Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 29 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट 231

सपना मस्ती में तुनकते हुए सूर्य के चूचक को अपने दांतो में बिच कर खींच देती है

सूर्य .....ोुच्छ जंगली बिली कही की

सपना ....... आप किस जंगल से गरीब हो इतनी प्रेमिका है आपके पास बहार इतनी लम्बी लाइन लगी है

सूर्य ...... हाहाहा मतलब तुम्हारा अमृत नसीब नहीं होगा

सपना .......उम्मम्मम्हा वो भी आपका मैं भी आपकी अभी मुझे सोना है ऐसे हे

सूर्य .....हम्म्म वैसे भी 1 से ऊपर समय हो गया है सुबह जल्दी भी उठना है कल कोमल के साथ नागलोक भी जाना है

सपना ......मतलब सुबह जल्दी नहीं उठना होगा

सूर्य ......हाहाहाहा अभ्यास के बाद जाऊंगा आवर परषो सुबह जल्दी लौट आऊंगा उम्मम्मम्हा शुबरात्रि सपना

सपना .......शुबरात्रि उम्म्म्मः ............

अब आगे .........

सूर्यगढ़ .......... सभी ध्यान वह योध अभ्यास कर घर लौट आये थे किरण आवर सपना भी साथ में आये थे क्यों की सूर्य कोमल नागलोक के लिया निकल रहे थे

शालिनी जी ....... बीटा कोमल का ख्याल रखना आवर अपना भी

सूर्य ......क्या माँ कोमल का अपना घर है वो भले हे पिछले जनम का हे क्यों न हो आवर मुझे क्या होगा आप भी न अब मैं बड़ा हो गया हूँ

रेखा जी...... कितना भी बड़ा हो जाये बीटा पेट माँ बाप के लिया वो हमेशा बचा हे रहता है जैसा शालिनी कह रही है वैसा हे करना एक तो तुम दोनों को अचानक से वह जाने की क्या सूजी है

सूर्य .......don't वोर्री मम्मी वो आपकी बेटी है आवर हमेशा आपका उस पे पहला हक़ है आवर हमेशा रहेगा

आपकी चिंता मैं समझता हूँ पैर जो जायज नहीं है पैर ये जो आपके अंदर माँ का दिल है न वो डरता है

रेखा जी ........ तू तो बड़ा समझदार हो गया है 2 बीबियो के आते हे

सूर्य .......... आप कहो तो तीसरी भी ले औ साथ में हे वही सदी करके ोुछःह सॉरी मम्मी मजाक कर रहा था

रेखा जी मज़ाक करते हुए सूर्य का कण खींच देती है

सूर्य भी दर्द होने का नाटक करता है जिस से रेखा जी के चेहरे पे हलकी मुस्कान उभर आती है

शालिनी जी ....... दीदी जरा अच्छे से कण खिचाई करो इसकी मेरी तो आजकल सुनता हे नहीं है

रेखा जी ....... क्या ये सच है बीटा

सूर्य .......ुम्मम्हा आपको लगता है मैं कभी ऐसा कर सकता हु मम्मी आपको भी पता है आवर इनको भी की मैं सबसे ज्यादा किसने प्यार करता हूँ

रेखा जी ......आवर कोण होगी स्वीटी के अलावा

सूर्य ......नहीं मम्मी ये न आप अपनी शालू से हे पूछो जो सुबह सुबह मेरे कान खिचवाना चाहती है

दूसरे रूम में कोमल त्यार हो रही थी तभी वह किरण आती है

किरण ...... कोमल त्यार हो है क्या

कोमल .....बस हो गई संजो दीदी

किरण ........ तुम्हारे साथ मानसी दीदी भी जा रही है कल सुबह आना ताकि तुम भी अच्छे से समय बिता साकी अपने परिवार में आवर मानसी दीदी भी थोड़ा गम फिर लेगी

कोमल ............ दीदी अब यही मेरा परिवार है आत्मा भले हे नागलोक राजकुमारी कोमलांगी की है पैर सरीर कोमल का है उस परिवार का सम्बन्ध आत्मा आवर यादो से है पैर इस परिवार रकत आवर ढूढ के साथ साथ ढेरो सम्बन्ध है

किरण ......बस बस मेरी कोमल गुड़िया आज सुबह सुबह किसी सिद्ध योगिनी से प्रवचन तो नहीं सुन लिया है न या फिर कोई तपस्विनी साध्वी जी की आत्मा तो नहीं गुस्स गई है

कोमल ....... ऐसा कुछ नहीं है दीदी पैर माँ

किरण ........ देखो कोमल वैसे तो हम दोनों हम उम्र है आप मुझसे कुछ महीने बड़ी होंगी पैर जो हक़ मुझे आप सब लोगो ने दिया है बड़ी बहन का तो मेरी बात याद रखना

रेखा मम्मी तुम्हारे वह जाने से नाराज नहीं है बल्कि आपको खोने से एक माँ का दिल दर रहा है इस लिया वो उदाश है बस आप उनने ये अहसास करवा दीजिये की वह जाने के बाद भी उनकी हे बेटी कोमल रहेंगी न की राजकुमारी कोमलांगी बन जाएगी

कोमल ....... हम भी तो यही आंजना चाहते है

किरण .......... वो माँ है बस एक बार प्यार से उनके गले लग जाइये वो सब समाज जाएँगी कुछ भी सजाने की जरुरत नहीं होगी उन्होंने जनम दिया है आपको आपकी धड़कन से आपकी मनोयस्थिति समाज जाएँगी वो

कोमल किरण के गले लग उसके गाल चुम कर थैंक्स कहती है

किरण ......वैसे अच्छा मौका है कुंवर जी के साथ कुछ खूबसूरत लम्हे बिताने के लिया पैर ध्यान से गलत जगह हाथ मत डालना हहहहए वो बहुत खतरनाक है

कोमल .......... क्या मतलब आवर मुझे उनसे कैसा खतरा

किरण .........उनसे नहीं पैर उनका वो बहुत खतरनाक है कही जल्दी में हेहेहे

कोमल ......... कोई नहीं जब आप थम सकती है तो मैं क्यों नहीं मैं नाम से हे कोमल हूँ बाकि दिल आवर सरीर दोनों मजबूत है

सूर्य ....... क्या बाते हो रही है दोनों में

किरण ....... आपको क्यों बताये ये हमारी बहनो की आपस की बात है

सूर्य ........ स्वीटी वो मेरी सकतिया मुक्त कर दो न

किरण .......... सॉरी मैं तो भूल हे गई आप वादे से मुक्त है पैर घर में अभी भी आप किसी का मंद रीड नहीं करेंगे जब तक जरुरी न लगे

सूर्य ........ ये क्या बात हुई भला

किरण ......... आपकी कोमल त्यार है अब जाइये आवर कल सुबह आराम से आना ध्यान आवर अभयश हम कर लेंगे बस वो पुस्तक हमें सौंप दीजिये

सूर्य .....जो हुकुम मालकिन गुलाम आपके कहे अनुसार हे करेगा हाहाहाहा

सूर्य उस दिव्या पुस्तक को याद करता है कुछ हे पल में पुस्तक सूर्य के हठी में थी

सूर्य पुस्तक किरण को सौंप देता है साथ हे वो मंत्र भी जिस से पुस्तक को प्रयोग में लाया जा सके

किरण मंत्र का प्रयोग कर पुस्तक गायब कर देती

कोमल ........ आप लोग एकेले में बात कर लीजिये मैं मानसी दीदी को देखती हूँ त्यार हुई की नहीं

सूर्य ......वो किस लिया

किरण .......किस लिया क्या वो आपके साथ जा रही है नागलोक उसका हनीमून बाकि है अभी

कोमल के जाते हे किरण रूम को लॉक कर सूर्य की कमर में अपने टैंगो की कैंची लगा सूर्य को किश करने लगती है 4,5 मिनट्स के किस के बाद सूर्य किरण को वैसे हे सीने से लगाए रखा जब तक बहार गेट नॉक न हुआ

किरण तो गायब हो कर निकल गयी सूर्य ने जब दूर खोला तो सामने मेनका जी थी

जिन्होंने गेट बंद कर सूर्य को कीच कर बीएड पे गिरा कर उसपे चढ़ बैठी

मेनका जी ........ तुम्हे मेरा तो जरा भी ख्याल नहीं रहा नहीं.

कितने टाइम से मेरे नजदीक भी नहीं आये अब सदी हो गई तो ये बूढी बुआ तुम्हे पसंद नहीं क्या

सूर्य ......... आपको ऐसा लगता है क्या बुआ सा आप हे देखो टाइम कहा मिलता है

मेनका जी ......टाइम निकलना पड़ता है मिलता नहीं पैर तुम्हे क्या मेरी जो हालत है वो मैं हे समाज सकती हूँ

सूर्य मेनका जी को पलट कर अपने निचे लेता है आवर अपने होंठ उन फुले हुए होंठो से लगा कर घूमने लगता है

अपना एक हाथ मेनका जी की जंगो को सह लेट हुए हलके हलके बालो वाली उनकी फुल्ली हुई छूट पे हाथ रख सहलाने लगता है

सूर्य के सहलाने भर से मेनका जी की मुनिया आंसू बहाना सुरु कर देती है

सूर्य अपने बिच वाली ऊँगली को उस गरम पैर गीली गुफा में पहुंचा आगे पीछे करता है मुश्किल से 2 मिनट्स भी नहीं लगे की मेनका जी की योनि ने अपना चरमसुख प् लिया

सूर्य होंठो से अलग हो साड़ी को उठा अपना सर उनकी लहंगे में दाल सीधा वो चुतराश पिने लगता है

मेनका जी फिर से गरम होने लगी तो सूर्य ने अपने जीप खोल अपना गरम लोंदा सताते हुए मेनका जी के होंटो को अपने हों तो में कैद कर गरम सूपड़ा उस कशी हुई छूट में गुस्सा देता है एक पल को तो मेनका जी के चेते पे दर्द भरी लकीरे उभर आई

सूर्य ......उम्म्म्मः बुआ अभी ज्यादा टाइम नहीं है थोड़ा दर्द बर्दाश्त करना

मेनका जी है में गर्दन हिला बेडशीट को अपने मुँह में भर लेती है ताकि आवाज न हो

सूर्य थोड़ी तेजी से आधे मुसल से ओखली में कुटाई सुरु कर देता है

मेनका जी के सरीर की गर्मी कुछ ज्यादा हे बढ़ चुकी थी जो 5,6 मिनट्स तेज दामोदर देखो ने उन्हें फिर से वो सुख दे दिया जिसके लिया वो सूर्य को उलाहना दे रही थी

सूर्य मेनका जी के करते हे अपना लिंग बहार निकल लिया

सूर्य कोई ख़राब कपडा देख रहा था जिस से वो लिंग को साफ करने वाला था पैर मेनका जी ने उस मुसल को थम अपने मुँह में भर कर अपनी हे योनिरस को चाट चाट कर साफ कर दिया

सूर्य उनने एक किश कर वह से गायब हो गया ताकि किसी को पता न चले की इतने देर वो अंदर क्या कांड कर रहा था

नागलोक ...........

सूर्य कोमल आवर मानसी को ले जब नागलोक पहुंचा तो सूर्य महल में न जा कर नागलोक के उस हिज शी में पहुंचा जी हिस्सा तक्षक नागवंशी नागो के अधिकार में था

सूर्य के लागलोक में कदम रखते हे वाइट ड्रैगन को सूर्य का आने का पता चल गया

कोमल ......हम यहाँ क्यों आये है हमें तो महल में होना चाइये था ये तो तक्षक नाग्वंशियो का इलाका है

सूर्य ......मैं जनता हूँ कोमल ये तक्षक नागवंशी नागो का आदिकारिक क्षेत्र है

अपने वास्तविक रूप को ददन करो कोमल

कोमल .......पैर उसकी क्या आव्सय्कता है

सूर्य .........बाद में बताऊंगा अभी जैसा कहता हूँ वो करो

मानसी .......कोमल दीदी जरूर इन्होने कुछ सोचा होगा

कोमल ......... ठीक है

कोमल आँखे बंद कर अपना रूप बदल नागलोक राजकुमारी कोमलांगी का रूप धार लेती है

वाइट ड्रैगन इस वक़्त नागलोक के उस निर्जन क्षेत्र में था जहा केवल पहाड़ गुफा आवर जीवित ज्वालामुखी हे थे कुछ अन्य जानवर भी जो नागो का सीकर होने से बचने के लिया इस निर्जन स्थान पे सरन लेते थे

वाइट ड्रैगन एक ज्वालामुखी में इस वक़्त आराम कर रहा था जैसे हे सूर्य नागलो नागलोक में कदम रखा वाइट ड्रैगन बगलामुखी से निकल सूर्य की आवर बढ़ गया

कुछ हे पालो में वाइट ड्रैगन सूर्य के सामने था

सूर्य .......तो हमारे आने का पता चल गया आपको भी

w.dragon ....... आपकी ऊर्जा मुझसे जुडी है फिर आपके आने का मुझे कैसे न पता चलता मालिक

सूर्य ........चलो फिर चलते है महल की आवर

सूर्य कोमल मानसी को लिया w.dragon पे स्वर हो महल की आवर बढ़ गया

सूर्य ........w.dragon सामान्य गति से उड़न भोर कोई जल्दी नहीं है

w.dragon ........ जैसा आप कहे मालिक अगर ेजजय हो तो कुछ पूछ सकता हूँ

सूर्य ....... यही न की हम सीधा महल भी तो जा सकते थे न फिर यहाँ इस स्थान को हे क्यों चुना हमने

w.dragon ....... आपको कैसे पता

सूर्य .......भूलो नहीं तुम्हारी ऊर्जा मुझसे जुडी है तुम्हारी सोच आवर मन में होने वाले परतेक विचार मुझे पता होते है

दर्जों को देख तक्षक नागो में खलबली मच उठी

ऐसा नहीं था की उन्होंने दृगों नहीं देखा था पहले

पैर इस लोक में हजारो सालो पहले हे इस प्रजाति का अस्तित्व ख़तम हो चूका था

यहाँ जो पहले ड्रैगन पाए जाते थे वो नागदरोगों प्रजाति के होते थे

नागो की तरह विशाल पैर ड्रैगन की तरह उड़ने वाले उनके हे जैसा मिलता जुलता चेहरा

कोमल ....... आपको पता है ये तक्षक नागवंशी बहुत हे क्रूर संभव के होते है हम वासुकि नागवंशी को अपने से कमजोर वह निम्न ( नीची ) प्रजाति का समझते है

हमारे वासुकि वंश के नागो पे जुलम करना जैसे इनका जामसिद्ध अधिकार हो

सूर्य ........ वैसे एक सोच उनकी सच भी है कोमल वो बल में वासुकि नागो से आदिक बलवान होते है गुरुदेव ने बताया था मुझे नागलोक आवर तक्षक आवर वासुकि वंश के विषय में जब मैंने उनसे यशा आने की इजाजत ली थी

मानसी ........ वो देखो हमारी आवर कोई अस्त्र आ रहा है

सूर्य .......... आने दो उस से कोई फरक नहीं पड़ने वाला w.dragon थोड़ा आवर निचे से चलो

w.dragon ....... ऐसे में तो हम उनके अस्त्र सस्त्रो की सीमा में आ जायेंगे

सूर्य ......वही तो मैं चाहता हूँ मानसी खुद को गायब कर को आवर मैं भी खुद को गायब कर रहा हूँ कोमल उनने केवल तुम हे दिखाई देनी चाइये

कोमल .......पता नहीं आप ऐसा क्यों कर रहे है

सूर्य ........ कुछ सबर तो रखो मेरी जान सब पता चल जायेगा

सूर्य मानसी खुद अदृश्य कर लेते है जैसे जैसे ड्रैगन निचे गया अब सभी तक्षक नागवंशी ड्रैगन पे स्वर किसी कन्या को उनका दर काम हुआ पैर वह मौजूद बड़े बुजुर्ग तक्षक नागो की दर के मरे हालत ख़राब हो गई

क्युकी उन्होंने नागराजकुमारी कोमलांगी को पहचान लिया था

उनके से कुछ बुजुर्ग नागो के मुँह से वासुकि नागवंशी राजकुमारी कोमलांगी नाम सुन कर बाकि लोगो को भी पता चल गया की ये कोण है

कोमल ....... इन्हें ऐसा डरता देख पता नहीं क्यों हमें अच्छा नहीं लग रहा है

सूर्य ....... पैर ये जरुरी है कोमल भविष्य में होने वाले योध में नागलोक की सेना का नेतृत्व तुम्हे करना होगा समय आ चूका है की दोनों नागवश एक हो जाये

कोमल .......ये संभव नहीं है हजारो सालों से हमारे पूर्वजो ने न जाने कितने हे पर्यटन किये पैर वो सब वयर्थ रहा ये लोग कभी एक नहीं हो सकते है

कुछ देर बाद सूर्य आवर मानसी अपना अदृश्य रूप से सामान्य रूप में लौट आये अब तक्षक नागवंशी सीमा ख़तम हो चुकी थी आवर वासुकि नागो का क्षेत्र आराम हो चूका था

कुछ हे देर बाद ड्रैगन वासुकि नागवंशी नागराज महावीर के महल के सामने उतरता है

एक बार तो सभी नाग पहाड़ी आवर वह मौजूद नाग दर के मरे जोर से चिल्लाते हुए खुद को बचने के लिया भाग उठे

बहार हो रहे शोर सरबे की खबर महल के भीतर लगी तो सेनापति माणिक नागराज महावीर राजगुरु नागेश्वर नागराजकुमार इंद्रजीत

( दोस्तों मुझे नागराज महावीर के पुत्र का नाम याद नहीं है तो उसे इंद्रजीत नाम दे रहा हूँ ) कुछ सही नाग सेनिको के साथ हठी में तलवार लिया उस आवर तेजी से बढे जहा से बचाओ बचो आवर आक्रमण हहआ है ऐसी आवाजे आ रही थी

सेनापति माणिक .......किसका इतना दशांश जो हमारे होते हुए महल पे आक्रमण करने की गुस्ताख़ करे

सामने सूर्य को आवर मानसी को देख सेनापति माणिक अपनी तलवार लिया तेजी से सूर्य की आवर बढ़ा

आवर अपनी तलवार सूर्य की गर्दन पे लगाने हे वाला था की मानसी की गायक शेरनी से सेनापति माणिक को उठा के जमीं पे दे मरती है

कोमल .......दीदी रुक जाइये ये आप क्या कर रही है

मानसी .......तुम्हारी निकट कैसे हुई इन पे तलवार उठाने की

माणिक ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ था की मानसी के पेअर की जोरदार ठोकर सेनापति माणिक के सीने पे आ लगी

मानसी के गुस्से का अंदाजा इस से हे लगाया जा सकता था की सेनापति का भरी भरकम सरीर जमीं पे रगड़ कहते हुए मानसी से 10,12 फिट दूर जा रुका

नागराज महावीर आवर कोमल मानसी को रोकने के लिया आगे बढे तो सूर्य ने कोमल का हाथ पकड़ कर रोक लिया

नागराज महावीर के कदम वही रुक गए जब सूर्य द्वारा कोमल को रोकते हुए देखा

सेनापति माणिक ....... डस्ट कन्या तुम्हारा ये दशांश की तुमने मुझे पत्थर किया

सेनापति माणिक अपना रूप बदल विशाल नाग में परिवर्तित हो गया आवर मानसी को अपनी पंच में जकड लिया

कोमल ........दीदी खुद को बचाओ मुझे छोड़िये मुझे दीदी की मदद करने दीजिये

सूर्य ........ इन दोनों के बिच में नहीं कोई भी नहीं आएगा पीछे हाथो सब

नागराज महावीर ........ किन्तु पुत्र सूर्य

सूर्य ....... पिता श्री आप कुछ पल में रहे

मानसी बड़ी तेजी से सेनापति माणिक की मजबूत पकड़ से किसी रेट की तरह निकल कर पीछे से उसकी विशाल पंच को पकड़ कर झटका देती है

सेनापति माणिक को इसकी उम्मीद नहीं थी की उसके इस विशाल सरीर को कोई इस तरह से दल भी छठा सकता है

सेनापति माणिक ोुण्डे मुँह अपने हे वजन से जमीं पे आ गिरता है

मानसी ......ब्लैक दरोगों बहार निकलो

सूर्य ....... नहीं मनु ये मुझे जिन्दा चाइये जान से नहीं मरना है इसे

किसी को कुछ भी समाज नहीं आ रहा था की आखिर यहाँ हो क्या रहा है आवर इसके पीछे वजह क्या है

नाग सैनिक अपने नागराज को में देख खुद भी में हो इस विषम दृश्य को देख रहे थे जहा एक दुर्बल से किसिरि कोमल कन्या कैसे एक 30 ,35 फिट लम्बे नाग के साथ खेल रही थी

मानसी ........ तुमने उनपे तलवार उठा अपने जीवन की अंतिम गलती है जिन्दा तो रहोगे पैर जीने लायक नहीं

मानसी सेनापति की पूछ पकड़ कर हवा में ऊपर उठते हुए गुमा कर एक बार फिर से सेनापति को दल छठा देती है

इस बार वॉर कुछ ज्यादा हे भयानक था की सेनापति माणिक का नागरूप अपने आप गायब हो सामान्य इंसानी रूप में आ गया जगह जगह पे सरीर पे बने जाखल मुँह से उगलता खून सेनापति की दुर्दशा बयां कर रहा था

सूर्य ........ पिता श्री इस हे ऐसे हे बंदी गाढ़ा में दाल दीजिये

महानी पूर्वी पूर्वी भी शोर सराभा सुन इस आवर आ गई थी सामने का भयानक मंजर उन्हें भी डरा गया थस पैर अपनी पुत्री कोमलांगी को देख सब कुछ भू वो कोमल को अपने सीने से लगा लेती है

नागराज महावीर .......पैर पुत्र ये हमारे नागलोक के सेनापति है इनके साथ इस तरह का वैभार इस कन्या को दंड का पत्र बनता है

सूर्य ......... आपने सायद पहचाना नहीं पिता श्री वो मेरी भार्या ( पत्नी ) है मानसी सूर्य ठाकुर पिता श्री सोच समाज कर निर्णय कीजिये बिना किसी भी राजा को बिना पूर्ण सत्य ज्ञात किये नये नहीं करना चाइये पहले अपनी पुत्री से मिल लीजिये आवर आप लोग देख क्या रहे है इसे उठा कर काराग्रह में डालो सभा में इसका नये होगा

नागराज महावीर के इस अरे पे कुछ सैनिक सेनापति माणिक को उठा कर कारागृह की आवर ले गए

N.mahaveer ....... सभी अपने स्थान पे लौट जाओ

n.purvi ......... जमता आप नागलोक आ रहे है हमें सन्देश तो भेजा होया आपके स्वागत की तयारी के लिया हमें कुछ वक़्त मिल जाता

सूर्य ......... क्या एक पुत्र को अपनी माता से भेंट करने के लिया पहले से सन्देश भेजना पड़ता है ारीस्वाद दीजिये माता

सूर्य मसनसी को साथ लिए नागरानी पूर्वी के चरण स्पर्श करता है

नागरानी ...... चिरंजीवी भाव पुत्र साधा सौभाग्यवती भाव पुत्री मानसी

सूर्य ुशी तरह नागराज महावीर आवर नाग राजगुरु नागेश्वर के चरण स्पर्श कर उनसे आसिष लेता है

इंद्रजीत ....... परनाम जीजा श्री परनाम बड़ी दीदी

सूर्य ........ कैसे हो इंद्रजीत

मानसी ....... ईश्वर आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे इंद्रजीत

इंद्रजीत ...... कोमलांगी दीदी आप हमें आशीर्वाद नहीं देंगी

कोमल ....... तुमने अपनी दीदी आवर जीजा श्री के चरण स्पर्श कर उनसे आसिष ली किन्तु क्या आपने हमारे चरण स्पर्श किये फिर हम बिना चरण स्पर्श किये आपको आसिष कैसे दे हुन्न

इंद्रजीत ....... हमें क्षमा करे दीदी

कोमल ......ुम्मम्हा कैसे हो इंद्रा

नागराज महावीर .......... महारानी जी अपनी दोनों पुत्रियों आवर जमता का तिलक कर महल में नहीं ले कर जाना क्या

नागरानी एक देशी से पूजा थल ले तीनो को तिलक आरती कर महल में चलने को कहती है

सूर्य ......... आप लोग बात कीजिये हम आते है माता श्री

कोमल को बहुत ख़ुशी हो रही थी सूर्य द्वारा नागरानी पूर्वी आवर नागराज महावीर को इतना सम्मान देता देख वही थोड़ी नाराज भी थी की सूर्य ने उसे कुछ भी नहीं बताया था

कोमल मानसी n.purvi इंद्रजीत चारो महल लौट गए

n..veer ....... पुत्र ये सब क्या है आवर आपने हमें भी बिच में आने से रोक दिया

सूर्य ....... पिता श्री पिछले कुछ समय से जो भी नागलोक में गठन गठित हो रही है इसके पीछे कोई आवर नहीं आपके प्रिय सेनापति माणिक हे है

राजगुरु ........ आपके विषय में महाराज से सुना था हमने किन्तु आपसे भेंट प्रथम बार हो रही है सच कहे तो हमें आपकी भार्या पे अत्यंत क्रोध आया किन्तु जब आपके साथ राजकुमारी कोमलांगी को देखा जब आप उन्हें इस योध में हस्तक्षेप करने से रोक रहे थे ुशी वक़्त महाराज को रुकता देखे तो हम समाज गए आप कोण है जरूर कुछ ऐसा जोगा जिसका भान हमें नहीं है

सूर्य ........ क्षमा चाहता हूँ राजगुरु जी किन्तु मानसी को मैंने हे आदेश दिया था सेनापति माणिक को दण्डित करने के लिया पैर उसने समय से पूर्व हे गलती कर दी जिसके चलते उसने हमारी गर्दन पे तलवार रख दी जिसे देखने के बाद मानसी स्वयं के क्रोध को रोक नहीं पाए हमने भी हस्तक्षेप करना उचित नहीं सामना पिता श्री अपने नहाय स्थान पे विराजिए आवर सेनापति को सभा में लेन का आदेश दीजिये

नागराज महावीर अपने सिंघासन पे विराजमान हो सेनिको को आदेश देते है वह कुछ आवर राजदरबारी भी मौजूद थे सूर्य सेनापति के सिंघासन पे विराजमान हो जट्स है क्यों की वही एक स्थान खली था इस वक़्त

कुछ हे देर में सैनिक दौड़ते हुए राजसभा में आते है

सैनिक ........ महाराज सेनापति माणिक काराग्रह से भाग गए

नागराज वीर ........ इस स्वस्थ में इना आंतरिक मदद के वो बंदी गाढ़ा से कैसे निकल सकते है

राजगुरु ........ महाराज इस से साबित होता है की सेनापति माणिक दोषी है वो ज्यादा दूर नहीं गए होंगे हमें सेनिको को आदेश देना चाइये सिगरा हे उसे गिरफ्तार कर सभा में पेश करे

नागराज वीर ...... सेनिका छापा छापा छान मारो किसी भी इस्थिति में माणिक हमारे समक्ष हो आवर जो बंदीग्रह में पहरे पे सैनिक मौजूद थे उन्हें ुशी बंदीग्रह में दाल दो

सूर्य ............ बंदीग्रह से गुप्त रूप से निकलने वाले दक्षिणी चोर के गुप्त मार्ग पे सेना को भेजिए क्यों की सेनापति माणिक के लिया फ़िलहाल तक्षक नाग्वंशियो की सरन में जाना हे सुरक्षित है आज्ञा दीजिये आवर जहा तक हो उसे जीवित हे गिरफ्तार कीजिये उसके खुलाशे पे बहुत से चुके भेजिए सामने आने वाले है जो आपके इस राजशृंगशान पे नजर गड़ाए बैठे है

उनके केवल एक मौका दे रहा हूँ अपना गुनाह सभी के समक्ष मन कर क्षमा याचना की तो कोई दंड नहीं मिलेगा किन्तु जिसने अपना पाप स्वीकार नहीं किया उसे दंड भोगना हे होगा संध्या काल तक का समय है उन सभी के पास

सूर्य राजगुरु आवर नागराज महावीर को परनाम कर कोमल की आवर निकल गया

नागराज ......... पुत्र सूर्य ने जो कहा ऐसा कोई भी व्यक्ति सभा में मौजूद है तो उसके पास अभी भी अपने किये पाप का प्रायश्चित करने का समय है उनके दिए हुए ॉडी के बाद हम भो किसी को नहीं बचा पाएंगे उनके हाथो दण्डित होने से अभी अपने पाप सभी के समक्ष उजागर किया तो दंड में नरमी बरती जाएगी आवर एक आवर मौका भी मिलेगा तैसा हम आप सभी पे छोड़ते है सभा समाप्त

( नागराज महावीर............ पुत्र सूर्य आपने तो आते हे भेड़िया के झुंड में खलबली मचा कर रख दी आपको कोटि कोटि नमन गुरुदेव जो आपने पुत्र सूर्य को यहाँ की परिस्थिति से पूर्व हे अवगत करवा दिया )

नागराज महावीर मुस्कुराते हुए मन में सोचते हुए रानी महल जा पहुंचने जहा सूर्य कोमल मानसी नागरानी पूर्वी आवर राजकुमार इंद्रजीत बंशी ठिठोली कर रहे थे

N.veer ........ आज कही हम किसी अन्य के महल में तो नहीं आ गए है महारानी जी

N.purvi ........ ये आपका हे महल है महाराज न की आप किसी आवर के महल में पहुंच गए आपकी पुत्री आपके जमता से रस्ट हो गयी है

n.veer ........ क्या हुआ पुत्री अपने पिता के हृद्या से नहीं लगेंगी आप

कोमल सोफे ( सोफे जैसे सिंघासन ) से उठ कर n.veer से गले मिलती है

कोमल .......हम आपसे भी रस्ट है पिता श्री क्या हम अब आपकी पुत्री नहीं रहे जो आपने इतना कुछ हमसे छुपा कर रखा

n.veer ........ पुत्री हम अपनी कोमलांगी को कैसे कास्ट दे सकते थे आप हमारी पुत्री थी है आवर सदैव रहेंगी आपका स्थान जो हमारे हृद्या में है वो कोई भी नहीं ले सकता आपका अनुज इंद्रजीत भी नहीं

सूर्य ........ ये तो अन्याय है पिता श्री यहाँ भी ये आपकी लाड़ली आवर वह भी सबकी लाड़ली इन्हें हम जरा गुस्से में कुछ बोल दे तो हमारी हे माता हमारे गाल लाल कर देती है

इंद्रजीत ........ क्या सच में जीजा श्री माता शालिनी जी आपकी पिटाई कर देती है पैर आप तो इतने बड़े है फिर भी

सूर्य .......पूछ को अपनी दीदी से कुछ दिन पहले हे पार्षद खा चूका हूँ इन पे गुस्सा होने की वजह से

इंदरजीत .......क्या जीजा श्री सत्य कह रहे है दीदी

कोमल ....... हम्म्म

इंद्रजीत ........ हमारी माता तो कभी हम पे क्रोधीय नहीं होती

सूर्य ........ जिस दिन सदी होगी तब देखना सेल साहब

इंद्रजीत ....... दीदी देखिये जीजा श्री कैसे अभद्र भाषा बोल रहे है

n.purvi ......हहहहए पुत्र इंद्रा आपके जीजा श्री ने आपको वही कहा जो आपके साथ इनका रिस्ता है

हमारे यहाँ बहन के पति को बहनोई कह कर सम्बोधित करते है पैर पृथ्वीलोक में बहनोई या फिर साला कहा जाता है

काफी देर सभी वह बे थे मजाक करते रहे आज महल की वो खामोश सही कक्ष हंशी के ठहाको से गूंज उठे थे

वही दरबारी महाराज के सभा से बहार निकलने बाद एक दूसरे का उतरे हुए डरे हुए चेहरे देख राजगुरु काफी खुश हो रहे थे जैसे उनकी मन की मुराद पूरी हो रही थी .....................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................
 
अपडेट. 232

सूर्य ........ जिस दिन सदी होगी तब देखना सेल साहब

इंद्रजीत ....... दीदी देखिये जीजा श्री कैसे अभद्र भाषा बोल रहे है

n.purvi ......हहहहए पुत्र इंद्रा आपके जीजा श्री ने आपको वही कहा जो आपके साथ इनका रिस्ता है

हमारे यहाँ बहन के पति को बहनोई कह कर सम्बोधित करते है पैर पृथ्वीलोक में बहनोई या फिर साला कहा जाता है

काफी देर सभी वह बे थे मजाक करते रहे आज महल की वो खामोश सही कक्ष हंशी के ठहाको से गूंज उठे थे

वही दरबारी महाराज के सभा से बहार निकलने बाद एक दूसरे का उतरे हुए डरे हुए चेहरे देख राजगुरु काफी खुश हो रहे थे जैसे उनकी मन की मुराद पूरी हो रही थी .....................

अब आगे ..........

नागलोक ........ राजगुरु जी ....... महाराज अभी तक सेनापति माणिक का कुछ भी पता नहीं चल पाया है

n.veer .......... क्या हमारे गुप्तचर जो तक्षक वंस में है उनसे कोई सुचना प्राप्त हुई

राजगुरु जी ...... नहीं महाराज उनसे भी अभी तक कोई गुप्त सन्देश प्राप्त नहीं हुआ है हमें

n.veer ....... हमें ुशी समय उस कुलद्रोही माणिक को मृत्यु दंड दे देना चाइये था

सूर्य ......... आप चिंता क्यों करते है पिता श्री सेनापति को देश्ध्रोगी घोषित कर दीजिये साथ हे तक्षक नागवंशी नोगो को सन्देश भी भेज दीजिये की जो कोई भी तक्षक नागवंशी उस देशद्रोही माणिक को सरन देगा ऊषे मृत्यु दंड दिया जायेगा

राजगुरु ......किन्तु पुत्र सूर्य वो महाराज का आदेश आज्ञा क्यों मैंने लगे वो हमें जन्मजात सत्रु मानते है फिर ऐसे में वो महाराज महावीर का आदेश क्यों मानेगे

सूर्य .......... राजगुरु जी आपका कथन उचित है किन्तु समय की मांग कुछ आवर हे है हमें भी समय के साथ खुद को बदलना होगा

जहा तक मुझे गुरुदेव ने दोनों वंशो की शत्रुता के विषय में जो बताया उसके हिसाब से तो दोनों वंशो की शत्रुता परबु द्वारा प्राप्त ...नागमणि ... को ले कर दोनों वंश हजारो सालों से एक दूसरे के रकत के प्यासे है

n.veer ...... है पुत्र सूर्य ये सत्य है किन्तु एक सत्य ये भी है की परबु ने हमें नागमणि वासुकि वंश के भक्ति से प्रश्न हो कर हमें प्रदान की थी जो की एक बहुत बड़ा दायित्व है हमारे लिया नागमणि का तक्षक वंश उचित उपयोग करेगा हम कदापि नागमणि उनने नहीं सौंप सकते है पुत्र

सूर्य .......पिता श्री हमने कब कहा की नागमणि आप उन्हें सौंप दीजिये हम भी मानते है की तक्षक वंश नागमणि का गलत उपयोग करेगा हम भी नहीं चाहते की नागमणि उनने सौंप दी जाये

राजगुरु जी ....... पुत्र हम आपका मंतव्य नहीं समाज प् रहे है

सूर्य ....... राजगुरु जी ये तो आप भी मानते है की दो लोगो की शत्रुता का कोई तीस्ता लाभ उठा लेता है

यहाँ वो तीशरे है असुर वंश जो अभी भी दोनों नाग वषो की शत्रुता का लाभ उठा रहा है आवर भविष्य में भी उठाएगा

n.mahaveer ....... किन्तु असुरो का तो नागलोक में प्रवेश हरजीत है पुत्र

सूर्य ....... ऐसा आपको लगता है पिता श्री जब हमें हमारी वास्तविकता का ज्ञान हुआ था हमें हमारी सकतिया क्र विषय में पता चला ुशी समय परबु द्वारा निर्मित सुरक्षा कवच तीनो लोक से हैट चूका था

राजगुरु जी ....... ये हम भी जानते है पुत्र आवर महाराज भी किन्तु अभी तक नागलोक में किसी भी असुर ने प्रवेश नहीं किया है

सूर्य ....... क्षमा करना राजगुरु जी ऐसा आपको लगता है अब तक 3 बार असुरलोक से असुर नागलोक में प्रवेश कर चुके है उस प्रवेश द्वार से जो सभी लोको को गुप्त रूप से जोड़े हुए है प्रथम बार हमारे हे ड्रैगन ने उनने अपना भोजन बनाया था

राजगुरु जी .....असंभव पुत्र

सूर्य .......संभव है क्यों की उस गुप्त द्वार का निकष स्थान तक्षक नागवंश के अधिकार क्षेत्र में आता है इस लिया न आपको आवर नहीं आपके गोचरो को कुछ भी ज्ञात हुआ उनके आने जाने का आवर इतना हे नहीं पिछले कुछ समय से जो कोमलांगी कन्याये ( कुंवारी कन्याये ) नागलोक से गायब हो रही है उनके पीछे असुरो का हे हाथ इसमें कुछ तक्षक नाग भी उनका सहयोग कर रहे है आवर आपके पिरया सेनापति माणिक भी उनसे मिला हुआ है

n.mahaveer ......इतना सब हो गया हमारे लोक में आवर हमें कुछ ज्ञात भी नहीं कैसे राजा है हम

सूर्य ...... चिंता न कीजिये पिता श्री वो सभी कन्याये अभी भी नागलोक में हे है सभी सुरक्षित आवर सकुसल हमें अभी इंद्रजीत के कक्षा में चलना होगा पिताश्री

सूर्य बड़ी तेजी से हवा के जोंके के जैसे वह से निकला उनके पीछे राजगुरु आवर n.mahaveer भी दौड़ते हुए निकले

सूर्य ......क्या हुआ मानसी तुम इतनी गजराज हुई क्यों हो

मानसी ......वो देखिये इंद्रजीत को क्या हो रहा है

सूर्य की नजर जब इंद्रजीत पे पड़ी तो एक पल के लिया तो वो भी घबरा गया आवर तेजी से इंद्रजीत को जमीं से उठा कर वही बीएड पे लिटा दिया

इंद्रजीत के मुँह से काला हरा रंग का तरल निकल रहा था जो दूषित विष था

तभी कक्ष में राजगुरु आवर n.veer के साथ कोमल आवर n.purvi भी दो उड़ते हुए इंद्रजीत के पास पहुंची

n.purvi ......पुत्र इंद्रा आँखे खोलो पुत्र देखो तुम्हारी माता तुम्हे पुकार रही

n.veer ......पुत्र इंद्रजीत आँखे खोलो अपनी राजगुरु जी देखिये न हमारे पुत्र को क्या हुआ है

राजगुरु आगे बढ़ इंद्रजीत की महज चेक करते है

राजगुरु जी ....... पुत्र इंद्रजीत के सरीर में मौजूद विष दूषित हो गया है महाराज किसी ने बहुत समय से इन्हें किसी अन्य विष का पान करवाया है जप डिग्री डिग्री इनके सरीर में मौजूद नाग विष को दूषित कर रहा था

कोमल ......... आप कुछ करते क्यों नहीं है हकम कुछ नहीं जानते आपको इंद्रजीत को ठीक करना हे होगा

सूर्य ....... कुछ नहीं होगा कोमल इसे तुम संत रहो मानसी कोमल को सम्भालो हम कुछ करते है

इतने में एक से निक राजवेद को लिया वह पहुंचा

राजवेद इंद्रजीत का निरक्षण करने लगते है

वही सूर्य वह से बहार निकल जाता है आवर एक कक्ष में ध्यान लगा वो गुरुदेव से संपर्क करता है

सूर्य .......परनामी गुरुदेव

गुरुदेव ...... कल्याण हो पुत्र कहो कैसे हमें िस्मरण किया पुत्र इस समय तो तुम ागलोक में हो

सूर्य .....जी गुरुदेव हमें आपकी सहायता चाइये इंद्रजीत का जीवन संकट में है गुरुदेव

गुरुदेव ...... हमें पूर्ण विवरण दो

सूर्य उनने दूषित विष के विषय में बाटता है

गुरुदेव ......चिंतित न हो पुत्र इंद्रजीत को कुछ नहीं होगा लगता है काफी समय से कोई इंद्रजीत को अन्य किसी जिव का विष दे रहा था जिस से इंद्रजीत का विष दूषित हो गया पुत्री कोमल के पास नागमणि है पुत्र उसका प्रयोग करो इंद्रजीत सिगरा हे ठीक हो जायेगा किन्तु नागमणि पुत्री कोमल के पास हे रहे प्रेमवश वो नागमणि इंद्रजीत या किसी अन्य को न सौंप दे क्यों की कोई अन्य नागमणि को दर्जन नहीं कर पायेगा

सूर्य ......जी गुरुदेव जैसा आप कहे परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ...... सदैव खुश रहो पुत्र

सूर्य वह से उठ कर इंद्रजीत के कक्ष में पंहुचा जहा राजवेद इंद्रजीत के गले पे किसी तरह का ॉधी लेप लगा रहे

सूर्य ........ कोमल तुम्हे इंद्रजीत पे नागमणि का प्रयोग करना होगा अब केवल नागमणि हे इस दूषित विष को इंद्रजीत के सरीर में सुच कर उसे जीवनदान दे सकती है

कोमल सूर्य की बात सुन फ़ौरन नागरूप में आ जाती है

पुरे कक्ष में गोल्डन रौशनी फ़ैल जाती है कोमल के गोल्डन नागिन सवरूप से

उसमे नागमणि का तीव्र प्रकाश एक अलग हे आभा बना रहा था





कोमल नागमणि ले इंद्रजीत के मस्तक पे रख देती है

नागमणि से एक बार फिर तेज प्रकाश निकला जो इंद्रजीत के पुरे सरीर को अपने प्रकाश में घेर लेता है

कुछ 2,3 मिनट्स में प्रकाश डेरी डेरी काम होता है तो इंद्रजीत का सरीर पहले से भी तेजवान लग रहा था नागमणि ने विष को हे सुध नहीं किया था बल्कि कुछ आवर बदलाव भी इंद्रजीत के सरीर में नागमणि की सकती से हुए थे

n.veer नागमणि को परनाम कर उसे उठाने हे वाले थे की सूर्य ने जल्दी से उनका हाथ पकड़ लिया

