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फ़्लैश बैक
बात उस वक़्त की जब ये दोनों परिवार एक hi गाओं की सीमा में रहा करते थे जहा का जान जीवन ें द्प्नो के घराने की बदौलत hi चलता जिसकी वजह थी गाओं हरित भूमि जो बहुत उपजाऊ और ओसधि से लिप्त थी जिस का पता जब मिताली के पिता के सौतेले पिता यानि सुदर्शन उर्फ़ टल्ली को चला तो वो लालच में गाओं लौट आया पैसे के लालच में
अरे रघुवीर काका आप आयी ये आयी ये बैठिये और बताइये घर बार में सब कैसे है और हमारा शैतान कारन कैसा है (सुरेश मिताली के पिता )
Raghvir-bus सब ठीक है मैंने सुना सुदर्शन भाई आये है तो मिल ने चला आया कहा है वो दिख नहीं रहे
सुरेश- काका वो खेतो की तरफ गए है आते hi होंगे
रघुवीर - खेतो पैर वो भी सुदर्शन भाई कमाल है
सुरेश - हां काका अजीब तो मुझे भी लगा पैर में अब क्या बोलू उनका सुभाव तो आप जानते hi हो
परनाम दादू कैसे है आप
रघुवीर- अरे मेरी गुड़िया में ठीक हु सच पूछो तो तुझे देख कर hi दिल खुश हो जाता है ऊपर से तेरी ये नीली आँखे क्या hi कहु ( प्यार से मिताली के सर पैर हाथ फिरते हुए बोले)
सुरेश - ये तो सच कहा काका आप ने मेरी रानी बिटिया सच में बहुत प्यारी है इसे देखता हु तो साडी थकान भूल जाता हु बिलकुल अपनी माँ जैसी है ये
रघुवीर- हां सुरेश बीटा बेटियों की यही खसियत है ाचा अब में चलता हु
मिताली- दादू हम भी चले आप के साथ आरती से मिलने
रघुवीर- मेरी बच्ची मेरा बस चलता तो तुझे हमेसा के लिए अपने घर रख लेता पैर क्या करू ये बिरादरी वाले लोग है न
सुरेश - अरे तो क्या हुआ काका अभी भी तो ये आप की बिटिया hi है और वैसे भी हमारे बिच ये बिरादरी कहा से आ गयी
रघुवीर- बात तो तुम्हारी भी सही है बीटा पैर शायद तुम समझे नहीं में मिताली बेटी को अपने कारन के लिए सोचता हु जानता हु ये उस से बड़ी है पैर सच पूछो तो मेरा दिल नहीं मानता कुछ भी
सुरेश- काका इतना स्नेह करते है आप मिताली से तो आज से ये आपके कारन की हुई जब दोनों बच्चे जवान होंगे तो हम धूम धाम से इनकी शादी करेंगे ये मेरा वादा है आप से क्यों मिताली बीटा
नहीं बाबा मिताली कभी उस कारन से नहीं मिलेगी देखो उसने क्या किया मेरा सर फोड़ दिया ( खून से लथपथ अर्जुन सुरेश के समीप आते हुए बोलै )
सुरेश- अरे ये क्या हुआ तुझे कितना खून बह रहा है और कारन ने क्यों मारा तुझे वो तो तुझे भैया कहता है न
अर्जुन- मुझे नहीं पता पैर अब में उसे नहीं छोडूंगा देख लेना
सुरेश- ये कैसी भाषा का प्रयोग कर रहे हो अर्जुन क्या मैंने तुम्हे यही सिखाया है और तुम मिताली बीटा जाओ कारन को बुला कर लाओ
अपने पिता की बात सुनकर मिताली तुरंत कारन को बुला ने दौड़ गयी जिस के जाते hi रघुवीर सिंह बोले
रघुवीर- मैं कारन की तरफ से माफ़ी मांगता हु सुरेश बीटा
सुरेश - अरे काका आप भी क्या बच्चो की शरारत से बह कर हाथ जोड़ ने लगे पहले कारन को आने दीजिये तभी सच और झूट का पता चलेगा में उसे अछि तरह से जानता हु वो ऐसा नहीं है जरूर इस में hi उसे उकसाया होगा और तुम जाओ मरहम पट्टी करवाओ अंदर जा के
