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- Dec 5, 2013
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तो दुसरी ओर सुबह धिरेन जब उठा तो रुममे कोइ नही था.. उनका सर दर्द कर रहा था.. पुनम जल्दीसे उठकर तैयार होकर नीचे चली गइ थी.. तो धिरेन अपना सुबहका कार्यक्रम नीपटाने लगा.. तब उसे रातकी सभी घटना याद आने लगी.. तो वो सर्मीन्दगी महेसुस करने लगा.. क्युकी पुरी रात प्यार करनेकी बडी बडी बाते करते ओर कामोतेजक गोली खानेके बावजुद वो पनुमको अेक बारभी ठीकसे नही चोद पाया..
ओर उस वजहसे उनको पुनमकी खरी खोटी सुननी पडी वो अलग.. उसे ये भी पता नही चलाकी वो इतनी जल्दीसे कैसे सोगया..? धिरेन नहाते नहाते सोचने लगा.. की वो नीलम ओर भीमाभाइकी बीवी पायल भाभीको कैसे कामोतेजककी गोली खाकर अच्छेसे चोद लेता था.. तो फीर वो पुनमको क्यु नही चोद पाता..? यही सब सोचकर वो नहाकर बहार नीकला तो पुनम उनके रुममे आचुकी थी..
ओर अलमारीसे उनके कपडे नीकालकर बेडपे रख रही थी.. तो धिरेनने मुस्कुराते उनके पीछे आगया.. ओर पुनमको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लीया.. तो पुनम थोडे गुसेसे उनकी ओर देखते घुरने लगी.. ओर धिरेनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तो धिरेनने उनको मुस्कुराते थोडा कसके पकडलीया.. ओर उनके होठोको जबरदस्तीसे चुम लीया.. तब पुनम कोइ प्रतीक्रिया दिये बगैर अैसेही खडी रही.. तभी..

धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो.. आइ अेम सोरी.. मुजे पता हे.. तुम रातकी बातोसे अभी तक मुजसे नाराज हो..
पुनम : (थोडी सख्तीसे) धिरेन.. आपको सब पता हे.. तो फीर आप अपना इलाज क्यु नही करवाते..? मेरी भी कुछ तम्मनाये होती हे.. क्या आप मेरी फीलींग्सको कभी नही समजोगे..?

धिरेन : (थोडा नाराज होते) यार मे ठीकसे तो करता हु.. पता नही तुजे देखते ही सब जल्दीसे होजाता हे.. तो मे क्या करु..? फीर भी तुम कहेती हो तो आज मे कीसी डोक्टरको दीखाकर आजाउगा.. बस..?
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. धिरेन.. पता नही.. आपने मुजे प्रेगनेन्ट कैसे करदीया.. आपको पता हे..? मेरी तम्मना क्या हे..? मुजे बीस्तरमे लंबी रेसका घोडा चाहीये.. जो मुजे सुबह तक प्यार करे..
धिरेन : (सामने देखते थोडी जल्द बाजीमे) पुनो.. मे लंबी रेसका घोडा ही हु.. यकीन नही हे.. तो पुछलो..
पुनम : (थोडा चोंकनेका नाटक करते) पुछलु..? कीसे..?
धिरेन : (गलतीका अहेसास होते ही बातको सम्हालते) वो.. वो.. मेरा मतलब.. आज डोक्टरको दीखा दुगा.. फीर उनको पुछ लेना.. की मे लंबी रेसका घोडा होगया हु.. की नही.. हें..हें..हें..
पुनम : (मनमे हसते बहारकी ओर जाते ) ठीक हे.. आप तैयार होकर नीचे आजाइअे.. ओर हां.. अब अपना इलाज करवाके ही मुजे हाथ लगाइअेगा.. अब मे अैसे प्यासी रहेना नही चाहती.. समजे..?
धिरेन : (थोडा गुस्सेसे) पुनो.. ये क्या बात हुइ..? थोडे दिन वहा रही तो.. तुजे तो बहुत आग लगी हे..

