Incest Asli Haqdaar ❤️( incest /Action) - SexBaba
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Incest Asli Haqdaar ❤️( incest /Action)

hotaks

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मैं तो पत्थर हूँ

मेरी माता शिल्पकार हैं

मेरी हर तारीफ़ के वो ही असली हक़दार हैं



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★ इंडेक्स ★

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राजा साहब आप को पता है आज युवराज घर वापस आ रहे है पैर अगर वो छोटे रस्ते से आये तो आप जानते हो न क्या हो सकता है पुरे राजस्थान पैर कब्ज़ा कर चुके है वो और अगर युवराज को पहचान लिया तो शायद वो उन्हें कोई हानि न पंहुचा दे इसलिए कहता हु कुछ पहरेदार भेज दीजिये उस तरफ भी वर्ण कही ऐसा न हो की युव राज भी भेंट चढ़ जाए उस शर्मा के हाथो

इतना आसान नहीं है मुंशी काका कारन सिंह को भेट समझ न आप सननगार में पानी रखिये नाहा ने के बाद hi मिलेंगे हम दादा जी से और रही बात राजस्थान पैर कब्ज़े की तो ये अब सपना hi रह जायेगा उस अर्जुन के लिए अब वापस आया हु में तो हर सरहद खली हो जाएगी

वाह मेरे लाल आते hi ऐसी गरम जोशी दिल खुश कर दिया पैर उसे हलके में मत लो वो उनकी विरासत का युराज चुना गया है

दादा जी वो चुना गया क्युकी उस में छल कपट नहीं है और ऐसे hi योद्धा से लड़ ने में मजा आता है और अब वैसे भी उस ने कदम इस रेगिस्तान में रख ने की कोशिश की है तो अब उसका सामना कारन सिंह से होगा जो गलत के साथ गलत और सही के साथ सही कर ने का दम रखता है बाकि छोटे रस्ते पैर उसके लिए आते वक़्त बहुत से तोहफे छोड़ कर आया हु इसलिए आप बेफिक्र हो कर सो जाइये शर्मा खानदान का वारिस अगर इधर आया तो वापस सिर्फ प्यार से जा सकता है गुस्से में तो उसके बाप और चाचा भी ज़िंदा नहीं जाने वाले

पैर बीटा वो बहुत सारे है और हम बूढ़े हो चुके

आप बूढ़े हुए हो दादा जी आपका पोता नहीं

सब कुछ समेत कर रखना है हर वॉर के लिए

और ये लड़ाई भी है अब असली हक़दार के लिए

असली हक़दार / वस / शर्मा परिवार

छोटी सी झलक
 
इतनी जलन एक स्टोरी के ट्रेलर से जब की ये स्टोरी में खुद पेड साइट पैर स्टार्ट कर ने के लिए भी कहा था क्या वह भी ये रिस्पांस देते आप लोग सच में बहुत hi छोटी मानसिकता के लोग हो आप और आपकी ये मानसिकता एक अछि स्टोरी जो अभी स्टार्ट भी नहीं हुई थी की उसकी झूटी आलोचना कर रहे हो एक दूसरी स्टोरी से जोड़ कर आप की ऐसी सोच को मेरा सात सात नमन 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 में खुद आपकी राह आसान कर देता हु थ्रेड क्लोज करवा कर प्ल्ज़ स्टफ्फ्फ क्लोज थे थ्रेड प्ल्ज़
 
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मुसाफिर लगते हो बीटा जो इतनी देर से उलझन में खड़े हो की जाना किधर है सुसान सड़क पैर खड़े उस गबरू जवान लड़के को इतनी देर से खड़ा देख कर वो भुद्दा आदमी उस के पास आते हुए बोलै


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लड़का -अनजान नहीं हु बाबा बस इतने सालो कितना कुछ बदल गया वो देख रहा हु पास आये उस बुजुर्ग अंकल को इज़्ज़त से अपने बारे में बाटते हुए बोलै

