अपडेट-125
अभ अग्गे...
रवि भी कोमल और सूजी के पीछे पीछे उनके घर पहुँच गया , रवि ने घर के अंदर जाकर देखा , सूजी सेड्यां चढ़ ऊपर की तरफ भाग रही थी , और कोमल भी उसके पीछे , ें दोनों की दोस्ती बेइंतहा गहरी थी , सूजी बेहद प्यार करती थी , अपनी इकलौती दोस्त कोमल को , सूजी ने कभी भी , कोमल को यह एहसास नै होने दिया था , के उसके बाबा ने , ें कबीले वालो ने , उस पर कोई एहसान किया है , वोह कोमल को अपने परिवार का इक अटूट हिस्सा मानती थी ,
वोह दोनों तोह ऊपर भाग गई , पर रवि ने देखा , dr.nelam घर के हॉल में बैठी हुई थी , रेहान और dr.nelam का बीटा बुनती शहर गए थे , रवि मुस्कराते हुए dr.nelam के साथ बेथ गया , वोह लकड़ी के सोफे पर बैठी हुई मुस्करा रही थी , शयद वोह बेहद खुश थी , के रवि उसे मिलने आया है ,
हसश अज्ज से कुछ दिन पहले dr.nelam बेहद परेशान थी , वोह टूट गई थी , भीकर गई थी , उसका पति मर चूका था , dr.nelam अपने पति को बेइंतहा प्यार करती थी ,
पर रवि ने जब उसके जीवन में पहली बार दस्तक दी , वोह कोई फैसला नै ले प् रही थी , वोह रवि के प्रेम को समाज नै प् रही थी , तब उसके पति जिन्दा थे , पर कुछ सालो से विदेश गए थे ,
सुरु सुरु में dr.nelam को रवि का प्यार , थोड़ा अजीब लगता था , क्यों की , जब उस गुंडे काली ने उसके साथ वोह सब किया , और रवि ने जिस तरह उसकी मदद की , वोह आकर्षित हो गई रवि की तरफ , पर अभ भी उसे रवि से प्यार नै था , जो वासना काली ने उसके मन में जगाई , नीलम को लगा , रवि से वोह अपनी जरुरत पूरी कर सकती है , पर रवि , कुछ और hi सोचता था , वोह दिल के किसी वीरान कोने में , dr.nelam को चाहता था , अगर सेक्स hi करना होता , तोह रवि कब का कर लेता , पर वोह वख्त दे रहा था , खुद को भी और dr.nelam को भी ,
इसका इक hi कारन था , जब कोमल ने उसकी जान बचने के लिए , उसे हवसी कहा , उसके मन में अपने लिए नफरत भर दी , चाहे कोमल ने , अपने भाई को बचने के लिए वोह सब किया था , वोह बेदर्द शब्द बोले थे , पर रवि पर उन चाँद शबदो का बहुत गहरा असर हुआ , रवि ने इक फैसला किया , के अज्ज के बाद , वोह कभी पहल नै करेगा , हाँ , अगर , कोई उससे जिद्द करेगा सेक्स के लिए , प्यार के लिए , वोह सोच कर hi अग्गे बढ़ेगा ,
रवि ने खुद से कहा था , अभ से वोह अपनी हर बहिन को प्यार देगा , हर लड़की को रेस्पेक्ट देगा , किसी के साथ भी , किसी भी तरह की जबरदस्ती नै करेगा , वोह सबका ख्याल रखेगा , हर इक को बेइंतहा खुशियाँ देगा , रवि मंटा था , सुरु सुरु में , उसने जो जो किया , वोह उसकी जवानी का जोश था , तब उसके मन में वासना थी , वोह हवस में बह जाता था ,
पर अभ वोह खुद को बदल रहा था , उसकी उम्र 32 साल हो चुकी थी , अभ वोह जिम्मेदार बन रहा था , और अभ उसकी इक बेटी भी थी , अभ उसके मन में वोह वासना नै थी , हाँ , वोह हर किसी के साथ वख्त बीतता था , उनको बहु में भर चूमता था , लेकिन यह उसकी फितरत थी , वोह डेविल था , पर जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ रही थी , वैसे वैसे वोह जिम्मेदार होता जा रहा था , बस ऐसी कारन उसने अपनी बहिन सोनल को पहले ठुकरा दिया , लेकिन आखिर जब सोनल ने अपने प्यार को साबित किया , तभी रवि ने उसे कबूल किया , रवि को पहले लगा जैसे सोनल को बस आकर्षण है , लेकिन सोनल बस आकर्षित नै थी उसकी तरफ , सोनल उसे बेइंतहा प्यार करती थी ,
ऐसे hi रवि ने अनु को भी सोचने का वख्त दिया , उसे लगा , उसने अनु की हेल्प की , इस लिए अनु उसे प्यार करती है , पर अनु ने भी साबित किया अपने प्यार को , उसका इंतज़ार करती रही , चाहे अनु ने जिद्द करके , चेहे जो भी करके , उसने अपने प्यार को प् लिया और रवि को झुकना पढ़ा , खैर अभ अग्गे...
