- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 148,668
इनके बाद लखन वहासे चला गया ओर सीधा हवेलीपे आ गया.. ओर चारु रश्मी कुछ देरके लीये आराम करने वापस बेडपे चली गइ.. क्युकी लखनने दोनोके अेक अेक अंगको जंजोरके रखदीया था.. हवेलीपे आया तब देवायतभी आ चुका था.. फीर सबने मीलकर खाना खाया..
खानेके बाद सबलोग होलमे आगये.. वहा लखनने सबको कार्डका आल्बम दीखाया ओर सीलेक्ट कीया हुआ कार्ड भी दीखाया.. सबको कार्ड पसंद आया.. ओर देवायतने उसे जल्दसे जल्द प्रीन्ट करवानेको कहा.. फीर कुछ ओर बाते हुइ.. तब नीर्मला देवायतको लेकर रुममे आराम करने चली गइ..
तो पुनम लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करदीया.. कुछही देरमे बंध कमरेमे पुनमकी हल्कीसी सीसकारीया गुज रही थी.. आज लखन अकेला आया था तो वो बहुत ही खुस थी.. साम चार बजे तब सबलोग आराम करते रहे तबतक लखन पुनमके उपरही लेटा हुआ उनकी चुदाइ करता रहा..
साम छे बजे लखन वहासे नीकल गया.. ओर अपने कामपे लग गया.. इन प्रद्नह दिनोमे कइ बार लखन गांव ओर सहेरके बीच चकर काटता रहा.. ओर इसी बीच वंदना ओर नीशासे भी बाते करते मीलनेकी योजना बनाते काफी आगे बढा.. अेक बार तो उसे फीरसे वंदनाको ओफीसमे अकेलेमे मीलनेका मौका मीला..
तो वंदनाको लगभग दबोच ही लीया.. ओर उनके बुब्सके साथ खेलते अेक दुसरेको चुमते रहे.. वंदना बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. ओर दोनोने अकेले मीलनेका प्लान भी बनाया.. फीर उसे दो बार ब्रीन्दासे अकेलेमे मीलनेका मौका भी मील गया.. अेक अपराध बोज महेसुस करते लखन ब्रीन्दासे फीजीकल होना टालता रहा.. लेकीन दोनो बार ब्रीन्दा नही मानी..
ओर उसने जबरदस्तीसे लखनके साथ फीरसे सारीरीक सबंध बनाये.. क्युकी जब लखनसे वो पहेली बार फीजीकल हुइ.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट हुइ तबसे ही लखन उनके मनमे बस गया था.. ओर भानुके घरपे वोही लखनपे नजर गडाये अेक आस लेकर देखती थी.. की कब उसे दुबारा लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीले..
ओर इन पंद्नह दीनमे ही उसे लखनसे अकेलेमे मीलनेका दो बार मौका मील गया.. जीनका ब्रीन्दाने लखनसे चुदवाकर खुब फायदा उठाया.. क्युकी दोनो बार श्रीधर जयश्री ओर बच्चेको लेकर मायके गया हुआ था.. ओर लखन श्रीधरको कामके सीलसीलेमे मीलने जाता उसे वहा ब्रीन्दा घरपे अकेली ही मीलती..
ओर ब्रीन्दा लखनसे जबरदस्तीसे फीजीकल होने मजबुर कर देती.. वो जानती थी.. की वो श्रीधरको धोखा दे रही हे.. फीर भी उसे लखनसे चुदवानेका कोइ अफसोस नही था.. क्युकी उन्होने खुद अपने पती श्रीधरको उनकी सास यानीकी वृन्दासे फीजीकल रीलेशनके लीये राजी कीया था.. ओर खुदभी लखनके साथ रीलेशन रखना चाहती थी..
लखनका हथीयार हमेसा खडा ही रहेता.. अब उनके लीये इतनी बीवीया ओर भाभीया थीकी लखनको कोइ तकलीफ नही थी.. इसके अलावा भी लखनके दुसरी कइ ओरतके साथ फीजीकल रीलेशन थे जो लखनको चाहती थी.. इनमे ब्रीन्दा टीना सरलाकाकीके अलावा रमा भी सामील थी..
लखन हर दिन कीसना कीसीको सारीरीक सुख देता रहा.. ओर अेक बार चारु पंचायतकी ओफीसमे थी तब वसुधाने लखनको घरपे बुला लीया.. उस दिन लखन कीसी कामसे गांवमे था तो वो वसुधाको मीलने उनके घरपे चला गया.. तब उसे वसुधाके साथ नीशाको भी चोदनेका मौका मील गया..
