Incest Deewanapan... - Page 20 - SexBaba
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Incest Deewanapan...



अपडेट-94

अभ अग्गे...

रवि अज्ज दिल से उदास था , दिल में दर्द था , आँखें नाम थी , उसकी बहिन , उसके जिस्म का आधा हिस्सा , अपना सब कुछ भूल कर , इक बची बन गई थी , जिसे प्यार का , जिस्मानी भूक का , कोई मतलब नै पता था ,

रवि डेविल बनकर किसी को मरना नै चाहता था , पर उसके दिल में इक आग सी लगी थी , वोह अपने पिता को दर्द देना चाहता था ,

रेहमान उल्ला का मास्स खा कर , रवि ने अपने पिता को चेतावनी दी थी , के अगर उसकी कोमल पहले जैसी न हुई , तोह वोह अग्गे और भी दरिंदगी से लोग की जान लेगा , उनको नोच नोच कर खायेगा ,

रवि के लिए उसकी बहिन कोमल , उसका सब कुछ थी , उसकी यह हालत , रवि को दर्द दे रही थी , उसका गुस्सा हर पल बढ़ता जा रहा था , उसे अपने पिता की बनाई इस दुनिआ को दर्द देना था ,

लेकिन रवि अचे लोग के साथ था , क्यों की अगर कोमल ठीक हो जाती , और उसे यह पता चलता , के उसके भाई ने बेगुनाह लोग की जान ली , तब कोमल उसे कभी माफ़ न करती ,

"पापा , हमें तोह सोना का घर पता hi नै , हम कैसे जायेगे..." फर्जी अपना माथा पीट कर बोली ,

"अले हाँ , ढय्या फली ताहि ठोल लहि , हमतो ढल तो टाटा नै..." कोमल भी उदास होकर तुतला कर बोली ,

"मेरी जान , मुझे पता है , कुछ देर में हम पहुँच जायेगे..." रवि मुस्करा कर कोमल के चेहरे को देखता हुआ होला ,

"ेहः फली , तें (में) ढय्या टी दान हु.." कोमल बेहद हस्ते हुए बोली ,

"हाँ मुम्मा , अप्प मेरी भी जान हो.." फर्जी कोमल का हाथ चुम कर बोली ,

फिर तीनो ऐसे hi मस्ती भरी बतिअन करते शहर पहुँच गए , पर शहर के अंदर जाते वख्त वह पुलिस नका था , वोह हर ऐनी जाने वाली गाड़ी रोक रहे थे , पूछताछ कर रहे थे , मतलब रेहमान उल्ला की मौत , अभ शहर में नंबर 1 पर ट्रेंडिंग कर रही थी ,

रवि ने अपने चेहरे पर हाथ रखा , तोह उसका चेहरा बदल गया , यह उसका जादू था , फर्जी के लिए उसका चेहरा पहले जैसा था , पर कोमल पर उसके जादू का असर नै हुआ , पर कोमल की उसे चिंता नै थी ,

"ेहः मिस्टर कहा जा रहे हो.." इक पुलिस वाला गाड़ी के मिरर में चेहरा घुसा , सबको अछि तरह देखता हुआ बोलै ,

"सर , मेरा नाम अनिल है , यह मेरी वाइफ कोमल , और यह मेरी बेटी फर्जी , हम अपने मां जी के घर जा रहे , क्या हुआ , इतनी सख्ती क्यों..." रवि ने साफ झूठ बोलते हुए बोलै , फर्जी अपने पापा के मोह से झूठ सुन , अपने चेहरे पर हाथ रख हसने लगी ,

"अरे कुछ नै भाई , कल रत इक रहस्य आदमी को किसी ने बम्ब ब्लास्ट में उड़ा दिया , उसी की इन्क्वायरी कर रहे बस..." वोह पुलिस वाला अपने माथे पर हाथ मरता हुआ बोलै ,

"ओह्ह , हम जाये सर , हमें वापिस भी मुड़ना है..."

"ओह्ह हाँ जाओ , लेकिन दयँ से..." वोह पुलिस वाला मुस्कराते हुए बोलै ,

"ेहः पोलित टेल ढय्या , मुड़े ाप्त टिटल (पिस्तौल) देथना..." कोमल मुस्करा कर बोली ,

"ः , क्या देखना..." पुलिस वाला हस्ता हुआ कुछ न समज़ते हुए बोलै ,

"टिटल , टिटल , तीचु तीचु , टिटल..." कोमल , अपने हाथ को गन की तरह बनाते हुए बोली ,

"अंकल , मुम्मा , गन वाले पिस्तौल की बात कर रही..." फर्जी अपना माथा पीट कर बोली ,

"मम , गन नै दे सकते हम ड्यूटी पर..." वोह पुलिस वाला मुस्करा कर बोलै ,

"आते थल , डाई डाई..." रवि ने गाड़ी अग्गे तोर ली , तब कोमल हाथ हिलाते हुए , सबको bye bye करने लगी ,

कोई आधे घंटे बाद , सब सोना के घर पहुँच गए , सोना के पापा इक गोवत अफसर थे , और उसकी माँ इक हाउसवाइफ थी , सोना की आगे फर्जी जितनी थी , इक hi स्कूल में पढ़ती थी ,

रवि , कोमल और फर्जी गाड़ी से उतर , घर के अंदर ा गए , वॉचमन से रवि ने बात कर ली थी , वोह सोना के मम्मी पापा को बुलाने चला गया ,

कुछ देर बाद सोना अपनी माँ के साथ बहार आयी , और वोह भाग कर फर्जी से मिलने लगी , दोनों घर के गार्डन में इक जुले पर बेथ बतिअन करनी लगी , रवि और कोमल घर के अंदर चले गए ,

"फर्जी तुम स्कूल क्यों नै अति..." सोना मुस्करा कर बोली ,

"यार में पापा और मुम्मा लोग के साथ रहती हु , अभी 4 दिन और नै ायुगी .." फर्जी थोड़ा मुस्करा कर बोली ,

"मुम्मा लोग , कितनी मुम्मा है तुम्हारी..." सोना थोड़ा फर्जी को छेड़ते हुए बोली ,

"मेरी 9 मुम्मा है , उफ़ सोना सब इक से बढ़कर इक , मस्त आइटम , तुम्हारी कितनी है..." फर्जी मुस्करा कर बोली ,

"अहह मेरी तोह इक है भाई , तुम्हारे तोह मज़े हैं..." सोना पहले उदास होकर फिर मुस्करा कर बोली ,

"हाँ , ाचा मेरी इक प्रॉब्लम है , कण कर में बताते हु..." फिर फर्जी ने सोना के कण में अपनी प्रॉब्लम बता दी ,

"हे माँ माता जी , यह क्या बोल रही हो तुम , ेहडेर कण करू..." फिर सोना भी चौंकते हुए फर्जी के कण में कुछ बोलने लगी ,

दोनों इक दूसरे के कनु में कुछ न कुछ बोल रही थी , तभी कोमल भी ा गई उनके पास , उसके हाथ में ट्रे थी , जिसमे तीन कप छाए , और खाने का सामान था ,

उसने गार्डन में रखे इक टेबल पर वोह सामान रख दिया , और वही पढ़ी चेयर पर बेथ दोनों को आवाज़ दी ,

"ेहः फली , थोङा , ा दो , तये तेलों , गलम गलम..." कोमल की आवाज़ सुन वोह दोनों भी उसके पास ा गई ,

"सोना यह सीक्रेट रहेगा हमरे बेच , हमेशा..." फर्जी ने सोना का हाथ पकड़ते हुए बोलै ,

"वादा रहा..." सोना भी मुस्कराते हुए बोली ,

"वाओ , कोमल मुम्मा , समोसे भी हैं..." फर्जी और सोना समोसे देख लार टपकती बोली ,

"हाँ , थमते बी ऐन ऑल तये बी गलम गलम , टालो तहो थमते..." कोमल उनको प्लेट में समोसे दाल कर देते हुए बोली ,

सोना कोमल की आवाज़ सुन बहुत हरिजन हुई , पर फर्जी ने उसके कण में सब बता दिया , फिर तीनो ने मिलकर सब साफ कर दिया , 8 समोसे , थे , अभ खली प्लेट चमक रही थी ,

"उम् थोङा थमते बाउट थे , मादा ा दया याल , में फील ायुडी ..." कोमल उठ कर सोना को बहु में भर , उसका चेहरा चूमते हुए बोली ,

"हाँ कोमल मुम्मा अप्प जरूर एना..." सोना भी कोमल को प्यार से गले लगा कर बोली ,

फिर रवि और सोना के पापा भी बहार ा गए , कोई इक घंटा सबने मस्ती की , और फिर रवि ने सोना को इक ाचा सा डॉल गिफ्ट में दिया , और फिर सबसे विदा लेकर , तीनो चाचा जी के घर निकल गए ,

फर्जी ने अपनी प्रॉब्लम सोना को बताई मगर उसके कण में , यह प्रॉब्लम अग्गे जाकर इस कहानी की दिशा बदलने वाली थी , और सोना का करैक्टर 6 part में फर्जी के साथ खुल कर सामने एना वाला था , ऐसी लिए सोना को कहानी में दाल दिया , क्यों की फर्जी को इक दोस्त चाहये , जो उसके दिल की बतिअन राज़ रख सके ,

करीब 2 घंटे के लम्बे सफर के बाद तीनो चाचा जी के गाओं पहुँच गए , रवि पहले यहाँ कई बार ा चूका था , पर उसकी बेटी फर्जी , पहली बार आयी थी , वोह बेहद खुश थी ,

फिर तीनो हवेली के पास पहुँच गए , तब फर्जी बेहद खुश होते हुए बोली ,

"वाओ , पापा कितना बड़ा घर है , में बहुत खुश हु..." फर्जी ख़ुशी में उछलते हुए बोली ,

"हाँ फली , तेह टाटा दी की तेली (हवेली) है , टाऊट (बहुत) बलि ..." कोमल , फर्जी के गालो को चुम कर बोली ,

रवि दोनों की बात सुन बस मुस्करा दिया , फिर वोह चाचा जी के घर के अंदर घुस गए , गाड़ी की आवाज़ सुन बड़ी चची (रुक्मणि) बहार आयी ,

जब रवि , कोमल और फर्जी तीनो गाड़ी से बहार निकले , तब बड़ी चची बहुत खुश हुई , ख़ुशी में उनकी आँखों से असनु बहने लगे , वोह तेज़ी से अग्गे बाद रवि के गले लग गई , और रोने लगी ,

"चची शांत हो जाओ प्लस..." रवि भी बेहद नाम आँखों से बोलै , कोमल और फर्जी भी रोने लगी ,

"कैसे शांत हो जाऊ (रट हुए) , मेरा बचा आया है , कितने सालो बाद , कहा था तू , हम दर गए थे , और तू कितनी बुरी हालत में गया था , मेरा बचा , उम्मा , अरे मेरी बेटी कोमल भी आयी है , रवि यह छोटी सी पारी कोण है .." रुक्मणि चची बेहद रट हुए दर्द भरे शबदो में बोली , और फिर कोमल और फर्जी को देख उनका पूछना लगी ,

"यह मेरी बेटी है फर्जी..." रवि अपने असनु साफ करता हुआ बोलै ,

"बलि ठाठी (चची) , तें टॉमल..." कोमल , फर्जी को गॉड से निचे उतर , रुक्मणि चची के गले लग बेइंतहा रट हुए बोली ,

"शठ मेरी बची , मेरी गुडिअ , कितनी बड़ी हो गई तू , *** साल पहले देखा था , शठ मेरी बेटी..." रुक्मणि चची खुद भी रट हुए कोमल का चेहरा चूमते हुए बोली , पर वोह थोड़ी हरिजन थी , कोमल के तुतला कर बोलने से ,

फिर रवि ने अग्गे बाद कोमल को अपनी बहु में भर लिया , और उसे शांत करने लगा , दूसरी तरफ रुक्मणि चची , फरिहा को गॉड में उठा , उसका चेहरा चुम रही थी , उनको फर्जी पर बहुत प्यार ा रहा था ,

"चलो घर के अंदर..." रुक्मणि चची तीनो को अपने साथ घर के अंदर ले आयी ,

अंदर एते hi सबने देखा , सूरज चाचू और छोटी चची (सुमन) दोनों घर के हॉल में बैठे हुए थे , रवि को देख सुमन चची वही बैठी बैठी रोने लगी , और फिर भागते हुए उसके गले लग गई ,

"मेरा बचा , मेरा बीटा , कहा था तू , मेरा बचा..." सुमन चची पगलू की तरह रट हुए , रवि के चेहरे को चूमती जा रही थी , रवि से कुछ नै बोलै जा रहा था , वोह बस रो रहा था ,

फिर कुछ वख्त बाद , दोनों अलग हुए , फिर सुमन चची कोमल को बहु में भरे उसे भी प्यार करने लगी , और आखिर में फर्जी का जानकर , वोह बेहद ख़ुशी से रोने लगी ,

फिर सब अपने चाचू से मिले , अज्ज पहली बार रवि ने देखा , उसके चाचू उसे गले लगा , बच्चू की तरह रो रहे थे , उफ़ परिवार आखिर परिवार hi होता है ,

कुछ वख्त और बीता , फिर सब घर के हॉल में सोफे पर बैठे बतिअन कर रहे थे , छोटी चची सुमन की गॉड में फर्जी बैठी थी , वोह फर्जी को इक पल के लिए भी , अपने से दूर नै कर रही थी , और कोमल को बड़ी चची ने अपने साथ बैठा रखा था , उनको कोमल पर बेइंतहा प्यार ा रहा था ,

कोमल के तुतला कर बोलने को वोह सब इक हादसा समाज रहे थे , क्यों की पिछली बार , रवि पगलू जैसी बतिअन कर रहा था , वोह बार बार बोल रहा था , कोमल मर गई , उसे छोड़ कर चली गई , लेकिन इस बात का जीकर किसी ने भी न किया ,

"ल्यो छाए ा गई और गरम गरम पकोड़े भी..." रुक्मणि चची मुस्कराते हुए बोली ,

"ेहः फली , तये ा दई गलम गलम और टोटोडे दी..." कोमल बेहद खुश होते हुए बोली ,

"उफ़ चची यह पेटू हो जाएगी , बहुत खाने लगी है .." रवि हस्ता हुआ बोलै ,

"नई ठाठी तें (मैं) टेटू नई होयूडी , ढय्या ठूठ तोलते..." कोमल दो तीन पकोड़े उठा चपर चपर कहते हुए बोली ,

"रावी , मेरी बेटी को खाने दो , और खाओ बेटी , उम्मा..." रुक्मणि चची मुस्कराते हुए कोमल का माथा चुम कर बोली ,

वही छोटी चची अपने हाथो से फर्जी को खिला रही थी , फर्जी का पेट तोह समोसे खा कर फुल था , बेचारी बेहद मुश्किल से खा रही थी ,

"ाचा चची मेरी बहने कहा हैं , कोई दिख न रही घर पर..." रवि बेहद उदास होकर as-pas नज़र घूमते हुए बोलै ,

"अहह , छाए पेओ , फिर बताती हु..." सुमन चची मुस्कराने की कोससिह करते हुए बोली ,

रवि उदास हो गया , फिर सबने छाए नाश्ता ख़तम किया , रवि ने देखा , सुमन चची ने रुक्मणि चची को कुछ इशारा किया , रुक्मणि चची , कोमल और फर्जी को अपने साथ ले गई , और सूरज चाचा खेतो की और चल दिए ,

अभ वह सुमन चची और रवि अकेले थे , फिर सुमन चची , रवि को अपने रूम में ले गई , और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ,

"चटककक..." इक जोरदार थपड मरने के बाद सुमन चची , रवि को बहु में भर रोने लगी , फिर रवि हरिजन रह गया , जब सुमन चची , रवि के होंठो को पगलू की तरह चूसने लगी , रवि अपनी चची को पीछे धकेलना लगा , पर सुमन चची तोह जैसे पागल सी हो गई थी , वोह बेहद शिदत और जनून से रवि के होंठो को दन्तु में दबा दबा कर काटते हुए चूस रही थी , जिस से रवि को हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था , आखिर 5 मिंट लम्बे चले किश के बाद सुमन चची ने रवि को छोड़ा , और तेज़ तेज़ हाफने लगी ,

