Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 35 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 282

गुरुदेव ........ उचित है ऋषि दूर्वा हम आपके निवेदन को अस्वीकार नहीं कर सकते है

कुछ देर बाद सभी ऋषि आवर गुरुदेव जमीं पे लगे नरम घास फ़स के आसान पे बैठे पत्तो के थल में सात्विक भोजन करने लग जाते है जिसमे खीर हलवा पूरी फल आदि सात्विक भोजन था ग

गुरुदेव साम तक विश्राम कर वह अन्य विषय पे बात करने के बाद सभी ऋषि आवर देवी मूल्य साध्वियों से विदा ले सूर्य से भेंट करने सूर्य
ग्रह निकल गए ...........

अब आगे ..........


सूर्यगढ़ ........... सूर्य साम के करीब 6 बजे हवेली पहुंचा तब गुरुदेव पहले से हवेली में मौजूद थे दादा जी दादी जी से मेर्री जी के विवाह को ले कर चर्चा कर रहे थे

जैसे हे सूर्य हवेली पंहुचा गुरुदेव को सूर्य के आने का आभाष हो चूका था वही सूर्य को भी गुरुदेव का हवेली में होने का पता चल गया था

गुरुदेव ने सूर्य को एकांत में मिलने के लिया मानसिक संकेत भेजा

सूर्य अपने दादा जी दादी जी से कुछ देर बात कर गुरुदेव के साथ हवेली के पीछे की आवर चल दिया करीब आधे घंटे बाद सूर्य वापिस लौटा गुरुदेव सूर्य से भेंट कर सीधा परीलोक के लिया परस्थान कर चुके थे

रात करीब 8 बजे शिव आवर महेंद्र जी भी हवेली आ चुके थे विजय फूफा जी फ़िलहाल बहार किसी बिज़नेस मीटिंग के लिया गए हुए थे

सभी निर्या किरण से ड्रैगन लोक की यात्रा पे चर्चा करते हुए हाशि ख़ुशी के बिच खाना ख़तम किया

ीदार सूर्य ने सभी के साथ खाना खाने के बाद कुछ देर टहलने के लिया हवेली की छठ पे आ गया अभी सूर्य अपने फ़ोन पे सोहेल से उसके निकाह को ले कर मज़ाक करते हुए तायल रहा था

तभी किसी ने पीछे से सूर्य को बहो में भर लिया सूर्य को अपनी पीठ पे बहुत हे कोमल अंगो का आभाष हुआ आवर ुशी के साथ सूर्य की गर्दन पे किसी के नाजुक कोमल होंटो से चुम्बन अंकित किया

सूर्य ने अपने सीने पे कसबे हर कोमल हाथो को पकड़ कर उस साक्ष को अपने सामने किया

वो कोई आवर नहीं बल्कि मेर्री जी हे थी जिसने सूर्य को अकेले में ऊपर आते देख पीछे पीछे चली आई थी आवर सूर्य को पीछे से अपनी बहो में भर लिया था

सूर्य ने सोहेल से बाद में बात करने का बोल कर कॉल डिसकनेक्ट किया आवर मेर्री जी की आँखों में देखने लगा मेर्री जी की आँखे हलकी नाम थी जैसे अभी रो पड़ेगी

सूर्य आवर मेर्री जी कुछ देर दोनों एक दूसरे को देखते रहे

इस बिच कब मेर्री जी की डबडबाई आँखों से आंसू निकल कर उसके गुलाबी गालो से बहते हुए गिरने लगे

सूर्य को भी मेर्री जी की ऐसी हालत देख बहुत दुःख हुआ पैर वो समाज नहीं प् रहा था की आखिर मेर्री जी की आँखों में आंसू आने की वजह क्या है

सूर्य अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेर्री जी के आँखों से बहते आंसू पोंछता है आवर उन्हें अपने सीने से लगा लेता है

सूर्य ........... क्या हुआ ममी जी आपकी आँखों में ये आंसू किस लिया

कुछ देर मेर्री जी सूर्य की किसी भी बात का जबाब नहीं देती है बस सूर्य के सीने से लगे सुबकती रहती है

मेर्री जी को ऐसे सुबकते रोतीहुए देख सूर्य आवर ज्यादा परेशान हो जाता है फिर अचानक से सूर्य मेर्री जी के आंसुओ से भीगे खूबसूरत चेहरे को अपने हाथो में थामे हुए दोनों बंद आँखों को चुम लेता आसुओं के कारन सूर्य के मुँह में मेर्री जी की आंसुओ का हल्का नमकीन सा टेस्ट आ रहा था

सूर्य ने बिना नमकीन टेस्ट की परवाह किया मेर्री जी के कपकपाते होंटो को अपने होंटो में भर कर किश करने लगता है

अगले हे पल मेर्री जी की आँखों से आंसू बहना बंद हो चूका था साथ हे साथ उनकी सुबकती हुई आवाज भी

दे
री डेरी सूर्य आवर मेर्री जी दोनों हे किश में खोते चले गए

करीब 5,6 मिनट्स बाद सूर्य ने किश तोड़ा तो मेर्री जी के साइज 36 के ुनात उभर उनकी तेज सांसो के साथ ऊपर निचे होने लगे थे

सूर्य ने छठ पे बने रूम को खोला आवर मेर्री जी को अपने गौड़ में उठा कर सीधा बीएड पे लिटा दिया आवर खुद भी उनकी बगल में लेट गया

मेर्री जी सूर्य के सीने पे सर रखे किसी गहरी सोच में डूबने लगी

सूर्य .. ...... आपको क्या हुआ है ममी जी किसी ने आपसे कुछ कहा है क्या या फिर कोई आवर परेशानी है जिसे ले कर आप इतनी परेशान है आप कब से इतनी कमजोर हो गई

मेर्री जी ........ मुझे ये सदी नहीं करनी है सूर्य

मेर्री जी की बात सुन मनो सूर्य के दिमाग में बचल हे आ गया हो

सूर्य ....... ये आप क्या कह रही है क्या मां जी ने आपको कुछ कहा है क्या

मेर्री जी ........ उन्होंने कुछ नहीं कहा मुझे

सूर्य ......... फिर बात क्या है सभी ने आपकी मर्जी से आपकी पसंद से हे तो इस रिश्ते के लिया है कहा था फिर भी अगर आप सदी नहीं करना चाहती है तो कोई आपको कुछ नहीं कहेगा ये आपका अपना फैसला है आवर मैं आपके हर फैसले की कदर करता हूँ पैर एक बार दोनों परिवार मां जी सभी के बारे में जरूर सोचियेगा फिर जो भी आपकी इच्छा होगी वही होगा

( सूर्य ने बोलने को तो बोल दिया था आवर ये सच भी था पैर उस हे अभी भी मेर्री जी के ऐसा करने की पीछे की वजह समाज नहीं आ रही थी आवर न हे सूर्य परिवार में से किसी का मंद रीड कर सकता था किरण से वडा जो किया था )

मेर्री जी ........ तुम कितना कुछ सोच लिया इतनी हे देर में मैं बस इस लिया सदी नहीं करना चाहती की मैं अपने इस परिवार से आवर तुमसे दूर नहीं होना चाहती

सूर्य ......... आप न सच में पागल है यार आवर किसने कहा की सदी हो जाने के बाद ये परिवार आपका नहीं रहेगा या फिर हम सब आपसे दूर हो जायेंगे

मेर्री जी .......आवर तुम क्या तुम सदी के बाद भी ऐसे हे मुझसे प्यार करते रहोगे

मेर्री जी इतना बोल सूर्य की आँखों में देखने लगती है जैसे वो सूर्य के भीतर जनकः कर इस बात की सचाई जानना चाहती हो

सूर्य ....... ये आप अपने दिल से पूछिए वो आपके इस सवाल का जबाब दे देगा

मेर्री जी ने सूर्य की t-shirts निकल कर उस से अलग कर देती है आवर सूर्य के सीने पे हर हिस्से पे अपने नाजुक होंतु से मिहिर लगाने लगती है

डेरी डेरी कमरे में तापमान भड़के लगता है आवर देखते हे देखते सूर्य आवर मेर्री जी दोनों हे जन्मजात नंगे एक दूसरे की बहो में समाये हुए थे

सूर्य का कामदण्ड मेर्री जी की गुलाबी योनि की गहराई में पेवस्त अंदर बहार हो रहा

हर गुजरते पल के साथ सूर्य पुर मेर्री जी के सम्भोग सिसकारियां रूम के भीतर किसी को भी उत्तेजित कर देने वाले कामुक संगीत के जैसे सुनाई दे रही थी

मेर्री जी का घाटी दूडिया शरीर पसीने से मनो कहा चूका हो पसीने की बुँदे मेर्री जी के गोर बदन पे ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे सफ़ेद संगेमरमर से निर्मित किसी खूबसूरत अप्सरा अपने यौवन की तपिश को ोंश की बूंदो से मिटा रही हो

सूर्य आवर मेर्री जी के इस 1हर तक चले अद्भुत सम्भोग मिलान से मेर्री जी का शरीर पूरी तरशा से पस्त हो चूका था जहा अभी भी मेर्री जी सूर्य के सीने पे ोंदे मुँह लेते तेज तेज साणे ले रही थी वही उनकी गुलाबी योनि से सूर्य आवर मेर्री जी के इस मिलान का कामर्स बहते हुए बीएड पे बिछी वाइट चादर पे इस मिलान की चाप छोड़ रहा था

मेर्री जी रह रक् कर सूर्य के होंटो को चुम कर मुस्कुरा देती

भले हे इस मिलान ने मेर्री जी की लगभग पूरी ऊर्जा ख़तम कर दी थी पैर इस सम्भोग मिलान की जो ख़ुशी संतुष्टि उनके मुख मंडल पे थी उसने बया कर पाना सायद हे संभव हो

कुछ देर बाद जब सूर्य का लिंग सुस्त हो कर मेर्री जी की योनि से निकल तो एक बाद फिर से मेर्री जी के मुँह से सीसी निकल गई

सूर्य ....... क्या अभी भी आपको लगता है की मैं आपसे दूर हो जाऊंगा या आपसे प्यार करना बंद कर दूंगा

मेर्री जी ........ ी ऍम रियली सॉरी माय स्वीटहार्ट लव ुम्मम्हा जब से सदी तय हुए है तब से पता नहीं आप सब को खो देने का दर सा लगने लगा है

सूर्य ....... समाज सकता हम मेर्री जी आपकी चिंता को बूत don't वोर्री आप हमेशा के इस परिवार का मुख्या हिस्सा रहेंगी जहा आप हर पल इन्तजार रहेगा

मेर्री जी ....... आवर तुम्हारा क्या हम्म

सूर्य ...........अच्छे से सोच लीजिये अभी हे प्रूफ दे सकता हूँ

कहते हुए सूर्य ने थोड़ी सख्ती से मेर्री जी की छूट के हलके सूजे हुए होंटो को अपने हाथ से सहला देता है

मेर्री जी ........अह्हह्ह्ह्ह िस्स्सस्स अभी नहीं अभी फिर से खेलने की ताकत नहीं है ुम्म्हा चलिए साथ में कहा कर निचे चलते है

कुछ देर बाद दोनों नाहा कर निचे आ गए अब ताज लगभग सब अपने अपने रूम में जा चुके थे केवल शालिनी जी आवर रेखा जी हे अभी हॉल में नजर आ रही थी

सूर्य सीधा अपने रूम में आ कर लेट गया जहा कोई भी नहीं था बाद हलकी हलकी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आ रही थी

सूर्य ......... स्वीटी बाथरूम में तुम हो क्या

मानसी ....... नहीं कुंवर जी मैं हूँ स्वीटी दीदी आज माँ के साथ सोने वाली है

सूर्य ....... Ok वैसे तुम क्या कर रही हो मनु

मानसी ....... वो मैं नाहा रही हूँ आपको कुछ काम था क्या

सूर्य ....... नहीं बस ऐसे हे पूछ लिया

कुछ देर बाद मानसी नाईट गाउन पहने बालो को टॉवल से बन्दे हुए बहार निकली

सूर्य जो अभी लेते लेते मोबाइल में लगा हुआ था वो बाथरूम के दूर खुलने की आवाज से उस आवर देखता है तो सामने पर्पल हॉट निघ्त्य पहने हुए मानसी बहार निकल रही थी

सूर्य अपने मोबाइल से खेलना छोड़ मानसी को हे देखने लगता है जो सीधा मिरर के सामने पहुंच कर हाथ पेअर सीने आदि भी किसी तरह की क्रीम का उसे कर रही थी जिस से पूरा रूम महक उठा

अभी अभी मेर्री जी के साथ सम्भोग करने के बाद भी फिर से हलचल होने लगी फिर भी सूर्य ने अभी के लिया कण्ट्रोल किया पैर बीएड से खड़ा हो कर मानसी के पीछे से उसने अपनी बहो में भर लिया

मानसी ......... ये आप क्या कर रहे है छोड़िये ने

सूर्य ........ आवर वो क्यों भला

मानसी ........मुझे त्यार होना है मेरा मतलब की मुझे अपने बालो को ठीक करना है आप बीएड पे चलिए

सूर्य ........ हम्म्म वैसे तुम्हारी ये खुसबू बहुत प्यारी है मनु उन्न्नणा

मानसी ......... आपको पसंद आई

सूर्य ......... है तुम्हारी बॉडी से निकलती तुम्हारी खुसबू इस क्रीम के साथ आवर भी प्यारी लगती है

मानसी ........ ये स्वीटी दीदी ने मुझे गिफ्ट की थी

सूर्य ........ ये तो अच्छी बात है दोनों बहनो में प्यार भडेगा वैसे आज साम को मैं बाबा से मिला था

मानसी ........ बाबा से मतलब .क्या सच में आप पिता श्री से मिले थे पैर वो तो इस संजय सुक्रलोक में है फिर आप क्या उनसे मिलने सुक्रालोम गए थे वो भी अकेले

सूर्य ....... नहीं मैं उनसे यही पृथ्वीलोक में हे मिला था पैर तुम कहना क्या चाहती हो की मैं अकेला सुक्रलोक नहीं जा सकता या तुम्हे दर है की मुझे सुक्रलोक में कोई नुकसान पंहुचा सकता है

मानसी ........ नहीं नहीं कुंवर जी हम ऐसा सोच भी नहीं सकते हमें नाफ्फ कर दीजिये बस हमें आपको ले दर लगता है अगर आपको कुछ हो गया तो हमारा परिवार हम सब का क्या होगा

मानसी का जो कुछ डेट पहले चेहरा खिला हुआ था वो अभ कुछ मुर्जा सा गया था

सूर्य ........ तुम बहुत भोली हो मनु सुक्रलोक में असुरगुरु सुक्रलोक के अलावा कोई नहीं है जो मेरा सामना कर सके

मानसी ....... मैं जानती हूँ पैर आप भी जानते है असुर चाल से वॉर करते है पीठ पीछे जैसे नरकादुर ने निर्भयासुर के साथ किया था

सूर्य ....... छोड़ो इन बातो को वो मैंने बाबा को सदी के लिया निमंत्रित किया था वो सदी में शामिल होने वाले है

मानसी .......क्या सच में पिता श्री परीलोक आपकी सदी में शामिल होंगे पैर उनके साथ अगर कोई आवर असुर आया तब आपने उन्हें किसी आवर को साथ लेन तो मन कर दिया था न

सूर्य ....... है वो अकेले आएंगे मैंने पहले देवयानी जी को भक आमंत्रित करने का सोचा था फिर बाबा ने ऐसा करने के लिया मन कर दिया

मानसी सूर्य को लिया बीएड पे आप पंहुचा

मानसी ....... आप किसी पे भी इतना जल्दी यकीं न किया कीजिये खाश कर के असुर आवर दानवो पे

सूर्य ....... अच्छा ठीक है बाबा अब मुस्कुरा भी दो

सूर्य आवर मानसी ऐसे हे कुछ देर बात करते है फिर मानसी की चाहत को समझते हुए सूर्य मानसी के साथ सम्भोग करता हक़ आवर दोनों एक दूसरे की बहो में भरे सो जाते है

परीलोक ............

उदार गुरुदेव ने रानी पारी प्रेतराज पारिजात रिद्धि j.king वैद्यराज को सूर्य आवर जीनत के विवाह को ले कर सूर्य आवर ऋषि दूर्वा आवर उनके भारतो के बिच जो कुछ भी बात हुई वो सभी के सामने रख दी

प्रेतराज भी इस बात से बेहद खुश थे आखिर जीनत उनकी बेटी थी कोई भी पिता यही चाहेगा की उसकी बेटी की डॉली उसकी चौखट से उसके द्वार से हे उसकी आँखों के सामने विदा हो

प्रेतराज ......... गुरुदेव आपके इस निर्णय से मैं आवर सम्पूर्ण प्रेतलोक आपके आभारी है

गुरुदेव .......... प्रेतराज हम आपकी मनोयस्थित से पूर्णतया अवगत है हम परीलोक के राज गुरु होने के साथ साथ एक पुत्री के पिता भी है किन्तु आपको इस बात का विशेष ख्याल रखना होगा की पुत्री जीनत आवर पुत्र सूर्य के आत्मा मिलान के दौरान किसी भी तरह का विघ्न उत्पन्न न हो पाए उचित समय पे ऋषि दूर्वा प्रेतलोक पधारेंगे आपको उनकी आज्ञा अनुसार हे कार्य करना होगा

प्रेतराज .......... आप निश्चिन्त रहे गुरुदेव ऋषि हर दूर्वा की हर आज्ञा का पालन आपके आदेश के सामान होगा आपके आवर उनके परिश्रम के चलते हे तो प्रेतलोक की राजकुमारी का विवाह उसके हे लोक में होना संभव हो पाया है फिर भला उनकी आज्ञा उनके आदेश की अवहेलना कैसे की जा सकती है

गुरुदेव .......... पुत्री जीनत के विवाह के लिया आपको ये सभी आवशयक तयारिया पूर्ण करनी होगी

कहते हुए गुरुदेव उन्हें कुछ सामग्री आवर उनका प्रयोग बताते है जिन्हे प्रेतराज खुशु ख़ुशी स्वीकार कर लेते है

प्रेतराज की तो सबसे बड़ी इच्छा अपनी पुत्री जीनत का विवाह अपने हे लोक में करने की इच्छा पूर्ण हो रही थी फिर भला उन्हें आवर क्या चाइये था

गुरुदेव ने वयपमासुर जी के आगमन की सुचना भी वह मौजूद सभी लोगो के सामने राखी जिसे सुन कुछ लोग चिंतित भी हुए

किन्तु जब गुरुदेव ने स्पष्ट किया के वो अकेले हे पुत्री मानसी के पिता आवर पुत्र सूर्य के ससुर श्री के रूप में ओस विवाह में शामिल हो रहे तब उनका मन संत हुआ

सब कुछ सभी को समाज कर गुरुदेव ने विवाह की तयारिया आवर सुरक्षा पे सभी से चर्चा की

रात का भोजन भरण कर गुरुदेव मंदिर में लौट आये आवर आराम करने के स्थान पे गगन ध्यान साधना में लीं हो गए

सूर्यगढ़ ........

.

ीदार ऐसे हे दो दिन बिट गए आज रात सूर्य का पुरे परिवार को परीलोक जाना था कल रात्रि सूर्य जीनत परिधि का विवाह जो होना था


शालिनी जी रेखा जी ने दादी जी के कहे अनुसार सभी तयारिया पूरी कर ली थी

दादा जी नाना जी दादी जी नानी जी दोनों मां जी फूफा जी शिव महेंद्र दोनों ममिया शालिनी जी रेखा जी मेनका जी मेर्री अलीना राधा किरण पायल प्रीती कोमल सपना वयोम सभी परीलोक जाने के लिया त्यार थे

सूर्य ने अपनी सकती से सभी के क्लोन त्यार किये ताकि किसी को भी उनकी इन उपस्थित का आभाष न हो विधि आवर गायत्री पहले से हे परीलोक में मौजूद थी व्योमासुर जी कल विवाह के समय हे परीलोक आने का सन्देश सूर्य को भेज चुके थे

तभी सूर्य को सोफिया की याद आई उसने भी तो सूर्य अपने विवाह के लिया आमंत्रित किया था

सूर्य ......... स्वीटी आप सभी को ले कर परीलोक चलो मैं सोफिया को ले कर आता हूँ

किरण ....... क्या वो भी परीलोक आ रही है

सूर्य ....... है उसने हमारी सचाई का पता है ऐसे में मुझे नहीं लगता की उसे इन्विते करना गलत होगा

किरण ........ ठीक है फिर आप एक काम क्यों नहीं करते है आप उसने पहले यही ले आइये हम सभी एक साथ हे वह चलते है

सूर्य ........ ठीक है तुम इस बारे में माँ को बता देना मैं अभी गया आवर अभी आया

सूर्य वह से गायब हो कर दिल्ली पंहुचा कुछ देर बाद सोफिया को लिया वापिस लौटा सभी लड़किया सोफिया से मिल काट खुश हो गई

शालिनी जी आवर रेखा जी ने भी सोफिया को गले लगा कर प्यार से स्वागत किया

सोफिया भी दिल से खुश होते हुए सभी से बड़े हे अपने पैन के साथ मिली उसने कही से भी ये मह्सुश नहीं हुआ की ये उसका परिवार नहीं है

शालिनी जी ......... सूर्य ये तुमने बहुत अच्छा किया जो सोफिया को ले आया

शिव ........ सूर्य तुम जानते हो न क्या कर रहे हो कही ये बात खुल गई तो

सोफिया ........ अंकल आप परेशान न हो मैं आप लोगो की सचाई कभी किसी को नहीं बताउंगी फिर भी आप को लगता है की मेरी वजह से आपको परेशानी हो सकती है तो ( सूर्य की आवर देख कर )

आप मेरी सभी यादें मिटा दीजिये ऐसा करने के बाद मैं चहु तब भी आप लोगो का सच किसी को पता नहीं चलेगा

शिव ........ उसकी जरुरत नहीं है सोफिया बीटा मुझे यकीं है ऐसा कभी नहीं होगा आवर अगर कभी ऐसा समय आया भी तो सूर्य सब संभल लेगा

दादा जी ........ अब हम सभी को चलना चाइये परीलोक सभी हमारा इन्तजार कर रहे होंगे

दादा जी के काने के बाद सूर्य ने टेलेपोर्टेशन द्वार का निर्माण किया आवर सभी लोग परीलोक के लिया निकल गए पीछे से उन सभी का स्थान उनके क्लोन ने ले लिया था ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
 
अपडेट. 283

असुरलोक ........... असुरलोक के असुर महल के एक कक्ष में अग्निमुखासुर अपने गुस्से की जवाला में दादाक रहा था उसके राक्षशी शरीर से बेहताशा अग्नि की लेट उठ रही थी

वही उसके सामने उस से कुछ दुरी पे कोई अपने गुथनो पे बैठा हुआ था जिसकी दर के मरे हालत ख़राब हो रही थी जो पूरी तरह से काळा लबादे से खुद को छुपाये हुए था केवल उसकी काली आँखे हे दिखाई दे रही थी जिनमे इस समय अग्निमुखासुर के गुस्से का भय ( दर ) व्याप्त था

अग्निमुखासुर ......... तुम सत्य कह रहे हो न मयासुर ( ये मयासुर कोई आवर है वातापी के पिता का नाम भी मयासुर था इस लिया कन्फ्यूज्ड न होना ) अगर तुम्हारी जानकारी लेश मात्रा भी असत्य निकली तो तुम्हे मेरे द्वारा दंड दिए जाने से कोई नहीं रोक पायेगा

मयासुर ............ स्वामी चाल कपट मेरा संभव है किन्तु आपसे चाल कपट करने जितना साहस नहीं है आपके सेवक में जो भी मेरे द्वारा आपके संज्ञान में आया है वो सभी जानकारी मैंने स्वयं एकत्रित की है वो सभी कांकरिया पूर्ण सत्य है स्वामी

अग्निमुखासुर ............ देवयानी का परीलोक से क्या सम्बन्ध है जो वो परीलोक की सहायता कर रही है मेरे असुर वीरों को गुस्पेट करने से रोकने में

मयासुर .......... इसकी पुख्ता जानकारी तो मुझे भी प्राप्त नहीं हुई है स्वामी किन्तु जो ज्ञात हुआ है उस से यही पता चला है की परीलोक से देवयानी जी का कोई सम्बन्ध नहीं है किन्तु बहुत पूर्व असुरलोक असुगुरु व्योमासुर जी का परीलोक से किसी तरह का पारिवारिक सम्बन्ध है किन्तु क्या ये अभी ज्ञात नहीं है

अग्निमुखासुर ........... क्यातुम निश्चित हो अपनी जानकारी तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की व्योमासुर का पारिवारिक सम्बन्ध है परीलोक से

मयासुर ........सुक्रलोक में गुप्त रूप से गुप्तचरी करने पे मुझे ज्ञात हुआ है स्वामी की आज रात्रि परीलोक की राजकुमारी का विवाह है जो किसी मनुष्य से होने जा रहा है उस विवाह में व्योमासुर को भी आमंत्रित किया गया है

अग्निमुखासुर .......... क्या कहा मनुष्य पृथ्वीलोक पे ऐसा कोनसा मनुष्य है जो परीलोक की राजकुमारी से विवाह करने योग्य है जहा तक मुझे परीलोक की राजकुमारी पारिजात के विषय में ज्ञात हुआ है वो तो मर्द जाट से be-intha नफरत करती है फिर ऐसा मनुष्य कोण आ गया जो परीलोक की राजकुमारी को अपने योग्य लगा

मयासुर ........ जी स्वामी आपका कथन सत्य है ये वही मनुष्य है स्वामी जिसने असुर महाराज असुरराज नरकासुर जी द्वारा कुछ समय पूर्व गुप्त रूप से भेजी गयी असुर थोड़ी का अंत किया था असुरलोक में वो उस समय असुरगुरु शुक्राचार्य के विशिष्ट अतिथि के रूप में सुक्रलोक में मौजूद था

अग्निमुखासुर मयासुर की बात सुन सन्ति से पास राखी सिंघासन नुमा चेयर पे बेथ कर गहरी सोच में दुब गया

( अग्निमुखासुर ....... माता श्री के कहे अनुसार राजकुमारी पारिजात स्वपन सुंदरी है फिर भला वो किसी सामान्य मनुष्य से विवाह कैसे कर सकती है किन्तु क्या वो मनुष्य वास्तव में सामान्य है किन्तु ऐसा संभव नहीं कोई भी सामान्य मनुष्य सुक्रलोक नहीं पहुंचने सकता जिसने स्वयं असुरगुरु अपना विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वागत करे फिर कोई सामान्य मनुष्य इतने असुरवीरो का अंत कैसे कर सकता है मयासुर से अभी भी बहुत से जानकारी छुपी हुई है या जानबुज कर चौपाई गई है क्या देवयानी पहले से हे मयासुर को सुक्रलोक में पहचान चुकी थी मुझे इस विषय पे माता श्री से चर्चा करनी चाइये )

अग्निमुखासुर ......... उस पार्थविवशी का नाम क्या है मयासुर

मयासुर ......... स्वामी उसने सुक्रलोक में ..काल ..कह कर सम्बोधित किया था देवयानी जी ने

अग्निमुखासुर ........ हम्म्म तुम कुछ समय विश्राम करो हम डोगरा हे तुमसे भेंट करेंगे

मयासुर ....... जी स्वामी जैसा आपका आदेश

कुछ हे पल में मयासुर हवा में विलीन हो गया जैसे उसका कोई अस्तित्व हे नहीं था

अग्निमुखासुर कक्ष से निकल कर सीधा द्वारिका के कक्ष में पहुंचा जहा द्वारिका आने गुप्त कक्ष में किसी तामसिक अनुष्ठान को पूर्ण करने में लगी हुई थी

द्वारिका ने अग्निमुखासुर को एक बार देखा आवर फिर से अपनी रक्षित अनुष्ठान में लग गई अग्निमुखासुर भी किसी संत बचे की तरह एक आवर खड़ा हो गया आवर द्वारिका की सभी किर्यो को बड़े हे ध्यान से देखने लगा

काफी समय बाद द्वारिका का तामसिक अनुष्ठान पूर्ण हुआ आवर ुश्मे से कोई काली परछाई बहार निकली जो देखने से हे बहुत भयानक लग रही थी कुछ हे पल में वो काली परछाई द्वारिका के भीतर समाहित हो गई

जैसे हे द्वारिका में वो काली परछाई समाहित हुई मनो द्वारिका का पूरा अस्तित्व हे बदल गया हो अभी द्वारिका किसी डरावनी डायन से भी भयानक लग रही थी पैर ये परिवर्तन कुछ हे पल रहा फिर सब सामान्य हो गया

अग्निमुखासुर ......... माता श्री ये कोनसा अनुष्ठान था जिस से आपको इतनी नकारात्मक सकती प्राप्त हुई

द्वारिका ........ हेहेहे पुत्र अग्निमुखासुर तुम्हे कब से इन तामसिक अनुस्थानो के पार्टी जिज्ञाषा होने लगी आवर हम असुर के लिया नकारात्मक ऊर्जा हे दिव्या ऊर्जा सामान है कहो अपने माता श्री की याद कैसे आ गई

अग्निमुखासुर समाज गया की उसकी माता द्वारिका अनुष्ठान के विषय में उस से कुछ भी बात नहीं करना चाहती है तब उसने भी इस से आगे कुछ भी जानने की कोशिश नहीं की अनुष्ठान को ले कर के

अग्निमुखासुर ......... माता श्री आपकी आज्ञा अनुसार मैंने अपने सबसे निपुण मायावी गुप्तचर मयासुर को सुक्रलोक गुप्तचरी करने भेजा था

द्वारिका ......... तो क्या मयासुर सुक्रलोक से लौट आया है क्या उसने कुछ खाश जानकारी मिली वह से क्यों देवयानी डस्ट व्योमासुर आवर असुरगुरु शुक्राचार्य का शिष्य परीलोक की सहायता कर रहे है

अग्निमुखासुर ....... जी माता श्री किन्तु पूर्ण सत्य मयासुर भी ज्ञात नहीं कर पाया है किन्तु जितना मयासुर ने पता किया है उस से तो यही निष्कर्ष निकलता है की व्योमासुर का परीलोक से किसी तरह का पारिवारिक सम्बन्ध है संभव ता उसके कहने पर हे देवयानी आवर p.shishy परीलोक की सहायता कर रहे है

द्वारिका गुस्से में अपने जबड़े भीचते हुए बोलती है

द्वारिका ........ मुझे पहले हे संदेह था की वो डस्ट मयासुर असुरगुरु पद के योग्य नहीं है इसी लिया मैंने सदैव उसका विरोध किया किन्तु तुम दोनों पिता पुत्र ने कभी मेरा समर्थन नहीं किया आज उसने ये स्पष्ट कर दिया है की वो असुर हितेषी नहीं है अपितु हम असुर का सबसे बड़ा सत्रु है कुल द्रोही है वो डस्ट व्योमासुर

अग्निमुखासुर ........ किन्तु माता उस डस्ट का परीलोक से इतना घनिष्ठ सम्बंद किस आदर पे हो सकता है की आज रात्रि परीलोक की राजकुमारी पारिजात के विवाह में उसने आमंत्रित किया गया है

द्वारिका ......... क्या परीलोक की राजकुमारी पारिजात का विवाह किन्तु ये कैसे संभव है वो तो सम्पूर्ण पुरुष जाती से घिरना करती है क्या मयासुर ने इस विवाह को ले कर कोई आवर जानकारी भी दी है

अग्निमुखासुर ......... है माता श्री राजकुमारी पारिजात का विवाह जिस से हो रहा है वो पार्थविवशी है ुशी ने पिता श्री द्वारा सुक्रलोक गुप्त रूप से भेजी गई गुप्तचरी की चौड़ी का समल विनाश किया था

द्वारिका ......... क्या कहा पार्थविवशी पृथ्वीलोक पे तो केवल इंसान रहते है जो हम असुरो आवर परीलोक के लिया कीड़े मकोड़े के सामान है उनने इतना सामर्थ्य नहीं है अवश्य इसके पीछे कोई रहश्य है हमें इसका पता करना होगा

( पहले उस पार्थविवशी का सुक्रलोक में आना आवर अब परीलोक से पारिवारिक सम्बन्ध कही भविष्य में असुरलोक पे कोई भयानक संकट तो नहीं आने वाला है स्वामी में इस समय तप में है मुझे इसके पीछे छुपे सत्य तक पहुंचना हे होगा )

द्वारिका .......... पुत्र अग्निमुखासुर हमें इस पूरी घटना के पीछे छुपे उस उद्देश्य का पता करना हे होगा आवर इसका केवल एक हे मार्ग है

अग्निमुखासुर ......... ऐसा कोनसा मार्ग है माता जिसके माध्यम से है इसके पीछे छुपे षड़यंत्र का पता कर पाए

द्वारिका ........... महा मायावी यक्षिणी चंडिका

अग्निमुखासुर ......... महा मायावी यक्षिणी चंडिका ये कोण है माता श्री

द्वारिका ने जबाब देने की बजाय अपने गले में पहनी माला में से काळा बुरे रंग का पत्थर निकला आवर कोई मंत्र जप कर उस हे जमीं पे फेंक दिया

कुछ पल उस पत्थर से दुन्वा निकला आवर उसके बाद वह एक आकर्ति बन गई जो किसी खूबसूरत महिला की थी

अग्निमुखासुर भी उस महिला की खूबसूरती में खोने से खुद को रोक नहीं पाया

चंडिका .......... यक्षिणी चंडिका आपकी सेवा में हाजिर है महारानी जी मेरे लिया क्या आदेश है महारानी जी

द्वारिका .......... तुम्हे सुक्रलोक जाना होगा आवर तुम्हे मेरा कार्य बिना किसी के नजरो में आये पूर्ण करना होगा

चंडिका ......... जी महारानी जी उसके बाद द्वारिका ने एक बॉक्स निकला आवर उसके से एक सफ़ेद दग़ा निकला आवर उसने यक्षिणी चंडिका के हाथ में बांड दिया फिर उसने कुछ समाज कर भेज दिया

अग्निमुखासुर तो इस दौरान बस यक्षिणी चंडिका के खूबसूरत यौवन में हे खोया रहा जैसे उसके लिया सब कुछ रुक गया हो

द्वारिका भी अग्निमुखासुर की परिस्थिति से अनभिज्ञ नहीं थी वो अग्निमुखासुर की यक्षिणी को ले कर जो पार्टी किर्या थी उसने देख मन हे मन मुस्कुरा रहज थी वही उसके चेहरे पे कुछ जलन के भाव भी थे जो की यक्षिणी की खूबसूरती को ले कर हे थे कादरी देर तक अग्निमुखासुर द्वारिका से बात करता रहा उसके बाद वो अपने कक्ष में लौट गया

परीलोक .........

