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- Dec 5, 2013
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अपडेट-11
कोई इक घंटा सोनल , रवि की बहु में सोती रही , लेकिन रवि की आँखों में नंद नै थी , वोह जगता हुआ कुछ सोच रहा था , उसकी आँखें , इक डैम काली होती जा रही थी , वोह बहुत कोससिह कर रहा था , सोने की , लेकिन नंद जैसे उससे रूत चुकी थी.
तभी किसी ने आकर दरवाजा खटका दिया , रवि ने सोनल को वैसे hi सोने दिया , और उठ कर रूम का दरवाजा खोल दिया , सामने कविता कड़ी थी.
"भाई कैसे हो अभ अप्प..." कविता ने मुस्कराते हुए पूछा.
"हम्म , में बिलकुल ठीक हु जणू , अज्ज बेहद खूबसूरत लग रही हो , किसी का कतल करने का इरादा है क्या..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"धत्त अप्प भी न , में तोह खाने का पूछने आयी थी..." कवी ने शर्मा कर बोलै.
"लेकिन मुझे तोह प्यास लगी है , कुछ नमकीन और मीठा पानी पीना है मुझे , तुम पलिअ दो न..." रवि ने इक शातिअनि स्माइल देते हुए बोलै.
"उम् , ऐसा पानी कहा मिलता है , जो मीठा भी हो और नमकीन भी..."
"यहाँ पर..." रवि ने इक डैम से कविता की फ्रॉक को ऊपर कर उसकी मखमली छोटी सी छूट को हाथ में कास कर दबोचते हुए बोलै.
"ोूछहः आईईईई मुम्ममय , छोड़ू भइआ , देदी उठ जाएगी..." कवी ने थोड़ा दर्द और मज़े के एहसास में बोलै.
"पहले प्यास तोह भुजा दो मेरी..." रवि ने अग्गे बाद कर कविता को बहु में भरते हुए बोलै.
"रत को भाई , अभी नै प्लस , सोनल देदी उठ जाएगी..." कविता ने थोड़ा डरते हुए बोलै.
"ठीक है..." इतना बोल रवि ने कविता को छोड़ दिया और वापिस बीएड की तरफ ा गया , वोह बीएड पर बेथ गया और कविता की तरफ देख कर बोलै.
"अरे कवी , तुम कब आयी यहाँ पर..." रवि ने मुस्कराते हुए पूछा.
"भाई , में तोह कब से आयी हु .." कवी को कुछ समाज नै ा रहा था.
"ाचा , में नंद में था , कोई काम था..."
"voh...voh.. खाना , खाने का पूछने आयी थी , आपको कुछ यद् नै , हम दोनों ने अभी जो बतिअन की.." कविता ने थोड़ा डरते हुए पूछा.
"बतिअन , कोनसी बतिअन , अरे कवी , अभी अभी तोह तुम आयी , तोह बतिअन कब की मने तुमसे , तुम भी न , बहुत शरारती हो गई हो , सोनल देदी , यह कब आयी यहाँ पर..." रवि ने पीछे पलट कर सोनल को सोते हुए देख कर बोलै.
"देदी , तोह पिछले 1 घंटे से आपके पास hi सो रही हैं.."
"ाचा , शयद में सोया था , जब देदी आयी होंगी ..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"भइआ शयद अभी ठीक नै है , कोई बात नै भाई , में बस आपकी हु , में आपका इंतज़ार करुँगी , जब अप्प पूरी तरह ठीक हो जाओगे , तब आपसे बेपनाह प्यार करुँगी , आपका इंतज़ार तोह में अपनी मौत तक कर सकती हु , आपके बिना मेरी जिंदगी में कोई नै ा सकता , कोई नै..." कविता ने नाम आँखों से अपने मन में बोलै और अग्गे बढ़ अपने भाई के गालो को चुम रूम से बहार चली गई.
"ओह्ह हो , मुझे वापिस जाना है , रमा पता नै कहा रह गई अभ.." रवि ने बीएड से उठ बहार हॉल की और जाते हुए बोलै.
रवि घर के हॉल में आया , तब सभी वही बैठे थे , रवि ने सीतल की तरफ देखा , उसकी आँखें इक डैम लाल हो चुकी थी , जैसे वोह बहुत रोई हो..
"अरे सीतल क्या हुआ , तुम बेहद उदास लग रही हो.." रवि ने सीतल के पास जाकर बोलै
"कुछ नै , वोह अप्प जा रहे हो , तोह मन उदास हो गया.." सीतल ने रट हुए बोलै.
"अरे मेरी प्यारी बहिन , रट नै , में वापिस ायुगा न , बस कोमल से मिल लू , वोह बहुत उदास हो जाती है , में बिना उसे बताये यहाँ ा गया..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.
सीतल और न सेह सकीय , और फुट फुट कर रोने लगी , वोह रट हुए अपने रूम की तरफ भाग गई ,
"रमा यह सीतल को क्या हुआ.." रवि ने रमा की तरफ देख कर बोलै.
"वोह भाई , कुछ नै , कोमल के बारे में सुन वोह रोने लगी .." रमा ने जबरन मुस्कराते हुए बोलै.
"उम् , मेरी कोमल है hi इतनी प्यारी , कोई भी उसकी उदासी के बारे में सुन रोने लग जाये , वैसे चले रमा..." रवि ने सबकी तरफ देख कर बोलै.
रमा ने सबको पहले hi समझा दिया था के रवि का वापिस जाना बेहद जरुरी है , उसकी हालत अभ भिगाडती जा रही है.
"हाँ बीटा जाओ तुम..." सुमन चची ने आँखों में असनु भरते हुए बोलै.
"अरे चची जी , अप्प क्यों रो रही हो , में ायुगा न वापिस , उस कोमल ने धोका दिया , इसका मतलब यह तोह नै के में अप्प सब को भूल जाउगा.." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै.
"कोमल , उसने कब धोका दिया तुम..." सुमन चची ने थोड़ा नाम आँखों से पूछा.
"अह्हह्ह्ह्ह वोह धोकेबाज थी , वोह बेवफा थी , मुझे अकेला छोड़ कर चली गई , कोमळळ , कोमल ..." रवि अपना सार दोनों हाथिओं में पकड़ छिलने लगा , वोह घुटनो के बल निचे बेथ गया.
रमा भाग कर उसके पास आयी , फिर रवि शांत पढ़ गया , और मुस्कराता हुआ उठा.
"ओह्ह हो में सोनल से मिला hi नै , क्या सोचेगी वोह बाद में , रमा में अभी आया..." रवि इतना बोल वापिस रूम में चला गया.
रवि ने दरवाजा अंदर से बंद किया और सोनल की तरफ देखा , वोह बेहद प्यारी लग रही थी सोते हुए , उसके गुलाबी नरम होंठ थोड़ा कंपकपा रहे थे.
