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रेखा जी .......वो माँ सा हम बस मजाक कर रहे आवर कुछ नहीं
साध्वी जी अंदर आ कर सूर्य के घावों को चेक किया जो की लग भाग भर चुके थे एक हे रात में कुछ तो ॉडी का असर था कुछ सूर्य के सरीर की अपनी खुबिया
सूर्य चेक करवाने के बाद अपने रूम में निकल गया
साध्वी जी को रात की घटना का पता लगा तो बहुत परेशान हो गई उन्होंने किसी को कुछ भी नहीं बताया जो उन्होंने कहा वही मन लिया जबकि उनको तो रात का कुछ पता भी नहीं था ..........
अब आगे .......
सपना आवर किरण 2 दिन सूर्यगढ़ में हे रुकी उसके बाद वो दोनों बड़े मां जी के साथ सूर्यगढ़ के लिया निकल गई
इन दो दिनों में सूर्य पूरी तरह से ठीक हो चूका था
साध्वी जी की आयुर्वेदिक ोस्दियो से शालिनी भी बहुत हद तक ठीक जो चुकी थी
थोड़ा पीछे चलते है .....
साध्वी जी हवेली से सबसे विधा ले जंगल में नानी कुटिया में आ गई थी हवेली से
किन्तु वो अपने चेहरे पे उभरी चिंता की रेखाया सकती आवर वयोम से छुपा नहीं पाई
सकती ......क्या बात है आज आप कुछ परेशान लग रही है सब कुसल से तो है न साध्वी जी
साध्वी जी ......पता नहीं सकती अभी हम कुछ कहा नहीं सकते है
वयोम .....ऐसा क्या हुआ है साध्वी जी क्या सूर्य को कुछ हुआ है या होने वाला है
साध्वी जी ......ऐसा नहीं है सूर्य आवर उसके परिवार को कुछ भी नहीं हुआ है वयोम हम जो हवेली में रात को घटना हुए उसको ले कर के चिंतित है
सकती ......ऐसा क्या हुआ साध्वी जी हवेली में
जिसके चलते आप इतनी परेशान है
साध्वी जी पूरी बात जो उन्होंने रेखा के मंद से जाना था सब बताया
सकती .......फिर आपको उसकी तह तक नाना चाइये जब आप वह थी तब ऐसा हो सकता है तो फिर आप के वह न होने पे कितना कुछ हो सकता है
साध्वी जी ......तुम्हे क्या लगता है मैंने कोशिश नहीं की होगी क्या इसके तह तक पहुंचने की किन्तु कुछ भी हाथ नहीं लगा
आवर वो जो कोई भी है वो सूर्य को या उसके परिवार को कोई नुस्क्सान नहीं पंहुचा ने वाला है
वयोम .......ऐसा कोण हो सकता है जो आपको भेष धरे आवर क्यों
साध्वी जी .....यही तो सब समाज नहीं आ रहा है की वो सकती थी कोण आवर क्यों उसने मेरा हे भेष दरहा
अभी ये तीनो बात कर हे रहे थे की इन तीनो को किसी की आवाज सुनाई दी
आवाज .......पुत्री चिंतित न हो वो मैं हे था जिसमे तुम्हारे रूप दर्जन किया था
साध्वी जी ......पिता जी आप ....परनाम पिता जी
सकती .वयोम .....परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्री तुम्हारे
यसस्वी भाव पुत्रो
साध्वी जी ......पिता जी जब आप रात्रि में आये थे तो आपने हमें सूचित क्यों नहीं किया
गुरुदेव ......पुत्री हम किसी अन्य कार्य के लिया आये थे
इस लिया हे हम आप से भेट नहीं कर सकते थे
साध्वी जी .....ऐसा क्या कार्य था पिता जी
जिसके चलते आप हमसे मिले नीना हे चले गए आवर आपको हमारा रूप क्यों दर्जन करना पड़ा
गुरुदेव ......हम वो सब आपको नहीं बता सकते है
हम केवल ये बताने आये थे की सकती आवर वयोम को सूर्य के जाने के बाद उसके परिवार की रक्षा करनी होगी
अगर कोई भी खतरा सूर्य के परिवार पे आता है तो किसी भी मूल्य पे उनके परिवार की रक्षा सर्वोपरि होने चाइये तुम दोनों के लिया
सकती ......गुरुदेव आपकी आदेश का पालन हम अपनी आकृ साँस तक करेंगे कित्नु क्या मैं आप से कुछ जान सकता हूँ
गुरुदेव .......कहो पुत्र क्या हन्ना चाहते हो
सकती ......गुरुदेव हम सूर्य को आज की युद्ध कला की शिक्षा भी दे सकते थे फिर आपने हमें उसके लिया क्यों मना किया आवर सूर्य है कोण जिसके लिया आप ये सब कर रहे है गुरुदेव
गुरुदेव ........सकती तुम्हे सूर्य को आज की योध कला की सीख्शा देने के पीछे का उद्देश्य ये है की
सूर्य को ये शिक्षा प्राप्त करने के लिया बहुत लम्बा सफारी याय करना होगा जिसमे सूर्य को भरी दुनिया को समझने आवर जुड़ने का मौका मिलेगा अच्छे आवर बुरे की पहचान करना आवर अपनी जिम्मेदारी को समझना बहुत जरुरी है
जो सूर्य यहाँ अपने परिवार के साथ रह कर नहीं शिख सकता
महलो में सोने वाला इंसान झोपड़े में सोने वाले इंसान की पीड़ा नहीं समाज सकता उसके लिया उसको झोपड़े में सोने की आव्सय्कता होगी है
ुशी तरह सूर्य को भी समाज फैली गंदगी को मिटने के लिया उस काबिल बन उसने उतरना होगा
रही बात सूर्य कोण है ये जानने की आव्सय्कता नहीं है पुत्र
साध्वी जी ......पिता जी हमने कुछ पूरा भी महसूस किया था सुबह क्या वो भी
गुरुदेव .......है पुत्री तुम जो सोच रही हो वो सत्य है किन्तु ये साथ अभी किसी को ज्ञात नहीं होना चाइये तुम्हारे अलावा
साध्वी जी ....ान आगे हमें क्या करना है पिता जी
गुरुदेव .....कुछ समय बाद सूर्य अपनी शिक्षा के लिया चला जायेगा उस से पहले तुम्हे सूर्य को अपना आयुर्वेदिक ज्ञान देना है आवर सूर्य के जाने के बाद तुम्हे हवेली में रह कर उस परिवार की रक्षा करनी है
वयोम तुम्हे सूरजगढ़ में सूर्य के नाना के परिवार की सुरक्षा करनी है
गुरुदेव .......मेरे लिया क्या आया है
गुरुदेव ......तुम्हे सपना आवर किरण की रक्षा करनी किन्तु याद रहे तुम उनके सामने नहीं आओगे
सकती .......तो क्या मैं अपनी सकती या इस्तेमाल कर सकता हु उसके लिया
गुरुदेव .....है किन्तु जब जरूरत जो तब हे तुम रूप परिवर्तन कर अपना करता कर सकते हो
वयोम तुम्हे सूर्य सूरजगढ़ पंहुचा देगा
अब मेरा जाने का समय हाउ चूका है
साध्वी जी .....पिता जी आपको तब कब पूर्ण होगा
गुरुदेव ........जब सूर्य मुझतक पहुंचेगा तब पुत्री
साध्वी आवर सकती वयोम गुरुदेव के जाते हे अपने अपने सौंपे कार्यो की त्यार करने लगे
प्रेजेंट टाइम ......