अेक जमानेमे नीशा ओर वसुधा.. दोनोही पती पत्नी थे.. अब जेन्डर चेन्ज करनेके बाद वसुधा भी अेक ओरत हो गइ थी.. ओर आज दोनोही लखनके साथ बीस्तर साजा कर रही थी.. वसुधा बहुत ही आसानीसे लखनको जेल रही थी.. उसने जान बुजकर नीशाकी मौजुदगीमे वसुधाको दो बार चोद लीया..
ताकी नीशा उतेजीत हो सके.. ओर हुआ बीलकुल वैसा ही.. नीशा वसुधा ओर लखनको फीजीकल होते देखती रही.. ओर अपनी चुतको सहेलाती रही.. फीर वसुधाको चोदलेनेके बाद कुछ ही देरमे नीशा आंसु बहाते मुह इधर उधर करते छटपटा रही थी.. ओर बेडपे दोनो पैर पटकते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस कर रही थी..
तब वसुधा नीशाके सरको सहेलाते उनके होंठ चुमने लगी.. ताकी नीशाका दर्द कम होजाये.. फीर तो बीना नीचे उतरे ही लखनने नीशाको लगातार तीन बार चोद लीया.. ओर नीशाकी हालत पतली करदी.. नीशाको लगा अबतककी सारी कशर लखनने अेक ही बारमे पुरी करदी.. फीर तीनो साथ नहाने चले गये.. तब लखनने वहा भी अेक बार खडे खडे वसुधाको चोद लीया..
फीर तीनो कंपलीट होकर बहार आगये.. वंदनाको छोडकर लखनकी बीवीओके अलावा अब उनकी सभी भाभीया.. ओर लखनके साथ जीनका अवैध रीस्ता था.. वो सभी ओरते हमेसा लखनको अकेलेमे मीलनेके लीये मौकेकी तलासमे रहेती.. फीर चाहे दीन हो या रात.. जबभी लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीलता वो लखनके साथ फीजीकल रीलेशन बना लेती..
दीन बीतने लगे.. पता ही नही चला अेक महीना कैसे गुजर गया.. नीमंत्रण देनेका काम सबने मीलकर संम्हाल लीया.. देवायतने पुरे असी (८०) गांवको सम्हाला.. इनमे सभीके पंचायतके सदस्यो सरपंचो ओर गांवके कइ जमीनदार ओर प्रतीष्टीत व्यक्तीके साथ गांवके सभी लोग सामील थे..
सृती भावीका ओर लखनने मीलकर कइ डोक्टर उद्योगपती ओर पोलीटीशनके साथ सरकारी अधीकारीओ भी सामील थे.. पंडाल ओर भोजनका कार्य लखनके सभी दोस्तो ओर भानुके अलावा गांवके कइ युवाओने सम्हाल लीया था.. तो बाकी कुछ काम अेजन्सीको दे दीया गया था..
पंकजभाइ ओर नयनाको खुद भावीका ओर लखन उनके घरपे जाकर नीमंत्रण देकर आगये.. ओर दोनोको खास उपस्थीत रहेनेको कहा.. फीर भावीकाने अपनी बचपनकी सहेली नेहासे भी फोनपे बात करते आमंत्रीत कीया.. ठीक तीन दिन पहेले लखन सबको लेकर गांव चला गया.. इस बार साथमे दया ओर रजीया भी गइ थी..
गांवमे अेक उत्सव जैसा वातावरण हो गया.. पुरा गांव फुलो ओर जंडोसे सजाया गया था.. आजु बाजुके गांवके कइ युवा ओर सरपंचो मददके लीये आते जाते रहे.. सबकी भोजनकी व्यवस्था देवायतने अपने खेतोके पास खुले मेदानमे कीथी.. दुसरे गांवकी कइ लडकीया ओर ओरते लखनको देखकर सर्मा जाती..
ओर कइतो लखन ओर इनके सभी दोस्तोको अपनी ओर आकर्सीत करनेकी कोसीस भी करती.. ओर इनका श्रीधर बंसी मुना ओर साहीलने खुब लाभ भी उठाया.. लखनके सभी दोस्तो सेटींग होतेही लडकीको लेकर अपने खेतो या अेकांत जगहपे चले जाते.. ओर वहा उसे चोदकर वापस आजाते..
