Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 34 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट 273

सूर्य ....... इसका अध्यन करो आवर इसमें लिखी गुप्त मायावी आसुरी विद्या का अभ्यास करो

निर्भया ...... जी ठीक है स्वामी

सूर्य .......ऐसे मुँह न लटकाओ बस कुछ दिन आवर फिर तुम असुरलोक जा कर नरकासुर को ऊँगली कर सकते हो मैं तुम्हे नहीं रोकूंगा बिलकुल भी पैर तब तक इस पुस्तक में लिखी सभी विधायक को अध्यन कर उनके पारंगत हो जाओ जब तुम सफल हो जाओ तो जा सकते हो

निर्भया ......... ठीक है मैं जल्द से जल्दी इन सभी विधयो में पारंगगत हो जाऊंगा आप चिंता न करे .................

अब आगे ..........

परीलोक ................ सकती आवर महिमा जी सूर्य आवर उनके परिवार को ड्रैगन लोक के लिया विदा कर अपनी सोच में सबसे नजरे बचा कर एकांत के लिया निकल गए थे

सकती आवर महिमा ने अपनी आवर से पूरी कोशिश की थी की वो किसी के सामने न आ जाये पैर क्या ये संभव था

वैद्यराज सकती आवर अपनी बेटी महिमा को सभी से बच कर जाते हुए देख लेते है आवर ये सब करते देख उनके चेहरे पे ख़ुशी थी

रानी पारी भी जल्दी हे उनकी ख़ुशी का कारन समाज गई आवर वो भी मुस्कुराने लगी

गुरुदेव ........ पुत्री रिद्धि पुत्री पारिजात आज से अभी से पुत्री विधि आवर गायत्री को शिक्षा देने का कार्य आप दोनों का है साथ हे साथ आप दोनों को भी अन्नंत आयाम में योध अभ्यास आवर अपनी ऊर्जा को अपनी सकती में परिवर्तित करने का अभ्यास आरम्भ कर देना चाइये पुत्री

रानी पारी ........ किन्तु गुरुदेव ये कार्य विवाह के पश्चात नहीं हो सकता क्या आपके द्वारा निर्धारित तिथि में केवल 6 सूर्यौदय शेष है आपके अनुसार पुत्री पारिजात आवर पुत्री जीनत का विवाह आज से थी 7 वे सूर्यौदय को है

गुरुदेव. ........ आपका कथन उचित है रानी पारी किन्तु पुत्री पारिजात आवर पुत्री जीनत का विवाह भी परीलोक के रीती रिवाज से होना है न की पृथ्वीलोक के नियम अनुसार

रानी पारी ........ जी गुरुदेव किन्तु क्या आपने इस विषय में प्रेतराज जी से चर्चा की गुरुदेव मन की प्रेतलोक के अपने कोई रीती रिवाज नहीं विवाह पढ़ती को ले कर के क्युकी वह सर सरीर केवल प्रेतराज आवर पुत्री जीनत हे है बाकि ......

गुरुदेव ........ हम समाज रहे है आपका मंतव्य रानी पारी किन्तु एक सत्य ये भी है की भले हे प्रेतराज आवर पुत्री जीनत के अलावा प्रेत लोक में सर सरीर निवेश नहीं कर सकता क्युकी प्रेतलोक प्रेत आत्माओ का लोक है किन्तु पुत्री जीनत प्रेतलोक की राजकुमारी भी है ऐसे में प्रेतलोक की आत्माये पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत के विवाह में शामिल होने की इच्छा अवश्य प्रेतराज के समक्ष रखेंगे जिन्हे वो भी नहीं नकार सकते है

रानी पारी ....... फिर तो ये बड़ी समस्या हो जाएगी गुरुदेव

गुरीदेव ........ हम इस विषय पे प्रेतराज से चर्चा करते है आप निश्चित रहे कोई न कोई मार्ग अवश्य निकल आएगा

रानी पारी ....... . जी गुरुदेव

गुरुदेव ......... वैध्य्राज हमें आपसे एकांत में आवशयक विषय पे चर्चा करनी है

वैद्यराज ........ जी गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा

गुरुदेव ....... चलिए हमारे साथ बचो को एकांत में कुछ समय वयतीत करने दीजिये पुत्री रिद्धि विधि पारिजात गायत्री आप लोग अन्नंत आयाम की आवर परस्थान करो

रिद्धि ....... जी पिता श्री

गुरुदेव वैद्यराज दोनों मंदिर के भीतर प्रवेश कर जाते है आवर मंदिर के अंदर की आवर से गुजरते हुए मंदिर के पीछे बने सरोवर को पार कर एक गुफा में प्रवेश करते है जिसका न कोई चोर नजर आ रहा था न कोई अंत नजर आ रहा था

वैद्यराज आवर गुरुदेव उस गुफा में कुछ आगे जाने के बाद उनके सामने एक पारदर्शी दिवार नजर आती है जो पास से भी बहुत गौर करने पे नजर आ रही थी उसने दूर से देखना तो संभव भी नहीं था

वैद्यराज ......... गुरुदेव ये तो आपका दिव्या जड़ी बूटी क्षेत्र है जहा आपके अलावा किसी अन्य को जाने का अदिकार नहीं है

गुरुदेव ......... उचित कहा वैद्यराज आपने आप वो दूसरे व्यक्ति है पुत्री रिद्धि के बाद जिसने इस क्षेत्र में प्रवेश किया है

कुछ आगे जाने के बाद गुफा की एक दिशा से बहुत हे प्यारी मन को प्रफुलित करने वाली ऊर्जा से भरपूर खुशबु वैद्यराज को सांसो से होते हुए उनके मन में उपजे सभी विचारों को संत कर रही थी

गुरुदेव गुफा की एक दिवार पे अपनी जादुई छड़ी से एक रौशनी डालते है रौशनी की वो किरण दिवार से टच होते हे वह की दिवार गायब हो जाती है आवर वह एक रास्ता नजर आने लगता है

गुरुदेव आवर वैद्यराज दोनों उस रस्ते से होते हुए गुफा से बहार निकल आते है जहा खुले आसमान के निचे रंग बिरंगी जड़ी बुटिया थी जिनसे मन मोहक ख़ुशी निकल रही थी

यहाँ की हवा में जैसे कुछ बहुत खाश था वैद्यराज जैसे खुद को सवरग के किसी दिव्या उद्यान में उपस्थित होने जैसा अनुभव कर प् रहे थे

वैद्यराज ........ गुरुदेव ये तो बहुत हे दिव्या स्थल है यहाँ तो दिव्या जड़ी बूटियों का भंडार है किन्तु मैं अभी भी समझने में असमर्थ हूँ की मेरा यहाँ होने का कारन क्या है गुरुदेव

गुरुदेव ......... हम चाहते है की तुम्हे इन सभी जड़ी बूटियों की पहचान आवर इनका ज्ञान प्राप्त हो ताकि भविष्य में हमारी अनुपस्थिति में तुम इन जड़ी बूटियों से विषम से विषम रोगो का उपचार कर सको

वैद्यराज ....... ये मेरा शोभाग्य होगा गुरुदेव आपकी कृपा के लिया कोटि कोटि धन्यवाद गुरुदेव

गुरुदेव ........ किन्तु इन सभी जड़ी बूटियों की पहचान आवर किस रोग में किस जड़ी बूटी का प्रयोग होगा इसकी पहचान तुम्हे सवयं करनी होगी तभी तुम आईएम जड़ी बूटियों का प्रयोग करने में सक्षम हो सकते हो अन्यथा तुम इन्हें स्पर्श भी नहीं कर पाओगे

गुरुदेव वैद्यराज को कुछ जरुरी तथ्य समजा कर एक दिशा में भाड़ जाते है

कुछ दूर जाने के बाद गुरुदेव एक स्थान पे रुकते है जहा का दृश्य बड़ा हे अद्भुत था सामने एक सरोवर था जिसमे अलग अलग प्रकार के पौधे जल स्तर पे तैर रहे थे

गुरुदेव कुछ मंत्र उच्चारण करते है देखते हे देखते वो मंत्र उच्चारण वह गूंजने लगते है आवर उन सभी पोधो में से कुछ फूल पाटिया उड़ते हुए गुरुदेव के हाथो में आ कर अपने आप हे एकत्रित होने लगती है

ड्रैगन लोक ............

सुबह सूर्य की जब आँखे खुली तो पैलेस के अपने कक्ष के बीएड पे अकेला पाया

सूर्य ........ ये स्वीटी इतनी सुबह सुबह उठ कर कहा चली गई

सूर्य बीएड से उठा आवर कक्ष में सब तरफ नजरे दौड़ने के बाद अपने सरीर पे एक सही लबादा दाल कर कक्ष से बहार निकला बहार पहरेदार बड़ी हे मुस्तैदी से पहरेदारी कर रहा था

सूर्य ........ क्या प्रिंसेस किरण बहार है

सैनिक .......... जी प्रिंस सूर्य प्रिंसेस किरण कुछ समय पूर्व हे कक्ष से बहार गई है अध्यन की आवर आपके लिया उनका सन्देश है

सूर्य ........ कैसा सन्देश

सैनिक .......... प्रिंसेस किरण का सन्देश है की आप जब अपनी निद्रा पूर्ण कर ले तब उत्तरी दिशा में िस्थित उद्यान में आ जाये प्रिंसेस किरण वही ध्यान करने गयी है

सूर्य ......... ठीक है सन्देश के लिया धन्यवाद

( सूर्य ....... आज ऐसा क्या हुआ की किरण इतनी जल्दी उठ कर त्यार भी हो गई आवर ध्यान भी करने चली गई आवर उसने मुझे उठाया भी नहीं )

सूर्य अपने मन में विचार करते हुए अध्यन में पहुंचा जहा पहले से हे किरण मानसी शालिनी जी जूलिया चारो ध्यान में लीं थी

सूर्य ....... क्या बात है माँ मानसी आवर जूलिया भी यही मौजूद है

सूर्य उन्हें परेशान न करके गुरुदेव द्वारा दी पुस्तक का प्रयोग कर अपना योध अभ्यास आरम्भ कर देता है काफी समय बाद सूर्य पुस्तक के आयाम से बहार निकलता है आवर कुछ देर आराम कर ध्यान करने लग जाता है

सूर्यौदय के बाद सूर्य सभी के साथ सुबह का स्वादिस्ट नास्ता कर देवसूफ़ी नियों जी से बात करता है आवर कुछ देर बाद किरण को साथ लिया गोल्डन ड्रैगन सिटी से वाइट ड्रैगन पे बेथ उतर दिशा की आवर भाड़ जाता है

किरण ........ कुंवर जी आपने किस स्थान से खोजबीन करने का सोचा है

सूर्य ........ हम लोग निर्वाण सिटी की आवर भाड़ रहे है वही से खोजबीन करते हुए ब्लैक ड्रैगन सिटी पहुंचेंगे मुझे यकीं है की हमें कुछ न कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिलेगी यहाँ से आगे का वह चल कर देखेंगे

किरण. ........... वैसे आपने एक बात पे ध्यान दिया क्या जब हम यहाँ पहली बार आये तब से अब तक यहाँ की हवा में भी अलग सा बदलाव मह्सुश हो रहा है

सूर्य ......... बिलकुल सही कहा स्वीटी तुमने पहले जब हम अपने ड्रैगन की खोज में यहाँ आये थे तब यहाँ की हवा में एक सुकून था ताजगी का पैर अब जैसे हवा में भी हलकी नकारत्मकता मह्सुश हो रही है क्युकी ये बहुत काम मात्रा में है इस लिया इसका अभी तक यहाँ के इंसानो में या जीवो में इसका असर नहीं हुआ है

किरण ........ वैसे हमें निर्वाण सिटी तक पहुंचने में कितना समय लगेगा

सूर्य ........ हम सीधा निर्वाण सिटी नहीं जा रहे है सिटी के आस पास के कसबे से हम निर्वाण सिटी जायेंगे तक़रीबन 1 हर में हम इस माध्यम गति से निर्वाण सिटी पहुंच जायेंगे

सूर्य किरण छोटे बड़े जंगल आवर नदिया पर करते हुए बड़ी तेजी से निर्वाण सिटी की तरफ बिना किसी परेशानी के आगे भाड़ रहे थे

इस बिच कुछ छोटे बड़े कसबे भी उनकी नजरो में आये पैर वो लोग आगे बढ़ते रहे

करीब 1 हर से कुछ पहले सूर्य वाइट ड्रैगन को एक बड़ी नाड़ी किनारे उतरता है

किरण ........ क्या हम पहुंच गए

सूर्य ......... यहाँ से हम लोग आगे का सफर आकाश मार्ग से नहीं बल्कि जमीनी मार्ग से करेंगे ताकि हम ज्यादा से ज्यादा जानकारी जूता पाए

सूर्य वाइट ड्रैगन को आगे की निगरानी करने का बोल कर उस हे भेज देता है आवर किरण का हाथ थामे नदी किनारे से होते हुए कसबे की आवर जाने लगते है

कुछ आगे जाने के बाद किरण की नजर नदी के दूसरे किनारे की तरफ पड़ती है जहा कुछ घोड़े जैसे करीब 30 जीवो का झुंड पानी पे रहा था तभी कुछ उतनी संख्या में डायनोसोराश जैसे जिव जंगल से निकल कर उनपे हमला करने लगते है

किरण ......... ये कोनसे जिव है दिखने में तो घोड़े के जैसे हे है पैर इनका सरीर कुछ अलग है आवर सर पे सींग भी है जैसे जंगली बारहसिंघा हो पैर ये दूसरे डायनोसोराश जैसे जानवर इनपे हमला क्यों कर रहे है

सूर्य ........ पता नहीं क्यों पर ये सब जंगली घोड़ो की किसी खाश नेसल के जैसा हे झुंड है आवर सायद ये डायनोसोराश उनको अपना सीकर बना रहे है उनके बिच जो सबसे बड़ा सुनहरे सींग वाला घोड़े जैसा जिव है वो इस झुंड का मुखिया लगता है वही इन सबकी रक्षा आवर नेतृत्व कर रहा है है इन्हे यहाँ के लोग .मरुत ..के नाम से जानते है

किरण ......... किरण इन सफ़ेद छोड़ो जैसे जीवो से किसी तरह की ऊर्जा निकल रही है क्या ये जादुई घोड़े है

सूर्य ......... ये तो मुझे भी पता नहीं है चलो चल कर पता करते है तुम यही रुको मैं इनकी सहायता करता हूँ

किरण. ....... मैं भी साथ चलती हूँ

सूर्य किरण का हाथ थामे एक हे छलांग में नदी पार कर उन मारूफ हॉर्स आवर डायनसोराश के झुंड के पास जा पहुंचते है

सूर्य आवर किरण को अचानक से वह आता देख दोनों झुंड के बाकि घोड़े वह डायनसोराश अपने अपने मुखिया के पीछे खड़े हो जाते है कुछ 4,5 मरुत अभी भी अपने मुखिया के बराबर में खड़े थे जैसे वो अपने मुखिया का योध में साथ देने के लिया खड़े उसके योद्धा हो

तभी उनका मुखिया हिनहिनाता आवर सूर्य के सामने आ खड़ा होता है आवर गौर से सूर्य को देखता है

सूर्य ....... जबरन की जरुरत नहीं है हम आप लोगो को कोई नुकसान पहुंचने नहीं आये है बल्कि इन डायनसोराश से तुम सबकी की रक्षा करने आये है

सूर्य की बात सुन कर मरुत सूर्य को देखता है आवर अपना हल्का सुनहरा सींग आगे कर देता है

ऐसा करते हे सूर्य के दिमाग में कुछ आवाज सुनाई देती है

आवाज ......... तुम कोण हो आवर हमारी सहायता क्यों करना चाहते हो क्या तुम भी हमें मर कर हमारी सकतिया पाना चाहते हो

सूर्य उस आवाज को सुन कर चौंक जाता है आवर उसे बड़ा अजीब भी लगता है की कोई जिव इस तरह से कैसे बात कर सकता है जैसे कोई इंसान किसी दूसरे इंसान से करता है

सूर्य ........ क्या तुम मुझसे टेलीफेटी के जरिये बात कर रहे हो खेर जो भी है पहले इन डायनसोराश को उनकी सजा तो दे दूँ

सूर्य कुछ अग्नि पुंज बना कर उन डायनसोराश के झुंड की आवर फेंक देता है कुछ हे देर में सभी डायनसोराश घायल हो जाते है आवर अपनी जान बचा कर वह से भागने लगते है

किरण ....... वो सभ भाग रहे है कुंवर जी

सूर्य ....... जाने दो वैसे भी मैं उन्हें मरना नहीं चाहता वो सीकरी जिव है उन्हें सीकर करने से तो रोक नहीं सकता जीवो को मार कर खाना उनकी परवर्ती ( आदत )जो है

( किरण ......... कुंवर जी इन सब घोड़ी के सींग देखिये इनमे से मुझे किसी तरह की ऊर्जा निकलती हुई मह्सुश हो रही है पैर पहले तो ऐसा नहीं था )

( सूर्य ....... इसके बारे में तो यही जिव बता सकते है )

सूर्य ........ क्या तुम सभी मरुत नेसल के घोड़े हो आवर तुम सभी से किस तरह की ऊर्जा निकल रही है

एक बार फिर से ुशी घोड़े की आवाज सूर्य किरण को एक साथ उनके दिमाग में सुनाई देती है

आवाज ........ मैं नहुष हूँ इन मरुत होश के झुंड का मुखिया आपने हमारी रक्षा की उसके लिया हम सभी मरुत आपके आभारी है

सूर्य ....... तो तुम्हारा नाम नहुष है आवर तुम इस मरुत झुंड के मुखिया हो पैर जहा तक मैं जनता हूँ तुम सभी तो पहाड़ो में रहने वाले जिव हो फिर यहाँ इस जंगल में क्या कर रहे हो

नहुष ........ हम सब अपनी जान बचा कर गोल्डन ड्रैगन सिटी की खोज में निकले है आवर वही जा रहे है

नहुष की बात सुन किरण आवर सूर्य दोनों एक दूसरे को देखते है

किरण ....... तुम सब वह क्यों जा रहे हो वह तो काफी दूर है यहाँ से आवर नहीं उसका कोई एक स्थान है वो कभी भी कही भी हो सकती है

नहुष ......... हम हमारी प्रजाति के आखरी जिव है हमारा अंत हुआ तो हमारी प्रजाति हे ख़तम हो जाएगी सभी जानवर हमारी जादुई सक्तियो को पाने के लिया हमारा सीकर करना चाहते है अब हमारी आखरी उम्मीद गोल्डन ड्रैगन सिटी हे है

सूर्य ........ तो तुम सभी गोल्डन ड्रैगन सिटी अपनी सुरक्षा के लिया जाना चाहते हो इसमें मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ किन्तु

नहुष ........ अगर ऐसा हुआ तो हम सभी मरुत आपके जीवन भर आभारी रहेंगे

सूर्य ........ ठीक है मैं तुम सभी को वह पहुंचा दूंगा पैर उस से पहले मुझे आप सब से कुछ जानना है

नहुष ........ आप हमसे क्या जानना चाहते है आवर क्यों

सूर्य .......... मुझे जानना है की तुम किस क्षेत्र से यहाँ आये हो आवर आवर ऐसा क्या है वह जिसके चलते आपकी बाकि पद्धति मरी गई जबकि आप सभी जादुई मरुत है तो अवश्य सवयं की रक्षा कर सकते है

नहुष ......... हम उत्तर दिशा में िस्थित ब्लैक ड्रैगन सिटी के पुराने जंगल से यहाँ आये है हम जिस क्षेत्र की रक्षा करते थे वह कुछ समय से बहुत कुछ विचित्र घटना घाट रही है जिनने हम सब भी समाज नहीं प् रहे है अचानक से हमारा जल स्थार्थ दूषित हो कर कला पड़ने लग गया जो भी उस जल का पैन करता वो जिव बदलने लगता यहाँ तक की हम जादुई मरुत भी उस से बच नहीं पाए

किरण ......... तुम्हारा मतलब है की जो भी जानवर उस पानी को पिता है वो बदलने लगता है ऐसा कोनसा बदलाव देखा जो पहले से अलग हो

नहुष .......... जो भी जानवर उस पानी को पिता वो गुस्से में किसी पे भी हमला कर उसका अंत कर देता उन सभी से एक अलग हे तरह की ऊर्जा निकलती है उनकी आँखे आवर सरीर उस ऊर्जा के सम्पर्क में आने पर बदलने लगता है

सूर्य .......... ठीक है मैं आप सब को गोल्डन ड्रैगन सिटी पहुंचा देता हूँ पैर नहुष मुझे तुम्हारी मदद चाइये

नहुष .......... आप सवयं इतने सक्तिसाली है भला आपको हमारी मदद क्यों चाइये

सूर्य ........ क्युकी मुझे उस बदलाव के पीछे की वजह जानना है सायद तुम्हारी समस्या आवर हमारी मंजिल एक हे हो

नहुष ......... आपने हमारी जान बचाई है मैं अपने साथियो को सुरक्षित करने के बाद हे आप की सहायता कर पाउँगा

सूर्य अपनी टेलेपोर्टेशन सकती का उपयोग कर वह एक टेलेपोर्टेशन द्वार का निर्माण करता है

सूर्य ........ आप सभी इस जादुई द्वार से गोल्डन ड्रैगन सिटी के अंदर पहुंचने जाओगे मैंने तुम्हारे विषय में खबर कर दी है तुम अपने साथियो के साथ कुछ समय विश्राम करो रात में तुमसे आवर बात करूँगा

नहुष ......... आपका सुक्रिया क्या हम जान सकते है की आप है कोण

सूर्य ........ मेरा नाम सूर्य शिव ठाकुर है आवर ये मेरी पत्नी किरण सूर्य ठाकुर अब तुम सब जाओ वह तुम्हारी भेंट डेवलिन जी आवर उनकी पुत्री जूलिया से होगी मैंने उन्हें आपके विषय में बता दिया है

नहुष जो उनका मुखिया भी था सूर्य किरण का आभार प्रकार करते हुए उनके सामने जुखता है आवर सभी को लिया टेलेपोर्टेशन द्वार में चला जाता है

सभी मरुत के जाने के बाद किरण सूर्य से बोलती है

किरण ......... आपको क्या लगता है की नहुष ने हमें सब सच बताया है आवर वो हमसे क्या छुपा रहा था

सूर्य .......... है उसने जो भी बताया वो सच हे था पर पूरी बात उसने हमें नहीं बताई है भले हे हमने उन सबकी जान बचाई है पैर उनके मन में जो दर है वो पहले बार में हे किसी पे पूरा विश्वाश नहीं कर प् रहे है इसी लिया उसने हम से जो भी चुराया है वो खुद हे हमें बता देगा जब उसके मन में हमारे लिया पूर्ण विश्वाश हो जायेगा

किरण ......... उनका सोचना गलत भी तो नहीं है सब जानवर उन्हें मार कर उनकी सकतिया जो पाना चाहते है

सूर्य ....... है पैर ये अदा सच है स्वीटी सकतिया सभी मरुत में नहीं है केवल नहुष हे उनके से ऐसा है जिसके पास सकतिया है बाकि सभी को नहुष ने अपनी ऊर्जा सकती से जोड़ रखा था जिस से हमें लगे की वो सभी मरुत जादुई है नहुष के पास हे वो ऊर्जा स्थार्थ है खेर हमें आगे भढना चाइये आज नहीं तो कक हम जान हे जायेंगे

किरण ..... ठीक हज कुंवर जी हम लोग कसबे में पहुंच गए है हमें अपना रूप बदल लेना चाइये

सूर्य किरण अपना अपना भेष बदल कर उस कसबे में आगे भाड़ जाते है ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................

कल अपडेट न दे पाने के लिया सॉरी दोस्तों कल अचानक से थोड़ी तबियत ख़राब हो गयी थी दोपहर बाद इसी लिया अपडेट पूरा लिख नहीं पाया था अभी भी थोड़ा फीवर है ...........
 
अपडेट. 274

किरण ......... उनका सोचना गलत भी तो नहीं है सब जानवर उन्हें मार कर उनकी सकतिया जो पाना चाहते है

सूर्य ....... है पैर ये अदा सच है स्वीटी सकतिया सभी मरुत में नहीं है केवल नहुष हे उनके से ऐसा है जिसके पास सकतिया है बाकि सभी को नहुष ने अपनी ऊर्जा सकती से जोड़ रखा था जिस से हमें लगे की वो सभी मरुत जादुई है नहुष के पास हे वो ऊर्जा स्थार्थ है खेर हमें आगे भढना चाइये आज नहीं तो कक हम जान हे जायेंगे

किरण ..... ठीक हज कुंवर जी हम लोग कसबे में पहुंच गए है हमें अपना रूप बदल लेना चाइये

सूर्य किरण अपना अपना भेष बदल कर उस कसबे में आगे भाड़ जाते है ...........

अब आगे ...........

असुरलोक ........... जब से नरकासुर फिर से असुरलोक के राजसिंहासन पे विराजमान हुआ है तभी से असुरलोक में दबी आवाज में नरकासुर के शासन में असुरो आवर दानवो में विद्रोह की एक लहार सी उठ रही थी जिस से नरकासुर पूर्ण रूप से अनजान था आवर इसका असर असुर आवर दानवो के मध्य हो रहा था जिसका परिणाम आये दिन होते ग्रहयोद्ध के रूप में था

विद्रोह का मुख्या कारन भी तो कही न कही नरकासुर आवर द्वारिका दोनों हे थे जिस तरह से नरकासुर इस विद्रोह से अनजान था ुशी तरह दानव आवर असुर भी इस बात से अनजान थे की दानव आवर असुर कन्याओ का अपहरण कर उनके कौमार्य का भोग कोई आवर नहीं उनके हे असुरराज नरकासुर आवर असुररानी द्वारिका द्वारा हे किया जा रहा है

किन्तु नरकासुर आवर द्वारिका के लिया जैसे ये कोई महत्वपूर्ण विषय हे नहीं था चाहे कोई असुर योद्धा मारा जाया या फिर कोई दानव योद्धा मारा जाये

डेरी डेरी आये दिन किसी न किसी दानव आवर असुर समादाय के बिच इस तरह के योध होने लगे थे जब भी को असुर कन्या किसी समुदाय से गायब होती उसका आरोप अपने दुश्मन दानव समुदाय पे लगा कर उनकी स्त्री आवर कन्याओ का अपहरण कर उनके साथ अनैतिक भोग या उनकी हत्या कर दी जाती

नरकासुर भले हे इन सब से अनजान था पैर सुक्रलोक से आये गुप्तचरों ने अपनी पैनी दृस्टि इस इस्थिति पे बनाये हुए थे जिसकी पल पल की खबर सुक्रलोक देवी देवयानी जी को मिल रही थी किन्तु अपना पूर्ण प्रयाश करने के बाद भी गुप्तचर वास्तविक सत्य से बहुत दूर थे

नरकासुर के मंत्रीगणों आवर मुख्या सभासदो के बिच भी ये मुद्दा पहुंच चूका था किन्तु जब उन्हें आदिकारिक रूप से किसी तरह का आदेश नहीं प्राप्त हुआ तो उन सभी ने भी इस मुद्दे को गम्बिरता से नहीं लिया जैसा राजा वैसे परजा जैसी कहावत सायद इन सभी के लिया हे बानी थी

उदार नीलसूर जो कुछ समय पूर्व पारिवारिक मतभेद के चलते असुर महल का त्याग कर अपने पत्नी वह बचो के साथ अपने ससुर के आदिकारिक क्षेत्र में जा चूका था

नीलसूर का अधिकांश समय ध्यान आवर युद्धाभ्यास में हे वयतीत होता था जैसे उसपे किसी तरह की सनक सवार हो बाकि असुरो की तरह नहीं जो भोग विलाश आवर मदिरा में दुबे रहना हे अपने जीवन का एक मात्रा लक्ष्य समझते थे

जब नीलसूर को इस विषय में जानकारी मिली की असुर आवर दानव समुदाय आये दिन एक दूसरे का रकत बहते है आवर असुरराज उसपे कोई प्रतिबन्ध लगाना तो दूर उन्होंने इन मसलो में हस्तक्षेप करना तक उचित नहीं समजा नीलसूर ने कुछ समय योध आवर ध्यान से विश्राम ले कर सवयं इसकी जाँच करने का विचार किया आवर उसके लिया उसने अपने ससुर ( मेघासुर ) से इस विषय पे बिचार विमर्श भी किया

मेघासुर .......... पुत्र नीलसूर हम सवयं भी इसकी जाँच करना चाहते है किन्तु हमें असुर महल से आदिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है इस लिया खुल कर हम इसके पीछे की सत्यता का पता नहीं कर सकते किन्तु तुम रक्ष कुमार होने के अदिकार से ऐसा कर सकते हो किन्तु उसके लिया तुम्हे असुर महल से सम्पर्क करना होगा आवर आव्सय्कता होने पे तुम्हे एक बार असुरमहल भी लौटना होगा

नीलसूर ....... हम असुर महल नहीं लौटना चाहते जहा किसी का कोई सम्मान नहीं वह हम नहीं जाना चाहते पिता श्री

मेघासुर ....... हम जानते है पुत्र किन्तु काम समय में आदिल जानकारी तुम महल से हे प्राप्त कर सकते हो पुत्र गुप्त रूप से इस कार्य में तुम्हारा आदिल समय व्यर्थ होगा अब निर्णय हम तुम पे छोड़ते है जो भी तुम्हारा निर्णय होगा हमें स्वीकार होगा

नीलसूर ....... उचित है पिता श्री हम राजधानी लौट रहे है हम डोगरा हे लौट आएंगे

मेघासुर ....... पुत्र अपनी पत्नी को अपने साथ ले कर जाओ इस कार्य में वो तुम्हारी आदिल सहायता कर सकती है हमारे दोनों नातिन हमारे साथ हे रहेंगे

नीलसूर ....... जी पिता श्री जैसा आप उचित सामने हम कल हे राजधानी के लिया परस्थान करेंगे

ीदार असुर महल में अग्निमुखासुर द्वारिका आवर नरकासुर के ऐसे कुकर्मो से आरम्भ में दुखी हुआ किन्तु डेरी डेरी जैसे उसे भी नरकासुर आवर द्वारिका का ये भोग विलाश वाला खेल आदिक हे भने लगा था

किन्तु अग्निमुखासुर असुर महल में ये सब कुछ करना नहीं छठा था भले हे वो असुर कुमारो में ज्येष्ठ था किन्तु ुशी असुर महल में उसकी पत्नी पुत्री आवर पुत्र भी निवेश करते थे साथ हे जिनके सम्मुख अग्निमुखासुर अपनी छवि बाकि असुरो के जैसी दुर्मिळ नहीं कर साथ अग्निमुखासुर अपनी पत्नी की नजरो में छवि साफ रखना चाहता था क्युकी वो अपनी पत्नी से भी प्रेम करता था किन्तु इसमें कितनी सचाई थी ये तो वही जाने आवर दूसरा कारन था की अग्निमुखासुर असुर कन्याओ का भोग नहीं करना चाहता

इस लिया अग्निमुखासुर अपने विशेष गुप्तचरों से अन्य लोको से गुप्त रूप में स्त्री वह कन्याओ का अपहरण कर अपने लोक में उनका भोग करना चाहता था

अग्निमुखासुर अपनी योजना को अपने खाश योद्धाओ से गुप्त रूप से सुरु करवा चूका था

जब अग्निमुखासुर को परीलोक की परियो की खूबसूरती आवर उनकी सक्तियो के विषय में घ्यात हुआ तब उसने अपने मायावी योद्धाओ को परीलोक में गुस्पेट कर परीलोक से खूबसूरत परियो के अपहरण कर असुरलोक लेन की योजना सुरु कर दी

जब अग्निमुखासुर के मायावी योद्धा अपनी योजना को कार्यान्वित करने के लिया परीलोक पहुंचने तो वो परीलोक के सुरक्षा कवच को पार कर परीलोक जाने में असमर्थ रहे आवर सिगरा हे असुरो की गुस्पेट की खबर रानी पारी आवर गुरुदेव को प्राप्त हो गयी उसके बाद सूर्य आवर गुरुदेव की योजना अनुरूप इस गुस्पेट के पीछे सुक्रलोक का हाथ होने के संदेह से बचने के लिया देवी देवयानी के आदेश अनुसरा प्रमुख शिष्य आवर उसके सहयोगी सेनिको के आकर्मण से अग्निमुखासुर के सभी मायावी योद्धा नरकलोक की यात्रा के मार्ग पर भेज दिए गए

नरकासुर अपने कक्ष में बैठा अभी अबुइ सुक्रलोक से आये सन्देश को पद रहा था

द्वारिका ....... स्वामी हम समाज नहीं प् रहे है जब आपने या मैंने किसी भी असुर को परीलोक में गुस्पेट करने का आदेश नहीं दिया तो ऐसा करना उनका दशांश भी कैसे हुआ कही ऐसा तो नहीं की ये देवयानी द्वारा आपको अपमानित करने का कोई सडयंत्र हो

नरकासुर. ........ द्वारिका तुम मेरी पत्नी हो आवर मैं तुमसे बहुत प्रेम भी करता हूँ किन्तु कभी कभी तुम मूर्खो जैसी बात करती हो तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी असुर गुरु पुत्री देवयानी को हमें अपमानित करने के लिया इस तरह के षड़यंत्र करने की आव्सय्कता नहीं है परीलोक में असुरो द्वारा गुस्पेट करने की कोशिश की गई थी ये सत्य है

द्वारिका ....... स्वामी हमें क्षमा करे किन्तु अगर ये सत्य है तो फिर ऐसा कोण है जिसने ऐसा दशांश किया बिना आपके आदेश के हम उसे कठोर दंड देंगे स्वामी

नरकासुर ....... हाहाहाहा तुम ऐसा नहीं कर सकती हो द्वारिका क्युकी ये कोई अपना हे है जिसने ऐसा करने का दशांश किया है

द्वारिका ....... क्या मतलब क्या इसके पीछे हमारे मंत्रीगण है या फिर कोई आवर

नरकासुर ........ आपका पिरया आवर हमारा जीएस्ट पुत्र अग्निमुखासुर द्वारा इस योजना को सुचारु किया गया था हम पूर्व से इस बारे में जानते थे

द्वारिका ....... क्या अग्निमुखासुर ने किन्तु उसने ऐसा करने की आव्सय्कता क्यों ाँ पड़ी वो भी बिना आपसे या हमसे अनुमति लिए

नरकासुर ........ इसके पीछे अग्नि का मुख्या उद्देश्य क्या है ये तो अभी तक हम भी पूर्ण रूप से नहीं जानते है किन्तु जितना हमें गुप्तचरों से पता चला है उनके अनुसार हमारा पुत्र खूबसूरत परियो की अस्मत आबरू के साथ उनकी अच्छे की सक्तियो का भी भोग करना चाहता है किन्तु वो विफल रहा

द्वारिका ......... आप अपने पुत्र की भूल के लिया उसने क्षमा कर दीजिये स्वामी हम पुत्र अग्निमुखासुर से इस बारे में चर्चा कर उसने समजा देंगे

नरकासुर ........ नहीं हम उसे कोई दंड नहीं देंगे आवर न उसे रोकना है उसे अपना प्रयाश करने दो किन्तु उसे ये न ज्ञात हो की हम उसकी योजना के विषय में जानते है बल्कि हम चाहते है की आप उसकी योजना उसका साथ दो परीलोक पूर्ण जानकारी उसे दो

द्वारिका ......... अवश्य आपके मस्तिष्क में किसी प्रकार की योजना चल रही है न स्वामी

नरकासुर ........ समय आने पे तुम अवश्य जान जाओगी द्वारिका आवर कुछ समय के लिया हम तप करने के लिया अज्ञानतवश में जा रहे है इस लिया कुछ समय के लिया असुर आवर दानवी कन्याओ का अपहरण बंद कर दो

द्वारिका ....... ठीक है स्वामी जैसा आपका आदेश

नरकासुर ....... अब जाओ आवर जा कर अग्निमुखासुर की योजना का पता करो द्वारिका

द्वारिका विशाल बागान सरीर पे वस्त्र दाल कर सवयं को व्यवस्थित कर अग्निमुखासुर के कक्ष की आवर भाड़ जाती है

ीदार नरकासुर काले कोहरे में बदल कर अपने कक्ष से गायब हो जाता है किसी अज्ञान्त स्थान के लिया

द्रगोंलोक .......... सूर्य आवर किरण भेष बदल कर निर्वाण सिटी के पास के कसबे में सब तरफ छानबीन कर चुके थे इसमें दोपहर से ऊपर का समय हो चूका था

किरण ........ कुंवर जी मैं अब बहुत थक गयी हूँ हमें कुछ देर आराम करना चाइये

सूर्य ....... ठीक है हम कोई विश्राम ग्रह देखते है फिर कुछ देर आराम कर हम निर्वाण सिटी की आवर निकल जायेंगे यहाँ जितनी खोजबीन की है उस से यही लगता है की हमें यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं मिलने वाला है जिस से हमें मदद मिले

किरण ....... वो जगह कैसी है वह काफी भीड़ भी है सायद हमें कुछ आवर जानकारी मिल जाये आवर कुछ देर यहाँ रुकने के लिया अच्छी जग्गा भी है

सूर्य किरण ने भले हे भेष बदल रखा था पैर दोनों हे काफी खूबसूरत भी लग रहे थे

ये एक सराय जैसी जगह थी जहा दूर दर्ज के व्यापारी लोग वयापार के समय कुछ भोजन आवर आराम कर सकते थे

सूर्य किरण को साथ लिया वह पहुंचा आवर दोनों के कुछ देर विश्राम करने के लिया कक्ष के विषय में पूछने लगा

सराय का मालिक भी नदी आदाब से दोनों से बात करता है क्युकी सूर्य के रूप में उसे मोती आसानी जो दिखाई दे रही थी

सूर्य ....... हम लम्बे समय से यात्रा पे है हम यहाँ कुछ समय विश्राम करना चाहते है क्या हमें कोई अच्छा आवर आरामदायक कक्ष मिल सकता है

सराय मालिक ..... ( s.malik ) ..... जी जरूर व्यापारी महोद्य आपके लिया विशेष आरामदायक कक्ष है किन्तु .......

