Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 9 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 62

विजय ने मिशंस की पूरी जानकारी अपनी पाण्ड्य सर तक पंहुचा दी उनको करीम खान के मरे जाने पे थोड़ी निराशा तो हुए पैर वो खुश भी था की एक आतंकी संगठन का सरगना मारा गया

विजय को कुछ दिन सूरजगढ़ में चूतिया बिताना का कह कर बाकि टीम को बापिस बुला लिया कुछ आर्मी जवान भी घायल हुए थे इस बिच करीम खान के हमले से ........

अब आगे .........

सुबह सूर्य जल्दी उठा आवर अपने दादा जी को सूचित कर

जंगल की तरफ निकल गया अपने रूटीन के अनुसार साध्वी जी से 2 हर ध्यान योग करने के बाद वयोम आवर सकती के साथ अभ्यास करने लगा

समय के साथ साथ सूर्य की शारीरिक आवर मानसिक ताकत बढ़ने लगी साथ हे साध्वी जी सूर्य को वेदो का ज्ञान भी देने लगी

सूर्य कोमल के साथ यही सूर्यगढ़ में स्कूल में एडमिशन करवा चूका था सूर्य के तेज दीमक के बदौलत यहाँ कोमल जो की सूर्य से एक क्लास आगे थी उसके साथ हे सूर्य का एडमिशन कर दिया

इस बिच कुछ वक़्त दुर्जन सिंह अपने सब काळा डंडे बंद कर दिए थे क्युकी आर्मी की उसपे नज़र पद चुकी थी

विजय को गुप्त रूप से अलग हे मिशन दिया गया था जिसके चलते विजय को ार्यं छोड़ ने का नाटक कर सूरजगढ़ में हे रह कर दुर्जन सिंह के खिलाफ साबुत जुटाने का काम करने लगा

इस बिच 6 मंथ का समय बिट गया

एक साम जब सूर्य अपनी ट्रेनिंग पूरी कर जंगल से लौट रहा था तभी कुछ लोगो को किसी का पीछा करते हुए देखता है

सूर्य ......ये कोण लोग है आवर उसका पीछा क्यों कर रहे है

सूर्य भी उनके पीछे लग गया 15 मिंट बाद उन लोगो ने उस लड़के को चारो तरफ से घेर लिया

सूर्य दूर से ये सब देख रहा था कुछ हे देर में जो 6,7 लोग थे वो उस लड़के पे टूट पड़े

सूर्य तेजी से आगे बढ़ कर उसक लड़के को एक आवर कर के उस लड़के आवर उन आदमियों के बिच खड़ा hi जाता है है

सूर्य ......कोण हो तुम आवर क्यों इसको मार रहे हो

आदमी 1....बच्चे चुप चाप निकल जाओ क्यों बे मतलब मरना चाहते हो

सूर्य ......वो सब बाद की बात तुम यहाँ के तो नहीं लगते हो क्यों इसको मरना चाहते हो

आदमी 2 .....भाई क्यों इसकी बकवाश सुन रहे है हम उसके साथ में इसको भी ख़तम कर चलते है यहाँ से

आदमी 1 जो सायद इनका लीडर था

आदमी 1 .....देख बच्चे अभी भी वक़्त है निकल ले यहाँ से

सूर्य आदमी 1 की बात सुनते बिना उस बगल लड़के के पास जाता है

सूर्य .....कोण हो तुम आवर ये लोग तुम्हे क्यों करना चाहते है

लड़का .....मेरा नाम विजय सिंह है ये सरे मुझसे वो फाइल लेना चाहते है जिसमे मैंने इनके बॉस की काली करतुते साबुत के साथ अपने पास राखी है

सूर्य .......विजय सिंह आप किसके लिया काम करते हो

विजय सिंह ....मैं इंडियन आर्मी के लिया काम करता हूँ

सूर्य उन आदमियों की तरफ गुरते हुए

सूर्य .....मैं नहीं जनता तुम लोग किसके लिया आवर क्या काम करते हो पैर सूर्यगढ़ है यहाँ पे तुम्हे नहीं आना चाइये था

सूर्य की बकवाश सुन लीडर अपनी साथियो को बोल्ट्स है उसके साथ साथ उसे भी ख़तम कर दो

सूर्य ....आवो हरामियों बहुत टाइम से तुम जैसे के लिया हे तयारी कर रहा हूँ

देखते हे देखते सूर्य को चारो तरफ से घेर लिया जाता है पैर ये उन सब की सबसे बड़ी गलती थी जिसने वो सब एक बच्चा समाज कर मरने चले थे वो उनका कल था

सूर्य के सामने जो बहुत आता पल भर में जमीं चाटने लगता

किसी की पसलिया टूटी तो किसी की हाथ की हड़िया टूटी

सूर्य ध्यान योग से अपने गुस्से पे लगभग कण्ट्रोल कर चूका था नहीं तो अब तक उन सबकी लाशे बिछा देता

2,4 मिंट बाद सब जब जमीं पे तड़प रहे थे तो सूर्य उनके लीडर आदमी 1 के पास जाता है

सूर्य .....अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो सब कुछ सच सच बोलना तुम सब किसके लिया काम करते हो आवर कोण कोण से काम करते हो

आदमी 1 .......हम नहीं बता सकते वार्न्स वो हमें जान से मार डालेगा

विजय .....मैं बताता हूँ ये सब यहाँ के नहीं है सायद आवर इनको दुर्जन सिंह ने बहार से हिलाया होगा मुझे पकड़ने के लिया सायद उसको पता चल गया होगा की मैं उसके खिलाफ साबुत जूता रहा हूँ

सूर्य .......ठीक है तुम सब जा सकते हो पैर याद रहे दुबारा सूर्यगढ़ या सूरजगढ़ के आसपास भी दिखे तो वो दिन तुम सबकी जिंदगी का आखिर दिन होगा

गुंडे लोग गिरते पड़ते वह ने अपनी जान बच्चा कर भाग निकले

विजय सिंह .....क्या मैं अपनी जान बच्चन वाले का नाम जान सकता हूँ

सूर्य .....सूर्य शिव ठाकुर आपको तो बहुत चोट लगी है चलिए मेरा साथ

विजय के मना करने के बाद भी सूर्य विजय को ले कर साध्वी जी के पास पंहुचा

साध्वी जी ....सूर्य क्या हुआ आप वापिस कैसे आ गए आवर आपके साथ में ये कोण है इन्हे जल्दी से अंदर ले चलिए काफी चोट लगी है

सूर्य .....साध्वी जी कुछ लोग इनको मरने के लिया पीछे पड़े हुए थे मैंने देखा तो इनको बच्चा कर यहाँ ले आया

वयोम .....ये तुमने बहुत अच्छा किया सकती जरा साध्वी जी की मदद करना

विजय चारो तरफ देख रहा था

वयोम .....क्या देख रहे हो ऐसे

विजय ........क्या आप किसी तरह के स्कूल चलते हो क्या यहाँ जो इतने अस्त्राय सस्त्र रखे हुए है जैसे कोई पुराने ज़माने का गुरुकुल हो

साध्वी जी .....ऐसा हे कुछ समाज सकते है

कुछ देर बात विजय के सरीर पे ॉडी का लेप लगा कर पट्टी वगेरा करके दर्द के लिया कुछ पिने को दिया

साध्वी जी .....सुबह तक बिलकुल ठीक हो जाओगे तुम

विजय ....जी मेरा नाम विजय है आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया

सकती ......सूर्य तुम इन्हे हवेली ले जाओ इनको आराम की सकता जरूरत है कल एक बार आवर अपने साथ ले आना ताकि एक बार आवर ॉडी लगवा लेंगे

सूर्य ......जी जरूर आया दे आज बहुत लेट जो गया हूँ घर के लिया

साध्वी वयोम आवर सकती से विदा ले सूर्य आवर विजय सूर्यगढ़ हवेली की तरफ निकल गए

vijay.........tum उन्हें कैसे जानते हो सूर्य आवर तुमने ऐसे लड़ना कहा से सीखा मैं खुद उनका मुकाबला नहीं कर प् रहा था जबकि तुम इतने आराम से सब की हड़िया तोड़ दी

सूर्य ..........क्युकी मैं ज्यातर उनके साथ हे रहता हूँ बाकि आप कल देख लेना

ऐसे हे बाते करते हुए सूर्य हवेली पहुंच जाता है जहा दादा जी सूर्य की प्रतीक्षा कर रहे थे

दादा जी ......बीटा आज लेट कैसे जो गए आवर ये तुम्हारे साथ में कोण है कुछ जाना पहचाना लग रहा है

विजय आगे बढ़ दादा जी के पेअर छूटा है

विजय ......ठाकुर साहब मैं आपके दोस्त सूरजगढ़ के राणा जी विक्रम सिंह के दोस्त का लड़का हूँ

दादा जी ......तुम मनोहर सिंह के बेटे तो नहीं हो क्या नाम था हम्म याद आया विजय सिंह यही नाम है न तुम्हारा

विजय .....जी ठाकुर साहब

सूर्य .....दादा जी अंदर चले इनको चोट लगी है इनको आराम करना है

दादा जी .....है है चलो

सूर्य जब अंदर पंहुचा तो सब उसकी हे रह देख रहे थे

शालिनी को देखते हे विजय के मुँह से दीदी निकल गया

शालिनी .....कोण हो तुम जो मुझे दीदी कह रहे हो

विजय सिंह शालिनी के पेअर छू कर

विजय .....दीदी मैं आपके मनोहर सिंह चाचा का बीटा विजय हूँ आपने बहुत साल बाद देखा है मुझे तो पहचाना नहीं होगा

शालिनी ......तुम विजु हो क्या अब तो काफी बड़े हो गए पैर तुम्हे ये चोट कैसे लगी आवर सूर्य कहा मिल गया तुम्हे

विजय .....कुछ नहीं दीदी कुछ लोगो से जगदे में चोट लग गई

शालिनी .....सूर्य बीटा ये तुम्हारे छोटे मां है विजय

सूर्य .....जी माँ

सूर्य विजय के पेअर चूसने लगा तो विजय ने सूर्य को गले से लगा लिया

सूर्य आप लोग बाते करो मैं नाना कर अभी आता हूँ

दादी जी .... बीटा तुम नाना लो मैं रुक्मणि को तुम्हारी मालिश के लिया भेजती हूँ

सूर्य .....जी दादी जी

सूर्य वह से चला जाता है

नहाने के लिया

पीछे से हॉल में

विजय ......दीदी सूर्य कितने साल का है

शालिनी ......क्यों क्या हुआ जो तुम सूर्य की उम्र पूछ रहे हो वैसे सूर्य को अभी क्सक्सक्स व साल लगा है

विजय .....क्या सिर्फ क्सक्सक्स साल का सूर्य को देख कर तो नहीं लगता की ये क्सक्सक्स साल का है

शिव .....ऐसा क्या कर दिया अब मेरे शेर ने सेल साहब जो आप चौंक रहे है

विजय शिव की बात सुन समाज जाता है की यही शालिनी के पति है महेंद्र को वो पहले जनता था

विजय .....परनाम जीजा श्री ....ऐसा कुछ नहीं है बस क्सक्सक्स साल का लगता नहीं है न इस लिया

दादा जी ......बीटा जी बात को गुमओ नहीं जो पूछना है साफ साफ पूछो

विजय .......वो सूर्य ने कही से ट्रेनिंग ले है क्या फाइट करने की

दादा जी ......तो तुमने भी देख लिया उसका तांडव कही उसने हे तो तुम्हारे ये हालत नहीं की है

विजय ......नहीं ठाकुर साहब सूर्य ने तो मेरी जान बच्चा है उन लोगो से अगर वक़्त रहते वो बिच में नहीं आया होता तो सायद अब तक मैं मर चूका होता वही जंगल में किसी जानवर का भोजन बन चूका होता मैं अब तक तो

दादा जी .....ऐसा नहीं लगते है बीटा अच्छे इंसान की मदद वो ऊपर वाला किसी न किसी रूप में कर हे देता है

शिव .....सच कहा आपने पापा

मुझे लगता है अब सूर्य खुद पे कभी करना शिख गया है

दादा जी ......ऐसा तुम्हे लगता है बीटा पैर मुझे नहीं है वो अपने गुस्से को दिशा देना जरूर शिख चूका है जिस से वो अपना नियंतरण नहीं खोता है

दादी जी .....बस भी कीजिये आप सब आपने अबले मशीन होने वाली माँ महाकाली पूजा उत्सव के बारे में क्या सोचा है मुझे लगता है वो कमीना कुछ न कुछ जरूर करेगा इस उत्सव में

दादा जी ......जनता हूँ मैं वो क्या करने वाला है वो सूर्य को बलि के लिया चुनौती देगा

सूरजगढ़ से तो सूर्य के बलि देने पे कोई परेशानी नहीं है पर सक्तिपुर से दुर्जन सिंह इस मोके का फायदा उठाएगा

क्युकी वो जनता है बलि के लिया दी गयी चुनौती सामने वाला असवीकार नहीं कर सकता है

पिछले बार जोरावर ने ये बलि दी पैर इस बार उसने साफ मना कर दिया है

शिव .......पापा सूर्य अभी बच्चा है सूर्यगढ़ की तरफ से मैं बलि चुनौती सवीकार कर लूंगा अगर जरूरत पड़ी तो

( विजय ....सूर्य इनको बच्चा लगता है जबकि वो बाड़े बाड़े बच्चो की पेण्ट गीली होने तक मरता है )

दादा जी ......नहीं तुम ऐसा बिलकुल भी नहीं करोगे

तुम क्या कोई भी सूर्यगढ़ से सूर्य के सिवाय बलि चुनौती सवीकार नहीं करेगा

शालिनी .....पैर पापा सूर्य कैसे ये सब कर पायेगा

दादा जी ........बेटी मैं जनता हूँ तुम एक माँ हो कोई भी माँ अपने बच्चे को खतरे में नहीं देख सकती पैर तुम जानती हो सूर्य को आवर फिर वो पिछले 6 मोनथस से तयारी कर रहा है

कुछ देर बाद सूर्य भी मालिश वगेरा करवा कर निचे आ जाता है

सब मिल कर डिनर करते है सूर्य अपनी माँ के साथ सोने चला जाता है क्युकी सुबह उसे फिर 5 बजे जंगल पंहुचा होता है रोज

दुर्जन को जब अपने भाड़े के आदमियों की नाकामी का पता चला

तो भोखला गया

आदमी 1 ......ठाकुर साहब हम उस को मर कर फाइल छीनने वाले हे थे की पता नहीं कहा से एक लड़का आ गया बिच में आवर हम सब की ये हालत कर दी

दुर्जन सिंह .....कोण लड़का था वो कुछ नाम पता है उसका

आदमी 1.....ठाकुर साहब नाम तो नहीं पता पैर वो सूर्यगढ़ से था उसने कहा भी था की तुम सबको यहाँ सूर्यगढ़ में नहीं आना चाइये था

दुर्जन सिंह .....हो न hi ये परताप ठाकुर का पिता हे होगा

कितने साल का था वो

आदमी 1 .....18 ,19. साल का था ठाकुर साहब बहुत हे ताकतवर आवर बहुत तेज

( दुर्जन सिंह .....अपने मन में ....अगर ये परताप ठाकुर का पिता न हुआ तो इसको मजबूर करके अपने दुसमन के पोते को मारा जा सकता है बलि चुनौती दे कर के मुझे उसका पता करवा न चाइये )

दुर्जन सिंह ... ....तुम्हारे जो आदमी ठीक है कुछ दिन आराम करके उस लड़के की पूरी खबर मुझे लेक दो या फिर उस लड़के को मेरे पास ले कर आवो मुँह मांगी कीमत दूंगा तुम्हे

आदमी 1 खुश होते हुए

आदमी 1......जी ठाकुर साहब हम किसी भी तरह आपके सामने उसको ले आएंगे

दुर्जन सिंह वह से निकल गया अपनी हवेली की आवर अभी जो जगह दुर्जन सिंह अपने काम में ले रहा था वो सक्तिपुर के गुस्से में जो जंगल आता है वह दुर्जन सिंह अपने फार्महाउस को हे अपने गोडाउन के रूप में काम में ले रहा था .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............
 
अपडेट. 63

आदमी 1 खुश होते हुए

आदमी 1......जी ठाकुर साहब हम किसी भी तरह आपके सामने उसको ले आएंगे

दुर्जन सिंह वह से निकल गया अपनी हवेली की आवर अभी जो जगह दुर्जन सिंह अपने काम में ले रहा था वो सक्तिपुर के गुस्से में जो जंगल आता है वह दुर्जन सिंह अपने फार्महाउस को हे अपने गोडाउन के रूप में काम में ले रहा था ........

अब आगे ...........

सुबह सूर्य अपने अभ्यास के लिया निकल गया

साध्वी द्वारा ध्यान करवा ने पे आज सूर्य ने अपने परतवि तत्वा को जागृत कर लिया काफी समय से जो सूर्य म्हणत कर रहा था आज उसे उसका फाल मिला था आज सूर्य ने आवर रूप से परतवि तत्वा को जागृत कर चूका था

साध्वी जी ......अति उत्तम सूर्य आज तुमने अपने ध्यान करनी के सीमा को आवर आदिक बढ़ा लिया जिसके चलते तुमने अपने पांच तत्वा से बने सरीर में से एक ततवा को आत्मसाद कर लिया है

सूर्य ......ये सब आप सबके ज्ञान आवर शिक्षा के बिना संभव नहीं था साध्वी जी

साध्वी जी ........कल से तुम अपने दूसरे तत्वा का ध्यान करना अब तुम अपने मास्टर के पास जाओ आवर अपनी युद्ध कला का अभ्यास करो

सूर्य वयोम के साथ युद्ध अभ्यास करने लगा

सकती ......क्या सूर्य अभी आगे की सीख्शा के लिया त्यार है

साध्वी जी ......क्या आपके पास कोई ऐसे युद्ध कला का ज्ञान बचा है जो सूर्य ने ग्रहण न किया हो

सकती ......जी नहीं मैं अपनी तरफ से पूर्ण शिक्षा ग्रहण कर चूका हूँ बस अभी सूर्य को इन योध कलाओ में दक्ष होना होगा .

साध्वी जी .......उचित कहा हमारा कार्य कुछ समय में समाप्त जो जायेगा उसके बाद अस्त्राय सस्त्र का ज्ञान सूर्य को किसी आवर से प्राप्त करना होगा

वास्तविक सीख्शा सूर्य को वही प्रदान करेंगे

sakti.....kintu वो है कोण जो सूर्य को आगे की शिक्षा प्रदान करेंगे

साध्वी जी .....उसका ज्ञान तो हमें भी नहीं है की वो कोण है आवर किसी शिक्षा सूर्य को प्रदान करने वाले है

दादा जी विजय के साथ वह आ पहुंचे

दादा जी .....परनाम साध्वी जी कैसे चल रही है सूर्य की शिक्षा

साध्वी जी ..... ...परनाम ठाकुर जी बहुत अच्छी सीख्शा चल रही है सूर्य आवर बहुत तेजी से वो शिख भी रहा है

सकती ........ठाकुर जी अब हमारी तरफ से सूर्य को पूर्ण सीख्शा प्राप्त हो चुकी है

विजय बस सूर्य आवर वयोम को युद्ध अभ्यास करते हुए देख रहा था

साध्वी जी .....चलो विजय तुम्हारा उपचार किया जाये

विजय ....जी साध्वी जी

विजय साध्वी जी के साथ कुटिया में चला जाता है

सकती .....ठाकुर जी अब सूर्य को आप आज के समय की शिक्षा के लिया किसी सकसक का चयन कीजिये जो सूर्य को आज के समय की युद्ध कला शिक्षा पाए

दादा जी ......जी बहुत बहुत शुक्रिया आप सभी का आपने अपने किन्तु समय सूर्य की शिक्षा में दिया मैं सदैव आपका आ भरी रहूँगा

सकती .......ऐसा न कहने ठाकुर जी आपका पोता सूर्य कोई सदर्न मानव नहीं है ये मैं जान चूका हूँ

वयोम आवर मुझे जो शिक्षा ग्रहण करने में बरसो लगे थे वो सूर्य ने केवल 7 मंथ में पूरी कर ली

है ये सत्य की अभी उसको अभ्यास रोज करना होगा जिस से वह अपने योध कोसल को आवर निखार पाए

दादा जी .......जी बिलकुल ऐसा हे होगा

विजय आवर साध्वी जी दोनों लौट आये

साध्वी जी .....क्या बट्टे हो रही है सकती

सकती .....बस यही की हमने अपनी ज्ञान आवर शिक्षा पूरी सूर्य के दे दी है अब आज के समय की शिक्षा के लिया किसी उचित शिक्षक का पारबन्द सूर्य के लिया कर लीजिये

vijay.......aaj की शिक्षा से आपका क्या मतलब है

माफ कीजिये बिच में बोलने के लिया

सकती .....कोई बात नहीं विजय

आज की शिक्षा से हमारा मतलब था की सूर्य को आज का मार्शल आर्ट फाइटिंग गन चलना वगेरा वगेरा

विजय ......बाउजी अगर आपको एतराज न हो तो क्यों नहीं आप सूर्य को आर्मी ट्रेनिंग दिलवाये कमांडो ट्रेनिंग सूर्य के लिया बेस्ट रहेगा मैंने देखा है सूर्य को फाइट करते हुए वो बहुत अच्छा फाइटर है

दादा जी ......ठीक है बीटा लईकिन मैं सूर्य को आर्मी ज्वाइन नहीं करने दे सकता हूँ

विजय ......माफ कीजिये बाउजी आर्मी में क्या बुराई है

दादा जी .....विजय आर्मी कोई बुराई नहीं है पैर मैं ये फैसला सूर्य पे हे छोडूंगा वैसे भी अभी काफी वक़्त है सूर्य के पास इन सब के लिया

विजय .....अगर आप इजाजत दे तो मैं आज हे सूर्य को अपने साथ किसी से मिलवाने ले जाना चाहता हूँ

दादा जी विजय की बात सुन साध्वी जी को देखता है

साध्वी जी ..........ठीक है तुम सूर्य को अभ्यास के बाद ले जा सकते हो किन्तु कल सूर्य अपने अभ्यास के समय यही होना चाइये

दोपहर तक सूर्य वयोम आवर सकती के साथ अभ्यास करता रहा

सूर्य के अभ्यास आवर उसकी लगन देख विजय सूर्य से काफी प्रभावित हुए

वही दादा जी को अपने पोते को इतने म्हणत करते देख दिल से सूर्य पे गर्व हो रहा था

कुछ देर बाद साध्वी सूर्य को खींच फॉलो के साथ वही शिलाजीत से बना दर्व्य पिलाती है

साध्वी जी .....सूर्य आज का अभ्यास पूरा हुआ अब तुम घर जा सकते हो

सूर्य ......किन्तु आज इतनी जल्दी कैसे

दादा जी ......क्युकी तुम्हे विजय के साथ कही आवर भी जाना है

सूर्य विजय की आवर देखता है तो विजय है में गर्दन हिला देता है

दादा जी विजय सूर्य कुछ देर बाद हवेली निकल गए

वही किसी अन्य जगह ..