अंकल - हां बेटे बदल तो बहुत कुछ गया अब इस राइट में ज़िन्दगी जीने की बजाये दम तोड़ जाती है वैसे कोण से गाओं से हो तुम पहले तो कभी नहीं देखा तुम्हे इधर

लड़का - क्सक्सक्स ग्रह से हु बाबा बहार पढता था आज hi लौटा हु 12 साल बाद पैर यहाँ देख कर तो लगता है जैसे सादिया बीत गयी ाचा बाबा चलता हु शाम ढल ने को है और रास्ता अभी काफी लम्बा है

अंकल - क्या क्सक्सक्स ग्रह से वह किस के यहाँ से हो और ये उस तरफ से कहा जा रहे हो

लड़का - दुर्जन सिंह का पौता हु बाबा और परताप सिंह का बीटा और ये रास्ता छोटा है गाओं के लिए जितना मुझे याद है

अंकल - रास्ता छोटा हुआ करता था बीटा पैर अब ये रास्ता वो आम रास्ता नहीं रहा इस रस्ते पैर मौत बरसती है वैसे तुम कारन सिंह हो न हवेली के असली हक़दार ( दर का साया महसूस करते हुए बोलै )


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लड़का - जी बाबा में कारन सिंह हु और मौत से क्या दर न वो तो घर बैठे भी आ सकती है और जब कदम बढ़ा hi लिया तो फिर कदम पीछे नहीं हटा ता में और एक बात बाबा असली नकली तो में नहीं जानता मुझे तो बस इतना पता है

में तो पठार हु मेरे माता पिता शिल्पकार है मेरी हर तारीफ़ के वो hi

( असली हक़दार ) है चलता हु बाबा जल्द मिलूंगा

यहाँ से कुछ दूर दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे थे जिस में से एक बोलै क्या सरहद क्या रेगिस्तान इन सिंह और शर्मा की दुश्मनी से पूरा गाओं दुखी है रामु काका और मुझे तो लगता है जब तक सिंह का वारिस आएगा तब तक पूरा गाओं शर्मा परिवार हड़प चूका होगा जिस की वजह से न चाहते हुए भी हमें शर्मा परिवार का जुल्म सहना पड़ेगा

नहीं बीटा भगवान् इतना भी निर्दयी नहीं हो सकता जो इन ज़ालिमों के हाथो हमें तड़प ने को छोड़ देगा वो आएगा और जब वो आएगा तो ये तो मौत का रास्ता भी दोबारा फूलु से खिल उठेगा जैसे पतझड़ के बाद सूखे पेड पैर नए पत्ते खिलते है रंग बिरंगे फूलो के साथ

रहने दो काका जो अब तक न लौटा वो अब कहा लौटेगा इस वीराने में मर ने के लिए

नहीं सुखी आज हवाओ का रुख उलटी डिसा में है जिसका मतलब है वो भानगढ़ की सीमा पैर कदम रख चूका है जैसा स्वामी जी ने कहा था

हां ताऊ शायद तभी तो देख खेत कैसे लेह लाहा ने लगे ऐसा तो कभी न हुआ इतने सालो में पैर क्या उस में सच में कोई शक्ति है


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बीटा सच को परिणाम की फ़िक्र नहीं होती और सच तो तुम्हारे सामने है खुद देख लो उस हक़दार की बात करते hi फसल लेह लाहा उठी तो सोच जब वो गाओं में कदम रखेगा तो क्या होगा

ये तो मुझे भी नहीं पता बीटा सुखी पैर कहते है वो पैदा हुआ था तो आश्मान में बदल घिर आये थे और बिजली कड़की थी बहुत. ...... ...आह्ह्ह्हह्ह बिलकुल ऐसे hi


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ताऊ ये बिजली कुछ नज़दीक नहीं गिरी और वैसे भी छोटे रस्ते से आना इतना आसान नहीं है और जहा तक मैंने सुना है वो पुराणी बाते अब तक नहीं भूला जिसका मतलब साफ़ है वो बड़े रस्ते से नहीं आएगा