सूर्य अपनी कमर में बंदी सोने की सिक्को की थैली निकलता है आवर उसने हाथ दाल कर 5 सोने के सिक्के निकल कर सराय के मालिक की तरफ उछाल देता है

s.malik सोने के सिक्के उठा कर फ़ौरन सूर्य आवर किरण को रास्ता दिखते हुए आगे आगे चलने लगा

सूर्य ....... यहाँ खाने के लिया कुछ खाश व्यंजन भी है क्या

s.malik ....... आप चिंता न कीजिये महोद्य आप कुछ देर विश्राम कीजिये मैं अभी आपके भोजन की व्यवस्था करता हूँ

सूर्य ........ किन्तु ज्ञात रहे सुच शाकाहारी भोजन होना चाइये

s.malik ....... माफ कीजिये महोद्य हम सामने नहीं

किरण ....... इनका कहने का मतलब है की भोजन ऐसा होना चाइये जिसमे किसी जिव का मांस न हो

s.malik ....... जी जी बिलकुल आप निश्चित रहिये जैसा भोजन आप चाहते है आपको वैसा हे मिलेगा

कह कर s.malik कक्ष से बहार निकल जाता है

उदार सूर्य द्वारा टेलेपोर्टेशन द्वार दवारा भेजे गए मरुत नहुष का झुंड गोल्डन ड्रैगन सिटी पहुंच चूका था

जब सभी टेलेपोर्टेशन द्वार से बहार निकले तो महल की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने सभी को घेर लिया पैर तभी वह डेवलिन जी जूलिया नियों जी के साथ किंग सोलोमन पहुंचते है आवर सेनिको को मरुत पे हमला करने से रोक देते है

देवसूफ़ी ......... सभी सैनिक पीछे हैट जाइये इन्हें किसी भी तरह की हानि न पहुंचे जाये

देवसूफ़ी नियों जी का आदेश सुन सभी सुरक्षा कर्मी पीछे हैट जाते है

देवसूफ़ी ....... आप सभी मरुत का गोल्डन ड्रैगन सिटी में स्वागत है हमें प्रिंस सूर्य द्वारा आपके आने की सुचना पूर्व हे मिल चुकी थी आप सभी निश्चिन्त रहे यहाँ आपकी जान को किसी से कोई खतरा नहीं होगा

जूलिया ........ आप में से आपके मुखिया मनुष्य कोण है

नहुष जो झुंड में सबसे आगे खड़ा था वो कुछ कदम आगे आ कर जूलिया के सामने आ खड़ा होता है

जूलिया ......... तो आप नहुष है आप अपने सभी साथियो के साथ गोल्डन ड्रैगन सिटी में रह सकते है जब तक आपकी इच्छा हो आप किसी भी क्षेत्र का चुनाव कर सकते है जो आपके रहने के अनुकूल हो क्युकी हमें नहीं पता की आपके रहने के लिया उत्तम क्षेत्र कोनसा है

देवसूफ़ी ......... प्रिंसेस जूलिया हम जानते है इनके लिया कोनसा स्थान उचित है आप निश्चित रहो हम इन्हे उस स्थान तक पहुंचा देंगे

जूलिया ....... जी देवसूफ़ी बाकि बाते आप इनसे कर लीजिये प्रिंस सूर्य इनसे रात्रि में मिलेंगे

जूलिया आवर डेवलिन दोनों हे महल की आवर चल देते है अब वह मरुतो के अलावा देवसूफ़ी नियों आवर किंग सोलोमन हे रुके हुए थे

कुछ देर बाद किंग सोलोमन भी वह से चले जाते है देवसूफ़ी नियों सभी मरुत को ले कर पैलेस के पीछे से एक दिशा की आवर भाड़ जाते है जूस तरफ खूबसूरत घाना जंगल आवर पहाड़िया थी

पैलेस से करीब 3 कम दूर जंगल में सभी मरुत देवसूफ़ी नियों के साथ गोल्डन पोंड के पास पहुंचते है

( ये वही गोल्डन पोंड ( तालाब ) था जिसमे सूर्य आवर जूलिया का प्रथम मिलान हुआ था )

नियों ........... हमारे विचार से गोल्डन ड्रैगन सिटी में आप सभी के लिया इस से उत्तम स्थान नहीं होगा रहने के लिया

नहुष ........ आपने उचित कहा इस स्थान पे बहुत खाश ऊर्जा है ये हमारे लिया सबसे उत्तम स्थान है हम आपके आभारी है

नियों जी ......... हमने आपके लिया कुछ नहीं किया हम केवल प्रिंस सूर्य की इच्छा का पालन कर रहे है इस स्थान का उन्होंने हे आपके लिया चयन किया है अवश्य आप बहुत खाश है

नहुष नियों जी को बड़े गौर से देखते है आवर कुछ देर बाद बोलना सुरु करता है

नहुष .......... हम सभी मैजिकल मरुत है हमारी प्रजाति के बचे हुए आखरी मरुत आपके प्रिंस सूर्य ये बात जानते है सम्भवता उन्होंने कुछ सोच कर हे हमारे लिया ये स्थान चिन्हित किया होगा

नियों जी ........ सम्भवता यही सत्य हो अब हमें इजाजत दीजिये हमें उम्मीद है आपको यहाँ किसी प्रकार का कास्ट नहीं होगा

नानुष ......... हमारी सहायता के लिया आपका सुक्रिया

नियों जी उन सभी मरुत से विदा ले पैलेस की आवर लौट गए

सभी मरुत कुछ देर आस पास का निरक्षण करते है उसके बाद सभी गोल्डन पोंड में उतरने लगते है नहुष के सींगो से एक गोल्डन रे निकलती है आवर पुरे गेंदें पोंड को कवर कर लेती है कुछ देर बाद जब वो गोल्डन ोुरा वह से हटा तो वह अब कोई भी मरुत नहीं थे जैसे यहाँ कुछ देर पहले कुछ हुआ हे नहीं था सब कुछ सामान्य हो चूका था


परीलोक .........

गुरुदेव के आदेश अनुसार रिद्धि विधि गायत्री पारिजात अनंत आयाम में काफी समय तक अभ्यास कर जब लौटी तो गायत्री आवर विधि की हालत बहुत ज्यादा ख़राब थी

दरशल रिद्धि आवर पारिजात इस से पहले भी अनंत आयाम ( ग्रेविटी रूम जैसा हे स्थान किन्तु उसका कोई अंत नहीं ) में ध्यान योग योद्धा अभ्यास कर चुकी थी उनकी सकतिया उनका सरीर इस योग्य था की दोनों आदिक ग्रेविटी में भी अभ्यास करने में बहुत हद तक सक्षम थी

विधि आवर गायत्री का आज ऐसा प्रथम अवसर था इस लिया उन दोनों को काम ग्रेविटी वाले कक्ष में ध्यान योग आवर यू ध अभ्यास करने को मिला किन्तु पहली बार में इन दोनों के लिया ये कार्य सरल नहीं था

विधि आवर गायत्री जैसे हे कक्ष में पहुंची दोनों के शरीर पे ग्रेविटी का असर होना आरम्भ हो गया आवर दोनों को हे अपने शरीर डेरी डेरी खिचाव मह्सुश होने लगा जैसे उनकर शरीर को कोई जमीं की आवर खिंच रहा हो

दोनों को इसका असर अपने शरीर के हर एक अंग अंग हे हो रहा था वो तो इतने समय से गुरुदेव के सानिध्य में रह कर ध्यान योग की शिक्षा ले रही थी इस लिया जल्दी हे दोनों ने खुद के संत कर ग्रेविटी के अनुकूल ध्यान योग आवर यू ध अभ्यास करना आरामः कर दिया किन्तु ज्यादा समय तक ग्रेविटी का मुकाबला नहीं कर पति आवर जल्द हे थक कर पसीने से लटपट हो कर दोनों बहार निकल आई

ुशी समय रिद्धि आवर पारिजात भी अनंत आयाम से बहार निकली इन दोनों की हालत विधि आवर गायत्री से विपरीत थी किन्तु हलकी थकावट उन दोनों के चेहरे पे भी नजर आ रही थी

रिद्धि ........तुम दोनों तो बहुत ज्यादा थक गयी हो विधि आवर गायत्री

विधि ....... रिद्धि दीदी हम आप जितनी स्ट्रांग नहीं है न आवर नहीं हम में कोई सकतिया है

पारिजात ........ विधि तुम्हारी आदि बात सच है आवर आदि जूथ

विधि ...... क्या मतलब दीदी मैंने क्या जूठी बोलै

रिद्धि ...... परिधि का मतलब है की तुम जो कह रही हो वो अदा सच है अनंत आयाम में सब सकती काम नहीं करती है विधि वह केवल शारीरिक बल से अभ्यास किया जा सकता है पैर ये भी सच है की हमारी सकतिया हमारे शरीर को स्ट्रांग बनाने में अहम् भूमिका निभाती है

गायत्री ........ आपका मतलब है की उस रूम में आपकी कोई भी सकती काम नहीं आई वह हम जो भी अभ्यास करते है वो हमारी शारीरिक ताकत के डैम पर हे कर सकते है फिर उस कक्ष में ध्यान करने से क्या फायदा दीदी

रिद्धि ........ मैंने ऐसा कब कहा की कोई भी सकती काम नहीं करती गायत्री विधि ऐसा सोचना गलत है इसका मतलब तुम दोनों को तब समाज आएगा जब तुम दोनों कुछ दिन अनंत आयाम में अभ्यास करोगी आवर अपने पांच तत्त्व पे ध्यान केंद्रित करोगी आवर उस हे अनंत आयाम में नियंत्रित करोगी

विधि ........दीदी अभी तक हम इसमें ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं कर सकीय है इसमें बहुत टाइम लगता है

परिधि ......... हेहेहे तुम्हे क्या लगता है विधि जल वायु पार्थिव अग्नि ाक्ष तत्वा को जागृत कर नियंत्रित करना इतना आसान है तुम दोनों ने अभी तक अग्नि आवर जल तत्वा को जागृत किया है वो भी इतनी सिगरा इस लिया कर सकीय हो क्युकी तुम परीलोक के पवित्र वातावरण में ध्यान लगाती हो आवर गुरुदेव भी आप दोनों की सहयता करते है

रिद्धि ......... तुम दोनों को पता है क्या की सूर्य को कितना समय लगा था अपने प्रथम तत्वा को जागृत कर उस हे नियंत्रित करने में जबकि उसके अंदर तो जनम से दिव्या सकतिया थी

विधि आवर गायत्री दोनों न में गर्दन हिला देती है

रिद्धि ........ सूर्य को अपने सभी तत्वा जागृत करने में 1 वर्ष से भी आदिल समय लगा था आवर ये भी तभी संभव हो पाया जब सूर्य को अपने पूर्व जनम का स्मरण हो पाया था तब

पारिजात ........ जहा तक मुझे पता है पृथ्वीलोक पे तपस्वी साधु ऋषियों का पूरा जीवन ध्यान में वयतीत हो जाता है फिर भी वो सभी पांच तत्वा को जागृत नहीं कर पते है तुम दोनों बहुत सौभाग्य साली हो की तुम दोनों इतनी जल्दी गुरुदेव की सहायता से एक एक तत्वा को जागृत कर नियंत्रित करने में इतनी जल्दी सफल हो पायी हो

विधि .......... जी दीदी वैसे दीदी अब तो आपकी भी जल्दी हे सूर्य से सदी हो जाएगी जन्नत दीदी के साथ फिर तो रिद्धि दीदी आपका no. भी जल्दी हे लग जायेगा

गायत्री ......... है पारिजात दीदी हम भी पहली बार पारी की सदी देखने वाली है वैसे आपने अभी तक शॉपिंग भी सुरु नहीं की है अपनी सदी की

पारिजात ....... चलो चल कर फ्रेश हो जाओ फिर साम को हम सभी नगर में हमने चलेंगे

तभी वह एक सेविका आती है जिसके हाथ में दो बॉक्स थे

सेविका चारो के सामने जुख कर सलाम करती है आवर दोनों बॉक्स रिद्धि की आवर बढ़ा देती है

सेविका ...... . राजगुरु जी ने ये बॉक्स आपके लिया भेजे है

रिद्धि ....... पिता श्री ने मेरे लिया भेजे है

कहते हुए रिद्धि दोनों बॉक्स लेती है आवर उन्हें खोल कर देखती है

पारिजात ....... क्या हुआ दीदी क्या है इन में

रिद्धि ......... इन बॉक्स में विधि आवर गायत्री के लिया विशेष ॉधी है सायद पिता श्री ने आज हे इनका निर्माण किया है

रिद्धि एक बॉक्स विधि को आवर दूसरा गायत्री को देती है

रिद्धि ........ विधि गायत्री ये ॉधी पिता श्री ने तुम दोनों को ध्यान में रख कर विशेष रूप से तुम्हारे लिया त्यार की है सूर्य आवर चन्द्रमा की ऊर्जा अवशोषित जड़ी बूटियों से

विधि ........ पैर दीदी हमें इसका उपयोग कैसे करना है हमें नहीं पता पहले जो भी ॉधी गुरुदेव हमें देते थे उनका उपयोग वो सवयं हे बता देते थे

रिद्धि ........ मुझे पता है विधि मैं बता देती है तुम जब सुबह उठो तब स्नान कर इसका सेवन करना आवर उसके तुरंत बाद दोनों अपना ध्यान जल आवर अग्नि तत्वा पे ध्यान लगाना इस से तुम्हारी जल तत्वा पुर अग्नि तत्वा की ऊर्जा में निरंतर वर्दी होगी आवर तुम्हारा नियंत्रण अपने अपने तत्वा पे मजबूत होगा अब जाओ आवर सनान कर भोजन करो उसके बाद कुछ देर विश्राम करना फिर सैम को नगर भर्मण के लिया भी चलना है

विधि गायत्री दोनों खुश होते हुए है बोल कर अपने कक्ष की आवर भाड़ गई

पारिजात ....... देखो तो दोनों कितनी खुश हो गई कगार भ्रमण का सुन कर हे

रिद्धि ....... वैसे इनके जैसे हे तुम आवर जिनिशा भी खुश होती थी जब पिता श्री तुम दोनों को योद्धा अभ्यास से अवकाश देते थे

पारिजात ....... हेहेहे दीदी तब हम बचे थे हमें गुमनाम फिरना बहुत पसंद था

रिद्धि ....... वो दोनों भी बची है हमारे सामने तो हम भले हे उनसे कुछ बड़ी लगती है पैर ये तुम भी जानती हो की हमारी उम्र कितनी है

पारिजात ...... छोड़िये हमें भी फ्रेश हो जाना चाइये भोजन कर कुछ विश्राम करना चाइये

रिद्धि ......... हम्म्म ठीक है चलो वैसे साम को जिनिशा आवर जीनत भी आ रही है उन्हें भी विवाह की खबर हो चुकी है

रिद्धि अपने कक्ष की आवर चल दी पैर पारिजात रिद्धि से बच कर एक कक्ष की आवर भाड़ गयी जहा उस कक्ष में केवल एक बड़ा सा मिरर था आवर कुछ नहीं

पारिजात ने अपनी जादुई छड़ी से एक रौशनी उस मिरर पे डाली कुछ हे देर में उसमे कुछ दृश्य आने सुरु हो गए ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................
 
अपडेट. 275

पारिजात ...... छोड़िये हमें भी फ्रेश हो जाना चाइये भोजन कर कुछ विश्राम करना चाइये

रिद्धि ......... हम्म्म ठीक है चलो वैसे साम को जिनिशा आवर जीनत भी आ रही है उन्हें भी विवाह की खबर हो चुकी है

रिद्धि अपने कक्ष की आवर चल दी पैर पारिजात रिद्धि से बच कर एक कक्ष की आवर भाड़ गयी जहा उस कक्ष में केवल एक बड़ा सा मिरर था आवर कुछ नहीं

पारिजात ने अपनी जादुई छड़ी से एक रौशनी उस मिरर पे डाली कुछ हे देर में उसमे कुछ दृश्य आने सुरु हो गए ...........

अब आगे ..........

प्रेतलोक .............. प्रेतलोक अपने नाम को पूर्ण रूप से सार्थक करने वाला लोक जहा प्रेतों का निवेश स्थान है इस लोक के सम्राट है प्रेतराज जो यहाँ की नये आवर दंडविधान को सुचारु रूप से कार्यान्वित रखते हुए इस लोक पे शासन करते है

प्रेतराज को प्रेतों के डिप्टी के रूप में भी जाना जाता है

जो भी असुर दानव मानव या अन्य प्रजाति जो अपने पाप कर्मो की आदिकता से अपनी आत्मा तक को कलुषित कर लेता है उनके अंत के पश्चात सभी पापियों की आत्मा प्रेतलोक के दानविदान के अधीन होती उनके करम अनुसार प्रेतराज हे उनके किया का दंड निर्धारित करते है अपने करम अनुसार दंड भोग कर हे आत्माये मोक्ष दाम की आवर अग्रसर हो सकती

प्रेतलोक का दृश्य बड़ा हे डरावना था चारो आवर प्रेत हे प्रेत थे जो सभी पापियों को उनके किया का दंड दे रहे थे कही तेजाब की नदी में आत्माओ को डाला जा रहा था तो कही बहते हुए गरम लावे में फेका जा रहा था

किसी किसी को तो उल्टा लटका ये हुए प्रेत उनपे कोदो की बरसात कर रहे थे चारो तरफ का दृश्य दिल दहला देने वाला था इस दृश्य से बिलकुल विपरीत गगनचूमी खूबसूरत पहाड़ पे एक विशाल के महल था जो अपनी खूबसूरती की छाता दूर से हे बिखेर रहा था

महल क चारो तरफ खूबसूरत विशाल के वृक्ष लताये खूबसूरत रंग बिरंगे पक्षी जगली जीवो की भरमार थी उनसे कुछ हे दुरी पे एक खूबसूरत उद्यान था कल कल करता झरने से गिरता जल एक अलग हे सुकून भरी आभा प्रकट कर रहा था कोई भी ये नहीं कह सकता की ये प्रेतों का लोक है जहा अनंत प्रेत निवेश करते है

सामने के दृश्य को देख कर कोई भी इसकी तुलना सवरग या परियोजना के लोक से किये बिना रह नहीं सकता नजारा हे ऐसा मन को मोह लेने वाला था था जैसे मृत्यु आवर जीवन दोनों हे पहलु के दृष्टिकोण को बहुत हे बारीकी से सामने रखा गया हो

तभी उदयन में से किसी की बहुत हे मधुर हाशि की आवाज सुनाई पड़ती है जैसे एक साथ ढेरो पक्षी ख़ुशी से छह चाहा उठे हो

कुछ खूबसूरत कन्याये एक बेहद खूबसूरत जवान यौवती को घेरे हुए कड़ी थी सम्भवता ये प्रेतराज जी की पुत्री राजकुमारी जीनत थी जो अपनी सखियों की किसी बात से शरमाते मुस्कुराते हुए उनके पीछे दौड़ रही थी उन्हें पकड़ने के लिया

सखी 1 .......... राजकुमारी जी हम सब आपकी पिरया सखिया है अब हमसे क्या छुपाना हमने तो यहाँ तक सुना है की हमारी सखी की पहले से हे दो सौतने है

जीनत ........ विजय अपनी मर्यादा की सीमा का उलंगन मत करो अन्यथा हम भूल जायेंगे की तुम हमारी सखी हो

जीनत के गुस्से भरे चेहरे को देख सभी लड़किया अपने हे स्थान पे जड़वत हो गई आवर सभी का शरीर किसी अनजाने भय से कपङे लगा आवर जिसका नाम विजय था वह लड़की फ़ौरन अपने गुथनो पे आ गई

विजय ....... राजकुमारी जी हमें माफ कर दीजिये हमसे भूल हो गई

जीनत डेरी डेरी उस लड़की के सामने आ कर रूकती है

जीनत ........ तुम हमारी बचपन की सखी हो विजय किन्तु इसका मतलब ये नहीं है की तुम अपनी मर्यादा भूल कर अनुचित सब्दो का प्रयोग करो

विजय ........ राजकुमारी जी मुझसे भूल हो गई मेरी अंतिम भूल समाज कर मुझे माफ कर दीजिये

जीनत ......... कड़ी हो जाओ सखी विजय

इस बार जीनत ने थोड़ी नरम आवाज में विजय से कहा तो थोड़ा दर आवर हिचक से वो कड़ी हो गई

विजय ने जब अपना सर ऊपर किया तो उसकी आँखे भीगी हुई थी

जीनत ने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी आँखे साफ की आवर उसने अपने साथ लिया झरने की आवर चल दी बाकियो को जाने का बोल कर

झरने के पास में लगे बड़े से झूले पे अब जीनत आवर विजय दोनों बे थे हुए थे

जीनत ........ विजय तुम हमारी पिरया सखी हो तुम्हारे स्थान इन सब्दो का प्रयोग स्वीटी आवर मानसी के लिया किसी आवर ने किया होता तो अब तक हम उसका अंत कर चुके होते

विजय ....... सखी जीनत हम सच में अपनी भूल के लिया आपसे क्षमा चाहते है हम केवल आपसे परिहास करना चाहते थे न की आपको किसी प्रकार की ठेश पहचाना चाहते थे

जीनत .......... हमने तुम्हे क्षमा किया सखी किन्तु ज्ञात रहे भविष्य में फिर से उनके लिया अनुचित सब्दो का प्रयोग न करना सायद हम भविष्य में आपको छह कर भी क्षमा नहीं कर पाएंगे

विजय ...... भविष्य में आपको क्रोधित होने का कोई भी ऐसा अवसर कभी नहीं देंगे क्या हम कुछ कह सकते है

जीनत ....... कहो क्या कहना चाहती हो तुम सखी

विजय ........ हमने महाराज के श्री मुख से सुना था कुछ दिवश पूर्व की सिगरा हे आपका उनसे विवाह होने वाला है ुशी समय परीलोक की राजकुमारी आवर आपकी सखी राजकुमारी पारिजात का भी उनके साथ विवाह होना तय हुआ है किन्तु एक हे समय पे दोनों से विवाह कैसे संभव है

जीनत ......... इसके विषय में हम भी नहीं जानते की ये कैसे संभव होगा किन्तु हमें पूर्ण विश्वाश है की इसका कोई न कोई उचित मार्ग गुरुदेव या पिता श्री निकल हे लेंगे

विजय ....... जो आज तक नहीं हुआ है अब तो वो होने की सम्भावना है राजकुमारी जी

जीनत .......क्या मतलब तुम कहना क्या चाहती हो

विजय. ........ राजकुमारी जी ये आप भी जानती है की प्रेतलोक में आज तक कोई विवाह नहीं हुआ है जहा तक मुझे पता है आप भी जानती है की सवयं महाराज ने अभी विवाह नहीं किया है आवर सायद वो कभी करेंगे भी नहीं उनके जीवनकाल की एक मात्रा ख़ुशी आप है क्या आपने कभी सोचा की आपके विवाह करने के बाद महाराज के जीवन में कितना सूनापन आ जायेगा

जीनत जो बहुत बार इस विषय पे प्रेतराज से बात कर चुकी थी किन्तु प्रेतराज की आवर से आज तक उन्हें संतुष्ट करने लायक जबाब नहीं मिला था ऐसे में जीनत अपनी सखी को क्या जबाब देती

अभी जीनत कुछ सोच हे रही थी की तभी किसी की आहात जीनत आवर विजय के कानो में पड़ती है

दोनों उस दिशा की आवर देखने लगती है कुछ पल बाद हे कुछ पुष्प लटाया अलग कर उनके बिच से एक खूबसूरत यौवती बहार निकलती है

विजय ........ सखी मेघा आप यहाँ

मेघा ....... राजकुमारी जी महाराज ने आपको याद किया है

जीनत ........ पिता श्री ने याद किया है

मेघा ........ जी राजकुमारी जी

जीनत ......... आप चलिए हम आते है

मेघा थोड़ी संकुचाते हुए आगे बोलती है

मेघा ....... क्षमा करे राजकुमारी जी किन्तु महाराज का आदेश है की आप सिगरा बिना विलम्भ के उनके समक्ष पहुंचे

जीनत ......... ठीक है चलो तुम हम भी चलते है चलो सखी विजय अवश्य पिता श्री को कुछ आवशयक विषय पे बात करनी होगी

जीनत आवर विजय दोनों आगे आगे एक साथ महल में प्रवेश करती है मेघा जो इन्हें सन्देश देने आयी थी वो इनसे कुछ दुरी पे इनके पीछे पीछे चल रही थी

जीनत ....... पिता श्री आपने हमें याद किया

प्रेतराज ........ है पुत्री जीनत आओ बैठो यहाँ हमारे समक्ष पुत्री विजय हम कुछ समय एकांत चाहते है

विजय ....... जी महाराज आज्ञा दीजिये

विजय प्रेतराज आवर जीनत को आदाब से मुख कर सलाम कर कक्ष से बहार निकल गयी

जीनत ........ क्या हुआ पिता श्री कोई विशेष बात करनी है क्या आपको हमसे आपने हमारी सखी को भी बहार भेज दिया

जीनत ने किसी जीडी बचे के जैसे हल्का नाराज होते हुए कहा

प्रेतराज ........ हाहाहा हमें क्षमा करना राजकुमारी जी हमने आपकी पिरया सखी को जाने का आदेश जो दिया उसके लिया

जीनत ....... आपने हमें इतनी सिगरा आने को क्यों कहा पिता श्री

प्रेतराज एक सहारा जादुई पत्र जीनत की पुर बढ़ा देते है

प्रेतराज ........ परीलोक से आपके लिया सन्देश है पुत्री जीनत ये खाश कर आपके लिया है इस लिया हम नहीं जानते की क्या सन्देश है अवश्य राजकुमारी पारिजात का है

जीनत हाथ में पत्र लेती है आवर हलहालके से उसपे फूंख मरती है पत्र फ़ौरन खुल जाता है

ये पारिजात का पत्र था जो जीनत के लिया हे था

जिसमे पारिजात ने गुरुदेव द्वारा उन दोनों के विवाह के विषय में हुए बात चित थी आवर पारिजात का जीनत को विवाह के लिया विशेष खरीददारी के लिया परीलोक आमंत्रित किया जाने का निमंतरण था

जीनत पत्र पढ़ते पड़ता शर्मा भी रही थी आवर मुस्कुरा भी रही थी

प्रेतराज ........ क्या हुआ पुत्री जीनत क्या लिखा है पत्र में कोई खाश सन्देश है क्या जो हमारी पुत्री इस तरह से लज़्ज़ावेश मुस्कुरा रही है

जीनत ........ वो वो पिता श्री हम परीलोक जाना चाहते है आपकी इजाजत है क्या

प्रेतराज ........ क्या हुआ पुत्री सब खिसक मंगल तो है न

जीनत ने जबाब न दे कर हाथ में पकड़ा हुआ पत्र प्रेतराज की आवर बढ़ा देती है

प्रेतराज पत्र पद कर बहुत खुश होते है

जैसे उनकी मन चाय मुराद पूरी हो गई हो

प्रेतराज ........ अवश्य पुत्री हम भी आपके साथ परीलोक चलते है हम आपको वह छोड़ कर गुरुदेव से कुछ जरुरी चर्चा कर लौट आएंगे

जीनत ....... पिता श्री क्या हम सखी विजय को भी ले कर जा सकते है परीलोक

प्रेतराज ....... किस लिया पुत्री खेर तुम्हारी यही इच्छा है तो हम इजाजत देते है जा कर त्यार हो जाओ आवर अपनी सखी से भी इसके विषय में बात कर लो हम कुछ हे समय में निकलते है

जीनत ......जी पिता श्री

जीनत मुस्कुराते हुए बहार निकल जाती है

प्रेतराज ........ आखिर वो समय आ हे गया पुत्री जिसका कब से तुम्हे इंतज़ार था मैं भी अपने वचन से मुक्त हो पाउँगा

प्रेतराज कुछ देर गहन विचारों में खोये रहने के बाद हलकी मुस्कान के साथ बहार निकल जाते है

ड्रैगन लोक .........

