Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 23 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 180

वयोम ......नहीं सकती तुम यही रुको मैं जा कर देखता हूँ कुछ प्रॉब्लम हुई तो आप गुरुदेव से या सूर्य से सम्पर्क करना

अकेले कुछ भी करना खतरनाक हो सकता है

सकती .......तुम ठीक कह रहे हो वयोम इस तरह बिना सोचे समजे हमें कोई कार्य नहीं करना चाइये

वयोम ......ठीक है में जा रहा हूँ कुछ भी गलत लगा मैं आपको सेंकेड दूंगा

सकती ......ठीक है सावधान रहना

वयोम वह से निकल जाता है ज

जंगल की आवर खुद पे आने वाले खतरे से अनजान ............


अब आगे .........

सक्तिपुर ......
अभी सुबह के कोई 11 सादे 11 का समय रहा होगा तभी अजय के फ़ोन पे किसी अनजान no. से कॉल आता है

जिसे एक बार तो अजय इग्नोर कर देता है

रुक्मणि .....तुम्हारे किसी लफंगे दोस्त का हे कॉल होगा तुम्हे बुलाने के लिया

देखो अजय पहले तुम क्या करते थे क्या नहीं मैं नहीं जानती

आवर न जानना चाहती हूँ पर अब तुम कोई भी ऐसा वैसा गलत काम नहीं करोगे जिस से हम सब किसी प्रॉब्लम में पड़े समाज गए तुम

अपने इन आवारा दोस्तों से जितनी जल्दी दुरी बना लव इतना अच्छा है तुम्हारे लिया आवर हम सब के लिया आवर अब तो वो लोग हवेली भी आने लगे है है मुझे ये बिलकुल पसंद नहीं है यहाँ तुम्हारी दो जवान बहने भी है इतने में हे समाज जाओ तुम

अजय ....... माँ वो सब ऐसे नहीं है मैं जनता हूँ हवेली तो सूर्य भी आता है आप उसे तो कुछ नहीं कहती उल्टा उसे तो आप किसी रियासत के राजकुमार जैसा ट्रीट करती है

रुक्मणि ...... मुझे मत समजा मैंने तुमसे ज्यादा दुनिया देखि है किस की नजरो में क्या है

क्या नहीं मुझे किसी से जानने की जरुरत नहीं समजे तुम आवर रही बात सूर्य की वो बीटा है मेरा समजे तुम हमने जितना कुछ गलत करना चाहा सब जानते हुए भी उसने न केवल हमें माफ किया बल्कि अपनी गलतिया सुंदरने का मौका भी दिया

वो किसी रियासत का राजकुमार न होते हे हुए भी सबके दिलो पे राज करता है दिल का राजा है वो ुसपने उन लफंगे आवारा दोस्तों की बराबरी न करो समजे

अभी रुक्मणि कुछ आवर भाड़ पिलाती एक बार फिर से अजय का फ़ोन बज उठा जो रुक्मणि ने फ़ौरन अजय से ले कर कॉल पिछ किया

रुक्मणि .....कोण हो तुम क्यों बार बार कॉल कर रहे हो

सामने से .....चची जी मैं विक्रम बोल रहा हूँ

रुक्मणि .....विक्रम बीटा तुम कहा हो बीटा कितने दिन से तुम्हारी कोई खबर नहीं है

विक्रम .....संत हो जाइये चची जी वो मेरा एक्सीडेंट हो गया था

चची जी अभी भी हॉस्पिटल से डॉक्टर के no.se कॉल कर रहा हूँ

रुक्मणि ......बीटा तुम ठीक तो हो न मुझे बताओ कहा हो तुम मैं अभी आती हूँ वह

विक्रम ...... आप रहने दीजिये चची जी अजय को यहाँ भेज दीजिये पैसो के साथ

रुक्मणि ......तू है कहा बीटा

विक्रम .....
छत्तीसगढ़ के एक हॉस्पिटल में हु चची जी अजय को आप भेज देना यहाँ आ कर वो इन no. पे कॉल कर लेगा अब रखता हूँ

विक्रम आगे कुछ सुने बिना हे कॉल कट कर देता है

रुक्मणि ....hello विक्रम बेटे विक्रम....

