Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 18 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट 140

वयोम .......इसे ऐसी सजा दे कर मुझे ख़ुशी होगी

वयोम के चुटकी बजाते हे कलां एक 18 साल की खूबसूरत लड़की में बदल गया

जिसे देख मानसी कभी उस लड़की को देखती कभी वयोम को

सूर्य ......उसे उसके स्थान इ पंहुचा दो आवर सकती तुम्हे गुरुदेव को परतविलोक लाना होगा

सकती .....ठीक है सूर्य मैं अभी जा रहा वही मिलता हूँ तुमसे

सकती वह से परीलोक के लिया गायब हो गया

वयोम कलां को काली बना कर चंपा रानी के कोठे पे पंहुचा सूर्य मानसी को ले श्रीनगर पहुंच गया

जहा उसने वयोम को समजा कर मानसी को उसके साथ भेज दिया

आवर खुद 5 बजे जा कर बीएड पे लेता लेटने के साथ हे सूर्य की आँख लग गई ........

अब आगे .......

दिल्ली .........

सुबह जब माया उठी तो उसे बाथरूम से किसी का गण गुनगुनाने की आवाज सुनाई पड़ी जब उसने सानिया के बिस्तर को देखा तो वह खली था

माया .......इसे क्या हुआ है जो इतनी सुबह उठ कर त्यार भी होने लगी है आवर तो आवर रोमांटिक गाने भी गुनगुना रही है

लगता है आज कुछ स्पेशल है

माया वह से अंगड़ाई लेते हे खिड़की की तरफ चली जाती है

कुछ देर बाद बाथरूम का दूर खुलने की आवाज आती है

सानिया एक टॉवल अपने सीने से ले कर जंगो तक खुद को कवर किया सीधा बड़े से मिरर के सामने पहुंच अपना टॉवल गिरा देती है





सानिया खुद के सरीर को पूरा नुदे सामने लगे मिरर में देख कर अपने उभर आवर मुनिया जिसकी अभी अभी बाथरूम से सफाई कर बालो की हलकी रेखा सी अपनी मुनिया पैर छोड़ी थी उसको भी सहला देती है

फिर पता नहीं सानिया को क्या सकता है की वह अपने मोबाइल से मिरर के सामने कुछ पिछ क्लिक करती है





सानिया एक नहीं काफी पिछ क्लिक करती है अलग अलग पोज़ में









(माया ......आज इसे क्या हुआ है इसका ऐसा रूप तो पहले कभी नहीं देखा था मैंने आज से पहले तो तो हमेशा खुद को छुपा कर रखती थी देखती हूँ आवर क्या करती है )

सानिया अपनी पूरी बॉडी पे क्रीम लगाने के बाद

एक बार फिर से अपने बदन पे टॉवल लगा कर अपनी अलमारी की तरफ बढ़ी तभी पीछे से माया जोर से बोल कर सानिया को डरा देती है

जिस का नतीजा ये होता है की





सानिया दर जाती है आवर उसके हाथो से टॉवल चुत कर सानिया के पैरो में आ गिरता है

सानिया जल्दी से अपनी छूट को आवर चूचियों को अपने डॉन हाथो से छुपाती है

माया ....... न न ये जुलम न कर मेरी जान कुदरती खजाने को तुमने अब तक छुपा रखा था अब तो दीदार करने दे

सानिया .....शट उप माया

माया फ़ौरन दौड़ कर सानिया का फ़ोन उठा लेती है

माया .......चुप चाप अपनी पुसी आवर बूब्स से हाथ हटाओ सानिया नहीं तो इसमें जो अभी जितने पोज़ में पिछ ली है वो किसी को भी सेंड कर दूंगी

सानिया .......मेरा फ़ोन लॉक है

माया ......ऐसी बात है तो रुक

सानिया को लगा माया मजाक कर रही है

इस लिया सानिया ने उसे इग्नोर कर अपना टॉवल लपेट अलमारी से कपडे निकलने लगी

माया ने सानिया का पासवर्ड पहले भी देखा तो वही लगाया आवर किस्मत से खुल भी गया माया अभी की सभी पिछ को तेग कर अपने no.pe सेंड करती है

तभी सानिया ब्रा पंतय में हे माया से अपना फ़ोन छीनने की कोशिश करती गलती से माया की ऊँगली से किसी आवर के no. पे भी पिछ सेंड हो जाती है

सानिया .......प्लेसेस माया फ़ोन निचे रख दो तुम्हारे पास है वही मेरे पास है यार

माया .....चल ठीक है उदाश न हो तुम

तभी माया के फ़ोन के मैसेज बीप एक के बाद एक 6,7 बीप होती है

माया ......लगता है तुम्हारी पिछ आ गई मेरे फ़ोन में

माया सानिया का फ़ोन दे कर अपना फ़ोन चेक करती है

उदार सानिया को जैसे हे फ़ोन मिला वह अपना फ़ोन चेक करती है

अगले हे पल सानिया पुरे गुस्से में माया पे चिलाती है

सानिया ........माया की बच्ची ये क्या किया तुमने बेवकूफ लड़की

माया ......क्या हुआ सानिया इतना चीला क्यों रही है यार तुम्हारे साथ बस मजाक कर रही थी ले तुम्हारे सामने हे डिलीट कर देती हूँ

सानिया अपना मुँह लटका कर वही बिस्तर पे बेथ जाती है

माया अपने फ़ोन से सभी पिछ सानिया के सामने डिलीट करती है फिर भी सानिया का मुँह उतरा देख माया सानिया के पास बेथ जाती है

माया .......सॉरी यार मुझे नहीं पता था तू इतनी नजर हो जाएगी देख अब तो मैंने तेरी पिछ डिलीट कर दी है

सानिया ......तुम्हे पता नहीं माया तुम्हारे मजाक ने क्या किया है

माया .....कैसे बहकी बहकी बात कर रही हो

सानिया ......मेरी पिछ तुम्हारे पास होती तो कोई बात नहीं थी पैर तुमने अपने साथ साथ किसी आवर को भी सेंड कर दिया क्या उसके फ़ोन से डिलीट कर सकती हो

माया ......ये क्या कह रही है यार

सानिया अपना फ़ोन माया को देती है

जब माया चेक करती है तो उसका भी मुँह खुला का खुला रह जाता है

माया .......ये तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई ये पिछ तो उसके पास पहुंच गई है

सानिया ......पता नहीं सूर्य मेरा बारे में क्या सोच रहा होगा की कैसी लड़की है जो सामने से अपनी इतनी साडी नुदे पिछ भेज रही है कल हे तो उसने मेरे भाई को बचने की खुशखबरी दी आवर आज सुबह हे ये सब

ये सब कहते हुए सानिया की आँखे नाम हो गई

लड़की कितनी भी खुले विचारो वाली हो पैर जब ऐसा कुछ उसकी मर्जी के बिना होता है तो दिल में कही न कही एक दर्द एक जखम बन हे जाता है

माया ......ी ऍम रियली सॉरी माया मुझे नहीं पता था ऐसा कुछ हो जायेगा

तू चिंता न कर अभी तुम्हारी पिछ डिलीट करवाती हूँ अभी उसने तुम्हारी पिछ देखि नहीं है

सानिया ...... क्या सच में ये संभव है

माया अपने फ़ोन से किसी को कॉल करती है

माया .....hello दीप्ती दी मैं माया बोल रही हूँ

दीप्ती .....है माया बोलो क्या बात है इतनी सुबह सुबह कैसे याद किया सब ठीक है न

माया ......दीदी एक गलती हो गई आवर उसे सुधरने के लिया मुझे आपकी हेल्प चाइये

दीप्ती .....है माया बोलो क्या बात है

माया .....दीदी मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ मजाक कर रही थे उसकी पिछ को ले कर मैं अपने फ़ोन पे सेंड कर रही थी पैर

दीप्ती .....पैर क्या माया

माया .....दीदी वो पिछ मेरे साथ साथ किसी आवर को भी सेंड हो गई प्लेसेस उसके देखने से पहले किसी भी तरह डिलीट कर दीजिये

दीप्ती ......क्या वो पिछ पर्सनल थी माया

माया .....जी दीदी प्लेसेस हेल्प में

दीप्ती ......ठीक है मैं अभी ऑफिस के रस्ते में हु मुझे वो दोनों no. सेंड कर जिस से पिछ भेजी है वो आवर आवर जिस no. पे पिछ पहुंची है वो दोनों no. दे जल्दी मुझे

माया .....थैंक्स दीदी मैं आपके no.pe दोनों no. मैसेज कर दिए है

दीप्ती .......तुम्हे बाद में देखती हूँ अभी ये काम ख़तम कर लूँ फिर बिताती हूँ

माया ......ी ऍम सॉरी दीदी

माया कॉल क्यूट कर देती है

सानिया ......माया ये दीप्ती कोण है आवर ये कैसे डेल्फ्ट करेगी

माया ......दीप्ती मेरी पहचान के एक बड़ी पुलिस अफसर है

वो जल्दी हे तुम्हारी पिछ सूर्य का फ़ोन से डिलीट कर देगी

सानिया ......पैर कैसे

माया .........सिंपल है यार फ़ोन को हक करके के

सानिया .....ी हॉप सूर्य को इसके बारे में पता न चले नहीं तो वो बहुत गुस्सा होगा उसके फ़ोन को इस तरह से हक करने से

अभी 15 मिनट्स भी नहीं हुए थे की दीप्ती का कॉल आता है माया को

माया ......hello दीप्ती दीदी आपतो बहुत फ़ास्ट निकली इतनी जल्दी काम हो भी गया

दीप्ती ......है हो गया काम तुम्हारे साथ साथ पुरे पुलिस डिपार्टमेंट का भी बेवकूफ लड़की किसका no. है ये #######911 पता भी है पूरा पुलिस सिस्टम हक कर लिया है उसने

माया ......क्याआ

दीप्ती ......मेरी नौकरी तो गई संजो

माया ......ये आप क्या कह रही हो ऐसा कैसे हो सकता है

दीप्ती .....उसका फ़ोन लाखो फ़ायरवॉल से प्रोटेक्ट एडवांस सॉफ्टवेयर उसे फ़ोन है अब पूरा पुलिस डिपार्टमेंट का डाटा उसके पास है

माया ......सॉरी दीदी मुझे नहीं पता था ऐसा हो जायेगा

दीप्ती ......किसी भी तरह उस से बात कर उसे मना की वो डाटा वापिस ट्रांसफर करे

माया ......मैं अपने दोस्त को बोलती हूँ वो सूर्य से बात कर किसी तरह मना लेगी उसे

दीप्ती ......ये सूर्य है कोण करता क्या है

माया ......दीदी ये आर्मी में है

दीप्ती ......नहीं आर्मी इतने एडवांस सॉफ्टवेयर उसे नहीं करती तुम क्या करोगी मुझे पता नहीं पैर जल्द से जल्द उसे किसी तरह मनाओ नौकरी तो गई कही केस हे न चालू हो जाये मुझपे तुम्हारे हेल्प करने के चाकर में घर की रही न घाट की

दीप्ती गुस्से में कॉल कट कर दिते है माया सानिया को पूरी बात बता कर सूर्य को

कवेयन्स करने बोलती है

सानिया .....ठीक है मैं बात करती हूँ मुझे हे उसका गुस्सा झेलना होगा

श्रीनगर आर्मी हेअद्क़ुअतेर ..........

सूर्य सुबह 3 हर की नींद पूरी कर उठा फ्रेश हुआ आवर कुछ वक़्त ध्यान लगाने के बाद जब अपना फ़ोन चेक करता है तो एक बार तो उसके चेहरे पे गुस्सा आ आया पैर अगले हे पल सूर्य का रूम ठहाको से गूंज उठा

सूर्य .........ये किस पुलिस वाले को चल मची है इतनी जो मेरा फ़ोन हक करने चला था आ रहा हूँ बीटा तेरी वही दिल्ली में मरूंगा

तभी सूर्य के नजर सानिया के मैसेज पे पड़ती है

सूर्य .....सुबह सुबह सानिया ने इतने कॉल क्यों किया है आवर इतनी पिछ किसकी भेजी है

जैसे हे सूर्य पिछ के टिक करता है उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है क्युकी सूर्य की आँखों के सामने सानिया का नंगे बदन की अलग अलग पोज़ में 6,7 पिछ थे जो खुद सानिया ने मिरर रिफ्लेक्शन में खींची थी

सूर्य .....क्या बात है लगता है इसकी जल्दी हे खोल्नु पड़ेगी कुछ ज्यादा हे गर्मी चढ़ी है

तभी एक बार फिर सूर्य के फ़ोन पे सानिया का कॉल आता है

सूर्य ......hello सानिया कैसे हो तुम क्या हुआ सुबह सुबह इतने कॉल वो क्या मैं अभी उठा था तो तो तुम्हारा हे कॉल आ रहा था मैं जल्दी हे दिल्ली आ रहा हूँ किसी ने मेरे फ़ोन को वह से हक किया वही मिलता हूँ तुमसे bye सानिया अभी जल्दी में हूँ फ्लाइट पकड़नी है

सूर्य कॉल कट कर देता है बिना सानिया को कुछ भी बोलने का मौका दिया

( सूर्य ने पिछ वाली बात कुछ सोच कर गोल कर दी )

सुर्यवहा से बहार निकल कर मेर्री जी को अपने साथ ले सूर्य सूर्यकांत सर से मिलने निकल जाता है वह सूर्य अपनी सभी फॉर्मेलिटी पूरी कर

कुछ 1 हर के बाद सूर्य सूर्यकांत सर मेर्री जी आवर सोहेल 10 ऍम की फ्लाइट से दिल्ली के लिया रवाना हो गए

11:45 पे सभी दिल्ली एयरपोर्ट पे लेंड करते है जहा बहार निकलते हे कुछ आर्मी कार्स सूर्यकांत सर आवर बाकि टीम को लेने आयी थी

सूर्यकांत सर .....देखा सूर्य ये वो स्पेशल सामान जो तुम्हारे वजह से मिला है ऐसा मौका बहुत काम आर्मी में को मिलता है

सूर्य .....सर आपको पता है न मैं या मेर्री जी मीडिया के सामने नहीं आएंगे

सूर्यकांत सर .....वो सब मैं देख लूंगा बीटा तुम बस मेरा साथ साथ चलो

सूर्य सूर्यकांत सर के बगल में उनके साथ चलने लगता है वही मेर्री जी सूर्य का हाथ किसी कपल के भाटी थम कर उसके साथ चलने लगती है

दोनों आर्मी यूनिफार्म में जबरदस्त लग रहे था

सोहेल सूर्य के नजदीकी आ कर बहुत डेरी से सूर्य के कान में बोलता है

सोहेल .....भाई कुछ भी बोल मेम के साथ तुम्हारी जोड़े मस्त लग रही है

मेर्री जी ......मैं भी सुन रही हूँ सोहेल

सोहेल .....वो वो सॉरी मेम

सोहेल को डरते देख मेर्री जी की हब्शी चुत जाती है साथ हे साथ सूर्य की भी

तभी बाकि आर्मी जवान इन चारो को घेर लेते है मीडिया दूर से हे इनकी पिछ आवर वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे

जैसे हे सूर्यकांत सर कार के पास पहुंचे एक ब्लैक कार में से आर्मी चीफ बहार निकल कर आते है

सूर्यकांत सर ..... जय हिन्द सर .सर आप यहाँ एयरपोर्ट पे

सूर्य सोहेल मेर्री जी भी आर्मी चीफ को जय हिन्द बोल सेलुटे करते है

आर्मी चीफ .......क्यों हम नहीं आ सकते mr.leftinent जेनेरल सूर्यकांत सिंह

सूर्यकांत सर .....सर मेरा वो मतलब नहीं था पैर ....

आर्मी चीफ .....कहा है वो कोहिनूर जिसके को लेने हम खुद आये है

सूर्यकांत सर .....सर वो मीडिया के सामने अपनी पहचाना उजागर नहीं काटना चाहता है

आर्मी चीफ .....कोई बात नहीं चलो चलते है हम समाज तो गए है पैर यकीं काटना मुश्किल है थोड़ा

आर्मी चीफ सूर्य को देखते हुए ये सब कहते है

सूर्यकांत सर .....जी सर पैर यही सच है

आर्मी चीफ .....चलो मेटा तुम मेरे साथ आओ

सूर्य .......सॉरी सर आपको ये सामान सूर्यकांत सर को देना चाइये उनकी वजह से हे मैं यहाँ हूँ वो मेरे लिया पिता सामान है उन्हें आप ये सामान देंगे तो मुझे ख़ुशी होगी

आर्मी चीफ ......हमें ख़ुशी होगी सूर्यकांत सर को ये सामान दे कर

आर्मी चीफ आगे भाड़ खुद सूर्यकांत सर का हाथ पकड़ कार में बेथ जाते है उनके पीछे की कार में सूर्य मेर्री जी आवर सोहेल बेथ जाता है

सोहेल इन सब से बहुत खुश था आखिर खुश हो भी क्यों न आर्मी चीफ एक देश के आर्मी के हेड के साथ पिछ आ रही थे उस से बड़ी क्या ख़ुशी होगी एक आर्मी सोल्डिएर्स के लिया

एक के बाद एक 6,7 कार का काफिला आर्मी हेअद्क़ुअतेर की तरफ बढ़ रहा वही आर्मी चीफ आवर सूर्यकांत सर कल रात की मिशन की पूरी जानकारी ले रहे थे साथ हे साथ वो सूर्य ने जो वीडियो सूर्यकांत सर को दिया था वो भी देख रहे थे

आर्मी चीफ ......मर .सूर्यकांत आपका ये कोहिनूर सुपरनैचरल है न

सूर्यकांत सर .......यस सर हे इस सुपरहमन बिंग किश हैट तक है मुझे पता नहीं पैर 5 एलिमेंट्स अभी से उसे कर सकता है सर आपको ये सब.......

आर्मी चीफ .......don't वोर्री ये हम तक हे सिमित रहेगा वैसे लड़का अच्छा है आपको वाकई में पिता का मान देता है मैंने देखा है उसकी आँखों में

सूर्यकांत सर .....मुझे हमेशा से एक आवर बेटे की ख्वाहिश थे वो तो बेटी होने के बाद कुछ प्रोब्लेम्स हो गई तो खवाहिश ादुरि रह गई थे पैर अब नहीं अब लगा है जैसे सूर्य से बेहतर मेरा बीटा हो हे नहीं सकता था

कुछ हे देर बाद सभी आर्मी हेअद्क़ुअतेर पहुंचे

सूर्य .....सर एक मिनट्स

सूर्यकांत .....है सूर्य कहो क्या बात है

सूर्य .....सर मुझे अर्जेन्ट कही जाना होगा अगर आप आवर आर्मी चीफ सर परमिशन दे तो

सूर्यकांत सर .....क्या हुआ सूर्य कुछ प्रॉब्लम है क्या

सूर्य ......जी सर बूत मैं बंडल कर लूंगा एक छोटी से मीटिंग है पुलिस वालो से

सूर्यकांत सर .....क्या हुआ सूर्य पुलिस का मामला है मैं देख लूंगा

सूर्य सर ऐसा कुछ नहीं जैसा आप सोच रहे है वो दरअशल दिल्ली पुलिस डिपार्टमेंट में से किसी ने आज सुबह गलती से मेरा no. हक करना चाहा था इस लिया बस उस साक्ष से मिलना था

सूर्यकांत सर .....उनकी हिमायत कैसे हुई तुमने क्या गुनाह किया जो उन्होंने ऐसा किया मेरी बेटी दीप्ती भी पुलिस डिपार्टमेंट में है मैं अभी कॉल करता आवर उसका पता लगता हूँ

सूर्य .....सर मैं देख लूंगा आप बस जाने की परमिशन दीजिये

आर्मी चीफ .....तुम जाओ बीटा नाईट में पार्टी है तब बात करते है

सूर्यकांत सर ....कुछ जवान ...

आर्मी चीफ ....ठीक है ले जाओ उन्हें भी आप चलिए मेरे साथ

सूर्य मेर्री जी को वही सोहेल के साथ रुकने को कह कर जिस काफिले से आये थे ुशी से वो जहा से सूर्य के फ़ोन को हक करने की कोशिश की थी उस तरफ निकल गया

वही पुलिस डिपार्टमेंट में अपने ऑफिस में दीप्ती उदार से उदार चाकर काट रही थी उसे माया द्वारा खबर मिल चुकी थी की सूर्य को पता चल गया है की उसका फ़ोन कहा से हक करने की कोशिश की गई थे

दीप्ती .....आखिर ये सूर्य है कोण आर्मी वाले कब से इतना एडवांस हो गए अगर पापा को पता चला की मैंने क्या किया है तो मेरा क्या होगा उनके आर्मी के उसूल मेरी बलि ले कर हे मानेगे

तभी बहार से एक हवलदार दण्डनेते हुए अंदर आता है

दीप्ती .....तमीज़ नहीं है क्या ये भी भूल गए अपने सीनियर के केबिन में जुड़ने से पहले परमिशन लेने चाइये

हवलदार ......सॉरी मेम वो बहार बहुत से आर्मी सोल्डिएर्स का काफिला आये है

हवलदार के बात सुन दीप्ती की आवइया इ लगी

दीप्ती ठीक है तुम चलो मैं आती हूँ

दीप्ती .....लगता है ये वही है क्या करू कहा फसा दिया इस माया की बची ने मुझे करे कोई भरे कोई बड़ी चली थे हेल्प करने

दीप्ती खुद को हलाल होने के लिया रीड कर बहार निकलती है आँखों पे ब्लैक सनग्लासेस लगा कर ताकि उसकी आँखों देख उसकी स्थिति न जान सके





नाम .....दीप्ती सींग आईपीएस अफसर

आगे ....25 ईयर

फिगर ...33 .28 .34

हिघ्त ..5.फिट 7 इंच

दीप्ती के अपनी केबिन से बहार निकलते हे सामने 12 ,13 आर्मी कमांडो के सामने सूर्य खड़ा था

सामने का नजर देख दीप्ती की हवा खुश्क होने लगती है

दीप्ती ......hello ी ऍम दीप्ती सिंह आईपीएस सो/ सूर्यकांत सिंह आपको किस से मिलना है

( सूर्य .....ये तो सूर्यकांत सर की बेटी है दीप्ती जी )

सूर्य .....hello मिस दीप्ती सिंह आईपीएस ी ऍम मेजर सूर्य ठाकुर क्या आप यहाँ की इंचार्ज अफसर है

दीप्ती ......यस मर .मेजर सूर्य ठाकुर कैन यू चामे माय केबिन प्लेसेस

सूर्य .......यस प्लेसेस आप सभी यही रुकिए

सूर्य दीप्ती के पीछे पीछे केबिन में चला जाता है दीप्ती सूर्य को चेयर ऑफर करती है

दीप्ती ....आप कुछ लेंगे mr.surya

सूर्य ......आप मुझे सूर्य कह सकती है मिस दीप्ती एंड कॉफ़ी प्लेसेस अभी अभी लम्बा सफर करके आया हूँ

दीप्ती हवलदार को 2 कॉफ़ी का बोलती है आवर बहार सब कमांडो के लिया भी

दीप्ती .....तो कहो मर .सूर्य आपकी क्या हेल्प कर सकती हूँ

सूर्य ......हेल्प अपनी कीजिये मुझे उसका नाम बता कर जिसने मेरे फ़ोन को हक करने की कोशिश की वर्ण पता तो मैं कर हे लूंगा आपके पुरे पुलिस डिपार्टमेंट का डाटा ऐसे हे थोड़े मैंने ट्रांसफर किया था

दीप्ती .....क्या सच में डाटा आपने ट्रांसफर कर दिया है

सूर्य .....अपना पक चालू कर के देख लीजिये यकीं न हो तो वो तो मैंने आपकी ऑफिस को छोड़ कर मुझे पता चलते हे कर दिया था

दीप्ती ......सुक्रिया आपका वर्ण पता नहीं मेरा क्या होता

सूर्य .....तो आप है जिसने मेरे फ़ोन को हक करने की हिमाकत की पता है इस से आपकी हे नहीं आपके senior's की भी जॉब जा सकती डिपार्टमेंट को नुकसान होता वो अलग से

सुबह मुझे उसपे गुस्सा था जिसने ये कोशिश की वो तो अच्छा है की सूर्यकांत अंकल को मैंने साथ आने से मना कर दिया वर्ण जब उन्हें पता चलता की उनकी बेटी ने क्या किया तो उनके गुस्से का सामना आपको करना पड़ता

दीप्ती ......आप पापा को कैसे जानते हो प्लीज उन्हें कुछ न कहना इस बारे में

सूर्य .......क्युकी अभी अभी अंकल के साथ हे श्रीनगर से लौटा हूँ आवर उन्हें आर्मी हेडक्वार्टर्स छोड़ कर यही आ रहा हूँ

अब आप उन्हें बुलाओ जिन्होंने आपको ये करने को कहा था

दीप्ती फ़ौरन माया को कॉल कर बुलाती है

कुछ 20 मिनट्स दोनों बात करते है तभी दीप्ती के केबिन को कोई नॉक करता है सूर्य केबिन में बने बाथरूम में चला जाता है

दीप्ती ....के इन

माया आवर सानिया दोनों आ कर दीप्ती के सामने कड़ी हो जाती है

दीप्ती .....आज तुम दोनों की नादानी की वजह से मेरी नौकरी पे बन आई थे पता भी है

माया सानिया .....सॉरी दीदी हमें क्या पता था ऐसा होता जायेगा

दीप्ती........ काम से काम मुझे तो बताती की किसका फ़ोन है मैं भी बेवकूफ बिना पूरी बात जाने मुसीबत अपने गले ले बैठी बैठो दोनों चुप चाप यहाँ

तभी बाथरूम से सूर्य निकल कर बहार आता है जिसे देखते सानिया आवर माया दोनों की नजर अपने आप जुख जाती है

सूर्य ......नजर तब जखनि चाइये थे जब गलत किया एक गलती को छुपाने के लिया दूसरी गलती की तुमदोनो की वजह से इनकी नौकरी जा सकती थे

सानिया ......सॉरी सूर्य मुझे माफ कर दो मेरी गलती नहीं थे

सूर्य ......तुम्हे क्या जरूरत थी ऐसी पिछ लेने की क्या यही सपना था तुम्हारा ऐसे डॉक्टर बनोगे तुम दोनों

सानिया चेयर से उठ कर सूर्य के पेअर पकड़ने लगी तो सूर्य ने उसे बिच में हे रोक कर गले लगा लिया

सूर्य .....अच्छा बाबा देखो सानिया रोकना नहीं मैं गुस्सा नहीं हूँ पैर तुमने ये नहीं सोचा की तुम्हारा फ़ोन किसी गलत इंसान के हाथ लग सकता है वो तुम्हारी पिछ का गलत इस्तेमाल भी कर सकता है

सानिया .....सॉरी सूर्य

सूर्य ......चल ठीक है माफ किया पैर आगे से ऐसे पिछ मत खींचना तुम्हे डॉक्टर जानना है उस पे ध्यान दो आवर आप मिस माया ममता हु लड़किया मज़ाक करती है पैर ऐसा मजाक किसी की जिंदगी तबाह कर सकता है

माया ......मुझे भी आप माफ कर दीजिये ऐसा दुबारा नहीं होगा हमें हमारा सबक मिल गया है

सूर्य .....चलो अच्छा है माफी दीप्ती जी से मानगो वो तो अच्छा है ये अंकल के बेटी निकली नहीं तो मैंने तो कुछ आवर हे सोचा था यहाँ पहुंचने से पहले

दीप्ती .....ये सब इस माया की बची की वजह से हुआ है

सानिया माया .....सॉरी दीदी

दीप्ती .....ठीक है माफ किया

सानिया .....वो वो मेरी पिछ

सूर्य .....सॉरी वो मैंने डिलीट कर दी है

दीप्ती .......फिर सॉरी क्यों बोल रहे हो

सूर्य तुम

तीनो सूर्य को देखने लगी

सानिया ......कही तुमने वो सब देखि तो नहीं न

सूर्य .....इसके लिया हे तो सॉरी बोल रहा हु की वो पिछ गलती से साडी मैंने देख ली थे डिलीट करने से पहले

सानिया ......रुको तुम्हे मैं बताती हु

सूर्य जल्दी से बहार निकलता सानिया भी पीछे पीछे दो उड़ते हुए बहार निकलती है

सूर्य को ऐसे दो ऊठे देख कमांडो अपने गन तन सूर्य को सेवे करने लपके

सूर्य ......बॉयज गन डाउन ये कोई आतंकी या खुनी नहीं है ये मेर्री फ्रेंड्स है

कमांडो ......सॉरी सर

सूर्य ....चलो चलते है सानिया तुम भी चलो सोहेल साथ आया है वो वही है आर्मी हेअद्क़ुअतेर में दीप्ती जी आप भी चलिए आपके घर हे जा रहा हूँ

दीप्ती ......ठीक है चलो हवलदार मेरी कार ले आना घर पे हमारे पीछे पीछे

माया तुम भी चलो

सूर्य तीनो लड़कियों को ले कर निकल गया

आर्मी हेअद्क़ुअतेर पहुंच सूर्य को जो हाउस अलॉट हुआ था वो मेर्री जी अपनी निगरानी में पहले हे क्लेन करवा चुकी थे सूर्य कुछ देर सबसे बात कर आराम करने चला गया वही मेर्री जी माया सानिया दीप्ती राधिका आज जो कुछ हुआ उसके बारे में चर्चा करने लगी

सूर्य काफी वक़्त तक सोता रहा वो तो सोहेल के उठाने पे उठा सोहेल ये ले भाई तेरे ड्रेस त्यार होजा आर्मी चीफ की पार्टी में चलना है की नहीं

सूर्य .....ये किसने भेजी है

सोहेल .......भाई ये मेर्री मेम ने भेजी है आवर ये दूसरी वाली मेरी है है

कुछ हे देर में सूर्य आवर सोहेल त्यार हो सूर्यकांत सर के यहाँ पहुंचे क्युकी सानिया आवर मेर्री जी वही थी वैसे भी जस्ट टच में जो हॉस्टन वही सूर्य को अलॉट हुए था सूर्यकांत सर ने अपने पास वाला हाउस हे सूर्य के लिया अलॉट करवाया था

सूर्य सोहेल जब दीप्ती के घर पहुंचे तो सब आल मोस्ट त्यार हे थे पार्टी के लिया सब लड़किया एक से भाड़ कर एक लग रहे थे

तभी किसी ने सूर्य के पीछे से उसकी आँखे बांड कर दी

लड़की ....पहचाना तो मैं कोण हूँ

सूर्य .......ुण्णं तुम्हारी खुसबू सुनिधि

सुनिधि .........क्या बात है क्या है मेजर साहब एक हे जटके में पहचाना लिया कैसे

सूर्य .....आपकी बॉडी स्मेल से जो महक खुसबू है वो हिप्नोटिक पाइजन परफ्यूम की है जो आपकी फवोरिट है

राधिका ......देवर जी लगता है गर्ल्स की खुसबू कुछ ज्यादा हे अच्छे से पहचानते है

सूर्य .....ऐसा है भाबी जी एक बार हमें जो भ जाये उसे हम भूलते नहीं सुनिधि हमारे दोस्त है तो इनकी खूबी कैसे भूल सकते है

मेर्री जी .....बाकि गुप्त सैप पार्टी में कर्जा सर के काफी कॉल आ चुके है

सभी आर्मी कैफेटेरिया की तरफ निकल गए जहा पार्टी राखी गई थे .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............

