Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 59 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

राधीका : (सीनेमे सर रखते) ओह.. लखन आइ लव यु.. आखीर आप आही गये.. मे कबसे आपका इन्तजार कर रही थी.. कहा थे इतने दिन..? फोन भी नही कीया..

लखन : (ठुंडी पकडकर सर उठाते) अरे राधु.. सांत होजा.. कीतना सवाल करलीया.. सुन.. आइ लव यु टु.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये इधर आगया हु.. अब मे तुजे कभी अकेली नही छोडुगा..

राधीका : (होंठ चुमकर) जानु.. आज मे बहुत खुस हु.. ओर मम्मी भी आपको बहुत याद कर रही हे.. कहेती थी जबसे सादी करके गया.. फीर तो आप आये ही नही.. ओर वो सही तो केह रही थी.. (सरमाकर मुस्कुराते) जानु.. हमने अभी तक हमारी सुहागरात भी नही मनाइ.. क्या आपका व्रत खतम होगया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. लेकीन मे जबसे यहासे गया.. तबसे कुछना कुछ काममे फसा हुआ था.. मे आज ही यहा रहेनेके लीये आया हु.. कल मेरे अंकलकी अंतीम वीधीया थी.. जो खतम होगइ.. इसी बीच दो तीन पहेले अ‍ेक दोस्तकी सादी थी.. तो आज उनके पापा यहा गुजर गये.. उन्हीका सब काम खतम करके आया हु.. बस.. दो तीन दिन इन्तजार करले.. फीर हमारी सुहागरात भी होगी..

राधीका : (मुस्कुराते होंठ चुमते) ओह.. चलो कोइ बात नही.. तो फीर दोडधामकी वजहसे आपने ठीकसे खाना भी नही खाया होगा.. तो आप चलो हमारे घरपे.. खाना भी खा लेगे.. ओर आप मम्मीको भी मील लेना.. ताकी उनको भी तसली मील जाये..

लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. आज नही.. आज यहा हमारा पहेला दिन हे.. लताने खाना बना लीया होगा.. वो तो तुजे भी खानेपे बुलाना चाहती थी.. लेकीन मम्मीकी वजहसे मैने मना करदीया.. तो मुजे घरपे ही जाना होगा.. सुन.. हमारे बारेमे मेरे घरपे सबको पता चल गया हे.. तो मेरी सभी भाभीया ओर लता तुमसे मीलना चाहती हे.. सबने हमारी सादीको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. हें..हें..हें..





राधीका : (खुस होते) क्या..? जानु.. ये तो बहुत ही अच्छी खबर सुनाइ आपने.. लेकीन अभी तो मेरा आना पोसीबल नही हे.. मे मम्मीको छोडकर नही आ सकती.. हां.. अगर वो सब यहा आयेगी.. तो मे सबको जरुर मील लुगी.. आप अ‍ेक काम करो.. फुरसतमे सबको मेरे घरपे खानेके लीये बुलालो.. सबलोग मम्मीको भी मील लेगी.. ओर हमारी भी मुलाकात होजायेगी.. क्या कहेते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे चल घरपे लतासे बात करता हु..

राधीका : (सरमाते धीरेसे नजरे जुकाते) जानु.. क्या अ‍ैसे ही चले जाओगे..? जबसे हमने सादी कीहे.. तबसे आपसे मीलन करनेका बहुत मन कर रहा हे.. क्या वो सुजन थी वो सब ठीक हो गया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. जब हम मीलेगे तब तेरे लीये सरप्राइज होगी.. फीर भी कुछ जानना होतो तुम तेरी सहेलीसे बात करलेना.. उनको सब पता हे.. की वहा सुजन क्यु आइ थी..

राधीका : (कातील नजरसे देखकर मुस्कुराते) क्या तुम भाइ बहेन अब भी इसी तराहकी बाते करते हो..? लेकीन पुनोकी तो अब सादी भी होगइ हे.. क्या आप अभी भी इनसे प्यार करते हो..?

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते मुस्कुराते) हां राधु.. क्या कभी पहेला प्यार भुला जा सकता हे..? अच्छा हुआ तुमने मुजे सम्हाल लीया.. वरना ये लखन तो कबका खतम हो चुका था.. राधु.. आइ लव यु..

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. लव यु टु जानु.. जानु तब मे भी मेरे डीवोर्सकी वजहसे टुट चुकी थी.. मे बहुत डीप्रेसनमे थी.. तब मुजे भी अ‍ेक सहारेकी जरुरत थी.. जो आपने मुजे समजाकर सम्हाल लीया.. ओर मेरी जरुरतको पुरी करदी.. आप मेरी कीतनी केर करते हे.. आज मम्मी भी बहुत खुस हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे.. अब मे चलता हु.. तुम फीकर मत करना.. बहुत जल्द हम दोनोका मीलन होगा.. मे कल आउगा.. तब बात करेगे..

फीर लखन थोडी देर रुककर वहासे नीकल गया.. ओर वापस घरपे आगया.. तब सृती ओर लता दोनो बाते करते वही बैठी थी.. तो लखनने उनके सामने देखा तक नही.. ओर उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लताने उसे खानेके लीये बुलाया.. फीर सब लोग खाना खाने बैठ गये.. लखनके साथ लता बैठी थी.. तो लताके पास रजीया बैठ गइ.. तो लखनके सामने सृती बैठ गइ..

ओर उनके पास रमा ओर नीलम बैठी थी.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देख रही थी.. फीर भी लखन सृतीकी ओर नही देर रहा था.. तो आज सृतीने हिंमत करते नीचेसे अपना पैर आगे कीया.. ओर लखनके पैरोपे अपना पैर रख दीया.. तो लखनने अपना पैर पीछे खीच लीया.. तो सृती बार बार लखनके पैरको छुकर उनको मनानेकी कोसीस करती रही.. लेकीन लखनकी ओरसे कोइ रीस्पोन्स नही मीला..

तो सृतीने भी अपना पैर वापस लेलीया ओर चुपचाप खाना खाने लगी.. वो समज गइकी लखन अभी भी उनसे नाराज हे.. तब सृतीने कीसीभी तराह लखनको मनानेकी ठानली.. इसके लीये चाहे उसे लखनका बीस्तरभी क्यु गरम करना पडे.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर चुपचाप खाने लगी.. तब रमा ओर नीलम भी लखनकी ओर बार बार देख रही थी.. तो लखनके साथ नजर मीलते ही सरमाकर मुस्कुराने लगती थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०८

तो सृतीने भी अपना पैर वापस लेलीया ओर चुपचाप खाना खाने लगी.. वो समज गइकी लखन अभी भी उनसे नाराज हे.. तब सृतीने कीसीभी तराह लखनको मनानेकी ठानली.. इसके लीये चाहे उसे लखनका बीस्तरभी क्यु गरम करना पडे.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर चुपचाप खाने लगी.. तब रमा ओर नीलम भी लखनकी ओर बार बार देख रही थी.. तो लखनके साथ नजर मीलते ही सरमाकर मुस्कुराने लगती थी.... अब आगे

जब खाना खालीया तो रजीया ओर नीलम सभी काम नीपटाने लगी.. तो लता सृती ओर रमा होलमे बैठकर बाते करने लगी.. तब लताने लखनको भी साथ बैठनेके लीये कहा.. तो लखन आज पुरा दिन दोडधामकी वजहसे थकानका बहाना बनाकर उपर अपने रुममे जाकर सो गया.. जब रजीया ओर नीलमने भी अपना काम नीपटा लीया.. तो वो दोनो भी लता ओर सृती रमाके पास आकर बैठ गइ..

फीर कुछ देर बात करनेके बाद सब लोग अपने अपने रुममे सोनेके लीये जाने लगी.. रमा ओर नीलमका रुम नीचे ही था.. तो अब रजीया हमेसाके लीये लखनके साथ ही सोने वाली थी.. तो आज लताने रजीयाको भी अपने साथ लेलीया.. ओर सृती भी अपने रुममे चली गइ ओर चेन्ज करके अपने बैडपे लैटे मोबाइलसे खेलने लगी.. तभी सृतीको कुछ चकर ओर बैचेनी जैसा लगने लगा..

लेकीन उसने इस बारतो इग्नोकर करदीया.. ओर वो फीरसे मीबाइलमे खेलने लगी.. आज उनकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. क्युकी आज उसे अकेले सोना था.. जो वहा गांवमे हर रात देवायतका प्यार मीलता था.. वो वहा जीतने दिन रही.. हर रात देवायतने उसे दो दो बार बीना नीचे उतरे खुब चोदा था.. ओर हर बार सृतीकी चुतको अपने गाडे पानीसे भरता रहा.. तब सृतीको पता नही था की वो वहासे देवायतसे प्रेगनेन्ट होकर आइ हे..

तो दुसरी ओर जब सृती पुनमको फोन कर रही थी तब धिरेन पुनमको बाहोमे भरते उनके साथ छेडखानी कर रहा था.. तो पुनम कीसी भी तराह धिरेनसे छुटनेकी कोसीस करते उनसे दुर रहेना चाहती थी.. आज धिरेन इतने दिनदके बाद पुनमको मील रहा था तो उनके उपर भी वासनाका भुत सवार था.. ओर वो पुनमको खाना खानेसे पहेले अ‍ेक बार चोदलेना चाहता था..