पुनम : (पीछे मुडकर थोडा रुकते) हां धिरेन.. मुजमे बहुत आग हे.. ओर मेरी आग बुजाना आपका फर्ज हे.. धिरेन.. ये सब मुजसे सादी करनेसे पहेले ही सोच लेना चाहीये था.. क्या आप मुजसे जगडा करना चाहते हे..? तो बता दीजीये.. सुबह सुबह मेरा मुड मत खराब कीजीये.. ओर हां.. मे ओर दया बहेन आपके जानेके बाद हमारे गांव जा रही हे.. वो सामतभाइके घरपे.. सोक मनाने.. ओर हम दोनो बससे वापस आजायेगी.. अगर हमे आनेमे देर होजाये तो चीन्ता मत करना.. हमे बडे भैया छोड जायेगे..
धिरेन : (मनमे बडबडाते) कमीनी कहीकी.. जब देखो बडे भैया ओर छोटे भैयाकी मालाही जपती हे.. अगर वो इतने ही प्यारे हे तो मुजसे सादी क्युकी..? पुरी जींदगी उनके पास रहेकर उनसे ही चुदवाती.. जानता हु तेरे बढे भैयाको.. अेक नंबरका अैयास हे वो.. ठरकी कहीका..
पता नही मेरी मां पे क्या जादु करदीया.. उनको फसाकर सादी करके लेगया.. ओर वो भी कमीनी चुदकढ नीकली.. अगर लंड खानेका इतना ही सौक था तो मुजसे कहेती.. घरपे इतना जवान लडकेको छोडके बहार वालोसे चुदवाती थी.. घरपे सीर्फ हम दोनो ही तो थे.. कीसीको क्या पता चलता..?
पुनम : (मनकी बात जानकर गुससे देखते) कुछ कहा आपने..? मनमे क्या बडबडाते हो.. जो कहेना हे साफ साफ कहो..
धिरेन : (थोडा जेंपते) नही तो.. कुछ नही.. तु जा यार.. मे आता हु..
कहा तो पुनम गुस्सेके साथ बहार चली गइ.. तो धिरेन उनको मुह फाडकर देखता ही रहा.. क्युकी आज उन्होने पहेली बार पुनमको इतने गुस्सेमे देखा था.. तो धिरेनका मुड भी थोडा खराब होगया.. ओर वो जल्दीसे अपने कपडे पहेनकर नीचे आगया.. तो देखा घरपे भीमाकी नइ बीवी पायल भाभी आइ हुइ थी.. जो वो ओर पुनम सोफेपे बैठकर हस हसके बाते कर रही थी.. तो धिरेन उनको देखकर खुस होगया.. तभी..
पायल : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) अरे देवरजी.. आगये आप..? बेंन्कपे जानेकी तैयारीया हो रही हे क्या..? आपने बताया नही मेरी देवरानी आगइ हे.. देखो.. कीतनी खुबसुरुरत हे.. अगर पता होताकी ये आगइ हे.. मे तो इनको मीलने पहेले ही आजाती.. हें..हें..हें..
धिरेन : (मुस्कुराकर पास बैठते) अरे भाभी.. मुजे भी कहा पता था.. की ये इतनी खुबसुरत हे.. वरना मे इनको उनके मायके थोडीना जाने देता.. हें..हें..हें.. ओर खुबसुरत तो आप भी कम नही हो.. तभी तो भीमाभाइ आपके पीछे इतना पागल हे.. क्यु पुनो..? हें..हें..हें..
पायल : (सर्मसार होते अेक मुका मारते) चलो.. हटो बदमास.. बीवीके सामने ही मस्तीया करते हो..? देवरानीजी.. इनकी जुबान बहुत चलती हे.. जरा इनको सम्हालके रखीयेगा.. कही हाथसे ना नीकल जाये.. आप इसे मार मारके सुधारदो.. हें..हें..हें.. बहुत बीगड गये हे..
पुनम : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. इनकी सीर्फ जुबान ही चलती हे.. बाकी कुछ नही.. मतलब.. ये अैसे नही हे.. बहुत कम बोलते हे.. भाभी.. थेन्क्स.. आपने धिरेनका इतने दिनो तक खयाल रखा.. वरना ये तो वहा खानेके लीये आते भी नही थे.. तो इनकी बहुत चीन्ता हो रही थी..
धिरेन : (मुस्कुराते सामने देखते मनमे) कमीनी.. कीतना जुठ बोलती हे..
पायल : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) देवरानीजी.. मेरे होते हुअे आपको इनकी चीन्ता करनेकी जरुरत नही हे.. मेरे अेक लौते देवर जो हे.. इनके भाइने मुजे इनका अच्छेसे खयाल रखनेको कहा हे.. क्यु देवरजी..?