जब से सूर्य को चूत लगी है तब से सूर्य बहार नहीं गया था वही पायल आवर प्रीति
भी सूर्य के साथ बहार गुमना चाहती थी पायल तो पहले से हे सूर्य को लिखे करती थी फिर जो बलि उत्सव में हुआ उसके बाद तो वो कुछ ज्यादा हे आकर्षित hi चुकी थी सूर्य की तरफ
पायल ......सूर्य क्या हम कही गुमने चले प्लेसेस मैं बोर होने लगी हूँ जब से आये है इंडिया तब से बस एक बार हवेली से बहार गए है वो भी जब पूरी फॅमिली उत्सव के लिया गयी थी
सूर्य ......दी मैं भी नाना चाहता हूँ पैर कोई मुझे जाने हे नहीं दे रहा है
प्रीति .......सूर्य आप माँ से बात कीजिये वो आपको मना नहीं करेंगे
सूर्य .......OK दी चलो फिर मैं बात करता हूँ
सूर्य पायल प्रीति अपने रूम से निकल बहार अपनी बुआ मेनका जो की हॉल में अपने भाबी आवर माँ सा के साथ बैठी हुए थी दादा जी बहार गए हुए थे
आवर शिव महेंद्र आवर फूफा जी बिज़नेस को सेटल्ड करने में लगे हुए थे
बुआ सा ......आ गया मेरा बीटा
सूर्य ......जी बुआ सा क्या कर रही है आप
कहते हे सूर्य अपने बुआ के साथ बड़े वाले सोफे पे लेट गया आवर अपना सर अपनी बुआ के गॉड में रख दिया
बुआ सा .......हम्म कहो क्या चाइये मेरे बेटे को
सूर्य ......कुछ भी तो नहीं बुआ सा मुझे क्या चाइये भला
बुआ सा .....बीटा मैं तुम्हारे पापा की बड़ी बहाने हूँ तुम उनके जैसा दीखता हे नहीं हरकते भी उसकी जैसे है बस वो शांत रहता है
अब बोलो भी क्या चाइये
सूर्य .....अपनी दोनों बहनो की तरफ देखते है
बुआ सा .....अब तो पक्का है कुछ तो प्लानिंग की है तुम लोगो ने
शालिनी .....दीदी मैं बताती हूँ ये तीनो बहार गुमने जाने चाहते है सूर्य को लगता है हम में से कोई इनको बहार जाने नहीं देगा आवर आपकी बात कोई ताल नहीं सकता है तो इनका प्लानिंग ये है की सूर्य आपसे परमिशन ले ताकि ये बहार गुमने जा सके
सूर्य पायल प्रीति मुँह फाडे शालिनी को देखने लगे
प्रीति ....ममी जी आपको कैसे पता की हमने यही प्लानिंग की है
पायल .....यू इडियट प्रीति मुँह खोल ने की क्या जरूरत थी
सूर्य ......दी गुस्सा न करो आपने ठीक किया दी हम झूट बोल कर वैसे भी नहीं जाने वाले थे
सूर्य .....बुआ सा मैं 4,5 रोक से बोर होल गया हूँ घर पे बैठे बैठे न बहार जा सकता हूँ न जंगल आप हे बताओ मैं क्या कृ माँ स्कूल भी नहीं जाने देती है
बुआ सा .....पैर बीटा आप ठीक तो जो जाओ पहले
सूर्य क्या आपको वाकई में लगता है बुआ सा की मैं ठीक नहीं हूँ
सूर्य अपनी शर्ट उतर देता है आवर अपने सीने पे पीठ पे दोनों बाजुओं पे लगी बेंडेड ( पट्टी ) सपना के मदद से उतर देता है
सूर्य .....ान आप हे देखो बुआ मैं ठीक हूँ की नहीं
मेनका ने अच्छे से चेक किया तो वाक़ई घाव पूरी गाढ़ा ठीक जो चुके था
बुआ .....ये इतनी जल्दी ठीक कैसे हुए तुम्हे तो इतने गहरे घाव थे की 15 दिन तो काम से काम लगे थे
सूर्य .....वो सब साध्वी जी से पूछना अब क्या हम जा सकते है
बुआ सा .....ठीक है तुम जा सकते हो
सूर्य .......दादी सा मैं राधा आवर कोमल को भी अपने साथ ले कर जा रहा हु साम तक लूट आएंगे
रेखा .....पैर बीटा वो तो स्कूल कॉलेज में है
सूर्य ......तो क्या हुआ
बुआ सा ......राधा तो तुम्हारी बुआ है न फिर तुम उसको नाम से क्यों बुलाते हो
सूर्य .....मुझे अच्छा लगता है आवर उनको भी
अब हम चलते है आप त्यार hi जाओ दी
कुछ देर में हे सूर्य पायल आवर प्रीति त्यार हो गई
सूर्य .....अच्छा माँ मम्मी बुआ दादी हम चलते है
सूर्य अपनी बहनो का हाथ पकड़ कर बहार निकला हे था की कुछ याद आते हे
सूर्य..... दी आप चलो कार निकालो मैं अभी आया बोल कर अंदर चला गया
बुआ सा .....कुछ भूल गए क्या सूर्य
सूर्य .....बुआ सा तो आपको साइज पूछना था
बुआ saa......kya कैसा साइज
सूर्य ....अरे बुआ सा आपका फिगर साइज आवर क्या
शालिनी .....ये क्या बकवाश है सूर्य क्या यही सब शिक्षा दी है हमने तुम्हे
सूर्य ......अरे माँ आप क्या बोले जा रही हो
बुआ सॉरी वो मैं बहार से अपनी पसंद की ड्रेस लाना चाहता था आप सेबल लिया ान मुझे ये तो पता नहीं न की आपकी ड्रेस किस मैप की आती है इस लिया पूछा था सॉरी माँ
बुआ सा .....शालिनी क्यों गुस्सा होती हो मेरे बेटे पे उसने कुछ गलत नहीं पूछा हम शॉप कीपर को भी तो बताये है अपनी साइज फिर ये तो अपना बीटा है
रेखा .....क्यों अपनी बुआ के लिया हे लाएगा क्या
सूर्य ......नहीं आप सब के लिया
बुआ सा एक पर्ची पे अपना साइज लिख कर शालिनी की तरफ बढ़ा देती है फिर देखा की तरफ तीनो ने अपनी अपनी बॉडी मेज़रमेंट
एक हे स्लिप पे लिख कर सूर्य की तरफ बढ़ा दी
सूर्य दादी की तरफ देखा तो
रेखा माँ सा को साड़ी पसद है तो तुम अपनी पसंद से कोई साड़ी ले आना
सूर्य अपनी बुआ के दोनों गालो पे किश करके
सूर्य .....थैंक्स बुआ सा आपने बच्चे लिया वर्ण माँ तो .....
