Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 14 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०२/२

सुधीर अपनी क्लीनीक पेसन्टकी वजहसे रात ९ बजेतक खुली रखता था.. ओर कभी कभीतो रातके दस साडे दसभी बज जाते थे.. उन्होने क्लीनीकपे सीर्फ दवाइ देनेके लीये उसी गांवके अ‍ेक पढे लीखे लडके मुनाको रखाथा.. ओर सुधीरके साथही वो घर जाता था.. क्युकी दोनो आसपासही रहेते थे.. ओर केस नीकालनेके लीये अ‍ेक लडकीको रखाथा.. जो मुनाकीही छोटी बहेन बरखा थी.. वोभी पढीलीखी थी.. वो आठ बजतेही अपने घर चली जाती थी..

दोनोही छोटे परीवारसे थे.. उनके पीताजी रमेशके वहा उनकी दुकानपे नोकरी करते हे.. रमेशनेही मुना ओर उनकी बहेन बरखाको पढाया था.. दोनोही भाइ बहेन सहेरमे साथमे बसमे पढने जाते ओर सामको वापस आजाते जीनकी वजहसे दोनो भाइ बहेनको साथमे रहेनेका मोका ज्यादा मीलताथा.. कभी कभी बसमे जगाह कम होती तो दोनो अ‍ेकही सीटमे अ‍ेडजेस्ट करके बैठ जाते..

तो कभी ज्यादा भीडकी वजहसे दोनोही खडे खडे मुसाफरी करते तब मुना उनकी बहेनको प्रोटेक्ट करते उनके पीछे खडा रहेता जीनकी वजहसे उनका लंड तनके खडे होजाता ओर अपनी बहेनकी चुतडपे घुसे मारता.. तब उनकी बहेन सर्मसार होजाती ओर ये कइ बार होता था.. फीरतो वोभी भीड ना होती तबभी मुनासे अपनी गांड सटकर खडी रहेती.. कभी कभी अ‍ेक जगाह मीलती तो मुनाकी गोदमेही बैठ जाती.. ओर दोनोके बीच अ‍ेक दुसरेके प्रती आकर्सण बढने लगा..





जब दोनो कोलेजमे आगये.. बार बार दोनो अ‍ेक दुसरेके छुनेकी वजहसे नजदीक आने लगे.. फीरतो घरपेभी दोनो अकेले होते तब अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करने लगे.. ओर बात मस्तीयोसे सुरु होकर छेडछाड तब पहुंच गइ.. मुना मस्यीया करते उनकी बहेनके चुतडको दबाता.. तो कभी जान बुजकर उनके बुब्सको छु लेता.. उनकी बहेनभी मुनाकी अ‍ैसेही म्सया करने लगती.. उनकोभी इस खेलमे मजा आने लगा..

ओर अ‍ेक दिन मुनाने कोलेज जाते वक्त मौका देखते उनकी बहेनसे अपने दिलकी बात कहेदी.. तो उनकी बहेनने सरमाते मुनाको सबको पता चल जानेका डर जाहीर कीया तो मुनाने उसे सबसे बात छुपाने ओर जींदगीभर साथ नीभानेकी बात कहेते उसे मनालीया ओर उनकी बहेन बरखाने मुनाका प्यार अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. नइ जवानीकी वजहसे आपसमे ही दोनो सबसे छुपकर प्यार करन लगे.. जबभी घरमे कोइ नही होता तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगते..





आखीर अ‍ेक दिन घरपे दोनो अकेलेथे तब दोनोही बहेक गये.. उस दिन मुनाने अपनी बहेनका कौमार्य भंग कर दीया.. ओर तबसे दोनोके बीच जीस्मानी तालुकात बन गये.. फीरतो अक्सर मौका मीलतेही दोनो मील जाते.. मुनाने उनकी बहेनको चोदकर उसे ओर कामुक्त करदीया.. उसेभी मुनासे चुदवानेकी लत लग गइ.. फीरतो दोनोही सबके सोजानेके बाद उपर छतपे मीलते.. यातो बरखा मुनाके रुममे देर रात चली जाती..

ओर खुब चुदाइ करते.. उनकी बहेनभी पढीलीखी होनेकी वजहसे समय समयपे आइपील लेलेती.. दोनोके रीस्तेके बारेमे आज तक कीसीको पता नही चला.. जब पढाइ पुरी होगइ तब दोनोही सुधीरके वहा नोकरीपे लग गये.. सबके सामने भाइ बहेन जैसा व्यहार करते ओर अपनी मयार्दामे रहेते.. ओर रात होतेही दोनो अ‍ेक दुसरेको मीया बीवी मानकर अ‍ेक होजाते.. ओर खुब चुदाइ करते..





देवायत जेसेही क्लीनीकमे गया वहा कोइ पेशन्ट नही था ओर सुधीरकी केबीनमेभी कोइ नही दिख रहाथा तब देवायत अंदरकी ओर जाने लगा.. तभी पेशन्टको चेक करनेकी केबीनसे उनका आदमी मुना अपने दांतोमे सर्ट दबाकर अपने पेन्टकी क्लीप बंध करते बहार नीकल रहाथा जैसेही देवायतकी ओर नजर गइतो अ‍ेकदा गभराते डर गया.. ओर सर नीचे करते जटसे बहार नीकल गया तो देवायतको कुछ अजीब लगा..

ओर वो उस केबीनकी ओर गया जहासे अभी मुना अपनी पेन्ट पहेनते बहार नीकलाथा.. ओर अंदर जाकते देखा तो सुधीरकी पेन्ट उनके घुटनो तकथी ओर वो जुककर टीस्यु पेपरसे अपनी गांड पोछ रहाथा.. तब देवायतको जरासीभी समजनेमे देर नही लगीकी सुधीर अंदर बेकीनमे अपने आदमी मुनासे गांड मरवा रहाथा.. ओर देवायत सुधीरकी नजर पडे इसे पहेलेही वहासे हट गया ओर बहार चला गया..

फीर कुछ देर रुककर फीरसे अंदर आगया.. तब सुधीरभी अपनी पेन्टमे क्लीप लगाते बहारकी ओर आ रहाथा ओर देवायतको अंदर आते देखकर अ‍ेकबार तो वोभी गभरा गया.. ओर फौरन नोर्मल होनेकी अ‍ेक्टींग करते देवायतकी ओर स्माइल करने लगा ओर उसे आवकार देते अपनी सामनेकी चेरपे देवायतको बेठनेका इसारा करने लगा.. तो देवायत उनके सामने बेठ गया ओर अ‍ेक नजरसे सुधीरकी ओर देखता रहा..

तब सुधीरकी गांड फटने लगी.. क्युकी वो देवायतको कोलेजसे जानता था ओर उसे येभी पताथाकी उनकी कोलेजमे सब उसे गांडु कहेके बुलातेथे.. तब अ‍ेक देवायतही था जो उनके लीये कीसीसेभी लडाइ करलेता था.. तबसे उनकी देवायतसे दोस्ती होगइ थी.. ओर उसने अपनी सादीमे देवायतकोभी न्योता दीयाथा ओर देवायतही उनके साथ सादीके मंडपमे उनके पासही अणवर बनके बैठाथा था..

देवायतकोभी पताथाकी सुधीरको सब गांडु क्यु कहेते थे.. लेकीन उसने आजतक सुधीरकी अ‍ैसी कोइ हरकत नही देखीथी जो सबपे विस्वास कर सके.. ओर आज उसने अपनी नजरोसे सुधीरकी सब हरकतोको देख लीया.. ओर उसे यकीन हो गयाकी वाकइ सुधीर गांड मरवानेका सौकीन हे.. तो वो अपनी खुबसुरत बीवीको कैसे चोदता होगा..? ओर उसे सुधीरकी बीवी नीशाका उनके प्रती देखनेका नजरीया समजमे आने लगाकी वो उनके प्रती क्यु आकर्सीत होने लगी हे..ओर उसे नीशाके लीये हम दर्दी होने लगी.. तभी..

डो.सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. कहो आज यहाका रास्ता कैसे भुल गये.. हें..हें..हें.. बहुत दिनोके बाद हमारी याद आगइ..

देवायत : (हसते) भाइ तुजे ओर भाभीको सादीका न्योता देने आयाथा.. लखन ओर मेरी बहेन पुनमकी सादी हे.. तो तुम दोनो मीया बीवीको सादीमे आना हे.. ओर दोनोकी सादी हवेलीपे रखी हे..

सुधीर : (हसते) अरे वाह.. तो फीर घरपे आना चाहीयेनां.. चलो हम दोनो घरपे चलते हे.. आपकी भाभी सुनकर खुस होजायेगी.. आपको बहुत याद कर रही हे.. कभीतो घरपे भाभीको लेकर आया करो..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. तेरे घरतो चलते हे लेकीन मुजे तुमसे ओर बातभी करनी हे.. बैठ थोडी देर..

कहातो सुधीरकी गांड फटने लगी.. वो गभराने लगा ओर सोचने लगाकी कही अभी देवायतने उसे मुनासे गांड मरवाते देखतो नही लीया.. जो इस बारेमे बात करना चाहते हो.. ओर वो धीरेसे कहेने लगा..

सुधीर : (थोडा गभराते) भाइ.. वो.. वो.. आप कीस बारेमे मुजसे बात करना चाहते हे..?

देवायत : (जोरोसे हसते) अबे साले तो तुम इतना गभरा क्यु रहे हो.. तुम आज भी इतना फंटुसही हो..

सुधीर : (हसते सरमाते) नही यार.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. बस तुम मुजसे बहुत कम मीलता हे तो तुमसे बात करनेमे अ‍ेक डरसा लगता हे.. तुम ठहेरे अ‍ेक ठाकुर ओर में.. अ‍ेक गांवका मामुली डाक्टर..

देवायत : (थोडा गुसेमे) साले अ‍ेक जापट लगाउगांना.. बात करता हे.. साले मे तुजे आजभी अपना वोही पुराना दोस्त मानता हु.. ओर मे दुसरोके लीये ठाकुर होगा.. तुम्हारे लीये नही समजा..? देख जाकर रमशेको.. वो आजभी मुजसे अ‍ेक दोस्तकी हेसीयतसे बीन्दास्त बाते करता हे.. साले उनके कहेनेपे तुमसे बात करने आया हु.. सोचा चलो बातभी करलुगा ओर साथमे सादीका न्योताभी देदुगा..

सुधीर : (थोडी आंख गीली करते) सोरी यार.. पता नही अब मुजे क्या होगया हे.. मुजे सबसे डर लग रहा हे.. साला मुजे कोइ समजने वालाही नही हे.. खुद मेरी बीवी भी नही..

देवायत : हां उसीके बारेमे तुमसे बात करनीथी.. बोल दोनोके बीच क्या इस्यु चल रहा हे.. तुम दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा हुआ हे क्या..? येतो आज रमेशने कहा तभी मुजे मालुम हुआ..

सुधीर : (आंखमे आंसु बहाते) भाइ मे अब आपसे क्या कहु.. मे टुट चुका हु.. अंदरही अंदर घुट घुटके मर रहा हु.. साला सबका इलाज करता हु.. पर खुदका इलाज नही कर सकता..

कहेते सुधीरका सब्रका बांध टुट चुका ओर वो फुट फुटकर रोने लगा तब देवायत खडा होकर उसे सीनेसे लगा लेता हे.. ओर उनकी पीठ सहेलाता हे.. तब कुछ देर रोनेके बाद सुधीर सांत होजाता हे तब वहीसे अ‍ेक मटकेसे देवायत उसे पानी भरके पीला देता हे.. ओर सुधीर सांत होजाता हे.. फीर वो अपना मुह पानीसे धीकर पोछ लेता हे ओर वापस अपनी जगाहपे बेठ जाता हे.. ओर अपने सीनेमे दबे हुअ‍े राज अपने यारको केह देनेका फैसला करलेता हे..

देवायत : हां सुधीर.. अब बोल तुजे क्या प्रोबलेम हे..? तु बतायेगा तभीतो उनका हल नीकलेगा..

सुधीर : भाइ.. अब आपसे क्या छुपाउ.. भाइ.. में.. में.. आपकी भाभीको डीवोर्स देना चाहता हु..

देवायत : (चोंकते) अरे पागलतो नही होगया क्या..? दोनोके बीच जगडा बगडातो नही हुआ..?

सुधीर : (सरमींदा होते) नही भाइ.. हम दोनो मीया बीवीके बीच कोइ जगडा नही हे.. हम दोनोही अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार भी करते हे.. फीरभी मे उसे डीवोर्स देना चाहता हु.. ताकी उनकी जींदगीतो सुधर जाये.. लेकीन वो मना कर रही हे.. कहेती हे डीवोर्स दियातो मे सुसाइड करलुगी.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? उसे दुखी होते भी तो नही देख सकता.. वो बहुतही मासुम ओर अच्छी हे..

देवायत : (थोडा गुसेसे) तो फीर डफर.. अगर तुम दोनोमे इतना प्यार हेतो तुम उसे डीवोर्स देना क्यु चाहते हो..? कुछतो रीजन होगा.. बता क्या प्रोबलेम हे..?

सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. प्लीज.. ये बात कीसीको मत कहेना.. दरसल.. दरसल मे आपकी भाभीको सारीरीक सुख ओर बच्चा देनेमे समर्थ नही हु.. ओर वो मुजे बार बार बच्चेके लीये फोर्स कर रही हे.. कहेती हे अपना इलाज करवाओ.. लेकीन अब उसे कैसे समजाउकी मेरा इलाज नही हो सकता.. मे उसे बच्चा नही दे सकता..

देवायत : (थोडा चींतीत होते) क्यु..? तेरा इलाज क्यु नही हो सकता..? अबतो विज्ञानभी काफी आगे बढ चुका हे.. ओर तुम खुद अ‍ेक डोक्टर हो.. तो इलाज करवानेमे क्या प्रोबलेम हे..?

सुधीर : (सरमाते) भाइ.. अब आपसे क्या कहु.. आपतो सब जानते हो.. बस बचपनसे मेरी कुछ गलत आदतकी वजहसे.. जो मे आपको नही बता सकता.. मेरे होर्मोन्स सामान्य मानीवसे कुछ अलगही हे..

देवायत : (थोडा सख्त लहेजेमे) मुजे पता हे तेरी आदत.. कोलेजमे सब सचही कहेते थे.. लेकीन में नही मानता था.. ओर आज देखभी लीयाकी वो लोग सच ही कहेते हे.. कमीने तुजे अ‍ैसी गलत आदत कहासे लग गइ.. हंम..? क्या इनकी वजहसे तुजे प्रोबलेम होगइ हे..? मुजे सब सच बताना..

सुधीर : (सर नीचे करते सरमाते) भाइ.. सोरी.. क्या आपने आज देखलीया..?

देवायत : (थोडी सख्तीसे) हां देखलीया.. अभी अभी वो रमशेके आदमीका लडका गया हे.. अपनी पेन्ट पहेनते.. सधीर तु अ‍ेक डोक्टर हे.. ओर डोक्टर होकर तुजे अ‍ैसी आदत कहासे लग गइ..? बात कुछ समजने नही आइ.. अगर तुजे पताही थाकी मे सारीरीक सुख ओर बच्चे देनेमे सक्षम नही हु.. तो फीर तुमने नीशाभाभीसे सादीही क्यु की..? क्युकी उनकी जींदगी खराब..

सुधीर : (खडे होते) भाइ.. सोरी.. अब मुजे आपको सब सचाइ बतानीही पडेगी वरना आपभी मुजे गलतही समजते रहोगे.. भाइ मेरे घरपे ये बात कोइ नही जानता.. मेने कीसीको नही बताया.. लेकीन मे आपको फुरसतमे सबकुछ सच बता दुगा.. अभीतो जानेका टाइम हे ओर आपकोभी ओर जगाह न्योता देने जाना हे..

तो आइअ‍े हम घर चलते हे आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. जब सादीका नीपट जायेतो हम दोनो अकेले मीलेगे तब मे आपको सबकुछ बतादुगा.. अभीतो मेरे साथ घर चलो.. ओर आपकी भाभीसेभी बात करलो उनको कुज समजाओ.. सायद आपकी बात मानजाये..

देवायत : (खडे होते बहारकी ओर नीकलते) साले समजना उनको नही तुजे हे.. तु उनको डीवोर्स देना चाहता हे वो नही.. समजे..? चल उनसेभी मील लेता हु.. कइ दिनोसे भाभीको मीलाही नही..

कहेते दोनोही क्लीनीकके बहार चले जाते हे.. तब सुधीर क्लीनीकको ताला लगा देता हे ओर देवायतके पीछे बाइकमे बैठ जाता हे फीर देवायतने बाइक सीधेही पासमे सुधीरके घरपे लेली.. ओर दोनो उतर कर अंदर चले गये.. तो सुधीरकी बीवी नीशा टीवी देख रहीथी.. जैसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे चमक आगइ ओर हसते हुअ‍े देवायतको नमस्ते करने लगी.. ओर सुधीरने देवायतको सोफेपे बीठाया..





नीशा : (खुस होते हसते) आइअ‍े देवरजी.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? मुजसे नही तो कमसे कम अपने फ्रेन्डको मीलनेतो आजाते.. हें..हें..हें..

सुधीर : (हसते) नीशा.. उनके छोटे भाइ बहेनकी सादी हे.. तो हमे न्योता देने क्लीनीकपे आयेथे.. तो मे इसे इधर लेकर आगया.. कहा आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते) हांतो सही हेनां.. न्योता देने क्लीनीकपे थोडीनां जाते हे.. वोतो घरका व्यवहार हे.. ओर मेरी इस बारेमे चारुभाभी ओर रश्मीभाभीसे बातभी होगइ हे.. आप नही कहेते तोभी हम कल आने वाली हे.. कलही मुजे चारुभाभीके साथ आपके घर जाना हे.. मंजुभाभीने कहेलवाया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) देखा..? देख डफर.. तुजे कैसी समजदार बीवी मीली हे.. ओर तु हेकी.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते) देवरजी समजाइअ‍े अपने भाइको.. कैसी कैसी नादानीया करते हे.. उनको मुजे डीवोर्स देना हे.. कुछतो सोच समजकर बोलते.. क्या ये सब बच्चोका खेल हे..? समजाइअ‍े इसे..

सुधीर : (हसतेअपने कान पकडते) सोरी नीशा.. अब अ‍ैसी गलती नही करुगा बस..? मेने इस बारेमे भाइसे बात करली हे.. वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. मे तुजे खोना नही चाहता..

नीशा : (हसते) हंम.. अब ठीक हे.. सुधीर तुम जरा फ्रेस होजाओ मे देवरजीके लीये कुछ बनाती हु..

देवायत : (हसते) भाभी कुछ नही पीना.. बस मुजे जाना हे.. अभी तीन चार घरपे ओर जाना हे..

सुधीर : (खडा होते) भाइ.. कीतने दिनोके बाद हमारे घर आये हो.. आप कुछ पीकरही जाना.. बैठो मे अभी फटाफट फ्रेस होकर आता हु..

कहेते वो बाथरुममे टोलीया लेकर चला गया तब नीशा जटसे अपने बेडरुममे चली गइ ओर थोडीही देरमे हाथमे अ‍ेक बंध कवर लेकर आगइ.. ओर देवायतके पास उनसे सटकर बैठ गइ फीर कवरको देवायतसे देते धीरेसे बात करने लगी..

नीशा : देवरजी ये चीठी हे.. अभी अपनी जेबमे फटाफट रखलो.. आप घर जाकर अकेलेमे फुरसतमे पढलेना.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. जो बात मेने चीठीमेभी लीखी हे आप पढोगे तो सब कुछ समज जाओगे..

देवायत : (हसते धीरेसे) भाभी ये सब मै क्या सुन रहा हु.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

नीशा : देवरजी मेने चीठीमे सबकुछ लीखा हे आप पढलीजीयेगा.. ओर हां इस बारेके कीसीसे जीक्र करनेकी जरुरत नही हे.. बात सीर्फ हम दोनोकेबीचही रहेनी चाहीये.. ये मेरी पर्सनल बात हे.. जो मे आपको रुबरु नही केह सकती.. इस बारेमे सीर्फ चारुभाभी जानती हे.. ओर कोइ नही.. अब आप बैठीये मे कुछ ठंडा बनाकर लाती हु.. अभी सुधीर आजायेगा.. हम फुरसतमे बात करेगे..

कहेते नीशा सरमाती हुइ कीचनमे चली गइ.. तब कुछही देरमे सुधीरभी अपना हाथ ओर मुह पोछते हुअ‍े नीकला तबतक नीशाकी चीठी देवायतने जेबमे रखली थी.. तो कुछही देरमे नीशाभी दो ग्लास ठंडा लेकर आगइ ओर देवायतको देते उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. जैसे कोइ जंग फतेह करली हो.. वो बहुतही खुसथी.. ओर देवायत ठंडा पीकर वहासे नीकलने लगा.. तब सुधीर ओर नीशा उनको दरवाजे तक बहार छोडने आये तब नीशा बहुतही सरमा रही थी..

फीर देवायत तीन चार जगाह ओर न्योता देकर सीधाही चंपाभाभीके घर चला गया.. तब वो सोनेकी तैयारीया कर रहीथी.. वो देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर उनके अंदर जातेही उन्होने घरका दरवाजा बंध करलीया फीर देवायतको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. जाहीरसी बात हे चंपाभाभी बहुतही कामी ओरत थी ओर देवायतको कभीभी अ‍ैसे बीना चुदवाये नही जाने देतीथी.. देवायत उसे कुछ कहे उनसे पहेलेही वो अपने सब कपडे नीकालकर अपने बेडपे पैर फैलाके लेट गइ.. ओर देवायतकी ओर देखकर हसने लगी..

फीर देवायतका हाथ खीचकर अपने उपर गीरा दीया.. तभी देवायत उसे कुछ कहेता इनसे पहेले चंपाभाभीने देवायतके मुहपे हाथ रखदीया ओर देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी.. वो उसे कुछ बोलनेही नही देतीथी.. ओर लेटे लेटेही देवायतके कपडेभी नीकाल दीया ओर अपने उपर चडालीया.. फीर हाथ नीचे लेजाते उनके लंडको मुठीमे पकडलीया..

अपनी गीली चुतमे घीरसे चुतके लव होलमे लंडको अपना रास्ता दीखा दीया.. तभी देवायतने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे उतार दीया तब चंपाभाभी दर्दके मारे मुह बीगाडते छटपटाने लगी.. ओर उसने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया ओर अपने पैर उनकी कमरपे रखते पैरकी आंटी लगादी.. फीर कुछ देर अ‍ैसेही देवायतकी कमरको अपनी चुतमे दबाते पडी रही.. ओर उनका दर्द कम होगया..





देवायत : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तुजेतो बहुत आग लगी हुइ हे.. हंम.. मुजे बोलनेही नही देती..

चंपा : (मुस्कुराते) मुजे सब पता हे आप मुजे न्योता देने आयेहो.. लेकीन मुजे मालकीनने केह दीया हे.. बस आपतो अपना कामही करो.. मुजे अ‍ेक बार ठंडी करदो.. जब आप मुजे अ‍ैसे बेहरीमेसे चोदते हो तो मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. आजतो आप मेरी हालत खराब करही दो..

देवायत : (हसते कमर हीलाते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.. इतनी ठरकीतो रश्मीभी नही हे..

चंपा : (कमर उछालते) आपको जोभी कहेना हो कहीये.. मेतो अ‍ैसेही आपसे चुदवाती रहुगी.. ओर कमसे कम तीन दिनमे तो मेरी अ‍ेक बार चुदाइ करकेही जाना.. अब आपकी आदतजो लग गइ हे..





फीर देवायत हाथके बल उचा होकर बडेही जोसमे चंपाकी चुदाइ करने लगता हे तब चंपा दर्दके मारे छटपटाते अपनी कमर उछाल उछालकर देवायतसे चुदवाती रही दोनोके बीच घमासान चुदाइ हुइ.. ओर काफी धकोपैनीके बाद दोनोही साथमे जड गये.. तब देवायतने चंपाभाभीकी चुतको अपने पानीसे लबालब भरदी.. ओर वो चंपाभाभीके उपरसे उतरकर बाथरुममे चला गया ओर अपना लंड साफ करेके बहार आगया..

