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अभ अग्गे...
अनु बेहद धीमी रफ़्तार से गाड़ी चला रही थी , क्यों की यह इक कच्चा रास्ता था , और बेहद घुमावदार भी था , लेकिन रस्ते के दोनों तरफ बहुत खूबसूरत नज़ारा था , as-pas बड़े बड़े hare-bhare पेड़ , पेड़ू के निचे बड़ी बड़ी जड़यां , उफ़ बेहद दिलकश नज़ारा था ,
अनु के दिलकश होंठो पर इक मुस्कराहट थी , उसके नरम गुलाबी होंठ बेहद खूबसूरत दिख रहे थे , जब उन होंठो पर हलकी हलकी मुस्कान थी ,
अनु ने जिंदगी में बस इक बार सेक्स किया था , जब उसका पाक़िआ ने रपे किया था , यह उसकी जिंदगी के सबसे मनहूस पल थे , उसके दिल में कई ीच्यां थी , के वोह अपना पहला सेक्स , उससे करेगी , जिसे वोह बेहद चाहती होगी ,
यह कुछ लड़कियाँ hi सोचती है , कुछ को इससे फरक नै पढता , लेकिन कुछ ऐसी लड़कियाँ भी होती हैं , जो अपना कुँवारापन अपने पति के लिए बचा कर रखती हैं , अनु उन्ही लड़कयों में से इक थी ,
लेकिन उसकी ीचा कभी पूरी नै हो सकीय , जो दर्द और मज़ा वोह अपने प्रेमी की बहु में पाना चाहती थी , वोह दर्द उसे जबरदस्ती मिला ,
रपे होने के बाद , अनु मानसिक तोर पर कमज़ोर हो गई थी , उसे अज्ज भी यद् था , रपे होने के बाद जब उसे 3 दिन बाद होश आया , वोह कितनी दरी और सेहमी हुई थी , किसी का भी हाथ लगते , उसकी रूह तक कम्प जाती थी ,
पर जब उसे उसकी माँ ने बताया के इक लड़का हमारी मदद कर रहा है , तब अनु को बहुत हेरियनि हुई , लेकिन जब रवि उसे मिलने आया था , तब उसने कितनी बेरुखी से रवि से बात की थी ,
उसे लगा रवि अभ नै आएगा , क्यों जब उसकी माँ ने बताया था , के रवि ने 20 लाख रुपए दिए हैं , उसके इलाज और उसकी जिंदगी को इक नए सिरे से सुरु करने लिए ,
अनु इस शहर से नै गई , चाहे उसे समाज की बुरी नज़रिओं को सहना पढ़ा , उसे बस रवि से मिलना था , रवि को जानना था , क्यों की रवि ने उसके पत्थर दिल में , प्यार का फूल खिला दिया था , उस फूल ने उसके पत्थर दिल को , अपनी मनमोहक खुशबु से तोड़ कर चकनाचूर कर दिया था , उसके दिल में अभ प्यार था , पर रवि के लिए ,
जब कोई लड़की किसी को शिदत से चाहती है , तब दुनिआ के लाखो मर्द भी उस लड़के की पूर्ति नै कर पते , और यही सच्चा प्यार करने वाले लड़को के साथ होता है ,
अज्ज भी वोह कुवारी थी , जो हुआ वोह जबरदस्ती हुआ , उसने प्यार से साथ नै दिया , लेकिन अभ वोह रवि के साथ अपना सपना जीना चाहती थी , वही दर्द महसूस करना चाहती थी , पर रवि तोह डेविल था , शेतीअन था , और अनु उसे कुछ और समाज रही थी ,
अनु मन के भेटेर यही सोचती अग्गे बढ़ रही थी , के उसे बेच रस्ते में इक लड़का खड़ा दिखाई दिया , उसकी पथ अनु की तरफ थी , लम्बे लम्बे काळा बाल , और ब्लैक कपडे पहने थे उसने , पर शरीर बेहद मस्कुलर था ,
अनु ने इक डैम गाड़ी रोकी और खिड़की खोल आँखों में असनु लिए , भाग कर उस लड़के से लेपित गई , अनु ने कास कर रवि को पीछे से बहु में भर लिया और रट हुए बोली ,
"रावी (रट हुए) कहा थे तुम , कितने साल गुजर गए , रावी में अनु हु , वही अनु..." अनु अभी बोल hi रही थी , के रवि इक डैम से पीछे घूम गया , और मुस्कराते हुए बोलै..
