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- Dec 5, 2013
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तो दोनोने फटाफट अपने कपडे वही नीकाल दीये.. तो लखन वही टेबलपे बैठ गया.. ओर रजीयाको अपनी गोदमे बीठाकर अपना लंड रजीयाकी चुतपे सेट करते घुसा दीया.. तो रजीयाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो वासना भरी नजरोसे लखनकी ओर देखते उछलने लगी.. लखन भी उनके नींतबको पीछेसे पकडकर रजीयाको अपनी गोदमे उछालते चोदने लगा..

लखन रजीयाको काफी देर अैसेही चोदता रहा.. इसी बीच रजीयाभी अेक बार जड चुकी थी.. फीर काफी देर चुदाइके बाद दोनो अपनी मंजीलके करीब पहोंच कगे.. तो लखनने अपनी स्पीड बढाइ.. रजीया सीसकारीया करने लगी.. ओर अंतमे दोनो अपने चरमोपे पहोचकर साथमे स्खलीत होगये.. फीर दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर सही होकर अपने अपने कपडे पहेन लेते हे..
लखन : (कपडे पहेनते) रजु.. मना आयाकी नही..?
रजीया : (कपडे पहेनते) जानु.. बहुत मजा आ गया.. बस अैसे ही प्यार करलीया करो..
तब नीलुके स्कुलसे आनेका टाइम भी हो चुका था तो लखन रजीयाके होठोको चुमकर वहासे नीकल गया.. ओर नीलुको लेकर वापस आ गया.. फीर वो नीलुको घरपे छोडकर होस्टेलपे चला जाता हे.. जीसे देखकर राधीका भी खुस होगइ.. ओर वहा भी लखन राधीकाके कुअेको दो बार अपने पानीसे सीच देता हे.. ओर राधीकाके अेक अेक अंगको तोड देता हे.. जीसे राधीका भी खुस होगइ.. फीर दोनो धरकी ओर नीकलते हे..

राधीका : (रास्तेमे) जानु.. ये आपने हमे मीलनेका अच्छा आइडीया ढुंढ नीकाला हे.. घरपे कोइ जंजट ही नही.. आप अपनी दुसरी बीवीओको प्यार करते रहो.. मुजे तो यहा आपका प्यार मील जाता हे.. आजतो आपने मुजे पुरी नीचोडली..
लखन : (मुस्कुराते) राधु.. पहेले भी हम यही तो मीलते थे.. ओर अब इतनी बीवीया होजायेगी तो कुछ मेनेज तो करना पडेगानां.. सुन.. क्या पुनो दीदीसे बात होगइ..?
राधीका : (मुस्कुराते) हां.. वैसे तो फोनपे बात होती रहेती हे.. लेकीन केह रही थी जब मे वहा आउगी तब आपको सब कुछ बताउगी.. फीर भी भाभीमांने मुजे बहुत कुछ बता दीया हे..
लखन : राधु.. तुजे हमारे खानदानके बारेमे जानकर बुरा तो नही लगा..?
राधीका : (हसते) बडा दीलचस्प खानदान हे आपका.. मेतो जानकर हेरान रेह गइ.. क्या आजके जमानेमे भी ये सब पोसीबल हे..? जानु.. क्या मे सचमे परी या अप्सरा हु..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. अगर भाभीमांने कहा हे तो जरुर होगी.. हें..हें..हें..
फीर दोनो अैसी ही बाते करते घरपे आजाते हे.. तो नीलम सोफेपे बैठकर टीवी देख रही थी.. आज दिनमे भी धिरेन नीलमको लेने स्कुलपे आया था.. फीर दोनो अपने पेपर लेकर कोर्टपे चले गये.. ओर मेरेजका फोर्म भरके अपने सभी पेपर अेडमीट करदीये.. फीर धिरेन नीलमको लेकर अपने घरपे जाना चाहता था.. तो नीलमने देर होजानेका बहाना बनाकर धिरेनके घरपे जानेका टाल दीया.. उनको पता था धिरेन उनको घरपे क्यु लेजाना चाहता हे..
