Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 73 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३२

आज पता नही सृतीको देवायतके पास जानेका मन नही हुआ.. तो पुनम करवट लेकर सृतीकी ओर होगइ.. ओर उसे बाहोमे भरते लेटने लगी.. तभी सृतीके फोनपे मेसेजकी रींग टोन बजी.. तो सृती जटसे बेडपे बैठ गइ ओर अपना मोबाइल उठाकर देखने लगी.. तो उनकी फ्रेन्डने सृतीको फोटो सेन्ड करदीया था.. ओर जैसे ही सृतीने फोटो देखली.. सृतीने जोरोसे मोबाइलको बेडपे पटक दीया.. तो पुनम भी जटसे बेडपे बैठ गइ.... अब आगे

पुनम : (थोडी चीन्तासे) सृतीदी.. क्या हुआ..?

सृती : (आंसु बहाते) दीदी.. वोही.. जीसका मुजे डर था.. ओह.. गो..ड..

सृती अपना चहेरा अपनी हथेलोओमे छुपाते जोरोसे रोने लगी.. तो पुनम सबकुछ समज गइ.. ओर उसने फोन करके मंजुको अकेली रुममे बुला लीया.. तो मंजु अपने आपको सही करके धीरेसे पुनमके रुममे घुस गइ ओर जटसे दरवाजा बंध करके सृतीके पास आकर बैठ गइ.. तब पुनम ओर मंजु अ‍ेक दुसरेकी ओर चीन्ताके भावसे देखने लगी.. ओर मंजुने सृतीको बैठेही अपनी बाहोमे थाम लीया..

मंजुला : (पीठको सहेलाते धीरेसे) सृती.. सांत होजा.. क्या कर रही हे..? सब लोग आराम कर रहे हे.. तो सुन लेगे.. चुप होजा.. ओर बता क्या हुआ..?

सृती : (कंधेपे सर रखते रोते) मंजु.. मम्मीने अ‍ैसा क्यु कीया..? जो मुजसे इतनी बडी बात छीपाइ..

मंजुला : (धीरेसे) सृती पहेले सांत होजा.. हम आरामसे बैठकर बात करते हेनां.. चल पहेले सांत होजा..

बडी मुस्कीलसे मंजुने सृतीको सांत कीया.. तब सृती खडी होकर बाथरुममे अपना हुलीया ठीक करने चली गइ.. तभी पुनम ओर मंजु धीरेसे बाते करने लगी..

पुनम : (धीरेसे) दीदी.. अब क्या करेगे..? उनकी डोक्टर फ्रेन्डने तसवीर भेजदी.. वो भुमी बुआ ओर नीर्मला आंटी की हे.. आप सम्हाल लेना..

मंजुला : (धीरेसे) पुनो.. अब सम्हालना मुजे नही.. तुजे ओर लखनको हे.. अब असली खेल सुरु हो गया हे.. तुम दोनो वहा जाकर इसे सम्हाल लेना.. अभी तो मे इनसे बात करती हु..

तभी सृती अपना मुह साफ करते वापस बहार नीकलती हे.. उनके चहेरेपे मायुसी छाइ हुइ थी.. ओर वो आकर चुपचाप मंजु ओर पुनमके बीच बैठ जाती हे.. तो मंजु ओर पुनम उनकी ओर देखते हे..

सृती : (सामने देखते) मंजुदी.. तुम ओर पुनोदीदी तो सब जानती थीनां..? ओर ताजुबकी बात हे.. इस बारेमे तो खुद नीर्मला आंटी थी जानती हे.. जो सीर्फ मुजे ही नही पता था.. मंजुदी.. मेरे साथ आपने अ‍ैसा क्यु कीया..?

मंजुला : (जानते भी अनजान बनते) सृती.. तुम क्या बोल रही हे..? हम दोनो क्या जानती थी..? मम्मीको क्या पता हे..? मेरी तो कुछ समजमे नही आता..

सृती : (गुस्सेसे मंजुकी ओर देखते) मंजुदी.. तुम कीतनी भोली बनती हो.. ना सीर्फ मम्मीने मुजे धोखा दीया हे.. बल्की तुम दोनोने भी मुजे अंधेरेमे रखा.. फीर भी मेरे मुहसे सुनना चाहती हो तो सुनो.. मे मम्मीकी प्रेगनन्सीके बारेमे बात कर रही हु.. ओर अभी मेने बहार आइ तब देखा भी.. उनका पेट कीतना बढ गया हे.. मे अ‍ेक डोक्टर हु.. पेट युही नही बढता.. उनके पेटमे कमसे कम पांच छे महीनेका गर्भ हे.. क्या ये सच हेनां..?

मंजुला : (सर जुकाये खामोस बेठी रही) .....

सृती : (थोडा जोरोसे) मंजुदी.. मे आपसे कुछ पुछ रही हु.. मुजे सब सच बतादो.. क्या ये सच हेनां..?

मंजुला : (नजर जुकाते हां मे गरदन हीलाते) हां.. सृती.. वो.. वो..

सृती : (सामने देखते) मंजुदी.. अब बात छीपानेका कोइ फायदा नही.. बस.. इतना बतादो.. इनके लीये कोन जीम्वेवार हे.. मम्मीका कीसके साथ अफैर चल रहा हे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना ही जानना हे..

मंजुला : (सामने देखते) मत जानो.. सचाइ जानकर दुख होगा तुजे.. मत भुलो भुमी आंटी भी हममे से अ‍ेक हे.. जो अपना फर्ज नीभाने इस धरतीपे आइ हे.. उसे भी अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका हक हे..

सृती : (गुस्सेसे सामने देखते) अब ये सब रहेनेदो मंजुदी.. क्या आपको लगता हे.. अ‍ैसी कहानीओ से मे मान जाउगी..? मत भुलो मे अ‍ेक डोक्टर हु.. ओर कमसे कम अ‍ैसी अयासीओ के लीये तो बीलकुल नही मानती.. जहा अ‍ैसी कहानीओके आडमे सीर्फ हवसका खेल चल रहा हो.. बस.. सीर्फ इतना बतादो.. की मम्मीका अफैर कीसके साथ चलता हे.. इस नाजायज बच्चेका बाप कौन हे..?

मंजुला : (सामने देखते) सृती.. वो बच्चा कोइ नाजायज नही हे.. समजी..?

सृती : (सामने देखते) अच्छा..? मम्मीकी उमर देखी हे तुमने..? ओर वो भी अ‍ेक विधवा.. वो इतनी हवसी कैसे हो सकती हे..? पता नही कीसके साथ मुह काला करेके उनका पाप अपने पेटमे पाल रही हे..

मंजुला : (थोडा गुस्सेमे) सृती.. मुह सम्हालके बोलो.. ये कोइ पाप नही हे.. भुमी आंटी विधजा नही हे.. आंटीने कायदेसे सादी कीहे उनसे.. ओर ये बच्चा भी उनके पतीका हे..

सृती : (चौंकते) व्होट..? मम्मीने सादी कीहे उनसे..? ओर वो भी इस उमरमे..? तुजे पता हे इस उमरमे बच्चे पैदा करना कीतना खतरनाक होता हे..? कल जब आपकी बात सुनीनां..? तब मुजे लगा मम्मीने अपनी जवानीमे बच्चेके लीये मामासे रीलेशन बनाया होगा.. तब मुजे इतना दुख नही हुआ.. जीतना आज इनके करतुत देखके हुआ.. आज पता चला.. वो कीतनी हवसी ओरत हे.. जो कीसीसे भी सादी करके अपने तनकी आग बुजाती हे..

मंजुला : (थोडा जोरोसे) चुप.. अ‍ेकदम चुप.. तुम समजती क्या हो अपने आपको..? जो कबसे अनाप सनाप बके जा रही हो..? तुजे पता हे तु कीसके बारेमे बोल रही हे..? अरे वो मम्मी हे तेरी.. जो तुजे इतना पढा लीखाके डोक्टर बनाया.. की तुम तेरी तमीज भी भुल गइ..? क्या तुजे तेरी डोक्टरीपे इतना घमंड हे..? जो तुम अ‍ेक तेरी दोस्तकी बातोमे आगइ..

सृती : (फोनपे तसवीर दीखाते) मंजुदी.. मे सीर्फ हवामे बात नही कर रही हु.. ये देखलो.. मम्मी ओर नीर्मला आंटीकी तसवीर हे.. वो दोनो खुद वहा चेक करवाने गइ थी.. ये तसवीरतो जुठ नही बोलेगी..? ओर ये देखो.. उनकी प्रेगनन्सीकी रीपोर्ट.. जो उनके मोबाइलमे आइ थी.. मंजुदी.. आपको मेरी कसम.. बस.. सीर्फ उस आदमीका नाम बतादो.. जीसने मम्मीके साथ सादी की.. मुजे ओर कुछ नही जानना..

मंजुला : (अपने सरपे हाथ रखते) ओह.. गोड.. सृती तु क्यु जीद कर रही हे..? मत जान.. तुजे ओर दुख होगा..

सृती : (खडी होते बहारकी ओर जाते) ठीक हे.. मत बताओ.. मे अभी उनसे ही पुछ लेती हु.. की तुम कीसका पाप लेकर घुम रही हो.. वो तो बतायेगीनां..?

मंजुला : (पीछे दोडते) सृती.. रुकजा.. तुजे मेरी कसम.. मत जा वहा.. उसे आराम करने दे..

लेकीन तबतक सृती दरवाजा खोलकर जा चुकी थी.. तो मंजु भी उनके पीछे पीछे जाने लगी.. पुनम भी थोडा गभराते मंजुके पीछे चली गइ.. मंजु सृती तक पहोंचे इनसे पहेले ही सृती जोरोसे दरवाजा खोलकर अपनी मम्मीके रुममे चली गइ.. तो दरवाजेकी आवाज सुनकर नीर्मला के साथ भुमीका भी जाग गइ.. ओर दोनो सृतीका रुप देखते ही बेड पे जटसे बैठ गइ.. ओर सृतीकी ओर देखने लगी..
 
सृती : (थोडा जोरोसे) मम्मी.. ये सब क्या हे..? आपने अ‍ैसा क्यु कीया..?

भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) बेटा क्या हुआ..? क्या कीया मैने..?

नीर्मला : (थोडा बहुत समज गइ) सृती बेटा.. तु पहेले यहा सांतीसे बैठजा.. आरामसे बात कर..

तबतक मंजु ओर पुनम भी रुममे आ चुकी थी.. तभी सृतीने अपनी मम्मीकी ओर घुरते उनको सीधा अपना मोबाइल ही पकडा दीया.. तो इनमे भुमीके साथ नीर्मला भी देखने लगी.. जैसे ही दोनोने अपनी तसवीर देखी.. दोनो समज गइकी इनकी चोरी पकडी गइ हे.. ओर अब बहुत बडा हंगामा होने वाला हे.. इसके लीये दोनो पहेलेसे ही र्पीपेर थी.. तब नीर्मलाने बातको सम्हालते सृतीका हाथ पकडा..

नीर्मला : देखो बेटा तु पहेले यहा सांतीसे बैठजा.. मे तुजे सब समजाती हु..

सृती : (हाथ जटकते) आंटी.. आप क्या समजाओगी मुजे..? यहीना.. की मेरी मांने कीसके साथ मुह काला कीया.. ओर इनके पेटमे कीसका पाप पल रहा हे..? वहीनां..?

भुमीका : (जोरोसे चीलाते) सृती.. मुह सम्हालके बोलो.. ये कीसीका पाप नही हे.. मेरे पतीकी नीशानी हे.. मेरे देवुकी.. देवु मेरा पती हे.. समजी..?

सृती : (सामने बडी आंखोसे घुरते) व्होट..? देवु..? पती..? अ‍ेक विधवाका पती..? वो भी इस उमरमे..? बोलनेसे पहेले आपको सरम भी नही आइ.. अरे वो आपकी बेटीका पती हे.. आपका दामाद हे वो.. अपनी हवस मीटानेके लीये क्या आपको मेरा ही पती मीला था.. मोम.. आप मेरे साथ अ‍ैसा केसे कर सकती हो..?

मंजुला : (आग बबुला होते अ‍ेक तमाचा मारते) स..टा..क.. सृती.. अब आंटीके बारेमे अ‍ेक सब्द भी कहानां.. तो मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. बहुत बोल लीया तुमने.. तुजे सब जानना हेनां.. तो सुन.. तेरी सादीसे पहेले ही आंटीने देवुसे सादी करली थी.. ओर ये बच्चा उन्हीका हे.. समजी..?

