेन : (खुस होते) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. मे तुजे अब फोन नही करुगा.. जब तु होस्टेलमे आजाओगी तब हम वही मीलते रहेगे.. तबतक मुजसे बात मत करना वरना.. वरना ओर लोगोको भी हमपे सक होजायेगा.. लेकीन तुमने मुजे जो कहेनाथा वो कहा नही.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? जीजु मुजे बहुत सरम आरही हे.. अ‍ेक डर लग रहा हे.. अगर कीसीको हमारे बारेमे पता चल गया तो..?

धिरेन : नीलु अब कीसीको पता नही चलेगा.. ओर सुन सायद पुनम मुजे चाहती ही नही हे.. मुजे लगता हे वो कीसी ओरसे प्यार करती होगी.. तभीतो मुजसे दुर रहेती हे.. (जुठ बोलते) नीलु वो मुजसे सादी अपने घरवालो के दबावमे कर रही हे.. अ‍ैसा मुजे लगता हे लेकीन मे स्योर नही हु.. बस अब तुही पता मे क्या करु..? इनसे ज्यादा तो तुमने मुजे प्यार दीया हे.. कारमे हम दोनोने कीतने मजे कीये..

नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) जीजु मे फोन रखु..? मुजे घर जान होगा.. मे दुकानपे रसी लेने आइथी तो छुपकेसे मम्मीका फोन लेलीया मुने जाना होगा.. फीर मौका मीलतेही मे आपसे बात करलुगी..

धिरेन : (हसते) नीलु.. क्या अबभी मुजे जीजु कहेगी..? मेरी बात सुनले मे तुमसे सचमे प्यार करता हु.. ओर मे तुमसे मौका मीलतेही सादीभी करलुगा.. हम मीया बीवी दोनो सहेरमे रहेकर हमारी अलग दुनीया बसायेगे.. क्या मुजसे सादी करोगी..? ओर अभी तक तुमने मुजे आइ लव युभी नही कहा..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) धि..रे..न.. आइ.. लव.. यु.. बस..? अब फोन रखदु..? सायद कोइ आ रहा हे..

धिरेन : (खुस होकर हसते) नीलु.. तुमने सादीके बारेमे कुछ नही कहा..

नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. पहेले मुजे सहेरमेतो आनेदो फीर हम वही मीलकर डीसाइड करेगे.. की क्या करना हे.. बस सादीमे मुजसे बात मत करना ताकी लतादीदीको मुजपे ओर आपपे विस्वास होजाये.. ओके.. चलो मे फोन रखती हु..

धिरेन : (हसते) बस अ‍ैसेही फोन बखदोगी..? कुछ कीस बीस.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) धिरेन.. आप बहुत नोटी हो.. मु..हां.. बुच..बुच.. बस.. आइ लव यु..

कहेते नीलमने फोन काटलीया ओर अपनी जेबमे छुपालीया फीर माही मन खुस होते हसने लगी.. ओर रसी लेकर खुस होते वापस घरपे आगइ.. ओर रसी लताको देदी.. तब अ‍ैसे बीहेव करने लगीकी कुछ हुआ ही नही.. ओर वही थोडी मदद करते अपनी मम्मीके रुममे चली गइ.. ओर फोनको चार्जींगपे रख दीया ताकी कीसीको सक नाहो.. ओर वो धिरेनसे बात करते मनमे बहुत खुस हो रहीथी.. ओर धिरेनके साथ सहेरमे उनकी बीवी बनकर घर बसानेका सपना देखने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०१ / २

तभी इधरभी देवायत अपनी कारमे हवेलीपे पहोंच गया.. पुरे रास्तेमे नीर्मला ओर देवायत मीररसे नैन मटक करते अ‍ेक दुसरेके साथ कामुक इसारे ओर मस्तीया करते रहे.. तब राजीवतो देवायतके साथ बातोमे ही बीजी रहा.. तब उनको नही पताथाकी उनकी बहेन कहो या उनकी पत्नी उनकी पीठके पीछे देवायतके साथ क्या क्या गुल खीला रहीथी.. ओर देवायतके कामुक इसारोसे उनकी चुतभी काफी गीली कर चुकी थी.. अगर राजीव उनके साथ कारमे नही होता तो आज पक्का वो देवायतसे कारमेही चुदवा लेती..

जैसेही कार हवेलीके अंदर आकर रुकी तब चंदा मंजु ओर पुनम दोडकर बहार आगइ.. तो कारमे राजीव ओर नीर्मलाको देखतेही मंजुकी आंखोसे खुसीके मारे आंसु बहेने लगे.. तब राजीव ओर नीर्मला कारसे उतर गये.. ओर उतरतेही पुरी हवेलीपे अ‍ेक नजर घुमाते देखने लगे.. तभी राजीवके पास मंजु दोडकर चली गइ.. ओर राजीवको देखती रही.. तभी राजीवकी नजर मंजुकी ओर गइ.. तो मंजु..

मंजुला : (आंसु बहाते) पापा..

राजीव : (अचानबक मंजुको देखकर खुसीसे) अरे.. मेरी बच्ची.. कैसी हे तु..?

कहेतेही दोनो आपसमे लीपट गये.. ओर मंजु उनके पापाको गले लगाकर फुट फुटकर रोने लगी.. तभी चंदाभी आंसु बहाते नीर्मलाको गले लग गइ.. फीर दोनोही राजीव ओर मंजु बाप बेटीका मीलन खुस होकर देखती रही.. तभी मंजुने अपने दोनो हाथोसे राजीवके चहेरेको अपने हाथोमे थाम लीया ओर आंसु बहाकर भी हसते हुअ‍े उनके पापाकी ओर देखती रही.. तब राजीवभी खुस होकर हसता रहा.. तभी..

नीर्मला : मेरी बच्ची.. मेभी यहा खडी हु.. आजा.. मेरे गले भी लगजा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते हुअ‍े) ओह.. मोम.. आपभीनां..

कहेते वो दोडके नीर्मलाके गले लग गइ.. ओर फीरसे रोने लगी तब बाजुमे खडी चंदा हसते हुअ‍े मंजुकी पीठ सहेलाती रही.. तो नीर्मला मंजुको गले लगाते सोरी.. सोरी कहेती रही.. तब मंजु नीर्मलासे अलग होगइ ओर उनका दोनो हाथ थामके उनके सामने हसते हुअ‍े देखती रही.. तो नीर्मलाने उसे अ‍ेक बार फीरसे अपने गले लगा लीया ओर मंजुके कानमे कहेने लगी..

नीर्मला : मेरी बच्ची मुजे माफ करदे.. मेने तुम्हे पहेचानेमे बहुत बडी गलती करदी.. आइ अ‍ेम सोरी..

मंजुला : (नीर्मलाको अपनी बाहोमे कसते) मोम.. भुल जाइअ‍े सब.., सभी बाते अ‍ेक हादसा समजकर उसे भुल जाइअ‍े.. मुजे आपसे कोइ गीला सीकवा नही हे..