लेकीन अब लखन कीसी ओरपे ध्यान नही देता था.. क्युकी उनके पास जीतनी ओरते थी वो उनके लीये पर्याप्त थी.. इसी दौरान काम करते लखनका खयाल रखनेका जीमा पुनमने नीलमको दीया था.. तो नीलम लगभग लखनके साथ ही रहेती ओर उनके काममे उनकी मदद भी करती.. ओर लखनकी सारीरक जरुरतको पुरी भी करती..
पंडाल घरसे नजदीक था तो कइ बार नीलम लखनको लेकर अपने नये घरपे आराम करनेके बहाने उपरकी मंजीलपे चली जाती.. ओर लखनके साथ फीजीकल हो जाती.. ओर कभी कभी इनका लाभ रमाको भी मीलता.. क्युकी गांवमे आनेके बाद ज्यादातर सरला भानुके साथ खेतोपे ही रहेने लगी थी.. ओर इस बातका नीलमने खुब फायदा उठाया..
ओर अेक बार दोपरको सरला काकी सो रही थी.. ओर भानु काममे लगा हुआ था.. तब नीलमने मौका देखकर लखनको रमाके कमरेमे भेज दीया.. ओर वो खुद बहार नीगरानी रखने लगी.. उनको रमाकी हल्कीसी सीसकारीया बहार तक सुनाइ दे रही थी.. वो प्रेगनेन्ट होनेकी वजहसे खडे खडे ही जुक गइ.. ओर लखन खडेखडे ही उनकी पीछेकी ले रहा था..
जब लखनने रमाको संतुस्ट कीया तो दोनो बहार आगये.. ओर रमा सरमाकर नीलमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर नीलम लखनको लेकर उपरकी मंजीलपे अेक कमरेमे चली गइ.. तो रमा हसने लगी.. वहा नीलमने लखनकी सवारीकी.. जब अेक बार जड गइ तब वो लखनके नीचे लेट गइ.. ओर लखनने नीलमको खुब रगड रगडके उनके ही घरपे चोद लीया..
अेक घंटे तक आराम करनेके बाद दोनो कंपलीट होकर नीचे आगये.. सरलाभी नीचे मौजुद थी.. तो लखनको देखते ही उनकी ओर कातीलाना हसने लगी.. इसी बीच नीलम सर्मसार होते रमाकी ओर देखते हस रही थी.. रमा सबकुछ समज गइ.. ओर इस बातसे बहुत खुसभी थी.. की लखनने उनको ओर उनकी बेटीको सम्हाल लीया था..
उधर श्रीधर ओर जयश्री भी अपने बच्चेको लेकर सहेर वृन्दाको मीलने गये थे.. तब वापसीमे वो वृन्दाको लेकर गांव आये थे.. अब श्रीधर हर हप्ते जयश्रीको लेकर सहेर चला जाता जीसे जयश्री भी मायके आकर बहुत खुस रहेती.. वो सोचती की श्रीधर उनका बहुत खयाल रख रहा हे.. जो उनको हर हप्ते मायके लेजाता हे..
लेकीन असली बात तो सीर्फ ब्रीन्दा श्रीधर ओर जयश्रीकी मम्मी वृन्दाही जानते थे.. जयश्रीको आज तक पता नही चलाकी उनके पतीका अनकी मांके साथ यानीकी सास दामादके बीच नाजायज रीस्ता पल रहा हे.. जयश्रीने वृन्दाको अपनी स्कुलमे नीयुक्तीकी खबर सुनाइ जीसे सुनकर वृन्दा बहुत खुस हुइ..
ओर जयश्रीने उसे भी उत्सवमे आनेका न्योता दीया.. तो वृन्दा साथ चलनेको तैयार होगइ.. ओर दो पहोर जब खानेके लीये जीतुलाल घरपे आया तो वो जीतुको कुछ दिन अकेला खानेका प्रबंध करलेनेको कहेकर श्रीधर जयश्रीके साथ गांव जानेको तैयार होगइ.. तो श्रीधर जीतुलालकी ओर देखते कातील मुस्कान करता हे..
