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- Dec 5, 2013
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माँ के संग थोड़ा वक़्त बिताने के बाद आज कारन सालो बाद अपने गाओं में घूम ने निकला था जहा बहुत कुछ बदल चूका था जिसे देखता वो पुराणी यादो को याद करता हुआ आगे बढ़ ने लगा जहा रस्ते में उसे खेत से घर को आते जाते लोग मिले जो अपने जानवरो संग लिए थे
हर चीज़ को बड़े गौर से देखता हुआ वो गाओं के पुराने बरगद के पेड के पास पंहुचा जो अब काफी दूर तक फैला हुआ था जिस के निचे गाओं के कई बुजुर्ग शरण लिए थे जिनसे मिलता वो आगे जाने लगा तो एक बुजुर्ग उसे आवाज़ देते हुए बोले
बुजुर्ग- बीटा कोण हो तुम इस गाओं के तो नहीं लगते कही बहार गाओं के हो क्या
कारन - अरे बाबा में हु पहचाना नहीं क्या रघुवीर जी का पौता
बुजुर्ग- अरे छोटे मालिक आप हो माफ़ करना नज़र कमजोर हो गयी है तो पहचान नहीं पाया और आप भी बड़े हो गए हो
कारन - जी बाबा वैसे चंदा कहा है अब तो उसकी शादी भी हो गयी होगी ( बचपन की फ्रेंड )
बुजुर्ग- अरे कहा बीटा इस गाओं को तो उस टल्ली के पौटे की नज़र लग गयी है तो शादी कैसे करते अब तो दर लगता है बीटा की कही उसके वहसि नौच न ले बच्चियों को
कारन - आप फ़िक्र न करो बाबा और निश्चित हो कर उसके लिए लड़का ढूंढो में आप से वादा करता हु की कुछ भी परेशानी नहीं होगी अब में आ गया हु अपने गाओं और अपने बुजुर्गो के बिच
बुजुर्ग- सुना तो था की किसी ने उन जल्लादो को किसी ने मार मार के बहार निकाल दिया क्या वो तुम ने hi किया है बीटा
कारन - जी बाबा और अब इस गाओं में और कोई घटना घटित नहीं होगी आप निश्चित रहे
अभी बाबा कुछ कहते की एक लड़की आयी और बुजुर्ग से बोली
लड़की - दादू घर चलो माँ बुला रही है खाना खा ने के लिए
बुजुर्ग - अरे आ गयी मेरी गुड़िया देख छोटे मालिक आये है तुझसे मिल ने पहचाना की नहीं
सावला रंग रसीले होठ और गदराया जिस्म जिस की बनावट ऐसी की कोई भी मोहित हो जाए उसे देख
लड़की - मुझसे क्यों मिल ने आये है और में नहीं पहचानती इन्हे जो भी ये है
बुजुर्ग- अरे पगली ये कारन बाबू है भूल गयी बचपन में कितना खेला करती थी और अब कह रही है की पहचानती नहीं ाचा छोटे मल्लिक फिर मिलता हु चाहे तो आप भी चलो गरीब की कुटिया में भोजन ग्रहण कर लीजियेगा
कारन - नहीं बाबा आप जाइये में फिर कभी कर लूंगा अभी तो मुझे इस नकचढ़ी से बात कर नई है
कारन की बात सुन कर बुजुर्ग मुस्कुराते हुए चले गए तो वही चंदा ने कारन को घुरा और गुस्से से मुड़कर जाने लगी तो कारन ने उसका हाथ थाम लिया और बोलै
कारन - क्या सच में नहीं पहचाना या फिर अपने बचपन के दोस्त से बात नहीं कर न चाहती