सृती : (आंसु बहाते) मंजुदी.. तो फीर देवुने मुजसे सादी क्यु की..? क्या कभी मां बेटीका अ‍ेक ही पती हो सकता हे..?

मंजुला : (सामने देखते) क्यु..? तु भीतो प्यार करती थी देवुसे.. सादी करना चाहती थीनां इनसे..? तुजे तो सब पता हे.. हम बहारके मर्दसे सादी नही करते.. फीर भी सुनना हे तो सुन.. ये हमारे पतीका बच्चा हे.. मेरे देवुका.. जो वो आंटीके भी पती हे.. ओर सुन.. जीस तराह तुम ओर भुमी आंटी इनकी बीवी हे.. उसी तराह मे ओर मेरी मां भी इनकी बीवीया हे.. मेरे देवुकी पहेली बीवी मेरी मां हे.. समजी..?

तबतक भुमीकाके रुमसे सोरकी आवाज सुनकर चंदा ओर देवायत भी अपने कपडे पहेनकर आ चुके थे.. तो उपरसे भावना लता ओर नीलम भी रुमके बहार खडे रहेते अंदरकी बात समजनेकी कोसीस कर रहे थे.. इतना सुनते ही भुमीका अपना चहेरा अपने ही हथेलीओमे छुपाते फुटफुटके रोने लगी.. तो दुसरी ओर नीर्मला भुमीका ओर देवुकी बात सुनकर चंदा भी सोक्ट होते मुह फाडके मंजुकी ओर देखती रही..

तो सृती भी देवायतको देखते ही उनकी ओर गुस्से से देखते आंसु बहाने लगी.. ओर अचानक देवुकी ओर जाते उनके गालपे अ‍ेक तमाचा जड दीया.. फीर रोते हुअ‍े दोनो हाथसे सीनेमे मुका मारने लगी.. तो देवायतने सृतीको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो सृती आग बबुला हो गइ.. ओर जटसे देवायतकी बाहोसे छुटते उनसे दुर जाकर खडी होगइ.. फीर रोते हुअ‍े कहेने लगी..

सृती : (जोरोसे रोते हुअ‍े) डोन्ट टच मी.. छोडो मुजे.. आजके बाद मुजे कभी हाथ भी मत लगाना.. तुम कीतने घटीया इन्सान हो.. अपनी सासके साथ ही मुह काला कीया.. छोडो मुजे.. अब मुजे आपके साथ कोइ रीस्ता नही रखना.. मे जा रही हु..

मंजुला : (उनका हाथ पकडते रोकते) सृती.. तु मेरी बात सुन..

मंजुला : (गुस्ससे हाथ छुडाते) नही मंजुदी.. अब मुजे कीसीकी बात नही सुनना.. जो सुनना था ओर देखना था देख लीया.. अब इस आदमीसे मेरा कोइ वास्ता नही.. मे जा रही हु..

कहा तो देवायत भुमीके पास चला गया.. ओर उनके पास बैठते उसे अपनी बाहोमे भर लीया.. तो भुमीका देवुके सीनेमे सर छुपाकर रोने लगी.. सृतीसे ये सब तमासा देखा नही गया.. फीर वो कुछ नही बोली.. ओर अपने आंसु पोछते अचानक रुमसे बहार जाने लगी.. तभी अचानक दरवाजेके पास खडी होगइ.. ओर मुडके अ‍ेक पल देवायतके सामने देखा.. सब लोग अवाचक होते सृतीकी ओर देख रहे थे..

तभी अचानक सृती वापस देवायतके पास जाने लगी ओर उनके सामने जाकर खडी होगइ.. ओर गुस्सेसे देवायतकी ओर देखते उसने अपने गलेसे देवायतने पहेनाया मंगलसुत्र खीचते तोड दीया.. ओर देवायतका हाथ पकडकर उनको हाथोमे थमा दीया.. फीर बीना कुछ कहे वो रुमसे नीकल गइ.. ओर पुनमके रुममे जाकर अपनी बेग लेकर अपने कपडे समेटने लगी.. तो पीछे पुनम ओर भावना लता भी दोडकर चली गइ..

पुनम : (सृतीको रोकते) दीदी.. मत जाइअ‍े.. आपको मेरी कसम..

सृती : (आंसु बहाते) नही दीदी.. आज मुजे कोइ कसम नही रोक सकती.. मत दीजीये कसम.. आजसे मेरा इस घरसे नाता टुट चुका हे.. जाने दीजीये मुजे..

सृती अपनी बेग पेक कर रही थी.. तो लता दोडकर वापस मंजुके पास आइ.. ओर उसे सृतीके जानेकी बात कही.. तो मंजु भी पुनमके रुममे चली गइ.. तो वहा पुनम सृतीको ना जानेके लीये समजा रही थी.. सृती रोते हुअ‍े यहा रुकनेके लीये इन्कार कर रही थी.. ओर अपने कपडे बेगमे भरते नीकल ही रही थी की मंजु अंदर आगइ.. सृती उनकी ओर देखते बेग लेकर नीकलने लगी..

मंजुला : (सामने देखते) सृती.. कहा जा रही हे..? बेग रख अपना.. तु कही नही जायेगी..

सृती : (आंसु बहाते सामने देखते) मंजुदी.. जीस घरमे रीस्तोकी मर्यादा ना हो.. ओर घरका मर्द कीसीके साथ जब चाहे वासनाका नंगा नाच कर रहा हो.. इस घरमे मुजे नही रहेना.. मे हमेसाके लीये जा रही हु.. अब मेरा देवुके साथ कोइ वास्ता नही हे.. मे इस रीस्तेको तोड चुकी हु..

मंजुला : (गुस्सेसे सामने देखते) इस घरकी चोखटके बहार कदम रखनेसे पहेले अ‍ेक बार फीर सोचले.. तुजे वापस यही आना हे.. अगर कदम बहार रखा तो फीर यहा वापस आना तेरे लीये मुस्कील होजायेगा..

सृती : (आंसे पोछते) हां.. सोच लीया हे मेने.. ओर देख भी लीया जो देखना था.. मुजे नही रहेना यहा.. ओर हां.. देवुसे कहेना मुजे इनसे डीवोर्स चाहीये.. लीगल पेपर मे भेज दुगी..

मंजुला : (गुस्सेसे सामने देखते) ठीक हे तो फीर चलीजा.. हम नही रोकेगे तुजे.. अ‍ेक दिन तु इस घरमे आनेके लीये तरसेगी.. तु जीसे वासनाका नंगा नाच केह रही हेनां.. वो हम सबकी जींदगीका अ‍ेक अहेम हिस्सा हे.. जो अ‍ेक दिन तुम भी इस घरके सभी मर्दोके साथ वो खेल खेलनेके लीये तरसेगी.. जा चली जा.. अब यहा कभी मत आना.. रही बात आंटीकी.. तो कान खोलकर सुनले.. आंटी अब हमारी जीम्वेवारी हे.. इस घरकी बहु हे.. वो बच्चा भी पैदा करेगी.. ओर वहा भी रहेगी.. अपने ससुरालमे.. समजी.. जा नीकलजा..

कहा तो सृती अ‍ेक पल मंजुकी ओर देखती रही.. फीर दुसरे ही पल अपना आंसु पोछते बेग उठाकर अपनी कार लेकर नीकल गइ.. तो मंजुकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर वो पुनमकी ओर देखने लगी.. तो पुनम सब कुछ समज गइ ओर वो दोडकर मंजुके गले लग गइ.. फीर मंजुने पुनमसे अलग होकर उनकी आंखोमे देखा.. लता ओर भावना.. दोनोकी ओर देखती रही.. तभी..
 
मंजुला : (धीरेसे) मेरी बच्ची.. जीसका डर था वो हो गया.. अब तुम ओर लखन सबकुछ सम्हाल लेना..

पुनम : (गले लगते) जी दीदी.. आप सृती दीदीकी चीन्ता मत करना.. अभी वो गुस्सेमे हे.. जब उनका गुस्सा सांत होजायेगा मे सामको ही उनसे बात कर लुगी..

मंजुला : पुनो.. चल अब वक्त आ गया हे.. हम तेरे बारेमे भी चंदा दीदीसे बात करले..

पुनम : (सामने देखते) नही दीदी.. क्या उसे अभी सब बताना जरुरी हे..? वो आज ही तो आइ हे.. हम कल आरामसे बात करेगेनां.. वरना वो हम मेसे कीसीको फेइस नही करपायेगी.. ओर वो भी टुट जायेगी..

मंजुला : (सामने देखते) नही पुनो.. सब अ‍ेक ही साथ नीपट जाये तो अच्छा हे.. क्युकी वो धिरेनसे बात कीये बीना नही रहेगी.. ओर धिरेन उनको सब बतादे इनसे पहेले हम ही उनको सब बता देते हे..

पुनम : (रोकते) नही दीदी.. तब तो बहुत अच्छा हे.. हमे चंदा भाभीसे कुछ कहेनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. ओर वो खुद धिरेनको यहा बुला लेगी.. तब मे सबके सामने हमारे डीवोर्सके पेपर उनके मुहपे मारुगी..

मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) हंम.. मेरी बेटीका दिमाग बहुत तेज चलने लगा हे.. ठीक हे.. जा नही बताती.. अब तुम लोग तैयार होजाओ ओर सादीमे चले जाओ.. मे यहा आंटीके पास हु..

फीर पुनम लता भावना सबलोग सादीमे जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो मंजु वापस नीर्मलाके रुममे चली गइ.. वहा नीर्मला चंदा ओर देवायत भुमीकाको सांत करके समजा रहे थे.. तभी..

नीर्मला : (मंजु अंदर आते ही) मंजु.. सृती कहा हे..?

मंजुला : (सामने देखते) मम्मी.. वो चली गइ.. सहेर.. अपने घर..

नीर्मला : (खडी होते) अरे..? वो अ‍ैसे कैसे चली गइ..? बीना कुछ बताये.. रोको उसे..

मंजुला : नही मम्मी.. जाने दीजीये उसे.. वो चली गइ.. अब भुमी आंटी यही रहेगी.. हमेसाके लीये.. हमारे पास.. कुछ दिन उसे वहा अकेली रहेने दीजीये.. जब उनका गुस्सा सांत होजायेगा तो पुनो उनसे बात करलेगी.. आप सृतीकी चीन्ता मत करो..

भुमीका : (थोडी चीन्तासे) बेटा वो वहा अकेली कैसे रहेगी..? उसे कहो.. हमारे लखनके घर चली जाये..

चंदा : हां मंजु.. सृतीका उनके घरपे अकेले रहेना ठीक नही.. उसे कहो हमारे घरपे चली जाये..

मंजुला : (मुस्कुराते) आंटी.. सृतीकी फीकर मत करो.. वो कइ बार घरपे अकेली रेह चुकी हे.. फीर भी यहासे जाते ही लखन उसे हमारे घरपे लेआयेगा.. अभी तो वो थोडी नाराज हे.. जब वो सहेर पहोच जाये..तब पुनो उनसे बात कर लेगी.. कल सादी खतम होते ही लखनको वहा भेज दुगी.. ओर देवु.. आप भी तैयार होजाइअ‍े.. आपको सादीमे नही जाना क्या..?

देवायत : (मंजुके सामने देखते) मंजु.. तुम भुमी..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे आप अपनी इस बीवीकी चीन्ता मत करो.. इसे हम सब सम्हाल लेगे.. अ‍ेक दिनतो ये सब होना ही था.. ओर सुनो.. अब आप भुल जाइअ‍े सृतीको.. मुजे इन तीनोसे कुछ जरुरी बात भी करनी हे.. तो आप आरामसे जाइअ‍े..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे..

कहेते देवायत चला गया.. तो चंदा नीर्मला ओर भुमीका तीनो मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही.. ओर देवायतके जाते ही मंजुने दरवाजा बंध करदीया.. फीर तीनोके पास आकर बैठ गइ.. मंजुने तीनोको देवायतकी इतनी सारी बीवीया होनेकी वजहसे जो मुस्कीले हो रही हे.. ओर इसके लीये खुदने ओर देवायतने मीलकर दोनो भाइओके साथ रीलेशनको लेकर जो फैसला लीया हे उनके बारेमे बता दीया.. जीसे सुनकर तीनो ही आस्चर्यसे मंजुको देखती रही..

