Incest Deewanapan... - Page 9 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

अपडेट-11

कोई इक घंटा सोनल , रवि की बहु में सोती रही , लेकिन रवि की आँखों में नंद नै थी , वोह जगता हुआ कुछ सोच रहा था , उसकी आँखें , इक डैम काली होती जा रही थी , वोह बहुत कोससिह कर रहा था , सोने की , लेकिन नंद जैसे उससे रूत चुकी थी.

तभी किसी ने आकर दरवाजा खटका दिया , रवि ने सोनल को वैसे hi सोने दिया , और उठ कर रूम का दरवाजा खोल दिया , सामने कविता कड़ी थी.

"भाई कैसे हो अभ अप्प..." कविता ने मुस्कराते हुए पूछा.

"हम्म , में बिलकुल ठीक हु जणू , अज्ज बेहद खूबसूरत लग रही हो , किसी का कतल करने का इरादा है क्या..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.

"धत्त अप्प भी न , में तोह खाने का पूछने आयी थी..." कवी ने शर्मा कर बोलै.

"लेकिन मुझे तोह प्यास लगी है , कुछ नमकीन और मीठा पानी पीना है मुझे , तुम पलिअ दो न..." रवि ने इक शातिअनि स्माइल देते हुए बोलै.

"उम् , ऐसा पानी कहा मिलता है , जो मीठा भी हो और नमकीन भी..."

"यहाँ पर..." रवि ने इक डैम से कविता की फ्रॉक को ऊपर कर उसकी मखमली छोटी सी छूट को हाथ में कास कर दबोचते हुए बोलै.

"ोूछहः आईईईई मुम्ममय , छोड़ू भइआ , देदी उठ जाएगी..." कवी ने थोड़ा दर्द और मज़े के एहसास में बोलै.

"पहले प्यास तोह भुजा दो मेरी..." रवि ने अग्गे बाद कर कविता को बहु में भरते हुए बोलै.

"रत को भाई , अभी नै प्लस , सोनल देदी उठ जाएगी..." कविता ने थोड़ा डरते हुए बोलै.

"ठीक है..." इतना बोल रवि ने कविता को छोड़ दिया और वापिस बीएड की तरफ ा गया , वोह बीएड पर बेथ गया और कविता की तरफ देख कर बोलै.

"अरे कवी , तुम कब आयी यहाँ पर..." रवि ने मुस्कराते हुए पूछा.

"भाई , में तोह कब से आयी हु .." कवी को कुछ समाज नै ा रहा था.

"ाचा , में नंद में था , कोई काम था..."

"voh...voh.. खाना , खाने का पूछने आयी थी , आपको कुछ यद् नै , हम दोनों ने अभी जो बतिअन की.." कविता ने थोड़ा डरते हुए पूछा.

"बतिअन , कोनसी बतिअन , अरे कवी , अभी अभी तोह तुम आयी , तोह बतिअन कब की मने तुमसे , तुम भी न , बहुत शरारती हो गई हो , सोनल देदी , यह कब आयी यहाँ पर..." रवि ने पीछे पलट कर सोनल को सोते हुए देख कर बोलै.

"देदी , तोह पिछले 1 घंटे से आपके पास hi सो रही हैं.."

"ाचा , शयद में सोया था , जब देदी आयी होंगी ..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.

"भइआ शयद अभी ठीक नै है , कोई बात नै भाई , में बस आपकी हु , में आपका इंतज़ार करुँगी , जब अप्प पूरी तरह ठीक हो जाओगे , तब आपसे बेपनाह प्यार करुँगी , आपका इंतज़ार तोह में अपनी मौत तक कर सकती हु , आपके बिना मेरी जिंदगी में कोई नै ा सकता , कोई नै..." कविता ने नाम आँखों से अपने मन में बोलै और अग्गे बढ़ अपने भाई के गालो को चुम रूम से बहार चली गई.

"ओह्ह हो , मुझे वापिस जाना है , रमा पता नै कहा रह गई अभ.." रवि ने बीएड से उठ बहार हॉल की और जाते हुए बोलै.

रवि घर के हॉल में आया , तब सभी वही बैठे थे , रवि ने सीतल की तरफ देखा , उसकी आँखें इक डैम लाल हो चुकी थी , जैसे वोह बहुत रोई हो..

"अरे सीतल क्या हुआ , तुम बेहद उदास लग रही हो.." रवि ने सीतल के पास जाकर बोलै

"कुछ नै , वोह अप्प जा रहे हो , तोह मन उदास हो गया.." सीतल ने रट हुए बोलै.

"अरे मेरी प्यारी बहिन , रट नै , में वापिस ायुगा न , बस कोमल से मिल लू , वोह बहुत उदास हो जाती है , में बिना उसे बताये यहाँ ा गया..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.

सीतल और न सेह सकीय , और फुट फुट कर रोने लगी , वोह रट हुए अपने रूम की तरफ भाग गई ,

"रमा यह सीतल को क्या हुआ.." रवि ने रमा की तरफ देख कर बोलै.

"वोह भाई , कुछ नै , कोमल के बारे में सुन वोह रोने लगी .." रमा ने जबरन मुस्कराते हुए बोलै.

"उम् , मेरी कोमल है hi इतनी प्यारी , कोई भी उसकी उदासी के बारे में सुन रोने लग जाये , वैसे चले रमा..." रवि ने सबकी तरफ देख कर बोलै.

रमा ने सबको पहले hi समझा दिया था के रवि का वापिस जाना बेहद जरुरी है , उसकी हालत अभ भिगाडती जा रही है.

"हाँ बीटा जाओ तुम..." सुमन चची ने आँखों में असनु भरते हुए बोलै.

"अरे चची जी , अप्प क्यों रो रही हो , में ायुगा न वापिस , उस कोमल ने धोका दिया , इसका मतलब यह तोह नै के में अप्प सब को भूल जाउगा.." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै.

"कोमल , उसने कब धोका दिया तुम..." सुमन चची ने थोड़ा नाम आँखों से पूछा.

"अह्हह्ह्ह्ह वोह धोकेबाज थी , वोह बेवफा थी , मुझे अकेला छोड़ कर चली गई , कोमळळ , कोमल ..." रवि अपना सार दोनों हाथिओं में पकड़ छिलने लगा , वोह घुटनो के बल निचे बेथ गया.

रमा भाग कर उसके पास आयी , फिर रवि शांत पढ़ गया , और मुस्कराता हुआ उठा.

"ओह्ह हो में सोनल से मिला hi नै , क्या सोचेगी वोह बाद में , रमा में अभी आया..." रवि इतना बोल वापिस रूम में चला गया.

रवि ने दरवाजा अंदर से बंद किया और सोनल की तरफ देखा , वोह बेहद प्यारी लग रही थी सोते हुए , उसके गुलाबी नरम होंठ थोड़ा कंपकपा रहे थे.

"उफ़ कितनी खूबसूरत है मेरी जान..." रवि ने सोनल के बालो को सेहला कर बोलै.

फिर िका इक रवि , सोनल के ऊपर लेट गया , और उसके होंठो को चूसने लगा , सोनल के होंठ लाजवाब और मीठे थे , रवि तोह मदहोश सा हो गया था.

तभी अचानक सोनल ने आँखें खोल ली , जब उसे महसूस हुआ के रवि उसके होंठो को चुम रहा है , उसने कास लिया उसे अपनी बहु में , और बड़े शिदत और प्यार से रवि का साथ देने लगी , यह किश बहुत देर तक चलता रहा.

"अह्ह्ह उह्ह्ह कैसा लगा मेरी जान..." रवि ने हफ्ते हुए बोलै.

सोनल कुछ न बोली , उसने शर्मा कर अपनी आँखों को बंद कर लिया.

"सोनल में जा रहा हु , सोचा तुमसे मिल कर जाऊ , में जल्द hi वापिस ायुगा.." रवि ने सोनल का माथा चूमते हुए बोलै.

"मत जाओ न , मेरा दिल नै लगता आपके बिना , प्लस.." सोनल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.

"सोनल , जिंदगी के कुछ सवाल है , जिनके जवाब में ढूंढ़ना चाहता हु , वार्ना हम कभी खुश नै रह पाएंगे..." रवि ने सोनल के कंपते होंठो को चुम कर बोलै.

"में आपके बिना कैसे रहूगी , मुझे चिंता रहती है आपकी.."

"शादी करनी है.."

"हूँ..."

"डॉक्टर बनु पहले , वादा किया था तुमने..."

"हाँ , में जल्द hi एडमिशन ले लुंगी , में डॉक्टर बानगी..." सोनल ने नाम आँखों से बोलै.

"बस फिर , अभ मुझे जाने दो , तभी तुम डॉक्टर बन पाउगी , और अभी से हमारे बच्चू का नाम सोच लो.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै तोह सोनल शर्माने लगी ,

"ाचा में जाता हु , अपना ख्याल रखना , कोई प्रॉब्लम हो , तोह फ़ोन कर देना , समाज गई न.." रवि ने सोनल के होंठो को चुम कर बोलै.

"हूँ , bye जान.."

"bye , मेरी मिथु.." रवि ने सोनल के होंठो को कास कर चूमा और रूम से बहार निकल आया.

रवि ने सबके साथ अचे से बेहवे किया और सबको जल्दी मिलने का बोल रमा के साथ घर की और निकल पढ़ा.

सबकी आँखें नाम थी , खास कर कविता और सीतल की , क्यों की वोह दोनों रवि से प्यार करना चाहती थी , पर रवि की हालत देख , वोह अंदर से टूट चुकी थी.

रवि और रमा अभ गाड़ी में बेथ घर की तरफ जा रहे थे , रमा कुछ खामोश थी , यह बात रवि को थोड़ा परेशान कर रही थी.

"मेरी जणू , क्या हुआ , उदास क्यों हो.." रवि ने प्यार से रमा के बाल सहलाते हुए पूछा.

"k..kuch नै भाई , में ठीक हु.." रमा ने मुस्करा कर बोलै.

"हम्म , अभ झूठ भी बोलूगी मुज़से , तू बहुत चालक हो गई है , गाओं में ऐसा नै करती थी , काश के वोह जिंदगी लोट ए.." रवि ने उदास सा होकर बोलै.

"भइआ वोह दिन कितने अचे थे..."

"जब में तुम्हारी चुदाई करता था..."

"धत्त्त , अप्प भी न , मुझे नै करनी आपसे बात..." रमा ने शर्मा कर बोलै.

"हम्म , सच में , जब तुम नंगी करके छोड़ रहा होता था , तब इक अलग hi मज़ा मिलता था .." रवि ने मुस्करा कर बोलै.

"भइआ बस करो , मुझे कुछ यद् नै..." रमा ने फिर से शरमाते हुए बोलै.

"तुम कहो तोह , जैसे मने पहले किया था , वोह सब करके दिखा सकता हु , ाचा इक चीज़ दिकहु तुम..." रवि ने हस्ते हुए बोलै.

"मुझे नै देखनी , कोई चीज़ -वीज़.." रमा ने मुस्कराते हुए बहार की तरफ देखते हुए बोलै.

"अरे देख ले , तेरी hi चीज़ है , तू बहुत खेलती थी इससे गाओं में , अभी दिखता हु..." इतना बोल रवि ने अपनी पेण्ट की जप खोल अपना लम्बा मोटा लुंड बहार निकल लिया.

रमा ने इक बार कनखियों से लुंड की तरफ देखा , और फिर वोह बुरी तरह शर्मा गई , उसके गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो गए.

"देख न , यह तेरा प्यारा खिलौना है , गाओं में तू इससे बहुत खेलती थी , हर रोज़.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.

"भाई ऐसे अंदर करो , मुझे शर्म ा रही है.." रमा ने अपनी आँखों पर हाथ रखते हुए बोलै.

"भाई तेरी किस्मत ख़राब है , अभ यह लड़की तुझे नै पहचानती , न न , में कुछ नै कर सकता , ाचा , हूँ , ठीक है , पूछता हु.." रवि ने अपने लुंड से बतिअन करते हुए बोलै , जब की रमा पगलू की तरह है रही थी.

"रमा यह बोल रहा है , इसकी फ्रेंड ऐसे जानती है , तुम अपनी फ्रेंड से पूछ कर बताओ न..." रवि ने रमा की जांगू के बेच हाथ डालते हुए बोलै.

"ोुछ्ह , मेरी फ्रेंड ऐसे नै जानती और न hi में , अभ हाथ निकालो बहार ..." रमा ने शरमाते हुए बोलै.

"सेल तेरा रंग hi कला है , उसकी फ्रेंड कितनी गोरी है , तेरा उससे कोई मेल hi नै , चुप चाप , पेण्ट के अंदर चल .." रवि ने अपने लुंड को प्यार से थपड जड़ते हुए बोलै , जिसे देख रमा बेइंतहा हसने लगी .." रमा सॉरी यार , यह कालू मुज़से झूठ बोल रहा था , कह रहा था , यह तुम्हारी मिस मुनिअ से कई बार खेल चूका है , कह रहा था , वोह बहुत मखमली और गोरी है , और यह भी बोल रहा है , गाओं में हम दोनों खूब लड़ते थे , और यह तुम्हारी मिस मुनिअ को खूब रुलाता था..." रवि ने रमा की आँखों में देखते हुए बोलै , रमा की आँखों में इक शर्माहट थी , वोह बस हसे जा रही थी.

"हहै , भइआ यह झूठ बोल रहा है , मेरी मुनिअ ऐसे नै जानती..." रमा ने हस्ते हुए बोलै.

"रमा तुम इसको इक थपड जड़ दो..." रवि ने रमा को आँख मरते हुए बोलै.

रमा शरमाते हुए गाड़ी से बहार देखने लगी , रवि ने धीरे से रमा का नरम मुलाम हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर रख दिया ,

रमा का पूरा बदन कम्प सा गया , इक अजीब सी खुमारी उसके बदन में दौड गई ,

रमा ने कुछ नै किया , न तोह उसने हाथ हटाया और न hi उसके हाथ में कोई हलचल हुई ,

"उफ़ रमा तुम्हारा हाथ कितना नरम है , प्लस ऐसे प्यार दो न अपने हाथ से.." रवि ने रमा का चेहरा अपनी और कर उसके होंठो को कास कर चूसते हुए बोलै , रमा का चेहरा शर्म से पूरा लाल हो चूका था ,

"अरे करो न प्यार..." रवि ने बेकाबू सा होते हुए बोलै.

"मुझे नै अत प्यार करना.." रमा ने शरमाते हुए बोलै.

"अरे बस हाथ को ऊपर निचे करो , इस कालू को यही सजा मिले , तब इसके होश ठिकाने ा जायेगे..."

"हहै , भइआ इसको सजा दूंगी , पर घर पर , प्लस अभी अप्प अंदर कर लो न , प्लस भाई , इसकी तोह घर जाकर अचे से खबर लुंगी में..." रमा ने प्यार से लुंड को सेहला कर बोलै.

रवि ने लुंड को पेण्ट के अंदर कर लिया और रमा को अपनी तरफ खींच उसके होंठो को चुम लिया , रमा बस मुस्कराती रही , रमा सोच रही थी , पहले उसके भाई उससे दूर भाग रहा था और अभ उसे इक पल भी नै छोड़ रहा था.

"रमा तुम रत को मेरे साथ सो जाना , प्लस.."

"न जी न , माँ को पता चला , मेरी तोह वाट लग जाएगी.." रमा ने थोड़ा डरते हुए बोलै.

"ौऊ , प्लस जणू , मुझे तुम्हारे साथ hi नंद आएगी , प्लस , में तुम अपनी बहु में भरकर सोना चाहता हु , प्लस जणू , हाँ बोल दो , प्लस ..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै.

"उम्म्म , सोचूंगी ..." रमा ने हस्ते हुए बोलै.

"ाचा जब मेरी बीवी बानगी , तब भी सोचूंगी..."

बीवी का नाम सुन रमा शर्माने लगी .." क्या भाई अप्प भी..." रमा का ऐसे शर्माना रवि को बेहद ाचा लगा..

ऐसे hi दोनों प्यार भरी बतिअन करते करते शहर पहुँच गए...

दूसरी तरफ...

"हहै , दिलवर खान , मने तुम बचा लिया , वार्ना तेरा भी वही हाल होता , जैसे , जैसे उस सुल्ताना का हुआ , खीयकहीईई , तुझे भी काट देता रवि खीयीकहींईईई..." जोकर ने अपनी डरावनी हस्सी हस्ते हुए बोलै.

"शुक्रिया दोस्त.."

"दोस्त नै , दोस्त नै हु में , किसी का भी दोस्त नै हु , ः , अभ रवि को मर दो तुम , जल्दी से जल्दी ..." जोकर ने थोड़ा गुस्से में बोलै.

"पर कैसे , उसे कैसे मरू में..."

"रास्ता , कोई तोह होगा रास्ता , हम्म , हास्सःह्ह्ह , उसकी कमज़ोरी दुंदु , कोण है , कोण है , हाँ , यद् आया , उसका परिवार , उसकी बहाने , उसकी बहनो को मर दो , हाँ , ख़तम कर दो , पहले किसे मरना है..." जोकर ने ब्यांक आवाज़ में बोलै.

"उसकी तोह बहुत सी बहाने हैं , किसको मरू पहले , तेन की वोह साला खुद बा खुद मर जाये..." दिलावर खान गुस्से में चीखते हुए बोलै.

"में तुम बताता हु , ेहडेर कण में सुनो , दीवारों के भी कण होते हैं , खीयीकहीई..." जोकर ने हस्ते हुए बोलै

"हम्म , अभ वोह जिन्दा नै बचेगी..." दिलवर खान मुस्कराते हुए बोलै..

"ओह्ह्ह , रवि तुमसे मिलने का वख्त ा गया , ः , जाओ , मुझे मेकअप करना है , ः , मेक उप करना है , रवि से मिलना है मुझे ..." जोकर हस्ते हस्ते गयाब हो गया , और दिलवर खान दर से कम्पनी लगा.

दूसरी तरफ...

रवि और रमा घर पहुँच गए , सीमा ने रवि को देखा तोह वोह भाग कर उसके गले लग गई , उसके चेहरे को चूमने लगी , जब उसके दिल को सकूं आया , तब उसने रवि को छोड़ दिया ,

फिर रवि इक इक कर रिमी और शूरति से मिला और फिर रमा का हाथ पकड़ सोफे पर बेथ गया , सीमा और बाकि सब हरिजन हुए देखते रहे.

"भाई दो मिंट में अभी अति हु.." रमा ने शरमाते हुए बोलै.

"नै , नै , तुम कही नै जोगी , मेरे साथ राहु बस..." रवि ने रमा का हाथ और भी कास कर पकड़ते हुए बोलै.

"भइआ बाथरूम जाना है , अभी ा जोगी दो मिंट में..." रमा ने धीरे से रवि के कण में बोलै.

"सिर्फ दो मिंट.."

"हाँ बाबा बस दो मिंट , अभी गई और अभी आयी..." रमा मुस्कराती हुई उठी और अपने रूम की तरफ चली गई.

सीमा , शूरति और रिमी , बस शॉकेड सी हुई दोनों की बतिअन सुन रही थी ,

"अरे सीमा खाना खिला दो , भूक लगी है.."

"अप्प फ्रेश होकर ायो , में तब तक खाना लगाती हु.." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै और फिर रिमी और शूरति को साथ लेकर किचन की तरफ चली गई.

रवि उठा और सीधा सेड्यां चढ़ ऊपर वाले रूम में चला गया , रवि ने रूम का दरवाजा खोला और अंदर घुस गया.

यह और कोई नै वही रूम था , यहाँ रवि और कोमल इक साथ रहते थे , इक साथ सोते थे.

रवि वाशरूम में घुसा और अपना चेहरा धोने लगा , रवि ने सामने मिरर में खुद की परछाई देखि तोह वोह अंदर तक हिल सा गया.

"k..kk...kon हो तुम..." रवि ने हकलाते हुए पूछा.

"में हु रवि.."

"रवि में हु , तुम कोण हो..."

"तुम इक कायर हो , में हु असली रवि , में हु , जिसने सोनल की जान बचाई , रमा को उसके हिस्से का प्यार दिया , तुम तोह किसी काम के नै , तुम तोह मर चुके हो , कोमल के साथ..." उस परछाई ने रवि की तरफ देख कर बोलै

"अपनी जुबान को लगाम दो , में रवि हु , तुम इक शतिआं हो , तुम्हारी कोई जरुरत नै मुझे , चले jao..."ravi ने चीख कर बोलै.

"जाता हु में , लेकिन अगर भूल से भी तुम्हारे मोह से कोमल का नाम सुना , यद् रखना , इस बार में ायुगा जरूर , लेकिन वापिस अपनी ीचा से जाउगा , समझे कायर .."

"तेरी तोह सेल , में कायर नै हु..."

"तुम कायर hi तोह हो , सारा दिन बस कोमल , कोमल , छीलते रहते हो , कोमल मुझे छोड़ गई , वोह बेवफा थी , वोह ऐसी थी , ठयऊ , तुम क्या कोमल के पालतू हो , जो उसके पीछे कुत्ते की तरफ घूमते रहते हो , अगर कोमल का दुबारा नाम लिया तोह ाचा नै होगा..." उस परछाई ने गुस्से में बोलै.

"अपनी जुबान बंद करो..."

रवि ने गुस्से में बोलै , लेकिन अभ वह कुछ नै था , उसका अपना चेहरा उसे दिख रहा था , रवि जल्दी से फ्रेश हुआ और घरके हॉल में वापिस ा गया.

उसने देखा , सभी उसी का रह देख रही थी , पर रमा वह नै थी.