फीर अपने कपडे पहेनकर चंपाभाभीकी ओर देखता हे तब वो बेसुध्ध जैसे बीस्तरे पडीथी ओर मुह बीगाडते दर्दके मारे कणस रहीथी.. आज देवायतने उनको बहुतही बहेरहेमीसे चोद लीया था.. तब देवायतको उनको देखकर हसी आगइ.. तो चंपाभी दर्द होते हुअ‍े भी सरमाकर मुस्कराने लगी.. ओर देवायतने उनके उपर जुकते चंपाभाभीके होंठ चुमलीये ओर वो बहार नीकलकर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गया..

इधर हवेलीपेभी सभी लोग अपने अपने रुममे जाकर सो चुकेथे.. होलमे सीर्फ नीर्मला चंदा ओर मंजुही बैठे थे ओर आपसमे बाते कर रहेथे.. कल पुरी रात देवायतने अपनी सुहागरातमे बीना नीचे उतरे चंदाको चौद लीयाथा.. इसीलीये वोभी काफी थकी हुइथी ओर उसे बहुत जोरोकी नींद आ रहीथी.. तो कुछ देर बाते करते वोभी सोने चली गइ.. तब होलमे सीर्फ मंजु ओर नीर्मलाही रहे गइ.. ओर देवु देरसे आने वाला था..

इसीलये मां बेटीको बाते करनेका पुरा मौका मील गया.. ओर मंजुने नीर्मलाको बाबाने कही हुइ सृतीकी पुरी बात बतादीकी सृतीभी उनकी सौतन हे.. तब अ‍ेक बारतो नीर्मलाकोभी सृतीसे ज्वेलेसी होने लगी.. फीर मंजुकी सब बाते याद आतेही अपने आपको नोर्मल करलीया.. फीरतो मंजुने सुरुसे लेकर अबतक की सब बाते नीर्मलाको बतादी की वो सब वास्तवमे कौन हे.. सभीका देवायतके साथ रीलेशन क्यु हे..

उसने भावना लता सरला.. सभीके बारेमे बात करली भानुको रमासे सादी क्यु करनी पडी वोभी मंजुने विस्तारसे नीर्मलाको बता दीया बस कुछ रीस्ते ओर पुनमके देवायतके साथ रीस्तेकी बात नही बताइ.. क्युकी नीर्मला धिरेनको बहुत प्यार करती हे ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. तो जाहीरसी बात हे वो पुनमको अपनी बहु मानने लगी थी.. अब उसे देवायतकी कीतनीभी सौतन आजाये उसे बुरा नही लगा.. तभी मंजुने सृतीको फोन लगा दीया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०३/१

उसने भावना लता सरला.. सभीके बारेमे बात करली भानुको रमासे सादी क्यु करनी पडी वोभी मंजुने विस्तारसे नीर्मलाको बता दीया बस कुछ रीस्ते ओर पुनमके देवायतके साथ रीस्तेकी बात नही बताइ.. क्युकी नीर्मला धिरेनको बहुत प्यार करती हे ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. तो जाहीरसी बात हे वो पुनमको अपनी बहु मानने लगी थी.. अब उसे देवायतकी कीतनीभी सौतन आजाये उसे बुरा नही लगा.. तभी मंजुने सृतीको फोन लगा दीया....अब आगे

मंजुला : (सृतीने फोन उठातेही हसते) हेलो.. क्या मेरी सौतन बोल रही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते फोनपे) कौन.. मंजु..? तुम अपनी हरकतोपे बाज नही आओगी.. हें..हें..हें.. कहो.. क्या बात हे.. अभी तक जाग रही हो.. ओर वोभी गांवमें.. यहा सीटीकी बात अलग हे.. यहातो सब देर तक जागते रहेते हे.. रातमेही रोनक होती हे जैसे दिन नीकला हो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही.. मम्मी पापा आये हे.. सबलोग सो गये हे ओर देवु बहार गया हे.. तो मे ओर मम्मी दोनो इधर उनका इन्तजार करते बैठीथी तो तुजे फोन करदीया.. क्या बुआ जाग रही हे..?

सृती : (हसते) हां सायद कोइ अपनी कीताब पढ रही होगी.. पता नही सारा दिन क्या पढती रहेती हे.. लो अभी उनको फोन देती हु..

मंजुला : (जटसे) सृती.. सुन.. कल तुजे ओर बुआको इधर आना हे.. ओर सादी तक यही रुकना हे.. ले.. मम्मीसे बात कर.. (कहेते फोन नीर्मलाको पकडा देती हे)

नीर्मला : (हसते) हेलो.. सृती.. कैसी हो..? ओर क्या कर रही हे तुम्हारी मम्मी..? सो गइ क्या..?

सृती : (हसते) अरे मौसी.. बस मजेमे.. अभी ठहेरो मे मम्मीको फोन देती हु.. जागती होगी.. (कहेते भुमीकाके रुममे जाते फोन उसे पकडा देती हे) लीजीये मोम.. नीर्मला मौसी आपसे बात करना चाहती हे..

भुमीका : (हसते फोन लेते) क्या कमीनीको फोन करनेका टाइम मील गया..? ला.. दे.. हेलो..

नीर्मला : (जोरोसे हसते फोनपे) कुती गालीयातो मत दे.. हमारी बेटीया साथमे हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां तो गालीयातो दुगीनां.. ना कोइ फोन ना मुजसे मीलने आइ.. ओर राजीवको इतना कुछ होगया.. फीरभी तुजे फोन कनेका टाइम नही मीला..? अरे फोन कर देती.. तो मे वहा आजाती.. तु अकेली वहा क्या करती..? अब कैसा हे राजीव..

नीर्मला : सोरी भुमी.. वो अचानक इतना कुछ होगया तो मेरा तो दिमागने ही काम करना बंध कर दीयाथा.. बडी मुस्कीलसे उनको होस्पीटल लेकर आइ.. येतो अच्छा हुआ सुबह ही देवु उधर आगया.. ओर रीपोर्ट बीपोर्ट करवालीया तो सब सही होगया.. अब बीलकुल ठीक हे.. हम दोनो देवुके साथ मंजुके घर आये हे..

भुमीका : (धीरेसे) सुन नीमु.. क्या अब देवु तुमसे बोत करने लगा हे..? कुछ कहातो नही..?

नीर्मला : (धीरेसे) सुन भुमी.. अभी नही.. तु कल मीलेगी तब हम इस बारेमे हम बात करेगे.. कल तुजे ओर सृतीको इधर आना हे.. ओर राजीवभी आज तुमको याद कर रहा था.. कल आजा हम दोनो चार पांच दिन अब यही हे.. ओर तुभी इसी हीसाबसे तैयारीया करके आना.. हम खुब अ‍ेन्जोय करेगे..

भुमीका : (हसते) चल ठीक हे.. मेने सृतीको केह दीया हे.. उसने क्लीनीकपे अपनी सहेलीको कहेकर सारा इन्तजाम कर लीया हे.. अब सृतीभी वही मेरे साथ रुकेगी.. हम दोनोही कल सुबह नीकल रही हे.. तो अ‍ेक डेढ घंटेमे उधर आजायेगी.. ओर सुन.. मुजे तुमसे कल मीलकर कुछ बतानाभी हे.. हमारी सृतीके बारेमे.. आकर बात करुगी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. मंजुने अभी मुजे सब बतादीया.. भुमी.. मे बहुत खुस हु.. हम दोनोकी बेटीया.. अ‍ेकही घरमे साथमे बहेन बनकर रहेगी.. कीतना अच्छा हेनां..? तुम कल मील.. फीर बात करेगे..

भुमीका : (हसते) क्या..? तुजे सब पता चल गया..? ओर तुम इस बातसे खुस हो..? चलो अच्छा हुआ.. मेरीतो सब टेन्शन खतम होगइ.. चल सृतीको देती हु.. कल मीलते हे.. (उधर नीर्मलाने फोन मंजुको देदीया)

सृती : (फोन लेते) मौसी.. आप फीकर मत करना मे मम्मीको लेकर सुबह आजाउगी..

मंजुला : (हसते) मौसीकी बच्ची मे तेरी सौतन बोल रही हु.. हें..हें..हें.. मेने सुनलीया हे.. कल सुबह तेरा इन्तजार करुगी.. चल अब रखती हु.. कल मीलते हे.. बाय..

सृती : (सरमाते हसते) बाय.. दी..दी.. हें..हें..हें.. (फोन कट करतेही) मोम.. अब सो भी जाओ.. हमे सुबह जल्दी नीकलना हे.. ओर मेने हम दोनोके सब कपडे पेक करलीये हे.. ओर मेभी सो जाती हु.. आपभी सुबहमे सब मेरे ओर आपके गहेने बहेने जोभी लेना हे याद करके ले लीजीयेगा..

भुमीका : (हसते) हां.. बाबा वो मे सुबह ले लुंगी.. अबतो तुजेतो जानेकी जल्दीही होगी.. अपने ससुरालजो जा रही हो.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) मोम.. आपभीनां.. चलो सो जाओ मे चलती हु.. जब देखो टांग खीचती रहेती हो..

कहेते सृती सरमाते हसती हुइ बहार नीकल गइ.. ओर सब लाइटे बंध करते दरवाजा चेक करलेती हे.. ओर अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करते मीररके सामने चली जाती हे.. ओर उनके डड्ढोअरसे अ‍ेक फोटो नीकालते उसे देखती हे वो देवायतका फोटोथा.. जो मंजुकी सादीमे उसने सबसे छुपकर मोबाइलमे लेलीया था.. ओर यहा फोटो नीकलवाकर हमेसा अपने डड्ढोअरमे रखती.. ओर अक्सर उनसे बाते करती..

सृती : (फोटो देखते) अरे.. मेरे सोना.. मु..हा.. कल तुमसे मीलनेके लीये आरही हु.. अपने ससुराल.. अब देखती हु.. मुजसे बचकर कहा जाते हो.. बहुत तडपाया हे तुमने अपनी सृती को.. बस अ‍ेक बार अपने हथीयारके दर्शन करादो.. वो कमीनी मंजु इनकी बहुत तारीफ करती रहेती हे.. आपको कीतनी हीन्टदी फीरभी कुछ समजतेही नही हे.. हें..हें..हें..

कहेते देवायतके फोटोको मीररके पास उनके सामने रख देती हे.. ओर उनसे बाते करते अपने अ‍ेक अ‍ेक कपडेको नीकालने लगती हे.. जबसे देवायतके पेन्टके उभारको देखाथा.. तबसे सृती देवायतको पानेकी कामना कर रहीथी.. जब पुरी नंगी होगइ तब दोनो हाथोमे अपने बुब्सको थामलीया.. ओर मीररमे देखकर उसे मसलने लगी.. ओर मदहोस होने लगी.. फीर देवायतका फोटो लेकर अपने बेडपे चली गइ ओर उसे चुमते हुअ‍े अ‍ेक हाथसे बुब्सको मसलते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी..





जबसे सृतीसे उनके लंडके बारेमे सुना तबसे सृती पागल जैसे होगइ थी.. की कीसाका इतना बडा लंड कैसे हो सकता हे..? ओर वो तबसे उसे देखनेके लीये मचल रहीथी.. ओर आज यही सोचकर अपनी चुतमे उंगली डालकर उसे हिला रहीथी की अब वही लंड उनकी चुतको नसीब होगा.. यही सब सोचकर वो बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर अपनी आंख आधी बंध करते मदहोसीमे जोरोसे चुतमे उंगली हीलाने लगी..

तब कुछही देरमे उनकी चुतने जवाब देदीया ओर अ‍ेक तेज फवारा उनकी चुतसे नीकलकर देवायतकी फोटोको भीगोने लगा.. फीर सृती सांत होगइ.. ओर जैसेही फोटोकी ओर देखा उसे हसी आगइ.. ओर फोटो लेकर बाथरुममे घुस गइ फीर नहाकर फोटोकोभी साफ करलीया ओर ड्रायरसे सुखा दीया.. फीर वोभी बहार नीकलकर फोटोको वापस ड्रोअरमे रखते नाइटगाउन पहेनकर सोगइ..

तो इधर सृतीके जातेही भुमीने कीताबको रख दीया ओर रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करलीया.. फीर अपने सब कपडे नीकालकर बेडपे आकर बेठ गइ.. सृतीसे ज्यादा कल उनको जानेकी जल्दीथी.. अपने यारको मीलनेके लीये वो बहुतही अ‍ेक्साइटेड थी.. जेसे सृती नही वो अपने ससुराल जा रही हो.. भुमी आजभी इतनी जवान दीख रहीथी.. उन्होने अपना सरीर बहुत मेइन्टेइन कीयाथा..





सृतीकी तराह वोभी अपने अतीतको याद करते अपनी चुत सहेलाने लगी.. अपने यारको इमेजींग करते जोरोसे चुतमे उंगली डालकर हीलाने लगी.. तो कुछही देरमे वोभी जडकर सांत होगइ.. भुमी भी नीर्मलाकी तराह बहुतही कामुक्त ओरतथी.. सायद नीर्मलासेभी ज्यादा.. उसने आज तब अपने नये रीस्तेको कीसीके सामने उजागर होने नही दीया.. फीर वोभी गाउन पहेनकर सब सही करके सो गइ..

उधर मंजु ओर नीर्मला आपसमे बात कर रहीथी तब मंजुने नीर्मलाको बाबाके बारेमे उनकी शक्तिओके बारेमे.. देवायतके बारेमे फीर इस गांवके बारेमे उनकी जमीनके बारमे बहुत कुछ बता दीया.. ओर नीर्मला सबकुछ सुनती रही.. मंजुने नीर्मलाको पीछले जन्मके बारेमे ओर आने वाले समय ओर उनके जन्मके बारेमे भी नीर्मलाको बता दीया.. जीसे सुनकर नीर्मलाभी अचंभीत होकर सुनती रही..

तब जाके नीर्मलाको बात समजमे आने लगीकी वास्तवमे वो सब कौन हे.. फीर मंजुने नीर्मलाको भानु ओर उनकी मामीके बीच जोभी कुछ हुआ उनके बारेमेभी बता दीया.. की कीन हालातोमे भानुको उनकी मामीसे सादी करनी पडी.. मंजुने नीर्मलासे देवायतके नये रीस्तोके बारेमेभी बात करलीकी देवुको क्यु सबके साथ रीलेशन रखना पडता हे.. तब जाकर नीर्मलाको कुह राहत महेसुस हुइ..

नीर्मला : (हसते) बेटी.. हम जो सोचते हे ओर कीसके बारेमे जो भी धारणा करते हे.. अ‍ैसा कुछ भी नही होता.. तुम कीतनी स्ट्रोंग हो.. इतना सबकुछ होगया.. फीरभी तुमको जरासाभी गुसा नही आया.. सबके साथ अपने प्यारको बडी आसानीसे बांटती हो.. ओर देखो में.. जब पता चलाकी तुमभी हमारे देवुसे प्यार करती हो.. मे उसी बातकोभी सहेन नही करपाइ.. ओर तुम दोनोपे गुसा करदीया.. ओर नतीजा.. इतने महीनो तक तुम दोनोसे मुजे दुर रहेना पडा..

मंजुला : (हसते) मोम.. ये सब बाते अ‍ेक हादसेकी तराह भुल जाओ.. जो हुआ सो हुआ.. अब हमे कीसीसे भी कोइ गीला सीकवा नही रखना.. येतो सीर्फ हम तीनोके बीचकी बातथी.. लेकीन आगे जाकर आपको अ‍ैसा बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. तब आप क्या करोगी..?

नीर्मला : (हसते) मंजु मे कुछ समजी नही.. तुम किसके बारेमे बात करना चाहती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. आप केह रहीथीनां मुजे सबके बारेमे जानना हे..? लेकीन अभी इतना टाइम नही हे.. फीरभी देवुके आने तक मे आपको कुछ बताती हु.. हमारी भावुके बारेमेही बात करते हे..

नीर्मला : (हसते) हमारी भावु..? अब इसके बारेमे क्या बाते हे.. मंजु मुजे सुरुसे बता..

मंजुला : (हसते) मोम.. आपको पता हे..? जब मे ओर भावु कोलेजमे थी.. तो भावु तबसेही हमारे देवुको प्यार करती हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) क्या..? हमारी भावु..? वोभी देवुसे प्यार करती थी.. तो फीर हमे बताया क्यु नही..? कमसे कम तुजेतो बता देती.. तेरी तो इनके साथ बनती भी हे..

मंजुला : (हसते) मोम.. वो बहुतही सर्मीली हे.. जबतक देवुको अपने दिलकी बात बताती इनसे पहेलेही मे ओर देवु बहुत आगे बढ चुके थे.. आप समज गइनां..? जीस दिन हम दोनो हमारे घरमे आपके सामने पकडे गये तब उसी दिन भावुभी अपना प्यारका लजहार करने आइथी.. ओर आपसे पहेले उसनेभी हम दोनोको देख लीयाथा.. तब हम दोनोने आपसमे पुरी बात करली.. ओर भावुको मेने सम्हाल लीया..

नीर्मला : मंजु तो फीर तुजे बादमेतो मुजे बताना चाहीये था.. क्युकी देवुतो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. वो कीतनीभी सादीया कर सकते हे तो फीर मे तबही भावुकी बातभी देवुसे करती..

मंजुला : मोम.. जो होनाथा होगया.. तब सीचुअ‍ेशनशी अ‍ैसी थी.. तो आपसे मे कैसे बात करती..? लेकीन मोम.. आज आपको अ‍ेक राजकी बात बता रही हु.. जो बात आप अपने तकही सीमीत रखेगी..

नीर्मला : (अ‍ेक नजरसे आस्चर्यसे देखते) अब कोनसी बात..? क्या भावुके बारेमे हें..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. बस आप तब भावुको कुछ मत कहेना.. या उनसे कुछ मत पुछना.. क्युकी सब प्रकृतीका खेल हे.. ओर मत भुलो हमारी भावुभी हम मेसे अ‍ेक हे..

नीर्मला : (हसते) मंजु अब तुने मुजे सब सचाइ बतादी हे.. तो अब मुजे कीसीभी ओर के बारेमे सुनकर बुरा नही लगता हें..हें..हें.. बता क्या कहेना चाहती हे तु..?

मंजुला : (हसते) मोम.. जबसे भावुको भानुभाइ ओर उनकी मामीके बीचके रीलेशनके बारेमे पता चल गया तबसे हमारी भावुने अ‍ेक फैसला करलीया हे.. वो अब अपने पुराने प्यारको फीरसे हासील करके भानुभाइसे दुर होजायेगी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप हमारी भावु अपने पुराने प्यार यानी हमारे देवुसे अपना प्यारका इजहार कर चुकी हे.. ओर ठीक होतेही जल्दसे जल्द वो देवुके साथ फीजीकल रीलेशनमे आजायेगी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) मंजु क्या ये सही होगा..?

मंजुला : (सोचमे डुबते) हां मोम.. हमारी भावुका देवुके साथ रीलेशनमे आना जरुरी हे.. बलकी.. बहुत जरुरी हे.. सीर्फ मेरे लीये ही नही.. आपके लीयेभी.. क्यु जरुरी हे ये बात मे आपको अभी नही बता सकती..

नीर्मला : तेरे ओर मेरे लीये मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : (सरमाते हसते) मोम.. हमारा देवु हमारे लीये सबकुछ हे.. फीर विजयका बेटा आयेगा.. तब सायद हम दोनो नही होगी.. हम दोनोकोही नया जन्म लेकर आना पडेगा.. तबभी हम दोनो मां बेटी होते हुअ‍ेभी आजकी तराह अ‍ेक दुसरेकी सौतन होगी.. तब आपको मेरी कोखसे जन्म लेना हे.. ओर हम दोनोही मेरे पोतेकी रानीया होजायेगी.. बस अभी सीर्फ इतना ही कहेना हे..

दोनोही बात कर रहीथी तब देवायत नीशाका लेटर कारमे रखते अंदरकी ओर आगया ओर दोनो मां बेटीकी बाते अधुरी रेह गइ.. तब देवायत आतेही मंजुके पास उनसे सटकर बैठ गया ओर मंजुके कंधेपे हाथ रखकर उसे अपने नजदीक खीचलीया तो मंजु ओर नीर्मला दोनोही हसने लगी.. ओर देवायतने मंजुका सर चुमलीया.. तब मंजुने जुठा गुसा करके देवायतकी जांगपे अ‍ेक चपत लगादी ओर सरमाते हसने लगी..

नीर्मला : (हसते) देवु.. बस अ‍ैसेही मेरी बेटीओको प्यार देते रहेना.. में तुम ओर चंदाकी सादीसे बहुत खुस हु.. मेने चंदाको कभी अपनी छोटी बहेन नही माना.. वोभी मेरी बडी बेटी हे.. इनको इतनी खुस कभी नही देखा.. वो यहा कीतनी खुस हे..

देवायत : (हसते) मंजु ओल मोस्ट सभी जगहपे न्योता देकर आयाहु.. बस भुमीआंटीसे बात करलेना..

मंजुला : (हसते) पतीदेव.. अभी अभी बात होगइ हे.. कल सुबह वो दोनो मां बेटीभी इधर आजायेगी ओर सामको सरलाचाचीके घरके लोगभी इधर आजायेगे.. ओर वंदनातो सादी तक इधर ही रहेगी..

देवायत : (हसते) हां चारुभाभीभी वही केह रही थी.. चलो अब सोना नही हे क्या..?

मंजुला : (हसते) बस हम दोनो आपहीका वेइट कर रहे थे.. चलीये..

फीर तीनो खडे होगये तब नीर्मला देवायतकी ओर सरमाते हसती रही.. ओर जटसे राजीवके पास चली गइ तब मंजु ओर देवायत दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडकर अपने रुममे चले गये.. ओर देवायतने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब चंदा घोडे बेचकर गहेरी नींदमे सो रहीथी.. तो मंजु उनकी ओर अ‍ेक नजर देखकर देवायतको देखते हसने लगी.. फीर देवायतकी बाहोमे समा गइ..

मंजुला : देवु.. लगताहे दीदी अभी तक ठीक नही हुइ.. बेचारी कल पुरी रात जागनेकी वजहसे सो गइ हे.. आपनेतो उनकी हालतही खराब करदीथी.. फीरभी बेचारी सारा दीन काम करती रही..

देवायत : (हसते) हंम.. मंजु हमे इनको डीस्टर्ब नही करना.. चल.. हम दोनो यही नीचे बीछाना डालकर सो जाते हे..

फीर मंजुने अ‍ेक गदा बेडके पास नीचेही बीछा दीया ओर दोनो चेन्ज करके वही नीचे सो गये तब मंजुने देवायतके सीनेपे सर रख दीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी मंजु अ‍ेक पैर उठाकर देवायतकी कमरपे डाल देती हे.. ओर देवायतके उपर चडकर लेट जाती हे.. तो देवायतभी मंजुको कसके अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे.. जबभी मंजु देवायतके साथ सोती तब उनका अ‍ेक अलगही रुप होता मानो वो कीसी कामदेवकी मुरत रती हो..

मंजुला : (धीरेसे कामुक आवाजमे) दे..वु.. पली..ज.. अंदर डालदो.. मुजे अंदर लेके सोना हे..

देवायत : (धीरेसे) मंजु अभी तुम ठीक नही हुइ.. बस सही होने तक इन्तजार करलो.. अभी ये सब करना तेरे लीये ठीक नही हे..

मंजुला : (होंठ चुमते) नही देवु.. में ठीक हु.. आप अंदर डालदो.. मुजे कुछ नही होता..

देवायत : मंजु क्या होगया हे तुजे..? क्यु जीद कर रही हे..? कुछ हुआहे क्या..? कीसीसे कुछ बात हुइ हे..? जो तुम इतनी गरम होगइ हो..