ओर सीर्फ यही नही.. पुनम लखनकी बातको छोडकर उसने लता देवायतके बारेमे भी तीनोको बता दीया.. फीर आने वाले वक्तमे इस गांव ओर सहेरमे कौनसे बदलाव होगे.. इनकी भी बात बतादी.. जीसे सुनकर तीनो ही सोक्ट होगइ.. फीर लखनको कीस परीस्थीतीमे जडी बुटी पीलाइ वो भी नीलम ओर धिरेनका नाम लीये बगैर तीनोको बता दीया.. ओर मंजुके सामने आस्चर्यसे देखते असंमजमे पड गइ.. तब..

नीर्मला : (आस्चर्यसे देखते) बेटा.. ये तुम क्या बोल रही हो..? इतना बडा फैसला..? क्या सब लोग तुम्हारे इस फैसलेको मानेगे..? ओर लखनको तो हम अपना बेटा मानती हे..

भुमीका : हां मंजु.. नीमुकी बात सही हे.. मानाकी वो भी इस खानदानका खुन हे.. वो राजाका अंस भी हे.. लेकीन उनके साथ..? नही नही.. ये हमसे नही होगा..

चंदा : (थोडा गुस्सेसे) कमीनी.. तुम दोनोने बीना सोचे समजे हमसे पुछे बगैर फैसला कैसे कर लीया..? अ‍ेक बार हमसे भी पुछ लेती.. अब हमारे देवरको भी हमारे उपर चडाओगी..? क्या हम जा रहेथे तब तुम जो बात कहेने वाली बात थी.. वो यही तो नही..?

मंजुला : (जोरोसे हसते) हें..हें..हें.. हां दीदी.. लेकीन.. मे आप तीनोको कहा केह रही हुकी लखनके साथ रीलेशन रखो.. वो सब आपकी मरजी.. मेने कहा तो सही.. जो भी होगा अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. ओर मंजुरीसे होगा.. मेने अपना फैसला कहा कीसीपे जबरदस्तीसे ठोक दीया हे.. बाकी आपकी मरजी.. मेने जो फेसला लीया उनके बारेमे आपको बता दीया.. अब आपको देखना हे.. की अपने देवरको अपने उपर चडाना हेकी नही.. हें..हें..हें..

चंदा : (दांत पीसते अ‍ेक मुका मारते) मंजुदी.. तुम कीतनी कमीनी हो.. बस.. अब यही बाकी रेह गया था..

भुमीका : (मुस्कुराते) मंजु.. क्या ये सही होगा..? क्या इसीलीये तुमने लखन बेटेको वो जडी बुटी पीलाइ हेनां..? हमने आते ही देखा.. उनमे कीतना बडा बदलाव आ चुका हे.. जब वो हमसे गले मीला.. बापरे कीतना बडा लग रहा था.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) क्या..? आते ही देख भी लीया.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाकर हसते) कमीनी.. भुमीदीदीका कहेना हे.. उनके पेन्टके उभारको देखा हे.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (जोरोसे हसते) दीदी.. तो मेने कब कहा.. की तीनोने पेन्ट नीकलकर देखलीया.. हें..हें..हें..

चंदा : (पीठमे अ‍ेक मुका मारते हसते) कमीनी.. तु नही सुधरेगी.. कुछ तो सरम कर.. ये मा ओर मौसी हे तेरी.. मानाकी तु मेरी सौतन हे.. लेकीन हुतो मेभी तेरी मौसी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. ये मजाक नही हे.. सुनो.. आपसे अ‍ेक ओर बात कहेती हु.. जबतक इस खानदानके मर्दसे प्यार करती रहोगी.. तबतक इस घरकी सभी ओरते अ‍ैसे ही जवान रहेगी.. ओर सोचो.. अ‍ेक वक्त अ‍ैसा भी आयेगा.. जब हमारे पती इतने काबील नही रहेगे.. जो आप सबको संतुस्ट करपाये.. धीरे धीरे उनकी काम शक्तिया खतम होती जायेगी.. तब आप लोग क्या करोगी..?

नीर्मला : (थोडी चीन्तासे) हम सब जवान रहेगी..? काम शक्ति खतम होजायेगी..? मगर क्यु..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. हमारे खानदानसे जुडी कोइ भी ओरत सामान्य नही हे.. या तो वो अप्सराअ‍े हे या फीर परीया.. वो सभी इस घरके मर्दके साथ संभोग करती रहेगी तबतक वो अ‍ैसे ही जवान रहेगी.. ओर रही बात देवुकी.. तो सब मेरे बारेमे तो जानते ही हे..

मुजे दुसरे जन्ममे हमारी भावुकी कोखसे फीरसे इस घरमे आना हे.. ओर जवान होते ही मे मेरे विजयकी बीवी होजाउगी.. जब मे चली जाउगी तब देवु.. टुट जायेगा.. ओर उनको कामसे इन्ट्रेस्ट कम होता जायेगा.. तब मेरे विजयके बडे होने तक हमारा लखन ही अ‍ेक सहारा होगा.. तब आप लोग क्या करोगी..?

नीर्मला : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. कमीनी तुम भी क्या बाते लेकर बैठ गइ.. जा चाइ बाइ पीलादे.. तब की तब सोचेगे.. अभी तो हमारा देवु हे.. हम इसीसे काम चला लेगे.. तेरी बाते सुनकर तो हमारा दिमाग ही खराब हो गया..

चंदा : (खडी होकर जाते) दीदी.. आप लोग फ्रेस होजाओ.. मे चाइ बनाकर लाती हु.. ये तो कमीनी अ‍ैसी ही बाते करती रहेगी.. हें..हें..हें..
 
भुमीका : (चंदाके जाते ही) मंजु.. क्या ये सब सच मे होगा..? इस बात पे तेरी सब सौतने मान गइ..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां आंटी.. आपतो जानती हे हम सभी ओरते कीतनी कामी होती हे.. तो मेरी ज्यादातर सोतने इस फैसलेके लीये मान गइ हे.. ओर इस बातको लेकर बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हे.. अब देखते हे सब कैसे आगे बढती हे.. हो सकेतो आपभी सोचो..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) जा जा.. काम कर अपना.. कमीनी सबकी सब चुदकड हे.. हें..हें..हें.. (धीरेसे) क्युकी तुजे तो सब पता चल जाता हे.. तो बतानां.. इस बारेमे तेरी क्या राइ हे..? हें..हें..हें..

मंजुला : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) मोम.. सच कहु..? हम सब इसीलीये तो यहा जन्म लेकर आइ हे.. ताकी हम हमारे स्वामीको खुस रख सके.. ओर हमारी प्यास भी बुजती रहे.. अगर आप सब चाहोतो लखनके साथ इन्टीमेट हो सकती हो.. यहा कीसीपे कोइ जोर जबरदस्ती नही हे..

मोम.. आप दोनो तो जानती हो.. की हमारी जींदगीमे हम सेक्सको कीतना इम्पोर्टन्ट मानते हे.. वहाकी तराह यहा भी कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. आप जब चाहो जीसके साथ चाहो सेक्स कर सकती हे.. इसी से तो हमारी दुनीया कायम रहेती हे..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) मंजु.. क्या सचमे देवुकी काम शक्तिया खतम.. आइ मीन..

मंजुला : (बीचमे ही रोकते) हमं आंटी.. समयके साथ सब बदलाव होगे.. सीर्फ मुजे नही देवु लखन आपको मम्मीको.. सबको दुबारा जनम लेकर यहा वापस आना होगा.. आप सबलोग मेरी ही संतान हो.. यहा तो रीस्ते सब नामके ही हे.. वो मेरा बेटा हे.. मेरा पती हे.. मेरा देवर हे.. मेरा दामाद हे.. ये सब दुनीयाको दीखानेके लीये हे.. बाकी आप भुल जाओ कोन कीसका क्या लगता हे.. बस.. अपनी लाइफको अ‍ेन्जोय करो..

नीर्मला : (मुस्कुराते धीरेसे) हां.. सही कहा तुमने.. मंजु.. तो क्या हमारी चंदा भी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. वो भी तो हम मेसे अ‍ेक हे.. मोम.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? हम मेसे सबसे ज्यादा कामी ओरत हेनां तो वो चंदा दीदी.. ओर हमारी सृती हे.. देखना आपसे पहेले तो वो लखनके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. इनका रीलेशन ना सीर्फ हमारे लखनसे होगा.. बल्की हमारा विजय ओर वो राजा.. जो मेरी कोखसे जन्म लेगा.. सबके साथ सभी ओरते मजा करेगी..

भुमीका : (हसते) नीमु.. हमारी चंदा तो हमसे भी दो कदम आगे नीकली.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) कमीनी.. वो तो पहेलेसे ही चुदकड हे.. मुजे ओर राजीवको भी छुप छुपकर देखती थी.. जब हम दोनो सेक्स करते थे.. फीर वही खडे खडे अपनी मुनीयाको सहेलाती थी.. इसीलीये तो हमने उनकी जल्दी सादी करवादी.. लेकीन मंजु तब हमारा देवु..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. तब सायद आप दोनो ओर देवुभी नही होगे.. क्युकी आपको भी फीरसे जन्म लेकर वापस आना हे.. ओर मेरा देवु ही वो राजा हे जो मेरी कोखसे जन्म लेगा.. लेकीन अभी आप इन सबमे मत पडीये.. मोम.. चंदा दीदी आये.. इनसे पहेले मुजे आप दोनोसे अ‍ेक जरुरी बात कहेनी हे..

भुमीका : (हसते) क्या..? अब हमे कीसी ओरसे चुदवानेका इरादा तो नही..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सीरीयस होते) नही आंटी.. बात थोडी सीरीयस हे.. देखना इस बारेमे अभी चंदा दीदीको पता ना चले.. वरना इसको अभी सम्हालना मुस्कील होजायेगा..

नीर्मला : (सीरीयस होते धीरेसे) क्या बात हे बेटा..? बता.. चंदाको पता नही चलेगा.. बोल..

मंजुला : (धीरेसे) मोम.. हमारा धिरेन ओर पुनो अलग हो चुके हे.. मतलब.. धिरेनने पुनोको डीवोर्स दे दीया हे.. क्युकी वो कीसी ओरको प्यार करता हे.. ओर उनसे सादी करना चाहता हे..

नीर्मला : (सोक्ट होते मुह फाडते) क्या..? मंजु.. ये तुम क्या केह रही हो..? लेकीन कब..?

मंजुला : (धीरेसे) मोम.. दो दिन पहेले.. दोनोमे खुब जगडा हुआ.. पुनोको दुसरी ओरतसे सादी करनेसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. लेकीन धिरेन खुद पुनोको छोडना चाहता हे.. ओर दुसरी बात.. दोनोकी सेक्स लाइफ भी अच्छी नही हे.. ओर वो चंदा दीदी ओर देवुको भी बुरा भला केह रहा था.. मोम.. धिरेनकी सोच बहुत ही घटीया हे.. उसने पुनोसे सादी इसीलीये की.. ताकी वो अपनी मम्मीका बदला हमारे देवुसे ले सके..

नीर्मला : (आस्चर्यसे) मम्मीका बदला देवुसे ले सके मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : मोम.. चंदा दीदी ओर देवु उनकी सादीसे पहेले दोनो उनके घरपे अक्सर मीला करते थे.. तो अ‍ेक दिन धिरेनने सब देखलीया होगा.. ओर उसे दोनोके बारेमे पता चल गया.. तबसे उसने देवुसे बदला लेनेकी ठानली थी.. ओर पुनोसे सादीसे पहेले ही वो कीसीको प्यार करने लगा था..

ओर उनका मक्सद पुनोको उनकी सादीसे पहेले ही प्रेगनेन्ट करके छोड देना था.. लेकीन पुनोने उनको सादीसे पहेले सेक्स करनेके लीये मना करदीया था.. तो उसे मजबुरन पुनोसे सादी करनी पडी.. ओर अब वो प्रेगनेन्ट होगइ हे.. तो उसने पुनोको छोड दिया..

भुमीका : (चीन्तासे) हे भगवान.. क्या हो गया हे इस लडके को..? दीखनेमे तो कीतना भोला लगता हे.. जब चंदाको पता चलेगा तो उनपे क्या बीतेगी..

मंजुला : (धीरेसे) मोम.. सीर्फ इतना ही नही.. धिरेन पुनोको बदचलन समजता हे.. कहेता हे वो बच्चा तेरे यारका होगा इसे गीरवादे.. ओर यही नही.. वो चंदा दीदीको भी पुनमकी तराह बदचलन समजता हे.. उसे रंडी तक केह दिया.. पुनोने वो सारा जगडा रेकोर्ड करलीया हे.. जो मेने भी सुना..

