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असुरगुरु .......किन्तु याद रहे पुत्र तुम जब तक वह हो नगीना आवर विसुद्धि से काम क्रीड़ा नहीं करोगे उनसे असुरलोक में कोई सम्बन्ध नहीं बनाओगे
k.asur ......ठीक है पिता श्री कब निकलना है हमें
असुरगुरु .....अभी निकलो तुम तीनो यहाँ से ( यहाँ काल पहुंचे उस से पहले तुम तीनो को चले जाना चाइये )
k.asur ......जैसा आपका आदेश पिता श्री आज्ञा दीजिये
k.asur नगीना आवर विसुद्धि को जब असुरगुरु का सन्देश देता है तो पहले तो वह जाने को बिलकुल भी त्यार नहीं थी
किन्तु जब k.asur ये बताता है की ये आदेश नरकासुर का है तब न चाहते हुए भी दोनों बहने असुरलोक जाने को त्यार हो जाते है
कुछ समय में तीनो वह से असुर लोक के लिया प्रस्थान कर जाते है ...............
अब आगे .............
सूर्य मानसी के परीलोक से जाने के बाद
रानी पारी .......क्या बात है पुत्री रिद्धि आप अकेले अपने कक्ष में क्या कर रही हो
रानी पारी की आवाज सुन रिद्धि पारी का ध्यान भांग होता है जो एक तक महल की खिड़की से बहार के सुन्दर नज़ारे में खोये हुए थी
रिद्धि पारी ने पहले भी ये नजारा कई बार इस कक्ष की खिड़की से देखा है पैर इतना खूबसूरत उसे ये नजारा पहले नहीं लगता था
कहने वाले ने सच हे कहा है की जब दिल में अपर प्रेम हो तो सब अच्छा हे लगता है
वही आज रिद्धि पारी के साथ हो रहा है जैसे जैसे रिद्धि के दिल में सूर्य के पार्टी प्रेम भध रहा था वैसे वैसे उसके सोचने समझने का नजरिया भी बदल रहा था
रिद्धि ......कुछ नहीं रानी माँ बस ऐसे हे कुछ वक़्त एकांत में बिताना चाहती थी
रानी pari.......putri मन की मैंने तुम्हे जनम नहीं दिया है
किन्तु तुम्हे अपनी पुत्री मन है तुम्हारे मन की वयथा मुझसे न छुपी है पुत्री मुझे भी प्रेम हुआ था आवर विवाह भी किन्तु भाग्य ने हमारा साथ ज्यादा नहीं लिखा था
रिद्धि .......क्या महाराज ने हे अपने प्रेम को सर्वपार्ट्म आपके सामने स्वीकार किया था
रानी पारी .......हेहेहे अब सामजी मेरी पुत्री यहाँ एकांत में क्या विचार कर रही थी
रिद्धि .....ऐसा कुछ नहीं रानी माँ बास हम ऐसे हे.......
रानी पारी ..........पुत्री ये जरुरी नहीं की कोण सर्वपार्ट्म अपने प्रेम को आने प्रेमी के सामने स्वीकार करता है या प्रेम परस्ताव रखता है
किन्तु दोनों में महत्वपूर्ण ये है की अपने प्रेमी के समकक्ष अपने प्रेम को स्वीकार करना
रिद्धि .......रानी माँ क्या जिस से हम प्रेम करते है वो हमारे हृद्या के भाव बिना कहे नहीं समाज सकता है
रानी पारी .......हेहेहे पुत्री जहा प्रेम हो वह सब्दो का कोई महत्व नहीं है प्रेमी प्रेमिका के बिच ये मून प्रेम संवाद भी प्रेम का हे एक सवरूप है जहा प्रेमिका प्रेमी के बिना कुछ कहे अपनी प्रेमी के मन मस्तिष्क में चल रहे विचारो को जान लेती है
जैसा की पुत्र सूर्य आवर किरण के बिच है मैं जानती हु की मेरी पुत्री भी पुत्र सूर्य से प्रेम करती है तो अब समय वयर्थ किये बिना अपने हृद्या का हल सूर्य से कह दो पुत्री
रिद्धि .......शुक्रिया रानी माँ मुझे ये समजने के लिया
रानी पारी .......रानी माँ भी कहती हो आवर शुक्रिया बोल कर हमें अपनी माँ होने के अदिकार से भी वंचित कर रही हो
रिद्धि ......आगे से हम आपके कथन को ध्यान रखेंगे रानी माँ .......