कहेते दोनो आपसमे बाते करने लगी तब चंदा राजीवके पास चली गइ ओर उनके पैर छुकर उनके गले लग गइ तो राजीवकी आंखोसे दो बुंद आंसु गीर गये.. ओर चंदाके सरपे हाथ रखकर उनको आशीर्वाद दीया.. तब पुनमभी अपने सरपे दुपटा ढकते राजीव ओर नीर्मलाके पांव छुने लगी.. तो राजीवने उनको धिरेनकी बहु समजकर सगुनके पैसेभी दिये.. तब पुनम बहुतही सरमाइ.. ओर नीर्मलानेभी पुनमको हसते हुअ‍े गले लगा लीया..

फीर सभी लोग हवेलीमे अंदर आगये तब राजीव ओर नीर्मला अंदर आतेही होलका इन्टीरीर देखकर बहुत खुस होगये.. क्युकी उनके जानेके बाद इस हवेलीमे काफी कुछ बदल गयाथा.. ओर दोनो सब जगह नजर घुमाते देखते रहे.. ओर खुस होते रहे.. तब मंजुने दोनोको सोफेपे बीठा दीया ओर खुद नीर्मलाके पास उनसे सटकर बैठ गइ ओर नीर्मलाका हाथ थामलीया.. तब देवायत ओर चंदाभी अ‍ेक साथ साथमे बेठ गये..

राजीव : (खुस होकर हसते) देवु बेटा.. अबतो मेरी दो दो बीटीया इस घरमे बहु बनके आगइ हे.. तुम अपना ध्यान रखना.. हें..हें..हें..

कहतो चंदा ओर मंजु दोनोही सरमा गइ ओर सर नीचा करते हसने लगी.. तभी रजीया ओर दया हसती हुइ सबको पानी देने लगी.. तो राजीव दयाको पहेचान गया ओर दया ओर रामुकाका का हाल चाल पुछने लगे तब दयाभी खुस होगइ.. ओर खाली ग्लास लेकर वापस कीचनमे चली गइ.. तब पुनमभी कीचनमे दयाकी मदद करने लगी.. क्युकी नीर्मला ओर राजीवमे उसे अपने सास ससुर नजर आ रहेथे..

तो वो उनसे बहुत सरमा रहीथी.. तभी भानु ओर लखनभी आगये तब भानुने आतेही अपने सास ससुरके पाव छुअ‍े.. ओर राजीवके पास बैठ गया फीर उनका हालचाल पुछने लगा.. तब लखनभी दोनोके पांव छुकर वही बैठ गया.. तो नीर्मला ओर राजीव भानुसे बाते करते भावनाकी खबर पुछने लगे तभी पुनम ओर रजीया सबके लीये चाइ नास्ता लेकर आगइ ओर सबको चाइ नास्ता देने लगी..

तब नीर्मलाने पुनमका हाथ पकडकर अपने पास बीठा दीया तब पुनम खुब सरमाइ ओर मुस्कराने लगी.. पुनमने अभीभी अपने सरपे दुपटा डालके रखाथा.. तो इसे देखकर चंदाभी खुस हो रहीथी.. आज उसे पुनमके व्यवहारपे गर्व होने लगा.. तभी नीर्मला उनके सरपे हाथ रख दती हे..

नीर्मला : (हसते) चंदा.. तुमने मेरे धिरेनके लीयेतो बहुतही खुबसुरत कुडी ढुंढी हे हें..हें..हें.. अब ये तेरी नही मेरी बहु हे.. मेरी बच्चीको कीसीकी नजर ना लग जाये..

कहेते नीर्मला अपनी आंखोसे काजल लेकर पुनमके कानके पीछे लगा देती हे तब सभी लोग हसने लगते हे तब पुनम सरमसे पानीपानी होगइ ओर जटसे खडी होकर हसते सरमाते अपने रुममे चली गइ.. ओर सब हसते रहे.. फीर भानुने परसो इधर आजानेकी बात करली ओर वो सबकी इजाजत लेकर नीकल गया.. तब चंदा ओर मंजु उसे देखती रही.. तब चंदाको नीर्मलासे भानुकी सादीके बारेमे बता देना उचीत लगा..

सबने चाइ नास्ता कीया.. फीर मंजु ओर चंदा नीर्मलाको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तब मंजुने नीर्मलाको भानु ओर उनकी मामीके बीच जोभी हुआ वो सब सचाइ बतादी.. जीसे सुनकर अ‍ेक बारतो नीर्मलाको भी दुख हुआ.. लेकीन जैसेही बतायाकी ये सबतो होनेही वाला हे.. ओर अपनी कुछ सचाइ बतानेकी बातकी तब जाके नीर्मलाको कुछ राहत महेसुस हुइ.. मंजु ओर नीर्मलाके बीच बहुत कुछ बाते हुइ..

इधर देवायत ओर राजीव आपसमे बाते करने लगे तब लखनभी वही बैठकर दोनोकी बाते सुनता रहा.. देवायत राजीवको इस गांवके बारेमे सब बाते बताने लगा.. ओर उसने यहाके सरपंच ओर उनके कारनामे उनकी जमीनके कागजातके बारेमेभी सब बतादीया.. जीसे सुनकर राजीव बहुतही खुस होगया.. फीर दोनोने भुमीका ओर सृतीके बारेमेभी बातकी.. ओर कहाकी उनका सब मेही देख रहा हु..

तब अ‍ेक बार राजीवने भुमीकाको मीलनेकी इच्छाभी जाहीर की.. तो देवायतने आज सामकोही भुमीका ओर सृतीके इधर आनेकी बात कही.. जीसे सुनते राजीव खुस होते मुस्कुराने लगा.. तो दुसरी ओर भुमीका ओर सृतीके आनेसे देवायतभी मनही मन खुस हो रहाथा.. खास करके भुमीकाके आनेसे.. देवायतने अपने मनमे कइ रहस्योको छुपाके रखाथा.. फीर दोनोही गांवकी बाते करने लगे..

राजीव : बेटा.. तुमने गांवकी सकलही बदलदी.. ओर गांववालोको उनकी जमीन वापस देनेका फैसला लेकर बहुतही नेक काम कीया हे.. अब मेरे किशनके आत्माको सांती मीलेगी..

देवायत : पापा.. सब कागजात मेरे पास हे.. मेने उस नये सरपंचको ओर पुराने सरपंचकी बीवीको सब गांव वालोकी जमीनकी सुची मंगवाइ हे.. ओर मे ये नेक काम आपके हाथोसे सादीके दिन करवाना चाहता हु.. आपही अपने हाथोसे सबको उनकी जमीन वापस सोंप दीजीये..

राजीव : (हसते) लेकीन बेटा में..? ये नेक काम आपही अपने हाथोसे करदो..

देवायत : नही पापा अगर आज बापु जींदा होतेतो मे उनके हाथोसे ये काम करवाता.. लेकीन आपभी मेरे पीता समान हो.. अरे पीता समान क्या आप मेरे पीता ही हो.. तो ये नेक काम आपही अपने हाथोसे करदो..

राजीव : (खुस होकर हसते) चलो ठीक हे.. बेटा मुजे तुमपे गर्व हे.. मे खुसकीस्मत हु की मेरी दोनो बेटी इस घरकी बहु हे.. आप सचमे अ‍ेक राजा हो.. जो गांवकी भलाइ चाहते हो.. मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ हे..