गुड नाईट फ्रेंड्स .......
 
अपडेट. 141

लड़की ....पहचाना तो मैं कोण हूँ

सूर्य .......ुण्णं तुम्हारी खुसबू सुनिधि

सुनिधि .........क्या बात है क्या है मेजर साहब एक हे जटके में पहचाना लिया कैसे

सूर्य .....आपकी बॉडी स्मेल से जो महक खुसबू है वो हिप्नोटिक पाइजन परफ्यूम की है जो आपकी फवोरिट है

राधिका ......देवर जी लगता है गर्ल्स की खुसबू कुछ ज्यादा हे अच्छे से पहचानते है

सूर्य .....ऐसा है भाबी जी एक बार हमें जो भ जाये उसे हम भूलते नहीं सुनिधि हमारे दोस्त है तो इनकी खूबी कैसे भूल सकते है

मेर्री जी .....बाकि गुप् सैप पार्टी में करना सर के काफी कॉल आ चुके है

सभी आर्मी कैफेटेरिया की तरफ निकल गए जहा पार्टी राखी गई थे .........

अब आगे .........

सूर्य आंटी जी मेर्री जी राधिका जी दीप्ती जी माया सानिया सुनिधि सोहेल सभी जब पार्टी में पहुंचे तो वह काफी लोग थे वही एक से भध कर एक आर्मी अफसर की वाइफ आवर उनकी लड़किया पार्टी को एन्जॉय कर रही थे

सोहेल ......भाई क्या पार्टी है देखो तो चारो तरफ खूबसूरती हे खूबसूरती भरी पड़ी है

सूर्य ......अपनी नजरो पे नियंत्रण रखा सोहेल ऐसा न की तुम्हारी वजह से सूर्यकांत सर का सर जुखे क्युकी ये आर्मी चीफ द्वारा राखी गई है

सोहेल .....भाई सकल से चुटिया दीखता हूँ पैर अकाल से हूँ नहीं मुझे भी पता है

ज्यादातर आर्मी अफसर ड्रिंक का मज़ा ले रहे थे वही कुछ आर्मी में की वाइफ भी थी जो थोड़ा बहुत ड्रिंक कर रहे थे

सूर्यकांत सर ने सूर्य को अपने साथ ले काफी अफसर से मिलवाया अपने बेटे के रूप केवल कुछ हे लोग पार्टी में थे जो सूर्य की सचाई जानते थे

कुछ देर बाद आर्मी चीफ सूर्यकांत सर को सूर्य को अपने साथ ले कर चले जाते है कहा तीनो काफी टाइम बात करते है

डेरी डेरी लड़किया भी हलकी फुलकी ड्रिंक करने लगती

मेर्री जी दीप्ती दोनों हे पहले भी ड्रिंक कर चिकि थी वो भी अच्छे से पार्टी एन्जॉय कर रही थे

सोहेल मेर्री जी आवर राधिका जी के फाॅर्स करने पे सूर्य ने पहली बार ड्रिंक की थी ( इस जनम में )

रात 11 बजे तक सब लोग अपने अपने हाउस की तरफ निकलने लगे क्युकी आर्मी चीफ जा चुके थे

सूर्यकांत सर .....बच्चो अब चलो घर चलते है

आंटी जी .....है बचो तुम सब की ड्यूटी या कॉलेज भी है कल अब सबको चल कर सोना चाइये

सूर्य ......जी आंटी जी

सभी वह निकल पड़ते है सुनिधि दीप्ती आवर राधिका के साथ उनके घर निकल गई वही माया सानिया मेर्री जी सोहेल सूर्य के घर की तरफ भध गए सूर्यकांत सर ने कहा भी था अपने घर रुकने पर सूर्य ने मना कर दिया

सानिया माया एक रूम में सोहेल को एक अलग रूम दे दिया था

वही मेर्री जी अपने अलग रूम में चली गई सूर्य अपने रूम में चला जाता है. जहा वह बाथरूम में जा कर अपने सरीर के कुछ पॉइंट प्रेस करता जिस से उसने जितनी सरब पि वो सब उलटी कर देता है

सूर्य .....उफ्फ्फ्फ़ इस राधिका भाबी आवर मेर्री जी ने तो हद हे करदी अरे खुद को पिणि थे तो पीती पैर मुझे क्यों

अब जा कर सन्ति मिली है पेट को

तभी वह वयोम आता है

वयोम ......सूर्य कल सुबह गुरुदेव ने तुम्हे बुलाया है है

मानसी के विषय में कुछ चर्चा करनी है

सूर्य ......क्या गुरुदेव ने वो कार्य कर दिया है

वयोम .....है पैर उसके साथ साथ कुछ आवर भी कल पता चल जायेगा

सूर्य .....ठीक है वयोम घर पे सब कैसे है

वयोम .....सब अच्छे है बस आप दोनों को याद कर रहे है आपकी सकल ऐसी क्यों हो रही है

सूर्य .....कुछ नहीं वो मेर्री जी ने आवर राधिका ने जबरदस्ती सरब पि ला दी थे वही वापिस निकल रहा था उसकी वजह से लग रहा

वयोम आप अपने रूम में जाओ आवर रेस्ट करो

सूर्य अच्छे से नहाने के बाद अपना टॉवल लपेट रूम में पहुँचता है जहा एक बड़ी सी सुराही भी राखी हुई थे

सूर्य ........अब थोड़ी रहत मिलेगी आवर ये क्या है उन्न्नन जिनलोक की मदिरा थैंक्स वयोम

आवाज .........एन्जॉय करो सूर्य

सूर्य अभी कुछ हे गुनत भरी थी की उसका दूर नॉक होता है

सूर्य .....अब कोण आया है

सूर्य जब दूर खोलता है तो सामने मेर्री जी कड़ी थी हॉट एंड सेक्सी सॉर्ट ड्रेस में मेर्री जी कॉफ़ी लिया कड़ी थी

सूर्य ......क्या हुआ ममी जी

मीरी .......तुमने पहली बार पि थे न तो तुम्हारे लिया कॉफ़ी ले कर आई हु तुम्हे आराम मिलेगा अब अंदर भी आने दो

सूर्य साइड हो गेट बंद करता है मेरी जी अंदर देखती है तो सामने वही सुराही राखी हुई थे

मेर्री जी ......ये क्या है सूर्य आवर इसमें क्या है ( सुराही की आवर इसरा करके )

सूर्य .....इसमें कुछ अलग किसम की सरबत है

मेर्री .....इसकी खुसबू अलग है इसे थोड़ा जरूर टेस्ट करूंगी

कहते हुए मेर्री जी सुराही से मुँह लगा कर गटागट 3,4 गुनत मार लेती है

सूर्य जल्दी से उनसे वो सुराही ले साइड में रख देता है

सूर्य ......आप अपनी कॉफ़ी पीजिये ये आपके लायक नहीं है

मेर्री जी .....अच्छी तो है मुझे आवर चाइये सूर्य के मन करने के बाद भी मेर्री जी 2 तीन गुनत भर हे लेती है

सूर्य उसे अपने मुँह से लगा कर पूरी ख़तम कर देता है

सूर्य अपना टॉवल हटा बीएड पे जा कर अंडरवियर में जा कर लेट जाता है

वही मेर्री जी अपनी कॉफ़ी का मग ले कर वही बगल में आ अधलेटी हालत में सूर्य के सरीर को देखते हुए कॉफ़ी की चुस्कियां लेते हुए अपने होंटो पे जुबान फिरने लगती

सूर्य

मेर्री जी ....सूर्य वो टीवी रिमोट देना जरा

सूर्य जैसे टीवी का रिमोट उठा कर पलट था है वैसे मेर्री जी के होंठ सूर्य के होंटो से टच हो जाते है आवर एक छोटा सा चुम्बन हो जाता है





सूर्य .....क्या कर रहे हो मां जी दे रहा हूँ न रिमोट

मेर्री जी .....हहहहए सूर्य मैं अभी दोस्त हूँ तुम्हारी ममी जी बानी नहीं हूँ समजे

मेर्री जी हसने को तो हैश रही थी पैर उसके बदन में सूर्य के नंगे सरीर से अपने सरीर रगड़े जाने से सरसराहट सुरु हो गई





मेर्री जी की आँखों के सामने 2 दिन पहले का वो दृश्य गुमने लगा जिसमे मेर्री जी को सूर्य की किंग कोबरा के दर्शन हुए थे बहार लोने में नहाते हुए

कुछ सरब का असता कुछ जवानी का उफ़्फ़्फ़न मेर्री जी का सरीर सेक्स की मांग करने लगता है

मेर्री जी ......सूर्य क्या तुम्हे मैं पसंद हूँ

सूर्य .....मैं कुछ समजा नहीं मेर्री जी

मेर्री .जी .....यही की एक लड़की के रूप में क्या तुम मुझे लिखे करते हो

सूर्य .......आपको तो कोई भी पसंद करेगा आप है हे इतने खूबसूरत अंदर से भी आवर बहार से भी

मेर्री सूर्य के अंडरवियर में हलके उभर को देख उसपे अपना पेट टिका कर लेट जाती है रिमोट के साथ कुछ करते हुए

सूर्य की आँखों के सामने मेर्री जी के मखमली गूरे गूरे खुल्हे आ जाते है जिसने सहलाने से खुद सूर्य भी अपने आप को रोक नहीं पाया





सूर्य के द्वारा अपने खुल्हो को सहलाने से मेर्री जी के चेहरे पे बड़ी सी मुस्कराहट फ़ैल जाती है

मेर्री जी .......तुमने मुझे कपड़ो के अंदर कब देख लिया की मैं वह से भी सुन्दर हूँ बताओ मुझे

सूर्य .....मेरा वो मतलब नहीं था आप वह से भी खूबसूरत हे होंगी मेरा कहने का मतलब था आपका दिल भी खूबसूरत है

मेर्री जी लगातार अपने पीट को सूर्य के लैंड पे रगड़ने से उसमे हरकत होनी सुरु हो गई थी

जिसे सूर्य आवर मेर्री दोनों हे महसूस कर रहे थे

merry......surya मेरी एक विश है पूरी करोगे क्या

सूर्य ......जी जरूर करूँगा

मेर्री जी ......सूर्य कैन यू ब्रेक माय विर्जिनिटी प्लेसेस मन नहीं करना

इतना बोल मेर्री जी अपने ऊपर की वो पतली से t.shirts उतर कर सूर्य की अंडरवियर में हाथ दाल सूर्य का अकड़ा हुआ लैंड थम लेती है

सूर्य ........एक बार फिर सोच लीजिये आप मां जी को देखा दे रही हो

मेर्री ....जी मैं उनसे भी प्यार करती हूँ आवर तुमसे भी सूर्य जब तक सदी नहीं होती तब तक केवल तुम्हारी आवर बाद केवल उनकी बांके रहूंगी प्लेसेस सूर्य अपनी दोस्त के लिया इतना भी नहीं करोगे

सूर्य मेरी जी को अपनी तरफ खींच उनके होतो पे किश करने लगता जिसने मेर्री जी ग्रीन सिग्नल समाज सूर्य के होंटो से राश चूसने लगती है

कुछ देर चले किश के बाद मेर्री जी सूर्य की आँखों में देखते हुए





सूर्य के लैंड पे जुखे लगती है

सूर्य के लैंड के लाल सूपड़ा देख मेर्री जी उसे अपने मुँह में भर चटकारे लगते हे चाटने आवर चूसने लगती है

मेर्री जी से जितना हो सकता था उतना वो सूर्य के लिंगमुण्ड को अपने मुँह में भर कर लॉलीपॉप के जैसे चूसने लगती है





सूर्य .........उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह मेर्री आराम से अभी पूरी रात बाकी है ये कहि भाग नहीं रहा है

मेर्री जी लैंड को मुँह से बहार निकल कर सूर्य की आँखों में देखती है

मेर्री ....ये नहीं भाग रहा है पैर इस्पे नजर काफी लोगो की तिकी हुई है आवर यकीं मनो वो सब बस मोके की तलाश में है की कब वो इसे अपने अंदर ले

मेर्री अपनी जुबान से सूर्य के पुरे लैंड को चाटने लगती है





सूर्य .....उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह आप किसकी बात कर रही है

कोण है जो इसके लिया इतनी तड़प रही है

आवर मुझे हे पता नहीं

मेर्री ....हहहहए उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह कोण कोण नहीं है यही देख लो राधिका है सानिया है आवर तो आवर दीप्ती मैडम भी इस लाइन में जुड़ गयी है आवर जहा तक जानती हूँ सुनिधि तुम्हे प्यार करती है जैसे अलीना मेरी गुड़िया करती है

मेर्री सूर्य के लैंड को फिर से अपने मुँह में भर त्यार करने लगती है सूर्य मेर्री के सर को अपने लैंड पे दबाने लगता है





सूर्य .....इस्स्स्सस्स अह्हह्ह्ह्ह ऐसे हे मेर्री जी आपको कैसे पता अलीना मुझे प्यार करती है

मेर्री ....उम्म्म्म हम्म्म.

सूर्य ......क्या हुआ आपने बताया नहीं आपको कैसे पता चला की अलीना भी मुझे प्यार करती है .

अब मेर्री कैसे जबाब देती सूर्य ने उसके मुँह में तो अपना कामदण्ड तुष् रखा था

मेर्री सूर्य के लैंड को बहार निकल जोर जोर से सांसे लेने लगती है

मेर्री .....अपना लैंड मुँह में दभा कर रखा है मैं कैसे जबाब देती





सूर्य मेर्री जी को बीएड पे खींच कर अपने हाथो उनकी ब्लैक पेंट्री निकल देता है

सूर्य .....उफ्फ्फफ्फ्फ़ क्या सीन है आप तो वाकई में यहाँ से भी बहुत खूबसूरत है मेर्री जी

मेर्री जी .....मैंने यहाँ आने से पहले हे जब तुम्हारा ये बिग कॉक देखा था

तभी सब तय कर लिया था की कुछ भी हो जाये इस मिशन में अपनी विर्जिनिटी तुमसे हे तुड़वा कर रहूंगी

surya.....aap तो बहुत तेज निकली

सूर्य मेर्री जी के पैरो को उठा कर अपने कंदो पे रख लेता है

ठीक अपने मुँह के सामने मेर्री जी की फुल्ली हुए छूट देख सूर्य उसे मुँह में भर हलके हलके खींचते हुए अपनी जुबान अंदर डालता है जो बहुत मुश्किल से थोड़ी से अंदर गई थी





एक तो इसकी वजह मेर्री जी ने आज तक एक ऊँगली के अलावा कुछ वह डाला नहीं दूसरा उनकी रोजाना अपने फिटनेस पे की जाने वाली म्हणत

कुछ हे देर में मेर्री जी का पूरा सरीर आकद जाता है

ये इतना जल्दी हुआ था की सूर्य को मेर्री जी ने पूरी ताकदत से अपनी छूट पे हे चिपका लिया

मेर्री जी को पहली बार ऐसा आनंद मिला था क्युकी किसी ने पहली बार वह अपनी जुबान लगाई थी

कुछ हे देर में मेर्री जी हफ्ते हे बीएड पे ढेर हो गई

सूर्य मेर्री जे के ऊपर लेट उनके तोश संहत चुच्चियो को चूसने लगा जैसे अभी उनमे से दूदू सूर्य के लिया बहार आ जायेगा

5, 7 मिनट्स में मेर्री जी फिर से त्यार थी

सूर्य ......मेर्री जी आप त्यार है न आपको पैन होगा चिलाना नहीं ज्यादा वर्ण बगल वाले रूम में माया आवर सानिया भी है

मेर्री ......don't वोर्री मैं त्यार हूँ

मेर्री अपने हाथो से अपने दोनों पैरो को छोड़ा कर पकड़ लेती है





सूर्य अपने लैंड को थूक से पूरी तरह से चिकना कर मेर्री की छूट पे जिश्ने लगता है

सूर्य .....आप त्यार है न

मेर्री ......उफ्फ्फफ्फ्फ़ सूर्य अब दाल दो क्यों तड़पा रहे हो ज्यादा से ज्यादा क्या होगा फैट जाएगी अब डालो अंदर

सूर्य ......जैसे आपकी मर्जी मेर्री जी





जैसे हे सूर्य मेर्री के पैरो को पकड़ जतका मरता है आवर लैंड विर्जिनिटी को ब्रेक करते हु एक इंच आगे पंहुचा मेर्री की लाख कोशिकाओं के बाद भी हलकी से चीख निकल गई थी

सूर्य फ़ौरन आगे हो मेर्री के होंटो से अपने होंठ लगा देता है





ताकि आवाज मेर्री के मुँह में हे रहे पैर सूर्य से यही गलती हो गई

जैसे हे सूर्य मेर्री के होंटो पे झुकता है वैसे सूर्य लैंड पुस हो मेर्री की छूट को घिरते हुए करीब 6 इंच से ज्यादा अंदर जा गुस्सा

मेर्री की आँखों से बेहतहासा आंसू बहने लगते है

सूर्य ......सॉरी मेर्री मुझे पता नहीं था ये हो जायेगा

मेर्री .....अह्ह्ह्हह्हह सूर्य बहुत पैन हो रहा मेर्री पुसी फैट गई प्लेसेस हिलना नहीं कुछ देर

सूर्य वैसे लेते लेते मेर्री को किश करने लगता है साथ हे मेर्री के सॉफ्ट सॉफ्ट बूब्स की अकड़न काम करने लगा

यही करम कुछ 5 मं चला जब सूर्य को लगा मेर्री जी ठीक है तो वह थोड़ा निचे खिसक कर मेर्री के चूचक ( निप्पल्स ) को मुँह में भर चुस्कने लगता है आवर हलके हलके अपने लैंड को पुस उप करते हुए मेर्री की गुफा का द्वारा खोलने लगता है





मेर्री .........अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माय लव उम्म्म्म अह्ह्ह्हह ऐसे प्यार से मुझे फ़क करो माय लव

उम्मम्मम अह्ह्ह्हह ी लव योर डिक सूर्य

सूर्य डेरी डेरी अपने जटके तेज करने लगता

सूर्य को हलकी हलकी मेर्री की छूट में रुकावट मह्सुश होती थी जब उम्मीद से तेज जतका लग जाता था





मेर्री ......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह ईस्सस्स्स्स सूर्या फ़क माय पुसी उम्म्म्म अह्ह्ह्हह्ह्बब माय लव ी ऍम कमिंग

सूर्य को जब अपने लैंड पे मेर्री की छूट में हो रहे अपने लैंड के उरद गिर्द कसाब को मह्सुश किया तो उसने भी अपने देखो की स्पीड तेज करदी

अगले 1 मं में हे मेर्री ने अपनी चुदाई से पहला चरम सुख प्राप्त किया जिसकी गुंड पास के रूम में सोये माया की आँखे खोल चुकी थी

maya......ye इतनी रात को चीला रहा किसकी फैट है

माया अपनी बगल में. देखती है तो वह सानिया आराम से ब्रा पेंट्री में सोये हुए थी जिसकी पेंट्री उसकी गांड में गुस्से हुई थी

माया ......ये अगर ऐसे हे मेरे साथ सोती रही तो कही मैं न बहक जाऊ

माया उठ कर अपने रूम से बहार जाती है

माया...... बहार तो कोई नहीं देख रहा आवर यहाँ तो लड़की हम दोनों के अलावा मेर्री जी हे है कही उन्हें कुछ हुआ तो नहीं

माया जैसे सूर्य के रूम को क्रॉस करती है उन्हें अंदर से मेर्री की आवाज सुनाई देती है सिसकारियों के साथ

माया के पेअर वही रुक जाते है

माया .....ये तो सूर्य का रूम है सायद पैर इसमें मेर्री जी की आवाज कैसे आ रही वो भी सिसकियों के साथ

माया जैसे हे के हॉल में देखती वह फ़ौरन नजर हटा लेती है

क्युकी सामने मेर्री जी पूरी तरह से नंगी सूर्य के सामने घोड़ी बानी हुई थी

आवर सूर्य अपना 9 इंची सोता पीछे से मेर्री की छूट की फंखो आवर गुदाद्वार पे रगड़ राग था





( माया ......ओह्ह माय गॉड यहाँ तो लाइव सेक्स मूवी चल रही है इनकी वाओ मेर्री जी क्या किस्मत है

आप दोनों की एक सुपर मॉडल लड़की आवर दूसरा सुपर हॉट लड़का वो भी ऐसे तगड़े हतियार काश यहाँ मैं होती )

ये सब सोचते हुए माया कब अपने पेंट्री में हाथ दाल अपनी मुनिया को सहलाने लती है उसे ये भी पता नहीं होता वो तब होश में आती है जब अपने कंधे पे किसी का हाथ मह्सुश कर दर जाती है

माया डरते हुए पीछे देखती है तो वह अपने सरीर पे चादर लपेटे हुए सानिया कड़ी उसे हे देख रही थे

सानिया को देख माया की जान में जान आती है

माया सानिया को मुँह पे ऊँगली रख चुप होने को कहती आवर के हॉल में देखने को कहती है

सानिया उत्सुकता वाश अंदर देखती है जहा सूर्य मेर्री जी के ऊपर घोडा बन चढ़ा हुआ था





मेर्री ......अह्ह्ह्हह सूर्य हर्डर प्लेसेस फूकिंग में हर्डर इन माय पुसी

उफ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्हह बेबी फूकिंग इन हार्ड माय लिटिल बीच उम्म्म्म

सूर्य .......उम्म्म्म अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी जान मेर्री इंग्लिश मैं मज़ा नहीं हिंदी में बोल

मेर्री .......अह्ह्ह्हह्हह सूर्य मेरी जान आवर जोर से छोड़ अपनी मेर्री को मेरी छूट में अपना पूरा लैंड दाल कर फाड् दो उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा तुम्हारी लैंड अंदर तक फील कर रही हूँ

सूर्य ......अह्हह्ह्ह्ह मेर्री तुम्हारी छूट बहुत गरम है

पैर उतनी हे चिकनी आवर सॉफ्ट अह्ह्ह्हह्हह मैं पैक पे हूँ

मेर्री .........अह्ह्ह्हह सूर्य मैं भी फिर से आने वाली बस 2 मिनट्स





सूर्य मेर्री के बल्लो को पकड़ अपनी पूरी ताकत से मेर्री जी की छूट की दनिया उधड़ने लगता

मेर्री जी का पूरा सरीर थिरकने लगता है साथ हे बीएड भी हिलने लगता है

बशर दोनों बरी बरी ये के हॉल से ये नजर देख अपनी अपनी छूट से पानी निकलने की कोशिश कर रही थी

सूर्य ........आआअह्हह्ह्ह्हह उम्मम्मम्म उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़. मेर्री मैं आ रहा हूँ

मेर्री ....एससससससस ी ऍम आल्सो किंग सूर्य आवर फ़ास्ट सूर्य अपना वीर्य मेर्री बच्चेदानी में भर दो अपनी निज़ामी समाज कर

अगले हे पल सूर्य आवर मेर्री दोनों एक साथ होकर भरे हुए झड़ने लगते है

वही माया आवर सोनिया भी अपनी टंकी खली कर चुकी थी दोनों के पेअर कानो रहे थे किसी तरह दोनों एक दूसरे का सहारा ले वह से अपने रूम में निकल गयी

सूर्य वैसे मेर्री जी की छूट में लैंड डेल मेर्री को अपने बहो में भर कब दोनों सुकून से सो गए पता हे नहीं

चला

रात में सूर्य जब करवट बदलता है तब मेर्री की छूट में लैंड निकलता है जिस से मेर्री की जख्मी छूट में पैन होता तो वह उठ जाती है बिना सूर्य को जागते वो बाथरूम जा वह अच्छे से अपनी छूट को साफ कर सूर्य से चिपक सो जाती है

सूर्य सुबह उठ फ्रेश हो छठे पे जा वही ध्यान में भेट जाता है ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........

सॉरी फॉर लेट अपडेट भाई लोगो थोड़ा काम में वयस्थ हूँ ........
 
अपडेट 142

वही माया आवर सोनिया भी अपनी टंकी खली कर चुकी थी दोनों के पेअर कानो रहे थे किसी तरह दोनों एक दूसरे का सहारा ले वह से अपने रूम में निकल गयी

सूर्य वैसे मेर्री जी की छूट में लैंड डेल मेर्री को अपने बहो में भर कब दोनों सुकून से सो गए पता हे नहीं

चला

रात में सूर्य जब करवट बदलता है तब मेर्री की छूट में लैंड निकलता है जिस से मेर्री की जख्मी छूट में पैन होता तो वह उठ जाती है बिना सूर्य को जागते वो बाथरूम जा वह अच्छे से अपनी छूट को साफ कर सूर्य से चिपक सो जाती है

सूर्य सुबह उठ फ्रेश हो छठ पे जा वही ध्यान में भेट जाता है ..............

अब आगे .........

सूर्य को अभी ध्यान में बे थे हुए कुछ हे समय हुआ था की वयं सूर्य के सामने आ खड़ा होता है

वयोम के आते हे सूर्य को ध्यान में भी उसके आने का पता चल जाता है

सूर्य ......आ गए वयोम मैं आपका हे इन्तजार कर रहा था

वयोम .........अगर त्यार हो तो फिर चले गुरुदेव तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे है यज्ञ पूर्ण होने वाला है आवर उसमे तुम्हारी आव्सय्कता कहि भी पद सकती है

सूर्य .....चलो मैं त्यार हूँ

वयोम सूर्य को ले वह से गया हो जाता है आवर जा पहुँचता है हिमालय की तलहटी में बने जंगल के बिच बने शिव मंदिर

थोड़ा पीछे चलते है ........

