Incest Deewanapan... - Page 16 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

फ्रेंड्स स्टोरी के प्लाट में कुछ चंगेस कर रहा हु.. जल्द hi कुछ नए मैजिकल प्लाट पर स्टोरी चलेगी... और जल्द hi उपदटेस आएंगे...
 


अपडेट-67

अभ अग्गे...

रवि कुछ पल बैठा रहा , ताकता रहा , अपनी बेजान , बेहोश मोह्हबत को , dr.nelam बेहोश थी , चेहरा मुरझा सा गया था , दिल के गहरे दर्द , यह मायूस चेहरा दिखा रहा था ,

रवि घुटनो के बल बेथ रो hi रहा था , के ख़ुशी भी वह पहुँच गई , रवि हरिजन सा हुआ , ख़ुशी को देखने लगा , उसे नै पता था , उसकी ख़ुशी , कुछ दर्द , कुछ गम और देने आयी है ,

"रवीए , मत रो प्लस , में भीकर जोगी , अगर तुम यु रट रहे..." ख़ुशी ने भाग कर रवि का चेहरा अपने पेट से लगते , उसके बालो को सेहला कर बोलै ,

"क्या करू , क्या , वोह , वोह देखो , यह बेजान जिस्म , कभी महकता था , इसके होंठो पर इक मुस्कान थी , और मने , इक दरिंदे की तरह , इनकी मुस्कान चीन ली , ख़ुशी में रोयु नै तोह क्या करू , तुम , हाँ तुम , dr.nelam को ठीक करो , उसे होश में लायो , मुझे बात करनी है , उसे एहसास दिलाना है , में जिन्दा हु , तू बेफिक्र होकर अपनी जिंदगी गुजर..." रवि दर्द में बह कर रट हुए बोलै ,

"रवि इक प्रॉब्लम हो गई है , बहार चारो तरफ पुलिस है , तुम पकड़ने ए है..." ख़ुशी नाम आँखों से बोली ,

"शेतीअन को पिंजरे में बंद करने ए हैं , ख़ुशी अगर अज्ज , मेरे और dr.nelam के बेच कोई आया , तोह लाशे बिषा दूंगा , उनको रोको , वार्ना में रोकने जाता हु..." रवि बेहद गुस्से में चीख कर बोलै , उसकी भेजी आँखों में इतना तेज़ गुस्सा था , के ख़ुशी का जिस्म भी कंपकपा गया ,

"रवि हम अपनी ताकत नै दिखा सकते दुनिआ को , तुमने hi यह बोलै था , कुछ और सोचना होगा..." ख़ुशी ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ठीक है , में बस dr.nelam से मिलुंगा , फिर पुलिस के हवाले हो जाउगा , लेकिन ऐसी बेच मेरे पास इक प्लान है , पहले तुम dr.nelam को ठीक करो..." रवि ने ख़ुशी के मासूम चेहरे को तकते हुए बोलै ,

"हम्म , करती हु.." ख़ुशी ने इक बार रवि की तरफ देखा , और फिर dr.nelam के पास चली गई , ख़ुशी ने अपना हाथ dr.nelam के माथे पर रखा , उसके हाथ से सफेद रौशनी निकल कर , dr.nelam के बदन में सामने लगी ,

धीरे धीरे dr.nelam को होश ऐनी लगा , तब तक ख़ुशी उसके पास से दूर हो गई थी , ख़ुशी ने रूम से जाते वख्त , रवि के कनु में कुछ बोलै और , बहार जाकर रेहान के साथ कड़ी हो गई ,

रवि अग्गे बाद dr.nelam के पास खड़ा हो गया , उसने धीरे धीरे अपनी आँखें खोल as-pas देखा , पर जैसे hi उसकी नज़र रवि पर पढ़ी , उसने चेहरा दूसरी तरफ मोड़ दिया ,

यह तोह होना hi था , जब अपने मुसीबत के वख्त मोह मोड़ ले , तब दिल का दर्द , कोई बयान कर नै सकता , और dr.nelam का दर्द , रवि बखूबी समाज रहा था ,

dr.nelam के जब पति गुजर गए , तब उनको लगा , है कोई , जिसके सहारे , जिसके असर , वोह अपनी काटे बिषई जिंदगी गुजर सकती है , लेकिन जब रवि नै आया , तोह वोह भीकर गई , टूट गई , नरम दिल टुकड़े टुकड़े हो गया , और आखिर वोह भूल गई , मुस्कराना , हसना ,

कभी किसी को दो शब्द प्यार के बोल दो , वोह आपका गुलाम हो जाता है , लेकिन यहाँ तोह आत्मा का मेल हो चूका था , दोनों की ातमयीआँ इक थी , दिल इक थे ,

में अज्ज भी कहता हु , मोह्हबत करो , तोह बिन चेहरा देखे करो , क्यों की चेहरों से मोह्हबत की कीमत नै लगाई जा सकती , कई हसन चेहरे धोका देते हैं , और कुछ बिना आपको देखे , बिना आपको मिले , आपके लिए पागल रहते हैं , काश इक बार उनकी खबर मिल जाये , अगर वोह खुश हैं , तोह हम खुश हैं , यही हाल dr.nelam का था , उसे बस रवि की चिंता थी , जिस्मानी प्रेम तोह उनमे कभी हुआ hi नै था ,

"नीलम..." रवि आँखों में असनु भरते बोलै , पर dr.nelam तोह नाराज़ थी , क्यों , आखिर क्यों , रवि ने उसका हाल न जाना , वोह किन हालातो से लड़ती रही , क्या रवि का हुक नै था , उसे सहारा देने का ,

dr.nelam अपना चेहरा दूसरी तरफ किये , आँखों में असनु लिए लेती थी , उसकी हिमेट नै थी , के वोह रवि से बात कर सके , उसे महसूस कर सके , अपनी बहु में भरके ,

"नीलम में जनता हु , तुम नाराज़ हो मुज़से , पर इक बार , बस इक बार केहदो , तुमने माफ़ कर दिया , में वादा करता हु , जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगा , तुम खुश रखुगा , प्लस नीलम , माफ़ कर दो इक बार..." रवि , dr.nelam के पास बेथ , उसके कंडे पर सर रख बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"mm..me..kk..kaha..tt..tumse..nn .naraz..hh..hu..." dr.nelam दर्द में हकलाते हुए बोली , यह दर्द जिस्मानी नै था , यह दर्द रूहानी था , जिसे कोई सच्चा प्रेमी hi समाज पता ,

"नीलम , में क्यों गया तुमसे दूर , क्यों नै था तुम्हारे पास , जब , जब तुम जरुरत थी मेरी , ी लव उउउ , में अभ कभी नै जाउगा , तुम अपने पास , अपने दिल में रखुगा..." रवि पगलू की तरह dr.nelam के चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

अभ dr.nelam पहले से काफी बेहतर महसूस कर रही थी , आँखों में असनु थे , दिल में दर्द था , जो तन्हाई के वख्त गुजरा था , अभ वोह बीत गया था ,

"अभ तोह नै जाओगे छोड़ कर..." नीलम ने आँखों में असनु लिए बेहद धीमी आवाज़ में बोलै ,

"नई , नई , अभ नई , नीलम , तुम रेहान के साथ कबीले में ा जाओ , में वही रहुगा , मेरा परिवार वही है , अभ तुम भी मेरे परिवार का हिस्सा हो ..." रवि ने dr.nelam के कंपते गुलाबी होंठो को चुम कर बोलै ,

"उम् , ठीक है , में ायुगी , ाहू ाहू (खासते हुए) रावी मेरे पति मर गए , में टूट गई थी , में उनको बहुत चाहती थी , और तुम भी , मने सोचा कही तुम भी..." dr.nelam यह बोलते बोलते रोने लगी , रवि ने उसे उठा कर अपने सीने से लगा लिया , और उसके मुलाम बालो में हाथ फिरा कर बोलै ,

"शहहह , बहुत रो लिया , में जनता हु , तुम्हारे पति की जगह में कभी नै ले सकता , पर वादा करता हु , तुम कभी दुखी नै होने दूंगा , जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगा , ी लव उउउ..." रवि दिल की गहराई से दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"जानती हु (हस्ते हुए) , तुम कही नै जाओगे अभ , ाचा रेहान आया है..." dr.nelam मुस्कराते हुए बोली ,

"हाँ , में बेह्जता हु , वादा करो , पहले जैसी बनकर रहूगी , वही हस्ती , खिलखिलाती , मेरी प्यारी dr.nelam.." रवि मुस्कराते हुए बोलै तोह dr.nelam भी मुस्कराने लगी ,

फिर रवि ने dr.nelam से कुछ देर बतिअन की , और उसे मुस्कराते छोड़ रूम से बहार रेहान और ख़ुशी के पास ा गया ,

रवि ने रेहान को अंदर बेहज दिया , और खुद ख़ुशी के पास खड़ा हो गया , अभ उनको लड़ना था , बहार कड़ी पुलिस से , बिना ताकत का दिखावा किये , जो बेहद मुश्किल था ,

रवि कुछ चिंता में था , और ख़ुशी भी , बहार पुलिस थी , अगर गयाब होते तोह पूरी दुनिआ को रवि की शक्ति का एहसास हो जाता ,

"तोह सुरु करे प्लान..." ख़ुशी मुस्कराते हुए बोली ,

"हम्म , उनको पहले बोलने दो , क्या चाहते हैं , हसश , फास गए अज्ज तोह..." रवि भी मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि अभी कुछ और बोलने hi जा रहा था , के उनकी नज़र दीवार पर लगे इक एलसीडी टीवी पर गई , जिस में इक सनसनी खेज न्यूज़ चल रही थी ,

"हमारे रिपोर्टर्स ने दवा किया है , इस शहर का मोस्ट वांटेड मुज़रिम , शहर के गोवत हॉस्पिटल में छिपा हुआ है , शहर की तमाम पुलिस उसे पकड़ने के लिए आयी हुई है , यह मुज़रिम रवि नाम इक लड़का है , जिसके सर ठाकुर कुणाल की हत्या और उसकी छोटी बहिन ख़ुशी ठाकुर को किडनैप करने का आरोप लगा है , अप्प हमारे साथ बने रह्यी , जल्द hi अग्गे की न्यूज़ आपको मिलती रहेगी..."

टीवी पर ा रही न्यूज़ सुन , रवि और ख़ुशी ने इक दूसरे की तरफ देखा और फिर हसने लगे , ख़ुशी , रवि के गले लग गई ,

"यह प्लान काम करेंगे , मुझे दर लग रहा है.." ख़ुशी थोड़ा चिंता में बोली ,

"हम्म , मेरी तामस कभ से डरने लगी..." रवि , ख़ुशी की प्यारी आँखों में ज़क कर बोलै ,

"जब से पृथ्वी पर आयी हु , जायदा दर लगता है..." ख़ुशी बेहद मसोमीयत से बोली ,

"अहःश्च , कुछ नै होगा , में हु न , वैसे भी इनकी गोलियों का मुझ पर कोई असर नै होगा , अभ तुम जाओ.." रवि ने ख़ुशी के गुलाबी होंठो को चुम कर बोलै ,

"तुम..."

"में अत हु , पुलिस को पूरा शहर घूम कर..."

"हहै , ok में जाती हु , इंतज़ार करुँगी..."

"जान , में यु गया और यु आया..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"bye..." ख़ुशी इतना बोल समाये चाकर को जीवट कर कबीले में चली गई ,

फिर रवि ने कुछ देर और सोचा और dr.nelam के रूम के दरवाजे के पास पहुँच गया , रवि ने रेहान को आवाज़ दी , रेहान भी उसके पास ा गया , उसके चेहरे पर चिंता के भाव थे , क्यों की उसने भी न्यूज़ सुन ली थी ,

"हाँ भइआ..."

"रेहान , मुझे अपनी चिंता नै , पर तुम्हारी है , तुम समज़ते हो न..."

"हाँ समज़ता हु , बहार पुलिस कड़ी है , और आपको दर है , कही में न फास जाऊ.."

"तुम कैसे पता चला..."

"वोह , मने टीवी पर देखा..."

"ाचा , कभी मर खायी है..."

"क्यों..." रेहान थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,

"अभी बताता हु..." रवि ने इतना बोलै , और रेहान के सार को पीछे से पकड़ , उसका माथा दीवार के साथ जोर से मारा , रेहान के माथा फटने से बेहद खून बहने लगा ,

"अह्ह्ह्हह , भइआ यह क्या..." रेहान अपने चेहरे पर बहते खून को अपने हाथ फिरा देखते हुए बोलै ,

"अभ सुनो , जब में भाग जाऊ , तब तुम पुलिस से कहना , के में तुम किडनैप करके यहाँ लाया था , तुम जंगल से अपनी सास को मिलने ा रहे थे , उनको शक भी नै होगा के में तुम्हारे साथ हु..." रवि अपना प्लान बता मुस्करा कर बोलै ,

"अह्ह्ह भइआ अगर वोह कबीले में गए तोह..."

"रेहान , वह ख़ुशी अपनी जादुई ताकत से सब सम्बल लेगी , तुम इस बात की चिंता मत करो , जो मने बोलै वही कहना , और डरना मत..." रवि इतना बोल बहार की तरफ जाने लगा ,

लेकिन िका इक रवि पीछे पलटा और रेहान की तरफ देखने लगा ,

"अभ क्या भइआ..."

"तुम बेहोश नै हुए..." रवि ने इतना बोल इक जोरदार घुसा रेहान के चेहरे पर जड़ दिया , रेहान का माथा फिर से दीवार पर जा टकराया , और रेहान बेहोश हो गया...

रवि ने सेकंड फ्लोर के एन्ड पर लगी खिड़की को थोड़ा सा खोल बहार देखा , 200 से जायदा पुलिस वाले , हाथों में हथियार लिए , उसका इंतज़ार कर रहे थे , पूरा हॉस्पिटल घिर चूका था , वोह सब इक घुटना जमीन पर टिकाये अपनी बंदूक का मोह हॉस्पिटल की तरफ किये निशाना लगाने के लिए त्यार बैठे थे ,

रवि ने हॉस्पिटल के मैं गेट के बहार देखा , वह कमिश्नर राजेश , दसप शमशेर सिंह , खड़े थे , फिर इक पुलिस वाला इक जीप के पास खड़ा होकर लाउडस्पीकर में कुछ बोलने लगा ,

"Mr.ravi हमने तुम चारो तरफ से घेर लिया है , तुम्हारा बच कर निकल पाना नामुमकिन है , अपने अप्प को कानून के हवाले कर दो , वार्ना हम अंदर ा जायेगे , हम इक मिंट तक इंतज़ार करेंगे ..." वोह पुलिस वाला बेहद गुस्से में बोलै ,

राजेश के चेहरे पर थोड़े चिंता के भाव थे , जब की दसप शमशेर सिंह के चेहरे पर इक मुस्कान थी , यह मुस्कान थी रवि के पकड़े जाने की ,

"हम्म , अभ तोह लड़ना hi होगा , सब कुछ बन लिया , किसान बन लिया , मज़दूर बन लिया , हस्बैंड बन लिया , प्रेमी बन लिया , वैम्पायर बन लिया , डॉन बन लिया , और पारी लोग का प्रिंस भी बन लिया , अभ वख्त है , डेविल बनने का , में त्यार हु..." रवि खुद से hi आँखें बंद कर बोलै ,

"Mr.ravi , अपने अप्प को कानून के हवाले कर दो..." वोह पुलिस वाला अभी बोल hi रहा था के शमशेर सिंह बोलै ,

"बस बहुत हुआ , अटैक करो , और उसे जिन्दा या मुर्दा पकड़ कर लाओ.."

अपने सीनियर पुलिस वाले का आर्डर सुन कोई 50 से जायदा पुलिस वाले हॉस्पिटल के अंदर घुस गए , हॉस्पिटल के अंदर डॉक्टर्स , और मरीज़ सब डरे सहमे हुए थे , पर पुलिस को कोण कुछ बोल सकता है , उनको बस रवि से मतलब था ,

रवि जल्दी से लिफ्ट के पास गया , और लिफ्ट के बोटोन्स को अपनी शक्ति से जैम कर दिया , अभ लिफ्ट काम नै कर रही थी , पुलिस वालो को मज़बूरन सेडीईओं से एना था ,

फर्स्ट फ्लोर पर पुलिस वालो ने , इक इक रूम का छापा छापा छान मारा , और फिर लिफ्ट बंद देख सेडीईओं से ऊपर जाने लगे , तब तक रवि त्यार खड़ा था , उसे बस किसी की जान नै लेनी थी , खुद को बचाना था , कोई 50 से जायदा पुलिस वाले सेड्यां चढ़ ऊपर ा रहे थे , और सेडीईओं के अंत पर रवि उनका इंतज़ार कर रहा था.....

वही दूसरी तरफ...

"हम्म , मने तुम उस कैद से मुकत किया है , जानती हो क्यों , क्यों की , तुम उन सब से बदला लेना है , मर दो सबको , तुम कितनी वहशी हो , दिखा दो सबको , तुम क्या हो , जाओ , उनकी जिंदगी में मुसिबतिअन पैदा करो , मुझे वोह मैप चाहये , किसी भी कीमत पर , अपने भाई को मारो , बहिन को मारो , चाहे कुछ भी करो , मुझे मेरा मैप लेकर दोऊ..." उस रहस्मयी औरत ने बेहद गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

रेखा उसकी बतिअन सुनती रही और फिर अचानक वह से गयाब हो गयी....

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-68

अभ अग्गे...

पुलिस सेड्यां चढ़ रवि को पकड़ने जा रही थी , रवि इंतज़ार में था , कब वोह ए , कब वोह लाडे , और कब वोह भागे ,

यह बात अलग थी , रवि ने पहले सिर्फ भागने का सोचा था , पर अभ उसका मन बदल गया था , क्यों की अभ रवि ने सोच लिया था , उसे इस शहर का सबसे पावरफुल आदमी बनना है , उसे इस पर राज़ करना है ,

आखिर वोह वख्त भी ा गया , जब पुलिस वाले सेड्यां चढ़ सेकंड फ्लोर पर पहुँच चुके थे , वोह सब रवि के सामने खड़े थे , हाथो में हथियार लिए ,

"यू अरे अंडर अरेस्ट mr.ravi..." उन में से इंस्पेक्टर रामसे हथकड़ी लिए अग्गे एते हुए बोलै ,

अभी वोह रवि के करीब hi पहुंचा था के रवि ने इक जोरदार किक उसके पेट में जड़ दी , रामसे उड़ता हुआ पीछे खड़े पुलिस वालो के ऊपर जा गिरा ,

"फिरी , नयी , नयी , जिन्दा पकडू ऐसे..." रामसे जमीन पर कहरहते हुए बाकि पुलिस वालो से बोलै ,

कोई 10 पुलिस वालो ने रवि को घेर लिया , वोह सब मरने के लिए त्यार खड़े थे , लेकिन उनको शयद यह एहसास नै था के रवि इंसान नै शेतीअन था , रिंग की कई ताकतों का मालिक ,

इक पुलिस वाले ने रवि के चेहरे पर इक पंच ज्यादा , रवि इक तरफ को ज़ुका और फिर रवि ने मुस्करा कर उसकी तरफ देखते हुए , इक जोरदार पंच उसके पेट में जड़ दिया , वोह पुलिस वाला दीवार के साथ टकरा कर निचे गिर गया ,

फिर रवि रुका नै , वोह मरता गया , मरते मरते उसके हाथ दीवार पर लगा छोटे सा अग्ग बजाने वाले स्लैंडर लग गया , अभ बस उसके सामने कोई 30 से जायदा पुलिस वाले खड़े थे ,

अभी रवि उनकी तरफ बाद hi रहा था के रामसे चीला कर बोलै ..."फिरी..."

उन पुलिस वालो ने रवि पर गोळ्यां चलनी सुरु कर दी , रवि की आँखें लाल रौशनी में चमक उठी , तेज़ गोळ्यां भी उसे बेहद धीमी रफ़्तार में अत्ति हुई दिखाई देने लगी ,

रवि जमीन पर झुक गया , उसके हाथ पीछे जमीन को छू रहे थे , गोळ्यां उसके ऊपर से गुजरने लगी , तभी रवि इक डैम सीधा हुआ और उस स्लैंडर का बोटों दबा उन पुलिस वालो की तरफ भागने लगा , इक तेज़ धुँआ सा निकल कर , चारो तरफ फैल गया , पुलिस को कुछ दिखाई नै दे रहा था ,

रवि उन पुलिस वालो के बेहद करीब पहुँच रुक गया , जब सफेद धुआँ थोड़ा काम हुआ , तब रवि को इक डैम अपने करीब देख वोह थोड़ा दर गए ,

"अभ बहुत हुआए..." रवि ने बेहद गुस्से में चीख कर बोलै , उसकी आँखें तेज़ लाल रौशनी में चमक उठी ,

रवि ने दो पुलिस वालो को गले से पकड़ ऊपर उठा लिया , उनकी टंगे हवा में जुलने लगी , रवि का वहशी रूप देख , बाकि पुलिस वाले निचे की तरफ भागने लगे ,

रवि ने उन दोनों पुलिस वालो के सार आपस में भिड़ा दिए , दोनों के माथे फैट गए और खून बहने लगा ,

रवि बाकि पुलिस वालो के पीछे भगा जो सेडीईओं से निचे उतर रहे थे , रवि भी सेड्यां उतारते हुए उनको मर रहा था ,

कुछ hi पलु में वह सनता पसरा हुआ था , हर तरफ घ्याल पुलिस वाले दर्द से कहरः रहे थे , कुछ बेहोश पढ़े हुए थे ,

"उफ़ ओह्ह यह रामसे कहा मर गया , इतना वख्त लगता है , किसी को पकड़ने में..." दसप शमशेर सिंह बेहद गुस्से में ेहडेर ोहडेर भटकते हुआ बोलै ,

तभी उसकी नज़र , जमीन पर रेंगते हुए इक आदमी पर गई , जो हाथो के बल अग्गे बढ़ने की कोससिह कर रहा था , उसकी तंग पर गहरी चोट थी ,

"यह , यह , तोह रामसे है..." दसप माथे पर बहते पसीने को साफ करते हुए बोलै ,

रामसे हॉस्पिटल के मैं गेट के पास आकर बेहोश हो गया , किसी की हिमेट नै थी अंदर जाने की , तभी सबने देखा , रामसे के पास इक लड़का खड़ा है , और यह लड़का रवि था ,

"हुऊ , मर दू ऐसी..." दसप शमशेर सिंह , रवि को सामने देख गुस्से में चीला कर बोलै ,

अभी सब गोली चलने hi वाले थे के रवि भागते हुए कमिश्नर राजेश और दसप शमशेर सिंह के पास पहुँच गया , उसकी रफ़्तार देख सब हरिजन सा हो गए ,

रवि ने दसप शमशेर सिंह को गर्दन से पकड़ इक जोरदार थपड उसके चेहरे पर जड़ते हुए bola..."me इंसान नै हुऊ , में शेतीअन हूँ , तुम सबका मालिक , मुझे जाने दो वार्ना तुम सबकी लाशे यही बिषा दूंगा , ाहः , दसपपपप में इस शहर पर राज़ करुगा , क्यों की शेतीअन राज़ करते हैं , में हु थे डेविल , ाहः... " रवि ने बेइंतहा गुस्से में शमशेर सिंह की आँखों में आँखें दाल बोलै , शमशेर सिंह का बदन कम्पनी लगा , क्यों की रवि की आँखें इक वहशी दरिंदे जैसी लग रही थी ,

रवि ने इक गाड़ी की खिड़की खोली , और अपने साथ दसप शमशेर सिंह को बिठा लिया और गाड़ी शहर के अंदर की तरफ डोडा दी ,

कमिश्नर राजेश ने बाकि पुलिस वालो के साथ उसका पीछा करना सुरु कर दिया , कोई 20 से जायदा गाड़यां रवि की गाड़ी का पीछा कर रही थी ,

शहर के अंदर एते hi रवि ने गाड़ी धीमी कर दसप शमशेर सिंह को बहार फेंक दिया और गाड़ी फिर से डोडा दी , शहर के अंदर की तरफ ,

वही दूसरी तरफ...

