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राधीका : (सीनेमे सर रखते) ओह.. लखन आइ लव यु.. आखीर आप आही गये.. मे कबसे आपका इन्तजार कर रही थी.. कहा थे इतने दिन..? फोन भी नही कीया..
लखन : (ठुंडी पकडकर सर उठाते) अरे राधु.. सांत होजा.. कीतना सवाल करलीया.. सुन.. आइ लव यु टु.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये इधर आगया हु.. अब मे तुजे कभी अकेली नही छोडुगा..
राधीका : (होंठ चुमकर) जानु.. आज मे बहुत खुस हु.. ओर मम्मी भी आपको बहुत याद कर रही हे.. कहेती थी जबसे सादी करके गया.. फीर तो आप आये ही नही.. ओर वो सही तो केह रही थी.. (सरमाकर मुस्कुराते) जानु.. हमने अभी तक हमारी सुहागरात भी नही मनाइ.. क्या आपका व्रत खतम होगया..?
लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. लेकीन मे जबसे यहासे गया.. तबसे कुछना कुछ काममे फसा हुआ था.. मे आज ही यहा रहेनेके लीये आया हु.. कल मेरे अंकलकी अंतीम वीधीया थी.. जो खतम होगइ.. इसी बीच दो तीन पहेले अेक दोस्तकी सादी थी.. तो आज उनके पापा यहा गुजर गये.. उन्हीका सब काम खतम करके आया हु.. बस.. दो तीन दिन इन्तजार करले.. फीर हमारी सुहागरात भी होगी..
राधीका : (मुस्कुराते होंठ चुमते) ओह.. चलो कोइ बात नही.. तो फीर दोडधामकी वजहसे आपने ठीकसे खाना भी नही खाया होगा.. तो आप चलो हमारे घरपे.. खाना भी खा लेगे.. ओर आप मम्मीको भी मील लेना.. ताकी उनको भी तसली मील जाये..
लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. आज नही.. आज यहा हमारा पहेला दिन हे.. लताने खाना बना लीया होगा.. वो तो तुजे भी खानेपे बुलाना चाहती थी.. लेकीन मम्मीकी वजहसे मैने मना करदीया.. तो मुजे घरपे ही जाना होगा.. सुन.. हमारे बारेमे मेरे घरपे सबको पता चल गया हे.. तो मेरी सभी भाभीया ओर लता तुमसे मीलना चाहती हे.. सबने हमारी सादीको अेक्सेप्ट करलीया हे.. हें..हें..हें..

राधीका : (खुस होते) क्या..? जानु.. ये तो बहुत ही अच्छी खबर सुनाइ आपने.. लेकीन अभी तो मेरा आना पोसीबल नही हे.. मे मम्मीको छोडकर नही आ सकती.. हां.. अगर वो सब यहा आयेगी.. तो मे सबको जरुर मील लुगी.. आप अेक काम करो.. फुरसतमे सबको मेरे घरपे खानेके लीये बुलालो.. सबलोग मम्मीको भी मील लेगी.. ओर हमारी भी मुलाकात होजायेगी.. क्या कहेते हो..?
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे चल घरपे लतासे बात करता हु..
राधीका : (सरमाते धीरेसे नजरे जुकाते) जानु.. क्या अैसे ही चले जाओगे..? जबसे हमने सादी कीहे.. तबसे आपसे मीलन करनेका बहुत मन कर रहा हे.. क्या वो सुजन थी वो सब ठीक हो गया..?
लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. जब हम मीलेगे तब तेरे लीये सरप्राइज होगी.. फीर भी कुछ जानना होतो तुम तेरी सहेलीसे बात करलेना.. उनको सब पता हे.. की वहा सुजन क्यु आइ थी..
राधीका : (कातील नजरसे देखकर मुस्कुराते) क्या तुम भाइ बहेन अब भी इसी तराहकी बाते करते हो..? लेकीन पुनोकी तो अब सादी भी होगइ हे.. क्या आप अभी भी इनसे प्यार करते हो..?
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते मुस्कुराते) हां राधु.. क्या कभी पहेला प्यार भुला जा सकता हे..? अच्छा हुआ तुमने मुजे सम्हाल लीया.. वरना ये लखन तो कबका खतम हो चुका था.. राधु.. आइ लव यु..
राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. लव यु टु जानु.. जानु तब मे भी मेरे डीवोर्सकी वजहसे टुट चुकी थी.. मे बहुत डीप्रेसनमे थी.. तब मुजे भी अेक सहारेकी जरुरत थी.. जो आपने मुजे समजाकर सम्हाल लीया.. ओर मेरी जरुरतको पुरी करदी.. आप मेरी कीतनी केर करते हे.. आज मम्मी भी बहुत खुस हे..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे.. अब मे चलता हु.. तुम फीकर मत करना.. बहुत जल्द हम दोनोका मीलन होगा.. मे कल आउगा.. तब बात करेगे..
फीर लखन थोडी देर रुककर वहासे नीकल गया.. ओर वापस घरपे आगया.. तब सृती ओर लता दोनो बाते करते वही बैठी थी.. तो लखनने उनके सामने देखा तक नही.. ओर उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लताने उसे खानेके लीये बुलाया.. फीर सब लोग खाना खाने बैठ गये.. लखनके साथ लता बैठी थी.. तो लताके पास रजीया बैठ गइ.. तो लखनके सामने सृती बैठ गइ..
ओर उनके पास रमा ओर नीलम बैठी थी.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देख रही थी.. फीर भी लखन सृतीकी ओर नही देर रहा था.. तो आज सृतीने हिंमत करते नीचेसे अपना पैर आगे कीया.. ओर लखनके पैरोपे अपना पैर रख दीया.. तो लखनने अपना पैर पीछे खीच लीया.. तो सृती बार बार लखनके पैरको छुकर उनको मनानेकी कोसीस करती रही.. लेकीन लखनकी ओरसे कोइ रीस्पोन्स नही मीला..
तो सृतीने भी अपना पैर वापस लेलीया ओर चुपचाप खाना खाने लगी.. वो समज गइकी लखन अभी भी उनसे नाराज हे.. तब सृतीने कीसीभी तराह लखनको मनानेकी ठानली.. इसके लीये चाहे उसे लखनका बीस्तरभी क्यु गरम करना पडे.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर चुपचाप खाने लगी.. तब रमा ओर नीलम भी लखनकी ओर बार बार देख रही थी.. तो लखनके साथ नजर मीलते ही सरमाकर मुस्कुराने लगती थी....
कन्टीन्यु
लखन : (ठुंडी पकडकर सर उठाते) अरे राधु.. सांत होजा.. कीतना सवाल करलीया.. सुन.. आइ लव यु टु.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये इधर आगया हु.. अब मे तुजे कभी अकेली नही छोडुगा..
राधीका : (होंठ चुमकर) जानु.. आज मे बहुत खुस हु.. ओर मम्मी भी आपको बहुत याद कर रही हे.. कहेती थी जबसे सादी करके गया.. फीर तो आप आये ही नही.. ओर वो सही तो केह रही थी.. (सरमाकर मुस्कुराते) जानु.. हमने अभी तक हमारी सुहागरात भी नही मनाइ.. क्या आपका व्रत खतम होगया..?
लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. लेकीन मे जबसे यहासे गया.. तबसे कुछना कुछ काममे फसा हुआ था.. मे आज ही यहा रहेनेके लीये आया हु.. कल मेरे अंकलकी अंतीम वीधीया थी.. जो खतम होगइ.. इसी बीच दो तीन पहेले अेक दोस्तकी सादी थी.. तो आज उनके पापा यहा गुजर गये.. उन्हीका सब काम खतम करके आया हु.. बस.. दो तीन दिन इन्तजार करले.. फीर हमारी सुहागरात भी होगी..
राधीका : (मुस्कुराते होंठ चुमते) ओह.. चलो कोइ बात नही.. तो फीर दोडधामकी वजहसे आपने ठीकसे खाना भी नही खाया होगा.. तो आप चलो हमारे घरपे.. खाना भी खा लेगे.. ओर आप मम्मीको भी मील लेना.. ताकी उनको भी तसली मील जाये..
लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. आज नही.. आज यहा हमारा पहेला दिन हे.. लताने खाना बना लीया होगा.. वो तो तुजे भी खानेपे बुलाना चाहती थी.. लेकीन मम्मीकी वजहसे मैने मना करदीया.. तो मुजे घरपे ही जाना होगा.. सुन.. हमारे बारेमे मेरे घरपे सबको पता चल गया हे.. तो मेरी सभी भाभीया ओर लता तुमसे मीलना चाहती हे.. सबने हमारी सादीको अेक्सेप्ट करलीया हे.. हें..हें..हें..