"डिटेक्टिव , तोह आखिर अप्प ा hi गई , मेरे पीछे पीछे , हो न हो , डिटेक्टिव अप्प मुझे चाहने लगी हो , डेविल की लिस्ट लम्बी हो रही है..." रवि बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,
"तुम , ओह्ह , रावी में अनु हु , वही अनु जिसे.." अनु अभी बोल hi रही थी के रवि फिर से बेच में बोल पढ़ा ,
"हाँ , हाँ , डिटेक्टिव तुम वही अनु हो , जिसकी जान मने फैक्ट्री में बचाई थी , यद् आया , वोह छोड़ो , अभ में तुम्हारे साथ काम करुगा..."
"नै कर सकते , बिलकुल भी नै..." अनु अभ थोड़ा गुस्से में बोली ,
"डिटेक्टिव , क्यों , मुझे लोग को सजा देनी है..." रवि थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
"ओह्ह , तुम बदल गए हो , तुम , तुम , अह्ह्ह , तुम रवि हो या नई..." अनु गुस्से में ehder-ohder चलती हुई गुस्स्स में चीला कर बोली ,
"डिटेक्टिव , राहुल का लो..."
"क्या..." अनु रुक कर चौंक कर बोली ,
"साँस , राहुल की साँस लो..." रवि मुस्करा कर बोलै ,
"अह्ह्ह , वोह राहुल नै रहत होता है , बेवकूफ..." अनु गुस्से में मुस्करा कर बोली ,
"डिटेक्टिव बेवकूफ नै , डेविल , डिटेक्टिव में डेविल हु , और तुम शांति से , चाहे राहुल का लो , या रहत का , पर लो , मेरा मतलब साँस..." रवि , अनु को आँख मर मुस्कराते हुए बोलै ,
"अह्ह्ह (चिढ़ते हुए) , ठीक है , में रहत की साँस लेती हु , और तुम मुझे बार बार डिटेक्टिव कहा बंद करो , में अनु हु , अनु , जिसका पाक़िआ ने रपे किया था (बेहद रट हुए) , तुम सुन्ना क्यों नै चाहते , बोलू..." अनु बेहद रट हुए जमीन पर घुटनो के बल बैठते हुए बोली ,
"डिटेक्टिव , में जनता हु , तुम वही अनु हो , पर डिटेक्टिव , वोह अनु मर गई , जब उसका रपे हुआ था , डिटेक्टिव तुम इक नयी अनु हो , तुम्हारा हॉस्पिटल में नया जनम हुआ था , में उस अनु को नै जनता , और अगर तुम वही अनु हो , तोह यहाँ से दफा हो जाओ , डेविल का वख्त बर्बाद करुँगी , तोह डेविल तुम हेलल बेहज देगा..." रवि पहले घम्बिर होकर और फिर आखिर में मुस्करा कर बोलै ,
"रावी , तुम इतने अचे क्यों हो , तुम सच में..."
"अह्ह्ह , में ाचा नै हु डिटेक्टिव , में डेविल हु , और चलो कोई केस सोल्वे करते हैं , कोई नया केस आया है , जो बेहद खतरनाक हो..." रवि उठ कर मुस्कराते हुए बोलै ,
"हाँ , इक केस आया है..." अनु भी जमीन से उठ कर , रवि की आँखों में देखते हुए बोली ,
"किसका..."
"तुम्हारा.." अनु थोड़ा घम्बिर होकर बोली ,
"मेरा (हस्ते हुए) , क्या मज़ाक है डिटेक्टिव..."
"रवि यह मज़ाक नै है..." फिर अनु ने रवि को उस दिन हॉस्पिटल में पुलिस के साथ मुठभेड़ , और ठाकुर का उस पर लगाया इल्ज़ाम सब बता दिया ,
"अरे डिटेक्टिव , ठाकुर जी , मुझ पर ऐसे hi भड़क रहे हैं , ख़ुशी मेरे साथ है , लेकिन वोह अपनी ीचा से आयी थी , अभ वोह तामस डेमों बन चुकी है..."