कोमल .......ये क्या है सूर्य वो पिता श्री है हमारे

सूर्य ......... क्षमा करे पिता श्री इस तरह आपको रोकने के लिया किन्तु ये जरुरी था कोमल केवल तुम हे इस योग्य हो की नागमणि को उठा सकती हो उसे दर्जन कर सकती हो ऐसा मैं नहीं गुरुदेव ने कहा है अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो अवश्य कोई वजह रही होगी

n.mahaveer ...... क्षमा करना पुत्र हमें इसका ज्ञान नहीं था किन्तु हम नाग है नागमणि को छू नहीं सकते ये कुछ समाज नहीं आया पुत्र

कोमल सूर्य को कहे सब्दो से खुद के हे आहात हो उठी

सूर्य ....... ये तो मुझे भी ज्ञात नहीं किन्तु गुरुदेव का यही आदेश था देखो इंद्रजीत ने भी आँखे खोल ले

सूर्य कुछ देर रुक वह से बहार चला गया

N.purvi ....... पुत्री कोमलांगी तुम्हे ऐसा नहीं कहना चाइये था पुत्र सूर्य को अभी उनसे क्षमा मानगो पुत्री

पैर सूर्य तो वह से जा चूका था कोमल को ख़ुशी थी इंद्रजीत के ठीक होने की पैर उस ख़ुशी से ज्यादा अब कोमल दुखी थी जैसा उसने वर्ताव किया सूर्य से उस से खुद कोमल भी आहात हो चुकी थी

अपने पक्ष में बैठा सूर्य (जो उसे विश्राम के लिया मिला ) अपनी हे उलझन में खोया हुआ था उसे कोमल का इस तरह से उस बात करना बिलकुल भी पसंद नहीं आया था वही इंद्रजीत के साथ राजमहल में रहते हुए जो कुछ हुआ उस ने भी सूर्य को उलझन में दाल रखा था

सूर्य ....... यहाँ बहुत कुछ ऐसा हो रहा है सभी की नजरो से छुपा कर जिसका मुझे पता करना हे होगा इसमें केवल गुरुदेव हे मेरी सहायता कर सकते है पैर यहाँ रह कर मैं उनसे ठीक से बात नहीं कर लाऊंगा मुझे कही एकांत में जाना होगा

सूर्य काफी देर अपने हे खयालो में खोया रहा तभी अपने कंधे पे किसी का हाथ मह्सुश कर सूर्य का ध्यान भांग होता है

मानसी .......क्या हुआ कुंवर जी कब से मैं आपको देख रही हूँ आप किसी बात को ले कर परेशान है

सूर्य ....... है मनु जितना मैंने सोचा था यहाँ उस से कही आदिक समस्या नजर आ रही है

मानसी ........मतलब कुंवर जी

सूर्य ......जब नागलोक का राजकुमार अपने हे महल में सुरक्षित नहीं है तो आम परजा की इस्थिति क्या होगी तुम सोच सकती हो मुझे लगा था की किसी तरह दोनों नाग वंशी समुदाय को एक किया तो समस्या ख़तम पैर यहाँ अंदर हे अंदर सांप की केचुली ओढ़े हुए नेवले गम रहे है जिन सभी को सामने लाना बहुत जरुरी है

मानसी ........ फिर आपने क्या सोचा है कुंवर जी

सूर्य ........ अभी तो कुछ समाज नहीं आ रहा है मैं गुरुदेव से बात करता हूँ सायद को मार्ग मिल जाये इस लिया मैं बहार जा रहा हूँ सायद कुछ समय लग जाये

मानसी ....... मैं भी चालू क्या

सूर्य ........ नहीं जब जरुरत होगी मैं याद कर लूंगा

मानसी ....... जी जैसा आप उचित समजे

सूर्य मानसी को बता कर वह से निकल गया महल से बहार निकल अपनी वास्तविकता बदल सूर्य नगर में भ्रमण करते हुए नगर से दूर निकल गया

नगर से कुछ दुरी पे एक विशाल किन्तु हरा भरा जंगल था जहा काफी सन्ति आवर सुकून था

सूर्य वही एक स्थान का चयन कर वही ध्यान लगा कर बेथ गया करीब एक घंटे बाद सूर्य की आँखे खुली

सूर्य असुरगुरु द्वारा दिए उस उपहार नुमा बॉक्स को याद करता है कुछ हे पल में वो लाल कपडे में बंधा बॉक्स सूर्य के हाथ में था

सूर्य जब उस कपडे को हटा कर देखता है तो वह एक मायावी बुक थी

सूर्य ...... ये तो पूरी तरह से लॉक है खुल हे नहीं रही है ओह्ह मैं तो भूल हे गया

सूर्य उस बुक पे अपने रकत की कुछ बुँदे अर्पित करता है देखते हे देखते बुक ओपन हो जाती है

सूर्य ........ मुझे वो मंत्र चाइये जिस से मैं अपने असुर अंश को अपनी अच्छा अनुसार दर्जन कर सकू

m.book ........ तुम एक विचित्र मानव अंश हो अपने मूल असुर अंश के बिना अपना असुर रूप प्राप्त नहीं कर सकते

सूर्य ........ अब मेरा मूल असुर अंश मैं तो एक मानव हूँ फिर मेरा मूल असुर अंश कैसे हो सकता है

m.book ......जिस से असुर अंश की प्राप्ति हुई वही आपका मूल असुर अंश है

सूर्य ......अर्थार्त मानसी से मुझे असुर सकती प्राप्त हुआ वही मेरा असुर अंश है

सूर्य कुछ देर आवर भी बुक स बात करता है जिसमे कैसे अपने असुर अंश को नियंत्रित किया जाये कैसे अपनी इच्छा अनुसार प्रयोग किया जाये उन सभी तथ्यों के विषय में सूर्य पता करता है

सूर्य मानसी को मानसिक सम्पर्क कर अपने पास बुलाता है

मानसी ........ क्या हुआ कुंवर जी आपने हमें याद किया

सूर्य .......मनु मुझे तुम्हारी सहायता चाइये अपने असुर रूप को पाने के लिया

मानसी .......पैर आप ये सब क्यों कर रहे है इसकी क्या आव्सय्कता है

सूर्य ......अभी कुछ भी न पूछो मानसी जैसा कह रहा हूँ वो करो

मानसी .....जी ठीक है

सूर्य मानसी को बुक से मिली जानकारी अनुसार वही एक स्थान पे असुर तंत्र विधि त्यार करवाता है आवर मानसी को क्या करना है ये भी समजता है

मानसी सूर्य के बताये आंध्र सभी तंत्र विधि पूर्ण करती है

सूर्य ........ अब एक अंतिम कार्य शेष है मानसी जो तुम्हे पूर्ण करनी है जब मैं इस तंत्र घेरे में बेथ जाऊ आवर ध्यान में चला जाऊंगा तब ये तंत्र घेरा जागृत हो उठेगा तब तुम्हे अपना असुर रूप दर्जन कर अंतिम विधि पूर्ण करनी होगी जब मेरा असुर रूप जागृत हो जाये तो तुम्हे जितना सिगरा हो यहाँ से महल लौट जाना चाहे मैं कितना भी तुम्हे पुकारू पैर तुम यहाँ नहीं रुकोगी मैंने महल को सुरक्षित कर दिया है तुम्हारे महल में जाने के बाद सुरक्षा घेरा अभेद्य हो जायेगा जिसको मेरे मानव रूप के अलावा कोई भेद नहीं सकेगा

मानसी ......जी ठीक है किन्तु वो विधि क्या है आपने बताया नहीं आवर आप मुझे जाने के लिया क्यों कह रहे है कुछ होने वाला है क्या

सूर्य अपने ऊपरी वस्त्र उतर उस तंत्र घेरे में जा बैठा

सूर्य ....... तुमसे मैंने कुछ छुपाया है मानसी क्यों की मैं जनता था तुम वो सब नहीं करोगी किन्तु अब मैं इस तंत्र घेरे में प्रवेश कर इस विधि को आरम्भ कर चूका हूँ जिस को पूर्ण किये बगैर बहार निकला तो मेरी सम्पूर्ण सकतिया मुझसे चीन जाएगी इस लिया तुम्हे वो अंतिम विधि पूरी करनी हे होगी

मानसी .......आपने ऐसा क्यों किया आपने इतनी बड़ी बात छुपा कर अच्छा नहीं किया आपको कुछ हुआ तो मैं क्या जवाब दूंगी माँ को क्या जबाब दूंगी स्वीटी को बाकि बहनो को आपकी कुछ भी हुआ तो मैं भी जीवित नहीं रहूंगी

सूर्य ....... अपने आंसू पॉच को मनु मन से सभी भरण मिटा कर अच्छी सोच आवर नेक दिल के साथ इस अंतिम विधि को पूर्ण करना

मानसी ......आपके लिया कहना आसान है मेरी यहाँ जान निकल रही है आपकी बाते सुन कर

सूर्य ........ मेरे ध्यान में लीं होते हे तुम्हे अपना असुर रूप दर्जन कर मेरे सीने से तुम्हे रकत पीना होगा तभी मेरा असुर अंश जागृत होगा

मानसी ........ नहीं मैं ये कड़ाई नहीं करुँगी आपका रकत नहीं पि सकती मैं मुझे माफ करे मुझसे ये नहीं होगा

सूर्य ....... ठीक है फिर लौट जाओ यहाँ से वैसे भी बिना सक्तियो के नरकासुर का अंत में कर नहीं सकता उसके हठी मरने से अच्छा है मैं स्वयं हे अपना अंत अपने हाथो से कर लूँ

सूर्य जादू से एक खंजर को प्रकार करता है

आवर मानसी को देखते हुए अपने दिल वाले स्थान पे अपने सीने में उतर लेता है

मानसी .......नाहीइ प्लेसेस ऐसा मत कीजिये

मानसी सूर्य को रोकने के लिए आगे बढ़ी

सूर्य ...... रुक जाओ मानसी तुम इस घेरे में प्रवेश नहीं कर सकती अपने इस रूप में तुम्हे मुझे रोकने के लिया असुर रूप दर्जन करना हे होगा

सूर्य उस खंजर को कुछ आवर अपने सीने में उतर देता है

मानसी की आँखों से निरंतर संधू निकल रहे थे

मानसी ....... किरण दीदी कहा हो आप मुझे आपकी मदद चाइये गुरुदेव पिता श्री मेरी सहायता कीजिये

सूर्य ....... रुक जाओ मनु स्वीटी को यहाँ मत बुलाओ

मानसी ......किरण डीडीईई .....

छीलते हुए गुथनो पे बेथ जाती है आवर रोने लगती है

आंसू तो सूर्य के आँखों से भी निकल रहे थे मानसी को इस तरह रोटा बिलखता देख कर पैर वो कुछ भी कर नहीं सकता था

तभी वह गुरुदेव के साथ साथ किरण भी पहुँचती है

किरण का यहाँ पहुंचते हे दिल जबरन लगता है जब सामने उस तंत्र घेरे में किरण की नजर सूर्य के आंसुओ से भीगने चेहरे पे पड़ी तो वो उस आवर तेजी से बढ़ी किन्तु गुरुदेव ने उसे वही रोक लिया

गुरुदेव .......पुत्री किरण रुक जाओ तुम वह नहीं जा सकती पुत्र सूर्य तंत्र घेरे में है जहा केवल असुर अंश हे जा सकता है पुत्री मानसी तुम्हे ये असुर विधि पूर्ण करनी हे होगी

मानसी .......नहीं गुरुदेव मुझे नहीं होगा मैं इनका रक्तपान नहीं कर सकती

किरण ......क्याआ क्या कागा रक्तपान

तभी किरण की नजर सूर्य के सीने पे पादरी है जहा से बहते रकत ने सूर्य के पेट को भिगोते हुए उस तंत्र घेरे तक पहुंच चूका था

गुरुदेव .......पुत्री यही एक मार्ग है जिसे केवल तुम हे पूर्ण कर सकती हो ये आज नहीं तो कल होना हे था

सूर्य ......मनु तुम्हे ये करना हे होगा स्वीटी समजाओ न मानसी को

किरण .......... आपकी हिमत कैसे हुई ऐसा कुछ करने आपने जरा भी नहीं सोचा की हम पे क्या बिट रही है आपको इस तरह देख कर मैं आपको कभी क्षमा नहीं करुँगी स्वामी

सूर्य ........ यहाँ मेरे या तुम्हारे अकेले का जीवन नहीं जुड़ा है स्वीटी यहाँ बहुत से लोग हजारी सालों से एक दूसरे के लहू के प्यासे है उन सब का जीवन स्वर्ण का मेरे पास कोई आवर मार्ग नहीं है

गुरुदेव ....... पुत्री मानसी ये हमारा आदेश है अंतिम विधि पूर्ण करो पुत्री

मानसी विवश हो अपने आंसू पांच अपना असुर रूप दर्जन कर घेरे में प्रवेश कर जाती है

सूर्य अपने सीने गुस्से उस खंजर को ुशी तरह छोड़ ध्यान करने लगता है कुछ मुश्किल के बाद सूर्य ध्यान में लीं हो गया

गुरुदेव ........ पुत्री मानसी जैसे हे पुत्र सूर्य के सरीर में बदलाव मह्सुश करो फ़ौरन घेरे से से बहार निकल जाना चलो पुत्री किरण हमारा यहाँ रुकना उचित नहीं सूर्य का असुर अंश पता नहीं किस रूप में प्रकट हो

किरण न चाहते हुए भी वह से कुछ दूर चली गयी गुरुदेव के साथ

मानसी जैसे हे तंत्र घेरे में प्रवेश करती है सूर्य के रकत की गंध ( खुशबु ) उश्के असुर अंश को अपनी आवर आकर्षित करती है

मानसी सूर्य के सामने जा जेठी आवर अपनी जुबान से सूर्य के सीने से बाह रहे रकत को चाटने लगती है

अभी भी सूर्य के सीने में वो खंजर ुशी तरह गधा हुआ था

जब पूरी तरह से सीने से रकत को चाट कर साफ कर दिया मानसी ने तब उसने वो खंजर बहार निकल कर फेंक दिया अपने आवर सूर्य के उस जखम को विचित्र तरीके से सूंघते हुए चाटने लगी

जैसे मानसी स्वयं में न हो कर किसी आवर के ादिन हो चुकी हो

अगले हे पल मानसी के वो नुकीले दन्त सूर्य के सीने में जा गुस्से ुशी के साथ तंत्र घेरा लाल रौशनी से जगमग हो उठा मानसी निरंतर सूर्य के सेरेने में अपने दंड गड़ाए रकत पि रही थी कुछ देर बाद सूर्य के सरीर में बदलाव होना सुरु हो गया किन्तु मानसी जैसे सब भूल रकत की प्यासी हो उठी हो तभी सूर्य का हाथ मानसी के सीने पे आ लगा मानसी अगले हे पल उस टंगतरा घेरे से दूर जा गिरी

बहार गिरते हे मानसी को वास्तविकता का ज्ञान हुआ

एक नजर सूर्य के उन गहरी लाल आँखों से टकराते हे मानसी किसी सम्मोहन में बढ़ी सूर्य की आवर बढ़ी पैर ठीक तभी गुरुदेव वह प्रकट हो मानसी को ले कर वह से गायब हो गए

गुरुदेव सूर्य को सुरक्षा घेरे में कैद कर दूर से मानसी किरण के साथ देख रहे थे

मानसी ...... मुझे उनके पास जाने दीजिये गुरुदेव वो मुझे पुकार रहे है

गुरुदेव ........ नहीं पुत्री तुम पुत्र सूर्य के असुर रूप से सम्मोहित हो इस लिया तुम्हे ऐसा लग रहा है

ीदार जैसे जैसे सूर्य का का मानव रूप असुर रूप में परवर्तित हो राग था वैसे वैसे उस तंत्र घेरे से तेज लाल रौशनी निकल रही थी साथ हे हलकी सफ़ेद रौशनी भी

ये करम करीब एक घंटे तक चला

अब सूर्य पूरी तरह से एक असुर में बदल चूका था जिसके





मानसी ....... गुरुदेव वो देखिये उनका असुर रूप कितना समय आवर तेजवान है

किरण आवर गुरुदेव उसे हे देख रहे थे

असुर सूर्य तंत्र घिरे से खड़ा हो कर ऊपर देखते हुए इतनी जोर से दहाड़ा की गुरुदेव किरण मानसी को अपने जानो पे हाथ रखना पड़ा ये दहाड़ नागलोक के महल तक सुनाई दी

गुरुदेव .....दंडनायक निर्भयासुर

किरण ......... क्या मतलब गुरुदेव

गुरुदेव ........... इस गर्जना में पापियों के लिया चेतावनी थी आवर साथ हे पुत्र सूर्य के असुर रूप की निर्भया होने का संकेत जिसे किसी का भय नहीं अर्थार्थ दंडनायक निर्भयासुर स्वयं के नाम का उद्घोष कर चूका है दंडनायक निर्भयासुर जिसके दंड की कोई सीमा नहीं हे परबु ये कैसे लीला है आपकी

निर्भयासुर तंत्र घिरे के पूर्ण ऊर्जा अपने भीतर समाहित कर अपना पांव को जोर से उस तंत्र घेरे पे दे मरता है अगले हे पल किसी तेज लाल सफ़ेद ऊर्जा पुंज के सामान निर्भयासुर सभी की आँखों से ओझल हो अंतरिक्ष में जा पंहुचा





गुरुदेव ....... यहाँ नहीं पुत्री नागलोक के बहार अंतरिक्ष में देखो अपने नैनों की अंतिम सीमा से वो वह है

किरण आवर मानसी अपनी देखने की काँटा बढ़ा कर नजर जब ऊपर देखा तो सूर्य अंतरिक्ष में फांख फैलाये खड़ा था वो कुछ करता हुआ नजर आ रहा था

किरण ....... अब कुंवर जी क्या कर रहे है

गुरुदेव

गुरुदेव ........ पुत्री इस वक़्त वो पुत्र सूर्य नहीं दंडनायक निर्भयासुर है किन्तु क्या कर रहा है हमें भी ज्ञात नहीं है

मानसी ........ पता नहीं क्यों हमें ऐसा प्रतीत हो रहा है गुरुदेव जैसे वो किसी अस्त्र का आह्वान कर रहे है

कुछ हे देर बाद निर्भयासुर किसी उल्कापिंड के सामान डर्टी पे आ गिरा जिसके हाथो में एक सोर्ड थी

निर्भयासुर अपने सर पे से वो लवासा हटाया है तब जो सूर्य की आँखों में चमक थी उसे देख मानसी दो कदम पीछे हैट जाती है





गुरुदेव ........ क्या हुआ पुत्री मानसी तुम विचलित क्यों हो

किरण ....... गुरुदेव हमें भी कुछ अनिष्ट होने की असंका हो रही है

मानसी ......... वो क्रोधित हो रहे है हम उनके क्रोध को मह्सुश कर प् रागे है गुरुदेव वो अपनी ऊर्जा नागलोक में प्रवाहित ( विस्तार .फैलाना ) कर रहे है

गुरुदेव ......... नहीं निर्भयासुर को रोकना होगा ान्यता वो नागलोक को रकत रंजीत लाखो में बदल देगा खाश कर तक्षक वंश का समूल विनाश कर देगा

पुत्री किरण हमें तुम दोनों की सहायता चाइये निर्भयासुर को अपने सबसे मजबूत सुरक्षा कवच में कैद करना होगा

गुरुदेव की बात मन किरण मानसी दोनों गुरुदेव की सहयता करते हुए अपना सबसे मजबूत सुरक्षा कवच से निर्भासुर को कैद कर देती है

निर्भयासुर को जब तक स्वयं का कैद में होने का अहसास हुआ तब तक गुरुदेव मानसी किरण तीनो अपना कार्य कर चुके थे

वही दंडनायक निर्भयासुर के गर्जना ने बहुत से नागलोक वासियो के दिल में दहसत भर दी थी जो पाप कर्मो से अपने आत्मा तक को दूषित कर चुके थे

उन्हें अंजनी अपनी मौत की आहात सुनाई दे रही थी भय के मारे उन सभी का बुरा हाल था सबसे ज्यादा उन असुर गोचरो का जिन्होंने उन नागकन्याओ को बंदी बना कर रखा था

निर्भयासुर ........ हम दंडनायक निर्भयासुर है कोई ऐसा कवच नहीं कोई ऐसी दिवार नहीं जो हमारे दण्डचक्र को बदित कर सके

निर्भयासुर अपने सोर्ड से सुरक्षा कवच पे पर्वत करता है एक के बाद एक अनगिनत प्रहार जिस से कवच का पहला घेरा कमजोर होने लगता है

साथ हे निर्भयासुर का क्रोध अपनी उग्रता की आवर भाड़ रहा था

गुरुदेव ........ हमरा सुरक्षा कवच ज्यादा समय तक इसे रोक नहीं सकता है पुत्री हमें किसी तरह पुत्र सूर्य को बहार लाना होगा आवर ये पुत्री कारन तुम हे संभव कर सकती हो

किरण ....... गुरुदेव हम कुंवर जी को मह्सुश तक नहीं कर प् रहे है फिर हम कैसे

गुरुदेव ........ ध्यान करो पुत्री आवर पुत्र सूर्य तक पहुंचने की कोशिश करो तब तक हम इसे रोकते है

किरण वही ध्यान में बेथ सूर्य को जे लगती है कुछ आधे घंटे में बाद सूर्य की बहुत हे काम ऊर्जा किरण को मह्सुश हुई जैसे हे किरण ने उस ऊर्जा से संपर्क किया निर्भयासुर के हाथ अपने आप रुक गए आवर उसकी आँखे बंद हो गई

किरण .......... कुंवर जी ये आप क्या कर रहे है

निर्भयासुर .......परनाम देवी ये हम है दंडनायक निर्भयासुर

किरण ....... आप जानते भी है की आप क्या कर रहे है आवर तुम भूलो मत तुम आवामी के एक अंश मात्रा हो तुम जो कर रहे हो आवर जो करने वाले हो वो स्वामी कभी स्वीकार नहीं करने वाले

निर्भयासुर ...... क्षमा करे देवी किन्तु स्वामी आज्ञा से मैं ये कर रहा हूँ मैं उनकी आज्ञा को ताल नहीं सकता आप चाहे तो मुझे दण्डित कर सकती है किन्तु उनके आदेश का पालन मैं अपनी अंतिम स्वांश तक करूँगा

किरण .......ये जानते हुए भी की तुम्हारे क्रोध की भेंट निर्दोष जिव भी चढ़ने वाले है

निर्भयासुर ...... दंडनायक बिना करम के दंड तो शैतान को भी नहीं देता फिर किसी निर्दोष को कैसे दण्डित कर सकता है आप निश्चिन्त रहे देवी हम किसी निर्दोष को दंड नहीं देंगे आवर दोषी को दूसरा मौका नहीं

किरण आगे कुछ कहती उस से पहले हे निर्भयासुर के प्रहार से गुरुदेव द्वारा निर्मित सुरक्षा घेरा नस्ट हो गया

मानसी वह किरण के घेरे को नस्ट करने में निर्भासुर को ज्यादा समय नहीं लगा क्यों की दोनों की ऊर्जा सकती उस से जुडी थी

निर्भयासुर किसी मदमस्त गज की भाटी चिंघाड़ते हुए तक्षक नागवंशी आदिकारित क्षेत्र की आवर भाड़ गया

गुरुदेव ........ ये उचित नहीं हो रहा है

किरण ......... ये हम भी जानते है गुरुदेव किन्तु निर्भयासुर कुंवर जी की आदेश पर हे ये सब कर रहा बस उसकी उग्र ऊर्जा हमें चिंतित कर रही है वो उन्ही को दंड देगा जो उसके योग्य होंगे हम भी उसे नहीं रोल सकते गुरुदेव उसे रोकने का केवल एक हे मार्ग है हमारा अंश रूप जिसमे हमें उस से योध कर उसके क्रोध को नस्ट करना होगा

गुरुदेव ....... नहीं पुत्री अगर ऐसा हुआ तो नागलोक का अस्तित्व हे संकट में पद जायेगा तुम दोनों के योध से वो तबाही बचेगी जिस से नागलोक समूल नस्ट हो जायेगा पुत्र सूर्य ने उसे आज्ञा दी है तो वो पुत्र सूर्य की ऊर्जा सकती का उपयोग करने से भी नहीं चुकेगा जो कदापि उचित नहीं

मानसी ........ एक रास्ता आवर है गुरुदेव उन्हें संत करने का

उदार निर्भयासुर तक्षक नाग वंशियो के बिच जा पंहुचा कुछ नाग पहाड़ी उसे रोकने आये तो उसने उन्हें घायल कर आगे बढ़ गया

जो भी रस्ते में निर्भयासुर को रोकने आता निर्भयासुर उनके पाप अनुसार उन्हें दण्डित कर आगे भाड़ जाता इस बिच कुछ नागो को उसने यमलोक भी पंहुचा दिया

जब निर्भासुर तक्षक महल के समक्ष पंहुचा तो वह एक विशेष सैनिक दाल उसकी प्रतीक्षा कर रहा था

किरण ........ सायद शालिनी माँ उन्हें रोक सकती है उनके आदेश को वो नकार नहीं सकते फिर चाहे सामने कितना भी बड़ा पापी क्यों न हो

गुरुदेव ......उचित कहा पुत्री हम अभी शालिनी पुत्री को ले कर आते है तुम दोनों उसपे नजर रखो आवर मासूमो की रक्षा करो

गुरुदेव के वह से निकलते हे किरण मानसी वह से गायब हो निर्भासुर के पास पहुंची जहा वो अपने सोर्ड से उस विशेष से निक टुकड़ी को छोड़ने में लगा हुआ था

मानसी ........ दीदी इन्हे देख हमें भी इनको मरने की इच्छा हो रही है ये सभी पापी है इन्होने न जाने कितनी हे नागकन्याओ का शोषण किया है आवर कितने निर्दोष नागो की हत्या की है

किरण ...... भूलो मत हम यहाँ किस लिया आये है

निर्भयासुर .......... प्रिये हमारे साथ योध में शामिल नहीं होंगी क्या आप

इस सबद मानसी के लिए थे जो निर्भासुर के साथ इन पापियों का संघार करना चाहती थी

निर्भयासुर ........देवी आप इन्हें इजाजत दे दीजिये

किरण ...... हम कोई देवी नहीं है हमारा नाम किरण सूर्य ठाकुर है

निर्भयासुर ......... हम अंश मात्रा है देवी हमें इजाजत नहीं है आपको नाम से सम्बोधित करने के

देख नहीं रहे हो हम चर्चा कर रहे है

अगले हे पल उस सैनिक की गर्दन उसके सरीर से विलम्ब जमीं पे पड़ी थी

( किरण .......मानसी इन्हें ऐसे हे बातो में उलझा कर रखो तब तक गुरुदेव लौट आएंगे

मानसी .......जी दीदी जैसा आप कहे )

निर्भयासुर ....... प्रिय आप सायद भूल रही है हम आप हमसे जुडी हुई है

निर्भयासुर एक बार फिर से उन सभी सेनिको पे टूट पड़ा कुछ देर में वह 100 से ुवेर सेनिको की शाट विकसित सव पड़े थे

निर्भयासुर तक्षक महल में प्रवेश कर चूका था

जहा कुछ सेनिको की बलि देने के बाद वो उन 10 असुरगुप्तचरो के सामने था

निर्भयासुर ........ अपना करम दंड पाने को सज हे असुर बरताओ तुम्हे केवल गुप्तचरी जो तुम्हारा कार्य है वही करना चाइये था

न की नागकन्याओ को बंदी बना उन्हें प्रताड़ित करना चाइये था

गोचर 1 ....... तुम असुर हो कर असुरराज के कार्य में विघ्न दाल रहे हो जानते इसका क्या दंड मिल सकता है तुम्हे

निर्भयासुर ............ दंडनायक निर्भयासुर है हम न हमारे दंड की सीमा है न हमारे कार्य क्षेत्र की हमें किसी असुरराज की आज्ञा या आदेश का या फिर उसके दंड का भय नहीं निर्भयासुर केवल स्वामी आज्ञा से बंधा है वही उसके लिया सर्वोपरि है तुम्हारा दंड विद्वान स्वयं स्वामी लिखेंगे इस लिया हम तुम सभी को दण्डित न करके केवल बंदी बना रहे है

निर्भयासुर उन सभी 10 असुरो को अपने सकती पास में बंदी बना लेता है

आवर एक तरफ भाड़ जाता है

किरण आवर मानसी भी उसके पीछे पीछे चल दी

निर्भासुर एक गुप्त तहखाने में पंहुचा जहा कुछ सैनिक पहरा दे रहे थे उन्हें ख़तम कर वह मौजूद 4 बंदी ग्रहो के गेट उखड फेंकता है जिनमे करीब 60 से ऊपर कोमल नागकन्याओ को बंदी बना कर रखा हुआ था

निर्भासुर ....... देवी इन्हें आप राजमहल पंहुचा देंगी आवर साथ हे इनका उपचार भी कर दीजिये

किरण .......... हमें ख़ुशी होगी इनकी सहायता करके निर्भयासुर

किरण उन सभी को ुशी अवस्था में वासुकि महल पंहुचा देती है आवर कोमल को सम्पर्क कर उन सभी का इलाज आराम करवाती है

किरण ....... अब आपका कार्य पूरा हो चूका है

निर्भयासुर ....... अभी कहा देवी अभी बहुत से पापी बचे हुए है

निर्भासुर एक आवर भाड़ गया जो तक्षक नागराज का कक्ष था वह वो अपनी पत्नी के साथ था हाथो में सोर्ड लिया जैसे उसे पता हो की जो कोई भी है वो उसके पास जरूर आएगा

निर्भासुर ....... तक्षक नागराज अपनी पत्नी से कुछ अंतिम चर्चा करनी है भेज दे आपको रामदेव के पास

t.nagraj निर्भासुर की आवर तेजी से लपका अपने सोर्ड लिए निर्भासुर ने हलके से प्रहार से t.nagrag की सोर्ड को दो भागो में काट दिया आवर सीने अपने सोर्ड की मुठ ( हाथे .दस्ते ) का पर्वत किया जिसके प्रभाव से t.nagraj अपनी पत्नी के चरणों में जा गिरा

निर्भयासुर ...... जिसे हमेशा अपने चरणों की धूल समाज कर अपमानित किया प्रताड़ित किया ुशी देवी के चरणों में गिर कर कैसा लग रहा है नागराज कालिंदी

निर्भयासुर आगे भाड़ नागराज कालिंदी के गले पे अपनी सोर्ड चलने हे वाला था की उसकी पत्नी निर्भयासुर के सामने आ कड़ी होती है तभी निर्भयासुर को किसी की आवाज सुनाई देती है जिसके कारन t.nagrani की गर्दन उड़ते उड़ते बची

शालिनी जी ........सूर्य रुक जाओ बीटा सूर्य

निर्भयासुर पलट कर जब पीछे देखता है तो सामने शालिनी जी आवर गुरुदेव खड़े थे मानसी आवर किरण के साथ साथ

निर्भयासुर ........ माते आप यहाँ ओह तो ये चमत्कार गुरुदेव का है हमें रोकने के लिए

निर्भयासुर आगे भाड़ शालिनी जी के पेअर छूटा है

शालिनी जी ......बीटा निर्भया ये सब करने की आव्सय्कता नहीं है

निर्भयासुर ...........तो गुरुदेव ने आपको सत्य से अवगत करवा दिया आपको हमसे दर नहीं लग रहा माते

शालिनी जी मुस्कुराते हुए निर्भयासुर के गाल सायला देती है

निर्भासुर की आँखे उस एक स्पर्श से नाम हो जाती है

शालिनी जी .......क्या हुआ बीटा अभी मुझे कह रहे थे की मुझसे दर नहीं लगता अभी देखो कैसे छोटे बचे के जैसे रो रहे हो

निर्भयासुर ............ अस्तित्व स्वामी ने दिया आवर ममता आपने माते असुर हुए तो क्या हुआ हम भी प्रेम के भूखे है माता हम असुर जरा दूजे किसम के है

अचानक से निर्भासुर के चेहरे पे क्रोध भढने लगा आँखे क्रोध से लाल जैसे सरीर का सम्पूर्ण रकत उन आँखों में एकत्रित हो उठा

निर्भयासुर ...... डस्ट आदर्मी दुराचारी तुम्हारे दूषित मस्तिष्क में ये विचार आया भी कैसे मौत तुम्हारे सामने कड़ी है फिर भी अपने डस्ट सोच का त्याग नहीं क्या हमारी माता पे को दृस्टि डालता है

कोई कुछ समझता हुस से पहले हे उस कक्ष में मौत का वो भयानक नंगा नाच होता है जिसे देख सामान्य इंसान की तो हृद्यगति हे रुक जाये

निर्भासुर ने n.kalindi के सीने में अपना हाथ दाल हरे रकत से लथपथ उसका दिल हे बहार निकल कर अपने हाथ फोड़ दिया

फिर अपनी सोर्ड से नागराज कालिंदी को बीचों बिच ऊपर से निचे तक चिर दिया दो भागो में बिकुक सामान रूप से

न्रिभयासुर ........ हमारी माता पे को दृस्टि डेल तो हम यमदेव को न क्षमा करे इन्ही आँखों से देखा था न तुमने इसी मस्तिष्क में वो गणित विचार उपज था न

निर्भयासुर अपने पैरो से n.kalindi के सर के दोनों भागो को वही कक्ष के फर्श पे चिपका देता आवर बाकि सरीर को उठा कर कक्ष की खिड़की से बहार दूर कही फेंक देता है

शालिनी जी ......... निर्भया रुक जाओ बीटा अपने गुस्से पे नियंत्रित करो

निर्भयासुर ......क्षमा करे माता अपने अपने क्रोध पे नियंत्रित नहीं कर सकते जब कोई हमारे परिवार के विषय में गलत सोचे मैं स्वामी जितना दयालु नहीं जो उन्हें सुधरने का अवसर दे

शालीनी जी ......... अब संत हो जाओ चलो मेरे साथ हम घर चलते है

निर्भयासुर ........माता स्वामी का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है अभी भी बहुत से सत्रु सामने आने शेष जिन्हे दंड मिलना आवशयक है

शालिनी जी ........ये हमारा आदेश है हमें माता कहा है तो आदेश का पालन हो अभी

निर्भयासुर .......उचित है माता हम आपके आदेश की अवज्ञा नहीं कर सकते गुरुदेव ये लीजिये इस सूचि पत्र में उन सभी पापियों के पाप आपके समक्ष आ जायेंगे जिन्हे दंड मिलना है

गुरुदेव ........उचित है पुत्र निर्भया

निर्भयासुर ........ माता हम अभी पृथ्वीलोक नहीं जा सकते सुबह तक स्वामी मुझे पूर्ण नियंत्रित कर लेंगे उसके पश्चात हे हम पृथ्वीलोक जा सकते है क्या इस बिच हम अपनी माता के सानिध्य में कुछ वक़्त सुकून से सो सकते है

शालिनी जी ........ क्यों नहीं बीटा चलो महल चलते है

निर्भयासुर .........देवी यहाँ वासुकि नागवंशी सेनापति माणिक छुपा है उन्हें कृपया कर बंदी फंगरहा पंहुचा देंगी

किरण ......ये कार्य आप अपनी प्रिये को हे करने को कहिये न क्यों प्रिये मातम मानसी हेहेहे

किरण माणिक को फिर से बंदी गाढ़ा पंहुचा देती है

गुरुदेव उन सभी को बंदी गाढ़ा पंहुचा देते है जो भी नाम उस सूचि पात्र में आते गए

शालिनी जी मानसी एक कक्ष में निर्भासुर को साथ ले तीनो विश्राम करने लगे किरण कोमल के पास चली गई

निर्भयासुर अपना दंडनायक रूप त्याग किसी मासूम बचे के जैसे शालिनी जी के गौड़ में सर रख लेट जाया कब शालिनी जी के प्यार भरे स्पर्श ने उसे सुकून भरी गहरी नींद में पंहुचा दिया उसे भी पता नहीं चला मानसी रात भर उसे निहारती रही सुबह को वो भी शालिनी जी की गौड़ में लेट गई .....................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................

अब तक का सबसे बड़ा अपडेट है दोस्तों इस स्टोरी का ये अपडेट ...............
 
अपडेट 233

किरण ......ये कार्य आप अपनी प्रिये को हे करने को कहिये न क्यों प्रिये मतलब मानसी हेहेहे

किरण माणिक को फिर से बंदी गाढ़ा पंहुचा देती है

गुरुदेव उन सभी को बंदी गाढ़ा पंहुचा देते है जो भी नाम उस सूचि पात्र में आते गए

शालिनी जी मानसी एक कक्ष में निर्भयासुर को साथ ले तीनो विश्राम करने लगे किरण कोमल के पास चली गई

निर्भयासुर अपना दंडनायक रूप त्याग किसी मासूम बचे के जैसे शालिनी जी के गौड़ में सर रख लेट जाया कब शालिनी जी के प्यार भरे स्पर्श ने उसे सुकून भरी गहरी नींद में पंहुचा दिया उसे भी पता नहीं चला मानसी रात भर उसे निहारती रही सुबह को वो भी शालिनी जी की गौड़ में लेट गई .....................

अब आगे ...........

