Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 57 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो इधर लखन जब उपरकी मंजीलपे आया तब अपने रुमके पास आकर रुक गया.. तभी उनका दरवाजा बंध था.. तो उनको अ‍ेब बार रमा ओर नीलमके रुमकी ओर जानेकी इच्छा होगइ.. ओर वो आजु बाजु देखकर दबे पांव रमा नीलमके रुमकी ओर चल गया.. ओर खीडकी थोडीसी खुली थी.. तो उनमेसे अंदर जांकने लगा.. तो अंदरका नजारा देखतेही लखन आस्चर्यके साथ चोंक गया..

क्युकी अंदर रुममे हल्कीसी रोसनीमे लखनको साफ दीखाइ दे रहा था.. की नीलम ओर रमा पुरी तराह नंगी होकर सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको अपने मुहसे खरोद रही थी.. अ‍ेक पल तो लखनको लगा की वो अंदर चला जाये.. ओर दोनो मां बेटीको पटक पटकके चोदले.. लेकीन दुसरे ही पल उन्होने अपने आपको कंट्रोल कर लीया.. क्युकी उनको पता था.. की अब उनका लंड बडा होगया हे..

तो अभी रमा ओर नीलम उनको नही जेल पायेगी.. ओर चीलायेगी तो सब लागोेके जाग जानेका डर भी था.. अब तो वो दोनो भी उनके साथ सहर आ रही थी.. तो लखन उन दोनोको आरामसे नीपटना चाहता था.. तो वो थोडी देर वहा खडा रहेके अंदर देखता रहा.. तब कुछ ही देरमे रमा ओर नीलम जड गइ.. ओर खडी होकर दोनो अ‍ेक साथ बाथरुामकी ओर जाने लगी..

तभी अचानक रमाका ध्यान खीडकीकी ओर गया.. तो वहा लखनको देखकर रमा चोंकते रुक गइ.. तो नीलम भी रमाकी रुकनेकी वजहसे उनकी नजरका पीछा करने लगी.. तो उसने भी लखनको देख लीया तो वो सरमसे पानी पानी होगइ.. क्युकी मां बेटी दोनो ही बीलकुल नंगी थी.. तो नीलम जटसे सरमाते दोडकर बाथरुममे धुस गइ.. तो रमाको भी होंस आया.. ओर वो भी सरमाते जटसे बाथरुममे चली गइ..

तब लखनको वहासे खीसकनाही बेहतर लगा.. ओर वो अपने रुममे चला गया.. तो इधर मां बेटी दोनो ही गभराते अ‍ेक दुसरेकी ओर देखती रही.. क्युकी उनको समजमे ही नही आ रहा था की दोनो क्या करे.. तभी रमाने कुछ सोचते अपने आपको सम्हाला ओर वो नोर्मल होनेकी कोसीस करने लगी.. ओर सरमाकर नीलमकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. तो नीलम उनको आस्चर्यसे देखती रही.. तभी..

रमा : (सरमाते धीरेसे) नीलु.. लखनजीसे गभरानेकी जरुरत नही हे.. अच्छा हुआ उन्होने हमे देखलीया.. देखना अब वो सामनेसे आगे बढेगे.. अगर इस बारेमे तुमसे कोइ बात करे.. तो पीछेहट मत करना.. उनकी जो भी डिमान्ड हो.. हां केह देना.. फीर आगे देखा जायेगा..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. क्या केह रही हो..? उन्होने हमे अ‍ैसेही नंगा देखलीया हे.. ओर वो भी हम दोनोको साथमे.. वो इतने बुध्धु नही हे की हमारा रीलेशन ना समजे.. वो सीर्फ मेरे पास नही.. आपके पास भी डिमान्ड कर सकते हे.. तब आप क्या करोगी..?

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) नीलु.. इतना कुछ सोचनेकी जरुरत नही हे.. फीर भी वो मेरे पास कोइ डिमान्ड करेगे तो मे मना करदुगी.. फीर भी नही माने तो आगे देखा जायेगा.. की हमे क्या करना हे..

इधर लखन जैसेही रुमका दरवाजा बंध करपे पलटा तब अ‍ेक बार फीर चौक पडा.. क्युकी बेडपे रजीया ओर लता दोनो बाते करते उनका इन्तजार कर रही थी.. तो जैसेही लखन अंदर आया तो रजीया सरमाकर हसने लगी.. तो लता भी लखनकी ओर देखते हस रही थी.. जैसे दोनोने लखनको सरप्राइज दी हो.. लखन हसता हुआ वही खडा रहा.. तो लता बेडसे खडी होगइ.. ओर हसते हुअ‍े उन्होने अपनी बाहे फैलाइ..

तो लखन दोडकर आगया ओर लताकी बाहोमे समा गया.. तब लताके कंधेपे सर रखते रजीयाकी ओर देखते हस रहाथा.. तब रजीया भी सर्मसार होते उनकी ओर देखते हस रहीथी.. तब लताने दोनो हाथसे लखनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थामलीया ओर हसते हुअ‍े लखनकी आंखोमे देखती रही.. फीर आंखोके इसारोसे रजीयाकी ओर इसारा करते अपने दोनो नैन नचाने लगी.. तब लखनकी हसी नीकल गइ..
 
लता : (हसते) क्यु पतीदेव.. कैसी रही हमारी सरप्राइज.. लीजीये अपनी इस बीवीको सम्हालीये..

लखन : (मुस्कुराते लताको बाहोमे भरते) लता.. आइ लव यु.. क्या तुजे सब पता चल गया..? तुम नाराज तो नही होनां..?

लता : (मुस्कुराते होठ चुमते) हां.. मे आपसे बहुत नाराज हु.. मुजे पहेले क्यु नही बताया..? क्या मुजपे भरोसा नही था क्या..?

लखन : (बाहोमे भीचते) नही लता.. भरोसेकी बात तो नही हे.. लेकीन मे तुमसे भी बहुत प्यार करता था.. मीन्स अभी भी करता हु.. लेकीन अ‍ेक डर था.. कही तुजे हमारे रीलेशनके बारेमे पता चला तो तुम मुजसे नाराज होकर चली ना जाओ.. इसीलीये बतानेमे डर रहा था..

लता : (चहेरेको थामते) मेरा भोला बलमा.. बहुत प्यार करते हो मुजे..? हंम..? लखन.. मे इतनी कमजोर नही हु.. की मे आपको छोडकर चली जाउ.. मुजे आज मंजुभाभीने सबकुछ बता दीया हे.. क्या सहेरमे भी आपकी अ‍ेक बीवी हेनां..? कभी हमसे मीलवाओगे नही..?

लखन : (आंख गीली करते मुस्कुराते) लता.. मे सायद तुजे पुरी तराह समज ही नही पाया.. तुमने कीतनी आसानीसे सब स्वीकार करलीया हे..

लता : (मुस्कुराते) जानु.. अब तो इस हवेलीमे बहुत कुछ बदलने वाला हे.. देखना कुछ रीस्ते देखकर वीचलीत मत होना.. क्युकी मंजुभाभी ओर भाइने कुछ तैय करलीया हे.. जो कभी फुरसतमे आपको मंजु भाभी बता देगी..

