Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 62 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१४

तो धिरेन नीलमकी पीठसे हट गया.. तो नीलम अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर मन ही मन धिरेनको कोसती जटसे बाथरुममे चली गइ.. ओर चुतको साफ करके अपने आपको सही करने लगी.. फीर सरमाते नंगी ही बहार आगइ.. तो धिरेन भी बाथरुमे चला गया.. ओर अपने आपको सही करने लगा.. तबतक नीलमने अपने कपडे पहेन लीये थे.. ओर अपने बालोको सही कर रही थी.. फीर धिरेन भी बहार आकर कंपलीट हो गया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरीकी बाहोमे समा गये.. तभी.... अब आगे





धिरेन : नीलु.. कल हमारे मकानका रजीस्ट्रेशन हे.. अभी मेरे नामपे लोन हे.. ओर नोमीनेशनमे मेने तेरा नाम डाल दीया हे.. अब हम बहुत ही जल्द सादी करलेगे.. तुम तैयार रहेना..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. अभी मुजे तीन साल ओर पढना हे.. क्या हम बादमे सादी नही कर सकते..? हंम..? अभी तो मेरी मम्मी भी इधर हे.. तो कुछ दिन हमे सावधानी रखनी पडेगी..

धिरेन : (जटसे धीरेसे) अरे पागल होगइ हो क्या..? नीलु.. मे तेरे बीना नही रेह सकता.. मे जल्दसे जल्द तुमसे सादी कर लेना चाहता हु.. पढाइ तो तुम मेरे साथ रहेकर भी कर सकती हो..

नीलम : (थोडी परेसानीसे) धिरेन आप समजते क्यु नही..? हमे पुनम दीदीके बारे भी तो सोचना पडेगा.. अगर हम सादी करलेगे तो आप उनको क्या कहोगे..? बाय ध वे.. फीर पुनम दीदीके बारेमे आपने क्या सोचा हे..?

धिरेन : नीलु.. मुजे नही लगता मे उनके साथ रेह पाउगा.. क्युकी उनके आते ही.. हमारे बीच थोडी बहेस होगइ थी.. ये भी नही.. की चलो.. इतने दिनोके बाद पतीको मीली हु.. तो कुछ प्यारकी बाते करले.. अब मुजे ना पुजोकी परवा हे नाही मेरी मम्मीकी.. क्युकी अब वोभी उसी परीवारकी होकर रेह गइ हे.. नीलु.. मुजे नही लगता.. मे पुनोके साथ पुरी जींदगी बीता पाउगां.. मे उनको जल्द से जल्द डीवोर्स देना चाहता हु.. फीर हम दोनो सादी करलेगे.. क्या कहेती हो..?

नीलम : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) धिरेन.. देखना जो भी करो.. सोच समजकर करना.. इसमे कही मेरा नाम ना आये.. पहेले आप पुनम दीदीको डिर्वोस देदो.. फीर हम अ‍ेकाद दो सालके बाद सादी कर लेगे.. बस.. मुजे सीर्फ मेरी पढाइकी चीन्ता हे.. क्युकी मे भी आपके साथ जोब करना चाहती हु..

धिरेन : (थोडा परेसान होते) दो साल..? नीलु.. हम सादी तो कर ही सकते हे.. सादी करनेके क्या हर्ज हे..? फीर भले ही सादीके बाद तुम दो साल लखन भैयाके घरपे रहो.. हम सबसे हमारी सादी छुपायेगे.. जब तेरी पढाइ खतम होजाये तब तुम हमारे घरपे चली आना.. मे अ‍ेक दो दिनमे ही पुनोसे बात कर लेता हु..

नीलम : (थोडी मायुस होते) धिरेन.. फीर भी कुछ महिने तक इन्तजार करना पडेगा.. मे कोइ नीर्णय नही लेपा रही.. मेरी तो कुछ समजमे नही आ रहा.. की मे क्या करु..? क्युकी मुजे मम्मी पापाका सपना भी पुरा करना हे.. ओर लता दीदी ओर भावना मम्मीकी मुजपे पुरी नजर हे.. हमे इस बारेमे जल्द बाजी नही करनी चाहीये.. मुजे तीन साल लखन जीजुके साथ ही रहेकर पढना पडेगा..

धिरेन : (आस्चर्यसे देखते) मतलब..? नीलु.. तुम ये क्या बोल रही हो..? देखना बाबा मे तेरी वजहसे पुनोको डिवोर्स दे रहा हु.. क्युकी मुजे तेरे साथ जींदगी बीतानी हे.. पुनोके साथ नही.. तो तुम कुछ उल्टा सीधा मत सोचना.. तुम जब कहोगी हम सादी कर लेगे.. ओर मे तेरी अभीसे सब जीमेदारी उठानेके लीये तैयार हु.. तुजे कुछ भी चाहीये मुजे बोलना.. मे तुजे लेकर दुगा.. समजलो.. आजसे तुम मेरी बीवी ही हो..

नीलम : (मनमे खुस होते) धिरेन.. वो तो ठीक हे.. लेकीन देखना फीर मे आपसे बहुत खर्चा करवाउगी.. ये बीवी बहुत महेंगी हे.. अ‍ेक बार फीर सोचलो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) हां सोचलीया हे.. नीलु.. मे तुजे अपनी रानी बनाके रखुगा.. देखा नही.. मेने हमारे मकानमे भी वारीसमे तेरा नाम रख दीया हे.. तुजे जीतना भी खर्चा करनाहो करना.. मे मना नही करुगा.. बस.. तुम सादीके लीये मना मत करना.. वरना मे तेरे बीना नही जी पाउगा.. क्या तबतक हम अ‍ैसे मीलतो सकते हेनां..?

नीलम : (थोडी सरारत करते) नही.. अगर सादीसे पहेले कही कुछ उच नीच होगइ तो..? बाबा मे सबको क्या जवाब दुगी.. की ये बच्चा कीसका हे.. हें..हें..हें.. अब तो जो भी करना हे सादीके बाद..

धिरेन : (थोडा परेसान होते) अरे.. पागल हो गइ हो क्या..? अरे बाबा मे तेरे बीना नही रेह सकता.. तुम कहोतो मे आज ही पुनोको डीवोर्स दे दुगा.. फीर हम कोर्ट मेरीज करलेगे.. फीर तुम लखन जीजुके यहा ही रहेना.. फीर तो हमे मीलनेमे कोइ प्रोबलेम नही हेनां..?

नीलम : (मुस्कुराते) हां.. तो फीर ठीक हे.. आप हीतो केह रहेथे.. की लखन जीजु हमे मीलनेमे पुरी मदद करेगे.. तो आप उनसे बात क्यु नही करते..? हो सकता हे वो कोइ रास्ता नीकाले..

धिरेन : (मुस्कुराते) अरे हां.. नीलु.. अच्छा हुआ तुमने याद दिलवाया.. वो मेरे सालेसे ज्यादा मेरे दोस्त हे.. उसीने कहा हे.. की जब भी नीलुको मीलनेका मन करे.. मुजे बता देना.. मे तुम दोनोके मीलनका इन्तजाम कर दुगा.. नीलु.. मुजे लगता हे.. वो हमारी सादी करवानेमे भी हमारी मदद करेगे.. मे अ‍ेक बार उनसे बात कर लुगा..

नीलम : (मनमे) बुध्धु कहीका.. धिरेन.. तुम कितना बुध्धु हो.. तुजे क्या पता.. हमे कीसलीये मीलवाना चाहते हे.. वो हम दोनोके मीलनका नही.. खुदके मीलनका इन्तजाम कर रहे हे.. वो रोज तेरी इस बीवीको चोदेगा.. इनके हथीयारेके आगे आपकी तो नुनी दिखती हे.. ओर मुजे भी तो अपनी जींदगीमे पुरे मजे चाहीये.. बस.. अंदर डाला नही ओर थोडी देरमे ढेर होजाते हो..

मेरी भी तुमसे सादी करनेकी मजबुरी हे.. वरना मे लखन जीजुसे ही सादी करना पसंद करती.. अब देखते हे.. लखन जीजुसे कब मीलन होता हे.. मुजे लगता हे जबतक मम्मी इधर हे.. मुजसे मीलनेका वो कोइ रीस्क नही लेगे.. कमीने कहीके.. अभी तो मेरी मम्मीके पीछे ही पडे हे.. लगता हे.. वो मम्मीको भी जल्द चोद लेगे..

धिरेन : (होंठ चुमते) नीलु.. क्या सोचमे पड गइ..? तुम फीकर मत करो.. हम दोनो अ‍ैसे ही मीलते रहेगे.. जबतक हमारी सादी नही होजाती तबतक हम सावधानी बरतेगे.. क्या केहती हो..?





कहातो नीलम जेंप गइ.. ओर फोरन तंद्नासे बहार आगइ.. उसने धिरेनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. आज बातो ही बातोमे नीलमने अपने दिलकी बात कहेदी.. ओर उसे जो भी चाहीये धिरेन उनको देनेके लीये तैयार था.. यही सब सोचके नीलमने मन ही मन खुस होने लगी.. उनको अपने प्लानके मुताबीक कामयाबी मीलती नजर आने लगी थी.. लेकीन उसे पता नही था वो आनायस ही लखनकी ओर ढलने लगी थी..
 