"नीलम जी कैसी हो अप्प.." रवि ने dr.nelam के मासूम , खूबसूरत चेहरे को निहारते हुए बोलै ,
"हम्म , ठीक हु , वख्त काट रही hu.."dr.nelam ने रवि की आँखों में अखन दाल बोलै , रवि ने उसकी आँखों में इक इंतज़ार देखा , उसकी आँखों में इक अधूरा सा एहसास देखा , उसकी आँखों में अधूरे प्यार को पूरा करने की भूक देखि ,
"आपका बीटा कहा है..."
"वोह , हम्म , वोह तोह रेहान के साथ शहर गया है ..."dr.nelam ने अपने नरम गुलाबी होंठो पर जीभ फिरा उनको गीला करते हुए बोलै ,
"ओह्ह , ाचा , रूम में एना , मुझे आपसे बात करनी है..." रवि इतना बोल , उसी रूम में चला गया , यहाँ पहले वोह dr.nelam से मिला था ,
dr.nelam की सांसे तेज़ हो गई , उसके होंठ कम्पनी लगे , दिल तेज़ी से धक् धक् करने लगा , उसने सेड्यां की तरफ नज़र डाली , सूजी और कोमल कही न थी , dr.nelam अपने मन में उठते प्यार भरे एहसास को , अपने साथ लिए रवि के पास चली गई , उसने दरवाजा बंद कर दिया , और रवि की तरफ देखा जो बीएड पर बैठा हुआ था , नीलम भी मुस्कराते हुए उसके साथ जाकर बेथ गई , कुछ देर दोनों खामोश रहे ,
"नीलम , में सोच रहा हु.." रवि ने बेहद शांत मन से बोलै ,
"क्या..." नीलम बिना रवि को देखे मुस्करा कर बोली ,
"तुम्हारे और मेरे बारे में..."
"ओह्ह , पर क्या.." dr.nelam का दिल धक् धक् कर रहा था , अभ उसके दूध से सफेद चेहरे पर हज़ारो भाव थे , उसे दर था , कही रवि उसे ठुकरा न दे , यहाँ बात सेक्स की नै थी , वोह रवि का बस साथ चाहती थी ,
"क्या , हशह्ह्ह , क्या , वोह , ाचा , कैसे बोलू , उफ़ क्या अप्प मुज़से प्यार करती हैं..." रवि ने पता नै क्यों यह सवाल किया ,
"अगर , अगर में बोलू , नै करती , तोह..." नीलम ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
"हम्म , नीलम , सुरु सुरु में , जब में तुम्हारे करीब आया , तब में बहक गया था.." रवि अभी बोल hi रहा था , नीलम बेच में बोल पढ़ी ,
"क्या , तोह , तोह , तुम , मुज़से प्यार नै करते , वोह , वोह सब मेरे जिस्म के लिए , पर क्यों , क्यों..." dr.nelam यह सुनते hi रट हुए बेइंतहा दर्द में बोली ,
"हष्ठ , नीलम , में बस तुमसे सच बोल रहा हु , में , में अपनी गलती मन रहा हु , मेरी पूरी बात सुनो , फिर कुछ बोलना , अधूरी बात दर्द देती है..." रवि ने dr.nelam के असनु साफ करते हुए , बेहद शांति से बोलै ,