"अहह चची अहह यह क्या..." रवि अभी इतना hi बोल पाया के सुमन चची फिर से उससे लिपट कर उसके होंठो को चूसने लगी , अभ रवि भी सेहन नै कर प् रहा था , उसके हाथ अपने अप्प सुमन चची के मोठे मोठे गदराये चूतड़ों पर पहुँच गए , और रवि उनको दोनों हाथ में पकड़ कास कास कर मसलने लगा ,

कुछ वख्त बाद सुमन ने किश तोडा और बीएड पर बेथ गई , वोह नज़रियन झुकाये मुस्करा रही थी , रवि भी उनके साथ बेथ गया ,

"चची आपको क्या हो गया है..." रवि अपने होंठो को हलके हलके उंगलियों से दबाते हुए बोलै ,

"अहह कुछ नई , ाचा यह बताओ , तुम्हारा और सोनल का क्या रिश्ता है..." सुमन चची तेज़ नज़रिओं से रवि का चेहरा देखते हुए बोली ,

"भाई बहिन का..." रवि चेहरे पर बिना कोई भाव लेट हुए बोलै ,

"हम्म , कहा से सीखा झूठ बोलना , तुम तोह झूठ नै बोलते थे..." सुमन इस बार घम्बिर होकर बोली ,

"मतलब , अप्प क्या बोल रही हो..." रवि अभ थोड़ा हड़बड़ा कर बोलै ,

"रवि , तुम्हारा और सोनल का रिश्ता पूछ रही हु , क्या किया तुमने सोनल के साथ , बताओ मुझे , तुम मेरी कसम..." सुमन चची थोड़ा नाम आँखों से बोली ,

"हैश्च , वोह , वोह , हम दोनों इक दूसरे को प्यार करते , पर इस में मेरी कोई गलती नै , में आपको सुरु से बताता हु..." फिर रवि ने सोनल के साथ हुए उस हादसे का जीकर किया , जब M.L.A का लड़का राहुल उसे ब्लैकमेल कर रहा था , और रवि ने सोनल देदी को उनसे बचाया था , फिर सोनल देदी का उसे प्यार का इजहार करना , उसका मन करना , और आखिर सोनल देदी के बार बार रोने से उसका सोनल के प्यार को सवीकार कर lena..."bus यही हुआ चची..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"हम्म , तोह तुम और सोनल इक दूसरे को प्यार करते हो , या यु कह लू , के सोनल तुम इमोशनली टार्चर कर रही है , तेन की तुम भी उसे प्यार करो , अभ बताओ कोनसी बात सच है..." सुमन चची बेहद तेज़ निगाहो से रवि के चेहरे को पढ़ते हुए बोली ,

"नयी (रट हुए) , में , में , उनको प्यार करता हु , बहुत प्यार करता हु , आपकी दूसरी बात झूठ है , चची हमारा प्यार पवितर है , वोह , वोह कहा है , मुझे सोनल से मिलना है..." रवि बेहद रट हुए बोलै ,

"हैश्च जानते हो उसने क्या क्या किया तुम्हारे पीछे..." सुमन बेहद नाम आँखों से बोली ,

"क्या , मेरी सोनल ठीक तोह है..." रवि इक डैम चौंक कर बोलै ,

"रवि जब तुम पिछली बार यहाँ से गए , तब सोनल बहुत खुश थी , उसने अपनी पढाई फिर से स्टार्ट कर दी , पढाई तोह उसकी चल hi रही थी , बस 1 साल रह गया था , फिर उसे अपनी डिग्री मिल जाती , और वोह डॉक्टर बन जाती , रवि , उसने दिन रत इक कर दिया , इतनी म्हणत की , के मेरी सोनल का 3रद रैंक आया सोल्लगे में , वोह बहुत खुश थी , वोह तुम फ़ोन करती रही , यह बताने के लिए , पर तुम्हारा फ़ोन बंद था , फिर वोह उदास हो गई..." सुमन चची बेहद रट हुए बोली ,

"ओह्ह मेरी सोनल..." रवि बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"रवि उसने हमें कुछ नै बताया , के वोह क्यों इतनी म्हणत कर रही है , उसने धार धार की ठोकरे खा , डॉक्टर की जॉब हासिल की , इस बात से हम सब बहुत खुश थे , 1 साल और निकल गया , उसने खुद को उस जॉब में बेहद शिदत से डूबा दिया , तुम्हारे चाचा ने उसे इक दिन घर बुलाया , वोह घर आयी , तोह हमने उसे उसके रिश्ते के बारे में बता दिया , तुम्हारे चाचा ने उसका शादी का रिश्ता किसी के साथ तेह कर दिया था , इस बात से उसे बेहद ढक हुआ , वोह अपने रूम में गई , और उसने , और उसने..." यह बोलते बोलते सुमन चची फुट फुट कर रोने लगी ,

"क्या , क्या हुआ सोनल को , बोलू चची वोह ठीक तोह है..." रवि बेहद डरते हुए बोलै ,

"रवि , उसने जहर खा लिया , हम उसे हॉस्पिटल लेकर गए , बहुत मुश्किल से उसकी जान बचाई , फिर मने उससे बात की , तब उसने बोलै के "माँ में रवि भइआ से प्यार करती हु , मने उनसे वादा किया है , में अपनी जान दे दूंगी , पर किसी और से शादी नै करुगीय..." रवि , मने , रुक्मणि देदी और तुम्हारे चाचा को यह बता दिया , पहले तोह वोह नै मने , पर सोनल की नाज़ुक हालत देख , उनहोनु ने हार मन ली , अभ वोह , अभ वोह , घर पर है , ऊपर अपने रूम में..." सुमन चची यह बोल बेइंतहा रोने लगी ,

रवि यह बात जान बेइंतहा गुस्सा हो गया , उसे खुद पर गुस्सा था , रवि इक डैम से उठा और रूम से बहार भगा ,

"कड़दायककककक..." रवि भागते हुए रूम के दरवाजे से टकरा गया , पर सुमन चची तब हरिजन रह गई , जब रूम का दरवाजा टूट कर चकना चुर्र हो गया , और रवि उसी रफ़्तार से सेड्यां चढ़ ऊपर की तरफ भाग गया , सुमन चची यह सब देख बेहद घबरा गई , क्यों की बंद दरवाजा , वोह भी बेहद मज़बूत लकड़ी का , इक इंसान के टकराने से टूट कर भीकर गया , पर उनको नै पता था , वोह इंसान नै , बेदर्द डेविल हैई , जो प्यार का भूका हैई....

तो बे कुनिटेड.....
 


अपडेट-95

अभ अग्गे...

रवि बेहद तेज़ रफ़्तार से सेड्यां चढ़ , अपनी बहिन सोनल के रूम तक पहुँच गया , रूम के दरवाजे के पास जाकर , वोह हिमेट जुटाने लगा , सोनल का सामना करने की ,

रवि जनता था , सोनल बहुत रोयेगी , और उसे सोनल को शांत करना होगा , रवि ने अपनी शक्ति से , बंद दरवाजे के अंदर ज़क कर देखा , उफ़ उसकी आँखें नाम हो गई ,

सोनल उसकी इक बड़ी सी तस्वीर को अपनी बहु में भरे सो रही थी , उफ़ कितनी प्यारी और मासूम लग रही थी वोह , उसका गोरा खूबसूरत चेहरा थोड़ा मुरझा सा गया था , इक लम्बे इंतज़ार के बाद ,

रवि ने अपनी नाम आँखें साफ की , और दरवाजा खटकता दिया , रवि अपनी आत्मिक विद्या का इस्तेमाल कर अंदर सोनल को देख रहा था , उसने देखा दरवाजे की आवाज़ सुन सोनल ने धीरे धीरे आँखें खोली , और उसकी तस्वीर को चूमने लगी , और फिर कुछ देर बाद बोली..

"कोण है..." सोनल अपने लम्बे बालो में इक रबड़ बंद डालती हुई बोली ,

"बीटा में तुम्हारी माँ हु..." रवि सुमन चची की आवाज़ निकल कर बोलै ,

"हाँ माँ , क्या बात है..." सोनल फिर से बीएड पर गिरते हुए बोली ,

"बीटा , तुम्हारा भाई रवि आया है..." रवि अपनी नाम आँखें साफ करता हुआ बोलै ,

सोनल इक डैम से उठ बैठी , उसकी आँखें ज़ार ज़ार बहने लगी , उसके रोने से रवि का बेजुबान दिल भी रोने लगा , सोनल ने जैसे तैसे खुद को सम्बल और बीएड से उठ कर बहार ऐनी लगी , लेकिन फिर वोह रुक गई , और भाग कर बीएड पर लेट रोने लगी ,

"सोनल , दरवाजा खोलू बीटा..." रवि फिर से चची की आवाज़ में बोलै ,

"माँ (रट हुए) , उनको बोल दो में , में , घर पर नै हु , मुझे नै मिलना उनको..." सोनल बेइंतहा रट हुए सिसक सिसक कर बोली ,

रवि ने कुछ देर इंतज़ार किया और फिर अपनी आँखों से इक लाल लाइट दरवाजे के लॉक पर मरी , और दरवाजे का लॉक इक डैम से खुल गया ,

रवि ने धीरे से रूम का दरवाजा खोला , और अंदर घुस , फिर से लॉक कर दिया , रवि ने रूम में as-pas नज़र डोडे तोह उसकी आँखें खुली की खुली रह गई ,

उफ़ रूम की हर देवर पर चारो तरफ , उसकी बड़ी बड़ी तस्वीरें लगी हुई थी , शयद यह तस्वीरें तब की थी , जब सब पिकनिक मानाने गए थे , पूरा रूम उसकी तस्वीरो से भरा हुआ था , रवि ने फिर अपनी बहिन को देखा , जो बीएड पर उलटी लेती हुई , रट हुए सिसक रही थी ,

रवि नाम आँखों के साथ , सोनल के साथ बीएड पर लेट गया , सोनल ने इक बार रवि को देखा , जो आँखें बंद किये लेता हुआ था , और उसकी आँखों में असनु बह रहे थे ,

सोनल अपना रोना भूल , बेहद हरिजन हुई , अपने भाई को देखती रही , उसे विश्वास नै हो रहा था , उसे लग रहा था , यह इक सपना है , यह हकीकत नै हो सकती ,

सोनल ने अपने कंपते हाथ से रवि को छू कर देखा , और फिर उससे लिपट कर रोने लगी , कुछ पलु बाद सोनल अपने भाई के चेहरे को बेइंतहा , बेहद शिदत से चूमने लगी , वोह पगलू की तरह , हर तरफ से , उसके पोरे चेहरे को चूमती जा रही थी ,

"शठ , बस कर पगली , में हु न तुम्हारे पास , अभ कही नै जाउगा..." रवि , सोनल का चेहरा दोनों हाथो में पकड़ , बेहद नाम आँखों से उसकी असनु भेजी आँखों में देखते हुए बोलै ,

"bb..bb..bhaiiiii..." सोनल हकलाते हुए बस इतना hi बोलै , और फिर से रट हुए रवि के सीने से लिपट गई ,

मोह्हबत खुशनुमा जिंदगी का राज़ , यह दर्द भी देती है और ख़ुशी भी , मोह्हबत भगवन का बनाया , सबसे घातक हथियार , जिसके वॉर से खुद भगवन भी न बच पाए , यहाँ तक भगवन शिव भी माता सटी की मृय्तु के बाद , सदियों तक अंधकार में दुब गए , अपने प्यार को भूल न पाए , उनकी मौत पर , उनकी लाश को उठा , पोरे संसार में घूमते रहे ,

कितनी पीड़ा सही होगी , कितना दर्द सहा होगा , कितने गम में तड़फे होंगे , रोये होंगे , चिलए होंगे , मेरे भगवन शिव , उफ्फ्फ उनकी पीड़ा , उनका दर्द , उनकी घोर तपस्या , कोण समाज सकता है , वोह है आशिक़ ,

और माता ने इक ऐसे इंसान को चुना , जो जंगलो में रहता था , भोटू , प्रेतु के साथ , शरीर पर मुर्दा लोग की रख लगा कर , और माता 32 गन सपन , मेरी माँ , दुनिआ में सबसे खूबसूरत , उनको प्यार हुआ तोह , इक वैरागी इंसान से , जो मेरे भगवन शिव थे ,

उनकी प्रेम कहानी से कुछ सिखने को मिलता है , कुछ समज़ने को मिलता है , माफ़ करना , में इक ऐसी साइट पर , इक ऐसी स्टोरी पर , अपने भगवन का नाम लिख रहा हु , पर यहाँ बात , मोह्हबत की है , प्यार की है ,

उनसे सीखो , के प्रेम करो , तोह न रूप देखो , न dhan-dolt , न जाट देखो , न रुतबा , प्रेम को हम इस क्रूर समाज की जंजीरो में नै बंद सकते , प्रेम अमर है , आज़ाद है , प्रेम से भगवन भी मिल जाते हैं , और इंसान भी , दुनिआ में सब कुछ मिल जाता है , अगर मन में प्रेम हो ,

अज्ज हमारी सोनल की तपस्या पूरी हो गई , उसने दिन रत म्हणत की , अपना वादा पूरा किया , डॉक्टर बन गई , पर जब उसका प्रेमी न आया , तोह उसने इंतज़ार किया , चाहे हज़ारो पल दर्द के थे , सेकड़ो राशन को वोह रोई थी , पर अभ उसका प्रेम उसके पास था , वोह अपनी हर पीड़ा , हर दर्द , भूल चुकी थी...

कुछ वख्त बीता , तोह सोनल शांत हो गई , पर वोह अपने भाई से इक पल भी दूर न हुई , उससे लिपटी रही , उसे बार बार चूमती रही ,

"उफ़ मेरी सोनल , मेरी जान , अभ शांत हो जाओ , देखो में तुम्हारे पास हु , अभ नै जाउगा..." रवि , सोनल का माथा चूमते हुए मुस्करा कर बोलै , तोह सोनल भी मुस्कराने लगी ,

"रवीए (रट हुए) , तुम , तुम , कहा थे , तुम , तुमने वादा किया था , में , में डॉक्टर बन गई रवीए , पर तुम नै आई , क्यों नै आई , तुम जूठे हूँ..." सोनल बेइंतहा रट हुए रवि के सीने पर मरते हुए बोली ,

"हास्सःह , इस वादा की कोई माफ़ी नै मिल सकती , इक बार , में तुमसे शादी करुगा , पर में तुमसे बेहद नाराज़ हु , तुमने , तुमने खुदकुशी करने की कोससिह की , अह्ह्ह , बेवकूफ अगर मर जाती तोह..." रवि ने प्यार से सोनल को डांटते हुए बोलै ,

"वोह , वोह , सब मेरी शादी करवा रहे थे , मेरे पास कोई और रास्ता नै था , अगर छोड़ कर चली जाती , तोह सब मेरे चरितर पर उंगलियाँ उठाते , पर मेरा प्यार सच्चा था , मैं , मैं , हमारे प्यार पर कोई डेग कैसे लगने देती , हमारा प्यार पवितर है रवि , बहुत पवितर , इस लिए मने जहर खा लिया..." सोनल बेहद नाम आँखों से बोली ,

"ओह्ह्ह , मेरी जान , इतना प्यार , पर क्यों , ाचा , तोह लड़के वालो को क्या बोलै चाचा जी ने..." रवि , सोनल के गुलाबी नरम होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै ,

"मेरे जहर खाने के बाद , मुझे 5 दिन बाद होश आया , तब छोटी माँ , मुझ पर बहुत गुस्सा हुई , जब उनहोनु मेरे प्यार पर सवाल उठाये , तोह , तोह में खुद को रोक न पायी , मने सब बता दिया , पिता जी पहले तोह मुज़से नाराज़ हुए , पर मेरा बलिदान देख , वोह रोने लगे , फिर पिता जी ने , लड़के वालो को मन कर दिया , और कहा के अभी उनकी बेटी , अग्गे और पढ़ना चाहती है , मेरे सब घर वाले मन गए , फिर भी जणू तुम 1 साल देरी से ए , क्यों..." सोनल पहले नाम आँखों से बोली , और अंत में शरमाते हुए ,

"हम्म , तोह यह बात है , कविता और सीतल देदी कहा हैं..."

