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मंजुला : (धीरेसे होंठ चुमकर) जानु.. आज आपके लीये बहुत बडी सरप्राइज हे..
देवायत : (मंजुकी ओर प्यारसे देखते) मंजु.. बताना कौनसी सरप्राइज हे.. क्युकी आज तु बहुत रोमेन्टीक मुड मे हे.. ओर बहुत खुस लग रही हे..
मंजुला : (प्यारसे आंखोमे देखते) हां जानु.. आज आपको मेरी भावुका सपना पुरा करना हे.. चलीये वो हमारा वही इन्तजार कर रही हे..
देवायत : (मंजुके बुब्सको मसलते होठोको चुमते) पहेले मुजे मेरी इस बहेनको प्यार तो करने दे.. फीर तेरी बहेनको भी नीपट लुगा..
मंजुला : (सरमाते धीरेसे) नही जानु.. अब जो भी करना हे हमारे रुममे जाकर करना हे.. पहेले आपको उनके साथ गांधर्व विवाह करना हे.. जो मे करवाउगी.. आज हम दोनो बहेने आपको छोडने वाली नही हे.. आज मेरी भावुका भी कल्याण करदो.. हम तीनो सुबह तक प्यार करेगे..
देवायत : (होंठ चुमते) मंजु.. मुजे कल अेक दिनके लीये वहा कबीलेपे भी जाना हे.. मे वहा जमीलाको प्रोमीस देकर आया हु.. उनसे भी सादी करनी हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. आप कल सुबह वहा चले जाना.. ओर उनसे सादी करके अपनी सुहागरात मनाकर उसे कबीलेकी रानी बनाकर आना.. आप जानते नही आपकी वो बीवी हमारे लीये कीतनी इम्पोर्टन्ट हे.. हमारी पुनोकी बच्चीकी बच्चीको वो ही सम्हालने वाली हे..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु.. लगता हे उनके बारेमे तुजे बहुत कुछ पता हे.. क्या मुजे बता सकती हो..?
मंजुला : (सीनेपे सर रखते धीरेसे) हां जानु बस.. थोडा बहुत बताउगी.. आप उस बुढी ओरतको कम मत आंकना.. वो बहुत कुछ जानती हे.. ओर जमीला रानी बनते ही अपनी सारी विद्या उनको सीखाने वाली हे.. जो आगे जाकर वो ही विद्या पुनोकी बेटीको देगी.. जो हमारे विजयकी बीवी होगी.. फीर उनकी बेटी ही हमारे स्वामीकी बीवी होगी.. ओर हमारे स्वामीको वहीसे सबकुछ ज्ञात होजायेगा..
देवायत : अच्छा.. तो ये बात हे..? मंजु.. क्या पुनोकी बेटी.. यानीकी मेरी ही बेटी हमारे विजयकी बीवी होगी..? तो फीर वो भी दोनो भाइ बहेन होगेनां..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. अब भाइ बहेनकी सादी हमारे खानदानकी परंपरा हो गइ हे.. आपकी जीतनी भी बेटीया होगी.. सब मेरे विजयकी बीवीया हे.. अब चलो भी सब आज ही जानलोगे क्या..?
कहेते मंजु देवायतका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. तो वहा बेडपे भावना पुरी तराह दुल्हनके लीबासमे बेठी थी.. जैसे ही देवायत ओर मंजु रुममे आये तब मंजुने दरवाजा बंध करदीया तब भावना देवायतको देखते ही बहुत ही सरमाने लगी.. तभी मंजुने उनको भी खडा करदीया ओर दोनोको लेकर घरके मंदिरके सामने चली गइ.. ओर वहाके दोनो हार उतारके देवायत ओर भावनाको अेक अेक हार थमा दीया..
मंजुला : जानु.. जीस तराह आपने मम्मीके साथ सादी कीथी उसी तराह आज आपको भावुके साथ सादी करनी हे.. दोनो अेक दुसरेको हार पहेना दीजीये..
देवायत : (सामने देखते) मंजु.. क्या सादी करना जरुरी हे..? क्युकी भावु हमारे भानुकी बीवी हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. जब आपने मम्मीसे सादी की.. तब वो भी तो हमारे पापाकी बीवी थी.. चलीये कोइ बहाना नही.. जैसा मे कहु दोनो करते जाओ.. फीर मुजे आपसे कुछ बात भी करनी हे.. पहेनाइअे हार..