"पर , पर , में , तुम चाहती हु , में मर जाती जब मेरे पति , मुझे अकेला छोड़ कर चले गए , लेकिन , लेकिन , तुम्हारे इंतज़ार में जिन्दा रही , पता नै क्यों , मुझे लगा , तुम मेरा साथ डोज , इस बेरहम , बेदर्द दुनिआ में , मेरा भी कोई अपना है , में अपने बेटे को और दर्द नै देना चाहती थी , इक तोह उसके पिता नै थे , और अगर में भी मर जाती , उसका क्या होता , पर , पर (रट हुए) , तुम भी मुज़से दूर चले गए जब मेरे पति मुज़से दूर हुए , में टूट गई , में खुद को सम्बल न पायी , में अकेली पढ़ गई , रावी , मुझे तुम्हारे साथ सोना नै है , में बस , यही चाहती हु , तुम मेरा और मेरे बेटे का ख्याल रखो , तुम मेरे जीवन में रहोगे , तोह , तोह , में अपना जीवन गुजर लुंगी , प्लस , प्लस रवीए , अभ मुज़से दूर मत जाना..." dr.nelam ने बेइंतहा रट हुए रवि का हाथ अपने हाथो में लेकर उसे चूमते हुए , बेहद दर्द में बोलै ,
"नीलम , में तुमसे प्यार करता हु , बहुत प्यार करता हु , नीलम , में , में , बस डरता हु , इक बार तुमसे दूर गया , उफ़ , तुम्हारी क्या हालत हो गई , अगर , अगर , मुझे कुछ हो गया , में मर्डर..." अभी रवि इतना hi बोलै था के ,
"चाट्ताक्कक्क..." इक जोरदार थपड उसके चेहरे पर ा लगा ,
"क्यों , क्यों बोलते हो ऐसा , तुम , तुम कुछ नै होगा , तुम बहुत अचे हो , मेरा दिल मत दुखाओ , आईन्दा ऐसी बात बोली भी , तोह में तुमसे कभी बात नै करुँगी..." dr.nelam ने रवि के चेहरे को बेतहाशा चूमते हुए बोलै ,
"सॉरी , पर , पर , नीलम , में यह भी नै चाहता , के तुम कभी यह महसूस हो , के में तुम्हारी मज़बूरी का , तुम्हारे अकेलेपन का , नाजायज फयदा उठा रहा हु , तुम्हारे साथ सो कर , अगर , अगर , कभी अप्प ने , हमसे यह बोलै , तोह इस पाप को कैसे धो पाउगा ..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"जोऊ , निकल जोऊ ..." नीलम ने अपने कनु पर हाथ रख चीखते हुए बोलै ,
"क्या..."
"हाँ , सही सुना तुमने , तुम , तुम , इक नंबर के बेवकूफ हो , मेरी भावनायिओं को , क्यों नै समाज रहे , तुम इस लिए , मेरे करीब नै ए , के तुमने मेरी जान बचाई उस काली से , मने , मने , तुम अपने करीब ऐनी दिया , कोई मर्द यह सोचता है के उसने अपने पैसो से , अपनी खूबसूरती से , अपने डैम पर किसी औरत को प् लिया है , तोह वोह इस पृथ्वी का सबसे मुर्ख इंसान है , औरत किसी मर्द को खुद चुनती है , औरत इक पल में पहचान लेती है के यह मर्द कैसा है ..." dr.nelam बेहद गुस्से में बोली ,
"हाँ , तुम्हारी बात सही है.."
"हाँ मर. रवि , मर्द यही सोचता है , के वोह औरत को जायदा प्यार देता है , नै रवि , औरत hi मर्द को जायदा प्यार देती है , अपना घर छोड़ देती है , अपने माँ बाप , बहिन भाई , अपने सपने , अपना सब कुछ , तुम , तुम , यह लगता है , के तुम मेरे करीब ए , मुझे चूमा , मेरे शरीर को अपनी बहु में भरा , यह सब , यह सब , मने तुम करने दिया , मने चुना तुम , जानते हो क्यों..." dr.nelam ने रट हुए बोलै ,
"क्यू..."
