Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 61 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो दुसरी ओर सुबह धिरेन जब उठा तो रुममे कोइ नही था.. उनका सर दर्द कर रहा था.. पुनम जल्दीसे उठकर तैयार होकर नीचे चली गइ थी.. तो धिरेन अपना सुबहका कार्यक्रम नीपटाने लगा.. तब उसे रातकी सभी घटना याद आने लगी.. तो वो सर्मीन्दगी महेसुस करने लगा.. क्युकी पुरी रात प्यार करनेकी बडी बडी बाते करते ओर कामोतेजक गोली खानेके बावजुद वो पनुमको अ‍ेक बारभी ठीकसे नही चोद पाया..

ओर उस वजहसे उनको पुनमकी खरी खोटी सुननी पडी वो अलग.. उसे ये भी पता नही चलाकी वो इतनी जल्दीसे कैसे सोगया..? धिरेन नहाते नहाते सोचने लगा.. की वो नीलम ओर भीमाभाइकी बीवी पायल भाभीको कैसे कामोतेजककी गोली खाकर अच्छेसे चोद लेता था.. तो फीर वो पुनमको क्यु नही चोद पाता..? यही सब सोचकर वो नहाकर बहार नीकला तो पुनम उनके रुममे आचुकी थी..

ओर अलमारीसे उनके कपडे नीकालकर बेडपे रख रही थी.. तो धिरेनने मुस्कुराते उनके पीछे आगया.. ओर पुनमको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लीया.. तो पुनम थोडे गुसेसे उनकी ओर देखते घुरने लगी.. ओर धिरेनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तो धिरेनने उनको मुस्कुराते थोडा कसके पकडलीया.. ओर उनके होठोको जबरदस्तीसे चुम लीया.. तब पुनम कोइ प्रतीक्रिया दिये बगैर अ‍ैसेही खडी रही.. तभी..





धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे पता हे.. तुम रातकी बातोसे अभी तक मुजसे नाराज हो..

पुनम : (थोडी सख्तीसे) धिरेन.. आपको सब पता हे.. तो फीर आप अपना इलाज क्यु नही करवाते..? मेरी भी कुछ तम्मनाये होती हे.. क्या आप मेरी फीलींग्सको कभी नही समजोगे..?





धिरेन : (थोडा नाराज होते) यार मे ठीकसे तो करता हु.. पता नही तुजे देखते ही सब जल्दीसे होजाता हे.. तो मे क्या करु..? फीर भी तुम कहेती हो तो आज मे कीसी डोक्टरको दीखाकर आजाउगा.. बस..?

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. धिरेन.. पता नही.. आपने मुजे प्रेगनेन्ट कैसे करदीया.. आपको पता हे..? मेरी तम्मना क्या हे..? मुजे बीस्तरमे लंबी रेसका घोडा चाहीये.. जो मुजे सुबह तक प्यार करे..

धिरेन : (सामने देखते थोडी जल्द बाजीमे) पुनो.. मे लंबी रेसका घोडा ही हु.. यकीन नही हे.. तो पुछलो..

पुनम : (थोडा चोंकनेका नाटक करते) पुछलु..? कीसे..?

धिरेन : (गलतीका अहेसास होते ही बातको सम्हालते) वो.. वो.. मेरा मतलब.. आज डोक्टरको दीखा दुगा.. फीर उनको पुछ लेना.. की मे लंबी रेसका घोडा होगया हु.. की नही.. हें..हें..हें..

पुनम : (मनमे हसते बहारकी ओर जाते ) ठीक हे.. आप तैयार होकर नीचे आजाइअ‍े.. ओर हां.. अब अपना इलाज करवाके ही मुजे हाथ लगाइअ‍ेगा.. अब मे अ‍ैसे प्यासी रहेना नही चाहती.. समजे..?

धिरेन : (थोडा गुस्सेसे) पुनो.. ये क्या बात हुइ..? थोडे दिन वहा रही तो.. तुजे तो बहुत आग लगी हे..





पुनम : (पीछे मुडकर थोडा रुकते) हां धिरेन.. मुजमे बहुत आग हे.. ओर मेरी आग बुजाना आपका फर्ज हे.. धिरेन.. ये सब मुजसे सादी करनेसे पहेले ही सोच लेना चाहीये था.. क्या आप मुजसे जगडा करना चाहते हे..? तो बता दीजीये.. सुबह सुबह मेरा मुड मत खराब कीजीये.. ओर हां.. मे ओर दया बहेन आपके जानेके बाद हमारे गांव जा रही हे.. वो सामतभाइके घरपे.. सोक मनाने.. ओर हम दोनो बससे वापस आजायेगी.. अगर हमे आनेमे देर होजाये तो चीन्ता मत करना.. हमे बडे भैया छोड जायेगे..

धिरेन : (मनमे बडबडाते) कमीनी कहीकी.. जब देखो बडे भैया ओर छोटे भैयाकी मालाही जपती हे.. अगर वो इतने ही प्यारे हे तो मुजसे सादी क्युकी..? पुरी जींदगी उनके पास रहेकर उनसे ही चुदवाती.. जानता हु तेरे बढे भैयाको.. अ‍ेक नंबरका अ‍ैयास हे वो.. ठरकी कहीका..

पता नही मेरी मां पे क्या जादु करदीया.. उनको फसाकर सादी करके लेगया.. ओर वो भी कमीनी चुदकढ नीकली.. अगर लंड खानेका इतना ही सौक था तो मुजसे कहेती.. घरपे इतना जवान लडकेको छोडके बहार वालोसे चुदवाती थी.. घरपे सीर्फ हम दोनो ही तो थे.. कीसीको क्या पता चलता..?

पुनम : (मनकी बात जानकर गुससे देखते) कुछ कहा आपने..? मनमे क्या बडबडाते हो.. जो कहेना हे साफ साफ कहो..

धिरेन : (थोडा जेंपते) नही तो.. कुछ नही.. तु जा यार.. मे आता हु..

कहा तो पुनम गुस्सेके साथ बहार चली गइ.. तो धिरेन उनको मुह फाडकर देखता ही रहा.. क्युकी आज उन्होने पहेली बार पुनमको इतने गुस्सेमे देखा था.. तो धिरेनका मुड भी थोडा खराब होगया.. ओर वो जल्दीसे अपने कपडे पहेनकर नीचे आगया.. तो देखा घरपे भीमाकी नइ बीवी पायल भाभी आइ हुइ थी.. जो वो ओर पुनम सोफेपे बैठकर हस हसके बाते कर रही थी.. तो धिरेन उनको देखकर खुस होगया.. तभी..

पायल : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) अरे देवरजी.. आगये आप..? बेंन्कपे जानेकी तैयारीया हो रही हे क्या..? आपने बताया नही मेरी देवरानी आगइ हे.. देखो.. कीतनी खुबसुरुरत हे.. अगर पता होताकी ये आगइ हे.. मे तो इनको मीलने पहेले ही आजाती.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराकर पास बैठते) अरे भाभी.. मुजे भी कहा पता था.. की ये इतनी खुबसुरत हे.. वरना मे इनको उनके मायके थोडीना जाने देता.. हें..हें..हें.. ओर खुबसुरत तो आप भी कम नही हो.. तभी तो भीमाभाइ आपके पीछे इतना पागल हे.. क्यु पुनो..? हें..हें..हें..

पायल : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) चलो.. हटो बदमास.. बीवीके सामने ही मस्तीया करते हो..? देवरानीजी.. इनकी जुबान बहुत चलती हे.. जरा इनको सम्हालके रखीयेगा.. कही हाथसे ना नीकल जाये.. आप इसे मार मारके सुधारदो.. हें..हें..हें.. बहुत बीगड गये हे..

पुनम : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. इनकी सीर्फ जुबान ही चलती हे.. बाकी कुछ नही.. मतलब.. ये अ‍ैसे नही हे.. बहुत कम बोलते हे.. भाभी.. थेन्क्स.. आपने धिरेनका इतने दिनो तक खयाल रखा.. वरना ये तो वहा खानेके लीये आते भी नही थे.. तो इनकी बहुत चीन्ता हो रही थी..

धिरेन : (मुस्कुराते सामने देखते मनमे) कमीनी.. कीतना जुठ बोलती हे..

पायल : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) देवरानीजी.. मेरे होते हुअ‍े आपको इनकी चीन्ता करनेकी जरुरत नही हे.. मेरे अ‍ेक लौते देवर जो हे.. इनके भाइने मुजे इनका अच्छेसे खयाल रखनेको कहा हे.. क्यु देवरजी..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अगर खयाल रखने वाली आप जैसी भाभी हे.. तो मुजे चीन्ता करनेकी क्या जरुरत हे..? आपने मेरा बहुत अच्छेसे खयाल रखा.. चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. आप भी बैठ जाइअ‍े..

पायल : (मुस्कुराते) अरे नही.. मे चाइ नास्ता करके ही आइ हु.. ये तो देवरानीजीको मीलनेके लीये आइ थी.. अब आप लोग चाइ नास्ता करलीजीये मे चली.. अब तो आना जाना लगाही रहेगा.. हें..हें..हें..

कहेते पायल धिरेनकी ओर कातील मुस्कान करते नीकलने लगी.. तभी धिरेनने पुनमकी नजर बचाते उनको जटसे आंख मारदी.. तो पायल बहुत ही सरमा गइ.. ओर जटसे नीकल गइ.. तब पुनम धिरेनकी ओर नजर गडाये बैठी थी.. जब धिरेनने पुनमकी ओर देखा तब पुनम सीर्फ उनको ही देख रही थी.. वो भी थोडा गुस्सेसे.. जीसे देखकर धिरेन थोडा जेंप गया.. ओर डाइनींग टेबलपे जाकर बैठ गया.. तो पुनम भी यहा आकर बैठ गइ..

पुनम : (धीरेसे) भाभीके साथ तो बडा फ्लर्ट कर रहे थे..? कही इनके साथ कुछ चकर बकर तो नही..?

धिरेन : (थोडा जेंपते) अरे यार.. तुम बीवीओका प्रोबलेम ही यही हे.. जरा कीसी लडकी या ओरतसे हसके बाते करलो.. तो तुरंत सक करने लगती हो.. मेरा अ‍ैसा कोइ चकर बकर नही हे.. समजी..?

पुनम : (चाइ नास्ता देते) ठीक हे.. ठीक हे.. चुपचाप चाइ नास्ता करलो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभी आपको बेन्कपे जानेमे देर नही हो रही..?

कहा तो धिरेन चुपचाप चाइ नास्ता करने लगा.. तब दया कीचनसे दोनोकी नोक जोक सुनकर हस रही थी.. उसे पता था इस नोक जोकसे पुनम धिरे धिरे करते धिरेनसे दुरीया बना रही थी.. धिरेन फटाफट चाइ नास्ता करके जटसे बेन्कपे चला गया.. तब पुनम ओर दया चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर चाइ नास्ता करने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१२

कहा तो धिरेन चुपचाप चाइ नास्ता करने लगा.. तब दया कीचनसे दोनोकी नोक जोक सुनकर हस रही थी.. उसे पता था इस नोक जोकसे पुनम धिरे धिरे करते धिरेनसे दुरीया बना रही थी.. धिरेन फटाफट चाइ नास्ता करके जटसे बेन्कपे चला गया.. तब पुनम ओर दया चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर चाइ नास्ता करने लगी.. तभी....अब आगे

पुनम : (मुस्कुराते) देखा दया बहेन.. यही छमक छलो थीनां..? जो कल हमारे घरपे आइ थी.. यही कमीनी हे.. जो इतने दिनोसे धिरेनसे चुदवा रही हे.. ओर अ‍ेक तेरे जीजु हे.. अपनी बीवीको तो खुस नही कर पाते.. जो उपर चडते ही ढेर हो जाते हे.. पता नही ये इनके पीछे दिवानी क्यु बनी हुइ हे..