देवायत : (हसते) पापा क्या आप उपरकी मंजीलपे चल सकते हो..? तो आइअ‍े मे आपको हमारी पुरी हवेली दीखाता हु.. हमने कीतना बडा बदलाव करदीया हे..

राजीव : (हसते) नही बेटा अभीतो डोक्टरने ज्यादा ट्रेस लेनेको मना कीया हे.. ओर मेने पुरी हवेली देखी हुइ हे.. यहा ही इतना बढीया डेकोरेशन इन्टीरीयर हेतो उपरभी वही कीया होगा.. मे जब ठीक होजाउ तब देख लुंगा.. क्या अभीभी यहा १६ बडे कमरे हेनां..? की कुछ बदलाव कीया हे..

देवायत : (हसते) ओह.. ठीक हे पापा.. तो आप ज्यादा मत घुमना.. ओर वोही कमरे हे.. कुछ ज्यादा कम नही कीया.. आपका कमरा इधरही होलमे हे आप उनमे आराम कीजीयेगा.. क्या अभी वहा जाना हे..?

राजीव : (हसते) अरे नही.. कुछ देर बैठते हेनां.. जब थक जाउगा तब वहा चला जाउगा.. ओर आपभी कोइ अपना काम होतो करलेना.. मेतो अकेले बेठनेका आदी हु.. हें..हें..हें.. अबतो चार पांच दीन हम यही हे..

देवायत : (हसते) जी पापा..

फीर दोनोही अ‍ैसे पारीवारीक बाते कर रहेथे तब मंजु चंदा ओर नीर्मला मंजुके रुममे बेठकर बाते कर रहीथी.. तो आज दया ओर रजीया बहुत बडीया खाना बना रहीथी.. ओर सब खाना मंजुके कहेनेपे बन रहाथा.. तभी मंजु ओर चंदा नीर्मलाको पुरी हवेली दीखाने लगी.. ओर घुमते घुमते पुनमके रुममे आगइ.. तब पुनम अपने बेडपे लेटकर मोबाइल देख रहीथी तो तीनोको देखतेही जटसे बेडसे उतर गइ ओर सर जुकाके मुस्कराते हुअ‍े खडी होगइ.. तब नीर्मलाने उसे हसते हुअ‍े हाथ पकडके फीरसे बेडपे बीठा दीया..

नीर्मला : (हसते) अरे मेरी बच्ची लेटी रहो.. हमतो तेरा ये रुम देखने आये हे.. (चारो ओर देखते) अरे वाह.. रुमतो तुमने बढीया सजाया हे.. बहुतही सुंदर.. बुलकुल तेरी तराह.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरारतसे हसते) दीदी.. अबतो हमारी पुनो सीर्फ आपकी बहु हे.. मेरी तो अब ननंद हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) हां तो सहीतो हे.. अब तुम उनकी भाभी होगइ हो.. तो तेरी ननंद ही हुइनां..? (पुनमकी ओर देखते) पुनमबेटा.. अबतो इसे तुम भाभी ही कहेना.. ओर खबरदार जो इसे तुमने अपनी सांस मानातो.. हें..हें..हें.. धिरेन मेरा बेटा हे.. समजी..? मे तेरी सास हुं.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) मोम.. आपतो मेरी बेटीको सरमादोगी..

नीर्मला : (हसते) क्या..? ये तुम्हारी बेटी हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मीजी.. ये सीर्फ मेरी भाभीही नही.. मेरी मांभी हे.. मेरी गुरुभी मेरी सबकुछ..

नीर्मला : (प्यारसे पुनके सरपे हाथ रखते) अरे वाह मेरी बेटीसे इतना प्यार करती हे.. साबास बेटी.. भाभीभी मां होती हे.. मुजे खुसी हुइ मेरी मंजुको इतनी प्यारीसी मासुम बेटी मील गइ.. क्या पढना खतम होगया..?

चंदा : (हसते) नही दीदी.. अब इनकी सादीके बाद ओपन युनीर्वसीटीमे दाखला दीलवा देगे.. कहेती हे घरमे बेठकर पढाइ करुगी..

पुनम : (सरमाते हसते) मम्मीजी.. अब दिल नही हे पढनेका.. मुजे अब नही पढना..

नीर्मला : बेटी अभी तेरी उमरही क्या हे.. अगर तु पढना चाहेतो जरुर पढले.. तेरे ही काम आयेगा..

मंजुला : नही मोम.. अब पुनमको नही पढना.. उनका मनही नही हे.. अबतो सादी करके अपने बाल बच्चेको सम्हाले.. वोही काफी हे.. पढाइ करके उसे कहा नोकरी करनी हे.. तो घरही सम्हालेगी.. क्यु पुनो..?

पुनम : (अकदम सर्मसार होकर हसते) जी.. भाभी.. ओर सोरी.. मम्मीजी आइअ‍ेना इधर बैठीयेनां..

नीर्मला : (हसते) नही बेटी.. आज तुम्हारी हवेली पुरी देखलु.. तुम आराम करो.. हम चलते हे.. अबतो हम चार पांच दीन यही हे..

चंदा : (हसते) दीदी आप मंजुको लेकर हवेली देखो मे कुछ कीचनका काम देख लेती हु.. देखुतो सही दया आज क्या बना रही हे.. हें..हें..हें.. दयाभी आपको पहेचानती हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. वो रामुभाइकी लडकी हे..

कहेते तीनोही बहार आगइ.. तब पुनम वापस बेडपे लेट गइ.. ओर तीनो नीचे सब कमरेमे घुमते देखती रही.. फीर मंजु नीर्मला दोनोही उपरकी मंजीलकी ओर जाने लगी.. तब चंदा कीचनमे चली गइ.. ओर नीर्मला मंजु उपरकी मंजीलपे आगइ.. वहाभी नीर्मलाने सबकुछ देख लीया.. हवेलीमे तकरीबन सोलाह बडे बडे कमरे थे.. हर अ‍ेक कमरेको देखकर उसे किशनके साथ बीताये हुअ‍े हर रंगीन पल याद आने लगे..

अ‍ैसा कोइ कमरा नहीथा वहा जहा किशनने उसे प्यार(चोदा) नां कीया हो.. नीर्मलाको सब याद आने लगा.. ओर अ‍ेक बार फीर उनकी यादे ताजा होगइ.. तब उनकी चुत फीर अ‍ेक बार फडफडाने लगी.. नीर्मलाने देखा की हवेलीमे काफी कुछ बदल गया हे.. तभी उपरकी मंजीलसे अचानक उनकी नजर दया ओर रजीयाके कमरेकी ओर चली गइ.. जहा अ‍ेक जमानेमे वो अपने परीवारके साथ वहा रहेती थी..

मां तो पहेलेही चल बेसीथी.. वहा सीर्फ उनके बुढे बापु खुद ओर राजीव रहतेथे तब चंदातो बहुतही छोटी थी.. ओर उस कमरेको देखकर उनकी आंखोसे कुछ आंसु छलक गये.. इस कमरेके साथ नीर्मला ओर किशनकी बहुत कुछ यादे जुडी हुइथी.. नीर्मलाको अ‍ेक बार फीर सबकुछ याद आने लगा.. किशनके साथ बीताये हर पल अ‍ेक बार फीर नीर्मलाको रोमांचीत करने लगा.. ओर उनकी चुत फीरसे फडफडाने लगी..