पायल .....अब चला नहीं है क्या सूर्य
सूर्य बहार की तरफ दौड़ गया
सूर्य कार ले कर निकल गया अपने स्कूल की आवर कोमल को लेंस के लिया
बुआ सा .......शालिनी ये क्या था तुम सूर्य पे be-vajha गुस्सा क्यों कर रही थे
रेखा जी .......है शालिनी सूर्य अभी बच्चा हे तो है सरीर से भले वो समझदार लगे पैर है तो बच्चा हे फिर बचपन से उसको जैसा माहौल मिला है उस हिसाब से तो ये बहुत आम बात है
बुआ सा ......सच कहा रेखा तुमने u.s के माहौल में पला बड़ा सूर्य यहाँ के बचो से बहुत समझदार बच्चे है उसपे फिर कभी गुस्सा नहीं होना पहले हे कब देती हूँ सबको
शालिनी ......सॉरी दीदी पता नहीं मुझे क्यों गुस्सा आ गया था सूर्य का ऐसा कहने पे
दादी जी .....वैसे भी वो ान कुछ दिन बाद चला जाने वाला है पता नहीं कब वापिस लौटेगा वह कितना टाइम लगेगा ये भी पता नहीं है
ऐसे में उसकी छोटी मोती गलतियों को भुला कर अपना प्यार लुटा बेटी वो किसी को सबसे सुपर मंटा है तो वो हो तुम शालिनी बेटी
रेखा .....माँ सा कोई आवर भी है जिसको वो इतना हे चाहता है जितना शालू को
बुआ सा .....कोण है वो जाता हमें भी तो पता चले
रेखा जी .....शालिनी की भतीजी किरण आवर सपना
दादी जी ......क्या किरण आवर सपना ये तुम क्या कहा रही हो बेटी
शालिनी ......है माँ सा दीदी सच कह रही है
सूर्य सपनो में भी यही नाम दोहराता रहता है
आवर सायद आपको यकीं भी न आये पैर संजय की बेटी किरण हमारे यहाँ आने से पहले हे सूर्य के सपने देखती आ रही है उसने तो बहुत सरे तस्वीरें तब बना दी थी सूर्य की बचपन से ले कर अब तक की सूर्य की सेकड़ो खूबसूरत तस्वीर बना चुकी है
बुआ सा .....ये कैसे मुमकिन है बोना किसी को देखते उसकी ऐसे तस्वीर बना देना
शालिनी .....मुझे भी यकीं नहीं हुआ था दीदी पैर जब मैंने प्रिय के पास राखी तस्वीरें देखि तो मैं भी चौंक गई
क्युकी उसने सूर्य के साथ जो गतणय गत चुकी थी वो सब तस्वीरें थी
जैसे सूर्य का एक्सीडेंट जो कर रोड पे पेस रहना खून में लथपत हो कर
उसका कोमा में बीएड पे लेता हुए जिसमे मैं सूर्य का हाथ थामे तो रही थी आवर
सूर्य को खेल खुद में मिले ट्रॉफी की
ऐसे बहुत सो तस्वीरें है जो उसने सपना में देख कर बना या था
बुआ सा .....लगता है दोनों का पीछे जनम से हे रिस्ता है
शालिनी ......दीदी ये तो पता नहीं पैर मुझे दर है की अगर सूर्य की यही वो स्वीटी है जिसके नाम लेते हुए सूर्य कोमा से निकला था तो कोई कुछ भी कर ले मुझे नहीं लगता की सूर्य किसी को किरण आवर अपने बिच आने देगा
दादी जी .....पैर बीटा शालू इनका रिस्ता समाज कभी सवीकार नहीं करेगा
शालिनी .....माँ सा मुझे भी तो यही सर है सूर्य भले हम से लड़ जाये पैर समाज से कैसे
बुआ सा .....अगर नौबत ऐसे आज तो मैं सूर्य को आवर किरण का हर फैसले में साथ दूंगी फिर चाहते मुझे तुम सभी की खिलाफ हे क्यों न जाना पड़े
रेखा ......क्या अपनी बेटी के खिलाप भी जा पाओगी दीदी
बुआ सा .....क्या मतलब किसी बात कर रही होगी रेखा तुम
रेखा .....मैं पायल की बात कर रही हूँ दीदी पायल सूर्य को लिखे करती है
वो सूर्य को भाई साथ साथ कुछ आवर रूप में देखने लगी है
बुआ सा ......मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है अगर सूर्य आवर पायल की तरफ से है हुए तो मैं त्यार हूँ भले हे फिर पायल सूर्य की दूसरी बीबी बने मेरे बेटे आवर बेटी की ख़ुशी से भध कर कुछ नहीं है मेरे लिया ..........
सूर्य स्कूल से कोमल को अपने साथ ले राधा की कॉलेज की आवर भध गया जो की ये ुशी दहाड़ में है जहा महेंद्र ने शॉपिंग मॉल खोल रहा है
( सिटी 1 के नाम जीकर होगा उसका आगे )
कुछ 20 ,25 मिनट्स की ड्राइविंग के बाद सूर्य कार को सीधा राधा की कॉलेज की पार्किंग में लगा देता है
काफी लड़के लड़किया बहार गम रहे थे कुछ कैंटीन में मजे कर रहे थे तो कुछ पैदा की ोुतः में सिगरेट खिंच रहे थे
प्रीति .....सूर्य ये कैसा कॉलेज है
इसमें कॉलेज जैसा तो कुछ है भी न यहाँ अच्छा बिल्डिंग' स्ट्रक्चर है नहीं मुझे यहाँ के टीचर कुछ खास लगे
सूर्य .....है दी मुझे भी ऐसा हे लगता है पैर यहाँ कोई अच्छा कॉलेज है भी तो नहीं
चलो दी हम राधा से को बुला लेट है
पायल ......सूर्य मैं यहिबरक्ति हूँ कार में तुम हो आवो
सूर्य .....ठीक है दी मैं अभी आता हूँ
कह कर सूर्य आगे भध गया
वही कुछ 3,4 लड़के जो की देखने तो अच्छे खास परिवार के लग रहे थे वो सब ीदार हे देख रहे थे सूर्य ने एक बार देखा आवर आगे भध गया
कुछ क्लास देखने के बाद भी जब राधा नहीं देखि तो सूर्य फिर से ुशी क्लास में फिर से गुस्सा गया जिसमे राधा को होना चाइये था सेकंड ईयर की क्लास में
सूर्य को देखते हे वह जो पढ़ा रही मेम ने गुस्से में गुरा क्युकी सूर्य बोना परमिशन के हे अंदर आ गया था
15 ,20 लड़के लड़किया स्टडी कर रहे थे
mem....kon हो तुम आवर बोना पीछे क्लास में कैसे आये
surya....sorry मेम मुझसे गलती जो गया
क्या आप मुझे बता सकती है की राधा ठाकुर कहा है
मेम .....कोण राधा ठाकुर किसी बात कर रहे हो
यहाँ 3 राधा है
सूर्य ......मेम जो राधा ठाकुर सूर्यगढ़ से आती है उनकी बात कर रहा हूँ
मेम .......महेंद्र ठाकुर की बहाने राधा क्या
सूर्य ......जी मेम उनकी हे बात कर रहा हूँ
मेम ......वो तो बहार गई हुए है तुम कोण हो आवर राधा से क्या सम्बंद है