"सीमा , रमा कहा है , उसे भी बुलाओ खाने के लिए..." रवि ने थोड़ा चिंता में बोलै.

"भइआ वोह बस अति hi होगी.." शूरति ने रवि के बालो को सेहला कर बोलै.

"में उसे बुला कर लती हु.." रिमी इतना बोल रमा को लेने चली गई.

जब तक रिमी , रमा को लेकर न ा गई , रवि ने खाना सुरु नै किया , रमा ने इक बार मुस्करा कर अपने भाई की आँखों में देखा और फिर दोनों खाना खाने लगे , सीमा बड़े दयँ से दोनों के hav-bhav नोट कर रही थी.

खाना खाने के बाद , रमा कुछ देर अपनी माँ सीमा के पास चली गई , बहुत मुश्किल से उसने रवि को मनाया.

फिर रवि ने रिमी और शूरति को इक इक करके अपने रूम में ऐनी को बोलै , क्यों की जब से वोह ठीक हुआ था , दोनों को वख्त नै दे पाया था.

रवि सेड्यां चढ़ अपने रूम में आकर बीएड पर बेथ गया , उसने सोच लिया था , गुस्सा नै करना है , वार्ना वोह डेविल बहार ा जायेगा.

कुछ देर बाद रूम का दरवाजा खुला और शूरति अंदर आयी और भाग कर रवि के गले लग रोने लगी.

"अरे , अरे , क्या हुआ मेरी जणू को..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै.

"भाई , ी लव ु , में आपसे बेइंतहा प्यार करती हु , प्लस , अप्प मुझे छोड़ कर मत जाना , नै जी सकती में आपके बिना..." शूरति ने रट हुए बोलै.

"अले मेले बाबू , में तुम्हारे पास हु , कभी तुमसे दूर नै जाउगा , हमेशा तुम्हारे पास रहुगा , तुम्हारी रूह की तरह , अभ प्यार करो मुज़से ..." रवि ने शूरति के बहते असंयिओं को छत्ते हुए बोलै.

"भाई में दर गई थी , कही आपको कुछ हो जाता तोह , में कैसे जिन्दा रहती , में आपके बिना जीने का सोच भी नै सकती..." शूरति ने पगलू की तरह रवि के चेहरे को चूमते हुए बोलै.

"उम् , मेरी जान , अभी तोह तुम शादी करनी है.."

"भाड़ में जाये शादी , में बस आपके पास रहूगी , चाहे जैसे भी रख लेना , आपको छोड़ कर नै जोगी , अप्प मेरे हो , मेरे हो , ी लव ु , मेरा बाबू , मेरा सोना , उम्मा.." शूरति ने रवि के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै.

"ः , शूरति ी लव ु , तुम भी बस मेरी हो , सिर्फ मेरी..." रवि ने बेइंतहा शूरति के चेहरे को चूमते हुए बोलै.

"भाई मुझे सेक्स से कोई मतलब नै , में बस आपके साथ रहना चाहती हु , में बिना सेक्स के जिंदगी गुजर लुंगी , पर आपकी इक पल की जुदाई मुझे मौत जैसी लगती है , प्लस , मुज़से दूर मत जाना , लव ु भाई , लव ु , अप्प कितने प्यारे हो , मेरी नज़र न लग जाये कही आपको , मुझे अपने पास रख लो भाई , प्लस..." शूरति ने रट हुए बोलै.

"अरे पागल , तू ऐसा क्यों बोल रही है , तू तोह मेरी जान है , क्या हुआ हमारी शादी नै हुई , तुम्हारा मुझ पर पूरा हुक है , ाचा अभ रोना बंद करो , और मेरी बहु में आकर , मुझे सकूं दो , मेरी प्यारी जणू , तुम मुज़से कुछ पूछने की जरुरत नै , अपना हुक मुज़से माँगा करो , इक वाइफ की तरह , समाजी , पगली कही की..." रवि ने शूरति के होंठो को चूसते हुए बोलै.

शूरति अभ शर्माने लगी थी , उसने अपने भाई के साथ सोते हुए पूछा.

"में आपकी वाइफ हु , सच में.."

"हाँ मेरी जणू.."

"भइआ ओह्ह सॉरी, मेरे पतिदेव , अज्ज से मेरा अप्प पर पूरा हुक है.." शूरति ने हस्ते हुए बोलै.

"अभ क्या बचे की जान लोगी तुम.."

"मेरे प्यारे पति , कल मुझे घूमने लेकर जाओ , जाओगे न.." शूरति ने मुस्कराते हुए पूछा.

"जी वाइफ जी , जो अप्प कहुगी.."

"हहै , भइआ ी लव ु.." शूरति ने रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै और फिर उसके सीने से लग , ें सकूं भरे लमहु को महसूस करने लगी , अभ वोह बेहद खुश थी....

"रविइइइइइइइइ..." इक संसू की आवाज़ रवि को सुनाई दी , रवि समाज गया के यह कोण है..

"शूरति मेरे बाबू , मेरे लिए छाए बना लायो प्लस.." रवि ने शूरति के गालो चूमते हुए बोलै.

"भइआ में अभी लायी , अपने हाथो से बनाकर.." शूरति ख़ुशी में चीखती हुई बोली और मुस्कराते हुए रूम से बहार चली गई.

रवि अभ काल का इंतज़ार करने लगा , उसे भी बेहद सवाल करने थे काल से...

तो बे कुनिटेड....
 
अपडेट-12

रवि बीएड से खड़ा हो गया , वोह न जाने कब से काल का इंतज़ार कर रहा था , उसका गुस्सा अभ बढ़ता जा रहा था.

तभी रूम में हल्का हल्का अँधेरा च गया और अचानक से काल , रवि के सामने प्रकट हो गया.

रवि ने अग्ग उगलती आँखों से काल की तरफ देखा , क्यों की कोमल के उन आखरी शबदो में काल का वर्णन बहुत अधिक था.

"रवि तुम मुझे पिछले कुछ दिनों से बहुत यद् कर रहे थे , तोह सोचा तुमसे मिल लू.. " काल ने अपनी ब्यांक भरी आवाज़ में बोलै.

"हम्म , यद् , हाँ , हाँ , यद् तोह में आपको कर रहा था , मुझे मेरे कुछ सवालों के जवाब जो पूछने थे..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै , अभ वोह अपने असली वजूद से भटक रहा था.

"हाँ , तुम्हारे सवालों के जवाब देने hi तोह आया हु.."

"ओह्ह , पहले मुझे यह बताओ , जब में मर चूका था , तोह यह नयी जिंदगी क्यों दी , रुको , रुको , में बताता हु , आपको इक गुलाम चाहये था , नै , नै , आपको नै , मेरी उस बेवफा बहिन को इक गुलाम चाहये था , उसने आपको बोलै होगा , यह वही इंसान है , जो हम दोनों की ीचा पूरी कर सकता है , रिंग को पहन सकता है , इससे बड़ा बेवकूफ और कोई होगा hi नै..." रवि ने कोमल को यद् कर बेहद गुस्से में चीखते हुए बोलै.

"इस बारे में मैं कुछ नै बोल सकता , यह सब तुम्हारी बहिन को पता है , उसने तुम इक नयी जिंदगी दी है.." काल ने शांत रहते हुए बोलै.

"जिंदगी दी है , कैसी जिंदगी दी उसने मुझे , जानते हो अप्प , ओह्ह हो , अप्प तोह सब जानते हो , कुछ नै छुपा आपसे , कितना अधिक प्रेम करता था में उसे , इक इक साँस पर उसका नाम था , लेकिन उसने मेरे प्यार को जिन्दा दफ़न कर दिया , जितनी गुनहगार कोमल है , उतने अप्प भी हैं..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बेहद गुस्से में बोलै.

"फिर भी , उसकी कोई मज़बूरी होगी , क्या तुम वोह उस दिन के बाद कही दिखाई दी है , किसी के मोह से उसका नाम सुना तुमने , कभी कभी जिंदगी को बचने के लिए , जिंदगी को कुर्बान होना पढता है..." काल वैसे hi शांत शबदो में बोलै.

"किस मोह से मेरे सामने आएगी , में अज्ज आपके सामने कसम खता हु , जिस दिन वोह मेरे सामने आयी , उसदिन मेरी जिंदगी का आखरी दिन होगा , अगर कभी मने उसे प्यार किया हो तोह , उस प्यार का वादा है मुझे..."

"यह वादा , तुम इक दिन , बहुत तकलीफ देगा , क्यों की तुम उसके लिए मर सकते हो , और वोह तुम्हारे लिए .." काल अंदर से दुखी था , क्यों की रवि ने वादा hi ऐसा लिया था.

"ः , यह तोह पागल है , यह मर जायेगा तोह में कैसे जिन्दा रहुगा , कोमल अगर जिन्दा है , तोह उसे रवि से दूर राखु , वार्ना , तुम्हारे साथ साथ सबकी सांसे बंद कर दूंगा..." रवि ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै.

"हम्म , तोह रिंग ने तुम अपने कब्जे में कर hi लिया , तुम्हारा मन कमज़ोर हो गया था और रिंग ने तुम अपना गुलाम बना लिया ..." काल ने ब्यांक आवाज़ में बोलै.

"शठ , रूही मुझे प्यार करती है , कोमल से कही अधिक , ऐसे आज़ाद करना है मुझे..."

"तुम रवि की जुबान से बोल रही हो , तुम आज़ाद होने के लिए कुछ भी कर सकती हो , लेकिन अगर तुम आज़ाद होना चाहती हो , तोह तुम कोमल की जरुरत पड़ेगी..." काल ने लाल चमकती आँखों से गुस्से में बोलै.

"ः , क्या बकवास कर रहे हो , में रवि हु , न के रूही , कोमल कभी वापिस नै आएगी , रवि का शरीर अभ मेरा हो चूका है , अभ हमें कोई अलग नै कर सकता , तुम चाहते हो , में कोमल को वापिस लेकर आयु , तेन के कोमल का प्यार पाकर रवि मुझे मर दे , नै नै , रवि तोह कायर है , अगर में न होता , तोह यह कब का मर जाता..." रवि ने हस्ते हुए बोलै.

"कोमल वापिस आएगी , और तुम hi उसे लोगे , क्यों की तुम दोनों इक दूसरे के बिना अधूरे हो , तुम इक मुर्दा जिस्म पर राज़ तोह कर सकते हो , लेकिन उसके दिल से कोमल का नाम नै मिटा सकते..."

"अगर मने इसके दिल से कोमल का नाम मिटा दिया तोह , फिर तोह यह जिस्म मेरा न , बोलो , बोलो , तुम पता है , मुझे रमा से प्यार हो गया है , अभ में अपनी रमा को छोड़ कर कही नै जाउगा..." रवि ने बेहद प्यार से रमा को यद् करते हुए बोलै.

"अगर कोमल का नाम दिल से मिटा दिया , तोह रवि का यह पूरा शरीर तुम्हारा , तुम रमा से प्यार करते हो , पर रवि नै , क्यों की सीमा ने उससे वादा लिया है..." काल ने बेहद गुस्से में बोलै.

"सीमा , कोण सीमा , हाँ , यद् आया , इसकी बीवी , प्यारी बीवी , हम्म , में रवि जैसा भावनायिओं में बहने वाला इंसान नै हु , और न hi में कमज़ोर हु , रमा और मेरे बेच जो जो भी आएगा , उसे जिन्दा दफ़न कर दूंगा , रमा सिर्फ मेरी है , रमा मेरी है , सिर्फ मेरी..." रवि ने बेइंतहा गुस्से में बोलै.

"हॉष्ह , में चहु तोह इक पल में तुम्हारे पोरे जिस्म को जला कर खाक कर दू , अज्ज तक किसी ने मुज़से , ऐसे बात करने की हिमेट नै की , लेकिन कोमल मेरी बेटी है , और उसकी बात में ताल नै सकता , ाचा इक राज़ की बात जानना चाहते हो.." काल ने थोड़ा शांत होकर बोलै.

"राज़ , कोनसा राज़.." रवि अभ शांत हो गया था , काल का गुस्सा देख कर.

"कोमल मेरी अपनी बेटी है , और तुम मेरे बेटे , तुम्हारी माँ hi शालिनी है , और में तुम्हारा बाप हु..." काल शांत रहते हुए बोलै.

"अह्ह्ह्हह , झूठ मत बोलू , में तुम्हारा बीटा नै हु , मेरे पिता जी शतिआं नै हो सकते..." रवि ने आँखों में असनु भरते हुए बोलै.

"हवेली में तुम्हारी माँ की शादी मुज़से hi हुई थी , मने जब तुम्हारी माँ को पहली बार देखा था , तब उस पर मोहित हो गया था , मेरी बहिन दयना और मने इक मायाजाल रचा और तुम्हारी माँ से शादी कर ली..." काल ने अभ प्यार से बोलै.

"फिर क्या हुआ .." रवि की आँखों में अभ भी इक दर्द था.

"में तुम्हारी माँ से बहुत प्यार करता था , धीरे धीरे हमारे तीन बचे हुए , रमा , कोमल और तुम..." काल अभी बता hi रहा था , के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"रेखा देदी , उनका क्या..."

"रेखा तुम्हारे दूसरे पिता , हरिया की बेटी थी , जो पहले से उसके साथ रहती थी , हरिया की पहली पत्नी मर चुकी थी , और वोह ठाकुर की हवेली में काम करता था.." काल ने बड़े प्यार से यह सब बोलै.

"क्या , अगर अप्प मेरे पिता थे तोह हम सब को छोड़ कर क्यों चले गए , बताओ , क्यों मेरी माँ को इक झोपड़े में जिंदगी बितानी पढ़ी..." रवि ने रट हुए गुस्से से बोलै.

"हमारी जिंदगी ऐसे hi गुजर रही थी , तुम सब बहुत छोटे थे , इक दिन तुम्हारी माँ को मेरी असलियत पता चली गई , और उसने मुझे छोड़ दिया , में उसे जाने नै देना चाहता था , लेकिन उसने मुज़से वादा लिया , के अगर में उसके सामने कभी भी आया तोह वोह जान दे देगी , तुम्हारी माँ ने हरिया से शादी कर ली , और गाओं में रहने लगी..." काल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै , उसकी आवाज़ में इक दर्द था.

"ओह्ह्ह माँ , कितना दर्द सहा मेरी माँ ने..." रवि ने रट हुए बोलै.

"में तुम तीनो से बहुत प्यार करता था , इक दिन कोमल रोड क्रॉस कर रही थी , तब उसका एक्सीडेंट हुआ , उसकी उम्र उस वख्त 15 साल थी , डॉक्टरों ने उसे मारा हुआ बता दिया , लेकिन तुम्हारा प्यार कोमल के लिए इतना अधिक था , के मुझे समाज के निज़मो को तोडना पढ़ा , और मने कोमल को इक नयी जिंदगी दी , पर उसे कभी यह नै बताया के में उसका पिता हु , धीरे धीरे , कोमल जवान होती गई , वोह प्यार करना चाहती थी , लेकिन वोह इक वैम्पायर थी , तुम तोह जानते हो , कोमल कितनी खूबसूरत थी , लेकिन वोह किसी मर्द की वासना को सेहन नै कर पति , तब मुझे तुम दिखाई दिए..." काल ने शांत आवाज़ में बोलै.

"ओह्ह तोह अपने hi कोमल को यह सलाह दी के अपने भाई से प्यार करो..."

"नै , मने उसे कभी नै बोलै , रवि , उसने तुमसे खुद प्यार किया था , जब तुम वोह प्यार करने से रोकती , तोह अकेले में बेथ कर घंटो रोटी रहती , वोह तुम अपनी मज़बूरी भी नै बता सकती थी , उसे दर था कही तुम उसका साथ न छोड़ दो , वोह मुज़से भेख मांगती के , बस इक बार , इक बार , अपने भाई को जी भर कर प्यार करने दो , लेकिन , में मज़बूर था , तुम इक इंसान थे , और वोह इक वैम्पायर .." काल ने दर्द भरी आवाज़ में बोलै.

"मेरी कोमल , मुझे इतना चाहती थी , और में उसे बेवफा समज़ता रहा..." रवि ने रट हुए बोलै.

"रवि , तुम्हारी वासना शांत हो जाती थी , तुम्हारे पास कई लड़कियाँ थी , लेकिन कोमल , वोह अपनी वासना की अग्ग में जलती रहती , रोटी रहती , वोह तुम प्यार करना चाहती थी , तुम्हारे सामने मुस्कराती रहती , तुम कभी यह एहसास hi नै होने दिया , के वोह कितनी दर्द में है , मने उसे रट देखा है , मने उसे पगलू की तरह छीलते देखा है , तुम किस मोह से उसे बेवफा कहते हो , बताओ मुझे , तुमने कोनसी क़ुरबानी दी है कोमल के लिए , बोलो..." काल ने दर्द भरी आवाज़ में पूछा.

"पिता जी , मने कोई क़ुरबानी नै दी , मेरी वासना तोह कई लड़कयों ने शांत की , मेरी बहाने , मेरी बीवी , में पागल था , में , कोमल का दर्द क्यों नै समाज पाया , हाँ , ठीक कहा अपने , मुझे उसे बेवफा कहने का कोई हुक नै hai..."ravi ने बेइंतहा रट हुए बोलै.

"तुम hi नै , में भी उसका कसूरवार हु , वोह मुज़से भेख मांगती रही , मेरे सामने हाथ जोड़ कर रोटी रही , गिड़गिड़ाती रही , के बस इक बार भइआ को प्यार करने दो , बस इक बार , वोह तुम पाने के लिए किस कदर पागल थी , यह तुम सोच भी नै सकते , वोह घंटो किताबे पढ़ती रहती , तेन की कोई रास्ता दंड सके , और तुमसे बेपनाह प्यार कर सके , उसने तुम मरने भी नै दिया , हर बार तुम बचती रही , जब तुम किसी और लड़की के पास होते , वोह तुम देखती हुई , अपने अप्प पर रोटी रहती , और तुम उसे बेवफा कह रहे हो , इक बार अपनी पूरी जिंदगी को यद् कर लो , तुम इक बार भी ऐसा लगे के कोमल ने कभी तुमसे प्यार नै किया , तोह में भी उसे बेवफा मन लूंगा..." काल ने रवि के सार को प्यार से सहलाते हुए बोलै.

"पर पिता जी , उस दिन जंगल में उसने ऐसा क्यों बोलै , क्यों मेरा दिल दुखाया उसने..." रवि ने रट हुए बोलै.

"बेवकूफ , तुम्हारी जान बचाना चाहती थी , तुम दयना से लड़ नै पते , उसने अपनी जान देकर तुम बचाया था , अगर वोह यह सब न करती तोह तुम कभी उस जगह से वापिस नै एते , तुम उसे भूल न पते , पर कोमल चाहती थी के तुम नयी जिंदगी की शुरुआत करो..." काल ने बेहद दर्द में बोलै.

"पिता जी , मुझे मेरी कोमल वापिस ला दो , अह्हह्ह्ह्ह , मेरा सार , अह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है , हहम्म्म्म , तुम मेरे रवि को मुज़से चीन रहे हो , यद् रखो , अभ यह मेरा है ..." रिंग ने लाल रंग में चमकते हुए बोलै.

"वख्त ऐनी पर , यही तुम मरेगा , यद् रखना , वोह भी कोमल के साथ मिल कर..." काल इतना बोल वह से गयाब हो गया.

"रवि , सब कुछ भूल जायेगा , वोह मेरा है , सिर्फ मेरा , इसका यह रूप अभ हमेशा के लिए ख़तम कर दूंगी , इसका दूसरा रूप hi जिन्दा रहेगा , जो कोमल को बेवफा समज़ता है..." रिंग इतना बोल मुस्कराने लगी....

कुछ देर बाद रवि अपने सार को दबाता हुआ उठा , तभी रूम का दरवाजा खुला और रमा छाए लेकर ा गई , जिसे देख रवि मुस्कराने लगा.

"हाय मेरी जणू आयी है , वोह भी छाए लेकर , ायो न , मेरे पास बैठो , में कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था , कितनी खूबसूरत हो तुम..." रवि ने रमा का हाथ पकड़ उसे बीएड पर बिठाते हुए बोलै.

"भाई , क्या अप्प भी.." रमा ने शरमाते हुए बोलै.

"रमा तुम मुज़से कितना प्यार करती हो..."

"यह क्यों पूछ रहे हो.."

"सच सच बताओ , यह मेरी जिंदगी और मौत का सवाल है.."

"भइआ , अप्प मेरी जिंदगी हो , और दुबारा मरने की बात की तोह पहले मुझे मर देना..." रमा ने रट हुए बोलै.

"शठ , मेरी जणू , सॉरी , तुम जानती हो , में तुम इक पल के लिए अपने से दूर नै देख सकता , तुम मेरे पास , मेरे साथ रहो करो..." रवि ने पगलू की तरह रमा के चेहरे को चूमते हुए बोलै.

"भाई माँ दन्त रही थी , वोह कहती है , के में उनको भी प्यार दू..." रमा ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.
 
"नै , नै , तुम्हारे प्यार पर सिर्फ मेरा हुक है , ाचा शाम को घूमने चले बहार..." रवि ने रमा के होंठो को बेइंतहा चूसते हुए बोलै.

"जी भाई , जैसा अप्प कहो..." रमा ने शरमाते हुए बोलै.

"मेरी जणू , मेरी रमा..." रवि प्यार से रमा के बाल सहलाता , छाए पता रहा.

"भाई में जाऊ अभ..." रमा ने मुस्कराते हुए पूछा.

"हम्म , जाओ , जउओ..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै , रमा दर गई , उसकी आँखें नाम हो गई.