सुबह सूर्यौदय के बाद जब शालिनी जी की आँखे खुली तो मानसी आवर सूर्य दोनों शालिनी जी के पैरों से लिपट कर सोये हुए थे

शालिनी जी ........ सदी हो गई है पैर अभी भी देखो कैसे बचे के जैसे सोये हुए है दोनों

वैसे कितने प्यारे लग रहे है इन्हें कुछ देर आवर सोने देती हूँ फिर उठा दूंगी मैं

शालिनी जी कुछ देर ुशी तरह अदलती स्वस्थ में फिर से आँखे बंद कर लेट गई

( शालिनी जी ......... निर्भया सायद जा चूका है पैर उसे देख हमें बिलकुल भी दर नहीं लगा उल्टा उसके हमें हमारे हे सूर्य का हे अक्ष नजर आया जब उसने माता कहा उसकी वो सफ़ेद नीली आँखे बहुत कुछ था उन आँखों में )

तभी सूर्य के हिलने से शालिनी जी अपनी सोच से बहार निकली

सूर्य ......गुड मॉर्निंग माँ आप इस तरह क्यों लेती है

शालिनी जी ........ गुड मॉर्निंग बीटा सूर्य नींद पूरी हो गयी

सूर्य ......जी माँ मैं फ्रेश हो कर आता हूँ आप रेस्ट कीजिये आवर इस हे भी उठा दीजिये देखि तो कैसे सो रही है

शालिनी जी .......तुझे जाना है है फ्रेश होने तो जाओ मेरी बेटी को सोने दे आराम से

सूर्य ........ क्या जमाना आ गया बेटी के लिए बेटे को दन्त रही हो

शालिनी जी ....... सुबह सुबह नौटंकी सुरु मत कर आवर जा कर फ्रेश हो जा

सूर्य अपने माँ के गाल चुम कर गुसलखाने में गेस गया

वही गुरुदेव महल की वाटिका में स्थित मंदिर में परबु पूजा कर महल लौट आये जहा उनकी भेंट नागराज महावीर आवर राजगुरु से हुई

N.mahaveer ....... परनाम गुरुदेव

राजगुरु ......परनाम गुरुदेव

गुरुदेव .......यसस्वी भाव पुत्र

N.veer ...... आसान गठन कीजिये गुरुदेव हम अभी आपके अल्पहार का पर बंद करते है

गुरुदेव .......उसकी आव्सय्कता नहीं है राजन उस से बहुत बहुत महत्व पूर्ण कार्य है जो आपको करना है अगर नागलोक को सुरक्षित देखना चाहते है तो

n.veer ...... गुरुदेव कुछ अनिष्ट होने वाला है क्या

गुरुदेव ........ अनिष्ट तो हो चूका होता कल रात्रि हे वो धन्यवाद कीजिये पुत्री शालिनी का जिन्होंने समय रहते उस नरसंघार को रोक दिया जिसे हम स्वयं भी रोकने में असमर्थ थे जीती सिगरा हो वासुकि नागवंशी आवर तक्षक वंश के सभी नागो को एक स्थान पे आने को कहिये

राजगुरु ......कही आप कल मध्यरात्रि से पूर्व इस असुर द्वारा किये नर संघार की बात तो नहीं कर रहे है हमें सुचना मिली के उसने तक्षक वंश के नागराज कालिंदी की निर्मम हत्या कर दी

गुरुदेव ......... वो कोई असुर नहीं है राजगुरु वो पुत्र सूर्य का असुराँश है दंड नायक निर्भयासुर आवर आप इतना खुश न होइए की उसने केवल तक्षक नागवंशी नागो का हे नरसंघार किया है वासुकि वंश के भी वही दृश्य होता जो तक्षक वंश में हुआ वो तो समय रहते पुत्री शालिनी को हमें यहाँ ले आये जिस से वो नरसंघार कुछ समय के लिया रोक पाए आवर कालिंदी की हत्या नहीं उसके पापो का दंड मिला है उसे

N.veer ....... गुरुदेव हम अभी दोनों समुदाय में सन्देश पारित करते है की सभी नाग प्राचीन मंदिर के समक्ष एकत्रित हो

गुरुदेव ......यही उचित होगा राजन उन सभी कन्याओ का स्वस्थ कैसा है अभी

N.veer ....... सभी पूर्ण रूप से स्वस्थ है गुरुदेव हमें तो अभी तक यकीं नहीं आ रहा की कालिंदी इन सब में शामिल था

गुरुदेव ....... अभी भी आप पूर्ण सत्य से स्वागत नहीं है राजन खेर जल्दी हे आप सब समाज जायेंगे

कोमल कक्ष ...... किरण ......क्या हुआ कोमल तुम्हारा चेहरा क्यों उतरा हुआ है

कोमल ...... मुझसे एक गलती हो गई दीदी

किरण ......... ऐसे कोनसी गलती हो गई कोमल जिसके चलते तुम्हारा खूबसूरत चेहरा हे मुर्जा गया है

कोमल ....... कल मैंने अनजाने में हे उनका दिल दुख दिया तभी से मैं उनके सामने जाने की हिमत तक नहीं जूता प् रही हूँ दीदी

किरण .......हुआ क्या है पूरी बात बताओ मुझे

कोमल कल इंद्रजीत के अस्वस्थ होने के समय जो सनद सूर्य को कहे वर्ड बी वर्ड किरण को बता देती है

गुरसे में किरण ने पहली बार कोमल को चांटा मारा

किरण ....... मैंने आपको कल कितना संजय था कोमल यही वो दर था रेखा मम्मी का जिसके चलते वो असंत थी तुमने उनके दर को सच कर दिया

कोमल ......मुझे माफ कर दो दीदी मुझसे गलती हो गई

किरण ....... गलती स्वीकार सकती हो तो उसका प्रायश्चित भी करो जब कुंवर जी ने तुम्हारे माता पिता को इतना मान सम्मान दिया फिर भी तुमने ऐसा किया मुझे ये उम्मीद नहीं थी आपसे काम से काम इतना तो यकीं रखा होता आपने उनपे की वो जो कुछ भी कर रहे है बिना वजह नहीं करेंगे अगर उन्होंने उस समय पिता श्री को नागमणि चुने से रोका है तो कोई तो वजह रही होगी

n.purvi ....... हम जानते है पुत्री किरण कोमल ने उचित व्यव्हार नहीं किया पुत्र सूर्य के साथ हमने पुत्री कोमल से कहा भी था की उन्हें पुत्र सूर्य से क्षमा मांगनी चाइये किन्तु तब तक वो जा चुके थे वह से

किरण ....... माता गलती कोमल ने की है क्षमा भी उसे हे मांगनी होगी हम इसमें कोई सहयता नहीं करेंगे इनकी इन्होने हमें ठेश पहुचाइए होती तो हम इन्हें क्षमा भी कर देते

n.purvi ......क्या अपनी इस माता के लिया भी नहीं

किरण ....... हम पहले हे जितनी इनकी सहायता कर सकते थे कर चुके है माता आवर रही बात पिता श्री को नागमणि चुने से रोकने की तो उसकी वजह ये है की इस समय पुरे नागलोक में केवल तीन हे लोग है जो नागमणि को छू सकते है एक हम कोमल आवर कुंवर जी क्यों की ये जो नागमणि है वो सासाराम नहीं है इतने लम्बे अंतराल तक वो परबु चरने में रही है कोमल के पूर्व जनम से इस जनम के अंतराल में वो पूर्व से कही आदिल सक्तिसाली नागमणि बन चुकी है जो कोई सामान्य नाग उसे ददन या छू नहीं सकता आपको क्या लगता है कोमल उस दिन परबु पूजा यज्ञ में नागमणि ने आपको चुना था नहीं

N.purvi ......क्या मतलब पुत्री अगर पुत्री कोमल को नहीं तो फिर की शी नागमणि ने चुना था

किरण ......कुंवर जी को किन्तु उन्होंने नागमणि को ददन करने से मन कर दिया परबु से क्षमा मान कर ये कहते हुए की नागमणि के धारक सदैव से नाग हे रहे है इस लिया उनकी इच्छा से नागमणि ने कोमल को चुना क्यों की कोमल पूर्व जनम से उनसे जुड़ चुकी थी जिसके कारन कोमल का नागमणि ने कोई अहित नहीं किया अब आंसू बहाने से कुछ नहीं होगा जाओ आवर जा कर क्षमा मानगो उनसे वो शालिनी माँ के साथ है यही उचित समय है

किरण की बात सुन न अग्रणी आवर कोमल दोनी हे जड़वत हो गई थी किन्तु लास्ट की बात सुन कोमल रोटी हुए सूर्य के कक्ष की आवर दौड़ गई

किरण ...... क्या हुआ माता कहा खो गई आप

N.purvi .....कुछ नहीं पुत्री हम बस यही सोच रहे थे अब तक की नागमणि ने स्वयं कोमल को चुना है अन्यथा आज तक तो पीढ़ी दर पीढ़ी नागमणि योग्य को सौंपी जाती रही है

किरण .....आप बहुत सोचती है माता जैसे पहले नागमणि पिता श्री के पास थे वैसे हे अब होना था किन्तु कुंवर जी वंस आवर अंश से नाग नहीं है न इस लिया उन्होंने कोमल को नागमणि समर्पित की दर्जन करने के लिया किन्तु कोमल उन सक्तियो को संतुलन में रखने में नाकाम रही इसी के चलते उसने अनजाने में कुंवर जी का अपमान कर दिया ये जानते हुए भी की वो जो सम्बन्ध बनाते है उन्हें दिल से निभाते है फिर भला वो पिता श्री या आपका अपमान कैसे करते आप सभी चिंता से मुक्त रहिये माता वो जानते है की कब क्या आवर क्यों करना है बाकि हम है न सब देखने के लिया कोमल की दीदी हेहेहे

n.purvi ....... तुम हमारे सबसे समझदार आवर पहाड़ी पुत्री हो किरण कोमल को गलती भी सामने राखी दंड भी दिया आवर प्रायश्चित का मार्ग भी दिखाया पैर कोमल को चांटा कुछ जोर से लगा दिया पुत्री

किरण ...... ुशी चांटे का नीसाण उन्हें बिना माफी मांगे माफ़ी दिलवाएगा कुंवर जी से माता जब वो उस नीसाण को देखेंगे तो समाज जायेंगे पैर शालिनी माँ ने देख लिया तो मेरी खेर नहीं बागवान बचा लेना

N.purvi .......कुछ नहीं होगा अगर कुछ हुआ तो जैम है न तुम्हारी दूसरी माता अपनी इस पुत्री के साथ

यही तो खूबी थी किरण की जो हर किसी के दिल में पल भर में अपना स्थान बना लेती थी

सूर्य त्यार हो कर जैसे हे बहार को निकला तो कोई उसके सीने से आ कर टकराया आवर काश कर सूर्य को अपनी बहो में भर लिया

कोमल ......हमें माफ कर दीजिये हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई चाहे तो हमें सजा दीजिये पैर हमसे मुँह न मोड़िये

सूर्य ......ष्ष्सस्सस पहले संत हो जाओ कोमल आवर उदार देखो हमारी आवर

सूर्य कोमल के न चाहते हुए भी खुद से कोमल को अलग कर उसका चेहरा ुवेर उठा कर देखता है जो बिल्क बजा हुआ था आंसुओ से भीगा हुआ बिलकुल निस्तेज जैसे उस खूबसूरत कोमल चेहरे के सरीर रौनक किसी ने चुरा ली हो

सूर्य कोमल के आंसू साफ़ करता है तभी उसकी नजर कोमल के राइट गाल पे बने उस उंगलियों के नीसाण पे पड़ती है

सूर्य ......ये किसने किया आपके साथ

कोमल न में गर्दन हिला देती है

सूर्य ....... ीदार देखो हमारी आँखों में कोमल

कोमल न में गर्दन बिलारी है पैर सूर्य उसका चेहरा सुपर कर आँखों में देखा है पैर कोमल जल्दी हे आँखे बंद कर लेती है

कोमल ....... आप को मेरी सौगंध है आप उन्हें कुछ नहीं कहेंगे गलती हमारी है हमने हे आपका दिल दुखाया

सूर्य ........ कोई बात नहीं पैर आगे से ख्याल रखना उम्म्म्मः एक बात याद रखना कोमल विश्वाश का सभा बहुत माहिम होता है जिसकी मज़बूरी है दो लोगो का आपसी एक सामान विश्वाश किसी एक का भी विश्वाश दगमय तो वो धागा टूट जाता है

आवर रही बात स्वीटी की तो उसके किसी भी निर्णय ा पे मैं संदेस या सावन नहीं करता जिस तरह वो मेरी किसी निर्णय पे सवाल नहीं उठती अब जाओ अंदर माँ है उनके साथ रहो तुम्हे अच्छा लगेगा आवर ये चेहरा फिर से मुरझाना नहीं चाइये मेरी कोमलंगी वो कमल की काली है जिसने हमेशा खिला हुआ देखना मुझे ज्यादा पसंद है

कोमल ......उम्मम्मम्हा थैंक यू

करीब एक घंटे बाद सूर्य शालिनी जी किरण कोमल मानसी गुरुदेव n.veer n.purvi राजगुरु इंद्रजीत सभी महल से परञ्चित परबु मंदिर की आवर निकल गए जहा लाखो को संख्या में दोनों समुदाय के नाग नागिन मौजूद थे

सूर्य कोमल को साथ ले अपने ड्रैगन पे स्वर हो उस आवर निकल गया शालिनी जी किरण के साथ आवर मानसी के साथ इंद्रजीत ड्रैगन पे स्वर हो वह के लिया निकल गए गुरुदेव राजगुरु n.veer n.purvi सभी सही रथ से प्राचीन मंदिर पहुंचे

एक साथ तीन तीन विशाल के ड्रैगन देख एक बार फिर से सभी में दर का माहौल पैदा हो गया

पैर वासुकि वंश के नागो ने जब अपनी राजकुमारी कोमलांगी को वाइट ड्रैगन पे स्वर देखा तो उन्हें रहत मिली आवर उनका कुछ दर काम हुआ

तीनो ड्रैगन एक स्थान पे उतर गए सूर्य कोमल किरण इंद्रजीत मानसी शालिनी जी सभी ड्रैगन से निचे उतर आये

सूर्य ......अब कैसा लग रहा है कोमल

कोमल ......अच्छा हे लग रहा है

किरण ....... इसे कुछ समाज नहीं आएगा आप चलिए पहले मंदिर चल कर दर्शन कर ले तब तक बाकि लोग भी आ जायेंगे

कोमल .......क्या समाज नहीं आएगा दीदी

किरण ........कल जो कुछ भी हुआ उसका कारन नागमणि की अंनियंत्रित ऊर्जा थी जो तुम संभल नहीं पायी जब नागमणि तुमसे विलम्ब थी ुशी के कारन तुम अचानक से वो सब कर गयी इस लिया कुंवर जी तुम्हे वाइट ड्रैगन पे ले कर आये अब तुम्हारी ऊर्जा संतुलित है

सभी लोग मंदिर जा परबु दर्शन वह पूजा कर बहार आये तब तक बाकि लोग भी आ चुके थे

सूर्य ऊच देर एकांत में गुरुदेव से बात कर उनके साथ मंच की आवर भाड़ गया जहा सभी लोग मौजूद थे

सूर्य की नजर नागराज कालिंदी की पत्नी नागरानी यामिनी जी पे पड़ी जो एक तरफ अपनी छोटी सी पुत्री वह कुछ दसियो के साथ कड़ी थी

सूर्य मंच पे न जा कर उस आवर भाड़ गया

सूर्य ........ परनाम माता देवी यामिनी जी

यामिनी जी .....परनाम पैर आप कोण है हमने आपको पहचाना नहीं आप हमें माता कह कर क्यों सम्बोधित कर रहे है

सूर्य ....... हम अपना परिचित अवश्य देंगे माता यामिनी जी किन्तु यहाँ नहीं आप हमारे साथ मंच पे आइये

यामिनी जी .....किन्तु

सूर्य ......चिंतित न होइए माता कहा है हमने आपको तो इस पुत्र पे इतना तो विश्वाश कीजिये

यामिनी जी सूर्य के साथ मंच की आवर भाड़ गई

सूर्य उन्हें शालिनी जी के समक्ष बैठा देता है एक तरफ n.purvi जी दूसरी तरफ n.yamini जी बिच में शालिनी जी

सूर्य ....... गुरुदेव आपकी आज्ञा हो तो मैं सुरु कृ वो कार्य जिसके लिया इन सभी को तत्काल में आने का आदेश मिला

गुरुदेव ......आज्ञा है पुत्र सूर्य

सूर्य ....... नागलोक की सम्पूर्ण नाग प्रजाति को सूर्य शिव शालिनी ठाकुर का परनाम आप सभी को यहाँ आने के लिया विवश किया उसके लिया हम हृद्या से आप सभी से क्षमा चाहते है

आप सोच रहे होंगे को हम कोण है आवर किस हक़ से आप सभी को यहाँ आने को विवश कर सकते है तो हम पृथ्वीलोक के एक मानव है .

जनता हूँ आप में से भूतो की नजरो में मानव सामान्य जिव है किन्तु न मैं सामान्य हूँ आवर न मेरा परिवार इस लिया अपने मन से ये सोच निकल दीजिये कुछ समय से से जो भी गतिविधि नागलोक में घटित हो रही है फिर चाहे वो दोनों वंश से कुंवारी नागकन्याओ का अपहरण हो या फिर किसी निर्दोष नाग का अंत बे वजह अंत उन सभी दोषियों के आपके सामने ला रहा हूँ जिन्होंने आपकी पुत्रियों का अपहरण किया आवर आप सभी की पुत्रिया भी जिन्हे कल मध्यरात्रि हमने मुक्त किया

सूर्य के एक इसारे से वह एक तरफ द्वार बन गया जिसमे से कुछ नागवंशी सैनिक उन 10 असुरो को आवर बाकि सभी बंदियों के साथ साथ उन 60 से ऊपर नाग कन्याओ को भी उस मार्ग से लाया जाता है

सूर्य ........ ये वो गोचर है जिनको असुरलोक से नरकासुर ने भेजा था आवर इनके हे कहने पे कुछ आपके हे भाई बंदु तक्षक नाग वंस के नागराज कालिंदी आवर वासुकि नागवंश से सेनापति माणिक आवर गुप्तचर विभाग के मुखिया ने आपकी अभेद कन्याओ का अपहरण कर उन्हें असुर लोक किसी शेरनी अनुष्ठान के लिया भेजा जाने वाला था किन्तु महाराज नागराज महावीर ने ी इस गंभीर घटना के विषय में हमारे गुरुदेव से सहायता मांगी आप सभी की पुत्रियों को सुरक्षित लौटा लेन के लिया

गुरुदेव ....... ये सत्य है हमने नागराज महावीर को आश्वासन दिया था राजन ने दोनों नागवंश की कन्याओ को सुरक्षित लौटा लेन के आग्रह पे हमने पुत्र सूर्य को नागलोक भेजा आपकी पुत्रियों को सुरक्षित मुक्त करने का श्रेया हमारे शिष्य को जाता है किन्तु इस से ये सत्य नहीं बदल जाता की अगर नागराज महावीर हमसे सहायता न लेते तो आपको पुरिया अब तक असुरलोक पहुंच चुकी होती आवर उनकी बलि शैतान को छड़ी दी जाती इस लिया धन्यवाद कीजिये नागराज वीर का

सूर्य .......... आप दोनों नागवंशी समुदाय की शत्रुता का लाभ सदैव असुरो को प्राप्त हुआ है हजारो सालों से चली आ रही इस शत्रुता का अंत करना होगा अगर आपको एक खुशाल आवर सुखी जीवन चाइये हो दोनों नागवंशी नागो को एक होना होगा अपनी शत्रुता भुला कर अन्यथा आप एक दूसरे के इशू तरह खून के प्यासे बने एक दूसरे को मरते रहेंगे आवर कोई तीसरा आपका लाभ उठा आपके जीवन से जैसे अब तक खेलता आया है वैसे आगे भी खोलेगा

माणिक ........ हम इन तक्षक नागो के सामने कभी नहीं जुखेन्गे हमें मरना मंजूर पैर दुश्मन को गले नहीं लगाएंगे

माणिक की बात सुन कुछ आवर बंदी आवर भीड़ से कुछ आवर नाग आगे आये आवर सभी इस बात का विरोध करने लगे

सूर्य ......... तुम्हारी मुर्ख ता का लाभ इसी तरह तो कोई तीस्ता उठा लेता है जिस माणिक को तुम लोक वासुकि नाग समाज रहे हो वो असल में वासुकि वंश से है हे नहीं वो एक तक्षक नाग है नागराज कालिंदी का जुड़वाँ भाई क्यों सेनापति माणिक जी अपनी वास्तविकता सबके समक्ष लेट हो या मेरे ड्रैगन का भोजन बनना पसंद करोगो या फिर दंड नायक निर्भासुर के दंड चक्र का सामना करना है तुम्हे क्या लगा राजकुमार इंद्रजीत के रकत को दूषित कर तुम नागलोक सिंघासन प्राप्त कर लोगे तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी भूल थी माणिक

न. यामिनी जी ....... हमें कुछ कहना है

सूर्य ....... आप को इजाजत लेने की जरुरत नहीं है माता

n.yamini जी ........ हम जानते है माणिक एक तक्षक नाग है हमारे समक्ष भी कल हे इनका वास्तविक रूप सामने आया जब ये महल में गायक स्वस्थ में लौट तब उपचार के दौरान इन्हें अपने वास्तविक रूप में आना पड़ा तब हमने इसकी वास्तविकता देखि जो अपने हे वंश की नयी पीढ़ी को बलि चढ़ा सकता है आप सब उसकी बात मान रहे हो कब तक एक दूसरे का रकत बहते रहोगे षड़यंत्र करि दूर बेथ कर देखता रहता है आवर आप आपस में लड़ काट कर मर जाते हो हमरो सालों से यही तो होता आ रहा है आवर किस लिया केवल नागमणि के लिया

क्या नागमणि आपके उन भाई बंदु को तपिश ला सकती है जिन्हे आपने इस शत्रुता में खो दिया बस बहुत हो गया हम तक्षक नागवंशी नागरानी यामिनी इस शत्रुता को अभी िश समय समाप्त करते है हमारे पूर्वज शेषनाग को साक्षी मन कर बिना किसी मांग के हम वासुकि वंश नागराज महाराज महावीर से इस शत्रुता को यही ख़तम करने की विनती करते है

n.mahaveer ...... हम नागरानी देवी यामिनी को हमारे पूर्वज देव वासुकि को साक्षी मान उनके मेट्री प्रस्ताव को स्वीकार करते है

रही बात नागमणि की तो नागमणि पुत्री कोमल के अलावा हम भी उसे दर्जन नहीं करते है इस लिया मग्ननी का जब कभी भी प्रयोग किसी नाग पे होगा तो उसके स्वस्थ्य लैब के लिया हे होगा या फिर नागलोक के विकाश के लिया जिसपे तक्षक नाग आवर वासुकि नाग का सामान रूप से अधिकार होगा

माणिक ...... तुम असत्य कह रहे हो नागराज

सूर्य ......... तुम्हे नागमणि की लालशा है न माणिक तो अब तुम्हारे जीवन का फैसला मग्ननी हे करेगी आवर इन बाकि सभी का भी दंड वही निर्धारित करेगी किसी मृत्यु मिलेगी आवर किसी दंड भोग अपने पापो का प्रायश्चित करने का मौका गुरुदेव

गुरुदेव मंच से कुछ दुरी पे एक स्थान का निर्माण करते है

गुरुदेव ........पुत्री कोमल नागमणि को उस स्थान पे रख दो

कोमल ......जी गुरुदेव

कोमल नागमणि का आह्वान कर उसे उस स्थान पे कमल पुष्पु में रख कर मंच पे लौट आती है

सूर्य .......जिसको नागमणि की लालशा है वो नागमणि उठा सकता है किन्तु उस से पहले मैं माता यामिनी जी से निवेदन करूँगा की वो नागमणि को स्पर्श करे

गुरुदेव .......जाओ पुत्री यामिनी अपने मन में उपजे सभी संदेह मिटा कर नागमणि को स्पर्श करो

n.yamini जी .....कुछबफरते डरते वह पहुंची आवर नागमणि को परनाम कर उसका स्पर्श किया नागमणि से एक रौशनी निकल उनके सरीर में सम्माहित हो गई कुछ पल उनका सरीर चमका आवर फिर नार्मल हो गया

सूर्य ......... अब आप की बाटी है माणिक जी अपने पापो का दंड पाने को

माणिक बिना किसी दर के उस आवर चल दिया उसे यकीं था की नागमणि से उसे कुछ हानि होगी आखिर वो नाग है

जैसे हे माणिक ने नागमणि को चूका अगले हे पल माणिक का जिसम जलने लगा

कुछ हे पल में वो रख के ढेर में बदल गया फिर वो रख हवा में गायब हो गई

सूर्य .......तुम सब की बारी तुम्हारे भाग्य में क्या है ये केवल नागमणि निर्धारित करेगी जो आगे नहीं बढ़ा वो मेरे दंडनायक निर्भयासुर रूप के दंड का पत्र बनेगा

सूर्य अपने निर्भासुर अवतार में आ उन 10 असुर गुप्तचरों की आवर भाड़ गया

निर्भयासुर ......ब्लैक ड्रैगन इनकी समस्त ऊर्जा इनसे चीन को

निर्भयासुर को देख उन सभी के सामने रात का वो भयानक मंजर आ गया

ब्लैक ड्रैगन तो जैसे इसी का इन्तजार कर रहा था

ब्लैक ड्रैगन डेरी डेरी उन 10 असुरो की आसुरी ऊर्जा का भोग करने लगता है देखते हे देखते वह चीखे चीत्कार गूंज उठी 2 मिनट्स बाद जब उनकी सम्पूर्ण असुर ऊर्जा ग्रहण करने के बाद निर्भासुर ने अपनी असीम अनंत गति कामे इस्तेमाल से इतनी तेज पत्थर किये की देखने से पहले एक एक असुर का सरीर 10 ,10 टुकड़ों में जमीन पे गिरा था जिसने निर्भासुर की अग्नि ने भड़क कर दिया

अब बाकि बंदी एक एक कर नागमणि की आवर भड़के लगे निर्भयासुर के ऐसे क्रूर मौत देता देख तक़रीबन 40 बंदी नागो में से केवल 11 नाग जीवित बचे किन्तु किसी न किसी विकलांग अंग या किसी गंभीर रोग से हर्षित हो कर बाकि सभी मारे गए

निर्भयसुर........ आप लोगो को एक मौका मिला है प्रायश्चित कर स्वयं को इस रोग से मुक्त कर नए जीवन का आरम्भ करने का आवर आप सब ये मत सोचना की चामरे पाप मुझसे छुपे हुए है केवल इस लिया तुम में उन हजारो को चढ़ रहा हूँ जिनके पाप क्षमा योग्य है पैर भविष्य में तुम्हारा एक बुरा करम दंड का पत्र बना सकता है मई यहाँ राहु या न रहूं नागलोक मेरे दंड चक्र के ादिन है इस लिया मुझसे कुछ भी नहीं चुप सकता

निर्भयासुर से सूर्य फिर से अपने वास्तविक रूप में लौट आया

सूर्य ....... अब अंतिम कार्य शेष है दोनों नहवानिस्यो के राज चिन्ह को एक करने का आज से दोनों वंशो की दुश्मनी ख़तम तक्षक नागवंश का शासक नागरानी देवी यामिनी जी करेंगे आवर वासुकि वंश के शासक नागराज महावीर किन्तु जहा दोनों वंश में किसी गंभीर मुद्दे पे दोनों की सहमति से फैसला होगा अगर कोई इनके फैसले से संतुष्ट न हो तो वह प्रभु मंदिर में अपने समस्या या याचिका ताड पत्र पे लिख उसे प्रभु मंदिर में स्वयं प्रजवलित जोड़ी में उस ताड पत्र को जला दे उसका फैसला दंडनायक निर्बयासुर या नागमणि स्वयं करेगी आप सभी भोजन कर के के जायेगा

सूर्य दोनों वंशो के चिन्ह के एक कर ुशी चिन्ह से प्रचलित मुद्रा का चलन कर सभी नगर वासियो से विधा ले महल की आवर लौट गया साथ में देवी यामिनी आवर उनकी पुत्री भी थी

सूर्य के जाते हे वह कुछ जिन पहुंचने जिनके जिमे सूर्य ने सम्पूर्ण नागलोक के भोजन का जिम सौंपा था

आज दोनों समुदाय की हमरो सालों से चली आ रही दुश्मनी का अंत हुआ था भले हे इन में कुछ ने दर कर इस हे स्वीकार किया था किन्तु नाग लोक की 90% जनता ने इसे ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार किया

गुरुदेव ....... नागराज महावीर आवर न अग्रणी पुत्री यामिनी अब नाग लोक की जनता का ख़ुशी आपके हाथो में है उन्हें उचित शिक्षा दीजिये ताकि फिर कोई तीसरा इन्हें फिर से न दुश्मन बना दे उचित शिक्षा हे एक ऐसा माध्यम है जिस से नागलोक का भविष्य उज्जवल बनाया जा सकता आवर इसका दायित्व राजगुरु आपके जिमे होगा

राजगुरु ....... जी गुरुदेव मुझे ये कार्य करके अत्यंत पर्शान्ता होगी जहा एक सम्मान सभी को शिक्षा दे सकूंगा

सूर्य ....... शिक्षा के साथ साथ एक मजबूत सेना का भी घट्न करना होगा ताकि नागलोक की सुरक्षा मजबूत हाथो में रही मैंने नागलोक में द्वारा को सुरक्षित कर दिया है कोई भी दूषित विचारों के साथ नागलोक में प्रवेश नहीं कर सकता है अब इस द्वारा से माता यामिनी जी वह के जिम्मेदारी आपके हाथो में है जो कोई भी वह से प्रवेश करे उसकी जानकारी दोनी शासक को रहे आवर एक पहचान पत्र के रूप में एक मुद्रा पारित कीजिये जिस से नागलोक में वो इंसान आजादी से गम फिर सके

n.mahaveer .......उसकी क्या आव्सय्कता है पुत्र

सूर्य ...... आव्सय्कता है पिता श्री क्यों की राजगुरु जी अकेले तो पुरे नागलोक को शिक्षा दे नहीं सकते है इस किया हमने कुछ जिन शिक्षा आवर कुछ शिक्षक परीलोक से यहाँ भेजने का सोचा है जो जादुई शिक्षा के साथ साथ योध शिक्षा भी नागलोक के युवाओ के दे सके जिसमे नागलोक के कन्याये भी भाग लेंगी

गुरुदेव .......उत्तम विचार पुत्र स्त्री पुरुष एक सामान शिक्षा ले इस से उत्तम क्या हो सकता है

कुछ देर बाद सभी भोजन कक्ष की आवर भाड़ गए

दिल्ली ..........

इन दो दिनों में दीनदयाल की लक्समी ने वो हालत की की अब तो दीनदयाल सच में पागलो जैसे हरकत करने लगा

आज दिन दयाल को हॉस्पिटल में दूसरा दिवश था दो दिन से तीन वक़्त शोक थेरेपी ने दीनदयाल के मानशिक संतुलन को पूरी तरह से हिला कर रख दिया था

रही सही कसार लक्समी जी गेप दे दे कर उसे दर का दोसे दे कर पूरी कर रही थी

अब जब भी लक्समी दिनु को दंड देती तब उसकी आवाज पहले की तरह बंद नहीं करती जिसके कारन दिनु के घरवालों को भी यकीं हो गया था की दिनु सच में पागल हो चूका

पैर आज सुबह चंद्रु चोरी चले हॉस्पिटल में गुस्स आया आवर किसी तरह दीनदयाल को वह से ले कर निकल गया किसी वार्डबॉय की मदद से

चंद्रु दिनों को ुशी के फार्महाउस की आवर ले कर निकल गया जो दिल्ली से कुछ बहार बहरी एरिया में था

दिनु ......... मुझे यकीं था तुम मुझे बचने जरूर आओगे

चंद्रु ......... मंत्री जी मुझे तो आना हे था बस थोड़ा सा लेट से पहुंचा उसके लिया माफ़ी चाहता हूँ

दिनु ......किसी सेफे आवर अच्छी जगह ले चल भाई बहुत बुरी तरह से ताखा हुआ हूँ दो दिन से थी से सो भी नहीं प् रहा ुवेर मादरचोद उस डॉक्टर ने करंट दे दे कर जो दीमक नशो की बेंड बजे है पूरा सर फैट रहा है

चंद्रु ...... ये लीजिये इस से आपको आराम मिलेगा बस कुछ हे देर में हम लोग पहुंचने वाले है मैंने गजेंद्र को भी वही बुलाया है आता हे होगा

दिनु वो सरब की महंगाई होटल चंद्रु से ले एक हे साँस में इस उम्र में आदि खींच जाता है बिना खास परेशानी के

दिनु ....... चंद्रु मुझे सोना है कार में सो जॉन तो उठा कर रूम में सुला देना

चंद्रु ......जी मंत्री जी

दिनु कुछ हे देर में वो बोतल पूरी हलक से निचे उतर कर वही पीछे की सहित पेट गया

हरणदृ इस बात से अनजान की उसकी कार में उन दोनों के अलावा कोई आवर साक्ष भी मौजूद है जो उन्हें सुन आवर देख पा रहा है

लक्समी चरणदृ के बगल वाली सहित पे बैठी हुई दोनों की बाते सुन रही थी

कुछ देर बाद कार एक आलिशान से फार्महाउस में प्रवेश करती है जहा पहले से कुछ आवर कार तीन सेड के निचे कड़ी थी

चंद्रु ......मंत्री जी फार्महाउस आ गया है उठिये लगता है साला पूरी बोतल गायक गया बूड़ौ अब इस 80 कग की बोरी को उठा कर अंदर ले जाना होगा देखता हूँ कोई है क्या

तभी अंदर से एक महिला जो कोई 30 32 की उम्र की रही होगी उसके साथ गजेंद्र आता हुआ नजर आता है चंद्रु उसे आवाज दे बुलाता है

दोनी मिल कर मंत्री को कार से निकल अंदर चल लक्समी उस औरत को गुर गुर कर देख रही थी

लक्समी ......ये साली तो लड़कियों को फशा कर उनकी डडली करती है इस हे भी सबक शिखना हे होगा

लंक्सि उस औरत की मटकती टाइट स्कर्ट के ऊपर से हे एक जानते दार चांटा उसकी फूली हुई गांड पे दे मरती है उसके साथ हे उसकी चीख निकल जाती है पैर औरत ठीक से चीला भी नहीं पायी थी की उसका दूसरा चूतड़ पे भी लक्समी का पंजा चाप गया

अब गांड फटी तो गिरते पढ़ते तेजी से अंदर भागी आवर खुद को एक रूम में बंद कर लिया

लक्समी ......... साली रंडी पैसो के लिया लड़कियों की ेजात से खेलती है अभ देख कैसे मैं तेरी इन दोनों कमीनो से अगड़ी आवर पिछड़ी लाल करवाती हूँ जब तेरी बेंड बनाएंगे तब तुम्हे अहसास होगा

लक्समी उस औरत के सरीर में गेस जाती है

लक्समी ........ तो इसका नाम लतिका है साली जिस कॉलेज में शिक्षा देनी चाइये वही लड़कियों को ड्रग्स दे उसने ब्लैकमेल कर इन जैसे कमीनो के आगे पैसे के लिया सुलाती है मन तो कर रहा की जान से मार दू तुझे पैर वो पाप मैं क्यों कृ तू खुद जीते जी नरक भोगे गई ऐसा कुछ करुँगी मई इसी फ़ोन के इस्तेमाल से तुमने बहुत सी लड़कियों की जिंदगी तबाह आवर बार बाद की है अभी यही फ़ोन तेरी आवर इनकी बर्बादी का कारन बनेगा

लक्समी उसके फ़ोन को साइलेंट कर वीडियो मूड लगा कर कुछ इस तरह से चुराया की बीएड पूरी तरह से उसके कैद हो आवर साथ हे साफ़ साफ़ आवाज भी सुनाई दे

( यहाँ इस सीन में सरीर आवर आत्मा दोनों लतिका की रहेगी बस सवाल लक्समी के होंगे जो लतिका को वश में किया उनसे पूछेगी )

लतिका लेडलिने से चंद्रु आवर गजेंद्र दोनों को रूम में आने का कहती है

लतिका ......... दोनों कमीने बहुत नीच किसम के है इतनी आसानी से तो मुँह खोलने से रहे है अत्यादित सरब हे इनका मुँह खुलवा सकती है

लतिका कुछ सरब की बोतल ले आती है आवर अपने हेंड़बैग जो दूसरे रूम में ठगा उसने से कुछ ड्रग्स निकल बोतल मिला देती है

कुछ हे देर में चंद्रु आवर गजेंद्र दोनों वह पहुंचे





सामने लतिका को इस अवतार में देख दोनों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा

गजेंद्र ........क्या बात है मेरी लतिका रानी आज तक जिस जिसम को हमें चुने तक नहीं दिया वो आज इस तरह बे पर्दा

लतिका ........ आज हम आप दोनों को वो ख़ुशी देंगे जो आपकी खवाहिश रही है काफी समय से पैर उस से पहले जो यहाँ राखी सरब की होटल पहले ख़तम नरेगा वही हमारे सरीर को छू पायेगा मर्द वही तो बोतल पे भी खड़ा रहा हे

गजेंद्र लपक कर बोतल उठा मुँह से लगा लेता है चंद्रु भी

दोनों बॉटल कुछ अंतराल के बाद ख़तम हो गयी





गजेंद्र लपक के बीएड पे पंहुचा आवर लतिका की खुली जांघो के बिच उस फूली हुए छूट पे अपना मुँह भिड़ा देता है

चंद्रु को मायुश खड़ा देख लतिका अपनी आवर आने का इशारा करती है

लतिका ........ हमारे सवाल का जबाब दो आवर शामिल हो जाओ अब तक हमने कितनी लड़कियों को तुम्हारे मंत्री दीनदयाल के निचे जोर जबरदस्त लिटाया है

चंद्रु ....... वो लड़किया नहीं कमसिन कालिया थी जिन्हे उस बूढ़े दीनदयाल ने काली से फूल बनाया अब तक कुल 32 लड़कियों को उसके निचे सुलाया है तुमने बदले में हर एक लड़की का 2 लाच तुम्हे मिला है

लतिका ........दोनों कपडे उतर के आ जाओ मैदान में

चन्दर आवर गजेंद्र जल्दी से पुरे नंगे हो गए

लतिका .......ह्म्मम्म्म्म हतियार तो दोने के तगड़े है

तुम्हे कितनी लड़किया मिली हमसे गजेंद्र जी





गजेंद्र ....... मुझे कुंवारी 8 आवर अभी तुम जो दो ले कर आई हो चूड़ी हुई उसके साथ कुल 12 चूड़ी हुई

लतिका दोनी के काले बुजंग नाग को चूसने लगती है

दोनों पे कुछ असर ड्रग्स का आवर कुछ सरब का होने लगा था लिंग पूरा आकद कर पत्थर जैसा हो गया ठगा इस ुमार में भी





लतिका ......उम्म्म्म काफी जान है लौवडे में वैसे मंत्री जी का भी तो लड़की विदेशो में सप्लाय करने का काम है क्या उनकी भी शील खोल कर भेजते हो तुम लोग

चंद्रु ........तुम हिच्च इतनी पूछ टच क्यों कर रही हो

लतिका ........मेरे पास कुछ कच्ची उम्र की चिड़िया जिन्हे विदेशी में भेज अच्छी रकम कामना चाहती हम इस लिया इस डंडे के बारे पूछ रही हूँ नहीं बिताना तो हटो यहाँ से

गजेंद्र ......मेरी रानी नाराज न हो तू लेट जा चंदू बता तब तक मैं इसकी छूट की गहराई नापता हूँ





गजेंद्र लतिका को बीएड पे पटक अपना कला अकड़ा हुआ खुटहा लतिका की टाइट छूट पे रख झटका मरता है

एक बार को तो लतिका की चीख निकल गई पैर गजेंद्र जैसे कोई गज हो बिना रुके सिरसा झटका मार उस साढ़े 7 इंच के नाग को जाट तक बिल में गुढ़ा कर हे रुका

ीदार चंद्रु लतिका का खुला मुँह देख अपना नाग उस बिल में गुस्सा दिया आवर मंत्री जी की काळा कारनामो का कला व्हिटः खोलने लगता है

लतिका ( लक्समी ) को तो यकीं हे नहीं हुआ की उस शैतान ने कितनी जिन्दगिया तबाह की है दिनु के साथ साथ चंद्रु आवर गजेंद्र के काळा कारनामे भी खुल क कर सामने आ गए थे

अब दोनों बदल बदल कर लतिका की बजने लगे





चंद्रु अपने ऊपर लिए लतिका छूट जो अब तक ठीक से खुल गयी थी उसे आवर आदिक खोलने में लगा हुआ था

उसके पास में खड़ा गजेंद्र अपने लैंड पे अपना थूक लगा कर त्यार कर रहा था

चंद्रु को एक इस्रा कर वो पीछे आ लतिका के गांड के ढक्कन पे लैंड लगा बिना पल गवाए झटका मर दिया लतिका की जो चीख निकली उस से फार्महाउस भी गूंज उठा पैर जैसे बहुत से आवाजे यहाँ पहले भी गुंजी आवर इन्हें दीवारे से टकरा कर डैम तोड़ दिया हो





गजेंद्र ........बस मेरी जान तेरी इस मटके जैसे मुलायम गांड ने बहुत तड़पाया है फिर मौका मिले न मिले

लतिका की गांड वर्जिन थी उस मुसल ने पूरी चिर कर रख दी कुछ बुँदे खून की बीएड की चादर पे अपने नीसाण चढ़ चुकी थी

गजेंद्र आवर चंद्रु दोनों करीब 20,25 मिनट्स तक लतिका के जिसम को बहुत अच्छे से भोगते है





इस दर्द में भी लतिका 3 बार अपना चरम पा चुकी थी छोटी बार के करीब थी

अब उसकी छूट में जलन होना सुरु हो गया था कुछ हे देर में चंद्रु ऊपर से अलग हो गया

अब गजेंद्र हे बच्चा था जो कुछ देर गांड मरने के बाद अपना लैंड निकल लेता है

दोनों लतिका को पैरों में बिठा कर मुठ मरते हुए वीर्य लतिका के स्थान आवर मुँह पे एक के बाद एक पिचकारी छोड़ने लगते है





लतिका ........ तुम दोनों ने मेरी हालत ख़राब कर दी पैर मजा भी बहुत आया

गजेंद्र .........हम भी थक गए है तुम्हे ठंडा कर के अब आराम करना है

लतिका ........आवर उन दो लड़कियों का क्या मैं घर जा रही हूँ

चंद्रु ........ उन्हें रात के लिया छोड़ जाओ कल भेज देंगे मंत्री जी भी तो है उन्हें भी तो चाइये

चंद्रु आवर गजेंद्र दोनों ुशी तरह से नघे हे दूसरे रूम में चले गए

लतिका कपडे पहन अपना मोबाईल ले वह से बहार निकली आवर कार ले कर फार्महाउस से निकल गयी

लतिका को घर पहुंचते पहुंचने 12 के करीब समय हो चूका था इस आलिशान घर में वो अकेली हे रहती थी पति उसका विदेश में जॉब करता था

लतिका अपने रूम में आ कर अपने फ़ोन से वीडियो अपने सभी सोशल साइड पे अपलोड कर देती है

काम पूरा होते हे लतिका उसके मंद को अपने कण्ट्रोल से आजाद कर देती है

जैसे हे लतिका आज़ाद हुई वो वही अपने बीएड पे बेहोश हो गयी

देखते हे देखते सोशल साइड पे लतिका का अपलोड किया वीडियो किसी सुनामी के जैसे चा गया

न्यूज़ में ब्रेकिंग न्यूज़ बन कर च गया जहा देखो वह मंत्री गजेंद्र दुर्जन आवर लतिका हे चाइये हुए थे

दीप्ती ......... सर अगर अभी भी एक्शन नहीं लिया तो इस वर्दी की कोई अहमियत नहीं रहेगी

कमिसिनोलेर ........ Ok जो हेड मिस दीप्ती एंड अरेस्ट आल क्रिमिनल्स

दीप्ती .....सर मुझे गन उसे करने की परमिशन चाइये

कमिश्नर ......... Ok कोशिश करना जितने ज्यादा जिन्दा लोगो को अरेस्ट कर सको आवर सबसे पहले इसे उठाओ

दीप्ती ......... सर ये लतिका क्सक्सक्सक्स कॉलेज की प्रोफेसर आलरेडी मैंने एक लेडी पुलिस टीम भेज दी है इसे अरेस्ट करने

कमिश्नर ......... वेल दोने जॉब बीटा अब तुम जाओ आवर खुद का ख्याल रखना

दीप्ती ......जी सर जय हिन्द सर ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................
 
अपडेट 234

न्यूज़ में ब्रेकिंग न्यूज़ बन कर च गया जहा देखो वह मंत्री गजेंद्र दुर्जन आवर लतिका हे चाइये हुए थे

दीप्ती ......... सर अगर अभी भी एक्शन नहीं लिया तो इस वर्दी की कोई अहमियत नहीं रहेगी

कमिसिनोलेर ........ Ok जो हेड मिस दीप्ती एंड अरेस्ट आल क्रिमिनल्स

दीप्ती .....सर मुझे गन उसे करने की परमिशन चाइये

कमिश्नर ......... Ok कोशिश करना जितने ज्यादा जिन्दा लोगो को अरेस्ट कर सको आवर सबसे पहले इसे उठाओ

दीप्ती ......... सर ये लतिका क्सक्सक्सक्स कॉलेज की प्रोफेसर आलरेडी मैंने एक लेडी पुलिस टीम भेज दी है इसे अरेस्ट करने

कमिश्नर ......... वेल दोने जॉब बीटा अब तुम जाओ आवर खुद का ख्याल रखना

दीप्ती ......जी सर जय हिन्द सर ................

अब आगे ...........

