Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 103 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

सलमा : (आंसु बहाते) जरीना.. लगता हे हमारा साहील मुजसे नाराज हो गया हे..

जरीना : (उनको सम्हालते) नही दीदी.. सांत होजाइअ‍े.. वो कोइ नाराज नही हे.. बस.. थोडा दुखी हे.. मे उसे सम्हाल लुगी..

सलमा : (जरीनाका हाथ थामते धीरेसे) जरीना.. प्लीज.. उसे सम्हाल लो.. वरना वो आज रात टुट जायेगा.. वो मुजे कीसी ओरके साथ सोते बरदास्त नही कर सकता..

जरीना : (फीरोजपे गुस्सा होते) इस कमीनेको भी इस उमरमे क्या सुजा जो आपसे सादी करली.. बुढेसे होता तो कुछ नही बस.. नइ बीवीके मजे लेने हे.. हमारे अच्छे खासे साहीलकी जींदगी खराब करदी.. आप दोनो कीतने खुस थे..

सलमा : (आस्चर्यसे देखते) जरीना.. ये तु क्या बोल रही हे..? अब वो हम दोनोके सौहर हे..

जरीना : (गुस्सेसे फुसफुसाते) सोहर..? अ‍ैसे होते हे सौहर..? पहेले तो महीना महीना गुजर जाता था फीर भी बीवीको हाथ तक नही लगाता था.. अब जनाबपे अचानक जवानी चडी हुइ हे.. अब तो हप्तेमे कमसे कम तीन बार चाहीये.. होतातो कुछ नही ओर नवाबो वाला सोख पालना हे.. दो बीवीया करेगे..

सलमा : (समजाते धीरेसे) जरीना.. सांत होजा.. अब कुछ नही हो सकता.. जो होना था हो गया.. अब आगे देख हमे क्या करना हे.. बस.. मुजे तो मेरे साहीलकी चीन्ता हे..

जरीना : (गुस्सेसे सामने देखते) दीदी पता हे..? जब मेने आप दोनोकी सादी रोकनेकी कोसीसकी तो उसने मुजे क्या कहा..?

सलमा : (सामने देखते) क्या..?

जरीना : (गुस्सेसे सामने देखते) कहा की तुम भाभीसे हमारे नीकाहकी बात करलो.. जब मेने आपती जताइ तो मुजे तलाक देनेकी धमकी देने लगे..

सलमा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? पागल होगये हे क्या..? दो दो बच्चोकी सादीया होगइ हे.. फीर भी..

जरीना : (आंसु बहाते) दीदी.. कैसे उस दोनो कमीनो भी हमे धोखा देकर चले गये.. मेरी सबुका सपना तोड गये.. येभी नही सोचा की इस फुल जैसी बच्चीका क्या होगा.. तब मेरे साहीलने आकर हम सबको सम्हाला.. ओर सबुका सपना पुरा कीया.. अगर मेरी ओर बच्चीया होती तोभी मे मेरे साहीलपे कुरबान कर देती.. हमारा साहील सबको सम्हालनेमे सक्षम हे..

सलमा : (सांत लहेजेमे धीरेसे) अब बस भी कर.. कीतना रोयेगी..? अब मेरे साहीलको सम्हालनेके लीये तु हेनां.. मुजे तुजपे पुरा यकीन हेकी तुम मेरे साहीलको सम्हाल लेगी.. तो मुजे कोइ चीन्ता नही..

जरीना : (मन मकम करते सख्त लहेजेमे) हां दीदी.. पहेले थोडा संकोत था.. लेकीन अब कोइ संकोच या सरम नही.. मे हमारे साहीलको सम्हाल लुगी.. वो भी हमेसा हमेसाके लीये.. दीदी.. आज इस घरमे अ‍ेक नही.. दो दो सुहागरात मनेगी.. अ‍ेक आपकी.. ओर अ‍ेक मेरी.. हमारे साहीलके साथ..

सलमा : (मनमे खुस होते) साबास जरीना.. आज तुमने मेरे मनका बोज हल्का करदीया..

जरीना : (सामने देखते आंसु पोछते) दीदी.. इस आदमीसे घीन आने लगी हे मुजे.. पता नही जब सबुको इस बारेमे पता चला तो क्या होगा..

सलका : (पीठ सहेलाते) तुम हमारी सबुकी चीन्ता मत कर.. उसे हमारा साहील समजा देगा..

जरीना : (सामने देखते) दीदी.. मैने अ‍ेक फैसला करलीया हे.. हमारी सबुके आते ही मे उनका नीकाह साहीलसे करवा दुगी.. बस.. आजकी रात आप सम्हाल लीजीये कलसे हम दोनो साहीलका बीस्तर साजा करेगी.. मुजे इस कमीने (फीरोज)को कैसे कंट्रल करना.. सब पता हे.. कलसे हमारे घरकी सभी औरतोको सम्हालनेकी जीम्वेवारी हमारे साहीलकी.. इस कुतेको तो मे अब अपनी उंगलीओपे नचाउगी..

सलमा : (सरमाकर मुस्कुराते) कमीनी गालीया तो मत दे अब हमारा सौहर हे.. लेकीन तुम कैसे कंट्रोल करोगी..?

जरीना : (कुटील मुस्कानसे धीरेसे) नींद की गोलीयोसे..

सलमा : (आस्चर्यसे देखते) नींदकी गोलीयोसे..? मगर कैसे..? तेरे पास नींदकी गोलीया कहासे आइ..?

जरीना : (मुस्कुराते) मेरे पास बहुत सारी पतीया पडी हे.. वो कमीनीके रुमको साफ करते बहुत सारी आइपीलकी गोलीया ओर नींदकी गोलीया मीली थी.. ओर उस कमीनेके रुमसे बहुत सारे कोन्डमके पेकेट भी मीले थे.. तब पता चला दोनो कमीने कइ महीनोसे हम सबको धोखा दे रहे थे..

सलमा : (मुहपे हाथ रखते धीरेसे) हाय.. र..बा.. वो तुम सबको नींदकी गोलीया देते थे..?

जरीना : (कुटील मुस्कानसे) हां.. क्युकी सबका खाना वो कमीनी ही बनाती थी.. उन दोनोके लीये अलग सब्जी नीकालकर सारी सब्जीमे गोलीया डालती थी.. फीर हमारे सोजानेके बाद कमीने दोनो भाइ बहेन अपने रुममे नंगा नाच करते थे.. हमे तो पता ही नही चला..

सलमा : (धीरेसे) तो फीर.. वो कादीर.. आपके साथ..

जरीना : (सरमाते नजरे चुराते धीरेसे) वो दीनमे.. तब वोभी पढता था.. सुबह तीनो पढने चले जाते.. ओर इनके अब्बा फेक्टरीपे.. तब वो कोलेजसे बंक मारके वापस घर आजाता.. ओर मेरे साथ अपनी हवस मीटाके चला जाता.. ओर मे नादान समजती थीकी वो मुजसे प्यार करता हे..

सलमा : (सामने देखते) इतना बडा धोखा..? जरीना.. उन्होने तुम्हारे जजबातोसे खेला..

जरीना : (आंसु बहाते सरको हांमे हीलाते) हां दीदी.. मे इस प्यारसे वंचीत थी.. तो भटक गइ थी.. उनका प्यार हमारे साहील जैसा पवीत्र नही था.. वो मेरे ओर सायराके तनके साथ खेलता रहा.. आज पता चला बाप बेटा दोनो ही हवसके पुजारी हे.. इनसे तो हमारा साहील लाख गुना अच्छा हे..

दोनोही बाते करते काम समेटती रही.. जब फीरोज आया तो जरीनाने सलमाको हल्कासा मेकअप कर दीया.. फीर अपने कमरेमे उसे बेडपे बीठाकर वापस बहार आगइ.. तो फीरोजने उसे अपनी बाहोमे भरके प्यार देनेकी कोसीसकी.. तो जरीनाने गुस्सेसे उनको धका देदीया..
 
जरीना : (गुस्सेसे देखते) दुर रहो मुजसे.. जाओ.. अपनी नइ बीजीके पास.. अब वोही आपको प्यार देगी.. आजके बाद मुजे हाथ भी मत लगाना..

फीरोज : (मुस्कुराते) अरे.. नाराज क्यु होती हो.. अब तो नीकाह होगया.. सीर्फ आजकी रात.. आज तुम सलमाके कमरेमे सो जाओ.. कलसे तीनो साथ सोयेगे..

जरीना : (गुस्से देखते धीरेसे) कोइ जरुरत नही.. सीर्फ आजकी रात नही.. अब तो आप अपनी नइ बीवीके साथ ही सोना.. मे हमेसाके लीये दीदीके रुममे सोउगी.. कुछ दीन मजे करलो.. फीर देखती हु.. कैसे कुतोकी तराह अपनी पुछ पटपटाते मेरे पास आते होकी नही..