अजय .....माँ कॉल कट हो गया है

रुक्मणि ......जा तू त्यार होने जा मैं दीदी को बताती हूँ

अजय .....भाई ने मुझे अकेले को आने को कहा है

रुक्मणि .....जितना कहा है इतना कर

अजय अपने पेअर पटकते हुए वह से अपने कमरे की आवर निकल जाता है

रुक्मणि फ़ोन पे जो बात हुई विक्रम से सब गीता ठाकुर को बताती है

गीता ठाकुर उन्ही no. पे कॉल करती जो की वही के किसी वार्डबॉय का no. था कॉल कर जब अपनी तसली कर लेती है तो गीता ठाकुर भी त्यार होने लग जाती है

रुक्मणि ......दीदी सूर्य से इस बारे में बात करनी चाइये सायद....

गीता ठाकुर .....नहीं रुक्मणि वह समय जितना लगे पता नहीं ऐसे में सूर्य को परेशान करना ठीक नहीं

गीता ठाकुर वह अजय त्यार होने रुक्मणि को हवेली आवर गायत्री विधि का ख्याल रखने का बोल कर जैसलमेर के लिया निकल जाते है

गायत्री .....चची जी भाई यहाँ आ रहे उन्हें तो यहाँ के बारे में कुछ भी पता नहीं है

उन्हें जाने के बाद यहाँ का माहौल पूरा बदल दिया है उन्होंने

रुक्मणि ......उन्होंने किसने सूर्य ने हेहेहे तू क्यों चिंता करती है है मेरी बच्ची हम सब है न हम संभल लेंगे विक्रम को वैसे तुम दोनों का ये सब कब से चल रहा है

विधि .....क्या माँ क्या चल रहा है हम दोनों का कुछ भी तो नहीं

रुक्मणि ....ीदार आओ दोनों मेरे पास बैठो

गायत्री आवर विधि दोनों रुक्मणि के अगल बगल सोफे पे बेथ जाती है

रुक्मणि ......अब सच सच बताओ तुम दोनों का सूर्य के साथ क्या चाकर है आवर ये सब कबसे चल रहा है

रुक्मणि की बात सुन विधि आवर गायत्री दोनों की गर्दन जुख जाती है

रुक्मणि .....वैसे मुझे भी पसंद है सूर्य पैर तुम दोनों जानती hi न वो किसी आवर से प्यार करता है फिर भी तुम दोनों उसे हे दिल दे बैठी

गायत्री ......आप सब जानती है चची जी

रुक्मणि ......है मुझे तो पहले हे शक था पैर परषो जब तुम दोनों सूर्य को बहार छोड़ने गयी थी तब मैं भी तुम्हारे पीछे हे आ रही थी तभी तुम तीनो की बात मैंने सुनी सोचा तुम दोनों से बाद में बात करूंगी

विधि की आँखों से तो तप तप कर आंसू बहने लगते है

जिसका अंदाजा रुक्मणि को हो जाता है रुक्मणि अपनी बेटी के प्यार से आंसू पोंछती है आवर उसका सर अपनी गॉड में रख लेती है

रुक्मणि .....देखो तुम दोनों समझदार हो पड़ी लिखी हो जो भी करना सोच समाज कर करना तुम दोनों की वजह से सूर्य पे कोई ऊँगली उठी तो भूल जाउंगी की तुम दोनों मेरी बेटी हो

प्यार करना गलत नहीं है बेटी मैंने भी किया था पैर गलत इंसान से आवर ये समझने में मैंने बहुत देर कर दी मैं नहीं चाहती तुम दोनों को भी वही दिन देखने पड़े क्युकी सूर्य ने भले हे साफ न कहा हो पैर उसने ये साफ कर दिया की वो जीवन भर तुम दोनों का साथ नहीं दे सकता है