रमा उठ कर जाने लगी , तभी रवि ने उसे पीछे से बहु में भर लिया और उसकी गर्दन को चूमते हुए बोलै.

"सॉरी , जणू , माफ़ कार्डो , पर , जब तुम मुज़से दूर जाने की बात करती हो , तोह गुस्सा ा जाता है , में बर्दाश्त नै कर सकता , जब तुम मुज़से दूर जाती हो..." रवि ने बेइंतहा रमा को गर्दन को चूमते छत्ते हुए बोलै.

"अह्ह्ह भाई छोड़ो मुझे , प्लस , अह्ह्ह , छोड़ो मुझे..." रमा ने गुस्से में चीला कर बोलै.

रवि ने रमा को छोड़ दिया , रमा रूम से बहार भाग गई , उसे अपने भाई का विव्हर कुछ अजीब लग रहा था , वोह कुछ समाज नै प् रही थी.

रवि ने गुस्से में अपने रूम का दरवाजा बंद कर लिया , और कुछ सोचने लगा , उसे रमा पर बेहद गुस्सा ा रहा था.

"पागल लड़की , इतना प्यार करता हु ऐसे , पता नै क्या हो गया है , मेरे प्यार को मज़ाक समाज रही है , बेवकूफ कही की..." रवि गुस्से में अपने अप्प से hi बतिअन किये जा रहा था.

करीब आधे घंटे बाद रूम का गेट खुला और रमा अंदर ा गई , उसके साथ रिमी भी थी.

"अरे रिमी , ायो न , मेरी जणू , कैसी हो तुम , में कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था..." रवि ने रमा को इग्नोर कर रिमी की तरफ देखते हुए बोलै.

"भइआ .." रिमी दौड कर रवि के गले लग गई , रमा कुछ देर रवि की तरफ देखती रही , और फिर वोह गुस्से से पलट कर बहार चली गई.

"अले मेले बाबू , रोना नै , उम्मा , मेरी प्यारी जणू , तुम मुज़से नाराज़ थी क्या , जो अभ तक आयी नै थी..." रवि ने रिमी के बालो को सहलाते हुए बोलै.

"नै भाई , में नाराज़ नै थी , वोह पहले शूरति देदी आयी और फिर रमा , में अकेले में आपसे मिलना चाहती थी , ी लव ु भाई..." रिमी ने मुस्करा कर रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै.

"लव ु तू जणू , देख न कितना वख्त बीत गया , तुम यद् है , जब पहली बार तुम छोड़ा था , तब तुम बची थी , और नादाँ भी , और अज्ज कितनी बड़ी और समज़दार हो गई हो.." रवि ने मुस्करा कर बोलै तोह रिमी शर्माने लगी.

"रिमी कोई मुझे प्यार नै करता , सब मुज़से नफरत करते हैं , क्या तुम भी मुज़से प्यार नै करती , बोलो न , कही तुम्हारा प्यार भी झूठा तोह नै , सबकी तरह..." रवि ने नाम आँखों से बोलै.

"चत्ताककककक..." इक थपड रवि के चेहरे पर ा लगा.

"दुबारा ऐसी बात की तोह जान ले लुंगी आपकी , में आपसे कितना प्यार करती हु , मेरे पास शब्द hi नै हैं , ी लव ु , लाओ , मेरा सीना चीयर कर देख लो..." रिमी ने गुस्से में रट हुए बोलै.

"रिमी , बस मुझे और कुछ नै चाहये , रिमी , मेरा साथ कभी मत छोड़ना , प्लस.." रवि ने रिमी को अपनी बहु में भरते हुए बोलै.

"भाई , सॉरी मने आपको मारा , माफ़ कर दो.." रिमी ने कण पकड़ते हुए बोलै.

"अरे कोई बात नै , अभ से तुम मेरे पास रहूगी , अगर इक पल भी मुज़से दूर हुई तोह , पता नै क्या होगा मेरा , मुझे दर लग रहा है , रिमी..." रवि ने रिमी को फिर से अपने गले लगते हुए बोलै.

"भाई में आपके साथ रहूगी , कही नै जोगी , आपके पास , आपके करीब रहूगी..." रिमी ने बेइंतहा रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै.

"भइआ भाभी से मिल लू , अप्प उनसे मिले नै अभी तक , प्लस.." रिमी ने मासूम सी बनते हुए बोलै.

"ठीक है , तुम उसे बेहज दो , तुम जो कहुगी , में वही करुगा ..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै तोह रिमी भी मुस्कराते हुए रूम से बहार चली गई , उसके होंठो पर इक दिलकश मुस्कान थी...

"अरे रिमी कितनी प्यारी है , उस रमा से कही जायदा , में रिमी से प्यार करुगा , रिमी को अपने पास रखुगा , किसी को उसके करीब नै जाने दूंगा , मेरी प्यारी रिमी..." रवि मुस्कराते हुए खुद से hi बतिअन कर रहा था.

अभी रवि कुछ सोच hi रहा था के सीमा अंदर ा गई , वैसे hi सीमा अभ कुछ जायदा hi खामोश रहती थी , वोह रवि को महसूस कर सकती थी , और वोह यह भी जानती थी के रवि और रमा के बेच क्या चल रहा है , वोह बस अपने दर्द को अपने अंदर hi बर्दाश्त कर रही थी.

"हाँ जी , अपने मुझे बुलाया था..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै.

"ेहडेर ायो , नाराज़ हो मुज़से..." रवि ने सीमा का हाथ पकड़ उसे अपने करीब बिठाते हुए बोलै.

"नै तोह.."

"झूठ मत बोलो.."

"नै रवि सच में..."

"खाओ मेरी कसम..."

"हूँ , तुमसे जब फ़ोन पर बात हुई , तब बहुत गुस्सा आया तुम पर , में तुम्हारे लिए जिन्दा हु , तुमसे प्यार करती हु , जब तुम बहकी बहकी बतिअन करते हो , तोह में टूट जाती हु , प्लस , या तोह मेरा गाला दबा कर मुझे मर दो , या फिर मुझे दुखी मत करो..." सीमा ने रट हुए बोलै.

"सॉरी जान , अग्गे से कभी ऐसा नै होगा , प्लस , में खुद नै जनता मने क्या बोलै तुमसे , प्लस सॉरी , ाचा क्या तुम मुज़से इतना प्यार करती हो , मेरे लिए मरने को त्यार हो गई ..." रवि ने नाम आँखों से बोलै.

"अरे में तुम्हारी जान हु , तुम मेरी जान हो , तुम्हारे बिना तोह में साँस भी नै ले सकती , जीना तोह दूर की बात.." सीमा ने रट हुए बोलै.

"सीमा hi वोह लड़की है , जो मुझे प्यार करती है , पर रिमी , नै नै , सीमा से जायदा प्यार मुझे कोई नै कर सकता , मेरी बीवी , में ऐसे बहुत प्यार दूंगा..." रवि ने अपने मन में बोलै और सीमा के होंठो को चूसने लगा ,

सीमा भी खुश हो गई के उसका रवि अभ ठीक है , वोह मुस्कराते हुए बोली ,

"बाबू , में तुम्हारे साथ सोना चाहती हु , मुझे अपनी बहु में भर लो न ..." सीमा ने बेहद मसोमीयत से बोलै , तोह रवि उसे बड़े प्यार से अपने साथ सुला कर उससे लिपट कर उसके बाल सहलाने लगा.

"सीमा मुझे दर लगता है अकेले में , तुम मेरे साथ hi रहना , इक पल के लिए भी मुज़से दूर मत होना , प्लस , सीमा , मेरी बहु में , मेरे साथ सो जाना , प्लस , तुम बहुत प्यारी हो सीमा , और खूबसूरत भी , मुझे अकेला मत छोड़ना , मुझे दर लगता है , अकेले में..." रवि ने सीमा को कास कर अपनी बहु में लेते हुए बोलै.

"ोुछ्ह , धीरे , बाबू कही नै जोगी , तुम्हारे साथ hi रहूगी , यहाँ यहाँ जोगी , तुम अपने साथ hi लेकर जोगी , अभ खुश हो न..." सीमा को महसूस हो गया था के रवि अकेलापन महसूस कर रहा था , इसलिए उसने फ़ासिला किया के वोह रवि से इक पल के लिए भी दूर नै होगी...

"ओह्ह मिली सीमा..." रवि ने सीमा के होंठो को चूमते हुए उसे अपनी बहु में भर सो गया , दोनों को कब नंद आयी , पता hi न चला....

तो बे कुनिटेड...
 
अपडेट-13

अभ अग्गे..

करीब 2 घंटे सीमा सोती रही , उसके बाद वोह उसने आँखें खोली , तोह रवि इक बचे की तरह उससे लिपट कर सो रहा था , सीमा के गुलाबी होंठो पर इक मुस्कान दौड गई.

"यह रवि को आखिर हुआ क्या है , लगता है कोई ऐसे कण्ट्रोल कर रहा है , रवि ऐसा नै था , चाहे वोह कोमल को बेवफा समज़ता हो , फिर भी वोह ऐसी बतिअन नै करता था , कोण बताएगा मुझे , हाँ , यद् आया , काल मेरे पिता , वही मुझे ें सवालों का जवाब दे सकते हैं , काश के में उनसे मिल पति , पिता जी , अगर अपने कभी मुझे अपनी बेटी मन है , तोह प्लस , प्लस मुझे मिलने ा जाओ , में हाथ जोड़ती हु , आपके अग्गे..." सीमा अपने मन में काल को यद् करते हुए रोने लगी ,

अभ इतने सच्चे दिल से किसी को यद् किया जाये , तोह उसे इंसान को महसूस जरूर होता है , और हुआ भी ऐसा hi , काल , सीमा को बहुत पसंद करता था ,

उसके तेज़ दिमाग की तरफ करता था , उसे अपने बेटे पर गर्व महसूस होता था , के उसने भी , उसकी तरह hi , इक ऐसी औरत से शादी की है , जो मन की निर्मल और सच्ची थी ,

अपनी बेटी की दर्द भरी पुकार सुन , काल जल्द से जल्द उसे मिलने पहुँच गया.

सीमा आँखें बंद कर रो रही थी , तभी रूम में इक अँधेरा सा चा गया , बस हलकी हलकी रौशनी थी , सीमा ने अपनी आँखें खोली , तोह सामने काल खड़ा था , जिसका कोई चेहरा नै था.

"पिता जी , अप्प ा गए , अप्प मेरे लिए ा गए , पिता जी अप्प बहुत अचे हो..." सीमा ने रट मुस्कराते हुए बोलै.

"बेटी , तुम दिल की साफ हो , अपनी पति की चिंता थी तुम , ऐसी लिए तुमने मुझे यद् किया , तुम किसी चीज़ का लालच नै है , अज्ज भी तुमने मुझे यद् किया है , तोह अपने पति के लिए..." काल ने बेहद ब्यांक आवाज़ में बोलै.

"पिता जी , अप्प सब जानते हो , इनको क्या हो गया है , प्लस बताओ न .." सीमा ने रवि के बाल सहलाते हुए पूछा.

"बेटी , जो रिंग ऐसे हमने दी थी , तेन की रवि इंसानो के बेच रह सके , उस रिंग ने रवि को अपने वश में कर लिया है , वोह इसके शरीर पर कब्ज़ा कर रही है .." काल अभी बोल hi रहा था के सीमा बेच में बोल पढ़ी ,

"हे भगवन , यह मने क्या कर दिया , वोह रिंग मने hi पहनाई थी रवि को , सब मेरी गलती है.." सीमा ने रट हुए बोलै.

"मेरी बची , इसमें तुम्हारी गलती नै है , उस रिंग के बिना रवि , तुम सबके बेच नै रह सकता था , लेकिन कोमल के जाने के बाद , उसका मन कमज़ोर हो गया और रिंग ने उसके पोरे जिस्म को अपना घर बना लिया..." काल ने थोड़ा दर्द भरी आवाज़ में बोलै.

"पिता जी , कुछ कर्यै न अप्प , मुझे इनकी चिंता है , प्लस अगर इनको कुछ हो गया तोह , में जी कर क्या करुँगी , कोई तोह रास्ता होगा.." सीमा ने रट हुए अपना हाथ जोड़ कर बोलै.

"इक रास्ता है , अगर रवि मेरे साथ , मेरी हवेली चलने को त्यार हो जाये , वोह भी अपनी ीचा से , और इस काम में बस तुम hi मेरा साथ दे सकती हो , तुम सोच लो..." काल ने लाल चमकती आँखों से बोलै.

"में त्यार हु , अगर में जान देकर भी रवि को ठीक कर पायी , तोह में ख़ुशी ख़ुशी अपनी जान दे दूंगी..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै.

"जानती हो , वह कई वामपिरेस हैं , इक डैम भूके , इंसान को देखते hi , उसे पल भर में ख़तम कर देते हैं , सोच लो , इक बार और.." काल ने सीमा को परखते हुए पूछा.

"में जोगी आपके साथ , वोह जगह कैसी भी हो , वह के लोग कैसे भी हो , अगर मेरा रवि , वह जाने से ठीक हो सकता है , तोह में उसके लिए कुछ भी कर सकती हु..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै , काल ने सार ज़ुका लिया सीमा के अग्गे ,

इतना अधिक प्रेम , उसने सदियाँ तक , न किसी को करते देखा था , और न शयद अग्गे कभी देख पायेगा ,

काल मन में सोच रहा था , उसका बीटा हवस में बह जाता है , लेकिन उससे प्यार करने के बाद , उसकी कोई भी बहिन , किसी दूसरे मर्द को अपने करीब भी नै ऐनी देती , चाहे वोह प्यार उनको सालो बाद मिले , लेकिन काल यह भी समज़ता था , रवि की हर बहिन , खास कर , रमा , शूरति , रिमी , कविता , सोनल , कोमल , और उसकी प्रेमिका बेबी , और उसकी पत्नी सीमा , ें सबकी मदद से hi वोह दयना को मर पायेगा ,

आखिर में जिस शक्ति की रवि को जरुरत होगी , वोह ें सबसे hi रवि को मिलेगी , लेकिन ें सब में कोमल अभ नै थी , और कोमल के बिना , इनकी जिंदगी अधूरी है ,

कोमल ने इस दुनिआ को लखु मर्दो को छोड़ कर , अपने भाई को चुना था , रिंग का विनाश करने के लिए ,

कोमल ने हमेशा अपने भाई को अपनी ीचा अनुसार चलाया था , रवि जिंदगी जरूर गुजर रहा था , लेकिन कोमल ने hi उसकी जिंदगी को नयी दिशा दी थी , रवि की हर बहिन जो उसके करीब आयी थी , उसके पीछे कोमल का हाथ था.

कोमल ने बहुत सोच समाज कर अपने भाई को चुना था , उसका भाई उसका कितना ख्याल रखता था , उसने अपनी पढाई तक छोड़ दी थी तेन की वोह पढ़ लिख सके , उसकी ख़ुशी के लिए किसी भी हद तक चला जाता था ,

उसकी ीचा के बिना उसे हाथ भी नै लगता था , कोमल जानती थी , के यह प्यार समाज के निज़मो के विरुद्ध है , पर उसके भाई जितना प्यार , इस दुनिआ का कोई मर्द उसे न कर पता ,

उसका भाई कितनी छोटी उम्र में खेतो में मज़दूरी करने लग गया था , सारा दिन गर्मी में म्हणत करता था , उसके हाथिओं पर चले पढ़ जाते थे , लेकिन फिर भी वोह न धुप देखता था न सर्दी , बस ऐसी लिए के उसकी छोटी बहिन , शहर में आराम से जिंदगी गुजर सके ,

कोमल अपने भाई पर इस कदर फिड्डा हो गई थी , उसको किस कदर दीवानगी थी अपने भाई से , के शबदो में बयान नै किया जा सकता.

"क्या सोच रहे हो पिता जी , मुझे ले चलो अपने साथ , मेरा रवि ठीक हो जायेगा , ले चलो मुझे..." सीमा ने काल की सोचु का अंत करते हुए बोलै.

"सीमा , में तुम्हारी रक्षा करुगा , तुम कोई नुकसान नै होगा , आखिर मेरे बेटे की जिंदगी हो तुम , तुम कोई तकलीफ नै होगी.." काल ने बेहद नरम आवाज़ में बोलै.

"क्या , अप्प रवि के पिता हो , लेकिन कैसे..." सीमा ने चौंक कर पूछा.

फिर काल ने सीमा को सब कुछ बता दिया , काल ने कुछ सोच समाज कर hi सीमा को यह सब बताया था , सीमा hi इस दुनिआ में इक ऐसी लड़की थी , जिस पर कोई भी आँखें बंद कर विश्वास कर सकता था.

काल की बतिअन सुन सीमा की आँखों में असनु ा गए , वोह अग्गे बढ़ कर अपने ससुर के पेअर चुने लगी ,

"पिता जी , अप्प सच में मेरे पिता हो , यह जान कर मुझे इतनी ख़ुशी मिल रही है के में शबदो में बयान नै कर सकती , जैसा प्रेम अपने शालिनी माँ से किया है , ऐसा कोई नै कर सकता , आपका बीटा बिलकुल अप्प जैसा है , आपका hi दूसरा रूप है , पिता जी में वादा करती हु , इक दिन आपको और माँ को , इक जरूर करुँगी.." सीमा ने मुस्कराते हुए नाम आँखों से बोलै.

"हम्म , मेरी बची , अभ वख्त बीत चूका है , मने अंधेरो को चुन लिया है , और अभ यही मेरी जिंदगी है , मगर मुझे हमेशा इस बात पर गर्व रहेगा , के मने जिस औरत से प्यार किया , वोह बेहद पवितर औरत थी..." काल ने दर्द भरी आवाज़ में बोलै.

"नै पिता जी , आपका बीटा भी तोह इक वैम्पायर है , उसने मर कर भी मेरा साथ नै छोड़ा , पर अप्प माँ की ख़ुशी के लिए उनसे दूर हो गए , में जानती हु , अज्ज भी आपको अपने बचो से प्यार है , तभी तोह अपने रवि को इक नयी जिंदगी दी , अपने रवि को hi नै , कोमल को भी इक नयी जिंदगी दी , पर अप्प को यह अजीब नै लगा के आपका बेटी अपनी hi बहनो के साथ सम्बंद बना रहा है..." सीमा ने अपनी नज़रियन ज़ुका कर पूछा.

"हाँ , बुरा लगता था , मने कोमल को रोका भी था , पर वोह नै मानती थी , उसका कहना था , के उसका भाई hi , उसे समाज सकता है , कोमल जब प्यार करती थी , तोह उसका दरिन्दापन बहार ा जाता था , इस से किसी भी आम इंसान को वोह मर देती , पर रवि को उसने इक सीमा में रखा , तेन की वोह अपने भाई के पास भी रहे , और उसे अपने से दूर भी रख सके , और रवि , अपनी बहिन की ख़ुशी के लिए कभी उसके जायदा करीब नै गया , मुझे धीरे धीरे विश्वास हो गया , के कोमल , रवि के बिना नै जी सकती , और न hi रमा..." काल अभी बोल hi रहा था के सीमा बेच में बोल पढ़ी.

"नै , पिता जी , रमा अभ मेरी बेटी है , रवि ने मुज़से वादा लिया है , वोह उससे दूर रहेगा , वार्ना में उससे सरे रिश्ते तोड़ दूंगी.." सीमा ने आँखों में असनु भरते हुए बोलै.

"हैश्च , तुम वोह नै बदल सकती जो वख्त ने लिखा है , तुम किस्मत को नै बदल सकती , रवि , रमा और कोमल , यह तीनो , आम इंसानो से अलग हैं , यह अपनी वासना की अग्ग को , बस इक दूसरे से hi शांत कर सकते हैं , क्यों की यह तीनो में मेरा अंश है , हम इनको अलग नै कर सकते , कभी नै.." काल की बात सुन सीमा खामोश हो गई.

"पर में अपनी बेटी को , कैसे यह सब करने दू , मेरा दिल जलता है , में रमा की माँ हु , उसका ाचा hi सोचूंगी.." सीमा ने रट हुए बोलै.

"तुम उसे खुश देखना चाहती हो.."

"हाँ.."

"वोह रवि के पास hi खुश रहेगी , मन लो , अगर रमा ने तुम्हारी बात मन कर , किसी और से शादी कर भी ली , तोह वोह जिंदगी भर रोटी रहेगी , वोह तुम्हारे सामने खुश रहेगी , पर अंदर से मर जाएगी ..."

"ओह्ह , में फैसला नै कर प् रही हु , मुझे सोचने के लिए वख्त देदू पिता जी , अभी में इस हालत में नै हु , के में कुछ बता सकू.." सीमा ने वैसे hi रट हुए बोलै.

"और इक बात बेटी , वख्त ऐनी पर तुम इक क़ुरबानी देनी होगी , जैसे कोमल ने दी थी , अगर तुम चाहती हो के कोमल वापिस इस दुनिआ में ा सके..." काल ने बहुत गम्बिरता से बोलै.

"क्या , मेरी कोमल वापिस ा जाएगी , उसे वापिस लेन के लिए में अपनी जान भी दे दूंगी.." सीमा ने खुश होते हुए बोलै.

"मुझे तुम गर्व है , वोह वख्त जल्द hi आएगा , और तब में तुम सब समझा दूंगा , ाचा अभ मेरा प्लान सुनो.." काल ने प्यार से बोलै.