ओर बाहोसे छुटकर फीरोजको गुस्सेसे घुरने लगी.. फीरोज थोडा सहम गया.. ओर जरीनाकी ओर गुस्सेसे देखते रुममे चला गया.. उसने दरवाजा बंध कर दीया.. अंदर सलमाके दीलकी धडकन तेज होगइ.. ओर फीरोज उनके पास जाकर बैठ गया..

जैसे ही फीरोजने दरवाजा बंध कीया जरीना सरमाके मुस्कुराने लगी.. ओर जटसे सलमाके रुममे चली गइ.. फीर नहाके उसने दुसरा ड्रेस पहेन लीया.. ओर खुले बालोके साथ हल्केसा मेकअप करते अपने आपको सवारने लगी.. जब कंपलीट होगइ तो बहार नजर घुमाते देखने लगी..

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बहार घोर अंधेरा ओर सनाटा छाया हुआ था.. फीरोजके कमरेमे फुसफुसाहट सुनाइ दे रही थी.. जरीना सलमाके रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके दबे पाव साहीलके कमरेकी ओर चली गइ.. अंदर जाकर देखा तो अभी साहील नही आया था.. वो अपने दोस्तोके साथ था.. जरीना दरवाजा बंध करके साहीलके बेडपे जाकर लेट गइ..

दुसरी ओर लखन श्रीधरके साथ मुना साहील ओर बंसी.. पांचो दोस्तोकी पुरी टीम चौराहेपे बैठी हुइ थी.. सब खुलकर अ‍ेक दुसरेके अनुभव ओर गांवके दुसरेके अफैर साजा कर रहे थे.. चाइ नास्तेका दौर चला.. सब देर रात तक बैठे रहे.. फीर सब अपने अपने घरकी ओर चलने लगे..

इस रात बंसीने ब्रीन्दाको नही छुआ.. वो बहुत ही गहेरी नींदमे सो चुकी थी.. बंसी उनसे चीपकके सो गया.. मुना घरपे गया तो बरखा लेटे अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. ओर बसंती अपने मोबाइलमे स्क्रोल करते वीडोयो देखते मुनाका इन्तजार कर रही थी..

मुना चेन्ज करके बेडपे आगया.. ओर सरारत करते उसने बरखाके दुसरे दुधुपे मुह लगा दीया ओर बुब्सको चुसते दुध पीने लगा.. तो बरखा उनके बालोमे हाथ घुकाते हसने लथी.. ओर बसंती भी जोरोसे हसने लगी.. फीर बसंतीने मुनाको हाथ पकडकर अपने उपर खीच लीया..

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कुछ ही देरमे पुरे कमरा बसंतीकी कामुक आवाजे ओर सीसकारीयोसे गुंजने लगा.. मुना बसंतीके दोनो पैर अपने कंधे पे रखते जोरोसे कम हीलाते बसंतीको चोद रहा था.. ओर बरखा दोनोकी ओर कामुक नजरोसे अपनी चुत ओर बुब्स सहेलाती रही..

इधर बंसी जब घर गयातो सांती सो गइ थी.. उनका पेट भी काफी दीख रहा था.. ओर जागृती मोबाइलपे अपनी ओर बंसीकी सादीकी तसवीरे देखते बंसीका इन्तजार कर रहीथी.. जैसे ही बंसी आया वो उनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. अब वो बंसीसे खुलकर प्यार करने लगी थी..

कुछ ही देरमे बंसी बेडपे बीठके बल लेटा हुआ था.. ओर जागृती बंसीकी कमरपे दोनो पैर पसारते उनका तगडा लंड अपनी चुतमे घुसाते उछल उछलके सवारी कर रही थी.. इस रात बंसीने बीना लंड बहार नीकाले जागृतीको तीन तीन बार चोद लीया.. ओर अ‍ेक बार बाथरुमे सावर लेते भी जागृतीको खडे खडे चोद लीया..

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तो साहील जब घर पहोंचा तो पुरे घरपे अंधेरा छाया हुआ था.. साहीलने अ‍ेक नजर फीरोजके कमरेकी ओर डाली.. ओर उसे पहेली बार वहा ताक जाक करनेकी इच्छा हुइ.. वो चारो ओर देखकर दबे पांव फीरोजके कमरेके पास चला गया.. ओर दरवाजेपे कान लगाकर अंदरकी बाते सुननेकी कोसीस करने लगा..

तो अंदर सलमा ओर फीरोजकी फुस फुसाहटके साथ बीच बीचमे सलमाकी कामुक सीसकारीया सुनाइ दे रही थी.. साहीलको सुनकर गुस्सा आगया.. ओर वो जटसे अपने कमरेकी ओर बढ गया.. दरवाजा खोलकर अंदर गया.. ओर लाइट जलाइ.. देखा तो उनके बेडपे जरीना दुल्हनकी तराह सजकर लेटी हुइ थी..

साहीलने जटसे वापस साइट ओफ करदी.. उनको वो सब पल याद आने लगे.. जब उसने कल जरीनाको अपनी बाहोमे भीच लीया था.. ओर उनके होठोको चुम लीया था.. तब जरीनाने उसे आज रात मीलनेका वादा कीया था.. जीसे सोचकर साहीलका हथीयार ठुमकी मारते खडे होने लगा..

वो धीरेसे दरवाजा लोक करता हे.. ओर अपने सभी कपडे नीकालकर धीरेसे जरीनाकी बगलमे जाकर लेट गया.. जरीनाकी आंख लग गइ थी.. साहील थोडी देर उनकी बगलमे लेटते जरीनाके मासुम चहेरेको देखने लगा.. ये वही मासुम चहेरा था.. जीसका फायदा उनके बडे बेटेने खुब उठाया था..

साहीलने मुस्कुराते धीरेसे जरीनाके होठोको चुम लीया.. तो जरीनाने जटसे आंख खोलदी.. ओर साहीलको उनके बगलमे मुस्कुराते लेटे हुअ‍े पाया.. तो जरीनाके दीलकी धडकन बढ गइ.. उसने जटसे मुस्कुराते साहीलको अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर साहीलके होठोको चुमने लगी..
 
जीरना : (मुस्कराते धीरेसे सरमाते) साहील.. देखो.. मेने अपना वादा पुरा कीया.. आजसे ये चाची आपकी हे.. लेलो सलमा दीदीका बदला.. मे अुंह तक नही करु्गी..

साहील : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) नही चाची.. मे आपको बदलेके रुपमे हाथ नही लगाउगा.. अगर बदलेके लीये आइ होतो चली जाओ.. मुजे अ‍ैसा प्यार नही चाहीये..

जरीना : (मुस्कुराते गाल चुमते) नही साहील.. कोइ बदला नही.. मे सचमे तुमसे मीलना चाहती थी.. क्या तुजे भी मेरे अतीतके बारेमे पता हेनां..? सलमा दीदीने बताया मुजे..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) हां चाची.. कादीर भाइने आपके साथ बहुत गलत कीया..

जरीना : (सामने देखते थोडी सख्तीसे) नाम नालो उस हराम जादेका.. बाप बेटा दोनो अ‍ेक ही हे.. येभी यहा आकर हवसके पुजारी हो गये हे.. प्यार क्या होता हे इनको तो पता ही नही.. यहा आकर मेने देखा तुम्हारा ओर सलमा दीदीका प्यार.. दोनो कैसे अ‍ेक दुसरेके लीये तडप रहे थे.. ओर आंसु बहा रहे थे..

साहील : (आंख गीली करते) चाची.. आपको तो हमारे बारेमे सब पता ही हे.. मे अम्मासे सादी करना चाहता था.. वो बच्चा हमारा हे.. मे अम्मासे बहुत प्यार करता हु.. ओर अम्मा भी मुजे..

जीरना : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. मेरी सबुतो आपका प्यार पाकर धन्य होगइ.. अगर आप ना होते तो उनका सपना सपना ही रेह जाता.. अ‍ैसी दस सबु आपके उपर कुरबान हे..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) चाची.. मेरे ओर अम्माके बारेमे जानते हुअ‍े भी आप सबुका हाथ मुजे दे रहे हो..? आपको बुरा नही लगा क्या..? क्युकी मे दोनोसे प्यार करता हु..

जरीना : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी जो लडका बीना प्यार ही मेरी सबुका सपना पुरा कर सकता हे.. वो सादीके बाद मेरी सबुके लीये कुछ भी करेगा.. आज सबु सलमा दीदीके साथ मेभी आपपे फीदा हो गइ हु.. ओर रही बात सलमा दीदीकी.. तो अ‍ेक ओरतकी तकलीफ सीर्फ ओरत ही जानती हे.. तभी तो मे कादीरके बहेकावेमे आगइ..

साहील : (मुस्कुराते) क्या आप दोनोमे प्यार होगया था..?

