Incest Deewanapan... - Page 7 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

अपडेट -2

अभ अग्गे...

दूसरी तरफ ....

शाम के 6 बज रहे थे , बेबी अकेली अपने रूम में बैठी रो रही थी , रोटी भी क्यों न , आखिर उसका प्यार , उसकी जान , उसका सब कुछ , अज्ज इक पत्थर की मूरत बना बैठा था ,

जिसे अज्ज उसके हाथ की चुहान भी ठीक नै कर प् रही थी , बेबी इस सब में अपनी hi गलती मानती थी ,

बेबी दिल में इक दर्द लिए तड़फ रही थी , वोह अपने अप्प को रवि का दोषी मानती थी , अगर वोह उस दिन जंगल न जाती तोह अज्ज उसका रवि ठीक होता ,

बेबी अभ रवि की असलियत जानती थी , उसे पता था , के उसका रवि इक वैम्पायर था , वोह वामपिरेस की ऐसी हालत पर रिसर्च कर रही थी , लेकिन उसे अभ तक इस बारे में कुछ पता नै चला था ,

बेबी अभी बीएड पर बैठी रो hi रही थी , के कैटलीन उसके लिए कुछ खाने को लेकर ा गई , उसे भी दुःख था रवि की ऐसी हालत पर ,

कैटलीन , बेबी के पास आकर बेथ गई , उसने बेबी को जब रट देखा तोह वोह इतने दिनों का दर्द जो उसने अपने अंदर दबा रखा था , वोह दर्द उसकी आँखों से बहने लगा ,

कैटलीन रोने लगी , बेबी ने जब कैटलीन को रट देखा , तब उसने अपनी खूबसूरत आँखों से बहते असनुईओं को हाथो से साफ किया और कैटलीन को अपने गले लगा लिया ,

"काट , क्यों रो रही हो तुम.." बेबी ने कैटलीन के असंयुईओं से भेज गलो को साफ करते हुए बोलै ,

"बेबी तुम पिछले 7 दिनों से दुखी हो , न कुछ ठीक तरह से कहती हो न पति हो , क्या करू में , (रट हुए) में तुम दर्द में नै देख सकती , क्यों कर रही हो यह सब.." कैटलीन ने बेबी के गलो को चूमते हुए रट हुए बोलै ,

"तोह क्या करू में , रवि की ऐसी दर्दनाक हालत मुज़से देखि नै जाती , वोह अंदर hi अंदर मर रहा है , और में , और में , कुछ नै कर सकती.." बेबी ने और भी जोर से रट हुए बोलै ,

"ओह्ह मेरी जान , वोह ठीक हो जायेगा , यह लो गन.." कैटलीन ने इक गन बेबी के हाथिओं में देते हुए बोलै ,

बेबी हरिजन सी हुई कैटलीन की तरफ देखती रही , कैटलीन ने बेबी के हाथो में गन पकड़ा , उसे अपने माथे के बेचू बेच रख लिया और बोली ,

"बेबी में तुम दुखी और रट हुए नै देख सकती , प्लस मुझे मर दो , में तुमसे बेइंतहा प्यार करती हु , और मुज़से यह सेहन नै हो रहा के तुम इस तरह हर पल रोटी रहो , मुझे दर्द हो रहा है अंदर hi अंदर , मुझे मर दो बेबी , प्लस .." कैटलीन ने रट हुए बोलै ,

बेबी ने िका इक गन दूर फेंक दी और कैटलीन को अपनी बहु में भर लिया और उसके पोरे चेहरे को चूमने लगी , कुछ देर बेबी कैटलीन के चेहरे को चूमती रही , उसके होंठो को चुस्ती रही ,

"काट , मुझे माफ़ कर दो , में अभ कभी नै रोयुगी , मुझे समाज ा गया के मेरा रवि जल्द hi ठीक हो जायेगा , पर में अपनी जान को ऐसे दर्द में नै देख सकती , अभ में खुश रहूगी , जैसा तुम कहुगी वैसा hi करुँगी.." बेबी ने कैटलीन के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै ,

कुछ देर दोनों ऐसी तरह आपस में प्यार करती रही , और फिर कैटलीन ने बेबी को अपने हाथिओं से खाना कहिल्या और उसे अपने साथ लेकर लेट गई ,

बेबी का दर्द तोह कैटलीन ने ख़तम कर दिया था , पर इक रवि था जिसका दर्द अभ हर गुजर रहे पल के साथ नफरत के उस सैलाब में परवर्तित हो रहा था , जिस में उसका पवित्र प्रेम कुछ लमहु के लिए बहने वाला था ,

रवि अभ धीरे धीरे रिंग का गुलाम बनता जा रहा था , क्या छुपा था ऐनी वाले वख्त में , रिंग का रहस्य अभी भी वैसे hi था , जैसा सदियों पहले था ,

दूसरी तरफ....

रत के 8 बज रहे थे , डाइनिंग टेबल पर सीमा सबको खाना खिला रही थी , किसी का भी मन नै था , खाना खाने को , लेकिन सीमा जबरदस्ती सबको खिला रही थी ,

सबकी आँखें बस उसी रूम पर अटकी हुई थी , यहाँ से रवि बहार ऐनी वाला था ,

"माँ भइआ ठीक होकर सुबह बहार आएंगे न.." रमा ने थोड़ा नाम आँखें कर बोलै ,

"हाँ मेरा बचा , अपनी माँ की बात पर विश्वास कर , सुबह होते hi तेरा भी तुम सबको प्यार से गले लगाएगा..." सीमा ने रमा के बालो पर प्यार से हाथ फिरते हुए बोलै ,

"भाभी कोमल देदी कहा है , पिछले 7 दिनों से हमने उसे नै देखा.." रिमी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"हाँ भाभी कोमल कहा है , वोह तोह भइआ के बिना इक पल नै रह पति थी , कहा है वोह.." शूरति ने भी रिमी की तरफ देखते हुए बोलै ,

"हशः , देखो मेरी इक बात दयँ से सुन लो , तुम सब की सब , अज्ज के बाद कोमल का नाम इस घर में कोई नै लेगा ..." सीमा ने सबकी तरफ देखते हुए बोलै ,

"माँ यह क्या बोल रही हो अप्प , अगर भये ने हमसे पूछा तोह क्या बोलेगे हम.." रमा ने खाने कहते कहते रुक कर बोलै ,

"भाभी , रवि तोह इक पल भी कोमल से दूर नै रह सकता .." शूरति भी खाना बेच में hi छोड़ते हुए बोली..