जब सूर्य सकती को परीलोक भेज वयोम के साथ मानसी को ले श्रीनगर पहुँचता है वह सूर्य vayom.ko सब समजता है की गुरुदेव से क्या कहना है क्या नहीं

दरशल सूर्य वयोम को मानसी के विषय में बताता है की वो कोण है आवर क्यों यहाँ पे सूर्य के साथ है

वयोम ......कही ये असुरगुरु की कोई चल तो नहीं है

सूर्य ......नहीं वयोम वो सच में सहायता चाहते थे फिर वो वचनबद्ध भी है

वयोम .....ठीक है अगर तुम्हे यकीं है तो मैं भी कर लेता हूँ पैर मैं सविधान रहूँगा

सूर्य ......उसके लिया तुम स्वतंत्र हो बस गुरुदेव मानसी की नेगेटिव ऊर्जा सकती सुप्त अवस्था में पंहुचा मानसी को सुरक्षा कवच प्रदान कर दे ताकि वो सुरक्षित रहे

वयोम .......ठीक है मैं मानसी को ले कर जा रहा हूँ

तुम आराम करो गुरुदेव को अगर कुछ जानना होगा तो मैं आपको लेने आ जाऊंगा

सूर्य के कहने पे मानसी गायों के साथ निकल जाती है. हिमालय की आवर जहा वयोम को सकती ने सन्देश दे कर बुलाया था

वयोम मानसी को ले वह पहुंच जाता है

जहा सकती आवर गुरुदेव पहले हे मौजूद थे

गुरुदेव मानसी को हे हे पहचान जाते है की वो एक असुर कन्या है

वयोम .....परनाम गुरुदेव

गुरुदेव .......कल्याण हो पुत्र वयोम

मानसी .......परनाम गुरुदेव

गुरुदेव .....तुम्हारा कल्याण हो पुत्री एक असुर कन्या वो भी यहाँ परतविलोक में

वयोम ......गुरुदेव ये असुरगुरु की पुत्री मानसी है इनकी जान को असुरराज नरकासुर से खतरा है

गुरुदेव .......पुत्री आपका नाम क्या है

मानसी .....गुरुदेव मैं असुरगुरु पुत्री मानसी हूँ

गुरुदेव अपना हाथ गुमा कर कुछ करते है

कुछ पल में उनके हाथो में कुछ कपडे आ जाते है

गुरुदेव ......पुत्री मानसी ये कपडे लो आवर मंदिर के पीछे सरोवर है वह सनान कर लो

मानसी .......जी गुरुदेव ...मानसी कपडे ले मंदिर की तरफ चल देती है

वयोम .....गुरुदेव आपको हे मानसी को असुरराज से सुरलषित करना होगा

गुरुदेव .......हम समाज गया है वयोम सकती यहाँ से कुछ दुरी पे ऋषि आसाराम है उन्हें ...असुर सुधि.... पूजा के लिया सामान पूर्वक यहाँ ले कर आओ क्युकी मानसी पुत्री आवर आगे हिमालय की पवित्र भीनी पे आगे नहीं बढ़ सकती है भले हे वो पाप मुक्त हो किन्तु उसका रकत असुर ताकत है

सकती .......जी गुरुदेव आज्ञा दे गुरुदेव

सकती वह से निकल जाता है

गुरुदेव अपनी सकती का प्रयोग कर वह हसन पूजा आदि की उचित आवर आवश्यता पुराण कर लेते है

गुरुदेव .......वयोम मानसी पुत्री के आने के बाद तुम यही रुकना हम अभी आते है

गुरुदेव वयोम को बोल मंदिर के अंदर जा द्वार बंद कर लेते है

कुछ 1 जानते बाद गुरुदेव बहार निकलते है तो उनके मुँह पे ख़ुशी जलक रहे थे

वयं ......क्या हुआ गुरुदेव आप बहुत परशान है

गुरुदेव ......नियति वयोम नियति ने अपना खेल सुरु कर दिया है पुत्र

कुछ देर में सकती 6 ऋषियों के साथ वह पहुँचता है

कुछ देर ऋषि आवर गुरुदेव बात करते है

सकती को सूर्य के परिवार के पास भेज देते है

कुछ देर बाद गुरुदेव आवर ऋषि यज्ञ सुरु करते है साथ यज्ञ में मानसी को भी बैठाया जाता है

वयोम वही यज्ञ से कुछ दुरी पे रुका हुआ था

सुबह से साम साम से रात हो जाती है किन्तु यज्ञ निरंतर चलता रहता है

मध्य रात्रि को वयोम गुरुदेव के आदेश पे कही चाहता है मिनट कुछ हे समय बाद लौट आता है

जैसे जैसे सूर्यौदय का समय नजदीकी आ रहा था वैसे वैसे यज्ञ अपने परचंद रूप ले रहा था जैसे हे सूर्य की पहली किरण हिमालय की पवित्र भूमि पे पड़ी गुरुदेव का इसरा मिलते हे वयोम गया हो सूर्य को ले वापिस आ जाता है

सूर्य जब हिमालय पंहुचा उस वक़्त यज्ञ सायद अपने अंतिम चरण में था

गुरुदेव .......पुत्र सूर्य यहाँ विराजमान हो जाओ

सूर्य .......जी गुरुदेव

सूर्य .......सभी दिव्या ऋषियों को सात सात नमन

6 ऋषि .....तुम्हारा कल्याण हो पुत्र

सूर्य यज्ञ को नमन कर गुरुदेव के बताये स्थान मानसी के पास जा भेठा

गुरुदेव ........पुत्री मानसी यज्ञ अपने अंतिम चरण में है तुम्हे थोड़ी पीड़ा होगी पुत्री आवर पुत्र सूर्य तुम्हे भी पीड़ा भोगनी होगी पुत्री मानसी के लिया

सूर्य ......जी गुरुदेव मैं साज हु अगर मेरी पीड़ा से मानसी जी का जीवन सुरक्षित होता है

मानसी ......हम सज है गुरुदेव

ऋषि ......पुत्र सूर्य अपने अपनी उप ेरी सरीर को निर्वस्त्र करो

सूर्य .....जी ऋषिवर

सूर्य अपना t.shirt निकल कर अलग रख देता है अब सूर्य ऊपर से पूरी तरह नंगा था

गुरुदेव आवर ऋषि जैसे हे मंत्रो उच्चारण करते हुए हसन यज्ञ में आहुति देते है वैसे हे हसन से एक प्रकाश पुंज निकल कर पुरे यज्ञ स्थल को घेर लेता है ( वयोम यज्ञ स्थल से बहार था )

यज्ञ स्थल के सुरक्षित होने के कुछ हे पल बाद मानसी बुरी तरह से छटपटाने लगती है

मानसी के सरीर से रीड आवर ब्लैक ऊर्जा निकलने लगती जो यज्ञ कुंड में जा रही थे

मानसी के सरीर से निकल रही ऊर्जा से मानसी को बहुत आदिक दर्द हो रहा था जिसके कारन बार बार मानसी का असुर रूप की जलक दिख रही थे

पता नहीं क्या सोच कर सूर्य ने मानसी का हाथ अपने हाथ में थम लेता है

मानसी जब अपनी भीगी आँखे खोल सूर्य को देखती है ुशी वक़्त सूर्य की आकर्षण सकती एक्टिव हो जाती है

मानसी अपना दर्द अपनी पीड़ा भूल बस सूर्य की आँखों में देखने लगती है सूर्य का पूरा सरीर इस वक़्त किसी देव पुरुष के जैसे चमक रहा था

जैसे जैसे मानसी के सरीर से ऊर्जा निकलती आहे वैसे यज्ञ कुंड में एक ऊर्जा पुंज बनने लगता है जो की पूरी तरह से रीड था

मानसी के सरीर से करीब 5,6 मिनट्स तक ऊर्जा निकलती है

उसके बाद मानसी के सरीर से ऊर्जा निकलना बंद हो जाता है

जैसे मानसी के सरीर से ऊर्जा निकालनी बंद होती वैसे हे यज्ञ कुंड में बन रहे ऊर्जा पुंज से एक रीड किरण निकल सूर्य के सीने से जा टकराती है

सूर्य के सीने से टकराने पे सूर्य के सरीर का वो स्थान जलने लगता है जिस से सूर्य को बहुत पीड़ा होती है

सूर्य .........आअह्ह्ह्हह स्वीटीयियय

सूर्य की आवाज सुन वयोम आगे बढ़ता तो वह किसी अदृश्य सकती से टकड़ा कर दूर जा गिरता है

दरशल वो वही ऊर्जा कवच था जो यज्ञ कुंड से निकल यज्ञ स्थल को घेरता है

मानसी अभी अपनी साडी पीड़ा भूल सूर्य को अपने जबड़े काशी हुए दर्द को पिता हुआ बेबश देख रही थे. उसकी आँखों से अविरल आंसू निकल रहे थे

मानसी .....गुरुदेव यज्ञ को रोकिये इन्हे बहुत पीड़ा हो रही है

गुरुदेव ........पुत्री ये पीड़ा सूर्य को सहन करने हे होगी अन्यथा

सूर्य .......नहीं गुरुदेव मुझे कुछ नहीं अह्ह्ह्हह्हह कुछ नहीं होगा यज्ञ पूर्ण कीजिये आपको मेरी सोगन्द गुरुदेव आप यज्ञ नहीं रोकेंगे

ऋषि आवर गुरुदेव यज्ञ में आहुति देते रहे आवर सूर्य का पूरा सरीर डेरी डेरी लाल होने लगता है जैसे सिरया के सरीर में किसी ने लावा भर दिया हो

इसका असर किसी आवर पे भी हो रहा था हिमालय से बहुत दूर

डेरी डेरी यज्ञ से पूरी ऊर्जा सूर्य में समाहित हो जाती है

तभी यज्ञ से एक आवर ब्लैक एंड वाइट ऊर्जा पुंज निकलता है जिसने देख. गुरुदेव के साथ साथ ऋषि भी चौंक जाते है

ऋषि .....ये कैसे संभव

गुरुदेव ......मैं नहीं जनता ऋषिवर ये कैसे ऊर्जा है

डेरी डेरी वो ऊर्जा पुंज सूर्य की तरफ भाड़ जाता है

सूर्य उस ऊर्जा पुंज को परनाम करता है

सूर्य के सीने पे अभी भी रीड ऊर्जा से जखम बना हुआ था

जैसे हे ऊर्जा सूर्य के जखम पे लगती है सूर्य का घाव भरने लगता है

आवर सूर्य की पीठ पे ब्लैक आवर वाइट ड्रैगन टैटू डिज़ाइन बनने लगता है





( कुछ ऐसा हे बूत ब्लैक एंड वाइट )

उनमे से एक ऋषि जो सूर्य के पास हे बे थे थे

उनकी नजर जैसे हे सूर्य के ड्रैगन टैटू पे पड़ी वो आवर ज्यादा चौंक गए

ऋषि .........ये कैसे संभव है ऋषि भाइयो

गुरुदेव .....क्या हुआ ऋषिवर क्या है जो संभव हो गया है

ऋषि .......जो ऊर्जा आपके अक्षय में समाहित हुई है वह अच्छे आवर बुरे ड्रैगन की इच्छा सकती है जिनका हजारो वर्ष पूर्व हे अंत हो चूका है

ऋषि की बात सुन गुरुदेव के चेहरे पे रहश्यमयी मुस्कान आ जाती है

गुरुदेव ........ऋषिवर आपसे एक विनती है पुत्री मानसी को बुरी शक्तियों से छुपाने के लिया जो सुरक्षा कवच प्रदान करने जा रहा हु उसमे आप सभी मेरा सहयोग करे

ऋषि .......किन...

गुरुदेव .....क्षमता चाहता हु ऋषिवर आपके मन में उपजे परशान का उतर मैं आपको एकांत में देना चाहूंगा ये उचित स्थान वह समय नहीं है

ऋषि आवर गुरुदेव 7 मिल मानसी को एक बहुत हे मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करते है

गुरुदेव .......पुत्री तुम अपनी शारीरिक सकती का प्रयोग कर सकती हो तुम्हारी शारीरिक सकती आम इंसानो से कही आदिक है

किन्तु किसी निर्दोष पे नहीं समय आने पे तुम्हे तुम्हारे सभी सक्रिय सूर्य से प्राप्त होंगी क्युकी तुम्हारी सभी सक्रिय का दरक कोई आवर नहीं सूर्य है

मानसी .......मई आप सभी ऋषि वर आवर गुरुदेव आपकी सदैव आभारी रहूंगी

ऋषि .......पुत्री हमने अपना करम किया तुम अपना करम करो

मानसी ......ऋषिवर आपने मुझे पुत्री कहा इस लिया आप सभी ऋषिवर वह गुरुदेव मेरे पिता तुल्ये है क्या अपनी इस पुत्री को आशीर्वाद नहीं देंगे

ऋषि ........... जब तुमने हमें पिता मन आशीर्वाद माँगा है तो एक पिता अपनी पुत्री को निराश कर दरम विधान के विपरीत करम नहीं कर सकता है मानगो पुत्री अपनी इच्छा अनुसार वॉर मानगो

मानसी ........ऋषिवर गुरुदेव मुझे आशीर्वाद दीजिये की मैं इनकी जीवनसंगिनी बन इनके चरणों में राहु

ऋषिवर .........तथास्तु पुर्त्री

गुरुदेव ..........तथास्तु पुत्री मानसी किन्तु याद रहे तुम असुर कन्या हो तुम्हारा विवाह गन्ध्र्व विवाह होगा भविष्य में कुछ ऐसे सच भी सामने आ सकते जिनके चलते तुम्हे सूर्य या किसी एक के जीवन को चुनना हो तो क्या करोगे तुम

मानसी .......मैं नहीं जानती गुरुदेव भविष्य में क्या होगा किन्तु जिस पेल मैंने इन्हे देखा ुशी पल से इन्हे अपना सबकुछ मन लिया है अभी यही सब कुछ है मेरे

( सूर्य .......बीटा सूर्य स्वीटी तेरी जान ले लेगी तुम कांड पे कांड किये जा रहे हो )

गुरुदेव .......पुत्र सूर्य अब तुम मानसी को ले कर घर लौट जाओ सब तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे है आवर पुत्री किरण को ले कर चिंतित न होना रिद्धि पुत्री वह पहुंच चुकी है

सूर्य ......क्या मतलब गुरुदेव

गुरुदेव .......वो तुम्हारी पूरक है पुत्र जो पीड़ा तुमने भोगी है वही पुत्री किरण ने भोगी है मानसी पुत्री के लिया इस लिया उसका स्थान पुर सामान सदैव सबसे ऊपर रहेगा पुत्र

surya......ji गुरुदेव

सूर्य सभी ऋषिवरो से आवर गुरुदेव से आशीर्वाद ले वयोम के साथ दिल्ली निकल गया

अब तक सभी उठ चुके थे दिल्ली में

सूर्य ......मानसी अब हम चल रहे किन्तु उस से पहले आपको परतविलोक का ज्ञान आवर भाषा पता होना चाइये वयोम

वयोम .......ये मैं नहीं कर सकता हूँ कोई आवर कार्य है तो कहो

सूर्य ......सकती कहा हो

सकती ......क्या हुआ सूर्य

वयोम ......मानसी जी को यहाँ का ज्ञान आवर भाषा का ज्ञान देना है

सकती मानसी के माथे पे हाथ रख यहाँ की सभी भाषा आवर ज्ञान मानसी को दे देता है

सूर्य ......वयोम आपने कभी भी अपने परिवार के विषय में नहीं बताया

वयोम .....तुमने कभी पूछा हे नहीं

मेरे परिवार में मेरे माता पिता मई आवर मेरी पत्नी हे है

सूर्य .......तुम्हारी कोई बहन नहीं है क्या

वयोम सूर्य को ऊपर से निचे तक गुर्गा है

सूर्य .....अरे ऐसे न गुरो कुछ गलत इरादा नहीं है

वयोम .....नहीं मेरी कोई बहन नहीं है

सूर्य .......पैर आज से तुम्हारी एक बहन है

वयोम ......क्या मतलब आवर कोण है मेरी बहन

सूर्य ......यही तो है तुम्हारे सामने क्यों मानसी जी

मानसी को परतविलोक का ज्ञान मिल चूका था वो समाज जाती है

mansi......ha वयोम भैया मैं हूँ न आपकी बहन मानसी

वयोम ...... सूर्य ये सब क्या है

सूर्य .....तुम्हारी कोई बहन नहीं थे पैर आज से मानसी आपकी छोटी बहन है

अब घर ले जा रहा हूँ तो कुछ तो बोलना होगा न

वयोम ......भले तुमने ये सब खुद को बच्चों या मानसी को घर ले जाने के बहाने किया पैर मुझे इस भने एक बहन तो मिली आज से तुम मेरी बहन हो मानसी थैंक्स सूर्य

सूर्य .....थैंक्स मुझे आपको कहना चाइये घर पे पता नहीं क्या हो रहा होगा वयोम मानसी को तुम अपने साथ ले जाओ आवर अपने बारे में जो जरुरी है मानसी को बता दो ताकि घर पे कोई कुछ पूछे तो मानसी संभल ले मैं मेर्री जी को ले कर आता हूँ आप जैसलमेर में मुझे मिलना

वयोम ........ठीक है है सूर्य

वयोम मानसी को ले कर चला जाता है सूर्य निचे चला जाता है ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............

सॉरी फ्रेंड्स ये सीन कुछ ज्यादा हे लम्बा होगा गया ........
 
अपडेट 143

वयोम ......भले तुमने ये सब खुद को बच्चों या मानसी को घर ले जाने के बहाने किया पैर मुझे इस भने एक बहन तो मिली आज से तुम मेरी बहन हो मानसी थैंक्स सूर्य

सूर्य .....थैंक्स मुझे आपको कहना चाइये घर पे पता नहीं क्या हो रहा होगा वयोम मानसी को तुम अपने साथ ले जाओ आवर अपने बारे में जो जरुरी है मानसी को बता दो ताकि घर पे कोई कुछ पूछे तो मानसी संभल ले मैं मेर्री जी को ले कर आता हूँ आप जैसलमेर में मुझे मिलना

वयोम ........ठीक है है सूर्य

वयोम मानसी को ले कर चला जाता है सूर्य निचे चला जाता है .......

अब आगे ........

सूर्यगढ़ ........

अभी सुबह की कोई 5 सवा 5 बजे होंगे सूर्यगड़ हवेली में सभी आराम से सोये होये थे कोमल राधा .किरण sapna.alina रेखा जी .शिव शमी जी .एंड दादा जी दादी जी बुआ सा पायल प्रीती महेंद्र जी कुछ काम से सूर्यगढ़ से बहार थे ...

किरण आवर सपना दोनों अभी सोये हुए थे





तभी उनके रूम में एक तेज रौशनी होती है

रौशनी जब आकर लेती है तो वह रिद्धि पारी कड़ी थी अपने पारी रूप में हाथो में अपनी जादुई चढ़ी लिए

रिद्धि अपनी जादुई चढ़ी गुलाटी है तो उस से एक रौशनी की किरण निकल के किरण पे पड़ती है

किरण जो सपना के सीने पे सर रख सोये हुए थे रौशनी गिरते हे उसका सरीर हवा में उठने लगता है

रिद्धि पारी अपनी जादुई चढ़ी का प्रयोग करते हुए दिवार में कोई द्वार बनती है आवर किरण को अपने साथ ले उस द्वार में परिवेश कर जाती है

जब दोनों बहार निकलती है तो वो परीलोक मंदिर में बने एक छोटे से खूबसूरत सरोवर के पास थे

रिद्धि पारी की जड़ी चढ़ी के इसारे से किरण का सरीर हवा में तैरते हुए

उस सरोवर में चला जाता है तभी वह रानी पारी आती आ पहुँचती है

रिद्धि ......रानी माँ आप यहाँ

रानी पारी .......रिद्धि पुत्री तुम अकेले ये सब नहीं कर सकती हो इस लिया राजगिरि ने हमें आपकी सहायता के लिया भेजा है सिगरता करो पुत्री

रानी पारी आवर रिद्धि पारी दोनों अपनी जादुई चढ़ी एक साथ टच कर सरोवर की तरफ करती है है जी से दोनों की जादुई चढ़ी से निकली वाइट ऊर्जा एक हो किरण के सरीर को पूरी तरह से कवर कर लेती है

कुछ हे देर में किरण का सरीर उस रोशिनी से भरे सरोवर के बभीतर चला जाता है

ठीक ुशी समय सूर्य के सीने में यज्ञ कुंड से निकली रीड ऊर्जा सामने लगती है

सरोवर के भीतर किरण का सरीर अचानक हे तड़पने लगता है यह करम तब तक चलता रहा जब तक हिमालय में सूर्य को ब्लैक एंड वाइट ड्रैगन की सकती मिल उसके दर्द को समाप्त नहीं कर देती है

रानी पारी ......पुत्री अभी पुत्री किरण को उनके कक्ष में उसके साथ पे फिर से छोड़ आओ पुत्री किरण को ज्ञात हो उस से पहले

रिद्धि ......जी रानी माँ हम अभी जा रहे है हम कुछ समय वही रुकने वाले है

रानी पारी ......जानते है पुत्री की किरण सदर्न नहीं आवर उसके कुछ हे समय में बहुत कुछ ज्ञात होने वाला है तब तुम्हे हे उसे संत करना होगा

रिद्धि ......जी रानी माँ जब तक सूर्य सूर्यगढ़ लौट के न जाये

रानी पारी ......नहीं पुत्री आपको तब तक वही रुकना होगा जब तक सभी परीलोक परबु की पूजा में शामिल नहीं होते

ridhi.....ji रानी माँ आज्ञा दे

कुछ हे डेरे किरण का सरीर चमकते हुए सरोवर से बहार निकलता है

किरण का सरीर इस वक़्त गोल्डन रौशनी से ऐसे चमक रहा था जैसे किरण किरण न हो कर दूसरा मिनी सूर्य हो

कुछ हे समय में वो पूरी गोल्डन ऊर्जा किरण के सरीर में समाहित हो जाती है रिद्धि ुशी तरह किरण को ले कर लौट जाती है जैसे वो आई थे

रिद्धि किरण को सपना के साथ सुला कर वह से गायब हो हवेली के मुख्या द्वार पे अपनी साध्वी रूप में पहुँचती है

इस वक़्त कोई आवर तो नहीं पैर हवेली में दादा जी आवर दादी जी उठ चुके थे सनान आदि कर अपनों पूजा आदि में लगे हुए थे

कुछ देर की प्रतीक्षा के बाद नौकर आ कर हवेली का मुख्या द्वार खोलता है

नौकर ......परनाम साध्वी जी

साध्वी जी ......कल्याण हो तुम्हारा

आशीर्वाद दे साध्वी जी हवेली के अंदर चली जाती अपने कक्ष में

एक एक कर परिवार के बड़े सदश्य अब उठने लगे थे

वही साध्वी जी जब किरण को अपने रूम में सुला कर वापिस चली जाती है उसके कुछ देर बाद हे किरण की आँखे खुल जाती है

किरण उठ कर बाथरूम में जाती है फ्रेश हो किरण जब अपने सभी कपडे उतारते हुए नहाने के लिया शावर ों करने जाती है तभी किरण की नजर अपने पीठ पे बने गोल्डन ड्रैगन के चित्र पे पड़ती है





किरण अपनी पीठ पे बने ड्रैगन टैटू को देख कर चौंक जाती है

किरण ......ये क्या है मैंने तो कभी ऐसा कुछ बनवाया है या गिर ऐसा कुछ पहले तो कभी नहीं देख

किरण अपनी पीठ हाथ लगा कर देखती है

किरण ......ये तो अमित लगता है पैर ये मेरी बॉडी पे कैसे आया

किरण टॉवल लपेट कर बहार आती है आवर सपना को उठा कर उसे सब बताती है

सपना .......क्या सच में स्वीटी ऐसा कैसे हो सकता है

किरण ....आप खुद हे देख लीजिये न मेरी पीठ पे चलिए मेरे साथ

किरण सपना का हाथ पकड़ बाथरूम ले जाती है आवर उसे अपना टॉवल हटा कर दिखती है

सपना ........स्वीटी सुबह सुबह अपने आम ( बूब्स ) क्यों दिखा रही है

किरण .....दीदी मेरी बूब्स नहीं मेरी पीठ देखो यहाँ मैं परेशान हूँ आवर आप है की सुबह सुबह मजाक कर रही है

सपना .......अच्छा बाबा सॉरी ला दिखा

किरण पलट कर सपना को अपनी पीठ दिखती है पैर उसे वह की टैटू नजर नहीं आता

सपना .......सुबह सुबह ऐसा मजब स्वीटी मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी

किरण ......दी मैं सच कह रही हूँ देखो ये है तो सही

किरण एक बार फिर मिरर में देखते हुए बिताती है

सपना .....सपना यहाँ कुछ नहीं है बिलकुल साफ है

किरण .........ये कैसे हो सकता है ये टैटू मैं देख प् रही हूँ पैर आपको दिखाई नहीं दे रहा है

सपना .....क्या तू सच बोल रही

किरण .....दी आपकी कसम अभी भी मेरी पीठ पे वो चित्र बना हुआ है

सपना .....पैर मुझे तो तुम्हारी पीठ पे कोई नीसाण तक नजर नहीं आ रहा है

किरण .......दी वो वैसा नीसाण है जैसे मूवीज में ड्रैगन नहीं दिखत है न वैसा हे पैर ये थोड़ा अलग है ये सोने के जैसे कलर में है

सपना ......तुम्हारा मतलब है की तुम्हारी पीठ पे जो टैटू तुम देख प् रही होगी वो गोल्डन ड्रैगन टैटू है

किरण ......है दी यही तो कब से आपको कह रही हूँ

सपना .......जरूर तुम्हारा इस या उसका तुमसे कोई सम्बंद है जब तक सूर्य नहीं आ जाता किसी से कुछ न कहना इस बारी में

किरण .....ठीक है दीदी अब आप जाइये मैं नाहा कर आती हूँ

सपना .......चल दोनों साथ हे नहाते है बचपन के जैसे

किरण .......दी तब हम छोटे थे

सपना .....है पता है अब हम दोनों के बड़े हो गए है हाहाहाहा





हस्ते हुए सपना किरण सफ़ेद चूचियों पे बने गुलाबी रंगत किसमिश को सहला कर बहार निकल जाती है





किरण .....िस्स्सस्स्स्स अह्ह्ह्हह्हह बहुत मरूंगी दी अगर दुबारा आपने इन्हे टच भी किया तो

सपना बाथरूम के बहार से

सपना ......क्यों अपने भाई को हे चूमने देगी क्या ये मैं नहीं छू सकती क्या

किरण ......हम्म्म्म इन्हे सिर्फ मेरा प्यारा भाई सूर्य हे छू सकता है कोई आवर इनपे नजर डालेगा तो जान से मर दूंगी उसे

किरण आँखे बंद कर सूर्य को याद करने लगती है तभी उसकी आँखों के सामने सूर्य का चेहरा आ जाता है जो दर्द में तड़प रहा था

किरण जल्दी से आँखों खोलती है

किरण ......ये क्या था जैसे भाई दर्द में मुझे पुकार रहा हो ये क्या होगा रहा पहले वो अजीब सा ड्रैगन का बच्चा आवर अभी ये मुझे गुरुदेव से बात करनी होगी आखिर ये सब मेरे साथ हो क्यों रहा है

क्या सम्बंद है इन सब से मेरा या भाई भाई का

वही दूसरे कक्ष में साध्वी जी आवर दादी जी किसी बात को ले कर चर्चा कर थे थे

दादी जी ......क्या सच में जो सुबह से समाचारो में दिखा रहे है वो सब मेरे पोते ने किया है

साध्वी जी ......है लाल कोई आवर नहीं सूर्य का रूद्र रूप है जिसके जरिये सूर्य बुराई का अंत कर रहा है

दादी जी ......पैर उसने मुखौटा क्यों पगन रखा है

साध्वी जी .......ताकि बुरी सकती या उसका वास्त्विम चेहरा जान आप सब को कोई नुकसान न पंहुचा पाए सूर्य अपनी पहचान गोपनीय रख कर आप सबको सुरक्षित रखते हुए अपना काम कर रहा है

दादी जी .......मैं आज बहुत खुश हूँ मेरे बेटे ने उन आतंकियों का ख़तम कर बहुत से बेगुनाहो की जान बक्शी है बहुत से माओ की गॉड उजड़ने से बचाई है

साध्वी जी .....सूर्य एक तरह से जुंग जीत कर आ रहा है बुराई के खिलाफ तो आपका फरक जनता है उसका स्वागत भी ऐसा हे हो किरण आवर कोमल दोनों के जरिया सूर्य के स्वागत तिलक करवाए

दादी जी ......किरण किस लिया

साध्वी जी ......जैसे कोमल को सूर्य की पत्नी के रूप में माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिला है

वैसे हे किरण को माँ महाकाली का आशीर्वाद है वो सूर्य की जीवनसंगिनी है दोनों का जनम विशेष कार्य के लिया हुआ है दोनों एक दूसरे के बिना ादुरे है

दादी जी ......ठीक है मैं अभी सब तयारी करती हूँ

साध्वी जी ......हेहेहे अभी सूर्य दिल्ली से चला भी नहीं है अभी से तयारी सुरु

दादी जी ......है अभी तयारी करूंगी सब अपने हाथो

दिल्ली सूर्य हाउस .......