नीलम : (कुछ सोचकर) धिरेन.. अगर लखन जीजुने खुद मददके लीये कहा हे.. तो मेरे खयालसे आपको अ‍ेक बार उनसे बात करलेनी चाहीये.. हो सकता हे वो हमारी मदद करे..

धिरेन : (मुस्कुराते) ठीक हे नीलु.. अब मीलेगे तब उनसे बात करलुगा..

ओर नीलुने मन ही मन दियाकी सलाहके अनुसार धिरेनके साथ सादी करनेका फैसला करलीया.. इसकी लीये उसे अपनी मम्मीको धोखा भी क्यु ना देना पडे.. नीलमको अपनी लाइफ सेटल होते दीख रही थी.. फीर दोनो दरवाजा बंध करते बहार आगये.. तो नीलमने अपने दुपटेसे अपना मुह ढक लीया.. ओर रुमको ताला लगाने लगी.. तबतक लखन अपना काम करते नीचे जा चुका था.. ओर अभी ओफीसमे बैठा था..

तभी नीलमने आजु बाजु नजर घुमाइ.. तो उनको खीडकीको थोडी खुली दीखाइ दी.. जीसे देखकर अ‍ेक बार तो नीलम भी गभरा गइ.. क्युकी वहा आसानीसे कोइ उन दोनोकी चुदाइ देख सकता था.. इस बारेमे नीलमने कुछ नही कहा.. ओर वो जटसे धिरेनको लेकर नीचे चली गइ.. ओर दोनो होस्टेलसे बहार नीकल गये.. तब दो आंखे उन दोनोको देखती रही.. जी हां.. ये हमारे लखन भैया ही थे..

जब वो ओफीसमे बेठे थे तब भी कीसी आवाजकी आहट सुनकर देख रहे थे.. तब नीलम ओर धिरेन आजु बाजु नजर घुमाकर उपरकी ओर जा रहे थे.. तब लखनके चहेरे पे कातील स्माइल आगइ.. ओर वो भी दबे पांव उनके पीछे चले गये थे.. ओर यहा वहा देखते उन्होने खीडकी थोडीसी खुली दीख गइ.. ओर वो अंदर जांकने लगे.. तो नीलम ओर धिरेन दोनो अपने कपडे नीकाल रहे थे..

तब लखनने अपना मोबाइल नीकाल लीया.. ओर खीडकीके पास केमेरा सेट करके विडीयो क्लीप बनाने लगे.. उसने धिरेन ओर नीलमकी पुरी चुदाइकी क्लीप बनाली.. फीर दोनोकी बाते भी रेकोर्ड करली.. फीर धिरेन ओर नीलमके रुमसे वापस बहार आनेसे पहेले.. वहासे खीसक लीये.. ओर ओफीसमे आकर दरवाजा बंध करते छुप गये.. तब नीलम ओर धिरेन भी नीचे आगये.. ओर बहार चले गये..

धिरेन ओर नीलम वापस स्कुलके गेटपे आगये.. ओर धिरेन नीलमको दो तीन दिनके बाद दुबारा मीलनेको कहेकर उसे स्कुलपे छोड देता हे.. ओर अ‍ेक बार फीर सादीका वादा करके धिरेन वहीसे सीधा अपने गांवकी ओर चला जाता हे.. तो इधर लखन भी अ‍ेक बार विडीयो क्लीप देखकर गरम होजाता हे.. तब उसे अपनी बहेन पुनमका खयाल आता हे.. ओर सृतीने उनके रोनेकी कही बातोसे उसे पुनमकी चीन्ता होने लगती हे..

कुछ सोचकर वो नीलम धिरेनकी विडीयो क्लीप पुनमको सेन्ड कर देता हे.. फीर अ‍ेक घंटेके बाद वो नीलमको लेने उनकी स्कुलपे चला जाता हे.. जब नीलम दियाके साथ स्कुलसे बहार आइ.. तब वो बहुत खुस नजर आ रही थी.. क्युकी आज पढाइके पहेले दिन ही उसने धिरेनसे अपनी प्यास बुजाली थी.. जब दोनो बहार आये तब लखन अपनी कार लेकर बहार ही खडा था.. ओर दोनो लखनके पास चली गइ..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. होगइ पढाइ..? क्या ये तेरी सहेली हे..? इनसे परीचय नही करवाओगी..?

नीलम : (सरमाकर हसते) जी.. जीजु.. इनसे मीलो.. मेरी बेस्ट फ्रेन्ड दिया हे.. जो होस्टेलमे मेरी रुम पार्टनर थी.. अब वहा रुममे अकेली रहेती हे..

लखन : (मुस्कुराते हाथ मीलाते) हाय दिया.. क्या वहा अकेला तो नही लग रहा..? वरना तुम भी हमारे घरपे नीलुके साथ रहेने आजाओ.. हें..हें..हें..

दिया : (सरमाकर मुस्कुराते) नही जीजु.. मे होस्टेलमे ही ठीक हु.. आप तो वो ही होनां..? जो वहा मेडमके पास आते जाते हे.. मेने कइ बार आपको वहा देखा हे.. लेकीन ये पता नही था की आप नीलुके जीजा हो..

लखन : (मुस्कुराते) जी.. अब आपकी मेडम भी मेरी बीवी होगइ हे.. हें..हें..हें..

दिया : (आस्चर्यये हसते) क्या..? आपने मेडमसे सादी करली..? हें..हें..हें.. लेकीन वो तो उमरमे आपसे काफी बडी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) जी.. बडी हेतो क्या हुआ.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते थे.. ओर हाल ही मे हम दोनोने सादी करली हे.. प्यारमे उमर नही देखी जाती.. सीर्फ दिल देखते हे.. क्युकी आपकी मेडम मुजे बहुत पसंद आ गइ थी.. हें..हें..हें..

दिया : (कातील नजरोसे हसते) वेरी इन्ट्रेस्टींग.. जीजु.. आप अच्छा मजाक कर लेते हे.. आपतो बहुत ही हेन्डसम ओर रंगीन मीजाजके हे.. हें..हें..हें.. आपको मीलकर बहुत खुसी हुइ.. चलो मे चलती हु.. अब तो मुलाकात होती ही रहेगी.. आपतो नीलुको ले गये.. तो मे अकेली पड गइ.. आज कल वही रुममे अकेली ही रहेती हु.. तो कभी नीलुको लेकर आइअ‍ेगा..

लखन : (कातील मुस्कानसे) जी.. जरुर.. आप इतना प्यारसे बुला रही हे.. तो आना ही पडेगा.. अगर नीलुको मीलनेका मन करे.. तो मुजे बोल दीजीयेगा.. मे नीलुको लेकर आजाउगा.. तो आपसे भी मुलाकात होजायेगी.. हें..हें..हें..

दिया : (कातील नजरोसे स्माइल करते) स्योर.. बाय जीजु.. हें..हें..हें..

कहेते दिया जाते जाते टेडी नजरसे लखनके पेन्टके उभारको देखने लगी.. तब उनका मुह खुलाही रेह गया.. ओर वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराते जाने लगी.. तो लखन भी दियाकी नजरको पहेचान गया.. ओर वो दियाकी ओर देखते नैन नचाने लगा.. तो दिया आंखोके इसारोसे लखनको उनके पेन्टकी ओर इसारा करते हसने लगती हे.. तो लखन सब कुछ समज गया.. की लडकी बहुत चालु हे..





लखन भी दियाकी ओर कातील स्माइल करते उनको आंख मार देता हे.. तो दिया सर्मसार होते कातील नजरोसे मुस्कुराने लगती हे.. ओर नीलमसे छुपकर फोन करनेका इसारा करते नीकल जाती हे.. ये सब देखकर आज पहेली बार नीलमको दियासे ज्वेलेसी फील होने लगी.. फीर लखन नीलमको कारमे बीठा देता हे.. ओर घरकी ओर नीकल जाता हे.. उसे घरपे जाकर आज सृतीके साथ स्कुटर लेने भी जाना था..

लखन : (कार चलाते मुस्कुराते) हां तो नीलुरानी.. कैसी रही आपके पहेले दिनकी पढाइ..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) जीजु.. बहुत अच्छी रही..

लखन : (नीलुकी ओर देखते मुस्कुराते) नीलु.. तो आखीर तुमने धिरेनसे मुलाकात कर ही ली.. तभी तो इतना खुस हो.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेक नजर डालकर सर जुकाते) जीजु.. वो.. वो.. सोरी..

लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते) अरे.. सोरी मत बोल.. नीलु.. तु डर मत.. मेने तुम दोनोको होस्टेलमे देख लीया था.. ओर दोनोकी बाते भी सुनली.. वो तुमसे सादी करना चाहता हेनां..?

नीलम : (सर जुकाते सरमाकर) हां जीजु.. वो.. वो.. मुजसे जल्द सादी करना चाहते हे.. स्कुलपे अचानक आ गये.. तो मुलाकात होगइ.. जीजु.. प्लीज.. ये बात घरपे कीसीको मत कहेना.. वरना हंगामा होजायेगा.. ओर मम्मी मेरी पढाइ भी रुकवा देगी.. प्लीज..
 
लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. नही कहुगा.. तो फीर मे तेरी मदद करुगा.. सीर्फ तेरे लीये.. तुजे हमारी सर्त तो याद हेनां..? तो फीर हमारे बारेमे तुमने क्या डीसाइड कीया..? हम आज मीले..?