"कोमल अभ इस दुनिआ में नै रही , वोह मर चुकी है.." सीमा ने रट हुए बोलै ,

"क्या ..." रमा , रिमी और शूरति इक डैम से चीला कर बोली , उनकी आँखों में असनु उभर ए थे ,

"यह सब कब हुआ माँ.." रमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"मेरी बची , तुम्हारे भइआ की जान बचने के लिए कोमल ने अपनी जान कुर्बान कर दी , तुम्हारे भइआ उन आदमखोर लोगो को मरने के लिए गए थे , तब कोमल ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर , तुम्हारे भइआ को बचा लिया पर.." सीमा रट हुए बोलती बोलती रुक गई ,

"हाँ माँ बोलू अग्गे.." रमा भी रट रट सब सुन रही थी ,

"हाँ भाभी अग्गे बोलू.." शूरति भी रट हुए बोली ,

"पर कोमल ने रवि के दिल में अपने लिए नफरत पैदा कर दी , इस नफरत को रवि सेहन नै कर पाया और कोमा में चला गया , कोमल के पास और कोई रास्ता नै बचा था , इक की जान तोह जनि hi थी , लेकिन कोमल ने अपने पवितर प्रेम को साबित किया और रवि को बचा लिया , इस लिए जब रवि सुबह ठीक होकर बहार आएगा , तब तुम सब ऐसे बेहवे करना जैसे कोमल इस दुनिआ में कभी मज़द hi नै थी , वार्ना तुम्हारा भाई फिर से कोमा में चला जायेगा.." सीमा ने अपनी नाम आँखों को साफ करते हुए बोलै ,

"मेरी कोमल इतना प्यार करती है अपने भाई से , अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी , हम कैसे छुपा पायेगी इस दर्द को ..."शूरति ने रट हुए बोलै ,

"यह सब तुम सब को करना hi होगा , तुम्हारे भइआ को कोमल के बारे में और पिछले 7 दिन क्या क्या हुआ , इसका कुछ भी यद् नै होगा , तुम सब उसकी हर बात में साथ देना , जो भी पूछे.." सीमा ने सबकी तरफ देख कर बोलै ,

"पर माँ अगर भइआ को कोमल देदी यद् हुई तोह..." रमा ने सेह भाविक hi यह सवाल कर दिया ,

"हाँ भाभी फिर क्या होगा.." शूरति भी रमा के समजदारी से भरे सवाल से प्रभावित होते हुए बोली ,

"देखो या तोह रवि कोमल को भूल चूका होगा , या फिर उसके मन में कोमल के लिए बेइंतहा नफरत होगी , क्यों की उसे ऐसा महसूस होगा , जैसे कोमल ने उसे प्यार में धोका दिया है , तब हम सब भी उसे यही एहसास दिलाएगी के वोह सही है , कोमल ने उसे धोका दिया है और वोह घर छोड़ कर चली गई.." सीमा ने फिर से नाम आँखें कर बोलै ,

"ओह्ह इतना बड़ा झूठ .."रिमी ने रट हुए बोलै ,

"रिमी में भी जानती हु के यह बहुत बड़ा झूठ होगा , लेकिन हमें यह झूठ बोलना hi होगा , कोमल मर चुकी है , उसने तुम्हारे भाई के दिल में जो नफरत छोड़ी है , वोह नफरत हमारे प्यार से काम होगी , भूल जाओ कोमल को तुम सब , तुम भी उसे बेवफा समझो , तेन की तुम्हारा भाई अपनी अग्गे की जिंदगी जी सके , तुम सब को मेरी बतिअन समाज ा गई न..."

"माँ हम अपने दिल पर पत्थर रख भइआ से झूठ बोल लेंगे , तेन की वोह खुश रह सके , माँ लेकिन कोमल हम सब के दिल में अमर रहेगी , हम सब उसकी पूजा करेगी , उसकी क़ुरबानी जाया नै होगी , वोह भइआ को खुश देखना चाहती थी , हम उसकी यह आखरी ीचा जरूर पूरा करेगी , माँ , हम अपने दिल पर पत्थर रख लेंगी , वैसे भी औरत का दिल बहुत विशाल और गहरा होता है , हम सब कोमल के बेवफा होने का दर्द अपने अंदर समां लेंगी.." रमा ने रट हुए बोलै ,

रमा ने वही बोलै , जो सबकी जुबान कहना चाहती थी , सब की आँखें नाम थी , अभ शयद उनके लिए भी कोमल बेवफा हो चुकी थी , कोमल अभ वोह बेवफा लड़की थी , जिसने अपने भाई को धोका दिया और उसे छोड़ कर चली गई....

तो बे कुनिटेड.....
 
फ्रेंड्स अपडेट 30 मिंट तक पोस्ट करता हु.. इक कम्पलीट कर लिया है..
 