राधीका : (खुस होते) क्या..? जानु.. ये तो बहुत ही अच्छी खबर सुनाइ आपने.. लेकीन अभी तो मेरा आना पोसीबल नही हे.. मे मम्मीको छोडकर नही आ सकती.. हां.. अगर वो सब यहा आयेगी.. तो मे सबको जरुर मील लुगी.. आप अेक काम करो.. फुरसतमे सबको मेरे घरपे खानेके लीये बुलालो.. सबलोग मम्मीको भी मील लेगी.. ओर हमारी भी मुलाकात होजायेगी.. क्या कहेते हो..?
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे चल घरपे लतासे बात करता हु..
राधीका : (सरमाते धीरेसे नजरे जुकाते) जानु.. क्या अैसे ही चले जाओगे..? जबसे हमने सादी कीहे.. तबसे आपसे मीलन करनेका बहुत मन कर रहा हे.. क्या वो सुजन थी वो सब ठीक हो गया..?
लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. जब हम मीलेगे तब तेरे लीये सरप्राइज होगी.. फीर भी कुछ जानना होतो तुम तेरी सहेलीसे बात करलेना.. उनको सब पता हे.. की वहा सुजन क्यु आइ थी..
राधीका : (कातील नजरसे देखकर मुस्कुराते) क्या तुम भाइ बहेन अब भी इसी तराहकी बाते करते हो..? लेकीन पुनोकी तो अब सादी भी होगइ हे.. क्या आप अभी भी इनसे प्यार करते हो..?
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते मुस्कुराते) हां राधु.. क्या कभी पहेला प्यार भुला जा सकता हे..? अच्छा हुआ तुमने मुजे सम्हाल लीया.. वरना ये लखन तो कबका खतम हो चुका था.. राधु.. आइ लव यु..
राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. लव यु टु जानु.. जानु तब मे भी मेरे डीवोर्सकी वजहसे टुट चुकी थी.. मे बहुत डीप्रेसनमे थी.. तब मुजे भी अेक सहारेकी जरुरत थी.. जो आपने मुजे समजाकर सम्हाल लीया.. ओर मेरी जरुरतको पुरी करदी.. आप मेरी कीतनी केर करते हे.. आज मम्मी भी बहुत खुस हे..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे.. अब मे चलता हु.. तुम फीकर मत करना.. बहुत जल्द हम दोनोका मीलन होगा.. मे कल आउगा.. तब बात करेगे..
फीर लखन थोडी देर रुककर वहासे नीकल गया.. ओर वापस घरपे आगया.. तब सृती ओर लता दोनो बाते करते वही बैठी थी.. तो लखनने उनके सामने देखा तक नही.. ओर उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लताने उसे खानेके लीये बुलाया.. फीर सब लोग खाना खाने बैठ गये.. लखनके साथ लता बैठी थी.. तो लताके पास रजीया बैठ गइ.. तो लखनके सामने सृती बैठ गइ..
ओर उनके पास रमा ओर नीलम बैठी थी.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देख रही थी.. फीर भी लखन सृतीकी ओर नही देर रहा था.. तो आज सृतीने हिंमत करते नीचेसे अपना पैर आगे कीया.. ओर लखनके पैरोपे अपना पैर रख दीया.. तो लखनने अपना पैर पीछे खीच लीया.. तो सृती बार बार लखनके पैरको छुकर उनको मनानेकी कोसीस करती रही.. लेकीन लखनकी ओरसे कोइ रीस्पोन्स नही मीला..
तो सृतीने भी अपना पैर वापस लेलीया ओर चुपचाप खाना खाने लगी.. वो समज गइकी लखन अभी भी उनसे नाराज हे.. तब सृतीने कीसीभी तराह लखनको मनानेकी ठानली.. इसके लीये चाहे उसे लखनका बीस्तरभी क्यु गरम करना पडे.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर चुपचाप खाने लगी.. तब रमा ओर नीलम भी लखनकी ओर बार बार देख रही थी.. तो लखनके साथ नजर मीलते ही सरमाकर मुस्कुराने लगती थी....
कन्टीन्यु