नीर्मला जबभी अपने कमरेमे अकेली होती तब किशन अक्सर वही आकर उनके कमरेमे रातभर ठहेरके नीर्मलाकी खुब चुदाइ कर लेताथा.. ओर किशनने उसे वही कमरेमे चोद चोदकर प्रेगनेन्ट कर दियाथा.. मंजु यही कमरेमे उनके पेटमे ठहेर गइथी.. तब नीर्मला उन कमरेकी ओर देखकर मंजुकी ओर देखने लगी.. तभी मंजुने देख लीया.. ओर उन कमरेकी ओर देखते उसे सबकुछ ज्ञात होने लगा.. ओर वो नीर्मलासे कहेने लगी..

मंजुला : (धीरेसे हसते) मोम.. ये वोही कमरा हेनां.. जहा आप ओर पापा रहेते थे.. मेरे ससुरने पुरी हवेलीको बदल दीया सीर्फ इस कमरेको छोड दिया.. कहेते थे इस कमरेको अ‍ैसेही रखना हे.. ओर उसने वहा कोइ चेन्ज नही करने दीया.. तब उसने नही बदलनेका कारण नही बताया था.. लेकीन आज मुजे सब ज्ञात होगया हे.. मोम.. यही कमरा हे.. जो असलमे मेरे जन्मके बीज यही आपके गर्भमे स्थापीत हुआ था.. क्या मे सही केह रही हुनां..?

नीर्मला : (सरमाते अपने आंसु पोछते मुस्कराकर) हां बेटी.. मुजे माफ करदे.. मे अभागन तुजे पहेचान नही पाइ.. की मेरी बेटी कोइ सामान्य लडकी नही कीसी ई--का अंस हे.. क्या तुजे हम सबके बारेमे सब ज्ञात होजाता हे..? तो फीर तुजे मेरे ओर किशनके बारेमे जानकर दुख नही हुआ..?

मंजुला : (नीर्मलाको गले लगाकर) नही मोम.. हम सब प्रकृतीसे बंधे हुअ‍े हे.. सायद मे खुदको नही पहेचान पाइ होती तो मुजे जरुर दुख होता.. लेकीन अब कीसीभी रीस्तेसे कोइ दुख नही होता.. क्युकी हमारा जीवन हमारे हाथोमे हे ही नही.. सब हमारे स्वामीके हाथोमे हे.. हम सब तो केवल हमारे स्वामीकी सेवामे यहा अपना कर्तव्य नीभाने आइ हे..

नीर्मला : (हसते) हम सब मतलब..? ओर कोन कौन हे..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) मोम.. मे.. आप.. मेरी सास विमला.. चंदामौसी.. सरलाचाची.. हमारी भावु पुनम लता सृती यहा तक की हमारी भुमीका बुआभी.. ओर कुछ अ‍ैसेभी नाम हे जीसे अभी आप उसे नही जानती.. हम सबका कोइना कोइ रोल होता हे.. तो आप ये सब सोचकर दुखी मत हो.. जबसे मेने ये सब जानलीया तबही मेने आपको मनसे माफ करदीया था.. मोम.. आपभी हम सबका हिस्सा हो.. तभीतो हम सब इस परिवारके सम्पर्कमे आये हे.. जो मे हु वही आपभी हे.. मुजमे ओर आपमे कोइ फर्क नही हे..

नीर्मला : (मंजुसे अलग होते उनके चहेरेको अपनी हथेलीमे थामते) मेरी बच्ची.. इतनी समजदार होगइ हे..? हंम.. की अपनी मांकी गलतीको भी माफ करदीया.. मुजे तुमपे गर्वहे.. बस भगवान करे हम दोनोका हर जन्ममे रुणानुबंध अ‍ैसेही बरकरार रहे.. बेटी तुम सबके बारेमे कैसे सब जान लेती हो.. अ‍ैसी कोनसी शकितया आगइ हे तुममे..?

मंजुला : (हसते) मोम.. आज अनजानेमे ही सही.. आपके मुहसे फीरसे वोही प्रार्थना नीकल गइ.., जो हर जन्ममे आप करती हो.. बस अभी इतनाही केह सकती हु.. की हम दोनो कही जन्मोसे रुणानुबंधसे बंधे हुअ‍े हे.. कभी मे आपकी बेटी बनकर जन्म लेती हु.. तो कभी आप मेरी कोखसे बेटी बनकर आती हो.. ओर वास्तवमे आपही मेरी बेटी हो..

आप नही जानतीकी आप कौन हे.. किशन अंकल कौन थे.. ओर हमारा पती.. हमारा देवु कौन हे.. मे आपको फुरसतमे सब बताउगी.. क्युकी कुछ बाते जानना आपके लीये जरुरी हे.. ये सब बाबाकी दि हुइ शकितीयोके कारण हे.. मोम.. हमारी भावुभी हम दोनोकी तराह हमारे इस परीवारका हिस्सा हे.. आगे बहुत कुछ बदलाव होने वाला हे.. तो आप उसे जानकर वीचलीत मत होना..

नीर्मला : (अ‍ेक नजरसे मंजुकी आंखोमे देखते) बेटी.. तेरी बातोसे अ‍ेक बाततो पता चल गइकी हम सभी कोइ सामान्य ओरत नही हे.. मुजे सब जानना हे.. तेरे बारेमे.. मेरे बारेमे.. हमारी भावुके बारेमे हम सबके बारेमे.. की वास्तवमे हम सब कौन हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हां मोम.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. बस अ‍ेक बार ये सादी नीपट जाये.. फीर आप दोनोको अब यही रहेना हे.. हमारे पास..

नीर्मला : (हसते) नही बेटा.. हमतो सीर्फ सादी अ‍ेटेन्ड करने आये हे.. इसी बहाने तेरे पापाका हवापानीभी बदल जाये ओर उनको अच्छा लगे.. हम सीर्फ पांच छे दिनही रुकेगे.. फीर हमारे घर चले जायेगे.. तेरे पापाभी कहेते हे बेटीओके घर ज्यादा दिन नही रहेना चाहीये.. तु हमे रुकनेके लीये फोर्स मत करना..

मंजुला : (हसते) ठीक हे मोम.. लेकीन ये सीर्फ आपकी बेटीओका घर नही हे.. मोम.. बुरा मत मानना.. ये घरपे आपकाभी इतना हक हे जीतना आपकी बेटीओका हे.. अ‍ेक दिनतो आपको इधर हमारे पती देवुका दामन थामने आनाही पडेगा.. अपने ससुराल..

नीर्मला : (सरमाकर धीरेसे) मंजु.. प्लीज.. मत कर अ‍ैसी बाते.. मत कर मुजे सर्मीन्दा.. तुमतो सब जानती हे.. मेरा अतीत कैसा हे.. क्या तुजे मेरे बारेमे जानकर दुख नही होता..? मे बहुत गंदी ओरत हु.. ना मे ठीकसे अ‍ेक बेटी बन पाइ.. नाही मे अ‍ेक अच्छी बहेन बन पाइ.. नाही ठीकसे बीवी बन पाइ.. ओर नाही मे ठीकसे मां बन पाइ.. बेटी.. मे अपने हर रोलको ठीकसे नही नीभा पाइ.. में देवुसे रीलेशन रखके तेरे सामने अपने आपको बहुतही सर्मीन्दा महेसुस कर रही हु..