लखन : (मनमे) लता.. बता देगी नही भाभीमांने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. मुजे तेरे बारेमे सबकुछ मालुम हो चुका हे.. तुम भीतो भाइको प्यार करती हो..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. आप कहा खो गये..? मैने आपको कुछ कहा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (थोडा हडबडाते मुस्कुराते) हां.. हां.. लता अगर तुजे सबकुछ पता हे तो तुही बता देनां..

लता : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी मुजे ये सब बतानेकी मरमीशन नही हे.. चलीये.. आज आप अपनी इस बीवीसे प्यार करीये.. बेचारीको बहुत दिन होगये जो आपसे दुर रही.. अगर मुजे पहेले पता होता तो मे ही इसे बुला लेती..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) अ‍ेक मीनीट.. अगर इनको तुमने नही बुलाया.. तो फीर कीसने बुलाया हे..?

लता : (हसते) मंजुभाभीने.. आज भाभीने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. तभी तो इनको यहा बुलाया हे.. लखन अब तो कल हम सहेर जा रहे हे.. तो अब रजीया दीदी हमारे साथ ही सोयेगी.. अब पता चला मुजे.. की बडे भैया ओर भाभी इनको हमारे साथ क्यु भेज रहे थे.. आइअ‍े.. अब भाभीने आपके लीये सब इन्तजाम कर दीया हे.. तो सम्हालीये अपनी बीवीको..

कहतो रजीया बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मुह घुमाकर मुस्कुराने लगी.. तब लताने लखनको रजीयाकी ओर धका देदीया तो लखन सीधा रजीयाके उपर जा गीरा.. तो रजीया बेडपे गीर गइ.. ओर लखन उनके उपर गीर गया.. तो वो रजीयाके उपर अ‍ैसेही रहेते उनकी ओर देखते हसने लगा.. तो रजीया बहुत ही सरमाने लगी.. तब लता हस रही थी.. ओर वो भी बेडपे आकर अपने कपडे नीकालने लगी..

लता : (हसते) चलीये रजुदीदी.. आज हम दोनो मीलकर हमारे पतीको खुस करदेती हे.. हालाकी मे तो सीर्फ उपर उपरसे ही प्यार करुगी.. अब आपको ही हमारे पतीको सम्हालना हे..

जब लता अपने कपडे नीकाल रही थी.. तब पता ही नही चला की रजीया ओर लखनके होठ कब मीलगये.. रजीया आधी आंख चडाते मदहोस हो चुकी थी.. ओर हल्केसे लखनके होठ चुस रही थी.. तब लखन रजीयाके उरोजोको दबाते होंठ चुम रहा था.. जीनकी वजहसे रजीयाकी चुत पानी बहाने लगी थी.. ओर धीरे धीरे दोनोके उपरसे अ‍ेक अ‍ेक कपडे नीकलते गये.. ओर तीनो पुरी तराह नंगे हो गये..

तो इस वक्त नीचेकी ओर नीर्मला पीठके बल लेटी हुइ थी.. ओर देवायतने अपना तगडा लंड उनकी चुतमे उतार दीया था.. तो वो मुह फाडकर चुदवाते देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देख रही थी.. ओर देवायत उनके बुब्सकी नीपलको मुहमे लेते हल्केसे चुस रहा था ओर साथमे कमर हीलाते धीरेसे नीर्मलाको चोद रहा था.. नीर्मलाने अपने लंबे बाल खुले करलीये थे जो अभी बैडपे बीखरे पडे थे.. जीनकी वजहसे वो बहुत ही कामुक लग रही थी..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे) जानु.. बस अ‍ैसेही मुजे चोदते रहीये.. मुजे हर दिन आपका लंड मेरी चुतमे चाहीये.. कमसे कम दो दिनमे अ‍ेक बार मेरी चुदाइ करलो.. बहुत मन होता हे..

देवायत : (होंठ चुमते) नीमु.. इसके लीये मंजुने कुछ तैय कीया हे.. जब तुम वापस आओगी तब वो तुजे बता देगी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. अभी वोही बात हो रही थी.. ठीक हे.. हम वापस आयेगी तब बात होगी.. अभी तो मुजे तृप्त करदो.. कीतने दिनोके बाद हम मीले हे..

देवायत : (हल्केसे चोदते) नीलु.. तुम मेरा पहेला प्यार ओर मेरी पहेली बीवी हो.. तुजमे आज भी वोही कसीस हे.. अ‍ैसा लगता हे.. मे तुजे पहेली बार चोद रहा हु..

नीर्मला : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह जानु.. आइ लव यु आइ लव यु सो मच.. आपको नही पता हम दोनोका जन्मोजन्मका साथ हे.. ओर मे हमेसा आपकी पहेली बीवी होती हु.. मे आपकी सोनु हु.. आप इस सोनुको चोद चोदके तृप्त करदो.. मे हमेसा आपकी दिवानी हु.. जानु.. मुजे ओर जोरोसे चोदीये..

तो देवायत हाथके बल उचा हो गया ओर नीर्मलाको जोरोसे चोदने लगा.. दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. तब नीर्मला हल्केसे सीसकारीया करते छटपटाती रही.. इसी बीच देवायतने उनको भी दो बार जडा दीया.. ओर अभी दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपके हुअ‍े थे.. ओर देवायत पुरा लंड घुसाकर अपनी कमरको जटके देते जड रहा था.. तब साथमे नीर्मला भी जडने लगी.. ओर देवायतने नीर्मलाकी चुतको लबालब अपने पानीसे भरदी..
 
नीर्मला : (पीठ सहेलाते सांस दुरस्त करते) जानु मजा ही आगया.. मेरी क्या मस्त चुदाइकी आपने.. बस.. आपसे जुदा होनेका मन ही नही करता.. अ‍ैसे ही अ‍ेक बार ओर चोदलो.. फीर आप आजाद.. आपको मंजुके पास भी जाना हे.. वरना वो कमीनी मुजपे चीलायेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (होठ चुमते) नीमु.. मे मेरी कीसी भी बीवीको चोदता हुनां.. तो उनके उपरसे उतरनेका मन ही नही करता.. बस अ‍ैसा लगता हे उनको चोदता ही रहु..

नीर्मला : (सर्मसार होते मुस्कुराते) तो फीर आपको मना कीसने कीया हे..? चोदते रहीयेनां.. वैसे भी मंजु तो अब यही हे.. आज आप मेरे साथ ही सोजाइअ‍े.. हम सुबह तक प्यार करेगे..

देवायत : (मुस्कुराते) नही नीमु.. मुजे वहा जाना होगा.. वरना चंदाको सक होजायेगा..

नीर्मला : (होठ चुमते) जानु.. फीकर मत करो.. अब कुछ ही दिनोमे उसे भी हमारे बारेमे पता चल जायेगा.. क्युकी अब मंजु सबको सचाइ बता देना चाहती हे.. चलीये अब चोदीयेना.. अभी भी बहुत मन कर रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे आपके हथीयारको बहार ही ना नीकालु..