कहातो देवायतने भावनाके गलेमे हार पहेना दिया तो भावनाने भी सरमाकर देवायतको हार पहेना दीया.. फीर मंजुने देवायतको अेक सींदुरकी डीबी थमादी.. ओर उसे भावनाकी मांग भरनेको कहा.. तो देवायतने चुटकी सींदुर लेकर भावनाकी मांग भरदी.. तो भावनाकी आंखसे आंसु छलक गये.. फीर मंजुने दोनोको सादीकी सभी कसमे खीलवाइ.. ओर भावनाने मंजु ओर देवायतके पैर छु लीये.. तो मंजुने उसे गले लगालीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आजसे भावु भानुभाइकी नही.. आपकी बीवी हे.. ये सादी जरुरी थी.. देखना अब मेरी भावु पुनो सृती ओर लता.. कभी विधवा नही कहेलायेगी.. चारो हमेसा सुहागन ही रहेगी.. अब चलीये हमारे बेडपे.. आज तो पुरी रात हम दोनो बहेने आपको सोने नही देगी.. हें..हें..हें..
भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. थेन्क्स.. आपने मेरा सपना पुरा करदीया.. पहेले आप चलीयेनां.. मुजे तो बहुत सर्म आ रही हे..
मंजुला : (बेडकी ओर जाते हसते) अरे क्यु सरमा रही हे.. आज तेरी सारी तम्मना पुरी हो रही हे.. लुटले हमारे पतीको.. आजा.. ओर मीलले अपने पहेले प्यारको.. आज बहुत दिनोके बाद मौका मीला हे तुजे.. ओर आज तो हम दोनो खुसकीस्मत हे.. की हम दोनो बहेने अेक ही बीस्तरमे हमारे पतीको मील रही हे.. वरना तुम दोनोको मे वहा हमारे घरपे भेजने वाली थी.. चल.. आजा..
देवायत : (मुस्कुराते) भावु.. आजा.. आज तो पुरी रात मुजे तुम दोनो बहेनोके साथ प्यार कना हे.. आज तुजे छोडने वाला नही हु..
कहातो भावना सर्मसार होकर मुस्कुराते बेडपे चड गइ.. वो आज दुल्हनके लीबासमे कयामत लग रही थी.. ओर उपरसे ढीला जुडा बनाके रखा था.. जो भावनाकी कामुक्तामे चार चांद लगा रहे थे.. वो अपने दोनो पैर सीकुडकर बेडके बीच बैठ गइ.. तब देवायत भी उनके पास आकर बैठ गया ओर भावनाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तो मंजु हसने लगी.. ओर बेडपे पीठके बल लेट गइ....
कन्टीन्यु
देवायत : (मंजुकी ओर प्यारसे देखते) मंजु.. बताना कौनसी सरप्राइज हे.. क्युकी आज तु बहुत रोमेन्टीक मुड मे हे.. ओर बहुत खुस लग रही हे..
मंजुला : (प्यारसे आंखोमे देखते) हां जानु.. आज आपको मेरी भावुका सपना पुरा करना हे.. चलीये वो हमारा वही इन्तजार कर रही हे..
देवायत : (मंजुके बुब्सको मसलते होठोको चुमते) पहेले मुजे मेरी इस बहेनको प्यार तो करने दे.. फीर तेरी बहेनको भी नीपट लुगा..
मंजुला : (सरमाते धीरेसे) नही जानु.. अब जो भी करना हे हमारे रुममे जाकर करना हे.. पहेले आपको उनके साथ गांधर्व विवाह करना हे.. जो मे करवाउगी.. आज हम दोनो बहेने आपको छोडने वाली नही हे.. आज मेरी भावुका भी कल्याण करदो.. हम तीनो सुबह तक प्यार करेगे..
देवायत : (होंठ चुमते) मंजु.. मुजे कल अेक दिनके लीये वहा कबीलेपे भी जाना हे.. मे वहा जमीलाको प्रोमीस देकर आया हु.. उनसे भी सादी करनी हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. आप कल सुबह वहा चले जाना.. ओर उनसे सादी करके अपनी सुहागरात मनाकर उसे कबीलेकी रानी बनाकर आना.. आप जानते नही आपकी वो बीवी हमारे लीये कीतनी इम्पोर्टन्ट हे.. हमारी पुनोकी बच्चीकी बच्चीको वो ही सम्हालने वाली हे..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु.. लगता हे उनके बारेमे तुजे बहुत कुछ पता हे.. क्या मुजे बता सकती हो..?
मंजुला : (सीनेपे सर रखते धीरेसे) हां जानु बस.. थोडा बहुत बताउगी.. आप उस बुढी ओरतको कम मत आंकना.. वो बहुत कुछ जानती हे.. ओर जमीला रानी बनते ही अपनी सारी विद्या उनको सीखाने वाली हे.. जो आगे जाकर वो ही विद्या पुनोकी बेटीको देगी.. जो हमारे विजयकी बीवी होगी.. फीर उनकी बेटी ही हमारे स्वामीकी बीवी होगी.. ओर हमारे स्वामीको वहीसे सबकुछ ज्ञात होजायेगा..