सूर्य आवर मानसी जब परीलोक पहुंचे तो संध्या काल सुरु हो चूका था
सूर्य ......मानसी तुम चलो मैं गुरुदेव से कुछ बात करके आता हूँ
मानसी .....अगर आपको एतराज न हो तो मैं भी आपके साथ चल सकती हूँ
सूर्य .......ठीक है चलो वैसे भी वह मैं आपके विषय में हे बात करने वाला था क्युकी कल सुबह हे हम तीनो को ड्रैगन प्लेनेट के लिया निकलना होगा
मानसी ......ठीक है जैसा आप कहे
सूर्य मानसी को अपने साथ ले कर गुरुदेव के कक्ष में जाता है जहा गुरुदेव .जकिंग आवर प्रेतराज किसी बात पे चर्चा कर रहे थे
सूर्य मानसी .......परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्र सूर्य पुत्री मानसी
सूर्य पुर मानसी .जकिंग आवर प्रेतराज को भी परनाम करते है
गुरुदेव .......क्या असुरगुरु ने तुम दोनों के विवाह प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की पुत्र
सूर्य ......जी गुरुदेव उन्हें हमारे विवाह से कोई आपत्ति नहीं है
उन्होंने कहा की हमारा विवाह असुर रीती रिवाजो से होगा
किन्तु उनसे भेट करने पे पता चला की उनका एक पुत्र आवर भी
गुरुदेव ......हम्म्म ये हम जानते है पुत्र क्युकी मानसी जनम स्व असुर कन्या है तो उसका विवाह असुर पार्था अनुसार हे होना उचित भी है
क्या असुरगुरु के पुत्र को तुम दोनों के विवाह से किसी तरह की समस्या है
सूर्य ........हमारी उस से भेट नहीं हो पाई है गुरुदेव किन्तु उन्होंने अपने पुत्र के लिया कुछ मांग की है
एक पिता के रूप में जिसे मैंने आपकी अनुमति के बिना हे स्वीकार कर लिया हो सके तो मुझे उसके लिया आप क्षमा कर दीजिये गुरुदेव
gurudev........aisi क्या मांग की असुरगुरु ने जिसके लिया पुत्र तुम क्षमा मांग रहे हो
सूर्य ........गुरुदेव उन्होंने अपने पुत्र के लिया एक जीवन दान माँगा है
उनका कहना है की जब भी उनके पुत्र का आवर मेरा सामना सामना हो तो उसे मैं एक जीवन दान अवश्य दूँ
आवर मैंने भी आपकी अनुमति के बिना उन्हें उनके पुत्र को एक जीवन दान देना स्वीकार कर लिया
गिरुदेव ......पुत्र ये तुमने उचित नहीं किया तुम्हारा अभय दान देना गलत नहीं है किन्तु अभय दान भी तभी देना चाइये जब वो सकाश उसके योग्य हो
पुत्री मानसी तुम सायद मेरे द्वारा कहे सब्दो से आहात अवश्य होगी
किन्तु ये भी सत्य है पुत्री इस्वर भी वरदान ुशी को देता है जिसके योग्य भक्त हो
मानसी ......गुरुदेव आपने जो कहा वो पूर्णतया सत्य है
किन्तु एक सत्य ये भी है गुरुदेव की सभी को अपने जीवन में किये गए पापो का प्रायश्चित करने का एक अवसर तो स्वयं महाकाल भी देते है
गुरुदेव ......उचित है पुत्री तुम्हारा कथन
पुत्र सूर्य भविष्य में बिना किसी के वास्तविक सत्य को जाने तुम किसी को भी कोई वचन नहीं डोज ये तुम्हे इस बात का अवश्य ख्याल रखोगे
सूर्य ......जी गुरुदेव आगे से मैं आपकी अनुमति आपसे विचार विमर्श करने के बाद हे ऐसा कोई वचन दूंगा
गुरुदेव .......उचित है पुत्र कल सूर्यौदय के साथ हे पुत्री मानसी आवर पुत्री किरण के साथ तुम्हे ड्रैगन प्लेनेट के लिया अपना सफर सुरु करना है जहा तुम तीनो को बहुत से परेशानी तो का सामना करना पद सकता है
सूर्य .......आप का आशीर्वाद साथ हो प्रभु महाकाल का भी फिर हमें किसका दर गुरुदेव