तब अ‍ेक बार फीर देवायत धीरे धीरेसे कमर हीलाना सुरु करदेता हे.. तब नीर्मला बहुत ही मदहोस होकर वापस देवायतसे चुदवाने लगी.. ओर इस बार भी देवायतने उनको दो दो बार जडाके तीसरी बार साथमे जड गये.. तब नीर्मलाकी पुरी चुत देवायतके कामरससे लबालब भरी हुइ थी.. ओर चुतसे बहेते उनके पैरोसे होते कामरस गदेको खराब कर रहा था.. आज नीर्मलाका अ‍ेक अ‍ेक अंग देवायतने जोरोसे चोद चोदके तोड दीया..





वो हीलनेकी स्थीतीमे भी नही थी.. तब देवायत उसे गोदमे लेकर बाथरुममे चला गया.. ओर वहा दोनोने साथमे सावर लीया तब अ‍ेक बार फीर नीर्मला उनकी ओर कामुक नजरोसे देखते मदहोस होगइ.. तब देवायतने उनको पीछेसे बाहोमे जकडलीया तो नीर्मला हसते हुअ‍े जुक गइ.. ओर देवायतने धीरेसे अपना लंड उनकी गांडमे घुसा दीया.. तब नीर्मलाकी हल्केसे चीख नीकल गइ..

ओर वो पीछे मुह करते देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. तब देवायत उनकी कमर को पकडकर उनकी गांडको चोदने लगा.. तो नीर्मला भी मदहोसीमे मजेसे चुदवाने लगी.. ओर नीर्मलाको अ‍ेक बार फीर जडाकर अपना लंड नीकालते नीर्मलाको अपने सामने करदीया.. ओर उनकी टांग पकडकर आगे चुतमे लंडको घुसा दीया.. फीर वो जोरोसे नीर्मलाको खडे खडे चोदने लगा..





तब नीर्मलाकी हालत वाकइ खराब हो चुकी थी.. आज देवायतने तीसरी बार नीर्मलाकी चुतको भरके हरी भरी करदी.. फीर दोनो नहाकर कंपलीट होगये.. ओर देवायत नीर्मलाको गोदमे ही उठाके बहार ले आया ओर बेडपे सुला दीया.. तब नीर्मलाने सोते सोते अ‍ेक बार फीर देवायतको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुम लीया.. फीर देवायत मुस्कुराते वहासे नीकल गया ओर अपने रुममे चला गया..

तब सृती ओर चंदा दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ लेस्बीयन खेलकर अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गइ थी.. तब मंजु नीचे फर्सपे अपने गदेपे सोते देवायतका इन्तजार कर रही थी.. क्युकी आज वो देवायतसे कुछ बाते कहेना चाहती थी.. तो देवायतको अंदर आते देखते ही हसने लगी.. ओर सोते सोते ही अपने दोनो हाथ फैलाकर देवायतको अपने पास बुलाने लगी.. तब देवायत भी नंगा होकर मंजुके पास चला गया ओर उनकी रजाइमे घुस गया.. तो मंजुने पलटकर उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया..

मंजुला : (होठ चुमकर) जानु.. अपनी दोनो बीवीओको कर आये ठंडी..? हंम..? कमीनी दोनो ही बहुत चुदकड हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (सामने देखते) मंजु.. तेरी मम्मीकी तो बात ही कुछ ओर हे.. भुमी बुआको भी सीर्फ आगे पीछे दो बार चोद पाया.. अब वो मुजे जेलनेकी स्थीतीमे नही हे.. मंजु.. हम भुमीका क्या करेगे..? वो सृतीसे बहुत डरती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. अ‍ैसे बात करनेके मजा नही आता.. पहेले आप इसे अंदर घुसादो.. ओर अ‍ेक बार मुजे अच्छेसे चोदलो.. फीर मे आपसे कुछ बात कहेती हु..

कहा तो देवायत मुस्कुराते मंजुके उपर चड गया.. तो मंजुने उनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. ओर देवायतने अ‍ेक ही जटकेमे पुरा लंड मंजुकी चुतमे उतार दीया.. तो मंजुकी चीख नीकल गइ.. तब चंदा ओर सृती दोनो ही चीखकी आवाज सुनकर जाग कइ.. ओर मंजु ओर देवायतकी ओर देखते मंजुको गालीया देने लगी.. तो मंजु ओर देवायत दोनो ही जोरोसे हसने लगे.. तब दोनो वापस अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गइ..

तब कुछ ही देरके बाद देवायत ओर मंजुके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. मंजु आधी आंख चडाते बहुत ही कामुक तरीकेसे चुदवा रही थी.. तब देवायत उनको चोदते चोदते बुब्सकी नीपलको चुमने लगता.. तो कभी गलेको ओर होठोको चुम लेता.. तब मंजु अ‍ेकदम पागल होजाती.. ओर अपनी कमरको हीलाते देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगती.. अ‍ैसेही मंजुको दो बार जडाकर तीसरी बारमे दोनो साथमे जड गये.. तब दोनो पुरी तराह पसीनेसे भीग चुके थे.. ओर मंजु देवायतकी पीठ सहेला रही थी.. तब..
 
देवायत : (होंठ चुमते) हां डार्लीग.. अब बोल क्या केह रही थी..?

मंजुला : (सांस दुरस्त करते धीरेसे) जानु.. पहेले सांस तो लेने दो.. आपने तो अ‍ेक ही बारमे मुजे नीचोडली.. कोइ इतना जोसमे करते हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) जब तक तुजे दो बार चोद नही लेता तबतक तु मुजे अपने उपरसे उतरने नही देती.. क्या ये मेरी वही मंजु बोल रही हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. आज कल बहुत थक जाती हु.. लगता हे अब मेरा जानेका वक्त नजदीक आने लगा हे..

देवायत : (जोरोसे बाहोमे भीचते) नही मंजु.. तु अ‍ैसा मत बोल.. मुजे बहुत डर लग रहा हे.. मे तुजे नही जाने दुगा.. तेरा विदेसमे जाकर भी इलाज करवाउगा.. मे तुमसे बहुत प्यार करता हु..

मंजुला : (होंठ चुमते) नही जानु.. अ‍ैसा मत करना.. क्युकी मुजे वापस भी तो आना हे.. मेरी भावुकी कोखसे.. आप प्रकृतीके बीच बाधा मत डालना.. मे कहा आपको छोडकर जा रही हु.. बस.. अ‍ेक नया सरीर लेकर ही तो भावुकी कोखसे वापस आना हे.. तभी तो हमारे स्वामी आयेगे.. जानु.. अब आप भावुको दया बहेनको ओर लताको भी अपनालो.. तीनो आपके लीये तडप रही हे.. आप तीनोको पुरी तराह अपनालो..