कोण हो तुम जो वक़्त से पहले मौत के करीब आ पहुंचे जरा शकल तो दिखाओ अपनी


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आज तक टोर्च लेके घूम रहा है हरिया और डरने की आदत आज तक नहीं गयी तुम्हारी जो हमें देख कर भी पहचान नहीं रहे

आवाज़ को सुनते hi सामने वाले को अपने जिस्म में सार्ड लहर सी महसूस हुई और वो लगभग चौक ते हुए बोलै का कारन बाबा आप लौट आये

तो क्या हमारा भूत तुम्हारे सामने खड़ा है

ओह्ह्ह बचिए कारन बाबा वो दरिंदे आ गए शायद उन्हें पता चल गया आप के आने का

तो चल जाने दो वो तो एक न दिन लग न hi था

बातो में वक़्त जाया न कर सामने तेरी मौत कड़ी है लड़के उसकी फ़िक्र कर

फ़िक्र तुम्हे करनी चाहिए थी मेरे सामने आने से पहले क्युकी अब ज़िंदा तो जाओगे नहीं तुम

काका ये कोण है जो इतना से भ्हीद गया वो भी निहथा

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ये वही है सुखी जिस की बात हम दोनों कर रहा थे हमारे कारन बाबा जिनके आते hi आज कितने बरसो में ये बदल भी बरस रहे है उनका स्वागत कर ने के लिए

वही हवेली में एक बड़े कमरे बैठे दो लोग आपस में बात कर रहे थे जिनका विषय भी कारन hi था

राजा साहब आप को पता है आज युवराज घर वापस आ रहे है पैर अगर वो छोटे रस्ते से आये तो आप जानते हो न क्या हो सकता है पुरे राजस्थान पैर कब्ज़ा कर चुके है वो और अगर युवराज को पहचान लिया तो शायद वो उन्हें कोई हानि न पंहुचा दे इसलिए कहता हु कुछ पहरेदार भेज दीजिये उस तरफ भी वर्ण कही ऐसा न हो की युव राज भी भेंट चढ़ जाए उस शर्मा खानदान के हाथो

इतना आसान नहीं है मुंशी काका कारन सिंह की भेट चढ़ाना आप तो सननगार में पानी रख वाइये नाहा ने के बाद hi मिलेंगे हम दादा जी से और रही बात राजस्थान पैर कब्ज़े की तो पूरा राजस्थान उस अर्जुन के लिए छोड़ देंगे पैर हमारी ज़मीन और हमारे गाओं की सरहद पैर भी बर्दाश्त नहीं करूँगा में बाकि मुझे किसी से कोई मतलब नहीं समझे आप और अब वापस आया हु में तो हर सरहद खली हो जाएगी

वाह मेरे लाल आते hi ऐसी गरम जोशी दिल खुश कर दिया पैर उसे हलके में मत लो वो उनकी विरासत का युराज चुना गया है दादा जी वो चुना गया क्युकी वो उनकी विरासत थी और ये मेरी है इस का हक़दार कोई और कैसे हो जायेगा आप फ़िक्र न करे सब ठीक हो जायेगा वैसे भी मजबूत योद्धा से लड़ ने में मजा आता है और अब अगर उस ने अपने कदम इस गाओं की तरफ रख ने की कोशिश तो अब उसका सामना कारन सिंह से होगा जो गलत के साथ गलत और सही के साथ सही कर ने का दम रखता है बाकि छोटे रस्ते पैर उसके लिए आते वक़्त बहुत से तोहफे छोड़ कर आया हु इसलिए आप बेफिक्र हो कर सो जाइये शर्मा खानदान का वारिस इधर नहीं आएगा और आया तो वापस सिर्फ प्यार से जा सकता है लड़ाई में तो उसके बाप और चाचा भी ज़िंदा नहीं जाने वाले पैर बीटा वो बहुत सारे है और हम बूढ़े हो चुके आप बूढ़े हुए हो दादा जी आपका पोता नहीं सब कुछ समेत कर रखना है हर वॉर के लिए और ये लड़ाई भी है अब असली हक़दार के लिए जो मेरे माता पिता और आप है और अब आप hi रहेंगे कल से में खुद देखूंगा सब अभी तो भूक लगी है वो भी बड़ी जोर की आज तो जी भर के खाऊंगा वैसे भी बहुत साल हो गए माँ के हाथो का खाना खाये
 