अपडेट-3

सीमा ने सबको खाना खिला कर अपने अपने रूम में बेहज दिया , अभ वोह अकेली सोफे पर बैठी कुछ सोच रही थी ,

कुछ पल वोह कुछ सोचती रही और फिर उठ कर , कोमल के रूम की तरफ चल पढ़ी , पर तभी उसके तेज़ चलते कदम थम सा गए , क्यों की उसी रूम में रवि लेता हुआ था , और सीमा अंदर जा नै सकती थी ,

फिर िका इक सीमा , रवि के रूम में पहुँच गई , सीमा ने अंदर देखा कुछ भी नै था , जो वोह चाहती थी ,

सीमा ने पूरा कमरा देखना सुरु किया , हर छोटी से छोटी चीज़ , सीमा वोह चीज़ चाहती थी जो कोमल हमेशा अपने पास रखती थी , और वोह चीज़ और कोई नै , वोह किताब थी ,

सीमा को अपने अप्प पर गुस्सा ा रहा था , के वोह पिछले इक साल से कोमल को उस किताब को पढ़ते देख रही थी , उस किताब में जरूर कुछ ऐसा था , जो सीमा जानना चाहती थी ,

सीमा ने भगवन से दुआ मांगी के रवि को वोह किताब न मिले , वोह सुबह सीधा बहार ा जाये , बिना कमरा देखे ,

सीमा उदास सा चेहरा लिए अपने रूम में चली गई , यहाँ रमा सोने की तयारी कर रही थी , कुछ देर दोनों ने बतिअन की , और फिर सीमा उसे अपनी बहु में भर सो गई ,

दुअरी तरफ...

"वोह साला जोकर अपने अप्प को समज़ता क्या है..." कुणाल ने गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

"भइआ अप्प इतना गुस्सा मत करो , कोई न कोई रास्ता निकल hi आएगा.." ख़ुशी ने अपने भाई के कंडे पर हाथ रखते हुए बोलै ,

"उम् खुशु , ऐसी कोई बात नै है , पहले वोह साला रवि चैन से नै जीने देता था , और अभ यह इक नया दुश्मन.." कुणाल ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

रवि का नाम सुन इक बार तोह ख़ुशी को वोह पुराने दिन यद् ा गए , कभी कभी उसे लगता था के उसने रवि की सचाई का नाजायज फिदा उठाया है ,

"क्या सोच रही हो जणू , अज्ज प्यार करे.." कुणाल ने ख़ुशी के करीब होते हुए बोलै ,

"भाई अपने कहा था के शादी से पहले कुछ नै करेंगे , पहले शादी करो मुज़से , प्लस भाई , अपने जैसा कहा , मने वैसा किया , प्लस अभ तोह शादी कर लो .." ख़ुशी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"अरे खुशु , इक भाई बहिन कैसे शादी कर सकते हैं , हम ठाकुर है , अगर किसी को पता चला तोह हमारी इज्जत नीलम हो जाएगी , तुम शादी किसी और से कर लेना , प्यार तुम मुज़से करती रहो.." कुणाल ने ख़ुशी की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"क्या , में आपको बाज़ारो रंडी लगती हु , नै , या तोह अप्प मुज़से शादी कर लो , या फिर मुझे भूल जाओ.." ख़ुशी ने रट हुए बोलै ,

"उफ़ तुम पागल हो गई हो , मेरा जो लोगो के बेच खौफ है , वोह ख़तम हो जायेगा , लोग हसेंगे मुझ पर , नै , नै , में तुम से शादी नै करुगा .." कुणाल इतना बोल वह से जाने लगा ,

"आपको बस लड़कियाँ चाहये , अपना दिल बहलाने के लिए , में उन जैसी नै हु , आपके कहने पर , मने उस सच्चे इंसान को धोका दिया , काश के वोह मुझे माफ़ करदे , जाओ अप्प , निकल जाओ मेरी जिंदगी से.." ख़ुशी ने चीखते रट हुए बोलै ,

कुणाल कुछ नै बोलै और वह से चुप चाप बहार निकल गया , ख़ुशी वही बीएड पर बेथ रोने लगी , अज्ज वोह खुद को बहुत अकेली महसूस कर रही थी , काश के अज्ज रवि उसके पास होता , जिसे उसने धोका दिया था....

ख़ुशी ने अपने रूम का दरवाजा बंद किया और शराब की बोतल निकल पीने लगी , अभ यही उसका आखरी सहारा बचा था ,

कुणाल अपनी बहिन के रूम से निकल सीधा अपने रूम में पहुँच गया , वोह पिछले 7 दिनों से मस्तानी बेगम की तलाश कर रहा था , लेकिन न तोह उसका कुछ पता चला था , और न hi वोह किसी को कुछ बताकर गई थी ,

"यह छोटी माँ , पता नै कहा मर गई , अज्ज उनकी जरुरत थी मुझे.." कुणाल ने इक गिलास में वीने दाल पेट हुए अपने अप्प से बोलै ,

कुणाल अभी दारू पे hi रहा था के उसे किसी ने आवाज़ दी ,

"कुनैल.."

जैसे hi कुणाल ने पीछे पलट कर देखा , उसके हाथो से गिलास छूट कर निचे गिर गया ,

"तट.. त्तुम्म्म.. y...yaha ..pp...par.." कुणाल बड़ी मुश्किल से हकलाते हुए बोलै ,

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"हम्म , कुणाल में कही भी ा जा सकता हु , खियई खिइइइइ , जब , जब लोग मुझे अचानक देख डरते हैं , ः , तब मुझे बहुत मज़ा अत है.." जोकर ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"तू सेल छठा क्या है मुज़से , तेरी माँ यही छोड़ दूंगा में.." कुणाल ने अपनी गन उठा उसके सीने की तरफ करते हुए बोलै ,
 
"न , न , यह मत कर , वार्ना , वार्ना , में तुझे ख़तम कर दूंगा , तू मस्तानी बेगम को दंड रहा है न , खोई खियई , जनता है , वोह कोण थी , ः , वोह , वोह इक वैम्पायर थी.." जोकर ने अपनी ब्यांक आवाज़ में हस्ते हुए बोलै ,

"क्या , बोल रहा है बे तू , सेल झूठ मत बोल.." कुणाल ने गुस्से में छीलते हुए बोलै ,