भारमंद के किसी लोक में एक विशाल खूबसूरत जंगल के बिच एक गुफा में एक विशालकाय महाकाल की प्रतिमा के सामने किसी बुजुर्ग ऋषि ( साधु ) तप ( ध्यान ) में लीं था

जैसे बरसो से वो अपने तप में लीं हो उनके सरीर पे मनो किसी से विशेष सोनो ( गोल्ड ) की परत चढ़ा दी हो उनका पूरा सरीर किसी सुनहरी रेट ( मिटटी ) देखा हुआ था

उनके मस्तिक का तेज देख कोई भी कह सकता है की ये कोई दिव्या सिद्ध योगी है

जो वर्षो से अपने अंदर दिव्या ज्ञान आवर सकती को संजो कर आत्मसाद किया हो

तभी वह एक बेहद खूबसूरत लड़की का आगमन होता है

लड़की कुछ समय वह की साफ सफाई करती है

लड़की ......गुरुदेव कब आपका तप पूरा होगा कितने बरष बिट चुके है आपको तप में लीं हुए

हम कब से आपके तप समाप्ति की प्रतीक्षा कर रहे है

हर बार हमें निराशा हे मुलती है कोई तो संकेत दीजिये गुरुदेव

तभी उस लड़की को किसी की आवाज सुनाई देती है

लड़की चारो तरफ ध्यान से देखती है किन्तु कोई भी उसको दिखाई नहीं देता है

लड़की .....अभी अभी हमने सच में आवाज सुनी है या हमारा कोई भरम था

तभी एक बार फिर से वही आवाज सुनाई देती है

आवाज .......पुत्री ये कोई भरम नहीं है हम तुम्हारे गुरु है

लड़की .....किन्तु गुरुदेव आप तो ...

गुरुदेव .....हम अभी भी अपने तप में लीं है पुत्री

लड़की .......गुरुदेव कब आपका तप पूर्ण होगा कब आप अपने ध्यान से उठेंगे

गुरुदेव .......बहुत जल्द पुत्री हमारा तप पूर्ण होगा कुछ वक़्त के बात है जहा इतनी प्रतीक्षा की है

कुछ वक़्त आवर कर लो पुत्री

लड़की ......हम प्रतीक्षा करेंगे गुरुदेव आपका तप पूर्ण होने की

गुरुदेव .......पुत्री अब तुम यहाँ तब तक नहीं आओगी जब तक हम तुम्हे न पुकारे

लड़की ......किन्तु गुरुदेव आप ऐसा क्यों चाहते है

लड़की कुछ देर आवर प्रतीक्षा करती है पैर गुरुदेव की आवाज न आने पे वो वह से गायब हो गयी

कुछ देर बाद वो जगह पूरी तरह से अदृश्य hi गयी नाना यहाँ कुछ था हे नहीं

सूर्य आवर विजय 3 हर का सफर करके आर्मी बेस पे पहुंचे

जब पाण्ड्य जी को विजय के लौटने के बारे में पता चला तो वो बहुत खुश हुए क्युकी विजय की रात में उनसे बात हुए थी

जब विजय सूर्य के साथ पाण्ड्य जी के केबिन में पंहुचा तो पाण्ड्य जी चौंक गए

विजय .......जय हिन्द सर

पाण्ड्य जी .......जय हिन्द विजय तुम्हारे सरीर पे ये चूत कैसे आवर तुम जिसको अपने साथ ले कर आये हो

तुम्हे पता है न की आर्मी के क्या क्या रूल होते है

विजय .......सॉरी सर मैं जनता हूँ पैर आपको इस से मिलाना जरूरी था

पाण्ड्य जी ....ये तुम्हारी पहली गलती है आइंदा ऐसा फिर न हो

विजय .......जी सर मैं ध्यान रखूँगा इस बात का

पाण्ड्य .......तुम्हे ये चूत कैसे लगी

विजय पाण्ड्य जी को फाइल्स देते हुए कल रात जो कुछ हुवा सब कुछ विस्तार से बताया

की कैसे दुर्जन सिंह को पता चला आवर उसके आदमियों से कैसे सूर्य ने जान बच्चे

पाण्ड्य ji......very गुड यंग में सूर्य ठाकुर तुमने न केवल विजय की जान बच्चे बल्कि इस फाइल को भी सेफे किया जिस से दुर्जन को आसान से गिरफ्तार किया जा सकता है

सूर्य .......सर विजय मेरे मां जी है इनके लिया इतना तो कर हे सकता हूँ मैं

विजय .......सर आपसे कुछ हेल्प चाइये सूर्य के लिया

पाण्ड्य जी फाइल देखते हुए विजय इस फाइल से हम जो चाहते है वो संभव नहीं है क्युकी इस से हम ज्यादा से ज्यादा दुर्जन सिंह को गिरफ्तार कर सकते है हतियारो की तस्करी करने आवर इललीगल एक्टिविटी के लिया पैर देशद्रोही घोषित नहीं कर सकते इस फाइल में सरहद पर आतकवादियो से लिंक होने के कोई भी ठोस साबुत नहीं है

विजय ......जी सर मैं जनता हूँ

पाण्ड्य ......तुम्हे सूर्य के लिया क्या हेल्प चाइये हमें ख़ुशी होगी अगर हम तुम्हारी जान बच्चन के बड़े सूर्य की कोई सहायता कर पाए तो

विजय .......सर सूर्य को ा ओने कमांडो ट्रेनिंग दिलवानी है आर्मी से बिना सूर्य के आर्मी ज्वाइन किये

पाण्ड्य जी .......जानते भी हो तुम क्या कह रहे हो विजय बिना आर्मी ज्वाइन किये सूर्य को ा ओने कमांडो ट्रेनिंग तो दूर नार्मल आर्मी ट्रेनिंग भी नहीं दी जा सकती है आवर कमांडो ट्रेनिंग कितनी हार्ड एंड टफ़्फ़ होती है

विजय .......सर सूर्य हार्ड से हार्ड ट्रेनिंग करेगा बूत आर्मी अभी ज्वाइन नहीं कर सकता है क्युकी आर्मी रूल के अकॉर्डिंग सूर्य की आगे अभी आर्मी ज्वाइन करने में सबसे बड़ी प्रॉब्लम है

पाण्ड्य जी एक बार सूर्य को ऊपर से निचे देखते है

पाण्ड्य जी ......कैसे प्रॉब्लम विजय जब सूर्य की आगे आवर सरीर दोनों हे आर्मी में के लिया फिट है

विजय ......क्युकी सूर्य अभी 15 इयर्स का है सर

पाण्ड्य जी ......व्हाट ये तुम क्या कह रहे हो

सूर्य ......जी सर विजय मां जी सच कह रहे है मेरे आगे 15 ईयर है

पाण्ड्य जी .......सूर्य अपना शर्ट उतरो जरा

सूर्य अपना शर्ट उतरता है जिसको बॉडी कट देख पाण्ड्य जी को कुछ सक सा हुआ क्युकी आज कल के लड़के बॉडी अच्छी दिखने के लिया तरह तरह के ड्रग्स का उसे करते है

पाण्ड्य जी .......सूर्य तुम किसी ड्रग्स का उसे तो नहीं करते हो न

सूर्य .....जी नहीं सर मैंने आज तक कोई ड्रग्स उसे नहीं किया है

विजय ......सर सूर्य पीछे 7 मोनथस से प्राचीन योध कला शिख रहा है आप यकीं नहीं करोगे बूत मैंने सूर्य की ट्रेनिंग देखि है आवर इसको फाइट करते हुए भी देखा है सूर्य एक बेहतरीन फाइटर है

पाण्ड्य जी ......अगर तुम जो बोल रहे हो वो सच है तो मैं देखा चाहता हूँ सूर्य की फाइट आवर उसकी ताकत को मेरे दिए हुए टास्क पूरा किया तो सूर्य की बेस्ट ट्रेनिंग दिलवाने का मैं वादा करता हूँ

विजय .....आप अभी देख लीजिये सर क्युकी सूर्य को निकलना भी है ये एक मंथ बाद हे अपनी ट्रेनिंग पे जा पायेगा

पाण्ड्य जी सूर्य आवर विजय को बहार ले गया जहा कुछ आर्मी जवान अपनी ड्यूटी से फ्री हो रेस्ट कर रहे थे

पाण्ड्य जी .......विजय तुमपे कितने आदमियों ने हमला किया था

विजय ....... 7,से 8 आदमी थे हतियारो के साथ में

पाण्ड्य जी 5 आर्मी जवानो को एक आवर खड़ा कर देते है

पाण्ड्य जी .....सूर्य आपको इन 5 जवानो के साथ फाइट करनी है क्या कर पाओगे इनके साथ फाइट

सूर्य ........OK सर

सूर्य आगे बढ़ उन 5 जवानो की बिच जा पंहुचा

5 जवानो ने सूर्य को घेर लिया

विजय .....सूर्य किसी की हड़िया नहीं तोड़ना है तुम्हे बस इनको हराना है वो भी बिना किसी को कोई नुकसान पहुचाये

सूर्य ....जी मां जी....

सूर्य आगे कुछ बोल्ट्स तभी एक जवान का पांच सूर्य के जबड़े पे पड़ा

सूर्य ने गिर कर उसको देखा

एक बार फिर सूर्य टूट पैड्स उन जवानो पे ये कोई मामूली गुंडे तो थे नहीं ब्रेक सूर्य को नुकशान न पंहुचा प् रहे थे पैर कुछ हद तक सूर्य को परेशान जरूर कर रहे थे

इसी परेशानी में सूर्य का गुस्सा बढ़ने लगा पैर उसे विजय की बात याद थी की किसी को घायल नहीं करना है

सूर्य ने किसी का हाथ पकड़ उसका नाटक दिया तो किसी की गर्दन की नाश पे चूत पहुंची कुछ देर में आर्मी जवानो की दर्द से चीखे निकलने लगी

पाण्ड्य जी ......ये क्या था विजय

विजय ......सर मुझे भी नहीं पता सूर्य ने क्या किया है जबकि इनके सरीर पे किसी भी चौथ तक का नीसाण तक नहीं है नहीं हे किसी की कोई बड़ी तोड़ी है

सूर्य ......लीजिये सर आपके जवान सब जमीं पे है

पाण्ड्य जी .......तुमने ऐसा क्या किया है इनके साथ में

सूर्य .....सर ये कोई फाइट नहीं थी अगर असली फाइट होती तो एक मिंट में आपके जवानो की हड़िया तोड़ चूका होता पैर मां जी ने उसके लिया मना कर दिया था आवर ये that's आर्मी अफसर हर मन्ना इनको शिखाया नहीं जाता भले इनकी जान हे क्यों न चली जाये

इस लिया मैंने इनके उस होसे पे प्रहार किया जहा इनको चूत काम लगे पैर दर्द ज्यादा हो

पाण्ड्य जी .....बहुत खूब सूर्य तुम बहुत अच्छे लड़के हो मैं अपने तरफ से तुम्हारे लिया बात करूंगा तब तक तुम अपनी ट्रेनिंग भी ख़तम कर लो पैर पहले इनको ठीक तो करना होगा विजय इनको मेडिकल तक पंहुचा दो

सूर्य .....उसकी जरूरत नहीं है सर

सूर्य ने देखते हे देखते उनको ठीक कर दिया उनके सरीर के जिस हिसे पे सूर्य ने चूत की थी उनको फिर से ठीक कर दिया

पाण्ड्य जी .......हम्म तुम एक मोनथस बाद विजय के साथ आ जाना विजय तुम भी वही ट्रेनिंग लो जो सूर्य ले रहा है

फिर तुम बाकि जवानो को उसकी ट्रेनिंग देना

विजय .....जी सर मैं पूरी कोशिश करुगा अगर उन्होंने मुझे ट्रेनिंग दी तो

पाण्ड्य जी .....ऐसा क्यों भाई तुम कहो तो मैं बात कृ उनसे

विजय ......सर सूर्य जिसने ट्रेनिंग लेता है वो पैसो के लिया ट्रेनिंग नहीं देते है वो ऋषि (साधु ) लोग है जो केवल सूर्य को हे ट्रेनिंग दे रहे है खास टूर पे सूर्य के लिया हे वो आये है

ऐसे हे 7 बजे तब बहुत से बाते सूर्य को ले कर के पाण्ड्य जी आवर विजय के बिच हुए

विजय ......सर अब हमें निकलना होगा क्युकी सूर्य को सुबह 5 बजे ट्रेनिंग पे भी जाना है आवर आज तो इसने अभी तक आराम भी नहीं किया है

पाण्ड्य जी ......विजय सूर्य में कुछ तो खास है सायद तुमने ठीक से ध्यान नहीं दिया जब सूर्य उन सब के बिच खड़ा था आवर तुमसे बात करते वक़्त सूर्य के मुँह पे जवान ने पांच मारा था उस वक़्त एक पल के लिया सूर्य बदल गया था उसकी फेस उसके आँखे सब कुछ पैर अगले हे पल वो शांत जो गया

विजय ........मैंने सायद गौर नहीं किया पैर सूर्य में कुछ तो खास है सर आवर आपने ऐसा क्या देख लिया जो मैंने नहीं देखा माफ करना सर मैं जिज्ञाषा वाश पूछ रहा हूँ

पाण्ड्य जी ......सूर्य का गुस्सा देखा है मैंने उसकी वो एक पल में बदलने वाली गहरी लाल आँखे

सायद सूर्य तुम्हारे बात को याद रखा होगा नहीं तो मुझे लगता है वो इनकी गर्दन उखाड़ने में एक पल न लगता .......

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स........

माफी चाहता हूँ लेट अपडेट पोस्ट: करने के लिया

पूरा अपडेट लिखा हुआ मेरी हे गलती से डिलीट hi गया था सुबह इस लिया फिर से लिखना पड़ा .......

कोशिश करूंगा एक आवर अपडेट पोस्ट कृ आज .....
 
अपडेट. 64

विजय ........मैंने सायद गौर नहीं किया पैर सूर्य में कुछ तो खास है सर आवर आपने ऐसा क्या देख लिया जो मैंने नहीं देखा माफ करना सर मैं जिज्ञाषा वाश पूछ रहा हूँ

पाण्ड्य जी ......सूर्य का गुस्सा देखा है मैंने उसकी वो एक पल में बदलने वाली गहरी लाल आँखे

सायद सूर्य तुम्हारे बात को याद रखा होगा नहीं तो मुझे लगता है वो इनकी गर्दन उखाड़ने में एक पल न लगता .......

अब आगे .........

सूर्य के जाने के बाद दादा जी अपनी दोस्त विक्रम राणा जी से मिलने सूरजगढ़ निकल गए

परताप सिंह को आया देख विक्रम सिंह को भी बहुत ख़ुशी हुए

नाना जी .....आवो मेरे दोस्त क्या बात है आज कैसे समय मिल गया इस आवर आने का

दादा जी .......क्या करे भाई अब तुमने तो जैसे कसम हे उठा ली है की अपने बेटी के ससुराल जाना नहीं अरे भाई वो तुम्हारे बेटी का ससुराल बाद में है पहले तेरे दोस्त का तेरे भाई का घर है

क्यों संधान जी मैंने सही कहा न हाहाहा

नानी जी .......जी संदी जी

दादा जी .........देख यार विक्रम आज में तुम्हारे पास किसी काम से आया हूँ

नाना जी ......अब आया न तू लाइन पे वही मैं सोचु आज सूर्यगढ़ का सूर्य सूरजगढ़ में कैसे दिख रहा है यार काम से काम मेरे नवासे ( सूर्य )/को हे साथ ले आता

दादा जी .....वो विजय के साथ गया है किसी काम से

नाना जी .....किस विजय की बात कर रहे हो तुम यार

दादा जी ......तुम्हारे दोस्त मनोहर के बेटे विजय की

नानी जी दादा जी आवर नाना जी के लिया जल पैन की वय्वस्ता कर अंदर चली गयी अभी दोनों हे दोस्त बे थे थे बैठक में

दादा जी ......देख यार मेरी बात जोरावर से तो होती रहता है फिर भी तुम से पूछना जरूरी है

नाना जी .....ऐसी कोनसी बात है जो तुम उसको पूछना के लिया यहाँ तक चले आये

दादा जी ......तुम्हे तो अचे से पता है की महाकाली उत्सव में कितना समय है आवर सक्तिपुर सूर्यगढ़ सूरजगढ़ से हमारा हे परिवार है जो बलि सम्पन कर पूजा करता है

नाना जी .......ये तो मैं भी जनता हूँ यार इसने पूछना वाली बात क्या है

दादा जी .....तुम्हारी आदत आज भी नहीं बदली बिना पूरी बात सुनते फैसला करने की भूल गए इस के चलते हे है दोनों 14 साल तक दुसमन बने रहे

नाना जी .....चल यार जो बिट गया उसको क्यों याद करना

दादा जी .....जोरावर ने बताया की सूरजगढ़ से कोई भी बलि नहीं देने वाला है

नाना जी ......क्या पैर मुझे तो इस बारे में कोई भी बात नहीं की जोरावर ने ये तो हमारे कुल की परम्परा है ऐसे कैसे कोई बलि नहीं देगा

दादा जी ......सूर्यगढ़ से बलि सूर्य देने वाला है सोच लो मैंने शिव आवर महेंद्र दोनों को हे बलि देने से मना कर दिया है

नाना जी ......क्या सूर्य बलि देने वाला है तुम पागल तो नहीं होगा गए हो परताप तुम्हे पता भी है तुम क्या कर रहे हो मैं तुम्हारे फैसले के खिलाफ हूँ

दादा जी .......एक बार सूर्य को देख लेना फिर खाना जो भी खाना है आवर मेरी बात सुनो सक्तिपुर से खबर है की दुर्जन सिंह किसी विशेष को बुलाया है सूर्य को चुनौती दे वो शिव से अपने भाई की लौट का बदला लेना चाहेगा उसका मकसद है बलि चुनौती दे कर सूर्य का सबके सामने मरने का

नाना जी .......सब कुछ जानते हुए भी तुम सूर्य को माउथ के मुँह में भेज रहे हो ठाकुर मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी

ये बात नाना जी ने थोड़ी गुस्से में बोली थे जिसको सुन कर नानी जी आवर बड़ी ममी जी भी वही आ गई

नानी जी ......क्या हुआ जी आप ऐसे गुस्से में क्यों हो जी

नाना जी .......अपने संदी से पूछो मैं गुस्से में क्यों हूँ

दादा जी .......देख मैंने जो फैसला किया है उसमे मेरा पूरा परिवार शामिल है

नाना जी .......मैं तुम्हारी बात से सहमत हूँ पैर तुम समाज क्यों नहीं रहे होंगे सूर्य को कुछ हुआ तो हम क्या करेंगे

दादी जी ......भाई साहब ये ठीक बोल रहे है आवर फिर वो कमीना दुर्जन सिंह इस मोके से कभी नहीं चुकेगा

दादा जी ....वही तो मैं बोल रहा हु भाबी जी दुर्जन कुछ गड़बड़ जरूर करेगा आवर अगर सूर्य के अलावा किसी आवर को मैदान में उतरता आवर किसी को कुछ हुआ तो मुझे नहीं लगता सूर्य किसी के रोके रुकेगा

नाना जी .......देख भाई जोरावर बलि के लिया उतरेगा या नहीं वो उसका फैसला पैर सूरजगर से किसी न किसी को तो बलि के लिया योध करना हे होगा ये हमारी कुल की परम्परा है फिर चाहे वो हर हे क्यों न जाये

दादा जी .....ठीक है फिर मैं कल हे सूर्य के साथ सक्तिपुर जा रहा हूँ दुर्जन सिंह को बलि चुनौती देने इस से पहले वो मेरी हवेली में अपने नापाक पेअर रखे

तभी वही संजय आ जाता है

संजय .....बाउजी क्या सूर्य बलि देने वाला है

दादा जी ....है बीटा संजय क्यों क्या हुआ

संजय .....पैर बाउजी वो तो अभी भी बच्चा है

दादा जी .....एक काम करना विक्रम तुम भी कल हे बलि चुनौती दे दो पहले सूर्यगढ़ फिर वह से साथ में सक्तिपुर के लिया निकल लेना हमारे साथ में आवर तुम्हारे मन में जो संदेह सूर्य को ले करके है वो भी दूर कर लेना

कुछ देर बाद संजय के साथ दादा जी निकल गए पीछे नाना जी आवर बाकि सबको चिंता में

नाना जी ......जरा शिव को फ़ोन लगाना प्रिय बेटी

प्रिय ....जी पापा अभी लगती हूँ कुछ देर बाद हे शिव ने फ़ोन उठाया

शिव ......hello भाबी जी कैसे हो

प्रिय ......देवर जी पापा जी आपसे बात करना चाहते है

नाना जी ......hello शिव कैसे जो बीटा तुम

शिव ......बाउजी मैं ठीक हूँ आप कैसे है आवर बाकि सब

दादा जी .....सब कुसल मंगल है पैर ये मैं क्या सुन रहा हूँ सूर्य बलि देने वाला है सूर्यगढ़ की तरफ से

शिव ......है बाउजी पापा आवर हम सब ने तो यही तय किया है क्यों क्या हुआ बाउजी

नाना जी ......बीटा मुझे ये सब ठीक नहीं लग रहा है वो अभी बच्चा है कुछ वक़्त पहले हे तो वो एक साल बाद कोमा से निकला है आवर फिर से उसे लौट के मुँह में भेज रहे हो

शिव ......बाउजी आप चिंता न करे अब सूर्य वो पहले वाला सूर्य नहीं रहा है आपको पता है वो पीछे 7 महीने से युद्ध कला शिख रहा है

नाना जी ......फिर भी बीटा है तो वो बच्चा हे न

शिव .......आप जोरावर भैया से पूछ लेना बाउजी वो सब बताएंगे आपको

कुछ देर आवर बात कर नाना जी फ़ोन रख देते है

वही 8 बजे के लगभग

विजय आवर सूर्य आर्मी बेस से सूर्यगढ़ के लिया निकले

विजय ड्राइव कर रहा था आराम से क्युकी बॉर्डर का इलाका होने के कारन यहाँ कोई ट्रैफिक का तो चांस था नहीं पैर रोड ख़राब थी कुछ हद तक

विजय .......सूर्य क्या तुम्हारे मास्टर मुझे ट्रेनिंग देने को त्यार होंगे

सूर्य ......मां जी कुछ कह नहीं सकता बिना उन्हें पूछे क्युकी आज तक तो ऐसा कभी हुआ नहीं की उन्होंने किसी आवर को शिक्षा दी हो

सूर्य आवर विजय ऐसे हे आराम से बात करते जा रहे थे की अचानक विजय की नजर कुछ दुरी पे छुपे लोगो पे पड़ी

विजय कार को कुछ डेरी कर गौर से उन्हें देखते हुए आगे बढ़ रहा था

सूर्य ......क्या हुआ मां जी आप ने गाडी क्यों डेरी कर दी

विजय .....सूर्य उन लोगो को गौर से देखो वो कुछ अजीब से लग रहे है

सूर्य विजय द्वारा बताई दिशा में देखा तो वह कुछ लोग थे जो गर्मी के मौसम में भी अपने आपको चादर वगेरा से देख रखा था अपने चेहरे को भी

सूर्य .....है मां जी है तो बड़े अजीब क्युकी गर्मी में कोण सल्ल वगेरा ोडने लगा

कुछ देर बाद विजय ने कार को एक तरफ करके बंद कर दिया

विजय .....तुम यही रुको मैं पता करता हूँ मुझे ये लोग ठीक नहीं लग रहे है

सूर्य ......नहीं आप रुकिए आप अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए है