दया : (जोरोसे हसते) दीदी.. ये साली आग बहुत बुरी चीज हे.. देखा नही.. उस रात चंपा भाभी लखन भैयाको देखकर कैसे बहेक गइ थी.. उनको पता था.. की लखन भैया रजीयाको मीलने आये हे.. फीर भी अंधेरेका फायदा उठाकर उन्होने लखन भैयाको अपने उपर चडा दीया.. ओर अपनी हालत खराब करवाली.. हें..हें..हें.. ठीकसे चलनेमे दो दिन लगे.. तब जाके सहीसे चल पाइ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) दया बहेन.. हमने लखन भैयाको जडी बुटी देदी हे.. ओर लताका पीरीयड चल रहा हे.. तो वो थोडा बेकाबु हो गये थे.. अब उसे कीसी भी हालमे सेक्स करना चाहीये ही चाहीये..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या वाकइ लखन भैयाका इतना बडा होगया हे..? रजीया केह रही थी.. अब मंजु भाभीने उसे हमेसाके लीये लखन भैयाके साथ सोनेके लीये कहा हे.. तो लखन भैयासे मीलते ही वो बेहोस होगइ थी.. इसीलीये आपको पुछ रही हु.. क्युकी आपको ओर भाभीको तो सब पता चल जाता हेनां..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) हां दया बहेन.. आपकी बात सच हे.. उनका बडे भैया जीतना लंबा.. ओर उनसे भी थोडा मोटा होगया हे.. लता मुजे भी बता रही थी.. जब मैने उनको सब बताया.. दया बहेन.. मे आज आपको भी सब बता देना चाहती हु.. की भाइ.. ओर भाभीने मीलकर क्या फैसला लीया हे.. आज मे हमारे घरके बारेमे आपको सबकुछ बता दुगी.. ओर आपके बारेमे भी.. जो आप नही जानती..

दया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. आप कल भी कुछ बतानेको केह रही थी.. अब तो जीजु भी बेन्कपे चले गये हे.. तो बताइअ‍ेना..

पुनम : (मुस्कुराते) दया बहेन.. पहेले चाइ नास्ता तो करलो.. फीर आरामसे बैठकर बाते करेगे..

फीर दोनो चाइ नास्ता खतम करके होलमे आकर बैठ गइ.. तो पुनम धीरे धीरे करते दयाको सभी बाते बताने लगी.. देवायत ओर लखनकी कीतनी बीवीया हे.. जीनके साथ सादी ओर गांधर्व विवाह कर लीया हे.. ओर आगे कीतनी बीवीया होगी.. से लेकर उनका कीसके साथ अवैध रीलेशन हे.. फीर विजय ओर आने वाले वक्तमे उनके बेटे यानीके उन राजाके बारेमे भी बता दीया..

फीर देवायतकी इतनी बीवीया होनेकी वजहसे मंजुको कीन हालातमे फैसला लेना पडा.. जीनमे फैसलेमे दोनो भाइ मीलकर घरकी सभी ओरतोको सम्हाल लेगे.. ओर लखनको कीन हालातमे जडी बुटी देनी पडी.. ओर हवेली के खीलाफ रमा नीलमकी वो साजीसके बारेमे भी बात करली.. ओर लखनकी उनके बारेमे क्या फीलींग्स थी.. ओर अभी कीस बातसे नाराज हे वो भी बता दीया.. तो दया गौरसे सुनते हसती रही..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या वो दोनो कमीनी पैसोके लीये इतना नीचे तक गीर सकती हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. तभी तो हमने लखन भैयाको वो जडी बुटी दी हे.. ओर भी बाते हे.. जो आप नही जानती.. तो वो बाते भी सुनो..

फीर पुनम दयाको अपने बारेमे भी सबकुछ बताने लगी.. की वो जब लखनके साथ स्कुलमे थी तब लखन उनसे प्यार करने लगे थे.. लेकीन अपना प्यार जता नही पाये.. से लेकर ओर अपने बडे भाइके साथ रीलेशनसे उनके साथ सादी तककी बाते कहेदी.. फीर आने वाले वक्तके बारेमे भी बता दीया.. ओर आखीरमे ये भी बतादीया की मंजुभाभी सृती लता सब आपसमे बहेने हे.. ओर जब पुनमने उनको ये बताया की वो भी उनकी सौतेली बहेन हे.. तब दया चौक गइ.. ओर उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तभी..

दया : (आंसु बहाते) दीदी.. इसीलीये मंजुदीदी ओर आप मुजे इतना प्यार करते थेनां..?

पुनम : (दयाको हग करते) हां दया बहेन.. इसके बारेमे पहेले सीर्फ मंजुदीदीको ही पता था.. फीर मुजे सब शक्तिया देदी.. तब मुजे पता चला.. वरना इस बारेमे हमे कभी पता नही चलता.. दया बहेन.. रामुकाका बापुके अच्छे दोस्त थे.. लेकीन वो भी बच्चा देनेमे सक्षम नही थे.. इसीलीये आपकी मम्मीने खुद बच्चेके लीये सामनेसे बापुके साथ रीलेशन रखा था.. ओर आपका जन्म हुआ..

दया : (आंसु पोछते) दीदी.. मे मेरे बापुको बहुत प्यार करती हु.. वो आज भी मेरे पीता हे.. ओर मे उसे ही अपना पीता मानुगी.. दीदी.. मैने भी बडे भैयाको प्यार कीया हे.. मैने उनको अपना सबकुछ सौंप दीया हे.. तब मुजे नही पता था.. की ये मेरे बडे भैया हे.. दीदी.. मैने भी अपने भाइके साथ रीलेशन रखलीया हे..

पुनम : (मुस्कुराते ) हां दया बहेन.. ये तो रखना ही था.. सीर्फ आप ही नही.. हम सभी बहेनोने भाइके साथ रीलेशन रखा हे.. ओर हम सभी बहेने आज उनकी पत्नीया हे.. वो बहुत जल्द आपके साथ ओर लता दीदीके साथ भी सादी कर लेगे.. ओर सीर्फ भाइ ही नही.. हमारे पीता ओर हमारे दादाजीने भी इनकी बहेनोके साथ सादीया करली थी.. रामुकाका सीर्फ आपके पीता नही हे.. हम भी उनको अपना पीता मानते हे..

दया : (आंसु पोछते मुस्कुराते) दीदी.. आज तो आपने बहुत बडा राज खोल दीया.. अब मे बडे भैयाके साथ कैसे नजरे मीलाउगी..? क्या उनको पता हे की मे भी उनकी बहेन हु..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. उनको मंजुभाभीने पहेले ही सब बता दीया था.. तो आपको उनके सामने सर्मीन्दा होनेकी जरुरत नही हे.. इसीलीये तो वो आपके साथ सादी करना चाहते हे.. दीदी.. अब आप भी भाइसे सादी करनेकी तैयारीया सुरु करदो.. वो बहुत जल्द आपसे भी सादी करलेगे.. फीर हम सभी बहेनोको मतलब.. हमारे घरकी सभी ओरतोको दोनो भाइ मीलकर सम्हाल लेगे.. तो अब लखन भैयासे मीलनेके लीये भी आप तैयार रहेना.. हें..हें..हें..

दया : (सरमाकर मुस्कुराते) ओह गोड.. दीदी.. मतलब मुजे दोनो भाइके साथ सुहागरात मनानी हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. आप भी तो उनकी बहेन हो.. तो क्या वो आपके साथ भी..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दया बहेन.. मे भी.. क्युकी वो तो मुजे सुरुसे ही प्यार करते थे.. लेकीन मेने आपको बतायाना.. तो इस वजहसे आजकल वो मुजसे रुठे हुअ‍े हे.. पता नही सृती दीदी उनको कैसे मनायेगी.. अभी तक उनका फोन भी नही आया.. सायद अपनी क्लीनीकपे जाकर बात करेगी..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. अब इस महारानीका क्या करना हे..? जो अभी आइ थी..

पुनम : (रहस्य मुस्कानसे) दया बहेन.. मेने इनके बारेमे भी जाना हे.. वो इतनी भी बुरी नही हे.. बस.. उनका पती भी इनको बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. इसीलीये उसने धिरेनके साथ सबंध बनाया हे.. इसी सीलसीलेमे मुजे लखन भैयासे बात करनी हे.. हमे इसीको जरीया बनाकर वापस हमारे घरपे जाना हे.. अब देखते हे.. लखन भैया कब मुजे माफ करते हे.. बस.. अ‍ेक बार वो मुजसे बात करले.. तो इनके ओर धिरेनके बारेमे उनको सब कुछ बता दुगी.. फीर लखन भैया ही इनको सम्हाल लेगे..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर आप कहोतो मे रजीयासे बात करलु..? क्युकी वो उनकी बहुत मानते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे दया बहेन.. तबतो आपके मुहमे घी सकर.. बस.. अ‍ेक बार मेरा लखन मुजसे बात करले.. फीर तो मे ही उनको मना लुगी..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. कोइ मस्तीया करते इतने रुठ जाते हे क्या..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां दया बहेन.. बस.. वो ही भाभी देवर वाली मस्ती.. आपको तो पता हे..? वो अब मुजे अपनी बहेन नही.. भाभी मानते हे.. बस.. दो दिन पहेले वो मेरी ओर सृतीदीदीकी मस्तीया करते थोडा बहेक गये थे.. ओर मेने उसे चाटा मार दीया.. तबसे वो मुजसे नाराज हे.. हें..हें..हें..

दया : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? आपने उसे चाटा मारा..? हें..हें..हें.. दीदी.. उनको भी पता चल गया की आप बडे भैयाकी बीवी हो..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) हां दया बहेन.. लेकीन गलती मेरी ही थी.. मैने ही उनको मेरे बारेमे ओर भैयाके बारेमे सब कुछ बता दीया था.. खैर.. अब चलीये फीर हम दोनोको जाना भी हे.. वो सामत भाइके घरपे.. बस.. अब आप इस पायल भाभीपे नजर रखना.. ओर अगर कुछ अ‍ैसा दीखनेको मीले.. तो उनकी विडीयो क्लीप बना लेना.. ताकी जल्दसे जल्द हम दोनोका यहासे छुटकारा होजाये..

दया : (हसते) दीदी.. हमे यहा आये रुमा जुमा सीर्फ दो दिन ही तो हुअ‍े हे.. क्या इतनी जल्दी हमे वापस जाना हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. अब मे इस कमीनेके साथ रहेना नही चाहती.. बस.. अ‍ेक बार मेरा लखन मुजसे बात करले.. फीर देखो.. कैसे हमारी जींदगीमे बहार आयेगी..