परीलोक में रात्रि को हो रहे विवाह की तयारिया बड़े हे जोर शोर से चल रही थी सूर्य आवर उसका पूरा परिवार सूर्य महल में थे हुए थे जहा पृथ्वीलोक की रीती रिवाजो के साथ सूर्य के विवाह की तयारिया चल रही थी

वही पारी महल में भी ऐसा हे माहौल बना हुआ था

पारिजात जो परीलोक की सबसे खूबसूरत पारी थी उस हे सहद चन्दन गुलाब जल ढूढ केसर आदि से नहलाया जा रहा था साथ हे साथ पृथ्वीलोक के विवाह विधि अनुसार पारिजात के खूबसूरत जिसम पे उप्टन भी लगाया जा रहा था

पारिजात की खूबसूरती जो पहले से हे अपने चरम पे थी वो आवर भी निखार रही थी

वही एक तरफ महिमा जी के साथ भी यही किर्या की जा रही थी महिमा जी की खुश सखी शी लिया इस बिच उसने छेद भी रही थी जिस से वह का माहौल बड़ा हे खुशनुमा बना हुआ था

J.king आवर जिनिशा इस विवाह में पारिजात की आवर से शामिल हुए थे इस लिया जिनलोक से इस विवाह में शामिल हुए सभी लोग पारी महल में हे रुके हुए थे

वही वयोम अपने परिवार के साथ सूर्य महल में रुका हुआ था वयोम के माता पिता भी सूर्य के परिवार आवर सूर्य से मिल कर बहुत खुश थे

सोफिया परीलोक की भव्य सुंदरता को देख मंत्र मुग्धा थी आवर कुछ निराश भी क्युकी इस समय परीलोक में जो भी लोग मौजूद थे उन सभी के पास अपनी सकती या थे केवल सोफिया हे एक ऐसे लड़की थी जो बिना किसी सकती के परीलोक में मौजूद थी

पैर जल्द हे विधु आवर गायत्री ने सोफिया को इस निराशा से बहार निकल दिया विधि जो अपनी चंचलता से किसी की भू ुदशी दूर कर सकती थी उसके रहते भला सोफिया कैसे निराश हो सकती थी ऊपर से अलीना कोमल प्रीती सपना आवर खाश कर किरण के सपोर्ट से सोफिया की सभी चिंताए दुनू के गुबार के सनान गायब हो गई

नागलोक से नागराज महावीर नागरानी पूर्वी युवराज इंद्रजीत के साथ तक्षक नागरानी आवर उनकी पुत्री भी परीलोक पहुंचने हुई थी

उदार सूर्य महल के एक कक्ष में गुरुदेव 5 ऋषिवरो के साथ बे थे हुए चर्चा कर रहे थे

R.durva ........... गुरुदेव पुत्री पारिजात का विवाह पूर्ण मध्यरात्रि को होना है किन्तु उस से पूर्व पुत्र सूर्य पुर पुत्री जीनत का विवाह प्रेतलोक में होना अनिवार्य है इसका तो एक हे अर्थ निकलता है की हमें पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत के आत्मा मिलान को समय से पूर्व हे पूर्ण मरवाना होगा

गुरुदेव ......... नहीं ऋषि दूर्वा ऐसा भूल कर भी नहीं करना हमने प्रेतराज से प्रेतलोक की कुंडली ले कर उसका अध्यन किया है मध्य रात्रि से पूर्व प्रेतलोक की गाढ़ा दशा में परिवर्तन होगा ुशी समय आत्मा मिलान की किर्या आरम्भ करनी होगी उस से पूर्व आत्मा मिलान कज किर्या आरम्भ करने से पुत्र सूर्य के साथ साथ प्रेतलोक भी संकट में पद सकता है हमें ऐसा होने से रोकना होगा

R.durva ......... जी गुरुदेव जैसा आप कहे किन्तु क्या इस विषय पे आप विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि समय रहते बिना किसी अतिरिक्त चूक के हम इस देव कार्य को सफलता पूर्वक पूर्ण कर सके

गुरुदेव .........अवश्य ऋषि दूर्वा इस गाढ़ा दशा का आरम्भ होने के पचत इसका असर ज्यादा लम्बा नहीं रहेगा प्रेतलोक पे इसका असर आधे पहर से भी काम होगा आपको इसके लिया ग्रहो की गाढ़ा दशा की पूर्ण जानकारी होना आवशयक है

कहते हुए गुरुदेव ने सूर्य जीनत आवर प्रेतलोक की कुंडली को प्रकार किया आवर ऋषि दूर्वा कक बारीकी से समझने लगे जैसे जैसे गुरुदेव इस विषय पे बताते गए रिशु दूर्वा को भी समाज आने लगा की क्यों गुरुदेव उन्हें इतने विस्तार से समाज रहे थे यहाँ अगर कोई भी चूक हुई तो उसका परिणाम सूर्य के साथ साथ सम्पूर्ण प्रेतलोक को भी भुगतना होगा

पूरी घटना को समाज ने के बाद ऋषि दूर्वा ने गुरुदेव को आस्वस्त किया की उनसे कोई भी चूक नहीं होगी गुरुदेव भी ऋषि दूर्वा के शब्दों से अपने भीतर उठे दावन्द से मुक्त हो गए

गुरुदेव .......... उचित है अब हमें पुर्त्र सूर्य के शरीर को सुरक्षित रखने हेतु उचित उपाय करना आरम्भ कर देना चाइये मुझे संदेह है की कोई अनिष्ट घटना घाट सकती है

ऋषि दूर्वा ....... जी गुरुदेव आप निश्चित रहे इस कार्य में मैं अपना योगदान देना चाहता हूँ

गुरुदेव ....... हम सामने नहीं ऋषि दूर्वा

ऋषि दूर्वा .......... गुरुदेव मुझे अपने पूर्वजो से भरण नाद सुरक्षा सूत्र की शिक्षा प्राप्त हुई है किन्तु आज तक मुझे भरण नाद सूत्र का प्रयोग करने की आव्सय्कता नहीं पड़ी है

गुरुदेव ऋषि दूर्वा की बात सुन छिनक गए वो बहुत अच्छे से जानते थे की भरण नाद सूत्र क्या है आवर उसका प्रयोग किस हेतु किया जाता है

गुरुदेव .......... ऋषि दूर्वा क्या आप इस अभेद्य सुरक्षा सूत्र का प्रयोग बिना किसी त्रुटि ( चूक ) के प्रयोग करने में सक्षम है हम आपके सामर्थ्य पे कोई संदेह नहीं कर रहे है किन्तु हम किसी तरह की त्रुटि नहीं चाहते इसका परिणाम आप भी जानते है

R.durva ........... हम आपकी चिंता को समाज रहे है गुरुदेव किन्तु हम आपको निश्चिन्त करते है की हम इस सूत्र का बिना किसी त्रुटि के प्रयोग करने में सक्षम है किन्तु इसमें एक समस्या है गुरुदेव

गुरुदेव ........ कैसे समस्या ऋषि दूर्वा

R.durva ......... गुरुदेव अगर हमें अपनी देह त्याग नहीं करना होता तो ये सामान्य नहीं होती किन्तु हमें भी सूर्य के साथ देह त्याग कर प्रेतलोक जाना है ऐसे में हमारे शरीर से आत्मा विलम्ब होने पे अगर हमारे शरीर को किसी ने नस्ट कर दिया तो भरम नाद सुरक्षा सूत्र नस्ट हो जायेगा

गुरुदेव ........... इस तात्या को हम भली भाटी जानते है आवर हमने इसके लिया उचित मार्ग का चयन भी कर लिया है आप भरण नाद सुरक्षा सूत्र की तयारी आरम्भ कीजिये आपकी सुरक्षा का दायित्व हमारा है

R.rishi ......जी गुरुदेव जैसे आपकी आज्ञा

ऋषि दूर्वा ुशी कक्ष के मध्य में ध्यान मुद्रा में बेथ गए आवर भरण नाद सुरक्षा सूत्र का जाप करने लगे कुछ देर बाद ऋषि दूर्वा के मस्तिष्क से एक बहुत तेज रौशनी निकली जिस से पूरा कक्ष रौशनी से भर उठा डिग्री डेरेस रौशनी से किसी कुंडली नुमा यन्त्र का निर्माण होने लगा कक्ष के ठीक बीचों बिच होने लगा

यन्त्र को पूर्ण होता देख गुरुदेव ने रहत की साँस ली उसकी ऊर्जा से हे गुरुदेव समाज गए थे की वो भरण नाद सुरक्षा सूत्र कितना सक्तिसाली है उसके होते हुए कोई भी सुरक्षा को भेद कर सूर्य तक नहीं पहुंचने सकता हर पल उसकी संरचना बदल रही थी जिसने भेद पाना सायद हे संभव हो

इस कार्य में ऋषि दूर्वा की बहुत से ऊर्जा आवर सकती की खपत हो चुकी थी किन्तु फिर भी उनके चेहरे पे जो ख़ुशी थी उसे बया कर पाना संभव नहीं आज उन्होंने पहली बार इस सूत्र का प्रयोग किया था आवर उसे सफलता पूर्वक बिना किसी त्रुटि के पूर्ण करने पे जो पदम् सुख कक अनुभूति उनके मुख मंडल पे थी वो भेद लुभावनी थी

गुरुदेव ........ ऋषि दूर्वा आपकी इस अनुपम सहायता के लिया धन्यवाद

R.durva ...... ये आप कैसे बात कर रहे है गुरुदेव ये तो मेरा पुर मेरे पूर्वजो को सौभाग्य है जो उनकी शिक्षा इस देव कार्य में काम आ रही है धन्यवाद कर मुझे शर्मिंदा न करे गुरुदेव

गुरुदेव ने अपने सक्तियो से पुरे कक्ष को सुरक्षित कर दिया आवर उन्होंने सूर्य के लिया निर्माण किये सुरक्षा सूत्र के पास हे ऋषि दूर्वा के लिया सुरक्षा कवच का निर्माण कर दिया था

बाकि चारो ऋषियों को कक्ष के चारो कोनो में उनके स्थान आवर कार्य को समाज कर गुरुदेव आवर ऋषि दूर्वा कक्ष से बहार आ गए अभी संध्या का समय हो चूका था सूर्य भी लगभग त्यार था

गुरुदेव आवर रिशु दूर्वा ने सूर्य से एकांत में कुछ देर बात की आवर कक्ष से चले गए

उनके जाते हे सूर्य ने अपने अंदर से एक ऊर्जा पुंज कक उत्पन्न किया आवर उसे छोड़ दिया कुछ हे पालो में ऊर्जा पुंज वह से गायब हो गया

डेरी डेरी वो समय भी आ गया जब सूर्य को प्रेतलोक के लिया निकलना था

सूर्य सभी से आशीर्वाद ले कर उस कक्ष की आवर भाड़ गया पैर उस से पूर्व किरण से मिल कर उसे कुछ समाज दिया किरण भी बड़े ध्यान से सूर्य की बात सुनु आवर उसने सूर्य को आस्वस्त किया की आप निश्चित हो कर जीनत से विवाह करने जाइये

सूर्य ऋषि दूर्वा के साथ उस कक्ष के भीतर प्रवेश कर गया आवर उनके भीतर प्रवेश करते हे कक्ष बंद हो गया

गुरुदेव ने अपने ऊर्जा स पुरे कक्ष को बहार से भी सुरक्षित कर दिया

साथ हे साथ गुरुदेव ने परीलोक आवर जिनलोक के विशेष योद्धाओ को उसकी सुरक्षा में लगा दिया

उदार सूर्य कक्ष में पहुंचने हे ऋषि दूर्वा के आदेश अनुसार भरम नाद सुरक्षा सूत्र में ध्यान लगा कर बेथ गया

उसके ध्यान में कीं होते हे ऋषि दूर्वा द्वारा उच्चारण किये मंत्र से सुरक्षा सूत्र एक्टिव हो गया

ऋषि दूर्वा भी चारो ऋदषियो को कुछ समाजक कर गुरुदेव द्वारा निर्मित सुरक्षा कवच में प्रवेश कर ध्यान में बेथ गए

कुछ हे देर बाद सूर्य का शरीर चमक ने लगा आवर उसे शरीर के बहार शेयर रंग के ऊर्जा से चक्र निर्माण होने लगा

ऐसा हे ऋषि दूर्वा के साथ हुआ किन्तु उनसे निकल रही ऊर्जा का प्रभाव इतना आदिक नहीं था

कुछ पल बाद सुनहरा ऊर्जा चक्र संत हो गया आवर ुशी के साथ कक्ष की चाट पे किसी तरह का हॉल नजर आने लगा जिसकी दूसरी आवर अलग हे दृश्य था

सूर्य आवर ऋषि दूर जा के शरीर से उन दोनों की आत्मा विलम्ब हो कर उस हॉल से गायब हो गई

बाकि चारो ऋषि तुरंत ध्यान में लीं हो अपने अपने तत्वों की ऊर्जा को मुक्त कर देते है जो सीधा ऋषि दूर्वा के शरीर में प्रवेश करने लगती है सूर्य आवर ऋषि दूर्वा आत्मा रूप में प्रेतलोक की यात्रा अपने गंतव्य पे निकल चुके थे ....................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ........................
 
The Immortal भाई इस नए वर्शन के कारन अपडेट के बिच में पिछ पोस्ट करने के बाद वर्ड साइज आवर टाइप करने में प्रॉब्लम हो रही है

जैसे हे अपडेट के बिच पिछ ऐड कर वर्ड साइज सेलेक्ट करते है तो सीधा अपडेट के फर्स्ट लेटर पे पहुंचना रहे है कलर आदि सेलेक्ट करने में भी प्रॉब्लम हो रही है पिछ ऐड करने के बाद
 
अपडेट 284

ऐसा हे ऋषि दूर्वा के साथ हुआ किन्तु उनसे निकल रही ऊर्जा का प्रभाव इतना आदिक नहीं था

कुछ पल बाद सुखदा ऊर्जा चक्र संत हो गया आवर ुशी के साथ कक्ष की चाट पे किसी तरह का हॉल नजर आने लगा जिसकी दूसरी आवर अलग हे दृश्य था

सूर्य आवर ऋषि दूर जा के शरीर से उन दोनों की आत्मा विलम्ब हो कर उस हॉल से गायब हो गई

बाकि चारो ऋषि तुरंत ध्यान में पीने हो अपने अपने तत्वों की ऊर्जा को मुक्त कर देते है जो सीधा ऋषि दूर्वा के शरीर में प्रवेश करने लगती है सूर्य आवर ऋषि दूर्वा आत्मा रूप में प्रेतलोक की यात्रा अपने गंतव्य पे निकल चुके थे ....................

अब आगे ..............

प्रेतलोक ........... प्रेतलोक के महल को विवाह के लिया विशेष रूप से किसी नव विवाहिता के जैसे सजाया हुआ था आवर ऐसा हो भी क्यों नहीं प्रेतलोक के िथश में ऐसा पहला अवसर था जहा किसी का विवाह होने जा रहा था

आज से पूर्व तो यहाँ प्रेतलोक में केवल आत्माओ को उनके कर्मो अनुसार दंड या फॉल हे प्राप्त होता था आज ऐसा पहला अवसर था जिसके चलते प्रेतलोक के िथश में पहली बार बदलाव हो रहा था

प्रेतराज का चेहरा अपनी पुत्री के विवाह की ख़ुशी से दमक रहा था

वही उन्हें अपनी पुत्री से विलम्ब होने का दुःख भी था जिसे प्रेतराज छुपाये हुए थे वो अपने इस दुःख को किसी के समक्ष नहीं आने देना चाहते थे खाश कर अपनी पुत्री राजकुमारी जीनत के सामने

प्रेतराज ने गुरुदेव के इच्छा अनुसार सभी पर बंद पहले हे कर चुके थे अब उन्हें केवल सूर्य आवर ऋषि दूर्वा के आगमन की प्रतीक्षा थी जिनका वो अदिर्ता से इन्तजार कर रहे थे

आज स्वयं प्रेतराज अपने महल के द्वार पे खड़े थे किसी की प्रतीक्षा कर रहे थे

उनके साथ उनके हे कुछ मंत्रीगण दण्डादिकारी भी वही उनके साथ खड़े हुए थे

उदार जीनत अपने कक्ष में अपनी सखी सहेलियों के बिच बे थी हुए थी

लाल सुहाग के जोड़े ने जीनत की खूबसूरती उसकी सुंदरता में आवर भी निखार ला दिया था

अभी भी राजकुमारी जीनत की सखिया उसे विवाह के लिया त्यार करने में लगी हुई थी

जीनत के खूबसूरत दूडिया हाथो पे खूबसूरत सुहाग की निसानी मेहँदी की आभा आवर भी प्यारी लग रही थी हाथ से ले कर कंधो तक मेहँदी से बानी खूबसूरत कारीगरी के साथ वो खूबसूरत सवर्ण ( गोल्ड ) कंगन जिन्हे बेसकीमती हिरे जेवरात से सुसज्जित किया हुआ था

पैरो में लगी मेहँदी के साथ जीनत द्वारा पहली हुए सुनहरी पायल जब जब जीनत के पांव हिलते खूबसूरत पैरो में पहनी पायल से जो दौनी निकलती मनो किसी ने वाद्य यन्त्र से मदुर संगीत दौनी प्रवाहित कर दी हो

वही जीनत की सखिया भी इस मोके पे जीनत को छेड़े बिना भला कैसे रह सकती थी जैसे जैसे समय निकल रहा था जीनत की दिल की धड़कन भी भाड़ रही थी अपने आवर सूर्य के मिलान का सोच कर

विजय ......... क्या हुआ सखी किस सोच में खोयी हुई है आप कही जीजा श्री अभी से तो याद सताने नहीं लगी है

जीनत ने तो कुछ नहीं कहा सिवाय मुस्कुराने के पैर जीनत का श्रीनगर कर रही उसकी दूसरी सखी ने मोके का फायदा उठाते हुए चीन सुरु कर दिया

2.सखी ........ देखो तो आज हमारी सखी कितनी खूबसूरत लग रही है इस सुहाग श्रीनगर में सब्ज़ी हुई

विजय ........ वो तो है हम सब ने इतनी म्हणत जो की है ऊपर से हमारी सखी जीनत किसी जानत की अप्सरा से काम खूबसूरत थोड़े न है

सखी 2 ........ ये तो है पैर हमारी मैंट का फल तो जीजा श्री को मिलने वाला है

विजय ...... क्या मतलब सखी

सखी 2 ........ हमने इतनी म्हणत कर हमारी सखी को किसी महकते गुलाब की काली जैसा बनाया है पैर इस गुलाब की खूबसूरत काली को तो फुल (पुष्प ) जीजा श्री हे बनायेगे जो गोवन सखी ने आज तक संभल कर रखा था आज की मिलान रात के बाद उस खूबसूरत काली का राश पान करने का अधिकार तो हमारे जीजा श्री को हे होगा न हेहेहे काश कुछ नजरे इनायत जीजा श्री अपनी इन सलियो पे भी कर दे

विजय ........ हमारी ऐसी किस्मत कहा सखी वैसे मैंने सुना है पृथ्वीलोक पे एक कहावत है की साली आदि घरवाली होती है मैं तो इसमें भी खुश हूँ बस सखी जीनत एक बार है तो कहे मैं तो आदि घरवाली बन कर भी खुश हूँ

जीनत ........ मुँह न तोड़ दूँ मैं तुम सब का अगर तुम सबने उन्हें परेशान किया तो

विजय ....... हेहेहे देखा सखी हमारी सखी तो अभी से हमें जीजा श्री से दूर करने की कोशिश कर रही है

पैर आज किसी पे भी जीनत के बनावटी गुस्से का कोई असर नहीं हो रहा था जीनत बहार से तो गुस्सा होने का नाटक कर रही थी पैर असल में वो अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी अपनी सखी शेलिए की इस चुलबाज़ी भरी छेद चढ़ से

वही कुछ देर बाद अचानक से प्रेतलोक के आसमान में बदलाव होना सुरु हो जाता है जिसे हर कोई देख प् रहा था अचानक से आसमान में बड़ी तेजी से बदलो का बवंडर बनने लगा जो एक हे स्थान पे जोरो से हमने लगा उसमे अलग अलग तरह के बीज लिया चमक रही थी

प्रेतराज की भी आँखे चमक उठी जब उनकी नजर आकाश में बनते बवंडर के बिच पड़ी जहा डेरी डेरी ब्लैक हॉल जैसा कुछ बन रहा था

प्रेतराज ......... पुत्र सूर्य आवर ऋषि दूर्वा प्रेतलोक में पदर चुके है

कुछ हे पल बाद प्रेतलोक के उद्यान में तेजी बिजली गिरती है जिसमे से दो परछाई बहार निकलती है दोनों हे परछाई से बहुत तेज रौशनी निकल रही थी जैसे वो किसी अदृश्य रौशनी के सुरक्षा कवच में हो

प्रेतराज मंत्रीगण दण्डादिकारी सभी फ़ौरन उनके समक्ष आ पहुंचे

सूर्य का इस समय जो तेज था उस से उसका चेहरा तक देख पाने में सभी को बहुत परेशानी हो रही थी

सूर्य की आत्मा के 7 चक्र पूर्ण रूप से जागृत थे जिस से अलग अलग ऊर्जा निकल रही थी ऐसा हे ऋषि दूर्वा के साथ हो रहा था

जैसे हे सूर्य के कदम उदयन में जमीं को टच हुए उदार अपने कक्ष में बैठी राजकुमारी जीनत की दिल की धड़कन भाड़ गई उसे सूर्य का प्रेतलोक में आ जाने का आभाष हो चूका था उसका मन मस्तिष्क अप्रषित रूप में ख़ुशी से भर उठा था

प्रेतराज ........ हम प्रेतलोम के सम्राट प्रेतराज अपने जमता सूर्य आवर ऋषि श्रेठ दूर्वा का प्रेतलोक में स्वागत करते है

सूर्य .......... परनाम पिता श्री

ऋषि दूर्वा ......... प्रेतलोक सम्राट प्रेतराज को ऋषि दूर्वा का परनाम स्वीकार हो

प्रेतराज ......... ऋषि दूर्वा हम इस योग्य नहीं है की एक सीधा ऋषि को आशीर्वाद दे सके आज आपके सामने प्रेतलोक का डिप्टी नहीं है अपितु एक पुत्री का पिता है

प्रेतराज सूर्य आवर ऋषि दूर्वा को सह सामान अपने महल में आमंत्रित करते हुए उनकी आडवाणी कर महल के मुख्या भाग में ले आते है जहा विवाह की बाकि तयारिया की गयी थी

ऋषि दूर्वा गुरुदेव द्वारा दी सूर्य आवर जीनत की कुंडली को प्रकट करते है आवर साथ हे साथ सभी ग्रहो की दिशा का पता कर प्रेतलोक की कुंडली का आकलन करते है

R.durva ........ प्रेतराज जी कुछ हे समय शेष है ग्रहो की दिशा बदलने में इस पूर्व हमें सभी तयारिया एक बार पुनः जाँच कर लेनी चाइये अन्यथा एक भी चूक हुए तो उसका परिणाम पुत्र सूर्य के साथ साथ सम्पूर्ण प्रेतलोक को भी भुगत न पड़ेगा

प्रेतराज ........ नहीं नहीं ऋषिवर हम ये जोखिम नहीं उठा सकते है

हमने अपनी आवर से सभी तयारिया अपनी देख देख में की है फिर भी आपसे अनुरोध है की आप स्वयं एक बार जाँच करे

ऋषि दूर्वा सभी तयारियो का बारीकी से निरक्षण करते है आवर पूर्ण संतुष्टि के साथ प्रेतराज को आस्वस्त करते है की तयारियो में कोई चूक नहीं हुई है

ऋषि दूर्वा ......... प्रेतराज जी आपको गुरुदेव ने पूर्व में हे विस्तार से समजा दिया होगा की आत्मा मिलान के दौरान कोई भी ैर्यशीट घटना के लिया आपको साज़ होना होगा क्युकी पुत्री जीनत आवर पुत्र सूर्य की दिव्या अंश के मिलान से जो ऊर्जा उत्पन्न होगी उसके मध्य कोई भी आया उसका विनाश निश्चित है

प्रेतराज ........ हम जानते है ऋषिवर इस लिया हमने पहले हे इसका समाधान निकल लिया है आत्मा मिलान के समय आप पुत्र सूर्य पुत्री जीनत के अलावा यहाँ केवल हम मौजूद रहेंगे हमारी परजा पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत के विवाह में उस समय शामिल होगी जब आपके द्वारा मानव विधि से दोनों का विवाह आरम्भ होगा

R.durva ......... हम भी आपसे यही आग्रह करना चाहते थे प्रेतराज जी क्युकी आप प्रेतराज है इस लिया आप पे उस दिव्या ऊर्जा का प्रभाव नहीं होगा आवर हम स्वयं इस आत्मा मिलान की विधि का आरम्भ कर रहे है इस लिया हमें उस दिव्या ऊर्जा से खतरा नहीं

प्रेतराज ......... ऋषि दूर्वा ग्रहो की दिशा में परिवर्तन होने जा रहा है

R.durva ......... पुत्री जीनत को आत्मा मिलान स्थल पे उपस्थित होना है

ऋषि दूर्वा की बात सुन प्रेतराज राजकुमारी जीनत के कक्ष की आवर भाड़ गए आवर ऋषि दूर्वा अपनी आत्मा ऊर्जा का प्रयोग कर दिव्या हवं का आह्वान करते है जो कुछ हे देर में प्रकट हो जाता है

कुछ हे देर में प्रेतराज राजकुमारी जीनत आवर उनकी कुछ सखिया के साथ ऋषि दूर्वा के पास आते है

R.durva ....... हम चारो को अलावा यहाँ किसी आवर का रुकना संभव नहीं है

ऋषि दूर्वा की बात सुन प्रेतराज जीनत की सभी सखिया को वह से जाने का आदेश देते है आवर खुद भी वह से दूर हो जाते है

प्रेतराज अपने हाथ में पकडे दंड पास को ाक्ष की आवर करते है जिसमे से काफी मात्रा में ऊर्जा रूप में रौशनी निकलती है आवर ऋषि दूर्वा सूर्य जीनत के साथ साथ आत्मा मिलान के लिया पर्याप्त स्थान को सुरक्षा घेरे में ले लेता है वह चार पिलर टाइप रौशनी के स्तम्भ उत्पन्न होते है उनसे निकलती रौशनी आपस में जुड़ कर एक चारदीवारी का रूप ले लेती है

ऋषि दूर्वा आत्मा रूप में मंत्र उच्चारण करना आरम्भ कर देते है हवन के आसपास रही सामग्री से एक निश्चित मात्रा में सामग्री हवन में जाने लगती हक़ करीब 10 मिनट्स के बाद हवन से दो ऊर्जा यन्त्र निकल कर हवन से कुछ दुरी पे जमीं पे अंकित हो जाते है

ऋषि दूर्वा सूर्य आवर राजकुमारी जीनत को उस यन्त्र रूपी ऊर्जा में बेथुने का इशारा करते है

सूर्य की आत्मा उस ऊर्जा यन्त्र में बेथ जाती है आवर ऐसा हे जीनत भी करती है प्रेतराज ने पहले हे जीनत को इस विधि से अवगत करवा दिया था

कीच देर बाद रिशु दूर्वा अपनी दृस्टि सूर्य जीनत आवर प्रेतलोक की कुंडली पे डालते है जिनमे ग्रहो की दिशा बदल रही थी पैर अभी भी कुछ पल थे आत्मा मिलान आरम्भ करने में

करीब दो मिनट्स बाद ऋषि दूर्वा अपनी आँखे बंद कर मंत्रो उच्चारण करने लगते है उनके मंत्री उच्चारण के साथ हे जीनत का शरीर गायब होने लगता है आवर जीनत के स्थान पे अब केवल जीनत की आत्मा थी जिस से बहुत हे पावरफुल ऊर्जा निकलती हुई मह्सुश हो रही थी

ऋषि दूर्वा के मंत्री उच्चारण से जीनत की आत्मा में बदलाव होने लगे आवर जीनत के 7 आत्मा चाहर जागृत हो गए

एक समय बाद ऋषि दूर्वा के मंत्री उच्चारण से सूर्य आवर जीनत की आत्मा से जुडी ऊर्जा ऋषि दूर्वा द्वारा आह्वान किये हवन में जाने लगी

जैसे जैसे ऊर्जा उस हवन में जा रही थी वैसे वही उस स्थान के ऊपर आकाश में बहुत जोरो से बिजलिया टकराने लगी जैसे बहुत हे भयानक तूफान आने वाला हो

प्रेतराज द्वारा दंड पास से उत्पन्न चारो स्थम्ब भी सूर्य आवर जीनत की आत्मा ऊर्जा के प्रेशर से हिलने लगे थे

जिन्हे देख प्रेतराज आवर पीछे हो गए भले हे प्रेतराज को मौत का कोई भय नहीं था पैर सूर्य आवर जीनत की ऊर्जा के प्रेशर से वो भी दर गए थे

डेरी डेरी सूर्य आवर जीनत जिन दो ऊर्जा यंत्रो में बे थे हुए थे वो हवा में ऊपर उठने लगे साथ हे दोनों से आदिक तेजी से ऊर्जा निकल हवन में सामने लगी ऐसे हे एक समय ऐसा भी आया जब ऐसा लगा की किसी भी समय हवन में विस्पोट हो सकता है ऊर्जा का इतना आदिक प्रेशर भाड़ चूका था

तभी ाक्ष में एक जोरदार विस्पोट हुआ जिसका दमका इतना तेज था जैसे 2 गाढ़ा आपस में टकरा गए हो आवर तभी आकाश से सप्त रंगी ऊर्जा किरणे हवन की आवर बड़ी तेजी से भड़ने लगी

ठीक ुशी समय हवन से बिजली की घाटी से ऊर्जा पुंज निकला आवर आकाश से निचे की आवर आती सप्तरंगी किरणों से टकरा गया

डेरी डेरी सप्त रंगी किरणे हवन स्व निकले ऊर्जा पुंज में समाहित हो कर निचे आने लगी आवर हवन में समाहित हो गई

तभी ऋषि दूर्वा की आँखे खुली आवर वो हवन को नमन कर वह से उठ कर उन दंड पास से निर्मित स्थम्ब के ऊर्जा क्षेत्र से बहार निकल आये

जीनत का शरीर फिर से जैसे गायब हुआ था ुशी तरह से पुनः आ गया वही सूर्य की आत्मा हवन में समाहित हो गई

ऋषि दूर्वा को अपनी आवर आते हुए देख प्रेतराज भी बोल उठे

प्रेतराज ........ ऋषिवर क्या पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत का आत्मा मिलान पूर्ण हो गया

ऋषि दूर्वा ....... जी प्रेतराज पुत्र सूर्य पुर पुत्री जीनत का आत्मा मिलान बिना किसी बढ़ा के ईश्वर कारण से पूर्ण हो गया

अभी ऋषि दूर्वा आवर प्रेतराज आपस में बात कर हे रहे थी के उनके कानो में विश्पोट की आवाज सुनाई दी

विश्पोट की आवाज सुन ऋषि दूर्वा खुश हो गए वही प्रेतराज अभी भी हवं से निकल रही दुन्वा को देख परेशान हो रहे थे

जब हवन से दुन्वा हटी तब उनके सामने करीब 8 फिट लम्बा बलिष्ठ योद्धा खड़ा था छोड़ा सीना विशाल बजाए जो बाहुबल से लबरेज लम्बे केश ( बॉल ) दिव्या तेज से चमकता मुख मंडल गहरी लाल आँखे होंटो पे खतरनाक मुस्कान हाथो में त्रिशूल जैसा क्षेत्र ( किन्तु इस शास्त्र में 4 शूल थे ) थामे हुए वो योद्धा अपने से कुछ कदम दूर कड़ी राजकुमारी जीनत को देख मुस्कुरा रहा था वो कोई आवर नहीं सूर्य का महाप्रेत रूप था

जीनत भी बस एक तक महाप्रेत सूर्य के इस रूप को निहार रही थी सूर्य कही से भी महाप्रेत नहीं लग रहा था अगर उसकी वो जवाला से दादाकति आँखे हटा दे तो मनो सवरग से कोई देव योद्धा प्रेतलोक में प्रकट हुआ हो

ऋषि दूर्वा ........ प्रेतराज आत्मा मिलान पूर्ण हुआ पुत्र सूर्य को महाप्रेत रूप प्राप्त हो चूका है

प्रेतराज ...... जी ऋषिवर आपने उचित कहा आपका कोटि कोटि धन्यवाद ऋषिवर जो आपकी सहयता से ये देव कार्य सम्पन हुआ

ऋषि दूर्वा ....... प्रेतराज आप धन्यवाद कर मुझे शर्मिंदा कर रहे है मेरे लिया तो ये बहुत हे शो भाग्य का अवसर है की इस देव कार्य में मैं योगदान कर पाया अब हमें सिगरा हे पृथ्वीलोक के विधि अनुसार पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत का विवाह आरम्भ कर देना चाइये

प्रेतराज ......... जी ऋषिवर जैसा आप कहे

ऋषि दूर्वा सूर्य के समक्ष जाते है आवर उसे कुछ बताते है जिसे सुन सूर्य अपने नार्मल रूप में लौट आता है

कुछ देर बाद जीनत की सखिया वह पहुँचती है आवर कुछ सेविकाएं भी जो सूर्य आवर जीनत को अलग अलग कक्ष की आवर ले जाती है

ऋषि दूर्वा आवर प्रेतराज महल के विशाल प्रागण में ऋषि दूर्वा के कहे अनुसार वो सभी तयारिया करवा रहे थे जिस से कुछ देर बाद सूर्य आवर जीनत का पृथ्वीलोक के विधि अनुसार विवाह होना था

परीलोक ............