"रावी , मने डॉक्टर बनने के लिए , अपना पूरा जीवन दे दिया , 30 साल की हुई , जब मुझे कड़ी म्हणत करने के बाद , यह जॉब मिली , पर , पर , तब तक , मेरी जवानी गुजर चुकी थी , डॉक्टर बनने की छह में , में खुद को भुला गई , कभी किसी से प्यार नै किया , हमेशा स्टडी स्टडी , स्टडी , उफ्फ्फ डॉक्टर बनते hi , जिम्मेदारी बढ़ गई , मुझे कभी वख्त hi न मिला , के में प्यार कर सकू , प्रेमी क्या करते हैं , यह महसूस कर सकू..." dr.nelam अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,
"तोह आपकी शादी..."
"हष्ठ , मेरी अर्रंगे मैरिज हुई , मेरे पति भी डॉक्टर थे , हम दोनों को कभी वख्त hi नै मिला , के हम खुल कर , इक दूसरे को जान सके , मेरे सरे अरमान , मेरे सरे जज्बात , मने अंदर दबा लिए , में भी , किसी लड़के से प्यार करना चाहती थी , प्यार का दर्द महसूस करना था मुझे , पर , पर , जब शादी हुई , इक साल बाद सूजी का जनम हुआ , तब सब कुछ ख़तम हो गया , में इक माँ बन गई , ऐसा नै के में अपने पति को चाहती नै थी , में अपने पति को , इस दुनिआ में सबसे जायदा प्यार करती हु , और आखरी साँस तक करुँगी , लेकिन में अपने जज्बात कभी अपने पति को बता न पायी , में जो चाहती थी वोह कर न पायी..." नीलम अपनी कहानी बताते हुए रवि की आँखों में अखन दाल बोली ,
"फिर..."
"फिर , फिर क्या , जिंदगी अग्गे बढ़ती गई , मेरी उम्र अभ ढलने लगी थी , पर , पर , तभी तुम ए , तुम , तुम , मेरे जीवन में इक तूफान की तरह ए , तुम्हारा यु मेरे साथ ched-chad करना , मेरे करीब एना , मुझे रेस्पेक्ट देना , में , में , बहुत पीछे चली गई , मुझे महसूस हुआ , में 18 साल की हु , में खुद को , इक जवान लड़की समज़ने लगी , में उस सपने को जीने लगी , जो में तब न जी पायी , उसदिन जब तुम मेरे घर ए , में खुद को रोक न पायी , तुम्हारा यु बेक़रार होना , मेरे लिए , तुम्हारी आँखों में इक तड़फ देखि , पर दर था , कही तुम , कही तुम..." नीलम अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,
"कही में , बस तुम्हारे साथ सोना तोह नै चाहता , तुम लगा , कही में , अपनी हवस मिटा , भाग न जाऊ ..." रवि ने मुस्करा कर बोलै , तोह नीलम भी मुस्कराने लगी ,
"हाँ , मने यही सोचा था , रवि , अगर तुम चाहते , तोह उसदिन , मेरे साथ सब कुछ कर सकते थे , पर मेरे इक बार कहने मटर से hi , तुम मुज़से दूर हो गए , बस उसी पल , मने महसूस किया , अगर में जवानी में प्यार करती , तोह शयद वोह लड़का तुम्हारे जैसा hi होता , अभ बोलो , अभ भी कहोगे कुछ , रावी , प्लस , मुझे मेरा सपना जीने दो , में तुम कभी दोष न दूंगी , प्लस , में तुमसे दूर नै रह सकती , प्लस ..." नीलम ने पहले मुस्कराते हुए और आखिर में बेहद रट हुए बोलै ,
