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रेखा .........अब तुम तीनो की नौटंकी ख़तम हो गई हो तो सूर्य राधा ये लो अपनी कॉफ़ी
सूर्य ......थैंक्स मम्मी ुम्मम्हा ी लव यू मम्मी आप को मेरा कितने ख्याल रहता है
रेखा .........चल चल बदमाश
सूर्य .........मम्मी दादू कहा मुझे कुछ काम है उनसे
शालिनी ......बीटा वो तो सूरजगढ़ गए हुए है
क्या हुआ तुम्हे क्या काम पद गया
सूर्य .......कुछ नहीं mom.kisi काम को ले कर उनकी रे लेनी थी कोई नहीं बाद में बात करता हूँ कोमल दी ये बॉक्स आवर बैग्स अलीना को दे दीजिये
अब आगे ........
अभी कोई 8 बजे होंगे हवेली में सभी लोग डिनर कर रहे थे
दादा जी पापा बड़े पापा भी लौट आये थे
सूर्य ......दादा जी वो मुझे आपसे कुछ जरुरी बात करनी थी सक्तिपुर को ले कर के
सक्तिपुर का नाम सुनते हे सभी के कान खड़े हो गए
दादी जी .....सूर्य कोई जगदा वगेरा तो नहीं किया है न तुमने किसी से
सूर्य ......नहीं दादी सा बात कुछ आवर हे करनी थी
शिव ......पहले डिनर फिनिश करो फिर कोई बात करना
सूर्य .......OK पापा
कुछ देर बाद सबने डिनर फिनिश कर लिया
दादा जी ......है बीटा बोलो क्या बात करनी थी तुम्हे
सूर्य .....वो दादू बात ऐसे है की
राधा .....बाउजी सूर्य सक्तिपुर के लोगो से आपसे पीछे बिना एक बड़ा कर दिया है अभी ये आपसे जीजाक रहा है
दादा जी .....बीटा ऐसा कोनसा वडा कर दिया है आवर अब अगर बड़ा कर दिया है तो पूरा भी करना चाइये आखिर हम ठाकुर है जान जाये पर जुबान न जाये
सूर्य ......बाउजी आज जब मैं सहर गया था तो सक्तिपुर के अंदर से हो कर गया था जब मैं वह स जा रहा था तो एक 9,10 साल की बची को सांप ने काट लिया था ........
सूर्य जो कुछ भी वह हुआ पूरा वाक्य सबको बताता है
दादा जी ......बीटा ये तो तुमने बहुत अच्छा काम किया है फिर जीजाक क्यों रहे हो
सूर्य .......बाउजी वो मैंने वह के लोगो से वादा किया की वह मैं एक हॉस्पिटल बनवाऊंगा वो आपसे पीछे बिना हे मैंने वादा कर दिया
शिव ......बीटा हॉस्पिटल बनाने में हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है
पैर वह के लोग इसके लिया सहमत होंगे
सूर्य .......पापा मुझे यकीं है वो लोग भी मन जायेंगे बस एक प्रॉब्लम है
शिव .....अगर वो लोग मन जाते है तो फिर प्रॉब्लम क्या है
सूर्य ......जमीं का प्रॉब्लम है पापा क्युकी मुझे नहीं लगता कोई हमें हॉस्पिटल के लिया जमीं देने वाला है
दादा जी ......उसकी चिंता तू न कर बीटा सायद इस काम के लिया हे बहुत पहले मैंने वह कुछ जमीं खरीदी थी उसके बाद मैंने हमारे ठाकुर परिवार की दुश्मनी के चलते उसपे कोई ध्यान नहीं दिया
सूर्य ......फिर मुझे नहीं लगता की कोई प्रॉब्लम होगी
थोड़ा बहुत दुर्जन सिंह के परिवार से प्रॉब्लम hi सकती थी पैर इस वक़्त वो भी ऐसा नहीं करेंगे
महेंद्र ......नहीं सूर्य मुझे नहीं लगता की वो सब हॉस्पिटल बनाने देंगे
दादा जी .....ऐसा तुम्हे क्यों लगता महेंद्र
महेंद्र ......बाउजी मुझे पता चला जोरावर से की दुर्जन सिंह का बीटा बहुत हे शातिर मौसम का लड़का है बहार से कुछ आवर अंदर से कुछ आवर
शालिनी ......भाई सा हम इस मामले में उनके सामने सामने बेथ कर बात क्यों नहीं करते है
गांव वालो के सामने उसको भी कामना पड़ेगा
दादा जी ......है ये ठीक रहेगा वह अभी भी कुछ भरोशे के लोग है हमारे जो आज भी मेरे दोस्त है भले हे मिले हुए काफी टाइम जो गया हो मैं इनसे बात करता हूँ हम कल हे वह सक्तिपुर में बैठक रहते है
कोमल ......दादू कल तो हम गुमने जा रहे है
महेंद्र ......हमें तो किसी ने ये बताया हे नहीं
कोमल .....पापा वो हम लोग मतलब बुआ मेर्री दीदी अलीना दीदी सूर्य बस यही लोग जा रहे है
दादा जी .....बेटी अगर आप सबको गुमने हे जाना है तो कल नहीं परसो चलना मेरे साथ जैसलमेर वह परषो ....तहत उत्सव ....है वह तुम सभी को गम कर अच्छा लगेगा
मेर्री .....अंकल जी ये .तहत उत्सव ..क्या है
दादा जी ......बेटी तहत उत्सव यहाँ राजस्थान में हर साल बनाया जाने वाला सांस्कर्तिक ुटस्वा है जिसमे दूर दूर से लोग आते है अपनी कला का पर्दशन करते है जिसमे नाच गण .ुण्ठ की दौड़ .अन्टू का नैऋत्य युद्ध कला ऐसे बहुत से कला का पर्दर्सन किया जाता है हज़ारो लाखो की संख्या में लोग दूर दूर से आते है यहाँ तक की विदेशी लोग भी बहुत आते है
अलीना .....इंटरेस्टिंग फिर तो हमें वही जाना चाइये गुमने के लिया
सूर्य .....ठीक है दादू हम कल सक्तिपुर चलते है फिर परषो आपके साथ चलेंगे
महेंद्र .......मैं जोरावर को कॉल कर कल के लिया बोल देता हूँ
दादा जी .....है बीटा आवर कुछ मुख्या लोगो को भी साथ लेन को बोल देना
दादी ji.....chalo अब सब आराम करो टाइम देखा है 10 बजने को आया है
सब अपने अपने रूम की तरफ सोने चल देते है
सूर्य फ्रेश होने कर कुछ देर जसप्रीत सतवीर आवर सोहेल से बात करता है उसके बाद सूर्य सो जाता है
सक्तिपुर ......