ीदार परीलोक में सूर्य महल में िस्थित कक्ष में सूर्य आवर ऋषि दूर्वा दोनी का आत्मा विहीन शरीर सुरक्षा कवच के भीतर सुरक्षित रखा हुआ था

ऋषि दूर्वा के बाकि 4 चारो गुरु भरता ( गुरु भाई ) गुरुदेव द्वारा सुरक्षा कवच से सुरक्षित कक्ष में ध्यान में लीं हो कर ऋषि दूर्वा के आत्मा विहीन शरीर में निरंतर अपने तत्वा रूपी ऊर्जा का परवाह कर रहे थे जिस से प्रेतलोक में ऋषि दूर्वा की आत्मा ऊर्जा में कोई कमी न आये

आवर ऋषि दूर्वा इस विचित्र अकल्पनीय विवाह को बिना किसी विघ्न के पूर्ण कर सके वही गुरुदेव दूसरे कक्ष में ध्यान साधना में लीं बैठे हुए थे

कक्ष के बहार किरण आवर मानसी पूरी मुस्तैदी से तायल रही थी जैसे वो सूर्य के शरीर की सुरक्षा कर रही हो

सूर्य को अभी कक्ष में गए हुए आधा घंटा हे हुआ होगा की तभी वयोम सूर्य महल में प्रवेश करता है उनके साथ साथ जूलिया डेवलिन जी किंग सोलोमन क्वीन एलिज़ाबेथ आवर देवसूफ़ी नियों जी भी सूर्य महल में प्रवेश करते है

उनके पीछे पीछे परीलोक के कुछ दैनिक भी मौजूद थे जिनके हाथो में कुछ बॉक्स आवर कुछ थाल थे जिन्हे कपड़ो से देखा हुआ था

डेवलिन जी किंग सोलोमन देवसूफ़ी नियों सभी शिव महेंद्र दादा जी नाना जी जोरावर जी आदि पुरुषों के साथ बेथ जाते है जबकि क्वीन एलिज़ाबेथ आवर जूलिया दादी जी नानी जी से मिल कर सीधा शालिनी जी के कक्ष की आवर भाड़ जाती है

शालिनी जी के कक्ष में इस समय आवर भी लोग मौजूद थे जैसे की मेनका जी रेखा जी आवर प्रिय ममी जी

जूलिया सीधा जा कर शालिनी जी के गले लग जाती है आवर फुट फुट कर रोने लगती है

शालिनी जी ........ क्या हुआ मेरी बची को ऐसे रोटी नहीं है न बीटा

शालिनी जी को कोई अंदाजा नहीं था की जूलिया इस तरह क्यों रो रही है उन्हें कुछ गलत होना का आभाष होने लगा

शालिनी जी .......... संत हो जाओ जूलिया बेटी आवर मुझे बताओ बात क्या है

जूलिया को इस तरह रोटी देख रेखा जी भी बैचेन हो उठी साथ हे प्रिय ममी जी आवर मेनका जी

रेखा जी .......... क्या हुआ जूलिया तुम इस तरह रो क्यों रही हो बेटी मुझे बताओ बात क्या है कोई परेशानी है तो हमें बताओ बीटा हम सब है न तुम्हारे साथ

मेनका जी ......... आखिर हुआ क्या है जुली को वो इस तरह क्यों रो रही है आप हे बताये की आखिर बात क्या है कोई परेशानी आ गई है क्या ड्रैगन लोक में

क्यू. एलिज़ाबेथ ........... वो दरशल आज सूर्यौदय के साथ हे नानुष जी ने अपनी देह का त्याग कर दिया था इस लिया प्रिंसेस जूलिया काफी दुखी है

शालिनी जी बहुत अच्छे से जानती थी की नहुष जी कोण है आवर जूलिया का उनसे क्या रिस्ता था उन्हें भी ये बात सुन कर बहुत दुःख हुआ उनके बलिदान के बारे में सोच कर हे शालिनी जी की आँखे भर आई आवर उन्होंने अपने बहे आवर आदिक जूलिया के िरद गिर्द काश कर अपने ममता मई आँचल में जूलिया को छुपाने लगी

मेनका जी .......... ये नहुष जी कोण है आवर उनका जूलिया से क्या सम्बन्ध है

रेखा जी ......... मेनका दीदी वो जूलिया के नाना जी थे मुझे शालिनी ने बतया वो जूलिया के माँ के वंस से आंखरी बचे हुए मारूफ थे उनके साथ हे उनके वंश उनकी प्रजाति का भी अंत हो गया

शालिनी जी .......... संत हो जाओ मेरी बची जूलिया ऊपर वाले के सामने कब किसी का जोर चला है जिसने जनम लिया है उसे एक न एक दिन तो अपने करम कर जाना हे होता है इस तरह रोने से वो तपिश नहीं आएंगे बीटा अगर तुम इसी तरह रो रो कर उन्हें उनके बलिदान को व्यर्थ करोगी तो उनकी आत्मा को बहुत तकलीफ होगी बीटा वो ड्रैगन लोक के बागवान से काम नहीं जिसने अपनी बेटी का अपना खुद का हे नहीं बल्कि अपने मारूफ वंश का बलिदान दे दिया ड्रैगन लोक की भलाई के लिया क्या तुम उनके महँ बलिदान का इस तरह रो रो कर उन्हें दुखी करके बदला चुकाना चाहती हो वो भले हे ईश्वर की सरन में चले गए है पैर क्या तुम्हे सच में ऐसा लगता है की वो तुमसे दूर हो गए है तुम्हारे पेट में जो तुम्हारा पुर सूर्य का अंश है वो आज अगर है तो उनके महँ बलिदान से क्या तुम उनके बलिदान को इस तरह दुखी हो कर जीवन देना चाहती हो उनके मारूफ वंश का अंश आज भी तुम्हारे घराब में उनके इतने बलिदानो वायरत न करो बीटा

शालिनी जी के समजने का असर जूलिया पे हुआ भले हे अभी भी उसकी आँखों से आंसू बाह रहे थे पैर अब जूलिया की आँखों एक भरपूर विश्वाश आवर संकल्प था एक नयी ऊर्जा का संचार भर उठा था जूलिया में

कुछ देर सभी के बिच रहने से आवर उन सभी के प्रेम ने जल्दी हे जूलिया को दुःख के भवर से बहार निकल दिया था

कुछ देर बाद कोमल आई आवर जूलिया को अपने साथ ले गई जहा सभी के बिच जूलिया भी थोड़ा बहुत मुस्कुराने लगी

ीदार बहार भी नहुष जी के बारे में जान कर सभी को दुःख हुआ पैर जाने वाले को भला कैसे कोई रोक सकता है सिवाय अफ़सोस जताने आवर उनकी आत्मा की सन्ति की प्राथना करने के अलावा

वयोम सभी को छोड़ कर जा चूका था वापिस महल से

डेरी डेरी चाँद अपनी रौशनी से परीलोक को रोशन कर रहा था पूर्ण चाँद की रौशनी से पूरा परीलोक जगमगा रहा था चारो तरफ संगीत नाशी ख़ुशी का भरा पूरा महल था आवर हो भी क्यों नहीं आज उनकी प्यारी राजकुमारी का विवाह जो था

इस से बड़ी ख़ुशी की बात सभी परीलोक वाशियो के लिया क्या हो सकती थी

आकाश में पाटिया अपने हाथो में अपनी जादुई छड़ी को लहराते हुए पुस्पा वर्षा आतिशबाज़ी कर रही थी जिस से परीलोक का ये दृश्य आवर भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था

वही परीलोक के उद्यान में अनंत प्रकार के जादुई जिव भी उपस्थित थे वो सभी भी अपनी राजकुमारी के विवाह में शामिल होने आये थे अलग अलग ग्रुप में चहचाने की आवाज जैसे ख़ुशी में कोई संगीत गुनगुना रहे हो

तभी आकाश से एक हलकी काली लाल रौशनी प्रकट होती है जो सीधा सूर्य महल कके द्वार से कुछ दुरी पर उतरती है जिसे देख कुछ पाटिया दर जाती है आवर वो सभी अपनी जादुई छड़ी को काश कर अपने हाथो में पकड़ लेती है

परीलोक के कुछ सुरक्षा सही सैनिक जो महल की सुरक्षा में थे वो भी सावधान हो जाते है आवर अपने पंख फैलाये हाथो में जादुई चढ़ी लिया उस आवर भड़ते है

पर वो सब जब उस काली लाल रौशनी के पास पहुंचे तो देखा की वह तो कोई खड़ा है

ये कोई आवर नहीं थे बहुत पूर्व असुरगुरु व्योमासुर जी थे मानसी के पिता जी जो इस समय मानव रूप में थे जो किसी का भी ध्यान अपनी आवर तो नहीं केंद्रित करना चाहते थे इस तरह से

पैर उनका असुर अंश आवर उनकी मायावी आसुरी सकतिया ने सभी का ध्यान उनके केंद्रित कर दिया

तभी भीड़ के पीछे से वयोम निकल कर उनके सामने आता है आवर हाथ जोड़ कर उन्हें परनाम करता है

वयोम को सभी सैनिक जानते थे इस लिया सभी ने व्योमासुर जी को परनाम कर अपने अपने स्थान पे लौट कर सुरक्षा में मुस्तैद हो गए

आसमान में उड़ती परिया भी निश्चित हो कर अपने पूर्ववत कार्य में मगन हो गई

वयोम ....... .... इन परियो आवर सेनिको की आवर से मैं आपसे माफ़ी मांगता हूँ बाबा दर्शक इन्हें मैंने हे महल की सुरक्षा में नियुक्त किया था

व्योमासुर जी ....... नहीं नहीं पुत्र वयोम तुम्हे क्षमा मांगने की कोई आव्सय्कता नहीं है वो सभी बस अपना कार्य कर रहे है संभव ता उन्हें मेरी आसुरी सक्तियो से किसी असुर के आगमन का आभाष हो गया आवर सम्भवता उन्हें लगा होगा की कोई असुर इस विवाह के अवसर पे कोई उत्पत्ति मचने तो नहीं आ गया है

वयोम ......... चलिए बाबा हम महल में चलते है गुरुदेव अभी ध्यान में लीं है तो उनसे आपकी भेंट कुछ समय बाद हे हो पायेगी

व्योमासुर जी वयोम के साथ सूर्य महल के भीतर की आवर भाड़ गए भव्य सजावट आवर खूबसूरत चका चांद को देख वो भी बहुत खुश थे

वयोम .व्योमासुर जी को ले सभी के सामने पहुंचा आवर सभी का परिचिया व्योमासुर जी से कराया

दादा जी नाना जी से भले व्योमासुर जी उम्र आवर पद में बड़े थे पैर यहाँ वो मानसी के पिता के रूप में आमंत्रित थे इस लिया शिव आवर महेंद्र जी के संदी हे हुए दादा जी नाना जी के भी बेटे सामान हे हुए भले हे दादा जी नाना जी की उम्र व्योमासुर जी की उम्र का 10 % भी नहीं था

व्योमासुर जी भी सूर्य के परिवार से इस तरह पहली बार मिल रहे थे आवर उनके सरल हृदय को देख व्योमासुर जी मानसी को ले कर बहुत संतुष्ट हुए मानसी को जब व्योमासुर जी के आगमन का पता चला तो वो किरण से कुछ देर अपने पिता से मिल कर आने का कह कर वह से चली गई

ीदार किरण को अचानक से हे सूर्य महल में किसी नकारात्मक ऊर्जा का आभाष होना सुरु हो गया

जिस से किरण थोड़ा उनकंफर्टबले होने के साथ साथ आवर ज्यादा सचेत हो गई थी

किरण ......... ऐसा कैसे हो सकता है इतनी सुरक्षा के बाद भी महल में कोई बुरी सकती प्रवेश कैसे कर सकती है परीलोक की सीमा में प्रवेश करना हे संभव नहीं है फिर ये महल के अंदर तक कैसे पहुंची जरूर कुछ गड़बड़ होने वाली है

तभी किरण को सूर्य की कही बात का ध्यान हुआ सूर्य ने कक्ष में जाने से पहले किरण से कहा था की अगर कुछ भी गलत लगे तो इस बारे में गुरुदेव से बात करना आवर अगर कोई सहायता चाइये तो निर्भया को याद कर लेना वो तुम्हारे आह्वान की प्रतीक्षा करेगा

किरण ने दूसरे कक्ष की आवर देखा अपनी आँखों पे कुछ जोर देने पे वो कक्ष के भीतर तक देख प् रही थी जहा गुरुदेव भी भी ध्यान में लीं थे

किरण ......... गुरुदेव तो अभी भो ध्यान में लीं है मानसी बाबा से मिलने गई है ऐसे में मैं यहाँ से हैट नहीं सकती आवर मेरा यहाँ कुंवर जी की सुरक्षा करना ज्यादा जरुरी है

किरण गुरुदेव का ध्यान भांग कर नहीं सकती थी आवर खुद भी वह से हैट नहीं सकती थी ऐसा में अब निर्भया का आह्वान करना एक मात्रा मार्ग बचा था

किरण मन हे मन निर्भया का आह्वान करती है

अगले हे पल निर्भया आत्मा स्वरुप में किरण के सामने खड़ा था

किरण ......... निर्भया क्या तुम्हे पता है की महल में कोई नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर चुकी है

निर्भया ........ मुझे भी आभाष हुआ था उस सकती का किन्तु वो कोई आसुरी सकती नहीं है बल्कि कोई आवर सकती है किन्तु नकारात्मक प्रभाव है उस सकती का

किरण. ......... गुरुदेव अभी ध्यान में है आवर मुझे नहीं लगता की मानसी इस सकती का पता कर सकती है ऐसे में मैं यहाँ से कुंवर जी की देह की सुरक्षा का त्याग कर उसे खोजने नहीं जा सकती हूँ इस लिया उस नकारात्मक सकती का पता कर उसे ख़तम करने का कार्य तुम्हे हे करना होगा

निर्भया ....... जी आप निश्चित रहे सम्भवता स्वामी को ऐसा कुछ होने का पहले से हे अंदेशा था तभी उन्होंने मुझे पहले से हे ऊर्जा रूप में खुद से अलग कर आपके हर आदेश को मैंने के लिया आदेश दे दिया था

किरण .......... ठीक है अब जाओ आवर जरुरत पड़े तो इसमें रिद्धि की सहायता ले सकते हो मैंने उसे सचेत कर दिया है

निर्भया वह से फ़ौरन हवा में विलीन हो कर गायब हो गया

ीदार जब से व्योमासुर जी महल में प्रवेश किया तभी से उन्हें कुछ गड़बड़ होने का लगातार अनदेखा हो रहा था पैर वो सूर्य के परिवार के बिच बैठे हुए थे वो सभी के बिच से उठ कर भी नहीं जा सकते थे ऐसे में सूर्य के बड़े बुजुर्गो का अपमान होता हुआ मह्सुश होता

तभी उन्हें ससि डेज़ी हुए मानसी अपनी आवर आते हुए नजर आती है

मानसी सीधा अपने बाबा से गले लग कर मुक्ति है यही उचित मौका देख व्योमासुर जी मानसी के कण में फुसफुसा देते है

जिसे सुन मानसी भी दुविधा में पद जाती है

दरशल व्योमासुर जी ने मानसी के कान में फुसफुसा कर कहा की वो उन्हें अपने साथ अपने कक्ष में ले कर चले जल्द से जल्द

मानसी को ये बड़ा अजीब तो लगा पैर व्योमासुर जी के गंभीर चेहरे को देख वो नकली हंसी हस्ते हर उनका हाथ थामे दादा जी से बोलती है

मानसी ........ बाउजी क्या हम पिता श्री को अपने साथ ले जाये ताकि बाकि सभी का परिचय भी करवा सके

दादा जी ........ अरे इसमें पूछने वाली क्या बात है मानसी बीटा जाओ आवर अपने पिता जी को सभी से परिचय करवाई आवर उन्हें महक भी दिखा दो

मानसी ........ जी बाउजी चलिए बाबा

मानसी व्योमासुर जी को ले कर वह से कुछ हे दुरी पे गई थी की व्योमासुर ने मानसी को रोक कर कहा .

व्योमासुर जी ........ पुत्री मानसी मैं जनता हूँ तुम बहुत कुछ कहना चाहती हो किन्तु अभी इन सब का समय नहीं है मुझे सिगरा हे पुत्र सूर्य के गुरुदेव के पास ले चलो

मानसी ......... पैर बाबा गुरुदेव तो इस समय ध्यान में लीं है उन्हें भेंट हो पाना संभव नहीं जब तक वो स्वयं ध्यान से न निकले किन्तु आप इतने परेशान क्यों है बाबा

व्योमासुर जी ........ पुत्री मेरी बात ध्यान से सुनो मुझे आभाष हो रहा है की महल में हम दोनों के अलावा भी कोई आवर आसुरी सकती मौजूद है जो न तो पूर्ण असुर है आवर न मानवीय या पारी सकती

मानसी का तो मुँह खुला का खुला हे रह गया उसे भी आभाष हुआ था पैर उसने यही सोचा था की उसके बाबा ने सायद कोई आवर मायावी आसुरी सकती की प्राप्ति की होगी किन्तु अब उसे भी गड़बड़ समाज आ रही थी

मानसी अपने बाबा का हाथ पकडे बड़ी तेजी से किरण के पास पहुंची आवर साडी घटना बताई वही किरण ने भी मानसी आवर व्योमासुर को सब कुछ बता दिया आवर साथ साथ किरण ने व्योमासुर जी आवर मानसी को अपने साथ रुकने को कहा ताकि किसी भी इस्तिति में सूर्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके

उदार निर्भया महल के हर एक कक्ष हर एक स्थान पे जहा जहा उसे उस नकारात्मक सकती के होने का आभाष होता उसका पीछा करते हुए उस तक पहुंच जाता

वही उस नकारात्मक ऊर्जा को भी आभाष हो चूका था की कोई उसका पीछा कर रहा है इस लिया वो महल में उदार से ीदार हो का निर्भया से पीछा छुड़ाना छाती थी सबसे बड़ी बात तो ये थी की उसे केवल निर्भया की पवित्र ऊर्जा का हे आभाष हो रहा था साथ हे साथ असुर अंश का भी किन्तु वो निर्भया को देखने में सक्षम नहीं थी जिस तरह निर्भया उसे मह्सुश हे कर प् रहा था ुशी तरह ठीक ुशी तरह वो भी निर्भया को देख नहीं प् रही थी

( निर्भया .......... इस नकारात्मक ऊर्जा का दरक जो कोई भी है वो बहुत शातिर है अगर इस समय मैं अपने मूल असुर रूप ( शरीर के साथ ) में होता तभी इसे कैद कर सकता हूँ आवर ये तभी संभव है जब स्वामी पुनः अपनी देह को स्वीकार कर लेंगे )

ीदार निर्भया से बचते हुए वो नकारात्मक ऊर्जा किरण की आवर हे भाड़ रहित थी जहा से उसे पवित्र ऊर्जा के साथ साथ दो मायावी आसुरी अंश का आभाष भी हो रहा था

किरण .......... सावधान वो काली ऊर्जा हमारी आवर हे भाड़ रही है

किरण की बात सुन व्योमासुर जी आवर मानसी भी सचेत हो गए

साथ हे साथ व्योमासुर जी आँखे बंद कर कुछ मंत्र बुदबुदाने लगे उनके शरीर से अदृश्य ऊर्जा निकल कक्ष के चारो आवर फ़ैल गई

तभज उनकी नजर एक आवर गई जहा उन्हें डुंडली सी परछाई एक पल के लिया तो नजर आई जब वो परछाई उनकी अदृश्य ऊर्जा से टकराई ठीक ुशी समय कुछ पल के लिया व्योमासुर जी के सामने उस परछाई का रूप नजर आया

व्योमासुर जी .......... ये कैसे संभव हो सकता है

अचानक से व्योमासुर जी के मुँह से निकले शब्दों को सुन कर किरण आवर मानसी भी छिनक कर उन्हें देखने लगती है

पैर व्योमासुर जी तो अभी भी मुँह खोले एक दिशा में देख रहे थे

मानसी ......... क्या संभव नहीं हो सकता बाबा

व्योमासुर जी ....... वो नकारात्मक ऊर्जा किसी आवर की नहीं बल्कि यक्षिणी की है पैर वो परीलोक में कैसे आवर क्यों आई

किरण ........क्या कहा आपने बाबा

व्योमासुर जी .......... पुत्री किरण वो यक्षिणी की हे ऊर्जा है जिसे अभी अभी हमने मह्सुश किया था किन्तु वो यहाँ क्यों आवर किस उद्देश्य से आई

किरण ........ बाबा इस से जरुरी है ये जानना की वो इतनी सुरक्षा के बाद भी परीलोक में कैसे प्रवेश कर गई

व्योमासुर जी भी इस बात से सोच में पद गए कही न कही उन्हें इस सब के पीछे असुरलोक का हाथ होने का अंदेशा हो रहा था

व्योमासुर जी ......... मुझे आभाष हो रहा है की इस यक्षिणी को यहाँ भेजने का पीछे जरूर असुरलोक से कोई न कोई है

किरण ......... इसका मतलब आपको पहले से इसका संदेह था बाबा

व्योमासुर जी ........ नहीं पैर जब मैं महल पहुंचा तभी मुझे कुछ गलत होने का आभाष होने लगा था

किरण ........ अब हमें क्या करना चाइये बाबा इस हे रोकना तो होगा इस से पहले की ये कुछ अनिष्ट करे

व्योमासुर जी .......... है पुत्री किन्तु वो किसी आवर के ादिन है उसे तब तक रोका नहीं जा सकता जब तक वो अपने वास्तविक रूप में आ नहीं जाती वो किसी पवित्र ऊर्जा के सुरक्षा घेरे में है जो उसे परीलोक की पवित्र ऊर्जा से सुरक्षित रखे हुए है

किरण ......... आपका मतलब है की उस यक्षिणी ने किसी पवित्र ऊर्जा का प्रयोग स्वयं को छुपाने आवर सुरक्षित रखने में किया है

व्योमासुर जी ......... है पुत्री आवर जब तक वो पवित्र ऊर्जा उसकी सुरक्षा कर रही है तब तक उसे देख पाना संभव नहीं है क्युकी उस पवित्र ऊर्जा का आभाष नहीं हो रहा है ऐसे में हमें उसे हमारी आसुरी ऊर्जा के प्रयोग से सामने लाना होगा ठीक ुशी समय पुत्री तुम्हे उसके शरीर से वो पवित्र ऊर्जा के कवच को हटाना होगा वो किसी भी रूप में हो सकता है उसके शरीर पर किन्तु जब भी वो आसुरी ऊर्जा के सम्पर्क में आएगा वो चमक ने लगेगा तुम्हे वही वास्तु उसके शरीर से अलग करनी होगी

इन सब के बिच यक्षिणी वह से निकल चुकी थी

उसे भी व्योमासुर की ऊर्जा से टकराने के बाद आभाष हो चूका था की उसकी पहचान उजागर हो चुकी है यक्षिणी के रूप में आवर अब वो यहाँ से निकलना चाहती थी पैर तभी उसे अपनी आवर बहुत तेजी से कुछ आता हुआ नजर आता है

पैर जब तक वो कुछ समझती या कुछ करती एक के बाद एक दो ऊर्जा उस से आ कर टकराती है

तभी गुरुदेव कक्ष से बहार निकलते है जिनके हाथ में उनकी जादुई छड़ी थी जो रह रह कर चमक रही थी

वही यक्षिणी दूर महल की दिवार से टकरा कर निचे गिर चुकी थी

गुरुदेव ने अपनी जादुई छड़ी से एक लाल रोशिनी यक्षिणी पे छोड़ी जो सीधा उसके हाथ पे बंधे दाग़े पे पड़ी आवर वो उसके शरीर से अलग हो गया अब यक्षिणी सभी के आँखों के सामने थी

गुरुदेव ........ तुम्हे यहाँ किसने भेजा है क्या तुम पुत्र सूर्य का कुछ ाहित करने के उद्देश्य से यहाँ आई हो

यक्षिणी गुस्से में गुरुदेव किरण मानसी व्योमासुर जी को देख रही थी वही मानसी का भी हॉल ऐसा हे था उसे भी बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था यक्षिणी पे

कोई कुछ आवर बोलता उस से पहले हे मानसी आगे बढ़ यक्षिणी को उठा कर फेंकती है जो सीधा गुरुदेव के सामने आ कर गिरती है

गुस्से में तो किरण भी थी पैर इतना ज्यादा नहीं की वो अपना नियंत्रण हे खो दे पैर मानसी ने जैसे हे गुरुदेव के मुँह से सुना की वो यहाँ सूर्य को नुकसान पहुंचने के उद्देश्य से आई है तो बस फिर क्या मानसी ने अकेले हे यक्षिणी की हालत ख़राब कर दी इस बिच मानसी को ये भी ध्यान न रहा की ऐसा करना ठीक भी या नहीं इस बिच मानसी ने 2.3 बार उठा उठा कर ुशी कक्ष की दिवार पे यक्षिणी को पटका जिसमे सूर्य का शरीर सुरक्षा में रखा हुआ था

किरण .......... मानसी रुक जाओ ये तुम क्या कर रही हो

मानसी ......... दीदी मैं इस हे जिन्दा नहीं छोडूंगी इसकी हिमत कैसे हुए कुंवर जी को नुकसान पहुंचने की

किरण ......... चुप बिलकुल चुप मानसी पागल हो गई हो क्या तुम्हे पता भी की यहाँ क्या हो रहा है यहाँ कुंवर जी का विवाह होने जा रहा है कितने मेहमान यहाँ मौजूद है क्या तुम चाहती हो को सभी को ये पता चले की यहाँ अभी किसी ने गुस्पेट की है माँ को पता चलेगा या बाकि हमारे परिवार को तो क्या वो सब इस ख़ुशी में ख़ुशी ख़ुशी शामिल हो पाएंगे नहीं उन सभी के मन में ख़ुशी की जगह दर भर जायेगा

गुरुदेव .......... है पुत्री मानसी तुम्हारा क्रोध जायज है पुत्री किन्तु अभी के लिया स्वयं को संत रखना होगा ताकि ख़ुशी भरा महल बिगड़ न जाये तब तक जब तक ये विवाह पूर्ण न हो जाये पुत्र सूर्य का प्रेतलोक में विवाह सम्पन हो चूका है वो किसी भी समय परीलोक पहुंचने हे होंगे जाओ आवर जा कर पुत्र सूर्य आवर पुत्री जीनत के स्वागत की तयारी करो

किरण .........जी गुरुदेव किन्तु ये यक्षिणी इसका क्या गुरुदेव

गुरुदेव ......... इस हे अपने गुरुदेव के हवाले छोड़ दो पुत्री जब तक विवाह सम्पन नहीं हो जाता तब तक ये हमारी कैद में रहेगी

किरण आवर मानसी वह से लौट गई आवर गुरुदेव ने यक्षिणी को अपनी कैद में कर उसे गायब कर दिया आवर सूर्य के कक्ष की आवर भाड़ गए जहा से अभी सूर्य का शरीर गायब था

जल्दी हे किरण आवर मानसी ने सूर्य आवर जीनत के विवाह सम्पन होने कज जानकारी अपने परिवार को दी तो सभी खुश हो गए

घर की महिलाये अपनी नव वधु के स्वागत सत्कार की न्यारी पहले हे पूर्ण कर चुकी थी तो सभी स्वागत थाल लिए सूर्य महल के द्वार पे आ कर खड़े हो गए सूर्य आवर जीनत के वर वधु के रूप में स्वागत करने के लिया ................

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रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........................
 
अपडेट 285

गुरुदेव ......... इसे अपने गुरुदेव के हवाले छोड़ दो पुत्री जब तक विवाह सम्पन नहीं हो जाता तब तक ये हमारी कैद में रहेगी

किरण आवर मानसी वह से लौट गई आवर गुरुदेव ने यक्षिणी को अपनी कैद में कर उसे गायब कर दिया आवर सूर्य के कक्ष की आवर भाड़ गए जहा से अभी सूर्य का शरीर गायब था

जल्दी हे किरण आवर मानसी ने सूर्य आवर जीनत के विवाह सम्पन होने कज जानकारी अपने परिवार को दी तो सभी खुश हो गए

घर की महिलाये अपनी नव वधु के स्वागत सत्कार की न्यारी पहले हे पूर्ण कर चुकी थी तो सभी स्वागत थाल लिए सूर्य महल के द्वार पे आ कर खड़े हो गए सूर्य आवर जीनत के वर वधु के रूप में स्वागत करने के लिया ................

अब आगे .............

परीलोक सूर्य महल ............. दादी जी नानी जी शालिनी जी रेखा जी दोनों ममिया बुआ जी मेर्री जी सूर्य का पूरा परिवार सूर्य आवर जीनत का नव वर वधु के रूप में स्वागत के लिया महल के मुख्या द्वार पे खड़े सकती जिसका आज सूर्य के साथ हे विवाह था महिमा जी (वैद्यराज की पुत्री ) से वो भी अभी हे नजर आया था काफी समय बाद रानी पारी भी सूर्य महल आ चुकी थी

सभी को सूर्य आवर जीनत के आने की ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी कुछ देर बाद हे महल के द्वार के सामने एक के बाद एक कई पुष्पों से सुसज्जित रथ आ कर रुके जिनमे से सबसे आगे वाले रथ से प्रेतराज बहार निकले

दूसरे रथ से सूर्य निचे उतरा आवर अपना हाथ बढ़ा कर जीनत का मेहँदी से सुसज्जित कोमल हाथ थम उसे रथ से निचे उतरने में सहायता की

तीसरे रथ से जीनत की कुछ सखी सहेलिया बहार निकली आवर जीनत आवर सूर्य के पीछे आ कर कड़ी हो गई जिनके हठी में कुछ थाल थे जिनमे अलग अलग तरह के पुष्पों की पंखुडिया थी जो वो सभी सूर्य आवर जीनत पे दाल रहे थे

सूर्य जीनत का हाथ थामे हुए महल के द्वार की आवर भाड़ चला सामने कुछ परिया हवा में घूमते हुए सूर्य आवर जीनत पे पुष्पों की वर्षा कर रही थी अपने जादू से पूरी कालीन पे भाटी भाटी के फूल निचे हुए थे जिनपे से होती हुए सूर्य अपनी नई दुल्हन का हाथ थामे द्वार पे अपने स्वागत के लिया खड़े अपने परिवार की आवर भाड़ गया

अब तक 5 ऋषि भी वह पहुंच चुके थे

सूर्य सबसे पहले जीनत को साथ लिया अपने माँ शालिनी जी के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेता है

शालिनी जी ख़ुशी से ममता भरी आवाज में सूर्य आवर जीनत के सर पे हाथ रख अनेको आशीर्वाद देती है

शालिनी जी .......... स्वीटी बीटा सूर्य आवर जीनत का तिलक कर उनका स्वागत करो

किरण भी ख़ुशी ख़ुशी इसके लिया त्यार हो गई

किरण ने सूर्य को तिलक कर जीनत को तिलक कर विधि पूरी की

जीनत ने भी बिना किसी हिचक के ख़ुशी से जूख्ट हुए किरण के पेअर छू लिया क्युकी की किरण सूर्य की पहली पत्नी थी इस रिश्ते में जीनत किरण की छोटी बहन सामान हुई आवर वैसे भी किरण को सभी ने पहले हे बड़ी बहन का दर्ज़ा दिया हुआ था

सूर्य दादी जी नानी जी दादा जी नाना जी रेखा जी प्रिय ममी जी सन्ति ममी जी मेनका जी रानी पारी अपने पिता बड़े पापा दोनों मां जी गुरुदेव आवर सभी ऋषिवरो से श्रद्धा भाव से चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लिया साथ क्वीन किंग डेवलिन जी देवसूफ़ी नोयों जी आवर j.king का भी

किरण आवर मानसी सूर्य आवर जीनत को अपने साथ लिया एक रूम की आवर भाड़ गई

गुरुदेव ......... हम जानते है की नव विवाहित जोड़े स्वागत के पश्चात के बहुत से रीती रिवाज पृथ्वीलोक के अनुसार अभी भी बाकि है किन्तु अभी इतना समय नहीं है क्युकी कुछ समय पश्चात पुत्र सूर्य आवर पुत्री पारिजात के मंगल विवाह का सुबह मुहूर्त आरम्भ हो जायेगा ऐसे समय में आपको सभी रीती रिवाज कुछ समय के लिया इस्थगित करने होंगे

दादी जी ....... जी गुरुदेव हम सब ये बात जानते है आवर समझते भी है इस लिया सूर्य आवर पारिजात के विवाह के बाद हे जीनत आवर परिधि के विवाह के सभी रीती रिवाज एक साथ हे पुरे करे तो कुछ गलत तो नहीं होगा

गुरुदेव ........ उत्तम विचार है हमें नहीं लगता इसमें कुछ भी अनुचित है क्यों रिशु दूर्वा क्या कुछ समय के लिया इन रीती रिवाज में विलम किया जा सकता है

ऋषि दूर्वा ........ जी गुरुदेव इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है आवर पृथ्वीलोक के नियम अनुसार अभी जो भी नव विवाह इतवार वधु के लिया रीती रिवाज है वो सूर्यौदय के पश्चात हे आरम्भ होना है कुछ रीती रिवाज को छोड़ कर जो जिनमे आदिक समय नहीं लगेगा इतने हम सब बाकि विवाह की तयारी कर लेते है

गुरुदेव ......... उचित है परीलोक के रीती अनुसार विवाह में आदिक समय नहीं लगेगा आप पृथ्वीलोक के नियम अनुसार विवाह की तयारी कर लीजिये

गुरुदेव ऋषि दूर्वा आवर बाकि चारो ऋषियों को अपने साथ ले कर वह से बहार की आवर पारी महल की आवर चल देते है

परिवार की बाकि महिलाएं कुछ तो ृतियो को पूर्ण करने में लग गई वही शालिनी जी मेनका जी मेर्री जी आवर बाकि लड़किया भी सूर्य आवर जीनत के कक्ष में चली गई

सभी लड़किया जीनत को घेरे हुए कड़ी थी

वही सूर्य ऐसे खड़ा था जैसे सदी में बिन बुलाये बाराती हो

मेनका जी ........ ये क्या हो रहा है दूल्हे राजा दुलहाल वह महारानी की तरह बीएड पे बैठी है आवर तुम यहाँ बिन बुलाये बाराती से खड़े हो

सूर्य .......... देखो न बुआ सा जीनत के आते हे सब मुझे तो भूल हे गई

मेनका जी ........ हेहेहे बीटा यही तो वीमेन पावर है अभी से आदत दाल लो इन सब की ताकि आगे आसानी हो हेहेहे

सूर्य ........ बुआ सा आप भी मुझे आप से तो ऐसे उम्मीद नहीं थी मुझे लगा मेरी ब्यूटीफुल बुआ सा तो मेरे पक्ष में होंगी