सूर्य ......जी मेरा नाम सूर्य शिव ठाकुर है राधा मेरी बुआ सा है
अभी सूर्य बोल हे रहा था की राधा बहार से क्लास में आई उसकी आँखे नाम थी जो सूर्य ने देख ली
राधा ने दहाड़ सूर्य पे ध्यान नहीं दिया आवर चुप चाप अपने सीट पे जा कर बेथ गई
surya.......radhaaa बुआ सा
सूर्य की आवाज सुन जैसे हे रहा ने सर उठाया
सूर्य को अपने सामने खड़ा देखा
सूर्य राधा के आँखों से बहते हुए आंसू देख राधा को गले से लगा लेता है
सूर्य ........किसने आप पे हाथ उठा राधा (सूर्य ने ये सब गुस्से में कहा )
जिन्होंने सूर्य को उत्सव में देखा था वो पहचान गए थे की ये सूर्य ठाकुर है में को भी ान चिंता होने लगी थी क्युकी में ने सूर्य को भले हे न देखा था पैर बलि उत्सव पे जो हुआ उस से में भी वाकिफ थे
सूर्य राधा का हाथ पकड़ गुस्से में बहार ले गया
उदार सूर्य के जाने के बाद वो चारो लड़के पायल प्रीति कोमल को ले कर कुछ प्लान बना रहे थे
ीदार रहा जब कैंटीन से गर्ल्स बाथरूम की आवर गई तो यहाँ के मला का का बीटा जो काफी दिन से राधा को पटाने में लगा हुआ था वो भी निकल गया
राधा बाथरूम से बहार निकली तो सामने वही लड़का खड़ा था
राधा तुम यहाँ क्या कर रहे हो
m.ladka .......राधा आज आखरी बार कब रहा हूँ मेरे प्यारा को काबुल कर लो नहीं तो मुझे दूसरे तरीके भी आते है
राधा ......मैंने कितनी बार तुमसे कहा मैं तुमसे प्यारा नहीं करती हूँ
m.ladka ......बहुत हुए प्यार प्यार का नाटक साली कब से तुम्हे अपने निचे लेन की कोशिश कर रहा हूँ
m.ladke की बात सुन राधा गुस्से में उसको दपद मर देती है
m.ladka .......रुक साली कुटिया मुझे थपड मरती है
कहते के साथ हे उसने राधा के दोनों गालो पे थपड मर दिया
जिस से राधा पे गिर गई
m.ladka .......ये देख साली कुटिया
राधा ने जब देखा तो m.ladke के हाथ में मोबाइल था आवर उसने अभी अभी की राधा की वीडियो थी जिसमे में पिसाब कर रही थी
m.ladka ......साली तुम्हे तो मैं अपनी रंडी बनाऊंगा
तभी m.ladke का फ़ोन बजे लगा
m.ladki ......hello पापा है अभी कॉलेज में हे हूँ
नहीं OK मैं अभी आता हूँ घर पे
m.ladki .......कल तक का टाइम है तुम्हारे पास मेरी रंडी बन के रहोगी या मैं ये वीडियो नेट पे दाल दिन ये सोच लेना
इतना बोल वो लड़की वह से चला गया
ीदार रहा कुछ देर रोटी रही फिर अपनी क्लास की तरफ चली गई
वही वो चारो लड़के भी पायल आवर प्रीति के साथ बकवाश कर रहे थे
सायद कुछ निशा किया था उन्होंने उनकी आँखे देख तो यही लग रहा था
वो अभी कुछ आवर आगे बैज उस से पहले हे m.ladki वह आ जाता है उसके कहते के साथ हे एक खुली जीप में बेथ वो चारो भी निकल गए
सूर्य ......कोण था रहा जिसमे तुम पे हाथ उठाया
आवर क्या हुआ है मुझे बताओ
सूर्य अपने गुस्से को काबू में कर के एक एक सबैड चबा कर बोल रहा था
राधा आवर सूर्य को कार में से कोमल ने देख लिया
कोमल ......देखो दी सूर्य आवर बुआ वह है
कोमल के बताने पे वो तीनो भी वही आ गई मूड इन तीनो का भी ख़राब हे था
सूर्य .....तुम तीनो को क्या हुआ है
कोमल ......वो भाई कुछ लड़के थे 4 जो हमारे साथ बतमीज़ी से बात की उन्होंने पायल दी का हाथ भी पकड़ा
सूर्य .......क्या ये हाउ क्या रहा है ये कॉलेज है या गुंडों की बस्ती
है कहा वो सेल आज
राधा ......तुमने ान अगर एच नहीं बोलै तो तुम्हारी कसम इस कॉलेज को हे आगे लगा दूंगा
उस बार सूर्य ने पूरी दहाड़ से बोलै जिसको को काफी लड़की लड़को ने सुना
वही में क्लास छोड़ प्रिंसिपल को पूरी जानकारी दी
प्रिंसिपल के पेअर कपङे लगे थे क्युकी ये प्रिंसिपल सूरजगढ़ का हे था उसकी पता था की कुछ भी गलत हुआ तो ठाकुर उसने भी काट डालेंगे उसने उम्मीद दिखी तो जोरावर राणा के रूप में
राधा ......मैं बताती हूँ सूर्य वो यहाँ का m.l.a का लड़की है सिद्धू गुजर नाम है उसका उसने मेरी बाथरूम करते हुए वीडियो बनाओ है आवर मुझे कल तक का टाइम दिया
सूर्य ......क्या कहा वीडियो आवर किस चीज़ का टाइम दिया है
राधा ......वो चाहता है की मैं उसके निचे नहीं लेती तो वो जल मेरी वीडियो नेट पे दाल देगा
सूर्य .......नहीं छोडूंगा किसी को भी सब मरेंगे सबने सब मरेंगे
कहा है वो जानवर
राधा .......वो अपनी जीप ले कर घर चला गया है
कोमल ......भाई वो लड़के भी एक जीप में बेथ कर हे गए है
उसका no.tha रज## ज***7
राधा .....ये उसकी हे जीप है
सूर्य कार की तरफ बढ़ा हे था की इतने में महेंद्र आवर जोरावर अपनी अपनी कार से वह आ गए
महेंद्र ......सूर्य रुक जाओ बात क्या हुई है
सूर्य .......आपको जो पूछना है इनसे पूछिए आवर आप बिच में बिलकुल भी मत आना आप दोनों को मेरी कसम है
सूर्य राधा को कार में बैठा फुल स्पीड से निकल गया ............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
रेखा जी .......वो माँ सा हम बस मजाक कर रहे आवर कुछ नहीं
साध्वी जी अंदर आ कर सूर्य के घावों को चेक किया जो की लग भाग भर चुके थे एक हे रात में कुछ तो ॉडी का असर था कुछ सूर्य के सरीर की अपनी खुबिया
सूर्य चेक करवाने के बाद अपने रूम में निकल गया
साध्वी जी को रात की घटना का पता लगा तो बहुत परेशान हो गई उन्होंने किसी को कुछ भी नहीं बताया जो उन्होंने कहा वही मन लिया जबकि उनको तो रात का कुछ पता भी नहीं था ..........