मंजुला : (धीरेसे) जानु.. लगताहे आज मुजे आपकोभी कुछ सचाइ बतानी पडेगी.. मेने सृतीको दीखाया तबही मे ठीक होगइ थी.. ओर कुछ बाते मे अभी आपको नही बताउगी.. इस बारेमे हम बादमे अकेले होगे तब डीस्कस करेगे.. बस यही समजलो मे अभीभी कवारी हु.. खब आप अ‍ेक बार घुसादो.. फीर मे आपको कुछ दीखाती हु..

देवायत : (धीरेसे हसते) मंजु तु बहुत बडा रीस्क ले रही हे.. अ‍ेक बार फीर सोचले..

मंजुला : (हसते) अरे बाबा कुछ नही होगा.. में केह रही हुनां.. चलो.. आप लेटे रहो.. मेही कुछ करती हु..

कहेते मंजु देवायतके उपरसे उतर गइ फीर खुदका ओर देवायतका गाउन नीकाल दीया.. ओर देवायतके पैरोके बीच बैठ गइ.. ओर उनके लंडपे जुककर अपनी जीभ नीकालकर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते उनके लंडको चाटने लगी.. देवायतको आज मंजु अ‍ेक अलगही रुपमे दीख रहीथी.. जैसे स्वर्गसे कोइ अप्सरा उतरके आइ हो.. आज पहेली बार देवायतको मंजुकी आंखोमे अ‍ेक अलगही चमक देखनेको मीली....





कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०३/२

जब लंड गीला होगया तब मंजुने लंडको अपने मुहमे भरलीया ओर धीरे धीरे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. तबतक देवायत मंजुकी सब हरकते देखता रहा.. उनकोभी अ‍ेक डर थाकी मंजु इतना बडा रीस्क क्यु ले रही हे.. लेकीन उनको क्या पता की मंजु पीछले जन्मकी देवयानी हे.. जो चुदवाते हुअ‍े भी अ‍ेक बार स्नान करतेही फीरसे कवारी लडकीकी तराह होजाती हे.. मंजु इस जन्ममेभी अपनी बहुत सारी शक्तिया पहेचान चुकी थी.. बस वो अभी कीसीके सामने उसे उजागर करना नही चाहती थी..





जब देवायतका लंड गीला होगया तब वो मुहसे लंड नीकालकर वापस देवायतके उपर चड गइ.. ओर अपने हाथोसे देवायतका लंड पकडते अपनी चुतपे सेट करने लगी.. ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते धीरे धीरे लंडपे बैठने लगी.. ओर लंडको अपनी चतकी गीरफ्तमे लेने लगी.. तब अ‍ेक बारतो उनका मुहभी दर्दके मारे बीगड गया.. तब देवायत मंजुको कुछ कहेता उनसे पहेलेही मंजुकी चुतने अ‍ेक साप चुहेको नीगलता हे उसी तराह देवायतका पुरा लंड उनकी चुतने नीगल लीया..





मंजु देवायतके चहेरेपे जुक गइ ओर उनके होठोको चुमते धीरे धीरे कमरको उपर नीचे करते देवायतसे चुदवाने लगी.. देवायत बस अ‍ैसेही लेटा रहा.. ओर मंजुका साथ देने लगा.. मंजुभी मदहोसीमे नसेकी हालतमे चली गइ.. ओर होले होले देवायतके लंडको अंदर बहार करते चोदती रही.. जब दोनोके बीच कामुक्ता भरी चुदाइ हो रहीथी.. तब चंदा गहेरी नींदमे सो रहीथी.. तभी मंजु देवायतके गलेके नीचे हाथ डालके उनसे पुरी तराह चीपक गइ.. ओर अपनी कमर हीलानेकी स्पीडको बढाने लगी..





तब कुछही देरमे मंजु आधी आंख चडाते नसेकी हालतमे अपनी कमरको जटके देने लगी.. तभी देवायत समज गयाकी मंजु जड रही हे.. जब मंजु सांत होगइ तब देवायत उसे अपनी बाहोमे भरके पलट गया ओर मंजुके उपर चड गया.. फीर मंजुसे चीपक कर उनके गलेको चुमते मंजुको होले होसे सोट मारते चोदने लगा.. तब देवायतके हर धकेके साथ उनका लंड मंजुकी बच्चेदानीसे टकराने लगा.. तब मंजुकी मस्ती भरी आहे नीकलने लगी.. दोनो ही चुदाइमे पुरी तराह मस्तीमे छागये थे..





दोनोही धीरे धीरे काफी देर तक अ‍ैसेही चुदाइ करते रहे.. देवायत मंजुको चोदते हुअ‍ेभी उनका बहुत खयाल रख रहाथा.. तभी अचानक देवायतने मंजुके गलेमे अपना मुह घुसा दीया ओर वहा उनके गलेमे दांत गडाते चुमने लगा.. तब मंजुने देवायतको जोरोसे कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तभी उसे अपनी बच्चेदानी पर देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ.. जो मंजुकी चुतको लबालब भरते ही जा रहाथा.. जीसे मंजुका तनभी कांपने लगा.. ओर वोभी मुह खुला रखते आहे भरती देवायतके साथ फीरसे जडने लगी..





तो दुसरी ओर आज दयाने सामनेसे रजीयाको लखनके पास जानेके लीये कहा.. तो रजीयाकी आंखमे आंसु आगये ओर वो दयासे लीपट गइ.. फीर जैसेही देवायत ओर मंजु अपने रुममे चले गये तब रजीया धीरेसे दबे पांव लखनके पास चली गइ.. ओर वहाभी दोनोके बीच जमकर चुदाइका दौर चल पडा.. लखनने रजीयाको तीन बजे तब दो बार चोद लीया.. ओर रजीया चुदवाकर वापस आकर सो गइ..

आज सुबहका सुरज नइ रोसनी लेकर अपने रथपे सवार होकर नीकला था.. तब हवेलीपे सबके मनमे अ‍ेक नइ उमंग ओर नइ उर्जाका संचार फील हो रहाथा.. दया ओर रजीया सुबह जल्दी उठकर अपने काममे लग गइ थी.. तभी नीर्मला मंजु चंदा सभी अपने अपने बाथरुममे नहाकर तैयार हो रहीथी.. तो पुनमभी सुबह कंपलीट होकर कीचनमे दयाका हाथ बटाने लगी.. तभी रजीया भी सभी सगाह जाडु पोछा लगा रहीथी..

इधर सहेरमे भी आज सृती सुबह जल्दी उठ गइ ओर नहा धोकर हल्कासा शींगार करने लगी.. तबतक भुमीकाभी उठ चुकी थी.. आज वोभी सजधजके कंपलीट होकर पुजा पाठ करके होलमे बैठीथी.. तभी सृती तैयार होकर रुमसे बहार आगइ तो भुमीका उसे देखतेही रेह गइ.. आज सृती पुरी तराह सज धजके अ‍ेक दुल्हनकी तराह तैयार हो गइथी.. जैसे उनकी आजही देवायतके साथ सगाइ हो.. तब भुमीका उनको देखकर हसने लगी.. तो सृती सरमा गइ..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) मोम.. क्या हस रही हो..? मे सीर्फ तैयारही तो हुइ हु..

भुमीका : (हसते) सृती तुमतो अ‍ैसे तैयार हुइहो जैसे आजही तुम्हारी देवुके साथ सगाइ हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) मोम.. आपभी नां.. आपभीतो आज पटाका लग रही हो.. जेसे मुजे नही आपको वहा जानेकी जल्दी हो.. चलीये हमे देर हो रहीहे.. मे पहेले चाइ नास्ता बनाती हु.. फीर चलते हे..

भुमीका : ((हसते) हां.. हां.. जा बनादे.. आजतो तुजेभी अपने ससुराल जानेकी जल्दी होगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते जुठे गुसेसे) मोम.. आप मुजे तंग करनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती.. देखना मेरी भी बारी आयेगी.. तब मेभी बदला लुंगी..

कहेते सृती सरमाते हसते कीचनमे चली गइ.. तो भुमीका उनको देखकर हसती रही.. फीर सृतीने चाइ नास्ता बनालीया तो दोनो मां बेटीने साथ बैठकर चाइ नास्ता करलीया ओर सृतीने दोनोके कपडेकी बेग लेली.. ओर घरके सची खीडकी दरवाजे अच्छेसे चेक करके बंध करलीया ओर घरको ताला लगा दीया.. फीर मां बेटी दोनोही पडोसीको ध्यान रखनेको कहेकर देवायतके गांवकी ओर नीकल गइ..

लेकीन सृतीको क्या पताकी उनको जानेकी जल्दीके बजाये भुमीकाको जानेकी जल्दीथी.. क्युकी उनका रीजन सीर्फ वोही जानती थी.. आज देवायतके पीता किशनके गुजर जानेके बाद कितने महीनोके बाद वो हवेलीपे अपने कदम रखेगी.. वो बहुतही अ‍ेक्साइटेड होने लगी.. सृती हाइवेकी ओर कार दोडाने लगी.. तब भुमीका उनके पास बैठकर अपने अतीतको याद करने लगी.. ओर आंख बंध करते पुरानी बाते ताजा करने लगी..

(थोडा फ्लेशबेकमें)

जब उनका पती नरेश वीरजी राजीह नीर्मला ओर उनका चहीता भाइ किशन.. सब अ‍ेकही कोलेजमे साथ पढ रहेथे.. सबने पढाइके अलावा बहुत धमाल कीथी.. इनमेसे सबसे ज्यादा होशीयार किशन था.. ओर उपरसे वो राज परीवारसे तालुक रखताथा तो दोस्तोके पीछे ज्यादातर वोही सब खर्चा करता था.. फीर चाहे पढाइमे हो या कोइ पार्टीमे हो.. तब भुमीके मनमे किशनके लीये अ‍ेक अलगही फीलीग्स थी.. पुरे गृपमे सीर्फ वो दोनोही लडकी थी..

वो ओर नीर्मला बहुतही पक्की सहेली थी ओर हर बात दोनो आपसमे सेर करती थी.. ओर इनके लीये दोनो आपसमे कसमसे बंधी हुइ थी.. वो किशनके बारेमे नीर्मलासे अपनी दिलकी बात कहे उनसे पहेलेही अ‍ेक दिन नीर्मलाने उसे किशेनके साथ फीजीकल रीलेशनमे होनेकी बात कहेदी.. तबतो भुमीका दिल टुट हीगया.. ओर उसने अपने चहेरेपे कोइ भाव आने नही दीया.. ओर इस बारेमें बात करना टाल दीया.. फीरतो कइ बार नीर्मलाके साथ कीशनको मीलने साथमे जाना पडा.. ओर वो सबकुछ देखना पडा..

जीनकी वजहसे कुछही दिनोके बाद अ‍ेक दिन नरेशने उसे प्रपोज करदीया.. तो उसने नरेशका प्रपोज अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. नीर्मलाभी घरपे किशनके बा बापुजी ओर उनके पीता ओर भाइ राजीवकी वजहसे किशनसे खुलकर नही मील पा रहीथी.. क्युकी तब किशनके मीलनेके लीये वो अक्सर भुमीकाको अपने साथ लेजाने लगी.. दोनो सहेलीया भुमीकाके घरका या सहेरमे कीसी होटेलमे खरीदी करनेका बहाना बनाकर साथमे अकेली चली जाती..

तब किशनभी सबकी नजर बचाते अकेलाही नीकल जाता.. ओर तीनो तैय की हुइ जगाहपे मीलने लगे.. भुमीकाके घरपे कोइ नही होता तब नीर्मला कभी भुमीके घर यातो किशन कीसी होटेलमे मीलनेके लीये बुलाता.. तब अ‍ेकही कमरेकी वजहसे नीर्मलाको भुमीकोभी साथ रखना पडता.. ओर नीर्मला किशन भुमीके सामनेही मीलने लगे.. अ‍ेक दो बार मीलनेके बादतो भुमीकाकी सरमभी चली गइथी.. किशन नीर्मलाकी चुदाइ अपनी आंखोके सामने देखकर तो उनके तनकी आग भी बढने लगी..

नीर्मलाभी नीर्लज होकर भुमीकाके सामनेही किशनसे चुदाइ करवाने लगती.. तो भुमीका भी वासनाकी आगमे जलने लगी.. लेकीन किशनको कहेभी तो कैसे..? ओर उपरसे नरेशभी उनको दिलोजानसे चाहने लगाथा.. ओर आखीर अ‍ेक दिन उनके घरपे कोइ नहीथा.. तब भुमीकाने नरेशको अपने घर बुलालीया..

ओर आखीर दोनो मीलही गये.. तब नरेशने भुमीकाका कौमार्य भंग कीया.. फीरतो वो ओर नरेश तीनसे चार बार फीजीकल हुअ‍े.. लेकीन उनके मामे अबभी किशन राज कर रहाथा.. वो किशनको अपने दिलसे नही नीकाल पाइ..

तो दुसरी ओर किशनभी मनसे भुमीकाको अपनी बहेन मानने लगाथा.. फीर तो किशनभी नीर्मलाको भुमीकाके सामने ही चोदने लगता.. दोनोही सब भुलकर खुब चुदाइ करते.. ओर भुमीका देखती रहेती.. अबतो किशन ओर नीर्मलाको भुमीकाकी हाजरीसे कोइ फर्क नही पडता था.. जब दोनो अपनी चुदाइमे मशगुल होते तब भुमीकाभी काफी गरम होजाती ओर दोनोकी चुदाइ देखते हुअ‍े अपनी चुतको सहेलाती..

जब बरदास्तसे बहार चला जाता तब अपनी चुतमे जोरोसे उंगली डालकर हीलाती ओर जड जाती.. यातो उसी दिन नरेशके साथ चुदाइ करवा लेती.. लेकीन भुमीकाने नीर्मलाको नरेशके साथ फीजीकल होनेकी बात कभी नही बताइ.. वो अपनी पसर्नल लाइफके बारेमे बहुतही कमही नीर्मलासे बाते करती.. उन्होने नीर्मलाको कभी नही बतायाकी उनका किशनके साथभी क्रश हे.. ओर ये बात वो सबसे छुपाना चाहती थी..

ओर जबसे किशनने उनको अपनी बहेन माना तबसे वोभी किशनको नरेशसे ज्यादा तवजो देने लगी.. जब चुदाइ होजाती तब किशन अक्सर नीर्मलाके साथ भुमीकाकोभी महेगी गीफ्ट देने लगा.. ओर राखीके दिन भुमीका किशनको राखी बांधती तबभी किशन भुमीकाहो राखीके तोहफे मे महेगी गीफ्ट ओर ढेर सारा केश भी देता.. ओर उसने भुमीकाकी पढाइका ओर उनकी सब जरुरतोका पुरा खर्चा उठालीया था..

तबभी भुमीका नरेशको प्यार करनेके बावजुद भी किशनकी ओर ज्यादा ढलने लगीथी.. लेकीन इसी बीच उनके साथ अ‍ेक हादसा होगया.. तब उसे नही पताथाकी वीरजीभी उसे प्यार करता हे.. ओर अ‍ेक दिन विरजीने भी उसे प्रपोज करदीया.. ओर भुमीने उसे मना करदीया तो विरजी बोखला गया ओर दोनोके बीच कहासुनी होगइ.. तब भुमीने विरजीको सनकी कहे दिया ओर विरजीका गुसा सातवे आसमानपे चला गया..

विरजीने मनमे भुमीकासे बदला लेनेकी ठानली.. ओर अ‍ेक दिन वासनाकी आगमे जलते मौका देखकर जबर दस्तीसे भुमीकाको उनके घर लेगया.. ओर भुमीकाके साथ बलात्कार कीया.. तभी पीछेसे किशन ओर नरेश आगये ओर किशनने विरजीको खुब मारा.. तब मारते वक्त किशनने विरजीको कहाकी ये उनकी बहेन हे.. तब विरजीकोभी पछतावा होने लगा ओर वही भुमीकाके पैरमे गीरते माफी मांगने लगा..

फीरतो दोस्तीकी वजहसे सबने विरजीको माफ करदीया.. लेकीन भुमीका मनसे विरजीको माफ नही कर पाइ.. फीरतो वोभी किशनको अपना भाइ मानने लगी.. लेकीन दिलके अ‍ेक कोनेमे अबभी किशनके लीये बेसुमार प्यार छलक रहाथा.. ओर अ‍ेक दिन अचानक नरेशके कहेनेपे कीसीको कहे बगैर भुमीका ओर नरेशने कोलेज छोडदी.. तब भुमीका ओर नरेशने आपसमे सादी करनेका फैसला करलीया था..

ओर अ‍ेक दिन दोनोही छुपकेसे अकेले किशनको कोलेजके बहार मीलनेके लीये आगये.. तब भुमीकाने किशनको भारी मनसे उनकी सादीमे आनेका न्योता दिया.. ओर दोनोही कोर्ट मेरेज करने वालेथे तब विटनेस के तौरपे भुमीकाने सीर्फ किशनको बुलालीया.. ओर कीसीको ना कहेनेकी किशनको कसमभी खीलवाइ.. तब किशन कीसीको कहे बगैर दोनोकी सादीमे चला गया.. ओर भुमीके भाइके रुपमे विटनेशमे साइन करदी..

तब भुमीका किशनको लीपटकर खुब रोइ.. फीर नरेश ओर भुमीकाने सीर्फ किशनको अपने घर मीलनेके लीये आनेकी छुट देदी.. तब किशनने कुछ पैसे देना चाहा तो भुमीका ओर नरेश दोनोने लेनेको मना कर दीया.. ओर किशनने भुमीकाको अ‍ेक भाइकी ओरसे तोहफा कहेकर जबर दस्तीसे भुमीको अ‍ेक तगडी रकम देदी.. फीरतो भुमीकी ओर नरेश दोनोका संसार अच्छेसे चलने लगा.. नरेशकोभी सरकारी होस्पीटलमे जोब मील गइथी.. ओर भुमीका उनका घर सम्हालने लगी..

किशन सालमे तीनसे चार बार भुमीका ओर नरेशको मीलने जाता.. ओर सालमे अ‍ेक बार भुमीकासे राखी बंधवाना कभी नही भुलता.. ओर गांवकी ओर दोस्तोकी सब बाते उनके साथ सेर करता.. तब दोपहोरका खाना वो उधर ही खाकर आता.. लेकीन भुमीकाने अब राखीके बदले तोहफा लेना बंध करदीया.. ओर हर बार जब जरुरत पडेगीतो मांग लुंगी कहेके टाल देती.. ओर अ‍ैसेही महीनो ओर साल बीतने लगे..

इसी बीच किशनकी हवेलीपे बहुत कुछ हो चुकाथा.. उनको नीर्मलाको छोडके उनकी बहेन विमलासे सादी करनी पडी.. तब सादीके कुछही हप्तो बाद किशनके माता पीताकी मोत होगइ.. ओर विरजीकीभी सादी सरलासे हो चुकीथी.. तब अ‍ेक दिन नरेश घरपे नहीथा तब किशन भुमीकाके घरपे आगया

ओर तब भुमीकाने किशनको अपने भाइ बहेनका वास्ता देकर विरजीसे बदला लेनेकी बात कहेदी.. ओर अ‍ैसा बदलाकी जीनकी वजहसे किशन सरलाके साथ रीलेशनमे आगया.. तब देवायत विमला नीर्मला के साथ बदलेकी बावनासे सरलाको भी प्रेगनेन्ट कर चुका था..

इसी बीच तीनसे चार साल बीत गये.. तबभी भुमीकाको बच्चा नही ठहेर रहाथा.. तब नरेश ओर भुमीका चींतीत होने लगे.. दोनोने बहुत इलाज करवाया.. फीरभी कुछ फर्क नही पडा.. ओर अ‍ेक दिन किशन नरेश ओर भुमीकाको अपने साथ आश्रमपे बाबाके पास लेगया.. तीनो पुरा दिन वही रहे.. तब बाबासे बहुत सारी बाते करली.. जब नरेश ओर किशन आश्रममे घुम रहेथे तब चुमीका बाबाके साथ बैठी रही.. जैसेही बाबा ओर भुमीका अकेले रेह गये तब बाबा भुमीकाके साथ अकेलेम कुछ बाते करने लगे..

बाबा : बेटी.. बुरा मत मानना.. जो मे तुमसे केह रहा हु उसे ध्यानसे सुनना.. तेरे नसीबमे अ‍ेक बच्ची हे.. लेकीन ये सब तेरे पतीसे मुमकीन नही हे.. वो कीसी ओरसे मुमकीन हे.. तु समज गइनां..?

भुमीका : (सरमाते थोडी सकपकाके) नही.. नही.. बाबा.. ये आप क्या केह रहे हे.. मे कुछ समजी नही.. इसका मतलब..? वो सब.. अ‍ैसा नही होसकता..

बाबा : (मुस्कुराते) बेटी.. तुम सब समजती हो.. ओर तुम जीनसे दिलसे प्यार करती हो उनसेही सब मुमकीन होगा.. क्या तुम तुम्हारे दोस्त देवायतसे प्यार नही करती..? हंम..?

भुमीका : (सरमाते) बाबा.. प्यारतो मे अबभी करती हु.. लेकीन अब मे सादी सुधा हु.. वो अब मुजे अपनी बहेन मानते हे.. ये सब अब मुमकीन नही हे.. अगर मे मानभी जाउ.. तो वो इस कामके लीये कभी राजी नही होगे..

बाबा : (हसते) बेटी.. उसने जब खुदकी सगी बहेनसे सादी करली.. फीरभी तुमतो उनकी मुह बोली बहेन हो.. ओर ये सब तुजे करनाही पडेगा.. तुजेही उनसे बात करके उनको मनवाना पडेगा.. ओर मुजे पका विस्वास हे तुम उनको मना लोगी.. ओर ये सब तेरे लीये जरुरीभी हे.. तुम चाहो या ना चाहो.. बच्चीतो सीर्फ उनसे ही होकर रहेगी..

भुमीका : (कुछ सोचते सरमाते) बाबा.. अब ये मुमकीन नही हे.. आपनेतो मुजे बडी उलजनमे डाल दीया.. अगर मेरे पतीको पता चल गया तो..? क्या ये सब उनको धोखा देना नही हे..? वो भी मुजे बहुत प्यार करते हे.. ओर किशनभी उनको कभी धोखा देना नही चाहेगा.. मे उसे अच्छी तराह जानती हुं..

बाबा : बेटी मेरी बात ध्यानसे सुनो.. सायद ये सब बाते जानकर तुजे दुखभी होगा.. लेकीन ये सब जानना तेरे लीये जरुरी भी हे.. ओर ये बात तुम सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. क्युकी ये सब होकरही रहेगा..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) जी. बाबा.. कहीये..

बाबा : (आंख बंध करते) सुन बेटी.. तेरे पतीकी आयु अब सीर्फ १० से १२ साल तककी ही हे.. फीर तुजे किशन ही तेरे साथ सादी करके तुजे सम्हालेगा.. तुम दोनोका संसार सबसे छुपके चलता रहेगा. तु इनकी चीन्ता मत करना.. ये सब किशन सम्हाल लेगा.. बस अब ये बातका जीक्र तुम अभी कीसीसे मत करना..

भुमीका : (सोक्ट होते धीरेसे) बाबा ये आप क्या केह रहे हे..? क्या ये सब सच हे..?

बाबा : हां बेटी.. मेरी आजतक कोइ बात मीथ्गा नही हुइ.. ओर अ‍ेक सचाइ ओर बता रहा हु.. किशनका बेटाही तेरी बेटीसे सादी करेगा.. अब उनके घरमे भाइ बहेनके बीच सादीकी परंपरा सुरु होगइ हे.. फीर वोही तुम दोनो मां बेटीका खयाल रखेगा.. तुम खुदभी उनको सामनेसे अपना लोगी..

भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) बाबा ये आप क्या केह रहे हे..? आपको पका यकीन हेकी मेरी बच्चीका बाप किशनही होगा.. कोइ ओर इलाज नही होसकता..? ओर किशनके बेटेको मे अपना लुगी..? मेरीतो कुछ समजमे नही आता.. अ‍ैसे कैसे हो सकता हे..?

बाबा : (हसते) नही बेटी.. मेरी बात ध्यानसे सुनो.. वास्तवमे तुम सबको पताही नही हेकी तुम सब कौन हो..? बस कुछ सालो तक इन्तजार करले.. अ‍ेक दिन तेरे सामने सब सचाइ सामने आजायेगी..