"तुम अभी बचे हो , मस्तानी बेगम का असली नाम दियना था , और तोह और , बचे , कोमल भी इक वैम्पायर थी , और उसका वोह आशिक़ भाई , रवि , यही नाम है न , हाँ , तोह में कहा था , यद् आया , हाँ तोह रवि भी इक वैम्पायर है , और में , और में , इक कैद से आज़ाद हुआ , इक खूंखार शतिआं हु , जो अचे लोगो को चबा चबा कर खा जाता है , खोई खिइइइइइ खोई ..." जोकर ने इतना बोल फिर से हस्ते हुए बोलै ,

"ओह्ह तोह छोटी माँ का नाम दयना है , कोमल और रवि वैम्पायर है , सेल कितने झूठ बोलेगा तू..." कुणाल ने अभी इतना hi बोलै था , के जोकर ने उसके माथे पर अपना हाथ रख दिया ,

फिर धीरे धीरे दयना , कोमल और रवि की वोह आखरी लड़ाई , कुणाल को दिखने लगी , कुणाल ने सब कुछ इक सपने की तरह देख लिया , उसे अभ भी विश्वास नै हो रहा था ,

"हीही , अभ बोल कुणाल , क्या में झूठ बोल रहा हु , में तुम इस शहर का बादशाह बना दूंगा , हम दोनों राज़ करेंगे , ें नीच और कियार लोगो पर , पहले इस शहर के लोगो को अपना गुलाम बनायेगे , फिर धीरे धीरे , पूरी दुनिआ को , हाहाहा , बोल क्या बोलता है , अगर तुमने , अगर तुमने , मुझे न बोलै , तोह अभी के अभी , तेरे चेहरा नोच खाऊंगा , तेरे चेहरे की सुबह कोई पहचान नै रहेगी..." जोकर ने अपने होंठो को खोल अपना दरिंदा पैन कुणाल को दिखते हुए बोलै ,

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"ठीक है , में तुम्हारा साथ दूंगा , लेकिन मेरी इक शरत है.." कुणाल ने दिल hi दिल मुस्कराते हुए बोलै ,

"हम्म , घटिया लोगो की घटया शरतीयं , क्या चाहये तुम.." जोकर ने कुणाल की आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"कोमल , मुझे कोमल चाहये , उसका वोह लाजवाब हुसैन , अज्ज भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा है , डोज कोमल को.." कुणाल ने इक और गिलास वीने का पेट हुए बोलै ,

"हम्म , मुश्किल है पर नामुमकिन नै , कोमल तुम मिल जाएगी , हमें , हमें , इक प्लान बना कर , इस दुनिआ को , ओह्ह्ह , इस घटया बेकार दुनिआ को , तबाह और बर्बाद करना है , फिर कोमल तुम्हारी..." जोकर इतना बोल गयाब हो गया ,

कुणाल मुस्कराता हुआ बीएड पर बैठा , उस काम की देवी , उस लाजवाब हुसैन की मलिका , कोमल को यद् करते हुए सोने लगा , जिसका अभ कोई वजूद न था इस दुनिआ में ....

दूसरी तरफ...

आधी रत हो चुकी थी , रत के 12 बज रहे थे , सीमा अपनी बेटी रमा को बहु में समाते सो रही थी ,

ें दोनों का रिश्ता भी अजीब था , शयद आम इंसानो के लिए , क्यों की रमा और सीमा दिखने में इक जैसी थी ,

लेकिन वख्त क्या कुछ नै कर सकता , रमा की जिंदगी के उतर चढ़ाव , कह सकते हैं के रमा जैसा बदनसीब कोई और नै होगा ,

जिंदगी की शुरुआत दोनों भाई बहिन ने साथ में की , रमा , रवि की जिंदगी में ऐनी वाली पहली लड़की , और अज्ज वोह अपने भाई के प्यार लिए तड़फ रही थी ,

खैर , रमा की जिंदगी में क्या होने वाला है यह तोह वख्त hi बताएगा , लेकिन अभ तोह वोह इक प्यार भरी नंद सो रही थी , इक सकूं था उसके खूबसूरत चेहरे पर , के कल वोह अपने भाई को मिलेगी , और गुलाबी होंठो पर इक दिलकश मुस्कराहट थी , शयद वोह सपने में भी , अपने भाई से प्रेम भरे पल बिता रही थी ,

सीमा अभी सोई थी के अचानक उसकी कनु में इक आवाज़ पढ़ी ,

"सीमा..." जैसे कोई संसू में hi उसका नाम पुकारा हो ,

सीमा ने आँखें खोली और उठ कर देखा , तोह सामने काल खड़ा था , काल कल भी आया था और अज्ज भी , उसका मकसद क्या था , वोह सीमा को इतना महत्व क्यों दे रहा था , सीमा अज्ज दरी नै , क्यों की वोह काल से कल मिल चुकी थी , तभी इक डैम से अंधेरा शा गया और सीमा अपने घर की चाट पर कड़ी थी.....

तो बे कुनिटेड...

. फ्रेंड्स अप्प के रेप्लीस के जवाब कल दूंगा..
 
अपडेट-4

अभ अग्गे..

सीमा घर की चाट पर अपने as-pas देख रही थी , इक तोह सर्दी का मासूम ा रहा था , ठंडी ठंडी हवा चल रही थी , सीमा अपने हाथिओं को आपस में रगड़ती हुई , काल का इंतज़ार कर रही थी ,

"सीमा..." काल ने फिर से संसू में hi बोलै ,

"जी बोलिये , क्या कहना था आपको.." सीमा ने अँधेरे में देखने की कोससिह करते हुए बोलै ,

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"सीमा , मुझे तुम कुछ खास बात बतानी थी , में जनता हु , और समज़ता भी हु , यह सही वख्त नै है , ें बातिओं के लिए , पर यह तुम सबकी जिंदगी से जुडी बात है.." काल ने अँधेरे से बहार एते हुए बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में तेज़ तेज़ चमक रही थी ,