देवायत : (सीनेपे सर रखते) मंजु.. भावुतो ठीक हे.. लेकीन लताको मीलनेमे थोडा संकोच हो रहा हे.. क्या तुमने जो नीर्णय लीया हे.. उनके बारेमे लखन जानता हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आपकी सब बाते मे समज गइ.. आज आपको यही बात बतानी थी.. भाइ.. आज जब आप मम्मीके साथ थे.. तब लखन आया तो मेने उनको सबकुछ बतादीया हे.. तो उसने मेरी हर बात मानली हे.. अब आपको लताको मीलनेके कोइ दीकत नही आयेगी.. अब हमारा विजय भी बडा होने लगा हे.. तो उनको भी तैयार करना हे.. ओर ये काम मैने पुनोको सोंप दीया हे.. भाइ.. हम दोनोने जो नीर्णय लीया हे.. सही लीया हे.. अब ये बात हमे जीनको नही पता हे उनको भी बता देनी चाहीये..

देवायत : मंजु.. कुछ गडबड तो नही होगीनां..? देखना कोइ तुमसे नाराज ना होजाये.. ओर तुम भुमीके बारेमे कुछ कहेने वाली थी.. बताना..

मंजुला : जानु.. बहुत जल्द सृतीको सब पता चल जायेगा.. तब भुमी आंटी ओर मेरी मम्मी दोनो पापाके मकानमे रहेने चली जायेगी.. ओर भुमी आंटीकी वही डीलीवरी करनी हे.. तब आपको वहा तीनोको सम्हालना हे.. भुमी आंटी मेरी मम्मी.. ओर हमारी भावुको.. वो भी वहा आती जाती रहेगी..

देवायत : मंजु.. तो फीर हमारा भानु..? क्या भावु उनके साथ नही रहेगी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आज अ‍ेक सीक्रेट ओर बता देती हु.. अब हमारे भानुभाइ कीसीको संतुस्ट करनेमे काबील नही रहेगे.. तब वो हमेसाके लीये हमारे खेतोपे आजायेगे ओर हमारा काम सम्हाल लेगे.. क्युकी अब रामुकाकाके जानेका वक्त भी हो गया हे.. अब आप दयासे भी सादी करलो.. बेचारीने आपका बहुत इन्तजार कीया हे.. भाइ.. वो भी हमारी बहेन हे.. उनको अ‍ेक बच्चेकी बडी तम्मना हे.. आप उनकी तमना पुरी करदो.. ओर हो सके तो रामुकाकाकी हाजरी मे ही आप दयासे सादी करलो.. बेचारे खुस होजायेगे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु.. तुम सबके बारेमे कीतना अच्छा सोचती हे.. ओर सादी तो मे करलुगा.. लेकीन भानुको कुछ होगया तो रमाभाभी ओर भावुका क्या होगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते होठ चुमते) क्यु.. हमारी भावुके लीये तो आप हेनां.. ओर रही बात रमाभाभीकी.. तो उन मां बेटीको तो अब हमारा लखनही सम्हाल लेगा.. कमीनी मां बेटी दोनो ही बहुत ठरकी हे.. अभी से दोनो हमारे लखनके पीछे पड गइ हे.. देखना बहुत ही जल्द हमारा लखन दोनोकी चुतको फाडेगा..

कमीनी दोनो हमारी जायदादके पीछे पडी हे.. भाइ.. अगर आपको उनके बारेमे कुछ सुननेको मीले तो आप इसके लीये लखन भैयाको कुछ नही कहोगे.. ओर नीलुकी वजहसे तो पुनो धिरेनसे अलग होकर वापस आयेगी.. ओर वो नीलु धिरेनसे सादी कर लेगी..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब अब यहा बहुत कुछ बदलाव होने लगा हे.. ठीक हे.. चल अब सोना नही हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. क्या अ‍ैसेही सोजाओगे..? अभीतो मुजे सीर्फ अ‍ेक ही बार तो चोदा हे.. चलीये सुरु होजाये.. फीर सुबह आपको जाना भी तो हे.. हें..हें..हें..

तब अ‍ेक बार फीर देवायत मंजुको जबरदस्त तरीकेसे चोद लेता हे.. तब मंजु पुरी तराह संतुस्ट हो जाती हे.. फीर देवायत ओर मंजु दोनो ही अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो जाते हे.. तब उपरकी मंजीलपे आज रजीयाकी हालत खराब होने वाली थी.. हालाकी वो देवायतसे कइ बार चुदवा चुकी थी.. फीर भी उनको लखनका लंड देवायतसे बडा लग रहा था.. सीक्स नाइन पोजीसनमे खेलते रजीया लखनके लंडको मुहमे लेकर चुस रही थी..

तब उनको वाकइ लखनका लंड देवायतके लंडसे बडा लगा.. क्युकी वो देवायतके लंडको भी कइ बार अपने मुहमे ले चुकी थी.. तब रजीया मनही मन डरने लगी.. की आजतो वो गइ कामसे.. तब कुछही देरमे उनकी चुतने जवाब देदीया.. तो लखनभी उतेजीत होकर जडने लगा.. ओर पीचकारीया मारते रजीयाके मुहको भरने लगा.. तब लखनका पानी रजीयाके मुहमे चला गया ओर वो खांसने लगी..

तब लता रजीयाकी ओर देखती ही रही.. क्युकी रजीयाका पुरा मुह लखनके पानीसे भरा हुआ था.. लखनका इतना सारा पानी नीकलते लताके साथ साथ रजीयाको भी आस्चर्य हुआ.. उसके बाद दोनो बाथरुममे जाकर सही होकर वापस आगये.. तो लखनने रजीयाको पीठके बल लीटा दीया.. ओर खुद उनके उपर चड गया ओर बुब्सको चुमने लगा.. अब लखन रजीयाके उपर पुरी तराह सवार हो चुका था.. तभी....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०५

तब लता रजीयाकी ओर देखती ही रही.. क्युकी रजीयाका पुरा मुह लखनके पानीसे भरा हुआ था.. लखनका इतना सारा पानी नीकलते लताके साथ साथ रजीयाको भी आस्चर्य हुआ.. उसके बाद दोनो बाथरुममे जाकर सही होकर वापस आगये.. तो लखनने रजीयाको पीठके बल लीटा दीया.. ओर खुद उनके उपर चड गया ओर बुब्सको चुमने लगा.. अब लखन रजीयाके उपर पुरी तराह सवार हो चुका था.. तभी.... अब आगे

रजीया : (सरमाते धीरेसे) लखन आप धीरेसे डालना.. ये तो बहुत बडा हो गया हे.. दीदी.. आप यहा ही रहेना.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..

लता : (मुस्कुराते बुब्स चुमते) रजुदीदी मे यही हु.. आपको कुछ नही होगा.. आपतो इनका कइ बार लेचुकी हे.. तो क्यु गभरा रही हे..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) दीदी तब इनका इतना बडा नही था.. प्लीज.. लखन.. जरा आरामसे..