नीर्मला : (थोडी चीन्तासे) मंजु.. हमारी चंदाकी जींदगी भर जवानीमे विधवा होनेके बाद कीतनी विरान होगइ थी.. ओर उनकी जींदगीमे हमारा देवु आगया ओर उनसे सादी की.. अब वो यहा कीतनी खुस हे.. मानो उनकी जींदगी ही बदल गइ.. उनकी जींदगीमे आप लोग खुसीओकी बहार लाये.. ओर अब धिरेनके बारेमे सुनेगी तो उनपे क्या बीतेगी..?

भुमीका : (धीरेसे) मंजु बेटा.. तो फीर अब हमारी पुनमका क्या होगा..? तुजे तो सब पता हेनां..?

मंजुला : हां आंटी.. मेने पुनोके बारेमे भी सोच लीया हे.. आप दोनो सीर्फ देखती जाइअ‍े.. अब कुछ ही दिनमे इस घरमे बहुत बडा बदलाव होगा.. मे अभी सीर्फ इतना केह सकती हु.. की आने वाले दिनोमे हमारी पुनो.. सृती.. हमारी भावु.. ओर लता.. सबकी जींदगी खुसहाल होगी.. ओर मेरे जानेके बाद इस घरकी महारानी सीर्फ हमारी पुनो होगी.. जो इस वीरासतको वो चारो मीलकर सम्हालेगी..

नीर्मला : (आस्चर्यसे देखते) महारानी..? हमारी पुनम..? मतलब..?

मंजुला : (धीरेसे) हां मोम.. महारानी.. क्युकी अब पुनमको हमारा लखन ही सम्हाल लेगा.. मे उन दोनो भाइ बहेनकी सादी करवा रही हु.. ओर अब लता यही रहेगी.. हमारी सौतन बनकर.. क्युकी उस राजाकी चहीती रानीको हमारी लता ही जन्म देगी.. क्युकी लता कभी लखनसे प्रेगनेन्ट नही होपायेगी.. इसीलीये मेने ये फैसला लीया हे.. बाकी कुछ बाते हे जो मे अभी आपको नही बता सकती..

भुमीका : (थोडी चीन्तासे) बेटा.. अभी तुमने सृतीका भी नाम लीया.. लेकीन सृतीतो चली गइ.. तो क्या वो फीर वापस आजायेगी..?

मंनुला : (मुस्कुराते) आंटी.. सृती कभी मेरे देवुकी बीवी थी ही नही.. वोतो अपनी नादानीकी वजहसे कुछ दिन देवुके साथ रही.. असलमे वो मेरे लखनकी बहेन हे.. जो अब उनकी बीवी होजायेगी.. ये बात बहुत गहेरी हे.. जो मे आपको बादमे बताउगी..

तीनो बाते करती रही तब मंजु बातो ही बातोमे दोनोको सब कुछ बता देती हे.. फीर तीनो होलमे आकर बैठती हे तब चंदा भी चाइ लेकर आती हे.. तो दुसरी ओर पुनम लता भावना ओर नीलम तैयार होकर सादीमे चली जाती हे.. तो वहा भी लखन सरला रमाको उनके घर छोडकर रमाकी बेन्ड बजाकर वापस सीधे ही सादीमे आजाता हे.. वहा श्रीधर ओर जयश्रीकी सादीकी बाकीकी रसम भी सुरु होजाती हे..
 
जैसे ही लखन ओर पुनमने अ‍ेक दुसरेको देखा.. तो पुनम सरमाकर लखनके सामने मुस्कुराने लगी.. ओर लखनने इसारोमे पुनमके ड्रेसकी तारीफ की.. जीसे पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. पुरी रसम तक दोनो सबकी नजर बचाते आंख मीचोलीसे प्यारका खेल खेलते रहे.. ओर जब भी भीड होती तब लखन सरकते पुनमके पास उनके पीछे चला जाता.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेका हाथ पकड लेते..

ओर धीरेसे प्यारकी बाते करने लगते.. तब बातो ही बातोमे पुनमने सृतीके बारेमे लखनको सबकुछ बता दीया.. जीसे सुनकर लखन भी सोक्ट हो गया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके हाथ पकडकर अ‍ैसे बाते करते रहे जैसे दोनो भाइ बहेन नही कोइ प्रेमी हो.. लखनके ज्यादातर दोस्त ओर गांवकी कुछ ओरते दोनोपे नजर गडाये हुअ‍े थे.. तो भावना ओर लता भी उन दोनोको देखकर हस रही थी..

लता : (हसते धीरेसे) अरे दोनो कुछ तो सरम करो.. सब लोग तुम दोनोको देख रहे हे..

लखन : (हसते धीरेसे) अरे.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. इसमे तु क्यु जल रही हे..?

लता : (मुह बीगाडते) जले मेरी जुती.. लगे रहे मेरे बापका क्या जाता हे..

पुनम : (जोरोसे हसते) क्यु.. अब पता चला.. की जलन क्या होती हे.. मेरा बोय फ्रेन्ड हे.. तो हम क्या गलत कर रहे हे.. सीर्फ बाते हीतो करते हे..

भावना : (हसते धीरेसे) ये तो सबलोग यहा हे इसीलीये.. वरना गलत भी करने लगो.. हमे क्या पता.. हें..हें..हें.. देखो.. घर वाले सब यहा रसम मे बीजी हे.. तो इनके घरमे कोइ नही होगा.. तो दोनो वहा चले जाओ.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां भाभी.. ये अच्छा आइडीया दीया आपने मुजे.. चलो पुनोदी.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते हाथ छुडाते) अरे आप भी पागल हो गये हो क्या..? ये तो पागल हे.. मजाक कर रही हे.. आप तो सच मान गये.. जाओ यहासे.. अभी मुजे कोइ रीस्क नही लेना..

भावना : (हसते कानमे धीरेसे) अच्छा.. अभी नही लेना.. तो मौका मीलातो बादमे लेनेके लीये तैयार हो..

पुनम : (सर्मसार होते जुठा गुस्सा करते अ‍ेक मुका मारते) हां.. आपको कोइ अ‍ेतराज हे..?

भावना : (सरारतसे हसते) हां मुजे कहा अ‍ेतराज हो सकता हे.. आपके होने वाली पती हे.. जाइअ‍े दोनो मजा कीजीये.. हें..हें..हें..

तो आज दो पहोरके बाद जया ओर सांती नही आइ थी.. इस मोकेका फायदा बंसी ओर जागृती भी उठा रहे थे.. वो दोनो भाइ बहेन भी लखन पुनमकी तराह आंख मीचोली खेलते रहे.. वो इसारोमे कइ बार जागृतीको अकेलेमे मीलनेके लीये कहेता रहा.. लेकीन जागृती हर बार उनको मीलनेके लीये मना करती रही.. तो आज नीलमने भी लखनने दिलवाइ पारदर्सी सेक्सी ड्रेस पहेना था.. जीसे वहा सभी लडके आज नीलमको ही ताड रहे थे.. ओर उनके नजदीक जाकर उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहेथे..

इसी बीच सृती गुस्सेसे फास्ट ड्राइव करते सहेर पहोंच गइ.. ओर रास्तेमे दो बार अ‍ेक्सीडन्ट करते करते बच गइ.. वो लखनके घरपे ना जाते सीधा अपने घरपे चली गइ.. ओर अपने रुममे जाकर फुटफुटके रोने लगी.. फीर रो रोके जब जी हल्का होगया.. तब हाथ मुह धोकर होलमे आकर बैठ गइ.. ओर गहेरी सोचमे डुब गइ.. वो मंजुकी कही बातोके बारेमे गौरसे सोचती रही..

लेकीन इस बीच आज चंदाको कही चेइन नही मील रहा था.. क्युकी अ‍ेक तो धिरेन उनको लेने भी नही आया.. ओर उनको फोन तक नही कीया.. उसने सोचा धिरेन काममे बीजी हे तो सामको घर आनेके बाद बात करेगा.. लेकीन अब तो साम भी ढल चुकी थी.. ओर वहा जवेरीलालके घरपे भी सब लोग खाना खाने लगे थे.. ओर इधर हवेलीपे भी सब लोग खानेके लीये बेठे थे तभी..

चंदा : (थोडी चीन्तासे) दीदी.. वो धिरेनका फोन अभी तक नही आया.. क्या वो काममे इतना बीजी हे..? की अ‍ेक फोन तक नही कीया.. इस लडकेको तो अपनी मांकी कुछ पडी ही नही हे..

नीर्मला : (बातको टालते) अरे क्यु इनकी चीन्ता करती हे.. काममे बीजी होगा.. जब फ्रि होजायेगा तब आजायेगा.. चुपचाप खाना खाले..

कहेते नीर्मलाने बातको वही रोक लीया.. तो दुसरी ओर भोजन संपन होते ही पुनम भावना लता ओर नीलमको लखन घरपे छोड गया.. ओर वापस चला गया.. रात हो गइ.. लखन ओर देवायत भी घरपे आ चुके थे.. लेकीन मंजु जान बुजकर लखन ओर पुनमको अ‍ेक दुसरेसे दुर रखना चाहती थी.. ताकी दोनोकी अ‍ेक दुसरेके प्रती प्यार ओर काम वासना बढ सके.. तो दुसरी ओर वो लतासे भी यही करना चाहती थी..

इसी वजहसे आज उसने लताको पुनमके साथ सोनेके लीये भेज दिया था.. ताकी लखन लताके साथ कुछ ना कर सके.. ओर आज नीलमके साथ भावना सो गइ थी.. तो दुसरी ओर नीर्मला ओर भुमीका.. अ‍ैसे ही सोये पडी मंजुकी बातोपे सोचनेपे मजबुर हो गइ थी.. तो आज चंदाका मुड भी धिरेनकी वजहसे थोडा खराब था.. ओर वो मंजुके साथ सोनेके लीये चली गइ..

इसी बीच गांवसे दुर आज भानुको पता थाकी रमा ओर उनकी मां सरला घरपे आगइ हे.. तो वो आज रीटाको घरपे नही ले गया.. तबतक रमा भी आराम करके सही होगइ थी.. ओर खाना बनाकर भानुका इन्तजार कर रही थी.. जब भानु घरपे आगया तो रमाको देखते ही खुस हो गया.. फीर तीनोने मीलकर खाना खालीया.. फीर कुछ देर बाते करते अपने अपने रुममे सोनेके लीये चले गये..

इतने दिनोके बाद रमा ओर भानु मील रहे थे.. तो इस रात भानुने भी अ‍ेक कामोतेजक गोली खाली.. ओर देर रात तब रमाकी गुफामे धमाका करते उसे चोदता रहा.. रमा भी कुछ कहे बगैर बेमन अ‍ैसेही लेटी रहेते भानसे चुदवाती रही.. ताकी वो भुलसे भी लखनसे प्रेगनेन्ट हुइ तो ये बच्चा भानुका केह सके.. इसीलीये रमा चुप चाप बडी रहेते भानुसे चुदवाती रही..





अब उसे भानुका लंड कुछ खास फील नही हो रहाथा.. क्युकी वो इतने दिनो तक लखनसे चुदवाती थी.. तो चुत लखनके लंडके हिसाबसे थोडी चोडी हो गइ थी.. तो भानुको भी आज रमाकी चुत थोडी ढीली लग रही थी.. क्युकी आज दो पहोरको ही लखन रमाकी गुफामे धमाका करके गया था.. ओर रमाको पुरी तराह नीचोडके रखदी थी..फीर भी भानु रमाकी दो बार चुदाइ करलेता हे.. फीर दोनो सो जाते हे..

दिनमे पुनमके साथ आंख मीचोली खेलते ओर थोडा बहुत रोमांस करते लखन भी काफी गरम हो गया था.. अब जडी बुटीकी वजहसे वो रातमे बीना चुदाइ नही रेह सकता था.. तो आज रात भी उसे अकेले ही सोना था.. पीछली रात तो उसे चंपा भाभीका सहारा मील गया था.. लेकीन आज अभी तक चंपा भाभीकी हालत ठीक नही थी.. तो चंपा भाभी अपने रुमका दरवाजा लोक करके सोइ थी..

तो लखन आज अपने रुममे जाकर अकेला अ‍ैसे ही लेट गया.. लेकीन चुदाइ ना होनेकी वजहसे उसे नींद नही आ रही थी.. वो सृतीके बारेमे पुनमने कही बातोपे सोचता रहा.. तभी उसे कुछ याद आया.. तो वो अपना फोन नीकालकर पुनमके साथ चेट करने लगा.. तो पुनम भी लताके साथ बाते करते अपने मोबाइलसे खेल रही थी.. तभी उसे मेसेजकी रींग टोन सुनाइ दी.. तो पुनम देखने लगी..