ीदार गोल्डन ड्रैगन सिटी के एक भव्य कक्ष में सूर्य किरण शालिनी जी मानसी जूलिया क्वीन एलिज़ाबेथ किंग सोलोमन डेवलिन जी बैठे हुए भोजन कर रहे थे

कुछ देर बाद सभी ने भोजन कर लिया था

किंग ........ प्रिंस आपकी आज की जाँच से कुछ पता चला की इन सभी घटनाओ के पीछे का क्या कारन है

सूर्य ........... अभी पूरी तरह से तो नहीं किंग किन्तु मुझे उम्मीद है कल की जाँच से बहुत कुछ साफ हो जायेगा

किंग ....... आप मुझे सोलोमन कह कर सम्बोधित कर सकते है प्रिंस सूर्य

सूर्य ....... जी ठीक है सोलोमन जी फिर आप भी मुझे सूर्य हे कहिये

सूर्य की बात सुन डेवलिन जी आवर किंग सोलोमन दोनों मुस्कुराने लगते है

सूर्य .......... किरण तुम जा कर आराम करो मैं बाद में आता हूँ

किरण ........ जी कुंवर जी मैं माँ के साथ हूँ उनके कक्ष में

सूर्य ........ ठीक है सोलोमन जी आप आवर डेवलिन जी आप मेरे साथ आइये आपसे जरुरी बात करनी है

किंग सोलोमन सूर्य आवर डेवलिन जी को अपने साथ लिया एक रूम में चले जाते है

सोलोमन जी ......... कहो सूर्य क्या बात है

सूर्य ........ देवसूफ़ी नोयों जी दिखाई नहीं दे रहे है जबसे मैं वापिस महल लौटा हूँ मैंने उन्हें देखा नहीं

डेवलिन जी ............ सूर्य वो किसी आवशयक कार्य हेतु गए है सम्भवता कल आप उनसे भेंट कर सकते है

सूर्य ....... जी कोई बात नहीं वैसे आप ब्लैक ड्रैगन सिटी के बारे में कितना जानते है वह के लोगो के विषय में आवर वह जो आपके द्वारा चयन किये प्रतिनिधि के विषय में

सोलोमन जी ....... क्या हुआ सूर्य आप ब्लैक ड्रैगन सिटी आवर वह के लोगो के बारे में क्यों पूछ रहे है क्या इन सभी घटनाओ के पीछे ब्लैक ड्रैगन सिटी है क्या

सूर्य ........ फ़िलहाल मैं पूरी तरह से इसका उत्तरदायी ब्लैक ड्रैगन सिटी को नहीं ठहरा सकता हूँ किन्तु जो भी जानकारी मुझे प्राप्त हुई है ड्रैगन बूटी के दूषित होने के पीछे की वो सभी जानकारिया ब्लैक ड्रैगन सिटी की आवर इशारा कर रही है

डेवलिन जी ......... अगर ऐसा है तो हम सिगरा हे कुछ जरुरी कदम उठाने चाइये आप क्या कहते है किंग सोलोमन

किंग ....... हम आप के विचार से पूर्ण रूप से सहमत है डेवलिन जी

सूर्य ........ माफ कीजिये मैं आप दोनों के विचारों से पूरी तरह से सहमत नहीं हूँ डेवलिन जी आवर सोलोमन जी

डेवलिन जी ......... आवर ऐसा क्यों सूर्य जब हम जानते है की ड्रैगन बूटी जो ड्रैगन लोक के सभी ड्रैगन के लिया कितनी आवशयक ॉडी है उसको दूषित करने के पीछे ब्लैक ड्रैगन सिटी का हाथ है ऐसे में हमें इसके पीछे के सभी दोषियों पे उचित करवाई करनी चाइये

सूर्य ......... माफ कीजियेगा डेवलिन जी किन्तु मैंने अपनी जानकारी में कही भी ये नहीं कहा की इस कार्य के पीछे ड्रैगन लोक के किसी इंसान का हाथ है जब तक जाँच में कोई दोषी नहीं पाया जाता किसी पे भी करवाई करना गलत होगा उस से पहले हमें हमें पूरी जानकारी जुटानी होगी तथ्यों के साथ उसके बाद हे दोषी पे करवाई करना उचित होगा

किंग ......... हम आपके विचारों से सहमत है किसी भी निर्दोष को बिना किसी अनुचित कार्य के लिया दण्डित करना गलत है आपने आगे क्या सोचा है

सूर्य ....... मैंने आवर किरण ने जब आज निर्वाण सिटी के सभी बड़े व्यपारियो की जड़ी बूटियों की जाँच की तो उसने जी भी ब्लैक ड्रैगन सिटी के पूर्वी भाग से ड्रैगन बूटी एकत्रित की गयी है उनके ब्लैक ब्लड की मात्रा आदिक पायी गई है खास कर के ब्लैक ड्रैगन किंतु के पूर्वी माउंटेन के आस पास से एकत्रित की गयी ड्रैगन बूटी में

डेवलिन जी ....... आपका मतलब की जो जल धरा आपकी भाषा में जो नाड़ी आइस माउंटेन सिटी को ब्लैक ड्रैगन सिटी से जोड़ती है उस क्षेत्र से है न नालन्दी नाड़ी के नाम से ड्रैगन लोक में जाना जाता है

सूर्य ......... जी डेवलिन जी हम ुशी नालन्दी नाड़ी की बात कर रहे है जो आइस माउंटेन आवर ब्लैक ड्रैगन सिटी के माउंटेन आवर फारेस्ट के बिच से होते हुए निर्वाण सिटी तक आती है निर्वाण सिटी से समुन्दर में लेने हो जाती है

सोलोमन ......... कही देवसूफ़ी नियों जी को भी तो किसी गुप्तचर से गुप्त जानकारी नहीं मिल गई है क्युकी देवसूफ़ी जी ब्लैक ड्रैगन सिटी हे तो गए है किसी आवशयक कार्य हेतु

सूर्य ........ आपने इस बारे में मुझे पहले क्यों नहीं बताया आपको इस बारे में मुझे पहले हे बता देना चाइये था सोलोमन जी खेर मैं देखता हूँ आप चिंता न कीजिये मैं चलता हूँ

सूर्य डेवलिन जी आवर सोलोमन जी से विदा ले कक्ष से बहार निकल गया

आवर अपने कक्ष में पहुंचा जहा मानसी आवर जूलिया दोनों लेती एक दूसरे से खिलखिला कर बात कर रही थी

सूर्य ........ जुली क्या तुम्हे पता था की देवसूफ़ी नोयों जी ब्लैक ड्रैगन सिटी जा रहे है

मानसी ........ क्या हुआ कुंवर जी आप इतने चिंतित क्यों है कुछ हुआ है क्या

सूर्य ........ मैं ठीक हूँ मनु बस ऐसे हे जूलिया से पूछ रहा था क्युकी जब से मैं आया हूँ मैंने उन्हें देखा नहीं था आवर अभी सोलोमन जी से इस बारे में पता चला की नियों जी ब्लैक ड्रैगन सिटी गए है तो मुझे लगा जुली की उनसे कोई बात हुई होगी इस लिया पूछा

जूलिया ........ है उन्होंने जाने से पहले मुझे बताया था की वो ब्लैक ड्रैगन सिटी जा रहे है पैर ये मुझे भी पता नहीं की वो वह क्यों गए है

सूर्य ........ ठीक है आप दोनों आराम करो मैं माँ से मिल कर आता हूँ कुछ देर में

मानसी जूलिया ......... ठीक है कुंवर जी हम आपका इन्तजार करेंगे

सूर्य वह से निकल कर पैलेस के बहार जाता है

सूर्य ........ निर्भया बहार आओ

सूर्य द्वारा निर्भयासुर को आदेश मिलते हे निर्भयासुर सूर्य के शरीर से ऊर्जा रूप में बहार आता है

निर्भयासुर ....... क्या हुआ स्वामी आप किसी बात को ले कर चिंतित है

सूर्य ........ निर्भया तुम्हे अभी ब्लैक ड्रैगन सिटी जाना होगा वह से तुम्हे नोयों जी पे नजर रखनी आवर उन्हें हर खतरे से सुरक्षित रखना है किन्तु उन्हें तुम्हारे बारे में कुछ भी पता न चले

निर्भयासुर ........ ठीक है स्वामी मैं अभी जाता हूँ आप चिंता न करे

सूर्य ........ अपना ख्याल रखना मुझे कुछ गलत होने का आभाष हो रहा है मैं सुबह गोल्डन ड्रैगन सिटी के साथ वह पहुँचता हूँ तुम भी सावधान रहना

निर्भयासुर ....... ठीक है स्वामी

निर्भयासुर फ़ौरन ब्लैक सिटी की आवर निकल जाता है

सूर्य वह से शालिनी जी के रूम में पहुँचता है जहा किरण चैन की नींद सो रही थी आवर शालिनी जी किरण के सर में अपना ममतामयी हाथ फिर रही थी

सूर्य ......... ये स्वीटी तो बड़ी जल्दी सो गई माँ लगता है आज कुछ ज्यादा हे थक गई है या आपने कुछ ज्यादा हे प्यार लुटा दिया है अपनी बहु पर

शालिनी जी ......... आहिस्ता बोल अभी अभी सोई है स्वीटी उसने आराम से सोने दे आज से पहले सायद हे पहले कभी इस तरह से बहार रही है

सूर्य ....... है आप सही कह रही हो माँ

सूर्य दूसरी तरफ से शालिनी जी की बगल में लेट जाता है आवर अपना सर शालिनी जी के पेट पे रख लेता है

शालिनी जी अपना दूसरा हाथ से प्यार से सूर्य के सर को सहलाने लगती है

शालिनी जी ........ क्या बात है सूर्य आज तुम कुछ परेशान नजर आ रहे हो बीटा

सूर्य ....... आपको कैसे पता माँ आपने ठीक कहा माँ पता नहीं क्यों पर अचानक से कुछ बहुत हे अजीब सा लग रहा है माँ जैसे कुछ बुरा होने वाला है मन में बैचेनी हो रही है समाज नहीं आ रहा है ऐसा क्यों हो रहा है क्या कारन है ऐसा मह्सुश होने का

शालिनी जी ........... बीटा तुम अगर ऐसे खुद को असंत कर लोगे तो कुछ भी ठीक नहीं कर पाओगे मैं ये तो नहीं जानती की इसके पीछे क्या कारन है या फिर क्या होने वाला है पैर इतना जरूर जानती हूँ की मेरा बीटा इतना कमजोर नहीं है वो हर मुसीबत से बहार निकलने का हौसला रखता है बस तुम खुद को भटकने मत दो खुद को संत कर तुम हर मुश्किल का सामना हे नहीं कर सकते बल्कि मुझे यकीं है जीत भी तुम्हारी होगी

बस खुद को एकाग्रचित करके आने वाली हर मुसीबत खतरे के लिया सवयं को त्यार रखो समाज लो ये तुम्हारी परीक्षा है बीटा गुरुदेव ने भी तो यही कहा था न बीटा

सूर्य ....... जी माँ थैंक यू मुझे समजने के लिया

शालिनी जी ....... ठीक है अब तुम जाओ आवर जा कर आराम करो मानसी आवर जूलिया तुम्हारा इन्तजार कर रही है स्वीटी को यही सोने दो

सूर्य ...... जी माँ जैसा आप कहे

शालिनी जी ....... क्या कुछ आवर भी जो तुम कहना चाहते हो सूर्य

सूर्य ....... वो माँ कुछ आवर भी बात है दरशल जब मैं आवर स्वीटी आज निर्वाण सिटी के उत्तरी बाहरी हिस्शे की जांच कर रहे थे तो वह से बहती हुई नाड़ी से बहुत हे नकारात्मक ऊर्जा का आभाष हुआ था

शालिनी जी ....... किस तरह की ऊर्जा सूर्य आवर तुमने उसका पता नहीं किया क्या

सूर्य .......... ऐसी नाजारात्मक ऊर्जा को सायद हे मैंने इस से पहले मह्सुश किया होगा माँ आवर जब मैंने उसके केंद्र का पता करने की कोशिश की तो आवर भी अजीब लगा

शालिनी जी ........ ऐसा क्या हुआ बीटा

अब तो शालिनी जी के माथे पे भी हल्का बल पड़ता हुआ नजर आने लगा था

सूर्य ........... जब मैंने अपनी सुध ऊर्जा से उसके केंद्र का पता करने की कोशिश की तो अचानक से वो नकारात्मक ऊर्जा गायब हो गई जैसे वह ऐसी कोई ऊर्जा पहले कभी थी भी या नहीं मैंने बहुत कोशिश की पैर निराशा के सिवाय मेरे हाथ कुछ भी नहीं लगा माँ उल्टा मुझे जो ऊर्जा निर्भया आवर मानसी से प्राप्त हुई कुछ देर के लिया वही अनियंत्रित होती हुई मह्सुश हुई

शालिनी जी ....... मतलब इस ऊर्जा का तुम्हारी आसुरी ऊर्जा पे बहुत आदिल प्रभाव पड़ता है आवर अगर भूल से निर्भयासुर या मानसी इसके सम्पर्क में आ गई तो

सूर्य ....... नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगा निर्भया आवर मानसी दोनों हे मेरे जीवन का अभिन अंग है माँ

शालिनी जी ....... मेरी बात ध्यान से सुनो सूर्य अभी मानसी आवर निर्भया के अनियंत्रित हो जाने पे केवल तुम या फिर स्वीटी हे रोक सकते हो तुम दोनों के अलावा अभी यहाँ कोई भी ऐसा नहीं है जो इनका सामना कर सके दोनों मेरी बात मानते है पैर अगर वो किसी आवर के नियंत्रण में हो तब ऐसा होना मुश्किल है इस लिया आगे की खोजबीन तुम अकेले करोगे आवर स्वीटी यही हमारे साथ रहेगी

सूर्य ........ जी माँ आप चिंता न करे मैं ऐसा कभी भी नहीं होने दूंगा

शालिनी जी ...... मुझे तुमसे यही उम्मीद है सूर्य अब जाओ आवर जा कर आराम करो कल सुबह फिर से जाना है तुम्हे

सूर्य ...... जी माँ गुड नाईट ुम्मम्हा

शैलिंजी ........ गुड नाईट बीटा ुम्मम्हा

सूर्य शालिनी जी को गाल पे गुड नाईट किश कर अपने रूम में आ गया जहा मानसी आवर जो लिया अभी भी सूर्य का इन्तजार करते हुए ड्रैगन लोक की हे बाते कर रही थी

सूर्य ........ आप दोनों अभी तक सोये नहीं

मानसी ......... हम आपका हे इन्तजार कर रहे थे ये लीजिये आपके नाईट के कपडे

सूर्य मुस्कुरा कर मानसी से कपडे लेता है आवर सनान कक्ष में जा कर कपडे बदल कर दोनों के साथ लेट जाता है

सूर्य ......... तो आप दोनों ने दिन भर क्या क्या किया

जूलिया ........ हम आज माँ को साथ ले कर ड्रैगन सिटी गुमने गए थे आप को भी हमारे साथ चलना चाइये था

सूर्य ......... फिर तो आज आप सबने खूब मस्ती की होगी ड्रैगन सिटी में

मानसी ......... इस जूलिया ने मार्किट से न जाने क्या क्या खरीदी करवा दी हमें रुकिए मैं अभी आपको दिखती हूँ

सूर्य ........ अरे बाबा अभी रात में देखना जरुरी है क्या वैसे भी मुझे यकीं तुम सभी ने जो भी खरीदी की वो तुम्हारी पसंद की हे होगी आवर खूबसूरत भी अभी मैं थोड़ा थका हुआ हूँ बस एक बार ये प्रॉब्लम ख़तम हो जाये फिर हम सब एक साथ हमने चलेंगे आवर ढेर साडी शॉपिंग भी करेंगे यहाँ से

जूलिया ......... आप लेट जाइये मैं आपके पेअर दबा देती हूँ

सूर्य ....... हाहाहा अब इतना भी कमजोर मत संजो जुली इसकी कोई जरुरत नहीं है लेती रहो ठीक आवर मेरी बात सुनो ध्यान से कल गोल्डन ड्रैगन सिटी को तुम ब्लैक ड्रैगन सिटी जाने का आदेश देना मैं सुबह जल्दी हे निकल जाऊंगा स्वीटी भी यही रहेगी

जूलिया ........ G.dragon सिटी तो आपका आदेश भी तो मानती है फिर आप हे आदेश क्यों नहीं देते

सूर्य ....... क्यों तुम्हे कोई प्रॉब्लम है क्या जूलिया

जूलिया न में अपना सर हिला देती है

सूर्य ........ तुम लोग आराम से पहुंच जाना कोई जल्दी नहीं है अब सो जाओ

जूलिया ........ मैं माँ के पास जा रही हूँ आप दीदी के पास रुकिए

सूर्य ....... इसकी क्या जरुरत है तुम भी आराम से सो सकती हो इतनी जगह है तो सही यहाँ

जूलिया ....... आपको दीदी के साथ टाइम निकलना चाइये

कह कर मुस्कुराते हुए जूलिया मानसी को आँख मर कर रूम से बहार निकल गई

सूर्य ......... इस हे क्या हुआ है मनु

मानसी ......... मुझे क्या पता सायद इस हे माँ के साथ सोने का मन होगा

अब सूर्य को क्या पता की मानसी आवर जूलिया पहले से हे कुछ प्लान किये बैठी थी जब सूर्य आवर मानसी रोम में अकेले बचे थे तो मानसी ने बीएड के पास लगी ान्तिक अलमारी खोली आवर उस स्व कुछ कपडे निकल कर संअंगहर में जाती है

सूर्य ......... लगता है जुली आवर मानसी दोनों ने मिल कर जरूर कोई खिचड़ी पकाई है नहीं तो जुली मेरे साथ वक़्त गुजरने का मौका बिलकुल नहीं छोड़ने वाली चलो अच्छा है मानसी को भी प्यार किये कई दिन हो गए आज उसे भी खुश कर देता हूँ

कुछ देर बाद जब मानसी संअंगहर स्व बहार निकली तो सूर्य की आँखे ुशी पे ातक गई





मानसी सूर्य की आवर स्व कोई भी पर्तिकिर्या न होते देख कुछ देर बाद अपनी नजरे ऊपर उठाई तो अपलक सूर्य को अपनी आवर देखता देख शरमाते हुए बीएड के पास जा पहुंची

सूर्य ......... मनु तुम वाकई बहुत खूबसूरत हो इसके लिया मुझे बाबा को धन्यवाद कहना चाइये

मानसी ........ थैंक यू पैर मैं कुछ सामजी नहीं बाबा को इसके लिया किस बात का धन्यवाद कहना चाहते है आप

अपने सामने कड़ी मानसी को देख सूर्य मुस्कुराते हुए मानसी के हाथ में पकडे ब्लैक गाउन टाइप निघ्त्य की दूर को खींच देता है आवर मानसी के कंधे से निघ्त्य निचे खिसका देता है

मानसी जो अंदर से पूरी तरह नुदे थी बिना किसी अंधरुनि वस्त्र के वो अगले हे पल अपने भू मूल्य खजाने को सूर्य के सामने be-parda होने से रोक नहीं पायी





सूर्य .......... इतनी खूबसूरत बेटी को जनम देने के लिया आवर सभी की बुरी नजरो से बचा कर मेरे जीवन मेरी जीवन संगिनी के रूप में भेजना उनका धन्यवाद करना तो बनता है हाहाहाहा

सूर्य की बात सुन मानसी के शर्मीले चेहरे पे एक प्यारी सी मुस्कान उभर आती है

सूर्य जो चादर के निचे पहले से हे पूरी तरह से त्यार था वो अगले हे पल उस खूबसूरत हसीना को अपने आग़ोश में भर लेता है आवर मानसी के ृषभरे होंटो को चूमने लगता है

मानसी को भी जैसे इसी पल का इन्तजार था वो सूर्य के गौड़ में बैठे सूर्य का पूर्ण सहयोग करने लगती है





मानसी किश करने के साथ साथ अपनी गरम चिकनी योनि को सूर्य के नागपास पे रगड़ते हुए बड़ी हे सिद्दत के साथ सूर्य के होंठो से राश पिटे हुए मदहोश होने लगी

सूर्य मानसी के गले को गर्दन को चूमते हुए कब पूर्ण निर्वस्त्र मानसी को पूरी तरह से बीएड पे लिया देता है

सूर्य कुछ पल मानसी की सुडोल उभर को देखता है जिसके गुलाबी चूचक पूरी तरह से अकड़ने लगे थे जो पहले के अनुपात में हलके लम्बे आवर मोठे थे मानसी की सदी के बाद से बूब्स आवर खुल्हो पे खास असर हुआ था

मानसी सूर्य के सर को थम एक लम्भा सा किश करती है फिर खुद से हे अपना एक नुकीला अकड़ा हुआ निप्पल्स सूर्य के होंटो से लगा देती है

सूर्य मानसी की चाहत समझते हुए निप्पल्स को चुस्त हुआ अपने दूसरे हाथ से मानसी की फुल्ली हुई छूट के डेन को अपने थूक से भीगी हुई ऊँगली से रब करने लगता है

दोहरे वॉर से मानसी जल्दी हे गरम हो कर मचलने लगती है

सूर्य बारे बारे से दोनी बूब्स को चूस कर लाल कर देता है आवर डेरी डेरी मानसी के पेट को चूमते हुए योनिकुंड के आवर भाड़ जाता है





जैसे हे सूर्य ने मानसी के अमृत मुख को अपने होंठो से चुवा मानसी का रोम रोम काम अग्नि से भर उठा

मानसी ......... उम्म्म्मः कुंवर जी आप नहीं जानते आपका ऐसा करना कितना सुकून देता है

आवर सूर्य के सर को थामे डेरी डेरी मानसी अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी छूट सूर्य के नाक आवर होंठो पे रगड़ ने लगती है

ये कुछ समय की दुरी थी या फिर मानसी की कामाग्नि जिसके चलते कुछ हे मिनट्स में मानसी कांपते हुए अपने कमरष सूर्य के चेहरे को भिगोते हुए संत हो गई

सूर्य मानसी के काम राश से भीगा हुआ अपना चेहरा अपनी सांसो को अनियंत्रित करती मानसी के चेहरे के नजदीक करता है

मानसी पहले तो सूर्य के इस तरह भीगे चेहरे को देख चौंक जाती है फिर जैसे हे मानसी की अहसास होता है की सूर्य का चेहरा इस तरह उसके हे योनिरस से भीगा है तो वो बुरी तरह से शर्मा जाती है

मानसी थोड़े संकोच के साथ अपने होंठो को सूर्य के होंठो से लगा कर होंठो पे लगे योनिरस चाटने लगती है

सूर्य अपने दूसरे हाथ से अपने अकड़े हुए लिंग को मानसी की चिकनी योनि से रब करते हुए डेरी से योनि में पुस करता है मानसी सूर्य के चेहरे पे लगा योनिरस पूरी तरह से साफ कर देती है





सूर्य मानसी के दोनों कोमल पैरों को उठा कर डेरी डेरी ले बढ़ ताल से अपनी लिंग को मानसी की गरम चिकनी योनि में अंदर बहार करने लगता है

पल पल मानसी के मुँह से कमुख सिसकारियां किसी मधुर संगीत के जैसे सूर्य को उत्साहित कर रही थी जिसका असर सूर्य की निरंतर बढ़ती गति थी

सूर्य आवर किरण के इस उत्तेजित सम्भोग से मानसी अपर्याशित रूप से न जाने कितनी हे बार तृप्त हुई थी जिसका साख्ष्य थी बीएड की जगह जगह से योनिरस से भीगी हुई चादर थी

सूर्य आवर किरण के इस एक घंटे लम्बी सम्भोग से मानसी को सरीरी आवर आत्मिक सुख की प्राप्ति हुई वही सूर्य को अपने भीतर बड़ी हुई बैचेनी से मुक्ति मिली दोनों हे शारीरिक आवर मानसिक रूप से सन्तुष्ट हो गए थे

मानसी सम्भोग से पूरी तरह से संतुष्ट हो कर सूर्य के सीने पे निर्वस्त्र लेती हुई अपनी आँखे बंद किये हुए अपने गर्भ में सूर्य के मिलान अंश को मह्सुश कर रही थी पैर मानसी की चेहरे पे हलकी चिंता की लकीर भी नजर आ रही थी

सूर्य .......... क्या हुआ मनु तुम अचानक से परेशान क्यों हो गई

मानसी अपनी आँखे खोल कर अपना चेहरा ऊपर उठा कर सूर्य की आँखों में देखने लगती है जैसे सूर्य की आँखों से उसके मन के भीतर जांखने का प्रयाश कर रही हो

सूर्य ........ तुम तो मुझे ऐसे देख रही हो जैसे की आज पहली बार मुझे देखा हो

मानसी ........ आप हमसे कुछ छुपा रहे है न कुंवर जी क्युकी आज आपको पहली बार मैंने परेशान मेह मह्सुश किया है मैं जानती हूँ मैं आपको किरण दीदी जितना नहीं समाज सकती पैर ....

सूर्य ........ है मनु मैं थोड़ा परेशान हूँ किसी बात से पैर मैं खुद नहीं जनता की वो बात क्या है

मानसी ........ अभी भी आप पूरी बात नहीं बता रहे है

सूर्य एक लम्बी सी साँस भरता है आवर मानसी के माथे को चुम लेता है

सूर्य ........ मनु मेरी बात ध्यान से सुनो मुझे नहीं पता की ये मेरा कोई बहम है या सच पैर मुझे किसी बड़े खतरे की असंका है इस लिया तुम अपना ज्यादा से ज्यादा समय स्वीटी के साथ या फिर ध्यान में अपना समय लगाओगी अगर कुछ भी प्रॉब्लम हो तो स्वीटी या फिर माँ से ुशी समय बात करोगी

मानसी ........क्या खतरा मुझे है कुंवर जी

सूर्य ......... क्या हुआ दर लग रहा है

मानसी ......... नहीं मुझे कोई दर नहीं है मैं जानती हूँ आपके रहते मुझे कोई खतरा छू भी नहीं सकता है मैं दीदी के साथ हे रहूंगी आप मेरी चिंता न कीजिये बस अपना ख्याल रखिये

मानसी कुछ आवर भी कहना चाहती थी पैर सूर्य को अपने लिया चिंतित देख कुछ कहा नहीं बल्कि अपनी निघ्त्य पहन कर सूर्य का सर अपनी गौड़ में लिया सहलाने लगती है

जिस से जल्दी हे सूर्य सब भूल कर मानसी की गौड़ में सर रखे चैन से सो जाता है

( मानसी ........ कुंवर जी मुझे यकीं है आप हर मुश्किल का सामना कर सकते है मुझे आप पे पूरा यकीं है मुझे भी यहाँ किसी डस्ट सकती के आभाष बार बार हो रहे है पैर मैं आपको आवर चिंतित नहीं करना चाहती आपको बता कर )

मानसी सूर्य को सुकून से सोया देख डेरी डेरी उसकी भी आँखे भोजील हो जाती है आवर वो भी बैठे बैठे कब गहरी नींद की बडियो में चली जाती उसे भी पता नहीं चलता

कल का सूर्यौदय ड्रैगन लोक में एक नयी सुरुहत लाएगा या कोई संकट ये तो आने वाला वक़्त हे बताएगा ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................

दोस्तों पिछले कुछ समय से बारिश के चलते थोड़ी तबियत उप एंड डाउन हो रही है कमजोरी के चलते बार बार फीवर से परेशान हूँ इस लिया अपडेट टाइम से नहीं दे प् रहा हूँ फीवर के चलते अपडेट लिखने का भी मन नहीं होता है ी हॉप आप सभी लेट अपडेट की वजह से समाज गए होंगे ............ थैंक यू एवरीवन
 
अपडेट 276

जिस से जल्दी हे सूर्य सब भूल कर मानसी की गौड़ में सर रखे चैन से सो जाता है

( मानसी ........ कुंवर जी मुझे यकीं है आप हर मुश्किल का सामना कर सकते है मुझे आप पे पूरा यकीं है मुझे भी यहाँ किसी डस्ट सकती के आभाष बार बार हो रहे है पैर मैं आपको आवर चिंतित नहीं करना चाहती आपको बता कर )

मानसी सूर्य को सुकून से सोया देख डेरी डेरी उसकी भी आँखे भोजील हो जाती है आवर वो भी बैठे बैठे कब गहरी नींद की बडियो में चली जाती उसे भी पता नहीं चलता .............

अब आगे ...........

परीलोक ............ प्रेतराज आवर राजकुमारी जीनत के साथ विजय भी परीलोक आई थी राजकुमारी जीनत के आग्रह पे प्रेतराज ने उन्हें परीलोक आने की अनुमति दी थी

प्रेतराज गुरुदेव आवर रानी पारी से मिल कर जीनत के विवाह के विषय में चर्चा कर वापिस प्रेतलोक लौट चुके थे जबकि जीनत आवर विजय परीलोक महल में रुके हुए थे

प्रेतराज अपनी पुत्री जीनत से भेंट करके जाना चाहते थे किन्तु उस से पहले हे जीनत पारिजात रिद्धि विधि महिमा गायत्री नगर भ्रमण आवर शॉपिंग के लिया जा चुकी थी

गुरुदेव ......... पुत्र सकती अब तुम्हे पृथ्वीलोक लौट जाना चाइये क्युकी वयोम अभी वह अकेला है आवर पुत्री रिद्धि भी कुछ समय पृथ्वीलोक नहीं जाने वाली है

सकती ....... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश मैं अभी पृथ्वीलोक के लिया निकलता हूँ

गुरुदेव ......... पुत्र सकती हम तुम्हे एक कार्य सौंप रहे है सूर्यगढ़ जाने से पूर्व तुम्हे हिमालय की पवित्र भूमि जाना होगा आवर वह ऋषि दूर्वा से भेंट कर उन्हें हमारा सन्देश देना होगा

सकती ....... जी गुरुदेव मुझे आपका आदेश पूर्ण कर पर्शान्ता होगी गुरुदेव

रानी पारी ........ गुरुदेव हम सामने नहीं आप ऋषिवर दूर्वा को क्या सन्देश देना चाहते है

गुरुदेव ....... रानी पारी पुत्री जीनत आवर पुत्र सूर्य का विवाह अवश्य परीलोक में हो रहा है किन्तु पुत्री जीनत आवर सूर्य का विवाह हमारी विधि से नहीं हो सकता है

रानी पारी ...... किन्तु गुरुदेव आपने तो प्रेतराज को आस्वस्थ किया था की वो पुत्री जीनत क्र विवाह को ले कर निश्चिंत रहे

गुरुदेव ......... हमने कुछ अनुचित तो नहीं कहा था रानी पारी पुत्री जीनत का विवाह यही होगा परीलोक में किन्तु किसी अन्य विधि से जो ऋषि दूर्वा के हाथो पूर्ण होगा

रानी पारी ........ जी गुरुदेव जैसा आप उचित समजे

गुरुदेव सकती को एक ताम्ब्रा पत्र देते है जिसपे किसी गुप्त भाषा में सन्देश लिखा हुआ था सकती रानी पारी आवर गुरुदेव को परनाम कर परीलोक से निकल जाता है

गुरुदेव परिमहल से निकल मंदिर चले जाते है आवर मंदिर में ध्यान लगा कर बेथ जाते है

ीदार पारिजात जीनत रिद्धि विधि गायत्री महिमा जी सभी संध्या होने से पहले ढेरो शॉपिंग कर अपनी सखी सेविकाओं के साथ परिमहल लौट आती है सभी के चेहरे ख़ुशी से दमक रहे थे

किसी ने सच हे कहा है की लड़किया किसी भी लोक की हो किसी भी प्रजाति की साज़ सजा श्रीनगर के पीछे पागल होती है

ऐसा हे कुछ यहाँ का मंजर था रानी पारी ने जैसे हे सभी को खुसी से दमकते देखा उनके चेहरे पे भी ख़ुशी से मुस्कान उभर आई

रानी पारी ......... लगता है हमारी राजकुमारियों को नगर भ्रमण करके बहुत अच्छा लग रहा है

विधि ........ रानी माँ आपका परीलोक बहुत खूबसूरत है हमने आज ढेरो शॉपिंग भी देखिये हम सब ने कितनी शॉपिंग की है

विधि बहुत हे ख़ुशी से अपनी पसंद की ड्रेस जेवेलरी आवर बहुत सी चीज़े रानी पारी को बड़े हे चाव से दिखती है

रानी पारी के लिया वैसे तो ये कुछ ज्यादा खास नहीं था पैर विधि को खुश देख वो भी बहुत खुश हुई

रानी पारी ............ तुमने पसंद किया है न तो फिर सब खूबसूरत हे होगा न विधि बीटा

विधि की शॉपिंग को ले कर जो ख़ुशी थी जो मासूमियत शॉपिंग करते हुए उसके चेहरे पे थी उसे देख सभी के चेहरे ख़ुशी से खिले हुए थे

गायत्री ......... अरे जवाला एक्सप्रेस आराम से पहले अच्छे से साँस तो ले ले रानी माँ यही है आराम से अपनी शॉपिंग दिखा देना उन्हें पागल कही की

महिमा जी .......... महारानी जी अब मुझे भी आज्ञा दीजिये पिता श्री इन्तजार कर रहे होंगे

रानी पारी ....... महिमा तुम पुत्री रिद्धि की सखी भी आवर पुत्र सूर्य की होने वाली भाबी भी हमें अच्छा लगेगा अगर तुम भी हमें रानी माँ कह कर सम्बोधित करोगी तो

महिमा जी थोड़ा सकुचाते हुए है में सर हिला देती है

रानी पारी ....... ठीक है पुत्री तुम जाओ वैद्यराज तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे आवर तुम सभी भी नगर भ्रमण से तक गई होगी तो तुम सब भी सनान आदि कर अपनी थकन काम कर लो

जीनत ........ रानी माँ क्या पिता श्री वापिस जा चुके है प्रेतलोक

रानी पारी ......... है पुत्री प्रेतराज गुरुदेव से तुम्हारे विवाह के विषय में चर्चा कर प्रेतलोक लौट चुके है उन्हें भी तो विवाह की कुछ तयारिया करनी है प्रेतलोक में

पारिजात ......... रानी माँ किन्तु जीनत का विवाह तो हमारे साथ परीलोक में होना है न फिर प्रेतलोक में किस लिया तयारिया की जा रही है

रानी पारी ........ पुत्री परिधि तुम्हे बड़ी जल्दी है विवाह की हेहेहे

पारिजात ........ माँ हमारा वो तात्पर्य नहीं था हमें केवल जानने की उत्सुकता थी आवर हमें कोई जल्दी नहीं है विवाह करने की

रानी पारी ....... अच्छा ऐसा है तो हम गुरुदेव से इस विषय पे बात कर आपका पुर पुत्र सूर्य का विवाह कुछ समय तक स्थगित करवा देते है कुछ वर्षों के लिया

पारिजात रानी पारी के बात सुन जल्दी से बिना सोचे उन्हें रोक कर बोलने लगती है

पारिजात ........ नहीं नहीं माँ हम अभी विवाह करेंगे हमने विवाह स्थगित करने को तो नहीं कहा

पारिजात की बात सुन महल का ये बे थक कक्ष एक साथ कई ठहाको से गूंज उठा सभी पेट पकड़ हसने लगे सिवाय पारिजात के

रानी पारी अपनी हाशि पे कण्ट्रोल कर पारिजात को अपने गले से लगा लेती है

रिद्धि ........ रानी माँ हम भी आप से सहमत है पारिजात अभी भी बची है विवाह के लिया इन्हें कुछ आवर समय देना चाइये विवाह के लिया परिपक्व होने के लिया हहहहए

रानी पारी ......... पुत्री रिद्धि तुम उचित कह रही हो अब तो हमें भी लगता है की हमें इस्पे विचार करना चाइये

पारिजात ......... जाइये हम आप में से किसी से बात नहीं करेंगे हूँ

पारिजात अपना मुँह फुला कर दूसरी आवर गुमा लेती है

रिद्धि ......... रानी माँ क्या ये हमारी वही गुस्सैल पारिजात है जो कभी मर्दजात नाम से हे नफरत करती थी आवर आज देखो अपने हे विवाह के लिया कितनी ादिर ( जल्दी ) है

रानी पारी ......... प्रेम ऐसा हे होता है पुत्री रिद्धि एक बार जो सच्चे प्रेम को प्राप्त कर लेता है उसे अपने प्रेमी के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता है पुत्री परिधि भी उसे प्रेम रोग से घर्षित है आवर तुम सभी भी ुशी प्रेम सागर के डराए हो जिसने सूर्य नमक प्रेम सागर में विलों होना है

इस बार रिद्धि आवर परिधि के साथ साथ जीनत विधि गायत्री को भी रानी पारी ने लपेट लिया था

विजय ........ महारानी जी क्या सच में प्रेम में इतनी सकती होती है

रानी पारी ........ पुत्री विजय प्रेम कोई वास्तु या चीज़ नहीं है जिसकी सकती का आकलन कर सके प्रेम एक पवित्र आभाष है जो ह्रदय की गजरे उत्पन्न होता है जिसको केवल हृद्या से मह्सुश किया जा सकता है जब तुम्हे प्रेम होगा न पुत्री तभी प्रेम की वास्तविक सकती का आभाष तुम कर पाओगी

रानी पारी सभी से काफी समय तक बाते करती रही वो भी इन सभी के बिच इन सब की सखी बन बैठी जैसे वो परीलोक की रानी न हो कर उन सभी की बचपन की सखी हो कितने हे आरसे बाद रानी पारी जी भर के हाशि थी आज उन्हें अपने प्रेम की कमी भी मह्सुश हुई थी किन्तु जल्दी हे अपनी भावनाओ को सयमित कर सभी के साथ चर्चा करती रही

ऐसे हे सभी ने हंसी मजाक के साथ भोजन आदि किया आवर सोने के लिया अपने अपने रूम में लौट गए

उदार मंदिर में गुरुदेव जब से परिमहल से प्रेतराज आवर रानी पारी से मिल कर लौटे थे तभी से वो ध्यान में लीं थे

उनके मस्तिष्क के सेंटर के स्थान ( थर्ड ऑय) से निकल रही वाइट ऊर्जा उनके सरीर के चारो तरफ किसी हवा के बवंडर के जैसे गम रही थी ये बेहद हे खूबसूरत दृश्य था

पैर जल्द हे ये पूरा खूबसूरत नजारा बदल गया आवर अचानक से गुरुदेव अपने ध्यान मुद्रा में हे बैठे बैठे वह से गायब हो जाये उनका नमो नीसाण तक मौजूद नहीं था

ड्रैगन लोक .........