सूर्यगढ़ ..........
साम को 5,5:15 के करीब सूर्य कोमल शालिनी जी आवर किरण मानसी सरायगढ़ पहुंचे

सभी से मिलने के बाद जब सूर्य अपने रूम में पंहुचा आवर कपडे बदल कर निचे आ हे रहा था की तभी अचानक से वयोम उसके सामने आ जाता है

सूर्य ......वयोम भाई आप यहाँ

वयोम ....... है आपने जो काम कहा था वो हो गया आवर कुछ बहुत जरुरी जानकारी भी मिली है

सूर्य .......ये तो अच्छी बात है बताइये क्या बात है

वयोम ....... जिसमे आपके परिवार की जानकारी निकलने के लिया मनोहर को यहाँ भेजा था जब मैं आपकी जानकारी ले मनोहर का रूप ले उसके पास पहुंचा तब मुझे पता चला की वो उसे भी ये काम किसी आवर ने दिया था

सूर्य ......ये तो मनोहर से हे पता चल गया था

वयोम .......है पैर आपके परिवार की जानकारी निकलने के पीछे वजह वो जमीं है जो हल हे में ठाकुर जी ने दिल्ली में खरीदी थी आपके परिवार की जानकारी जुटाने के मंत्री दीनदयाल के खाश आदमी चंद्रु उर्फ़ चंदू ने उसे कांटेक्ट किया था

सूर्य ........ अगर उसे जमीं चाइये थे तो वो खरीद भी तो सकता था

वयोम ......जमीं मंत्री की नहीं किसी आवर को चाइये थे पैर राजीव ने वो जमीं उसे नहीं दी क्यों की राजीव जी जानते थे की वो उस जमीं का इस्तेमाल गलत नमो में नरेगा फिर जब आपके पापा ने अच्छा ऑफर दिया तो उन्होंने वो जमीं आपके पापा को दे दी

सूर्य ....... तो फिर मंत्री क इसमें क्या दिलचस्पी है जो उसका आदमी ये सब जानकारी निकल रहा है

वयोम ......आप सच में सूर्य हे हो न भाई आज हुआ क्या है आपको तबियत तो ठीक है न

सूर्य ......सब ठीक है बस आज राजावत कुछ ज्यादा हो रही है यार

वयोम ........ आप आराम कीजिये मैं बाद में बात करता हूँ

सूर्य ...... अब बता भी दो भाई

वयोम ....... दर्शक ये जमीं दिल्ली के एक गुंडे गजेंद्र को चाइये थी ताकि वो उस जमीं से अपना ड्रग वह मौजूद कॉलेज में सप्लाई कर अच्छा खाशा प्रॉफिट कमा सके क्युकी वह जो कॉलेज है जो दिल्ली की मोस्ट टॉप कॉलेज में से आती है वह पढ़ने वाले विद्यार्थी सभी रिच फॅमिली से आते है

सूर्य ....... मतलब गजेंद्र दीनदयाल का आदमी है आवर चंद्रु उसका राइट हेंड

वैसे इस दीनदयाल के पीछे तो लक्समी को लगाया हुआ है मैंने

वयोम ...... है भाई उसने तो पूरी दिल्ली में गजेंद्र चंद्रु दीनदयाल को मुँह छुपाने लायक नहीं छोड़ना

सूर्य .......क्या मतलब

वयोम .......ये देखिये आपकी लक्समी ने क्या किया इन तीनो के साथ साथ उस महिला लतिका का भी जो इनके पास जोर जबरदस्ती लड़किया भेजती थी

वयोम दिवार पे वो वीडियो चला देता है जैसे जैसे वीडियो में खुलाशा हो रहा था वैसे वैसे सूर्य का गुस्सा भी भाड़ रहा था

सूर्य ....... शाबाश लक्समी तुमने अपना बदला हे नहीं लिया बल्कि उन मासूमो का भी बदला लिया जो इनके हवश की शिकार हुई थो

वयोम चाहो तो जिनलोक से या परीलोक से जितने सहयोगी चाइये ले आओ पैर इनके द्वारा बहार देशों में बेचीं सभी लड़किया कल सुबह तक मेरे सामने चाइये किसी भी हाल में साथ हे वो लोग जो इन्हें खरीद कर ले गए थे

वयोम .....ऐसे तो बहुत से लोग है भाई पृथ्वीलोक में

सूर्य ......तो समझो दिल्ली से सफाई अभियान सुरु पहले उन महानगर को टारगेट करेंगे बाद में बाकि छोटे सहरो को क्यों की सबसे ज्यादा यही से ये सब होता है

वयोम ......थी है जैसा आप कहो भाई एक बात आवर

सूर्य ....... वो क्या है भाई वो भी बता दे फिर रेस्ट करूँगा मैं

वयोम ....... दीप्ती दीनदयाल चंद्रु गजेंद्र के पीछे निकल चुकी है उनने अरेस्ट करने आवर उसकी टीम में कुछ उस मंत्री के लोग भी शामिल है आप समाज रहे हो न

सूर्य ....... लगता है आज टेस्ट करना नहीं लिखा चल भाई तू निकल मैं भी निकलता हूँ निर्भया त्यार रह भाई तेरा कहर बसरासने वाला है

वयोम .....ठीक है भाई मैं चलता हम आपका काम सुबह तक हो जायेगा

सूर्य ......एक बात आवर जिन्होंने लड़किया खरीदी आवर बेचीं है उन सभी को कंगाल कर दो उनके पास एक भी पैसा न रहे इन पैसो से इन लड़कियों की मदद करेंगे खुद के पैरों पे खड़ा होने में

वयोम .....समझो काम हो गया

सूर्य वयोम से बात कर निचे चल दिया

सूर्य ...... कैसे है दादा जी


दादा जी ....... आओ बीटा बैठो मैं ठीक हूँ तू सुना बीटा गम आये नागलोक

सूर्य ......... आपको क्या लगता है बाउजी मैं तुमने गया था नागलोक नहीं बाउजी आप भी जानते होंगे तक्षक आवर वासुकि नागो की जनम जन्मांतर की शत्रुता के बारे में

दादी जी ....... है बीटा सुना तो है पैर कितना सच कितना जूथ ये नहीं जनता क्यों क्या हुआ बीटा

सूर्य ....... ुशी दुश्मनी को ख़तम करने गया था बौ जी आवर आप सभी के आशीर्वाद से सफल भी रहा अब दोनों नागवंश एक हो चुके है भले हे दोनों वंशो के शासक अलग अलग है

दादा जी ....... ये तो बहुत ी ख़ुशी की बात है बीटा अकसर दो राज्य या दो समुदायों के बिच पिश्ते वो लोग है जो निराप्रद हो निर्दोष हो तुमने उन सभी को एक नयी जिंदगी दी है मेरे बचे हमेशा निर्बल की रक्षा करना आवर be-sabaro का सहारा बनना बीटा धन डॉलर आणि जनि है बस हम जो अंत समय में साथ ले कर जाते है वो है लोगो का प्यार उनकी दूवये इस लिए मेरे बचे अगर किसी निर्बल के रक्षा करने के लिया अगर तुम्हारे सामने कोई अपना भी खड़ा हो तो उसका भी सामना करो न की अपना रास्ता बदल लो

सूर्य ........ आपने बिलकुल सही कहा बाउजी मैं रात को दिल्ली निकल रहा हूँ बाउजी एक दो दिन लग सकते है

दादा जी .......ठीक है बीटा यहाँ की चिंता न कर न तेरे बाउजी की बूढी हडियो में अभी भी बहुत जान है

सूर्य ....... हाहाहा बाउजी मुझे यहाँ की चिंता है भी नहीं मेरे परिवार की तरफ बुरी दृस्टि से कोई भी देखेगा तो मुझसे पहले हे बहुत है उनने नोचने के लिया ये लीजिये ये आपके लिया है आवर नाना जी के लिया बहुत खाश चीज़ है

सूर्य दादा जी को प्राचीन काल की सुराही देता है जिसपे कुछ माणिक मोती भी जेड थे

दादा जी ...... ये क्या है बीटा

सूर्य ....... ये आप दोनों के लिया स्पेशल टॉनिक है दादा जी आज रात लीजिये आवर कल इसका असर देखिये अब जाइये आपके दोस्त मर विक्रम सिंह राणा जी आ रहे है यहाँ इस से पहले की दादी जी की नजर पड़े निकल लीजिये

दादा जी ........ शाब्बाश मेरे शेर ये हुई न कुछ मर्दो वाली बात

दादा जी जल्दी से बहार की आवर निकल गए इतने में नाना जी की कार वह आ कर रुकी

दादा जी ......अरे अंदर कहा जा रहा चल यही से कार गुमा जल्दी ठकुराइन ने देख लिया तो गई 1 घंटे की

नाना जी ...... अरे यार संदन के हाथ की चाय तो पिने दे

दादा जी ........चाय छोड़ आज तुझे कुछ स्पेशल पिलाता हूँ मेरे शेर बेटे ने दी है हम दोनों के लिया

नाना जी .......चल भाई गुमा कार जल्दी से आवर वो मेरा भी नाती है

दादा जी ......है पता है पता है चल आज हम पुराने अड्डे पे चलते है वही पुराणी यादें तजा करेंगे जाते हुए कुछ सामान ले चलना तेरे हाथ का बना खाये बहुत टाइम हो गया है

नाना जी ....... चल भाई फिर आज वही सही वैसे भी गर्मी में खुले आसमान के निचे मज़ा हे कुछ आवर आएगा आवर सामान की चिंता नहीं है सब मिल जायेगा वह बस मटन यही से ले कर चल्न्ते है

सूर्य अंदर जा अपनी दादी जी को दादा जी के बारे में बाटता है

दादी जी ....... तुम न उनको दिन बा दिन बिगड़ रहे हो बीटा तुम्हे क्या लगा मैंने देखा नहीं तुम्हे

सूर्य ......उम्म्म्मः मेरी प्यारी स्वीट से दादी माँ आप न बहुत तेज हो हर जगह आपकी नजर होती है पैर मैं भी आपका पोता हूँ दादी माँ वो जो राज पिटे है उनकी वही आदत छुड़ा रहा हूँ आवर जो मैंने दी वो भी सरब हे है पैर वो सरीर को नुकसान नहीं पहुँचती

दादी जी ....... सरब कोई भी हो नुकसान हे पहुँचती है बीटा

सूर्य ...... नहीं माँ सा वो परीलोक की मदिरा है आवर उसने कुछ विशेष मिला हुआ है कल देखना दादा जी को उछाल खुद करते हुए किसी छोटे बचे की तरह तब संजोगी आप आवर आज रात मैं दिल्ली जा रहा हूँ सायद कल रात या परषो तक आ पाउँगा माँ सा

दादी जी ......तू अब्बी अभी तो आया है बीटा फिर अभी जा रहा है

सूर्य ....... आप तो जानती है माँ सा इन सक्तियो के साथ बहुत से दायित्व भी मिले है वही निभाने जाना है बहुत सी मासूम जिंदियो को बचाना है आवर बहुत से इंसानी खाल में छुपे भेडियो का शिकार करना है

दादी जी ...... ठीक है बीटा पैर खाना खा कर जाना ठीक है

सूर्य ......ठीक है माँ सा मैं माँ के रूम में रेस्ट कर रहा हु कुछ देर

दादी जी ....... ठीक है बीटा जा तू आराम कर

सूर्य वह से शालिनी जी के रूम में जा कर लेट गया इस वक़्त रूम में कोई नहीं था
शालिनी जी रूम से बहार थी

अभी सूर्य को सोये कुछ हे देर हुए थी की जुली शालिनी जी से मिलने वह आ पहुंची सूर्य को अकेला सोया देख वो भी सब भूल ुशी के बगल में आ जेठी सूर्य जुली को लिटा उसके बगल में बहो में लिया लेट गया

जुली ........ आज आप इस वक़्त सो रहे है तबियत तो ठीक है न

सूर्य ......हम्म्म बस थोड़ी देर चुप रहो मुझे सोने दो तक गया हूँ

जुली सूर्य के बालो में ऊँगली घूमने लगती है जिस से सूर्य जल्दी हे नींद में चला गया

शालिनी जी जब अपने रूम में आई आवर सूर्य को इस तारा जुली के साथ सोया देखा तो पलट कर जाने लगी

जुली .......माँ कहा चली आप यहाँ आइये

शालिनी जी ..... क्या हुआ बेटी जुली

जुली ....... आप यहाँ लेटिए फिर बताती हूँ

जुली डेरी से सूर्य से अलग हो गयी आवर शालिनी जी वह लेट गई सूर्य शालिनी जी को टटोल कर उनकी नही कमर में हाथ दाल डेट जाता है

जुली ...... आप इनका सर सहलाइये माँ मैं इनके पेअर दबती हूँ ये थक गए है पता नहीं क्यों

शालिनी जी .......अभी से पति की सेवा कर रही हो बेटी

जुली ...... जी नहीं बस इनकी थकन काम कर रहे है पता नहीं वह ऐसा क्या किया नागलोक में जो इतने थक गए है

शालिनी जी सूर्य के बल्लो में ऊँगली गिरते हुए जुली से बाते करने लगती

इस बिच एक बार रेखा जी भी शालिनी जी से बात करने आई पैर सूर्य को ऐसे सोया देख वो बिना कुछ कहे मुस्कुरा कर बाद में मिलने का बोल किचन में निकल गयी

सूर्य की आँखे करीब रात 8 बजे खुली शालिनी जी भी सूर्य के साथ लेते लेते कब सो गई जुली अभी भी डेरी डेरी सूर्य के पेअर दबा रही

दादी जी ...... जुली बेटी उसे उठा दो कब से सोया हुआ है आवर ये देखो शालिनी भी सो गई इसके साथ

जुली .......दादी जी सोने दीजिये न

दादी जी ...... बेटी इसे दिल्ली जाना है रात में कोई काम से बता रहा था अब उठा दो ताकि खाना खा ले फिर इसे जाने की जल्दी होगी इसके पापा लोग भी आ चुके है

जुली ......जी दादी जी मैं इन्हें उठा देती हु

शालिनी जी ...... उसकी जरुरत नहीं है बेटी मैं उठ गई हुई इसे मैं उठा दूंगी चल कर हाथ मुँह दो कर खाना खाओ

जुली उठ कर दादी जी के साथ बहार निकल गई

शालिनी जी ...... चल अब उठ जा बहुत हुआ सोने का नाटक

सूर्य ...... आपको हमेशा पता कैसे चल जाता है माँ

शालिनी जी ....... माँ हूँ तेरी चल अब उठ तेरे पापा आ चुके है

सूर्य एक तगड़ी सी अंगड़ाई ले कर उठ गया बहार जाने से पहले शालिनी जी के माथे को चुम कर अपना प्यार जाता गया

शालिनी जी ...... ये जब भी ऐसे करता है सरीर में सनसनाहट होने लगती है पैर ये कुछ समझता हे नहीं है

शालिनी जी हाथ मुँह दो खर बहार आ सभी को रेखा जी के साथ मर खाना परोशने लगती है

थोड़ी बहुत बाटी के साथ सभी का खाना फिनिश हो गया

सूर्य खाना खा कर शिव के रूम में चल दिया ( ज्यादातर शिव कुछ समय से यही पे सो रहे है इस लिया इसको शालिनी जी का रूम न लिख कर शिव का रूम लिखा )

कुछ देर बात करने के बाद सूर्य अपने रूम से त्यार हो सभी से मिल कर करीब रात के no बजे दिल्ली के लिया गायब हो गया ........

दिल्ली ........ करीब 4 बजे जब दीप्ती अपने ऑफिस लौटी तो थोड़ी निराश थी साथ में कुछ 6,7 गुंडों को अरेस्ट कर अपने साथ लिए थी

दीप्ती ...... इन सभी को लॉकअप में डालो आवर चरगेशित त्यार कर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर इन सब के मुँह खुलवाओ आवर एनकाउंटर में जो 9 गुंडे मरे है उनकी जगह 11 लिखो रिपोर्ट में इन में से जो भी मुँह खोलने में आना की करे उसे थोक दो समाज आया मैं कमिश्नर ऑफिस जा कर आती हूँ

ल. इंस्पेक्टर ...... मेम उस लेडी का क्या करना है जो उस वीडियो में है

दीप्ती ...... लतिका कहा है उसे स्पेशल सेल्ल में डालो मैं अभी आती हूँ

दीप्ती वह से अपने केबिन में जा कर हाथ मुँह दो कर कॉफ़ी आर्डर करती है

कुछ देर बाद दीप्ती कॉफ़ी फिनिश कर उस सेल्ल की तरफ भाड़ गई जहा लतिका को रखा था

दीप्ती ........ इसने अपना मुँह खोला की नहीं

l.officer ...... नहीं मेम अभी तक इसने कुछ भी नहीं बोलै है

दीप्ती ........ देख अभी शराफत से पूछ रहे है अपना मुँह खोल वर्ण ये जो डंडा देख रही हो न कहा डालूंगी आवर कहा से निकलूंगी तू सोच भी नहीं सकती

लतिका ....... मुझे कुछ भी नहीं पता मुझे जाने दीजिये मैंने कुछ नहीं किया

दीप्ती ....... साली रंडी कितनी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर कहती है मैंने कुछ नहीं किया जाने दे तुझे तेरा वो यार गजेंद्र चंदू या वो मंत्री दीनदयाल तुझे बचने वाले नहीं है उल्टा तुझे वो दंड रहे होंगे तुझे थोक ने के लिया तुमने उनकी पोल्ल पति जो खोल कर रख दी

लतिका ....... मुँह संभल कर बोलिये कानून मई. भी जानती हम आवर न मैं इनमे से किसी को नहीं जानती जिनके आपने नाम लिया मेरा इनसे कोई सम्बन्ध नहीं

दीप्ती ...... ज़रा बड़ी स्क्रीन में मैडम की करतूत तो चलना

दीप्ती की बाद सुन लेडी अफसर लतिका का गजेंद्र आवर चंद्रु के साथ का थ्रीसम सेक्स वीडियो प्ले कर देती है जो करीब आधे घंटे का था जिसे देख लतिका की जो हालत हुई वो देखने लायक थी

वीडियो देख दीप्ती आवर बाकि दो लेडी अफसर भी कुछ गरम हो गयी थी पैर ड्यूटी पे थी तो खुद को कण्ट्रोल किये रखा

दीप्ती ...... साली खुद वीडियो बना कर सोशल मीडिया पे अपलोड करती है आवर सुपर से नाटक ऐसा जैसे कुछ भी पता न हो इसके कपडे उतरो नंगी करो साली को तब ये सच उगलेगी

2 लेडी अफसर आगे भाड़ लतिका के सुबह वाली ड्रेस जोर जबरदस्ती उतर देती है अब लतिका इन तीन लेडी पुलिस के सामने ाधनाघि हालत में टेसुए बहा रही थी

दीप्ती ......आखरी मौका देती है सब सच उगल वर्ण लॉकअप में जो गुंडे है सब को तुज पे चढ़ दूंगी

लतिका ...... प्लेसेस मैं सब बताती हूँ सच सच मुझे कुछ मत कीजिये

दीप्ती ...... कपडे दो इसके इसे चल पहन आवर सब सच सच बता

लतिका कपडे पहन लेती है दीप्ती के इशारा से वीडियो कैमरा ों कर लतिका के बयां रिकॉर्ड करने लगती

लतिका .......... मैं नहीं जानती की ये वीडियो किसने बनाया आवर किसने मेरे मोबाइल से अपलोड किया अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

दीप्ती ......एक बार फिर से जूठी बोलै तो ख़ाक में घुसा भर दूंगी

लतिका ...... मैं सच कह रही हूँ मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता

आज सुबह मैं मंत्री दीनदयाल के फार्महाउस पे गई थी गजेंद्र के साथ 2 लड़कियों को ले कर वह पे कुछ देर बाद मंत्री दीनदयाल आवर उनका आदमी चंद्रु आया तभी किसी ने मेरे कूल्हों पे मारा पैर कोण मुझे नहीं पता मैं इतना दर गई की वह से भाग कर एक रूम में चुप गई उसके बाद जब मुझे होश आया तो मैं तो मैं अपने घर में थी कोई जोर जोर से करबेल बजा रहा था जब गेट खोला तो वह पुलिस थी जिन्होंने मेरी एक भी नहीं सुनी आवर मुझे यहाँ ले आई

दीप्ती ...... फ़ौरन उस फार्महाउस का एड्रेस दो मुझे

लटका ...... क्सक्सक्सक्स एरिया में बना हुआ है दद फार्महाउस वही पे गई थी मैं

दीप्ती ........ इस से उन सभी लड़कियों की जानकारी लो जिनकी इसने लाइफ बर्बाद की है आवर एक टीम इसके घर पे सर्च करने भेजो वह जो कुछ भी इललीगल लगे सब उठा के लाओ आवर वह नजर रखने को कहो

मैं उस फार्महाउस के लिया निकल रही हूँ

लेडी अफसर .......जी मेम

दीप्ती किसी को कॉल करते हुए गोरान बहार निकल गयी

कुछ देर बाद हे दीप्ती अपने टीम के साथ तेजी से फार्महाउस की आवर भाड़ गयी रास्तमे कुछ आवर फाॅर्स ने दीप्ती को ज्वाइन किया जो कमिश्नर की तरफ से दीप्ती के हेल्प के लिया भेजी गई थी

फार्महाउस 2 पं ...... गजेंद्र चंद्रु दोनों नशे में दूत हो कर सोये पड़े थे बार बार फ़ोन की घंटी दे गजेंद्र की नींद टूटी तो उसने आदि नींद में हे फ़ोन उठा कर कान से लगा लिया सामने से पता नहीं क्या कहा गया की अगले हे पल बीएड से उछाल पड़ा आवर जल्दी से टीवी चालू कर न्यूज़ चैनल लगाया जहा गजेंद्र लतिका चंद्रु दीनदयाल ये आवर इनके काले साम्राज्य की तकिया उत्तदायी जा रही थी

गजेंद्र ........ ये साला अभी भी सो रहा यहाँ किसी ने हम सब की हैंड कर्ली आवर पता भी नहीं चला चंदू उठ मादरचोद भाग जल्दी लग लौवडे

चंदू के पिछवाड़े में गजेंद्र की लत पड़ी तो वो भू उठ गया

चंदू ...... क्या है बे चूतिये ठीक सोने भी नहीं देगा क्या

गजेंद्र .......... तुझे सोने की पड़ी है यहाँ हम सब की गांड मरली किसी ने सामने देख मादरचोद जल्दी निकल यहाँ से इस से पहले की पूरी पुलिस फाॅर्स हमारी गांड में गोली मरे भाग यहाँ से

चंदू .........आवर उस सेल बूढ़े का क्या

गजेंद्र ....... अब्बे उसे भी उठा कर निकल वो पकड़ा गया तो हम भी गए समझो

दोनों जल्दी से दीनदयाल को उठा कुछ पैसे आवर हतियार ले कर फ़ौरन फार्महाउस से निकल गए

बार बार दोनों के फ़ोन बज रहे थे

दीनदयाल ........ आखिर हुआ क्या है

चंदू ........मंत्री जी हमारे काले कारनामे पूरी दिल्ली ने देख लिए है

दीनदयाल .....क्या मतलब है ालो

गजेंद्र ....... पता नहीं कैसे पैर हमारे सभी गलत धंदे आप सभी के सामने आ गए है आवर आपको मंत्री पढ़ से हटा दिया गया है पुलिस भी निकल चुकी होगी हमें जिन्दा या मुर्दा पकड़ने पता नहीं कैसे पता चला उनको

दीनदयाल ........ दिल्ली हमारे लिया सेफे नहीं है हरिद्वार की आवर निकलो बाकि वही देखते है एक तो साली ये लक्समी ने गांड मार राखी है ( दर्शक इस वक़्त लक्समी यहाँ मौजूद नहीं थी )

चंदू .....कोण लक्समी मंत्री जी

दीनदयाल ....... राजीव की बहन लक्समी जिसका रपे किया था मैंने आवर कुछ लोगो ने उसने बाकियो को तो मार दिया अब मेरे पीछे पड़ी है गांड मरी नहीं पैर बाकि छोड़ा नहीं ुशी की बझा से पागल तक बना दिया लोगो

गजेंद्र ....... क्या मंत्री जी आप भी जैसे कोई बचो को कहानी सुनाता हो

दीनदयाल ...... मादरचोद मैं कोई चुटिया नहीं हूँ जो कोई कहानी सुनाऊंगा वो भूत बन कर लौट आई है जीना हराम कर दिया उसने सुपर ये अब इन पुलिस से बच कर भागो वर्षों की कमाई ेजात सब मिटटी में मिल गई मेरा परिवार नाम ख़ुर्शी सब गया

चंदू पुरे 120 पे कार को दौड़ा रहा था रस्ते में एक चेक पोस्ट पे रुकने का इशारा किया तो 3,4 पुलिस वालो को गोली मार वह से कच्चे रस्ते निकल गए मेरठ मुजफराबाद होते हुए साम को करीब 6 से कुछ सुपर हरिद्वार पहुंचे तीनो वही दीनदयाल किसी को से मिल कर सर छुपाने का बंदोबस्त करते है

ीदार दीप्ती की टीम जब फार्महाउस पहुंची तो न उसे मंत्री मिला न गजेंद्र आवर चंदू वह लतिका द्वारा लायी गयी दोनों लड़किया दीप्ती को मिल चुकी थी दीप्ती दोनों लड़कियों को आवर वॉचमैन को अपनी टीम के साथ ले कर निकल गया वापिस अपने ऑफिस बाकि टीम पुरे फार्महाउस की तैसी लेने में लग गई जहा उनने घेर कानूनी हथियार ड्रग क्योकिं अफीम के साथ आवर भी बहुत कुछ घेर कानूनी सामान मिला जिसकी कीमत करोड़ो में थी

दीप्ती एक बार फिर खली हाथ लौटी थी जिसका गुस्सा उसने लतिका की ढुलाई कर निकला पुलिस को साथ देख दोनों लड़कियों ने भी जैम कर लतिका पे हाथ साफ किया

दीप्ती ........ इसने जानकारी दी या अभी भी ये रंडी नाटक कर रही है आवर तुम दोनों इसके खिलाफ रिपोर्ट लिखो फिर तुम्हे घर भिजवा देती हूँ जब भी जरुरत होगी तुम दोनों को कांटेक्ट करुँगी

लड़की 1 ......प्लेसेस मैडम हमें इसमें मामले में मत डालिये हमारे parent's को पता चला तो वो जीते जी मर जायेंगे

दीप्ती गुस्से में दोनों लड़कियों को थापर मर देती है

दीप्ती ......ये सोच तब कहा गयी थी जब माँ बाप की खून पसीने की कमाई को तुम नशे के दुए में ुढती फिरती थी आज माँ बाप का ख्याल आ रहा तुम लोगो को अगर ये ख्याल पहली बार जब नशा करने की सोची ुशी टाइम आया होता तो ुए दिन न देखना पड़ता

दोनों लड़किया दीप्ती के पैरों में गिर माफी मांगने लगती है

दीप्ती ......ठीक कड़ी हो जाओ आवर घर जाओ पुलिस साथ जाएगी को गलत समझेंगे लोग पैर तुम दोनोफिर कभी नशा करते या किसी भी गलत मामले में नाम सामने आया तो मैं कोई दया नहीं करूंगी समाज गई न तुम दोनों

कुछ देर आवर लतिका से पूछताछ के बाद दीप्ती अपने घर निकल गई

आज दिल्ली में बहुत से जगह पे पुलिस डिपार्टमेंट ने चले मारे जहा से ड्रग्स हतियार आवर बहुत कुछ हाथ लगा आवर कुछ गुंडे भी पकडे गए

दीप्ती माँ ......क्या हुआ बीटा आज तुम्हारा मूड ख़राब क्यों है

दीप्ती ......माँ प्लेसेस बाद में बात करते है मेरा सर दर्द से फैट रहा है

सूर्यकांत जी ......ok बीटा जा कर रेस्ट करो ी क्नोव आज का दिन तुम्हारे लिया बहुत थकन भरा रहा है कमिश्नर से बात हुई थी मेरी

दीप्ती .....ok पापा बाद में मिलती हूँ

राधिका .......आप चलिए दीदी मैं आपके लिया एक कॉफ़ी ले कर आती हूँ अभी सर दर्द आवर थकन दूर हो जाएगी

दीप्ती बाथ ले कर बहार निकली तो सामने राधिका कॉफ़ी मैग लिया कड़ी थी

दीप्ती ....थैंक यू राधिका

राधिका .....क्या दीदी मैं कोई घेर हु क्या जो थैंक्स बोल रही है आप कॉफ़ी लीजिये मैं डिनर आपका यही लगा देती हूँ

दीप्ती ......अभी नहीं राधिका अभी मूड नहीं है मैं कुछ देर अकेले रहना चाहती हूँ

राधिका ......ठीक है दीदी जैसा आप ठीक समजे

निचे राधिका आंटी जी सूर्यकांत जी तीनो डिनर कर रहे थे तभी किसी ने डोरबेल बजे तो राधिका ने गेट खोला सामने झड़े साक्ष को देख राधिका की ख़ुशी का कोई टिकना न रहा ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................
 
अपडेट 235

दीप्ती .....ok पापा बाद में मिलती हूँ

राधिका .......आप चलिए दीदी मैं आपके लिया एक कॉफ़ी ले कर आती हूँ अभी सर दर्द आवर थकन दूर हो जाएगी

दीप्ती बाथ ले कर बहार निकली तो सामने राधिका कॉफ़ी मैग लिया कड़ी थी

दीप्ती ....थैंक यू राधिका

राधिका .....क्या दीदी मैं कोई घेर हु क्या जो थैंक्स बोल रही है आप कॉफ़ी लीजिये मैं डिनर आपका यही लगा देती हूँ

दीप्ती ......अभी नहीं राधिका अभी मूड नहीं है मैं कुछ देर अकेले रहना चाहती हूँ

राधिका ......ठीक है दीदी जैसा आप ठीक समजे

निचे राधिका आंटी जी सूर्यकांत जी तीनो डिनर कर रहे थे तभी किसी ने डोरबेल बजे तो राधिका ने गेट खोला सामने झड़े साक्ष को देख राधिका की ख़ुशी का कोई टिकना न रहा ................

अब आगे .........


हरिद्वार .......... दीनदयाल चंदू गजेंद्र इस वक़्त तीनो हरिद्वार के बहरी क्षेत्र में सबकी नजरो से एक पुराणी हवेली में छुपे हुए थे

रात करीब 11 बजे दीनदयाल चंद्रु गजेंद्र को सोया हुआ समाज कर चुप चाप उस पुराणी हवेली से निकला खुद के चेंबर को किसी चादर में छुपा कर एक टोर्च ले दाभे पांव हवेली के पिछले द्वार से बहार निकल गया उस आवर जिस आवर जंगल जैसा इलाका था


गजेंद्र ....... चंदू उठ सेल

चंदू .......... अबे भेनचोद क्यों गांड मार रहा साली कैसे जिंदगी है ठीक से सोने भी नहीं मिलता

गजेंद्र ...... अबे वो बूढ़ा रात के अँधेरे में पता नहीं कहा अपनी माया छुड़वाने गया चल उठ देखे कही साला हमारी खबरे न छुड़वाने निकला हो

चंदू आवर गजेंद्र दोनों हे दीनदयाल बीदर निकला उदार निकल गए

दिनु अँधेरे में एक तरफ डरते हुए बड़ी तेजी से भाड़ रहा था

तभी कुछ अघोरी टाइप के लोग उसे दिखाई दिए ेब दिनु एक बार तो दर गया क्यों की उसे भी पता था की इनके क्षेत्र में सदर्न इंसान प्रवेश करे तो उसे मौत के घाट उतरने में ज्यादा वक़्त नहीं लगते ये लोग

दिनु ......अगर इन्होने देख लिया तो ये मुझे जिन्दा हे खा जायेंगे क्या कृ कैसे बाबा के पास पहुँचू इन से बच कर

तभी उन अगोरियो में से एक अघोरी उठा आवर दिनु की तरफ आने लगा

दिनु दर के मारे वही जमीं पे लेट खुद को छुपाने की कोशिश करने लगा

कुछ देर बाद कुछ आवाज हुई तो दिनु ने अपने सर को उठा कर देखा तो उस से कुछ हे कदमो को दुरी पे अघोरी पिसाब करता हुआ नजर आया

दिनु फिर से ुशी तरह आँखे बंद कर लेट गया

अघोरी ....... मेरी नजरो से चुप नहीं सकते डस्ट पापी इंसान जाओ यहाँ से जिसकी तुम्हे तलाश है वो यहाँ से कुछ दूर पुराने खंडहर में मिलेगा इस से पहले की हमारा क्रोध जागृत हो आवर हम तुम्हारे इस नटवर सरीर आवर पापी आत्मा को अपने क्रोध से जला कर रख दे चले जाओ यहाँ से

दिनु की तो उस अघोरी की आवाज सुन कर हे फैट कर हाथ में आ गई थी

उसके कानो में अघोरी की आवाज गूंज उठी

अगोरी के जाते हे दिनु उसके बताये हुए मार्ग पे निकल भगा

चंदू आवर गजेंद्र भी उसके पीछे पीछे हे दौड़ लगा दी

अपने पीछे किसी के दौड़ने की आवाज सुन दिनु को अपनी आवर बढ़ते उन कदमो की आहात ऐसे लग रही थी जैसे रामदेव उसके प्राण निकलने उसके पीछे लगे हो

गिरदते पढ़ते हफ्ते हुए किसी तरह दल मीठी में सना दिनु उस मंजिल पे जा पहुंचा जहा जिसका पता उस अघोरी ने दिया था

जैसे हे दिनु उस कंधार में प्रवेश करता है कुछ लोग उसे पकड़ लेते है

दिनु ........ मेरा नाम दीनदयाल है मैंदेल्ही से आया मुझे तांत्रिक गुरु मारीच से मिलना है

आदमी 1 ..... तुम गुरुदेव मारीच को कैसे जानते हो

दिनु ...... वो मेरे भी गुरु है मेरी जान को खतरा है मुझे उनसे मिलने दीजिये

आदमी 1 ......चढ़ दो इसे आवर इसे ले कर गुरुदेव के पास जाओ

तभी वह गजेंद्र आवर दचंदु भी पहुंचने जाते है

कुछ आवर आदमी उन दोनों को भी पकड़ लेते है

चंदू .......मंत्री जी कोण है ये लोग

दिनु ......तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो तुम्हे तो मैं सोता हुआ छोड़ कर आया था ये दोनों मेरे साथी है

आदमी 1 ....... केवल तुम आगे जा सकते हो जब तक गुरुदेव का आदेश न हो ये यही निगरानी में रहेंगे इनका क्या करना है गुरुदेव तय करेंगे

आदमी 1 दीनदयाल को ले कर खंडहर के दूसरी तरफ निकल गया जहा से कुछ आवाजे आ रही थी

मारीच ......आओ दिनु आखिर तुम्हे अकाल आ हे गई अगर समय रहते आ जाते तो इस तरह दर दर की टोखरे न कहानी पड़ती न तुम्हे वो लास्ट भोगने होते

दिनु .......गुरुदेव बचा लीजिये मुझे उस चुड़ैल से वर्ण वो मुझे तड़पा तड़पा कर मार डालेगी जीना हराम कर रखा है ऊपर से ये पुलिस

मारीच ....... उस प्रेत आत्मा से तुम इतनी आसानी से नहीं बच सकते वो एक पवित्र आत्मा थी जिसने तुमने अपवित्र कर प्रेत बनने विवश किया हमें सब विस्तार से बताओ उस आत्मा के विषय में तभी हम तुम्हारी रक्षा कर पाएंगे ( तुम यहाँ स्वयं से नहीं आये हो तुम्हे यहाँ आने के लिया विवश किया है जिस आत्मा की तलाश हमें है ये वही हुई तो इसे बंदी बनाते हे हमारे 101 आत्मा हमारे ादिन होंगी उन सभी 101 एक पवित्र आत्माओ तांत्रिक क्रिया के माध्यम से हम उन सभी की सकतिया प्राप्त कर इस लोक के स्वामी बन जायेंगे )

दिनु ....... उस प्रेत का नाम जयलक्मी है गुरुदेव सालों पहले मैंने आवर मेरे कुछ साथियो ने हे उसके साथ बालकपुराव दुष्कर्म कर उसे मारा हुआ समाज कर जमीं में दफ़न कर दिया था एक दुर्घटना में मेरे बाकि साथी तो मरे गए पैर मैं बच गया उस के बाद मैं कभी उस स्थान पे नहीं गया जहा उसे दफ़न किया था सुनने में आया की वो भूत बन चुकी है पैर आज इतने सालों बाद पता नहीं कैसे वो फिर से लौट आई आत्मा बन कर आवर उसने मेरा जीना हराम कर दिया है अब आप हे मुझे बचा सकते है उस से

मारीच ....... ठीक है हम आज रात हे अनुष्ठान कर उस आत्मा को अपने बंदक में बांड लेंगे

शिष्य आत्मा बंदन क्रिया की तयारी करो

आदमी 1 ......जी गुरुदेव इनके 2 साथी भी इसके पीछे यहाँ आ गए है गुरुदेव

मारीच ......उन्हें यहाँ भेज दो आवर तुम आत्मा बंदक विधि की तयारी करो

शिष्य ......जी गुरुदेव

इनसे कुछ दूर वही अघोरी ग्रुप जिसने दिनु को यहाँ तक का मार्ग बताया था

अघोरी 1 ...... आपने अच्छा कार्य किया जो एक डस्ट आदर्मी को दूसरे डस्ट आदर्मी तक पहुंचने का मार्ग दिखा दिया हमने अपना कार्य कर दिया बाकि स्वयं परबु शिव संभु जाने

अघोरी 2 ....... उचित कहा आपने हमें जो संकेत मिले हमने उन्हें पूर्ण किया बाकि परबु की लैला वही जाने हम तो केवल निमित मात्रा है हमारा कार्य सम्पन हुआ अब किसी आवर को अपना कर्त्तव्य पूर्ण करने का समय है हमें अपने उचित स्थान पे लौट जाना चाइये इस कार्य में हमारे द्वारा कोई भिगान उत्पन्न न होने पात्र जय जय शिव संभु

चारो अघोरी जय जय कर करते हुए वह से हरिद्वार के भीतर की आवर निकल गए

दिल्ली ..........

राधिका सूर्य को देख वही गेट पे हे ख़ुशी के मरे उसके गले से लग जाती है

सूर्यकांत सर .....राधिका बेटी कोण आया है

सूर्यकांत सर की आवाज सुन राधिका जल्दी से अलग हो उन्हें जबाब देती है

राधिका ........ पापा जी देवर जी आये है चलिए अंदर चलिए

सूर्य ......कैसे है भाभी जी आप

राधिका ......अच्छी हूँ देवर जी चलिए हम सब डिनर हे कर रहे थे आप भी हमारे साथ कीजिये

सूर्य ...... सॉरी मैं बहार कर चूका हूँ

राधिका ......मैं कुछ नहीं जानती चलिए

सूर्य राधिका जी के साथ भीतर हॉल में पहुंचा जहा सूर्यकांत सर आवर आंटी जी का डिनर लगभग हो चूका था

सूर्य ........ नमस्ते अंकल आंटी जी

सूर्य दोनों के पेअर छू उनका आशीर्वाद लेता है

सूर्यकांत सर .....जीते रहो बीटा बैठो डिनर करो

आंटी जी ..... खुश रहो सूर्य बीटा

सूर्य .....सॉरी अंकल मैं बहार डिनर कर चूका हूँ

आंटी जी ......ये गलत बात है बीटा जब तुम्हारा यहाँ घर है तो फिर बहार डिनर करने की क्या जरुरत थी तुम्हे

सूर्य .....सॉरी आंटी

राधिका ......मम्मी आप चिंता न कीजिये इनके कण खीचूँगी न तो ये खुद हे डिनर करेंगे हेहेहे

सूर्यकांत सर ....... आराम से बेटी ज्यादा न खिचाई कर देना मेरा हो गया है खाना

आंटी जी ....मेरा भी हो गया है

सूर्य .....ok अंकल सुबह बात करते है

सूर्यकांत सर .....ok बीटा अपने भाबी से बात करो फिर आराम करना

सूर्य ....जी उन्सेल गुड निगह गुड नाईट आंटी जी

दोनों के जाते हे राधिका हक़ से सूर्य की गौड़ में आ बैठी आवर खाने का निवाला बना कर सूर्य की आवर किया

सूर्य भी ाँ आवर राधिका का मान रखते हुए निवाला खा लिया

सूर्य ......सच में मैं डिनर कर चूका हूँ भाभी बस आपका मान रखने के लिया इतना हे कर सकता हूँ

राधिका .......यहाँ हमारे अलावा कोई आवर है क्या जो भाभी बोल रहे हो राधिका कहो

सूर्य .....दीप्ती उदार हे आ रही है

सूर्य की बात सुन राधिका सूर्य की गौड़ से उठ गई

दीप्ती ...... तुम कब आये आवर मुझे किसी ने बताया क्यों नहीं

राधिका ...... आपने हे तो कहा था की आपको अकेले कुछ वक़्त चाइये पुर ये भी अभी अभी आये है बस

दीप्ती ..... फिर भी बिताना तो चाइये था न

राधिका ......आपका खाना लगा दूँ क्या दीदी

दीप्ती .....तुम खाओ मैं लगा लुंगी आवर जनाब कैसे आना हुआ आज इस तरफ

सूर्य ......सच कहु या जूथ

दीप्ती सूर्य की बात सुन कुछ पल उसके चेहरे को गौर से पढ़ने के कोशिश करने लगी

सूर्य ....... मैं कोई मुजरिम नहीं हूँ जो आप इतनी आसानी से मेरे चेहरे को पढ़ पाओ वैसे सुना है आज आपने बहुत म्हणत की किसी मुजरिम को पकड़ने के लिया पैर कामयाबी नहीं मिली

दीप्ती ....... तुम्हे ये सब कैसे मालूम कही तुमने हमारे डिपार्टमेंट सिस्टम को फिर हैक तो नहीं किया

सूर्य ....... मुझे उसकी जरुरत नहीं है मेरा नेटवर्क उस से कही आदिक फ़ास्ट है वैसे मुझे लग रहा है वो तीनो आपके हाथ नहीं लगने वाले है

दीप्ती ......पता नहीं कैसे पैर वो बच निकले जब मैं वह पहुँचू उस से पहले हे वो लोग भाग निकले थे

सूर्य ......क्युकी तुम्हारे डिपार्टमेंट में गद्दारो की कमी नहीं है जिस टीम को आप लीड कर रही थी उसके हे अंदर इनके तलवे चने वाले भी मौजूद है जिन्होंने पहले हे खबर कर दी थी जब वो वीडियो नई पे ब्रेकिंग न्यूज़ बन के पूरी दिल्ली देख रही थी वो तभी वह से निकल गए थे यकीं न हो तो अपनी टीम में मौजूद हर पुलिस ऑफिसर्स की कॉल डिटेल्स निकलवा कर चेक कर सकती है

दीप्ती ....... मुझे भी लगता है ऐसा हे हुआ होगा हमारे डिपार्टमेंट में कुछ ऐसे घुश्खोर भी है जो चाँद पैसो के लिया इन जैसों के पास अपना इमां तक गिरवी रख देते है इनकी चाँद लोगो की वजह से पुरे पुलिस डिपार्टमेंट को शर्मिंदा होना पड़ता है

सूर्य ........ पता नहीं क्यों पैर ऐसा लग रहा है आज की रात बहुत कुछ अच्छा होने वाला है दिल्ली के आम लोगो के लिया

अच्छा मैं चलता हूँ सुबह मिलता हूँ आप लोगो के भाभी आप मुझे घर के चाबी देंगी

राधिका .......आप यहाँ भी रुक सकते है न

सूर्य . ...नहीं वो मुझे कुछ काम भी है अभी बहार जाना है पता नहीं कब लौटूंगा उस लिया आप मुझे चाबी दे दीजिये

राधिका खाना फिनिश कर सूर्य को चाबी दे देती है दीप्ती राधिका मुझे कॉफ़ी मिलेगी क्या मैं कुछ काम कर रही हूँ

राधिका .....जी दीदी आप चलिए मैं ले कर आती हूँ

दीप्ती के निकलते हे राधिका सूर्य को एक तरफ ले उसे किश करने लगती है

राधिका ......मुझे लगा आप मेरे साथ रुकेंगे पैर आप तो जा रहे है

सूर्य .....मुझे कुछ काम है आप एक काम कीजिये मेरे वाले घर में आराम कीजिये आते हे आपकी इच्छा पूरी करूँगा आवर आपकी इसकी भी तरफ मिटा दूंगा

सूर्य राधिका की इलास्टिक वाली लेग्गी में हाथ दाल राधिका के हलके बालो वाली उस नरम फुल्ली हुई योनि को अपने पंजे में भर लेता है

सूर्य द्वारा ऐसा करने पे राधिका की सिसकी निकल गयी

राधिका ...... ठीक है मैं इन्तजार करुँगी आपका वह

सूर्य ....नहीं आप आराम से लेट जाना मैं खुद उठा लूंगा आपको पता नहीं कितना टाइम लगेगा आपको