अर्जुन- आप अपने बेटे का साथ दे ने की बजाये उस कारन की पैरवी कर रहे है सच कहते है दाद्दु आप ें सिंघो से दबते है पैर में नहीं और रही बात मिताली की तो वो मेरी बहिन है माँ के बाद मैंने hi उसका ख्याल रखा है तो उसे में इनके घर की बहु तो बन ने नहीं दूंगा
शाबाश मेरे शेर तू सच मेरा पौता है देख न एक दिन पुरे इलाके पैर तेरा राज होगा और रघुवीर तुमसे मुझे तुम्हारी वो जंगल से लगती ज़मीन चाहिए
रघुवीर- वो तो में नहीं दे सकता भाईसाब क्युकी वो मेरे कारन और राहुल के नाम है पैर आप को क्यों चाहिए आप तो गाओं में जायदा रहते भी नहीं
अभी कुछ और बात होती उस से पहले hi मिताली कारन का हाथ थामे घर के अंदर आयी जिसे देख कर सुरेश बोलै
सुरेश- कारन बीटा तुम ने अर्जुन भैया को क्यों मारा
कारन - काका अर्जुन भैया आरती और सुरभि दीदी के लिए गन्दा गन्दा बोल रहे थे और जब मैंने इन्हे टोका तो ीन्हो ने मेरे पेट में लात मारी तो मैंने पत्थर उठा कर मार दिया वर्ण ये और मारते मुझे
सुरेश - देखा काका मैं ने कहा था न कारन को इस ने अक्षय होगा और पिता की आप क्यों इस के दिल में नफरत भरते रहते है ये सही नहीं है
सुदर्शन- मुझसे जुबान लड़ता है अपने बाप से अरे क्या है ें सिंघो के पास जो तू इन के पीछे दम हिलता फिरता है जैसा तेरा दादा फिरता था जिसकी वजह से ये इतने फल फूल रहे है वर्ण इनकी औकात यहाँ खड़े रह ने की भी नहीं और ये मुझे ज़मीन दे ने से मना कर रहा है
रघुवीर- सुदर्शन में इज़्ज़त करता हु इस का मतलब ये नहीं की तुम कुछ भी कहते रहोगे और में सुनता रहूँगा अगर में तुम्हे कुछ नहीं बोल रहा तो इस की सिर्फ एक वजह है शर्मा परिवार से हमारी पुरखो की यारी और भागीदारी न की तुम्हारी वजह से
सुदर्शन- देख रहा है तू कैसे तेरे बाप से बात कर रहा है खैर तुमसे में कोई उम्मीद भी नहीं रखता मुझे मेरे पौटे अर्जुन पैर पूरा भरोषा है वो ें को इनकी औकात दिखा कर रहेगा और हां इनके साथ कोई रिश्ता तो भूल hi जाओ वर्ण अंजाम बहुत बुरा होगा
सुरेश- ये मेरे बच्चे है पिता जी और आप सिर्फ मेरी माँ के दूसरे पति जिसकी वजह से में आप की इज़्ज़त करता हु बाकि रही ें से रिश्ते की बात तो मिताली बीटा सुनो आज से में कारन hi तुम्हारा पति और जीवनसाथी होगा बोलो तुम अपने बाबा का वादा निभाओगी न
मिताली - जी बाबा आज से हम आप के वाडे को पुरे दिल से निभाएंगे और जब भी आप हमारी शादी करेंगे हम बिना किसी ऐतराज़ के कर लेंगे
रघुवीर- सुरेश बीटा तू ने मिताली हमारी झोली में दाल कर हमें धन्य कर दिया लो मिताली बीटा शगुन
कारन - तो अब मिताली दीदी हमें नहीं मारेगी दादू और माँ की तरह हम्हारी बात भी मानेगी
कारन की बात सुनकर सुरेश मिताली और रघुवीर हसने लगे
सुरेश - हां बीटा नहीं मारेगी पैर अब ये तुम्हारी दीदी भी नहीं है अब से ये तुम्हारी जीवन साथी है जिसका ख्याल तुम्हे साड़ी ज़िन्दगी रख न होगा बोलै रखोगे न
कारन - जी काका रखूँगा पक्का वादा
अर्जुन- उस से पहले में तुझे जान से मार दूंगा कुत्ते के पिल..........