"रवि , वोह , तोह विदेश चली गई हैं , अगले महीने आएगी..." सोनल प्यार से रवि के सीने पर उंगलियाँ फिरते हुए बोली ,

"चलो मेरे साथ , मुझे तुमसे किसी को मिलवाना है , तेन की तुम एहसास हो के में 3 साल देरी से क्यों आया..." रवि , सोनल के होंठो को चुम , उसे अपने साथ बहार लता हुआ बोलै ,

बहार घर के हॉल में कोमल , फर्जी , रुक्मणि चची और सुमन चची , चारो बैठी हुई बतिअन कर रही थी ,

सुमन चची और रुक्मणि चची , रवि और सोनल को एक साथ एते देख बेहद खुश हो गई ,

"देदी दोनों की जोड़ी कितनी अछि लग रही है..." सुमन मुस्कराते हुए रुक्मणि से बोली ,

"हाँ , किसी का नज़र न लग जाये दोनों को..." रुक्मणि चची हस्ते हुए बोली ,

"ल्यो फर्जी जी , आपकी खूवसिह पूरी हो गई , आपकी मुम्मा नंबर 10 ा रही है , हैश अभ इनको भी मुम्मा बोलना सिख लो , लेकिन आइटम मस्त है..." फर्जी अपने माथे पर हाथ मर , मन hi मन सोचते हुए बोली ,

"ेहः टनल ा दई , टनल ा दई.." कोमल ख़ुशी में मुस्कराते हुए बोली , और सोनल के पास एते hi उसके गले लग गई ,

"मेरी कोमल जणू , कैसी हो अप्प..." सोनल , कोमल का माथा चूमते हुए बोली ,

"तें थिथ तू ज़िज़ी.." कोमल तुतला कर बोली , तोह सोनल चौंक गई , फिर उसे महसूस हो गया , आखिर रवि इतना लेट क्यों हुआ था ,

"अले यह प्यारी सी बची किसकी है..." सोनल , कोमल से मिलने के बाद फर्जी के पास जाकर घुटनो के बल बैठते हुए बोली ,

"आपका hi माल हु नयी मुम्मा..." फर्जी मन hi मन सोचते हुए मुस्कराती हुई बोली ,

"तेह ढय्या टी देती या , फली..." कोमल बेहद खुश होते हुए बोली ,

"हाय सोनल मुम्मा..." फर्जी , सोनल का गाल चुम कर बोली , तोह सोनल बुरी तरह शर्मा गई ,

"सोनल तुम बैठो में छाए लती हु तुम्हारे लिए..." रुक्मणि चची इतना बोल जाने लगी , तभी कोमल बोली ,

"ठाठी , मुड़े दी टेनी तये गलम गलम ऑल टोटोडे दी ठाणे , दलदी ताऊ..." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

फिर सब ऐसे hi बतिअन करते रहे , और वख्त गुजरता गया , फिर सबने छाए और पकोड़े खाये , सरे पकोड़े कोमल ने थुश लिए , दुसरो का तोह बस नाम hi हुआ ,

शाम का वख्त हुआ , तब रवि ने जाने की इजाजत मांगी , सोनल इस बात से बेहद उदास हो गई , फिर रवि ने उसे प्यार से समैया के , अगले 7 दिन बाद वोह उससे सगाई करेगा , जिसे सुन सोनल ख़ुशी से चहक उठी , यह बात रवि ने सुमन चची के सामने बोली , और उनको स्पेशल बोलै , के कविता और सीतल देदी को वापिस बुला लो , और अगले 7 दिन बाद की कोई भी डेट पंडित जी से निकलवा लो ,

फिर रवि ने सोनल से उसका मोबाइल नंबर लिया , और कुछ देर उससे प्यार किया , फिर रवि ने सबसे विदा ली , और करीब 2 घंटे बाद सब घर वापिस ा गए....

शाम के 4 बजे....

"ल्यो भी बचा लोग , घर ा गया , अहहूश्च..." रवि ुबाशी लेते हुए बोलै ,

"ओह्ह हु , फली घाल ा दया , टालो तये तेते गलम गलम..." कोमल गाड़ी से उतर घर के अंदर भागते हुए बोली ,

"हाश , पापा मुम्मा कुछ जायदा बीमार नै.." फर्जी थोड़ा उदास होकर बोली ,

"मेरा बचा , तुम्हारे साथ कितना खेल रही वोह , और घबराओ मत , कोमल मुम्मा जल्द hi ठीक हो जाएगी , जाओ खेलो उसके साथ..." रवि मुस्कराते हुए फर्जी के गाल चुम कर बोलै ,

"कोमल मुम्मा रुको..." फर्जी गाड़ी से उतर इतना बोल घर के अंदर भाग गई...

रवि ने गाड़ी रेहान के घर पार्क की , और कुछ देर रेहान , और dr.nelam से बतिअन कर , वापिस घर ा गया , dr.nelam बेहद खुश हो गई रवि से मिलकर...

रवि के जाने के बाद , सीमा ने काट को छोड़ बाकि सबको , कोमल की इस हालत की असली वजह बता दी , तेन की कोई उसे अजीब न समझे ,

सीमा ने इक माँ होने के नाते , सबको चेतावनी दी , के कोमल इक बची है , उस पर कोई गुस्सा नै करेगा , चचे वोह कितना भी तंग क्यों न करे ,

"थीम मुम्मु , थीम मुम्मु..." कोमल छीलते हुए घर में घुसी , तब सीमा किचन में खाना बनाने की तयारी कर रही थी , वोह कोमल की आवाज़ सुन इक डैम से बहार ा गई ,

"अरे मेरी बेटी ा गई..." सीमा मुस्कराते हुए अपनी बहे फैला कर बोली ,

"मुम्मु..." कोमल भाग कर सीमा के गले लग गई..

"मुम्मु तें ता दायी , तेने (मने) तहा टोटोडे दी तये , थमते दी तये , ऑल तये दी टी गलम गलम..." कोमल , सीमा का चेहरा चूमते हुए बेहद ख़ुशी में बोली ,

"मिली बची , अभी और छाए नै पेनी , में दूदू देती हु गरम करके , ठीक है उम्मा.." सीमा मुस्करा कर कोमल का माथा चूमते हुए बोली ,

तब तक फर्जी भी उनके पास ा गई ,

"मुम्मु तो तिलास टूडू गलम गलम कालो , मिली फली बी टूडू पीढ़ी , तें न फली.." कोमल , फर्जी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,

"मेरी बची फर्जी , उम्मा.." सीमा , फर्जी को गॉड में उठा उसका चेहरा चूमते हुए बोली ,

"मुम्मु , ाप्ति तो तो (दो) तेतियाँ..." कोमल भी सीमा के गले लगते हुए बोली ,

"ाचा तुम दोनों खेलो में , तब तक दूध गरम करती हु , ठीक है..." सीमा किचन के अंदर जाते हुए बोली ,

"ेहः फली ताल , लाला ऑल थुतेज़ा ते पथ टालते , ताल ताल तल्दी..." कोमल , फर्जी का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए लारा और एलिज़ा के रूम में ले गई ,

कुछ वख्त बाद रवि भी घर ा गया , रवि एते hi पहले ख़ुशी के पास चला गया , उसने दरवाजा खटकता दिया ,

"कोण है..." ख़ुशी अंदर से चीला कर बोली ,

"में बेवकूफ , ओह्ह मेरा मतलब रावी..." रवि अपना माथा पीट कर बोलै ,

कुछ hi पलु में ख़ुशी ने दरवाजा खोला , वोह थोड़ा नशे में लग रही थी , उसने अध् खुली आँखों से रवि को देखा , और रवि को अंदर कर दरवाजा बंद कर लिया....

वही दूसरी तरफ...

अनु कल से बीएड पर लेती हुई थी , उसकी हालत अभ ठीक थी , वार्ना रवि ने उसकी हालत बुरी कर दी थी , जो भी हो , अनु को अपना प्यार मिल गया था , अज्ज उसने रेस्ट करने का सोचा था , उसने कल प्लान किया था , रवि से मिलने का और उसे इक ाचा सा मोबाइल गिफ्ट करने का ,

रेहमान उल्ला की मौत की खबर अनु को भी पता चल गई थी , लेकिन अभी वोह काम पर नै जा सकती थी , उसने 3 दिन की चुटी ले थी , उसके बाद hi वोह इस केस पर दयँ देने वाली थी...

वही दूसरी तरफ...

"तुम रवि से मिलने गई थी रेखा..." यह जोकर था जो बेहद गुस्से में था ,

"गई थी में रवि से मिलने , हो गई गलती मेरे से , लाएगा वोह महाशक्ति अभ , किया है वादा उसने..." रेखा नज़रियन ज़ुका कर बोली ,

"ऐसा क्या वादा किया उसने , जो तुम्हारी बात मन वोह उस महाशक्ति को लेन के लिए मन गया..."

"नै पता , मन गया वोह मेरी बात , जानती हु इतना बस..." रेखा ने फर्जी की बात छुपाते हुए बोलै ,

"तुम गाडरी कर रही हो , ाहः , जोकर से गाडरी , थोड़ी सी सजा तोह मिलेगी तुम..." जोकर ने इतना बोल , अपने हाथ से बिजली की किरणे छोड़ी , जो रेखा के जिस्म पर पढ़ते hi , रेखा दर्द से चखने लगी , पर उसने यह नै बताया , के फर्जी उसकी बेटी है , और यही बात वोह रवि को बताने गई थी ,

जोकर ने रेखा को बिजली की जंजीरो में जकड दिया , रेखा को बेइंतहा दर्द हो रहा था , पर अपनी ममता की शक्ति से , उसने अपना मोह न खोला , चाहे पूरी रत , वोह बिजली के जटके सेहती रही....

तो बे कुनिटेड.....

 
फ्रेंड्स कहा से स्टार्ट करू , खैर बताना तोह है , वार्ना अप्प सोचोगे , राइटर भाग गया , स्टोरी बेच में छोड़ कर ,

मेरी तईबाट थोड़ी भिगाड गई है , पिछले कुछ दिन से में अपनी मेडिसिन टाइम पर नै ले पाया , और लिवर ट्रांसप्लांट के बाद , मुझे रेगुलर मेडिसिन लेनी थी , जो में नै कर पाया ,

थोड़ी सी प्रॉब्लम हो गई है हेल्थ की , जायदा बड़ी नै है , तोह चिंता करने की जरुरत नै है , में इक ब्रेक ले रहा हु , थोड़ा सा , मतलब 5,6 दिन का ,

खैर चिंता मत करना , में वापिस ायुगा , अपना ख्याल रखना , और घर पर रहना , अगर 2 वीक्स गुजर जाये , तब मोड्स से रिक्वेस्ट होगी , वोह खुद hi इस थ्रेड को क्लोज कर दे ,

कहिअर जो 5 अपडेट लिखे हुए हैं , वोह पोस्ट करता रेहगा , अप्प रिप्लाई शार्ट में देना , कोई बड़ा रिप्लाई करने की जरुरत नै


में रेप्लीस के जवाब नै दे पाउगा , इसके लिए सॉरी , रत को अपडेट ा जायेगा 9 बजे , थँक्स यू

.. bye दोस्तों..
 


अपडेट - 96

अभ अग्गे...

कोमल और फर्जी भागते हुए लारा और एलिज़ा के रूम के सामने पहुँच गई , वोह दरवाजा पीट ते हुए दोनों को आवाज़ देनी लगी ,

"लाला , लाला , थुतेज़ा , तोलो दलवाड़ा , तोलो न..." कोमल दरवाजे पर हाथ पेअर मरते हुए बोली ,

"मुम्मा धीरे , आपको चोट लग जाएगी..." फर्जी , कोमल को रोकते हुए बोली ,

"आते , लाला , लाला , तात तात..." कोमल बेहद प्यार से दरवाजे पर उंगलियाँ मरते हुए बोली ,

कुछ वख्त बाद लारा ने दरवाजा खोला , वोह थोड़ी हरिजन हुई , कोमल और फर्जी को देख कर , पर वोह दोनों , लारा की इक साइड से अंदर घुस गई ,

"अले ताप (बाप) ले , ते तय हे , फली टेटनी बलि दामे , टालो तेलते ें..." कोमल सामने देवर पर लगे सुपर कंप्यूटर को देखते हुए बोली , जो एलिज़ा ने दिन रत इक करके त्यार किया था ,

"हाँ मुम्मा , चलो..." फर्जी भी बेहद खुश होते हुए बोली ,

दोनों की बात सुन लारा ने अपना माथा पीट लिया ,

"अरे रुको बच्चू , यह गेम नै है..." एलिज़ा , बेहद मुश्किल से कोमल और फर्जी को रोकते हुए बोली ,

"यह थथमा (चस्मा) ट्यू लड़ाया तपने , नॉलेज अला (वाला) यह..." कोमल , एलिज़ा के नज़र वाले चश्मे को देखते हुए बोली ,

"हाँ , मेरी नज़र थोड़ी कमज़ोर है.." एलिज़ा प्यार से कोमल का गाल सेहला कर बोली ,

"ताहि तो , ाप्तो दीठ नई लाहा याल , ाप्ति नॉलेज तंदूर यह , यह तुटूटेर (कंप्यूटर) ै , दामे यह (है) ..." कोमल अपना माथा पीट कर बोली ,

"हाँ एलिज़ा मुम्मा , कोमल मुम्मा सही बोल रही है..." फर्जी भी समजदारी से कोमल का समर्थन करते हुए बोली ,

"हे भगवन , ओह्हू , बीटा यह कंप्यूटर है , इससे लोग पर नज़र रखते हैं.." एलिज़ा दोनों को प्यार से समज़ते हुए बोली , पर उसका दिमाग अंदर से घुमा हुआ था ,

"ओह्ह अतः , ाप्ति नॉलेज तंदूर यह , ेठी तिये तप ेथ तुटूटेर थे , नॉलेज तख्ती तोडू पल..." कोमल बेहद समजदारी से घम्बिर होकर बोली ,

"वह , मेरी बेटी समाज गई , शाबाश..." एलिज़ा , कोमल और फर्जी को बहु में भर दोनों का चेहरा चूमते हुए बोली ,

"तयबत (शाबाश) यही (नै) , टाला कल दिठो तुटूटेर..." कोमल अपनी कमर पर दोनों हाथ रख बोली ,

एलिज़ा ने लारा की तरफ देखा , जो उसकी हालत पर बेहद हस्स रही थी , इस बात से एलिज़ा लारा पर और भी गुस्सा हो गई ,

"तुम क्या देख रही हो दन्त निकल कर..." एलिज़ा गुस्से में लारा के करीब जाकर बोली ,

"हहै , सो फनी , मने क्या किया.." लारा बेहद हस्ते हुए बोली ,

"तुम अपने दन्त मत निकालो , वार्ना तोड़ दूंगी..." एलिज़ा , लारा के और हसने पर चिढ़ते हुए बोली ,

"क्या , तोड़ दन्त , नै तू दन्त तोड़ , क्या ऐसी दिन के लिए तुज़से प्यार किया था , में तुम्हारी आँखें निकल दूंगी..." लारा भी बेहद इमोशनल होकर गुस्से में बोली ,

फिर दोनों लड़ने लगी , तब फर्जी धीरे से कोमल के कण में बोली...

"मुम्मा खिसक लेते यहाँ से , वार्ना बिना बात के पीट जाएगी..." फर्जी बेहद धीरे से कोमल के कनु में बोली ,

"ताहि फली याल , मुड़े तोडू पल नॉलेज रहतनि , ेथ तुटूटेर थे , ताल तहा डेड (बीएड) पल ठेठ ते टिंटो ललते डेथते..." फिर कोमल , फर्जी को साथ लेकर बीएड पर बेथ गई , और दोनों मुस्कराते हुए दोनों को लड़ते देखने लगी...