"उफ़ कितनी खूबसूरत है मेरी जान..." रवि ने सोनल के बालो को सेहला कर बोलै.
फिर िका इक रवि , सोनल के ऊपर लेट गया , और उसके होंठो को चूसने लगा , सोनल के होंठ लाजवाब और मीठे थे , रवि तोह मदहोश सा हो गया था.
तभी अचानक सोनल ने आँखें खोल ली , जब उसे महसूस हुआ के रवि उसके होंठो को चुम रहा है , उसने कास लिया उसे अपनी बहु में , और बड़े शिदत और प्यार से रवि का साथ देने लगी , यह किश बहुत देर तक चलता रहा.
"अह्ह्ह उह्ह्ह कैसा लगा मेरी जान..." रवि ने हफ्ते हुए बोलै.
सोनल कुछ न बोली , उसने शर्मा कर अपनी आँखों को बंद कर लिया.
"सोनल में जा रहा हु , सोचा तुमसे मिल कर जाऊ , में जल्द hi वापिस ायुगा.." रवि ने सोनल का माथा चूमते हुए बोलै.
"मत जाओ न , मेरा दिल नै लगता आपके बिना , प्लस.." सोनल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.
"सोनल , जिंदगी के कुछ सवाल है , जिनके जवाब में ढूंढ़ना चाहता हु , वार्ना हम कभी खुश नै रह पाएंगे..." रवि ने सोनल के कंपते होंठो को चुम कर बोलै.
"में आपके बिना कैसे रहूगी , मुझे चिंता रहती है आपकी.."
"शादी करनी है.."
"हूँ..."
"डॉक्टर बनु पहले , वादा किया था तुमने..."
"हाँ , में जल्द hi एडमिशन ले लुंगी , में डॉक्टर बानगी..." सोनल ने नाम आँखों से बोलै.
"बस फिर , अभ मुझे जाने दो , तभी तुम डॉक्टर बन पाउगी , और अभी से हमारे बच्चू का नाम सोच लो.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै तोह सोनल शर्माने लगी ,
"ाचा में जाता हु , अपना ख्याल रखना , कोई प्रॉब्लम हो , तोह फ़ोन कर देना , समाज गई न.." रवि ने सोनल के होंठो को चुम कर बोलै.
"हूँ , bye जान.."
"bye , मेरी मिथु.." रवि ने सोनल के होंठो को कास कर चूमा और रूम से बहार निकल आया.
रवि ने सबके साथ अचे से बेहवे किया और सबको जल्दी मिलने का बोल रमा के साथ घर की और निकल पढ़ा.
सबकी आँखें नाम थी , खास कर कविता और सीतल की , क्यों की वोह दोनों रवि से प्यार करना चाहती थी , पर रवि की हालत देख , वोह अंदर से टूट चुकी थी.
रवि और रमा अभ गाड़ी में बेथ घर की तरफ जा रहे थे , रमा कुछ खामोश थी , यह बात रवि को थोड़ा परेशान कर रही थी.
"मेरी जणू , क्या हुआ , उदास क्यों हो.." रवि ने प्यार से रमा के बाल सहलाते हुए पूछा.
"k..kuch नै भाई , में ठीक हु.." रमा ने मुस्करा कर बोलै.
"हम्म , अभ झूठ भी बोलूगी मुज़से , तू बहुत चालक हो गई है , गाओं में ऐसा नै करती थी , काश के वोह जिंदगी लोट ए.." रवि ने उदास सा होकर बोलै.
"भइआ वोह दिन कितने अचे थे..."
"जब में तुम्हारी चुदाई करता था..."
"धत्त्त , अप्प भी न , मुझे नै करनी आपसे बात..." रमा ने शर्मा कर बोलै.
"हम्म , सच में , जब तुम नंगी करके छोड़ रहा होता था , तब इक अलग hi मज़ा मिलता था .." रवि ने मुस्करा कर बोलै.
"भइआ बस करो , मुझे कुछ यद् नै..." रमा ने फिर से शरमाते हुए बोलै.
"तुम कहो तोह , जैसे मने पहले किया था , वोह सब करके दिखा सकता हु , ाचा इक चीज़ दिकहु तुम..." रवि ने हस्ते हुए बोलै.
"मुझे नै देखनी , कोई चीज़ -वीज़.." रमा ने मुस्कराते हुए बहार की तरफ देखते हुए बोलै.
"अरे देख ले , तेरी hi चीज़ है , तू बहुत खेलती थी इससे गाओं में , अभी दिखता हु..." इतना बोल रवि ने अपनी पेण्ट की जप खोल अपना लम्बा मोटा लुंड बहार निकल लिया.
रमा ने इक बार कनखियों से लुंड की तरफ देखा , और फिर वोह बुरी तरह शर्मा गई , उसके गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो गए.
"देख न , यह तेरा प्यारा खिलौना है , गाओं में तू इससे बहुत खेलती थी , हर रोज़.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"भाई ऐसे अंदर करो , मुझे शर्म ा रही है.." रमा ने अपनी आँखों पर हाथ रखते हुए बोलै.
"भाई तेरी किस्मत ख़राब है , अभ यह लड़की तुझे नै पहचानती , न न , में कुछ नै कर सकता , ाचा , हूँ , ठीक है , पूछता हु.." रवि ने अपने लुंड से बतिअन करते हुए बोलै , जब की रमा पगलू की तरह है रही थी.
"रमा यह बोल रहा है , इसकी फ्रेंड ऐसे जानती है , तुम अपनी फ्रेंड से पूछ कर बताओ न..." रवि ने रमा की जांगू के बेच हाथ डालते हुए बोलै.
"ोुछ्ह , मेरी फ्रेंड ऐसे नै जानती और न hi में , अभ हाथ निकालो बहार ..." रमा ने शरमाते हुए बोलै.
"सेल तेरा रंग hi कला है , उसकी फ्रेंड कितनी गोरी है , तेरा उससे कोई मेल hi नै , चुप चाप , पेण्ट के अंदर चल .." रवि ने अपने लुंड को प्यार से थपड जड़ते हुए बोलै , जिसे देख रमा बेइंतहा हसने लगी .." रमा सॉरी यार , यह कालू मुज़से झूठ बोल रहा था , कह रहा था , यह तुम्हारी मिस मुनिअ से कई बार खेल चूका है , कह रहा था , वोह बहुत मखमली और गोरी है , और यह भी बोल रहा है , गाओं में हम दोनों खूब लड़ते थे , और यह तुम्हारी मिस मुनिअ को खूब रुलाता था..." रवि ने रमा की आँखों में देखते हुए बोलै , रमा की आँखों में इक शर्माहट थी , वोह बस हसे जा रही थी.
"हहै , भइआ यह झूठ बोल रहा है , मेरी मुनिअ ऐसे नै जानती..." रमा ने हस्ते हुए बोलै.