इंट्रो :-

दुर्जन सिंह - गाओं के मुखिया पैसो की कोई कमी नहीं है उम्र के आखिरी पड़ाव में है फिर भी ज़िंदा दिल इंसान है पैर आज कल कुछ मुरझाये से रहते है वजह है शर्मा परिवार की दुश्मनी जो इनके गाओं की सीमा तक आ पंहुचा है

परताप सिंह - दुर्जन सिंह के बड़े बेटे और कारन की पिता जी जिनका एक हाथ शर्मा परिवार से लड़ते हुए काट गया था इसलिए अब बस खेत और घर तक सिमित रह गए है

साक्षी - परताप सिंह की बीवी और कारन की माँ जो दिख ने में आज भी किसी लड़की सी लगती है पैर घर की दहलीज पार किये इन्हे भी ज़माना हो गया


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आरती - कारन की बड़ी बहिन इस ने अपनी पडाहै घर से hi पूरी की है और अब अपनी माँ के साथ रह कर hi उनका हाट बताती है और कारन से बहुत प्यार करती है

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महेश - कारन के चाचा आर्मी में है तो घर पैर तो कभी कभार hi आते है जिसकी वजह से ये शर्मा परिवार की नज़रो से आज तक बचते आये है

शीला - महेश की बीवी जो नेचर से बहुत hi हैश मुख पारवती की है पैर घर के हालातो की वाहह से इन्हे ये भी याद नहीं की कब हसी थी


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सुरभि - महेश और शीला की बड़ी बेटी अपने नाम की तरह खिली खिली सी रहने वाली जिसकी चेहरे से मुस्कान कभी जाती hi नहीं

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राहुल - ये महेश का छोटा बीटा जिसे शर्मा परिवार ने ज़िंदा जला दिया था जिसके बाद से हवेली पैर पहरा और शाक्त कर दिया गया

रूही - महेश की 3श्री संतान और नटखट तो पूछो मत हर वक़्त कोई न कोई कारनामा करती hi रहती है

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समय - दुर्जन सिंह की बेटी और कारन की बुआ जिसके पति को भी उन ज़ालिमों ने मार डाला था जब ये 4 माह की ग्राब्वती थी जो अब अपने बाप के घर में रह कर अपने क्सक्स साल के बच्चे की देखभाल करती है और एक कामुक काय की मालकिन है

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सोमपाल - ये यहाँ मुंशी का काम करता है जिस पैर दुर्जन सिंह का पूरा विश्वाश है

शेरा - मुंशी का बीटा है और घर की देखभाल करता है या यु कहे की घर की सुरक्षा इस के हाथो में है जो अपने साथ 20/ 25 पहलवान लिए रहता है घर के मुख्य दरवाज़े पैर जिस्म भी काफी गठीला और भरा हुआ है

सुनीता - शेरा की बीवी शादी 5 साल हो गए पैर कोई बच्चा नहीं है और ये घर में रहकर पशु पालन संभालती है

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और अब मिलते है कहानी के हीरो उर्फ़ कारन सिंह से

कारन सिंह - घर आखिरी चिराग जिसे बचने के लिए दुर्जन सिंह जी ने इसे 12 साल पहले क्सक्सक्सक्स सेहर भेज दिया था जहा रहकर इस ने अपनी पूरी पडाहै की और अचे गुरु के नेतत्व में खुलती मुक्केबाज़ी निशाने बाज़ी की उत्तम शिक्षा ग्रहण की जिसकी वजह से ये एक मजबूत जिस्म का मालिक है और आज ये अपने घर लौटा है जहा अभी तक इस की मुलाकात सिर्फ अपने दादा से हुई है