वही दूसरी तरफ...

रवि , ख़ुशी के रूम में घुस ख़ामोशी से उसके बीएड पर बेथ गया , ख़ुशी नशे में चुर्र दरवाजा बंद कर उसके पास कड़ी होती बोली ,

"क्या हुआ , इतना सदा सा मोह क्यों बना रखा , कहा छुड़ा कर ा रहा तू..." ख़ुशी इक और बोतल उठा छोटे छोटे सिप पेट बोली ,

"खुशी , अहह , में उदास हु अज्ज..." रवि बेहद उदास होकर बोलै ,

"तोह , में क्या करू , हाँ , अगर सेक्स करना है , तोह में त्यार हु..." ख़ुशी , रवि को कण्डु से पकड़ पीछे बीएड पर गिरा उसके ऊपर लेटते हुए बोली ,

"ख़ुशी नै यार , अभी मूड नै मेरा..." रवि , ख़ुशी को अपने ऊपर से धकेलता हुआ बोलै ,

"अबे तेरा खड़ा भी होता है या , इतनी बीवियों की मर मर कर , खुद..." ख़ुशी अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में चीला पढ़ा ,

"शट उप , अपनी बकवास बतिअन बंद करो.." रवि बेहद गुस्से में बोलै , उसकी आँखें नाम हो गई ,

"डेविल रो रहा है , आ हां हां (अजीब सा है कर) , यह तोह अजीब बात हुई..." ख़ुशी इक फुल बोतल रवि को देते हुए बोली ,

रवि ने बोतल पकड़ उसे मोह से लगा लिया ,

"अबे बहिन के टेक , ढकन तोह खोल ले , इतना भी क्या गम तुझे..." ख़ुशी अपना माथा पीट कर बोली ,

"ओह्ह सोली..." रवि मुस्करा कर बोलै ,

फिर रवि ढकन खोल इक hi साँस में पूरी बोतल पे गया , और बेहद नशीली आँखों से ख़ुशी को देखने लगा ,

"क्या देख रही मेरी जान..." ख़ुशी , रवि को आँख मरते हुए बोली ,

रवि , ख़ुशी के हाथ से बोतल चीन उसे मोह से लगा खली कर बोलै..." यह देख रहा था में..." रवि भी ख़ुशी को आँख मर बोलै ,

"हहै , अभ हुई न डेविल वाली बात , जितनी मदिरा पेनी है , मिलेगी , पर उदास नै होना तुम..." ख़ुशी , रवि का गाल चुम कर बोली ,

"ख़ुशी तुम यद् है , हेलल में हम दोनों , इक दूसरे से शरत लगा , वोह बड़ा मदिरा का मटका ख़तम करते थे , और तुम , तुम हमेशा जीत जाती थी ..." रवि उन पलु को यद् कर मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ यद् है , पर तुम क्यों बोल रहे हो..." ख़ुशी बेहद हस्ते हुए बोली ,

"क्यों मुझे फिर से खेलना है , वोह खेल... " रवि बीएड से उठते हुए बोलै ,

ख़ुशी भी मुस्कराते हुए कड़ी हुई , उसने आँखें बंद कर कुछ बोलै , तोह 4 फुट की बड़ी मिटटी की सुराही उनके सामने प्रकट हो गई ,

"इस सुहरै में 15 बोटलो जितनी मदिरा है , जो पहले पियेगा , वोह जीत जायेगा , और वोह अपनी मन की ीचा दूसरे के सामने रखेगा..." ख़ुशी उस सुराही को उठा , उसके मोह को अपने होंठो से लगा बोली ,

"हशः , वोह तोह तुम hi जीतूंगी , हज़ारो बार हार चूका हु , इस खेल में..." रवि भी उदास मन से सुराही उठते हुए बोलै ,

फिर दोनों पीने लगे , दोनों मदिरा पेट हुए इक दूसरे की तरफ मुस्करा कर देखते , लेकिन इस बार इक अजीब बात हुई , रवि जीत गया , सदियों में पहली बार डेमों तामस हार गई , क्या वोह अपनी ीचा से हारी थी ,

"एस , में जीत गया..." रवि मदिरा के नशे में चुर्र उछलता हुआ बोलै ,

"तोह इतना उछाल क्यों रहे हो लाल दानव , हम्म , बोलू क्या ीचा है तुम्हारी..." ख़ुशी अपने हरने पर थोड़ा इत्र कर बोली ,

"ाहः , हम जीत गए , यह हम जीत गए , पिता जी देखो , आपका बीटा , आपका अपना खून जीत गया , और इस बार भी वही जीतेगा..." रवि ख़ुशी से उछलते हुए बेहद घम्बिर होकर लाल अखन चमकते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह बहिन का ताका पागल हो गया है..." ख़ुशी बीएड पर जाकर सोते हुए बोली ,

"अबे चिमकंदी उठ , तुमने बहुत कुछ करवाया हेलल में मुज़से , अभ मेरी बरी है..." रवि , ख़ुशी को हाथ से पकड़ खींच कर उठाते हुए बोली ,

"क्या करोगे , इस अबला लड़की के साथ ..." ख़ुशी बेहद मासूम बनते हुए बोली ,

"अरे , सोना नै है , शिकार पर जाना है , इक नया शिकार , उसका गरम गरम मास्स , उफ़ उसका बेहटा मीठा खून , अज्ज रत को त्यार रहना , हम दोनों जायेगे , और फिर..." रवि , ख़ुशी की आँखों में देखता हुआ , बेहद ख़ुशी में बोलै ,

"और फिर , रत भर खायेगे , हहै , में त्यार हु मेरी जान..." ख़ुशी रवि के होंठो को चूसते हुए बोली , और फिर वोह बीएड पर गिर कर खर्राटे मरने लगी ,

"हम्म , यह त्यार है , लग तोह नै रहा..." रवि अपने बाल खुजाता यह बोल रूम से बहार चला गया....

रवि रूम से बहार आया , तब वोह अपने अगले शिकार असलम खान के बारे में सोच रहा था , वोह जानते था , उसे मरने से शहर में दंगे हो जाते , वोह कोई बेच का रास्ता सोच रहा था ,

इस बार उसने कुछ ऐसा सोचा था , के असलम खान की मौत इक शिकार लगे , जैसे किसी जंगली जानवर ने उसे मारा हो , इस बात को सोचता वोह अपने रूम की तरफ चला गया ,

रूम के अंदर घुसा , तब उस पर दारू का नशा कुछ जायदा hi हावी होने लगा था , उफ़ इतनी शराब कभी उसने इक साथ पे भी नै थी , हाँ हेलल में बात अलग थी , तब वोह और ख़ुशी पूरा दिन दारू के नशे में दुबे , बुरी आत्मीयों को कष्ट देते , उनके साथ खेलते रहते , वह करने के लिए कुछ और था भी नै , न प्यार था , न बचे , न घर , वोह दर्द भरा जेवण था ,

कई बार अमर होना भी दुःख देता है , बहुत दुःख देता है , हम इंसान सोचते हैं , काश हम अमर होते , पर अगर इस छोटी सी जिंदगी में इतने दुःख देख लिए , तब पता नै कितनी सदियों तक दुःख देखने पढ़े ,

रवि झूमता हुआ बालकोनी के पास खड़ा होकर , दूर तक फैले जंगल को निहारने लगा , उसके मन उदास था , कोमल की नाज़ुक हालत देख कर , कोमल इक 2 साल की बची जैसे बोल रही थी , अगर वोह फर्जी जैसी होती , तब भी रवि थोड़ा बहुत सेह लेता ,

रवि अभी सोच hi रहा था , के किसी ने उसे पीछे से बहु में भर लिया , उफ्फ्फ यह काट थी ,

"काट तुम..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ , क्या कल रही मिली जान..." काट मुस्कराते हुए रवि के साथ खड़े होते हुए बोली ,

"वाओ , कितनी हॉट लग रही हो यार..." रवि काट को ऊपर से निचे तक देखते हुए बोलै ,

"चल झूठा..." काट शर्मा कर बोली ,

"सच में यार , पर शयद मने बेहद दारू पे है , इस कारन तुम मुझे खूबसूरत लग रही हो..."

"क्या , तोह क्या में खूबसूरत नै हु..." काट रवि को मरते हुए बोली ,

"नई..."

"ाहू , में जा रही हु , गुड़ bye मिस्टर उल्लू..." काट बेहद अड्डा से अपना बालो को जतका देकर वह से जाते हुए बोली ,

"ेहडेर ा मिस रोटू..." रवि , काट का हाथ पकड़ उसे खींच कर अपने सीने से लगते हुए बोलै ,

"छोड़ू मुझे..." काट रवि की बहु में थोड़ा कसमसा कर बोली ,

"शठ , कपडे उतरो , तेन की में तुम्हारी खूबसूरती अछि तरह देख सकू..." रवि काट की नरम गर्दन चूमते हुए बोलै ,

"नयी , बतमीज़ आशिक़..." काट , रवि को ढाका देकर यह बोलते हुए शरमाते हुए वह से भाग गई...

रवि मुस्करा कर उसे जाते हुए देखता रहा , और फिर रत को असलम खान को मरने का सोचने लगा...

वही दूसरी तरफ....

सीमा दूध गरम करके कोमल को फर्जी को देने चली गई , उसे पता था दोनों , लारा के रूम में हैं , सीमा मुस्कराते हुए उसी तरफ चली गई ,

सीमा जब रूम के अंदर घुसी , उसने अपने होंठो पर हाथ रख लिया , क्यों की उसने देखा , लारा और एलिज़ा बच्चू की तरह लड़ रही थी , और कोमल और फर्जी बीएड पर बैठी दोनों हस्ते हुए दोनों को देख रही थी ,

"लारा तुम इक नंबर की कामिनी लड़की हो.." एलिज़ा , लारा के बालो पर हाथ मरती बोली ,

"ाहू तूने मेरी बालो को हाथ लगाया , में तेरे बाल नोच लुंगी..." लारा , एलिज़ा के बाल पकड़ते हुए बोली ,

फिर दोनों इक दूसरे के बाल नोचने लगी ,

"रुकू दोनों..." सीमा ने बेहद ुचि आवाज़ में बोलै , तोह दोनों रुक गई , लेकिन दोनों के हाथ में इक दूसरे के बाल थे ,

"तय मम्मू लालने दो , मादा ा लाहा..." कोमल बेहद हस्ते हुए बोली ,

"नै बचा लड़ना बुरी बात है , चलो दूध पेयों , और तुम दोनों ेहडेर ायो , लड़ क्यों रही हो..." सीमा ने कोमल और फर्जी को दूध दिया और लारा और एलिज़ा को अपने पास बुला लिया...

तो बे कुनिटेड....[friends sorry apke replys ke jawab nai de paya , meri health thodi nazuk hai , thode update likhe hain , jo me post karta rehuga , kal hospital admit ho jauga , chinta ki jarurat nai , hospital me mera ana-jana laga rehta hai , haha ,

app log reply me bus "nice update , aisa kuch hi likhna , me vapis reply nai de pauga..." apna khyal rakhna... ]

 
फ्रेंड्स अपडेट टाइप कर लिया है , रत को 9 बजे पोस्ट कर दूंगा , अभ ऑपरेशन हो चूका है , तोह डेली अपडेट आएंगे... शुक्रिया..
 


अपडेट-97

अभ अग्गे...

शाम के 6 बजे...

"असलम जी , अप्प अपना ख्याल रखो..." इक आदमी फ़ोन पर असलम खान से बात कर रहा था ,

"क्यों बे , अपुन को किसी का दर नै , और अपुन को कोई नै मर सकता..." असलम खान बेहद घमंड में बोलै ,

"घमंड मत करो , रेहमान उल्ला , जैसे पावरफुल इंसान को , बम्ब से उड़ा दिया , तोह अगला टारगेट हम लोग hi हो सकते..." उस आदमी ने असलम खान को समझते हुए बोलै ,

"तू है कोण बे..." असलम खान अभ थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"में आपका खिदमतगार हु सर , मुझे बस आपकी थोड़ी सी रेहमत चाहये , अप्प कुछ दिन अंडरग्राउंड हो जाओ..." वोह इंसान मुस्कराते हुए बोलै ,

"हूँ , तुम शयद सही हो , में अज्ज hi अपने अड्डे पर चला जाता हु , तुम कुछ दिन बाद मुज़से मिलना..." असलम खान कुछ सोचते हुए बोलै ,

"अप्प अकेले जाना , किसी को खबर मत देना , क्या पता सर , आपके लोग उसने खरीद रखे हो , जैसी गलती रेहमान उल्ला ने की , वैसी गलती आपको नै करनी..."

"हम्म , तुम सही हो , ाचा में फ़ोन रखता हु..." इतना बोल असलम खान ने फ़ोन कट कर दिया....

वही दूसरी तरफ....

रत के 7 बज रहे थे , सब खाना खा रहे थे , अज्ज का दिन बहुत ाचा गुजरा था , खास कर फर्जी के लिए , वोह अपनी बेस्ट फ्रेंड सोना से मिल आयी थी , अपनी प्रॉब्लम उसे बता आयी थी ,

सब खाना खा रहे थे , पर रवि और ख़ुशी अपने अपने रूम में थे , सीमा उनकी हालत देख आयी थी , वोह तोह नशे में धुत होकर सो रहे थे ,

"सीमा देदी , रवि कहा है..." जूही ने मुस्कराते हुए पूछा ,

"उफ़ ओह्ह जूही , क्या बताऊ तुम , वोह और ख़ुशी , हे भगवन , दोनों दारू से तुन हुए पढ़े हैं..." सीमा भी मुस्कराते हुए अपने माथे पर हाथ मरती बोली ,

"ओह्ह , लेकिन रवि तोह शराब नै पता है..." काट थोड़ा चिंता में बोली ,

"हमारी भोली काट , अप्प तोह चुप hi रहो , आपसे बड़ा दारुबाज यहाँ कोण है..." जूही , काट को छेड़ते हुए बोली ,

"शट उप बेबी , अभ तोह छोड़ दी मने..." काट बेहद शर्मा कर बोली ,

"अरे कुछ नै होता , रवि कोनसा रोज़ पता है , इक दिन के लिए कुछ नै होता..." लारा , रवि का समर्थन करते हुए बोली ,

"अरे शूरति देदी , खाना खो न , अप्प बहुत काम कहती हो..." रिमी शूरति को अपने हाथो से खिलाती बोली ,

"ओह्ह मेरी प्यारी बहिन , तुम जितना बोलेगी , उतना खायुगी..." शूरति , रिमी का गाल चूमते हुए बोली ,

दोनों का प्यार देख , सब उनकी तरफ देखने लगे ,

"ाहू ाहू , मम्मू तानी (पानी) .." कोमल खासते हुए बोली ,

"अरे मेरा बचा , यह लो पानी , बीटा धीरे खाओ , लायो में खिलाती हु..." फिर सीमा कोमल को पानी पीला कर उसे अपने हाथो से खाना खिलने लगी ,

बेबी से कोमल की यह हालत देखि न गई , वोह खाना बेच में छोड़ , नाम आँखों से वह से भाग गई ,

"अरे बेबी को क्या हुआ..." सीमा उसे जाते देखती बोली ,

"में देखती हु देदी..." काट इतना बोल , बेबी के पीछे चली गई ,

बेबी अपने रूम में जाकर बीएड पर गिर गई , और रोने लगी , तभी काट भी वह ा गई , और उसके साथ बेथ गई , उसने बेबी के कंडे पर हाथ रख बोलै ,

"तुम , तुम , वह से क्यों आयी , प्लस कुछ तोह बोलो , हैश्च , बेबी , कोमल की हालत सच में बहुत बुरी है , मुज़से भी न देखि जाती , उसकी यह हालत , पर रवि ने बोलै है , वोह जल्द hi ठीक हो जाएगी , अह्ह्ह्ह , अभ रोना बंद करो प्लस..." काट बेहद दर्द भरे शबदो में बोल , बेबी को अपनी बहु में भर कर बोली ,