"जी पिता जी.." सीमा मुस्कराते हुए बोली और अपने पिता की बात दयँ से सुनने लगी ,

"में सब समाज गई पिता जी , बिलकुल ऐसा hi होगा .." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै , वोह बेहद खुश थी ,

फिर अचानक काल वह से गयाब हो गया , रूम में रौशनी वापिस लोट आयी , सीमा ने रवि को सोते देखा , वोह मुस्कराती हुई रवि को वापिस अपनी बहु में भर लेट गई ,

करीब 1 घंटे बाद रवि की आँख खुली , सीमा को अपने पास पाकर , रवि बेहद खुश हुआ , रवि ने सीमा को सीधा लेता दिया और उसके ऊपर लेट गया ,

"उफ़ मेरी जान कितनी खूबसूरत हो तुम.." रवि ने मुस्कराते हुए सीमा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए , वोह प्यार से धीरे धीरे सीमा के होंठो को चूसने लगा ,

सीमा ने कसमसा कर अपनी आँखें खोली तोह कास कर रवि को अपनी बहु में भर लिया और बड़ी शिदत से उसके होंठो को चूमने लगी ,

"उफ़ रवि , मेरे रवि..." सीमा ने इक बार होंठो को होंठो से अलग कर बोलै और फिर कास कर रवि को अपनी बहु में भर उसके होंठो को चूसने लगी ,

धीरे धीरे रवि के हाथ हरकत करने लगे , रवि ने तेज़ी से सीमा की कमीज़ को ऊपर उठा दिया , उफ़ सीमा की पतली गोरी सफेद कमर नंगी हो गई , उसकी गहरी नाभि , जो उसके तेज़ साँस लेने से ऊपर निचे हो रही थी ,

रवि ने सीमा के होंठो को छोड़ उसके ऊपर से उठते हुए उसकी कमीज़ को तेज़ी से ऊपर खींचना सुरु कर दिया , सीमा ने मुस्कराते हुए रवि की तरफ देखा और थोड़ा ऊपर को उठ , रवि की मदद की , उसकी कमीज़ उसके बदन से अलग हो गई , देखते hi देखते रवि ने सीमा की ब्रा को खींच कर फाड् दिया ,

उफ़ सीमा के मोठे मोठे दूध , इक डैम नंगे होकर हवा में उछाल पढ़े , दोनों मम्मो की गुलाबी निप्पल देख , रवि के मोह से पानी टपकने लगा ,

सीमा के दोनों मम्मी दूध से गोर और मुलाम थे , और उनके गुलाबी निप्पल उन पर चार चाँद लगा रहे थे ,

रवि ने सार ज़ुका अपने तपते होंठो को सीमा की गर्दन पर रख दिया.

"अह्ह्ह उम्म्म शहहह रवि , तुम अह्ह्ह बहुत अचे हो..." सीमा ने सिसकते हुए बोलै.

"अहह सीमा तुम बहुत हॉट हो जान.." रवि ने सीमा की गर्दन को चूमते छत्ते हुए बोलै..

अभी रवि ने सीमा के गोर मम्मो के प्यासे निप्पलों को मोह में भरा hi था के किसी ने रूम का गेट खटकता दिया ..

"उफ़ कोण है बस , मुझे मेरी बीवी से भी प्यार नै करने दे रहा.." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै , वही सीमा के होंठो पर इक दिलकश मुस्कान थी , वोह रवि की हालत पर दिल hi दिल हसे जा रही थी ,

रवि , सीमा के ऊपर से उठ गया , सीमा ने भी जल्दी से अपना कमीज़ पहन अपने कपडे ठीक कर लिए ,

"उफ़ ओह्ह रवि , रत को प्यार करेंगे , में तुम्हारे पास hi हु , जितना चाहे उतना प्यार कर लेना..." सीमा ने मुस्कराते हुए रवि के होंठो को चुम कर बोलै.

फिर सीमा ने उठ कर रूम का दरवाजा खोला तोह रमा बहार कड़ी थी , उसके होंठो पर इक मुस्कान थी ,

रवि ने रमा को देखते hi अपनी नज़रियन उससे चुरा ली , रमा यह देख मन hi मन मुस्कराने लगी ,

"ओह्ह मेरी बेटी क्या बात है.." सीमा ने रमा के गोर गालो को अपने हाथो से सहलाते हुए पूछा.

"माँ , मुझे सोल्लगे जाना है , भइआ को कहो न मेरे साथ चलने को , प्लस..." रमा ने बहुत मसोमीयत से बोलै.

सीमा कुछ देर काल की कही बतिअन सोचती रही और फिर उसने मन hi मन इक फ़ासिला लिया.

"ठीक है मेरी बची , भइआ को साथ ले जाओ.."

"पर सीमा.."

"मुझे कुछ नै सुन्ना , मेरी बेटी के साथ जाओ , और हाँ , इसको प्यार करो , जो यह कहे , वही करो , बस मेरी बेटी खुश रेहनी चाहये , चाहे आपको कुछ भी करना पढ़े.." सीमा यह बोलते हुए बहुत गहरी निगाहो से रवि को देखने लगी ,

"ठीक है , जैसा तुम कहो.." रवि इक डैम से उठा और रूम से बहार निकल गया , सीमा ने अपनी बेटी का हाथ पकड़ उसे अपना साथ बिठा लिया...

तो बे कुनिटेड...
 
अपडेट-14

सीमा कुछ देर रमा के चेहरे को देखती रही , और फिर उसका चेहरा अपना हाथो में पकड़ उसका माथा चुम लिया.

सीमा का इतना प्यार देख रमा की आँखें भर आयी ,

"माँ में आपको कभी धोका नै दूंगी , जो अप्प कहुगी में वही करुँगी.." रमा ने सिसकते हुए नाम आँखों से बोलै.

"रमा इक बात पुछु तुमसे.."

"हाँ माँ..."

"तुम अपने भाई से प्यार करती हो न.." सीमा के इस सवाल से रमा चौंक गई.

"माँ यह कैसा सवाल है , हर बहिन अपने भाई से प्यार करती है .."

"बेटी तुम बहुत चालक हो , पर में तुम्हारी माँ हो , सब समज़ती हु , मेरे सवाल का जवाब दो..." सीमा ने अभ थोड़ा घम्बिर होकर पूछा.

"नै माँ..." रमा ने अपनी नज़रियन चुराते हुए बोलै.

"हम्म , ाचा तुम अपनी पुराणी जिंदगी यद् है.." सीमा के इस सवाल से रमा फिर चौंक गई.

"नै माँ , में सब भूल चुकी है.." रमा ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै.

"मेरी कसम खा कर बोलो के तुम कुछ यद् नै.."

"माँ , यह क्यों पूछ रही हो , मैं नै बता सकती..." रमा ने रट हुए बोलै.

"ाचा अगर में रवि और तुम्हारे बारे में हां बोल दू , फिर.."

"माँ में उनको छोड़ दूंगी , मुझे आपका प्यार चाहये..." रमा ने सीमा के गले लगते हुए बोलै.

"रमा , में जानती हु , तुम सब यद् है , आखिर इक लड़की अपना पहला प्यार कैसे भूल सकती है.."

"माआ , मुझे और कुछ नै सुन्ना इस बारे में , हाँ , मुझे सब यद् है , लेकिन तब में उनकी बहिन थी , और अभ में आपकी बेटी हु , अप्पने मुझे कितना प्यार दिया , अप्प hi मेरी माँ हो , में आपको धोका नै दे सकती , नै माँ , में भइआ को भूल जोगी..." रमा ने रट हुए बोलै.

"पर में नै चाहती के तुम उनको भूल जाओ , पहले hi उनकी जिंदगी से कोमल जा चुकी है , अभ तुम चली जोगी तोह वोह टूट जायेगे , तुम उनको फिर से अपनाना होगा..." सीमा की बात सुन रमा चौंक कर उसकी तरफ देखने लगी ,

"माँ , अप्प पागल हो गई हो , पिछले कुछ दिनों से में भइआ के करीब जा रही थी , लेकिन मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया , मेरे लिए अप्प पहले हो , भइआ बाद में , प्लस , में यह नै कर सकती ..." रमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै.

"सोच लो , अभी वख्त है तुम्हारे पास , और यह ख्याल कभी दिल में मत लाना के में तुमसे नाराज़ हो जोगी , मेरे जाने के बाद उनका ख्याल रखना.." सीमा ने थोड़ा नाम आखो से बोलै.

"माँ , कहा जा रही हो अप्प , प्लस , अप्प मेरा दिल दुख रही हो..." रमा ने कास कर सीमा को अपने गले लगते हुए बोलै.

"शठ , मेरी बची , चुप हो जा , कही न जा रही में , बस तुम बता रही हु , अगर मुझे कुछ हो जाये , तोह रवि को सम्बल लेना..."

"नै माँ , आपको कुछ नै होगा , अगर आपको कुछ भी हुआ तोह , में सब को मर दूंगी , किसी को जिन्दा नै छोडूगी , माँ , में जिन्दा हु , आपको कुछ नै होगा , जब तक में हु..." रमा ने सीमा के असनु साफ करते हुए बोलै.

सीमा ने गौर से देखा , रमा की आँखें लाल लाल रौशनी में चमक रही थी ,

"उम् , मेरी प्यारी बेटी , जाओ अपने भइआ के साथ , और हाँ , जो भी वोह मांगे दे देना , उनको दुखी मत करना , वार्ना में दुखी हो जोगी , समाज गई न , में क्या देने को बोल रही हु.." सीमा ने हस्ते हुए बोलै.

"क्या माँ अप्प भी..." रमा ने शरमाते हुए बोलै और रूम से बहार भाग गई.

रमा के जाते hi सीमा कुछ सोचने लगी , क्यों की काल की कही इक इक बात सच थी , रमा के अंदर कुछ अजीब सी ताकत थी , मतलब रमा में कुछ शक्तियाँ थी ,

पर उसकी ताकत तभी बहार आएगी , जब सीमा उससे दूर होगी ,

क्यों की सीमा को hi रमा इस दुनिआ में सब से जायदा प्यार करती है , रवि तोह उसके बाद अत है उसकी जिंदगी में...

दूसरी तरफ...

"क्या हुआ जणू , अज्ज कुछ परेशान लग रहे हो.."

यह प्रिय थी , जो अपने गीले बालो को अपने हाथो से सूखा रही और साथ में इंस्पेक्टर राजेश से बतिअन भी कर रही थी ,

सॉरी , सॉरी , राजेश अभ इंस्पेक्टर नै रहा वोह इस शहर का पुलिस कमिश्नर बन चूका था ,

उन दरनीदो वाले केस को सोल्वे करने के बाद ,

उस हादसे के 2 मंथ बाद राजेश और प्रिय ने शादी कर ली , प्रिय ने अपनी नौकरी छोड़ दी , अभ दोनों ख़ुशी ख़ुशी अपनी जिंदगी बिता रहे थे.

"कुछ नै प्रिय , तुम तोह जानती हो , कम. यादव को किसने मारा था , यह बस मुन्ना की गवाही पर देपेंद करता था..."

"तोह.."

"अभ मुन्ना तोह गयाब सा हो गया है , हष्ठ , और इस शहर की हालत बेहद बुरी हो चुकी है , मुझे कोई रास्ता नै मिल रहा.." राजेश ने और भी परेशान होकर बोलै.

"आपको किसने बचाया था उस दिन..." प्रिय ने राजेश के करीब बैठते हुए पूछा.

"अरे यह भी कोई पूछने की बात है , रवि ने.." राजेश ने मुस्कराते हुए बोलै.

"तोह फिर आपकी परेशानी का हल भी रवि है , अप्प रवि से बात करो , उसे बोलो के वोह आपके लिए अंडरकवर एजेंट बने , वोह इस शहर से साडी गंदगी साफ कर देगा..." प्रिय ने स्माइल करते हुए बोलै.

"हम्म , बात तोह तुम्हारी सही है..."

"अरे में भी पहले एजेंट थी , मुझे सब अत है , में सैर से रवि का नंबर ले लगी , फिर अप्प उससे मिल कर उसे मन लेना , नै तोह में , रवि के घर जा ायुगी , बोलो क्या कहते हो अप्प , मुझे सब अत है.." प्रिय ने मुस्कराते हुए बोलै.

"हम्म , गलत बात , बिस्तर पर तुम कुछ नै अत , सब म्हणत मुझे करनी पढ़ती है.." राजेश ने प्रिय के गाल चुम कर बोलै.

"क्या अप्प भी , हर वख्त बस गन्दी बतिअन..." प्रिय का चेहरा शर्म से लाल हो गया.

"ाचा तुम सैर से बात करो , और में चला ऑफिस , और इक गुड़ bye किश.." राजेश ने प्रिय के होंठो को चूस लिया और फिर मुस्कराते हुए ऑफिस के लिए निकल गया.

प्रिय ने मुस्कराते हुए अपना मोबाइल उठाया और सैर को कॉल लगा दिया , उस दिन के बाद वोह अज्ज सैर से बात कर रही थी.

कुछ रिंग्स गई होंगी , फिर सैर ने फ़ोन उठा लिया ,

"हलो कोण..." सैर ने बहुत प्रेम से पूछा , उसकी आवाज़ में उसकी मसोमीयत झलकती थी.

"हलो सैर , में प्रिय बोल रही हु..."

"प्रिय देदी अप्प , पर में आपसे बेहद नाराज़ हु , मुझे आपसे बात hi नै करनी..." सैर ने थोड़ा रूठते हुए बोलै.

"अरे क्या हुआ छोटी , ाचा , सॉरी , मने तुम कभी फ़ोन नै किया , प्लस , छोटी माफ़ करदे..." प्रिय ने बड़े प्यार से बोलै.

"ओह्ह देदी , कोई बात नै , अप्प और राजेश भइआ खुश हो न..."

"हम्म , हमने शादी कर ली और तुम मुन्ना के साथ खुश हो न.." प्रिय ने मुस्कराते हुए बोलै.

"हाँ देदी , रवि भइआ ने मुन्ना को बचा लिया और हम दोनों ने शादी कर ली , देदी रवि भइआ बहुत अचे इंसान हैं..." सैर ने बेहद ख़ुशी में बोलै.

"हाँ , यह तुमने ठीक बोलै , अगर रवि न होता तोह हम दोनों को हमारा प्यार नै मिलता , ाचा में क्या कहती हु..." प्रिय ने शरारती मुस्कान के साथ बोलै.

"हाँ देदी बोलो.."

"परसो राखी है , तोह हम दोनों अपने भाई को राखी बाँड्ने चले , क्या कहती हो तुम.." प्रिय ने बेहद ख़ुशी में बोलै.

"अरे यह तोह बहुत अछि बात है , ऐसी बहाने रवि भइआ से मिल भी लुंगी , अप्प मेरे घर ा जाना , फिर हम दोनों साथ निकल जाएगी.." सैर ने बेहद ख़ुशी में बोलै , उससे अपनी ख़ुशी सम्बली hi नै जा रही थी.

"ok छोटी , ाचा मेरी जान , तुम बेबी से एड्रेस ले लेना रवि का , तेन की हमें कोई परेशानी न हो और अपना भी एड्रेस मुझे बेहज दो , और परसो मिलते हैं..." प्रिय ने मुस्कराते हुए बोलै.

"जी देदी bye.." सैर ने भी मुस्कराते हुए फ़ोन कट कर दिया ,

उसने पहले अपना एड्रेस प्रिय को सेंड कर दिया और फिर बेबी का नंबर ढूंढ़ने लगी.

तभी मुन्ना भी ा गया , उसके साथ सना थी.

"जेजु , देदी कितनी खुश लग रही हैं .." सना ने हस्ते हुए बोलै.

"अरे हाँ , सांता , तुम ठीक बोल रही हो.." मुन्ना भी सरिए को खुश देख कर बोलै.

"उफ़ ओह्ह जेजु , सांता नै सना , इक तोह अप्प मेरा नाम भूल जाते हो.." सना ने मुस्कराते हुए बोलै और फिर सरिए के पास जाकर बेथ गई.

"अरे मेरी बुलबुल क्या कर रही है , और काम मत किया कर , छोटे मुन्ना को कुछ हो न जाये .." मुन्ना ने मुस्करा कर बोलै.

"क्या अप्प भी , प्रिय देदी का फ़ोन आया था , हम दोनों रवि भइआ को राखी बाँड्ने जा रही है परसो..." सैर ने ख़ुशी में मुस्कराते हुए बोलै.

"अरे यह तोह अछि बात है , रवि का अपुन पर बहुत एहसान है..."

"जेजु में भी जोगी , उनसे मिलने पर राखी बाँड्ने बिलकुल नै..." सना ने घम्बिर होकर बोलै.

"अरे सांग तुम चली जाना , ऐसे में इतना गुस्से में मत बोलो यार..." मुन्ना ने सैर की तरफ देखा जो इक डेरी पर कुछ दंड रही थी ,

"सांग नै सना जेजु , अप्प मेरा नाम हर बार भूल जाते हो , में जा रही हु..." सना मोह फुल्ल कर अपने रूम में चली गई.

"ओह्ह आखिर मिल hi गया..." सैर ने धीरे से बोलै , और अपने पेट को सहलाने लगी , सैर 2 मंथ से प्रेग्नेंट थी ,

"क्या मिल गया अपुन की बुलबुल को.." मुन्ना ने सैर के साथ बेथ उसके गालो को चूमते हुए बोलै.

"बेबी जी का नंबर , और अप्प जाओ रूम में , मुझे उनसे बात करनी है , जाओ..." सैर ने मुस्करा कर बोलै तोह मुन्ना उसके होंठो को कास कर चुम अपने रूम में चला गया.

सैर ने हस्ते हुए बेबी को फ़ोन लगा दिया , कुछ रिंग्स जाने के बाद दूसरी तरफ से बेबी ने कॉल उठा लिया.

"हलो सैर कैसी हो.." बेबी ने बेहद ख़ुशी में बोलै , वोह बीएड पर बैठी हुई थी और कैटलीन उसकी जांगू पर सार रख आराम कर रही थी.

"हलो , बेबी जी , कैसी हो अप्प .." सैर ने मुस्कराते हुए बोलै.

"में ठीक हु , ाचा कैसे यद् किया मेरी प्यारी सैर ने..." बेबी ने कैटलीन की तरफ देख कर बोलै , जिसकी आँखों में बेइंतहा गुस्सा था.

"वोह बेबी जी , परसो राखी है , में और प्रिय देदी , रवि भइआ को राखी बाँड्ने ा रही हैं , आपका एड्रेस नै पता हम दोनों को , अप्प एड्रेस सेंड कर दो अपना..." सैर ने मसोमीयत से सब बोल दिया.

"उम् , अभी कर देती हु , मेरी प्यारी सैर तुम जरूर एना , में भी तुमसे मिलना चाहती हु , ाचा तुम ा जाना , bye .." बेबी ने हस्ते हुए बोलै.

बेबी ने फ़ोन कट कर कैटलीन की तरफ देखा , उसका चेहरा पूरा लाल था , और आँखें अग्ग उगल रही थी ,

"क्या हुआ काट , इतने गुस्से में क्यों हो.."

"तेरी माँ की , साली , इक रवि काम है जो उस चुड़ैल को बुला रही अपने पास.." कैटलीन ने बेबी को खींच कर बीएड पर गिरा दिया और उसके पेट पर बेथ गई.

"ोुच्छ काट , उफ़ बहुत मोती है तू , उठ न , देख रवि को बोल दूंगी , फिर मत कहना तू.." बेबी ने थोड़ा कसमसा कर बोलै.

"रवि क्या कर लेगा..." काट ने बेबी के मम्मो को कास कर मसलते हुए बोलै.

"ोुछः तेरी छूट फाड् देगा वोह , फिर मत कहना , जब उसका लम्बा लुंड तेरी इस प्यारी मखमली छूट में घुसेगा , तब तेरी चखे निकल जाएगी..." बेबी ने कैटलीन को आँख मर मुस्कराते हुए बोलै.

"कामिनी कही की , में क्यों लुंगी उसका लुंड अपनी छूट में..." काट ने शरमाते हुए बेबी के ऊपर से उठ कर उसके साथ सोते हुए बोलै.

"काट बहुत मज़ा अत है जब उसका लुंड पूरा छूट में गहराई तक घुसता है..." बेबी ने कैटलीन की गर्दन चूमते हुए बोलै.

"अह्ह्ह मुझे नै लेना उसका लुंड , तू hi ले.." कैटलीन ने बेबी को कास कर अपनी बहु में भरते हुए बोलै.

"ाचा काट , में कल रवि को यहाँ बुलाती हु , फिर हम दोनों यही सेक्स करेंगे , और तू हम दोनों को चुप कर देखना..." बेबी ने काट के मोठे मोठे फुल्ले हुए मम्मो को दबाते हुए बोलै.

"उम् , शठ , में क्यों देखु , तुम फड़वाओ उससे अपनी छूट , तुम मुझे बहकाओ मत , वार्ना तुम्हारी छूट चाट चाट कर लाल कर दूंगी..." कैटलीन ने मदहोश होते हुए बोलै.

"हहै , काट मेरी जान , कल जरूर देखना हम दोनों को..." बेबी ने इतना बोल अपने होंठ कैटलीन के रसीले होंठो पर रख दिए और उनको बेइंतहा चूसने लगी ,

बेबी बस कैटलीन को मर्द का वोह प्यार दिलवाना चाहती थी , जिसे शयद वोह कभी एक्सेप्ट न कर पति , इस लिए बेबी ने फ़ासिला किया था वोह काट की छूट का उद्घाटन रवि के मोठे लम्बे लुंड से karvayegi...yahi सब सोचते हो बेबी बहुत गरम हो रही थी...

दूसरी तरफ...

राजेश अपने ऑफिस पहुँच चूका था.