नीलम : (नजर जुकाते सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. वो.. वो.. अभी मम्मी इधर हे.. क्या हम उनके जाने तक इन्तजार नही कर सकते..? हंम..? मुजे आपकी सभी बाते मंजुर हे.. बस.. देखना इस बारेमे कीसीको पता ना चले.. खास करके धिरेन जीजुको.. वरना मेरी जींदगी बरबाद होजायेगी..





लखन : (मनमे खुस होते) क्यु..? बहुत प्यार करती हो धिरेनसे..? ठीक हे.. तुम फीकर मत करो.. हमारे बारेमे कीसीको पता नही चलेगा.. इसीलीये तो तुजे नीचेका कमरा दिया हे.. ताकी हमे मीलनेमे आसानी रहे.. ओर फीकर मत करो.. पुरी जींदगी धिरेनको हमारे बारेमे पता नही चलेगा.. आइ प्रोमीस.. क्या तुम भी उनसे सादी करना चाहती हेनां..?

नीलम : (थोडा चोंकते सरमा गइ) जीजु.. वो.. वो.. हां.. प्लीज.. वो बहुत जीद करते हे.. की मे उनसे सादी करलु.. ये बात कीसीको कहीयेगा नही.. खास करके मेरी मम्मीको.. वरना वो मेरी पढाइ रुकवा देगी..

लखन : (कातील मुस्कानसे) नीलु.. फीकर मत कर.. ये बात कीसीको पता नही चलेगी.. बल्की मे खुद तेरी सादी धिरेनसे करवानेमे मदद भी करुगा.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बात याद रदना.. हम दोनोका तेरी सादीके बाद भी रीलेशन बरकरार होना चाहीये.. जब तक हम दोनो जीन्दा रहेगे.. ओर कुछ नही.. क्युकी तु मुजे बहुत अच्छी लगती हे..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु थेन्क्स.. वही होगा जो आप चाहते हो.. तो फीर मुजे आपके साथ जींदगीभर रीलेशन रखनेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. जीजु.. वो.. वो आपको जडी बुटी दी हे.. तो मुजे कुछ होगा तो नही..? क्युकी आपका बहुत बडा होगया हे.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) क्या..? तुजे भी पता चल गया..? नही नीलु.. मे हुना..? तुजे कुछ नही होगा.. बस.. पहेली बार थोडासा मामुली दर्द होगा.. जैसे तुजे धिरेनके साथ पहेली बार मीलन करते हुआ था.. तो मे सब सम्हाल लुगा.. तुम फीकर मत कर.. बस.. अब तो तुम हम दोनोके मीलनकी तैयारीया करो.. हम दोनो खुब मजे करेगे.. धिरेनको पता भी नही चलेगा.. अब हम दोनो बहुत ही जल्द मीलेगे..

कहा तो नीलम बहुत ही सर्मसार होते कातील नजरोसे लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. अब नीलम भी समज चुकी थी.. लखनके साथ उनको रीलेशन रखना ही पडेगा.. क्युकी लखन धिरेनसे सादीके मामलेमे उनकी मदद भी कर रहा हे.. तब नीलमको लखनके उपर बहुत प्यार आने लगा.. तो दुसरी ओर रमा भी उनका इस्तेमाल करते लखनके खानदानको ओर अपने पतीको धोखा देकर लखनसे माल नीकलवाना चाहती थी..

ओर नीलमकी सादी लखनसे करवाकर वो खुद अ‍ेसो आरामकी जींदगी जीना चाहती थी.. उपरसे लखनकी सास होकर उनके साथ रीलेशन भी रखना चाहती थी.. इसी बातपे नीलमको रमासे ज्वेलेसी होने लगी थी.. तो आज अ‍ेक बार फीर धिरेनके साथ हुइ मुलाकातके बारेमे लखनको पता चल गया था.. इसी बातसे नीलम थोडी चींतीत थी.. इसीलीये नीलमने आज कुछ सचाइ लखनको बताना उचीत लगा.. तभी..

नीलम : (सरमाकर नजरे जुकाते धीरेसे) जीजु.. मे आपसे अ‍ेक बात कहेना चाहती हु.. प्लीज.. देखना इस बारेमे धिरेन जीजुको पता ना चले.. की ये बात मैने आपको कही हे..

लखन : (नीलमकी ओर आस्चर्यसे देखते) नीलु.. कौनसी बात..? बता मुजे ये बात कीसीको पता नही चलेगी.. आइ प्रोमीस..

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) जीजु.. वो.. वो.. पुनम दीदीके बारेमें..

लखन : (जटसे) क्या पुनम दीदी..? नीलु.. क्या हुआ हे उनको..? कुछ हुआ हे क्या.. बता मुजे..

नीलम : (जटसे) अरे नही नही.. जीजु.. दीदीको कुछ नही हुआ.. दरसल.. वो.. वो.. धिरेन जीजु मुजसे सादी करना चाहते हे.. तो वो पुनम दीदीको जल्दसे जल्द डिवोर्स देना चाहते हे.. जीजु.. प्लीज.. ये बात कीसीको मत कहेना.. की ये सब मेने आपको कहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम उनकी फीकर मत करो.. वो सब मे सम्हाल लुगा.. अच्छा हुआ तुमने धिरेनकी सचाइ मुजे बतादी.. आज तुमने सचाइ बताकर लखनका दिल जीत लीया.. क्या तुम उनसे सादी करना चाहती हेना..? मे खुद तेरी सादी उनसे करवा दुगा.. जा जीले अपनी जींदगी..

नीलम : (मनमे खुस होते) जीजु.. थेन्क्स.. आइ प्रोमीस.. मे भले ही धिरेन जीजुसे सादी करलु.. लेकीन मे आपका साथ कभी नही छोडुगी..

आज दोनोने दिल खोलकर बात करली.. तब नीलम पुरे रास्ते लखनसे सरमा रही थी.. अब तो उसने भी धिरेनके साथ सादी करते लखनके साथ रीलेशनमे रहेनेका फैसला करलीया था.. ओर दोनो घरपे आगये.. तो नीलम फटाफट कारसे उतरकर सरमाती हसते हुअ‍े घरके अंदर चली गइ.. आज लखनसे बाते करते उनकी चुत बहुत गीली होचुकी थी.. क्युकी अब तो वो खुद लखनसे चुदवानेके लीये बेताब थी..

वो अंदर जाते ही अपनी बेग रखकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर फटाफट कपडे नीकालकर नंगी होगइ.. फीर कमोडपे बैठकर अांख बंध करते लखनके बडे लंडको इमेनींग करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. फीर धीरेसे उंगलीको चुतमे घुसा दीया.. ओर लखन उसे चोद रहा हे.. अ‍ैसा इमेजींग करते वो आंख बंध करते जोरोसे चुतमे उंगली अंदर बहार करने लगी.. ओर कुछ ही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक तेज फवारा नीकल गया..





तो दुसरी ओर पुनम ओर दया दोनो सामत भाइका सोक मनाकर वापस अपने गांव जा रही थी.. तभी पुनमके मोबाइलमे मेसेजका रींग टोन बजा.. तो पुनम अपना फोन देखने लगी.. देखा तो लखनका मेसेज आया था.. जीसे देखकर पुनम बहुत खुस होगइ.. ओर मुस्कुराते जटसे फोनके मेसेजको देखने लगी.. तो लखनने उनको अ‍ेक विडीयो क्लीप भेजी थी.. तो पुनम उसे डाउनलोड करते देखने लगी.. तो वो सोक्ट होगइ..
 
क्युकी लखनने उनको वोही होस्टेल वाली क्लीप भेजी थी जीसमे धिरेन नीलमकी चुदाइ कर रहा था.. जीसे देखकर पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर उसने जटसे अपना माथा पकडलीया.. तो दयाने उसे पुछा तो पुनमने दयाको भी वो क्लीप दीखाइ.. तो दया भी देखकर सरमा गइ.. फीर पुनमने अपना मोबाइल बंध कर दीया.. ओर कुछ देरतो वो धिरेनके उपर आग बबुला होने लगी.. फीर कुछ सोचकर मुस्कुराने लगी.. ओर दयाके कानमे कुछ कहेने लगी..

फीर दोनो अपने गांव पहोंच गइ.. गांव आते ही बसमेसे उतरते घरकी ओर चल पडी.. जो सामने ही कुछ दुरी पे उनका घर दीख रहा था.. तो दोनो पैदल चलते अपने घरकी जा ही रही थी तभी अचानक पुनमकी नजर अपने घरकी ओर गइ.. तो भीमाकी बीवी पायल हाथमे चाइकी कीटल लेकर उनके घरमे जा रही थी.. तो पुनम दयाका हाथ कपडकर वही रुक गइ.. ओर दयाको उंगलीसे अपने घरकी ओर दिखाने लगी.. तो..

दया : (सोक्ट होते) दीदी.. ये तो कल मुही पायल भाभी हे.. वो हमारे घरपे क्या करने जा रही हे..?

पुनम : दया बहेन जटसे अपना मोबाइल नीकालो.. सब कुछ सुट कर लेना.. लगता हे रंडी चाइके बहाने धिरेनसे चुदवानेके लीये जा रही हे.. सहेरमे कमीनी वो नीलु.. ओर यहा ये रंडी.. पता नही दोनोने इस कुतेमे क्या देखलीया हे.. दया बहेन.. आज दोनोको रंगे हाथो पकडनेका अच्छा मौका हे..