तब पुनमको भी पता था.. की अभी नही तो रातमे आज धिरेन उनको छोडने वाला नही हे.. वो ये भी जानती थी.. की आज वो आखरी बार धिरेनके साथ चुदाइ करेगी.. वो यहा कुछ दिनके लीये ही आइ हे.. फीर वो हमेसाके लीये धिरेनका साथ छोड देगी.. ओर अपने भाइ लखनकी होजायेगी.. जीतना पुनमको अपने बारेमे पता था उतना ही वो सृती भावना ओर लताके बारेमे भी जानती थी..

धिरेन : (होठोको चुमते बुब्सको मसलते) पुनो.. चलना.. अ‍ेक बार करलेते हे.. अब तेरे बीना नही रहा जाता.. हम इतने दिनो तक नही मीले.. तो बहुत मन कर रहा हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे पागल हो गये हे क्या..? नीचे दयाबहेन मेरा इन्तजार कर रही हे.. पहेले आप खाना तो खालो.. मे इसीलीये आपको बुलाने आइ हु.. हमारे पास पुरी रात पडी हे.. रातको आपको जीतना प्यार करनाहो कर लीजीयेगा.. चलो..

धिरेन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन रातमे तैयार रहेना.. आज तुजे पुरी रात सोने नही दुगा.. केह देता हु..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे हां बाबा हां.. पहेले चलोतो सही.. आपको भुख नही लगी क्या..?

धिरेन : (गालको चुमते) अरे बहुत लगी हे.. पुनो.. क्या अभी लखन भैया हमारे घरपे आये थे..?

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? अभी दया बहेनने भी अपना आंगन साफ कर रही थी तब उन्होने भी भैयाको देखा था.. वो सहेरकी ओर जा रहे थे.. वो कीसी कारण वापस गांव गये होगे.. दया बहेनने उनको आवाज लगाइ.. तो घरपे भी नही आये.. क्या आपको वो रास्तेमे मीले थे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हां.. अभी आरहा था तो कुछ दुरीपे ही मील गये थे.. वो आज सामतभाइको बंसी भैया सहेरमे दिखानेके लीये होस्पीटल गये थे.. तो वही गुजर गये.. तो उनको लेकर गांव आये थे.. श्रीधर भैया उनको सहेर छोडने जा रहे थे.. तो मैने सोचा यहा आये होगे.. मैने उनको घरपे आनेके लीये कहा.. तो कहेने लगेकी बहुत देर होगइ हे.. ओर वो चले गये..

पुनम : (थोडी नीरास होते) नही.. वो यहा नही आये.. क्या..? क्या सामतभाइ गुजर गये..? अच्छा हुआ कमसे कम अपनी बहेनका घर बसाके तो गये.. उन्होने अपनी विधवा बहेनकी सादी अपने बेटे बंसी भैयासे करदी.. सायद लखन भैया इसीलीये गांव गये होगे.. अब आप नीचे चलीये.. खाना रेडी हो गया हे..

कहेते पुनम जल्दीसे नीचे आगइ.. वो कीसी भी हालमे धिरेनसे मीलन करना नही चाहती थी.. तो दयाने उसे अपना फोन दीया ओर कहाकी इनमे रींग बज रही थी.. तो पुनमने फोनमे देखा तो सृतीकी तीन मीस्डकोल आ चुकी थी.. ओर पुनमने फुरसतमे बात करनेका सोचा.. जब धिरेन नीचे आकर डाइनींगपे बैठ गया तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर अपनी बेगसे कुछ गोलीया नीकालकर अपने पास छुपाकर फटाफट नीचे आगइ..
 
धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो आजानां.. बहुत भुख लगी हे..

पुनम : (कीचनमे जाते) अरे बाबा.. आ रही हु.. खाना तो नीकालने दो..

कहेकर पुनम कीचनमे चली गइ.. ओर सब गोलीया दयाको देकर धीरेसे समजाने लगी.. तो दया भी हसते हुअ‍े हांमे गरदन हीलाते सब गोलीया ले लेती हे.. ओर इनमेसे दो गोलीया नीकालकर धिरेनकी सब्जीमे मीला देती हे.. ओर बाकीकी गोलीया छुपाकर रख देती हे.. तब तक पुनम धिरेनके पास आकर बैठ जाती हे.. ओर दया दोनोको खाना परोसने लगती हे.. तो धिरेन ओर पुनम खाने लगते हे..

आज दया भी अपना खाना लेकर वही दोनोके पास ही बैठ जाती हे.. पुनमको पता था.. की धिरेनके साथ अ‍ेक पत्नी होनेका फर्ज तो नीभाना ही पढेगा.. फीर भी वो जीतना हो सके धिरेनको अपने आपसे दुर रखना चाहती थी.. आज धिरेनको पुनमको चोदनेकी बडी जल्दी थी.. तो वो फटाफट खाना खाकर पुनमको जटसे आनेका इसारा करते उपर अपने रुममे चला गया.. ओर पुनम दया सभी काम नीपटाने लगी.. तभी..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आप कीतने दिनोके बाद तो अपने पतीको मील रही हो.. तो फीर उनको नींदकी गोलीया देनेकी क्या जरुरत थी..?

पुनम : (धीरेसे) दया बहेन.. आपको सब बताती हु.. आपको पता हे..? धिरेन हमारे घरपे खाना खाने क्यु नही आ रहेथे..? क्युकी उन्होने खानेका इन्तजाम यही करलीया था.. ओर हमारे नीचेके रुमसे अलमारीमे बहुत सारी कामोतेजक गोलीया ओर आइपीलकी गोलीया मीली.. ओर साथमे बहुत सारे कोन्डम.. ओर कचरेके डीब्बेमे भी युज कीया हुअ‍े कोन्डम मीले.. तो इसका मतलब भी जानती हो..?

दया : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. क्या कहे रही हो आप..? इसका मतलब जीजु.. क्या वो यहा कीसीके साथ.. मतलब.. वो कीसीको यहा लाते होगे..? आपको ओर मंजुभाभीको तो सब पता चल जाता हे.. तो कहीयेनां.. यहा कौन ओरत आती हे..

पुनम : (धीरेसे) हां दया बहेन.. आपने बीलकुल सही सोचा.. मुजे सब पता चल गया हे.. इनमे मुजे आपकी मदद चाहीये.. मे धिरेनको रंगे हाथ पकडना चाहती हु.. वो बडे भैयाका अ‍ेक दोस्त यहा रहेता हे.. उनकी ही बीवी हे.. पायल नाम हे उनका.. धिरेन उसीके साथ सोता हे.. आप ध्यान रखना हमारे घरपे कौन कौन ओरत आती हे.. अगर आपको यहा कुछ अ‍ैसा दिखनेको मीला तो आप छुपकेसे उनकी विडीयो बना लेना.. फीर मुजे देना..

दया : (धीरेसे) पुनोदीदी.. अभी जीजु नही आये थे.. तब आप सब्जी लेने गइ थीनां..? तब अ‍ेक ओरत बनठनके आइ थी.. कमीनी क्या मस्त तैयार होकर आइ थी.. मैने उसे पुछा तो वो आपको ही मीलने आइ थी.. कहेती थी हमारे पडोसमे रहेती हे.. ओर उसने अपना नाम पायल कहा.. वो यहा कीसी भीमाभाइकी बीवी थी.. क्या ये वोही तो नही..?

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) क्या.. वो पायल भाभी खुद आइ थी..? हां दया बहेन.. ये वोही हे.. कमीनी धिरेनको सुबह ओर रातका चाइ नास्ता ओर खाना वही देजाती थी.. ओर धिरेनके साथ मजे भी करके जाती थी.. दोनो नीचेके रुममे ही मजे करते थे.. ओर दो तीन बारतो भीमा भाइ कीसी गांव गये थे.. कमीनी पुरी रात धिरेनके साथ सोकर बीताइ थी.. मानो इनकी बीवी हो..

दया : (धीरेसे) दीदी.. उनको भी पता हे.. जीजु सादी सुधा हे.. तो फीर वो अ‍ैसा क्यु कर रही हे..? आपको ओर मंजु दीदीको तो सब पता चल जाता हे.. क्या इसीलीये ये सब आपको पता चला..?

पुनम : हां दया बहेन.. इस घरमे पैर रखते ही मुजे सबकुछ पता चल गया था.. वो ये सब बच्चेके लीये कर रही हे.. क्युकी अब भीमाभाइ उनको संतुस्ट करनेमे सक्षम नही हे.. तो उनको बच्चे कहासे देगे..? बस.. इसीकी वजहसे उनकी पहेली बीवी उनको छोडकर अपने देवरके साथ भाग गइ..

ओर ये पायल भाभी उनके सालेकी बीवी हे.. बस बदलेकी भावनाकी वजहसे ही भीमाभाइने उनके सालेकी बीवीसे सादी कीहे.. अब देखना.. अ‍ेक बार हमे उन दोनोको रंगे हाथो पकडना हे.. अब मुजे धिरेनमे कोइ इन्ट्रेस नही हे.. तभी तो उसे नींदकी गोलीया दी हे.. आप समज गइनां..?