गायत्री ...... चची जी आपको बुरा नहीं लगा ये सब जान कर

रुक्मणि .....बुरा जरूर लगा बेटी पैर इस लिया नहीं की तुम दोनों सूर्य से प्यार करती हो बुरा लगा की तुम तीनो हमेशा के लिया एक नहीं हो सकते हो

विधि ..... माँ वो भी तो ठाकुर है उन्हें कोण रोक सकता है

रुक्मणि ......ठाकुर होने का मतलब ये तो नहीं है विधि बेटी की वो समाज को नजरअंदाज कर दे

मन की हम ठुकरा में अभी भी एक से अनेक विवाह परथन है पैर उसकी कोई मज़बूरी अवश्य रही होगी जिसके चलते वह जीवन भर साथ निभाने का वादा नहीं कर रहा आवर तुम दोनों भी उस से ऐसा कोई वादा न लेना जिस से उसे सुख हो या वो मजबूर हो जाये सूर्य बहुत अच्छा लड़का है उसके साथ दोस्ती करो उसे संजो तो तुम उसके मज़बूरी भी समाज जाओगे

अब जाओ अपने रूम में मैं भी थोड़ा आराम करती हूँ

गायत्री आवर विधि तो वह से चली जाती है

पैर रुक्मणि वही बैठे किन्ही भरे विचारो में खो जाती है उसे अपनी बेटियों की चिंता थी .......

परीलोक .....

शालिनी जी ......बीटा सूर्य तुम अपने फूफा जी से मिलने तो जा रहे हो पैर वह उनसे इस बारे में कोई बात नहीं करना आवर उन्हें यही ले आना हम सब यही है तो उनसे यही पे बात कर लेंगे इस बारे में

मेनका जी .....भाबी सा आप चिंता न करो मैं भी तो साथ जा रही हूँ वह

दादी जी .....इसी बात का तो दर है बेचारे जमाई सा की तुम्हारे सामने चलती हे कहा है

मुझे तो दर है कही तुम उन्हें हुकुम हे न सुना दो की.. .पायल प्रीती की सदी सूर्य से होगी यही मेरा फैसला है ....हहहहए

मेनका जी ...... अगर नहीं मने तो ये भी कर दूंगी माँ सा

शालिनी जी ......आप ऐसा कुछ नहीं करेंगी दीदी आप उनसे इस बारे में कोई भी बात नहीं करेंगी वह आवर जल्द से जल्द वह से आ जाये उन्हें ले कर के

मेनका जी ......अब संधान ने आर्डर दे हे दिया अपने समधी को तो मैं क्या कर सकती हूँ

सूर्य .....बुआ सा हमें निकलना चाइये पहले हमें सूर्यगढ़ भी जाना है

मेनका जी ....... ठीक है चलो पैर वो दोनों कहा है

पायल .....माँ हम यही है आवर हमारे साथ जुली भी चल रही है उसे भी परतविलोक का रहन सहन देखना है

सूर्य ......ठीक है पैर आप सायद भूल रही है

हम लोग पिकनिक पे नहीं जा रहे है वह ज्यादा समय नहीं रुकेंगे


शालिनी जी .....अगर उसका साथ जाने का दिल है तो ले कर जाने में क्या प्रॉब्लम है तुम्हे

पायल ......ये लो अब तो ममी जी की भी परमिशन मिल गई है

सूर्य ......ठीक है चलो फिर

सूर्य पायल प्रीती जुली मेनका जी सभी से विदा ले जल्दी लौटने का बोल सूर्यगढ़ के लिया गायब होने जाते है

सूर्यगढ़ ........