राजेश ने अपना फ़ोन निकल किसी को कॉल किया , दूसरी तरफ इक लड़की ने राजेश का फ़ोन उठा लिया.

"हलो सर ..."

"हलो एजेंट , मने इक लड़का चुना है , वोह तुम्हारे साथ काम करेगा..."

"सर , no , no , अप्प जानते हो सरे मर्द दरिंदे होते हैं , मुझे सबसे नफरत है..."

"ओह्ह अनु में जनता हु , तुम्हारा रपे हुआ था , बूत इस लड़के को देखते hi , तुम उसे अपने साथ काम पर लगा लोगी , मेरा विश्वास करो , ाचा अगर तुम वोह ाचा न लगा , जो तुम्हारा डिसिशन होगा , वोह में मन लूंगा.."

"ok , वैसे नाम क्या है उसका.."

"रवि , रवि नाम है उसका , बहुत ाचा इंसान है , तुम इक बार मिल लो , तुम कायल हो जोगी उसकी.."

"क्या अप्प भी सर , में बस इक इंसान को जानती हु , जिसने मेरी माँ को 20 लाख रुपए दिए थे , पर इत्तफाक की बात है , शयद उसका नाम भी रवि था , में जरूर इक बार उससे मिलूगी..." अनु ने मुस्कराते हुए बोलै.

"शयद यह वही हो , अचे bye 4 दिन बाद तुम कॉल करुगा उससे मिलने के लिए.."

"bye सर..." अनु ने फ़ोन कट किया , और कंप्यूटर पर कुछ काम करने लगी , पर बार बार उसके दिल में रवि की तस्वीर चाप रही थी , जब वोह उसे हॉस्पिटल में मिलने आया tha...voh भगवन से दुआ कर रही थी के यह रवि वही हो...

दूसरी तरफ...

रमा के जाते hi सीमा बीएड पर लेट आराम करने लगी , वोह धीरे धीरे सोचती हुई सो गई , ऐसा पहले कभी नै हुआ था , सीमा को नंद बहुत काम अति थी ,

सोते हुए सीमा ने देखि वही जगह , कला पहाड़ , उसके बाद अजीब अजीब से जानवर और अंत में इक अग्ग hi अग्ग , और उस अग्ग के पर इक लड़की , जो अग्ग की लपटु में जल रही थी ,

जब अग्ग बेचू बेच सीमा की नज़र उस लड़की पर गई , सोते हुए भी उसकी आँखों से असनु बह निकले , वोह लड़की कोई और नै कोमल थी ,

कोमल बेहद दर्द में थी , कोमल ने आँखें खोल बोलै ,

"डेडीईई , मेरा लॉकेट भइआ को पहना दो , अह्ह्ह्ह देदी , वोह ठीक हो जायेगे अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह देदी में जल रही हु , मुझे बचाओ डीडीई , लॉकेट वही है अअअअअ यहाँ भइआ कोमा में गए थे आआह्ह्ह्ह उसी रूम में , ाअस्सष्ठहहहह मुझे दर्द हो रहा है अह्हह्ह्ह्ह देदी लॉकेट भइआ के गले में जाते hi ाआईई शहहह वोह रिंग जल जाएगी अस्सआह्हः और अपने असली रूप में ा जाएगी उम्म्म्म सस्शह्ह्ह्ह जल्दी करो डेडीईई और मुझे बचा लुओ प्लसससस डेडीईईईई..."

"कोमललललललललल..." सीमा इक डैम से चीख कर उठी , उसकी सांसे बेहद तेज़ चल रही थी , उसकी आँखों से ज़ार ज़ार असनु बह रहे थे , सीमा को बेहद वख्त लग गया अपने अप्प को नार्मल करने में...

सीमा जैसे hi कुछ ठीक हुई , वोह भाग कर उस रूम में पहुंच गई , यहाँ रवि अचानक से पहुंचा था , सीमा पोरे रूम की तलाशी लेने लगी ,

पोरे रूम में ढूंढ़ते ढूंढ़ते सीमा ने जब बीएड के निचे ज़क कर देखा , तोह लाल रंग में चमकता हुआ इक लॉकेट सीमा को दिखाई दिया ,

सीमा ने वोह लॉकेट उठा लिया और रवि के ऐनी का इंतज़ार करने लगी , लेकिन उससे पहले वोह काल से इस लॉकेट के बारे में बात करना चाहती थी , आखिर क्या था इस लॉकेट का राज़...

दूसरी तरफ..

रवि और रमा गाड़ी में बैठे सोल्लगे की तरफ जा रहे थे , रमा बार बार अपने भाई की तरफ देख मुस्करा रही थी ,

अभ तोह उसकी माँ ने हाँ बोल दी थी , अभ रमा को कोई चिंता नै थी.

"कोई हमसे नाराज़ है , हम्म , कोई हमसे नाराज़ है , जिसे हम प्यार करते हैं , वोह हमसे नाराज़ है , ओह्ह हूँ बेहद नाराज़ है , अभ कैसे संजो अपने भाई को , में उसे कितना प्यार करती हु , पर वोह मुज़से नाराज़ है , ओह्ह होऊ..." रमा ने सांग गुनगनाते हुए बोलै.

"अपना मोह बंद रखो , समाज गई न.." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै.

"भाई किसी होटल ले चलो न , उफ़ देखो न , मेरी मिस मुनिअ , आपके लिए रो रही है , जैसे गाओं में रोटी थी , ऐसे अपने कालू फ्रेंड से मिलना है , प्लस , अपना कालू को बोलो के मेरी मिस मुनिअ उससे मिलना चाहती है.." रमा ने बेहद मसोमीयत से बोलै तोह रवि हसने लगा , रमा यह देख खुश हो गई.

"रमा तुम भी न , और क्या कहती है तुम्हारी मिस मुनिअ.." रवि ने हस्ते हुए बोलै.

"भाई मेरी आँखों देखो , वोह दिन जब खेत में अपने चिलम पेट हुए मुझे प्यार किया था , हाँ भाई , मुझे सब यद् है , कैसे भूल जाऊ में , और हाँ , यद् रखना , में आपसे 2 साल बड़ी हु , अप्प इस बात को भूल गए हो , ाभसे मेरी हर बात आपको माननी होगी , समझे अप्प.." रमा ने पहले प्यार से और फिर थोड़ा गुसी से बोलै.

"हम्म , यद् है देदी , जैसा अप्प कहो.." रवि को यद् आया रमा सच में उससे दो साल बड़ी थी.

"गुड़ बॉय , चलो अभ पहले अभ सोल्लगे चलते हैं , उसके बाद किसी होटल में , मुझे आपसे प्यार करना है , यहाँ हम दोनों हो , और कोई न हो..." रमा में शर्मा कर बोलै.

"हम्म , ठीक है देदी.."

"और इक बात और , मुझे वैसे hi प्यार करो , चिलम पेट हुए , जैसे गाओं में उस झोपड़े में किया था , बिलकुल वैसा hi , आपकी रमा वैसी है , जैसी आपको गाओं में मिली थी , पहले दिन जैसी..." रमा ने मुस्कराते हुए बोलै , रवि की आँखों में असनु ा गए थे.

"क्या हुआ भइआ , मुझे माफ़ कार्डो.." रमा ने नाम आँखों से बोलै.

"अरे पगली , यह ख़ुशी के असनु हैं , मेरी हर बहिन बस मुझे प्यार करती हैं , तुम सबको मने बहुत दुःख दिए हैं , कितना इंतज़ार करवाया तुम सबको , अगर में घर छोड़ कर न जाता , तोह कुणाल की हिमेट न होती तुम्हारी तरफ देखने की , मुझे माफ़ कर देना बहिन.." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै.

"भइआ अप्प बेहद ताकतवर हो , पर हम सब के सामने अप्प कमज़ोर पढ़ जाते हो , पता है , जब इंसान को किसी से बेपनाह प्यार होता है , तभी उसकी आँखें नाम होती हैं , ी लव ु भइआ , रमा तब भी आपकी थी और अज्ज भी आपकी है , और हमेशा आपकी रहेगी , दुनिआ का कोई मर्द रमा को वोह प्यार नै दे सकता जो अप्प दे सकते हो , रमा बस आपके लिए जीती है , और मारेगी भी आपके लिए , चाहे अप्प रमा से शादी करो , या न करो..." रमा ने मुस्कराते हुए बोलै , रवि बस आँखें फाडे रमा की बतिअन सुन रहा था , तभी रमा का सोल्लगे भी ा गया था ,

रमा गाड़ी से उतारते हुए बोली ,

"और इक बात परसो राखी है , पर रमा आपको राखी नै बंदगी , क्यों की अप्प रमा के हमसफ़र हो , यह बात अप्प कभी भूलना मत..." रमा ने मुस्कराते हुए बोलै और गाड़ी से निचे उतर गई और रवि भी शॉकेड हुआ उसके साथ hi उतर कर बहार ा गया....

तो बे कुनिटेड...
 
अपडेट-15

रवि और रमा सोल्लगे पहुँच गए ,

रमा अज्ज बेहद खुश लग रही थी , उसके होंठो पर इक हसन मुस्कान थी ,

रवि को सब लड़के लड़कियाँ घर कर देख रहे थे ,

देखते भी क्यों न , वोह इस सोल्लगे का बॉक्सिंग चैम्प जो था ,

पिछली बार वोह जब आया था , रौनी की बहुत पिटाई की थी ,

"रमा यह सब मुझे घर क्यों रहे हैं."

"भाई अप्प इस सोल्लगे के चैम्प जो हो."

फिर रमा ने अपने मोबाइल से किसी को कॉल किया और कुछ देर बतिअन कर कॉल कट कर दिया ,

"भइआ ायो मेरे साथ"

"कहा पर"

"उफ़ ओह्ह , अप्प सवाल बहुत करते हो , ायो कैंटीन में चलते हैं"

रमा मुस्कराती हुई रवि को देख रही थी , उसकी आँखों में इक शरारत थी ,

फिर रवि भी उसके साथ चल पढ़ा , दोनों कैंटीन में पहुँच गए ,

रवि ने देखा वह भी सभी उसे hi घर कर देख रहे थे ,

वैसे देखते भी क्यों न , उसके बॉडी पहले से भी दमदार बन गई थी , ऊपर से हद से जायदा वाइट स्किन , ब्लू आँखें , लम्बे काळा बाल , और ब्लैक कपडे , रवि बेहद आकर्षित जो लग रहा था ,

रवि , रमा के साथ चलता हुआ इक टेबल पर बेथ गया , रमा ने कोल्ड ड्रिंक और कुछ खाना का आर्डर कर दिया ,

"भइआ अप्प खुश तोह हो न"

"तुम खुश हो"

"बहुत"

"तोह में भी खुश हु"

रमा अपने भाई की बात सुन उसकी आँखों में देखने लगी ,

तभी उसकी फ्रेंड्स वह ा गई , रश्मि , प्रिय और स्वाति ,

रवि ने उनकी तरफ देखा , उनके चेहरे पर बहुत अधिक गुस्सा था ,

और तोह और स्वाति तोह ऐसे देख रही थी , जैसे अभी रवि का खून कर देगी ,

"हलो फ्रेंड्स, ायो बैठो न , मने वादा किया था तुमसे , के भइआ को लेकर ायुगी , तोह ले आयी..."

रवि शॉकेड हो गया , अभ उसे समाज आया के यह सब रमा की चल थी ,

फिर स्वाति ने प्रिय और रश्मि को कुछ इशारा किया , तोह वोह दोनों रमा को अपने साथ बहार ले गई ,

स्वाति बिलकुल रवि के सामने बेथ गई ,

"वोह स्वाति में..."

"कुछ मत बोलो , मुझे क्या रंडी समझा था तुमने , इक बार सेक्स कर , दुबारा अपनी शकल तक नै दिखाई , क्या एहमियत है मेरी , तुम्हारी नज़रिओं में.." स्वाति ने रट हुए बोलै.

"स्वाति , मेरी बहिन मुझे छोड़ कर चली गई , में टूट कर भीकर गया था , जिस बहिन को बचपन में , मने अपने हाथों से पला था , उसको दुनिआ की हर ख़ुशी दी , वही मुझे छोड़ कर चली गई , स्वाति में कोमा में चला गया था , अभी कुछ दिन पहले hi ठीक हुआ हु.."

"ओह्ह म सॉरी डिअर , मुझे लगा , तुम भी बाकि लड़को जैसे हो , जिनको बस मेरे जिस्म से मतलब है , पर उस दिन , तुम्हारी आँखों में मने प्यार महसूस किया था.." स्वाति ने रवि का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोलै.

"ाचा , में भी तोह और लड़को जैसा हु.."

"नै , में जानती हु , तुम्हारी शादी हो चुकी है , बूत हम दोस्त तोह रह सकते हैं न.."

स्वाति की आँखों में इक कससिह थी , वोह रवि को खोना नै चाहती थी ,

"स्वाति , उस बात को भूल जाओ , और ाचा सा लड़का देख शादी कर लो.."

"नै रवि , मेरा मतलब , अगले साल में उसे जा रही हु , मम्मी पापा के साथ , बूत तब तक में तुम्हारा साथ चाहती हु , प्लस , मन मत करना.."

"स्वाति तब में हवस में बह चूका था , लेकिन अभ में बदल चूका हु. "

"प्लस रवि , में तुम पर कोनसा हुक जाता रही हु , बस पल दो पल का प्यार hi चाहती हु , प्लस रवि , प्लस.." स्वाति ने नाम आँखों से बोलै.

"मुझे सोचने दो .."

रवि कुछ पल सोचता रहा ,

वोह स्वाति के चेहरे को देखता रहा , स्वाति ने अपनी नज़रियन ज़ुका राखी थी ,

"ठीक है स्वाति , में तुम्हारा साथ दूंगा , में तुम खुश देखना चाहता हु .."

"थैंक ु , रवि.."

"में यह भी महसूस कर रहा हु , के उस दिन के बाद तुम किसी और लड़के के करीब तक नै गई हो.."

स्वाति शॉकेड सी हुई रवि के चेहरे को घूरने लगी ,

"सच बोलै न मने.."

"हाँ , मैं कई लड़को के साथ रिलेशनशिप में रही हु , बूत मने कभी वोह प्यार महसूस नै किया जो तुम्हारे साथ हुआ था , ी लव ु .." स्वाति ने मुस्कराते हुए बोलै.

"ाचा , स्वाति रमा को बुला लो , वोह शक न करे हम पर.."

"ठीक है.."

फिर स्वाति ने रश्मि को कॉल किया तोह वोह तीनो भी वह ा गई ,

रमा की आँखों में इक शरारत सी दिख रही थी ,

"भइआ माँ ने मुज़से कहा था , जब में बीमार थी , तब हम लोग जंगल में रहने गए थे.."

रमा ने अपनी फ्रेंड्स की तरफ देखते हुए बोलै ,

रवि ने जैसे hi रमा के मोह से यह सुना , उसे वोह सब यद् ा गया ,

इक इक पल , इक इक लम्हा , रवि को रोहन यद् आया , सूजी , बाबा हमशा , सब यद् ा गए , और वोह भी ,

उफ़ पहली बार कोमल को वही मिला था रवि , उस रत कितना प्यार किया था दोनों ने ,

जैसे जैसे रवि को कोमल की यद् ऐनी लगी , वैसे वैसे रिंग लाल रौशनी में चमकने लगी ,

उसके बाद जब सीमा वह ा गई थी , तब कितने प्यार भरा पल गुजरे थे रवि ने , उफ़ इक इक लम्हा , उन 20 दिनों में रवि ने अपनी पूरी जिंदगी गुजर ली थी ,

डॉ नीलम , िका इक रवि को कुछ यद् ा गया , उसने अपना माथा पीट लिया ,

रवि अभी सोच hi रहा था के 4-5 लड़के वह ा गए ,

"हाय स्वाति डार्लिंग , मेरा फ़ोन क्यों नै उठा रही तुम.." उन में से इक लड़का स्वाति की तरफ देख कर बोलै ,

"गेट आउट , जाओ यहाँ से , अभ मेरा तुमसे कोई रिलेशन नै.."

"क्यों , कोई और एरर मिल गया तुम.." इतना बोल वोह लड़के हसने लगे ,

स्वाति कड़ी हुई और इक थपड उसके मोह पर जड़ दिया ,

"साली , मुझे मरती है , बस , देख अभ तुझे इस सोल्लगे में सब के सामने नंगा करुगा.." उस लड़के ने स्वाति का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए बोलै ,

"छोड़ो इसका हाथ.." रमा ने चेयर से उठ कर गुस्से में बोलै ,

"क्यों तुझे भी नंगी होना है.." इतनी बात पर सभी हसने लगे ,

रवि को इस बात पर बेहद गुस्सा ा गया ,

रवि खड़ा हुआ , और इक कास कर थपड उस लड़के के मोह पर जड़ दिया ,

थपड इतना जोरदार था , के उसका निचला होंठ इक तरफ से फैट गया और खून की पतली धार बहने लगी ,

"ओह्ह्ह्हह मारो सेल को.." वोह लड़का गुस्से से चीखता हुआ बोलै ,

वोह लड़के भाग कर ए और रवि को चारो ने घेर लिया ,

इक लड़के ने रवि के चेहरे पर मुक्का मरना चाहा , रवि ने उसका हाथ कलाई से पकड़ बेच में hi रोक दिया ,

और इक कास कर मुक्का उसके ढाई गाल पर जड़ दिया ,

"अह्ह्ह्ह " मुक्का पड़ते hi वोह दर्द से खरहाता हुआ पास में इक चेयर पर गिर गया ,

तभी दो लड़को ने पीछे से रवि को पकड़ लिया और इक लड़के ने सामने से दो तीन पंच रवि के मोह पर जड़ दिए ,

रवि ने थोड़ा पीछे हैट इक किक उसके पेट में जड़ दी , जैसे hi वोह थोड़ा पीछे हटा , जिन लड़को ने रवि को पकड़ रखा था , रवि पोरे जोर से पीछे की तरफ उनको धकेलता हुआ इक गोल मज़े पर उनके साथ hi गिर गया ,

अभी रवि खड़ा hi हुआ था के इक कांच की बोतल ढाई तरफ माथे पर ा लगी , यह बोतल उन लड़को के लीडर ने मरी थी ,

रवि थोड़ा निचे झुक गया , उसके माथे से खून बहने लगा , खून बेहटा हुआ जब उसके होंठो तक पहुंचा, तब रवि को खून का मिटना सा स्वाद महसूस हुआ , उसकी आँखें ब्लू रंग में चमक उठी ,

रवि इक डैम से खड़ा हुआ और उस लड़के को गले से पकड़ ऊपर उठा दिया , उस लड़के के पेअर जमीन से ऊपर उठ गए ,

उसके दोनों दोस्त रवि को पीछे से मरने लगा ,

"कददायकककक..." की आवाज़ के साथ दो बोतल और रवि के साडी पर लग टूट गई , रवि ने उस लड़के को गले से उठाये hi दूर फेंक दिया , वोह इक मज़े पर जा गिरा , और मज़े भी उसकी वजन से टूट गया ,

फिर रवि ने पलट कर , उन दोनों लड़को को गुस्से से देखा ,

इक लड़के ने रवि के चेहरे पर मरना चाहा , रवि ने उसका हाथ बेच में hi रोक कर , उसकी पसलियों के थोड़ा निचे इक जोरदार पंच जड़ दिया , उसकी पसलियाँ टूट गई और मोह से खून पानी की तरह बहने लगा ,

दूसरा लड़का भागने लगा , रवि ने उसको पीछे से पकड़ , घुमा कर अपनी तरफ किया , और उसके हाथ को अपने कंडे पर रख जातक दिया ,

"आयईईईई माआआ..." हाथ की हड्डी टूटते hi वोह निचे गिरा दर्द सè तडफने लगा ,

दो लड़के जैसे तैसे उठ कर भाग गए , फिर रवि उस लड़के की तरफ बड़ा , जिसने स्वाति और रमा से बतमीज़ी से बात की थी , रवि ने उसे गर्दन से पकड़ उठा लिया ,

"क्यों बे सेल , मेरी बहिन को नंगी करेगा , और तोह और , मेरी फ्रेंड स्वाति को भी.." रवि ने दो तीन थपड उसके मोह पर जड़ते हुए बोलै ,

"भइआ छोड़ दो उसे.." रमा ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"शह्ह्ह्ह , स्वाति , ेहडेर ायो मेरे पास.."

स्वाति डरते डरते रवि के पास गई , वोह रवि के खून से लथपथ चेहरे को देख रही थी ,

"सेल , अभ यही स्वाति तुम नंगा करेगी , वोह भी अभी के अभी.."

"ः , में इस सोल्लगे का लीडर हु , पिछले साल की वोटिंग में मेरी जीत हुई थी , यह सब मेरे साथ हैं.."

"तू सिर्फ इस सोल्लगे का लीडर है , में इस पोरे शहर का लीडर हु , जनता है , रेहमान उल्ला के भाई को किसने मारा , मने मारा था , करीम खान को भी मने मारा था , दयँ से सुन लो सब , जो भी अभ मुज़से लड़ने आया , इस बार मरुँगा न , सीधा गर्दन मरोड़ कर जान ले लूंगा.." रवि ने सबकी तरफ गुस्से से देखते हुए बोलै.

