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तो सृती भी अपने रुममे अपना सामान लेने चली गइ.. तब लता रमा नीलम भी अपना सब सामान लेकर नीचे आगइ.. तो रजीया पुनमने भी अपना सामान लाकर रख दीया.. तब चंदा ओर मंजु नीर्मला भुमीका ओर सरला काकीका सामान बहार रख रहे थे.. तभी भावना विजयको लेकर आगइ.. तो चंदाको देखते ही वो रोने लगा.. तब चंदाने दोडकर उसे अपनी गोदमे ले लीया ओर अपने सीनेसे लगा लीया..
फीर उनके चहेरेको चुमते आंसु बहाने लगी.. तो मंजु देवायत सब देखकर मुस्कुराने लगे.. तो चंदा विजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो पीछे मंजु ओर सृती भी हसती हुइ चली गइ.. तभी अंदर जाके देखा तो चंदा विजयको अपने दुधुसे लगाकर बैठी थी.. जैसे उनको दुध पीला रही हे.. जैसेही सृती मंजु अंदर आये वो अपना आंचल छुपाते बहुत ही सरमाने लगी.. क्युकी आज सृती ओर मंजुने उनको विजयसे दुध पीलाते देख ही लीया..
मंजुला : (हसते) अरे दीदी.. क्या आप इसे दुध भी पीलाती हे..?
चंदा : (सरमाते धीरेसे) मंजु.. सोरी.. विजयको देखकर मेरी ममता जाग गइ.. मे उनको अैसे ही सुलाती हु..
मंजुला : (मुस्कुराते पास बैठते) दीदी.. गभराइअे नही.. मे जानती हु.. सचमे विजय आपका ही बेटा हे.. इनपे सबसे पहेले आपही का हक हे.. मेतो खुस नसीब हु.. की मेरे विजयका खयाल रखनेके लीये उनकी इतनी माताये हे..
चंदा : (सरमाते धीरेसे) नही मंजु.. मे मेरे विजयको कीसीके साथ बांट नही सकती.. ये हमेसा मेरे साथ ही रहेगा.. अगर तुजे ओर बेटा चाहीये तो हमारे पतीको कहेदे.. वो तुजे फीरसे प्रेगनेन्ट कर देगा.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) दीदी.. वो तो ठीक हे.. लेकीन अभी आपके पेटमे हमारे पतीका बच्चा पल रहा हे उनका क्या..? सृती.. इनको कुछ उल्टी बुल्टीकी दवाइआ देदे.. वरना बीच रास्ते उल्टीया होगी तो ये जायेगी कहा..? हें..हें..हें..
सृती : (आस्चर्यसे खुस होते धीरेसे) मंजुदी.. क्या केह रही हो..? क्या चंदादीदी सचमे प्रेगनेन्ट होगइ हे..?
मंजुला : (हसते) हां.. जब तुम लोग सहेर गये थे.. तब खाना खानेके बाद ये दोनो ही उपर तेरे रुममे चले गये थे.. ओर तभी हमारे पतीको अपने उपर चडा दीया था.. तो फीर सामको अपने उपरसे उतारा.. ओर जब तक हमारे पतीने अपना बीज अंदर नही डालदीया तबतक उनका हथीयार बहार ही नही नीकालने दीया.. हमारी ये सौतन सीर्फ दीखनेमे भोली लगती हे.. कमीनी हे तो हमसे भी बडी चुदकड.. हें..हें..हें..
कहातो चंदा दुसरी ओर मुह घुमाकर हसती रही.. तो सृती ओर मंजु दोनो उनकी ओर देखते हसने लगी.. तब चंदा अेक बार फीर बहुत सर्मसार होगइ.. ओर उसने विजयको अपने दुधुसे हटाया तब विजय सबकी ओर देखते मुस्कुरा रहा था.. तब चंदाने अपना बुब्स अंदर रखते ब्लाउसको सही कीया ओर खडी होकर विजयको मंजुको थमा देती हे.. ओर मुस्कुराते कहेती हे..
चंदा : (हसते) ले कमीनी संभाल मेरे विजयको.. ओर इनका खयाल रखना अच्छेसे.. चल अब जानेका समय भी हो गया हे..