जरीना : (साहीलको बाहोमे भीचते) नही.. मुजे नही पता था.. भावनाओमे बहेकते मुजसे अ‍ेक गलती होगइ थी.. तो कमीनेने उसी बातका फायदा उठाकर पहेली बार मेरे साथ जबरदस्ती की.. लेकीन उस दीन पता चला.. की मेने कादीरसे वो सुख पालीया था.. जो कभी तेरे चाचा नही दे पाये..

साहील : (मुस्कुराते जरीनाके बाल सहेलाते) फीर..?

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) फीर क्या..? फीर तो कमीना आये दीन मेरी इजत लुटता रहा.. फीर तो मुजे भी उनकी आदत होगइ.. ओर मन ही मन उनको प्यार करने लगी.. लेकीन उनको तो बस मेरे तनसे प्यार था.. ओर वो आये दीज अपनी हजस मेरे साथ मीटाने लगा.. तबतक.. जबतक दोनो भाइ बहेन पकडे नही गये..

साहील : (मुस्कुराते) क्या आपको मेरे ओर अम्माके बारेमे पता था..?

जरीना : (मुस्कुराते) पहेले नही पता था.. लेकीन यहा आये तो सलमा दीदीने मुजे सबकुछ बता दीया.. ओर आपका प्यार सच्चा हे.. बस.. आजसे सलमा दीदी ओर सबुके जैसा प्यार मुजे भी चाहीये.. मे इस प्यारसे बहुत वंचीत रही हु.. आजसे आपकी ये चाचीको भी यही प्यारमे सामील करलो.. मेरा तन धन मन सबकुछ आपको सौपती हु.. ओर जरुरत पडी तो मे आपसे नीकाह करनेके लीये भी तैयार हु..

साहील : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) क्या..? सबके सामने..? इतनी हींमत..?

जरीना : (मुस्कुराते) अरे नही.. सबके सामने नही.. ओर ध्यान रहे.. इस बारेमे सबुको भी पता ना चले.. ये राज सीर्फ हम तीनोके बीच रहेगा.. मे.. आप.. ओर सलमा दीदी.. मेने दीदीको वादा कीया हे.. की मे हमारे साहीलको सम्हाल लुगी.. आज भले ही वो दोनो अपनी सुहागरात मनाये.. लेकीन आज यहा भी सुहागरात मनेगी.. हमारी सुहागरात..

कहेते जरीना साहीलके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. साहीलतो पहेलेसे ही अपने कपडे उतार चुका था.. ओर धीरे धीरे प्यार करते करते जरीनाके तनसे भी कपडे दुर होते गये.. जीरनाने पहेली बार साहीलका हथीयार देखा.. वो देखते ही दंग रेह गइ..

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जब पहेली बार साहीलका लंड अपनी चुतमे लीया साहीलने जरीनाको अ‍ेक कुआरी लडकी जैसा अहेसास करवा दीया.. उनकी चीखे साहीलके मुहमे ही दब गइ.. आंखोसे आंसु बहेते रहे.. जरीना साहीलका बडा लंड अपनस चुतपे लेकर अपने दोनो पैर बेडपे पटकते साहीलसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही..

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कुछ ही देरके बाद कमरा सांत होगया.. जैसे तुफानके पहेले सनाटा छा जाता हे.. फीर तो पुरा कमरा जरीनाकी कामुक सीसकारीयोसे गुंजने लगा.. ओर चुदाइका अ‍ैसा दौर चला.. जैसे प्यारका भवंडर कमरेमे तबाही मचा रहा हो.. ना जाने अबतक जरीना कीतनी बार जड चुकी थी..

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साहीलने बीना नीचे उतरे ओर बीना लंड बहार नीकाले ही जरीनाको तीन तीन बार चोद लीया.. साहील भी नइ चुत मीलनेकी वजहसे बहुत जोसमे था.. फीर साहील जरीनाको गोदमे उठाकर बातरुममे लेगया.. वहा भी सावर लेते दोनो उतेजीत होगये.. ओर साहीलने वहा भी जरीनाको खडे खडे अ‍ेक बार चोद लीया..

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फीर दो धंटे आराम करते फीरसे अ‍ेक चुदाइका दौर चला.. आज साहीलने पहेली बारमे ही जरीनाकी सारी तम्मना पुरी करदी.. जैसे दोनोकी सुहागरात हो.. फीर सुबह होनेसे पहेले साहील जरीनाको गोदमे उठाकर सलमाके कमरेमे छोडकर आगया.. ओर सो गया.. तब फीरोज ओर सलमा भी अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो चुके थे..
 
इधर लखन जब देरसे हवेलीपे पहोचा तो ज्यादातर लोग सो चुके थे.. होलमे सीर्फ मंजु ओर पुनम ही बैठे बाते कर रहे थे.. पुनम मंजुको लखनके बारेमे पुरा ब्योरा दे रही थी.. पुनमकी बच्ची भी उनकी गोदमे थी.. जैसे ही लखन आया दोनो मुस्कुराने लगी..

ओर लखन बच्चीको प्यार देते वही सोफेपे मंजुकी गोदमे सर रखके लेट गया.. तो मंजु हसते उनके सरमे हाथ घुमाने लगी.. पुनम प्यारसे लखनकी ओर देखते हस रही थी.. जब बच्ची रोने लगी तो पुनम ब्लाउस उचा करते अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तभी..

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. आपकी बहु मेरे बारेमे क्या चुगली कर रही थी..

मंजुला : (जोरोसे हसते) हें.. हें.. हें.. पता चल गया तुजे..?

पुनम : (हसते) मे कोइ चुगली नही कर रही थी.. काफी होशीयार होगये हे.. मेतो आपके बारेमे बता रही थी.. की सब मुजे पुछकर जाते हे.. ओर अभी भी गील्टी फील कर रहे हे..

लखन : (सरमाते हसते) येस मोम.. मेने पुनोसे वादा कीया हे.. लेकीन ये सब अजीब भी लग रहा हे.. कभी कभी तो सोचता हु की ये सब जीम्वेवारी मुजे ही क्यु..? कही मे कीसीको धोखातो नही दे रहा..

मंजुला : (सामने देखते मुस्कुराते) लखन.. अ‍ेक बातका जवाबदे मुजे.. क्या तुमने आज तक कीसीको फसाया..? फीर चाहे वो हमारे घरकी ओरत हो या फीर बहारकी..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) नही मोम.. सबने सामनेसे मुजे रीलेशनमे आनेको कहा था..

मंजुला : (मुस्कुराते) तो फीर तुमने कीसको धोखा दीया..? सब सामनेसे तो आइ हे.. ओर तुम्हारा काम हे सभीकी भावनाओका सन्मान करना.. वो वक्त भी बहुत जल्द आयेगा जब देवु इन सभी रीलेशनसे उब जायेगा.. तब उनकी सभी बीवीया कहा जायेगी..? क्या तुम चाहते होकी उनकी सभी बीवीया बहार इधर उधर मुह मारती फीरती रहे..?

लखन : (सामने सीरीयस होते देखते) नही मोम.. मे सब समज गया.. मोम.. वो चंदा भाभी भी..

मंजुला : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. वो देवुसे मनसे कइ दीनोसे दुर हो चुकी हे.. ओर कल रात ही वो तुमसे मनसे अपने आपको समर्पीत कर चुकी हे.. बस.. इसी तराह सबका सन्मान करो.. ओर आगे बढो.. क्युकी जबतक मेरा वीजय बडा नही होजाता.. तबतक तुम ही अ‍ेक इस खानदानमे अकेला मर्द होगे.. जीनपे घरकी सभी ओरतोकी जीम्वेवारी होगी.. तो कुछ उल्टा सीधा मत सोचो..

पुनम : (मुस्कुराते) मोम.. मे इनको यही तो समजा रही हु.. फीर भी मुजसे बार बार पुछने चले आते हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. यही तो उनका तेरे प्रती सच्चा प्यार हे.. वो तुजे कभी धोखेमे रखना नही चाहता.. तुमसे बहुत प्यार करता हे.. कास मेने धीरेन वाली गलती ना की होती..

पुनम : (सरमाके मुस्कुराते) आइ नो मोम.. मुजे पता हे ये मुजे कभी धोखा नही देगे.. मुजे क्या बल्की कीसीको भी धोखा देना नही चाहते.. इतना भरोसा तो हे मुजे.. तो फीर मुजसे पुछनेकी भी जरुरत नही हे.. क्युकी जोभी इनके साथ रीलेशन रखेगी.. वो सामनेसे ही आइ होगी..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) मोम.. आप ठीक तो हेनां..? मुजे आपकी बहुत चीन्ता हो रही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) मेरा बच्चा.. मेरी कीतनी चीन्ता करता हे..? बेटा तुजे सब मेरे बारेमे पता तो हे.. तो फीर क्यु चीन्ता करता हे..? मे हमेसाके लीये थोडीना जा रही हु.. फीर अ‍ेक नया सरीर लेकर वापस भीतो आना हे.. मेरी भावुकी कोखसे.. वो अभी प्रेटनेन्ट हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) येस मोम..

