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अभ अग्गे...
रवि अज्ज दिल से उदास था , दिल में दर्द था , आँखें नाम थी , उसकी बहिन , उसके जिस्म का आधा हिस्सा , अपना सब कुछ भूल कर , इक बची बन गई थी , जिसे प्यार का , जिस्मानी भूक का , कोई मतलब नै पता था ,
रवि डेविल बनकर किसी को मरना नै चाहता था , पर उसके दिल में इक आग सी लगी थी , वोह अपने पिता को दर्द देना चाहता था ,
रेहमान उल्ला का मास्स खा कर , रवि ने अपने पिता को चेतावनी दी थी , के अगर उसकी कोमल पहले जैसी न हुई , तोह वोह अग्गे और भी दरिंदगी से लोग की जान लेगा , उनको नोच नोच कर खायेगा ,
रवि के लिए उसकी बहिन कोमल , उसका सब कुछ थी , उसकी यह हालत , रवि को दर्द दे रही थी , उसका गुस्सा हर पल बढ़ता जा रहा था , उसे अपने पिता की बनाई इस दुनिआ को दर्द देना था ,
लेकिन रवि अचे लोग के साथ था , क्यों की अगर कोमल ठीक हो जाती , और उसे यह पता चलता , के उसके भाई ने बेगुनाह लोग की जान ली , तब कोमल उसे कभी माफ़ न करती ,
"पापा , हमें तोह सोना का घर पता hi नै , हम कैसे जायेगे..." फर्जी अपना माथा पीट कर बोली ,
"अले हाँ , ढय्या फली ताहि ठोल लहि , हमतो ढल तो टाटा नै..." कोमल भी उदास होकर तुतला कर बोली ,
"मेरी जान , मुझे पता है , कुछ देर में हम पहुँच जायेगे..." रवि मुस्करा कर कोमल के चेहरे को देखता हुआ होला ,
"ेहः फली , तें (में) ढय्या टी दान हु.." कोमल बेहद हस्ते हुए बोली ,
"हाँ मुम्मा , अप्प मेरी भी जान हो.." फर्जी कोमल का हाथ चुम कर बोली ,
फिर तीनो ऐसे hi मस्ती भरी बतिअन करते शहर पहुँच गए , पर शहर के अंदर जाते वख्त वह पुलिस नका था , वोह हर ऐनी जाने वाली गाड़ी रोक रहे थे , पूछताछ कर रहे थे , मतलब रेहमान उल्ला की मौत , अभ शहर में नंबर 1 पर ट्रेंडिंग कर रही थी ,
रवि ने अपने चेहरे पर हाथ रखा , तोह उसका चेहरा बदल गया , यह उसका जादू था , फर्जी के लिए उसका चेहरा पहले जैसा था , पर कोमल पर उसके जादू का असर नै हुआ , पर कोमल की उसे चिंता नै थी ,
"ेहः मिस्टर कहा जा रहे हो.." इक पुलिस वाला गाड़ी के मिरर में चेहरा घुसा , सबको अछि तरह देखता हुआ बोलै ,
"सर , मेरा नाम अनिल है , यह मेरी वाइफ कोमल , और यह मेरी बेटी फर्जी , हम अपने मां जी के घर जा रहे , क्या हुआ , इतनी सख्ती क्यों..." रवि ने साफ झूठ बोलते हुए बोलै , फर्जी अपने पापा के मोह से झूठ सुन , अपने चेहरे पर हाथ रख हसने लगी ,
"अरे कुछ नै भाई , कल रत इक रहस्य आदमी को किसी ने बम्ब ब्लास्ट में उड़ा दिया , उसी की इन्क्वायरी कर रहे बस..." वोह पुलिस वाला अपने माथे पर हाथ मरता हुआ बोलै ,
"ओह्ह , हम जाये सर , हमें वापिस भी मुड़ना है..."