मेनका जी ......... मैं तो हमेशा मेरे राजा बेटे के साथ हूँ ( डेरी से कण में कागा ...... अभी कितना भी वीमेन पावर गर्ल्स एकता दिखा ले आना तो सबको तुम्हारी गौड़ में हे है वैसे दोनों के बारे में क्या सोचा है )

कहते हुए मेनका जी ने एक कुटिल मुस्कान के साथ सूर्य को सभी से नजरे बचा कर आँख मर देती है

सूर्य को कुछ भी समाज नहीं आया तो वो मेनका जी को विषमय से भरे चेहरे को देखने लगा

( मेनका जी ......... पता नहीं सब मर्द लैंड से हे सोचते है क्या )

मेनका जी ........ अरे बुद्धू फर्स्ट नाईट का क्या सोचा है एक रूम काफी है क्या दोनों के लिया वैसे भी आगे यही तो होने वाला है नहीं तो तुम्हारी इन सब के बिच खैर नहीं

सूर्य मेनका जी के सवाल का कोई भी जबाब नहीं दे पाया वो समाज गया था की बुआ जी केवल उसे छेद रही है

ीदार सन्ति जी शालिनी जी भी जीनत के पास जा कर बेथ गई आवर उस से बाते करने लगी कुछ देर बाद दादी जी रेखा जी नानी जी आवर प्रिय ममी रूम में आई आवर कुछ रीती पूर्ण कर सूर्य को त्यार होने को कह दिया

शालिनी जी .......... स्वीटी बीटा मेरे रूम में सूर्य की सदी के कपडे रखे है वो ले आना तो

किरण ............ जी माँ अभी ले कर आई

कह कर किरण कोमल को साथ ले कर चली गई

दादी जी ........ बीटा सूर्य जरा बात सुनो

सूर्य ..........जी माँ सा कहिये

दादी जी .......... बीटा अब तुम पारिजात से विवाह के लिया त्यार हो जाओ अभी स्वीटी रानी पारी की आवर से तुम्हारे लिया भेजे कपडे ले कर आती होगी

सूर्य पहले से जनता था की परीलोक की रीती अनुसार दूल्हे के वस्त्र दुलहाल के परिवार की आवर से भेंट किये जाते थे जिनमे पहन कर दूल्हा विवाह स्थल पे आता है

सूर्य दादी जी की बात मान कर बाथरूम में जा कर सनान करता है आवर कुछ देर बाद टॉवल आवर बनियान में बहार आया

किरण सूर्य को कपडे देती है आवर खुद किरण कोमल अलीना मिल कर सूर्य को त्यार करती है

ऊपर से निचे तक सूर्य पुरे वाइट कपड़ो में बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रहा था गले में मोतिया जड़ित हर सितारों की तरह चमक रहा था

शालिनी जी ........ बीटा तुम त्यार हो न गुरुदेव ने आने का आदेश दिया है हमें पारी महल भी जाना है

किरण ........ माँ हम सब त्यार है कुंवर जी भी

शालिनी जी ......... ठीक है बीटा चलो फिर सब लोग गुरुदेव को इन्तजार करवाना ठीक नहीं है

सभी लोग सूर्य को लिया पारी महल की आवर चल दिए ( जादुई कालीन पे स्वर हो कर )

5 मिनट्स बाद सूर्य सभी के साथ एक बड़े से मैदान में पहुंच जो देखने में किसी स्टेडिकम जैसा हे था पैर काफी ज्यादा विशाल भाग में फैला हुआ जिसमे पहले से हे लाखो की संख्या में परिया एंगेल मौजूद थे ठीक बीचों बिच बड़ा सा मंच बना हुआ था जिसके ठीक बिच में किसी भाषा में कुछ लिखा हुआ आवर चित्रित किया हुआ था

सूर्य ने आज से पहले ये स्थान नहीं देखा था

गुरुदेव ऋषि दूर्वा आवर पारी लोक के मंत्रीगण j.king पहले हे मंच पे मौजूद थे सकती भी सूर्य की तरह हे वाइट कपड़ो में था जो काफी खूबसूरत लग रहा था

जैसे हे सूर्य अपने परिवार के साथ वह पंहुचा गुरुदेव ने सभी को वह रखे आसनो पे विराजमान होने को कहा

गुरुदेव .......... पुत्री जीनत को भी विवाह स्थल पे ले आइये

गुरुदेव आकाश में देखती है जहा चाँद अपनी पूरी रौशनी में जगमगा रहा था

गुरुदेव का आदेश मान कुछ परिया पारी महल में चली गई

गुरुदेव मंच के पास खड़े हो कर अपने हाथो में पकड़ी जादुई छड़ी को आकाश की आवर कर कुछ मंत्र उच्चारण करने लगते है

मैजिक स्टिक से तेज रौशनी निकलने लगती है

वह मौजूद परीलोक की परजा भी अपने स्थान पे कड़ी हो कर अपनी अपनी मैजिक स्टिक आकाश की आवर कर देती है सभी की मैजिक स्टिक चमक रही थी

करीब 5 मिनट्स बाद गुरुदेव अपनज मैजिक स्टिक निचे करते है आवर मंच के सेंटर में बने छेद में अपनी मैजिक स्टिक लगा देते है जिस से रौशनी निकल कर मंच के एक स्थान को घेर लेती है सूर्य आवर उसका परिवार बड़ी हे उत्सुकता से ये सब देख रहा था उनके लिया ऐसा पहला अवसर था

कुछ पल बाद मंच के बीचो बिच लिखे सबद आवर चित्र गुरुदेव की मैजिक स्टिक से निकली ऊर्जा से चमक ने लगते है

ठीक तभी मंच के बिच का स्थान गायब होने लगता है आवर वह से कुछ बहार आने लगा

ीदार रानी पारी परिधि जिनिशा महिमा पारिजात की कुछ सहेलिया सेविकाए राजकुमारी पारिजात को ले कर मंच पे पहुँचती है

पारिजात आवर महिमा दोनों हे विवाह के वाइट गाउन में बेहद खूबसूरत लग रही थी वैसे तो सभी परिया वाइट गाउन में हे थी किन्तु महिमा पारिजात रिद्धि रानी पारी इनकी खूबसूरती अलग हे लीगल पे थी

सूर्य की नजरे कभी परिधि पे जाती तो कभी रिद्धि पे बिच बिच में रानी पारी आवर महिमा जी को देखने से खुद को रोक नहीं प् रहा था

सकती का हल भी कुछ ऐसा हे था वो महिमा को बस एक तक निहारे जा रहा था

रानी पारी ने जब सूर्य पुर सकती को देखा तो वो खुद भी मुस्कुराये बिना रह नहीं पायी

कुछ हे पालो में मंच के अंदर से जो बहार निकला था वो सभी के आँखों के सामने स्पष्ट रूप में दिखाई दे रहा था

दरशल वो एक छोटे आकर का मंच था महज 5 से 6 लोगो के खड़े होने के स्थान के बराबर ठीक बीचो बिच एक स्थम्ब थस करीब 4 फिट के आसपास जिसपे एक बड़ा सा जल कुंड बना हुआ था जिसके चारो आवर अनगिनत हिरे माणिक मोती लगे हुए थे जल से निकल रही ऊर्जा बहुत हे पवित्र ऊर्जा थी

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य पुत्र सकती अपना स्थान ग्रहण करो पुत्रो

सूर्य आवर सकती दोनों उस मंच पे आ खड़े हुए

रानी पारी आवर रिद्धि ने पारिजात आवर महिमा को भी सूर्य आवर सकती के सामने खड़ा कर दिया

चारो के वह खड़े होते हे उनके पीछे चार ऊर्जा स्थाम स्थम्ब दिखाई देने लगे जो डेरी डेरी ठोस रूप में परिवर्तित हो गए

ये पर्किर्या पूरी होते हे चारो स्थम्ब से रौशनी निकलो आवर आपस में टकरा कर चाँद की आवर आकाश में भाड़ गई सभी की नजरे परीलोक से दूर जाती ुशी रौशनी पे तिकी हुई थी जो चाँद की आवर भाड़ रही थी

कुछ देर बाद सभी की लगा की जैसे चाँद में कुछ बदलाव होना सुरु हो गया

पहले जहा एक चन्द्रमा था अब वह दो चन्द्रमा नजर आने लगे उन दोनों चन्द्रमा से 2 तेज रौशनी की किरणे निकली आवर सीधा मंच के बिच बने जल कुंड के जल से जा टकराई

गुरुदेव आगे बढे आवर चारो के पास चले गए

रानी पारी भी अपनी मैजिक स्टिक लिया उन चारो के पास आ गई

गुरुदेव ......... आगे की पर्किर्या आरम्भ करे मातारानी जी

रानी पारी ......... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

इतना बोल रंज पारी अपने मैजिक स्टिक को हवा में घूमने लगती है साथ हे कोई मंत्र भी दोहराने लगती है

मैजिक स्टिक से ऊर्जा निकलती है आवर वो जल कुंड से जा तक रति है जिस से जल कुंड में कुछ हलचल हुई आवर उस से कुछ बहार निकला वो कुछ आवर नहीं 4 रिंग थी 2 मेल आवर 2 फीमेल रिंग जिनपे जोड़े में नीसाण बने हुए थे

गुरुदेव चारो रिंग को दिशा देते है वो चारो रिंग सूर्य सकती पारिजात महिमा जी चारो के सामने आ कर रुक जाती है

सकती ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया रिंग सकती के हाथ में आ गई ऐसा हे सूर्य पारिजात महिमा के साथ हुआ

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य राजकुमारी पारिजात को रिंग पहनाओ पुत्र सकती तुम भी पुत्री महिमा को रिंग पहनाओ

सूर्य .सकती ...... जी गुरुदेव

सूर्य पारिजात का मेहँदी से सुसज्जित खूबसूरत हाथ अपने हाथ में लेता है आवर पारिजात की आँखों में देखता है

जैसे वो इसकी इजाज़त पारिजात से आँखों हे आँखों में मांग रहा हो

पारिजात भी सूर्य की आँखों कज भाषा समाज गई आवर मुस्कुरा कर अपने पलके जपका कर सूर्य को में स्वीकृति दे दी

सूर्य ने पारिजात की तीसरी ऊँगली में वो खूबसूरत रिंग पन्ना दी

सकती इस मामले में बड़ा तेज निकला जो उसने जल्दी से महिमा की ऊँगली में रिंग पौने कर उसका हाथ चुम लिया

ऐसा करने पे महिमा जी के फुले गुलाबी गाल सरम से आवर आदिल लाल हो गए महिमा को आसाराम भी आ रहे थी आवर सकती के इस कार्य से दिल हे डिल खुश भी थी आखिर सकती ने परीलोक की इतनी जनता के बिच महिमा का हाथ चुम कर अपने प्यार का इजहार जो किया था

गुरुदेव ......... पुत्री पारिजात पुत्री महिमा अब आप अपने जीवन साथी को रिंग पहना कर परीलोक की ृत को पूर्ण करो किन्तु ज्ञात रहे एक बार आप दोनों ने इस ृत को पूर्ण कर लिया

आप दोनों का जीवन अपने अपने जीवन साथ के साथ जुड़ जायेगा अपने जीवन साथी से तुम्हारा सम्बन्ध अटूट हो जायेगा

पारिजात आवर महिमा ने है में सर हिला कर सूर्य आवर सकती को अपने जीवन साथी के रूप में चयन कर रिंग दोनों को पहना दी

दरशल परीलोक में सबसे ुचा स्थान परियो को प्राप्त है परियो को पुरुषों के मुकाबला आदिक महत्व आवर सामान प्राप्त होता है इशू लिया गुरुदेव ने ऐसा कहा था

विवाह में अंतिम फैसला वधु को मिलता है अगर विवाह स्थल पे पारी विवाह के लिया न कर दे तो कोई भी उस से सवाल करने का अधिकार नहीं रखता फिर चाहे वो उस पारी के माता पिता हे क्यों न हो अंतिम निर्णय सवयं पारी का होता हाउ उस हे तो परीलोक की रानी भी इस मामले में बदलने का अधिकार नहीं रखती

पारिजात आवर महिमा जी के ऐसा करते हे जल कुंड से दो प्याले ( गिलट टाइप हिस्टोरिकल मग ) बहार निकले जो ढूढ जैसे तरल से भरे हुए थे

गुरुदेव आगे भाड़े आवर दोनों प्यालो को उठा कर पारिजात आवर महिमा को सौंप दिया सूर्य आवर सकती ने भी अपना अपना हाथ बढ़ा कर प्यालो को थम लिया आवर प्याले को पारिजात आवर महिमा जी के कोमल होंटो से लगा दिया उस सफ़ेद अमृत सामान तरल की एक एक गुनत अपने गले से उतरने के बाद पारिजात आवर महिमा ने वो प्याले सूर्य आवर सकती के होंटो से लगा दिया

सूर्य आवर सकती ने भी एक एक गुनत उस तरल की अपने गले से उतर ली सूर्य को उस तरल से बहुत हे आदिक सुखद आभाष हुआ जैसे उसने अमृत पान किया हो उसके एक सुखद सन्ति का अनुभव हुआ ऐसा हे सकती को लगा

सूर्य आवर सकती ने एक बार फिर से पारिजात आवर महिमा के होंटो से लगा दिया दोनी ने एक एक गुनत में प्याले को ख़तम कर दिया दोनों प्याले उनके हाथ से गायब हो गए थे

रानी पारी ........ पुत्र सूर्य हम सभी परियो को चन्द्रमा से ऊर्जा प्राप्त होती है इस लिया चन्द्रमा हमारे लिया पूजनीय है इस लिया आप दोनों को चन्द्रमा को साक्षी मान अपने अपने प्रेम का परमं चन्द्रमा को देना होगा तभी इस विवाह को सफल मन जायेगा आवर उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा

सूर्य वैसे भी पहले से ये सब जनता था पैर रंज पारी ने एक बार फिर से चारो को इसकी विशेस्ता समाजी

सूर्य आवर पारिजात दोनों एक दूसरे का हाथ थामे एक दूसरे के सामने थे दोने एक दूसरे की आँखे में देख खोने लगे जैसे जैसे दोनों जोड़ो के शरीर पास आ रहे थे उन दोनों जोड़ो के चारो तरल सफ़ेद ऊर्जा उत्पन्न होने लगी

पारिजात की दिल की धड़कन मनो रुक सी गई पारिजात का कोमल सीना सूर्य के सीने से सत्ता हुआ था

ऐसा के नजर सकती आवर महिमा के बिच था

सूर्य आवर पारिजात दोनों के होंठ एक दूसरे से जा मिले आवर तभी सूर्य आवर पारिजात के चारो तरफ तेज रौशनी निकली आवर उनने पूरी तरह से कवर कर लिया

अभी सूर्य आवर पारिजात के स्थान पे केवल ऊर्जा आवर रौशनी हे थी जिसके पार कोई नहीं देख प् रहा था यहाँ तक की रानी पारी आवर गुरुदेव भी

सकती आवर वयोम के साथ भी ऐसा हे हुआ पैर जल्दी हे दोनों को कवर किये हुए जो ऊर्जा थी वो सकती आवर महिमा में समाहित हो गई आवर उन दोनों ने एक दूसरे को किस करना बाद कर अलग हो गए आवर एक दूसरे को हाथ थामे खड़े मुस्कुरा रहे थे अब दोनों पति पत्नी जो बन गए थे

ीदार सूर्य आवर पारिजात के चारो तरफ की ऊर्जा निरंतर भड़ती जा रही थी

जशे देख गुरुदेव रानी पारी रिद्धि सब बहुत खुश थे

( रानी पारी ....... पारिजात आवर पुत्र सूर्य में आपसी प्रेम बहुत गहरा है इनकी ऊर्जा कितनी पवित्र आवर विशाल है अब मुझे कोई चिंता नहीं न अपनी पुत्री की आवर न परीलोक के भविष्य की पुत्र सूर्य से यही अपेक्षा थी )

करीब 10 मिनट्स बाद सूर्य आवर पारिजात अलग हुए तो उन दोनों का शरीर बहुत तेज चमक रहा था

उनके शरीर से अभी भी रौशनी फुट रही थी

गुरुदेव ........ पुत्री पारिजात पुत्र सकती पुत्री महिमा अब समय आ चूका है चन्द्रमा से आशीर्वाद ले कर विवाह को पूर्ण करने का

रानी पारी ....... गुरुदेव क्या पुत्र सूर्य को देवताओ का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होगा

गुरुदेव ........ हमने ऐसा कब कहा किन्तु ये भी सत्य है की पुत्र सूर्य को चन्द्रमा से सकतिया प्राप्त नहीं होगी क्यों की उसने पहले हे वो सकती प्राप्त हो चुकी है

गुरुदेव की बात सुन कर सभी छिनक गए सिवाय सूर्य किरण के

रानी पारी ...... क्या मतलब गुरुदेव हम कीच समजे नहीं

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य क्या तुम्हे भी संदेह है

सूर्य ........ जी नहीं गुरुदेव आप पे संदेह करना यथार्थ ईश्वर के कथन पे संदेह करना होगा

गुरु ईश्वर मूल्य होता है आप पे संदेह कर पाप का भागी नहीं बन सकता

सूर्य की बात सुन रानी पारी भी कुछ शर्मिंदा हो गई थी आवर कुछ लोग जिनके मन में भी यही संदेह था

रंज पारी ........ क्षमा करे गुरुदेव हम आपके वचनो पे संदेह नहीं कर रहे है किन्तु हम अभी भी आपके वचनो का सर समाज नहीं प् रहे है कृपया हमें सरल वचनो में समझाए

किरण ....... रानी माँ कुंवर जी को पहले हे परीलोक की सकती प्राप्त हो चुकी है राजकुमारी पारिजात के रूप में गुरुदेव का कहने का यही ास्य था

गुरुदेव ....... उचित कहा पुत्री किरण ने पुत्र सूर्य को परीलोक की सकती पुत्री पारिजात से हे प्राप्त होगी

पारिजात सकती महिमा ने अपनी अपनी मैजिक स्टिक का आह्वान किया आवर चन्द्रमा की आवर कर दी आवर मंत्र बुदबुदाने लगे जो की परीलोक की भाषा में देव स्तुति ( आरती ) थी

कुछ देर बाद तीनो ने चन्द्रमा को नमन किया आवर मंच से गुरुदेव के साथ निचे उतर आये

मंच से सभी के उतर ते हे रानी पारी ने अपनी मैजिक स्टिक को ऊपर कर ऊपर की आवर तेज रौशनी छोड़ी जो साक्ष में जा कर किसी भयानक पैर खूबसूरत दमके के साथ पुरे परीलोक को रंग बिरंगी रौशनी से नहला दिया

ये एक संकेत था की परीलोक की राजकुमारी के विवाह सम्पन होने का रानी पारी की जादुई आतिशबाज़ी के बाद तो पुरे परीलोक में मनो ाक्ष में असंख्य सितारों की तरह आतिशबाज़िया होने लगी

गुरुदेव सूर्य सकती महिमा पारिजात को पारी महल ले गए जहा शालिनी जी आवर से सूर्य सकती आवर पारिजात महिमा के लिया दूल्हे दुल्हन के लाल जोड़े भेंट किये गए थे

सकती ने भी सूर्य के साथ पार्थविलोम के विधि अनुसार महिमा से विवाह करने की इच्छा जताई जिसे सभी ने स्वीकार किया

जल्दी हे ऋषि दूर्वा आवर उनके ऋषि भारतो की ने सूर्य पारिजात आवर सकती महिमा का पृथ्वीलोक की विधि अनुसार विवाह सम्पन कराया

शालिनी जी आवर रेखा जी ने सूर्य आवर सकती का अपनी अपनी दुल्हन के साथ सूर्य महल में स्वागत सत्कार किया

शालिनी जी ने साफ साफ कह दिया था की जो रीती रिवाज सूर्य आवर पारिजात के होने है वही सकती आवर महिमा के होंगे किसी को वैसे भी कोई आपत्ति नहीं थी

इन सभी कार्यो में सूर्य उदय के लगभग यानि की भरण मुहूर्त का समय हो चूका था सभी काफी थक भी गए थे

इस लिया सूर्य ने पारिजात आवर जीनत को एक साथ आराम करने को कह कर किरण के साथ सोने चला गया

सकती आवर महिमा अपने कक्ष में आराम करने लगे ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................
 
अपडेट ...... 286

जल्दी हे ऋषि दूर्वा आवर उनके ऋषि भारतो की ने सूर्य पारिजात आवर सकती महिमा का पृथ्वीलोक की विधि अनुसार विवाह सम्पन कराया

शालिनी जी आवर रेखा जी ने सूर्य आवर सकती का अपनी अपनी दुल्हन के साथ सूर्य महल में स्वागत सत्कार किया

शालिनी जी ने साफ साफ कह दिया था की जो रीती रिवाज सूर्य आवर पारिजात के होने है वही सकती आवर महिमा के होंगे किसी को वैसे भी कोई आपत्ति नहीं थी

इन सभी कार्यो में सूर्य उदय के लगभग यानि की भरण मुहूर्त का समय हो चूका था सभी काफी थक भी गए थे

इस लिया सूर्य ने पारिजात आवर जीनत को एक साथ आराम करने को कह कर किरण के साथ सोने चला गया

सकती आवर महिमा अपने कक्ष में आराम करने लगे ...............

अब आगे .............

सूर्यगढ़ .............. सूर्य अपने विवाह के दो दिन बाद अपने परिवार के साथ परीलोक में बिताने के बाद सूर्यगढ़ अपनी हवेली लौट आया था

यही सूर्यगढ़ में मेर्री जी आवर विजय जी के विवाह की तयारिया भी आरम्भ हो चुकी थी

सूर्य को अपनी पत्निया ( जीनत पारिजात ) से मिलान करने तक का मौका नहीं मिला था

सूर्य ने भी हनीमून पे हे सब प्लान कर रखा था इस लिया उसे भी कोई जल्दी नहीं थी उसने जीनत आवर पारिजात को भी सब समजा दिया था दोनों ने बिना किसी आपत्ति के सूर्य की बात का मान रखते हुए सब हनीमून पे चढ़ दिया

सूर्य अब ज्यादा से ज्यादा समय अपनी आध्यात्मिक तपश्या में देने लगा था ताकि जल्द से जल्द महाप्रेत सक्तियो पे अपना पूर्ण नियंत्रण कर सके

अभ सूर्य ने जंगल में जा कर ध्यान लगाना बंद कर दिया था वो अब अपनी हवेली में हे ध्यान लगाना सुरु कर चूका था

सूर्य सभी के साथ नास्ते के टेबल पे बैठा हुआ था

आज पारिजात आवर जीनत की पहली रसोई थी सभी को बड़ी बेसब्री से उनके हाथो बने खाने का इन्तजार था

कुछ देर की प्रतीक्षा के बाद सभी का इन्तजार ख़तम हुआ

पारिजात आवर जीनत ने मिल कर पहली रसोई त्यार कर ली थी

कोमल किरण पायल प्रीती की मदद से दोनों ने खाने की पूरी टेबल को खाने से सजा दिया था

जीनत आवर पारिजात खुश भी थी आवर थोड़ी नर्वस भी क्युकी उनके लाइफ का खाना बनाने का पहला एक्सपीरियंस था उन्हें दर था की सभी को पसंद आएगा भी या नहीं

सभी के प्लेट में खाना लगाने के बाद किरण जीनत पारिजात उत्सुकता से सभी के खाना स्टार्ट करने की प्रतीक्षा थी

दादा जी ........ वह भाई वह खाने से खुसबू तो बहुत लाज़बाब आ रही है खुसबू ने हे मेरी तो भूख आवर बढ़ा दी है मुझसे तो आवर रुका नहीं जा रहा है

कहते हुए दादा जी ने खीर से भरी कटोरी से चम्मच से खीर निकल कर खाना सुरु कर दिया

खीर की पहली चम्मच मुँह में जाते हे दादा जी का चेहरा चमक उठा

उन्होंने कटोरी को हाथ में उठा कर किसी छोटे बच्चे की तरह खाना सुरु कर दिया

सभी लोग ये देख कर जोर जोर से हसने लगे तब जा कर दादा जी का ध्यान उनकी आवर गया जो सभी उन्हें देख कर हे हांसे जा रहे थे

दादी जी ........... इतने बड़े हो गए है पैर इनका बचपना अभी तक नहीं गया बचे भी इनकी तरह नहीं करते

दादा जी ......हूँ हूँ ( खाश कर ) वो खीर इतनी अच्छी बानी की मुझसे रुका हे नहीं गया पारी बीटा मुझे थोड़ा खीर आवर देना

पारिजात ........ जी बाउजी ये लीजिये

खुश होते हुए पारिजात ने दूसरी खीर से भरी कटोरी दादा जी के थाल में रख दी

एक बार फिर से उन्होंने वही किया जो पहले किया

इस बार सबने खीर खाना सुरु कर दिया खीर वाकई में बहुत लाज़बाब थी सबने जी भर कर तारीफ की

किरण ....... आप सबने खीर तो टेस्ट कर ली आवर उसकी तारीफ भी कर दी ये खीर परिधि ने बनाई थी अब जरा जीनत के बनाये हलवे का टेस्ट भी कर लीजिये

पारिजात सभी के मुँह से अपने हाथो बानी खीर कहते आवर तारीफ करते देख काफी खुश थी उसके चेहरे की चमक हे काफी थी ये बताने के लिया की वो कितनी खुश है

सूर्य ने जीनत को देखा जो थोड़ी नर्वस थी फिर सूर्य ने चम्मच से हलवा खाना सुरु किया मुँह में जाते हे हलवा मेल्ट हो कर अपना टेस्ट भिखरने लगा मुँह में जैसे टेस्ट की सुनामी से आ गई हो

सूर्य ने कुछ भी कहने की बजाय आराम से बड़े मज़े से हलवा खाना सुरु कर दिया सबने बहुत तारीफ की पैर जीनत की नजर तो सूर्य पे हे थी की कब सूर्य कुछ कहे पर सूर्य ने कुछ भी नहीं कहा आवर नास्ता फिनिश कर अपने रूम की आवर आ गया

किरण भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी

किरण ......... क्या हुआ जीनत तुम उदाश क्यों हो

जीनत ........ दीदी मैंने खाना अच्छा नहीं बनाया

किरण ........ तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की तुम्हारा खाना अच्छा नहीं बना सबने कितनी तरफ जो की है फिर भी तुम ये बोल रही हो

तभी पीछे से रेखा जी की आवाज सुनाई देती है

रेखा जी ....... परिधि जीनत बीटा यहाँ आना जरा मेरे रूम में

किरण ....... जाओ बड़ी मम्मी आप दोनों को बुला रही है

जीनत आवर पारिजात दोनों रेखा जी के रूम में पहुंची जहा रेखा जी एक बॉक्स लिए बीएड पे बैठी हुए थी

परिधि आवर जीनत को अपने अगल बगल बैठा कर उन्होंने बॉक्स खोला उसमे वही खानदानी कंगन थे जो दादी जी ने उन्हें सौंपे थे बड़ी बहु के रूप में

उन्होंने एक ेल जोड़ी कंगन जीनत पुर पारिजात को पौने दिए

रेखा जी ........ परिधि जीनत बेटी ये हमारे खानदानी कंगन है जो माँ सा को उनकी सास ने दिए थे आवर उन्होंने मुझे अब मैं ये तुम्हे दोनों रही हूँ

परिधि ......... ये तो वही कंगन है न बड़ी मम्मी जो स्वीटी दीदी के पास भी है

रेखा जी ....... है बेटी ये वही खानदानी कंगन है

फिर रेखा जी अलमारी से दो बॉक्स आवर निकलती है जिनमे 2 गोल्ड नेकलेस थे रेखा जी ने दोनों को उनकी पहली रसोई पर ये नेकलेस उपहार स्वरुप उन्हें पहना दिया

जीनत आवर परिधि काफी खुश थी उन्हें सोने चंडी हेरे जेवरात से कोई मतलब नहीं था उन्होंने ये अपनी लाइफ में बहुत देखा था पैर रेखा जी ने जिस हक़ से प्यार से उन्हें पहनाया था वो गोल्ड कंगन आवर नेकलेस उनके लिया अनमोल खजाने से काम नहीं थे उनके रेखा जी का प्यार सनेह उनका आशीर्वाद था दोनों के लिया

शालिनी जी दादी जी बुआ जी दोनों ममिया नानी जी ने भी उन्हें उपहार स्वरुप बहुत से आभूषण भेंट किये

किरण जब ऊपर रूम में पहुंची तो सूर्य निर्भया से बात कर रहा था पैर जब सूर्य की नजर किरण पे पड़ी तो वो चुप हो गया

किरण ....... क्या हुआ कुंवर जी

सूर्य ......... तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया यक्षिणी के बारे में

किरण ......... मुझे लगा आपको निर्भया से इस बारे में पता चल गया होगा आवर फिर गुरुदेव ने भी मुझे आपको बाटने से रोका था उन्होंने कहा था की जब विवाह सम्पन हो जायेगा तब वो खुद आपको विस्तार से सब बता देंगे

सूर्य ......... ठीक है कोई बात नहीं वैसे गुरुदेव से इस बारे में कुछ आवर बात हुई है क्या की किसने उसने यहाँ भेजा आवर क्यों भेजा था

किरण ........ नहीं गुरुदेव को भी सायद अभी तक इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है वो पता कर रहे है

निर्भया .......... हो न हो इसमें असुरलोक का हाथ जरूर है आवर मुझे लगता है की वो किसी खास मकसद से हे परीलोक आई थी

सूर्य ......... तुम इतना यकीं से कैसे कह सकते हो निर्भया क्या तुम कुछ जानते हो इस बारे में

निर्भया ........ मैं ज्यादा कुछ तो नहीं जनता हूँ पैर जिसने भी उसने परीलोक भेजा था वो व्यक्ति बहुत सक्तिसाली है तंत्र मंत्र में निपुण मालूम होता है

सूर्य ......... है ये तो है जिसने भी उसने भेजा था वो कोई सामान्य असुर नहीं है वो तांत्रिक तंत्र मंत्र में महारथी है वर्ण यक्षिणी बिना किसी की नजरो में आये परीलोक में प्रवेश करने में कभी सफल नहीं हो पति इसके पीछे जरूर कोई सक्तिसाली असुर है

किरण ........ जो भी हो पैर ये अच्छे संकेत नहीं है हमें इसका कोई इलाज जरूर करना चाइये वो तो बाबा व्योमासुर जी ने समय रहते उसकी पहचान कर ली आवर गुरुदेव ने भी उचित समय पे उसपे वॉर कर उसने बंदी बना लिया अगर वो आपको थोड़ी भी हानि पहुचंड में सफल हो जाती तो पता नहीं क्या अनर्थ हो जाता

सूर्य ........ तुम ठीक कह रही हो स्वीटी असुरो को उनकी सीमा दिखानी पड़ेगी नहीं तो वो फिर ऐसा दशांश जरूर करेंगे

निर्भया ......... तो क्या मैं अब असुरलोक जा सकता हूँ भाई

सूर्य ......... क्या तुम उन सभी मंत्री सीढ़ियों को साद चुके हो जो उस पुस्तक में थे

निर्भया ......... नहीं वो अभी भी कुछ सिडिया साध्ना बाकि है

सूर्य ....... हम्म्म ठीक है फिर जब तक तुम उन्हें साद नहीं लेते वह जाना ठीक नहीं है

निर्भया ......... लेकिन मई. त्यार हूँ किसी का भी सामना करने के लिया

सूर्य ........ तुम्हे क्या लगता है निर्भया तुम इतने सक्षम हो चुके हो नहीं निर्भया ये केवल तुम्हारा भरम है मैंने जो पुस्तक तुम्हे दी है वो बाबा ने स्वयं लिखी है उनके लिखे सभी मंत्र सोडियो को बाबा ने पहले हे साद लिया है किन्तु जब वो हे यक्षिणी को पहचान कर पाने में सक्षम नहीं थे तो क्या तुम्हे अब भी लगता है की तुम अकेले इतने सक्षम हो गए हो

किरण ......... निर्भया कुंवर जी ठीक कह रहे है तुम खुद हे सोचो इस बात को जब बाबा अकेले यक्षिणी का अंत नहीं कर सकते थे जबकि वो तो असुरो के गुरु भी रह चुके है ऐसे में तुम्हे नहीं लगता की तुम इस मामले की गंभीरता हलके में ले रहे हो जबकि तुमने खुद हे कहा है की जिसने भी यक्षिणी को परीलोक भेजा वो तांत्रिक तंत्र मंत्र में नुपिन लगता है ऐसे में सत्रु की पूरी जानकारी के बिना योध में उतरना स्वयं को मौत के मुँह में ढकेलने के सामान है

सूर्य .......... ठीक है तुम कुछ दिन इन्तजार करो जब तक मैं अपने महाप्रेत सक्तियो को पूर्ण जागृत कर उन्हें नियंत्रित नहीं कर लेता उसके बाद तुम दोनों असुरलोक जा सकते हो तब तक तुम्हे इन्तजार करना होगा मैं तुम्हे पांच तत्वा शरीर देता हूँ इस बिच तुम ध्यान के माध्यम से अपनी सक्तियो को आवर आदिक बढ़ाओ तभी तुम असुरलोक जा सकते हो

सूर्य अपनी आँखे बंद कर अपने पांच तत्वा को जागृत कर निर्भया को शरीर प्रदान करता है

निर्भया भी ख़ुशी ख़ुशी सूर्य आवर किरण को परनाम कर वह से गायब हो गया

ऐसे हे दो दिन आवर निकल गए सभी मेर्री जी के विवाह की तयारियो में लगे हुए थे

साम को सगाई समारोह रखा गया था इसके ठीक 3 दिन बाद मेर्री जी आवर विजय मां जी की सदी होने वाली थी

दोपहर के भोजन के बाद सूर्य अभी अपने रूम में आया हे था की उसका फ़ोन रिंग होता हुआ दिखा

सूर्य ने जब फ़ोन उठा तब तक कॉल डिसकनेक्ट हो चूका था कॉल राधिका का था साथ में कुछ आवर मैसेज आवर मिस कल आई हुए थी

सूर्य ने फ़ौरन कॉल बैक किया दूसरी रिंग में हे कॉल पिक हो गया

सूर्य ........... Hello राधिका कैसे हो

दीप्ती ......... Hello मैं दीप्ती बोल रही हूँ आपकी राधिका नहीं सामने मर.