मंजुला : (मुस्कुराते) बस.. उनके गर्भमे जो बच्ची पल रही हे.. वो ही मे हु.. जब उनका पुर्ण सरीर वीकसीत होजायेगा.. तब मे वहा चली जाउगी.. इसी तराह सबको जाकर वापस आना हे.. फीर मुजे भी अपनी गोदमे खीलाना..

लखन : (हसते) मोम.. आपने अपने बारेमे तो बताया लेकीन बडे भैया ओर पुनोके बारेमे तो आपने कभी नही बताया..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनोको सब पता हे.. कभी फुरसतमे उनसे पुछ लेना..

लखन : (पुनमकी ओर देखते) कोन ये..? येतो मुजे कुछ भी नही बताती.. बस हमेसा बातको टालती रहेती हे.. जीतना पुछो इतना ही बताती हे..

पुनम : (जोरोसे हसते) अरे..? मेने कब बातको टाली..? आपने कभी पुछा ही नही.. ओर जीनके बारेमे पुछा उनके बारेमे तो सब बता दीया मेने..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन अब मुजे सबके बारेमे जानना हे.. जीनके बारेमे पुछु उनके बारेमे ओर जीनके बारेमे ना पुछु उके बारेमे भी.. अब देखता हु तुम बताती हो या नही..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे बाबा बता देगी.. जगडा मत करो दोनो.. अब सोना नही हे क्या..? देखो रात कीतनी होगइ हे..

फीर तीनो सोने चले गये.. पुनम लखनकी ओर कुछ आंखोसे इसारा करते बात करलेती हे.. ओर वो बच्चीको लेकर अपने रुममे चली जाती हे.. तो लखन उपर अपने पुराने वाले रुममे चला गया.. देखा तो बडे बेडपे राधीका ओर सृती बाते करते लखनके इन्तजारमे लेटी हुइ थी..

सृती अपने हादसेके बाद ढाइ तीन महीना लखनसे दुर रही थी.. फीर लखनको भी भावीकासे परमीशन मील चुकी थी.. ओर इस रात लखनने राधीकाको दो दो बार ठंडी करते सुला दीया.. फीर सृती ओर लखन कइ दीनोके बाद मीले.. इस रात सृतीको फीरसे अपनी सुहागरातकी फीलींग्स आइ.. लखन बडी ही सावधानीसे सृतीको सुबह चार बजे तक चोदता रहा.. ओर सृतीको पुरी तरह तृप्त करदीया.. फीर दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सोगये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८६

सृती अपने हादसेके बाद ढाइ तीन महीना लखनसे दुर रही थी.. फीर लखनको भी भावीकासे परमीशन मील चुकी थी.. ओर इस रात लखनने राधीकाको दो दो बार ठंडी करते सुला दीया.. फीर सृती ओर लखन कइ दीनोके बाद मीले.. इस रात सृतीको फीरसे अपनी सुहागरातकी फीलींग्स आइ.. लखन बडी ही सावधानीसे सृतीको सुबह चार बजे तक चोदता रहा.. ओर सृतीको पुरी तरह तृप्त करदीया.. फीर दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सोगये.... अब आगे

दुसरे दीन सन्डे था.. तो पंचायतमे भी छुटी थी.. तो लखन मुनाके दीये हुअ‍े पेपर लेके सीधे ही रश्मीके नये घरपे चला गया.. देखा तो रश्मी सोफेपे बैठकर अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. लखनको देखते ही सरमा गइ.. ओर पलुसे अपना आंचल ढक लीया.. ओर हसने लगी..

रश्मी : (जोरोसे हसते) अरे देवजी.. आज आप रास्ता कैसे भुल गये..? कही मे गलत तो नही देख रही..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां.. अब आप भी मेरी खीली उडाओ.. क्या मे अपनी भाभीओको मीलने नही आ सकता..? घर भी नही देखा था.. तो सोचा दोनो काम हो जायेगे..

रश्मी : (भवे चडाते मुस्कुराते) दोनो काम..? मतलब कीसी ओर कामसे आये हे.. बैठीये..

तभी दोनोकी बाते सुनकर वंदना ओर टीना भी बहार आगइ.. जी हां.. सेटरडे सन्डे था तो दो दीनसे टीना भी अपनी कार लेकर रश्मीको मीलने आइ हुइ थी.. वो लखनकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. तो वंदना भी सरमाते लखनको नमस्ते करने लगी.. तभी..

लखन : (जोरोसे हसते) देखो.. मेरी भाभी होगइ फीर भी कैसे अजनबीकी तराह नमस्ते कर रही हे..? (पेपर देते) येलो.. आपके कामके लीये ही आया हु..

वंदना : (हसते) मे कोइ अजनबीकी तराह नमस्ते नही कर रही.. ये तो आपको इतनो दीनोके बाद देखा इसीलीये.. अब तो देवरके साथ मेरे जीजु भी होगये हो.. (पेपर लेते) कीसके पेपर हे..?

लखन : (मुस्कुराते रश्मीके पास बैठते) क्यु..? हमारे नये स्कुलके लीये.. अ‍ेक टीचरकी अ‍ेप्लीकेशन आइ हे.. इसे लेना ही पडेगा..

वंदना : (पेपर देखते) कही आपके बडे भैया केह रहेथे.. वोतो नही..? कोइ गीता नाम बता रहे थे.. हां.. वो ही हे.. ठीक हे.. मे उपर भीजवा दुगी.. अच्छा बोलो.. क्या पीयोगे..? चाइ या ठंडा..

लखन : (रश्मीकी ओर देखते हसते) भाभी.. ना चाइ पीनी हे ना ठंडा.. दुध पीला दीजीये..? हें..हें..हें..

रश्मी (दांत पीसते अ‍ेक मुका पीठमे मारते) बेसर्म कहीके.. अगर दुध पीना हेतो अपनी बीवीको कहो.. उनको भी बच्चा हुआ हे.. हें..हें..हें..

लखन : (कानमे धीरेसे) उनका तो रोज पीता हु.. आज आप ही पीला दीजीये.. हें..हें..हें..

कहा तो रश्मी सर्मसार होगइ.. ओर जुठा गुस्सा करते अपने दांत पीसते लखनकी पीठमे तीन चार मुके जड दीये.. जीसे लखन जोरोसे हसते उनसे दुर बैठ गया.. तो वंदना ओर टीना भी उन दोनोको लडते देखकर हसती रही.. तभी लखनका ध्यान टीनाकी ओर गया तो टीना बडी ललचाइ नजरोसे लखनकी ओर देखते हस रही थी..

लखन : (टीनाकी ओर देखते) भाभी.. ये.. मेने पहेचाना नही..

रश्मी : (टीनाकी ओर देखते मुस्कुराते) ओह.. ये टीना हे.. मेरी बचपनकी सहेली.. आपहीके सहेरमे बुटीक चलाती हे.. आपको कपडेका बहुत सौक हेनां..? तोये नइ नइ डीजाइन खुद बनाती हे..

लखन : (नमस्ते करते हसते) अच्छा..? तब तो पहेचान करनी पडेगी.. क्युकी कपडेकी खरीदी मेही करता हु..

रश्मी : (टीनाको) हां टीना.. ये हे लखन.. हमारे अ‍ेक लौते देवर.. ओर इनको कपडे खरीदनेका बहुत सौक हे.. घरकी सभी लेडीसके कपडे येही लेते हे.. ओर हमारे लीये भी.. हें..हें..हें..

टीना : (नमस्ते कहेते खुस होते) अच्छा..? तब तो जान पहेचान बढानी ही पडेगी.. मेरा नया कस्टमर जो मील गया.. हें..हें..हें..

रश्मी : (मुस्कुराते) हां देवरजी.. टीनाके वहा नये नये डीजाइनके कपडे मील जायेगे.. वोही सब डीजाइन करती हे.. बहुत बडी बुटीक हे इनकी.. हम वहा गये थे तब हमने इनकी बुटीक देखी थी..

टीना : (मुस्कुराते) हां लखनजी.. मे ही सब लेडीस कपडे डीजाइन करती हु.. हमेसा लेटेस्ट कपडे मील जमायेगे.. अभी मे अपना कार्ड देती हु.. कभी देखनेके लीये आइअ‍ेगा..

कहेते टीना बडे ही उत्साहसे अपने मोबाइलमे लखनको कपडेकी डीजाइन दीखाने लगी.. तभी दरवाजा खुला.. देखातो चारु नीशा ओर वसुधा मुस्कुराते अंदर आगये.. वंदना उनकी मम्मीके गले लग गइ.. कीसीको पता नही चलाकी टीना ओर लखनने अपने नंबर अ‍ेक्सचेन्ज करलीये.. फीर सबलोग टीनाको भी गले मीले.. तभी चारुकी नजर लखनपे गइ..