अब आगे .......
सपना आवर किरण 2 दिन सूर्यगढ़ में हे रुकी उसके बाद वो दोनों बड़े मां जी के साथ सूर्यगढ़ के लिया निकल गई
इन दो दिनों में सूर्य पूरी तरह से ठीक हो चूका था
साध्वी जी की आयुर्वेदिक ोस्दियो से शालिनी भी बहुत हद तक ठीक जो चुकी थी
थोड़ा पीछे चलते है .....
साध्वी जी हवेली से सबसे विधा ले जंगल में नानी कुटिया में आ गई थी हवेली से
किन्तु वो अपने चेहरे पे उभरी चिंता की रेखाया सकती आवर वयोम से छुपा नहीं पाई
सकती ......क्या बात है आज आप कुछ परेशान लग रही है सब कुसल से तो है न साध्वी जी
साध्वी जी ......पता नहीं सकती अभी हम कुछ कहा नहीं सकते है
वयोम .....ऐसा क्या हुआ है साध्वी जी क्या सूर्य को कुछ हुआ है या होने वाला है
साध्वी जी ......ऐसा नहीं है सूर्य आवर उसके परिवार को कुछ भी नहीं हुआ है वयोम हम जो हवेली में रात को घटना हुए उसको ले कर के चिंतित है
सकती ......ऐसा क्या हुआ साध्वी जी हवेली में
जिसके चलते आप इतनी परेशान है
साध्वी जी पूरी बात जो उन्होंने रेखा के मंद से जाना था सब बताया
सकती .......फिर आपको उसकी तह तक नाना चाइये जब आप वह थी तब ऐसा हो सकता है तो फिर आप के वह न होने पे कितना कुछ हो सकता है
साध्वी जी ......तुम्हे क्या लगता है मैंने कोशिश नहीं की होगी क्या इसके तह तक पहुंचने की किन्तु कुछ भी हाथ नहीं लगा
आवर वो जो कोई भी है वो सूर्य को या उसके परिवार को कोई नुस्क्सान नहीं पंहुचा ने वाला है
वयोम .......ऐसा कोण हो सकता है जो आपको भेष धरे आवर क्यों
साध्वी जी .....यही तो सब समाज नहीं आ रहा है की वो सकती थी कोण आवर क्यों उसने मेरा हे भेष दरहा
अभी ये तीनो बात कर हे रहे थे की इन तीनो को किसी की आवाज सुनाई दी
आवाज .......पुत्री चिंतित न हो वो मैं हे था जिसमे तुम्हारे रूप दर्जन किया था
साध्वी जी ......पिता जी आप ....परनाम पिता जी
सकती .वयोम .....परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्री तुम्हारे
यसस्वी भाव पुत्रो
साध्वी जी ......पिता जी जब आप रात्रि में आये थे तो आपने हमें सूचित क्यों नहीं किया
गुरुदेव ......पुत्री हम किसी अन्य कार्य के लिया आये थे
इस लिया हे हम आप से भेट नहीं कर सकते थे
साध्वी जी .....ऐसा क्या कार्य था पिता जी
जिसके चलते आप हमसे मिले नीना हे चले गए आवर आपको हमारा रूप क्यों दर्जन करना पड़ा
गुरुदेव ......हम वो सब आपको नहीं बता सकते है
हम केवल ये बताने आये थे की सकती आवर वयोम को सूर्य के जाने के बाद उसके परिवार की रक्षा करनी होगी
अगर कोई भी खतरा सूर्य के परिवार पे आता है तो किसी भी मूल्य पे उनके परिवार की रक्षा सर्वोपरि होने चाइये तुम दोनों के लिया
सकती ......गुरुदेव आपकी आदेश का पालन हम अपनी आकृ साँस तक करेंगे कित्नु क्या मैं आप से कुछ जान सकता हूँ
गुरुदेव .......कहो पुत्र क्या हन्ना चाहते हो
सकती ......गुरुदेव हम सूर्य को आज की युद्ध कला की शिक्षा भी दे सकते थे फिर आपने हमें उसके लिया क्यों मना किया आवर सूर्य है कोण जिसके लिया आप ये सब कर रहे है गुरुदेव
गुरुदेव ........सकती तुम्हे सूर्य को आज की योध कला की सीख्शा देने के पीछे का उद्देश्य ये है की
सूर्य को ये शिक्षा प्राप्त करने के लिया बहुत लम्बा सफारी याय करना होगा जिसमे सूर्य को भरी दुनिया को समझने आवर जुड़ने का मौका मिलेगा अच्छे आवर बुरे की पहचान करना आवर अपनी जिम्मेदारी को समझना बहुत जरुरी है
जो सूर्य यहाँ अपने परिवार के साथ रह कर नहीं शिख सकता
महलो में सोने वाला इंसान झोपड़े में सोने वाले इंसान की पीड़ा नहीं समाज सकता उसके लिया उसको झोपड़े में सोने की आव्सय्कता होगी है
ुशी तरह सूर्य को भी समाज फैली गंदगी को मिटने के लिया उस काबिल बन उसने उतरना होगा
रही बात सूर्य कोण है ये जानने की आव्सय्कता नहीं है पुत्र
साध्वी जी ......पिता जी हमने कुछ पूरा भी महसूस किया था सुबह क्या वो भी
गुरुदेव .......है पुत्री तुम जो सोच रही हो वो सत्य है किन्तु ये साथ अभी किसी को ज्ञात नहीं होना चाइये तुम्हारे अलावा
साध्वी जी ....ान आगे हमें क्या करना है पिता जी
गुरुदेव .....कुछ समय बाद सूर्य अपनी शिक्षा के लिया चला जायेगा उस से पहले तुम्हे सूर्य को अपना आयुर्वेदिक ज्ञान देना है आवर सूर्य के जाने के बाद तुम्हे हवेली में रह कर उस परिवार की रक्षा करनी है
वयोम तुम्हे सूरजगढ़ में सूर्य के नाना के परिवार की सुरक्षा करनी है
गुरुदेव .......मेरे लिया क्या आया है
गुरुदेव ......तुम्हे सपना आवर किरण की रक्षा करनी किन्तु याद रहे तुम उनके सामने नहीं आओगे
सकती .......तो क्या मैं अपनी सकती या इस्तेमाल कर सकता हु उसके लिया
गुरुदेव .....है किन्तु जब जरूरत जो तब हे तुम रूप परिवर्तन कर अपना करता कर सकते हो
वयोम तुम्हे सूर्य सूरजगढ़ पंहुचा देगा
अब मेरा जाने का समय हाउ चूका है
साध्वी जी .....पिता जी आपको तब कब पूर्ण होगा
गुरुदेव ........जब सूर्य मुझतक पहुंचेगा तब पुत्री
साध्वी आवर सकती वयोम गुरुदेव के जाते हे अपने अपने सौंपे कार्यो की त्यार करने लगे
प्रेजेंट टाइम ......