किशन : (नरेशके साथ आते) बाबा क्या केह रहीहे भुमी.. कही आपका दिमागतो नही खा रही.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जुठे गुसेसे हसते) किशन.. अ‍ेक मारुगीनां.. मे ओर बाबा तो बाते कर रहे थे.. बाबाने मुजे अ‍ेक दवाइ देदी हे.. मुजे वो छे महीने तक लेनी हे.. फीर सब ठीक होजायेगा.. क्यु बाबा..?

तभी किशन ओर नरेशभी खुस होते वही बैठ गये ओर बाबाभी भुमीके जुठ बोलनेपे हसने लगे.. फीर बाबाने भुमीकाको अ‍ेक बच्ची होनेकी बात केहदी.. तब नरेश बहुत खुस होगया.. फीर साम होतेही तीनो बाबाको दक्षीणा देकर वहासे नीकल गये.. तब किशनको नरेश ओर भुमीको छोडने वापस सहेर जानाथा.. ओर तीनो वहासे नीकल गये.. उनके बाद भुमी का नरेशके प्रती देखनेका नजरीया बदल चुकाथा..

वो अब किशनको अपने भाइसे ज्यादा अ‍ेक भावि पतीके रुपमे देखने लगी.. बच्चेकी चाहतमे उसे नरेशकी कम आयुकाभी अफसोस नही हो रहाथा.. बस अब भुमीके लीये सीर्फ अ‍ेकही काम बाकी रेह गया था.. ओर वो था किशनको इस बातके लीये राजी करना.. ओर ये बात वो भली भांती जानतीथी की किशनको इस बातके लीये कैसे राजी करना हे.. ओर वो इस बातके लीये आजसेही मीशन चाइल्डपे लग गइ..

भुमीका : (कारमे पीछे बैठे) नरेश.. तुम कितने दिन होगये बा को मीलने गांवमे नही गये.. तो इस बार २० दिनके बाद राखीभी हे.. तो तुम अपनी बहेनसे राखी भी बंधवा लेना.. ओर बा की तबीयत भी देख आना..

नरेश : भुमी पागल होगइ हो क्या..? हमारा गांव थोडीना नजदीक हे..? वहा जानेके लीयेभी १४ घंटे लगते हे.. मे वहा अ‍ेक दिन रुककर आजाउगा फीरभी वहा आने जानेके लीये तीन दिन लग जायेगे.. ओर अगर जाना हे तो तुजेभी साथ चलना पडेगा.. तुम तीन दिन अकेली यहा क्या करोगी..?

भुमीका : नरेश तुम समजते क्यु नही..? मुजे यहा अकेली कोन खाजायेगा.. ओर वेसेभी मुजेभी तो अपने भाइको राखी बांधनी हे.. मे किशनके घरही चली जाउगी.. तीन दिन पहेलेही बा का फोन आयाथा.. वो तुजे बहुत याद कर रही हे.. हम सादीके बाद सीर्फ तीन बारही उधर गये हे.. इस बार तुम अकेलाही चले जाना..

नरेश : भुमी.. पहेले मे छुटीका देखता हु.. अगर छुटी मील गइतो चला जाउगा.. ओर तुमभी अकेली यहा मत रहेना.. किशनके घरही चली जाना..

भुमीका : (मनमे खुस होते) हां तो वही चली जाउगी.. मेरे भाइका घर हे.. कीतने दिन होगये मे विमला भाभीको भी नही मीली.. उनसेभी मील लुंगी.. हें..हें..हें..

तीनोही बाते करते घर पहोंच गये.. पुरे रास्ते भुमी सीर्फ किशनके बारेमेही सोचती रही.. तो दुसरी ओर आज किशनको भी भुमीकी नजर उनके प्रती कुछ अलग ही लगी.. उसे बार बार किशनका वो तगडा लंड नजरमे आने लगा.. जो कइ बार नीर्मलाकी चुदाइ करते अपनी आंखोसे देख चुकीथी..

भुमी बार बार किशनके पेन्टके उभारको देखने लगी.. तब किशनको वहासे नीकल जाना मुनासीब लगा.. ओर वो नीकलने लगा तब भुमी ओर नरेशने किशनको रुकनेका बहुत आग्रह किया फीरभी किशन घरकी ओर नीकल गया.. तभी..

(फस्लेसबेक खतम)

सृती : (थोडी उची आवाजमें) मोम.. मोम.. क्या हुआ.. नींद आगइ क्या..? पुरी रात तो खर्राटा मारके सोती रही हो.. फीरभी आपको नींद कैसे आजाती हे.. हें..हें..हें.. कोइ नींद वींदकी गोलीतो नही खाइ..?

भुमीका : (अतीकसे बहार आते) अरे मे कोइ सो नही रहीथी.. कोइ गली नही खाइ.. समजी.. बस आंख बंध करके बैठी हुइ थी.. बस कुछ पुरानी बाते याद आ रहीथी.. मेरा किशन.. कीतने सालो के बाद मे वहा पैर रखुगी..

सृती : (हसते) मोम.. बस हम पहोंच गये.. देखो.. आपके देवुका गांव आगया.. ओर ये हवेली तो देखो.. दुरसेही बहुत बडी लग रही हे..

भुमीका : (सरारतसे हसते) हां.. यही तेरा ससुराल हे.. मे तो यहा कइ बार आ चुकी हु.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) मोम.. आप मेरी टांग खीचनेका कोइ भी मौका नही छोडती.. हें..हें..हें..

दोनोही मस्ती मजाक करते हवेलीपे आगइ.. जैसेही कारका बोर्न बजा तो मंजु चंदा पुनम सभी दोडके बहार आगइ.. ओर सृतीने कारको वही पार्क करदीया.. ओर दोनो कारसे उतर गइ.. तो भुमीका उतरतेही सब जगाहपे नजर घुमाते देखती रही.. तभी मंजु दोडकर सृतीके गले लग गइ.. फीर भुमीकाके पैर छु लीया तो सभी सृतीको गले लगाते भुमीके पैर छुने लगे.. ओर पुनमने सृतीका बेग लेलीया.. ओर सभी होलमे आने लगे.. तब होलमे राजीव ओर नीर्मला तैयार होकर बैठे थे.. जेसेही नीर्मलाने भुमीकाको देखा....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०४/१

दोनोही मस्ती मजाक करते हवेलीपे आगइ.. जैसेही कारका वोर्न बजा तो मंजु चंदा पुनम सभी दोडके बहार आगइ.. ओर सृतीने कारको वही पार्क करदीया.. ओर दोनो कारसे उतर गइ.. तो भुमीका उतरतेही सब जगाहपे नजर घुमाते देखती रही.. तभी मंजु दोडकर सृतीके गले लग गइ.. फीर भुमीकाके पैर छु लीया तो सभी सृतीको गले लगाते भुमीके पैर छुने लगे.. ओर पुनमने सृतीका बेग लेलीया.. ओर सभी होलमे आने लगे.. तब होलमे राजीव ओर नीर्मला तैयार होकर बैठे थे.. जेसेही नीर्मलाने भुमीकाको देखा....अब आगे

नीर्मला जटसे खडी होगइ ओर आगे आकर भुमीकाके गले लग गइ.. तब राजीवभी हसते हुअ‍े खडा होगया.. जब दोनो अलग हुइ तब चुमीका धीरेसे राजीवकी ओर बढते उसे बस देखती ही रही.. ओर उनकी आंखसे दो बुंद आंसु गीर गये.. ओर जटसे राजीवको गले लगा लीया.. दोनो काफी देर अ‍ैसेही खडे रहे.. जब अलग हुअ‍े तब भुमीकाने राजीवका सर चुमलीया ओर उनके दोनो हाथ थामके उनके सामने देखती रही..





भुमीका : राजीव.. मेरे भाइ.. कैसी तबीयत हे तेरी..? देख.. कैसा होगया हे तु..

राजीव : (हसते) भुमी.. मेतो अब ठीक होगया हु.. तु बता.. तुम कैसी हो..? जबसे गइ.. वापस कभी मुडके भी नही देखा.. क्या कभी तुजे हमारी याद नही आइ..? कमसे कम अपनी सहेलीको ही मील लेती.. क्या हमसेभी नफरत हो गइथी..?

भुमीका : (मुस्कुराते) नही भाइ.. अ‍ैसी बात नही हे.. तुजेतो सब पता हे.. बस सीर्फ किशनको मीलती थी.. वो हस साल राखी बंधवाने आजाता था.. तो कभी कभी मेभी उनको मीलने यहा आती थी.. तब आपकी ओर नीमुकी खबर उनसे पुछ लेतीथी.. भाइ सब बीखर गया.. मेरा किशन हमे छोडकर चला गया..

राजीव : (भुमीको हाथ पकडते अपने पास बीठाते) भुमी.. अब हमारी उमरभी तो होगइ हे.. सबको अ‍ेक दिन जानाही हे.. मुजे किशनसेही पता चलाकी नरेशभी गुजर गया.. लेकीन तुमसे मीलनेभी कैसे आउ..? तुमतो हमे मीलना ही नही चाहती थी.. तेरा भाइतो सीर्फ किशनही था.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) नही भाइ.. सोरी.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. आजाते.. मेने तुजे तो अपना भाइ नही मेरा जीजाजी माना हे.. हें..हें..हें.. नीमुतो मेरी बडी बहेन हे.. हें..हें..हें.. लेकीन राजीव.. मेने तुम दोनोको बहुत मीस कीया.. (जोरोसे हसते) तुम तो वाकइ अब बुढे होगये हो.. हें..हें..हें.. मे ओर नीमुतो आजभी वैसी ही हे.. क्यु नीमु.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (थोडी जेंपते सर्मसार होते) भुमी.. तेरा बस चले तो तु कभी बुढी ही नही होती.. हें..हें..हें.. देख तुतो आजभी वैसी ही दीख रही हे.. जैसे तु सृतीकी मां नही उनकी बडी बहेन हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां.. तो मे अभी जवानही हु.. क्यु भाइ..? भाइ आदमी भलेही सरीरसे बुढा हो जाये.. लेकीन वो दिलसे जवान होना चाहीये.. तबभी तो बुढापा हसी खुसीसे बीत जाता हे.. हें..हें..हें..

राजीव : (जोरोसे हसते) हां.. तभीतो आजभी मे तेरी बडी बहेनसे प्यार करता हु.. लेकीन आज कल वो मुजे कुछ खास भाव नही देती.. हें..हें..हें.. अब तुजो आगइ हे.. तो मेरा चान्स बढ गया हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरर्मसार होते हसते) राजीव.. कुछतो सर्म करो.. यहा बच्चेभी खडे हे.. आतेही मेरी बहेनपे लाइन मार रहे हो.. हें..हें..हें.. अब आपका कोइ चान्स लगने वाला नही हे.. क्यु भुमी..? हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे हसते) हां राजीव.. अभीतो कहाकी तुम अब बुढे हो चुके हो.. हें..हें..हें..

तीनो बाते कर रहेथे तब मंजु पुनम.. चंदा सृती सब वही खडे रहेते तीनोकी अ‍ैसी मजाक भरी बाते सुनकर जोरोसे हस रहेथे.. देवायतभी सुबह देर तक सोता रहा तो वोभी जागकर अपने रुममे तयार हो रहाथा.. लखन पहेलेही उठकर चाइ नास्ता करके खेतोपे चला गयाथा.. भुमीका आइ तो घरमे रोनक आगइ थी.. तभी दया सबके लीये पानी लेकर आगइ.. तो मंजुने कहा..

मंजुला : (हसते) बुआ.. इनको पहेचानती होनां..? ये रामुकाका की लडकी हे.. दया..

भुमीका : (हसते) अरे हां इनको कइ बार मील चुकी हु.. इसे अच्छी तराह पहेचानती हु.. रामुभाइ किशनके बहुत अच्छे दोस्त थे.. वोही तो सब खेती बाडी सम्हालते थे.. दया.. अब कैसे हे वो..?

दया : (भुमीके पैर छुते) बुआ.. बस अब उमरकी वजहसे सारा दिन खेतोपेही होते हे.. वही बेठे होगे..

भुमीका : (हसते) बेटा अबतो तीन दिन यही हु.. उनकोभी मीलकर जाउगी.. (ंमंजुकी ओर देखते) बेटा.. तेरा पती कीधर हे.. वो कही दिख नही रहा..? कही धंधेपे तो नही चला गया..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) नही बुआ.. बस अंदर तैयार हो रहे हे.. अभी आते होगे.. मे बुलाती हु..

तभी देवायत तैयार होकर बहार नीकलता हे तो भुमीका ओर सृतीको देखकर खुस होते सृतीको गले लगाता हे.. ओर भुमीकाके पास जातेही भुमीका खडी होजाती हे.. ओर देवायत उनके पैर छुअ‍े उनसे पहेलेही उसे रोकते वो हसती हुइ देवायतको जोरोसे गले लगा लेती हे.. तब नीर्मला उनकी ओर कामुक मुस्कान करते देखती रहेती हे..

ओर देवायतने भुमीकाको हसते हुअ‍े जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तो भुमीका जोरोसे आउच.. करते देवायतसे अलग होगइ ओर उनकी पीठमे मुका जड दीया.. तो सबलोग हसने लगे.. फीर भुमीका देवायतको हाथ पकडके अपने पास उनसे सटाकर बीठा देती हे..

देवायत : (हसते) बुआ.. आपको आनेमे कोइ तलकीफ तो नही हुइ..? हवेली सीधी मील गइनां..?

भुमीका : (हसते) देवु.. मे यहा तेरे बापु थे तब कइ बार आचुकी हु.. लेकीन तुमने हवेलीमे काफी चेन्ज करलीया हे.. थोडी देर बैठ.. फीर मुजे पुरी हवेली देखनी हे.. ओर तुम्हारे खेतोपे भी जाना हे.. मे वहाभी कइ बार जा चुकी हु.. मे वहा ज्यादातर सबको जानती हु..

मंजुला : (हसते) बुआ.. आप दोनो पहेले फ्रेस होजाओ.. फीर चाइनास्ता करके जीधर भी जाना हो देवुके साथ चली जाना.. चलीये मे आपको अपना कमरा दिखाती हु..

नीर्मला : (हसते) मंजु.. इसे भी हमारे पास वाले कमरेमे ही सेट करना.. दोनो वहा मीलती रहेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बुआ यहा नीचेभी ६ कमरे हे.. ओर उपरभी दस कमरे हे सभी लोग आरामसे अ‍ेडजेस्ट हो जायेगे.. ओर अब आयेगाभी तो कौन.. सीर्फ भानुकी फेमीलीतो हे.. ओर मंजु.. तुम वो धिरेनको भी फोन करदे.. अभी तक आया क्यु नही..? कही उनको छुटी बुटीकी प्रोबलेमतो नही..?

चंदा : (सरमाते हसते) मंजु.. रहेने दे मे अभी उनसे बात कर लेती हु..

सृती : (हसते) हां भाइ.. हम सब दुल्हेके बगैर क्या करेगे.. बुलालो.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) सृतीदीदी आप मेरे साथही आजाइअ‍े.. हम तीनो वही रहेगे.. आइअ‍े..

कहेते पुनम सृतीको लेकर अपने रुममे चली गइ.. फीर सभी लोग चाइ नास्ता करने बेठ जाते हे.. तो आज सृती सरमाते देवायतको कुछ अलगही नजरोसे नजरे चुराते देख रहीथी.. तब भुमी नीर्मला राजीव ओर देवायत आपसमे बाते करते चाइ नास्ता कर रहेथे.. तभी चंपाभाभी ओर रश्मीभाभी भी आगइ.. सबने दोनोको चाइनास्ता करनेका बहुत आग्रह कीया लेकीन वो दोनो घरसे ही चाइनास्ता करके आइथी.. सबने चाइनास्ता करलीया तब देवायत खेतोपे जानेके लीये तैयार होगया..

भुमीका : देवु.. तुम अभी चले जाओ.. हम दोपहोरके बाद खेतोपे जायेगे.. मुजे अभी मंजु ओर नीमुसे कुछ कामभी हे..

राजीव : (हसते) हां भाइ.. तुम सामकोही चली जाना लेकीन मेतो अभी जा रहा हु.. तुम लेडीसके बीच मेतो बोर होजाउगा.. हें..हें..हें.. चलो बेटा.. मे भी तुम्हारे साथ ही चलता हु.. खेतोकी तो बातही कुछ ओर हे..

नीर्मला : (थोडी चींतासे) राजीव.. तुम्हे आराम करना हे.. अ‍ेक बार ठीक होजाओ.. फीर घुमते रहेना..

राजीव : (हसते) अरे कुछ नही होता.. ओर मेने खेत देखा हे.. वहाभी आराम करनेके लीये मकान बकान ओफीस सब हे.. चलो बेटा.. फीर तुम्हारे साथ ही चला आउगा.. नीमु.. वहा हवा ताजी आती हे..

मंजुला : (हसते) हां मोम.. पापाको जाने दीजीये.. उनको वहा अच्छा लगेगा.. जाइअ‍े पापा..

फीर देवायत ओर राजीव दोनोही अपने खेतोपे चले जाते हे.. तभी मंजु नीर्मला दोनो सृती ओर भुमीकाको लेकर पुरी हवेली दीखाने लगती हे.. तो चंपा ओर रश्मी दोनोही दया ओर रजीयाका हाथ बटाने लगती हे तो साथमे पुनमभी चारोके साथ बाते करते काम करने लगती हे.. तभी चंदा अपने रुममे चली जाती हे ओर बेडपे बेठते ही धिरेनको फोन लगा देती हे.. तो कुछ ही देर मे धिरेन फोन उठा लेता हे..

धिरेन : (हसते) हेलो.. मोम.. कैसी हो आप..? क्या वहा सादीकी सब तैयारीया होगइ..?

चंदा : (हसते) हां बीटु.. लेकीन तुम अभी तक आये क्यो नही..? तुजे मंजु ओर सृती याद कर रही हे.. ओर सुबह देवुभी पुछ रहाथा.. क्या कुछ प्रोबलेम तो नही..?

धिरेन : नही मोम.. कोइ प्रोबलेम नही हे.. बस कुछ काममे बीजी हु.. ओर बेंकमेभी आज कल बहुत काम हे.. सामके ७ बज जाते हे.. तो थोडी छुटीमे प्रोबलेम हुइथी.. लेकीन अब ठीक हे.. मे कल साम तक वहा पहुंच जाउगा..





चंदा : (हसते) क्या.. कल साम तक पहोंच जाउगा..? धिरेन परसो तुम्हारी सादी हे.. क्या आज नही आ सकते..? ओर तुमने तेरी सब तैयारीया करली..?

धिरेन : मोम.. इसीलीये मे कल ही आपाउगा.. बस मुजेभी कुछ तयारीया करनी हे.. तो काममे बीजी हु.. सहेरमेभी कुछ पुनोके लीये खरीदी बाकी रेह गइ हे तो कलतक सब नीपटाकर आजाउगा..

चंदा : (हसते धीरेसे) हां अब अपनी बीवीके लीये कुछ बडीयासी गीफ्ट लेना.. हें..हें..हें.. बेटा.. सुन.. तु कही हमसे या मुजसे नाराज बाराज तो नही हेनां..? मुजे सच बताना.. तुजे मेरी कसम हे..

धिरेन : मोम.. ये आप क्या बोल रही हे.. कसम मतदो.. भला मे आपसे क्यु नाराज होउगा..? उल्टा मेतो आपकी सादीसे बहुत खुस हु.. मोम.. अ‍ेक.. अ‍ेक बात कहु.. जो काम आपको बहुत पहेले कर देना चाहीयेथा.. वो अब कीया हे.. खैर.. देरसे ही सही.. आपको बात समजमे तो आइ.. वो कहेते हेना देर आये दुरुस्त आये हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) हंम.. मोमकी मस्ती करता हे..? चलो मेरा बेटा बहुत सयाना होगया हे.. बस तेरे खाने पीनेकी चीन्ता हे.. वहा जट पुनो आजाये तो ये चीन्ता भी दुर होजायेगी.. उसे फोनपे बात करता हेकी नही..? बीटु तेरी बहुत याद आती हे.. आइ मीस यु..

धिरेन : आइनो मोम.. आइ ओल्सो मीस यु.. अब वही आकर उनसे बात करुगा.. लेकीन मे बहुत खुस हु.. मोम.. आपको जीजु जैसे पती मील गये.. मोम.. जीजु बहुत अच्छे हे.. हम सबकी कीतनी कैर करते हे.. (धीरेसे सरमाते) मोम.. क्या वो भानुजीजुकी फेमीलीके लोग आगये..?

चंदा : नही बीटु.. अभी सीर्फ बडीदीदी ओर तेरे मामाही आये हे.. तुजे बहुत याद कर रहेथे.. ओर अभी अभी तेरी सृतीदीदी ओर भुमी मौसी आये हे.. ओर वो भानुभाइकी फेमीलीके लोगभी सामतक आजायेगे.. बस सीर्फ तुम नही आये.. आजा बीटु..

धिरेन : (हसते) मोम.. मे कल पका आजाउगा.. ओर ट्राइ करुगाकी वहा जल्दी आजाउ.. मोम.. लव यु..

चंदा : (हसते) लव यु टु बेटा.. बस तु खुस रहे.. ओर अब मोमको लव यु बोलना छोडदे.. क्या पुनमसे फोनपे बात करता हेकी नही.. अब उसे आइ लव यु बलोदे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) क्या मोम.. आपभी.. चलो मे रखता हु.. वैसेभी अब सादीतो हे.. हें..हें..हें..

चंदा : हंम.. चल बाय.. कल जल्दी आजाना.. मुं..हा..

चंदाने हसते हुअ‍े फोन काट दीया ओर बहार चली गइ.. तो इधर धिरेनभी फोन कट होतेही फोनको देखते कातील मुस्कान करने लगा.. आज वो पहेली बार चंदाकी देवायतके साथ सादीसे खुस हो रहाथा.. क्युकी वो अकेला होतेही अब अपनी मर्जीके मालीक बन गयाथा.. अब वो जैसे चाहे अपनी लाइफ जी सकता था.. जबसे नीलमके संपर्कमे आया तबसे उसने बहुत कुछ प्लानींग करके रखी थी..

जब पुनमने उनको सादीसे पहेले सेक्सके लीये मना कीया तबसे वो कीसीभी हालमे अ‍ेक बार पुनमको भोगना चाहता था.. अब उसे पुनमके प्रती कोइ लगाव नहीथा.. लेकीन पुनमके साथ सादी करनाभी उनकी मजबुरी थी.. ताकी कीसीको उनके ओर नीलमके बारेमे पता नाचले.. इसीके लीये उसने अभीसे बहुत सारी तैयारीया करनी सुरु करदीथी.. ओर ये बात सीर्फ दोही लोग जानते थे.. अ‍ेक मंजु.. ओर दुसरी पुनम..

जबसे मंजुने पुनमको अनुभुती करवाइ तबसे पुनमभी बहुत कुछ जानने लगीथी.. उसे अपने भाइ देवायतके सभी नाजायज रीसतोके बारमे पता चल गयाथा.. लेकीन वोभीतो उसे बहुत प्यार करतीथी.. ओर इस बारेमे उसे मंजुने सब समजा भी दीयाथा.. इसीलीये देवायतके कीसीभी रीस्तेसे उसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. ओर उनकी दोनो सहेलीओके साथ खुद पुनम चाहती थी की उनका रीस्ता देवायतके साथ होजाये..

अ‍ेक थी वंदना ओर दुसरी नीशा.. दोनोही पुनमकी बेस्ट सहीली थी.. वो नीशा ओर वंदनाके प्रोबलेम के बारेमे भी भली भांती जानती थी.. उसे गांवमेभी कइ अ‍ैसे रीस्तोके बारेमे पता चल गयाथा.. तो फीर उनके होने वाले पती धिरनको कैसे नही पहेचानती..? फीरभी उनसे सादी करना जरुरी था.. ताकी वो अपने उदरमे पलने वाले बच्चेको धिरेनका नाम दे सके.. ओर दुसरोके सामने अपने भाइके साथ के रीस्तेको छुपा सके..