दया : (सरमाते धीरेसे) पुनोदीदी.. वो आपके पती हे.. फीर भी आपको उनके साथ सोना तो पडेगा ही.. तो वो क्या आपको अ‍ैसे ही छोड देगे..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दया बहेन.. बस.. मुजे उसी बातकी टेन्शन हे.. दया बहेन उनसे मीलकर भी क्या करुगी..? उनका हे भी बहुत छोटा.. कुछ फील ही नही होता.. इसीलीये तो उनको नींदकी गोली दी हे.. अब उसे हर रात अ‍ैसेही सुलाना पडेगा.. दया बहेन.. कल मुजे आपसे कुछ जरुरी बात भी करनी हे.. जब धिरेन बेन्क चले जायेगे.. तब हम दोनो फुरसतमे बात करेगे.. क्युकी बहुत जरुरी बात हे.. जो आपके लीये भी जानना जरुरी हे..

दया : (सरमाकर हसते) ठीक हे दीदी.. अब आप जाइअ‍े.. मे सब काम नीपटा लुगी.. ओर सो जाउगी.. आप अपने पतीकी छोटीसी लुलीसे खेलीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर हसते धीरेसे) क्या दया बहेन.. आप भीनां.. हें..हें..हें.. अब आप भी मेरी टांग खीचलो.. चलो मे चलती हु.. आप भी काम नीपटाकर सोजाओ..

पुनम बहुत सर्मसार होते हसते हुअ‍े अपने हाथ पोछते सब दरवाजा बंध करते उपरकी ओर जाने लगी.. ओर दयाभी सब काम फटाफट करने लगी.. ओर कुछ देरके बाद वो भी सभी लाइटे बंध करके अपने रुममे चली गइ.. तो उपरकी ओर पुनम अपने रुममे दरवाजा बंध करके चेन्ज करने बाथरुममे घुस गइ.. तब धिरेन चेन्ज करके रेडी होकर पुनमके इन्तजारमे मोबाइपे गेम खेल रहा था.. जैसेही पुनम आइ..
 
धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो.. जटसे आजाना नही रहा जाता.. क्या मस्त जुडा बनाया हे तुमने.. इनमे बहुत सेक्सी लग रही हो.. आजा फटाफट..

पुनम : (मुस्कुराते बेडपे आते) जानु.. इतनी बेताबी अच्छी नही हे.. देखना बीचमे ही मत छोड देना.. आज मे भी देखती हु.. की तुम कहा तक आगे जाते हो.. कोइ गोली बोली तो नही खाइनां..?

धिरेन : (मुस्कुराते) सोरी पुनो.. आज मुजे तुमको पुरी रात प्यार करना हे.. तो बगैर गलीसे कैसे कर सकता हु..? मे सहेरसे लेकर ही आया हु.. यही समजलो आज फीरसे हम दोनोकी सुहागरात हे..

पुनम : (मनमे) कमीने तुम क्या सुहागरात मनाओगे.. वो तो मे भाइके साथ मनाकर आइ हु.. वो भी बीना गोलीकी.. तुम तो अंदर डाला नही की ढेर होजाते हो.. दो मीनीट भी नही टीक पाते.. मेरे उदरमे पल रहा बच्चा उसीका नतीजा तो हे..

लखन : (मुस्कुराते) पुनो कहा खो गइ..? क्या सोच रही हे..? आजाना जल्दी.. नही रहा जाता..

पुनम : (धिरेनके साथ रजाइमे घुसते) जानु.. आप बहुत कमीने हो.. कोइ बीवीके साथ अ‍ैसा करते हे क्या..? आज पका आप मेरी हालत बीगाड दोगे.. देखना बाबा मुजे सुबह चलने फीरने लायक छोडना..

पुनमको भी कइ दिनोसे देवायतने नही चोदा था.. क्युकी उनको भी पता था.. की देवायतकी इतनी सारी बीवीओकी वजहसे उनको का टाइम देपा रहा हे.. ओर उपरसे कइ दिनोसे लखन भी उनके साथ फ्लर्ट कर रहा था.. ओर जडी बुटीकी वजहसे बार बार उनके लंडको देखनेकी इच्छा हो रही थी.. तो वो इतने दिनोसे भावनाके साथ ही लेस्बीयन खेल खेल रही थी.. जीनकी वजहसे उनकी भी ठरक बढी हुइ थी..

तो आज पुनम धिरेनकी तारीफ करते उनको चोदनेके लीये उक्साने लगी.. ताकी उनके तनकी गर्मी थोडी कम होजाये.. लेकीन उनके जहेनसे अभी भी लखन नीकलनेका नाम नही ले रहा था.. आज पुनमको धिरेनमे भी लखनकी सकल दीखाइ दे रही थी.. क्युकी उनको भी नही पता था.. की अनायास ही सही.. वो लखनकी ओर जुकती जा रही थी.. ओर उसे लखनसे प्यार होने लगा था..

तो धिरेन अ‍ेक्साइटेड होकर पुनमके कपडे नीकालने लगा.. ओर खुदभी कपडे नीकालकर जल्दीसे नंगा हो गया.. पुनम धिरेनकी बेताबी देखकर सरमा गइ.. ओर मुह दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. तभी धिरेन पुनमकी बगलमे आकर लेट गया.. फीर पुनमसे चीपकर उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तब पुनम आंख बंध करते धिरेनमे लखनको देखते लखनको इमेजींग करने लगी..

ओर उसने धिरेनको लखन समजकर जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. तब धिरेनभी पुनमकी अ‍ेक्साइटमेन्ट देखकर खुस हो गया.. पुनम लखनके बडे लंडको इमेजींग करते बहुत ही उतेजीत होगइ थी.. उनकी चुत लखनके बारेमे सोचते ही फडफडाने लगी.. ओर पानी बहाने लगी.. फीर अपनी चुतमे लंडके घुसनेका इन्तजार करने लगी..





तो दुसरी ओर आज धिरेनको भी पुनमको चोदनेकी जल्दी थी.. उनका लंडभी तनके सख्त हो गया था.. ओर पुनमकी चुतमे घुसनेके लीये चुतपे दस्तक देते जटके मार रहा था.. तो धिरेनने अपने लंडको अपनी उंगलीसे पकड लीया.. ओर पुनमकी चुतपे सेट करने लगा.. तो पुनम भी आंख बंध करते धिरेनके लंडको पकडकर अपनी चुतमे घुसानेके लीये धिरेनकी मदद करने लगी..

उनकी चुतसे लगातार पानी बेह रहाथा..पुनम आधी आंख चडाते पुरी तराह मदहोस हो गइ थी.. तभी धिरेनने अ‍ेक जोरोका जटका मारा तो उनका पुरा लंड पुनमकी चुतमे घुस गया.. ओर पुनमकी हल्कीसी आहे नीकल गइ.. ओर उसने धिरेनको लखन समजकर जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. पुनम अब पुरी तराह मदहोसीमे छा गइ थी.. वो अबभी आधी आंख चडाते लखनके चहेरेको इमेजींग कर रही थी..

तभी धिरेन अपना मुह पुनमके गलेमे छुपालेता हे.. ओर उनके बुब्सको मसलते जोरोसे अपनी कमर हीलाते पुनमको चोदने लगता हे.. तब पुनमको कुछ खास फील नही हो रहा था.. ओर उनको अहेसास होगया.. की ये लखनका लंड नही.. धिरेनका लंड हे.. तब वो थोडी नीरास होगइ.. ओर उसने फौरन अपनी आंखे खोलदी.. तब धिरेन जोरोसे कमर हीलाते उनको चोद रहा था.. ओर पुनम भी अपनी कमर आडी टेडी करते हीलाने लगी..





ताकी वो भी धिरेनके साथ संतुस्ट हो सके.. लेकीन धिरेन आज बहुत ही उतेजीत हो चुका था.. ओर पुनमकी गरम भठी जैसी चुतके आगे कामोतेजक गोली खानेके बावजुद भी ज्यादा देर टीक नही सका.. ओर वो पुनमसे चीपककर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तब पुनमने उनको रुकनेके लीये बहुत कहा.. फीर भी धिरेन उनकी चुतके आगे टीक नही पाया ओर जडने लगा.. तब पुनम ना चाहते हुअ‍े भी उनकी पीठ सहेलाने लगी.. तभी..
 
धिरेन : (सरमके मारे धीरेसे) सोरी डार्लींग.. बहुत दिनोके बाद तुजे चोदा हे.. तो थोडा जल्दी हो गया..

पुनम : (थोडा गुस्सेमे) क्या धिरेन..? अ‍ैसे कोइ प्यार करता हे..? उपर चडे नही के फटाफट चोदने लगे.. ओर जड भी गये.. आपने वो गोली खाइ थी फीर भी..? आप मुजे हर बार प्यासी रख देते हो.. अब हटो मेरे उपरसे.. कमसे कम अ‍ेक बारतो मुजे संतुस्ट कर देते.. आप हर बार मुजे प्यासी छोड देते हो..

धिरेन : (सर्मीन्दा होते धीरेसे) पुनो आइ अ‍ेम सोरी.. मेने गोली खाइ हे.. तो अभी थोडी देर ठहेरो.. अभी वापस खडा होजायेगा.. इस बार पका तुजे जडा दुगा.. यकीन करो..