क्युकी अब धिरेनके साथ इतनी बार सेक्स करते भी नीलम धिरेनके छोटे लंडसे संतुस्ट नही होती थी.. इसी वजहसे नीलमकी दिलचस्पी धिरेनसे कम होती जा रही थी.. जबसे लखनके लंडको देखा तबसे वो मन ही मन लखनको चाहने लगी थी.. इसीलीये तो लखनके साथ रातमे खुलकर प्यार करने लगी थी.. उनको अब धिरेनके बजाये लखनका लंड पसंद आने लगा था..
कइ बार दोनो ओरल सेक्स करते इतने बहेक जाते की नीलम लखनको अपने उपर चडनेकी मनते करने लगती.. अब वो कीसी भी हालमे लखनसे चुदवाना चाहती थी.. इसके लीये नीलमने कइ बार कोसीस भी की.. लेकीन लखन अभी सही वक्त नही हे.. कहेके नीलमकी बातको टाल देता.. क्युकी लखन जानता था की वो नीलमके साथ सेक्स करेगा तो नीलम दो दिन बीस्तरसे उठ नही पायेगी..
ओर नीलमको अैसे ही जडा देता.. इसी वजहसे लखनके प्रती नीलमकी चाहत बढती ही जा रही थी.. वो चाहती थीकी अब कीसी भी हालमे वो लखनके साथ सेक्स करे.. लेकीन रमाकी हालत देखकर लखन भी जानता था.. की अभी घरपे नीलमके साथ सेक्स करना उचीत नही हे.. वो इसके लीये कीसी खास मौकेके इन्तजारमे था.. राधुको लेकर घरपे आते ही वो नीलमके पास जाकर बैठ गया..
लखन : (मुस्कुराते) कहो नीलु.. पढाइ कैसी चल रही हे..? कोइ प्रोबलेम तो नही..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही जीजु.. अच्छी चल रही हे.. जीजु.. मुजे आपसे बात करनी हे..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. बोल.. कुछ चाहीये क्या..?
नीलम : (मुस्कुराते) नही.. जीजु.. आज धिरेन आया था.. फीर मे ओर धिरेन कोर्टमे सब पेपर अेकमीट करवाके आ गये.. कोर्टने हमे अेक महीनेके बादकी डेट दी हे.. तो मे क्या करु..?
लखन : (मुस्कुराते) क्या करु मतलब..? सादी करले उनसे.. ओर क्या..? तु फीकर मत कर.. मे सब इन्तजाम करदुगा.. तुजे कुछ नही होगा..
नीलम : (मायुस होते) जीजु.. मेरी वजहसे पुनो दीदीके साथ जो भी हुआ मुजे अच्छा नही लगा.. अगर धिरेनने मेरे साथ भी अैसा कीया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..? आपने तो पुनोदीदीको अपना लीया.. ओर उनसे सादी भी कर रहे हो.. लेकीन धिरेनने मुजे छोड दीया तो मुजे कौन अपनायेगा..? जीजु.. धिरेनके बारेमे सोचनेके लीये अभी भी वक्त हे.. मुजे आपकी राय चाहीये..
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. फीर भी हमे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही.. मेरी मान तु करले धिरेनसे सादी..
नीलम : (आंख गीली करते) जीजु.. वही तो..? अगर आपकी जगहपे कोइ ओर होता तो नाजाने अब तक मेरे साथ वो लोग क्या क्या करते.. आप लोग इतने अच्छे क्यु हे..? जीजु.. आइ लव यु..
लखन : (बैठेही हग करते) हंम.. आइ लव यु टु.. नीलु.. तु बहुत अच्छी हे.. हमारी किस्मतमे जो लीखा होता हे वही होता हे.. उसे ना तुम टाल सकती हो ना मे..
नीलम : (आंख पोछते) नही जीजु.. ये किस्मतका खेल नही हे.. कीसीकी साजीसका खेल हे..
लखन : (सामने देखते) मतलब..? तु कहेना क्या चाहती हे..?