"अह्ह्ह्ह , मुझे लेकर चलो उसके पास..." अनु वापिस अपनी गाड़ी में बैठते हुए बोली ,
"गाड़ी में , डिटेक्टिव , तुम डेविल का मज़ाक बना उड़ा रही हो , हम उड़द कर जायेगे..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,
"चुप चाप गाड़ी में बेथ जाओ , वार्ना ..." अनु बेहद गुस्से में बोली , तोह रवि भी चुप चाप अनु के साथ गाड़ी में बेथ गया...
फिर दोनों में कोई कुछ न बोलै , कबीले का नदी के ऊपर बना , लकड़ी का पल पर करते हुए अनु , रवि का उदास चेहरा देख कर बोली ,
"रावी , जानते हो , अज्ज मेरी लाइफ का सबसे खुशनुमा दिन है , मुझे किसी का खौफ नै अपनी लाइफ में , पर तुम मुझे किस नज़र से देखते हो , ऐसी पर मेरी पूरी लाइफ देपेंद करती है , मुझे लगा , मेरा रपे हुआ था , पता नै तुम मुझे अपनी लाइफ का हिस्सा समझोगे या नै , या मुझे नफरत और घृणा की नज़र से देखोगे , पर रावी (रट हुए) तुमने मुझे गलत साबित कर दिया , तुम डेविल नै हो , पता नै तुम बार बार खुद को डेविल क्यों बोल रहे हो , पर अगर तुम जैसे इंसान डेविल हैं , तोह , तोह रावी , मेरी हर जिंदगी तुम जैसे हर डेविल पर कुर्बान , ी लव यू..." अनु बेहद रट हुए ग़मगीन शबदो में बोली ,
"वोह , वोह , डिटेक्टिव घर ा गया , बस रोक दो गाड़ी..." रवि बिना कुछ कहे गाड़ी से उतर अनु का इंतज़ार करने लगा ,
फिर दोनों घर के अंदर ा गए , अनु बेहद उदास नज़रो से रवि को बार बार घर रही थी , शयद वोह रवि से अपने सवाल का जवाब चाहती थी , शयद उसे लगता था , उसकी पूरी जिंदगी रवि के जवाब पर निर्भर करती थी ,
"हळू , कामचोरों , बहार ायो , देखो कोण आया है , डिटेक्टिव आयी है , जल्दी आयु..." रवि बेहद चीला कर बोलै ,
तोह सभी अपने अपने रूम से बहार ा गए , रिमी और शूरति , काट और बेबी , सीमा , ख़ुशी , कोमल , लारा और एलिज़ा भी , और फर्जी भी , बस रमा बहार नै आयी ,
"तोह सुनो , यह हैं डिटेक्टिव अनु , मेरी खास दोस्त , और यह मुज़से मिलने आयी हैं , शहर से..." रवि , अनु की आँखों में आँखें दाल मुस्करा कर बोलै , शयद अनु को उसका जवाब मिल गया था , लेकिन वोह खुश थी के उसे रवि ने दोस्त तोह बोलै ,
"यह यहाँ क्यों आयी है..." ख़ुशी , अनु के करीब जाकर उसके चारो तरफ चाकर लगते हुए बोली ,
"तामस , गेट बैक बेब , डिटेक्टिव यहाँ तुम लेने आयी है , और जानती हो , इक फनी न्यूज़ भी लायी है , यह डेविल (फर्जी की तरफ देख कर) मेरा मतलब , यह मुझे डेविल समज़ती है , ओह्ह्ह बेचारी डिटेक्टिव..." रवि , फर्जी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोलै ,
"नई , मेरे पापा डेविल नै हैं , वोह बहुत अचे हैं..." फर्जी बेहद गुस्से में चीला कर बोली ,
"तुम्हारी बेटी (बेहद उदास होकर) , ख़ुशी तुम्हारे पापा बहुत परेशान हैं , उनहोनु रवि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराइ है , प्लस तुम मेरे साथ चलो..." अनु , ख़ुशी के करीब जाकर बोली ,
"सॉरी अनु , में नै जा सकती , हाँ , अगर इस बेवकूफ की बात होती , तोह शयद में जाने का सोच लेती , पर फर्जी को छोड़ कर , में कही नै जोगी..." ख़ुशी , फर्जी के प्यार में बह कर बोली ,
"में बेवकूफ , खुशी..." रवि , ख़ुशी को देख चिढ़ता हुआ बोलै , पर बाकि सब ख़ुशी की बात पर हस्स रहे थे ,
"पर वोह तुम्हारे पिता हैं , तुम्हारी माँ है वह पर , तुम इक बची के लिए , अपने maa-baap को छोड़ डौगी..."