सीमा , कोमल , रिमी और शूरति घर के हॉल में बैठी बतिअन कर रही थी , तभी ख़ुशी भी उनके पास पहुँच गई , उसके चेहरे पर कुछ परेशानी थी ,

"ख़ुशी क्या हुआ..." सीमा ने ख़ुशी के करीब जाकर उससे पूछा ,

"वोह डीडीई , रवि को पुलिस ने घेर लिया है , मुझे चिंता है..." ख़ुशी थोड़ा उदासी में बोली ,

"ओह्ह कुछ नै होगा रवि को..." सीमा ने ख़ुशी के बालो पर हाथ फिरते हुए बोलै ,

"देदी , रवि की नै , मुझे पुलिस वालो की चिंता है , पता नै रवि क्या क्या कर रहा होगा..." ख़ुशी मुस्कराते हुए बोली ,

"हम्म , देदू टीवी होता तोह पता चल जाता..." रिमी ने मसोमीयत से बोलै ,

"अरे वह रिमी , तू बहुत इंटेलीजेंट है..." शूरति , रिमी की बात सुन मुस्कराते हुए बोली ,

"सच्ची देदू..." रिमी भी शूरति की आँखों में ज़कते हुए बोली ,

"हाँ सच्ची..."

"हलो , तुम दोनों अपनी सच्ची झूठी पुराण बंद करो , में कुछ करती हु..." ख़ुशी ने मुस्करा कर बोलै और अपनी आँखें बंद कर , कुछ मंत्र पढ़ने लगी , तभी घर के हॉल में इक बड़ा सा टीवी जैसा स्क्रीन बन गया , जिसमे बस रवि hi दिख रहा था ,

"अरे यह तोह भइआ हैं , देदू कोनसा चैनल लगाया अपने..." रिमी बेहद उत्सुक होते हुए बोली ,

"हे भगवन , मासूम रिमी , यह रवि है , जो वोह कर रहा है अभी , वोह हम देख रहा है , तुम होंठो पर ऊँगली रख , बस देखो ..." ख़ुशी अपना माथा पीट ते हुए इक लकड़ी की चेयर पर बेथ बोली ,

फिर सब बेथ कर रवि और पुलिस वालो की फाइट देखने लगी ,

"देदू मूवी जैसा लग रहा है , कुछ पॉपकॉर्न मिल जाते तोह ..." रिमी , ख़ुशी की तरफ मासूम नज़रिओं से देखते हुए बोली ,

ख़ुशी ने अपना माथा इक बार और पीट लिया और आँखें बंद कर होंठो में कुछ बोलै तोह उसके हाथ में पॉपकॉर्न ा गए , जो उसने रिमी को दे दिए ,

"देदू कोल्ड ड्रिंक भी..." रिमी ने मसोमीयत से पॉपकॉर्न कहते हुए बोलै ,

"शठ , में क्या बोतल से निकला जीन हु , जो आर्डर पर आर्डर किये जा रही हो , में तामस हु , अभ कोल्ड ड्रिंक के बाद तुमने कुछ माँगा तोह , में तुम कोल्ड ड्रिंक की बोतल में बंद कर दूंगी..." ख़ुशी ने गुस्से में बोलै और फिर से आँखें बंद कर कुछ मंत्र पढ़े , और इक कोल्ड ड्रिंक रिमी को दे दी ,

"थैंक्स देदू..." रिमी मुस्कराते हुए बोली और फिर ख़ामोशी से रवि को देखने लगी ,

वही दूसरी तरफ...

रवि की गाड़ी के पीछे पुलिस की गाड़यां लगी हुई थी , शहर के हर न्यूज़ चैनल पर यह फाइट दिखाई जा रही थी , हर न्यूज़ चैनल पर रवि के बारे में बहस हो रही थी , शहर के हर हिस्से में रवि का नाम चाय हुआ था , इक किसान से इक मोस्ट वांटेड मुज़रिम , रवि को थे डेविल का नाम दिया जा रहा था , शहर के इक इक आदमी की जुबान पर , इस वख्त थे डेविल रवि , नाम सार चढ़ कर बोल रहा था ,

रवि गाड़ी चलते हुए अभ शहर के बेहतर घुस गया था , वह बहुत ट्रैफिक भी था , पुलिस की गाड़यां अभ अलग अलग हो चुकी थी , वोह रवि को घेर रहे थे ,

"उम् , वापिस जाता हु , यहाँ तोह मासूम लोग भी हैं , कही किसी को चोट न लग जाये , ः मज़ा ा रहा है , डेविल , में हु डेविल , शहर पर मेरा राज़ होगा , में आम लोगो की मदद करुगा , अभ बिना किसी रोक टोक के , डेविल बन कर..." रवि ने खुद से hi बोलै और गाड़ी वापिस डोडा दी ,

रवि ने गाड़ी मोड़ कर देखा , सामने रोड पर 3 गाड़यां कड़ी थी ,

"अभ आएगा मज़ा , अभी क्या करू..." रवि ने खुद से hi बोलै और गाड़ी बेहद तेज़ रफ़्तार में उन गाड़यों की तरफ डोडा दी , पर तभी रवि गाड़ी में से गयाब हो गया , और गाड़ी तेज़ रफ़्तार में hi पलट गई , कुछ दूर तक पलटने के बाद , गाड़ी जलने लगी ,

पुलिस वालो ने गाड़ी के करीब आकर देखा , उसमे कोई नै था , वोह सब परेशान थे , आखिर रवि कहा गयाब हो गया ,

वही दूसरी तरफ...

"हैं , खुशु देदू भइआ कहा गयाब हो गए..." रिमी ने कोल्ड ड्रिंक के छोटे छोटे सिप लेते हुए बोलै ,

"ओह्ह नू , में नै जानती..." ख़ुशी बेहद परेशानी में बोली ,

"हे भगवन , अभ क्या होगा..." सीमा बेहद चिंता में बोली ,

ें सब में कोमल कुछ नै बोल रही थी , उसे शयद एहसास था , उसका भाई कहा होगा , आखिर रिंग ने दोनों को इक जैसी शक्ति दी थी , इस लिए वोह दोनों आपस में जुड़े थे , मन से भी , और दिल से भी , कोमल उठ कर अपने रूम में चली गई ,

वही दूसरी तरफ...

"अह्हह्हह्हू , वह , वह , मेरी खूबसूरत शेतीअन , कमल कर दिया , तुमने पूरा फार्मूला hi बदल दिया , अभ आएगा मज़ा , तबाही , तबाही , हर तरफ तबाही , और इस में मुझे ख़ुशी मिलती है , अहहहहआ..." जोकर हाथ में इक केमिकल की कांच की छोटी सी बोतल लिए हस्ते हुए बोलै ,

"शुक्रिया सर , यही तोह मेरा काम है , सर लारा का कुछ पता चला..." एलिज़ा बेथ थोड़ा परेशानी में बोली , क्यों की वोह और लारा हमेशा साथ रही थी , कभी अलग नै हुई थी ,

"हम्म , लारा धोकेबाज है , धोका दिया उसने , तुम , मुझे , लेकिन उसे इसकी सजा भी मिलेगी , पहले इस फॉर्मूले का कमाल तोह दिखाओ..." जोकर उस कांच में से उस ग्रीन लिकुड को देखते हुए बोलै ,

"सर इसकी इक बूँद hi इस दुनिआ में तबाही मचने के लिए काफी है , मने इक शेतीअन को जनम दिया है , और अभ इक जीता जगता शेतीअन त्यार करुँगी , जो रवि को ख़तम कर देगा..." एलिज़ा ने बेहद गुस्से में बोलै , क्यों की उसे लगता था , रवि ने hi लारा को उससे दूर किया है ,

"ाहाःहाहू , करो जिन्दा शेतीअन को , तबाही मचा दो हर तरफ , इंसानो का रोना , तड़फना सुन्ना है , उनकी असलीयत देखनी है , उनके चेहरों से नकाब उतरना है , जल्दी करो..." जोकर बेहद ख़ुशी में बोलै ,

"जी सर , अभी कल इस शहर में इक नया दरिंदा तबाही मचा देगा , जिसे कोई रोक नै पायेगा..." एलिज़ा बेथ ने हस्ते हुए बोलै तोह जोकर भी हसने लगा , आखिर कोण सा दरिंदा उस ग्रोथ फॉर्मूले की इक बूँद से जनम लेने वाला था , और आखिर अभ इस फॉर्मूले में क्या चेंज हुआ था , यह तोह ऐनी वाले वख्त में hi छिपा था ,

वही दूसरी तरफ...

बेबी सुबह सुबह hi कबीले से निकल आयी थी , आखिर उसे काट से मिलना था , काट और रवि , यह दो शक़श उसकी जिंदगी में क्या एहमियत रखते थे , इनको शबदो में बताया नै जा सकता , बस महसूस किया जा सकता था ,

बेबी अपनी जादुई शक्ति से अपने घर पल भर में hi पहुँच गई थी , उसके चेहरे पर इक मुस्कान थी , आखिर उसे अपनी बेटी फर्जी से जो मिलना था ,

बेबी ने दुर्बल बजे तोह कुछ पलु बाद दरवाजा खुला , उफ़ सामने काट कड़ी थी , चेहरा मुरझा सा गया था , आँखें लाल हुई थी और बाल भिकारी हुए थे ,

बेबी ने अंदर एते hi काट को अपनी बहु में भर लिया , उसके पूरे चेहरे को चूमने लगी , काट बस रो रही थी , कभी जंगली जानवर जैसी हिंसक काट , अज्ज कितना बदल गई थी , उफ़ यही तोह वख्त की मार कहलाती है ,

वख्त सब बदल देता है , वख्त गरीब को अमीर और अमीर को गरीब कर देता है , वख्त की मार यु पढ़ती रहती है , के शेतीअन भी इंसान बन जाते हैं , क़ातिल , मासूम बन जाते हैं ,

और यही हाल काट का था , काट अभ बदल गई थी , वोह अभ प्रेम की भुकी थी , कल यहाँ उसे बेहटा खून ाचा लगता था , अभ असनु बहने पर भी वोह टूट कर भीकर जाती थी , क्युकी उसे प्यार था , और प्यार दर्द देता है , ख़ुशी देता है , प्यार का दर्द भी रहस्मयी होता है , प्यार की ख़ुशी भी रहस्मयी होती है ,

बेबी , काट को अपनी बहु में भरे उसे चूमती रही , उसने इतना चूमा के काट को ब्रह्माण्ड से भी गहरे अपने मन के केन्देर तक , इक सकूं सा मिल गया , उसकी आँखें बंद हो गई , मन शांत हो गया , प्यार न मिलने का जो दर्द उसके मन में था , वोह बेबी के हज़ारो चुम्नो ने पल भर में मिटा दिया , वोह बेबी के प्यार को महसूस करती , खो सा गई , उसकी आँखें बंद थी और सांसे तेज़ थी...

"मेरी जान , मेरी कटत , मुझे माफ़ कर दू..." बेबी ने काट की भेजी आँखों में ज़कते हुए बोलै , और फिर उसके गीले गुलाबी लबु को चूस लिया ,

"में , में ठीक हु जान , मुझे , अहह (रट हुए) , कुछ नै हुआ ..."

"ाचा (रट हुए) , अभ झूठ भी बोलने लग गई , चल कपडे पैक कर , हमें जाना है..." बेबी ने काट के गालो पर प्यार से मरते हुए बोलै ,

"कहा जाना है..." काट बैडरूम की तरफ जाते हुए बोली ,

"सरप्राइज दूंगी , मेरी बेटी कहा है..." बेबी ने घर में ehder-ohder देखते हुए बोलै ,

"वोह सो रही है , बेबी इक बात कहु.." काट अभ बैडरूम में पहुँच चुकी थी , वोह अपने और फर्जी के कपडे पैक करती हुई , साथ साथ बेबी से बतिअन भी कर रही थी ,

"हाँ पुछु.." बेबी बीएड पर बैठते हुए बोली ,

"बेबी , तुम फर्जी की जरा सी भी चिंता नै है , जानती हो , जब तुम घर से चली गई , वोह कितना रोई , कितना तदफी , बेबी तुम उसकी माँ हो , और इक माँ कैसे अपने प्यार के लिए , अपनी बेटी को यु छोड़ कर चली जाती है , बेबी मेरा दिल नै मन , फर्जी मेरी भी बेटी है , में उसे कभी अकेला न छोड़ पायी , अभ तुमसे में बस यही कहुगी , कभी फर्जी को अकेला मत छोड़ना , वार्ना , वोह हम दोनों जैसी बन जाएगी , और में नै चाहती के फिर इस दुनिआ में , किसी बेबी और कैटलीन का जनम हो..." काट ने आँखों में बहते असनु साफ कर बोलै ,

बेबी खामोश कड़ी सब सुनती रही , काट की बातिओं ने उसके दिल को चीयर कर रख दिया था , लेकिन वोह खामोश रही , उसने मन hi मन , खुद से इक वादा किया , कभी वोह अपनी बेटी को खुद से दूर नै करेगी....

काट कपडे पैक कर नहाने चली गई और बेबी बीएड पर सोई फर्जी के पास बेथ गई , फर्जी भी पहले से बड़ी हो चुकी थी , उसकी उम्र अभ दस साल की हो चुकी थी , वख्त नै रुका था , और वख्त अभ फर्जी को बेबी जैसा बना रहा था.....

"मेरी बची , तुम्हारा पापा , तुमसे मिल कर कितने खुश होंगे , कितनी खूबसूरत है मेरी प्यारी बेटी...." बेबी ने फर्जी के माथे को चूमते हुए बोलै , उसकी आँखें नाम थी , तभी फर्जी ने अपनी आँखें खोल ली....

"मुम्मा..." फर्जी आँखें नाम करते हुए बोली ,

"मेरी बाछीइ..." बेबी बस इतना hi बोल पायी , उसने फर्जी को उठा कर अपनी बहु में भर लिया , बेबी रोने लगी , बेइंतहा रोने लगी , फर्जी को अपने सीने से लगाए , आखिर वोह उसकी बेटी थी , क्या हुआ उसने उसे जनम न दिया हो , पर माँ की ममता कभी झूठी नै हो सकती ,

"मेरी बेटी , माफ़ कर दे मुझे , में , में , बुरी मुम्मा हु , माफ़ कर दे , उम्मा , मेरी बेटीइ..." बेबी पगलू की तरह फर्जी के चेहरे को चूमते हुए बोली ,

कुछ पल फर्जी को अपने सीने से लगा , बेबी अपनी बेटी को महसूस करती रही , जब उसकी ममता को सकूं सा मिला , तब उसने फर्जी को अपने से अलग किया , और खुद बीएड पर लेट , फर्जी को अपने सीने से लगा लिया ,

"मुम्मा , पापा कहा हैं , मुज़से मिलने नै एते , मुम्मा , पापा नाराज़ हैं मुज़से , बोलो न मुम्मा ..." फर्जी बेहद मसोमीयत से बोली ,

"फर्जी मेरी बची , पापा बहार गए थे , उनको काम करना पढता है , ाचा मेरी बची , अज्ज मुम्मा आपको सरप्राइज देगी , अज्ज मुम्मा आपको पापा के पास लेकर जाएगी , अप्प पापा से बतिअन करना , शरतीयं करना , अज्ज के बाद आपकी मुम्मा आपके पास रहेगी , और आपके पापा भी , हम दोनों आपको बहुत प्यार देंगे , क्यों की अप्प हमारी छोटी सी एंजेल हो ..." बेबी बेइंतहा दर्द में डूबी आवाज़ में बोली , वोह बार बार फर्जी के चेहरे को चुम रही थी ,

"सच में मुम्मा , में पापा से मिलूगी , मुम्मा मेरे स्कूल में , मेरे दोस्तों के उनके पापा छोड़ने एते हैं , मेरे पापा क्यों नै एते , मुम्मा , में पापा से बहुत नाराज़ हु , में उनसे बात नै करुँगी..." फर्जी ने बेबी के सीने में चेहरे छुपा बेहद नरम आवाज़ में बोलै ,

"नै बीटा ऐसा नै कहते , पापा परेशान थे , तुम नै पता , पापा तुमसे कितना प्यार करते हैं , ाचा , जब तुम पापा से मिलूगी तब देख लेना..." बेबी बेहद नाम आँखों से बोली और फर्जी के माथे को चुम लिया ,

फिर कोई कुछ न बोलै , बेबी अपनी बेटी को बहु में भर उसे महसूस करती रही , अज्ज नजाने कितने वख्त बाद उसने अपनी बेटी को यु बहु में भरा था , वोह पागल सी हो गई थी , वोह बार बार अपनी बेटी के चेहरे को चुम रही थी ,

यहाँ यह बात माईने नै रखती थी , जनम किसने दिए , यहाँ यह बात माईने रखती थी , प्यार किसने दिए , फर्जी को माँ मिल गई , और बेबी को इक बेटी , इंसान कभी अनाथ नै होता , अनाथ हमारी सोच होती है , जंगल से फर्जी को बचा कर , बेबी ने यह साबित कर दिया था , माँ की ममता कब , कहा , किस रूप में सामने ा जाये , यह भगवन भी नै सोच सकता... अज्ज फर्जी , बेबी की बेटी थी , वोह अनाथ नै थी , वोह रवि और बेबी की अपनी बेटी थी , और वोह दोनों उसके maa-baap थे....

तो बे कुनिटेड...

 


अपडेट-69

अभ अग्गे...

बेबी अपनी बेटी फर्जी को अपने सीने से लगाए लेती रही , वोह महसूस करती रही अपनी बेटी को ,

बेबी अभ रवि के बारे में सोच रही थी , उफ़ उसकी भी कोई गलती नै थी , यह तोह था नै के रवि जानबूझ कर फर्जी से न मिलने आया हो ,

रवि क्यों नै आया , वोह कहा था , यह बात बेबी दिल की गहराई से समज़ती थी , उसे पता था रवि कैसा इंसान है , रवि से बढ़कर उसकी बेटी को प्यार , इस दुनिआ में कोई नै कर सकता ,

"अरे उठो तुम दोनों , जाना नै है क्या..." काट मुस्कराते हुए बोली , वोह नाहा कर रेडी हो चुकी थी ,

"हम्म , चलो , इक मिंट मेरी बेटी तोह रेडी हुई hi नै..." बेबी उठ कर फर्जी का माथा चूमते हुए बोली ,

"बेबी में त्यार करती हु , चलो मेरी बची ायो जल्दी..." काट भी फर्जी के पास आकर उसे गॉड में उठाते हुए बोली ,

"फर्जी को क्या पसंद है , वही पहना दो.." बेबी , फर्जी के कपडे उसे दिखते हुए बोली ,

"बेबी यार इक बात कहु , फर्जी के बालो ने मुझे बहुत परेशान किया , तुम यहाँ थी नै , यह मुज़से कहती , बालो की दो छोट्या करो , माँ कसम , मेरी तोह हालत ख़राब कर दी , लेकिन धीरे धीरे मने बालो के डिज़ाइन बनाना सिख लिया , है न बेतु..." काट , फर्जी के बालो की छोट्या बनाते हुए बोली ,

"हाँ मुम्मा..." फर्जी , काट की तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,

करीब 1 घंटे बाद सब त्यार थे , बेबी ने इक लीव एप्लीकेशन लिख दी थी , तेन की फर्जी को स्कूल से कुछ दिनों की लीव मिल जाये ,

फिर दोनों घर से बहार आकर स्कूल बस का इंतज़ार करने लगी , जब तक बस अति , तब तक बेबी ने कपड़ो से भरा बैग गाड़ी की दिग्गी में रख लिया ,

करीब 10 मिंट बाद स्कूल बस भी ा गई , काट ने वोह लीव एप्लीकेशन बस में बैठी इक टीचर को दे दी , और वापिस बेबी के पास ा गई , काट ने अज्ज भी महसूस किया , बस ड्राइवर उसे कैसे घर घर कर देख रहा था , लेकिन उसने यह नार्मल बात समाज कर छोड़ दिया ,

बेबी ने गाड़ी स्टार्ट की और तीनो जंगल की तरफ निकल पढ़े , तीनो में hassi-mazak चलता रहा , क्यों की परिवार जब साथ हो , तब खुशियाँ hi मिलती हैं...

वही दूसरी तरफ....

रवि गाड़ी से गयाब होकर इक अनजान सी जगह पर पहुँच गया था , as-pas हरा भरा जंगल था , और इक झोपड़ी सी दिख रही थी , रवि परेशान सा हुआ उस झोपड़ी की तरफ बढ़ने लगा ,

"हलो कोई ही , किसने मुझे गयाब किया , लड़ना है , सामने ायो , में शेतीअन हु , शेतीअन , सामने ायो , बुज़दिल कही के..." रवि झोपड़ी की तरफ बढ़ते गुस्से में चीला कर बोलै ,

रवि ने झोपड़ी में घुस कर देखा , झोपड़ी इक डैम खली थी , अंदर कोई नै था , इक छोटा सा बिस्तर था , घास का , इक मिटटी का मटका था पानी का , और कुछ नै ,

"कोण हीी , शेतीअन को बुला , खुद चुप गया , सामने आयु ..." रवि झोपड़ी से बहार आकर गुस्से से चीला कर बोलै ,

"रवीए , गुस्सा काम करो , शांत रहो , वख्त ने तुम बदल दिया , किसान से शेतीअन , यही तोह वख्त की मार है , कल अपने गाओं में थे , इक खुशहाल जिंदगी गुजरते हुए और अज्ज इक दरिंदे बन गए हो..." इक रहस्मयी आवाज़ रवि को सुनाई दी , पर यह सिर्फ आवाज़ थी , कुछ दिखाई नै दे रहा था ,

"हुऊ , कोण हो अप्प , सामने क्यों नै एते..." रवि ने पगलू की तरह as-pas नज़र दौड़ते हुए बोलै ,

"जब तुम टूट चुके थे , तब तुम वापिस बेहज दिया , में वही हु , भूल गए क्या..." वही आवाज़ फिर से रवि को सुनाई दी ,

"बाबा..." रवि घुटनो के बल बेथ गया , उसने सार ज़ुका लिया , उसे सब यद् था , इंसान चाहे जिस मुकाम पर पहुँच जाये , अपनी जिंदगी के काळा दिन कभी नै भूल सकता , जिन लमहु ने दर्द दिया हो , उस दर्द के घाव कभी कोई भुला नै सकता ,

"हाँ में हु , तुम तोह बहुत जल्द यद् ा गया..." फिर से वही रहस्मयी आवाज़ रवि को सुनाई दी ,

"बाबा , आपको कैसे भूल सकता हु , अप्प ने नयी जिंदगी दी मुझे , अगर अप्प , हाँ अप्प , उस वख्त मुझे वापिस न बेह्जते , में न तोह अपनी सीमा को प् सकता और न अपनी कोमल को , अप्प मेरे लिए सब कुछ हो..." रवि ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"मने तोह इंसान को वापिस बेह्जा था , पर तुम तोह शेतीअन बन गए..."

"बाबा हालातो ने मुझे शेतीअन बना दिया , इक दरिंदा बना दिया , प्यार पते पते में दरिंदा बन गया , लेकिन बाबा में बुरा नै हु , लड़ रहा हु खुद से , अपने उसी प्यार को पाने के लिए , हैश्च , अप्प सब जानते हो , कुछ नै छुपा आपसे..." रवि ने आँखें बंद कर बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"हाँ जनता हु बीटा , शिव भगवन को तुम अचे लगे , तुम्हारे करम अचे लगे , और में तोह शिव का सेवक हु , जो वोह चाहते हैं वही कहता हु , वही करता हु , तुमने जिंदगी की हर लड़ाई प्यार से जीती है , बुरे लोग को अच्छी के रस्ते पर लाये , अचे लोग का साथ दिया , लेकिन..." बाबा बोलते बोलते थम सा गए ,

"लेकिन क्या बाबा..." रवि भी थोड़ा परेशान सा होकर बोलै ,

"बहिन का प्यार नै मिला..."

"नै मिला बाबा , उसी बहिन के लिए तोह तड़फ रहा हु , जब भी उसे पाना चाहता हु , तब कोई न कोई बुराई मेरे रस्ते में ा जाती है , इस बार..." रवि अभी बोल hi रहा था के बाबा बेच में बोल पढ़े ,

"इस बार रिंग पहने वोह औरत ा गई , होता है , शिव कहते हैं , यह संसार नशीन है , कुछ भी जीवट नै है , जो सुन्दर है उसे भी नष्ट होना है , तुम्हारी कोमल इक रहस्मयी लड़की है , उसे पाना , किसी के बस की बात नै , शिव कहते हैं , ऐसी लड़की का जनम सदियों में इक बार होता है , जो पवितरता के साथ जनम लेती है , और आखरी साँस तक पवितर रहती है..." बाबा की आवाज़ ने रवि को सब सचाई बताते हुए बोलै ,

"पर बाबा , में उसे चाहता हु , जनता हु वोह अनोखी है , इस दुनिआ से अलग है , लेकिन में उसे पाकर रहुगा..."