"शह्ह्ह्ह , बस अभ , मेरे दिल को सकूं मिल गया , के में गलत नै था , मने तुम्हारे करीब आकर कोई गलती नै की , जणू , अभ से में तुम हर वोह ख़ुशी दूंगा , जो तुम चाहती हो , तुम मेरी गफ बानगी , नीलम जी.." रवि ने मुस्कराते हुए नीलम के होंठो को चूसते हुए बोलै ,
"सोचूंगी..." नीलम हसीं चेहरा लिए हस्ते हुए बोली ,
"जणू , दुबारा ड्यूटी ज्वाइन करलो , मेरी खातिर , प्लस..." रवि ने नीलम को पीछे बीएड पर लिटाते हुए बोलै ,
"उम् , ठीक है , तुम्हारे लिए , बस तुम्हारे लिए..." dr.nelam अपने नरम लाल होंठो को जीभ फिरा गीला करते हुए बोली ,
"ओह्ह जानू थैंक्स..." रवि ने इतना बोलै अपने होंठ नीलम के होंठो से मिला दिए , दोनों प्यार में खो गए , दोनों प्यार से , इक दूसरे के होंठो को चूसने लगे , कुछ देर बाद रवि ने होंठो को चूमना छोड़ , नीलम के खूबसूरत चेहरे को देखते हुए बोलै ,
"जणू , कल हम शहर चलेंगे , पहले हॉस्पिटल और फिर होटल , में तुम प्यार दूंगा , जो तुम चाहती हो , तुम्हारा मन चाहता है , है न..." रवि ने मुस्कराते हुए बार बार dr.nelam के नरम गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह नीलम शर्माने लगी , किसी ने सच hi कहा है , प्यार की कोई उम्र नै होती , यह हो जाता है ,
"भइआ , भइआए..."
दोनों इस आवाज़ को सुन उठ कर बेथ गए , फिर रवि ने नीलम को कास कर अपनी बहु में भर , उसे कल त्यार रहने को बोलै , और फिर उसके होंठो को चुम , दरवाजा खोल दिया , बहार कोमल और सूजी कड़ी थी ,
"क्या हुआ.." रवि ने थोड़ा चौंक कर बोलै ,
"अप्प क्या कर रहे थे..." कोमल और सूजी रूम के अंदर एते हुए बोली ,
"वोह , वोह , कोमल , में नीलम जी को समझा रहा था .."
"तोह नीलम जी समाज गई..." कोमल मासूम सी बनती हुई बोली ,
"हाँ , वोह , वोह , मने , समझा दिया .." रवि थोड़ा हड़बड़ा कर बोलै तोह कोमल और सूजी हसने लगी ,
"जेजू , क्या समझा दिया माँ को ..."सूजी आँखों में शरारत लिए बोली , उसने देखा उसकी माँ शर्मा रही है , वोह अपनी माँ को इतना खुश देख , खुद भी बेहद खुश हो गई ,
"उफ़ तुम दोनों , अरे नीलम जी दुबारा ड्यूटी ज्वाइन करले , यह समझा दिया..." रवि ने नीलम की तरफ देख कर बोलै , जो अभ भी बीएड पर बैठी , मुस्करा रही थी , वैसे ब्लैक सूट में , बहुत कातिलाना लग रही थी वोह ,
"ओह्ह , ाचा , चले घर भइआए..." कोमल , सूजी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,
"हाँ , हाँ , चलो.." रवि तोह यही सुन्ना चाहता था , वोह तेज़ी से बहार निकल गया , कोमल और सूजी बेइंतहा हसने लगी , फिर कोमल , सूजी के गले मिल , अपने भाई के पीछे पीछे चल पढ़ी ,
दूसरी तरफ....