"काट , क्या करू , तुम रवि की हालत का अंदाज़ा नै है , मने सम्बल था उसे , वोह , वोह , कोमल के लिए किसी भी हद तक जा सकता , काट , मने रवि को जिस हालत में देखा था , वोह कितनी दर्दनाक थी , यह सोच कर मेरी रूह तक कम्प जाती है , मुझे दर लग रहा , कही वोह फिर से..." बेबी बेहद रट हुए बोली ,

"शठ , नै , नईईई , इस बार ऐसा कुछ नै होगा , में अपने रवि को कुछ नै होने डूंगीए , मैं , मैं , कोमल के सामने हाथ जोड़ दूंगी , वोह ठीक हो जाएगी , तुम , तुम , हाँ , मेरी जान , तुम चिंता मत करो , ेहडेर ायो मेला बचा..." काट बेहद नाम आँखों से बोलते हुए बेबी के चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"तुम , अह्ह्ह मेरी जान , तुम क्या करुगीय , तुम बहुत प्यारी हो काट..." बेबी भी काट के गुलाबी होंठो को चूसते हुए बोली ,

"मुम्माआ..." फर्जी की तेज़ चखने की आवाज़ सुन , काट और बेबी अलग होकर , नज़रियन झुकाये मुस्कराने लगी ,

"नई भाई यह मज़ाक हो रहा , अरे तुम दोनों लड़कियाँ हो , यह चूमा छाती , युककक , क्यों मुम्मा , क्यों..." फर्जी अग्गे बढ़ बेबी की गॉड में बेथ मुस्कराते हुए बोली ,

"वोह , वोह , मेरा बचा , काट मुम्मा के होंठो में दर्द था , में उनको ठीक कर रही थी..." बेबी बेहद शरमाते हुए बोली ,

"हम्म , में बेवकूफ हु , न में चेहरे से बन्दर लगती हु , मेरे पापा को जानती हो , इस दुनिआ के , इस ब्रह्माण्ड के , सबसे चालू पापा है वोह , जब दो लड़कियाँ चूमा छाती करती हैं , मतलब वोह लेसबु होती हैं , अप्प दोनों लेसबु हो , है न..." फर्जी मुस्करा कर बोली ,

बेबी और काट , फर्जी की बात सुन चौंक गई , उनके मोह खुले के खुले रह गए , काटो तोह खून नै , वोह बात हो गई , लेकिन सबसे बड़ी बात , उनकी बेटी यह सब कैसे जानती थी , वोह यह जानना छह रही थी ,

काट और बेबी इक दूसरे की तरफ देख घबरा सा गई , उन दोनों के चेहरे बेहद रोटू हो गए , मनो अभी रो देंगी , उनसे कुछ बोलै भी नै जा रहा था ,

"ओह्ह हो मुम्मा , अप्प चुप क्यों हो गई , में अप्प दोनों से नाराज़ नै हु , बल्कि मुझे बहुत ख़ुशी हुई , के अप्प दोनों इक दूसरे को बेइंतहा चाहती हो , और यह बात में बहुत पहले से जानती थी..." फर्जी , काट और बेबी का हाथ चूमते हुए बोली ,

"व्हाट , कब , ओह्ह , मतलब बीटा कब से..." काट शर्म से लाल होते हुए अपने माथे पर हाथ मरते हुए बोली ,

"अज्ज से ठीक 4 साल पहले जब बेबी मुम्मा आपसे मिलने गई थी , तब पहली बार मने आपको देखा , अप्प इक दूसरे को कितना प्यार कर रही थी..." फर्जी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"व्हॉट , काट , यह क्या किया तुमने..." बेबी उस मुलाकात को यद् कर अपने माथा पीटते हुए बोली ,

"अरे जान , अभ मुझे क्या पता था , इक बची हमें देख लेगी , तोह यह सब होगा , उस वख्त , उस वख्त , में तुम प् कर पागल हो गई थी , मुझे माफ़ कर दो बेबी..." काट अपनी कमज़ोर भावनायिओं में बहकर रट हुए बोली ,

"उफ़ , ओह्ह , मुम्मा चुप हो जाओ , में कोनसा आपको घर से निकल रही हु..." फर्जी , काट को बहु में भर , उसके चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"बीटा , अभी तुम छोटी हो , तुम्हारी बतिअन सुन हमें शर्म अति है , कुछ बतिअन दिल में दफ़न कर लिया करो , प्लस..." बेबी बेहद शर्मिंदा होकर शर्मा कर बोली ,

"जी मुम्मा , में समाज गई , में आपसे इस बारे में कभी बात नै करुँगी..." फर्जी बेहद मसोमीयत से बोली , तोह काट और बेबी दोनों ने उसे बहु में भर लिया ,

"ाचा मुम्मा , में कोमल मुम्मा के पास जा रही हु... " फर्जी यह बोल , बीएड से उतर बहार की तरफ जाने लगी , तभी वोह रुक गई और पीछे पलट कर बोली..." मुम्मा अप्प दोनों में से लड़का कोण है..." यह बोल फर्जी रूम से बहार भाग गई ,

फर्जी की बात सुन बेबी और काट ने इक दूसरे की तरफ देखा , और बेहद हस्ते हुए , इक दूसरे के गले लग गई...

रत के 8 बजे...

ख़ुशी रूम में लेती सो रही थी , शराब इंसान पर हावी हो जाती है , उसे दुनिआ की सचाई (रियलिटी) यद् नै रहती , वोह भूल जाता है , वोह कोण है , कैसा है , ाचा है या बुरा है , उसे कैसे बात करनी है , मतलब उसका दिमाग खुद की रची कल्पनीयों को सच मैंने लगता है , उसे लगता है वोह सही है , छोटी छोटी बातिओं पर रूत जाता है , लड़ने पर उतारू हो जाता है ,

लेकिन शराब पेट क्यों हैं , कभी गम में , कभी ख़ुशी में , कही प्यार मिलने की ख़ुशी होती है , कभी दोस्त मिलने की , कभी रोज़ की आदत मन कर , कभी वासना में बह कर ,

लेकिन 100 में से 80 लोग किसी दुःख में बह कर शराब का सेवन करते हैं , किसी को नौकरी नै मिल रही , किसी को शोकरि नै मिल रही , किसी का प्यार धोकेबाज है , किसी को अपनी थकन मिटानी है , और किसी को पैसे उड़ा कर मज़ा लेना है ,

यह सब आम सी बतिअन है , लेकिन जब प्यार में धोका मिले , उन पलु का दर्द , कितना दर्दनाक होता है , आँखों से खून बेहटा है , जीने की ीचा डैम तोड़ देती है , कही चैन नै अत , दिल करता है मर जाये , कही दफ़न हो जाये जिन्दा , हम सब इक इक पल , इक इक लम्हा , किसी को बेहद शिदत से मोह्हबत करते हैं , उसकी ख़ुशी में , उसके दर्द में , सबसे अग्गे रहते हैं , क्यों , आखिर क्यों , वोह इंसान हमें धोका देता है , जब के हम में , कोई कमी नै होती , न डोलत की , न जिस्मानी , इसका जवाब है किसी के पास... नै होगा , हो hi नै सकता , क्यों , और ऐसे इंसान कभी जिन्दा नै रहते , वोह बिन बताये डैम तोड़ देते हैं , धोखेबाजो के लिए दो लाइन्स है ,

[ के , चेहरे तोह बहुत मिल जायेगे खूबसूरत ,

पर जब बात दिल की होगी , हर जाओगे तुम :क्राई:

हम जितना प्यार , न कोई करेगा , न कर पायेगा ,

क्यों हमने अपनी सांसे भी तुम्हारे नाम की थी....]

हम भी बेवफा हैं , हम भी धोकेबाज हैं , हमने भी किसी न किसी को धोका दिया होगा , या दे रहे होंगे , तोह फिर शराब क्यों न पिए , हमारे दर्द की दवा है , यह सभी बतिअन हमारी तामस (ख़ुशी) की थी ,

(प्लीज रीड अपडेट -53 )

ख़ुशी जो रवि से बेपनाह प्यार करती थी , जो रवि के लिए पिछले जनम में पवितर रही , उसके लिए जान दी , उसका प्यार न मिलने से दारू पीने में दुब गई , कहते हैं , कुछ ादश्यां हर जनम में साथ रहती हैं , और तामस की बेपनाह दारू पीने की आदत , उसके इस जनम में ख़ुशी ने अपना ली थी ,

ख़ुशी बेसुध नशे में डूबी सो रही थी , वोह पेट के बल लेती हुई थी , उसके चेहरे की इक साइड बीएड के मखमली गद्दे पर दबी हुई थी , और दूसरी साइड को उसके लम्बे बालो ने छुपा रखा था ,

तभी कोई उसके पास आकर बेथ गया , वोह रवि था , जिसकी आँखें अभी भी नशे में चुर्र थी , पर बहिन का बदला उसे चैन से सोने नै दे रहा था ,

रवि ने ख़ुशी के ऊपर झुक कर , उसके बालो को बेहद प्यार से उसके गालो के ऊपर से हटा दिया , उफ़ दूध जैसा सफेद नरम गाल रवि की आँखों के सामने था , रवि ने झुक कर ख़ुशी के गाल को चुम लिया , और हल्का सा दांतो में दबा काट दिया ,

"खुशी ..." रवि ने बेहद प्यार से ख़ुशी को कंडे पकड़ सीधा करते हुए धीरे से बोलै , ख़ुशी अभ सीधी लेती थी , पर उसकी नन्द अभी भी टूटी नै थी ,

रवि , ख़ुशी के खूबसूरत , मासूम चेहरे को देखता रहा , फिर रवि , उसके चेहरे पर झुक गया , उसके होंठ , ख़ुशी के गुलाबी नरम होंठो से कुछ hi दूर थे ,

रवि ने अपनी जीभ निकल , ख़ुशी के गुलाबी होंठो को चाट लिया , उफ्फ्फ रवि से और सेहन न हुआ , उसने झुक कर ख़ुशी के होंठो को मोह में भर लिया , और धीरे धीरे ख़ुशी के होंठो को चूसने लगा ,

होंठ माखन से भी नरम थे , जब रवि उनको थोड़ा दबा कर चुस्त तोह , वोह शहद की तरह घुलते जाते मोह में , रवि अभ बेहद शिदत से , बेहद सकूं से , ख़ुशी के होंठो को कास कास कर चूस रहा था ,

िका इक ख़ुशी की आँखें खुल गई , रवि को अपने होंठ चूसते प् , ख़ुशी बेहद खुश हो गई , अज्ज तामस रूप में उसे पहली बार रवि ने चूमा था , वोह प्यार के इस लम्हे में खो सा गई ,

रवि होंठ चूसते चूसते ख़ुशी के ऊपर ा गया , और उसके बिग बूब्स को हाथ में पकड़ दबाने लगा , ख़ुशी के मोह से सिसकाईआं फूटने लगी ,

रवि ने ख़ुशी के होंठो को कास कर चूमा और फिर , चेहरा ऊपर उठा , उसकी आँखों में देखने लगा , ख़ुशी ने शर्मा कर चेहरा दूसरी तरफ कर लिया ,

"खुशी..." रवि ने ख़ुशी के कण को हल्का सा दांतो में दबा बेहद धीरे से बोलै ,

"ख़ुशी , में तुमसे बहुत करता हु , पर मुझे तामस से अधिक प्यार है , जानती हो क्यों , क्यों की तामस ने मेरे लिए पारी लोग छोड़ दिया , मेरे साथ हेलल में रही , और मने अपनी तामस को कभी नै समझा , तामस में तुम बहुत प्यार दूंगा..." रवि ने ख़ुशी का चेहरा सीधा कर , उसकी आँखों में देखते हुए , बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"बेवकूफ , रुला दिया मुझे , में तेरे साथ कही भी रहने को त्यार हु , तुमसे इश्क़ है , मोह्हबत है , और तुम्हारे लिए किसी भी हद तक जा सकती में , शिकार पर चले..." ख़ुशी ने उठ कर बैठते हुए बेहद अजीब से भाव लेट हुए बोलै ,

"नेकी और पूछ पूछ , लेकिन अज्ज शिकार को नोच नोच कर खायेगे , समाज गई..." रवि बीएड से उठ कर बेहद ख़ुशी में बोलै ,

"वुहुम , चलो..." ख़ुशी भी उठ कर रवि का हाथ पकड़ समाये यंत्र का निर्माण कर , उसे अपने शिकार असलम खान के पास ले गई...

दूसरी तरफ....

"टिक , टिक , टिक , इस खेल में बहुत मज़ा है , है न रेखा , किसी को चुप कर डरना , उफ़ उस डरे हुए इंसान का चेहरा देख , मन को कितना सकूं मिलता है..." वोह नकाबपोश औरत अँधेरे में घूमते हुए बोली ,

"मुझे किसको डरना है..." रेखा जो कल रत से बिजली के जटके खा खा कर कमज़ोर हो चुकी थी , बेहद घम्बिर होकर बोली ,

"काट को , वोह जितना डरेगी , उसकी ताकत उतनी बढ़ेगी , धीरे धीरे वोह , वह के हर इंसान की , पूरी शक्ति चूस लेगी , सब कमज़ोर हो जायेगे , और वही वख्त होगा , सुहाना के ऐनी का..." वोह नकाबपोश औरत बेहद ख़ुशी में हस्ते हुए बोली ,

"जाती हु डरने में काट को..." इतना बोल रेखा वह से गयाब हो गई...

रेखा वह से गयाब हो गई , तब वोह नकाबपोश औरत बेइंतहा हसने लगी , आखिर उसने पहला कदम उठा लिया था ,

"हम्म , अभ मेरे मालिक की निर्दयी दानवी सेना , पृथ्वी पर आतंक मचा देगी , हर तरफ विनाश लोग , लोग पूजा करेंगे , मेरे मालिक की , और रवि तुम उस सेना को कभी नै रोक पाओगे , खीयीकहींईईई...." वोह औरत मन hi मन सोचते हुए बोली ,

[ के , बुराई हर कदम पर रोकती है रास्ता प्यार का ,

दो , चार कदम उठा , खुद को भगवन समाज लेती है.. ]

लेकिन यह सारा खेल न तोह जोकर का था , और न उस औरत का , यह सब खेल था रिंग का , आखिर शेतीअन पृथ्वी पर ऐनी को तड़फ रहा था , और इसका इक मटर रास्ता कोमल की मौत थी , शेतीअन की निर्दयी सेना , पृथ्वी पर ऐनी को बेक़रार थी....

तो बे कुनिटेड....
 


अपडेट-98

अभ अग्गे...

मिथली शहर में जंगल के पास इक पहाड़ी इलाका था , जो 50 किलोमीटर तक फैला हुआ था , इस पहाड़ी इलाके के इक तरफ बेहद गर्मी और धुप पड़ती थी , और दूसरी तरफ बर्फ जैसी ठण्ड ,

अजीब सा मासूम था , लेकिन यह मौसम पिछले कुछ सालो से उपजा था , पहले इतने थोड़े इलाके में ऐसा मौसम नै था ,

इक तरफ बेहद धुप , इक तरफ बेहद बर्फ , और बर्फीले इलाके के साथ , 500 कम तक फैला वंश जंगल ,

उस पहाड़ी इलाके में , इक बड़े से पहाड़ के निचे इक सुरंग बानी हुई थी , जो अग्गे जाकर इक खुफ़िआ बिल्डिंग में तब्दील हो जाती थी , मतलब पहाड़ को अंदर से काट कर , यह खुफ़िआ जगह बनाई गई थी , सबसे बड़ी बात यह चारो तरफ से कवर थी , किसी बम या किसी दुश्मन का कोई हमला यहाँ काम नै करता था ,

असलम खान अकेला वह छुपा हुआ था , गुफा से बहार उसके आदमी पहरा दे रहे थे , लेकिन अंदर उसके पास ऐनी की इजाजत किसी को नै थी ,

असलम खान बैठा टीवी देख रहा था , यहाँ इस खुफिया बनकर में बिजली का पूरा पारबन्द था , 3 जनरेटर चल रहे थे ,

असलम खान के हाथ में शराब का भरा गिलास था , वोह टीवी पर अति हुई न्यूज़ देख रहा था , के तभी उसे कुछ अहहत सुनाई दी ,

"कताककककक..." इक लड़की का बक्सा जमीन पर गिर गया , असलम खान के रंग उड़द गए , वोह इक डैम से अपनी गन उठा , उस तरफ बढ़ने लगा , लेकिन जब उसने वोह लकड़ी का छोटा सा बॉक्स उठाया , वह कोई भी नै था ,

असलम खान ने अपने माथे पर आयी , पसीने की कुछ बूंदे साफ की , और as-pas देखने लगा , उसने अपनी गन लोड कर ली ,

"बिला , रखा , कहा हो , अंदर ायो..." असलम खान अपने अद्मयों को आवाज़ देने लगा , पर उसकी आवाज़ बहार जा hi नै रही थी ,

"बहुत अछि दारू है , अहह मज़ा ा गया..."