इधर हवेलीपे उपरकी मंजीलपे मंजु ओर सृती दोनोही धीरे धीरे आपसमे हस हसके देवायतके बारेमे बाते करती चल रहीथी तो उनके पीछे नीर्मला ओर भुमीकाभी आपसमे धीरेसे बात करते सब जगाहको देख रहीथी.. दोनोही राजीवके बारेमे बाते कर रहीथी.. लेकीन नीर्मलाके कइ बार पुछनेभी भुमीका अपने अफेरके बारेमे बतानेको तैयार नहीथी.. तो दुसरी ओर नीर्मला जब इतने सालोके बाद भुमीकाको पहेली बार सहेरमे जाकर मीली.. तबही देवायतके साथ अपने अफेरकी बात बता चुकी थी....

तो दुसरी ओर भुमीकाने भी आजतक किशनके साथ अपने रीलेशनकी बात कीसीको नही बताइ.. लेकीन वो आजभी अ‍ेक जवान लडकीकी तराह इतनी रोमांजीत हो रहीथी.. ओर इनका कारणभी सीर्फ वोही जानती थी.. भुमीका आजभी दिखनेमे कयामत लग रहीथी.. आजभी अपने नीतंभ हीलाके चलती ओर उनकी घुटनो तककी चोटी या खुले बाल लहेराती तो आजभी कइ मर्द अपने पेन्टमे तंबु खडा कर देते.. ओर यहाभी अपने यारको कहो या अपने नये पतीको.. उसे मीलनेकी सब तैयारीया करके आइथी..





तभी नीचे चारुभाभी ओर वंदना अपने सामानके साथ आगइ तो साथमे सुधीरकी वाइफ नीशाभी थी.. जीसे देखकर पुनम खुसीसे जुम उठी.. ओर सबको गले लगाकर वंदना ओर नीशाको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो चारुभाभी हसते हुअ‍े सबके साथ काममे हाथ बटाने लगी.. तभी विजयके रोनेकी आवाज आइ तो रश्मीभाभी उनको लेकर सोफेपे बैठ गइ ओर बच्चेके साथ खेलने लगी.. जीसे देखकर सभी हसने लगी..

चंपा : (हसते) रश्मी.. अच्छेसे बच्चेको संभालना सीखले.. अब तेरे ही काम आयेगा हें..हें..हें..

रश्मी : (सरमाते हसते) हां.. तो मे आपकोही लेजाउगी.. आपही सम्हालनां.. मेरी भाभी कीस दिन काम आयेगी.. हें..हें..हें..

चंपा : (हसते) अरे आजाउगी तु फीकर मत करना.. हम सब हेनां.. चारुकोभी अच्छा खासा अ‍ेक्स्पीरीन्स हे हें..हें..हें.. वोभी अभी भी बच्चा पैदा कर सकती हे.. बस हमारे रमेशभाइ कुछ करते नही.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) कीमीनीओ धीरे बोलो.. अंदर लडकीया हे.. सुन लेगी.. मेरीतो अ‍ेक बच्ची हे.. कहोतो रमेशको आपके यहा भेजदु.. हें..हें..हें.. अपनीभी बच्चेकी तम्मना पुरी करलो.. हें..हें..हें..

चंपा : (जोरोसे हसते) क्या अब रमेशभाइसे कुछ होगा..? तो भेजदे उनको मे ही रखलुगी.. फीर तु क्या करेगी..? हें..हें..हें.. आयेगी उसे ढुंढते हुअ‍े.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) हां लेजाओ उसे.. कमीनी तुजेभी पता चलेकी वो कोइ कामका हेकी नही.. हें..हे..हे..

दया : (हसते) चंपाभाभी.. रहेने दीजीये.. उनसे कुछ होता नही होगा.. वरना चारुभाभी आपको हां थोडीना कहेती.. हें..हें..हें.. वरना अभी तक वंदनाका अ‍ेक भाइभी होता.. हें..हें..हें..

सभी अ‍ैसी मस्ती मजाक करते काम करती रही.. तो रुममे भी पुनम वंदना ओर नीशा बेडपे बैठकर अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया कर रहीथी.. आज नीशाभी मेकअप करके अ‍ेकदम सजधजके आइथी..

नीशा : (धीरेसे हसते) पुनोदीदी क्या सादीकी सब तैयारीया आपने करली..? आइ मीन.. नीचे सब सफाइ बफाइ.. वैक्सीन वगैरे.. कहोतो मे करदु..?

वंदना : नही नीशा.. इसीलीये तो आइ हु.. कमीनीको आजही सब कर दुगी ओर देखना.. अ‍ैसी चीकनी करदुगी.. की धिरेन जीजु देखतेही पागल हो जायेगे.. हें..हें..हें..

नीशा : (सरारतसे हसते) कमीनी चीकनी सीर्फ इनको नही अब तुजेभी चीकनी होनेकी जरुरत हे.. अब कोइ अच्छेसे लडकेको सेट करके तुमभी सादी करले.. कबतक अ‍ैसे उंगलीसे काम चलायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (जोरोसे हसते) हां.. नीशाभाभी ये आपने सही कहा.. हें..हें..हें..

वंदना : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) नीशा.. अब तुभी मम्मीकी तराह सुरु होगइ.. अरे बाबा नही करनी मुजे सादी.. मे अ‍ैसेही खुस हु.. ओर तुमनेभी सादी करके कोनसा तीर मारलीया..?

पुनम : (गुसा होकर वंदनाको अ‍ेक मुका मारते) कमीनी अ‍ैसातो मत बोल.. कीसीको अ‍ैसा नही कहेते..

नीशा : (मुस्कुराते) नही पुनोदीदी.. सीर्फ तुम दोनोही तो मेरी बेस्ट सहेली हो.. वंदु मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे.. इसीलीये अ‍ैसा केह रही हे.. ओर मुजे उनकी बातोसे दुखभी नही होता.. सचही तो केह रही हे वो.. अब मेरा नसीबही अ‍ैसा हेतो वो क्या कहेगी..?

पुनम : (माहोल हल्का करनेके लीये वंदनाकी ओर देखते) नीशाभाभी.. आप फीकर मत करो.. कुछही दिनमे वंदुभी मेरी तराह चीकनी होकर घुमेगी.. हें..हें..हें..

नीशा : (खुसीसे आस्चर्यसे देखते) क्या..? वंदु चीकनी होकर घुमेगी..? मतलब..? क्या इसने कीसीको सेट करलीया हे..? कमीनी ने मुजे बतायाभी नही.. मेरीतो सब बाते जानलेती हे.. वंदु ये तुने अच्छा नही कीया..

वंदना : (सर्मसार होते हसते) नही नीशा.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. पुनो जुठ बोल रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (वंदनाकी ओर कातीलाना मु्स्कानसे) अच्छा..? मे जुठ बोल रही हु..? कमीनी.. तो फीर खा मेरी कसम.. की मे जुठ बोल रही हु.. हें..हें..हें..

वंदना : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) नही.. हें..हें..हें.. कमीनी क्यु मेरी पोल खोल रही हे..? तुजेभी पता हे मे तेरी कसम नही खा सकती.. अभी बात तो पक्की होने दे.. हें..हें..हें..

नीशा : (वंदनाको अ‍ेक मुका मारते) अच्छा.. तो मतलब कोइ हे.. कमीनी तो फीर तुमने मुजसे जुठ क्यु बोला..? वंदु.. मे तुमसे आज बहुत नाराज हु.. मेरी तो सब बाते जानलेती हे.. तो तुमने मुजे अपनी दिलकी बात क्यु नही बताइ.. क्या मुजपे इतनाभी भरोसा नही हे..? तुमने मुजे आज हर्ट कीया हे..

वंदना : (सरमाते हसते) सोरी नीशा.. मुजे डर थाकी कही बातोही बातोमे तुम मम्मीको बतानादो.. इसीलीये..

नीशा : (थोडा नीरास होते) वंदना.. आज तुमने वाकइ मुजे हर्ट कीया.. अरे कमीनी तेरी मम्मीसे पहेले इस गांवमे तु ओर पुनो मेरी सहेली हो.. पुनोतो यहा नहीथी.. लेकीन मेने तुमसे कभी कोइ बात नही छुपाइ.. यहा तक की मेने तुमसे अपनी पर्सनल बातेभी सेर की.. अब मे तुजपे विस्वास करु भी तो कैसे..?

वंदना : (थोडी रुहांसी आवाजमे) नीशा.. आइ अ‍ेम सोरी.. बस अ‍ेक बार मेरी गलतीको माफ करदो.. में तुजे अपनी सब बाते सेर करुगी.. लेकीन अभी नही.. जब सब कंन्फोर्म होजायेगा तो बादमे तुजे सब सच बता दुगी.. (कान पकडते) सोरी..

पुनम : (हसते) भाभी.. अ‍ेक बार इस कमीनीको माफ करदो.. इस मामलेमे ये बहुत सर्मीली हे.. अभीतक अपने दिलकी बात केह नही पाइ..

नीशा : (हसते) हां.. पता हे मुजे.. अभी कंन्फर्म नही हुआ हे.. कमीनी आइन्दा ध्यान रखना.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. गांड मारलुंगी तेरी.. हें..हें..हें.. तेरे भाइने मुजे गांड मारना सीखा दीया हे.. हें..हें..हें..

कहेते नीशा ओर पुनम जोरोसे हसने लगी तो वंदनाभी सरमाकर हसने लगी ओर नीशाकी पीठमे दांत पीसते अ‍ेक मुका जड दीया.. नीशा नीहायती अ‍ेक खुबसुरत गोरी पतली लडकीथी.. जो उनके बालभी उनकी नीतंब तक लंबे थे.. उनके मा बापकी हालत इतनी अच्छी नहीथी.. सुधीर ओर नीशाका परीवार अ‍ेक दुसरेको अच्छी तराह जानते थे.. नीशा अ‍ेकदम गोरी पतली ओर बहुतही आकर्सक थी इसीलीये नीशाकी सादी सुधीरके साथ उनकी डोक्टरीकी वजहसे करदी गइ थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०४/२

लेकीन पहेली रातमेही नीशा नीरास होगइ.. क्युकी उनकी खुबसुरती ही इतनीथी की सुधीर उनको देखतेही जड गयाथा.. सुधीर देवायतके साथ पढनेकी वजहसे उनका दोस्तभी था.. उनके होर्मोन्समे कुछ गडबडी थी.. उनको लडकीके बजाये लडके ज्यादा पसंद थे.. जीनकी वजहसे बस अ‍ेकही गलत आदतथी.. वो अपनी गांड मरवानेका सौकीन था.. वो नीशाको संतुस्ट नही कर सकता था..

उनका लंड बडी मुस्कीलसे खडा होताथा.. जो कोइ बहुतही खुबसुरत लडकीको देखता.. ओर वो फोरनकी जड जाता.. नीशा पहेली रातमेही सुधीरको पहेचान चुकीथी.. ओर उनका नतीजा.. चारुसे देवायतके व्यक्तीत्व ओर उनके दमदार लंडकी बाते सुनकर वोभी देवायतकी ओर ढलने लगीथी.. चारुसे उनकी अच्छी पटती थी.. तो चारुने नीशाको बता दीया थाकी देवायतके साथ उनका फीजीकल रीलेशन हे..

आज गांवसे दुर भानुके घरभी सुबहसे ही वहाका माहोल खुसनुमां लग रहाथा.. सबके दिलमे आज अ‍ेक अलगही अ‍ेक्साइटमेन्ट फील हो रहीथी.. ओर खास करके.. भावना सरला.. ओर लताके दिलमे.. तो दुसरी ओर नीलमभी बहुतही खुसहो रहीथी लेकीन अपनी खुसी चहेरेपे जाहीर करना नही चाहतीथी.. जबसे अ‍ेक बार धिरेनके साथ फोनपे बात करली ओर अपने प्यारका लजहार करलीया..

ओर जब नीलमके साथ कारमे धिरेनने छेडछाडकी तबसे नीलमका दिल अपने हाथोमे नही रहा.. तबसे उनकी कामवासना बढ गइथी.. ओर वो बहुतही अ‍ेक्साइटेडके साथ वापीस धिरेनसे फोनपे यातो उनसे रुबरु मीलके बात करना चाहती थी.. लेकीन उसे फोनपे बात करनेका मौका नही मील रहाथा.. आज सुबहशी सब चाइ नास्ता करके खडे हुअ‍े तब भानु तो खेतोपे चला गया.. तब भावनाने अपनी बच्चीको दुध पीला दीया..

फीर भावेश ओर बच्चीको बहार खटीयापे सरलाके पास उसे संभालनेको देदीया.. फीर भावु लता रमा अपने बाकी रेह गये कपडे पेक करने लगी.. तो नीलम चाइ नास्तेके बर्तन धोने लगी.. पीछले अ‍ेक घंटेसे तीनो सब सामान पेक कर रही थी.. तभी बच्चीकी रोनेकी आवाज आइ.. तो भावना ओर लता दोनो काम छोडकर बच्चोको लेकर लताके रुममे चली गइ.. तो रमाभी कीचनमे सब काम समेटने लगी..

ओर भावना रुममे आतेही ब्लाउस उचा करके बच्चीको दुध पीलाने लगी तो लताभी भावेशको अपनी बगलमे लीटाकर सुलाने लगी.. तभी भावेशभी लताके बुब्सपे मुह मारने लगा.. जीसे देखकर लता सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ये पहेली बार नहीथा.. लेकीन आज भावनाके सामने भावेशकी इस हरकतकी वजहसे लता सरमा रहीथी.. उसीने जब कोइ नहो होता तब भावेशको अपने बुब्स चुसवानेकी आदत डाली थी..

भावना : (हसते धीरेसे) लता.. अभी मौका हे.. भावेशको अपना दुध पीलाते प्रेक्टीस करले.. हें..हें..हें.. देख तेरा दुधु ढुंढ रहा हे.. कही हमसे छुपके तु इसे दुधतो नही पीलाती.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते हसते) भाभी.. आपभीनां.. मुजे नही पीलाना दुध.. मे कोइ इसे दुध नही पीलाती.. बस येतो मुजे आप समजकर अ‍ैसी हरकत करता रहेता हे.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या आपकी मेरे जेठसे कुछ बात हुइ..?

भावना : (नीरास होते) नही लता.. तुमभी जानती हे इधर सभी होते हे.. तो मे उनसे कैसे बात करती..? लता क्या तुम लोग आये तब उनसे तेरे साथ कोइ बात हुइ..?

लता : (हसते) नही भाभी.. वो नीलम साथमे थी.. तो में उनसे कैसे बात करती..? भाभी.. वहा आपको बहुत मौका मीलेगा.. बस अ‍ेक बार अकलेमे उनसे बात करलो..

भावना : (सरमाते हसते) चल देखती हु.. मेरी छोड.. तु बता.. कल अ‍ेक रात वहा रुककर आइ.. क्या लखनसे अकेले मीलीकी नही..? आइ मीन.. तुम दोदोने.. कुछ कीया बीयाकी नही.. सच बताना.. हें..हें..हें..

लता : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे हसते) भाभी.. वो बहुत ठरकी हे.. उनको मौका मीलेतो वो कैसे जाने देते.. रातको हमारे कमरेमे घुस आये.. मुजेतो बहुत ही डर लगा.. वो कमीनी नीलमभी तो साथमे थी..

भावना : (उत्सुक्तासे धीरेसे) अरे उसे गाली क्यु देती हे..? नीलमका कैसा डर.. कही बहार चले जाते.. ओर वोभी तो कमीनी जवान होगइ हे.. उनकाभी अब खयाल रखना पडेगा.. तु बताना कुछ कीया दोनोने..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. भाभी सब सो गये तब वो मुजे होलमे लेकर गयेथे.. ओर वहा दोनोने होलमे सोफेपे अ‍ेक बार करलीया.. जालीमने कीतनी बेहरेमीसे कीया.. मुजेतो नीचे दर्द होने लगाथा.. लेकीन भाभी.. हमे नीलमपे ध्यान रखना पडेगा.. वो धिरेनकी नीयत मुजे ठीक नही लगती.. ओर ये कमीनीभी उसे लाइन दे रही हे.. मुजेतो लगता हे दोनोका टाका भीड गया हे..

भावना : (हसते) क्यु..? इन दोनोने कुछ कीया हे क्या..? जो तुम अ‍ैसा केह रही हो.. कही तुमने कुछ देखतो नही लीया.. मुजेभी इन लडकीकी नीयत ओर उनकी चाल चलन ठीक नही लगती..

लता : (धीरेसे) भाभी जब हम सब खरीदी करते रातको आ रहेथे तब नीलु ओर धिरेन साथमे ही बैठेथे.. ओर धिरेन पता नही नीलुको कहा कहा छु रहाथा.. मुजेतो कहेनेभी सर्म आती हे.. कभी उनके बोबे तो कभी गलेमे चुमताथा.. ओर अ‍ेक बारतो नीलुके नीचेभी हाथ डाल दीया था.. ओर ये महारानीभी उनको हस हसके ना जाने क्या क्या कर रहीथी.. दोनोही लीप कीस कर रहेथे.. इसीलीये केह रही हु..

भावना : (हसते धीरेसे) लता अ‍ेक बात कहु..? जब हम दोनो बहेने कोलेजमे थी तब हम दोनोकाभी बहुत मन कर रहाथाकी कोइ हमेभी अ‍ैसे प्यार करे.. लेकीन इस मामलेमे मेरा नसीब फुटा हुआथा.. ओर मंजु बडी नसीब वालीथी.. उसने ओर जीजुने सादीसे पहेले बहुत प्यार कीया हे.. मौका मीलतेही दोनोही फीजीकल हो जाते..

ओर तुमने भीतो लखनके साथ सादीसे पहेले सब कुछ करलीया हे.. तो फीर हमे नीलमपे क्यु पाबंधी लगानी हे..? उनकीभी लाइफ हे उनकेभी सपने हे.. लता.. अ‍ेक बात कहु.. उसेभी अपनी कीस्मतपे छोड देनी चाहीये.. अब वोभी जवान होगइ हे.. साली जवानी चीजही अ‍ैसी हे.. इनमे हमभी बाकात नही हे..

लता : लेकीन भाभी.. धिरेनकी अभी पुनोदीदी के साथ सादी हे.. ओर उनके साथ ये सब..?

भावना : लता.. वो मेरा भाइभी हे.. ओर भाइसे पहेले वो अ‍ेक मर्द हे.. अगर हम हमारी सादीके बावजुदभी दुसरे मर्दको प्यार कर सकती हे तो मर्दको क्यु छुट नही मीलनी चाहीये.. हमे उनकीभी भावनाओका खयाल रखना हे.. अगर मर्द अ‍ैसे सोख रखते हेतो हमे इनमे कोइ अ‍ेतराज नही करना चाहीये..

ओर क्या पता तुजेभी सादीके बाद कीसी ओरसे प्यार होजाये..? मे भी ओरत हु.. ओर तुम मेरी बेस्ट सहेलीके साथ मेरी दीदी भी हे.. समज गइनां..? ओर सच कहुतो आज कल सबको अ‍ैसेही रीस्तोमे प्यार करना पसंद हे..

लता : (आस्चर्यसे) भाभी मे कुछ समजी नही आप क्या कहेना चाहती हे..?

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) देख लता.. अगर हम कोइ मर्दकी नजरको पहेचान जाती हेतो.. ओरतकी क्यु नही.. तुम बुरा मत मानना.. पीछले कुछ दिनोसे मे देख रही हु.. देवुके प्रती तेरी देखजेकी नजर कुछ बदल गइ हे.. ओर मे इसे बुराभी नही मानती.. क्युकी हमारा देवु हे ही अ‍ैसा.. कीसीकाभी मन मोहले..

लता : (सर्मसार होते नजरे चुराते) भाभी.. प्लीज.. ये आप क्या केह रही हे.. अभी लखनके साथ मेरी सादी होने वाली हे.. ओर आप अ‍ैसे केसे केह सकती हे.. वो मेरे जेठजी हे..

भावना : (हसते धीरेसे) लता बुरा मत मानना.. ओर मुजे इनमे कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. ओर तुम बेफीक्र रहेना.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी.. मेरी कसम खाकर कहेदे ये जुठ हे.. मेने तुम्हारी ओंखोमे देवुके लीये प्यार देखा हे.. ओर कल देवु गया तो मेने तेरा इसारा भी देखलीया था.. ये सच हेनां..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. प्लीज.. अपनी कसम मत दो.. मे आपकी कसम नही खा सकती.. ओर आपसे जुठभी नही बोल सकती.. क्युकी मे इस घरमे सबसे ज्यादा आपको प्यार करती हु ओर आपपे ही विस्वास कर सकती हु.. मे सच कहुगी.. (नजरे जुकाते धीरेसे) आपकी सब बाते सच हे.. दिलके अ‍ेक कोनेमे लखनसे पहेले ही मुजे देवुभैयासे प्यार हे.. ओर मैने लखनसेभी इसीलीये सगाइ कीहे.. ताकी मे देवुभैयाके नजदीक रेह सकु.. पता नही भाभी मे सुरुसेही उनके प्रती आकर्सीत हु..

भावना : (हसते) लता.. तेरे मुहसे सब सच जानकर आज मे बहुत खुस हु.. आज मुजे यकीन होगया.. तुम पीछले जन्ममे जरुर मेरी बहेन होगी.. तुम यकीन मानोे हमारा देवु हम सबको खुस रख पायेगा.. अगर तुजेभी अपना प्यार मील जायेतो मुजे तुमसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस लखनको मत छोडना.. वो बहुत अच्छा लडका हे.. मेनेभी भानुसे इसीलीयेही सादी कीथी ताकी मेभी जीजुसे मीलती रहु..

लता : भाभी.. आप फीकर मत करना.. आप जबभी उधर आयेगी तब मे आप दोनोके मीलनका इन्तजाम करदुगी.. मेरे रुममे मेरे बेडपेही मील लेना.. मेतो आप जैसी बहेनको पकर धन्य होगइ.. अब मुजे कोइ चीन्ता नही हे.. लव यु भाभी..

भावना : (हसते) लता आइ प्रोमीस हम दोनोही अ‍ेक दुसरेका अ‍ैसेही खयाल रखेगी.. क्या अबभी मुजे भाभी कहोगी..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) सोरी दीदी.. लेकीन सबके होनेकी वजहसे मुजे आपको भाभीही कहेना पडेगा..

भावना : (हसते) क्यु.. ये रमातो तेरी भाभी हे.. सबको कहेदे भावना आजसे मेरी दीदी हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) हां.. ये सही कहा आपने.. कोइ बात नही मौका मीलतेही मे सबको केह दुगी.. अब चलो ये दोनोतो सो गये हे.. अ‍ेरे दहेजका अभी बहुत सामान पडा हे.. उसेभी पैक करले..

दोनोही बच्चेको सुलाकर वही रखा सब सामान पेक करने लगी.. अ‍ैसेही दोपहोर होनेको आइ तब रमा खाना बनाने लगी.. तो दुसरी ओर नीलमभी बर्तन धोकर कीचननमे रख रहीथी तब रमाने नीलमको कहा..

रमा : (रोटी बनाते) नीलु.. सब काम होगया हे तो अब तुमभी मेरे रुममे जाकर नहाले.. ओर नये कपडेभी वहीसे लेलेना.. ताकी दोपहरको चेन्ज ना करना पडे.. जा.. सुबहसे अ‍ैसेही घुम रही हे..

नीलम : (कुछ सोचते खुस होते) जी मम्मी.. अभी जाती हु..

कहेते नीलम जटसे खुस होते रमाके रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करलीया फीर टोलीया लेकर फोन ढुंढने लगी.. तभी रमाका फोन उसे टेबलपे मील गया ओर वो फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ ओर उनकाभी दरवाजा बंध करलीया ताकी कोइ बाथरुमके पाससेभी उनकी बाते सुन ना सके.. ओर उसने टोवेलको साइडमे रखकर धडकते दिलसे धिरेनको फोन लगा दीया.. तो कुछही देरमे धिरेनने फोन उठालीया..