"हाँ , बोलिये न , अप्प ए हैं , तोह वोह बात बेहद जरुरी होगी.." सीमा ने काल की तरफ देखते हुए बोलै , जैसे वोह उसका चेहरा देखना छह रही हो ,

"में रमा के बारे में कुछ बताना चाहता हु.." काल ने िका इक रुकते हुए बोलै ,

"रमा , उसे क्या हुआ , वोह ठीक है , और वोह , वोह कोई वैम्पायर भी नै.." सीमा ने थोड़ा दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"तुम जानती हो , रमा ठीक कैसे हो गई , वोह तोह अनपढ़ लड़की थी , फिर ठीक होते hi , इतना तेज़ दिमाग , तुम कुछ भी नै पता.." काल ने भरी आवाज़ में गरजते हुए बोलै ,

"ओह्ह , लेकिन , ओह्ह मैं नै जानती , अप्प hi बता दो..." सीमा ने कम्पटी आवाज़ में बोलै ,

"जब रवि झरने से गिर गया था , तब कोमल समाज गई के तुम यह दर्द जायदा दिन नै जेहल पाउगी , तुम सबको नै सम्बल पाउगी , इस लिए कोमल ने मुज़से खास इजाजत मांगी के , वोह रमा को ठीक कर सके , उसके बार बार कहने पर , आखिर मने है बोल दिया ..." काल अभी बता hi रहा था सीमा बेच में hi बोल पढ़ी ,

"तोह क्या मेरी रमा इक वैम्पायर है..."

"नै , अग्गे सुनो , कोमल ने अपनी शक्त्यिओन से रमा को ठीक कर दिया , लेकिन यह शक्तियाँ कोई मामूली नै हैं , रमा को अंदाज़ा भी नै के वोह क्या क्या कर सकती है , उसकी शक्तियाँ उसके मन में , अभी सुपत अवश्था में सोई हुई हैं , इक खास पल के इंतज़ार में..." काल ने सीमा के चेहरे की तरफ देखते हुए बोलै , जिस पर अभी सैकड़ो भाव उमड़ रहे थे ,

"ओह्ह नै , कोमल को क्या जरुरत थी , मेरी बची का क्या होगा..." सीमा ने रट हुए बोलै ,

"तुम खुश होना चाहये..."

"कैसे खुश रेहु में , ताकत कभी खुश नै रहने देती , यह भूक की तरह है जो बढ़ती रहती है , अगर कल को , मेरी रमा को कुछ हो गया तोह..." सीमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"यह अभी तुम सोच रही हो , लेकिन ऐनी वाले वख्त में , तुम अपनी बची पर गर्व महसूस होगा , वोह इक खास मकसद के लिए पैदा हुई है , उसका ऐनी वाला वख्त बहुत खुशियों भरा होगा..." काल ने अपनी ब्यांक आवाज़ में बोलै ,

"यह अप्प क्या बोल रहे हो , क्या होगा कल को..."

"तुम्हारा दिमाग बेहद तेज़ है , लेकिन सीमा , में ऐनी वाले वख्त के बारे में कुछ नै बता सकता , बस इतना जान लो , जो काम कोमल नै कर पायी वोह रमा करेगी ...."

"कोनसा काम , नै , में पहले कोमल को खो चुकी हु , अभ अपनी बेटी को नै खो सकती ..." सीमा ने रट हुए बोलै ,

"सीमा जो वख्त ने लिखा है , उसे कोई नै मिटा सकता , हम चाहे जो भी बोले , वही होगा जो लिखा है , कोमल को महसूस हो रहा था के वोह जायदा दिन अपने भाई की रक्षा नै कर पायेगी , इस लिए उसने रमा को कुछ खास दिया , तेन की रमा वोह काम करे जो कोमल न कर पायी...." काल इतना बोल वह से गयाब हो गया ,

"रुकय्ये ..." सीमा बस इतना hi बोल पायी , और वही बेथ कर रोने लगी ,

आखिर कोमल ने क्या दिया था रमा को , रमा किस मकसद के लिए अपने भाई की मदद करने वाली थी ,

रमा के पास कोण सी ऐसी ताकत थी के काल को खुद एना पढ़ा सीमा के पास , और काल ने सीमा को यह सब क्यों बताया था , सवाल कई थे , लेकिन जवाब वख्त में छिपा था ,

सीमा कुछ देर वही बैठी रही और फिर उठ कर अपने रूम में ा गई , सीमा ने बीएड पर बेथ रमा के चेहरे की तरफ देखा , कितना मासूम चेहरा था , ब्राउन आँखें जो अभी बंद थी , और गुलाबी होंठ , सीमा ने झुक कर रमा के माथे को चुम लिया और उसे अपनी बहु में भर सो गई ,
 
दूसरी तरफ....

रहना अभी भी अपनी स्टोरी सुना रही थी , और रवि मदहोश सा हुआ उसकी बतिअन सुनता जा रहा था , रिंग रवि को अपना गुलाम बनाएगी या नै , यह तोह ऐनी वाले वख्त में छिपा था ,

"तोह रूही तुम्हारी बहिन ने 6 बलियन देदी , आखिर में बस तुम hi बची थी , अग्गे क्या हुआ..." रवि ने उत्सुकता वश पूछा ,

"वोह मेरी बलि नै दे पायी , माँ , पिता जी ने उसी जादूगरनी से सब पता कर लिया था , लेकिन सुहाना को रोक पाना अभ नामुमकिन था , उसकी ताकत बेहद बाद गई थी..." रूही ने लाल रंग में चमकते हुए बोलै ,

"ओह्ह , फिर कैसे रोका तुमने उसे.." [/COLOR ]

"हमारा और उसका इक युद्ध हुआ , मेरे पास पवितर शक्तियाँ थी और उसके पास बुराई की , हम दोनों कई सालो तक लड़ती रही , पूरा पारी लोग तबाह हो चूका था , हज़ारो लोग मरे जा चुके थे , यह युद्ध कई सालो तक चलता रहा , लेकिन न तोह में जीत पायी और न वोह..." रूही ने फिर से लाल रंग में चमकते हुए बोलै ,

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""फिर नतीजा कैसे निकला , और तुम रिंग कैसे बन गई "... रवि ने थोड़ा दर्द भरी आवाज़ में पूछा ,

"बताती हु , सुनो अग्गे.....