चारु : (जोरोसे हसते) अरे.. आज तो हमारे अ‍ेक लोते देवर भी आये हे.. हें..हें..हें..

लखन : (खडा होते गले मीलते) क्यु..? मे अपनी भाभीओको मीलने नही आ सकता क्या..? लगता हे यहा कोइ पार्टी बार्टी हे..

फीर लखन नीशाको भी गले मीला.. तो नीचे वही चुनवाला अहेसास.. नीशा बहुत ही सरमा गइ.. फीर लखन वसुधाको देखकर मुस्कुराया.. ओर उनको गले लगा.. तो वसुधाको थोडा जोरोसे भीच लीया.. जीसे वसुधा सर्मसार होगइ.. उनको भी नीचे चुंभन महेसुस हुइ.. तभी..
 
रश्मी : (मुस्कुराते) बस.. आज सन्डेकी छुटी थी.. तो सोचा सब साथमे बैठकर खाना खायेगे.. हमारी तो अ‍ैसी ही पार्टी होती हे..

वंदना : (मुस्कुराते) लखन भैया.. आपभी रुक जाओ.. मे पुनोदी ओर सृतीदीको फोन करके बुला लेती हु.. सब साथमे लंच करेगे..

लखन : (खडा होते) मुजे नही करना लंच.. येतो मे अ‍ैसे ही कामसे आया था.. अगर बुलाना ही होतातो पहेले फोनसे न्योता देकर बुलाती.. ये तो खामखा मे कबाबमे हडी बन गया..

चारु : (हाथ पकडकर जोरोसे बीठाते) अरे बैठो.. बहुत नखरे कर रहे हो.. हमारा भी अ‍ैसा कुछ खास प्लान नही था.. बस.. हमतो अ‍ैसे ही हर सन्डेको मीलते हे.. बैठो.. वरना पीटना पडेगा..

लखन : (जोरोसे हसते) अरे.. धमकी दे रही हो..?

चारु : (जोरोसे हसते गोदमे बैठते) हां दे रही हु.. अब उठकर दीखाओ.. हें..हें..हें..

कहेते वो लखनकी गोदमे बीना जीजक बैठ गइ तो सब जोरोसे हसने लगे.. ओर लखन भी अपने दोनो हाथोसे चारुको पेटसे पकड लीया हसते उनको अपनी गोदसे धकेलनेकी कोसीस करने लगा.. लेकीन चारु नही हटी.. तो लखनने दोनो हाथोसे उनका दोनो बुब्स थाम लीया..

ओर हल्केसे दबाया तो चारु सर्मसार होते भी जोरोसे हसने लगी.. लेकीन फीर भी लखनकी गोदसे नही उठी.. क्युकी इतने दीनोके बाद उसे अपने पीछे बुछ बडी ही चुंभन महेसुस हो रही थी.. तभी लखनने उनके कानमे फुसफुसाते कुछ कहा.. तो चारु अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. ओर वो उतेजीत होने लगी..

उसे मंजुकी कही बाते याद आने लगी.. उसे पता थाकी अ‍ेक दीन लखन ही देवायतकी सब बीवीयोको सम्हालेगा.. ओर फौरन लखनकी गोदसे उठ गइ.. माहोल ओर खुसनुमा ओर होगया.. तो इनमे रश्मी के साथ वसुधा वंदना ओर नीशा भी सामील होगइ.. चारो लखनके साथ हाथापाइ करते मस्तीया करने लगी..

वंदना भी जोरोसे हसते पुनम ओर सृतीसे फोनपे बात करने लगी.. टीना चारोकी मस्तीया देखते हसती रही.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी वसुधा ओर टीनाकी नजर बार बार लखनके पेन्टके उभारकी ओर जा रही थी.. दोनो सरमाते अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते हसने लगी..

फीर सब अ‍ैक साथ सोफेपे अ‍ेडजेस्ट करके बैठ गये.. ओर अ‍ेक दुसरेकी टांग खीचाइ करते रहे.. तबतक पुनम ओर सृती भी बच्चीके साथ आगइ.. तो वंदनाने बच्चीको पुनमसे लेलीया.. ओर उनके साथ खेलने लगी.. फीर सबने बारी बारी बच्चीको प्यार दीया..

वसुधा ओर टीनाने भी पुनमकी बच्चीको गोदमे लीया.. तब दोनोके मनमे मातृत्वके भाव जागने लगे.. टीनाकी आंख तो गीली भी होगइ.. लेकीन उसने बहुत ही जल्द अपने आपको सम्हाल लीया.. फीर लखन ओर वसुधा नइ होस्पीटलको लेकर बाते करने लगे..

लखन ने बातो ही बातोमे वसुधाको साहीलकी नइ बीवीके बारेमे बता दीयाकी वो पढाइके बाद डोक्टर बनके इधर ही आ रही हे.. फीर वंदना टीना ओर नीशाने मीलकर खाना बनालीया तो सब लोग लखनकी मस्तीया करते खाना खाने लगे.. आज सबने खुलकर लखनकी मस्तीया की..

लेकीन कीसीको अ‍ेक दुसरेके मनमे बारेमे पता नही चलाकी लखनने सबके दीलके तारको छेड दीया था.. सीर्फ पुनमको पता थाकी सबके दीलमे लखनके लीये चीन्गारी सुलग चुकी हे.. ओर आगे चलकर इनके कुछ परीणाम भी होगे.. जीसे सोचते पुनम भी बहुत खुस थी..

तो दुसरी ओर सलमा सुबह पांच बजे बहुत ही जल्द उठ गइ.. ओर अपनी सुहाग सेजसे उतरके नहाने चली गइ.. कल रात अपनी सुहागरातमे पहेली बार अपने पती ओर साहीलके अलावा तीसरे मर्दसे चुदी थी.. ओर फीरोजने उसे दो बार वायग्रा खाकर चोद लीया था..

बीलकुल वैसा ही था जैसे उनको जरीनाने बताया था.. उसे साहीलका हथीयार लेनेके बाद फीरोजका हथीयार कुछ खास फील नही हुआ.. बस.. लेटे ही वो फीरोजको सेटीस्फेक्शन देनेकी कोसीस करती रही.. पुरी सुहागरातमे फीरोजने मुस्कीलसे सलमाको अ‍ेक बार जडाया था..

सलमा कंपलीट होगइ.. ओर अ‍ेक नजर फीरोजपे डालकर बहार नीकल गइ.. फीरोज अभी भी बेसुध जैसी हालतमे लेटा हुआ था.. सलमा सीधे अपने रुममे चली गइ.. देखा तो जरीना अर्ध नंगी हालतमे अपनी चुतपे हाथ रखते सोइ हुइ थी.. ओर सलमा धीरेसे मुस्कुराते उनके पास चली गइ..

सलमा जरीनाके पास बैठ गइ.. ओर अपना अ‍ेक हाथ जरीनाके सरपे रख दीया.. तो जरीनाका पुरा बदन तप रहा था.. सलमाने अ‍ेक नजर जरीनाके गरदनपे ओर उनके आधे बहार नीकले बुब्सपे डाली.. तो वहा उनको साहीलके दीये हुअ‍े लव बाइटके नीशान दीखे..

जीसे देखते ही सलमाकी मुस्कान नीकल गइ.. उसे तस्सली मील गइ.. की चलो जरीनाने उनके साहीलको अच्छी तराह सम्हाल लीया हे.. ओर दोनोका मीलन हो चुका हे.. सलमाने जरीनाके उपर चदर डालदी.. ओर उनके सरको चुम लीया.. तो जरीनाने आंख खोलदी..
 
जरीना : (मुस्कुराते) दीदी..

सलमा : (मुस्कुराते धीरेसे सरको सहेलाते) तु कुछ मत बोल.. मुजे सब पता चल गया हे.. थेन्क्यु.. मेरे साहीलको अच्छेसे सम्हालनेके लीये.. मेने तेरी हालत देखी.. कैसी हे तेरी तबीयत..?

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. अ‍ैसा लगा.. सही मायनोमे मेरी सुहागरात कल ही हुइ हे.. मेने कल रात आप दोनोका प्यार महेसुस कीया.. मेरी सबुतो धन्य होजायेगी..

सलमा : (मुस्कुराते) कुछ मत बोलो.. बस आराम करलो.. मे ना कहु तबतक कमरेसे बहार मत नीकलना.. फीरोजके जानेके बाद हम बाते करेगे.. देखो कीतना बदन तप रहा हे.. मेरे साहीलने हालत बीगाडदी तेरी.. उनके प्यारने बुखार चडा दीया तुजे.. कैसा लगा मेरा साहील..?

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. अब मेरा साहील नही.. हमारा साहील कहो.. बहुत मस्त हे.. साहील भी.. ओर उनका हथीयार भी..

सलमा : (मुस्कुराते) हां.. हमारा साहील अ‍ैसा ही हे.. तुम आराम करो.. मे सब सम्हाल लुगी.. फीरोजके जानेके बाद तुजे ठीक करती हु.. तब हम आरामसे बात करेगे..