चंदा- दोस्ती का मतलब भी पता है आप को छोटे मालिक जो मुझे अपना दोस्त कह रहे है याद न हो तो याद दिला दू की आप बिना बताये गायब हो गए थे अब आये है दोस्ती की दुहाई देने छोड़िये मेरा हाथ कोई देख लेगा तो बाते बन जाएगी जिस से आप को शायद कोई फर्क न पड़े पैर मुझे पड़ता है ( बिना कारन की तरफ देखे )
कारन - जितना में जानता हु तो दोस्ती में नाराज़गी की जगह नहीं होती मगर फिर भी तुम्हे बता दू की मुझे भी जबरन भेज दिया गया था तो में कैसे बता ता तुम्हे
चंदा- बातो को घुमा ने की कला तो तुम शरू से जानते हो खैर छोडो कब आये
कारन - 2 दिन पहले hi आया हु और आज समय मिलते hi तुमसे मिल ने चला आया पैर तुम तो टेहरी नकचढ़ी जो आज भी गुस्सा नाक पे लिए घूमती हो
चंदा- पहले खुद को देखो सांड हो गए हो पुरे पैर अकाल अभी भी नहीं आयी झींगुर को
कारन - ाचा रुक नकचढ़ी तुझे अभी बताता हु बहुत बोल ने लगी है
चंदा - चल चल बड़ा आया बता ने वाला पहले पकड़ कर दिखा सांड
दोनों की शर्ते आज भी बच्चो जैसी थी जिस में कारन को चिढ़ाती चंदा बच्चो की तरह खेतो की तरफ भाग ने लगी जिस के पीछे मुस्कुराता कारन बार बार उसे रुक ने को बोल रहा था जिस पैर पीछे मुद कर चंदा कारन को चिढ़ाते हुए बोली
चंदा - अब नहीं रुक ने वाली अब तो अपने पुराने ठिकाने पैर hi जा कर रुकेंगी समझा याद हो तो आ जाना धीरे धीरे
कारन - ाचा तुझे क्या लगता है में तुझे पकड़ नहीं सकता रुक अब तुझे पकड़ कर hi तेरी नाक तोडूंगा नक् छड़ी
तेज़ी से दौड़ लगता वो चंदा के करीब पहुंच कर पीछे से उसका हाथ पकड़ कर बोलै
कारन - अब बोल कहा जाएगी भाग कर हां नकचढ़ी कही की
चंदा - ाःह हाथ छोड़ दर्द कर रहा ऐसा भी कोई करता है क्या देख छोड़ी गड ने लगी है हाथ में
कारन की नज़र उसकी कलाई को देखा तो झटके से अपनी तरफ खींचा जिसके चलते चंदा की सम्पूर्ण काय उसकी बाहो में झूल गयी जिस पैर शर्माती चंदा कारन की आँखों में देखते हुए बोली
चंदा - कारन छोड़ मुझे कोई देख लेगा
कारन - क्यों पहले भी तो हम ऐसे hi खेलते हुए एक दूसरे को पकड़ लेते थे तो फिर अब क्या हुआ
चंदा - बुद्धू hi रहा न पागल अब हम बच्चे नहीं बड़े हो गए और वैसे भी तुम छोटे मालिक हो गाओं के ऐसे मेरे साथ कोई देखेगा तो गलत समझेगा
कारन - ओह्ह सॉरी यार तुझसे मिल के में भूल hi गया थी की अब हम वो गलियों में खेल ने वाले बच्चे नहीं रहे पैर सच में वो वक़्त बेहद हसीं था न चंदा न किसी फ़िक्र और न किसी का डर
चंदा - हम्म चल अब जायदा सत्य मत हो देख हम अपनी पुराणी जगह आ गए भागते हुए
कारन ने चंदा के कह ने पर उस जगह को देखा जहा बचपन में उसका काफी समय यहाँ बिता था तो वह बैठ कर चंदा को अपने पास बैठ ने को बोलै
कारन - आज भी यहाँ कितना सकूं है न चंदा यहाँ
चंदा- हम्म और बता कहा था इतने साल और हां में तो भूल hi गयी तुझसे मिलने की ख़ुशी में तुझे काकी ने ( साक्षी) ने वापस आने कैसे दिया ये जानते हुए की यहाँ तेरी जान को खतरा है