वयोम हवेली से गायब होने जंगल पंहुचा

वह वयोम अदृश्य रूप में हे असुरगुरु की तरफ भध रहा था

जैसे हे वयोम जंगल में पंहुचा उसका अहसास असुरगुरु को भी हो गया था

असुरगुरु ......सावधान किसी को हमारे यहाँ होने का पता चल चूका हेयर वह इस वक़्त हमारी आवर हे भध रहा है

असुरगुरु के सावधान करने पे सभी शिष्य सावधान हो जाते है

असुरगुरु ....... ये कोई सदर्न मानव नहीं है जो भी है वो जादुई सक्तियो से परिपूर्ण है हमें आगे का मार्ग इसी के जरिये ज्ञात होगा इस लिया इसको बंदी बनाना बहुत जरुरी है

असुरगुरु वह अपने 6 शिष्यों में से 2 को छोड़ कर खुद वह बाकि चार को गायब कर देते है

उदार वयं इनकी असुर सकती को सीन्स करते हुए इनसे कुछ दुरी पे आ रुकता है अदृश्य रूप में

वयोम ......ये क्या यहाँ तो केवल 2 हे लोग है सकती ने तो यहाँ आदिक लोगो के होने का अंदेशा था

कही ये इनकी कोई चल तो नहीं है मुझे कुछ पल यही प्रतीक्षा करनी होगी जब तक पूरी तरह से आस्वस्त न होने जाऊ की ये कोई जाल नहीं है

वही असुरगुरु को वयोम की ऊर्जा से ज्ञात हो जाता है की जो भी है वह अदृश्य रूप में उनके दोनों शिष्यों पे नजर रख रहा है

( असुरगुरु ....... अगर ऐसे हे उसे कैद करने की कोशिश की तो सायद ये यहाँ से बीच कर निकल सकता है पहले मुझे यहाँ इसे घेरे में बंदना होगा ताकि ये यहाँ से मुक्त न होने सके )

असुरगुरु अदृश्य रूप में हे वह अपने साथ साथ सभी को वयोम को भी अपने मंत्र सकती से उत्पन तेरे में बंद लेता है

वयोम ......नहीं ये नहीं हो सकता ये एक जाल है आवर मैं मूर्खो के भरी इसमें फर्श चूका हूँ अब सकती को कोई संकेत भी नहीं भेज सकता मुझे किसी भी तरह यहाँ से निकलना होगा

वयोम अपना अदृश्य रूप त्याग दोनों असुर शिष्यों के सामने प्रकट होते जाता है

वयोम .....तुम असुर यहाँ क्या कर रहे हो

शिष्य 1......ओह्ह तो तुम हो वो जिन जिसको ऊर्जा यहाँ मौजूद थी आवर तुम्ही से सावधान होने को कह रहे थे गुरुदेव

शिष्य 2 ......अब कोई फायदा नहीं तुम यहाँ कैद हो चुके हो यहाँ से निकलना संभव नहीं है

तभी वयोम तेजी से शिष्य 2 के सीने पे अपने जादुई सोर्ड से वॉर करता है जिस से एक गहरा जखम शिष्य 2 के सीने पे बन जाता है

वयोम ......जिन हूँ पैर इतना भी कमजोर नहीं

वही अपने साथी पे वॉर होता देख बाकि चारो शिष्य आगे बढे पैर असुरगुरु के इसारे पे वही रुक जाते है

असुरगुरु ......संत रहो आवर जो हो रहा है उसे देखो मून हो कर

शिष्य 5 ......पैर गुरुदेव वो

असुरगुरु ......ये केवल एक मोहरा मात्रा है यहाँ जो ऊर्जा अंश मिले थे उन्ही में से एक

अपने साथी को गायगायल देख शिष्य 1 अपनी सोर्ड ले वयोम से टकरा जाता है

व्
ायोम कोई सदर्न योद्धा नहीं था जो ऐसे हे हर मान जाता

वयोम दोनों हाथो में सोर्ड ले दोनों असुरो से योध करने लगता है

डेरी डेरी वयोम दोनों असुरगुरु शिष्य पे हावी होने लगता है

दोनों के सरीर से जगह जगह से रकत बाह रहा था

वयोम द्वारा दिए जखम जादुई सोर्ड के थे जिसके चलते जखम अपने आप भर नहीं रहे थे

वयोम ......तुम दोनों अच्छे असुर्योधा हो पैर मेरे सामने ज्यादा टिक नहीं सकते हो तलवारबाज़ी बहुत हुई अब थोड़ा मेरी चुटकी का मज़ा भी चख लो