राधिका ........ ठीक है जैसा आप कहो

सूर्य ...............ये लीजिये चाबी अपने पास रखिये मैं चलता हम ुम्मम्हा

सूर्य राधिका को किस कर वह से निकल गया

कुछ दूर जा कर सूर्य अचानक से गायब हो एक बिल्डिंग पे पहुंचा

अब सूर्य .सूर्य न हो कर दंड नायक निर्भयासुर में बदल चूका था


निर्भयासुर .......... अब वक़्त है दंड चक्र का बहुत खेल खेल लिया मासूम जिंदिगियो के साथ अब वक़्त है दंड नायक निर्भयासुर के दण्डचक्र का सामना करने का





निर्भयासुर ...... ये रूप सामान्य मनुस्यो के लिया उचित नहीं है मुझे रूप परिवर्तित करना होगा

तभी निर्भयासुर को सूर्य की आवाज सुनाई देती है

सूर्य ....... सर्वप्रथम उन असुर गुप्तचरों का नाश करो जो नरकादुर के कार्य हेतु पृथ्वीलोक पे मौजूद है उसके बाद तुम बाकियो को दंड दो निर्भया

निर्भयासुर .....जो आज्ञा स्वामी ऐसा हे होगा

निर्भयासुर वही ध्यान में बेथ अपने दंड चक्र ऊर्जा को असुरो को खोजने के लिया लिया मुक्त कर देता है

निर्भयासुर के सरीर से लाल आवर सफ़ेद ऊर्जा निकल एक दिशा में भाड़ गयी

निर्भयासुर जिस आवर उसकी ऊर्जा निकली ुशी दिशा में बड़ी तेजी से निकला

1 मिनट्स भी न लगी निर्भयासुर को उन असुर गोचरो तक पहुंचने में

निर्भयासुर ......तो तुम लोग यहाँ छुपे बैठे हो

असुर 1 ...... कोण हो तुम आवर यहाँ कैसे पहुंचने हमारे तंत्र सकती के इस पार

निर्भयासुर ...... दंडनायक निर्भासुर है हम जिसके दंड की कोई सीमा नहीं है न कोई ऐसा तंत्र मंत्र जो निर्भयासुर को रोक सके अपनी मृत्यु के लिया सज हो तुम सब

निर्भयासुर को अपनी आवर सवाल ले कर भद्रा देख उन सभी असुरो ने अपने अपने अस्त्र शास्त्रों से निर्भयासुर पे प्रहार करना आरम्भ कर दिया

असुरो द्वारा निर्भयासुर पे पांच तत्वा में से 4 तत्वा ( अग्नि वायु जल पार्थवी ) का प्रयोग किया जाना उनके लिया हे जातक रहा चारो तत्वा निर्भयासुर के सरीर से टकरा कर उन असुरो से हे जा टकराये

निर्भयासुर ......पांच तत्वा स्वयं मेरे स्वामी के ादिन है इनसे मुझे कोई हानि नहीं होगी असुरो तुम्हे असुरलोक से निकलना हे नहीं चाइये था

निर्भयासुर असुरो द्वारा चोदे तीर भले बचे आदि का ऐसे सामना कर रहा था जैसे वो उसके लिया खिलोने हो

असुर 1 .....हम सभी को अपनी जान बचानी है तो सभी के एक साथ अपनी ऊर्जा सम्मिलित कर इस पे प्रहार करना होगा

असुर 1 की बात मान सभी अपनी अपनी ऊर्जा को अपने हठी में एकता करने लगते है देखते हे देखते सभी 8 असुरो के रूप बदल कर विशाल दानव में बदल गए

निर्भयासुर ....... अब थोड़ा मज़ा आएगा तुम सभी को दंड देने में तुमने अपना रूप दिखाया अब मेरी बारी देखना चाहोगे मेरे भयानक रूप को हाहाहाहा

निर्भयासुर गुस्से में जमीं पे अपना गुस्सा मरता है जिस से एक पल को तो भूमि में जैसे भूकंप हे आ गया हो चारो तरफ दल हे दल नजर आ रही थी

जब दल हटी तो सामने निर्भयासुर का भयानक रूप देख असुर पीछे हटने लगते है





असुर 1 ....... तुम तुम तो हम में से एक हो फिर हमारे खिलाफ असुरराज के कार्य में विघ्न क्यों बन रहे हो

दंडनायक .......... हाहाहाहा नरकासुर वो विश्वश्घाती कपटी मित्रद्रोही उसे तो नरक की आग में जलाएगा ये निर्भयासुर पैर उस से पहले तुम सभी को निर्भयासुर के क्रोध में जलना होगा

निर्भयासुर की आँखे इस समय क्रोध में किसी जलदते हुए लावा सामान दाहक रही थी निर्भयासुर अपनी सोर्ड को वही भूमि में घड असुरो की तरफ भद्दा अपनी तरफ निर्भयासुर को बिना किसी अस्त्र सस्त्र के आते देख असुरो में कुछ हिमत बढ़ी आवर सभी 8 असुर निर्भयासुर को घेर लेते है

जैसे हे असुर 1 निर्भयासुर पे अपने अस्त्र का वॉर करता है निर्भयासुर गम कर अपने तेज पंखो से उसका वो हाथ हे उसके सरीर से अलग कर देता है जिसमे अस्त्र पकड़ा हुआ था

निर्भयासुर असुर 1 के पेट में प्रहार कर अपना हाथ दाल उसकी रीद की हदी हे बहार निकल लेता है फिर उसके सीने में अपना हाथ गुस्सा उसका दिल बहार निकल लेता है

निर्भयासुर के पंजे में अभी भी असुर 1 का दिल दाधाक रहा था जो सामान्य मनुष्य के दिल से करीब 4 गुना बड़ा था

निर्भयासुर अपना मुँह खोल दिल को निकलने हे वाला था की रुक जाता है जैसे किसी ने उसे रोक दिया हो

घुसे में दिल को जमीं पे गिरा कर अपने पेअर से रोड देता है

निर्भयासुर के ऐसे विभत्ष आवर भयानक रूप को देख बाकि 7 असुरो के पेअर का ओने लगे अपनी मृत्यु की आहात सुन कर

निर्भयासुर ......मेरे पास तुम्हारे जितना समय नहीं है


निर्भयासुर किसी मदमस्त गज के सामान चलता हुआ एक असुर को दबोच लेता है

असुर 2 ...... मुझे क्षमा कर दो मैं फिर कभी असुरराज की आज्ञा नहीं मन ऊगा आपका देश बन कर रहूँगा

निर्भयासुर ......... मुझे तुम जैसे असुरो से चूर्ण है जो अपनी मृत्यु को सामने देख अपने हे स्वामी से चाल करने लगे

निरभभासुर असुर 2 के दोनों हाथ उखड फेंकता है फिर अपने घुटनो के प्रहार से दोनों जंगा ( जंघे ) भी गौड़ कर उसे तड़प ने के लिया छोड़ देता

( सूर्य ......निर्भया क्रीड़ा ( खेल ) बहुत हुई सभी को सिगरा हे समाप्त करो भविष्य में बहुत मोके मिलेंगे तुम्हे अपनी क्रीड़ा करने के लिया

निर्भयासुर...... जी स्वामी )

नर्भयासुर जमीं में गुड्डी अपनी तलवार निकल बाकि बचे. असुरो की आवर लपका आवर किसी तेज बिजली के जैसे देखते हे देखते 6 असुरो को अनगिनत भागो में चीरते हुए निकल गया

निर्भयासुर जब पलट कर देखता है तो सभी वैसे हे खड़े थे पैर अगले हे पल किसी रेट की मूर्ति की तरह उन सभी 6 असुरो के सरीर मांश के ढेर में बदल गए

निर्भयासुर ......यहाँ का कार्य सम्पन हुआ स्वामी

सूर्य ......अब तुम अपना रूप बदल कर इंसानी में छुपे शेतानो का नाश कर सकते हो निर्भया

निर्भयासुर....... जी स्वामी

निर्भयासुर आँखे बांड कर अपना रूप बदलता है जो थोड़ा काम भयानक था किसी ब्लैक निंजा के जैसे






निर्भयासुर अपने इस रूप को देख कर ज्यादा खुश नहीं लगा

सूर्य .......क्या हुआ निर्भयासुर तुम खुश नहीं लग रहे

निर्भयासुर ....... ये कैसा रूप दिया है आपने मुझे स्वामी मैं एक असुर हूँ न की इंसान

सूर्य ....... तुम इंसान भी हो भूलो मत हम दोनों सरीर से एक है बस अस्तित्व आवर व्यक्तित्व अलग अलग है जिन इंसानो तुम दंड देने जा रहे हो तुम्हारे उस रूप को देख वो वैसे हे हृद्यघात से मृत्यु को प्राप्त हो जाते जिनकी मृत्यु का समय नहीं आया वो भी मारे जाते इस लिया यही रूप उचित है तुम अपना वो रूप तभी सामने लाओगे जब कोई असुरो सकती या फिर तांत्रिक सकती दरक से तुम्हारा सामना होगा अब जाओ आवर पापो के अनुपात में पापियों को दंड दो

निर्भयासुर ......जी स्वामी समाज गया असुर बूढी है थोड़ा देर से समाज आता है

सूर्य ...... अपने हे स्वामी को चलने के चेस्टा न करो तुम्हारे भूतकाल से परिचित हूँ आवर तुम्हारे क्रोध की वजह से भी उचित समय पे तुम्हे अपना क्रोध निकलने का भी मौका मिलेगा

निर्भयासुर वह से गायब हो दिल्ली की एक पुराणी ईमारत के पीछे अप्पेअर हुआ जहा कुछ लोग गन्स लिए पहरा दे रहे थे

निर्भयासुर ...... यही से सुरुहत किराये पैर उस से पहले उन सभी को उनकी मौत की आहात तो सुनाई देनी चाइये

निर्भयासुर एक बार फिर अपने असुर रूप में आ जो गर्जना की उसकी गर्जना में जो दर जो चेतावनी थी उसका असर जल्द हे पूरी दिल्ली में दिखाई देने लगा

सभी गुंडे आवर बुरे लोगो के दिल में एक अंजना भय व्याप्त हो उठा

निर्भयासुर असुर रूप त्याग अपने नए रूप में उस ईमारत की आवर भाड़ गया अपने तरफ किसी नकाबपोश को आता देख कुछ गुंडों का वो दर आवर भाड़ गया जो निर्भयासुर की गर्जना में था इन सभी के लिया

उनके हठी से उनकी गन चुत कर गिरने लगी एक दो ने निकट कर निर्भयासुर पे गोइलिया भी चलाई

निर्भयासीर अट्टहास करते हुए ईमारत में जा गुढ़ा जहा कच्ची संख्या में आवर भी गुंडे मौजूद थे

निर्भयासुर ......... कहा है तुम्हारा कमीना बॉस जाओ आवर उसे ग्रसित कर मेरे सामने ले कर

अपने से कुछ दुरी पे खड़े 2 गुंडों को गुरते हुए ये ये निर्भयासुर ने चेतावनी दी तो वो दोनों गुंडे किसी आज्ञा करि सेवक के जैसे एक तरफ भाड़ गया

निर्भयासुर अपनी सोर्ड आवर खंजर निकल उन सभी गुंडों की तरफ भद्दा आवर गाजर मूली की तरह काटने लगता है देखते हे देखते पूरी ईमारत चीखो से गूंज उठी रात के उस सन्नाटे में

सामने 20 ,25 लाखो का ढेर लग चूका था बॉस को वह लेन तक कुछ गुंडों के पेअर तो कुछ हाथ उनके सरीर से अलग हो चुके थे जो अभी भी तड़प रहे बाकि सभी के सीने में खंजर उतर उनकी गर्दन हे अलग कर दी थी निर्भासुर ने

निर्भयासुर .......आओ तुम्हारा हे इन्तजार था

बॉस अपनी आँखों के सामने बिना सर की लाशो का ढेर देख कर अपना सीना हे पकड़ लेता है

निर्भयासुर ......... इतनी आसान मौत नहीं मिलेगी तुम्हे जो हृद्यघात से मृत्यु प्राप्त हो जाये इसे यही छोड़ दो आवर जो कोई भी सामान है सब यहाँ ला कर एकता करो आवर फिर एक दूसरे को जान से मार दो

बॉस .......मुझे जाने दो चाइये तो मेरा सब कुछ ले लो

निर्भयासुर ....... तुम्हारी जान चाइये देदो जाने दूंगा वर्ण उदार देखा वही तुम्हारा सर होगा

बॉस ने उस तरफ देखा जहा निर्भयासुर ने इसरा किया था वह एक के बाद एक किसी माला में संजोये मोतियों के जैसे गुंडों के सर दिवार से लगे हुए थे सभी के माथे की बीचों बिच कील थोक कर दिवार से लगा दिया था

बॉस ...... नहीं नहीं मुझे वह नहीं लटकना

बॉस वही पड़ी किसी गुंडे की गन उठा कर कुढ़ को शूट करता है गोली चली पैर बॉस के सर से टच होते हे रुक गयी

निर्भयासुर ......इतनी आसान मौत नहीं मिलेगी तुम्हे तुम्हे मरते हुए तो पूरी दिल्ली के साथ साथ दुनिया देखेगी

निर्भयासुर बॉस के दोनों हाथ तोड़ देता है बॉस गाला फाड़ कर चीखने लगता है

ीदार दोनों गुंडे जो भी सामान ईमारत में मौजूद था सब वह से एकता कर एक दूसरे को ख़तम कर देते है

निर्भयासुर बॉस के फ़ोन से हॉस्पिटल आवर पुलिस हेडक्वार्टर्स कॉल कर घटना की जानकारी दे देता है

तभी वह वयोम पहुँचता है आवर पैसे आवर गोल्ड डायमंड्स गायब कर देता है निकल लेता है

निर्भयासुर .......ये क्या बात हुए भला आया काम किया आवर निकल गया न कोई दुहा सलाम किया ऐसे हे निकल गया साला

सूर्य ........ भूलो मत वो मानसी का मुँह बोलै धरम भाई है वो तुम्हारी हे बीएड बजा देगी इस से पन्गा लिया तो

निर्भयासुर ....... मेरा भी तो साला है जब आपका हुआ तो जीजा श्री के चरण स्पर्श तो करने चाइये थे न

सूर्य ........ ठीक है मानसी से बोल कर करवाता हूँ चरण स्पर्श तुम्हारे

निर्भयासुर ........... न न स्वामी ऐसा दंड तो न दीजिये

सूर्य ......तो फिर अपने काम पे लग जाओ

(निर्भयासुर .....एक असुर की इतनी बजती

सूर्य ......मैं यही हूँ निर्भया

निर्भयासुर ......क्षमा स्वामी भूल हुई मुझसे )

निर्भयासुर बॉस को ले कर वह से निकल गया इस बार एक खूबसूरयत बंगलो के बहार अप्पेअर हुआ

निर्भयासुर ....... सेल निर्दोष लोगो का खून चूस चूस कर देखि तो कैसे तहत से रहता है

निर्भासुर बेदक अंदर जा गुस्सा अंदर एक 45 .50 की उम्र का आदमी सरब की चुस्किया ले रहा था

निर्भयासुर ....... कैसे हो चीकटशक महोदय असलम खान

असलम खान दिल्ली का जाना मन दिल का डॉक्टर था जिसके खुद के 2 बड़े बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल्स दिल्ली में मौजूद है

असलम खान निर्भयासुर को देखते हे भय से कपङे लगा

निर्भयासुर ..... ..... मृत्यु का इतना खौफ वो भी एक चिकित्षक को जिसने न जाने कितने निर्दोष को अपने लालच में मृत्यु की नींद सुलाई होगी मनुष्य तुम्हारे पास अपने रोगों से मुक्ति पाने के लिया आते है वो सब तुम्हे उस ईश्वर के सामान मान कर अपना जीवन तुम्हारे हाथो में सौंपते है तुम उनके हे जीवन को देव पे लगा देते थे उनके अंगो को उनके सरीर से निकल कर छान पैसो के लिया

असलम खान ......कोण हो तुम तुम्हे ये सब कैसे पता

निर्भयासुर .......... तुम्हारी मौत है हम आज तुम्हे तुम्हारे सभी कर्मो का दंड देने आये है देखो तुम्हारे किये पाप

निर्भयासुर dr.aslam खान के द्वारा किये उसके पाप कुसी चलचित्र के जैसे हे उसके सामने चला देता है पैर असलम खान की तो पहले हे फैट चुकी थी थी जब निर्भयासुर ने उसके पाप करम उस कक्ष की दिवार पे चलाये असलम खान समाज चूका था ये जो कोई भी है सामान्य इंसान नहीं है दर के मारे असलम खान वही बेहोश हो गया

निर्भयासुर ......जब पाप किये तो बड़ी दिलेरी से आवर जब उन्हें पापो की सजा भुगत ने का वक़्त आया तो इतना कमजोर निकला

निर्भयासुर ने असलम खान को गायब कर बॉस को जहा रखा वही पहुंचा दिया

निर्भयासुर ...........अब बरी है दीनदयाल तुम्हारे काळा साम्राज्य को नस्ट करने का

निर्भयासुर वह से निकल दीनदयाल की फैक्ट्री पहुंचा जो बहार से दिखने के लिया फैक्ट्री थी पैर अंदर फैक्ट्री के निचे यही से दीनदयाल आवर गजेंद्र पुरे दिल्ली में ड्रग्स सप्लाई किया करते थे ऐसे दिल्ली में अलग अलग जगह पे 4 फैक्ट्री आवर भी थी

निर्भयासुर पूरी फैक्ट्री की जाँच कारक के बाद एक ब्लास्ट करने लगता है अपनी ऊर्जा से करोड़ो की कीमत का ड्रग्स जल कर खख हो गया

वह से दूसरी फैक्ट्री पहुंचा जहा से हतियार सप्लाई होते थे यहाँ काफी मरता में हतियार हे नहीं गुंडे भी मौजूद थे सब कहते हुए मक्कार बदमाश निर्भयासुर सभी गुंडों को मार उनके सर को फैक्ट्री की दिवार पे तंग पुलिस को हथियारों की खबर देता है कुछ हे देर में पुलिस वह आ कर करोड़ो के हठी यार जप्त कर लेती है

निर्भयासुर ....... यहाँ का काम पूरा हुआ

सूर्य ......जल्दी तीसरी फैक्ट्री के गोडाउन पहुँचो वह से सभी लड़कियों को वो लोग कही आवर सिफत कर रहे है साथ में पुलिस को भी मैसेज दे दो

निर्भयासुर वह से निकल सीधा गोडाउन पहुंचा जहा करीब 18 से 25 के उम्र के बिच उतनी हे संख्या में लड़कियों को बंदी बनाया रखा था

जीवानंद ...... ( जिसके अंडर में ये गोडाउन आता था )

जीवानंद .......जल्दी से इन सभी को कंटेनर में डालो आवर निकलो यहाँ से इस से पहले की कोई आया आये

निर्भयासुर ........आ गया है तुम सभी की मौत बन दंडनायक निर्भयासुर तुम वो भेड़िया हो जो इंसानी जिसम का सोडा करते हो

जीवानंद ......कोण हो तुम आवर यहाँ कैसे पहुंचे

निर्भयासुर ....... सभी लड़कियों को आज़ाद कर क्षमा मानगो तो आसान मृत्यु होगी तुम्हारी अन्यथा टिल टिल कर मरूंगा तुम सभी को जो भी नारी जाती को केवल भोग की वास्तु समझता है उनके लिया मेरे दिल में कोई रहम नहीं होती

बहार से पुलिस साइरन की आवाज से पता चल गया था की पुलिस पहुंच चुकी है

कुछ गुंडे आगे भाड़े निर्भयासुर की तरफ तो निर्भयासुर अपना खंजर निकल उन्हें जख्मी कर तड़पने के लिया छोड़ आगे भाड़ गया

ीदार पुलिस किसी तरह गेट तोड़ अंदर आ पहुँचू

जब तक पुलिस लड़कियों तक पहुँचू निर्भयासुर आधे गुंडों के सरीर को अनगिनत जखम दे चूका था

इस टीम में खुद कमिश्नर के साथ साथ दीप्ती भी मौजूद थी

पुलिस को देख जीवा अपने हथ्यार दाल आत्म समर्पण कर देता है

निर्भयासुर ...... पुलिस तुम्हारी मुझसे रक्षा नहीं कर सकती कहा था मैंने लड़कियों के पेअर पकड़ क्षमा मांग को तो मृत्यु आसान मिलेगी पैर तुम नहीं मने

कमिश्नर ...... रुक जो वर्ण तुम्हे गोलियों से भून दिया जायेगा कानून को अपने हाथ में न को आवर खुद को हमारे हवाले कर दो

निर्भयासुर ....... तुम्हारे ये खिलोने मुझे छू भी नहीं सकते है कमिश्नर इन सभी की मृत्यु आज हो कर रहेगी तुम्हे मैंने इस लिया नहीं बुलाया था की तुम इन जैसे भेड़िया की रक्षा करो बल्कि इस लिया बुलाया था की इन लड़कियों को सुरक्षित इनके परिवारजनों तक सकुशल पहुंचा सको सप मिस दीप्ती ये कार्य आपको करना है इन सभी लड़कियों को बिना किसी परेशानी के इनके परिवारजन तक पहुंचने का कार्य तुम करोगे

निर्भयासुर को आगे भढ़ते देख कमिश्नर आवर उसकी टीम निर्भयासुर पे गोलिया चलने लगती है पैर कोई भी गोली निर्भयासुर को छू तक नहीं पति

निर्भयासुर ........बस बहुत हुआ कमिश्नर कल तक तुम्हारे डिपार्टमेंट से इन जैसो के तलवे चाटने वालो को सजा नहीं दी तो मैं खुद उन्हें मौत दूंगा वो भी दिल्ली की जनता के बीचों बिच अब हटो मेरे रस्ते से

निर्भयासुर के हाथ के इसारे से सभी पुलिस वालो की गन उनके हाथ से दूर जा गिरी

निर्भयासुर ने सभी पुलिस वालो को स्थम्बित कर दिया था जिस से कोई भी अपनी जगह सा न हिल प् रहे थे आवर न कुछ बोल प् रहे थे

निर्भयासुर सभी गुंडों को अपने खंजर से तड़पा तड़पा कर मार रहा था केवल जीवा को छोड़ सभी की गर्दन अलग कर वही छोड़ दी

सभी लड़कियों को के हाथ पेअर खोल निर्भयासुर जीवा को लेने के लिया आगे बढ़ा तो उनमे से एक लड़की हिमत जूता कर निर्भयासुर के सामने आ खुदी हुई

लड़की ......क्या मैं अपने इस भाई का नाम जान सकती हूँ जिसने हम सभी की रक्षा की है

निरभयऔर ...... तुम्हे मुझसे दर नहीं लगता क्या देखो उन सभी को कैसे दर से कानो रहे है

लड़की ...... बहन को भाई से कैसा दर

निरभयऔर ....... दंडनायक निर्भयासुर नाम है मेरा कभी भी इस भाई की जरुरत मह्सुश हो बस एक बार दिल से याद कर लेना तेरा भाई तेरे सामने होगा तुझे गुड़िया कहु या मुस्कान

मुस्कान ....... आप मेरा नाम भी जानते है आप को जो अच्छा लगे वही कहो भैया

निर्भयासुर ......... सुनो कमिश्नर कल दोपहर तक का समय है तुम्हारे पास अपने डिपार्टमेंट से गदारो को निकलने का उसके बाद मैं सीकर करूँगा वो भी सभी के सामने चलो गुड़िया तुम्हे घर छोड़ देता हूँ

निर्भयासुर उस लड़की आवर जीवा को ले कर वह से गायब हो गया

कमिश्नर ........ये कुआ था दीप्ती बीटा

दीप्ती ........ सर मैंने पहले हे कहा था हमारे डिपार्टमेंट के बारे में अब इसने जो कहा है नहीं किया तो ये कल अपना सीकर करेगा जिसे हम नहीं रोक सकते क्युकी ये इंसान नहीं है इसके पास सुपरपावर है जिसका सामना हम नहीं कर सकते बेहतर रहेगा की हम अपने डिपार्टमेंट में से उन सभी पे एक्शन ले जो गद्दार है मैं इन लड़कियों को ले कर जा रही हूँ सर ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
अपडेट ..... 236

मुस्कान ....... आप मेरा नाम भी जानते है आप को जो अच्छा लगे वही कहो भैया

निर्भयासुर ......... सुनो कमिश्नर कल दोपहर तक का समय है तुम्हारे पास अपने डिपार्टमेंट से गदारो को निकलने का उसके बाद मैं सीकर करूँगा वो भी सभी के सामने चलो गुड़िया तुम्हे घर छोड़ देता हूँ

निर्भयासुर उस लड़की आवर जीवा को ले कर वह से गायब हो गया

कमिश्नर ........ये कुआ था दीप्ती बीटा

दीप्ती ........ सर मैंने पहले हे कहा था हमारे डिपार्टमेंट के बारे में अब इसने जो कहा है नहीं किया तो ये कल अपना सीकर करेगा जिसे हम नहीं रोक सकते क्युकी ये इंसान नहीं है इसके पास सुपरपावर है जिसका सामना हम नहीं कर सकते बेहतर रहेगा की हम अपने डिपार्टमेंट में से उन सभी पे एक्शन ले जो गद्दार है मैं इन लड़कियों को ले कर जा रही हूँ सर ............

अब आगे ............

परीलोक ......... रानी पारी ........ गुरुदेव क्या ये जो कुछ हो रहा है वो उचित हो रहा है इस तरह तो पृथ्वीलोक में बहुत से मानव मरे जायेंगे

गुरीदेव ......... आप अभी स्व विचलित हो उठी रानी पारी अभी तो आपने कुछ भी नहीं देखा है ये तो केवल आरम्भ है इसका अंत कहा होगा हम भी नहीं जानते है

रानी पारी ......हम मानते है की बुरे करम करने वालो को सजा मिलना उचित है पैर इस तरह कत्ले आम करना कहा तक उचित है

गुरुदेव ....... हम इस विषय पे पुत्र सूर्य से केवल चर्चा हे कर सकते है क्यों की जो कुछ भी वो कर रहा है वो सब नये सांगत है मानते है की पृथ्वीलोक पे कलयुग के कारन मानव अच्छी का त्याग कर बुराई का दमन थम रहा है यही कारन है की मानव के मन से भय मिट चूका है पुत्र सूर्य का ये असुर अंश ुशी भय को सभी के दिल में फिर से जनम दे रहा है

रानी पारी ....... आपका कथन उचित है गुरुदेव सायद है इस नरशनगर के कारन विचलित हो उठे गुरुदेव

गुरुदेव ....... हम समाज सकते है रानी पारी आप एक माता है माता का हृद्या ममतामयी होता इशू लिया आप इस दृशय को देख विचलित हो गयी है हमने तो पुत्र निर्भय असुर का वो भयाभय रूप देखा है जिसके समकक्ष ये रूप उसका समय रूप है

गुरुदेव नागलोक में सूर्य के असुर रूप दर्जन करने से ले कर शालिनी जी मानसी के साथ काश में पहुंचने तक का वो दृश्य दिखते है

रानी पारी ......... पुत्र सूर्य इतने क्रूर कैसे हो सकता है गुरुदेव जिस तरह उन नागो के अंत करते समय जो क्रूरता थी उसे देख हमें स्वयं को पुत्र सूर्य के इस रूप से भय लग रहा है गुरुदेव

गुरुदेव ....... आपका ये हाल है तो हमारा उस समय क्या हाल हुआ होगा रानी पारी वो केवल हम हे जानते है जब पुत्री किरण पुत्र निर्भयासुर के क्रोध को रोकने में विफल रही तो विवश हो कर हमें पुत्री शालिनी को पुत्र निर्भय असुर के समक्ष लाना पड़ा पुत्री शालिनी के एक बार पुकारे जाने पे निर्भयासुर में जो परिवर्तन जो बदलाव हमने देखे हम उसे शब्दों में समजा नहीं सकते जो पहले क्रोध में किसी ज्वालामुखी के जैसे दहन रहा था वही पुत्री शालिनी द्वारा पुत्र कहे जाने पे अपना सम्पूर्ण क्रोध त्याग वो किसी नन्हे बालक के सामान बदल गया जिसने केवल अपनी माता के प्रेम के अलावा कोई चाहत हे न रही हो

रानी पारी ......बड़ा हे विचित्र व्यक्तित्व है निर्भयासुर का गुरुदेव

गुरुदेव ........ आपने सत्य कहा रानी पारी पुत्र दंडनायक निर्भयासुर का व्यक्तित्व बड़ा हे विचित्र आवर जटिल है

रानी पारी ......हम आपका तात्पर्य नहीं समजे गुरुदेव ऐसा क्या है निर्भयासुर के विषय में जो आप भी विचलित दिखाई दे रहे है

गुरुदेव ......... हमारे विचलित होने का कारन खुद पुत्र निर्भयासुर है हम इसके भूतकाल के विषय में कुछ भी ज्ञात नहीं कर प् रहे है रानी पारी न हे परबु हमें कोई संकेत दे रहे है

रानी पारी .......फिर तो अवश्य इसके पीछे कोई महत्वपूर्ण कारन रहा होगा गुरुदेव

गुरुदेव ......परबु की महिमा परबु हे जाने इनकी इच्छा बिना तो भारमंद भी गतिमान नहीं होता फिर इनके इच्छा के विरुद्ध हम कैसे किसी के विषय में जान सकते है जब परबु की इच्छा होगी तो सफाया परबु सत्य तक पहुंचने का मार्ग दिखाएंगे

दिल्ली ..........

निर्भयासुर मुस्कान उर्फ़ गुड़िया को उसके घर ले कर गया

निर्भयासुर ........ मुस्कान तुम्हारे माता पिता तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे है जाओ आवर किसी बात की चिंता मत करना

मुस्कान .......क्या मैं अपने भाई का चेहरा देख सकती हूँ जिसने मेरी जान बचाई क्या उसका चेहरा भी देखना नसीब नहीं होगा मुझे

निर्भयासुर ...... ये मेरा वास्तविक रूप या चेहरा नहीं है आवर न मुझे अपना वास्तविक चेहरा दिखने की इजाजत है गुड़िया

मुस्कान ......आपको किस की इजाजत चाइये भैया आप किसी के गुलाम थोड़े है

निर्भयासुर .......... अब तुम्हे कैसे समज़ॉन मैं

मुस्कान ......ठीक है मैं आप पे जोर नहीं डालूंगी पैर अपना असली नाम तो बता सकते हो मुझे इस मुखोटे के बिना असल जिंदगी में जो आपकी पहचान है

निर्भासुर ...... असल जिंदगी में मेरा कोई अस्तित्व नहीं है जिनके अस्तित्व से जुड़ा हूँ वो है सूर्य ठाकुर बस इस से ज्यादा कुछ मत पूछना मैं बता नहीं सकता अब जाओ घर

मुस्कान बिना किसी दर के निर्भयासुर के गले लग जाती है उसकी आँखों से कुछ बुँदे आंसू निर्भयासुर के सीने पे गिर जाती है

निर्भयासुर को मुस्कान के गले लगने पे जो सुकून मह्सुश हुआ उसे सब्दो में बया करना दोनों के लिया हे कठिन था मुस्कान के दिल में जो हमेशा एक भाई की खवाहिश थी आज वो पूरी हुई

निर्भयासुर ....... अब जाओ मुझे कई आवर जाना है याद रखना जब भी तुम्हे मेरी जरुरत हो मुझे बस याद कर लेना

मुस्कान ......जी भैया bye

निर्भयासुर कुछ देर मुस्कान को देखता रहा जब वो भीतर बंगलो में चली गए तो वह से गायब हो निकल चला अपने मिशन पे कुछ आवर पापियों का नाश कर कुछ आवर को जीवा असलम के पास पहुंचा कर

नर्भयासुर सूर्य में बदल जब अपने बगलो पे पहुंचा तो राधिका जी सो चुकी थी सूर्य का इन्तजार करते करते समय भी तो 1 से ऊपर हो चूका था काज़मी है नींद आणि हे थी

अभी अपने कपडे बदल हे रहा था की तभी उसके कानो में किसी के द्वारा पुकारे जाने की आवाज सुनाई दी

....मेरे मसीहा मेरे मुक्तिदाता मेरी रक्षा करो मेरी सहायता करो इस शैतान तांत्रिक के बंदन से मुक्ति दो मुझे ......

सूर्य आँखे बंद कर उस आवाज का पीछा किया तो जो दृश्य सूर्य के समक्ष आये उसे देखे सूर्य को एक पल न लगा दंडनायक निर्भासुर में बदलने में

निर्भयासुर फोरों वह से निकला गुस्से में निकला

आइये देखते है सूर्य ने ऐसा क्या देख लिया जो जिसने सूर्य को निर्भयासुर में बदलने के लिया विवश कर दिया

सूर्य जब उस आवाज का पीछा कर उस उसे पु करने वाले को देखा तो वो कोई आवर नहीं बल्कि जयलक्मी थी जिसे कुछ तांत्रिक जैसे सिखने वाले लोग तंत्र क्रिया से बंदक बना रहे थे आवर लक्समी सूर्य को पुकार रही थी मदद के लिया

दरशल तांत्रिक मारीच मध्यरात्रि को हे लक्समी की पवित्र आत्मा को कैद करने की विधि आराम कर देता है किन्तु लक्समी को सूर्य की मदद प्राप्त होने वह उसकी पहुंच से बहार होने के कारन उसके हाथ नहीं आ रही थी

शिष्य 1 .......गुरुदेव आज इतना समय क्यों लग रहा इस से पहले तो कभी इतना समय नहीं लगा किसी भी आत्मा को बंदक बनाने में फिर आज कैसे

मारीच ....... आज हमारी तंत्र किर्या में इतना समय क्यों लग राग है ये हम भी नहीं जानते या तो ये आत्मा बहुत सकती शैली है या फिर कोई इसका रहनुमा है जिसके कारन हमें इतना समय लग रहा है

दिनु ......गुरुदेव अब आप हे मेरे जीवन की रखा कर सकते है उस चुड़ैल लक्समी से

मारीच ....... में रहो मूरख हम अपना कार्य कर रहे है अवश्य हम से कुछ चूक हुई है उस आत्मा का पूर्ण सत्य हमसे तुमने चुप्या है क्या

दिनु ......नहीं गुरुदेव हम ऐसा क्यों करेंगे हम तो कुढ़ उस लक्समी से बचने के लिया आपकी सरन में आये है

मारीच ...... क्या ये उसका नक्षत्र नाम है

दिनु ......मैं कुछ समजा नहीं गुरुदेव

शिष्य 1 ......क्या लक्समी उस आत्मा का पूरा नाम है कुंडली अनुसार

दिनु ......कुंडली आंसर उसका नाम ये नहीं है उसका पूरा नाम जयलक्मी है गुरुदेव

मारीच गुस्से में दिनु के सीने पे बे थे बे थे हे लात मरता है दिनु लात खा कर पीछे की तरफ लुढ़क जाता है 80 .85 की उम्र में भी मारीच की बजाओ में काफी बल था

मारीच ......मुर्ख तुम्हारे कारन आज हमारी तंत्र विधि खंडित हो जाती

दिनु अपने सीने को पकडे हुए मारीच से माफ़ी मांगता है

मारीच फिर से तंत्र क्रिया आराम करता है कुछ आधे घाटे बाद उसे कुछ सफलता मिलती है जब लक्समी की आत्मा को अपने क्षेत्र में प्रवेश कार्य हुआ वो तंत्र क्रिया से देखता है

मारीच आवर उसके शिष्य तंत्र क्रिया के मंत्र उच्चारण करने की गति बढ़ा देते है

देखते हे देखते लक्समी किसी काली ऊर्जा के घेरे में बंदी उस तंत्र क्रिया की बिच आ कड़ी होती है

लक्समी ......... तांत्रिक मुझे अपने तंत्र से मुक्त करो वर्मा मैं तुम सभी का विनाश कर दूंगी मुझे केवल इस शैतान को मरना है

t.marich .....ये मेरे सरन है में इसका तुम कुछ नहीं बिगड़ सकती अग्नि को साक्षी मान हमारी गुलामी स्वीकार करो तुम्हे इस पीड़ा से मुक्ति प्रदान कर दूंगा

लक्समी .....कभी नहीं तुम्हारे जैसे नीच तांत्रिक की गुलामी स्वीकार करने से अच्छा है मैं अपनी मुक्ति तक ये लास्ट सहती रहूं मैं तुम्हारी गुलामी कभी स्वीकार नहीं करुँगी डस्ट तांत्रिक

लक्समी द्वारा अपने हे शिष्यों के समक्ष अपना अपमान होता देख तांत्रिक क्रोध में कोई बसम जैसा कुछ लक्समी की बंदी आत्मा पे डालता है जिस से लक्समी की चुके उस खंड हर में गूंज उठी ( ये चुके केवल वही सुन सकते है जिनके पास कोई एब्नार्मल पावर्स हो ) दिनु लक्समी को इस तरह तड़पता देख खुश हो रहा था पैर आगे भड़ने की निकट अभी भी नहीं थी

लक्समी ...... मुझे मुक्त कर दे तांत्रिक वर्ण बहुत पछतायेगा इस शैतान के साथ साथ तुम सब भी मरोगे

t.marich .........कोण तू मारेगी हमें जो मेरी कैद से मुक्त नहीं हो सकती वो मेरा अंत करेगी आज तुम्हे मीका कर कुल 101 तुम्हारे जैसी हे आत्माओ को मैंने अपना बंदक बना लिया है शिष्य समय आ गया तुम्हारे गुरु का इस लोक पे राज करने का सभी आत्मा को एक करने के पश्चात इन सभी की सकतिया मेरी होगी जिसका इस लोक में कोई सामना नहीं कर पायेगा

लक्समी ......हाहाहाहा मुर्ख डस्ट पापी तुम्हारे ये सपना कभी पूरा नहीं होगा तुमने अपने जीवन की सबसे बड़ी 2 भूल की पहली इस दुरस्त को पापी शैतान दिनु को जिसने मुझे बहन मन आवर मेरी हे ेजात लूट ली दूसरी गलती तुमने मुझे बंदक बना कर की है अब अपनी की गलतियों की सजा भुगति ने को त्यार रह शैतान तांत्रिक

तांत्रिक मारीच गुस्से में लक्समी का गाला दबाने लगता है

लक्समी ........मेरे मशीहा मेरे मुक्तिदाता मेरी रक्षा करो मेरी सहायता करो इस शैतान तांत्रिक के बंदन से मुक्ति दो

..... यही वो सबद थे जो सूर्य को सुनाई दिए आवर उसका क्रोध निर्भयासुर के रूप में जागृत हुआ.....

t.marich ........ किसे पुकार रही हो तुम तुम्हे मुझसे कोई मुक्त नहीं कर सकता मुर्ख आत्मा इस तांत्रिक मारीच के पंचे से उसका सीकर कोई नहीं चीन सकता बुला अपने मसीहा अपने मुक्तिदाता को मैं भी तो देखु कोण है वो जो तुझे मौसे बचने का जिगरा रखता है

तभी वह एक जोरदार दमका होता है चारो तरफ भूकंप जैसा माहौल था जैसे किसी ने पूरी डर्टी हे हिला कर रख दी हो

तांत्रिक मारीच का तंत्र घेरा कबका उस दमके से खंडित हो गया था मारीच आवर उसके शिष्य इस दमके से दूर जा गिरे थे

जब वह की दल मिटटी कुछ साफ हुई तो मारीच के सामने काज़मी कड़ी मुस्कुरा रही थी

लक्समी .......... मैंने कहा था न तांत्रिक ये तुमने इस हे अपने सरन में ले कर अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती की फिर मुझे कैद करने की अब अपने गलती का अंजाम भुगतने को त्यार हो तुम मेरे मसीहा को देखना चाहते थे न देखो वो आ गया है

लक्समी मारीच के सामने से हाथ जाती है तब मारीच की नहर अपने कुछ दुरी पे खड़े दंडनायक निर्भयासुर पे पादरी है उसे देखते हे मारीच को अपनी सासे रूकती हुई मह्सुश होने लगी उसका गाला अचानक से सिखने लगता है

निर्भयासुर ........ तांत्रिक मारीच तुमने परबु भक्त अघोर समुदाय को लॉज़िट किया है आवर इसका दंड तुम्हे मिलेगा तुमने उस अघोरी विद्या का दूर उपयोग किया है जो तुमने अघोरी बन अपने गुरु से प्राप्त की किन्तु तुम अपने मोह माया के बंदनों में उलझ उस दिव्या ज्ञान का दुरूपयोग किया जो किसी भी पवित्र हृद्या अघोरी को परबु से जोड़ता

है आज तुम्हे तुम्हारे हर करम का दंड भोगा होगा किन्तु उस से पूर्व तुम्हे अपने गुरु का सरीर त्यागना होगा आवर अपनी वास्तविक सरीर को अपनाना होगा जिस गुरु ने तुम्हे अपना समस्त ज्ञान समस्त सीढ़ियों की शिक्षा दी तुमने ुशी गुरु के साथ चल किया तुम एक गुरुद्रोही हो

तांत्रिक मारीच ......कोण हो तुम तुम ये सब कैसे जानते हो जो कोई नहीं जनता कोण हो तुम

निर्भयासुर ........ तुम्हारे जैसे के लिया दंडनायक निर्भयासुर हूँ मैं

निर्भयासुर कुछ मंत्रो उच्चारण करता है देखते हे देखते वह की जमीं दो हिशो में बाद जाती है आवर वह से एक बड़ा सा बॉक्स निकलता 3 फिट छोड़ा 7 फिट लम्बा काळा कपडे से देखा

T.marich ......नहीं मुझे जाने दो मैं सभी बुरे करम छोड़ दूंगा मैं अघोर गुरु भरमानन्द से भी क्षमा मांग लूंगा

निर्भयासुर ........... क्षमा मांगने का वक़्त निकल चूका है अब वक़्त है दंड पाने का आवर दंडनायक निर्भयासुर दंड देने में कभी कोटि नहीं करता करम अनुसार दंड देता है

निर्भासुर के इस अरे से उस बॉक्स के हवा में हे चीथड़े चीथड़े हो गए उसने किसी का सव रखा हुआ था काळा कपड़ो में बाँदा हुआ

निर्भयादुर के मंत्र उच्चारण करते हे t.marich की चिकने निकलने लगी जैसे जैसे निर्भयासुर के मुँह से मंत्र उच्चारण होता गया उसकी चिकने बढ़ती गयी