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शर्मा परिवार जिसका मुखिया( सुदर्शन उर्फ़ ताली है )

जो इस वक़्त मौत का दूसरा नाम बना हुआ है आस पास के 10 कस्बो में जो न जाने कितने hi लोगो को जान से मार चूका है और अब उसकी नज़र इस कसबे के आखिरी गाओं यानी की दुर्जन सिंह जी के गाओं पैर टिक गयी है जिस के जंगल में अमुल्ये जड़ी बूटियों का भण्डार है जिसकी वजह से वो इसे हथ्याने चाहता है पैर 3सालो में वो बस छोटा रास्ता hi कब्ज़ा पाया है वजह है दुर्जन सिंह जो हिम्मत से दते हुए है आज तक

शर्मा परिवार का दरिंदा सुपुत्र जो आदमियों को मर न अपना हक़ समझता है

अर्जुन -शर्मा हैवानियत का दूसरा नामजीस के सामने खुद शैतान भी काँप जाए


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दीदी कारन आ गया है

क्या सच में मेरा बाबू लौट आया

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अपडेट - 2

कारन की बात मानते हुए मुंसी जी घर के किचन में जा कर जब सबको कारन के आने की खबर सुनाई तो कुछ के चेहरे खिल उठे जबकि रोटी बनती उसकी माँ के दिल में तीस सी उठ गयी और वो उन 12 सालो के छुपे दर्द की शारद लहर उसके पुरे जिस्म में दौड़ गयी जिसे महसूस करती वो खुद को बहुत कमजोर सा महसूस कर ने लगी और दिल hi दिल में कोस ने लगी की खास उस रात वो काली रात आती hi न तो उसे अपने बच्चे से दूर नहीं रहना पड़ता बुआ यही सोचती वो हॉल में आयी और कारन को देख कर उसे झूटी डाट लगते हुए बोली


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साक्षी- तुम क्यों आये हो यहाँ तुम्हे पता भी है कैसा माहोल है यहाँ आखिर 12 साल बाद यहाँ आने की ऐसी क्या जरुरत पद गयी तुझे बोलता क्यों नहीं है

कारन- माहोल कैसा है ये सोच कर क्या में अपने परिवार से न मिलु और कितना दूर रखोगी मुझे खुद से माँ क्या आप के दिल में मेरे लिए जरा भी प्यार नहीं है पता भी है आप लोगो के बिना ये 12 साल किस तरह गुज़ारे है मैंने और आज जब में आप के पास हु तो आप मुझे गले लगा ने की बजाये मुझे माहोल की दुहाई दे रही है क्यों

साक्षी - क्युकी में नहीं चाहती की तुम्हे कुछ हो अब और कुछ खो ने की हिम्मत नहीं बची है मुझ में मौत को अपनी बाहे फैलते महसूस किया है मैंने जो इस पुरे परिवार को अपने में समां लेना चाहती है इसलिए में नहीं चाहती की जैसे उस फूल से राहुल को उन हथियारों ने जिन्दा जला डाला वैसा hi कुछ मेरे बच्चे के साथ हो समझे तुम इसलिए जैसे आये हो वैसे hi रात के सन्नाटे में वापस चले जाओ में शेरा को बुलाती हु


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कारन - नहीं माँ अब और नहीं अब अगर मौत भी लिखी है नसीब में तो वो भी आप सब के साथ hi कबूल होगी अकेले रह कर तो मुझे दुनिया भर की दौलत भी गंवारा नहीं है इसलिए अब आप मुझे खाना दो सुबह से खुश नहीं खाया है

कारन की दो तुक बात सुनकर साक्षी को आने वाले खतरे का दर सत्ता ने लगा था पैर सामने से दुर्जन सिंह जी को आता देख चुप रसोई घर में चली गयी और कारन के लिए चपाती सिक ने लगी अपने दिल में लगी आग को अपने झूठे गुस्से में दबाये जब की कारन के आने की खादर सुनकर आरती ख़ुशी से उसके पास आते हुए बोली