कारन - खतरा कहा नहीं होता चंदा और माँ ने मुझे नहीं आने दिया बल्कि में खुद बिना बताये आया हु वैसे कब तक अपनों से दूर रहता
चंदा - अगर तू ने राहुल को मरते देखा होता तो सहायद तुम वापस आने के बारे में सोचते भी नहीं
चंदा की बात सुनकर कारन उदास हो कर दूर बैठ ते हुए बोलै
कारन - इस बात का hi तो गम है चंदा की में तब यहाँ नहीं था पैर अब हु तो अब कोई राहुल बे मौत नहीं मारा जाएगा
चंदा- बहादुरी और बेवकूफी में जायदा अंतर नहीं होता कारन गाओं के लोगो से पूछ की रात और दिन कैसे बराबर से है उन लोगो के लिए हर वक़्त एक दर का साया मंडराता है उनके दिलो दिमाग में
कारन - वो दर hi ख़तम कर ने आया हु चंदा
चंदा - भगवान् करे ऐसा hi हो जैसे तुम ने सोचा है पैर अभी घर चलो देखो बदल आ गए है शायद बारिश आएगी
कारन - तुम जाओ चंदा अगर जाना चाहती हो में रुकूंगा अभी यहाँ कुछ वक़्त और
चंदा - रुक न तो में भी चाहती हु कारन पैर सारे जानवर खुले है जो माँ से अकेले नहीं बंधेंगे इस लिए मुझे जाना होगा
कारन - क्यों काका कहा गए जो काकी अकेले संभालेगी
चंदा - वो उस दरिंदे की भेंट चढ़ गए तुम्हारी हवेली पैर सुरक्षा देते हुए शेरा चाचा के पास ( जाते हुए बोल कर बिना कुछ सुने hi घर को भागती हुई)
चंदा को जाता देख कारन उसकी आवाज़ में दर्द महसूस करता खड़ा हुआ और बाहे फैला कर बारिश की तेज़ बूंदो में भीगा जोर से चिल्लाते हुए बोलै
कारन - अर्जुन तेरे दिए हर दर्द का हिसाब होगा जल्द hi
माँ के संग थोड़ा वक़्त बिताने के बाद आज कारन सालो बाद अपने गाओं में घूम ने निकला था जहा बहुत कुछ बदल चूका था जिसे देखता वो पुराणी यादो को याद करता हुआ आगे बढ़ ने लगा जहा रस्ते में उसे खेत से घर को आते जाते लोग मिले जो अपने जानवरो संग लिए थे
हर चीज़ को बड़े गौर से देखता हुआ वो गाओं के पुराने बरगद के पेड के पास पंहुचा जो अब काफी दूर तक फैला हुआ था जिस के निचे गाओं के कई बुजुर्ग शरण लिए थे जिनसे मिलता वो आगे जाने लगा तो एक बुजुर्ग उसे आवाज़ देते हुए बोले
बुजुर्ग- बीटा कोण हो तुम इस गाओं के तो नहीं लगते कही बहार गाओं के हो क्या
कारन - अरे बाबा में हु पहचाना नहीं क्या रघुवीर जी का पौता
बुजुर्ग- अरे छोटे मालिक आप हो माफ़ करना नज़र कमजोर हो गयी है तो पहचान नहीं पाया और आप भी बड़े हो गए हो
कारन - जी बाबा वैसे चंदा कहा है अब तो उसकी शादी भी हो गयी होगी ( बचपन की फ्रेंड )
बुजुर्ग- अरे कहा बीटा इस गाओं को तो उस टल्ली के पौटे की नज़र लग गयी है तो शादी कैसे करते अब तो दर लगता है बीटा की कही उसके वहसि नौच न ले बच्चियों को
कारन - आप फ़िक्र न करो बाबा और निश्चित हो कर उसके लिए लड़का ढूंढो में आप से वादा करता हु की कुछ भी परेशानी नहीं होगी अब में आ गया हु अपने गाओं और अपने बुजुर्गो के बिच