"रमा तुम इसको इक थपड जड़ दो..." रवि ने रमा को आँख मरते हुए बोलै.
रमा शरमाते हुए गाड़ी से बहार देखने लगी , रवि ने धीरे से रमा का नरम मुलाम हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर रख दिया ,
रमा का पूरा बदन कम्प सा गया , इक अजीब सी खुमारी उसके बदन में दौड गई ,
रमा ने कुछ नै किया , न तोह उसने हाथ हटाया और न hi उसके हाथ में कोई हलचल हुई ,
"उफ़ रमा तुम्हारा हाथ कितना नरम है , प्लस ऐसे प्यार दो न अपने हाथ से.." रवि ने रमा का चेहरा अपनी और कर उसके होंठो को कास कर चूसते हुए बोलै , रमा का चेहरा शर्म से पूरा लाल हो चूका था ,
"अरे करो न प्यार..." रवि ने बेकाबू सा होते हुए बोलै.
"मुझे नै अत प्यार करना.." रमा ने शरमाते हुए बोलै.
"अरे बस हाथ को ऊपर निचे करो , इस कालू को यही सजा मिले , तब इसके होश ठिकाने ा जायेगे..."
"हहै , भइआ इसको सजा दूंगी , पर घर पर , प्लस अभी अप्प अंदर कर लो न , प्लस भाई , इसकी तोह घर जाकर अचे से खबर लुंगी में..." रमा ने प्यार से लुंड को सेहला कर बोलै.
रवि ने लुंड को पेण्ट के अंदर कर लिया और रमा को अपनी तरफ खींच उसके होंठो को चुम लिया , रमा बस मुस्कराती रही , रमा सोच रही थी , पहले उसके भाई उससे दूर भाग रहा था और अभ उसे इक पल भी नै छोड़ रहा था.
"रमा तुम रत को मेरे साथ सो जाना , प्लस.."
"न जी न , माँ को पता चला , मेरी तोह वाट लग जाएगी.." रमा ने थोड़ा डरते हुए बोलै.
"ौऊ , प्लस जणू , मुझे तुम्हारे साथ hi नंद आएगी , प्लस , में तुम अपनी बहु में भरकर सोना चाहता हु , प्लस जणू , हाँ बोल दो , प्लस ..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै.
"उम्म्म , सोचूंगी ..." रमा ने हस्ते हुए बोलै.
"ाचा जब मेरी बीवी बानगी , तब भी सोचूंगी..."
बीवी का नाम सुन रमा शर्माने लगी .." क्या भाई अप्प भी..." रमा का ऐसे शर्माना रवि को बेहद ाचा लगा..
ऐसे hi दोनों प्यार भरी बतिअन करते करते शहर पहुँच गए...
दूसरी तरफ...
"हहै , दिलवर खान , मने तुम बचा लिया , वार्ना तेरा भी वही हाल होता , जैसे , जैसे उस सुल्ताना का हुआ , खीयकहीईई , तुझे भी काट देता रवि खीयीकहींईईई..." जोकर ने अपनी डरावनी हस्सी हस्ते हुए बोलै.
"शुक्रिया दोस्त.."
"दोस्त नै , दोस्त नै हु में , किसी का भी दोस्त नै हु , ः , अभ रवि को मर दो तुम , जल्दी से जल्दी ..." जोकर ने थोड़ा गुस्से में बोलै.
"पर कैसे , उसे कैसे मरू में..."
"रास्ता , कोई तोह होगा रास्ता , हम्म , हास्सःह्ह्ह , उसकी कमज़ोरी दुंदु , कोण है , कोण है , हाँ , यद् आया , उसका परिवार , उसकी बहाने , उसकी बहनो को मर दो , हाँ , ख़तम कर दो , पहले किसे मरना है..." जोकर ने ब्यांक आवाज़ में बोलै.
"उसकी तोह बहुत सी बहाने हैं , किसको मरू पहले , तेन की वोह साला खुद बा खुद मर जाये..." दिलावर खान गुस्से में चीखते हुए बोलै.
"में तुम बताता हु , ेहडेर कण में सुनो , दीवारों के भी कण होते हैं , खीयीकहीई..." जोकर ने हस्ते हुए बोलै
"हम्म , अभ वोह जिन्दा नै बचेगी..." दिलवर खान मुस्कराते हुए बोलै..
"ओह्ह्ह , रवि तुमसे मिलने का वख्त ा गया , ः , जाओ , मुझे मेकअप करना है , ः , मेक उप करना है , रवि से मिलना है मुझे ..." जोकर हस्ते हस्ते गयाब हो गया , और दिलवर खान दर से कम्पनी लगा.
दूसरी तरफ...
रवि और रमा घर पहुँच गए , सीमा ने रवि को देखा तोह वोह भाग कर उसके गले लग गई , उसके चेहरे को चूमने लगी , जब उसके दिल को सकूं आया , तब उसने रवि को छोड़ दिया ,
फिर रवि इक इक कर रिमी और शूरति से मिला और फिर रमा का हाथ पकड़ सोफे पर बेथ गया , सीमा और बाकि सब हरिजन हुए देखते रहे.
"भाई दो मिंट में अभी अति हु.." रमा ने शरमाते हुए बोलै.
"नै , नै , तुम कही नै जोगी , मेरे साथ राहु बस..." रवि ने रमा का हाथ और भी कास कर पकड़ते हुए बोलै.
"भइआ बाथरूम जाना है , अभी ा जोगी दो मिंट में..." रमा ने धीरे से रवि के कण में बोलै.
"सिर्फ दो मिंट.."
"हाँ बाबा बस दो मिंट , अभी गई और अभी आयी..." रमा मुस्कराती हुई उठी और अपने रूम की तरफ चली गई.
सीमा , शूरति और रिमी , बस शॉकेड सी हुई दोनों की बतिअन सुन रही थी ,
"अरे सीमा खाना खिला दो , भूक लगी है.."
"अप्प फ्रेश होकर ायो , में तब तक खाना लगाती हु.." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै और फिर रिमी और शूरति को साथ लेकर किचन की तरफ चली गई.
रवि उठा और सीधा सेड्यां चढ़ ऊपर वाले रूम में चला गया , रवि ने रूम का दरवाजा खोला और अंदर घुस गया.
यह और कोई नै वही रूम था , यहाँ रवि और कोमल इक साथ रहते थे , इक साथ सोते थे.
रवि वाशरूम में घुसा और अपना चेहरा धोने लगा , रवि ने सामने मिरर में खुद की परछाई देखि तोह वोह अंदर तक हिल सा गया.
"k..kk...kon हो तुम..." रवि ने हकलाते हुए पूछा.
"में हु रवि.."
"रवि में हु , तुम कोण हो..."