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आरती - बाबू आ गए तुम और मुझे मिले भी नहीं क्या भूल गयी अपनी दीदी को

कारन - सूरज उगना भूल सकता है नदी बह न पैर में आप को भूल जाऊ ये कभी नहीं हो सकता दीदी वो तो मुझे भूख लगी थी जोरो की इसलिए खाना खा ने लगा आइये आप भी खाइये न


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कारन की मासूमियत से भरे जवाब से आरती की आंखे भर आयी उसे आज अपना भाई वही 12 साल पहले वाला मासूम सा बच्चा लगा जो अपनी मासूम बातो से हमेशा आरती को हसता रहता था पैर बाईट कुछ सालो में ये मासूमियत कही खो गयी थी जिसे आज फिर से कारन को देख कर आरती को याद आने लगी जिस में खोटी वो प्यार से आगे बढ़ी और कारन को गले लगते हुए बोली

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आरती - ओह्ह्ह मेरे भाई में तरस गयी थी तेरी ये प्यारी सी आवाज़ सुन ने के लिए आज सकूं मिला है मुझे अब तो कही नहीं जायेगा न तू हमें छोड़ कर

कारन - बिलकुल नहीं दीदी अब तो में आप के पास रहूँगा हमेशा इसलिए अब आप ये रोनी शकल मत बनाओ और ये मिठाई खाओ मेरे आने की ख़ुशी में समझी आप बाकि सब टेंशन भूल जाओ

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दोनों भाई बहिन बात कर hi रहे थे की मुंशी जी बिच में बोल पड़े

मुंशी- छोटे मालिक आप के दादा और पापा जी आपको अपने आराम ग्रह में बुला रहे है

कारन - आप चलिए काका में आता हु अभी और हां शेरा भैया को भी बुलवाओ मुझे मिलना है उनसे और कुछ दिन के लिए छोटा रास्ता बंद करवा दो जब तक में खोल ने को न कहु

मुंशी - जी छोटे मालिक जैसा आप कहे में अभी शेरा को बुलवाता हु और छोटा रास्ता भी बंद करवाने का इंतज़ाम करता हु

छोटे रस्ते का नाम सुनते hi आरती की आंखें हैरत से फ़ैल गयी और आंख खोले एक तक कारन को देखते हुए बोली

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आरती - कह दो की ये झूट है कह दो की तुम उस मनहूस रस्ते से नहीं आये बोलो कारन कुछ पूछ रही हु में

कारन - ये सच है दीदी और मनहूस कोई रास्ता नहीं होता मनहूस होते है उस पैर कब्ज़ा कर ने वाले और आप इतना हैरान हो कर मत देखो अब आप भाई आ गया है सब ठीक हो जायेगा

आरती - तुझे नहीं पता मेरे भाई पिछले कुछ सालो में कितना कुछ झेला है हम सब ने इस हवेली की चार दीवारी के सिवा हमें तो बहार का कुछ भी याद नहीं है हर रात के अनजानी चीख लेकर आती है जो गर्मी में भी जिस्म को ठंडा कर जाती है रूह काँप उठती है

कारन - है है ः क्या दीदी आप भी न कब से इतना दर ने लगी भूल गयी बचपन में में जब दर जाता था तब आप hi मुझे समझती थी और आज खुद ऐसी बाते कर रही हो और आप को देख कर तो नहीं लगता की आप को ठण्ड लग रही है देखो जरा कितना पसीना आ रहा आपको

आरती की गर्दन से छाती की तरफ बढ़ती पसीने की बूंदो को देख कर मुस्कुराते हुए बोलै जहा आरती के उन्नत और ुन्छुए उरूज अपनी आभा की हलकी हलकी चमक बिखेर रहे थे

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एक पल को तो आरती घबरा hi गयी जब उस ने कारन की बताई जगह पैर ध्यान पैर जल्द hi सँभालते हुए बोली