सूर्य के निकलते हे ये बात दुर्जन सिंह की हवेली तक पहुंच गई जो कुछ भी आज हुआ था
पैर इस वक़्त हवेली पे रुक्मणि आवर गायत्री विधि हे थे गीता ठाकुर अभी भी बहार थी
विक्रम आवर अजय भी हवेली नहीं लौटे थे
साम को जब तीनो हवेली पे आये तो उनको आज के वाक्य के बारे में पता चला
गीता ठाकुर ......ये तो अच्छी बात है की वो यहाँ हॉस्पिटल बना रहा है
रुक्मणि ......ये आप क्या कह रही होगी दीदी इस से तो सक्तिपुर के लोग उसको अपना मसीहा मन्नेर लगेंगे
आवर हमारी कोई ेजात नहीं करेंगे
गीता ठाकुर ......आज तक कोई ऐसा काम हम लोगो ने किया है जिस से हम लोगो की ेजात हो
आवर वो मसीहा हे है भले उसने हमारा सुहाग मिटाया है पैर वो गलत नहीं है
विक्रम ......मम्मी ये आप क्या कह रही है पता भी है
गीता ठाकुर ......इसमें मैंने क्या गलत कह दिया क्या तुम नहीं जानते तुम्हारे पापा कैसे आदमी थे कैसे काळा कारनामे करते थे
अगर किसी को पता चल जाये तो इस हवेली की तरफ कोई तुकेगा भी नहीं
क्या तुम्हारे चाचा के बारी में पता नहीं न जाने कितने हे औरतो आवर लड़कियों की ेजात लूटी है उन्होंने किस हक़ से ेजात करने की बात करते हो
अजय .....माँ सा ये आपको आज क्या हो गया है कैसे बाते कर रहे है आप
गीता ठाकुर ......मेरी आँखे खुल गई है इस लिया ऐसे बाते कर रही हूँ मैं
विक्रम .....तो आप क्या चाहती है मम्मी जैसा आप कहेंगी वैसा हे मैं करूंगा
गीता ठाकुर .......क्या तुम सच कह रहे हो विक्रम
विक्रम .....जी मम्मी जैसा आप कहेंगी वैसा हे होगा
गीता ठाकुर ......फिर तुम कल खुद पुरे गांव वालो से इसके लिया बात करोगे आवर उनको राज़ी करोगे की वो इस काम में कोई अड़चन न डेल आवर इसकी मदद करे
विक्रम .....जी ऐसा हे होगा मम्मी है अभी हे सबको कल के लिया बोल देते है मीटिंग हम हवेली में हे रखते है
जिस से सबको यकीं हो की हमें इस काम से कोई परेशानी नहीं है
रुक्मणि ......दीदी आप कुछ भी कहो मुझे ये ठीक नहीं लग रहा है उसका साथ दे कर
विक्रम ......चची जी मम्मी सही बोल रही है अगर हम कुछ अच्छा नहीं कर सकते है तो जो अच्छा कर रहा है उसको भी नहीं रोकना चाइये
रुक्मणि गुस्से से वह से निकल जाती है
विक्रम .....अजय राणा अंकल को बोल कर गांव में खबर भिजवा दो कल के मीटिंग के लिया
अजय .......ठीक है भाई सा
अजय भी बहार की तरफ निकल गया
गीता ठाकुर .....मेरे रूम में चलो तुम जरा कुछ बात करनी है
विक्रम गीता के साथ रूम की तरफ निकल जाता है
गीता रूम को अच्छे से लॉक करके के
विक्रम .....मम्मी एक बात कहे हमें भी चची जी की बात ठीक लगती है इस से तो वो यहाँ के लोगो का मसीहा बन जायेगा
गीता ठाकुर .....वॉर ऐसा करो की सामने वाला भी मर जाये आवर पता भी न चले की किसने मारा
विक्रम .....ओह अब समजा आपकी चल को वैसे एक बात तो है मम्मी आप एक्टिंग बहुत अच्छी कर लेती है
गीता ठाकुर ......बीटा माँ से सीखता है पैर यहाँ उल्टा हो रहा मुझे तुमसे सीखना पढ़ रहा है
पैर ये समाज नहीं आया की तुमने ऐसा करने को क्यों कहा
विक्रम ......क्युकी ऐसा करने से हमारा फायदा है एक बार फिर से मैं पापा का बिज़नेस स्टार्ट करने की सोच रहा हूँ पैर सामने परदे अजय आवर राणा होंगे आवर इनके पीछे हमारा
गीता ठाकुर ......अभी नहीं विक्रम कुछ वक़्त लो उसके बाद अपना काम सुरु करो क्युकी अभी भी आर्मी के नज़रो से बचे नहीं है
उनकी नज़र अभी भी हम लोगो पैर है
विक्रम ......ठीक है मम्मी
गीता ठाकुर ......बस यही वजह थी या कुछ आवर भी प्लान है
विक्रम .....नहीं मम्मी बस यही है फ़िलहाल तो बाकि कल मीटिंग के बाद देखता हूँ
गीता ठाकुर .....ठीक है फिर मैं आराम करती हूँ तुम भी आराम करो जाओ
विक्रम वह से निकल कर अपने रूम में आता है आवर रूम को लॉक कर लेता है
विक्रम ......आपको क्या लगता है मम्मी मुझे इतनी जल्दी समाज जाओगे भले हे बीटा आपका हूँ पैर मेरी सोच आपके जैसे नहीं है
मैं उनमे से हूँ जो सामने से हाथ मिलता हूँ पैर गले लगते हे गाला काटने में वक़्त नहीं लगता
बस देखती जाये कैसा खेल खेलता हूँ जिसकी सीकर आप भी बनेगी सॉरी मम्मी क्या कृ आपका आवर पापा का खून हूँ न
हॉस्पिटल तो बनेगा हे पैर देखना ये है की इलाज कैसे होता है यहाँ इन जैसे कीड़े मकोड़ों की यही ोकत है हमारी जुटी कहते आवर भीख मांग कर जिन्दा रहे
विक्रम किसी को कॉल कर कुछ देर बात करता है
तभी दूर नॉक होता है विक्रम दूर खोलता है तो सामने अजय खड़ा था
अजय .....भाई सा मैंने राणा अंकल को बोल दिया है उन्होंने कहा है की सुबह तक सभी आ जायेंगे
विक्रम ......ठीक है ये लो कुछ पैसे रखो जरूरत हो तो आवर ले लेना आवर चची जी को कुछ मत बताना वर्ण वो मुझपे गुसा करेंगी जाओ अभी लेट तक बहार मत रहना
विक्रम से 1 लाख ले कर अजय वह से निकल जाता है ख़ुशी ख़ुशी
विक्रम .....यही पैसा तुजसे हर वो काम करवाएगा जो मैं चाहता हूँ
वही अजय पैसे ले कर सीधा अपनी कार ले सहर की तरफ निकल गया मस्ती करने........