बुजुर्ग- सुना तो था की किसी ने उन जल्लादो को किसी ने मार मार के बहार निकाल दिया क्या वो तुम ने hi किया है बीटा
कारन - जी बाबा और अब इस गाओं में और कोई घटना घटित नहीं होगी आप निश्चित रहे
अभी बाबा कुछ कहते की एक लड़की आयी और बुजुर्ग से बोली
लड़की - दादू घर चलो माँ बुला रही है खाना खा ने के लिए
बुजुर्ग - अरे आ गयी मेरी गुड़िया देख छोटे मालिक आये है तुझसे मिल ने पहचाना की नहीं
सावला रंग रसीले होठ और गदराया जिस्म जिस की बनावट ऐसी की कोई भी मोहित हो जाए उसे देख
लड़की - मुझसे क्यों मिल ने आये है और में नहीं पहचानती इन्हे जो भी ये है
बुजुर्ग- अरे पगली ये कारन बाबू है भूल गयी बचपन में कितना खेला करती थी और अब कह रही है की पहचानती नहीं ाचा छोटे मल्लिक फिर मिलता हु चाहे तो आप भी चलो गरीब की कुटिया में भोजन ग्रहण कर लीजियेगा
कारन - नहीं बाबा आप जाइये में फिर कभी कर लूंगा अभी तो मुझे इस नकचढ़ी से बात कर नई है
कारन की बात सुन कर बुजुर्ग मुस्कुराते हुए चले गए तो वही चंदा ने कारन को घुरा और गुस्से से मुड़कर जाने लगी तो कारन ने उसका हाथ थाम लिया और बोलै
कारन - क्या सच में नहीं पहचाना या फिर अपने बचपन के दोस्त से बात नहीं कर न चाहती
चंदा- दोस्ती का मतलब भी पता है आप को छोटे मालिक जो मुझे अपना दोस्त कह रहे है याद न हो तो याद दिला दू की आप बिना बताये गायब हो गए थे अब आये है दोस्ती की दुहाई देने छोड़िये मेरा हाथ कोई देख लेगा तो बाते बन जाएगी जिस से आप को शायद कोई फर्क न पड़े पैर मुझे पड़ता है ( बिना कारन की तरफ देखे )
कारन - जितना में जानता हु तो दोस्ती में नाराज़गी की जगह नहीं होती मगर फिर भी तुम्हे बता दू की मुझे भी जबरन भेज दिया गया था तो में कैसे बता ता तुम्हे
चंदा- बातो को घुमा ने की कला तो तुम शरू से जानते हो खैर छोडो कब आये
कारन - 2 दिन पहले hi आया हु और आज समय मिलते hi तुमसे मिल ने चला आया पैर तुम तो टेहरी नकचढ़ी जो आज भी गुस्सा नाक पे लिए घूमती हो
चंदा- पहले खुद को देखो सांड हो गए हो पुरे पैर अकाल अभी भी नहीं आयी झींगुर को
कारन - ाचा रुक नकचढ़ी तुझे अभी बताता हु बहुत बोल ने लगी है
चंदा - चल चल बड़ा आया बता ने वाला पहले पकड़ कर दिखा सांड
दोनों की शर्ते आज भी बच्चो जैसी थी जिस में कारन को चिढ़ाती चंदा बच्चो की तरह खेतो की तरफ भाग ने लगी जिस के पीछे मुस्कुराता कारन बार बार उसे रुक ने को बोल रहा था जिस पैर पीछे मुद कर चंदा कारन को चिढ़ाते हुए बोली
चंदा - अब नहीं रुक ने वाली अब तो अपने पुराने ठिकाने पैर hi जा कर रुकेंगी समझा याद हो तो आ जाना धीरे धीरे
कारन - ाचा तुझे क्या लगता है में तुझे पकड़ नहीं सकता रुक अब तुझे पकड़ कर hi तेरी नाक तोडूंगा नक् छड़ी
तेज़ी से दौड़ लगता वो चंदा के करीब पहुंच कर पीछे से उसका हाथ पकड़ कर बोलै
कारन - अब बोल कहा जाएगी भाग कर हां नकचढ़ी कही की