"वोह औरत दुनिआ बर्बाद कर देगी , उसे मैप चाहये , वोह उस ताकत को पाना चाहती है , जो शिव भगवन ने छुपा राखी है , इस दुनिआ से , तुम रोक पाओगे उसे ..." बाबा ने रवि को चेतावनी सी देते हुए बोलै ,

"रोकूंगा और मरुँगा भी , में उसे उस पवितर ताकत तक कभी नै पहुँचने दूंगा , चाहे मेरी जान क्यों न चली जाये..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"रवि मरना आसान नै होता , अपनी जिंदगी पर नज़र डालो , तुम अकेले नै हो , में अकेला हु , संसार से दूर , कुदरत के बेच , शिव से जुड़ा हुआ , तुम अकेले कभी थे hi नै , तुम्हारी जिंदगी कई जिन्दगियों से जुडी हुई है , तुम्हारी पत्नी , तुम्हारी बहने , तुमसे प्यार करने वाली प्रेमिकयाँ , तुम मर नै सकते , अगर तुम अकेले रखना होता , तोह में तुम अपने पास से कभी दूर जाने hi नै देता , शिव ने मुज़से कहा , तुम अंत करना है , उस शेतीआणि रिंग का , दुनिआ को मुक्ति दिलाओ उस शेतीअन रिंग से , सदियों से जो पाप पृथ्वी पर बढ़ रहा है , वोह सब इस रिंग की बुराई के कारन बढ़ रहा है , हर बुरी चीज़ का इक कैंडेर होता है , इंसान अगर बुरा है तोह इस बुराई का कैंडेर उसका मन है , अगर पृथ्वी पर बुराई है , तोह इसका कैंडेर वोह रिंग है..." बाबा की शांत और नरम आवाज़ रवि को सब समझा रही थी , उनके इक इक शब्द में वास्तविक सचाई थी ,

"हैश्च , पर बाबा वोह रिंग उस औरत ने धारण की हुई है , और अगर वोह अपनी ीचा से रिंग नै उतारेगी , तब तक में उसका कुछ नै भिगाड सकता , क्या करू , मेरी पूरी ताकत व्यर्थ है ..." रवि ने अपना चेहरा ज़ुका कर बोलै ,

"तुम बहुत कुछ कर सकते हो , तुमने अपनी जिंदगी कहा से सुरु की , और अज्ज तुम कहा पहुँच गए , तुम बेहद खास हो , खुद को काम समज़ना , किसी भी इंसान के लिए हानिकारक होता है , कोई भी इंसान कमज़ोर नै होता , उसे बस खुद की पहचान करनी होती है , रिंग क्यों है , किस लिए है , तुम रिंग से लड़ना है , न के उस औरत से , रिंग को नष्ट करने की तरफ बडोगे , तब वोह औरत खुद बा खुद नष्ट हो जाएगी..."

"पर बाबा , रिंग को कैसे नष्ट करू , जब के इस दुनिआ में सब जानते हैं , रिंग अमर है , उसे कोई नै मार सकता , वैसे भी वोह रिंग नै , मेरी बहिन सुहाना है , जो मुझे पाकर अपना बदला लेना चाहती है ..." रवि ने सुहाना को यद् कर थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"सुहाना तोह सीमा है , और सीमा ने तुम प् लिया है , तुम्हारी पत्नी बनकर , रिंग कभी सुहाना थी hi नै , रिंग इक बुराई है , शेतीअन का अंश..." बाबा अभी बोल hi रहे थे , के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"में कुछ समझा नै..."

"जब सुहाना ने 6 कुवारी कइओं की बलि दी , तब ब्रह्माण्ड में विराजमान शेतीअन , अपनी सुपत अवशता से जग उठा , सुहाना के मन के भेटेर उपजी बेइंतहा बुराई और नफरत ने शेतीअन को बहुत प्रभावित किया , उसे सुहाना अछि लगी , जब सुहाना बार बार उसे अपना पिता कहती रही , तब शेतीअन ने उसे अपनी बेटी मन लिया , अपनी बुराई का इक अंश उसने , सुहाना को वरदान के रूप में दे दिया , अभ सुहाना अपने पिता से जुड़ चुकी थी , उसके अंदर उसके पिता शेतीअन की बेमिसाल बुरी ताकतों का अंश पलने लगा था , वोह बुरा अंश जीवट प्राणी जैसा था ..." बाबा अभी बोल hi रहे थे , के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"ओह्ह तोह फिर रिंग कैसे बानी..." रवि सब कुछ जानने की ीचा से उत्सुक होते हुए बोलै ,

"बताता हु , जरा धीरज रखो , जब वोह बुरा अंश सुहाना के मन में पलने लगा , तब सुहाना के मन में बुराई का प्रभाव इस कदर बढ़ गया , के उसे अपने पिता के इलावा कुछ दिखाई नै दे रहा था , और इक दूसरा मकसद था , अपने पिता से मिलने की बेइंतहा ीचा , उसकी ीचा शक्ति और वोह बुरा अंश दोनों मिल गए , तब सुहाना खुद इक शेतीअन की देवी बन गई , पारी लोग में अंतिम युद्ध में , उसने सब को मर दिया , पारी लोग तबाह कर दिया , तब तुम्हारी बहिन सुमों , जो अभ रमा के रूप में जनम ले चुकी है , उसने अपनी काली शक्तियों से सुहाना के जिस्म का नाश कर दिया..."

"ाचा तोह रमा ने सुहाना को मारा था , यह बात तोह में जनता हु , ख़ुशी ने बताई थी..."

"हाँ , रमा ने सुहाना का अंत किया था , सुहाना का जिस्म जल कर रख हो गया , पर शेतीअन का वोह जीवट अंश अभ भी आज़ाद था , रमा ने अपनी पूरी ताकत लगा , इक रिंग का निर्माण किया , और उस अंश को उस रिंग में दाल दिया , रमा इस जुंग में बेहद कमज़ोर हो गई थी , तभी उसे भी किसी ने धोके से मर दिया ..." बाबा ने रमा के बारे में बताते हुए कहा ,

"अभ समाज गया , में सब समाज गया , रिंग में शेतीअन का अंश है , उसे इक जिस्म चाहये , वोह जिस्म भी वही चाहती है , जिसने उसके अंश को सबसे पहले धारण किया था..." रवि सब समज़ता हुआ बोलै ,

हाँ , और वोह जिस्म किसका है..." बाबा ने इक सवाल किया ,

"मतलब सीमा का जिस्म..." रवि िका इक बोलै ,

"हाँ , सीमा hi सुहाना है , रिंग को जिस्म भी सीमा का hi चाईए , इक बात और , अगर सीमा ने रिंग धारण कर ली , तोह वोह कोमल की बलि देगी , और शेतीअन पूरी तरह से जागृत होकर , इस पृथ्वी पर फैल जायेगा , वोह नाश कर देगा , इक इक इंसान का , इक इक जीवट चीज़ का , तुम रोकना है , रिंग को , रिंग सीमा के जरिये कोमल तक पहुंचे , उससे पहले तुम रिंग का नाश करना होगा..."

"बाबा में समाज गया , क्यों कल रत उस औरत ने मुझे कोमल के नज़दीक नै जाने दिए , वोह उस औरत ने नै , रिंग ने किया था , रिंग चाहती है , कोमल पवितर रहे , इसका मतलब अज्ज तक , में कोमल के करीब न जा सका , क्यों की रिंग कोमल की बलि देना चाहती है , क्यों की आखरी बलि सुहाना को मेरी बहिन रूही की देनी थी , और रूही इस जनम में कोमल है , ओह्ह्ह सब समाज गया बाबा में..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"हाँ , कोमल को तुम तभी प् सकते हो , जब रिंग का विनाश करोगे , रिंग के जीवट रहते , कोमल कभी तुम्हारी नै हो सकती , यह इस जनम में hi नै , हर जनम में होगा , तुम्हारे पास अभ भी वख्त है , रिंग को नष्ट कर दो..." बाबा ने रवि को चेतावनी देते हुए बोलै ,

"बाबा , पहले मुझे उस औरत को रोकना होगा , उसे ख़तम कर , रिंग को आज़ाद करवाना होगा , फिर में रिंग का अंत कर सकूगा..."

"उस औरत को मरना इतना आसान नै होगा , तुम्हारी बहिन रमा , तुम्हारे और उस औरत के बेच हमेशा कड़ी रहेगी , तुम उससे भी लड़ना होगा , उसके अंदर वही शक्तियां जागृत हैं , जो पिछले जनम में उसके पास थी..."

"क्या करू फिर में , किस तरह रोकू में उस औरत को..."

"इक रास्ता है , रमा को किसने मारा था , यह पता कर लो , हो न हो , शयद ऐसी औरत ने रमा को मारा था , तुम रमा को यह एहसास दिलाना होगा , के वोह गलत है , जब रमा को एहसास होगा , तब रमा उस औरत को ख़तम कर देगी , उसके बाद तुम रिंग के अंदर जाकर उसका अंत कर देना..." बाबा की आवाज़ ने इक रास्ता रवि को बताते हुए बोलै ,

"मतलब , रिंग के अंदर जाकर , में कुछ समझा नै..."

"अभी इसका वख्त नै , पहले तुम उस औरत के बारे में सोचो , शिव की उस पवितर ताकत की रक्षा करो , शहर में फैल रही बुराई का अंत करो , तुम्हारी इक बेटी भी है..." बाबा की आवाज़ ने इक सवाल किया ,

"हाँ बाबा , फर्जी नाम है उसका , पर में उसका बदकिस्मत बाप , उसे कोई ख़ुशी नै दे पाया , उसकी नज़रिओं में मेरी पता नै कैसी छवि बन रही होगी , बाबा इक बात सच्चे दिल से कहुगा , में अपनी बेटी को बहुत प्यार करता हु , बहुत जायदा , पर कभी जाता नै पाया , पर अप्प क्यों पूछ रहे हो..." रवि ने फर्जी को बेइंतहा यद् करके नाम आँखों से बोलै ,

"वख्त ऐनी पर बताउगा , फर्जी को मेरा प्यार देना , वोह बहुत खास लड़की है , इक दिन वोह तुम्हारे लिए कुछ बहुत बड़ा करेगी , तुम इक अचे बाप बनना , अभ जाओ घर..."

"लेकिन अगर मुझे आपसे फिर से मिलना हुआ तोह..." रवि ने जमीन से उठते हुए बोलै ,

"शिव को यद् करके , मुझे यद् कर लेना , में ा जाउगा , जाओ अभ..." बाबा की आवाज़ ने इतना कहा , रवि गयाब होकर वापिस कबीले में पहुँच गया , उसी नदी किनारे यहाँ कल रत वोह रमा के साथ वख्त बीता रहा था....

वही दूसरी तरफ...

दुपहर के 2 बज रहे थे , जोकर अपनी बिल्डिंग में ेहडेर ोहडेर घूम रहा था , वोह बेताब था , अपने पुराने दुश्मन रवि को मत देने के लिए ,

एलिज़ा सुबह से उस फॉर्मूले पर काम कर रही थी , फार्मूला बन कर त्यार था , बस एलिज़ा कुछ बदलाव चाहती थी , जो उसने अभ तक शयद पोरे कर लिए थे ,

अपने काम के वख्त भी , वोह बस लारा को यद् करती रही , लारा के बिना उसकी जिंदगी मायूस सी हो गई थी , लारा से उसका रिश्ता बेहद गहरा था , लारा उसकी इस दुनिआ में अंतिम दोस्त थी , उसके दिल के बेहद करीब थी ,

अपने फॉर्मूले को कम्पलीट कर एलिज़ा , जोकर के पास पहुँच गई , जोकर अपने जादू से एलिज़ा को इक बेहद प्रचीन खण्डार में ले गया , यह प्रचीन खण्डार शहर के बहार था , सदियों पुराण , अज्ज चाहे यह खण्डार में तब्दील हो चूका था , लेकिन इसकी tuti-futi दीवारे इसकी मज़ूदगी का एहसास अज्ज भी लोगो को करवाती रहती थी ,

"सर हम यहाँ क्यों ए हैं..." एलिज़ा बेथ ने खण्डार के निचे इक गुप्त गुफा में सेड्यां उतर निचे जाते हुए बोलै ,

"एलिज़ा यही तोह दफ़न है , मेरे दुश्मन रवि की मौत का राज़ , ाहाःहाहु , अभी दिखता हु , कोण है वोह..." जोकर बेहद वेह्शी अंदाज़ में बोलै ,

फिर एलिज़ा कुछ न बोली , जोकर उसे गुप्त गुफा से होकर तेहकने में ले गया , लेकिन वह चारो तरफ घोर अंधकार था , जोकर ने अपनी हाथ की चुटकी बजे तोह तहखाने की दीवारों पर आग की मचले जलने लगी ,

जब वह हलकी हलकी रौशनी चारो तरफ फैल गई , तब एलिज़ा की नज़र तहखाने के बेचू बेच इक ताबूत पर गई , जोकर उस ताबूत को देख बेहद खुश हुआ , जोकर ने तेज़ी से अग्गे बढ़ उस ताबूत को खोल दिया , उसके अंदर इक योद्धा की मम्मी थी ,

"सर यह किसकी मम्मी है ..."

"एलिज़ा यह इक कहकर योद्धा , बेरहम कातिल , बुराई का प्रतीक , इसका नाम है मार्को , हज़ारो साल पहले मार्को ने इस शहर पर hi नै , इस पृथ्वी पर इतना कोहराम मचाया था , में बता नै सकता , लोगो के ताज़े खून से नाहटा था , बेरहम , दरिंदा , पुराणी कथाओं में ऐसे नाराज का बीटा कहा जाता है , अभ इस फॉर्मूले से में मार्को को वापिस जिन्दा करुगा , मार्को उस रवि को जान से मर देगा , ाहः , अभ होगी तबाही..." जोकर ने ग्रोथ फॉर्मूले की बोतल खोल , इक बूँद मार्को की बेजान पत्तियों से ढकी मम्मी के माथे पर दाल दी ,

एलिज़ा बेथ की म्हणत , और जोकर की काली ताकतों से मिल कर बना ग्रोथ फार्मूला अभ अपना असर दिखने लगा , धीरे धीरे मार्को का जिस्म हरा पढ़ने लगा ,

एलिज़ा बेथ और जोकर ताबूत से थोड़ा दूर हो गया , इक तेज़ धमाका हुआ ताबूत में , सफेद धुआँ ताबूत से बहार निकलने लगा , और तभी इक हाथ ताबूत के बहार निकला , और फिर उठ कर बेथ गया , नाराज का बीटा मार्को.....

वही दूसरी तरफ....

रवि नदी किनारे बैठा था , उसके मन के बेहतर कई सवाल चल रहे थे , जिंदगी क्या है , वोह पहला दिन , जब वोह खेतो में काम कर रहा था , उसकी बहिन रमा उसके लिए खाना लायी थी , फिर उसका और रमा का इक अनोखा रिश्ता बना , फिर वोह शहर आया ,

शहर आकर कोमल , शूरति और रिमी से मिला , सीमा उसकी जिंदगी में आयी , सीमा उसकी जिंदगी में आयी , फिर वोह कोमल और सीमा से अलग हुआ , जूही उसकी जिंदगी में आयी ,

फिर ख़ुशी उसकी जिंदगी में आयी , धीरे धीरे उसे अपना खोया सब कुछ मिल गया , जब वोह मर कर दरिंदा बना , तब रिंग उसकी जिंदगी में आयी , और अज्ज उसे पता चला , वोह कोमल के करीब क्यों नै जा सकता , इक hi तोह कारन था , रिंग ,

लेकिन अभ रवि के मन में कुछ चल रहा था , वोह यह था , उसे अपनी बेटी फर्जी से मिलना था , उसे गले लगा रोना था , इक बाप के मन में कितनी भावनायें जनम लेती हैं , यह अपनी बेटी को दिखाना था ,

रवि , बाबा से मिलने के बाद , अपनी बेटी से मिलने के लिए तड़फ रहा था , उसका मन विचलित हुआ पढ़ा था , उसके दिल की हर धड़कन में बस फर्जी , फर्जी नाम गूंज रहा था ,

रवि अपनी बेटी के लिए कुछ करना चाहता था , इक ाचा और आदर्श बाप बनना चाहता था , पता नै बाप बेटी का यह रिश्ता , अभ कहा , किस तरफ अग्गे बढ़ता , पर इक बात तोह तेह थी , रवि अपनी बेटी के लिए , जान दे भी सकता था , और किसी की जान ले भी सकता था...

तो बे कुनिटेड....[note- friends ring ki pori detail bata di hai , kuch swalo ke jawab apko mil gye honge...]

 


अपडेट-70

अभ अग्गे...

रवि करीब 1 घंटा वह बैठा रहा , कुछ सोचते सोचते उसने बहुत कुछ सोच लिया था , वोह शेतीअन जरूर था , पर अभी जिंदगी में कुछ करम अधूरे थे , जिनको पूरा करना था ,

रवि वह से उठ कर सीधा कबीले में अपने घर पहुँच गया , घर के अंदर आकर , रवि को इक सकूं सा महसूस हुआ , लेकिन मन पूरी तरह शांत नै हुआ था ,

घर के हॉल में रिमी और शूरति बैठी बेटियन कर रही थी , उस इक साल के नाराज भरे जेवण ने , दोनों बहनो को इतना करीब कर दिया था , के अभ इक पल की दूरी भी दोनों को बेचैन सा कर देती थी ,

रवि उन दोनों के पास आकर बेथ गया , ख़ुशी और रमा अपने अपने रूम में थी , सीमा किचन में खाना बना रही थी , वोह अपनी इस आदत से मज़बूर थी , घर का हर काम करना , उसकी आदत का हिस्सा बन चूका था ,

"क्या बतिअन हो रही हैं दोनों में..." रवि ने रिमी और शूरति के मुस्कराते चेहरे देखते हुए बोलै ,

"कुछ नै भइआ , बस ऐसे hi टाइम पास कर रही हैं , अप्प कहा थे..." शूरति ने रिमी की तरफ देख मुस्करा कर बोलै ,

"में शहर गया था , बेबी ा गई क्या..." रवि बेचैन सा होता हुआ बोलै ,

"नै , बस अति होंगी..." शूरति ने बेहद नरम आवाज़ में बोलै ,

"हम्म , रिमी क्या सोचा फिर , में तुमसे पूछना चाहता था , सोल्लगे जोगी , या शूरति के साथ बिज़नेस संभालोगी..." रवि ने रिमी के हसन चेहरे को देख बोलै ,

"भइआ में तोह देदू के साथ रहूगी , इनके साथ hi ऑफिस में काम करुँगी , में देदू से दूर नै रह सकती..." रिमी ने शूरति का हाथ अपने हाथो में लेते हुए बोलै ,

"ओह्ह मेरी बहिन , में भी तुमसे दूर नै रह सकती..." शूरति भी रिमी की आँखों में ज़कते हुए बोली ,

रवि दोनों के चेहरों में छुपे असीम प्यार को महसूस करता गया , वोह बहुत कुछ समाज चूका था ,

फिर रवि उठा और किचन में चला गया , यहाँ उसकी सीमा खाना त्यार कर रही थी , रवि ने धीरे से अग्गे बढ़ सीमा को पीछे से अपनी बहु में भर लिया ,

"ा गए मेरे जणू..." सीमा ने काम करते करते इक हाथ से रवि के गाल सेहला कर बोलै ,

"मेरी सुहाना , ी लव उउउ..." रवि ने सीमा की गर्दन को बेइंतहा चूमते हुए बोलै ,

"सुहाना , हम्म , यह जरूर तुम्हारी कोई नयी गफ होगी , पर मर. रवि , तुम्हारी यह सुहाना , इस सीमा की जगह नै ले सकती , समझे..." सीमा ने इक डैम से रवि की तरफ पलट उसकी आँखों में देखते हुए बोलै ,

रवि कुछ नै बोलै , बस सीमा की आँखों में खो सा गया , सीमा भी समाज गई , रवि का मन अशांत है , वोह फिर से अपने काम करने लगी , लेकिन मुस्कराते हुए बोली ,

"हम्म , तोह mr.ravi तुम्हारी यह सुहाना , काम क्या करती है , क्या मुज़से भी खूबसूरत है..."

"नै , लेकिन तुम्हारे जैसी है , तुम्हारी जितनी खूबसूरत , और मुज़से प्यार भी उतना hi करती है , जितना तुम करती हो..." रवि ने सीमा की कमर में बहे दाल उसे अपने करीब करते हुए बोलै ,

"ाचा , तोह क्या अभ सुहाना के लिए मुझे छोड़ डोज अप्प..." सीमा मन में जलन के भाव लती हुई बोली ,

"नई , सुहाना तोह बीत चूका कल है , लेकिन मेरी सीमा मेरा अज्ज है , सीमा , मेरी बेटी फर्जी ा रही ही , हस्सस , मेरा मन बेचैन सा हो गया है , इक खिचाव सा हो रहा है , दिल करता है , पालक झपकते hi , फर्जी को अपनी बहु में भर लू ..." रवि ने सीमा की गर्दन को चूमते दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"होता है , इक माँ से जायदा , इक बेटी के लिए , उसके बाप में अधिक प्रेम पनपता है , तुम बेचैन हो , में समज़ती हु , और तुम्हारी बेचैनी तब दूर होगी , जब तुम फर्जी से मिल लोगे , वार्ना तुम बार बार , हर बार , हर पल , यु बहकी बहकी बतिअन करते रहोगे..." सीमा ने रवि की तरफ घूम उसकी आँखों में आँखें दाल बोलै ,

"हाँ , तुमने ठीक कहा , में अशांत हु , मेरी बेटी अति hi होगी , ाचा वोह सब बाद में , अज्ज रोमांस करे , नजाने कितना वख्त बीत गया , तुमसे प्यार किये हुए , मेरी सीमा , उम्मा , आखिर तुमने मुझे प् hi लिया..." रवि ने सीमा के नरम गुलाबी होंठो को बेहद शिदत से चुम कर बोलै ,

"हाँ , तुम पाना तोह था , मेरी जिंदगी का आखिरी मकसद , तुम पाने के लिए , में पूरी जिंदगी अकेले गुजर लेती..." सीमा ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"पर ऐसा क्यों..."