कुछ हे पल में t.marich का सरीर जमीं में गिर गया

t.marich की आत्मा उस (/गुरुदेव ) सरीर से निकल उस काले कपडे में बन्दे निर्जीव सरीर में प्रवेश कर गयी

निर्भयासुर .......अघोर गुरुदेव भरमानन्द आप अपने सरीर को अपना सकते है

निर्भयासुर ने ये पास में कड़ी उस दिव्या आत्मा को देख कर कहा था

अगर गुरु ......नहीं पुत्र ये सरीर अवश्य मेरा है है किन्तु अब वो इस डस्ट के कर्मो आवर तंत्र किरियो से दूषित हो चूका है पुत्र जिसे मैं दर्जन नहीं कर सकता नहीं किसी आवर सरीर को

ीदार t.marich अपने सरीर में प्रवेश कर चूका था

लक्समी अब तक दिनु को इतना प्रताड़ित कर चुकी थी की के अब केवल उसकी सांसे हे चल रही थी

निर्भयासुर ......लक्समी इसका अंत नहीं करना इसका नजब सभी के सामने खतना चाइये उसके पश्चात तुम इसका अपने हाथो से अंत कर सकती हो

लक्समी ......इसके दो साथी आवर भी है

निर्भयासुर ....... चाहो तो उन्हें भी दण्डित कर सकती हो बस किसी के प्राण न लेना

लक्समी ..... आपका बहुत बहुत शुक्रिया

अगर गुरु .......पुत्र निर्भयासुर इस डस्ट को उन्ही आत्मा के हठी दंड मिले जिसे इसने अपने लालच के लिया वर्षों से बंदी बनाया हुआ है वो सभी उस कक्षा में तंत्र मंत्र से रक्षित है

निर्भयासुर अपनी सोर्ड उस दिशा में फेक देता है एक तेज दमके साथ हे उस कक्षा के चीथड़े चिठ्ठे ुध गए सभी आत्माये t.marich के तंत्र किर्या से मुक्त हो चुकी थी सभी आत्माये मारीच के नए सरीर जिसमे मारीच को बलपूर्वक प्रवेश कराया था निर्भयासुर ने मंत्र सकती से उस पे टूट पड़ती है

निर्भयासुर ....... गुरुदेव मेरे लिया कोई आवर आदेश

अघोर गुरु ........ पुत्र ये देह अवश्य ा पवित्र हो चुकी है किन्तु मेरी आत्मा इस से तभी मुक्त हो सकती है जब इसका विधि पूर्वक दाह संस्कार हो अघोर निति अनुसार इस लिया इस देह को मेरे शिष्य तक पहुंचा दो जो यहाँ से कुछ दुरी पे प्रतीक्षा कर रहे है

निर्भयासुर .......जी गुरुदेव जैसी आपकी इच्छा

अगोरगुरु ........ पुत्र निर्भयासुर मैं चाहता हूँ की अपनी समस्त सिंधिया तुम्हे प्रदान करू किन्तु तुम्हे इसके लिया तुम्हे सभी बंदनों से मुक्त होना होगा

निर्भयासुर ....... क्षमा करे गुरु अघोर आपके आदेश को न मैंने के लिया आप जो चाहे उचित सजा दे सकते है किन्तु मैं सांसारिक बंदनों से मुक्त नहीं हो सकता हूँ

अघोर गुरु ......किस लिया उस कन्या के लिया या अपनी उस बहन के लिया जो मिथ्या है

निर्भयासुर ........नहीं गुरु अघोर अपने स्वामी की सेवा से आवर अपनी माता के प्रेम से

जिस बहन के विषय में आप कह रहे है मैं जनता हूँ वो आपकी पौत्री ( पोती ) है आवर ये सब आपने हे अपनी सीधी के प्रयोग से किया था जब उसने भाई कह कर गले से लगाया ुशी पल मैं समाज गया था की उसके भीतर कोई दिव्या ऊर्जा है किन्तु जब यहाँ पे पहुंचा तो आपने सर्वप्रथम वो दृश्ये दिखाए मुझे जो आपके आवर t.marich के बिच घटित हुए

गुरु अघोर ....... उचित कहा पुत्र जब तुमने इस रूप को दर्जन किया तभी हमें तुम्हारे विषय में ज्ञात हुआ तब तुम्हारी परीक्षा लेने के लिया हे हमने तुमपे ध्यान में नजर राखी फिर हमने अपनी पोती मुस्कान को उन लड़कियों के बिच पहुचाये जिन्हे उन दोस्तो ने कैद किया था

निर्भयासुर .......... तो क्या हम आपकी परीक्षा में सफल हुए

गुरु अघोर ........है पुत्र तुम सात प्रतिसत सफल हुए हमारी परीक्षा में इस लिया हम अपनी समस्त सिडिया तुम्हे आदिवाद फलसवरूप अर्पित करते है

निर्भयासुर ....... हम आपकी इच्छा के विरुद्ध नहीं जा सकते है हमें आपका आशीर्वाद स्वीकार है गुरुदेव

गुरु अगर ......... तुम उन सीढ़ियों को तभी ग्रहण कर सकते हो पुत्र जब तुम अपने वास्तविक रूप में हो अपने वास्तविक रूप में हमारे समक्ष आओ

निर्भयासुर .......हमें कुछ समय मिलेगा गुरुदेव तब तक हम इन सभी मारीच शिष्यों को यमलोक भेज दे

गुरु अघोर .......अवश्य पुत्र हम गंगा किनारे तुम्हारी प्रतीक्षा करेंगे पुत्र उन सभी कन्या को भी अपने साथ लाना पुत्र जिन्हे तुम यहाँ से मुक्त किये हो

गुरु अघोर वह से गायब हो गए निर्भयासुर उन सभी शिष्यों ो का नट कर अंत में t.marich की सरीर के पास पहुंचा जिसे आत्मनो ने टुकड़े टुकड़े कर दिए थे

निर्भयासुर दिनु चंद्रु गजेंद्र को वह से गगयाब कर उसके उचित स्थान पे भी दिया आवर उन सभी आत्माओ को अपने साथ ले गंगा किनारे गुरु अघोर के पास जा पहुंचा

गुरु अघोर की आज्ञा मान निर्भयासुर उन सभी आत्माओ के साथ गंगा जी के पवित्र जल में डुबकी लगा खुद को आवर उन सभी आत्माओ को पवित्र कर दिया

एक एक कर सभी आत्माये मुक्ति प् चुकी थी केवल लक्समी को छोड़ कर

गुरु अघोर ........ पुत्र अपने वास्तविक रूप में हमारे सामने विराज मन हो जाओ

निर्भयासुर सूर्य रूप में आ गुरु अघोर द्वारा बताने अनुसार करता है गुरु अघोर कुछ देर ध्यान में लीं होते फिर अपना हाथ सूर्य के सर पे रख देते है गुरु अघोर की आत्मा से कुछ रौशनी निकल सूर्य के मस्तिष्क में पहुंचने लगती है

कुछ देर ये किर्या निरंतर चलती रही फिर गुरु अघोर ने अपना हाथ सूर्य के सर से हटा लिया

गुरु अघोर ......पुत्र सूर्य तुम एक दिव्या अंश हो परबु के ये सत्य हमसे क्यों छुपाया पुत्र अब हमारी इच्छा है तुम हमारी देह को अग्नि अर्पित करो मेरे शिष्य के साथ ताकि मैं परबु में सम्माहित हो साकू मुक्ति प्राप्त कर साकू

सूर्य ....... अगर यही आपकी इच्छा है तो एक शिष्य अपने गुरु की इच्छा को कैसे ताल सकता है मैं आपकी इच्छा अवश्य पूर्ण करूँगा गुरुदेव

सूर्य लक्समी को भेज एक बार फिर खंड हर जाता है जहा से वो गुरु भरमानन्द के सरीर को ले कर उनके शिष्यों सोंपता है जो कुछ विधि पूर्ण कर चन्दन साया त्यार कर लिटा देते है

एक शिष्य आगे आता है जो की गुरु भरमानन्द के बाद इस अघोर समुदाय के नए गुरु थे

गुरु .....पुत्र गुरुदेव की इच्छा है की उनका अंतिम संस्कार तुम करो

सूर्य ......जी मैं जनता हूँ आवर मैंने उन्हें आस्वस्त किया है की उनकी इच्छा अवश्य पूर्ण करूँगा

सूर्य गुरुदेव की चिटा को अग्नि दे कुछ कदम पीछे हो जाता जाता आवर वह से पलट कर चल देता है क्युकी यही अगर नियम थे

सूर्य ......अब मुझे आज्ञा दे सूर्य उदय होने वाला है

न. गुरु ....... अवश्य पुत्र हम ये तो नहीं जानते तुम कोण हो पुत्र किन्तु तुम्हारे मस्तक की रेखाएं बहुत हे तेज मई है अवश्य तुम विशेष हो पुत्र इस तुम पे सदैव अपनी कृपा दृस्टि बनाये रखे

सूर्य उन्हें परनाम कर वह से निकल गया

करीब 3 बजे सूर्य घर पहिचा आवर सनान कर अंडरवियर में जा कर राधिका को बहो में भर कर सो गया ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
 
अपडेट. 237

गुरु .....पुत्र गुरुदेव की इच्छा है की उनका अंतिम संस्कार तुम करो

सूर्य ......जी मैं जनता हूँ आवर मैंने उन्हें आस्वस्त किया है की उनकी इच्छा अवश्य पूर्ण करूँगा

सूर्य गुरुदेव की चिटा को अग्नि दे कुछ कदम पीछे हो जाता जाता आवर वह से पलट कर चल देता है क्युकी यही अगर नियम थे

सूर्य ......अब मुझे आज्ञा दे सूर्य उदय होने वाला है

न. गुरु ....... अवश्य पुत्र हम ये तो नहीं जानते तुम कोण हो पुत्र किन्तु तुम्हारे मस्तक की रेखाएं बहुत हे तेज मई है अवश्य तुम विशेष हो पुत्र इस तुम पे सदैव अपनी कृपा दृस्टि बनाये रखे

सूर्य उन्हें परनाम कर वह से निकल गया

करीब 3 बजे सूर्य घर पंहुचा आवर सनान कर अंडरवियर में जा कर राधिका को बहो में भर कर सो गया ...............

अब आगे ............

सुबह जब 05.ऍम को अलार्म से राधिका की आँखे खुली तो खुद को सूर्य के बहो में लेते हुए पाया ुनिधि में राधिका सूर्य के सीने से चिपके फिर से आँखे बंद कर लेती है

सूर्य ......... आँखे बंद कर लेने से समय नहीं रुकने वाला राधिका ये अलार्म तुम्हारे लिया हे लगाया था उठो आवर घर जाओ सुबह होने वाली है है

राधिका ....... आप कब आये रात में आवर मुझे क्यों नहीं उठाया आपने

सूर्य ........ तुम्हारी नींद ख़राब नहीं करना चाहता था इस लिया नहीं उठाया मैंने तुम्हे

राधिका सूर्य की कमर पे एक पेअर चढ़ा कर सूर्य के होंटो को घूमने लगती है

सूर्य भी राधिका की वाइट पंतय में कैद उन मुलायम गोर गद्देदार कूल्हों को मसलते हुए किश करने लगा





सूर्य .......उम्म्म्मः लगता है बिना चल बदले आप मानेगी नहीं न

राधिका ........बिलकुल नहीं ऐसा मौका मैं नहीं घोष सकती आवर आपको भी अपने बेटे का ख्याल रखना होगा ुम्मम्हा अब जल्दी से मुझे मेरी खुराख दीजिये

सूर्य राधिका को किसी छोटे बचे की तरह गुमा देता

राधिका .......आपने तो मुझे डरा हे दिया

सूर्य ......... जल्दी कीजिये कही कोई उठ गया तो आपको प्रॉब्लम हो सकती है

सूर्य राधिका की पेंटी के ुवेर से हे उसकी फुल्ली हुई छूट को सहलाने लगा

राधिका भी ख़ुशी से सूर्य की अंडरवियर में हाथ दाल उस अजगरनुमा लैंड को फैन पकड़ कर पिटारे से बहार निकल लेती है









सूर्य ......सुबह सुबह इतना गीलापन

राधिका ....... ये सब आपकी वजह से हो रहा है जब भी आप पास होते हो तो ये आंसू बहाने लगती है

सूर्य राधिका की छूट के होंठ अपने होंठो में भर कर खींच देता है

राधिका भी मस्ती में सूर्य के मोठे सुपडे पे हलके से काट लेती है

सूर्य राधिका की पेंटी आवर ब्रा निकल पंक्त है राधिका सूर्य की अंडरवियर उसके पैरों से निकल कर अलग कर देती है

सूर्य राधिका को अपने ऊपर खींच कर उसकी जंगो की बिच उसकी महकती हुई छूट को चाटने लगता है





राधिका सूर्य के लैंड को पूरा निकलने को कोशिश करती है पैर करीब 4 इंच से ज्यादा ले नहीं पति

कुछ देर दोनों एक दूसरे के कमुख अंगो को सह लेट है चूसते है

सूर्य समय की कमी की समझते हुए राधिका को सवयं से हटा कर बीएड पे राधिका को घोड़ी बना उसके पैरों को थोड़ा आदिल खोल कर अपना मोटा सूपड़ा राधिका की पनियाई हुई छूट पे जिसने लगता है

राधिका ......अब दाल भी दीजिये मुझे ऐसा तड़पाने में मज़ा आता है है क्या अह्ह्ह्ह माँ माआरररर डाला

सूर्य का मोटा सूपड़ा राधिका की छूट के छाले को फैलाया हुआ जब अंदर गुस्सा तो राधिका की खुली हुई छूट आवर आदिक खुल गयी हलके दर्द के साथ सूर्य का मोटा सूपड़ा राधिका की छूट में जा गुस्सा





सूर्य ......अब समय काम है मेरी जान नहीं तो तुम्हे बिलकुल भी तकलीफ नहीं देता ये आगे से कुछ ज्यादा हे मोटा है

सूर्य हलके हलके देखो से राधिका की चुदाई करने लगता है

इंटने दिनों से प्यासी राधिका जल्दी हे गरम हो आधे लैंड की चुदाई से हे अपने चरम के नजदीक जा पहुंची

सूर्य ने राधिका के बालो को पकड़ तेजी से सखे मरने लगता है है





कुछ हे देर बाद राधिका अपनी छूट में बचल सा मह्सुश कर हफ्ते हुए बीएड पे हे गिर गयी

सूर्य राधिका को करवार के बल लिटा कर पेअर को उठा पीछे से अपना लैंड राधिका की छूट में गुस्सा फिर से सुरु हो गया

राधिका .......मुझे कुछ आराम तो करने दो

सूर्य .....वक़्त नहीं है 05:15 हो चुके है आपको घर भी जाना होगा





सूर्य बिना कुछ सुने अगले 20 मिनट्स राधिका की अलग अलग तरह से चुदाई कर सुबह सुबह राधिका की मटकी में अपना गरम लावा स्टोर कर दिया

सूर्य .....जल्दी से उठिये आपको घर जाना है

राधिका .....ुम्मम्हा थैंक यू जान बस उसे अंदर जमा हो जाने दो

सूर्य ....... जितना हो चूका है उस से ज्यादा नहीं होगा

राधिका अपने गैरो को फैलाये किसी तरह अपनी नाईट ड्रेस बिना ब्रा पेंटी के दाल अपने बालो को ठीक कर सूर्य को किश कर बे बोल कर चोरी चले घर से निकल गयी

सूर्य ......आज ध्यान करना कैंसिल थोड़ा आवर आराम करता हूँ फिर देखता हूँ पैर उस से पहले दिल्ली वालो के लिए सुबह सुबह की न्यूज़ तो दे दू

सूर्य अपने मोबाईल से कुछ देर कुछ करता है

फिर सूर्य ुशी तरह नाग धडंग बीएड पे लेट जाता है कुछ देर बाद फिर से उसकी आँख लग जाती है

राधिका के पहुंचते हे उसके पीछे हे 2,3 मिनट्स बाद दीप्ती भी घर पहुचीती है

दीप्ती सीधा अपने रूम में जा कर फ्रेश होती है जब दीप्ती बहार निकलती है तो चार्ज में लगा उसके फ़ोन की रिंग सुनाई देती है

दीप्ती ......अब इस वक़्त इतनी सुबह किसको चल मची है

दीप्ती जब no.dekhti है तो ये उसके हे साथी अफसर का था

दीप्ती ......क्या है अभी अभी घर पहुंची हूँ आराम भी करने डोज की नहीं

अफसर .....मेम कोई भी न्यूज़ लगा कर न्यूज़ देखिये

दीप्ती .....ऐसा क्या हो गया सुबह सुबह

अफसर ......मेम आप खुद हे देख लीजिये

डीओटी अपने रूम का टीवी ों कर न्यूज़ देखती है तो उसने वही रात वाला कांड की वीडियो फुटेज नव्स में ब्रेकिंग न्यूज़ बन कर चल रही थी

बॉस .जीवा .असलम खान .के साथ साथ आवर भी कुछ गुंडों की जो हत्या की गयी थी वही न्यूज़ में दिखाया जा रहा था

दीप्ती ....... सुबह सुबह फिर वही सब रात का अभी दिमाग से निकला हे नहीं आवर सुबह फिर वही सब देखो

राधिका .....क्या हुआ दीदी आवर आप कब आई

दीप्ती .....तुम्हारे पीछे पीछे हे मेरा मतलब है की बस अभी आई हूँ

राधिका ......क्या हुआ आप कुछ परेशान लग रही है

दीप्ती .......ये देखो न्यूज़ में रात भर इसने पुरे पुलिस डिपार्टमेंट की बजा राखी थी आवर अभी सुबह सुबह ये सब

राधिका ......बाप से बाप इन सबको किसी बेहरहमी से मार रहा है दीदी कोण है ये लोग आवर ये इंसान कोण है जो इन्हें इतनी बेहरहमी से मार रहा है वो वो आप है न दीदी आवर ये तो आपको जनता भी है

दीप्ती .......ये जो मारे जा रहे ये सब दिल्ली के मोस्ट क्रिमिनल है आवर इन्हें जो मार रहा है वो कोई इंसान नहीं है उसका नाम निर्भयासुर है पता नहीं कहा से आया है पैर एक हे रात में इसने दिल्ली को खून से लाल कर दिया है अभी दिन में जो कहर धने वाला है वो अभी बाकि है

राधिका .....क्या मतलब दीदी

दीप्ती ......इसने वार्निंग दी है की पुलिस डिपार्टमेंट में से दोपहर तक सभी गद्दारी को दंड कर सजा न दी तो ये बिच बाजार दिल्ली के जनता के बिच उन्हें सजा देगा आवर हम छह कर भी इसे रोक नहीं सकते है

दीप्ती ......ये तो अच्छी बात है दीदी इस से आपका डिपार्टमेंट भी साफ हो जायेगा उन गुश्खोरो से जो आपके डिपार्टमेंट को बदनाम कर रखा है

दीप्ती ......पैर इस से जो डिपार्टमेंट की बदनामी होगी वो अलग है राधिका

राधिका .......दीदी आप को एक सलाह दूँ आप न पापा जी से इस बारे में बात कीजिये वो जरूर कोई मदद करेंगे आपकी

दीप्ती .....यू अरे राइट राधिका तुम मेरी आवर पापा की कॉफ़ी त्यार करो आवर है संभल कर इतनी लापरवाही ठीक नहीं आपकी

राधिका .....क्या मतलब दीदी

दीप्ती अपनी अलमारी से राधिका को उसकी ब्रा पेंटी देती है जो राधिका सूर्य के पास चढ़ आयी थी

दीप्ती ....... ये लीजिये आवर आगे से ध्यान रखना आवर थोड़ा चल को संभल कर चलो वर्ण माँ की नजरो से बच नहीं पाएंगे आवर वो सूर्य भी बे- सरम नुदे हे सोये हुआ था जैसे कही का राजा हो आवर उसके बिना कोई उसके रूम में नहीं आएगा

राधिका ......सॉरी दीदी वो रात को लेट आये थे इस लिया मुझे भी लेट हो गया पैर आपको कैसे पता चला

दीप्ती ......तुम्हे वह से चोरी चले निकलते देख मैं समाज गयी बाकि जब रूम में पहुंची तो तुम्हारे ये कपडे जाओ कॉफ़ी बनाओ इस हे तो मैं देखती हूँ एक बार इस निर्भयासुर से निपट लूँ

दीप्ती वह से सीधा अपने डैड के रूम में पहुंची जो खुद भी यही न्यूज़ देख रहे थे आवर साथ हे किसी से फ़ोन पे बात भी कर रहे थे

दीप्ती ......पापा वो

D.papa .....एक मिनट्स बेटी

कुछ देर बाद सूर्यकांत जी ने कॉल कट किया

सूर्यकांत जी ......बेटी ये क्या हो राग दिल्ली में आवर तुमने मुझे कुछ बताया तक नहीं वो तो मैंने न्यूज़ देखि यब पता चला अभी तुम्हारे कमिश्नर उन्सेल से बात हुई ये मामला बहुत संगीन है बीटा संभल कर

दीप्ती .....ी क्नोव डैड बूत समाज नहीं आता इस निर्भयासुर को हम रोके तो रोके कैसे हमारे पास दोपहर तक का हे समय है क्या आर्मी इस हे रोक सकती है या कोई ऐसा हथियार जो इसे कमजोर कर सके

सूर्यकांत जी .......... तुम मेरी बेटी हो आवर एक अच्छी ईमानदार पुलिस अफसर भी पैर मैं तुम्हे आर्मी सीक्रेट नहीं बता सकता बेटी ये आर्मी के रूल्स है

दीप्ती ......मतलब आपके पास ऐसा इंसान या फिर कोई हथियार है जिस से इसे रोका जा सकता है

सूर्यकांत जी ....... कहा न बेटी आर्मी सीक्रेट नहीं बता सकता मुझे जाना होगा बेटी एक हायर अफसर की अर्जेन्ट मीटिंग है जरा सूर्य को रेडी होने को कहो उसे भी जाना होगा बेटी

दीप्ती ........ ठीक है डैड पैर सूर्य को क्यों वो तो हायर अफसर में नहीं आता है

सूर्यकांत जी ........ राधिका बेटी जरा सूर्य को रेडी होने का कहो उस से कहो हमने त्यार होने को कहा है अर्जेन्ट मीटिंग है

दीप्ती ......राधिका आप रहने दीजिये मैं जाती हूँ सूर्य के पास

(राधिका ......अगर वो नघे सोये है जो दीदी को भी पता है फिर दीदी वह क्यों जा रही है कही इन्होने आज उनका सिनर करने का तो नहीं सोच लिया है अच्छा है दोनों नानन्द भाभी मिल कर मज़ा लेंगी इनका no.lag गया तो )

दीप्ती वह से निकल तो आई पैर जब सूर्य के रूम में पहुंची तो सूर्य को ुशी तरह सोया देख असमंजश में पद गई की उसे कैसे जगाये सामने सूर्य बिलकुल नंगा होकर सोया पड़ा था





दीप्ती ये इंसान का हे है की किसी घोड़े का इतना बड़ा कैसे लिया होगा राधिका ने मेरी तो कुंवारी छूट में ऊँगली के अलावा कभी कुछ गया नहीं

मैं कैसे ले पाऊँगी इसके इस डिक को अपनी छोटी सी पुसी में

सूर्य का सोया हुआ लिंग भी किसी सामान्य खड़े लिंग से बड़ा लग रहा था

दीप्ती ढींगे कदमो से सूर्य के बिलकुल पास आ गई उसकी धड़कन इतनी तेज हो चुकी थी की धड़ धड़ की आवाज उसके कणो तक सुनाई पद रही थी तेज सानो के साथ वो दीप्ती के ठोस उभर भी ऊपर निचे हो रहे थे

हिमत जूता का दीप्ती ने पहले बार किसी रियल लिंग को अपने हाथ में पकड़ा था पैर अगले हे पल लिंग की गर्माहट आवर कोमल स्पर्श होने से लिंग में हुई हलकी सरसाहट ने दीप्ती को पीछे हटने को विवश कर दिया

दीप्ती ...बाप रे ये इतना गरम कैसे था आवर अचानक से ये फूलने क्यों लगा

दीप्ती की नहर अभी भी वही तिकी थी आवर सूर्य का लिंग सच में डेरी डेरी फूल कर पकड़ने लगा था

दीप्ती ने निचे पड़ी चादर उठा सूर्य के सीने तक दाल

पपेर सायद सूर्य को पसंद नहीं आयी अपने सीने पे चादर उसने हॉल से करवार केते हुए चादर अपने कमर तक कर दी





एक बार फिर से वो अजगर खुली हवा में आ गया

दीप्ती की पेंटी तो चुने भर से गीली हो चुकी थी उसकी छूट में मीठी मीठी खारिश के साथ जैसे hajaro.anginat चींटिया रेंगने लगी

दीप्ती ......भाड़ में गयी सरम इसे अगर लेना है तो मुझे हे बे- सरम बनना होगा 26 की हो चुकी हूँ 27 की सुरु हो गयी अभी तक कुंवारी हूँ

इस बार दीप्ती ने बड़ी हिम ात से अपना हाथ आगे बढ़ा सुरुआ के लैंड को दबा दिया

सूर्य .....राधिका tum.fir से आ गई सोने दो न जान रात में करते है न

दीप्ती ......क्यों राधिका के पास हे है क्या इसको पकड़ने का हक़

दीप्ती की आवाज सुन सूर्य फ़ौरन आँखे खोल देता है

सबसे पहले दीप्ती के लाल सुराख़ चेहरे पे सूर्य की नजरे पड़ती है दीप्ती अभी भी सुये लैंड को ुशी तरह मज़बूरी से पकडे हुई थी

सूर्य ......आप यहाँ पे

दीप्ती ......क्यों तधिका हे आ सकती है क्या यहाँ आवर उसे हे इसे चुने का हक़ है क्या

सूर्य की नजर अपने लैंड पे पड़ी जिसके ऊपरी भाग को दीप्ती ने कैद किया हुआ था अपने उंगलियों में मजबूती से

सूर्य ......दीप्ती दीदी छोड़िये उसे ये क्या कर रही है

दीप्ती .....जो बहुत पहले करना चाइये था सोचा था तुम खुद से पहल करोगे पैर नहीं आज मैंने आखिर में अपनी सरम को त्याग बे- सरम होना हे पड़ा

दीप्ती का हाथ अपने आप ऊपर निचे होने लगा उस से सूर्य का लैंड आवर ज्यादा आकडने लगा

सूर्य ......प्लेसेस को दिए इसे हम बाद में बात करते है कोई भी आ जायेगा

राधिका ........कोई नहीं आएगा आप दोनों लगे रहो हेहेहे वह दीदी आप तो बड़ी हिम्मत वाली निकलो जो इस अजगर को काबू में कर लिया

सूर्य ........ राधिका तुम भी इनके साथ मिली हो

राधिका ....... है क्युकी ये मेरी दीदी है जिन्होंने मेरी ख़ुशी के लिया मेरा हर कदम पे साथ दिया आपसे मैं प्यार करती हूँ आवर दीदी भी मैं आपको मजबूर नहीं करुँगी पैर मेरी भी यही इच्छा है आप दीदी को थोड़ा हे सही पैर प्यार करो

सूर्य ........ ठीक है मई करूँगा पैर सदी नहीं कर सकता पहले हे मेरी दो बिबिया है

दीप्ती ......क्या कहा दो क्या बिबिया राधिका कब से बीबी हो गई

सूर्य ......किरण मानसी आवर राधिका सीक्रेट बीबी है अब छोड़ हो भी इसे मेरा मूड बन रहा है

दीप्ती अपना हाथ हटा लेती है

राधिका .......... हम बाद में बात करेंगे अभी पापा आपको जल्दी रेडी हो कर बुलाया है इनको उसके लिया हे भेजा था पैर यहाँ तो कुछ आवर हे हो रहा था

सूर्य जल्दी से नंगा हे बाथरूम में जा गुस्सा यहाँ दोनों के चेहरे ख़ुशी से खिल उठे दोनों की अपनी अपनी वजह था

कुछ हे देर में सूर्य त्यार हो सूर्यकांत सर के साथ मीटिंग के लिया निकल गया जहा काफी सीनियर्स अफसर भी मीटिंग में मौजूद थे कुछ देर कल रात की घटना पे चर्चा हुई

फिर आर्मी चीफ सूर्य आवर सूर्यकांत सर को छोड़ बाकि सब वह से निकल गए

आर्मी चीफ ने सभी कैमरा आवर माइक बंद कर दिए

आर्मी चीफ ....... सूर्य बीटा अब तुम्हे हे इस तबाही को रोकना होगा

सूर्य ....... सॉरी सर मैं ऐसा नहीं कर सकता

सूर्यकांत सर .......ये तुम क्या कह रहे हो बीटा एक तुम हे हो जो इसे रोक सकते हो फिर तुम मन क्यों कर रहे हो क्या तुम उसे रोक पाने में सक्षम नहीं हो अगर तुम उसके सामने कमजोर हो तो उसका रास्ता भी है हमारे पास में

सूर्य ......मैं जनता हूँ आप किस रस्ते की बात कर रहे है जिस सूट की बात आप कर रहे है उसकी मुझे जरुरत नहीं है सर

आर्मी चीफ ....... फिर तुम उसे क्यों नहीं रोक रहे हो तुम एक आर्मी सोल्जर हो तुम्हारा कर्त्तव्य बनता है देश की देश की जनता की रक्षा करना तुम अपने कर्त्तव्य से पीछे कैसे हैट सकते हो

सूर्य ....... आप कुछ भी कह लीजिये सर मैं उसे नहीं रोकूंगा वो जो कर रहा है बिलकुल सही कर रहा है अभी तो केवल दिल्ली से इसकी सुरुहत हुई है सर

अभी तो लाशो के ढेर लगने बाकि है

सूर्यकांत सर ....... ये तुम कैसी बात कर रहे हो सूर्य

मैं जिस सूर्य को जनता हूँ वो तो ऐसा नहीं था क्या तुम उस से दर रहे हो तुम्हे जो पावर्स मिली है तुम उन से बड़ी आसानी से उसका सामना कर न जाने कितने बेगुनाहो की रक्षा कर सकते हो

सूर्य .......... हाहाहाहा डरता हूँ वो भी मैं हाहाहाहा सॉरी सर पैर आपने बात हे ऐसी कह दी

मैं खुद चाहता हूँ की दंड नायक निर्भयासुर उन सभी को वही दंड दे जैसा उसने कहा था आवर वो वैसा हे करेगा भी उसे कोई नहीं रोक सकता चाहे पूरी दुनिया की आर्मी हे क्यों न उसके सामने आ जाये वो सभी सजा भुगतने के लायक हे है न जाने कितने हे बेगुनाह निर्दोष लोगो के खून से उसके हाथ रांघे है

आपने अब्बी तक उसका एक हे रूप देखा है सर उसका दंडनायक रूप देखने के बाद मुजरिम उसकी आहात से मौत को गले लगा लेते है

सूर्यकांत सर ......तुम इसका मतलब तुम जानते हो उसे

सूर्य. ..... है जनता हूँ निर्भयासुर को इसी लिया उसे रोक नहीं रहा हूँ उसे जो आदेश मिला है वो पूरा करेगा हे

आर्मी चीफ ....... तुम कैसे जानते हो उसे आवर उसे क्या आदेश मिला है आवर किस से

सूर्य ....... ये मैं आपको नहीं बता सकता हूँ माफ करना सर पैर उसने जो कागा है वो करके हे रहेगा ठीक दोपहर 1 बजे एक बार फिर उसका तांडव सुरु होगा ये अभी केवल सुरुहत भर है हज पुलिस डिपार्टमेंट का no..hai कल मंत्री लोगो तो परषो किसी आवर सहर में किसी आवर का ये सिलसिला तब तक चलेगा जब तक लोगो के दिल में मौत का दर न हो जो पाप करेगा वो मरेगा या तो जीना छोड़ तो या पाप करना चलता हूँ सर

सूर्य वह से दोनों को हल्का बक्का चढ़ कर निकल गया

आर्मी चीफ ......ये क्या है जिस से उम्मीद थी उसने हे साफ इंकार कर दिया मैं इसे अभी आर्मी से निकल दूंगा सूर्यकांत

तभी वह एक जवान एक लेटर ले कर आता है

जवान .....सर ये आपके लिया जय

आर्मी चीफ .......मेरे लिया लाओ दो

आर्मी चीफ लेटर खोल कर देखता है तो उसके सूर्य का रेसिग्नेशन लेटर्स था साथ हे एक आवर चिठ्ठी

सूर्य .......सर मुझे निकलने की जहमत न कीजिये मैं खुद हे रेसिग्नेशन देता हूँ

आर्मी चीफ .......यार ये लड़का है क्या चीज़ आखिर

सूर्यकांत सर ...... मैं बात करता हूँ उस से

सूर्यकांत सर आर्मी चीफ को सलूट कर वह से घर की आवर निकल गए सूर्य अभी आंटी के साथ बैठा बाते हे कर रहा था की वह सूर्यकांत सर भी आ पहुंचे

सूर्यकांत सर ......बीटा ये सब क्या है इतनी से बात के लिया तुमने आर्मी से रिजाइन कर दिया ये क्या बात हुई भला

सूर्य ......आवर क्या करता सर जब वो खुद मुझे निकलने की बात कहेंगे तो मैं क्या करता देश की सेवा के लिया आर्मी हे तो एक मात्रा जरिया नहीं है न आवर भी बहुत से रस्ते है

दीप्ती ......पागल हो क्या इतनी अच्छी पोस्ट कोई ऐसे हे छोड़ देता है क्या आखिर हुआ क्या था मीटिंग में

सूर्यकांत सर ....... कुछ नहीं बेटी सूर्य मैं तुम्हारा रेसिग्नेशन लेटर्स रिजेक्ट कर फाड् रहा हूँ समाज गए

सूर्य ......ठीक है उन्सेल पैर उन्हें भी सामना दीजिये जो मेरी नजरो में सही होगा मैं उसे नहीं रोकूंगा फिर चाइये सामने कोई भी क्यों न हो

सूर्यकांत सर .......मुझे अकेले में कुछ बात करनी है अभी

सूर्य ......ok उन्सेल

सूर्य एंड सूर्यकांत सर दोनों बहार निकल जाते है

सूर्य ...... जी उन्सेल कहिये

सूर्यकांत सर ........अब सच बताओ की tum.nirbhayasur को कैसे जानते हो जूठी बिलकुल भी नहीं अगर तुम मेरी ेजात करते हो तो

सूर्य ......... उन्सेल निर्भयासुर कोई आवर नहीं मैं हे हूँ वो मेरा हे एक रूप है

सूर्यकांत जी......... क्या वो तुम हे हो पैर बीटा कोई आवर तरीका भी तो हो सकता है सजा देने का

सूर्य ......है न उन्सेल बहुत से तरीके है पैर ये जरुरी है क्युकी जब तक इंसान अपने पाप से डालेंगे नहीं तब तक वो ऐसे हे पाप करते रहेंगे उन्हें अगर बुरे कर्मो से दूर रखना है तो उनके मौत का दर होना जरुरी है तभी वो पाप करने से पहले हजार बार सोचेंगे आपको क्या लगता मुझे खून खतना करके अच्छा लगता है मेरी खुद की आवर बहुत से परेशानिया मैं क्यों अपना टाइम यहाँ बर्बाद करूँगा इंसान जो अपनी इंसानियत भुला कर पाप के दलदल में डूबता जा रहा है उसे बचाना है उनके मन में दर होना चाइये

सूर्यकांत सर ...... मतलब जो कहा है वो हो कर हे रहेगा

सूर्य ....... बिलकुल सर पैर आप चिंता न करे किसी भी निर्दोष को सजा नहीं मिलेगी आवर जो दोषी है वो सजा से बच नहीं सकता आपके लिया इतना हे कर सकता हूँ जो सामने से अपना गुनाह काबुल कर सजा भोगने को त्यार होगा उसे कानून सजा देगा उसने मैं बिच में नहीं आऊंगा जब पाप अनुसार दंड न मिले इस से ज्यादा कुछ नहीं कर सकता हूँ मुझे जाना होगा उन्सेल

सूर्यकांत सर ......ठीक है बीटा

सूर्य वह से गायब हो गया सूर्यकांत सर कुछ देर वह खड़े रह कर अंदर चल दिए

सूर्य वह से सिदा वयोम के पास पंहुचा

सूर्य ......सब थी हो गयी वयोम भाई

वयोम जी ......भाई सब तयारी हो गयी आवर आपने जैसा कहा था ठीक वैसे हे किया है सभी लड़कियों ले आया हूँ आप चाहो तो उन से मिल सकते है

सूर्य ...... अभी नहीं पहले उनकी सजा सुरु करनी है लक्समी कहा है

लक्समी .......मैं यहाँ हूँ

सूर्य ......... क्या बात है आज आप बहुत पायरी लग रही है जयलक्मी जी बिलकुल किसी विदेशी गुड़िया की तरह

लक्समी ......हेहेहे मुझे लाइन मार रहे है आप पैर यहाँ आपकी दाल नहीं गलने वाली हेहेहे आवर आप मुझे लक्समी हे कहो अच्छा लगता है

सूर्य ......आवर वो क्यों भला

लक्समी .......क्युकी मेरा कोई सरीर नहीं है मैं एक आत्मा हूँ न

सूर्य ......... आज पहली बार आपकी बंशी सुनी है वाकई में बहुत प्यारी हंशी है बिलकुल सोफी की तरह आवर मैं लाइन नहीं मार रहा हूँ बस सच कह रहा हूँ आपके पिता ने आपको बिलकुल सही नाम दिया था जयलक्मी आज आपको मुक्ति प्राप्त हो जाएगी जब आपके छोटे भाई राजीव विधि पूर्वक आपका अंतिम संस्कार करेंगे अब आप दीनदयाल को अंतिम सजा दे सकती है ताकि आपकी अंतिम इच्छा पूरी हो जाये

लक्समी .......जी मुझे अब उसे सजा देने का मन नहीं है उसे मार कर मैं अपनी आत्मा को ा पवित्र नहीं करना चाहती हूँ आप उसे उसके कर्मो दंड दीजिये मैं बस उसे तड़पता देखूंगी

सूर्य .....वयोम उन सभी को उन चेम्बूर में छोड़ दो आवर उन सभी के बुरे करम पूरी दुनिया देखे इस लिया उन सभी ने पाप काबुल किये है उन सभी की एक एक कॉपी पूरी दुनिया में हर न्यूज़ पे यही दिखनी चाइये आवर वो लिंक कुछ देर बाद पूरी दुनिया में जितने भी मोबाईल है उन सभी पे उसका लिंक होना चाइये खुद जनता उन्हें अपने हाथो से सजा दे

वयोम ...... जी भाई काम हो गया है आप भी देखिये पैर समाज नहीं आ राग आप इन्हें खुद सजा क्यों नहीं फे रहे है

सूर्य ........ इन्हें इस गेम के जरिये जनता हे सजा देगी आखिर परेशानी भी तो उन्हें हे हुई है इनकी वजह से सजा देने का हक़ भी उन हे होना चाहिए जनता की अदालत से भाड़ कर कोई अदालत नहीं

सामने दिवार पे बहुत दीनदयाल चन्दर गजेंद्र जीवा बॉस असलम खान आवर भी बहुत से गुंडे अपने गुनाह काबुल कर रहे थे करीब एक घंटे तक उनके गुनाह दुनिया के हर एक टीवी पे छाए रहे

वयोम .....भाई अब आपके निर्भया रूप पूरी दुनिया के सामने आने का वक़्त आ गया है

( दोस्तों यहाँ निर्भयासुर के 2 रूप है जिसमे थोड़ा कन्फूसिओं हो रहा है इस लिया थोड़ा क्लियर कर रहा हूँ जो रूप सूर्य ने नागलोक में पहली बार लिया था दंड नायक निर्भयासुर का असुर रूप उसे आगे के अपडेट में इस नाम से हे सामने रखूँगा आवर





जिसने दिल्ली में तहलका मचाया उसे निर्भया नाम से पेश करूँगा ताकि निर्भयासुर की दोनों पर्सनालिटी कोई कन्फूसिओं न हो )

सूर्य .......वैसे एक बात बताओ वयोम भाई कल आपने निर्भया से कोई चर्चा नहीं की न hi hello न कोई दुहा सलाम वो पूछ रहा था भाई

वयोम ......भाई पता नहीं क्यों पैर उसके सामने जाते हे मेरी फटने लगती है एक दर सा लगने लगता है

सूर्य .........हाहाहाहा कही आपने भी को कोई करम कांड न कर दिए है पृथ्वीलोक आ कर अब जिनि तो यहाँ है नहीं हाहाहाहा

वयोम .....नहीं नहीं ऐसा मैंने कुछ नहीं किया है

सूर्य ........ आप इतना घबरा क्यों रहे है मैं तो बस मज़ाक कर रहा हूँ आवर उस से डरने की जरुरत नहीं है बस आपने जो आपकी जिनि ऊर्जा है जब जब वो सामने आएगा थोड़ा असंतुलित हो जाती है आवर कुछ नहीं

वयोम .....उसे आप ऐसे हे कामो में लगा कर रखो मुझे नहीं मिलना है उस से अब आ जाइये समय हो गया है

सूर्य निर्भया रूप ले वह लगे कमरा के सामने चला जाता है

निर्भया ........ आप सभी मुझे तो जान हे गए होंगे सुबह सुबह न्यूज़ में मैं हे चाय हुआ हूँ फिर भी अपना परिचय एक बार फिर से दोहरा देता हूँ

मैं हूँ दंडनायक निर्भया अच्छे इंसानो को मेरा सलाम आवर बुरे इंसानो को मेरी तरफ से वार्निंग जो अच्छे आवर नेकी की रह पे चलते हुए ईमानदारी से अपना करम करेगा वो मेरे दंड चक्र से सुरक्षित रहेगा आवर जो पाप के पथ पे चलेगा उसे मेरे दंड चक्र का सामना करना होगा फैसला तुम सभी पे छोड़ता हूँ अगर आप में से कोई खुद की किये बुरे करम कानून के सामने काबुल कर सजा भोगता है तो मुझसे बच सकता है अगर मैंने दंड देना सुरु किया तो कोई नहीं बचेगा जिसने बुरा किया उसे बुरा भोगा हे होगा यही मेरा दंड विधान है दिल्ली पुलिस को मैंने आज दोपहर का समय दिया है जिसने केवल ये चेतावनी मात्रा लगती है उसका अंजाम भी दोपहर बाद देख लेना

ये केवल इंडिया में हे नहीं पृथ्वीलोक पे मौजूद हर देश में होगा मेरे पहुंचने से पहले खुद को कानून के हवाले कर बचना है या मेरे हाथो मरना ये फैसला आप पैर छोड़ता हूँ कुछ समय पहले जो मुजरिम अपने गुनाह काबुल कर रहे थे अब उन्हें दंड देने की बाटी है आवर वो आप देंगे अपने हाथो से पैर ज्यादा खुश मत होने जिसने पाप किया कल आपने से भी भी वह कोई मौजूद हो सकते है

आप सभी अच्छे बुरे इंसानो के मोबाईल में एक वीडियो लिंक है जिसके जरिये आप इन्हें सजा देंगे जितना आप उस लिंक पे उन्हें सजा देंगे उतनी हे सजा यहाँ मिलेगी

निर्भया के इसारे पे टीवी स्क्रीन पे वो सभी गुंडे चेम्बूर में बंद नजर आने लगे कुछ देर बाद बहुत से मासूम लड़किया टीवी आवर मोबाइल स्क्रीन पे नजर आती है

निर्भया ........ ये वो लड़किया है है जिन्हे दिल्ली से अपहरण कर विदेशो में बेचा गया जैसे इनका अपना कोई अस्तित्व हे नहीं ये वही लोग है जिनके गुनाह की लम्बी दास्ताँ आपने कुछ देर पहले हे टीवी पे देखि थी इन्हे के हाथो की कटपुतली बन नारकीय जीवन जी रही थी ये लड़किया अब आप वह गेम खेलो आवर यहाँ इन्हें सजा मिलेगी

जाते जाते आप सभी के लिया एक आखरी सन्देश ......... या तो बुरे करम से अपना रिस्ता तोड़ लो

या फिर अपने सरीर से अपनी आत्मा छोड़ दो

मिलते है एक छोटे से अंतराल के बाद

देखते हे देखते उन चैम्बर में से चीखे निकलने लगी

निर्भया .......वयोम अब चलो उन लड़कियों से मिलते है

वयोम ....... इस रूप में उनके सामने जाना ठीक होगा क्या वो दर जाएँगी

निर्भया ........... सूर्य रूप में गया तो उनके समक्ष मेरी पहचान आ सकती है

वयोम ........ फिर क्या करे

निर्भया .......देखते है पहले चले तो सही

सूर्य वयोम जब उन लड़कियों के सामने पहुंचे तो सूर्य की आँखे दांग रह गयी वह इतनी लड़कियों को देख कर

निर्भया .........वयोम इतनी लड़किया केवल दिल्ली से

वयोम ......है दिल्ली आवर आस पास के गाँवो से है ये सभी लड़किया

निर्भया .......... एक काम करो जो अपने घर जाना चाहती है उन्हें जो पैसे उन गुंडों से मिले है जरुरत अनुसार दे कर इनकी बुरी यादें मिटा दो आवर इनके परिवार की भी भी ताकि फिर से ये अपना नया जीवन सुरु कर सके आवर जो जाना नहीं चाहती उनके लिया कोई रोजगार खोलो रहने के लिया घर की वय्वस्ता करो ताकि खुद ये अपने पैरों पे कड़ी हो अपनी इच्छा अनुसार जीवन जी सके

वयोम ......वो मैंने पहले हे कर दिया है शालिनी माँ के नाम से मैंने इनके लिया ठहरे आवर आवर ेजात से नौकरी कर सके उसके लिया कंपनी भी खोल दी है अब जादू का इतना भी फायदा न हो तो किस काम का

निर्भया ......समझदार हो गए हो आप सभी आज से अभी से आज़ाद है जो घर जाना चाहती है वो जा सकती है आवर जो घर नहीं जाना चाहती वो यही रुक सकती है उन्हें अच्छा घर आवर एक ेजात की नौकरी मिलेगी जिस से फिर कोई आपका फायदा न उठा पात्र फैसला आ पे है जो भी जाना चाहती है इस तरफ हो जाये खली हाथ किसी को नहीं भेजूंगा जरुरत के हिसाब से एक अच्छी जिंदगी जी सको उतने पैसे आपको दिए जायेंगे साथ हे आपने जो खींच भी झेला है उन बुरी या दो को भी मिटा फि जाएगी आवर आपके परिवार को भी याद नहीं रहेगा की आप कभी उनसे अलग हुई थी मैं बस इतना हे कर सकता हूँ आप सभी के गुनहगारों को सजा मिल चुकी है

निर्भयसुर के कहने के कुछ देर बाद तक खुसर फुसर होती रही उसके बाद सभी लड़किया दो भागो में बात गयी एक तरफ करीब 500 के करीब लड़किया थी तो दूसरी तरफ करीब 150 लड़किया जो घर नहीं जाना चाहती थी

निर्भया ......वयोम जो घर जा रही है उनकी जरुरत अनुसार उनके नाम पे बैंक में पैसे दाल दो आवर उनकी कड़वी यादें मिटा कर उनके घर पंहुचा दो मैजिक डोर का इस्तेमाल करो जो भी इनके सम्पर्क में आएंगे इनसे जुड़े इनके गायब होने की याद अपने आप मिट जाएगी

वयोम ......जी भाई ऐसा हे होगा आवर इन बाकियो का क्या

निर्भया ....... इन्हें वह पंहुचा फ़ो जहा तुमने इनके ठहरने का इंतजाम किया है इन्हें कोई भी कमी नहीं हो

वयोम ......जी भाई ऐसा हे होगा .............