"ाचा , यह बताओ , शादी होने के बाद लड़की कहा रहती है..." ख़ुशी , अनु के सामने आकर उसकी आँखों में आँखें दाल बोली ,
"अपने पति के साथ..."
"वही तोह कर रही हु , अपने पति के पास hi तोह रहती हु , और अगर , इक बार तुमने और मुझे , वापिस जाने का बोलै , तोह में तुम्हारा मोह तोड़ दूंगी..." ख़ुशी बेहद गुस्से में चीख कर बोली ,
"ओह्ह्ह , यह गलती करके तोह देखो , में भी काम नै हु..." अनु भी ख़ुशी के और करीब होकर बोली ,
"रुको , रुको , शांत , अनु तुम तुम्हारा जवाब मिल गया है , है न.." रवि , अनु की आँखों में ज़क्त हुआ बोलै ,
"हाँ मिल गया , पर दुःख बहुत हुआ , शयद , ओह्ह , में चलती हु..." अनु यह बोल जाने लगी , पर tabhi.."anu रुको , ख़ुशी की बातिओं का बुरा मत मनो , यह अभी भी बची है , तुम ायो , खाना खा कर जाना..." सीमा , अनु के पास आकर बोली ,
"नै देदी , फिर किसी दिन , अभी मुझे काम है.." अनु यह बोल रवि की तरफ देख घर से बहार निकल गई ,
बहार आकर अनु अपनी आँखों से बहते असनु साफ करते हुए गाड़ी की खिड़की खोल रही थी , तभी रवि भी उसके साथ आकर बेथ गया ,
"तुम , बहार निकालो ..." अनु गाड़ी में बेथ कर बोली ,
"शठ , कुछ मत बोलू , गाड़ी चलाओ ..." रवि इस बार घम्बिर होकर बोलै ,
फिर अनु भी कुछ न बोली , वोह गाड़ी ड्राइवर करती रही , दोनों जंगल के बेचू बेच ा गए , तब रवि ने गाड़ी रुकवा दी , रवि गाड़ी से बहार निकल कर खड़ा हो गया , कुछ hi पलु में अनु भी उसके सामने आकर कड़ी हो गई , वोह कुछ पल रवि का चेहरा देखती रही , और फिर रोने लगी ,
"अनु प्लस.." रवि ने अनु को शांत करने के लिए अनु के कंडे पर हाथ रखते हुए बोलै , पर अनु ने जातक दिया ,
"डिटेक्टिव प्लस , शांत हो जाओ , रोना बंद करो.." रवि दिल की गहराई में दर्द महसूस करता हुआ बोलै ,
"मुझे , मुझे हाथ मत लगाओ रवि , में अनु हु , मेरा रपे हुआ था , में तुम्हारे काबिल नै हु , रवि , तुमने मुझे इसलिए ठुकरा दिया , क्यों की मेरा रपे इक गुंडे ने किया था , में वर्जिन नै हु , रवीए , में वही अनु हु , वोह अनु अभी तक जिन्दा है..." अनु ने जोर जोर से रट हुए बोलै ,
"नयी , नई (बेहद गुस्से में गाड़ी की खिड़की के मिरर पर हाथ मरते हुए) , यह वजह नै है , अनु , मुझे इस बात से फरक नै पढता , के तुम्हारा , ओह्ह्ह , क्यों , क्यों , बार बार , वही बात , क्यों कर रही हो , तुम , तुम मेरा दिल दुख रही हो , इक hi बात करके , जानती हो , अगर में दर्द में डूबा , तोह पूरा शहर हेलल में बदल जायेगा..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , उसके हाथ से खून बह रहा था , गाड़ी का मिरर टूट चूका था ,
"तोह क्या कारन है , क्यों मुझे अपना नै रहे , क्यों , तुम्हारी शादी हो चुकी है इस लिए , या तुम्हारे पास लड़कयों की कमी नै , हाँ यही कारन होगा , वह तोह बहुत साडी लड़कियाँ थी , तुम्हारा दिल बहलाने के लिए , तुम्हारी भूक शांत करने के लिए , तोह तुम , मुझ जैसी आम सी लड़की को , क्यों अपने दिल में जगह डोज..." अनु बेहद रट हुए गुस्से में बोली ,
"अह्ह्ह्हह (गुस्से में चीला कर) , इक और शब्द भी , तुमने उनके बारे में बोलै , तोह में तुम्हारी सांसे यही रोक दूंगा , उनसे अपनी तुलना मत करो , उनका प्यार अलग अलग है , उनके मेरे लिए किये बलिदान अलग अलग हैं , मने कभी प्यार के लिए तुलना नै की , जो मुझे जितना प्यार करता है , में उतनी hi शिदत से उसे प्यार करता हु..." रवि बेहद गुस्से में चीला कर बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी , वोह तोह ाचा था , उसकी पीठ थी , अनु की तरफ..