अभी सूर्य मेर्री जी सानिया माया सोहेल हॉल में बैठे हे ऐसे अपने अपने जिसने सुना रहे थे तभी वह सुनिधि आवर राधिका सबका नास्ता ले कर आती है

सुनिधि .......क्या बात आप सब तो यहाँ गप्पे पड़ा रहे जो आवर हम सब वह इन्तजार कर रहे थे

माया .......बस हम आ हे रहे थे कुछ देर में

राधिका ......चलो सब नास्ता करो तुम सब का नास्ता उसे ले आये है हम

माया ......चलो सब बैठो वैसे भी भूख लगी है

अभी ये बैठने हे जा रहे थे की सोहेल के अबू का कॉल आ जाता है तो वो वह से उठ कर एक साइड चला जाता है

राधिका ......क्या बात है देवर जी इतने गोपियों के बिच कृष्णा कन्हैया लग रहे हो आप तो

सूर्य .......बस राधा रुक्मणि की हे कमी थी भाबी जी आप आ गई दोनों की ममी पूरी हो गई

राधिका ......रुक्मणि तो बने से रही वैसे भी मेरा नाम राधिका है आप कहो तो राधिका से आपकी राधा बन जाती हूँ

सुनिधि ......आवर मैं रुक्मणि बने को त्यार हूँ

सूर्य .......लगता है आप दोनों मुझे घर से निकलवा कर रहोगी

मेर्री जी ......बिलकुल सही इनकी राधा रुक्मणि वह जो इन्तजार कर रही है

राधिका .......आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले देवर जी इतनी गोलिया यहाँ बना ले आवर राधा रुक्मणि कही आवर छुपा राखी है हमसे कब मिलवा रहे हो

मेर्री जी .....ये ऐसे थोड़े मिलवाएगा आप हे आ जाओ हमारी तरफ पूरी फॅमिली के साथ कभी फिर राधा रुक्मणि के साथ साथ बाकि सभी से भी मिल लीजिये

सुनिधि .......सूर्य मैं आपको बताना भूल गई वो पापा आपसे मिलना चाहते है

सूर्य ......क्या पैर वो क्यों भला आवर वो तो मुझे जानते भी नहीं उन्हें

सुनिधि .......वो तुम्हे जानते भी है आवर उन्हें पता भी है की आप यहाँ हो मैंने हे उन्हें कॉल किया था

सूर्य .....आज नहीं सुनिधि एक हर बाद मेरे फ्लाइट है

सानिया ........क्या तुम आज हे जा रहे हो सूर्य कुछ समय तो रुक जाते ममी अबू भी आ रहे है सोफी के साथ आपसे मिलने

सूर्य .......सॉरी सानिया पैर मेरा जाना बहुत जरुरी है यकीं मनो वर्ण मैं भी तुम सब के साथ कुछ वक़्त बीतता

मेर्री जी .......ये सही बोल रहे है जब से आर्मी ज्वाइन की है ये ठीक से फॅमिली को टाइम हे नहीं दे पाए है कभी एक दिन तो कभी 2 दिन से ज्यादा घर पे रुक हे नहीं पते है

अभी ये लोग बात कर रहे थे की सूर्य के फ़ोन पे मैसेज बीप होता है

सूर्य फ़ोन चेक करने लगता है की राधिका फ़ोन ले लेती है आवर चेक करती है

राधिका .......ये स्वीटी कोण है देवर जी उसका हे मैसेज

surya......phone दीजिये भाबी जी

राधिका .....पहले बताओ कोण है स्वीटी फिर दूंगी

मेर्री जी .....इनके मां जी की लड़की है स्वीटी

राधिका ......ओह मुझे लगा देवर जी की कोई गफ होगी

स्वीटी मैसेज ......कब आ रहे हो आप जल्दी घर आओ मुझे काम है आपसे लव यू ......

सूर्य मैसेज ........लव यू स्वीटी 1 हर बाद की फ्लाइट है जल्दी हे मिलता हूँ ...

सूर्य मेर्री सब के साथ वक़्त बिताने कर सब से विदा ले एयरपोर्ट की तरफ निकल गई

सूर्यकांत सर ने इस बार अपनी पूरी फॅमिली के साथ 1 हफ्ता सूर्यगढ़ हवेली में बिताने का वडा किया सूर्य से आवर खुद हे सूर्य आवर मेर्री को छोड़ने गए सोहेल कुछ दिन सानिया आवर अपनी फॅमिली के साथ सूर्य हाउस में हे रुकने के बाद पुणे जाने वाला था सूर्य ने बिना किसी रोक के हाउस के सोहेल को सौंप दी आवर जाते वक़्त सूर्यकांत सर को देने को कहा

सूर्य 10:30 की फ्लाइट से जैसलमेर के लिया निकल गया जहा सूर्य के लिया कई सुरपरिसेस आवर जटके मिलने वाले थे............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..............
 
अपडेट. 144

सूर्य मेर्री सब के साथ वक़्त बिताने कर सब से विदा ले एयरपोर्ट की तरफ निकल गई

सूर्यकांत सर ने इस बार अपनी पूरी फॅमिली के साथ 1 हफ्ता सूर्यगढ़ हवेली में बिताने का वडा किया सूर्य से आवर खुद हे सूर्य आवर मेर्री को छोड़ने गए सोहेल कुछ दिन सानिया आवर अपनी फॅमिली के साथ सूर्य हाउस में हे रुकने के बाद पुणे जाने वाला था सूर्य ने बिना किसी रोक के हाउस के सोहेल को सौंप दी आवर जाते वक़्त सूर्यकांत सर को देने को कहा

सूर्य 10:30 की फ्लाइट से जैसलमेर के लिया निकल गया जहा सूर्य के लिया कई सुरपरिसेस आवर जटके मिलने वाले थे............

अब आगे ........

जैसलमेर एयरपोर्ट 12:30 पं.....

सूर्य मेर्री साढ़े 12 को जैसलमेर एयरपोर्ट से बहार निकले तो सामने वयोम कार लिया खड़ा मिला

सूर्य ......( नाटक करते हुए) वयोम आप यहाँ कैसे क्या आपको पता था की हम आ रहे है

वोयोम .......नहीं मैं यहाँ किसी आवर को लेने आया था

मेर्री जी ........चलो अच्छा है आप मिल गए वर्ण कोई तेज़ी बुक करनी पड़ती

वैसे आप जिसने लेने आये है

वयोम. .....वो मेरी छोटी बहन मानसी को लेना आया था

सूर्य .....क्या आपकी बहन आ रही है आपने कभी जिक्र नहीं किया

वयोम .....मुझे भी कहा पता था मेरी बहन भी है

मेर्री जी .....क्या मतलब बहन भी है से

सूर्य ......उनका मतलब होगा की इन्हे भी कहा पता था की वो यहाँ आ रही है क्यों वयोम जी

वयोम .....है है बिलकुल यही कह रहा था मैं

मेर्री जी .....आपकी बहन मानसी है कहा आवर कहा से आ रही है

वयोम ....वो देखो वो आ गई मेरी छोटी बहन मानसी

सूर्य जब उदार देखता है तो उसका मुँह खुला का खुला हे रह जाता है





मानसी एक बहुत हे खूबसूरत सिल्वर गोल्डन पंजाबी सूट में एयरपोर्ट से बहार निकलती है जिसे देख सूर्य चुप न रह सका

सूर्य ......वाओ क्या लग रही है

मेर्री जी आवर वयोम दोनों को सूर्य की बात सुनाई देती है पैर वोयोम ऐसे शो करता है की उसने कुछ भी नहीं सुना

मेर्री जी सूर्य की पीठ पे थपकी लगा देती है

मेर्री जी ......कुछ तो सरम कर वो वयोम की बहन है

सूर्य .....सॉरी

वयोम ......सूर्य मेर्री जी यही है मेरी छोटी बहन मानसी

मेर्री जी आगे बढ़ मानसी से hello करती है आवर गले लग मुलती है

सूर्य आगे बढ़ खुद हे मानसी का हाथ थम बेंड शेक करता है

( मेर्री ......ये आज सूर्य को क्या हुआ है ऐसा पहले तो कभी किसी को ले कर उतावला नहीं हुआ )

(vayom.....jyada एक्टिंग न कर सूर्य कही भन्दा न फुट जाये

सूर्य ......सॉरी पैर ये सब कैसे

वयोम ......मानसी को भी परतविलोक की हवा लग चुकी है संभल लेना वर्ण तुम्हारे साथ साथ मेरी भी लग जाएगी )

सूर्य .....hello मानसी जी कैसे है आप

मानसी ......hello मर. सूर्य ठाकुर ी ऍम फाइन hello भैया कैसे है आप

मानसी सूर्य को छोड़ वयोम से गले मिलती है

वयोम .....सफारी में कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुई न मानसी

मानसी ......नहीं भैया अब चले गर्मी बहुत है

वयोम सूर्य आगे बेथ जाते है वही मानसी आवर मेर्री जी पीछे बेथ जाती है

वयोम कार ड्राइव करते हुए सूर्य से बात करते हुए सूर्यगढ़ की तरफ निकल पड़े वही

मानसी आवर मेर्री की जल्दी हे दोस्ती जो गई 1 जानते से भी ज्यादा लम्बे इस सफारी में दोनों पुरे रस्ते पता नहीं दुनिया भर की बाटे करती रहे दोनों में से एक बार भी किसी ने वयोम आवर सूर्य को टोका नहीं

सूर्य .....देवियो अभी तो अपनी चर्चा को विक्रम दो हम घर पहुंचे वाले है

मेर्री जी .....क्या घर आ भी गया इतनी जल्दी कैसे

सूर्य ......देवी जी जरा अपना फ़ोन चेक करो 01:45 बज गए

मानसी .....आपसे बात करते करते वक़्त का पता हे नहीं चला

सूर्य जैसे हे हवेली में कार गुश्ता है

वैसे स्वीटी तेजी से भागते हुए निचे आती है

शालिनी जी ......अरे स्वीटी बेटी आराम से बेटी देख कर तुम्हे कही लग न जाये ऐसे क्यों दौड़ रही है

किरण ......बुआ सा सूर्य आ गया है

दादी जी ......स्वीटी जरा रुकना बेटी

किरण ......जी माँ सा कहिये

दादी जी ......कोमल बेटी जरा आरती का थल तो ले कर आना पूजा घर से

कोमल ....अभी ले कर आती हूँ माँ सा

कोमल आरती का थल ले कर आती है

कोमल .....ये लीजिये माँ सा

दादी जी .....थल तुम स्वीटी को दो आवर मेरी बात ध्यान से सुनो तुम दोनों को सूर्य का तिलक करना है तिलक होने के बाद हे वो अंदर परिवेश करेगा

शालिनी जी .....ये सब क्या है माँ सा

दादी जी .........शालिनी ये दोनों दोनों परिवार में सबसे छोटी है उनका अदिकार है सूर्य को तिलक करने का

रेखा जी .....माँ सा आप तो ऐसे खुश हो रही है जैसे मेरा बीटा कही का राजा है आवर वह जैसे बहुत बड़ा योध में विजय प्राप्त कर लोटा है

आवर किरण आवर कोमल उसकी पत्नी है जो अपने पीटीआई के योध विजय पे विजय तिलक करने जा रही हो

दादी जी .....जिसको जो समझना है संजो पैर मेरे बेटे का ग्रह में प्रवेश तब हे होगा जब स्वीटी आवर मेरी कोमल. तिलक करेंगी

शालिनी जी .....ठीक कोमल किरण जाओ सूर्य का तिलक करो

दादी जी दोनों को ले कर हवेली के द्वार पे पहुंची जहा सूर्य मेर्री आवर मानसी के साथ एंटर होने हे वाला था की दादी जी ने वही रोक दिया

सूर्य .....क्या हुआ माँ सा आपने अंदर आने से क्यों रोका

दादी जी .....पहले तिलक करने दे तुम सब का फिर अंदर आना आवर ये प्यारी से पार्क कोण है तुम्हारे साथ

मेर्री जी .....माँ सा ये वयोम की छोटी बहन है कुछ वक़्त यही रहेंगी

दादी जी .....स्वीटी कोमल जाओ सूर्य का तिलक करो फिर दोनों बच्चियों का

किरण आवर कोमल दोनों बहुत खुश थी सूर्य को तिलक करते वक़्त दोनों की वजह अलग अलग थे

जहा कोमल को लग रहा था की माँ सा उसे सूर्य की पत्नी के रूप में सवीकार कर उस से तिलक करवा रही जो की गलत भी नहीं था

वही स्वीटी ये सोच कर खुश थी की दादी जी ने अंजाम हे सही पैर उसे सूर्य की पत्नी होने पहले हे उसका अदिकार मिल रहा है

कोमल ने मेर्री जी का तिलक करने के बाद थल किरण को दे दिया किरण ने जैसे हे मानसी को तिलक किया एक पल को किरण की आँखों के सामने कुछ दृश्य गम गया जिन्हे देख किरण सूर्य को गुस्से से गर्ने लगी साथ हे किरण की आँखे भी नाम हो गई थे

सूर्य अपनी माँ सा के पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है

किरण पलट कर जाने लगी तो सूर्य ने उसका हाथ थम लिया

आवर किरण को अपने गले से लगा लेता है





ऐसे हे सूर्य के गले कोमल भी लग्न चाहती थी पैर वह बोल नहीं पायी पैर सूर्य समाज जाता है आवर दूसरी तरफ से कोमल को गले लगा लेता है

मेर्री जी आवर मानसी दादी जी के पेअर छू आशीर्वाद लेती है

दादी जी दोनों को अंदर ले जाती है

सूर्य .....क्या हुआ मेरे स्वीटी की आँखों में आंसू क्यों है क्या मैंने कुछ गलत कर दिया

किरण ......क्या जरुरत थे इतना सब झेलने की कितनी तकलीफ हुई होगी आपको

सूर्य .....किसी बात कर रही हो स्वीटी तुम

किरण .....आज सुबह जो हुआ मुझे पता चल गया

कोमल ......क्या हुआ था आपको सुबह

सूर्य .....कुछ भी तो नहीं देख मैं बिलकुल ठीक हूँ

कोमल सूर्य के दिल पे हाथ रख देती है

कोमल .....यही वो जगह है न जहा आपको पीड़ा हुई थी

सूर्य .....मतलब तुम्हे भी पता चल गया

किरण .....क्या जरुरत थी उस यज्ञ में भाग लेने की

सूर्य .....अभी नहीं बाद में रूम में बात करेंगे आवर है प्लेसेस उसे इस सबके लिया कभी दोष मत तुम दोनों आवर ये सब अपने तक हे सिमित रखना

किरण ........मुझे एक बात आवर पूछनी थी

सूर्य .....पहले अंदर चलो

सूर्य दोनों को ले कर अंदर आता है जहा बाकि सब मानसी आवर मेर्री जी से मिल रही थी

सूर्य अपनी माँ आवर बड़ी मम्मी से गले लग मिलता है

रेखा जी .....कैसा है मेरा बीटा आज कुछ बदला बदला लग रहा है

सूर्य .....कुछ ज्यादा हे हैंडसम जो गया हूँ न मम्मी

रेखा जी ....हेहेहे आते हे शैतानी सुरु कर दी क्या देख ले शालू अपने बेटे को मुझसे हे शैतानी कर रहा है

शालिनी जी ......दीदी सूर्य मुझसे ज्यादा आपका बीटा है अब माँ बेटे के बिच मैं नहीं आने वाली

रेखा जी ......देख वो तेरी गफ आ रही है कही मेरे साथ चिपका देख जलने न लगे

सूर्य देखा जी के नजरो का पीछे करता है तो सीढ़ियों से मेंजा बुआ आती हुई बहार आती है

सूर्य आगे भध मेनका बुआ के पेअर छूटा है

सूर्य ....कैसे हो बुआ सा

मेनका जी ......मुझे क्या हुआ है बिलकुल फिट हूँ तुम्हारे सामने

सूर्य उन्हें अपने साथ लगा ये हुए हॉल में बाकि सब के साथ आ बेथ जाता है

सूर्य .....माँ भूख लगी है खाना लगाओ न

प्रीती .......है माँ अब तो सूर्य भी आ गया है

सूर्य ......मेरे आने से क्या मतलब है आपका

पायल ......तुम्हारे आने के चाकर में हमने भी खाना नहीं खाया है

सूर्य .....ये क्या है माँ 2 से ऊपर टाइम जो गया है आवर आप सब ने अभी खाना नहीं खाया

ये बात सूर्य ने थोड़ी नाराजगी से कही थी

मेनका .....भाबी पे क्यों गुस्सा जो रहा माँ सा ने मना किया था

कहा की सब साथ में हे खाएंगे

सूर्य .......ये क्या है माँ सा काम से काम आप को तो ऐसा नहीं करना चाइये था किसी एक पे प्यार लुटाने के चाकर में आपने मेरी सभी बहनो आवर बाकि सब को भूखा रखा है अगर मैं साम को आता या फिर कल तो क्या फिर भी आप ऐसा हे करती

शालिनी जी .....सूर्य ये कैसे बात कर रहा है वो माँ सा है

सूर्य ......सॉरी माँ सॉरी माँ सा पैर ये सब ठीक नहीं है प्यार जताने के बहुत से तरीके हो सकते पैर इस तरह एक को खुश करने के चाकर में बाकि सब को पीड़ा पंहुचा दी

सूर्य की बात सुन दादी जी का खुला हुआ चेहरा मुर्जा जाता है जो किसी को अच्छा नहीं लगता

सूर्य को भी लगा की उसने अपनी माँ सा की भावनाओ को आहात किया है

सूर्य .......सॉरी माँ सा चलिए आज आपको मैं अपने हाथो खाना खिलता हूँ

सूर्य अपनी माँ सा को ग्लैड में उठा कर वही हॉल में लगी चेयर पे बैठा देता है

बाकि सब भी एक एक कर आ कर बेथ जाते है

सूर्य एक प्लेट में खाना निकल कर अपने हाथो निवाला बना माँ सा के मुँह की तरफ करता माँ सा सूर्य का हाथ पकड़ लेती है

सूर्य के मन करने हाथ हटा लेती है

जैसे हे सूर्य ने निकल माँ सा के मुह में डाला वैसे हे माँ सा की आँखों से 2 बून्द आंसू उनके गलो पे लुढ़क जाते है जो पास में बैठी किरण सूर्य के रुमाल से पूछ देती है

ये सब नजारा सभीबड़ेख रहे थे खुश कर मानसी क्युकी उसकी लाइफ में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा था

सूर्य एक आवर निवाला बना कर माँ सा के पास बैठी स्वीटी के मुँह की तरफ करता है

स्वीटी एक बार सूर्य की आँखों में देखता है फिर अपना मुँह खोल देती है

सब अपना अपना निवाला वापिस अपनी अपनी प्लेट में रख देती है

सूर्य .....क्या हुआ तुम सब खा क्यों नहीं रही हो

राधा .....जैसे माँ सा आवर स्वीटी को खिलाया वैसे हे हमें खुला तब खाएंगी

माँ सा .........जा खुला दे अपनी बहनो को भी मैं अपना खाना खा लुंगी

सूर्य कोमल राधा पायल प्रीती अलीना सपना आवर मेर्री जी को खिला कर मानसी की तरफ बढ़ा

मानसी .....मैं खाल लुंगी आप खा लीजिये

सूर्य ....जब सबको खुला रहा हूँ तो आपको कैसे नहीं खिलाऊंगा अब आप भी इस परिवार का अभिन अंग है इस लिया जो सबका है वो आपका भी है अब अपना मुँह खोलो

शालिनी जी .....बेटी मानसी ाँ का कभी अपमान नहीं करते है आज से तुम भी इस परिवार का निशा जो इस परिवार की बेटी हो फिर अपने हे परिवार के बिच कैसे सरम कैसे जीजाक बेटी

मानसी अपना मुँह खोल देती है आवर सूर्य उसे भी निवाला खिला देता है

सूर्य .....लड़कियों का हो गया अब आपको भी खुला हे देता हूँ

सूर्य रेखा जी आवर शालिनी जी को खिला कर मेनका जी को जैसे हे खिलता है मेनका जी मजाक में सूर्य की ऊँगली आवर अंगूठे को दांतो में दबा लेती है

सूर्य ....अह्ह्ह्हह बुआ आपने मेरे ऊँगली काट ली

मेनका .....मुझे सबसे लास्ट में क्यों खिलाया

सूर्य जल्दी से मेनका के दोनों गलो को चुम लेता है जिस से मेनका का पूरा चेहरा एक हे पल में लाल हो जाता है

सूर्य ......इस लिया खिलाया आपको सबसे लास्ट में

सूर्य अपने लिया खाना निकलने लगता है तो सभी लड़किया एक एक निवाला सूर्य की प्लेट में अपनी प्लेट से रख देती है

सूर्य .....थैंक्स अगर ये सब आपने एक साथ मुझे कहिल्या होता तो पता नहीं मेरा क्या होता

सब बहुत मस्ती मजाक के साथ खाना कहते है है फिर सब किसी न किसी के साथ रूम में आराम करने चल देते है गर्मियों में ये एक तरह का रूटीन सा जो जाता है खाना खाने के बाद रेस्ट न करे तो खाना पचता हे नहीं है

सूर्य .....अंदर आ जाओ राधा बहार क्यों कड़ी हो

राधा अंदर आते हे रूम को लॉक कर देती है

आवर सीधा आ सूर्य की बहो में समां जाती है

सूर्य .....क्या बात है मेरी राधा रानी

राधा .....इस बार जहा भी तुम जाओगे मैं भी चलूंगी मुझे यहाँ अच्छा नहीं लगता तुम्हारे बिना

सूर्य .....ठीक है राधा रानी जरूर चलना

राधा ....सच कह रहे hi न

सूर्य ........बिलकुल सच वैसे भी 3,4 दिन में हम सब परीलोक चल रहे है

राधा .....क्या सच में हम परीलोक जायेंगे

सूर्य ....है राधा वह तुम्हारे सामने बहुत से सच आएंगे तुम जल्दी हे इमोशनल हो जाती हो खुद पे काबू रखना राधा रानी

राधा .....ऐसा कोनसा सच है

सूर्य .....पता नहीं पैर मुझे लग रहा कुछ है जो सामने आने वाला है जो कही न कही मुझसे जुड़ा है या फिर हम सब में से किसी से जुड़ा है

राधा ......तब की तब देखेंगे अभी मुझे मुँह मीठा करना है 2 दिन जो गए है

कहते हुए राधा सूर्य के लिप्स चूसने लगती है सूर्य की बहो में काश कर

जिस से राधा की मौसमी से सूर्य के सीने में गुदगुदी सी होने लगती है

कुछ 7,8 मिनट्स बाद दोनों अलग हुए

राधा सूर्य के सीने से लगे अपनी सांसे दुरुस्त करने लगती है सूर्य राधा को उठा कर बीएड पे लेट जाता है

दिल्ली सूर्य हाउस .........

सूर्य आवर मेर्री जी के सूर्यकांत जी के घर से जाने के बाद

माया आवर सानिया दोनों बहार लोने में रात में जो मूवी देखि थी सूर्य आवर मेर्री की उसकी चर्चा कर रही थी

इस बात से बिलकुल अनजान की वो किचन के पास कड़ी है है जहा किचन में इस वक़्त राधिका खाना बनाने के लिया चावल (रेज ) साफ कर रही थे

माया आवर सानिया नार्मल आवाज में बाते करते हुए हैश रही थी दोनों को की हाशि सुन राधिका का ध्यान इनकी बातो पे चला जाता है

माया ......कुछ भी बोल यार सानिया तेरा आशिक़ सूर्य ठाकुर एब्नार्मल है वह से यार सच में कितनी बड़ा डिक था उसका आवर उसका हेड देखा के हॉल से हे कितने बड़ा आवर प्यारा लग रहा था

सानिया ......कहा था न मैंने वो बहुत अलग है तुम्हारे तो देखने भर से हालत कैसे होगा गई थी रात को यहाँ मेरी हालत तुमसे भी ख़राब थी

मैंने तो उसे अपने हाथ से पकड़ के मस्सगे की थी आवर तो आवर उसका वो गोरा चिता 9 इंची लैंड अपने मुँह में लिया था तब सोच मेरी मुनिया का क्या जाल हुआ होगा

माया .....तू बड़ी किस्मत वाली है यार आवर एक मैं हु जो ऊँगली कर कर के यहाँ छूट संत करती हूँ

सानिया .......देख लेना तुम से पहले तुम्हारी छोटी बहन सूर्य को अपने अंदर. ले लेगी

माया .....सच कहा यार मैं तो ये सोच कर दर रही हु जब उसका वो घोडा सुनिदि की गुफा में गुसेगा तो जिन्दा बचेगी भी की नहीं

सानिया .......चुदाई से कभी कोई करता है क्या देखा नहीं रात में कैसे मेर्री जी जो की सूर्य को कभी ट्रेनिंग दिया करती थी आर्मी कल सूर्य उसको हे घोड़ी बना कर अपना घोडा मेर्री जी की गोरी छूट में पेल रहा था

माया ......जल्दी उसे बुला फिर हम दोनों भी एक साथ अपनी अपनी खुलवाती है

( राधिका ......वह द्वार जी आप तो बड़े वाले सीकरी निकले एक तीर से तीन तीन सीकर कर लिया इन दोनों के चाकर में मेरी छूट कब गीली हो गई

एक वो मेरा पति है गांडू कही का जिसकी नुनी तक कड़ी नहीं होती खुद को आर्मी में कहता है

अब तो देवर जी इसका सीकर भी आपको हे करना होगा अपने घोड़े से )

सानिया ......नहीं यार माया मुझे किसी आवर के सामने करना वो भी पहली बार नहीं यार

माया ......तू उसे बुला तो सही फिर देखते है कुछ वैसे भी वो तुम्हारी गरम जवानी कल देख चूका भले हे पिछ में हे सही हहहहए

सानिया .......वो सब तेरी वजह से हुआ है आवर फर्श गई बेचारी दीप्ती दीदी वो तो अच्छा है सूर्य ने उन्हें माफ कर दिया

माया ......सच कहा यार न हमने सोचा था की ऐसा होगा न उन्होंने सोचा था की सूर्य इतना तेज है

आंटी जी .......बेटी आप दोनों वह कर रही हो चलो अंदर आ जाओ गर्मी बहार क्यों कड़ी जो दूप लग जाएगी

माया ....अभी आई आंटी जी

वही सोहेल अपने अम्मी अबू आवर अपनी छोटी बहन को लेने निकल जाता है एयरपोर्ट क्युकी उनकी फ्लाइट्स का टाइम हो चूका था

राधिका सानिया आवर माया का प्लान सुन अपना अलग हे प्लान त्यार करते हुए खाना त्यार करने लगती है ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............
 
अपडेट. 145

सानिया .......वो सब तेरी वजह से हुआ है आवर फर्श गई बेचारी दीप्ती दीदी वो तो अच्छा है सूर्य ने उन्हें माफ कर दिया

माया ......सच कहा यार न हमने सोचा था की ऐसा होगा न उन्होंने सोचा था की सूर्य इतना तेज है

आंटी जी .......बेटी आप दोनों वह कर रही हो चलो अंदर आ जाओ गर्मी बहार क्यों कड़ी जो दूप लग जाएगी

माया ....अभी आई आंटी जी

वही सोहेल अपने अम्मी अबू आवर अपनी छोटी बहन को लेने निकल जाता है एयरपोर्ट क्युकी उनकी फ्लाइट्स का टाइम हो चूका था

राधिका सानिया आवर माया का प्लान सुन अपना अलग हे प्लान त्यार करते हुए खाना त्यार करने लगती है .............

अब आगे ......

असुर लोक .........