दया : (खडी होते मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. आप फीकर मत करो.. मे सब देख लुगी.. लगता हे आप भी लखन भैयासे प्यार करने लगी हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां दया बहेन.. अब आपसे क्या छीपाना.. आप भी हमारी बहेन हो.. दया बहेन.. मे लखनसे प्यार करने लगी हु.. बस.. अ‍ेक बार मील जाये.. मे उनकी सारी नाराजगी दुर करदुगी..

कहेते दोनो बाते करते खडी होगइ.. ओर घरका सभी काम मीलकर नीपटाने लगी.. फीर घरका सारा काम नीपटाकर पुनम अपना फोन लेकर होलमे सोफेपे बैठ गइ.. ओर दया घरका दुसरा काम देखने लगी.. पुनमने सृतीको फोन लगा दीया.. फोन लगते ही पहेले उसने लखनके बारेमे पुछ लीया.. तब सृतीने लखनके साथ हुइ सारी बाते पुनमको बतादी.. जीसे सुनकर पुनम थोडी नीरास होगइ..
 
फीर पुनमने सृतीको धिरेनकी करतुतके बारेमे बता दीया.. की धिरेन इतने दिन हवेलीपे खाना खाने क्यु नही आ रहे थे.. ओर घर जाते ही उनकी धिरेनके साथ बहेस भी हुइ थी.. ओर वोभी बता दीया.. की रुमकी सफाइ करते उसे घरमे कीतने सारे कोन्डम ओर आइ पीलकी गोलीया मीली.. फीर उनके बीच ओर धिरेनके बीचकी अपनी सेक्स लाइफके बारेमे भी चर्चा हुइ.. जीसे सुनकर सृतीको भी आस्चर्य हुआ..

सृती : (आस्चर्यसे) दीदी.. क्या बात कर रही हो..? उनका दुसरी ओरतके साथ भी चकर हे..? वो आपको तो ठीकसे संतुस्ट नही कर पाता.. तो दुसरी ओरतको कैसे संतुसट कर पाता हे..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. वोही तो.. ओर मे दुसरी ओरतोसे थोडी अलग हु.. वो दुसरी ओरतको संतुस्ट करपाये या ना करपाये वो मुजे नही पता.. लेकीन मुजे हमारे घरके मर्दोके अलावा कोइ ओर संतुस्ट नही कर सकता.. बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. ये तो बाबाके कहेनेपे इनसे सादी करनी पडी.. वरना मे लखन भैयासे सादी करना पसंद करती.. भाभी.. क्या लखन भैया मुजसे बात तो करेगेनां..?

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) अरे हां दीदी.. क्यु नही करेगे..? वो अब मुजसे नाराज नही हे.. वो मुजसे खुलकर बात करने लगे हे.. देखना बहुत ही जल्द वो आपसे भी बात करेगे.. मे पुरी कोसीस कर रही हु.. की वो आपसे बात करे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. थेन्क्स.. तब तो बहुत ही अच्छा हे.. देखना अब उनको कभी कोइ सीकायतका मौका नही दुगी.. भाभी.. अभी कीसीको कहीयेगा नही.. अब मेने भी लखन भैयाके साथ आगे बढनेका फैसला करलीया हे.. बस.. अ‍ेक बार वो मुजसे बात करले.. फीर मे सबकुछ सम्हाल लुगी..

सृती : (मुस्कुराते खुस होते) दीदी.. अ‍ैसा अचानक क्या हो गया..? जो आपने इतनी जल्दीसे फैसला लेलीया.. कुछ ओर हुआ हे क्या..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) नही दीदी.. इनकी दो वजह हे.. अ‍ेक तो अब बडे भैया सबको बहुत ही कम समय देपायेगे.. ओर दुसरा मेरी धिरेनके साथ सेक्स लाइफ अच्छी नही हे.. ओर वो खुद नीलमसे सादी करनेके लीये मुजसे छुटना चाहते हे.. तो मे कहा जाउगी..? ओर तीसरी बात.. भाभी.. हमे भी पता हे.. की आगे क्या होने वाला हे.. हमे अ‍ेकना अ‍ेक दिन तो लखन भैयाको अपनाना ही पडेगा..

सृती : (सरमाते हसते) दीदी.. कीतना अजीब हेनां..? हमारे पतीके होते हुअ‍े भी हमे हमारे देवरको पतीके रुपमे स्वीकार करना पडेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अब हमारी जींदगीमे हमारे घरके मर्दोके अलावा कोइ नही हे.. जो हमे संतुस्ट कर सके.. बडे भैयाके पास हमारे लीये टाइम नही हे.. इसीलीये मेने लखन भैयाके साथ आगे बढनेका फैसला करलीया हे.. अब तो जबतक विजय बडा नही होजाता तबतक हमे लखन भैयाका ही सहारा हे..

सृती : दीदी.. ये अपने बहुत अच्छा नीर्णय लीया हे.. फीकर मत करो.. मे भी आपके साथ हु.. अब मैने भी यही फैसला करलीया हे.. अब तो हमे जींदगी खुलकर जीनी हे.. अब जीतना हो सके मे इतना टाइम हमारे देवरके साथ स्पेन्ड कर रही हु.. लेकीन अ‍ेक डरसा लग रहा हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी डरो मत.. आपने सही डीसीजन लीया हे.. पता नही ये बात मे कैसे समज नही पाइ.. अच्छा हुआ मंजुदीदीने सबको अच्छी तराहसे समजा दीया.. चलो अब मे फोन रखती हु.. मुजे ओर दया बहेनको सामत भाइके घरपे जाना हे.. सामको हम दोनो वापस आजायेगी.. अगर लखन भैयासे कुछ बात होजाये तो मुजे फोन करके बता देना.. बाय..

सृती : (मुस्कुराते) बाय दीदी.. टेक केर.. हें..हें..हें..

फीर पुनम ओर दया.. घरको ताला लगाकर बसमे अपने गांव चली गइ.. ओर सीधी हवेलीपे आगइ.. तो वहा सीर्फ भावना ओर मंजुला ही थी.. तो दया आकर चंपाभाभीको गले मीली.. ओर मंजुके पैर छु लीये.. तो पुनम भी आते ही मंजु ओर भावनाके गले लग गइ.. तब भावना थोडा लंगडाते चल रही थी.. तो पुनम उनको देखकर सब कुछ समज गइ.. ओर हसने लगी.. फीर तीनो होलमे जाकर सोफेपे बैठ गये.. ओर दया कीचनमे चली गइ.. तब..

पुनम : (खुस होते धीरेसे) दीदी.. क्या आपका काम होगया..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां पुनो.. अब भावु भी हमारी सौतन होगइ हे.. मेने इनकी भी सादी देवुसे करवादी हे.. बस.. अब तुम्हारे वापस आनेकी देरी हे.. फीर मे दयाकी सादी भी जल्दी करवा दुगी.. फीर तुम चारो इस हवेलीको सम्हाल लेना..

पुनम : (बैठे ही हग करते) नही दीदी.. आप अ‍ैसी बाते मत करो.. हमे डर लग रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे.. आप हमे कही छोडकर जा रही हो..

मंजुला : (सरको चुमते) अरे मेरी बच्ची.. मे कहा जा रही हु..? मुजे जाकर वापस भी तो आना हे.. मेरी भावुकी कोखसे.. बस.. तुम हमारे घरके लोगोको सम्हाल लेना.. ओर सुन..? क्या धिरेनसे कुछ अन बन हुइ हेनां..?

पुनम : (सर जुकाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. अब आपसे कैसे कहु..? आपको तो सब पता हे.. वो यहा इतने दिन क्यु नही आये थे.. दीदी.. वहा उनका भाइके दोस्तकी बीवीके साथ चकर हे.. ओर मेरी भी सेक्स लाइफ अच्छी नही हे.. जातेही उनसे थोडी बहेस होगइ थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. जानती हु मे.. तुजे सम्हालना धिरेनका काम नही हे.. इसीलीये तुजे लखनके साथ अच्छे संबध रखनेको केह रही थी.. बस.. कुछ ही दिनोकी तो बात हे.. फीर यहा तो तुम सबके मजे ही मजे हे.. ओर तुम उन ओरतकी फीकर मत कर.. हमने लखनको अ‍ैसे ही वो जडी बुटी नही दीहे.. अब वो ही उनको ओर आप सबको सम्हाल लेगे..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. पुनोदीदी क्या केह रही हे..? हमारा धिरेन कीसी ओरतके चकरमे पडा हे..? कमीना.. अपनी बीवीको तो ठीकसे संतुस्ट नही करपाता ओर दुसरी ओरतके चकरमे हे.. अभी नीलु भी उनके साथ लगी हुइ हे.. जब उनको पता चलेगा तो नीलुका क्या होगा..? कमीना कहीका..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) नही भावु.. धिरेन अ‍ेक नोर्मल इन्सान ही हे.. वो दुसरी ओरत ओर नुलुको तो संतुस्ट करपाता हे.. लेकीन हमारी पुनोको संतुस्ट करना धिरेनके बसकी बात नही हे.. क्युकी मुजे पुनोको ओर हमारी लताको संतुस्ट करना हर कीसीका काम नही हे.. हम तीनो ओरते सबसे अलग हे.. हमारे अंदर बहुत आग हे.. हमे तो हमारे घरके मर्दही संतुस्ट करपायेगे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. हमने वो सामत भाइके बारेमे सुना.. तो मुजे ओर दया बहेनको वही जाना हे.. क्या आप साथमे आ सकती हे..? फीर हमे धिरेनके आनेसे पहेले घरपे जाना भी होगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. चल मे साथ चलती हु.. भावु भले ही यहा आराम करती.. हमारे पती कबीलेपे गये हे.. वो वहाकी रानीका उधार करने.. हें..हें..हें.. सायद वापस भी आगये होगे.. पुनो.. तुम कभी उसे मीलना.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. क्या लखनसे तेरी बाते होगइ..?

पुनम : (आंख गीली करते) नही दीदी.. अभी तो नही.. वोतो मुजसे बात करनेके लीये राजी ही नही हे.. कल रातमे ही सृती दीदीसे बात हुइ.. वो सृती दीदीकी माफी मांग रहे थे.. ओर मुजसे भी मीलकर मेरी माफी मागने वाले हे.. ओर अभी यहा आइ तब वापस सृतीदीदीसे बात हुइ तो पता चला.. वो आज सुबहसे सृती दीदीसे बात करने लगे हे.. वो बहुत जल्द लखन भैयाको मेरे लीये मना लेगी..

मंजुला : पुनो.. तुम फीकर मत कर.. वो बहुत जल्द तुमसे भी बात करने लगेगा.. क्युकी वो ज्यादा दिन तुमसे दुर नही रेह सकता.. आखीर जन्मो जनमका प्यारहे तुम दोनोका.. इसीलीये तो पहेलेसे ही प्यार करता हे तुजे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या हम जानती हे.. वो ही सबकुछ होगा..? मुजे अ‍ैसा लगता हे मे बडे भैयाको धोखा दे रही हु.. इसी डरसे तो मेरा हाथ उठ गया..