राजेश और अनु शहर पहुँच चुके थे , दोनों ने पहले यह तेह किया था , अभी किसी को रवि का कुछ नै बतायेगे , अगर कोई पूछेगा , तोह बस इतना कहेगे , रवि फिर से भाग गया है , दसप शमशेर सिंह के बारे में , जो राजेश ने , रवि के मोह से सुना था , उस बात को लेकर राजेश थोड़ा चिंता में था , वोह नै चाहता था के रवि की जान पर कोई खतरा बने , और अनु तोह इतना खुश थी के क्या लिखू , उसे बस इंतज़ार था , कब वोह और रवि , साथ में काम करे , और वोह रवि से प्यार कर सके ,
राजेश जब घर पहुंचा तब शाम के 7 बहज रहे थे , अज्ज वोह बेहद खुश था , अरे उसकी पत्नी का भाई मिल गया था , जिसके लिए उसकी पत्नी प्रिय इतनी उदास रहती थी , राखी के दिन रोटी थी , कई कई दिन उस से बात भी नै करती थी , खैर इस सब का कल अंत होने वाला था , राजेश ने घर पहुँच दूर बेल्ल बजे , तोह कुछ देर बाद , प्रिय ने दरवाजा खोला ,
"अरे ा गए अप्प , यह टीवी पर क्या दिखा रहे थे सुबह से..." प्रिय ने थोड़ा परेशान होते हुए बोलै ,
"कुछ नै , उफ़ में तोह थक गया , ाचा , खाना लगाओ , बहुत भूक लगी है..." राजेश ने सोफे पर बेथ ते हुए , अपनी टोपी उतर , इक तरफ रखते हुए बोलै ,
"हम्म , लगाती हु , रवि भइआ का कुछ पता चला , मने सुना था , वोह यही है , ऐसी शहर में..." प्रिय फिर से उदास सा होते हुए बोली , वोह राजेश के साथ आकर बेथ चुकी थी ,
"बीवी साहिबा , आपका भाई ा जायेगा , ाचा , इक बात बताओ , तुमने इक बार उसे राखी बंधी है , और वोह 3 साल से फिर कभी आया नै , तोह क्यों , परेशान रहती हो , उसे तुम्हारी कोई चिंता नै..." राजेश ने इक नाटक सा करते हुए बोलै ,
"आपको डिनर करना है.." प्रिय ने चेहरे के भाव बदलते हुए कहा ,
"क्यों..."
"नै , मुझे लगा , आपको डिनर से पहले , मुज़से मार कहानी है , ऐसी लिए पूछा..." प्रिय ने बेहद गुस्से में अपने गोर गाल पहला कर बोलै ,
"हैश्च , में तोह..."
"ससष्ठ , भइआ के बारे में , में कुछ नै सुनोगी , वोह आएंगे , जरूर आएंगे , मेरा दिल कहता है , और अप्प , आपको कितनी बार बोलै है , रवि भइआ की बुराई मत किया करो , अप्प , अप्प क्यों सताते हो मुझे..." प्रिय ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,
"प्रिय , में बस , यही चाहता हु , तुम खुश रहो , उफ़ रावी , ा जा भाई..." राजेश अपना माथा पीट कर बोलै ,
"हम्म , अप्प नाहा लो , में खाना लगाती हु..." प्रिय ने उठते हुए बोलै ,
"कल में तुम इक सरप्राइज दूंगा..." राजेश ने भी उठते हुए बोलै ,
"सच में , क्या भइआ ा रहे हैं..." प्रिय बेहद मुस्कराते हुए बोली ,
"नई ..."
"आह्हः हुऊ , तोह भाड़ में जाये आपका सरप्राइज , मुझे कुछ नै चाहये , अगर सरप्राइज देना है , तोह मेरे भइआ रवि को लाओ ..." प्रिय ने पहले गुस्से में और आखिर में बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"ाचा , सैर कैसी है..."
"सैर , वोह भी दिन काट रही है , हासष्ठ , कितना दर्द दे रहा भगवन मुझे , भइआ ा जाओ , प्लस..." प्रिय बेइंतहा रट हुए बोली ,
"प्रिया , विश्वास करो , रवि जल्द hi ा जायेगा , चलो अभ मुस्करायो , हाँ , यह हुई न बात , ाचा , मेरा बीटा कहा है , अमित , अमित..." राजेश , प्रिय के चेहरे पर मुस्कान ला , बैडरूम की तरफ चला गया , अपने बेटे के पास , पर प्रिय फिर से उदास हो गई , उसे अपने भाई से मिलना था , वोह तड़फ रही थी , पता नै क्यों , जब से उसने , रवि को राखी बंधी थी , तब से , उसका दिल गहरायी से , अपने भइआ से जुड़ चूका था , पता नै कैसे , वोह खुद को सम्बल रही थी , और दूसरी तरफ सैर , वोह तोह पहले hi दिल की कमज़ोर थी , उस मासूम का पता नै क्या हाल हुआ होगा , खैर प्रिय को , कल अपने जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी मिलने वाली थी , पर क्या यह इतना आसान होता ,
दूसरी तरफ...