दया : (मोबाइल नीकालते) दीदी.. तब तो हमे थोडी देरके बाद जाना होगा.. क्युकी वो अभी अभी तो अंदर गइ हे.. हम पांच सात मीनीट यही इन्तजार करते हे.. क्या कहेती हो..?

पुनम : (हाथ पकडकर चलते) दया बहेन यहा नही.. हम छुपकेसे हमारे आंगनसे होते घरके पीछेकी ओर चले जायेगे.. ओर वही इन्तजार करेगे.. क्युकी नीचेकी रुमकी खीडकी बहारकी ओर हे तो सायद वही हमे कुछ दिखनेको मीले.. वरना दोनोकी बाते तो सुनही सकते हे.. चले.. ध्यान रखना कोइ आवाज ना आये..

कहेते पुनम दयाका हाथ पकडकर जटसे घरकी ओर चलने लगी.. तबतक पायल अंदर चली गइ थी.. ओर उसने घरका मेइन डोर भी बंध कर दीया था.. तो पुनम ओर दया जटसे चलकर घरके आंगनपे आगइ.. ओर आते ही दोनो धीरेसे दबेपांव घरके पीछे जाने लगी.. तभी अचानक पुनमने दयाका हाथ छोड दीया.. ओर दयाको चुप रहेनेका इसारा करते उसे घरके पीछे जानेका इसारा करने लगी..

ओर वो खुद घरके मुख्य दरवाजेकी ओर दबे पांव जाने लगी.. तो दया पीछे जाते मुडके देखने लगी.. तो पुनम दरवाजेके पास जाकर जुककर की होलसे देखने लगी.. तो अंदरका नजारा देखते चोंक गइ.. क्युकी पायल ओर धिरेन अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे थे.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम रहे थे.. तभी अचानक धिरेनने पायलको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर नीचेके रुमकी ओर चल पडा..

तो पुनम जटसे दबे पांव घरके पीछेकी ओर जाने लगी.. पीछे गइ तो देखा.. दया छुपकेसे खीडमे जांक रही थी.. ओर अपना मोबाइल नीकालते खीडकीसे लगा रही थी.. तब पुनम भी दबे पांव वहा पहोच गइ.. ओर वो भी अंदर जांकनेकी कोसीस करने लगी.. देखातो धिरेन ओर पायल दोनो फटाफट अपने कपडे नीकाल रहे थे.. जब दोनो नंगे होगये तो पायलने अपने बालोके जुठेको खोल दिया..

ओर बाल खुले रखते वो बेडपे आकर पीठके बल लेट गइ.. खुले बालोमे पायल बहुत सेक्सी ओर कयामत लग रही थी.. तभी धिरेनभी अपना लंड हीलाते पायलके पैरोके बीच बैठ गया ओर लंडको पायलकी चुतपे घीसने लगा.. तो पायल आंख बंध करते सीसकारीया करने लगी.. दोनोके उपर काम वासना पुरी तराह हावी हो चुकी थी.. तभी लंड गीला होते ही धिरेनने लंडको चुतके होलमे फसा लीया.. तभी..





पायल : (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. पहेले जट मेरे उपर आजाओ.. ओर अपना लंड घुसादो.. मुजसे नही रहा जाता..

धिरेन : (उपर लेटते) हां भाभी.. वैसे भी हमे जल्दीसे करना पडेगा.. क्युकी पुनो ओर दया बहेन कभी भी आ सकती हे..

कहेते पायलके उपर जुकते लेट गया तो पायलने धिरेनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोके होठ मील गये.. जैसे दोनोको जल्दी हो.. धिरेन पागलोकी तराह पायलके होठोको ओर उनके उरोजोको चुमते मसलने लगा.. ओर अ‍ेक ही जटकेमे अपना पुरा लंड पायलकी चुतमे घुसा दीया.. तो पायल हल्केसे चीखते धिरेनको जोरोसे चुमते अपनी कमर हीलाने लगी.. जैसे उनको भी जल्दीसे चुदवानेकी पडी हो..





ओर धिरेन भी कमर हीलाते पायलको चोदने लगा.. रुमके अंदर चुदाइका नंगा नाच होने लगा.. पायल सीसकारीया करते धिरेनको चुदवानेमे साथ देने लगी.. कुछ ही देरकी धका पैनी चुदाइके बाद पायल अकडने लगी.. ओर उसने अपनी चुतको कसाव देते धिरेनके लंडको अपनी चुतमे जकड लीया ओर धिरेनसे लीप लोक करते जडने लगी.. तो धिरेन भी बरदास्त नही करपाया..

ओर वो भी पायलके साथ जडने लगा.. दोनो ही अपने चरम सुख पे पहोंच गये.. पायलने अपने दोनो पैरसे धिरेनकी कमरपे आंटी लगाली.. ओर भारी सांसोसे धिरेनकी पीठको सहेलाती अ‍ैसे ही पडी रही.. तो धिरेन भी पायलके बुब्सपे सर रखते ढेर हो गया था.. इसी दौरान दयाने पुरी फील्म सुट करली थी.. तो पुनम भी दोनोकी चुदाइ देखकर काफी उतेजीत हो चुकी थी.. ओर दयाके पीछे खडी रहेकर अपनी चुतको सहेला रही थी.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१५

ओर वो भी पायलके साथ जडने लगा.. दोनो ही अपने चरम सुख पे पहोंच गये.. पायलने अपने दोनो पैरसे धिरेनकी कमरपे आंटी लगाली.. ओर भारी सांसोसे धिरेनकी पीठको सहेलाती अ‍ैसे ही पडी रही.. तो धिरेन भी पायलके बुब्सपे सर रखते ढेर हो गया था.. इसी दौरान दयाने पुरी फील्म सुट करली थी.. तो पुनम भी दोनोकी चुदाइ देखकर काफी उतेजीत हो चुकी थी.. ओर दयाके पीछे खडी रहेकर अपनी चुतको सहेला रही थी.. तभी.... अब आगे

दया : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. दोनोका सुटींग हो गया..

पुनम : (धीरेसे कानमे) दया बहेन चलो अंदर.. आज दोनोको रंगे हाथ पकडनेका अच्छा मौका हे.. अ‍ैसा मौका बार बार नही मीलता.. आप इस क्लीपको मेरे फोनपे सेन्ड करदो.. चलो..

दया : (हाथ पकडकर थोडी दुर लेजाते धीरेसे) नही दीदी.. अभी पकडेगे तो बडा हंगामा होजायेगा.. हमे दिमागसे काम लेना हे.. अगर जगडा बढ गया तो हमे रातको ही वापस जाना होगा.. ओर बडे भैया ओर लखन भैया भी नही हे.. तो रातको अकेले जाना ठीक नही हे.. हम जैसे भी करते आजकी रात नीकालते हे.. आप जीजुको सुबह ये क्लीप दीखाकर बात कर लेना.. तबतक हो सकता हे सुबह तक लखन भैयासे भी बात होजाये..

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. बात तो आपकी सही हे.. ये लखन भैयासे बात करनेका अच्छा मौका हे.. हम अ‍ैसा ही करेगे.. तो फीर अभी तो हमे इस कुतीयाको जाना देना पडेगा.. हम धिरेनको सुबह ही नीपट लेगे.. दया बहेन.. आज रात आप हमारा बोरीया बीस्तरा बांधलो.. हो सकता हे हमे सुबह ये घरको छोडना पडेगा..





दया : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. आपकोतो सबकुछ पता चल जाता हे.. क्या सचमे सुबह आप जीजुसे अलग होजायेगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. मेरी मंजील यहा धिरेन नही हे.. लेकीन हम इतनी जल्दी अलग हो जायेगे इतनी उमीद नही थी..

दया :(मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर हमे थोडी देर यहा वेइट करना पडेगा..

कहातो पुनम वापस धीरेसे दबे पाव खीडकीके पास चली गइ.. ओर अंदर छुपकेसे जांकने लगी.. तो पायल खडी रहेकर अपना पेटीकोट पहेनकर ब्लाउस पहेन रही थी.. तब धिरेन अपने कपडे पहेनते उनके पीछे चला गया.. ओर पीछेसे ही पायलको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके गलेको चुमने लगा.. तो पायल मदहोस होते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर ब्लाउसके बटन बंध करके धिरेनकी ओर पलटकर उनकी बाहोमे समा गइ..





पायल : (होंठ चुमते) जानु.. मत छेडोना.. फीर मुजसे रहा नही जायेगा.. ओर अभी आपकी बीवी भी आजायेगी..

धिरेन : नही डार्लींग.. अब आजाये तो भी उनसे डरनेकी जरुरत नही हे.. क्युकी मे उनको डिवोर्स दे रहा हु..

पायल : (चोंकते) अरे..? पागल होगये हो क्या..? कीतनी खुबसुरत बीवी मीली हे आपको..? कही ये सब आप मेरे लीये तो नही कर रहे..? देखना बाबा अगर आपके भाइको पता चला तो वो तो मुजे जानसे मार देगे..