फीर सलमा चली गइ.. वो साहीलके कमरेमे जा ही रही थी तभी उसे फीरोजके रुमके दरवाजेकी आवाज आइ.. तो सलमा कीचनमे चली गइ.. फीरोज अपना नीत्यकार्य करने लगा.. फीर नहाकर कंपलीट होगया.. ओर अंदर आगया.. वो सलमाकी ओर देखकर हसने लगा..

सलमा : (मुस्कुराते) आप बैठो मे चाइ नास्ता देती हु..

फीरोज : (मुस्कुराते) जरीना ओर साहील नही जागे..?

सलमा : (सामने देखते) साहील कल देर रात दोस्तोके साथ था.. वो लखन भैया आये हुअ‍े हे.. ओर जरीनाको थोडा बुखार जैसा हे.. तो मेने आराम करनेको कहा हे.. वो सो रही हे..

कहेते सलमा कीचनमे चली गइ.. उसने फीरोजको चाइ नास्ता दीया.. फीरोजने उनको साथ बैठनेके लीये कहा.. तो सलमाने बडी ही सीफततासे टाल दीया.. ये कहेकर की वो जरीना ओर साहील साथमे करेगे.. फीर फीरोज कोइ नही था तो सलमाको बाहोमे लेकर होठ चुमलीये..

सलमा थोडी असहेज होते पीछे हट गइ.. ओर अपने मुहपे हाथ रखते कोइ देख लेगा कहेते पीछे हट गइ.. ओर फीरोज मुस्कुराते अपने खेतोकी ओर नीकल गया.. तो सलमाने जटसे बहारका दरवाजा बंध करलीया.. ओर लोक करके वो साहीलके कमरेमे चली गइ..

कुछ ही देरके बाद साहीलके कमरेसे सलमाकी जोरोसे सीसकीयोकी आवाज आने लगी.. साहील बडे ही जोसमे सलमाको घोडी बनाके पीछेसे चुतमे लंड डालकर चोद रहा था.. अ‍ेक बार दोनो साथ जड गये तो सलमा पीठके बल लेट गइ.. ओर अपने दोनो पैर साहीलके कंधेपे रख दीये..

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साहील बडी ही सावधानीसे सलमाको फीरसे चोदने लगा.. सलमाने रातकी सारी अधुरी कशर साहीलसे दो बार चुदवाकर पुरी करली.. फीर दोनो साथमे सावर लेने चले गये.. बाथरुम जाते सलमाने अ‍ेक नजर बीछानेपे डाली.. तो वहा उनको खुनके धब्बे दीखाइ दीये..

जीसे देखकर सलमाके मुहसे हसी नीकल गइ.. तो साहीलने उसे अपनी गोदमे उठालीया.. ओर बाथरुममे लेगया.. वहा भी साहीलने सलमाकी खडे खडे चुदाइ करली.. फीर दोनो कंपलीट हो गये तो सलमा साहीलकी बाहोमे समा गइ..

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सलमा : (सीनेमे सर रखते) जानु.. बस अ‍ैसे ही आपको प्यार देती रहुगी.. अब तो दो दो आपको सम्हालने वाली हे..

साहील : (मुस्कुराते) अम्मा.. चाची कीधर हे..?

सलमा : (सामने देखकर मुस्कुराते) कल आपके प्यारने उसे बुखार चडा दीया.. आराम कर रही हे.. हेना सबुकी तराह कडक माल.. बेचारीका खुन भी नीकाल दीया..

साहील : (मुस्कुराते) बहुत मस्त हे.. चलो देखते हे..

सलमा : (हसते साथ चलते) देखो.. अभी उनके साथ कोइ सरारत मत करना.. उनकी हालत ठीक नही हे..

साहील : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही करुगा.. चलो तो सही.. मेरी होने वाली सास हे.. उनका खयाल तो अब रखना ही पडेगा.. हें..हें..हें..

सलमा : (कातीलाना मुस्कानसे) मुजे पता हे आप उनका कैसे खयाल रखोगे.. रातमे बीचारीकी हालत खराब करदी.. अभी तक बीस्तरमे पडी हे..

अंदर जाते ही साहीलने सलमाको नाकपे उंगली रखते अ‍ेक तरफ इसारा करते छुपा दीया.. ओर वहीसे देखनेको कहा.. फीर वो जरीनाके पास जाकर बैठ गया.. ओर जुकते धीरेसे जरीनाके होठोको चुम लीया.. जरीनाने जटसे आंख खोलदी.. ओर गभराते दरवाजेकी ओर देखने लगी..

साहील : (मुस्कुराते धीरेसे) चाचा खेतोपे चले गये हे.. अब कैसी हे तबीयत..?

जरीना : (मुस्कुराते) सचमे चले गये..? खुद देखलो.. आपने कैसी हालत की हे मेरी..

कहेते जरीनाने साहीलका हाथ पकडकर अपने उपर खीचलीया.. ओर उनको जोरोसे बाहोमे भरते साहीलके होठोपे होठ रख दीये.. ओर बहुत ही गहेरा चुंबन देदीया.. जीसे देखकर सलमा भी हसने लगी.. तो जरीनाका ध्यान सलमाकी ओर गया.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कुराने लगी..

सलमा : (मुस्कुराते) जरीना.. अब हम दोनोको अ‍ैसे ही प्यार मीलता रहेगा.. चल उठजा तुजे ठीक करदु.. फीर तैयार होजा हम साथमे चाइ नास्ता करेगे..

फीर जरीनाकी सलमाने गरम पानीसे सीकाइ करदी.. ओर जरीना नहाकर कंपलीट होगइ.. वो धीरे धीरे लंटडाते चल रही थी.. फीर तोनोने साथ बैठकर चाइ नास्ता कीया.. ओर आगेकी योजनाके बारेमे बात करने लगे.. ताकी हर दीन दोनोमेसे कोइना कोइ साहीलके साथ सो सके..
 
तो दुसरी ओर उस साम लखन सबको लेकर वापस नीकलने लगा.. तो दयाने कुछ दीन रजीयाको वही रोक लीया.. ओर मंजुने भी अ‍ेक्जाम खतम होनेकी वजहसे नीलमको कुछ दीन अपने माता पीताके साथ रहेनेको कहा.. तो नीलम लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुराने लगी..

ओर हां कहेदी.. लखन सबको लेकर भानुके गांवकी ओर चला गया.. वहा सबने चाइ नास्ता कीया.. रमा ओर सरला सबको देखकर बहुत खुस हुइ.. सृतीने वही औपचारीक रमाको चेक करलीया.. फीर नीलमको कुछ दीनके लीये वहा छोडकर सब वापस सहेर चले गये..

उस दीन सामको सबानाने साहीलको फोन कीया.. कीसी कारणवस कोलेजमे चार दीनकी छुटी थी.. तो वो घरपे आनेके लीये साहीलसे बात करने लगी.. तभी साहीलने उसे अपने अबु ओर सलमाके नीकाहकी बात की.. ओर साहीलने सबानाको वो नीकाह वाली वीडीयो क्लीप मेज दी..

जीसे देखकर सबाना सोक्ट हो गइ.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. उनको अब जरीनाकी चीन्ता होने लगी.. आखीर उनको भी समज आ गयाकी उनके अबु भी अब गांवके रंगमे रंग गये हे.. उसने फीर साहीलको फोन कीया..

सबाना : (धीरेसे) साहील.. क्या हे ये सब..?

साहील : (धीरेसे) जो तुमने देखा.. चाचाने अम्मासे नीकाह करलीया.. क्युकी वो वीधवा थी.. ओर अब गांवमे कोइ अ‍ेसी महीला नही हे जो वीधवा या फीर त्यक्ता हो.. सभीने अपने ही रीस्तेदारीमे सादीया करली हे.. तो चाचा भी चाहते थेकी अम्माकी सादी उनसे हो जाये..

सबाना : (थोडा गभराते) तो फीर अब अम्मी..? क्या वो इस बातके लीये मान गइ..?

साहील : (धीरेसे) नही.. सबकुछ फोनपे नही बता सकता.. ये बताओ तुम कब आ रही हो..? चार दीनकी छुटी होने वाली हेनां..?

सबाना : हां.. अगले हप्ते.. थर्सडे टु सन्डे.. वहा आनेकी योजना बना रही थी.. लेकीन अब नही आउगी.. मुजे कुछ अजीब लगेगा..

सबाना : (कुछ सोचते) सबु.. मेरे खयालसे तुम अ‍ेक बार सृतीभाभी ओर पुनम भाभीसे बात करलो.. सायद वो कोइ सजेसन दे सकती हे..

सबाना : (मायुस होते) हां.. सायद यही ठीक रहेगा.. दोनोने हमेसा मेरा मार्गदर्सन कीया हे.. उनसे बात करके फीर आपको कोल करती हु..