"ओह्ह हाँ जाओ , लेकिन दयँ से..." वोह पुलिस वाला मुस्कराते हुए बोलै ,
"ेहः पोलित टेल ढय्या , मुड़े ाप्त टिटल (पिस्तौल) देथना..." कोमल मुस्करा कर बोली ,
"ः , क्या देखना..." पुलिस वाला हस्ता हुआ कुछ न समज़ते हुए बोलै ,
"टिटल , टिटल , तीचु तीचु , टिटल..." कोमल , अपने हाथ को गन की तरह बनाते हुए बोली ,
"अंकल , मुम्मा , गन वाले पिस्तौल की बात कर रही..." फर्जी अपना माथा पीट कर बोली ,
"मम , गन नै दे सकते हम ड्यूटी पर..." वोह पुलिस वाला मुस्करा कर बोलै ,
"आते थल , डाई डाई..." रवि ने गाड़ी अग्गे तोर ली , तब कोमल हाथ हिलाते हुए , सबको bye bye करने लगी ,
कोई आधे घंटे बाद , सब सोना के घर पहुँच गए , सोना के पापा इक गोवत अफसर थे , और उसकी माँ इक हाउसवाइफ थी , सोना की आगे फर्जी जितनी थी , इक hi स्कूल में पढ़ती थी ,
रवि , कोमल और फर्जी गाड़ी से उतर , घर के अंदर ा गए , वॉचमन से रवि ने बात कर ली थी , वोह सोना के मम्मी पापा को बुलाने चला गया ,
कुछ देर बाद सोना अपनी माँ के साथ बहार आयी , और वोह भाग कर फर्जी से मिलने लगी , दोनों घर के गार्डन में इक जुले पर बेथ बतिअन करनी लगी , रवि और कोमल घर के अंदर चले गए ,
"फर्जी तुम स्कूल क्यों नै अति..." सोना मुस्करा कर बोली ,
"यार में पापा और मुम्मा लोग के साथ रहती हु , अभी 4 दिन और नै ायुगी .." फर्जी थोड़ा मुस्करा कर बोली ,
"मुम्मा लोग , कितनी मुम्मा है तुम्हारी..." सोना थोड़ा फर्जी को छेड़ते हुए बोली ,
"मेरी 9 मुम्मा है , उफ़ सोना सब इक से बढ़कर इक , मस्त आइटम , तुम्हारी कितनी है..." फर्जी मुस्करा कर बोली ,
"अहह मेरी तोह इक है भाई , तुम्हारे तोह मज़े हैं..." सोना पहले उदास होकर फिर मुस्करा कर बोली ,
"हाँ , ाचा मेरी इक प्रॉब्लम है , कण कर में बताते हु..." फिर फर्जी ने सोना के कण में अपनी प्रॉब्लम बता दी ,
"हे माँ माता जी , यह क्या बोल रही हो तुम , ेहडेर कण करू..." फिर सोना भी चौंकते हुए फर्जी के कण में कुछ बोलने लगी ,
दोनों इक दूसरे के कनु में कुछ न कुछ बोल रही थी , तभी कोमल भी ा गई उनके पास , उसके हाथ में ट्रे थी , जिसमे तीन कप छाए , और खाने का सामान था ,
उसने गार्डन में रखे इक टेबल पर वोह सामान रख दिया , और वही पढ़ी चेयर पर बेथ दोनों को आवाज़ दी ,
"ेहः फली , थोङा , ा दो , तये तेलों , गलम गलम..." कोमल की आवाज़ सुन वोह दोनों भी उसके पास ा गई ,
"सोना यह सीक्रेट रहेगा हमरे बेच , हमेशा..." फर्जी ने सोना का हाथ पकड़ते हुए बोलै ,
"वादा रहा..." सोना भी मुस्कराते हुए बोली ,
"वाओ , कोमल मुम्मा , समोसे भी हैं..." फर्जी और सोना समोसे देख लार टपकती बोली ,
"हाँ , थमते बी ऐन ऑल तये बी गलम गलम , टालो तहो थमते..." कोमल उनको प्लेट में समोसे दाल कर देते हुए बोली ,