पुनम : (थोडा सांत होते) धिरेन.. देखना.. इस बार मुजे संतुस्ट नही कर पाये.. तो फीर मे आपको दुबारा कभी करने नही दुगी.. याद रखीयो.. देखो.. बहार भी नही नीकालना पडा.. अ‍ैसे ही बहार नीकल गया.. आप इनका कुछ करते क्यु नही..? आजकल तो इनकी बहुत सारी दवाइआ आती हे.. आप अपना इलाज करवाओ..

धिरेन : (थोडा परेसान होते) अरे यार.. अ‍ेक बार तो कहा.. की दुसरी बारमे तुजे संतुस्ट कर दुगा.. फीर भी तुम कहेती हो.. तो कल कीसी डोक्टरको दीखा दुगा.. बस..?

पुनम : (धिरेनको अपने उपरसे हटाते) अब हटीये मुजे बाथरुम जाना हे.. तबतक आप खडा करनेकी कोसीस करो.. अभी तो बहुत डींगे मार रहे थे.. की तुजे पुरी रात चोदना हे.. हमे सुहागरात मनानी हे.. क्या हुआ..? अब हटीये उपरसे.. मुजे बाथरुम जाना हे..

कहेते पुनम धिरेनको मनमे गालीया देते बाथरुममे चली गइ.. तबतक दयाकी दी हुइ गोलीका असर भी होने लगा था.. ओर उपरसे धिरेन जड गयातो काफी थकावट भी महेसुस कर रहा था.. तो धिरेन धीरे धीरे नीदकी आगोसमे जाने लगा.. जैसेही पुनम अपनी चुतको साफ करके वापस बहार नीकली.. तब धिरेन खरार्टे मारते सो रहा था.. तो पुनमकी हसी नीकल गइ..

ओर वो वापस बाथरुममे धुस गइ.. ओर कमोडपे बैठ गइ.. फीर आंख बंध करते अपने पती देवायतको इमेजींग करने लगी.. लेकीन पता नही आज देवायतकी जगह बार बार उनकी आंखोके सामने लखनका चहेरा आजाता था.. ओर वो अपनी शक्तिओके माध्यमसे लंखनके बडे लंडको भी देख चुकी थी.. उपरसे पीछले कइ दिनोसे लखन भी अपने प्यारका इजहार कइ बार पुनमके सामने कर चुका था..

ओर इस बारेमे उनकी सृती मंजु ओर भावनासे काफी चर्चा भी हो चुकी थी.. तो कल ही मस्तीया करते लखन उनके उरोजोको भी दबा चुका था.. ओर उनके होठोपे चुमा भी ले चुका था.. जीनकी वजहसे उनको लखनको चाटा मारना पडा.. जब अपनी गलतीका अहेसास मंजुने करवाया तबसे वो लखनकी ओर पुरी ढल चुकी थी.. ओर उसे प्यार करने लगी थी.. ओर अब कीसीभी हालमे वो लखनको मनाना चाहती थी..

इसके लीये चाहे उनको कोइ भी कुरबानी क्यु ना देनी पडे.. ओर वो ये भी जानती थी.. उनको कोनसी कुरबानी देनी पडेगी.. यही सब सोचते पुनम फीरसे बहुत उतेजीत होगइ.. ओर उनकी चुत अ‍ेक बार फीर पानीका रीसाव करते फडफडाने लगी.. तब पुनमका हाथ अनायास ही अपनी चुतपे चला गया.. ओर वो आंख बंध करते लखनको इमेजींग करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर सहेलाते सहेलाते चुतमे उंगली खुसाते हीलाने लगी..

पुनम : (आंख बंध करते धीरेसे दबी आवाजमे) ओह.. लखन भैया आपने क्या जादु करदीया.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. मे भी आपको प्यार करती हु.. चोद लीजीये अपनी इस बहेनको.. आपके लीये बहुत तरसी हु.. बस.. अ‍ेक बार अपनी बहेनको माफ करदो.. मे वादा करती हु.. मे हमेसाके लीये आपकी होजाउगी.. फीर आपको जीतनी मरजी हो.. मुजे चोद लीजीयेगा.. भाइ.. फक मी हार्ड.. आपसे चुदवानेका बहुत मन कर रहा हे.. चोद लीजीये अपनी बहेनको..

आंख बंध करते धीरेसे बडबडाते पुनम जोरोसे अपनी चुतमे उंगली अंदर बहार करने लगी.. तब कुछ ही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक तेज धारका फवारा नीकल गया.. तब पुनमने राहतकी सांसली.. तब उनको होस आया.. ओर उनको रीयलाइज हुआ.. की वो लखनको इमेजींग करते चुतमे उगली कर रही थी.. तब वो मुस्कुराते बहुत सर्मीन्दा हुइ.. फीर वो अपनी चुतको साफ करते बहार आगइ.. ओर अपने कपडे पहेनकर अपना फोन लेकर नीचे होलमे चली गइ.. ओर अंधेरेमे सोफेपे बैठकर सृतीको फोन करने लगी.. तभी..



 
सृती : (सामनेसे फोन उठाते धीरेसे) हां पुनोदीदी.. फोन क्यु नही उठा रही थी..? अभी तक जाग रही हो..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप भी तो अभी तक जाग रही हो.. वो.. मे धिरेनके साथ अपने रुममे थी.. कमीना मुजे छोड ही नही रहा था.. इनसे होता तो कुछ नही.. ओर पुरी रात प्यार करनेकी बाते कर रहा था.. कहीये.. आप अभी क्या कर रही हे..? बडे भाइकी बहुत याद आ रही हे क्या..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. आपके भाइने जो लत लगादी हे.. अब उनसे मीलन कीये बगैर नींद ही नही आ रही.. तो मोबाइलसे खेल रही थी.. ओर आप इतने दिनोके बाद तो अपने पतीसे मील रही हो.. तो क्या अभी आप फ्रि होगइ..? मैने सोचाकी अभी आप दोनो प्यार करते होगे.. दोनो काफी दिनोके बाद जो मीले हो.. ओर आपतो अपने पतीको गालीया दे रही हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. तो फीर मे क्या करु..? ओर यहा अ‍ैसा प्यार मेरे नसीबमे कहा हे..? जो हमे वहा हमारे पतीसे मीलता था.. यहा तो बस.. उपर चड गया.. अंदर डाला ओर हीलाकर कुछ ही देरमे ढेर होगया.. ये भी नही की पहेले अपनी बीवीको ठीकसे प्यार ब्यार करो.. पता नही इनको इतनी जल्दी कीस बातकी होती हे.. जो सीर्फ दो मीनीटमे ही खतम होजाता हे.. भाभी.. मेरी सेक्स लाइफ अच्छी नही हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. अब क्या कर सकते हे..? आपको कुछ दिन तो अ‍ैसे ही गुजारना पडेगा..

पुनम : भाभी.. कास मे इनसे सादी ही ना करती.. ओर लखन भैयाका प्यार कबुल कर लेती.. लेकीन मुजे बाबाकी बात भी माननी थी.. भाभी.. आज लखन भैयाकी बहुत याद आ रही हे.. क्या आपकी लखन भैयासे कोइ बात हुइ..?

सृती : (थोडी नीरास होते) नही दीदी.. कुछ खास नही.. आपको पता हे आज बंसीभाइ इधर सहेरमे सामतभाइको होस्पीटलमे दीखाने आये थे.. तो वही गुजर गये.. फीर देवु ओर लखन भैया इनको लेकर वापस गांव गये थे.. ओर लखन भैया देर सामको ही लौटे हे.. सीर्फ दो मीनीट मेरे पास बैठे.. ओर मुजे सोरी बोलके चले गये.. लगता हे.. वो हम दोनोसे अब भी बहुत नाराज हे..

पुनम : (थोडी उत्सुक्तासे) भाभी.. अभी सामको रास्तेमे धिरेनको भी मीले थे.. जब वो सहेर वापस जा रहेथे.. धिरेनने उनको घरपे आनेके लीये कहा.. तो नही आये.. उसीने मुजे बतायाकी सामतभाइ गुजर गये हे.. भाभी.. क्या लखन भैयाने मेरे बारेमे कुछ नही कहा..?

सृती : नही दीदी.. मैने उनसे बात करनेकी बहुत कोसीसकी तो वो चले गये.. फीर भी मैने उनको आपसे फोनपे बात करनेके लीये कहा.. तो कहा मुजे कीसीसे बात नही करनी.. जब मे उनसे रुबरु मीलुगा तब उनकी भी माफी मांग लुगा.. कहेकर नीकल गये.. ओर रातमे खाना खाते भी मुजसे बात नही कर रहे थे.. बात तो छोडीये.. वो मेरे सामने देखते तक नही थे..