सृती : (मुस्कुराते कुछ दवाइआ देते) दीदी.. लीजीये ये सब गोलीया अपने पास रखीये.. अब कुछ बैचैनी या उल्टी जैसा लगे तो इनमेसे ये दो गोली खालेना.. ओर कुछ अैसा लगे तो वहा कीसी लेडी डोक्टरको दीखा देना..
चंदा : (विजयको देते सरमाते धीरेसे) मंजु.. क्या सचमे मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..?
मंजुला : (विजयको लेते) हां दीदी.. आपको अेक फुल जैसी बच्ची आयेगी.. जो हमारी भावनाके बेटे भावेसकी बीवी होगी.. तो आप उनको सम्हालीयेगा ओर अच्छेसे पढाइअेगा..
चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. मतलब हमारी भावु मेरी समधन हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. मे मेरी बच्चीको खुब पढाउंगी..
कहते चंदा हां मे गरदन हीलाते बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुको गले लगाकर हसने लगी.. तब सृती भी दोनोकी ओर देखते हसती रही.. फीर तीनो बहार आगइ.. तब देवायतने अपनी बडी कार रेडी रखी थी.. तो देवायतने लखनको अपनी जीप लेनेके लीये कहा.. ओर वहा जाकर दुसरी कार लेनेको कहेते जीप वापस यहा भेज देनेको कहा.. फीर जीपको सृतीकी कार के पीछे चलानेको कहा..
तभी नीर्मला भुमीका सरला काकी ओर चंदा सबको गले मीलने लगी.. तब सरला काकीने रमाको मीलते घरका ओर भावेसका ध्यान रखनेको कहा.. फीर नीलमको मीलते भी उनके सरको चुम लेती हे.. तो लता भी सबको गले मीलते मंजु भावनाको गले मीलते खुब रोइ.. फीर पुनमको मीलते भी रोने लगी.. तब पुनमने भी आंसु बहाते अपने घरपे आनेका न्योता दीया..
तबतक पुनम बार बार लखनकी ओर देखती रही.. उनको लगाकी लखन भी हमेसाके लीये सहेर जा रहा हे.. तो उनको मीलने आयेगा.. लेकीन लखन अैसेही कीसीके सामने देखे बीना जीपमे बैठा रहा.. तब पुनमका दिल टुट गया.. ओर वो अेक बार फीर लताको गले मीलते रोने लगी.. तब सृतीने उन्को सम्हाला.. फीर सबलोग कारमे सामान रखकर बैठने लगे.. लखनका ओर पुनमका सब सामान लखनकी खुली जीपमे पीछे रख दीया..
तब सृतीने अपनी कारमे आगे पुनमको ओर पीछे दया रजीया ओर नीलमको बीठा दीया.. देवायतकी कारमे नीर्मला चंदा भुमीका ओर सरलाकाकी बैठ गइ.. तो लखनकी जीपमे लखनकी बाजुकी सीटमे सीर्फ लता ओर रमा ही बैठ गइ.. तब देवायतने अपनी कारको जाने दी.. तो पीछे सृतीने अपनी कार जाने दी ओर लास्टमे लखन अपनी जीप लेकर सृतीकी कारके पीछे चलाने लगा.. तब जाते वक्त सबलोग मंजु ओर भावनाको हाथ हीलाते बाय कहेने लगे..
आज हजेलीपे सीर्फ तीनो बच्चोके साथ मंजु भावना ओर चंपाभाभी ही रेह गये.. दया ओर रजीयाके जानेकी वजहसे चंपाभाभी भी आंसु बहा रही थी.. तब मंजुने विजयको भावनाको थमाते चंपाभाभीको गले लगाकर सांत कीया.. ओर तीनो अंदर चली गइ.. तो इधर पुरे रास्ते लखन खामोस बैठा रहा.. तब रमा लखनके साथ बैठकर बहुत खुस हो रही थी.. ओर बार बार लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगती थी..
तो सृतीकी कारमे पुनम भी खामोस बैठी रही.. तब आधे घंटेके अंदर ही सबलोग धिरेनके गांवमे उनके घरके सामने खडे थे.. तब पुनम ओर दया वहा उतर गइ.. तो सृती भी अपनी कारसे उतरके उनके गले लगते जल्द से दुबारा मीलनेको कहेने लगी.. तब पुनम भी मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर दयाके साथ अपना सामान लेनेके लीये लखनकी जीपके पीछे चली गइ.. तब भी लखन अैसे ही बेठा रहा तभी लताने कहा....
