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अभ अग्गे....
सुहाना और रूही की मुलाकात , इक अजीब सा खेल था कुदरत का , कहते हैं कुदरत खुद को बार बार दोहराती है , वोह पहले चीज़े बनती है , फिर उनका विनाश कर देती है , फिर बनती है , फिर विनाश करती है ,
कुदरत से बड़ा कोई नै , कोई शक्तिशाली नै , सब गुलाम है उसके , वोह जो चाहती है , वही होता है , पारी लोक बना , फिर तबाह हुआ , पृथ्वी बानी , लेकिन क्या अभ वोह भी तबाह होगी , या कुदरत उसे जीवट रखेगी ऐनी वाली कुछ सदियों तक ,
किसी sarav-shaktiman लोक का विनाश , वह के लोग खुद करते हैं , ऐसा होता आया है सदियों से ,
पारी लोक को न तोह जीता जा सकता था , न chal-kapat से परापत किया जा सकता था , शेतीअन बेबस था पारी लोक के अग्गे , लेकिन इक माचिस की तेली पोरे जंगल को जला सकती है , और शेतीअन को वोह मौका मिल hi गया , शेतीअन के लिए वोह माचिस की तेली सुहाना थी ,
इक ऐसा दुश्मन , जिस पर किसी का शक न जाता , उसने पारी लोक के 6 पवितर सतब , जो दुनिआ की अच्छी का प्रतीक थे , कुवारी कइओं की बलि के मदयम से , शेतीअन को समर्पित कर दिए ,
इक आखरी सतब अभी बचा था , लेकिन वोह सबसे मज़बूत था , जैसे इंसान की तीसरी आँख होती है वैसा , 3श्री आँख खोलना नामुमकिन है , वैसे hi कोमल की बलि देकर , यह पवितर और मज़बूत सतब शेतीअन को समर्पित करना भी मुश्किल था ,
सुहाना हार गई , चाहे उसने हर परियस किया , पारी लोक को तबाह कर दिया , सबको शाप से लिपट कर दिया , पर कह सकते हैं , सुहाना हार गई थी , लेकिन उसकी ीचा अभी जिन्दा थी ,
ीचा hi इक कारन है , जिस कारन इंसान बार बार जनम लेता है , अगर िच्यिओं से मुकत हो जाये , तोह हम इस दुनिआ में क्या लेने आएंगे , सब 0 में वालीं हो जायेगे ,
अज्ज सदियों बाद सुहाना अपनी बहिन से मिल रही थी , उस नाज़ुक वख्त पर , जब फिर से जुंग उनके दरवाजे पर कड़ी थी , यहाँ से किसी इक की मौत भी हो सकती थी , और कोई जीवट भी रह सकता था ,
सुहाना सेड्यां चढ़ रूम के दरवाजे के पास पहुँच गई , सुहाना ने दरवाजे को ढाका देना चाहा , पर उसके हाथ रुक सा गए , उसके हाथ की उंगलियाँ कम्पनी लगी , आँखों से असनु बहने लगे ,
वोह अपनी बहिन से नज़रियन मिलाने से दर रही थी , आखिर किस मोह से वोह उससे बात करती , उसने सब कुछ बर्बाद किया था , इक खुशहाल परिवार , इक आज़ाद दुनिआ , सब जला कर खाक कर दिया था ,
"हम , हम नै कर सकते , हम रूही का सामना नै कर सकते , हम बुरे हैं बहुत बुरे..." सुहाना वापिस पलट बेइंतहा रट हुए खुद से hi बोली ,
वोह जाने hi लगी थी , के उसे रवि की यद् ा गई , उसे रवि की मदद करनी थी , लेकिन मरने से पहले अपने बहिन से माफ़ी भी मांगनी थी ,