धिरेन : (हसते) हेलो.. कोन.. नीलु..? मेने तेरा ये फोन नंबर सेव करलीया था..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हां धिरेन.. मे नीलु बोल रही हु.. कैसेहे आप..? क्या कर रहे हो..? आप ओफीस चले गये..?

धिरेन : नही नीलु.. बस आधे घंटेके बाद नीकल रहा हु.. क्या तुम वहा अकेली हो..? कहासे बोल रही हो..? देखना बाबा कोइ तुजे देखना ले.. मे तेरे मामलेमे कोइ रीस्क लेना नही चाहता.. आइ लव यु..

नीलम : (धीरेसे) हां.. बाथरुममे नहाने आइ हु.. धिरेन आपकी बहुत याद आरही थी.. तो फोन करलीया..

धिरेन : (धीरेसे) नीलु मुजेभी तेरी बहुत याद आ रही हे.. कल पुरी रात नही सो सका तुमने मेरी नींद ओर मेरा चैइन चुरा लीया हे.. नीलु.. तुम बहुत खुबसुरत हो.. मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. आइ लव यु टु.. मेरीभी आपकी जैसी होलत होगइ हे.. मुजेभी आपसे प्यार हो गया हे.. क्या वहा आप मुजे मीलोगे..? अब यहा मन नही लगता..

धिरेन : नही नीलु.. वहा सबलोग होगे.. नीलु मुजे विडीयो कोल करनां.. मे तेरा दिदार करना चाहता हु.. मुजे तुमको देखना हे..

नीलम : (सरमाते हसते) जी.. अभी करती हु..

धिरेन : (विडीयो कोल आतेही) हाइ.. नीलु.. क्या आजु बाजुमे कोइ हेतो नही..? मतलब बहार रुममे..

नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मेने रुमका दरवाजा बंध कीया हे.. बस लता दीदीका डर लग रहा हे..

धिरेन : नीलु.. वहाभी ध्यान रखना मुजसे बात मत करना.. उनसेतो मुजेभी डर लग रहा हे.. अबतो मे तुम सहेरमे आओगी तबही मीलुगा.. नीलु.. उस दिन कारमे बहुत मजा आया.. लेकीन लताभाभीने मुड खराब करदीया.. क्या सहेरमे मेरे साथ घुमनेतो आओगीनां..? मेने हम दोनोकी बहुत कुछ प्लानींग करली हे..

नीलम : (सरमाते हसते) मुजे क्या पता..? मे कोइ मीलने बीलने नही आउगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (जुठमुठ नाराज होते) ठीक हे तो फीर मे फोन रखता हु.. तुम सब अ‍ेक जैसी ही लडकीया हो..

नीलम : (हसते) अरे.. आपतो नाराज होगये.. ठीक हे.. वही मीलीगे.. लेकीन आपकोही कुछ जुगाड करना पडेगा.. वरना होस्टेलमे बीना पहेचान वालोके साथ नही भेजते.. वही होस्टेलमे दाखला ले रही हु.. जहा पुनमदीदी थी.. क्या वो होस्टेल आपने देखा हे..?

धिरेन : (हसते) हां.. तेरी सौतनको पहेले वही मीला था.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते) धत्.. मे थोडीना उनकी सौतन हु.. हमारी सादी कहा हुइ हे.. धिरेन आपभीनां.. कुछभी बोलते हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) नीलु.. नही हुइ तो होजायेगी.. देखना मे तुजे यही सहेरमे रानी बनाकर रखुगा.. वोभी सबसे छुपाके.. क्या मुजसे सादी करोगीनां..? मेने सब इन्तजाम करलीया हे..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) मुजे नही पता.. अभीतो पुनोदीदीसे भी सादी नही हुइ.. ओर नीकले मुजसे सादी करने.. क्या दो दो सादी करोगे.. आपकी दीदीको देखा हे..? हें..हें..हें.. सुनो.. अब मे फोन रखदु..? मुजे नहाना हे.. देर होजायेगी लता दीदी मुजपे सक करेगी..

धिरेन : (हसते) नीलु.. बस अ‍ेक कीस दे दोनां.. उस दिन दोनोने कीतना मजा कीयाथा.. प्लीज..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) नही.. मुजे बहुत सरम आरही हे.. वोतो मेने थोडीना कीयाथा.. आपने मुजसे जबरदस्तीसे कीयाथा.. आप बहुत नोटी हो.. हें..हें..हें.. कोइ अपनी सालीके साथ अ‍ैसा करता हे.. अपनी होने वाली बीवीसे करलो..

धिरेन : (हसते) नीलु प्लीज.. सीर्फ अ‍ेक बार.. क्या तुम मुजसे प्यार नही करती..?

नीलम : (सर्मसार होते) हंम.. करती हु.. लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार.. मुं..हां.. बुच.. बुच.. बुच.. बस..?

धिरेन : (दिलपे हाथ रखते) हाये.. नीलु डार्लींग आइ लव यु.. कपडोमे भी क्या मस्त लग रही हे.. जब हमारी सुहागरातमे तुजे बीना कपडे देखुगा तो कयामतही आजायेगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) धिरेन.. आप भीना.. अ‍ेक नंबरके.. मे फोन रखती हु.. गंदे कहीके..

धिरेन : (हसते) अरे सुननां..? मेतो मजाक कर रहाथा.. लेकीन नीलु मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे.. ओर मेने हम दोनोके बारेमे बहुत कुछ प्लानींग करली हे.. हम सबसे छुपकर सादीभी करलेगे.. वो बाकीका मे तुजे बादमे बताउगा.. चल अब आखरी बार.. बस अ‍ेक बार उनके दर्शन करादे.. फीर फोन रख देनां.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? कीसके दर्शन..? धिरेन आप हेनां बहुतही कमीने हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) वो.. तुम्हारे गोरे गोरे संतरे जेसे रसीले आम.. आइमीन तेरे बुब्सका दर्शन.. क्या मस्त हे.. उस दिन दबाया था मेने.. कीतने सोफ्ट हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) धिरेन अब आप कुछ ज्यादाही आगे बढ रहेहो.. तुम्हारी डीमांड बढतीही जा रहीहे.. मुजे बहुत सर्म आरही हे.. पता हे मुजे.. वो.. वो कारमे भी आप.. इनके साथ छेडछाड कर रहेथे..

धिरेन : (हसते) नीलु तो फोनपे थीडाना छेडछाड करुगा.. बस सीर्फ देखनाही तो हे.. प्लीज.. वरना तुमसे बात नही करुगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. प्लीज.. बहुत देर होगइ हे.. अभी मम्मी बुलायेगी.. मान जाओ प्ली..ज..

धिरेन : (जुठ मुठका मुह बीगाडते) ठीक हे.. रखदे फोन.. मुजे तुमसे बात नही करनी..

नीलम : अरे यार आपतो बात बातमे नाराज होते हो.. धिरेन प्लीज मुजे बहुत सर्म आ रही हे.. ठीक हे.. लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार ओर ये आखरी बार फीर आप कोइ डीमांन्ड नही करोगे.. मे फोन रख दुगी..

धिरेन : (हसते) ठीक हे.. फीर हम जब मीलेगे तब तुमसे बदला ले लुगा.. हें..हें..हें.. दीखादो.. अपना टीसर्ट ही नीकालदो.. बस.. फीर फोन रख देना..

नीलम : (सर्मसार होते) अब कोनसा बदला लेना हे.. आप बहुत नोटी हो.. मुजसे हर काम करवा लेते हो..

कहेते नीलम सर्मसार होते सामने फोन सेट करके रख देती हे ओर सरमाते हुअ‍े धीरेसे अपना टीसर्ट नीकालने लगती हे.. धिरेनकी अ‍ैसी डीमांडपे वोभी रोमांचीत ओर उतेजीत होने लगती हे.. ओर सच कहोतो धिरेनकी अ‍ैसी डीमान्ड उसे अच्छी भी लगती हे.. नीलमने पुरा टीसर्ट नीकाल दीया उसने ब्रा नही पहीनीथी तो उनके गोरे गीरे छोटे संतरे बहुा उछलते दीखने लगे ओर नीलमने उसपे अपने दोनो हाथ रख दीया फोर फोनमे देखकर सरमाती सरारतसे मुस्कराती रही..





धिरेन : (हसते) अरे नीलु हाथ हटालोनां.. प्लीज.. देखना वरना मीलोगी तब उसे मसल दुगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते) धिरेन.. आपभीनां.. (हाथ हटाते) बस.. अब देख लीयानां..? चलो मुजे नहाना हे फोन रखती हु..

धिरेन : नही.. थोडी देर अ‍ैसेही रहोनां.. नीलु तुम मोबाइलको थोडा नीचे करके नहालो.. मुजे देखना हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (जुठा गुसा करते) धिरेन.. अब आप कुछ ज्यादाही आगे बढ रहेहो चलो मे फोन रखती हु.. मम्मी बुला रही हे.. बाय..

कहेते नीलमने फटाफट फोन काट दीया ओर हसने लगी.. फीर फोन साइडमे रखकर पुरी नंगी होगइ ओर नहाने लगी.. तभी उनको कुछ याद आयातो सरमाते हसने लगी.. ओर फोनको सेट करके विडीयो रेकोडींग चालु विडीयो क्लीप बनाने लगी.. जब साबुन लगा रहीथी तब उनके बुब्सपे साबुन लगाते कुछ ज्यादाही मसलकर साफ करने लगी.. जैसे उनके बुब्सको ओर गोरा करनेकी कोसीस कर रहीहो..

तभी बहारसे रमाने दरवाजा बटखटाया तो नीलमने सुनलीया ओर गभराकर फोनको बंध करदीया ओर फटाफट नहाने लगी.. ओर नहाकर बहार आगइ.. बहार आतेही फोनको रखनेसे पहेले विडीयोकी वो क्लीप धिरेनको सेन्ड करदी.. ओर फोनसे डीलीट करदी.. फीर फोन अपनी जगाहपे रखदीया ओर अपने कपडे पहेनने लगी.. जब कपडे पहेन लीये तब उसने दरवाजा खोल दीया तो रुममे रमा आगइ..

आतेही बेडपे बैठकर नीलमको घुरने लगी.. तो अ‍ेक बारतो नीलमकीभी गांड फटने लगी.. ओर रमा उसे घुरते हुअ‍े वापस कीचनमे चली गइ.. तो नीलमने राहतकी सांसली.. ओर गाना गुनगुनाते अपने बालोको सवारने लगी.. जब बाल सवारके घुमी तभी सामने दरवाजेपे लता अपने दोनो हाथ अपनी कमरपे रखते नीलमको अ‍ेक नजरसे घुर रहीथी.. ओर अ‍ैसेही कमरपे हाथ रखते लता धीरेसे अंदर आगइ....

कनटीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०५/१

आतेही बेडपे बैठकर नीलमको घुरने लगी.. तो अ‍ेक बारतो नीलमकीभी गांड फटने लगी.. ओर रमा उसे घुरते हुअ‍े वापस कीचनमे चली गइ.. तो नीलमने राहतकी सांसली.. ओर गाना गुनगुनाते अपने बालोको सवारने लगी.. जब बाल सवारके घुमी तभी सामने दरवाजेपे लता अपने दोनो हाथ अपनी कमरपे रखते नीलमको अ‍ेक नजरसे घुर रहीथी.. ओर अ‍ैसेही कमरपे हाथ रखते लता धीरेसे अंदर आगइ....अब आगे

लता : क्यु महारानी.. आज नहानेमे इतनी देर कैसे लगादी..? ओर तुमने रुमका दरवाजा क्यु बंध कीयाथा..? आज कुछ ज्यादाही खुस लग रही हो..? कही धिरेनका फोन बोन तो नही आगया..?

नीलम : (थोडी गभराते) अरे नही नही.. दीदी.. वो..वो मुजे नहाकर सीधे कपडे बदलने थे तो.. दरवाजा बंध रखाथा.. आपतो पीछेही पड गइ हे..

भावना : (हसते अंदर आते) लता क्यु बच्चीको तंग कर रही हे.. दरवाजा बंध रखातो क्या हुआ..?

लता : (नीलमको घुरते) भाभी.. अब ये कोइ बच्ची वच्ची नही हे.. इनपे भी नइ नइ जवानी चडी हुइ हे.. आज कल ये कुछ ज्यादाही उछल कुद कर रही हे.. मुजे तो दालमे कुछ काला लग रहा हे.. क्यु नीलु..? सच बताना.. क्या धिरेनका फोन आया थानां..?

नीलम : (मायुस होते गभराते) नही.. छोटी मम्मी.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. दीदी खामखा मुजपे सक कर रही हे.. ना उनका फोन आया हे ओर मेरे पासतो फोन ली नही हे..

भावना : (सरपे हाथ घुमाते) चल कोइ बात नही.. बेटा इस उमरमेही तुजे खयाल रखना हे.. ओर सभी लडके अच्छे नही होते.. ओर तुजेतो अभी होस्टेलमे रहेना हे.. तो तुजे वहा अपना बहुत खयाल रखना पडेगा.. कही तेरा पैर बैर फीसल गया तो तेरी मम्मी कही मुह दिखाने लायक नही रहेगी.. समज गइनां..? चल खाना खाले.. फीर हमारी थोडी मदद भी करदे..

लता : (नीलमकी ओर घुरते) भाभी इनको ज्यादा सरपे मत चढाना.. इनपे नजर रखनी पडेगी.. आपको इनकी करतुतके बारेमे पता नही..

फीर तीनो ही बहार आजाती हे.. ओर सभी खाना खाने बैठ जाते हे.. तब नीलमकोभी अपनी गलतीका अहेसास होने लगा.. उसने धिरेनके साथ फोनपे कुछ ज्यादा देर तक बाते करलीथी.. धिरेनकी बातसे उनको बहुत कुछ उमीद जगीथी.. वो मनही मन धिरेनके साथ घर बसानेका सपना देखने लगी.. अबतो धिरेन नीलमके दिलो दिमागमे पुरी तराह हावी हो चुकाथा.. ओर उसे सीर्फ धिरेनही दीखाइ दे रहाथा..

तभी दुसरी ओर सुबह देवायत ओर राजीव अपने खेतोपे चले गयेथे.. तभी वहा रामुकाका भानु ओर लखनभी बैठे थे.. तभी ये दोनोभी वहा जाकर बैठ गये.. तो रामुकाका राजीवको देखते ही खुस होगये ओर उनके गले लग गये.. फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेका हाल चाल जाना.. ओर भानु लखनने भी राजीवके पैर छुलीये.. फीर भानु मालतीको आवाज देकर चाइके लीये कहेता हे.. ओर सभी वही खटीयापे बैठ जाते हे..

भानु : भाइ.. अब वो छोटुका प्लास्ट नीकलवाने जाना हे.. अब उनकाभी टाइम होगया हे.. बेचारा कबतक खटीया पे पडा रहेगा..

देवायत : भानु बस दो दीन ठहेरजा.. ये सब सादीका नीपट जाये तो तुमही उनको सहेरमे लेजाकर सबकुछ करवाले.. वरना वहाके डोक्टरको फोन करके पुछले तो सुधीरके पास जाकर ही इनका प्लास्टर नीकलवा देगे..

लखन : (हसते) भाइ वोतो ठीक होगया हे.. अबतो प्लास्टर होनेके बावजुद भी वो चलता हे.. इनमे कुछ नही होता.. यही सुधीभाइके वहा जाकरही नीकलवालो..

देवायत : लखन यहाभी सबको कहेदे सादीमे वही खानेके लीये आजाये..

भानु : (हसते) भाइ वोतो सबको केह दीया हे.. अबतो हमभी घरके सभी लोग सामको इधर आजायेगे..

हरीया : (हाथ जोडते आते) मालीक घरपेभी कुछ काम होतो कहेना.. मे अभी मंडप वालाको लेकर घरही जा रहा हु.. वहा सब कंपलीट करवा दुगा.. कुछ ओर काम होतो बताइअ‍े..

भानु : भाइ वो हलवाइ वालेको भी सामको उधर बुलाया हे.. कुछ सामान लेना हे.. तो जाना पडेगा..

देवायत : भानु तु रहेने दे वो सब रमेश देख लेगा.. मेने उनको बोल दिया हे.. ओर वो सुधीरभी सामको आ रहा हे.. मेने सबको केह दीया हे.. अब हमे कुछ कामही नही हे.. ओर वो पंडीतकोभी मंजुने केह दीया हे.. पुजाका सामानभी वोही लेकर आयेगा.. तो हमे कामही क्या हे.. ओर लोगभी कीतने हे.. सीर्फ गांवके लोग ओर हम घरके लोगही तो हे.. ओर हां.. तुजेभी तेरे गांवमे कीसीको कहेना होतो केह देना..

भानु : (हसते) नही भाइ.. सीर्फ दो लोगोको ही बोला हे.. वहा हे ही कौन मेरातो सबसे ज्यादा पहेचान वाले यहा हे.. जो आपनेभी उसे बोल दिया हे.. हें..हें..हें..

तभी मालती सबके लीये चाइ लेकर आगइ ओर देवायतको देते उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. तभी देवायतने नजरोसे राजीवकी ओर इसारा करदीया तो मालती चुपचाप सबको चाइ देकर नीकल गइ.. तबतक राजीव ओर रामुकाका सब पुरानी बाते याद करके अ‍ेक दुसरेके साथ हस हसके बाते कर रहेथे.. तभी देवायत खडे होकर छोटुके रुमकी ओर चला गया.. तो छोटु ओर रीटा वही बेठे थे..

तो देवायतको देखतेही रीटा सरमाकर हसने लगी.. ओर कीचनमे जाने लगी.. तभी देवायतने छोटुको कुछ पैसे दीये.. ओर यहा सुधीरसे प्लासटर नीकलवानेकी बात करली.. जीसे सुनकर छोटु ओर रीटा दोनोही खुस होगये.. तभी रीटा देवायतके लीये पानी लेकर आगइ ओर देवायतको पानी देते अपने दोंतोसे नीचेहे होंठ दबाते फीर अपनी जीभ अपने होठोपे फीराने लगी.. मानो वो देवायतको कुछ हिन्ट देना चाहती हो..

छोटु : मालीक.. अबतो में ठीक हो गया हुं.. सब काम कर सकता हुं.. तो मेरी बीवीभी अकेली बोर होजायेगी.. क्या येभी खेतोमे कामपे लग जाये..? मेरे काममे हाट बट जायेगा..

देवायत : देख छोटु.. अब ये तुम्हारा ही खेत हे.. यहा कीसीको कुछ पुछनेकी जरुरत नही हे.. तुजे जैसे ठीक लगे अ‍ैसा करना.. तुम दोनोकोही पगार मीलेगी.. अबतो तुम दोनोको यही रहेना हे.. ओर इस लडकेको भी गांवकी स्कुल खुलतेही उनमे दाखला दीलवा देना.. इसेभी कुछ पढा लीखा बनाओ..

रीटा : (सरमाते कातीलाना हसते) मालीक आपकी महेरबानीसे यहा बहुत अच्छा काम मील गया हे.. ओर मे खानाभी बहुत अच्छा बनाती हु.. (सरमाते डबल मीनींग) वो मालतीसे भी अच्छा.. हें..हें..हें.. तो कभी कभी मालतीकी तराह मुजेभी मौका दीजीये.. बस अ‍ेक बार मेरे हाथोका खाना खालीया.. तो फीर मुजसे ही खानेके लीये कहेगे..

देवायत : (रीटाकी सब बाते समज गया.. हसते) ठीक हे रीटा.. बस अ‍ेक बार घरपे सादी होजानेदे.. अ‍ेक बार तेराभी खाना खाउगा.. देखता हु तु कैसा खाना मुजे खीलाती हे..

छोटु : (नीर्दोस भावसे) मालीक रीटा ठीक केह रही हे.. ये बहुत अच्छा खाना बनाती हे.. अ‍ेक बार इसे मौका देकर तो देखलो.. आपको नीरास नही करेगी.. हें..हें..हें..

रीटा : (कातीलाना नजरोसे हसते) देखा मालीक.. अबतो इन्होने भी केह दीया हे.. तो मुजे कभीभी बुला लीजीयेगा.. मे आपकी सेवामे हाजीर होजाउगी.. हें..हें..हें..

फीर देवायत रीटाके हाथोमें पैसा देकर वहासे नीकलने लगा तो रीटा देवायतकी ओर तीरछी नजरसे कामुक स्माइल करती रही.. वो यहा रहेकर अक्सर जमीला ओर मालतीको देवायतकी ओफीसमे जाते देखती रहेती.. ओर कइ कइ बारतो दोनोकी चीखे भी सुनलेती तब वो समज गइकी दोनोही मालीकसे चुदवाती हे..

ओर उपरसे छोटुने भी पैर टुटनेकी वजहसे रीटाको दो महीनोसे चोदा नही था.. तबसे रीटाकी प्यास बढ गइ थी.. ओर देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकी थी.. इसीलीये आज मौका मीलतेही देवायतको इनडारेक्टली नीमंत्रण दे चुकीथी..

देवायत वापस आता उनसे पहेलेही लखन खेतोपे काम करने ट्रेक्टर चलाते दुर चला गयाथा.. तो भानु राजीव ओर रामुकाका अभीभी बातोमे मसगुल थे.. ओर देवायत चलकर खेतोकी ओर चला गया ओर सभी जगहका जायजा लेने लगा.. सभी मजदुरो खेतोपे काम कर रहेथे तो देवायतको देखतेही सब खडे होकर उनको जुकते प्रणाम करते रहे.. ओर देवायत ट्युबवेलकी रुमके पाससे गुजरा..

तो ट्रेक्टर वही बहार पडा हुआ मीला जो अभी लखन चला रहाथा.. वहा आसपास कोइ दिख नही रहाथा.. ओर रुमके अंदरसे कुछ आवाजे आ रही थी.. तो देवायतको कुछ आसंकाये हुइ.. ओर वो धीरेसे रुमके पीछे चला गया.. ओर पीछेकी खीडकीसे अंदर जांकने लगा.. तो अंदरका नजारा देखतेही चोंक गया.. क्युकी अंदर लखन कीसी मजदुरकी जवान लडकीके उपर चडकर उनको चोद रहाथा.. ओर वो लडकीभी हस हसके अपनी कमर उछालते लखनसे मजेसे चुदवा रहीथी..





जीसे देखकर देवायतकी हसी नीकल गइ.. आखीर लखनभी तो उनकाही खुनथा.. तो वो कैसे इन सब चीजोसे बाकात रहेता..? ओर यहीतो जवानी हे.. इसी जवानीमे तो सब मोज मस्ती करनी होती हे.. ओर खुदके भी अ‍ैसी कइ ओरते ओर लडकीयोसे नाजायज रीस्ते हे.. वोभी जमीला ओर मालतीको अकस्र अपनी ओफीसमे बुलाकर उनकी चुदाइ कर लेताथा.. ओर अभी वो अ‍ेक नइ चुतका इन्तजाम करके आयाथा..

कइ मजदुरकी बीवीया जो सामनेसे आतीथी उनकोभी देवायत चोद लेता था.. गांवमेभी चारु रश्मीके अलावा जीनकी गोद भराइ नही होतीथी अ‍ैसी कइ ओरतोकी चुदाइ करके उनकी गोद भर चुकाथा.. जैसे देवायतका जन्मही इन सब चीजोके लीये हुआ हो.. तो वो लखनको इन सब चीजोके लीये कैसे मना करता..? यही सब सोचकर वो चुपचाप मुस्कुराते हुअ‍े वापस राजीव भानुके पास आकर बैठ गया..

फीर देवायतने सुधीरको फोन करके बात करली.. तो सुधीरने छोटुको क्लीनीकपे बुला लीया.. तो भानु छोटुको कारमे लेकर सुधीरके पास चला गया.. ओर सुधीनने अ‍ेक्सरेकी कोइ जरुरत नही हे कहेके छोटुका प्लास्टर काट दीया.. ओर आधे घंटेके बाद भानु छोटुको लेकर वापस खेतोपे आगया तब छोटुभी खुस था.. ओर देवायतके पांव पडते अपने रुममे चला गया.. तो रीटा ओर बच्चेभी खुस होगये.. ओर भानुने पुरे परीवारको खानेका न्योता भी देदीया.. दो पहोरको जब घर जानेका टाइम हुआ तब देवायतने भानुको कहा..