कहने के साथ हे वयोम ने चुटकी बजे आवर वयोम के के हाथो में 2 रशिया प्रकट हुई जो की वाइट ऊर्जा से परिपूर्ण थी

दोनों असुरसीष्य कुछ समाज पेज उस से पहले हे रशिया दोनों के सरीर को अपने बंदन में बंद कर उन्हें पीड़ा पहुंचने लगी

यही वयोम से भी गलती हो गई अपने सामने 2 असुरो को बंदी देख अपना ध्यान भटकने से वयोम भी खुद को रोक नहीं पाया तभी

वयोम की पीठ पे एक तेज ऊर्जा का प्रहार हुआ जो की असुरगुरु ने हे किया था

वयोम असुरगुरु की ऊर्जा के प्रहार से सामने के विरीक्षा को तोड़ते हुए सामने की चेतन से जा टकराया

असुरगुरु ......तुम सचमुच अच्छे जिनयोधा हो पैर हर योद्धा की एक कमजोरी होती है

तुमने समय से पहले हे सवयं को विजयी घोषित कर योध निति का पहला नियम भूल कर अपना ध्यान योध से हटा दिया

वयं खड़ा हो कर अपने सरीर की मिटटी झाड़ कर असुरगुरु को देखता है जो अपने 4 शिष्यों के साथ खड़े वयोम को हे देख रहे थे

वयोम .....उचित कहा आपने गलती तो मुझसे हुई है

पैर आप असुरु से आवर अपेक्षा भी क्या की जा सकती है

पीठ पीछे वॉर करना आप असुरु के रकत में होता है

शिष्य 5 ......योध में सब जायज होता है

योध में विजय हे महत्व रखती है न की नियम

वयोम एक बार फिर से अपने दोनों हाथो में अपनी जादुई सोर्ड लिया योध के लिया त्यार था

वयोम .....फिर तो कोई नियम भांग होने का मुझे भी मलाल नहीं होगा आ जाओ मरने से पहले तुम सब को भी जहनुम के द्वार तक साथ ले कर जाऊंगा

असुरगुरु ......उसकी कोई आव्सय्कता नहीं है हमें जो जानना है वो बता कर तुम मुक्त हो सकते हो

वयोम ......हाहाहाहा वयोम कभी अपने फ़राज़ से गाडरी नहीं करेगा तुम लोग जिसको तलाश में आये हो उस तक कभी नहीं पहुंच सकते हो आवर पहुंच भी गए तो उसके सामने तुम सब चींटी से ज्यादा कुछ नहीं

असुरगुरु ......जाओ इसे बंदी बना लो

असुरगुरु के आदेश पे चारो शिष्य एक साथ वयोम पे हमला करते है

असुरगुरु अपने शिष्य 1,2 को वयोम के सकती पास से मुक्त कर अपनी ऊर्जा सकती से उन्हें हील करते है

ीदार वयोम डेरी डेरी कमजोर पड़ने लगता है क्युकी एक तो दोनों शिष्य से अभी अभी योध किया ऊपर से असुरगुरु की परचंड ऊर्जा का वॉर झेलना कोई आसान काम नहीं था अभी एक साथ चार असुरो से योध कर रहा था

शिष्य 1,2 ठीक होते हे वयोम पे हमला सुरु कर देते है

वयोम बुरी तरह से जख्मी होने के बाद भी योध कर रहा था साथ हे उन्हें जकाँ दे रहा था

असुरगुरु .....अभी भी तुम्हारे पास समय है जिन क्यों अपने जान देना चाहते हो हमें जो जानना है वो बता दो हम असुरगुरु तुम्हे जीवन दान दे देंगे

वयोम ...... अपने महाराजा से द्रोह कर जीवन जीने से बेहतर है मैं तुम्हारे साथ योध करते हुए अपने प्राण त्याग दूँ