ीदार ड्रैगन लोक में खूबसूरत पहाड़ो के बिछे से हलकी सुनहरी किरणे भिखेरते हुए सूर्य अपने उदय होने का संकेत दे रहा था

सूर्य अपने नियत समय से उठ कर सनान आदि कर अपने कक्ष से निकला आवर उद्यान में आ पहुंचा

सुबह की झीनी झीनी ठंडक में खिले हुए तजा पुष्पों की महक से सूर्य के सरीर में अभी तक का थोड़ा बहुत ालाह जो सूर्य की आँखों में बचा था वो भी कुछ हे पालो में गायब हो गया आवर सूर्य उस खुसबूदार ठंडी हवा में खुद को एक पविरफुल्ल एनर्जी सा मह्सुश कर प् रहा था

सूर्य बिना समय की व्यर्थ ख़राब करे अपना ध्यान आसान लगा लेता है कुछ देर बाद किरण भी वह आ जाती है

दोनों करीब ी हर ध्यान योग करते है

सूर्य किरण को ब्लैक ड्रैगन सिटी में मिलने का बोल कर किरण से विदा ली किरण सूर्य के साथ जाना चाहती थी पैर सूर्य के समजने से वो सूर्य की बात समाज जाती है

ीदार सूर्य जैसे हे गोल्डन सिटी से बहार निकला उसके चेहरे पे जहा पहले सन्ति के भाव थे वो अचानक से बदल कर सीरियस हो गए

सूर्य ......... अभी भी निर्भयासुर से कोई सम्पर्क नहीं हो प् रहा है न हे उसका कही होने का आभाष हो रहा है मुझे जल्द से जल्द उसका पता कर उस तक पहुंचना होगा कही जिसका दर था वही तो नहीं हो रहा है

सूर्य तेजी से ब्लैक ड्रैगन सिटी की आवर भाड़ रहा रहा

करीब आधे घंटे बाद सूर्य को ब्लैक ड्रैगन सिटी नजर आने लगती है

सूर्य ....... सबसे पहले मुझे नियों जी से भेंट करनी चाइये सायद उन्हें कुछ पता हो इस बारे में पैर मैंने तो निर्भयासुर को बिना नियों जी को ाभश हुए उनपे नजर रखने को कहा था

ीदार जब मानसी की आँखे खुली तो खुद को रूम में अकेला पाया

मानसी ........ लगता है आज फिर मैं ध्यान के लिया समय से उठ नहीं पायी मुझे जल्दी हे त्यार हो कर ध्यान लगाना होगा वर्ण स्वीटी दीदी की दन्त सुन्नी पड़ेगी

उन्होंने कल हे कहा था की ध्यान करने के लिया सभी को समय से उठना होगा

मानसी जल्दी से बहा कर त्यार होती है आवर रूम से बहार निकलती है तो किसी से टकरा जाती है

किरण ...... देख कर मनु

मानसी ....... सॉरी दीदी वो जल्दी आँख नहीं खुली पता नहीं कैसे इतनी नींद आ गई थी मुझे

किरण ........ ठीक है मनु कोई बात नहीं मुझे पता है कल रात तुम काफी लेट सोई थी मुझे कुंवर जज ने बता दिया था की मानसी को आराम करने दूँ अब जब तुम उठ हे गयी हो तो चलो थोड़ा टाइम ध्यान करो

किरण मानसी को लिया उड्डयन में आ जाती है

पैर अचानक हे मानसी के चेहरे के भाव बदलने लगते है आवर उसका सरीर कपङे लगता है आवर उसकी ऊर्जा उसके कण्ट्रोल से बहार होने लगती है

मानसी की अच्चानक से बिगड़ी हुई हालत देख किरण भी घबरा जाती है पैर जल्दी हे किरण खुद को संभालती है आवर अपनी गोल्डन ऊर्जा को मानसी की तरफ बढ़ा देती है

किरण के हाथो से निकलती सुनहरी किरण मानसी के चारो तरफ हमने लगती है जल्दी हे मानसी पूरी तरह से किरण की ऊर्जा से पूरी तरह से देख गई

किरण. . ....... मानसी क्या हो रहा है तुम्हे तुम्हारी ऊर्जा अनियंत्रित क्यों हो रही है

मानसी ........ अह्हह्ह्ह्ह पता नहीं दीदी मुझे क्या हो रहा है मेरी ऊर्जा मेरे काबू से बहार हो रही है

महल के भीतर कक्ष में बैठी शालिनी जी भी मानसी की ऊर्जा को सेन्स कर फ़ौरन उद्यान की आवर जाती है

जब शालिनी जी ने सामने का नजारा देखा तो उन्हें दमकते देर नहीं लगी की मानसी को कुछ हुआ है

शालिनी जी अभी आगे भाड़ मानसी का हाथ पकड़ने हे वाली थी की किरण ने उन्हें जल्दी से रोक दिया

किरण ........ माँ ये आप क्या कर रही है मानसी को अभी चुना खतरनाक है उसकी सकती या उसके काबू में नहीं है वो आपको भी नुकसान पहुंचा सकती है

शालिनी जी ........ नहीं मानसी ऐसा नहीं कर सकती है वो मुझे नुकसान नहीं पहुंचा सकती

किरण ....... माँ मनु आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती है पैर उसकी सकती या जो इस वक़्त बेकाबू है वो आपको नुकसान पहुंचा सकती है

शालिनी जी .......... पैर हमें कुछ तो करना करना होगा स्वीटी

किरण. ......... जी माँ मैं कुछ करती हूँ

किरण कुछ मंत्र बुदबुदाने लगी तभी गोल्डन ड्रैगन सिटी के जंगल की आवर से किसी की उनकी तरफ आने की आहात हुई

शालिनी जी की नजर उस आवर गयी तो सामने से उन्हें नहुष आता हुआ दिखाई दिया

नहुष ............ मुझे माफ कीजियेगा मैं आपको कोई हानि पहुंचने नहीं आया हूँ

नहुष की आवाज सुन किरण अपनी आँखे खोलती है आवर नहुष को देखती है

नहुष ........ अभी समय बर्बाद करना उचित नहीं प्रिंसेस आप प्रिंसेस मानसी को ले कर मेरे पीछे आइये

किरण ......... क्या तुम जानते हो ये मानसी के साथ क्या आवर क्यों हो रहा है

नहुष ........ नहीं मैं नहीं जनता पैर कोई है जो जानते है आप जल्दी मेरे साथ चलिए

किरण ........ माँ मैं इनके साथ जा रही हूँ आप जूलिया से कहना की वो g.dragon सिटी को ब्लैक ड्रैगन सिटी ले कर चले वही कुंवर जी भी है

शालिनी जी ..... मैं भी चलती हूँ स्वीटी तुम्हारे साथ

नहुष .......... हमारे पास आदिल समय नहीं है प्रिंसेस मानसी को हमें गोल्डन पोंड पे ले कर जाना होगा

किरण मानसी को अपने वायु तत्वा के प्रयोग से बिना टच किये अपने साथ ले कर नहुष के पीछे उड़ने लगती है नहुष बड़ी हे तेजी से दौड़ते हुए गोल्डन पोंड पे पहुँचता है जहा पहले से कोई उनकी प्रतीक्षा कर रहा था

किरण जैसे हे मानसी को लिए वह पहुंची दूसरे साक्ष को देख कर छिनक जाती है

जबकि दूसरा जो साक्ष वह मौजूद था वो किरण को ऐसे चौंकते देख मुस्कुरा देता है

किरण .......... गुरुदेव आप यहाँ पैर कैसे

जी है वो दूसरा साक्ष कोई आवर नहीं सूर्य आवर किरण के गुरुदेव आवर परीलोक के राजगुरु थे

गुरुदेव ........ पुत्री किरण अभी समय नहीं है इन सब बातो के लिया अभी पुत्री मानसी की पीड़ा का उपचार आरम्भ करना आवशयक है

किरण ........ जी गुरुदेव

गुरुदेव ......... पुत्री मानसी चिंतित न हो पुत्री सिगरा हे सब ठीक हो जायेगा पुत्री किरण अपने ऊर्जा कवच को वापिस ले लो

किरण गुरुदेव के कहे अनुसार अपनी ऊर्जा से निर्मित ऊर्जा कवच को वापिस ले लेती है

गुरुदेव कुछ मंत्र बुदबुदाते है आवर उनके हाथ में किसी तरह का पेस्ट जैसा गधा तरल आ जाता है जिसने वो मानसी के मस्तिष्क पे लगा देते है

गुरुदेव ........ पुत्री मानसी जाओ आवर इस तालाब के जल में ध्यान लगाओ

मानसी के गोल्डन पोंड में उतरने के बाद मानसी जल में बेथ कर ध्यान लगाने की कोशिश करती है ऐसा करते हे हे पोंड में हलचल होने लगती है आवर मानसी के ध्यान मुद्रा शरीर पे हलकी हलकी गोल्डन परत से बनने लगती है

गुरुदेव एक बॉक्स खोलते है आवर अलग अलग रंगो की चमकदार पति निकल कर उस पोंड में दाल देते है ऊपर से अपनी ऊर्जा से पुरे गोल्डन पोंड पे एक सुरक्षा कवच का निर्माण कर देते है

गुरुदेव ........ पुत्री किरण अब तुम्हे महल लौट जाना चाइये पुत्री मानसी की चिंता न करो अभी मुझे एकांत चाइये

किरण जाना तो नहीं चाहती थी पैर गुरुदेव के आदेश की अवहेलना भी नहीं कर सकती इस लिया गुरुदेव को परनाम कर किरण बे मन से वह से चली जाती है

किरण के जाने के बाद गुरुदेव नहुष को देखते है

गुरुदेव .......... अब तुम्हारी बरी है नहुष पुत्री मानसी की ऊर्जा निरंतर काम हो रही है

नहुष ....... जी देवसूफ़ी

नहुष बड़ी हे अजीब आवाज में जंगल की पुर दहाड़ता है कुछ हे देर में वह बाकि मरुत भी आ जाते है

नहुष ........ समय आ चूका है अब हमारा एक होना का

सभी मरुत नहुष की बात सुन गुरुदेव द्वारा निर्मित सुरक्षा कवच में प्रवेश करने लगते है जैसे हे वो सब सुरक्षा कवच के सम्पर्क में आते है वैसे हे उनका शरीर गायब हो जाता है आवर कवच में केवल उनकी सुनहरी परछाई दिखाई देती है जैसे वो सुनहरी परछाई उन मरुतो की आत्मा हो

केवल नहुष हे ऐसा था जो अपने शरीर के साथ कवच में अंदर जा पाया था

सभी एक दूसरे से जुड़ कर मानसी को घेर लेते है आवर उनसे निकली ऊर्जा मानसी के शरीर पे बानी उस सुनहरी परत से जा कर मिलने लगती है

वही सूर्य जैसे जैसे ब्लैक ड्रैगन सिटी के नजदीक पहुंचने रहा था उसे ब्लैक ड्रैगन सिटी की उतर दिशा की पहाड़ियों से नकारात्मक ऊर्जा के संकेत मिलने सुरु हो गए जो डेरी डेरी बढ़ती जा रही थी

सूर्य ......... अचानक से ये नकारात्मक ऊर्जा क संकेत क्यों मिल रहे है वो भी इतनी आदिक मात्रा में कही ......

सूर्य .......... नहीं ऐसा संभव नहीं है सूर्य फ़ौरन अपनी दिशा बदल उस नकारात्मक ऊर्जा की दिशा में भाड़ जाता है करीब 10 मिनट्स बाद सूर्य नाड़ी को पार कर एक पहाड़ की छोटी पे उतरता है

सूर्य की आँखे अपने सामने बहुत से जुड़े हुए पहाड़ो के बिच काली मीठी के बिच बने बड़े से गधे पे पड़ती है वह के आसपास अनगिनत जीवो के कंकाल पड़े हुए थे कुछ के शरीर पे तो अभी भी सदा गाला मांश लगा हुआ था जिस से वह का वातावरण भयानक बदबू से भरा हुआ था जहा साँस लेना भी मुश्किल था

सूर्य ......... ये कैसा स्थान है देख कर हे उलटी आ रही है आवर यहाँ की हवा में जैसे मौत का सनता पसरा हो

सूर्य अपनी तलवार लिया पहाड़ से निचे उतरने लगता है आवर उस खड़े की आवर भाड़ जाता है

जइसे जैसे सूर्य उस आवर भाड़ रहा था सूर्य का सर चक्र रहा था साथ हे वह की हवा में नकारात्मक ऊर्जा की वृदि होने लगी जैसे की सूर्य का यहाँ आना उस ऊर्जा को पसंद नहीं आया

सूर्य उन जीवो के नरकंकालों को पर कर उस खड़े के पास पहुंचा तभी अचानक से सभी कंकालों में हलचल होने लगी आवर सभी कंकाल जमीं से उठ खड़े होते है आवर सूर्य को चारो आवर से घेर लेते है

सूर्य ....... ये क्या हो रहा है ये सभी तो कभी के मर चुके थे फिर अचानक से ये सब जीवित कैसे हो गए

सूर्य अपनी तलवार को मजबूती से थामे अपनी आवर उन अलग अलग जीवो के कंकाल को आता हुआ देख प् रहा था

सूर्य ने जब सभी की आँखों में देखा तो आवर चौंक जाता है क्युकी उनकी आँखों की जगह उसे बस 2 काली आग की चिंगारी दिखाई दे रही थी

सूर्य ....... हो न हो ये सब उस नकारात्मक ऊर्जा के वश में है वह नहीं चाहती की मैं उस तक पहुँचू इस लिया मुझे रोकने के लिया इनका उपयोग कर रही है

सूर्य अपनी सोर्ड को बिजली की तेजी से घूमते हुए अपने सामने आ रहे कंकाल ड्रैगन डायनासोर को सुखी टहनियों के जैसे चीरते हुए आगे बढ़ता है

इस बात से अनजान की जिन कंकालों को सूर्य ने अभी अभी दावस्थ किया वो फिर से एक दूसरे जीवो की हडियो से अपना आकर बड़ा कर फिर से हमला करने को त्यार हो रहे है पर जल्द हे सूर्य अपने पीछे हो रही हलचल से सावधान हो कर पीछे पलटा तो सामने बड़े बड़े आकर के विचित्र जीवो के 2 कंकाल खड़े थे

सूर्य ........ ये क्या जिव है आवर वो सब हड़िया कहा गई

सूर्य अपने अभी अभी ख़तम किये कंकाल ड्रैगन आवर डायनासोर की हडियो पे नजर डालता है जो आपस में एक दूसरे से जुड़ कर उनके हे जैसे जीवो में बदल रही थी

सूर्य ........... लगता है ऐसे इनका अंत नहीं होगा मुझे कुछ ऐसा करना होगा की इनका अस्तित्व हे ख़तम हो जाये इनके लिया अग्नि का प्रयोग करना बेहतर होगा

सूर्य अपने भीतर छुपी ड्रैगन ऊर्जा को जागृत करता है सूर्य के सरीर में कुछ बदलाव होते है आवर उसकी पीठ से ड्रैगन के पंख निकल आते है जिनके सहारे सूर्य जमीं से उचाई पे पहुंच जाता है

सूर्य अपने अग्नि तत्वा की ऊर्जा आवर ड्रैगन की ऊर्जा को मिक्स कर उन कंकाल जीवो के अग्नि वर्षा करना सुरु कर देता है कुछ देर तो अग्नि का असर नहीं होता पैर जल्दी हे वह का तपन बसने लगता है जिस से पहाड़ी का जो हिस्सा अग्नि के सम्पर्क में आ रहा था वो भी पिंगल ने लगा

जल्दी हे सभी कंकाल जलने लगते जिनसे हल्का कला लिक्विड निकलने लगता है पैर वो अभी भी कोशिश कर रहे थे सूर्य पे हमला करने की जल्दी हे लिक्विड पूरी तरह से उनसे अलग हो जाता है आवर तेजी से उस गद्दे के अंदर जाने लगता है आवर ड्रैगन के वो कंकाल बिखर ने लगते है

सूर्य ....... अभी तो इनसे छुटकारा मिला पैर मुझे देखना होगा की कही फिर से इन में कोई हलचल होती है या नहीं

कुछ देर सूर्य वही आसमान से वह की इस्थिति पे नजर रखता है करीब 15 मिनट्स बाद भी कब सब कुछ सामान्य रहा तो सूर्य आकाश से हे सिदा उस गहरे गद्दे में उतर जाता है जो की वास्तवम में अँधेरी गुफा थी

सूर्य ........ यहाँ तो काफी अँधेरा है मुझे सावधानी से आगे बढ़ना होगा पता नहीं आगे क्या है किस तरह का खतरा है आगे

सूर्य अपने हाथ से अग्नि पुंज का निर्माण कर गुफा में हवा में अग्नि पुंज को नियंत्रित किये बहुत हे सावधानी से आगे भढने लगता है

वही g.dragon सिटी जूलिया के निर्देश अनुसार ब्लैक ड्रैगन सिटी से कुछ दूर सिटी से बहार हे रुक जाती है

बहुत से लोगो में दर का माहौल बन गया g.dragon सिटी को ब्लैक ड्रैगन सिटी की आवर आता देख क्युकी बहुत से लोग इस बात से अनजान थे की ये गोल्डन ड्रैगन सिटी है जो ुध भी सकती है

सभी को लगा की किसी ने उनपे आकर मन कर दिया है

जब ये बात नियों जी जो ब्लैक ड्रैगन में मौजूद थे उन्हें पता चली तो वो जल्दी से ब्लैक ड्रैगन सिटी के सही महल से बहार निकलते है आवर गोल्डन ड्रैगन सिटी की आवर भाड़ जाते है

जल्दी हे नियों जी गोल्डन ड्रैगन सिटी पैलेस में थे

नियों जी ....... किंग सोलोमन आप सभी लोग यहाँ वो भी पूरी ड्रैगन सिटी के साथ

किंग ........ देवसूफ़ी हमें प्रिंस सूर्य का यही आदेश मिला था की हम ब्लैक ड्रैगन सिटी पहुंचने वो हमसे यही भेंट करेंगे

नियों जी ........ क्या प्रिंस सूर्य पहले से ड्रैगन सिटी में मौजूद है

किंग ......... उन्होंने हमसे यही मिलने के लिया कहा था क्या आपकी उनसे भेंट नहीं हुई

नियों जी ....... हमारी भेंट उनसे क्या वो जानते थे की हम यहाँ है

किंग सोलोमन कल रात डेवलिन जी आवर उनके साथ जो बाते सूर्य की हुई वो सब नियों जी को बता देते है

( नियों जी ........ इसका मतलब उन्हें पता चल चूका होगा की जो कुछ भी हो रहा है वो ब्लैक ड्रैगन सिटी से जुड़ा है पैर वो अभी तक हमसे भेंट करने क्यों नहीं आये )

नियों जी ......... तीनो प्रिंसेस आवर देवी शालिनी जी कहा है हमें उनसे अभी भेंट करनी है

डेवलिन जी ...... वो सभी गोल्डन पोंड गए हुए है जहा हम नहीं जा सकते है

ये बात सुन कर नियों जी भी चौंक जाते है

नियों जी ........ वो सभी वह क्या कर रहे है आवर आप लोग क्यों नहीं जा सकते वह

डेवलिन जी सुबह से अभी तक जो भी घटना घाटी वो सब नियों जी को बता देते है जैसे जैसे उन्होंने डेवलिन जी की बात सुनी उनके माथे पे चिंता की लकीर उभरने लगी पैर जब उन्हें गुरुदेव का यहाँ होने के विषय में पता चला तब उन्हें थोड़ी तहत मिली आवर एक उम्मीद की किरण नजर आई

नियों जी.......... आपने अच्छा किया जो उनके आदेश की अवहेलना नहीं की हम स्वयं वह जा रहे है उनसे भेंट करने

नियों जी बड़ी तेजी से से गोल्डन पोंड की आवर भाड़ जाते है

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ........................
 
अपडेट 277

डेवलिन जी ...... वो सभी गोल्डन पोंड गए हुए है जहा हम नहीं जा सकते है

ये बात सुन कर नियों जी भी चौंक जाते है

नियों जी ........ वो सभी वह क्या कर रहे है आवर आप लोग क्यों नहीं जा सकते वह

डेवलिन जी सुबह से अभी तक जो भी घटना घाटी वो सब नियों जी को बता देते है जैसे जैसे उन्होंने डेवलिन जी की बात सुनी उनके माथे पे चिंता की लकीर उभरने लगी पैर जब उन्हें गुरुदेव का यहाँ होने के विषय में पता चला तब उन्हें थोड़ी तहत मिली आवर एक उम्मीद की किरण नजर आई

नियों जी.......... आपने अच्छा किया जो उनके आदेश की अवहेलना नहीं की हम स्वयं वह जा रहे है उनसे भेंट करने

नियों जी बड़ी तेजी से से गोल्डन पोंड की आवर भाड़ जाते है .............

अब आगे ............

काली घनघोर अँधेरी गुफा में सूर्य सावधानी से एक हाथ में सोर्ड आवर दूसरे से अग्नि पुंज को कण्ट्रोल करते हुए

सूर्य .......... ये कैसी जगह है जैसे जैसे आगे भाड़ रहा हूँ उमस आवर शीलं के साथ साथ बची खुची हवा काम हो रही थी वही गुफा में घुटन भाड़ रही थी

मजबूरन सूर्य को अपना वायु तत्वा का प्रयोग करना पड़ता है

सूर्य ....... मैं कितने समय से इस अँधेरे में आगे भाड़ रहा हु पैर अभी तक इस बढ़ती घुटन आवर शीलं के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है यहाँ

कुछ आवर आगे चलने पे सूर्य को हलके हलके आवाजे सुनाई देती है सूर्य को एक उम्मीद नजर आती है सूर्य ुशी तरफ तेजी से भढने लगता कुछ पल बाद बहुत हलकी रौशनी दिखाई देने लगती है जैसे की ये गुफा का आखरी चोर हो

जैसे हे सूर्य उस अँधेरी गुफा से बहार निकला सूर्य की आँखे विषमय से खुली की खुली रह गई

सूर्य की आँखों के सामने का नजारा हे कुछ ऐसा था दरशल सूर्य जहा पहुंचा था वो स्थान था एक बड़ा सा ज्वालामुखी पैर सूर्य के चौंकने का कारन ये नहीं था की वो ज्वालामुखी के अंदर है

बल्कि चौंकने का कारन था वह मौजूद अलग अलग जानवरो का झुंड था क्युकी उनके से बहुत से जानवर ऐसे थे जो पानी में रहने वाले थे कुछ जंगल में रहने वाले उनका उस जवाला मुखी में होने का अनदेखा भी लगाना मुश्किल था

पर जिस तरह सूर्य उन्हें देख कर चौंका था वैसे हे उन सभी की नजर सूर्य के वह पहुंचते हे उस पे हे तहर गई थी सभी की नजरो में सूर्य को अपने लिया मौत हे नजर आ रही थी जैसे उनका बस चले तो वो किसी भी पल सूर्य के सरीर को चिर फाड् कर अपना भोजन बना लेंगे

सूर्य .......... लगता है ये सभी जानवर उस काली सकती के वाश में है जिसने उन ड्रैगन कंकालों से मुझपे बहार हमला कराया था पैर ये सभी तो जीवित है क्या उन्हें मरना ठीक रहेगा पैर इनसे लाडे बिना मैं उस काली सकती तक पहुंच नहीं सकता ये सभी मेरे रस्ते को रोके हुए है

सूर्य ......... वाइट ड्रैगन वक़्त आ गया है मैदान में आने का कुछ देर बाद वाइट ड्रैगन सूर्य के सरीर से निकलता है आवर सभी जानवरो को देख भयानक दहाड़ मरता है

सूर्य ........ चलो फिर खेल सुरु करे तुम इन ऊपर ुध रहे ड्रैगन का सफाया करो निचे का मैं देखता हूँ

सूर्य की बात मान वाइट ड्रैगन ऊपर ुध रहे ड्रैगन को ऐसे देखता है जैसे वो सभी उसका भोजन है आवर दहाड़ मरते हुए उनपे टूट पड़ता है

सूर्य भी अपनी तेज गति का प्रयोग करते हुए अपनी सोर्ड को अग्नि सोर्ड में बदल कर उन जीवो पे टूट पड़ा जो ुध नहीं सकते एक हाथ में सोर्ड दूसरे हाथ में से निकलती भयानक बिजली जीवो के लिया सूर्य उनका काल बना हुआ था

वही जब नियों जी गोल्डन पोंड के पास पहुंचे तो वह जूलिया किरण शालिनी जी गुरुदेव से कुछ दुरी बनाये हुए मानसी को देख रही थी

गुरुदेव जो ध्यान में बैठे थे उनकी भी आँखे खुल जाती है

जब किरण को आभाष हुआ की गुरुदेव ध्यान से बहार आ गए है तो वो उनके सामने आ कड़ी होती है

किरण ......... परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......... साधा सौभाग्यवती भाव पुत्री

किरण .......... गुरुदेव मानसी को क्या हुआ है आवर कुंवर जी कहा है

किरण काफी चिंतित थी क्युकी वो सूर्य आवर मानसी दोनों को ले कर हे चिंतित थी

गुरुदेव ......... संत हो जाओ पुत्री हम जानते है तुम किस लिया चिंतित हो किन्तु किसी भी सनाढ्य का समाधान सन्ति से हे निकला जा सकता है न की असंत आवर चिंता गरिष्ट मन से

शालिनी जी ......... गुरुदेव ये सब क्या हो रहा है हम कुछ भी समाज नहीं प् रहे है अब आप हे हमारी चिंता दूर कर सकते है सूर्य का भी पता नहीं चल रहा है

गुरुदेव . ......... निर्भयासुर को किसी डस्ट नकारात्मक सकती ने कैद कर लिया है

गुरुदेव की बात सुन कर सभी के चेहरे की हवा क्या उड़ने लगती है क्युकी यहाँ मौजूद ज्यादातर लोग जानते थे की निर्भयासुर किस बाला का नाम है

किरण .......... ये कैसे संभव है गुरुदेव निर्भयासुर को भला कैसे कोई कैद कर सकता है

गुरुदेव ......... क्युकी निर्भयासुर असुर अंश है पुत्री आवर उसकी उत्पत्ति पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी के पूर्ण प्रेम मिलान से हुआ था इसी लिया निर्भयासुर की आसुरी सकतिया जिनमे असुर अंश मौजूद है जिस से नकारात्मक सकतिया निर्भयासुर की आवर आकर्षित होती है आवर निर्भयासुर उनकी आवर

किरण. .......... किन्तु फिर भी गुरुदेव निर्भयासुर एक शूरवीर योद्धा होने के साथ महावी विधियों में भी निपुण है क्या उसे कैद करना इतना आसान है जबकि वो कुंवर जी का अंश भी तो है

गुरुदेव ......... है ये सत्य है पुत्री किरण की निर्भयासुर पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी के अंश से उत्पन्न हुआ है आवर यही कारन है की उसका कैद हो जाने पे सबसे आदिक असर पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी पे हुआ है

शालिनी जी ......... गुरुदेव क्या सूर्य भी इसी इस्थिति में है जिसमे मानसी है

देवसूफ़ी जी . ........ गुरुदेव ड्रैगन लोक में ऐसे नकारात्मक सकती भी है हमें तो इस विषय में कुछ भी घात नहीं

गुरुदेव .......... पुत्र सूर्य सकुशल आवर सुरक्षित है उसपे पुत्री मानसी जितना असर नहीं हुआ है क्युकी वो नकारात्मक ऊर्जा है उसे आसुरी सकती से ऊर्जा प्राप्त होती है किन्तु सूर्य पवित्र सकती ऊर्जा का धारक है इस लिया रही बात पुत्री मानसी को क्या हुआ है तो इसके पीछे वही नकारात्मक ऊर्जा है जो निर्भयासुर के माध्यम से पुत्री मानसी की सकतिया चीन कर स्वयं में अवशोषित कर रही है किन्तु अब वो ऐसा करने में सक्षम नहीं है जब ताज मानसी इस सुरक्षा कवच में ध्यान लीं है उसकी ऊर्जा नियंत्रण में रहेगी

किरण. .......... पैर ये इतनी सक्तिसाली भयानक नकारात्मक ऊर्जा है किसकी गुरुदेव जिसने निर्भयासुर को बण्डल बना लिया

गुरुदेव .......... ये नकारात्मक काली सकती पाप आवर बुराई का डिप्टी दुराचारी बुराई के प्रतीक महामहिम की है पुत्री किरण

जो भारमंद में विद्यमान बुरी सक्तियो का स्वामी है

देवसूफ़ी जी ........ किन्तु गुरुदेव वो इस लोक में क्यों है यहाँ तो सभी सामान्य रूप में रहते है प्रेम पूर्वक

गुरुदेव ......... महामहिम को सच्चाई आवर अच्छे की सक्तियो से इस कदर दुश्मनी है जिसका न कोई आरम्भ है आवर न कोई अंत आवर रही बात उसके यहाँ मौजूद होने की तो वो इस समय भारमंद के किस भाग में है कोई नहीं जनता यहाँ वो स्वयं नहीं है अपितु उसकी नकारात्मक ऊर्जा है जो अब जागृत हो चुकी है

पिछले कुछ समय में जो कुछ भी ड्रैगन लोक में हो रहा उसके पीछे यही नकारात्मक ऊर्जा है ड्रैगन बूटी के माध्यम से ड्रैगन के सरीर में जाती है आवर फिर ड्रैगन के मस्तिष्क को नकारात्मक सकती के वाश में कर हिंसक विध्वंशकारी बना देती है

नियों जी गुरुदेव के समक्ष अपने हाथ जोड़ कर उनसे आग्रह करते है

नियों जी ...... गुरुदेव इस विनाश को रोकने में हमारी सहायता कीजिये अन्यथा ड्रैगन लोक नस्ट हो जायेगा

गुरुदेव ........ किसी को चिंता करने की आव्सय्कता नहीं है पुत्र सूर्य अपने कर्त्तव्य को पूर्ण करने निकल चूका है वो किसी भी समय पुत्र निर्भयासुर को मुक्त करा कर उस नकारात्मक ऊर्जा को नस्ट कर देगा

उदार सूर्य आवर वाइट ड्रैगन सभी जीवो को अपनी आग बिजली आवर सोर्ड के प्रयोग से सभी जानवरो का अंत कर रहे थे चारि तरफ मांस के टुटकड़े हे टुकड़े पड़े हुए थे

सूर्य का सरीर पूरी तरह से खून से लथपतब था किन्तु अपने खून से नहीं उन सभी जानवरो के खून से जो सूर्य के हाथो सीकर हुए थे

वाइट ड्रैगन भी निचे उतर आया था सूर्य जल तत्वा का प्रयोग कर खुद पे लगे खून को साफ करता है

सूर्य चारो तरफ नजर डालता है तो यहाँ भी वही किर्या दोहराई जा रही थी सभी जानवरो के सरीर से वो कला लिक्विड रूप में उनसे निकल कर एक तरफ जा रहा था सूर्य फ़ौरन वाइट ड्रैगन को अपने भीतर लेता है आवर दौड़ते हुए उस काळा लिक्विड रूपी काली सकती का पीछा करता है

कुछ आगे जाने के बाद सूर्य फिर से खुले में पहुँचता है पैर इस बार नजारा आवर भी अलग था

एक तालाब जिसके बीचों बिच ड्रैगन बूटी का पेड़ ( ड्रैगन बूटी एक पौधे के रूप में पायी जाती है किन्तु यहाँ वो किसी बड़े पेड़ के रूप में थी ) था किन्तु सबसे अजीब बात ये थी की वो तालाब पूरी तरह से उस काळा लिक्विड के जैसा था जो उन जानवरो से निकल कर इस तालाब में आ कर मिक्स हो चूका था

सूर्य दूर से हे उस ड्रैगन बूटी वृक्ष को देखता है जो किसी अजूबे से काम नहीं था उस पेड़ के तने से ऊपर निचे बाह रहा था जैसे पेड़ में ब्लैक नियों पाइप डाली हुई हो आवर उन से वो ब्लैक लिक्विड पेड़ को पोषण दे रहा हो

सूर्य .......... यहाँ मुझे निर्भया का होने का आभाष हो रहा है .पैर वो कही नजर क्यों नहीं आ रहा है