चंदा - ाःह हाथ छोड़ दर्द कर रहा ऐसा भी कोई करता है क्या देख छोड़ी गड ने लगी है हाथ में
कारन की नज़र उसकी कलाई को देखा तो झटके से अपनी तरफ खींचा जिसके चलते चंदा की सम्पूर्ण काय उसकी बाहो में झूल गयी जिस पैर शर्माती चंदा कारन की आँखों में देखते हुए बोली
चंदा - कारन छोड़ मुझे कोई देख लेगा
कारन - क्यों पहले भी तो हम ऐसे hi खेलते हुए एक दूसरे को पकड़ लेते थे तो फिर अब क्या हुआ
चंदा - बुद्धू hi रहा न पागल अब हम बच्चे नहीं बड़े हो गए और वैसे भी तुम छोटे मालिक हो गाओं के ऐसे मेरे साथ कोई देखेगा तो गलत समझेगा
कारन - ओह्ह सॉरी यार तुझसे मिल के में भूल hi गया थी की अब हम वो गलियों में खेल ने वाले बच्चे नहीं रहे पैर सच में वो वक़्त बेहद हसीं था न चंदा न किसी फ़िक्र और न किसी का डर
चंदा - हम्म चल अब जायदा सत्य मत हो देख हम अपनी पुराणी जगह आ गए भागते हुए
कारन ने चंदा के कह ने पर उस जगह को देखा जहा बचपन में उसका काफी समय यहाँ बिता था तो वह बैठ कर चंदा को अपने पास बैठ ने को बोलै
कारन - आज भी यहाँ कितना सकूं है न चंदा यहाँ
चंदा- हम्म और बता कहा था इतने साल और हां में तो भूल hi गयी तुझसे मिलने की ख़ुशी में तुझे काकी ने ( साक्षी) ने वापस आने कैसे दिया ये जानते हुए की यहाँ तेरी जान को खतरा है
कारन - खतरा कहा नहीं होता चंदा और माँ ने मुझे नहीं आने दिया बल्कि में खुद बिना बताये आया हु वैसे कब तक अपनों से दूर रहता
चंदा - अगर तू ने राहुल को मरते देखा होता तो सहायद तुम वापस आने के बारे में सोचते भी नहीं
चंदा की बात सुनकर कारन उदास हो कर दूर बैठ ते हुए बोलै
कारन - इस बात का hi तो गम है चंदा की में तब यहाँ नहीं था पैर अब हु तो अब कोई राहुल बे मौत नहीं मारा जाएगा
चंदा- बहादुरी और बेवकूफी में जायदा अंतर नहीं होता कारन गाओं के लोगो से पूछ की रात और दिन कैसे बराबर से है उन लोगो के लिए हर वक़्त एक दर का साया मंडराता है उनके दिलो दिमाग में
कारन - वो दर hi ख़तम कर ने आया हु चंदा
चंदा - भगवान् करे ऐसा hi हो जैसे तुम ने सोचा है पैर अभी घर चलो देखो बदल आ गए है शायद बारिश आएगी
कारन - तुम जाओ चंदा अगर जाना चाहती हो में रुकूंगा अभी यहाँ कुछ वक़्त और
चंदा - रुक न तो में भी चाहती हु कारन पैर सारे जानवर खुले है जो माँ से अकेले नहीं बंधेंगे इस लिए मुझे जाना होगा
कारन - क्यों काका कहा गए जो काकी अकेले संभालेगी
चंदा - वो उस दरिंदे की भेंट चढ़ गए तुम्हारी हवेली पैर सुरक्षा देते हुए शेरा चाचा के पास ( जाते हुए बोल कर बिना कुछ सुने hi घर को भागती हुई)
चंदा को जाता देख कारन उसकी आवाज़ में दर्द महसूस करता खड़ा हुआ और बाहे फैला कर बारिश की तेज़ बूंदो में भीगा जोर से चिल्लाते हुए बोलै
कारन - अर्जुन तेरे दिए हर दर्द का हिसाब होगा जल्द hi