जब से सूर्य को चूत लगी है तब से सूर्य बहार नहीं गया था वही पायल आवर प्रीति
भी सूर्य के साथ बहार गुमना चाहती थी पायल तो पहले से हे सूर्य को लिखे करती थी फिर जो बलि उत्सव में हुआ उसके बाद तो वो कुछ ज्यादा हे आकर्षित hi चुकी थी सूर्य की तरफ
पायल ......सूर्य क्या हम कही गुमने चले प्लेसेस मैं बोर होने लगी हूँ जब से आये है इंडिया तब से बस एक बार हवेली से बहार गए है वो भी जब पूरी फॅमिली उत्सव के लिया गयी थी
सूर्य ......दी मैं भी नाना चाहता हूँ पैर कोई मुझे जाने हे नहीं दे रहा है
प्रीति .......सूर्य आप माँ से बात कीजिये वो आपको मना नहीं करेंगे
सूर्य .......OK दी चलो फिर मैं बात करता हूँ
सूर्य पायल प्रीति अपने रूम से निकल बहार अपनी बुआ मेनका जो की हॉल में अपने भाबी आवर माँ सा के साथ बैठी हुए थी दादा जी बहार गए हुए थे
आवर शिव महेंद्र आवर फूफा जी बिज़नेस को सेटल्ड करने में लगे हुए थे
बुआ सा ......आ गया मेरा बीटा
सूर्य ......जी बुआ सा क्या कर रही है आप
कहते हे सूर्य अपने बुआ के साथ बड़े वाले सोफे पे लेट गया आवर अपना सर अपनी बुआ के गॉड में रख दिया
बुआ सा .......हम्म कहो क्या चाइये मेरे बेटे को
सूर्य ......कुछ भी तो नहीं बुआ सा मुझे क्या चाइये भला
बुआ सा .....बीटा मैं तुम्हारे पापा की बड़ी बहाने हूँ तुम उनके जैसा दीखता हे नहीं हरकते भी उसकी जैसे है बस वो शांत रहता है
अब बोलो भी क्या चाइये
सूर्य .....अपनी दोनों बहनो की तरफ देखते है
बुआ सा .....अब तो पक्का है कुछ तो प्लानिंग की है तुम लोगो ने
शालिनी .....दीदी मैं बताती हूँ ये तीनो बहार गुमने जाने चाहते है सूर्य को लगता है हम में से कोई इनको बहार जाने नहीं देगा आवर आपकी बात कोई ताल नहीं सकता है तो इनका प्लानिंग ये है की सूर्य आपसे परमिशन ले ताकि ये बहार गुमने जा सके
सूर्य पायल प्रीति मुँह फाडे शालिनी को देखने लगे
प्रीति ....ममी जी आपको कैसे पता की हमने यही प्लानिंग की है
पायल .....यू इडियट प्रीति मुँह खोल ने की क्या जरूरत थी
सूर्य ......दी गुस्सा न करो आपने ठीक किया दी हम झूट बोल कर वैसे भी नहीं जाने वाले थे
सूर्य .....बुआ सा मैं 4,5 रोक से बोर होल गया हूँ घर पे बैठे बैठे न बहार जा सकता हूँ न जंगल आप हे बताओ मैं क्या कृ माँ स्कूल भी नहीं जाने देती है
बुआ सा .....पैर बीटा आप ठीक तो जो जाओ पहले
सूर्य क्या आपको वाकई में लगता है बुआ सा की मैं ठीक नहीं हूँ
सूर्य अपनी शर्ट उतर देता है आवर अपने सीने पे पीठ पे दोनों बाजुओं पे लगी बेंडेड ( पट्टी ) सपना के मदद से उतर देता है
सूर्य .....ान आप हे देखो बुआ मैं ठीक हूँ की नहीं
मेनका ने अच्छे से चेक किया तो वाक़ई घाव पूरी गाढ़ा ठीक जो चुके था
बुआ .....ये इतनी जल्दी ठीक कैसे हुए तुम्हे तो इतने गहरे घाव थे की 15 दिन तो काम से काम लगे थे
सूर्य .....वो सब साध्वी जी से पूछना अब क्या हम जा सकते है
बुआ सा .....ठीक है तुम जा सकते हो
सूर्य .......दादी सा मैं राधा आवर कोमल को भी अपने साथ ले कर जा रहा हु साम तक लूट आएंगे
रेखा .....पैर बीटा वो तो स्कूल कॉलेज में है
सूर्य ......तो क्या हुआ
बुआ सा ......राधा तो तुम्हारी बुआ है न फिर तुम उसको नाम से क्यों बुलाते हो
सूर्य .....मुझे अच्छा लगता है आवर उनको भी
अब हम चलते है आप त्यार hi जाओ दी
कुछ देर में हे सूर्य पायल आवर प्रीति त्यार हो गई
सूर्य .....अच्छा माँ मम्मी बुआ दादी हम चलते है
सूर्य अपनी बहनो का हाथ पकड़ कर बहार निकला हे था की कुछ याद आते हे
सूर्य..... दी आप चलो कार निकालो मैं अभी आया बोल कर अंदर चला गया
बुआ सा .....कुछ भूल गए क्या सूर्य
सूर्य .....बुआ सा तो आपको साइज पूछना था
बुआ saa......kya कैसा साइज
सूर्य ....अरे बुआ सा आपका फिगर साइज आवर क्या
शालिनी .....ये क्या बकवाश है सूर्य क्या यही सब शिक्षा दी है हमने तुम्हे
सूर्य ......अरे माँ आप क्या बोले जा रही हो
बुआ सॉरी वो मैं बहार से अपनी पसंद की ड्रेस लाना चाहता था आप सेबल लिया ान मुझे ये तो पता नहीं न की आपकी ड्रेस किस मैप की आती है इस लिया पूछा था सॉरी माँ
बुआ सा .....शालिनी क्यों गुस्सा होती हो मेरे बेटे पे उसने कुछ गलत नहीं पूछा हम शॉप कीपर को भी तो बताये है अपनी साइज फिर ये तो अपना बीटा है
रेखा .....क्यों अपनी बुआ के लिया हे लाएगा क्या
सूर्य ......नहीं आप सब के लिया
बुआ सा एक पर्ची पे अपना साइज लिख कर शालिनी की तरफ बढ़ा देती है फिर देखा की तरफ तीनो ने अपनी अपनी बॉडी मेज़रमेंट
एक हे स्लिप पे लिख कर सूर्य की तरफ बढ़ा दी
सूर्य दादी की तरफ देखा तो
रेखा माँ सा को साड़ी पसद है तो तुम अपनी पसंद से कोई साड़ी ले आना
सूर्य अपनी बुआ के दोनों गालो पे किश करके
सूर्य .....थैंक्स बुआ सा आपने बच्चे लिया वर्ण माँ तो .....