j.king .......ये सत्य है पुत्र किन्तु समय को सतर्क रखने की जी मदारी भी तुम्हारी है जब हम उस स्थान से अनभिज्ञ हो जहा हम है या जा रहे तो वह हमेशा अपनी इन्द्रियों को जागृत रखना चाइये आने वाले किसी भी बड़े खतरे के लिया सदैव त्यार रहना चाइये
सूर्य .....जी पिता श्री आपने सत्य कहा सवयं की सतर्कता आवर सूझ बुझ से हम बड़े से बड़े खतरे का सामना कर सकते है
गुरुदेव ........ठीक है पुत्र अब तुम जाओ आवर सभी को अपना समय दो वैसे भी कुछ समय तुम्हे सब से दूर जाना है उनका भी मन होगा
क्यों j.king .प्रेतराज हमने उचित कहा न हहहह
j.king .......बिलकुल उचित कहा गुरुदेव आपने बच्चो को भी अपना समय मिलना चाइये
प्रेतराज ......हम आपसे सहमत है j.king यही तो वो समय होता है जब बच्चे अपने माता पिता से ज्यादा अपने प्रेमी के साथ समय वयतीत कर्जा चाहते है
सूर्य .....गुरुदेव आज्ञा दे मैं चलता हूँ परनाम गुरुदेव .
गुरुदेव j.king प्रेतराज सूर्य की बात सुन कर हसने लगते है
गुरुदेव से ाजाज्ञा ले मानसी आवर सूर्य वह से निकल जाते है
सैम तक सूर्य सब बड़ो के साथ वक़्त बिताता है
रात के भोजन के बाद सूर्य जब अपने कक्ष में पहुँचता है तो वह पहले से हे सब मौजूद थी
सूर्य ......क्या बात है आज पारी लोक की सब खूबसूरत पड़िया मेरे कक्ष में कैसे
परिजात .......जब पूरा परीलोक आवर परीलोक की राजकुमारी हे आपकी है तो बाकि परीलोक की पड़िया भी आपकी हुई
किरण ......पारिजात ऐसा न कहो कही बागवान ने आपकी सुन ली तो क्या होगा
वैसे हे हमारे अलावा इनकी लिस्ट बहुत मंभी है हेहेहे
जिनिशा सूर्य का हाथ पकड़ कर बीएड पे ले जाती है
सूर्य .....अरे मुझे फ्रेश तो होने दो
जिनिशा .......ये लीजिये अभी आपको फ्रेश कर देती हूँ
सूर्य .......जीनु फिर से नहीं
जिनिशा .......अरे बाबा ये तो बहुत छोटा सा मैजिक है
सूर्य ......छोटी छोटी गलतिया एक दिन बड़ी बन जाती है आप सब बस 10 मिनट्स आवर वेट करो
सूर्य वह से उठ कर अपना टॉवल ले बाथरूम में फ्रेश होने चला जाता है
कुछ देर बाद सूर्य शार्ट में अपने कंडे पे टॉवल डेल बहार निकलता है
किरण सूर्य को हाफ नुदे देख अपने मुँह में ऊँगली रख सिटी मर देती है
किरण ........आवर कुछ डालने की जरुरत नहीं चुपचाप यहाँ लेट जाओ
सूर्य टॉवल रख स्वीटी के साथ जा बैठा
सूर्य ......तो आज रात आप सबका यही रुकने का इरादा है क्या
पारिजात .......है आज हम सब यही रुकने वाले है
सूर्य ......पैर आज तो जीनत
जीनत ......मुझे कोई एतराज नहीं है इन सबका हक़ मुझसे ज्यादा है आप पे आवर फिर मुझे जो चाइये था वो मिल भी तो रहा है
किरण .....मानसी हमें चलना चाइये आज की नाईट इनको साथ बॉटने दो फिर कुछ वक़्त तो हमारे हे साथ है सूर्य
किरण मानसी के साथ दूसरे कक्ष में चली जाती है
अब यहाँ सूर्य के साथ पारिजात जिनिशा कोमल अलीना पायल प्रीती राधा जीनत आवर रिद्धि बचे हुए थे
सूर्य ......देखो मैं माफी चाहता हु आप सबको ज्यादा वक़्त नहीं दे पाउँगा क्युकी मुझे कल के सफर के लिया पूरा आराम चाइये पता नहीं वह कैसे स्थिति हो
राधा ......आप चिंता न करे हम बस कुछ वक़्त बिता कर चले जायेंगे
कुछ देर बात करने के बाद सब ुशी कक्ष में लगे दूसरे बीएड पे जा कर आराम करने लगते है
प्रीति .....मैं आपके साथ हे सोने वाली हूँ जीनत ......आवर मैं भी
सूर्य .....थीम है जैसा तुम्हे ठीक लगे सूर्य कुछ देर उनके साथ मस्ती करता है फिर प्रीती आवर जीनत को एक प्यारा सा किश कर दोनों को बहो में भर कर सो जाता है