धिरेन : (मुस्कुराते गाल चुमते) अरे नही नही भाभी.. आप गलत समज रही हे.. मे ये सब आपके लीये नही कर रहा.. बीवी अगर खुबसुरत होती हे तो भी कुछ नही होता.. अ‍ैसा प्यार भीतो मीलना चाहीये जो मुजे आपसे मीलता हे.. (थोडा जुठ बोलते) मुजे पता हे.. आप भीमा भाइको नही छोड सकती.. वरना मे आपसे ही सादी कर लेता.. हें..हें..हें..

पायल : (सरमाते धीरेसे) हटो पागल.. अगर पहेले मीले होते तो मे जरुर आपसे सादी करलेती.. देवरजी.. देवरानी कीतनी खुबसुरत ओर अच्छी हे.. कीसी अप्सरासे कम नही लगती.. तो फीर आप उसे क्यु छोडना चाहते हो..? मुजे नही लखता वो आपको प्यार नही देती होगी.. दोनोके बीच जमती नही हे क्या..? की उनका कही ओर चकर हे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. यही समजलो.. क्युकी वो मुजे ज्यादा सेक्स नही करने देती.. मुजे लगता हे वो कीसी ओरको प्यार करती हे.. ओर उसने मुजसे कीसी मजबुरीमे सादी की हे.. मुजे तो सक हे अभी जो उनके पेटमे बच्चा पल रहा हे.. सायद वो भी मेरा नही हे..

पायल : (सोक्ट होते) देवरजी.. ये आप क्या अनाप सनाप बोल रहे हे..? मेरी देवरानी अ‍ैसी दिखती तो नही हे..? सायद आपको कुछ गलत फेहमी हे.. ओर अगर वो प्रेगनेन्ट हे.. तो फीर वो आपको डिवोर्स क्यु देगी..?
 
धिरेन : (कातील मुस्कानसे) भाभी.. देखना वो जरुर देगी.. मेरे पास पुरा प्लान हे.. ओर मेने तो मेरे डिवोर्स पेपर भी रेडी रखे हे.. बस.. मौका मीलते ही उनसे साइन करवा लुगा..

पायल : (साडी पहेनते) देवरजी.. बडे कमीने हो आप.. कीतनी अच्छी बीवी मीली हे आपको.. मुजे लगता हे.. उनको छोडनेका कारण कुछ ओर ही हे.. आपकी मम्मीकी ननंद हेनां.. आपके भाइ केह रहे थे उनके दोस्त तो वहाके राजा हे.. वो बहुत रहीस हे.. ये उसीकी बहेन हेनां..? तो फीर क्यु छोड रहे हो..?

धिरेन : (थोडा गुसेसे) भाभी.. आपको पता नही उन कमीनोने हमारे साथ क्या कीया.. उसने मेरी मम्मीको अपने जुठे प्यारमे फसाकर फायदा उठाया.. मेरी गैर हाजरी मे रोज आकर मेरी मम्मीको ठोकते थे.. तभी मैने ठान लीया था.. की मे भी इनकी बहेनको ठोकुगा.. ओर उसे प्रेगनेन्ट करके छोड दुगा.. ताकी कमीनेको पता चले.. की कीसीकी मांको फसाकर ठोकनेमे क्या होता हे.. लेकीन कमीनीने हमारी सादीसे पहेले ही मुजे सेक्स करनेको मना करदीया.. ओर मुजे मजबुरन उनसे सादी करनी पडी..

पायल : (कपडे पहेनकर पलटते) हंम.. तो ये बात हे.. देवरजी.. बुरा मत मानीयेगा.. मे तो आपको अ‍ेक अच्छा इन्सान समजती थी.. लेकीन आपकी सोच इतनी घटीया होगी मुजे नही पता था.. पता हे मैने आपसे क्यु रीलेशन रखा..? क्युकी हम ओरतोकी अ‍ेक जरुरत होती हे.. जो मुजे मेरे पतीसे नही मीलती.. ओर मुजे तो अ‍ेक बच्चेकी चाहत हे.. सोचा मे आपसे रीलेशन रखते अपनी चाहत पुरी करुगी.. लेकीन आपतो..

धिरेन : (कपडे पहेनकर पास आते) नही भाभी.. आप मुजे गलत समज रही हे.. मे आपसे सचमें प्यार करता हु..

पायल : (थोडी दुर जाते) देवरजी.. बुरा मत मानीयेगा.. क्या आप प्यारका मतलब भी जानते हे..? प्यार तो वो होता हे.. जो अ‍ेक दुसरेके प्रती समर्पीत होते हे.. ओर अ‍ेक दुसरेके लीये त्याग भावना रखते हे.. ना ही आपकी तराह दुस्मनी नीकाले.. आप मुजसे प्यार करते हेनां..? चलो मे आपके भाइको छोड दुगी.. वैसे भी आप अपनी बीवीको डीवोर्सतो देही रहे हो.. करलो मुजसे सादी.. मे वादा करती हु जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी.. कहीये.. हम कब कर रहे हे सादी..?

धिरेन : (थोडा सकपकाते) अरे भाभी.. ये क्या बात हुइ..? इतनी जल्दी कैसे..? मुजे थोडा सोचनेका वक्ततो दीजीये.. ओर मे भीमाभाइको कैसे धोखा दे सकता हु..?

पायल : (अ‍ेक नजरसे देखते) क्यु.. ? अभी तो आपने कहानां..? की मे आपसे सचा प्यार करता हु..? अपने भीमा भाइकी बीवीको ठोक तो रहे हो.. तो ये धोखा नही हे..? लेकीन उनसे सादी नही कर सकते.. उनकी बीवीके साथ बीस्तर गरम करके भीमा भाइको धोखा तो दे रहे हे.. हंम..? तुम मर्द जातको मे अच्छी तराह जानती हु.. आप लोगोको सीर्फ मजे करने हे.. आप लोग ओरतोको सीर्फ मजे करनेका साधन समजते हे.. देवरजी.. आपको मेरी कसम.. सच बताओ आप देवरानीको कीसके लीये छोड रहे हे..?

धिरेन : (कंधेपे हाथ रखते) भाभी.. कसम मत दो.. मे.. मे.. मेरे दुसरे जीजुकी लडकीसे प्यार करता हु.. नीलम नाम हे उनका.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे बहुत प्यार करते हे.. ओर हम दोनो आपसमे सादी करना चाहते हे..

पायल : (सामने देखते) हंम..? अब समजी.. की आप देवरानीको क्यु छोडना चाहते हो.. कीतने घटीया इन्सान हो आप.. अ‍ेक लडकीके लीये बेचारी अ‍ेक मासुम बीवीपे जुठा इल्जाम लगाते आपको सरम नही आइ..? कल अगर आपने उस लडकीसे सादी करली.. ओर उसे हम दोनोके रीस्तोके बारेमे पता चल गया.. जीनकी वजहसे वो आपको छोडके चली गइतो..? तो फीर आप क्या करोगे..?

धिरेन : (बाहोमे भरते) नही भाभी.. इनको हमारे रीस्तेके बारेमे कभी पता नही चलेगा.. क्युकी उनको मे सहेरमे मेरे दुसरे घरपे ही रखुगा.. ओर यहा तो आप हे ही.. हें..हें..हें..

पायल : (दुर हटते) हंम.. दुर रहो मुजसे.. मतलब यहा आप मुजे अपनी रखेलकी तराह रखना चाहते हे.. की जब चाहा आप यहा आकर मुजे ठोक सके.. देवरजी.. मे कोइ रंडी नही हु.. जीसे जब चाहा यहा आकर भोग लीया.. मेरा आपके साथ रीलेशन रखनेका कुछ ओर ही कारण था.. ताकी मुजे लोगोके बांजके ताने सुनना ना पडे लेकीन आजसे हम दोनोका रीस्ता खतम.. आजके बाद मुजे फोन भी मत करना..

धिरेन : (बाहोमे भरते) भाभी.. मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. मे सचमे आपसे प्यार करता हु.. अगर आप कहोगी तो हमारा बच्चा भी होगा.. मे आपको कभी नही छोडुगा.. आइ प्रोमीस..

पायल : (धका मारते दुर जाते) मत छुओ मुजे.. मुजे अफसोस हेकी मेने आपके साथ रीलेशन रखा.. अरे वो मेरी देवरानी तो बेचारी कुछ जानती भी नही हे.. वो कीतना प्यार करती हे आपसे.. ओर आपकोतो पता हेनां आपकी मम्मी अ‍ेक विधवा थी.. जो इतने बरसो तक अपनी इच्छाओको दबाये रखी थी..

अगर इनको कीसी मर्दसे थोडासा प्यार मील भी गया तो क्या बुराइ हे..? क्या उसने आपकी मम्मीको रंडीकी तराह इस्तमाल कीया..? नहीनां..? अरे उन दोनोका प्यार तो सचा था.. जो उसने आपकी मम्मीसे सादी भी करली.. ओर आज वो अ‍ेक सुहागनकी जींदगी गुजार रही हे.. कभी वहा जाकर देखना वो कीतनी खुस हे..

धिरेन : (पास आते) भाभी.. प्लीज..

पायल : (थोडा गुस्सेसे) मत छुओ मुजे.. मुजसे दुर रहो.. मे कोइ रंडी नही हु.. जो आप समज रहे हे.. आजके बाद हम दोनोका रीलेशन खतम.. मुजे कभी कोल भी मत करना.. मुजे तो आपकी बीवीपे तरस आ रही हे.. जीनका तुम जैसे घटीया इन्सानसे पाला पडा हे.. जा रही हु में..