कन्टीन्यु
फीर उनके चहेरेको चुमते आंसु बहाने लगी.. तो मंजु देवायत सब देखकर मुस्कुराने लगे.. तो चंदा विजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो पीछे मंजु ओर सृती भी हसती हुइ चली गइ.. तभी अंदर जाके देखा तो चंदा विजयको अपने दुधुसे लगाकर बैठी थी.. जैसे उनको दुध पीला रही हे.. जैसेही सृती मंजु अंदर आये वो अपना आंचल छुपाते बहुत ही सरमाने लगी.. क्युकी आज सृती ओर मंजुने उनको विजयसे दुध पीलाते देख ही लीया..
मंजुला : (हसते) अरे दीदी.. क्या आप इसे दुध भी पीलाती हे..?
चंदा : (सरमाते धीरेसे) मंजु.. सोरी.. विजयको देखकर मेरी ममता जाग गइ.. मे उनको अैसे ही सुलाती हु..
मंजुला : (मुस्कुराते पास बैठते) दीदी.. गभराइअे नही.. मे जानती हु.. सचमे विजय आपका ही बेटा हे.. इनपे सबसे पहेले आपही का हक हे.. मेतो खुस नसीब हु.. की मेरे विजयका खयाल रखनेके लीये उनकी इतनी माताये हे..
चंदा : (सरमाते धीरेसे) नही मंजु.. मे मेरे विजयको कीसीके साथ बांट नही सकती.. ये हमेसा मेरे साथ ही रहेगा.. अगर तुजे ओर बेटा चाहीये तो हमारे पतीको कहेदे.. वो तुजे फीरसे प्रेगनेन्ट कर देगा.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) दीदी.. वो तो ठीक हे.. लेकीन अभी आपके पेटमे हमारे पतीका बच्चा पल रहा हे उनका क्या..? सृती.. इनको कुछ उल्टी बुल्टीकी दवाइआ देदे.. वरना बीच रास्ते उल्टीया होगी तो ये जायेगी कहा..? हें..हें..हें..
सृती : (आस्चर्यसे खुस होते धीरेसे) मंजुदी.. क्या केह रही हो..? क्या चंदादीदी सचमे प्रेगनेन्ट होगइ हे..?
मंजुला : (हसते) हां.. जब तुम लोग सहेर गये थे.. तब खाना खानेके बाद ये दोनो ही उपर तेरे रुममे चले गये थे.. ओर तभी हमारे पतीको अपने उपर चडा दीया था.. तो फीर सामको अपने उपरसे उतारा.. ओर जब तक हमारे पतीने अपना बीज अंदर नही डालदीया तबतक उनका हथीयार बहार ही नही नीकालने दीया.. हमारी ये सौतन सीर्फ दीखनेमे भोली लगती हे.. कमीनी हे तो हमसे भी बडी चुदकड.. हें..हें..हें..
कहातो चंदा दुसरी ओर मुह घुमाकर हसती रही.. तो सृती ओर मंजु दोनो उनकी ओर देखते हसने लगी.. तब चंदा अेक बार फीर बहुत सर्मसार होगइ.. ओर उसने विजयको अपने दुधुसे हटाया तब विजय सबकी ओर देखते मुस्कुरा रहा था.. तब चंदाने अपना बुब्स अंदर रखते ब्लाउसको सही कीया ओर खडी होकर विजयको मंजुको थमा देती हे.. ओर मुस्कुराते कहेती हे..
चंदा : (हसते) ले कमीनी संभाल मेरे विजयको.. ओर इनका खयाल रखना अच्छेसे.. चल अब जानेका समय भी हो गया हे..
सृती : (मुस्कुराते कुछ दवाइआ देते) दीदी.. लीजीये ये सब गोलीया अपने पास रखीये.. अब कुछ बैचैनी या उल्टी जैसा लगे तो इनमेसे ये दो गोली खालेना.. ओर कुछ अैसा लगे तो वहा कीसी लेडी डोक्टरको दीखा देना..