जबसे लखनको जडी बुटी दी थी.. तबसे उन्होने कीसीकी चुदाइ नही कीथी.. लखन रजीयाके बुब्सको मुहमे लेकर चुसने लगा.. थो रजीयाके दोनो बुब्स कठोर हो चुके थे.. बुब्सकी नीपल तनके सख्त होचुकी थी.. जीसे लखन मुहमे लेके हल्केसे अपने दातोसे दबाकर खचने लगा.. तो रजीया बहुत ही उतेजीत होकर सीसकारीया करने लगी.. लखनका सख्त लंड रजीयाकी चुतपे ठोकर मारने लगा.. ओर अपने बीलमे जानेका रास्ता ढुंढने लगा..

लखन रजीयाके साथ खेलते तावमे आ गया.. ओर वो जल्दसे जल्द अ‍ेक बार रजीयाको चोदलेना चाहता था.. तो दुसरी ओर आज रजीया भी चुदनेके लीये रेडी थी.. आज वो बहुत ही कामुक दीख रही थी.. जीनसे अ‍ेक बार तो लताको भी जलन होने लगी थी.. तब रजीयाने धीरेसे लखनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करते उनमे घुसनेका रास्ता दीखा दीया.. ओर आंख बंध करते लखनको जोरोसे बाहोमे भीचकर लेटी रही.. तब..





लता : (सरको सहेलाते) रजीया दीदी गभराना नही मे यही हु.. (लखनकी ओर देखते) जानु.. आप आरामसे धीरे धीरे डालना.. आजसे आपकी पहेली बीवी यही हे.. यही समजलो.. आज आप दोनोकी सुहागरात हे.. इस नये हथीयारसे आप रजुदीदीका फीरसे उद्घाटन करदो.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) लता मे तुमसे भी बहुत यार करता हु.. मुजे तुम भी चाहीये..

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) अरे हां बाबा मे कहा मना कर रही हु.. जब मेरा पीरीयड खतम होजाये तब आप मुजे भी चोद लेना.. लेकीन अभीतो अपनी पहेली बीवीको चोदलो.. कबसे आपके लीये तडप रही हे..

कहातो लखन मुस्कुराते रजीयाके होठोको चुमने लगा.. वो लताको ये दिखाना नही चाहता थाकी उनके बारेमे उसे सबकुछ पता चल गया हे.. वो लताके साथ पहेलेकी तराह ही व्यवहार कर रहा था.. ओर रजीयाके दोनो हाथोको कसके पकड लीया.. फीर धीरेसे कमरको पुस कीया.. तो लखनका थोडासा लंड रजीयाकी चुतमे घुस गया.. तब रजीयाकी चीख नीकल गइ.. ओर लखनके मुहमे ही दब गइ..

वो गुं.. गुं.. करते लखनसे मुह छुडवानेकी कोसीस करने लगी.. तब लता उनके सरको सहेलाते रजीयाको सांत करने लगी.. तो रजीयाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. वो लखनके लंडको बरदास्त नही करपाइ.. उनको लगा कीसीने उनकी चुतमे बडा डंडा घुसा दीया हे.. उनकी चुतमे बहुत जलन हो रही थी.. तब लताने लखनकी ओर देखा.. ओर मुस्कुराते आंख मारदी.. ओर इसारोसे कीला फतेह करनेको कहा..

लखन लताके इसारोको समज गया.. लखन कुछ दैर अ‍ैसे ही रजीयाके उपर लेटा रहा.. तो कुछ ही देरमे रजीया भी सांत होगइ.. तो लखन अ‍ैसेही लेटे रहेते रजीयाके होठोको छोडके उनके बुब्सको चुमने लगा.. तब कुछ ही देरमे रजीया फीरसे उतेजीत होने लगी.. ओर मदहोस होकर लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. लखन रजीयाके दोनो बुब्स बारी बारी चुस रहा था.. जब रजीया नोर्मल होगइ..

लखनने फीरसे अपना होंठ रजीयाके होठोपे रख दीया ओर चुमने लगा.. तभी चुमते चुमते अचानक रजीयाके होठोपे लीपलोक करदीया.. ओर अपनी कमरको जोरोसे जटका देदीया.. तो लखनका पुरा लंड रजीयाकी चुत चीरते पुरा अंदर घुस गया.. ओर रजीया जोरोसे चीखते बेहोस होगइ.. तो लखनने गभराकर रजीया के होठोको छोड दीया.. ओर डरके मारे रजीयाकी ओर देखते लताकी ओर देखने लगा.. तब लता मुस्कुरा रही थी..

लता : (लखनके होठ चुमते) साबास मेरे सेर.. मुबारक हो.. आखीर आपने कीला फतेह कर ही लीया.. आप अ‍ैसे गभराइअ‍े मत वो सीर्फ बेहोस हुइ हे.. अब आप इनको होंसआनेसे पहेले बेहीसी मे ही चोदलो.. ओर उनकी चुतको अपने हथीयारके लायक करदो ताकी इनको दुबारा कोइ तकलीफ नाहो..

लखन : लता.. देखतो जरा इनको कुछ हुआ तो नही..?

लता : (होंठ चुमते) अरे कुछ नही हुआ हे.. सीर्फ रजीयाकी चुतसे थोडासा मामुली खुन नीकल गया हे.. बस.. थोडी देरके लीये बेहोस हुइ हे.. जानु.. आज फीरसे दोनोकी सुहागरात हे.. अब आपको सबके साथ अ‍ैसे ही करना हे..

लखन : (लताकी ओर आस्चर्यसे देखते) सबके साथ अ‍ैसे ही करना हे मतलब..?

लता : (अपनी गलतीका अहेसास होते ही) वो.. वो.. अरे कुछ नही.. मतलब मेरे साथ भी.. अब आप इनको फटाफट चोदलो वरना इनको होस आजायेगा तो आपको चोदने नही देगी.. आप फटाफट चोदना चालु करो.. जब इनको होस आने लगे.. तब आप रुक जाना..

तब लखन हाथके बल उचा हो गया.. ओर रजीयाको बेहोसीमे ही चोदने लगा तो रनीयाके दोनो बुब्स तालमेलमे उछलने लगे.. ओर रजीया अ‍ैसेही बेहोसीमे लखनसे चुदती रही.. अब लखनका लंड बडेही आरामसे रजीयाकी चुतमे अंदर बहार हो रहा था.. तब कुछ ही देरमे रजीया मुह बीगाडते होसमे आने लगी.. तब लताने इसारा करते लखनको चोदनेसे रोकदीया ओर उनके होठोको चुमने कहेने लगी..





तो लखन रजीयाके उपर जुकते लेट गया.. ओर अ‍ेक हाथसे बुब्सको सहेलाते रजीयाके होठोको चुमने लगा तब रजीयाने धीरेसे आंख खोलदी.. तब उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो लता उनके सरको सहेलाते मुस्कुराने लगी.. अब रजीया बीलकुल सांत हो चुकी थी.. तब लखनने उनके होठोको छोड दीया तो रजीया बहुत ही सर्मसार होते लताकी ओर देखने लगी.. तब वो बहुत सरमाइ.. ओर धीरेसे कहा..
 
रजीया : (धीरेसे) दीदी.. नीचे बहुत जलन हो रही हे.. अ‍ैसा लगता हे कीसीने बहुत बडा डंडा घुसा दीया हे..