"हम , हम मिलेंगे अपनी बहिन को.." सुहाना ने अपने बहते असनु , अपने हाथो से साफ किये , और बेहद तेज़ी से रूम के अंदर घुस गई ,
सुहाना ने अंदर घुस कर देखा , उसकी बहिन रूही (कोमल) बालकोनी में कड़ी दूर जंगल की तरफ देख रही थी , उसकी आँखें शांत थी , मन भी शांत था , और चेहरे पर कोई भाव नै था , न नफरत का , न प्यार का , न गुस्से का , वोह भावहीन थी ,
"रहना..." सुहाना ने बेहद नाम आँखों से कोमल की तरफ देखते हुए बोलै , उसकी आवाज़ में इक दर्द था ,
कोमल इस आवाज़ को सुन कर पलट गई , सुहाना उसे देख चौंक सा गई , पर कोमल मुस्कराने लगी ,
"थीम मुम्मा तप..." कोमल अपनी तोतली आवाज़ में बोली ,
"रूही , फिर से वही मायाजाल , हम सुहाना है , आपके इस मायाजाल को जानते हैं , हमें नै पता , अपने क्यों ऐसे वापिस अपना लिया , हम अपनी रूही से बात करना चाहते हैं..." सुहाना ने बेहद नाम आँखों से दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,
कोमल मुस्कराते हुए खामोश हो गई , लेकिन वोह कुछ बोली नै , बस सुहाना को देखती रही , उसका बीता हुआ कल , उसकी आँखों के सामने खड़ा था ,
"रूही कुछ तोह कहो , हमें अपनी गलती का पछतावा है , हमें माफ़ कार्डो..." सुहाना , कोमल के बेहद करीब आकर रट हुए बोली ,
"में रूही नै हु , में कोमल हु , रूही तोह मर गई , और अपने अननत शापो का भर कोमल पर छोड़ गई , कोमल को रूही के हर शाप का कारज उठाना पढ़ रहा है..." कोमल वैसे hi शांत भाव से बोली ,
"हमें पता है रूही , आपका और हमारा दूसरी बार जनम हुआ है , यह सब हमारी गलतियों के परिणाम हैं , हमें माफ़ कार्डो बहिन , हमने तुमसे ेरखा और जलन के भाव रखे , हमने तुम तुम्हारे प्यार से अलग किया , हमें कोई भी सजा दो..." सुहाना अभी बोल hi रही थी के कोमल बेच में बोल पढ़ी ,
"किस गलती की सजा दे , अप्प मेरी बड़ी बहिन हो , आपको माफ़ करने का और सजा देने का , मुझे कोई अधिकार नै है , में आपसे तब भी प्यार करती थी , और अज्ज भी करती हु..." कोमल बेहद नाम आँखों से बोली ,
"नै , नै , हमने तुमसे सब कुछ चीन लिया , हम अछि नै हैं , हम बुरी है..." सुहाना बेहद रट हुए बोली ,
"शहहह देदी , जब मेरे अंदर कोई नफरत hi नै , कोई गुस्सा hi नै , में क्या सजा दू आपको , भूल जाओ उन बातिओं को , आपकी अछि जिंदगी आपके सामने है , में आपसे प्यार करती थी , और हमेशा करती रहूगी , जाओ देदी , भइआ को जरुरत है आपकी , उनका साथ दो..." कोमल बेहद प्रेम भरे शबदो से बोली ,
"तुम , तुम , सच में पवितर शक्ति हो , तुम , तुम , हमारी बहिन हो , इस बात का गर्व है हमें , हम आखरी साँस तक , लड़ेंगे , और रवि को कुछ नै होने देंगे , हम वादा करते हैं..." सुहाना इतना बोल कोमल के गले लग गई , सदियों पुराणी ेरखा ने डैम तोड़ दिया , जलन के भाव जल गए , और प्यार ने इक नयी शुरुआत कर्ली ,
वही दूसरी तरफ....