रवि के मोह से यह बतिअन सुन वोह लड़का बेहद दर गया , उसके पेअर कम्पनी लगे ,

"रवि छोड़ दो उसे , प्लस..." स्वाति ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"शठ , और तू दयँ से सुन ले मेरी बात , तू लीडर है , इस बात से मुझे कोई फरक नै पढता , लेकिन अगर तूने कभी स्वाति की तरफ आँख उठा कर भी देखा , तोह ऐसी सोल्लगे में सबके सामने तुझे जान से मर दूंगा , चल निकल यहाँ से..." रवि ने उस लड़के को इक तरफ फेंकते हुए बोलै ,

फिर कुछ hi देर बाद सब तळ्यां बजने लगे ,

शयद वोह सब भी इस लड़के से बहुत परेशान थे ,

"भाई अप्प इस बार के इलेक्शन में जरूर खड़े होना , हम सब आपको जितवाना चाहते हैं.." इक लड़का रवि के करीब आकर बोलै ,

रवि ने रमा की तरफ देखा , जो हाँ में सर हिला रही थी ,

"ठीक है , लेकिन इक शरत पर.."

"वोह क्या भाई.."

"इस सोल्लगे में सिर्फ स्टडी होगी , न कोई ड्रग्स लेगा , न कोई किसी लड़की को उसकी ीचा के बिना परेशान करेगा , जो लड़के लड़कियाँ अपनी फीस पाय नै कर सकते या जिनको कोई लड़का या लड़की परेशान कर रहा है , अप्प उसकी पूरी जानकारी मेरी बहिन रमा को दे दो , बाकि में सब सम्बल लूंगा .." रवि ने सबकी तरफ देख कर बोलै ,

"भाई पहले अप्प हॉस्पिटल चलो.." रमा ने रवि का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए बोलै ,

उसके साथ hi रश्मि , प्रिय और स्वाति भी ऐनी लगी ,

रवि को िका इक डॉ अंजू का यद् आया , और dr.nelam का भी ,

"रमा गाड़ी गोवत हॉस्पिटल की तरफ ले लो..."

"ok भाई.."

फिर सभी हॉस्पिटल की तरफ चल पढ़े , लेकिन रवि नै जनता था , वह उसकी लाइफ चेंज होने वाली थी ...

तो बे कुनिटेड...
 
अपडेट-16

अभ अग्गे..

"भइआ क्या जरुरत थी लड़ने की.." रमा ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"अरे मेरी स्वीटू , पहले उसने स्वाति के साथ बतमीज़ी की , और बाद में तुम्हारे साथ , मुज़से बर्दाश्त नै हुआ.."

.

"अप्प जानते हो न , अप्प गुस्से में कितने कहकर हो जाते हो , फिर भी.."

"ाचा वोह कैसे रमा.." स्वाति ने थोड़ा परेशानी में पूछा ,

"स्वाति जब इनको गुस्सा अत है , तब यह सब कुछ भूल जाते हैं , और जान निकल देते हैं किसी की भी.."

"ओह्ह ऐसा क्या.." स्वाति ने डरते हुए गले से थूक निगलते हुए पूछा ,

"हहै , दर गई स्वाति तोह , में मज़ाक कर रही हु.."

रमा ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , स्वाति शर्म से पानी पानी हो गई ,

"स्वाति और तुम दोनों भी सुन लो , अगर तुम सबको कोई परेशान करे तोह मुझे बता देना .."

"जी बता देंगी.." सभी इक साथ बोली , और मुस्कराने लगी ,

"भाई अज्ज तोह पिटाई पाकी है मेरी.."

"वोह कैसे.."

"माँ , मारेगी मुझे.."

"ः , फिर तोह में कुछ नै कर सकता..."

रवि की बात सुन सब हसने लगे ,

ऐसी तरह प्यार भरी नोक जोक के साथ सब हॉस्पिटल पहुँच गए ,

हॉस्पिटल पहुँच रवि और बाकि सब अंदर ा गए , हॉस्पिटल के अंदर एते hi रवि की नज़र उस रूम की तरफ गई ,

यहाँ वोह ख़ुशी के साथ रहा था , कितने खुशनुमा पल थे ,

लेकिन ख़ुशी के दिए धोके ने सब बर्बाद कर दिया ,

रवि को इस बात का दुःख नै था के ख़ुशी , कुणाल से प्यार करती थी , बस दुःख इस बात का था , उसने पीछे से वॉर किया था ,

"भइआ किस डॉक्टर के पास जाना.."

"ओह्ह हाँ , फर्स्ट फ्लोर पर dr.anju से मिलना है .."

फिर रवि और बाकि सब फर्स्ट फ्लोर पर पहुँच गए ,

रवि ने निचे जब उस रूम को देखा था , तब उसमे कई डॉक्टर्स चिंता में अंदर बहार जा रहे थे ,

कुछ बात तोह जरूर थी , लेकिन रवि को समाज नै ा रहा था ,

रवि और बाकि सब dr.anju के केबिन के पास पहुँच गए ,

रवि ने रूम का दूर नॉक किया ,

"के इन.." अंदर से बेहद खूबसूरत आवाज़ आयी ,

रवि जैसे hi गेट खोल अंदर घुसा , dr.anju उस पर बार्स पढ़ी ,

अभी रवि अकेला hi अंदर घुसा था , बाकि बहार कड़ी थी ,

"कमीने , कुत्ते , अभ क्या लेने आया है तू.." dr.anju बेहद गुस्से में चीखते हुए बोली , उसे अंदाज़ा भी नै था के रवि के साथ कोई और भी है ,

तभी रवि के पीछे पीछे रमा , रश्मि , प्रिय और स्वाति भी अंदर ा गई , उन सब ने सब कुछ सुन लिया था , पर वोह मुस्करा रही थी ,

dr.anju शर्मा गई , उसे लगा था रवि अकेला आया होगा ,

"ओह्ह सॉरी.." dr.anju ने शरमाते हुए बोलै ,

"कोई बात नै , तुम्हारा हुक बनता है , मुझे गळ्यां देने का , अभ तुमसे मिलने नै आया तोह तुम गुस्सा तोह आएगा hi , सॉरी अंजू.." रवि ने कण पकड़ते हुए बोलै ,

"हे भगवन यह चोट कैसे लगी.." dr.anju ने जब रवि के चेहरे को देखा तोह वोह जल्दी से उठ कर उसके पास पहुँच गई ,

"अरे कुछ नै.."

"शट उप , तुम कभी सही सलामत मुज़से मिलने ए हो , जब भी एते हो , तुम चोट आयी hi होती है , कभी गोली लगी होती है , कभी कुछ , कभी कुछ.." dr.anju ने डेटोल से रवि के चेहरे को रोई से साफ करते हुए बोलै ,

"ाचा इनसे मिलो , यह मेरी बहिन रमा , यह इसकी फ्रेंड्स , यह रश्मि , यह प्रिय , यह स्वाति .." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाय .."

"हाय देदी.." सभी इक साथ बोल पढ़ी ,

"ोुछ्ह धीरे.."

"यह तोह कांच के टुकड़े जैसा कुछ है , कहा मर पीट की तुमने.."

फिर रवि ने अंजू को सब सचाई बता दी , अंजू बेहद खुश हो गई , उसने बड़े प्यार से रवि को मरहम पट्टी करदी ,

"ाचा उस परदे के पीछे लेट जाओ , मुझे इंजेक्शन लगाना है.."

"ok , तुम सब भी बेथ जाओ , यहाँ पर.." रवि ने सबकी तरफ देख कर बोलै ,

फिर अंजू और रवि उस ग्रीन परदे के पीछे पहुँच गए ,

अंजू बहुत धीरे से इंजेक्शन लगते हुए बोली ,

"कमीने कहा था तू , में दर गई थी , तुझे कुछ हो तोह नै गया.."

"मेरी जान , कुछ नै हुआ मुझे , ाचा अपना नंबर देदो मुझे.."

dr.anju ने अपना माथा पीट लिया ,

"हे भगवन 4 बार तुझे अपना नंबर दे चुकी हु , इक बार और लिख ले.." अंजू ने मुस्कराते हुए बोलै ,

फिर अंजू ने अपना नंबर दे दिया , और झुक कर रवि के होंठो को चुम लिया ,

"ाचा अंजू यह निचे इक रूम में बहुत से डॉक्टर्स टेंशन में भागे फिर रहे हैं , क्या बात है.."

"वोह रवि , ठाकुर की बेटी ख़ुशी , जो पहले तुम्हारे साथ थी , वोह एडमिट हुई है कल यहाँ पर.."

"क्यों .."

"डॉक्टर्स बता रहे थे , पिछले कुछ दिनों से वोह लगातार शराब पे रही थी , इस लिए उसका लिवर डैमेज हो चूका है , वोह दवाई भी नै ले रही , बहुत मुश्किल से कण्ट्रोल कर रहे है उसको.."

"ओह्ह्ह , वोह बच तोह जाएगी न.." रवि ने थोड़ा उदास सा होते हुए बोलै ,

"यह तोह अभ ख़ुशी के हाथ में है , अगर वोह दवाई लेती रहे , और शराब पीना छोड़ दे , बूत उसकी जीने की ीचा जैसे ख़तम हो गई है , जब होश में अति है , बस रोटी रहती है , मेरी तोह खुद की आँखें नाम हो जाती है उसकी हालत देख कर..." अंजू ने अपने असनु साफ करते हुए बोलै , लेकिन उसने कुछ छुपा लिया रवि से ,

"उफ़ तुम क्यों रो रही हो , मेरी जान , अभ रोना बंद करो , ाचा में सोच रहा हु , के अगले कुछ दिन तुम्हारे साथ बितौ , मुझे अपना नौकर बना कर रख लो न.." रवि ने अंजू के मोठे मोठे चुचु को दबाते हुए बोलै ,

"ोूछह , में क्यों राखु तुम , क्या सच में तुम मेरे पास रहोगे.."

"हम्म , लेकिन सैलरी देनी होगी.."

"उम् , कितनी.."

"वोह तोह में खुद ले लूंगा , दिन में 3 बार लूंगा सैलरी.."

इतना बोल रवि ने अंजू की छूट को मसल दिया ,

"ओह्ह्ह कमीना कही का , ाचा अभ जाओ , तुम्हारी बहिन शक करेगी.." अंजू इतना बोल वह से पलट कर बहार ा गई ,

"देदी इतना टाइम इंजेक्शन लगाने में.." रमा ने हस्ते हुए बोलै ,

अंजू , रमा की बात सुन शर्मा गई ,

"हाँ तोह कितने पैसे हुए डॉ जी.."

रवि ने जैसे hi यह पूछा , अंजू इक खली इंजेक्शन लेकर उसे मरने डोडी ,

यह देख सब लड़कियाँ हसने लगी ,

"रमा जी , अपने भाई को समझो , अगर दुबारा पैसो की बात की तोह जानवरो वाला इंजेक्शन लगा दूंगी .." अंजू ने हस्ते हुए बोलै ,

"देदी यह क्या बात हुई , में आपसे छोटी हु , मुझे बस रमा hi कहो , चले भइआ घर , बहुत देर हो गई है.." रमा ने मुस्कराते हुए पूछा ,

फिर रवि ने अंजू से दुबारा मिलने का वादा लिया और सबके साथ निचे ा गया ,

रवि फर्स्ट फ्लोर से निचे आकर रुक गया , वोह उस रूम की तरफ देखने लगा ,

"रमा तुम सभी बहार चलो , में मेडिकल से कुछ दवाई लेकर अत हु.."

"जी भाई.."

रमा और उसकी फ्रेंड्स बहार चली गई ,

रवि धीरे धीरे से उस रूम की तरफ बढ़ने लगा ,

रवि ने थोड़ा सा अंदर ज़क कर देखा तोह उसकी आँखें नाम हो गई ,

अंदर ख़ुशी की हालत पागलो जैसी थी , बाल बिखरे हुए , चेहरे पर चोट के निशान थे , पूरा शरीर सुख सा गया था ,

"तुम सब से बोल दिया न , नै कहानी मुझे दवा , निकालो यहाँ से , कुत्तो बहार जाओ , अह्ह्ह्हह मेरे हाथ छोड़ो , अह्हह्ह्ह्ह रवि बचाओ मुझे रवीए , अह्ह्ह्हह छोड़ो मुझे , मरने दो प्लस , मुझे मर कर रवि के पास जाना है , अह्ह्ह्हह छोड़ दो , रावी मुझे ले चलो अपने पास अह्ह्ह्ह.." ख़ुशी पागलो की तरह तड़फ रही थी , डॉक्टर्स ने उसे पकड़ कर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया , फिर ख़ुशी गहरी नंद में सो गई ,

रवि की आँखों से असनु बहने लगे , कुछ डॉक्टर्स उसके पास से गुजरे , रवि उनकी बतिअन सुन रहा था ,

" वैरी क्रिटिकल सिचुएशन, अगर रवि नै लोटा तोह यह मर जाएगी..." इक डॉक्टर दूसरे डॉक्टर को बोल रहा था ,

"लेकिन रवि तोह मर चूका है , ठाकुर साहब बोल रहे थे.."

"फिर यह भी नै बचेगी , इसके जीने की ीचा ख़तम हो चुकी है , काश के रवि जिन्दा होता तोह ख़ुशी बच जाती .." रवि कुछ देर उनके पीछे चलता हुआ उनकी बतिअन सुनता रहा , और फिर वापिस ख़ुशी के पास ा गया ,

अभ ख़ुशी के रूम में कोई नै था ,

रवि ने रूम के अंदर जाकर ख़ुशी के बालो को प्यार से सहलाया और निचे झुक उसका माथा चुम लिया ,

"में ा गया मेरी जान , में कल से यही रहुगा तुम्हारे साथ , तुम बचा कर कही दूर ले जाउगा , बस कल तक का इंतज़ार करना , bye खुशु , उम्मा.." रवि ने रट हुए यह बोलै और निचे झुक ख़ुशी के होंठो को चुम लिया ,

"ेहः मिस्टर कोण हो तुम.." इक नर्स ने गुस्से में छीलते हुए बोलै ,

"शहहह , दीखता नै , सो रही है मेरी जान.. "

"लेकिन तुम हो कोण.."

"रवि..."

नर्स ने जैसे hi यह सुना वोह अपना सार पकड़े निचे गिर गई , उसे पता था के रवि मर चूका है ,

रवि मुस्कराते हुए उसके पास से गुजर गया , और बहार आकर गाड़ी में बेथ गया ,

"भइआ इतनी देर.." रमा ने गंभीर होकर बोलै ,

"अरे वह भीड़ बहुत थी.."

"हम्म , लेकिन दवा कहा है , जो अप्प लेने गए थे ."

"अरे मेरी माँ , मने कहा न , भीड़ बहुत थी तोह में बहार ा गया .."

"ओह्ह .."

"ाचा रमा , हम सब उसी जगह घूमने चले , मतलब , में तुम और तुम्हारी फ्रेंड्स .."

"जंगल में कोण घूमता है भाई..." रश्मि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"ेहः dr.gulati चुप कर तू.." प्रिय की बात सुन सब हसने लगे ,

"उस जंगल के बेच इक कबीला रहता है , बहुत मोडरें है , तुम सबको वह जरूर जाना चाहये , कुछ दिनों बाद का प्रोग्राम रखते हैं.."

"ok..." सभी इक साथ बोल पढ़ी ,

फिर रवि ने रमा की फ्रेंड्स को सोल्लगे छोड़ा और रमा के साथ घर की तरफ निकल गया ,

"भइआ यह dr.anju के साथ तुम्हारा क्या चाकर है"

रवि ने अपना माथा पीट लिया ,

"अरे मेरी माँ , वोह बस मेरी दोस्त है"

"दिख रहा था मुझे"

"ाचा बताता हु , अज्ज से 10 साल पहले जब में चाचा जी के घर गया था , तब अंजू को हॉस्पिटल में छोड़ दिया था , बस उसके बाद 8 साल बाद मिला , बूत उसने मुज़से कहा के उसके पति काम के सिलसिले में बहार रहते हैं तोह में उसको कभी कभी मिलता राहु , उसके बाद बस 2 बार सेक्स किया है मने , और कुछ नै..."

"हे भगवन , कितने हवसी हो अप्प.. "

"गाड़ी रोको तुम.." रवि ने गुस्से में बोलै ,

"क्या हुआ भाई.."

"अज्ज के बाद कभी मुज़से बात मत करना.."

"सॉरी भइआ , प्लस ऐसे मत बोलो , में मर जोगी आपके बिना.." रमा ने रट हुए बोलै ,

"जानती हो हवसी इंसान को होता है , जो किसी से रपे करता है , मैं तुम सब से प्यार करता हु , किसी के साथ अज्ज तक मने जबरदस्ती नै की , अगर तुम मुझे हवसी समज़ती हो , जिंदगी में कभी मेरे करीब मत एना.." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"प्लस भइआ माफ़ कार्डो , मेरे मोह से निकल गया.." रमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"पहले कोमल ने मुज़से यह बोलै , और अभ तुम , तुम सब को अगर में प्यार हवस से भरा लगता है , तोह किसी और से करलो प्यार , मैं तुम में से किसी को नै रोकूंगा , पर प्लस , मुझे हवसी कह कर मेरे प्यार का अपमान मत करो , में अंजू से जायदा मिलता भी नै हु , पर उसके दिल में जो मेरे लिए प्यार है , वोह तुम सब में मुझे नै दीखता , अभ घर चलो.."

"भइआ इक बार माफ़ कार्डो , अग्गे से कभी भी ऐसी गलती नै करुँगी , प्लस भइआ , प्लस इक बार माफ़ कार्डो.."

"शट उप , चुप हो जाओ , घर तक अपना मोह मत खोलना , मुझे अपना मन शांत करने दो.."

रमा खामोश हो गई , पर उसका रोना बंद नै हुआ , वोह घर पहुँचने तक सिसकती रही ,

जब दोनों घर पहुँच गए तब रमा कार से उतरने लगी , तभी रवि ने उसका हाथ पकड़ उसे खींच कर अपनी बहु में भर लिया ,

"भइआ माफ़ कर दो , मने मज़ाक में बोलै था.." रमा ने रट हुए बोलै ,

"शठ बस भूल जाओ उस बात को , सॉरी मेरी जान , ी लव ु.." रवि ने कास कर रमा के होंठो को चूस लिया , रमा मुस्कराती हुई कार से उतर कर घर भाग गई ,

तो बे कुनिटेड...
 
अपडेट-17

अभ अग्गे...

सीमा अभ भी कोमल के उस लॉकेट को हाथो में लेकर बैठी हुई थी ,

फिर उसने सोच लिया के पहले काल से बात करेगी और फिर hi रवि को यह लॉकेट पहनाएगी ,

"पिता जी मुझे आपसे बात करनी है , प्लस ा जाओ.." सीमा ने आँखें बंद कर ली ,

कुछ hi देर बाद रूम ने अँधेरा सा हो गया , सीमा ने अपनी आँखें खोल देखा , तोह काल उसके सामने खड़ा था ,

"पिता जी मुझे आपसे बहुत जरुरी बात करनी थी.."

"जनता हु में , कोमल का लॉकेट तुम मिल गया है , और कोमल का वोह सपना जो तुम अभी कुछ देर पहले आया था , वोह अग्ग में जल रही थी.."

"हाँ , पर आपको सब पता है.." सीमा काल से बेहद प्रभावित होते हुए बोली ,

"कोमल का वोह सपना बिलकुल सच था.."

"क्या , मेरी कोमल इतनी मुसीबत में है.." सीमा ने नाम आँखों से बोलै ,

"में जनता हु , तुम रवि से अधिक प्रेम कोमल से है , मने तुमसे कहा था , तुम इक दिन क़ुरबानी देनी होगी , जानती हो वोह क़ुरबानी क्या होगी.." काल ने सीमा की चेहरे के भावो को पढ़ते हुए बोलै ,

"नै जानती हु.."

"अभ सुनो दयँ से , जब तुम यह लॉकेट रवि को पहनोगी , तभी तुम वोह रिंग खुद अपनी ऊँगली में पहननी होगी , समाज गई मेरी बेटी.." काल ने बेहद दर्द आवाज़ में बोलै ,

"ओह्ह में त्यार हु , पर उस रिंग को में hi क्यों पहन सकती हु.."