असुरगुरु असुर लोक पहुंच काल के विषय में जानने की बहुत कोशिश करते है किन्तु अपने अथक प्रयाश के बाद भी असुरगुरु के हाथ खली के खली रहे

असुरगुरु ......कोण है ये काल क्या विशेष है इसमें जो हम अपनी सम्पूर्ण सकती लगा कर भी उसका वास्तविक परिचय नहीं जान पाए थे

समय का खेल देखो हम असुरलोक के असुरगुरु जो अपनी ीचा के बिना किसी को आसिष तक नहीं देते थे

वही हम आज एक नहीं काल को 2 2 वचन दे बैठे है

नियति का कैसा ये कैसे भिसत है जिसमे केवल हम एक सूक्षम प्यादे भर रह गए है

असुरगुरु अपने हाथो में वो सीसी उठा कर देखते है जिसमे सूर्य के खून की एक बून्द थी


असुरगुरु ....अगर हम वचन से न बन्दे होते तो इस रकत से उसकी सत्यता जान सकते थे किन्तु हम विवश है अपने हे दिए वचन से अब जो त्रिदेव की मर्जी वही होगा

असुरगुरु सूर्य के रकत वाली सीसी को ले कर गुफा में बने एक दूसरे कक्ष में जाते है

जहा असुरगुरु अपनी तांत्रिक सकती का प्रयोग कर हवन स्थल का निर्माण करते है

असुरगुरु वही हवन स्थल पे बेथ उसे परनाम करते है जिस से अग्नि प्रज्वलित hi जाती है

सूर्यगुरु कुछ बड़े हे विचित्र मंत्र को प्रयोग करने लगते है साथ हे घी आवर ब्लैक कलर के दानो जैसे हवन सामग्री की आहुति हवन में देने लगते






देखते हे देखते हवन से अग्नि की लपटे उठा सुरु जो जाती है

असुरगुरु हवन में मन्त्रोव्स्की साथ आवर आदिक मात्रा में आहुति देने लगते है

लगभग 1 हर तक चले इस हवन में असुरगुरु बिना रुकने मंत्रो का जाप करते हुए आहुति देते है

अंत में अपने दाहिने अंगूठे पे अपने हे पास रहे खंजर से जखम कर कुछ बुँदे रकत की हवन को आहुति देते है

असुरगुरु .....अब वक़्त है पुत्र काल के रकत की आहुति हवन को प्रदान करनी की

कहते हुए वह काल से लिया हुआ एक बून्द रकत उस हवन में अर्पण कर देते है

सूर्य का रकत हवन में गिरते हे हवन की अग्नि अपना परचंड रूप लेने लगती है






अग्नि का परचंड रूप आवर तप एक बार को तो असुरगुरु को भी अपने आँखों के आगे हाथ करने पे मजबूरन कर देता है

असुरगुरु .....हम जानते है तुम सदर्न मानव नहीं हो काल .या फिर तुम मानव हे नहीं हो तुम्हारे रकत की केवल एक बून्द अग्नि को भी जवाला में बदल दिया

कुछ देर पचत अग्नि डेरी डेरी संत होने लगती है

कुछ देर बाद उस अग्नि से कुछ प्रकट होता है

जो कुछ देखने में ऐसा था






asurguru.......yagya पूर्ण हुआ उत्तम आवर सटीक गुप्त रकता संदेशवाहक पत्र (रकत पत्र ) भी त्यार है अपने आदेश के लिया

तभी उस रकत पत्र से आवाज आती है

R.patra ......मेरे लिया क्या सन्देश है स्वामी

असुरगुरु ........अभी तुम जाओ रकत पत्र तुम्हारी आवश्यकता होने पे लौट आना

R.patra .....जो आज्ञा स्वामी

रकत पत्र वह से गायब हो जाता है

असुरगुरु ......अभी बहार निकले हे थे की सामने से वातापी आती हुई नजर आती

असुरगुरु ......पुत्री वाटीपी तुम इस वक़्त यहाँ

वातापी ......परनाम पिता श्री

असुरगुरु .....कल्याण हो पुत्री वातापी

पुत्री हमने तुमसे कहा था हमें तुम केवल काली अमावश्या को हे मिलने आ सकती हो फिर इस वक़्त समय से पूरा किस लिया

वातापी .....क्षमा पिता श्री आपके पुत्र का संदेश है आपके लिया

असुरगुरु .....क्या सन्देश है पुत्री हमारे पुत्र कंटकासुर का हमारे लिया

वातापी .......पिता श्री उनका सन्देश है की कल रात्रि को उनके क्षेत्र में आसुरी ऊर्जा का आगमन हुआ था वो भी एक नहीं दो दो आसुरी सकती

असुरगुरु ........वो कोई आवर नहीं हम हे थे पुत्री कल रात्रि हम परतविलोक पे थे किसी अन्य के साथ लगता है पुत्र कंटकासुर की सकती में वारिधि hi रही है

वातापी .......आपने हे तो हमें उस मार्ग का सुझाव दिया था पिता श्री जिस से स्वामी अपनी सकती अपना सामर्थ्य बढ़ा सके

असुरगुरु को कल रात की घटना याद आते हे उनके मुख पे चिंता की रेखाएं उभर आती है

वातापी ......क्या हुआ पिता श्री आपके मुख मंडल पे ये चिंता की रेखाएं किस लिया

असुरगुरु .......पुत्री कल परतविलोक पे एक विशेष दिव्या सकती दरक से हमारी भेट हुई जो की बहुत सक्तिसाली आवर खुसाल योद्धा था कही पुत्र कंटकासुर उसके मार्ग में न आ जाये क्युकी पुत्र कंटकासुर उस योद्धा का मुकाबला नहीं कर सकता है

वातापी ......ऐसी कोनसी दिव्या सकती है पिता श्री जिसके विषय में सोच कर आपके मुख मंडल पे चिंता की रेखाएं उभर आई

असुरगुरु .......काल नाम उस दिव्या सकती दरक योद्धा का उसका वास्तविक परिचय हम भी नहीं जान पाए किन्तु .........

वातापी ......किन्तु क्या पिता श्री आप रुक क्यों गए

असुरगुरु ........जितना वो कुसूल योद्धा है उतना हे वाणी से मोह लेने वाला भी जिस तरह के उसके नारी जाती के विषय में विचार है आज नहीं तो कल पुत्र कंटकासुर आवर पुत्र काल का सामना सामना आवश्य होगा हमें इसी बात की चिंता है

वाटीपी ......आपको हे कुछ करना होगा पिता श्री

असुरगुरु ......हम कुछ नहीं कर सकते है पुत्री हम वचन से बन्दे है अब केवल तुम हे पुत्र कंटकासुर को सुरक्षित कर सकती हो

वातापी ......वो कैसे पिता श्री

असुरगुरु ..........जब तक हम कंटकासुर की हवश को नियंत्रित करने का मार्ग नहीं खोज लेते तुम्हे आवर दोनों राजकुमारियों को पुत्र कंटकासुर की हवश को सॉना होगा

वातापी .....आप सिगरा हे उपाय कीजिये हम उन्हें सन्देश भेज उन्हें सावधान करते है

वातापी .....पुत्री अब से तुम मुझे मिलने नहीं आओगी जो भी सन्देश तुम सन्देश पत्र के जरिये मुज तक पहुचाओगी आवर परतविलोक से जुडी हर चर्चा मुज तक पहुचानी है

वातापी ......किन्तु कैसे पिता श्री

असुरगुरु ......अपने रकत के एक बून्द हमें दो तुम्हारे पास हमारा सन्देश पत्र अपने आप पहुंच जायेगा बिना किसी की नजर में आये

वातापी अपने रकत की बून्द दे कर वह से चली जाती है

वही असुरगुरु फिर से एक पत्र त्यार करने लगते है ...........

सूर्यगढ़ .......

साम के यही को 5 बज रहे होंगे इस वक़्त ज्यादातर लड़किया रेखाजी शालिनी जी आवर मेनका के साथ हॉल में बैठे कॉफ़ी का मज़ा ले रहे यहाँ से जो गायब थे वो थे राधा किरण आवर पायल दादी जी सूर्य

दादा जी बहार वयोम के साथ थे आवर दादी जी साध्वी जी के साथ

मेनका जी .....ये पायल आवर राधा स्वीटी नजर नहीं आ रहे है अभी तक उठे नहीं क्या

यहाँ पैर आ कर लगता है ये लड़की भी आलसी हो गई है आने दो उसके पापा का कॉल वही कान खीचेंगे उसके

रेखा जी .....हेहेहे दीदी आपका बर्फ भी तो गायब है अब समाज जाइये कहा होगी चांडाल चौकड़ी

शालिनी जी .....आवर कहा दीदी अब उनका भाई आ गया है तो वही होगी उसके रूम में

मेनका ji......main देखता हूँ उन्हें तो

सपना ......आप रुकिए बुआ सा मैं बुला कर लती हु उन सबको

रेखा जी .....बेटी सपना तुम भी कही उनके साथ न शामिल hi जाना

सपना .....बस अभी आई बड़ी बुआ सा

सपना वह से निकल जाती है सूर्य के रूम की तरफ

मेनका जी .......शालिनी जल्दी से सूर्य की सदी कर दो कही ऐसा न हो उसकी ये बहने किसी को उसके पास भी न फटखने दे

शालिनी जी ......क्या दीदी आप भी सूर्य अभी बच्चा है आवर ये सब उसकी बहने है तो अपनी भाबी यही सब याय कर लेंगी मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं मेरी बेटीये जिसे पसंद करेंगी उसे सूर्य के लिया OK कर दूंगी

मेनका जी ......वो अब बच्चा नहीं रहा है शालिनी पूरा घोडा हो गया है ( अब तुम्हे कोण बताये जिसे तुम बचाई बोल रही होगी वो घोडा एक बार चढ़ गया तो 9 महीने बाद बचाई बहार होगा )

रेखा जी ......दीदी आपने कब देख लिया की मेरा बीटा घोडा बन गया है हेहेहे

मेनका .....एक बार तू भी देख ले पता चल जायेगा की वो घोडा है की बच्चा

शालिनी जी .........बेटी आप सब बहार जाओ सूर्य वही आता होगा

सब लड़किया एक एक कर बहार लोने में चली गई

शालिनी जी .....दीदी काम से काम बच्चियों के सामने तो ऐसा न कहा करो बछिया जवान hi चुकी है उनपे क्या असर होगा

मेनका ji.....matlab तुम मानती हो की सूर्य का part एब्नार्मल है

शालिनी जी .....हम्म्म

शालिनी जी का जनाब सुन रेखा जी उसे गर्ने लगती है

शालिनी जी .....दीदी ऐसा वैसे कुछ न सोचा सूर्य कोमा में था तब जो नर्स सूर्य को बीएड बाथ देती थी तो मैं भी कभी कभी हेल्प करती थे इस लिया मुझे पता है की वो वह से एब्नार्मल है पैर मुझे दीदी आप पे कुछ फौत hi रहा है

मेनका जी .......देख मैं पहले हे सॉरी बोल देती हूँ तुम दोनों को जो देखा वो गलती से देखा था

रेखा जी ......क्या मतलब गलती से देखा था

दीदी

मेनका जी .....तुम दोनों को याद है परषो जब सूर्य को माँ सा ने अंदर नहीं आने दिया था क्युकी वो मिटटी से भरा हुआ था

शैली जी ......याद है माँ सा ने फिर उसे बहार हे बहाने को कहा था

मेनका जी .....ुशी वक़्त विजय का कॉल आ गया था इस लिया मैं ऊपर चली गई थी वही खिड़की के पास मैं उसने बात कर रही ...... ..... ...... तभी मैंने आवर मेर्री ने गलती से उसका एब्नार्मल part देख लिया था

रेखा जी .....छू छू दीदी आप भी न वो आपका भतीजा है

मेनका जी .....मैंने कब मन किया भाबी सा आवर मैं कोनसा उस घोड़े के निचे आने वाली हूँ मैं जो देखा वही कहा इस लिया कह रही वो बच्चा नहीं अभी सदी कार्डो बच्चो की लिंग लगा देखा तुम दोनों की ग्लैड में एक ीदार एक उदार एक कंडे पे एक ग्लैड में फिर खिलाती रहना अपने पोते पोतियो को

सपना जब रूम में पहुंची तो किरण राधा पायल तीनो सूर्य को अपने निचे दबाये मस्ती कर रही थी

सपना .....ये क्या होगा रहा है वह बड़ी बुआ सा छोटी बुआ सा तुम सब पे गुस्सा हो रही चलो निचे चल कर कॉफ़ी पीओ

राधा ......सपना की बच्ची एक दिन तू पिटेगी मुझसे देख लेना

सपना ........देख लुंगी बुआ सा आपको भी

राधा......... रुक बुआ सा की बच्ची कितनी बार कहा मुझे बुआ बोलेगी मुँह you'd दूंगी सपना जल्दी से बाथरूम में गुस्सा जाती है कुछ देर नाटक कर सपना किरण आवर पायल बहार चले जाते है

सूर्य .....सपना गेट खोलो सब गए बहार

सपना .....राधा गई क्या रूम के बहार

सूर्य .....जब इतना डर्टी hi तो पंगे क्यों लेती हो उस से चलो बहार आवो वो गई

सपना गेट खोल कर देखते सूर्य के अलावा वह कोई नहीं था

मौका देख सपना सूर्य को देखा दे बीएड पे गिरा देती है

सपना ........दोपहर से तराश रही थी एक किश के लिया आप hi की अपनी बीबी का जरा भी ख्याल नहीं रखते हो

सूर्य ......बीबी खुद दूर दूर रहती है जैसे मैं कुछ चुभा दूंगा

सपना सूर्य के ऊपर लेट किश करने लगती है वही गेट हल्का सा खोल किरण देख कर मुस्कुराते हुए बंद कर देती है

कुछ देर चले किश से सूर्य का नागराज नींद से जाने लगता है जिसे सपना अपने हाथ से सहला देती है किश करते हुए सूर्य का एक हाथ इस किया से सपना की सलवार के अंदर कूल्हों पे जा पंहुचा वही अपने नंगे खुल्हो पे सूर्य का हाथ मह्सुश कर किरण आँखे खोल सूर्य को देखि तो

सूर्य की आँखों से आँखे मिलते हे सपना अपनी आँखे बंद कर लेती है सूर्य आराम से किश करते हुए सपना के रूही जैसे सॉफ्ट सॉफ्ट खुले को सहलाने लगता है बिच बिच में सपने के बैक दूर को भी ऊँगली से सहला देता जिस से कुछ हे देर में सपना लपटे हे हुए सूर्य पे ढेर जो गई आवर हाफने लगी

कुछ देर बाद सूर्य के माथे पे किश कर सपना अपने रूम में भाग जाती है वही सूर्य फ्रेश होने निचे चला जाता है सब के पास .............

असुर कबीला .........

विक्रम की आँखे जब खुली जब तेज दूप का असर उसके चेहरे पे हुआ

विक्रम चीखते हुए आँखे खोलता है खुद के सरीर को टटोल कर देखता है की वो जिन्दा है की नहीं

विक्रम .......थैंक गॉड मैं जिन्दा हु लहता है वो जरूर कोई भयानक सपना था

विक्रम अपना सर से मिटटी पैटर्न झड़ते हुए उठा तो सामने का सीन देख उसकी चीख गूंज उठी जंगल में

विक्रम .....वो वो सपना न नन्ही सच था ये ईई गुजर सिंह की बॉडी है

विक्रम के हाथ पैर एक बार फिर कोने लगते है जैसे जैसे कलां के आदमियों की लाशे सामने आती उसका दर भदाता जाता है

अंत में जब बर्दास्त न हुआ तो वो बिना देखे जंगल की आवर भागने लगा उसे ये भी पता नहीं की वो जूस दिशा में भाग रहा वो जंगल की उतना हे अंदर असुर कबीले की तरफ भाग रहा

विक्रम अपनी जिंदगी में सायद हे पहले कभी इतना आदिक डरा था

विक्रम बार बार पलट कर देखते हुए भागता रहा उसकी सबसे हद से ज्यादा तेज हो गई थी

गिरते पेस्ट पैदा से तकरते हुए विक्रम खंडहरों से काफी दूर निकल जाने के बाद जब उसका सरीर जनाब दे देता तो वह वही गिर कर बेहोश हो जाता है

विक्रम का सरीर जगह जगह से पैदा आवर झाड़ियों से टकराने वह उलझने से चील गया था

कोई 2 जानते बाद जंगल से लकड़ी आवर सीकर ले कर जाते हुए आदमी आवर महिलाओ की नजर विक्रम पे पड़ती है

ये दरशल असुर कबीले के लोग थे जो जंगल से सुखी लकड़ी आवर जंगली जीवो का सीकर करते हुए यहाँ तक पहुंच गए थे

विक्रम को देख सभी वह आ जाते उनमे से एक महिला 28.29 साल की थी वो विक्रम को पहचान जाती है

महिला .....ये तो वही सहरी बाबू है जो कुछ दिन पहले हमारे कबीले में गुरु जी से मिलने आये थे बिखु इन्हे ले कर आया था

आदमी ....उसे कबीले में ले चलो वही गुरु जी इसका उपचार करेंगे

वही पास से पेड के दो सीधी लड़की काट कर चाल से रही बना कर कुछ लकडिया बांड कर स्टेचर जैसा त्यार कर विक्रम को इस्पे लिया कर असुर कबीले की तरफ भाड़ जाते है सब लोग विक्रम अभी भी बेहोश हे था आवर उसके जख्मो से खून निकल रहा था ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............

कल की एक अपडेट आज हे पोस्ट कर दी है फ्रेंड .........गुड नाईट फ्रेंड .......
 
अपडेट. 146

विक्रम को देख सभी वह आ जाते उनमे से एक महिला 28.29 साल की थी वो विक्रम को पहचान जाती है

महिला .....ये तो वही सहरी बाबू है जो कुछ दिन पहले हमारे कबीले में गुरु जी से मिलने आये थे बिखु इन्हे ले कर आया था

आदमी ....उसे कबीले में ले चलो वही गुरु जी इसका उपचार करेंगे

वही पास से पेड के दो सीधी लड़की काट कर चाल से रही बना कर कुछ लकडिया बांड कर स्टेचर जैसा त्यार कर विक्रम को इस्पे लिया कर असुर कबीले की तरफ भाड़ जाते है सब लोग विक्रम अभी भी बेहोश हे था आवर उसके जख्मो से खून निकल रहा था ...

अब आगे ............

हिमालय ऋषि आश्रम ......

ऋषि 1......आपके शिष्य की वास्तविक परिचय क्या राजगुरु (पारी लोक गुरुदेव )

जिन जीवो का अस्तित्व हजारो वर्ष पूरा परतवि से मिट चूका है उन जीवो की ऊर्जाशक्ति आपके शिष्य को कैसे मिली

गुरुदेव .......ऋषिवर आपसे क्या छुपाये है आप ये तो अवश्य जान चुके होंगे की सूर्य दिव्या अंश है

ऋषि 2 ......ये तो हमें ुशी वक़्त पता चल गया था जब जब आपके शिष्य ने पुत्री मानसी की असुर सकती दर्जन की थी

कोई सदर्न मानव उस पीड़ा को सहन नहीं कर सकता उसकी मृत्यु निचित थी अगर आपका शिष्य सदर्न मानव होता तो

गुरुदेव .......ऋषिवर मेरा शिष्य परबु @@@@ का अंश है किसका जनम असुरराज नरकासुर के अंत के लिया हुआ है

ऋषि 1.......क्या ये सत्य है राजगुरु

गुरुदेव ......जी ऋषि दूर्वा ये सत्य है

ऋषि 2 .....किन्तु जहा तक हम जानते है परबु @@@@ के अंश का जनम परतवि पे हुआ है तो उसकी सकती भी किसी न किसी रूप से परतविलोक से जुडी है किन्तु हमें इसका अहसास तक नहीं हुआ ये कैसे संभव है

गुरुदेव .......क्युकी वो सकती ऊर्जा रूप में नहीं है बल्कि गॉडेस के अंश रूप में सूर्य के साथ हे परतविलोक पे जनम ले चुकी है किन्तु वो अभी पूर्ण रूप स जागृत नहीं हुई है इस लिया आपको उस दिव्या सकती के संकेत नहीं मिले

ऋषि दूर्वा ........किन्तु आपके शिष्य के लिया भी अच्छी आवर बुराई के प्रतीक दोनों ड्रैगन की ऊर्जा सकती को संभल अपना आसान नहीं होगा

गुरुदेव ......इसका उपाय पहले हे नियति कर चुकी है ऋषि दूर्वा कुछ समय पूर्व गोल्डन ड्रैगन ड्रैगन प्लेनेट पे अस्तित्व में आ चूका है

ऋषि दूर्वा .......आपके शिष्य को समय रहते वह पंहुचा होगा अनयथा बहुत से बुरी सकतिया गोल्डन ड्रैगन को अपने ादिन करने का प्रयाश करेंगी

गुरुदेव ......जी ऋषि दूर्वा आपका कथन सत्य है सूर्य को शीघ्र अपनी सकती के साथ ड्रैगन प्लेनेट जाना होगा

ऋषि दूर्वा ......पुत्री मानसी भी पुत्र सूर्य आवर ड्रैगन से जुड़ा चुकी है उसे भी ड्रैगन गाढ़ा जाना होगा

गुरुदेव .......अथारत ब्लैक ड्रैगन पुत्री मानसी.....

ऋषि दूर्वा .......है यही सत्य है ब्लैक ड्रैगन पुत्री मानसी से जुड़ेगा क्युकी वही असुरसक्ति सूर्य से जुडी है

गुरुदेव ......आप सब से एक निवेदन है ऋषिवर कुछ समय बाद परबु @@@@ आवर माँ गॉडेस की पूजा है आप सभी से अनुरोध है आप सब वह उपस्थित hi

ऋषि दूर्वा .....अवश्य राजगुरु किन्तु उस से पूर्व माँ गॉडेस आवर परबु @@@@ के अंश के दर्शन करने की अभिलाषा है

राजगुरु .....अवश्य ऋषि दूर्वा जब आप उचित समजे

ऋषि दूर्वा .....कल सुबह हे हम सभी उनके दर्शन करने जाना चाहते है

राजगुरु .....जैसे आपकी इच्छा ऋषिवर मैं उचित समय आपके पास पहुंच जाऊंगा अब आज्ञा दीजिये ऋषिवर

गुरुदेव सभी ऋषियों से विदा ले परीलोक लौट जाता है आवर माँ गॉडेस आवर परबु की पूजा आदि की तयारी सुरु कर देते है

रानी पारी .....राजगुरु प्रभु की महापूजा की सभी तयारिया समय से हो जायेंगे बस पूजा में कोई बिगन न आने पाए

गुरुदेव .....निचिंत रहे रानी पारी ऐसा कुछ नहीं होगा हमने सब वय्वस्ता देख ली है

रानी pari......hamare लिया कोई आज्ञा राजगुरु

राजगुरु .....रानी पारी आपको नागलोक जाना होगा रनगराज महावीर आवर नागरानी पूर्वी को परबु पूजा के लिया आमंत्रित करने हेतु उन्हें ये भी सन्देश दे दीजिये की उनकी पुत्री से मिलने का समय आ चूका है

रानी पारी .....जी राजगुरु हम सिगरा हे नागलोक के लिया परथन करते है

राजगुरु .........जी रानी पारी हम प्रेतलोक जा रहे है

रानी पारी के निकलते हे गुरुदेव भी प्रेतलोक के लिया निकल जाते है

सूर्यगढ़ .......

सूर्य कोमल किरण इस वक़्त अपने रूम में लेते हुए थे लगभग सभी सो गए थे किन्तु ये तीनो अभी भी जगहे हुए थे

किरण .....मैं जानती हूँ मानसी वयोम की बहन नहीं है

अब बताइये मानसी कोण है आवर आपने इसके लिया इतनी तकलीफ क्यों सही क्या मैंने जो देखा वो सही है

सूर्य .....तुमने क्या देखा स्वीटी मुझे ज्ञात नहीं पैर मानसी कोई सदर्न कन्या नहीं है जैसे तुम सब हो

कोमल ......वही तो हम दोनों जानना चाहती है आवर मुझे जो सुबह के समय में सपने में आपके सीने से बहता हुआ खून देखा वो सब क्या था आवर मुझे क्यों सीखा

सूर्य ......वो कोई सपना नहीं था कोमल आवर तुम्हे इस लिया वो दिखा क्युकी तुम मेरी पत्नी हो तुम्हारा जीवन चक्र मुझसे जुड़ चूका है

कोमल ......क्या सच में आप मुझे दिल से अपनी पत्नी सवीकार कर चुके है

कोमल की बात सुन सूर्य पलट कर कोमल के ऊपर आ जाता है आवर कोमल की आँखों में देखते हुए कोमल के कोमल कोमल अधरों पे अपने होंठ टिका कर प्यार से किश करने लगता है

कोमल भी सूर्य की गले में बहे दाल अपना पहले किसी एन्जॉय करने लगती है





किरण ......अरे बेशर्मो अभी तुम दोनों मिया बीबी बने नहीं हो जो अभी से सुरु हो गए मेरे सामने

किरण की बात सुन सूर्य किश तोड़ कर दोनों के बिच लेट जाता है

कोमल अपने पहले किश से बहुत शर्मा रही थे इस लिया वह सूर्य के सीने अपना सर छुपाये सरमने लगती है

किरण .....देखो तो कैसे शर्मा रही है जैसे दुल्हन सुहागरात की पहली सुबह सरमाती है हेहेहे

कोमल .....दीदी चुप hi जाइये

किरण ........ये मैं तुम्हारी दीदी कब से हो गई मैं तो तुमसे छोटी हूँ

कोमल ......भले हे आप उम्र में हम सब से छोटी हो पैर आपका स्थान इनके बराबर है

सूर्य .....क्या बात है मेरी बीबी तो एक किश से हे इतनी समझदार हो गई लगता है लगे हाथ एक दो किश आवर कर हे लेता हूँ हाहाहाहा

किरण ......सही कहा भाई आपने

कोमल ......आप बात को गुमस रहे है आपने बताया नहीं मानसी के बारे में

सूर्य ......मानसी एक असुर कन्या है जनम से पैर उसने अभी तक ऐसा कोई कारन नहीं किया जो मानसी को असुर होने का संकेत करे

किरण ......जब मैंने मानसी को तिलक किया तभी मुझे कुछ दृश्ये दिखा जिसमे आप उसके साथ वो सब कर रहे थे आवर फिर आपको दर्द में मुझे पुकारते हुए तड़पता देखा

ये सब कहते वक़्त किरण का गाला भरा जाता है

सूर्य किरण को अपने सीने पे लिया उसके सर पे हाथ फिरने लगता है

सूर्य .....मानसी असुरगुरु की पुत्री है कोमल स्वीटी उसकी जान कहते में है नरकासुर से मानसी के जीवन को खतरा है परषो रात मेरी असुरगुरु से जंगल में मुककत हुयी थी उन्होंने मानसी को सुरक्षित रखने हेतु मुझसे सहायता की मांग की अब तुम हे बताओ मैं क्या करता

क्या उन्हें मना कर एक लड़की के जीवन को कहते में दाल देता या फिर एक गुरु को निराश कर देता भले हे वो असुर गुरु हे क्यों न होने पैर उनका स्थान एक गुरु का है

किरण ......आपने कुछ गलत नहीं किया आपने जो किया सही किया पैर आपको मानसी के साथ सेक्स करने की क्या आवश्यकता थी

कोमल .......आपने मुझसे पहले उस मानसी से सेक्स किया

सूर्य किरण .......क्याआ कहा तुमने

कोमल को जब तक अहसास होता की वो जल्दी में क्या बोल गति तब तक तीर निकल चूका था

कोमल .....वो गलती से निकल गया आपको ककया जरुरत थी मानसी के साथ सेक्स करने की

किरण .....यही तो मैं कह रही हूँ तुम न पहले की तरह बे लगाम घोडा जानते जा रहे हो

सूर्य ......अरे यार सच में मैं मानसी के साथ कोई सम्बंद नहीं बनाये है कसम से देख स्वीटी तू नाराज हो ऐसे मुँह न फुलाया कर सबसे छुपा सकता हु पैर तुमसे नहीं मैंने तो मानसी को अभी तक किश तक नहीं किया है

kiran.......to तुम्हारी ये इच्छा भी है

surya......ummm अह्ह्ह्हह तुम्हारे होते हुए मुझे किसी आवर की क्या इच्छा भला

कोमल .....मैं भी हूँ यहाँ कुछ तो सरम करो

सूर्य आवर किरण कोमल की आवाज इग्नोर करते हुए जब किश में डुभे रहे जब तक दोनों की सांसे उखाड़ने न लगी

किरण .......भाई ये मेर्री जी की रंगत कैसे बदल गयी 2 हे दिन में आवर उनकी चल भी बदली हुई थी

सूर्य .......मुझे क्या पता स्वीटी

kiran......abhi तो आप कह रहे थे मुझसे कुछ नहीं छुपाते hi आवर इतने हे जल्दी

सूर्य .........सॉरी स्वीटी सॉरी कोमल

किरण ......मतलब ये सब आपकी वजह से है

सूर्य ......वो वो मैं मेर्री जी आवर मेरे बिच रात को .......