सूर्य अपनी आँखे बंद कर करके

निर्भयासुर का आवाहन करता है किन्तु उसकी आत्मिक ऊर्जा के अलावा कुछ भी आभाष नहीं होता सूर्य को जो उस पेड़ की आवर इशारा करती है

सूर्य जैसे हे आगे भद्दा ब्लैक लिक्विड पोंड की आवर पेड़ बड़ी तेजी से हिलने लगता है जैसे उसे आने वाले खतरे का आभाष पहले से हे हो गया हो आवर वो सूर्य को अपने पास आने से रोकने की कोशिश कर रहा हो

जैसे हे सूर्य अपना पहला कदम लिक्विड में डालता है ड्रैगन बूटी की कुछ पाटिया टूट कर सूर्य की तरफ तेजी से आती है अचानक से बिच हवा में उन पतियों में कुछ परिवर्तन हुआ जो अभी तक सामान्य पाटिया नजर आ रही थी वो अचानक से काळा स्पीयर्स ( भलो ) में बदल जाती है

सूर्य अपने आवर आते खतरे को भांपते हुए अपने सरीर को अपनी ऊर्जा से कवर करता है पैर तब तक देर हो चुकी थी सभी 6 स्पीयर्स तेज फाॅर्स के साथ एक के बाद एक सूर्य के सीने पे आ लगते है सूर्य फाॅर्स आवर वॉर से करीब 6 से 7 मिटेर पिच पथरो की दिवार से जा ताकता है

सूर्य ........ अह्हह्ह्ह्ह ये क्या बला है इतना तेज फाॅर्स इन मामूली पेड़ की पतियों में ऐसा लगता है सीने की हड़िया हे टूट गई है

हलाकि ऐसा कुछ हुआ नहीं था सूर्य ने केवल उनका फाॅर्स हे फील किया था बाकि सरीर पूरी तरह से सलामत था

सूर्य अभी ये सब सोच हे रहा था की उसे लिक्विड पोंड में कुछ हलचल मह्सुश होती है

सूर्य जब ध्यान से देखता है तो पता है की पोंड से लिक्विड निकल कर उसकी आवर हे भाड़ रहा था

सूर्य फ़ौरन वायु तत्वा का प्रयोग कर हवा में उठ जाता है हवा में अपनी पूरी ताकत से सूर्य अग्नि तत्वा का प्रयोग करता है लिक्विड पे

अग्नि का कुछ खास असर नहीं हो रहा था सिवाय लिक्विड से उठ रही ब्लैक भाफ का निकलना

सूर्य ......... ये क्या इस पे तो इतनी भयानक आग का भी कोई असर नहीं हो रहा है बस इसमें से गरम भाफ निकलने के अलावा ऐसे तो मैं यही इस लिक्विड के साथ उलझा रहूँगा निर्भया तक पहुंचने में जितना लेट करूँगा उतना हे खतरा निर्भयासुर को होगा

सूर्य ...... मुझे सोच समाज कर बूढी से काम करना होगा तभी इस हे रोकने का कोई रास्ता निकल पाउँगा है ये ठीक रहेगा अग्नि के असर से ये गरम हो गया है अगर वायु आवर जल तत्वा का इस पे एक साथ प्रयोग किया जाये तो मुझे कुछ वक़्त मिल सकता है इसके बारे में सोचने का

सोचते हुए सूर्य वायु आवर अग्नि तत्वा का एक साथ ब्लैक लिक्विड पे हमला करता है पानी आवर हवा का बवंडर बड़ी तेजी से लिक्विड पोंड की आवर भड़ने लगता है गुफा में अचानक से गर्मी ख़तम हो जाती है आवर तापमं गिरने लगता है जिसका असर लिक्विड के बड़ी हे जल्दी से हो रहा था आवर लिक्विड जहा जहा मौजूद था वो हमने लगता है किसी मेटल की तरह जिसने देख सूर्य के चेहरे पे भी हलकी मुस्कान आ जाती है

पैर ये मुस्कान ज्यादा देर नहीं रुकी कुछ आवाज ने सूर्य का ध्यान अपनी आवर खींच लिया

सूर्य ........ ये क्या बस अब यही देखना बाकि था जैसे

ड्रैगन बूटी वृक्ष पोंड के बिच बने पत्थर से बहार निकल रहा था जैसे की वो हवा आवर जल के बवंडर से दूर जाने वाला हो

सूर्य अपनी तलवार निकर तेजी से उड़ते हुए वृक्ष की आवर भाड़ गया वृक्ष सच्चानक लम्भी कभी टहनिया निकलती है आवर सूर्य पे अंडदंड हमले करना आरम्भ कर देती है

सूर्य अपनी तलवार से टहनियों को रोकने लगता है कुछ टहनिया सूर्य के तेज शार्प वॉर से कट कर निचे गिर जाती है

जो भू टहनिया वृक्ष से कट कर अलग हो रही थी वो कुछ हे देर में सुख कर पाउडर में बदल रही थी

कुछ टहनिया जो मजबूत थी वो बार सूर्य पे वॉर कर पीछे हटने को विवश कर रही थी

दूसरी तरफ वायु आवर जल से बने बवंडर की गति काम होने पैर जमा हुआ लिक्विड फिर से तरल लिक्विड में बदलने लगता है

सूर्य को मजबूरन पीछे हटना पड़ता है

सूर्य ......... इस तरह तो इसका कोई अंत नहीं है मुझे कुछ आवर सोचना होगा जब तक ये पेड़ सही सलामत है मुझे नहीं लगता की ये नकारात्मक लिक्विड रुकने वाला है

सूर्य फिर से हवा आवर जल का एक साथ प्रयोग कर अनगिनत बवंडर त्यार कर लिक्विड की आवर छोड़ देता है ये पहले वाले बवंडर से ज्यादा खतरनाक थे

सूर्य हवा में हे अपनी आँखे बंद कर अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा को जागृत कर अपने हाथ में पकड़ी ड्रैगन सोर्ड में डालता है

देखते हे देखते सूर्य की ऊर्जा इतनी ज्यादा भाड़ गई थी की पूरी गुफा में तेज रौशनी फ़ैल जाती है

एकाएक सूर्य के शरीर से 4 अलग ऊर्जा पुंज निकल कर रूप लेने लगते है ये सूर्य के वही रूप थे जिनके साथ सूर्य गुरुदेव द्वारा दी पुस्तक में योध कला का अभ्यास करता था

अब गुफा में एक नहीं बल्कि एक जैसे 5 सूर्य थे सभी के हाथो में तेज रौशनी से चमक रही सोर्ड थी

कोई भी ये नहीं बता सकता था कक कोनसा सूर्य असली है आवर कोनसा पार्टीभीमभ है

सभी एक दूसरे की आँखों में देखते है आवर बिजली की तरह लिक्विड वृक्ष की आवर भढ़ते है एक साथ चारो आवर से हमला होने पे वृक्ष कुछ देर हमले का सामना करता रहा तभी एक रौशनी का पुंज सा गुफा के दूसरे कोने से पेड़ की तरफ भाड़ा जैसे हे पेड़ के ेक्रम नजदीक ऊर्जा पुंज पहुंचा तो वह केवल एक सोर्ड नजर आई जो अगले हे पल वृक्ष के अनगिनत टुकड़े कर चूका था

दरशल तेज रौशनी के बिच सूर्य ने खुद को छुपा लिया आवर अपने स्थान पे माया का प्रयोग कर अपने प्रतिरूप को खड़ा कर दिया आवर उस से 4 पार्टीभिम का निर्माण किया

सही समय के इन्तजार में सूर्य खुद को छुपाये हुए था आवर जब मौका मिला तो सूर्य ने पूरी सकती से पेड़ पे वार किया आवर सफल भी हुआ

ड्रैगन वृक्ष के अनगिनत टुकड़े पड़े हुए थे जो डेरी डेरी सुख रहे थे तभी ड्रैगन वृक्ष के तने से कुछ निपटा हुआ मह्सुश हुआ जब सूर्य नजदीक जा कर देखा तो वो वही ब्लैक दिल था जो अब वृक्ष के तने से बहार था जिस से अभी भी काली नकारात्मक ऊर्जा निकल रही थी

अच्चानक से ब्लैक दिल हवा में उठने लगता है आवर किसी परछाई में बदलने लगता है

परछाई जब पूर्ण आकर ले लेती है तभी उस परछाई का चेहरा नजर आता है

ये परछाई कोई आवर नहीं निर्भयासुर था

सूर्य ....... निर्भया तुम

पैर जब निर्भयासुर की आँखों में सूर्य ने देखा तो वह कला सहाय अँधेरा था जैसे निर्भयासुर का कोई अस्तित्व हे नहीं था उन आँखों में

निर्भयासुर के चेहरे जैसे सूर्य के इस तरह देख कर मुस्कान उभर आई हो पैर काळा घने अंधकार के अलावा वह कुछ नहीं था

अचानक से सूर्य के सीने में अजीब सी हलचल होना सुरु हो जाती जैसे कोई चीज़ बिना सूर्य की इच्छा के उसके सीने से बहार आना चाहती है

सूर्य ने जैसे हे अपनी आँखे बंद कर अपने भीतर जनखा उसे निर्भयासुर द्वारा दिया भरम ऋषि का वो दिव्या पवित्र जल कमंडल था जो बुरी तरह सूर्य के सीने से बहार निकलने को ादिर था

सूर्य कुछ भी समाज नहीं प् रहा था की कमंडल इस तरह का आचरण क्यों कर रहा पैर फिर भी सूर्य ने इच्छा का मन रख उसे अपने सीने से बहार आने की अनुमति दी

जैसे हे सूर्य ने अनुमति दी सूर्य के सीने से कमंडल निकल कर सूर्य के हाथ में आ गया

सूर्य के हाथ में कमंडल देख पता नहीं क्यों निर्भयासुर (ब्लैक दिल की परछाई ) हवा में करीब 15 मिटेर दूर जा पहुंचा

सूर्य......... ये क्या हुआ निर्भयासुर ( परछाई ) इस कमंडल को देख पीछे क्यों हैट गया जैसे निर्भयासुर को इस कमंडल से कोई खतरा हो

सूर्य कमंडल हाथ में लिया हुए निर्भयासुर की आवर बढ़ा तो वो आवर पीछे चला गया

सूर्य ........ कुछ तो रिस्ता है इस कमंडल आवर इस नकारात्मक ऊर्जा के बिच ओह सहित मैं इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकता हूँ निर्भया ने मुझे बताया था की ये जल किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को पवित्र कर सकता है इसका मतलब ये नकारात्मक ऊर्जा इस जल की सकती आवर कार्य से परिचित हो सकता है

तभी सूर्य के मंद में कुछ तस्वीर चलने लगती है साथ हे आवाज सुनाई देती है जो की निर्भया आवर भरण ऋषि की थी

सूर्य के मस्ती में वही घटना घाट रही थी जो निर्भया ने देखि थी महामहिम आवर भरण ऋषि का योध आवर उसके बाद भरण ऋषि द्वारा कमंडल निर्भया को सौंपते हुए कही बाटे

सूर्य सब कुछ समाज चूका था इस लिया फ़ौरन सूर्य ने कमंडल को अपने हाथ से छोड़ दिया अगले हे पल कमंडल से बड़ा सा जल का बवंडर निकला जो कमंडल के ऊपर हे गम रहा था कुछ देर बाद निर्भयासुर ( परछाई ) उस बवंडर की फाॅर्स में आ जाती है आवर कमंडल के बवंडर में खिचड़ी चली जाती है साथ हे गुफा में मौजूद ब्लैक लिक्विड मेटल जो हवा आवर जल से अभी तक मेटल रूप में था देखते हे देखते गुफा से ब्लैक लिक्विड का नमो निशान हे गायब हो गया था

करीब 5 मिनट्स बाद कमंडल में उठा बवंडर संत हुआ आवर कमंडल सूर्य के हाथ में वापिस आ गया

सूर्य के हाथ में आते हे कमंडल से निर्भयासुर आत्मा रूप में बहार निकलता है उसके कुछ देर बाद एक डायमंड्स रूपी रतन बहार निकलता है

सूर्य फ़ौरन रतन को अपने हाथ में ले लेता है

सूर्य ........ निर्भया तुम ठीक तो हो न

निर्भयासुर सूर्य के सामने अपनी गर्दन जुखाये हुए खड़ा था

निर्भयासुर ....... स्वामी मुझे नाफ्फ कर दीजिये मैंने अपनी मूर्खता में आपके आदेश के अवहेलना की

सूर्य ......... वो तो तुमने की है पैर ये बाते बाद में करेंगे पहले यहाँ से निकला जाये चलो अंदर आओ तुमसे इस बारे में बाद में बात करूँगा

सूर्य की बात मन निर्भयासुर ऊर्जा रूप में सूर्य में सम्मानित हो जाता है

सूर्य ......... अच्छा हुआ जो भरम ऋषि जी ने निर्भया के माध्यम से अपने तपोबल से प्राप्त ये पवित्र जल का निर्माण किया आवर मुज तक पहुंचा दिया अन्यथा पता नहीं कितने टाइम मुझे यहाँ उलझा रहना पड़ता खेर पहले सब सामान्य किया जाया

सोचते हुए सूर्य ज्वालामुखी के मध्य आता है आवर वह से ज्वालामुखी के मुँह से उड़ते हुए बहार निकल आता है पहाड़ी पे खड़ा हो कर सूर्य चारो तरफ देखता है पास से बहती हुई नदी पे सूर्य की नजर पड़ती है

सूर्य नाड़ी की आवर भाड़ जाता है नाड़ी के ऊपर पहुंच सूर्य कमंडल से थोड़ा जल नाड़ी में डालता है

अपने जल तत्वा के प्रयोग से सूर्य नाड़ी में बहुत बड़ा बवंडर बनता है आवर उसपे अग्नि तत्वा का प्रयोग कर जल को वास्प ( भाफ ) में बदलने लगता है जल्दी हे भाफ की वजह से वह बड़े बड़े बदल बनने लगते है

सूर्य बदलो को नियंत्रित कर उनके विद्युत् तत्वा का प्रयोग कर तूफान में बदल देता है जो नाड़ी से जल ऊपर की आवर खींचते हुए नाड़ी की सतह पे भड़ने लगता है जल्दी हे बदलो से बारिश होने लगती है आवर जो भी जिव पेड़ पौधे ब्लैक लिक्विड से प्रभावित थे वो सभी बारिश की बूंदो के असर से ब्लैक लिक्विड से मुक्त हो जाते है

सूर्य ........ अब मुझे फ़ौरन मनु के पास पहुंचने होगा वो काफी कमजोर होगी इस वक़्त

सूर्य जैसे हे निर्भयासुर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करता है ुशी समय सूर्य को मानसी के साथ जो कुछ भी हुआ उसका पता चल जाता है इस लिया हे सूर्य ने अभी निर्भयासुर से कुछ भी नहीं पूछा उसे जल्द से जल्द मानसी के पास पहुंचना था

ीदार गुरुदेव से महामहिम के ब्लैक दिल का सारा सच जान कर सभी चकित थे

शालिनी जी ........... गुरुदेव क्या आपको सूर्य की सहायता नहीं करनी चाइये

गुरुदेव ........ हम कुछ नहीं कर सकते पुत्री शालिनी पुत्र सूर्य का चयन स्वयं भरण ऋषि की दिवंगत आत्मा ने किया ये सनाज लो की ये पुत्र सूर्य की परीक्षा जिसने उसे हे उत्तीर्ण करना होगा

किरण ........ गुरुदेव आप सब कुछ पहले से जानते थे न की यहाँ ड्रैगन लोक में क्या हो रहा है आवर यहाँ आने पे मानसी आवर कुंवर जी के साथ क्या होने वाला है

गुरुदेव ......... नहीं पुत्री हम ड्रैगन लोक के सत्य से पूर्ण रूप से परिचित नहीं थे वो तो पुत्री जूलिया के ड्रैगन के लिया जब देवसूफ़ी नियों जी ने ड्रैगन बूटी ले कर परीलोक पहुंचे तब हमने जाँच की तब घात हुआ की ड्रैगन बूटी किसी नकारात्मक ऊर्जा से दूषित है किन्तु हमें ये सत्य तुम सभी से छुपाना पड़ा यही आज्ञा थी हमारे लिया हमने ने नियों जी को भी पूर्ण सत्य नहीं बताया बाकि हमें कल रात्रि परबु इच्छा से ध्यान में ज्ञात हुआ तो हम बिना किसी विलम्ब के ड्रैगन लोक आ गए किन्तु हम किसी भी इस्थिति में हस्तक्षेप नहीं कर सकते थे इस लिया घटना करम का आरम्भ होने की प्रतीक्षा करते रहे

जूलिया ........ गुरुदेव ये मानसी दीदी को क्या हो रहा है

सभी की नहर मानसी की तरफ पड़ती है जिसकी अनियंत्रित ऊर्जा संत हो रही थी आवर वापिस मानसी के सरीर में जा रही थी

गुरुदेव ........... पुत्र सूर्य अपने कार्य में अपनी परीक्षा में सफल हुआ पुत्र सूर्य ने महामहिम की नकारात्मक ऊर्जा का नाश कर विजय प्राप्त की है अब पुत्री मानसी पूर्ण सुरक्षित है

गुरुदेव अपनी ऊर्जा कवच से मानसी को मुक्त कर देते है

किरण शालिनी जी आगे भाड़ मानसी को संभालती है वो काफी कमजोर लग रही थी

गुरुदेव ........ पुत्री किरण पुत्री मानसी को महल ले जाओ उसे विश्राम की आव्सय्कता है आवर देवसूफ़ी नियों जी कल पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण के राज्य अभिषेक की तयारी आराम की जाये

नियों जी ........ जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश हम अभी सभी नगरों में इसकी घोषणा कर देते है आप से आग्रह है आप भी गोल्डन ड्रैगन सिटी पैलेस पधारे

गुरुदेव ......... आप सभी चलिए हम कुछ समय बाद आपसे महल में भेंट करेंगे

नियों जी ....... जी गुरुदेव

मानसी जो की काफी कमजोर लग रही थी उसकी ठीक से आँखे भी नहीं खुल रही थी उसे किरण आवर शालिनी जी जूलिया अपने साथ लिया महल की आवर चल दी वही नियों जी भी उनके पीछे पीछे चल दिए

अब केवल यहाँ गुरुदेव हे रह गए थे किन्तु नहुष भी यही था जो किसी की भी नजरो में नहीं आया था

नहुष ......... गुरुदेव हमारा उद्देश्य पूर्ण हुआ अब हम अपना सरीर त्याग कर सकते है

गुरुदेव .......... अभी नहीं मनुष्य तुम अंतिम कार्य भूल रहे हो

नहुष .......... मुझे ज्ञात है गुरुदेव प्रिंस सूर्य को उसकी अमानत सौंपे बिना हम मुक्त नहीं हो सकते

गुरुदेव ......... हम तुम्हे ज्यादा परेशान नहीं करेंगे हम भी चाहते है की आपकी इच्छा पूर्ण हो आवर आप मोक्ष की प्राप्ति कर पाए

नहुष .......... ये आपके सहयोग के बिना संभव नहीं था गुरुदेव आपको कोटि कोटि नमन गुरुदेव

गुरुदेव .......... कल राज्याभिषेक है पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण का हम चाहते है तुम स्वयं पुत्र सूर्य को वो अमानत सांपो जो भविष्य में पुत्री जूलिया के घराब में पल रहे ड्रैगन लोक के कुमार की है

नहुष ......... किन्तु क्या ये संभव है गुरुदेव

गुरुदेव ............ आपकी इच्छा को केवल पुत्र सूर्य हे पूर्ण कर सकता है इसी लिया हमने इस धरोहर के लिया पुत्र सूरा को चुनाव किया समय आने पे पुत्री जूलिया के घराब में पल रहे अंश को पुत्र सूर्य उसकी धरोहर सौंप देगा आप निश्चिंत रहे

नहुष ........जी गुरुदेव हम आपके वचनो से आस्वस्थ है

गुरुदेव ........ हम चलते है आप समय से महल पहुंच जाना

नहुष ........ जी गुरुदेव आप निश्चिन्त रहे ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........................
 
अपडेट. 278

नहुष ......... किन्तु क्या ये संभव है गुरुदेव

गुरुदेव ............ आपकी इच्छा को केवल पुत्र सूर्य हे पूर्ण कर सकता है इसी लिया हमने इस धरोहर के लिया पुत्र सूरा को चुनाव किया समय आने पे पुत्री जूलिया के घराब में पल रहे अंश को पुत्र सूर्य उसकी धरोहर सौंप देगा आप निश्चिंत रहे

नहुष ........जी गुरुदेव हम आपके वचनो से आस्वस्थ है

गुरुदेव ........ हम चलते है आप समय से महल पहुंच जाना

नहुष ........ जी गुरुदेव आप निश्चिन्त रहे ..............

अब आगे ..........

गुरुदेव की आज्ञा अनुसार नोयों जी कल सूर्य आवर किरण के राज्य अभिषेक की घोषणा सभी सिटी में कर चुके थे साथ हे साथ ड्रैगन में हुए बदलाव को ले कर जो समस्या थी उसकी भी सार्वजनिक रूप में समाप्ति की घोषणा कर चुके थे जिसका क्रेडिट प्रिंस सूर्य को दिया जो ड्रैगन लोक के भावी सम्राट बनने वाला था

सभी ड्रैगन लोक के रह वाशी इस घोषणा से खुश थे वही कुछ ऐसे भी थे जिन्हे सूर्य का उनका भावी सम्राट बनाया जाना खाल रहा था क्यों की उनका मन्ना था की ड्रैगन लोक के राजसिंघषण पे कोई ड्रैगन लोक का हे रह वाशी विराजमान हो किन्तु वो कुछ कर भी नहीं सकते थे इस लिया अपने मन में उपजी विचारों को मन में दबाना पड़ा

4 सिटी के प्रतिनिधि का कल होने वाले राज्य अभिषेक में उपस्थित होना अनिवार्य था आवर इसके लिया उन्हें सूचित किया जा चूका था

नियों जी किंग सोलोमन वह डेवलिन जी को कल होने वाले राज्य अभिषेक की तयारी का कार्य भर सँभालने ला दायित्व सौंपा जिसने किंग सोलोमन आवर डेवलिन जी से ख़ुशी से स्वीकार करते हुए कार्य में जुट गए

ीदार सूर्य गोल्डन ड्रैगन सिटी पहुंच चूका था आवर वह सीसा मानसी के कक्षा में पहुंचा

जहा मानसी महल के कक्ष शालिनी जी की गौड़ में लेती हुए आराम कर रही थी क्वीन एलिज़ाबेथ शालिनी जी के अलावा किरण आवर जूलिया भी यही मौजूद थी

सूर्य को देखते हे किरण जल्दी से कड़ी होती है आवर सूर्य से गले लग जाती है

किरण ......... आप ठीक तो है न कुंवर जी

सूर्य ......... मैं बिलकुल ठीक हूँ स्वीटी मुझे क्या हुआ है

किरण सभी की मौजूदगी का आभाष कर सूर्य से अलग होती है आवर गौर से सूर्य को देखती है जो काफी थका हुआ लग राग था

सूर्य ने अभी तक जिन प्रतिरूपो का प्रयोग पुस्तक में अपने योध अभ्यास ले लिया पुस्तक की दुनिया में किया था पहली बार बहरी वास्तविक दुनिया में किया था उस से उसकी ऊर्जा पे प्रभाव पड़ा था जिसके चलते सूर्य थोड़ा थका हुआ लग रहा था यही कारन था की किरण सूर्य को ले कर चिंतित हो गई

किरण ........ आप सच कह रहे है न आप हमसे कुछ छुपा तो नहीं रहे है न

सूर्य ........... स्वीटी मैं बिलकुल ठीक हूँ बस ऊर्जा का आदिल प्रयोग करने से थोड़ा थकावट मह्सुश कर रहा हूँ आवर कुछ नहीं मनु कैसी है अभी

सूर्य किरण से बात करते हुए मानसी के पास आ पहुंचा जो शालिनी जी की गौड़ में सर रखे लेती हुई विश्राम कर रही थी

शालिनी जी ....... बीटा मानसी अभी ठीक है पैर काफी कमजोर भी हो चुकी है

सूर्य ........ सॉरी माँ ये सब मेरी गलती है मैं मानसी को सुरक्षित रखने में नाकाम रहा मुझे माफ कर दीजिये

शालिनी जी प्यार से अपना हाथ बढ़ा कर सूर्य के गालो को सहलाती है

शालिनी जी ........ इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है सूर्य भविष्य में कब क्या होगा ये किसी को पता थोड़ी न होता है अगर फिर भी तुम्हे लगता है की ये सब तुम्हारी गलती है तो खुद को हर मुश्किल सम्भावना के लिया पहले से त्यार रखो

सूर्य ........ जी माँ ी लव यू माँ एंड थैंक यू मानसी का ख्याल रखने के लिया

शालिनी जी ........ अब ज्यादा नाटक न कर नहीं तो तेरी दोनी बीबियो के सामने कान खुचुँगी तो तुम्हे हे बुरा लगेगा बड़ा आया थैंक यू बोलने वाला

सूर्य मुस्कुराते हुए अपने आँखे बंद करता है अगले हे पल सूर्य के हाथ में भरम ऋषि दिल से बना वो डैमोंड क्रिस्टल था जो कभी भरम ऋषि का दिल जो बाद में महामहिम की नकारात्मक ऊर्जा से ब्लैक हार्ट में बदल गया था

किन्तु अभी वो पूरी तरह से पवित्र ऊर्जा से परिपूर्ण था उस से जो ऊर्जा निकल रही थी वो इतनी पवित्र थी की कुछ हे देर में कक्ष में परम सन्ति फ़ैल गई सभी के मन सभी विचारो से मुक्त हो कर संत हो चुके थे

शालिनी जी किरण जूलिया सभी सूर्य के हाथ में पकडे उस क्रिस्टल को बड़े ध्यान से देख रही थी किरण आवर शालिनी जी हे ऐसी थी जो उस से निकल रही ऊर्जा को देखने में सक्षम थी मानसी अभी भी लेती हुई थी वही जूलिया की आत्मा की गजराज अभी उतनी नहीं थी की वो उस क्रिस्टल से निकलती ऊर्जा को देख सके

किरण ......... ये कैसी दिव्या मणि है कुंवर जी इस से निकल रही ऊर्जा कितनी पवित्र आवर आदिक है किन्तु आपके पास इस से पूर्व तो नहीं देखा हमने

सूर्य क्रिस्टल को मानसी के मस्तिष्क पे रख देता है डेरी डेरी क्रिस्टल से ऊर्जा निकल कर मानसी के सरीर में जाने लगती है जिस से जल्दी हे मानसी के सरीर की नस्ट हुए ऊर्जा की पूर्ति हो जाती है आवर वह अपनी आँखे खोल लेती है

सूर्य ........ अब कैसा मह्सुश कर रही हो मनु अभी भी कमजोरी या कोई आवर परेशानी हो रही है क्या

मानसी ....... कुंवर जी मैं ठीक हूँ मुझे पहले से बहुत अच्छा लग रहा है

सूर्य ....... सॉरी मनु ये सब मेरी वाज.....

मानसी. ........ इसमें आपकी गलती नहीं है कुंवर जी

सूर्य ....... ठीक है तुम अभी कुछ देर पुर आराम करो

सूर्य ........ यही वो क्रिस्टल है जिस से सब परेशानी कड़ी हुई थी पहले ये बुराई की सकारात्मक ऊर्जा से पारी पूर्ण था किन्तु अभी इस से सभी तरह को सकारात्मक ऊर्जा को नस्ट किया जा चूका है

शालिनी जी ........ सूर्य बीटा निर्भया कैसा है

सूर्य ........ आप खुद हे पूछ लीजिये माँ

सूर्य निर्भासुर को बहार आने का आदेश देता है निर्भय असुर भी आज्ञा का पालन करते हुए सभी के समक्ष प्रकार हो जाता है किन्तु अभी भी उसकी गर्दन अपरदबोध से जुख़ी हुई थी

शालिनी जी ........ निर्भया इस तरह का वैभार क्यों कर रहा क्या तुमने इसको डांटा है सूर्य

सूर्य ....... नहीं नहीं माँ मैंने इसे कुछ भी नहीं कहा अरे भाई क्यों मुझे मरवाने पे तुले हो तुम

निर्भयासुर ...... मुझे माफ कर दीजिये स्वामी मेरे कारन हे आपको इतनी परेशानी हुई

सूर्य ........ वो सब छोड़ आवर मुझे ये बता निर्भया की तुम्हे तो मैंने नियों जी की सुरक्षा आवर उनपे नजर रखने को कहा था तो तुम वह उस गुफा में कैसे पहुंचे आवर इतने लापरवाह कब से हो गए तुम की बिना सोचे समझे उस ऊर्जा के कैद में आ गए जानते भी हो तुम्हारी वजह से हे मानसी की ये हालत हुई तुम्हारी आसुरी सकतिया मुझसे आदिक मानसी से जुडी हुई है जिस कारन तुम्हारे माध्यम से उस काली ऊर्जा ने मानसी की ऊर्जा को अवशोषित कर इसे इतना कमजोर कर दिया वो तो समय रहते स्वीटी आवर गुरुदेव ने इसका समाधान निकल लिया अन्यथा इसका परिणाम कितना भयानक हो सकता था मुझे तुमसे ये अपेक्षा तो बिलकुल नहीं थी

निर्भयासुर पहले हे अपनी की गई भूल से अपरदबोध से ग्रषित था

ऊपर से सूर्य की बातो ने उस हे आवर आदिक अपरदबोध से ग्रषित कर दिया था

किरण आवर मानसी दोनों को हे सूर्य का इस तरह से निर्भयासुर को डांटना अच्छा नहीं लग रहा था पैर वो दोनों सूर्य को रोक भी नहीं सकती थी इस लिया किरण ने शालिनी जी की आवर देखा जैसे कह रही हो की माँ अब आप हे इन्हें रोक सकती है

शालिनी जी .. ....... बस करो सूर्य अब इसे पुर कितना डाँटोगे उसे अपनी गलती का अहसास है बीटा

सूर्य ...... पैर माँ

शालिनी जी ...... पैर वर कुछ नहीं

निर्भयासुर ......... माता आप स्वामी को मत डांटिए इन्होने बिलकुल उचित कहा ये मेरी हे गलती थी की बिना सावधानी बिना उनकी आज्ञा मैंने फैसला किया जिसकी सजा देवी मानसी को भुगतनी पड़ी मुझे अपने किये का दंड मिलना हे चाइये

सूर्य ........ पहले मुझे पूरी बात बताओ की तुम वह कैसे पहुंचे आवर कैसे वह कैद हुए

निर्भयासुर . ........ आपने मुझे नोयों जी पे नजर रखने आवर उनकी सुरक्षा का दायित्व सौंपा था मैं पूरी रात्रि उनसे दुरी बनाये उनपे नजर रखे हुए था ताकि उनपे आने वाले किसी भी खतरे से उन्हें सुरक्षित रख सकू

सुबह जब सूर्य उदय होने वाला था तब मैं पुनः आपके पास लौट रहा था ुशी दौरान मुझे कही से बहुत आदिक मात्रा में नकारात्मक असुर ऊर्जा का आभाष हुआ आवर यही मुझसे भूल हो गई जो आपके आदेश की अवहेलना कर मैं उस आसुरी ऊर्जा के स्थार्थ का पता लगाने ऊर्जा का पीछा करता हुआ गुफा तक पहुंचा जहा पहले से सम्भवता मेरे लिया कोई षड़यंत्र रचा हुआ था

जैसे हे मैंने गुफा में प्रवेश किया चारो आवर से किसी अदृश्य सकती ने मेरी आत्मा से जुडी मेरी आसुरी सक्तियो को अवशोषित कर्जा आरम्भ कर दिया मैं कुछ कर पता उस से पहले हे मैं किसी गहन अंधकार में डूबता हुआ चला गया उसके बाद क्या हुआ मैं नहीं जान पाया जब मुझे वास्तविकता का आभाष हुआ तब मैं भरम ऋषि के पवित्र तपोबल से निर्मित जल कमंडल की दुनिया में था जहा मुझे ज्ञात हुआ की उस नकारात्मक सकती के वश में आने के बाद क्या क्या घटना चरित हुई

सूर्य ......... हम्म्म तो अब तुम समाज गए की तुमसे क्या क्या गलतियां हुई है

निर्भयासुर ......... जी स्वामी मैं जनता हूँ मैंने क्या गलतियां की है आवर उसका क्या परिणाम हो सकता था

सूर्य ......... तुम हमेशा असुर लोक जा कर नरकासुर को दण्डित करना चाहते थे क्या अभी भी तुम्हारा वही इरादा है

निर्भयासुर कुछ भी कहने लायक इस्थिति में नहीं था

सूर्य ......... तुम अभी भी अपनी सक्तियो के उचित प्रयोग से अनभिज्ञ हो निर्भया तुम अभी भू कार्य के गंभीर परिणामो से अनभिज्ञ हो कर कार्य करते हो तुम कार्य के सफल होने या वाइटल होने पे होने वाले गंभीर परिणामो पे विचार नहीं करते उन्ही परिणामो में से एक आज तुम्हारे सामने था मानसी की ये गंभीर इस्थिति

मानसी ........ कुंवर जी .......