कुछ देर बाद रिद्धि अपने बीएड से उठ कर सूर्य के बीएड पे पहुँचती है आवर सूर्य के सर को अपने गॉड में रख प्यार से सहलाने लगती है
रिद्धि को लगा की सूर्य सो चूका है आवर ये सच भी था पैर जब रिद्धि ने सूर्य का सर अपनी गॉड में रखा ुशी वक़्त सूर्य जग गया था रिद्धि को लगा की सूर्य उसके जादू से गाह्रो नींद में चला गया है
रिद्धि ......मुझे माफ कारनामे आप पे जादू इस्तमाल करने के लिया मुझे बस आपके साथ कुछ वक़्त बिताना था
मैं भी आपसे बाकियो के जैसे हे प्रेम करती हूँ पैर आपके सामने स्वीकार नहीं कर सकती हु. पता नहीं कब मैं आपको अपने हृद्या का हल बता पाऊँगी
रिद्धि रात भर सूर्य के सर को ढकते हुए मन में न जाने क्या क्या सोचती रही जब सुबह सूर्य का उठने का समय हुआ तो रिद्धि अपने स्थान पे जा कर लेट जाती है
कुछ डेड बाद सूर्य उठा फ्रेश हो कर बाकि सभी को उठा देता है
सूर्य महल में बने उद्यम में जा कर अपने सभी इन्द्रियों को जागृत करता है
सूर्य ने जब अपनी आँखे खोटी तो उसके सामने किरण आवर मानसी के साथ साथ बाकि सब भी वही ध्यान में बैठी हुई थी
सूर्य ......क्या बात है आप सब यहाँ वो भी ध्यान में लीं
पारिजात ......गुरुदेव का आदेश है जब तक आप अपने सदर से लौट कर नहीं आते है हम सब रोज सूर्यौदय के साथ ध्यान करे
सूर्य ......मेरे लौटने के बाद भी ऐसे हे कर्मा इस से आप सबकी ऊर्जा नियंत्रण में रहेगी आवर आपकी इन्द्रियों को ऊर्जा प्राप्त होगी
कुछ देर बाद सूर्य बाकि सभी के साथ नास्ता करता है
सभी बड़ो को ले कर सूर्य महाकाल मंदिर जाता है जहा वह तीनो मिल कर पूजा करते है
गुरुदेव ......पुत्र सूर्य अब तुम्हारे प्रस्थान का समय हो चूका है
सूर्य .....जी गुरुदेव
सूर्य मानसी किरण सब से गले लग कर मिलते है सभी विजय होने का आशीर्वाद देते है
सूर्य ......गुरुदेव जब तक मैं लौट के नहीं आता कोई भी परतविलोक नहीं जायेगा ये जिम्मेदार आपकी है
गुरुदेव .....तुम चिंता न करो पुत्र तुम बस अपने लक्ष्य पे ध्यान केंद्रित करो
सूर्य .....जी गुरुदेव आज्ञा दे परनाम गुरुदेव
मानसी किरण .....परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ....विजयी भाव पुत्र सूर्य पुत्री किरण मानसी
जैसे हे सूर्य किरण आवर मानसी का हाथ थमता है किरण के सरीर से गोल्डन ऊर्जा सूर्य के सरीर से वाइट ऊर्जा आवर मानसी की सरीर से ब्लैक ऊर्जा निकल कर तीनो को घेर लेती है कुछ देर बाद जब ऊर्जा वह से हटी तो तीनो गायब हो चुके थे
एडवेंचर ऑफ ड्रैगन वर्ल्ड .........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
असुरगुरु .......किन्तु याद रहे पुत्र तुम जब तक वह हो नगीना आवर विसुद्धि से काम क्रीड़ा नहीं करोगे उनसे असुरलोक में कोई सम्बन्ध नहीं बनाओगे
k.asur ......ठीक है पिता श्री कब निकलना है हमें
असुरगुरु .....अभी निकलो तुम तीनो यहाँ से ( यहाँ काल पहुंचे उस से पहले तुम तीनो को चले जाना चाइये )
k.asur ......जैसा आपका आदेश पिता श्री आज्ञा दीजिये
k.asur नगीना आवर विसुद्धि को जब असुरगुरु का सन्देश देता है तो पहले तो वह जाने को बिलकुल भी त्यार नहीं थी
किन्तु जब k.asur ये बताता है की ये आदेश नरकासुर का है तब न चाहते हुए भी दोनों बहने असुरलोक जाने को त्यार हो जाते है
कुछ समय में तीनो वह से असुर लोक के लिया प्रस्थान कर जाते है ...............