ख़ुशी बेहद तेज़ी से बेबी के रूम के पास पहुँच गई , "बेबी , बेबी , मुझे बात करनी है , दरवाजा खोलो जल्दी..." ख़ुशी बेहद दर्द में दरवाजे पर हाथ मरते हुए बोली ,
िका इक बेबी ने दरवाजा खोल दिया , ख़ुशी तेज़ी से रूम के अंदर घुस गई , बेबी ने दरवाजा बंद कर लिया , और जाकर बीएड पर बेथ गई , जब की ख़ुशी वह कड़ी रही , उससे कुछ दूर ,
"बेबी हम सब को मिलकर रवि की मदद करनी है , प्लस , जल्दी चलो , शेतीअन की सेना ा रही है , हम सब मरे जायेगे..." ख़ुशी अभी बोल hi रही थी के बेबी बेच में बोल पढ़ी ,
"बस्स्स , ख़ुशी , मने अभी अभी अपनी बेटी को खो दिया , अपना प्यार खो दिया , इस हालत में , मैं कैसे लड़ सकती हु..." बेबी बेहद नाम आँखों से बोली ,
"शठ वोह सब तुम मिल जायेगा , में और रवि हेलल वापिस जा रहे हैं , लेकिन बेबी अगर जुंग में रवि हार गया तोह फर्जी और काट भी मर जाएगी , वोह कही भी सुरक्षित नै हैं , ायो बेबी मिलकर अपने प्यार की मदद करे..." ख़ुशी , बेबी के करीब बीएड पर बैठते हुए , उसके दोनों हाथ अपने हाथो में लेते हुए बोली ,
"में , में , नै कर सकती , में टूट चुकी हु अंदर से..." बेबी बेहद रट हुए बोली ,
"जानती हो , मने कितना दर्द सही हैं , पिछले जनम में , मुझे डेविल के साथ हेलल में रहना पढ़ा , सदियों तक उस गरम आग की तपश को सेहती रही , क्यों , क्यों की मुझे अपने प्यार को पाना था , उसके साथ रहना था , उसे कोई दर्द नै पहुँचने देना था , पर में नाकाम रही , उस जुंग में रवि मर गया , में भी मर गई , में न तोह प्यार को प् सकीय और न उसे बचा सकीय , बेबी अज्ज फिर वही हालत सामने हैं , में वादा करती हु , में फर्जी और काट को तुम्हारे पास छोड़ कर जोगी , पर अभी मेरे साथ चलो..." ख़ुशी ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"में नै कर पाउगी , में कमज़ोर हो चुकी हु , में , में , अभ नै लड़ पाउगी... " बेबी अपना चेहरा ज़ुका रोने लगी ,
"हासष्ठ ठीक है , जानती हो अगर निशा जिन्दा होती तोह वोह तुम रवि की मदद के लिए खुद बेहज देती , और इतना hi नै , वोह तुम्हारे साथ जाती , खैर अगर मन बदल जाये तोह ा जाना..." ख़ुशी इतना बोल रूम से बहार चली गई , बेबी चेहरा ज़ुका नाम आँखों से पिछले वख्त को सोचने लगी ,
ख़ुशी , बेबी के रूम से निकल लारा और एलिज़ा के पास चली गई , उसे उम्मीद नै थी , के लारा और एलिज़ा उसके साथ जाएगी , पर वोह पूछना जरुरी समज़ती थी ,
ख़ुशी उनके रूम में घुस गई , वोह दोनों बीएड पर लेती हुई थी , ख़ुशी को देख दोनों उठ कर बेथ गई ,
"कैसी हो तुम दोनों..." ख़ुशी मुस्कराते हुए बोली , पर उसकी यह मुस्कान झूठी थी ,
"हम ठीक हैं , ाचा मने अपने सुपर कंप्यूटर में कुछ देखा , इस जंगल के सबसे बड़े परबत पर इक सफेद सी रौशनी आसमान की तरफ जा रही है , कोई खतरा आने वाला है क्या..." एलिज़ा अपना तेज़ दिमाग दौडते हुए बोली ,
"हाँ , ऐसा hi कुछ समाज लो..." ख़ुशी बेहद घम्बिर होकर बोली ,
"कितने दुश्मन हैं..." लारा बीएड से उठ कर खड़े होते हुए बोली ,
"लाखो में..." ख़ुशी यह बोल दोनों के चेहरे देखने लगी ,
"ोहुआहहहह (अंगड़ाई लेते हुए) एलिज़ा इतने दिनों बाद मज़ा आएगा , चलो ख़ुशी हम त्यार हैं... " लारा इक पल में hi अपने निंजा सूट में एते हुए बोली ,
"ओह्ह्ह , क्या , इक बार सोच लो , जान का खतरा है वह..." ख़ुशी दोनों की बात सुन चौंकते हुए बोली ,
"let's जो ख़ुशी , jaan-vaan की चिंता हम दोनों नै करती , चलो अभ अच्छी के लिए मारा जाये..." लारा , ख़ुशी को आँख मर रूम से बहार जाते हुए बोली ,
"में भी त्यार हु..." एलिज़ा इतना बोल लारा के पीछे पीछे रूम से बहार ा गई ,
"कमल है , में इनके पास क्यों नै आयी पहले..." ख़ुशी मुस्कराते हुए खुद से hi बोली , और रूम से बहार ा गई ,
अभ चारो त्यार थी , सुहाना (सीमा) , लारा , एलिज़ा और ख़ुशी , वोह चारो चल पढ़ी , इक आखरी जुंग की और , जो बेहद विनाश करि होने वाली थी...