कहेते पायल गुस्सा करते बहार जाने लगी.. तो पुनम दोनोकी बाते सुनकर सोक्ट होगइ.. ओर वो दोडकर आगेकी ओर आते दरवाजा खटखटाने जा ही रही थी तभी पायलने दरवाजा खोल दीया.. तो सामने पुनमको देखकर चोंक गइ.. ओर थोडा गभराने लगी.. तभी पुनम उनका हाथ पकडकर वापस अंदर ले गइ.. ओर पीछे दया भी अंदर आगइ.. तब पायल सीर्फ डरते पुनमकी ओर ही देख रही थी.. तभी..
 
पुनम : (प्यारसे गले लगाते) भाभी.. थेन्क्स.. मुजे माफ कर दीजीये.. मैने आपको कीतना गलत समजा था.. मेने सोचा थाकी आप अ‍ेक हवसखोर ओरत हे.. जो मेरे पतीको फसाया हे.. लेकीन मे गलत थी.. मेने आप दोनोकी सभी बाते सुनली.. हवसखोर आप नही मेरा पती हे..

पायल : (आंख गीली करते) नही देवरानीजी.. मे हवसखोर नही हु.. ये सब मेने अ‍ेक बच्चेके लीये कीया था.. जो इस धोखे बाज नामर्दका काम नही हे.. आज मेने देखली इनकी मर्दानगी.. जो अ‍ेक ओरतको सीर्फ मजा करनेका साधन समजता हे.. इनकी सोच कीतनी घटीया हे..

पुनम : (गले लगते) बस.. बस भाभी.. अब कुछ मत बोलीये.. मेरे पती हे वो.. मेने आप दोनोकी पुरी बात सुनली हे.. अब जो भी हुआ सब भुल जायेइये.. मुजे आपसे कोइ गीला सीकवा नही हे.. आपको बच्चा चाहीनां..? मे वादा करती हु.. अब आप बांज नही रहेगी.. मे आपको अ‍ेक बच्चा दिलवाउगी..

पायल : (जटसे अलग होते) नही देवरानीजी.. ये आप क्या बोल रही हे..? नही चाहीये मुजे बच्चा.. ओर कमसे कम इस कमीनेसे तो बीलकुल नही..

पुनम : (अलग होते) भाभी.. अब आप आरामसे घर जाइये.. मे कल सुबह अपने घर जानेसे पहेले आपको मीलकर जाउगी.. तब आपको सब कुछ बता दुगी.. जाइअ‍े..

पायल : (आस्चर्यसे देखते) देवरानीजी..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अब देवरानीजी नही.. दीदी कहीये.. क्युकी कलसे मे इस आदमीकी बीवी नही रहुगी.. वो जहा कहेगे साइन करदुगी.. ओर गभराइअ‍े मत.. इस रीस्तेके बारेमे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. विस्वास कीजीये मुजपे..

पायल : (जटसे बहार नीकलते) दीदी.. थेन्क्स..

कहेते पायाल बीना मुडके धिरेनकी ओर देखे बगैर बहार नीकल गइ.. ओर अपने घर चली गइ.. तबतक धिरेन रुमके दरवाजेके पास खडे रहेकर सोक्ट होते सबकुछ देखता रहा.. उसे पता ही नही चला की बातो ही बातोमे इतना कुछ हो गया.. धिरेनको पता चल गयाकी उनकी सारी करतुत पुनमको पता चल गइ हे.. अब धिरेनके पास सचाइका सामना करनेके अलावा कोइ चारा नही था..

तो वो भी पीछे हटनेके मुडमे नही था.. ओर पुनमसे जगडा करके उसे नीलमकी सारी बाते बता देना चाहता था.. लेकीन ये तो पुनम थी.. उसे सबकुछ पता थाकी आगे क्या होने वाला हे.. वो धिरेनको कंट्रोल करना अच्छी तराह जानती थी.. धिरेनको भी लगाकी अभी पुनम इनके साथ जगडा करने लगेगी.. लेकीन पुनम कुछ नही बोली.. ओर वो धिरेनकी ओर देखे बीना चुपचाप उपर अपने कमरेमे चली गइ..

तो धिरेन भी पुनो.. पुनो.. पुकारता उपर पुनमके पीछे चला गया.. तो रजीया अपने करमेमे जाकर फ्रेस होकर बहार आगइ.. ओर कीचनमे जाकर रातका डीनर बनानेकी तैयारीया करने लगी.. तो धिरेन थोडा गभराते पुनमके पीछे पीछे अपने रुममे चला गया.. तो पुनम बाथरुममे फ्रेस होने चली गइ.. फीर कुछ देरके बाद पुनम चेन्ज करके नीकली.. ओर धिरेनको बीना कुछ कहे नीचेकी ओर चली गइ..

तो धिरेन पुनमके इस बरतावको देखकर सन्न रेहते उनको मुह फाडते देखता ही रेह गया.. ओर वो भी पुनमसे बात करनेके लीये पुनमके पीछे नीचे चला गया.. देखा तो पुनम ओर रजीया कीचनमे खाना बनानेकी तैयारीया कर रही थी.. वो कीचनके पास पुनमसे बात करनेके लीये खडा रहा.. लेकीन पुनमने उनके सामने तक नही देखा.. तो धिरेन तीलमीलाने लगा.. पुनम कुछ लेने दयाके रुममे गइ..

तो धिरेन वहा भी चला गया ओर दरवाजेके बीच खडा रहा.. तो पुनम उनके सामने आकर आंख बडी करते देखने लगी.. तो धिरेन थोडा डरते साइड हो गया.. तो पुनक बहारकी ओर जाने लगी.. तभी..

धिरेन : (थोडा जोरोसे) पुनो.. क्या हो गया हे तुजे.. मुजसे बात करो..

पुनम : (अचानक पीछे मुडते गुस्सेसे) क्या बात करु..? (जोरोसे चीलाते) मे तुमसे क्या बात करु..? हंम..? देखो धिरेन.. मुजे जो जानना देखना था देख लीया.. अभी तुमसे बात करनेका मेरा मुड नही हे.. कीतने कमीने हो तुम.. जाओ मुजसे तुमसे कोइ बात नही करनी..

धिरेन : (थोडा गुस्से) देखो पुनो.. तुम मुजसे इस तराह बात नही कर सकती.. मे पती हु तेरा..

पुनम : (अदब लगाते गुस्सेसे) अच्छा..? तुम पती हो मेरे..? थु.. तुमको पती कहेनेमे भी सरम आती हे.. देखो अभी मुजसे बात मत करो.. मेरा जगडा करनेका कोइ मुड नही हे.. अब जो भी बात होगी सुबह होगी.. समजे..? अभी खाना बन जायेगा.. चुपचाप खालेना ओर सो जाना.. मे यहा दया बहेनके पास सोजाउगी..

कहेते पुनम धिरेनकी ओर घुरते वापस कीचनमे चली गइ.. तो धिरेन मुह फाडते पुनमको देखता ही रहा..? क्युकी वो भी जानता थाकी अब बाजी बीगड चुकी हे.. जो पुनम उनके साथ इस तराहसे बाते कर रही हे.. जब खाना बन गया तो पुनमके कहेनेपे दयाने आज भी धिरेनकी सब्जीमे दो नींदकी गोली डालदी.. ताकी धिरेन चुइनकी नींद सोजाये.. ओर रातमे कोइ हंगामा ना करे..

तो दुसरी ओर नीर्मला भुमीका चंदा ओर सरलाकाकी भी हरीद्वार पहोंच चुके थे.. जहा सबने राजीवकी अस्थीयाका विसर्जन कीया.. फीर वहा आजु बाजुके सभी तीर्थ स्थानोके दर्शन करने चले गये.. फीर साम होते ही चारो वापस अपनी होटलकी ओर आ रहे थे.. तब चंदाको रास्तेमे ही उल्टीया होने लगी.. तो नीर्मला गभरा गइ.. ओर तीनो चंदाको लेकर वहा पासकी कोइ लेडीसकी होस्पीटलपे चले गये..

तो वहा लेडी डोक्टरने चंदाको चेक कीया.. ओर उनको प्रेगनेन्ट होनेकी बात कही.. तो नीर्मला भुमीका ओर सरलाकाकी तीनो ही खुस होगये.. तब चंदाने अपने पास रखी कुछ दवाइआ नीकालकर दीखाइ तो वहाकी डोक्टरने उसी दवाइमेसे गोली खीलाइ.. ओर चंदाको कुछ सुचनाये देदी.. फीर चारो होटेलमे आगइ.. तो आते ही नीर्मलाने फोन लगाकर मंजुसे बात करली.. ओर चंदाके प्रेगनेन्ट होनेकी खुस खबरी सुनाइ..

तो दुसरी ओर मुम्बइमे भी सुधीरकी तबीयतमे काफी सुधार हो रहा था.. सुधीर पहेलेसे बीलकुल अलग दीख रहा था.. तो चारु ओर नीशा दोनो ही इनकी देख भाल करते उनकी टांग खीचाइ करते मस्तीया कर रही थी.. जीसे सुधीर बहुत ही सरमा जाता.. ओर दोनोके उपर जुठा गुसा करने लगता.. सुधीरके सरीरमे काफी बदलाव हो रहा था.. धीरे धीरे करते उनके स्तन बढ रहे थे.. ओर वो अ‍ेक पुर्ण ओरत होने लगा था..