अब आगे .............
सूर्य मानसी के परीलोक से जाने के बाद
रानी पारी .......क्या बात है पुत्री रिद्धि आप अकेले अपने कक्ष में क्या कर रही हो
रानी पारी की आवाज सुन रिद्धि पारी का ध्यान भांग होता है जो एक तक महल की खिड़की से बहार के सुन्दर नज़ारे में खोये हुए थी
रिद्धि पारी ने पहले भी ये नजारा कई बार इस कक्ष की खिड़की से देखा है पैर इतना खूबसूरत उसे ये नजारा पहले नहीं लगता था
कहने वाले ने सच हे कहा है की जब दिल में अपर प्रेम हो तो सब अच्छा हे लगता है
वही आज रिद्धि पारी के साथ हो रहा है जैसे जैसे रिद्धि के दिल में सूर्य के पार्टी प्रेम भध रहा था वैसे वैसे उसके सोचने समझने का नजरिया भी बदल रहा था
रिद्धि ......कुछ नहीं रानी माँ बस ऐसे हे कुछ वक़्त एकांत में बिताना चाहती थी
रानी pari.......putri मन की मैंने तुम्हे जनम नहीं दिया है
किन्तु तुम्हे अपनी पुत्री मन है तुम्हारे मन की वयथा मुझसे न छुपी है पुत्री मुझे भी प्रेम हुआ था आवर विवाह भी किन्तु भाग्य ने हमारा साथ ज्यादा नहीं लिखा था
रिद्धि .......क्या महाराज ने हे अपने प्रेम को सर्वपार्ट्म आपके सामने स्वीकार किया था
रानी पारी .......हेहेहे अब सामजी मेरी पुत्री यहाँ एकांत में क्या विचार कर रही थी
रिद्धि .....ऐसा कुछ नहीं रानी माँ बास हम ऐसे हे.......
रानी पारी ..........पुत्री ये जरुरी नहीं की कोण सर्वपार्ट्म अपने प्रेम को आने प्रेमी के सामने स्वीकार करता है या प्रेम परस्ताव रखता है
किन्तु दोनों में महत्वपूर्ण ये है की अपने प्रेमी के समकक्ष अपने प्रेम को स्वीकार करना
रिद्धि .......रानी माँ क्या जिस से हम प्रेम करते है वो हमारे हृद्या के भाव बिना कहे नहीं समाज सकता है
रानी पारी .......हेहेहे पुत्री जहा प्रेम हो वह सब्दो का कोई महत्व नहीं है प्रेमी प्रेमिका के बिच ये मून प्रेम संवाद भी प्रेम का हे एक सवरूप है जहा प्रेमिका प्रेमी के बिना कुछ कहे अपनी प्रेमी के मन मस्तिष्क में चल रहे विचारो को जान लेती है
जैसा की पुत्र सूर्य आवर किरण के बिच है मैं जानती हु की मेरी पुत्री भी पुत्र सूर्य से प्रेम करती है तो अब समय वयर्थ किये बिना अपने हृद्या का हल सूर्य से कह दो पुत्री
रिद्धि .......शुक्रिया रानी माँ मुझे ये समजने के लिया
रानी पारी .......रानी माँ भी कहती हो आवर शुक्रिया बोल कर हमें अपनी माँ होने के अदिकार से भी वंचित कर रही हो
रिद्धि ......आगे से हम आपके कथन को ध्यान रखेंगे रानी माँ .......