सोना कोमल की आवाज़ सुन बहुत हरिजन हुई , पर फर्जी ने उसके कण में सब बता दिया , फिर तीनो ने मिलकर सब साफ कर दिया , 8 समोसे , थे , अभ खली प्लेट चमक रही थी ,
"उम् थोङा थमते बाउट थे , मादा ा दया याल , में फील ायुडी ..." कोमल उठ कर सोना को बहु में भर , उसका चेहरा चूमते हुए बोली ,
"हाँ कोमल मुम्मा अप्प जरूर एना..." सोना भी कोमल को प्यार से गले लगा कर बोली ,
फिर रवि और सोना के पापा भी बहार ा गए , कोई इक घंटा सबने मस्ती की , और फिर रवि ने सोना को इक ाचा सा डॉल गिफ्ट में दिया , और फिर सबसे विदा लेकर , तीनो चाचा जी के घर निकल गए ,
फर्जी ने अपनी प्रॉब्लम सोना को बताई मगर उसके कण में , यह प्रॉब्लम अग्गे जाकर इस कहानी की दिशा बदलने वाली थी , और सोना का करैक्टर 6 part में फर्जी के साथ खुल कर सामने एना वाला था , ऐसी लिए सोना को कहानी में दाल दिया , क्यों की फर्जी को इक दोस्त चाहये , जो उसके दिल की बतिअन राज़ रख सके ,
करीब 2 घंटे के लम्बे सफर के बाद तीनो चाचा जी के गाओं पहुँच गए , रवि पहले यहाँ कई बार ा चूका था , पर उसकी बेटी फर्जी , पहली बार आयी थी , वोह बेहद खुश थी ,
फिर तीनो हवेली के पास पहुँच गए , तब फर्जी बेहद खुश होते हुए बोली ,
"वाओ , पापा कितना बड़ा घर है , में बहुत खुश हु..." फर्जी ख़ुशी में उछलते हुए बोली ,
"हाँ फली , तेह टाटा दी की तेली (हवेली) है , टाऊट (बहुत) बलि ..." कोमल , फर्जी के गालो को चुम कर बोली ,
रवि दोनों की बात सुन बस मुस्करा दिया , फिर वोह चाचा जी के घर के अंदर घुस गए , गाड़ी की आवाज़ सुन बड़ी चची (रुक्मणि) बहार आयी ,
जब रवि , कोमल और फर्जी तीनो गाड़ी से बहार निकले , तब बड़ी चची बहुत खुश हुई , ख़ुशी में उनकी आँखों से असनु बहने लगे , वोह तेज़ी से अग्गे बाद रवि के गले लग गई , और रोने लगी ,
"चची शांत हो जाओ प्लस..." रवि भी बेहद नाम आँखों से बोलै , कोमल और फर्जी भी रोने लगी ,
"कैसे शांत हो जाऊ (रट हुए) , मेरा बचा आया है , कितने सालो बाद , कहा था तू , हम दर गए थे , और तू कितनी बुरी हालत में गया था , मेरा बचा , उम्मा , अरे मेरी बेटी कोमल भी आयी है , रवि यह छोटी सी पारी कोण है .." रुक्मणि चची बेहद रट हुए दर्द भरे शबदो में बोली , और फिर कोमल और फर्जी को देख उनका पूछना लगी ,
"यह मेरी बेटी है फर्जी..." रवि अपने असनु साफ करता हुआ बोलै ,
"बलि ठाठी (चची) , तें टॉमल..." कोमल , फर्जी को गॉड से निचे उतर , रुक्मणि चची के गले लग बेइंतहा रट हुए बोली ,
"शठ मेरी बची , मेरी गुडिअ , कितनी बड़ी हो गई तू , *** साल पहले देखा था , शठ मेरी बेटी..." रुक्मणि चची खुद भी रट हुए कोमल का चेहरा चूमते हुए बोली , पर वोह थोड़ी हरिजन थी , कोमल के तुतला कर बोलने से ,