"तुम इक कायर हो , में हु असली रवि , में हु , जिसने सोनल की जान बचाई , रमा को उसके हिस्से का प्यार दिया , तुम तोह किसी काम के नै , तुम तोह मर चुके हो , कोमल के साथ..." उस परछाई ने रवि की तरफ देख कर बोलै
"अपनी जुबान को लगाम दो , में रवि हु , तुम इक शतिआं हो , तुम्हारी कोई जरुरत नै मुझे , चले jao..."ravi ने चीख कर बोलै.
"जाता हु में , लेकिन अगर भूल से भी तुम्हारे मोह से कोमल का नाम सुना , यद् रखना , इस बार में ायुगा जरूर , लेकिन वापिस अपनी ीचा से जाउगा , समझे कायर .."
"तेरी तोह सेल , में कायर नै हु..."
"तुम कायर hi तोह हो , सारा दिन बस कोमल , कोमल , छीलते रहते हो , कोमल मुझे छोड़ गई , वोह बेवफा थी , वोह ऐसी थी , ठयऊ , तुम क्या कोमल के पालतू हो , जो उसके पीछे कुत्ते की तरफ घूमते रहते हो , अगर कोमल का दुबारा नाम लिया तोह ाचा नै होगा..." उस परछाई ने गुस्से में बोलै.
"अपनी जुबान बंद करो..."
रवि ने गुस्से में बोलै , लेकिन अभ वह कुछ नै था , उसका अपना चेहरा उसे दिख रहा था , रवि जल्दी से फ्रेश हुआ और घरके हॉल में वापिस ा गया.
उसने देखा , सभी उसी का रह देख रही थी , पर रमा वह नै थी.
"सीमा , रमा कहा है , उसे भी बुलाओ खाने के लिए..." रवि ने थोड़ा चिंता में बोलै.
"भइआ वोह बस अति hi होगी.." शूरति ने रवि के बालो को सेहला कर बोलै.
"में उसे बुला कर लती हु.." रिमी इतना बोल रमा को लेने चली गई.
जब तक रिमी , रमा को लेकर न ा गई , रवि ने खाना सुरु नै किया , रमा ने इक बार मुस्करा कर अपने भाई की आँखों में देखा और फिर दोनों खाना खाने लगे , सीमा बड़े दयँ से दोनों के hav-bhav नोट कर रही थी.
खाना खाने के बाद , रमा कुछ देर अपनी माँ सीमा के पास चली गई , बहुत मुश्किल से उसने रवि को मनाया.
फिर रवि ने रिमी और शूरति को इक इक करके अपने रूम में ऐनी को बोलै , क्यों की जब से वोह ठीक हुआ था , दोनों को वख्त नै दे पाया था.
रवि सेड्यां चढ़ अपने रूम में आकर बीएड पर बेथ गया , उसने सोच लिया था , गुस्सा नै करना है , वार्ना वोह डेविल बहार ा जायेगा.
कुछ देर बाद रूम का दरवाजा खुला और शूरति अंदर आयी और भाग कर रवि के गले लग रोने लगी.
"अरे , अरे , क्या हुआ मेरी जणू को..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"भाई , ी लव ु , में आपसे बेइंतहा प्यार करती हु , प्लस , अप्प मुझे छोड़ कर मत जाना , नै जी सकती में आपके बिना..." शूरति ने रट हुए बोलै.
"अले मेले बाबू , में तुम्हारे पास हु , कभी तुमसे दूर नै जाउगा , हमेशा तुम्हारे पास रहुगा , तुम्हारी रूह की तरह , अभ प्यार करो मुज़से ..." रवि ने शूरति के बहते असंयिओं को छत्ते हुए बोलै.
"भाई में दर गई थी , कही आपको कुछ हो जाता तोह , में कैसे जिन्दा रहती , में आपके बिना जीने का सोच भी नै सकती..." शूरति ने पगलू की तरह रवि के चेहरे को चूमते हुए बोलै.
"उम् , मेरी जान , अभी तोह तुम शादी करनी है.."
"भाड़ में जाये शादी , में बस आपके पास रहूगी , चाहे जैसे भी रख लेना , आपको छोड़ कर नै जोगी , अप्प मेरे हो , मेरे हो , ी लव ु , मेरा बाबू , मेरा सोना , उम्मा.." शूरति ने रवि के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै.
"ः , शूरति ी लव ु , तुम भी बस मेरी हो , सिर्फ मेरी..." रवि ने बेइंतहा शूरति के चेहरे को चूमते हुए बोलै.
"भाई मुझे सेक्स से कोई मतलब नै , में बस आपके साथ रहना चाहती हु , में बिना सेक्स के जिंदगी गुजर लुंगी , पर आपकी इक पल की जुदाई मुझे मौत जैसी लगती है , प्लस , मुज़से दूर मत जाना , लव ु भाई , लव ु , अप्प कितने प्यारे हो , मेरी नज़र न लग जाये कही आपको , मुझे अपने पास रख लो भाई , प्लस..." शूरति ने रट हुए बोलै.
"अरे पागल , तू ऐसा क्यों बोल रही है , तू तोह मेरी जान है , क्या हुआ हमारी शादी नै हुई , तुम्हारा मुझ पर पूरा हुक है , ाचा अभ रोना बंद करो , और मेरी बहु में आकर , मुझे सकूं दो , मेरी प्यारी जणू , तुम मुज़से कुछ पूछने की जरुरत नै , अपना हुक मुज़से माँगा करो , इक वाइफ की तरह , समाजी , पगली कही की..." रवि ने शूरति के होंठो को चूसते हुए बोलै.
शूरति अभ शर्माने लगी थी , उसने अपने भाई के साथ सोते हुए पूछा.
"में आपकी वाइफ हु , सच में.."
"हाँ मेरी जणू.."
"भइआ ओह्ह सॉरी, मेरे पतिदेव , अज्ज से मेरा अप्प पर पूरा हुक है.." शूरति ने हस्ते हुए बोलै.
"अभ क्या बचे की जान लोगी तुम.."
"मेरे प्यारे पति , कल मुझे घूमने लेकर जाओ , जाओगे न.." शूरति ने मुस्कराते हुए पूछा.
"जी वाइफ जी , जो अप्प कहुगी.."
"हहै , भइआ ी लव ु.." शूरति ने रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै और फिर उसके सीने से लग , ें सकूं भरे लमहु को महसूस करने लगी , अभ वोह बेहद खुश थी....
"रविइइइइइइइइ..." इक संसू की आवाज़ रवि को सुनाई दी , रवि समाज गया के यह कोण है..
"शूरति मेरे बाबू , मेरे लिए छाए बना लायो प्लस.." रवि ने शूरति के गालो चूमते हुए बोलै.
"भइआ में अभी लायी , अपने हाथो से बनाकर.." शूरति ख़ुशी में चीखती हुई बोली और मुस्कराते हुए रूम से बहार चली गई.
रवि अभ काल का इंतज़ार करने लगा , उसे भी बेहद सवाल करने थे काल से...