इक आवाज़ असलम खान के कनु में पढ़ी , उसने इक डैम से पीछे पलट कर देखा , उसकी तरफ पीठ किये , कोई सोफे पर बैठा , शराब पे रहा था , यह और कोई नै , बल्कि रवि था ,

असलम खान धीरे धीरे उस आदमी की तरफ बढ़ने लगा , और उसके पीछे पहुँच , अपनी गन रवि के सार पर लगा दी ,

"kk...kon ..hh..ho...tt...tum..." असलम खान बेहद कंपते हुए हकला कर बोलै ,

"हम्म , गन हटा लो , डेविल इक छोटी सी गोली से नै मरने वाला , बेकर कोससिह होगी..." रवि बिना पीछे पालते दारू के छोटे छोटे सिप लेता हुआ बोलै ,

"रखा , बिला , कहा हो तुम..." असलम खान चीला कर बोलै ,

"ओह्ह्ह बेचारा , मौत का दर , हुऊ , मौत का दर भी अजीब है , देखो न , तुम इक डॉन होकर , कितना दर रहे हो , अह्ह्ह , लोग फ़ज़ल में तुमसे डरते हैं..." रवि धीरे से मुस्करा कर बोलै ,

"अह्ह्ह्ह बकवास बंद करो , वार्ना यही थोक दूंगा..." असलम खान गन रवि के सार पर दबा गुस्से में चीखता हुआ बोलै ,

"तुम बेवकूफ हो यार , खुशियी , ायो यार खाने का वख्त हो गया..." रवि बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"kk..kaisa खाना..." असलम खान घबराते हुए इतना hi बोलै था , के किसी ने पीछे से उसके कंडे पर हाथ रखा ,

"yaaaahhhhhhhhhh ...." असलम खान बेहद दर से चीखता हुआ पीछे गिर गया , क्यों की उसने जो देखा था , वोह सच में रूह कंपा देने वाला था ,

उसकी आँखों के सामने ख़ुशी कड़ी थी , खून से लथपथ , उसके हाथ में किसी इंसान का हाथ था , जो वोह बेहद मज़े से दांतो में चबा चबा कर खा रही थी ,

"ख़ुशी बचे को डरा दिया तुमने..." रवि सोफे से उठ कर ख़ुशी के करीब अत हुआ बोलै , ख़ुशी उस हाथ से इक ऊँगली दांतो से उखड चबाते हुए मुस्कराने लगी ,

"rrr...raviii..tt..tumm..." असलम खान दर से कप्टा सोफे से पीठ लगता हुआ बोलै ,

"शठ , अहह जान कितनी खूबसूरत लग रही हो , उम् , दिल करता है चुम लू तुम..." रवि , ख़ुशी के खून से लथपथ गाल अपनी जीभ से छत्ते हुए बोलै ,

"उम् , यह खा कर देखो , बहुत टेस्टी है..." ख़ुशी , रवि के होंठो से होंठ मिला , जो ऊँगली वोह चबा रही थी , वोह रवि के मोह में डालती हुई बोली , फिर ऐसे hi दोनों इक दूसरे के होंठो को चूसने लगे , रवि के हाथ ख़ुशी की कमर पर कास गए ,

असलम खान भय्बीत हुआ दोनों को देख रहा था , उसकी गांड फैट रही थी , उसे दर लग रहा था , वोह कम्प रहा था , उसे अपने किये बुरे करम यद् ा रहे थे , पर शयद अभ सब फ़ज़ल था ,

रवि और ख़ुशी के मोह में मास्स के टुकड़े घूम रहे थे , वोह कभी ख़ुशी के मोह में जाते तोह कभी रवि के मोह , डेमों ख़ुशी अभ मदहोश हो चुकी थी , डेमों ख़ुशी को यह प्यार सदियों में पहली बार मिल रहा था ,

असलम खान ने गन का निशा रवि पर लगाया , और डरते डरते फायर कर दिया , "Dishhhuuuuunnnnnnnnnnmm..." गन से तेज़ आवाज़ करती इक लोहे की गोली , आग बरसाती बेहद तेज़ रफ़्तार से रवि की तरफ बढ़ी ,

गोली तेज़ी सी हवा में अग्गे बढ़ती रवि की सीने से टकराई , और उसके जिस्म को फाड़ती दूसरी तरफ निकल गई ,

पर असलम खान की गोट्यां उसके मोह में गई , जब उसने देखा , उसकी चलाई गोली का रवि पर कोई असर नै हुआ , वही ख़ुशी और रवि दोनों असलम खान से बेखबर अपने प्यार भरे चुमन में खोये हुए थे ,

असलम खान वह से उठ कर भगा , पर वोह फिर से चौंक गया , क्यों की उस बैंकर की दीवारों पर अभ कोई दवाजा नै था ,

"dd...dd...darvajaa..." असलम पसीने से लथपथ छलकता हुआ बेहद धीमी आवाज़ में बोलै ,

"कहा जा रहे हो..." यह आवाज़ सुन जैसे hi असलम खान पलटा , उसके पीछे ख़ुशी कड़ी थी , उसका आधा चेहरा जला हुआ था , इक आँख भी बिलकुल काली थी , वोह दिखने में बेहद ब्यांक थी , अज्ज ख़ुशी , डेविल रवि का प्यार गहराई से महसूस कर , अपने अंतिम रूप में ा गई थी , अभ वोह डेमों थी ,

"aaaahhhhhhhhhhhhh....." असलम पीछे हत्ता दीवार से टकराते हुए चखा , उसका जिस्म पूरा कम्प रहा था , वोह यह तोह जनता था , मौत आएगी , पर इतनी ब्यांक , यह उसने कभी सपने में भी नै सोचा था ,

"क्या कर रही मेरी जान... " रवि , ख़ुशी को पीछे से बहु में भरता हुआ बोलै , रवि के होंठ ख़ुशी की गर्दन पर लगे इंसानी खून को चाट रहे थे ,

"अह्ह्ह्ह उम्म्म डेविल , अह्ह्ह इस चूतिये का खून पीना मुझे उम्म्म , ईईईई छोड़ू मुझे..." ख़ुशी बेहद सिसकते हुए बोली , जब के रवि के हाथ उसके कैसे हुए मम्मो को मसल रहे थे ,

"तुम अह्ह्ह तुम लाजवाब हो जानेमन..." रवि ने अभ कास कर ख़ुशी के मम्मो को दबाते , अपना लुंड ख़ुशी की मखमली गांड पर घिसते हुए बोलै ,

"10 मिंट अह्ह्ह्ह मम्मा रुक जाओ..." ख़ुशी पूरी तरह मदहोश होते हुए बोली , जब की असलम खान 3 रूम्स जितने बड़े बैंकर में ेहडेर ोहडेर भाग रहा रहा , कही से निकल जाये ,

रवि ने ख़ुशी को घुमा कर दीवार से लगा दिया , और उसकी आँखों में देखते हुए , अपनी जीभ निकल दी , ख़ुशी ने अपना चेहरा अग्गे कर , अपनी जीभ निकल रवि की जीभ को चाटने लगी ,

"बचाऊऊऊ , कोईई हाइइइइ... " असलम खान ेहडेर ोहडेर भागता हुआ छीलते हुए बोलै ,

"आठ हाहाहाहा , यह कुछ जायदा hi शोर कर रहा , पहले इसका काम तमाम करते हैं... " रवि इक डैम से पलट कर असलम खान की तरफ बढ़ता हुआ ,

"नयी छोड़ दो म्युज़िए..." असलम , गिड़गिड़ाते हुए बोलै ,

रवि इक डैम से असलम खान के करीब आया , और जोरदार थपड उसके मोह पर जड़ दिया , असलम दर्द से कहरहते जमीन पर गिर गया , उसके मोह से आधे दन्त उड़ते हुए खून के साथ दूर जा गिरे ,

ख़ुशी भी रवि के पास आयी और उसने झुक कर असलम को उठा लिया , और सोफे के पास पढ़े कांच के टेबल पर लिटा दिया ,

फिर रवि और ख़ुशी इक दूसरे के सामने बेथ गए , ख़ुशी ने असलम खान के कपडे फाड् दिए , और फिर रवि की तरफ देखा ,

दोनों इक साथ असलम खान के ऊपर झुक गए , रवि इक तरफ से असलम खान के सीने को दांतो से काट काट कर उसका मास्स उखाड़ने लगा , तोह ख़ुशी दूसरी तरफ से , असलम खान दर्द से चिलता उठने की कोससिह करने लगा , पर वोह कुछ न कर पाया , क्यों की दोनों ने उसे कण्डु से दबा रखा था ,

असलम खान के सीने की बोटी बोटी नोचते नोचते , दोनों के चेहरे खून से लाल हो गए थे , खून की बूंदे उनके चेहरे से निचे गिर रही थी ,

असलम खान दर्द में कहरहटा अभ बेहोश हो गया था ,

िका इक रवि ने अपना हाथ उसके सीने में घुसा दिया , और ख़ुशी ने भी , और दोनों असलम खान के सीने से उसके सभी अंगु को उखड उखड कर ऊपर की तरफ उछलते हुए , बेइंतहा हसने लगे , उनके हसने का शोर बेहद ब्यांक था , दोनों की आँखें लाल थी , मोह में असलम खान का मास्स घुसा हुआ था ,

दोनों पगलू की तरह हस्स रहे थे , आखिर दोनों ने अपने मोह असलम खान के फाटे हुए सीने में घुसा दिए...

दूसरी तरफ....

इक बेहद अँधेरी जगह , दूर तक फैला घोर अंधकार , और उस अँधेरे में चमकते सितारे , यह था हमारा अनंत ब्रह्माण्ड , पता नै लखु ग्रह , अनंत दूरी , जिसका कोई अंत hi नै था , और इक पहाड़ जैसा बड़ा उल्का पिंड , जिस पर इक शक़श खड़ा था ,

"मेरे मालिक , मेरा ज़ुका सार सवीकार करू..." इक काळा लिबास में लिपटी औरत इक बेहद अजीब से बेहद बड़े इंसान के अग्गे कड़ी थी ,

"हुऊ , वोह लड़की अभ भी जिन्दा है , अगर बादशाह ड्रीमन को पता चला , तोह सबकी सांसे चीन लेगा वोह , सबको ख़तम कर देगा..." वोह इंसान अपने अपने काळा हाथ को नकाब से बहार निकलता हुआ बोलै ,

"मालिक , उसका मनहूस भाई , उसे बचा रहा हमसे , और अभ तोह उसके पास सभी हैं , वोह इक साथ हैं , उनका कुछ नै भिगाड हम सब...." वोह औरत बेहद घबरा कर बोली ,

"रिंग के होते दर कैसा , यह रिंग पृथ्वी पर पाप को बड़ा रही , तेन की , ड्रीमन पृथ्वी पर अकर्मण कर सके , यह लो ..." वोह इंसान इक बड़ा सा चमकता पत्थर , उस नकाबपोश औरत को देते हुए बोलै ,

"खीयकहीईई अभ आएगा मज़ा..."

"हुऊ , पृथ्वी पर हमारी दानवी सेना तबाही मचा देगी , तभी सुहाना , कोमल की बलि देगी , फिर शेतीअन ड्रीमन का सदियों पुराण मकसद पूरा हो जायेगा..." वोह इंसान इतना बोल वह से गयाब हो गया , और वोह नकाबपोश औरत पृथ्वी पर ा गई... अभ दानवी सेना पृथ्वी पर ऐनी को बेक़रार थी...

दूसरी तरफ...

"थेमा मम्मू नंद ा ली यल , टालो सोने टेल..." कोमल , सीमा का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए बोली , पर फिर कोमल रोने लगी ,

"कोमल , मेरा बचा क्या हुआ , क्यों रो रही हो..." सीमा भी नाम अखन करते हुए कोमल को अपनी बहु में भरते हुए बोली ,

"मम्मू मुझे ढय्या ते ठाठ (पास) दाना है.." कोमल और भी रट हुए बोली ,

"बस आने वाले है भइआ , शठ , मेरी कोमल बहुत अछि है , बहुत सयानी है ..." सीमा मुस्कराते हुए कोमल का चेहरा चूमते हुए बोली ,

"धईआआआ..." कोमल , सीमा के गले लगे बेहद जोर से चीखते हुए बोली ,

"कोमळळ..." तभी दोनों को कोई आवाज़ सुनाई दी , कोमल ने पीछे पलट कर देखा , तोह उसका भाई खड़ा था ,

"धईआए..." कोमल भागते हुए अपने भाई के गले लग गई , उफ्फ्फ कितना सकूं देने वाला पल था , मोह्हबत फिर से इक हो गई थी....

तो बे कुनिटेड... [Friends update thode short hain , kyu ki hospital me etna wakht nai milta , jab bhi dil karta hai , thoda thoda likhta rehta hu , 2 , 4 din bad update bade aya karege... shukariya... ]

 
फ्रेंड्स 9 बजे अपडेट पोस्ट कर दूंगा .. शुक्रिया
 


अपडेट-99

अभ अग्गे...