फिर रवि ने अग्गे बाद कोमल को अपनी बहु में भर लिया , और उसे शांत करने लगा , दूसरी तरफ रुक्मणि चची , फरिहा को गॉड में उठा , उसका चेहरा चुम रही थी , उनको फर्जी पर बहुत प्यार ा रहा था ,
"चलो घर के अंदर..." रुक्मणि चची तीनो को अपने साथ घर के अंदर ले आयी ,
अंदर एते hi सबने देखा , सूरज चाचू और छोटी चची (सुमन) दोनों घर के हॉल में बैठे हुए थे , रवि को देख सुमन चची वही बैठी बैठी रोने लगी , और फिर भागते हुए उसके गले लग गई ,
"मेरा बचा , मेरा बीटा , कहा था तू , मेरा बचा..." सुमन चची पगलू की तरह रट हुए , रवि के चेहरे को चूमती जा रही थी , रवि से कुछ नै बोलै जा रहा था , वोह बस रो रहा था ,
फिर कुछ वख्त बाद , दोनों अलग हुए , फिर सुमन चची कोमल को बहु में भरे उसे भी प्यार करने लगी , और आखिर में फर्जी का जानकर , वोह बेहद ख़ुशी से रोने लगी ,
फिर सब अपने चाचू से मिले , अज्ज पहली बार रवि ने देखा , उसके चाचू उसे गले लगा , बच्चू की तरह रो रहे थे , उफ़ परिवार आखिर परिवार hi होता है ,
कुछ वख्त और बीता , फिर सब घर के हॉल में सोफे पर बैठे बतिअन कर रहे थे , छोटी चची सुमन की गॉड में फर्जी बैठी थी , वोह फर्जी को इक पल के लिए भी , अपने से दूर नै कर रही थी , और कोमल को बड़ी चची ने अपने साथ बैठा रखा था , उनको कोमल पर बेइंतहा प्यार ा रहा था ,
कोमल के तुतला कर बोलने को वोह सब इक हादसा समाज रहे थे , क्यों की पिछली बार , रवि पगलू जैसी बतिअन कर रहा था , वोह बार बार बोल रहा था , कोमल मर गई , उसे छोड़ कर चली गई , लेकिन इस बात का जीकर किसी ने भी न किया ,
"ल्यो छाए ा गई और गरम गरम पकोड़े भी..." रुक्मणि चची मुस्कराते हुए बोली ,
"ेहः फली , तये ा दई गलम गलम और टोटोडे दी..." कोमल बेहद खुश होते हुए बोली ,
"उफ़ चची यह पेटू हो जाएगी , बहुत खाने लगी है .." रवि हस्ता हुआ बोलै ,
"नई ठाठी तें (मैं) टेटू नई होयूडी , ढय्या ठूठ तोलते..." कोमल दो तीन पकोड़े उठा चपर चपर कहते हुए बोली ,
"रावी , मेरी बेटी को खाने दो , और खाओ बेटी , उम्मा..." रुक्मणि चची मुस्कराते हुए कोमल का माथा चुम कर बोली ,
वही छोटी चची अपने हाथो से फर्जी को खिला रही थी , फर्जी का पेट तोह समोसे खा कर फुल था , बेचारी बेहद मुश्किल से खा रही थी ,
"ाचा चची मेरी बहने कहा हैं , कोई दिख न रही घर पर..." रवि बेहद उदास होकर as-pas नज़र घूमते हुए बोलै ,
"अहह , छाए पेओ , फिर बताती हु..." सुमन चची मुस्कराने की कोससिह करते हुए बोली ,
रवि उदास हो गया , फिर सबने छाए नाश्ता ख़तम किया , रवि ने देखा , सुमन चची ने रुक्मणि चची को कुछ इशारा किया , रुक्मणि चची , कोमल और फर्जी को अपने साथ ले गई , और सूरज चाचा खेतो की और चल दिए ,