जीसे जीतुलाल मन ही मन श्रीधरसे ओर चीडने लगा ओर मनमे गालीया देने लगा.. जयश्री नोकरी मीलनेकी वजहसे बच्चीको अपनी मांके पास छोडकर जागृतीके साथ स्कुलमे मदद करने चली जाती.. तब दोनो बहेने खुब बाते करते बच्चीको सम्हालती.. जीसे दोनो बहेने ओर करीब आगइ.. ओर अपनी अंतरंग बाते भी सेर करने लगी..
अेक दिन बसंती भी ब्रीन्दाको जबरदस्तीसे मदद करनेका बहाना बनाकर साथ लेकर चली गइ.. तब श्रीधरको मौका मील गया.. वो सबके साथ कामपे जयश्री ओर ब्रीन्दाको देखकर छुपकेसे मुनाको कामका बहाना बनाकर घरपे चला गया.. वहा जाकर देखा तो घरपे सीर्फ वृन्दा बच्चीको जुलेमे जुला रही थी..
घरमे श्रीधरको देखते ही वृन्दा सर्मसार होगइ.. ओर श्रीधरकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. श्रीधरने घरमे आकर धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. तो वृन्दा सबकुछ समज गइ.. उनकी चुत पानीयाते पानी छोडने लगी.. ओर सरमाकर श्रीधरकी ओर देखते मुस्कुराने लगी..
वृन्दा : (धीरेसे सरमाकर) आगया मेरा आसीक.. क्या वोदो वहा हे..? देखना कही वो दोनो आना जाये..
श्रीधर : (मुस्कुराते) नही डार्लींग.. वो दोनो वहा काममे बीजी हे.. इसीलीये तो मौका देखकर आया हु.. यहा की रुमके अंदर..?
वृन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे फुसफुसाते) नही.. अंदर होगे ओर कोइ आगया तो हमपे सक करेगा.. यही करलो.. मे यही लेट जाती हु..
श्रीधर : (वही बेठते होठोको चुमते) डार्लींग.. तुमने क्या जादु करदीया.. तुम्हारी लेनेके लीये तो तरसता हु..
कहेते श्रीधरने वही सोफेपे वृन्दाको दबोच लीया.. ओर उसे नंगी करके खुदभी नंगा हो गया.. कुछ ही देरमे वृन्दाकी कामुक सीसकारीया होलमे गुंजने लगी.. उन्होने जोरोसे श्रीधरको अपनी बाहोमे भीच लीया था.. ओर उनके दोनो पैर श्रीधरकी कमरपे आटी लगाये हुअे थे.. ओर श्रीधर होले होले वृन्दाको चोद रहा था..
खानेके बाद सबलोग होलमे आगये.. वहा लखनने सबको कार्डका आल्बम दीखाया ओर सीलेक्ट कीया हुआ कार्ड भी दीखाया.. सबको कार्ड पसंद आया.. ओर देवायतने उसे जल्दसे जल्द प्रीन्ट करवानेको कहा.. फीर कुछ ओर बाते हुइ.. तब नीर्मला देवायतको लेकर रुममे आराम करने चली गइ..
तो पुनम लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करदीया.. कुछही देरमे बंध कमरेमे पुनमकी हल्कीसी सीसकारीया गुज रही थी.. आज लखन अकेला आया था तो वो बहुत ही खुस थी.. साम चार बजे तब सबलोग आराम करते रहे तबतक लखन पुनमके उपरही लेटा हुआ उनकी चुदाइ करता रहा..
साम छे बजे लखन वहासे नीकल गया.. ओर अपने कामपे लग गया.. इन प्रद्नह दिनोमे कइ बार लखन गांव ओर सहेरके बीच चकर काटता रहा.. ओर इसी बीच वंदना ओर नीशासे भी बाते करते मीलनेकी योजना बनाते काफी आगे बढा.. अेक बार तो उसे फीरसे वंदनाको ओफीसमे अकेलेमे मीलनेका मौका मीला..
तो वंदनाको लगभग दबोच ही लीया.. ओर उनके बुब्सके साथ खेलते अेक दुसरेको चुमते रहे.. वंदना बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. ओर दोनोने अकेले मीलनेका प्लान भी बनाया.. फीर उसे दो बार ब्रीन्दासे अकेलेमे मीलनेका मौका भी मील गया.. अेक अपराध बोज महेसुस करते लखन ब्रीन्दासे फीजीकल होना टालता रहा.. लेकीन दोनो बार ब्रीन्दा नही मानी..