आरती - तू सच में बहुत बदल गया भाई पैर में तेरी दीदी हु इसलिए मेरी बात मान उस रस्ते पैर फिर कभी मत जाना वो रास्ता अब छोटा नहीं रहा बल्कि ज़िन्दगी से खेल ने वाला यमराज बन गया है हम तो दादा जी को भी समझते है की यहाँ से दूर चलते है कही पैर वो माने तब न

कारन - रास्ता वही है दीदी जिस पैर न जाने कितनी बार गिर कर चल न सीखा है हम सब ने फर्क है तो किसी की गन्दी नज़र का जिसे में हर हाल में उतार कर रहूँगा वैसे याद आया चची सुरभि और रूही कहा है दिख नहीं रही

कारन ने इतना कहा hi था की रसोईघर से साक्षी को शांत करा कर कारन के गाल पैर प्यार से हाथ फिरते हुए शीला बोली

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शीला - सब यही है मेरे बच्चे तेरी बुआ के कमरे में अभी पता नहीं है न उनको सुबह मिल लेना दीदी देखो तो कितना बड़ा हो गया हमारा कारन और आप हो की रोये जा रही हो

अपनी माँ की रोने की बात सुनी तो कारन खड़ा हो कर अपनी माँ के पास गया जो कारन को अपने पास महसूस करते hi रट हुए उसके गले लग गयी और बोली

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साक्षी - मेरे बच्चे मुझे माफ़ कर दे मैंने तुझे आते hi डाट दिया ये भी नहीं पूछा की कैसा है तू

कारन - माफ़ी मांग कर मुझे पाप का भागी मत बनाओ माँ मुझे पता है आपको मेरी फ़िक्र है इसलिए आप ने मुझ पैर गुस्सा हुई पैर सच मानो अब सब ठीक हो जायेगा बिलकुल पहले की तरह यकीन करो मेरा

साक्षी - तुझ पैर यकीन है मेरे बच्चे पैर उन हथियारों का नहीं जिनके लिए किसी निर्दोष की जान की कोई कीमत है इसलिए तू अपने दादा से बात कर न की वो सेहर चल ने को मान जाए यहाँ का सब कुछ बेच कर

कारन - नहीं माँ में ऐसा नहीं करूँगा और आप एक बात बताओ हम क्यों जाए यहाँ से आखिर ये हमारा गाओं है कई मीठी यादें जुडी है यहाँ हमारे बचपन और फिर मान लो अगर हम यहाँ से चले भी गए तो क्या होगा क्या वह कोई गुंडा नहीं होगा तो क्या हम हमेशा भागते रहेंगे बोलो नहीं न इसलिए अब आप मस्त हो जाइये समझी आप में जब तक दादा और पापा जी मिल लेता हु ok

कारन की बाहो लिपट कर मनो दर कही हवा सा हो गया था साक्षी के दिल से इसलिए कारन को और जोरो से चिपक गयी

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कारन - अब आप लोग भी आराम करो सुबह मिलता हु और हां ये रोनी सी शकल नहीं चाहिए मुझे सुबह किसी की भी तकलीफ होती है मुझे ऐसे देख कर सो प्ल्ज़ स्माइल गुड नाईट

अपनी माँ दीदी और चची से विदा लेकर मुस्कुराते हुए बोलै और चल दिया रघुवीर जी के कमरे की तरफ

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मस्त हठी की तरह टहलता हुआ कमरे पहुंच कर अपने पिता परताप जी मिलने के बाद वही पैर राखी कुर्शी पैर जा कर बैठ ते हुए बोलै

कारन - तो दादा जी क्या बात कर नई थी आप को जो रात में hi बुलवा लिया आप ने मुझे और मुंशी जी शेरा भैया कहा है

मुंशी - जी आ रहा है बस

दुर्जन सिंह - देखो कारन बीटा तुम हमारे वंश का आखिरी चिराग हो इसलिए हम चाहते है की अगर तुम्हे जरा भी शक हो की तुम्हारी जान को खतरा है तो तुम वापस सेहर चले जाओ और बहु और बच्चो को भी ले जाओ हम तो वैसे भी अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव पैर है और चाहते है की हम अपनी आखिरी सांस अपनी जन्मभूमि पैर hi ले