तो बे कुनिटेड....
कोई इक घंटा सोनल , रवि की बहु में सोती रही , लेकिन रवि की आँखों में नंद नै थी , वोह जगता हुआ कुछ सोच रहा था , उसकी आँखें , इक डैम काली होती जा रही थी , वोह बहुत कोससिह कर रहा था , सोने की , लेकिन नंद जैसे उससे रूत चुकी थी.
तभी किसी ने आकर दरवाजा खटका दिया , रवि ने सोनल को वैसे hi सोने दिया , और उठ कर रूम का दरवाजा खोल दिया , सामने कविता कड़ी थी.
"भाई कैसे हो अभ अप्प..." कविता ने मुस्कराते हुए पूछा.
"हम्म , में बिलकुल ठीक हु जणू , अज्ज बेहद खूबसूरत लग रही हो , किसी का कतल करने का इरादा है क्या..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"धत्त अप्प भी न , में तोह खाने का पूछने आयी थी..." कवी ने शर्मा कर बोलै.
"लेकिन मुझे तोह प्यास लगी है , कुछ नमकीन और मीठा पानी पीना है मुझे , तुम पलिअ दो न..." रवि ने इक शातिअनि स्माइल देते हुए बोलै.
"उम् , ऐसा पानी कहा मिलता है , जो मीठा भी हो और नमकीन भी..."
"यहाँ पर..." रवि ने इक डैम से कविता की फ्रॉक को ऊपर कर उसकी मखमली छोटी सी छूट को हाथ में कास कर दबोचते हुए बोलै.
"ोूछहः आईईईई मुम्ममय , छोड़ू भइआ , देदी उठ जाएगी..." कवी ने थोड़ा दर्द और मज़े के एहसास में बोलै.
"पहले प्यास तोह भुजा दो मेरी..." रवि ने अग्गे बाद कर कविता को बहु में भरते हुए बोलै.
"रत को भाई , अभी नै प्लस , सोनल देदी उठ जाएगी..." कविता ने थोड़ा डरते हुए बोलै.
"ठीक है..." इतना बोल रवि ने कविता को छोड़ दिया और वापिस बीएड की तरफ ा गया , वोह बीएड पर बेथ गया और कविता की तरफ देख कर बोलै.
"अरे कवी , तुम कब आयी यहाँ पर..." रवि ने मुस्कराते हुए पूछा.
"भाई , में तोह कब से आयी हु .." कवी को कुछ समाज नै ा रहा था.
"ाचा , में नंद में था , कोई काम था..."
"voh...voh.. खाना , खाने का पूछने आयी थी , आपको कुछ यद् नै , हम दोनों ने अभी जो बतिअन की.." कविता ने थोड़ा डरते हुए पूछा.
"बतिअन , कोनसी बतिअन , अरे कवी , अभी अभी तोह तुम आयी , तोह बतिअन कब की मने तुमसे , तुम भी न , बहुत शरारती हो गई हो , सोनल देदी , यह कब आयी यहाँ पर..." रवि ने पीछे पलट कर सोनल को सोते हुए देख कर बोलै.
"देदी , तोह पिछले 1 घंटे से आपके पास hi सो रही हैं.."
"ाचा , शयद में सोया था , जब देदी आयी होंगी ..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"भइआ शयद अभी ठीक नै है , कोई बात नै भाई , में बस आपकी हु , में आपका इंतज़ार करुँगी , जब अप्प पूरी तरह ठीक हो जाओगे , तब आपसे बेपनाह प्यार करुँगी , आपका इंतज़ार तोह में अपनी मौत तक कर सकती हु , आपके बिना मेरी जिंदगी में कोई नै ा सकता , कोई नै..." कविता ने नाम आँखों से अपने मन में बोलै और अग्गे बढ़ अपने भाई के गालो को चुम रूम से बहार चली गई.
"ओह्ह हो , मुझे वापिस जाना है , रमा पता नै कहा रह गई अभ.." रवि ने बीएड से उठ बहार हॉल की और जाते हुए बोलै.
रवि घर के हॉल में आया , तब सभी वही बैठे थे , रवि ने सीतल की तरफ देखा , उसकी आँखें इक डैम लाल हो चुकी थी , जैसे वोह बहुत रोई हो..
"अरे सीतल क्या हुआ , तुम बेहद उदास लग रही हो.." रवि ने सीतल के पास जाकर बोलै
"कुछ नै , वोह अप्प जा रहे हो , तोह मन उदास हो गया.." सीतल ने रट हुए बोलै.
"अरे मेरी प्यारी बहिन , रट नै , में वापिस ायुगा न , बस कोमल से मिल लू , वोह बहुत उदास हो जाती है , में बिना उसे बताये यहाँ ा गया..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.
सीतल और न सेह सकीय , और फुट फुट कर रोने लगी , वोह रट हुए अपने रूम की तरफ भाग गई ,
"रमा यह सीतल को क्या हुआ.." रवि ने रमा की तरफ देख कर बोलै.
"वोह भाई , कुछ नै , कोमल के बारे में सुन वोह रोने लगी .." रमा ने जबरन मुस्कराते हुए बोलै.
"उम् , मेरी कोमल है hi इतनी प्यारी , कोई भी उसकी उदासी के बारे में सुन रोने लग जाये , वैसे चले रमा..." रवि ने सबकी तरफ देख कर बोलै.
रमा ने सबको पहले hi समझा दिया था के रवि का वापिस जाना बेहद जरुरी है , उसकी हालत अभ भिगाडती जा रही है.
"हाँ बीटा जाओ तुम..." सुमन चची ने आँखों में असनु भरते हुए बोलै.
"अरे चची जी , अप्प क्यों रो रही हो , में ायुगा न वापिस , उस कोमल ने धोका दिया , इसका मतलब यह तोह नै के में अप्प सब को भूल जाउगा.." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै.
"कोमल , उसने कब धोका दिया तुम..." सुमन चची ने थोड़ा नाम आँखों से पूछा.
"अह्हह्ह्ह्ह वोह धोकेबाज थी , वोह बेवफा थी , मुझे अकेला छोड़ कर चली गई , कोमळळ , कोमल ..." रवि अपना सार दोनों हाथिओं में पकड़ छिलने लगा , वोह घुटनो के बल निचे बेथ गया.
रमा भाग कर उसके पास आयी , फिर रवि शांत पढ़ गया , और मुस्कराता हुआ उठा.
"ओह्ह हो में सोनल से मिला hi नै , क्या सोचेगी वोह बाद में , रमा में अभी आया..." रवि इतना बोल वापिस रूम में चला गया.
रवि ने दरवाजा अंदर से बंद किया और सोनल की तरफ देखा , वोह बेहद प्यारी लग रही थी सोते हुए , उसके गुलाबी नरम होंठ थोड़ा कंपकपा रहे थे.