कहेते सबानाने कोल कट करदीया.. वो बडी उलजनमे थी.. आखीर उसने सृतीको फोन कीया.. तो सृती सारा मामला समज गइ.. ओर उसने सबानाको पुनमसे बात करवाइ.. लेकीन पुनमको सबकुछ पता था.. वो जानती थी की सबानाको कैसे हेन्डल करना हे..

ओर उसने साहीलके जरीना ओर सलमाका साथ रीलेशनको छुपाकर सबानाको कुछ अ‍ैसा समजा दीया.. जीसे सबानाने फीरोन ओर सलमाके रीस्तेको अक्सेप्ट करलीया.. उसने सबानाको भी अपनी लाइफ खुलकर जीनेको कहा.. जीसे सबानाने भी अ‍ेक फैसला करलीया.. ओर उसने फीरसे साहीलको फोन करदीया..

साहील : (मुस्कुराते) हां सबु.. सृती भाभीसे होगइ बात..?

सबाना : (मुस्कुराते) हां साहील.. लगता हे हमे भी गांवके बदलावको स्वीकार करना पडेगा.. क्या आप अ‍ेक काम कर सकते हो..?

साहील : (मुस्कुराते) हां बोलो.. क्या..?

सबाना : (मुस्कुराते) अब मे वहा नही आ रही.. बस.. कीसी भी तराह आप यहा बुधवार साम तक पहोंच जाइअ‍े.. लेकीन ध्यान रहे.. कीसीको बतानेकी जरुरत नही हेकी आप मुजसे मीलने आ रहे हो..

साहील : (मुस्कुराते) लेकीन.. क्या अम्माको भी नही..? क्युकी उसे हम दोनोके बारेमे सब कुछ पता हे.. वो कोइ अ‍ेतराज नही करेगी..

सबाना : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन सीर्फ बडी अम्माको.. बाकी कीसी ओरको नही.. समज गयेनां..? यहा आतेही कोल करना.. मे आपको लेने आजाउगी.. बाकीकी बाते मीलकर करेगे..

साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे बुधवार सामको वहा पहोंचकर फोन करुगा..

सबाना : (मु्कुराते) गुड.. आइ लव यु जान..

साहील : (मुस्कुराते) लव यु टु बेबी.. अब ओर इन्तजार नही होता.. मीलते हे बाय..

तो दुसरी ओर घरपे सीर्फ लखन पुनम सृती राधीका ओर चंदा ही थे.. इस रात सृती ओर राधीकाने मीलकर लखनको खुब प्यार दीया ओर पुनमने भी लखनको पीछेसे खुस कर दीया.. तब पुनमके अलावा कीसीको पता नही थाकी दरवाजेके बहार चंदा सबकी मस्तीया सुन रही हे..

जबसे उसने लखनसे प्यारका इजहार कीया.. ओर लखनने उसे अपनी बाहोमे भीचते प्यार कीया तबसे चंदाकी भी कामाग्नी ओर भडक गइ थी.. ओर वोभी जल्दसे जल्द लखनसे मीलना चाहती थी.. लेकीन गांव जानेकी वजहसे चंदाके पास इन्तजार करनेके अलावा कोइ रास्ता नही था..
 
दुसरे दीन सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे.. तब चंदा कुछ ज्यादा ही लखनसे सरमा रही थी.. ओर पुनम सृती चंदाकी ओर देखकर अ‍ेक दुसरेके सामने देखते मुस्कुराने लगी.. फीर लखन सबको गले मीलते राधीकाको छोडने होस्टेलपे चला गया.. तभी उनके मोबाइलपे मेसेजकी रोंग बजी..

राधीका : (मुस्कुराते) आज कल आपके फोनपे कुछ ज्यादा ही मेसेज आने लगे हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. जलन..?

राधीका : (हसते) अरे..? मे क्यु जलुगी..? जले मेरी जुती.. मुजे तो अपना प्यार मील जाता हे..

लखन : (मेसेज दीखाते) देखो कुछ भी नही हे.. गांवमे टीना मीली थी.. उसने अपने बुटीकका अ‍ेड्रेस सेन्ड कीया हे..

राधीका : (मोबाइलको धकेलते) अरे नही देखना मुजे.. इतना तो भरोसा हे मुजे.. सुनो.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी..

लखन : (मोबाइल जेबमे रखते) हां बोलो..

राधीका : (मुस्कुराते) जानु.. कोइ लडकीया नही हे.. यहा सीर्फ नइ लडकीयोकी अ‍ेडमीशनके लीये आना पड रहा हे.. मे सोच रही थी.. जब हमारा बच्चा आयेगा तब मे क्या करुगी..?

लखन : (मुस्कुराते) कुछ मेनेज होजायेगा.. तुम चीन्ता मत करो.. अगर अ‍ेडमीशनकी बात हेतो मे मेनेज कर लुगा.. तुम छुटी तक घरपे आराम करो..

राधीका : (खुस होते) तो फीर ठीक हे.. कलसे आप आना.. मे घरपे रहुगी.. आप चले जाते हो तो पुरी होस्टेलमे मेही अकेली रेह जाती हु.. अब सादी होगइ हेतो अकेले होस्टेल चलाना बहुत मुस्कील लगता हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) तो कुछ अ‍ेरेन्ज कर लेते हे.. बच्चा होजानेके बाद तो बहुत मुस्कील होगी.. तेरी मददके लीये रजुको साथ भेजु..?

राधीका : (मुस्कुराते) तब तो बहुत ही बडीया.. घरके लोग होगे तो आसानी रहेगी..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर ठीक हे.. मे इस बारेमे अ‍ेक बार पुनोसे बात कर लुगा.. तोफीर मे चलु..? दो पहरको लेने आउगा..

राधीका : (सरमाते हसते) ओर मेरे हीस्सेका प्यार..? दरवाजा लोक करके आजाओ..

तो लखन मुस्कुराने लगा.. वो दरवाजा लोक करके राधीकाको लेकर अपने पर्सनल रुममे चला गया.. राधीकाको अब हर दीन होस्टेलमे ही प्यार करनेकी आदत हो चुकी थी.. घरपे लखनसे उनको जीतना भी प्यार मीले.. वो होस्टेलपे लखनसे चुदवाये बीना नही रहेती..

तो आज भी लखनने उनकी धमाकेदार दो बार चुदाइ करली.. फीर दोनो सावर लेने गये.. तब भी राधीकाने लखनसे खडे खडे चुदवा लीया.. फीर बहार आकर दोनो कंपलीट हो गये.. फीर लखनकी बाहोमे आकर उनके होठ चुम लीया.. ओर दो पहोरको जल्दीसे लेने आनेको बोला..

फीर लखन बहार नीकलते फीरसे मोबाइल देखता हे.. दरसल मेसेज सृतीकी डोक्टर फ्रेन्ड भावीकाका मेसेज था.. ओर लखनने राधीकाको टीनाका मेसेज दीखा दीया था.. लखनने भावीकाका मेसेज देखा.. तो उनमे सीर्फ यही लीखा था.. माइ क्लीनीक.. ३:०० पी.अ‍ेम.

ओर लखन सबकुछ समज गया.. ओर मुस्कुराने लगा.. दरसल भावीकाके साथ पुरा दीन होटेलमे बीतानेके बाद आज भावीकाने फीरसे लखनको अपनी क्लीनीकपे बुलाया था.. फीर वो टीनाने सेन्ड कीया हुआ अ‍ेड्रेसपे चला गया.. देखा तो टीनाका बहुत बडा बुटीक था..

वहा कइ ओरते सीलाइ मशीनपे काम कर रही थी.. ओर टीनाका अ‍ेक अलगही ओफीस था.. लखन वहा चला गया.. तो टीना उनको देखते ही खुसीके मारे सोक्ट हो गइ.. ओर उसने लखनको गले लगा लीया.. फीर हाथ पकडकर सामनेकी चेरपे बीठाया..

टीनाने लखनके लीये ठंडा मंगवाया फीर कुछ ओपचारीक बाते करते टीनाने लखनको अपना कलेक्शन आल्बम दीखाया.. तो लखनको इनमे ही बहुत डीजाइन पसंद आइ.. फीर टीना ने लखनको पुरी बुटीक दीखाइ.. तो वहा.. चालीस से पचास महीलाये काम कर रही थी..

टीना : (मुस्कुराते) तो लखनजी.. ये हे मेरी छोटीसी बुुटीक.. कैसी लगी आपको..?

लखन : (मुस्कुराते) ये छोटी हे..? ये तो बहुत बडी हे.. आपका कलेकश्न भी बहुत बडीया ओर बडा हे.. चलीये ओफीसमे आपको ओर्डर लीखवाता हु..