विजय .....नहीं मैं तुम्हे खतरे में नहीं दाल सकता हूँ क्या पता ये कोई आतंकी आवर या फिर उनकी मदद करने वाला कोई गिरोह हो

सूर्य ......फिर तो एक हे रास्ता है हम दोनों हे चलते है कुछ गड़बड़ लगी तो वही सबका सफाया कर देंगे

विजय को सूर्य की बात अच्छी लगी क्युकी विजय अकेला इस हालत में उनका मुकाबला नहीं कर सकता था

विजय .......ये लो खंजर गन तुम्हे चलने नहीं आती है खंजर का इस्तेमाल करना अगर ये आतकवादी hi तो

सूर्य ......क्या उनको जान से मरना ठीक होगा

विजय ......सूर्य अगर जो मैं सोच रहा हूँ वही ये लोग है तो इनको जान से मरना नेक काम होगा

क्युकी इनके द्वारा सहरो में किये जाने वाले बम ब्लास्ट में क्या बच्चे क्या बूढ़े क्या औरते कितने हे बे माउथ मरे जाते है

सूर्य ......सही कहा मां जी आपने इनका कोई देश कोई दरम नहीं होता बस ये मोत के सौदागर होते है

दोनों हे छुपा छुपाते उनकी आवर झड़ने लगे 6,7 मिंट बाद उनसे कुछ 500 मीटर की दुरी पे रेगिस्तान में पाए जाने वाले ाक के पीछे विजय आवर सूर्य चुप गए दूर से हे उनपे नज़र रख रहे थे

सूर्य ......मां जी आप चारो तरफ ध्यान रखा

मुझे बस डैड मिन्ट्स दीजिये

विजय ......अब तुम क्या करने वाले hi सूर्य

सूर्य चुप चाप साफ जगह देख ध्यान लगा कर बेथ जाता है कुछ 15 मिंट बाद ध्यान से बहार निकलता है

सूर्य .....चलिए मां उनका काम ख़तम करते है

विजय ......तुम पहल तो नहीं हो गए जो सूर्य ऐसे उनके सामने गए तो वो लोग या तो भाग जायेंगे या फिर हमें हे मर डालेंगे अगर उनके पास हतियारो हुए तो

सूर्य .......ऐसा कुछ नहीं होगा

सूर्य आवर विजय छुपते हुए उनके पास जाने लगे जैसे जैसे वो उनके पास जा रहे थे सूर्य को उनकी बाते सुनाई दे रही थी

उनसे लगभग 200 मीटर दुरी पे दोनों चुप गए

सूर्य ......मां जी वो सब नशे में है आवर ये लोग यहाँ किसी का इन्तजार कर रहे है

कुछ देर सूर्य बड़े ध्यान से अपने कानो को तेज करके उनकी बाते सुनने लगता है

सूर्य ......मां जी ये यही वास् पास के चोरड डकैत है ये बॉर्डर पर से आने वाले आतंकियों को सहर तक छोड़ ने की बात कर रहे है

विजय .....ये सब तुम्हे कैसे पता

सूर्य ......रोज रोज ध्यान करने से मेरी इन्द्रिय आम लोगो से कही तेज है मेरे देखने आवर सुनने की ताकत बहुत ज्यादा है

विजय .....तो इन्तजार करते है इनके दोस्तों का जो सरहद पर से आने वाले है या फिर पाण्ड्य सर को इन्फॉर्म करे

सूर्य ......आप रुकिए मैं इनको ख़तम करके आता हूँ फिर इनकी जगह हम उनसे मिलेंगे आवर उनका भी काम तमाम कर देंगे

विजय मना करता रहा पैर सूर्य खंजर से आसान पास के कटीली झाड़ियों से कुछ पतली आवर सीधी टहनिया काट कर उनको साफ कर किसी तीर के जैसे नुकीला कर

उनकी आवर बढ़ा मज़बूरी में विजय भी सूर्य के पीछे गन लिया चल दिया

30,35 ,मीटर की दुरी से हे एक के बाद एक तीर उनकी तरफ हाथ से फिख्ते आगे बढ़ा

सूर्य के हाथ की तेजी आवर इतने अंदर में भी उसका अचूक निशाना देख विजय हैरान था

सूर्य तेजी से दौड़ते हुए अपने पालक झपकते हे 3 लोगो की गर्दन तोड़ दी

एक को विजय ने दबोच लिया दूसरे की गर्दन में सूर्य द्वारा छोड़ो तीर लगा हुआ था

सूर्य ..........कितने लोग आ रहे है सरहद पर से आवर तुम उन्हें कहा तक पंहुचा ने वाले होने सब कुछ सच सच बताओ मुझे

सूर्य ने जिस से पीछा था उसने न में गर्दन हिलाई थी की सूर्य ने उसकी गर्दन भी गुमा दी कुछ देर उसका सरीर फड़फड़ाता रहा

सूर्य ......अगर तुम भी मरना नहीं चाहते हो तो सब सच बताओ

सूर्य के रूप में अपने सामने यमराज को खड़ा देख बेचारा ने धोती तक गीली कर दी

विजय .....ये क्या सेल ने मेरे भी कपडे ख़राब कर दिए

सूर्य ......बोलो कितने आदमी आ रहे है

आदमी .....वो वो मुझे मत मरना सब बताता हूँ वो 4 आदमी आने वाले है

सूर्य ......तुम उन्हें कैसे पहचानोगे क्या संकेत है तुम्हारा आवर उनका

आदमी .....हम टोर्च से तीन इसरा करेंगे आवर उदार से चार इसरा करेगा तभी हम एक दूसरे से मिलेंगे आवर ये एक नक्शा है उसका अदा भाग उनके पास है आवर अदा हमारे पास दोनों को मिलाने के बाद हे हम आगे बढ़ेंगे आवर कुछ दिने बाद वो जयपु में बम ब्लास्ट करके जाते हुए यहाँ पास में होने वाले सक्तिपुर आवर सूर्यगढ़ के बिच महाकाल उत्सव में वो बम ब्लास्ट कर वापिस लौट जायेंगे

surya......our कुछ है क्या

आदमी ......जितना मुझे पता था हमने सब कुछ बता दिया

विजय .......तुम्हे उस पर से आने वाली का सन्देश कैसे मिलता है

आदमी अपने मरे हुए साथी के जेब से एक सॅटॅलाइट मोबाइल निकल कर सूर्य की आवर बढ़ता. है

सूर्य विजय को इसरा करता है विजय उस आखिर इंसान की भी गर्दन गुमा कर संत कर देता है

surya.....ab क्या विचार है मां जी यही पे उनका इन्तजार करना है या फिर उनका सवागत सामने से करना है

विजय ......मैं पाण्ड्य जी को खबर कर देता हूँ

सूर्य ......ठीक है जैसा आपको ठीक लगे

कुछ देर बाद विजय उन सबकी तलाश ले कुछ जरूरी समाज आवर 5 में से 2 की गन ले वही कुछ दुरी पे चुप गए

लगभग 20 मिंट में हे पाण्ड्य जी वह अपनी टीम के साथ आ पहुंचे

विजय ने सब कुछ विस्तार से बताया

पाण्ड्य जी के कहने पे कुछ आर्मी जवानो ने उन 5 की जगह ले ले अभी कुछ 10 ,15 मिंट बाद हे 1 कम दूर से टॉरह को बार बार इसरा मिलते देख

पाण्ड्य जी ......लगता है वो लोग आ गए है तुम सब चुप जाओ विजय सूर्य तुम भी चुप जाओ

बाकि सब अब हम देख लेंगे

5 जवानो को छोड़ सब सवदानी से चुप जाते है

विजय द्वारा संकेत बताएंगे जाने के बाद वैसे हे इसरा मिलने पे 10 मिंट बाद चारो आतकवादी उनके सामने थे

पाण्ड्य जी का इसरा मिलते हे सबने उनको घेर लिया

उन्स्की तलाश ले कर उनको ा रेस्ट कर लिया गया

पाण्ड्य जी ...... वेल दोने विजय एंड सूर्य तुम दोनों ने बहुत अच्छा काम किया

विजय .......सर सूर्य नहीं होता तो सायद मैं अकेला कुछ नहीं कर पत्र आपने उनको देखा होगा उनमे से चार को सूर्य ने नहाते हे ख़तम कर दिया पल भर में

मैंने तो बस इस आंखरी वाले को ख़तम किया

अगर आप वक़्त पे न भी आते तो भी सूर्य इनको ख़तम कर देता

पाण्ड्य जी ......बिलकुल ठीक कहा विजय अब तुम दोनों को जाना चाइये आगे का मैं खुद देख लूंगा आवर अभ तुम निश्चित रहो जैसे ट्रेनिंग सूर्य को चाइये उसे वैसे हे मिलेगी

सूर्य आवर विजय सूर्यगढ़ की आवर निकल गए इन सब में 10:30 से ऊपर टाइम जो चूका था ........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स...........
 
अपडेट. 65

पाण्ड्य जी ......बिलकुल ठीक कहा विजय अब तुम दोनों को जाना चाइये आगे का मैं खुद देख लूंगा आवर अभ तुम निश्चित रहो जैसे ट्रेनिंग सूर्य को चाइये उसे वैसे हे मिलेगी

सूर्य आवर विजय सूर्यगढ़ की आवर निकल गए इन सब में 10:30 से ऊपर टाइम जो चूका था ........

अब आगे .........}

सूर्य आवर विजय रात को काफी लेट से हवेली पहुंचे

सूर्य सुबह जल्दी उठ अपने अभ्यास के लिया निकल गया

सुबह जब विजय द्वारा रात की घटना का दादा जी शिवि आवर महेंद्र को पता चला तो उनको सूर्य पे गर्व हुआ

दादा जी ......आखिर खून किसका है शेर के घर सियार नहीं शेर हे पैदा होते है

विजय .......सच कहा बाउजी आपने हमारे इंचार्ज पाण्ड्य सर को जब पूरी बात पता चली के कैसे सूर्य ने उन सब का सफाया किया वो बहुत खुश हुए

आवर उन्होंने सूर्य के ट्रैंनिंग का वादा भी कर दिया है

शिव .......सूर्य की किस ट्रैंनिंग की बात हो रही है पापा

दादा जी ......शिव सूर्य की आगे की ट्रैंनिंग जो है वो आर्मी में रह कर हे सूर्य पूरी करेगा

विजय .....बाउजी पाण्ड्य सर का कहना की सूर्य को इंडियन आर्मी ज्वाइन का लेनी चाइये

दादा जी ......पैर बीटा सूर्य अभी बहुत छोटा है आगे में

विजय .......भविष्य में तो ज्वाइन कर सकता है न बाउजी

महेंद्र. ......नहीं विजय सूर्य कभी भी आर्मी ज्वाइन नहीं करेगा

दादा जी ......तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो बीटा

महेंद्र ......पापा सूर्य हमारे वंश में अकेला लड़का है मैं नहीं चाहता उसने कुछ हो जाये भले हे वो बीटा शिव का है पैर मुझे कोमल से काम प्यारा नहीं है इस लिया मैं सूर्य को कभी भी आर्मी या पुलिस में ज्वाइन होने का समर्थन नहीं करूँगा

शिव ......मैं भी भाई सा की बात से सहमति हूँ पापा

विजय .....पैर जीजा सा एक बार ..

शिव .....नहीं विजय तुम समाज नहीं रहे हो अगर तुम्हारे पाण्ड्य जी यही चाहते है की सूर्य को ट्रैंनिंग देने के बदले तो फिर मैं सूर्य के लिया कोई आवर का इंतजाम कर लूंगा जो सूर्य को ट्रैंनिंग दे

vijay.......aisa नहीं है जीजा सा

दादा जी ......वो सब बाद की बात है तुम सब त्यार रहो हमें आज सक्तिपुर जाना है बलि उत्सव चुनौती देने

shiv.....papa क्या सूर्य का वह जाना जरूरी है

दादा जी ......है बीटा क्युकी जो बलि चुनौती दे उसका वह होना जरूरी है

शिव ......कल बाउजी भी पूछ रहे थे की हमने सूर्य को बलि चुनौती देने के लिया क्यों चुना है

वो नहीं चाहते है की सूर्य बलि उत्सव में चुनौती दे

दादा जी ......हहहह जनता हूँ मैं उसको सूर्य को ले कर बहुत चिंता है पैर उसको जब सूर्य को देखा था आवर आज जो सूर्य है उस से मेरा यार पूरी तरह अनजान है

उसको आज भी यही लगता है की सूर्य जो 6 महीने पहले मिला था वैसा हे है

महेंद्र .....पापा मेनका को भी खबर करनी होगी न

वर्ण आपको तो पता हे है वो हम सबका क्या हल करेगी

दादा जी .......ठीक है तुम उसको वह खबर पंहुचा दो वैसे वो इंडिया कब आ रहे है

महेंद्र .........वो चाहती है की शालिनी आवर शिव खुद उसे लेने जाये

दादा जी .......फिर तो तुम खबर करने की सोचना भी मत शिव बीटा तुम तयारी करो अपने बड़ी बहन से जुटे खाने की

शिव .......पापा मैं सोच रहा हूँ की अपना बिज़नेस भी यही सिफत कर लेता हूँ दीदी को लेने तो जाना हे है उस तो अपना भी लगे हाथ काम ख़तम कर लेता हूँ आवर अपनी हेड ऑफिस यही सिफत कर लेता हूँ

दादा जी .......सोचा तो अच्छा है पैर यहाँ सूर्यगढ़ में नहीं बीटा है क्युकी कल बच्चे बड़े हो रहे है उनकी शिक्षा को ध्यान में रख कर किसी अच्छे सहर को चुनो आवर दोनों भाई मिल कर बिज़नेस करो ठीक लगे तो अपने जीजा सा को भी यही सिफत करने को कह दो

दादी जी .......क्या आप लोगो नास्ता नहीं करना है कब से बच्चे इन्तजार कर रहे है

आवर आपके दोस्त का फ़ोन था वो यहाँ के लिया निकल गए है

दादा जी .....मैं तो भूल हे गया था शिव तुम जा कर सूर्य को ले आना मैंने उसको भी नहीं बताया है आवर महेंद्र तुम अपने दादा जी की कार बहार निकालो उसको सूर्य के लिया त्यार करो

दादी जी .......पहले नास्ता करो आप सब बाद में जो करना है कर लेना

दादा जी .......है हम आ रहे है ठकुराइन आपकी बात भला सूर्यगढ़ में कोई ताल सकता जो हम ताल दे

दादा जी बात सुन शिव विजय आवर महेंद्र की हंसी चौथ गई

सबने जल्दी नास्ता किया क्युकी बहार हो रही आवाज से पता चल गया था की विक्रम सिंह राणा सूर्यगढ़ पहुंच चुके है

दादा जी .......शिव जाओ आवर सूर्य को ले आना साथ में

Shiv.......ji पापा

शिव वह निकल जाता है

बाकि सब भी अपनी अपनी तयारियो में जूथ जाते है

सक्तिपुर .......

दुर्जन फॅमिली ....

1........ दुर्जन सिंह ठाकुर सक्तिपुर का करता डरता यहाँ इसकी हे हुकूमत चलती है इसके सरे 2 no. के धंदे है ड्रग्स .हतियार .kidnaping.rape.hatya.bomb ब्लास्ट.

जैसे इसके अनेक काळा धंदे है

2 ......गीता ठाकुर ( दुर्जन वाइफ ) हाउस वाइफ है ये दुर्जन के हर काळा धंदे से वाकिफ है ये इनसे दुर्जन को 1 लड़का आवर 1 लड़की है

3......विक्रम ठाकुर .( विक्की ) , दुर्जन का बीटा

4 .....गायत्री ठाकुर , गीता की बेटी

5.....दुस्यंत ठाकुर ( डेथ हो चुकी है ) दुर्जन ठाकुर का भाई

6......रुक्मणि ठाकुर ( दुस्यंत वाइफ )

7........अजय ठाकुर दुस्यंत सोन

8..........विधि ठाकुर ,दुस्यंत की बेटी

9 ........सकती ठाकुर 25 इयर्स दुर्जन का भाई बहुत हे ायश किसम का अपने भाई से भी दो कदम आगे सरीर में दुर्जन से भी तगड़ा बस इसको दो हे काम पसंद है सीकर करना फिर वो चाहे आवर ात हो या जानवर आवर खली वक़्त पहलवानी करना

दुर्जन को जब सुबह उठा तो खबर मिली की कल रात जिन्होंने बॉर्डर पार किया है वो सब ब्सफ़ के चाहते चढ़ गए

दुर्जन सिंह को अपने खबरि के माध्यम से ये भी पता चला की उसके जो आदमी उन्हें लेने गए थे वो भी मरे जा चुके है

दुर्जन .......ये सब हो क्या रहा है मेरे साथ पहले भीमा आवर उसके साथी फिर हरिया आवर करीम के दोनों साथी फिर करीम मारा गया उसके साथियो से किसी तरह बच्चा तो अब ये सब पकडे गए कही वो मेरे खिलाफ न मुँह खोल दे मुझे कुछ करना होगा

दुर्जन जल्दी से बिना नास्ता किये हे अपनी कार ले हवेली से निकल गया बिना किसी को कुछ बताये

सकती सिंह जो रात भर रुक्मणि ठाकुर की छूट बजा रहा था बहार निकला तो दुर्जन सिंह को कही बहुत तेजी से जाते हुए देखा

उसने आवाज भी दे कर रोकना चाहा पैर वो रुका नहीं

सकती ......ये भैया कहा निकल लिए गांड मरवाने सुबह सुबह

अरे गांड से याद आज सुबह सुबह बड़ी भाबी की गांड मर हे लेता हूँ

सकती सिंह गीता के रूम की तरफ बढ़ गया जहा गीता be-fikar हो कर सोई हुए थे निघ्त्य डेल

सकती जब रूम में पंहुचा तो सामने कुछ ऐसा नज़ारा था





सकती ........देख साली रात भर गांड मरवाई है फिर भी

टंगे छोड़ी किया अभी भी पड़ी

सकती रूम को लॉक कर अपने कपडे उतर देता है

आवर आगे बढ़ गीता की 36 की चुचुकतो को पकड़ कर जोर से दबाता है

तेज दर्द के कारन गीता की चीख निकल जाती है

गीता .......अह्हह्ह्ह्ह कमीने सुबह सुबह क्यों मेरी बोबे मरोड़ दिए

सकती .......रैंड पूरी रात चूड़ी फिर भी टंगे ऐसे खोल राखी है जैसे अभी भी लैंड ले रहे हो

जाता .......चल जो करने आया है वो कर मुझे बहार भी जाना है

आवर तेरा भण्डि भाई सिर्फ गांड मरता है मेरी तो बाकियो की पता नहीं छूट में ऐसा क्या है जो मादरचोद उनकी कामिनियों की छूट में पड़ा रहता है

गीता सकती के लैंड को मुँह में भर कर चूसने लगती है कुछ हे देर में पूरा त्यार कर देती है

गीता ........चल दाल कर छोड़ मुझे हरामी तू आज फिर मुझे उस कुटिया की छूट रास को स्टाफ किये बिना मुँह में दाल दिया

सकती .......भूल मत तुम दोनों की छूट मेरी गुलाम है रंडी हो तुम दोनों मेरी बाकि गांव वलियो की तरह

सकती अपना साढ़े 7 इंच का लैंड एक बार में दाल देता है





गीता ......आअह्हह्ह्ह्ह मादरचोद सुखी छूट में एक बार में दाल दिया

सकती .....चुप कर नहीं तो गांड भी मरूंगा वो अभी अभी हे सुबह सुबह

कुछ देर बाद गीता की छूट ने पानी बहा दिया

सकती अभी भी ताबड़ तोड़ देखे मरने में लगा हुआ था

जैसे जैसे सकती नजदीकी पंहुचा अपने चरम के उसके कमर आवर तेजी से चलने लगी

तभी बहार किसी ने जोर जोर से गेट बजने लगा

गीता ......हटो सकती लगता वो गांडू आ गया है तुम निकालो पीछे से

सकती ......साली रंडी मेरा हुआ भी नहीं है अभी

गीता ......बाथरूम में चुप जाओ

गीता जैसे हे गेट खोलती है सामने गीता की बेटी गायत्री कड़ी थी

गायत्री ......मम्मी क्या हुआ आप अभी तक उठी नहीं है

गीता ......कुछ नहीं बेटी तू चल मैं आती हूँ

गायत्री .....ठीक है मम्मी ( पता है अपने यार से छुड़ा रही होगी सुबह सुबह रंडी कही की )

गीता .....क्या हुआ

गायत्री .....कुछ नहीं मम्मी मैं चलती हूँ

गीता ने फिर से रूम लॉक कर दिया सकती ....कोण था गेट पे

गीता ......कुछ नहीं गायत्री थी उठाने आयी थी

सकती ......इसकी माँ को छोड़ू पूरा मज़ा ख़राब कर दिया

गीता ......हेहेहे थोड़ी देर पहले उसकी माँ को हे तो छोड़ रहे थे

सकती .....वैसे चिढ़ने लायक तो ये भी हो गई है

चाताआक कर के एक जोरदार आवाज गूंज उठी कमरे में

गीता .......( पुरे गुस्से में ) ...अपनी हद में रहो सकती भले मैं जैसे भी हु अच्छी या बुरी मुझे कोई फरक नहीं पड़ता पैर तुमने या किसी ने भी मेरी बच्ची पे बुरी नज़र डाली तो ुशी पल बिच चौराहे उसका वो हल करुँगी की वो मरने के भेख मांगेगा

सकती .......मुझसे गलती हो गई भाबी सा

गीता .....सकती मुझे भी माफ़ कर दे पैर दुबारा मेरी बच्ची से दूर हे रहना

सकती वह से चला गया

तकरीबन 12 बजे सूर्य अपने दादा पापा मां नाना के साथ

अपने परदादा जी की कार में सवार हो सक्तिपुर के लिया निकला जिसको खुद जोरावर ड्राइव कर रहा था





बाकि सब अलग अलग कार से सक्तिपुर की आवर भाड़ रहे थे

सूर्य .......मां जी ये सब करना जरुरी है क्या

मां जी .......है बीटा तुम्हारे लिया तो आवर भी जरूरी है क्युकी तुम दोनों खंडन की अगली पीढ़ी हो एक तरह से राणा आवर ठाकुर खंडन की अगले वरिष्ठ हो तुम दूसरी बात जो सायद तुम्हे किसी ने भी पूरी नहीं बताई वो ये की सक्तिपुर के ठाकुर दुर्जन सिंह आवर तुम्हारे ठाकुर परिवार के बिच की दुश्मनी है पहले बिलकुल भी ऐसा नहीं था पहले सूर्यगढ़ सूरजगढ़ आवर सक्तिपुर तीनो में भाईचारा मित्रता थी

सूर्य ......फिर ऐसा क्या हुआ जो ये मिटेगा दुश्मनी में बदल गई

मां जी

मां जी ......तुम्हारी माँ का रिस्ता हमने दुर्जन ठाकुर के भाई दुस्यंत के साथ तय किया था जबकि शिव आवर शालिनी एक दूसरे से प्रेम करते थे जिसका हमें पता नहीं था दुस्यंत जिसको हम सब अच्छा इंसान समझते थे वो बहुत हे घटिया निकला जिसका पता मुझे तुम्हारी माँ आवर पापा से चला