रत के 8:30 बज रहे थे , रवि और उसका पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पर बैठा खाना खा रहा था , अज्ज सब खुश थे , क्यों की , जुंग ख़तम हो गई थी , और उनको कोई नुकसान भी नै हुआ था , क्या रवि , सबको जिन्दा रख पता , किसी न किसी को , शयद ऐनी वाले वख्त में वोह खो hi देता ,
"देदी , भइआ अनु से भी प्यार करते हैं..." कोमल ने सीमा को वोह बात यद् दिलाते हुए बोलै , तोह रवि चौंक सा गया , वोह खस्ने लगा , उसने जल्दी से पानी पिया , पर बोलै कुछ नै ,
"हाँ भाई पति देव , बताओ , यह ितम कब पता ली..." सीमा ने गुस्से का नाटक करते हुए बोलै तोह सब हसने लगी ,
"क्या सीमा , वोह दोस्त है बस..." रवि मासूम सा बनते हुए बोलै ,
"अह्ह्ह बकवास , यह झूठ बोल रहा , अनु और इसका चाकर बहुत वख्त से चल रहा..." ख़ुशी अपने सेहभाव के अनुसार , अनु से चिढ़ते हुए बोली ,
"खुशु , में सच बोल रहा हु..." रवि ने ख़ुशी की आँखों में अखन दाल बोलै ,
"हम्म , तोह करवाई सुरु करो , अनु से भइआ को प्यार है , इसका पहला कारन है , जैसे अनु भाग कर भइआ से लिपट गई , और बेइंतहा रोने लगी , तोह माय लार्ड सीमा , और इक कारन अनु गोली खाने को भी त्यार थी , और उसने बोलै भी , में रवि को प्यार करती हु..." कोमल बेहद मुस्कराते हुए रवि पर किसी वकील की तरह इल्ज़ाम लगते हुए बोली ,
"माय लार्ड सीमा जी , कोमल के लगाए इल्ज़ाम जूठे हैं , उनको बोलो सबूत पेश करे , क्यों की अदालत सबूत मांगती है..." रवि भी कोमल को आँख मरते हुए बोलै ,
"मेरे पास सबूत है..." कोमल भी अपने भाई को आँख मरते हुए बोली ,
"ाचा , कोनसा..." रवि थोड़ा चौंक कर बोलै ,
"माय लार्ड , मेरा सबूत है , मिस ख़ुशी , जो भइआ पर , हमेशा अपनी नज़र रखती है..." कोमल ने ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै ,
"तोह मर. रवि , अभ बताओ , अभ क्या कहना है आपको..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे ,
"पापा , मन जाओ , वैसे कोमल मुम्मा ठीक बोल रही है.." फर्जी , जो रवि की गॉड में बैठी थी , उसका गाल चूमते हुए बोली ,
"बाबू बता भी दो , सच सच..." बेबी ने पहले प्यार से , फिर इक डैम से गुस्से में टेबल पर हाथ मरते हुए बोलै ,
"बेबी , शांत , शांत..." काट हस्ते हुए , बेबी के बालो को प्यार से सेहला कर बोली ,
"आर्डर , आर्डर , हाँ तोह , ख़ुशी जी बताओ , अप्प क्या जानती हो..." सीमा ने ख़ुशी की तरफ देखा , जिसका मोह , खाने से भरा हुआ था , वोह हाथ हिलती हुई , कुछ वख्त मांगने लगी , तेन जो उसका मोह खली हो सके , सब यह देख हसने लगे ,
"हॉष्ह , तोह जानवर , इस बेवकूफ का चाकर चल रहा है , मने देखा , अपनी ें दो आँखों से , यह अनु के घर गया , उसे प्यार भी किया , मने सब देखा , में आपको लाइव दिखती हु..." ख़ुशी चेयर से उठती हुई बोली , रवि चौंक गया , कही ख़ुशी उसका और अनु का पूरा सेक्स वीडियो न दिखा दे ,