"उफ़ कितनी खूबसूरत है मेरी जान..." रवि ने सोनल के बालो को सेहला कर बोलै.
फिर िका इक रवि , सोनल के ऊपर लेट गया , और उसके होंठो को चूसने लगा , सोनल के होंठ लाजवाब और मीठे थे , रवि तोह मदहोश सा हो गया था.
तभी अचानक सोनल ने आँखें खोल ली , जब उसे महसूस हुआ के रवि उसके होंठो को चुम रहा है , उसने कास लिया उसे अपनी बहु में , और बड़े शिदत और प्यार से रवि का साथ देने लगी , यह किश बहुत देर तक चलता रहा.
"अह्ह्ह उह्ह्ह कैसा लगा मेरी जान..." रवि ने हफ्ते हुए बोलै.
सोनल कुछ न बोली , उसने शर्मा कर अपनी आँखों को बंद कर लिया.
"सोनल में जा रहा हु , सोचा तुमसे मिल कर जाऊ , में जल्द hi वापिस ायुगा.." रवि ने सोनल का माथा चूमते हुए बोलै.
"मत जाओ न , मेरा दिल नै लगता आपके बिना , प्लस.." सोनल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.
"सोनल , जिंदगी के कुछ सवाल है , जिनके जवाब में ढूंढ़ना चाहता हु , वार्ना हम कभी खुश नै रह पाएंगे..." रवि ने सोनल के कंपते होंठो को चुम कर बोलै.
"में आपके बिना कैसे रहूगी , मुझे चिंता रहती है आपकी.."
"शादी करनी है.."
"हूँ..."
"डॉक्टर बनु पहले , वादा किया था तुमने..."
"हाँ , में जल्द hi एडमिशन ले लुंगी , में डॉक्टर बानगी..." सोनल ने नाम आँखों से बोलै.
"बस फिर , अभ मुझे जाने दो , तभी तुम डॉक्टर बन पाउगी , और अभी से हमारे बच्चू का नाम सोच लो.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै तोह सोनल शर्माने लगी ,
"ाचा में जाता हु , अपना ख्याल रखना , कोई प्रॉब्लम हो , तोह फ़ोन कर देना , समाज गई न.." रवि ने सोनल के होंठो को चुम कर बोलै.
"हूँ , bye जान.."
"bye , मेरी मिथु.." रवि ने सोनल के होंठो को कास कर चूमा और रूम से बहार निकल आया.
रवि ने सबके साथ अचे से बेहवे किया और सबको जल्दी मिलने का बोल रमा के साथ घर की और निकल पढ़ा.
सबकी आँखें नाम थी , खास कर कविता और सीतल की , क्यों की वोह दोनों रवि से प्यार करना चाहती थी , पर रवि की हालत देख , वोह अंदर से टूट चुकी थी.
रवि और रमा अभ गाड़ी में बेथ घर की तरफ जा रहे थे , रमा कुछ खामोश थी , यह बात रवि को थोड़ा परेशान कर रही थी.
"मेरी जणू , क्या हुआ , उदास क्यों हो.." रवि ने प्यार से रमा के बाल सहलाते हुए पूछा.
"k..kuch नै भाई , में ठीक हु.." रमा ने मुस्करा कर बोलै.
"हम्म , अभ झूठ भी बोलूगी मुज़से , तू बहुत चालक हो गई है , गाओं में ऐसा नै करती थी , काश के वोह जिंदगी लोट ए.." रवि ने उदास सा होकर बोलै.
"भइआ वोह दिन कितने अचे थे..."
"जब में तुम्हारी चुदाई करता था..."
"धत्त्त , अप्प भी न , मुझे नै करनी आपसे बात..." रमा ने शर्मा कर बोलै.
"हम्म , सच में , जब तुम नंगी करके छोड़ रहा होता था , तब इक अलग hi मज़ा मिलता था .." रवि ने मुस्करा कर बोलै.
"भइआ बस करो , मुझे कुछ यद् नै..." रमा ने फिर से शरमाते हुए बोलै.
"तुम कहो तोह , जैसे मने पहले किया था , वोह सब करके दिखा सकता हु , ाचा इक चीज़ दिकहु तुम..." रवि ने हस्ते हुए बोलै.
"मुझे नै देखनी , कोई चीज़ -वीज़.." रमा ने मुस्कराते हुए बहार की तरफ देखते हुए बोलै.
"अरे देख ले , तेरी hi चीज़ है , तू बहुत खेलती थी इससे गाओं में , अभी दिखता हु..." इतना बोल रवि ने अपनी पेण्ट की जप खोल अपना लम्बा मोटा लुंड बहार निकल लिया.
रमा ने इक बार कनखियों से लुंड की तरफ देखा , और फिर वोह बुरी तरह शर्मा गई , उसके गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो गए.
"देख न , यह तेरा प्यारा खिलौना है , गाओं में तू इससे बहुत खेलती थी , हर रोज़.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"भाई ऐसे अंदर करो , मुझे शर्म ा रही है.." रमा ने अपनी आँखों पर हाथ रखते हुए बोलै.
"भाई तेरी किस्मत ख़राब है , अभ यह लड़की तुझे नै पहचानती , न न , में कुछ नै कर सकता , ाचा , हूँ , ठीक है , पूछता हु.." रवि ने अपने लुंड से बतिअन करते हुए बोलै , जब की रमा पगलू की तरह है रही थी.
"रमा यह बोल रहा है , इसकी फ्रेंड ऐसे जानती है , तुम अपनी फ्रेंड से पूछ कर बताओ न..." रवि ने रमा की जांगू के बेच हाथ डालते हुए बोलै.
"ोुछ्ह , मेरी फ्रेंड ऐसे नै जानती और न hi में , अभ हाथ निकालो बहार ..." रमा ने शरमाते हुए बोलै.
"सेल तेरा रंग hi कला है , उसकी फ्रेंड कितनी गोरी है , तेरा उससे कोई मेल hi नै , चुप चाप , पेण्ट के अंदर चल .." रवि ने अपने लुंड को प्यार से थपड जड़ते हुए बोलै , जिसे देख रमा बेइंतहा हसने लगी .." रमा सॉरी यार , यह कालू मुज़से झूठ बोल रहा था , कह रहा था , यह तुम्हारी मिस मुनिअ से कई बार खेल चूका है , कह रहा था , वोह बहुत मखमली और गोरी है , और यह भी बोल रहा है , गाओं में हम दोनों खूब लड़ते थे , और यह तुम्हारी मिस मुनिअ को खूब रुलाता था..." रवि ने रमा की आँखों में देखते हुए बोलै , रमा की आँखों में इक शर्माहट थी , वोह बस हसे जा रही थी.
"हहै , भइआ यह झूठ बोल रहा है , मेरी मुनिअ ऐसे नै जानती..." रमा ने हस्ते हुए बोलै.
"रमा तुम इसको इक थपड जड़ दो..." रवि ने रमा को आँख मरते हुए बोलै.