वही सक्तिपुर के एक पुराणी घर में कुछ बुजुर्ग लोग आवर बैठे बात कर रहे थे
बुजुर्ग 1......हमें ठकुराइन से एक बार तो बात करनी चाइये क्या पता वो मन जाये
बुजुर्ग 2 .....मुझे भी ऐसा हे लगता है क्युकी हवेली का ठाकुर अब विक्रम सिंह आवर वो अच्छा लड़का है अपने बाप चाचाओं के जैसा नहीं संत लड़का है
अभी ये लोग बात हे कर रहे थे की बहार से एक 20 ,22 साल का लड़का आता है
लड़का .....बापू जी वो हवेली से सन्देश आया है की कल वह सभी को बुलाया बैठक के लिया
बुजुर्ग 1.....ठीक है बीटा तुम जाओ
लड़का वह से चला जाता है
बुजरुग 2......मुझे लगता है ये बैठक इसी बात ले लिया राखी है अब तो जाना हे पड़ेगा
बुजुर्ग 3.......सामने से बैठक रख रहे है मुझे ये कुछ ठीक नहीं ठकुराइन गीता बहुत हे चालक आवर मक्कार औरत है अगर उसने अस्पताल के काम के लिया बैठक हवेली में राखी है तो वो जरूर कोई चाल कपट का सहारा लेगी
बुजुर्ग 1.....भाई तुम तो हवेली में बरसो काम कर चुके हो तुम्हे तो पता होगा हे
bujurg.3.....tabhi तो कह रहा हूँ हवेली में सब शेतानो का राज़ है
वो सामने कुछ आवर दीखते है भीतर से कुछ आवर है
वो कहावत इन जैसो के लिया हे बानी है ....हाथी के दांत खाने के कुछ आवर दिखने के खुश आवर ....
बुजुर्ग 1.....अब तो कल जा कर हे पता चलेगा भाई
अगर अस्पताल बन जायेगा तो सक्तिपुर के लोगो को भी कुछ अच्छी जिंदगी नसीब हो जाये
इन हवेली वालो से लड़को तक की नेसल ख़राब कर दी है .........
सुबह सूर्य जल्दी उठ कर अकेला हे जॉगिंग करने निकल जाता है
जॉगिंग करते हुए सूर्य जंगल जा पंहुचा जहा सकती वयोम आवर साध्वी जी थी
सूर्य .....आप कब यहाँ पहुंचे साध्वी जी आपको तो मैं घर पे छोड़ कर आया था
साध्वी जी .....मैं पहले हे आ चुकी थी
अब अपना ध्यान लगाओ आवर अपने तत्वों की प्रैक्टिस करो वयोम आवर सकती के साथ
सूर्य .....जी जैसा आप कहे
सूर्य ध्यान कर अपने तत्वों को जागृत करता है
कुछ देर बाद सूर्य अपनी आगे खोलता है
सामने वयोम अपने सुरक्षा चाकर में खड़ा था अपने दोनों हाथो में सोर्ड लिया
साध्वी जी ....सूर्य वयोम तुम दोनी त्यार हो
सूर्य .....जी साध्वी जी
साध्वी जी ......सूर्य अपनी ऊर्जा को नियंत्रण में रख कर प्रयोग करना अनन्यता कल के जैसे तुम जल्दी हे अपनी ऊर्जा नस्ट कर लोगे
सूर्य ......जी मैं ध्यान रखूंगा
सूर्य परतवि से जुड़ कर अपने परतवि तत्वों से वयोम पे प्रहार करने लगा
वयोम बड़ी कुशलता से सूर्य के पथरो को विफल करने लगता है अपने तलवार से
सूर्य वयोम को देख मुस्कुरा रहा था
( सकती .....ये सूर्य वॉर करते हुए मुस्कुरा क्यों रहा है क्या चल रहा है इसके दिमाग में )
ीदार सूर्य परतवि हटवा का वार करते करते अच्चानक से जल तत्वा का बार सुरु कर देता
पानी से आने भले तीर जो ठोस रूप में वयोम के चारो तरफ से वॉर होने लगा
( सकती .....ओह्ह मतलब 2 तत्वा का एक साथ प्रयोग कर रहा है बहुत अच्छा सूर्य पैर इस से काम नहीं चलेगा वयोम को याराना इतना भी सरल नहीं होगा )
सूर्य सकती की तरफ गौर से देखता है
सकती को ऐसे लगता है जैसे सूर्य उसके भीतर गुस्स रहा है
सूर्य वॉर करते हुए फिर से ध्यान लगाने लगता है
जैसे जैसे सूर्य ध्यान में गहरा जाता है वैसे वैसे सूर्य के परहरो की तीव्रता बढ़ने लगी
सकती .....साध्वी जी ये सूर्य क्या कर रहा है
साध्वी जी .....सूर्य अपने इच्छा सकती का प्रयोग कर रहा अपने पथरो को दिशा देने में
सकती ....क्या मतलब मैं कुछ समजा नहीं
साध्वी जी .....सूर्य ध्यान लगा कर अपनी ऊर्जा को संतुलित करने के साथ साथ अपनी ऊर्जा सकती को भी भाषा रहा है
गौर से देखो सूर्य को आवर उसके पथरो को वयोम अगर अपनी जगह से हैट कर भी वॉर रोकेगा तो भी ऊर्जा वयोम को स्वयं से खोज कर उसपे प्रहार करेंगे
सकती ......पैर सूर्य ये कैसे कर प् रहा है जबकि सूर्य की सक्रिय अभी बहुत सुप्त स्वस्थ में है
साध्वी जी ......हम पूरी तरह नहीं जानते पैर हमें लगता है सूर्य ुशी मंत्र का ध्यान कर रहा जिस से कल सूर्य खुद को संतुलित किया था अपनी ऊर्जा को पुनः प्राप्त किया था
डेरी डेरी सूर्य का वायु तत्वा भी सूर्य के परतवि आवर जल तत्वा के साथ सम्मिलित हो जाता है
सकती ......आपको वयोम की शय्या करनी होगी
साध्वी जी .....हम नहीं आप जाये आवर दोनों मिल कर सूर्य के पथरो को रोकिये आवर साथ हे अपने ऊर्जा का प्रयोग कर सूर्य पे वॉर कीजिये
सकती .....पैर वो तो ध्यान में लीं है ऐसे में उसे चौथ लग सकती है
साध्वी जी .....हम जो कह रहे है वही कीजिये किन्तु बहुत काम मात्रा से सुरु कीजिये