अभ वह सुमन चची और रवि अकेले थे , फिर सुमन चची , रवि को अपने रूम में ले गई , और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ,
"चटककक..." इक जोरदार थपड मरने के बाद सुमन चची , रवि को बहु में भर रोने लगी , फिर रवि हरिजन रह गया , जब सुमन चची , रवि के होंठो को पगलू की तरह चूसने लगी , रवि अपनी चची को पीछे धकेलना लगा , पर सुमन चची तोह जैसे पागल सी हो गई थी , वोह बेहद शिदत और जनून से रवि के होंठो को दन्तु में दबा दबा कर काटते हुए चूस रही थी , जिस से रवि को हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था , आखिर 5 मिंट लम्बे चले किश के बाद सुमन चची ने रवि को छोड़ा , और तेज़ तेज़ हाफने लगी ,
"अहह चची अहह यह क्या..." रवि अभी इतना hi बोल पाया के सुमन चची फिर से उससे लिपट कर उसके होंठो को चूसने लगी , अभ रवि भी सेहन नै कर प् रहा था , उसके हाथ अपने अप्प सुमन चची के मोठे मोठे गदराये चूतड़ों पर पहुँच गए , और रवि उनको दोनों हाथ में पकड़ कास कास कर मसलने लगा ,
कुछ वख्त बाद सुमन ने किश तोडा और बीएड पर बेथ गई , वोह नज़रियन झुकाये मुस्करा रही थी , रवि भी उनके साथ बेथ गया ,
"चची आपको क्या हो गया है..." रवि अपने होंठो को हलके हलके उंगलियों से दबाते हुए बोलै ,
"अहह कुछ नई , ाचा यह बताओ , तुम्हारा और सोनल का क्या रिश्ता है..." सुमन चची तेज़ नज़रिओं से रवि का चेहरा देखते हुए बोली ,
"भाई बहिन का..." रवि चेहरे पर बिना कोई भाव लेट हुए बोलै ,
"हम्म , कहा से सीखा झूठ बोलना , तुम तोह झूठ नै बोलते थे..." सुमन इस बार घम्बिर होकर बोली ,
"मतलब , अप्प क्या बोल रही हो..." रवि अभ थोड़ा हड़बड़ा कर बोलै ,
"रवि , तुम्हारा और सोनल का रिश्ता पूछ रही हु , क्या किया तुमने सोनल के साथ , बताओ मुझे , तुम मेरी कसम..." सुमन चची थोड़ा नाम आँखों से बोली ,
"हैश्च , वोह , वोह , हम दोनों इक दूसरे को प्यार करते , पर इस में मेरी कोई गलती नै , में आपको सुरु से बताता हु..." फिर रवि ने सोनल के साथ हुए उस हादसे का जीकर किया , जब M.L.A का लड़का राहुल उसे ब्लैकमेल कर रहा था , और रवि ने सोनल देदी को उनसे बचाया था , फिर सोनल देदी का उसे प्यार का इजहार करना , उसका मन करना , और आखिर सोनल देदी के बार बार रोने से उसका सोनल के प्यार को सवीकार कर lena..."bus यही हुआ चची..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"हम्म , तोह तुम और सोनल इक दूसरे को प्यार करते हो , या यु कह लू , के सोनल तुम इमोशनली टार्चर कर रही है , तेन की तुम भी उसे प्यार करो , अभ बताओ कोनसी बात सच है..." सुमन चची बेहद तेज़ निगाहो से रवि के चेहरे को पढ़ते हुए बोली ,