चाटटककक चात्तट्ठाकककक दो जोर दर थप्पड़ गाल पैर पड़ते hi अर्जुन निचे गिर पड़ा जिसे सहारा देकर खड़ा कर के सुदर्शन बोलै
सुदर्शन - तूने आज जो किया है उस का खामियाज़ा तुम सब को भुगत न होगा याद रख न चल बीटा अर्जुन तेरा बाप इनकी गुलामी hi करेगा
दोनों के वह से जाने के बाद सुरेश मिताली से बोलै
सुरेश- देखो मिताली बीटा कारन अभी थोड़ा नासमझ है पैर आगे भविस्ये में ये एक हों हार युवा बनेगा मेरा दिल कहता है इसलिए तुम इस बात का ख़याल रख न की इसे मैंने तुम्हारे लिए चुना है और मुझे यकीन है तुम मेरी बात का मान रखोगी
मिताली- पिता जी आप यकीन रखिये में समझती हु आप ने मेरे लिए कुछ सोचा है तो ाचा hi सोचा होगा इसलिए में भी आप से वादा करती हु की शादी जब भी हो पैर आज से कारन मेरे लिए मेरा जीवन साथी मेरा पति है
रघुवीर- शाबाश मेरी बची भगवान् तुम्हे सदा खुश रखे ाचा सुरेश में चलता हु और तुम भी अर्जुन को प्यार से समझाओ जवान हो रहा है ऐसे गुस्से में कही कोई गलत कदम न उठा ले
सुरेश- ऐसी बात का दर है लका ऊपर पिता जी दिन रात न जाने क्या क्या उसके मैं में भरते रहते है खैर कोई नहीं आप जाइये में समझाता हु उसे
सुरेश दे विदा ले कर रघुवीर सिंह कारन को साथ लिए घर लौट गए जब की सुदर्शन अपने कमरे में बैठा अपनज जीत की ख़ुशी मना रहा था पेग लगा कर क्युकी आज उस ने अर्जुन से पहला गुनाह करवा दिया था कारन की औरतो पैर हाथ डलवा के और कही न कही एक नफरत की चिंगारी भी फूक दी थी सुरेश के खिलाफ
सुदर्शन पेग पीटा हुआ आगे के बारे में सोच रहा था की तभी सुरेश कमरे में दाखिल हुआ और सुदर्शन को दारु पीटा देख बोलै
सुरेश- ये क्या कर रहे है आप पिता जी जानते है न हमारे खानदान में कभी किसी ने दारु को हाथ तक नहीं लगाया और आप हो की दिन में hi चालू हो जाते हो
Sudharshan-mujhe मत सीखा क्या करना है और क्या नहीं वर्ण दाना पानी भी बंद कर दूंगा समझा अब अगर पेग लगा न है तो बोल वेर न निकल यहाँ से
सुरेश- आप भूल रहे ये सब शानो शौकत और ज़मीदारी का वारिश में हु और मेरे बाद अर्जुन इसलिए जितनी जल्दी हो सके अपनी आदत सुधार लो और एक बात मेरे बेटे के कान भर न बंद कर दीजिये
सुदर्शन- ाचा बड़े पर निकल आये है तेरे पहले तो तेरी जुबान नहीं खुलती थी ( सुरेश की तरफ कुर्सी घुमा कर देखते हुए बोलै )
सुरेश - क्युकी बात अब मेरे बच्चो की है इसलिए में अब कोई भी गलत बात सेहन नहीं होगी इस बात को जितनी जल्दी समझ लो उतना ाचा है आप के लिए
सुरेश सुदर्शन को बोल कर कमरे से निकल जहा वो अपना एक पेग और बनाते हुए मैं में आगे के बारे में सोच ने लगा
फ़्लैश बैक
बात उस वक़्त की जब ये दोनों परिवार एक hi गाओं की सीमा में रहा करते थे जहा का जान जीवन ें द्प्नो के घराने की बदौलत hi चलता जिसकी वजह थी गाओं हरित भूमि जो बहुत उपजाऊ और ओसधि से लिप्त थी जिस का पता जब मिताली के पिता के सौतेले पिता यानि सुदर्शन उर्फ़ टल्ली को चला तो वो लालच में गाओं लौट आया पैसे के लालच में