"ढय्या तहा (कहा) थे तप..." कोमल , रवि के चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"में तुम्हारे पास था , ाचा चलो सो जाओ अभ , पूरा दिन खेलती रहती हो , थक गई हो तुम , चलो सोते हैं..." रवि , कोमल का हाथ पकड़ उसे बीएड पर ले आया ,

सीमा दोनों को कुछ देर देखती रही , और फिर रूम से बहार चली गई , वोह अभी सेड्यां उतर hi रही थी , के उसे चाकर ऐनी लगे , वोह चीख भी न पायी और सेडीईओं से गिर गई ,

गिरते हुए उसका सार सेडीईओं के इक तरफ दीवार से जा टकराया , सीमा ने उठने की कोससिह की , पर फिर वोह वही गिर कर बेहोश हो गई ,

"सीमा डीडीई..." अचानक से ख़ुशी छीलते हुए वह ा गई ,

उसने सीमा का चेहरा थप थापा कर उसे जगाना चाहा , पर कुछ असर न हुआ , ख़ुशी ने अपना हाथ सीमा के माथे पर रख उसे अपनी शक्ति से होश में लाना चाहा , पर तभी , ख़ुशी वह से गयाब हो गई , और सीमा वही पढ़ी रही बेहोश ,

वही दूसरी तरफ कोमल और रवि बीएड पर लेते हुए थे , कोमल ने अपना सार रवि के कंडे पर रखा हुआ था , और मुस्कराते हुए कुछ सोच रही थी , रवि प्यार से कोमल के बालो को सेहला रहा था ,

उफ़ अजीब मोह्हबत थी , आवारापन था , दीवानापन था , रवि , कोमल को पाना चाहता था , पर क्या कोमल पाने की चीज़ थी , क्या कोमल हवस मिटने की चीज़ थी ,

नै , कोमल महसूस करने की चीज़ थी , प्यार करने की चीज़ थी , उसे अपने भाई से बेइंतहा प्यार था , पर रवि उसे अभी तक प् नै सका था , क्यों की रवि उसके नयाब खूबसूरत जिस्म को भोगना चाहता था ,

"धईआए ते ठाठ (थक) दई अज्ज..." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

"हम्म , पूरा दिन शरारतीयं करती रहती हो , ाचा इक बात बताओ , तुम सबसे जायदा प्यार किस से है दुनिआ में..." रवि , कोमल के बालो को प्यार से सहलाता हुआ बोलै , रवि बेहद शिदत से कोमल को महसूस करते हुए बोलै था , उसके शबदो में बस दर्द hi दर्द था ,

"आपसे भइआ..." कोमल बेहद ख़ामोशी से बोली ,

रवि चौंक गया , कोमल ने अभ तुतला कर नै बोलै था , पर क्यों , क्या वोह जानबूझ कर यह सब कर रही थी , क्या उसने खुद को किसी मायाजाल में कैद किया था , क्या वोह सही थी ,

कोमल को समाज पाना नामुमकिन था , कोमल के मन में क्या था , वोह क्या पाना चाहती थी , इक डेविल का प्यार , या इक भाई का प्यार , या बस प्यार ,

इंसान चाहे लाख सोच ले , पर कई बार सब रस्ते बंद हो जाते हैं , तब दर्द , तन्हाई , अकेलापन , उसे चारो तरफ से घेर लेते हैं , इंसान जब कुछ प् नै सकता , तब वोह टूट कर भीकर जाता है , रवि , कोमल को पाना चाहता है , तभी वोह अंदर से कमज़ोर है ,

"तुम , तुम , ठीक हो गई हो , तुम , तुम , अभ बच्चू जैसा नै बोल रही हो , कोमल , तुम ठीक हो ..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"में ठीक हु , हमेशा ठीक थी , पर आपका दर्द मुज़से सेहन नै होता , आपके मन में क्या चल रहा , यह में महसूस कर सकती हु , वोह मेरा खुद का रचा मायाजाल था..." कोमल अपने भाई के गाल को चूमते हुए बोली ,

"इतना गहरा प्यार , उफ़ तुम मेरे लिए क्या क्या नै कर रही , कैसे , कैसे तुम मेरा दर्द महसूस कर लेती हो , में क्यों नै कर पता तुम महसूस..." रवि , कोमल के नरम होंठो को चुम कर बोलै ,

"भइआ , आपके मन में वासना है , अप्प मुझे पाना चाहते हो , अप्प मुझे दूसरी लड़कयों जैसा समज़ते हो , हाँ यह बात अलग है , मुझे भी आपसे प्यार करना है , पर मेरे प्यार में वासना नै , पर आपके प्यार में वासना है , और जब तक अप्प मेरे जिस्म को भोगने की ीचा रखोगे , कोमल आपसे दूर रहेगी , जिस दिन अप्प मुझे महसूस कर लोगे , कोमल आपकी हो जाएगी , तब तक मुझे बची रहने दो..." कोमल ने बेहद मसोमीयत से बोलै ,

"नई , प्लस अभ नई , कोमल , कोमल , अभ तुम बची मत बनना , मुझे नै चाहये कुछ , मुझे तुम्हारा जिस्म नै चाहये , मुझे बस महसूस करना है तुम , में रो रहा हु अंदर से , दिल में दर्द सा उठ रहा है , तुम कोई भी मायाजाल अभ नै रचुगि , तुम मेरी कसम , प्लसस , कोमल तुम , तुम जो कहुगी में वही करुगा...." रवि बेहद नाम आँखों से कोमल के चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

"वासना , वासना अप्प सेहन नै कर सकते , भइआ यही सही होगा , यह आपकी परीक्षा है , अगर मुझे पाना है , तोह कहकर बनो , डेविल बनो , विनाश कर दो पिता जी का..." कोमल इतना बोल आँखें बंद कर सो गई....

दूसरी तरफ...

बेहद सुनसान सी जगह , दूर तक फैली बंजर जमीन , कोई पेड़ नै , कोई पहाड़ नै , धीमी धीमी काली रौशनी , पर इतनी भी नै के कुछ दिखाई न दे , लेकिन यह जगह थी कोनसी ,

"अह्ह्ह्ह मेरा सार.."

अपने सार को पकड़े ख़ुशी जमीन से उठ , कड़ी होते हुए बोली , उसने अपना सार दोनों हाथो में पकड़े as-pas नज़र दोड़ै , उफ़ वोह समाज गई , यह पृथ्वी तोह नै है , लेकिन यह किसकी दुनिआ है ,

"कोई हैईईई , यह किसकी दुनिआ हीी , सामने आयु..." ख़ुशी बेहद छीलते हुए बोली , उसकी आवाज़ उस शांत माहौल में दूर तक फैल गई , लेकिन कोई नै आया था , वोह अकेली थी वह , यहाँ तक ख़ुशी की नज़र जाती , वह तक बस काली जमीन नज़र अति ,

ख़ुशी ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया , पर उसे कुछ महसूस न हुआ , ख़ुशी जान गई के वोह इक मायाजाल में फास चुकी है , किसी से कोई मदद नै ले सकती ,

"उफ्फ्फ , कहा फास गई में , पर हुआ क्या , सीमा देदी के माथे पर हाथ रखा , और यहाँ ा गई , उफ़ कुछ समाज नै ा रहा , अभ वापिस कैसे जाऊ , रवि का इंतज़ार करना होगा..." ख़ुशी बेहद उदास होकर बोली , वोह चलते जा रही थी , इक पल के लिए भी नै रुक रही थी ,

इक जैसी जमीन थी , ख़ुशी को समाज नै ा रहा था के वोह कहा जा रही है , कही वोह गोल गोल तोह नै घूम रही , ऊपर से वोह शक्तिहीन थी , किसका मायाजाल था यह , ख़ुशी परेशान थी , बहुत परेशान ,

आखिर ख़ुशी चलते चलते थक गई , और वही बेथ आराम करने लगी , उसे इंतज़ार करना था बस रवि का , इस मायाजाल से , बस वही उसे निकल सकता था ,

दूसरी तरफ...

सीमा अभी भी वही पढ़ी हुई थी , िका इक बेबी अपने रूम से बहार आयी , उसे फर्जी के लिए पानी लेना था , पर किचन के पास उसने सीमा को बेहोश पढ़े देखा ,

"सीमा डीडीई..." बेबी चीख मरते हुए सीमा के पास आयी , और निचे बेथ सीमा को होश में लेन लगी ,

पर सीमा को होश नै ा रहा था , बेबी रोने लगी , वोह रट हुए सेड्यां चढ़ रवि के पास गई ,

"रवीए , रवीए , जल्दी बहार ायो..." बेबी बेहद रट हुए चीख कर बोली ,

"क्या हुआ बेबी..." रवि इक डैम से बहार अत हुआ बोलै ,

"वोह , वोह , सीमा देदी..." बेबी यह बोलते बोलते रोने लगी ,

"kk...kya हुआ.." रवि बेहद उदासी में बोलै , पर वोह समाज चूका था , आखिर बात क्या हुई है , सीमा की हालत उसने महसूस कर ली थी ,

"मेरे साथ ायो..." बेबी यह बोल भागते हुए सेड्यां उतर गई , और रवि भी उसके पीछे पीछे सेड्यां उतर निचे ा गया..

रवि ने निचे आकर देखा , सीमा बेहोश पढ़ी हुई थी , रवि तेज़ी से निचे बेथ गया , और सीमा के चेहरे को thap-thapa उसे होश में लेन की कोससिह करने लगा ,

पर सीमा तोह जैसे गहरी नंद में चली गई थी , शयद अभ सुहाना की यदिअण फिर से उस पर हावी होने लगी थी , इस बात से रवि की चिंता अभ बेहद बढ़ गई थी ,

"क्या हुआ सीमा को..." बेबी भी रवि के पास बेथ बेहद रट हुए बोली ,

"पता नै , ख़ुशी को बुलायो जल्दी , उसे वरदान मिला है , किसी को भी ठीक करने का , जल्दी लायो उसे... " रवि बेहद गुस्से में बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी ,

तब तक वह , काट , रिमी , शूरति , लारा , एलिज़ाबेथ , सभी ा चुकी थी , वोह सब भी बेहद उदास हो गई थी , उनको भी सीमा से बेहद लगाव था , उनकी आँखें खुद बा खुद नाम हो गई थी ,

"सीमा उठो प्लस , प्लस उठ जाओ , उठती क्यों नै तुम , क्या हुआ तुम..." रवि बेहद नाम आँखों से बेहद गुस्से में बोलै ,

तभी इक डैम से रमा के रूम का दरवाजा खुला , और रमा उड़ते हुए उन सबके पास ा गई , उसके लाल जादुई बाल , चारो तरफ उड़द कर , सबके चेहरों को छू कर महसूस करने लगे ,

काट ने अज्ज पहली बार रमा को देखा था , उसकी जुबान सील हो गई , वोह पत्थर की तरह खामोश हो गई , उसकी आँखें खुद बा खुद नाम होने लगी , उसने पहले कभी रमा को यहाँ नै देखा था ,

"माँ , क्या हुआ माँ को..." रमा बेहद नाम आँखों से सीमा के पास बेथ उसके चेहरे पर हाथ फिरते हुए बोली ,

"तुम , ओह्ह तुम रूम से बहार क्यों आयी..." रवि को रमा पर बेहद गुस्सा आया , क्यों की काट भी यहाँ थी ,

"शहहह , मेरी माँ को क्या हुआ , बताओ मुझे , वार्ना सबकी जान ले लुंगी में..." रमा अपने वेह्शी रूप में एते हुए बोली , उसके बालो ने वह खड़े हर इंसान को जकड लिया ,

तब तक बेबी भी वह ा गई , वोह बेहद चिंता में थी , क्यों की ख़ुशी वह नै थी , ख़ुशी उसे कही नै मिली थी , लेकिन रमा को देख , उसने अपना माथा पीट लिया ,

"बबयय , बचाओ मुझे..." काट बेहद रट हुए बोली ,

"काट..." बेबी बेहद चिंता में उसकी तरफ बड़ी , तब रमा के बालो ने उसे भी जकड लिया ,

"रमा पागल हो गई तुम , क्या बच्चू जैसी हरकत है , छोड़ू सबको..." रवि गुस्से में चीखता हुआ उठ कर बोलै ,

"मेरी माँ को होश में लयऊ , वार्ना पूरी दुनिआ तबाह कर डूंगीए..." रमा भी गुस्से में चीख कर बोली , उसका कला जिस्म जलने लगा ,

रिमी और शूरति अभ दर्द में रोने लगी थी , क्यों की वोह दोनों इंसान थी , और काट भी , काट अभ जोर जोर से रोने लगी थी , इक तोह वोह दर रही थी , और इक उसे दर्द भी हो रहा था ,

"अह्ह्ह में कमज़ोर हो रही हु , क्या हो रहा मूज़ी..." रमा अपने मन hi मन यह सोचते हुए बोली , खुद को कमज़ोर पाकर , रमा और भी गुस्से में ऐनी लगी , रवि भी धीरे धीरे कमज़ोर होने लगा था ,

रवि भी समाज गया था , रमा कमज़ोर हो रही है काट के रोने से , पर उसे पता था , अगर रमा कमज़ोर हुई , तोह उसके लाल बाल , तबाही मचा देंगे , क्यों की वोह उनकी माँ थी , काट के रोने से शयद रमा के बालो पर कोई प्रभाव नै पढ़ रहा था ,

"उफ़ ख़ुशी कही नै मिली , मतलब वोह मुसीबत में है..." रवि मन hi मन यह सोच बेहद उदास होता हुआ बोलै ,

रवि ने निचे झुक सीमा को गॉड में उठा लिया , और उसे लेकर रमा के रूम की तरफ भाग गया , उसने दरवाजे के पास पलट कर इक बार उदास नज़रिओं से रमा को देखा , और फिर वोह अंदर घुस गया ,

"मा , माँ..." रमा भी रवि के पीछे पीछे अपने रूम में घुस गई , उसके बालो ने सबको आज़ाद कर दिया , सब की सब रमा की कैद से आज़ाद होते hi , जमीन पर घुटनो के बल बेथ हाफने लगी ,

बेबी इक डैम से उठी और तेज़ी से काट के पास जाकर , उसे बहु में भर शांत करने लगी , उसे प्यार देने लगी , उसके चेहरे को चूमने लगी , पगलू की तरह...

"bb..babyy ..vv..voh , वोह... bb..bhuttt थी .." काट रट हुए बेहद हकला कर बोली , उसका जिस्म कम्प रहा था , उसे बोलने में दिकत हो रही थी ,

बेबी खुद भी काट के रोने से कमज़ोर हो रही थी , सिर्फ बेबी hi नै सब की सब उसके रोने से कमज़ोर होकर दर्द से कहरः रही थी , लेकिन रिमी और शूरति को छोड़ कर , क्यों की इंसानो पर काट की शक्ति का कोई असर नै होता था ,

"काट , शांत हो जाओ , तुम्हारी जान मर जाएगी , प्लस चुप हो जय , प्लस..." बेबी , काट की बहु में बेहोश सी होते हुए बोली , उसके जिस्म बेहद कमज़ोर होने लगा था , जिस्म का मास्स सड़ने लगा था , बेबी की खूबसूरत सफेद चमड़ी अभ फटने लगी थी , उसके मोह से खून बहने लगा था ,

"बेबी डीडीई..." रिमी बेइंतहा रट हुए चीख कर बोली , वोह बेबी की तरफ बढ़ने लगी थी पर शूरति ने उसका हाथ पकड़ उसे रोक लिया , उसे चिंता थी रिमी की...

लारा और एलिज़ाबेथ का भी यही हाल था , आखिर काट ने जब बेबी की हालत देखि , वोह और भी रोने लगी , पर इस बार वोह बेबी की चिंता में रो रही थी , उसके असनु बेबी के चेहरे पर पढ़ने लगे थे , उसके अमृतमयी असनुईओं ने बेबी के जिस्म को ठीक करना सुरु कर दिया था , धीरे धीरे बेबी को होश ा रहा था , और इक पल आया , जब बेबी बिलकुल ठीक थी ,

धीरे धीरे लारा और एलिज़ाबेथ भी ठीक होने लगी , वोह ठीक होते hi इक दूसरे से लिपट गई , इक दूसरे की बेइंतहा चिंता में , इक दूसरे को चूमने लगी ,

पर अभी कुछ था , जिससे सब अनजान था , बेबी जब ठीक हुई तोह उसने काट के होंठो को चुम लिया , कुछ पल दोनों इक दूसरे के होंठो को चुस्ती रही , फिर बेबी , काट का हाथ पकड़ रूम की तरफ जाने लगी ,

पर तभी बेबी और काट की सांसे थम सा गई , क्यों की उनके रूम के गेट पर , फर्जी कड़ी थी , वोह बेहद रो रही थी , शयद उसने सब देख लिया था , शयद रमा के उस ब्यांक रूप को भी , वोह कम्प रही थी ,

"फारीईई..." बेबी इक डैम से चीखते हुए बोली , पर तब तक फर्जी जमीन पर गिरकर बेहोश हो चुकी थी....

दूसरी तरफ...

इक नकाबपोश औरत , इक अँधेरी गुफा में बैठी हुई थी , अपने तख़्त पर , उसके हाथ में इक चमकता नीला पत्थर था , बहुत अजीब सा , जिस के अंदर बिजलियाँ दौड रही थी , और नीले रंग आपस में gul-mil रहे थे , लेकिन यह था क्या , क्या था इसका रहस्य ,

यह रिंग धारक औरत कुछ बड़ा प्लान कर रही थी , सीमा का बेहोश होना , और फिर इसका यह जादुई स्टोन लाना , मतलब इसका मकसद अभ करीब था ,

क्या रवि ऐसे रोक पता , हाँ रवि अभ अपनी ताकत की अंतिम सीमा पर था , पिछली बार वोह मर गया था , क्यों की उसके पास कोई साथी नै था , पर इस बार उसके पास , उसके सब चाहने वाले थे , जो उसके लिए किसी भी हुड तक जा सकते थे , मतलब जुंग होने को त्यार थी , और इस जुंग में , कुछ बेहद बड़ा होने वाला था...

तो बे कुनिटेड....[Note:- friends kal rat ik bar check kar lena , kossih karuga kal bhi update de saku... ]

 


अपडेट-100

अभ अग्गे...