पायल .....अब चला नहीं है क्या सूर्य
सूर्य बहार की तरफ दौड़ गया
सूर्य कार ले कर निकल गया अपने स्कूल की आवर कोमल को लेंस के लिया
बुआ सा .......शालिनी ये क्या था तुम सूर्य पे be-vajha गुस्सा क्यों कर रही थे
रेखा जी .......है शालिनी सूर्य अभी बच्चा हे तो है सरीर से भले वो समझदार लगे पैर है तो बच्चा हे फिर बचपन से उसको जैसा माहौल मिला है उस हिसाब से तो ये बहुत आम बात है
बुआ सा ......सच कहा रेखा तुमने u.s के माहौल में पला बड़ा सूर्य यहाँ के बचो से बहुत समझदार बच्चे है उसपे फिर कभी गुस्सा नहीं होना पहले हे कब देती हूँ सबको
शालिनी ......सॉरी दीदी पता नहीं मुझे क्यों गुस्सा आ गया था सूर्य का ऐसा कहने पे
दादी जी .....वैसे भी वो ान कुछ दिन बाद चला जाने वाला है पता नहीं कब वापिस लौटेगा वह कितना टाइम लगेगा ये भी पता नहीं है
ऐसे में उसकी छोटी मोती गलतियों को भुला कर अपना प्यार लुटा बेटी वो किसी को सबसे सुपर मंटा है तो वो हो तुम शालिनी बेटी
रेखा .....माँ सा कोई आवर भी है जिसको वो इतना हे चाहता है जितना शालू को
बुआ सा .....कोण है वो जाता हमें भी तो पता चले
रेखा जी .....शालिनी की भतीजी किरण आवर सपना
दादी जी ......क्या किरण आवर सपना ये तुम क्या कहा रही हो बेटी
शालिनी ......है माँ सा दीदी सच कह रही है
सूर्य सपनो में भी यही नाम दोहराता रहता है
आवर सायद आपको यकीं भी न आये पैर संजय की बेटी किरण हमारे यहाँ आने से पहले हे सूर्य के सपने देखती आ रही है उसने तो बहुत सरे तस्वीरें तब बना दी थी सूर्य की बचपन से ले कर अब तक की सूर्य की सेकड़ो खूबसूरत तस्वीर बना चुकी है
बुआ सा .....ये कैसे मुमकिन है बोना किसी को देखते उसकी ऐसे तस्वीर बना देना
शालिनी .....मुझे भी यकीं नहीं हुआ था दीदी पैर जब मैंने प्रिय के पास राखी तस्वीरें देखि तो मैं भी चौंक गई
क्युकी उसने सूर्य के साथ जो गतणय गत चुकी थी वो सब तस्वीरें थी
जैसे सूर्य का एक्सीडेंट जो कर रोड पे पेस रहना खून में लथपत हो कर
उसका कोमा में बीएड पे लेता हुए जिसमे मैं सूर्य का हाथ थामे तो रही थी आवर
सूर्य को खेल खुद में मिले ट्रॉफी की
ऐसे बहुत सो तस्वीरें है जो उसने सपना में देख कर बना या था
बुआ सा .....लगता है दोनों का पीछे जनम से हे रिस्ता है
शालिनी ......दीदी ये तो पता नहीं पैर मुझे दर है की अगर सूर्य की यही वो स्वीटी है जिसके नाम लेते हुए सूर्य कोमा से निकला था तो कोई कुछ भी कर ले मुझे नहीं लगता की सूर्य किसी को किरण आवर अपने बिच आने देगा
दादी जी .....पैर बीटा शालू इनका रिस्ता समाज कभी सवीकार नहीं करेगा
शालिनी .....माँ सा मुझे भी तो यही सर है सूर्य भले हम से लड़ जाये पैर समाज से कैसे
बुआ सा .....अगर नौबत ऐसे आज तो मैं सूर्य को आवर किरण का हर फैसले में साथ दूंगी फिर चाहते मुझे तुम सभी की खिलाफ हे क्यों न जाना पड़े
रेखा ......क्या अपनी बेटी के खिलाप भी जा पाओगी दीदी
बुआ सा .....क्या मतलब किसी बात कर रही होगी रेखा तुम
रेखा .....मैं पायल की बात कर रही हूँ दीदी पायल सूर्य को लिखे करती है
वो सूर्य को भाई साथ साथ कुछ आवर रूप में देखने लगी है
बुआ सा ......मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है अगर सूर्य आवर पायल की तरफ से है हुए तो मैं त्यार हूँ भले हे फिर पायल सूर्य की दूसरी बीबी बने मेरे बेटे आवर बेटी की ख़ुशी से भध कर कुछ नहीं है मेरे लिया ..........
सूर्य स्कूल से कोमल को अपने साथ ले राधा की कॉलेज की आवर भध गया जो की ये ुशी दहाड़ में है जहा महेंद्र ने शॉपिंग मॉल खोल रहा है
( सिटी 1 के नाम जीकर होगा उसका आगे )
कुछ 20 ,25 मिनट्स की ड्राइविंग के बाद सूर्य कार को सीधा राधा की कॉलेज की पार्किंग में लगा देता है
काफी लड़के लड़किया बहार गम रहे थे कुछ कैंटीन में मजे कर रहे थे तो कुछ पैदा की ोुतः में सिगरेट खिंच रहे थे
प्रीति .....सूर्य ये कैसा कॉलेज है
इसमें कॉलेज जैसा तो कुछ है भी न यहाँ अच्छा बिल्डिंग' स्ट्रक्चर है नहीं मुझे यहाँ के टीचर कुछ खास लगे
सूर्य .....है दी मुझे भी ऐसा हे लगता है पैर यहाँ कोई अच्छा कॉलेज है भी तो नहीं
चलो दी हम राधा से को बुला लेट है
पायल ......सूर्य मैं यहिबरक्ति हूँ कार में तुम हो आवो
सूर्य .....ठीक है दी मैं अभी आता हूँ
कह कर सूर्य आगे भध गया
वही कुछ 3,4 लड़के जो की देखने तो अच्छे खास परिवार के लग रहे थे वो सब ीदार हे देख रहे थे सूर्य ने एक बार देखा आवर आगे भध गया
कुछ क्लास देखने के बाद भी जब राधा नहीं देखि तो सूर्य फिर से ुशी क्लास में फिर से गुस्सा गया जिसमे राधा को होना चाइये था सेकंड ईयर की क्लास में
सूर्य को देखते हे वह जो पढ़ा रही मेम ने गुस्से में गुरा क्युकी सूर्य बोना परमिशन के हे अंदर आ गया था
15 ,20 लड़के लड़किया स्टडी कर रहे थे
mem....kon हो तुम आवर बोना पीछे क्लास में कैसे आये
surya....sorry मेम मुझसे गलती जो गया
क्या आप मुझे बता सकती है की राधा ठाकुर कहा है
मेम .....कोण राधा ठाकुर किसी बात कर रहे हो
यहाँ 3 राधा है