अरे रघुवीर काका आप आयी ये आयी ये बैठिये और बताइये घर बार में सब कैसे है और हमारा शैतान कारन कैसा है (सुरेश मिताली के पिता )
Raghvir-bus सब ठीक है मैंने सुना सुदर्शन भाई आये है तो मिल ने चला आया कहा है वो दिख नहीं रहे
सुरेश- काका वो खेतो की तरफ गए है आते hi होंगे
रघुवीर - खेतो पैर वो भी सुदर्शन भाई कमाल है
सुरेश - हां काका अजीब तो मुझे भी लगा पैर में अब क्या बोलू उनका सुभाव तो आप जानते hi हो
परनाम दादू कैसे है आप
रघुवीर- अरे मेरी गुड़िया में ठीक हु सच पूछो तो तुझे देख कर hi दिल खुश हो जाता है ऊपर से तेरी ये नीली आँखे क्या hi कहु ( प्यार से मिताली के सर पैर हाथ फिरते हुए बोले)
सुरेश - ये तो सच कहा काका आप ने मेरी रानी बिटिया सच में बहुत प्यारी है इसे देखता हु तो साडी थकान भूल जाता हु बिलकुल अपनी माँ जैसी है ये
रघुवीर- हां सुरेश बीटा बेटियों की यही खसियत है ाचा अब में चलता हु
मिताली- दादू हम भी चले आप के साथ आरती से मिलने
रघुवीर- मेरी बच्ची मेरा बस चलता तो तुझे हमेसा के लिए अपने घर रख लेता पैर क्या करू ये बिरादरी वाले लोग है न
सुरेश - अरे तो क्या हुआ काका अभी भी तो ये आप की बिटिया hi है और वैसे भी हमारे बिच ये बिरादरी कहा से आ गयी
रघुवीर- बात तो तुम्हारी भी सही है बीटा पैर शायद तुम समझे नहीं में मिताली बेटी को अपने कारन के लिए सोचता हु जानता हु ये उस से बड़ी है पैर सच पूछो तो मेरा दिल नहीं मानता कुछ भी
सुरेश- काका इतना स्नेह करते है आप मिताली से तो आज से ये आपके कारन की हुई जब दोनों बच्चे जवान होंगे तो हम धूम धाम से इनकी शादी करेंगे ये मेरा वादा है आप से क्यों मिताली बीटा
नहीं बाबा मिताली कभी उस कारन से नहीं मिलेगी देखो उसने क्या किया मेरा सर फोड़ दिया ( खून से लथपथ अर्जुन सुरेश के समीप आते हुए बोलै )
सुरेश- अरे ये क्या हुआ तुझे कितना खून बह रहा है और कारन ने क्यों मारा तुझे वो तो तुझे भैया कहता है न
अर्जुन- मुझे नहीं पता पैर अब में उसे नहीं छोडूंगा देख लेना
सुरेश- ये कैसी भाषा का प्रयोग कर रहे हो अर्जुन क्या मैंने तुम्हे यही सिखाया है और तुम मिताली बीटा जाओ कारन को बुला कर लाओ
अपने पिता की बात सुनकर मिताली तुरंत कारन को बुला ने दौड़ गयी जिस के जाते hi रघुवीर सिंह बोले
रघुवीर- मैं कारन की तरफ से माफ़ी मांगता हु सुरेश बीटा
सुरेश - अरे काका आप भी क्या बच्चो की शरारत से बह कर हाथ जोड़ ने लगे पहले कारन को आने दीजिये तभी सच और झूट का पता चलेगा में उसे अछि तरह से जानता हु वो ऐसा नहीं है जरूर इस में hi उसे उकसाया होगा और तुम जाओ मरहम पट्टी करवाओ अंदर जा के