नीलम : (सामने देखते धीरेसे) जीजु.. अभी नही.. हम जब रातमे मीलेगे तब.. मे आपसे कुछ कन्फेस करना चाहती हु.. क्युकी मुजसे अब ओर पाप नही होगा.. फीर आप फैसला करना की मुजे क्या करना चाहीये..

लखन रजीयाको काफी देर अैसेही चोदता रहा.. इसी बीच रजीयाभी अेक बार जड चुकी थी.. फीर काफी देर चुदाइके बाद दोनो अपनी मंजीलके करीब पहोंच कगे.. तो लखनने अपनी स्पीड बढाइ.. रजीया सीसकारीया करने लगी.. ओर अंतमे दोनो अपने चरमोपे पहोचकर साथमे स्खलीत होगये.. फीर दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर सही होकर अपने अपने कपडे पहेन लेते हे..
लखन : (कपडे पहेनते) रजु.. मना आयाकी नही..?
रजीया : (कपडे पहेनते) जानु.. बहुत मजा आ गया.. बस अैसे ही प्यार करलीया करो..
तब नीलुके स्कुलसे आनेका टाइम भी हो चुका था तो लखन रजीयाके होठोको चुमकर वहासे नीकल गया.. ओर नीलुको लेकर वापस आ गया.. फीर वो नीलुको घरपे छोडकर होस्टेलपे चला जाता हे.. जीसे देखकर राधीका भी खुस होगइ.. ओर वहा भी लखन राधीकाके कुअेको दो बार अपने पानीसे सीच देता हे.. ओर राधीकाके अेक अेक अंगको तोड देता हे.. जीसे राधीका भी खुस होगइ.. फीर दोनो धरकी ओर नीकलते हे..

राधीका : (रास्तेमे) जानु.. ये आपने हमे मीलनेका अच्छा आइडीया ढुंढ नीकाला हे.. घरपे कोइ जंजट ही नही.. आप अपनी दुसरी बीवीओको प्यार करते रहो.. मुजे तो यहा आपका प्यार मील जाता हे.. आजतो आपने मुजे पुरी नीचोडली..
लखन : (मुस्कुराते) राधु.. पहेले भी हम यही तो मीलते थे.. ओर अब इतनी बीवीया होजायेगी तो कुछ मेनेज तो करना पडेगानां.. सुन.. क्या पुनो दीदीसे बात होगइ..?
राधीका : (मुस्कुराते) हां.. वैसे तो फोनपे बात होती रहेती हे.. लेकीन केह रही थी जब मे वहा आउगी तब आपको सब कुछ बताउगी.. फीर भी भाभीमांने मुजे बहुत कुछ बता दीया हे..
लखन : राधु.. तुजे हमारे खानदानके बारेमे जानकर बुरा तो नही लगा..?
राधीका : (हसते) बडा दीलचस्प खानदान हे आपका.. मेतो जानकर हेरान रेह गइ.. क्या आजके जमानेमे भी ये सब पोसीबल हे..? जानु.. क्या मे सचमे परी या अप्सरा हु..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. अगर भाभीमांने कहा हे तो जरुर होगी.. हें..हें..हें..
फीर दोनो अैसी ही बाते करते घरपे आजाते हे.. तो नीलम सोफेपे बैठकर टीवी देख रही थी.. आज दिनमे भी धिरेन नीलमको लेने स्कुलपे आया था.. फीर दोनो अपने पेपर लेकर कोर्टपे चले गये.. ओर मेरेजका फोर्म भरके अपने सभी पेपर अेडमीट करदीये.. फीर धिरेन नीलमको लेकर अपने घरपे जाना चाहता था.. तो नीलमने देर होजानेका बहाना बनाकर धिरेनके घरपे जानेका टाल दीया.. उनको पता था धिरेन उनको घरपे क्यु लेजाना चाहता हे..