"नै जानती , बस जब तुम बचपन में पहली बार देखा , तब दिल में इक दर्द सा उठा , ऐसा लगा , जैसे मेरा जनम तुम्हारे लिए हुआ है , तुमसे मेरा कई जनमो का रिश्ता हो , बस तभी मने सोच लिया , जिंदगी गुजरोगी तोह तुम्हारे साथ , और जब तुमने मुझे गन्ने के खेत में , पहली बार चूमा था , उफ़ रवि तुम नै समाज सकोगे , उस पल भर के किश ने मेरी आत्मा तक को तृप्त कर दिया , तुम्हारे साथ दो पल प्यार करने से मेरी आत्मा तक तृप्त हो जाती है..." सीमा ने बेहद नाम आँखों से अपने मन की सचाई रवि को बताते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह मेरी सीमा ...." रवि ने सीमा को कास कर अपनी बहु में भर लिया ,

"उफ्फ्फ सीमा तुम hi सुहाना हो , जो गलती मने पीछे जनम में की , वोह गलती इस जनम में कभी नै करुगा , तुम बेपनाह मोह्हबत करुगा , जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगा , मेरी सुहाना..." रवि ने मन hi मन खुद से बोलै ,

"रवि , तुम कोमल के पास जाओ , और रत को मेरे पास सोना..." सीमा ने रवि के होंठो को चुम कर बोलै ,

"ठीक है..." रवि मुस्कराते हुए बोलै , और किचन से बहार ा गया , रवि ने किचन से बहार आकर देखा , और वोह देखता hi रहा ,

शूरति और रिमी इक दूसरे से चिपक कर बैठी हुई थी , रिमी ने शूरति के कंडे पर अपना सार रखा हुआ था , और शूरति उसके बालो को सेहला रही थी , दोनों के बेच पनप रहे , असीम प्यार को देख , रवि मन hi मन मुस्करा दिया , और सेड्यां चढ़ ऊपर कोमल के पास चला गया ,

रवि ने रूम में घुस कर देखा , कोमल खिड़की के पास कड़ी , दूर तक फैले hare-bhare जंगल को निहार रही थी , उसने इक ब्लैक टॉप और शार्ट ब्लैक लेहंगा पहन रखा था , ब्लैक कपड़ो में कोमल का दूध जैसा सफेद जिस्म , बेहद आकर्षिक और खूबसूरत लगता था ,

उसके काळा लम्बे बाल , उसे बेहद परेशान कर रहे थे , जब भी हवा का ज़ोका उसके जिस्म पर पढता , उसके बाल भीकर कर उड़ने लगते , रवि कुछ पल , वही खड़ा कोमल को देखता रहा ,

कोमल के मन में उठती दर्द भरी भावनायिओं को , रवि महसूस कर रहा था , वोह प्यार चाहती थी , बेइंतहा प्यार , सदियों से भुकी थी प्यार की , उसका प्यार उसके पास था , पर वोह प्यार नै कर सकती थी , कितनी बदकिस्मत थी उसकी कोमल ,

रवि से और सेहन न हुआ , उसने तेज़ी से अग्गे बढ़ कोमल को पीछे से बहु में भर लिया , उफ़ अभ उसके मन को इक सकूं सा महसूस हुआ ,

"भइआए..." कोमल बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोली , उसकी आवाज़ ने रवि के दिल को गहराई तक चीयर दिया ,

"मुझे यद् कर रही थी , मेरे बारे में सोच रही थी , कोमल , अभ हमें लड़ना है , इक बार और , हम साथ साथ लड़ेंगे..." रवि ने कोमल की गर्दन को चूमते हुए बोलै ,

"हम्म , भइआए में आपके साथ हु , आखिर तक , मेरा दीवानापन इतना जायदा है , में आखरी साँस तक , आपसे प्यार करुँगी , और हर जनम में , जब तक आपको अपना नै बना लेती..." कोमल ने अपने भाई की तरफ पलट उसकी आँखों में आँखें दाल बोलै ,

"कोमल अज्ज मेरे मन में ख्याल आया , के में इक शेतीअन हु , और खुद को शेतीअन समज़ना , उफ्फ्फ इक अलग hi एहसास था , लेकिन वख्त रहते , मुझे खुद की पहचान हो गई..." रवि ने कोमल की गहरी नली आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"भइआ इक बात पुछु..."

"हाँ , क्यों नै..."

"भइआ आपको पिछले जनम का , क्या क्या यद् है , मतलब प्रिंस के रूप में आपको क्या क्या यद् है..." कोमल ने रहस्मयी तरीके से रवि के चेहरे को घूरते हुए बोलै ,

"हष्ठ (इक लम्बी साँस लेकर) , कुछ भी नै , मुझे बस इतना यद् है , में प्रिंस हु , तुम रूही हो , सीमा , सुहाना है , ख़ुशी मेरी बॉडीगार्ड तामस है , बेबी , कविया थी , और , और कुछ यद् नै..." रवि ने दिमाग पर जोर डालते हुए बोलै ,

"हम्म , भइआ मन की गहराई तक सोचना , आपको यद् आएगा , अप्प प्रिंस भी थे , और कुछ और भी..." कोमल ने इक राज़ की बात बोलते हुए कहा ,

"कोमल (हस्ते हुए) , में प्रिंस था , पर इस में सोचना क्या , ओह्ह्ह , तुम्हारा मतलब , तभी , हाँ तभी , कोमल मुझे अजीब सा महसूस होता है , में समाज गया , पर में , में कैसे , और मेरा तुमसे वोह रिश्ता , कैसे , यह असंभव था , तुम पवितर थी और में , यह नै हो सकता , नै हो सकता..." रवि ने बेहद जज्बातो में बहकर दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"हाँ , अप्प कोण हो , कोण थे , यह में जानती थी , और भइआ , अप्प फिर से वही बन जाओगे , धीरे धीरे , आपको रोकना होगा खुद को , इस बार वोह सब नै होगा , भइआए वादा करो , कभी अतीत में नै जाओगे , जैसे हो वैसे hi रहोगे , में आपसे प्यार करती हु , बेइंतहा प्यार करती हु , पर इस बार , वोह सब मत करना..." कोमल ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ठीक है , में खुद पर कण्ट्रोल रखुगा , क्यों की में तुमसे प्यार करता हु , में वादा नै करुगा , क्यों की वादे होते hi टूटने के लिए हैं , में तुमसे कभी अलग नै हो सकता , पर शेतीअन और पारी , कभी इक नै हो सकते .." रवि ने कोमल को बहु में भर उसके होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"भइआ , हम इक होंगे , कभी न कभी , इक दिन उनको भी हमारे प्यार का एहसास होगा..." कोमल ने नाम आँखों से मुस्कराते हुए बोलै ,

"हम क्या हैं , हम जानते हैं , हम खुद से भाग नै सकते , लेकिन हमें ऐसा बनाया किसने , हमारे पिता जी ने , पिता जी ने हमें पारी लोग से निकल दिया , इक छोटी सी गलती के कारन , और हमारी माँ , कोमल हमारी माँ ने हमारा साथ तक नै दिया , पिता जी से इक बार भी बात नै की , हमें नफरत है माँ से , बेइंतहा नफरत , कोई इतनी बड़ी सजा कैसे दे सकता है , अपने बचो को..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , उसकी आँखें गुस्से में बेहद लाल हो चुकी थी , और जब रवि का मन शांत हुआ , तब उसकी आँखें बेहद काली हो गई , इक डैम अंधकार से भरे अँधेरे जैसी ,

"शठ भइआ शांत हो जाओ , आपको सजा मिली , मतलब हमें भी सजा मिली , आपसे दूर रहना पढ़ा , इक पारी और डेविल कभी इक नै हो सकते , लेकिन हम इक होंगे , अप्प डेविल जरूर हो , पर अचे डेविल .." कोमल मुस्कराते हुए बोली , उसकी मुस्कराहट में इक शरारत थी ,

"डेविल , डेविल होता है , वोह ाचा कैसे हुआ..."

"ाचा जी (हस्ते हुए) , लेकिन मेरा डेविल ाचा है , यह में जानती हु , लेकिन चोर जरूर है , उसने मेरा धड़कता हुआ दिल चुरा लिया , मुझे अपना बना कर , भइआ रिंग की ताकत आपको आपके असली रूप में ला रही है , अप्प खुद पर कण्ट्रोल रखना..." कोमल ने बेहद चिंता में बोलै ,

"हम जानते हैं , पिछले कुछ दिनों से हमारा मन अशांत है , हमारे अंदर किसी को सजा देने की भूक सी जग उठी है , हम बदल रहे हैं , हर बीत रहे पल के साथ..." रवि भी बेहद चिंता में बोलै ,

"में समज़ती हु , आपके बोलने का लहजा बदल गया है , धीरे धीरे अप्प पूरी तरह से डेविल बन जाओगे , पर भइआ यह पृथ्वी है , यहाँ खुद को सम्बल कर रखना होगा , ाचा , अभ जाओ , मुझे कुछ वख्त अकेले बिताना है..." कोमल ने अपने भाई के गालो को चुम कर बोलै ,

"तुम भी बदल रही हो , तुम भी रूही बन रही हो , जो अकेले रहती थी , जानवरो , पंचयिओं के बेच , तुम कुदरत की माँ हो , और हम नाराज के रखवाले , अह्ह्ह पिता जी ने कितना घटिया काम दिया हमें , नाराज (हेलल) में कोण रहना चाहता है , हम्म , अभ मुझे समाज आया , क्यों नाराज की अग्ग मुझे जला न पायी , जब में तुम बचने गया था , और क्यों उन दानवी पहरेदारो ने मुझ पर हमला नै किया , सब सार ज़ुका कर बेथ गए , क्यों की..." रवि अभी बोल hi रहा था के कोमल बेच में hi बोल पढ़ी ,

"क्यों की अप्प इक डेविल हो , यह बात में बहुत पहले से जानती थी , लेकिन आपको बता न पायी , में आपको परेशान नै करना चाहती थी , अप्प दुनिआ के लिए डेविल हो , पर मेरे लिए , अप्प मेरे हमसफ़र हो , मेरे प्रेमी हो , और मेरे भाई भी , और भाई अप्प प्रिंस जरूर हो , पर नाराज (हेलल) के ..." कोमल ने बेहद घम्बिर होकर बोलै ,

"कोमल , में जल्द hi अपने असली रूप में ा जाउगा , मेरा इक नया जनम होगा , मुझे इंसानो के बेच रहना सीखना होगा , रवि तोह मर गया , अभ में हेलल का प्रिंस हु , और तुम भी रूही बन जोगी..."

"भइआ में रूही बन भी जाऊ , पर में कोमल hi रहूगी , आपकी कोमल , और कोमल तोह कोमल है , सब जानते हैं , और कोमल कभी रूही नै हो सकती , और रूही कभी कोमल नै हो सकती , कोमल इक है , जो अपने डेविल भाई से प्यार करती है , लाखो लोगो को छोड़ कर..." कोमल ने अपने भाई से लिपट कर नाम आँखों से बोलै ,

रवि भी कोमल को बहु में भर कर , उसे महसूस करता रहा , लेकिन उसकी आँखें बार बार , लाल रौशनी में चमक रही थी , और मन में कई खवैशियन जनम ले रही थी , और उसका मन्ना था , मन की हर खाविश पूरी करना चाहये , चाहे वोह अछि हो या बुरी...

"अरे जेजु , थम जाओ , बेबी देदी ा गई हैं..." सूजी दरवाजे के पास कड़ी मुस्कराते हुए बोली ,

"सूजी की बची , भइआ अप्प जाओ.." कोमल सूजी को कुछ बोलने hi जा रही थी , के उसने अपना मन बदल लिया ,

"ओह्ह मेरी बेटी फर्जी आयी है , में जाता हु..." रवि इतना बोल बेहद ख़ुशी में रूम से बहार निकल गया ,

"फर्जी , हाँ , यही वोह इक मटर लड़की है , जो भइआ को कण्ट्रोल में रखेगी , फर्जी , डेविल की बेटी है , डेविल अपने बच्चू से बेहद प्यार करता है , तोह जरूर भइआ के दिल में अपनी बेटी के लिए सबसे जायदा प्रेम होगा , लेकिन अगर फर्जी ने अपने पापा का वोह ब्यांक रूप देख लिया तोह..." कोमल अपने मन में hi यह सब सोचते हुए बोली ,

रवि बेहद ख़ुशी में सेड्यां उतर घर के हॉल में आया , वह पहुँच उसने देखा , बेबी , काट और फर्जी , बाकि सब से मिल रही थी , रवि की आँखें तोह फर्जी पर जैम सी गई , उसे फर्जी पर पहले से जायदा प्यार ा रहा था , पता नै क्यों ,

"बेतु , वोह देखो पापा , जाओ पापा से मिलो..." बेबी ने फर्जी का चेहरा रवि की तरफ घूमते हुए बोलै ,

"पापा..." फर्जी इतना बोलते हुए भाग कर रवि के पास गई , रवि घंटो के बल बेथ गया और भाग कर ा रही फर्जी को अपने गले से लगा लिया ,

उफ़ अभ उसके मन को इक सकूं सा मिला , जो सकूं उसे न सीमा से मिला , न कोमल से मिला , वोह सकूं बस उसे फर्जी से मिल पाया ,

"मेरी बाछीइ , मेरी बेटी..." रवि , फर्जी का चेहरा चूमते हुए बोलै , वोह पागल सा हो गया था , उसकी आँखों में इक कससिह सी थी , इक भूक थी प्यार की ,

"पापा अप्प कहा थे..." फर्जी ने फिर से रवि के गले लग बोलै ,

"सॉरी बीटा , में तुम वख्त न दे पाया , लेकिन अभ से लेकर हमेशा , में तुम्हारे पास रहुगा , क्यों की तुम मेरी बेटी हूँ , और में अपनी प्यारी बेटी से , अभ दूर नै रह सकता..." रवि बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"प्रॉमिस पापा..." फर्जी बेहद खुश होते हुए बोली ,

"हाँ प्रॉमिस , में तुम्हारे पास रहुगा , तुम स्कूल छोड़ने भी जाउगा और लेने भी जाउगा , तुम पापा की प्यारी बेटी हो , चलो हम घूम कर एते हैं..." रवि , फर्जी को गॉड में उठा घर से बहार निकलता हुआ बोलै ,

"पापा मुझे टाइगर देखना है..." फर्जी मुस्कराते हुए बोली ,

"ओह्ह मेरी बेटी , हम टाइगर देखने जायेगे..." रवि प्यार से फर्जी के गाल चुम कर बोलै , फिर वोह जंगल की तरफ बढ़ने लगा , उसकी अखन लाल रौशनी में चमक रही थी , क्यों की डेविल को उसकी बेटी मिल गई थी , जो रवि की कमज़ोरी भी थी....

रवि के जाने के बाद सब शॉकेड से हो गए थे , और आँखें खोल इक दूसरे की तरफ देख रहे थे , बेबी की आँखें नाम थी , उसका प्रेमी , उसकी बेटी को इतना चाहता है , यह उसने कभी सपने में भी नै सोचा था , बेबी के दिल में रवि के लिए प्यार और बढ़ गया था ,

लेकिन बेबी इक बात नै जानती थी , पिता बनने का एहसास जो रवि ने सदियों तक महसूस नै किया था , वोह एहसास उसे फर्जी दिला रही थी , इस लिए रवि अभ फर्जी के बेहद करीब ा चूका था , वोह इक पिता था , इक डेविल पिता....

अगर कोई गलती से भी फर्जी को नुकसान पहुँचने के बारे में सोचता , तोह रवि तबाह कर देता उसे , फर्जी अभ अपने पिता का प्यार थी , उसकी इकलौती बेटी थी , रवि को पिता बनने का एहसास , इक अलग hi सकूं दे रहा था , यह सकूं उसने सदियों तक महसूस नै किया था , वोह बस अपनी बेटी फर्जी के पास रहना चाहता था , उसे दुनिआ की हर ख़ुशी देना चाहता था , अभ यह नया रिश्ता , किस तरफ अग्गे बढ़ता , यह तोह ऐनी वाले वख्त में छुपा था....

तो बे कुनिटेड....[Note-: friends hamari ik pyari reader , Sona ka ajj happy wala bday hai , sabhi usko dil se wish karna , ham sab dil se dua karege , Sona dear ki jindgi khushyion se bhari rehe , unke dukh , taklefe , kabhi unki jindgi ka rasta na roke , or unki health hamesha achi rehe .. happy birthday Sona jii...]

 


अपडेट-71

अभ अग्गे...

"उफ़ ओह्ह्ह , काट मेरी बात तोह सुनो , इतना क्यों रो रही हो , ाचा बात तोह बताओ..." बेबी ने काट के पास बैठते हुए बोलै ,

काट पिछले आधे घंटे से लगातार , बिन मासूम बरसात की तरह , आँखों से पानी बहा रही थी ,

"बेबी ( रट हुए) , रावी , ओह्ह्ह बेबी , रवि मुज़से प्यार नै करता , में टूट रही हु अंदर से , क्या करू , कुछ समाज नै ा रहा..." काट ने बेहद रट हुए बोलै , उसकी आवाज़ में इक अनचाहा दर्द था ,

"हम्म , तोह यह बात है , क्या रवि ने तुमसे कहा , के वोह मेरी भोली काट को प्यार नै करता..." बेबी ने काट को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"नै कहा..."

"तोह , मेरी प्यारी काट , क्यों अपना दिल जला रही हो..." बेबी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"बेबी (फिर से रट हुए) , उसने मेरी तरफ देखा तक नै , बस फर्जी को लेकर निकल गया , में क्या , लड़की नै हु , तुम समाज रही हो न , में लड़की हु यार , और उसने मुझे देखा तक नै ..." काट ने फिर से रट हुए बोलै , बेबी ने उसकी बतिअन सुन माथा पीट लिया ,

"अहह मेरा बचा , जानती हो , में खुद शॉकेड हु , क्या कहु , रवि हमारी बेटी से इतना प्यार करता है , यह मने अज्ज महसूस किया , काट , बात यह है , उसे फर्जी के बिना तब कुछ नै दिखा , न में दिखी , न तुम , और न कोई और , उसे अपनी बेटी से मिलना था , अभ वोह इक पिता है , जिसकी नज़रिओं में पहले उसकी बेटी है , और बाद में हम सब..." बेबी ने काट को बेहद घोर से समज़ते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह , में यह बात क्यों न समाज पायी , फर्जी से दूर रहकर , उसका दिल तड़फ उठा होगा , और इतने सालो तक वोह उससे मिला भी नै था , अह्ह्ह में अपने रवि को बेवजह गलत समाज रही थी..." काट नाम आँखों से hi मुस्कराते हुए बोली ,

"ओह्ह हो , मेरा रावी , चूलगुजी तू बहुत फ़ास्ट है..." बेबी ने काट के गीले गलो को चूमते हुए बोलै ,

"तू जा , कामिनी कही की..." काट ने शर्मा कर मुस्कराते हुए बोलै ,

"ाचा , में जाऊ , रुक बताती हु..." बेबी ने इतना बोल काट को पीछे बीएड पर गिरा दिया , और उसके ऊपर लेट , अपने होंठ उसके गुलाबी नरम होंठो पर रख दिए , और दोनों प्यार में दुब गई ,

वही दूसरी तरफ...

"ओह्ह पापा वोह देखो टाइगर कितना बड़ा है..." फर्जी ने इक जड़ी में चुप कर नदी के दूसरी तरफ टिगर्स का इक झुंड देखते हुए बोलै , जो धुप में आराम कर रहे थे ,

"हम्म , मने कहा था , पापा तुम टाइगर दिखने लेकर जायेगे , अभ मेरी बेटी खुश है..." रवि ने मुस्कराते हुए फर्जी का माथा चुम कर बोलै ,

"पापा बहुत खुश हु , काश में उनको छू कर देख पति , कितने बड़े हैं पापा , और कितने कहकर भी हहै ..." फर्जी फिर से टिगर्स को देख कर हस्ते हुए बोली ,

"ओह्ह मेरी बेटी , कितनी प्यारी है , यह सब उस काट ने किया , मुझे मेरी बेटी से दूर रखा , उसे इसकी सजा मिलेगी , लेकिन कोनसी सजा उसके लियाक है , अहन , यह ठीक रहेगा...." रवि ने मन hi मन गुस्से में मुस्कराते हुए बोलै ,

"पापा वोह देखो , दो टाइगर खेल रहे हैं..." फर्जी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि भी फर्जी के साथ देखने लगा , लेकिन तभी आसमान से कोई चीज़ जमीन पर गिरी , उन टिगर्स के पास , उफ्फ्फ इक तेज़ धमाका हुआ , टिगर्स भी दर कर भाग गए ,

"पापा यह कोण है..." फर्जी ने बेहद डरते हुए बोलै ,

"शहहह , आवाज़ मत करना..." रवि ने फर्जी की तरफ देख अपने होंठो पर ऊँगली रख बोलै ,

क्यों की सामने 7 फ़ीट का इक आदमी खड़ा था , जिसके जिस्म पर काळा विस्तार धारण किये हुए थे , वोह इक ओहदा की तरह लग रहा था , उसके हाथ में इक तेज़ चमकती तलवार थी , और उसकी आँखें हरे (ग्रीन) रंग में चमक रही थी ,

"उफ़ क्या मुसीबत है , अगर इस से लड़ा तोह फर्जी को मेरा असली रूप दिख जायेगा , हम ऐसा नै कर सकते , हमें कोई और रास्ता ढूंढ़ना होगा , यह कम्बख्त तामस कहा गई , वह हेलल में तोह बड़े वादे कर रही थी , हम आपके लिए जान दे देगी , अभ कहा गई..." रवि मन hi मन ख़ुशी को गळ्यां देता बोलै ,

मार्को अभ धीरे धीरे रवि की तरफ बढ़ रहा था , अचानक उसने जैसे hi नदी में अपना पेअर रखा , पानी पूरी तरह से सुख गया , अभ नदी खली थी , और मार्को रवि की तरफ बढ़ रहा था ,

तभी रवि ने देखा , आसमान से बिजली जमीन पर गिरी , और जब रौशनी काम हुई , तब रवि ने देखा , वोह ख़ुशी थी , हाथ में तलवार लिए हुए ,

"वह मेरी बेवडी जानेमन ..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"पापा यह लड़की कोण है..."

"चलो घर चले , हमें लेट हो रहा है.." रवि तेज़ी से फर्जी को गॉड में उठा घर की तरफ जाते हुए बोलै ,

"पापा , मुझे उनको लड़ते देखना है..." फर्जी , रवि की गॉड में uchal-kud मचाते हुए बोली ,

"गन्दी बात , बीटा बड़ो को लड़ते नै देखते..."

"तोह कब देखते हैं ..." फर्जी ने नादानी में इक और सवाल पूछ लिया ,

"खाना कहते हुए देखते हैं.."

"पर उसमे देखने वाली क्या बात होती है , पापा..." फर्जी ने अपना तेज़ दिमाग चलते हुए बोलै , फर्जी का दिमाग बेहद तेज़ हो रहा था , खास कर जब वोह रवि के बेहद करीब थी , उसका दिमाग तेज़ी से बढ़ रहा था ,

"हम्म , यह बात भी है..."

"पापा अप्प मुम्मा से कब मिले , और अप्प हमारे साथ क्यों नै रहते , मुम्मा और काट मुम्मा इक साथ क्यों रहती हैं..." फर्जी ने ढेर सरे सवाल रवि को करते हुए बोलै ,

"हे भगवन , इतने सवाल , बीटा में काम में बिजी रहता हु , तोह इसलिए मुम्मा और काट मुम्मा इक साथ रहती हैं..." रवि , फर्जी के सवालों से बचता हुआ बोलै ,

"पापा , क्या डेविल होता है..." फर्जी ने मसोमीयत से पूछा ,

"ओह्ह (इक लम्बी साँस लेकर) , तुम किसने बताया..."

"मुम्मा ने , मुम्मा कहती है , बुरे इंसान डेविल होते हैं..."

"हम्म , सही कहती है मुम्मा , वोह देखो घर ा गया , तुम घर पर रहना , में इक काम निपटा कर जल्द hi वापिस ा जाउगा..." रवि ने घर के पास पहुँच फर्जी को अपने सीने से लगते हुए बोलै ,

"अप्प उस डेविल से लड़ने जा रहे हो..." फर्जी ने रवि के कनु में धीरे से बोलै ,

"नै , नै , मेरी नटखट बेटी , में क्यों लडूगा , तुम गलत समाज रही हो.." रवि , फर्जी को घर के बहार अपनी गॉड से निचे उतरता हुआ बोलै , और उसके सामने घुटनो के बल बेथ गया ,

"ाचा , पापा अप्प मेरे साथ घर चलो , अगर आपको लड़ना नै है..." फर्जी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"अहह , ठीक है , मुझे लड़ना है , में उस डेविल को रोकना चाहता हु , पर तुम्हारे सामने नै , क्यों की तुम मेरी बेटी हो , और में तुम्हारी नज़रिओं में इक ाचा बाप बनना चाहता हु , न के बुरा..." रवि ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"पापा सॉरी , अप्प बहुत अचे पापा हो..." फर्जी ने रवि के गले लग उसके गाल चूमते हुए बोलै ,

"क्या कहा तुमने , में ाचा हु..." रवि को यह सुन कर मन में इक सकूं सा महसूस हुआ ,

"हाँ पापा , अप्प बहुत अचे हो , अप्प मेरे बेस्ट पापा हो , पापा अप्प जाओ , और जल्दी वापिस एना..." फर्जी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ मेरी बची , में अभी ा जाउगा..." रवि ने फर्जी का माथा चूमा और उठ कर जाने लगा ,

"ा गए दोनों बाप बेटी घूम कर..." बेबी घर के बहार आकर मुस्कराते हुए बोली , उसके साथ काट भी थी ,

"मुम्मा , पापा को कही जाना है , इक जरुरी काम के लिए , पापा अप्प जाओ..."