तो वहा भी अ‍ेक अ‍ेक दिनके अंतरालमे नीशा ओर चारुको उल्टीया हुइ.. तब दोनोने वही होस्पीटलमे चेक करवाया तो पता चला दोनो ही इस वक्त प्रेगनेन्ट होचुकी हे.. तब दोनोही बहुत सरमाइ ओर उसने ये बात सुधीरको कही.. तो सुधीर उन दोनोको देवायतको लेकर छेडने लगा.. तो चारु ओर नीशा दोनोही सर्मसार होते सुधीरको बाजुमे मुका मारने लगी.. वहा अ‍ैसेही हसी मजाक चलता रहा..

तो दो दिनसे रश्मी ओर वंदना भी सहेरमे टीनाके घरपे थी.. टीना खुद अपनी कार लेकर दोनोको अपने घरपे लेगइ थी.. फीर टीनाने दोनोको अपनी बुटीक दीखाइ.. ओर वहा अलग अलग जगाहपे खुब घुमाया.. अब तीनो ही अ‍ेक सहेलीकी तराह अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते धमाल करने लगी थी.. तो रश्मीके साथ वंदना भी टीनाके साथ काफी धुल मील गइथी.. ओर वो टीनाको दीदी दीदी कहेकर बुलाने लगी थी..
 
तो इधर सहेरमे भी सृती कबसे ६ बजनेका इन्तजार कर रही थी.. आज वो लखनके साथ स्कुटर लेने जाने वाली थी.. तो वो बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हो रही थी.. तब उनको भी थोडा अजीब लग रहा था.. की वो लखनके साथ जानेके लीये इतनी बेताब क्यु हो रही हे..? कही उसे भी तो लखनसे प्यार नही होगया..? यही सब सोचते ६ बज गये.. तो सृती फटाफट अपनी रीसेपनीस्टको सुचना देकर अपनी कार लेकर नीकल गइ..

ओर घरपे आगइ.. देखा तो लखन होलमे बेठकर कीसीसे फोनपे बीजनेसकी बाते कर रहा था.. तो सृती उनकी ओर देखकर स्माइल करती फटाफट उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर चेन्ज करके बाथरुममे घुसकर फ्रेस होने लगी.. फीर नहा धोकर अच्छेसे बाल बनाते तैयार होने लगी.. जैसे अपने बोय फ्रेन्टके साथ डेटपे जा रही हो.. उन्होने आज जीन्स ओर सोर्ट ज्ञीसर्ट पहेनली..

ओर अपने होठोपे अच्छेसे लीपस्टीक लगाकर गालोपे लाली लगाते अपने आपको आयेनेमे देखते सजाने लगी.. इस ड्रेसमे आज सृती बहुत ही कयामत के साथ साथ वो अ‍ेक छोटी लडकीकी तराह लग रही थी.. ओर वो ढेर सारा मेकअप करके नीचे आगइ.. तो लता तो उनको देखते ही खुस होगइ.. ओर उनके गले लग गइ.. तो रमाको सृतीको देखकर थोडीसी जलन होने लगी.. क्युकी वो लखनके साथ जा रही थी.. तब इस वक्त लता ओर रमा घरका सामान सेट कर रही थी.. तभी..

रमा : (हसते) वाह देवरानीजी.. क्या कयामत लग रही हे.. कही आज हमारे नंनदोयपे बीजली गीरानेका इरादातो नही.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे) क्या भाभी आपभीनां.. वो मेरे देवर हे.. हमारे लीये आपके बडे देवर ही ठीक हे.. क्या तो हम बाजारमे अ‍ैसे ही जायेगे.. मत भुलो.. हम स्कुटर लेने बडे शो रुम मे जा रहे हे.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. आप भाभीकी बातोका बुरा मत मानीयेगा.. वोतो आपसे मजाक कर रही थी.. लेकीन आज आप सचमे बहुत खुबसुरत लग रही हे.. बीलकुल परीकी तराह.. अ‍ेकदम छोटी.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) लता.. थेन्क्स.. तुम फीकर मत करो.. मुजे भी पता हे वो मजाक कर रही हे.. चलो हम चलते हे.. कहा हे हमारे देवर..

लखन : (फोन रखकर खडा होते सृतीको देखताही रेह गया) भाभी.. मे यही हु.. आ रहा हु.. चलीये..

सृती : (मुस्कुराते) अरे लता.. तुजे कोनसा कलर पसंद हे..? बता.. हम तेरी मसंदका ही कलर ले लेगे..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. वो सब मुजे कहा पता चलता हे.. आपको जो पसंद हो वोही ले लेना..

लखन : (मुस्कुराते चलते) भाभी चलीये.. उनको कौनसा कलर पसंद हे वो मुजे पता हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते साथ चलते) अरे हां.. मेतो भुल ही गइकी आपको सबकी चोइसका पता हे.. चलीये.. देवरजी.. मेरी ही कारमे चले जाते हे.. लीजीये चाबी.. आप ही चला लीजीये.. फीर वापसीमे आप स्कुटर ले लेना..

लखन : (मुस्कुराते चाबी लेते) जी भाभी.. हमे कोनसा स्कुटर लेना हे..? आइ मीन कोनसी कंपनीका..?

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. वो.. आज कल अ‍ेक्टीवा बहुत चलता हे.. मुजे तो वही पसंद हे.. हें..हें..हें..

सृती :(हसते) अरे वाह.. वोतो मुजे भी बहुत पसंद हे.. देवरजी.. फीर भी आपको जो भी पसंदहो लेलेना.. तो फीर हम चले..?

लखन : (कारकी ओर जाते) नही भाभी.. हम आपका ओर लताकी पसंदका ही स्कुटर लेगे.. वैसे आज इस डे्रसमे आप बहुत सुंदर लग रही हे.. कहासे लीया ये ड्रेस..? बहुत अच्छा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (जुठा गुसा करते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) देवरजी.. आप बहुत ही कमीने हो.. भुलकड कहीके.. अरे ये वोही ड्रेस तो हे.. जो आपने दिलवाया था.. आपही ने तो सीलेक्ट कीया था.. याद हे आपको..?

लखन : (कारमे बैठते मुस्कुराते) ओह.. सोरी सोरी भाभी.. क्या हेना.. आपने इसे कभी पहेना नही हेना.. तो मे भुल गया था.. सोरी.. हें..हें..हें..

सृती : (लखनकी बाजुमे बैठते कातील नजरोसे मुस्कुराते) वैसे तारीफके लीये थेन्क्स.. देवरजी.. क्या मे सचमे अच्छी लग रही हु..? कही मेरा दिल रखनेके लीयेतो तारीफ नही कर रहे..?

लखन : (कार स्टार्ट करते) अरे नही नही भाभी.. आज आप सचमे बहुत खुबसुरत लग रही हो.. आपको मेरे साथ देखकर कोइ नही कहेगा की आप मेरी भाभी हो.. वो लोग तो हमे साथमे.. सोरी भाभी.. हें..हें..हें..

सृती : (कातील नजरोसे हसते) अरे हां हां.. बोलोनां.. सोरी क्यु बोलते हो.. बोलो.. क्या केह रहेथे.. मे कुछ नही कहुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) नही भाभी.. जाने दीजीयेनां.. कहीये हम कोनसे शोरुममे जाये..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे.. बातको मत काटो.. अच्छा मे ही कहेती हु.. वहीनां की हम दोनो मीया बीवी.. या फीर लवर्स लगते हे.. यहीनां..? ठीक हे.. यही समजलो.. की आज आपके साथ आपकी गर्लफ्रेन्ड आइ हे.. हें..हें..हें.. वो भी डेटपे.. तो क्या हम पहेले थोडी देरके लीये कीसी कोफी शोपपे बैठ सकते हे..? मुजे आपसे कुछ जरुरी बाते भी करनी हे.. क्युकी यहा रमा भाभी ओर नीलम हर वक्त साथ ही होती हे..

लखन : (कार चलाते सामने देखकर) जी भाभी.. हम पहेले वही जाते हे.. क्या कोइ सीरीयस मेटरतो नही..?

सृती : (सामने देखते) सायद.. क्युकी मेरी बात सुनकर फीर आपही डीसाइड करना.. की बात सीरीयस हे की नही..

कहा तो लखनने कारको अ‍ेक कोफी शोपपे लेली.. सृती आज बहुत ही खुबसुरत ओर अ‍ेक छोटी लडकीकी तराह लग रही थी.. तो लखनको छेडते उनके साथ रोमेन्टीक बात करना सृतीको बहुत अच्छा लग रहा था.. दोनो कार पार्क करके साथ चलने लगे.. सृती जटसे चलकर लखनके साथ होगइ..