मंजुला : (हसते) मोम.. आपको सर्मीन्दा होनेकी जरुरत नही हे.. ओर सर्मीन्दा होगीतो भी कीससे..? मुजसे..? मोम.. आप बहुतही भोली ओर अच्छी हो.. आपने सबको अपना प्यार बांटा हे.. आपकी हमसब की जींदगीमे क्या अहेमीत हे आपकोतो पताही नही हे.. आपने अपनी जींदगीका हर रोल अच्छी तराह नीभाया हे.. ये सब हमारे उस स्वामीकी मरजीसे हुआ हे.. तो अपना दिल छोटा मत कीजीये.. हमारे देवुके साथ रीलेशनसे मुजे कोइ दुख नही हे.. आपही उनकी पहेली बीवी रहेगी..

नीर्मला : (आंखमे आंसुके साथ) बेटी.. फीरभी मे तेरी गुनेहगार हु.. मे तुमसे क्या कहु..? तेरे ही पती.. जो मेरा जमाइ हे.. उनके साथही.. मेने सादी.. हमारे जीस्मानी तालुकात.. तो मे इधर कैसे आसकती हु..?

मंजुला : मोम.. आप कुछभी मत बोलीये.. आपको नही पता आपका रोल क्या था.. मुजे आपके ओर देवुके रीस्तेसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. आप इधर आजाइअ‍े.. मे खुद केह रही हु.. तो फीर क्या प्रोबलेम हे..? ओर ये आपका हकभी हे.. हमारा देवु इतना सक्षम हेकी हम सबको सम्हाल सकता हे..

हम सबको संतुस्ट कर सकता हे.. मोम.. आप अपनी लाफ खुलकर जीलो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. आप उनकी पहेली बीवी थी.. आजभी हे.. ओर आगेभी हमेसा रहेगी.. सीर्फ इस जन्ममे नही हर जन्ममे आपही उनकी पहेली बीवी रहेगी.. आपका ये हक कोइ नही छीन सकता.. पीछले जन्मकी आपही मेरी सोनु हो..





जब मंजुलाने इतनी बाते खुलकर कहेदी तब नीर्मला मंजुके गले लग गइ ओर फुट फुटकर रोने लगी.. तब उनकी आवाज सुनने वाला उपरकी मंजीलपे कोइ नही था.. मंजु उनकी पीठ सहेलाती रही.. ओर नीर्मला उनकी बाहोमे उनके कंधेपे सर रखकर आंसु बहाती रही.. कुछ देरके लीये मंजुनेभी उनको रोने दिया ताकी नीर्मलाका जी रोकर कुछ हद तक हल्का होजाये.. फीर मंजुने उसे अपने आपसे अलग करके उनके आंसु पोछ दीये.. तब नीर्मलाने मंजुको प्यारभरी नजरोसे देखते उनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थामलीया..

नीर्मला : (मंजुके गालोको हाथोमे थामते) बेटी.. मे बहुत खुसकिस्मत हुकी तुम मेरी बेटी हो.. तुमने मुजे कीतनी आसानीसे माफ करदीया.. ओर मे अभागन आजभी तेरी सास विमलाको माफ नही करपाइ..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. अब आप उसेभी माफ करदो.. कबतक बदलेका बोज अपने दिलमे रखकर रहोगी.. अबतो वोभी इस दुनीयामे नही हे.. ओर वोभीतो कीसीना कीसी रोल नीभाने इधर आइ होगी..

नीर्मला : बेटी सही कहा तुने.. अब मुजे कीसीसेभी कोइ गीला सीकवा नही हे.. ओर नाही कोइ अपने कीयेपे अफसोस.. आज मेरी बेटीने मुजे बहुत कुछ सीखा दीया.. तु वाकइ मेरी बेटी नही मेरी मां हे.. बेटी मुजे सबकुछ जानना हे.. बस मेरे लीये कुछ टाइम नीकाल.. हम दोनो अकेली फुरसतमे सब बाते करेगे..

मंजुला : (हसते) ठीक हे मोम.. आपको अ‍ेक ओर बातभी कहेनी हे.. सायद कल आपकी बेस्ट फ्रेन्डभी इधर आजायेगी.. वो ओर उनकी बेटी.. सृती ओर भुमीका बुआ.. क्या आप उनके बारेमे कुछ जानती हे..?

नीर्मला : (हसते) भुमीका..बु..आ.. हें..हें..हें.. लगता हे तुम काफी कुछ जानचुकी हो.. चल कोइ बात नही.. कमीनी कीतने दिनोसे मीली ही नही.. फोनपे भी बात नही हुइ.. उसे राजीवका तो पताही नही होगा.. मीलेगी तब मुजे बहुत गालीया देगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही मोम.. पापाके बारेमे उनकी देवुसे बात होगइ हे.. इसीलीयेतो इधर आ रही हे.. सादीभी अ‍ेटेन्ड करलेगी ओर आप दोनोको मील भी लेगी.. ओर सृती..? मोम.. इनके बारेमेभी मुजे आपसे बात करनी हे.. वो हम फुरसतमे बात करेगे.. अब चले नीचे.. डीनरभी बन गया होगा..

नीर्मला : (खुस होकर हसते) हां मेरी बच्ची.. चलो.. आजतो तुमसे बाते करते जी हल्का होगया.. हें..हें..हें..

दोनोही मां बेटी मुस्कुराते नीचेकी ओर आने लगी.. तब लखनके कमरेके पास गुजरे तब लखनभी अपने बेडपे लेटकर मोबाइलपे लतासे बात कर रहाथा तो वहा दरवाजेके पास रुकते मंजुने लखनकोभी नीचे डीनरके लीये आनेको केह दीया.. ओर दोनो मां बेटी नीचे आगइ तब राजीव ओर देवायत अभी दोनो गांवकी बाते करते गप्पे लगा रहेथे.. ओर नीर्मला मंजु उनके पास आकर सोफेपे बैठ गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०२/१

दोनोही मां बेटी मुस्कुराते नीचेकी ओर आने लगी.. तब लखनके कमरेके पास गुजरे तब लखनभी अपने बेडपे लेटकर मोबाइलपे लतासे बात कर रहाथा तब वहा दरवाजेके पास रुकते मंजुने लखनकोभी नीचे डीनरके लीये आनेको केह दीया ओर दोनो मां बेटी नीचे आगइ तब राजीव ओर देवायत अभी दोनो गांवकी बाते करते गप्पे लगा रहेथे.. ओर नीर्मला मंजु उनके पास आकर सोफेपे बैठ गइ....अब आगे

तभी डीनरभी बन गया ओर दयाने सबको डीनरके लीये बुलालीया.. तब राजीव ओर नीर्मला अपने रुममे फ्रेस होने चले गये.. तो देवुभी मंजुके साथ अपने रुममे चला गया.. तो उनके पीछे चंदाभी आगइ.. तीनो बारी बारी फ्रेस होगये.. आज चंदा बहुतही सरमा रहीथी.. तभी देवायतने उसे अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होंठ चुमलीया.. तो मंजु ठहाका मारते हसने लगी.. तो देवुने उसनके बुब्स दबालीये..