सूर्य ....... Hello दीप्ती जी कैसी है आप

दीप्ती .......... कभी खुद से भी सामने से कॉल करके हल चल पूछ लिया करो या फिर आपको एक राधिका हे अपनी नजर आती है

सूर्य ....... आप ऐसा क्यों बोल रही है दीप्ती जी आपको तो पता है अभी सदी की तयारिया चल रही है ऐसे में टाइम हे नहीं मिलता

दीप्ती ........ पता है पता है ज्यादा एक्सप्लेन करने की जरुरत नहीं है वैसे तुमने पूछा नहीं की मैंने कॉल क्यों किया था

सूर्य. ....... क्या बिना पूछे आप नहीं बताएंगी क्या

दीप्ती ........ बिलकुल नहीं हहहहए

सूर्य ........ वैसे एयरपोर्ट कब तक पहुंचने वाले है आप

दीप्ती ....... तुम्हे कैसे पता की हम एयरपोर्ट जा रहे है

( दरशल सूर्य दीप्ती से बात करते करते अपने फ़ोन में आये हुए मैसेज भी चेक कर रहा था जिसमे मधु जी ने जब सूर्य को एयरपोर्ट के लिया निकलने से पहले कॉल किया तब सूर्य ने कॉल उठाया नहीं था तब उन्होंने मैसेज कर अपनी फ्लाइट्स का टाइम सूर्य को मैसेज कर दिया था )

सूर्य ....... बस ऐसे हे पता चल गया वैसे सभी लोग आ रहे है न सदी में

दीप्ती ...... है मैं राधिका माँ डैड अंकल आंटी ( राधिका माँ डैड ) माया सुनिधि सानिया सोफिया आवर भी लोग है साथ में

सूर्य ....... आवर भी लोग है मैं कुछ समजा नहीं आवर कोण लोग है

दीप्ती ...... अच्छा हम लोग एयरपोर्ट पहुंच गए है मैं मैसेज कर तुम्हे फ्लाइट्स का टाइम भेज रही हूँ टाइम से एयरपोर्ट पहुंच जाना बाकि आवर कोण आ रहा है वो तुम्हे एयरपोर्ट पे पता चल जायेगा bye

सूर्य कुछ बोलता उस से पहले हे दीप्ती ने bye बोलते हुए कॉल कट कर दिया

राधिका. ...... क्या कहा उन्होंने वो आ रहे है न

दीप्ती ........ क्या बात है राधिका तुम तो काफी बदल गई है ऐसे तो इतनी बे- सबरी से रोहन का इन्तजार भी नहीं किया होगा हेहेहे

राधिका ......... वो वो मैं तो

दीप्ती ......... अरे चील यार हम दोंनो ननद भाबी काम दोस्त ज्यादा है हम दोनों हे एक दूसरे के राजदार है ऐसे में इतना मजाक तो चलता है समाज सकती हूँ अपने होने वाले बचे के बाप का इतना इन्तजार करना तो बनता है हेहेहे

दीप्ती ने अपनी कार पार्क कर अपने साथ राधिका का सामान लिया अपने माँ डैड आवर बाकि सभी के साथ अंदर की आवर भाड़ गई

सूर्यकांत जी अभी भी कॉल कर रहे थे सूर्य ने जब कॉल नहीं उठाया तो उन्होंने अलीना को कॉल किया पैर सायद वो भी कही बिजी थी

दीप्ती ....... क्या हुआ डैड किसी कॉल कर रहे है

सूर्यकांत जी ....... कुछ नहीं बीटा वो सूर्य को खबर कर रहा था पैर वो कॉल हे नहीं उठा रहा है

दीप्ती ....... कोई बात नहीं डैड मैंने उस से बात कर ली है आवर हमारे आने का आवर फ्लाइट्स की जानकारी उसे मैसेज कर दी है

मधु जी ......... अरे दीप्ती बीटा मैंने पहले हे मैसेज कर बता दिया है सब

सूर्यकांत जी ....... बीटा सानिया तुम्हारे एमी अबू कब तक आ रहे है

सानिया ...... अंकल उनकी फ्लाइट्स का टाइम तो हो चूका है वो बस आते हे होंगे कुछ देर में

करीब 10 मिनट्स बाद सानिया के एमी अबू सोहेल सलमा आवर उनके साथ एक महिला आवर आती हुई नजर आई

सोहेल ने सूर्यकांत जी को देखते हे जैन हिन्द बोल कर सलूट किया

सूर्यकांत जी ...... अरे सोहेल मैं यहाँ कोई आर्मी अफसर की हैसियत से नहीं आया हूँ इस लिया ये फॉर्मेलिटी जरुरी नहीं है

सोहेल ........ फिर भी सर आप मेरे सीनियर है आपकी रेस्पेक्ट करना जरुरी है

सूर्यकांत जी सोहेल के अबू से हाथ मिलते है आवर सोहेल की एमी आवर दूसरी महिला को सलाम करते है

सानिया आवर सोफिया अपनी एमी अबू आवर अपने भाई के साथ सलमा आवर उस महिला से भी गले लग कर मिलते है

कुछ देर बाद सभी के फ्लाइट्स की अनाउंसमेंट हो गई सभी अपने अपने सामान के साथ फ्लाइट्स में चढ़ गए

ीदार सूर्य ने किरण आवर बाकि सभी को भी उनके आने की खबर दे दी थी

किरण ने जीनत मानसी आवर परिधि को सब समझा दिया था

हलाकि मानसी पहले हे जानती थी उन्हें उनके सामने किस तरह से पेश आना है

जीनत को ये सब पसंद तो नहीं आ रहा था की पैर किरण के समजने पे वो भी मान गई

किरण .......... देखो जीनत परिधि मानसी मैं जानती हूँ ये सब करना तुम लोगो को अच्छा नहीं लग रहा है इन्फेक्ट मैं भी ऐसा करना नहीं चाहती हूँ पैर यहाँ डर्टी पे ऐसा जरुरी है पहले के समय में राजा महाराजा ऐसा कर सकते पैर आज का कानून ऐसा करने की इजाजत नहीं देता है

बाकि हम सब हमारे घरवाले तो ये सब जानते है हे हमें किसी आवर को कुछ भी बता कर कुछ हासिल तो करना है नहीं

मानसी ........ ठीक है दीदी मैं त्यार हूँ मैं भी नहीं चाहती की कोई भी कुंवर जी से इतने विवाह करने को ले कर सवाल करे आवर उन्हें जुट बोलना पड़े

किरण ........ थैंक मनु बस कुछ टाइम की बात है बस सदी के 2,3 दिन बाद वो लोग लौट जायेंगे तब तक हमें ये सब छुपाना होगा

ीदार सूर्य कुछ देर आराम कर एयरपोर्ट की आवर निकल गया अपनी कार लिया सूर्य ने पहले हे वयोम को सब समजा दिया था वो कुछ जिनो को लिया पहले हे कार के साथ एयरपोर्ट पहुंच गया था

सकती आवर महिमा जी अभी भी परीलोक में हे मौजूद थे सूर्य ने भी उन्हें सदी में शामिल होने को कहा तब तक दोनों प्रेमी जोड़े को एन्जॉय करने को कहा

हलाकि सकती इस से थोड़ा नाराज हुआ पैर सूर्य ने उसे मन लिया वही महिमा भी सूर्य के इस फैसले से बहुत खुश थी कोई भी नव विवाहिता दुल्हन ज्यादा से ज्यादा समय अपने प्रेमी अपने पति के साथ उसकी बहो में बिताने का सपना देखती है फिर भला सूर्य उनके लाइफ के ये खुशनुमा पल कैसे चीन सकता था इस लिया उसने जोर दे कर सकती को सदी तक परीलोक में रुकने को मन लिया

करीब 4 बजे सूर्य एयरपोर्ट पंहुचा कुछ देर बाद फ्लाइट्स लेंड हुए सूर्य वयोम को अपने साथ लिया अंदर चला गया कुछ समय बाद सभी लोग सूर्य को देख उसकी आवर चले आये

वयोम आवर सूर्य ने सभी का अविवादन किया वयोम अपने साथ आये ड्राइवर्स को सामान कार में रखने का बोल खुद भी बेग लिया बहार निकल गया

सूर्य सोहेल से बड़े हे गर्मजोशी से गले लग कर मिलता है

सूर्य ....... कैसे हो सोहेल भाई

सोहेल ......... बिलकुल ठीक भाई तुम सुनाओ भाई सदी के बाद तुम तो आवर भी ज्यादा बदल गए हो यार हाहाहा लगता है भाबी जी ने सेहत का कुछ ज्यादा हे ध्यान रखा है

सूर्य ....... हाहाहा ये तो तुमने ठीक कहा भाई वैसे अब तुम्हे जल्दी हे सलमा भाबी के हाथो से बना खाना नसीब होने वाला हक़ फिर देखते है तुम्हे भी क्यों सलमा भाबी

सलमा सूर्य की बात सुन मुस्कुरा उठी आवर उस महिला के पीछे जा कड़ी हुई जो सोहेल के साथ आई थी

सोहेल ....... सूर्य इनसे मिलो ये सलमा की अम्मी जान है नदिया जी मेरी फुफिजां

सोहेल ने जिस महिला का परिचय अपनी फुफिजां नदिया के रूप में कराया था वो दिखने में काफी खूबसूरत महिला थी दूडिया भरे पुरे बदन की अच्छी हिघ्त की महिला तीखे नयन नक्श उन्हें आवर भी खूबसूरत बना रहे थे

सूर्य ने उनका हाथ जोड़ कर अवुवादन किया

वही नदिया जी तो एक तक सूर्य में खोये हुए थी फातिमा जी जो उनके पास कड़ी थी उन्हें समझते देर नहीं लगी जब उन्होंने सूर्य के अविवादन का कोई जबाब नहीं दिया तो

फातिमा जी ने डेरी से उनकी कमर में चिकोटी कटी तब कही जा कर वो वास्तविकता में लौटी आवर सरमते हुए उन्होंने सूर्य को आदाब किया

सूर्यकांत जी ....... सूर्य बीटा तुम इन्हें तो जानते हे होंगे न ये मेरी साली साहिबा है आवर माया सुनिधि की माँ आवर ये मेरे दोस्त आवर साडू भाई है माया के पापा

सूर्य ....... जी अंकल मैं जनता हम अंकल आंटी को पैर मिलना पहली बार हे हुआ है

कुछ देर बाद सभी लोग कार में बेथ सूर्यगढ़ की आवर निकल गए 7.8 कार्स का काफिला सूर्यगढ़ की आवर भाड़ रहा था

वयोम ने सभी एक हे मॉडल की कार का अपनी जादुई सकती से पर बंद किया था सभी नई चमचमाती कार का काफिला बहुत से लोगो को अपनी आवर आकर्षित कर रहा था

करीब पौने घंटे बाद सभी हवेली पहुंचे सभी कार को हवेली के पीछे लगा दिया गया पुर सभी लोगो का सामान हवेली में पहुंचा दिया

करीब एक घंटे चाय नास्ता आवर बात चित में बिताने के बाद सभी लोग फ्रेश हो कर सगाई की तयारिया करने में लग गए

क्युकी मेर्री जी का कन्यादान सूर्यकांत जी करने वाले थे ऐसे में सगाई से जुड़े सभी कार्य उन्होंने अपने जिनमे ले लिया थे

हवेली की लोने में हे खुले में बड़ा सा मंच त्यार किया गया था जहा सगाई समारोह रखा जाना था

सूर्यगढ़ से भी काफी संख्या में लोगो को आमंत्रित किया गया था

करीब 8 बजे सूरजगढ़ से भी 6,7 कार्स का काफिला हवेली में आ पहुंचा जिसमे से नाना जी नानी जी मां जी ममी जी विजय मां जी आवर वह के कुछ मुख्या लोग शामिल थे जिनमे कुछ विजय जी के रिश्तेदार थे तो कुछ आस पास के हम उम्र बुजुर्ग पडोसी

दादा जी आवर सूर्यकांत जी ने सभी का स्वागत सत्कार किया आवर सभी को उनके लिया त्यार स्थान पे बेठ्या वेटर को सभी के सेवा में लगा कर वो खुद भी कुछ देर बात चित कर शिव आवर महेंद्र जी को मेहमानो की देख रेखा का बोल कर बाकि सभी स मिलने चल दिए

हवेली के अंदर मेर्री जी को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था

किरण परिधि राधा अलीना चारो मेर्री जी को सजाने में लगी हुई थी

वही मेर्री जी की नजर बार बार मिरर से होते हुए गेट पे जा रही थी

किरण मेर्री जी के दिल के बैचेनी को समाज रही थी

उसने सूर्य को मानसिक सन्देश भेज कर रूम में बुला लिया

सूर्य को देखते हे मेर्री जी का चेहरा खिल उठा

सूर्य पुर मेर्री जी के बिच कैसा सम्बन्ध है ये वह मौजूद सभी जानते थे पैर एक दूसरे से अनजान केवल किरण को हे पता था की दोनों के रिश्ते के बारे में सभी लोग जानते है

सूर्य ........ क्या बात है ममी जी आप तो बहुत हॉट एंड सेक्सी लग रही है आज तो मां जी के साथ साथ भूतो की खेर नहीं आपको देख कर हे मां जी से जलन करने लगेंगे लोग उनकी झोली में तो किस्मत से कोहिनूर आ गिरा

अलीना ........ सच में दी आज तो आप कहर धने वाली है आपकी परफेक्ट बॉडी दुल्हन के लिबाश में आपको आवर भी हॉट बना रही है

कहते हुए अपने आँखों से काजल निकल कर मेर्री जी के कान के पीछे टिका कर देती है

मेर्री जी सूर्य आवर अलीना की बात सुन शर्मा भी रही थी आवर सर निचे किये मुस्कुरा भी रही थी

बहार से फ्लोर दज के साउंड की आवाज अंदर भी आ राहु थी

किरण ......... कुंवर जी आप यही मेर्री जी के साथ रुकिए हम लोग थोड़ा डांस कर के अभी आते है

कह कर किरण अलीना परिधि राधा को अपने साथ बहार ले गई

ताकि सूर्य आवर मेर्री जी कुछ देर एकांत में एक दूसरे से बात कर सके

सूर्य ....... क्या बात है ममी जी आज तो आपको इस रूप में देख मैं भी खुद पे काबू खोता जा रहा हूँ सच में आप बहुत खूबसूरत लग रही हो जैसे कोई अप्सरा ......

सूर्य आगे कुछ बोलता उस से पहले हे मेर्री जी ने अपने लाल लिपस्टिक से सजे हुए होंटो से सूर्य के मुँह को बंद कर दिया

मेर्री जी के लाल होंठ अभी भी लरज़ रहे थे उनने हो रहे कम्पन से सूर्य ने मेर्री जी की मनोयस्थिति को समझते हुए उनकी कमर को पकड़ मेर्री जी को अपने सीने से लगा लिया सूर्य के सीने से लगते हे मेर्री जी की बड़ी हुई धड़कन डेरी डेरी संत हो गई आवर वो प्यार से एक दूसरे के होंटो का राशन करने लगे

करीब 5 मिनट्स बाद सूर्य ने किश तोडा आवर मेर्री जी को अपने सीने से लगा लिया

सूर्य ....... आप इतनी परेशान क्यों है अपने मन मस्तिष्क से सभी ख्याल निकल दीजिये ये आपके जीवन की एक नयी सुरुहत है क्या आप अपने इस नए जीवन का आरम्भ बैचेन हो कर दुविद्याओ में संकाओ में घिरे हुए करना चाहती है

मेर्री जी ........ तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे न सदी के बाद

सूर्य ....... िस्स्सस्स ऐसा सोचना भी नहीं जैसे आज आप मेरी बहो में है ुशी हक़ से आगे भी होंगी जब तक आप चाहे बस हमेशा अपने दिल की सुन्ना बाकि हम सब है न आपके साथ अपने अपने होंटो को साफ कीजिये कभी भी कोई भी आ सकता है

मेर्री जी अपने हैंकि से सूर्य के होंटो को साफ करती है जिनपे ुशी की लाल लिपस्टिक लगी हुई थी

फिर ुशी हैंकि से अपनी लिपस्टिक ठीक कर फिर से लिपस्टिक लगा कर खुद को ठीक किया

तभी किसी ने दूर नॉक किया सूर्य ने देखा की वो किरण है तो उसने गेट खोल दिया किरण अलीना को लिया अंदर आई आवर मेर्री जी को ठीक करने लगी वही अलीना ने मौका देख सूर्य के होंटो पे एक छोटा सा चुम्बन कर सूर्य को आँख मार मेर्री के पास चली गई

सूर्य भी रूम से बहार निकल गया पुर सभी मेहमानो से मिलने लगा

कुछ देर डांस आदि का प्रोग्राम चला फिर वो समय भी आ गया जब मेर्री जी को पुष्प वर्षा के बिच से दुल्हन की तरह सजाये मंच पे लाया गया

मंच पे लगे सिंघासन नुमा 2 चेयर पे एक तरफ विजय जी दूसरी तरफ मेर्री जी को बैठाया गया

पंडित जी मंच पे पहुंचे आवर कुछ देर रीती रिवाज पूर्ण कर मंत्री उच्चारण के साथ दोनों रिंग दी गई

पंडित जी के कहे अनुसार मेर्री जी आवर विजय जी ने एक दूसरे को रिंग पहनाई

विजय मां जी की नजर जब से मेर्री जी को मंच पे लाया गया तभी से उन पे हे ताकि हुई थी

एक दूसरे को रिंग पहनने के बाद कुछ लड़किया उनके आस पास कड़ी रही वो मेर्री जी आवर विजय मां जी से मजाक रही थी

वही बाकि सभी फ्लोर दज पे तुमने लगा कर इस खुशनुमा पल को आवर भी हसीं बना रहे थे

जैसे जैसे टाइम बिट रहा था लोग खाना खाने लगे वही अभी भी बहुत से नौजवान डांस कर रहे थे कुछ तो खूबसूरत लड़कियों से सेटिंग करने की कोशिश में भी थे इस बात से अनजान की यहाँ दाल नहीं गले वाली उनके से ज्यादा तर पहले हे किसी आवर को दिल दिए बैठी है

करीब रात 12 बजे तक डांस प्रोग्राम चला फिर दादा जी ने सभी को खाना खाने को कहा अब दादा जी की बात किसी में टालने की जीनत नहीं थी

सभी ने नाशी मजाक के बिच भोजन किया सूर्यकांत जी आवर दादा जी ने सूरजगढ़ से आये सभी लोगो को जाते हुए गिफ्ट दे कर विदा किया रात करीब एक बजे विजय जी मेर्री जी को पाने की है रेट लिया हुए सभी से विदा ली

अब सभी काफी थक गए थे इस लिया सभी अपने अपने रूम में सोने चल दिया शिव महेंद्र जी अभी लगे हुए थे साथ हे वयोम भी

मेर्री जी आवर विजय मां जी की सगाई सम्पन हो चुकी थी आवर दूसरा दिन भी सुरु हो चूका था दो दिन बाद मेर्री जी आवर विजय जी की सदी की देते फिक्स थी ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........................

सॉरी दोस्तों अपडेट पोस्ट करने में काफी वक़्त लगाया उसके लिया

पैर मैं खुद वायरल फीवर की चपेट में आ चूका था

ाभु भी जुखाम आवर फीवर से परेशान हूँ ुशी लिया न तो मैसेज कर पाया आवर न अपडेट पोस्ट कर पाया अभी भी फीवर से परेशान हूँ जल्दी हे ठीक हो कर नेक्स्ट अपडेट पोस्ट करता हूँ .............
 
अपडेट 287

अब आगे ................

असुर लोक ............. असुर महल के एक कक्ष में एक महिला परेशान इस्थिति में ीदार से उदार टहल रही थी

काफी समय तक वो ऐसे हे परेशानी में टहलती रही

तभी कोई कक्ष के अंदर आता है महिला फ़ौरन पीछे की आवर देखती है

अभी जो कक्ष में आया वो कोई आवर नहीं असुर कुमार अग्निमुखासुर था आवर ये कक्ष द्वारिका का गुप्त कक्ष था जहा द्वारिका अपनी तांत्रिक किर्यो को एकांत में purnm.karti थी

ये महिला कोई आवर नहीं असुर महारानी नरकासुर पत्नी द्वारिका थी

द्वारिका ........ क्या हुआ पुत्र तुम इस समय यहाँ कैसे

अग्नि म......... परनाम माता श्री एक समस्या हो गई है

द्वारिका ......... अब क्या हुआ अब कोनसी नयी समस्या उत्पन्न हो गई है

अग्नि .म....... माता श्री गुप्तचरों से घात हुआ है की नीला सुर को महल के आसपास देखा गया है

द्वारिका ....... इसमें समस्या कैसे पुत्र अग्निमुखासुर नीलसूर का महल में या उसके आसपास होना कोई समस्या तो नहीं

अग्नि .म........ नहीं माता श्री गुप्तचरों से घात हुआ है की वो गुप्त रूप से किसी की तलाश कर रहा है

द्वारिका ........ क्या मतलब किसकी तलाश कर रहा है नीलसूर

अग्नि .म ........... अभी स्पष्ट नहीं है माता श्री किन्तु जिस तरह की जानकारी मुझे मेरे गुप्तचरों ने दी है उस से यही प्रतीत होता है की वो उन असुर की तलाश कर रहा है जो मुख्या रूप से किशोरी कन्याओ का अपहरण करते है

द्वारिका ......... उसने इन सब से क्या कार्य हो सकता है

agni.m....... माता श्री आप भूल रही हाउ आपने पिछले कुछ समय में पिता श्री के लिया जिन भी असुर दानवी कन्याओ का अपहरण किया है उस से असुर लोक में क्या प्रभाव हुआ है आये दिन दानवो आवर असुरो में योध हो रहा है अनगिनत असुर आवर दानव एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए है

द्वारिका ......... कही तुम ये तो नहीं कहना चाहते हो की नीला सुर को इस विषय में कुछ ज्ञात हो गया है आवर वो इन सब के पीछे के मुख्या व्यक्ति यथार्थ मुज तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है

अग्नि .म........ मुझे भी यही लगता है अन्यथा वो असुर महल अवश्य आता आपसे भेंट करने उस हे कुछ तो अवश्य ज्ञात हुआ है माता श्री

द्वारिका ......... उसकी तुम चिंता न करो मैं नीला सुर को स्थल लुंगी मुझे ज्ञात है नीला सुर को कैसे संजना है सुक्रलोक से कुछ खबर मिली

अग्नि .म..... ... है माता श्री व्योमासुर सुक्रलोक लौट आया है किन्तु यक्षिणी से अभी भी कोई सम्पर्क नहीं हुआ है सुक्रलोक से भी आदिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है ऐसे में वह क्या हुआ कुछ भी समझ पाना संभव नहीं

द्वारिका ........... हमें दर है की यक्षिणी चंडिका को परीलोक में कैद कर लिया गया है या उसका अंत कर दिया गया है

agni.m..... क्या किन्तु ऐसा कैसे संभव है आपने तो उसे पवित्र ऊर्जा कवच से सुरक्षित कर सभी की दृस्टि को बदित कर दिया था न फिर बिना किसी के नजर में आये उसका अंत करना या कैद में करना क्या संभव है

द्वारिका .......... हम नहीं जानते की यक्षिणी के साथ क्या हुआ है वो जीवित है या उसे किसी ने कैद में किया है एक समय के बाद हमारा सम्पर्क उस से टूट गया है अब केवल एक हे मार्ग है जिस से हम उसके विषय में कुछ जानकारी ले सकते है

अग्नि .म.... आवर वो मार्ग क्या है माता श्री

द्वारिका गुप्त कक्ष में एक तरफ रखे बंद संदूक की आवर भाड़ जाती है आवर उसे खोलती है जिसमे काफी छोटे छोटे बॉक्स रखे हुए थे आवर भी बहुत कुछ सामान रखा हुआ था

द्वारिका एक बॉक्स को उठा लेती है आवर फिर से संदूक को बंद कर देती है

बॉक्स को अपने हाथ में लिया हुए द्वारिका तंत्र मंत्र का प्रयोग करती है बॉक्स हवा में उठ जाता है आवर द्वारिका के सामने जमीं पे तांत्रिक तंत्र किरिया का मंत्र यन्त्र बन जाता है

अग्निमुखासुर दूर खड़ा हो कर सब कुछ देख रहा था

द्वारिका बॉक्स को खोलती है उस में एक काळा कपडे में कुछ रखा हुआ था उस कपडे को खोल कर उसके अंदर से कुछ निकलती है वो किसी महिला के बॉल ( हेयर ) थे सायद यक्षिणी चंडिका के सर के बाल थे वो

द्वारिका उसके से कुछ बॉल ले कर तांत्रिक यन्त्र के बिच रख देती है पुर थोड़ा पीछे हो कर अपना हाथ हवा में गुमटी है जिस से उसके सामने एक बड़ी से प्राचीन पुस्तक आ जाती है जो हवा में उसके सामने ठहर जाती जिसके पाने अपने आप पलटने लगते है आवर कुछ देर बाद एक स्थान पे रुक जाते है जहा पुस्तक में वैसा हे तांत्रिक यन्त्र बना हुआ था आवर उसके निचे अजीब से लिपि में मंत्र लिखे हुए थे

द्वारिका मंत्र बुदबुदाने लगती है जिस से तांत्रिक यन्त्र एक्टिव हो जाता है हलकी लाल रौशनी तांत्रिक यन्त्र स उभरने लगती है जो डेरी डेरी तांत्रिक यन्त्र के बिच रखे बल्लो में सम्मानित होने लगती है

करीब 20 मिनट्स बाद यन्त्र से निकलो लाल रौशनी से बॉल जलने लगते है अब वह उस तांत्रिक यन्त्र में दुहा हे दुहा था जो डेरी डेरी कोई आकर ले रहा था

अगले दो मिनट्स में वो आकर स्पष्ट हो कर द्वारिका आवर अग्निमुखासुर के सामने था

ये आकर महिला की आकर्ति में था जिसमे वो आकर्ति किसी जंजीर नुमा चीज़ से बंदी हुई थी

अपने सामने के दृश्य को देख द्वारिका के माथे पे मोती मोती चिंता की लकीरे उभर आती है

अग्नि .म........ इसका क्या मतलब है माता श्री क्या यक्षिणी को परीलोक में बंदी बनाया जा चूका है

द्वारिका ......... है पुत्र अग्निमुखासुर यक्षिणी को कैद कर लिया गया है किन्तु चिंता का विषय ये नहीं है पुत्र

अग्नि .म........ ये आप क्या कह रही है माता श्री अगर यक्षिणी ने आपके विषय में बता दिया तो ये बात सुक्रलोक पहुंचने में आदिक समय नहीं लगेगा आप तो भली भाटी परिचित है की परीलोक आवर सुक्रलोक के बिच कैसे सम्बन्ध है

द्वारिका ......... हम्म्म हम जानते है किन्तु तुम निश्चित रहो पुत्र यक्षिणी हमारे विषय में किसी को कुछ भी नहीं बता पायेगी उस से पहले हे मैं उसका अंत कर उसका जीवन हे समाप्त कर दूंगी

द्वारिका एक बार फिर से ुशी संदूक के पास जाती है जिसमे से दूसरा बॉक्स निकलती है उसमे कुछ कला मोती जैसा पत्थर रखा हुआ था उसे निकल कर द्वारिका पहले बॉक्स में रखे बाकि बचे बल्लो को भी निकल कर आग के हवेली कर देती है

अपने हाथ में रखे काळा मोती को गौर से देखती है आवर अपनी आँखे बंद कर मंत्र बुदबुदाती है जैसे हे मंत्र उच्चारण पूर्ण हुआ द्वारिका ने अपनी आँखे खोली तो वो पूरी तरह से लाल थी दोनों आँखों से दो तेज लाल किरणे किसी लेजर लाइट सी निकलो आवर उस काळा मोती से टकरा गई अगले हे पल कला मोती रख के ढेर में बदल गया साथ हे तांत्रिक यन्त्र में दिखाई दे रही वो परछाई भी गायब हो गई किन्तु कुछ ऐसा भी था जिस हे देख द्वारिका की चिंता आवर भाड़ गई आवर वो गहरी सोच में दुब गई

जिसे देख अग्निमुखासुर के चेहरे पे भयानक मुस्कान उभर आई वही द्वारिका कुछ देर सब देखने आवर सोचने के बाद ांयश हे गुस्से में बोल उठी

द्वारिका ......... नहीं नहीं ये नहीं हो सकता वो डस्ट चंडिका मेरे साथ चाल नहीं कर सकती वो मेरी गुलाम थी वो मुझे दिखा नहीं दे सकती

द्वारिका ने गुस्से में लगभग दहढ़ते हुए कहा जिसे सुन अग्निमुखासुर की मुस्कान फ़ौरन गायब हो गई

अग्नि .म ...... क्या हुआ माता श्री आप अचानक इस तरह से क्रेडिट क्यों हो गई

द्वारिका ........ तुम जाओ यहाँ से मुझे एकांत चाइये

द्वारिका का गुस्से से भरा चेहरा देखने के बाद अग्निमुखासुर की आगे कुछ भी कहने कज निकट नहीं हुई आवर वो फ़ौरन गुप्त कक्ष से बहार निकल गया

अग्निमुखासुर ये तो समाज गया था की कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ हो चुकी है जिस से द्वारिका इतने गुस्से में है

वही परीलोक में गुरुदेव सभी कार्यो को पूरा करने के बाद परीलोक कैद खाने पहुंचे जहा उनने यक्षिणी से कुछ जरुरी पूछताछ करनी थी

गुरुदेव जब कैदखाने पहुंचे तो सामने यक्षिणी के स्थान पे रख का ढेर पड़ा था जिसे देख गुरुदेव अपने हे स्थान पे जड़ हो गए

गुरुदेव काफी देर तक ुशी तरह एक हे जग्गा खड़े सभी तरह की परिस्थिति के बारे में सोचते रहे पैर उन्हें भी कुछ समाज नहीं आ रहा था की आखिर जो सामने दिखाई दे रहा है वो सच है या झूट

गुरुदेव .......... ये क्या हो गया क्या इसने खुद से अपने जीवन का त्याग कर आत्महत्या कर ली या फिर किसी ने इसकी सांसे चीन ली किन्तु यहाँ कारागाह में तो परीलोक की सकती के अलावा अन्य कोई सकती कार्य नहीं करती है तो क्या परीलोक के किसी वासिंदे ने इसका अंत किया है किन्तु क्यों कोण है जो मेरे आदेश की अवहेलना करने का दशांश कर सकता है

गुरुदेव को ुए सब सोच सोच कर हल्का गुस्सा भी आ रहा था वही वो खुद असमंजस में थे की क्या सत्य है आवर क्या असत्य है

तभी 2 सुरक्षा कर्मी वह पहुंचे आवर गुरुदेव को परनाम किया

गुरुदेव .......... क्या तुम लोग इस तरह से अपना कर्त्तव्य निभा रहे हो मेरा आदेश था की किसी को भी इस कैदी के पास जाने की इजाजत नहीं फिर मेरे आदेश की अवहेलना करने का किस्मे दशांश हुआ

दोनों सुरक्षा कर्मी जल्दी से अपने गुथनो पे आ गए आवर विनती करते हुए गुरुदेव सड़ क्षमा याचना करने लगे

सैनिक 1 ......... गुरुदेव हमें क्षमा करे किन्तु हम आपके आदेश न मैंने जैसा दशांश नहीं कर सकते है आपके आदेश के पश्चात कोई भी इस कैद खाने में नहीं आया हम नहीं जानते की इस कैदी का अंत किसने आवर कैसे किया

सैनिक 2 ....... हम सत्य कह रहे है गुरुदेव आपके आदेश की अवहेलना स्वयं रानी पारी तक नहीं कर सकती है ऐसे में हम सदर्न सैनिक इतना साहस कैसे कर सकते है

गुरुदेव भी ये अच्छे से जानते थे की कोई भी परीलोक वाशी उनका अनादर नहीं कर सकता है

गुरुदेव कुछ देर चुप चाप सब कुछ सोचते रहे फिर उन्होंने दोनों सेनिको को जाने का आदेश दिया

गुरुदेव को अभी कुछ समाज नहीं आ रहा था जिस से इस घटना के पीछे का सत्य जान पाने में सहायता करे या इस घटना से जुड़ पाए

गुरुदेव अपनी मैजिक स्टिक को पकडे हुए कैद खंड को ध्यान से देख रहे थे उन्हें अभी भी उम्मीद थी की सायद कुछ ऐसा मिल जाये जो उन्हें इस सब के पीछे चले व्यक्ति तक पहुंचने में सहायक साबित हो

काफी देर की खोजबीन के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला

गुरुदेव ......... इस कैद खाने का निगरानी यन्त्र ( एक जादुई आँख जिस से सभी कैद किये हुए गुनहगारों पे नजर रखने आवर उनके क्रिया कलापो के नजर बने रखने के लिया इसका उपयोग किया जाता था एक तरह का कक्तव कैमरा ) ले कर आओ

गुरुदेव का आदेश मिलते हे सैनिक 2 दौड़ता हुआ गया आवर क्रिकेट बोलल जितना बड़ा वाइट क्रिस्टल लिया हुआ गुरुदेव के सामने आ कर खड़ा हो गया

गुरुदेव ने अपनी मैजिक स्टिक से अपनी ऊर्जा उस मैजिक बोलल में डाली तो वो चमक ने लगी सैनिक 2 वह से बहार जा कर खड़ा हो गया

मैजिक क्रिस्टल बोलल से एक तेज रौशनी निकलो आवर उस कैद खाने की दिवार से जा टकराई आवर उनकी आँखों के सामने वो सभी दृश्य आने लगे जिसमे यक्षिणी चंडिका जंजीरो में कैद कड़ी थी 2 दिन के दृश्य सामान्य रहा तीसरे दिन के दृश्य में यक्षिणी उन मैजिक जंजीरो से मुक्त होने ला प्रकाश करती हुई नजर आई बहुत बार उसने कोशिश की पैर वो नाकाम रही आखिर में वो दृश्य भी सामने आया जिसमे अचानक से यक्षिणी चंडिका दर स चीख ने लगती है उसका पूरा शरीर दर के मरे कैंप रहा था उसकी आँखों में मौत की दहसत थी

गुरुदेव ने पुरे कैदखाने ने अपनी नजर डाली पैर उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दिया

फिर अचानक से उनकी नजर यक्षिणी के पैरो की तरफ गई जहा से अपने आप हे आग की लपटे निकल रही थी हर गुजरते पल की साथ आग की लपटे यक्षिणी को अपने आग़ोश में समां रही थी

यक्षिणी be-thasha चीखे जा रही थी पैर उसकी चीख सुनने वाला या उसकी मदद करने वाला कोई भी वह नहीं था

देखते हे देखते एक दमके के साथ यक्षिणी का सर ब्लास्ट हो गया आवर वो रख के ढेर में बदल गई

तभी गुरुदेव को कुछ चमकती हुई चीज़ दिखाई दी जो अगले हे पल उस रख के ढेर में गायब हो गई

फिर गुरुदेव का आना आवर सेनिको को डांटना वही सब नजर आने लगता है

मैजिक क्रिस्टल बोलल से रौशनी निकलना बंद हो गई गुरुदेव ने सैनिक को मैजिक क्रिस्टल बोलल वापिस कर दी आवर अपनी मैजिक स्टिक का इस्तेमाल यक्षिणी की रख पे किया तो उस में से एक मोतियों की माला बहार निकली गुरुदेव ने हाथ आगे बढ़ा कर उसे थम लिया

सूर्यगढ़ ...........