सकती अपनी ऊर्जा का प्रयोग कर सूर्य पे वॉर करने लगा
सकती .....वयोम अपनी ऊर्जा का प्रयोग करो पैर बहुत काम मात्रा में
ीदार ध्यान में सूर्य को अपनी तरफ किसी ऊर्जा को आते हुए सेंस करते हे एक एक करके तीनो तत्वा सूर्य के चारो तरफ रक्षा कवच का रूप दर्जन कर लेते है
बहरी परत वायु तत्वा फिर जल तत्वा अंत में परतवि तत्वा
साध्वी जी ......बहुत अच्छा सूर्य बहुत जल्दी अपने तत्वों का प्रयोग करना शिख रहे हो
( साध्वी जी ....वयोम सकती अपने पथरो में ऊर्जा का विस्तार करो
सकती ....क्या ये ठीक रहेगा
साध्वी जी .....है हम कह रहे है न )
सकती आवर वयोम साध्वी जी की बात मन सूर्य पे दुगुनी ऊर्जा से सूर्य पे वॉर करते है
सूर्य ध्याम में लीं हो किसी आवर हे स्थान पे जा पंहुचा
तीनो तत्वा अपनी उग्रता की आवर भाड़ रहे थे
साध्वी जी .....हमें ऐसा क्यों महसूस हो रहा है की कुछ ानिस्ट होने वाला है
साध्वी जी सूर्य के नजदीकी जाने लगी किन्तु जैसे जैसे वो आगे भाड़ रहे थे वैसे वैसे सूर्य के सरीर से निकल रहे तप को वो महसूस कर रही थी
साध्वी जी .......ये ये सूर्य की देह से ऐसा तप क्यों निकल रहा जैसे हम सूर्य के पास नहीं किसी अग्नि पुंज के पास जा रहे है
साध्वी जी अपनी आँखे बंद कर सूर्य के चारो तरफ एक बहुत मजबूत शील्ड बनती है आवर पीछे हैट जाती है
साध्वी जी ....सकती वयोम अपने ऊर्जा का प्रहार रोक दो
सकती .....क्या हुआ साध्वी जी
साध्वी ji.....waha से हैट जाओ सूर्य से दूर हो जाओ
सकती ......किन्तु हुआ क्या है साध्वी जी
साध्वी जी .....सकती हमारी बात ध्यान से सुनो अपने अपने सबसे सुरक्षित सुरक्षा कवच से खुद को सुरक्षित करो
हम ध्यान में जा रहे है कुछ भी हो जाये तुम सूर्य के नजदीकी नहीं जाओगे आवर न हमारे पास आओगे
सकती ......जी ठीक है
साध्वी जी ध्यान में लीं हो सूर्य की ऊर्जा से जुड़ कर सूर्य तक पहुंचने की कोशिश करती है बहुत बार कोशिस ह करने के बाद आखिर साध्वी जी को सफलता मिल जाती है
बहार सूर्य के चारो तरफ जल आयु पर्तिवि तत्वा के साथ साथ अग्नि के लपटों ने भी सूर्य को कवर कर लिया था
वयोम आवर सकती इस तप को सहन नहीं कर प् रहे थे इस लिया वो पीछे हैट गए
साध्वी जी के सरीर से बहुत आदिक मात्रा में सफ़ेद ऊर्जा निकल रही थी
साध्वी जी जब सूर्य तक पहुंची तो देखा की सूर्य ध्यान की अवश्य में सूर्य( सूरज ) की आवर भाड़ रहा था
साध्वी जी ....सूर्य अपने ध्यान को भांग करो
सूर्य के कानो में जब साध्वी जी की आवाज पड़ती है तो वह अपनी आँखे खोलता है सूर्य की आँखे किसी सूर्य की तरह हे चमक रही थी
साध्वी जी .....सूर्य अपनी अग्नि तत्वा को संत करो अनन्यता बहुत बड़ा संकट उत्पन हो जायेगा
सूर्य .....मैं खुद को रोक नहीं प् रहा हूँ
साध्वी जी .....अपने ध्यान मंत्र ...om...ka प्रोग करो वो तुम्हारी सहायता करेगा
सूर्य ........मैं खुद को संतुलित नहीं कर प् रहा हूँ
( साध्वी जी .....पिताजी हमारी सहायता कीजिये सूर्य को संत करने ानयता हम कुछ नहीं कर पाएंगे
गुरुदेव ......पुत्री तुम्हे अपने वास्तविक रूप में आना होगा आवर आवर गॉड स्तुति का प्रयोग कर सूर्य के महाकाल अंश को संत करना होगा
इस वक़्त तुम्हारे सामने सूर्य नहीं है
साध्वी जी .....जी पिताजी
गुरुदेव .......सफल मनोरथ भाव पुत्री )
साध्वी जी .....सूर्य पर्यटन करो कुढ़ को संत करने का
सूर्य ध्यान लगाने की कोसिस करता है
साध्वी जी अपना साध्वी रूप त्याग कर अपने पारी रूप में आ गई
सकती आवर वयोम दूर खड़े जंगल में लगी आग को अपनी जल तत्वा स रोक रहे थे तभी
साध्वी जी के पारी रूप में आने का उनको आभाष हुआ
सकती .....वयोम तुम इस अग्नि को रोको मैं यहाँ मायाजाल का निर्माण करता हूँ अनन्यता किसी के सामने हमारा भेद खुल सकता है
वयोम ......जैसा तुम कहो मित्र
किन्तु ये हो क्यों रहा है
सकती .....ये तो रिद्धि पारी हे बता सकती है की उन्होंने अपना वास्तविक रूप क्यों दर्जन किया है
सकती अपने सकती का प्रयोग कर वह एक माया का निर्माण करता है
आवर एक बार फिर से अग्नि को जल से संत करने लगता है
वही सूर्य साध्वी जी की गॉड स्तुति से संत होने लगता है आवर देखते हे देखते पूरी तरह से संत हो जाता है
साध्वी जी ध्यान भांग कर पुरे जंगल में सूर्य के वजह से जो हानि हुई उसको ठीक करने लगी
सूर्य ने जैसे हे अपनीं आँखे खोली वो मूर्छित हो गया ........
अपडेट पोस्ट्स फ्रेंड्स ........


रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......