सूर्य ........ में रहो मानसी निर्भया को समझना होगा बिना सभी पहलु पे बिचार किये योध में उतरना कितना घातक हो सकता है केवल सकतिया के बल पे सभी समश्याओ का समाधान नहीं होता सकती आवर बूढी का उचित समय पे उचित प्रयोग हे हमारी सफलता का मंत्र बन सकता है

किरण .......... आप जो कह रहे वो सच है पैर आप ये भी मत भूलिए की निर्भया आपका अंश है

सूर्य ........ जनता हूँ स्वीटी आवर इसी कारन से मुझे निर्भया पे आदिक गुस्सा आ रहा है इसने बिना अनुमति के अपनी आवर से कार्य करना चाहा उसके लिया मैं नाराज नहीं हूँ किन्तु इसने बिना पूरी जानकारी के एक अनजाने मार्ग का चयन किया ऊपर से इसने बिना सावधानी के उस मार्ग पे चलना भी आराम कर दिया बिना दुश्मन की ताकत या कमजोरी जाने

शालिनी जी ......... तुम ठीक कह रहे हो बीटा निर्भया तुम्हे इन सभी बाटी का ध्यान रखना चाइये था बिना अपने दुश्मन या कार्य की पूर्ण जानकारी के अगर हम किसी कार्य को करने जा रहे हो तो हमें हर कदम हजार बार सोच समाज कर पूरी सावधानी से सतर्क हो कर करना चाइये साथ हे इस बात का भी ध्यान रखना चाइये की हमारी सफलता या विफलता से क्या परिणाम हमारे सामने होंगे इस लिया जहा सकती की जरुरत हो तभी सकती का प्रयोग करना चाइये अन्यथा बूढी का उचित प्रयोग करना चाइये

निर्भयासुर ........... मैं मंटा हूँ स्वामी मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है आवर आप जो भी दंड मुझे देंगे मैं सहरसा स्वीकार करूँगा

तभी सभी को कक्ष के दूर के पास से आवाज सुनाई देती है

आवाज ........ यही शिक्षा तुम सभु पे भी लागु होती है पुत्र सूर्य केवल पुत्र निर्भयासुर पे नहीं

सूर्य ....... परनाम गुरुदेव आपका स्वागत है

गुरुदेव ........ तुम्हारा कल्याण हो पुत्र सूर्य पुत्री मानसी अभी तुम्हारा स्वस्थ्य कैसा है

मानसी गुरुदेव को देख कर बीएड से उठने लगी तो गुरुदेव ने उसने हाथ के इसारे से रोकते हुए लेते रहने का इशारा किया

मानसी ......... जी गुरुदेव मैं पहले से काफी ऊर्जावान मह्सुश कर रही हूँ आपका कोटि कोटि धन्यवाद गुरुदेव

गुरुदेव ....... एक पिता अपनी पुत्री की सहायता पुत्री से आभार या धन्यवाद प्राप्त करने के लिया नहीं करता अपितु पुत्री आवर पिता के प्रेम सम्बन्ध के लिया करता है

सूर्य ......... गुरुदेव जब आप रात्रि में हे ड्रैगन लोक आ चुके थे तो आप महल क्यों नहीं आये

गुरुदेव ........ हाहाहा पुत्र हमें महलो के बिस्तर आदिक पसंद नहीं

गुरुदेव ने मजाक करते हुए सूर्य की बात को ताल दिया

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य पुत्री किरण कल तुम दोनों का राज्य अभिषेक है हम तुम दोनों के इस खाश अवसर में सरिक होने के पश्चात परीलोक लौट जायेंगे आवर तुम सभी को भी डोगरा हे परीलोक आना होगा विवाह में आदिक समय शेष नहीं है

सूर्य .......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

गुरुदेव ........ क्या बात है पुत्र सूर्य कुछ कहना या जानना चाहते हो क्या

सूर्य ......जी गुरुदेव आप तो जानते है की न तो स्वीटी के पास इतना समय आवर न हे मेरे पास की हम ड्रैगन लोक का कार्य भर संभल सके ऐसे में आप हे कोई उचित मार्ग सुजाये

गुरीदेव ........ जब तक पुत्री जूलिया के गर्भ से ड्रैगन लोक का आतिश जनम ले कर इस योग्य नहीं हो जाता तब तक तुम्हे हे इसका दायित्व संभालना होगा रही बात अभी की तो फ़िलहाल तुम्हारे राज्य अभिषेक के बाद किंग सोलोमन करकरी राजा बन ड्रैगन लोक का कार्य भर संभालेंगे जिसमे डेवलिन जी आवर नियों जी भी उनकी पूरी सहायता करेंगे

सूर्य ........ जी गुरुदेव मैं समाज गया

गुरुदेव ........ आवर क्या जानना कहते हो पुत्र

सूर्य ......... मरुत नानुष कोण है गुरुदेव उनकी वास्तविकता क्या है

गुरुदेव सूर्य कज बात सुन मुस्कुराये बिना नहीं रह पाए

गुरुदेव ......... मरुत नहुष की वास्तविकता जानने के लिया कल तक का इन्तजार करना होगा पुत्र सूर्य

गुरुदेव के होंठो पे इस वक़्त जो मुस्कान थी किसी गुप्त रहस्य की आवर इशारा कर रही थी

सूर्य भी समाज गया था की गुरुदेव से पूछने का कोई फायदा नहीं अब तो कल हे पता चलेगा की ये नानुष आवर गुरुदेव किश रहश्य को छुपा रहे है

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य तुमने अपने आध्यात्मिक सवरूपो का प्रयोग बहरी दुनिया में किया है न जबकि हमने तुम्हे इसके लिया सचेत किया था अब तो तुम समाज हे गए होंगे न की क्यों हमने इस सकती का प्रयोग करने के लिया रोका था

सूर्य ....... जी गुरुदेव मैं समाज गया किन्तु उस समय मेरे समक्ष कोई आवर मार्ग नहीं था इसी लिया मुझे ऐसा कर्जा पड़ा गुरुदेव

गुरुदेव ....... उचित है पुत्र किन्तु आगे से इसका ध्यान रखना जब तक तुम्हारी ऊर्जा का क्षेत्र भारमंद मंडल में न पहुंच जाये इस सकती का प्रयोग करने से ज्यादा से ज्यादा बचना होगा

किरण ...... भारमंद मंडल स्तर ये क्या है गुरुदेव

गुरुदेव ........... ऊर्जा के श्रेष्ठ 3 चरण होते है पुत्री प्रथम चरण है पार्थवी मंडल द्वितीय चरण भारमंद मंडल आवर तृतीया चरण है सवरग मंडल इन तीनो मंडल में ऊर्जा की अलग अलग विश्चेस्टा होती है पुत्री बिलकुल इनके नाम के अनुरूप हे है अभी तुम सभी पार्थवी मंडल में

सूर्य ......... जी गुरुदेव हम समाज गए

गुरीदेव ... ...... तुम सभी को आदिक से आदिक ध्यान के माध्यम से अपनी ऊर्जा को बढ़ने पे ध्यान देना होगा साथ हे साथ योध कला का अभ्यास स्तर में भी सुधर करने की आव्सय्कता है

गुरुदेव कुछ देर आवर सभी से बाते करते है आवर फिर महल से चले जाते है

ीदार सूर्य भी अपने कक्ष में जा कर कुछ देर विश्राम कर अपने कक्ष में हे ध्यान में लीं हो जाता है

अननोन प्लेनेट ............

एक अनजान अंधकार से भरे प्लेनेट में बहुत से लोग एक बड़े से विशालकाय महल के सामने एकत्रित हो रहे थे ( महल कहना गलत होगा क्यों की ये किसी विशालकाय किल्ले जैसा था ) जो पहली नजर में देखने से हे किसी शैतान का शैतानी महल लग रहा था

सभी ऊपर से निचे तक ब्लैक लबादे ( ब्लैक गाउन टाइप ) से देखे हुए थे केवल एक स्थान को छोड़ कर जो की पूरी तरह काळा दुहे से कवर था मनो वह उनका चेहरा न हो कर केवल दुहा हे दुहा था

सभी किसी समझदार बचे के जैसे एक लाइन या ग्रुप बनाये हुए उस शैतानी महल में प्रवेश कर रहे थे किसी के हाथ में कुछ था तो किसी के हाथ में कुछ उनके पीछे पीछे अलग अलग प्रजाति के इंसानी बचे योद्धा महिला लड़किया बड़े बड़े पिंजरों में कैद किये हुए लाया जा रहे थे

उन सभी बंदियों के सरीर पे बहुत से चौथ के नीसाण भी बने हुए थे जैसे उन्हें जबरदस्ती मर पिट कर यहाँ लाया गया हो सभी के सरीर से खून निकल रहा था पैर सभी के सरीर से अलग अलग रंग का

सभी काळा लबादे में देखे हुए लोग महल के एक खुले भाग में अपने अपने ग्रुप बनाये खड़े थे सभी की दृस्टि महल के एक द्वार की तरफ थी जैसे उन्हें किसी खास के आने का इन्तजार हो

काफी लम्बे समय के बाद वो द्वार खुला जिसकी आवर सभी अपनी दृस्टि लगाए खड़े थे

उसमे से एक कला गाउन डेल हुए साक्ष निकला आवर चलते हुए सभी को पे एक नजर डालने के बाद वही पास में बड़े से सिंघासन पे बेथ गया तभी ुशी कक्ष से 2 आवर शक्श निकले इसी के तरह के किन्तु इनकी चल आवर सरीर बनावट से लग रहा था की ये दोनों कोई माहिल्या थी

दोनों महिलाएं चलते हुए सिंघासन पे बैठे शक्श के सामने आदाब से मुक्ति है आवर अपना नकाब हटा कर सिंगशान के बगल में गुथनो पे बेथ जाती है

जैसे वो दोनों खूबसूरत महिलाएं उस सिंघासन पे बैठे नमः पॉश साक्ष की गुलाम सेविकाए हो

सभी के सामने अब उन दोनों महिलाओ का बिना नकन के खूबसूरत चेहरे साफ साफ नजर आ रहे थे

सभी काळा लबादे पहने हुए लोग अपने अपने चेहरे से काळा दुहे का नकाब हटा देते है

अब सभी के चेहरे साफ साफ नजर आ रहे थे

उन में बहुत से लोगो देखने से हे पता चल रहा था की वो सभी किसी शैतान से काम नहीं थे उनके कुछ माहिल्या भी थी कुछ जवान खूबसूरत तो कुछ बूढी बदसूरत पिसाच जैसे

सभी ने गुथनो पे बेथ एक साथ अपने सीने पे हाथ रख एक ले में जय जय कर करने लगी

सभी ........ महामहिम की जय हो महामहिम की जय हो

काफी देर ये सब चलता रहा फिर सिंघासन पे बैठा वो साक्ष जिसे सभी महामहिम के नाम से सम्बोधित कर रहे थे उसने अपने हाथ का इशारा किया तो सभी संत हो गए

साथ में कड़ी दोनों खूबसूरत महिलाओ को महामहिम ने कुछ इशारा किया

महामहिम की आज्ञा का पालन करते हुए उनके से एक महिला ने बोलना सुरु किया

महिला 1 ......... सभी बंदी गुलामो को महामहिम के सामने पेश किया जाये

महिला की बात मानते हुए सभी बंदी गुलामो को महामहिम के सामने पेश किया गया

महामहिम ने सिंघासन पे बैठे बैठे अपना हाथ आगे बढ़ाया आवर सभी बंदियों के सरीर से उनकी जीवन ऊर्जा निकल कर महामहिम में समाहित होने लगी केवल 4 बंदियों को छोड़ कर जो दिखने में काफी हट्टे काटते योद्धा जैसे प्रतीत हो रहे थे

कुछ हे देर में सभी बंदी बचे महिलाएं लड़कियों के सरीर उसके कंकाल जैसे नजर आने लगे थे

महामहिम सभी की जीवन ऊर्जा को सोंख कर अपने सिंघासन से उठे आवर अपने सामने खड़े सभी गुलामो को देखे लगे उनने से एक बुजुर्ग शैतान जैसे दिखने वाले आदमी पे महामहिम की नजर जा कर रुकी अगले हे पल उस बूढ़े शैतान की चीख गूंज उठी

महिला 1 ......... ही अँधेरे के शैतानी गुलामो महामहिम तुम्हारे इन भेंट से खुश नहीं है इस बार पिसाच कुल ने सबसे काम योगदान महामहिम की सेवा में दिया है इस लिया पिसाच कुल के मुखिया को दंड मिला

महामहिम .......... ( गुस्से में ) सभी लोको में जाओ क़त्ले आम मचा दो पाप आवर बुराई का साम्राज्य स्थापित करो नए शैतानी गुलाम त्यार करो शैतानी सीना का निर्माण करो अन्यथा तुम सभी का अंत भी इसी प्रकार होगा जैसे पिसाच कुल के मुखिया का

महामहिम की बात सुन सभी शैतानी गुलामो को अपनी मौत नजर आ रही थी महामहिम में सभी की घिगी बंद गयी दर के मरे

सभी ने डरते डरते अपने साथ लाये उपहार दोनों महिलाओ को सौंप कर पीछे हाथ गए महामहिम तपिश महल में लौट चूका था

महिला 2 ....... तुम सभी ने महामहिम का आदेश सुना न जाओ आवर सिगरता से महामहिम के आदेश का पालन करो गुलामो इन चारो बंदियों को ज्येष्ठ बहन दृश्टिका के कक्ष में पहुंचा दो आवर इन्हे त्यार करो

कुछ गुलाम आगे आये आवर उन चारो बंदियों को अपने साथ लिए एक तरफ चल दिए इन में से जिस महिला को दृश्टिका नाम से सम्भोदित किया उसके चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान थी

सभु उपहार महल में पहुंचने के बाद दोनी महिलाये उस तरफ चल दी जिस तरफ उन बंदियों को ले जाया गया था

दृश्टिका ......... क्या हुआ देना तुमने अपने हिशे का पुरुस्कार भी मुझे सौंप दिया इसके बदले क्या चाइये तुम्हे मुझसे

देना ............ ज्येष्ठा आपको क्यों लगता है की मुझे इसके बदले कुछ चाइये आप को चारो बंदियों में आदिक रूचि थी इस लिया मैंने अपने हिशे के दोनों बंदी आपको सौंप दिए

दृश्टिका ........ हम शैतान सम्राट महामहिम के गुलाम है बिना अपने लाभ के कोई कार्य नहीं करते बोलो तुम्हे क्या चाइये इसके बदले

देना .......... ज्येष्ठा अब आप इतना आग्रह कर रही है तो भविष्य में महामहिम के क्रोध से मेरी रक्षा कर इस उपहार का अहसान उतर सकती हो

( दृश्टिका ........... मैंने कब इस से आग्रह किया आवर इस तूच से उपहार के लिया मैं महामहिम के क्रोध का सामना कृ बिलकुल नहीं )

दृश्टिका ........ बिलकुल नहीं मुझे महामहिम के क्रोध का सामना करने की ताकत नहीं है तुम अपने दो बंदियों का भोग कर सकती हो

देना . ....... अच्छा ठीक है ज्येष्ठा आपको ऐसा कुछ नहीं करना मेरे लिया किन्तु क्या हम उन बंदियों को एक साथ भोग सकती है

( दृश्टिका ........ ये देना कितनी शैतान है इसे ज्ञात था की मैं महामहिम का सामना नहीं कर सकती इस लिया जानबुज कर इसने ऐसी मांग राखी )

दृश्टिका ........ ठीक है किन्तु ये प्रथम आवर आखरी बार होगा

दोनों बाते करते हुए एक बड़े से कक्ष में पहुंची जहा दीवारों पे बहुत सी मसल जल रही थी

आवर बिच कक्ष में वो चारो बंदी पूर्ण नग्न किसी मूरत के जैसे हाथ बन्दे किसी आदेश की प्रतीक्षा में थे

जैसे वो किसी के वश में हो कर सब कुछ बिना इच्छा के करने की त्यार थे

दृश्टिका आवर देना दोनों ने अपने सरीर से काळा लबादे उतर फेंके निचे से दोनों जन्मजात नंगी थी दोनों के इसारे से चारो बंदी आगे बढे आवर उनकी योनि आवर वक्षो पे किसी वहसि दरिंदे से टूट पड़े

वही महामहिम अपने कक्ष में लौट आया था उसने आते हे अपने बिस्तर की आवर देखा जहा दो हसीं यौवतिया पूर्ण बागान एक दूसरे के अंगो का राषपन कर रही थी

महामहिं में अपने सरीर पे पन्ना ला बड़ा उतर फेंखा उसका चेहरा अब साफ साफ नजर आ रहा था जो की कंटकासुर का था आवर बिस्तर पे जो हसीं युवतिया एक दूसरे की योनि आवर वक्षो के साथ क्रीड़ा कर रही थी वो दोनों कोई आवर नहीं नगीना आवर विसुद्धि थी दोनों के सरीर में अविश्वश्नीय रूप से बदलाव आ चुके थे दोनों के नितम्ब आवर बक्शो में काफी बदलाव आ चूका था

कंटकासुर को देखते हे दोनों बिस्तर से उत्तरी आवर कंटकासुर को बिस्तर पे ढकेलते हुए कंटकासुर के भयानक लिंग का भोग करने लगी

कुछ हे समय में कंटकासुर ने दोनों को दिन रात भोगा जिससे नगीना आवर विसुद्धि की कमवशना चरम सिमा को भी पार लार चिकि थी जब भी नरकासुर उर्फ़ महामहिम कक्ष मौजूद नहीं होता तब दृश्टिका आवर देना इनके सम्भोग सेविकाए थे आवर जब कोई नहीं होता तो दोनों आपस में हे एक दूसरे की कंझावला को संत करने लगती थी ...........

नगीना ........... स्वामी आपने पिता श्री की खोज खबर ली

विसुद्धि जो नरकासुर के लिंग को चूस रही थी उसने भी अपनी गति रोकते हुए नरकासुर को देखा

नरकासुर ........ नगीना तुम चिंता क्यों करती हो पिता श्री पे मेरे गुलाम नजर बनाये हुए है

नगीना ......... अगर उन्हें हमारे विषय में ज्ञात हुआ तो

नरकासुर ......... उनने स्वयं भोग विलाश से समय नहीं मिलता आवर अगर पता करनी की कोशिश भी की तो यहाँ तक नहीं पहुंच सकते जब तक मैं न चहु

नरकासुर ने मसल से रोशन उस कक्ष में नरकासुर आवर द्वारिका द्वारा भोगी जा रही असुर आवर दांगी कन्या के कुछ अंश दिखाए जिसने देख कुछ पल तो दोनों रुक गई फिर अपने अपने कार्य में जुट गई जैसे कुछ हुआ हे नहीं नरकासुर के सम्भोग चलचित्र को देखने के बाद भी ............

अपडेट पोस्ट फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................
 
hello दोस्तों बारिश के चलते लाइट की प्रॉब्लम काफी बाद गई है इशू लिया अपडेट अभी तक लिख नहीं पाया हूँ

अभी लिखना स्टार्ट करूँगा जैसे हे अपडेट पूरा होता है पोस्ट करता हूँ

रही बात स्टोरी स्लो होने की तो कुछ अपडेट के बाद से स्टोरी कुछ टाइम के लिया फ़ास्ट फोरवोर्ड चलेगी .........
 
अपडेट. 279

नरकासुर ........ नगीना तुम चिंता क्यों करती हो पिता श्री पे मेरे गुलाम नजर बनाये हुए है

नगीना ......... अगर उन्हें हमारे विषय में ज्ञात हुआ तो

नरकासुर ......... उनने स्वयं भोग विलाश से समय नहीं मिलता आवर अगर पता करनी की कोशिश भी की तो यहाँ तक नहीं पहुंच सकते जब तक मैं न चहु

नरकासुर ने मसल से रोशन उस कक्ष में नरकासुर आवर द्वारिका द्वारा भोगी जा रही असुर आवर दांगी कन्या के कुछ अंश दिखाए जिसने देख कुछ पल तो दोनों रुक गई फिर अपने अपने कार्य में जुट गई जैसे कुछ हुआ हे नहीं नरकासुर के सम्भोग चलचित्र को देखने के बाद भी ............

अब आगे .............

सूर्य की सुबह जब अपने नियत समय से आँखे खुली तो अपने निर्वस्त्र शरीर पे खाश कोमलता का आभाष हुआ

सूर्य की बंद आँखों के सामने कल रात किरण आवर उसका प्रेम मिलान किसी मूवी की तरह चलने लगा जिसे याद कर सूर्य के चेहरे पे बहुत हे पहाड़ी सी मुस्कान फ़ैल गई आवर उसकी जंगो के बिच हलचल तेज हो गई

किरण जो पूरी निर्वस्त्र सूर्य के शरीर पे मखमली चादर के जैसे बिछी सुकून की वादियों की शेरे कर रही थी जल्दी हे उसने अपनी योनि पे किसी गरम कोमल अंग का आभाष होने से कुनमुना कर अपनी आँखे खोटी है आवर सामने सूर्य का मुस्कुराता चेहरा देख फिर से आँखे बंद कर लेती है

किरण ......... सोने दीजिये न कुंवर जी आवर परेशान मत कीजिये न

सूर्य ........ मैंने कब परेशान किया स्वीटी मैंने तो कुछ भी नहीं किया

किरण लेते लेते हे अपने एक पेअर को उठा कर अपने हाथ से सूर्य के लुंड को पकड़ कर साइड कर देती है जो किरण की योनि पे सुबह सुबह दस्तक दे रहा था

किरण ....... हम्म्म अपने नाग को पिटारा में बंद कर लीजिये

ये मुझे परेशान कर रहा है कुंवर जी

सूर्य मुस्कुरा कर किरण की योनि को सायला देता है

सूर्य ........ इसे ये बिल कुछ ज्यादा हे पसंद आ गया है तो इसमें मैं क्या कर सकता हूँ स्वीटी

किरण जो अब तक ठीक से जाग चुकी थी उसने भी चुहुल करते हुए सूर्य के अकड़े हुए लुंड को थोड़ा सकती से पकड़ा आवर बेंड कर देती है

सूर्य ....... अह्हह्ह्ह्ह स्वीटी सुबह सुबह उखाड़ने का इरादा है क्या

किरण ......... अपने नाग को काबू में रखा कीजिये नहीं तो सच में उखड दूंगी रात भर सब करके भी मन नहीं भरा क्या आपका

सूर्य ........ उम्म्म्मः बिलकुल नहीं मेरा तो अभी अभी 2,4 राउंड मरने का मन है

किरण जल्दी से सूर्य के ऊपर से उठी आवर चादर लपेट कर खड़े खड़े सूर्य को गर्ने लगती है

किरण ....... आज कल न आपकी डिमांड दिन बा दिन बढ़ती जा रही है कुंवर जी

सूर्य बीएड से उठा तो उसका नाग किसी गायक नागराज की तरह फुफकारते हुए जुलने लगता है कुछ तो सुबह सुबह का असर आवर कुछ किरण की चुहुल ने सूर्य के लुंड को पुरे आकर में ला दिया था

सूर्य ुशी स्वस्थ में आगे बढ़ा आवर किरण के शरीर से चादर हटा कर उसे अपनी गौड़ में उठा लिया आवर सीधा संअंगहर की आवर भाड़ गया एक बड़े से पानी के टब में सूर्य किरण को गौड़ में लिया उतर गया

वही बहार सभी लोग भी उठ गए थे क्यों की आज ड्रैगन लोक के लिया बहुत खाश दिन था चारो तरफ महक में तेज चहल पहल हो रही थी सभी तरफ किसी न किसी तयारी में लगे हुए थे

वही नोयों जी आवर गुरुदेव अध्यन में बे थे हुए थे

गुरुदेव ........ नियों जी सभी तयारिया समय से पूर्ण हो जाएगी न

नियों जी ....... जी गुरुदेव आप निश्चिन्त रहे आपके आदेश अनुसार सभी तयारिया समय से पूर्व हे पूर्ण हो जाएगी

गुरुदेव ......... आप जानते है न आपको आगे क्या करना है इसमें कोई चूक नहीं होनी चाइये

नियों जी ........ गुरुदेव मैं जनता हूँ मुझे क्या करना है मुझे इस पल का वर्षों से इन्तजार था ऐसे में मैं कोई चूक कैसे कर सकता हूँ

गुरुदेव ........ चूक होनी भी नहीं चाइये अन्यथा मरुत नहुष जो अपनी प्रजाति के अंतिम मरुत है उनका जीवन त्याग व्यर्थ हो जायेगा सायद हे भविष्य में आपको ऐसा फिर से कोई सुअवसर परैत हो जिसे आप अपने लोगो आवर जीवो के बिच जो जनम जन्मांतर के सम्बंद है उसे खंडित कर पाओ क्युकी ये अवसर दुबारा सायद हे प्राप्त हो

नियों जी .......... नहीं नहीं गुरुदेव ऐसा नहीं होगा किन्तु मुझे अभी भी नहुष जी के इस बलिदान का अर्थ समाज नहीं आया गुरुदेव

गुरुदेव ......... आप ये तो जानते है हे की मरुत प्रजाति का उदय ड्रागोनो के साथ साथ हे इस गाढ़ा पे हुआ था उसके बाद हे इंसानो आवर अन्य जीवो का उदय इस गाढ़ा पे हुआ था ड्रैगन आकाश के राजा थे तो वही मरुत जमीं के किन्तु ड्रैगन सदैव मरुत की दिव्या सक्तियो का सामना करने में असमर्थ थे किन्तु जब से ड्रैगन बूटी का उदय हुआ डेरी डेरी ड्रैगन सक्तिसाली होने लगे आवर मरुतो की सकतिया कमजोर पढ़ने लगी आवर उनका अंत होना आरम्भ हो गया ड्रैगन के हाथो

नियों जी ......... गुरुदेव ज्यादा विस्तृत जानकारी नहीं है मुझे इस विषय में सम्भवता मुझसे पहले के देवसुफियो को इसकी जानकारी रही होगी किन्तु.....

गुरुदेव ........ किन्तु उन सभी घटनाओ का कही कोई उल्लेख नहीं किया गया इसी लिया आप इस विषय में पूर्ण जानकारी नहीं रखते नहुष सामान्य मरुत नहीं है वो भविष्य देखने में सक्षम है इशू लिया वो अपने जीवन का त्याग कर यहाँ के मनुष्य आवर जीवो के बिच जो जनम से सम्बन्ध स्थापित है उसे विछेद ( ख़तम ) करने में अपनी अंतिम भूकर निभाना चाहते है

नियों जी ...... जी गुरुदेव मैं भी यही चाहता हूँ क्यों की सभी जानते है ड्रैगन की उम्र हम से दुगुनी होती है अगर ड्रैगन किसी योध में मारा जाता है तो उस से जुड़ा उसका रेडर अपने आप मारा जाता है ऐसा हे ड्रैगन के साथ होता है आवर आप तो ड्रैगन की पारवती से अनभिज्ञ नहीं है

गुरुदेव ........ है आवर नहुष वो अंतिम जिव है जो बिना अपने राइडर्स ( जनम से जुड़े साक्ष ) के बिना जीवित रहने वाला ड्रैगन लोक का अंतिम जिव

नियों जी ....... आपसे कुछ भूल हुई है गुरुदेव नहुष के अलावा भी ऐसा एक साक्ष आवर है

गुरुदेव ......... हाहाहाहा आपको क्या लगता है मैं इस विषय में नहीं जनता क्या आपको सच में ऐसा लगता है की जिस साक्ष की आप बात कर रहे है वो इस लिया बिना अपने ड्रैगन के जीवित रहा की आपने उसे अपना शरीर दर्जन करने दिया

गुरुदेव की बात सुन नियों जी को समाज आ चूका था की वो उस दूसरे साक्ष के विषय में उस से भी बेहतर जानते है

नियों जी ......... अगर ऐसा नहीं है तो फिर इसके पीछे क्या कारन है गुरुदेव

गुरुदेव ......... आपको क्या लगता है भविष्यवाणी ने पुत्री जूलिया को हे क्यों चुना राजसिंहासन के ुत्रादिकारी के रूप में

नियों जी ........... क्यों की किंग सोलोमन आवर क्वीन एलिज़ाबेथ की कोई संतान नहीं है इस लिया ......

पैर अचानक से नियों जी बोलते बोलते रुक जाते है आवर अपनी फटी हुई आँखों से गुरुदेव को देखने लगते है

गुरुदेव ......... हाहाहा हमें आपसे ये उम्मीद नहीं थी आप भविष्य की जलक देख सामने में सक्षम होने के बाद भी नहुष की माया से भ्रमित हो गए हाहाहा

नियों जी का सर सरम से मुख गया जैसे उन्होंने कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया हो

गुरुदेव ......... डेवलिन वो पहले साक्ष है जिसे नहुष ने इस सम्बन्ध से मुक्त किया था जब डेवलिन गोल्डन ड्रैगन सिटी का आवर आपके समुदाय का त्याग कर यहाँ से निकले थे तभी उनकी नहुष से भेंट हुई थी नहुष ने भविष्य पूर्व में हे देख लिया था इस लिया उन्होंने डेवलिन आवर उनके ड्रैगन का सम्बन्ध विछेद किया था डेवलिन जी की पत्नी यथार्थ पुत्री जूलिया की माता कोई आवर नहीं थी नहुष की पुत्री आवर मरुत प्रजाति की राजकुमारी थी

गुरुदेव के मुँह से इतने बड़े रहश्य का खुलाशा होने पे नियों जी तो जैसे सदमे में जा चुके थे गुरुदेव उनने देख मुस्कुराये बिना न रह सके

नियों जी को काफी समय लगा सँभालने में

नियों जी .......... ये कैसे संभव हो सकता है गुरुदेव मरुत आवर इंसानी मिलान हमारा मतलब है की डेवलिन एक मनुष्य है जबकि नहुष जी की पुत्री राजकुमारी जी तो जीवो की श्रेणी में आते है फिर इनका मिलान कैसे संभव हुआ आवर क्या डेवलिन जी ये बात जानते है

गुरुदेव ......... डेवलिन जी ये बात जानते थे किन्तु नहुष ने उनकी इन यादो को अपनी सकती से कैद कर दिया तभी वो उन्हें पहचान नहीं पाए मरुत राजकुमारी ने इंसानी रूप में हे डेवलिन जी से विवाह किया था आवर उसकी मरुत समुदाय को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी जिस से मरुत प्रजाति का बचा हुआ अस्तित्व हे समाप्त हो गया था राजकुमारी जी को इंसानी रूप पर्सन करने के लिया सभी मरुतो ने अपनी सम्पूर्ण सकतिया राजकुमारी जी को इंसानी रूप देने में लगा दी आवर इस कार्य में उनका जीवन का अंत हो गया पुत्री जूलिया मरुत आवर इंसानी नेसल का मिलान ( मिक्स ब्लड )है

नियों जी ......... तो क्या इसी लिया प्रिंसेस जूलिया को रैसिंघासन का ुत्रादिकारी चुना है आवर क्या उनके भी मरुतो की दिव्या सकतिया है

गुरुदेव ......... है ये सत्य है किन्तु पूर्ण सत्य नहीं मरुतो की सकतिया पुत्री जूलिया में है जो पुत्र सूर्य के विवाह उपरांत जागृत होंगी किन्तु पुत्री जूलिया का मरुत अंश होने से उसे ुत्रादिकारी नहीं चुना गया है अपितु पुत्र सूर्य आवर पुत्री जूलिया के मिलान से जिस अंश का जनम होगा उसे राजसिंहासन ने चुना है वो ड्रैगन लोक का अंतिम सम्राट होगा

नियों जी ......... मरुत नहुष जी ने इस लोक के कल्याण के लिया कितना कुछ बलिदान किया है पहले अपनी पुत्री आवर अपने हे प्रजाति का बलिदान आवर अब अपने जीवन का अंत करने जा रहे इस लोक के कल्याण में

गुरुदेव फीकी नाशी हस्ते हुए नियों जी को देखते है

गुरुदेव ........... बड़ी सकती के साथ बड़ा दायित्व भी आता है ये कोई नहीं देखता की उन दायित्व को पूर्ण करने के लिया क्या क्या बलिदान कर्जा पड़ता है

नियों जी. ........ मरुत नहुष जी ने अपने बलिदानो से साबित कर दिया है की उनका स्थान देव तुल्य है गुरुदेव

गुरुदेव. .......... उचित कहा आपने अब आप पे है की आप आवर ड्रैगन लोक उनके बलिदानो का क़र्ज़ किस तरह से चूका ते है

जाइये आवर राज्य अभिषेक की तयारिया कीजिये हम नहुष जी मिलने जा रहे है

गुरुदेव अध्यन से निकल कर जंगल की आवर चक देते है

नियों जी भी भोजील मन से महल की आवर चल दिए आज उनके दिल में जहा एक तरफ ख़ुशी थी वही अब बहुत बड़ा दुखो का पहाड़ भी था

सभी तयारिया पूरी हो चुकी थी गुरुदेव भी लौट आये थे

स किरण मंसू जूलिया शालिनी जी क्वीन एलिज़ाबेथ सभी त्यार हो चुके थे

सभी सिटी से उनके प्रतिनिधि सह परिवार गोल्डन ड्रैगन सिटी पहुंच चुके थे

गोल्डन ड्रैगन पैलेस का कक्ष वैसे तो काफी बड़ा था जिसमे आराम से काफी संख्या में लोग आ सकते थे किन्तु गुरुदेव के आदेश पे नियों जी ने खुले में राज्याभिषेक की तयारिया की थी ताकि राज्याभिषे में शामिल लोग सभी पर्किर्या को देख सके

एक बड़ा सा छोड़ा सा मंच त्यार किया गया था जिसपे बहुत से सिंघासन लगे हुए थे उनके बिच एक बड़ा सा छोड़ा खूबसूरत सिंघासन भी लगा हुआ था जिसपे बहुत से जीवो की आ करती उभरी हुई थी

सामने खुले मैदान में हजारो की संख्या में लोग खड़े हुए थे मंच के ठीक सामने कुछ कदम की दुरी पे एक छोटा मंच आवर बना हुआ था जिसपे हवन का निर्माण किया हुआ था आवर कुछ चौकिया लगी हुई थी

नियों जी आवर डेवलिन जी सब कुछ अपनी देख देख में कर रहे थे

कुछ हे देर में गुरुदेव नहुष के साथ वह पधारे

सभी लोग उन्हें देख कर चौंक गए थे क्युकी दोनों को हे सभी ने पहली बार देखा था जहा गुरुदेव यहाँ के इंसानो स अलग लग रहे थे वही मरुत नहुष की प्रजाति के विषय में कोई जनता नहीं था

गुरुदेव सीधा हवं मंच पे पहुंचने आवर एक चौकी पे विराजमान हो गए

ीदार गोल्डन ड्रैगन पैलेस से किरण मानसी शालिनी जी जूलिया क्वीन एलिज़ाबेथ आवर बहुत सी महिलाएं सेविका के साथ पहुंची

उनके कुछ देर बाद हे सूर्य आवर किंग कुछ मुख्या सेनिको के साथ वह पहुंचे

सूर्य किरण आवर किंग एंड क्वीन चारो सीधा गुरुदेव के पास हवं मंच पे पहुंचे गुरुदेव ने हवं पूजा सुरु कर दी करीब आधे घंटे बाद पूजा पूर्ण हो गई