तो चंदा खुब सरमाते हसते हुअ‍े देवुके सीनेपे मुके मारने लगी.. ओर उनसे छुटकर बहार भाग गइ.. तब मंजु ओर देवायत दोनोही हसने लगे.. ओर मंजु हसते हुअ‍े देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ थामते बहार आगये.. तभी नीर्मला ओर राजीवभी डाइनींगपे आगये तो पुनमभी आकर देवायतके दुसरी ओर बैठ गइ.. ओर दया रजीयाने सबको खाना परोस दीया..

ओर सभी लोग डीनर करने लगे.. तो पुनम खाना खाते नीचेसे देवायतके पैर सहेलाने लगी.. तो देवायतभी अ‍ेक हाथ नीचे इेजाते पुनमकी जांघोपे रख देता हे तब पुनम सीहरसी गइ.. वो कामुक होते तीरछी नजरोसे देवायतको देखने लगी.. तभी देवायत सबसे छुपकर पुनमकी जांघको सहेलाने लगा.. तो पुनमने धीरेसे देवायतके कानमे रश्मीभाभीको वहा मीलनेकी बात कहेदी.. तभी..





मंजुला : (खाना खाते) देवु आप डीनर करके यहाभी कुछ लोगोको न्योता देना हे उसेभी कहेदो.. तब मे सृती ओर भुमीआंटीको भी फोन कर देती हु.. वो रश्मीभाभी चंपाभाभी रमेशभाइ चारु ओर आपके वो डोक्टर उनीकी बीवी नीशाकोभी कहेदो.. बाकीको जीनकोभी बुलाना हो उसे कल साम तक कहेदो.. कलतो सरलाचाचीके घरके लोगभी आजायेगे..फीरतो आपको टाइमही नही मीलेगा..

राजीव : (सरारतसे मुस्कुराते) कौन हमारी समधन..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाकर हसते) हां.. आपकी समधन.. हें..हें..हें.. उनसे तो बहुत लटु पटु होकर बात करते हो.. हें..हें..हें..

राजीव : (जोरोसे हसते) नीमु.. देखतो सही इधर बच्चेभी बैठे हे.. क्या तुमभी.. हें..हें..हें.. अब वोही तो हमारी अ‍ैक लौती भाभी हे.. तो भाभीसे बात नही करुगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) कोइबात नही पापा.. आप लगे रहो.. हमने कुछभी नही सुना.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) लो..जी.. आगइ पापाकी परी.. हें..हें..हें..

कहातो सब खाना खाते ठहाका मारते हसने लगे.. इसी तराह सब मस्ती मस्ती मजाक करते डीनर करने लगे.. जब डीनर फीनीस कीया तब नीर्मला ओर राजीव बहुतही खुस लग रहेथे.. ओर सभी उनके साथ घुलमील गयेथे.. तब देवायत अपनी बाइक लेकर सीधा रश्मीके घर चला गया.. तो रश्मी उसे देखकर ही खुस हो गइ.. ओर उसे सरपंच वाले रुममे लेजाकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. वो काफी देर तक उनकी बाहोमे खडी रही..

रश्मी : जानु.. कीतने दिनोके बाद आयेहो.. क्या इस बीवीको मीलनेका मन नही करता..? क्या इतना बीजी होगये थे..? सुनाहे आपके ससुरकी तबीयत खराब होगइ थी..?

देवायत : हां रश्मी.. मे वही था ओर कुछ सादीकी खरीदीमे बीजी था.. अब कैसीहे तेरी तबीयत..

रश्मी : (मुस्कुराते होंठ चुमते) जानु.. सब ठीक हे.. ओर मे हरदिन पंचायतकी ओफीसमे जाती हु.. ओर आपने जो कहाथा वो कामभी पुरा होगया हे.. सब लीस्ट रमेशभाइके पास हे.. ओर उसी हीसाबसे हमने सभी दस्तावेजोकी फाइल कंपलीट करदी हे..

देवायत : रश्मी कल सायद सृतीभी इधर आजायेगी.. मे चाहता हु तुम ओर पुनो उसे अ‍ेक बार यही सब दीखादो..

रश्मी : (होंठ चुमते) जानु.. क्या पुनोदीदीका भी काम होगया..? कही दीखाकर कंन्फर्म कीया..?

देवायत : रश्मी वो मंजुकी फ्रेन्ड उन्हीकी डोक्टर हे.. वो कल इधरही आ रहीहे तो वोही सब कल कन्फर्म करलेगी.. वो यही आकर तुम दोनोको चेक कलेगी.. तुमभी उसे दीखादो..

रश्मी : जानु मे जानती हु उनको.. मेराभी उन्हीके पास चेकअप करवायाथा.. ओर उनकीही दवाइआ चालु हे..

देवायत : ओर सुन.. तीन दिनके बाद पुनो ओर लखनकी सादी हे.. तुम्हे अब उधर रोज आना हे..

रश्मी : जानु वोतो आप नही कहेते तोभी मे आजाउगी.. लेकीन आपसे अ‍ेक बातभी कहेनी हे.. आप जरा उस रमेशभाइको समजा देना.. उनकी नीयत मुजे ठीक नही लगती.. मुजे अजीब नीगाहोसे घुरते रहेते हे.. साला सब सरपंच बनतेही सब हरामी होजाते हे.. तो मेने पहेले आपसे बात करनेका उचीत समजा..

देवायत : (कुछ सोचते) रश्मी.. तुभी कुछ कम नही हे.. तु आजभी जवान ओर सेक्सी दीखती हेतो रमेशतो क्या सबकी नजर तुजपे रहेती हे.. बस तुम सीर्फ उनको इतनाही कहेना.. की मुजे घुरना बंध करदो वरना मे ठाकुर साहबको तुम्हारी सीकायत करदुगी.. फीर देखना कैसे उनकी गांड फटती हे.. साला अपनी बीवीकोतो ठीकसे चोद नही पाता ओर दुसरी ओरतोको घुरता हे.. इसीलीयेतो चारुभाभीभी मुजसे चुदवाती हे..

रश्मी : (सरमाते हसते) जानु मे इतनीभी सेक्सी हुतो क्या आप अ‍ैसेही चले जाओगे..? अभी मेरा पेट उतना नीकला नही हे.. कमसे कम मेरी जरुरतको तो पुरा करदीजीये.. बस अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार इनके सामनेही मुजे चोद लीजीये.. आज कल खटीयापे पडे हे फीरभी नखरे कर रहे हे.. यही इनके सामने ही मुजे खडे खडे चोद लीजीये..

देवायत : (हसते) रश्मी.. तुभी चारुभाभीकी तराह ठरकी होगइ हे.. चल आजा..

कहेते देवायत रश्मीको वही दिवालसे सटाकर खडा कर देता हे ओर रश्मीका ड्रेस उचा करते उनकी पेन्टी नीचे सरका देता हे.. फीर अपनी पेन्टको ढीली करते लंडको बहार नीकाल लीया ओर रश्मीकी कमर पकडते अपने तनसे सटाते लंड पकडकर उनकी चुतमे घुसा दीया तो रश्मीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. देवायत वही खडे खडे रश्मीको चोदने लगा.. तो रश्मीभी सीसकारीया करते मजेसे देवायतसे चुदवाने लगी..