रेखा .........अब तुम तीनो की नौटंकी ख़तम हो गई हो तो सूर्य राधा ये लो अपनी कॉफ़ी
सूर्य ......थैंक्स मम्मी ुम्मम्हा ी लव यू मम्मी आप को मेरा कितने ख्याल रहता है
रेखा .........चल चल बदमाश
सूर्य .........मम्मी दादू कहा मुझे कुछ काम है उनसे
शालिनी ......बीटा वो तो सूरजगढ़ गए हुए है
क्या हुआ तुम्हे क्या काम पद गया
सूर्य .......कुछ नहीं mom.kisi काम को ले कर उनकी रे लेनी थी कोई नहीं बाद में बात करता हूँ कोमल दी ये बॉक्स आवर बैग्स अलीना को दे दीजिये
अब आगे ........
अभी कोई 8 बजे होंगे हवेली में सभी लोग डिनर कर रहे थे
दादा जी पापा बड़े पापा भी लौट आये थे
सूर्य ......दादा जी वो मुझे आपसे कुछ जरुरी बात करनी थी सक्तिपुर को ले कर के
सक्तिपुर का नाम सुनते हे सभी के कान खड़े हो गए
दादी जी .....सूर्य कोई जगदा वगेरा तो नहीं किया है न तुमने किसी से
सूर्य ......नहीं दादी सा बात कुछ आवर हे करनी थी
शिव ......पहले डिनर फिनिश करो फिर कोई बात करना
सूर्य .......OK पापा
कुछ देर बाद सबने डिनर फिनिश कर लिया
दादा जी ......है बीटा बोलो क्या बात करनी थी तुम्हे
सूर्य .....वो दादू बात ऐसे है की
राधा .....बाउजी सूर्य सक्तिपुर के लोगो से आपसे पीछे बिना एक बड़ा कर दिया है अभी ये आपसे जीजाक रहा है
दादा जी .....बीटा ऐसा कोनसा वडा कर दिया है आवर अब अगर बड़ा कर दिया है तो पूरा भी करना चाइये आखिर हम ठाकुर है जान जाये पर जुबान न जाये
सूर्य ......बाउजी आज जब मैं सहर गया था तो सक्तिपुर के अंदर से हो कर गया था जब मैं वह स जा रहा था तो एक 9,10 साल की बची को सांप ने काट लिया था ........
सूर्य जो कुछ भी वह हुआ पूरा वाक्य सबको बताता है
दादा जी ......बीटा ये तो तुमने बहुत अच्छा काम किया है फिर जीजाक क्यों रहे हो
सूर्य .......बाउजी वो मैंने वह के लोगो से वादा किया की वह मैं एक हॉस्पिटल बनवाऊंगा वो आपसे पीछे बिना हे मैंने वादा कर दिया
शिव ......बीटा हॉस्पिटल बनाने में हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है
पैर वह के लोग इसके लिया सहमत होंगे
सूर्य .......पापा मुझे यकीं है वो लोग भी मन जायेंगे बस एक प्रॉब्लम है
शिव .....अगर वो लोग मन जाते है तो फिर प्रॉब्लम क्या है
सूर्य ......जमीं का प्रॉब्लम है पापा क्युकी मुझे नहीं लगता कोई हमें हॉस्पिटल के लिया जमीं देने वाला है
दादा जी ......उसकी चिंता तू न कर बीटा सायद इस काम के लिया हे बहुत पहले मैंने वह कुछ जमीं खरीदी थी उसके बाद मैंने हमारे ठाकुर परिवार की दुश्मनी के चलते उसपे कोई ध्यान नहीं दिया
सूर्य ......फिर मुझे नहीं लगता की कोई प्रॉब्लम होगी
थोड़ा बहुत दुर्जन सिंह के परिवार से प्रॉब्लम hi सकती थी पैर इस वक़्त वो भी ऐसा नहीं करेंगे
महेंद्र ......नहीं सूर्य मुझे नहीं लगता की वो सब हॉस्पिटल बनाने देंगे
दादा जी .....ऐसा तुम्हे क्यों लगता महेंद्र
महेंद्र ......बाउजी मुझे पता चला जोरावर से की दुर्जन सिंह का बीटा बहुत हे शातिर मौसम का लड़का है बहार से कुछ आवर अंदर से कुछ आवर
शालिनी ......भाई सा हम इस मामले में उनके सामने सामने बेथ कर बात क्यों नहीं करते है
गांव वालो के सामने उसको भी कामना पड़ेगा
दादा जी ......है ये ठीक रहेगा वह अभी भी कुछ भरोशे के लोग है हमारे जो आज भी मेरे दोस्त है भले हे मिले हुए काफी टाइम जो गया हो मैं इनसे बात करता हूँ हम कल हे वह सक्तिपुर में बैठक रहते है
कोमल ......दादू कल तो हम गुमने जा रहे है
महेंद्र ......हमें तो किसी ने ये बताया हे नहीं
कोमल .....पापा वो हम लोग मतलब बुआ मेर्री दीदी अलीना दीदी सूर्य बस यही लोग जा रहे है
दादा जी .....बेटी अगर आप सबको गुमने हे जाना है तो कल नहीं परसो चलना मेरे साथ जैसलमेर वह परषो ....तहत उत्सव ....है वह तुम सभी को गम कर अच्छा लगेगा
मेर्री .....अंकल जी ये .तहत उत्सव ..क्या है
दादा जी ......बेटी तहत उत्सव यहाँ राजस्थान में हर साल बनाया जाने वाला सांस्कर्तिक ुटस्वा है जिसमे दूर दूर से लोग आते है अपनी कला का पर्दशन करते है जिसमे नाच गण .ुण्ठ की दौड़ .अन्टू का नैऋत्य युद्ध कला ऐसे बहुत से कला का पर्दर्सन किया जाता है हज़ारो लाखो की संख्या में लोग दूर दूर से आते है यहाँ तक की विदेशी लोग भी बहुत आते है
अलीना .....इंटरेस्टिंग फिर तो हमें वही जाना चाइये गुमने के लिया
सूर्य .....ठीक है दादू हम कल सक्तिपुर चलते है फिर परषो आपके साथ चलेंगे
महेंद्र .......मैं जोरावर को कॉल कर कल के लिया बोल देता हूँ
दादा जी .....है बीटा आवर कुछ मुख्या लोगो को भी साथ लेन को बोल देना
दादी ji.....chalo अब सब आराम करो टाइम देखा है 10 बजने को आया है
सब अपने अपने रूम की तरफ सोने चल देते है
सूर्य फ्रेश होने कर कुछ देर जसप्रीत सतवीर आवर सोहेल से बात करता है उसके बाद सूर्य सो जाता है
सक्तिपुर ......