लता : (मुस्कुराते गाल चुमते) बस रजुदीदी हो गया.. मुबारक हो.. आपने हमारे पतीका पुरा लंड अंदर लेलीया हे.. अब आपको कभी तकलीफ नही होगी.. बस.. कुछ ही देरमे सब ठीक होजायेगा.. अब तो आपके मजे ही मजे हे.. बस.. अ‍ेक बार मुजे भी ये दर्द जेलना हे.. लेकीन यहा नही.. तब हम सहेरमे हमारे बंगेलेपे होगे..

रजीया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या वाकइ पुरा अंदर हे..? देखना नीचे कुछ हुआ तो नही..?

लता : (मुस्कुराते होठ चुमते) अरे रजुदीदी कुछ नही हुआ.. बस थोडासा मामुली खुन नीकला हे.. समजोना आज सही मायनोमे आपकी सहागरात हुइ हे.. अब तो लखनपे पहेला हक आपका ही होगा.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाकर मुस्कुराते) नही दीदी.. ये आपको भी बहुत प्यार करते हे..

लता : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. हम दोनोका बराबर हक हे.. बस..? मेरा लखन तो इस मामलेमे बीलकुल अनाडी था.. उनको सब आपनेही तो सीखाया हे.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये आपको सब पता चल जायेगा.. दीदी.. अब कैसा लग रहा हे..?

रजीया : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. अब दर्द कम होगया हे..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. अब आप धीरे धीरे दीदीको चोदीये.. अबतो आपकी बले बले हे.. हें..हें..हें..

कहतो तीनो हसने लगे.. ओर लखन धीरे धीरे कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगा.. तब अ‍ेक बार फीर रजीया तावमे आने लगी.. वो धीरे धीरे मदहोस होने लगी.. उनकी आज तब अ‍ैसी चुदाइ नही हुइ थी.. उनको लखनसे चुदवाते इतना मजा आ रहाथा जीतना मजा देवायतके साथ चुदवाकर भी नही आया था.. रजीया अपनी कमर हीलाकर लखनका साथ देने लगी.. ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी..





अब रजीया पुरी तराह तावमे आचुकी थी.. तभी लता उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको भी चुस रही थी.. तब लखन हाथके बल उचा होते रजीयाकी जबरदस्त तरीकेसे चुदाइ कर रहा था.. तो कुछ ही देरकी जबरदस्त चुदाइके बाद रजीया अकडने लगी.. ओर लताको जोरोसे बाहोमे भीचते जडने लगी.. तब लखन अब भी जोरोसे कमर हीलाते रजीयाकी चुदाइ कर रहा था.. तो लखनकी स्टेमीना देखकर आज लता ओर रजीया दोनो ही खुस होने लगी..





अ‍ैसे ही अबतक रजीया दो बार जड चुकी थी.. फीर भी लखन बीना थके उनकी चुदाइ करता रहा.. आज चुदाइका दौर बहुत ही लंबा चला.. तब लखनने चोद चोदकर रजीयाका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. तभी वो अचानाक रजीयाके उपर जुक गया तो रजीया समज गइ.. ओर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपनी कमरको भी जटका देते लखनसे लीपलोक करलीया..





तब कुछही देरमे रजीयाको अपने बच्चेदानीमे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वो उतेजनासे कांपते लखनके साथ जडने लगी.. तब लखन रजीयाके सीनेपे ढेर हो गया.. तब रजीया उनकी पीठको सहेलाती रही.. आज लखन ओर रजीया दोनो ही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. रजीयाके सभी बाल बीखरे हुअ‍े थे.. आज सही मायनोमे वो सादी सुधा लग रही थी.. तब लखनका लंड अब भी अ‍ैसे तना हुआ रजीयाकी चुतमे था..

देखा तो लखन र्खराटे मारते सो गया था.. तो रजीया ओर लता दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने दखकर हसने लगी.. फीर रजीया ओर लताने मीलकर लखनको रजीयाके उपरसे हटाया.. तो रजीया जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर अपने नीकरसे चुतको पोछकर लंखनके लंडको भी साफ करने लगी.. तबतक लताने लखनको अच्छेसे सुला दीया था.. तब रजीया बेडसे उतरने लगी.. तो लताके दोनो पैर कांपने लगे.. ओर लताकी ओर देखते वापस बैड गइ..

लता : (पास बैठते) दी.. क्या हुआ..? कुछ तकलीफ हे क्या..?

रजीया : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. नीचे बहुत जलन हो रही हे.. मुजसे चला नही जायेगा..

तब लताने उनको सहारा दीया ओर दोनो धीरे धीरे बाथरुममे चली गइ.. तबतक रजीयाकी सारी सरम जा चुकी थी.. वहा दोनो साथमे सावर लेने लगी.. तो लता रजीयाकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगी.. फीर उनके तनमे साबुन लगाने लगी तो रजीया बहुत ही सरमाइ.. तभी रजीयाने भी हिंमत करते लताको साबुन लगा दीया.. फीर दोनो सावरके नीचे चीपककर खडी होगइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके बुब्सको मसलते साफ करने लगी..

लता : (सरमाते धीरेसे बुब्स मसलते) दीदी.. आजसे हम दोनो के बीच अ‍ेक नया रीलेशन हो गया हे.. अब आप मेरी सौतन होगइ हे.. तो अब हमे अ‍ेक दुसरेका अ‍ैसे ही खयाल रखना हे..

रजीया : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) ठीक हे दीदी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. कमसे कम हम अ‍ेक दुसरेकी आगको सांत तो कर सकेगे..

तभी अचानक लताने रजीयाके होठोपे अपना होठ रखदीया.. ओर मदहोस होकर चुमने लगी.. तो रजीयाभी मदहोस होने लगी.. ओर वो भी लताके बुब्सको मसलते लताका साथ देने लगी.. तब कुछ ही देरमे लता रजीयाकी चुतको अपने मुहसे खरोदने लगी.. तो रजीया फीरसे बहुत उतेजीत होगइ.. ओर आंख बंध करते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. तब कुछ ही देरमे रजीयाकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया..

तो रजीया सांत होगइ.. ओर बहुत सरमाने लगी.. तभी लता जटसे खडी होगइ.. ओर अपनी चुतमे उंगली घुसाकर अंदर बहार करने लगी.. उनकी उंगलीपे चुतसे नीकला खुन चीपग गया था.. तब कुछ ही देरमे लताभी जडकर सांत होगइ.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगइ.. फीर बेडपे साथ लेटकर अ‍ेक दुसरेके सामने मुह रखते अ‍ेक दुसरेसे चीपक गइ.. ओर सो गइ..
 
तो दुसरी ओर गांवमे आज बंसी भी सांतीको दो बार चोदकर उनसे चीपककर सो गया था.. आज सादीके बाद दोनोकी दुसरी रात थी.. जब रातको सांती बंसीके रुममे जा रही थी.. तब उसने हसते हुअ‍े जागृतीको भी साथ आनेको कहा.. तो जागृती जुठा गुस्सा करते नामे गरदन हीलाकर हसने लगी.. तो आज जया भी सामतभाइके साथ ही सो गइ थी.. तब जागृती भी आज अपने भाइके सपने देखते सोगइ..