मंजुला : (प्यारसे अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) मेरी बच्ची.. तु अपने भाइको कोइ धोखा नही दे रही.. तु जानती हे तो वहा हमारे उस लोकमे क्या परंपरा हे.. तो तुम क्यु इतना डर रही हे..? क्या तुजे पता नही की तुम कौन हो..? तुजे भी पता हे तेरा तेरे बडे भाइके साथ रीलेशन सीर्फ तेरी बच्ची तक ही सीमीत था.. फीर भी वो तुजे प्यार करनेको कहा मना कर रहे हे..? तुम जब भी देवुको मीलना चाहो मील सकती हो.. इनमे लखन भी मना नही करेगा..

पुनम : (आंसु छलक गये) दीदी.. मैने लखन भैयाके साथ बहुत बुरा कीया हे.. पता नही मे कब उसे मनाउगी..

मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) बहुत जल्द.. मेरी बच्ची दिल छोटा मत कर.. वैसे भी पती पत्नीके बीच अ‍ैसे छोटे मोटे जगडे होते ही रहेते हे.. बस.. मे इतना जानती हु.. की आने वाले दिनोमे तेरी ओर सृतीकी जींदगीमे खुसीओकी बहार आयेगी..

पुनम : (सर्मसार होते नजर जुकाते) दीदी.. पती..? लेकीन लखन भैया मेरे पती नही हे.. मे तो सीर्फ बडे भैया ओर धिरेनकी अमानत हु.. तो आप हमे पती पत्नी क्यु केह रही हे..?

मंजुला : (अ‍ेक नजरसे देखते) क्या सबकुछ मेरे मुहसे उगलवायेगी..? क्या तुजे नही पता तुम ओर लखन कौन हो..? हंम..? पुनो.. लोगोकी नजरोमे तुम भले ही कुछ भी हो.. असलमे अब तुम मेरे लखनकी सुहागन हो.. बीटु.. तुजे तो पता हे वो पहेले भी तेरा पती था.. ओर यहा भी तुजे उनकी पत्नी बनकर जींदगी गुजारनी हे.. तेरा असली पती लखन ही होगा.. जो तुजे बेइम्तहा महोबत करता हे.. वो तुजे अब समयके साथ सबकुछ पता चल जायेगा.. चल.. हम सामत भाइके घरपे जाते हे..

फीर मंजु पुनो ओर दयाको लेकर सामत भाइके घरपे सोक जताने चली गइ.. तो वहा उनको ब्रिन्दाके साथ बसंती भी मील गइ.. तब सांती ओर बरखा पुनम मंजुको देखकर बुहत ही सरमा रही थी.. फीर वहा आधे घंटे बैठकर तीनो वापस हवेलीपे आगइ.. तब मंजुने पुनम ओर दयाको खानेके लीये रोकना चाहा.. लेकीन पुनमको धिरेनके आनेसे पहेले वापस अपने घरपे पहोंचना था.. तो दया पुनम बसमे बैठकर अपने घरकी ओर नीकल गइ..
 
जब पुनम मंजु ओर दया सामत भाइके घरपे थी तब देवायत हरीया ओर मालती रेणुको लेकर अपने खेतोपे आ चुका था.. फीर कुछ देर अपना काम देखकर रामुकाकाके पास जाकर बैठ गया.. तब उसने हरीयाको आवाज लगाते दो कप चाइ बनानेको कहा.. तो रामुकाका खुस होते देवायतके सामने हसने लगे.. फीर देवायतने कुछ देर खेतोकी जानकारीया लेकर रामुकाकाको भानुके बारेमे पुछा.. तबतक मालती दोनोको चाइ देकर चली गइ..

देवायत : (मुस्कुराते चाइ पीते) कहो काका.. सब कैसा चल रहा हे..? कही भानु दिखाइ नही देता..?

रामुकाका : (चाइ पीते मुसकुराते) हां वो भी आता हे.. अब तो फसल कटाइका वक्त हे.. तो मजदुरोसे काम करवाता हे.. लेकीन लगता हे आजकर वो कुछ परेसान दीख रहा हे.. यहाका काम जल्दीसे खतम करके वो अपने घरपे चला जाता हे.. बेटा.. क्या उनके घरपे तो सब सही हेनां..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां काका सब सही हे.. अब अकेला आदमी परेसान नही होगा तो क्या करेगा.. क्युकी कुछ दिनोसे भाभी नीलु ओर काकी हमारे घरपे ही हे.. रमाभाभी ओर नीलुको पढाइके लीये सहेर छोडने ओर लखनके घरका कुछ सामान सेट करने गइ हे.. ओर काकी मेरी सास ओर चंदाके साथ अंकलके अस्थी विसर्जन करने हरीद्वार गइ हे.. तो भानुको खाने पीनेमे तकलीफ तो होगीनां..

रामुकाका : (मुस्कुराते) हां सही कहा तुने.. बीवीके बीना तकलीफ तो होती ही हे.. कीसको पतीके बीना तो कीसीको पत्नीके बीना.. बेटा.. कैसी हे मेरी दया..? आज कल दिखाइ नही देती..

देवायत : (मुस्कुराते) काका.. आप दयाकी फीकर करना तो छोडही दो.. आवकल वो पुनोके साथ उनके घरपे हे.. दोनो पकी सहेलीया जो हो गइ हे.. दोनोकी खुब जमती हे.. हें..हें..हें..

रामुकाका : (खुस होते) अच्छा अच्छा.. वो पुनो बीटीयाके साथ हे.. कोइ बात नही.. बस.. वो खुस रहे..

देवायत : (सरमाते धीरेसे) काका मुजे आपसे अ‍ेक जरुरी बात करनी हे..

रामुकाका : (मुस्कुराते) हां कहो बेटा.. क्या बात करनी हे..?

देवायत : (सरमाते धीरेसे) काका.. आपको जानते हे हमारे आनदानमे कीतनी सादीया होती हे..

रामुकाका : (हसते) हां सब पता हे मुजे.. ना जाने तेरे बापु ओर दादाने भी कीतनी सादीया की होगी.. ओर सबसे मजेकी बाते सभीने अपनी बहेनसे सादी करली थी.. तो गांवमे बहुत बडा हंगामा हो गया था.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) काका.. तो फीर अगर आप बुरा ना माने ओर आपकी रजामंदी होतो मे हमारी दयासे सादी करना चाहता हु.. बस.. आप हमे आशीर्वाद दीजीये..

रामुकाका : (सोक्ट होते आस्चर्यसे देवायतकी ओर देखते) बेटा.. ये तुम क्या केह रहे हो..? अ‍ेक नोकरानीके साथ..? वो विधवा हे.. बेटा हम बहुत गरीब लोग हे.. हमारा मजाक मत उडाओ..

देवायत : (पैरोके पास घुटनोके बल बैठते) काका.. मे मजाक नही कर रहा.. क्या कभी मेने आपके साथ मजाक कीया हे..? ओर कीसने कहा आप गरीब हो.. दुनीयामे सबसे धनी हो आप.. दया जैसी लक्ष्मी हे आपके घर.. गरीब तो हम हे.. जो आपकी बेटीका हाथ मांग रहे हे.. काका नीरास मत कीजीये हमे.. दे दीजीये दया हमे.. ओर ये सब आपकी बडी बहुने कहा हे..

कहा तो रामुकाका अपना चहेरा अपने हाथोसे ढकते फुट फुटके रोने लगे.. तो अ‍ेक पलतो दुर खडे हरीया मालतीको भी अजीब लगा.. वो दोनो दुर अपने रुमके पास खडे होकर अ‍ेक नजरसे रामुकाका ओर उनके पैरोमे बैठे देवायतको देखते रहे.. देवायतने रामुकाकाको थोडी देर रोने दिया ओर हरीयाकी ओर देखते उसे पानी लानेका इसारा कीया.. तो हरीया दोडकर पानी लेकर आगया.. ओर देवायतको दीया..

देवायत : (पानी देते) बस कीजीये काका.. लीजीये पानी पीजीये.. अगर मेने कुछ गलत केहदीया होतो मुजे माफ कीजीये.. लीजीये..

रामुकाका : (पानी लेते दुसरा हाथ देवायतके सरपे रखते) अरे नही नही बेटा.. ये तुम क्या बोल रहे हो..? आपसे कोइ गलती नही हुइ.. ये तो मेरे खुसीके आंसु थे.. जो इस अभागेको आपने काबील समजा.. तुम बीलकुल तेरे बापकी तराह हो.. अ‍ेकदम दयालु.. बेटा मुजे खुसी होगी जो आप मेरी दयाको इस हवेलीकी रानी बना रहे हो.. मे दुनीयाका सबसे बडा खुसनसीब बाप हु.. जो आप मेरी विधवा दयासे सादी कर रहे हो..

खेवायत : (मुस्कुराते) काका.. ये सब आपकी बडी बहुका हुकम हे.. हम सबने कभी दया ओर रजीयाको अपनी नोकरानी समजा ही नही.. हमारी रजीयाने भी हमारे लखनसे सादी करली हे.. बस.. अब आपका आशीर्वाद चाहीये.. मे हमारी दयाको विधवा नही सुहागन देखना चाहता हु..

रामुकाका : (देवायतके सरपे हाथ रखते) बेटा मेरा आशीर्वाद तो हमेसा तेरे साथ हे ही.. रजीया भी मेरी बेटी जैसी हे.. अच्छा हुआ लखन बेटाने उनसे सादी करली.. बेचारीका हमारे सीवा इस दुनीयामे उनका कोइ हे भी नही.. भगवान आप सबको लंबी उमर दे.. खुस रहो बेटा..

देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) काका.. मे आज ही आपकी बडी बहुसे बात करलेता हु.. देखते हे वो कब सादीका केहती हे.. काका हम चाहते हे सादी आपकी मौजुदगीमे हो.. हमारे आश्रमपे..

रामुकाका : (खुसीसे हाथ जोडते) बेटा.. तबतो मेरा अहोभाग्य.. जो बाबाकी हाजरीमे मेरी दयाकी सादी हो रही हे.. मे जरुर आउगा..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे काका तो फीर मे चलता हु.. दो दिनसे घरपे गया ही नही.. आपकी बहुसे बात करके आपको बताता हु..

रामुकाका : (हसते) अच्छा अच्छा तो फीर जल्दीसे जाओ.. वरना मेरी बहु की डांट खानी पडेगी.. हें..हें..हें..

कहातो देवायत भी हसने लगा ओर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गया.. जबतक देवायत घर पहोंचता तबतक घरसे पुनम ओर दया भी वापस अपने घरकी ओर नीकल चुकी थी.. तो देवायतको देखतेही मंजु खुसीके मारे दोडकर उनको गले लग गइ.. तो भावना भी बहुत सरमाते हसने लगी.. तो देवायतने उनकी ओर भी अपनी बाहे फैलादी.. तो भावना भी सरमाकर देवायतके गले लग गइ.. तभी..

देवायत : (मुस्कुराते) भावु.. तुम क्यु इतना सरमा रही हो..? मत भुलो तुम अब भानुकी नही मेरी बीवी हो..