दुस्यंत ने तुम्हारी माँ की किडनैपिंग कर ेजात लूटने की कोशिश की वो तो वक़्त पे शिव ने दुष्यंत से शालिनी को बच्चा लिया आवर दुस्यंत को मार मार कर बाघा दिया तुम्हारे पापा शालिनी से सदी कर विदेश चले गए पीछे से दुष्यंत को किसी ने मर दिया

दुर्जन आज भी यही समझता है की शिव ने हे शालिनी के लिया दुस्यंत मो मार दिया आवर शालिनी को बाघा कर ले गया

सूर्य ......ये तो गलत है न मां जी उसको सचाई बता देनी चाइये

मां जी ......उस से अब कोई फरक नहीं पड़ता एक तरह से अच्छा हे हुआ दुर्जन सिंह के यहाँ अगर शालिनी की सदी हो जाती तो सब कुछ बर्बाद हो जाता वो सब के सब राक्षश है इंसान के भेष में

सूर्य ........सच कहा मां जी कल रात जो आतंकवदीओ को ब्सफ़ ने पकड़ा उनका लिंक भी इस दुर्जन ठाकुर के साथ था

मां जी ......है विजय ने बताया मुझे सब कुछ

आवर अब तो वैसे भी पापा ने भी है कर दिया है आवर सूरजगढ़ से भी तुम्हे कोई चुनौती नहीं दे रहा है

बस मेरी एक बात याद रखना ये दुर्जन पीठ पीछे वॉर करता है जब कभी भी सामना हो तो सचेत क्रूर रहना बाकि तेरा मां है तेरे साथ हहहहह

ऐसे बात करते हुए सूर्य सक्तिपुर आ पंहुचा

कुछ देर बाद सक्तिपुर के ठाकुर दुर्जन सिंह की हवेली पे एक के बाद एक कार्स का काफिला आ कर रुकता है

जिनको देख हवेली पे तैनात सिक्योरिटी गार्ड सचेत हो गए

एक नौकर ने अंदर जा कर ठकुराइन गीता देवी को सन्देश पहुंचाया

नौकर .....मालकिन सूर्यगढ़ से ठाकुर परताप सिंह जी आवर उनके बेटे आया है साथ हे सूरजगढ़ से विक्रम सिंह जी आवर उनके बेटे भी आये है

गीता देवी .......वो यहाँ क्यों आये है

नौकर .....मालकिन पता नहीं उन्होंने ठाकुर साहब को सूचना देने को कहा है

गीता देवी .......उनके जलपान की वय्वस्ता करो हम आते है

गीता देवी फ़ोन करती दुर्जन सिंह को पैर बार बार फ़ोन करने के बाद भी कॉल कोई नहीं ुत्य तो गीता देवी ने सकती को फ़ोन मिला दिया

2,3 रिंग के बाद सकती ने कॉल उठाया

सकती सिंह .......बोलो क्या बात है क्यों कॉल कर रही हो

गीता देवी ......तुम जहा कही भी हो फ़ौरन हवेली पहुंचो

यहाँ सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ से ठाकुर आये हुए है

सकती सिंह ......हम अभी पहुंचते है उनकी जलपान की वय्वस्ता करो भाई सा नहीं है क्या हवेली पे

गीता देवी .....वो फ़ोन नहीं उठा रहे है नहीं हवेली पे है

दादा जी ........यार विक्रम ये अभी तक कोई आया क्यों नहीं अंदर से

नाना जी ......कही दुर्जन पहले से हे हार तो स्वीकार नहीं कर ली है

थोड़ी देर बाद गीता देवी परदे में वह पहुंची

दादा जी ......बेटी आप यहाँ क्यों आई है

आपको यहाँ नहीं आना चाइये

गीता देवी ......माफ कीजिये ठाकुर साहब हवेली के ठाकुर बहार गए हुए है

अभी आप जलपान कीजिये इतने में छोटे ठाकुर सकती सिंह आते हे होंगे

दादा जी ......कोई बात नहीं बेटी हम इन्तजार करते है पैर जलपान नहीं कर सकते बेटी हम

गीता देवी ......ऐसा क्यों क्या घर आये अतिथि का सत्कार करने का अदिकार भी नहीं है हमें

नाना जी ......बेटी ऐसे बात नहीं है हम यहाँ कुछ दिन बाद होने वाले बलि उत्सव में होने वाली बलि के लिया चुनौती देने आये है

अब तुम समाज गई होगी की हम जलपान क्यों नहीं कर सकते

गीता देवी ......जी ठाकुर साहब लीजिये ठाकुर सकती सिंह भी आ गए है हमें आज्ञा दे

गीता देवी वापिस हवेली लौट गई

सकती सिंह ......माफी चाहता हूँ आपको इन्तजार करना पड़ा

हुकम कीजिये हम आपके लिया क्या कर सकते है

दादा जी ......मैं सूर्यगढ़ का ठाकुर परताप सिंह हूँ मुझे तो जानते हे होंगे ठाकुर सकती सिंह

सकती सिंह ......जी आपको कोण नहीं जनता है

दादा जी .......जोरावर सूर्य ठाकुर को ले आओ

जोरावर सिंह ....जी बाउजी

कुछ पल बाद हे सूर्य सकती सिंह के सामने खड़ा

दादा जी सूर्य को इसरा करते है

सूर्य गर्दन है में जातक कर सकती सिंह की आँखों में देखता है

सूर्य. ........मैं सूर्यगढ़ के ठाकुर पड़ताल सिंह का पोता शिव आवर महेंद्र ठाकुर का बीटा सूर्य शिव महेंद्र ठाकुर सक्तिपुर के ठाकुर दुर्जन सिंह को बलि उत्सव में होने वाली बलि के लिया चुनौती देता हूँ

अगर सक्तिपुर के ठाकुर इस चुनौती को स्वीकार नहीं करते है तो वो अपनी खानदानी तलवार हमारी चरणों में अर्पित कर अपनी हर सवीकार करे

सकती सिंह सूर्य की चुनौती सुन गुस्से में आग बबूला हो जाता है

पैर छह कर भी वो कुछ नहीं कर सकता था क्युकी या तो चुनौती सवीकार करो या फिर हर मन कर अपनी खानदानी तलवार सूर्य ठाकुर के चरणों में अर्पित करो

सकती सिंह .........मैं सक्तिपुर का ठाकुर सकती सिंह सूर्यगढ़ के ठाकुर सूर्य शिव महेंद्र ठाकुर की चुनौती स्वीकार करता हूँ महाकाली बलि उत्सव में होने वाली बलि मैं सक्तिपुर की तरफ से मई अर्पित करूँगा

सकती सिंह के चुनौती स्वीकार करते हे चारो तरफ से हवा में एक के बाद एक कई राउंड फायर हुए

दादा जी .......अब हमें इजाजत दे ठाकुर सकती सिंह

सकती सिंह ......आपको एकमत है ठाकुर पड़ताल सिंह जी

सब अपनी अपनी कार्स की तरफ चल दिए

वही सकती सिंह कुछ सोच कर शिव की तरफ भध गया

सकती सिंह .......शिव ठाकुर ये तुम्हारा हे बीटा है न शालिनी आवर तुम्हारा खून है न

क्या शालिनी आज भी उतनी हे खूबसूरत है मैंने देखि नहीं है कभी शालिनी को पैर बहुत तुम्हारे बेटे को मरने के बाद वो मेरे निचे होगी तुम्हारे आँखों के सामने अपने गॉड में बताऊंगा उसको बागान करके..........

सकती सिंह की ऐसे सोच आवर बात सुन शिव के बदन में आग लग गई वही कार में बैठते हुए अपने पिता की आवर सकती सिंह को जाते हुए देख लिया या था

जैसे सकती सिंह अपनी बात पूरी की उसके सीने पे एक जोरदार लात पड़ी

सकती सिंह ......ahhhhhhhhhhh माहार गयाआ

सबने जब सामने देखा तो सकती सिंह 12,13 फिट दूर दिवार से टकरा कर जमीं में पड़ा बिलख रहा था

शिव ने फ़ौरन सूर्य का हाथ पकड़ लिया

पैर सायद देर हो चुकी थी क्युकी सूर्य अपना सयम खो चूका था

सूर्य ...... हरामी तुम्हारी हिमत कैसे हुए मेरी माँ के बारे में ऐसा बोलने की

सूर्य शिव से हाथ चढ़ा कर सकती सिंह को गर्दन से पकड़ कर उठा लिया

सकती सिंह को मार पड़ते देख जो नौकर हवेलिवके पहरेदारी कर रहे थे वो भी बिच में आ गए

सूर्य के सामने जो भी आता वही अगले पल जमीं पे होता

सकती सिंह की अभी भी गर्दन सूर्य ने दबा राखी थी

दादा जी .......शिव रोको सूर्य को वर्ण वो इसको यही मार डालेगा

शिव ......उसने जो शमी के लिया कहा है उसकी लिया सूर्य उसको मर भी डालेगा तो भी गलत न होगा

नाना जी ......सूर्य को पूरा मौका मिलेगा उसको मरने का पैर यहाँ नहीं बलि मैदान में अभी उसको रोको

शिव ......पैर कैसे रोकू मैं

संजय ........शालू की कसम से वो रुक जाये

शिव .....सूर्य तुम्हे तुम्हारी माँ की कसम ओस कमीने को छोड़ दे

सूर्य शिव द्वारा दी कसम से सकती को दूर फेंक दिया आवर गुस्से में अपने पापा की आवर बढ़ा

सूर्य ......आपने ऐसा क्यों किया

शिव ......शांत हो जाओ सूर्य उसको तुम सजा बलि उत्सव में देना वो भी जान से मार कर

सूर्य बिना शिव की बात सुने कार के तरफ बढ़ गया जोरावर भी साथ चला गया

बाकी सब भी बेथ गया कई लोगो के तो समाज भी न आया की ये हुआ क्या था

सूर्य अभी भी पुरे गुस्से में था

कुछ देर बाद सूर्य कार रुकवा कर उतर गया

मां जी .......सूर्य क्या हुआ तुम यहाँ क्यों उतरे हो

सूर्य ......मां जी मैं जंगल जा रहा हूँ अभ्यास करने आप जाये मैं रात को घर आता हूँ

मां जी .....पैर बीटा .....

सूर्य .......प्लीज मां जी

मां जी .......ठीक है बीटा पैर अपना ख्याल रखना

सूर्य तेजी से दौड़ते हुए जंगल में गायब हो गया

जोरावर ने सबको घर चलने को कहा .............

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अपडेट. 66

मां जी .......सूर्य क्या हुआ तुम यहाँ क्यों उतरे हो

सूर्य ......मां जी मैं जंगल जा रहा हूँ अभ्यास करने आप जाये मैं रात को घर आता हूँ

मां जी .....पैर बीटा .....

सूर्य .......प्लीज मां जी

मां जी .......ठीक है बीटा पैर अपना ख्याल रखना

सूर्य तेजी से दौड़ते हुए जंगल में गायब हो गया

जोरावर ने सबको घर चलने को कहा .............

अब आगे ........

सूर्य आवर बाकि सबके सक्तिपुर से निकलने के बाद

कुछ लोगो ने सकती सिंह को उठा कर उसके रूम तक पहुंचाया

सकती हालत से अगर किसी को दुख था तो वो थी दुस्यंत की बीबी रुक्मणि

गीता भी खुश थी क्युकी आज सुबह जो सकती में उसकी बेटी गायत्री को ले कर जो कुछ भी सकती में कहा वो कही न कही गीता देवी को खटक गया था

सबसे ज्यादा खुश थी विधि ठाकुर वो सकती सिंह आवर अपनी माँ रुक्मणि के सम्बन्दो को ले कर दोनों से नफरत करती थी जब सूर्य सबकी ढुलाई कर रहा था तब विधि अपने रूम की खिड़की से बेस्ड सूर्य को हे निहार रही थे जब से सूर्य वह आया था विधि सूर्य की आवर आकर्षित हो चुकी थी

जल्द हे डॉक्टर को बुलवा कर सकती का इलाज सुरु किया

ज्यादा कुछ नहीं बस हल्का सा सर फटा था आवर कुछ हद तक सकती सिंह में सीने में लगी चौथ से सकती सिंह के उस स्थान पे सूजन अस चुकी थी

पुरे सक्तिपुर में ये बात आग की तरह फ़ैल गई की सूर्यगढ़ के ठाकुर ने सकती को उसकी हे हवेली पे मार मार कर हालत ख़राब कर दी

ज्यादातर सक्तिपुर में लोग खुश थे पैर कुछ लोगो में लिए ये बात अपने ेजात मान सामान पे किसी काले दाभे से काम नहीं थी

क्युकी इस से आसपास के इलाकों में यही सन्देश पहुंचने वाला था की सक्तिपुर के ठाकुरो में डैम नहीं जो उनको उन्हें की घर में किसी ने थोक दिया

गीता .......क्या जरूरत थी तुम्हे सकती बिना किसी मतलब के शिव ठाकुर से बतमीज़ी करने की

रुक्मणि ......ये आप क्या कह रही हो दीदी उन्होंने सकती के साथ इतना कुछ कर दिया फिर भी आप इनको हे बोल रही है

गीता ........तुम तो चुप हे करो मुझे समजने की जरूरत नहीं है

रुक्मणि ......ुशी ठाकुर ने मेरे पति को मारा फिर भी आप ये बोल रही है

गीता .......जानती हूँ पैर तुम भूल रही हो वो यहाँ क्यों आये थे

आवर छोड़ूगाबदला हे लेना था तो बलि उत्सव में अपनी मर्दानगी दिखते यहाँ पैर उसको उक्षा कर क्या हासिल हुआ सबके सामने पूरी ेजात मिटटी में मिला दी सक्तिपुर की

सकती ......चुप करो रंडियो अह्ह्ह्ह उसे तो मैं जिन्दा नहीं छोड़ूगा

बलि उत्सव में उसकी हे बलि चढ़ेगी मेरे हाथो

गीता ......तुमसे कुछ नहीं होगा सकती सिंह वो यहाँ तुम्हारी मार के चला गया वह भी मरेगा सबके सामने तुम बस एक काम करो इस रंडी की हैंड मारो यही तुम कर सकते हो

गीता देवी की बात सुन रुक्मणि आवर सकती गांड हे सुलग उठी

गीता देवी वह से चली गई पीछे रही गए सकती आवर रुक्मणि

रुक्मणि .......मुझे रंडी बोल कर चली गई वो तुम्हारे सामने आवर तुम नामरद की तरह देखते रहे

सकती ......चुप कर साली मेरा दीमक वैसे हे ख़राब है इस से पहले की मैं तुम्हारा मच तोड़ दू चली जाओ यहाँ से

रुक्मणि गुस्से में पेअर पटकते हुए वह से चली गई .........

सूर्य जब गुस्से में जंगल पंहुचा तो साध्वी जी ने सूर्य से बहुत पूछा पर सूर्य बिना कुछ होल गुस्से में दौड़ने लगा पता नहीं कितने देर तक सूर्य दौड़ता रहा पैर उसका गुस्सा काम होने का नाम हे नहीं ले रहा था

1 हे तक लगातार दौड़ने के बाद सूर्य खुल्हाडी ले कर जंगल में निकल गया

साध्वी जी .....सकती वयोम आज सूर्य बहुत गुस्से में है तुम दोनों उसके पीछे जाओ पैर याद रहे ऐसा कुछ भी नहीं करना जिस से उसका गुस्सा आवर बढे उसके गुस्से को उसके हे खिलाफ उसे करो आवर किसी कठिन कार्य में उसको लगाओ ताकि उसकी उग्र ऊर्जा बहार निकले

सकती .......आप जानती है सूर्य क्यों गुस्से में है फिर आप उसकी सहायता क्यों नहीं कर रही है

साध्वी जी ........क्युकी सूर्य को गुस्से से ताकत मुलती आवर उसको ुशी गुस्से को अपने नियंत्रण में कर्मा शिखना होगा न की अपने हे गुस्से कर गुलाम बनना है सूर्य को हम हवेली जा रहे है किसी से मिलने तब तक उसका ध्यान रखना

सकती आवर वयोम अपने अपने अस्त्र ले कर सूर्य के पीछे निकल गए साध्वी जी तेजी से हवेली की आवर निकल गई

सूर्य अपनी साथ ले हुए कुल्हाड़ी से जो भी सूखा पेड मिलता उसपे हे अपने गुस्से से प्रहार करने लगता जब वो जमीं पे गिरता तब आगे बढ़ जाता

सूर्य पेड के जगह सकती को देख अपना गुस्सा निकल रहा था

वयोम .......यार सकती कभी कभी तो मुझे ये सूर्य समाज नहीं आता है की आखिर ऐसा क्या है इसमें जो इसको गुस्सा आने पे पूरी तरह बदल जाता है

सकती .......सच कहु तो मुझे भी नहीं पता यार मैंने बहुत बार सूर्य के दीमक में जखने की कोशिश की किन्तु हर बार मैं विफल रहा

वयोम ........ऐसा कैसे हो सकता है यार जबकि तुम इन सब में माहिर हो

सकती .......तुम्हे पता है एक बार मैंने सूर्य के साथ अभ्यास करते हुए बेहोश हुआ था

वयोम ......उस दिन को कैसे भूल सकता हूँ यार तुम्हे कितने मुश्किल से होश आया था

पैर आज तक सामान नहीं आया ऐसा तुम्हारे साथ हुआ क्या था

सकती .......क्युकी मैंने सूर्य के दीमक में गुस्स गया था फिर पता नहीं क्या हुआ की अच्चानक से में बेहोश हो गया

जब सूर्य के दीमक में मैं गुस्सा तो मैंने ऐसा विचित्र दीमक आवर उसकी दिमागी सकती को मैं झेल नहीं पाया आवर बेहोश जो गया

उस के बाद बहुत बार कोशिश की पैर फिर कभी कामयाब नहीं हुआ आवर साध्वी जी ने भी सख्ती से मन कर दिया की फिर कभी सूर्य के दिमाग के साथ ऐसा कुछ नहीं कृ

साध्वी जी हवेली पहुंची जहा पे सभी सूर्य को ले कर के चिंतित थे

नाना जी मां जी भी अभी तक यही थे सूर्यगढ़ के कुछ जीने चुने लोग हे मौजूद थे बाकि सबके सब जा चुके थे

साध्वी जी को देख दादी जी ने उनको हवेली के अंदर हे ले कर चली गई

शालिनी .......साध्वी जी आप यहाँ क्या सूर्य आपके साथ आया है कहा है मेरा बीटा सूर्य

साध्वी जी ......शांत हो जाओ शालिनी सूर्य अपना अभ्यास कर रहा है आप चिंता न करे

ये बताये की ऐसा क्या हुआ की सूर्य इतने गुस्से है

शिव आवर जोरावर अंदर आते हुए

शिव ......मैं बताता हूँ आपको सूर्य क्यों गुस्से में है क्यों वो घर आये बिना हे चला गया

शिव जो कुछ भी सक्तिपुर में हुआ सबके कुछ साध्वी जी को बताया

साध्वी जी .......देखिये आप सभी सूर्य को अच्छे से जानते है फिर आपने आइडे में सूर्य को अकेला क्यों छोड़ा जबकि आपको पता है सूर्य की कमजोरी आवर ताकत उसका परिवार है ऐसे में आप में से जो सूर्य के सबसे नजदीक है उसको इस वक़्त सूर्य के साथ होना चाइये था मुझे आपसे ऐसे उम्मीद तो न थी

सूर्य गुस्से में खुद को या किसी आवर को नुक्सान पंहुचा सकता है वो कुछ वक़्त पहले हे तो मरणासन( कोमा ) अवस्था से बहार निकला है ऐसे में उसको अकेला छोड़ दिया आप लोगो ने

साध्वी जी के कहे एक एक सबद शालिनी आवर बाकियो को अपने गलती का अहसास करवा रहा था

शालिनी रोटी हुए बहार जाने लगी तब रेखा ने शालिनी टोका

शालिनी .......मैं मेरे बेटे का पास जा रही हु दीदी कैसे माँ हूँ जो अपने बच्चे को तकलीफ में मैंने अकेला छोड़ दिया

रेखा .......छोटी सूर्य तुम्हारा हे नहीं मेरा भी बीटा है गलती मैंने भी की है तुमसे कही ज्यादा गलती मेरी है चलो मैं भी चलती हूँ अपने बेटे के पास

शालिनी बहार निकल गई पीछे से रेखा भी दोनों कार ले जंगल की तरफ निकल गई

शिव ......जोरावर भैया हमें भी चलना चाइये

जोरावर ......है शिव साध्वी जी आप भी चल रही है क्या

शिव ने कार निकली आवर तीनो जंगल की आवर निकल गए

***** सहर में जहा सपना आवर किरण अपने मां जी के यहाँ से स्टडी कर रहे है

आज दोपहर से हे किरण बहुत ज्यादा परेशान थी बार बार सूर्य का गुस्से भरा चेहरा उसके सामने अस रहा था

आज पहले बार था जब किरण को ऐसे खुली आँखों से सूर्य का चेहरा दिखाई से रहा था नहीं तो सपनो में हे उस से मुलाकात होती थी

सपना ......क्या बात है छोटी जब से हम घर आये है तुम कुछ ज्यादा हे परेशान हो रही हो कुछ हुआ है क्या या कोई प्रोब्लेम्स है तो बताओ मुझे

किरण ......पता नहीं दी क्यों आज बार बार मन बेचें हो रहा है आवर रहा रहा कर आज वही चेहरा सामने आ रहा है

सपना ......किस चेहरे की बात कर रही हो स्वीटी

किरण .......वही चेहरा दी जो अक्सर रात सपनो में देखती हूँ जिसकी मैं तस्वीर बनती हूँ पैर आज वो सब खुली आँखों के सामने बार बार आ रहा है आज मैंने उस मुस्कुराते हुए चेहरे पे गुस्सा दर्द परेशानी देखि दी पता नहीं क्यों मुझे अच्छा नहीं लग रहा

सपना .......जो सकता है स्वीटी ये तेरा कोई बहम हो तुमने जब भी देखा सामने में हे रेखा है क्या पता वो किस सहर में है या है भी नहीं

किरण .......प्लेसेस दी ऐसा तो न बोलिये आप

सपना .......चल एक काम कर घर पे बात कर ले चची से या माँ से तुम्हे अच्छा लगेगा

किरण अपना फ़ोन निकल अपने मम्मी से बात करने लगती है फिर अपनी बड़ी मम्मी प्रिय से बात करती है दोनों से बात करने के बाद उसको कुछ रहत से महसूस होती है

शालिनी आवर रेखा जब जंगल पहुंची तब वह सूर्य को न प् कर दोनों का मन जबरन लावा कुछ मिनट्स बाद हे शिव जोरावर आवर साध्वी जी भी पहुंचाया गेट