पुनम : (आंख गीली करते) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे आपसे भी नाराज हो गये हे.. अब मे इनको कैसे मनाउगी..? मेरी तो कुछ समजमे ही नही आ रहा.. ओर मुजे उनके साथ ओर आपके साथ धिरेनके बारेमे अ‍ेक जरुरी बात भी करनी हे.. जो सीर्फ आप दोनोसे ही कर सकती हु.. भाभी.. आप लखन भैयाको कीसी भी हालमे मना लीजीये.. इसके लीये चाहे मुजे कुछ भी करना पडे.. मे रेडी हु.. भाभी.. मंजु दीदीने जो बात कही हे.. इस बदलाकी सुरुआत मुजसे भी क्यु ना हो.. मे तैयार हु..

सृती : पुनो दीदी.. बस.. मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये.. मे धीरे धीरे करते उनको मना लुगी.. आप फीकर मत करना इसमे मेभी आपके साथ हु.. अगर लखन भैयाको मनानेके लीये मुजे दुसरा तरीका अजमाना पडे तो भी मुजे मंजुर हे.. देखना वो आपसे भी बात करेगे.. कहीये.. ओर क्या बात करनी थी मुजसे..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. थेन्क्स.. वो.. वो धिरेनके बारेमे.. उनकी लाइफमे अ‍ेक ओरत आ चुकी हे.. तो मे अब आसानीसे धिरेनसे छुटकारा पा सकती हु.. लेकीन अभी नही.. वो सब बाते हम कल फुरसतमे करेगे.. वो जब कल बेन्कपे चले जायेगे.. तब मे आपसे आरामसे बात करुगी.. चलो अभी तो सोते हे.. गुड नाइट..

सृती : (मुस्कुराते) हंम ठीक हे.. गुड नाइट..

दोनोही बाते करके सो गइ.. तो उपरकी ओर लता ओर रजीया दोनो अपने कमरेमे गइ.. तो लखन आज थकानकी वजहसे जल्दी सो गया था.. तो दोनोको आज लखनको जगाना उचीत नही लगा.. ओर दोनो उनकी बगलमे जाकर सोगइ.. तो आज नीलम ओर रमाको भी नींद नही आ रही थी.. दोनो अपने अपने कमरेमे बीस्तरपे करवटे बदल रही थी.. तब रमासे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे बहार नीकली..

सृती ओर लखनका रुम तो उपर ही था.. क्युकी जबतक रमा इधर थी तबतक सृती उपरकी मंजीलपे ही सोने वाली थी.. नीलमको नीचेकी ओर अ‍ेक लास्ट वाला अलग कमरा दे दीया था.. ओर उनके बगलका कमरा फीर हाल गेस्टका था जो अभी इसमे रमाभाभी सो रही थी.. तो उपरकी मंजीलपे भी चार कमरे थे.. जो अ‍ेकमे लखन लता ओर रजीया सोये हुअ‍े थे ओर दुसरेके अभी सृती सो रही थी.. ओर दो अ‍ैसे ही खाली थे..

तो रमा अभी नीचे गेस्ट रुममे थी.. तो बहार नीकलते ही वो सीडीके पास जाकर उपरकी ओर देखने लगी.. जब उपर सब सांत था.. तो रमा धीरेसे नीलमके रुमके पास चली गइ.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका देने लगी.. तो दरवाजा लोक था.. ओर रमाने दरवाजेपे धीरेसे नोक कीया.. तो नीलम जाग ही रही थी.. तब नोक सुनते ही उनके दिलकी धडकर तेज हो गइ.. उन्होने सोचा की आज तो पका ही लखन जीजु होगे..

ओर उसने सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे दरवाजा खोला तो सामने रमा मुस्कुराते अंदर आ गइ.. ओर उसने दरवाजा फीरसे लोक करदीया ओर नीलमका हाथ कपडकर उसे बेडपे ले गइ.. ओर उनके साथ लेट गइ.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो रमाकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर वो भी बेडपे सो गइ.. तो रमा भी उनके साथ लेट गइ.. ओर कंबल खीचकर रमाने दोनोके उपर डाल दीया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०९

ओर उसने सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे दरवाजा खोला तो सामने रमा मुस्कुराते अंदर आ गइ.. ओर उसने दरवाजा फीरसे लोक करदीया ओर नीलमका हाथ कपडकर उसे बेडपे ले गइ.. ओर उनके साथ लेट गइ.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो रमाकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर वो भी बेडपे सो गइ.. तो रमा भी उनके साथ लेट गइ.. ओर कंबल खीचकर रमाने दोनोके उपर डाल दीया.. तभी.... अब आगे

रमा : (मुस्कुराते नीलमकी ओर करवट लेते धीरेसे) नीलु.. वहा अकेली नींद ही नही आ रही थी.. तो इधर आगइ.. अभी तक सोइ नही क्या..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही मोम.. आज पहेला दिन हे.. ओर नइ जगाह हे.. तो मुजे भी नींद नही आ रही थी.. अच्छा हुआ आप इधर आगइ.. मोम.. आप जब तक इधर हे मेरे पास ही सोइअ‍ेनां..?

रमा : (सरमाते धीरेसे हसते नीलुकी टांग खीचते) नही नीलु.. अगर तेरे लखन जीजुको तुमसे मीलनेका मन कीया तो..? हें..हें..हें.. देख अभी नीचेकी मंजीलपे सीर्फ हम दोनो ही हे.. ओर आज वो सामत भाइकी वजहसे बहुत दोडधाम कीये हुअ‍े हे.. जीनकी वजहसे वो बहुत थके हुअ‍े लग रहे थे.. तो आज उनके आनेकी कोइ संभावना नही हे.. इसीलीये मे आगइ..

नीलम : (सरमाकर हसते बाजुमे मुका मारते) मोम.. आप भीनां.. क्या में सीर्फ जीजुके लीये ही इधर आइ हु..? हें..हें..हें.. मोम.. कीतना अजीब हेनां..? अभी घरपे आइ थी तब मे आपसे कीतनी डर रही थी.. ओर अब देखो.. हम दोनोके बीच ये कैसा रीस्ता हो गया हे.. अब तो आपको अपनी बेटीके बारेमे अ‍ैसा कहेते सरम भी नही आती..

रमा : (नीलमकी कमरपे पैर ओर हाथ डालते धीरेसे) अरे.. इसमे सरमानेकी क्या बात हे.. नीलु.. तब तुम सीर्फ मेरी बेटी थी.. अब हम दोनोका रीस्ता अ‍ेक सहेलीका हे.. वैसे भी हम दोनोकी मंजील भीतो अ‍ेक हे.. नीलु..

नीलम : (सामने देखते धीरेसे) मोम.. क्या हम दोनो सही कर रहे हे..? ये लोग कीतने अच्छे हे..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. जानती हु मे.. हम गलत कर रहे हे.. लेकीन तेरे पापा मे भी तो दम नही हे.. की वो हम दोनोको अ‍ेसो आरामकी जींदगी दे सके.. मेने तो उनके साथ अपनी जींदगी बरबाद करली.. कमसे कम तु तो अपनी जींदगी सुधारले.. ओर मे ये सब तेरे लीये हीतो कर रही हु.. क्या ये तुजे अच्छा नही लगता..?

नीलम : (मुस्कुराते धीरेसे) नही मोम.. बात अच्छा लगनेकी या ना लगनेकी नही हे.. अनजानेमे ही सही.. हम लता दीदीका घर बरबाद कर रहे हे.. ओर बडे जीजु लखन जीजुभी कीतने अच्छे हे.. माना की दोनो जीजु थोडे रंगीन मीजाजके हे.. लेकीन धानका सारा बीजनेस जीजु ओर पापा ही तो सम्हालते हे..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. तेरे लखन जीजु अब सीर्फ तेरा जीजु नही हे.. तेरा होने वाला पती भी तो हे.. ओर उन लोगोमे तो कीतनी सादीया होती हे.. अगर तुमने भी उनसे सादी करली तो क्या फर्क पडता हे..? ओर अब तुम सीर्फ मेरी बेटी ही थोडीना हो.. अब तो मेरी पकी सहेली होगइ हो.. ओर अब तो हम दोनो ही अ‍ेक दुसरेका सहारा हे.. तो तुम बार बार क्यु अ‍ैसा सोचती हो..? मे तो अब तुजे अपनी बेटी नही मानती.. अब तो सहेलीके अलावा हमारा रीस्ता कुछ ओर ही हो गया हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम आपभीनां.. मे तो सीर्फ आपसे पुछ रही थी.. लेकीन मोम.. मुजे बहुत डर लग रहा हे.. अगर सचमे लखन जीजु इधर आगये तो..? अभी आपने दरवाजेपे नोक कीया तो मुजे तो यही लगा.. की सायद लखन जीजु आये होगे.. मुजे तो बहुत सरम आइ..

रमा : (कमरसे खीचते अपने तनसे चीपकाते) अरे वो आभी गये तो क्या हुआ..? मेने तुजे सब समजाया तो हे तुजे क्या करना हे.. तुम खामखा उनसे डर रही हे.. इनमे कुछ नही होता.. बस.. पहेली बारमे थोडा दर्द होगा तो वो पेइन कीलरकी गोली खा लेनां.. तुजे कुछ नही होगा.. लेकीन बादमे जो मजा आता हे.. नीलु मे तुजे बया भी नही कर सकती..