धिरेन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अगर खयाल रखने वाली आप जैसी भाभी हे.. तो मुजे चीन्ता करनेकी क्या जरुरत हे..? आपने मेरा बहुत अच्छेसे खयाल रखा.. चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. आप भी बैठ जाइअे..
पायल : (मुस्कुराते) अरे नही.. मे चाइ नास्ता करके ही आइ हु.. ये तो देवरानीजीको मीलनेके लीये आइ थी.. अब आप लोग चाइ नास्ता करलीजीये मे चली.. अब तो आना जाना लगाही रहेगा.. हें..हें..हें..
कहेते पायल धिरेनकी ओर कातील मुस्कान करते नीकलने लगी.. तभी धिरेनने पुनमकी नजर बचाते उनको जटसे आंख मारदी.. तो पायल बहुत ही सरमा गइ.. ओर जटसे नीकल गइ.. तब पुनम धिरेनकी ओर नजर गडाये बैठी थी.. जब धिरेनने पुनमकी ओर देखा तब पुनम सीर्फ उनको ही देख रही थी.. वो भी थोडा गुस्सेसे.. जीसे देखकर धिरेन थोडा जेंप गया.. ओर डाइनींग टेबलपे जाकर बैठ गया.. तो पुनम भी यहा आकर बैठ गइ..
पुनम : (धीरेसे) भाभीके साथ तो बडा फ्लर्ट कर रहे थे..? कही इनके साथ कुछ चकर बकर तो नही..?
धिरेन : (थोडा जेंपते) अरे यार.. तुम बीवीओका प्रोबलेम ही यही हे.. जरा कीसी लडकी या ओरतसे हसके बाते करलो.. तो तुरंत सक करने लगती हो.. मेरा अैसा कोइ चकर बकर नही हे.. समजी..?
पुनम : (चाइ नास्ता देते) ठीक हे.. ठीक हे.. चुपचाप चाइ नास्ता करलो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभी आपको बेन्कपे जानेमे देर नही हो रही..?
कहा तो धिरेन चुपचाप चाइ नास्ता करने लगा.. तब दया कीचनसे दोनोकी नोक जोक सुनकर हस रही थी.. उसे पता था इस नोक जोकसे पुनम धिरे धिरे करते धिरेनसे दुरीया बना रही थी.. धिरेन फटाफट चाइ नास्ता करके जटसे बेन्कपे चला गया.. तब पुनम ओर दया चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तो दोनो अेक दुसरेकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर चाइ नास्ता करने लगी.. तभी....
कन्टीन्यु
ओर उस वजहसे उनको पुनमकी खरी खोटी सुननी पडी वो अलग.. उसे ये भी पता नही चलाकी वो इतनी जल्दीसे कैसे सोगया..? धिरेन नहाते नहाते सोचने लगा.. की वो नीलम ओर भीमाभाइकी बीवी पायल भाभीको कैसे कामोतेजककी गोली खाकर अच्छेसे चोद लेता था.. तो फीर वो पुनमको क्यु नही चोद पाता..? यही सब सोचकर वो नहाकर बहार नीकला तो पुनम उनके रुममे आचुकी थी..
ओर अलमारीसे उनके कपडे नीकालकर बेडपे रख रही थी.. तो धिरेनने मुस्कुराते उनके पीछे आगया.. ओर पुनमको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लीया.. तो पुनम थोडे गुसेसे उनकी ओर देखते घुरने लगी.. ओर धिरेनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तो धिरेनने उनको मुस्कुराते थोडा कसके पकडलीया.. ओर उनके होठोको जबरदस्तीसे चुम लीया.. तब पुनम कोइ प्रतीक्रिया दिये बगैर अैसेही खडी रही.. तभी..

धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो.. आइ अेम सोरी.. मुजे पता हे.. तुम रातकी बातोसे अभी तक मुजसे नाराज हो..
पुनम : (थोडी सख्तीसे) धिरेन.. आपको सब पता हे.. तो फीर आप अपना इलाज क्यु नही करवाते..? मेरी भी कुछ तम्मनाये होती हे.. क्या आप मेरी फीलींग्सको कभी नही समजोगे..?

धिरेन : (थोडा नाराज होते) यार मे ठीकसे तो करता हु.. पता नही तुजे देखते ही सब जल्दीसे होजाता हे.. तो मे क्या करु..? फीर भी तुम कहेती हो तो आज मे कीसी डोक्टरको दीखाकर आजाउगा.. बस..?