मंजुला : (भावनाकी ओर हसते) बेचारी सरमायेगी नही तो क्या करेगी..दो दिन आराम करते बडी मुस्कीलसे अपने बीस्तरसे उठ पाइ हे.. आपने उनकी हालत जो खराब करदी थी.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमसे पानी पानी होते) दीदी.. चुप रहीये.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. जीजु.. कैसा रहा आपका सफर..?

मंजुला : (हसते) कमीनी अब तो इसे जीजु कहेना बंध करदे.. अब हमारे पती हे ये.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) नही दीदी.. मे इसे जीजुही कहुगी.. क्युकी मेने जीजुको प्यार कीया था.. ओर वैसे भी जबतक भानु हे मुजे जीजु सालीका रीलेशन बरकरार रखना पडेगा..

देवायत : (बाहोमे भीचते) मंजु.. भावु सही केह रही हे.. कबीले पे भी सब मस्त रहा.. वहा जमीलाको मेरी रानी बनाकर उसे सब जीम्वेवारी देकर आगया.. ओर सुन.. मेने हमारी दयाके बारेमे भी अभी रामुकाकासे बात करली हे.. अब सब तुजे देखना हे.. की दयाके साथ कब सादी करनी हे.. मेने उसे हमारे आश्रमका कहा हे..

मंजुला : (खुस होते मुस्कुराते) ये आपने अच्छा कीया.. जो रामुकाकासे बात करली.. देवु.. तो फीर हमे कीसीका वेइट नही करना.. हम दो तीन दिनमे ही आश्रमपे जाकर सब नीपटा लेते हे.. अभी आपके आनेसे पहेले ही पुनो ओर दया यहासे गइ.. दोनो सामत भाइके लीये सोक मनाने आइ थी..

देवायत : (मुस्कुराते) क्या वो दोनो आइ थी..? तो मुजे फोन करना चाहीयेना... मे उन दोनोको छेडकर आजाता..

मंजुला : (हसते) जी नही.. अब तो दयाको सादीके दिनही मीलोगे.. वरना पता चला आपने आज ही उनके साथ सुहागरात मनाली.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) वेरी फनी.. मंजु.. हमारी पुनो कीतनी व्यावारीक ओर समजदार होगइ हे.. मुजे अफसोस हे.. की आज कल मे उनको समय नही दे रहा..

मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) देवु.. भुल जाइअ‍े पुनोको.. अब इसकी कोइ आवस्यक्ता नही हे.. ओर पुनोकी फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. पहेले आप फ्रेस होजाइअ‍े.. फीर हम आरामसे बात करते हे.. आज आपको पुनोके बारेमे भी बात करनी हे.. तबतक खाना भी बन जायेगा.. आप सफरसे थके भी होगे.. जाइअ‍े..

कहातो देवायत मंजु ओर भावनाके होठोपे बारी बारी कीस करते अपने रुममे चला गया.. ओर फ्रेस होकर बहार आगया.. तब भावना ओर मंजु होलमे सोफेपे देवायतके इन्तजारमे बैठी आपसमे पुनम ओर लखनके बारेमे बाते कर रही थी.. जैसे ही देवायत उनके पास आकर बैठ गया तो मंजुने पुनम ओर धिरेनके बीच सुरुसे यहा आने तक हुआ सारा वाक्या सुना दीया.. जीसे सुनकर थोडी देरतो देवायत भी सोक्ट हो गया.. ओर उसे पुनमकी चीन्ता होने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१३

कहातो देवायत मंजु ओर भावनाके होठोपे बारी बारी कीस करते अपने रुममे चला गया.. ओर फ्रेस होकर बहार आगया.. तब भावना ओर मंजु होलमे सोफेपे देवायतके इन्तजारमे बैठी आपसमे पुनम ओर लखनके बारेमे बाते कर रही थी.. जैसे ही देवायत उनके पास आकर बैठ गया तो मंजुने पुनम ओर धिरेनके बीच सुरुसे यहा आने तक हुआ सारा वाक्या सुना दीया.. जीसे सुनकर थोडी देरतो देवायत भी सोक्ट हो गया.. ओर उसे पुनमकी चीन्ता होने लगी.. तभी.... अब आगे

देवायत : (मनमे) ओह.. गोड.. ये क्या हो गया..? पुनो मुजसे कीतना प्यार करती हे.. मेरा बच्चा भी उनके उदरमे पल रहा हे.. कही धिरेनको इस बातका पता तो नही चल गया होगा..? ये सब मेरी वजहसे तो नही हुआ..? मुजे लगता हे कहीना कही मेरी वजहसे पुनोका घर उजड रहा हे.. नही.. अब मे पुनोसे दुर ही रहुगा.. मंजु ओर पुनो तो बहुत कुछ जानती हे.. पता नही मंजु पुनोके बारेमे मुजे क्या बात करने वाली थी..

मंजुला : (मनकी बात जानते) जानु.. क्या सोच रहे हो..?

देवायत : मंजु.. तुम पुनोके बारेमे क्या यही सब कहेने वाली थी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही देवु.. सीर्फ यही नही.. मुजे इनके बारेमे कुछ ओर भी बाते करनी हे.. अब आप अब पुनोकी चीन्ता मत करना.. उनकी कीस्मतमे जो लीखा हे वोही सब हो रहा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हां मंजु.. तुजे ओर पुनोको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. बोल.. ओर क्या बात करना चाहती थी..?

मंजुला : (अ‍ेक नजरसे देखते) जानु.. आपको पता हे पुनो कौन हे..? वो पीछले जन्ममे कीसकी बीवी थी..? ओर इस जन्ममे उसने आपसे क्यो सादी की..?

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? बता.. मुजे यही सब जानना हे.. मंजु.. मुजे लगता हे इस बातके लीये कहीना कही मे भी जीम्वेवार हु.. मे अब पुनोसे दुर ही रहुगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. इसके लीये आप गील्टी फील मत करो.. जो इनकी किस्मतमे लीखा था वो सब हो चुका.. लेकीन.. हां.. अब आप पुनोसे दुरीया रखना चाहो तो रख सकते हे.. पता हे क्यु..?

देवायत : (आस्चर्यसे सामने देखते) क्यु..? बता मुजे..

मंनुला : (मुस्कुराते) जानु.. तो फीर सुनो.. असलमे पुनो आपकी बीवी थी ही नही.. वो हमारे लखनकी बीवी हे.. जो पुनोके पीछले जन्मकी अ‍ेक कामनाकी वजहसे इस जन्ममे आपसे सादी करनी पडी.. जो बाबाने अ‍ेक मक्सदसे करवादी.. जो मक्सद अब पुरा हो चुका हे.. जानु.. वो पीछले जन्ममे आपकी बेटी थी.. पीयु.. आपके छोटे भाइ बबलुकी बीवी..

देवायत : (आस्चर्यसे) मंजु.. ये क्या केह रही हो तुम..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानुं.. मेरी बात ध्यानसे सुनो अब..

फीर मंजुने पुनम ओर लखनके पीछले जन्मसे लेकर इस जन्म तक सबकुछ देवायतको बता दीया.. जीसे सुनकर देवायत भी सोक्ट हो गया.. क्युकी पीछले जन्ममे उस राजाने उनको अपनी बेटी माना था.. उसी क्षण देवायतके मनमे पुनमको लेकर थोडा क्षोभ होने लगा.. उनको अफसोस होने लगाकी अपनी ही बेटीके साथ..? बस.. मंजुने बडी ही सीफततासे देवायतको पुनमसे दुर करदीया.. ओर देवायतको पता भी नही चला..

बस.. यही तो मंजु चाहती थी.. ताकी अब पुनम लखनके साथ उनकी बीवी बनकर अपनी लाइफ खुलकर जी सके.. इसी तराह वो लताको भी लखनसे दुर करना चाहती थी.. ताकी लता देवायतके साथ सादी कर सके.. मंजु ये सब काम जल्दसे जल्द नीपटाना चाहती थी.. ओर उसे सबसे बडी टेन्सन सृती भुमीका ओर चंदाकी होने लगी.. क्युकी कुछ ही दिनोमे इन तीनोकी जींदगीमे बहुत बडा भुचाल आने वाला था..

हालाकी मंजुको ये भी पता था की इस मुसीबतको लखन ओर पुनम अच्छी तराहसे सम्हाल लेगे.. फीर भी उनको आने वाले तुफानकी थोडीसी चीन्ता होने लगी.. तो दुसरी ओर उनको भी आभास होने लगा था.. की अब उनके जानेका वक्त नजदीक आने लगा हे.. क्युकी दुसरे जन्ममे उनको खुद अपने ही बेटे विजयकी सोतेली बहेन बनकर अपनी ही छोटी बहेन भावनाकी कोखसे वापस आना था.. जीसके लीये आजकल देवायत ओर भावना बहुत महेनत कर रहे थे..

तो दुसरी ओर सहेरमे सृती भी १० बजे अपनी कार लेकर क्लीनीकपे चली गइ थी.. तो अ‍ेक घंटेके बाद लखन भी नीलमको लेकर उनके स्कुल चला गया.. तब नीलम बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हो रही थी.. क्युकी उसे धिरेनके साथ बात करनेकी बहुत जल्दी थी.. वहा जाकर लखनने उनकी प्रीन्सींपालसे बात करली.. फीर छुटीका समय जानकर वहासे होस्टेलकी ओर नीकल गया..

फीर अपनी होस्टेल वाली बीवीके पास चला गया.. तो पता चला राधीका अपनी मम्मीको लेकर होस्पीटल गइ थी.. ओर वो आज होस्टेलपे आइ ही नही हे.. तो लखन उसे फोन करके सीधा ही होस्पीटल पहोंच गया.. जहा राधीकाने उनकी मम्मीको अ‍ेडमीट कीया था.. तो लखनको देखते ही उनके गले लग गइ.. ओर रोने लगी.. तब लखनने उनको सम्हाला.. फीर उनकी मम्मीका हालचाल जाना.. तो पता चलाकी उनकी मम्मीको फीरसे पेरेलीसीसका अ‍ेटेक आगया था.. तो सुनकर राधीकाके उपर भडक गया..





लखन : (थोडा गुस्सा होते) राधु.. क्या मुजे इतना पराया कर दीया..? की अ‍ेक फोन तक नही कीया..?

राधीका : (आंसु पोछते) लखन.. प्लीज.. आप गुस्सा मत करो.. सबकुछ इतनी जल्दीसे हो गया.. मे जस्ट इनको आधे घंटे पहेले ही यहा लेकर लाइ हु.. जब मे मम्मीको नहेला रही थी.. तब ही ये सब हो गया..

लखन : (हग करते) चलो ठीक हे.. कहा हे मम्मीजी..? चलो उनके पास बैठते हे.. मे अभी लताको फोन करके बताता हु..

राधीका : (थोडी परेसान होते साथ चलते) यार.. अभी उनको मत बताओनां.. वो सब खामखा परेसान हो जायेगे.. अब मम्मीकी तबीयत भी स्थीर हे.. तो सबको क्यु परेसान करना..

लखन : (मुस्कुराते) चुप.. अ‍ेक दम चुप.. राधु.. मत भुलो अब तुम हमारे खानदानकी बहु हो.. अगर मैने घरपे नही बताया तो उल्टा सब लोग मुजे डांटेगे.. क्या तुम मुजे सबकी डांट खीलवाना चाहती हो..?