"रुको , पहली बात माय लार्ड कह लो , जानवर क्या हुआ भाई , और में मंटा हु , अनु से में प्यार करता हु , पर लार्ड सीमा , मने बहुत कोशिश की , उसे दूर करने की , वोह बहुत जिद्दी है , मुझे झुकना पढ़ा , हसश , यही बात है..." रवि ने अपनी गलती मानते हुए बोलै ,
"याहहहा हुऊ , में केस जीत गयी..." कोमल बेइंतहा ख़ुशी में खाने की प्लेट ऊपर की तरफ उछलते हुए बोली ,
"हे भगवन , कोमल रुकू.." सीमा मुस्कराते हुए बोली , पर तब तक खाने की प्लेट रवि के सार पर ा गिरी , उसके लम्बे बाल और कपडे , खाने से लथपथ हो गए , वोह अपने माथे पर हाथ मरते हुए , सबकी तरफ देखने लगा , सब हस्स रही थी ,
"माँ , अभ भइआ को सजा दो.." रमा मुस्करा कर बोली ,
"हाँ भाभी , सजा दो , सजा दो..." रिमी छीलते हुए बोली , जो कब से खमोश थी ,
"शांत बीटा , शांत..." शूरति , रिमी को अपनी बहु में भरते हुए बोली ,
"अहह देदू..." रिमी ने शूरति के गाल को चुम कर , बेहद प्यार से बोलै ,
"ाचा तोह रावी , सरे गवाहों , और सबोटो को देखते हुए , हम तुम यह सजा सुनते हैं , तुम कल रत 9 बजे , अपनी और अनु की लव स्टोरी हमें सुनाओगे , बोलो मंज़ूर है , और वोह भी अनु को यहाँ लेकर..." सीमा ने खड़े होते हुए अपना फैसला सुना दिया ,
"लार्ड सीमा की जय हो , जय हो.." सभी इक साथ , अपना सार ज़ुका बोलने लगे , और फिर इक दूसरे की तरफ देख हसने लगे ,
रत के 10 बज रहे थे , रवि ने सीमा और कोमल को अपने पास बुला लिया था , उसे सीमा और कोमल से बात करनी थी , पर उसे दर था , पता नै , उसकी बात सुन , दोनों क्या बोलेगी ,
रवि बीएड पर बेच में लेता हुआ था , उसकी इक तरफ कोमल (रूही) और इक तरफ सीमा (सुहाना) लेती हुई थी , दोनों ने रवि के कंडे पर सार रखा हुआ था , और रवि दोनों को बहु में भरे , कुछ सोच रहा था ,
"जणू भइआ , क्या सोच रहे हो..." कोमल ने सीमा की तरफ देखते हुए मुस्करा कर बोलै ,
"हाँ जणू , क्या बात करनी थी आपको , जल्दी बताओ , मुझे जाना है फिर , मेरी बेटी रमा , मेरा इंतज़ार कर रही होगी .." सीमा ने थोड़ा सा चेहरा ऊपर उठा , रवि के गाल को चूमते हुए बोलै ,
"हैश्च , ाचा , पहले में इक बात , तुम दोनों से कह दू , में तुम दोनों को बहुत चाहता हु , और..."
"भइआ , क्या बात है , अप्प बेचैन हो..." कोमल ने उठ कर बेथ ते हुए बोलै ,
"हाँ सोना , तुम इतना क्यों परेशान हो..." सीमा भी उदास सा चेहरा लिए उठ ते हुए बोली ,
रवि अभी भी लेता हुआ था , वोह जो बात कहना चाहता था , उसे पता नै था , दोनों क्या कहेगी , पर उसे बात करनी थी , वोह सीमा और कोमल से अपनी बहिन सोनल के बारे में बात करना चाहता था , पर वोह थोड़ा दर रहा था , खैर वोह भगवन का नाम लेकर उठा , और दोनों की तरफ देख , अपना दुःख दर्द बोलने लगा....
तो बे कुनिटेड... [Friends app ne jo replys diye hain , unka jawab me kal dunga , ajj me bahut busy tha , sorry dosto..]