वही दूसरी तरफ...
इक अँधेरी जगह , इक वीरान हवेली , यह वही हवेली थी , यहाँ से रवि के जीवन की इक नयी शुरुआत हुई थी , इक रहस्मयी हवेली , इस हवेली में कई राज़ दफ़न थे , लेकिन अभ इस हवेली पर वामपिरेस का राज़ था , वोह शाशन करते थे , हवेली पर , और हवेली के as-pas के पोरे जंगल पर ,
"मालिक , वोह ा गए..."
इक अँधेरे कमरे में , इक औरत ने दरवाजे से अंदर ज़कते हुए बोलै , और फिर वोह वह से चली गई ,
"हूअण , सर्दियाँ ऐनी वाली हैं , लेकिन जुंग में सर्दी का होना जरुरी है , धुप में लड़ा नै जा सकता , कुछ करना होगा मालिक..." इक औरत बेहद मुस्कराते हुए बोली , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी , उस गहरे अँधेरे में...
"मेरा बीटा , कितना बदल गया है , में उससे बात करना चाहता हु , पर वोह आग में जलता हुआ राक्षस परतीत हो रहा है , में उसके सामने नै जा सकता..."
यह काल था , रवि का पिता , वामपिरेस का राजा , इस दुनिआ के हर वैम्पायर इसका आज्ञा का गुलाम था ,
"अप्प जा सकते हो मालिक , अप्प में कई रहस्मयी ताकतीअं हैं..." माया , काल के करीब एते हुए बोली ,
"जनता हु , में चाहता था , वोह खुद से सब सिख जाये , जब वोह यहाँ आया था , तब भी नासमझ था और अभ भी नासमझ है , औरत उसकी कमज़ोरी है , यह बताया था उसे , लेकिन अज्ज फिर वोह औरत की बतिअन से गुस्से में जल रहा है , में आखरी बार उसे मिलना जाउगा..." काल बेहद ब्यांक गरजती आवाज़ में बोलै ,
"मालिक हमारे सभी साथी ा चुके हैं , हम त्यार है जुंग में लड़ने के लिए..." माया लाल चमकती आँखों से मुस्कराते हुए बोली ,
"हम्म , जब मेरे मन की आवाज़ सुनो , तब उस स्थान पर पहुँच जाना , लेकिन हम रत होने का इंतज़ार करेंगे , रत होने तक , रवि को शेतीआणि सेना को रोक कर रखना होगा , यह नामुमकिन तोह है , पर मेरा बीटा इसको मुमकिन भी कर देगा..." काल बेहद शांत आवाज़ में बोलै ,
"मालिक अप्प कुछ भी कर सकते हो , हम दिन में लड़ सकते हैं , जायदा से जायदा हमें चोट पहुंचेगी , वैसे भी हम मरे हुए हैं , जायदा दर्द नै होगा..." माया , काल के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए बोली ,
"हम्म , में कुछ सोचता हु , जब मन की आवाज़ ए तब सबको साथ लेकर वह ा जाना..." काल इतना बोल वह से गयाब हो गया...
तो बे कुनिटेड....

