"रवि को हमने इस लिए चुना था क्यों की उसके दिल में हर किसी के लिए प्रेम था , कोई ेरखा नै था , सबसे इक जैसा प्यार था , और तुम्हारे अंदर भी वही गन मज़द हैं , तुम रवि से प्यार करती hi हो , पर उसकी बहनो से भी उतना hi प्यार करती , जब की तुम पता है , के उनके सम्बंद रवि से कैसे हैं , मने कभी तुम्हारे मन में किसी के लिए ेरखा नै देखि , न hi जलन के भाव , और तोह और मेरे कहने मटर से hi तुमने रमा को अपने पति को सौंप दिया , तुम से बड़ा दिल रवि का भी नै , इस दुनिआ में रवि के बाद तुम hi इक लड़की हो जो रिंग को धारण कर सकती हो.." काल ने बहुत शांत आवाज़ में सीमा को सब समझते हुए बोलै ,

"जी , में सब समाज गई , रिंग को में पहन लुंगी , यह क़ुरबानी में दूंगी , लेकिन इस लॉकेट का रवि पर क्या असर होगा , जो कोमल ने मुझे खास सपने में बताया.." सीमा ने लॉकेट को घर कर देखते हुए बोलै ,

"यह लॉकेट कोमल ने खुद बनाया था , अपनी बरसो की म्हणत से , कोमल जानती थी इक दिन उसे क़ुरबानी देनी होगी , तभी उसने आखरी वख्त पर यह लॉकेट अपने भाई को पहना दिया , इस लॉकेट में कोमल का प्यार बसा हुआ है , अभी रवि कोमल से नफरत करता है , पर यह लॉकेट उसे कोमल के असीम प्यार का एहसास दिलवाएगा , और तोह और , उसे उन दुश्मनो से लड़ने में मदद करेगा , जो इंसान नै हैं , यही लॉकेट रवि को कोमल तक लेकर जायेगा , क्यों की कोमल इसकी मालकिन है , यह जायदा दिन अपनी मालकिन से दूर नै रह सकता , जब रवि इसको पहन लेगा , यह रवि को हथियार बना कर कोमल को वापिस लाएगा , बस तुम किसी तरह रवि से दूर होना पड़ेगा , वोह वख्त कब आएगा में तुम बता दूंगा..." काल इतना बोल वह से गयाब हो गया ,

सीमा को अभ सब समाज ा चूका था , इक तरह से वोह कोमल से प्यार करती थी , जंगल में रहते हुए दोनों बहुत करीब ा गई थी ,

पर यह नै था के सीमा को रवि से प्यार नै था , पर कोमल की कमी उसे हर पल महसूस होती थी , उसे लगता था , रवि और वोह , दोनों कोमल के बिना अधूरे हैं ,

सीमा अपनी सोचु में घूम थी , के किसी ने दरवाजा खटका दिया ,

सीमा ने उठ कर दरवाजा खोला तोह रमा ख़ुशी से उसके गले लग गई ,

"क्या हुआ मेरी बेटी को , इतनी खुश क्यों है.." सीमा ने रमा का माथा चूमते हुए बोलै ,

"माँ , अज्ज पता है सोल्लगे में क्या हुआ " रमा ने सब अपनी माँ को बता दिया ,

इक बार तोह सीमा थोड़ा उदास हो गई , पर फिर वोह मुस्कराने लगी ,

"उम् , मुझे गर्व है मेरी बेटी पर , उसे कितना प्यार करने वाला हमसफ़र मिला है.."

"माँ , क्यों अप्प अपना प्यार मुज़से बाँट रही हो.." रमा ने रट हुए बोलै ,

"ओह्ह हो मेरी बची , बात यह है के में तुम दूर नै करना चाहती , में तेरी जुदाई बर्दाश्त नै कर पाउगी , जब तुम बीमार थी और छोटी सी बची बन गई थी , तब मुझे ऐसा एहसास होता था , जैसे मने तुम अपने पेट से जनम दिया हो , ऐसी लिए मने कोई बचा नै लिया , क्यों की तू मेरी बेटी थी , मेरी प्यारी बेटी , अगर तुझे दर्द होता था , में बहुत रोटी थी , तुझे कभी इक पल के लिए भी खुद से दूर नै किया , तेरी ख़ुशी मेरी ख़ुशी है...." सीमा ने रमा के चेहरे को चूमते रट हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह मेरी माँ , मेरी प्यारी माँ , यही समाज लो , के अपने मुझे अपने पेट से जनम दिया है , ी लव ु माँ , लव ु..." रमा ने बेहद रट हुए सीमा के चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

"बस कर पगली रुला दिया तुमने तोह , मेरी बची , ाचा अज्ज भइआ ने कुछ किया या नै , किश -विस्स कुछ.." सीमा ने बड़े प्यार से पूछा ,

"क्या माँ , मुझे शर्म ा रही है.." रमा के गोर गाल शर्म से लाल हो गए , वोह बेहद शर्मा रही थी ,

"ल्यो जी , मेरी जवान बेटी शर्माती भी है , हहै , रमा मेरी जान , मेरी बेटी.." सीमा ने कास कर रमा को अपनी बहु में भर लिया ,

"ाचा रमा पढाई पर दयँ देती हो या नै.."

"युपपप , नै माँ , पिछले कुछ दिनों से दयँ नै दे पायी.."

"ाचा जी , अज्ज रत को मेरे पास बेथ कर पढाई करना , कोई मोबाइल नै , कोई भइआ नै , चलो अभी तुम खाना देती हु , वोह तेरा लफंगा कहा है .." सीमा ने हस्ते हुए पूछा ,

"वोह बहार होंगे.." रमा ने शरमाते हुए बोलै ,

"चलो फिर हमारे पतिदेव को खाना खिलाती हैं , दोनों मिल कर.." सीमा ने हस्ते हुए बोलै तोह रमा शर्माने लगी , उसे समाज नै ा रहा था , उसकी माँ का दिल इतना बड़ा कैसे है , उसे अपनी माँ पर इतना प्यार ा रहा था , के उसका चेहरा चुम चुम कर लाल कर देती ,

फिर दोनों बहार की तरफ चल पढ़ी ,

वही दूसरी और...

रवि जब घर के अंदर आया , तब रिमी और शूरति सोफे पर बैठी हुई थी ,

"अरे मेरी दोनों परयाण क्या कर रही हैं.." रवि ने रिमी और शूरति के बेच सोफे पर बैठते हुए बोलै ,

"ओह माय गॉड , क्या हुआ भइआ आपको.."

"प्लस , प्लस , रोना मत तुम दोनों , में बता देता हु.." फिर रवि ने दोनों को सब बता दिया ,

"भइआ अप्प इतने अचे क्यों हो.." रिमी यह बोल रवि के गले लग गई ,

"अरे भाई मुझे भी जगह देदो थोड़ी सी.." शूरति ने हस्ते हुए बोलै ,

फिर दोनों कुछ देर रवि के गले लगी रही ,

रिमी कुछ दिनों से कुछ सोच रही थी , वोह कुछ सोचते हुए उठी और अपने रूम में चली गई ,

"ऐसे क्या हुआ .."

"कुछ नै , पिछले कुछ दिनों से कुछ सोच रही है , बताती भी न मौसे..." शूरति ने कुछ परेशान होकर बोलै ,

"हम्म , कोई बात नै , में बात कर लूंगा.."

"जी भाई.."

"और मेरी बीवी कैसी है.."

"सीमा भाभी तोह रूम में होंगी.."

शूरति की बात सुन रवि ने अपना माथा पीट लिया ,

"में तुम्हारी बात कर रहा हु पगली.." रवि ने शूरति के होंठो को चुम कर बोलै ,

"क्या भाई , अप्प भी न.." शूरति ने शरमाते हुए बोलै ,

"देखो अभ मुझे तुम , ेहः जी , ओह्ह जी , सुनते हो , ऐसे बुलाया करो , आखिर तुम मेरी पत्नी हो , समाज गई.."

"भइआ बहुत शर्म ा रही है मुझे.." शूरति ने अपना चेहरा अपने हाथिओं में लेते हुए बोलै ,

"अरे हमसे क्या शर्माना , हम तोह तुम्हारे पति हैं.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

शूरति वह से उठ कर जाने लगी तोह रवि ने उसका हाथ पकड़ उसे अपने साथ बिठा लिया ,

"जाने दो न प्लस.." शूरति ने खूबसूरत लबु में मुस्कराते हुए बोलै ,

"में तोह यही पूछना चाहता था , हमारी सुहागरात कब होगी.." रवि की बात सुन शूरति ने अपना चेहरा उसके सीने में छुपा लिया ,

तभी सीमा और रमा हस्ती मुस्कराती हुई घर के हॉल में ा गई ,

"सुनते हो जी , अगर अप्प दोनों का प्यार -व्यार हो गया हो तोह , ा जाइए डाइनिंग टेबल पर , में खाना लगा रही हु..." सीमा ने हस्ते हुए बोलै तोह रमा भी खिलखिला कर हसने लगी ,

शूरति तोह शर्म से पानी पानी हो गई , वोह उठी और अपने रूम में भाग गई ,

रवि भी मुस्कराते हुए उठा और डाइनिंग टेबल पर बेथ गया , रमा भी रवि के सामने बैठी थी ,

"क्या हुआ रमा , बार बार क्यों मुस्करा रही हो.."

"नै जी , ऐसी तोह कोई बात नै..." रमा ने शरमाते हुए बोलै ,

रवि का मोह खुला का खुला रह गया रमा की बात सुन कर ,

तभी सीमा खाना लेकर ा गई ,

"क्या हुआ जी , इतना मोह क्यों खोल रखा है , खाना ला रही थी में , अप्प भी न.." सीमा ने हस्ते हुए बोलै तोह रमा भी हसने लगी ,

"माँ अप्प खाना खिला दो न मुझे.." रमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"मुझे भी खिलाओ.." रवि ने रमा को आँख मरते हुए बोलै ,

"अभ तुम दोनों को ऐसे कैसे खिला दू , रवि तुम यहाँ रमा के साथ आकर बेथ जाओ.." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि उठ कर रमा के साथ बेथ गया , फिर सीमा दोनों को प्यार से खाना खिलने लगी , रवि और रमा दोनों खुश हो गए ,

खाने के बाद , रमा , सीमा के पास किचन में चली गई , और रवि सोफे पर बेथ गया ,

तभी उसे कुछ यद् आया ,

"सीमा में बेबी से मिलने जा रहा हु.."

"हाँ जा ायो.." सीमा किचन में से hi बोली ,

रवि मुस्कराते हुए बेबी के घर की तरफ चल पढ़ा ,

तभी उसे फर्जी की यद् ा गई , उसने रस्ते से कुछ चॉकलेट्स खरीद ली , फिर वोह बेबी की घर के सामने पहुँच गया ,

रवि ने दूर बेल्ल बजे तोह कैटलीन ने दरवाजा खोल दिया ,

इक बार तोह कैटलीन रवि को देख हड़बड़ा गई , क्यों की बार बार बेबी की बतिअन उसके मन में तूफान मचा रही थी ,

कैटलीन मुस्कराते हुए इक तरफ हो गई , और रवि घर के अंदर घुस गया...

कैटलीन भी मुस्कराती हुई रवि के पीछे पीछे अंदर ा गई ,

रवि ने सामने देखा तोह उसका दिल ख़ुशी से ज़ूम उठा ,

होता भी क्यों न , फर्जी अज्ज स्कूल ड्रेस में बैठी हुई थी , वोह थोड़ी दरी दरी सी थी ,

बेबी उसे अचे से त्यार कर रही थी ,

कैटलीन भी रवि के पास आकर कड़ी हो गई ,

"काट , बेबी तोह रियल की माँ बन गई है.."

"रवि में भी माँ बन चुकी हु , फर्जी हम दोनों की बेटी है.."

रवि काट की बात सुन हरिजन सा हो गया ,

जैसे hi बेबी की नज़र रवि पर गई , उसने इशारे से उसे अपने पास बुला लिया ,

रवि भी बेबी और फर्जी के साथ सोफे पर बेथ गया ,

"फर्जी , पापा को hello बोलो.."

"हलो पापा.." फर्जी ने बहुत मसोमीयत से बोलै ,

"फर्जी तुम पता है , तुम्हारी मुम्मा कितनी खूबसूरत है , पर यह सारा प्यार तुमको hi करती है , मुझे तोह करती hi नै.." रवि ने बुरा सा मोह बना कर बोलै ,

रवि की बात सुन फर्जी और काट हसने लगी ,

"ाचा फर्जी यह देखो में तुम्हारे लिए चॉकलेट लाया हु.."

"रवि इतनी साडी , इसके दन्त ख़राब हो जायेगे.."

"नै होंगे मुम्मा , पापा , लव ु.." फर्जी ने रवि के गाल को चुम लिया ,

फिर कैटलीन , फर्जी को अपने साथ बहार ले गई , क्यों की स्कूल बस ा चुकी थी , कैटलीन ने बड़े प्यार से फर्जी के गालो को चुम कर उसे बस में बिठा दिया , और इक लड़की से उसकी दोस्ती भी करवा दी ,

फिर कैटलीन वापिस घर के अंदर ा गई , उसने महसूस किया था , बस ड्राइवर उसे खा जाने की नज़रिओं से घर रहा था ,

पर कैटलीन सभी मर्दो की फितरत को जानती थी , यह उसकी जिंदगी में बहुत बार हो चूका था , लेकिन उसे रवि की नज़रिओं में अपने लिए इक सामान सा दीखता था , उसकी नज़रिओं में हवस नै थी , वोह मुस्कराती हुई घर के अंदर ा गई ,

उसने देखा बेबी और रवि रूम के अंदर हैं , वोह दरवाजे के पास जाकर उनकी बतिअन सुनने लगी...

तो बे कुनिटेड ...
 
अपडेट-18

रवि ने बेबी को अपनी बहु में भर रखा था ,

"हाय मेरी जान , कैसी हो तुम.." रवि ने बेबी के रास भरे होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"अछि हु.."

"यह चोट कैसे लगी तुम.." बेबी ने रवि के माथे की तरफ देख कर बोलै ,

फिर रवि ने सब बता दिया , जो सोल्लगे में हुआ था , रवि की बात सुन बेबी उसके गले लग गई , उसे रवि पर गर्व था ,

"इक किसी दो न.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"काट से पूछ लो , मेरी वाइफ है वोह.."

"ओह्ह ाचा जी , तुम्हारे पास कोनसा लुंड है , ाचा काट को छोड़ती कैसे हो तुम..." रवि ने बेबी के कैसे हुए चुचु को कास कर दबाते हुए पूछा ,

"चल हैट , गंदे कही की , में क्यों बताऊ , तुम खुद hi काट से पूछ लो.." बेबी ने आँखों में इक शरारत भरते हुए पूछा ,

"यार बेबी में उसकी बहुत इजाजत करता हु , मेरे पास पहले hi बहुत प्यार करने वाली हैं , जैसे रिमी , शूरति , रमा , सीमा , और तुम , में उसकी जिंदगी नै बर्बाद कर सकता , वोह सिर्फ तुम्हारी है , वोह तुमसे प्यार करती है , वादा करो , कभी उसे उकसयोगी नै के वोह मेरे साथ सेक्स करे..." रवि ने बेबी की आँखों में देख बोलै ,

बेबी की आँखें नाम हो गई और फिर वोह रोने लगी ,

"उफ़ रवि कितना ाचा इंसान है , मेरे जैसी लड़की को भी तुखरा दिया , बस बेबी की ख़ुशी के लिए.." काट ने अपनी आँखों में ए असनुईओं को साफ करते हुए बोलै ,

"ओह्ह रवि म सॉरी , में बस यही चाहती थी के कैटलीन भी वोह महसूस करे जो में तुम में महसूस करती हु.." बेबी ने नाम आँखों से बोलै ,

"बस इतनी सी बात.."

"मतलब.."

"मेरी जान , अगर वोह कभी मर्द के करीब गई तोह तुम उसे खो डौगी.."

"में अपनी ख़ुशी के लिए अपनी काट को धोका दू , नै रवि में इतनी खुदगरज नै हु , प्लस उसे प्यार दो , प्लस.." बेबी ने रट हुए बोलै ,

"नै जान , उसका जनम बस तुम्हारे लिए हुआ है , मने तुम्हारी निशा को तुमसे चीन लिया , पर अभ कैटलीन को नै चीन सकता , प्लस , मुझे मज़बूर मत करो .." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

"उसमे तुम्हारी कोई गलती नै थी बाबू.."

"गलती थी , मेरे कारन hi वोह सब हुआ , जूही नाम की मासूम लड़की इक किलर बन गई , मेरे कारन , वोह पता नै कोनसा मनहूस वख्त था , जब में तुमसे मिला , काश के में कभी तुमसे मिला hi नै होता.." रवि ने रट हुए बोलै ,

बहार कड़ी कैटलीन को जब बेबी की सचाई का पता चला तोह वोह फुट फुट कर रोने लगी ,

उसे विश्वास नै हो रहा था , उसके बिना भी बेबी की जिंदगी में कोई लड़की थी ,

"शठ चुप हो जाओ , निशा को तुमने नै मारा था , लेकिन अभ कैटलीन hi मेरी निशा है , प्लस उसे वोह ख़ुशी दो , वोह प्यार दो , जो मेरी निशा कभी न प् सकीय..." बेबी ने अपने हाथ जोड़ते हुए बोलै ,

कैटलीन पगलू की तरह रोये जा रही थी , वोह नै जानती थी के बेबी उसे इतना चाहती है ,

"इसका अंजाम पता है क्या होगा.."

"मुझे परवाह नै.."

"वोह तुम छोड़ कर चली जाएगी , इक मर्द के साथ सेक्स का जो एहसास उसे मिलेगा , तोह वोह रुक न पायेगी , तुमसे दूर हो जाएगी , और में यह नै चाहता.."

"प्लस रवि , मुझे इसकी चिंता नै है , उसे प्यार दो , वोह बरसो से भुकी है , प्लस.." बेबी ने रट हुए अपने हाथ फिर से जोड़ते हुए बोलै ,

तभी रूम का दरवाजा इक डैम से खुला और कैटलीन भाग कर बेबी से लिपट गई , उसे पगलू की तरह चूमने लगी ,

"शठ मुझे किसी मर्द का प्यार नै चाहये, तुम मेरे पास हो , बस में ऐसी से खुश हु , ाईदा कभी तुमने यह बोलै तोह में अपनी जान दे दूंगी.." कैटलीन ने कास कर बेबी के होंठो को चूसते हुए बोलै ,

रवि ने कभी दो लड़कयों को प्यार करते नै देखा था , दोनों के होंठ बेइंतहा नरम थे , रवि का लुंड इक डैम से खड़ा हो गया ,

"चल हैट बदमाश , रवि बैठा है.."

कैटलीन को जब यह एहसास हुआ तोह वोह शर्माने लगी ,

"ाचा में चलता हु जान.."

"ठीक है , कल मिलने एना मुज़से.."

"ok , bye काट.." रवि इतना बोल वह से बहार ा गया ,

रवि के जाते hi काट बोली ,

"क्या बोल रही थी कामिनी , रवि को , में क्या भुकी हु प्यार की.." कैटलीन ने बेबी को अपने साथ बीएड पर सुलाते हुए बोलै ,

"हम्म , तुम बहुत भुकी हो , मेरी छूट को चाट चाट कर लाल कर देती हो , कितनी भुकड़ हो तुम , में hi जानती हु.." बेबी ने हस्ते हुए बोलै ,

"उफ़ , तुमने hi तोह बनाया मुझे इतना भुकड़ , नै तोह अभ तक में और कितने लोग की जान ले चुकी होती..." कैटलीन ने बेबी को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"उम् , ाचा किया मने , वार्ना में तुम खो देती , ाचा अभ खाना बना ले , बाकि प्यार रत ko.."baby मुस्कराते हुए उठी , और फिर दोनों खाना बनाने लगी ,

वही दूसरी और..

रवि घर वापिस ा गया , उसने देखा , सभी बहार सोफे पर बैठी हुई थी ,

रमा और सीमा उसकी तरफ कुछ अजीब नज़रिओं से देख रही थी ,

सीमा बार बार रमा के कण में कुछ बोल रही थी ,

और रमा शरमाते हुए हस्स रही थी ,

वही दूसरी और शूरति और रिमी भी आपस में बतिअन कर रही थी ,

रिमी अज्ज रवि को बहुत बेचैन नज़रिओं से देख रही थी ,

पता नै उसके मन में क्या चल रहा था ,

जब रवि सबके पास आकर बेथ गया , तब चारो उसे घर कर देखने लगी ,

"रवि कल राखी है , पर इक मुसीबत भी है.." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"और वोह मुसीबत क्या है.."

"यह तीनो तुम राखी नै बंदना चाहती.." सीमा ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"क्यों.."

"भइआ मेरी तोह न है.." रिमी इतना बोल अपने रूम में चली गई ,

"मेरी भी.." शूरति ने नज़रियन ज़ुका कर बोलै ,

"और तुम.." रवि ने रमा की तरफ देख कर बोलै ,

"मने तोह अज्ज hi आपको बोलै था.." रमा इतना बोल सीमा की तरफ देख कर मुस्करा दी ,

रवि खामोश हो गया , ें तीनो को समझना मतलब पत्थर पर सार मरने जैसा था ,

फिर रवि को िका इक कोमल की यद् ा गई , उसने भी तोह कभी उसे राखी नै बंदी थी ,

बचपन से लेकर जब उसकी सूरत सम्बली थी , तब से उसने राखी बंदना बंद कर दिया था ,

और फिर वोह जब शहर रहने आयी , तब तोह 8 सालो तक रवि ने उसकी शकल तक नै देखि थी ,

फिर ऐसी तरह रत हो गई , सबने मिलकर खाना खाया ,

और फिर सब सोफे पर बेथ बतिअन करने लगे ,

रिमी फिर वैसे hi खामोश थी , वोह कुछ नै बोल रही थी ,

रवि ने सोचा मामला कुछ गंभीर है , सुबह इससे बात करुगा..

सीमा ने रमा को कुछ बोलै और उठ कर स्टोर रूम की तरफ चली गई , उसने दरवाजे के पास पहुँच कर पीछे की तरफ देखा और रवि को आवाज़ लगा दी ,

"रवि मेरी हेल्प करना , कुछ कपडे निकलने थे , सर्दी ा रही है .." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि उठ कर सीमा के पास पहुँच गया , और अंदर आकर बोलै ,

"कोनसे कपडे.."

"बेवकूफ.." सीमा , रवि के करीब कड़ी होक बोली .." बहाना भी नै समज़ता ." इस से पहले रवि कुछ बोल पता , सीमा ने उसे कास कर अपनी बहु में भर लिया और गुलाबी नरम होंठ उसके होंठो पर रख दिए ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सीमा" रवि मज़े से सिसक उठा और वोह भी सीमा के रसभरे होंठो को अपने होंठो में लेकर चूसने लगा , सीमा भी अपने होंठ रवि के होंठो से रगड़ रगड़ कर चूसने लगी ,

"अह्ह्ह्हह्हह रविइइइइइइ जल्दी कर लो , इस से पहले कोई देख ले.." सीमा वासना में लिपट ाहहए भर्ती हुई बोली , जब रवि ने उसके होंठो को चूमते हुए उसके मोठे मोठे चुचु को अपने हाथो में कास कर मसल दिया ,

"उफ्फ्फ सीमा " रवि उसके होंठो को अपने होंठो में खींच खींच चुस्त हुआ बोलै " अभ नै रहा जाता सीमा.."