सूर्य के निकलते हे ये बात दुर्जन सिंह की हवेली तक पहुंच गई जो कुछ भी आज हुआ था
पैर इस वक़्त हवेली पे रुक्मणि आवर गायत्री विधि हे थे गीता ठाकुर अभी भी बहार थी
विक्रम आवर अजय भी हवेली नहीं लौटे थे
साम को जब तीनो हवेली पे आये तो उनको आज के वाक्य के बारे में पता चला
गीता ठाकुर ......ये तो अच्छी बात है की वो यहाँ हॉस्पिटल बना रहा है
रुक्मणि ......ये आप क्या कह रही होगी दीदी इस से तो सक्तिपुर के लोग उसको अपना मसीहा मन्नेर लगेंगे
आवर हमारी कोई ेजात नहीं करेंगे
गीता ठाकुर ......आज तक कोई ऐसा काम हम लोगो ने किया है जिस से हम लोगो की ेजात हो
आवर वो मसीहा हे है भले उसने हमारा सुहाग मिटाया है पैर वो गलत नहीं है
विक्रम ......मम्मी ये आप क्या कह रही है पता भी है
गीता ठाकुर ......इसमें मैंने क्या गलत कह दिया क्या तुम नहीं जानते तुम्हारे पापा कैसे आदमी थे कैसे काळा कारनामे करते थे
अगर किसी को पता चल जाये तो इस हवेली की तरफ कोई तुकेगा भी नहीं
क्या तुम्हारे चाचा के बारी में पता नहीं न जाने कितने हे औरतो आवर लड़कियों की ेजात लूटी है उन्होंने किस हक़ से ेजात करने की बात करते हो
अजय .....माँ सा ये आपको आज क्या हो गया है कैसे बाते कर रहे है आप
गीता ठाकुर ......मेरी आँखे खुल गई है इस लिया ऐसे बाते कर रही हूँ मैं
विक्रम .....तो आप क्या चाहती है मम्मी जैसा आप कहेंगी वैसा हे मैं करूंगा
गीता ठाकुर .......क्या तुम सच कह रहे हो विक्रम
विक्रम .....जी मम्मी जैसा आप कहेंगी वैसा हे होगा
गीता ठाकुर ......फिर तुम कल खुद पुरे गांव वालो से इसके लिया बात करोगे आवर उनको राज़ी करोगे की वो इस काम में कोई अड़चन न डेल आवर इसकी मदद करे
विक्रम .....जी ऐसा हे होगा मम्मी है अभी हे सबको कल के लिया बोल देते है मीटिंग हम हवेली में हे रखते है
जिस से सबको यकीं हो की हमें इस काम से कोई परेशानी नहीं है
रुक्मणि ......दीदी आप कुछ भी कहो मुझे ये ठीक नहीं लग रहा है उसका साथ दे कर
विक्रम ......चची जी मम्मी सही बोल रही है अगर हम कुछ अच्छा नहीं कर सकते है तो जो अच्छा कर रहा है उसको भी नहीं रोकना चाइये
रुक्मणि गुस्से से वह से निकल जाती है
विक्रम .....अजय राणा अंकल को बोल कर गांव में खबर भिजवा दो कल के मीटिंग के लिया
अजय .......ठीक है भाई सा
अजय भी बहार की तरफ निकल गया
गीता ठाकुर .....मेरे रूम में चलो तुम जरा कुछ बात करनी है
विक्रम गीता के साथ रूम की तरफ निकल जाता है
गीता रूम को अच्छे से लॉक करके के
विक्रम .....मम्मी एक बात कहे हमें भी चची जी की बात ठीक लगती है इस से तो वो यहाँ के लोगो का मसीहा बन जायेगा
गीता ठाकुर .....वॉर ऐसा करो की सामने वाला भी मर जाये आवर पता भी न चले की किसने मारा
विक्रम .....ओह अब समजा आपकी चल को वैसे एक बात तो है मम्मी आप एक्टिंग बहुत अच्छी कर लेती है
गीता ठाकुर ......बीटा माँ से सीखता है पैर यहाँ उल्टा हो रहा मुझे तुमसे सीखना पढ़ रहा है
पैर ये समाज नहीं आया की तुमने ऐसा करने को क्यों कहा
विक्रम ......क्युकी ऐसा करने से हमारा फायदा है एक बार फिर से मैं पापा का बिज़नेस स्टार्ट करने की सोच रहा हूँ पैर सामने परदे अजय आवर राणा होंगे आवर इनके पीछे हमारा
गीता ठाकुर ......अभी नहीं विक्रम कुछ वक़्त लो उसके बाद अपना काम सुरु करो क्युकी अभी भी आर्मी के नज़रो से बचे नहीं है
उनकी नज़र अभी भी हम लोगो पैर है
विक्रम ......ठीक है मम्मी
गीता ठाकुर ......बस यही वजह थी या कुछ आवर भी प्लान है
विक्रम .....नहीं मम्मी बस यही है फ़िलहाल तो बाकि कल मीटिंग के बाद देखता हूँ
गीता ठाकुर .....ठीक है फिर मैं आराम करती हूँ तुम भी आराम करो जाओ
विक्रम वह से निकल कर अपने रूम में आता है आवर रूम को लॉक कर लेता है
विक्रम ......आपको क्या लगता है मम्मी मुझे इतनी जल्दी समाज जाओगे भले हे बीटा आपका हूँ पैर मेरी सोच आपके जैसे नहीं है
मैं उनमे से हूँ जो सामने से हाथ मिलता हूँ पैर गले लगते हे गाला काटने में वक़्त नहीं लगता
बस देखती जाये कैसा खेल खेलता हूँ जिसकी सीकर आप भी बनेगी सॉरी मम्मी क्या कृ आपका आवर पापा का खून हूँ न
हॉस्पिटल तो बनेगा हे पैर देखना ये है की इलाज कैसे होता है यहाँ इन जैसे कीड़े मकोड़ों की यही ोकत है हमारी जुटी कहते आवर भीख मांग कर जिन्दा रहे
विक्रम किसी को कॉल कर कुछ देर बात करता है
तभी दूर नॉक होता है विक्रम दूर खोलता है तो सामने अजय खड़ा था
अजय .....भाई सा मैंने राणा अंकल को बोल दिया है उन्होंने कहा है की सुबह तक सभी आ जायेंगे
विक्रम ......ठीक है ये लो कुछ पैसे रखो जरूरत हो तो आवर ले लेना आवर चची जी को कुछ मत बताना वर्ण वो मुझपे गुसा करेंगी जाओ अभी लेट तक बहार मत रहना
विक्रम से 1 लाख ले कर अजय वह से निकल जाता है ख़ुशी ख़ुशी
विक्रम .....यही पैसा तुजसे हर वो काम करवाएगा जो मैं चाहता हूँ
वही अजय पैसे ले कर सीधा अपनी कार ले सहर की तरफ निकल गया मस्ती करने........