नीलम : (हसते) मोम.. लगता हे.. आप पापासे इतने दिन दुर रही हे.. तो आपको बहुत इच्छा हो रही हे..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. मे सादी सुधा हु.. तो इच्छा तो होगीनां.. नीलु.. अब जल्दसे जल्द तुम भी अपने लखन जीजुको अच्छेसे सेट करलो.. इसमे तुम जीतनी जल्दी करोगी.. आगे जाकर तुजे मजे के साथ साथ माल भी मीलता रहेगा..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. अ‍ेक बात कहु..? जब हम सब खाना खा रहे थेनां.. तब लखन जीजु मेरी बजाये आपकी ओर ज्यादा ध्यान दे रहे थे.. वो बार बार आपकी ओर देख रहे थे.. मुजे लगता हे.. वो मेरे साथ साथ आपकी ओर भी आकर्सीत हो गये हे..

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते बाहोमे भरते अपनी बात रखते) हां नीलु.. सायद तेरी बात सच हे.. मुजे भी लगता हे तेरे जीजु मुजपे लाइन मार रहे हे.. ये साले मर्द जातको तो सीर्फ अ‍ेक ही चीजमे इन्ट्रेस होता हे.. फीर वो चाहे सादी सुधा ओरत हो या तेरी तराह कुआरी लडकी.. क्या तुजे देखकर बुरा लगा..? हंम..?

नीलम : (मुस्कुराते) अरे नही नही मोम.. मुजे क्यु बुरा लगेगा.. इस घरमे तो रीस्ते जैसा कुछ दीखता ही नही.. आपने नीर्मला आंटीको देखा नही..? वो कैसे बडे जीजुकी ओर देखती रहेती हे.. जैसे उनकी सांस नही.. उनकी बीवी हो.. मुजे तो सक हे.. दोनोके बीच जरुर कोइ चकर होगा.. मोम.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? आप बुरा तो नही मानोगी..?

रमा : (मुस्कुराते होठ चुमते) अरी पुछना.. अब क्यु बार बार परमीशन ले रही हे.. कहा तो हे की अब हम दोनो सहेलीया हे.. पुछ.. कोइ बुरा नही लगेगा..





नीलम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. आपके कहेनेके मुताबीक अगर मुजे लखन जीजुके साथ सोना ही हे.. तो हम उनके पाससे अ‍ैसे ही माल नीकलवा सकते हे.. तो उनसे सादी करनेकी क्या जरुरत हे..?

रमा : (नीलुके बुब्सपे हाथ रखते) नीलु.. बात तो तेरी सही हे.. लेकीन लगता हे तुम मेरी बात ठीकसे समजी नही हो.. अगर तुम उनसे सादी करलोगी.. तो तुम उनकी लीगल बीवी होजाओगी.. ओर इसका मतलब तुम इनकी वीरास्तकी आधी जायदादकी कायदेसे वारीस होजाओगी.. तो भविस्यमे तुम ओर मे सारी जींदगी अ‍ैसे ही बैठे बैठे बीता सकती हे..
 
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. आपकी बात तो मे समज गइ.. लेकीन वो तो मेरे बजाये आपके पीछे पडे हे.. मानलो मेने उनसे सादी भी करली.. फीर भी वो आपके साथ रीलेशन रखना चाहते हे.. तो आप क्या करोगी..?

रमा : (गाल सहेलाते) नीलु.. तुम तो कुआरी लडकी हो.. सीर्फ अ‍ेक बार उनसे मीलन करले.. वो सबको भुल जायेगे.. फीर भी हमारी अ‍ैसो आरामकी जींदगीके लीये अगर मुजे भी उनके नीचे लेटना पडे तो मे भी उनके नीचे लेटनेके लीये तैयार हु.. समजी..? इसीलीये तुजे उनके साथ सादी करना जरुरी हे.. लेकीन तुमने अ‍ैसा पुछा ही क्यु..? क्या तुम उनसे सादी करना नही चाहती..?

नीलम : (गभराते धीरेसे) अरे नही नही मोम.. मे तो बस.. अ‍ैसे ही पुछ रही थी.. ठीक हे.. मे उनसे सादीके लीये तैयार हु.. लेकीन मोम.. मे आपसे केह देती हु.. मे मेरी पढाइ तक कोइ सादी नही करुगी.. बस.. अ‍ेक बार मुजे ग्रेज्युअ‍ेट होजाने दीजीये.. फीर हम आरामसे सादी कर लेगे.. क्युकी मे सरकारी जोब करना चाहती हु..

रमा : (थोडा सरमाते धीरेसे बाहोमे भरते) अरे वाह.. मेरी बच्ची.. मे तुजे ग्रेज्युअ‍ेशनके लीये कहा मना कर रही हु.. प्यार तो सादीके बीना भी हो सकता हे.. बस.. जब तेरे लास्ट यरकी अ‍ेग्जामका वक्त नजदीक आजाये.. तब तुम सीचुअ‍ेशन देख लेना.. अगर तुजे लगे की तेरे जीजु तुजे सादी करनेके लीये तैयार नही हे.. तो फीर तुम्हारे पास अ‍ेक ही विकल्प होगा.. तब तुजे उनसे प्रेगनेन्ट होना हे.. जब तु प्रेगनेन्ट होजायेगी.. तब बाकीका सब काम मे सम्हाल लुगी..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. मे आपकी सब बाते समज गइ.. लेकीन अ‍ेक जीजु हे.. जो अभी मेरे बजाये आपपे ज्यादा ध्यान देते हे.. कही उनका दिल आपपे तो नही आगया.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाकर हसते) हंम.. नीलु.. आभी जाये तो क्या फर्क पडता हे.. अगर आ गया तो तुजे बुरा तो नही लगेगा..? हंम..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही मोम.. मुजे क्यु बुरा लगेगा.. सबको अपनी अपनी नीड होती हे.. अगर लखन जीजु आपसे प्यार करे तो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. क्युकी आजकल तो अ‍ैसे बहुत रीलेशन देखनेको मीलते हे..

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) नीलु.. सही कहा तुमने.. ओर वैसे आज कल तेरे पापाभी मुजसे दुर रहेने लगे हे.. ओर तेरे जीजुके गांवमे तो अ‍ैसे कइ रीस्ते हे.. मां अपने बेटेके साथ रीलेशनमे हे.. तो उनकी बेटी भी अपने उसी भाइके साथ रीलेशनमे हे.. अ‍ैसा मैने सादीमे कीसीके कानोसे सुना हे.. तो अगर हम दोनो भी लखनजीसे रीलेशन रखले तो क्या फर्क पडता हे.. आखीर वो भी तो मेरा दामाद होगा.. अगर मेरे साथ भी उनका रीलेशन होजाये.. तो क्या इस रीलेशनके लीये तुम राजी होनां..?

नीलम : (सरमाते हसते) हां मोम.. मुजे मंजुर हे.. वैसे भी हमारा मक्सद उनके साथ रीलेशन बनाना थोडीना हे.. हमे तो बस.. इनकी जायदादसे मतलब हे.. फीर वो चाहे मेरे साथ रीलेशन रखे या फीर आपके साथ.. वैसे भी आपने सच कहा.. अब पापा आपको कहा वो सुख देपाते हे..

हम इतने दिनसे यहा हे.. तो उन्होने आपको अ‍ेक फोन तक नही कीया.. तो इनसे तो बेटर हे आप लखन जीजुसे अपनी प्यास बुजालो.. मोम.. इस मामलेमे आप लखन जीजुके साथ आगे बढ सकती हो.. बस.. हमारी सर्त याद रखना.. मुजसे आप अपनी हर बात सेयर करना..

रमा : (बाहोमे भीचते गाल चुमते) ठीक हे नीलु.. तुम कीतनी समजदार हो गइ हो..? मेरे लीये कीतना सोचती हे..? मेरे लीये यही बहुत हे.. की तुम मेरी सब तकलीफ जानती हो.. मुजे हमारी हर सर्त याद हे.. (तभी मनमे सोचते..)





रमा : (मनमे) नीलु.. मे हर बात तेरे साथ सेर नही कर सकती.. तुजे क्या पता तेरी मांको तेरे जीजुसे सचमे प्यार हो गया हे.. मे तेरे जीजुको प्यार करने लगी हु.. आज मेरी मजबुरी हे.. वरना तेरी जगाह मे ही उनसे सादी करलेती.. बस.. अ‍ेक बार हम दोनोका मीलन होजाये.. फीर मे हमेसाके लीये तेरे जीजुकी होजाउगी.. देखना अ‍ेक दिन तेरे जीजु हम दोनो मां बेटीको अ‍ेक साथ अ‍ेक ही बीस्तरमे चोदेगा.. नीलु.. मुजे तेरे जीजुसे चुदवानेकी बहुत इच्छा हो रही हे.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. पता नही कब हम दोनोका मीलन होगा..

नीलम : (सरारत करते हसते) मोम.. कहा खोयइ आप..? हें..हें..हें.. कही अभी लखन जीजुसे मीलनेकी इच्छा तो नही होगइ..? हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते हसते) हां.. होगइ हे.. कमीनी तुमने तो बातोसे ही मुजे गरम करदीया.. चल अब तेरे लखन जीजु ना सही तुतो हे.. बस थोडासा अपनी मा को भी प्यार देदे..