गुरुदेव ......... नियों जी राजमुकुट सुधिकरण पूर्ण हुआ पुत्र सूर्य का विधिवत राज्याभिषेक आरम्भ कर सकते है

गुरुदेव की आज्ञा मिलते हे कुछ सैनिक तेजी से वह जल दुग्ध सहद चन्दन कुमकुम आदि के थल आवर भरे हुए पत्र लिया उपस्थित हुए

सूर्य हवं मंच से निचे उठा आवर नियों जी आवर गुरुदेव के साथ एक दिशा में भाड़ गया जाया दुग्ध सहद जल चन्दन आदि से सूर्य को सनान कराया गया

सूर्य वस्त्र बदल कर किरण के साथ मंच पे सिंघासन के पास पहुंचा जहा शालिनी जी आवर मानसी ने गुरुदेव के आदेश अनुसार आरती कर सूर्य आवर किरण को तिलक किया

किंग सोलोमन आवर क्वीन एलिज़ाबेथ ने सूर्य आवर किरण को राजसिंहासन पे बिठाया

नियों जी के इशारे से 2 सवर्ण थल लिया सादिया उपस्थित हो गयी

नियों जी ने दोनों थल पर से कपडा हटाया तो उनमे वही दोनों सरवन मुकुट रखे हुए थे जिनका कुछ समय पूर्व हे पूजा कर सुधिकरण किया गया था

गुरुदेव ........... नियों जी आप ड्रैगन लोक के देवसूफ़ी है इस लिया पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण के सर को राजमुकुट से आप हे सुसज्जित करे

नियों जी ने ख़ुशी ख़ुशी गुरुदेव की आज्ञा ला पालन किया आवर पहला मुकुट अपने हठी में लिया

सूर्य सिंघासन से उठा आवर अपना एक पेअर मोड़ कर नियों जी के सामने जुखा नियों जी ने मुकुट सूर्य के सर पे सुसज्जित कर दिया

ऐसा हे किरण ने किया दूसरा मुकुट किरण के सर पे सुसज्जित कर दिया गया

नियों जी ने दोनों को कंधे से पकड़ कर खड़ा किया आवर उन्हें सम्मान पूर्वक राज सिंघासन पे बैठा दिया

कुछ हे पालो में सिंघासन से सतरंगी रौशनी निकली आवर सूर्य किरण को अपने अंडे ले लिया कुछ देर बाद रौशनी दोनों मुकुट में समाहित होने लगी

सूर्य आवर किरण को बड़ा हे सुखद आभाष होने लगा दोनों को अपने भीतर ऊर्जा आवर सकती का भंडार महसूस होने लगा

दोनों अभी भी आँखे बंद किये हुए थे आवर उनकी आँखों के सामने पूरा ड्रैगन लोक गम रहा था जैसे सूर्य आवर किरण ड्रैगन लोक के हर हिस्से को वही से बैठे बैठे साफ साफ देख हे नहीं बल्कि मह्सुश भी कर प् रहे हो

कुछ हे बाद रौशनी ख़तम हो गई आवर दोनों ने अपनी आँखे खोली

नियों जी .......... अब से आप ड्रैगन लोक के किंग है किंग सूर्य शिव ठाकुर आवर आप ड्रैगन लोक कीक्वीन है क्वीन किरण सूर्य ठाकुर

ड्रैगन लोक के किंग आवर क्वीन बनने के लिया आपको ढेरो शुभकामनाये किंग एंड क्वीन

गुरुदेव .......... ड्रैगन लोक के राजा आवर रानी बनने की ढेरो शुभकामनाये पुत्र सूर्य पुत्री किरण

सूर्य आवर किरण अपने सिंघासन से उठे आवर सीधा गुरुदेव के चरण स्पर्श किया

सूर्य .......... गुरुदेव आपके आशीर्वाद के बिना ये संभव नहीं था भले हे हम ड्रैगन लोक के राजा आवर रनो बन गए किन्तु आपके लिया सदैव आपके शिष्य आवर पुत्र पुत्री हे रहेंगे गुरुदेव

गुरुदेव सनेह से दोनों को ढेरो आशीर्वाद देते है

सूर्य किरण नियों जी का आशीर्वाद ले कर शालिनी जी से ासुरवाद लेते है शालिनी जी ख़ुशी से भीगी हुई आँखे लिया सूर्य आवर किरण को अपने सीने से लगा लेती है

किसी भी माता पिता के लिया ये पल बेहद हे खाश पल होता है जब अपनी संतान को सफलता के सिखर पे बैठा हुआ देखते है

शालिनी जी ........ मैं आज बहुत खुश हूँ बीटा पैर कभी भी इसका घमंड मत करना तुम राजा जरूर बने हो पर यहाँ की प्रजाति के मालिक नहीं उनकी सेवा आवर सुरक्षा तुम दोनों का मुख्या कर्त्तव्य है

सूर्य. ...... जी माँ

सूर्य किंग क्वीन डेवलिन जी से भी आशीर्वाद लेता है आवर सभी पर्तिनिधियो से भेंट करता है

सभी से भेंट कर सूर्य किरण राजसिंहासन पे जा कर बेथ जाते है

तभी मरुत नहुष मंच पे आता है

आवर सिंघासन के सामने खड़ा हो जाता है

सूर्य आवर किरण उनकी ऊर्जा को मह्सुश कर प् रहे थे जो पहली मुलाकात से कही गुना आदिक थी

गुरुदेव .......... पुत्र सूर्य पुत्री किरण ये मरुत सम्राट नहुष है आवर तुम्हारे नाना ससुर भी इनका आशीर्वाद लो

सूर्य .......... क्याआ कहा ननसासुर

सूर्य ने चौंक ते हुए कहा बाकि सभी भी मुँह फाडे गुरुदेव को देख रहे थे तभी डेवलिन जी को अचानक से पता नहीं क्या हुआ आवर वो नहुष के सामने आता है आवर भीगी हुई आँखे लिया अपने गुथनो पे बेथ उनके सामने हाथ जोड़ देता है

नहुष ......... उठो पुत्र डेवलिन

डेवलिन जी ......... मान्यवर सम्राट नहुष मुझे माफ कर दीजिये मैं आपकी पुत्री राजकुमारी मरिया की रक्षा नहीं कर पाया

जूलिया जो पहले से हे कन्फ्यूज्ड कड़ी कड़ी अपने पिता को देख रही थी वप अपनी माँ का नाम नहुष की पुत्री के रूप में सुन कर आवर भी चौंक जाती है

नहुष .......... पुत्र डेवलिन जिसका समय पूर्ण हो जाता है उसे अपने मोक्ष धाम लौटना हे पड़ता है पुत्री मरिया का जीवन कल उतना हे था प्रिंसेस जूलिया को जनम दे कर उसका उद्देश्य पूर्ण हो चूका था इस लिया उसे जाना पड़ा तुम स्वयं को इसका दोषी मत संजो पुत्र

जूलिया अभी भी कन्फ्यूज्ड थी इस लिया उस से आखिर रहा नहीं गया तो पूछ हे लिया

जूलिया ......... पिता श्री ये कोण है

डेवलिन अपनी भीगी हुई आँखों से जूलिया को देखते है

डेवलिन जी ....... जूलिया मेरी बची ये तुम्हारी माँ राजकुमारी मरिया के पिता है मरुत सम्राट नहुष

गुरुदेव ........... है पुत्री जूलिया ये सत्य है तुम्हारी माता राजकुमारी मरिया मरुत सम्राट नहुष की हे पुत्री थी जिनका विवाह इन्होने डेवलिन से करवाया था जिनका जीवन का मुख्या उद्देश्य था तुम्हे जनम देना

जूलिया की आँखों से निरंतर आंसू बाह रहे थे बार बार उसकी आँखों के सामने उसकी माँ का चेहरा आवर माँ बेटी के बचपन के वो लम्हे याद आ रहे थे जो दोनों ने एक साथ बिताये थे

शालिनी जी ने जूलिया को अपने सीने से लगा कर संत करने लगी किन्तु जूलिया के मन में तो उथल पुथल मची हुई थी

तभी नहुष अपना रूप त्याग कर इंसानी रूप लेता है

नहुष चलते हुए जूलिया के पास आता है आवर प्यार से अपना हाथ जूलिया के सर पे फिरता है

जूलिया नहुष का सनेह रूपी हाथ अपने सर पे मह्सुश करती है तो उसे ऐसा लगता है जैसे उसकी माँ प्यार से उसके सर को सहला रही है

नहुष ........... मुझे माफ कर देना मेरी राजकुमारी मुझे बहुत पहले हे तुम्हे सब सत्य बता देना चाइये था किन्तु मैं विवश था

जूलिया ........ आपने ऐसा क्यों किया क्यों आप हमसे दूर रहे क्यों कभी आप मुझसे मिलने नहीं आये

नहुष ......... मेरी विवस्ता थी पुत्री तुम सभी से दूर रहने की मैं तुम्हारे जीवन को संकट में नहीं दाल सकता था अगर किसी को ज्ञात होता की तुम्हारी वास्तविकता क्या है तो तुम आवर ज्यादा खतरे में पद जाती इसी लिया सदैव तुमसे दूर रह कर तुम्हारी रक्षा करता रहा

डेवलिन जी ......... क्या आप पहले से पुत्री जूलिया को जानते थे

तभी नहुष एक बार फिर से अपना रूप बदलता है इस बार वो जिस रूप में थे उसे देखते हे जूलिया बोल पड़ी ...बाबा आप .....

जूलिया .. ...... क्या आप सच में वही थे

दरशल जूलिया को जब लगा की उसके पिता योध में मरे गए है तब जूलिया ड्रैगन सिटी से भाग गई थी तब इसी साक्ष ने उसे सरन दी थी जिसे मुखिया के नाम से लोग बुलाते थे आवर जूलिया बाबा के नाम से सूर्य किरण मानसी जब पहली बार ड्रैगन लोक आये थे तब जूलिया गिफ्ट गुफा में इनके पास हे ले कर गयी थी किरण सूर्य आवर मानसी को

नहुष ....... यही सच है पुत्री मुझे अपनी वास्तविकता छुपा कर रखनी पड़ी क्युकी जब तक प्रिंस सूर्य से तुम्हारा मिलान नहीं हो जाता तब तक तुम पे सदैव खतरा रहता इसी लिया मुझे ऐसा करना पड़ा

गुरुदेव ......... नहुष जी अब आप वो कार्य कर सकते है जिसका आपने इतना लम्बा इन्तजार किया है

नहुष एक बार फिर से मरुत होश जैसे रूप में आता है आवर उनके बारे सिंघा जैसे सिंघी के बिच गोल्डन रौशनी एकत्रित होने लगती है जो जल्दी हे किसी तरह की गोल्डन मणि में बदल जाती है

जो अपने आप हे उड़ते हुए सूर्य के सर पे पहने मुकुट में जा लगती है मुकुट में कुछ पल परिवर्तन हुआ उसके बाद स्थायी रूप से वो गोल्डन मणि मुकुट में लग गई

सूर्य की अचानक से एक झटका लगा आवर उसकी आँखे बंद हो गई

करीब 5 मिनट्स बाद सूर्य की आँखे खुली जो अब पूरी तरह से सुनहरी हो चुकी थी

नहुष एक बार फिर से मानव रूप में आता है

नहुष. ....... मुझे उम्मीद है सम्राट सूर्य आप इस दिव्या सकती का उचित उपयोग करेंगे

सूर्य ........ मैं आपको वचन देता हूँ इस दिव्या सकती का कभी भी दूर उपयोग नहीं होगा

सूर्य अपने सिंघासन से खड़ा होता है आवर अपनी आवाज बुलंद करते हुए बोलता है

सूर्य ........ मेरे ड्रैगन लोक के वासियो मैं सम्राट सूर्य शिव ठाकुर मरुत सम्राट नहुष जी द्वारा दी गई दिव्या सकती का प्रयोग करते हुए इंसान आवर जानवर का जनम से जुड़ा सम्बन्ध विछेद ( ख़तम ) करने की घोषणा करता हूँ आपकी प्रिंसेस जूलिया के घरब से जब आपका युवराज जनम लेगा ुशी पल से ड्रैगन आवर इंसानो के बिच जनम का सम्बन्ध ख़तम हो जायेगा जिस से किसी भी राइडर्स या ड्रैगन की मृत्यु उसके राइडर्स या ड्रैगन की वजह से मृत्यु नहीं होगी

सभी तरफ काना फुसशि सुरु हो गई थी की ये कैसी घोषणा कर दी सम्राट ने

सूर्य ........ मैं जनता हूँ आप में से बहुत से लोगो ने अपने को इस िस्थित में खोया होगा जहा ड्रैगन या अन्य जीवो की आपसी लड़ाई ने अपनों को खोया होगा किन्तु यदि आप जनम समबन्द बनाये रखना चाहते है तो आप अपने ड्रैगन के साथ ब्लड पैक कर सकते है मतलब की दोनों की सहमति से एक दूसरे को अपना साथी चुन सकते है बस एक दूसरे को सहमति से अपने अपने रकत की एक बून्द एक दूसरे को पिलानी होगी आवर दोनी का सम्बन्ध बन जायेगा इसी तरह दूसरी बार अपने रकत का प्रयोग कर अपनी इच्छा से इसका ख़तम भी किया जा सकता किन्तु ऐसा केवल दो हे बार किया जा सकता है

गुरुदेव ......... उतर अति उत्तम पुत्र तुमने सभी के लिया उत्तम आवर उचित मार्ग निकला है वहां आवर स्वामी दोनों को अपनी इच्छा अनुसार कार्य करने का असर दिया है

नियों जी ....... पैर इस तो ड्रैगन पे से नियंत्रण पूरी तरह से ख़तम हो जायेगा आवर वो किसी पे भी हमला कर मर सकते है

सूर्य ......... ऐसा नहीं होगा क्युकी नहुष जी द्वारा दी गई इस दिव्या मणि से सभी जिव राजमुकुट की इच्छा के ादिन है केवल वो तभी हमला करेंगे जब कोई उन्हें विवश करेगा उन्हें हमला करेगा अन्यथा ये सभी जिव सहर से कसबे से गाँवो से दूर जंगल में रहेंगे केवल अपने राइडर्स के बुलाने पर हे ये इंसानो के करीब आएंगे

कुछ देर आवर राज्याभिषेक समारोह चलता रहा

उसके बाद सूर्य किरण सभी के साथ महल लौट गए आवर दावत का आनंद लेने लगे

नहुष जी भी सभी के साथ दावत में शामिल हुए

गुरुदेव ने उनसे जुडी जो जरुरी बाते थी सभी को बताई

जूलिया ने जब उनके देह त्याग की बात सुनी तो वो विचलित हो गई

जूलिया की इस्थिति को देखते हुए सूर्य आवर किरण ने उनसे कुछ समय आवर माँगा नहुष जो भविष्य देख सकता था उसे पहले हे ज्ञात हो गया था इस बारे में इस लिया उसने कुछ दिन जूलिया आवर डेवलिन के साथ बिता कर अपनी देह त्याग का आश्वासन दिया हलाकि जुली अभी भी उदाश थी पैर वो पहले से काफी खुश थी

गुरुदेव ने जूलिया के लिया महल में हे एक ऐसे कक्ष का निर्माण किया जिसमे समय की रफ़्तार बहुत काम थी ताकि जूलिया आदिक से आदिल ध्यान आवर योद्धा अभ्यास काम समय में भी कर सके

सूर्य ने किंग होने के नाते कुछ आवर आदेश सभी पर्तिनिधियो को दिए आवर उन्हें उपहार दे कर विदा किया गुरुदेव साम को नहुष से मिल कर परीलोक लौट गए थे

सूर्य शालिनी जी किरण मानसी अगली सुबह परीलोक के लिया निकलने वाले थे

जबकि जूलिया कुछ समय ड्रैगन लोक में हे रहने वाली थी अपनी माँ के विषय में आदिक से आदिक जानने के लिया

जूलिया किंग आवर क्वीन डेवलिन पुर नियों जी के साथ हे सूर्य जीनत परिजाय के विवाह में शामिल होने वाली थी ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
 
अपडेट. 280

गुरुदेव ने जूलिया के लिया महल में हे एक ऐसे कक्ष का निर्माण किया जिसमे समय की रफ़्तार बहुत काम थी ताकि जूलिया आदिक से आदिल ध्यान आवर योद्धा अभ्यास काम समय में भी कर सके

सूर्य ने किंग होने के नाते कुछ आवर आदेश सभी पर्तिनिधियो को दिए आवर उन्हें उपहार दे कर विदा किया गुरुदेव साम को नहुष से मिल कर परीलोक लौट गए थे

सूर्य शालिनी जी किरण मानसी अगली सुबह परीलोक के लिया निकलने वाले थे

जबकि जूलिया कुछ समय ड्रैगन लोक में हे रहने वाली थी अपनी माँ के विषय में आदिक से आदिक जानने के लिया

जूलिया किंग आवर क्वीन डेवलिन पुर नियों जी के साथ हे सूर्य जीनत पारिजात के विवाह में शामिल होने वाली थी ...............

अब आगे ................

गुरुदेव कल की साम को हे ड्रैगन लोक से परीलोक लौट चुके थे

सूर्य शालिनी जी किरण मानसी आज परीलोक लौटने वाले थे आज सूर्य को ड्रैगन लोक आये 4 दिन हो चुके थे

जूलिया सभी के वापिस जाने की बात से बहुत उदाश थी पैर वो कुछ कर भी नहीं सकती थी

शालिनी जी ने जूलिया की ुदशी को समझते हुए एक माँ की तरह जूलिया को प्यार से संजय तक कही जा कर जूलिया के मन से ुदशी के बदल छठे

सभी ने साथ में मिल का सुबह का नास्ता किया

किंग सोलोमन क्वीन एलिज़ाबेथ डेवलिन जी ने बहुत से बहुमूल्य उपहारों से सभी को नवाजा

सूर्य ने किंग सोलोमन को कार्यकारी राजा के टूर पे कार्यभार सौंपा जिसमे डेवलिन जी के साथ साथ नियों जी की सहमति भी आवशयक थी

सभी आवशयक कार्य पूर्ण कर सूर्य किरण मानसी शालिनी जी ने सभी से विदा ली इस दौरान जूलिया की आँखों से निरंतर अश्रु धरा बाह रही थी

कुछ हे समय में जहा शालिनी जी ने जूलिया के दिल में माँ का स्थान बना लिया था वही किरण मानसी से बड़ी बहनो का प्रेम मिला था

सभी से अलगाव से जूलिया व्यथित थी भले हे वो सभी जल्दी हे परीलोक में सूर्य के विवाह में फिर से मिलने वाले थे

सूर्य टेलेपोर्टेशन सकती का इस्तेमाल कर शालिनी जी किरण मानसी को अपने साथ लिया सभी से विदा ले टेलेपोर्टेशन द्वार में इंटर कर गया

सूर्य की फ़िलहाल की ड्रैगन लोक की यात्रा पूर्ण हो चुकी थी ड्रैगन लोक के नई सम्राट के रूप में

सूर्य के जाते हे गमहीन जूलिया अपने कक्ष में लौट गई

डेवलिन जी जूलिया को ुदशी भरे चेहरे से अपने कक्ष में जाते हुए देख रहे थे

नियों जी .......... डेवलिन जी प्रिंसेस जूलिया को कुछ समय एकांत में वयतीत करने दीजिये

डेवलिन जी ........ मैं आपके सुझाव से सहमत हूँ देवसूफ़ी जी किन्तु जूलिया को इस तरह उदाश भी नहीं देख सकता

नहुष .......... क्वीन एलिज़ाबेथ आप प्रिंसेस जूलिया के पास जाइये उसे इस वक़्त आपकी सबसे ज्यादा जरुरत है

कहते हुए नहुष उन्हें एक तस्वीर देता है जो किसी महिला की थी बहुत हे खूबसूरत जो जूलिया से काफी मिलती जुलती थी

डेवलिन जी ........ ये तो जूलिया की माँ राजकुमारी मरिया की तस्वीर है

अपनी पत्नी की तस्वीर को देख डेवलिन जी की आँखे भी नाम हो गई

डेवलिन जी ........ काश मरिया भी हमारे बिच होती तो आज जूलिया को वो स्वयं संभल लेती

क्वीन .......... आप चिंता न करे डेवलिन जी मैं प्रिंसेस जूलिया के पास जाती हूँ

क्वीन एलिज़ाबेथ अपने हाथ में तस्वीर लिया जूलिया के कक्ष की आवर भध गई जो की अंदर से बंद था

कुछ कोशिश के बाद जूलिया ने अपनी आँखे साफ कर अपना कक्ष का द्वार खोला सामने क्वीन एलिज़ाबेथ कड़ी हुई थी

जूलिया ........ आप यहाँ पर

क्वीन ......... क्या मुझे अंदर आने की इजाजत नहीं है

जूलिया ........ माफ़ कीजिये आप अंदर आइये

जूलिया क्वीन एलिज़ाबेथ को साइड हो कर रूम में आने की जगह देती है

जूलिया की नजर जब क्वीन के हाथो पे पड़ी तो फ़ौरन उसके चेहरे के भाव बदल गए

क्वीन .......... ये तस्वीर तुम्हारी माँ मरिया की है जूलिया तुम्हारे नाना जी ने तुम्हारे लिया भेजी है

जूलिया फ़ौरन आगे बढ़ उनके हाथो से लगभग तस्वीर चीन हे लेती है

तस्वीर को देख कर जूलिया की आँखे फिर से डबडबाने लगी

क्वीन एलिज़ाबेथ ने जूलिया की आँखे पूछते हुए उसे बीएड पे बिठाया

जूलिया .......... थैंक यू क्वीन

क्वीन ........... तुम मुझे मेरे नाम से बोल सकती हो प्रिंसेस या किसी आवर नाम से सम्बोधित कर सकती हो

वैसे तुमने पृथ्वीलोक पे काफी समय बिताया है वह लोगो की किस तरह से सम्बोधित किया जाता है

जूलिया. ......... आप भी तो पृथ्वीलोक जा चुकी है आपको तो पता होगा हे

क्वीन ....... मैंने केवल एक बार पार्थवलोक की यात्रा की है इस लिया मुझे वह का इतना ज्ञान नहीं जितना तुम्हे है

क्वीन डेरी डेरी जूलिया का ध्यान भटकने में कामयाब हो रही थी फिर सूर्य के बाकी परिवार के बारे में आवर जूलिया के वह बिताये समय के बारे में बात करने लगी जल्दी हे जूलिया मुस्कुराने लगी आवर सूर्य आवर उसके परिवार में बिताये हुए खुशनुमा पल बताने लगी

परीलोक ..........

परीलोक में जोरो शोर से विवाह की तयारिया की जा रही थी गुरुदेव ने सीमा सुरक्षा आवर भी आदिक कर दी थी

वही जीनत भी अपने लोक लौट चुकी थी अपनी सखी के साथ

गुरुदेव ने सभी को सूर्य की ड्रैगन लोक विजय यात्रा के विषय में सभी को बताया तो सभी बहुत खुश हुए थे

अभी गुरुदेव विधि आवर गायत्री को उनके ध्यान लगाने आवर अगले तत्वा को जागृत करने में मार्गदर्शन कर हे रहे थे की तभी उन्हें टेलेपोर्टेशन सकती का आभाष होता है सवतः हे उनकी नजरे सुपर आकाश की आवर उठ जाती है जहा एक बड़ा सा टेलेपोर्टेशन ब्लैक हॉल द्वार बन रहा था

गुरुदेव को अचानक से चुप होते देख विधि आवर गायत्री ने भी उनकी आवर देखा आवर उनकी नजरो का पीछा किया जो आकाश में जमी हुई थी

तभी टेलेपोर्टेशन द्वार से गोल्डन ड्रैगन पे स्वर शालिनी जी आवर किरण टेलेपोर्टेशन द्वार से बहार निकलती है ठीक उनके पीछे वाइट ड्रैगन जिसपे आगे मानसी आवर पीछे सूर्य बैठा हुआ था

सूर्य आवर किरण दोनों जमीं पे उतारते हे अपने अपने ड्रैगन को ऊर्जा रूप में अपने भीतर समाहित कर लेते है

उद्यान में गुरुदेव को विधि आवर गायत्री को शिक्षा देते देख सूर्य किरण मानसी शालिनी जी चारो गुरुदेव की आवर भाड़ जाते है

सभी गुरुदेव के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेते है

गुरुदेव .......... दीर्घायुष्मन भाव ईश्वर सभी पे अपनी कृपा दृस्टि बनाये रखे

सूर्य ........... विधि गायत्री तुम दोनों का अगला तत्वा जागृत हुआ की नहीं

सूर्य की बात सुन दोनों न में सर हिला देती है

गुरुदेव......... सिगरा हे दोनों अपने अपने दूसरे तत्वा को जागृत करने में सफल हो जाएँगी पुत्री विधि आवर गायत्री दोनों हे इसके लिया बहुत परिश्रम कर रही है पुत्र सूर्य

सूर्य ........ जी गुरुदेव आपके मार्गदर्शन से ये सिगरा हे अपने तत्वों को जागृत कर पूर्ण नियंत्रित करने में सक्षम होंगी

शालिनी जी विधि आवर गायत्री को गले से लगा कर उनका माथा चुम लेती है

शालिनी जी ......... मेटि दोनों बछिया बहुत समझदार है मुझे उम्मीद है की जल्दी हे गुरुदेव की चाय में रह कर बहुत कुछ शिख जाएँगी

विधि आवर गायत्री मानसी आवर किरण से भी ुशी तरह से प्रेम से गले लग कर मिलती है जैसे अपनी बड़ी बाँहों से मिल रही हो

कुछ देर बाद गुरुदेव ने सूर्य को छोड़ा कर सभी को जाने को कहा विधि आवर गायत्री भी शालिनी जी मानसी किरण के साथ पारी महल आ गई

सूर्य आवर गुरुदेव के बिच काफी समय तक ड्रैगन लोक आवर विवाह को ले कर बात चित चलती रही

करीब एक घंटे बाद सूर्य गुरुदेव से विदा ले पारी महल आ गया वही गुरुदेव उद्यान से कही के लिया अंतर्ध्यान हो गए

सूर्य जब पारी महल पहुंचा तो रानी पारी परिधि आवर रिद्धि सभी के साथ जेठी हुए बाते कर रही थी

सूर्य सीधा रानी पारी के सामने पहुंचा आवर उनके चरण स्पर्श किये रानी पारी ने सूर्य को गले लगाने के बाद उसका माथा चुम लिया

परिधि आवर रिद्धि भी सूर्य से उतने हे प्यार से गले लग कर मिली

रानी पारी ....... पुत्र सूर्य ड्रैगन लोक का सफर कैसा रहा आप सब का

सूर्य .......... आप तो पहले से हे जानती है रानी माँ इस विषय में गुरुदेव ने तो आपकी सब बताया हे होगा मेरे जाने के बाद क्या _क्या फिर से असुरो की आवर से किसी तरह की कोई गुस्पेट तो नहीं हुई

रानी पारी ........ अभी तक तो िस्थित सामान्य है पुत्र फिर भी गुरुदेव ने परीलोक की सीमा सुरक्षा आवर भी सुदृढ़ कर दी है ताकि विवाह में किसी भी तरह का कोई विघ्न न उत्पन्न कर पाए असुर

सूर्य ......... हम्म गुरुदेव ने सब सोच समाज कर किया है हमें अपनी सुरक्षा स्वयं हे निर्धारित करने चाइये इस्थिति को बदलते देर नहीं लगती

रानी पारी ...... उचित कहा पुत्र तुमने जाओ जा कर कुछ पल परिधि के साथ बिताओ फिर विवाह से पहले भेंट नहीं हो पायेगी तुम दोनों की

सूर्य परिधि को देख मुस्कुरा देता है जो शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी

किरण ........ परिधि तो बहुत शर्मा रही है रानी माँ मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की वो अभी विवाह नहीं करना चाहती हो

परिधि ......... हमने ऐसा कब जताया दीदी हम तो कब से विवाह करना चाहते है

किरण ........ कब से

परिधि की बात सुन रिद्धि अपना सर पिट लेती है

रिद्धि ......... रानी माँ अब तो मुझे भी लग रहा है की हमें कुछ समय के लिया परिधि की विवाह तिथि ताल देनी चाइये ये अभी भी बची हे है

परिधि ....... दीदी आप भी हमारा खाश ुधा रही है

शालिनी जी ........कोई मेरी बची का ुफश नहीं उड़ाएगा यहाँ आओ परिधि

पारिजात मुँह फुलाए शालिनी जी के पास सात कर बेथ जाती है

शालिनी जी . ......... अरे सभी मजाक कर रहे तुमसे ऐसे मुँह नहीं फूलते परिधि बीटा देखो तो कैसे लाल गुलाबी बंदरिया लग रही हो इस तरह मुँह फूलने से

परिधि ......... शालिनी माँ बस आप हे है जो मुझे प्यार करती है

परिधि का ऐसे बचो की तरह से रूठा आवर शालिनी जी का बातो बातो में उसे ले कर जो मजाक किया उसे बिना सामने उनका हे पक्ष लेते देख सभी डाभी हुई हाशि हसने लगते है

शालिनी जी ........ अच्छा तुम जाओ सूर्य के साथ फिर हमें घर भी जाना है

परिधि शालिनी जी के दोनों गलो को चुम कर सूर्य का हाथ पकड़ वह से अपने कक्ष की आवर भाड़ गई

शालिनी जी ......... रानी पारी विवाह की तयारिया कैसी चल रही है

रानी पारी ........ लगभग सभी तयारी पूरी हो चुकी है

शालिनी जी .......... आवर जीनत के विवाह की तयारी भी तो आप हे देख रही है न

रानी पारी ........ नहीं पुत्री जीनत का विवाह अवश्य यहाँ हो रहा है किन्तु पुत्री जीनत के विवाह की सभी तयारिया गुरुदेव ने गुप्त राखी है अभी इस लिया हम नहीं जानते

शालिनी जी. ........ सम्भवता गुरुदेव कुछ खाश विधि से विवाह करवाने का विचार है जिस से हम सभी अनभिज्ञ है

उदार सूर्य परिधि के कक्ष में पहुंचे हे परिधि को अपनी गौड़ में उठा कर सीधा आलिशान बीएड पे ले आता है

परिधि को बीएड पे लिटा सीधा उसके होंठो पे टूट पड़ता है

परिधि भी जैसे इसी मोके की तलाश में थी

वो पूरी तन्मयता के साथ सूर्य का सहयोग करते हुए सूर्य के होंटो को चूसने लगती है

साथ हे सूर्य का हाथ जो परिधि की कोमल कमर पे था उसे खुद से पकड़ कर अपने 34 साइज की बेहद कोमल उन्नत उभारो पे रख देती है

एक पल को सूर्य ुशी अवस्था में रुक जाता है उसके पुरे बदन में एक कर अंत सा दौड़ गया आज पहला ऐसा अवसर था जहा सूर्य का हाथ परिधि के मखमली उभारो पे था आज स पहले सूर्य ने जान बुज कर कभी भी उन खूबसूरत पहाड़ो को टच तक नहीं किया था

परिधि के शरीर में एक अंजनी सेंसिटिव सी लहार दौड़ गई

सूर्य निरंतर परिधि की आँखों में देख रहा था

परिधि सूर्य को अपनी पालमे जपका कर आगे भढने का इशारा करती है

सूर्य डेरी डेरी परिधि के ृषभरी पंखुड़ियों को चूमते हुए अपने हाथ पकड़ी परिधि की कोमल कोमल चूचियों को सहलाने लगता है

निचे परिधि की ठीक योनि स्थल के पास सूर्य का नागराज बार बार सर उठाये परिधि की गुफा पे दस्तक दे रहा था

पहलु हे बार में ऐसे तीन तरफ़ा हमले को परिधि सहन नहीं कर पायी आवर सूर्य को काश कर अपने सीने में दबाये हुए परिधि किसी सूखे पत्ते के जैसे कंपनी लगती है

कुछ हे पल में परिधि का पूरा रूम एक अंजनी पैर बेहद असरदार खुसबू से भर उठा

सूर्य ने जैसे हे ये खुसबू संगी उसे समझते देर नहीं लगी की ये किस चीज़ की खुसबू है .