शालिनी ......साध्वी जी सूर्य कहा है वो यहाँ तो है हे नहीं

साध्वी जी ......वो जंगल में है चलो मैं ले कर चली हूँ

साध्वी जी चारो को ले कर जंगल की आवर भध गई कोई 15 मिंट बाद सूर्य के पास पहुंची

जब शालिनी आवर रेखा ने सूर्य को पसीने से लटपट सूखे पेड पे निरंतर प्रहार करते रेखा तो उनको भी अंदाजा हो गया की सूर्य कितना परेशान है शालिनी आवर रेखा ने बिना किसी चीज़ की परवा किते सूर्य को आगे बच दोनों ने हे अपने सीने से लावा लिया एक पल को तो सूर्य चौंक गया की यहाँ कोण आ गया जो उसको ऐसे जकड़ा है

पैर कहते है जब रिस्ता दिल से जुड़ा हो तो धड़कन एक दूसरे को पहचाने में वक़्त नहीं लगाती है

ऐसा हे कुछ सूर्य के साथ हुआ अबले हे पल सूर्य ने अपनी माँ आवर मम्मी दोनों को अपने नहीं में काश लिया सूर्य का गुस्सा शांत हो चूका था

अब सूर्य को अपने सरीर में थकावट महसूस होने लगी हिज से उसका सरीर जबाब डेनसे लगा

जैसे हे सूर्य लड़खड़ाया शालिनी आवर रेखा ने सूर्य को संभल लिया

शालिनी .....बीटा तुम थीं तो हो न मुझे माफ करदे मेरे बच्चे मैंने तुम्हे अकेला छोड़ दिया

कहते हुए शालिनी के ान तक रूखे आंसू बाह कर सूर्य के सीने पे तप तप करने गिरने लगे ऐसा हे कुछ हाफ रेखा जी का भी था

सूर्य .......मैं थीं हूँ माँ एंड मम्मी आवर आप माफी न मांगिये आवर मुझे माफ कर दीजिये गुस्से में पता नहीं मैं क्या कर रहा था मैंने ये भी नहीं सोचा मेरे ऐसा करने से आपको कितनी तकलीफ हुए होगी

ी ऍम सो सॉरी माँ ,मम्मी मुझे मेरिट गलती के लिया माफ कर दीजिये

शिव .....बीटा हमें भी माफ करदे हमें तुम्हे इस तरह अकेला नहीं छोड़ना चाइये था जबकि हमें पता है तुम गुस्से में थे

सूर्य ......सॉरी पापा पैर मैं क्या करता उसने माँ को जो कुछ कहा मैं अपना सयम खो बैठा

जोरावर .......तुमने कुछ गलत नहीं लिया मेरे शेर आवर आगे भी हालत नहीं करोगे पता है मुझे पैर तुम्हे अपने गुस्से को खुद पे ऐसे हावी नहीं होने देना चाइये

गुस्से में इंसान जीती हुई बाज़ी भी बार जाता है

इस लिया गुस्से को अपना हतियार बनाओ न की खुद के गुस्से का साकार खुद बन जाओ

सूर्य ......जी मां जी मैं ख्याल रखूँगा ान घर चले मैं बहुत थख गया हूँ

साध्वी जी ......पहले कुटिया पे चलो आज तुमने हद से ज्यादा म्हणत की है तुम्हे ॉधी की जरूरत होगी

घर जा कर अच्छे से सरीर की मालिश करवा लेना किश से थकन उतर जाएगी आवर कल कोई अभ्यास नहीं होगा घर पे हे रहा कर ध्यान योग कर लेना

कुछ देर बाद सूर्य काढ़ा पे कर हवेली लौट आया

जहा सूर्य को सही सलामत देख सब खुश हुए

सब बहुत कुछ पूछना चेंज थे पैर शालिनी ने सबको मना कर दिया की सूर्य को अभी आराम की आव्सय्कता है उसे आराम करने दिया जाया

जोरावर सबसे विधा ले सूरजगढ़ की आवर निकल गया

ऐसे देखते हे देखते महाकाली उत्सव भी नजदीक आ चूका था अगले दिन महाकाली बलि उत्सव होने वाला था सूर्यगढ़ आवर सक्तिपुर में इस उत्सव को ले कर बहुत से लोग उत्साह में थे .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स.........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स............

टाइम मिला तो नेक्स्ट अपडेट रात तक आएगा दोस्तों .......
 
अपडेट. 67

जहा सूर्य को सही सलामत देख सब खुश हुए

सब बहुत कुछ पूछना चेंज थे पैर शालिनी ने सबको मना कर दिया की सूर्य को अभी आराम की आव्सय्कता है उसे आराम करने दिया जाया

जोरावर सबसे विधा ले सूरजगढ़ की आवर निकल गया

ऐसे देखते हे देखते महाकाली उत्सव भी नजदीक आ चूका था अगले दिन महाकाली बलि उत्सव होने वाला था सूर्यगढ़ आवर सक्तिपुर में इस उत्सव को ले कर बहुत से लोग उत्साह में थे .............

अब आगे .........

इस बिच शिव आवर शालिनी उस निकल गए थे मेनका बुआ को लेन आवर अपना बिज़नेस इंडिया में सिफत करने के लिया

सुबह का नास्ता करने के कुछ देर बाद हे विजय के साथ सूर्य सहर की आवर निकल गया

वही सूर्य के जाते हे शिव का कॉल आ गया था की वो लोग जयपुर पहुंच गए है कुछ कुछ देर में हे जैसलमेर के लिया उनकी flight's है

एक यही एयरपोर्ट था जो सूर्यगढ़ सक्तिपुर आवर सूरजगढ़ के आस पास जैसलमेर इंटरनैशनल एयरपोर्ट

जो की खाश टूर पे इंडियन आर्मी वॉर की स्थिति में एयर फाॅर्स के रूप में भी काम लेती है





दादा जी .......ाजी सुनती हो

दादी जी .........क्या है जी अब क्या चाइये आपको

दादा जी ने चारो तरफ देखा किसी को अपने आस पास न देख कर

दादा जी .......ाजी चाहने को तो बहुत कुछ है जी

दादी जी ........अब आप बूढ़े हो गए है बुढ़ापे में ज्यादा उछाल कुढ़ करना आपकी सेहत के लिया ठीक नहीं है

दादा जी ........ठकुराइन आप कहो तो राधा की छोटी बहन हम आज भी लेन को त्यार है

तभी दादा जी को रेखा उस आवर हे आते हुए नज़र आती है

रेखा .......माँ सा वो देवर जी का फ़ोन आया था अभी वो जयपुर से फ्लाइट ले जैसलमेर आने वाले है

दादी जी .......क्या सच में बेटी

रेखा ........है माँ सा अब तक तो सायद वो जैसलमेर के लिया उड़ान भी भर चुके होंगे

दादा जी .......बेटी सूर्य सहर गया है न उसको कॉल कर के उन्हें भी खबर कर दो ताकि वो एयरपोर्ट निकल जाये

रेखा जी ......जी पापा जी मैं सूर्य आवर विजय को बोल देती हूँ

दादी जी ......चल बैठी वो लोग भी जल्दी हे पहुंच जायेंगे बरसो बाद बेटी आवर जमाई सा घर आ रहे है उनके पसंद का खाना बनाने में तुम्हारी हेल्प कर देती हूँ

रेखा जी सूर्य को कॉल कर सब बता देती है

सूर्य वही से जैसलमेर के लिया निकलने का बोल देता है

सक्तिपुर .......

कुछ दिन पहले हे दुर्जन सिंह वापिस लौट आया था

जब उसको पता चला की उसके पीछे से क्या क्या हुआ तो उसको सकती आवर खुद पे बहुत गुस्सा आया

दुर्जन सिंह ......सकती तुम्हे चुनौती सविकरणे की क्या आव्सय्कता थी तुम हमारा इंतजार भी नहीं कर सकते थे क्या

सकती सिंह ......भाई सा हम क्या करते सूर्यगढ़ वाले खुद चुनौती देने हवेली पहुंच चुके थे हमें जो ठीक लगा उस वक़्त हमने वही किया

दुर्जन सिंह ......काम से काम हमें तो इत्तला कर सकते थे सब करे कराये पे पानी फेर दिया तुमने

सकती सिंह ......ऐसा हमने क्या कर दिया जो आप इतना गुस्सा कर रहे है भाई सा

दुर्जन सिंह .......सकती तुम्हे अच्छे से पता है उस लड़के ने हे भीमा आवर उसके साथियो की क्या दुर्दशा की उसके बाद भी तुमने चुनौती स्वीकार की

ऊपर से बेबजह ऊँगली भी कर दी जिसका नतीजतन भी तुमने भुगत लिया क्या तुम्हे जरा भी लगा की तुम उसके सामने टिक पड़ोगे तुम्हारा हारना तय है साथ हे साथ सक्तिपुर की नाक सूर्यगढ़ के सामने काटने वाली है

सकती सिंह ........ऐसा कुछ नहीं होगा भाई सा हम उस लड़के से नहीं डरते है दफना हमारे खून में नहीं है

हमने अपना इंतजाम कर लिया है

दुर्जन सिंह .......ऐसा क्या इंतजाम किया है तुमने

सकती सिंह .......वो हम आपको बाद में बताएंगे भाई सा बस हम चाहते है की हम उसको जान से मार दे उसने हमारे सीने पे पेअर मारा था

दुर्जन सिंह .......अब हम कुछ कर भी नहीं सकते है तुमने चुनौती स्वीकार नहीं करनी चाइये थी हमने उसके लिया पहले से बहुत कुछ सोच रखा था

गीता देवी ......ऐसा क्या सोच रखा है जरा हमें भी तो पता चले

दुर्जन सिंह .....तुम कब आई आवर ये तुम्हारी आदत नहीं जाने वाली न चुप चुप कर हमारी बात सुनने की

गीता देवी .......ऐसा कुछ नहीं है आपने बताया नहीं क्या क्या सोच रखा था आपने

दुर्जन सिंह ......हमने एक किलर को बुलाया था सूर्य को मरने के लिया

हमने सोचा था की परताप ठाकुर को हम सामने से चुनौती देंगे हमारी तरफ से वो किलर सूर्य को ख़तम कर देता पैर सब कुछ बर्बाद हो गया

गीता देवी ......तो क्या हुआ आपके भाई सकती है न वो क्या किसी से काम है

दुर्जन सिंह ......सकती तुम्हे कुछ दिन तक अपनी सब हरकते बंद करनी होगी आप केवल अभ्यास करेंगे आवर कुछ नहीं आपकी अय्याशी उत्सव तक बंद समजे आप हम आपके लिया किसी चीज़ का बंदोबस्त करते है

कुछ दिन तक सकती सिंह सब कुछ छोड़ केवल अभ्यास में लगा रहा तलवारबाज़ी में सकती सिंह भी बहुत माहिर खिलाडी था

वही दुर्जन सिंह किसी को कॉल कर कुछ मंगवाता है जिस से सकती सिंह सूर्य को मरने में सफल हो पाए

एक रूम में गायत्री आवर विधि ...

विधि ......गायत्री दीदी हम आपसे कुछ पूछे क्या

गायत्री ......तुम कबसे पूछने लगी विधि

विधि .......दीदी क्या आपको लगता है की सकती चाचा जी सूर्य ठाकुर से जीत पाएंगे

गायत्री ........तुम्हे क्या लगता है उन्हें देख कर

विधि .....आपको तो पता है मैं उन्हें बिलकुल भी पसंद नहीं करती हूँ

मुझे कोई फरक नहीं पड़ता उनके साथ क्या होता है या क्या होगा

गायत्री ......तुम क्या चाहती हो की कोण जीते

विधि ......चाहती तो हूँ की सक्तिपुर जीते पैर मुझे नहीं लगता की ऐसा होगा क्युकी सूर्य

सकती चाचा को जिन्दा नहीं छोड़ने वाला वो तो उन्हें ुशी दिन मर डालते

गायत्री ......अच्छा होता उस जैसे हवसी जानवर के साथ यही होना चाइये

जैसलमेर एयरपोर्ट ......12:30

शिव शालिनी अपनी बहन आवर जीजा के साथ बहार निकले एयरपोर्ट से तो सामने सूर्य खड़ा था विजय के साथ में जिसने देख शालिनी दो उड़ते हुए आ कर सूर्य को गले से लगा लिया

सूर्य ......कैसे हो माँ आप

शालिनी ......अब चैन मिला है तुम्हे देख लिया

शिव .....अरे भाई ये क्या बात हुए अपने बेटे से एक हफ्ते भी दूर नहीं रह सकती क्या

शालिनी ......आप क्या जानो एक माँ की तड़प को

शिव ......बीटा इनसे मिलो ये है आपकी बुआ सा मेनका

मेनका का रूप लावण्या किसी मेनका से काम नहीं था मेनका नाम इनपे बहुत फिट होता था

5,6हिघ्त 36,31,37 का जबरदस्त फिगर खूबसूरत नैन नकास जो किसी को भो अपनी आवर आकर्षित करने के लिया काफी है





सूर्य ने जब अपनी बुआ सा मेनका को देखा तो वो आगे बढ़ उनके पेअर चुने लगा पैर मेनका ने सूर्य को गले से लगा लिया कास कर

सूर्य को पहली बार ऐसा कुछ फील हुए अपने सीने की सूर्य की ाँसे तेज हो गई

सूर्य .....कैसे है बुआ सा दोनों दिदिया आवर फूफा सा कहा है

शिव .....अरे बरखुरदार जरा अपने पीछे भी देख लो

तुम्हारी बहने तुम्हारे पीछे हे कड़ी है

सूर्य जब पीछे पलटा तो दो खूबसूरत लड़किया कड़ी थी









सूर्य .....hello दी कैसे है आप

शालिनी ....सूर्य वो तुमसे बड़ी है हैं न

सूर्य दोनों के पेअर छू कर दोनों बहनो से गले मिलता है

अपने पास खड़े इंसान को देख सूर्य उनके पेअर चुने लगा तो उन्होंने भी सूर्य को गले से लगा ढेरो आशीर्वाद दे डेल

ये थे विजय ठाकुर सूर्य के फूफा जी ( विजय मां जी आवर विजय फूफा जी में कोई कन्फूसिओं न हो इस लिया फूफा जी को फूफा जी लिखूंगा )

पायल ठाकुर ....तो तुम हो हमारे छोटे भाई बहुत सुना है तुम्हारे बारे में ममी जी से

सूर्य .......फिर तो सच हे सुना होगा दीदी आप ने पैर आप दोनों में से पायल दी कोनसी है आवर प्रीति दी कोनसी है

प्रीति ठाकुर .....खुद हे पता कर लो

शालिनी .......ये सब तुम तीनो भाई बहन कार में करना चलो सब यहाँ से

फूफा जी ....कुछ भी कहो शिव बीटा तुम्हारा बहुत हे हैंडसम है अगर भाई नहीं होता तो पायल के लिया अभी सूर्य का हाथ मांग लेता

मेनका .......तो क्या हुआ है तो कजिन बरोथेर हे उस में तो ये सब चलता है हेहेहे क्यों शालिनी

शिव .....दीदी ये उस नहीं है इंडिया है

शालिनी ......आप एक कार आवर बुक कर लीजिये आराम रहेगा

सूर्य .....उसकी कोई जरूरत नहीं है माँ

शिव .....क्यों क्या हुआ सूर्य तुम्हारी माँ ठीक हे तो बोल रही है

सूर्य .....पापा मैंने बाइक लेनी है जो मुझे रस्ते में एक शोरूम में देखि थी

शिव ....बूत बीटा आपकी आगे अभी बाइक की नहीं हुए है

surya......aap चलो तो सही पापा बाइक बहुत अच्छी है

फूफा जी ......चल मेरे बेटे को मैं अपनी तरफ से बाइक गिफ्ट करता हूँ

शिव के मन करने के बावजूद फूफा जी सूर्य की बताई हुए शोरूम आ पहुंचे जहा सूर्य ने

यंहा की स्पोर्ट्स बाइक पसंद की थी ब्लैक कलर्स में





शिव .....बीटा बाइक तो अच्छी है पैर तुम्हे चलनी कहा आती है

विजय मां जी ......जीजा सा लेने दीजिये सूर्य को बाइक वो बहुत अच्छी बाइक चला लेता है

शिव शालिनी ....ये कब हुआ हमने तो कभी नहीं देखा

विजय ....क्युकी सूर्य पिछले कुछ दिन से मेरी बाइक से चलना षिक रहा था आवर यकीं कीजिये वो बहुत अच्छी बाइक चला लेता है

फूफा जी ने सूर्य को बाइक बीफ कर दी

कुछ हे देर में पीपर वर्क पूरा कर बाइक की चाबी सूर्य को थम्हा दी

प्रीति ने बाइक को तिलक किया जिसके नेग के रूप में प्रीति ने सूर्य से लॉन्ग ड्राइव की मांग की जो की सूर्य मन गया

पायल .....सबसे पहले बाइक पे सूर्य के साथ मैं बेठुंगी

शिव .....बीटा ध्यान से चलना

surya......aap लोग निकालो हम आते है

फूफा जी ......नहीं बीटा हेलमेट भी ले लेना चाइये उसके बाद हे तुम दोनों निकलोगे

सूर्य ने अपने पसंद के 2 ब्लैक हेलमेट ले कर सपना आवर खुद पहन बाइक ले ुढे दोनों हे

सबकी नजरो से देखते हे देखते गायब हो गए





फूफा जी ........सेल साहब आपका बीटा तो मेरी बेटी को ले ुधा हमारे सामने हे

शिव .......गिफ्ट भी तो आपने हे की थी जीजा सा अब आप हे पकड़ो उसको

1हर बाद सूर्य सूर्यगढ़ में हवेली पे था

सपना ......बहुत अच्छी बाइक चलते हो मुझे तो दर था की कही तुम मुझे गिरा न दो

सूर्य .....ऐसे कैसे गिरा देता आपको दीदी

सपना .....मुझे सपना कहो तो ज्यादा बेटर है सच कहु तो तुम्हे देख भाई वाली फिल्लिंग्स आई हे नहीं हम फ्रेंड्स बन सकते है

अब सूर्य क्या जबाब देता तो उसने भी है करदी

दोनों हे अंदर आये तो दादी जी की सबसे पहले नजर पड़ी

सूर्य के हेलमेट उतारते हे

दादी जी ......सूर्य बीटा तुम आ गए पैर ये किसकी बाइक है आवर ये साथ में कोण है क्या तुम एयरपोर्ट नहीं गए

सूर्य ...........दादी जी आराम से ये है सपना दीदी आवर बाइक मेरी है

फूफा जी ने गिफ्ट की है

अब तक सभी आ गए थे

कोमल .....भाई ये बाइक किसकी है बहुत खूबसूरत है

सूर्य .....कोमल दी ये मेरी बाइक है फूफा जी ने गिफ्ट की है

कोमल .....क्या सच में चलो फिर मुझे गुन्हा कर ले कर आओ

सूर्य .....चलो फिर बैठो पीछे दीदी आप अंदर चलिए पापा लोग भी आते होंगे

सूर्य कोमल को बैठा कर सूर्यगढ़ का चाकर लगा वापिस आ गया

उसके बाद राधा को बैठा कर निकल गया

फिर दादी जी के कवने पे रेखा जी को एक छोटा सा राउंड लगवाने के बाद जब घर पंहुचा तो शिव शालिनी फूफा जी लोग भी आ गए थे

सबने ने मिल कर के खाना खाया फिर अपने अपने बातो लग गए सूर्य इन सब से दूर हे रहना उचित समजा आवर जा कर के अपने रूम में आराम करने लगा

साम को लेट करीब 5 बजे कोमल ने हे आ कर के सूर्य को जगाया

सूर्य फ्रेश हो निचे चला गया

सब लोग बहुत बिजी लग रहे थे

दादा जी .....सूर्य बीटा आज तुम कही नहीं जाना आवर जल्दी हे सो जाना क्युकी सुबह जल्दी हे हमें महाकाली मंदिर पहुंचना है

सूर्य .......जी दादा जी आप चिंता न करे मैं टाइम से पहले हे उठ जाऊंगा

दादा जी ......आवर है बीटा मेरी बात याद है न तुम्हे की सकती सिंह से सौदान रहना क्युकी वो कोई न कोई चाल जरूर चलेगा हो सकता है वो तुम्हे कुछ ऐसा वैसे भी बोल दे जिस से तुम्हे गुस्सा आये पैर तुम अपना नियंत्रण मत खोना

सूर्य .....जी दादा जी मैं ध्यान रखूंगा

आपकी बात का भले हे मैं उसपे बहुत गुस्सा हूँ पैर मुझे अपने गुस्से को काबू में रखना होगा

दादा जी ......जाओ एक बार साध्वी जी मिल आओ उनका सड़ंदेश आया था वो तुमसे मिलना चाहती है

सूर्य वह से जंगल चला गया

साम 7 बजे के आस पास घर लौटा

सबने खाना पीना करके जल्दी हे सोने चल दिए शालिनी आवर रेखा दोनों हे सूर्य के साथ सोये थी

सूर्य तो सो गया पैर शालिनी आवर रेखा की आँखों में नींद कोशो दूर थी

उनको विश्वाश था सूर्य पे पैर एक माँ का दिल अपने बेटे की हमेशा फ़िक्र करता है फिर चाहे बीटा खुद बर्मनद का सबसे सकती साली इंसान हे क्यों न

ऐसा कुछ रेखा आवर शालिनी की साथ था पिछले 8,9 महीनो में रेखा ने सूर्य को हे अपना बीटा मन चुकी थी

उसके मन में भी सूर्य को ले कर चिंता थी

रात भर दोनों बस सूर्य को सोये हुए निहारती रही सुबह के करीब 3बजे जा कर दोनों की आँख लगी 2,घंटे हे हुए थे सोये की सूर्य अपने समय से उठ गया

सूर्य ने दोनों को जगाया

दोनों ने उठते हे सूर्य को प्यार किया आवर बहार चल दी खाना तो आज बनना था नहीं क्युकी बलि उत्सव के बाद हे घर की महिलाये जल या अन्न ग्रहण करती थी घर की महिलाये बलि चुनौती सविकरणे करने वाले की कम्भी उम्र आवर विजयकामना के लिया व्रत जो रखती थी

जैसे जैसे समय बिट रहा था घर की महिलाओ की बेचैनियां बढ़ती जा रही थी

सूर्य घर में पूजा आदि से निपट कर करीब 7 बजे त्यार हो अपने परिवार के साथ निकल गया मंदिर की आवर जहा हज़ारो की संख्या में सूर्यगढ़ सक्तिपुर सूरजगढ़ के साथ साथ दूर दूर से यहाँ हज़ारो की संख्या में लोग पहुंचे हुए थे बहुत ज्यादा पुलिस आवर आर्मी जवान भी सुरक्षा में लगे हुए थे

आर्मी इस लिया यहाँ बॉर्डर पास में है क्या पता कब क्या हो जाये

जैसे हे सूर्य महाकाली बलि मैदान में कार से अपने परिवार के साथ उतरा चारो तरफ से सूर्यगढ़ के जैकारे गूंज उठा साथ हे सूर्य आवर उसके परिवार के भी जैक अरे गूंजने लगे .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
 
स्फोरम परिवार में शामिल सब वरिटेरस आवर रीडर्स आवर उनकी फॅमिली को नई ईयर 2021 की ढेरों शुभकामनाएं

आप आवर आपके परिवार को इस्वर हमेशा खुश रखे सवास्थ्य सकुसल बनाये रखे

हैप्पी नई इयर्स दोस्तों 2021 में आपका स्वागत है

कल्याणसूर्य .राजस्थान इंडिया
 
अपडेट 68

सूर्य घर में पूजा आदि से निपट कर करीब 7 बजे त्यार हो अपने परिवार के साथ निकल गया मंदिर की आवर जहा हज़ारो की संख्या में सूर्यगढ़ सक्तिपुर सूरजगढ़ के साथ साथ दूर दूर से यहाँ हज़ारो की संख्या में लोग पहुंचे हुए थे बहुत ज्यादा पुलिस आवर आर्मी जवान भी सुरक्षा में लगे हुए थे

आर्मी इस लिया यहाँ बॉर्डर पास में है क्या पता कब क्या हो जाये

जैसे हे सूर्य बलि मैदान में कार से अपने परिवार के साथ उतरा चारो तरफ से सूर्यगढ़ के जैकारे गूंज उठा साथ हे सूर्य आवर उसके परिवार के भी जैक अरे गूंजने लगे .........