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अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
अपडेट 238

सूर्यगढ़ ....... सुबह जब किरण सभी के साथ ध्यान आवर योध अभ्यास कर लौटी तब तक दादा जी के साथ सूर्य के नाना जी भी हवेली लौट आये थे आवर लोने में बैठे मज़ाक कर हैश रहे थे

कोमल .......क्या बात है बाउजी नाना जी आज आप दोनों बहुत खुश लग रहे है आपका चेहरा भी चमक रहा है

दादा जी ......कुछ नहीं कोमल बीटा बस ऐसे हे आ गए तुम लोग बीटा

राधा ......... क्या हम आपको नजर नहीं आये बाउजी या हमें नजर अंदाज कर रहे है आप

दादा जी ....... मैं भला अपनी बचो को कैसे नजर अंदाज कर सकता हूँ बेटी क्यों भाई विक्रम

नाना जी ....... बिलकुल सही भाई यही तो हमारे घर की रौनक है इन्हें अगर नजर अंदाज किया तो कैसे चलेगा बच्चों जाओ आवर जा कर फ्रेश हो कर नास्ता करो हम दोनों का तो ऐसे हे चलता रहेगा

दादा जी .......नास्ते से याद आया कोमल बीटा जरा अपनी दादी सा से कहो भाई दो भूखे बहार भी बे थे है उनपे भी ठकुराइन की थोड़ी दया दृस्टि हो जाये तो

कोमल ...... आपने ऐसा क्या किया जो आप अभी तक बिना नास्ते के बे थे है बाउजी कुछ तो बात है बाउजी

अब दादा जी क्या कहते की सुबह सुबह आते हे अपनी बीबी की डाट खा चुके है

नाना जी ...... हाहाहा कुछ नहीं बिटिया आज सैमसन जी नाराज है कुछ

कोमल ......ठीक है मैं आपके लिया अभी नास्ता भिजवाती हूँ नाना जी बाउजी

कोमल ने जैसे हे पीछे पलटा उसकी मम्मी दादा जी नाना जी का नास्ता ले कर आती हुई नजर आई

कोमल ......लीजिये बाउजी नाना जी आप लोगो का नास्ता आ गया मैं चलती हूँ

दादी जी .....जाओ बेटी जा कर तुम लोग भी नास्ता करो

किरण ....... बाउजी रत की पार्टी कैसे रही आपकी लगता है कुंवर जी का गिफ्ट क्यों ज्यादा हे पसंद आ गया

दादा जी ..... तुमसे क्या छुपा है बेटी रात में कुछ ज्यादा हे हो गयी

किरण ......कोई बात नहीं बाउजी ये ुशी का असर है जो आप इतने ऊर्जा से भरपूर चमक रहे हो पैर रोज नहीं

नाना जी ....... है बेटी रोज नहीं वो तो रात में हे पूरी हो गयी

किरण ......क्या एक हे रात में पूरी हो गयी कोई बात नहीं मैं आवर मंगवा दूंगी आपके लिया पैर अगले संडे को हेहेहे

सभी लड़किया अंदर चली गयी आवर ये दोनों दोस्त किसी भूकर के जैसे नास्ते पे टूट पड़े गरमा गरम पराठे दही के साथ

नाना जी ......कुछ भी कह यार रात वाली चीज़ बड़ी मस्त थी देखा इतनी पिने के बाद भी सरीर में कोई बहरीपन या कोई ताकवत नहीं आवर भूख भी बड़ी जोरो की लग रही है

दादा जी ...... ये वही थी परीलोक वाली पैर कुछ अलग सरीर में जैसे किसी ने नयी ऊर्जा भर दी हो अब्बी 4,5 पहलवानो को उठा के पटक दू ऐसा जोश भर गया है हाहाहा

कोमल ......क्या बात है माँ सा आज आपने बाउजी का नास्ता नहीं दिया हमेशा तो आप हे देती है

रेखा जी ....... तुम जा कर फ्रेश हो जा आवर नास्ता कर बड़ी आई सवाल जबाब करने वाली

दादी जी ...... मेरी बेटी को क्यों डट रही हो रेखा

कोमल ...... माँ सा आप बताइये माँ को छोड़िये बात क्या है

दादी जी ......कुछ नहीं बीटा तेरे दादा जी रात को हवेली नहीं थे आवर न सूरतगढ़ वाली हवेली रात में पता नहीं कहा रहे ये लग न कोई फ़ोन किया न कोई जानकारी दी बिना बताये निकल गए दोनों दोस्त अपनी महफ़िल लगाने गुस्सा नहीं कृ तो क्या कृ काम से काम बिताना तो चाइये मैं मन थोड़े करती

कोमल ...... मेरी स्वीट से माँ सा आप भी न हम सब है न हमारे होते उनके कैसे कुछ होने दे सकते है आप न ज्यादा टेंशन न लिया करो ुम्मम्हा अभी से बूढी हो गई आप दादा जी अभी भी जवान है देख लीजिये कहि छोटी दादी जी की तयारी में तो नहीं है बाउजी फिर

दादी जी ........ रुक तू छोटी दादी की बची अब्बी बताती हूँ तुझे रेखा पकड़ जरा इसे बड़ी आई मुझे बूढी कहने वाली

कोमल फ़ौरन वह से ऊपर अपने रूम की आवर दौड़ गयी

रेखा जी ......अभी मैं उसे दन्त रही थी तो आप मुझे हे गुस्सा हो रही थी माँ अभी देख ली उसकी नौटंकी

दादी जी ...... जाने दे बेटी इन्ही की हाशि से तो ये हवेली घर बानी है वर्ण तो दीवारे तो होटल आवर खंडहरों की भी है पैर वो कभी घर नहीं बन सकते इन hi की नाशी ख़ुशी से तो ये परिवार ये घर रोशन है पोती अपनी दादी से तस्करी न करेगी तो किस से करेगी तू जा कर अपनी बाउजी को आवर नास्ता दे

रेखा जी .....जी माँ सा अभी जाती हूँ

अंदर शालिनी जी न्यूज़ पे सूर्य के कारनामे देख रही थी

मानसी ......मम्मी आपका नास्ता यही ले. क्या हुआ मम्मी

शालिनी जी ...... कुछ नहीं बेटी चल मैं भी तुम लोगो के साथ हे नास्ता करती हूँ

शालिनी जी टीवी ऑफ कर सभी के साथ नास्ता करने लगती है

परीलोक ........ सूर्य वयोम से मिलने के बाद सीधा परीलोक पहुंचा गुरुदेव के सामने पहुंचा

सूर्य ......परनाम गुरुदेव आपने याद किया

गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्र सूर्य आओ बैठो यहाँ

सूर्य ....... जी गुरुदेव

गुरुदेव ........ पुत्र ये तुमने पृथ्वीलोक पे कैसा कत्ले आम सुरु कर दिया है हम इस से सहमत नहीं है न हे रानी पारी

सूर्य ...... गुरुदेव मैंने जो किया क्या वो अनुचित है या मैंने किसी निर्दोष को दंड दिया है

गुरुदेव ....... नहीं पुत्र तुमने जो किया वो अनुचित नहीं है पुत्र आवर न हे तुम्हारे हाथो किसी निर्दोष को दंड मिला है पुत्र किन्तु क्या यही एक उत्तम मार्ग है उनने दंड देने का

सूर्य ........ मैं जनता हूँ गुरुदेव जो दंड मैं दे रहा हूँ उसमे सभी को केवल मेरी क्रूरता हे नजर आ रही है पैर क्या आपको भी यही लगता है गुरुदेव

गुरुदेव ........ नहीं पुत्र ऐसा कदापि नहीं है सभी को तुम्हारी जो क्रूरता नजर आ रही है उसके पीछे का कारन हम जानते है पुत्र तुम्हारा उद्देश्य अच्छा है पुत्र किन्तु तुम्हे भी ये समझना होगा पुत्र की पृथ्वीलोक पे कलयुग चल रहा है इंसान छह कर भी पूर्ण रूप से पाप मुक्त जीवन नहीं जी सकता है

इंसान को जिस तरह का माहौल सांगत मिलेगी उसका असर उसपे होगा हे तुम या कोई भी इंसान को पूर्ण रूप से पाप मुक्त नहीं कर सकता है पुत्र

सूर्य .......आप जो कह रहे है मैं जनता हूँ गुरुदेव पैर जब तक मनुष्य के भीतर मौत का भय नहीं होगा वो ऐसे हे एक के बाद एक पाप करता रहेगा क्यों की उसके मन में किसी का भय नहीं आवर मैं जो क्रूरता कर रहा हूँ ुशी के माध्यम से पापियों के मन में वो भय व्याप्त करना चाहता हूँ इस से कुछ तो असर उनपे होगा गुरुदेव आगे जैसा आपका आदेश जैसे आपकी आज्ञा होगी वही मैं करूंगा गुरुदेव

गुरुदेव ........ उचित है पुत्र हम चाहते है पुत्र की तुम केवल उन्ही को मृत्यु प्रदान करो जिनमे किसी भी तरह के सुधर की आसा न नजर आये या जिनके पाप का भाड़ा भर चूका हो

सूर्य ......आवर बाकि सभी का क्या बाबा

गुरुदेव .......हाहाहा अपने हे बाबा की परीक्षा ले रहे हो पुत्र सूर्य

सूर्य ........ बाबा आपने भी तो सब जानते हुए मेरी परीक्षा ले रहे हो

गुरुदेव ....... तुमने अपने बाबा की परीक्षा लेनी चाय पुत्र अगर तुमने अपने गुरु की परीक्षा लेनी चाय होती तो हम तुम्हे अवश्य दण्डित करते

सूर्य ......जनता हूँ बाबा तभी तो आपको बाबा कह कर सम्बोधित किया था मैंने गुरु अपने शिष्य की कभी भी कृषि भी परिस्थिति में परीक्षा ले सकते है किन्तु शिष्य को ये अधिकार नहीं बाबा अब वो उचित स्थान भी बता दीजिये जहा उनने रखा जा सके

गुरुदेव .......... ये अनुरोध एक शिष्य का एक गुरु से है या एक पुत्र का अपने बाबा से हाहाहा

सूर्य .......ये अनुरोध मेरे गुरुदेव से है

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य तुमने जो सोचा वो उचित है बस कुछ बदलाव करने आवशयक है

सूर्य ......जैसे की गुरुदेव

गुरुदेव ....... पुत्र जिनमे सुधर की कोई आसा की किरण न नजर या जिनके पापो से उनकी आत्मा भी काली हो चुकी हो उन्हें तुम वही दंड जो तो उचित हो जिन्हे सुधार नहीं जा सकता किन्तु मृत्यु दंड भी नहीं दिया जा सकता उन्हें अज्ञान्त वाश में रख खतौर कारवश का दंड दो जो उनके जीवन की अंतिम स्वाश तक भोगते रहे तो उचित है पुत्र किन्तु तुम उन सभी को सदर्न पृथ्वीलोक के दंडविधान ( कानून ) के तहत दंड दो जो अपनी इच्छा से नहीं बल्कि अपनी किसी विवशता अपनी किसी मज़बूरी के चलते जाने अनजाने पाप किये है उन्हें वही दंड दो पुत्र

सूर्य ....... जी गुरुदेव जैसा आप कहे

गुरुदेव ....... है तुम मनुष्य जाती में भय भयापत रखने हेतु असुर माया का प्रयोग कर सकते हो पुत्र सूर्य जिसका ज्ञान तुम्हे उस पुस्तक से प्राप्त हो जायेगा जो तुम्हारे सवसुर श्री असुरगुरु ने विवाह अवसर पे भेंट की थी

सूर्य ....... जी गुरुदेव फिर आप हे सहायता वह उस स्थान का चयन करे गुरुदेव जहा मुजरिमो को अज्ञात वाश में रखा जा सके जब तक उन्हें उनकी किये दुस्करयो की सजा न मिले आवर किसी को ज्ञात भी न हो

गुरुदेव .......... इस कार्य के लिया तुम्हे प्रेतराज से सहायता लेनी चाइये पुत्र हमने उन्हें सन्देश भेज दिया है वो तुमसे भेंट कर लेंगे

सूर्य जी ......... जी गुरुदेव विधि आवर गायत्री की शिक्षा कैसी चल रही है गुरुदेव

गुरुदेव ........ बहुत पहाड़ी बछिया है दोनों पूरा समय अपनी शिक्षा को हे अर्पित रहती है आरम्भ में अवश्य ध्यान लगाने में उन्हें कुछ कठिनाई होती थी किनत समय के साथ शिक्षा के लिया आवर समर्पित होती जा रही है

प्रेतराज .......परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ........ आइये राजन आपका कल्याण हो

सूर्य ......परनाम पिता श्री

प्रेतराज ........ यशश्वी भाव पुत्र आज्ञा कीजिये गुरुदेव आपने इतनी सिगरा आने का सन्देश दिया

गुरुदेव प्रेतराज को सब समजा देते है की किस कार्य हेतु उन्हें बुलावा भेजा गया

प्रेतराज ....... पुत्र इसमें कोई इतनी बड़ी बात नहीं ये कार्य तो तुम स्वयं भी कर सकते थे

गुरुदेव .......नहीं प्रेतराज ये कार्य आपको हे करना है आवर आप हे उनकी सजा निर्धारित करेंगे आपको इसका बहुत अनुभव है इस लिया ये कार्य क्षेत्र आपके ादिन रहेगा

प्रेतराज ........ उचित है फिर पुत्र सूर्य तुम अपना कार्य करो इस कार्य दायित्व हमारा है

सूर्य ...... जी पिता श्री विक्रम का क्या हुआ पिता श्री

प्रेतराज ...... पुत्र सूर्य उसका जीवन चक्र पूर्ण हो अपनी नियति को प्राप्त कर चूका है अथार्त उसका अंत हो चूका है वो प्रेतयोनि में जा चूका है पुत्र आवर हमारे हे लोक में दंड भोग रहा है

सूर्य ......जी पिता श्री गुरुदेव अब आज्ञा दीजिये मुझे लौटना होगा

गुरुदेव ...... हाहाहा दंड नायक का दंड चक्र जो आरम्भ होने वाला है जाओ पुत्र प्रेतराज आप भी अपने कार्य में लग जाइये

सूर्य प्रेतराज आवर गुरुदेव से आज्ञा ले पृथ्वीलोक के लिया निकल गया

दिल्ली .......

सूर्य सीधा अपने घर पहुंचा जहा कुछ देर ध्यान में रह कर गुरु भरमानन्द द्वारा प्राप्त सीढ़ियों को साध उनको सिद्ध करता है

सूर्य ध्यान से निकल कर उन्ही सीधी का प्रयोग कर दंडनायक निरभयऔर को अपने सरीर से बहार आने का आदेश देता है

निर्भयासुर लाल आवर वाइट ऊर्जा की मिश्रित ऊर्जा पुंज के रूप में सूर्य के सरीर से बहार निकल कुछ पल हवा में राग आवर डेरी डेरी एक आकर्ति लेने लगता है

कुछ हे देर में वो पारदर्शी आकर्ति एक सरीर का रूप लेने लगती करीब 5 मिनट्स के बाद वो आकर्ति अब निर्भयासुर में बदल चुकी थी

सूर्य ....... पूर्ण सरीर प्राप्त कर कैसे लग रहा है दंडनायक निर्भयासुर को

निर्भयासुर ...... बहुत हे अच्छा है लग रहा जैसे आज हे मेरा जनम हुआ हो

सूर्य ..... तुम्हे ज्ञात है न क्या करना है आवर किस तरह से वैसे तो तुम्हे जरुरत नहीं है इस पुस्तक की किन्तु फिर भी इसे रखो

निर्भयासुर ...... मुझे सभी आसुरी विद्याओ का ज्ञान है स्वामी असुर कुल के प्रथम गुरु शुक्राचार्य का शिष्य हूँ

सूर्य .......... है पता है कैसे शिष्य हो तुम लो रखो आवर जैसा गुरुदेव ने कहा वैसा हे होना चाइये आवर प्रेतराज से कोई अभद्रता नहीं करना

निर्भयासुर .......जनता हूँ स्वामी वो आपके होने वाले ससुर श्री है

सूर्य .......ठीक है अब जाओ पुलिस डिपार्टमेंट में खटिया कड़ी कर दो पैर जाने से पहले निर्भया में बदल जाओ

निर्भयासुर निर्भया में बदल वह से गायब हो गया

सूर्य. .. ..अच्छा मार्ग सुजय गुरुदेव ने कल से बेंड बजी पड़ी है सुबह नास्ता भी नसीब न हुआ आवर न घर पे ठीक से बात की किसी से

तभी दुर्बल की गति बज उठी सूर्य के घर की

सूर्य ........ अब कोण आ गया इस वक़्त

सूर्य ज डोर खोलता है तो सामने सुनिधि कड़ी थी गुस्से में भरी

सुनिधि सूर्य को साइड कर दनदनाती अंदर आ गयी बिना कुछ बोले सूर्य एक बार बहार देखता है की कोई आवर तो नहीं आया है

किसी आवर को बहार न देख कर सूर्य गेट सत्ता कर अंदर आ गया सामने सोफे पे अभी भी गुस्से में मुँह फुलाए सुनिधि बैठी थी

सूर्य .......क्या हुआ सुनिधि इस तरह गुस्से में क्यों हो

सुनिधि ....... फ़ोन कहा है तुम्हारा

सूर्य फ़ोन निकल कर सुनिधि को देता है

सूर्य .......क्या देख रही हो फ़ोन में सुनिधि

सुनिधि ........ देख रही हूँ no. है की नहीं मेरा तुम्हारे पास

सूर्य .......बात क्या है सुनिधि

सुनिधि .......no. है पैर कॉल नहीं कर सकते यहाँ कल रात से हो पैर मिलना तो दूर कॉल तक नहीं किया क्या यही दोस्ती है तुम्हारी

सूर्य....... अरे यार अब तुम्हे क्या बताऊ काम हे इतना था की पूछो हे मत

सुनिधि ......कोई भने नहीं चलेंगे तुम्हारे

सूर्य .....सच में यार बहुत बिजी था सच कहा रहा सुबह का नास्ता तक नहीं किया आवर अभी देखो खाने का टाइम हो चूका है कबका पैर खाना भी नहीं खाया अभी तक

सुनिधि ......तुम सच कह रहे हो न

सूर्य .......सच में यार अभी भाबी के पास खाना खाने जा हे रहा था की तुम आ गयी वैसे तुम अकेली कैसे आई हो आज

सुनिधि ......अकेली कहा आई हूँ सोफिया आयी है न साथ में अब वो भी मेरे साथ हे पढ़ने वाली है वो भी नाराज है इस लिया भाई के पास रुक गयी

सूर्य ....... लगता है सभी नाराज है वैसे तुम्हे कैसे पता चला

राधिका .....वो गलती से मैंने हे बता दिया था देवर जी लीजिये खाना खाइये सुबह नास्ता भी नहीं किया पता नहीं कोनसा काम कर रहे हो जो खाने का भी टाइम नहीं मिलता है

सूर्य .....hello सोफे कैसी हो तुम आओ बैठो यहाँ

सोफे ......जी मैं अच्छी हूँ आप खाना खा लीजिये मैं लगा देती हम

सुनिधि ......तुम तो नाराज थी न इस से

सोफे .....हमने कब कहा हम नाराज है इनसे वो तो आपने कहा तो हमने है कह दिया

सुनिधि .......बड़ी चालू है यार तू तो सोफिया जनाब के सामने कितनी मासूम बन रही हो

सूर्य .....वो तो ये है हे चलो भूख लगी है आप में से किसी को खाना खाना है मेरे साथ तो ज्वाइन हो जाओ मुझे तो बहुत भूख लगी है मैं हाथ मुँह दो कर आता हूँ

सूर्य के जाने के बाद राधिका दो प्लेट में खाना निकल लेती है वो अपने लिया आवर सूर्य के लिया ले थी पैर अब चारो के लिया 2 प्लेट में हे निकल लिया था

कुछ देर बाद सूर्य हाथ मुँह दो कर कपडे बदलने के बात तीनो के साथ दिंनिंग टेबिल पे आ बैठा

सूर्य चलो खाना सुरु करो किसका इन्तजार है

सुनिधि .......मुझे भूख नहीं है

सोफी ........ रस्ते में तो आपको बहुत भूख लगी थी

सोफिया की बात सुन सुनिधि उसे आँखे दिखती है

सूर्य सोफी भाभी आप दोनों खाना सुरु कीजिये मेरी दोस्त मुझसे नाराज है तो उसे मैं हे मनाता हूँ

सूर्य खाने का निवाला बना सुनिधि के मुँह की तरफ करता है

सूर्य ......देखि नाराजगी मुझसे है न तो मुज तक रखो खाने से कैसी नारंगी चलो सोफी ये तो खा नहीं रही तुम हे खा लो

सूर्य अपने हाथ का निवाला सोफी की तरफ बढ़ाया तो सुनिधि फ़ौरन सूर्य के हाथ का निवाला खा लेती है आवर साथ हे उँगलियाँ भी काट देती है

सूर्य ........ आउच जंगली बिली कही की भूख लगी है तो खाना खा मेरी उँगलियाँ क्यों खा रही है

सूर्य दूसरा निवाला सोफी की तरफ किया तो वो सरमते हे खा लेती है

राधिका खाना खाने के साथ दोनों लड़कियों के हाव भाव देख मुस्कुरा रही थी

उदार दिल्ली हेडक्वार्टर्स में निर्भया ने कुछ आवर हे तूफान मचा रखा था

जैसे हे निर्भया सूर्य से विलख हो दिल्ली हेडक्वार्टर्स पहुंचा वह चारो तरफ खाल भली मच गई देखते हे देखते निर्भया के आने की खबर पुरे पुलिस हेडक्वार्टर्स में फ़ैल गई

ाड़गप .ैप .िग .दिग .SP.SSP .द्क्प .सभी बड़े मुख्या अदिकारियों की भी जान हलक में ातकी थी

निर्भया के आने की खबर मिलते हे कोर्रुप्त पुलिस अफसर जो अब तक छुपते फिर रहे थे वो सब एक एक कर अपना गुनाह अपने किये अपराध काबुल करने लगते है

कमिश्नर...... देख रहे है सर मौत की आहात सुन उसके भय से आज हमारे हे बिच पुलिस की वर्दी में छुपे भेड़िया कैसे अपना गुनाह काबुल कर रहे है मुझे नहीं पता था की पुलिस डिपार्टमेंट में इतने मुजरिम भरे पड़े है

िग ........उम्मीद तो थी अफसर पैर इतने गुनहगार होंगे ये नहीं सोचा था हमने भी सब के खिलाफ एक्शन लो अफसर किसी को मत छोड़ना

कमिश्नर...... उसके हाथो से कोई बचेंगे तब न एक्शन लेंगे न सर मुझे नहीं लगता वो किसी को बक्श ने वाला है भले हे उसका रास्ता कानून की नजरो में गलत है पैर इन्हे देखने के बाद लगता है वही इन सब के लिया सही है

निर्भया किसी मदमस्त हठी के जैसे चलता हुआ उन सभी के सामने आ खड़ा हुआ

निर्भया ........... मन तो करता है तुम सभी को यही जिन्दा अग्नि में झोंक दूँ तुम सभी ने इस वर्दी को कहालाँकित किया है जिन्हे इंसानियत की रक्षा करने के लिया रक्षक का दायित्व सौंपा वही इंसानियत का भक्षण करने वाले राक्षश बन बैठे तुम लोग सबको सजा मिलेगी

निर्भया एक बार उन हजार से ऊपर पुलिस वालो को घर के देखता है

निर्भया .......... अभी भी बहुत से लोग बाकि है जो चुप रहे है पर मुझसे चुप नहीं सकते

निर्भया पीछे पलट कर िग को घूरता है

िग निर्भया की नजरे खुद पे मह्सुश कर थार थार कपङे लगा

निर्भया ........ गाब्रिए नहीं गुनाह आपसे भी हुए है पर वो अनजाने में उम्मीद है आगे ऐसा नहीं होगा इन सभी की तत्काल इन सभी के पद आवर वर्दी से रक्षक होने का अधिकार चिन्ह चीन लीजिये

ी ग ....... कम ..... कमिश्नर इन सबकी वर्दी से इनके स्टार आवर गन उतर लो

निर्भया के इसारे पे करीब 100 से ऊपर पुलिस वाले किसी रोबोट के भाटी उन पुलिस वालो के बिच से निकल कर सामने आ खड़े होते है

निर्भया ........ तुम सब वो मुजरिम हो जिनका अंत आज होगा तुम लोगो ने न जाने कितनी जिन्दगिया बर्बाद की है इस वर्दी की आड़ में आज तुम सभी की मौत का तांडव पूरी दुनिया देखेगी कमिश्नर ये वो गुनहगार है जिन्होंने कुछ पल के सुख के लिया कितने परिवार बर्बाद किये कितने हे मासूमो की जिंदिगिया बर्बाद की है इन सभी की वर्दी उतर दो आवर तुम सब ये मत समझना की बच गए अपने पापो का प्रायश्चित करने का एक मौका दे रहा हूँ तुम लोगो द्वारा किया एक बुरा करम तुम्हे िम्हे पापियों की भीड़ में ला खड़ा करेगा अब अपने किया पापो की सजा भोग कर अच्छा इंसान बनना है या मेरे हठी मृत्यु प्राप्त करनी ये तुम्हारे करम तय करेंगे

निर्भया उन बाकि पुलिस वालो को छोड़ उन्हें अपने पीछे ले कर निकल गया जिन्हे निर्भया का दंड चक्र भोगा था

पुलिस हेडक्वार्टर्स के बहार मीडिया वालो का ुजुम उम्दा हुआ था

पैर किसी की हिमत न हुई निर्भया से कुछ पूछने की

चलते चलते निर्भया असुरमय का प्रयोग कर उन सभी को प्रेतराज द्वारा भेजे सेनिको के साथ भेज दिया आवर उन सभी के स्थान पे माया रूपी पुलिस वालो को ले कर एक स्थान पे पहुंचा

निर्भया .....ये वो पुलिस वाले है जिनके बुरे कुकर्मो का दंड आज इन्हें मिलने वाला है आप में से कुछ इनके परिजन होंगे मात्रा होंगे इन्हें यहाँ देख मुझे क्रोधित भी हो रहे होंगे पैर मुझपे कोई असर नहीं होगा आज जिस तरह तुम लोगो आवर मुजरिम बेबश हो रहे ुशी तरह वो मासूम आवर निर्दोष बेबश हो कर इनके हत्याचार सही इनका हर जुलम सहा इन्होने जिस अधिकार का दुरूपयोग कर उन्हें प्रताड़ित किया आज इनसे वो सब अधिकार चीन गए समय का चक्र जहा से गुमनाम आरम्भ करता है उसे लौट के आना भी वही पड़ता ुशी तरह पापी के पाप करम भी एक समय स्वयं पापी के समक्ष आ खड़े होते है

निर्भया उन पुलिस वालो की तरफ गम कर किसी मंत्र का प्रयोग करता है तो वह अनगिनत विचित्र प्रकार के अनगिनत छोटे छोटे जिव अचानक से प्रकट हो जाते है आवर वो सभी उन पुलिस वालो की आवर बड़ी तेजी से भाड़ उनके सरीर को काटने लगते है आवर उनके सरीर में प्रवेश करने लगते है

चारो तरफ चीख पुकार मचने लगती है कुछ रिपोर्टर तो इस भैया नज़ारे को देख पीछे हैट कर उल्टिया करने लगते है कुछ तो बेहोश भी हो चुके थे

देखते हे देखे सभी पुलिस वालो के सरीर चलनी के जैसे उन जीवो ने कुतर कुतर के छेद कर दिए पूरी दुनिया इस भयावय दृश्यों को देख रही थी नदी बुजुर्ग ने तो बचो को टीवी से दूर हे कर दिया कुछ ने तो दर आवर घिन से टीवी हे बंद कर दिए

करीब 15,20 मिनट्स में वह केवल उन पुलिस वालो की हड़िया का संधा हे बचिए था

निर्भया ....... आज से ठीक 7वे दिवश यही फिर से एक बार मेरा कहर बरपेगा पैर इस बार मुंबई महानगर पे बचना चाहते हो तो अपने गुनाहों से तोबा कर खोद को कानून के हवाले कर दो वर्ण यही असर या इस से भी भयानक तुम्हारा होगा आज का दंड चक्र समाप्त हुआ

निर्भया वह से अगले हे पल गायब हो सूर्य में समाहित हो गया ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................

नेक्स्ट अपडेट दीप्ती सूर्य फर्स्ट सेक्स नाईट सीन ..........
 
अपडेट .239.

सुनिधि सूर्य सोफी राधिका चारो खाना खा चुके थे

सुनिधि ....... अब बताओ कब तक यहाँ पे हो तुम

सूर्य ...... अभी तो एक दो दिन के लिया मुझे जाना होगा उसके बाद पूरी फॅमिली के साथ दिल्ली में हे रहूँगा पापा यहाँ से बिज़नेस स्टार्ट करने वाले है आवर बाकि सभी का भी कॉलेज में यही एडमिशन होना है

सुनिधि ......क्या सच में आप सभी दिल्ली सिफत हो रहे हो आवर कोनसी कॉलेज में एडमिशन ले रहे हो

सूर्य ....... तुम हे कोई बढ़िया कॉलेज बता दो बाकि बाद में सभी की जहा मर्ज़ी होगी वह एडमिशन लूंगा कॉलेज तो उन्हें हे जाना है न

राधिका ......क्यों आप नहीं जायेंगे क्या

सूर्य .....जाऊंगा पैर बहुत काम क्यों की अब ड्यूटी भी करनी है साथ में पापा का बिज़नेस आवर भी बहुत कुछ है करने को थड़ा आपके साथ मस्ती मज़ाक करने के लिया भी तो टाइम चाइये न हाहाहा

सोफिया ....... हम भी यही एडमिशन ले रहे सानिया दीदी ने बात की है अम्मी अब्बू से उन्होंने इजाजत दे दी है

सूर्य. ..... ये तो बहुत अच्छी बात है सोफी माँ तो तुम्हे बिलकुल भी छोड़ने वाली नहीं है उन्हें तुम बहुत पसंद आवर स्पेशलय तुम्हारी ये प्यारी सी मन को मोह लेने वाली दिलकश मुस्कान

तुम्हारी एक मुस्कान से न जाने कितनो के दिल की धड़कन रुकने लगती है






सूर्य के मुँह से अपने लिया तारीफ भरे अलफ़ाज़ सुन सोफिया की मुस्कान आवर गहरी हो जाती है जिसने देख सूर्य बोलना हे भूल सोफी की उन गुलाबी रंगत भरे मधुप्याले में खोने खोने लगता जिनके बिच से वो सफ़ेद नायब मोती सामान चमकते दन्त

राधिका आवर सुनिधि इन दोनों को ऐसे खोया देख दोनों एक दूसरे को कोई इसरा देती राधिका सूर्य के चेहरे के बिलकुल पास अपना मुँह उसके कान से सत्ता कर जोर से चिल्लाती है

इस तरह चिल्लाने से सूर्य हड़बड़ी में दैंनिग चिर से निचे गिर जाता है

राधिका आवर सुनिधि के साथ हे सोफिया की हंसी भी गूंज उठी

सूर्य ........ ये आपने अच्छा नहीं किया कोई इस तरह भी किसी को डरता है क्या भाबी

राधिका .....ये सुनिधि का प्लान था मेरा नहीं आवर यहाँ दो आवर भी खूबसूरत लड़किया है फिर तारीफ सिर्फ एक की ये तो न इंसाफ़ी है न देवर जी क्या हम खूबसूरत नहीं है या सोफिया आपको कुछ ज्यादा हे खूबसूरत लगती है इरादे क्या है आपके

सूर्य ..... मैंने कब कहा भाबी की आप आवर सुनिधि खूबसूरत नहीं हो

सुनिधि ......... बस बस पता है हमें की सोफिया हम सबसे ज्यादा स्वीट आवर क्यूट है

राधिका .....मतलब हॉट एंड सेक्सी न

सुनिधि .......हॉट एंड सेक्सी तो सानिया दी आवर माया दी है हम दोनों तो स्वीट आवर क्यूट है

है आप भी कुछ दिनों से बहुत हॉट होती जा रही है

सूर्य ....... आप सब को घर नहीं जाना क्या 3 बजने को आये भाबी आंटी जी घर में अकेली होंगी

सुनिधि ....... हम आज यही रहेंगी दोनों समाज गए मर .