रमा शरमाते हुए गाड़ी से बहार देखने लगी , रवि ने धीरे से रमा का नरम मुलाम हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर रख दिया ,
रमा का पूरा बदन कम्प सा गया , इक अजीब सी खुमारी उसके बदन में दौड गई ,
रमा ने कुछ नै किया , न तोह उसने हाथ हटाया और न hi उसके हाथ में कोई हलचल हुई ,
"उफ़ रमा तुम्हारा हाथ कितना नरम है , प्लस ऐसे प्यार दो न अपने हाथ से.." रवि ने रमा का चेहरा अपनी और कर उसके होंठो को कास कर चूसते हुए बोलै , रमा का चेहरा शर्म से पूरा लाल हो चूका था ,
"अरे करो न प्यार..." रवि ने बेकाबू सा होते हुए बोलै.
"मुझे नै अत प्यार करना.." रमा ने शरमाते हुए बोलै.
"अरे बस हाथ को ऊपर निचे करो , इस कालू को यही सजा मिले , तब इसके होश ठिकाने ा जायेगे..."
"हहै , भइआ इसको सजा दूंगी , पर घर पर , प्लस अभी अप्प अंदर कर लो न , प्लस भाई , इसकी तोह घर जाकर अचे से खबर लुंगी में..." रमा ने प्यार से लुंड को सेहला कर बोलै.
रवि ने लुंड को पेण्ट के अंदर कर लिया और रमा को अपनी तरफ खींच उसके होंठो को चुम लिया , रमा बस मुस्कराती रही , रमा सोच रही थी , पहले उसके भाई उससे दूर भाग रहा था और अभ उसे इक पल भी नै छोड़ रहा था.
"रमा तुम रत को मेरे साथ सो जाना , प्लस.."
"न जी न , माँ को पता चला , मेरी तोह वाट लग जाएगी.." रमा ने थोड़ा डरते हुए बोलै.
"ौऊ , प्लस जणू , मुझे तुम्हारे साथ hi नंद आएगी , प्लस , में तुम अपनी बहु में भरकर सोना चाहता हु , प्लस जणू , हाँ बोल दो , प्लस ..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै.
"उम्म्म , सोचूंगी ..." रमा ने हस्ते हुए बोलै.
"ाचा जब मेरी बीवी बानगी , तब भी सोचूंगी..."
बीवी का नाम सुन रमा शर्माने लगी .." क्या भाई अप्प भी..." रमा का ऐसे शर्माना रवि को बेहद ाचा लगा..
ऐसे hi दोनों प्यार भरी बतिअन करते करते शहर पहुँच गए...
दूसरी तरफ...
"हहै , दिलवर खान , मने तुम बचा लिया , वार्ना तेरा भी वही हाल होता , जैसे , जैसे उस सुल्ताना का हुआ , खीयकहीईई , तुझे भी काट देता रवि खीयीकहींईईई..." जोकर ने अपनी डरावनी हस्सी हस्ते हुए बोलै.
"शुक्रिया दोस्त.."
"दोस्त नै , दोस्त नै हु में , किसी का भी दोस्त नै हु , ः , अभ रवि को मर दो तुम , जल्दी से जल्दी ..." जोकर ने थोड़ा गुस्से में बोलै.
"पर कैसे , उसे कैसे मरू में..."
"रास्ता , कोई तोह होगा रास्ता , हम्म , हास्सःह्ह्ह , उसकी कमज़ोरी दुंदु , कोण है , कोण है , हाँ , यद् आया , उसका परिवार , उसकी बहाने , उसकी बहनो को मर दो , हाँ , ख़तम कर दो , पहले किसे मरना है..." जोकर ने ब्यांक आवाज़ में बोलै.
"उसकी तोह बहुत सी बहाने हैं , किसको मरू पहले , तेन की वोह साला खुद बा खुद मर जाये..." दिलावर खान गुस्से में चीखते हुए बोलै.
"में तुम बताता हु , ेहडेर कण में सुनो , दीवारों के भी कण होते हैं , खीयीकहीई..." जोकर ने हस्ते हुए बोलै
"हम्म , अभ वोह जिन्दा नै बचेगी..." दिलवर खान मुस्कराते हुए बोलै..
"ओह्ह्ह , रवि तुमसे मिलने का वख्त ा गया , ः , जाओ , मुझे मेकअप करना है , ः , मेक उप करना है , रवि से मिलना है मुझे ..." जोकर हस्ते हस्ते गयाब हो गया , और दिलवर खान दर से कम्पनी लगा.
दूसरी तरफ...
रवि और रमा घर पहुँच गए , सीमा ने रवि को देखा तोह वोह भाग कर उसके गले लग गई , उसके चेहरे को चूमने लगी , जब उसके दिल को सकूं आया , तब उसने रवि को छोड़ दिया ,
फिर रवि इक इक कर रिमी और शूरति से मिला और फिर रमा का हाथ पकड़ सोफे पर बेथ गया , सीमा और बाकि सब हरिजन हुए देखते रहे.
"भाई दो मिंट में अभी अति हु.." रमा ने शरमाते हुए बोलै.
"नै , नै , तुम कही नै जोगी , मेरे साथ राहु बस..." रवि ने रमा का हाथ और भी कास कर पकड़ते हुए बोलै.
"भइआ बाथरूम जाना है , अभी ा जोगी दो मिंट में..." रमा ने धीरे से रवि के कण में बोलै.
"सिर्फ दो मिंट.."
"हाँ बाबा बस दो मिंट , अभी गई और अभी आयी..." रमा मुस्कराती हुई उठी और अपने रूम की तरफ चली गई.
सीमा , शूरति और रिमी , बस शॉकेड सी हुई दोनों की बतिअन सुन रही थी ,
"अरे सीमा खाना खिला दो , भूक लगी है.."
"अप्प फ्रेश होकर ायो , में तब तक खाना लगाती हु.." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै और फिर रिमी और शूरति को साथ लेकर किचन की तरफ चली गई.
रवि उठा और सीधा सेड्यां चढ़ ऊपर वाले रूम में चला गया , रवि ने रूम का दरवाजा खोला और अंदर घुस गया.
यह और कोई नै वही रूम था , यहाँ रवि और कोमल इक साथ रहते थे , इक साथ सोते थे.
रवि वाशरूम में घुसा और अपना चेहरा धोने लगा , रवि ने सामने मिरर में खुद की परछाई देखि तोह वोह अंदर तक हिल सा गया.
"k..kk...kon हो तुम..." रवि ने हकलाते हुए पूछा.
"में हु रवि.."
"रवि में हु , तुम कोण हो..."