लखन : (मेसेज) हाइ स्वीट हार्ट.. क्या कर रही हो..? सो गइ क्या..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते टाइप करते) नही भाइ.. बस.. अ‍ैसे ही जाग रही हु.. कहो..

लखन : (मेसेज पढते ही) दीदी.. आपसे बाते करनेका बहुत मन कर रहा हे.. तो यहा उपर मेरे रुममे आजाइअ‍ेनां..

पुनम : (सरमाते टाइप करते) नही यार.. यहा लता जाग रही हे.. तो मे नही आ सकती..

लखन : (टाइप करते) यार उनके सोजानेके बाद आजाना.. मे यहा अकेला हु.. हम बाते करेगे..

पुनम : (सरमाते टाइप करते) नही भाइ.. मुजे पता हे आप बाते नही करोगे.. कुछ दिन सबर करलो.. फीर वो सबकुछ होगा जो आप चाहते हो.. लेकीन अभी नही..

पुनम : (मेसेज लीखते) दीदी.. हम कुछ नही करेगे.. आइ प्रोमीस.. हम सीर्फ बाते करेगे.. डरो मत..

पुनम : (लताकी ओर देखकर मेसेज लीखते) भाइ.. मे डर नही रही.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. लेकीन मुजे अपने आपपे भरोसा नही.. कही मे बहेकना जाउ.. वरना मेरा भी आपको मीलनेका मन करता हे.. आइ लव यु भाइ.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (रीप्लाइ) दीदी.. आइ लव यु टु.. मे भी आपसे बहुत प्यार करता हु.. लगता हे अब आपके बीना मे नही रेह पाउगा.. मुजे आपसे मीलना हे.. अभी के अभी..

पुनम : (टाइप करते) भाइ.. थोडा सबर करलो.. मे भी आपसे मीलनेके लीये तरस रही हु.. प्लीज.. फीर भी देखती हु.. अगर कुछ देरमे लता सो गइ तो आपके पास आजाउगी.. ओके.. चलो गुड नाइट..

लखन : (रीप्लाइ) आपके इन्तजारमे.. गुड नाइट अ‍ेन्ड स्वीट ड्रीम..

तो नीचेकी ओर आज सृतीकी वजहसे देवुका मुड भी ठीक नही था.. तो तीनो अ‍ैसे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गये.. तो गांवमे भी आज कुछ खास नही हुआ.. जैसे पुरे गांवकी काम शक्ति खतम होगइ हो.. इसे तो अ‍ैसा ही लगता हे.. पुरे गांवकी काम शक्तिका सेन्टर इस हवेलीमे हे.. अब देखते हे कलका सुरज अब कौनसा नया तुफान लेकर नीकलता हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३३

तो नीचेकी ओर आज सृतीकी वजहसे देवुका मुड भी ठीक नही था.. तो तीनो अ‍ैसे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गये.. तो गांवमे भी आज कुछ खास नही हुआ.. जैसे पुरे गांवकी काम शक्ति खतम होगइ हो.. इसे तो अ‍ैसा ही लगता हे.. पुरे गांवकी काम शक्तिका सेन्टर इस हवेलीमे हे.. अब देखते हे कलका सुरज अब कौनसा नया तुफान लेकर नीकलता हे.... कन्टीन्यु

देर रात सबलोग नींदकी आगोसमे चले गये.. तब मंजुको प्यास लगी.. ओर वो कीचनमे जाकर फ्रिजसे पानीकी बोतल नीकालकर अपने रुमकी ओर जाही रही थी.. तभी उसे पुनमके रुमकी ओर दरवाजा खुलनेकी आहट सुनाइदी.. तो मंजु अपने रुमके दरवाजेके पास ही रुक गइ.. ओर देखने लगी.. तभी पुनम धीरेसे दबे पांव बहार नीकलके दरवाजा बंध कर रही थी.. तो मंजु सबकुछ समज गइ..

ओर मुस्कुराते देखने लगी.. पुनम दरवाजा बंध करके आजु बाजु नजर घुमाने लगी.. ओर अपने सरपे हाथ घुमाते अपने बालोको सही करने लगी.. वो लताके सोजानेके बाद लखनको अ‍ेकेलेमे मीलना चाहती थी.. तो अपने आपको सही करके वो दबे पांव आजु बाजु देखते सीडीओकी ओर जाने लगी.. जैसे ही वो सीडीयोके पास पहुंची उसे वहा सामने मंजु खडी दीखाइ दी.. पुनम उसे देखकर डर गइ.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरी बहु इतनी देर रात कहा जा रही हे..? मेरे बेटेको मीलने..? हें..हें..हें..

पुनम : (थोडा गभराते सर जुकाते) दीदी.. वो.. मे.. वो.. भैयाको कुछ काम था.. तो.. उसे मीलने जा रही थी.. वो बात करना चाहते हे मुजसे..

मंजुला : (मुस्कुराते हाथ पकडकर सोफेकी ओर लेजाते) चल.. बैठ इधर.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे.. फीर तुम डीसाइड करना तुजे क्या करना हे.. चल.. आजा बैठ इधर..

पुनम : (सरमींदा होते मंजुके साथ सोफेपे बैठते) जी दीदी.. कहीये..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. यहा ओर कीसीको नही पता.. की मे कौन हु..? तुम कौन हो..? मेरा लखन कौन हे..? लेकीन मुजे ओर तुजे तो सब पता हेनां..? की तुम मेरी कौन हो.. तो क्या अब भी मुजे दीदी कहोगी..?

पुनम : (नजरे जुकाये) सोरी दीदी.. आइ मीन.. सोरी अगेइन.. मम्मी.. क्या मे आपको मम्मी केह सकती हु..? मुजे पता हे आप मेरी सासुमां हो.. ओर भैया आपका बेटा हे.. ओर सृतीदी आपकी बेटी..

मंजुला : (मुस्कुराते) गुड.. तुम मुजे मम्मी या मोम भी केह सकती हो.. क्या तुम दोनोने अ‍ेक दुसरेसे अपने प्यारका इजहार कर लीया हेनां..? तो फीर सुन.. मे चाहती हु की लखन अभी तेरे प्यारके लीये ओर तरसे.. वो तेरे ओर सृतीके पीछे पागल हो जाना चाहीये.. दोनो उनकी काम वासना इतनी बढाओकी वो तुम दोनोके बीना ना रहे सके.. ताकी जींदगी भर तुम दोनोको खुस रख सके.. समज गइनां..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) जी मोम.. मे सबकुछ समज गइ.. लेकीन वो मुजसे बाते करना चाहते थे..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. मे जानती हु.. लेकीन वो सीर्फ बाते नही करेगे.. वो तुजे प्यार करना चाहता हे.. तो क्या तुम रेह पाओगी..? वो प्यार करनेमे इतना माहीर होगया हेकी तुम क्या.. मे भले ही उनकी मां हु.. मेभी कंट्रोल नही कर पाउगी.. जब सही वक्त आयेगा.. तब मे सामनेसे तुमको उनके पास भेज दुगी.. तबतक तुम भी थोडासा कंट्रोल करलो..

पुनम : (सरमसे नजरे जुकाते) जी मोम..

मंनुला : (मुस्कुराते) हां.. कभी कभी मीलो तो थोडा बहुत चलता हे.. ओर मर्दको कैसे अपने पीछे पागल करना हे वो तुम सृती ओर चंदा दीदीसे बेहतर कोइ नही जानता.. तुम समज गइनां..? अब तुजे फैसला करना हे.. लखनके पास जाना हेकी नही..

पुनम : (सर जुकाते) जी मोम.. समज गइ.. मे नही जा रही.. जाकर सोजाती हु..

मंजुला : (सर चुमते) हंम.. गुड गर्ल मेरी प्यारीसी बेटी.. सुन.. मे जल्द से जल्द तुमारी सादी लखनके साथ करवाना चाहती हु.. फीर मेरे लखनको तुने ओर सृतीको ही सम्हालना हे.. चल.. अब सोजा.. जा..

कहातो पुनम सरमाते जटसे वहासे चली गइ.. ओर अपने रुममे जाकर सोगइ.. तो मंजु भी पानी पीकर देवायतसे चीपकके सो गइ.. सुबह होते ही आज हवेलीपे सबको जवेरीलालके यहा सादीमे जाना था.. तो सब लोग जागकर तैयार हो रहे थे.. तब लखन मोकेका फायदा उठाते रुमसे बहार नीकला.. ओर भावना नीलम सोये थे उस रुमकी ओर चल पडा..

खीडकीसे देखा तो भावना नीलमको बच्चोका ध्यान रखनेका कहेते टोलीया लेकर बाथरुममे जा रही थी.. जब अंदर चली गइ तो लखनने धीरेसे इसारा करते नीलमको अपने रुममे आनेको कहा.. तो नीलम सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर बाथरुमकी ओर देखते बच्चोकी ओर देखन लगी.. तो बच्ची सो रही थी.. नीलम धीरेसे दरवाजा खोलती हे.. तो लखन उसे हाथ पकडकर अपने रुममे लेजाता हे..

नीलम बहुत ही सरमा रही थी.. अंदर जाते ही लखन नीलमको अपनी बाहोमे भर लेता हे.. ओर नीलमके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगता हे.. तो नीलम भी मदहोस होते मुस्कुराते लखनका साथ देती हे.. ओर वो भी लखनके होठोको चुमने लगती हे.. तभी लखनने उनके टोपको उचा करके अ‍ेक हाथ नीलमके टोपमे घुसा दीया.. ओर बुब्सको मसलते दुसरे बुब्सको मुहमे भरलीया ओर चुसने लगा..





तब नीलम भी मदहोस होते आंखोकी पुतलीया पलटते सातवे आसमानमे पहोंच गइ.. उसे लखनका यही प्यार करनेका अंदाज भा गया था.. ओर वो मन ही मन लखनको प्यार करने लगी थी.. वो लखनके सरको अपनी चुचीओपे दबाने लगी.. तभी लखनने उनकी चुतको सहेला दीया.. ओर हल्केसे अपनी मुठीमे भीच लीया तो नीलम सीसकारीया करते उछल पडी.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया..

लखन कपडेके उपरसे ही नीलमकी चुतको सहेलाने लगा.. तो उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. नीलम बहुत ही उतेजीत होगइ.. ओर लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तभी नीचेकी ओर कीसीकी उपर आनेकी आहट सुनाइ दी.. तो नीलम जटसे लखनकी बाहोसे छुटकर अपना टोप सही करते अपने रुममे भाग गइ.. तो लखन भी आनन फाननमे अपने बाथरुममे घुस गया.. तभी उसे आवाज आइ..
 
मंजुला : (जोरोसे) लखन बेटा.. तु जाग गया हे..? चल फटाफट नहाकर नीचे आजा.. तुजे सादीमे नही जाना क्या..?

लखन : (बाथरुमसे) जी भाभीमां.. मे अभी नहाकर आता हु..

मंजुला : (मुस्कुराते मनमे बहार जाते) कीतना कमीना हे.. अ‍ेक भी मौका नही छोडता.. अभी नही आइ होती तो बेचारी नीलमकी हालत खराब करदेता.. ओर वो भी कमीनी अपनी मांकी तराह चुदकड हे.. हमेसा तैयार रहेती हे.. तभी तो वो धिरेनको छोडके इनके साथ आइ हे..

फीर मंजु भावना ओर नीलमके रुममे चली गइ.. तो वहा पहेलेसेही दोनो जाग चुकी थी.. तो मंजु नीलमकी ओर मुस्कुराते नीचे चली गइ.. फीर सबलोग नहाकर कंपलीट होकर नीचे आगये.. नीलम लखनकी ओर देखते बहुत ही सरमाकर हस रही थी.. फीर सबलोग चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तो आज भी पुनम जान बुजकर लखनके साथ बैठ गइ.. तो लखनने नीचेसे पुनमका हाथ पकड लीया.. तो पुनम खुब सरमाइ.. ओर पुनमने भी लखनके हाथको कसके जकड लीया.. ओर धीरेसे कानमे..

पुनम : (मुस्कुराते कानमे) भाइ.. हाथ छोडो.. मम्मीको सब पता चल जाता हे..

लखन : (हाथ छोडते) दीदी.. हम फोनपे चेटकी थीे आप आइ क्यु नही.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..

पुनम : (धीरेस मुस्कुराते) भाइ.. पता हे मुजे.. मेने आपके मेसेजका जवाब देदीया हे.. पढ लेना..