सूर्य ......मेम जो राधा ठाकुर सूर्यगढ़ से आती है उनकी बात कर रहा हूँ
मेम .......महेंद्र ठाकुर की बहाने राधा क्या
सूर्य ......जी मेम उनकी हे बात कर रहा हूँ
मेम ......वो तो बहार गई हुए है तुम कोण हो आवर राधा से क्या सम्बंद है
सूर्य ......जी मेरा नाम सूर्य शिव ठाकुर है राधा मेरी बुआ सा है
अभी सूर्य बोल हे रहा था की राधा बहार से क्लास में आई उसकी आँखे नाम थी जो सूर्य ने देख ली
राधा ने दहाड़ सूर्य पे ध्यान नहीं दिया आवर चुप चाप अपने सीट पे जा कर बेथ गई
surya.......radhaaa बुआ सा
सूर्य की आवाज सुन जैसे हे रहा ने सर उठाया
सूर्य को अपने सामने खड़ा देखा
सूर्य राधा के आँखों से बहते हुए आंसू देख राधा को गले से लगा लेता है
सूर्य ........किसने आप पे हाथ उठा राधा (सूर्य ने ये सब गुस्से में कहा )
जिन्होंने सूर्य को उत्सव में देखा था वो पहचान गए थे की ये सूर्य ठाकुर है में को भी ान चिंता होने लगी थी क्युकी में ने सूर्य को भले हे न देखा था पैर बलि उत्सव पे जो हुआ उस से में भी वाकिफ थे
सूर्य राधा का हाथ पकड़ गुस्से में बहार ले गया
उदार सूर्य के जाने के बाद वो चारो लड़के पायल प्रीति कोमल को ले कर कुछ प्लान बना रहे थे
ीदार रहा जब कैंटीन से गर्ल्स बाथरूम की आवर गई तो यहाँ के मला का का बीटा जो काफी दिन से राधा को पटाने में लगा हुआ था वो भी निकल गया
राधा बाथरूम से बहार निकली तो सामने वही लड़का खड़ा था
राधा तुम यहाँ क्या कर रहे हो
m.ladka .......राधा आज आखरी बार कब रहा हूँ मेरे प्यारा को काबुल कर लो नहीं तो मुझे दूसरे तरीके भी आते है
राधा ......मैंने कितनी बार तुमसे कहा मैं तुमसे प्यारा नहीं करती हूँ
m.ladka ......बहुत हुए प्यार प्यार का नाटक साली कब से तुम्हे अपने निचे लेन की कोशिश कर रहा हूँ
m.ladke की बात सुन राधा गुस्से में उसको दपद मर देती है
m.ladka .......रुक साली कुटिया मुझे थपड मरती है
कहते के साथ हे उसने राधा के दोनों गालो पे थपड मर दिया
जिस से राधा पे गिर गई
m.ladka .......ये देख साली कुटिया
राधा ने जब देखा तो m.ladke के हाथ में मोबाइल था आवर उसने अभी अभी की राधा की वीडियो थी जिसमे में पिसाब कर रही थी
m.ladka ......साली तुम्हे तो मैं अपनी रंडी बनाऊंगा
तभी m.ladke का फ़ोन बजे लगा
m.ladki ......hello पापा है अभी कॉलेज में हे हूँ
नहीं OK मैं अभी आता हूँ घर पे
m.ladki .......कल तक का टाइम है तुम्हारे पास मेरी रंडी बन के रहोगी या मैं ये वीडियो नेट पे दाल दिन ये सोच लेना
इतना बोल वो लड़की वह से चला गया
ीदार रहा कुछ देर रोटी रही फिर अपनी क्लास की तरफ चली गई
वही वो चारो लड़के भी पायल आवर प्रीति के साथ बकवाश कर रहे थे
सायद कुछ निशा किया था उन्होंने उनकी आँखे देख तो यही लग रहा था
वो अभी कुछ आवर आगे बैज उस से पहले हे m.ladki वह आ जाता है उसके कहते के साथ हे एक खुली जीप में बेथ वो चारो भी निकल गए
सूर्य ......कोण था रहा जिसमे तुम पे हाथ उठाया
आवर क्या हुआ है मुझे बताओ
सूर्य अपने गुस्से को काबू में कर के एक एक सबैड चबा कर बोल रहा था
राधा आवर सूर्य को कार में से कोमल ने देख लिया
कोमल ......देखो दी सूर्य आवर बुआ वह है
कोमल के बताने पे वो तीनो भी वही आ गई मूड इन तीनो का भी ख़राब हे था
सूर्य .....तुम तीनो को क्या हुआ है
कोमल ......वो भाई कुछ लड़के थे 4 जो हमारे साथ बतमीज़ी से बात की उन्होंने पायल दी का हाथ भी पकड़ा
सूर्य .......क्या ये हाउ क्या रहा है ये कॉलेज है या गुंडों की बस्ती
है कहा वो सेल आज
राधा ......तुमने ान अगर एच नहीं बोलै तो तुम्हारी कसम इस कॉलेज को हे आगे लगा दूंगा
उस बार सूर्य ने पूरी दहाड़ से बोलै जिसको को काफी लड़की लड़को ने सुना
वही में क्लास छोड़ प्रिंसिपल को पूरी जानकारी दी
प्रिंसिपल के पेअर कपङे लगे थे क्युकी ये प्रिंसिपल सूरजगढ़ का हे था उसकी पता था की कुछ भी गलत हुआ तो ठाकुर उसने भी काट डालेंगे उसने उम्मीद दिखी तो जोरावर राणा के रूप में
राधा ......मैं बताती हूँ सूर्य वो यहाँ का m.l.a का लड़की है सिद्धू गुजर नाम है उसका उसने मेरी बाथरूम करते हुए वीडियो बनाओ है आवर मुझे कल तक का टाइम दिया
सूर्य ......क्या कहा वीडियो आवर किस चीज़ का टाइम दिया है
राधा ......वो चाहता है की मैं उसके निचे नहीं लेती तो वो जल मेरी वीडियो नेट पे दाल देगा
सूर्य .......नहीं छोडूंगा किसी को भी सब मरेंगे सबने सब मरेंगे
कहा है वो जानवर
राधा .......वो अपनी जीप ले कर घर चला गया है
कोमल ......भाई वो लड़के भी एक जीप में बेथ कर हे गए है
उसका no.tha रज## ज***7
राधा .....ये उसकी हे जीप है
सूर्य कार की तरफ बढ़ा हे था की इतने में महेंद्र आवर जोरावर अपनी अपनी कार से वह आ गए
महेंद्र ......सूर्य रुक जाओ बात क्या हुई है
सूर्य .......आपको जो पूछना है इनसे पूछिए आवर आप बिच में बिलकुल भी मत आना आप दोनों को मेरी कसम है
सूर्य राधा को कार में बैठा फुल स्पीड से निकल गया ............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........

