दोनो काफी देर चुदाइ करते रहे तभी देवायतने रश्मीको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर नीचेसे कमरको जटके देने लगा.. तो रश्मीका मुह खुला रेह गया ओर आधी आंख चडाते वोभी मदहोसीमे देवायतके साथ जडने लगी.. ओर दोनो सांत होके अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहे.. तब सरपंच गुसा होते रश्मीको देवायतसे चुदवाते हुअ‍े देखता रहा की कैसे उनकी बीवी अ‍ेक रंडीकी तराह उनके सामनेही देवायतसे चुदवा रही हे..

रश्मी : (चुतको साफ करते) जानु.. वो चारुभाभी मीलीथी.. हम दोनोमे आपके बारेमे बात हुइ.. वो आपसे अकेलीमे मीलना चाहती हे.. तो मेने केह दियाकी जबभी मीलना हो मेरे घर चली आना.. मे फोन करके आपको बुला दुगी..

देवायत : (हसते) हां अब वोभी तेरी तराह मेरे लंडकी आदी होगइ हे.. इसीलीये मेनेही उसे तुमसे मीलनेके लीये कहाथा.. लेकीन अभी ये सब सादी बादी नीपटाने दे.. फीर तुम दोनोको मे यहा ठंडी करता रहुगा..

रश्मी : (सरमाते होंठ चुमते) जानु.. अ‍ैसी कीतनी आपकी सीक्रेट बीवीया हे.. ओर हां आप अ‍ेक बार चारुभाभीको मील लेना.. बेचारी आपका कीतना खयाल रखती हे.. वो उनकी सहेलीको आपसे मीलवाना चाहती हे.. क्युकी उनकी सहेलीके घरमे दोनो मीया बीवीके साथ बहुत बडा इस्यु चल रहा हे.. इसीलीये उसे आपकी मदद की जरुरत हे.. सायद उनकाभी चारुभाभी जैसा इस्यु हे.. लगता हे वोभी आपसे चुदवाना चाहती हे.. क्या मस्त माल हे.. आप अ‍ेक बार उनसेभी मीललो..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. चल मे चलता हु.. अभी मुजे कइ जगाहपे जाना हे ओर सबको न्योता देना हे..

रश्मी : (जोरोसे बाहोमे भीचते) जानु.. क्या अ‍ैसेही चले जाओये..? रुक जाइअ‍ेनां.. कीतने दिनोके बादतो आये हो.. आपके लीये मे कुछ बनाती हु..

देवायत : (होंठ चुमते) नही रश्मी.. आज जान जरुरी हे.. फीर आउगा तब तेरा दुध पीउगा.. ओर तुम अपना खयाल रखना ओर टाइमपे आजाना.. अब हम सादीके बादही अच्छी तराह मीलेगे.. ओर अब तुभी मीलन करनेमे थोडा ध्यान रखना.. समजी..? कही बच्चेको चोटना लगजाये..

रश्मी : (सरमाते हसते) जी.. समज गइ.. इसीलीये तो आज खडे खडे कीया.. ओर कोइ हुकुम.. हें..हें..हें..

देवायत : हां.. सायद सादीसे पहेले मुजे मीलनेके लीये पुनम इधर आजाये.. तब मुजे फोन करना.. ओर हो सकता हे मेरी कुछ सीक्रेट बीवीभी मीलना चाहे.. तो मे उसे इधर लेकर आउगा.. तुम समज जानाकी ये मेरी सीक्रेट वाइफ हे..

रश्मी : (हसते) हां.. सायद पुनमदीदी अपने पतीके साथ आखरी बार मीलन करना चाहती होगी.. हें..हें..हें.. जानु.. अब इस मकानका क्या करु..? यहा सबकी नजर रहेती हे.. साले सब मुजे ताडते रहेते हे..

देवायत : पुनोकी सादीके बाद तुम हमारे गांवके बहार घर बनवाना चालु करदे.. तो वहा हम सबको मीलनेमे आसानी रहेगी.. रमेशको कहेना लास्ट वाला प्लोट नीकालकर देदे.. मे उनसे बात करलुगा..

फीर देवायत वहासे नीकल गया तब राघव दोनोकी बाते सुन रहाथा ओर देवायतके जातेही रश्मीकी ओर गुस्सेसे घुरने लगा.. तो रश्मी उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. ओर अपने पेटपे हाथ घुमाते जोरोसे हसने लगी.. तभी अचानक उसने अपना ब्लाउस उचा करदीया ओर उनके बुब्स बहार आगये.. ओर रश्मी राघवकी कमरपे चडके बेठ गइ ओर राघवपे जुकते उनका बुब्स राघवके मुहमे दे दीया.. ओर कहेने लगी..

रश्मी : (थोडा गुसेसे) देखले भडवे.. अभी जो आयाथानां उसीने तेरी बीवीको चोद चोदकर प्रेगनेन्ट कीया हे.. असली मर्द वोही हे.. देखते होनां वो यहा आकर कैसे तेरी बीवीको चोदता हे.. अब कुछही दिनोमे इधरसे दुध नीकलेगा.. तब तु जींन्दा होगातो तुजेभी पीलाउगी..

नामर्द कहीका.. वो कैसे मेरी चीखे नीकलवाता हे.. तुमने भी तेरी बहेनका बहुत दुध पीया हेनां.. अब मे तुजे पीलाउगी.. ओर जबतक तु जीन्दा हे तेरे सामनेही उनसे अ‍ैसेही चुदवाउगी.. तुजे चोदनाका बहुत सोक थानां.. हंम.. देख वो तेरी चंपाको भी अ‍ैसे चोदता हे.. ले देखले..

कहेते रश्मी राघवके उपरसे खडी होजाती हे.. राघवके मुहके पास जाकर अ‍ेक पग उनके बेडपे रखदेती हे ओर अपना पेटीकोट उचा करके अपनी चुत राघवके मुहके पास रखकर उनमे अपनी उंगली घुसा देती हे ओर देवायतको इमेजींग करते जोरोसे चुतमे उंगली अंदर बहार करने लगी.. तब कुछही देरमे चुतसे अ‍ेक पानीका फवारा नीकलकर राघवके चहेरेको भीगो देता हे.. फीर रश्मी ड्रेस सही करते बहार चली जाती हे..

तो राघव उसे गुसेसे आंख घुमाते जाते हुअ‍े घुरने लगता हे.. उनका चहेरा रश्मीके कामरससे भीगा हुआथा फीरभी उनकी मजबुरीथी.. वो अपने आप चहेरेको पोछभी नही सकताथा.. राघवको कामरसकी अ‍ेक अजीबसी खुस्बु आ रहीथी.. रश्मी राघवको जलील करनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती थी.. राघवभी रश्मीको अ‍ैसेही जलील करता था.. तो अब रश्मीभी राघवसे बदला ले रहीथी.. इधर रश्मी फ्रेस होकर कीचनमे खाना नीकालकर खाने लगी..