"तोह मुज़से भी करो , जितना प्यार में तुमसे करती हु , उतना मुज़से भी करो..."
"यह प्यार नै , जिद्द है तुम्हारी , जल जोगी , तुम्हारा वजूद मिट जायेगा , इस मास्स के जिस्म को मत देखो , इसके अंदर शेतीअन बैठा है , में डेविल हु अनु , तुम इक इंसान हो..." रवि बेहद घम्बिर होकर दर्द भरे शबदो में बोलै ,
"फिर से बहाना , हूँ (हस्ते हुए) , तुम दुनिआ के इकलौते लड़के हो , जो खुद को डेविल बता कर , मेरा पर्पस ठुकरा रहे हो , सीधा सीधा यह क्यों नै बोलते , के तुम बस वही लड़की चाहये , जो पूरी लाइफ बस तुमसे प्यार करती रहे , और तुम दुसरो के अग्गे , उसके बलिदान के किस्से सुनते रहो , तुम डेविल हो या नै , में नै जानती , लेकिन तुमने मेरी सोच गलत करदी , में मानती थी कुछ मर्द अचे होते हैं , पर , छोड़ो ें बातिओं को , अभ मेरा तुमसे कोई रिश्ता नै..." अनु बेहद घम्बिर होकर रट हुए बोली ,
"अनु..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"अनु (हस्ते हुए) , यह नाम नै है रवि , यह इक कलंक है , जो मेरे साथ जुड़ चूका है , किसके साथ रपे हुआ , अनु के साथ , मेरे साथ नै हुआ , अनु के साथ हुआ , हमदर्दी किसे मिली , अनु को , मुझे नै , तुमने 20 लाख रुपए किसे दिए , अनु को , मुझे नै , और अभ , तुम किसे ठुकरा रहे हो अनु को..." अनु फिर से रट हुए बोली ,
"तुम समज़ती क्यों नै अनु , में डेविल हु , मेरे दुश्मन तुम मर देंगे , यह सब लड़कियाँ अमर हैं , इसलिए में बेफिक्र हु , पर तुम , तुम इंसान हो , तुम मर जोगी..." रवि इस बार रट हुए बोलै ,
"तोह मरने दो मुझे , वैसे भी में जिन्दा कहा हु , में उसी दिन मर गई थी , जब पूरी रत मेरा रपे होता रहा , हाँ , जिन्दा रहने की वजह तुम थे , अभ वोह भी नै रही , अगर तुम्हारे साथ दो पल का प्यार पाकर में मर भी जाऊ , तब भी मुझे कोई ढक नै होगा..." अनु यह बोल वह से जाने लगी , तभी गाड़ी में बैठने से पहले वोह अपनी आँखों से बहते असनु साफ कर बोली ,
"रवि 24 घंटे का वख्त देती हु , अछि तरह सोच लेना , घबराओ मत , अनु जान नै देगी , क्यों की इसपर मेरा कोई हुक नै है , यह जिंदगी तुमने खरीद ली है , पोरे 20 लाख रुपए में , रावी , में अपने दिल के दरवाजे हमेशा हमेशा के लिए बंद कर डोंगी , और पूरी जिंदगी तन्हाई में गुजरोगी , यह वादा है तुमसे..." अनु यह बोल मुस्कराते हुए गाड़ी में बेथ वह से चली गई , रवि पत्थर बना वही खड़ा रहा ,
उफ़ , रवि दुविद्या में फास चूका था , अनु इक इंसान थी , वोह डेविल था , अनु के साथ प्रेम करने का परिणाम क्या होगा , वोह अछि तरह से जनता था , और यह परिणाम था अनु की मौत....
तो बे कुनिटेड....