देवायत : (कारकी चाबी भानुको देते) भानु.. तु अब मेरी बडी कारही लेजा.. तेरी कार मुजे देदे ताकी घरके सभी लोग ओर सामान इनमे आजायेगे..

भानु : (की अ‍ेक्सेन्ज करते) हां भाइ यही ठीक रहेगा.. मे सामको चार बजे सबको लेकर वहा पहोंच जाउगा..

फीर भानु देवायतकी बडी कार लेकर चला गया.. ओर देवायतभी राजीवको लेकर वापस हवेलीपे आ गया.. वहा खुली हवामे बेठकर रामुकाकासे बाते करते राजीवभी खुस लग रहाथा.. फीर दोनोही फ्रेस होकर होलमे बैठ गये.. तब वंदना ओर चंपाभाभीके अलावा गांवकी सभी ओरते अपने घर जा चुकीथी.. फीर सभी लोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब आज वंदना भी बार बार देवायतकी ओर नजरे चुराते खाना खा रही थी.. जब दोनोकी आंख मीलती तो वंदना सरमाते मुस्कराने लगती..

तो सृतीभी आज देवायतसे काफी सरमा रहीथी.. लखनभी खाना खाते रजीयाकी ओर चोर नजरसे देख लेताथा.. सबके दिलमे कोइना कोइ हलचल मच रहीथी.. सीर्फ दो लोगही सब जानते हुअ‍ेभी आरामसे मजा लेते खाना खा रहेथे.. अ‍ेकथी मंजु ओर अब दुसरी पुनम.. तो सृतीभी काफी कुछ जानती थी.. सभी खाना खाकर थोडा आराम करने अपने अपने रुममे चले गये.. तो पुनमने सृतीको अपने साथ बुला लीया..

तो सृती वंदना पुनमके साथ चली गइ.. तो नीर्मलाभी भुमीकाके रुममे आराम करने चली गइ.. राजीवको नीर्मलाने दवाइ पीलादीथी तो वो अपने रुममे जाकर सो गया.. ओर मंजु चंदा देवायतके साथ अपने रुममे चली गइ.. तब चंपाभाभी रजीया ओर दयाने भी खाना खाकर सब काम समेट लीया.. ओर तीनो दया वाले रुममे आराम करने चली गइ.. देवायत रुममे जातेही सो गया..

तो वंदना पुनमको वेक्स बेक्स लगाकर सही करने लगी.. ओर सृती दोनोसे बेडपे लेटकर बाते करती रही.. इधर भुमीके रुममे नीर्मलाने आतेही दरवाजा बंध करलीया ओर भुमीके पास बेडपे लेट गइ.. तो भुमीने हसते हुअ‍े नीर्मलाके मुहकी ओर करवट लेली.. तो नीर्मला सरमाकर हसने लगी.. ओर भुमीने उनकी कमरमे हाथ डालकर अपने तनसे चीपका लीया.. फीर नीर्मलाको अपनी बाहोमे भरलीया..

नीर्मला : (हसते) कमीनी अबतो ये आदते छोड.. हमारी लडकीयोकी भी सादी होगइ हे.. तु कीतनी ठरकी होगइ हे.. अब तुभी अ‍ेक लंडका इन्तजाम करले.. ताकी तुजे ठंडी करता रहे..

भुमीका : (हसते) नही नीमु.. हम दोनोने जींदगीभर अ‍ेक दुसरेका साथ देनेका वादा कीया था.. मुजे कीसीभी लंडकी जरुरत नही हे.. मे तुमसे मीलकरही संतुस्ट होजाती हु..

नीर्मला : (हसते) आइनो.. भुमी.. बस अबतो हम दोनोको अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेका खयाल रखना पडेगा..

भुमीका : (मुस्कुराते) क्यु..? क्या हमारा भाइ तुजे अब नही चोदता..? नीमु वो ठीकतो हेनां..? ओर हमारा देवुभीतो हे.. क्या उसे अब नही मीलती..?

नीर्मला : (नीरास होते) नही भुमी.. सब बीखर गया.. राजीवको ब्रेइनमे स्ट्रोक आया हे.. उनको अब ट्रेस नही लेना.. अगर मुजे चोदेगा तो उनका रक्तचाप बढ जायेगा.. ओर वो उनके लीये घातक होगा.. तु समज गइनां.. अब राजीव मेरे लीये कोइ कामका नही रहा..

जींदगीमे उसने मेरा खुब साथ नीभाया हे.. भुमी.. मेने उनके साथ सादी करली.. तबसे आज तक उन्होने मुजे कोइ सवाल नही पुछा.. बस वो मुजे सीर्फ खुस रखना ही जानते हे.. कभी कभी देवुसे मीलती थी तो मुजे राजीवको धोखा देनेका दुख होता था..

भुमाका : नीमु.. अ‍ेक बात कहु..? तुजे नही लगता तुमने किशनको सादीके लीये ना कहेते बहुतही जल्द बाजीमे फैसला लीया हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. भुमी.. मेने बहुत बडी गलती कीहे.. पर क्या करती..? विमलाकी बातोने मेरा दिमागही सुन.. करदीया था.. मे कुछ सोचही नही पा रहीथी.. ओर उपरसे जवानीकी ये तनकी आग.. मे किशनके बगैर बहुतही तडपी हु.. जब सारी जानकारीया मुज तक पहोंची तबतक बहुत देर हो चुकीथी..

तबतक मे ओर राजीव फीजीकल रीलेशनमे आ चुकेथे.. जब राजीवने मुजे प्रेगनेन्ट करदी तब मेरे पेटमे उनकी बेटी यानी मेरी भावु पल रहीथी.. तो मेने राजीवसे सादी करली.. अब तुही बता मे क्या करती..? तु बता तुम दोनो कीसीको क्यु नही मीले..?

भुमीका : (मुस्कुराते) नीमु.. तुमतो जानती हे.. वो विरजीने मेरे साथ क्या कीया.. फीर मे सबको क्या मुह दीखाती.. मुजे बहुत सरम आ रहीथी.. ओर नरेशभी नही चाहताथा की अब हम कीसीसे मीले.. बस सीर्फ किशन सहेर आता तब मीलताथा.. ओर राखीके दिन मुजे अचुक मीलता.. वो राखी बंधवाने आजाता..

नीर्मला : (मुस्कुराते) कीतना अजीब हेनां..? खुदकी बहेनको बीवी बनालीया.. ओर मुहबोली बहेनके साथ बहेनका हर रीस्ता नीभाया.. मे कीशनको कभी समजही नही पाइ.. विमलासे सादी करकेभी वो मुजे बहुत चाहता था.. जब बाबाने श्रापका नीवारण करदीया तब मुजसे फीरसे अपनानेके लीये ओर सादी करनेके लीये कहेने आयाथा.. तब मेनेही उसे मना करदीया..

भुमीका : (हसते) तो क्या प्रोबलेम थी.. तु करलेती किशनसे सादी..

नीर्मला : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. भुमी.. क्युकी तबतक मे ओर राजीव रीलेशनमे आगये थे.. हम दोनो बहुत आगे बढ चुके थे.. तब हम दोनोके बीच भाइ बहेनका रीस्ता ना रहेके बीना सादीही अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जी रहेथे.. भुमी.. उन्होने मेरी हर जरुरतको पुरा कीया..

फीर चाहे घर चलानेकी बातहो या ये तनकी आंग मीटानेकी बातहो.. राजीवने मुस्कील वक्तमे मेरा खुब साथ दीया.. तो मे उनको धोखा देना नही चाहती थी.. तो किशन ओर मुजमे क्या फर्क रेह जाता.. मेरा राजीव.. ओर अभी भी मेरा साथ दे रहा हे.. आजभी मुजे इतना प्यार करता हे..

भुमीका : नीमु.. तुम बहोत नसीबवाली हो.. जो अभी तक राजीवके साथ हो.. मेरा नरेशतो मुजे सृती बाराह सालकी थी तबही मुजे छोडके चला गया.. तब किशनने मेरा खुब साथ दीया.. उन्होनेही सृतीको पढाया लीखाया.. हमारे घर चलानेका खर्चा देता रहा.. मेरी सृतीको उन्होने ही डोक्टर बनाया.. ओर अब हमारा खयाल हमारा देवु रखता हे.. बीलकुल हमारे किशनपे गया हे.. बस अब मेरी सृतीकी सादी होजाये.. तो गंगा नहाये..

नीर्मला : (कुछ सोचते) भुमी अगर तुम बुरा ना मानोतो अ‍ेक बात कहु..? ये लोग अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. इन लोगोमे तो दुसरी तीसरी भी सादी कर सकते हे.. तो फीर.. सृतीके लीये हमारे देवुके लीये कुछ सोचनां..? वैसेभी देवु तुम दोनोका खयालतो रखही रहा हे.. ओर सृतीको कहा इधर रहेना हे.. वहाभी उनकी क्लीनीक हे.. तो देवुसे सादी करके सृती वही रहेगी.. ओर उनका घरभी बंध जायेगा.. क्या कहेती हो..? कहोतो मे मंजुसे बात करु..?

भुमीका : (सरमाते हसते धीरेसे) नीमु.. मे तुमसे यही बात कहेने वालीथी.. लेकीन सोचतीथी तुमसे कैसे कहु..? सुन.. जब चार दिन पहेले हम सब चंदाकी सादीमे गयेथे.. तब खुद बाबाने ये बात मंजुको कहेदी.. की सृती इस घरकी बहु बनेगी.. तो मंजुने खुद मेरे पास इस बातका प्रस्ताव रखा.. ओर मेने उसे हां केह दीया.. नीमु.. तेरी बात सच होगइ.. मेरी सृतीभी इस घरकी बहु बनेगी.. मेरे देवुकी रानी..

नीर्मला : (खुसीसे भुमीको बाहोमे भीचते) कमीनी.. तो अबतक तुमने मुजे कहा क्यु नही..? भुमी.. मे बहुत खुस हु.. हमारी सृतीकाभी घर बस जायेगा.. क्या इस बारेमे तुमने देवुसे बात की..?

भुमीका : (हसते) नही.. अभी उनकोतो कुछ पताभी नही हे.. ओर तुमभी खयाल रखना अभी कीसीको ये बात मालुम नही हे.. मंजुने कहा हे.. सबको सरप्राइज देनी हे.. मे सोच रहीहु अगर मामला यही आगे बढेतो दोनोकी सगाइ इधर ही कर देना चाहती हु.. बस अभी इस बातपे सृती ओर देवुको खुद आगे बढने दो.. मेने ओर मंजुने मीलकर कुछ प्लान कीया हे.. जब दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे तब हम दोनोकी सादी कर देगे.. बोलो.. क्या कहेतीहो तुम..?

नीर्मला : (सरमाते हसते) हां तो सहीतो हेनां.. मेरी मंजु इस मामलेमे बहुतही समजदार हे.. भुमी तुम इस बातपे आगे बढना.. आज तुमने मुजे बहुत बडी सरप्राइज के साथ खुसखबर देदी हे..

भुमीका : (सरारतसे मुस्कराते) तो चल इसी खुसीमे कुछ होजाये.. नीमु कीतने दिन हो गये हम नही मीले.. चलना.. मुजे अ‍ेक बार ठंडी करदे.. फीर मे तुजे कर दुगी..

नीर्मला : (सरमाते) कमीनी तुजेतो कोइना कोइ बहाना चाहीये.. वहा आती हु तबभी मुजे नही छोडती..

भुमीका : (हसते) तो कमीनी इस उमरमे मे कहा लंड ढुंढने नीकलु.. हें..हें..हें.. तुही तो अ‍ेक सहारा हे..

नीर्मला : (हसते) कहोतो देवुको बुलालु.. हें..हें..हें.. वो इतना सक्षमहे की हम दोनोको ठंडी कर देगे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) कमीनी कुछतो सरम कर.. वो मेरा भतीजा हे.. ओर तेरा दामाद हे.. क्या तु उसे अबभी चुदवाती हे..? बात करती हे..

नीर्मला : (बातको वही छोडते) चल.. कपडे नीकाल.. कुती तुने तो बातोसे ही मुजे गरम करदीया.. हें..हें..हें..

भुमीका : (अपनी सारी नीकालते) बातोसे.. या.. देवुकी बातोसे.. कमीनी सच बताना.. क्या अबभी उनसे चुदवाती हेनां..?

नीर्मला : (अपने कपडे नीकालते) कमीनी दामाद हे वो मेरा.. अगर चुदवाभी लीया तो मेरा हक हे उनपे.. हमने भी घरके मंदिरके सामने आपसमे गांधर्व विवाह कीया हे..





दोनोही बेडपे बैठकर अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगी.. फीर भुमीका ओर नीर्मला दोनोही कपडे नीकालकर सीक्स नाइन पोजीसनमे होजाती हे.. ओर अ‍ेक दुसरीकी चुतको छेडने लगती हे तब कुछही देरमे दोनोही सीसकारीया करते अ‍ेक दुसरेकी चुतमे जीभ घुसाके चुतके दानेको छेडने लगी.. नीर्मला अब भुमीकासे देवुके साथ अपने रीलेशन छुपाना चाहती थी.. तो दुसरी तरफ भुमीकाभी देवुके बारेमे ज्यादा बात करना नही चाहती थी.. फीर अचानक दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने बैठ गइ..





ओर अ‍ेक दुसरोकी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हिलाते अंदर बहार करने लगी.. तब कुछही देरमे भुमीकाकी चुतने जवाब दे दीया.. तो नीर्मलाकी चुतसेभी अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर दोनो जडकर सांत होगइ.. फीर दोनो नंगीही बाथरुममे चली गइ.. तब अंदर जातेही भुमीकाने नीर्मलाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर नीर्मलाके होंठ चुमने लगी.. तब नीर्मला भी भुमीके होंठ चुमते उनका साथ देने लगी..

भुमीका : (लडखडाती आवाजमें) नीमु.. अब मुजसे अकेलापन नही सहा जाता.. चलना मेरे साथ रहेने आजानां.. वहा घरपे मेरा बेल्ड वाला डोल्डोतो हे.. हम अ‍ेक दुसरेको चोदकर ठंडी करते रहेगे..

नीर्मला : (चुमते) भुमी.. मेरीभी वोही हालत हे.. लेकीन मे राजीवको छोडकर नही आ सकती.. हम हमेसाकी तराह हप्ते दस दीनमे मीलती रहेगेनां.. अब लंडके बीना बहुत मुस्कील लग रहा हे.. आदतजो पड गइ हे..

भुमीका : (धीरेसे कानमे) नीमु.. मेरी मान.. तुम हमारे देवुको फीरसे सेट करले.. क्यु उनसे रीलेशन खतम करलीये.. पहेलेभी उनसे तुम चुदवा चुकी हो.. कमसे कम तेरे नसीबमे तो लंड होगा.. क्या कहेती हो..?

नीर्मला : (उतेजीत होकर होंठ चुमते) नही.. अब दामाद हे वो मेरा.. मेरा दिल नही मानता.. तबकी बात कुछ ओर थी.. क्या तेरा दिल करता हे..? तो तुमही उसे सेट करले.. वो तुम मां बेटी दोनोको खुस रखेगा.. भुमी.. कितना दमदार लंड हे उनका.. बस अ‍ेक बार अपनी चुतमे लेगी तो उनकी दिवानी होजायेगी.. किशनसेभी बडा ओर मोटा हे.. मे कइ बार उसे अपनी चुतमे ले चुकी हु.. मानजा तु..

भुमीका : (अलग होते सरमाते) नही.. नीमु.. मेरा भतीजा हे वो.. ओर अब उपरसे मेराभी दामाद होजायेगा.. पहेले कहा होतातो कुछ सोचती.. तुम ठीक केह रही हो.. हम दोनो लंडके बीना नही रेह सकती..

दोनोही आज अ‍ेक दुसरेकी दिलकी बाते करहेनेसे रेह गइ.. ओर अपनी अपनी चुतको साफ करके बहार आगइ.. फीर दोनोने अपने कपडे पहेन लीये.. ओर अ‍ेक दुसरेके साथ चीपककर बेडपे लेट गइ.. लेकीन दोनोके दिमागमे देवु घुम रहाथा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बातको अ‍ेक दुसरेसे छीपा रहीथी.. नीर्मलाकी आंख लग गइ.. लेकीन भुमीके आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. ओर वो अ‍ेक बार फीर सोचते अतीतमे चली गइ....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०५/२

(थोठा अतीत में)

उसे वो दिन अच्छी तराह याद था.. जब नरेशको चार दिनकी छुटी मील गइ.. उसने घर आकर भुमीको बतादीया.. फीर अपने घरपेभी अकेले आनेकी बात करली ओर किशनकोभी भुमीको घर लेजानेकी बात करलेता हे.. ओर आखीर वो दिन आही गया.. राखीके अगले दिन नरेशको दो पहोरको जानाथा.. ओर किशन सुबह ही अपनी कार लेकर चला गया.. आज भुमीने जल्दी खाना बनालीया था..

फीर तीनोने साथ बैठकर खाना खाया तब नरेशने अ‍ेक बार फीर किशनको भुमी का खयाल रखनेको कहा.. उनको सबसे ज्यादा किशनपे विस्वास था.. लेकीन उनको क्या पताथाकी उनकी खुदकी पत्नी इस विस्वासको तार तार करने वाली हे.. जब तीनोने खाना खालीया तब भुमीकाने नरेशके सब कपडे अ‍ेक बेगमे पेक करलीये थे.. नरेशने बेग हाथमे लेली तो भुमीका ओर किशन नरेशको स्टेसन छोडने कारमे चले गये..

किशन ड्राइव कर रहाथा ओर नरेश आगे बेठाथा.. दोनोही बाते कर रहेथे तो भुमी पीछली सीटमे बीचमे बेठकर दोनोकी बाते सुन रहीथी.. ओर बीच बीचमे सेन्ट्रल मीररसे देवायतकी ओर अजीब नजरोसे नजरे चुराते देख लेती थी.. जब किशनभी मीररमे देखता तब दोनोकी आंखे मील जाती तो भुमीका किशनकी ओर कामुक स्माइल कर देती थी.. तो कुछ पलतो किशनको भी आज थोडा अजीब लगा..

किशनके साथ बिन्दास्त बाते करनेवाली भुमीका आज किशनसे नजरे चुराते देख रही थी.. उनके दिलकी धडकन आज बहुतही बढ गइ थी.. दिलके अ‍ेक कोनेमे आज उसे नरेशको धोखा देनेका डर भी था.. फीरभी वो आज किशनके साथ अपना नया रीस्ता बनानेका मन बना चुकी थी.. ओर इसके लीये वो कइ दिनोसे सही मौकेकी तलासमे थी.. ओर इस दिनका इन्तजार कर रही थी.. जो मौका आज उसे मील ही गया..

नरेश : (पीछे देखकर) भुमी.. मे आते वक्त तुजे या किशनको फोन करदुगा.. तो किशनको कहेना तुजे छोडने आजायेगा.. ओर विमला भाभीको भी मेरा नमस्ते कहेना.. हो सकेतो उनकोभी साथ लेआना..

भुमीका : (हसते) अरे हां बाबा.. उसे मे केह दुगी.. देखती हु वो आती हेकी नही.. वो उनका बच्चा भी तो छोटा हे.. सादीके बाद सीर्फ अ‍ेक बारही हमारे घर आइ हे.. भाइ उनको कभी हमारे घर लाते ही नही..

किशन : (हसते) नरेश.. वो देवुका स्कुलमे अभी अभी दाखला दीलवाया हे.. देखते हे वो क्या कहेती हे.. अगर वो आना चाहे तो मे जरुर साथ लाउगा..

तीनोही बाते करते स्टेसन पहोंच गये जबतक नरेश ट्रेनमे नही बैठ गया तबतक भुमी ओर किशन वही खडे रहेके नरेशसे बाते करते रहे.. जब नरेश ट्रेनमे बैठकर चला गया तब किशन ओर भुमी स्टेशनसे बहार नीकल गये.. तो भुमीकी दिलकी धडकन तेज होने लगी.. वो किशनसे कैसे बात करे इसके बारेमे सोचने लगी.. ओर दोनो चुपचाप बीना बोलेही कारके पास आगये.. ओर भुमी बीना कुछ कहे किशनके साथ उनकी बगलमे बैठ गइ.. ओर किशनने कारको नरेशके घरकी ओर जानेदी..

किशन : भुमी.. तुमने अपने कपडे पेक करलीये हेनां..? हम सीधे कपडे लेकर मेरे गांव नीकल जायेगे..

भुमीका : (सरमाते हींमत करते) किशन.. मे.. मे.. वो.. उधर तुम्हारे साथ नही आ रही..

किशन : (आस्चर्यसे भुमीकी ओर देखते) लेकीन क्यु..? अभी तो नरेशके सामने केह रही थी तुम आ रही हो.. अचानक क्या हो गया..?

भुमीका : (सर जुकाते नजरे चुराते) वो.. वो.. मेने नरेशसे जुठ बोला था.. तुम पहेले घर चलो.. फीर हम बात करते हे.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात कहेनी हे..

किशन : (भुमीकाकी ओर देखते) भुमी.. क्या बात हे.. कुछ हुआ हे क्या..? कही नरेशके साथ कुछ अन बनतो नही होगइ..? हंम..? नही आनाथा तो मुजे इधर बुलायाही क्यु..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही किशन.. वो बात नही हे.. तुम घर चलो वहा हम आरामसे बात करते हे.. वैसे कल राखीका दिनभी हे.. तो आपकोतो वैसेभी आनाथा.. तो अ‍ेक दिन पहेलेही सही.. (तीरजी नजरोसे हसते) भाइ.. कल राखी हे.. आप मुजे क्या गीफ्ट देने वाले हो..? हें..हें..हें..

किशन : (हसते) अरे तुम कहा मुजसे गीफ्ट लेती हो.. मेतो तु जोभी कहे देनेके लीये तैयार हु.. लेकीन तुम मांगती भी नही हो.. हर बार मना कर देती हो.. भुमी.. तुम अ‍ैसा क्यु करती हो..? तुम्हारा भाइ तुजे सब कुछ देनेको तैयार हे.. लुटलो मुजे हें..हें..हें..

भुमीका : (अपनी बात बडी सीफततासे आगे बढाते हसते) भाइ.. इस बार मे राखीकी गीफ्ट मांग लुंगी.. देखती हु आप मुजे गीफ्ट देपाते हो की नही.. अगर नही दे पाये तो मे जींदगीभर आपसे कोइ गीफ्ट नही लुगी.. आइ प्रोमीस..

किशन : (आस्चर्यसे भुमीकी ओर देखते) भुमी.. अ‍ैसा कोनसा गीफ्ट हे जो तुम अ‍ैसा बोल रही हो..? क्या तुजे अपने भाइपे इतनाभी यकीन नही हे..? मेरी जानभी मांगले.. मे उंह.. तक नही करुगा.. बोल क्या चाहीये तुजे..?

भुमीका : (आंखमे आंसुके साथ किशनका हाथ चुमते) भाइ.. मत करो जानकी बात.. तुम्ही तो मेरा सबकुछ हो.. आपही मेरी जान हो.. ओर अ‍ैसी कोइ गीफ्ट नही हे.. जो आप दे ना सको.. आप घर चलीये.. मे आपको सबकुछ बताती हु..

नरेशका अ‍ेक बडा भाइभी था जो गांवमे उनकी माताके साथ रहेता था.. उनके पीताजीने तबही बटवारा करदीया था जब वो जीन्दा थे.. गांवमेभी उनकी बहुत सारी खेतीबाडीकी जमीन थी.. नरेश सहेरमे रहेना चाहता था.. लेकीन उनके बडेभाइको सहेरकी हवेलीपे नरेशका कब्जा कर लेनेका डर था.. तब खुद नरेशने गांवकी सारी जमीन ओर गांवका मकान उनके बडे भाइके नाम करदेनेको कहा..