वही सक्तिपुर के एक पुराणी घर में कुछ बुजुर्ग लोग आवर बैठे बात कर रहे थे
बुजुर्ग 1......हमें ठकुराइन से एक बार तो बात करनी चाइये क्या पता वो मन जाये
बुजुर्ग 2 .....मुझे भी ऐसा हे लगता है क्युकी हवेली का ठाकुर अब विक्रम सिंह आवर वो अच्छा लड़का है अपने बाप चाचाओं के जैसा नहीं संत लड़का है
अभी ये लोग बात हे कर रहे थे की बहार से एक 20 ,22 साल का लड़का आता है
लड़का .....बापू जी वो हवेली से सन्देश आया है की कल वह सभी को बुलाया बैठक के लिया
बुजुर्ग 1.....ठीक है बीटा तुम जाओ
लड़का वह से चला जाता है
बुजरुग 2......मुझे लगता है ये बैठक इसी बात ले लिया राखी है अब तो जाना हे पड़ेगा
बुजुर्ग 3.......सामने से बैठक रख रहे है मुझे ये कुछ ठीक नहीं ठकुराइन गीता बहुत हे चालक आवर मक्कार औरत है अगर उसने अस्पताल के काम के लिया बैठक हवेली में राखी है तो वो जरूर कोई चाल कपट का सहारा लेगी
बुजुर्ग 1.....भाई तुम तो हवेली में बरसो काम कर चुके हो तुम्हे तो पता होगा हे
bujurg.3.....tabhi तो कह रहा हूँ हवेली में सब शेतानो का राज़ है
वो सामने कुछ आवर दीखते है भीतर से कुछ आवर है
वो कहावत इन जैसो के लिया हे बानी है ....हाथी के दांत खाने के कुछ आवर दिखने के खुश आवर ....
बुजुर्ग 1.....अब तो कल जा कर हे पता चलेगा भाई
अगर अस्पताल बन जायेगा तो सक्तिपुर के लोगो को भी कुछ अच्छी जिंदगी नसीब हो जाये
इन हवेली वालो से लड़को तक की नेसल ख़राब कर दी है .........
सुबह सूर्य जल्दी उठ कर अकेला हे जॉगिंग करने निकल जाता है
जॉगिंग करते हुए सूर्य जंगल जा पंहुचा जहा सकती वयोम आवर साध्वी जी थी
सूर्य .....आप कब यहाँ पहुंचे साध्वी जी आपको तो मैं घर पे छोड़ कर आया था
साध्वी जी .....मैं पहले हे आ चुकी थी
अब अपना ध्यान लगाओ आवर अपने तत्वों की प्रैक्टिस करो वयोम आवर सकती के साथ
सूर्य .....जी जैसा आप कहे
सूर्य ध्यान कर अपने तत्वों को जागृत करता है
कुछ देर बाद सूर्य अपनी आगे खोलता है
सामने वयोम अपने सुरक्षा चाकर में खड़ा था अपने दोनों हाथो में सोर्ड लिया
साध्वी जी ....सूर्य वयोम तुम दोनी त्यार हो
सूर्य .....जी साध्वी जी
साध्वी जी ......सूर्य अपनी ऊर्जा को नियंत्रण में रख कर प्रयोग करना अनन्यता कल के जैसे तुम जल्दी हे अपनी ऊर्जा नस्ट कर लोगे
सूर्य ......जी मैं ध्यान रखूंगा
सूर्य परतवि से जुड़ कर अपने परतवि तत्वों से वयोम पे प्रहार करने लगा
वयोम बड़ी कुशलता से सूर्य के पथरो को विफल करने लगता है अपने तलवार से
सूर्य वयोम को देख मुस्कुरा रहा था
( सकती .....ये सूर्य वॉर करते हुए मुस्कुरा क्यों रहा है क्या चल रहा है इसके दिमाग में )
ीदार सूर्य परतवि हटवा का वार करते करते अच्चानक से जल तत्वा का बार सुरु कर देता
पानी से आने भले तीर जो ठोस रूप में वयोम के चारो तरफ से वॉर होने लगा
( सकती .....ओह्ह मतलब 2 तत्वा का एक साथ प्रयोग कर रहा है बहुत अच्छा सूर्य पैर इस से काम नहीं चलेगा वयोम को याराना इतना भी सरल नहीं होगा )
सूर्य सकती की तरफ गौर से देखता है
सकती को ऐसे लगता है जैसे सूर्य उसके भीतर गुस्स रहा है
सूर्य वॉर करते हुए फिर से ध्यान लगाने लगता है
जैसे जैसे सूर्य ध्यान में गहरा जाता है वैसे वैसे सूर्य के परहरो की तीव्रता बढ़ने लगी
सकती .....साध्वी जी ये सूर्य क्या कर रहा है
साध्वी जी .....सूर्य अपने इच्छा सकती का प्रयोग कर रहा अपने पथरो को दिशा देने में
सकती ....क्या मतलब मैं कुछ समजा नहीं
साध्वी जी .....सूर्य ध्यान लगा कर अपनी ऊर्जा को संतुलित करने के साथ साथ अपनी ऊर्जा सकती को भी भाषा रहा है
गौर से देखो सूर्य को आवर उसके पथरो को वयोम अगर अपनी जगह से हैट कर भी वॉर रोकेगा तो भी ऊर्जा वयोम को स्वयं से खोज कर उसपे प्रहार करेंगे
सकती ......पैर सूर्य ये कैसे कर प् रहा है जबकि सूर्य की सक्रिय अभी बहुत सुप्त स्वस्थ में है
साध्वी जी ......हम पूरी तरह नहीं जानते पैर हमें लगता है सूर्य ुशी मंत्र का ध्यान कर रहा जिस से कल सूर्य खुद को संतुलित किया था अपनी ऊर्जा को पुनः प्राप्त किया था
डेरी डेरी सूर्य का वायु तत्वा भी सूर्य के परतवि आवर जल तत्वा के साथ सम्मिलित हो जाता है
सकती ......आपको वयोम की शय्या करनी होगी
साध्वी जी .....हम नहीं आप जाये आवर दोनों मिल कर सूर्य के पथरो को रोकिये आवर साथ हे अपने ऊर्जा का प्रयोग कर सूर्य पे वॉर कीजिये
सकती .....पैर वो तो ध्यान में लीं है ऐसे में उसे चौथ लग सकती है
साध्वी जी .....हम जो कह रहे है वही कीजिये किन्तु बहुत काम मात्रा से सुरु कीजिये