मेर्री जी आवर विजय जी की सगाई विधिवत पूरी हो चुकी थी बिना किसी परेशानी के सभी ने सगाई में भरपूर एन्जॉय किया

हवेली में रात को लेट सोने के बाद भी दूसरे दिन की सुबह कुछ ज्यादा हे जल्दी सुरु हो चुकी थी

पूरी हवेली में सुबह सुबह हे विवाह की तयारियो के चलते कुछ ज्यादा हे हलचल हो राखी थी

दादा जी जो सुबह सुबह चाय के साथ हमेशा अख़बार की खबरों में उलझे रहते थे आज वो भी सुबह सुबह हवेली के पीछे की तरफ कुछ मजदूरों से हवेली की सफाई आदि करवा रहे थे

सूर्य अपना ध्यान अभ्यास पूरा कर निचे आया तब तक घर की महिलाएं सभी के लिया सुबह का चाय नास्ता त्यार कर चुकी थी

सूर्य सीधा अपनी माँ सा के पास पंहुचा जो अभी दीप्ती की माँ से विवाह में होने वाले रीती रिवाज आवर उनके लगने वाली जरुरी सामान के विषय में उन्हें बता रही थी

सूर्य को देख कर दादी जी आवर आंटी जी ने अपनी बाटे बंद कर दी आवर दोनों सूर्य को देखने लगी

सूर्य भी सीधा अपनी दादी जी के बगल में आ कर उनकी गौड़ में सर रख कर लेट गया

दादी जी ने भी प्यार से अपने हाथ सूर्य के सर में गिरना सुरु कर दिया सुकून से सूर्य की आँखे बंद हो गई

आंटी जी ये सब देख आवर ज्यादा मुस्कुराने लगी थी

आंटी जी ........ लगता है सूर्य की रात की नींद पूरी नहीं हुई है अभी तक

सूर्य बिना कुछ कहे दादी जी की गौड़ से सर उठा कर आंटी जी के गौड़ में रख देता है

सूर्य की हरकत देख दादी जी की हंसी चुत जाती है

दादी जी ........ बीटा क्यों अपनी आंटी को सुबह सुबह परेशान कर रहा है

आंटी जी ....... नहीं नहीं माँ जी मुझे कोई परेशानी नहीं है उल्टा मुझे तो अच्छा लगता है जब सूर्य एक माँ की तरह मुझे हक़ जमता है इनके लिया सूर्य रोहन से भाड़ कर है वो हमेशा सूर्य की तारीफ करते है पहले पहल तो मुझे भी अजीब लगता था पैर जब से इसे समाज ने लगी हूँ तब से मैंने इसे एक आवर बेटे के रूप में प् लिया है

दादी जी ....... सच कहा बेटी तुमने जब से इसके कदम हवेली के अंदर पड़े है तब से हम सब की जिंदगी हे बदल गई

सूर्य ........ क्या माँ सा आप फिर से सुरु हो गई है वैसे आंटी जी ये राधिका भाबी कहा है नजर नहीं आ रही है आवर भी कुछ लोग गायब है

दादी जी ........... बीटा तुम्हारी भाबी राधा तुम्हारी बुआ सब मंदिर गए है राधिका बहु की इच्छा थी मंदिर जाने की फिर बाद में सभी लोग काम में वयस्थ हो जायेंगे इस लिया वो लोग अभी निकल गए

कुछ काम था क्या

सूर्य ........ नहीं माँ सा बस ऐसे हे पूछ लिया मैंने तो

कुछ देर बाद सूर्य बहार चला गया जहा सूर्यकांत जी आवर गोविन्द जी के साथ दादा जी लोने में टहलते हुए उनसे बात कर रहे थे

तभी सूर्य की नजर सुमन पे पड़ी जो हवेली से निकल कर पीछे अपने रूम की तरफ जा रही थी

सूर्य भी ुशी तरफ भाड़ गया कुछ आगे निकल कर सूर्य ने सुमन को आवाज दे कर रोक लिया

सुमन ......... आपको मुझसे कुछ चाइये क्या छोटे मालिक

सूर्य ......... हाहाहा मैं कहा से तुम्हे छोटे मालिक नजर आता हूँ हम दोनों की उम्र में कोई ज्यादा अंतर नहीं है आप हे मुझसे एक दो साल बड़ी है तो मुझे ऐसे मालिक वालिक न कहा करो ठीक है

सुमन ........ पैर आप तो ..

सूर्य ........... देखो सुमन हम दोनों हम उम्र है तो ऐसे अगर आप मुझे मेरे नाम से बालुओ तो मुझे ज्यादा अच्छा लगेगा खेर ये सब छोड़ो आपकी पदक कैसे चल रही है यहाँ कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न आपको किसी तरह की अगर कोई भी प्रॉब्लम हो या कोई जरुरत आप बे- जीजाक मुझे या दादा जी माँ किसी से भी बात कर सकती है इस बारे में

सुमन ......... नहीं नहीं हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है आपकी बझा से मैं पहले से भी अच्छे से पड़े कर लेती हूँ कॉलेज में भी आपको वजह से कोई परेशानी नहीं होती सभी प्रोफेसर भी बहुत अच्छे है जब भी किसी की हेल्प चाइये होती है तो वो लोग हेल्प करते है दीदी भी अब पहले से ज्यादा खुश रहती है

सूर्य . ......... ये तो बहुत अच्छी बात है वैसे मैं आज सभी को शॉपिंग पे ले कर जा रहा हूँ सदी की खरीददारी के लिया अगर आप भी हमारे साथ चलेंगी तो मुझे अच्छा लगेगा

सुमन .......... पैर मैं कैसे सदी के इतने काम है मुझे दीदी की हेल्प करनी होती है

सूर्य ........ Don't वोर्री तुम्हारी दीदी से मैं बात कर लूंगा आप भी इस फॅमिली का हिस्सा है फिर हमारी खुशियों में आपका भी शामिल होना जरुरी है आप त्यार हो जाये हम लोग कुछ देर बाद चलेंगे

सुमन बार बार सूर्य को मन करती रही पैर सूर्य ने उसकी एक न सुनी आवर मल्टी से भी इस बारे में बात कर के उसे सुमन के लिया है कहलवा दिया


सभी ने नास्ते के बाद शॉपिंग के लिया सहर की आवर निकल लिया

सूर्य ने वयोम की हेल्प से घर के बाकि महिलाओ के लिया घर पे हे शॉपिंग का इंतजाम कर दिया क्युकी वो सब सहर नहीं जा रही थी ऐसे में कपडे गहनों की शॉपिंग के लिया वयोम ने सूर्य के कहने पे कुछ जिनियो को नसानी रूप में घर पे हे सबके शॉपिंग का इंतजाम कर सहर की आवर चल दिया

शिव आवर महेंद्र जी सोहेल के अबू ने मिल कर सदी की लगभग सभी तयारी पूरी कर ली थी

हवेली की पीछे की तरफ खुले में जगह ठीक कर सामियाना लगाना सुरु कर दिया था

साथ हे साथ मेहमानो के खाने पिने के लिया हलवाइयों की व्यवस्था भी कर दी थी

जो की अपने साथ मेल आवर फीमेल वेट्रेस भी साथ लाये थे ताकि हवेली के भीतर मेल वेटर को जाने की साफ साफ मनाई थी इस लिया फीमेल वेट्रेस का इंतजाम किया गया था हलाकि अभी पूरा स्टाफ नहीं आया था

दादा जी सदी की तयारिया देख संतुष्ट थे भले हे मेर्री उनकी सगी बेटी नहीं थी पैर उनके विवाह का इंतजाम सूर्य के विवाह से भी बहुत अच्छा किया था शिव आवर महेंद्र जी भी उनके हर फैसले को मान ुशी के अनुरूप तयारिया कर रहे थे

सूर्य सोहेल सभी को ले कर सिटी 1 चले गए थे शॉपिंग के लिया

वह से उन्हें शॉपिंग कर लौट ने में साम हो गई थी

इस बिच दोपहर का खाना भी सभी ने बहार हे किया था

साम को जब सूर्य सभी को लिया वापिस हवेली पंहुचा तो पाण्ड्य जी भी अपनी फॅमिली के साथ हवेली पहुंच चुके थे साथ हे कोमल के नाना जी का परिवार भी

सभी के चेहरे पे शॉपिंग का उत्साह था वही कुछ ज्यादा हे शॉपिंग करने की थकन भी

सूर्य सीधा अपने रूम में पंहुचा आवर नहाने के लिया बाथरूम में चला गया कुछ देर में नहाने के बाद सूर्य जब त्यार हो कर अपने रूम से बहार आया तो सामने से उसे राधिका आवर दीप्ती ऊपर आते हुए नजर आये

दीप्ती ......... सूर्य हमारे शॉपिंग बैग हमारे रूम तक पहुंचने में हेल्प करोगे प्लेसेस हम बहुत थक गए है

सूर्य ........ तुम सब से ज्यादा तो मैं थका हुआ हूँ भला इतनी शॉपिंग भी कोई करता है आज के बाद मैं किसी भी लड़की के साथ शॉपिंग पे नहीं जाने वाला

राधिका ........ आप ऐसा क्यों बोल रहे है ह लड़कियों को शॉपिंग करना अच्छा लगता है

सूर्य ....... आवर तुम लोगो की शॉपिंग कॉम्पिटिओं ने मेरी जो दुर्गति की उसका क्या

सूर्य शॉपिंग बैग लिया ऊपर के रूम आ पंहुचा

दीप्ती ....... तुम लोग बाते करो मैं शावर ले कर आती हूँ

दीप्ती राधिका को इशारा कर अपने कुछ कपडे लिया बाथरूम में चली गई

सूर्य भी राधिका को अकेला देख उसका हाथ थम सोफे पे जा भेठा

राधिका सूर्य का सर अपनी गौड़ में रख उसके बालो में उँगलियाँ फिरने लगी

सूर्य ....... क्या हुआ राधिका तुम इस तरह से क्यों देख रही हो मुझे

राधिका ....... कुछ नहीं बस ऐसे हे देख रही हूँ

सूर्य राधिका की झील से आँखों में देखते हुए राधिका का सर निचे जुखा उसके गुलाबी होंटो पे चुम्बन कर देता है

चुम्बन बहुत छोटा था पैर इस चुम्बन ने राधिका की सरम ख़तम कर दी फिर क्या था राधिका आगे भाड़ सूर्य के होंठो पे टूट पड़ी आवर किसी भूखी बिल्लो के जैसे सूर्य के होंटो को चूसने लगी

दीप्ती जो बाथरूम के दूर के पीछे से सब देख रही थी खुद के होंठ कटे बिना रह न सकीय

कुछ देर बाद राधिका को साँस लेने में जब परेशानी होने लगी तब राधिका ने सूर्य कज गर्दन को छोड़ना आवर सोफे पे पीछे की आवर सर टिकाये तेजी से सांसे लेने लगी

सूर्य ........ आप टी बिलकुल हे जंगली हो गई भला ऐसे भी कोई करता है

सूर्य ने अपने होंटो पे ऊँगली फिरै से उसके होंटो से निकला खून उसकी ऊँगली से लग गया

राधिका ........ मैं कितना तड़पती हूँ उस तड़प को आप नहीं समाज सकते है मेरा बस चले तो मैं एक पल भी आपको अपनी आँखों से दूर न कृ

सूर्य ........ आप जानती है न की ये सब संभव नहीं है भले हे हमारा एकांत में तीस्ता कुछ भी हो लेकिन सभी के नजरो में हमारा रिस्ता कुछ आवर हे है आपको ये बात समझनी होगी

राधिका की आँखों से दो बून्द आंसू टपक कर सूर्य के चेहरे पे आ कर गिरती है

राधिका ......... मैं जानती हूँ पैर तुम हे बताओ मैं क्या कृ जब से आपके अंश को अपने भीतर पल पल बढ़ता हुआ महसूस करती हूँ मेरी भावनाये मुझे कमजोर करने लगती

सूर्य राधिका की साड़ी को उसके पेट से हटा कर अपने होंठ राधिका के हलके फुले हुए पेट की चुम लेता है

सूर्य ....... मैं आपको रोकूंगा नहीं पैर कोई भी कदम उठाने से पहले इसका ख्याल जरूर करना आपके हर एक फैसले का इस पे क्या असर होगा इसका जरूर ध्यान रखना

सूर्य की बात सुन राधिका अपनी आँखों से बहते हुए आंसू पांच लेती है

राधिका ........ नहीं मेरी कोई भी इच्छा मेरे बेटे से भाड़ कर नहीं है मैं आपसे दूर रह सकती हूँ पैर इस से नहीं जिसने मुझे माँ होने की ख़ुशी दी है

सूर्य ......... ुम्मम्हा मैं आपसे कभी दूर नहीं होऊंगा जब भी मेरी जरुरत होगी वह आप मुझे अपने साथ पाओगी बस खुद के साथ साथ बाकि सभी की भावनाओ का भी ख्याल रखना जरुरी है

राधिका ........ ह्म्म्मम्म वो क्या आज आप मेरे साथ ......

सूर्य ........ अभी नहीं रात में देखता हूँ अभी तुम आराम करो

राधिका ....... पैर वो दीदी भी यही मेरे रूम में होगी फिर

सूर्य ......... वो मैं देख लूंगा वैसे हम लोग भी जल्दी हे दिल्ली आने वाले है फिर आपकी ये शिकायत भी दूर हो जाएगी जब आपका मन करे तब हम से मिलने आ जाना

कुछ देर आवर बात करने के बाद दीप्ती के बहार आने पैर सूर्य वह से निचे चला जाता है

राधिका भी सूर्य से बात कर खुद को बहुत हल्का महसूस कर रही थी ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................

 
अपडेट 288

सूर्य ......... ुम्मम्हा मैं आपसे कभी दूर नहीं होऊंगा जब भी मेरी जरुरत होगी वह आप मुझे अपने साथ पाओगी बस खुद के साथ साथ बाकि सभी की भावनाओ का भी ख्याल रखना जरुरी है

राधिका ........ ह्म्म्मम्म वो क्या आज आप मेरे साथ ......

सूर्य ........ अभी नहीं रात में देखता हूँ अभी तुम आराम करो

राधिका ....... पैर वो दीदी भी यही मेरे रूम में होगी फिर

सूर्य ......... वो मैं देख लूंगा वैसे हम लोग भी जल्दी हे दिल्ली आने वाले है फिर आपकी ये शिकायत भी दूर हो जाएगी जब आपका मन करे तब हम से मिलने आ जाना

कुछ देर आवर बात करने के बाद दीप्ती के बहार आने पैर सूर्य वह से निचे चला जाता है

राधिका भी सूर्य से बात कर खुद को बहुत हल्का महसूस कर रही थी ............

अब आगे ............

सूर्य जब राधिका आवर दीप्ती से मिल कर निचे आता है तो देखता है की दादी जी कुछ पदोष की माहिल्या कुछ त्यार कर रही थी

सूर्य ....... माँ सा ये आप लोग क्या कर रहे है

दादी जी ........ बीटा हम सब मेर्री बेटी को लगने वाला हल्दी चन्दन का उप्टन त्यार कर रहे है आज से मेर्री को उप्टन लगाया जायेगा न जैसे तुम्हे लगाया था तुम्हारी सदी में

सूर्य ......... ओह ऐसा क्या पैर आप अपने हाथो से क्यों त्यार कर रही है उसे तो बारीक़ करने में आपको काफी टाइम लगेगा लाइए मैं अभी आते के चाकी से बारीक़ पिसाई करवा लता हूँ

महिला 1 ....... नहीं बीटा ऐसा नहीं होता है इसे घर की बड़ी महिलाये हे खुद अपने हाथो से त्यार करती है तभी इसका निखार बढ़ता है


सूर्य ......... ऐसा क्यों छोटी दादी जी

दादी जी ........ बीटा वो इस लिया की अगर हम इसे घर में अपने हाथो से त्यार करते है तो इसमें बड़े बुजुर्ग का प्रेम आवर आशीर्वाद भी लगाने वाले को मिलता है आवर उनके आशीर्वाद से शरीर के साथ साथ मन की मलिनता भी नस्ट हो जाती है आवर विवाह जीवन में सुख आवर समृद्धि का विस्तार होता है

रेखा जी ......... सूर्य बीटा तुम यहाँ क्या कर रहे हो जाओ तुम्हे राधा बुला रही है

सूर्य ....... Ok मम्मी मैं अभी जाता हूँ कहते हुए सूर्य रेखा जी के गाल को चुम कर राधा के रूम की आवर भाड़ जाता है

रेखा जी सभी महिलाओ के बिच सूर्य की इस हरकत से अवाक् रह जाती है

वही दादी जी के साथ साथ बाकि महिलाओ की भी हाशि छूट जाती है

महिला 1 ....... जीजा सा ( बड़ी दीदी ) देख रही है आप आपके लादले की सदी हो गई है बाप भी बनने वाला है पैर बचपना अभी भी नहीं गया है इसका

दादी जी .......... छोटी इसके बचपने ने हे तो इस हवेली को घर बनाया है बस ईश्वर से यही मांगती हूँ की ये हमेशा ऐसे हे रहे हस्ता मुस्कुराता ये खुश है तो समझो की सभी खुश है

रेखा जी ........ सच कहा माँ सा आपने इसके कदम हवेली में क्या पड़े ये हवेली की सुनी दीवारे भी खुशियों से चहक उठी क्या कुछ नहीं बदल दिया इसने

दादी जी ........ रेखा बेटी जाओ जा कर मेर्री को त्यार होने को कहो फिर उसे उप्टन भी लगाना है संध्या होने पहले

रेखा जी ...... जी माँ सा अभी ले

उदार सूर्य जब राधा के रूम में पहुंचा तो वह राधा सानिया माया सुनिधि अलीना पायल प्रीती सलमा जीनत मानसी भी मौजूद थी

सूर्य ....... क्या बात है सब एक साथ यहाँ पे क्या खिचड़ी पकाई जा रही है

सभी को अपनी आवर देखता देख सूर्य समाज गया की सभी ने मिल कर जरूर कोई खुराफाती प्लान बनाया है

राधा ......... तुम यहाँ बैठो जरा मेरे पास अलीना तुम उठो जरा

राधा सूर्य का हाथ पकड़ अपने लगते हुए बीएड पे बैठा लिया अलीना की जगह अलीना उठ कर रूम का दूर अंदर से लॉक कर दिया आवर हाथ बन्दे कड़ी हो गई

सूर्य ....... तुम सब इस तरह से क्यों घर रहे हो मुझे

राधा ....... हम तुम्हे घर नहीं रहे है बस तुम्हारी हेल्प चाइये हम लोगो को

सूर्य ....... कैसे हेल्प पहले साफ साफ बताओ अगर सब ठीक लगा तो हे हेल्प करूँगा नहीं तो भूल जाओ

राधा ....... प्लीज न सूर्य देखा हम सभी कितने दिन बाद एक साथ एकता हुए है न जाने फिर कब मौका मिलेगा

सूर्य ....... राधा बात को गुमओ नहीं जो भी कहना है साफ साफ कहोगी तो बेहतर रहेगा

राधा ....... हम्म्म ठीक है फिर सुनो देखो कल का दिन बाकि है फिर परषो सदी है

सूर्य ....... ये तो मुझे भी पता है पैर जो तुम गुमा रही हो वो बोलो न

पायल ....... राधा मस्सी आप.......

राधा ....... चुप कर मस्सी की बची कहा से मैं मस्सी लगती हूँ तुम्हे तुमसे 2,3 साल हे बड़ी हूँ

सूर्य ....... देखो अब अगर तुम लोगो ने साफ साफ नहीं बोलै तो मैं चला मुझे आवर भी बहुत से काम है जो करने है इस लिया जो भी कहना है जल्दी कहो

राधा ......... हम सब मेर्री जी की सदी की
बैचलर पार्टी मानना चाहते है

सूर्य ...... इसमें कोनसी बड़ी बात है क्या किसी ने इसके लिया मन किया कही तुम लोग बहार तो पार्टी करने का प्लान नहीं कर रही है

देखो अगर ऐसा है तो मैं बिलकुल भी सपोर्ट नहीं करूँगा इसके लिया क्युकी न तो माँ सा आवर न बाउजी इसकी इजाजत देंगे

राधा ........ चुप बिलकुल पहले पूरी बात तो सुन लो मेरी बिच में हे कुछ भी बोले जा रही हो

पायल .......... राधा आराम से ( बोलते हुए पायल ने आँखों से जीनत आवर मानसी की आवर इशारा किया दोनों के चेहरे के भाव देखते हे राधा भी संत पद गई )

राधा ........ देखो हमने बहार पार्टी करने का कोई प्लान नहीं किया है हम सब यही हवेली में हे बैचलर पार्टी मानना चाहते छठ पे पैर इसमें हमें तुम्हारी हेल्प चाइये पार्टी में थोड़ा ड्रिंक....

राधा अपनी बात की अधूरी छोड़ कर सूर्य को देखने लगी

सूर्य भी समाज गया की माजरा क्या है

सूर्य ....... ठीक है मैं देख लूंगा सब पैर तुम सबको भी इस बात का ख्याल रखना की कोई भी लिमिट से ज्यादा नहीं लेगा आवर ज्यादा लेट तक कोई भी नहीं जागेगा तुम्हे तुम्हारे जरुरत की हर चीज़ ऊपर के रूम मिल जाएगी

राधा ....... थैंक यू सूर्य ुम्मम्हा

राधा जल्दी से सूर्य के गाल को चुम लेती है

सानिया ....... वो सूर्य तुम्हे सोहेल भाई को भी संभालना होगा उन्हें पता न चले

सूर्य ....... इसके लिया सलमा भाबीजां है न क्यों भाबीजां सोहेल को तो हेंडल कर हे लेंगी न आप

सलमा सभी के बिच सूर्य की बात सुन सरम से दोहरी हो गई

सूर्य ....... Ok मैं सोहेल भाई को संभल लूंगा मैं चलता हूँ कुछ देर बाद सारा सामान ऊपर पहुंच जायेगा पैर याद रहे न तो ज्यादा ड्रिंक करनी है आवर न ज्यादा लेट तक जागना है

वैसे मैं भी बैचलर पार्टी में आ सकता हूँ क्या

अभी कोई सूर्य की बात का जबाब देता उस से पहले हे बहार से किसी ने दूर को नॉक किया

अलीना ने एक नजर सब पैर डाली आवर दूर खोल दिया

सामने मेनका जी कड़ी थी

मेनका जी ........तुम सब रूम को बंद कर यहाँ क्या कर रही हो बहार मेर्री को उप्टन लगाया जा रहा है आवर तुम सब यहाँ बैठी हो बीटा तुम भी यहाँ

सूर्य ....... वो बुआ सा मैं तो बस ऐसे हे कुछ काम से आया था

सूर्य वह से बहार की आवर निकल गया

मेनका जी ........ क्या चल रहा है तुम सब का

पायल ....... कुछ नहीं माँ बस ऐसे हे सदी को ले कर डिसकस कर रहे थे

मेनका जी ...... लगता तो नहीं खेर चलो सब चल कर मेर्री को उप्टन लगाओ सदी के घर में कोई इस तरह सन्ति से बैठा रहता है क्या भला

मेनका जी आँख मरते हुए रूम से निकल गई

राधा ...... चलो सब मेर्री जी का मज़ा लेते है यही तो एक मौका है उन्हें चढ़ने का

ीदार सूर्य वयोम से बोल कर सभी के लिया ड्रिंक आवर डांस पार्टी के लिया जो भी जरुरी चीज़े चाइये थी उनका इंतजाम कर दिया था

साथ हे दीप्ती को समझा भी दिया की ये सब रात की बैचलर पार्टी के लिया है जो छठ पे या उनके रूम में होने वाली है साथ हे उन्हें ये भी समजा दिया की वो सभी का ध्यान रखे की कोई भी लिमिट क्रोर्स न करे

हवेली के भीतर भी मिनी d.j का इंतजाम कर दिया था ताकि कोई भी डांस करना चाइये तो कोई भी प्रॉब्लम न हो

करीब 7 बजे सक्तिपुर से रुक्मणि जी गीता ठाकुर अजय गायत्री दीप्ती पाछो लोग भी हवेली पहुंच चुके थे

सूर्य अजय को रोकना चाहता था पैर उसने कल सुबह आने का आवर हवेली पे किसी का भी न होने का बोल कर कुछ देर बात वो घर के लिया निकल गया

बहार लोने में भी d.j बज रहा था जहा बड़े बुजुर्ग आराम से बैठे सरब का आनंद ले रहे थे ठाकुरो में ये चलन कुछ ज्यादा हे है

सभी अपने अपने हम उम्र लोगो के साथ ड्रिंक एन्जॉय कर रहे थे तो कुछ लड़के लोग d.j की दूँ पे थिरक रहे थे सूर्य सोहेल के साथ छठ पे खड़ा निचे लोगो को एन्जॉय करता देख रहा था

सोहेल ........ भाई तुम लोगो का अच्छा सिस्टम है यार

सूर्य ....... क्या मतलब भाई मैं समजा नहीं

सोहेल ....... वो देखो तुम्हारे बड़े पापा आवर डैड एक साथ अपने दोस्तों के साथ ड्रिंक कर रहे है उनसे कुछ कदम दूर दादा जी सूर्यकांत सर अपने हम उम्र दोस्तों के साथ ड्रिंक कर रहे है

सूर्य ....... हाहाहा तो आपका ये मतलब था

सोहेल ...... है भाई हमारे में सरब पीना गुनाह है

सूर्य ....... पैर सोहेल भाई तुम तो ड्रिंक करते हो आवर सायद अंकल भी ड्रिंक करते है

सोहेल ....... तुम्हे तो पता है मैं पहले बेयर ले लेता था कभी कबर पैर अब कभी कभी ड्यूटी की वह से सरब भी पि लेता हूँ

सूर्य ........ हम्म्म वैसे ये जो आप नजारा देख रहे हो न वो कभी कबर ऐसे सदी विवाह के टाइम हे देखने को मिलता है वर्ण बड़े पापा या डैड दादा जी के सामने ड्रिंक नहीं करते है ये समाज लो सदी के माहौल में उन्हें ये चुत मिली हुई है

सोहेल ....... वैसे तुम्हारी ड्यूटी कहा है ड्यूटी कर भी रहे हो या नहीं

सूर्य ....... हम्म्म अभी तो समाज ले चुटहि काट रहा हूँ हाहाहा पैर जल्द हे दिल्ली रिपोर्ट करनी होगी वही पे ड्यूटी है मेरी अलीना आवर मेर्री जी की

सोहेल ...... तुम्हारा अच्छा है भाई हम लोग रात भर पहरेदारी करते है आवर तुम आराम से a.c में बेथ कर मज़े करते हो

सूर्य ....... ऐसा तुम्हे लगता है भाई अपनी अपनी जगह हम दोनों हे सही है आपकी जहा ड्यूटी है वह हारवर्ड ज्यादा है पैर खतरा काम मेरा इस से उलट है भाई खतरा ज्यादा हार्डवर्क काम

सोहेल ....... सही है भाई वैसे कुछ समय से तुम्हारा काल रूप दुनिया से गायब है वो चर्चा में नहीं आया

सूर्य ....... हाहाहा आपको बड़ी याद आती है काल की

सोहेल ....... सच में भाई उस दिन को याद करता हूँ तो अभी भी मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते है

सूर्य ........ चल छोड़ यार जो बिट गया उसे भूल कर आगे भढना हे जिंदगी है मेरे भाई बाईट हुए कल से सबक लेना चाइये ताकि भविष्य में फिर उन घटनाओ से बचा जा सके

सोहेल ........ भाई अपने लिया भी कुछ जुगाड़ है क्या

सूर्य .........हाहाहाहा चलो फिर भाई आज तुझे कुछ खास पिलाता हूँ

कहते हुए सूर्य सोहेल को लिए अपने रूम में आ गया

रूम में अभी कोई भी मौजूद नहीं था सभी लड़किया निचे हॉल में डांस कर रही थी

सूर्य ने रूम को लॉक किया आवर अलमारी के साइड में एक छुपे हुए बटन को दबा दिया वह से दिवार गायब हो गई आवर सामने एक मिनी बार नजर आने लगा

( दरशल ये सब वयोम ने किया था सूर्य के कहने पैर )

सोहेल ....... ये क्या है भाई तूने तो पूरा स्टॉक हे लगा रखा है यहाँ पैर तो

सूर्य सोहेल अभी बात कर हे रहे थे की सूर्य ने रूम को खोल कर वयोम को अंदर ले लिया जो कुछ खाने की चीज़े ले कर आया था

सूर्य ...... आओ वयोम भाई बैठो मैं आपका हे इन्तजार कर रहा था मैं पेग बनता हूँ

सूर्य ने एक बोतल उठाई आवर तीन पेग त्यार कर वयोम आवर सोहेल की आवर कर दिया आवर तीसरा खुद उठा लिया

तीनो बाटे करते हुए आराम से बाते करते हुए जिनलोक की सरब का आनंद लेने लगे

जल्दी हे एक बोतल ख़तम हो गई सूर्य ने दूसरी बोतल खोल ली सूर्य आवर वयोम पे ज्यादा असर नहीं हो रहा था पैर सोहेल पहली बार ये इसको पि रहा था उसपे जल्दी हे असर होने लगा

फिर सभी ने मिल कर खाना खाया सोहेल को जल्दी हे सूर्य ने उसके रूम में पहुंचा दिया

वयोम ........ भाई इस सब की क्या जरुरत थी

सूर्य ....... जरुरत थी भाई आपको तो पता है न की आज सभी लड़किया ऊपर पार्टी करने वाली है सभी ड्रिंक भी करेंगे सानिया आवर सलमा को दर था की कही सोहेल को पता न चल जाये इस लिया सब करना पड़ा

वयोम ......... अच्छा तो इस लिया आपने वो सब थी करवाई थी

सूर्य ....... है भाई ताकि वो सब खुल कर एन्जॉय करे उन्हें कोई परेशानी न हो वैसे सभी काम ठीक से हो गया न भाई

वयोम ........ हाहाहा बिलकुल भाई बहार से लेबल कुछ आवर है पैर अंदर कुछ आवर अगर ज्यादा ड्रिंक भी की तो शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा

कुछ देर बात करने के बाद वयोम निचे चला गया

रात करीब 11 बजे तक सभी लड़किया निचे डांस करती रही फिर एक एक कर सभी छठ पे जा पहुंची

वयोम द्वारा किया गया इंतजाम को देख कर सभी लड़किया बहुत खुश हुई

माया ....... वह क्या बात है मेर्री जी आपकी बैचलर पार्टी का तो सूर्य ने पूरा इंतजाम कर दिया बेयर व्हिस्की

वाइन वोडका .................

कंटिन्यू विथ नेक्स्ट अपडेट ...........

अपडेट गलती से पोस्ट हो गया इसके आगे का भाग अभी लिखूंगा उसके बाद पोस्ट करता हूँ ...........
 