राधीका : (सरमाते हसते) नही.. चलीये इधर रुममे मम्मी हे.. देखना आपको देखकर खुस होजायेगी.. पता नही होस्टेलपे क्या हाल होगा..

लखन : (मुस्कुराते साथ चलते) राधु.. तु वहाकी फीकर मत कर.. मे दो पहोरको खाना खाकर होस्टेलपे चला जाउगा.. ओर वहा चकर लगाता रहुगा.. अभी तो मेरा काम फोनपे ही चल जाता हे.. तो वही बैठकर काम करता रहुगा.. मेरी ओफीस बादमे खोलुगा..

राधीका : (प्यारसे लखनकी ओर मुस्कुराते) लखन.. थेन्क्स..

लखन : (मुस्कुराते सरपे टपली मारते) तु बहुत बीगड गइ हे.. कभी पतीको थेन्क्स कहेते हे..? चल आजा..

कहातो राधीका सरमाके हसने लगी.. ओर दोनो रुममे चले गये.. तो राधीकाकी मम्मी लखनको देखते ही खुस होजाती हे.. फीर लखनने लता ओर सृतीसे बात करते सबकुछ बता दीया.. तो रजीयाने घरपे ही उन लोगोका खाना भी बना दीया.. तबतक लता ओर रमाने घरका बहुत सारा सामान सेट करलीया था.. जब दो पहोरको सृती घरपे खानेके लीये आइ.. तब लखन भी घरपे आ चुका था.. फीर सब मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तभी..

लता : दीदी.. आपके देवर नीलुको छोडने गये तब राधीका दीदीको मीलने गये थे.. तो पता चला उनकी मम्मीको फीरसे पेरेलीसीसकी असर होगइ हे.. तो दोनो मां बेटी अभी होस्पीटलमे हे..

सृती : देवरजी.. तब तो दोनो मां बेटी अकेली होगी.. हमे उनके पास जाना चाहीये.. क्युकी अब तो वो भी आपकी बीवी हे.. तो हमारा फर्ज बनता हे.. हम मुसीबतके वक्त उनके साथ रहे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मे अभी तक उनके पास ही था.. ओर रजीयाने उनका टीफीन भी तैयार करदीया हे.. मे खाना खाकर अभी टीफीन लेकर जाता हु.. सीफ राधुका टीफीन ही हे.. उनकी मम्मीको वहाका खाना खीलाना हे..

सृती : (मोकेका फायदा उठाकर) अरे.. तो चलो मे भी आती हु.. हमारी समधनकी खबर भी पुछ लुगी.. ओर मेरी देवरानीसे भी मील लुगी.. हें..हें..हें..

लता : (हसते) दीदी.. मे भी साथ चलती हु.. देखु तो सही मेरी सौतन कैसी हे.. हें..हें..हें.. तबतक भाभी थोडा आराम कर लेगी.. आज उन्होने बहुत काम कीया हे..

ओर इनके बाद लता सृती ओर लखन टीफीन लेकर होस्पीटल चले गये.. तो वहा लता सृतीको देखकर राधीका बहुत सरमाइ.. ओर सृतीने उनको देखते ही अपने गले लगालीया.. फीर लता भी उनको गले मीली.. फीर राधीकाने उनकी मम्मीका परीचय करवाया.. तब राधीकाकी मम्मी बहुत ही खुस होगइ.. क्युकी ये जानकर की इनकी बेटीको लखनके परीवारने स्वीकार करलीया था..

तब राधीका ओर लता सृती हस हसके बाते करने लगी.. तो लखन राधीकाकी टांगे खीचकर उनकी मस्तीया करते राधीकाकी मम्मीको खुब हसा रहा था.. जीसे देखकर राधीका के साथ सृती भी बहुत खुस हो रही थी.. अब सृतीकी नजरमे लखनके लीये फीलीग्स बदल गइ थी.. ओर वो लखनकी ओर ज्यादा ढलने लगी थी.. तो वो कातील नजरोसे लखनकी ओर देखते हसती रही.. ओर लखनको रीजानेकी कोसीस करने लगी..

फीर राधीकाने खाना खालीया तो तीनो वापस घरपे आगये.. इसी दौरान सृतीने कइ बार लखनसे बाते करते उनसे नजदीया बढाइ.. अब तो लखन भी पहेलेकी तराह सृतीसे हस हसके खुलकर बाते करने लगा था.. ओर अपने अपने रुममे आराम करने चले गये.. फीर दो घंटे आराम करके सृती वापस अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. तो लखन भी वापस राधीकाके होस्टेल पे चला गया ओर उनकी ओफीसमे जाकर बैठ गया..
 
वो वापसीमे वो नीलमको लेकर वापस घरपे आने वाला था.. तो इसी दौरान रीसेसमे नीलमने उनकी होस्टेल वाली रुम पार्टनर जो उनकी खास सहेली दियाको ढुंढ लीया.. ओर दोनो गले मीलकर अ‍ेक पेडके नीचे जाकर बैठ गइ.. तब नीलमने दियाके पुछने पर अपनी ओर उनकी मम्मीने जो प्लान कीया था.. उनको छोडकर बाकी सब कुछ दियाको बता दिया.. की धिरेनके साथ उनके घरपे गइ.. तब उनके साथ क्या क्या हुआ..

उसने अपने ओर धिरेनका पहेली बार मीलन हुआ तबसे लेकर दो दिन तक दोनोने कीतने मजे कीये.. ओर धिरेनने उनकी कीतनी बार चुदाइ करली.. तबसे लेकर आखीर दोनो उनके लखन जीजु ओर लता दीदीसे चुदाइ करते पकडे गये.. ओर उनको साथमे घरपे ले गये.. से लेकर लखन जीजु उनको अपने घर छोडते वक्त बीचमे लखनके खेतोपे लखनने भी उनके साथ क्या कीया.. वो भी बता दीया..

नीलमने दियाको बातो ही बातो मे वो भी बता दिया की जडी बुटीकी वजहसे उनके पेनीसमे कीतना बदलाव हो गया हे.. मतलब नीलमने दियाको सबकुछ बता दीया जो उनके साथ घटीत हुआ था.. जीसे सुनकर दिया भी आस्चर्यसे नीलमकी ओर देखने लगी.. नीलमकी बाते सुनकर दियाकी चुत भी गीली होने लगी.. तब दियाके मनमे भी लखनके लंडको अ‍ेक बार देखनेकी इच्छा होने लगी..

फीर नीलमके पुछने पर दियाने भी अपने बारेमे नीलमको सबकुछ बता दीया.. की वो अपने बोय फ्रन्डके घरपे गइ थी.. तब वहा उनके बोयफ्रेन्डने उनकी कीतनी बार चुदाइ करली.. उनके फ्रेन्डने मोलमे जाकर उनको कीतनी गीफ्ट दीलवाइ.. दोनोने डिस्को थीयेटरमे खुब मजे किये.. ओर आखरी रात दोनोने जमकर चुदाइ की.. जीनकी वजहसे दोनो देर तक सोये पडे थे.. तब सुबह ही उनके मम्मी पापा आ गये..

ओर दोनो अ‍ेक साथ पकडे गये.. फीर उनके बोय फ्रेन्डके मम्मी पापाने दोनोके रीलेशनको अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. ओर उनके खुदके पापा इनकी सगाइ अपने बोय फ्रेन्डके साथ बहुत जल्द कर देने वाले हे.. सुनकर नीलम थोडी नीरास होगइ.. क्युकी वो अपनी मम्मीके प्लानकी वजहसे लखन ओर धिरेनके बीच मजधारमे फसी हुइ थी.. ओर उनकी मम्मीके प्लानके बारेमे वो दियाको बताना नही चाहती थी..

ओर जबसे लखनके बडे लंडको देखा तब से वो भी लखनकी ओर आकर्सीत भी होने लगी थी.. उनको लखनके साथ मीलन करनेकी बहुत इच्छा होने लगी थी.. तो दुसरी ओर उनकी मम्मीके साथ भी लेस्बीयन रीस्ता हो गया था.. तो नीलम अब अपनी सादीको लेकर कुछ नीर्णय नही लेपा रही थी.. क्युकी लखनके बजाये धिरेनसे पैसा नीकलवाना ओर अपने सभी सोक पुरा करना बहुत ही आसान था.. तब उसने दियाको पुछ ही लीया..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दिया.. वो.. वो धिरेन जीजु मुजसे सादी करना चाहते हे.. ओर लखन जीजु भी उनके साथ रीलेशन रखनेको केह रहे हे.. तो अब तुही बता मे क्या करु..?

दिया : (सरमाते हसते) नीलु.. तु दिखनेमे हो ही इतनी होट.. की कोइ भी लडका तुमसे रीलेशन रखनेको तैयार होजायेगा.. पहेले ये बता.. क्या वाकइ तेरे लखन जीजुका इतना बडा होगया हे ..? मुजे तो यकीन ही नही होता.. की कीसी आदमीका इतना बडा हो सकता हे.. तुमने अपनी आंखोसे देखा हेनां..?

नीलम : (सरमाकर हसते) कमीनी होट तो तु भी कम नही हे.. पता नही अब तक कीतनोका अंदर ले चुकी हे.. जो अब जाके अ‍ेकसे खुटेसे बंधने वाली हे.. हें..हें..हें..

दिया : (पीठमे अ‍ेक मुका मारते) कमीनी.. वो सब छोडना.. मे जो पुछ रही हु उनका बता..

नीलम : (सामने देखकर धीरेसे) हां दिया.. उनकी तो बात ही मत कर.. जब वो मुजे घरपे छोडने आ रहे थे.. तब भी मेने देखा था.. वो तब भी धिरेनसे बहुत बडा था.. ओर अब तो उनको जडी बुटी देदी गइ हे.. इनके बाद भी मेने देखा हे..ओ.. बापरे.. कीसी गध्धेसे कम नही हे.. पहेली बारमे वो पका कीसीको बेहोस कर देगे.. अब तो इनके आगे धिरेनकी नुनी लगती हे..

दिया : (कातील नजरोसे हसते) नीलु.. तब तो तुम ध्यान रखना.. क्युकी अब तो दो तीन साल तुम उन्हीके साथ रहेने वाली हो.. सभी लडकीया ओर ओरतोको बडे लंड ही पसंद हे.. कास.. मेरे बोय फ्रेन्डका भी इतना बडा होता.. मे तो उनको बहार ही नही नीकालने देती.. नीलु.. क्या वो थोडीसी जडी बुटी तुम मुजे दिलवा सकती हो..? तो मे भी मेरे बोय फ्रेन्डको देना चाहती हु..

दिया : (जटसे) अरे.. पागल होगइ हो क्या..? ना बाबा ना.. मैने सुना हे.. वो जडी बुटी हमारे वोही आश्रम वाले बाबाने दि हे.. ओर वो भी मंजु दीदीके पास हे.. क्युकी मैने सुना हे.. बाबाने उनको अ‍ेक खास मक्सदसे दी हुइ हे.. तो मे उनसे नही मांग सकती.. अ‍ैकतो अ‍ैसे ही मेरे ओर धिरेनके बारेमे सबको पता चल गया हे.. कमीनी तुजे जो कहा हे.. उनके बारेमे बतानां.. ये बीचमे जडी बुटी लेकर कहा बैठ गइ..?