सूर्य आवर मानसी जब परीलोक पहुंचे तो संध्या काल सुरु हो चूका था
सूर्य ......मानसी तुम चलो मैं गुरुदेव से कुछ बात करके आता हूँ
मानसी .....अगर आपको एतराज न हो तो मैं भी आपके साथ चल सकती हूँ
सूर्य .......ठीक है चलो वैसे भी वह मैं आपके विषय में हे बात करने वाला था क्युकी कल सुबह हे हम तीनो को ड्रैगन प्लेनेट के लिया निकलना होगा
मानसी ......ठीक है जैसा आप कहे
सूर्य मानसी को अपने साथ ले कर गुरुदेव के कक्ष में जाता है जहा गुरुदेव .जकिंग आवर प्रेतराज किसी बात पे चर्चा कर रहे थे
सूर्य मानसी .......परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्र सूर्य पुत्री मानसी
सूर्य पुर मानसी .जकिंग आवर प्रेतराज को भी परनाम करते है
गुरुदेव .......क्या असुरगुरु ने तुम दोनों के विवाह प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की पुत्र
सूर्य ......जी गुरुदेव उन्हें हमारे विवाह से कोई आपत्ति नहीं है
उन्होंने कहा की हमारा विवाह असुर रीती रिवाजो से होगा
किन्तु उनसे भेट करने पे पता चला की उनका एक पुत्र आवर भी
गुरुदेव ......हम्म्म ये हम जानते है पुत्र क्युकी मानसी जनम स्व असुर कन्या है तो उसका विवाह असुर पार्था अनुसार हे होना उचित भी है
क्या असुरगुरु के पुत्र को तुम दोनों के विवाह से किसी तरह की समस्या है
सूर्य ........हमारी उस से भेट नहीं हो पाई है गुरुदेव किन्तु उन्होंने अपने पुत्र के लिया कुछ मांग की है
एक पिता के रूप में जिसे मैंने आपकी अनुमति के बिना हे स्वीकार कर लिया हो सके तो मुझे उसके लिया आप क्षमा कर दीजिये गुरुदेव
gurudev........aisi क्या मांग की असुरगुरु ने जिसके लिया पुत्र तुम क्षमा मांग रहे हो
सूर्य ........गुरुदेव उन्होंने अपने पुत्र के लिया एक जीवन दान माँगा है
उनका कहना है की जब भी उनके पुत्र का आवर मेरा सामना सामना हो तो उसे मैं एक जीवन दान अवश्य दूँ
आवर मैंने भी आपकी अनुमति के बिना उन्हें उनके पुत्र को एक जीवन दान देना स्वीकार कर लिया
गिरुदेव ......पुत्र ये तुमने उचित नहीं किया तुम्हारा अभय दान देना गलत नहीं है किन्तु अभय दान भी तभी देना चाइये जब वो सकाश उसके योग्य हो
पुत्री मानसी तुम सायद मेरे द्वारा कहे सब्दो से आहात अवश्य होगी
किन्तु ये भी सत्य है पुत्री इस्वर भी वरदान ुशी को देता है जिसके योग्य भक्त हो
मानसी ......गुरुदेव आपने जो कहा वो पूर्णतया सत्य है
किन्तु एक सत्य ये भी है गुरुदेव की सभी को अपने जीवन में किये गए पापो का प्रायश्चित करने का एक अवसर तो स्वयं महाकाल भी देते है
गुरुदेव ......उचित है पुत्री तुम्हारा कथन
पुत्र सूर्य भविष्य में बिना किसी के वास्तविक सत्य को जाने तुम किसी को भी कोई वचन नहीं डोज ये तुम्हे इस बात का अवश्य ख्याल रखोगे
सूर्य ......जी गुरुदेव आगे से मैं आपकी अनुमति आपसे विचार विमर्श करने के बाद हे ऐसा कोई वचन दूंगा
गुरुदेव .......उचित है पुत्र कल सूर्यौदय के साथ हे पुत्री मानसी आवर पुत्री किरण के साथ तुम्हे ड्रैगन प्लेनेट के लिया अपना सफर सुरु करना है जहा तुम तीनो को बहुत से परेशानी तो का सामना करना पद सकता है