तो दुसरी ओर आज श्रीधरने कामोतेजक गोली खाकर बहुत ही बेरहेमीसे जबरदस्त तरीकेसे जयश्रीको दो बार चोदलीया.. तो जयश्रीका अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला होगया था.. ओर वो तीसरी बार भी जयश्रीको चोदना चाहता था.. तब जयश्री पुरी तराह थक चुकी थी.. प्रेगनेन्ट होनेकी वजहसे वो श्रीधरको तीसरी बार जेलनेमे असमर्थ थी.. तो उसने तीसरी बार श्रीधरको चोदने नही दीया.. ओर श्रीधरसे चीपककर सो गइ..

तब उनको बरखा ओर जागृतीकी कही अ‍ेक अ‍ेक बातोपे सचाइ नजर आने लगी.. ओर मन ही मन चाहने लगी की डीवोर्सके बाद श्रीधरका रीस्ता भी उनकी मां ब्रीन्दाके साथ होजाये.. लेकीन उनको नही पता था की श्रीधर ओर ब्रीन्दाका रीस्ता पहेलेसे ही था.. ओर दोनोकी सादी भी हो चुकी थी.. तब घरकी उपर छतपे आज भी जीतुलाल वृन्दाको जोरोसे चोद रहा था.. ओर वृन्दा उछल उछलके जीतुसे चुदवा रही थी..





तो मुनाके घरपे भी यही हाल था.. मुना अब भी बरखाको तीसरी दुसरी बार चोद रहा था.. तब बरखाकी हालत भी पतली होचुकी थी.. लखनके सभी दोस्तोने जडी बुटी खाइ थी.. तो उनके कीसी भी दोस्तको जेलना इतना आसान नही था.. सबकी बीवीया दो बारमे ही ढेर हो जाती थी.. तो आज भी बरखा चुदवाते हुअ‍े मुनाको उनकी माके साथ सादी करलेनेकी बात कर रही थी.. ओर अ‍ैसेही रात बीत गइ..

आज हवेलीपे सबलोग जल्दीसे जाग गये थे.. क्युकी सबको आज जाना था.. तो आज लताने रजीयाको वही आराम करनेको कहा.. ओर उनकी जगाह वो खुद काम करने चली गइ.. तब दया ओर चंपाभाभीने उनको काम नही करने दीया.. सब लोग नहा धोकर तैयार होने लगे.. तो थोडी देरके बाद लखन रजीया भी कंपलीट हो गये.. तो आज पुनमको भी अपने घरपे जाना था.. तो उनका मुह भी लटका हुआ था..

सब लोग चाइ नास्ता करने टेबलपे आगये.. तो आज मंजु देवायतके पास ही बैठी थी.. तो पुनम ओर सृती बार बार लखनकी ओर देख रही थी.. लेकीन लखन आज भी उन दोनोकी ओर नही देख रहा था.. तब पुनम थोडी वीचलीत होने लगी.. आज लता ओर रजीया दोनो कीचनमे ही थी.. फीर दया लताने सबको चाइ नास्ता देदीया.. क्युकी रजीया अब भी थोडा लंगडाते चल रही थी.. तो उनको बहार आनेमे बहुत सरम आ रही थी.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुनीये सबलोग.. आज हमारा देवर सहेरमे रहेनेके लीये जा रहे हे.. तो आज पुनोदीदी भी अपने ससुराल जा रही हे.. तो मम्मी लोग भी दस बाराह दिनके लीये यात्रापे जा रही हे.. तो सबको अ‍ेक जरुरी बात बतानी हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) अरे हां बेटा बोलनां.. सबको क्या बात करनी हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते लखनकी ओर देखते) मोम.. आप सबतो जानती हे.. हमारे खानदानमे सभी मर्दोने कीतनी सादीया कीहे.. तो फीर इनमे हमारा देवरभी कैसे बाकात रेह सकता हे.. हें..हें..हें.. तो उसने भी दो सादीया ओर करली हे.. अ‍ेक सहेरमे ओर अ‍ेक यहा.. ओर इस बातपे हमारी लता भी सहेमत हे..

भुमीका : (हसते) अच्छा..? कोन हे वो खुस नसीब लडकीया.. जो हमारे लखनकी बीवीया हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) बुआ.. अ‍ेक तो जब वो सहेरमे पढते थे.. तब पुनमकी होस्टेलकी जो मालकीन हे वो.. जीनके साथ हालही मे हमारे लखन भैयाने सादी करली हे.. ओर दुसरी हमारी रजीया.. जो लताके साथ सादी हुइ उनसे पहेले ही दोनो गांधर्व सादी करचुके हे.. तो आजसे ये दोनो भी हमारे खानदानकी बहु होगइ हे.. तो बहुत जल्द हम यहा उनकी सहेर वाली बीवीको भी मीलेगे.. जब मम्मी लोग वापस आजायेगे..

कहा तो सबलोग खुस होकर लखनको बधाइआ देने लगे.. तब लखन बहुत ही सरमाने लगा.. ओर मुस्कुराते खडा होकर अपने रुममे चला गया.. तो सबलोग उनको देखकर हसने लगे.. तब रजीया भी कीचनमे बहुत सरमा रही थी.. तभी दया ओर चंपा भाभीने उसे गले लगाकर बधाइआ देदी.. तो रजीया भी सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. तब पुनम अ‍ैसेही गंभीर होकर कीसी सोचमे डुबी हुइ थी..

ना जाने क्यु.. आज उनको लखनके बारेमे सबकुछ जानते हुअ‍े भी मंजुकी बाते सुनकर अच्छा नही लग रहा था.. तो दुसरी ओर सृतीको भी मंजुकी बात सुनकर रजीया ओर राधीकासे थोडी ज्वेलेसी फील होने लगी.. दोनोको मनमे थोडा डर लग रहा था.. की कोइ लखनको इनसे छीन रहा हे.. पुनम सोचमे डुबी हुइ थी.. तब सृतीने उनके हाथपे हाथ रख दीया.. तो पुनम तंद्नासे बहार आगइ..

ओर मुस्कुराते नोर्मल होनेकी कोसीस करने लगी.. तब सृती भी पुनमकी मनो दसा समज गइ.. सबने चाइ नास्ता करलीया तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. तो सृती भी उनके पीछे पीछे चली गइ.. तब पुनम बेडपे बैठकर अपने चहेरे पे हाथ रखते रो रही थी.. तो सृती दरवाजा बंध करके पुनमके पास आकर बैठ गइ.. तो पुनम उनके कंधेपे सर रखकर रोने लगी.. ओर सृती उनके सरको सहेलाती रही..
 
सृती : (धीरेसे समजाते) दीदी.. क्या कर रही हे..? सम्हालीये अपने आपको.. अगर सबको पता चल गया तो सबको क्या कहोगी..?

पुनम : (रोते हुअ‍े) भाभी मुजसे गलती होगइ हे.. तो मे क्या करु..? वो तो हमारे सामने देखते भी नही हे.. तो मे उनकी माफी कैसे मांगु..?