अर्जुन- आप अपने बेटे का साथ दे ने की बजाये उस कारन की पैरवी कर रहे है सच कहते है दाद्दु आप ें सिंघो से दबते है पैर में नहीं और रही बात मिताली की तो वो मेरी बहिन है माँ के बाद मैंने hi उसका ख्याल रखा है तो उसे में इनके घर की बहु तो बन ने नहीं दूंगा
शाबाश मेरे शेर तू सच मेरा पौता है देख न एक दिन पुरे इलाके पैर तेरा राज होगा और रघुवीर तुमसे मुझे तुम्हारी वो जंगल से लगती ज़मीन चाहिए
रघुवीर- वो तो में नहीं दे सकता भाईसाब क्युकी वो मेरे कारन और राहुल के नाम है पैर आप को क्यों चाहिए आप तो गाओं में जायदा रहते भी नहीं
अभी कुछ और बात होती उस से पहले hi मिताली कारन का हाथ थामे घर के अंदर आयी जिसे देख कर सुरेश बोलै
सुरेश- कारन बीटा तुम ने अर्जुन भैया को क्यों मारा
कारन - काका अर्जुन भैया आरती और सुरभि दीदी के लिए गन्दा गन्दा बोल रहे थे और जब मैंने इन्हे टोका तो ीन्हो ने मेरे पेट में लात मारी तो मैंने पत्थर उठा कर मार दिया वर्ण ये और मारते मुझे
सुरेश - देखा काका मैं ने कहा था न कारन को इस ने अक्षय होगा और पिता की आप क्यों इस के दिल में नफरत भरते रहते है ये सही नहीं है
सुदर्शन- मुझसे जुबान लड़ता है अपने बाप से अरे क्या है ें सिंघो के पास जो तू इन के पीछे दम हिलता फिरता है जैसा तेरा दादा फिरता था जिसकी वजह से ये इतने फल फूल रहे है वर्ण इनकी औकात यहाँ खड़े रह ने की भी नहीं और ये मुझे ज़मीन दे ने से मना कर रहा है
रघुवीर- सुदर्शन में इज़्ज़त करता हु इस का मतलब ये नहीं की तुम कुछ भी कहते रहोगे और में सुनता रहूँगा अगर में तुम्हे कुछ नहीं बोल रहा तो इस की सिर्फ एक वजह है शर्मा परिवार से हमारी पुरखो की यारी और भागीदारी न की तुम्हारी वजह से
सुदर्शन- देख रहा है तू कैसे तेरे बाप से बात कर रहा है खैर तुमसे में कोई उम्मीद भी नहीं रखता मुझे मेरे पौटे अर्जुन पैर पूरा भरोषा है वो ें को इनकी औकात दिखा कर रहेगा और हां इनके साथ कोई रिश्ता तो भूल hi जाओ वर्ण अंजाम बहुत बुरा होगा
सुरेश- ये मेरे बच्चे है पिता जी और आप सिर्फ मेरी माँ के दूसरे पति जिसकी वजह से में आप की इज़्ज़त करता हु बाकि रही ें से रिश्ते की बात तो मिताली बीटा सुनो आज से में कारन hi तुम्हारा पति और जीवनसाथी होगा बोलो तुम अपने बाबा का वादा निभाओगी न
मिताली - जी बाबा आज से हम आप के वाडे को पुरे दिल से निभाएंगे और जब भी आप हमारी शादी करेंगे हम बिना किसी ऐतराज़ के कर लेंगे
रघुवीर- सुरेश बीटा तू ने मिताली हमारी झोली में दाल कर हमें धन्य कर दिया लो मिताली बीटा शगुन
कारन - तो अब मिताली दीदी हमें नहीं मारेगी दादू और माँ की तरह हम्हारी बात भी मानेगी
कारन की बात सुनकर सुरेश मिताली और रघुवीर हसने लगे
सुरेश - हां बीटा नहीं मारेगी पैर अब ये तुम्हारी दीदी भी नहीं है अब से ये तुम्हारी जीवन साथी है जिसका ख्याल तुम्हे साड़ी ज़िन्दगी रख न होगा बोलै रखोगे न
कारन - जी काका रखूँगा पक्का वादा
अर्जुन- उस से पहले में तुझे जान से मार दूंगा कुत्ते के पिल..........