"पापा की बची , तुम चुप रहो , ाचा रवि , मुझे तुमसे कोई बात करनी थी..." बेबी ने मुस्करा कर बोलै ,

"बेबी अभी नै , अभी मुझे जाना है..."

"ठीक है , ाचा तुम काट को अपने साथ ले जाओ..." बेबी ने फर्जी को अपनी गॉड में उठा रवि की तरफ देख कर बोलै ,

"काट , नै , नै , काट को वोह दरिंदा चोट पहुंचा सकता है..." रवि ने मन hi मन सोचते हुए बोलै ,

"बेबी , काट मेरे साथ नै जा सकती , मतलब , मुझे जाना है , bye..." रवि इतना बोल तेज़ी से उस तरफ बढ़ने लगा , यहाँ ख़ुशी अकेले मार्को से लड़ रही थी ,

रवि के जाने के बाद काट , और बेबी ने इक दूसरे की तरफ देखा ,

"बेबी , उसने मेरी तरफ देखा तक नै , में कल वापिस जा रही हु शहर , अगर तुम जाना है , तोह मेरे साथ चलो , वार्ना तुम यही रुक जाओ..." काट रट हुए इतना बोली और घर के अंदर चली गई ,

"मुम्मा , काट मुम्मा क्यों रो रही थी..."

"बीटा , यह बड़ो की बात है , तुम नै समाज पाउगी..." बेबी ने फर्जी के गाल को चुम कर बोलै ,

"लगता है काट मुम्मा से पापा नाराज़ हैं , में बात करुँगी पापा से..." फर्जी ने मन hi मन सोचते हुए बोलै ,

वही दूसरी तरफ...

जब रवि वह से गया , तब ख़ुशी और मार्को इक दूसरे के सामने खड़े थे , ख़ुशी मुस्करा रही थी , उसके इक हाथ में तलवार थी , और इक हाथ में मदिरा (शराब) ,

"अहह में बोर हो रही थी , यहाँ जंगल में कुछ भी करने को नै था , तुमने तोह मेरा दिन बना दिया , अभ आएगा मज़ा..." ख़ुशी मदिरा के छोटे छोटे सिप लेते हुए बोली ,

मार्को ने अपनी तलवार उठाई और ख़ुशी की तरफ बढ़ने लगा , ख़ुशी ने अपनी मदिरा की बोतल ख़तम की , और वोह भी मार्को की तरफ बढ़ने लगी ,

"तुम इक घटिया इंसान हो , बेहद घटिया , और ख़ुशी तुम कभी खुश नै रहने देगी ..." ख़ुशी ने तलवार का जोरदार वॉर मार्को की गर्दन पर करते हुए बोलै ,

"बूढ़ी कही की..." मार्को पहली बार कुछ बोलै , लेकिन जो उसने बोलै , उससे ख़ुशी का गुस्सा और भी बढ़ गया ,

"मुझे बूढ़ी बोलै , सेल , तुझे नै छोडूगी..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में चीख कर बोलै ,

ख़ुशी ने तलवार के कई तेज़ वॉर मार्को पर किये , पर मार्को तलवार चलने में माहिर था , उससे तेज़ इस दुनिआ में कोई तलवार नै चला सकता था , क्यों की वोह इक खतरनाक योद्धा था ,

िका इक ख़ुशी ने तलवार का वॉर मार्को की गर्दन पर किया , जैसे hi मार्को ने अपना बचाव करने के लिए तलवार ऊपर की , ख़ुशी ने अपना दांव बदल दिया , ख़ुशी ने निचे झुकते हुए तलवार का वॉर मार्को की कमर पर कर दिया , मार्को की कमर चीरती हुई तलवार ने इक बड़ा सा कट लगा दिया ,

"अह्ह्ह बूढ़ी , तूने धोके से मारा..." मार्को ने अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोलै .."इसकी सजा तुम मिलेगी , बहुत हुआ खेल अभ जान जाने तक लड़ते हैं..." मार्को ने इतना बोलै , और ख़ुशी पर तलवार का वॉर किया , जो ख़ुशी ने रोक लिया ,

पर तभी मार्को की आँखों से इक ग्रीन रौशनी निकली , जो इक लाइट की तरह सीधा ख़ुशी के चेहरे पर पढ़ी , ख़ुशी पीछे की तरफ गिर गई , उसे बेहद जलन हो रही थी ,

"तुम , तुम इक डेमों हो , ः , जब में मर कर हेलल में था , तब तुम्हारे भाई बहनो ने मुझे बहुत टार्चर किया , तुम डेमों हो..." मार्को ने हरिजन होते हुए बोलै , क्यों की ख़ुशी के लाल जिस्म से उसे सचाई का पता चल गया था ,

"हाँ , में डेमों हु , और इम्मोर्टल (अमर) भी हु , तुम मुझे नै मर सकते , लेकिन हाँ , में तुम उतना hi टार्चर करुँगी , जितना तुम हेलल में किया गया था..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए उठ कर बोलै ,

"अहह वोह हेलल था , यहाँ अभ में नै हु , यह पृथ्वी है , यहाँ मुझे ताकत मिलती है..." मार्को ने इतना बोल ख़ुशी के पेट पर इक लत्त जड़ दी , ख़ुशी उड़ते हुए इक पेड़ से जा टकराई और निचे जमीन पर गिर गई ,

"अभ खेल ख़तम..." मार्को ने इतना बोलते हुए उड़द कर तलवार का वॉर सीधा ख़ुशी के ऊपर किया ,

पर तभी किसी ने तेज़ रफ़्तार से ख़ुशी को वह से हटा दिया , मार्को की तलवार जमीन में आधी घुस गई ,

"तोह मेरी ख़ुशी , में ा गया हु , तुम मुझे थैंक्स बोल सकती हो , अगर तुम्हारा नशा थोड़ा काम हो गया हो..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

तभी रवि को कुछ आवाज़ सुनाई दी ,

"तुम कोण हो , ओह्ह्ह तोह तुम हो डेविल , हेलल के प्रिंस , हेलल बहुत बुरी जगह है , यहाँ बार बार , हर पल , टार्चर किया जाता है , और यह सब तुम करते हो..." मार्को ने रवि की तरफ बढ़ते हुए बोलै ,

"करता हु , मतलब नै , मार्को मेरे भाई , हम दोनों इक जैसे हैं , में भी डेविल , तुम भी डेविल , तोह लड़ना क्यों , हम दोस्त हैं..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"तुम क्या बकवास कर रहे हो , उसे मर कर खेल ख़तम करो..." ख़ुशी ने गुस्से से रवि की तरफ देखते हुए बोलै ,

"अहह यह मेरी अंगरक्षक है , और गुससेखोर भी , और बूढ़ी भी , मेरा मतलब , यह मेरी है , मेरी खास डेमों , तोह मेहेरबानी करके ख़ुशी तुम अपना मोह बंद रखोगी..." रवि ने ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै ,

"बढ़ में जाओ ..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

"हाँ , तोह में कहा था , मार्को हम इक जैसे हैं..." रवि अभी बोल hi रहा था के मार्को बेच में बोल पढ़ा ,

"हम इक जैसे नै हैं , में तुमसे भी बुरा हु , तुम मरना hi मेरा मकसद है , तोह वापिस हेलल जाने के लिए त्यार हो जाओ..." मार्को ने बेहद गुस्से में बोलै ,

मार्को ने इतना बोल भागते हुए अपनी तलवार रवि के सीने में घुसा दी ,

"जो तो हेलल , डेविल..." मार्को हस्ते हुए बोलै ,

"बेवकूफ , में डेविल हु , में इम्मोर्टल हु , में मर नै सकता , क्यों की मेरी कोई कमज़ोरी नै , कमज़ोरी..." रवि कुछ बोलते बोलते थम सा गया ,

"अहह यह नै हो सकता , में तुम मर कर hi डैम लूंगा..." मार्को ने अभी इतना hi बोलै था , के रवि ने उसे कास कर इक पंच जड़ दिया , मार्को के गाल चील गए और खून बहने लगा ,

"में डेविल हु , डेविल को मर नै सकते , या शयद मर सकते हैं , पर कैसे , ओह्ह्ह छोड़ो ें बातिओं को , अभ बोल मेरी स्वीटी तेरे साथ क्या सलूक करू..." रवि ने वोह तलवार अपने सीने से निकल बेहद गुस्से में बोलै , उसकी आँखें लाल हो गई , और चेहरा भी बेहद ब्यांक और लाल हो गया , दन्त बढ़ कर नोकीले हो गए ,

"तुम मुझे नै मर सकते , क्यों की में पहले hi मर चूका हु , मेरी मौत नै हो सकती , में फिर ायुगा..." मार्को इतना बोल वह से गयाब हो गया , रवि ने नार्मल होकर ख़ुशी की तरफ देखा , जो उसे खा जाने वाली नज़रिओं से घर रही थी ,

"क्या , वोह सच बोल रहा था , उसे नै मर सकते , वैसे भी वोह मुझे नै मर सकता में उसे नै मर सकता , न हम दोनों इक दूसरे की मर सकते हैं , तोह बात यही ख़तम..." रवि ने इतना बोल वह से चलते हुए बोलै ,

"तुम , तुम बदल रहे हो , तुम इंसानी रूप को छोड़ कर , अपने असली रूप में ा रहे हो , ओह्ह्ह यह बहुत बुरा होगा..." ख़ुशी ने थोड़ा चिंता में बोलै ,

"में रवि हु , हाँ में hi रवि हु , तुम्हारा रवि , और हाँ , तुम यह कह सकती हो , में डेविल भी हु , और मुझे सजा देनी है लोग को , इस लिए में..."

"क्या , तुम करना क्या चाहते हो..."

"में , में यानि डेविल , में पुलिस में काम करुगा , मतलब अनु के साथ , इससे दो फयदे होंगे , में अनु के पास भी रहुगा और लोगो को सजा भी दूंगा , इस में मज़ा आएगा..." रवि बेहद खुश होते हुए बोलै ,

"ओह्ह मतलब में भी डेमों बन गई हु , पर कैसे , अह्ह्ह में ख़ुशी हु , लेकिन वही , जिद्दी , बूढ़ी ख़ुशी , में अपने असली रूप में ा गई हु..." ख़ुशी ने हरिजन सा होते हुए बोलै ,

"वही तोह , हम सब बदल रहे हैं , इसके पीछे जरूर पिता जी का हाथ होगा , और हमें अभ पिता जी से लड़ना है , उनकी हर साज़िश हमें नाकाम करनी होगी , वैसे में इक बात बता दू , तुम जिद्दी और बूढ़ी hi अछि लगती हो ..." रवि ने ख़ुशी को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"छोड़ो मुझे , तुम पिता जी से नै जीत सकते , वोह बहुत ताकतवर हैं , और मुझे वापिस हेलल जाना है..." ख़ुशी ने गुस्से में बोलै ,

"क्या , तुम पागल हो , इतनी खूबसूरत दुनिआ को छोड़ कर , उस गंदे , बदबूदार , हेलल में जाना चाहती हो..." रवि , ख़ुशी के साथ चलते बोलै ,

"मुझे लोग को मरना है , और उनको टार्चर भी करना है , और मुझे इस में मज़ा मिलता है , सेक्स से भी जायदा..." ख़ुशी ने अपने गुलाबी होंठ दांतो में चबाते हुए बोलै , वोह थोड़ी अजीब लग रही थी , यह सब करते हुए ,

"तुम यह क्या कर रही हो , तुम बहका रही हो मुझे , पर क्यों.."

"अहह मुझे सेक्स करना है , और तुम अगर सेक्स नै करोगे , तोह में तुम्हारा वोह काट दूंगी..." ख़ुशी ने अपना डेमों खंजर पर अपनी जीभ घूमते हुए बोलै ,

"अहह , ाचा ठीक है , में सोचुगा , मतलब रत को करुगा , पर तुम सच में , मेरे साथ सोना चाहती हो..."

"क्यों में लड़की नै हु , में लड़की हु , और मुझे भूक लगी है , सेक्स की , बहुत जायदा सेक्स की , इतनी भूक..."

"ाचा , ाचा , में समाज गया , तुम भूक लगी है सेक्स की ..."

"हाँ , और भूक के साथ साथ प्यास भी लगी है , उम्म्म , मुझे तुम्हारे ें दिलकश होंठो का रास चूसना है..." ख़ुशी ने अपने होंठो पर जीभ फिरते हुए बोलै ,

"अहह , घर ा गया , रत को मिलता हु..."

"अगर नै ए , तोह यह खंजर तुम्हारी गांड में घुसा दूंगी , तुम्हारे रूम में आकर..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै , और रवि डरते हुए भाग कर घर में घुस गया ,

घर में घुसते hi काट उसके सामने ा गई , उसने काट की तरफ देखा , और फिर जाने लगा ,

"रवि , प्लस माफ़ कार्डो , मुज़से गलती हो गई , पर में तुमसे प्यार करती हु , बहुत जायदा प्यार ..." काट ने रट हुए बोलै ,

"ओह्ह प्यार , काट मुझे एहसास हो गया है , तुमसे दूर रहकर , मतलब हम दोनों अलग है , में तुमसे प्यार नै करता हु , और में डेविल भी हु..."

"ओह्ह डेविल , इससे ाचा तोह यह बोल देते , के में इक गे हु , वोह में मन भी लेती , पर डेविल (हस्ते हुए ) , में क्या तुम पागल लगती हु..." काट ने हस्ते हुए बोलै ,

"तुम यह मज़ाक लगता है , में इक डेविल हु , में हेलल का प्रिंस हु , में लोग को सजा देता हु , में बहुत बुरा हु..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"ओह्ह डेविल , तुम बहुत अजीब हो , पर डेविल नै हो , और यह hell-vell कुछ नै होता..."

"होता है , वह बुरे लोग को सजा मिलती है , और में यह दावे के साथ कह सकता हु , तुम भी हेलल hi जोगी..."

"शट उप , इडियट , में तुमसे प्यार का इजहार कर रही हु और तुम मुझे हेलल बेहज रहे हो , अह्ह्ह में पागल जो जोगी..." काट इतना बोल पेअर पटकते हुए वह से जाने लगी , पर तभी रवि ने उसका हाथ पकड़ लिया ,

"काट , में सच बोल रहा हु , तुम यकीन करना होगा , क्यों की में डेविल हु , मेरी आँखों में देखो..." रवि ने काट के चेहरे के बेहद करीब होकर बोलै , काट ने जैसे hi उसकी आँखों में देखा , रवि की आँखें वैसी hi रही , जैसे पहले थी ,

"अहह तुम मुझे चाहते हो , मुझे तुम्हारी आँखों में दिख रहा है..." काट ने मुस्करा कर बोलै ,

"लेकिन तुम दर क्यों नै रही हो , मेरी आँखें लाल रौशनी में चमक रही हैं , और तुम दर नै लग रहा , यह कैसे..." रवि ने थोड़ा चिंता में बोलै ,

"तुम पागल हो , इक डैम पागल , पर में तुम प्यार करती हु , ी लव उउउ , और खुद को डेविल कहना बंद करो..." काट ने रवि के कनु में धीरे से बोलै ,

"अरे में सच में डेविल हु..." रवि ने बेहद चिंता में बोलै ,

"अह्ह्ह्हू , अगर इक बार और डेविल वाला मज़ाक किया , तोह में तुम ऐसी जगह किक मृगी , के तुम इक वीक तक , किसी लड़की को मोह नै दिखा पाओगे , में तुमसे प्यार भरी बतिअन कर रही हु , ोहू तुम सच में पागल हो..." काट जोर से पेअर पटक कर गुस्से में जाते हुए बोली ,

"में डेविल हु , पर काट को यह एहसास क्यों नै करवा पाया , ओह्ह कोमल के पास इसका जवाब hoga..."ravi ने मन hi मन खुद से बोलै ,

रवि ने इक लम्बी साँस ली और वह से जाने लगा , तभी उसके चेहरे के रंग उड़द गए , क्यों की सामने फर्जी कड़ी थी....

"फर्जी बीटा , तट ...तुम यहाँ पर..." रवि ने हकलाते हुए बोलै ,

"पापा अप्प..." फर्जी ने इतना बोल अपने होंठो पर हाथ रख लिया....

तो बे कुनिटेड...

 


अपडेट-72

अभ अग्गे...

रवि , फर्जी को अपने सामने देख दर सा गया , पर अपने दर को संभालते हुए , रवि मुस्करा कर बोलै ,

"बीटा , तुम यहाँ क्या कर रही हो..." रवि मुस्कराने का नाटक करते हुए बोलै ,

"पापा , मुझे आपसे बात करनी है..." फर्जी ने रवि के करीब जाकर उसका हाथ पकड़ते हुए बोलै ,

"लेकिन क्या.."

"यहाँ नै , मेरे साथ ायो..." फर्जी , रवि का हाथ पकड़ , उसे अपने रूम की तरफ ले गई ,

फिर दोनों ने दरवाजे के पास चुप कर देखा , और रवि ने भी , क्यों की सामने काट बेइंतहा रो रही थी , और बेबी उसे चुप करवाने की कोससिह कर रही थी , फिर वोह दोनों की बतिअन सुनने लगे ,

"काट अभ चुप भी हो जाओ , प्लस , में बात करुँगी रवि से..." बेबी ने नाम आँखों से बोलै ,

"नै (रट हुए) , तुम उससे बात करने की जरुरत नै , वोह , वोह , पागल हो गया है , खुद को बार बार डेविल बोल रहा था , अह्ह्ह , में जानती हु वोह झूठ बोल रहा है , इस लिए के में उससे दूर चली जाऊ , और में जोगी भी , मने डिसिशन ले लिया है..." काट ने अपने बहते असनु साफ कर बोलै ,

"नै काट (रट हुए) , न तोह में तुमसे दूर रह सकती हु , और न रवि से , में , में तुम दोनों के बेच फास सा गई हु , तुम दोनों मुझे दर्द दे रहे हो , प्लस काट , सब ठीक हो जायेगा , कुछ दिन रुक जाओ , मेरी खातिर..." बेबी ने बेहद रट हुए बोलै ,

"तुम्हारे लिए तोह में अपनी जान भी दे सकती हु , तुम रोना बंद करो , में बहक गई थी..." काट ने मुस्करा कर बोलै ,

"क्या मतलब..."

"बेबी , में बहक गई थी , मेरी जिंदगी में किसी मर्द के लिए कोई जगह नै , में बस तुम्हारे लिए बानी हु , और में तुमसे वादा करती हु , मेरी जिंदगी में कभी भी , कोई मर्द नै आएगा , में गलत थी..." काट ने बेबी के होंठो को चुम कर बोलै , तभी रवि ने फर्जी की आँखों पर हाथ रख दिया ,

"काट पर ..."

"बेबी अभ और कुछ नै , मने तुम्हारे कहने पर रवि से प्यार किया , जब के उसे मेरी कोई परवाह hi नै , उसने मुझे ठुकरा दिया , और बेबी मुज़से वादा करो , जिंदगी में तुम मुझे कभी किसी मर्द के करीब जाने का नै बोलूगी , बेबी अगर में टूट गई तोह तुम भी मुझे सम्बल नै पाउगी..." काट ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"ठीक है , में वादा करती हु , मेरी जान खुश रहे , मुझे और कुछ नै चाहये..." बेबी ने हस्ते हुए बोलै , और काट को बहु में भर लिया ,

फर्जी ने रवि का हाथ वापिस पकड़ा और उसे घर से बहार ले आयी , अभ दोनों अकेले थे , हाँ कुछ कबीले वाले उनसे थोड़ा दूर थे , लेकिन वोह अपनी मस्ती में थे ,

"फर्जी बीटा , यह सब क्या है..." रवि घुटनो के बल फर्जी के सामने बेथ कर बोलै ,

"पापा मुझे आपसे बात करनी थी..."

"हाँ बोलो..."

"अप्प काट मुम्मा से क्या बोल रहे थे , अप्प डेविल हो.." फर्जी ने मसोमीयत से बोलै ,

"वोह , वोह , में..."

"पापा में जानती हु , अप्प डेविल नै हो , क्यों की मेरे पापा बहुत अचे हैं , अप्प ने काट मुम्मा से झूठ बोलै , में जानती हु , लेकिन पापा , आपको काट मुम्मा के साथ ऐसा नै करना चाहये..." फर्जी ने थोड़ा उदास होकर बोलै ,

"ओह्ह मेरी बेटी , सॉरी , पर में काट की भलाई के लिए यह सब कर रहा हु..."

"पापा , अप्प काट मुम्मा को माफ़ कर दो , वार्ना वोह फिर से दारू पीने लग जाएगी , और में उनसे बहुत प्यार करती हु , वोह मेरी माँ है..." फर्जी ने नाम आँखों से बोलै ,

फर्जी की आँखें नाम हुई तोह रवि का दिल जल उठा , उसने तेज़ी से फर्जी को अपनी बहु में भर लिया ,

"नै बीटा रोना नई , में काट से बात करुगा , में उसे अप्पन लूंगा , पर तुम रोना बंद करो , में तुम रोटा हुआ नै देख सकता , तुम मेरी बेटी हो , तुम मेरा सब कुछ हो..." रवि ने नाम आँखों से बोलते हुए कहा ,

"रवि , क्या बतिअन हो रही दोनों बाप बेटी में..."

रवि और फर्जी ने इक दूसरे से अलग होकर देखा , सामने ख़ुशी कड़ी थी , वोह मुस्करा रही थी , उसके इक हाथ में दारू की बोतल थी , और इक हाथ में इक ब्लैक खंजर ,

"बीटा यह ख़ुशी मुम्मा है..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"पापा अप्प बहुत चालू हो , और कितनी मुम्मा है मेरी..." फर्जी ने अपना माथा पीट कर बोलै ,

"अहह नै , बेटी में ाचा हु , यह सब मेरे पीछे पढ़ी हुई हैं ..." रवि शरमाते हुए नज़रियन ज़ुका कर बोलै ,

"मेरी बची फरिहा , तुम्हारे पापा बहुत चालू हैं , और भूके भी , मेरी तरह , में भी भुकी हु , सदियों से ..." ख़ुशी अपना निचला होंठ दन्तु में दबा कर अजीब सा चेहरा बनाते हुए बोली ,

"पापा , यह मुम्मा थोड़ी पागल नै है , सदियों से कोई कैसे भूका हो सकता है..." फर्जी थोड़ी चिंता में बोली ,

"बेटी में सच में भुकी हु , पापा को बोलू मेरी भूक शांत करे..." ख़ुशी भी घुटनो के बल बेथ कर बोली ,

"ख़ुशी बची के सामने कैसी बतिअन कर रही हो , अभी बची है वोह..." रवि अपना माथा पीट कर बोलै ,

"वैसे आपको क्या खाना है..." फर्जी ने थोड़ा मुस्करा कर पूछा ,

"मुझे खाना नै करना है सी..." ख़ुशी अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"सैंडविच खाना है , खाना हैईईई , फर्जी तुम जाओ , यह कुछ भी बोलती रहेगी..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"ok , ok , में जाती हु , फर्जी बीटा चलो..." ख़ुशी ने फर्जी का हाथ पकड़ते हुए बोलै ,

"तुम , अह्ह्ह , तुम फर्जी को रहने दो , तुम उसे परेशान करुँगी , और क्या पता , क्या अजीब अजीब करुँगी..." रवि ख़ुशी के सामने आकर बोलै ,

"ओह्ह्ह , mr.devil , रत को मेरे रूम में ा जाना , और में फर्जी को अपने साथ लेकर जा रही हु..." ख़ुशी ने रवि की आँखों में देख कर बोलै , उसकी आँखें आग जैसी जल उठी ,

"ठीक है जाओ , में रत को मिलुंगा तुमसे..." रवि थोड़ा घबरा कर बोलै , उसे पता था , ख़ुशी अभ हेलल वाले रूप में घूम रही थी , और उसकी ादश्यां , उसकी हर हरकत , अभ डेमों तामस जैसी हो गई थी ,

"मुम्मा ख़ुशी , अप्प रत को क्या करेगी , पापा के साथ..." फर्जी ने ख़ुशी के साथ चलते हुए बोलै ,

"हम गेम खेलेंगे..." ख़ुशी मुस्कराते हुए बोली ,

"कोनसी गेम..." फर्जी ने उत्सुक होकर पूछा ,

"अह्ह्ह ओहूऊऊ , अह्ह्ह , ओह्ह्ह अह्ह्ह्हह , यह वाली गेम..." ख़ुशी अपने लम्बे बालो के सेहला कर बोली ,

"यह कोनसी गेम है..."