सृती : दीदी.. अभी उनसे बात करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. दो तीन दिन हमसे रुठे हुअ‍े रहेगे.. फीर अपने आप ही बोलने लगेगे.. मे भी वहा जाकर उनको समजाउगी.. फीर फोनपे आपकी बात करवाउगी.. तब आप उनसे माफी मांग लेना.. देखना वो अपसे ज्यादा दिन दुर नही रेह पायेगे.. आपसे प्यार जो करते हे..

पुनम : (आंसु पोछते) नही भाभी वो अ‍ैसे नही मानेगे.. मुजे ही उनसे बात करनी पडेगी.. मैने आज तक कीसीपे हाथ नही उठाया.. तो मुजसे ये गलती कैसे होगइ..? गलती मेरी ही हे.. वो तो हमारी मस्तीया कर रहे थे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) पुनोदीदी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या हमारे देवरकी अ‍ैसी मस्तीया जायज हे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. वैसे देखा जायेतो अ‍ैसी मस्तीया जायज नही हे.. लेकीन हम भी तो दिलसे यही चाहती थी.. की हमारा देवर हमारी अ‍ैसीही मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट करे.. ओर हमारे घरकी तो बात ही कुछ ओर हे.. क्या हमको नही पता की हमारे साथ भवीस्यमे क्या होने वाला हे..? अगर हमे ये सही नही लगता तो हमे उसे तबही रोकना चाहीये था.. जब वो हमारे साथ फ्लर्ट करने लगे थे.. हमने उसे आगे क्यु बढने दिया..? भाभी.. कमसे कम हम दोनोके लीये सब जायज हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. बात तो आपकी भी सही हे.. तो फीर हम क्या करे..? दीदी.. तो क्या हमे इस रीस्तेको स्वीकार कर लेना चाहीये..? जो मंजु दीदीने कहा हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भाभी.. हमारे चाहने या ना चाहनेसे कुछ नही होगा.. हमे ये रीस्तेको स्वीकार करना ही पडेगा.. ओर वो भी दिलसे.. आपने मंजु दीदीकी बात नही सुनी..? अगर हमे अ‍ैसेही जवान रहेना हेतो हमारे पास दुसरा कोइ रास्ता भी तो नही हे..

सीर्फ लखन भैया ही नही.. हमे विजयके लीये भी तैयार रहेना पडेगा.. तब जाके हम हमारे स्वामीको मील सकेगी.. अगर हमारे देवरने अ‍ैसी थोडीसी मस्ती की तो हमे स्वीकार करलेनी चाहीये थी.. भाभी.. ये तो अभी सुरुआत हे.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ..

सृती : (हसते सामने देखते) दीदी.. तो क्या मे मानलु.. अब आप हमारे देवरके प्यारको स्वीकार करलोगी..?

पुनम : (सरमाते नजरे जुकाते) भाभी.. आपसे सच कहु..? मेने कल उसे चांटा मारा.. तब ही उनका प्यार स्वीकार करलीया था.. जब वो हमसे रुठके चले गये.. भाभी.. मे वो बात भी जानती हु.. जो मंजु दीदीने हमे नही कहा.. सुनकर आपको भी अच्छा नही लगेगा..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. क्या केह रही हो..? क्या आप मुजे बता सकती हो..? प्लीज.. बताइअ‍ेना.. मुजे सुनकर कोइ बुरा नही लगेगा.. आइ प्रमीस..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. ज्यादा तो नही बता सकती.. सीर्फ इतना केह सकती हु.. की अब हम दोनोको बडे भाइका प्यार बहुत कम.. मतलब कभी कभार ही मीलेगा.. अब हमे लखन भैयाकाही सहारा हे.. भाभी.. आगे चलकर हम दोनो लखन भैयाको पुरी तराह समर्पीत होजायेगी.. बस.. इतना ही केह सकती हु..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) बस.. इतनीसी बात..? दीदी.. तो फीर चलीये.. अब हमे इस रीस्तेको स्वीकार करना ही हे.. तो फीर हमारे देवरको मनाना कोइ मुस्कील काम नही हे.. मे उनसे बात कर लुगी.. देखती हु वो अब कब तक हमसे नाराज रहेते हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी.. देखना इनको मनाना.. मतलब इनमे खतरा भी हे.. जरा सम्हालके.. वरना मंजु दीदीकी बात सच होजायेगी.. हें..हें..हें.. कही सचमे उनकी पहेली चपटमे आप आ सकती हो..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. कोइ बात नही.. उनकी बाते सच होजायेगी नही.. सच ही होगी.. क्युकी आपको ओर उस कमीनीको सब पता चल जाता हे.. तो मुजे तो लगता हे हमारे देवरकी चपेटमे सबसे पहेले मे ही आउगी.. हें..हें..हें.. दीदी.. फीकर मत करो.. इसके लीये मे तैयार हु..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अपना खयाल रखना.. क्युकी उनका हमारे पतीसे बहुत बडा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे खडी होते) दीदी.. देखा जायेगा.. अगर हमारे पती ओर हमारी सौतनने ही सब छुट देदी हे.. तो अब हमे कीसका डर..? अ‍ेक सुहागरात ओर सही.. कमसे कम हमे सुहागरातकी फीलींग्स तो आयेगी.. हें..हें..हें.. चलीये बहार..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभी.. लगता हे आपने तो हमारे देवरसे मीलन करनेका पुरा मन बनालीया हे.. वैसे भी अब कुछ दिनो तक उनके पास ही तो रहेना हे.. वहा हमारे पती कहा आपको मीलेगे..? तो देवरसे ही मन बहेलाइअ‍ेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (दोनो बहारकी ओर जाते धीरेसे) हां दीदी.. सही कहा आपने.. अब सब तैय कर ही लीया हे तो क्यु पीछे हटना.. हम यही समजेगे की हमने दोनो भाइसे सादी करली हे.. ओर दोनो हमारे पती हे.. आप भी सब तैयारीया सुरु करदो.. मे आपका भी मीलन करवा दुगी.. कमीने वो आपको प्यार जो करते हे.. देखती हु.. वो कब तक आपसे दुर रेह पाते हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अब इसके अलावा कोइ रास्ता भी तो नही हे.. हें..हें..हें.. बस अ‍ेक बार मान जाने चाहीये.. वोतो अभी हमारे सामने तक नही देखते..

सृती : (हसते) देखगे.. देखेगे.. अब सब तैय कर ही लीया हे.. तो क्यु डरना.. चलीये..

बाते करते पुनम ओर सृती दोनो बहार आगइ.. तब दोनो ही मन ही मन लखनसे रीलेशन रखनेका मन बना चुकी थी.. ओर सृती तो इस बातको लेकर बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हो गइ थी.. क्युकी अब वो कही दिनो तक सीर्फ लखनके साथ ही रहेने वाली थी.. तब वहा सब लोग अपना अपना सामान बहार नीकाल रहे थे.. पुनम भी वापस जाकर अपना सामान लेकर बहार आगइ..
 
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