तो उनका बडाभाइ ओर उनकी भाभी बहुतही खुस होगये.. ओर आसानीसे हवेली नरेशको देने राजी होगये.. इसीलीये ये हवेली उनके पीताजीने नरेशके नाम करदी.. ओर खेतीकी जमीन उनके बडे भाइको देदी.. तैय हुआकी नरेशके माता पीता जबतक जीन्दा रहेगे तब उनकी सारी जीम्वेवारी उनके भाइकी होगी ओर वो उन्हीके साथ रहेगे.. ये सब बाते सबकी रजा मंदीसे तैय हुइ.. तबसे नरेश यहा अकेला रहेता हे..

किशन ओर भुमीका बाते करते भुमीके घर आगये.. ये घर नरेशके पुर्खोने बनवाया था.. बहारसे अ‍ेक हवेली जैसा लग रहाथा.. लेकीन नरेशने अंदरसे बहुतही आधुनीक बंगलेकी तराह सजाया हुआ था.. वो बहुत बडी जगाह थी.. तकरीबन २५०० मीटर.. मकानतो सीर्फ जमीनके चोथाइ भागसेभी कम जमीनपे था.. बाकी सब जमीन खुली पडीथी.. ओर चारो ओर कंम्पाउन्ड वोलके साथ अ‍ेक बडा पुराना दरवाजा भी था..

जो सीधा सहेरके मेइन रोडपे ही खुलता था.. ओर मेइन रोडकी वजहसे ये हवेलीके दाम आसमानको छु रहाथा.. जब नरेशने भुमीसे सादी करली.. ओर सृतीके जन्मके बाद बीमार रहेने लगा तबही नरेशने ये हवेली भुमीके नाम करदीथी.. भुमी ओर किशन दोनोही कार लेकर अंदर आगये.. ओर भुमीने घरका ताला खोल दीया ओर दोनो अंदर चले गये.. तब भुमीके दिलकी धडकन ओर तेज होगइ.. ओर दोनो सोफेपे बैठ गये..

भुमीका : (खडी होकर) भाइ आप बैठो मे पानी लेकर आती हु.. फीर हम दोनोके लीये मस्त चाइ बनाती हु..

किशन : (मुस्कुराते) भुमी रहेने दे.. अभी अभी तो खाना खाया हे सीर्फ पानी ही पीलादे..

भुमीका : (पानी लेकर आते) भाइ.. थोडी बनाने दोनां.. आज मेराभी चाइ पीनेका दिल कर रहा हे..

किशन : (पानी पीकर हसते) ठीक हे तो थोडी ही बनाना..

तब भुमीका खाली ग्लास लेकर हसते हुअ‍े चली गइ ओर फटाफट चाइ बनाने लगी.. वो चाइ बनाते किशनके साथ कैसे बात करे उनके बारेमे सोचती रही.. तभी चाइ उबलने लगी तब भुमी सोचकी तंद्गासे बहार आगइ ओर दो कप चाइ लेकर होलमे आगइ.. फीर किशनके साथ आज उनसे थोडी सटकर नजदीक बैठ गइ ओर किशनको अ‍ेक चाइका कप पकडा दीया तब किशन चाइकी चुस्की लेते भुमीकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखता रहा..

किशन : भुमी.. तुम मुजे कुछ कहेने वाली थी.. बता क्या प्रोबलेम हे.. तु मेरे घर क्यु नही आ रही..?

भुमीका : (चाइ पीते नजरे चुराते) भाइ.. मुजे कल क्या गीफ्ट दोगे..? क्या मे जो मांगु मुजे दोंगे..?

किशन : (चाइ पीते हसते) अरे भुमी.. ये क्या बात हुइ.. घर आनेका ओर गीफ्टका आपसमे क्या वास्ता..? कीतने दिनोके बादतो तुम गीफ्ट मांग रही हो.. वरना मुजे राखीके दिन अ‍ैसे ही खाना खीलाते वापस भेज देती हो.. बोल क्या चाहीये तुजे..? तैरा भाइ तुजे प्रोमीस करता हे.. जो तुम मांगोगी वोही मीलेगा.. बोल कल तुजे क्या गीफ्ट चाहीये..? आइ प्रोमीस तेरा भाइ तुजे मना नही करेगा..

भुमीका : (चाइका कप साइडमे रखते नजरे जुकाकर सरमाते धीरेसे) भाइ.. कल.. गीफ्टमे.. वो.. वो.. बस.. आपसे.. मुजे अ‍ेक.. बच्चा चाहीये.. भर दीजीये मेरी कोख.. बस मे गीफ्टमे आपसे सीर्फ यही मांगती हु..

किशेन : (चोंकते थोडे गुसेमे उची आवाजमें) भुमी.. तुम पागल होगइ हो..? ये क्या पागलपन हे..? कोइ भाइसे अ‍ैसी गीफ्ट मांगते हे..? पागल कहीकी.., तुजे पताभी हे तुमने मुजसे क्या मांगा हे..? इसका मतलब भी जानती हो..? मे ये काम कैसे कर सकता हु..? तेरा दिमाग खराब हो गयाहे क्या..?

भुमीका अपने घुटनोपे दोनो हाथ टीकाते दोनो हथेलीमे अपने चहेरेको छुपाकर फुटफुटकर रोने लगती हे.. ओर किशन उसे रोते हुअ‍े देखता ही रहा.. भुमीका काफी देर रोती रही.. तब किशनका गुसा थोडा कम होगया.. ओर वो हीचकीचाते भुमीके पीठमे हाथ रख देता हे.. ओर उनकी पीठ सहेलाने लगा.. तभी भुमीका किशनको बैठेही लीपट गइ ओर उनके कंधेपे सर रखते काफी देर तक रोती रही.. किशन अबभी उनकी पीठको सहेलाता रहा..

किशन : भुमी.. बसभी करो.. अब रोना बंध करो.. कीतना रोयेगी..? देख रोते रोते क्या हालत होगइ हे तेरी.. कोइ अ‍ैसी नादानी थोडीना करता हे..? कुछ ओर मांगले.. मेरी जान मांगले.. मेरी सारी प्रोपर्टी मांगले.. मे तुजे मना नही करुगा..

भुमीका : (अबभी अ‍ैसे रोते) भाइ सोरी.. मुजे माफ करदो.. अब मुजे कुछ भी नही चाहीये.. सोरी..

किशन : (आंख गीली करते) भुमी.. क्यु..की अ‍ैसी नादानी..? तुमतो मेरी समजदार बहेन हो.. बस अ‍ेक हम दोनोका रीस्ताही तो पवित्र रहा हे.. क्यु हमारे रीस्तेको तार तार करनेपे तुली हो..? ओर तेरे मनमे ये सोच आइभी तो कैसे..? क्या कीसीने तुजे कुछ कहा हे..? अरे बच्चा नही हो रहाहे तो नरेशका अच्छेसे इलाज करवाओ.. ओर उस बाबाने भीतो तुजे दवाइ देदी थी.. बस सीर्फ छे महीने तक तो इन्तजार करना हे..

भुमीका : (किशनकी बाहोसे अलग होते अपने आंसु पोछते) भाइ.. उस दिन मेने जुठ बोलाथा.. बाबाने मुजे कोइ दवाइ नही दी.. जब आप दोनो आश्रममे घुम रहेथे मे ओर बाबा हम दोनोही अकेले बैठे थे तब उसने मुजे साफ साफ केह दीयाकी नरेश मुजे बच्चा नही दे सकता.. ओर उसने मुजसे अ‍ेक सचाइ ओर बतादी.. इसीलीये मेने ये कदम उठा लीया.. भाइ आइ अ‍ेम सोरी..

किशन : (आस्चर्यसे देखते) भुमी.. उस दिन तुमने जुठ कहाथा..? तो फीर बाबाके साथ तुम्हारी क्या बाते हुइ..? क्या इसके बारेमे नरेशको कुछ पता हे..? भुमी.. मुजे सब बाते बता.. उस दिन बाबाने तुमसे क्या क्या कहा हे..

भुमीका : (सर जुकाते धीरेसे) भाइ.. उस दिन जब आप दोनो बहार घुम रहेथे तब बाबाने मुजे सब सचाइ बतादी.. की.. की.. नरेश कभी बाप नही बन सकता.. भाइ.. नरेश मुजे बच्चा देनेमे सक्षम नही हे..

किशन : (चोंकते) क्या..? बाबाने खुद तुमसे अ‍ैसा कहा..? तो उसने क्या उपाय बताया..?

भुमीका : भाइ आपको सब सचाइ बता दुगी.. बाबाने मुजसे कहा की मेरे नसीबमे अ‍ेक बच्ची हे.. लेकीन वो नरेशसे नही होगी.. भाइ.. उसी समय मेनेभी बाबाके सामने अ‍ेतराज कीया था.. लेकीन बाबाने कहा ये सब होकर ही रहेगा.. मेरी आज तक कोइ बात मीथ्या नही हुइ.. ओर इस बच्चीका बाप नरेश नही होगा..

किशन : (चोंकते) व्होट..? बाबाने तुमसे अ‍ैसा कहा..? तो फीर.. वो बच्चीका बाप.. भुमी मुजे सब सचाइ जाननी हे.. बता बाबाने तुमसे ओर क्या क्या कहा हे..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे सर जुकाते) भाइ.. जब मेनेभी ये सवाल कीया तो बाबाने कहा.. की.. वो.. तुम जीनसे सचा ओर ज्यादा प्यार करती हो उनसेही ये बच्ची होगी.. ओर भाइ आपभी जानते हे.. मेरे दिलके सबसे करीब आप ही हो.. मेने नरेशको भी आपके बादका स्थान दीया हे.. बाबाने भी आपका नाम लीयाथा..

किशन : (धीरेसे) वोतो ठीक हे लेकीन भुमी.. में..? तुमतो जानती हो मेने तुजे अपनी बहेन माना हे.. तो मे कैसे ये काम कर सकता हु..? क्या तुजेभी ये सब जायज लगता हे..? बाबाभीनां..

भुमीका : (किशनके दोनो हाथ थामते) भाइ.. मेने आज तक अपने दिलकी बात कीसीको नही बताइ.. जो आज आपसे केह रही हु..

किशन : (अ‍ेक नजरसे देखते) कौनसी बात..? भुमी आज तुम मुजे सब खुलकर बतादे..

भुमीका : भाइ.. जब हम सब कोलेजमे थे तबसेही मे आपको पसंद करती थी.. लेकीन जब मे अपने दिलकी बात आपसे कहु उनसे पहेलेही नीर्मलाने मुजे आप दोनोके रिलेशनके बारेमे बता दिया.. ओर कहाकी हम दोनो कइ बार फीजीकलभी हो चुके हे.. भाइ तब मेरा दिल टुट गया.. उस रात मे खुब रोइ.. बडी मुस्कीलसे मेने अपने आपको संभाला हे.. मे तबसे आपको पसंद करती हु.. बाकीतो सब आप जानतेही हे..

किशन : (थोडा विचलीत होते) तो भुमी तुमने मुजे तब वो बात क्यु नही बताइ.. तुजेतो पता हे हमारे घरमे सादीकी कोइ पाबंदी नही हे.. हम कीतनीभी सादी करले.. तो मे तुजेभी अपना लेता.. लेकीन अब बहुत देर होचुकी हे.. अब ये सब मुमकीन नही हे.. सोरी ओर मे नरशको भी धोखा नही दे सकता..

भुमीका : (मायुस होते सर जुकाते) भाइ कोइ बात नही.. गलती मेरी ही हे जो मेने आपको अपने दिलकी बात नही बताइ.. अब मुजे मेरी किस्मतपे ही छोडदो.. रहेनेदो मुजे बांज.. भाइ.. आज बाबाकी सब बाते मीथ्या होगइ.. उसने नरेशके बारेमेभी मुजे बताया.. लेकीन अब आपसे कहेनेका कोइ मतलब नही हे.. मे अकेली ही अपनी जींदगी गुजार लु्रगी..

किशन : (आस्चर्यसे) नरेशके बारेमे..? क्या बताया बाबाने..? भुमी मेने कहानां मुजे सब बाते जाननी हे..

भुमीका : भाइ.. बाबाने कहाथा.. जब मेरी बच्ची बाराह सालकी होजायेगी तब वो हमारे बीच नही होगा.. तब आपही मेरे पती होगे.. ओर हम दोनो सबसे छुपकर हमारा संसार चलायेगे..

किशन : (थोडा परेसान होते) भुमी.. ये तुम क्या केह रही हो..? मेरीतो कुछ समजमे नही आ रहा.. क्या तुम सब सच केह रही हो..?

भुमीका : भाइ मुजपे विस्वास नही हेनां..? आप अ‍ेक बार बाबासे मीलकर बात करलेना.. मुजे मेरे हालपे छोडदो.. मुजे आपके घर नही आना.. मे यहा अकेली रेह लुगी.. मेरी फीकर मत करना..

किशन : (कुछ सोचते अचानक खडा होकर भुमीका हाथ पकडते) भुमी.. तु अभीके अभी चल मेरे साथ.. हम दोनो बाबाको मीलने जा रहे हे..

भुमीका : (खडी होकर थोडी परेसान होते) लेकीन.. भाइ अब हमे बाबाको मीलने क्यु जाना हे..? मे कहा कोइ जीद कर रही हु.. नही चाहीये मुजे कोइ बच्चा..

किशन : नही भुमी.. आज जींदगीमे पहेली बार मेरी बहेनने कुछ मुजसे मांगा हे.. लेकीन इनसे पहेले मे अ‍ेक बार बाबाको मीलना चाहता हु.. ओर हम दोनोही जायेगे.. तेरे सामनेही मुजे बाबासे कुछ जानना हे.. चल..

कहेते किशन लगभग भुमीकाको हाथ पकडते खीचता बहार लेगया.. ओर भुमीने भी बहार नीकलकर फटाफट घरको ताला लगादीया वो थोडी गभराइ हुइ थी.. ओर किशनके साथ कारमे बैठ गइ तो किशनने कार सीधेही आश्रमकी ओर जानेदी.. तब भुमी पुरे रास्ते सीर्फ किशनको ही देखती रही.. उनको कुछ समजमे नही आ रहाथा की किशनको अचानक क्या होगया हे.. ओर पुरे रास्ते दोनोमेसे कोइ कुछ भी नही बोले..

फीर आधे घंटेमे दोनो आश्रमके परीसरमे पहोंच गये.. ओर किशन कारसे उतरतेही भुमीके पास आकर उनका हाथ पडकर बाबाके पास लेगया.. तब बाबा ओर अ‍ेक आश्रमका सेवक बाते करते होलमेही बैठेथे.. ओर बाबा इन दोनोको देखकर सब कुछ समज गये.. ओर उसने सेवकको सबके लीये चाइ लानेको कहेकर उसे बहार भेज दीया.. तब किशन ओर भुमीका बाबाके पैर छुकर उनके चरणोके पास बैठ गये..

बाबा : (मुस्कुराते) क्यु महाराज.. आज कुछ ज्यादाही परेसान लग रहे हो.. हें..हें..हें..

किशेन : (मुस्कुराते) हां.. अब बाकी रेह गया हेतो आपभी मेरी टांग खीचलो.. बाबा इसे समजाओ.. आपने इसे क्या केह दीया हे..? ये कैसी नादानी करती हे.. ओर मे इनको दुखी होते देखभी तो नही सकता..

बाबा : (मुस्कुराते) समजना इनको नही तुजे हे.. बेचारी सहीतो केह रही हे.. इसने क्या गलत केह दीया..?

किशन :(आस्चर्यसे देखते) बाबा.. ये आप केह रहे हे..? जानते हे ये मेरी कौन हे..? में बहेन मानता हु इसे..

बाबा : (हसते) अच्छा..? तो फीर जीनसे तुमने सादी करली हे वो कौन हे..? उसे कही बहारसे ब्हाकर लाया हे क्या..? हंम..? बेटा मत भुलो तुम सब कौन हो.. जब खुदकी बहेनसे सादी करके उसे बच्चा दे सकता हे तो फीर भी येतो तेरी मुह बोली बहेन हे.. अगर इसे उनके पतीसे बच्चा नही हो रहाहे.. तो तुजे बच्चा देने मे क्या प्रोबलेम हे..? तेरातो काम ही यही हे.. मत भुलो तुम कौन हो..

किशन : बाबा.. आपभी तो नही कहेते की वास्तवमे हम सब कौन हे.. क्या होने वाला हे..

बाबा : सुन बेटा.. अ‍ेक दिन अकेला टाइम नीकालकर आजा तुजे सब बता दुगा.. अभी सीर्फ इताही बताता हु.. सीर्फ तुमही नही.. तेरे दादाने तेरे पीताजीने ओर अभी तुम खुदने.. सबने अपनी बहेनसे सादी करली हे.. क्यु..? पता हे तुजे..? बेटा आने वाले वक्तमे तुम्हारे वहा बहुत बडा बदलाव आने वाला हे..

तुम उन हिमाचलके राजाके बारेमे तो सब जानते ही हो.. बस यही समजले आगे जाकर वोही राजा तुम्हारे घर दुबारा जन्म लेकर आने वाला हे.. तुम सब उन्हीके अंस हो.. ओर सब इन्हीकी वजहसे ये सब बदलाव हो रहा हे..

किशन : लेकीन बाबा वो सब हमारे यहा ही क्यु जन्म लेना चाहते हे..? कोइ खास वजह..?

बाबा : (हसते) हां.. वो बहुत बडी वजह हे.. इसीलीये तो स्वयंम काम ओर रती अपने अंसको तुम्हारे यहा जन्म दे रहे हे.. सभी परीया ओर अप्सराये तुम्हारे घर जन्म ले रही हे.. तुम्हारी दादी तुम्हारी मां.. तुम्हारी बहेन जो अभी तेरी बीवी हे.. यहा तक की तुमने जीसे छोडा हे वोभी.. ओर मेरी इस बेटीभी.. बेटा मत भुलो तुम सब इन्हीके अंस हो.. इसीलीयेतो ये तुम्हारे साथ जुडी हुइ हे..

किशन : बाबा मुजेतो ये सब बहुत अजीब लग रहा हे.. हमतो ठीक हे क्या हमारी आने वाली पीढी इस बातको मानेगी..? मुजे नही लगता वो सब इन बातोपे यकीन करेगे..

बाबा : (हसते) बेटा तुमतो ठीक हे लेकीन वो सबतो तुमसे भी दो कदम आगे होगे.. वोतो कोइ रीस्ते नाते मानते ही नही होगे.. तब सायद तुम नही होगे.. लेकीन तेरा बेटा जो अभी बहुत छोटा हे वोभी अपनी सभी बहेनो से सादी कर लेगा.. तब मेरी इस बेटी होगी जो सब अपनी आंखोसे देखेगी..

किशन : (सरमाते हसते) बाबा तो फीर अ‍ेक बात पुछु..? अगर मानलो की मे इसे अ‍ेक बच्ची देभी दु.. तो वोभी तो मेरे बटेकी बहेन हुइनां..? तो क्या वोभी..

बाबा : (हसते) हां.. इसीलीयेतो इनको बच्चा देनेको केह रहा हु.. ताकी वोभी तेरे बेटेके साथ सादी कर सके.. बेटा तुजे पता ही नही हे.. तेरे बेटेकी कीतनी रानीया होगी.. उनकी सब बहेने उनकी रानीया होगी.. सब प्रकृतीके हिसाबसे चलेगा.. इनमे ना तेरी चलेगी ओर नाही मेरी.. चलेगी.. क्युकी तुम्हारा जीवन तुम्हारे होथोमे हे ही नही..

किशन : (भुमीकाकी ओर देखते) बाबा मे समज गया.. फीरभी मुजे ये काम करने मे संकोच हो रहा हे..

बाबा : अच्छा..? सीर्फ सेकोच ही हो रहा हेनां..? इनका काम करनेमे तो कोइ अ‍ेतराज नही हेनां..? तुम दोनो चलो मेरे साथ.. अब कोइ सवाल मत करना..

कहेते बाबा अपनी जगहसे खडे होगये.. तब किशन ओर भुमीकाभी आस्चर्यसे अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते खडे होगये.. ओर बाबाके पीछे चुपचाप जाने लगे.. बाबा दोनोको लेकर मंदिरमे चले गये.. तब किशन ओर भुुमीकाने अंदर जातेही हाथ जोडकर दर्शन करलीये ओर बाबाके सामने देखते रहे.. तभी बाबाने दोनोको मंदिरके अंदर बुला लीया.. तो दोनो चुपचाप अंदर चले गये तभी बाबाने वही पडे दो हार उठालीये..

बाबा : (मुस्कुराते अ‍ेक हार किशनको देते) ले पकड इसे ओर पहेनादे मेरी इस बेटीको.. (अ‍ेक हार भुमीको देते) ले बेटी.. तुमभी इसे पहेनादे.. मे आज तुम दोनोका गांधर्व विवाह अभी करा रहा हु..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) बाबा लेकीन मेरा पती.. मेतो ओल रेडी सादीसुधा हु..

बाबा : बेटी पता हे मुजे.. ये गांधर्व विवाहतो कभीभी कीसीसेभी हो सकता हे.. ओर इसीलये करवा रहा हु की ये महासयको अपनी बहेनको बच्चा देनेमे संकोच हो रहा था.. अबतो संकोच नही करेगा.. क्युकी आजके बाद तुमभी इनकी बीवी होजाओगी.. चलो दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेनादो.. ओर ये मेरा आदेश भी हे..

तभी किशन भुमीकाको हार पहेना देता हे तो भुमीकाभी नजरे जुकाते किशनको हार पहेना देती हे.. फीर बाबा वहासे अ‍ेक सींदुरकी डीबी नीकालते हे ओर खोलकर किशनको थमा देते हे.. फीर किशनको भुमीकाकी मांग भरनेको कहेते हे ओर किशनने भुमीकाकी मांग भरदी.. तब भुमीकाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर बाबाने दोनोको जींदगीभर अ‍ेक दुसरेका साथ नीभानेकी कसम खीलवाइ..





बाबा : बेटा अब तुम दोनो हार यही छोडदो ओर वापस चलो.. मुजे तुमसे कुछ बातभी करनी हे..

दोनोही अ‍ेक साथ बाबाके पैर छुकर वापस मंदिरमे दर्शन करने लगे.. फीर चुपचाप बाबाके पीछे जाने लगे.. तब भुमीका बहुतही सरमा रहीथी.. तीनो होलमे आगये तब सेवक चाइ लेकर तीनोका इन्तजार करते खडाथा.. ओर बाबाने सबको चाइ देनेको कहा ओर वो तीनोको चाइ पीलाकर डीस लेकर चला गया तब बाबाने दोनोकी ओर देखा ओर मुस्कुराने लगे..

बाबा : बेटा संकोच मत कर.. वास्तवमे तो ये सब होनेही वाला था.. ओर बेटी तुमभी कोइ संकोच मत करना की मेने अपने पतीको धोखा दीया हे.. वास्तवमे यही तुम्हारा पती हे.. अगर उस दिन अपने दिलकी बात इनको बताती तो आज यही तुम्हारा पती होता.. खैर छोटो.. जानेदो पुरानी बाते.. अब दोनो अच्छेसे अपना संसार चलाओ.. बेटी मेरा आशीर्वाद हे तुजे जींदगीमे कोइ तकलीफ नही होगी..

किशन : (हसते) ठीक हे बाबा.. अब हमे आज्ञा दीजीये..

बाबा : (हसते) ठीक हे अब आरामसे जाओ.. ओर बेटी.. जल्द मुजे खुसखबरी देदे.. तेरा काम होजायेगा..

भुमीका : (सर्मसार होते हसते) जी बाबा.. आशीर्वाद दीजीये.. हम चलते हे..

फीर किशन ओर भुमीका कारमे आकर बैठ गये.. ओर किशनने कार सहेरकी ओर जाने दी.. तब भुमीका चोर नजरोसे किशनको सर नीचे करते सरमाते देखती रही.. अब वो बहुत सरमा रहीथी.. तो दुसरी ओर किशनभी बार बार भुमीकाकी ओर देख रहाथा.. दोनोको कोइ उमीद नही थी की बाबा इन दोनोकी सादी करवा देगे.. ओर इस बातपे भुमीका अंदरसे बहुत ही खुस थी....

कन्टीन्यु
 
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