ओर उसने जबरदस्तीसे लखनके साथ फीरसे सारीरीक सबंध बनाये.. क्युकी जब लखनसे वो पहेली बार फीजीकल हुइ.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट हुइ तबसे ही लखन उनके मनमे बस गया था.. ओर भानुके घरपे वोही लखनपे नजर गडाये अेक आस लेकर देखती थी.. की कब उसे दुबारा लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीले..
ओर इन पंद्नह दीनमे ही उसे लखनसे अकेलेमे मीलनेका दो बार मौका मील गया.. जीनका ब्रीन्दाने लखनसे चुदवाकर खुब फायदा उठाया.. क्युकी दोनो बार श्रीधर जयश्री ओर बच्चेको लेकर मायके गया हुआ था.. ओर लखन श्रीधरको कामके सीलसीलेमे मीलने जाता उसे वहा ब्रीन्दा घरपे अकेली ही मीलती..
ओर ब्रीन्दा लखनसे जबरदस्तीसे फीजीकल होने मजबुर कर देती.. वो जानती थी.. की वो श्रीधरको धोखा दे रही हे.. फीर भी उसे लखनसे चुदवानेका कोइ अफसोस नही था.. क्युकी उन्होने खुद अपने पती श्रीधरको उनकी सास यानीकी वृन्दासे फीजीकल रीलेशनके लीये राजी कीया था.. ओर खुदभी लखनके साथ रीलेशन रखना चाहती थी..
लखनका हथीयार हमेसा खडा ही रहेता.. अब उनके लीये इतनी बीवीया ओर भाभीया थीकी लखनको कोइ तकलीफ नही थी.. इसके अलावा भी लखनके दुसरी कइ ओरतके साथ फीजीकल रीलेशन थे जो लखनको चाहती थी.. इनमे ब्रीन्दा टीना सरलाकाकीके अलावा रमा भी सामील थी..
लखन हर दिन कीसना कीसीको सारीरीक सुख देता रहा.. ओर अेक बार चारु पंचायतकी ओफीसमे थी तब वसुधाने लखनको घरपे बुला लीया.. उस दिन लखन कीसी कामसे गांवमे था तो वो वसुधाको मीलने उनके घरपे चला गया.. तब उसे वसुधाके साथ नीशाको भी चोदनेका मौका मील गया..
अेक जमानेमे नीशा ओर वसुधा.. दोनोही पती पत्नी थे.. अब जेन्डर चेन्ज करनेके बाद वसुधा भी अेक ओरत हो गइ थी.. ओर आज दोनोही लखनके साथ बीस्तर साजा कर रही थी.. वसुधा बहुत ही आसानीसे लखनको जेल रही थी.. उसने जान बुजकर नीशाकी मौजुदगीमे वसुधाको दो बार चोद लीया..
ताकी नीशा उतेजीत हो सके.. ओर हुआ बीलकुल वैसा ही.. नीशा वसुधा ओर लखनको फीजीकल होते देखती रही.. ओर अपनी चुतको सहेलाती रही.. फीर वसुधाको चोदलेनेके बाद कुछ ही देरमे नीशा आंसु बहाते मुह इधर उधर करते छटपटा रही थी.. ओर बेडपे दोनो पैर पटकते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस कर रही थी..
तब वसुधा नीशाके सरको सहेलाते उनके होंठ चुमने लगी.. ताकी नीशाका दर्द कम होजाये.. फीर तो बीना नीचे उतरे ही लखनने नीशाको लगातार तीन बार चोद लीया.. ओर नीशाकी हालत पतली करदी.. नीशाको लगा अबतककी सारी कशर लखनने अेक ही बारमे पुरी करदी.. फीर तीनो साथ नहाने चले गये.. तब लखनने वहा भी अेक बार खडे खडे वसुधाको चोद लीया..
फीर तीनो कंपलीट होकर बहार आगये.. वंदनाको छोडकर लखनकी बीवीओके अलावा अब उनकी सभी भाभीया.. ओर लखनके साथ जीनका अवैध रीस्ता था.. वो सभी ओरते हमेसा लखनको अकेलेमे मीलनेके लीये मौकेकी तलासमे रहेती.. फीर चाहे दीन हो या रात.. जबभी लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीलता वो लखनके साथ फीजीकल रीलेशन बना लेती..