"तुम इक कायर हो , में हु असली रवि , में हु , जिसने सोनल की जान बचाई , रमा को उसके हिस्से का प्यार दिया , तुम तोह किसी काम के नै , तुम तोह मर चुके हो , कोमल के साथ..." उस परछाई ने रवि की तरफ देख कर बोलै
"अपनी जुबान को लगाम दो , में रवि हु , तुम इक शतिआं हो , तुम्हारी कोई जरुरत नै मुझे , चले jao..."ravi ने चीख कर बोलै.
"जाता हु में , लेकिन अगर भूल से भी तुम्हारे मोह से कोमल का नाम सुना , यद् रखना , इस बार में ायुगा जरूर , लेकिन वापिस अपनी ीचा से जाउगा , समझे कायर .."
"तेरी तोह सेल , में कायर नै हु..."
"तुम कायर hi तोह हो , सारा दिन बस कोमल , कोमल , छीलते रहते हो , कोमल मुझे छोड़ गई , वोह बेवफा थी , वोह ऐसी थी , ठयऊ , तुम क्या कोमल के पालतू हो , जो उसके पीछे कुत्ते की तरफ घूमते रहते हो , अगर कोमल का दुबारा नाम लिया तोह ाचा नै होगा..." उस परछाई ने गुस्से में बोलै.
"अपनी जुबान बंद करो..."
रवि ने गुस्से में बोलै , लेकिन अभ वह कुछ नै था , उसका अपना चेहरा उसे दिख रहा था , रवि जल्दी से फ्रेश हुआ और घरके हॉल में वापिस ा गया.
उसने देखा , सभी उसी का रह देख रही थी , पर रमा वह नै थी.
"सीमा , रमा कहा है , उसे भी बुलाओ खाने के लिए..." रवि ने थोड़ा चिंता में बोलै.
"भइआ वोह बस अति hi होगी.." शूरति ने रवि के बालो को सेहला कर बोलै.
"में उसे बुला कर लती हु.." रिमी इतना बोल रमा को लेने चली गई.
जब तक रिमी , रमा को लेकर न ा गई , रवि ने खाना सुरु नै किया , रमा ने इक बार मुस्करा कर अपने भाई की आँखों में देखा और फिर दोनों खाना खाने लगे , सीमा बड़े दयँ से दोनों के hav-bhav नोट कर रही थी.
खाना खाने के बाद , रमा कुछ देर अपनी माँ सीमा के पास चली गई , बहुत मुश्किल से उसने रवि को मनाया.
फिर रवि ने रिमी और शूरति को इक इक करके अपने रूम में ऐनी को बोलै , क्यों की जब से वोह ठीक हुआ था , दोनों को वख्त नै दे पाया था.
रवि सेड्यां चढ़ अपने रूम में आकर बीएड पर बेथ गया , उसने सोच लिया था , गुस्सा नै करना है , वार्ना वोह डेविल बहार ा जायेगा.
कुछ देर बाद रूम का दरवाजा खुला और शूरति अंदर आयी और भाग कर रवि के गले लग रोने लगी.
"अरे , अरे , क्या हुआ मेरी जणू को..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.
"भाई , ी लव ु , में आपसे बेइंतहा प्यार करती हु , प्लस , अप्प मुझे छोड़ कर मत जाना , नै जी सकती में आपके बिना..." शूरति ने रट हुए बोलै.
"अले मेले बाबू , में तुम्हारे पास हु , कभी तुमसे दूर नै जाउगा , हमेशा तुम्हारे पास रहुगा , तुम्हारी रूह की तरह , अभ प्यार करो मुज़से ..." रवि ने शूरति के बहते असंयिओं को छत्ते हुए बोलै.
"भाई में दर गई थी , कही आपको कुछ हो जाता तोह , में कैसे जिन्दा रहती , में आपके बिना जीने का सोच भी नै सकती..." शूरति ने पगलू की तरह रवि के चेहरे को चूमते हुए बोलै.
"उम् , मेरी जान , अभी तोह तुम शादी करनी है.."
"भाड़ में जाये शादी , में बस आपके पास रहूगी , चाहे जैसे भी रख लेना , आपको छोड़ कर नै जोगी , अप्प मेरे हो , मेरे हो , ी लव ु , मेरा बाबू , मेरा सोना , उम्मा.." शूरति ने रवि के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै.
"ः , शूरति ी लव ु , तुम भी बस मेरी हो , सिर्फ मेरी..." रवि ने बेइंतहा शूरति के चेहरे को चूमते हुए बोलै.
"भाई मुझे सेक्स से कोई मतलब नै , में बस आपके साथ रहना चाहती हु , में बिना सेक्स के जिंदगी गुजर लुंगी , पर आपकी इक पल की जुदाई मुझे मौत जैसी लगती है , प्लस , मुज़से दूर मत जाना , लव ु भाई , लव ु , अप्प कितने प्यारे हो , मेरी नज़र न लग जाये कही आपको , मुझे अपने पास रख लो भाई , प्लस..." शूरति ने रट हुए बोलै.
"अरे पागल , तू ऐसा क्यों बोल रही है , तू तोह मेरी जान है , क्या हुआ हमारी शादी नै हुई , तुम्हारा मुझ पर पूरा हुक है , ाचा अभ रोना बंद करो , और मेरी बहु में आकर , मुझे सकूं दो , मेरी प्यारी जणू , तुम मुज़से कुछ पूछने की जरुरत नै , अपना हुक मुज़से माँगा करो , इक वाइफ की तरह , समाजी , पगली कही की..." रवि ने शूरति के होंठो को चूसते हुए बोलै.
शूरति अभ शर्माने लगी थी , उसने अपने भाई के साथ सोते हुए पूछा.
"में आपकी वाइफ हु , सच में.."
"हाँ मेरी जणू.."
"भइआ ओह्ह सॉरी, मेरे पतिदेव , अज्ज से मेरा अप्प पर पूरा हुक है.." शूरति ने हस्ते हुए बोलै.
"अभ क्या बचे की जान लोगी तुम.."
"मेरे प्यारे पति , कल मुझे घूमने लेकर जाओ , जाओगे न.." शूरति ने मुस्कराते हुए पूछा.
"जी वाइफ जी , जो अप्प कहुगी.."
"हहै , भइआ ी लव ु.." शूरति ने रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै और फिर उसके सीने से लग , ें सकूं भरे लमहु को महसूस करने लगी , अभ वोह बेहद खुश थी....
"रविइइइइइइइइ..." इक संसू की आवाज़ रवि को सुनाई दी , रवि समाज गया के यह कोण है..
"शूरति मेरे बाबू , मेरे लिए छाए बना लायो प्लस.." रवि ने शूरति के गालो चूमते हुए बोलै.
"भइआ में अभी लायी , अपने हाथो से बनाकर.." शूरति ख़ुशी में चीखती हुई बोली और मुस्कराते हुए रूम से बहार चली गई.
रवि अभ काल का इंतज़ार करने लगा , उसे भी बेहद सवाल करने थे काल से...
तो बे कुनिटेड....