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. धिरेन.. पता नही.. आपने मुजे प्रेगनेन्ट कैसे करदीया.. आपको पता हे..? मेरी तम्मना क्या हे..? मुजे बीस्तरमे लंबी रेसका घोडा चाहीये.. जो मुजे सुबह तक प्यार करे..
धिरेन : (सामने देखते थोडी जल्द बाजीमे) पुनो.. मे लंबी रेसका घोडा ही हु.. यकीन नही हे.. तो पुछलो..
पुनम : (थोडा चोंकनेका नाटक करते) पुछलु..? कीसे..?
धिरेन : (गलतीका अहेसास होते ही बातको सम्हालते) वो.. वो.. मेरा मतलब.. आज डोक्टरको दीखा दुगा.. फीर उनको पुछ लेना.. की मे लंबी रेसका घोडा होगया हु.. की नही.. हें..हें..हें..
पुनम : (मनमे हसते बहारकी ओर जाते ) ठीक हे.. आप तैयार होकर नीचे आजाइअे.. ओर हां.. अब अपना इलाज करवाके ही मुजे हाथ लगाइअेगा.. अब मे अैसे प्यासी रहेना नही चाहती.. समजे..?
धिरेन : (थोडा गुस्सेसे) पुनो.. ये क्या बात हुइ..? थोडे दिन वहा रही तो.. तुजे तो बहुत आग लगी हे..

पुनम : (पीछे मुडकर थोडा रुकते) हां धिरेन.. मुजमे बहुत आग हे.. ओर मेरी आग बुजाना आपका फर्ज हे.. धिरेन.. ये सब मुजसे सादी करनेसे पहेले ही सोच लेना चाहीये था.. क्या आप मुजसे जगडा करना चाहते हे..? तो बता दीजीये.. सुबह सुबह मेरा मुड मत खराब कीजीये.. ओर हां.. मे ओर दया बहेन आपके जानेके बाद हमारे गांव जा रही हे.. वो सामतभाइके घरपे.. सोक मनाने.. ओर हम दोनो बससे वापस आजायेगी.. अगर हमे आनेमे देर होजाये तो चीन्ता मत करना.. हमे बडे भैया छोड जायेगे..
धिरेन : (मनमे बडबडाते) कमीनी कहीकी.. जब देखो बडे भैया ओर छोटे भैयाकी मालाही जपती हे.. अगर वो इतने ही प्यारे हे तो मुजसे सादी क्युकी..? पुरी जींदगी उनके पास रहेकर उनसे ही चुदवाती.. जानता हु तेरे बढे भैयाको.. अेक नंबरका अैयास हे वो.. ठरकी कहीका..
पता नही मेरी मां पे क्या जादु करदीया.. उनको फसाकर सादी करके लेगया.. ओर वो भी कमीनी चुदकढ नीकली.. अगर लंड खानेका इतना ही सौक था तो मुजसे कहेती.. घरपे इतना जवान लडकेको छोडके बहार वालोसे चुदवाती थी.. घरपे सीर्फ हम दोनो ही तो थे.. कीसीको क्या पता चलता..?
पुनम : (मनकी बात जानकर गुससे देखते) कुछ कहा आपने..? मनमे क्या बडबडाते हो.. जो कहेना हे साफ साफ कहो..
धिरेन : (थोडा जेंपते) नही तो.. कुछ नही.. तु जा यार.. मे आता हु..
कहा तो पुनम गुस्सेके साथ बहार चली गइ.. तो धिरेन उनको मुह फाडकर देखता ही रहा.. क्युकी आज उन्होने पहेली बार पुनमको इतने गुस्सेमे देखा था.. तो धिरेनका मुड भी थोडा खराब होगया.. ओर वो जल्दीसे अपने कपडे पहेनकर नीचे आगया.. तो देखा घरपे भीमाकी नइ बीवी पायल भाभी आइ हुइ थी.. जो वो ओर पुनम सोफेपे बैठकर हस हसके बाते कर रही थी.. तो धिरेन उनको देखकर खुस होगया.. तभी..
पायल : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) अरे देवरजी.. आगये आप..? बेंन्कपे जानेकी तैयारीया हो रही हे क्या..? आपने बताया नही मेरी देवरानी आगइ हे.. देखो.. कीतनी खुबसुरुरत हे.. अगर पता होताकी ये आगइ हे.. मे तो इनको मीलने पहेले ही आजाती.. हें..हें..हें..