दुसरी ओर देवायत रमेशके घर चला जाता हे.. तब रमेश घरपेही था.. ओर वो रश्मी ओर वंदना तीनोही खाना खाकर टीवीमे न्युज देख रहेथे जैसेही देवायतको देखा तो रमेश टीवी बंध करके उनके गले लग गया.. ओर रमेशने उसे हाथ पकडते उनके पास बीठा दीया तब चारु ओर वंदना दोनोही पास बेठते हसती रही.. तभी वंदना अपने रुममे जानेके लीये सरमके मारे खडी होने लगी तब चारुने उनका हाथ खीचके रखा ओर वही बैठे रहेनेका इसारा कीया..

ओर वो देवायतकी ओर कामुक नजरोसे हसती रही.. तब वंदनाभी सर्मसार होते वही बैठी रही तभी रमेशने चारुकी ओर देखातो चारु खडी होकर पानी लेने कीचनमे चली गइ.. ओर अंदर जातेही वो वंदनाको कीचनकी खीडकीसे हाथोके इसारेसे वही बेठनेको कहेती हे.. तब वंदनाकोभी उनकी मम्मीकी हरकतसे सरम आने लगी.. वो जानतीथी की उनकी मम्मी अ‍ैसा क्यु कर रही हे.. ओर वो सर जुकाते बैठी रही.. तब चारु पानी लेकर आगइ.. ओर देवायतको देते उनके हाथोको छुलीया..

चारु : (हसते) कहो देवरजी.. कैसेहो आप ओर मेरी देवरानी..? क्या सादीकी सब खरीदी होगइ..?

देवायत : (हसते) हां भाभी.. बस उसीका न्योता देने आया हु.. तीन दिनके बाद हमने घरके लोगोमेही सादी रखी हे.. तो आप सबको तीन दिन वही आना हे..

रमेश : भाइ क्या सब तैयारीया होगइ..? अरे कुछ काम होतो मुजे या चारुको कहेना.. हम आजायेगे..

देवायत : यार.. वो भानुकी फेमीलीभी इधर आयेगी तो तुम चारुभाभी ओर वंदनाको उधर भेज देना.. ओर वंदना तु अपने सब कपडे लेकर ही उधर आजा.. जबतक पुनो इधर हे तुम उनके साथही रहेना..

वंदना : (सर्मसार होकर हसते) जी..

चारु : (कामुक नजरोसे देखते) देवरजी आप फीकर मत करो मे ओर वंदु दोनोही आजायेगी.. वेसेभी पुनोदीदी वगैरे सबका मेकअप भी तो करना हे.. तो वंदना उधरही रुक जायेगी.. हम कल सुबहही उधर आजायेगे.. कुछ काम बाममे हाथ बट जायेगा.. अ‍ेजी.. क्या कहेतेहो आप..?

रमेश : (हसते) अरे तो चली जाओनां मुजसे क्यु पुछती हो.. वोभीतो हमारा ही घर हे.. क्यु भाइ..?

देवायत : (रमेशकी ओर देखते) ओर नहीतो क्या..? रमेश.. मेने तुजे कुछ काम सोंपाथा.. क्या हुआ इनका..?

रमेश : (हसते) बस इस बारेमे मे कल आपको फोन करनेही वाला था.. अच्छा हुआ आज आप आगये.. सब रेडी हे.. मेने ओर रश्मीभाभीने मीलकर सब पेपर रेडी रखे हे.. कमीनो ने कीतनी गडबड कीथी..

चारु : (जोरोसे हसते) अरे वो बेचारा तो खटीयामे पडा हे.. क्यु उसे गाली देते हो.. हें..हें..हें..

रमेश : चारु वो कोइ बेचारा नही हे.. तुम उनकी सब करतुत सुनतीनां.. तो हमसे पहेले तुमही उनको मार देती.. साला अ‍ेक नंबरका हरामी था.. अब मर जायेतो अच्छा हे..

चारु : (हसते) छोडो ये सब कामकी बाते.. देवरजी कहो आप क्या पीयोगे चाइ या कुछ ठंडा..?

देवायत : (हसते) अरे कुछ नही पीना मुजे ओर जगह भी जाना हे फीर कभी पीलुगा.. हें..हें..हें..

चारु : (कामुक मुस्कानसे) अरे बैठोनां मे अभी फटाफट बनाकर लेआइ.. वंदुकोभी आपसे कुछ कामथा.. तबतक आप दोनो बाते करो मे अभी बनाकर लेआइ.. (कहेते अंदर चली गइ)

देवायत : (हसते) हां वंदना.. बोल सब पेपर रेडी करलीया..?

वंदना : : (सरमाचे हसते) हां.. बस वोही कहेनाथा आपसे.. मेने सब पेपर कंपलीट रखे हे..

देवायत : रमेश.. अबतो सादीके बादही हम जा सकेगे.. अभीतो मेरे सास ससुर ओर कलभी सब महेमान आजायेगे तो मे सादी तक बीजी रहुगा.. ओर तुमभी आजाना.. ओर हमारे पंचायतके सभी सदस्योकोभी आना हे मे उनको मीलकर केहतो दुगा लेकीन तुमभी सबको केहदेना..

रमेश : भाइ उनकी चीन्ता आप मत करो.. ओर कीसीको कहेना हे..? तो बोलो उनकोभी मे केह दुगा..

देवायत : हां यार.. गांवमे हमारे जीतनेभी जान पहेचानके हे सबको कहेना हे.. ओर तुजेतो सब पता हे हमारे जान पहेचान वाले कौन हे.. बस मे वो सुधीरके घर अभी जा रहा हु.. कमीना मेरे स्कुलका दोस्तभी हे.. अगर नही कहुगातो वोतो साला अकडु हे.. मुजसे नाराज होजायेगा.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) ठीक हे भाइ.. लेकीन भाइ.. आजकल वो कुछ ज्यादाही परेसान लगता हे.. उनका कुछ प्रोबलेम हे.. आप उसे बात करके नीपटालो.. मुजेतो कुछभी नही कहेता..

चारु : (ठंडा लाते) लीजीये देवरजी.. पीजीये.. मे ओर वंदु कल आजायेगे..

चारु सबके लीये ठंडा लाइ तो सब पीने लगे.. तब आज पहेली बार वंदनाको चारुने जबरदस्तीसे वही बीठाके रखा.. तो वंदना खुब सरमा रहीथी.. इनके पीछे चारुका बस अ‍ेकही इन्टेस था.. की वंदना ज्यादासे ज्यादा देवायतके साथ वक्त बीता सके.. ओर वंदनाके दिलमेभी देवायतके लीये अपनी फीलींग्स बढ सके.. उसके बाद देवायत वहासे जाने लगा तब रमेश ओर चारु उनको बहार तक छोडने आये..

तबभी चारु अपनी हरकतोसे बाज नही आइ.. उसने मौका मीलतेही देवायतका हाथ पकडलीया ओर अपनी चुचीपे रखदीया फीर उनकी ओर देखते कामुक मुस्कान करने लगी.. ओर देवायत जटसे अपना हाथ खीचकर वहासे सीधाही डो. सुधीरकी क्लीनीकपे चला गया.. जो महज सुधीरके घरसे कुछही दुरी पर थी.. उसी समय रातके तकरीबन ८.४५ बजनेको आयेथे....कन्टीन्यु
 
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