"नयी (रट हुए) , में , में , उनको प्यार करता हु , बहुत प्यार करता हु , आपकी दूसरी बात झूठ है , चची हमारा प्यार पवितर है , वोह , वोह कहा है , मुझे सोनल से मिलना है..." रवि बेहद रट हुए बोलै ,
"हैश्च जानते हो उसने क्या क्या किया तुम्हारे पीछे..." सुमन बेहद नाम आँखों से बोली ,
"क्या , मेरी सोनल ठीक तोह है..." रवि इक डैम चौंक कर बोलै ,
"रवि जब तुम पिछली बार यहाँ से गए , तब सोनल बहुत खुश थी , उसने अपनी पढाई फिर से स्टार्ट कर दी , पढाई तोह उसकी चल hi रही थी , बस 1 साल रह गया था , फिर उसे अपनी डिग्री मिल जाती , और वोह डॉक्टर बन जाती , रवि , उसने दिन रत इक कर दिया , इतनी म्हणत की , के मेरी सोनल का 3रद रैंक आया सोल्लगे में , वोह बहुत खुश थी , वोह तुम फ़ोन करती रही , यह बताने के लिए , पर तुम्हारा फ़ोन बंद था , फिर वोह उदास हो गई..." सुमन चची बेहद रट हुए बोली ,
"ओह्ह मेरी सोनल..." रवि बेइंतहा रट हुए बोलै ,
"रवि उसने हमें कुछ नै बताया , के वोह क्यों इतनी म्हणत कर रही है , उसने धार धार की ठोकरे खा , डॉक्टर की जॉब हासिल की , इस बात से हम सब बहुत खुश थे , 1 साल और निकल गया , उसने खुद को उस जॉब में बेहद शिदत से डूबा दिया , तुम्हारे चाचा ने उसे इक दिन घर बुलाया , वोह घर आयी , तोह हमने उसे उसके रिश्ते के बारे में बता दिया , तुम्हारे चाचा ने उसका शादी का रिश्ता किसी के साथ तेह कर दिया था , इस बात से उसे बेहद ढक हुआ , वोह अपने रूम में गई , और उसने , और उसने..." यह बोलते बोलते सुमन चची फुट फुट कर रोने लगी ,
"क्या , क्या हुआ सोनल को , बोलू चची वोह ठीक तोह है..." रवि बेहद डरते हुए बोलै ,
"रवि , उसने जहर खा लिया , हम उसे हॉस्पिटल लेकर गए , बहुत मुश्किल से उसकी जान बचाई , फिर मने उससे बात की , तब उसने बोलै के "माँ में रवि भइआ से प्यार करती हु , मने उनसे वादा किया है , में अपनी जान दे दूंगी , पर किसी और से शादी नै करुगीय..." रवि , मने , रुक्मणि देदी और तुम्हारे चाचा को यह बता दिया , पहले तोह वोह नै मने , पर सोनल की नाज़ुक हालत देख , उनहोनु ने हार मन ली , अभ वोह , अभ वोह , घर पर है , ऊपर अपने रूम में..." सुमन चची यह बोल बेइंतहा रोने लगी ,
रवि यह बात जान बेइंतहा गुस्सा हो गया , उसे खुद पर गुस्सा था , रवि इक डैम से उठा और रूम से बहार भगा ,
"कड़दायककककक..." रवि भागते हुए रूम के दरवाजे से टकरा गया , पर सुमन चची तब हरिजन रह गई , जब रूम का दरवाजा टूट कर चकना चुर्र हो गया , और रवि उसी रफ़्तार से सेड्यां चढ़ ऊपर की तरफ भाग गया , सुमन चची यह सब देख बेहद घबरा गई , क्यों की बंद दरवाजा , वोह भी बेहद मज़बूत लकड़ी का , इक इंसान के टकराने से टूट कर भीकर गया , पर उनको नै पता था , वोह इंसान नै , बेदर्द डेविल हैई , जो प्यार का भूका हैई....
तो बे कुनिटेड.....