अब आगे .............

कुछ देर बाद हे सूरजगढ़ से भी सूर्य के नाना जी का परिवार उत्सव में पहुंच गया

उनका भी बहुत अच्छे से स्वागत हुआ

कुछ देर बाद सक्तिपुर से भी दुर्जन ठाकुर अपने भाई सकती सिंह को ले कर आ गया

जैसे हे सकती सिंह पंहुचा वैसे हे सक्तिपुर में लोगो का जोश भध गया चारो तरफ गोलिया की आवाज के साथ सक्तिपुर की जय जय कर होने लगी

दादा जी .....सूर्य पूजा का वक़्त हो चूका है बीटा

surya......ji दादा जी

सूर्य अपने दादा जी के साथ मंदिर की आवर भध गया जहा सकती सिंह पहले से हे खड़ा था

सकती सिंह बे सूर्य को अपनी लाल लाल आँखों से गुर कर देखा

दादा जी .......पंडित जी पूजा के लिया सूर्य ठाकुर त्यार है

दुर्जन सिंह .....सकती सिंह भी पूजा के लिया त्यार है पंडित जी

पंडित जी ......आप दोनों गर्भ गाढ़ा में का कर के अपने अपने वस्त्र बदल लीजिये

सकती आवर सूर्य परतिमको परनाम कर मंदिर में िस्थित गुप्त कक्ष में दोनों वस्त्र बदलने चल दिए दोनों को अलग अलग कक्ष दिया गया था

वही बलि सब अपने अपने परिवार के साथ जहा उनके लिया बैठने की वय्वस्ता की गई थी वह बेथ गए

किरण आवर सपना जब अपने परिवार के साथ यहाँ पहुंची थी तब जयस्व हे दोनों की नज़र सूर्य पे पड़ी दोनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था

प्रिय में दोनों के चेहरों की ख़ुशी को भाप लिया था पैर यहाँ का माहौल ऐसा नहीं था की यहाँ इस विषय पे कोई बात की जाये

सूर्य में अभी ताम सपना या किरण को नहीं देखा था

दादा जी आवर नाना जी का पूरा परिवार एक तरफ बैठा था आवर दुर्जन सिंह का परिवार दूसरी तरफ

kiran......badi मम्मी हे तो वही है जिनकी मैं......

प्रिय ......बेटी हम यहाँ से चलने पे बात करेंगे सो सूर्य है तुम्हारी हुआ सा शालिनी का बीटा

अब तक जो ख़ुशी सपना आवर किरण के चेहरे पे थी पल भर में हे गायब हो गई जब उनको पता चला की सूर्य से उसका रिस्ता क्या है

दुर्जन के खेमे में भी कुछ विचित्र हे हो रहा था

जहा शिव को देखा रुक्मणि गुस्से में गालिया से रही थी

वही गीता देवी शिव को देख कुछ आवर हे सपने देख रही थे आज शिव राजपुताना पोशाक में किसी जवान राजकुमार से काम नहीं लग रहा था

कुछ देर बाद दादा जी आवर दुर्जन दोनों हे अपने अपने स्थान पे आ बैठे

तभी विजय वह पंहुचा जो की आज अपनी यूनिफार्म में था साथ हे उनके मर संकर पाण्ड्य जी भी आये हुए थे

विजय .......बाउजी इनसे मिलिए हे है हमारे सीनियर्स ऑफर्स मर संकर पाण्ड्य हमारे बॉर्डर इन चार्ज

s.pandy जी ......नमस्कार ठाकुर परताप सिंह जी

दादा जी ......नमस्कार पाण्ड्य जी आप भी यहाँ पादरी है आप से मिल कर ख़ुशी हुए

पाण्ड्य ....जी आपसे तो मिलना हे था पैर आज यहाँ की ड्यूटी मिली है इस हे बहाने आपसे भी मुलाक़ात हो गई

वैसे सूर्य को दुर्जन से सौदान रहना चाइये आवर आप आवर आपके परिवार को भी विजय को मैं यही छोड़ रहा हूँ आपके साथ

कुछ देर बाद हे नगाड़ो के उद्घोष से सबका ध्यान उस तरफ गया जहा पे सूर्य आवर सकती मंदिर से बहार निकल आये

पंडित जी दोनों के ले कर के मैदान में आ पहुंचे

दोनों के मैदान में पहुंचे हे हे जोरो से शोर होने लगा सूर्य ठाकुर के नाम से जय करे गूंजने लगे क्युकी सूर्यगढ़ के सभी समर्थक का सपोर्ट सूर्यगढ़ की तरफ था जिसके चलते सकती सिंह का पारा हाई होने लगा

वही दुस्जारन सिंह ने अपने पत्नी के हाथो सकती सिंह के लिया पूजा लिया हुआ जल भिजवाया जिसमे उसने कुछ मिलाया था सबसे चुप कर

सूर्य के लिया पूजा लिया हुआ जल शालिनी ले कर मैदान में पहुंची जिसे सकती सिंह अपनी हवस भरी नजरो से देखने लगा सूर्य में सकती सिंह की हवसी नजरो को भाप लिया था

सूर्य ने अपनी माँ के हाथो जल ग्रहण किया

सकती सिंह ने गीता देवी के हाथो जल गाढ़ा किया

इसके पीछे का मंतव्य हे था की स्ट्रीट में माँ का अंश विद्मान रहता है

जैसे हे शालिनी सूर्य को जल पीला कर पलटी सकती सिंह हवस में चूर कुछ ऐसा बोल दिया की सूर्य के साथ साथ शालिनी को भी गुस्सा आ गया

सकती सिंह ......शालिनी तुम्हारे बेटे को मरने के बाद तुम मेरी हो जाओगी तुम्हे अपनी रखेल बना कर अपने पैरो के निचे रखूँगा

सकती सिंह की बात सुन सूर्य के गुस्से का बंद टूट गया पैर शालिनी ने सूर्य को रोक दिया

शालिनी .....सूर्य ान अपनी सकल मुझे तभी दिखाना जब तुम इस गलीच जनजानवर का सीस उसके धड़ से अलग कर उसके खून से मेरे पेअर ढोयेगा

अपने गुस्से को सपना हतियार बनाओ इस पापी के पाप से डर्टी को मुक्त कर दे

जाते जाते शालिनी ने ऐसा कुछ कर दिया के एक पल के लिया तो चारो तरफ सनता पसर गया

शालिनी सूर्य को समजा रही थी वही कुत्ते की आउच सकती सिंह न जाने किस नशे में चूर अपनी हवस भरी नजरो से शालिनी को टैक्स रहा था

तभी एक जोर के छटाक करके आवाज गुंजी जो की शालिनी ने सकती सिंह के गालो पे मारा था

कुछ देर के लिया तो सकती सिंह भी जड़वत हो गया

जितने भी लोग आये थे सब हैरान थे की हे क्या हुआ किसी स्त्री द्वारा इतने आदमियों के बिच अपने भाई को तपाद मरीन पे दुर्जन सिंह तिलमिला उठा पर कुछ कर नहीं पाया आवर हे अपमान का घूंट पि कर रह गया

पंडित जी .........सभी shan't हो जाये

जैसा की आप सब देख रहे है सक्तिपुर आवर सूर्यगड़ के दोनों योद्धा मैदान में आ चूका है जिन्होंने बलि चुनौती दो आवर सवीकार की

इस बलि उस्तव में दोनों योद्धा के अलावा सूरजगर से कोई आवर इनको चुनौती देना चाहता है तो अभी से सकता है एक बार युद्ध आरम्भ हुआ उसके बाद कोई भी भाग नहीं ले सकता है

इसमें कोई नियम कोई कानून नहीं है जब तक दोनों योद्धा में से कोई एक हार सवीकार नहीं कर लेटसहै या दोनों में से कोई एक मारा नहीं जाता है तब तक हे याद चलता रहेगा

दोनों योद्धा में से जो विजेता रहेगा वही चरणों में बलि अर्पित करेगा

पंडित जी कुछ देर प्रतीक्षा करते है की कोई आवर योद्धा तो भाग नहीं लेंस चाहता है

जब कोई सामने नहीं आया तो पंडित जी के इसारे पे दो पुजारियों ने सकती आवर सूर्य के सामने एक एक तलवार कर दी

सूर्य आवर सकती ने अपनी अपनी तलवारे मयान से निकल ली सकती अपनी तलवार के साथ करतब करने लगा

वही सूर्य ने अपनी तलवार को मस्तिक्ष से लगा कर परनाम किया आवर मैदान की मिटटी को अपने माथे पे तिलक के रूप में लगा गॉडेस को याद किया

पंडित जी द्वारा संख दौनी करते हे हे दोनों का योध आराम होने की घोषणा हो उठी

सूर्य एक बहार अपने परिवार की तरफ देखा

इसी का फायदा उठा सकती सिंह ने सूर्य की पीठ पे एक जोरदार वॉर कर दिया जिस से सूर्य के मुँह से एक चीख निकल गई

दादा जी ......सूयाआआ बीटा संभल कर

जैसे सूर्य के पीठ पीछे वॉर हुआ वैसे हे किरण की आँखों में आंसू बाह निकले

सूर्य कुढ़ के कार्ड को बर्दास्त कर सकती के साथ भीड़ गया सूर्य की नंगी पीठ पे से बहता हुआ लहू उसके कमर से निचे बन्दे सफ़ेद धोती को लाल करने लगा

सूर्य आवर सकती की तलवारे आपस में टकराने लगी

कबि सूर्य भरी पड़ता तो कभी सकती सिंह

ऐसे हे हे योध चल रहा था वही साध्वी जी जो ध्यान में बेथ यहाँ जो कुछ हाउ रहा था वो देख रही थी उन्होंने अपने कुटिया से कुछ अपने झोले में दाल वह से निकल गयी मैदान के लिया

सकती आवर वयोम यहाँ पहले से मौजूद थे

सकती .......तुमने बहुत बड़ी गलती की है सूर्य मुझे चुनौती देना कर के आज तुम्हे मैं किन्दा नहीं जाने दूंगा तुम्हारे पिता ने मेरे बेस भाई को मारा था

आज मैं तुम्हे मार कर सपना बदला पूरा करुगा

आवर फॉर तुम्हारे खंडन की एक एक औरत मेरे निचे होगी

सूर्य ........तुमने बहुत से जिंदियो को तबाह किया है पैर आज के बाद तुम ऐसा कुछ नहीं कर पाओगी तुमने अपने जीवन की आखरी गलती कर दी मैं तो तुम्हे इस हे दिन मर देता पैर किस्मत में कुछ दिन आवर जीवित रहना लिखा था

जैसे हे सकती का ध्यान भटका सूर्य ने सकती के सीने पे वॉर कर दिया जब तक सकती संभालता वॉर हो चूका था जिस से सकती के मुँह से एक दर्दभरी चीख गूंज उठी

इस के साथ सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ की जनता सूर्य की जय जय कर करने लगी

सूर्य .....इतनी भी जल्दी तुम्हे मरने वाला नहीं हूँ मैं

सकती सिंह कुढ़ के दर्द को पिटे हुए अपने घाव पे मैदान की मिटटी लगा कर फॉर एक बार सूर्य पे वॉर करने लगा ान सकती के वॉर में थोड़ी तेजी आ गई थी

जैसे हे सकती ने सूर्य के पैरो पे वॉर किया

सूर्य ने जम्प कर के खुद को वॉर से बचाया आवर एक प्रहार पेअर से सकती के सीने से बहते हुए घाव के किया जिस से सकती पीछे की तरफ गुर गया आवर उसके हाथ से तलवार छिटक कर दूर घिर गई

सूर्य ने आगे भध अपने तलवार सकती के गर्दन पे लगा दी सबको लगा की सूर्य सकती को मर डालेगा पैर सूर्य ने तो कुछ आवर हे सोच रहा था

सूर्य ने हलके से तलवार को गुहा कर सकती का एक कान काट दिया

आवर अपनी तलवार से सकती की तलवार उसकी तरफ खिसका दी

अपनी कान कटे जाने पे सकती सिंह दर्द से तिलमिला उठा

सूर्य दहाड़ मैट हुए

सूर्य ......उठ ठाकुर इतने जल्दी हे हार मन लिया जहा गयी तेरी मर्दानगी मैंने तो सुना है तुम्हारी सक्तिपुर का सबसे बड़ा मर्द बना फिरता है

क्या बेबश औरतो पे हे अपनी मर्दानगी की दिखानी आती है

नामर्द कही का

सूर्य की दहाड़ सुन जहा सकती सिंह आवर उसके परिवार द्वारा सताए हुए लोगो को ख़ुशी हुए वही दुर्जन सिंह अंदर हे अंदर सूर्य के कहे सब्दो से जल रहा था किसी जवालामुखी के जैसे

सकती सिंह उठा खड़ा हुआ इस वक़्त सकती सिंह की आँखों में आगरे बरष रहे थे मनो उसने कुछ करने की दृढ़ निश्चय कर लिया हो

एक बाद फॉर दोनों की से चिंगारिया निकलने लगी

कबि सूर्य सकती के वॉर से बचता तो कभी सकती सूर्य के वॉर से बचता

कभी सकती सूर्य की तलवार को थम सूर्य के सीने पे अपने पैरो से वॉर करता एक पल के लिया सकती का बैलेंस बिगड़ा जिस से वो निचे गिर गया सूर्य जैसे उसके नजदीक पंहुचा

सकती ने अपनी कायरता का एक बार फिर पर्दशन किया

सकती सिंह ने सूर्य की आँखों में धूल ( मिटटी ) झोंक दी

जिस से सूर्य को कुछ भी दिखाई नहीं दिया

सब जोरो से छिलने लगे यस देखा है देखा है पैर यहाँ कोई नियम कोई कानून नहीं थे जिसके चलते इन्हे कोई भी रोक नहीं सकता था

सूर्य संभालता उस से पहले हे सूर्य के दोनों बाजुओं पे सकती सिंह ने वॉर कर दिया

जिस से सूर्य को बेहनता दर्द हुआ आवर आवर उसके मुँह से चीखे निकल ने लगी

सूर्य का ऐसा खुद बहता देखा नानी जी दादी जी दोनों ममी बुआ बहने सब की आँखों नाम थी सब सूर्य को हे देख रहे थे सिवाय शालिनी के शालिनी सबसे विपरीत सूर्य की तरफ पीठ कर बैठे अपने बेटे की चीख पे आंसू बहा रही थी

आंसू तो दर्द से सूर्य की आँखों में भी निकल रहे थे

जिस से सूर्य के आँखों में घिरी हुए मिटटी कुछ हद तक निकल जाने से सूर्य अपनी आँखे खोल प् रहा था

तभी सूर्य को साध्वी जी की आवाज अपनी मस्तिक्ष में गूंजती हुए सुनाई दी

साध्वी जी ......सूर्य अपने मन को शांत कर अपने ध्यान को एक जगह केंद्रित कर युयदह करो

साध्वी जी की बात सुनते हे सुया अपनी आँखे बंद कर एक जहा खड़ा हो गया सूर्य को ऐसा खड़ा देख सब लोग shan't हो गया की सूर्य ऐसे क्यों रुक गया

सकती सिंह अपनी तलवार ले सूर्य की तरफ डिग्री डिग्री भध रहा था

वही सूर्य सकती सिंह केवटीज चलती सांसो को बहुत ध्यान से शूम अपनी तलवार पे अपने हाथ की मजबूती दिखते हुए जोर से काश लिया सकती सिंह गम गम कर देख रहा था की हे सूर्य ऐसा क्यों खड़ा है

जैसे हे सकती ने सूर्य के पीठ पीछे से सूर्य की कमर में वॉर करने की कोशिश की सूर्य तेजी से वह हैट गया आवर सकती सिंह के बगल में कुछ दुरी पे खड़ा जो गया जैसे हे सकती सिंह ने अपनी गर्दन गुमाई सकती सिंह का सर उसके सरीर से अलग हो निचे आ गिरा सकती सिंह का सरीर कुछ देर तो खड़ा ीदार उदार दौड़ता रहा फिर निचे गिर कर तड़पने लगा

किसी के मुँह से आवाज तक नहीं निकली

कुछ सुनाई से रहा था तो सो थी लोगो की तेज चलती दिल की धड़कन की आवाज

चलिए थोड़ा सलौली देखते है की सकती सिंह के साथ हुआ क्या

जब सूर्य को साध्वी जी की आवाज सुनी तो सूर्य खड़ा खड़ा हे अपने मन को शांत कर सब कुछ बुला कर अपने ध्यान को केंद्रित करने लगा जिस से बलि सब से सूर्य का ध्यान हैट गया आवर

सूर्य ने अपने सुनने की सकती पे ध्यान दिया जिस से सकती सिंह के धड़कन तक सूर्य को साफ साफ सुनहि देने लगी

जैसे हे सकती सिंह सूर्य के कमर में पीछे से तलवार घुसने के लिया वॉर किया सूर्य ने पलट कर अपने तलवार से बहुत तेजी से वॉर सकती सिंह की गर्दन पे किया तलवार सकती सिंह के गर्दन को चीरते हुए निकल गयी

सूर्य तेजी से हैट कर सकती सिंह के बगल में कुछ दुरी पे का खड़ा हुआ

जब सकती सिंह को सामने सूर्य न दिखा आवर जैसे हे गर्दन गुमस कर सूर्य को देखा उसकी गर्दन उसके सरीर से अलग हो निचे गिर गई

सकती सिंह का सरीर वही मैदान में तड़पते हुए ीदार उदार दौड़ने लगा दिशाहीन हो कर

जब सबको सकती सिंह के मरे जाने का अहसाँस हुआ तो सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ की जनता ने सो शोर मचाया की दुर्जन सिंह जो किसी सदमे जैसे हालत में चला गया था सो तेजी से सकती सिंह के सरीर की तरफ लपका

दुर्जन सिंह जैसा भी था पैर अपने भाई पे जान छिड़कता था भले हे वो दिखता नहीं था

दुर्जन सिंह अपने भाई सकती के सरीर से निपट लिपट कर रोने लगा

पंडित Ji.......bali उत्सव के विजेता है सूर्यगढ़ के ठाकुर सूर्य शिव ठाकुर है जिन्होंने सकती सिंह का वध कर इस बलि उत्सव के विजेता बने है

जैसे हे पंडित जी ने घोसना की वैसे हे शालिनिशालिनी तेजी से दौड़ते हुए सूर्य के सीने से लग कर सूर्य का मिटटी से सना चेहरा थम चूमने लगे

शालिनी का पूरा चेहरा आंसुओ से भीगा हुआ था सूर्य अपनी माँ शालिनी के आंसू पूछ कर उनके माथे को चुम लेता है आवर अपनी माँ से अलग हो सकती के सर को उठा कर अपनी माँ शालिनी के पैरो में रख देता है

शालिनी सकती सिंह के खून से साणे चेहरे को देख अपने पेअर पीछे कर लेती है

दुर्जन सिंह अपने भाई के सर को शालिनी के पैरो में देख अपने अंदर अभी तक का छुपा हुआ गुस्सा किसी जवालामुखी के रूप में फैट पड़ा आवर उसने वो गलती कर दी जो उसके जीवन की अन्य्तिमे गलती साबित होने वाली थे

दुर्जन सिंह ने अपने कमर में छुपी गन निकल कर शालिनी पे गोलिया चली दी जो सूर्य ने देख लिया एक गोली शालिनी की बाजु को चीरते हुए निकल गई वही दूसरी गोली सूर्य के बिच में आ जाने से सूर्य के कंडे में लगी

शालिनी को जैसे हे गोली लगी शालिनी के मुँह से चीख निकली आवर उसकी आँखों के सामने अंदर आ चलने लगा वही अपनी माँ की हालत देख सूर्य ने बिना कुछ कहे तलवार सीधा दुर्जन सिंह के दिल को चीरते हुए पीठ से बहार निकल गई

कोई सूर्य को रोक पता उस से पहले हे सूर्य ने तलवार वापिस निकल दुर्जन की गर्दन पे भरपूर प्रहार किया

गीता देवी ........सूर्या नाहीइइइइइइ

पर तब तक देर हो चुकी थी सूर्य दुर्जन सिंह की गर्दन ुधा चूका था

सूर्य ने तलवार फेंक अपनी माँ को संभाला जिसके शिव आवर देखा ने थम रखा था

सूर्य .....माँ आँखे खोलो प्लेसेस माँ आपको कुछ नहीं होगा माँ प्लेसेस आँखे खोलिये

साध्वी जी बिच में आये हुए

सूर्य के कंडे पे हाथ रखती है

सूर्य ......देखिये न माँ को क्या हुआ है

साध्वी जी .....चिंता न करो सूर्य इन्हे कुछ नहीं होगा शिव शालिनी को मंदिर में ले चलो

शिव जल्दी से शालिनी को उठाने लगा पैर बिच में हे सूर्य अपनी माँ को उठा शालिनी को मंदिर की तरफ दौड़ गया

साध्वी जी ने माँ महाकाली के चरणों में राखी क़तर को उठा अग्नि कुंड से गरम कर सबको बहार भेज शालिनी का ब्लाउज निकल उसके बाजु से गोली निकल अपने झोले में से कुछ ॉडी का लेप निकल कर शालिनी की बाजु में पट्टी बंद दिया फिर उन्हों को होश में ले कर आई सपने बेटे को अपनी आँखों के सामने देख शालिनी अपने दर्द को भुला कर अपने बेटे के गले से लग गई

सूर्य ......माँ आप थिंक है न आपके कुछ हुआ तो नहीं

शालिनी ....बीटा मैं थिंक हूँ तुम ठीक जो न बीटा

साध्वी जी ......सूर्य तुम्हारी गोली निकालनी बाकि है

साध्वी जी की बात सुन शालिनी को पता चला की सूर्य को गोली लगी है

शालिनी जल्दी से सूर्य से अलग जो देखने लगी की कहा गोली लगी है

जहा गोलिया लगी वह से बहते हुए खून को देख शालिनी फुट फुट कर रोने लगी

साध्वी जी ने सूर्य की गोली निकल दी आवर जहा जहा घाव लगे थे वह ॉडी का लेप कर दिया

कुछ देर बाद सूर्य आवर शालिनी साध्वी जी के साथ बहार निकले जहा बलि परिवार वाले भी खड़े थे

तभी सूर्य की नज़र किरण पे पड़ी अच्चानक से सूर्य के दिल की धड़कन भाड़ गई आवर उसके मुँह से निकल गया

surya.......sweetyyyy

सबको बड़ा जतका लगा खासतौर पे जोरावर मां की फॅमिली को ( दोनों ममी आवर जोरावर मां के अलावा किसी ने किरण द्वारा बनाई पेंटिंग नहीं देलखि थी सूर्य की स्वीटी भी दोनों ममी आवर सपना हे पुअकृति है )

रेखा .......नॉन स्वीटी बीटा तुम किसी बात कर रहे हो

सूर्य ......कुछ नहीं मम्मी है ऐसे हे मुँह से निकल गया

कुछ देर बात करने के बाद पंडित जी ने सूर्य को बलि देने को कहा

जब सूर्य बलि स्थान पे पंहुचा तो वह भैंस के नवजात बछड़े को बन्दे हुए पाया पास में उसकी एक भैंस भी बंदी हुए थे

पंडित जी .......ठाकुर जी अपनी तलवरव से इस बछड़े की आपको माँ महाकाली के चरणों में बलि चांदनी है

जैसे हे सूर्य तलवार ले बछड़े के पास पंहुचा

उदार भैंस जोरो से रम्भाने लगी

सूर्य ने बछड़े पे वॉर न कर के जिस रस्सी से बंद रखा था उसको हे काट दिया

बछड़ा आज़ाद होते हे दौड़ता हुआ भेष के पास का पंहुचा आवर ढूढ पिने लगा

पंडित जी .....हे क्या किया सूर्य ठाकुर हे तो अपसकुन हो जायेगा

सूर्य ......किसी निर्दोष की हत्या कर कैसे सुबह हो सकता है

पंडित जी ..... प्रतिमा पे खून हे अर्पित होता अगर खून अर्पित नहीं किया तो माँ क्रोधित जो जाएगी

सूर्य ने अपनी तलवार से अपने हाथ को हल्का आ काट कर के प्रतिमा की खुलू मुँह आवर बहार निकली लाल जिव्हा ( जुबान ) पे अपना खून गिराने लगा

दादा जी ......शाबाश मेरे शेर तुमने आज ठाकुर खंडन का नाम रोशन कर दिया तुमने बलि का असली मतलब समजा दिया सबको बलि किसी निर्दोष जिव की नहीं बल्कि पापियों की दी जाती है

आज आवर अभी से मैं परताप सिंह ठाकुर सूर्य ठाकुर को सूर्यगढ़ का वरिष्ठ घोषित करता हूँ

नाना जी ......सही कहा मेरे यार ने

जोरावर तुम भी कुछ कहना चाहते हो अपने लादले के लिया

जोरावर .....जी पिता जी मैं भी यही चाहता हूँ के सूर्य को सूरजगढ़ का वरिष्ठ घोषित किया जाये

नाना जी ने सूर्य को सूरजगढ़ का वरिष्ठ घोषित कर्मा चाहा पैर दादा जी ने नाना कर दिया हे कब कर की वो पहले सूरजगढ़ में इस विषय पे बाकि सब से चर्चा करे उसके बाद हे कोई निर्णय ले

कुछ देर बाद सब सूर्यगढ़ की आवर निकल गए

सक्तिपुर के लोगो ने सकती सिंह आवर दुर्जन सिंह का सरीर सक्तिपुर के लाइट ले कर निकल गए थे ..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........