ओर उनके हाथमे हाथ डालकर लखनके साथ चलने लगी.. आज वो बहुत ही खुस नजर आ रही थी.. तो लखनभी सृतीके व्यवहारसे खुल हो गया.. ओर दोनो कोफी शोपमे अ‍ेक कोनेपे जाकर बैठ गये.. तो लखनने सृतीको पुछकर दो कोल्ड्रीन्क्स.. ओर्डर करदीये.. ओर सृतीकी ओर देखने लगा.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१६

कहा तो लखनने कारको अ‍ेक कोफी शोपपे लेली.. सृती आज बहुत ही खुबसुरत ओर अ‍ेक छोटी लडकीकी तराह लग रही थी.. तो लखनको छेडते उनके साथ रोमेन्टीक बात करना सृतीको बहुत अच्छा लग रहा था.. दोनो कार पार्क करके साथ चलने लगे.. सृती जटसे चलकर लखनके साथ होगइ.. ओर उनके हाथमे हाथ डालकर लखनके साथ चलने लगी.. आज वो बहुत ही खुस नजर आ रही थी.. तो लखनभी सृतीके व्यवहारसे खुस होगया.. ओर दोनो कोफी शोपमे अ‍ेक कोनेपे जाकर बैठ गये.. तो लखनने सृतीको पुछकर दो कोल्ड्रीन्क्स.. ओर्डर करदीये.. ओर सृतीकी ओर देखने लगा.. तभी.... अब आगे

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कहीये.. क्या कुछ जरुरी बात करनी थी..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे..? आज आपके साथ आकी गर्लफ्रेन्ड आइ हे.. इसे पहेले जरा पुछोतो सही.. की तुम क्या पीओगी..? क्या कीसी लडकीको लेकर कभी डेटपे नही गये क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाकर हसते) नही.. अब आप ही सब सीखादो.. हें..हें..हें.. कहीये.. पहेले आपके लीये क्या ओर्डर करु..? ठंडा या गरम..? साथमे कुछ स्नेक्स.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. ये हुइनां बात.. देवरजी.. इनसे लडकीया थोडी इम्प्रेस होथी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे आप इम्प्रेस होने वालोमे थोडीनां हे.. सीधे चांटा ही मारदेती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) अरे..? मेने कहा आपको चांटा मारा था..? आपको भी पता हेनां आपने हमारे साथ क्या कीया था..? फीर भी मेने आपसे कुछ कहा..? नहीनां.. तो फीर भुल जाइअ‍े इन सब बातोको..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. सब भुल ही गया हु.. सोरी भाभी.. उस दिन मे थोडा बहेक गया था.. खैर छोडीये इसे.. कहीये.. आप मुजसे क्या बात करने वाली थी..

सृती : (थोडा सीरीयस होते) अरे हां देवरजी.. आज सुबह पुनो दीदीका फोन आया था.. वो धिरेनके साथ खुस नही हे.. वहा जाते ही उनके साथ थोडी बहेस होगइ थी.. ओर धिरेनका वहा कीसी ओरतके साथ चकर भी हे.. तभी तो इतने दिन वो हमारे घरपे खानेके लीये नही आ रहा था.. (लखनको मनानेके लीये थोडा जुठ बोलते) देवरजी.. वो बाते करते बहुत रो रही थी.. पुनो दीदीने आपको भी फोन कीया था.. लेकीन आपने उठाया ही नही..

लखन : (सांत लहेजेमे) भाभी.. सोरी.. तब मे उनसे थोडासा नाराज था.. क्या आपको पुनोने कही सभी बाते मुजे खुलकर बता सकती हे..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) हां देवरजी.. लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी हे मे आपको खुलकर नही बता पाउगी.. वो बाते आपको सीर्फ पुनम दीदी ही बता सकती हे.. क्युकी अ‍ैसी चर्चातो आप दोनोने कइ बार की हे.. अ‍ैसा आप ओर पुनम दीदीने ही मुजे बताया हे.. क्या नीलु भी धिरेनके साथ रीलेशनमे हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. नीलु सीर्फ रीलेशनमे ही नही.. उनका धिरेनके साथ जीस्मानी रीस्ता भी हे.. वो धिरेनके साथ सादी भी करना चाहती हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? क्या नीलु धिरेनसे..चु.. मतलब धिरेनसे जीस्मानी रीसता..? वोभी इतनी छोटी उमरमे..? ओर उनसे सादी भी करना चाहती हे..? लेकीन रमा भाभी तो उनकी सादी आपके साथ करवाना चाहती हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. नीलु इतनी भी छोटी नही हे.. अ‍ेक महीनेके बाद वो उनीसकी होजयेगी.. मेने कहा थानां मे सबकुछ सम्हाल लुगा.. बस.. आप सीर्फ देखती जाओ.. उन मां बेटीको दोनोको मे अपने कंट्रोलमे करके रखुगा.. फीर देखो वो दोनो कैसे मेरी दिवानी हो जाती हे.. मे रमा भाभीका सारा प्लान ही चोपट कर दुगा.. लगता हे पुनो दीदीके साथ आपकी काफी चर्चा हो चुकी हे.. क्या ओर कोइ बात हुइ..?

सृती : (मुस्कुराते अपना पासा फेकते) हां.. बहुत सारी बाते हुइ हे.. लेकीन मेरी भी बतानेकी कुछ मर्यादाअ‍े हे.. ओर अब आप भी हमारे साथ खुलकर बाते नही करते.. तो आपके साथ अब मुजे भी अ‍ैसी बाते करनेमे डर लग रहा हे.. क्युकी मे अब हमारे देवर भाभीके सबंध आपकी नजरोमे ओर खराब करना नही चाहती.. मुजे लगता हे.. उस हादसेके बाद हमारे बीच काफी दुरीया बढ गइ हे.. आप जो हमसे बात नही करते थे.. पता नही इसमे मेरी क्या गलती थी..

लखन : (आंख गीली करते) सोरी भाभी.. भुल जाइअ‍े सब.. मे भी भुल चुका हु.. इसमे आपकी कोइ गलती नही थी.. तब मुजे गुस्सा ही इतना आया.. लेकीन सब गलती मेरी थी.. जो मे अपनी मर्यादा भुल गया था.. मुजे आप दोनोके साथ अ‍ैसा नही करना चाहीये था.. भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे आप हर्ट हुइ..

सृती : (सरमाते नजरे चुराते) अरे नही नही देवरजी.. इसमे आपकी भी कोइ गलती नही थी.. क्युकी जो बात आपको यहा आनेसे अ‍ेक दिन पहेले मंजु दीदीसे पता चली.. वो बाते मे पुनोदीदी ओर भावनादीदी कइ दिनो पहेले ही जानती थी.. मंजुदीदीने आपको वो बात बतानेकी जीम्वेवारी पुनम दीदीकोे इसीलीये दी थी.. की आप दोनोके बीच अच्छी पटती थी.. आप दोनो बहुत क्लोज भीतो थे..

लखन : (आंख गीली करते) भाभी.. मे उनसे क्लोज तो आज भी हु.. पता नही वो मुजसे कैसे दुर होगइ..

सृती : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. आप दोनो अ‍ैसी चर्चा पहेले भी खुलकर करते थे.. जो अ‍ेक बोय फ्रेन्ड गर्ल फ्रेन्डके बीच होती हे.. लेकीन पता नही फीर भी पुनोदीदी आपको ये बात खुलकर क्यु नही बता पाइ..

लखन : (अपनी आंख पोछते) भाभी.. मे उनको बहुत प्यार करता था.. ओर अभी भी करता हु.. अपनी जानसे भी ज्यादा.. तो फीर वो ये बात मुजसे पहेले क्यो नही केह पाइ..? आपको पता हे..?

सृती : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? क्यु..?

लखन : (फीकी मुस्कानसे) भाभी.. क्युकी उनके मनमे अ‍ेक डर हे.. अब वो बडे भैयाकी अमानत होगइ हे.. तो उनको डर लग रहा हे.. की मे उनकी मस्तीया ओर उनके साथ फ्लर्ट करते उनको बडे भैयासे छीन लुगा.. भाभी.. मुजे मेरी मर्यादा पता हे.. पता नही उस दिन मस्ती मस्तीमे मे कैसे बहेक गया था..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) नही देवरजी.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. क्युकी आपको नही पता था.. लेकीन हम तीनो तो जानती थी.. की आगे हमारे साथ क्या होने वाला हे.. इसीलीये तो हमने आपके फ्र्लट करनेसे भी अ‍ेतराज नही कीया.. इस बातके लीये मे ओर पुनोदीदी पहेलेसे ही प्रीपेर थी.. इसीलीये हम दोनो खुद आगे बढ रही थी.. हम दोनोने इस बदलावको सवीकार करलीया था.. तो फीर अचानक उसने अ‍ैसा क्यो कीया..? सायद आपकी बात सच हे.. सायद उनको वही डर लग रहा होगा..

तभी वेइटर दोनोको कोल्ड्रीन्क्स ओर कुछ नास्ता देकर चला जाता हे.. तो दोनो खाना खाते ठंडा पीने लगते हे.. ओर साथमे बाते भी करते हे.. तब सृतीने बातको जारी रखते आगे पुछा..

लखन : (सरमाते) भाभी.. क्या सचमे आप सभीने इस भाभीमांने कहा वो बदलावको स्वीकार करलीया हे..?

सृती : (नजर जुकाते सरमाते धीरेसे) हां देवरजी.. क्युकी हम जानती थी आगे क्या होने वाला हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर पुनो दीदीने मुजे चांटा क्यु मारा..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) पता नही.. लेकीन उनको अपनी गलतीका अहेसास फौरन होगया था.. देवरजी.. अ‍ेक बात कहु..? सायद वो भी आपको प्यार करने लगी हे.. आप अ‍ेक बार उनसे बात कर लीजीये.. हो सकता हे.. आपको अपना पहेला प्यार मील जाये..
 
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