चंदा : (विजयको देते सरमाते धीरेसे) मंजु.. क्या सचमे मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..?
मंजुला : (विजयको लेते) हां दीदी.. आपको अेक फुल जैसी बच्ची आयेगी.. जो हमारी भावनाके बेटे भावेसकी बीवी होगी.. तो आप उनको सम्हालीयेगा ओर अच्छेसे पढाइअेगा..
चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. मतलब हमारी भावु मेरी समधन हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. मे मेरी बच्चीको खुब पढाउंगी..
कहते चंदा हां मे गरदन हीलाते बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुको गले लगाकर हसने लगी.. तब सृती भी दोनोकी ओर देखते हसती रही.. फीर तीनो बहार आगइ.. तब देवायतने अपनी बडी कार रेडी रखी थी.. तो देवायतने लखनको अपनी जीप लेनेके लीये कहा.. ओर वहा जाकर दुसरी कार लेनेको कहेते जीप वापस यहा भेज देनेको कहा.. फीर जीपको सृतीकी कार के पीछे चलानेको कहा..
तभी नीर्मला भुमीका सरला काकी ओर चंदा सबको गले मीलने लगी.. तब सरला काकीने रमाको मीलते घरका ओर भावेसका ध्यान रखनेको कहा.. फीर नीलमको मीलते भी उनके सरको चुम लेती हे.. तो लता भी सबको गले मीलते मंजु भावनाको गले मीलते खुब रोइ.. फीर पुनमको मीलते भी रोने लगी.. तब पुनमने भी आंसु बहाते अपने घरपे आनेका न्योता दीया..
तबतक पुनम बार बार लखनकी ओर देखती रही.. उनको लगाकी लखन भी हमेसाके लीये सहेर जा रहा हे.. तो उनको मीलने आयेगा.. लेकीन लखन अैसेही कीसीके सामने देखे बीना जीपमे बैठा रहा.. तब पुनमका दिल टुट गया.. ओर वो अेक बार फीर लताको गले मीलते रोने लगी.. तब सृतीने उन्को सम्हाला.. फीर सबलोग कारमे सामान रखकर बैठने लगे.. लखनका ओर पुनमका सब सामान लखनकी खुली जीपमे पीछे रख दीया..
तब सृतीने अपनी कारमे आगे पुनमको ओर पीछे दया रजीया ओर नीलमको बीठा दीया.. देवायतकी कारमे नीर्मला चंदा भुमीका ओर सरलाकाकी बैठ गइ.. तो लखनकी जीपमे लखनकी बाजुकी सीटमे सीर्फ लता ओर रमा ही बैठ गइ.. तब देवायतने अपनी कारको जाने दी.. तो पीछे सृतीने अपनी कार जाने दी ओर लास्टमे लखन अपनी जीप लेकर सृतीकी कारके पीछे चलाने लगा.. तब जाते वक्त सबलोग मंजु ओर भावनाको हाथ हीलाते बाय कहेने लगे..
आज हजेलीपे सीर्फ तीनो बच्चोके साथ मंजु भावना ओर चंपाभाभी ही रेह गये.. दया ओर रजीयाके जानेकी वजहसे चंपाभाभी भी आंसु बहा रही थी.. तब मंजुने विजयको भावनाको थमाते चंपाभाभीको गले लगाकर सांत कीया.. ओर तीनो अंदर चली गइ.. तो इधर पुरे रास्ते लखन खामोस बैठा रहा.. तब रमा लखनके साथ बैठकर बहुत खुस हो रही थी.. ओर बार बार लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगती थी..
तो सृतीकी कारमे पुनम भी खामोस बैठी रही.. तब आधे घंटेके अंदर ही सबलोग धिरेनके गांवमे उनके घरके सामने खडे थे.. तब पुनम ओर दया वहा उतर गइ.. तो सृती भी अपनी कारसे उतरके उनके गले लगते जल्द से दुबारा मीलनेको कहेने लगी.. तब पुनम भी मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर दयाके साथ अपना सामान लेनेके लीये लखनकी जीपके पीछे चली गइ.. तब भी लखन अैसे ही बेठा रहा तभी लताने कहा....
कन्टीन्यु