सोचते रमा खुस होते नीलमको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे.. ओर उनके होठोको चुमने लगती हे.. तब नीलम भी सर्मसार होते हसने लगती हे.. फीर वो भी रमाका साथ देने लगती हे.. आज रमाने बडी ही सीफततासे लखनके साथ रीलेशनके लीये नीलमका मन जान लीया था.. तो दुसरी ओर नीलम भी लखनके साथ सादी करना नही चाहती थी.. फीर भी अपनी मां की बाते सुनकर हां मे हां मीला रही थी..





तब कुछ ही देरके बाद नीलम ओर रमा पुरी तराह नंगी हो चुकी थी.. ओर मां बेटी दोनो ही सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाटकर अपनी जीभसे खरोद रही थी.. रमा नीलमके साथ लेस्बीयन खेलते नीलमको सेक्सका सारा पाठ पढा रही थी.. तब उनको नही पता थाकी उनकी बेटी पहेलेसे ही इस खेलमे खेली खीलाइ हे.. ओर मास्टर हो गइ हे.. दोनोने दो घंटे तक अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलते प्यार कीया ओर अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर दीया.. फीर दोनो ही आपसमे चीपककर नंगी ही सो गइ..

तो दुसरी ओर आज गांवमे भी कुछ खास नही हुआ.. सबलोग सामतभाइकी मोतकी वजहसे थोडा सदमे मे थे.. तो आज सुबह टीना भी कार लेकर सुबह ही रश्मी ओर वंदनाको लेकर सहेरमे अपने घरपे ले गइ थी.. देवायत रमेश ओर कुछ सदस्य सामतक सामतभाइके घरपे रहे.. फीर वो सब भी अपने अपने घरपे चले गये.. लखनके सारे दोस्त आज पुरे दिनकी दोडधामसे थके हुअ‍े थे.. तो उन सबके घरपे भी कुछ खास नही हुआ..
 
लेकीन आज देवायतकी बहुत सारी बीवीया कहीना कही चली गइ थी.. चंदा नीर्मला सब हरीद्वार तो नीशा चारु बोम्बे थी.. तो आज रश्मी वंदना भी टीनाके घरपे चली गइ थी.. तो सृती लखनके साथ ओर पुनम अपने घर चली गइ थी.. तो इस वक्त आज हवेलीमे सीर्फ मंजु भावना ओर चंपा भाभी ही थी.. जीसका मंजुलाने पुरा फायदा उठा लीया.. दोनो अपने बच्चेको लेकर होलमे बैठे दुध पीला रही थी..

ओर आपसमे धीरेसे बाते कर रही थी.. तब चंपा भाभी अकेली रातका खाना बना रही थी.. आज मंजुने अपनी छोटी बहेन भावनाको अपने पहेले प्यारको मीलवानेका पुरा प्लान सामको ही बनालीया था.. तो वो भावनाको सबकुछ बता देना चाहती थी.. जो पुनमने भावनाको पहेले ही सबकुछ बता दिया था.. भावना थोती पतली.. मगर उनके बुब्स मंजुके मुकाबले बहुत बडे ओर भरावदार लग रहे थे.. तभी..

मंजुला : (अपने बच्चेको दुध पीलाते) भावु.. आज घरपे कोइ नही हे.. तो आज तुम मेरे रुममे ही चली आना.. ओर अब जबतक मम्मी लोग वापस नही आजाते तुम हमारे साथ ही सोना.. आज अच्छा मौका हे देवुको मीलनेका.. तो तुम देवुको मीललो.. तुजे हमारे घर भेजनेका मेरा यही मक्सद था..

भावना : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. थेन्क्स.. लेकीन मुजे तो बहुत सरम आयेगी.. क्युकी मे इनको कभी नही अ‍ैसे मीली.. ओर जब मीली तब सृती दीदीने मुजे डीलीवरीकी वजहसे मीलनेके लीये मना कीया था.. तो हम दोनोने सीर्फ उपर उपरसे ही प्यार कीया.. तो आज बहुत डर लग रहा हे.. क्युकी जीजुका हे भी बहुत बडा.. तो क्या आप वहा साथमे तो रहोगीनां..? क्युकी अगर मुजे कुछ होजाये तो आप सम्हाल सकती हो..





मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. मुजे भी तेरे जीजुके बगैर कहा नींद आती हे.. तो मे साथमे ही रहुगी.. ओर तुम डरो मत.. मे तेरे साथ हुंना इनमे कुछ नही होगा.. यही समजलेना आज तेरी उनके साथ सुहागरात हे.. बस.. पहेली बार थोडा मामुली दर्द होगा.. जैसे तुजे भानुभाइके साथ अपनी पहेली सुहागरातमे हुआ था.. फीर तो मजे ही मजे हे.. देखना इसके बाद तु भानुभाइको भी भुल जायेगी..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. जीजु हे भी मस्त ओर हेन्डसम.. कोइ भी ओरत होया लडकी.. उनकी ओर आकर्सीत होजाती हे.. दीदी.. पुनोदीदी भी कुछ केह रहीथी.. क्या वाकइ आपने ओर जीजुने ये सब तैय कीया हे..? पुनो दीदीसे सुना हे.. अब लखन भैयाका भी बहुत बडा ओर मोटा होगया हे.. सायद जीजुसे भी बडा.. क्या ये वाकइ सच हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. ये सच हे.. लखनका तेरे जीजुसे थोडा छोटा था.. तो तेरे जीजु जीतना बढा ओर तेरे जीजुसे थोडा मोटा हो गया हे.. तुम उनकी बातोसे डर गइ क्या..?

भावना : (मुस्कुराते) नही दीदी.. अगर आप साथमे होतो कोइ डर नही.. क्या देवुकी सब बीवीया लखनके साथ रीलेशन रखने रजी होजायेगी..?

मंजुला : हां भावु.. मे तो यही समज रही हु की हम सब उसी लोकमे हे.. जहासे हम सब अपने स्वामीको मीलने आइ हे.. ओर हमारे खानदानमे सभी मर्द हमारे स्वामीके अंस ही तो हे.. तो फीर यहा हम कौनसा रीस्ता नीभाये..? इसीलीये मे तुजे सबसे पहेले तेरे जीजुसे मीलवा रही हु.. वरना लखनको पहेले जेलना तेरे बसका काम नही हे..

मंजुला : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. क्या मुजे भी लखन भैयासे मीलना पडेगा..? पुनो दीदी केह रही थी.. की अब हम चारोको इस हवेलीको सम्हालना हे.. उन्होने तो मुजे इनसे भी आगेका बहुत कुछ कहा हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. लेकीन अगर तुम चाहो तो.. वरना यहा जबर दस्ती कुछ भी नही होगा.. मंजु.. अ‍ेक वक्त अ‍ैसा भी आयेगा.. देवुकी सभी बीवीया लखन ओर मेरे विजयके साथ रीलेशनमे आयेगी.. ओर लखनकी बीवीया भी देवुके साथ रीलेशन रखेगी.. खुद हमारी चंदा मौसी भी हमारे विजयके साथ रीलेशन रखनेको मजबुर होजायेगी.. तुम सब तब भी अ‍ैसेही जवान रहोगी जैसे अभी हो.. तब कहा कोइ रीस्ते बचे..? ओर पुनोने सही कहा हे.. अब तुम चारोको ही सबकुछ सम्हालना हे..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर भानु..? क्या मुजे उनके साथ नही रहेनां..? हंम..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. अभी कुछ दिनतो उनके साथ रहेना पडेगा.. फीर भानुभाइ भी हमेसाके लीये हमारे खेतोपे रहेने आजायेगे.. तब वो कीसी कामके नही रहेगे.. फीर भी उनको कभी कभी इच्छा हुइ.. तो हमारे खेतोपे बहुत सारी ओरते हे.. जो उनके साथ रीलेशनमे हे.. ओर आज भी वो अपने घरपे अकेले नही हे.. हमारे खेतोकी अ‍ेक मजदुरन तेरे घरपे पीछले चार पांच दिनसे रेह रही हे..

भावना : (आस्चर्यसे) दीदी.. क्या केह रही हो..? कौन हे वो मजदुरन..?

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. क्या करोगी जानकर..? अ‍ैसी अ‍ेक थोडीना हे..? भानुने आजतक अपने कीसी भी दोस्तकी बीवीओको नही छोडा.. कुछ दोस्तकी बीवीओके तो बच्चे भी उनके हे.. बस.. सीर्फ वो लखनके दोस्त मुनाभाइकी मां बसंती भाभी ही उनकी चुंगलसे नीकल पाइ.. ओर अभी जो हे वो पहेले रश्मीके घरपे काम करती थी.. छोटुकी बीवी.. जीसे रश्मीके पतीने मारा था.. आज कल वो भानुभाइ की रखेल होगइ हे.. ओर पैसोके लीये खुद छोटु उन दोनोकी बहार रखवाली करता हे.. हें..हें..हें..