फ्लैशबैक...

"हम्म , यह रूही पता नै किस मिटटी की बानी है , अभ इसकी बलि तोह में नै दे पाउगी पर ऐसे जिन्दा भी नै छोडूगी..." सुहाना ने इक यड्यंतर रचते हुए मन में बोलै ,

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"बस बहिन में और नै लड़ सकती , में हर मानती हु..." सुहाना ने सर ज़ुका कर बोलै ,



"बहिन तुमने जो पाप किये हैं , उनकी सजा तोह तुम मिलेगी , माँ और पिता जी देंगे तुम सजा .." रूही ने शांत होते हुए बोलै ,

"जैसा तुम कहो , पर मुझे माफ़ कर दो..." सुहाना ने रट हुए बोलै ,

"माफ़ी , न जाने कितने मासूम लोग को मारा है तुमने , माफ़ी नै सही , सजा मिलेगी तुम..." रूही ने नाम आँखों से बोलै ,

"मेरी बहिन , जो तुम कहो..." सुहाना ने वैसे hi सर ज़ुका बोलै ,

पर जैसे hi रूही उसके करीब आयी , सुहाना ने इक शैतानी खंजर उसके सीने में उतर दिया , रूही दर्द से तड़फती हुई निचे गिर गई ,

"हहै , में हु मलिका सुहाना , शतिआं की बेटी , रूही तेरा स्थान मेरे कदमो में होना चाहये था , और अज्ज वोह मंगल अवसर ा hi गया , में तुमसे कही तेज़ , चालक और ताकतवर हु..." सुहाना ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"अहह कामिनी तू मेरी बहिन नै हो सकती , में तुझे कभी वोह हासिल नै करने डोंगी , जो तू चाहती है..." रूही ने दर्द और गुस्से से चीखते हुए बोलै ,

तो बे कुनिटेड......[/COLOR]
 
फ्रेंड्स रत को 9 बजे अपडेट पोस्ट कर दूंगा. अभी टाइप कर रहा हु...
 
अपडेट-5

अभ अग्गे...

सुहाना ने रूही के सीने में खंजर उतर दिया था , रूही दर्द में तड़फ रही थी , उसकी आँखों से असनु बह रहे थे ,

"देखा रूही मेरी बहिन , तुम मर रही हो , और तुम्हारे बाद यह पूरा पारी लोग मरेगा , इसके बाद इक नयी शुरुआत होगी , में इस पारी लोग की नयी मलिका बानगी..." सही ने हस्ते हुए बोलै ,

"लेकिन तुम बचूगी तब न..." रूही ने दर्द में भी मुस्कराते हुए बोलै ,

"तुम कुछ नै कर सकती , तुम हर चुकी हो..." सही ने थोड़ा गंभीर होकर बोलै ,

"हहै , तुम भूल गई , में पवितर पारी हु , मेरे पास इक ऐसी शक्ति है , जो माँ पिता जी ने मुझे वरदान में दी थी , पवित्र देवताईनो की शक्ति , अभ तुम्हारा अंत करीब है.." रूही ने अपनी आँखें बंद करते हुए बोलै ,

बैक तो स्टोरी...

रवि मदहोश सा हुआ कहानी सुन रहा था , कहानी ख़तम हो चुकी थी , रूही काळा रंग में चमक रही थी , जैसे वोह बेइंतहा रो रही हो , धीरे धीरे ख़ामोशी बढ़ रही थी , लेकिन यह कहानी तोह अधूरी थी , क्या हुआ था उस दिन ,

रूही रिंग कैसे बानी , पारी लोग का क्या हुआ , सुहाना मर गई या कैद हो गई , लेकिन रूही अग्गे कुछ नै बता रही थी , वोह खामोश थी ,

"रूही मेरी जान , क्या हुआ , जब तुम कड़ी हुई थी तब.." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

"मुझे यद् नै , मने ऐसा क्या किया के में रिंग बन गई , मुझे सच में कुछ यद् नै , बहुत कोससिह करती हु लेकिन कुछ यद् नै अत.." रूही ने काळा रंग में चमकते हुए बोलै ,

"ाचा , कोई बात नै , पर तुम यु रोना बंद करो , में तुम रट हुए नै देख सकता.." रवि ने रिंग को अपने होंठो से लगते हुए बोलै ,

"रवि.."

"हम्म , बोलो.."

"रवि क्या तुम मुझे आज़ाद करोगे , इक दिन सच्चे दिल से में तुमसे यह मांगूगी , के में आज़ाद होना चाहती हु , तब तुम मुझे आज़ाद कर देना.." रिंग ने सफेद रौशनी में चमकते हुए बोलै ,

"इतनी से बात , में तुम आज़ाद करता हु.." रवि ने सच्चे दिल से बोलै ,

रिंग इक बार बहुत तेज़ चमकी , पर फिर से जैसे hi रौशनी काम हुई , रिंग वैसी की वैसी रही ,

"तुम आज़ाद क्यों नै हुई.." रवि ने थोड़ा उदास होकर बोलै ,

"अभी तुम्हारे दिल में प्यार काम है और नफरत जायदा , जब तुम्हारे पोरे दिल में बस प्रेम hi प्रेम होगा , तब तुम्हारे कहने से में आज़ाद हो जोगी , इक ऐसा सच्चा इंसान जिसके दिल में किसी दूसरे के लिए इतना अधिक प्रेम हो , के वोह उस इंसान के लिए हस्ते हस्ते मर जाये , उसी के हाथिओं मेरी , मुक्ति हो सकती है..." रिंग ने सफेद रंग में तेज़ तेज़ चमकते हुए बोलै , जैसे वोह अपनी आज़ादी के बारे में बता कर मुस्करा रही हो ,