दीन बीतने लगे.. पता ही नही चला अेक महीना कैसे गुजर गया.. नीमंत्रण देनेका काम सबने मीलकर संम्हाल लीया.. देवायतने पुरे असी (८०) गांवको सम्हाला.. इनमे सभीके पंचायतके सदस्यो सरपंचो ओर गांवके कइ जमीनदार ओर प्रतीष्टीत व्यक्तीके साथ गांवके सभी लोग सामील थे..
सृती भावीका ओर लखनने मीलकर कइ डोक्टर उद्योगपती ओर पोलीटीशनके साथ सरकारी अधीकारीओ भी सामील थे.. पंडाल ओर भोजनका कार्य लखनके सभी दोस्तो ओर भानुके अलावा गांवके कइ युवाओने सम्हाल लीया था.. तो बाकी कुछ काम अेजन्सीको दे दीया गया था..
पंकजभाइ ओर नयनाको खुद भावीका ओर लखन उनके घरपे जाकर नीमंत्रण देकर आगये.. ओर दोनोको खास उपस्थीत रहेनेको कहा.. फीर भावीकाने अपनी बचपनकी सहेली नेहासे भी फोनपे बात करते आमंत्रीत कीया.. ठीक तीन दिन पहेले लखन सबको लेकर गांव चला गया.. इस बार साथमे दया ओर रजीया भी गइ थी..
गांवमे अेक उत्सव जैसा वातावरण हो गया.. पुरा गांव फुलो ओर जंडोसे सजाया गया था.. आजु बाजुके गांवके कइ युवा ओर सरपंचो मददके लीये आते जाते रहे.. सबकी भोजनकी व्यवस्था देवायतने अपने खेतोके पास खुले मेदानमे कीथी.. दुसरे गांवकी कइ लडकीया ओर ओरते लखनको देखकर सर्मा जाती..
ओर कइतो लखन ओर इनके सभी दोस्तोको अपनी ओर आकर्सीत करनेकी कोसीस भी करती.. ओर इनका श्रीधर बंसी मुना ओर साहीलने खुब लाभ भी उठाया.. लखनके सभी दोस्तो सेटींग होतेही लडकीको लेकर अपने खेतो या अेकांत जगहपे चले जाते.. ओर वहा उसे चोदकर वापस आजाते..
लेकीन अब लखन कीसी ओरपे ध्यान नही देता था.. क्युकी उनके पास जीतनी ओरते थी वो उनके लीये पर्याप्त थी.. इसी दौरान काम करते लखनका खयाल रखनेका जीमा पुनमने नीलमको दीया था.. तो नीलम लगभग लखनके साथ ही रहेती ओर उनके काममे उनकी मदद भी करती.. ओर लखनकी सारीरक जरुरतको पुरी भी करती..
पंडाल घरसे नजदीक था तो कइ बार नीलम लखनको लेकर अपने नये घरपे आराम करनेके बहाने उपरकी मंजीलपे चली जाती.. ओर लखनके साथ फीजीकल हो जाती.. ओर कभी कभी इनका लाभ रमाको भी मीलता.. क्युकी गांवमे आनेके बाद ज्यादातर सरला भानुके साथ खेतोपे ही रहेने लगी थी.. ओर इस बातका नीलमने खुब फायदा उठाया..
ओर अेक बार दोपरको सरला काकी सो रही थी.. ओर भानु काममे लगा हुआ था.. तब नीलमने मौका देखकर लखनको रमाके कमरेमे भेज दीया.. ओर वो खुद बहार नीगरानी रखने लगी.. उनको रमाकी हल्कीसी सीसकारीया बहार तक सुनाइ दे रही थी.. वो प्रेगनेन्ट होनेकी वजहसे खडे खडे ही जुक गइ.. ओर लखन खडेखडे ही उनकी पीछेकी ले रहा था..
जब लखनने रमाको संतुस्ट कीया तो दोनो बहार आगये.. ओर रमा सरमाकर नीलमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर नीलम लखनको लेकर उपरकी मंजीलपे अेक कमरेमे चली गइ.. तो रमा हसने लगी.. वहा नीलमने लखनकी सवारीकी.. जब अेक बार जड गइ तब वो लखनके नीचे लेट गइ.. ओर लखनने नीलमको खुब रगड रगडके उनके ही घरपे चोद लीया..
अेक घंटे तक आराम करनेके बाद दोनो कंपलीट होकर नीचे आगये.. सरलाभी नीचे मौजुद थी.. तो लखनको देखते ही उनकी ओर कातीलाना हसने लगी.. इसी बीच नीलम सर्मसार होते रमाकी ओर देखते हस रही थी.. रमा सबकुछ समज गइ.. ओर इस बातसे बहुत खुसभी थी.. की लखनने उनको ओर उनकी बेटीको सम्हाल लीया था..