रवि ने सीमा को बीएड पर लिटा दिया , और उसके पास बेथ गया , वही रमा ने अंदर एते hi रूम का दरवाजा इक डैम से बंद कर दिया , उसकी आँखों में बेहद गुस्सा था ,

रवि ने रमा की तरफ देखा पर बोलै कुछ नै , रवि ने अपनी आँखें बंद कर ली , उसका जिस्म अभ अपने असली वजूद में ा गया , पूरा जिस्म लाल हो गया , आँखें लाल रौशनी में चमकने लगी , हाथ की कलाई का मास्स फटने लगा , और जमा हुआ लाल खून नज़र ऐनी लगा ,

रवि ने सीमा के माथे पर हाथ रखा , और अपनी आँखें बंद कर ली , सीमा का माथा तेज़ सफेद रौशनी में चमक उठा , वोह सफेद रौशनी रवि के पोरे जिस्म में फैल गई , रवि का पूरा जिस्म सफेद रंग में चमकने लगा , हलाकि उसे दर्द भी महसूस हो रहा था , पर उसे महसूस करना था सीमा को , उसकी आँखें बंद थी , वोह कही खो सा गया ,

पारी लोग का पवितर जर्ना , उस जरने के निचे बहती सुनहरी पानी की नदी , जो धुप पढ़ने से चमक रही थी , ऐसे महसूस हो रहा था , जैसे नदी के पानी में सोना भरा हो ,

नदी के किनारे पर , rang-birange फूल खिले हुए थे , जिनकी खुशबु से दिल को सकूं सा महसूस होता था , उन फूलु के as-pas नरम हरी घास की जमीन , जमीन पर ुग्गी वोह घास इतनी नरम और मुलाम थी , जैसे वह नरम रोई भीकर दी गई हो ,

उस घास भरी जमीन से कुछ दूर , पारी लोग का खूबसूरत जंगल , जिसके पेड़ ुचियाओं को छूटे थे , पेडू के ऊपरी किनारे हवा में तैरते बदलो को छू कर , जैसे खिलखिला कर मुस्करा रहे थे , बेहद खुश हो रहे थे ,

नदी किनारे इक लड़की काळा लिबास में उलटी लेती हुई थी , उसका इक हाथ पानी के अंदर था , वोह छोटी छोटी मछलियों की चुहान को अपने हाथ पर महसूस कर रही थी , उसकी आँखों से असनु बह कर उस सुनहरी नदी में ik-mik हो रहे थे , पर यह लड़की थी कोण ,

"सुहाना..." रवि अपने डेविल रूप में बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै , वोह सीमा के माथे पर हाथ रखे उसे महसूस कर रहा था ,

रवि अभ वह पहुँच चूका था , खुद को पारी लोग में वापिस पाकर उसे बेहद सकूं मिल रहा था , आखिर घर लौटने की ख़ुशी किसे नै होती , और जिसे घर से निकल दिया गया हो , वोह वापिस घर ए , उस इंसान की ख़ुशी का अंदाज़ा नै लगाया जा सकता ,

रवि पारी लोग की रूहानी हवा को महसूस करने लगा , फिर वोह खूबसूरत पेडू को निहारने लगा , यह जंगल उसकी रूही ने रचा था , उसे बेहद प्यार था कुदरत से ,

फिर रवि िका इक जरने से गिरते सोने जैसे सुनहरी पानी को देखने लगा , इस जरने से उसकी बहुत सी यदिअण जुडी थी , उसने यहाँ बहुत प्रेम भरे पल बिताये थे अपनी बहिन रूही के साथ , फिर उसकी नज़र नदी किनारे लेती लड़की पर गई , उसकी बहिन सुहाना पर ,

"सुहाना..." रवि ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में सुहाना को पुकारा ,

सुहाना यह आवाज़ सुन इक पल के लिए पलट गई , उसने देखा , उसके प्रिंस ए थे , उसके भाई प्रिंस सोनिक , पर उनके कपडे , उनका रूप बहुत अलग था , सुहाना को बेहद गुस्सा ा गया , शयद कोई बेहरुपिया न हो , जो प्रिंस के रूप में आया हो ,

"सुहाना मेरी बहिन..." रवि इतना बोल सुहाना की तरफ बढ़ा ,

पर तभी सुहाना इक डैम से कड़ी हो गई , उसकी आँखों में बेहद गुस्सा था , पल भर में उसके हाथ में उसकी तलवार ा गई , उसकी जादुई तलवार ,

"कोण हो अप्प , और हमारे भाई का रूप धारण करने की ग़ुस्ताख़ी क्यों की , जल्दी बताओ , वार्ना हम आपका यह सार , धड़ से अलग कर देंगे..." सुहाना बेहद गुस्से में रवि की करीब आकर अपनी तलवार रवि की गर्दन पर रखते हुए बोली ,

"उफ्फ्फ में तुम्हारा भाई हु , में फ्यूचर से आया हु..." रवि मुस्करा कर बोलै ,

"यह फुटर क्या है , कोनसा मायाजाल है यह..." सुहाना कुछ सोचते हुए बेहद गुस्से में बोली ,

"अरे फ्यूचर मतलब भविष्ये से आया हु में , मेरा दूसरा जनम हुआ है , पृथ्वी पर..."

"ाचा जवाब है हमारी बातिओं का , हम नासमझ नै , जो आपकी तुष् बातिओं में ए , अभ सचाई बयान करो , अप्प कोण हो , वार्ना आपको मर देंगे हम , हम पहले hi परेशान हैं..." सुहाना ने बेहद गुस्से में और आखिर में उदास होते हुए बोलै ,

"मुझे रूही की कसम में सच बोल रहा हु , सुहाना तुमसे बात करनी है मुझे , इस लिए एना पढ़ा , इस बीते वख्त में.." रवि ने निचे बेथ घास पर लेटते हुए बोलै ,

"हमारी आरामगाह पर लेटने की हिमेट , दफा हो जाओ , यह हमारी जगह है..." सुहाना ने रवि के सीने पर तलवार की नोक चुबते हुए बोलै ,

"वोह सब छोड़ो , कितनी बलियन दे दी अप्प ने , अभी 4 तोह हो गई होंगी , हम hi प्रिंस सोनिक थे सही..." रवि ने तलवार की तीखी चुंबन को अपने सीने में घुसते , दर्द बर्दाश्त करते हुए बोलै ,

"यह , यह , अप्प कैसे जानते हो , कोई नै जनता पारी लोग में , क्या अप्प सच में भविष्ये से ए हो , हम जानना चाहती हैं , हमारा मकसद पूरा हुआ या नै..." सुहाना बेहद खुश होते हुए रवि के साथ बैठते हुए बोली ,

"हाँ , अप्प अपने करम करते जाना , इसका फल आपको , पृथ्वी पर मिल चूका है , अप्प हमारी मलिका हो पृथ्वी पर , हमने पृथ्वी पर सबसे पहले आपसे प्यार किया , पर अभ इक समसया ाँ पढ़ी है वह..." रवि बेहद उदास लहजे में बोलै ,

"हम आपकी अर्धाग्नि है , हमें यह जानकर बेइंतहा ख़ुशी हुई , पर अभ क्या समस्या है वह..." सुहाना ख़ुशी में खिलखिला कर बोली ,

"अप्प को सुमों नाम की जादूगरनी मर देगी , और आपका मकसद अधूरा रह जायेगा , पर वोह आपके मकसद को , आपकी यादिओं को , इक शक्तिशाली रिंग में कैद कर देगी , वोह रिंग आपके इस जिस्म , आपकी आत्मा को तलाश करती रहेगी , सदियों तक , और आखिर हम सब का दूसरा जनम होगा पृथ्वी पर , आपके सच्चे प्रेम की ताकत , आपको मेरी बीवी बना देगी , मतलब मलिका , पर जैसे hi वोह रिंग अप्प धारण करुँगी , तब अप्प पर फिर से रूही को मरने का भूत स्वर हो जायेगा , इक बात समाज लेना , रूही और आपकी दुश्मनी , ेरखा , जलन , वोह इस पारी लोग में थी , पर आपके दूसरे जनम में अप्प और रूही , लेस्बियन हो..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"ओह्ह मतलब मेरे पाप , मेरी खुशहाल जिंदगी को नाराज बना देंगे पृथ्वी पर , यह क्या बोलै अपने लिस्बन..." सुहाना आखिर में कुछ न समाज पते हुए बोली ,

"लेस्बियन मतलब , जब दो लड़कियाँ इक साथ वोह वाला प्रेम करती हैं..." रवि , सुहाना को आँख मरते हुए बोलै ,

"ोहू , हम ऐसा नै कर सकते , वोह भी रूही के साथ , हम ऐसा कभी सोच भी नै सकते , वोह भी रूही के साथ.." सुहाना अपने चेहरा टेड़ा सा बना कर बोली ,

"ाचा सुहाना , हमारी मुलाकात पृथ्वी पर होगी जल्द hi , मेरी कही बतिअन अप्प अपने दिल में बैठा लो , मुझे लगता वोह ा रही मुझे कमज़ोर करने , में जाता हु , वार्ना मर देगी मुझे वोह..." रवि उठ कर सुहाना से दूर जाकर खड़ा होता हुआ बोलै ,

"में यद् रखूगी प्रिंस , और शुक्रिया अपने मुझे अपना लिया पृथ्वी पर..." सुहाना थोड़ा सा सार ज़ुका , रवि को शुक्रिया कहते हुए बोली ,

"इक बात और , मेरे जाते hi अप्प सब भूल जोगी , जो जो हमने बतिअन की , पर मुझे विश्वास है , आपको सब यद् ा जायेगा , अभ में जाता हु..." रवि इतना बोल वह से गयाब हो गया ,

दूसरी तरफ...

"उफ्फ्फ कब आएगा रावी , इक तोह इतनी प्यास लगी है , शरीर भी कमज़ोर सा हो रहा है , मेरा इंसानी शरीर कितना कष्ट दे रहा हैई , रावी ायो ना..." ख़ुशी बेहद नाम आँखों से बोली ,

मायाजाल , इक ऐसा शब्द , जिसे समाज पाना आसान नै , हम भी इस शब्द में फसे हुए हैं , हम क्रोध , वासना , लालच , घमंड , कई तरह के विनाश करि मयाजालो में फास चुके हैं , जेवण का कुछ ज्ञात नै , हमें किस मार्ग पर चलना है , कोण ाचा है या कोण बुरा ,

जब हम किसी बात पर निराश होते हैं , इस मायाजाल में भटक जाते हैं , तब हमें शिव की यद् अति है , अगर कोई महामारी फैल जाती है , तब भी हम चाहते हैं , शिव उस बीमारी को अपने अंदर समां ले , इस महामारी रुपी मायाजाल से हमारी रक्षा करे , पर क्यों ,

हर बार भगवन hi क्यों कष्ट सही हमारे लिए , हम प्रेम , man-saman का अर्थ नै समज़ते , dhoka-dhadi , वासना , लालच को महत्व देते हैं अपने जेवण में , और दिन में 5 मिंट भगवन का समरण कर , बाकि पूरा दिन बुरे करम करते हैं , बुरे शब्द बोलते हैं , और हम कहते हैं , हम उनके बचे हैं , हम बचे नै हैं , हम दिल से कभी यह सवीकार नै करना चाहते के हम कमज़ोर हैं , बुराई हमसे ताकतवर है , हम उनके बताये निजमु का पालन नै कर सकते , हम बस ढोंग करते हैं पूजा पथ का , जब की हम कष्ट नै सहना चाहते , ऐसे शिव का प्रेम नै मिलता मेरे दोस्त , शिव को हम पाना चाहते हैं , पर उनको पाया नै जा सकता , उनको महसूस करो , उनसे प्रेम की अपेक्षा रखो , बदले में अगर प्रेम न भी मिले , क्यों की परीक्षा तोह वोह लेंगे hi , रावण को भी अपना सार काटना पढ़ा था , थोड़ा सा दर्द तोह सहना hi पड़ेगा ,

(सॉरी में रास्ता भटक जाता हु स्टोरी में कई बार..)

खैर अभ अग्गे....

इक अजीब से मायाजाल में कैद ख़ुशी , अभ धीरे धीरे बेहद दर्द महसूस कर रही थी , पता नै क्या था इस मनहूस जगह में , के जिस्म का रोम रोम दर्द करने लगा था ,

"अह्ह्ह सामने ायो मेरे , कोण है , कायर हो तुम उम् शठ मुझे यहाँ कैद करके अह्ह्ह्ह खुद को ताकतवर समज़ते हो..." ख़ुशी बेइंतहा दर्द में कहरहते हुए जमीन पर लेटते हुए बोली ,

"हम कायर तोह नै हैं , बस हमें मज़ा अत है , जब कोई हमारे सामने रोटा , चिलता है , मौत की भेख मांगता है..." इक बेहद प्यारी आवाज़ इस शांत दुनिआ में गुनगुना उठी ,

ख़ुशी ने हिमेट जूता खड़े होकर देखा , उफ़ उसको देखते hi ख़ुशी अंदर तक कम्प गई , शक्तिहीन ख़ुशी का सामना , शेतीअन की प्यारी बेटी के साथ था , और शेतीअन की बेटी इक hi थी , वोह थी सुहाना... लेकिन सीमा तोह बेहोश थी , फिर सुहाना यहाँ कैसे ,

दूसरी तरफ....

फर्जी के गिरकर बेहोश होते hi , बेबी और काट उसे उठा कर रूम में ले गई थी , उन दोनों ने काफी कोससिह की , पर जब फर्जी को होश न आया , तब वोह दोनों बिना रवि को बताये , फर्जी को लेकर हॉस्पिटल की तरफ निकल गई , हॉस्पिटल जाने के लिए उन दोनों ने रेहान की गाड़ी ली , dr.nelam भी उन दोनों के साथ हॉस्पिटल चली गई , तेन की वोह खुद की dekh-rekh में फर्जी का इलाज कर सके ,

लारा और एलिज़ा अपने रूम में ा चुकी थी , उनको गहरा सदमा लगा था , जिस घर में कुछ पल पहले हसी और ख़ुशी का माहौल था , वही घर अभ दुखु में गिर चूका था ,

वही तोह , हम कभी यह सोच भी नै सकते , सोचना तोह दूर कल्पना भी नै कर सकते , के इक पल के बाद हमारे साथ क्या होगा , यही तोह मायाजाल है भगवन का , ऐसी को किस्मत कहते हैं , इक पल ख़ुशी का होता तोह दूसरा दुःख का , यहाँ रवि का परिवार पहले खुश था , अभ पल भर में भीकर गया था , दुनिआ की अंतिम सचाई यही है , के हम कभी खुश नै रह सकते , दर्द तोह हमें मिलेगा hi , दुःख दर्द साथ साथ चलते हैं मेरे दोस्त...

वही रिमी और शूरति बीएड पर इक दूसरे से लिपट कर कम्प रही थी , रमा के दर्द भरे हमले ने उनको सुहाना के दिए अत्याचारों की यद् दिला दी थी , पर इक दूसरे का साथ , उनके दर्द को खुद बा खुद काम कर रहा था ,

वही अनु कल की चुदाई से अभी तक उभर नै पायी थी , और सुबह से आराम कर रही थी , वोह रवि से मिलना चाहती थी , पर कल मिलने का सोच वोह मन hi मन बेहद खुश थी...

और दूसरी तरफ वोह नकाबपोश औरत , जोकर और रेखा को साथ लेकर , वंश जंगल के सबसे ुचे पहाड़ पर अपने मकसद को अंजाम देने की भरपूर कोससिह कर रही थी , उसने अपनी तंत्र विद्या से इक यन्त्र का निर्माण किया था , पहाड़ की छोटी ऊपर से सपाट जमीन जैसी थी , और उस पर वोह औरत वोह ब्लू स्टोन रखे , उस पर कुछ मंत्र का जप कर , उसके अंदर की बेइंतहा शक्ति को , उससे बहार निकलने की कोससिह कर रही थी , तेन की शेतीअन की सेना पृथ्वी पर आगमन कर सके...

तो बे कुनिटेड... [Friends es site par mere 100 update pore ho gye , or pori story ke 792 updates .. shukariya yeh sab apka pyar hai mere liye... ]

 
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