किरण .....घड़े कही के तुम फिर से सुरु हो गए मुझे लगा हे था की जो न ये काम तुम्हारा हे है बेचारी मेर्री जी हेहेहे रात भर रोटी रही होगी

किरण को हस्ते देख सूर्य को चैन आया वही कोमल कभी सूर्य को तो कभी किरण को देख रही थी

कोमल .....तुम्हे इनपे गुस्सा नहीं आ रहा स्वीटी इन्होने मेर्री जी के साथ सेक्स किया आवर तुम हैश रही हो

किरण .......मैं जितना इन्हे जानती हूँ पहल उन्होंने नहीं की होगी मेर्री जी ने की होगी क्यों सही कहा न

सूर्य है में गर्दन हिला देता है

किरण .......भाई एक बात मेरी हमेशा याद रखना आप किसी से भी सम्बंद बनाओ जो भी आपसे प्यार करती है उनमे से आवर मुझे या किसी आवर को बताने की भी जरुरत नहीं है पैर आपको वादा करना होगा की आप कभी सामने से पहल नहीं करेंगे न अपने मज़े के लिया समजे आप

सूर्य .......तुम जानती हो स्वीटी मैं पहल न भी कृ तब भी लिस्ट बहुत लम्बी हो जाएगी

किरण ......आपसे जो प्यार करती है आप उन सब से सदी तो नहीं कर सकते है पैर उन्हें कुछ सुनहरे पल प्यार के दे कर उन्हें खुशिया तो दे हे सकते है

सूर्य ......ठीक है स्वीटी जैसा तुम कहो लव यू स्वीटी लव यू कोमल

कोमल किरण .......लव यू तो उम्म्माह

सूर्य........ चलो अब सो भी जाओ मेरी परियो गुड नाईट ुम्मम्हा

किरण .....गुड नाईट भाई ुम्मम्हा

कोमल .....गुड नाईट सूर्य ुम्मम्हा

कुछ हे देर में तीनो एक दूसरे को बहो में भर सो जाते है

वही निचे दूसरे रूम में मानसी आराम से सोई हुई थे ुशी रूम के बाथरूम में मेर्री जी शावर के निचे अपने गरम बंदन पे





पानी सकते हुए अपनी छूट में भाड़ की हुई आग को भन्दा करने में लगी हुई थी





मेर्री जी .......अह्ह्ह्हह्हह उम्मम्मम सूर्य ये कैसे आग लगा दी है तुमने उफ्फ्फफ्फ्फ़ पूरी बॉडी जाल रही है

मेर्री जी .....उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह आज तक इतनी तड़प कभी नहीं हुई थी सूर्य सिक माय पुसी उम्म्म्म अह्ह्ह्हह सूर्य के इन इन्सर्ट यू बिग डिक इन माय पुसी ुम्मम्हा. अह्ह्ह्हह एसससस एससससस ी ऍम कमिंग सूर्य उम्म्म्म सूर्याअ

काफी देर मेर्री जी अपनी छूट को रब करती है तब कही जा कर रिलीज़ होती है कुछ देर वही फर्श पे अपनी उखड़ी हुई सांसो को संभल मेर्री जी बनाने के बाद पतली से माइटी दाल बिना उंडेर्गारमेंट के हे मानसी के बगल में जा कर सो जाती है

सुबह सूर्य उठा कोमल आवर मानसी के माथे पे किश कर जंगल निकल जाता है

वह सूर्य अपना ध्यान पूर्ण कर कुछ समय पांच तत्वों का अभयश करता है तभी वह रिद्धि पारी आ पहुंची साथ हे किरण भी थी

रिद्धि जी के साथ किरण को यहाँ जंगल में देख सूर्य अपना अभ्यास रोक उनके पास आता है

सूर्य ......स्वीटी तुम यहाँ कैसे ऋषि जी आप स्वीटी को यहाँ क्यों ले कर आई है

रिद्धि ......पिता जी कुछ ऋषियों के साथ यहाँ आ रहे है आपसे मिलने ऊन्होने हे स्वीटी को यहाँ लेन का आदेश दिया है मुझे

ये लोग अभी बात कर हे रहे थे की उनके पास हे रौशनी होती है आवर उस रौशनी से गुरुदेव के साथ कल जो हवन में 6 ऋषि थे वो निकलते है

सूर्य ......परनाम गुरुदेव परनाम ऋषिगण

गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्र सूर्य

ऋषिगण ........यशश्वी भाव पुत्र

किरण ....परनाम गुरुदेव परनाम ऋषिगण

गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्री किरण

ऋषिगण .....कल्याण हो पुत्री

सूर्य .....गुरुदेव आप यहाँ सभी ऋषिगणों के साथ मुझे बुलवा लिया होता

गुरुदेव .......पुत्र सभी ऋषिगण तुमसे आवर पुत्री किरण से भेट करना चाहते थे

सूर्य ........आज्ञा करे ऋषिवर मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ

ऋषि दूर्वा वही पास में पड़ी शिला पे किरण आवर सूर्य को बैठा देते है

आवर दोनों का तिलक करते है

सूर्य आवर किरण को कुछ विचित्र लगा ये सब पैर वो कुछ होल नहीं तभी 6 ऋषियों के साथ गुरुदेव परबु माँ गॉडेस की वंदना स्तुति करने लगते

सूर्य आवर किरण की पलके भोजील होने लगती है आवर कुछ देर बाद पूरी तरह से बंद होने जाती है आवर डेरी डेरी दोनों का वास्तविक रूप देखने लगता है दोनों का पूरा मुख मंडल सूर्य के सामान तेजमयी hi चमाकलने लगता है

सूर्य किरण .......आप सभी ऋषियों का कल्याण हो

ऋषि दूर्वा ......माँ गॉडेस परबु आपके अंश रूप के दर्शन कर हम धन्य हुए परबु

ऋषि 2 ......माँ गॉडेस परबु हमें आपकी सेवा करने का अवसर परथन करे आपके अंश रूप में जनम लेने के लक्ष्य में हम सभी योगदान कर अपना जीवन सर तक करना चाहते है कर्प्या कर हमें ये अवसर प्रदान करे माता परबु

सूर्य किरण .......उचित समय आने पे आप सभी को ये अवसर अवश्य प्रदान होगा आपके हे हाथो सूर्य के विवाह की विधि होगी आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी

पुत्री रिद्धि समय आने पे तुम्हारे मन में उपजे संसय का भी निवारण होगा चिंतित न होने पुत्री

रिद्धि पारी ........आपको कोटि कोटि धन्यवाद माँ बारभु

सूर्य किरण .......इच्छित वर प्राप्ति हस्तु पुत्री

रिश्ता दूर्वा ......आपको कोटि कोटि नमन माता गॉडेस परबु म@@@

डेरी डेरी सूर्य आवर किरण का तेज लुप्त हो उनके भीतर सरमने लगता है आवर सूर्य आवर किरण का मूल रूप प्रकट होने लगता है

सूर्य ......क्या हुआ ऋषिवर आप सभी आवर गुरुदेव आप भी ऐसे हाथ जोड़े अपने गुथनो पे क्यों हो

( सूर्य आवर किरण को अभी जो कुछ हुआ उसके विषय में कुछ पता नहीं )

सभी ऋषि आवर गुरुदेव खड़े जो जाते है

ऋषि ......राजगुरु अब हमें लौटना होगा

सूर्य .....नहीं ऋषिवर आप ऐसे नहीं लौट सकते आप यहाँ आया है आवर बिना सेवा किया बिना भोजन करवाए आपको जाने नहीं दे सकता हूँ आपको हवेली चलना होगा मेरे बाकि परिवार को आप अपना बहुमूल्य आसीस दिए बिना कैसे जा सकते है अपने अपने पवित्र चरम बंदन से हवेली को पवित्र करे ऋषिवर

आप इस आग्रह को ताल नहीं सकते है

ऋषि दूर्वा ......उचित है पुत्र हम आवश्य चैलेंज आवर भोजन भी करेंगे किन्तु भोजन तुमसे जुडी कन्या हे करवाए गई

सूर्य ......मैं कुछ समजा नहीं ऋषिवर

गुरुदेव .....पुत्र जिनसे तुम्हारा जीवनचक्र जुड़ा हो उन्ही के द्वारा प्रोशे भोजन को ऋषिगण ग्रहण करेंगे

किरण .....गुरुदेव मैं समाज गई हूँ

ऋषि दूर्वा ........तुम सब तयारी करो पुत्र हम अभी सामान आदि कर आते है

सूर्य साध्वी जी किरण वह से विदा ले हवेली की तरफ चल दिए

सूर्य ......स्वीटी मैं अभी भी नहीं समजा

किरण .....भाई उनका कहना है की वो उन्ही के हाथो परोसा भोजन करेंगे जिनका विवाह आपसे होना है

किरण ......आप कहा खोई हुई है रिद्धि पारी जी मैं जानती हूँ आप पारी है सूर्य ने मुझे बता या था आपके विषय में

वही जंगल में ....

राजगुरु ......ऋषिवर आपके इस मांग के पीछे आपके उद्देश्य को हम समाज नहीं पाए

ऋषि दूर्वा ......राजगुरु हमारी ये मांग करना की भोजन उनके हे हाथो परोसा हुआ करेंगे जो सूर्य से जुडी है इसके पीछे केवल एक हे कारन है वो सभी हमारे लिया माँ तुम्हे है क्युकी जिनका विवाह परबु अंश से भविष्य में होने वाला वो सब हमारे लिया माँ गॉडेस के अंश सामान है जैसे पुत्री किरण है तो उनके हाथो से परोसा हुआ भोजन हमारे लिया माँ गॉडेस के दिव्या पार्षद के सामान है आवर वो सभी कन्याये माँ गॉडेस के अंश रूप

राजगुरु .....उचित कहा आपने ऋषिवर

सूर्य हवेली पहुंच अपनी माँ सा को ऋषिगणों को बारे में बताया तो

माँ सा सीधा साध्वी जी से जा कर मिलती है जहा उन्हें ऋषिगणों के विषय में आवर बहुत कुछ जानने को मिलता है

जल्दी हे सभी लड़कियों को ले दादी जी खुद किट्चेंस संभालती है

जल्दी हे किचन भाटी भाटी की खुसबू से महकने लगता है

सूर्य अपने रूम में जा कर फ्रेश होने जाता है

कुछ 1 हर से ऊपर समय लगा जब सब कुछ बन कर त्यार होने चूका था

गुरुदेव भी हवेली की आवर निकल गए थे सभी ऋषियों को साथ ले ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............
 
अपडेट. 147

जल्दी हे सभी लड़कियों को ले दादी जी खुद किट्चेंस संभालती है

जल्दी हे किचन भाटी भाटी की खुसबू से महकने लगता है

सूर्य अपने रूम में जा कर फ्रेश होने जाता है

कुछ 1 हर से ऊपर समय लगा जब सब कुछ बन कर त्यार होने चूका था

गुरुदेव भी हवेली की आवर निकल गए थे सभी ऋषियों को साथ ले ...

अब आगे .......

असुर कबीला ........

असुर कबीले के लोग विक्रम को घायल अवस्था में देखते है तो वो उसे उठा कर अपने कबीले में ले आते है

दूर से अपने कबीले के लोगो को देख बिखु उनकी आवर चल देता है

बिखु .......क्या बात लगता है किसी बड़े जानवर का सीकर किया है आज तुम लोगो ने

आदमी 1......मुखिया जी इसमें सीकर नहीं है

बिखु जब पास जा कर देखता है तो विक्रम का चेहरा दिखा

bikhu.......ishe क्या हुआ है इसकी हालत ऐसे तुम लोगो ने तो नहीं कर दी है

आदमी.2 ......मुखिया जी ये सहरी बाबू जी हमें जंगल में जखिमी हालत में मिले ये तो जुमकी ने इन्हे पहचान लिया की ये आपके जान पहचान के है

बिखु ......जुमकी तुमने अच्छा काम किया है इसे अपने घर ले जाओ आवर इसका इलाज करो मैं गुरु जी को ले कर आता हूँ

जुमकी ......जी मुखिया जी

बिखु के कहने पे सब विक्रम को जुमकी के घर ले जा कर सुला देते है

बिखु गुफा के बहार से हे अपने गुरु (k.asur ) को आवाज देता है

बिखु ......गुरु जी गुरु जी

कुछ देर बाद k.asur गुफा से बहार निकलता है अपने सरीर पे बसम लगाए हाथ में मदिरा की मटकी किये

बिखु ......गुरु जी वो सहरी लड़का सीकर पे गए हमारे लोगो को जंगल में जख्मी हालत में मिला है

k.asur ........ठीक है चलो हम देखते है

K.asur आवर बिखु दोनों जुमकी की घर पहुंचे है जहा k.asur कुछ बड़ी बित्यो का लेप विक्रम के जख्मो पे लगता आवर उसे होश में लगा है

विक्रम खुद को किसी अंकन जगह देख दर जाता है

बिखु ......संत हो जाओ चूका क्यों रहे हो

विक्रम .....वो मुझे भी मार देगा मुझे बचा लो वो मुझे भी मार देगा

विक्रम को डरा हुआ देख k.asur उसे संत करता है कुछ देर बाद विक्रम कुछ संत होता है

विक्रम ......उस काल ने गुजर को मार दिया वो मुझे भी मार देगा मुझे बचाई लीजिये गुरु जी

k.asur ......संत हो जाओ आवर मुझे बताओ की कल रात क्या हुआ जंगल में तुम्हारे साथ

विक्रम बिस्तर से काल के विषय में जब तक बेहोश नहीं हुआ था जितना उसे पता था सब बता देता है

k.asur......jab तक तुम यहाँ जो सुरक्षित हो कोई तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं बिगड़ सकता है

विक्रम k.asur के पैरो में गिर जाता है

विक्रम .....गुरु जी मुझे अपने साथ रखिये मुझे उस काल से बचाई लीजिये वो बहुत खतरनाक है

k.asur .....ठीक है जब तक हम नहीं कहते तुम यही कबीले में रहोगे इस घर में

k.asur वह से गुफा की आवर निकल गया आवर बिखु जुमकी को समजा विक्रम की देखभाल आवर खाने पिने की वय्वस्ता का जिम जुमकी को सौंप कर चला जाता है

k.asur जब गुफा में पंहुचा तो वो थोड़ा चिंतित था

नगीना .....क्या हुआ भाई आप कुछ चिंता में है सुबह भी आप ऐसे हे चिंतित थे

k.asur ......कुछ नहीं नगीना आज भरम मुहरत में हमें यहाँ आस पास किसी आलोकिक सकती का आभाष हुआ था साथ हे असुर सकती का भी

आवर अभी पता चला है की कल मध्य रात्रि के बाद किसी काल नमक व्यक्ति ने हमारे अनुयायिओं में से एक की हत्या कर दी दूसरा भी बहुत जख्मी आवर भयभीत है

विसुद्धि ........भाई ये अच्छे संकेत नहीं है असुर सकती हम तीनो के अलावा इस वक़्त परतविलोक पे कोई नहीं है आवर जो भी है उसका पता करना जरुरी है क्या पता वो हमारा सत्रु है या मित्र

k.asur ......तुम उचित कह रही होगी विसुद्धि हम असुर लोक सन्देश भेज पता करते है वह से हमें कुछ अवश्य ज्ञात हो जायेगा

नगीना .....भाई पिता शरद भी लौट आये है असुरलोक अगर उन्हें हमारे सम्बंद के विषय में पता चला तो

k.asur .....तुम दोनों चिंता न करो इसका उपाय हम जानते है उन्हें कुछ ज्ञात नहीं होगा अब चलो हमारा सम्भोग अस्त्र वयाकुल हो रहा है

k.asur नगीना आवर विसुद्धि का योनि भेदन सुरु कर देता है ये तूफ़ान तभी रुका जब k.asur ने नगीना आवर विसुद्धि के यूनिखुन्ड को अपने वीर्य से भर नहीं दिया

सूर्यगड़ .......

गुरुदेव आवर ऋषि दूर्वा के साथ पधारे सभी ऋषियों का पुरे मन सामान के साथ हवेली में आदर सत्कार किया

सबने उनके चरम वंदन कर आशीर्वाद लिया

दादा जी ......आप सभी ऋषियों के पधारने से ये हवेली पवित्र हो गई ऋषिवर

ऋषि दूर्वा .......जहा महाकाल का वश जो वह से पवित्र स्थान क्या हो सकता है पुत्र परताप

दादी जी .....मैं कुछ समजा नहीं ऋषिवर

गुरुदेव .....उनका कहना है की आपके परिवार पे परबु महाकाल की विशेष कारण दृष्टि है

दादा जी .......आप सभी से एक विनती है ऋषिवर किन्तु पहले आप सब भोजन ग्रहण करे

दीदी जी अंदर जा कर सब को भोजन प्रश्न को कहती है

वही हॉल में निचे आसान लगा सभी ऋषियों को बैठा दिया जाता है

किरण कोमल पायल प्रीती प्रिय अलीना राधा सपना मानसी मेर्री जी सभी भाटी भाटी के स्वादिस्ट भोजन का थल सभी ऋषि आवर गुरुदेव के सामने रखती है

दादी जी ......आप सभी भोजन सुरु करे महाराज

सभी ऋषि आवर गुरुदेव भोजन को परनाम कर भोजन करना आराम कर देते है

सभी ऋषि बहुत हे चाव से भोजन ग्रहण करते है

सभी ऋषि भोजन की दिल खोल कर तरफ करते है आवर कुछ समय पश्चात सभी को आशीर्वाद दे कर हिमालय के लिया निकल जाते है गुरुदेव को हवेली छोड़ कर

गुरुदेव .......ठाकुर जी हम आप दोनों पारी पत्नी से एकांत में बात करना चाहते है आपके पोते के विषय में

दादा जी दादी जी ......जी ऋषिवर

दादा जी गुरुदेव को साथ ले अपने रूम में आते है उनके पीछे पीछे हे साध्वी जी भी आ जाती है

दादा जी साध्वी जी दादी आवर गुरुदेव काफी समय तक दादा जी के रूम में बात करते है

साम को गुरुदेव साध्वी जी को अपने साथ ले परीलोक लौट जाते है

जब से रिद्धि पारी ने सूर्य किरण का वास्तविक रूप ( महाकाल अंश रूप ) देखा था तब से वो बार बार सूर्य की आवर आकर्षित होते हुए मह्सुश कर रहे थी

बार बार साध्वी जी को सूर्य आवर किरण का तेज मई मुख मंडल आँखों के सामने आ रहा था

रिद्धि पारी अभी रुकना चाहती थी पैर गुरुदेव को कह नहीं पाई की वो सूर्य के साथ रुकना चाहती है

परीलोक ..........

परीलोक महल ......रिद्धि पारी आवर गुरुदेव के पहुंचते

गुरुदेव वह से सीधा महाकाल मंदिर जा ध्यान में कीं hi जाते है

वही रिद्धि पारी के लौट ने की खबर मिलते हे पारिजात जिनात जिनिशा उसे ले पारिजात के कक्ष में पहुंच जाती है

पारिजात ......सखी रिद्धि कैसे है वो

रिद्धि .......कैसे सखी हो तुम ये नहीं की अपनी सखी का हल चल पूछ ले मैं तो जैसे तुम लोगो की सन्देश वाहक हु

पारिजात .....सखी अब इतना भी न ित्रो एक बार उनको यहाँ आ जाने दीजिये जो पाबन्दी है उसे हैट जाने दीजिये फिर हम उनके साथ हे रहेंगी क्यों जीनु डार्लिंग

जीनत ......क्या बात है सखी तुम हैसे दुल्हन के जैसे क्यों शर्मा रही हो

पारिजात .......देखो तो जीनु डार्लिंग कहने भर से मेरी प्यारी सौतन के गाल गुलाबी हो गई जैसे दीद में केसर मिला दिया हो

जिनिशा .......ऐसा कुछ नहीं वो तो हमें प्यार से सरताज ने ये नाम दिया था यो उनकी याद आ गई थी आवर कुछ नहीं

जिनात ........आज आपको क्या हुआ है सखी रिद्धि आज आप कुछ बदली बदली लग रही है

जीनत की बात सुन जी निशा आवर पारिजात की नजर रिद्धि पे पड़ती है जो कही खोये हुए थी

जिनिशा .......क्या बात है सखी

जिनिशा रिद्धि पारी को हिला कर होश में लती है

रिद्धि ......है क्या हुआ

पारिजात .......वही तो हम जानना चाहते है की आज आपको क्या हुआ है

जिनिशा ......सायद मैं जानती हूँ इन्हे क्या हुआ है

जीनत .....क्या हुआ है

जिनिशा .......हमें लगता है इनको इनके दिल ने धड़कना सुरु कर दिया

पारिजात .......क्या सच में सखी कहि आपके मन मंदिर में भी प्रेम बीज अंकुरित नहीं होने लगा है

रिद्धि .......पता नहीं सखी हमें क्या हुआ है आज उनका वो दिव्या रूप सामने आया तब से हमें उनके अस्स पास रहने को दिल कर रहा है

जिनिशा ........सखी इनको भी प्रेम रोग ने जकड लिया है

तीनो रिद्धि पारी को छेंड़ने लगती है वही जीनत के मन से सूर्य से मिलने की आवर आदिक उत्सुकता होने लगती है

नागलोक ........

रानी पारी गुरुदेव के सुझाव पे नागलोक महाकाल पूजा के लिया नागराज महाराज महावीर आवर नागरानी पूर्वी को आमंत्रित करने नागलोक मजाक पहुंची

जैसे हे किसी पारी का नागलोक में आपने की खबर नागराज आवर नागरानी को मिली दोनों महल के मुखिया द्वार में रानी पारी का सत्कार सवागत करने पहुंच जाते है

नागराज ......आइये रानी पारी परीलोक की महारानी का नागलोक में मैं वासुकि नागराज महावीर स्वागत करता हु

नागरानी .....रानी पारी आपका स्वागत है नागलोक में

नागरानी पूर्वी आगे भध रानी पारी का स्वागत सत्कार कर उन्हें सामान साइड महल में ले आती है

नागराज वीर .......रमहरानी जी आसान ग्रहण कीजिये

रानी पारी .......धन्यवाद आपका राजन

हम आपको अपने परिवार सहित परीलोक महाकाल पूजा के लिया ामान्तरण करने आई हूँ राजन .

नागराज ......हमें आपने इस योग्य समजा आवर सवयं नागलोक पधारी आमंत्रित करने हेतु हम अवश्य परीलोक में होने वाली महाकाल पूजा में सब परिवार समलित होंगे

नागरानी पुत्री .......महारानी जी कोई आवर सन्देश

नागराज वीर .....ये आप कैसी बाते कर रही है महारानी

रानी पारी ......वो एक माँ है राजन उनका संकेत अपनी पुत्री कोमलांगी के विषय में जानना है क्यों उचित कहा न नागरानी पूर्वी

नागरानी पूर्वी .....जी महारानी जी क्या मेरी पुत्री का जनम हो गया आपको कुछ ज्ञात हुआ उनके विषय में

रानी पारी ......है आपकी पुत्री का आवर बाकि सभी जिनका जनम आपके दामाद के साथ जुड़ा उनका जनम परतविलोक में हो चूका है सिगरा हे आपकी उसने भेट होगी

नागरानी पूर्वी अपनी पुत्री के मिलने की ख़ुशी में रानी पारी को गले लगा कर अपनी ख़ुशी जाहिर करती है

नागराज आवर नागरानी पूर्वी दोनों की आँखों में आंसू थे पैर ये ख़ुशी के आंसू थे अपने बेटी से मिलने की ख़ुशी

रानी पारी ......आपकी पुत्री आपके जमता के साथ इस पूजा में शामिल hi रही आप अवश्य आइयेगा अब हम इजाजत चाहते है

नागराज आवर नागरानी हाथ जोड़ रानी पारी को नागलोक से विदा करते है ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............

दोस्तों आज थोड़ी तबियत ख़राब है अगर कुछ सुधर हुआ तो अपडेट पोस्ट करूंगा नहीं तो आज के लिया माफ कीजियेगा .........
 
अपडेट. 148

रानी पारी ......है आपकी पुत्री का आवर बाकि सभी जिनका जनम आपके दामाद के साथ जुड़ा उनका जनम परतविलोक में हो चूका है सिगरा हे आपकी उसने भेट होगी

नागरानी पूर्वी अपनी पुत्री के मिलने की ख़ुशी में रानी पारी को गले लगा कर अपनी ख़ुशी जाहिर करती है

नागराज आवर नागरानी पूर्वी दोनों की आँखों में आंसू थे पैर ये ख़ुशी के आंसू थे अपने बेटी से मिलने की ख़ुशी

रानी पारी ......आपकी पुत्री आपके जमता के साथ इस पूजा में शामिल hi रही आप अवश्य आइयेगा अब हम इजाजत चाहते है

नागराज आवर नागरानी हाथ जोड़ रानी पारी को नागलोक से विदा करते है ............

अब आगे ............

गुरुदेव के जाने के बाद दादी जी आवर दादा जी कुछ परेशान से दिखाई दिए

सूर्यास्त हो चूका शालिनी जी रेखा जी आवर मेनका जी तीनो इस वक़्त किचन में रात का खाना त्यार कर रही थी

शालिनी जी ......दीदी माँ सा आवर पापा जी आज कुछ परेशान है जब से वो उन ऋषि से मिले है आप. पता कीजिये न

रेखा जी ........पापा जी तो सायद कुछ न बताये मेनका दीदी आप माँ सा से पता कीजिये न की क्या बात है आवर साधु बाबा ने क्या कहा

मेनका जी ......ठीक है तुम लोग खाना बनाओ मैं पता करती हूँ

मेनका जी वह से बहार निकल जाती है

शालिनी ji.......didi वो आपसे कुछ आवर भी पूछना था मुझे

रेखा जी .......है तो पूछ न शालू तुम्हे कब से इजाजत लेनी पड़ने लगी है मुझसे

शालिनी जी .......दीदी वो बात ऐसी नहीं बस आप कही मेरा मजाक न उद्धव इस लिया काफी बार सोचा आपसे पुछु पैर हर बार यही सोच कर ताल देती की आप यकीं करोगी की नहीं

शालिनी की बात सुन खाना बनती हुए रेखा जी के हाथ अपने आप रुक जाते है

रेखा जी .......देख हमारा रिश्ता भले हे देवरानी आवर जेठानी का हो पैर मैं तुम्हे अपनी छोटी बहन समझती हे नहीं हूँ बल्कि दिल से मानती भी हूँ फिर भी तुम्हे मुझसे कुछ पूछने में संकोच होता है तो

जरूर मेरे हे प्यार में तुम्हारे पार्टी कुछ कमी रही होगी

शालिनी जी ......ऐसा न कहिये दीदी ऐसा मई लं सोच भी नहीं सकती हूँ वो बात हे कुछ अजीब सी है क्या आपको पुनर्जनन पे यकीं है

रेखा जी ........मैं ऐसी बातो पे यकीं नहीं करती हूँ ये सब अंधविश्वास की बाटे है पैर तुम ये सब क्यों पूछ रही हो बात क्या है शालू

शालिनी जी .......दीदी वो कुछ दिनों से मुझे अजीबो गरीब सपने आते है हर रोज वही चेहरे वही जगह सपने में देखती हूँ

रेखा जी .......वो सब सपने है कहि तुम्हे ये तो नहीं लगता न की तुम्हारा पुनर जनम हुआ है

शालिनी जी ......पता नहीं दीदी जब से सूर्य साध्वी जी के साथ गया था वह लौटने के बाद पहली बार जब मेरे गले से लगा था तभी से ये सब हो रहा है उस दिन जब सूर्य वह से लौटने के बाद मेरे सीने से लगा था तभी ऐसे लगा जैसे किसी ने मेरी आँखों के सामने कुछ पल के लिया फ़ास्ट फॉरवर्ड में मूवी चला दी हो

आवर आप यकीं नहीं करेंगे दीदी मुझे उस पल ऐसा लगा जैसे वो जिंदगी मैं पहले जी चुकी हूँ

रेखा जी .........ये सब तुम्हारा वहां होगा शालू वैसे शिव भी था क्या उस मूवी में हेहेहे

शालिनी जी ......दीदी मैंने कहा था न आप मेरा मजाक उठाएंगी इस लिया हे आपको कुछ बॉटने से जीजाक रही थी

रेखा जी ......ok बाबा मजाक नहीं करती हूँ एक बात बताओ तुम्हे इन सब पे यकीं है क्या जो सपने तुम देखती हो उन पे

शालिनी जी है में गर्दन हिला देती है

रेखा जी .......जब से सूर्य साध्वी जी के साथ जा कर लौटा है तभी से ये सब हो रहा है न

शालिनी जी .....जी दीदी तब से हे ये सब हो रहा है

रेखा जी ......फिर एक काम करो आज सूर्य के साथ सो कर देखो जैसा की तुमने खुद कहा की सूर्य से गले मिलने के बाद हे ये सब सुरु हुआ है तो जो कुछ भी है वह क्लियर हो जायेगा आवर तुम्हारे मन में जो भी है इन सब को ले कर वह भी दूर हो जायेगा

इस बहाने काम से काम आज रात मैं भी चैन से सो पाऊँगी वर्ण रात भर तुम दोनों मिया बीबी जो कुस्ती खेलते हुए आवाजे निकलते हो उस से मुझे परेशानी होती है

शालिनी जी .....क्यों दीदी भाई साहब ( जेठ जी ) कुस्ती नहीं खेलते क्या रात को आपके साथ जो आपको परेशानी होने लगी

रेखा जी ......यही तो प्रॉब्लम है शालू कुछ टाइम से तुम्हारे भाई साहब इन सब से दूर रहने लगे है जैसे अब उनकी रूचि हे ख़तम हो गई हो

शालिनी जी .......आपको उनसे बात करनी चाइये दीदी मेरे ख्याल से कोई प्रॉब्लम हो सकती या फिर कोई बिज़नेस को ले कर के कोई टेंशन हो सकती इन सब का असर सबसे ज्यादा दिमाग पे पड़ता है अभी आपकी आगे हे क्या है इस उम्र में आपके बॉडी को सेक्स की सबसे ज्यादा जरुरत होती है मेरे ख्याल से आप दोनों को बेथ कर बात करनी चाइये

बहार कोई आवर भी था जिसने शालिनी जी की लास्ट के बाते सुन ली थी वो चुपचाप वह से निकल गया

कुछ देर बाद खाना त्यार हो गया था महेंद्र आज घर लौट आये थे पैर उन्हें देख कर लग रहा था जैसे काफी ताखे हुए हो