टीना : (हसते) अरे.. आपको ओर्डरके लीये थोडीना बुलाया हे.. मेने तो आपको ये देखनेके लीये बुलाया था.. आप हमारी रश्मीके देवरजो हे.. आप तो अब घरके ही हे.. आपके बारेमे रश्मी ओर वंदुसे बहुत कुछ बाते हुइ.. ओर सबकी सोपींग आप ही करते हे इसीलीये..

लखन : (मुस्कुराते) आप लेडीज लोग सबकुछ जल्दी जान लेती हो.. कभी अपने बारेमे तो बताया नही..?

टीना : (सरमाकर हसते) ओर आपने पुछा ही नही.. हें..हें..हें.. खैर.. उस दीन हमारी पहेली मुलाकात थी.. अब तो हम घरके होगये.. कभी मेरी सभी दीदीओको लेकर घरपे आइअ‍े.. डीनरके साथ हम खुब बाते करेगे.. रही बात मेरी.. तो मेरे बारेमे जाननेके लीये हमे कोफीपे मीलना पडेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) जी.. जरुर.. कभी कोफी पीलाने बुलाइअ‍े.. मे आजाउगा..

टीना : (सरमाकर मुस्कुराते) स्योर.. आपको जब भी टाइम मीले कोल करदेना.. हम मीलेगे.. तब ढेर सारी बाते करेगे.. आप बहुत ही दीलचस्प आदमी हो.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन आपकी कलेक्शन मुजे बहुत पसंद आइ.. इसीलीये आपको ओर्डर लीखवा रहा हु.. चलीये लीख लीजीये..

फीर दोनो वापस ओफीसमे आ गये.. टीना साथ चलते टेडी नजरसे लखनके पेन्टकी ओर देखती रही.. लखनने सबके लीये कुछना कुछ लीया.. लेकीन कुछ ओर्डर आउट ओज स्टोक था.. तो टीनाने दो दीनका समय मांगा.. फीर बहार नीकलकर धीरेनकी बेन्क पे चला गया.. तो धीरेन भी लखनको देखकर सोक्ट हो गया.. फीर दोनो बहार कोफी सोपपे चले गये..
 
धीरेन : (मुस्कुराते) क्या बात हे भाइ.. आज अचानक इस नाचीजको याद कीया..? सब ठीक तो हेनां..? (वेइटरकी ओर देखते) वेइटर.. दो कोफी..

लखन : (मुस्कुराते) हां धीरेन.. सब ठीक हे.. आज कल छुटी चल रही हे.. तो नीलु अपने गांव उनके माता पीताको मीलने गइ हे.. वहा सायद तुम्हारा कोन्टेक्ट ना होसके.. वोही बात बताने आया हु..

धीरेन : (मुस्कुराते) भाइ.. जानेसे पहेले बात हुइ थी.. मुजे सब पता हे.. अब वो कोलेजमे आजायेगी.. भाइ.. हमारे बारेमे कीसीको पता तो नही..? मीन्स.. मम्मीको.. कैसी हे वो..? मुजे याद करती हेकी नही..?

लखन : (मुस्कुराते) अब काफी बहेतर हे.. नोर्मल होगइ हे.. ओर आजकल मेरे घर मेरे साथ ही रेह रही हे.. मुजे इनके बारेमे भी बात करनी हे..

धीरेन : (थोडी चीन्तासे) यहा रेह रही हे..? सब ठीक तो हेना भाइ..?

लखन : (मुस्कुराते) वैसे सब ठीक हे.. कोइ दीकत वाली बात नही हे.. बस.. उनके इलाजके वास्ते ओर अच्छे माहोलमे रेह सके इसीलीये मे उनको यहा लेकर आया हु.. सुन.. सायद मे तुम दोनोकी मुलाकात करवाउ.. तो बीना कोइ सवाल कीये उनकी माफी मांग लेना..

धीरेन : (नजरे जुकाते) भाइ.. गलतीसे बीना सोचे समजे मेने उनको बहुत बुरा भला कहा हे.. क्या वो मुजे माफ करदेगी..?

लखन : (कोफी आते ही पीते) हां.. भैया भाभी.. ओर गुरुजीने उनको बहुत समजाया.. तब जाके माफी देने राजी हुइ हे.. लेकीन उनको अपने घर आनेकी उमीद मत करना..

धीरेन : (मुस्कुराते कोफी पीते) भाइ.. आपका घर अब उनका ससुराल हे.. वो अब मेरे घर क्यु आयेगी..? बस.. मुजे माफ करदे वोही मेरे लीये बहुत हे.. क्या वो मेरे ओर नीलुके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलेगी..?

लखन : (सामने देखते) अभी तो कीसीके सामने उनका जीक्रभी मत करना.. वरना नीलुसे हाथ धो बेठोगे.. बस.. नीलुकी कोलेज खतम होनेका इन्तजार करलो.. अगर बीचमे सीचुअ‍ेशन अच्छी रही तो मे खुद नीलुको आपके साथ भेज दुगा..

धीरेन : (मुस्कुराते) भाइ.. थेन्क्स.. आपने हमारी बहुत मदद कीहे.. जैसा आप बोलोगे वैसा ही हम करेगे..

लखन : (कोफी खतम करते खडा होते) ठीक हे धीरेन.. मे चलता हु.. अ‍ेक दीन तुजे फोन करके भाभीको लेकर तेरे घर आजाउगा.. तब उनसे माफी मांगलेना वो माफ करदेगी.. मे चलता हु..

फीर लखन राधीकाको लेकर घर वापस आ गया..आज खाना चंदा ओर पुनमने मीलकर बनाया था.. सृती भी आगइ तो पांचो खानेपे बैठ गये.. चंदा बडेही प्यारसे लखनकी ओर देख रही थी.. तो लखन टेबलके नीचे धीरेसे चंदाके पैरको अपने पैरोसे सहेलाने लगा..

चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. उसने अपने पैर हटानेकी कोसीस की लेकीन लखनने उनके पैरको अपने पैरोसे दबा दीया.. ओर अ‍ैसे खाना खा रहा था जैसे कुछ हुआ ही नही.. चंदा कामुक मुस्कानसे लखनकी ओर टेडी नजरोसे देखते खाना खाती रही..

वो लखनको सब हरकते करने देने लगी.. जीसे उनकी चुतपे गीलापन महेसुस होने लगा.. ओर वो थोडी असहज होने लगी.. तो पुनमने मुस्कुराते धीरेसे लखनकी जांगपे मुका मार दीया.. तो सृतीको भी सब पता चल गया.. ओर वो मंद मंद मुस्कुराते खाना खाने लगी.. तभी..

पुनम : (मुस्कुराते) लखन.. यहा मोल वाला थीअ‍ेटर भाभीने कभी नही देखा.. तो आज आप उसे मोलमे मुवी दीखाने लेजाइअ‍े..

चंदा : (सरमाते हसते) अरे..? सीर्फ मे ही क्यु..? हम सब चलेगेनां..

सृती : (मुस्कुराते) नही भाभी.. आज साम वो मेरी दोस्त भावीका हमसे मीलने आ रही हे.. कुछ पर्सनल कामसे.. साम छे बजे मेभी घर वापस आजाउगी.. तो आप ओर लखन ही चले जाइअ‍े.. हम सब कभी बादमे जायेगे..

पुनम : (मुस्कुराते) ओर हां.. आज मे वीजयको मेरे साथ उपर सोने लेजाउगी.. आप इनकी चीन्ता मत करना.. दोनो आरामसे आना..

चंदा : (सरमाते लखनकी ओर मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर हम दोनो ही चले जायेगे..

लखन : (मुस्कुराते) पुनो.. अगर सामको जाना हे तो मुजे तीन बजे अ‍ेक काम भी हे.. उसे अभी नीपटाना पडेगा.. मे दो घंटेमे वापस आजाउगा..

राधीका : (मुस्कुराते) आज मेरा भी होस्टेल जानेका मन नही हे.. सीर्फ आराम करना हे..

सबकी बात सुनकर पुनम मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. जैसे सबकुछ उनकी योजनाके तहत हो रहा हे.. ओर खुस तो तब हुइ जब सबसे छुपकर चंदा भी लखनके पैर सहेलाते लखनको रीस्पोन्स देने लगी थी.. आग दोनो ओर लग चुकी थी.. ढाइ बजते ही लखन कंपलीट होकर बहार जाने लगा तब..

लखन : (चंदाकी ओर कामुक मुस्कानसे) भाभी.. छे बजे तैयार रहेना.. मेरे आते ही हम नीकल जायेगे..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) ठीक हे देवरजी.. मे रेडी रहुगी..

पुनम सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तो राधीका भी उनकी कदद करने बहारकी सफाइ करने लगी.. तब चंदा वीजयको लेकर सोफेपे बैटी थी.. ओर लखनसे धीरेसे फुसफुसाते बात कर रही थी.. तभी भावीकाकी क्लीनीक जाते समय लखनने सबसे छुपकर चंदाको आंख मारदी.. जीसे चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी....

कन्टीन्यु
 
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