"हम्म , शयद तुम सही हो , पर में वोह इंसान नै हु , यह तुम भी जानती हो.." रवि ने रिंग को चूमते हुए बोलै ,

"ाचा रवि , सुबह होने वाली है , सब लोग तुम्हारा इंतज़ार कर रहे होंगे , तुम बहार जाना चाहये..." रिंग ने फिर से चमकते हुए बोलै ,

"हम्म .." रवि ने दरवाजे की तरफ देखते हुए बोलै , रिंग समाज गई के रवि क्या सोच रहा है ,

"रवि यह मत सोचो के तुम मेरे बिना किसी से प्रेम नै कर सकते , लेकिन मुज़से अधिक भी नै , जो बहार हैं , वोह तुमसे आत्मिक रूप से जुडी हुई हैं , उनको में छह कर भी तुमसे अलग नै कर सकती , उनका तुमसे प्रेम इतना अधिक है , के उनके मरने के बाद hi वोह तुमसे अलग हो पायेगी , और रही बात मेरी , जितना प्यार तुम कोमल से करते थे , उतना मुज़से करो , जैसे उसको पाए बिना तुम उससे प्यार करते थे वैसे hi मुज़से करो..." रिंग ने गुलाबी रंग में चमकते हुए बोलै ,

"उस कोमल का नाम भी मत लो , वादा करो , वादा करो , के अग्गे जिंदगी में कभी तुम उस बेवफा का नाम नै लोगी , वादा करो मुज़से.." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

"ठीक है , वादा करती हु , अग्गे से उसका जीकर भी तुम्हारे अग्गे नै करुँगी , ाचा अभ चले बहार , तुम्हारे अपने और तुम्हारे दुश्मन , तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं..." रिंग ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"हम्म , अपनों को तोह में सम्बल hi लूंगा , लेकिन मेरी नफरत की अग्ग , मेरे दुश्मनो को जला कर खाक कर देगी..." रवि ने बीएड से उतारते हुए बोलै ,

"इक बात यद् रखना.."

"क्या.. " रवि ने रुकते हुए बोलै ,

"तुम अभी भी वैम्पायर हो , कुछ भी भूलना मत.." रिंग ने रवि को चुकाना करते हुए बोलै ,

"ok..." रवि इतना बोल रिंग को चूमता हुआ रूम के गेट की तरफ बढ़ गया ,

रवि ने रूम का गेट खोला , तब सुबह के 7 बज रहे थे , रवि धीरे से बहार आया ,

उसने रूम से बहार निकल कर देखा , घर के हॉल में उसकी तीनो बहने मायूस बैठी हुई थी , सीमा , तभी उसे यद् आया , वोह किचन में होगी ,

इक सीमा hi तोह थी , जो उसे जिंदगी में कभी अकेला छोड़ कर नै गई , चाहे वोह जिन्दा था या अभ मर चूका था , वोह साथ थी , और अभ भी साथ है ,

रवि दरवाजा पर खड़ा अभी सोच hi रहा था के रिमी की नज़र उस पर पढ़ गई ,

"भइआएए.." रिमी चीखती हुई उठी और भाग कर रवि के गले लग गई , वोह उसके चेहरे को चूमती हुई रोटी जा रही थी , और रवि बस उसके बाल सेहला उसे शांत कर रहा था ,

रवि अभी रिमी को शांत कर रहा था , तभी रमा और शूरति भी उसके गले लग रोने लगी , वोह रिमी के साथ साथ , उनको भी चुप करवाने लगा ,

करीब 15 मिंट तक वोह तीनो रोटी रही , और रवि ने भी उनको भरपूर रोने दिया , क्यों इस दर्दनाक वख्त के बाद, अभ हमेशा वोह खुश रहने वाली थी , ऐसी रवि की सोच थी ,

"बस करो , में ठीक हु , बस अभ शांत हो जाओ..." रवि ने तीनो का चेहरा इक इक कर चूमते हुए बोलै ,

"भइआए..." रमा फिर से रोटी हुई रवि के गले लग गई , वोह बार बार रवि के चेहरे को चुम रही थी ,

रवि नै जनता था , रमा का प्यार उसके लिए कितना बढ़ चूका था , उसने पिछले 7 दिन , इक इक पल , मौत से भी बदतर वख्त गुजरा था ,

"ाचा ायो तुम सब , हम बेथ कर बतिअन करते हैं.." रवि तीनो को साथ लेकर सोफे पर बेथ गया ,

"रवि मेरे बारे में कुछ मत बोलना , और अपनी बहने से छपाक कर बैठे हो , शर्म नै अति तुम.." रिंग ने शरमाते हुए बोलै ,

"तुम बार बार ऐसे शर्माती हो , जैसे मेरी बीवी हो.." रवि ने मन hi मन में बोलै ,

"भइआ कहा खो गया , आपको क्या हुआ था , पिछले 7 दिनों से हमारी हालत मौत से भी बदतर हो गई थी ..." रमा ने फिर से रट हुए बोलै ,

"उम् , मेरी रमा , अभ अगर तुम रोई तोह , इक कण के निचे बजाऊगा .." रवि ने प्यार से रमा को थपड दिखते हुए बोलै ,

"भइआ आपको , ठीक देख कर , मुझे बेइंतहा ख़ुशी हो रही है.." रिमी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ रवि , तुम्हारे बिना , जैसे जिन्ढी रुक सा गई थी , वादा करो , फिर मुझे छोड़ कर नै जाओगे , वार्ना मर जोगी में .." शूरति ने रट हुए बोलै ,

"शठ , चुप हो जाओ , शूरति , वादा रहा , अज्ज के बाद , बल्कि , ऐसी लम्हे के बाद , तुम सब को खुश रखुगा और कभी तुम सब से अलग नै होगा.." रवि ने तीनो को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"भइआ माँ से मिल लो..." रमा ने अपने भाई की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"अरे बाप री , भूल गया , कहा है वोह..." रवि ने इक डैम से उठते हुए बोलै ,