दिया : (सेड मुह करते) हंम.. येतो तेरे लखन जीजुके बडे लंडके बारेमे सुना इसीलीये पुछ रही थी.. नीलु.. तुजे नही पता.. आज कल सीर्फ हम लडकीया ही नही.. सादी सुधा ओरते भी बडे लंडकी दिवानी हे..

नीलम : (हसते) कमीनी.. अगर बडे लंडका इतना ही सौक हे.. तो मे तुजे भी लखन जीजुसे मीलवा दुगी.. ओर इनसे तुजे चुदवा भी दुगी.. वो इन सब चीजोके बहुत सौकीन हे.. हें..हें..हें.. अ‍ेक बार ट्राइ बरलेनां.. हें..हें..हें..

दिया : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते हसते) हां अगर तुजे बुरा ना लगे तो वो भी कर लुगीं.. कमीनी.. तुजे भी मतलब..? मतलब तुम भी तेरे लखन जीजुका लेना चाहती हे..? हें..हें..हें.. देखना तेरी फट जायेगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (थोडा गुस्से होनेका नाटक करते) दिया.. प्लीज.. मजाक नही.. बताना हे तो बता.. मे यहा दोनो जीजुके बीच उलजनमे फसी हु.. ओर तुजे मजाक सुज रहा हे..? बताना मे क्या करु..? अभी तो पुनो दीदी उनकी बीवी हे.. ओर धिरेन केह रहा था.. वो उनको छोडदेना चाहता हे.. ओर तुजे अ‍ेक बात ओर बताउ..? उन्होने हम दोनोके लिये यहा सहेरमे अ‍ेक घर भी लेलीया हे.. दिया.. मे तो लखन जीजु.. ओर धिरेन जीजुके बीच फस गइ हु.. बताना मे क्या करु..?

दिया : (मुस्कुराते) कमीनी.. तो अच्छा हेना.. तुजे तो दो दो लंड मील जायेगे.. तेरे धिरेन जीजुकी तो सरकारी नोकरी हे.. वो भी बेन्कमे.. तो तुम अ‍ैसो आरामकी जींदगी तो उनके साथ अ‍ैसे ही गुजार सकती हो.. ओर रही बात लखन जीजुकी.. तो अभी तुमने ही बताया.. की तेरे लखन जीजुने भी तीन तीन सादी करली हे.. तो फीर तुजे उनके साथ कहा रहेना हे..? बस.. कभी बडे लंडका मजा चाहीये.. तो तेरे लखन जीजु तो हे ही.. अगर तेरी धिरेन जीजुके साथ सादी भी हो गइ.. तो क्या फर्क पडता हे..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी.. क्या बोल रही हे..? क्या मे दो दो मर्दसे चुदवाउगी..? कुछ तो सरम कर.. तु हे ही अ‍ैसी.. अगर मेरी जगाहपे तुम होती तो तुजे पता चलता..

दिया : (फीकी मुस्कानसे) नही नीलु.. में पहेले अ‍ैसी नही थी.. मे तुमसे भी सरीफ थी.. जबसे मैने मेरी मांके बारेमे ओर मेरी सौतेली माके बारेमे जाना.. तब मेरी समजमे आया.. की सबको बडा लंडही चाहीये.. यहा रीस्तोकी तो कोइ अ‍ेहमीयत ही नही हे.. मेरी दोनो मांओका उनके देवरके साथ यानी मेरे असली बापके साथ नाजायज रीस्ता हे.. ओर मे तो खुद मेरे चाचाकी संतान हु.. जीस तराह तुम अपने पापाके होते हुअ‍े भी अपनी बुआके लडकेकी संतान हो..
 
नीलम : (सीरीयस होते) हां दिया.. मेरी मम्मी मेरे इस पापाकी मामी थी.. ओर मामी भांजेके बीच नाजायज रीस्ता होगया था.. तो मे उनकी ही नीशानी हु.. तुम सच केह रही हो.. कमीनी सभी ओरतोको बडा लंड ओर अ‍ैसो आरामकी जींदगी चाहीये.. इसके लीये वो ये भी नही देखती की मर्द रीस्तोमे उनका क्या लगता हे.. अभी हाल ही मे गांवमे लखन जीजुके अ‍ेक दोस्त हे बंसी भैया.. उनकी सादी उनकी विधवा बुआसे होगइ.. ओर खुद उनके पापाने अपनी विधवा बहेनकी सादी अपने बेटेसे करवाइ..

दिया : (आस्चर्यसे देखते) क्या केह रही हो तुम..? खुद बापने अपनी बहेनका हाथ अपने बेटेको सोंपा..?

नीलम : (मुसकुराते) हां दिया.. मे खुद उस सादी अ‍ेटेन्ड करके आइ हु.. सब मेरी आंखोसे देखा..

दिया : (मुस्कुराते) नीलु.. तो फीर मेरी मान.. अगर तेरे धिरेन जीजु तुमसे सादी करना चाहते हे.. तो तुम उनसे सादी करले.. ओर मजा तो हम कीसीके साथ भी ले सकती हे.. मेरी जींदगीमे भी तीन तीन बोय फ्रेन्ड आचुके हे.. ओर मे तीनोका बीस्तर गरम कर चुकी हु.. तब जाके मुजे अ‍ेक अच्छा लंड नसीब हुआ हे.. ओर आज तेरे लखन जीजुके बारेमे भी.. सुना.. तो मन बेकाबु होने लगा हे.. बस.. हमे तो हमारी जवानीका मजा ही लुटना हे.. जब अ‍ेक बार हमे बच्चे हो गयेनां.. तो सब जोस ठंडा होजायेगा..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दिया.. सच कहा तुमने.. मेने भी कल लखन जीजुका देखा.. तबसे मेरा भी मन भटकने लगा हे.. तभी तो तेरी सलाह ले रही हु.. की मे क्या करु..? ओर धिरेनकी मम्मी खुद लखन जीजुकी भाभी हे.. ओर मेरी लता दीदी खुद उनकी बीवी हे.. तो हमारा मीलना जुलना तो अ‍ैसे ही होता रहेगा.. तो मे लखन जीजुसे आसानीसे मील सकती हु.. दिया.. तुजे अ‍ेक ओर बात बताउ..?

दिया : (सामने देखते) हां.. क्या..?

दिया : (हसते) दिया.. हभी हालमे ही पता चला हे.. की लखन जीजुने हमारी होस्टेलकी मेडमसे भी सादी करली हे.. हमे तो पता ही नही था.. की वो लखन जीजुसे चुदवाती थी.. हें..हें..हें..

दिया : (सरमाते हसते धीरेसे) नीलु.. क्या केह रही हो तुम..? तब तो मेने तेरे लखन जीजुको जरुर वहा देखा होगा.. नीलु.. अगर तुम बुरा ना मानोतो अ‍ेक बात कहु..? क्या तुम अ‍ेक बार तुम्हारे लखन जीजुसे मीलवा सकती हो..? क्युकी मे उनके पेन्टके उभारको देखना चाहती हु.. बहारसे ही पता चल जायेगा.. की उनका कीतना बडा हे.. तुम फीकर मत करना.. मे इनसे आगे नही बढुगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) कमीनी क्या बोल रही हे..? देखना वो बहुत ही रंगीन मीजाजके हे.. अगर तुजे अ‍ेक बार देख लीया तो तुजे पटा लेगे.. तो तेरी सादी धरीकी धरी रेह जायेगी.. फीर मुजे दोस मत देना.. की तेरे जीजुने मेरी फाडके रखदी.. हें..हें..हें..

दिया : (हसते अ‍ेक मुका मारते) चल हट कमीनी.. हसले.. अ‍ैसा कुछ भी नही होगा.. मेरे लीये तो मेरा बोय फ्रेन्ड ही ठीक हे.. तुजे पता नही वो कीतने पैसे वाले हे.. बस.. अब उनके साथ सादी करते सारी जींदगी अ‍ैसे ही बीतानी हे.. हां.. कभी कभी बहारका खाना खानेका मन हुआ.. तो मे तेरे लखन जीजुको बुला लुगी.. बडे लंडसे चुदवानेका मजा ही अलग हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते मुका मारते) कमीनी.. अगर उनसे चुदवायेगी तो देखना वो तेरी फाडके ओखली कर देगा.. मे मजाक नही कर रही.. उनका सचमे बहुत बडा हे.. हें..हें..हें.. चल बहुत हुआ मजाक.. अब जरा तेरा मोबाइल फोनदे मुजे.. मुजे धिरेन जीजुसे बात करनी हे.. मेरा फोनतो दीदीने ले लीया हे.. अच्छा हुआ उन्होने मुजे उनका नंबर देदीया.. मे लेकर आइ हु.. ला.. फोन..

कहेते नीलमने दियाका फोन लेलीया ओर धिरेनका नंबर नीकालकर वो धिरेनको फोन करने लगी.. फीर दो टड्ढाइके बाद धिरेनने फोन उठा लीया.. ओर नीलमसे बात करने लगा.. तो कुछ ही देरमे वो नीलमको लेने आ रहा हे.. कहेकर फोन काट दीया.. तो नीलम खुस होकर बहुत ही सरमाने लगी.. ओर फोन काटकर उसने दियाको सब बता दीया.. ओर कहा.. की यहा स्कुलमे वो सब सम्हाल ले.. वो छुटी होनेसे पहेले वापस आजायेगी.. तो दियाने कहा..

दिया : (सरारतसे) नीलु.. अगर तुम तेरे जीजुको मीलना चाहती हो.. तो आज हमारी रुममे चली जाओ.. क्युकी आज मेडम उनकी मम्मीको लेकर होस्पीटलमे हे.. तो वहा तुमको देखने वाला आज कोइ नही होगा..

नीलम : (सर्मसार होते) दिया.. अगर कीसीने हमे देख लीया तो..? क्या वहा ओर कोइ लडकी नही हे..?

दिया : (हसते धीरेसे) कमीनी.. सभी लडकीया इस वक्त यही स्कुलमे हे.. तो वहा कौन होगा..? ये ले मेरी रुमकी चाबी.. आज मेरे पास ही हे.. फीर तेरे जीजीुको मीलकर वापस आजाना.. मे टीचरको तेरे पीरीयडका बहाना देदुगी.. कहे दुगी तुम पेड पहेनने गइ हो.. थोडी देर लगेगी.. जा वही मीलले उसे.. येले चाबी..

नीलम : (सरमाकर चाबी लेते) दिया.. थेन्क्स.. देखना सब सम्हाल लेना.. आज कीतने दिनोके बाद हम मील रहे हे.. जबसे हम मीले हे तबसे धिरेनको मीलनेका बहुत मन कर रहा हे.. तु सही केह रही थी..

दिया : (हसते धीरेसे) कमीनी.. तभी तो तुजे केह रही थी.. की जा अ‍ेक बार मीलले उसे.. साली ये आग ही अ‍ैसी हे.. जब अ‍ेक बार कीसीका अंदर लेलीयानां.. तो फीर इनके बीना रेह ही नही सकती..