सूर्य ....... उनननननहहहह तुम्हारे प्रथम ओर्गास्म की खुसबू तो बहुत लाज़बाब है परिधि जैसे कोई इत्र हो

परिधि तो पहले हे सरम से मरी जा रही थी ये सोच कर कज कैसे उसने अपने हाथ से सूर्य के हाथ को अपने सीने पे रखा आवर फिर कुछ हे पल में वो डिस्चार्ज हो कर अपने हे आन्तरा वस्त्र ख़राब कर दिए

परिधि सरम से अपना चेहरा सूर्य के सीने छुपा लेती है

सूर्य अपना हाथ गुमा कर परिधि के वस्त्र बदल देता है

सूर्य .......... परिधि मेरी आवर देखो तो

परिधि न में सर हिला कर आवर सख्ती से अपना चेहरा सूर्य के सीने में छुपा लेती है

सूर्य परिधि को लिया हुए हे बीएड पे पलट जाता है

अब सूर्य निच्चे आवर परिधि सूर्य के सीने पे थी

सूर्य ......... क्या हुआ परिधि क्या अब मेरी आवर देखेगी भी नहीं क्या

परिधि ......... मुझे शर्म आ रही है मैंने वस्त्र गंदे कर दिया

सूर्य ......... किसने कहा की तुमने वस्त्र गंदे कर दिए आवर मुझसे कैसी सरम तुम्हे अभी अभी जो चरम सुख प्राप्त किया है वो कोई बुरी बात नहीं है परिधि एक उम्र के बाद हर इंसान की कुछ शारीरिक जरिये होती है जो वो अपने प्रेमी या पति के साथ पूरा करती है ये भी प्रकर्ति का अभिन अंग है कन्या से स्त्री अवस्था में प्रवेश करने के लक्षणों में से एक इस लिया इस बात को ले कर कोई भी गलत भावना अपने मन में न ले कर आओ

परिधि ........ आप सच कर रहे है न कुंवर जी

सूर्य ........ क्या मैं अपनी जान अपनी परिधि से असत्य कहूंगा ुम्म्हा ये कोई गलत भावना नहीं है परिधि ये यौन समझो की ये भी प्रेम जताने मिलान का एक तरीका है आवर तुम अगर इसी तरह सहमति रहोगी तो हमारा मिलान कैसे होगा मैं तो कब से उस पल का इन्तजार कर रहा हूँ जब मैं अपनी परिधि को पूर्ण हक़ से अपना बना पाउँगा अगर तुम हमारी मिलान की रात भी ऐसे हे सरमाओगी तो मेरा क्या होगा हाहाहाहा

परिधि ....... आप ..... आप न सच में बहुत गंदे है पैर बहुत प्यारे भी ी लव यू कुंवर जी

सूर्य ....... ी लव यू तू माय लव उम्म्म्मः आवर सुनाओ सदी की शॉपिंग हो गई तुम्हारी पृथ्वीलोक से कुछ चाइये क्या

परिधि अपने कोमल हाथ को सूर्य के शर्ट में दाल कर सूर्य के छोड़े सीने को सहलाते हुए न में सर हिला देती है

सूर्य ....... तुम अभी भी शर्मा रही हो फिर भी अगर कुछ भी चाइये तो स्वीटी को बता देना ुम्म्हा

परिधि ........ वो हमने शॉपिंग की थी आवर मैंने आवर जीनत दीदी ने आपके लिया कुछ पसंद किया है

सूर्य ....... ये तो अच्छी बात है दिखाना तो जरा मैं भी तो देखु आप दोनों ने मिल कर ऐसा क्या पसंद किया है मेरे लिया

परिधि .......... हेहेहे वो अभी आप नहीं देख सकते

सूर्य ........ मेरे लिया पसंद किया पैर मई हे नहीं देख सकता बड़ी अजीब बात है

परिधि ........ वो ... वो जब हमारा विवाह होगा आवर हमारी मिलान की रात होगी तभी आप देख लेना

सूर्य ....... चलो ये भी मंजूर है इसे तुम दोनों खुश तो हो न इस सदी से परिधि

परिधि अचानक से थोड़ा सीरियस हो जाती है आवर सूर्य के सीने से उठ कड़ी होती है आवर दूसरी आवर मुँह कर लेती है

सूर्य ......क्या हुआ परिधि तुम्हे

सूर्य परिधि के चेहरे को अपनी आवर करता है तो देखता है की कभी भी परिधि के आँखों से मोती चालक कर उसके कोमल गलो पे आ सकते है

सूर्य परिधि के चेहरे को थम कर इसकी आँखे चुम लेता है जो आंसू अभी निकलने वाले थे उन्हें चुम कर होंटो से पि जाता है

परिधि जोर से सूर्य के सीने लग कर सूर्य को काश लेती है

परिधि ....... आपने ऐसा सोचा भी कैसे कुंवर जी अगर हम खुश नहीं होती तो क्या आपके बहो में इस तरह से होती हम सब बनने जानती है की आप सबसे ज्यादा प्यार बदु दीदी किरण से करते है वो भी आपसे बहुत प्रेम करती है पैर यकीं मानिये हम सब भने भी आपको दिलो जान से प्यार करती है इतना की सायद आपके बिना हमारा जीना नरक सामान है

सूर्य परिधि को बहो में लिया काफी देर तक उसे संत करता है आवर फिर थोड़ी बहुत शेफ चढ़ हंसी मजाक के बाद परिधि के चेहरे पे पहले की तरह हे ख़ुशी की लौट आई कुछ देर बाद सूर्य सभी के साथ वक़्त बिता ता है आवर दोपहर का खाना खा कर चारो परीलोक से पृथ्वीलोक के लिया विदा हो गए

सूर्य सभी को लिया घर पहुंचने गया था जैसे हे सभी घर पहुंचने उनके क्लोन अपने अपने मुख्या रूप में समाहित हो गए सभी को इन चार दिनों में हुए घटनाये उन्हें उनके क्लोन से पता चल चुकी थी

जो की कुछ खाश नहीं थी बस मेर्री जी के विवाह को ले कर हो रही तयारिया आवर कुछ छोटे मोठे काम काज को ले कर हे थी

सूर्य .......... माँ मैं दिल्ली जा कर आता हूँ सायद अब ताज हमारा वह का घर त्यार हो चूका होगा अगर कुछ जरुरी बदलाव होंगे तो अभी से करना हे बेहतर होगा

शालिनी जी ........ ठीक है स्वीटी आवर कोमल को भी साथ ले जाओ अगर इन्हें अपनी पसंद का कुछ बदलाव करवाना हुआ तो

सूर्य ......जी माँ

सूर्य कोमल आवर किरण को साथ ले गायब हो सीधा अपने दिल्ली वाले घर पहुंचा जो लगभग त्यार हो चूका था

सूर्य को देखते हे शिल्पी जी सीधा उनके पास हे आ गए

शिल्पी जी ........... युवराज आप यहाँ पे अच्छा हुआ जो आप यहाँ आ गए आपके कहे अनुसार हमने महल का निर्माण कर दिया

किरण ......... कैसा महल शिल्पी जी

शिल्पी जी ...... प्रिंसेस किरण युवराज सूर्य का आदेश था की बंगले के निचे गुप्त महल का निर्माण किया जाये जिसमे कुछ खाश विशेताएं हो उनके अनुकूल हे हमने गुप्त महल का निर्माण किया है

किरण. ....... आपने इस बारे में हमें तो कुछ नहीं बताया कुंवर जी

सूर्य .......... मैं बाद में बाटने वाला था जब हम सब यहाँ आते तब कैद अब पता तो चल हे गया है पैर अभी वह कोई नहीं जायेगा जब तक मैं उसको अच्छे से समाज नहीं लेता तब तक

कोमल ........ उसने ऐसा क्या है जो समझना है

सूर्य ........ क्या तुम्हे वाकई में ऐसा लगता है कोमल की गुप्त महल सदर्न महल होगा वो एक महावी तिलिस्मी महल है जिसमे कुछ बदलाव के बाद बड़े बड़े राक्षस तक की सकतिया डैम तोड़ देंगी

शिल्पी जी ........ क्सहम करे युवराज मैं आपकी इच्छा अनुकूल कार्य करने में सक्षम नहीं हो पाया

सूर्य ....... आपको क्षमा मांगने की आव्सय्कता नहीं है मैं ये पहले से जनता था की आपकी सकतिया केवल महल आवर तिलिस्म तक का हे कार्य पूरा कर सकती है बाकि का कार्य मैं स्वयं करूँगा बाकि टेक्नोलॉजी का कार्य पूरा हो गया क्या

शिल्पी जी ........ है आप चाहे तो देख सकते है

सूर्य ...... नहीं अभी नहीं अभी आप बहार के सभी कार्य पुराण कर दीजिये बाकि एक बार ग्रहपरवेश के बाद अच्छे से जाँच करने के बाद कुछ कमी रही तो मैं स्वयं ठीक कर लूंगा आप किरण आवर कोमल को पूरी पैलेस दिखा दीजिये इन्हें कुछ बदलाव करना होगा तो अभी से कर दीजिये

शिलिपि जी सूर्य को ले कर घर के भीतर चल देते है

सूर्य वह से उस तरफ निकल जाता है जहा पहले कर कन्ना था जहा लक्समी के साथ दीनदयाल ने दुष्कर्म किया था

सूर्य ने वह अपनी सकती का प्रयोग कर एक खूबसूरत से छोटा सा उद्यान का निर्माण किया जहा अलग अलग नेसल के पुष्पों का अम्बर लगा हुआ था जिसमे ड्रैगन लिम परीलोक की बहुत हे खस्सी किस्मे भी थी ठीक अध्यन के बीचों बिच ेल छोटा सा मगर खूबसूरत चबूतरा था जिसमे सूर्य ने उस तुलसी को लगाने का स्थान बनाया था जिसके लिया सूर्य ने लक्समी को वचन दिया था

कुछ देर सूर्य लक्समी को याद करता रहा फिर पैलेस में लौट आया जहा किरण आवर कोमल ने अपने हिसाब से बदलाव भी सुरु करवा दिए थे

पैलेस बहार से देखने पे ज्यादा बड़ा नहीं था पैर अंदर तो जैसे परीलोक का सूर्य महल भी फीका लगने लगा हो

सूर्य ...... आपने तो परीलोक के महल को भी पीछे छोड़ दिया है ऐसे तो सभी को हम पे शक हो जायेगा

शिल्पी जी ....... ये दृश्य केवल आप की इच्छा से जुड़ा है जिसे आप ये दृश्ये देखने की अनुमति देंगे वही इस हे देख पायेगा सामान्य रूप में ये ऐसा लगेगा बहरी लोगो के लिया

शिल्पी जी ने जैसे हे अपनी जादुई चढ़ी गुमाई वह का वातावरण हे बदल गया अब वह तीन बड़े बंगले थे जो एक साथ जुड़े थे आवर तीनो बंगलो का मुख्या हॉल एक हे था यानि की तीनो बंगलो को जोड़ कर मुख्या हॉल एक हे बनता था वही एक बड़ा सा द्वार जिस से हो कर हॉल में आया जा सकता था आवर ुशी हॉल स तीनो बंगलो में जाया जा सकता था

किरण कोमल ....... वाओ ये तो बहुत खूबसूरत है

सूर्य ....... सच में शिल्पी जी आपने बहुत हे खूबसूरत घर का निर्माण किया है जैसे हमारे तीनो परिवारों जोड़ कर एक परिवार की सोच को दर्शाया है आपने

शिल्पी जी .......... ये आपके परिवार क ok मद्देनजर रखते हुए इस तथा से त्यार करने के लिया सकती ने कहा था

सूर्य ........ सकती भाई ने बिलकुल सही सुझाव दिया है क्यों स्वीटी

किरण ...... बिलकुल सही कहा आपने

कुछ दी बाद सूर्य शिल्पी जी को विवाह के लिया आमंत्रित कर किरण आवर कोमल को भेज कर सीधा सोफिया से मिलने के लिया निकल गया ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एंजोये फ्रेंड्स ...................

दोस्तों कल रीत पेपर के कारन नेट बंद होने से अपडेट लिख नहीं पाया अभी लिखा है सो पोस्ट कर दिया ............
 
अपडेट 281

सूर्य ....... सच में शिल्पी जी आपने बहुत हे खूबसूरत घर का निर्माण किया है जैसे हमारे तीनो परिवारों जोड़ कर एक परिवार की सोच को दर्शाया है आपने

शिल्पी जी .......... ये आपके परिवार क ok मद्देनजर रखते हुए इस तथा से त्यार करने के लिया सकती ने कहा था

सूर्य ........ सकती भाई ने बिलकुल सही सुझाव दिया है क्यों स्वीटी

किरण ...... बिलकुल सही कहा आपने

कुछ दी बाद सूर्य शिल्पी जी को विवाह के लिया आमंत्रित कर किरण आवर कोमल को भेज कर सीधा सोफिया से मिलने के लिया निकल गया ................

अब आगे .........

सुनिधि की हॉस्टल में सोफिया के साथ रह कर स्टडी करने की जिद के चलते सुनिधि के पापा को अपना पुलिस अफसर का इन्फ्लुएंस उसे करना पड़ा जिस से सुनिधि आवर सोफिया को हॉस्टल में एक प्राइवेट रूम अल्लोव हो गया जिसमे रह कर दोनों अपनी स्टडी कंटिन्यू कर रही थी

आज सुनिधि दोपहर में कॉलेज से सोफिया को हॉस्टल के बहार ड्राप कर अपनी माँ से मिलने अपने घर चली गई थी इसी लिया सोफिया अपने हॉस्टल रूम में अकेली थी

सूर्य जब सोफी
के रूम में पहुंचा तब पूरी तरह से वह इनविजिबल था पैर जब सूर्य की नजर सामने के बीएड पे गई तो बस वो एक तक देखता रह गया अपने सामने का नजारा





सामने बीएड पे हुसैन की मलिका खूबसूरत सोफिया थी जो इस वक़्त करवट के बल लेते हुए सो रही थी

उसके खूबसूरत चाँद से प्यारे मुखड़े पे उसकी गुलाबी गालब की पंखुड़ियों सनान लाभों पे ओस वक़्त जी हलकी सी स्माइल थी जो किसी को भी अपने मोहपास में बांड सकती थी

सूर्य ने कोई जल्दबाज़ी नहीं की सोफी को उठाने की विज़िबल होने से पहले उसने पुरे रूम को सन किया की कही आवर तो यहाँ नहीं है

जब सूर्य को यकीं हो गया तब सूर्य ने खुद को विज़िबल किया आवर स्टडी टेबल के पास राखी चेयर को उठा कर बीएड से कुछ दुरी पे रख कर उस पे आराम से बेथ गया आवर प्यार से सोफिया को निहारने लगा

करीब 15 मिनट्स बाद अचानक से सूर्य की तन्द्रा भांग हुई वो भी सोफिया के फ़ोन की रिंग बजने से

सोफिया कच्ची नींद में हे अपना हाथ उदार उदार मरते हुए फ़ोन को उठाया आवर नींद में हे पिछ कर कान से लगा लिया

सोफिया ...... Hello कोण .....

दूसरी तरफ से पता नहीं कोण था जो कुछ कह रहा था

सोफिया नीड की बझा से है हूँ में जबाब दे रही थी

कुछ देर बाद नीड में हे फ़ोन सोफिया के कान से खिसक कर चेहरे के सामने आ गिरा

जब दूसरी आवर के साक्ष को सोफिया का कोई आवर जबाब नहीं मिला आवर न कोई आवाज आई तो फिर से सायद ुशी ने कॉल मिलाया था

सोफिया ने कॉल उठाया आवर सीधा जबाब दिया

सोफिया ........ अम्मी जान अभी मुझे नींद आ रही है प्लीज बाद में बात करती हूँ न

दूसरी आवर से .............

सोफिया ........ Ok अम्मी अभी मुझे सोने दीजिये आप आपि से बात कर लेना

कहते हुए सोफिया ने करवट बदल कर सीधी लेटने की कोशिश की तभी उसकी अधखुली आँखों से देखा की कोई उसके ठीक सामने बैठा है आवर उसे हे देख रहा है

सोफिया जल्दी से गबराते हुए अपनी आँखों को अपनी उंगलियों से रब किया आवर दो तीन बार बंद कर खोल कर ठीक से देखने के लिया एडजस्ट किया तब उसे ठीक से दिखाई दिया की सामने कोण है

सोफिया ....... आप.... आप यहाँ कब आये

दूसरी तरफ से फ़ोन की लाइन अभी भी चालू थी

सूर्य ने सोफिया को उसका फ़ोन उठा कर दिया जिसमे से अभी भी hello hello की आवाज आ रही थी

सोफिया ...... Hello अम्मी जान मैं आपको बाद में फुर्सत से कॉल बैक करती हूँ .

दूसरी आवर से फिर कुछ कहा जिस हे सुन सोफिया सूर्य को देखने लगी

सूर्य ने सोफी से उसका फ़ोन लिया उसे पहले हे पता चल गया था की कॉल किसका है

सूर्य ...... Hello आंटी

फातिमा जी ...... Hello बीटा आप कोण है

सूर्य ....... हाहाहा अरे आंटी गबराये नहीं मैं सूर्य बोल रहा हूँ वो मैं दिल्ली आया था कुछ काम से तो सोचा सुनिधि आवर सोफिया से मिलता चालू इस लिया चला आया

फातिमा जी ......... ये तुमने बहुत अच्छा किया बीटा मैं खुद तुम्हे कॉल करने वाली थी

सूर्य ....... ऐसी क्या बात है आंटी सब ठीक तो है न

फातिमा जी ........ सब ठीक है बीटा वो सलमा की अम्मी ने सोहेल आवर सलमा के रिश्ते को मंजूरी दे दी है जल्दी हे दोनों का निकाह होना है बस सोहेल को चूतिया मिलते हे

सूर्य ......... ये तो बहुत अच्छी खुसखबरी सुनाई है आपने आंटी जी

फातिमा जी ...... हम सब तुम्हारे निकाह में शामिल हुए थे अब तुम सभी को सोहेल के निकाह में शामिल होना है बीटा

सूर्य ....... सॉरी आंटी ये संभव नहीं है

फातिमा ....... ये क्या बात हुए बीटा तुम्हारे दोस्त का निकाह है आवर तुम हे निकाह में सरिक होने से इंकार कर रहे हो

सूर्य ........ अरे अरे रुकिए आंटी आपने गलत समाज लिया दरशल आप तो जानती है की स्वीटी प्रेग्नेंट है ऐसे में सभी तो निकाह में शामिल नहीं हो सकते है न पैर मैं अपने दोस्त के निकाह में जरूर सिरकट्ट करूँगा पापा आवर बड़े पापा भी अभी अभी नई

बिज़नेस स्टार्ट कर रहे है तो उनका आना संभव नहीं

कुछ देर आवर बात करने के बाद फातिमा जी ने फ़ोन रख दिया

जब तक सूर्य फातिमा जी के साथ फ़ोन कॉल पे रहा सोफिया एक तक सूर्य को देखती रही जैसे हे सूर्य ने कॉल कट किया सोफिया फ़ौरन बीएड से बैठे बैठे सूर्य की आवर अपना हाथ बढ़ा देती है आवर सूर्य को अपनी खींच लिया

जैसे वो बस फ़ोन कॉल डिसकनेक्ट होने का बे- सबरी से इन्तजार कर रही थी

जैसे हे सूर्य बीएड पे बैठा सोफिया ने सूर्य को पीछे की आवर पुस किया सूर्य ने बिना किसी विरोध के बीएड से दो पिलो के सहारे अधलेटी अवस्था में आ कर लेट गया

सोफिया जो इस वक़्त पतली सी लेग्गी आवर समीज़ टाइप t-shirts पहने हुए थी थोड़ी आराम आवर संकोच के साथ सूर्य की गौड़ में आ बैठी






सूर्य ........क्या बात है सफी आज तुम बड़ी बदली बदली लग रही हो हमेशा शर्माने वाली सोफी इतनी बोल्ड कब से हो गई

सोफिया ......... आपको मेरा ये बोल्ड रूप पसंद नहीं आया क्या

सूर्य ........ सच कहु या झूट

सोफिया ......... सच हे कह दीजिये मुझे बुरा नहीं लगेगा

सूर्य ......... मुझे तुम्हारा ये रूप पसंद आया पैर जो तुम्हारी सादगी है सरमो हाय है उसके सामने ये रूप कुछ भी नहीं मुझे मेरी वो सोफी सबसे ज्यादा पसंद है जिसकी खूसूरत सादगी हे उसकी मासूमियत हे उसकी पहचान है

सूर्य की बात सुन सोफिया का खूबसूरत खिखिलता चेहरा कुछ मुर्जा सा गया था

सोफिया ....... सुनिधि ने तो कहा था की आपको मेरा ये बोल्ड रूप पसंद आएगा

सूर्य ....... हाहाहाहा तुम न सच में बहुत मासूम हो सोफी

कहते हुए सूर्य सोफिया को अपने सुपर जुखा लेता है

आवर उसकी गुलाबी लाभों पे एक प्यारा सा चुम्बन अंकित कर देता है जिस से सोफिया का मुरझाया चेहरा सरम आवर मुस्कान से हल्का लाल गुलाबी रंगत ले लेता है

सोफिया कुछ जीनत जूता कर खुद से सूर्य के सर को थम अपने होंठ सूर्य के होंठो की तरफ बढ़ा देती है






सोफिया के होंठ लरज़ रहे थे हल्का हल्का कम्पन सा खुद सोफिया भी अपने होंठो पे मह्सुश कर रही थी

सूर्य ने प्यार से सोफी के कोमल लाभों को अपने होंठो में भरते हुए चूमना सुरु कर दिया

करीब 5 मिनट्स बाद जब सोफिया की सांसे भरी होने लगी तब सोफिया किश तोड़ते हुए सूर्य के सीने पे निढाल सी हो गई

कुछ देर बाद सूर्य ने हे रूम में छाए सन्नाटे को भांग किया

सूर्य ....... सोफी सुनिधि दिखाई नहीं दी यहाँ क्या आजकल तुम अकेली रह रही हो रूम में

सोफिया ......... नहीं सुनिधज आवर मैं साथ में हे रहते है आज वो अपने घर गौ है उसकी माँ की तबियत कुछ ख़राब थी सो उसे dr.ke पास ले कर गई है सुनिधि नाईट से पहले आ जाएगी

सूर्य ....... सानिया आवर माया भी मिलने आती होंगी यहाँ तो

सोफिया ....... है कभी कभी दोनों आपि आती है हमसे मिलने वैसे आप कब आये रूम में आवर मुझे उठाया क्यों नहीं नींद से

सूर्य अपने सीने पे लेती सोफिया की पीठ आवर कमर को सह लेट हुए बोलै

सूर्य ....... जब मैं यहाँ रूम में आया तब तुम गहरी नींद में थी आवर सायद कोई खूबसूरत खवाब भी देख राहु थी तुम्हे इस तरह से इतने प्यार से सोते हुए स्माइल करते देख मैं तुम्हे जग्गा नहीं पाया आवर तुम्ही में खो गया

सोफिया ........ क्या मैं सच में इतनी खूबसूरत लगती हूँ आपको किरण आपि तो मुझसे भी कही ज्यादा खूबसूरत आवर मासूम है मुझे वो सबसे ज्यादा पसंद है

सूर्य ....... स्वीटी वप सच में बहुत खूबसूरत है तुम्हारी तरह अंदर से भी आवर बहार से भी खेर मैं तुम्हे कुछ बाटने आया था वो तो भूल हे गया

सोफिया अपना सर उठा कर सूर्य को देखती है आवर फिर से अपना सर सूर्य के सीने पे रख लेती है






सोफिया ........ ऐसी कोनसी जरुरी बात है

सूर्य ....... वो दो दिन बाद परीलोक में मेरी पारिजात आवर जीनत से सदी है उसके तुम्हे शामिल होने के लिया इन्विते करने आया था

सूर्य की सदी कज बात सुन पहले तो सोफिया को थोड़ा गुस्सा आया पैर जल्द हे उसे सूर्य की वास्तविकता याद आई तो उसके चेहरे पे स्माइल आ गई

सोफिया ......... मैं आपके निकाह में जरूर शामिल होउंगी पैर जीनत आपि तो प्रेतलोक की राजकुमारी है आवर परिधि आपि परीलोक की फिर दोनों की सदी परिलोम में

सूर्य ...... वो सब गुरुदेव का आदेश हाउ पैर इस सदी की बात तुम अपने तक हे रखना सानिया माया सुनिधि या किसी आवर को इसकी खबर तक नहीं होनी चाइये केवल तुम हे मेरी वास्तविकता जानती हो तो उसे अपने तक हे सिमित रखना

सोफिया ने सूर्य के होंठो पे चुम्बन कर है में सर हिला दिया

सूर्य ........ आवर है ये सुनिधि की उठ पतंग बाटी पे ज्यादा ध्यान न दिया करो तुम जैसी हो वैसी हे बहुत खूबसूरत हो किसी के लिया खुद को कभी मत सोफी बदलना जब तक तुम गलत न हो किसी को तुम्हारी बझा से कोई परेशानी न फिर चाहे मैं हे क्यों न तुम्हे बदलने को कहु जो तुम्हारा दिल तुम्हारी आत्मा कहे वही करना

सोफिया ......... आपने सुनिधि से वडा किया था कुछ याद है न

सूर्य ....... तुम लड़किया भी न पता नहीं इतनी आसानी से इतना सब कैसे शेरे कर लेती हो आपस में

सोफिया ........ बात को बदलिया नहीं क्या ये सच है

सूर्य एक लम्बी साँस छोड़ते हुए है में अपना सर हिला देता है


सोफिया .... ..... अगर सुनिधि को पता चला की आप यहाँ आये थे आवर बिना उस से मिले चले गए तब क्या होगा

सूर्य ........ उसे कुछ बाटने की जरुरत नहीं है मैं खुद बात कर लूंगा नाईट में उस से अच्छा अब मैं चलता हूँ

सोफिया ...... कुछ देर आवर नहीं रुक सकते आप

सूर्य सोफिया के कहने पे कुछ देर आवर रुकने के बाद सोफिया को bye बोल कर वह से निकल गया

सोफिया भी काफी खुश थी सूर्य के आने से

सूर्य के जाने के बाद सोफिया मुस्कुराते हुए पिलो अपने सीने से लगाए फिर से लेट गई अपनी आँखे बंद किये

बेसक नींद आँखों से अब तक पूरी तरह से गायब हो चुकी थी ........

देवभूमि हिमालय ..........

हिमालय की पवन भूमि के पर्वत सारंखलाओ के मध्य में िस्थित ऋषिवर दूर्वा के
आसाराम के चारो आवर बहुत हे खूबसूरत दिव्या आध्यात्मिक आभा से पारी पूर्ण आश्रम जहा बहुत से शिष्य ऋषि दूर्वा आवर बाकि ऋषि भारताओ से शिक्षा दीक्षा ग्रहण करते थे आश्रम से कुछ हे दुरी से कल कल बहती जल धरा यहाँ के आध्यात्मिक वातावरण को आवर भी खूबसूरत आवर संत चित बना रही थी

आश्रम के एक आवर गुरुकुल था वही एक आवर सभी शिष्य के विश्राम करने के लिया आवर ठहरने के लिया कुटियो का निर्माण किया गया था

जहा बहुत से शिष्य इस समय अपनी अपनी कुटिया में बैठे ध्यान में लगे हुए थे वही कुछ शिष्य प्राचीन ताड पत्र लेख का अध्यन कर रहे थे

उनसे कुछ दुरी पे ऋषिवर दूर्वा की कुटिया थी जहा इस समय ऋषि दूर्वा अपनी बाकि ऋषि भारताओ के साथ किसी विषय पे चर्चा कर रहे थे

इनमे पारी लोक के राजगुरु (गुरुदेव )भी मौजूद थे

( दर्शक सूर्य से भेंट करने के बाद गुरुदेव परीलोक से कुछ समय बाद सीधा ऋषि दूर्वा के आश्रम पहुंचने थे )

R.durva ........ गुरुदेव आपने जैसे हे सकती के माध्यम से हमें सन्देश भेजा था हम तभी से इस विषय पे बहुत गंभीरता से खोजबीन कर रहे थे हमने सभी प्राचीन ग्रंथो का अध्यन किया है किन्तु हमें इस समस्या का कोई समाधान नहीं मिला

गुरुदेव .......... हम जानते है ऋषि दूर्वा हमने स्वयं भी इसके लिया भूतकाल की घटनाओ का बहुत हे ध्यान से अध्यन किया है हमें इसका केवल एक हे मार्ग नजर आया है हम ुशी पे आपसे चर्चा करने यहाँ आये है

R.durva ......... ऐसा कोनसा मार्ग मिला है आपको गुरुदेव जिस से इस समस्या का समाधान हो

गुरुदेव ........ आप इस सत्य से तो अवश्य अवगत होंगे हे की राजकुमारी जीनत का जनम गर्भ ( किसी स्त्री की kokh)se नहीं हुआ है अपितु प्रेतराज ने राजकुमारी जीनत को वरदान के फलसवरूप पाया है

R.durva ......... है हम इस सत्य से अनभिज्ञ नहीं है गुरुदेव की प्रेतलोक की राजकुमारी जीनत की उतपति वरदान के फलसवरूप हुई है न की प्रेत योनि में उनका जनम हुआ है प्रेत विवाह संभव नहीं है इस लिया प्रेत लोक में कोई विवाह पार्था नहीं है

गुरुदेव ........ बिलकुल उचित समजा आपने ऋषि दूर्वा किन्तु .....

गुरुदेव अपनी बात बिच में हे रोक कर कुछ सोचने लगते है

र. दूर्वा ......... किन्तु क्या गुरुदेव क्या हुआ गुरुदेव जिसके चलते आप कुछ विचलित नजर आ रहे है

गुरुदेव एक लम्भी साँस छोड़ते हुए बोलना सुरु करते है

गुरुदेव ......... किन्तु अगर पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत का विवाह परीलोक या अन्य किसी लोक में होता है तो इस से भविष्य में बहुत से संकटो का सामना पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत को करना होगा

र .दूर्वा गुरुदेव की बात सुन कर चोन जाते है आवर गंभीरता से गुरुदेव को देखते है जैसे गुरुदेव का आगे बोलने का इन्तजार कर रहे हो

गुरुदेव .........पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत का विवाह आवर आत्मा मिलान प्रेतलोक में होना अति आवशयक है ऋषि दूर्वा आवर उसमे आपको हे पुत्र सूर्य की सहायता करनी होगी

ऋषि दूर्वा .........ये आप क्या कह रहे है गुरुदेव हम किस तरह पुत्र सूर्य की सहायता कर सकते है कृपया हमें मार्ग सुनाये हम पूर्ण निस्ता से इस सुबह कार्य को करने का वचन देते है

गुरुदेव ............. उचित है ऋषि दूर्वा आप अगर इस कार्य को करने के लिया त्यार है तो हम आपको अवश्य इसका मार्ग बताएँगे ..

गुरुदेव .......... आपको एक नियमित समय के लिया अपनी देह को (शरीर ) त्याग कर प्रेतलोक जाना होगा .......

R.durva ........ क्या ये आप क्या कह रहे है गुरुदेव ( फिर कुछ सोच कर )ठीक है गुरुदेव इस शुभकार्य के लिया हम अपने जीवन का त्याग करने के लिया भी तत्पर है

गुरुदेव .......... नहीं आपने हमारे सब्दो की गहराई को समाज नहीं हमने ये नहीं कहा की आपको अपने जीवन का त्याग करना होगा हमने कहा की आपको एक समय अवधि के लिया अपने देह ( शरीर ) का त्याग कर प्रेतलोक जाना होगा जहा आपको पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत की आत्मा का मिलान करवाना होगा उनके आत्मा मिलान में किसी भी तरह का विघ्न न आना पाए

ऋषि वेद ( 2 )...... यथार्थ भारत श्री दूर्वा को अपने तपोबल अपनी सीढ़ियों का प्रयोग कर प्रेतलोक जाना होगा आवर वह पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत कस आत्मा मिलान करवाना होगा दोनों के आत्मा मिलान के पश्चात भरता श्री पुनः अपनी देह में प्रवेश कर सकते है किन्तु पुत्र सूर्य तो स्वयं सह शरीर प्रेतलोक में अभी प्रवेश करने में सक्षम नहीं है फिर ये कैसे संभव होगा कही आप पुत्र सूर्य को भी देह त्याग विधि से तो प्रेतलोक नहीं भेजने वाले है

गुरुदेव ......... ऋषि वेद आपने उचित समय पे अपनी प्रखंड बूढी ( तीव्र बूढी ) से उचित समजा है पुत्र सूर्य को अपनी देह त्याग कर प्रेतलोक जा कर पुत्री जीनत से विवाह कर आत्मा मिलान करना होगा तभी पुत्र सूर्य को महाप्रेत की प्रेतलोक से पूर्ण सकती प्राप्त होगी जिस तरह से परियो कोउनकी सकतिया परीलोक से प्राप्त होती है ुशी तरह से प्रे
तो को उनकी प्रेत सकतिया प्रेतलोक से प्राप्त होती है अगर पुत्र सूर्य प्रेतलोक में पुत्री जीनत से आत्मा मिलान नहीं करता है एक पुत्र सूर्य पुत्री जीनत से प्रेत अंश तो प्राप्त कर प्रेत तो बन जायेगा किन्तु महा प्रेत नहीं बन पायेगा इस लिया सर्वप्रथम पुत्र सूर्य को अपने शरीर का त्याग कर आत्मा रूप में प्रेतलोक जाना होगा वह पुत्री जीनत से विवाह कर आत्मा मिलान कर महा प्रेत बनना होगा उसके पश्चात उसे परीलोक आना होगा जहा महा प्रेत की ऊर्जा को संतुलित करने के लिया ुशी पुत्री पारिजात से प्रेम मिलान करना होगा

R.durva ......... उचित है गुरुदेव आपके द्वारा सुनाये मार्ग पे चल कर मैं इस देव कार्य को करने के लिया सज हूँ

गुरुदेव ........ क्यों की आप इस कार्य के लिया सज है तो आप सभी ऋषि भारतो को परीलोक आना होगा जहा बाकि चारो ऋषि अपनी ऊर्जा से आपके शरीर को ऊर्जा पर्सन करेंगे ये कार्य यहाँ भी हो सकता है किन्तु हम किसी भी तरह की चूक नहीं होने दे सकते आवर वैसे भी आपको पुत्र सूर्य के विवाह में शामिल भी तो होना है

R.durva ........ जी गुरुदेव जैसा आप उचित समजे किन्तु पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत का विवाह किस विधि से होगा

इस विषय पे आपने कुछ भी नहीं बताया

गुरुदेव ( मुस्कुराते हुए )........ प्रेतलोक में किसी भी विवाह विधि का कोई मतलब नहीं है किन्तु पुत्र का सूर्य मानव योनि में जनम हुआ है इस लिया जैसे हे पुत्र सूर्य का आवर पुत्री जीनत का आत्मा मिलान होगा उसे प्रेतलोक में एक नया शरीर प्राप्त हो जायेगा उसके पश्चात आप मानव विधि से दोनों का विवाह सम्पन कर देना हम सिगरा हे प्रेतराज को इस विषय में सूचित कर सभी तयारिया पूर्ण करने को कह देंगे

R.durva .......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश क्या पुत्र सूर्य से आपकी इस विषय पे बात हुए है गुरुदेव

गुरुदेव. ....... नहीं ऋषि दूर्वा हम यहाँ से पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण से भेंट करने हे जायेंगे

R.durva ........ आप जब हमारे आश्रम में आये है तो हमारे साथ फलाहार भोजन कर कुछ समय विश्राम करने के बाद हे पुत्र सूर्य से भेंट करने प्रशाथं कर सकते है ये हम सभी का आपसे विनम्र निवेदन है गुरुदेव

गुरुदेव ........ उचित है ऋषि दूर्वा हम आपके निवेदन को अस्वीकार नहीं कर सकते है

कुछ देर बाद सभी ऋषि आवर गुरुदेव जमीं पे लगे नरम घास फ़स के आसान पे बैठे पत्तो के थल में सात्विक भोजन करने लग जाते है जिसमे खीर हलवा पूरी फल आदि सात्विक भोजन था ग

गुरुदेव साम तक विश्राम कर वह अन्य विषय पे बात करने के बाद सभी ऋषि आवर देवी मूल्य साध्वियों से विदा ले सूर्य से भेंट करने सूरतगढ़ निकल गए ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
 
Back
Top