"यह बड़े लोग खेलते हैं , अभ और सवाल नै , में तुम चाकू चलना सिखाती हु..." ख़ुशी ने अपने रूम का दरवाजा खोला , और फर्जी को अपने साथ लेकर अंदर घुस गई...

रवि , ख़ुशी और फर्जी के जाते hi वापिस पलट कर घर के अंदर चला गया , वोह कोमल से मिलने जा hi रहा था के उसे कुछ यद् ा गया ,

"क्या में अंदर ा सकता हु..." रवि ने दरवाजे पर कोनक करके पूछा ,

"भइआ ा जाओ , आपको कब से पूछने की जरुरत पढ़ गई..." रमा बीएड पर बैठी हुई थी , उसने मुस्करा कर बोलै , उसके लम्बे बाल ेहडेर ोहडेर पोरे रूम में भटक रहे थे ,

"तुम अपने बालो का जाल हटाओ , तभी तुम देख पाव , और तुम्हारे पास ा पाव..." रवि ने रमा के लाल जादुई बालो को सेहला कर बोलै ,

"हम्म , मेरे बचे खेल रहे थे , इनको ऐसे खेलना ाचा लगता है..." रमा ने अपने बालो को सेहला कर बोलै , और मन hi मन कुछ बोली तोह उसके बाल फिर से छोटे हो गए ,

"तुम बहार क्यों नै आयी..." रवि ने रमा के साथ बैठते हुए बोलै ,

"आपकी बेटी आयी है , अगर उसने मुझे देख लिया , तोह शयद वोह दर जाये..." रमा ने उदासी में बोलै ,

"ओह्ह मेरी जान , तुम इतना सोचती हो मेरे बारे में , ी लव उउउ..." रवि ने रमा के होंठो को चुम कर बोलै ,

"अप्प डेविल बन चुके हो , पर आपकी भावनायें नै बदली , लेकिन आपका दूसरा रूप अप्प पर हावी हो रहा है , लगता है अभ मज़ा आएगा..." रमा ने मुस्करा कर बोलै ,

"हाँ , हम डेविल बन चुके हैं , पर हम तुम सब से बेइंतहा प्यार करते हैं , लेकिन यह रूप हमें तुम सब से अलग करता है..." रवि ने उदासी में बोलै ,

"मुझे आपका वोह रूप देखना है.." रमा ने रवि के चेहरे पर हाथ फिरा बोलै ,

"सच में..."

"हाँ..."

रवि ने खुद को थोड़ा पीछे किया , तभी उसका चेहरा , बेहद लाल हो गया , अभ वोह डेविल के रूप में था ,



"अहह , कितना खूबसूरत है , मेरी तरह , भइआ अभ हम इक लग रहे हैं , ी लव ू..." रमा ने रवि के उस ब्यांक चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

तभी रूम का दरवाजा अपने अप्प बंद हो गया , और रूम में हल्का सा अँधेरा शा गया ,

"ा गई तुम्हारी बदसूरत माँ..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै , रमा इस बात पर बस मुस्कराने लगी ,

िका इक रूम में इक काली परछाई सी बन गई , यह वही थी काळा लिबास में , काली परछाई में , जिसका कोई चेहरा नै था , पर जिसके हाथ में रिंग पहनी थी , वोह तेज़ रौशनी में चमक रही थी , इसका बस इक hi कारन था , रिंग सीमा को अपने करीब महसूस कर रही थी ,

और रिंग को जिस्म भी बस सीमा का hi चाहये था , वोह बहुत अधिक रौशनी में चमक रही थी , रवि और रमा भी रिंग को मोहित सा होकर देख रहे थे ,

"रावी , क्या सोचा तुमने , इक दिन गुजर चूका है , लेकिन तुम , ओह्ह नई , तुम अपने असली रूप में कैसे ा गए..." वोह औरत थोड़ा गुस्से में बोली ,

"में हु डेविल (हस्ते हुए) , तोह ब्यूटीफुल घटिया लेडी , अप्प यहाँ से दफा हो जाओ , इस से पहले में तुम नाराज की आग में फेंक दू..." रवि ने बेहद गुस्से में चीख कर बोलै , उसकी अखन तेज़ लाल रौशनी में चमक उठी ,

"ाचा (हस्ते हुए) , में खुद यहाँ से जाना चाहती हु , तुम बस मुझे वोह मैप देदो..."

"मैप (हस्ते हुए) , घटिया औरत , मेरी बात सुनो , मुझे गॉड से नफरत है , और क्यों की में सदियों तक उस हेलल में रहा , क्यों की मेरे पागल पिता ने मुझे पारी लोग से निकल कर , उस घटिया हेलल में दाल दिया , अह्ह्ह मेरी रूही से दूर करके , तोह अभ तुम भूल जाओ , में तुम कुछ बताने वाला हु , उनके बारे में..." रवि ने बेहद गुस्से में मुस्करा कर बोलै ,

"भइआए , माँ से ठीक से बात करो , अप्प उन पर चीला नै सकते , वोह माँ है मेरी..." रमा ने बीएड से उठ कर निचे उतारते हुए बोलै , उसके बाल भी बेहद ब्यांक हो गए थे ,

"ओह्ह्ह नीस (हस्ते हुए) , तोह तुम डेविल को बताऊगी , इक छोटी सी जादूगरनी , अच्छा , तोह फिर अपनी माँ को समझा दो , दुबारा मुज़से उस मैप के बारे में मत पूछे , क्यों की में उनका नाम नै ले सकता , तोह मैप के बारे में क्या बताउगा , ऐसे बोलू , भूल जाये ..." रवि ने बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"तुम , तुम मुझे वोह मैप डोज , हम्म और वोह भी अपनी ीचा से , में तुम तबाह कर दूंगी , और मने सुना है तुम्हारी बेटी आयी है , इक छोटी सी इंसान , और उसे मरना मेरे लिए मुश्किल नै होगा..." वोह नकाबपोश औरत रवि के करीब आकर मुस्कराते हुए बोली ,

"अह्ह्ह्हह तेरी इतनी हिमेट , डेविल की बेटी को मारगीई..." रवि ने बेइंतहा गुस्से में चीख कर बोलै , उसकी तेज़ गुस्से भरी आवाज़ से रमा कम्प सा गई ,



रवि ने अपने पोरे गुस्से में उस औरत का गाला पकड़ लिया , रवि का पूरा जिस्म लाल होकर जलने लगा , उसके कपडे भी जलने लगे ,

रिंग लाल रौशनी में चमकने लगी , रिंग से तेज़ लाल रौशनी निकल कर उस औरत के पोरे जिस्म में सामने लगी , उस औरत ने लाल चमकती आँखों से रवि का हाथ पकड़ लिया , और उसे हटाने लगी ,

लेकिन रवि के मन में फर्जी की तस्वीर बन रही थी , और उसका गुस्सा हर बढ़ते पल के साथ और बढ़ रहा था , उसकी पकड़ अभ बेहद मज़बूत हो चुकी थी , उसके बदन पूरा जलने लगा था , पूरा बदन आग की तरह जल रहा था , रवि के पोरे जिस्म से कपडे गयाब हो चुके थे , जल कर रख हो गए थे ,

हाथ से निकलती आग की लपटे उस औरत के अँधेरे भरे जिस्म को जलने लगी थी , लेकिन रिंग की ताकत , रवि की ताकत के इक सामान थी ,

वोह औरत , रवि का हाथ हटाने की हर नाकाम कोससिह कर रही थी , तभी रवि के पीछे कड़ी रमा चीख कर बोली ,

"छोड़ो मेरी माँ को , भइआए..." रमा बेहद गुस्से में चीख कर बोली ,

"ाःहाहा , नईईई , मुझे मज़ा ा रहा ही , यह घटिया औरत मेरी बेटी को मारेगी , में ऐसे हेलल में कैद कर दूंगा , अभी ऐसी वख्त , मेरी बेटी को कोई छू भी नै सकता..." रवि ने उस औरत का गाला और भी जोर से दबाते हुए , पलट कर रमा की तरफ देखते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह तोह मुज़से भी लाडू..." रमा ने बेहद गुस्से में बोलते हुए , अपने जादुई बालो से रवि के पोरे जिस्म को चारो तरफ से जकड लिया ,

"नईईई..." रवि और भी तेज़ गुस्से में चीख उठा , उसका जिस्म की चमड़ी जल कर फटने लगी , अंदर का मास्स लाल होकर चमकने लगा , खून की छोटी छोटी बूंदे , गरम आग के लावे की तरह जलते हुए जमीन पर गिरने लगी ,

रमा के जादुई लाल बाल जल कर टूटने लगे , और इक पल आया , जब रवि , रमा के बालो की पकड़ से आज़ाद हो चूका था ,

रवि की तेज़ पकड़ से , उस औरत का गाला जलने लगा था , वोह हेलल की तरफ बढ़ने लगी थी ,

" ाःहाहा , तुमने गलती कर डीईई , मेरीए बेटीई का नममम लेकरररररररर..." रवि ने और भी तेज़ गुस्से में चीख कर हस्ते हुए बोलै ,

तभी वह तेज़ अँधेरा हो गया , इक कोई हवा से भी तेज़ , रवि से ा टकराया , रवि वह से दूर जाकर , उस लकड़ी की दीवार से जा टकराया , दीवार रवि के टकराते hi टूट कर भीकर गई ,

वोह तेज़ चीज़ रेखा थी , वोह नकाबपोश औरत , रवि की पकड़ से आज़ाद होते hi जमीन पर गिर कर हाफने लगी , रवि धीरे धीरे उठने लगा , रेखा उस औरत को लेकर वह से गयाब हो गई ,

"तुम बच नै सकतीई , में तुम हेलल बेहज कर hi रहुगा , और तुम भी..." रवि ने पहले उस औरत को और फिर रमा की तरफ देखते हुए बोलै ,

रवि , रमा की तरफ बढ़ने लगा , पर तभी किसी ने दरवाजा खटकता दिया , रवि वही रुक गया ,

"रमा बेटी दरवाजा खोलो , कहा हो तुम..." यह सीमा थी , जो रमा से मिलने आयी थी ,

रवि इक डैम से नार्मल हो गया , लेकिन उसके बदन पर कपडे नै थे , वोह नंगा खड़ा था , उसने रमा की तरफ देखा , वोह हस्स रही थी ,

"तुम हस्स रही हो , कुछ करो , सीमा आयी है..." रवि ने अपना माथा पीट कर बोलै ,

"में क्या करू , गलती आपकी है , अभ भुगतो.." रमा हस्ते हुए बोली ,

"अहह क्या मुसीबत ही..." रवि ने अग्गे बढ़ दरवाजा खोल दिया , सीमा , रवि को नंगा देख चौंक सा गई ,

रवि बिना कुछ बोले सेड्यां चढ़ ऊपर अपने रूम में चला गया , सीमा अपने बाल खुजाती , कुछ सोचती हुई रमा के रूम में घुस गई ,

"बेटी रोमांस कर रही थी , मज़ा आया उनके साथ..." सीमा अग्गे बढ़ रमा को अपनी बहु में भरते हुए बोली ,

"माँ मुझे शर्म ा रही है , हमने कुछ नै किया..." रमा शरमाते हुए बोली ,

"हम्म , वोह तोह रूम की हालत देख पता चल रहा है , वैसे कर लेती , बेचारा नंगा hi चला गया..." सीमा हस्ते हुए बोली , तोह रमा ने अपना चेहरा सीमा के सीने में छुपा लिया ....

रवि ने रूम में जाकर अभी पेण्ट hi पहनी थी , के लारा उसके रूम में ा गई , उसने रवि की मज़बूत बॉडी देखि , तोह वोह मोहित सी हो गई , मज़बूत कंडे , छोड़ी छाती , पेट में बनते मसल , उफ़ लारा तोह बस मोहित सी हो गई ,

"लारा जी अप्प , इतने दिनों बाद हमारी यद् कैसे ा गई .." रवि ने इक ब्लैक टीशर्ट पहनते हुए बोलै ,

"लारा (मुस्कराते हुए) , बस यद् आयी तोह सोचा मिल लू आपसे..." लारा , रवि के पास से गुजर कर , बालकोनी की लकड़ी की ग्रिल पर हाथ रखते हुए बोली ,

"ाचा किया , पर तुम इक मिंट लेट हो गई..." रवि हस्ते हुए बोलै ,

"ाचा , अगर 1 मिंट लेट अति , तोह क्या हो जाता ..." लारा , रवि की आँखों में जैकटे हुए बोली ,

"कुछ नई , ाचा तुम कैसी हो , मेरे परिवार में वख्त बिताया करो , पूरा दिन रूम में बैठी रहती हो..." रवि ने लारा के साथ खड़े होते हुए बोलै ,

"अभी मुझे खुद को समाज लेने दो , में हमेशा बुराई के बेच रही हु , और में अपनी दोस्त एलिज़ा (रट हुए) को बहुत यद् कर रही हु , में उससे दूर नै रही हु..." लारा ने रवि के गले लग रट हुए बोलै ,

"शहहह , तुम बेहद खूबसूरत हो , मुझे तुम्हारे जिस्म की महक अपनी तरफ खींच रही है , तुम लाजवाब हो और वर्जिन भी , में तुम्हारी दोस्त को लयुगा , तुम्हारे लिए , तुम रोना बंद कर दो..." रवि ने लारा के बाल सहलाते हुए उसे कास कर अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"पापा..."

यह आवाज़ सुनते hi रवि , लारा से दूर हो गया , और चौंकते हुए घबरा कर बोलै..." बीटा , तुम ..."

"पापा , यह भी मेरी मुम्मा है..." फर्जी ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह लारा मोह खोले उसे देखती रही , और रवि का चेहरा देख शर्माने लगी , फिर उसने अपनी नज़रियन ज़ुका ली , सच में इस वख्त वोह दुनिआ की सबसे खूबसूरत लड़की थी ,

"पापा मने कुछ पूछा , ाचा वोह सब छोड़ो , अज्ज ख़ुशी मुम्मा ने मुझे चाकू चलना सिखाया , अप्प वही खड़े रहो , में ेहडेर से चाकू फेंकूँगी , और वोह चाकू आपकी तंग के बेच दीवार पर लगेगा..." फर्जी अपने हाथ में इक चाकू पकड़े हस्ते हुए बोली ,

"मर गया पापा..." रवि बेहद धीरे से बोलै , तोह लारा हसने लगी , क्यों उसने सुन लिया था , जो रवि ने बोलै था....

तो बे कुनिटेड.....[Note:- Friends ik bat kehni thi... plot thoda change kiya haii.. lekin bahut alag hai... or akhir me plot ring ke ant tak hi pahunchega... es liye enjoy karo... han plot thoda lucifer se milta hai... but yeh family ki kahani hai.. toh eski sari ghatnayian meri icha se hongi.. or bilkul alag hongi... or yeh plot un 7 dino par kaindrit hoga.. jo us aurat ne ravi ko diye the... ]

 


अपडेट-73

अभ अग्गे...

"पापा हिलना मत , थोड़ी टंगे खोलू , बस , बस , यही ठीक है ..." फर्जी ने इक आँख बंद कर निशाना लगते हुए बोली ,

"बेटी सम्बल कर , कही निशाना ऊपर निचे न हो जाये..." रवि अपनी जांगू पर हाथ रख घबराते हुए बोलै , क्यों की फर्जी के हाथ में डेमों खंजर था , जिसे हेलल में बनाया गया था , जो रवि को चोट पहुंचा सकता था ,

"तुम्हारी बेटी बहुत फ़ास्ट है , लगता है रवि जी आपकी खैर नै..." लारा बेहद हस्ते हुए बोली ,

"तुम हस्सी ा रही है , यहाँ मेरी मर्दानगी खतरे में है..." रवि धीरे से बोलै , जिसे सुन लारा और भी हसने लगी ,

"पापा नयी मुम्मा से बतिअन बाद में करना , अभी मुझे चाकू फेंकने दो..." फर्जी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

फर्जी के मोह से मुम्मा सुन लारा मंद मंद मुस्कराने लगी , उसे बेहद शर्म ा रही थी , लेकिन क्यों , क्यों की उसने कभी ऐसा पहले महसूस नै किया था , इक मर्द का एहसास , खुद को माँ कहलवाना , यह सब उसके लिए नया था , वोह खुद को इक आम सी लड़की महसूस कर रही थी ,

"बीटा दयँ से..." रवि घबरा कर बोलै ,

"रवि तुम पलट कर खड़े हो जाऊ , मर्दानगी बच जाएगी ..."लारा फिर से हस्ते हुए बोली ,

"हम्म , गुड़ आईडिया..." रवि इक डैम से पलट कर खड़ा हो गया , अभ उसकी मर्दानगी बच गई , लेकिन कुछ और खतरे में था ,

"पापा अप्प पलट क्यों गए , में चाकू फेंक रही हु..." फर्जी ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"बीटा जल्दी करो , मुझे और भी काम है..." रवि पीछे पलट कर थोड़ा घबरा कर बोलै ,

"आआह्ह्ययययआआ..." फर्जी ने इक योद्धा लड़की की तरह चीख मरते हुए चाकू फेंक दिया , यह सब ख़ुशी ने उसे सिखाया था ,

फर्जी के हाथ से चाकू तेज़ रफ़्तार से छूटा और रवि की तरफ तेज़ी से बढ़ने लगा , रवि की आँखें बंद थी , और सांसे तेज़ , और िका इक निशाना लग गया , पर कही और ,

"आआआआईईईईई माआआ..." रवि ने दर्द से चीखते हुए बोलै , क्यों की चाकू उसके दये चूतड़ में आधा घुस चूका था ,

"ओह्ह्ह नू , पापा सॉरी..." फर्जी थोड़ी उदासी में भाग कर रवि के पास आयी ,

"अह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है , अभ पता चला लड़कयों क्यों चीखती है अस्स मरवाने में..." रवि चाकू के तेज़ दर्द को महसूस करता हुआ धीरे से बोलै ,

"ओह्ह रवि तुम ठीक तोह हो , देखा मर्दानगी बच गई , मेरा आईडिया काम आया..." लारा , रवि के कण में धीरे से हस्ते हुए बोली ,

"पापा में निकल देती हु..." फर्जी ने चाकू पकड़ कर खींच दिया ,

"बीटा रहने दो..." रवि इक डैम से चाकू निकलने पर चीख कर बोलै , उसे बेहद दर्द हो रहा था ,

"ok पापा..." फर्जी ने दुबारा से चाकू रवि के चूतड़ में घुसते हुए बोलै ,

"आयआईईईईईईईईईई यह मर देगी मुझे..." रवि ने फिर से चीख कर बोलै , रवि इक डैम से पलट गया , और चाकू खुद hi खींच कर निकल लिया ,

"पापा आपको मज़ा आया न , तभी अप्पने बोलै रहने दो..." फर्जी मुस्कराते हुए बोली ,

"ओह्ह हाँ , ाचा लगा , बहुत ाचा लगा , ओह्ह कोमल ा गई..." रवि ने दरवाजे की तरफ देखा , यहाँ कोमल कड़ी सबको देख रही थी ,

सबने कोमल की तरफ देखा , लेकिन फर्जी फिर से रवि की तरफ देख कर मुस्कराते हुए बोली ,

"पापा यह भी मेरी मुम्मा होगी , अप्प सच में बहुत चालू हो , पता नै कितनी मुम्मा और होंगी , में तोह जा रही हु..." फर्जी अपने बालो को जतका देकर पेअर पटकते हुए जाते हुए बोली ,

फर्जी की बात सुन सब हसने लगे , फिर लारा , रवि और कोमल से कुछ देर बतिअन कर अपने रूम में चली गई ,

कोमल अपने भाई से थोड़ा दूर कड़ी हो गई , और दूर तक फैले हरे भरे जंगल को निहारने लगी , रवि बस ख़ामोशी से कोमल के हसन चेहरे को देखता रहा ,

"कोमल , तुम भी बदल गई हो , में जनता हु , तुम रूही बन चुकी हो..." रवि ने कोमल के करीब जाकर बोलै , उसने जैसे hi कोमल को छुआ , इक तेज़ बिजली का जतका उसे लगा ,

"भइआए , अप्प ठीक तोह हैं , हाँ , हम बदल चुके हैं , हम रूही बन चुके हैं , लेकिन पता नै कैसे , यह है हमारा असली रूप..." कोमल ने अपनी आँखें बंद कर दर्द भरी आवाज़ में बोलै , वोह अपने असली रूप में ा चुकी थी ,

कोमल का पूरा जिस्म रौशनी में बदल गया , इक सुनहरी रौशनी में , उसका जिस्म जैसे था hi नै , वोह तेज़ चमकती रौशनी की परछाई परतीत हो रही थी ,



रवि से कोमल का पवितर तेज़ सेहन न हुआ , रवि का जिस्म जलने लगा , रवि आँखों पर हाथ रखे पीछे हैट गया ,

िका इक वोह रौशनी बेहद सफेद जिस्म में बदल गई , यह हद से भी जायदा सफेद जिस्म रूही का था ,



जिसके सफेद पंख थे , बेहद खूबसूरत , दूध जैसे सफेद बाल , हद से भी जायदा खूबसूरत चेहरा , उफ़ रवि मोहित सा हो गया , जैसे वोह पहले हुआ करता था ,

कोमल ने आँखें ज़ुका राखी थी , रिंग की आधी ताकत उसमे भी थी , और रिंग की ताकत हर इंसान को उसके असली रूप में ढल रही थी , कोमल अभ रूही बन चुकी थी ,



कोमल ने इक बार नज़र उठा अपने भाई की तरफ देखा , जो अपने डेविल रूप में उसके सामने खड़ा था , उसका पूरा जिस्म लाल था , बेहद ब्यांक , और दो बड़े बड़े लाल ब्यांक पंख ,



कोमल कुछ पल अपने भाई को देखती रही , और फिर चेहरा ज़ुका आँखें बंद कर ली , रवि बस कोमल से दूर खड़ा उसे मोहित सा होकर देख रहा था , लेकिन अभ वोह रवि और कोमल नै थे , अभ वोह डेविल और रूही थे ,

"हमारी बहिन , हमारी रहीइ , हमारा प्यार..." रवि ने कोमल के करीब जाते हुए बोलै , लेकिन जैसे hi उसने कोमल को छुआ , उसे इक तेज़ जतका लगा , और वोह पीछे गिर गया ,

"अह्हह्ह्ह्ह , पिता जी का श्राप हमें रोक रहा है , हम तुम अभ भी छू नै सकते , काश के उस पल पिता जी में हमें न देखा होता , अह्ह्ह्ह हम तुम छू कर महसूस करना चाहता हैं , पर कर नै सकते..." रवि ने अपने डेविल रूप में चीख कर बोलै ,

"भाई , हम आपके हैं , हम पर किसी और का कोई हुक नै , चाहे पिता जी ने हम दोनों को अलग कर दिया , लेकिन हम हमेशा आपके रहेंगे , भाई आपको यह श्राप ख़तम करना होगा..." कोमल जो रूही के रूप में थी , वोह बेहद धीमे से बोली , उफ़ उसकी आवाज़ इतनी मदुर थी , के कोई भी उस पर पल भर में मोहित हो जाता ,

"नै कर सकते , हम छह कर भी यह नै कर सकते , हम उस जगह नै पहुँच सकते , क्यों की हम डेविल हैं ..." रवि ने कोमल की आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"करना होगा , आपको सब कुछ करना होगा , हम दोनों पारी लोग में भी इक नै हो पाए , और अभ पृथ्वी पर भी नै , हमें यह करना hi होगा .." कोमल ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"अह्ह्ह ठीक है , हम दोनों मिलकर यह करेंगे , पिछली बार हम सफल हो जाते , अगर सुहाना ने जुंग की शुरुआत न की होती , लेकिन इस बार सुहाना नै है , हम दोनों यह मिलकर करेंगे..." रवि ने मुस्कराने की कोससिह करते हुए बोलै ,

"भइआ वोह मैप हमारा मिलान करवाएगा , हम वह पहुंचना होगा , इस से पहले कोई और वह पहुँच जाये... " रूही ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै , तोह रवि खो सा गया ,

"हाँ , मेरा मतलब , वोह मैप मेरे दिमाग में है , ब्यांक रस्ते , अंधकार से भरे खौफनाक जंगल , ब्यांक जीव , इतने कठिन रस्ते पर चल पाउगी मेरे साथ..." रवि ने कोमल की नली गहरी आँखों में देखते हुए बोलै ,

"भइआ (मुस्करा कर) , मने जब आपको चाहा , जब आपसे हर जनम साथ रहने का वादा किया , तोह भाई कुछ मत सोचु , में आपके साथ जोगी , क्यों की यह सब मेरी नादानी और बेवकूफी के कारन हुआ है..." कोमल जो बेहद मासूम रूही थी , नाम आँखों से बोली ,

"शहहह तुम्हारी कोई गलती नै , हम साथ थे , हम दोनों में प्यार हुआ , और हमें इक दूसरे को चूमते हुए पिता जी ने देख लिया , और इस जनम में माँ ने , तब हेलल की सजा मिली और इस जनम में 8 साल तुमसे दूर रहने की , कोमल हम हार नै मन सकते , हमें पिता जी के श्राप का अंत करना होगा , और इस जनम में माँ को भी मानना होगा..." रवि जो डेविल रूप में था , बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"भइआ सब वैसा hi हो रहा है , जिंदगी में , जो पारी लोग में हुआ था , वह तोह हार गए , लेकिन यहाँ जरूर जीतेंगे , हमें मैप के रस्ते उस पवितर जगह पहुंचना होगा , तभी हम रिंग का अंत कर सकते हैं..." कोमल ने मुस्कराते हुए बोलै , चाहे वोह अभ रूही थी , लेकिन दोनों का प्यार तोह इक hi था ,

"हाँ कोमल , ाचा इक बात करनी थी तुमसे.." रवि कुछ यद् करते हुए बोलै ,

"हाँ बोलू..."