अपडेट ........ 288 { बी }

अपडेट विल बे कंटिन्यू 288 ............ }

परीलोक ............ परिमहल के एक कक्ष में गुरुदेव रानी पारी प्रेतराज तीनो बैठे हुए थे

सायद वो किसी बात पे चर्चा कर रहे थे या करने वाले थे

कुछ देर बाद j.king भी उस कक्ष में प्रवेश करते है

रानी पारी ........ आइये j.king हम सब आपका हे इन्तजार कर रहे थे

j.king गुरुदेव को परनाम करते है गुरुदेव उन्हें बैठने का इशारा करते है

प्रेतराज ......... गुरुदेव अब तो हम सब यहाँ मौजूद है अब कृपया कर इस मंत्रणा ( मीटिंग ) का मुख्या कारन बताये

गुरुदेव ......... ठीक है फिर सब ध्यान से मेरी बात सुनो

रानी पारी आप तो जानती है की पुत्र सूर्य आवर पुत्री पारिजात के विवाह में क्या हुआ था आवर क्या हो सकता था

रानी पारी ........ जी गुरुदेव हम जानते है हमारी सुरक्षा को भेद कर यक्षिणी परीलोक में गुस्पेट करने में सफल रही

प्रेतराज .......... आप किस यक्षिणी की बात कर रहे है आवर विवाह में ऐसा कुछ हुआ तो हमें घात क्यों नहीं हुआ

गुरुदेव ........ संत हो जाओ प्रेतराज हमने हे इसे समय की गंभीरता को देखते हुए गुप्त रखने का आदेश दिया था हम नहीं चाहते थे की विवाह में कोई विघ्न उत्पन्न हो इसके चलते हर्षो उल्लाश से भरे माहौल को नस्ट नहीं करना चाहते थे इसी लिया हमने अभी तक इसे सभी से छुपाये रखा था

j.king ........... गुरुदेव हम आपके इस फैसले से सहमत है किन्तु हम अभी ये नहीं समाज प् रहे है की परीलोक की इतनी कड़ी सुरक्षा को भेद कर किसी डस्ट का परीलोक में गुस्पेट करना कैसे संभव हुआ जबकि हम सभी ने पहले से हे परीलोक की सुरक्षा इतनी मजबूत कर दी थी फिर ये चूक हुई कैसे

गुरुदेव ............ ये चूक हमसे हुई है इसका दायित्व हम अपने ऊपर लेते है

रानी पारी ........ ये आप क्या कह रहे है गुरुदेव

प्रेतराज ............ है गुरुदेव हम सभी जानते है की परीलोक की सुरक्षा को ले कर आप कभी भी कोई चूक नहीं कर सकते है फिर आप सब दोष अपने ऊपर क्यों ले रहे है

गुरुदेव ........... भले हे हम परीलोक के राजगुरु है किन्तु जो सत्य है वो सत्य है प्रेतराज

पहले हमें घात नहीं था इसी लिया हमने इस बात को गुप्त रखा आवर स्वयं इसकी जाँच की आवर जो नतीजा हमें प्राप्त हुआ उसमे चूक हमसे हुई है

रानी पारी ........ ऐसा क्या पता चला गुरुदेव आपको जिसके चलते आपको लगता है की यक्षिणी का परीलोक में प्रवेश करने के पीछे आपकी कोई गलती है

गुरुदेव .......... हमने ये कब कहा रानी पारी की हमसे गलती हुई है हमने कहा की हमसे चूक हुई है गलती जाने अनजाने में होती है हमसे चूक हमारी असावधानी के चलते हुए है

प्रेतराज .......... गुरुदेव जो हो चूका है उसे बदला नहीं जा सकता हमें इस विषय पे आगे विचार करना चाइये आवर पता करना चाइये की इस घटना के पीछे कोण है उसका उद्देश्य क्या था परीलोक आने का

गुरुदेव ........... इसी लिया हमने आप सभी को चर्चा पे आमंत्रित किया है हमने जब इसकी जाँच की तो हमें घात हुआ की यक्षिणी परीलोक में गुस्पेट करने में सक्षम इस लिया हो पायी क्युकी वो पुत्री मानसी के पिता व्योमासुर जी की परछाई के रूप में परीलोक में प्रवेश करने में सफल रही जिसका पता सम्भवता खुद व्योमासुर जी को भी नहीं था

गुरुदेव की बात सुन रानी पारी j.king .प्रेतराज तीनो हे गुरुदेव को विषमय भरी दृस्टि से देखने लगे

गुरुदेव ....... हम जानते है आपके मन मस्तिष्क में उपज रहे विचारों को किन्तु कोई भी धरना अपने मन में लेन से पूर्व इतना अवश्य याद रखना की व्योमासुर जी पुत्र सूर्य को या उस से जुड़े किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का सोच भी नहीं सकते है

रानी पारी ........ गुरुदेव ये आप इतने विश्वाश से कैसे कह सकते है आखिर वो है तो असुर हे न

प्रेतराज ......... महारानी जी गुरुदेव उचित कह रहे है क्युकी व्योमासुर जी भले हे असुर हो किन्तु वो अपनी पुत्री मानसी से बहुत प्रेम करते है आवर दूसरी बात वो जमता सूर्य आवर पुत्री किरण की वास्तविकता जानते है

गुरुदेव ......... सत्य वचन प्रेतराज इसी लिया हमने कहा की व्योमासुर जी को सम्बुआवता इस विषय में कुछ भी घात नहीं हो सकता

रानी पारी ........ गुरुदेव इसके पीछे तो फिर एक हे कारन हो सकता है या तो शुक्र लोक या फिर असुर लोक से जुड़ा कोई असुर किन्तु ये सत्य है की इस घटना के पीछे कोई न कोई असुर अवश्य है

गुरुदेव ......... हम जानते है की इसके पीछे अवश्य कोई सक्तिसाली असुर हे है किन्तु अभी तक हमें कोई भी ऐसा साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है जिस से हम किसी को भी दोषी साबित कर सके

प्रेतराज ........ क्या इस घटना के विषय में जमता सूर्य जानते है गुरुदेव आवर अगर जानते है तो वो अभी तक संत क्यों है

गुरुदेव ........... हमने अभी तक सूर्य से इस विषय में कोई बात नहीं की है किन्तु हम जानते है की सूर्य को इस घटना की जानकारी हो चुकी है वो में है तो इस लिया की एक तो अभी तक हमने इस विषय में उस से कोई चर्चा नहीं की है दूसरा कारन अभी वो अपने परिवार की खुशियों में शामिल है इस लिया अभी में है कल पुत्री मेर्री के विवाह के पश्चात हम पुत्र सूर्य से इस विषय पे बात करेंगे

( प्रेतराज ......... हमें चिंता है की इस समय पुत्र सूर्य को इन सभी मुद्दों से दूर रखना हे उचित होगा जब तक पुत्री जीनत से जमता सूर्य का मिलान ( प्रेम मिलान सुहागरात ) न हो जाये तब तक पुत्री जीनत अपनी परचंड ऊर्जा सकती को प्राप्त नहीं कर पायेगी ऐसे में हमें सूर्य को कुछ वक़्त देना चाइये भले हे जमता सूर्य ने महाप्रेत स्वरुप प्राप्त कर लिया है किन्तु पूर्णतया नियंत्रण पाने के लिया पुत्री जीनत आवर जमता सूर्य का मिलान आवशयक है )

j.king .......... प्रेतराज जी क्या हुआ आप किन गहन विचारों में खोये हुए है

प्रेतराज जी को काफी समय से में विचारों में खोये देख j.king ने उनसे पूछा

तब गुरुदेव आवर रानी पारी दोनों का ध्यान उनकी आवर गया

रानी पारी ........ प्रेतराज जी क्या कोई आवर गंभीर मसला है क्या जो आपको परेशान कर रहा है

प्रेतराज ........ हमें जमता सूर्य से अभी इस विषय में कोई भी बात करना उचित नहीं लग रहा है गुरुदेव जमता सूर्य को हमें कुछ समय आवर देना चाइये

गुरुदेव ........ आपको ऐसा क्यों लगता है प्रेतराज अगर आप ऐसा कह रहे है तो अवश्य इसके पीछे कोई महत्व पूर्ण कारन होगा

प्रेतराज ........ जी गुरुदेव कारन है पुत्री जीनत आवर जमता सूर्य का मिलान जमता सूर्य ने महाप्रेत स्वरुप को साद ( धारण ) लिया है किन्तु अभी तक पुत्री जीनत आवर जमता सूर्य का एकांत मिलान नहीं हुआ है ऐसे में सूर्य महाप्रेत को नियंत्रण नहीं कर सकता केवल पुत्री जीनत का सानिध्य हे महाप्रेत स्वरुप को संत कर सकता है ऐसे में संभव है की पुत्री पारिजात आवर जमता सूर्य का एकांत मिलान भी नहीं हुआ होगा

रानी पारी ........ गुरुदेव हम भी प्रेतराज जी से सहमत है हमें कुछ समय पुत्र सूर्य से इस विषय पे बात करना उचित नहीं लग रहा है

गुरुदेव .......... आपको क्या लगता है की पुत्र सूर्य इस विषय में नहीं जनता है या फिर वो इतना सक्षम नहीं है की असुरो सामना कर पाए

प्रेतराज ........ क्षमा करे गुरुदेव हमारा वो तात्पर्य नहीं था हम जमता सूर्य की क्षमता या उसपे किसी तरह का संदेह नहीं कर रहे है

गुरुदेव ............ वैसे हमें भी लग रहा है की हमें कुछ समय पुत्र सूर्य को इस विषय से दूर हे रखना चाइये तब तक हम अपने स्तर पे इसकी जाँच करते है

रानी पारी ......... है गुरुदेव तब तक हम यक्षिणी को कैद में रखे रखे भी बहुत कुछ जान पाएंगे

गुरुदेव .......... ये संभव नहीं है रानी पारी यक्षिणी चंडिका का कारागाह में अंत हो चूका है अब उस से हम कोई भी जानकारी नहीं जूठा सकते है

रानी पारी .......क्याआ पर ये कैसे हुआ गुरुदेव

गुरुदेव की बात सुन रानी पारी के साथ साथ प्रेतराज आवर j.king भी चौंके बिना रह नहीं पाए

गुरुदेव ........... जहा तक हमें यक्षिणी चंडिका के विषय में ज्ञात हुआ उस से यही लगता है की यक्षिणी किसी सक्तिसाली तांत्रिक असुर की गुलाम थी सम्भवता उस असुर को ज्ञात हो चूका था की यक्षिणी हमारी कैद में आ चुकी इस लिया उसने अपने तंत्र मंत्र का प्रयोग कर यक्षिणी का अंत कर दिया

j.king ....... किन्तु ये कैसे संभव है बिना कोई परीलोक में आये उसने यक्षिणी का अंत कर दिया

गुरुदेव ........ J.king जब भी कोई यक्षिणी किसी को स्वामी स्वीकार करती है तब उसे अपनी आत्मा का एक हिस्सा अपने स्वामी को सौंपना पड़ता है जिसके माध्यम से उसका स्वामी जब चाहे तंत्र मंत्र से उसका अंत किसी भी स्थान से बिना उस से सम्पर्क किये उसका अंत करने में सक्षम हो सकती है आप लोग इसी से इस बात का अंदाजा लगा सकते है की वो असुर तंत्र मंत्र में निपुण है

रानी पारी ....... अब हमें क्या करना चाइये गुरुदेव

गुरुदेव .......... हम इस विषय में व्योमासुर जी से चर्चा करेंगे हमें उम्मीद है की हम अवश्य किसी निष्कर्ष तक पहुंचने सक्षम होंगे ..........

सूर्यगढ़ ........... उदार हवेली के तीसरी मंजिल पे बने रूम में मेर्री जी की बैचलर पार्टी बड़े जोर शोर से चल रही थी

मेर्री जी किरण मानसी पायल प्रीती राधा राधिका दीप्ती माया सानिया कोमल सुनिधि सोफिया मानसी जीनत पारिजात अलीना कोमल सभी मस्ती में मिनी d.j के सांग पे जम रही थी

हलाकि सोफिया आवर कोमल ने कोई भी ड्रिंक नहीं की थी वो बस
जूस पिटे हुए सभी के साथ एन्जॉय कर रही थी

अभी रात करीब 1 बजने को आये थे ड्रिंक करने वाली सभी लड़किया हलके ससुर में थे

इस समय सानिया आवर माया हलके नशे मर निघ्त्य पहने हुए मिनी d.j पे चल रहे सांग पे एक दूसरे से चिपके हुए हॉट डांस कर रही थी

दोनों नशे की खुमारी में एक दूसरे से कुछ ज्यादा हे चिपक कर डांस कर रही थी बिच बिच में माया सानिया के मखमली खुल्बे सायला देती तो सानिया माया की चूचियों को

पायल ........ क्या बात है ये तो बड़ा हे हॉट एंड सेक्सी डांस कर रही है

पास में बैठी दीप्ती वोडका का सीप लेते हुए

दीप्ती ........ अभी इनका असली रूप देखा हे नहीं है मुझे तो दर है कही दोनों यही एक दूसरे की निघ्त्य उतर सुरु न हो जाये

पायल ....... ( जुटे हुए ) क्या सच में कही इनके बिच वो सब भी तो नहीं होता है

दीप्ती बिना कुछ बोले पायल को देख आँख मर देती है

साथ हे पायल की बूब्स पे उभरे हुए निप्पल्स को पकड़ कर हल्का सा खींच देती है

पायल ....... िस्स्सस्स अह्ह्ह्हह क्या कर रही है दीदी

दीप्ती ...... उम्म्म तुम बहुत हॉट हो पायल

पायल ........ Hello मैं वैसी लड़की नहीं हूँ हेहेहे

दीप्ती ....... हेहेहे चल न यार हम भी तरय करते है

पायल दीप्ती की नशीली आँखे अपने सीने पे देख फ़ौरन वह से उठ कड़ी होती है

किरण जो दूसरी तरफ बैठी थी उसने डेरी से दीप्ती के कण में कहा

किरण ....... दीप्ती दी यहाँ लाइन मरना बेकार है सायद माया इसके लिया परफेक्ट है

दीप्ती ........ हेहेहे नहीं यार स्वीटी मैं तो बस मज़े ले रही हूँ मुझे भी ये पसंद नहीं है

माया आवर सानिया के डांस करने के बाद

कोमल सोफिया को अपने साथ लिए डांस करने लगी

दोनों ने कोई भी ड्रिंक नहीं की थी इस लिया दोनों ने बहुत अच्छा डांस किया सभी ने दिल से दोनों की तारीफ की

एक के बाद एक जोड़े में लड़किया डांस कर रही थी

करीब घंटे भर बाद कोमल सानिया आवर प्रीती को अपने साथ लिया निचे वाले फ्लोर पे अपने रूम में चली गए सोने का बोल कर

सानिया ....... ( कान में ) यार माया कुछ कर न निचे पेंटी में आग लगी है

माया .....( पुष्पोसते हुए ) पागल है क्या यहाँ सभी की पता चल जाना है

राधिका जिसने बहुत काम ड्रिंक की थी वो माया आवर सानिया की पुष्पसहत भरी बाते साफ सुन रही थी

वो पहले से हे सूर्य के इन्तजार में गरम थी ऊपर सड़ सानिया आवर माया की बात सुन उसकी छूट में भी हलचल होने लगी

राधिका ........ आप लोग एन्जॉय करो मैं निचे सोने जा रही हूँ

दीप्ती ...... क्या हुआ राधिका

राधिका ......... दीदी आपको तो पता है न मेरी हालत

किरण ........ भाबी मैं भी चलती हूँ आपके साथ

मेर्री जी ...... ये क्या बात हुई स्वीटी

किरण ........ आपको तो पता है न मेर्री दीदी हम दोनों का हमारा आराम करना जरुरी है

मेर्री जी ....... ओह सॉरी स्वीटी मैं तो भूल गई थी की तुम दोनों के पेट में बेबी है तुम जाओ आवर आराम करो

किरण राधिका को अपने साथ ले कर निचे आ जाती है आवर अपने रूम के पास वाले रूम में राधिका को सुला देती है

अभी राधिका को सोये करीब 20 ,25 मिनट्स हे हुआ होगा की किसी ने बहुत हलके से दूर नॉक किया

राधिका अभी भी जगी हुई थी उसने जैसे हे दूर खोला सामने सूर्य खड़ा था उसे देखते हे राधिका की आँखे ख़ुशी से चमक ुति

सूर्य आगे भाड़ रूम को अंदर से लॉक कर लेता है आवर राधिका को उठा सीधा बीएड पे लिटा देता है

देखते हे देखते राधिका आवर सूर्य के शरीर से उनके नाम मात्रा बचे कपडे अलग हो चुके थे

सूर्य का लैंड पहले से हे बुरी तरह सड़ फड़फड़ा रहा था क्युकी सूर्य अभी अभी स्वीटी को सम्भोग सुख से तृप्त कर के स्वीटी के कहने पे राधिका के पास आया था

हलाकि बाद में सूर्य वैसे भी राधिका के पास आने वाला था

सूर्य राधिका के टाइट उभरे हुए चूचक पे अपनी जुबान फिरते हुए दूसरे बूब्स को अपने पंजे में भर दबाते हुए निप्पल्स को चूसने लगता है

सूर्य का राधिका के नंगे यौवन से भरपूर जिसम पे होने से सूर्य का नागराज बार बार राधिका की गीली फुल्ली हुई छूट के लिप्स पे अपनी ठोकर मर रहा था

राधिका ......... उम्म्म्मः कुंवर जी मैं कब से आपका इन्तजार कर रही थी देखो आपका इन्तजार करते करते मेरी छूट आंसू बहा रही है

सूर्य ने अपना हाथ राधिका की बुरी तरह से फड़फड़ा रही गीली छूट पे रखा तो वो वास्तव में बहुत ज्यादा गीली आवर गरम थी जैसे को गरम भाटी हो

सूर्य ने अपनी दो ऊँगली राधिका की गीली पनियाई छूट में उतर दी

राधिका ......... उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह इस्सस

सूर्य की उँगलियाँ अपनी छूट में महसूस कर राधिका के मुँह से कमुख सीकरी निकल गई

आवर वो बे- थषा सूर्य के चेहरे आवर गर्दन को चुम ने चाटने लगी राधिका के नटुनो से गरम सांसे अपने गर्दन पे महसूस कर सूर्य आवर भी उत्तेजित हो जाता है

आवर उसका असर राधिका के निप्पल्स पे हुआ जहा सूर्य ने अपने हाथ पुर मुँह की सख्ती बढ़ा दी थी

राधिका ........ उम्मम्मम अह्ह्ह्ह आराम से जान दर्द होता है

सूर्य ....... उम्मंन राधिका दर्द में भी मजा है मेरी जान

सूर्य राधिका के गुलाबी होंटो को चाहते हुए राधिका के मुँह में अपनी जुबान दाल देता है

राधिका सूर्य की जुबान को बुरी तरह से चूसने लगती है राधिका के मुँह में मीठा मीठा सा सवाद गुलने लगा साथ हे साथ सूर्य के खुल्हो से लेकर पीठ तक राधिका अपने हाथ फिरने लगती है

कुछ देर बाद सूर्य राधिका की गर्दन कान की लौ चूमते हुए सीने से होते हुए नाभि पे आ पहुंचा अपनी जुबान को तीखा कर सूर्य ने राधिका के नाभि में अपनी जुबान घूमने लगता है

सूर्य की इस हरकत से राधिका की कमर कमान की तरह बुरी तरह से तन गई

राधिका के शरीर में जनजनहत होने लगी जैसे किसी ने बिजली का झटका दे दिया हो

नाभि को चूमते हुए सूर्य के नथुनों में राधिका की छूट से बाह रहे अमृत राश की खुसबू सूर्य के नाक से होती हुए सूर्य के दिमाग में अलग हे खुमारी भरने लगी

सूर्य राधिका की आँखों देखता है जहा सूर्य को अपने लिया परिणय निवेदन था

मनो जैसे आँखों हे आँखों में सूर्य से निवेदन कर रही थी की कुछ करो मेरे जिसम की आग को ठंडी करो

सूर्य राधिका की बगल में लेट कर राधिका को अपने ऊपर 69 पोज़ में ले लेता है

जैसे हे सूर्य ने अपनी गरम जुबान राधिका की चासनी से भरी छूट पे फिरै राधिका गैप से सूर्य के लैंड का लाल मोटा दहकता सूपड़ा अपने मुँह में भर लिया

सूर्य ...... उम्म्म्म यामी राधिका तुम तो दिन बा दिन आवर टेस्टी होती जा रही हो

राधिका अपने मुँह से सूर्य के लैंड को बहार निकला आवर कुछ बोलने हे वाली थी की

तभी सूर्य ने राधिका की छूट में अपनी ऊँगली घुसते हुए छूट के डेन को अपने दांतो से हल्का हल्का कुरेदते हुए काटने लगा

दर्द आवर मज़े में राधिका की आँखे फिर से बंद हो गई आवर वो सूर्य के लैंड पे ढेर सारा थूक डालते हुए चूसने चाटने लगी साथ हे साथ सूर्य के अंडकोष को सहलाना सुरु कर दिया

सूर्य ने गीली ऊँगली राधिका की छूट से निकली आवर उस से राधिका की वर्जिन गांड को कुरेदने लगा

राधिका की गांड में सुरसुरी होने लगी जल्दी हे राधिका अपना कण्ट्रोल खोते हुए सूर्य के मुँह में भलभला कर झड़ने लगी

सूर्य ने पूरी तरह से एक भी बून्द ख़राब किये राधिका की छूट राश को चाट कर साफ कर दिया

राधिका कुछ देर सूर्य के लैंड को चूसने चाटने के बाद सूर्य की कमर के दोनों तरफ पेअर किये लैंड को पकड़ कर अपनी छूट के छेद पे लगते हुए डेरी डेरी बैठने लगी

राधिका की छूट का चला सूर्य के लैंड को बुरी तरह से कस्ते हुए अंदर जाने लगा

आधा लैंड अपनी छूट में लेने के बाद राधिका की जीनत जबाब देने लगी

सूर्य ने राधिका कज कमर थामे हलके हलके देखे राधिका की छूट में मरते हुए थोड़ा थोड़ा लैंड आवर अंदर करते हुए चुदाई करने लगा

बहुत दिनों सड़ प्यासी राधिका 5 मिनट्स में भटके कहते हुए सूर्य पे ढेर हो गयी सूर्य ने झड़े हुए हे पूरा लैंड राधिका की छूट में दाल दिया

राधिका के चेहरे पे दर्द आवर सुकून के मिले झूले भाव थे

सूर्य राधिका को ुशी तरह अपने ऊपर लिया चुदाई करता रहा जब तक राधिका दूसरी बार न झाड़ गई

सूर्य .......... राधिका डार्लिंग अब जरा घोड़ी बन जाओ

राधिका ....... क्या आप वह करने वाले है मैंने वह कभी नहीं किया है

सूर्य ........क्या मतलब राधिका

राधिका ........ वो मैंने कभी भी अनल सेक्स नहीं किया है

सूर्य ...... हाहाहा अरे पागल मैं तुम्हारी गांड नहीं करूँगा बस पीछे से तुम्हारी छूट मरूंगा

राधिका ....... आप न बिलकुल बेशरम होती जा रहे है

राधिका फिर भी बीएड पे घुटनो के बाल कुटिया बन गई राधिका की छूट अभी भी उसके छूट राश से पूरी तरह से चिकनी थी सूर्य ने बिना कोई मौका दिए एक हे बार में पूरा लैंड राधिका की बच्चेदानी तक पहुंचा दिया सूर्य के मोठे खिलते अंडकोष राधिका की छूट स जा चिपके

राधिका ........ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मरने का इरादा है क्या आराम से करो न

सूर्य ........ मार हे तो रहा हूँ तुम्हारी गरम नरम राश भरी छूट

सूर्य राधिका के दोनों बूब्स को पकडे बड़े तेज झटका के साथ राधिका की छूट की गर्मी संत करने लगा राधिका भी पूरी मस्ती से चूका रही थी आज सूर्य से इस तरह चूसने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था

हर बार सूर्य का लिंगमुण्ड राधिका की बच्चेदानी को टच करता तो मस्ती आवर मीठे दर्द से राधिका आसमान में उड़ने लगती

3,4 मिनट्स में राधिका की छूट का सिकंजा सूर्य के लैंड के इर्द गिर्द बनने लगा राधिका की छूट में भरते संकुचन से सूर्य के लैंड पे जैसे जैसे कसावट भाड़ रही थी वैसे वैसे सूर्य की लैंड की नशे पतली राशि के जैसे उभर कर राधिका की छूट के अंद्रूंज हिस्से में रगड़ खा रही थी राधिका झड़ने से पहले हे अर्ध बेहोशी की हालत में बीएड पे पसर गई

सूर्य ने भी लास्ट के स्ट्रोक्स कुछ ज्यादा हे तेजी से मरे अंत में राधिका की छूट से गरम बिछड़ सूर्य के लिंगमुण्ड पे एक के बाद एक गिरने लगी सूर्य ने लास्ट झटका इतना तेज मारा की पूरा लिंगमुण्ड बच्चेदानी का मुँह खोल उसमे जा गुस्सा एक जोरदार हुनर के साथ सुरुआ राधिका की पीठ पे ढेर हो गया उसका लैंड राधिका की छूट में रह रह कर गरम भूरिया की पिचकारी बच्चेदानी में भर रहा था अपनी बच्चेदानी में सूर्य का गरम लावा महसूस कर राधिका बेहोशी में हे कटी हुई मुर्गी की तरह झटके कहती हुई चीख के साथ फिर स्व झाड़ गई

करीब 5 मिनट्स बाद सूर्य ने जब अपना लैंड बहत निकला तो राधिका आवर उसका मिला जुला ढेर सारा वीर्य छूट के खुले हुए छेद से निकल कर बीएड की चादर को भी गॉन लगा

राधिका ुशी हालत में गहरी नींद में चली गई

सूर्य ने अपने जादू से सब ठीक किया आवर राधिका को ठीक से साफ कर जादू से कपडे पहना कर अपने रूम में चला गया

दूसरी मंजिल की सीढ़ियों से दीप्ती सूर्य को राधिका के रूम से निकलता देख अपने होंटो को काट कर दाभे पांव ऊपर चली गई

रात के 2 से ऊपर टाइम होने से d.j आवर ड्रिंक बंद हो चुकी थी ज्यादा तर लड़किया खाना खा रही थी या थोड़ा बहुत जबरदस्ती कहिल्याया जा रहा था

जीनत परिधि सूर्य के रूम में किरण के साथ लेती हुई थी

मानसी अलीना आवर पायल को साथ लिया तीनो वह स्व जा चुकी थी

अब यहाँ दीप्ती मेर्री जी राधा सानिया माया सलमा हे बचे थे

माया ......... मेर्री जी अब सब लोग सो गए है तो क्यों न हम हमारी पार्टी सुरु करे

मेर्री जी ......... मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है पैर क्या ये ठीक रहेगा

दीप्ती ........ कोई मुझे बताएगा की आखिर तुम किस पार्टी के बारे में बात कर रही हो यही तो हमने पार्टी की है

माया ........ अरे दीदी ये अलग पार्टी है जो हम सबने बाद में एन्जॉय करने के लिया प्लान की थी

दीप्ती ......... ठीक है मैं भी त्यार हूँ पैर थोड़ा बताओ तो सही इस बारे में

सानिया .......... माया ये तुम्हारा प्लान था तो अब तुम हे बताओ

राधा .....है तुम बताओ तब तक मैं बहार देख कर आती हूँ की आवर तो नहीं है ऊपर

राधा वह से बहार चल देती है आवर माया दीप्ती से कहती है

माया ........ सॉरी दीदी हमने आपको बताया नहीं पैर ये वही ट्रुथ एंड डरे वाली पार्टी है पैर इसमें कोई लिमिट नहीं है

दीप्ती ........ क्या मतलब

माया ......... यहाँ हम सब परिपक्व लड़कियां है तो आप समाज जाये

दीप्ती ........ ठीक है मैंने भी कॉलेज हॉस्टल में बहुत सुना था ऐसे पार्टी के बारे में

राधा ........ तो सब त्यार है पैर ध्यान रहे कोई ज्यादा आवाज न करे क्युकी सूर्य ऊपर चाट पे सोया है उसे इस बारे में पता न चले

राधा एक कोने से 2 वोदका की बोतल लिए कुछ बने हुए काजू बिदाम आवर कुछ सनेक्स लिया सभी के साथ एक राउंड में बेथ गई

माया ........ रूल सिम्पली है ट्रुथ डरे में से किसी एक को चूमना होगा जिसका भी no. आएगा उसे दोनों में से एक चुनना होगा तीसरा ऑप्शन नहीं है हर एक राउंड पे एक पेग वोद्का का शॉट लगाना होगा

राधा ने एक खली बोतल बिच में रखते हुए कहा आवर अपने लिया मेर्री जी सानिया दीप्ती माया सलमा 6 लोगो के लिया वोदका के एक सामान पेग त्यार कर दिया

मेर्री जी ने बेयर बोतल को घुमाया 4,5 राउंड गुमने के बाद बोतल का मुँह सलमा की आवर रुका

मेर्री जी ........ सलमा क्या चुंगी त्रुटि एंड डरे

सलमा ........ ट्रुथ

मेर्री जी ........ मैंने सुना है सोहेल की तुमसे सदी फिक्स हो गई है तो तुमने सेक्स भी किया होगा तुमने फर्स्ट टाइम सेक्स कब किया था आवर किसके साथ एक बात आवर यहाँ जो कुछ भी आवर आज हे ख़तम इसके बाद कोई भी यहाँ जो भी हो उसको ले कर बात नहीं नरेगा

सलमा ........ मेरे 18 बिर्थडेज़ पैर सोहेल के साथ

मेर्री जी ....... क्या तुम उस टाइम वर्जिन थी

सलमा ... ... हाहाहा दीदी ये दूसरा सवाल हो गया

सलमा ने बोतल गुमाई तो इस बार बोतल का मुँह दीप्ती की आवर था

दीप्ती ....... मैं डरे चुंगी ( इतना बोल दीप्ती ने वोदका का शॉट लगाया आवर सलमा की आवर देखने लगी )

सलमा ........ हम्म्म आप न सानिया आपकी को स्मूच करो

दिपतु ........क्या कहा

सलमा ......... आपने डरे चुना है अब पीछे नहीं हैट सकती

सानिया ........ के ों दी जस्ट किश हे तो है

दीप्ती ........ है पैर तुम्हारे लिया तुम दूसरी हो ज इसे मैं किसी करने वाली हूँ

सलमा ....... पहला कोण है दीदी आपका बर्फ

दीप्ती .......... बेटर लक नेक्स्ट टाइम बेबी

दीप्ती आगे जुख सानिया का चेहरा पकड़ उसे किश करने लगती है करीब 2 मिनट्स बाद दोनों अलग हुए

सानिया तो किश की खुमारी अपनी निघ्त्य के ऊपर से अपनी छूट को सहलाये बिना नहीं रह पायी

दीप्ती ........ सच में यार ये इतना भी बुरा नहीं था

दीप्ती ने बोतल गुमाई तो इस बार बोतल राधा की आवर रुकी

राधा ........ ट्रुथ

दीप्ती ............ तुम अभी भी कॉलेज कर रही क्या तुम वर्जिन हो अगर है तो किसी को लिखे तो करती होगी अगर वर्जिन नहीं तो वीरगिनती ब्रेक करने वाले का नाम बताओ

राधा ........ ये तो बहुत स सवाल एक साथ कर दिए आपने

एक शॉट लगा कर राधा ने बोना सुरु किया

राधा ........ मैं अभी भी वर्जिन हूँ

डेरी डेरी 2 राउंड पुरे हो गए इन दो राउंड में बहुत से राज भी खुले जैसे की पहला लाइव सेक्स किसका देखा किसके साथ कारनामे चाहती है वगेरा वगेरा सानिया ने तो दो बार में माया की निघ्त्य आवर ब्रा तक उतरवा दी थी

माया ने भी मोके पैर दीप्ती की पेंटी उतरवा दी थी निघ्त्य के निचे से

सरब के नशे ने सभी के शरीर में ऐसे माहौल में उत्तेजना भर दी थी

इस बार जब बोतल गुमाई सानिया ने आवर बोतल रुकी मेर्री जी की तरफ

मेर्री जी ........ हम्म्म डरे

सानिया ......... हेहेहे दी आपको न माया के चूचिया छनि होगी 3 मिनट्स कंटिन्यू

माया ....... मैं त्यार हूँ ( कहते हुए माया अकेली पेंटी पहने मेर्री जी की गौड़ में जा जेठी मेर्री जी ने माया की गूरे गोरे 36 के बूब्स पे पिंक अंडे हुए निप्पल्स देखे तो खुद को रोक नहीं पाई आवर बरी बरी से बूब्स चूसने लगी

माया के रोम रोम में उत्तेजना की लहार दौड़ गई आवर खुद हे अपनी हलकी गीली ब्लैक पेंटी के ऊपर से अपनी वर्जिन छूट को हाथ स रगड़ ने लगी

3 मिनट्स भी पुरे हो गए पैर दोनों ने इस आवर ध्यान नहीं दिया तब राधा ने दोनों को चेताया

मेर्री जी ने बोतल गुमाई तो राधा की आवर रुकी

राधा ........ मैं डरे चुंगी ( राधा को भी मज़ा आ रहा था आवर वो काम से काम अपने सीक्रेट खोलना चाहती थी )

मेर्री ....... राधा तुम्हे अपनी निघ्त्य उतर कर 2 मिनट्स रूम के बहार बिताना होगा

राधा ........ क्या ये आप क्या कह रही है बहार सूर्य भी सो रहा है

सानिया ........ आपने डरे चुना है आपको करना होगा राधा डार्लिंग नहीं तो मैं यही आपका पानी निकल दूंगी

नशे में लाल आँखे लड़खड़ाती जुबान से सानिया ने कहा

राधा ने कुछ सोच कर अपनी निघ्त्य उतर आवर वाइट ब्रा पेंटी में अपनी हुसैन के जलवे भिखेरते हुए रूम के बहार चली गई इस वक़्त सभी सोये हुए थे तो किसी का कोई दर नहीं था

2 मिनट्स बिताने के बात राधा अंदर आ गई

कुछ हे देर बाद सभी की ऑलमोस्ट कपडे गायब थे

सभी की खूबसूरत चूचिया अकड़ कर कड़ी थी केवल मेर्री जी हे ऐसे थी जो अभी तक पेंटी में थी

दीप्ती ने बोतल गुमाई तो माया पे रुकी

माया जो फूल नशे में लग रही थी उसने डरे चुना

दीप्ती ........ माया तुम्हे सानिया की छूट चूस कर उस हे डिस्चार्ज करना है


दीप्ती को ऐसा डरे देते हुए किसी ने नहीं रोका था सभी इस खेल का आवर मज़ा लेना चाहती थी

माया आवर दीप्ती तो पहले से फूल गरम थी माया सानिया पे किसी भूखे भेड़िया के जैसे टूट पड़ी देखते हे देखते रूम में पूरा माहौल बदल चूका था

अब ट्रुथ आवर डरे का खेल पूरी तररह से बदल कर ग्रुप लेस्बियन प्ले ग्राउंड में बदल गया था

मेर्री जी जल्दी हे सभी नजरे बचा कर अपनी निघ्त्य लिया रूम से निकल गई

आवर सीधा सूर्य को उठा आवर अन्देरी की तरफ चल दी करीब आधे घंटे बाद ख़ुशी से चाहिए हुए मेर्री जी अपनी टंगे हलकी छोड़ी कर अँधेरे से निकली आवर चुपचाप रूम में आ कर लेट गई

राधा जिसपे नशा काम था उसने आवर दीप्ती ने मिल कर खुद आवर सभी को कपडे पहनाये

राधा ...... चलो ये सब ख़तम हुआ अब सोने चलते है

दीप्ती ...... मैं निचे जा रही हूँ आप सो जाओ

राधा ...... यही सो जाओ न जगह तो है हे

दीप्ती ....... वो मैं राधिका के पास जा रही हूँ वो अकेली सोये होगी

मेर्री जी ....... ठीक है दीप्ती

मेर्री जी ने राधा को आँख मर दी जिस से उसने कुछ भी नहीं कहा

दीप्ती रूम से बहार निकल गई

राधा ........ क्या हुआ आपने मुझे क्यों रोका

मेर्री जी ....... जाने दो उस हे वो सूर्य के पास गई है

राधा ...... क्या सच में

मेर्री जी ....... तुम्हे याद नहीं क्या दीप्ती ने क्या कहा था

राधा ....... ओह्ह तो इसकी वीरगिनती सूर्य ने ली है क्या

मेर्री जी ....... हम्म्म पैर ये किसी को मत बिताना ये सानिया माया सुनिधि सभी सूर्य के पीछे है

जैसा मेर्री जी ने कहा ठीक वैसा हे हुआ दीप्ती हलके नशे में सीधा सूर्य की चादर में जा गुस्सी

सूर्य की नींद तो मेर्री जी से सेक्स करने के बाद ुध चुकी थी वो समाज गया की दीप्ती यहाँ क्यों आई है ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
अपडेट. 289

राधा ........ क्या हुआ आपने मुझे क्यों रोका

मेर्री जी ....... जाने दो उस हे वो सूर्य के पास गई है

राधा ...... क्या सच में

मेर्री जी ....... तुम्हे याद नहीं क्या दीप्ती ने क्या कहा था

राधा ....... ओह्ह तो इसकी वीरगिनती सूर्य ने ली है क्या

मेर्री जी ....... हम्म्म पैर ये किसी को मत बिताना ये सानिया माया सुनिधि सभी सूर्य के पीछे है

जैसा मेर्री जी ने कहा ठीक वैसा हे हुआ दीप्ती हलके नशे में सीधा सूर्य की चादर में जा गुस्सी

सूर्य की नींद तो मेर्री जी से सेक्स करने के बाद ुध चुकी थी वो समाज गया की दीप्ती यहाँ क्यों आई है ............