मंजुला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. दोनो चुपचाप नास्ता करलो.. बाते बादमे करलेना.. सादीमे नही जाना क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) जी.. वो.. भाभीमां.. मे ये केह रहा था.. की सादी होते ही मे सहेर नीकल जाउगा.. वहा रजु.. ओर राधीका घरपे अकेली हे.. ओर उनकी मम्मी भी हमारे घरपे हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. सुन.. अभी कुछ दिन लता यही रहेगी.. तु सीर्फ नीलुको साथ लेजा.. उनकी पढाइ डीस्टर्ब हो रही हे.. ओर नीलु.. अभी तेरा अ‍ेक्जाम भी नजदीक हेनां..? बेटा तुम अभी थोडा पढाइमे ध्यान दो.. ये सादी बादी तो होती रहेगी.. अ‍ैसे बार बार घरपे आना ठीक नही हे.. समजी..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) जी बडी मम्मी..

भावना : (जोरोसे हसते) बडी मम्मी..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) क्यु..? इसमे क्या गलत कहा इसने..? ये भी मेरी बेटी ही हे.. समजी..?

भुमीका : (हसते) नीलु बेटा.. तेरी तो नीकल पडी.. तेरी इतनी सारी मम्मीया जो हे.. हें..हें..हें..

कहा तो नीलम सरमाके हसने लगी.. इस बार लता प्यारसे नीलमकी ओर देखते हसने लगी.. अब पुनम धिरेनके बीच सबकुछ खतम हो चुका था.. तो उसे अब नीलमके धिरेनके साथ रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. ओर उनको नीलमके भवीस्यके बारेमे भी सबकुछ पता था.. पता नही क्यु आज उसे नीलमपे बहुत प्यार आने लगा.. तभी..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. तेरी जीप तो अब यही रहेगी.. तु वापस जायेगा कैसे..? अ‍ेक काम कर.. मे कल सुबह अ‍ेक कामके सीलसीलेमे सहेर जा रहा हु.. तो तुम ओर नीलु मेरे साथ ही चलना.. हम सुबह चार बजे नीकल जायेगे..

लखन : (मुस्कुराते) भैया.. इतनी जल्दी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. तेरे भैयाको इतनी सुबह ही अ‍ेक जरुरस काम हे.. अब तो सृती भी चली गइ हे.. वरना उनकी कारमे चले जाते.. खैर तुम ओर नीलु सुबह ही तेरे भैयाके साथ नीकल जाना.. तो टाइमपे पहोंच जाओगे.. ओर नीलुकी पढाइ भी डीस्टर्ब नही होगी..

इधर सब चाइ नास्ता करते बाते कर रहे थे.. उधर जवेरीलालके घरपे भी सादीकी तैयारीया जोरोसे चल रही थी.. जागृती बरखा सुबह ही जयश्री ओर ब्रीन्दा वुन्दाको तैयार करने आगइ थी.. तो आज बरखाने भी ब्रीन्दाको भी दुल्हनकी तराह सजा दीया था.. जीसे देखकर श्रीधर भी बहुत अ‍ेक्साइड हो गया था.. ओर ब्रीन्दाभी बार बार कंपलीट होकर श्रीधरके आसपास ही घुमते उनको रीजाती रही..

तो दुसरी ओर आज जयाने भी बंसी ओर सांतीको सादीमे भेज दिया.. ओर खुद नही गइ.. क्युकी अभी पंद्नाह दिन भी नही हुअ‍े सामत गुजर गया.. जीनकी वजहसे जया अकेली ही घरपे रही.. जीसका फायदा आज रमेशने उठा लीया.. जबसे सामत गुजर गया तबसे वो लगभग उनके घरपे ही आता जाता था.. जीसकी वजहसे उनको जयाको अ‍ेकेलेमे मीलनेका मोका मीलते ही आगेकी प्लानींगके बारेमे बात कर लेना चाहता था..

तो दुसरी ओर मुनाभी आज बरखा सुबह जल्दी जयश्रीको सजानेके लीये सादीमे होनेकी वजहसे मोकेका फायदा उठा लेता हे.. उनके पीता हाजत ओर नहानेमे बीजी थे तो मुना जटसे कीचनमे घुस गया.. जहा उनकी मां बंसीती चाइ नास्ता बना रही थी.. अंदर जाते ही मुनाने बसंतीको पीछेसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर पीछेसे ही उनके दोनो बुब्स थामते मसलने लगा.. ओर बसंतीके गलेको चुमने लगा..

बसंती : (सर्मसार होते धीरेसे दबी आवाजमे) जानु.. क्या कर रहे हो..? अभी आपके बापु घरपे हे.. छोडदो.. अगर उसने हमे इस हालतमे देख लीया तो मुसीबत होजायेगी..





मुना : (अपनी ओर पलटाते होठ चुमते) मोम.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. चलोना आज कीतना अच्छा मौका हे.. अभी बापु सादीमे चले जायेगे.. तो हम खुब मजा करेगे..

बसंती : (सरमाते धीरेसे दबी आवाजमे) अरे पागल होगये हे क्या..? छोडो अभी नहाकर आजायेगे.. ओर हमे भीतो चलना हे.. आप भी नहालो.. अभी नही.. आज सादी हे.. दो पहोरको सबलोग सादीमे बीजी होगे.. तो हम मोका मीलतेही घरपे आजायेगे.. तब आपको जीतना प्यार करना हो करलीजीयेगा..

मुना : (बाहोमे बुब्स मसलते होठोको चुमते) मोम.. अब आपके बीना रहा नही जाता.. सचमे आपसे प्यार हो गया हे.. ओर अब तो दीदी भी बहुत कम करने देती हे..





बसंती : (जटसे बहारकी ओर देखते धीरेसे) अरे बाबा हम दो पहोरको मीलतो रहे हे.. आपको जीतना प्यार करना हो करलीजीयेगा.. ओर हां.. मुजे आपसे बरखाके बारेमे बात भी करनी हे.. अभी छोडो मुजे.. आपके बापु बहार नीकल गये हे.. हम बादमे बात करेगे..

मुना : (बहारकी ओर देखते जटसे छोडते बहार जाते) ठीक हे मोम.. मे इसारा करुतो आप घरपे चली आना.. थोडी देरके बाद मेभी आजाउगा..

मुना अपनी मां बंसतीको मीलनेकी प्लानींग कर लेता हे.. मुनाने उसे सुबह सुबह ही छेड दीया था.. जीसकी वजहसे आज सुबहसे ही बसंतीकी चुत पानी छोडने लगी थी.. ओर वो मुनासे अपनी चुदाइ करवानेके लीये बेकरार थी.. तो वो भी आज तैयार होकर पटाका बनके आइ थी.. ओर मुनाके साथ आंख मीचोली खेल रही थी.. तो सलमा भी आज पटाका बनकर साहीलके साथ उनकी बीवी बनके आइ थी..
 
इधर सहेरमे सुबह जब सृतीकी आंख खुली तो खुदको होलमे सोफेपे पाया.. तभी उसे पता चला की कल वो भुमी ओर देवायतके बारेमे सोचते होलमे ही बैठी थी.. ओर सोचते सोचते पता नही वो कब नींदमे चली गइ.. वो सोफेपे ही सो गइ.. वो आंख खोलके सही बैठ गइ तब अ‍ेक बार फीर उसे देवायत ओर भुमीकाका खयाल आने लगा.. ओर वो मनही मन देवायतको कोसते उनसे नफरत करने लगी..

वो देवायतसे जीतनी नफरत करने लगी थी उतना ही वो लखनके करीब जा रही थी.. उसे अब देवायतके बजाये लखन ज्यादा अ‍ेक बीन्दास्त ओर हसता खेलेता लडका लगा.. सृतीको लखनमे वो सारी खुबीया नजर आने लगी.. जो देवायतमे नही थी.. उनका मस्ती करनेका अंदाज.. उनके रुठनेका अंदाज अब सृतीको अच्छा लगने लगा था.. ओर अब उनकी लखनको मीलनेकी तडप भी बढने लगी थी.. क्युकी वो अर देवायतको छोड चुकी थी..

फीर वो फ्रेस होकर कंपलीट तैयार होगइ.. ओर बीना चाइ नास्ता कीये बगैर अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. तो आज वहा भी बहुत सारे पेसन्ट इनके इन्तजारमे बैठे थे.. सृती सबकुछ भुलनेकी कोसीस करते अपने पेसन्टको देखने लगी.. लेकीन फीर भी उनके मनमे बार बार भुमी ओर देवायतके खयाल आते रहे.. ओर मंजुने कही बाते उसे सुलकी तराह चुभती रही.. उसे लगाकी वो अब कभी हवेलीपे नही जा पायेगी..

तो इधर हवेलीपे भी सब लोग तैयार होकर चाइ नास्ता कर रही थे.. जब चाइ नास्ता फीनीस हुआ तो सब लोग सादीमे जानेके लीये रेडी थे.. देवायत मंजु ओर चंदाको लेकर चला गया.. तो पुनम भावना नीलम ओर लता लखनके साथ ही पैदल चलने लगी.. पुनम जान बुजकर लखनके साथ ही उनसे बाते करते चल रही थी.. ओर बीच बीचमे सबकी नजर बचाते दोनो अ‍ेक दुसरेके हाथको पकड लेते थे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कल रात आपका कीतना इन्तजार कीया.. आप आइ ही नही..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. मे आ रही थी.. तब बहार मम्मी मील गइ.. तो वापस जाना पडा.. सोरी भाइ.. मेरी वजहसे आपको जागना पडा..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कोइ बात नही.. लेकीन आप अचानक भाभीमांको दीदीकी जगह मम्मी क्यु केह रही हो..? कोइ खास वजह..?

पुनम : (सरमाते धीरेस) वो कुछ दिनमे आपको भी पता चल जायेगा.. भाइ.. अब वक्त आ गया हे.. आप सृती दीदीको अपनालो.. ओर उनके साथ आगे बढो.. क्युकी वो बडे भैयाको छोड चुकी हे.. आपको उनके घर जाकर उसे वापस आनेके लीये मनाना होगा..

लखन : (हाथ दबाते धीरेसे) दीदी.. वो तो मे जाउगा.. उनको मनाना कोइ मुस्कील काम नही हे.. बस.. मे ही अ‍ेक डरकी वजहसे आगे नही बढ रहा था.. लेकीन प्यार तो मे आपसे करता हु.. आज आप इन कपडोमे बहुत मस्त लग रही हे.. जीतो चाहता हे आपको भगाकर लेजाउ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. थेन्कस.. आपको भगाकर लेजानेकी कोइ जरुरत नही हे.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कर लीजीये.. मे खुद आपके पास चली आउगी.. अभी तो आप सृती दीदीके बारेमे सोचीये.. क्युकी उसने भाइके साथ सभी रीलेशन खतम करलीये हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आपको नही लगता भाभीने थोडी जल्दबाजी करली हे..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. वो भाभी नही हे हमारी.. हमारी बडी बहेन हे.. हमारे बापुकी संतान..

लखन : (हसते) तो क्या भुमी बुआनेभी उनके भाइके साथ रीलेशन रखा..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. हमारे खानदानमे तो सभी बहेने अपने भाइकी बीवीया हे.. तो भुमी बुआ पीछे कैसे रेह सकती हे..? उसने भी बापुसे सादी करली थी.. जब बापु गुजर गये.. तो बडे भैयाने उनसे सादी करली.. अब हमारे घरपे रीस्ते नातेकी कोइ अहेमीयत नही हे.. इसीलीये तो मंजुदीने ये नीर्णय लीया हे.. अ‍ेक वक्त अ‍ैसा भी आयेगा.. जब आप हमारे घरकी सभी ओरतोके साथ रीलेशनमे होगे.. बस.. अभी सीर्फ इतना ही बता सकती हु..

लखन : (धीरेसे कानमे मुस्कुराते) दीदी.. आपको अपना वादा तो याद हेनां..?

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) हां भाइ.. मुजे मेरा वादा याद हे.. वो मे जल्द पुरा करुगी.. जब मे जहा आउगी.. भाइ.. वो हम दोनोका पहेला मीलन होगा.. जो मे उसे स्पेसीयल बनाना चाहती हु..

भावना : (पीछे मुडते जोरोसे) ओये.. लैला मजनु.. प्यारकी बाते बादमे करलेना.. जल्दी चलो दोनो..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. ये भावना भाभी बहुत फुदक रही हे.. अ‍ेक दिन रमा भाभीकी तराह इनको भी लाइनमे ले लेना.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते धीरेसे) दी ये क्या बोल रही हो..?

पुनम : (सरमाते जट चलते) भाइ.. अभी तो चलो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे..