"कोमल अज्ज मने काट को अपना असली रूप दिखाना चाहा , पर में कमज़ोर पढ़ गया , पता नै किस कारन..." रवि ने बेहद चिंता में बोलै ,

"ओह्ह्ह भाई और कोण था वह..." कोमल बेहद उदासी में बोली ,

"और , और , हाँ फर्जी कड़ी थी मेरे पीछे.."

"भइआ , इसका इक hi मतलब है , या तोह काट होगी या फर्जी , लेकिन फर्जी नै हो सकती , तोह फिर..." कोमल अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"तोह काट होगी , ओह्ह्ह मतलब काट वही है , लेकिन कैसे..." रवि ने बेहद परेशानी और गुस्से में बोलै ,

"भइआ काट वही है , अह्ह्ह भाई यह बहुत बड़ी परेशानी की बात है , आपको काट से दूर रहना होगा , वार्ना कोई भी आपको मार सकता है , मने अभी बोलै भी , वही सब हो रहा है जो पारी लोग में हुआ था , हम फिर से जुंग की तरफ बढ़ रहे हैं..." कोमल ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"हाँ , लेकिन कोमल , काट को यह एहसास न होने पाए , के वोह कोण है , और क्यों डेविल उसके सामने कमज़ोर पढ़ जाता है , लेकिन काट को कब एहसास होगा , के वोह कोण है..."

"भइआ जब काट किसी मर्द के प्यार में दुब जाएगी , तब वोह एहसास करेगी , अपनी ताकत को , वोह डेविल को कमज़ोर करती है , इस लिए अप्प काट के करीब नै जाओगे , जब तक हम उस मैप की आखरी मंज़िल न प् ले..." कोमल ने बेहद घम्बिर होकर बोलै ,

"में समाज गया , मुझे क्या करना है.." रवि मुस्कराते हुए बोलै और वह से बहार चला गया , उसका जिस्म अभ नार्मल हो चूका था , जब वोह रूम से बहार निकला ,

रवि सेड्यां उतर निचे आया तोह किचन में सीमा उसे कुछ परेशान दिखी , रवि उसके पास चला गया , और उसे बहु में भरते हुए बोलै ,

"क्या हुआ मेरी जान , तुम ठीक तोह हो..."

"अह्ह्ह पता नै , सीने में जलन सी हो रही है , और सार भी दर्द कर रहा है , जैसे कोई चीज़ खींच रही है मुझे , अह्ह्ह बहुत दर्द कर रहा है मेरा सार..." सीमा दोनों हाथो से अपना सार दबाते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह no , मतलब सीमा जब रमा के रूम में गई , तब सीमा के जिस्म को रिंग का एहसास हो गया , जरूर रिंग ने अपनी कुछ रौशनी भरी किरणे वह छोड़ी होंगी , यह रिंग बेहद चालक है , सीमा को उससे दूर रखना होगा..." रवि ने मन में सोच कर बोलै ,

"अह्ह्ह रवि क्या सोच रहे हो..."

"सीमा तुम ख़ुशी के पास जाऊ , वोह पल भर में तुम ठीक कर देगी..." रवि ने कुछ सोचते हुए बोलै ,

"हाँ तुम ठीक बोल रहे हो , में जाती हु.." सीमा , रवि के होंठो को चुम , ख़ुशी के पास चली गई ,

शाम के 5 बज रहे थे , अज्ज का दिन ाचा भी गुजरा था , और बुरा भी , लेकिन अभी रत बाकि थी , और रवि का चूतड़ अभ भी दर्द कर रहा था , लेकिन उसे बदला लेना था ख़ुशी से , वोह यही सोच रहा था ,

रवि अभी किचन में खड़ा कुछ सोच hi रहा था , के कोई किचन में आया , रवि उसकी आँखों में खो सा गया , इक इंसानी आँखें , जो उसे कमज़ोर कर रही थी , यह और कोई नै काट थी ,

काट ने बिना रवि को देखे , इक गिलास में पानी भरा और ख़ामोशी से पीने लगी , रवि बस पत्थर सा बना उसे घूरता रहा , काट पानी का गिलास बेहद धीरे धीरे खली कर रही थी , वोह चाहे बेबी को बोल आयी थी वोह रवि को भूल जाएगी , पर उसका मन उसे यह करने नै दे रहा था , उसके मन ने इक मर्द के प्यार को महसूस कर लिया था , जो उसने पूरी जिंदगी नै किया था ,

जब काट से बर्दाश्त न हुआ तोह वोह बेहद गुस्से में बोली ,

"अभ चुप क्यों हो , काम से काम यह तोह बोलू में डेविल हु , कुछ तोह बोलू , में तुम भूलना चाहती हु , पर नै हो रहा मुज़से , मेरा दिल मेरे साथ भागवत कर रहा है , रवि ी लव ू , तुम क्यों नै अप्पन रहे मुझे , बोलू , जवाब दो , भूल गए , तुमने hi मुझे प्यार का एहसास करवाया था..." काट बेहद गुस्से में रट हुए रवि की टीशर्ट को गले से खींचते हुए बोली , फिर वोह रट रट जमीन पर घुटनो के बल बेथ गई , उसने अपना सार रवि के घुटनो से लगा लिया और बेइंतहा रोने लगी ,

"ओह्ह्ह में कमज़ोर हो रहा हु , काट के साथ में इंसान बन जाउगा , क्या करू , में फास गया हु दुविद्या में , लेकिन काट को रट हुए नै देख सकता , लेकिन काट वही है , हाँ , काट वही है..." रवि ने मन hi मन दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"रविइइइ , प्लस कुछ तोह बोलू , प्लस , में तुम चाहती हु , में मर जोगी तुम्हारे बिना , रवीए ी लव ू , प्लस कुछ तोह बोलू..." काट रवि की जांगू पर मरते हुए रट चीखते बोली ,

रवि से और बर्दाश्त न हुआ , वोह निचे घुटनो के बल बेथ गया , काट की आँखों से लगातार असनु बह रहे थे , वोह रोये जा रही थी , उसका दिल प्यार से भर चूका था , और कमज़ोर भी बेहद हो गया था , लेकिन उसकी शक्ति अभ सुपत अवशता से जग रही थी ,

"रवीए..." काट रट हुए इतना बोली और रवि को अपनी बहु में भर लिया , काट के मन को अभ सकूं मिला था , वोह काफी देर तक रवि के गले लगी रही , उसे महसूस करती रही , और थोड़ा पीछे हैट , रवि की आँखों में आँखें दाल देखने लगी ,

"रविइइइ , ी लव ू.." काट , रवि के चेहरे को पगलू की तरह चूमते हुए बोली , जब उसका मन भरा , तब वोह फिर से रवि के गले लग गई , रवि बस नाम आँखों से काट के बालो को सहलाता रहा ,

रवि ने िका इक दरवाजे की तरफ देखा , फर्जी वह कड़ी मुस्करा रही थी , और फर्जी के पीछे बेबी कड़ी थी , जो बेहद खुश दिख रही थी ,

काट फिर रवि से अलग हुई , उसने अपनी गीली गलो को हाथ से साफ किया , और मुस्कराने लगी ,

"रावी में तुमसे बहुत प्यार करती हु , और अभ खुद को डेविल मत बोलना , तुम पता है , मुझे ें चीज़ो से बहुत दर लगता है..." काट हस्ते हुए बोली ,

"में डेविल hi हु , सच में , में छह कर भी तुमसे झूठ नै बोल सकता , पता नै क्यों , में तुम सच hi बता प् रहा हु , में डेविल हु काट , बेहद ब्यांक और बुरा..." रवि ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै , क्यों की बेबी और फर्जी अभ वापिस चली गई थी , वोह दोनों अकेले थे ,

"उफ्फ्फ ओह्ह्ह , ाचा ठीक है , मन लेती हु तुम डेविल हो , तोह सबूत दिखाओ , बनो डेविल , में तुम इक मिंट का वख्त देती हु , अगर तुम डेविल न बन पाए , तोह तुम कभी भी यह बकवास नै करोगे..." काट ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"नै दिखा सकता (बेहद गुस्से में) , में तुम अपना रूप नै दिखा सकता , क्यों की तुम..." रवि बोलते बोलते रुक गया , और काट को अपनी बहु में भर लिया , रवि खामोश हो गया....

"रावी , अभ तोह मुझे छोड़ कर नै जाओगे न , प्लस , तुम जो कहोगे में वही करुँगी , बस मुझे खुद से अलग मत करना ..." काट ने थोड़ा पीछे हैट रवि के होंठो को चुम कर बोलै ,

"अभ चले काट , में तुम कभी अकेला नै छोड़ूगा , जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगा , लेकिन इक बात है , में डेविल हु , तुम मेरा विश्वास करो या नै , में डेविल हु , पर तुम दिखा नै सकता..." रवि ने काट का माथा चुम कर बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"ओह्ह्ह तुम जो कोई भी हो , मुझे इसकी कोई चिंता नै , तुम मेरा पहला प्यार हो , तुम वोह पहले मर्द हो , जो मेरी जिंदगी में ए , और तुम hi आखरी होंगे..." काट ने मुस्कराते हुए बोलै , वोह बेहद हसन और मासूम लग रही थी , लेकिन कुछ भी हो , रवि अभ खतरे में था , आखिर काट थी कोण , रवि की बहिन थी , कोई जादूगरनी थी , क्या वोह एंगल थी , डेमों थी , यह बात बस दो hi लोग जानते थे , इक कोमल और दूसरा डेविल रवि.....

फिर काट , रवि को अपने साथ ले गई , वोह दोनों जंगल में घूमने निकल गए , लेकिन रवि को जाते हुए कोमल देख रही थी , कोमल जल्दी से ख़ुशी के पास गई , और उसे रवि पर नज़र रखने का बोलै , लेकिन कोमल ने इतना नै बताया के काट उसे कमज़ोर करती है....

वही दूसरी तरफ....

"अह्ह्ह तुम हार कैसे गए..." जोकर ने बेहद गुस्से में चीख कर बोलै ,

"वोह इक नंबर का पागल है , और वोह डेविल है , उसे मर नै सकता ..." मार्को ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"ाहः , तुम , तुम , उस बेवकूफ से दर गए , उसे मरना है तोह पहले कमज़ोर करो , उसकी किसी प्रेमिका को मर दो , वोह खुद बा खुद मर जायेगा , जाओ अभी..." जोकर ने बेइंतहा चीख कर बोलै ,

"हम्म , लेकिन उसका परिवार बेहद ताकतवर है..."

"अभी वोह अकेला है , इक लड़की के साथ , ओह्ह यह तोह काट है , मार्को जाओ और काट को ख़तम कर दो..." जोकर बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"अभ आएगा मज़ा..." मार्को इतना बोल वह से गयाब हो गया...

मार्को के जाने के बाद एलिज़ा बेहद उदास आवाज़ में बोली ,

"बॉस , मुझे लारा वापिस चाहये , किसी भी कीमत पर , चाहे इसके लिए कितने भी लोग को मरना न पढ़े , में इस पोरे शहर को तबाह कर दूंगी , अगर लारा वापिस न आयी तोह..." एलिज़ा ने बेहद गुस्से में चीख कर बोलै ,

"ाहः , तुम क्या सोच रही हो , जो सोच रही हो , उसे अंजाम दो , तबाही मचा दो , इस गंदे , बेकार शहर में ..."

"तबाही नै बॉस , में इस शहर को नाराज में बदल दूंगी , लारा मेरी दोस्त है , इस दुनिआ में मेरा सब कुछ , मने ग्रोथ फॉर्मूले में थोड़ा और चेंज कर दिया है , लेकिन इस तबाही से पहले में रवि से बात करुँगी , अगर लारा वापिस न आयी , तोह इक hi जटके में पूरा शहर नाराज जैसा बना दूंगी..." एलिज़ा इतना बोल लैब से बहार चली गई , जोकर मुस्कराने लगा ,

"ओह्ह्ह , यह प्यार भी अजीब चीज़ है , लेकिन अगर प्यार को दर्द में बदल दिया जाये , अगर लारा मर जाये , तोह एलिज़ा का सारा गुस्सा , रवि और उसके परिवार पर निकलेगा , हम्म , मार्को वापिस ा जाओ , तुम इक खास काम करना है..." जोकर ने अपना ब्यांक प्लान बनाते हुए बोलै ,

"अपने मुझे क्यों बुला लिया , में रवि से लड़ने hi जा रहा था , अभ क्या करना है..."

"लारा को मर दो , सिर्फ लारा को , वोह भी ख़ामोशी से , बिना किसी को अहहत हुए , अहःअहः , कल का दिन लारा की जिंदगी का आखरी दिन होगा , लेकिन यह बात हम दोनों के बेच रहे..." जोकर बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी....

तो बे कुनिटेड....[NOTE:- Friends kuch din update nai kar pauga... karan nai bata sakta , bus yahi samaz lo busy hu , apni life me... ]

 


अपडेट-74

अभ अग्गे...

अज्ज का दिन कुछ लोग की जिंदगी में बेहद खुशनुमा गुजरा था , ें खुशनुमा लोग में काट भी शामिल थी ,

हैश्च आखिर काट को उसका प्यार मिल hi गया , जिस प्यार के किये शयद वोह अभ तक पवितर घूम रही थी , लेकिन इस सब के पीछे भी वोह था ,

वोह मतलब डेविल के पिता , काट कोई आम सी लड़की नै थी , जिस्मानी शरीर में जकड़ी उसकी आत्मा , बेहद शक्तिशाली थी , वोह इंसान होकर भी इंसान नै थी , लेकिन उसे अभी अपनी शक्ति का एहसास नै था , आखिर क्यों वोह रवि को कमज़ोर करती है ,

दूसरी तरफ रवि , जिसने काट के बहते असंयिओं के अग्गे हथयार दाल दिए , काट को अपना लिया , असनु औरत का सबसे बड़ा हथयार होते हैं ,

मर्द कभी औरत को रट हुए नै देख सकता , और औरत , मर्द को रट देखना चाहती है , यह बात भी है , के जो मर्द किसी के सामने रट हैं , वोह यह दिखाना चाहते हैं , के वोह इंसान उनकी जिंदगी में कितनी एहमियत रखता है ,

खैर यह सब बतिअन हैं , रवि और काट जंगल की तरफ बढ़ रहे थे , वोह कुछ दिल की बतिअन करना चाहते थे , और कुछ प्यार भी ,

दोनों इक दूसरे का हाथ थामे धीरे धीरे अग्गे बढ़ रहे थे , दोनों के मन में हज़ारो विचार जनम लेकर , उनके दिमाग में अलग अलग तस्वीर बना रहे थे ,

यहाँ रवि के मन , काट को करीब से जानना चाहता था , उसे यह जानना था , आखिर काट कोण है , वही काट , मन में यह सोच कर शर्मा रही थी , रवि उसके साथ अकेले में क्या क्या करेगा ,

दोनों खामोश थे , लेकिन चलते चलते जब दोनों की नज़रियन आपस में टकरा जाती , तोह दोनों मुस्कराने लगते , लेकिन दोनों इस बात से अनजान थे , के ख़ुशी उनका पीछा कर रही है , उन पर नज़र रख रही है ,

आखिर दोनों नदी किनारे पहुँच hi गए , नदी में बेहटा पानी , धुप में चमक रहा था , यह पानी बेहद साफ था , क्यों की इंसानो की पहुँच से दूर था , नदी के as-pas कुदरत की खूबसूरती का जलवा भीकृ हुआ था , बड़े बड़े hare-bhare पेड़ थे , उन पेडू के निचे हरी नरम घास ुग्गी हुई थी ,

रवि और काट इक बड़े से पेड़ से पीठ टिका उस नरम घास पर बेथ गए , और अपनी आँखों के सामने बहती नदी को देखने लगे , यह इक सकूं भरा पल था , कुदरत को महसूस करना बेहद आसान भी होता है , और बेहद मुश्किल भी ,

कुदरत को सिर्फ शांत रहकर महसूस किया जा सकता है , शांत मन और बंद आँखें , यह हमें कुदरत का एहसास करवाती हैं ,

"काट..." रवि सामने बहती नदी की तरफ देख कर बोलै ,

"हम्म..."

"काट , कहा से सुरु करू , कुछ समाज नै ा रहा , खैर , अभ बोलना तोह है , काट , में तुमसे प्यार तोह करता हु , पर काट , में तुमसे शादी नै कर सकता , तुम समाज रही हो न..." रवि ने थोड़ा उदास मन से बोलै ,

"(इक लम्बी साँस लेकर) हाँ , में समाज रही हु , और में भी तुमसे यही कहने वाली थी , रवि , मने अपनी इस छोटी सी जिंदगी में बेइंतहा दर्द महसूस किया है..." काट ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"शठ , रोना मत प्लस , काट , तुम गुस्से में बेहद खूबसूरत लगती हो , काट , में जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगा , चाहे हालत अचे हो या बुरे , में वादा करता हु तुमसे..." रवि ने काट के बालो को सहलाते हुए बोलै ,

"रवि तुम दुनिआ के इक मटर मर्द हो , जो बेहद अचे हो , तुम दुसरो से अलग हो , तुम , तुम , अह्ह्ह , में , रवि , ी लव ु..." काट ने मुस्करा कर बोलै ,

"ाचा , सब यही कहती हैं , खैर वोह सब छोड़ू , तुम यह बताओ अभ कब डौगी..." रवि ने मुस्कराते हुए पूछा ,

"क्या..." काट नज़रियन चुरा कर बोली ,

"वही , तुम्हारा अनमोल खजाना..." रवि ने काट की जांगू में हाथ घुसा उसकी छूट को कपड़ो के ऊपर से मसल कर बोलै ,

"ोुछःह , गंदे कही के , हाथ हटाओ , इस खजाने पर अभी टाला लगा हुआ है..."

"मेरे पास इसकी चाबी है , इस खजाने का टाला में खोल लूंगा , काट देदू न प्लस.." रवि , काट को अपनी बहु में भर उसकी गर्दन को चूमते छत्ते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह सष्ठ तुम पागल कर डोज , अभी नई प्लस , अह्ह्ह्ह ोुछःह इनको क्यों मसल रहे हो ..." काट ने रवि के हाथो को अपने मोठे मोठे चुचु से हटते हुए बोलै ,

"उम् तुम्हारा हुसैन लाजवाब है , उफ्फ्फ अगर तुम कोई देख ले , तोह पागल हो जाये , अह्ह्ह कोई हुआ है पागल ..." रवि ने काट को घास पर लिटा उसके नरम गुलाबी होंठो का रास निचोड़ते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह रवि मत करू प्लस , मने पहले किसी मर्द के साथ , ोुछहहह , रुकू तुम , अह्ह्ह्ह मेरी टीशर्ट फाड् डोज , रुकू न..." काट दर्द और मज़े से सिसकते हुए बोली , जब के रवि के हाथ उसके चुचु को कास कास कर मसल रहे थे ,

"काट , में रुक नै प् रहा , तुम्हारा यह हुसैन , उफ्फ्फ में सेहन नै कर प् रहा , में खींचता चला जा रहा हु , काट कपडे उतरो न..." रवि ने काट की टीशर्ट को ऊपर कर उसके माखन जैसे नरम सफेद पेट को चूमते हुए बोलै ,

"इक मिंट रुको अह्ह्ह्हह , रवि रुको ..." काट से अभ बढ़ती वासना सेहन नै हो रही थी , उसने रवि को ढाका दिया और उठ कर बेथ गई , वोह तेज़ तेज़ सांसे भर्ती हाफ रही थी , उसके मखमली चुके ऊपर निचे हो रहे थे ,

"काट रोका क्यों तुमने..." रवि ने काट के हसन खूबसूरत चेहरे को निहारते हुए पूछा ,

"रवि , में तुमसे बेपनाह प्यार करती हु ,

पर , पर रवि , मुझे कुछ वख्त दो , प्लस , में वादा करती हु , जल्द hi तुमसे बहुत प्यार करुँगी..." काट मुस्कराते हुए बोली , और रवि से लिपट गई ,

"ठीक है , वख्त दिया , पर जायदा इंतज़ार मत करवाना , तुम घोड़ी बना कर छोड़ना है मुझे..."

"ष्ठीी , कितनी गन्दी बतिअन करते हो , और में , सुनो तुम , में घोड़ी नै बानगी ..." काट ने बुरा सा मोह बना कर बोलै ,

"वोह तोह वख्त बताएगा , वैसे तुम क्या बनना चाहती हो..."

"में , कुछ नै..."

"ाचा , मतलब तुम , बस लेट कर , टंगे पसर कर छोड़ना पसंद है , कितना बोरिंग स्टाइल है..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"सीई , में घर जा रही हु , bye..." काट उठते हुए बोली ,

"इतनी जल्दी..." रवि ने काट का हाथ पकड़ उसे अपने करीब खींचते हुए बोलै ,

दूसरी तरफ ख़ुशी इक पेड़ के पीछे छुपी दोनों को देख रही थी , उसके मन में कई विचार जनम ले रहे थे , लेकिन वोह खामोश थी , उसे बस नज़र रखनी थी ,

"हाँ इतनी जल्दी , मुझे घर जाना है..." काट गुस्से में अपना हाथ छुड़वाते हुए बोली ,

"ेहडेर ा मोती..." रवि ने काट का हाथ वापिस पकड़ उसे खींचते हुए बोलै , इस बार काट सीधा रवि के गॉड में गिर गई , रवि ने मौका देख उसके पेट को अपनी बहु में कास लिया , और उसकी गर्दन को चूमने लगा , काट उसकी बहु में कसमसाने लगी ,

"अह्ह्ह्ह छोड़ू , कहा फास गई में , बेबी , बचाओ..." काट ने आँखें बंद कर जोर से चीखते हुए बोली , उसकी चीख सुन रवि ने उसे इक डैम से छोड़ दिया ,

काट कड़ी होकर , रवि की तरफ देख हसने लगी ,

"मेले बाबू , घर चले क्या..." काट अपने लम्बे मुलाम बालो को हाथो में सहलाते हुए बोली ,

"हाँ , मेरी माँ चलो..." रवि अपना माथा पीट उठते हुए बोलै ,

फिर दोनों घर की तरफ चल पढ़े , जब वोह घर की तरफ बढ़ रहे थे , तभी काट की नज़र इक बड़े से पेड़ के पीछे पढ़ी , यहाँ किसी की तंग नज़र ा रही थी ,

काट ने रवि को बता दिया , रवि थोड़ा घबरा गया , क्यों की काट उसके साथ थी , अभ वोह इक इंसान था , लेकिन वोह कुछ नै कर सकता था ,

काट उस पेड़ के पास पहुंची , और वह देख हरिजन रह गई , उसने रवि की तरफ देखा , और मुस्कराने लगी , रवि भी काट के पास पहुँच गया , वह देख उसने अपना माथा पीट लिया ,

क्यों की पेड़ से पीठ लगाए , ख़ुशी चैन की नंद सो रही थी ,

"रवि , यह ख़ुशी यहाँ क्या कर रही है..." काट सवाल भरी नज़रिओं से रवि की तरफ देख बोली ,

"mm...muze कुछ नै पता..." रवि अपने दोनों हाथ उठा कर बोलै ,

"ख़ुशी , ख़ुशी , उठू , उफ्फ्फ ओह्ह्ह , कैसे सोती है..." काट जोर जोर से छीलते हुए बोली ,

"आँखें बंद करके..." रवि बेहद धीमी आवाज़ में बोलै ,

"तुमसे पूछा ..." काट गुस्से से रवि की तरफ देख बोली ,

"छोड़ू काट , चलो घर चले , यह ा जाएगी..."