सकती अपनी ऊर्जा का प्रयोग कर सूर्य पे वॉर करने लगा
सकती .....वयोम अपनी ऊर्जा का प्रयोग करो पैर बहुत काम मात्रा में
ीदार ध्यान में सूर्य को अपनी तरफ किसी ऊर्जा को आते हुए सेंस करते हे एक एक करके तीनो तत्वा सूर्य के चारो तरफ रक्षा कवच का रूप दर्जन कर लेते है
बहरी परत वायु तत्वा फिर जल तत्वा अंत में परतवि तत्वा
साध्वी जी ......बहुत अच्छा सूर्य बहुत जल्दी अपने तत्वों का प्रयोग करना शिख रहे हो
( साध्वी जी ....वयोम सकती अपने पथरो में ऊर्जा का विस्तार करो
सकती ....क्या ये ठीक रहेगा
साध्वी जी .....है हम कह रहे है न )
सकती आवर वयोम साध्वी जी की बात मन सूर्य पे दुगुनी ऊर्जा से सूर्य पे वॉर करते है
सूर्य ध्याम में लीं हो किसी आवर हे स्थान पे जा पंहुचा
तीनो तत्वा अपनी उग्रता की आवर भाड़ रहे थे
साध्वी जी .....हमें ऐसा क्यों महसूस हो रहा है की कुछ ानिस्ट होने वाला है
साध्वी जी सूर्य के नजदीकी जाने लगी किन्तु जैसे जैसे वो आगे भाड़ रहे थे वैसे वैसे सूर्य के सरीर से निकल रहे तप को वो महसूस कर रही थी
साध्वी जी .......ये ये सूर्य की देह से ऐसा तप क्यों निकल रहा जैसे हम सूर्य के पास नहीं किसी अग्नि पुंज के पास जा रहे है
साध्वी जी अपनी आँखे बंद कर सूर्य के चारो तरफ एक बहुत मजबूत शील्ड बनती है आवर पीछे हैट जाती है
साध्वी जी ....सकती वयोम अपने ऊर्जा का प्रहार रोक दो
सकती .....क्या हुआ साध्वी जी
साध्वी ji.....waha से हैट जाओ सूर्य से दूर हो जाओ
सकती ......किन्तु हुआ क्या है साध्वी जी
साध्वी जी .....सकती हमारी बात ध्यान से सुनो अपने अपने सबसे सुरक्षित सुरक्षा कवच से खुद को सुरक्षित करो
हम ध्यान में जा रहे है कुछ भी हो जाये तुम सूर्य के नजदीकी नहीं जाओगे आवर न हमारे पास आओगे
सकती ......जी ठीक है
साध्वी जी ध्यान में लीं हो सूर्य की ऊर्जा से जुड़ कर सूर्य तक पहुंचने की कोशिश करती है बहुत बार कोशिस ह करने के बाद आखिर साध्वी जी को सफलता मिल जाती है
बहार सूर्य के चारो तरफ जल आयु पर्तिवि तत्वा के साथ साथ अग्नि के लपटों ने भी सूर्य को कवर कर लिया था
वयोम आवर सकती इस तप को सहन नहीं कर प् रहे थे इस लिया वो पीछे हैट गए
साध्वी जी के सरीर से बहुत आदिक मात्रा में सफ़ेद ऊर्जा निकल रही थी
साध्वी जी जब सूर्य तक पहुंची तो देखा की सूर्य ध्यान की अवश्य में सूर्य( सूरज ) की आवर भाड़ रहा था
साध्वी जी ....सूर्य अपने ध्यान को भांग करो
सूर्य के कानो में जब साध्वी जी की आवाज पड़ती है तो वह अपनी आँखे खोलता है सूर्य की आँखे किसी सूर्य की तरह हे चमक रही थी
साध्वी जी .....सूर्य अपनी अग्नि तत्वा को संत करो अनन्यता बहुत बड़ा संकट उत्पन हो जायेगा
सूर्य .....मैं खुद को रोक नहीं प् रहा हूँ
साध्वी जी .....अपने ध्यान मंत्र ...om...ka प्रोग करो वो तुम्हारी सहायता करेगा
सूर्य ........मैं खुद को संतुलित नहीं कर प् रहा हूँ
( साध्वी जी .....पिताजी हमारी सहायता कीजिये सूर्य को संत करने ानयता हम कुछ नहीं कर पाएंगे
गुरुदेव ......पुत्री तुम्हे अपने वास्तविक रूप में आना होगा आवर आवर गॉड स्तुति का प्रयोग कर सूर्य के महाकाल अंश को संत करना होगा
इस वक़्त तुम्हारे सामने सूर्य नहीं है
साध्वी जी .....जी पिताजी
गुरुदेव .......सफल मनोरथ भाव पुत्री )
साध्वी जी .....सूर्य पर्यटन करो कुढ़ को संत करने का
सूर्य ध्यान लगाने की कोसिस करता है
साध्वी जी अपना साध्वी रूप त्याग कर अपने पारी रूप में आ गई
सकती आवर वयोम दूर खड़े जंगल में लगी आग को अपनी जल तत्वा स रोक रहे थे तभी
साध्वी जी के पारी रूप में आने का उनको आभाष हुआ
सकती .....वयोम तुम इस अग्नि को रोको मैं यहाँ मायाजाल का निर्माण करता हूँ अनन्यता किसी के सामने हमारा भेद खुल सकता है
वयोम ......जैसा तुम कहो मित्र
किन्तु ये हो क्यों रहा है
सकती .....ये तो रिद्धि पारी हे बता सकती है की उन्होंने अपना वास्तविक रूप क्यों दर्जन किया है
सकती अपने सकती का प्रयोग कर वह एक माया का निर्माण करता है
आवर एक बार फिर से अग्नि को जल से संत करने लगता है
वही सूर्य साध्वी जी की गॉड स्तुति से संत होने लगता है आवर देखते हे देखते पूरी तरह से संत हो जाता है
साध्वी जी ध्यान भांग कर पुरे जंगल में सूर्य के वजह से जो हानि हुई उसको ठीक करने लगी
सूर्य ने जैसे हे अपनीं आँखे खोली वो मूर्छित हो गया ........
अपडेट पोस्ट्स फ्रेंड्स ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......


