इधर भावनाने कहा तो सब हसने लगे.. तो पुनम ओर लखन बहुत सर्मसार होगये.. ओर उसने पुनमका हाथ छोड दीया तो पुनम दोडकर सबके पास चली गइ.. ओर जुडा गुस्सा करते भावनाको पीठमे मुके मारने लगी.. जीसे देखकर भावना भी उनसे बचते लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते हसती रही.. क्युकी भावनाको भी पता था.. उनकी मंजील भी लखन हे..

कल रात भले ही मंजुने उसे लखनसे दुर रहेनेके लीये कहा हो.. लेकीन अब पुनमके दिमागमे लखनके लीये प्यारका परवाना हावी हो चुका था.. वो अब कीसी भी हालमे लखनसे दुर रहेना नही चाहती थी.. ओर लखनके साथ रहेते उनकी चुत हमेसा गीली होजाती.. मंजु पुनम सृतीको लखनसे दुर रखनेकी पुरी कोसीस करती थी.. ताकी दोनोका लखनके प्रती आकर्सण ओर काम वासना बढ सके.. तो यही सब वो लखनके साथ भी कर रही थी.. ताकी लखन दोनोको जल्दसे जल्द अपनाले..

सबलोग हसी मजाक करते सादीमे पहोंच गये.. लखनको ना चाहते हुअ‍े भी पुनमको छोडकर अपने दोस्तोके पास जाना पडा.. वहा मंडपमे सादीकी तैयारीया चल रही थी.. घरके अंदर श्रीधर अपनी मम्मीके रुममे ओर जयश्री अपने रुममे तैयार हो रहीथी.. लखन ओर बंसी श्रीधरके पास चले गये.. तो वहा साहील ओर मुना श्रीधरको तैयार कर रहेथे.. तो बंसीभी उनकी मददमे लग गया..
 
तभी श्रीधरने लखनको मंडपमे अपने साथ रहेनेको बोला.. तो वहा ब्रीन्दा भी खडी थी.. जो सुबहसे श्रीधरके आस पास ही घुम रही थी.. तो लखनको श्रीधरका अणवर बननेकी बात सुनकर बहुत खुस होगइ.. ओर धीरेसे सरकते लखनके पास आगइ.. ओर धीरेसे दबी आवाजमे लखनके साथ बाते करने लगी..

ब्रीन्दा : (लखनकी ओर कातील नजरोसे) देखना देवरजी.. मेरे श्रीधरका अच्छेसे खयाल रखीयेगा.. कोइ इनके जुते बुते ना लेजाये.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) अरे भाभी.. आप फीकर मत करो.. मेरे होते कोइ इनके जुतेको छुअ‍ेगा भी नही..

ब्रीन्दा : (कातीलाना मुस्कुराते) अच्छा..? अपने आप पे इतना कोन्फीडन्स..? अगर मेने चुरा लीया तो..?

लखन : (पास आकर धीरेसे कानमे) भाभी.. अ‍ेक पत्नी अपने पतीके जुते नही चुराती.. अगर आपने चुरा लीया तो आपसे जुता वापस कैसे लीया जाये मुजे पता हे.. क्युकी अभी आपने मेरा कोन्फीडन्स देखा ही कहा हे..? कभी मौका मीले तो आप भी देख लेना.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (धीरेसे मुस्कुराते) हां.. देख लुगी.. देख लुगी.. बस.. सही मौका तो मीलने दो.. फीर देखती हु आपमे कीतना दम हे.. वैसे बहारसे तो बडा दम दीखता हे.. कही जीम बीममे जाते हो क्या.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप भीनां.. मे घरपे ही कसरत करता हु.. लेकीन आज तो आप बहुत ही खुब सुरत लग रही हो.. अ‍ैसा लगता हे.. आज श्रीधरपे बीजलीया गीरेगी.. दुल्हन जयश्री भाभी नही आप लग रही हो.. कहोतो लगे हाथ दुबारा आपके भी फेरे श्रीधरके साथ करवा दे..?

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) आप बहुत कमीने हो.. मुजे पता हे आपको मेरे ओर श्रीधरके बारेमे सबकुछ पता हे.. आप फीकर मत करो.. मेरे फेरे तो इनके साथ कबके हो चुके हे.. मुजे पता हे आपही ने तो सब अ‍ेरेन्ज कीयाथा.. बस.. अ‍ेक बार इन दोनोकी सादी होजाने दीजीये.. फीर देखीये.. आपकी सब तम्मना पुरी होजायेगी.. मुजे पता हे आप क्या चाहते हो..? बस.. थोडासा सबर करलो.. वैसे इतना बडा हथीयार कैसे होगया..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. हे अ‍ेक राज.. जो कभी फुरसतमे हम दोनो अकेले मीलेगे बताउगा.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (कातीलाना मुस्कानसे धीरेसे) हां.. मेभी इसी दिनके इन्तेजारमे हु.. क्या सीर्फ बताओगे..? दिखाओगे नही..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. अगर आप चाहोगी तो कभी मौका मीले तो दीख भी लेना ओर अजमा भी लेना.. क्या पता आपको देखकर ट्राइ करनेका मन होजाये.. फीर मुजे दोस मत देना.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. आप तो बहुत फास्ट जा रहे हो.. ठीक हे.. देखकर सोचुगी.. अभी तो मेरे श्रीधरको सम्हालो.. आज तो कमीना बहुत मस्त लग रहा हे.. लगता हे आज तो जयश्री गइ कामसे..

लखन : (मुस्कुराते कानमे) मस्त तो आप भी लग रही हे.. कहोतो जयश्री भाभीके साथ साथ आज आपकी भी श्रीधरके साथ सुहागरात करवादु..? अ‍ेक सुहागरात ओर सही.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे) लगता हे आपको मे कुछ ज्यादाही पसंद आगइ हु.. कही सुहागरात मनानेका आपका इरादा तो नही हे..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते कानमे धीरेसे) भाभी.. आप खुबसुरात तो होही.. बस मौका मीलने दो.. सुहागरात तो अ‍ैसी मनाउगा.. की दो दिन आप बीस्तरसे उठ भी नही पाओगी.. ओर श्रीधरको भुल जाओगी.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (जुठे गुस्सेसे दांत पीसते अ‍ेक मुका मारते) बडे ही कमीने देवर हो आप..

कहेते ब्रीन्दा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर वो लखनकी ओर कातीलाना स्माइल करते उनकी पीठमे अ‍ेक मुका मारके बहार चली गइ.. तबतक श्रीधरको मुना बंसी ओर साहीलने तैयार करदीया था.. तो आज जयश्री भी दुल्हनके रुपमे कयामत ढाल रही थी.. जब वो तैयार होकर बहार आइ तो उसने लखनको देख लीया.. तो बहुत ही सर्मसार होते लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी..

बरखा : (हसते) लखन भैया.. देख लीजीये अपनी नइ भाभीको.. कैसी लग रही हे..?

लखन : (मुस्कुराते) वाह.. बहुत ही मस्त.. लगता हे आजतो श्रीधर भैयापे बीजलीया गीरेगी.. वैसे जयश्री भाभीके साथ साथ आप भी मस्त लग रही हे.. लगता हे आज तो मुना गया कामसे हें..हें..हें..

बरखा : (र्सासार होते अ‍ेक मुका मारते) लखन भैया.. आप भीनां.. जब देखो मस्तीया करने लगते हो..

कहा तो जयश्री बरखा दोनो सरमसे पानी पानी होगइ.. तब जागृती सीर्फ लखनको देखते इनके पेन्टके उभारको ही देख रही थी.. ओर तीनो सहेली सरमाकर हसते जाने लगी.. तो जागृतीने सबकी नजर बचाते लखनके उभारको पकडके छोड दीया.. ओर सरमाके हसते हुअ‍े चली गइ.. तभी पंडीतजीने आवाज लगाइ तो लखन भी श्रीधरको लेकर मंडपके नीचे चला गया.. ओर वहा वृन्दाने श्रीधरका स्वागत कीया.. ओर जयश्रीने आकर श्रीधरके गेलेमे वरमाला डाली.. तो श्रीधरने भी जयश्रीको माला पहेनाइ..

फीर सादीकी विधीया सुरु होगइ.. तो जवेरीलाल ओर वुन्दा कन्यादान करने बैठ गये.. वृन्दा ओर जीतुलालने सब पहेलेसे ही तैय करलीया था.. तो साथमे जीतुलाल भी आकर वुन्दाके साथ बैठ गया.. ओर जयश्रीको भी मंडपके नीचे लाया गया.. लखन श्रीधरके पास बैठ गया तो पुनम उनको देखकर बहुत खुस होगइ.. जैसे ही लखन ओर पुनमकी नजर मीली तो पुनमने अपना फोन लखनको दीखाया..

तो लखन सबकुछ समज गया.. लखनने फोन देखनेकी कोइ जल्दबाजी नही की.. ओर उसने पहेलेतो श्रीधरके चहेरेको पोछनेका नाटक कीया.. फीर श्रीधरसे धीरेसे बात करते अपना मोबाइल जेबसे नीकाल लीया.. ओर अंदर पुनमके चेटको देखने लगा.. तो पुनमका दो मेसेज आ चुके थे.. अ‍ेक पुराना ओर अ‍ेक अभी जो पुनमने कीया था.. तो लखन अ‍ेक नजर पुनमकी ओर डालते मुस्कुराता हे.. ओर फीर पढता हे..

पुनम : (पुराना मेसेज) भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे आपको बहुत मीस करती हु..

पुनम : (दुसरा मेसेज) भाइ.. आज तो दुल्हेके साथ बहुत जच रहे हो.. देखना यहा बहुत सारी तीतलीया हे.. कही मेरे भाइको उडाकर ना लेजाये.. ओर खास तो उन तीतलीसे बचते रहेना.. जो अभी अंदर आपसे बाते कर रही थी..

लखन : (मेसेज पढते ही रीप्लाइ देता हे) दीदी.. फीकर मत करो.. जब मेरे सामने मेरी परी हे.. तो फीर ये तीतलीओकी क्या ओकात जो आपके भाइको उडाके लेजाये.. मेरी दोरतो आपके पास हे.. खीच लेना..

तो पुनम मेसेज पढकर सरमाते हसने लगी.. ओर उसने रीप्लाइ मे अ‍ेक फ्लाइग कीसकी साइनको सेन्ड करदीया.. ओर साथमे अ‍ेक दिलकी साइनको भी सेन्ड करदीया.. तो लखन देखकर बहुत खुस होगया.. ओर उसने भी अ‍ेक फ्लाइंग कीस सेन्ड करदी.. ओर आइ लव यु लीख दीया.. तो पुनमने भी आइ लव यु टु भाइ.. भेजकर लखनके सामने हसने लगी.. तभी जवेरीलाल वृन्दा ओर जीतुलाल कन्यादान करने खडे होगये..

तो लखन थोडी देर फोनको साइडमे रखकर श्रीधरपे ध्यान देने लगा.. जब तीनो वापस बैठ गये तब ब्रीन्दा भी लखनके पास आकर खडी होगइ.. ओर लखनके कानके पास मुह रखके उनसे बाते करने लगी.. सबकी बातोसे शोर शराबेमे कीसीको कुछ सुनाइ नही देता था.. तो सबको लगाकी ब्रीन्दा सादीको लेकर लखनको कुछ सुचनाये दे रही हे.. लेकीन मंजु ओर पुनमके अलावा कीसीको क्या पता था..

की ब्रीन्दा लखनके साथ प्यारकी बाते करते उनके साथ फ्लर्ट कर रही हे.. ओर लखनको अकेले मीलनेकी प्लानींग कर रही हे.. पुनमको ब्रीन्दासे थोडी ज्वेलेसी फील होने लगी.. ओर उसने तुरंत अ‍ेक मेसेज लीखकर लखनको सेन्ड करदीया.. तो लखन पढने लगा..

पुनम : (मेसेज) भाइ.. लगता हे भाभी आपके उपर कुछ ज्यादा ही लटु होगइ हे.. कही दोनोका कोइ चकरतो नही चल रहा..? अभी आप सादीमे ध्यान दो.. वरना घर जाकर आपकी खुब पीटाइ करुगी..

लखन : (मुस्कुराते मेसेज रीप्लाय करते) अरे नही दीदी.. क्या आपसे मेरी कोइ बात छुप सकती हे..? आप फीकर मत करो.. मे जो भी करुगा.. आपको पुछकर करुगा.. मे आपका भरोसा तोडना नही चाहता..

पुनम : (रीप्लाइ) हंम.. गुड बोय.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. अभी के अभी.. अकेलेमे मीलो..

लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते रीपलाय देते) हंम.. अभी थोडा फ्रि होने दीजीये.. मे बहार चला जाउगा..

लखन ओर पुनम फीरसे अपने अपने फोनपे प्यारकी बाते करते चेट करते रहे.. दोनोको इस खेलमे बहुत मजा आ रहा था.. लखन बीच बीचमे श्रीधरका ध्यान रखते पुनमसे चेटपे बाते कर रहा था.. ओर चेट करते करते बहुत आगे बढते खुलकर बात करने लगे.. चेट करते बातो ही बातोमे लखनने पुनमको पुछ ही लीया.. जीसे पढकर पुनम बहुत ही सरमाइ..
 
लखन : (चेट मेसेज) दीदी.. क्या ये सादी देखकर आपको कुछ नही होता..? मुजेतो बहुत कुछ होता हे.. क्या खयाल हे आपका..?

पुनम : (बहुत ही सर्मसार होते मेसेज लीखकर सेन्ड करती हे) भाइ.. मे आपकी बात समज गइ.. की आप क्या कहेना चाहते हो.. बताओ.. आपको क्या होता हे..?

लखन : (मुस्कुराते रीप्लाय करते) दीदी.. पहेले तो आपकी फीलींग्स बताओ..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. सादी देखकर बहुत कुछ होता हे.. आप फीकर मत करो.. हमारी भी अ‍ैसी ही सादी होगी.. सबके सामने.. हमारी मां ही करवायेगी.. तब मे हमेसा हमेसाके लीये आपकी अर्धागींनी होजाउगी.. मेरे लखन भैयाकी दुल्हन..

लखन : (मुस्कुराते लीखते) दीदी.. पता नही हमारी सादी कब होगी.. लेकीन आपको मीलनेका बहुत मन कर रहा हे.. मे आपके बीना नही रेह सकता.. प्लीज.. कुछ करोनां..

मेसेज पढते ही पुनम सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर बडी आंख करते जुठे गुस्सेसे देखते मुस्कुराने लगती हे.. फीर वो भी मोबाइलमे अ‍ेक लम्बा मेसेज लीखकर लखनको सेन्ड करती हे..

पुनम : भाइ थोडा सबर करलो.. जबतक धिरेनका इस्यु खतम नही होजाता तबतक मुजे यही रहेना पडेगा.. ओर यहा चंदा भाभीके रहेते हमारा मीलना पोसीबल नही हे.. मे भी हमेसाके लीये आपके साथ रहेना चाहती हु.. लेकीन अभी हमपे कुछ पाबंधी भी लगी हुइ हे.. तो हमारा मीलना कुस्कील हे..

लखन : (रीपलाय देते) दीदी.. तो फीर मेरे साथ सहेरमे आजाओनां.. आपको तो पता हे.. मेरी अ‍ेक फेन्टासी हे.. सादीसे पहेले.. आपने मुजे वादा भी कीया था.. आप समज गइनां..? वहा हम दोनो खुब प्यार करेगे..

पुनम : (सर्मसार होते लीखते) भाइ.. मुजे आपकी सभी फेन्टासीके बारेमे पता हे.. मुजे पता हे आप क्या चाहते हो.. भाइ.. मे आपसे बहुत.. बहुत.. बहुत.. प्यार करती हु.. तो आपकी बात कैसे टाल सकती हु.. मुजे अपना वादा याद हे.. बस.. थोडासा सबर करलो.. मे जल्द वहा आपके पास आजाउगी.. तब आपकी ये फेन्टासी भी बहुत जल्द पुरी कर दुगी..

लखन : (मनमे खुस होते) दीदी.. सच..? कही आप मजाक तो नही करती..?

पुनम : (जटसे लीखते सेन्ड करते) नही भाइ.. मे अपने होने वाले पतीसे कैसे मजाक कर सकती हु..? मेरी भी फेन्टासी हे.. की आपकी बीवी होनेसे पहेले हम खुब प्यार करे.. स्कुल टाइमपे हमने जो प्यार मीस कीया.. वो अ‍ेक हर लम्हा मे जीना चाहती हु.. मे भी आपके अंदर समा जानेके लीये तरस रही हु.. भाइ.. फीकर मत करो.. बहुत जल्द हम दोनोका मीलन होगा.. वो भी हमारी सादीसे पहेले.. आइ प्रोमीस.. भाइ.. आइ लव यु सो मच.. जो मुजे मुसीबतमे आपने सम्हाल लीया..

पुनमका मेसेज पढकर लखन बहुत ही इमोस्नलके साथ साथ उतेजीत भी होगया.. ओर उनका लंड पेन्टके अंदर ही जटके मारने लगा.. जो पेन्टके उभारमे साफ दीख रहा था.. तभी जयश्रीके साथ साथ उनके पास बैठी जागृती ओर बरखाभी टेडी नजरसे लखनके पेन्टके उभारको देखने लगी.. जीसे देखकर तीनो बहुत ही सर्मसार होते मुह दुसरी ओर करते हसने लगी.. ओर ये सब लखनने देखलीया.. तो वो सरमाकर अपनी जगाहपे मुनाको बीठाकर बहार चला गया..

पुनम लखनकी मनोदसा समज गइ.. ओर वो भी फ्रेस होनेका बहाना बनाते लताको साथ लेकर लखनकी ओर चली गइ.. सबलोग सादीमे बीजी थे.. अब श्रीधर ओर जयश्रीके सात फेरेकी तैयारीया हो रही थी.. देवायत सभी जेन्ट्सके साथ बेठकर पंचायतकी चर्चा कर रहा था.. ओर गांवके लोग इनकी बाते गौरसे सुन रहे थे.. ब्रीन्दाने बसंतीको अपने साथ ही रखा.. तो बसंतीका मुड भी थोडा बीगड गया..

क्युकी मुना उनको कबसे इसारा करते घरपे जानेकी बात कर रहा था.. तभी रमेश सबकी नजर बचाते धीरेसे वहासे खीसक लेता हे.. ओर दुसरे रास्तेकी ओर जाते घुमकर जयाके घरपे उनके पास चला जाता हे.. वहा जया घरपे अकेली ही रमेशके इन्तजारमे बेठी थी.. जैसे ही रमेश आया जयाने फटाफट दरवाजा बंध करलीया.. ओर पलटते रमेशकी बाहोमे समा गइ..

तो रमेश इतने दिनो तक जयाको नही मीलाथा तो वो भी पागलोकी तराह जयाके चहेरेको चुमने लगा.. दोनोके उपर वासनाका भुत पुरी तराह हावी हो चुका था.. ओर रमेश कुछ बोले बीना ही जयाको अपनी गोदमे उठालेता हे.. ओर जयाके लेकर रुमकी ओर चल पडता हे.. जया सीर्फ रमशेके गलेमे हाथ डालते उनकी आंखोमे ही देख रही थी.. ओर रमेशने जयाको नीचे उतारा ओर जयाके कपडे उतारने लगा..

तो जया भी रमेशकी ओर देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. ओर कुछ ही देरमे दोनो पुरस तराह नंगे हो गये.. तभी जया बीना कुछ बोले अपने बेडपे पीठके बल लेट गइ.. ओर दोनो पैर घुटनोसे मोडकर फैला दीये.. ओर रमेश अपना लंड हीलाते जयाके पैरोके बीच आकर बैठ गया.. घुटनोके बल बैठते अपना लंड जयाकी चुतपे घीसने लगा.. जयाकी चुत तो कबसे पनीया रही थी..

ओर रमशेका लंड गीला हो गया.. तो जयाकी चुतके फांकोमे अपना लंड घुसाते जयाके उपर लेट गया.. जयाने जोरोसे रमेशको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर रमशेने अ‍ेक ही जटकेमे जयाकी चुतमे अपना लंड पुरा घुसा दीया.. जयाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसने राहतकी सांस ली.. वो रमेशकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. जैसे केह रही हो.. की मुजे जल्दीसे चोदलो..





सब कुछ नीसब्द हो रहा था.. रमेश जयाके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुमने लगा.. तो जया भी अपना मुह खोलते रमेशकी जीभसे पेच लडाते मुहके रसको पीने लगी.. ओर रमेश धीरे धीरे कमर हीलाते जयाको चोदने लगा.. ओर कुछ ही देरके बाद रमेश हाथके बल उचा होते जयाकी धमाकेदार चुदाइ कर रहा था.. जया भी मदहोसीमे आंखोकी पुतलीया पलटते अपनी कमर उछाल उछालते रमेशको चुदाइमे साथ दे रही थी..





उधर सबलोग सादीके माहोलमे बीजी थे.. तो बंसी भी अपनी बहेन जागृतीके साथ आंख मीचोली खेलते इसारोमे मीलनेके लीये केह रहा था.. तो उसे पता नही थाकी उनके घरपे उनकी मां अपने यारके साथ चुदाइका नंगा नाच नाच रही थी.. रमेशने जयाको अ‍ेक बार जडा दीया.. फीर कुछ देरकी धमाकेदार चुदाइके बाद दोनो अपनी चरमपे पहोच गये.. दोनो पसीनेसे भीग चुके थे.. ओर रमेश जयाके सीनेपे ढेर होके पडा था.. तो जया रमेशके बालोको सहेला रही थी.. तभी..

जया : (बाल सहेलाते) रमेश.. अब तो आपके भाइकी सब क्रिया खतम हो गइ हे.. तो फीर आपने हमारे बारेमे क्या सोचा..?

रमेश : (होंठ चुमते) डार्लींग.. बस उसीके बारेमे बात करने आया हु.. मेने सहेरमे हमारे रहेनेका सब इन्तजाम करलीया हे.. अब हमे जानेकी ही देरी हे.. मे चाहता हु कल वहेली सुबह हम दोनो यहासे नीकल जाये.. ओर जाते ही पहेले हम सादी कर लगे.. हमारे नये जीवनकी सुरुआत होजायेगी.. फीर हम कही हनीमुनपे चले जायेगे.. मेने वहा रासन बासन सब डरवा दीया हे.. बाकीका तुम आओगी तब लेलेगे..

जया : (बाल सहेलाते) ठीक हे रमेश.. अब तो जागु ओर सांतीको भी हम दोनोके बारेमे पता हे.. ओर गांवमे भी हम दोनोकी बाते होने लगी हे.. मे चाहती हु बात मेरे बंसी तक पहोचे.. इनसे पहेले ही हमे यहासे नीकल जाना चाहीये.. ओर अब तो मेरा पेट भी बढने लगा हे.. तो हम ज्यादा दिन मेरी प्रेगनन्सीकी बातको नही छीपा सकते.. हमे जाना ही होगा..

रमेश : हां जया.. मेने ओर सामतभाइने साथ मे ही मकान लीया था.. वहा सब कंपलीट हे.. थोडा बहुत घरका सामान भी लेलीया हे.. तु कल सुबह चार बजे तैयार रहेना.. हमारे जानेका इन्तजाम हो गया हे..

जया : रमेश.. देखना रातको आपकी स्कुटरकी आवाजसे कोइ जाग ना जाये.. हम गांवसे बहार पैदल ही जायेगे.. ताकी कीसीको आवाज ना आये..

रमेश : (मुस्कुराते) जया.. हमारा स्कुटरतो पहेलेसे ही वहा पहोचा दीया हे.. मेने हमारे जानेका दुसरा इन्तजाम करलीया हे.. कल सुबह देख लेना.. तु सीधे मेरे घरपे चली आना वहासे हम दोनो नीकल जायेगे..

जया : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे.. अब उपरसे हटीये.. मुजे बाथरुममे नहाने जाना होगा.. ओर अब आप भी यहासे जाइये.. वरना कीसीने देखलीया तो गडबड होजायेगी.. मे सुबह आपके घरपे आजाउगी..

फीर रमेश वापस सादीमे आजाता हे.. कीसीको पता भी नही चला की रमेश जयाकी चुदाइ करके कल भागनेकी प्लानींग करके आगया.. वो भोजन पंडालमे जाकर सब व्यवस्था देखने लगा.. इसी बीच लखन बहार चला गया था तो पीछे पुनम ओर लताभी लखनके पास जानेके लीये बहार नीकल गइ.. देखा तो लखन सादीके माहोलसे सबसे दुर अ‍ेक जगाहपे खडा था.. जहा कोइ आता जाता नही था.. तो पुनम लता भी उनके पास चली गइ.. पुनमको पता थाकी लखनको क्या प्रोबलेम हे.. तीनो थोडी दुर अ‍ेक जगहपे जाकर खडे होगये....

कन्टीन्यु
 
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