सूर्य .......आप का आशीर्वाद साथ हो प्रभु महाकाल का भी फिर हमें किसका दर गुरुदेव
j.king .......ये सत्य है पुत्र किन्तु समय को सतर्क रखने की जी मदारी भी तुम्हारी है जब हम उस स्थान से अनभिज्ञ हो जहा हम है या जा रहे तो वह हमेशा अपनी इन्द्रियों को जागृत रखना चाइये आने वाले किसी भी बड़े खतरे के लिया सदैव त्यार रहना चाइये
सूर्य .....जी पिता श्री आपने सत्य कहा सवयं की सतर्कता आवर सूझ बुझ से हम बड़े से बड़े खतरे का सामना कर सकते है
गुरुदेव ........ठीक है पुत्र अब तुम जाओ आवर सभी को अपना समय दो वैसे भी कुछ समय तुम्हे सब से दूर जाना है उनका भी मन होगा
क्यों j.king .प्रेतराज हमने उचित कहा न हहहह
j.king .......बिलकुल उचित कहा गुरुदेव आपने बच्चो को भी अपना समय मिलना चाइये
प्रेतराज ......हम आपसे सहमत है j.king यही तो वो समय होता है जब बच्चे अपने माता पिता से ज्यादा अपने प्रेमी के साथ समय वयतीत कर्जा चाहते है
सूर्य .....गुरुदेव आज्ञा दे मैं चलता हूँ परनाम गुरुदेव .
गुरुदेव j.king प्रेतराज सूर्य की बात सुन कर हसने लगते है
गुरुदेव से ाजाज्ञा ले मानसी आवर सूर्य वह से निकल जाते है
सैम तक सूर्य सब बड़ो के साथ वक़्त बिताता है
रात के भोजन के बाद सूर्य जब अपने कक्ष में पहुँचता है तो वह पहले से हे सब मौजूद थी
सूर्य ......क्या बात है आज पारी लोक की सब खूबसूरत पड़िया मेरे कक्ष में कैसे
परिजात .......जब पूरा परीलोक आवर परीलोक की राजकुमारी हे आपकी है तो बाकि परीलोक की पड़िया भी आपकी हुई
किरण ......पारिजात ऐसा न कहो कही बागवान ने आपकी सुन ली तो क्या होगा
वैसे हे हमारे अलावा इनकी लिस्ट बहुत मंभी है हेहेहे
जिनिशा सूर्य का हाथ पकड़ कर बीएड पे ले जाती है
सूर्य .....अरे मुझे फ्रेश तो होने दो
जिनिशा .......ये लीजिये अभी आपको फ्रेश कर देती हूँ
सूर्य .......जीनु फिर से नहीं
जिनिशा .......अरे बाबा ये तो बहुत छोटा सा मैजिक है
सूर्य ......छोटी छोटी गलतिया एक दिन बड़ी बन जाती है आप सब बस 10 मिनट्स आवर वेट करो
सूर्य वह से उठ कर अपना टॉवल ले बाथरूम में फ्रेश होने चला जाता है
कुछ देर बाद सूर्य शार्ट में अपने कंडे पे टॉवल डेल बहार निकलता है
किरण सूर्य को हाफ नुदे देख अपने मुँह में ऊँगली रख सिटी मर देती है
किरण ........आवर कुछ डालने की जरुरत नहीं चुपचाप यहाँ लेट जाओ
सूर्य टॉवल रख स्वीटी के साथ जा बैठा
सूर्य ......तो आज रात आप सबका यही रुकने का इरादा है क्या
पारिजात .......है आज हम सब यही रुकने वाले है
सूर्य ......पैर आज तो जीनत
जीनत ......मुझे कोई एतराज नहीं है इन सबका हक़ मुझसे ज्यादा है आप पे आवर फिर मुझे जो चाइये था वो मिल भी तो रहा है
किरण .....मानसी हमें चलना चाइये आज की नाईट इनको साथ बॉटने दो फिर कुछ वक़्त तो हमारे हे साथ है सूर्य
किरण मानसी के साथ दूसरे कक्ष में चली जाती है
अब यहाँ सूर्य के साथ पारिजात जिनिशा कोमल अलीना पायल प्रीती राधा जीनत आवर रिद्धि बचे हुए थे
सूर्य ......देखो मैं माफी चाहता हु आप सबको ज्यादा वक़्त नहीं दे पाउँगा क्युकी मुझे कल के सफर के लिया पूरा आराम चाइये पता नहीं वह कैसे स्थिति हो