हैप्पी नई एसर्स दोस्तों .......
 
अपडेट. 69

जोरावर .....जी पिता जी मैं भी यही चाहता हूँ के सूर्य को सूरजगढ़ का वरिष्ठ घोषित किया जाये

नाना जी ने सूर्य को सूरजगढ़ का वरिष्ठ घोषित कर्मा चाहा पैर दादा जी ने नाना कर दिया हे कब कर की वो पहले सूरजगढ़ में इस विषय पे बाकि सब से चर्चा करे उसके बाद हे कोई निर्णय ले

कुछ देर बाद सब सूर्यगढ़ की आवर निकल गए

सक्तिपुर के लोगो ने सकती सिंह आवर दुर्जन सिंह का सरीर सक्तिपुर के लाइट ले कर निकल गए थे ..........

अब आगे .........

सूर्य फॅमिली सूर्यगढ़ पहुंच चुके थे

सूर्य ने सबको अपने हाथो से जल पीला कर उनके व्रत को पूरा किया जो उन्होंने सूर्य के जीवन के लिया रांझा था सुबह से अन्न आवर जल का त्याग कर के

दोनों मामियो ने भी सूर्य के लिया वर्ग रखा था

सूर्य अपने माँ के साथ लेता हुआ था मर्दो को छोड़ बाकि सब इस वक़्त शालिनी के रूम में हे थे

रेखा ......सूर्य बीटा तुम ठीक तो हो न तुम्हे दर्द तो नहीं है न

सूर्य ......मम्मी मैं ठीक हूँ आप चिंता न कीजिये

माँ आप तो ठीक है न मेरे होते हुए आप घायल हो गयी मुझे माफ करना माँ

शालिनी ......नहीं बीटा तू तो मेरे प्यारा बीटा है आज तुमने अपने माँ को वो ख़ुशी दी है जो सब्दो में बया नहीं की जा सकती

तुमने मेरे सब्दो का मान रख उस पापी की सीस मेरे पैरो में ला रखा मुझे तुमपे बहुत गर्व है बीटा

प्रिय .....सच कहा शालू आखिर बीटा किसका है

सूर्य .......आप हे बता दीजिये बड़ी ममी जी ...हहहह

किसी को कुछ समाज नहीं आया की सूर्य ने क्या बोलै है

सन्ति ममी ......सच कहा आपने सूर्य बीटा तुम किसी एक के बेटे नहीं हो

तुम हम सब के लिया उतने हे हमारे बेटे हो जितने की शालू के

सूर्य .....वाओ क्या बात है छोटी मां जी आप बोलती भी है

मुझे तो लगा आप बोलती नहीं है

प्रिय ......रुक तू अपनी हे ममी को चढ़ता है

ये जो तेरी ममी है न इसका जिसने भी नाम रखा सन्ति बहुत सही रखा ये हमेशा शांत हे रहती है

सूर्य ......सॉरी ममी जी ुम्मम्हा आपको बुरा लगा हो तो

सूर्य सॉरी बोलते हुए सबके सामने अपनी ममी के फलो पे किश कर देता है अब सूर्य शालिनी आवर मेनका के लिया तो ये बहुत नार्मल

था पैर बाकियो के मुँह खुल गए

वही सन्ति ममी सरम से पास बैठी रेखा मम्मी से चिपक कर सरमने लगी

मेनका बुआ ......क्या हुआ तुम सब ऐसे क्यों मुँह फाडे देख रहे हो मुँह बंद करो वार्ना कोई मक्खी गुस्स जाएगी

ये सब नार्मल है अब एक बीटा अपने माँ को प्यार भी नै जाता सकता क्या

शालिनी ......दीदी ये इंडिया है यहाँ पे बस पेअर चुना हे प्यार मन जाता है ज्यादा से ज्यादा गले लग्न

मेनका बुआ ......मैं कोई अलीबाग से आयी हूँ क्या

मेनका बुआ सूर्य के सर को अपनी गॉड में रख कर लेटने को कहती है

आवर फिर उसके माथे पे आवर हलके से सबके सामने हे अपने होंठ 2,3 सेकंड के लिया सूर्य के होंटो से चिपका देती है

मेनका बुआ .....ये मेरे असली ठाकुर की जीत का इनाम

दादी जी ......तू तो बहुत बिगड़ गई है मेनका मेरे पोते को भी बिगड़ने पे आ गई है

मेनका ...... माँ सा मैंने सुना है पापा मेरी छोटी बहन लेन की तयारी में है हाहाहा

क्या ये सच है

दादी जी रेखा की आवर देखने लगी

रेखा अपनी सास को इस तरह देख अपनी तरफ देख आँखे चीरने लगी

मेनका .....हाहाहा इसका मतलब पापा जी तयारी में है

सूर्य कब मेनका की गॉड में सोया उसको भी पता नहीं चला

बहार बहुत से लोग दादा जी के साथ बैठे थे

जिनमे से कुछ सूर्यगढ़ के थे तो कुछ सूरजगढ़ के थे

नाना जी ........मैं आप सबके सामने एक बात कहना चाहता हूँ

किसी को कोई एतराज हो तो अभी हे बोल देना

दादा जी .......सही कहा किसी को कोई भी आपत्ति हो तो वह अभी बे खौफ हो कर बोल दे

नाना जी ........मेरे दो बेटे है पैर उनका कोई बे बीटा नहीं है इस लिया मैंने अगली पीढ़ी से अपना वरिष्ठ सूर्य को चुना है सूर्यगढ़ का अगर आप में से किसी को मेरी बात से एतराज हो तो वह अभी हे बोल दे

क्युकी कुछ दिनों बाद सूर्य के जन्मदिन पे मैं सूरजगढ़ का वरिष्ठ घोषित करने वाला हूँ

कुछ देर तक सब खुसर फुसर करते रहे कुछ थे जो सायद नहीं चाहते की कोई आवर वरिष्ठ बने पैर सबने सूर्य का वो खूंखार रूप देखा था तो न चाहते हुए भी सूर्य को ले कर कोई कुछ नहीं बोलै सबने सूर्य को वरिष्ठ के रूप में चुना जाना सविकरणे कर लिया

सभी log.......rana सा आप सूरजगढ़ के ठाकुर है ये आपका निजी फैसला भी होता तो हमें कोई एतराज नहीं था

अगर आप सूर्य ठाकुर को अपना वरिष्ठ चुब्ते है तो हमें कोई आपत्ति नहीं पैर आने वाले चुनाव में आप के परिवार से किसी को राजनीती में आना होगा

अब अगर ये कहा जाये तो गलत नहीं होगा की सूर्य ठाकुर को वरिष्ठ चुनते हे सूर्यगढ़ सूरजगढ़ भले हे कहने को दो सहर है पैर वो सामरिक टूर पे एक हो जायेगा

तो आपको राजनीती में आने से किसी को कोई प्रोब्लेम्स भी नहीं होगी आवर साथ हे साथ दोनों कस्बो का विकाश भी होगा

दादा जी .......ये आपने बिलकुल ठीक कहा आवर मेरे ख्याल से इसके लिए जोरावर बीटा बिलकुल उचित कैंडिडेट साबित होगा क्यों जोरावर बीटा

जोरावर सिंह ......बाउजी मुझे कोई एक्सपीरियंस नहीं है राजनीती का

दादा जी ......कोई नहीं तुम दीमक से तेज आवर मन से शांत इंसान हो बीटा तुम्हे ज्यादा वक़्त भी नहीं लगेगा

नाना जी .....है सही कहा राजनीती में ह सफल हो सकता है जो दीमक से तेज भावनाओ से शांत

जोरावर सिंह ......ठीक है मैं त्यार हूँ

महेंद्र .....ये हुए न बात भाई

आवर वैसे भी अब शिव ने भी यही पे अपना बिज़नेस सिफत कर लिया है

जरूरत पड़ी तो मैं भी हूँ तुम्हारे साथ

इतनी देर से खामोश बैठा शिव जब अपना नाम सुनता है तब उसकी तन्द्रा भांग हुए

दादा जी .........कहा खोये हो शिव बीटा तुम कब से देख रहा हूँ

शिव ......पापा जी क्या हमें सक्तिपुर नहीं जाना चाइये मन की दुर्जन से हमारी दुश्मनी थी पैर दुश्मनी इंसान के जीवित रहने तक हे होती है उसके मरने के बाद कैसे दुश्मनी

दादा जी ......बीटा बात तो तुम्हारी ठीक है हमें भी लगता है की वह जाना चाइये पैर आज नहीं बीटा

क्युकी अगर आज हम गए तो कोई भी गुस्से में गलत कर बैठेगा जो किसी के लिया ठीक नहीं

नाना जी .......है बीटा क्युकी उनके घर मुख्या की मरतु हुए है ऐसे में उनकी मानसिक स्थति इस वक़्त ठीक नहीं

तभी वह विजय मां जी आवर पाण्ड्य जी अपने कुछ जवानो के साथ पहुंच जो की बॉर्डर के लिया निकलने से पहले एक बार सूर्य से मिलना चाहते थे

आज जो कुछ भी हुआ था उसे देख पाण्ड्य जी सूर्य से बहुत प्रभावित हुए थे

दादा जी ......आये आये पाण्ड्य जी विजय बीटा आओ बैठो

सभी एक दूसरे को परनाम कर बेथ जाते है

विजय .....बाउजी पाण्ड्य सर सूर्य से मिलने आये है ये सब बॉर्डर के लिया लौट रहे थे

दादा जी .....माफ कीजिये मैं अभी खबर करता हूँ सूर्य को

पाण्ड्य जी ......उसकी आव्सय्कता नहीं है क्युकी सूर्य hi गायक हुआ है अगर आप इजाजत दे तो मैं सूर्य को उसके रूम में हे मिल लेता हूँ

दादा जी ......क्यों नहीं शिव बीटा पाण्ड्य जी को साथ ले जाओ

शिव .......आइये सर आप को मैं ले चलता हूँ

शिव पाण्ड्य जी को सूर्य के रूम में ले कर जाता है पैर वो वह नहीं था

तभी दादी जी सामने से आती दिखी

शिव ......माँ सा सूर्य कहा है

दादी जी ......बीटा वो आवर शालिनी बेटी दोनों आराम कर रहे है क्या हुआ कुछ काम था

शिव ......जी माँ सा ये पाण्ड्य जी है ब्सफ़ से ये सूर्य से मिलना चाहते है

दादी जी .....रुको मैं देखती हूँ

दादी जी शालिनी के रूम में गई जहा सूर्य अपने माँ के सीने से चिपका हुआ था सूर्य उठ चूका था साथ में सपना किरण आवर पायल थी

दादी जी .....बीटा सूर्य तुमसे मिलने के लिया कोई ब्सफ़ से पाण्ड्य जी आये है

सूर्य ......क्या वो यहाँ पे साये है आप चलिए मैं आता हूँ

दादी जी .....चुप कर के लेता रह इतनी चौथ लगी है फिर भी एक मघा नहीं टिकता है

वो यही आ रहे है शालिनी बेटी तुम थोड़ा आराम से बेथ जाओ

शालिनी .....जी माँ सा

कुछ हे मिंट में पाण्ड्य जी सूर्य के पास बैठे थे

सूर्य ......सर आप यहाँ पे मुझे तो लगा आप वापिस लौट गए है

पाण्ड्य जी ......तुमसे मिले बिना कैसे लौट जाता यंग में तुमसे तो मिलना हे था

आवर अगर तुम्हे एतराज न हो तो मुझे सर की बजाय मां जी कहोगे तो मुझे अच्छा लगेगा ऐसे हे सही पैर मुझे भी भाई बोलने वाली एक बहन तो मिलेगी

इतना कहते कहते पाण्ड्य जी की आँखों में आंसू आने लगे

दादी जी .......ऐसा नहीं सोचते बीटा रिश्ते दिल से जुड़े होते है दिल से देखो तो तुम्हे हर औरत में माँ बहन बेटी नज़र आएगी

फिर तुम ऐसा कैसे सोच सकते हो

शालिनी जी ने अपने साड़ी का एक चोर फाड् कर पाण्ड्य से बिना पूछे उनकी कलाई पे बंद दिया

शालिनी ......आज से आप को मैं दिल से अपने बड़े भाई का दर्जा देती है भाई सा फिर कभी ये न सोचना की आपकी कोई बहन नहीं है आज से आप मेरे लिया जोरावर भाई सा के सामान है आज से तीन नहीं 4 भाई है मेरे आवर आप उन सबसे बड़े भाई

विजय ......सच कहा दीदी आपने क्यों पाण्ड्य भाई सा

पाण्ड्य जी ......विजय तुम भूल रहे हो मैं तुम्हारी सीनियर्स अफसर हूँ

विजय ......आप भूल रहे है मैं इस वक़्त आपका छोटा भाई हूँ क्यों दीदी सही कहा न मैंने

शालिनी .....हेहेहे सही कहा छोटे

पाण्ड्य जी .........तुम दांया हो शालिनी ने बहन आज तुमने मेरे बर्षो पहले खोई हुए बहन लौटा दी आज से ये देवीशंकर पाण्ड्य अपनी बहन की एक आवाज पे अपनी जान तक न्योछावर कर देगा पैर मेरी बहन के परिवार पे कभी आंच तक नहीं आने देगा

शालिनी ......ये क्या बात हुए भाई सा आप भी अब मेरा परिवार हो तो ऐसे मरने मरने के बात न करे आप आवर अपने भांजे से बात कर लीजिये

सूर्य .......मतलब अब मुझे एक आवर मां जी मिल गए है वाओ

शिव ......क्यों सेल साहब अब जवाब दीजिये

पाण्ड्य जी ......बिलकुल जमाई सा आज से सूर्य तुम हमें मां जी हे कहोगे हमें भी ख़ुशी होगी तुम्हारे मुँह से मां जी सुन कर

अब तुम कैसे हो बीटा

सूर्य .......बिलकुल ठीक मां जी बस अब आपसे मिलने में थोड़ा आवर टाइम लगेगा जब तक घाव ठीक नहीं हो जाते है

पाण्ड्य जी .......कोई जल्दी नहीं है बीटा तुम पूरी तरह ठीक हो जाओ उसके बाद मैं खुद तुम्हे लेने आऊंगा

ज्यादा तक्लिप तो नहीं है न तुम्हे

सूर्य .....नहीं मां जी मैं बिलकुल ठीक है बस हल्का हल्का दर्द है आवर कुछ नहीं

कुछ देर बाद पाण्ड्य जी आवर विजय ब्सफ़ के लिया लौट गए .....

सक्तिपुर .........

दुर्जन आवर सकती सिंह के मेरिट सरीर को सक्तिपुर ले कर आ चुके थे

पुरे कसबे में सनता पसरा हुआ था

दुर्जन सिंह के हवेली में मातम पसरा हुआ था

भले हे दुर्जन सिंह एक गठिया किसम का इंसान था इंसान कहना गलत होगा

पैर वो अपने परिवार के लिया हमेशा खड़ा रखता था

हवेली के चौक में दुर्जन सिंह आवर सकती सिंह को का पार्टिव सरीर रखा हुआ था महिलाये बिलाप कर रहे थे

वही गायत्री बार बार बेहोश हो रहे थी

क्युकी गायत्री दुर्जन सिंह से बहुत प्यार करती थी दुर्जन सिंह गायत्री के नजरो में अच्छा इंसान भले हे न था पैर एक अच्छा पिता हमेशा रहा उसने कभी भी दुस्यंत आवर अपने बच्चो के बिच भेद भाव नहीं आने दिया

रुक्मणि किसी मुर्दा सरीर के जैसे बैठी सकती सिंह को निहार रही थी रुकमणी अपना सुहाग तो बहुत पहले हे खो चुकी थी पैर आज उसने अपना सहारा भी खो दिया जो की सकती सिंह के रूप में था

आज हवेली की पूरी जिम्मेदारी गीता देवी पे आ चुकी थी

पैर वो तो अपने हे गम में सब्जी हुए थे

कुछ बुजर्गो ने अंतिम संस्कार की तयारिया आराम कर दी ताकि उचित समय पे अंतिम संस्कार किया जा सके

राणा .......छोटे ठाकुर ( अजय रुक्मणि का बीटा ) हमें अंतिम संस्कार की तयारी कर ली है

आपको अपने चाचा आवर बड़े ठाकुर को अनितम स्नान करवाना होगा विक्रम सिंह इस हालत में नहीं होगा

अजय ......चाचा जी हम से नहीं हो पायेगा ये सब हमें माफ करे

राणा .......आपको इस वक़्त अपने परिवार को संभालना होगा जरा अपनी माँ सा की हालत देखो अपनी बड़ी माँ सा को अपनी बहनो को देखो

कुछ देर समजने के बाद अजय आगे बढ़ दुर्जन आवर सकती को अंतिम स्नान करवाता है

दुर्जन आवर सकती की गर्दन उनके सरीर से डॉक्टर ने फिर से जोड़ दी थे टांके लगा कर के

कुछ बुजर्गो द्वारा समाये जाने पे विक्रम सिंह अपने बड़े होम का फ़र्ज़ निभा कर सब किर्यो को पूर्ण करने में लग गया

साम 5 बजे के लगभग दुर्जन सिंह आवर सकती सिंह को गमहीन माहौल में अंतिम यात्रा आराम की जो सक्तिपुर से होते हुए सक्तिपुर के बहरी चोर पे मौजूद मसान तक लाया गया

पंडित जी के कहे अनुसार दुर्जन सिंह को मुखाग्नि विक्रम सिंह ने

सकती सिंह को अजय सिंह ने मुखाग्नि दी

डेरी डेरी अग्निवने अपना पार्चड रूप धार सकती आवर दुर्जन को अपने समाहित कर भसम कर दिया

ज्यादार लोग जा चुके थे कुछ ेके ढुके लोगो को छोड़ कर

अजय सिंह .....भाई सा ये सब क्या हो गया देखतेव हे देखते सब कुछ तबाह बर्बाद हो गया

विक्रम सिंह .......अजय जो कुछ भी हुआ है ये इनके कर्मो की सजा थी आजतक इन्होने किसी के साथ अच्छा किया है जो इनके साथ अच्छा होता

अजय ......भाई सा वो आपके पिता है उनके बारे में आप ऐसा कैसे बोल सकते है

विक्रम .......मेरे पिता है इस लिया हे मैंने उनका वो रूप देखा है जो तुमने नहीं देखा है

अजय .......मुझे नहीं पता आपने ऐसा क्यों बोलै है पैर मैं उस सूर्य ठाकुर की नेसल हे मीठा दूंगा

विक्रम सिंह .......ऐसा सोचना भी मत नहीं तो जो आज कुछ बच्चा है वो भी नहीं बचेगा

वक़्त सबका बदलता है हमारा भी बदलेगा तब तक अपने मुँह को बंद रखो

अपने कण आवर आँखों का सुनने आवर देखने का दायरा बढ़ाओ

जब तक मैं न कहूं तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगे समाज गए

अजय ......ठीक है भाई सा

दोनों भाई अपने आदमियों के साथ हवेली लौट आये

कुछ तो था जो विक्रम सिंह के दिलो दिमाग में चल रहा था जो कोई भी समाज नहीं प् रहा था

क्या ये भविष्य में आने वाले तूफान की दस्तक थी या कुछ आवर .....

सूरजगढ़ .......