"वोह किचन में है.." शूरति ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि भाग कर किचन की तरफ चला गया , उसने देखा सीमा , खाना पका रही थी , रवि की तरफ उसकी पीठ थी , वोह शयद कुछ सोच रही थी ,

रवि धीरे धीरे सीमा की तरफ बढ़ने लगा , तभी रिंग बोली ,

"वाओ , अपनी बीवी को कास कर गले लगाना , उसे बेइंतहा प्यार करना..." रिंग ने हस्ते हुए बोलै ,

"तुम बहुत हस्सी ा रही है , जब रिंग से लड़की बानगी , तब तुम भी ऐसे hi कास कर गले लगाऊगा.." रवि ने मन hi मन बोलै , तेन की बस रिंग hi सुन सके ,

रवि ने सीमा के करीब पहुँच कर उसे पीछे से अपनी बहु में भर लिया ,

"ओह्ह्ह्ह रविइइइ.." सीमा ने दर्द भरी आवाज़ में बोलते हुए , इक डैम से पलट कर रवि को अपनी बहु में भर लिया ,

वोह रोने लगी , पिछले 7 दिनों का दर्द , जो उसने अंदर hi अंदर दबाये रखा था , वोह इस पल के इंतज़ार में था , वोह बस रवि की बहु में रोना चाहती थी , कितना अधिक सच्चा प्रेम था उसे , रवि जब दूर होता था , तब वोह पत्थर सी हो जाती थी ,

जब 7 साल दोनों दूर हुए , तब भी सीमा पत्थर बन गई , फिर रवि जब झरने से गिरा , तब भी वोह पत्थर बन गई , और अज्ज , रवि फिर से 7 दिन कोमा में रहा , तब भी वोह पत्थर बन गई , बस जब जब रवि वापिस अत था , तब तब सीमा उसकी बहु में सिमट कर रोटी थी...
 
वोह कहती कुछ न थी , न गुस्सा करती थी , न उससे रूत जाती थी , बस कुछ पल रो कर , फिर पहले जैसी हो जाती थी , उसके अंदर अनंत भावनायें थी , अनेको प्रकार की दर्द सहने की शक्ति थी , वोह इक औरत नै , इक पवित्र आत्मा थी ,

रवि प्यार से उसके बालो को सेहला रहा था , दोनों की आँखें नाम थी ,

"उफ़ , मेरी सीमा कितना चाहती है मुझे , कितना दर्द सहा होगा बेचारी ने , में अभ ऐसे कभी रोने नै दूंगा.." रवि ने मन hi मन बोलै , और बहती आँखों से ख़ामोशी के साथ , सीमा को और भी कास कर अपने गले लगा लिया ,

"सही कहा रवि , यह बहुत पवितर औरत है , में ऐसे महसूस कर सकती हु , ऐसे कुछ नै चाहये , यह बस तुम चाहती है , तुम्हारे दो पल के प्यार बदले , यह अपनी लखु जिन्दगियां कुर्बान कर सकती है..." रिंग ने काळा रंग में चमकते हुए बोलै , जैसे वोह ें दोनों का प्यार देख कर रो रही हो ,

"सीमा , बस करो यार , बहार सब को चुप करवाया बड़ी मुश्किल से , अभ तुम मत तड़फाओ मुझे.." रवि ने सीमा को कण्डु से पकड़ पीछे करते हुए बोलै ,

"रवि , क्यों करते हुए हर बार ऐसा , पता है में कितना दर गई थी.." सीमा ने रवि के चेहरे को बेइंतहा चूमते हुए बोलै ,

"सॉरी , अग्गे से ऐसा नै hoga.."ravi ने मुस्कराते हुए सीमा को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"ठीक है , कोई बात नै , तुम भूक लगी होगी , में खाना बना रही थी , तुम्हारे लिए..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

पिछले 7 दिन का दर्द वोह भूल चुकी थी , उसे इतना विश्वास था के रवि सुबह बहार आएगा , और वोह उसके लिए खाना बना रही थी ,

"उम् , मेरी जान को पता था के में अज्ज hi उठ कर ायुगा..." रवि ने सीमा के होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"हम्म.. " सीमा ने भी इतना hi बोलै , और रवि के होंठो पर अपने प्यासे गुलाबी होंठो को रख दिया ,

दोनों इक दूसरे के होंठ चूमने लगे , उफ़ कितना हसन पल था , जैसे बरसो की तड़फ थी , दोनों के नरम होंठ आपस में जैसे घुलमिल सा गए थे , कभी रवि , सीमा के होंठो को दबा दबा कर चुस्त तोह कभी सीमा , दोनों इक दूसरे में खोये हुए थे के तभी ,

"ाहू अहूऊऊ.." किसी के खस्ने की आवाज़ सुन दोनों अलग हो गए ,

दोनों ने दरवाजे की तरफ देखा , रमा , रिमी और शूरति , कड़ी हस्स रही थी ,

सीमा ने शर्मा कर चेहरा दूसरी तरफ कर लिया , और रवि उन तीनो की तरफ भाग पढ़ा , वोह तीनो हस्ती हुई , घर के हॉल में भाग गई ,

रवि वापिस सीमा के पास ा गया , और फिर से उसे अपनी बहु में भर लिया ,

"उम् सीमू..." रवि ने सीमा की गर्दन को चूमते हुए बोलै ,

"अहह रवि , बस करो , फिर ा जाएगी वोह..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"ा नै जाएगी , वोह ा चुकी हैं..." रिंग ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि ने पलट कर देखा , तीनो फिर से देख कर मुस्करा रही थी , रवि ने इस बार सीमा को छोड़ा और उन तीनो के पीछे भागने लगा...

तो बे कुनिटेड....
 
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