अब आगे ............

सुबह सुबह की हलकी ठंडक भरी हवा ने जब दीप्ती की नग्न शरीर को चूहा तो दीप्ती ठण्ड से बचने के लिया सूर्य से आवर ज्यादा काश के लिपट गई

अपने शरीर पे कोमल बहो की कसावट को मेहसुआह करते हे सूर्य की आँखे खुल गई

सूर्य ने चारो तरफ नजर दौड़ाई उसे अभी भी काफी अँधेरा नजर आ रहा था फिर अपने सीने से अम्बारबेल के जैसे नग्न लिपटी दीप्ती पे गई

सूर्य आवर दीप्ती दोनों हे अभी तक पतली चादर के अंदर पूरी तरह से जन्मजात नंगे थे

सूर्य ने डेरी से दीप्ती की बहो से निकलने की कोशिश की पैर सायद दीप्ती पहले हे जग चुकी थी

सूर्य के हिलने डुलने से मॉर्निंग इरेक्शन के कारन खड़ा सूर्य का लिंग दीप्ती को अपनी जंगो के बिच रात की चुदाई के दर से फुल्ली हुई छूट पे सूर्य के खड़े लैंड की गर्माहट को कठोरता को आँखे बंद किये मज़े में खोये हुए थी

जब सूर्य ने उसकी बहो से निकलने की कोशिश की तो दीप्ती ने एक बार आँखे खोली आवर सूर्य की आँखों में देख उसने सूर्य को कस्ते हुए आँखे बंद कर ली

सूर्य ...... दीप्ती उठो सुबह होने वाली है छठ पैर कोई भी आ सकता है हम अभी भी नंगे है

दीप्ती ....... ुन्नन. थोड़ी देर आवर सोने दो न सूर्य

सूर्य ...... पागल न बनो कभी भी कोई भी ऊपर आ सकता है सामना करो

दीप्ती अनमने मन से सूर्य के ऊपर से साइड में लेट जाती है आवर अपने ऊपर से चादर हटा देती है

सूर्य की नजर एक बार तो दीप्ती के निर्वस्त बदन पे अटक जाती है दीप्ती भी ये देख अंदर हे अंदर मुस्कुरा उठी जब दीप्ती की नजर सूर्य के हवा में भटके कहते लैंड पे पड़ी तो हलके मीठे मीठे दर्द के साथ उसकी छूट में खारिश होने लगी

सूर्य साइड में पड़े अपने लोअर को उठा कर फ़ौरन पहन लेता है

जिसे देख दीप्ती का चेहरा हल्का ुदशी से भर जाता है

सूर्य ....... जल्दी से अपने कपडे पहनो आवर रूम में जा कर लेट जाओ

कहते हुए सूर्य बिस्तर के आस पास पड़ी दीप्ती की व् शेप ब्रा पेंटी आवर निघ्त्य उठा कर दीप्ती की आवर बढ़ा देता है

दीप्ती उदाश मन से सब पहन कर बिस्तर से कड़ी हो जाती है

सूर्य दीप्ती को अपनी आवर खींचता है आवर दीप्ती के बिना कुछ कहे उसे किश करने लगता है

साथ साथ अपना हाथ निघ्त्य के अंदर से पेंटी में दाल दीप्ती की छूट को रब करने लगा

डेरी डेरी दीप्ती अपनी छूट पे हो रही रोब्बिंग से काफी गरम हो गई

सूर्य ने किश करते हुए दीप्ती के बैक से हाथ दल ऊँगली से दीप्ती की गांड के छेद को भी कुरेधना सुरु कर दिया

दीप्ती अपनी छूट आवर गांड पे हो रही किरिया को ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पति है आवर किश करते करते हे सूर्य की बहो में झाड़ जाती है

सूर्य उसे अपनी गौड़ में उठा कर निचे जहा राधिका आकिलि सोये हुए थी उस रूम की आवर भाड़ जाता है

सूर्य दीप्ती को राधिका की बगल में सुला कर एक छोटा सा किश कर रूम से निकलने लगता है

दीप्ती ....... अपने होने वाले बचे की माँ को प्यार नहीं करोगे क्या

सूर्य ने पलट कर जब राधिका को देखा जो अभी अपने जांघों आवर सीने में पिलो दबाये किसी मासूम बच्चे के जैसे दिन दुनिया से be-khabar मीठी नींद में थी

सूर्य ने दीप्ती को देखा आवर फिर राधिका के होंठो आवर माथे पे छोटा सा किश कर सर को सहला कर मुस्कुराते हुए रूम से बहार निकल गया

दीप्ती को अपनी गिल्ली पेंटी से थोड़ी प्रॉब्लम हो रही थी आवर उसे अभी आवर भी सोना था इस लिया नहाने की जगह उसने रूम को लॉक किया आवर अपनी पेंटी निकल कर अपनी पेंटी से अपनी गीली छूट को साफ कर उसे पिलो के निचे रख पीछे से राधिका को अपनी आवर कर उसे बहो में भर लेट गई फिर से जल्दी हे दीप्ती को नींद आ गई

उदार सूर्य अपने रूम में पहुंचा तो जीनत पारिजात किरण के अगल बगल दोनों तरफ से बहो में भरे सो रही थी

तीनो सोये हुए बहुत मासूम आवर प्यारी लग रही थी

सूर्य ने एक भरपूर नजर तीनो पे डाली आवर टॉवल लिया बाथरूम में नहाने चल दिया

कुछ देर बाद सूर्य नाहा कर बाथरूम से निकला आवर त्यार होने लगा बार बार सूर्य की नजर मिरर से जीनत परिधि स्वीटी को सत्य हुए देख रही थी

जिस तरह से तीनो एक दूसरे से चिपके हुए सो रही थी उनने देख यही लगता की जैसे तीनो बहने हो

सूर्य त्यार होने के बाद किरण जीनत पारिजात के माथे पे किश कर वह से गायब हो गया जैसे तीनो के अलावा कभी कोई वह था हे नहीं

सूर्य के रूम से जाते हे किरण ने मुस्कुरा कर अपनी आँखे खोली जीनत आवर परिधि को एक नजर देखा आवर रूम में लगी घडी की आवर देखा जिसमे 04:50 ऍम हो रहा था

किरण ने दोनों को बिना उठाये बिच से निकल कर कपडे लिया आवर बाथरूम में गुस्स गई

डेरी डेरी हवेली में सभी लोग भी उठ गए थे

हवेली के पीछे हलवाई सभी के लिया चाय नास्ता त्यार कर वेटर वेटर्स के हाथो मेहमानो को सर्व करने लगे

रात की bachelor's पार्टी के हेंग ओवर के बाद भी सभी लड़किया काफी एनर्जेटिक लग रही थी

सबसे ज्यादा दीप्ती माया सुनिधि मेर्री जी के चेहरे पे निखार थी

उदार सूर्य जंगल में 2 हर ध्यान करने के बाद अपने 5 तत्वा आध्यात्मिक शरीर के साथ योद्धा अभयश कर रहा था तभी उसे आस पास किसी के छुपे होने का आभाष हुआ

सूर्य ......... सेल जी आप सामने आ सकते है आपको मुझसे छुपने की आव्सय्कता नहीं है

सूर्य ने मुस्कुराते हुए कहा वही सूर्य की बात सुन अस्वसुर जो अपनी आसुरी सकती के आवरण में छुपा हुआ था वो बहार आता है

अस्वसुर .......... ( व्योमासुर जी का शिष्य ) मुझे क्षमा करे मैं आपको योध अभ्यास करते हुए परेशान नहीं करना चाहता था

( इन्होने मुझे गली क्यों दी क्या मैंने इस समय यहाँ आ कर कुछ अनुचित कर दिया है )

सूर्य ....... कोई बात नहीं मेरा योद्धा अभ्यास पूरा होने हे वाला था मैं आपका हे इन्तजार कर रहा था मुझे बाबा से कल रात हे सन्देश मिल चूका था

अस्वसुर .......... मुझे गुरुदेव ने हे भेजा है

सूर्य ........ तो क्या उन्होंने पता कर लिया की इस घटना के पीछे कोण है

अस्वसुर ........ माफ कीजिये मुझे इस विषय में कुछ भी ज्ञात नहीं है आवर न गुरुदेव ने मुझे इस विषय में कुछ कहा है

सूर्य ........ फिर आप किस उद्देश्य से यहाँ आये है सेल साहब

अस्वसुर ......... सेल साहब

सूर्य ........ क्यों भाई आप मानसी के गुरु भाई है न इस नाते मेरे तो रिश्ते में सेल हे लगे न

अस्वसुर ........ जी जी

सूर्य ........ खेर ये सब छोड़िये आवर आपके आने का कारन बताये

अस्वसुर ......... वो असुरगुरु गुरुदेव शुक्राचार्य जी की पुत्री देवी देवयानी जी ने आपके लिया सन्देश भेजा है

वो स्वयं आपसे भेंट करना चाहती थी किन्तु उन्हें आपके स्थान के विषय में कुछ भी ज्ञात नहीं था इस लिया उन्होंने आपको सन्देश देने की लिया मुझे भेजा है

सूर्य ........ किन्तु वो क्यों मुझसे मिलना चाहती है क्या उन्होंने इस बारे में कुछ बताया है

अस्वसुर ......... जी उन्होंने आपको ये सन्देश पत्र देने को कहा है

कहते हुए अस्वसुर सूर्य के सामने एक कपडे में लिप्त सन्देश पत्र ( पुराने ज़माने का ) सूर्य के सामने करता है

सूर्य उसे खोलता है किन्तु वह कुछ भी नहीं लिखा था पूरा हिस्सा पूरी तरह से खली था

सूर्य ........ ये तो पूरी तरह से खली है है इस सन्देश पत्र में तो कुछ भी नहीं लिखा है

तभी सूर्य को अपने मन में निर्भया का स्वर सुनाई दिया

निर्भया ...... भाई ये मायावी सन्देश है इसे पढ़ने के लिया आपको उसमे आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा डालनी होगी तभी आप सन्देश प्राप्त कर सकते है

सूर्य ने अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को सन्देश पत्र में इंजेक्ट कर दिया अगले हे पल सन्देश पत्र चमक उठा आवर उसमे सूर्य को देवयानी जी का चेहरा नजर आने लगा

देवयानी जी का सन्देश सुन सूर्य सोच में पद गया आवर देखते हे देखते सन्देश पत्र को अग्नि ने अपने आगोश में ले लिया

सूर्य अपनी आँखे बंद कर रकत सन्देश को याद करता है आवर बाबा व्योमासुर जी के नाम सन्देश लिखता है आवर उन्हें भेज देता है

अस्वसुर चुप चाप सूर्य की गतिविधि पे नजर बनाये सूर्य को सन्ति से आँखे बंद किये खड़ा देख रहा था

कुछ देर बाद सूर्य ने अपनी आँखे खोली आवर अस्वसुर को देखा जो उसे हे देख रहा था

सूर्य ....... अस्वसुर जी अब आप जा सकते है मुझे उनका सन्देश मिल चूका है बस उनसे कहना की जैसा वो चाहती है वैसा हे होगा बाकि वो खुद समझ जाएँगी ( सूर्य किसी मंत्र का प्रयोग कर किसी वास्तु का आह्वान करता है ) ये लीजिये इस बॉक्स को आप देवयानी को दे दीजिये

अस्वसुर ...... जी जैसा आप कहे

अस्वसुर फ़ौरन वह से गायब हो गया सूर्य का मुस्कुराता चेहरा अचानक से गंभीर हो गया आवर वो काफी देर किसी गहरी सोच में डूबा रहा

सूर्य का ध्यान तब भांग हुआ जब किसी ने पीछे से उसके कंधे पे अपना कोमल हाथ रखा

सूर्य ने पीछे पलट कर देखा तो वह जीनत कड़ी थी

जीनत ........ कुंवर सा क्या हुआ मैं कब से आपके पीछे कड़ी हूँ पैर आपका ध्यान हे नहीं गया मुझपे आप कुछ परेशान लग रहे है कुछ हुआ है क्या

सूर्य ........ सॉरी वो मेरा ध्यान कही आवर था इसी लिया मई तुम्हारे यहाँ होने का आभाष नहीं कर पाया वैसे तुम्हे कैसे पता की मैं यहाँ मिलूंगा

जीनत ....... आप भूल रहे है हमारा आत्मा मिलान हो चूका है आपको मह्सुश करने के लिया मुझे अपनी सकतिया का प्रयोग करने की आव्सय्कता नहीं है आप भले हे अपनी परेशानी मुझे बताना न चाहे फिर भी आपकी इस्थिति मुझसे चुप नहीं सकती है

सूर्य ........ सॉरी जीनत मैं थोड़ा परेशान था इस लिया मैं ध्यान नहीं दे पाया आवर मैं तुम्हे भी सब बता कर परेशान नहीं करना चाहता था

जीनत ....... मैं जानती हूँ आप हम में से किसी को भी परेशान नहीं करना चाहते पैर आपको ये भी ख्याल रखना होगा की हमारी किस्मत हमारा अस्तित्व आपसे जुड़ा है समस्या कितनी भी विकत आवर विशाल हो संत चित से मंथन करने पर हर समस्या का समाधान कर सकते है हम

सूर्य ........ सच कहा आपने खेर छोड़ो ये सब अब हमें घर चलना चाइये

जीनत ......... क्या हम कुछ देर आवर नहीं रुक सकते ये वही स्थान है न जहा आपने रिद्धि दीदी के साध्वी रूप में ध्यान लगाना आरम्भ किया था

सूर्य ........ है ये वही स्थान है जहा से मेरे इस जीवन में उस जीवन की यादो को प्राप्त करने के मार्ग की नीव राखी गई थी ये स्थान मेरे लिया बहुत खाश है बहुत कुछ शिखा है यहाँ मैंने

जीनत सूर्य का हाथ अपने कोमल हाथो में लिए पेड़ के निचे पड़े बड़े से पत्थर की आवर चल देती है

सूर्य पत्थर पे बेथ जीनत को अपनी गौड़ में बैठा लेता है

जीनत प्यार से सूर्य की आँखों में देखि है जहा अपने लिया बे- सुमार प्यार हे प्यार था

जीनत ने अपनी झील से गहरी आँखों को बंद कर अपने होंठ सूर्य के होंटो की आवर बढ़ा देती है

सूर्य भी जीनत के लरजते होंटो से अपने होंठ चूहा देता है कुछ पल बाद सूर्य जीनत के निचले कोमल गुलाबी होंठ को अपने होंटो में भर चूसने लगता है

जीनत के हाथ सूर्य की पीठ आवर सर के बालो को सहलाने लगता है

कुछ देर वासना से मुक्त इस प्यार भरे चुम्बन से एक दूसरे के होंटो की प्यास मिटने के बाद सूर्य ुशी तरह जीनत को अपनी गौड़ में लिया उस से बाते करने के बाद दोनों हवेली की आवर भाड़ चले

जीनत के साथ कुछ मिनट्स प्यार भरे लम्हे बिताने से सूर्य सभी परेशानियों से मुक्त हो खुद को पहले की तरह ठहरे हुए शीतल जल की तरह संत कर चूका था ..........

सुक्रलोक ..........

व्योमासुर जी को जैसे हे सूर्य का रकत सन्देश प्राप्त हुआ जिस से उन्हें देवयानी जी का सन्देश भी मिल चूका था इस से वो भी कुछ परेशान हो चुके थे

किन्तु वो सामने से देवयानी जी से इस बारे में कोई भी बात नहीं कर सकते थे

अगर वो ऐसा करते तो उन्हें देवयानी जी के बहुत से सवालो के जबाब भी देने पड़ते जो उनके लिया ठीक तो बिलकुल नहीं था सम्भवता उन्हें सूर्य आवर अपने बिच बने रकत सन्देश का राज़ भी उजागर करना पद सकता है

इस लिया वो छह कर भी खुद से पहल कर देवयानी जी से कोई सवाल जबाब नहीं कर सकते थे

उदार अस्वसुर भी सुक्रलोक लौट आया था आवर उन्होंने देवयानी जी को सूर्य का सन्देश दे दिया था

पहले तो देवयानी को कुछ समझ नहीं आया पैर जब बार बार सूर्य के सन्देश को अपने दिमाग में दोहराया तो उन्हें सूर्य का सन्देश समझते देर नहीं लगी

देवयानी जी ......... अच्छा अब तुम जाओ हमें एकांत चाइये तुम असुर लोक लौट सकते हो अब

अस्वसुर ...... जी जैसा आपका आदेश देवी

अस्वसुर वह से व्योमासुर जी के कक्ष की आवर लौट गया

देवयानी जी ने अपने कक्ष का द्वार बंद किया आवर अपने कक्ष को अपनी सकती से कवर कर उस बॉक्स को खोला जो सूर्य ने अस्वसुर के हाथो भिजवाया था बॉक्स में जो चीज़ राखी थी उसे देख देवयानी जी को फ़ौरन याद आ गया की पहले भी उसने ऐसी चीज़ सूर्य के पास देखि थी

देवयानी जी ......... ये तो ुशी तरह का यन्त्र है जो सूर्य के पास था जिस से संगीत निकलता है

देवयानी जी ने फ़ौरन बॉक्स में रखे फ़ोन को उठा लिया

देवयानी जी का हाथ लगते हे फ़ोन की स्क्रीन चमक उठी आवर उस से सूर्य की आवाज आने लगी जिसमे सूर्य का वास्तविक सन्देश था देवयानी जी के लिया

सन्देश सुन देवयानी जी भी मुस्कुराने लगी

देवयानी जी ........ ये तो बहुत हे काम का यन्त्र ( मोबाइल ) है इस पूर्व भी हमने ऐसा हे यन्त्र सूर्य के पास देखा था जिस से संगीत दौनी निकलती है

इसकी आवर क्या क्या विशेस्तए होंगी

देवयानी काफी देर मोबाइल को देखती है थोड़ा बहुत उसे समाज आता है पैर उसका प्रयोग किस रूप में होगा ये उस हे समझ नहीं आया

अंत में मोबाइल को गायब कर देवयानी जी अपने हे कक्ष में सोचते हुए उदार उदार टहलने लगती है

काफी देर बाद वो अपने कक्ष से बहार निकल जाती है

ीदार व्योमासुर जी भी देवयानी के विषय में हे सोच रहे थे

व्योमासुर जी ........ क्या मुझे देवयानी से इस बारे में बात करनी चाइये उनके मस्तिष्क में क्या विचार चल रहे है कही वो सूर्य को कोई नुक्सान न पहुंचा दे अगर उन्होंने ऐसा कुछ भी किया तो अनर्थ हो जायेगा

काफी देर सोच विचार करने के बाद व्योमासुर जी ने देवयानी से मिलने का फैसला किया आवर अपने कक्ष से बहार निकल देवयानी जी के कक्ष की आवर चल दिए

किन्तु वह जब वो पहुंचे तो उनने निराशा हे हाथ लगी क्युकी देवयानी जी अपने कक्ष में नहीं थी

उन्होंने सोचा की सायद वो आश्रम में कही होंगी किन्तु पुरे आश्रम की खोजबीन के बाद भी उनने देवयानी जी कही नहीं मिली

व्योमासुर जी चिंतित होती हुए असुरगुरु शुक्राचार्य के प्रमुख शिष्य के कक्ष की आवर चल दिए

वह से उन्हें पता चला की देवयानी किसी आवशयक कार्य के लिया आश्रम से बहार गई है किन्तु किस काम से ये उन्हें भी नहीं पता था

काफी लम्बे इन्तजार के बाद देवयानी जी साम को आश्रम में लौटी

जैसे हे उन्हें देवयानी जी के आने का पता चला वो बिना वक़्त ख़राब किये उनसे मिलने उनके कक्ष में पहुंच गए

देवयानी जी ........ आप यहाँ इस समय

व्योमासुर जी ........ जी वो मुझे आपसे कुछ आवशयक बात करनी थी परन्तु आप यहाँ थी नहीं मैं काफी समय से आपका इन्तजार कर रहा था मुझे माफ कीजिये अगर आप वयस्थ है तो

देवयानी जी ......... कोई बात नहीं अब आप आ हे गए है तो कहिये किस लिया आना हुआ

व्योमासुर जी ........ मुझे क्षमा करे किन्तु मैं ये जानना चाहता हूँ की आपने पुत्र सूर्य से भेंट करना का अचानक से समय निर्धारित क्यों किया इसके पीछे कोई ऐसा उद्देश्य तो नहीं है जिस से सूर्य को कोई हानि हो

देवयानी जी ......... ( गुस्से में ) व्योमासुर आप हमारे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकते है

हमारा सूर्य से भेंट करने के पीछे ऐसा कोई उद्देश्य नहीं है अगर हमें सूर्य को कोई हानि पहुचानी होगी तब भी हम सामने से वॉर करना उचित समझेंगे न की पीठ पीछे से किसी षड़यंत्र के तहत

व्योमासुर जी ........ मेरी ड्रिस्त्त के लिया मुझे क्षमा करे किन्तु राजकुमारी जी किन्तु मैं पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी को ले कर चिंतित हूँ मैं यहाँ ओस समय गुरु शुक्राचार्य के रूप में नहीं अपितु एक पिता के रूप में आपके समक्ष खड़ा हूँ मुझे अपनी पुत्री के जीवन को ले कर चिंता है

व्योमासुर जी की बात सुन देवयानी जी का गुस्से से लाल खूबसूरत चेहरा संत हो जाता है

देवयानी जी ........ हम्म्म मुझे माफ कीजिये व्योमासुर मुझे आपको पहले हे इस बारे में बता देना चाइये था सायद तब आप को इस बात से इतनी चिंता नहीं होती फिर भी हम आपको आस्वस्त करते है की हम कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिस से सूर्य को या उस से जुड़े किसी व्यक्ति को हानि पहुंचे इस लिया आप निश्चिन्त रहे

व्योमासुर जी ........ आपका बहुत बहुत धन्यवाद राजकुमारी जी

देवयानी जी ........ राजकुमारी जी हम्म्म आप भूल रहे है पिता श्री के शिष्य होने के चलते आप हमारे भाई भी है राजकुमारी हम सुक्रलोक के आम लोगो के लिया है आपके लिया नहीं आपके लिया हम केवल देवयानी है आपकी बड़ी बहन मानसी हमारे लिया पुत्री सामान है आवर सूर्य जमता इस लिया आप निश्चिंत रहे हम कभी भी सूर्य को कोई हानि नहीं पहुचायेंगे

व्योमासुर जी ........ आपने सब तयारिया कर ली

देवयानी जी ........ है हमने सब तयारिया कर ली है किन्तु इस बात को आप अपने तक हे सिमित रखे हमें संदेह है की हमारी हर गति विधि पे नजर राखी जा रही है

व्योमासुर जी ....... जी मैं समाज गया किन्तु आपको फिर भी सावधान रहना होगा

कुछ देर आवर बात करने के बाद व्योमासुर जी वह से निकल गए

परीलोक ...........

इस समय गुरुदेव मंदिर में ध्यान में लीं थे तभी सूर्य वह प्रकार होता है

गुरुदेव को ध्यान में बे थे देख सूर्य परबु पटरिमा को परनामी कर गुरुदेव से कुछ दुरी पे आसान पे बेथ गुरुदेव का ध्यान से बहार आने का इन्तजार करने लगता है

करीब 20 मिनट्स बाद गुरुदेव अपनी आँखे खोलते है

जैसे हे गुरुदेव आँखे खोलते है उन्हें अपने सामने कुछ दुरी पे बैठा हुआ सूर्य नजर आता है

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य तुम इस समय यहाँ पे सब कुशल मंगल तो है न पुत्र

सूर्य ........ परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......... आयुष्मान भाव पुत्र कहो कैसे आना हुआ पुत्र तुम्हे तो इस समय पुत्री मेर्री के विवाह की तयारिया करनी चाइये थी

सूर्य ......... जी गुरुदेव पैर आपसे कुछ जरुरी बात करनी थी इस लिया मुझे यहाँ आना पड़ा

गुरुदेव ........ क्या हुआ पुत्र सब ठीक तो है न

सूर्य ............ जी गुरुदेव फ़िलहाल तो सब ठीक है आगे भी आपके आसिष से सब ठीक हे होगा गुरुदेव

अभी सूर्य आवर गुरुदेव बात कर हे रहे थे की तभी मंदिर में रानी पारी आवर रिद्धि दोनी आ पहुँचती है

रानी पारी ......... पुत्र सूर्य आप यहाँ पुर हमें खबर तक नहीं

सूर्य ......... परनाम रानी माँ हम बस अभी अभी आये है गुरुदेव से कुछ जरुरी बात करनी थी उसके बाद हम आपसे मिलने आ हे रहे थे

सूर्य आवर रिद्धि ने आँखों हे आँखों में एक दूसरे को अविवादन किया

रानी पारी .......... पुत्र सूर्य ये अनुचित है काम से काम हमें आपके यहाँ आने का सन्देश तो देना चाइये था विवाह के पश्चात आप पहली बार यहाँ आये आवर हमने अपने जमता के स्वागत की कोई विशेष तयारी भी नहीं की

रिद्धि ........ क्या परिधि भी आई है आपके साथ

सूर्य अपने जगह से उठा आवर रानी पारी के चरण स्पर्श कर उनसे गले लग कर मिलता है

ऐसा हे रची के साथ भक करता है

सूर्य ........ माँ आप ऐसा क्यों सोचती है भले हे मेरा विवाह आपकी पुत्री परिधि से हो जाने से मैं आपका दामाद बन गया हूँ पैर मैं कल भी आपका बीटा था आवर आज भी आपका बीटा हूँ रही बात सन्देश की तो फ़िलहाल मैं अकेला हे आया हूँ अगर आपकी यही इच्छा है तो जब मैं आवर रिद्धि पति पत्नी के रूप में परीलोक आएंगे तब पहले से आपको सूचित कर आपकी इस इच्छा का मन भी रखूँगा अभी आपके सामने आपका दामाद नहीं आपका बीटा है जो कभी भी किसी भी समय अपनी माँ से मिलने आ सकता है बिना किसी औपचारिकता के

गुरुदेव ........ हाहाहा बिलकुल उचित कहा पुत्र माँ से मिलने के लिया बेटे को किसी भी आज्ञा या औपचारिकता की आव्सय्कता नहीं

सूर्य ....... रिद्धि मुझे गुरीदेव से कुछ जरुरी बात करनी है तब तक आप ड्रैगन लोक से जूलिया देवसूफ़ी नियों जी किंग सोलोमन क्वीन एलिज़ाबेथ आवर डेवलिन जी को यहाँ ले आएँगी विवाह में शामिल होने के लिया मैं आपके लिया अभी टेलेपोर्टेशन द्वार खोल देता हूँ

रिद्धि ......... ठीक है जैसा आप कहे

सूर्य अपनी मंत्र सकती से मंदिर के बहार टेलेपोर्टेशन द्वार खोल देता है जो सीधा ड्रैगन सिटी के मुख्या द्वार के सामने खुला

रिद्धि टेलेपोर्टेशन द्वार से ड्रैगन लोक पहुंच गई जहा जूलिया सूर्य के इन्तजार में कड़ी ठु टेलेपोर्टेशन द्वार को एक्टिव होने पैर उसे लगा की सूर्य उस आया है पैर रिद्धि को आता देख जूलिया भी चौंक गई बाकि सभी के साथ

जूलिया ......... रिद्धि दीदी आप यहाँ पे

बोलते हुए जूलिया रिद्धि के गले लग जाती है

रिद्धि ....... लगता है मुझे यहाँ देक्ग कर ज्यादा ख़ुशी नहीं हुई क्या तुम्हे किसी आवर का इन्तजार था जूलिया

जूलिया ......... मैं बहुत खुश हूँ दीदी आपको यहाँ देख कर पैर मुझे लगा सायद कुंवर जी आये होंगे बस इतना हे

रिद्धि ........ चल कोई बात नहीं जल्द हे मिल लेना हमारे कुंवर जी से उन्होंने हे भेजा है मुझे आप सब को परीलोक ले जाने के लिया

जूलिया .......... हम सब बस उनके आने का इन्तजार हे कर रहे थे

जूलिया बाकि सभी से रिद्धि को मिलवाती है

ीदार सूर्य गुरुदेव आवर रानी पारी को देवयानी के विषय में बिताना सुरु कर देता है

सूर्य ......... गुरुदेव सुबह मुझे अस्वसुर के माध्यम से असुरगुरु शुक्राचार्य जी की पुत्री देवयानी जी का सन्देश मिला वो मुझसे मिलना चाहती है किसी अत्यंत जरुरी विषय पे बात करना चाहती है

रानी पारी ........ पैर अचानक से उसे तुमसे मिलने की क्या जरुरत पद गई पुत्र तुम्हे उस से साधन रहना चाइये ये असुर किसी के सेज नहीं होते है धन सत्ता सकती के सामने ये अपनों की भी बलि चढाने में देर नहीं करते बिना सोचे विचारे

गुरुदेव ......... पुत्र क्या तुम रानी पारी की बात से सहमत हो

गुरुदेव सूर्य की सोच जानना चाहते थे असुरो को ले कर के इस लिया उन्होंने ऐसा कहा

सूर्य ......... जी गुरुदेव मैं रंज माँ कक बात से सहमत हूँ पैर पूरी तरह से नहीं

गुरुदेव ........ पुत्र अपने विचारो को थोड़ा स्पष्ट करोगे

सूर्य ........ जी गुरुदेव जैसा की रानी माँ का मन्ना है की असुर किसी के सेज नहीं होती उनका कहना सही भी है पैर ेल सच ये भी है की सभी असुर बुरे नहीं होती है जैसा की हम इंसानो को देख लीजिये सभी इंसान अच्छे नहीं होती तो सभी बुरे भी नहीं होती है ऐसा हे असुरो में भी एक तरफ नरकासुर जैसे असुर भी है वही बाबा व्योमासुर जी आवर वातापी जैसे अच्छे असुर भी सबसे बड़ा उद्दरण है महाराज बलि भक्त फरलड जैसे ईश्वर पिरया असुर

गुरुदेव ........... उत्तम अति उत्तम पुत्र तुम्हारे विचार तुम्हारी सोच जान कर अच्छा लगा पुत्र मन की असुर योनि में जनम तभी मिलता है जब जिव के करम बुरे हो डस्ट करम किये हो पैर ये भी उतना हे सत्य है कक सभी असुर एक सामान नहीं पुत्री देवगनी कक ले कर तुम्हारे क्या विचार है

सूर्य .......... गुरुदेव जितना मैं देवयानी जी को अपनी पहली मुलाकात में समाज पाया हूँ मुझे नहीं लगता की उनका नाम उन बुरे असुरो में आता होगा है ये अवश्य कहा जा सकता है की वो असुरगुरु शुक्राचार्य की तरह बूढी से चतुर आवर चालक है बूढी आवर विवेक से कार्य करने वाली

गुरुदेव ........ फिर तुम्हे किस बात को ले कर चिंता है पुत्र जब तुम इतने अच्छे स उन्हें जानते हो तो फिर चिंता किस बात को ले कर है

सूर्य ........ गुरुदेव मुझे चिंता इस बात की नहीं है की वो मुझसे मिलने आ रही है चिंता मुझे इस बात की है की उनका यहाँ मुझसे मिलने आने के पीछे उद्देश्य क्या है आवर अगर उन्होंने इस समय पृथ्वीलोक पे रुकने का आग्रह किया तो मैं उन्हें इंकार भी नहीं कर पाउँगा क्युकी मैंने उन्हें अहले हे पृथ्वीलोक आने के लिया निमंतरण दे चूका हूँ आवर दूसरा भविष्य में उनका सहयोग हमारे लिया बहुत उपयोगी होगा

गुरुदेव .......... ठीक पुत्र तुम सबसे पहले उस से भेंट करो उसके पश्चात इस विषय में हम मिल कर चर्चा करते है

सूर्य ......... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

रंज पारी ......... पुत्र मन की तुम देवयानी को ले कर सुनिश्चित हो किन्तु तुम्हे बहुत आदिल सावधान रहना होगा

सूर्य ........ जी माँ मैं ये अच्छे से जनता हूँ मैं आपकी बात का ध्यान रखूँगा

गुरुदेव ......... विवाह की तयारिया कैसे चल रही है पुत्र

सूर्य .......... सब तयारिया पूर्ण हो चुकी है गुरुदेव मैं आप सभी को विवाह में सम्मिलित होने के लिया लेने आया हूँ

रानी माँ आप भी चलने की थी कीजिये

गुरुदेव ......... नहीं पुत्र मैं अभी नहीं चल सकता मैं कल उचित समय पे पहुंच जाऊंगा तुम रानी पारी आवर पुत्री रिद्धि को अपने साथ ले जाओ

रानी पारी ...... नहीं पुत्र मैं भी कल हे विवाह में सम्मिलित हो पाऊँगी

सूर्य ........ मुझे कुछ नहीं सुन्ना माँ आप अभी चल रही है आवर रिद्धि भी गुरुदेव आप भी

गुरुदेव ........ नहीं पुत्र मुझे कुछ आव्सय्क कार्य पूर्ण करना है

सूर्य .......ठीक है गुरुदेव किन्तु आप कल समय स विवाह में पहुंच जायेगा

गुरुदेव ........ अवश्य पुत्र

सूर्य गुरुदेव को परनाम कर रंज पारी के साथ पारी महल लौट आया वह सूर्य ने महिमा जी वैद्यराज शिल्पी जी सकती को भी बुला लिया

कुछ देर बाद रिद्धि जूलिया डेवलिन क्वीन एलिज़ाबेथ भी ड्रैगन लोक से आ चुके थे कुछ देर बात चित कर सूर्य सभी को अपने साथ ले कर के सूरतगढ़ हवेली के लिया निकल गया. ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एंजोये फ्रेंड्स ..................
 
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