दीदी जी ......रेखा बेटी सभी बचो से कहो की खाना खाने के लिया निचे आ जाये

वही सूर्य इस वक़्त जंगल में बहुत तेजी से दौड़ते हुए जंगल के भीतर जिस तरफ बहुत हे काम किसी का आना जाना होता है उस तरफ दौड़े जा रहा था हाथो में कुछ घास फ़स सा था

कुछ दूर जाने के बाद सूर्य एक बड़े से बहुत पुराने पेड के पास रुकता है चारो तरफ गौर से देखने के बाद एक तरफ जा कर के एक छोटे से झाड़ जैसे दिखने वाले पौधे की जादो के पास से मिटटी हटा कर कुछ जाड़े निकटता है

आवर कुछ अन्य पौधों के पतिता आवर टहनियां तोड़ कर अपने साथ ले कर हवेली लौट आता है

सूर्य सीधा साध्वी जी के रूम में जाता है जहा इस वक़्त कोई नहीं था

सूर्य साध्वी जी के झोले से कुछ आवर जादि बुटिया निकल कर उन सबको को मिक्स कर उन्हें अच्छे से कूटने के बाद एक एक कटोरी में निकल कर किचन में जा कर गैस ों कर एक छोटा पतीले में हाफ लेटर मिल्क दाल कर कटोरी में राखी सभी जड़ी बुटिया मिल्क में दाल कर उन्हें अच्छे से उगलता है

रेखा जी .....बीटा तुम यहाँ क्या कर रहे हो मुझे बोल देते अगर तुम्हे ढूढ चाइये था मैं बना देती चलो हटो यहाँ से जा कर खाने की टेबुल पे बैठो

सूर्य .....मम्मी बस कुछ देर रुक जाइये मेरा काम हो हे गया है

रेखा जी .......ये तुमने ढूढ में क्या डाला है ये ऐसा पीला पीला क्यों हो रहा तुमने हल्दी डाली है क्या

सूर्य .....मम्मी ऐसा कुछ नहीं है बस आप ये बड़े पापा को दे देना आपको मेरी कसम आगे कुछ मत पूछना आवर उनको बोल देना संडे के अलावा घर में वो सरब को टच भी नहीं करेंगे

रेखा जी .....ऐसा क्या है इसमें आवर तुम्हे कैसे पता वो सरब पिटे है

सूर्य ......उनका सैर कमजोर हो रहा मम्मी जो दल्ली सरब का उसे करने से हो रहा आप याद से ये ढूढ उन्हें पीला देना इस से उन्हें बेहतर लगेगा आवर जल्द हे वो सरब भी छोड़ देंगे

रेखा जी .......मेरा बीटा कितना समझदार हो गया है चल अब खाना खा ले

सूर्य सभी के साथ बेथ कर खाना खता है

मेर्री जी सूर्य की कुछ इसरा करती है तो सूर्य सभी को देखता जो खाने में लगे हुए थे सूर्य है में गर्दन हिला कर खाना खाने लगता है

जल्दी हे सब खाना फिनिश कर अपने अपने रूम के तरफ निकल लेते है

वही महेंद्र के अंदर जाते हे अपनी अलमारी से सरब की बोतल निकलते है तभी रेखा जी ढूढ ले कर रूम में आती है

रेखा जी .....आप फिर सुरु हो जाये

महेंद्र ......तुम्हे पता है मुझे खाने के बाद 2 पेग चाइये रेखा

रेखा जी ......ये लीजिये ढूढ पि लीजिये

महेंद्र .......क्या ढूढ तुम्हे पता है ढूढ पे सरब नहीं पि सकता फिर भी

रेखा जी ......ये मैंने नहीं आपके बेटे ने त्यार किया है आपके लिया खुद अपने हाथो से अब अगर नहीं पीना है तो मैं बोल देती हूँ सूर्य को की आपने नहीं पिया

महेंद्र ......उसे क्या जरुरत थे ये सब करने की लाओ मुझे दो मेरे बेटे ने कहा है मना नहीं करूँगा

महेंद्र .......इसमें से तो अजीब सा टेस्ट आ रहा है जैसे इसमें कुछ मिलाया हो

रेखा जी ......है कुछ मिलाया तो था उसने पैर पता नहीं क्या उसने खुद अपने हाथो से त्यार किया है

महेंद्र जी एक हे साँस में पूरा ढूढ खली कर देते है

रेखा जी सरब की बोतल उठा कर वापिस रख देती है आवर बहार चली जाती है

ीदार महेंद्र जी के सरीर से सरीर थकान गायब हो चुकी थी आज उनको अपने लिंग में भी कुछ अजीब से सुरसुराहट महसूस होने लगी

सूर्य खाना खाने के बाद सबसे बच कर ऊपर चला जाता है कुछ देर बाद मेर्री जी भी वही आ पहुँचती है

सूर्य .....कहिये ममी जी आप कुछ कहना चाहती थी .

मेर्री जी सूर्य का हाथ पकड़ कोने में बानी बड़ी टंकी के पीछे ले जाती है

मेर्री जी ......देखो तुम्हारी वजह से क्या से क्या हो गया है

सूर्य .....मैंने क्या किया ममी जी

मेर्री जी अपनी इलास्टिक वाली पजामी निचे खिसिअ कर सूर्य का हाथ पकड़ अपनी गीली हो चुकी पंतय के ऊपर से से अपनी छूट पे रख देती है

मेर्री जी .......इसका कुछ करो सूर्य सुबह से 3 बार बहुत मुश्किल से खुद को संत किया है

सूर्य अपना हाथ मेर्री जी की पेंटी के अंदर दाल कर मेर्री जी की कमरष से भीगी हुए छूट में अपनी एक ऊँगली दाल देता है






मेर्री जी सूर्य के होंटो को अपने होंटो में कैद कर सूर्य की लैंड को ऊपर से हे सहलाने लगती है

कुछ देर किश करने के बाद सूर्य मेर्री जी से अलग होता है

सूर्य ........मेर्री जी यहाँ ठीक नहीं है कुछ भी करना आपके रूम में चलते है मेरे रूम में कभी भी कोई भी आ सकता है

मेर्री जी ....पैर वह टी मानसी है आवर अलीना भी

सूर्य ......चलो फिर यही चौबारे में चलते है

सूर्य मेर्री जी को छठ पे बने चौबारे में ले कर जाता है सूर्य लाइट ों कर दूर को लॉक कर देता है

मेर्री जी जल्दी से सूर्य की पेन निचे कर सूर्य के लैंड को बहार निकल लेती है

आवर सूर्य की आँखों में देखते हुए सुपाड़ी को मुँह में भर आइस क्रीम के जैसे चूसने लगती है





सूर्य मेर्री जी के सर को पकड़ हलके हलके मेर्री के मुँह में देखे मरने लगता है

मेर्री जी जितना हो इतना सूर्य के लैंड को अपने अपने मुँह में लेने की कोशिश करती है

सूर्य मेर्री जी को खड़ा कर पूरा नंगी कर देता है आवर खुद भी नंगा हो जाता है

मेर्री जी एक बार फिर से सूर्य के मुँह में भर अपने तुख से पूरी तरह चिकना कर देती है





कुछ देर की चूसै के बाद सूर्य वही पास में मेर्री जी को सोर्स पे लेता कर मेर्री जी की छूट को चाटने लगता है

मेर्री जी ........उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्हह एसससस सूर्य तुम्हारे इस अहसास के लिया बहुत तदपि हूँ मैं अह्ह्ह

सूर्य .....मेर्री जी अभी ज्यादा सकत नहीं है अभी आपको संतुस्ट काटना जरुरी है





सूर्य अपनी जुबान निकल मेरी के छूट पे फ़िटने लगता है

साथ हे अपनी 2 उँगलियों को मेर्री की छूट में दाल अपने लैंड के लिया त्यार करने लगता है

कुछ हे देर में मेर्री जी का सरीर अकड़ जाता है देखते हे देखे मेर्री जी की छूट अपना कमरष भ देती है

जिसे सूर्य अच्छे से चाट कर साफ कर देता है

सूर्य वही मेर्री जी को लिटा कर अपना लैंड मेर्री जी की छूट पे सेट कर अंदर पुस करता है जो बिना किसी ज्यादा परेशानी की 3,से 4 इंच अंदर दकन जैसे फिट हो जाता है





सूर्य ......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह ममी जी अप्प तो अंदर से आवर ज्यादा गरम हो गई है पहले से ज्यादा

मेर्री जी .......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह सूर्य ये ाजगगगग तुम्हारी हे लगाई हुई है उफ्फ्फफ्फ्फ़ आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बातो में उल्का कर फाड़ डाली मेरी छूट को

सूर्य मेर्री जो को बातो में उलझा कर दो जोरदार जातको में लगभग पूरा लैंड उतर देता है जिस से मेर्री की चीख निकल जाती है





सूर्य .......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह बस जितना दर्द होना था एक बार में हे हो गया

मेर्री जी ......अह्हह्ह्ह्ह छूट तो मेरी फटी है न दर्द के मरे जान निकल दी

सूर्य .........उम्म्म्म ममी जान आग भी तो आपकी छूट में लगी है मुझे क्यों दोष देती हो

मेर्री जी ........उफ्फ्फफ्ग ऐसे हे लगे रहो सूर्य अब अच्छा लग रहा है

आवर ये सब तुम्हारी वजह से हो रहा है इतने सालो से अपनी विर्जिनिटी संभल कर राखी थी मैंने

अह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ सूर्य आवर जोर से मैं झड़ने वाली हूँ

कुछ हे रखो में मेर्री जी अपने कमरष से सूर्य के लैंड को नजला देती है

सूर्य कुछ पल रुकने के बाद मेर्री को डोगग्य पोज़ में कुटी न बना कर डेरी डेरी प्यार से चूसै कर गरम करने लगता है





सूर्य ......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह ममी जी कुछ भी कहो पैर इस सुख का अनुभव आपने हे मुझे दिया है आपके साथ हे मैंने भी अपनी विर्जिनिटी आपकी दी है

मेर्री जी .....
.क्या सच में अह्ह्ह्हह्हह आवर तेज करो कही कोई आ न जाये उफ्फ्फ्फ़ हाहा ऐसे हे पूरा अंदर दाल कर अच्छे से मेरी खुजली मिटा दो पता नहीं तुम्हारे मां जी मुझे संत कर लाएंगे भी या नहीं

सूर्य तेजी से मेर्री की कमर को पकड़ कर अपने लैंड को पूरा अंदर बहार करने लगता है जिस से पूरा बीएड हे चरमर चरमर करने लगता है






कुछ देर ऐसे हे दुहदार चुदाई से जल्दी हे मेर्री जी के साथ साथ सूर्य भी अपने पीके पे आ पंहुचा

सूर्य की लिंग के नशे तेज ताकत परवाह से फिल्मे लगती है जिसका अहसास मेर्री जी को आवर ऐंद्रिक मज़े दे रहा था जब सूर्य की उबरी हुई नशे मेर्री जी की छूट की दीवारी को अंदर से रगड़ते हुए अंदर बहार होने लगती है

जल्दी हे मेर्री जी की छूट अपनी पकड़ सूर्य के लिंग मुंड के उरद गीदड़ कसने लगती है

सूर्य ......उम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ ममी जी मेरा वीर्य निकलने वाला है

मेर्री .....अह्हह्ह्ह्ह सूर्य मेरा फिर से होने वाला है अंदर मत निकलना मुझे तुम्हारा वीर्य टेस्ट करना है

मर्त्य जो जैसे हे झड़ती है सूर्य भी पीक पे आ पंहुचा

सूर्य अपना लैंड मेरी जी की छूट से निकल देता मेर्री जी लपक कर सूर्य के लैंड पे लगे अपनी योनिरस को चाट कर साफ करते हुए सूर्य के लैंड को मुँह में भर बोललस को ढकने लगती है

सूर्य होकर भरते हुए मेर्री के मुँह में एक के बाद एक 10,12 अपने घड़े वीर्य की पिचकारी मेर्री जी के गले में उतर देता है

मेर्री जी से जितना हो सका उतना पिया बाकि सब सूर्य के लैंड पे उंडेल दिया






मेर्री जी लम्बी लम्बी संशे भरते हुए सूर्य को गर्ने लगती है

सूर्य ........सॉरी वो ध्यान नहीं रहा था मेरा

मेर्री जी .....अभी अह्हह्ह्ह्ह अभी मैं मरते मरते बची hu.koi ऐसा भी करता है क्या

सूर्य .....सॉरी वो आपने हे तो कहा था टेस्ट करना है अब मुझे क्या पता था ऐसा हो जायेगा

कुछ देर में मेर्री जी अपने कपडे पहन कर सूर्य को एक किस कर निकलने लगती है

मेर्री जी ......वैसे टेस्ट अच्छा था आवर पेट भी भर गया हेहेहे

मेर्री जी गेट खोल चुप चाप वह से बच कर निकल जाती है

सूर्य अपने कपडे पहन कर अपने रूम में चला जाता है

इनके जाने के बाद कोई रूम में आता है आवर वह का निरक्षण करने के बाद निचे गिरे सूर्य के वीर्य को अपनी ऊँगली पे ले कर चेक करता है फिर पता नहीं क्या सोच कर वह सूर्य के वीर्य को अपने नाक के पास कर संगति है आवर टेस्ट करती है

साक्ष ........खुसबू आवर टेस्ट दोनों हे अच्छे है तो यहाँ म्हणत की जा रही है अब समाज आई की क्यों इतने देर से आवाज हो रही थी .........

सूर्य अपने रूम में जा कर अच्छे से नहाने के बाद अभी लेता हे था की उसके रूम का दूर नॉक होता है

सूर्य ......अब कोण आया होगा

सूर्य जा कर गेट खोलता है तो सामने उसकी माँ शालिनी जी कड़ी थी

सूर्य .......mom.aap इस वक़्त यहाँ कुछ काम था क्या

शालिनी जी .......क्या मुझे अपने बेटे के साथ वक़्त बिताने के लिया भी कोई काम होना जरुरी है

सूर्य ......अंदर आइये माँ

शालिनी जी अंदर आ कर बीएड पे लेट जाती है सूर्य गेट बंद कर अपनी माँ के बगल में लेट जाता है

शालिनी जी सूर्य का सर अपने सीने पे रख प्यार से उसके बालो में उंगलियां फिरने लगती है सूर्य अपने माँ की दिल की धड़कन साफ सर्फ़ सुन प् रहा था

सूर्य ......माँ कुछ हुआ है क्या

शालिनी जी ......नहीं तो तुम्हे ऐसा क्यों लगता है

सूर्य .....वो आप इस वक़्त यहाँ इस लिया

शालिनी जी ......आज मेरा मन अपने बेटे के साथ सोने का था तो आ गई आवर वैसे भी तुम्हारे पापा सो चुके है आवर मैंने उन्हें बोल दिया की आज रात में अपने बेटे के पास सोऊंगी है अगर तुम्हे कोई एतराज है तो बोल दो

सूर्य ......ऐसा सोचना भी नहीं माँ मुझे तो ख़ुशी होगी आपकी गॉड में सर सोने में जो सुकून है वो कही नहीं माँ

(आपको पता नहीं माँ आपके प्यार के लिया कितना तरफ़ा था मैं वो तो सपना ने छोटी माँ के रूप में आपका प्यार दिया वर्ण सायद मैं कभी खुद को संभल हे नहीं पता आप कभी मुझे छोड़ कर नहीं जाना माँ पहले आपको खो कर बहुत तड़पा हूँ इस बार नहीं )

शालिनी जी ......क्या हुआ कहा खो गए

सूर्य ......कुछ नहीं माँ

शालिनी जी सूर्य की आवाज सूर्य उसका चेहरा ऊपर करती है तो देखती है की सूर्य की आँखे हलकी नाम है

शालिनी जी .....क्या हुआ बीटा तुम्हारी आँखे नाम क्यों है

सूर्य .....कुछ नहीं माँ काफी समय बाद आपके साथ सो रहा हूँ न तो बस पुराने दिन याद आ गए

शालिनी जी .....बीटा बाईट हुए समय से हमें अच्छी गड़े हे चुन्नी चाइये बुरे पल हमेशा दुःख हे देते है

सूर्य .....बिलकुल सही कहा माँ ी लव यू माँ उम्म्म्मममः

शालिनी जी ........ी लव यू तो बीटा उम्म्म्मः चल अब सो जा

सूर्य अपना सर अपनी माँ के सीने से हटाने लगता है तो शालिनी जी उसे रोक देती है

सूर्य ......माँ आपको तकलीफ होगी से सोने पे मैं अब बड़ा हो गया हूँ

शालिनी जी ......हेहेहे पता है मुझे कितना बड़ा हो गया है तुम माँ हूँ तुम्हारी तू मेरे लिया हमेशा मेरा प्यारा छोटा सा सूर्य हे रहेगा फिर चाहे दुनिया के लिया कितना हे बड़ा हो जाये

शालिनी जी द्वारा अपना सर सहलाने से सूर्य को पता नहीं चला वह कब गाह्रो नींद में चला जाता है

शालिनी जी काफी देर तक सूर्य के सर को सहलाती रहती है

सूर्य नींद में हे अपने माँ को काश लेता जिस से शालिनी जी के चेहरे पे मुस्कान तैर जाती है

शालिनी जी ......आज भी वैसे हे सोता है जैसे मैं इसे छोड़ कर कही चली जाउंगी मेरा प्यारा बीटा

सूर्य .... ( नींद में ,) आपको एक बार खो कर बहुत तड़पा हु माँ दुबारा आपसे दूर नहीं हो सकता माँ

शालिनी जी ......नींद में भी इसे मैं हे नजर आती हूँ

ककुछ देर बाद शालिनी जी को नींद आ जाती है आवर एक बार फिर उन्हें वही अपने पिछले जीवन से जुडी सचाई सपनो में दिखाई देने लगती है

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............

अभी इतना हे लिख पाया हूँ दोस्तों ठीक होते हे आपको कंटिन्यू 2 अपडेट मिलते रहेंगे ........
 
अपडेट 149

(मेगा अपडेट )

शालिनी जी काफी देर तक सूर्य के सर को सहलाती रहती है

सूर्य नींद में हे अपने माँ को काश लेता जिस से शालिनी जी के चेहरे पे मुस्कान तैर जाती है

शालिनी जी ......आज भी वैसे हे सोता है जैसे मैं इसे छोड़ कर कही चली जाउंगी मेरा प्यारा बीटा

सूर्य .... ( नींद में ,) आपको एक बार खो कर बहुत तड़पा हु माँ दुबारा आपसे दूर नहीं हो सकता माँ

शालिनी जी ......नींद में भी इसे मैं हे नजर आती हूँ

ककुछ देर बाद शालिनी जी को नींद आ जाती है आवर एक बार फिर उन्हें वही अपने पिछले जीवन से जुडी सचाई सपनो में दिखाई देने लगती है........

अब आगे ........

सुबह सूर्य जब अपने रूटीन पे उठा तो चौंक गया क्युकी

चौंकने की बझा थे सूर्य का हाथ जो इस वक़्त शालिनी जी के राइट साइड बूब्स को निघ्त्य के अंदर से थामे हुए था आवर शालिनी जी को पीछे से अपने बहो में काश कर सोया हुआ था

सूर्य वही सूर्य का नागराज शालिनी के निघ्त्य ऊपर हो जाने से उनके पेंटी के ऊपर से गुदाद्वार को कुरेद रहा था

सूर्य डेरी से अपना हाथ निघ्त्य से निकल कर उठ जाता है

सूर्य एक बार अपनी माँ को देखता है जो इन सब से बे खबर चैन की नींद सोये हुए थे





सूर्य अपने लिंग को शार्ट के अंदर एडजस्ट कर अपनी माँ पे डेरी से चादर दाल कर बाथरूम में फ्रेश को बहार निकलता है

( सूर्य ......माँ आज भी कितनी प्यारी है ी लव यू माँ )

सूर्य शालिनी जी के गाल पे हलके से किश कर निकल जाता है जंगल में अपना रूटीन पूरा करने के लिया

सूर्य के घर से निकलने के बाद 1,30 हर के बाद शालिनी जी उठी

सूर्य को अपने साथ सोया न देख एक बार तो चिंता हुई पैर जल्दी उन्हें याद आता की सूर्य इस वक़्त जंगल में होता है

शालिनी जी ......आज फिर वही सपना पता नहीं ये सब मेरे साथ हे क्यों हो रहा है आवर ये मेरी निघ्त्य कही सूर्य ने देखा तो नहीं होगा

आज तो उठने में भी लेट हो गया है दीदी तो कब की उठ गई होगी

शालिनी जी जल्दी से अपनी निघ्त्य को ठीक करती है आवर सूर्य के रूम से निकल जाती है

शालिनी जी शिव को उठा जल्दी से अपने कपडे ले बाथरूम में फ्रेश होने चली जाती है कुछ 20 मिनट्स बाद शालिनी जी किचन में पहुंची जहा मेनका जी आवर मानसी दोनों चिअ नास्ता बना रही थी

मेनका जी .....क्या बात है भाबी आज आप इतने लेट कैसे

शालिनी जी .......दीदी वो ऊपर सूर्य के साथ सोई थे पता नहीं चला टाइम का

मेनका जी .......संभल कर बीटा अब बड़ा हो गया है

शालिनी जी .....दीदी रेखा दीदी नहीं दिख रही आवर बीटा कितना भी बड़ा हो जाये माँ के लिया हमेशा अपने जिगर का टुकड़ा हे रहेगा

मेनका जी .....बिलकुल भाबी बच्चे अपने माँ बाप को भूल सकते है पैर माँ बाप अपनी औलाद को कभी नहीं भूलते है

शालिनी जी .....मैं देखती हूँ दीदी को

मेनका जी ......वो अभी रूम से नहीं निकली है

शालिनी जी .......क्या पैर वो तो मुझसे भी पहले उठ जाती है दीदी मैं देखती हूँ कही उनकी तबियत तो ख़राब नहीं हो गई है

शालिनी जी रेखा जी के रूम की तरफ निकल जाती है बहार हॉल में महेंद्र आवर दादा जी अखबार पढ़ रहे थे

शालिनी जी जब अंदर गई तो रेखा जी अभी भी चादर ओढ़े सो रही थी

शालिनी जी ......ये लो ये दीदी तो अभी तक सो रही है

शालिनी जी आगे भध रेखा जी के माथे को छू कर देखती है की कही तबियत तो ख़राब नहीं है सब कुछ नार्मल था बहुत हल्का सा सरीर गरम था जो नार्मल था

शालिनी जी ......दीदी उठो सुबह हो गई है

रेखा जी ......सोने दीजिये न अब मुझसे आवर नहीं होगा रात को कर लीजिये

शालिनी जी रेखा की बात सुन पहले सोच में पद जाती फिर उनके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है जैसे वो रेखा जी की बात का मतलब समाज जाती है

शालिनी जी जैसे हे रेखा जी पे से चादर निचे खींचती है उनकी आँखे छोड़ी जाती है

शालिनी जी के हाथ वही रुक जाते है





सामने रेखा जी के भरी सफ़ेद 36 की चूचिया बिस्तर पे लड़की हुए थी

शालिनी जी जल्दी से गेट लॉक करती है

शालिनी जी ......इनको ये तक होश नहीं है की रात को मस्ती करने के बाद कपडे भी पहने चाइये की नहीं

शालिनी जी रेखा जी को हिला कर उठती है

शालिनी जी ......दीदी उठो सुबह के 7 बज गए है आप अभी तक सो रही है

शालिनी की बात सुन रेखा जी गड़बड़ी में आँखे खोल बीएड से उतने लगती है वही शालिनी जी की आँखे एक बार रेखा जी की योनि पे पड़ते हे छोड़ी हो जाती है

रेखा जी की योनि पे कुछ ज्यादा के जंगल उठा हुआ था जो उनके कामुक होने की निज़ामी थी

शालिनी जी .....दीदी क्या ऐसे हे जाओगी बहार नंगी हे आपको अंदाजा भी है कोई आवर यहाँ मेरी जगह आपको जगाने आता तो क्या होता

रेखा जल्दी से अपने ऊपर चादर दाल कर बाथरूम में भाग जाती है

शालिनी जी बीएड की हालत देख कर समाज जाती है आवर मुस्कुराते हुए रूम को लॉक कर निकल जाती है

सूर्य जब अपना रूटीन पूरा कर लौट रहा था तभी उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसपे नजर रख रहा है

सूर्य ......देखो तुम जो कोई भी हो सामने आ जाओ अगर मैंने तुम्हे ढूंढा तो अच्छा नहीं होगा

सूर्य के पुकारने के बाद भी जब कोई सामने नहीं आता है तब सूर्य उस आवर भध जाता है जहा से उसे आभाष हो रहा था किसी का छुपे होने का

सूर्य अब तो बहार आ जाइये मैं जनता हूँ आप कोण है

तभी पेड़ के पीछे से राणा निकल कर सूर्य के सामने आता है

सूर्य ......अगर कुछ काम था तो सामने आना चाइये ऐसे दुसरो पे नजर रखना अछि बात नहीं है जनता हूँ कुछ टाइम से आप मुझपे नजर रख रहे है

राणा .........तुम मुझसे क्यों मिलना चाहते थे

सूर्य .........आप इस लिया तो मुझपे नजर रख नहीं रहे हो पॉइंट पे आओ राणा

राणा .....मुझे तुमपे नजर रखने को कहा था

सूर्य ........तुम लोग कभी नहीं सुधरने वाले हो न न खुद चैन से जीना जानते हो न दुसरो को जीने देते हो जिसने ये काम दिया है उसे बोल देना मेरे परिवार आवर मुझसे जितनी दूर रहेगी उतना अच्छा है

राणा .......तुम जानते हो जिसने तुम पे नजर रखने को कहा उसके बारे में

सूर्य ..........तुम्हे वाकई में ऐसा लगता है की मुझे कुछ नहीं पता अगर तुम ये सोच रहे हो तो भूल है तुम्हारी आवर तुम्हारी उस ठकुराइन की समजे आवर जितना हो उस से दूर रहने में हे भलाई है तुम्हारी आवर तुम्हारे परिवार की एक बार तुम्हारे किये करम का दंड मेरे माँ डैड भुगत चुके पैर तुम गलत नहीं थे इस लिया आज तक बचे हुए हो तुम

राणा ......बचे तुम कुछ ज्यादा नहीं बोल रहे हो अपनी ुमार से

सूर्य ........अपनी जुबान को लगाम दो राणा सकती सिंह का खून तुमने किया आवर उसका इलज़ाम मेरे पापा के आया

उसने तुम्हारी बहन के साथ गलत किया था उसके किये की सजा तुमने उसे दी पैर इसका मतलब ये नहीं की तुम कोई ढूढ के दूल्हे हो इस लिया हे उस दिन मैं तुम्हारे घर गया था

राणा ......तुम जूथ बोल रहे मैंने सकती सिंह को नहीं मारा

सूर्य .......राणा मेरे पास आज भी गवाह मौजूद है जिसने तुम्हे आवर तुम्हारे साथी को खून करते देखा था

राणा गुस्से में

राणा .......खून नहीं करता तो क्या करता उस हवन ने मेरी मासूम बहन की जिंदगी बर्बाद करके रख दी मैंने कितनी मिनट की उसे पेअर तक पकडे की वो मेरी बहन से सदी कर उसकी जिंदगी बचा ले पैर वो शीतन अपने किये पाप को अपनाना तो दूर उसने साफ साफ इंकार कर दिया जिस वजह से वह टूट गई

सूर्य ......तुम्हारी बहन के साथ जो हुआ वो गलत था राणा किसी भी स्त्री की इजाजत से खेलने वाले के लिया यही सजा होती है पैर उसकी वजह से मेरे माँ डैड को लेटने साल अपने परिवार से दूर रहना पड़ा सिर्फ एक वजह से तुम्हे माफ कर दिया क्युकी उसकी वजह थी तुम्हारा अपनी बहन के पार्टी प्रेम पैर तुमने दुर्जन के पिता को क्यों मारा

राणा के लिए ये एक आवर जतका था

राणा ..........वही तो था जो उस शीतन के हर बुरे करम को अपनी ताकत से छुपा लेता था उसके कहने पे हे मेरी बहन को मर कर दुर्जन सिंह ने पेड़ से लटका दिया आवर गांव में जुट फैला दिया की मेरी बहन ने खुद को पेड़ से लड़का कर आत्महत्या कर ली मेरी बहन तो पेड़ पे चढ़ना भी नहीं जानती थी

सूर्य ......जो हो चूका है उसे बदला नहीं जा सकता है राणा पैर अब भी वक़्त है जिन लोगो के लिया तुम काम करते जिनके हर आदेश को आँख मैच पूरा करते हो वो ऐसे नाग है जो वक़्त आने पे अपनी जान बचने के लिए तुम्हे भी देश लेंगे

राणा ......मुझे अपना परिवार भी पालना पड़ता है

सूर्य ......तो क्या उसके लिया तुम किसी भी हस्ते खेलते परिवार को बर्बाद कर डोज भूलो मत राणा जो दुसरो के घर मलते है एक दिन खुद भी ुशी आग में जलते है

आज उन्हें तुम्हारी जरुरत है कल को जरुरत ख़तम तो तुम भी ख़तम वैसे दोनों ठकुराइन को अच्छा मेंटेन कर रखा है बाकियो के साथ लगे रहो

वैसे साम को आ रहा हूँ हवेली पैर तुम चिंता मत करो तुम्हारा राज हमेशा मेरे सीने में दफ़न रहेगा जो सके तो खुद को पाप की कमाई से दूर रखो चलता हूँ

राणा .........तुम सच कह रहे हो

सूर्य .........गहरा नहीं राणा पैर मेरी बात याद रखा अब तक जो गलत किया सो किया एक गलती आवर की उसे दिन मेरी तलवार होगी आवर तुम्हारा सर होगा सोच लो क्या करना है

सूर्य वह से घर की तरफ निकल गया

राणा वही जमीं पे बेथ अपने किये करमो को याद करने लगा क्युकी वो जनता था सूर्य ने जो कहा वो करने से उसे कोई नहीं रोक सकता है आवर अगर हवेली रहा तो उस वो गलती कभी हो सकती जो उसके जीवन की अंतिम गलती साबित हो सकती है

असुर लोक ........