भावना : (थोडा गुस्सा करते) दीदी.. कुतेकी दुम.. तुम कीतनी भी कोसीस करते सीधी करो.. वो कभी सीधी हो ही नही पाती.. मैने तो सोचा था की रमा भाभीसे सादी करके कमीना सुधर गया होगा.. लेकीन आज भी वो अपनी हरकतसे बाद नही आता.. अब आप ही कहो.. मे इस कमीनेके साथ कैसे रेह पाउगी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. फीर भी तीन चार दिन तुजे कुछ भी मालुम नही हे.. अ‍ैसा समजकर उनके साथ रहेना होगा.. वो तुजे बादमे पता चल जायेगा.. क्युकी तुम भी पुनोकी तराह अपने पतीके साथ ज्यादा दिन नही रेह पाओगी.. अभी हाल ही मे भानुभाइके साथ कीसीने अपना बदला लेलीया हे.. तुम फीकर मत करो.. ओर कुछ ही दिनमे उनका हथीयार बेकार होजायेगा.. तब वो तुजे अपने आप ही छोड देगा.. ओर हमारे खेतोपे आजायेगे..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. कीसीने बदला लेलीया हे मतलब..? कौन हे वो..? जीसने भानुसे बदला लीया हे.. ओर मेरा तो ठीक हे.. लेकीन उस रमा दीदीका क्या होगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. उनके साथ कीसने बदला लीया हे.. क्या करेगी जानकर..? तुम बस.. अब यहा मजे कर.. हमने लखन भैयाको अ‍ैसे ही जडीबुटी नही दी.. वो तुम सबको बहुत खुस रखेगा.. ओर वो दोनो कमीनी हमारे खीलाफ साजीस रच रही हे.. देखना वो हमारे लखनकी रखैल बनकर रेह जायेगी.. उनको तो बस पैसे चाहीये.. तो पैसोके लीये वो मां बेटी दोनो लखनके नीचे लेटनेको भी तैयार हे.. हें..हें..हें..
 
भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर वो नीलु..? क्या उनके साथ भी वही होगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन नीलु उतनी बुरी नही हे.. अभी तो वो रमाके बहेकावेमे आ गइ हे.. वो बहुत जल्द धिरेसे सादी करलेगी.. क्युकी उनको अपनी मांकी नीयत कुछ ठीक नही लगती.. फीर वो लखनके साथ भी रीलेशन रखेगी.. क्युकी धिरेन नीलुको कभी संतुस्ट नही करपायेगा.. ओर आगे जाकर हमारा विजय चंदा दीदीके साथ ही रहेता होगा.. तो वो भी नीलमका फायदा उठायेगा.. भावु.. अ‍ैसा तो बहुत कुछ होगा.. तब तुम चारो इन सबकी साक्षीया होगी.. देखना..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. अभी आपने कहा.. की हमारा धिरेन नीलुको भी संतुस्ट नही कर पायेगा.. तो मतलब..? तो क्या वो पुनोदीदीको भी संतुस्ट नही कर पाता..

मंजुला : (गहेरी सांस लेते) हां भावु.. सही कहा तुमने.. ओर पुनोको संतुस्ट करना हर कीसी मर्दका काम नही हे.. इसे सीर्फ हमारे घरके मर्दही संतुस्ट करपायेगे.. तभी तो उसने तेरे जीजुसे सादीकी.. देखना अब वो हमारे लखनकी भी बीवी होते ही उनकी दिवानी होजायेगी..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. पुनो दीदीने तो जीजुसे सादी कीहेनां..? तो फीर लखन भैयाके साथ भी..? आइ मीन.. जो आपने कहा हे वो होजायेगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. हमारे खानदानमे सादी तो अ‍ेक औपचारीक हे.. ताकी अ‍ेक दुसरेके साथ सेक्स करते कभी गील्टी फील ना हो.. पुनोका तेरे जीजुसे सादी करनेका अ‍ेक ही मक्सद था.. जो उनसे बाबाने कहा था.. देवुसे प्रेगनेन्ट होना.. जो अब हो चुकी हे..

आज तेरे जीजुका बच्चा उनके उदरमे पल रहा हे.. उन दोनोका सफर यही तक था.. हांलाकी फीरभी उनका रीलेशन तेरे जीजुसे होगा.. लेकीन अब पुनो लखनकी दिवानी ओर उनकी चहीती बीवी होजायेगी.. वो अ‍ेक पल लखनसे दुर नही रहेगी.. दोनोके बीच इतना गहेरा प्यार होगा.. देखलेना..

चंपाभाभी : (वहा आते) देवरानीजी.. खाना रेडी हे.. तो आप देवरजीको बुला लीजीयेना.. वरना खाना ठंडा होजायेगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) भाभी.. बस.. अब वो आते ही होगे.. देखोना साम भी ढल गइ हे.. आप खाना खालो.. ओर सोजाओ.. आज हमे थोडी देर होजायेगी.. काम आप सुबह नीपटालेना.. कल उठनेकी कोइ जल्दी नही हे..

चंपाभाभी : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे खाना टेबलपे रख देती हु.. आप खालेना..

कहेते चंपा भाभी चली गइ.. ओर खाना खाने बैठ गइ.. तो आज भावना भी उनकी ओर आस्चर्यसे देखने लगी.. क्युकी अ‍ैसा मंजुने कभी नही कहा था.. तभी मंजुने उसे इसारोसे चुप रहेनेको कहा.. तो भावना समज गइकी मंजु चंपाभाभीको जल्दी अपने रुममे भगा देना चाहती थी.. लेकीन क्यु इसका अंदाजा भावनाको भी होने लगा.. ओर चंपा भाभी खाना खाकर कुछ काम नीपटाकर अपने रुममे चली गइ.. तब..

मंजुला : (खडी होकर) भावु.. क्या भावेश सो गया..? तो फीर जा.. फटाफट अपनी बच्चीका जुला हमारे रुममे लेकर आजा.. आज थोडी तैयारीया करनी हे.. फीर बच्चीको लेकर जुलेमे सुलादे मे भी विजयको सुला देती हु..

भावना : (सरमाकर खडी होते) दीदी.. भावेशको तो कबका खाना खीलाकर आपके रुममे सुला दीया हे.. इतनी जल्दी क्या हे..? पहेले जीजुको तो आने दीजीये..

मंजुला : (धीरेसे विजयको लेकर जाते) अरी जाना.. तु इनको लेकर फटाफट मेरे रुममे आजा फीर तुजे बताती हु क्या करना हे.. जा.. फटाफट..

कहातो भावना सरमाकर मुस्कुराती बच्चीको वही छोडकर जुला मंजुके रुममे रखकर आइ ओर बच्चीको लेकर मंजुके रुममे चली गइ.. तब दोनोने अपने अपने बच्चेको जुलेमे डालकर सुला दीया.. तब मंजुने भावनाको नहानेके लीये भेज दीया.. तो भावनाको भी थोडा आस्चर्य हुआ.. लेकीन वो कुछ नही बोली.. ओर जैसा मंजुने कहा करती गइ.. जब भावना नहाकर आइ तो मंजुने उनकी सादीका जोडा भावनाको पहेननेके लीये कहा..





तो भावना चुपचाप सादीका जोडा पहेन लीया.. तब मंजुने उनको तैयार करके दुल्हनकी तराह सजा दीया.. फीर भावनाको अपने रुममे ही खाना खीला दीया.. ओर यही बैठे रहेते देवायतका इन्तजार करनेको कहा.. तब कुछ ही देरमे देवायत भी आजाता हे.. तो मंजु ओर देवायत खानेके लीये बैठ जाते हे.. मंजुने चंपाभाभीको पहेले ही अपने रुममे भेज दिया था.. तब मंजु देवायतकी गोदमे बैठ गइ.. ओर खाना खाते मुस्कुरा रही थी..

देवायत : (मुस्कुराते) बेबी.. आज बडी खुस हो रही हो..? मुजे फ्रेस होने अपने रुममे भी नही जाने दिया.. ओर मेरी गोदमे भी बैठ गइ.. कुछ हुआ हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. खुस तो हुगीना..? क्युकी आज आपके लीये बहुत बडी सरप्राइज हे.. आप फटाफट खाना खालो.. आज तो आपको पुरी रात जागना हे.. हें..हें..हें.

देवायत : (हसते) अरे तेरे साथ प्यार करनेके लीये कइ रात जागनेके लीये तैयार हु.. हें..हें..हें.. अरे हां.. अब पता चला.. आज तो सीर्फ तुम ओर मे ही घरपे हे.. ओर वो भावु कीधर गइ..? क्या उनको खाना नही खाना..?

मंजुला : (हसते) नही.. उन्होने खाना खालीया हे.. आप भी फटाफट खालो.. ओर हमारे रुममे चलो.. तबतक मे घरकी सभी लाइटे ओर दरवाजा बंध करके आती हु..

कहेकर मंजुने पानी पीलीया ओर खडी होकर घरकी सभी साइटे ओर दरवाजा बंध करने लगी.. तबतक देवातने भी खाना खालीया ओर वो भी खडा हो गया.. तब मंजु उनके पास आगइ.. ओर उनको लेकर होलमे चली गइ.. ओर वहा भी अंधेरा करके दोनो सोफेपे बैठ गये तब मंजु देवायतकी गोदमे बैठ गइ.. तो देवायत मंजुकी ओर देखकर हसता रहा.. ओर मंजुकी सभी हरकतोको देखता रहा.. तभी मंजु बैठे बैठे ही देवायतकी बाहोमे समा गइ..
 
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