क्युकी अब धिरेनके साथ इतनी बार सेक्स करते भी नीलम धिरेनके छोटे लंडसे संतुस्ट नही होती थी.. इसी वजहसे नीलमकी दिलचस्पी धिरेनसे कम होती जा रही थी.. जबसे लखनके लंडको देखा तबसे वो मन ही मन लखनको चाहने लगी थी.. इसीलीये तो लखनके साथ रातमे खुलकर प्यार करने लगी थी.. उनको अब धिरेनके बजाये लखनका लंड पसंद आने लगा था..
कइ बार दोनो ओरल सेक्स करते इतने बहेक जाते की नीलम लखनको अपने उपर चडनेकी मनते करने लगती.. अब वो कीसी भी हालमे लखनसे चुदवाना चाहती थी.. इसके लीये नीलमने कइ बार कोसीस भी की.. लेकीन लखन अभी सही वक्त नही हे.. कहेके नीलमकी बातको टाल देता.. क्युकी लखन जानता था की वो नीलमके साथ सेक्स करेगा तो नीलम दो दिन बीस्तरसे उठ नही पायेगी..
ओर नीलमको अैसे ही जडा देता.. इसी वजहसे लखनके प्रती नीलमकी चाहत बढती ही जा रही थी.. वो चाहती थीकी अब कीसी भी हालमे वो लखनके साथ सेक्स करे.. लेकीन रमाकी हालत देखकर लखन भी जानता था.. की अभी घरपे नीलमके साथ सेक्स करना उचीत नही हे.. वो इसके लीये कीसी खास मौकेके इन्तजारमे था.. राधुको लेकर घरपे आते ही वो नीलमके पास जाकर बैठ गया..
लखन : (मुस्कुराते) कहो नीलु.. पढाइ कैसी चल रही हे..? कोइ प्रोबलेम तो नही..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही जीजु.. अच्छी चल रही हे.. जीजु.. मुजे आपसे बात करनी हे..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. बोल.. कुछ चाहीये क्या..?
नीलम : (मुस्कुराते) नही.. जीजु.. आज धिरेन आया था.. फीर मे ओर धिरेन कोर्टमे सब पेपर अेकमीट करवाके आ गये.. कोर्टने हमे अेक महीनेके बादकी डेट दी हे.. तो मे क्या करु..?
लखन : (मुस्कुराते) क्या करु मतलब..? सादी करले उनसे.. ओर क्या..? तु फीकर मत कर.. मे सब इन्तजाम करदुगा.. तुजे कुछ नही होगा..
नीलम : (मायुस होते) जीजु.. मेरी वजहसे पुनो दीदीके साथ जो भी हुआ मुजे अच्छा नही लगा.. अगर धिरेनने मेरे साथ भी अैसा कीया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..? आपने तो पुनोदीदीको अपना लीया.. ओर उनसे सादी भी कर रहे हो.. लेकीन धिरेनने मुजे छोड दीया तो मुजे कौन अपनायेगा..? जीजु.. धिरेनके बारेमे सोचनेके लीये अभी भी वक्त हे.. मुजे आपकी राय चाहीये..
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. फीर भी हमे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही.. मेरी मान तु करले धिरेनसे सादी..
नीलम : (आंख गीली करते) जीजु.. वही तो..? अगर आपकी जगहपे कोइ ओर होता तो नाजाने अब तक मेरे साथ वो लोग क्या क्या करते.. आप लोग इतने अच्छे क्यु हे..? जीजु.. आइ लव यु..
लखन : (बैठेही हग करते) हंम.. आइ लव यु टु.. नीलु.. तु बहुत अच्छी हे.. हमारी किस्मतमे जो लीखा होता हे वही होता हे.. उसे ना तुम टाल सकती हो ना मे..
नीलम : (आंख पोछते) नही जीजु.. ये किस्मतका खेल नही हे.. कीसीकी साजीसका खेल हे..
लखन : (सामने देखते) मतलब..? तु कहेना क्या चाहती हे..?
नीलम : (सामने देखते धीरेसे) जीजु.. अभी नही.. हम जब रातमे मीलेगे तब.. मे आपसे कुछ कन्फेस करना चाहती हु.. क्युकी मुजसे अब ओर पाप नही होगा.. फीर आप फैसला करना की मुजे क्या करना चाहीये..