उधर श्रीधर ओर जयश्री भी अपने बच्चेको लेकर सहेर वृन्दाको मीलने गये थे.. तब वापसीमे वो वृन्दाको लेकर गांव आये थे.. अब श्रीधर हर हप्ते जयश्रीको लेकर सहेर चला जाता जीसे जयश्री भी मायके आकर बहुत खुस रहेती.. वो सोचती की श्रीधर उनका बहुत खयाल रख रहा हे.. जो उनको हर हप्ते मायके लेजाता हे..
लेकीन असली बात तो सीर्फ ब्रीन्दा श्रीधर ओर जयश्रीकी मम्मी वृन्दाही जानते थे.. जयश्रीको आज तक पता नही चलाकी उनके पतीका अनकी मांके साथ यानीकी सास दामादके बीच नाजायज रीस्ता पल रहा हे.. जयश्रीने वृन्दाको अपनी स्कुलमे नीयुक्तीकी खबर सुनाइ जीसे सुनकर वृन्दा बहुत खुस हुइ..
ओर जयश्रीने उसे भी उत्सवमे आनेका न्योता दीया.. तो वृन्दा साथ चलनेको तैयार होगइ.. ओर दो पहोर जब खानेके लीये जीतुलाल घरपे आया तो वो जीतुको कुछ दिन अकेला खानेका प्रबंध करलेनेको कहेकर श्रीधर जयश्रीके साथ गांव जानेको तैयार होगइ.. तो श्रीधर जीतुलालकी ओर देखते कातील मुस्कान करता हे..
जीसे जीतुलाल मन ही मन श्रीधरसे ओर चीडने लगा ओर मनमे गालीया देने लगा.. जयश्री नोकरी मीलनेकी वजहसे बच्चीको अपनी मांके पास छोडकर जागृतीके साथ स्कुलमे मदद करने चली जाती.. तब दोनो बहेने खुब बाते करते बच्चीको सम्हालती.. जीसे दोनो बहेने ओर करीब आगइ.. ओर अपनी अंतरंग बाते भी सेर करने लगी..
अेक दिन बसंती भी ब्रीन्दाको जबरदस्तीसे मदद करनेका बहाना बनाकर साथ लेकर चली गइ.. तब श्रीधरको मौका मील गया.. वो सबके साथ कामपे जयश्री ओर ब्रीन्दाको देखकर छुपकेसे मुनाको कामका बहाना बनाकर घरपे चला गया.. वहा जाकर देखा तो घरपे सीर्फ वृन्दा बच्चीको जुलेमे जुला रही थी..
घरमे श्रीधरको देखते ही वृन्दा सर्मसार होगइ.. ओर श्रीधरकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. श्रीधरने घरमे आकर धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. तो वृन्दा सबकुछ समज गइ.. उनकी चुत पानीयाते पानी छोडने लगी.. ओर सरमाकर श्रीधरकी ओर देखते मुस्कुराने लगी..
वृन्दा : (धीरेसे सरमाकर) आगया मेरा आसीक.. क्या वोदो वहा हे..? देखना कही वो दोनो आना जाये..
श्रीधर : (मुस्कुराते) नही डार्लींग.. वो दोनो वहा काममे बीजी हे.. इसीलीये तो मौका देखकर आया हु.. यहा की रुमके अंदर..?
वृन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे फुसफुसाते) नही.. अंदर होगे ओर कोइ आगया तो हमपे सक करेगा.. यही करलो.. मे यही लेट जाती हु..
श्रीधर : (वही बेठते होठोको चुमते) डार्लींग.. तुमने क्या जादु करदीया.. तुम्हारी लेनेके लीये तो तरसता हु..
कहेते श्रीधरने वही सोफेपे वृन्दाको दबोच लीया.. ओर उसे नंगी करके खुदभी नंगा हो गया.. कुछ ही देरमे वृन्दाकी कामुक सीसकारीया होलमे गुंजने लगी.. उन्होने जोरोसे श्रीधरको अपनी बाहोमे भीच लीया था.. ओर उनके दोनो पैर श्रीधरकी कमरपे आटी लगाये हुअे थे.. ओर श्रीधर होले होले वृन्दाको चोद रहा था..