राधा ......आप चिंता न करे हम बस कुछ वक़्त बिता कर चले जायेंगे
कुछ देर बात करने के बाद सब ुशी कक्ष में लगे दूसरे बीएड पे जा कर आराम करने लगते है
प्रीति .....मैं आपके साथ हे सोने वाली हूँ जीनत ......आवर मैं भी
सूर्य .....थीम है जैसा तुम्हे ठीक लगे सूर्य कुछ देर उनके साथ मस्ती करता है फिर प्रीती आवर जीनत को एक प्यारा सा किश कर दोनों को बहो में भर कर सो जाता है
कुछ देर बाद रिद्धि अपने बीएड से उठ कर सूर्य के बीएड पे पहुँचती है आवर सूर्य के सर को अपने गॉड में रख प्यार से सहलाने लगती है
रिद्धि को लगा की सूर्य सो चूका है आवर ये सच भी था पैर जब रिद्धि ने सूर्य का सर अपनी गॉड में रखा ुशी वक़्त सूर्य जग गया था रिद्धि को लगा की सूर्य उसके जादू से गाह्रो नींद में चला गया है
रिद्धि ......मुझे माफ कारनामे आप पे जादू इस्तमाल करने के लिया मुझे बस आपके साथ कुछ वक़्त बिताना था
मैं भी आपसे बाकियो के जैसे हे प्रेम करती हूँ पैर आपके सामने स्वीकार नहीं कर सकती हु. पता नहीं कब मैं आपको अपने हृद्या का हल बता पाऊँगी
रिद्धि रात भर सूर्य के सर को ढकते हुए मन में न जाने क्या क्या सोचती रही जब सुबह सूर्य का उठने का समय हुआ तो रिद्धि अपने स्थान पे जा कर लेट जाती है
कुछ डेड बाद सूर्य उठा फ्रेश हो कर बाकि सभी को उठा देता है
सूर्य महल में बने उद्यम में जा कर अपने सभी इन्द्रियों को जागृत करता है
सूर्य ने जब अपनी आँखे खोटी तो उसके सामने किरण आवर मानसी के साथ साथ बाकि सब भी वही ध्यान में बैठी हुई थी
सूर्य ......क्या बात है आप सब यहाँ वो भी ध्यान में लीं
पारिजात ......गुरुदेव का आदेश है जब तक आप अपने सदर से लौट कर नहीं आते है हम सब रोज सूर्यौदय के साथ ध्यान करे
सूर्य ......मेरे लौटने के बाद भी ऐसे हे कर्मा इस से आप सबकी ऊर्जा नियंत्रण में रहेगी आवर आपकी इन्द्रियों को ऊर्जा प्राप्त होगी
कुछ देर बाद सूर्य बाकि सभी के साथ नास्ता करता है
सभी बड़ो को ले कर सूर्य महाकाल मंदिर जाता है जहा वह तीनो मिल कर पूजा करते है
गुरुदेव ......पुत्र सूर्य अब तुम्हारे प्रस्थान का समय हो चूका है
सूर्य .....जी गुरुदेव
सूर्य मानसी किरण सब से गले लग कर मिलते है सभी विजय होने का आशीर्वाद देते है
सूर्य ......गुरुदेव जब तक मैं लौट के नहीं आता कोई भी परतविलोक नहीं जायेगा ये जिम्मेदार आपकी है
गुरुदेव .....तुम चिंता न करो पुत्र तुम बस अपने लक्ष्य पे ध्यान केंद्रित करो
सूर्य .....जी गुरुदेव आज्ञा दे परनाम गुरुदेव
मानसी किरण .....परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ....विजयी भाव पुत्र सूर्य पुत्री किरण मानसी
जैसे हे सूर्य किरण आवर मानसी का हाथ थमता है किरण के सरीर से गोल्डन ऊर्जा सूर्य के सरीर से वाइट ऊर्जा आवर मानसी की सरीर से ब्लैक ऊर्जा निकल कर तीनो को घेर लेती है कुछ देर बाद जब ऊर्जा वह से हटी तो तीनो गायब हो चुके थे
एडवेंचर ऑफ ड्रैगन वर्ल्ड .........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................