देवायत : अच्छा.. तो ये बात हे..? मंजु.. क्या पुनोकी बेटी.. यानीकी मेरी ही बेटी हमारे विजयकी बीवी होगी..? तो फीर वो भी दोनो भाइ बहेन होगेनां..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. अब भाइ बहेनकी सादी हमारे खानदानकी परंपरा हो गइ हे.. आपकी जीतनी भी बेटीया होगी.. सब मेरे विजयकी बीवीया हे.. अब चलो भी सब आज ही जानलोगे क्या..?
कहेते मंजु देवायतका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. तो वहा बेडपे भावना पुरी तराह दुल्हनके लीबासमे बेठी थी.. जैसे ही देवायत ओर मंजु रुममे आये तब मंजुने दरवाजा बंध करदीया तब भावना देवायतको देखते ही बहुत ही सरमाने लगी.. तभी मंजुने उनको भी खडा करदीया ओर दोनोको लेकर घरके मंदिरके सामने चली गइ.. ओर वहाके दोनो हार उतारके देवायत ओर भावनाको अेक अेक हार थमा दीया..
मंजुला : जानु.. जीस तराह आपने मम्मीके साथ सादी कीथी उसी तराह आज आपको भावुके साथ सादी करनी हे.. दोनो अेक दुसरेको हार पहेना दीजीये..
देवायत : (सामने देखते) मंजु.. क्या सादी करना जरुरी हे..? क्युकी भावु हमारे भानुकी बीवी हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. जब आपने मम्मीसे सादी की.. तब वो भी तो हमारे पापाकी बीवी थी.. चलीये कोइ बहाना नही.. जैसा मे कहु दोनो करते जाओ.. फीर मुजे आपसे कुछ बात भी करनी हे.. पहेनाइअे हार..
कहातो देवायतने भावनाके गलेमे हार पहेना दिया तो भावनाने भी सरमाकर देवायतको हार पहेना दीया.. फीर मंजुने देवायतको अेक सींदुरकी डीबी थमादी.. ओर उसे भावनाकी मांग भरनेको कहा.. तो देवायतने चुटकी सींदुर लेकर भावनाकी मांग भरदी.. तो भावनाकी आंखसे आंसु छलक गये.. फीर मंजुने दोनोको सादीकी सभी कसमे खीलवाइ.. ओर भावनाने मंजु ओर देवायतके पैर छु लीये.. तो मंजुने उसे गले लगालीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आजसे भावु भानुभाइकी नही.. आपकी बीवी हे.. ये सादी जरुरी थी.. देखना अब मेरी भावु पुनो सृती ओर लता.. कभी विधवा नही कहेलायेगी.. चारो हमेसा सुहागन ही रहेगी.. अब चलीये हमारे बेडपे.. आज तो पुरी रात हम दोनो बहेने आपको सोने नही देगी.. हें..हें..हें..
भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. थेन्क्स.. आपने मेरा सपना पुरा करदीया.. पहेले आप चलीयेनां.. मुजे तो बहुत सर्म आ रही हे..
मंजुला : (बेडकी ओर जाते हसते) अरे क्यु सरमा रही हे.. आज तेरी सारी तम्मना पुरी हो रही हे.. लुटले हमारे पतीको.. आजा.. ओर मीलले अपने पहेले प्यारको.. आज बहुत दिनोके बाद मौका मीला हे तुजे.. ओर आज तो हम दोनो खुसकीस्मत हे.. की हम दोनो बहेने अेक ही बीस्तरमे हमारे पतीको मील रही हे.. वरना तुम दोनोको मे वहा हमारे घरपे भेजने वाली थी.. चल.. आजा..
देवायत : (मुस्कुराते) भावु.. आजा.. आज तो पुरी रात मुजे तुम दोनो बहेनोके साथ प्यार कना हे.. आज तुजे छोडने वाला नही हु..
कहातो भावना सर्मसार होकर मुस्कुराते बेडपे चड गइ.. वो आज दुल्हनके लीबासमे कयामत लग रही थी.. ओर उपरसे ढीला जुडा बनाके रखा था.. जो भावनाकी कामुक्तामे चार चांद लगा रहे थे.. वो अपने दोनो पैर सीकुडकर बेडके बीच बैठ गइ.. तब देवायत भी उनके पास आकर बैठ गया ओर भावनाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तो मंजु हसने लगी.. ओर बेडपे पीठके बल लेट गइ....
कन्टीन्यु