चाटटककक चात्तट्ठाकककक दो जोर दर थप्पड़ गाल पैर पड़ते hi अर्जुन निचे गिर पड़ा जिसे सहारा देकर खड़ा कर के सुदर्शन बोलै
सुदर्शन - तूने आज जो किया है उस का खामियाज़ा तुम सब को भुगत न होगा याद रख न चल बीटा अर्जुन तेरा बाप इनकी गुलामी hi करेगा
दोनों के वह से जाने के बाद सुरेश मिताली से बोलै
सुरेश- देखो मिताली बीटा कारन अभी थोड़ा नासमझ है पैर आगे भविस्ये में ये एक हों हार युवा बनेगा मेरा दिल कहता है इसलिए तुम इस बात का ख़याल रख न की इसे मैंने तुम्हारे लिए चुना है और मुझे यकीन है तुम मेरी बात का मान रखोगी
मिताली- पिता जी आप यकीन रखिये में समझती हु आप ने मेरे लिए कुछ सोचा है तो ाचा hi सोचा होगा इसलिए में भी आप से वादा करती हु की शादी जब भी हो पैर आज से कारन मेरे लिए मेरा जीवन साथी मेरा पति है
रघुवीर- शाबाश मेरी बची भगवान् तुम्हे सदा खुश रखे ाचा सुरेश में चलता हु और तुम भी अर्जुन को प्यार से समझाओ जवान हो रहा है ऐसे गुस्से में कही कोई गलत कदम न उठा ले
सुरेश- ऐसी बात का दर है लका ऊपर पिता जी दिन रात न जाने क्या क्या उसके मैं में भरते रहते है खैर कोई नहीं आप जाइये में समझाता हु उसे
सुरेश दे विदा ले कर रघुवीर सिंह कारन को साथ लिए घर लौट गए जब की सुदर्शन अपने कमरे में बैठा अपनज जीत की ख़ुशी मना रहा था पेग लगा कर क्युकी आज उस ने अर्जुन से पहला गुनाह करवा दिया था कारन की औरतो पैर हाथ डलवा के और कही न कही एक नफरत की चिंगारी भी फूक दी थी सुरेश के खिलाफ
सुदर्शन पेग पीटा हुआ आगे के बारे में सोच रहा था की तभी सुरेश कमरे में दाखिल हुआ और सुदर्शन को दारु पीटा देख बोलै
सुरेश- ये क्या कर रहे है आप पिता जी जानते है न हमारे खानदान में कभी किसी ने दारु को हाथ तक नहीं लगाया और आप हो की दिन में hi चालू हो जाते हो
Sudharshan-mujhe मत सीखा क्या करना है और क्या नहीं वर्ण दाना पानी भी बंद कर दूंगा समझा अब अगर पेग लगा न है तो बोल वेर न निकल यहाँ से
सुरेश- आप भूल रहे ये सब शानो शौकत और ज़मीदारी का वारिश में हु और मेरे बाद अर्जुन इसलिए जितनी जल्दी हो सके अपनी आदत सुधार लो और एक बात मेरे बेटे के कान भर न बंद कर दीजिये
सुदर्शन- ाचा बड़े पर निकल आये है तेरे पहले तो तेरी जुबान नहीं खुलती थी ( सुरेश की तरफ कुर्सी घुमा कर देखते हुए बोलै )
सुरेश - क्युकी बात अब मेरे बच्चो की है इसलिए में अब कोई भी गलत बात सेहन नहीं होगी इस बात को जितनी जल्दी समझ लो उतना ाचा है आप के लिए
सुरेश सुदर्शन को बोल कर कमरे से निकल जहा वो अपना एक पेग और बनाते हुए मैं में आगे के बारे में सोच ने लगा