साम को किरण आवर सपना को छोड़ सभी सूरजगढ़ लौट आये थे

नाना जी आवर नानी जी अपने कक्ष में किसी को ले कर चर्चा कर रहे थे

वही जोरावर अपने कक्ष में कुछ परेशान दिखाई दे रहा था

प्रिय .......क्या हुआ जी आप कुछ परेशान दिख रहे है

जोरावर .....ऐसा कुछ नहीं है बस कुछ सोच रहा था

प्रिय .......ऐसा क्या सोच रहे हो आप जिस से आपके माथे पे चिंता की रेखाएं आ गई

जोरावर उठ कर खिड़की के पास जा खड़ा हुआ आवर एक सिगरेट दूल्हा कर पिने लगा

प्रिय ......बात क्या है जी आप आज से पहले तो कभी ऐसे गुमसुम नहीं देखा

जोरावर .......मुझे सूर्य आवर बाकि सबकी चिंता हो रही है

प्रिय .........आज जो कुछ भी देखा उसके बाद भी आपको चिंता हो रही है मैं आपका मतलब नहीं समाज प् रही हूँ

जोरावर सिगरेट ख़तम कर प्रिय को देखते हुए

जोरावर .......सूर्य ने जो आज किया है उस से बहुत से लोग खुश है तो कुछ सूर्य आवर हमारे परिवार के दुसमन भी बन गए है

दुर्जन सिंह मारा गया सकती सिंह भी पैर ये दुश्मनी केवल दो ठाकुरो के बिच थी

वो अब आने वाले वक़्त में सायद दो कस्बो की दुश्मनी बन जाये

प्रिय ......आप बे बझा परेशान हो रहे है ऐसा कुछ नहीं होगा क्युकी दुर्जन सिंह पुर सकती सिंह के बाद ऐसा कोण है जो सूर्यगढ़ से दुश्मनी रखे

जोरावर .....विक्रम सिंह दुर्जन सिंह का बीटा उसकी आँखों में सूर्य के लिया एक ऐसे नफरत देखि थी मैंने जो विक्रम सिंह के व्यक्तित्व को दर्शाने के लिया काफी है

दुर्जन सिंह आवर सकती सिंह अपने गुस्से के आवेग में कुछ भी कर जाते थे पैर विक्रम सिंह ने अपने गुस्से को पालना सिख चूका है दुसमन से भी प्रेम से गले मिल मौका मिलते हे गाला काटने वाली सोच रखता है वो

प्रिय .......ये तो कोई अच्छी खबर नहीं है

पैर आपको ये सब कैसे पता मुझे कुछ दिन पहले से पता है जब मुझे विजय ने ये सब बताया तो मैंने किसी को उसके पीछे लगाया जिसका परमं आज बलि मैदान में देखा जब दुर्जन आवर सकती मारा गया तब सबके आँखों में ासु थे केवल विक्रम सिंह शांत था

प्रिय .......आप ने आज किरण आवर सपना को देखा वो सूर्य को देख कितनी खुश थी

जोरावर .........यही तो चिंता का विषय है प्रिय क्युकी दोनों सूर्य की आवर आकर्षित है आवर ये आकर्षण कब प्रेम में बदल जाये कुछ कहा नहीं जा सकता

न हम सूर्य को रोकने की काबिलियत रखते है आवर नहीं उनके बिच आना चाहते है

प्रिय .........पैर ये तो भाई बहिन है फिर

जोरावर .......सब कुछ समय पे छोड़ दो उनका फैसला उन्हें करने दीजिये

प्रिय ......ठीक है अब आप भी आराम कीजिये मुझे भी नींद आ रही है

दोनों हे कुछ देर में लेट जाते है

वही संजय मां जी सन्ति ममी जी को घोड़ी बनाये हुए बड़े जोरो से सम्भोग में लगे हुए थे..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स............
 
अपडेट. 70

न हम सूर्य को रोकने की काबिलियत रखते है आवर नहीं उनके बिच आना चाहते है

प्रिय .........पैर ये तो भाई बहिन है फिर

जोरावर .......सब कुछ समय पे छोड़ दो उनका फैसला उन्हें करने दीजिये

प्रिय ......ठीक है अब आप भी आराम कीजिये मुझे भी नींद आ रही है

दोनों हे कुछ देर में लेट जाते है

वही संजय मां जी सन्ति ममी जी को घोड़ी बनाये हुए बड़े जोरो से सम्भोग में लगे हुए थे..........

अब आगे ........

साध्वी जी आज रात हवेली में हे रुकी थी दादा जी के कहने पे

रात में सबने मिल कर डिनर किया सूर्य आवर शालिनी दोनों को डिनर रूम में दिया गया

सूर्य आवर शालिनी की साध्वी जी ने फिर से मलहम पति की आवर दोनों को हे नींद की ॉडी पीला दी जिस से दोनों जल्दी हे सो गए कुछ देर बार रेखा जी भी वही आ कर सूर्य के बगल में सो गई ताकि रात को किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो वो सब संभल ले

वही सूर्य के रूम में किरण आवर सपना आपस में बाते कर रही थी sapna.....sweety आखिर तुम्हारे सपना के राजकुमार से मुलाक़ात हो हे गई तुमसे

किरण .......दी क्यों जले पे नमक छिड़क रहे हो

आवर आप भूल रही है जो मेरे सपनो का राजकुमार है आपके दिल भी उसके लिया हे धड़कता है

अब वो रिश्ते में हमारे भाई निकले तो उसमे हम क्या कर सकती है

सपना .......सच कहा स्वीटी अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है

किरण .......दी आपको याद है बड़े पापा ने जब हमें बुआ सा आवर फूफा सा के बारे में बताया था आवर बुआ सा फूफा सा की पिछ सेंड की थी तब उन्होंने उनका कोई जीकर तक नहीं किया

सपना ......क्युकी पापा नहीं चाहते होंगे की हमें इनके बारे में पता चले

पैर किस्मत में मिलना लिखा तो तब नहीं तो अब मिलवा दिया

किरण .......दी बात इतने में ख़तम नहीं होती है

जब हम मां जी के यहाँ गए बुआ सा ुशी दिन घर आये थे उसका मतलब बड़े पापा इनको पहचान चुके थे आवर जानबुज कर हमें इनसे दूर रखा जा रहा था

सपना .......सच कहा स्वीटी ये पापा तो बड़े शातिर निकले

मैं अभी बात करती हूँ उनसे

किरण ........नहीं दी उन्होंने कुछ सोच कर हे ऐसा किया होगा जबकि हम अच्छे से जानती है की वो हमें कितना प्यार करते है आज तक हमारे बोलने से पहले वो हमारे हर इच्छा पूरी कर देते थे क्या पता हमें उनके ऐसा करने के पीछे क्या वजह

सपना ......हम्म्म एक बात तो है स्वीटी अपना राजकुमार है बहुत स्ट्रांग तुमने देखा कैसे उस सकती सिंह की गर्दन ुधा दी एक हे वॉर में उसके सरीर से सर अलग हो गया

kiran.......ha ये तो होना हे था राधा बुआ सा बोल रही थी की उस सकती सिंह ने फूफा सा को भी बुआ सा को ले कर कुछ गलत कहा था

उस दिन मैंने आपको बताया भी था की उनका चेहरा बार बार मेरी आँखों के सामने आ रहा है ये ुशी दिन की बात है

तब सूर्य ने गुस्से में बहुत मारा था सकती सिंह को वो तो फूफा सा ने बुआ सा की कसम दे कर रोक लिया

सपना .......उसके बाद भी आज उसने वही गलती की तुम्हे पता है उसके भाई ने उसके पानी में कोई सफ़ेद पाउडर जैसा कुछ मिलाया था सायद कोई ड्रग्स वगेरा हो

किरण .......उनके बारे में बहुत सुना है वो ठाकुरो के नाम कलंक है

वैसे आपने सूर्य की बॉडी देखि थी जब वो मैदान में आये थे

सपना .......चल सो जा स्वीटी आपको में देखा उसकी बॉडी आवर कुछ भी करना हो तो कर लेना कोई नहीं रोकेगा हेहेहे

किरण .....है कुछ भी दी मैंने बस ऐसे हे कहा था

सपना ......OK गुड नाईट स्वीटी ुम्मम्हा लव यू

किरण .....गुड नाईट दी एंड लव यू तो ुम्मम्हा

रात को एक बार किरण अपने रूम से निकली आवर चोरी छुपे शालिनी के रूम की आवर भाड़ गई

छुपते छुपते सूर्य के बीएड तक आ पहुंची

हलकी रौशनी में तीनो आराम से सोये हुए थे एक तरफ शालिनी बिच में सूर्य दूसरी तरफ रेखा जी

किरण बीएड के सिरहाने की तरफ आकर के सूर्य को सुकून से अपने बड़ी मम्मी के सीने पे सर रख सोये हुए देख रही थी सूर्य का एक हाथ जिसके के कंडे पे गोली लगी थी

वो हाथ रेखा के नंगे पेट पे था क्युकी रेखा के सोते वक़्त निघ्त्य किसक गयी थे

किरण ने डिग्री से हाथ हटाया सूर्य का आवर नाईट ठीक की

सूर्य के माथे पे हलकी सी सिकन आई जिस से सूर्य नींद में हे अपना हाथ अपने मुँह के पास रेखा जी के 36 की चुकी पे रख दिया

रेखा जी की नींद सायद कच्ची थी या वो सतर्क हो के सोये होगी की कुछ भी जरूरत पड़ने पे वो उठ जाये

अपने चुकी पे हाथ पड़ते हे उन्होंने आँखे खोली सूर्य का हाथ अपने सीने पे देख उन्होंने हल्का सा निचे किया आवर आँखे बंद कर ली

सूर्य ने फिर वैसे हे किया इस बार किरण की हलकी से हंसी चूत गई

रेखा जी के कानू में ये हंसी सुनाई दे गई पैर वो वैसे हे सोई रही

कुछ देर बाद किरण ने हिमत कर के सूर्य के गालो को हलके से चुम लिया

किरण .....आप बहुत प्यारे हो सूर्य पता नहीं हम आपसे प्यार करते है या ये कुछ आवर है

आपको अपने सामने देख हमें बहुत ख़ुशी हुए अगर ये भाई बहाने का रिस्ता न होता तो हम अपनी पूरी लाइफ आपकी बाँहों में रहना चाहते

हमने जब से होश संभाला है केवल आपके हे सपने देखते है हमें तो आज पता चला है की जिसके हम कब से सपने देखते है जिनकी तस्वीरें बनाते है उस चेहरे का नाम सूर्य ठाकुर है आवर वो हमारे भाई है

हम कभी आपको भाई के रूप में सायद हे देख पाया

हो सके तो कभी याद कर लीजिये गए हमें हम तो ुशी में खुश हो जायेंगे

तभी किरण की आँखों से टपका वो आंसू सूर्य के गालो पे गिरा

सूर्य नींद में हे बेचें हो कर बड़बड़ाने लगा

सूर्य ........स्वीटी तुममम मेरी हो मेरी हे रहोगी

तुम्हे कही नहीं जाने दूंगा

सूर्य की आवाज सुन रेखा जी ने सूर्य को देखा जो आराम से सोया था

( रेखा .....ये हो क्या रहा है क्या सूर्य की स्वीटी किरण है इसका भी तो नाम स्वीटी है ओह्ह no स्वीटी सपना .इसका मतलब शालिनी ने जो नाम बताये थे ....किरण स्वीटी सपना .वो ये है पैर ये तो भाई बहाने है )

कुछ देर बाद किरण सूर्य के गाल से आंसू साफ कर हलके से चुम कर निकल गई

कुछ देर बाद हे सूर्य चीख उठा

सूर्य. ......स्वीटीयै अह्ह्ह्हह

रेखा .....क्या हुआ बीटा तुम्हे तुम ऐसे क्यों चिलाय

सूर्य ......मम्मी पता नहीं क्यों मेरे सीने में दर्द हो रहा मुझे घुटन हो रही है

डेरी डेरी सूर्य की सांसे भरी होने लगी

रेखा जल्दी से साध्वी जी को जगह कर ले

साध्वी जी ......क्या हुआ सूर्य तुम्हे

सूर्य ......अह्ह्ह पता नहीं सीने में बहुत दर्द हो रहा मुझे घुटन हो रही है

साध्वी जी सूर्य को चेक करती है पैर कुछ भी समाज नहीं आ रहा था

वही किरण सूर्य की तस्वीर सीने से लगाए तो रही थे

साध्वी जी ......पता नहीं चल रहा क्या हुआ है सूर्य को

रेखा .....मुझे भी पता नहीं ये नींद में हे बोले जा रहा था कुछ किरण स्वीटी तुम मेरी हो कहीं नहीं जाने दूंगा ऐसे हे बड़बड़ा रहा था

साध्वी जी .....क्या किरण बेटी यहाँ आई थी

रेखा ....जी वो जैसे यहाँ से गई उसके बाद से हे सूर्य की हालत ऐसे है

साध्वी जी किरण के रूम की आवर भाड़ गई थी

रेखा जी भी उन्हें पीछे हे आ गई

साधवी जी ने डोर नॉक किया कुछ देर बार डोर किरण ने खोला जिसकी आँखे देखते हे साध्वी जी आवर रेखा समाज गई की किरण रो रही थी रूम के अंदर

किरण रात के इस समय रेखा आवर साध्वी जी को देख चौंक गई

किरण ....क्या हुआ बड़ी बुआ सा

रेखा जल्दी में बोल गई आवर उसका रिएक्शन भी जल्दी हे मिल गया

रेखा ......वो स्वीटी सूर्य को सीने में बहुत दर्द जो रहा है आवर घुटन भी ...अरे बेटी रुकी तो सही

साध्वी जी ......रेखा जाने दो उसे उसको मत रोको

रेखा .....पैर वो सूर्य

साध्वी जी .......उसकी चिंता न करो ( रेखा की आँखों में जानका तो साध्वी जी को कुछ देर पहले की जो घटना गयी थी जो बाते किरण की सुनी थी वो पता चली)

वैसे सपना सोचना बहुत भध तक वही है आप यही सो जाये किरण को सूर्य के पास सोने देना ठीक

रेखा ......अगर किसी ने पूछा तो क्या कहूँगी आवर किरण कैसे सूर्य को ठीक करेगी जबकि आप भी

साध्वी जी ......मुझे नहीं पता कैसे पैर मुझे लग रहा है ये किरण या स्वीटी सूर्य के लिया बहुत खास है

जब रेखा जी आवर साध्वी ने शालिनी की रूम में देखा तो सूर्य आराम से किरण के गॉड में सर रख कर सोया था आवर किरण बड़े प्यार से निहारते हुए सूर्य के बल्लो में उंगलिया फिर रही थी

साध्वी जी ........देखो रेखा कहा था न मैंने

अब तुम भी जा कर सो जाओ सूर्य की चिंता न करना

रेखा ......जी साध्वी जी

रेखा सपना के साथ सो गई वही साध्वी जी अपने कक्ष में आ गई जहा एक आवर साध्वी जी सोये हुए थे

जो साध्वी रेखा के साथ थी वो देखत हे देखते एक सफ़ेद ऊर्जा में बदल कर गायब हो गई

वही रेखा जी भी कुछ देर में हे सो गई

सुबह सबसे पहले शालिनी की आँखे खुली तो शालिनी की नज़र सीधा किरण पे गई जो सूर्य का सर अपनी गॉड में रखते बैठे बैठे हे सो गई

शालिनी .......अरे ये किरण यहाँ कब आई आवर ये ऐसे सूर्य का सर अपनी गॉड में रखे हुए बैठी बैठी सोई हुए है

शालिनी ने सूर्य का सर किरण की गॉड से हटा के टिक से किया

फिर किसी तरह अपने एक हाथ से किरण को सूर्य की बगल में सुला दिया

शालिनी ने टाइम देखा तो सुबह के 5 बजे थे

शालिनी सूर्य को अपने सीने लगाए पीछे से किरण को भी सूर्य से चिपका कर दोनों को टपकी लगाए हुए फिर से सो गई

06:30 ऍम के लग भाग सूर्य की जब आँखे खुली तो शालिनी का खूबसूरत चेहरा सामने था हलकी से मुस्कान देख सूर्य अपनी माँ के माथे को चुम पीछे को हुआ तो पीछे से चिपकी हुए किरण का अहसास सूर्य को हुआ

डेरी से सूर्य पीछे को पलटा आवर किरण को सोये हुए निहारने लगा

सूर्य के करवट बदलने से हुए हलचल आवर अपने बेटे द्वारा किसी किस से शालिनी भी जग चुकी थी वो सूर्य को ऐसे प्यार से किरण को निहारते देख

बहुत खुश हो रही थी

कुछ देर बाद शालिनी सूर्य आवर किरण के गाल चुम कर सूर्य को गुड मॉर्निंग विश करती है

सूर्य भी ख़ुशी से अपनी माँ को हलके से विश करता है

शालिनी .....तुम लेते रह मैं फ्रेश हो करकर आती हूँ

सूर्य ......OK मैं

शालिनी .......आवर अपनी स्वीटी को ज्यादा परेशान मत करना ये रात भर सायद ठीक से सोये नहीं

सूर्य ......अपनी स्वीटी मतलब माँ

शालिनी ......अरे बुढ़ऊ हमारे स्वीटी जिसके चेहरे में तुम खोये हुए हो

शालिनी फ्रेश होने चली गई वही रेखा जी भी सपना को उठा कर फ्रेश होने अपने रूम में चली गई आज सभी लोग अपनी टाइम से लेट उठे थे

कुछ बाद सपना रेखा जी से किरण के विषय में पूछती है

तब रात की घटना रेखा जी को याद आती है वो तेजी से शालिनी की रूम की आवर लपकी

उदार शालिनी भी बाथरूम से फ्रेश hi कर गेट पे खड़ा सूर्य को एक तक किरण में खोया देख रही थे

पल पल बदलते सूर्य के चेहरे के भाव शालिनी की अनुभवी आँखों से बच नहीं पाए

ीदार रूम के मैं दूर पे रेखा जी आवर सपना भी कुछ यही देख रहे थे

सपना आगे बड़ी तो रेखा जी ने रोक दिया

रेखा ji.....sapna बीटा रहने दे उनको ऐसे

रेखा की आवाज पे शालिनी का भी ध्यान उस तरफ गया

शालिनी .....अरे दीदी आप वह क्यों कड़ी है अंदर आये आवर मेरी हेल्प कीजिये

सूर्य ......गुड मॉर्निंग मम्मी गुड मॉर्निंग सपना

रेखा जी..... गुड मॉर्निंग बीटा अब कैसे तबियत है तुम्हारी अभी तो रात वाला दर्द नहीं है न तुम्हारे सीने में

सूर्य .......नहीं मम्मी मई बिलकुल ठीक हूँ पता नहीं रात को अच्चानक से कैसे सीने में इतना तेज दर्द होने लगा था

शालिनी .......क्या फिर मुझे कैसे पता नहीं चला दीदी आवर आपको कैसे पता चला की सूर्य को दर्द होने रहा है

रेखा जी ......क्युकी तुमने जो ॉडी ली थे उसमे नींद की दवा भी थी आवर मैं तुम दोनों के देखभाल के लिया यही पे सोई थे रात में तो मुझे पता चला

इन सबको बात सुन किरण भी उठा गई

किरण .....अब आपकी तबियत कैसी है अभी तो आपको दर्द नहीं है न

सूर्य ......गुड मॉर्निंग स्वीटी मैं अच्छा हूँ थैंक्स रात के लिया

तुम्हारे गॉड में सर रखते हे मेरा दर्द आवर घुटन ठीक हो गई आवर बहुत अच्छे नींद भी आई

रेखा जी ........साध्वी जी ने हे कहा था की किरण को सूर्य के पास रहने दे तो मैं फॉर सपना के पास सो गई ताकि ये रात को अकेले दर न जाये

सूर्य ........माँ आप चिंता न कीजिये मैं बिलकुल ठीक हूँ

शालिनी ......बीटा सपना जरा साध्वी जी को बुला कर लाना ताकि वो सूर्य के घावों को एक बार देख ले

सूर्य उठावूर बाथरूम की तरफ जाने लगा

rekha.....ab तुम कहा चले बीटा

सूर्य ......मम्मी बाथरूम जा रहा हूँ फ्रेश होने

शालिनी .....पहले अपने घावों को चेक करवा बीटा फिर फ्रेश होना

सूर्य .....प्लेसेस माँ समजा करो

रेखा ......कहा न चुपचाप बेथ यहाँ

सूर्य ......मैं जा रहा हूँ वार्न्स मेरी यही निकल जाएगी

शालिनी ......ठीक है ठीक है जा जल्दी पैर ध्यान से चैन का ध्यान रखा

सूर्य .....क्या माँ अब मैं बच्चे थोड़ी हु जो हर बार ऐसा होगा

सूर्य के जाने के बाद

रेखा .....क्या हुआ शालिनी तुम हंस क्यों रही हो

शालिनी .....कुछ नहीं दीदी बस सूर्य की बचपन की कुछ याद आ गई थी दिमाग में बस इस लिया हंस रही हूँ

रेखा जी .....ऐसा क्या हुआ था जो इतना हंस रही हो

शालिनी ......अरे दीदी कुछ नहीं वो क्या है सूर्य बचपन में काफी बार पिसाब करने के बाद जब चैन बंद करता था तो जल्दी में अपनी नुनी ( चाइल्ड लॉन्ग) चैन में फशा लेता था

फिर पूरा घर चिलाय चला के उठा लेता था

शालिनी की बात सुन �सुबह �सुबह पूरा रूम चारो की हंसी भरे ठाको से गूंज उठा

सूर्य जब बहार निकला आवर सबको अपनी तरफ देख हँसते हुए पाया तो उसको समझते देर न लगी

सूर्य .........माँ फिर से नहीं पल्सेस मैंने आपको मना किया था न

Shalini......sorry बीटा वो मुँह से निकल गया

सूर्य मुँह लटका कर बेथ गया

रेखा ......कोई बात नहीं बीटा ऐसा जब बच्चे होते है तो किसी के साथ भी हो सकता है

सूर्य ......मम्मी अब ये सब लोग मुझे चिड़ाएंगे जैसे वह मेरे कॉस्ट चिढ़ाते थे

रेखा ......कोई भी मेरे बेटे को नहीं चिड़ाये गई सामजी तुम सब

देखो अब ये तुम्हे बिलकुल भी नहीं चिड़ाएंगी

वैसे कितना बार चैन में अपनी नुनु फसाया तुमने सूर्य

सूर्य .....मम्मी आप भी जाओ मुझे किसी से बात नहीं करनी

वैसे तो ये बस एक मज़ाक हे था पैर सूर्य को उदाश देख रेखा जी को भी बुरा लगा

दादी जी अंदर आते हुए

दादी जी .....अरे क्या बात है आज कोई चाय नास्ता त्यार नहीं कर रहा है क्या

आवर इसको क्या हुआ �सुबह �सुबह ऐसा मुँह बना कर क्यों बैठा है

क्या हुआ सूर्य ले पूजा का प्रसाद ले आवर मुझे बता क्या हुआ

सूर्य ......दादी जी मैंने अभी स्नान नहीं किया है मैं बाद में ले लूंगा

दादी जी सपना आवर रेखा को प्रसाद देती है

दादी जी .....अब बोल क्या हुआ जो तुम ऐसे उदाश बैठे हो

रेखा जी .......वो माँ सा हम बस मजाक कर रहे आवर कुछ नहीं

साध्वी जी अंदर आ कर सूर्य के घावों को चेक किया जो की लग भाग भर चुके थे एक हे रात में कुछ तो ॉडी का असर था कुछ सूर्य के सरीर की अपनी खुबिया

सूर्य चेक करवाने के बाद अपने रूम में निकल गया

साध्वी जी को रात की घटना का पता लगा तो बहुत परेशान हो गई उन्होंने किसी को कुछ भी नहीं बताया जो उन्होंने कहा वही मन लिया जबकि उनको तो रात का कुछ पता भी नहीं था ..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स.........

सॉरी आज का अपडेट. कुछ खास नहीं है ठीक से लिख नहीं पाया ...
 
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