नीलम : (सरमाते हसते) दिया.. सच कहा तुमने.. आज कल मुजे भी बहुत इच्छा होने लगती हे..

तब कुछ ही देरमे धिरेन अपनी बाइकसे बेन्कसे छुटी लेकर आगया.. तो दिया उनकी ओर देखकर हसने लगी.. फीर नीलमने दियाका अ‍ैजे खास फ्रेन्डके रुपमे परीचय करवाया.. तो धिरेनने स्कुल खतम होनेसे पहेले नीलमको वापस छोडनेकी बात की.. तो नीलमने सरमाकर हसते धिरेनको होस्टेलके रुमकी चाबी दीखाइ.. तो धिरेन सब कुछ समज गया.. फीर नीलम धिरेनके पीछे बैठकर नीकल गइ.. तो दिया वापस क्लासमे चली गइ..

इधर धिरेन नीलमको लेकर होस्टेलपे आगया.. तो वहा कोइ नही था.. तब नीलमने धिरेनको होस्टेलकी मेडमकी सारी बात बतादी.. जीसे सुनकर धिरेन भी खुस होगया.. ओर दोनो उपरकी मंजीलपे दियाके रुममे चले गये.. तो अंदर जातेही नीलमने रुमको लोक कर दीया.. ओर धिरेनकी बाहोमे समा गइ.. तब धिरेन नीलमको अपनी बाहोमे कसते उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा..





तब उनको नही पता था.. की ओफीसमे लखन बैठा हे.. ओर दोनोको आते हुअ‍े देख चुका हे.. जैसे ही नीलम ओर धिरेन उपरकी ओर अपने रुममे गये.. तब पीछेसे लखन भी दबे पांव अपना मोबाइल लेकर उपर चला गया.. ओर वो रुमके दरवाजे ओर खीडकीकी ओर देखने लगा.. तभी उसे खिडकी थोडीसी खुली दीख गइ.. तो लखन मुस्कुराते वहा चला गया ओर अंदर जांकने लगा.. तभी अंदर..
 
नीलम : (उतेजनामे) धि..रे..न.. हमे जल्दसे वापस जाना होगा.. बस.. अब बस भी करो.. मे आपको मीलना चाहती थी.. ओर कुछ बाते कहेना चाहती थी.. आपको जो भी करना हे जल्दीसे कर लीजीये..

धिरेन : (फटाफट कपडे नीकालते) नी..लु.. प्लीज.. थोडी देर रुकते हेनां.. मुजे तुमसे मीलन करनेका बहुत मन कर रहा हे.. तेरे बीना रहा नही जाता.. चल फटाफट कपडे नीकाल.. मे अ‍ेक बार तुमसे मीलना चाहता हु.. कीतने दिन हो गये हम नही मीले.. क्या तुजे घरपे कीसीने कुछ कहा तो नही..?

नीलम : (मुस्कुराते सरमाकर कपडे नीकालते) धिरेन.. प्लीज.. वो सब बाते बादमे.. पहेले जो भी करना हो थोडा जल्दीसे करना.. आज सीर्फ अ‍ेक ही बार.. फीर मुजे उसीके बारेमे आपसे बात भी करनी हे..

तब कुछ ही देरमे दोनो नंगे होगये.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. कीतने दिनोसे वो ये सुखसे वंचीत थी.. तो आज वो भी धिरेनके साथ मीलन करना चाहती थी.. तब धिरेन बेडके कीनारे बैठ गया.. ओर अ‍ेक हाथसे अपना लंड पकडकर हीलाते हुअ‍े नीलमकी ओर देखकर हसने लगा.. ओर आंखोके इसारोसे लंडकी ओर इसारा करते नीलमको मुहमे लेनेको कहेने लगा..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. प्लीज.. ये सब हम कीसी ओर दिन करे..? आप जल्दीसे मेरे उपर आजाओनां.. हमारे पास टाइम बहुत कम हे..

धिरेन : (मुस्कुराते नीलमके बुब्सको थामते) नीलु.. प्लीज.. सीर्फ अ‍ेक बार.. मुहमे लेना.. बहुत मन कर रहा हे..

तब नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर घुटनोके बल धिरेनके पैरोके बीच बैठ गइ.. फीर अ‍ेक नजर धिरेनकी ओर देखते अपनी नजर चुका लेती हे.. ओर धीरेसे धिरेनके लंडको अपनी मुठीमे पकड लेती हे.. फीर धीरे धीरे सहेलाते अपना मुह लंडकी ओर लेजाती हे.. ओर अपनी जीभसे चाटने लगती हे.. तब धिरेन आंख बंध करते उतेजीत होने लगा.. ओर मुस्कुराने लगा.. तब नीलममे पुरा लंड अपने मुहमे ले लीया..





ओर लोलीपोप की तराह चुसने लगी.. तो धिरेनका लंड तनके सख्त हो गया.. ओर उसे नीलमसे दुरीया बरदास्त नही हुइ.. ओर वो नीलमको अपने उपर खीच लेता हे.. ओर उनके होठोको चुमने लगता हे.. तब नीलम भी पुरी मदहोसीमे छागइ थी.. ओर वो भी नसीली आंखोसे देखते धिरेनके मुहमे जीभसे जीभका पेच लडाने लगी.. दोनोके उपर वासना पुरी तराह हावी हो चुकी थी..

तब धिरेन नीलमको बेडपे लीटा देता हे.. ओर उनके उपर छा जाता हे.. फीर उनके होठोको चुमते अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेजाते नीलमकी चुतको सहेलाने लगता हे.. तब नीलम मदहोस होकर सीसकारीया करने लगी.. वो नसीली आंखोसे धिरेनकी आंखोमे देखने लगी.. ओर धिरेनकी गरदनमे दोनो हाथ डालकर उनको जोरोसे अपने तनसे चीपका देती हे.. ओर उनके होठोको चुमने लगी..





नीलम : (उतेजनामें) धि..रे..न.. प्लीज.. जल्दीसे अंदर डालदो.. नही रहा जाता..

कहा तो धिरेन सरकते उनके पैरोके बीच आजाता हे.. फीर अपना लंड पकडकर नीलमकी चुतपे घीसने लगता हे.. तब नीलमकी चुत फडफडाते पानीका रीसाव करने लगी.. ओर धिरेनके लंडको भीगोने लगी.. जब लंड गीला हो गया तब धिरेनने चुतपे रखते थोडासा पुस कीया.. ओर लंडको चुतमे फसा लीया.. फीर वो नीलमके उपर जुकते उनके बुब्सको मसलते होठोको चुमने लगा..





तभी नीलमने धिरेनको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर वासना भरी नजरोसे धिरेनकी आंखोमे देखने लगी.. फीर अपनी नजर जुकाली.. तब धिरेनने अ‍ेक ही जटकेमे अपना पुरा लंड नीलमकी चुतमे उतार दीया.. तो नीलमके मुहसे अचानक हुअ‍े हमलेसे आहे नीकल गइ.. ओर नीलमने जोरोसे धिरेनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो धिरेन नीलमके बुब्सको चुमते धीरे धीरे कमर हीलाते नीलमको चोदने लगा..





नीलम भी उतेजीत होते अपनी कमर हीलाने लगी.. तो धिरेन पागल जैसा होने लगा.. ओर कमर हीलाते नीलमको जोरोसे चोदने लगा.. नीलमकी चुत गरम भठीकी तराह तप रही थी.. तब उसे लगा की वो अभी छुट जायेगा.. तो वो नीलमको अभी भी चोदना चाहता था.. तो उसने फोरन नीलमको चोदना बंध करदीया.. ओर नीलमसे चीपकते उनके बुब्सको ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तब नीलमको भी अच्छा नही लगा.. ओर वो सरमाते धीरे धीरे अपनी कमर हीलाने लगी.. तब..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. चोदोनां.. चोदना बंध क्यु करदीया.. कीतना मजा आ रहा था.. जोरोसे चोदो मुजे.. मुजसे रहा नही जाता..

धिरेन : (सरमाते धीरेसे) नीलु.. थोडी देर रुकजा.. वरना मेरा नीकल जायेगा.. मे तुजे ओर चोदना चाहता हु.. क्युकी हम इतने दिनोसे बाद मील रहे हे.. तो मेरा जल्दी होजायेगा..

कहातो नीलम सर्मसार होगइ.. ओर नजरे चुराते अपनी कमर हीलाना छोडदीया.. ओर धिरेनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. तभी अचानक धिरेनने अपना लंड बहार नीकाल दीया.. ओर नीलमको घोडीकी तराह होजानेको कहा.. तो नीलम बहुत ही सरमा गइ.. ओर बेडपे बैठते उल्टी होगइ.. ओर घीडी बनके जुक गइ.. तब धिरेन नीलमके पीछे चला गया.. ओर पैरोके बीच जाकर घुटनोके बल बैठ गया..

फीर अपना लंड पकडकर पीछेसे नीलमकी चुतमे घुसाने लगा.. तब नीलमने भी हाथ नीचेकी ओर लेजाते लंडको सहारा देते अपनी चुतका रास्ता दीखा दीया.. तब धिरेन नीलमकी कमर पकडकर पुस करता हे.. तो उनकी लंड बडी आसानीसे नीलमकी चुतमे चला गया.. ओर धिरेन कमर पकडकर धीरे धीरे नीलमको वापस चोदने लगा.. तो नीलमको थोडा दर्द होने लगा.. ओर वो चदर पकडकर अपना मुह बीगाडने लगी..





तो धिरेन वापस बहुत ही उतेजीत हो गया.. ओर जोरोसे कमर हीलाने लगा.. तब कुछ ही देरमे उनका लंड फुट पडा.. ओर लंडसे पीचकारीया छोडते नीलमकी चुतमे उडेलने लगा.. जब जड गया.. तो नीलमकी पीठमे मुह रखते ढेर होगया.. तब नीलम अब भी प्यासी थी.. तो वो जोरोसे अपनी कमरको आडी टेडी होलाने लगी.. तब वो भी इतने दिनोसे नही चुदी थी.. जीनकी वजहसे वो भी जल्दीसे जड गइ.. तब..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) क्या धिरेन.. थोडी देर ओर करना थानां.. इतनी भी जल्दी नही थी..

धिरेन : (पीछेसे बुब्सको मसलते) नीलु.. हम इतने दिनोसे नही मीले थे.. तो सब जल्दीसे हो गया.. आइ अ‍ेम सोरी.. क्या तेरा होगया..? वरना तु लेटजा.. मे कर देता हु..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही धिरेन.. हो गया.. अब उपरसे हटीयेनां.. मुजे बाथरुम जाना हे..

तो धिरेन नीलमकी पीठसे हट गया.. तो नीलम अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर मन ही मन धिरेनको कोसती जटसे बाथरुममे चली गइ.. ओर चुतको साफ करके अपने आपको सही करने लगी.. फीर सरमाते नंगी ही बहार आगइ.. तो धिरेन भी बाथरुमे चला गया.. ओर अपने आपको सही करने लगा.. तबतक नीलमने अपने कपडे पहेन लीये थे.. ओर अपने बालोको सही कर रही थी.. फीर धिरेन भी बहार आकर कंपलीट हो गया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरीकी बाहोमे समा गये.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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