"ष्ठीय , कैसे मर्द हो , इक मासूम अबला नारी को , इस सुनसान जंगल में अकेला छोड़ कर जाना चाहते हो..." काट , ख़ुशी के मासूम चेहरे को देखते हुए बोली ,

"काट , मेरी बात सुनो , यह मासूम अबला नारी , इक तूफान है , और तूफान को छेड़ते नै , उससे भागते हैं , चलो..." रवि , काट का हाथ पकड़ते हुए बोलै ,

"चुप , इक शब्द नै , में ख़ुशी को साथ लेकर जोगी..." काट ने ख़ुशी को कण्डु से पकड़ जीजोड़ते हुए बोलै , ख़ुशी ने धीरे से आँखें खोली ,

" आआआआससष्ठ (लम्बी अंगड़ाई लेते हुए) , ओह्ह हो , लैला मजनू , कितनी बकबक करते हो , मुझे नंद ा गई , तुम दोनों की बकवास बतिअन सुन कर , ष्ठी , मेरा नशा उतर दिया..." ख़ुशी पेड़ का सहारा लेकर उठते हुए बोली ,

"तुम , तुम , कब से यहाँ हो..." काट , रवि की तरफ देख बोली ,

"वोह सब छोड़ू , हाय कितनी खूबसूरत हो , उफ़ तुम्हारा यह हसन बदन , तुम्हारे गुलाबी होंठ , अगर इस बेवकूफ से प्यार कर लिया है , तोह मेरे साथ भी करो न , उम्म्म , तुम्हारा हुसैन का रास मुझे भी पीना है , इस से जायदा मज़ा दूंगी , और काट , में तुम घोड़ी भी नै बनाउंगी..." ख़ुशी अग्गे बढ़ काट की गर्दन को सूंघते मुस्कराते हुए बोली ,

"तुम , तुम , पागल हो गई हो , रवि , कुछ बोलू..." काट , थोड़ा घबरा कर रवि से चिपकते हुए बोली ,

"में क्या करू , तुम , तुम बोलै था , ख़ुशी को सोने दो , नै , मासूम अबला नारी है , जंगल में अकेली , अभ भुगतो , में चला..." रवि , काट का हाथ जातक घर की तरफ जाते बोलै ,

"काट , जाने दो उसे , तुम पता है , में भुकी हु , मेरी भूक शांत करो , ायो उन जड्यों के पीछे चले..." ख़ुशी , काट की गर्दन को चूमते हुए बोली ,

"नईईई , रविइइइ..." काट आँखें बंद कर जोर से चखी , जब उसने आँखें खोली , रवि अकेला उसके सामने खड़ा था , ख़ुशी वह नै थी ,

"चले घर..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"वोह भुकी कहा गई..." काट दर से कंपते as-pas देखते हुए बोली ,

"वोह गई यार , लेकिन वापिस भी ा सकती है , तोह.."

"चलो घर ..." काट , रवि का हाथ पकड़ तेज़ी से घर की तरफ जाते हुए बोली ,

दूसरी तरफ

लारा अपने रूम में बैठी हुई थी , वोह खुद को अकेला महसूस कर रही थी , उसके पास अभ परिवार था , लेकिन वोह अभ भी खुद को अकेला महसूस कर रही थी ,

इसका इक विशेष कारन था , यह कारन था , उसकी दोस्त एलिज़ा ,

लारा चाहे कितनी भी बुरी क्यों न हो , लेकिन उसकी मनहूस जिंदगी में , अगर कोई अपना था , तोह वोह एलिज़ा थी , जिंदगी भर दोनों ने बुरे काम किये थे , लेकिन हर बुरे काम को , दोनों ने इक साथ अंजाम दिया था , इक लगाव सा हो गया था दोनों को ,

लारा उदास थी , तड़फ रही थी , उसका दिल दर्द सा कर रहा था , वोह एलिज़ा से मिलना चाहती थी , कहते हैं , किसी की कदर तब होती है , जब वोह हमसे दूर हो , उन पलु को महसूस करना , बेहद मुश्किल होता है , वोह दर्द , अह्ह्ह , उस दर्द को शबदो में बयान नै किया जा सकता ,

लारा उदास बैठी हुई थी , तभी उसके रूम में कोई आया , यह सीमा थी , सीमा ने जब लारा को उदास देखा , वोह खुद उदास हो गई , अजीब सी लड़की थी सीमा , अजीब सा दिल था उसका , उसका दिल बेहद बड़ा था ,

"लारा..." सीमा ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"देदी अप्प , आइए बेठयिए न.." लारा अपनी उदासी को छुपा मुस्कराते हुए बोली ,

सीमा , लारा के साथ बेथ गई ,

"तुम उदास हो , पर क्यों , किसी ने कुछ कहा , या तुम हमें अपना नै समज़ती..." सीमा ने नाम आँखों से बोलै ,

"अरे नै देदी , अप्प सब बेहद अचे हो , बहुत प्यारे हो , आपका परिवार इस दुनिआ में सबसे खूबसूरत परिवार है , और मुझे बेपनाह ख़ुशी है , के आपके परिवार का हिस्सा हु , पर..." लारा इतना बोलते हुए रोने लगी ,

"अरे क्या हुआ , ेहडेर ायो मेरी बहु में , शठ , शांत हो जाओ , और बोलो क्या हुआ है ..." सीमा ने लारा को अपनी बहु में भर उसे शांत करते हुए बोलै ,

"देदी (रट हुए) , देदी मुझे एलिज़ा की यद् ा रही है , मुझे एलिज़ा से मिलना है , मुझे उसके पास जाना है..." लारा बेहद रट हुए बोली ,

"ओह्ह्ह , तुम शांत हो जाओ , में एलिज़ा को तुम्हारे पास लयुगी..." सीमा ने नाम आँखों से बोलै ,

"क्या , सच में , देदी प्लस , एलिज़ा को ले ायो , में उसके बिना नै रह सकती..."

"में रवि से बात करुँगी , इक दो दिन में एलिज़ा यहाँ होगी , वादा रहा , ाचा , अभ मुस्कराओ , हाँ , यह हुई न बात , अभ निचे चलो , सबके साथ बतिअन करो .." सीमा , लारा के मुस्कराते hi खुश होते हुए बोली ,

"देदी अप्प चलो , में अति हु.." लारा मुस्करा कर बोली ,

"ठीक है..." सीमा इतना बोल उठ कर जाने लगी , अभी वोह दरवाजे के पास hi गई थी , के उसे चाकर ऐनी लगे , वोह गिरने hi वाली थी के लारा ने उसे बहु में थम लिया ,

"देदी , देदी , क्या हुआ.." लारा बेहद घबराते हुए सीमा को सहारा देते हुए बोली , सीमा कुछ hi पलु में नार्मल हो गई ,

"अह्ह्ह में ठीक हु , बस चाकर सा ा गया , उफ्फ्फ मेरा सार , उफ्फ्फ इतना दर्द , लारा में जाती हु..." सीमा अपना सार हाथो में पकड़े रूम से बहार चली गई ,

"(मन में ) एलिज़ा अभ कुछ पलु की दूरी है , फिर हम इक हो जाएगी , में तुमसे बहुत बतिअन करुँगी , एलिज़ा..." लारा बेहद ख़ुशी में मन hi मन मुस्कराते हुए बोली....

लेकिन कोई था , जो लारा और एलिज़ाबेथ के बेच , इक अनहोनी बनकर ा रहा था , शयद लारा की जिंदगी , अभ उसके बुरे कर्मो के कारन , खतरे में पढ़ चुकी थी , क्यों की मार्को अभ कबीले में पहुँच चूका था....

तो बे कुनिटेड... [NOTE-: friends writing skill check kar reha tha , kal se update bada aya karega , shukriya...]

 


अपडेट-75

अभ अग्गे...

रवि और काट घर पहुँच चुके थे , काट अज्ज बेहद खुश थी , उसका दिल ख़ुशी से भर चूका था , वोह ख़ुशी जो उसे कभी नै मिली थी ,

काट ने बचपन से अपनी नादाँ जिंदगी में , हज़ारो दुःख दर्द महसूस किये थे , जिस उम्र में लड़कियाँ अपने माँ बाप से , जिद्द करती हैं , अपनी हर दिली ीचा मनवाने के लिए , उस उम्र में काट खून के असनु रोटी रही ,

यह दुनिआ फ्री में कुछ नै देती , यहाँ हसने के पैसे लगते हैं , और कोई हमें हसता है , उसे भी कुछ न कुछ देना पढता है ,

हर इंसान दुखु में डूबा होता है , इस दुनिआ में कोई खुश नै , और न कोई किसी को खुश कर सकता है ,

इंसानी मन जिसकी इक ीचा ख़तम होती है , तोह पल भर में दूसरी ीचा जनम ले लेती है , पर काट , उसकी बचपन में हर ीचा मर गई , वोह भूल गई , के वोह इक आम सी इक लड़की है ,

उसे भी प्यार करना है , उसे भी किसी से रूठना है , उसे भी हुक है , के वोह जब रूत जाये , तोह उसे कोई मनाये , जब वोह उदास हो , तब उसे कोई हसए , लेकिन काट जिंदगी के दुखु में , सब भूल गई ,

वोह लोग को मरती गई , उसे हर मर्द में , इक हेवियन नज़र अत , वही हवाएं , जो उसकी माँ की इज्जत हर रोज़ लुटता था , मर्दु के परती उसकी नफरत , बेहद बढ़ गई ,

लेकिन इसका अंत हुआ , जब उसे प्यार हुआ , कहते हैं , प्यार होने के लिए , दिन , हफ्ते या साल नै लगते , प्यार होने के लिए इक पल का वक्त लगता है ,

रवि ने काट का दिल जीत लिया , लेकिन यह इक कहानी नै लगती , काट के जिंदगी में वोह सब होना , उसका मर्दु से नफरत करना , और इस दुनिआ में बस रवि से प्यार करना , यह सब इक प्लान का हिस्सा था , लेकिन यह सब कोण कर रहा था , खैर यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात है ,

काट घर में एते hi , अपने रूम में चली गई , वोह बेहद खुश थी , और यह ख़ुशी वोह बेबी के साथ बाँटना चाहती थी , उसका मासूम चेहरा अज्ज खिला खिला सा लग रहा था ,

रवि अभी रूम की तरफ जा hi रहा था , के उसे लारा दिखाई दी , जो थोड़ी उदास थी , वोह शयद घर के बहार जा रही थी ,

"हे लारा , कहा जा रही हो , और इतनी उदास क्यों हो..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"वोह , वोह , रवि में , ाचा यह सब छोड़ू , सीमा देदी की तबीयत ख़राब है , अप्प उनसे मिल लो , जाओ जल्दी..." लारा ने अपनी बात इक डैम से पलटते हुए बोलै ,

"ओह्ह no , ाचा में मिलता हु तुमसे..." रवि इतना बोल तेज़ी से सीमा के पास चला गया ,

लारा ने इक लम्बी साँस ली , और घर के बहार जंगल की तरफ निकल गई , अभी शाम होने को थी , वोह उदास थी , और कुछ देर अकेले रहना चाहती थी ,

रवि , लारा की बात सुन , जल्दी जल्दी सीमा के पास चला गया , रवि ने रूम के अंदर घुस देखा , सीमा बीएड पर लेती हुई थी , उसका सार रमा की इक जंग पर था , और रमा उसका सार धीरे धीरे दबा रही थी ,

सीमा की आँखें बंद थी , और रमा के लाल जीवट बाल भी , सीमा का माथा सेहला रहे थे , रवि यह देख बेहद खुश हो गया ,

"रमा वोह..." रवि अभी इतना बोलै hi था के रमा ने उसे रोक दिया ,

"शह्ह्ह्ह..." रमा ने अपना होंठो पर ऊँगली रख बोलै ,

रवि समाज गया के सीमा अभी सो रही है , और रमा नै चाहती , के कोई उसकी माँ को उठाये ,

रवि रूम से बहार ा गया , और ऊपर की तरफ जाने hi लगा था , के उसने सोचा , पहले रिमी और शूरति को मिल ले , रवि सीधा उनके रूम के पास पहुँच गया ,

रवि ने रूम के अंदर जक कर देखा , रिमी और शूरति इक दूसरे से लिपट कर बतिअन कर रही थी , रवि ने उनको डिस्टर्ब न करने का सोचा , और ऊपर अपनी कोमल के पास पहुँच गया ,

दूसरी तरफ...

"अह्ह्ह्ह मेरी गर्दन अह्ह्ह शठ..." इक औरत अँधेरी गुफा में अपनी गर्दन पकड़े हाफ रही थी ,

"अप्प ठीक तोह हो..." रेखा उस अँधेरे में बेहद वहशी आवाज़ में बोली , उस अँधेरी गुफा में हलकी हलकी रौशनी थी , क्यों की इक छोटी सी अग्ग की मशाल वह जल रही थी ,

"ठीक हु , अह्ह्ह लेकिन रवि में इतनी ताकत कहा से ा गई , मेरी गर्दन का मास्स जला दिया , नै छोडूगी उसे..." वोह औरत गुस्से में चीखते हुए बोली ,

"मेरा भाई , बेहद ताकतवर , उससे लड़ना आसान नै , उसकी कमज़ोरी कोमल , दूसरी कमज़ोरी कोई नै..." रेखा बेहद गुस्से में बोली ,

"अह्ह्ह्ह यह निशान कैसे जायेगे , अगर काल ने यह निशान देख लिया , तोह मुसीबत हो जाएगी..." वोह औरत अपने जले हुए गले पर हाथ फिरा बोली ,

"काल कोई शक न होगा , गले पर कपडा दाल लो , रवि को में देख लुंगी , उससे मुझे लेना है बदला , मेरी इस हालत का , वोह है जिम्मेदार , उसे मरकर , बना दूंगी , अपने जैसा , तब बदला होगा पूरा मेरा..." रेखा अपनी वहशी आवाज़ में हस्ते हुए बोली ,

"हम्म , लेकिन तुम उसे पर अभी हमला मत करना , अह्ह्ह बस नज़र राखु उस पर , तब तक , में कोई रास्ता सोच लुंगी..."

"नज़र रखूगी में , अपने भाई पर , पता करुँगी , उसकी ताकत का राज़ , करुँगी पता , उसकी कमज़ोरी का , फिर मर दूंगी उसे , तब पूरा होगा मेरा बदला , जिसके लिए बातक रही हु में ..." रेखा इतना बोल वह से गयाब हो गई ,

वोह औरत अपने गले पर इक ब्लैक कपडा बंद , हवेली चली गई , यहाँ काल उसका इंतज़ार कर रहा था ,

दूसरी तरफ...

लारा जंगल में कबीले से दूर इक छोटी सी पहाड़ी पर बैठी , आसमान की तरफ देख रही थी , उसका मन उदास था ,

"भगवन इक बार एलिज़ा से मिलवा दो , में जानती हु , मने कई पाप किये हैं , लोग को मारा है , उनको दर्द दिया है , हज़ारो घर तबाह किये हैं , तुम सजा दो , पर प्लस , इक बार एलिज़ा से मिलवा दो..." लारा आँखों में असनु लिए मन hi मन भगवन से दुआ मांग रही थी ,

कहते हैं , ाचा इंसान भी भगवन से कुछ न कुछ मांगता है , और बुरा इंसान भी , जब सब दरवाजे बंद हो जाये , तब हमारे होंठो पर भगवन का नाम निकलता है ,

भगवन जिसे हम शयद , अपनी पूरी जिंदगी न देख पाए , वोह कोण है , कहा है , कैसा है , हमें कुछ पता नै , हमने कभी नै सोचा , के हमें भगवन से मिलना चाहये , हमारा इक hi मकसद हो , किसी न किसी तरह , उस अदृश्य ताकत से मिलना है ,

"लारा..."

लारा आँखें बंद कर रो रही थी , तभी उसे किसी लड़की की आवाज़ सुनाई दी , लारा ने आँखें खोल पीछे पलट देखा , वोह पत्थर सा हो गई , उसकी आँखें सामने खड़े इंसान पर जैम सा गई ,

"लारा मेरी जान ..." इक बार फिर वोह लड़की प्यार से बोली ,

"एलिज़ा..." लारा चीखते हुए उठी , और भाग कर एलिज़ा के गले लग गई ,

"एलिज़ा , तुम , तुम , यहाँ , ओह्ह , में , में , एलिज़ा , कहा थी तुम , में , में , तुम्हारे बिना नै रह सकती..." लारा ने एलिज़ा के गले लग रट सिसकते हुए बोलै ,

"लारा , तुम मरना है..." एलिज़ा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"क्या , अह्हह्ह्ह्ह शठ..." लारा थोड़ी हरिजन होते हुए बोली , तभी उसकी चीख निकल गई ,

क्यों की एलिज़ा ने इक जादुई खंजर लारा के पेट में घुसा दिया था , लारा थोड़ा पीछे हुई , तोह एलिज़ा ने वोह खंजर खींच कर निकल लिया ,

"अअअअअअअ माआ..." लारा दर्द से चीखते हुए बोली ,

तभी एलिज़ा का रूप बदल गया , वोह मार्को था , जो एलिज़ा का रूप धारण कर आया था ,

"अह्ह्ह्ह तुम , हम्म शठ तुम k..kon हो..." लारा ने अपने पेट पर हाथ रखते हुए बोलै , क्यों की वह बेहद खून बह रहा था ,

"ः , में हु मार्को , इस दुनिआ का सबसे बड़ा योद्धा , और मुझे तुम मरना है..." मार्को ने बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह k..kk..kisne बेह्जा.. tt..tume..." लारा दर्द सेहन न कर पते हुए जमीन पर घुटनो के बल बेथ गई ,

"मुझे , मुझे , तुम्हारी दोस्त एलिज़ा ने बेह्जा है , क्यों की तुमने उसका साथ छोड़ दिया..."

"nn...naiii...yy..yeh...zz...zuth है..." लारा बेहद गुस्से में चीखते हुए बोली ,

"तुम मनो या न मनो , वैसे भी तुम मर कर , मुझे कुछ हासिल नै होने वाला , एलिज़ा ने मुझे जिन्दा किया , तेन की तुम मर सकू , वैसे भी उसने hi बोलै था , के तुम मरने के लिए , में उसका रूप धारण करू..." मार्को ने लारा के मन में इक जहर सा घोलते हुए बोलै ,

"क्यों , आखिर क्यों , एलिज़ा क्यों किया तुमने..." लारा मन hi मन रट हुए बोली , बरसो की दोस्ती अज्ज डैम तोड़ रही थी ,

लारा दर्द सेहती हुई कड़ी हो गई , उसने गुस्से में मार्को की तरफ देखा ,

"अह्ह्ह लाडू मुज़से ..." लारा ने अपनी अध् खुली आँखों से दर्द में कहरहते हुए बोलै ,

"ः , अभ भी लड़ना है , तोह ा जाओ..." मार्को ने खंजर पर लगे खून को जीभ से छत्ते हुए बोलै ,

लारा ने अपनी टीशर्ट उतर अपने पेट पर कास कर बंद ली , तेन की उसका बेहटा खून काम हो जाये , पर तब तक खून बेहद बह चूका था ,

"ा जा कुत्ते..." लारा ने अपने दोनों हाथो की मुठियाँ कस्ते हुए बोलै ,

मार्को बेहद गुस्से में लारा की तरफ भगा , मार्को ने लारा के करीब जाते hi , उसपर खंजर कर जोरदार वॉर किया , पर लारा निचे झुक गई ,

निचे झुकते hi लारा के पेट में इक दर्द की लहर दौड गई , उसकी आँखों से असनु बह निकले , मार्को ने लारा के चेहरे पर अपना घुटना जड़ दिया ,

लारा पीछे जमीन पर गिर गई , मार्को ने निचे गिरी लारा के जख्मी पेट पर अपने पैरो से मरना सुरु कर दिया ,

ताज़ा जखम पर मार्को के पत्थर जैसे जूतों ने लारा की हालत भिगाड दी , उसकी आँखें बंद होने लगी ,

तभी मार्को ने लारा को बालो से पकड़ खड़ा किया , उसने अपना खंजर इक बार और लारा के पेट में घुसा दिया , लारा के होंठो से इक चीख निकली , और फिर उसकी आँखें बंद हो गई ,

मार्को ने लारा के बेजान जिस्म को वही छोड़ दिया , और खुद वह से गयाब हो गया ,

जोकर का इक प्लान सफल हो गया था , अभ दूसरा प्लान था , एलिज़ा के मन में जहर घोलने का , अभ जोकर को एलिज़ा को यह एहसास दिलाना था , के लारा की मौत रवि के कारन हुई है ,

दूसरी तरफ...

रवि अपने रूम में जाकर बीएड पर बेथ गया , क्यों की कोमल वह नै थी , रवि अज्ज पूरा दिन हुई , घटनायिओं के बारे में सोच रहा था ,

रवि अभी अपनी बहिन रेखा के बारे में सोच रहा था , धीरे धीरे कई बतिअन उसके जेहन में जिन्दा हो रही थी ,

जब रमा ठीक नै थी , तब सीमा कई बार बोलती थी , के उसकी माँ , रेखा से मिलने गई है , पर अभ उसकी माँ कहा है , वोह अपनी माँ से कैसे मिले , वोह कहा है ,

रवि कभी अपनी माँ को समाज नै पाया था , उसकी माँ अजीब थी , लेकिन वोह अभ कहा थी , रवि का दिल तड़फ सा उठा , अपनी माँ के बारे में सोच कर , आँखों से असनु बह निकले ,

अभी रवि अपनी माँ के बारे में सोच hi रहा था , के ख़ुशी उसके सामने ा गई , वोह बेहद चिंता में थी ,

"ख़ुशी क्या हुआ..." रवि इक डैम से खड़ा होता हुआ बोलै ,

"वोह , वोह , लारा को किसी ने मर दिया..." ख़ुशी इतना बोल रोने लगी , और रवि गुस्से में जल उठा , उसका गुस्सा अंतिम सीमा को पर कर गया , पूरा बदन लाल होकर जलने लगा , वोह चीख उठा , उसकी चीख इतनी ब्यांक थी , के पूरा कबीला कम्प सा गया , पूरा जंगल सेहम सा गया.....

"रवि संभालो खुद को..." ख़ुशी थोड़ा डरते हुए पीछे हैट गई , क्यों की रवि का जिस्म बेहद खौफनाक थी ,

"नआईई , हूणंमम , लार्राआ ककू ककीस्स्न्नीयी मारआए..." रवि बेहद भरी आवाज़ में गरजते हुए बोली , (इसमें अप्प लूसिफ़ेर के डेविल की आवाज़ की कल्पना कर सकते हो...)

"mm...maaarkoo ...n..ne...." ख़ुशी अपने सूखे गले से बेहद हकला कर बोली ,

"हहूँनंम , मार्को..." रवि इतना बोल चीख उठा , और फिर तेज़ी से ऊपर को उड़ा , कमरे की छत्त जो लकडियों की बानी हुई थी , वोह टूट कर चकना चुर्र हो गई , रवि बेहद गुस्से में शहर की तरफ बढ़ने लगा , तभी उसके सामने वोह ा गई... यह कोमल थी ,

तो बे कुनिटेड... ( नेक्स्ट 2 उपदटेस में रवि और उसकी फॅमिली में फाइट होगी , क्यों की सब रवि को रोकने की कोससिह करेंगे , तेन की रवि शहर न जा पाए...)

 
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