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कारन - ये जान भी आप की दी हुयी दादा जी और रही बात आपकी उम्र की तो अभी तो आप जवान हुए हो और फिर अभी मेरे 12 साल का बचपन भी तो जीना है आप को मेरे साथ क्यों पिता जी

परताप - बिलकुल मेरे बच्चे भगवान् तुझे ऐसे hi हस्ता मुस्कुराता रखे पैर बेटे बात उतनी भी सरल नहीं जितनी तुम समझ रहे हो और मैंने सुना है तुम बहुत कुछ कर के आये हो छोटे रस्ते पैर

अपने पिता की बात सुनकर कारन धीरे से मुस्कुराया और फिर एक रहश्य मुस्कान देकर बोलै

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कारन - पुराने निसान मिटा कर hi नए कदमो की निसानी छोड़ी जाती है पिता जी बस वही कर के आया हु और आप बेफिक्र रहे हलकी चीज़ो का शोक मुझे आज भी नहीं इसलिए अब सब मुझ पैर छोड़ दीजिये अब में खुद देखूंगा सब और हां दादा जी मुझे एक कार लेनी है कल तो पैसे निकल कर रखियेगा

दुर्जन सिंह - हो जायेगा बीटा अब हम चलते है रात बहुत हो गयी है तुम भी आराम करो

कारन - जी बस शेरा भैया से बात कर के जा रहा हु आप निश्चित हो कर सो जाइये

अपने दादा को विश्राम का कह कर कारन कुछ देर शेरा से बात कर ने के बाद हवेली की छत पैर टहल ने चला गया जहा घुप्प अँधेरा था जिसे चाँद की रौशनी काम कर ने की कोशिश कर रही थी जिसकी रौशनी में एक अक्ष चलते हुए कारन के पास आ कर उसके गले लग गया जिसे कारन ने भी बाहो में भरा और उसे महसूस कर ने लगा

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यहाँ चंडी रात में जहा शांति छायी थी तो वही क्सक्सक्सक्सपुर में अर्जुन के सामने उसके आदमियों की लाशें पड़ी थी जिन्हे देख ने अर्जुन घर में बने प्रांगण में पंहुचा और उन सब को देख ने लगा जिसे देख कर उसके चेहरे पैर कुटिल मुस्कान आ गयी जिसे देख कर सुदर्शन शर्मा चिढ़ते हुए बोले


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सुदर्शन - उस मुंशी के पिल्लै शेरा ने हमारे इतने आदमियों को मार डाला और तुम है रहे हो शर्म नहीं आती इतने सालो से एक छोटे से गाओं पैर कब्ज़ा नहीं कर पाए तुम

अर्जुन- आपको क्या लगता है ये उस शेरा का काम है तो शर्मा जी आप बुड्ढे हो गए हो अरे उसकी तो इतनी भी हिम्मत नहीं की वो अकेला हमारे इतने आदमियों की लाशें बिछा दे नहीं बिलकुल नहीं

सुदर्शन - तो फिर ये नया दुश्मन कोण पैदा हो गया

अर्जुन - ये नया नहीं है पुराण hi है और इस का हाल भी में वो hi करूँगा जो अर्जुन ने महाभारत में क......

सुदर्शन - कारन सिंह पैर वो तो मर चूका था

बिच में hi अर्जुन को रोकते हुए बोलै

अर्जुन - मर गया होता तो में कब का उस गाओं को ख़तम कर चूका होता शर्मा जी और वैसे भी मुझे इस का hi इंतज़ार था असली मजा तो अब आएगा खेल का अब मरेगा वो बुद्धा दुर्जन सिंह वो भी उसकी आँखों के सामने जिसे वो अपना ( असली हक़दार ) कहता फिरता है 😄😄😄

एक शैतानी मुस्कान होठो पैर लाते हुए

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