नरकासुर दिन पार्टी दिन बेहतर होता जा रहा था जिसे देख द्वारिका राजवैद्य से काफी खुश थी

वही असुरगुरु से द्वारिका की घिरना दिन पार्टी दिन असुरगुरु के पार्टी भढ़ती जा रही थी

ये बात असुरगुरु एक दो बार महल में गए तो उनसे ये बात छुपी न रह सकीय की द्वारिका की दृस्टि में उनकी क्या अहमियत है

आज भी जब असुरगुरु नरकासुर से भेट करने असुरराजमहल पहुंचे तो द्वारिका ने उनका अपमान कर दिया आवर न उन्हें नरकासुर से मिलने लिया

दूर खड़ा नीलसूर ये सब देख कर भी मून था पैर उसने कुछ निचय कर लिया था की कुछ भी करके वो ये सब पता कर के हे रहेगा

इसके लिया वह असुरगुरु के निकलते हे उनके पीछे पीछे निकल गया उनसे जन्मे के लिया

कुछ देर बाद असुरगुरु अपनी गुफा पहुंचे जहा उनके पीछे पीछे नीलसूर भी आ पंहुचा

नीलसूर .......परनाम असुरगुरु

असुरगुरु .......कल्याण हो पुत्र नीलसूर कहो पुत्र कैसे आना हुआ हम अभी अभी महल से लौट रहे कुछ कार्य था तो वही मिल लेते

नीलसूर .....क्षमा करे असुरगुरु मैंने आपको देखा था महल में आवर वही से आपका पीछा करते हुए यहाँ आया हूँ

असुरगुरु ......हम जानते है पुत्र की तुम हमारा पीछा करते हुए यहाँ पहुंचे हो खो क्या कार्य है

नीलसूर ......असुरगुरु हमने आपका आवर माता का वाद विवाद सुना आवर देखा भी था हम जानते है इसमें आपका कोई दोष नहीं है हम बस आपसे इस वाद विवाद का कारन जानना चाहते है

असुरगुरु .......क्या करोगे पुत्र जान कर क्या तुम अपनी माता को समजा सकते हो या उनके किसी आदेश को न मान कर उनके आदेश के अवहेलना कर सकते हो

नीलसूर अपनी गर्दन जुखा लेता है

असुरगुरु ......जिस दिन हमारे इस पर्सन का उतर तुम अपना सर उठा के दे सको उस दिन हमारे पास चले ासना हम तुम इस वाद विवाद का मुख्या कारन बता देंगे

नीलसूर .....क्या आप कुछ भी सहायता नहीं कर सकते असुरगुरु

असुरगुरु ......क्या तुम जानते हो पुत्र नीलसूर

असुर कुल में जन्मा हर एक सिसु हर एक कन्या किस विकार के साथ जनम लेता है

नीलसूर .......काम .क्रोध. मोह. माया इन 4 विकारो के साथ असुरगुरु

असुरगुरु ......है पुत्र नीलसूर यही चार विकार हमें देवो से भीं करते है किन्तु क्या तुम्हे एक सत्य पता है एक ऐसा गुण देवो में आवर असुरो में सामन रूप से होता है

नीलसूर .....मुझे ज्ञात नहीं असुरगुरु

असुरगुरु ......अहंकार अभिमान घमंड ये सम्बोधन भले हे तीन हो पुत्र किन्तु इनका अर्थ एक हे है

नीलसूर ......किन्तु इस से आपके आवर माता के वाद विवश से क्या लेना देना है असुरगुरु

असुरगुरु .....अब तुम जाओ पुत्र महल जा कर आराम से मेरी बातो को संत स्थिर बूढी से समझने की कोशिश करने तुम्हे ज्ञात हो जायेगा की हम तुम्हे क्या बताया है इस वाद विवाद का मूल कारन हमने तुम्हे बता दिया है

नीलसूर ........आज्ञा दे असुरगुरु परनाम

असुरगुरु ........कल्याण हो पुत्र

नीलसूर वह से निकल जाता है

असुरगुरु ......माता अपमान करती है आवर उसका पुत्र हमें सहानुभूति दिखने यहाँ चला आता है हमने अपनी पत्नी की हत्या को बुला दिया था इस असुरलोक के भविष्य के लिया कितनी द्वारिका तुम्हारी वजह से हमें अपने पढ़ का अपमान सहना पड़ा तुम इस योग्य नहीं हो की असुरलोक की महारानी पढ़ पे रहो हम तुम्हे इस पढ़ से बहुत जल्द उतर फेकेंगे भले हे फिर चाहे मेरा पुत्र कंटकासुर असुरराज पढ़ पे विराजे या कोई आवर जो असुरराज पढ़ का सामान करे न की अपमान

असुरगुरु वह से माँ पटल भेरी के समकक्ष जा कर ध्यान में लीं हो जाता है

नीलसूर जब महल पंहुचा तो वह अपने पिता जी के कक्ष की आवर बढ़ा उनसे भेट करने पैर अंदर से उसे अपनी माता क्रोध भरा सवार सुनाई पड़ा नीलसूर के पेअर वही रुक गए

द्वारिका .......मैं नहीं जानती स्वामी मुझे वो फिर से महल में नजर नहीं आना चाइये

नरकासुर .........तुम जानती भी हो द्वारिका वो असुरगुरु है

हम पहले हे एक पाप कर चुके है उनकी पत्नी की हत्या कर

भले वो पाप हमसे अनजाने में हुआ था फिर भी उन्होंने हमें माफ कर दिया

अब तुम चाहती हो की हम उन्हें असुरगुरु पढ़ छोड़ने को कहे

द्वारिका ......मैं कुछ नहीं जानती उसने हमारा अपमान किया है

काफी देर तक द्वारिका आवर नरकासुर में वाद विवाद चलता रहता है

नीलसूर को ये जान कर बहुत बड़ा जतका लगा था की असुरगुरु की पत्नी की हत्या उसके पिता द्वारा हुई थी उसे तो यहाँ पता था की महल में कुछ विद्रोही असुरो ने आकर्मण किया था जिसमे उनकी पत्नी की भी हत्या कर दी गई

नीलसूर दुखी मन से अपने कक्ष में चला जाता

सूर्यगड़ ..........

सूर्य साम को त्यार हो जब निचे आ रहा था

तभी सामने से शालिनी जी सूर्य की कॉफ़ी ले कर आ रही थी

शालिनी जी ......बीटा कही बहार जा रहे हो क्या

सूर्य ......है माँ वो सक्तिपुर जा रहा हूँ हॉस्पिटल में किसी चीज़ की जरुरत तो नहीं है वह सब कुछ ठीक तो चल रहा कुछ काम था क्या माँ

शालिनी जी .....बीटा मानसी बहुत अच्छी लड़की है उसे भी साथ ले जा अच्छा लगेगा उसे भी बहार गम कर

सूर्य ......ok माँ जो आपकी आज्ञा उसे कह दीजिये त्यार हो जाये तब तक मैं बाइक निकलता हूँ

शालिनी जी ......हेहेहे कभी मुझे भी गुमा कर ले आ अपनी बाइक पे

सूर्य ......आप कहो तो अभी आपको सहर ले चलता हूँ

शालिनी जी ......अभी तो तुम मानसी को गुमा कर ले आओ

सूर्य .....ok माँ कल आप चलना मेरे साथ हम दोनों कुछ शॉपिंग करेंगे आवर बहार हे लंच कर लौट आएंगे वैसे भी आप जब से u.s.a से आयी है कभी गुमने नहीं गई हो

शालिनी जी ......क्यों पुणे नहीं गई थी क्या

सूर्य .......वो मैं नहीं जनता माँ उम्म्म्म है बे माँ लव यू

शालिनी जी .....बदमाश ध्यान से ले जाना मानसी को

सूर्य........ ok अब आप उनको कहो की जल्दी से त्यार हो जाये

सूर्य बहार निकल जाता है शालिनी जी अपने गाल को ढकते हुए खली कॉफ़ी मग लिए मेर्री जी के रूम में पहुँचती है

शालिनी जी .........क्या कर रहे हो मानसी बेटी

मानसी .....कुछ नहीं आंटी बस ऐसे हे

शालिनी जी .......जाओ त्यार हो जाओ बेटी सूर्य बहार जा रहा है तुम भी गम आओ उसके साथ तुम्हे अच्छा लगेगा

मानसी .....जी आंटी जी अभी त्यार होती हूँ

मेर्री जी ........कहा जा रहा सूर्य दीदी

शालिनी ......सक्तिपुर जा रहा है मेर्री सायद कुछ काम यो उसे वह

शालिनी जी मेर्री के रूम से निकल जाती है कुछ देर बाद मानसी बहार आती है

सूर्य अभी अपनी बाइक पे कपडा मर रहा था तभी सूर्य के कानो में मानसी की सुरीली आवाज पड़ती है

मानसी ......क्या हम बाइक से जा रहे है बहार

सूर्य जैसे हे मानसी की आवाज सुन कर पलटा तो सामने ब्लैक जिनसे आवर ब्लैक टॉप में मानसी क़यामत ध रही थी





मानसी .....क्या हुआ जान कहा खो गए

सूर्य ......क्या क्या कहा तुमने वैसे बहुत खूबसूरत लग रही हो मोनसी तुम इन कपड़ो में

मानसी .........शुक्रिया तारीफ करने के लिया मुझे यहाँ के कपडे बहुत पसंद आये

सूर्य .......चलो चले अब बैठो बाइक पे

मानसी फ़ौरन बाइक पे बेथ जाती है आवर सूर्य के कमर में हाथ दाल कर चिपक जाती है पीछे से

मानसी के चिपकते हे सूर्य को अपनी पीठ पे मानसी के कोमल कोमल उभरी का अहसास होने लगता है

सूर्य .....थोड़ा पीछे खिसको कोई देखेगा तो गलत समझेगा

सूर्य अपनी बाइक हवेली बहार निकल कर सक्तिपुर की आवर भध जाता है

मानसी ......जो देखेगा वो यही समझेगा की मैं आपकी गफ हूँ

सूर्य .......आपको नहीं लगता की आप कुछ ज्यादा हे फ़ास्ट जा रहे है

मानसी .....क्या आप अपने गुरुदेव का आशीर्वाद विफल कर देंगे

सूर्य .....गुरुदेव का आशीर्वाद विफल नहीं होगा पैर आशीर्वाद की आड़ में आप कोई मर्यादा पर मत कीजियेगा समय आने पे आपको अपना अधिकार मिल जायेगा

मानसी .....आप तो बहुत हे बोरिंग है .किरण दीदी तो आपके बारे में कुछ आवर कह रहे थी

सूर्य ......स्वीटी आपकी दीदी कैसे हो गई वो तो आपसे भी छोटी है

मानसी ......भले उम्र में मुझसे छोटी हो पैर आपके दिल में उनके लिए बहुत ुचा स्थान है इस लिया मेरे से वो बड़ी बहन है

सूर्य .....बहुत कुछ पता कर लिया है 2 दिन में हे वैसे मेरा परिवार कैसा लगा

मानसी ......आपका नहीं हमारा परिवार जो आपके है वो अब हमारे है समजे आप वैसे मुझे सभी बहने बहुत पसंद है खाश कर शालिनी मम्मी जी

सूर्य .........क्या बात है देख रहा हूँ 2 दिन से तुम सभी की बहुत सेवा कर रहे हो

मानसी .........तभी तो मम्मी जी खुद आपको मुझसे विवाह करने को कहेंगी

सूर्य .....ओह्ह तेरी तो ये प्लान है सबकी सेवा कर उन्हें अपनी तरफ करना

मानसी ......आप ऐसा कह सकते है पैर ये आदिरा सच है मुझे कभी अपनी माता का प्रेम नहीं मिला मुझे तो उनका चेहरा तक याद नहीं है की वो कैसे दिखती थी जब से होश संभाला है बस बाबा हे मेरी दुनिया रहे है

यहाँ आपकी वजह से मुझे इतना बड़ा परिवार मिला है जहा एक नहीं 2 नहीं 3 ,3 माता का प्यार मिल रहा तो फिर कैसे में इस सुनहरे अवसर को खो सकती हूँ

यहाँ आने के बाद हे तो मुझे रिश्तों की अहमियत आवर उनके बिच के प्रेम का पता चला है

सूर्य ......बहुत दुःख हुआ जान कर की तुमने अपने माता का मुख तक याद नहीं है न उनका प्रेम मिला

मानसी ......किसने कहा क्या आपकी माता मेरी माता नहीं है जरूर मेरी माता भी शालिनी माँ की जैसे हे रही होंगी

सूर्य ......तुम्हे जो कर्जा है करो मानसी बस सबके सामने मर्यादा न पार हो तुम अभी कुछ नहीं जानती हो मेरे विषय में डेरी डेरी जान जाओगे

मानसी आगे खिसक कर सूर्य के मजबूत सीने पे अपने दोनों हाथ काश कर दोनों गमो पे अपने लिपिस्टिक के नीसाण छोड़ देती है

सूर्य ......ये क्या था मानसी

मानसी ........आपने हे तो कहा सबके सामने अपनी मर्यादा पार न कृ यहाँ हमारे सिवाय कोई नहीं तो अपना हक़ ले लिया वैसे भी आपकी हाफ वाइफ हूँ समजे स्वामी

सूर्य आवर मानसी बात करते हुए सक्तिपुर आ पहुंचे

सूर्य सबसे पहले मानसी को कुछ समय सकती पुर गौमाता है

फिर कुछ देर हॉस्पिटल का जायजा ले सूर्य दुर्जन सिंह की हवेली आ पंहुचा

सूर्य को हवेली में आते हुए विधि अपने रूम में से देख लेती है

विधि ......ये तो सूर्य ठाकुर है सूर्यगढ़ से पैर इसके साथ ये कोण है जो बाइक पे है

सूर्य अपनी बाइक कड़ी कर आगे बढ़ा तो मानसी सूर्य का हाथ थम कर साथ चलने लगती है

सूर्य भी कुछ सोच कर मानसी को अपने आवर नजदीकी कर लेता है

सूर्य जब हवेली में पंहुचा तो सामने हे गायत्री गीता ठाकुर आवर रुक्मणि सोफे पे बैठी कोई बात कर रही थी

सूर्य को देखते हे तीनो कड़ी हो गई

गीता ठाकुर ......आओ बीटा सूर्य बैठो बीटा गायत्री जाओ इनके लिया कॉफ़ी ले कर आओ

सूर्य .....इसकी कोई जरुरत नहीं है आंटी जी अभी अभी घर से पि कर आया हूँ

सूर्य आगे बढ़ गीता आवर रुक्मणि के पेअर छूटा है

पैर मानसी नहीं उसे यहाँ बहुत हे अजीब सा मह्सुश हो रहा था

गीता ठाकुर .....आओ बीटा बैठो बेटी तुम कड़ी क्यों हो बैठो

सूर्य आवर मानसी दोनों सामने के सोफे पे बेथ जाते है

सूर्य .....hello गायत्री जी hello विधि जी कैसे है आप

गायत्री विधि .....हम अच्छे है आप कैसे है

सूर्य ....अच्छा हूँ

गीता ठाकुर .....आज ीदार कैसे आना हुआ बीटा कुछ काम था क्या

सूर्य रुक्मणि को देखता है जो सूर्य को अपनी तरफ ऐसा देखता प् कर अपनी नजरे गुमा लेती है

सूर्य .....जी आंटी जी कुछ काम था तो सोचा आप सब से भी मिक लेता हूँ

गीता ठाकुर ........बीटा ये प्यारी से बची कोण है

मानसी ......जी मैं इनकी गर्लफ्रेंड हूँ मानसी

मानसी की बात सुन कर विधि का मुँह उतर जाता है उदाश तो गायत्री भी हुई थे पैर उसने ज्यादा अपने आपको एक्सपोज़ नहीं होने दिया

वही रुक्मणि मानसी की बात सुन अपना नाक सिकोड़ लेती है

विधि वह से किचन में चली जाती है आवर कॉफ़ी बनाते हुए अपने आंसू टपकने लगती है

गीता ठाकुर .....बहुत प्यारी बच्ची है बीटा इसका ख्याल रखना सूर्य

सूर्य ....जी आंटी जी

गायत्री कुछ बाद चली जाती है वह से अपने रूम में विधि भी कॉफ़ी देने के बाद चली जाती है वह से

सूर्य जैसे हे पहली सीप भरता है उसे विधि की मनोस्थिति का पता चल जाता है सूर्य कुछ सोच कर कॉफ़ी फिनिश करता है

सूर्य ........रुक्मणि चची जी आप क्या चाहती है

रुक्मणि .....क्या मतलब क्या चाहती हूँ

सूर्य ......देखिये चची जी मुझे बाते गुमा फिर कर करने की आदत नहीं है आपसे भी यही उम्मीद करूँगा की जो आपके दिलो दिमाग में चल रहा है उसे यही रोक दीजिये अगर दुबारा हवेली का कोई भी आदमी मेरे परिवार या मुज पे नजर रखने की कोशिश करेगा तो मैं आपका भी लिहाज भूल जाऊंगा की आप एक ोुरत है

गीता ठाकुर .......बात क्या है बीटा जरा विस्तार में बताओगे

सूर्य ......इनसे हे पूछो क्यों मुझपे आवर मेरे परिवार पे ये नजर रखवा रही है अगर आप दुश्मनी रखना चाहते तो फिर ये बीटा बीटा कहना बंद कीजिये आवर खुल कर सीने पे वार कीजिये न मैं किसी की पीठ पीछे वॉर करता हूँ न मुझे ऐसा कुछ पसंद है

मैंने पहले भी कहा था आपके पति की हत्या के पीछे मेरे परिवार का कोई हाथ नहीं है फिर आप लोगो ने यकीं नहीं किया

गीता ठाकुर .......मैं ये क्या सुन रही हूँ रुक्मणि क्या सूर्य जो बोल रहा है वो सच है

रुक्मणि अपनी गर्दन जुखा लेती है

सूर्य ......चची जी आपको मेरी बात बुरी लगे पैर एक बात आपके मुँह पे जरूर कहूंगा आपके पति कोई सांत आदमी नहीं थे ये आप भी जानती है आवर गीता चची जी आप भी उनके वयक्तित्वा से परिचित रही होंगी उन्होंने जीते जी न जाने कितने हे औरते कितनी लड़कियों को बर्बाद किया था न जाने सामने आवर उनकी पीठ पीछे कितने दुसमन थे उनके उस दिन मेरे पापा ने उन्हें मारा क्युकी उन्होंने मेरी माँ का किडनैप काटना चाहा था पैर फिर भी उन्होंने उसे जान से नहीं मारा था

रुक्मणि .....वो भला क्यों किडनैप करेंगे तुम्हारी माँ का जब उनकी सदी उन से होने वाली थी

सूर्य .....हो तो आपको ये पता है तो फिर एक बात आवर भी बता दीजिये आपका बीटा अजय किसका बीटा है

रुक्मणि .....जुबान संभल कर सूर्य ठाकुर

सूर्य .....जुबान अपनी सम्भालिये कैसे औरत है आप जब आपको पता था की जिस इंसान ने सदी से पहले हे चोरी छुपे आपके गॉड में 2 ,2 औलाद दाल दी अब वो किसी आवर की जिंदगी नरक बनाने जा रहा है उसे तब रोका होता आपने तो आपको आज ये सब न सहना पड़ता

बागवान न करे कल को उस जैसा नीची इंसान धोखे में रख कर आपकी बेटी से विवाह करे फिर आपको पता चले तब क्या बेटिगी आप पे खुद को मेरी माँ की जगह रख कर सोचिये

गेता ठाकुर ......बीटा मैं तुमसे माफी मांगती हूँ रुक्मणि की तरफ से

सूर्य ......आप माफी न मांगिये चची जी

सॉरी रुक्मणि चची जी मुझे माफ कर दीजिये पैर ये भी उतना हे सच हैं चची जी इंसान जैसा करम करेगा वैसे फल उसे मिलता है

आपने आज तक वो चेहरा देखना हे नहीं चाहा जो उनका वास्तविक चेहरा था

संबं किसी भी तरह का हो चाहे वो मानसिक आवर या शारीरिक दोनों में सहमति होना जरुरी है अगर उन्होंने सच बोल सहमति से सम्बंद बनाये होते तो कोई पाप नहीं था अगर उन्होंने आपका आवर आपके बच्चो का सच बता कर मेरी माँ से विवाह करते तो सायद वो मान भी जाती या मना भी कर देती

आप जानती है मेरे माँ डैड दोनों एक दूसरे से बचपन से प्यार करते थे फिर भी दोनों ने अपने परिवार की ख़ुशी मान सामान के लिया अपनी खुशियों का गाला घोट दिया आवर इस रिश्ते को सवीकार किया

जब माँ डैड को आपके विषय में पता चला तब माँ ने पापा के साथ सदी करने का फैसला किया था आपका कुछ पता नहीं था की आप कहा हो

बिना साक्ष्य कोई मंटा नहीं इस सच को एक तरह से माँ डैड आपको समाज के सामने आप आवर आपके बचो को उनका अदिकार दिलाना चाहते थे पैर दुष्यंत सिंह ने मेरी माँ को किडनैप करने की गलती की जिसका आजम ये हुआ की मेरे पापा ने उन्हें बहुत मारा पैर जान से नहीं मारा उन्होंने भी वो कोई आवर हे था जिसने दुष्यंत सिंह को मारा होगा कोई जिसके साथ दुष्यंत सिंह ने गलत किया था

आज आप वही गलती कर रही है अगर आपकी जगह कोई आदमी होता तो उसके दिमाग में मेरे परिवार के लिए बुरी सोच उपजाति उस से पहले मैं उसकी बलि चढ़ा चूका होता

सूर्य की बात सुन रुक्मणि फफक फफक कर रोने लगती है

आज उसे अहसास हो रहा था की उसने इतने साल एक नीच पापी इंसान के लिया बर्बाद कर दिया यहाँ तक की दुश्मनी निभाने के लिया अपनी इज्जत तक लुटवाई

रुक्मणि ......मुझे माफ कर दे बीटा मैं पापिन हूँ मैंने बहुत से पाप किये है हमेसा तुम्हारा आवर तुम्हारे परिवार का बुरा हे करना चाहा मुझे जैसे ोुरत को तो माफी मांगने का हक़ भी नहीं है तुमसे .मैं तो औरत के नाम पे कलंक हूँ

सूर्य रुक्मणि को खड़ा कर अपने सीने लगा लेता है

सूर्य ......चची जी बिट गया है उसे भूल कर एक नयी जिंदगी सुरु कीजिये अभी भी कुछ नहीं बिगड़ है अभी भी आपके पास आपका बीटा है प्यारी से बेटी है उनको अच्छे संस्कार दीजिये ताकि वो अपनी जिंदगी में कुछ बन सके अपनी जिंदगी सवार सके

रुक्मणि .....तुम भी मुझे माफ कर देना बीटा मैंने तुम्हे हमेशा बद्दुआ हे दी है पैर आज तुम्हे अपने दिल से अंतरात्मा को साक्षी मन तुम्हे आशीर्वाद देती हूँ की तुम आवर तुम्हारा परिवार हमेशा कुछ रहे

सूर्य .......मैंने तो आपको ुशी पल माफ कर दिया था चची जब आपके सीने लगा था आवर आपकी बद्दुआ भी मुझे आशीर्वाद हे लगी जब मेरे महाकाल मेरे साथ है तो मुझे दर कैसा फिर आप भी तो मेरी माँ सामान है क्या एक माँ कभी अपने बेटे को बददुहा दे सकती है

गेता ठाकुर .........सच में बीटा तुम्हारी माँ बहुत भाग्यशाली है जिसने तुम्हारे जैसे हीरे को जनम दिया

सूर्य ......जी चची जी भाग्यशाली तो मैं भी हूँ जो मुझे इतनी माओ का प्यार मिला

सूर्य एक तरफ से जाता ठाकुर को भी गले से लगा लेता है आज दोनों के मन से पाप की परत उतर चुकी थी दोनों सच्चे दिल से सूर्य को अपना बीटा मन चुकी थी

गीता ठाकुर .....बीटा तुमने शालिनी को तो माफ कर दिया अब मुज.......

सूर्य ......आपको माफी मांगने की जरुरत नहीं है बस विक्रम को उचित मार्ग पे ले आइये वो उन्हें कदमो पे चल रहा है जो एक दिन उसे अंत की आवर ले जायेंगे हो सके तो उसे उस रस्ते पे आगे बढ़ने से रोक लीजिये

गीता ठाकुर ......मैं उसे सैम जाउंगी बीटा

सूर्य .......तुम दोनों वह कड़ी क्यों आंसू बहा रही हो

गीता आवर रुक्मणि दोनों जब देखती है तो उनके पीछे कुछ दुरी पे गायत्री आवर विधि कड़ी थी दोनों की आँखों से आंसू बाह रहे थे

गीता ठाकुर ........सूर्य से नहीं मिलोगी क्या अब से ये हमारा बड़ा बीटा है

रुक्मणि ......बिलकुल ठीक कहा दीदी आपने आवर आप भी मुझे मेरे बुरे वर्ताव के लिया माफ कर दीजिये

सूर्य रुक्मणि गीता को अलग कर गायत्री आवर विधि के सामने जा खड़ा होता है

सूर्य जैसे हे अपने बहे फैलता है दोनों अपनी माँ की तरफ देखती है जो दोनों को है में गर्दन हिला कर इसरा करती है

गायत्री आवर विधि दोनों सूर्य के सीने से लग जाती है दये बाये

सूर्य .....वैसे विधि कॉफ़ी बहुत स्वादिस्ट थी फिर कब मिलेगी मुझे नमकीन कॉफ़ी पिने को पैर इस बार आंसू ख़ुशी के होने चाइये न की दुःख के तुम्हारे मन की भावनाओ को जनता हूँ मैं पैर ये संभव नहीं है विधि

विधि ......क्या कुछ वक़्त के लिया भी संभव नहीं है ठाकुर साहब

ये सब विधि ने सूर्य की आँखों में देख कर कहा था

सूर्य .......क्या पता तुम्हारे हिस्से की कुछ ख़ुशी तुम्हारे नसीब में हो पैर जीवन भर का वादा नहीं कर सकता हूँ

विधि ......मेरे लिया उतना हे काफी है

गायत्री .....तुम दोनों क्या बात कर रहे हो मुझे कुछ भी समाज नहीं आ रहा है

surya.......chalo अब मैं निकलता हूँ फॉर आऊंगा आप सब से मिलने के लिया

विधि गायत्री ........कब आओगे

सूर्य ......जब तुम कहो वैसे मुझे कलम कर सकती हो कभी कुछ भी काम हो तो सूर्य उन्हें अपना no. दे देता है

सूर्य .....अच्छा चची जी मैं चलता हूँ फिर आऊंगा आवर चची जी आप भी अजय का ध्यान रखिये उसकी सांगत गलत लोगो के बिच ज्यादा हे हो रही है कैसे ऐसा न हो की वो भी ......

रुक्मणि ......नहीं बीटा मई. उसे उसके बाप जैसा नहीं बनने दूंगी

गीता ठाकुर ......बीटा खाने का वक़्त हो गया है खाना खा कर जाना अब से ये भी तुम्हारा घर है

सूर्य ......जोर चची जी खाना भी खाऊंगा पैर तब जब आप चारो वह आएंगे पहले

गीता ठाकुर ......जरूर आउंगी बीटा जल्दी हे

सूर्य ......अभी मैं कुछ दिनों के लिया बहार जा रहूं हूँ आते हे कॉल करता हूँ

गीता ठाकुर .......ठीक है बीटा अपना ख्याल रखना

गीता रुक्मणि विधि गायत्री एक बार आवर सूर्य से गले मिल उसे विदा करती है

सूर्य अपनी बाइक उठा सूर्यगढ़ की तरफ निकल जाता है .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स................

सॉरी फ्रेंड्स गलती से अपडेट no.149 की जगह 148 लिख दिया था

अभी चेंज कर दिया है कन्फ्यूज्ड न होने न ...
 
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