राधिका .....वो मम्मी जी घर पे नहीं है वो अपनी शैली मल्होत्रा जी के घर गयी है उनकी बेटी से मिलने तो वो साम को हे आएँगी घर

सूर्य ...... अच्छा ठीक है आप लोग बाते कीजिये मैं थोड़ा आराम करता हूँ

राधिका ....... ठीक है आप आराम कीजिये हम लोग भी घर जा कर आराम करते है

सूर्य ......ये भी तो आपका हे घर है राधिका ी मैं भाबी जी

सूर्य वह से उठ अपने रूम की आवर चल दिया

सुनिधि आप सोफी के साथ आराम कीजिये मुझे कुछ बात करनी है सूर्य से

राधिका ......ठीक है पैर बात हे करना कही कुछ आवर न करने लग जाना हम भी यही पे है

सुनिधि ...... अगर कुछ आवर करना होगा तो हक़ से करुँगी भाई दोस्त पे इतना हक़ तो बनता है जैसे आपका अपने देवर पे

सुनिधि ने ये बात कही तो केवल मजाक में हे थी पैर राधिका को पता चल गया की सूर्य आवर उसका सच सुनिधि जानती है

राधिका ...... सोफिया तुम चलो मैं आती हूँ

सोफिया ........ जी भाबी

राधिका ........ रुको सुनिधि सच बिताना तुम्हे मेरी कसम तुमने ऐसा क्यों कहा की

सुनिधि ......क्या मतलब भाबी

राधिका ......देखो सुनिधि इस वक़्त मैं मज़ाक के मूड में नहीं हूँ

सुनिधि ........ सच में भाबी मैंने केवल मज़ाक में कहा था वेट मिनट्स ओह माय गॉड तो आप वो समाज रही है है मैं वो भी जानती हूँ भाई आवर मैंने कसम खाई है किसी को आपके आवर सूर्य के दूसरे रिश्ते के बारे में नहीं बताउंगी आप बे फ़िक्र रहो आपकी मज़बूरी मैं जानती हूँ पैर कभी आपको मेरी वजह से कोई शिकायत नहीं होगी जैसे दीप्ती दीदी सब जानती है वैसे मैं जानती हूँ वैसे हम सब एक हे कस्ती के स्वर है बस आपकी खवाहिश कुछ आवर थी जो पूरी हो गयी पैर हमारी पूरी हो कर भी अधूरी रह जाएँगी

राधिका ......... मुझे लगा हे था मतलब तुम भी

सुनिधि .....मैं क्या लड़की नहीं हूँ भाबी या मेरे पास वो सब नहीं जो आपके पास है जिन्दा है तो इच्छा भी होगी हे न चाहते हुए भी इसकी आवर कदम अपने आप भाड़ जाते है ये जानते हुए भी की ये मेरा नहीं हो सकता है फिर भी खुद को रोक नहीं पति हूँ अब आपका आवर मेरा राज एक हे है सो चिंता मत कीजिये आवर उसका ख्याल रखिये जो आपने है

राधिका ......... थैंक यू सुनिधि मेरी मज़बूरी समझने के लिया

सुनिधि ......वैसे आपकी चल आज भी कुछ बदली हुई है कही रात में हे घोडा चढ़ तो नहीं गया इस घोड़े पे हहहहए

राधिका ......... वो जब चढ़ेगा न तब तुम्हे भी पता चल जायेगा

सुनिधि .........सुनिधि इतनी जल्दी हाथ न आने वाली भाभी स्टाम्प उसका हे लगेगा पैर मर्जी आवर जगह हमारी होगी हेहेहे

राधिका ...... ये भूल है तुम्हारी या उसकी सराफत संजो तुम अब जाओ तेरा घोडा कही सो न जाया

सुनिधि ......मेरा या आपका ाचा कुछ देर डिस्टर्ब न करे कोई

राधिका ......गेट लॉक कर लेना अंदर से सोफिया को मैं संभल लुंगी बाकि कोई है नहीं

सुनिधि आवर सूर्य बाते करते करते a.c की ठंडी हवा में न जाने कब सूर्य की आँख लग गई

सूर्य को सोया देख सुनिधि डेरी से खिसक कर सूर्य से सात कर आहिस्ता से सूर्य का हाथ सीधा कर अपने सर के निचे तकिये के रूप में लगा सूर्य से चिपक करअपने एक हाथ सूर्य के सीने पे दाल कर लेट जाती है

सूर्य एक बार आँखे खोल कर देखता है आवर मुस्कुराते हुए सुनिधि के बालो को सहलाते हुए दोनी पे चादर दाल आँखे फिर से बंद कर लेता है






करीब 5 बजे राधिका एक बार घर जाने से पहले सूर्य के दूर को नॉक करती है पैर जब कोई दूर नहीं खोलता है तो के हॉल से देख मुस्कुराते हुए घर चल देती है

साम को करीब साढ़े 6 के आस पास सोफिया की आँखे उसके फ़ोन की घंटी से खुली कॉल उसकी अम्मी का था

सोफी बात करते हुए बाथरूम में जा खुद को फ्रेश करती है हाथ मुँह दो कर अपने बालो को संवर वो बहार निकल तो कोई नहीं था बहार उसे लगा सूर्य आवर सुनिधि राधिका के घर गए होंगे तो वो भी उदार हे चल दी

रात करीब 8 बजे दीप्ती भी ताकि हरी ड्यूटी से लौट आयी थी

सूर्यकांत सर आज किसी जरुरी काम से आउट ऑफ दिल्ली रहने वाले थे रात को

सूर्य ...... Hello आंटी जी क्या बात है आज आप की तबियत ठीक नहीं है क्या जो आप इस तरह से उदाश है

आंटी जी .....कुछ नहीं बीटा मैं ठीक हूँ

सूर्य ......क्या आंटी जी बीटा भी कहती हो आवर बेटे से बात भी छुपाती हो ये क्या बात हुई

सूर्य उनका हाथ पकड़ कर महज़ चेक करता है

सूर्य ....... आपका तो ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है आंटी जी इतनी टेंशन किस लिया आंटी जी

आंटी जी ...... तुम्हे कैसे पता बीटा मैं टेंशन में हूँ

सूर्य ........ आपका सरीर ठंडा पद रहा है आवर गर्दन पे हल्का पसीना बता रहा है की आपको ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है

राधिका ......पता नहीं जब से मम्मी जी घर लौटी है कुछ परेशान सी है मुझे भी कुछ नहीं बताया इन्होने

सूर्य .......कोई बात नहीं इन्हें इनकी दवा दे दीजिये आवर रात में खाने के बाद याद से नींद की दवा ताकि अच्छी नींद आये इन्हें टेंशन की वजह से नहीं तो ठीक से सो नहीं पाएंगी आंटी जी

राधिका .....जी देवर जी मैं अभी लती हूँ

राधिका अभी दवा लेन पलटी हे थी की अचानक से उसका बैलेंस बिगड़ जाता है आवर वो गिरने लगती है सूर्य जल्दी से राधिका को निचे गिरने से संभालता है

आंटी जी .....राधिका बेटी क्या हुआ तुम्हे तुम ठीक तो हो न बीटा ध्यान कहा है तुम्हारा

सूर्य .......क्या हुआ भाबी आपका इस तरह से अचानक से लड़खड़ा कैसे गई

राधिका ......कुछ नहीं वो बस पता नहीं कैसे अचानक से चाकर आ गया था

सूर्य ........कोई बात नहीं आप खाना खा कर आराम कीजिये बाकि सोफी सुनिधि आवर दीप्ती जी है कोई काम हुआ तो वो देख लेंगी

कुछ देर बाद राधिका सभी का खाना लगा देती है अब दीप्ती भी फ्रेश लग रही थी आवर कुछ खुश भी

सूर्य खाना खा कर कुछ देर बहार टहलने का बोल कर बहार आ गया उसके पीछे हे दीप्ती भी बहार आ गयी

दीप्ती ....... रुको मैं भी साथ चलती हूँ तुम्हारे

दीप्ती आवर सूर्य दोनों चुपचाप चहल कदमी करते हुए ख़ामोशी से तुमने लगते है कुछ देर बाद आखिर दीप्ती ने हे ख़ामोशी भांग की

दीप्ती ....... तो क्या सोचा आपने

सूर्य .......किस बारे में पूछ रही है दीप्ती जी

दीप्ती ......इतने भोले भी नहीं हो आप समजे मर. दो दो सादिया कर ली आवर देखो तो कैसे भोले बने गम रहे हो दो बिबिया घर पे एक ीदार भी बाकि कहा कहा है बना राखी है

सूर्य .....ऐसा कुछ नहीं है दीप्ती जी

दीप्ती ........ देखो अगर तुम मेरे हे मुँह से सुन्ना चाहते हो तो बोल दो मैं हे सुबह की तरह बे- सरम बन जाती हूँ पैर अपने इरादे नहीं बदलूंगी 27 की हो चुकी हूँ कुछ साल आवर सही

सूर्य ........ सुनिए दीप्ती जी राधिका का मामला कुछ आवर था आवर आप जो छह रही है वो कुछ आवर राधिका जी सदी सुधा है लेकिन आप कुंवारी आपकी पूरी लाइफ पड़ी है आपके सामने मैं आपका जीवन भर साथ नहीं दे सकता ये आप अच्छे से जानती है फिर भी ऐसे चाहत अपने दिल में जागते बैठी है आप

दीप्ती ........ हो गया आपका प्रवचन पूरा अब मेरी सुनिए मैंने कब कहा की आप मुझसे सदी कीजिये आवर अपने साथ रखिये मैं ये बात अच्छे से जानती हूँ की आपका मेरा जीवन भर का साथ नहीं जो सकता है

पैर क्या अपने कुछ पल भी नहीं दे सकते आप आवर रही बात कुंवारी होने का तो मैं कुंवारी नहीं हूँ है ये बात अलग है की मैंने किसी भी लड़के के साथ आजतक सम्बन्ध नहीं बनाये ट्रेनिंग के वक़्त हे ट्रेनिंग करते हुए मेरी विर्जिनिटी ब्रेक हो गयी तो उसकी आप चिंता न करे

सूर्य ....... सोच को अभी भी वक़्त है सुबह जबाब दे देना

दीप्ती ......मैंने सोच लिया है आवर मेरा जबाब है आज रात हे मुझे वो अहसास चाइये जो मैंने आज तक मह्सुश नहीं किया

सूर्य ........सुबह ड्यूटी नहीं जा पाएंगी ड्यूटी छोड़ो बीएड से भी नहीं उठ पाओगी

दीप्ती ......पुलिस वाली हूँ इतनी कमजोर नहीं संजो मुझे

सूर्य ....... ठीक है फिर त्यार रहना आज रात आपके हे रूम में आऊंगा ऊपर का गेट खुला रखना छठ का

दीप्ती ........ ठीक है मैं रहूंगी

सूर्य ......हाहाहा लगता है कुछ ज्यादा हे जल्दी में है आप ठीक है जाइये आवर उन दोनों का क्या मेरा मतलब सोफी आवर सुनिधि

दीप्ती ......उन्हें राधिका संभल लेगी मई चलती हूँ

दीप्ती चारो तरफ देख कर सूर्य के गाल चुम फ़ौरन वह से दौड़ गयी घर की तरफ

सूर्य एक स्थान पे बेथ किरण सपना राधा कोमल अलीना मानसी जुली शालिनी जी से मानशिक संपर्क कर बात करता है

फिर रेखा जी मेनका जी मेर्री जी अपने पापा दादा जी दादी जी से भी बात करता है सभी से अच्छे से बात करते करते सूर्य को समय का पता भी नहीं चला की कब 10 से ऊपर समय हो चला

सूर्य सभी को सोने का बोल अपने घर आ जाता है आवर अच्छे नाहा कर लेट जाता है

दिन में सो लेने की वजह से नींद तो आणि थी नहीं तो लेते लेते टीवी देखने लगा दिन भाई के निर्भया के कारनामे हे दिखाए जा रहे थे सूर्य टीवी ऑफ कर छठ पे जा कर असुरगुरु द्वारा दी पुस्तक को पढ़ने लगता है

राधिका ....... क्या हुआ दीदी कुछ कहा क्या उन्होंने कुछ बात बानी की ऐसे हे ताल दिया आपको बाटी में उल्का कर

दीप्ती .......... आपने सही कहा था सूर्य इतनी जल्दी मैंने वाला नहीं पैर मैं भी be-saram बन जिद पे आड़ गयी तो उसने आखिर यस कह दिया पैर जैसे मैंने हेल्प की आपको भी करनी होगी

राधिका ........ क्या मतलब

दीप्ती ......... माँ तो नींद कज दवा से सुबह लेट उठेंगे पेट सुनिधि आवर सोफिया को तुम्हे संभालना होगा

राधिका ......मतलब आप यही इसी घर में कोई नहीं मैं ढूढ में दोनों को नींद की एक एक टेबलेट दे दूंगी पैर ज्यादा चीख न चुकाना नहीं सुबह आप मह्सुश तो कर हे चुकी है मेरी मानो तो आप पहले हे एक आड़ दर्द की टेबलेट ले लीजिये ताकि आसानी हो

दीप्ती ......हम्म. ठीक है मैं देख लुंगी अब मैं रूम में जा रही हूँ उन्हें किसी भी तरह संभल लेना ok

राधिका ..... फर्स्ट नाईट के लिया आल थे बेस्ट दीदी

दीप्ती ...... थैंक यू राधिका

दीप्ती अपने रूम में जा कर अपने रूम को लॉक कर सीधा बटोरूँ में जा गुस्सी आवर उस आदम कद मिरर के सामने कड़ी हो है अपने इलास्टिक वाली पतली आराम दायक लेग्गी उतर खुद को मिरर में निहारती है फिर डेरी से अपनी रेड

g-spot पेंटी निचे खिसका कर अपनी बाल विहीन योनि क्षेत्र को सहमति है





दीप्ती ....... इन हलके बालो पे हेयर रिमूव उसे करना होगा

दीप्ती अपने पेंटी निकल अपनी चीची ब्रा से आज़ादी कर अलग अलग जंगल से निहारती है जिनके चूचक अभी से अकड़े हुए मिरर में नजर आ रहे थे





दीप्ती ......आज तुम्हारी साडी अकड़ निकल देगा सूर्य ऑफिस में भी हर कोई तुम्हे घूरता रहता है

दीप्ती खुद से हे बात करते हुए अपने अकड़े हुए चूचक को अपनी उंगलियों से कुछ ज्यादा हे जोर से खींच दी की हलकी सी दर्द भर आह दीप्ती के मुँह से निकल जाती है

दीप्ती अपने सरीर पे बचे एक मात्रा कपडे को भी खुद के जिसम से अलग कर हिरे रेमोवेद क्रीम अपने हाथो में अपनी छूट पे आवर अपने काँखो में अच्छे लगा लेती है कारबी 5,6 मिनट्स बाद बाथरूम में रखा छोटा टॉवल गिला कर अपनी छूट आवर काँखो को उस से साफ कर लेती है पूरी अब दोनों जगह बिलकुल साफ़ थी न बाल न बालो के कोई नीसाण वह मौजूद थे

दीप्ती शावर ों कर अच्छे से कहा अपने नंगी हे अपने रूम में आ जाती आवर अपने बालो को टॉवल से लपेट अपने बॉडी पे अलग अलग तरह कज कुछ क्रीम आवर कोई बॉडी स्पेरी का इस्तेमाल करती है पूरा रूम उस भीं भीनी खुशबु से महक उठा था ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
 
अपडेट. 240

दीप्ती खुद से हे बात करते हुए अपने अकड़े हुए चूचक को अपनी उंगलियों से कुछ ज्यादा हे जोर से खींच दी की हलकी सी दर्द भर आह दीप्ती के मुँह से निकल जाती है

दीप्ती अपने सरीर पे बचे एक मात्रा कपडे को भी खुद के जिसम से अलग कर हिरे रेमोवेद क्रीम अपने हाथो में अपनी छूट पे आवर अपने काँखो में अच्छे लगा लेती है कारबी 5,6 मिनट्स बाद बाथरूम में रखा छोटा टॉवल गिला कर अपनी छूट आवर काँखो को उस से साफ कर लेती है पूरी अब दोनों जगह बिलकुल साफ़ थी न बाल न बालो के कोई नीसाण वह मौजूद थे

दीप्ती शावर ों कर अच्छे से कहा अपने नंगी हे अपने रूम में आ जाती आवर अपने बालो को टॉवल से लपेट अपने बॉडी पे अलग अलग तरह कज कुछ क्रीम आवर कोई बॉडी स्पेरी का इस्तेमाल करती है पूरा रूम उस भीं भीनी खुशबु से महक उठा था ...........

अब आगे ..........

सूर्य को असुरगुरु दवारा दी पुस्तक से बहुत से नए आसुरी मंत्रो का ज्ञान हुआ जो असुरगुरु की स्वयं की रचना थी साथ हे असुरलोक के भूतकाल के विषय में ज्ञान मिला

सूर्य को पुस्तक का अध्यन करते हुए काफी समय हो चूका था जब उसके फ़ोन की रिंग बजी तब सूर्य का ध्यान भांग हुआ कॉल दीप्ती का हे था जो सूर्य का इन्तजार कर रही थी

सूर्य ....... साढ़े 11 बज गए पता भी नहीं चला आवर ये दीप्ती की छूट में कुछ ज्यादा हे खुजली मची सुबह जब टंगे छोड़ी करके चलेगी तब पता चलेगा मेरा क्या मैं तो निकल लूंगा

सूर्य दीप्ती के घर की छठ से होते हुए निचे चल दिया साथ हे पुरे घर को स्कीन कर रहा था घर में केवल दो हे जान जगहे हुए थे दीप्ती आवर राधिका

सूर्यव दीप्ती के रूम के सामने पहुंचा आवर दूर के नूब को घुमाया तो डोर लॉक नहीं था सूर्य दूर खोल अंदर आ गया सूर्य ने जब नजरे दौड़ाई तो दीप्ती खिड़की से बहार के नज़ारे देख रही थी

सूर्य ने दूर को अंदर से लॉक कर दीप्ती के पीछे से उसे बहो में भर लेता है

दीप्ती ......आ गए आप

सूर्य .......ये आप आप क्या लगा रखा है मैं कोई पति थोड़े हूँ आपका ुम्मम्हा

सूर्य दीप्ती के गोर गोर गालो को चुम लेता है जिस से दीप्ती के होंठो पे एक प्यारी से मुस्करात उभर आती है





दीप्ती ....... आज की रात आवर हर उस रात जब आप मुझे इस तरह से बहो में भरेंगे उस पाल में आप हे मेरे सब कुछ होंगे

सूर्य ........ ये कुछ ज्यादा नहीं हो रहा इतनी सनाजदार है आप फिर भी ऐसे बाते कर रही है

दीप्ती ......... आपकी बाते यहाँ असर करती है पैर इसका क्या जो आपका होना चाहता है

दीप्ती सूर्य का हाथ अपने राइट साइड की चुकी से थोड़ा ऊपर जहा दिल होता है वह रक्त देती है

ढाक ढाक की वो तेज आवाज सूर्य इस सनते में आराम से मह्सुश कर पा रहा था

दीप्ती ...... मेरे बदन पे किसी आवर का हक़ हो सकता है पैर आत्मा पे केवल आपका

अब सूर्य क्या जबाब देता वो दीप्ती की मनोस्थिति समाज रहा था यहाँ भी हाल मेर्री जी जैसा आवर बाकियो के जैसा था

सूर्य बिना कुछ कहे दीप्ती की उन गहरी काली आँखों में झटका हुआ दीप्ती को अपने सीने से लगा अपने होंठ दीप्ती के होंटो से लगा किश करने लगा





एक लम्बे रोमांटिक किश करने के बाद सूर्य दीप्ती को अपने गौड़ में उठा ुशी के बीएड पे ला कर लिटा देता

सूर्य ...... वैसे एक बात तो माननी होगी दीप्ती तुम्हारी

दीप्ती ........आवर वो क्या है

सूर्य ........यही की तुम हो पाकी बे- सरम हाहाहा सुबह तुमने जो किया ुशी वक़्त मैंने भी सोच लिया था की तुमने जिसने जगाया अब वही तुम्हारी हालत बिगड़ेगा

दीप्ती ......... पुलिस वाली हूँ समजे आप

सूर्य ......वो तो जब सुबह अपनी टंगे छोड़ी कर के चलिए तब पता चलेगा ये पुलिस वाली कितनी मजबूत है

दीप्ती सूर्य को अपने ऊपर खींच फिर स्व किश करने लगी सूर्य किश करते हुए दीप्ती की ठोस घोषत से भरे उभारो को थम लेता है जो मेर्री जी के उभारो से भी कुछ ज्यादा हे ठोस थे

किस करते करते सूर्य दीप्ती के कंधे से से स्ट्रिप्स हटा कर निचे कर देता है अब दीप्ती की दोनों चूचिया जो की 34 की साइज से हलकी बड़ी थी उन्हें बे पर्दा कर चूका था

दीप्ती ......ुम्मम्हा आज पता चल रहा है एक मर्द के स्पर्श से लड़की मदहोश क्यों होने लगती है

सूर्य दीप्ती की गर्दन चूमते हुए उसके बदन की वो भीनी भीनी खुशबु लेता हुआ दीप्ती के एक अकड़े हुए चूचक को मुँह में भर लेता है





दीप्ती ......उम्म्म उमंमाहहहह आज इनकी साड़ी अकड़ निकल दीजिये हर वक़्त अकड़े रहते है

सूर्य ......उम्म्म्म इनके साथ साथ साथ किसी आवर की भी अकड़ निकालनी है

दीप्ती ....... आपको जो करना है कीजिये मुझे बस इस मज़े को मह्सुश करने दीजिये

सूर्य ...... बस...

अभी सूर्य आगे कुछ बोलता उसे किसी आवर ऊर्जा का रूम के अंदर अहसास हुआ सूर्य दीप्ती से हैट उदार उदार देखता है

दीप्ती ....... क्या हुआ आप रुक क्यों गए

सूर्य ......कुछ नहीं मैं बाथरूम हो कर आता हूँ

सूर्य वह से दीप्ती के बाथरूम में गेस गया

सूर्य ......सामने आओ लक्समी

जी है सूर्य को जी दीप्ती के रूम में ऊर्जा मह्सुश हुई वो किसी आवर की नहीं लक्समी की थी

लक्समी की नवविवाहिता के जैसे शरमाते हुए सूर्य के सामने अप्पेअर हो जाती है

सूर्य ....... ये सब क्या है आप यहाँ क्या कर रही है

लक्समी ......वो मुझे आपसे मिलना था पैर आप यहाँ एक इंसान के साथ वो सब कर रहे थे तो मुझसे रुका नहीं गया आवर मैं चुप कर देखने लगी

सूर्य ......मैं भी इंसान हूँ मेरा जनम इंसानी योनि में हुआ है आवर आपको सरम नहीं आती किसी लड़के लड़की को इस तरह एकांत के पालो में डिस्टर्ब करते हुए

लक्समी .......सॉरी पैर आपको वो सब करता देख अच्छा लग रहा था इस लिया बिना आपकी मर्ज़ी के हे

दीप्ती .....क्या हुआ इतनी देर क्यों लगा रहे हो

सूर्य ...... आ रहा हूँ दीप्ती .तुम जाओ मैं सुबह मिलता हूँ आपसे लक्समी जी

लक्समी ...... क्या आप मुझे भी प्यार करेंगे

सूर्य ......क्या कहा ....

दीप्ती .........मैंने तो कुछ नहीं कहा

सूर्य .......देखिये लक्समी आप एक आत्मा है आवर कल आप मुक्त हो जाएँगी फिर क्यों ऐसे ख्याल ला रही है आप

लक्समी ......... आत्मा की इच्छा पूरी न हो तो वो मुक्त नहीं हो सकती प्लेसेस मेरी आखरी बात मान लीजिये मैं इनके सरीर में

सूर्य .....पागल हो क्या

लक्समी ....... क्यों मुझे प्यार करने ख़ुशी से मुक्त होने का हक़ नहीं है

सूर्य ........ठीक है पैर ये लास्ट विश होगी आपकी मांग तो बढ़ती hi जा रही है

लक्समी ख़ुशी से सूर्य के गले लग जाती है

सूर्य ....... अभी जाओ जब मैं याद कृ तब आ जाना

लक्समी .....जी ठीक है

दीप्ती ......क्या हुआ आप किस से बात कर रहे थे

सूर्य ......कुछ नहीं खुद से बात कर रहा था आप त्यार है

दीप्ती .....हम्म्म

सूर्य अपने कपडे उतर दीप्ती के ऊपर आ जाता आवर फिर से उसे चूमने लगता है





गर्दन को चूमते हुए सूर्य डेरी डेरी दीप्ती के बूब्स की आवर भाड़ जाता है

साथ हे अपना एक हाथ दीप्ती के स्कर्ट में दाल देता है

दीप्ती ने निचे स्कर्ट में कुछ भी नहीं पन्ना था सूर्य का हाथ सीधा उस लचीले फुले हुए अंग पे लगता है जहा हलकी उमेश जैसा गीलापन के साथ रूम के विपरीत हलकी गर्माहट थी

दीप्ती .....ुम्मम्हा उसे सहलाओ बहुत अच्छा लग रहा है

सूर्य ....... लगता है काफी बटलर सहलाया है वह आवर उंगलियों का इस्तमाल भी हुआ है

सूर्य दोनों बूब्स की अच्छे से कुश दीप्ती की स्कर्ट उठा उसकी बाल विहीन छूट को देखने लगता है

दीप्ती पहली बार सरम के चलते अपने ादखिले कमल पुष्प सामान योनि को अपने हाथ से चुनती है

सूर्य .....इस नायब पुष्प से पर्दा तो बताइये दीप्ती जी हम इसका दीदार नहीं करेंगे तो आपके इस कमल पुष्प से वो ोष की बूंदा राश पान कैसे करेंगे

सूर्य दीप्ती का हाथ हटा उसके दोनों पेअर फैला कर देखता है





बहार से हल्का बुरापान लिया वो खूबसूरत योनि का छोटा सा छेद काफी था ये बाटने के लिया की यहाँ ज्यादा म्हणत नहीं की है

सूर्य अपना चेहरा बढ़ा दीप्ती के अधखिली कमल पुष्प को चुम लेता है

डीओटी की तो एक पल के लिया सांसे हे अटक गया थी

जजिसम में एक अलग हे मदहोशी चने लगे जैसे छूट में किसी ने एक साथ हजारी चींटिया छोड़ी दी रेंगने के लिया





दीप्ती ....... उम्म्म्म अह्ह्हह्हह्हं पता होता इसमें इतना मज़ा है तो मई कब की be-saram बन होती आपके सामने उम्म्म्म अह्ह्ह्ह ऐसे हे अपनी जीव अंदर दलीय बहुत अच्छा लग रहा है

सूर्य दीप्ती के पैरों को थोड़ा आवर फैला देता है जिस से दीप्ती की छूट के दोनों चिपके हुए होंठ थोड़े खुल कर अंदर का वो लाल लचीला मांश दिखने लगते है

सूर्य अपने जुबान को दीप्ती की छूट में दाल छूट के अंदुरनी भाग को कुरेधने लगा





दीप्ती का जिसम जैसे हवा में तैर ने लगता है उसकी छूट के होंठ फड़फड़ाने लगते है

दीप्ती ...... अहहहजह मुझे कुछ हो रहा है उफ्फफ्फ्फ़ मैं ुध रही हूँ

सूर्य दीप्ती की छूट में अपनी एक ऊँगली दाल उसके काम राश से गीली कर दीप्ती के गुदाद्वार को सहलाने लगा अगले हे पल दीप्ती की कमर कमान की भाटी अकड़ गयी सूर्य के सर को जोर से अपनी छूट पे दबाये दीप्ती भटके कहते हुए झड़ने लगी

हलके खट्टे सवाद का वो तरल सूर्य पूरा चाट कर साफ कर देता है

कुछ पल बाद सूर्य दीप्ती के सर की आवर चला जाता है दीप्ती बीएड पे पलट सूर्य की अंडरवियर में बने उभर को सहला कर अपना हाथ अंडरवियर में दाल उस फुफकारते नाग को सितारे से आज़ादी करती है





दीप्ती .....ये तो सुबह से भी बड़ा आवर गरम है ये वह चला तो जायेगा न

सूर्य .....आराम से बस एक बार दर्द होगा फिर नहीं बस अपनी छूट में लेने से पहले उसे थोड़ा कुश कर गिला कर दो तो तुम्हे ज्यादा तक्लिप नहीं देगा ये





दीप्ती .....ुम्मम्हा इसका टेस्ट ऐसा कैसे है बकबका सा

सूर्य .....तुम पहली बार कुश रही हो न इस लिया ऐसा लग रहा है

दीप्ती से जिस तरह से चूसना गया वो चुने लगी पैर जल्दी हे उसे उबकाई आने लगो तो सूर्य ने हे उसे पीछे किया





सूर्य ......जब अच्छा नहीं लग रहा तो कोशिश क्यों करती हो

दीप्ती ....पैर आपको तो अच्छा लग राग है न

सूर्य जरुरी तो नहीं की जो मुझे पसंद हो वही करो

तुम्हारा पहला अनुभव है इस लिया जो तुम्हे पसंद हो वैसे हे करो न की मुझे समाज गयी कोई क्रीम है तो देना मुझे

दीप्ती अपने कोल्ड क्रीम बॉडी लोशन सूर्य की आवर बढ़ा देती

सूर्य दीप्ती की छूट पे अच्छे से कोल्ड क्रीम लगा कर कुछ उसकी छूट में बिड ऊँगली से भीतर कर देता है आवर अपने लैंड पे क्रीम लगा

दीप्ती की छूट की फांक हो पे सूपड़ा जिश्ने लगता है

दोनों के गर्मी से जल्दी हे क्रीम मेल्ट हो चिकने तरल में बदल गयी

सूर्य .....दीप्ती तुम त्यार हो

दीप्ती ......है मैं त्यार हु पैर आराम से डालना मेरी छूट फाड् मत देना

दीप्ती दोनों हठी से अपनी छूट को थोड़ा खोल लेती है

सूर्य अपने दहकते मोठे सुपडे को दीप्ती के छूट के चढ़ पे लगा थोड़ा जोर से झटका देता है





दीप्ती की तो जैसे जान इतने में हे nakal.gai उसकी आँखों के सामने अँधेरा सा आ गया आवर आँखों से आंसू

सूर्य..... बस कुछ पल हिमत रखा क्या तुम राधिका से भी कमजोर हो दीप्ती.

सूर्य डिप्टी की बूब्स को चूसते हुए किश करते हुए उसे नार्मल करने लगता है

कुछ हे देर में जब छूट ी अपनी कसावट कुछ ढीली की की तो सूर्य ने एक बार फिर से कोई मौका दिए बिना जोरदार झटका दे मारा इस बार सूर्य को भी थोड़ी परेशानी हुई पैर सभी रुकावट तोड़ सूर्य उस गरम मांश की गुफा में करीब 4 इंच अंदर जा गुसा

दीप्ती .....अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मी मेरी छूट अह्ह्ह्ह सूर्य बहुत दर्द हो रहा है प्लेसेस कुछ करो

सूर्य दीप्ती की आंसू पिटे हुए उसके पुरे चेहरे को चुम उतने हे लैंड से दीप्ती की छूट छोड़ने लगा





दीप्ती .....अहहहजह माँ प्लेसेस सूर्य रुक जाओ कुछ देर

सूर्य .....अगर अभी रुका तो दर्द ज्यादा होगा तुम्हे तुम्हारे खुले कमर बहुत हलकी है इस लिया इतना दर हो रहा है अगर मैं रुका तो तुम्हारा सरीर ठंडा पढ़ने लगेगा तो ज्यादा दर्द होगा

दीप्ती अपना हाथ ले जा कर अपनी छूट पे रखती तो कुछ गीलापन मह्सुश होता है





( सूर्य ...... अगर इसे ऐसे हे दर्द होता रहा तो सुबह तक भी इसकी ठीक से चुदाई नहीं होगी लगता है लक्समी को अभी बुलाना होगा उसकी भी इच्छा पूरी हो जाएगी आवर इसका भी काम पूरा हो जायेगा )

सूर्य लक्समी को याद करता तो जैसे लक्समी बस इसकी हे पार्टिकाश में थी

लक्समी सीधा दीप्ती के सरीर में प्रवेश कर गयी

सूर्य ने भी ुशी समय अपने लैंड को पूरा लक्समी की छूट में उतर दिया





लक्समी ......... आअह्हह्ह्ह्ह मार गयी अहहहजह अभी भी इतना दर्द होता है

सूर्य ....बस कुछ देर देखो आत्मा तुम्हारी है पैर सरीर तो कुंवारा दीप्ती का है उसका आज पहली बार था इस लिया तुम्हे भी दर्द ख़ुशी सुख दुःख सब मह्सुश होगा जैसे की ये तुम्हारा सरीर है

सूर्य लक्समी की छूट में पूरा लैंड उतर चूका था अब डेरी डेरी लक्समी की चुदाई करनी सुरु कर चूका था दीप्ती के सरीर में कोई खाश फरक नहीं आया बस अब बूब्स की साइज थोड़ी बढ़ी हुई थी आवर दीप्ती के चेहरे में लक्समी का अक्ष नजर आ रहा था





सूर्य लक्समी की चुदाई के साथ साथ उसके सरीर के साथ साथ उसकी आत्मा के हर हिशे में अपना प्यार लुटा रहा था

लक्समी को आज पता चल रहा था प्यार आवर हताश में कितना अंतर होता है हवश केवल सरीर भोगती है पैर प्यार प्यार आत्मा तक को मह्सुश होता है

लक्समी की भीगी हुई आँखे देख सूर्य उन्हें चुम लेता है

सूर्य ....... जो बिट चूका है उसे कोई नहीं बदल सकता लक्समी आवर न इन िंचाओ का कोई अंत है तुम्हारा जीवन चक्र बहुत पहले हे समाप्त हो चूका था पैर तुम्हारी इच्छा ने तुम्हे मुक्त नहीं होने दिया सभी इच्छाओ का दमन कर अपने मुक्ति के मार्ग पे बढ़ो लक्समी जहा तुम्हारा नया जीवन तुम्हारा इन्तजार कर रहा है

लक्समी .....उम्म्म्म मेरी योनि से कुछ बहार आ रहा है

सूर्य .....वो तुम्हारा पहला चरम सुख है लक्समी अब तुम्हारी इच्छा पूरी हो चुकी है

लक्समी के झड़ते हे लक्समी दीप्ती के सरीर से निकल जाती है

लक्समी .......आपका बहुत बहुत शुक्रिया मुझे ये अहसास देने के लिया मैं चलती हूँ मुक्त होने से पहले एक बार आप से फिर मिलना चाहूंगी

सूर्य ....ठीक है

दीप्ती .....अहहहजह क्या ठीक है

सूर्य मेरा मतलब तुम ठीक हो न

सूर्य दीप्ती खड़ा कर घोड़ी बना एक बार फिर से अपना लैंड टिका देता है





दीप्ती की छूट पूरी तरह से खुल चुकी थी आवर कुछ दर्द की टेबलेट की वजह से दीप्ती को अब दर्द नहीं हो रहा था

बल्कि मज़ा आ रहा था

सूर्य .....अब कैसा लग रहा क्या अभी भी दर्द है

दीप्ती .....िष्ठ्हज्ज अह्ह्हह्हह्हं अभी तो बहुत मज़ा आ रहा है दर्द बिलकुल भी नहीं है बस छोड़ते रहो





सूर्य एक ताल में दीप्ती की चुदाई करने लगता है बिच बिच में दीप्ती के गांड के के भूरे छेद की भी कुरेद देता है

दीप्ती .....वह के बारे में सोचना भी नहीं वह डाला तो मैं जिन्दा भी न बचने वाली

सूर्य ....... चिंता न कृ वह मैं नहीं डालने वाला

4.5 मिनट्स ुशी तरह चुदाई से दीप्ती पहली बार चरम सुख का मज़ा ले रही थी पहले टाइम तो लक्समी ने वो चरम प्राप्त किया था

दीप्ती अब मैं आपकी ऊपर आ कर चुदाई करुँगी

सूर्य .....जैसे आपकी मर्जी मेरा भी होने वाला है

दीप्ती ......पहली बार अंदर हे करना मैं पिल्स ले लुंगी

सूर्य लेट जाता है आवर दीप्ती आहिस्ता आहिस्ता अपनी छूट के सूजे हुए होंठो के बिच सूर्य के लैंड को लगा बेथुने लगती है





सूर्य हल्का सा अपनी कमर का प्रहार कर लगभग पूरा लिंग एक हे बार में उतर दिया

दीप्ती के चेहरे के रंगत एक बार फिर बदली

पैर खुद को सँभालते हुए डेरी डेरी सूर्य के लैंड पे अपनी छूट पटाने लगी

सूर्य ....... अब तो खुश हो न दीप्ती

दीप्ती ...... अभी के लिया तो है मैं बहुत खुश हूँ पैर आगे भी ऐसे हे खुश रखना होगा आपकी

सूर्य ....उम्म्म्म ये कहा से सीखा इस तरह लैंड एंड ले गांड को गुमाना

दीप्ती ......पोर्न वीडियोस में देखा था कभी कभी देख लेती हूँ रात में

सूर्य ...... सदी नहीं करनी क्या तुम्हे जो आगे भी मैं हे ख्याल राखु

दीप्ती .....हेहेहे क्यों एक बार में हे मन भर गया क्या मुझे से ुम्मम्हा





सूर्य ......किसने कहा मन भर गया एक यही काम तो है जिसमे हर मर्द को करने मज़ा आता है आगे का आगे देखेगा अभी जल्दी करो टाइम देखो जरा

सूर्य दीप्ती की कूल्हे थम तेजी से सत्ता सात निचे से कमर चलने लगता है

देखो की तेजी से बीएड भी हिलने लगता है दीप्ती की चूचिया भी थिरकने लगती है

दीप्ती .....आसा आराम से पेट में तुम्हारे बड़ा लैंड लग रहा है जैसे पेट में हे छेद कर बहार निकल जायेगा कैसे आदमी हो इतना बड़ा ले कर ऐसे मासूम बने घूमते हो

सूर्य अपने चरम पे था इस लिया बिना ध्यान दिए वो बस दीप्ती की छूट पे ध्यान लगा चुदाई कर रहा था

जैसे हे विस्पोट होने की कगार पे पहुंचा दीप्ती को पलट कर निचे लिटा अपना लावा दीप्ती की छूट में उगले लगा दीप्ती भी अपनी छूट में गरम तरल को मह्सुश कर खुद को झरने से न रोक पायी बचा खींचा वीर्य दीप्ती के पेट पे गिरा सूर्य साइड में लटक गया





दीप्ती तो अपनी छूट में रेंगते सूर्य के गरम वीर्य को हे मह्सुश कर रही थी

कुछ देर बाद शुन्य उठा आवर दीप्ती को गौड़ में उठा बाथरूम ले कर गया वह गरम पानी से भरे बाथटब में दीप्ती को बिठाया थोड़ी तक्लिप हुई दीप्ती को पैर जल्द हे उस गुनगुने पाने ने उसकी सूजी हुई छूट को आराम पहचाना सुरु कर दिया सूर्य शावर के निचे बहा कर दीप्ती को नहला कर उसे बीएड पे लिटा कर कोई क्रीम उसकी छूट के अंदरूनी हिशे में लगा था

दीप्ती ......... ये कोनसी क्रीम है

सूर्य .....इस से तुम्हारे छूट जो जख्मी है जल्दी ठीक हो जाएगी आवर दर भी काम होगा अब आराम से लेट जाओ

दीप्ती .....तुम भी लेट जाओ मेरे सोने के बाद चले जाना

सूर्य ......ठीक है पैर पहले ये टेबलेट ले को दर्द की

सूर्य दीप्ती को टेबलेट खिला खुद पे आवर दीप्ती की कमर तक चादर दाल दीप्ती को बहो में भर लेट गया

10 ,15 मिनट्स में हे दीप्ती को नींद आ गई

सूर्य दीप्ती को ठीक से चादर ुधा निचे चल दिया जहा राधिका उसका इन्तजार करते करते दूसरे रूम में सो गयी थी

सूर्य राधिका के साथ एक राउंड सेक्स कर उसे उसके कमरे में सोने का बोल अपने घर आ कर लेट गया ....

सुबह सोफिया के उठाने पे सूर्य उठा

सुबह सुबह वो खूबसूरत तजा खिला गुलाब देख सूर्य उसे अपने ऊपर हे खींच लेता है आवर सोफी को एक छोटा सा किश कर बाथरूम जा फ्रेश होता है आवर कॉफ़ी पि कर सोफिया को किसी काम का बोल कर बहार निकल गया

राजीव हाउस .....

सूर्य .....hello अंकल कैसे है आप

राजीव ....आओ बेटे सूर्य बैठो विद्या देखो तो कोण आया है

विद्या ( राजीव वाइफ )...... अरे बीटा आप कब आये

सूर्य ....नमस्ते आंटी बस अभी अभी आया हूँ

विद्या ....... अपने अंकल से बात करो मैं कॉफ़ी ले कर आती हूँ

सूर्य ......साथ में नास्ता भी लेते आये आंटी जी

विद्या .......ok बीटा

सूर्य ........अंकल अब आपको उनका अंतिम संस्कार कर देना चाइये आवर मेरे khayal.se आज हे अच्छा रहेगा

राजीव ......ठीक है बीटा जैसा तुम कहो मैं भी यही चाहता हूँ मेरी दीदी को मुक्ति मिले

लक्समी ...... क्या हम एक बार हमारे पुराने घर चल सकते है

सूर्य ......क्या मैं आपका पूर्ण घर देख सकता हूँ अंकल

राजीव ........ है क्यों नहीं बीटा जब से पापा की डेथ हुई आवर मैंने कारोबार संभाला वह रहना हे छोड़ दिया है मैं भी साथ चलता हूँ बाकि तो कोई है नहीं रिस्तेदार जिन्हे बुलाना हो

सूर्य ......मेरे ख्याल से केवल आपको हे वह जाना चाइये उनके अंतिम संकर में कोई है भी तो फिर से उनके जख्मो हरा करना ठीक नहीं

विद्या ......को बीटा आपका नास्ता

सूर्य .....थैंक यू आंटी

सूर्य नास्ता कर राजीव को काम सामना कर उनसे चाबी ले लक्समी के पुराने घर की तरफ निकल गया जो राजीव के घर से 45 मिनट्स को दुरी पे था

सूर्य ......वैसे आपने अचानक घर देखने का विचार कैसे किया

लक्समी ......वह कुछ है जो मैं आपको देना चाहती हूँ बस उसके लिया हे वह ले कर जाना है आपको

सुबह के ट्रैफिक के कारन यहाँ पहुंचने में 1 हर का समय लग गया

सूर्य .......... घर तो अभी भी किसी हवेली के जैसा हे है लक्समी जी लगता है आपके पापा उस समय दिल्ली के अच्छे कारोबारी रहे है

लक्समी ....... जी है ये हवेली दादा जी ने बनवाई थी पापा के लिया जब हम सब दिल्ली आये थे अब अंदर चलिए

हवेली काफी खूबसूरत थी आवर आस पास अच्छी काशी खुली जगह भी थी पैर काफी समय से जैसे किसी ने देखभाल न की हो यहाँ की ऐसा उन जंगली पोधो की वजह से था

सूर्य कार को अंदर कर हवेली का मुख्य गेट खोल लक्समी को साथ लिया अंदर चल दिया पूरी हवेली को देखने के बाद लक्समी सूर्य को एक तरफ ले गयी

लक्समी ......यही आपको देना चाहती थी मैं मेरी मदद के बदले वैसे तो ये एक जिम्मेदारी है मुझे भी यकीं नहीं था की ये अभी तक यहाँ पे इतनी अच्छी हालत में होगी

सामने एक छोटा सा चबूतरे टाइप बना हुआ था आवर उसके बिच में 3क्ष3 का उतना हे उचाई तक का एक पिलर नुमा चबूतरा आवर था उस के बिच में वो बड़ा सा तुलसी का हरा भरा पौधा खड़ा था जो लक्समी सूर्य को देना चाहती थी

लक्समी ........ ये मैंने अपनी माँ के साथ मिल कर लगाया था अपने 15वे जन्मदिन पे मैं चाहती हूँ आप उस कारखाने को हटा कर जहा मेरा सरीर दफ़न है वह का सुधि कारन करके आप अपने हाथो से इसे वह लगाए

सूर्य ......... मुझे ख़ुशी होगी ऐसा करने में लक्समी जी वैसे भी मैं उस तरफ एक छोटा सा बगीचा बनाने वाला था पैर अब वह वाटिका बनेगी फुल्लो की आवर ये पवित्र तुलसी का पौधा भी वही लगेगा उन खुसबूदार पुष्पों के बिलकुल बीचो बिच दादी जी इसे देख सबसे ज्यादा खुश होंगी " लक्समी वाटिका "अच्छा नाम रहेगा इस तुलसी के पोज के साथ साथ आप नाम भी हमेशा हमारे साथ जुड़ा रहेगा

लक्समी ...... आपने जो ख़ुशी दी उसका आभार व्यक्त कर आपकी सहायता का निरादर नहीं करुँगी मैं बस उस ऊपर वाले से आप आवर आपसे जुड़े लोगो की कृषि की प्राथना करूंगी

सूर्य .......अब चलिए चलते है

लक्समी ....... आप जाइये मैं यहाँ कुछ वक़्त अकेले में रहना चाहती हूँ जाने से पहले यहाँ की उन सभी यादो को अपने साथ ले जाना चाहती हूँ

सूर्य ....... ठीक है आपके भाई वह पहुंच गए है आपके सरीर को निकलने के लिया मैं भी चलता हूँ

लक्समी ........ जी शुक्रिया ईश्वर ने इस अभागिन पे दया की तो उनसे प्राथना करुँगी की मुझे अगला जनम आपके आस पास हे दे

सूर्य ........ क्या पता वो ऊपरवाला कब किसकी झोली खुसियो से भर दे

सूर्य लक्समी को चढ़ वह से चला गया लक्समी काफी समय तक उस तुलसी के पौधे को निहारती रही

सूर्य सीधा घर पहुंचा आवर राधिका को सूर्यगढ़ जाने का बता देता है

राधिका ........ आप वापिस कब आओगे

सूर्य .......परषो सुबह या साम तक ये मेरा कार्ड है घर में सभी रूम में जो भी सामान की जरुरत हो आप मंगवा लेना अपनी पसंद का जब तक घर त्यार नहीं होता यही पे रहूँगा बाद में वह सिफत हो जाऊंगा

राधिका .......ठीक है नास्ता कर लीजिये

सूर्य ........ वो मैंने बहार कर लिया राजीव अंकल के यहाँ है दीप्ती कैसे है अब

राधिका ........ उसे बुखार है है आवर दर्द भी

सूर्य ......मैं उस से मिल कर आता हूँ फिर निकलना है आवर सोफी आवर सुनिधि की भी ममद ले सकती है आप घर के लिया

सूर्य वह से दीप्ती से मिल उसे डेब्लेट दे कुछ देर बात कर उसे भी घर जाने का बोल कर निचे आता है सोफिया सुनिधि से बात कर सूर्य वह से करीब 10 बजे निकल गया

सूर्य सीधा सैमसन भूमि पहुंचा जहा लक्समी का आत्म संस्कार होने हे वाला था

राजीव पंडित जी के कहे अनुसार सरीर विधि कर लक्समी की चिटा को अग्नि देता है है

लक्समी ........अलविदा मेरे मसीहा अब मैं मुक्ति प् सकती हूँ

देखते हे देखते लक्समी की आत्मा रौशनी में बादल गायब हो गयी

राजीव को बता कर सूर्य वह से लक्समी की चिटा की रख ले हरिद्वार पहुंचा वह गंगा में रख प्रवाहित कर सनान कर वह से गायब हो सूर्यगढ़ आ गया ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
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