"मुज़से भी नै रहा जायेगा रवि.." सीमा उसके सीने से कास कर लिपटते हुए बोली , रवि ने सीमा का नाज़ुक हाथ पकड़ कर पेण्ट के ऊपर से hi अपने खड़े हो चुके लुंड पर रख दिया ,

" देखो सीमा क्या हॉल है मेरा.." रवि के मोठे खड़े लुंड को अपने नाज़ुक हाथो में महसूस कर सीमा की बेताबी और बढ़ गई , वोह रवि के लुंड को अपने हाथ में कास कर दबाते हुए रवि की तरफ देख कर बोली.." रविइइइइ मेरा भी यही हॉल है.."

"उफ़ सीमा कुछ करो न.." रवि ने अपने होंठ फिर से सीमा के होंठो से जोड़ते हुए बोलै , इतने में उन दोनों को रमा की आवाज़ सुनाई दी , दोनों अलग हो गए , सीमा घबरा कर रवि की तरफ देखती हुई बोली .." आयी रमा बेटी.."

सीमा जाने लगी तोह रवि ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया ,

"रवि अभ तुम जाओ अपने रूम में.." सीमा उसकी तरफ देख कर बोली , पर रवि ने ना में सर हिला दिया ,

"सुनो तोह सही.." सीमा तेज़ी से बोली .." में रमा को सुला कर तुम्हारे पास ा जोगी .."

"सच्ची.." रवि उसकी तरफ देख कर बोलै ,

"हाँ बाबा , अपना गेट खुला रखना , में ा जोगी .." सीमा इतना बोल इक बार रवि के होंठो को चुम कर स्टोर रूम से बहार चली गई ,

सीमा स्टोर रूम से बहार ा गई , उसके हाथ खली देख रमा , रिमी और शूरति हस्स पढ़ी ,

सीमा को उनकी आँखों में इक शरारत सी दिख रही थी , सीमा मुस्कराते हुए उनके पास hi बेथ गई ,

"क्या हुआ देदी , जो लेने गई , वोह मिल गया न.." शूरति सीमा को छेड़ते हुए बोली ,

"रमा क्या कहना था तुम.."

"कुछ नै माँ , बस ऐसे hi बुला लिया.." रमा हस्ते हुए बोली , सीमा जानती थी यह तीनो उसकी तंग खींच रही हैं ,

रवि स्टोर रूम से बहार निकला और सेड्यां चढ़ अपने रूम में चला गया , तीनो लड़कियाँ हस्स पढ़ी और सीमा ने अपना चेहरा अपने हाथिओं में छुपा लिया ,

"हम्म , भाई मुझे तोह नंद ा रही , में तोह चली सोने.." शूरति मुस्कराते हुए बोली और अपने रूम में चली गई , उसके साथ रिमी भी ,

अभ रमा और सीमा hi सोफे पर बैठी हुई थी ,

"रमा तुम भी जाओ सोने.."

"नै माँ , में आपके साथ hi सोयुगी.." रमा ने अपनी आँखों में शरारत भरते हुए बोलै ,

"मुझे अभी टाइम लग जायेगा , तुम रूम में जाओ.."

"क्यों माँ , आपके सरे काम तोह ख़तम हो गए , अभ कोनसा काम रह गया.." रमा ने हस्ते हुए बोलै ,

"बेशरम कही की , बेटी जाओ न , मुझे तुम्हारे भाई से मिलना है , वोह मुझे बुला रहे हैं.."

"ओह्ह हो , फुल तो रोमांस , मुझे भी देखना है.."

"मर खायेगी अभ तू.." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"ठीक है , में जाती हु , पर इक शरत पर.."

"कोनसी.."

"कल बताऊगी , अप्प जाओ , फुल नाईट रोमांस करो.." रमा इतना बोल भाग गई , सीमा उसको जाते देख मुस्कराने लगी और फिर उठ कर सेड्यां चढ़ रवि के रूम के सामने पहुँच गई , उसका नरम दिल धक् धक् कर रहा था , सीमा ने दरवाजे को थोड़ा सा ढाका दिया तोह दरवाजा खुल गया , सीमा होंठो पर इक कातिल मुस्कान लिए अंदर घुस गई ,

तो बे कुनिटेड...
 
अपडेट-19

अभ अग्गे..

"इतनी देर लगा दी सीमा.." सीमा गेट को लॉक कर भाग कर रवि के पास गई और उसे कास कर अपनी बहु में भर लिया ,

"उफ़ बड़ी बेताब हो रही है , मेरी जान.." रवि ने सीमा की पीठ को सहलाते उसे कास कर अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"तुम्हारी बहनो ने इतनी देर लगा दी , उनके जाने के बाद आयी हु.." सीमा ने रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"ओह्ह सीमा .." रवि ने उसके गुलाबी होंठो को चूमते चूमते अपना मोह खोल दिया , सीमा बेताब होकर उसकी जीभ अपने मोह में भरने लगी ,

"ohhhhhhhhhh सीमा.." सीमा ने कुछ देर रवि की जीभ को कास कर चूसा और फिर अपनी नरम जीभ को कड़ा कर रवि के होंठो को छत्ते हुए उसके मोह में दाल दिया , रवि उसकी जीभ को अपने होंठो में दबा कास कर चूसने लगा , रवि के हाथ धीरे धीरे उसकी पथ पर घूमते घूमते उसकी नरम मोती गदराई गांड पर पहुँच गए , रवि ने उसके मोठे चूतड़ों को कास कर दबा दिया ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह रवि.." सीमा सिसक उठी , रवि उसके चेहरे को चूमता हुआ , उसकी गोरी नरम दूध जैसी सफेद गर्दन को चाटने लगा ,

"अह्हह्ह्ह्ह रवीए अह्ह्ह्ह शहहह.." सीमा ने रवि के गले में अपनी बहे दाल उसके सर को अपने मोठे मोठे चुचु पर दबा लिया ,

रवि कमीज़ को ऊपर से hi उसके गदराये मम्मो को चूमता छत्ता उसकी गुलाबी निप्पलों को होंठो में भर कास कर चूसने लगा ,

सीमा के जिस्म की अग्ग और बादक उठी , यही हॉल रवि का था , उसने सीमा की बलखाती कमर से उसकी कमीज़ को पकड़ ऊपर खींच दिया , सीमा ने भी अपने हाथिओं को ऊपर उठा उसकी मदद कर दी कमीज़ उतरने में ,

उफ़ काली ब्रा में कैद गोल गोल मोठे चुचु को देख रवि मदहोश सा हो गया , वोह इक हाथ से उसके मम्मो को सहलाता हुआ , दूसरे हाथ को पीछे लेजाकर ब्रा की हुक खोलने लगा , ब्रा उतारते hi दोनों चुके रबड़ की बॉल की तरह उछाल कर बहार ा गए ,

रवि की आँखें उसके मोठे मोठे चुचु पर जैम सी गई , रोई से भी नरम दोनों चुके हद से जायदा गोर थे , रवि से और बर्दाश्त न हुआ और उसने अपना चेहरा दोनों चुचु के बेच रख दिया , और पागलो की तरह नंगे गोर चुचु को चाटने , चूमने लगा ,

"ओह्ह्ह्हह्हह रविइइइइ..." सीमा सिसकती हुई बोली.. " प्लस जल्दी करो न .."

रवि ने सर उठा कर सीमा की तरफ देखा , सीमा मदहोश हुई रवि की टशीट को ऊपर उठा उसके चोदे नंगे सीने को चूमने लगी , सीमा के तपते गरम होंठो की तपश रवि को मदहोश कर गई ,

"ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी जाएं.." रवि ने उसे कास कर अपनी बहु में भर लिया , सीमा के नंगे चुके रवि के चोदे सीने पर रगड़ खाने लगे ,

सीमा ने रवि की शर्ट उतर कर इक तरफ फेंक दी और उसके सीने को चूमती हुई , उसकी पेण्ट के बोटों खोलने लगी , सीमा की गरम सांसे रवि को बेचैन कर रही थी , रवि उसकी गोरी नरम पीठ पर हाथ फिरने लगा ,

सीमा ने उसकी पेण्ट खोली और थोड़ी सी निचे खींच दी , उफ्फ्फ रवि का लुम्बा मोटा लुंड अंडरवियर में फसा हुआ सीमा की आँखों के सामने ा गया , पता नै कितने दिनों बाद उसने लुंड को इतने करीब से देखा था , उसकी सांसे और तेज़ चलने लगी ,

सीमा ने अपने गुलाबी होंठ को दांतो में दबा कर रवि की तरफ देखा , और उसकी पेण्ट पूरी निचे खींच उसके परिजन से निकल दी , उफ़ अभ इक मटर अंडरवियर बचा था , जो रवि के मोठे लुंड को सीमा की नज़रिओं से दूर कर रहा था ,

सीमा ने अंडरवियर खींच कर निचे कर दिया , रवि का सख्त लुंड इक डैम से उछाल कर सीमे के चेहरे पर जा लगा ,

"ोुछःह शेतें कही ka..."seema हस्ते हुए बोली , फिर उसकी नज़रियन जटके मरते सख्त लुंड पर जैम सी गई , सीमा ने अपना इक नाज़ुक हाथ अग्गे बड़ा , लुंड को कास कर पकड़ लिया ,

"उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सीमाआ.." रवि मदोष होकर बीएड पर पीछे की तरफ गिर गया , सीमा मुस्कराते हुए रवि को देखने làgi , सीमा के गोर हाथ में रवि का लुंड काळा नाग जैसा लग रहा था , सीमा धीरे धीरे अपने हाथ को लुंड पर ऊपर निचे करने लगी , सीमा की तंग छूट पूरी गीली हो चुकी थी , लुंड को मुठीअते हुए सीमा ने अपने गुलाबी होंठो को जीभ फिरा खूब गिल्ला किया , और घुटनो के बल बेथ लुंड के मोठे टोपे को अपने तपते होंठो से चुम लिया ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शहहहहह सीमा अह्ह्ह तुम पागल कर डौगी .." रवि , नरम होंठो का स्पर्श पाकर सिसक उठा , रवि ने सीमा के सार पर अपने हाथो से दबाव डाला तेन की वोह लुंड को मोह में भर चूस ले ,

"रावी उम्म्म में तुम्हारे नाग को चूस लू अह्ह्ह कितना लम्बा है उम् शठ.." सीमा सिस्क्याइँ भरते हुए बोली , और िका इक सीमा ने आधा लुंड अपने मोह में भर लिया , रवि का पूरा शरीर अकड़ सा गया , इतना मज़ा , इतना एहसास उसे पहले कभी महसूस नै हुआ था ,

सीमा ने अपने मोह के अंदर hi लुंड के टोपे पर जीभ घुमानी सुरु कर दी , इक तोह सीमा का गरम मोह , ऊपर से उसकी नरम जीभ , जो बार बार मोह के अंदर hi , उसके टोपे के छेद को बार बार छेद रही थी , रवि तोह पागल सा हो गया ,

"उम्म्म शठ सुररपपपप सुररपपप.." सीमा अभ कास कास कर लुंड को चूसने लगी , वोह अपने होंठो को कास कर लुंड पर दबाते हुए , इक सील बंद छूट का एहसास रवि को देने लगी , सीमा के दांतो की मीठी मीठी रगड़ रवि को और मज़ा देने लगी , उसे लगा वोह सीमा के मोह में hi जड़ जायेगा ,

"ओह्ह्ह्ह शहहह सीमा रुक अह्ह्ह जाओ अह्ह्ह प्लसस ..." रवि ने सिसकते हुए बोलै , पर सीमा होंठो पर इक मुस्कान लिए , और भी कास कास कर लुंड को चूसने लगी , करीब 5 मिंटो तक सीमा ने तेज़ रफ़्तार से लुंड को चूस चूस कर रवि को पागल सा कर दिया ,

"अह्ह्ह्ह सीमा में जड़ने वाला हु अह्ह्ह्ह शठ और तेज़ अह्ह्ह चुसो ..." सीमा को इक अलग सा मज़ा मिल रहा था , वोह इक हाथ से लुंड को जड़ से पकड़े , तेज़ तेज़ उसे चुस्ती , कभी लुंड को मोह से निकल , आइसक्रीम की तरह उसके मोठे टोपे को चाटने लगती , आखिर इतनी तेज़ लुंड चूसै से रवि का लुंड फुल्ने लगा , और वोह तेज़ तेज़ जटके खता , सीमा के मोह में जड़ने लगा ,

"अह्ह्ह्ह मा , सीमा शहहह अह्ह्ह्ह में ग्याआ .." रवि ने मज़े से अहहू भरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली , उसका लुंड सिकोड़ कर सीमा के लाजवाब गुलाबी होंठो से बहार ा गया ,

सीमा ने जल्दी से अपनी पजामी का नाला खोला , और पजामी उतर कर जल्दी से अपने पैरो से निकल दी , सीमा अभ इक मटर पेंटी में कड़ी थी , सीमा ने जल्दी से अपनी पेंटी भी उतर फेंकी , और जल्दी से भाग कर नंगी hi रवि से लिपट गई , और उसके चोदे सीने को सहलाती , उसकी गर्दन को चूमती हुई , रवि को फिर से गरम करने लगी ,

"अह्ह्ह रवि मेरी जान उम्म्म शहहह देखो न मेरी गीली हो गई है ुम्मश्ह्ह कुछ करो न.." सीमा ने रवि का हाथ अपनी माखन जैसी छूट पर रख सिसकते हुए बोलै , इक डैम क्लीन शवेद छूट पर रवि का हाथ फिसलने लगा , छूट की गर्मी रवि को अपने हाथ पर महसूस हो रही थी ,

रवि इक डैम से उठ कर सीमे के ऊपर लेट उसके होंठो को चूसने लगा , उफ़ सीमा के नाज़ुक नरम होंठ रवि के होंठो से पिस्टे चले गए , सीमा को इक मीठा सा दर्द होने लगा था ,

होंठो को चूमने के बाद रवि धीरे धीरे सीमा के चुचु को जीभ से छत्ता हुआ , उसकी भलखती कमर तक पहुँच गया , उसकी गोरी नाभि को चूमने के बाद , रवि ने उसकी जांगू को छोड़ा कर , उसकी तंग छूट को देखा , उफ़ इक डैम साफ नरम थोड़ी थोड़ी गीली छूट , जिसके दोनों नरम होंठ थोड़े थोड़े अलग हो गए थे , उनके बेच का लाल मास्स और छूट से टपकता नमकीन रास , रवि मदहोश हुआ छूट की खुली फैंको को देखता रहा ,

"ओह्ह्ह्ह बेबी अह्ह्ह कॉमन सूचक आईटी प्लस .." सीमा ने सिसकते हुए बोलै , छूट में उठी खुजली उससे बर्दाश्त नै हो रही थी , रवि ने धीरे से अपनी जीभ निकल , "सुरररपपपपप.." की आवाज़ करते छूट को चाट लिया ,

"उम्म्म शठ मर गयी मैंनं.." सीमा अपना सार बीएड पर ेहडेर ोहडेर पटकते हुए बोली ,

रवि इक बार मुस्कराया और फिर छूट पर अपने होंठ रख , दोनों फैंको को छोड़ा कर , छूट में जीभ दाल , कास कास कर छूट चाटने लगा , सीमा तेज़ तेज़ चीखती हुई ाहहए भर्ती रही , छूट से निककता नमकीन रस अभ तेज़ी से बहने लगा , "सुररपपपप सुररपपप .." की अवाजिअं करता रवि पूरी जान से छूट को चुस्त रहा , जब सीमा जड़ने के करीब आयी , तब रवि उठ कर उसके ऊपर लेट , उसके प्यासे होंठो को जबर्दस्त तरीके से चूसने लगा ,

निचे रवि का लम्बा मोटा लुंड सीमा की छूट पर घिसने लगा , अपने लुंड के गरम टोपे पर सीमा की नरम मुलाम गीली गरम छूट की गर्मी महसूस कर अभ रवि से बर्दाश्त नै हो रहा था , यही हॉल अभ सीमा का था ,

"उफ्फ्फ ुम्मश्ह्ह रवि अभ दाल दो अह्ह्ह ..." सीमा ने अपनी जांगू को थोड़ा और छोड़ा करते हुए बोलै , और रवि के लुंड को अपने नरम हाथ में पकड़ अपनी माखन जैसी छूट के होंठो में उसका टोपा फसा दिया , गीली छूट पर लुंड का स्पर्श पते hi सीमा और भी मदहोश हो गई ,

रवि ने जोश में आकर अपने लुंड पर दबाव सीमा की छूट के छेद पर डाला , गरम टोपा छूट के गीले छेद को खोलता हुआ अंदर जाने लगा ,

"अह्ह्ह्हह रवीए..." अपनी छूट के खुलते छेद में जाते लुंड के टोपे का दर्द महसूस करके सीमा सिसकार उठी , और को कास कर अपनी बहु में जकड लिया , रवि ने और भी जोश में आकर अपने लुंड का कास कर इक जतका सीमा की टाइट छूट में जड़ दिया ,

"ueeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaa , aieeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaa" सीमा चीख उठी , इक डैम से लुंड घुसने से उसे मज़ा भी आया , लेकिन दर्द भी हुआ , सीमा ने रवि के कंडे पर थोड़ा सा काट दिया , रवि ने थोड़ा सा लुंड चिपचिपाती छूट से पीछे खींच इक कास कर ढाका और जड़ दिया ,

लुंड का तीखा टोपा छूट के नरम दीवारों से रगड़ खता , छूट के होंठो को खोलता हुआ , आधे से जायदा अंदर घुस गया ,

"aiiiiieeeeeeeeee रविइइइइ उफ्फ्फ्फ़ ृक्क जोऊ.." सीमा ने दर्द बर्दाश्त करते हुए बोलै , लेकिन छूट के भेटेर की गर्मी रवि को रुकने नै दे रही थी , रवि ने इस बार लुंड को आधा बहार निकल , पूरी जान से इक ढाका जड़ दिया , "पाछहहह.." की आवाज़ करता , लुंड सीमा की छूट में जड़ तक समां गया ,

"अह्ह्ह्हह्हह माआआआआ aieeeeeeeeee .." सीमा जो बहुत दिनों बाद लुंड ले रही थी , थोड़ा दर्द से चीख उठी , वोह रवि की आँखों में देखने लगी और मदहोशी में बोली.. "ओह्ह्ह्ह रवीए बहुत लम्बा है और मोटा भी..." सीमा ने अपने गुलाबी होंठो को जीभ से गीला करते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह्हह्ह सीमाआ , तुम्हारी छूट कितनी टाइट है..." सीमा , रवि की बात सुन मुस्करा दी , और अपने होंठो को रवि के होंठो से रगड़ते हुए चूसने लगी , सीमा की इस हरकत से रवि पागल सा हो गया , इक मस्ती की लहर उसके बदन में दौड गई , रवि अभ धीरे धीरे लुंड को छूट में अग्गे पीछे करने लगा ,

"अह्ह्ह्हह्हह रावी ढेरी.." सीमा उसके होंठो को कास कर चूमती मज़ा लेती हुई बोली ,

रवि का हर ढाका सीमा को अभ मज़ा दे रहा था , रवि ने सीमा के होंठो को छोड़ उसके चेहरे को देखा , उसके मासूम चेहरे पर इक शर्म की लालिमा देख रवि का जोश और बढ़ गया , वोह अभ तेज़ तेज़ ढके मरने लगा ,

"ahhhhhhhhhhh रविइइइइइइ ढेरी.." सीमा ने अपना मोह खोल जैसे hi यह बोलै , रवि ने अपनी जीभ उसके मोह में दाल दी , और तेज़ तेज़ ढके जड़ने लगा , सीमा भी मस्ती में जीभ चुस्ती अपनी भलखती पतली कमर को हिला हिला कर अपने छूट में पड़ते ताबड़तोड़ ढको का स्वाद लेने लगी ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह रवीए बहुत मज़ा ा रहा शहहहहह और तेज़ करो नाआ.." सीमा ने मदहोशी में अपनी काली काली आँखों को मटका कर बोलै , रवि उसकी इस ऐडा पर मर सा गया , रवि अभ तेज़ तेज़ ढके जड़ता उसके होंठो को चूमने लगा , गीली फिसलती गरम छूट में पढ़ते ढको से रवि और भी जोश में ा चूका था , वोह पूरी रोह से जोश में आकर सीमा की छूट में लुंड अंदर बहार कर रहा था ,

"ओह्ह्ह्हह रविइइइ बहुत मज़ा ा रहा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लम्बे लम्बे ढके लगाओ न अह्ह्ह्हह.." सीमा मुस्कराते हुए बोली , सीमा पहले कभी ऐसे नै बोली थी ,

रवि और भी तेज़ तेज़ ढके मरने लगा , रवि की मोती जंगे सीमा की नरम जांगू पर टकराती ठप्प्प थप्प्प्प की अवाजिअं कर रही थी ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह रविइइइइइइ उउउउउ मेनन गाइइइइइ उम्म्म्म सीईई.." सीमा ने अपनी कमर ऊपर उठा ली , उसका बदन इक डैम से अकड़ सा गया , वोह कम्पटी हुई जड़ने लगी , रवि इक डैम से रुक गया और सीमा के गुलाबी लबु को चूसने लगा , वोह अभी तक नै ज्यादा था ,

तो बे कुनिटेड....
 
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