धिरेन : (मुस्कुराकर पास बैठते) अरे भाभी.. मुजे भी कहा पता था.. की ये इतनी खुबसुरत हे.. वरना मे इनको उनके मायके थोडीना जाने देता.. हें..हें..हें.. ओर खुबसुरत तो आप भी कम नही हो.. तभी तो भीमाभाइ आपके पीछे इतना पागल हे.. क्यु पुनो..? हें..हें..हें..
पायल : (सर्मसार होते अेक मुका मारते) चलो.. हटो बदमास.. बीवीके सामने ही मस्तीया करते हो..? देवरानीजी.. इनकी जुबान बहुत चलती हे.. जरा इनको सम्हालके रखीयेगा.. कही हाथसे ना नीकल जाये.. आप इसे मार मारके सुधारदो.. हें..हें..हें.. बहुत बीगड गये हे..
पुनम : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. इनकी सीर्फ जुबान ही चलती हे.. बाकी कुछ नही.. मतलब.. ये अैसे नही हे.. बहुत कम बोलते हे.. भाभी.. थेन्क्स.. आपने धिरेनका इतने दिनो तक खयाल रखा.. वरना ये तो वहा खानेके लीये आते भी नही थे.. तो इनकी बहुत चीन्ता हो रही थी..
धिरेन : (मुस्कुराते सामने देखते मनमे) कमीनी.. कीतना जुठ बोलती हे..
पायल : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) देवरानीजी.. मेरे होते हुअे आपको इनकी चीन्ता करनेकी जरुरत नही हे.. मेरे अेक लौते देवर जो हे.. इनके भाइने मुजे इनका अच्छेसे खयाल रखनेको कहा हे.. क्यु देवरजी..?
धिरेन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अगर खयाल रखने वाली आप जैसी भाभी हे.. तो मुजे चीन्ता करनेकी क्या जरुरत हे..? आपने मेरा बहुत अच्छेसे खयाल रखा.. चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. आप भी बैठ जाइअे..
पायल : (मुस्कुराते) अरे नही.. मे चाइ नास्ता करके ही आइ हु.. ये तो देवरानीजीको मीलनेके लीये आइ थी.. अब आप लोग चाइ नास्ता करलीजीये मे चली.. अब तो आना जाना लगाही रहेगा.. हें..हें..हें..
कहेते पायल धिरेनकी ओर कातील मुस्कान करते नीकलने लगी.. तभी धिरेनने पुनमकी नजर बचाते उनको जटसे आंख मारदी.. तो पायल बहुत ही सरमा गइ.. ओर जटसे नीकल गइ.. तब पुनम धिरेनकी ओर नजर गडाये बैठी थी.. जब धिरेनने पुनमकी ओर देखा तब पुनम सीर्फ उनको ही देख रही थी.. वो भी थोडा गुस्सेसे.. जीसे देखकर धिरेन थोडा जेंप गया.. ओर डाइनींग टेबलपे जाकर बैठ गया.. तो पुनम भी यहा आकर बैठ गइ..
पुनम : (धीरेसे) भाभीके साथ तो बडा फ्लर्ट कर रहे थे..? कही इनके साथ कुछ चकर बकर तो नही..?
धिरेन : (थोडा जेंपते) अरे यार.. तुम बीवीओका प्रोबलेम ही यही हे.. जरा कीसी लडकी या ओरतसे हसके बाते करलो.. तो तुरंत सक करने लगती हो.. मेरा अैसा कोइ चकर बकर नही हे.. समजी..?
पुनम : (चाइ नास्ता देते) ठीक हे.. ठीक हे.. चुपचाप चाइ नास्ता करलो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभी आपको बेन्कपे जानेमे देर नही हो रही..?
कहा तो धिरेन चुपचाप चाइ नास्ता करने लगा.. तब दया कीचनसे दोनोकी नोक जोक सुनकर हस रही थी.. उसे पता था इस नोक जोकसे पुनम धिरे धिरे करते धिरेनसे दुरीया बना रही थी.. धिरेन फटाफट चाइ नास्ता करके जटसे बेन्कपे चला गया.. तब पुनम ओर दया चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तो दोनो अेक दुसरेकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर चाइ नास्ता करने लगी.. तभी....
कन्टीन्यु