उनके लिया मैं सवयं अपना सीस उनके अपने तलवार से उतर उनके कदमो में अर्पित कृ तो भी काम है फिर तुम असुरो ने कैसे सोच लिया की मैं कुछ भी तुम्हे बताऊंगा वो भी केवल अपने प्राणो की रक्षा के लिया

शिष्य 1,2 ने वयोम के पैरो पे सोर्ड से भरपूर वॉर करता है जिस से वयोम लडख़ड़ा कर जमीं पे गिर जाता है

शिष्य 3,5 के वॉर से वयोम की सोर्ड उसके हाथो से चुत कर जमीं पे गिरते हे गायब होने जाती है

असुरगुरु .....तुम्हे बहुत से अवसर दिया पैर तुम अपने हाट पे आड़े हो तो यही सही इसका सर इसके सरीर से विलख कर दो

वयोम ....... हाहाहाहा

असुरगुरु .......मृत्यु को अपने सामने देख अपना मानसिक संतुलन तो नहीं खो दिया तुमने जो ऐसे अतःष ( हंस ) कर रहे हो

वयोम ......तुम सभी की मृत्यु का दृश्य देख रहा हूँ जब उन्हें मेरी मृत्यु का पता चलेगा तो सवयं महाकाल तुम सभी के प्राण लेने तुम्हारे सामने खड़े होंगे तुम सभी का काल बांके

असुरगुरु वयोम के मुँह से काल सबद सुनते हे उनके हाथ में पकड़ी सोर्ड जो वयोम की गर्दन उड़ने वाली थी

वयोम की गर्दन से टच होने से पहले हे रुक जाती है

तभी एक तेज गर्जना के साथ सूर्य वाइट ड्रैगन पे स्वर असुरगुरु द्वारा बना ऊर्जा घेरा खंडित करते हुए

वह पहुँचता है

असुरगुरु .........पुत्र काल

तभी वाइट ड्रैगन के मुँह से वाइट एनर्जी निकलती है जो सभी शिष्यों से जा टकराती है जिस से सभी वयोम से दूर जा कर गिरते है

सूर्य इस वक़्त काल रूप में था इस लिया असुरगुरु को काल को पहचानने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा

असुरगुरु काल को वाइट ड्रैगन पे सवार देख चिंता में पद जाते है

काल वाइट ड्रैगन के ऊपर से चलन लगा कर वयोम के सामने उतरता है

काल ......वयोम आप ठीक तो हो न

काल वयोम के रकत रंजीत सरीर को देख कर भी अगर अपने क्रोध को रोले रखा था तो केवल इस लिया की वो असुरगुरु थे मानसी के पिता

वयोम ...... मैं ठीक हूँ भाई आप यहाँ कैसे

तभी वह मानसी प्रकट होती है जिसको नजर सबसे पहले वयोम के लहूलुहान सरीर पे पड़ती है

मानसी .....भाई आपकी ये हालत कैसे हुई मुझे बताये मैं उसे जिन्दा नहीं छोड़ूंगी

मानसी की गुस्से भरी गुर्राहट सुन असुरगुरु का ध्यान भी मानसी पे जाता है

मानसी .....बाबा आप यहाँ पे

काल वयोम को अपने हीलिंग पावर से ठीक कर देता है

काल .....गुरुवार ये सब क्या है आपसे ये उम्मीद नहीं थी आपने वयोम पे हमला करवाया

मानसी सूर्य की बात सुन असुरगुरु को देखने लगती है

मानसी ......बाबा क्या ये सच कह रहे है आपने हे वयोम पे हमला करवाया है

वयोम ......मानसी संत हो जाओ इनकी कोई गलती नहीं है

मानसी .......आप संत रहो भाई मुझे बाबा से जानना है

असुरगुरु ......है पुत्री मानसी मेरे हे आदेश पे वयोम पे हमला हुआ था

मानसी ......वही तो मैं जानना चाहती हूँ बाबा आपने वयोम भाई पे हमला क्यों किया

असुरगुरु ......मैं कुछ समय से परतविलोक पे मौजूद ऊर्जा का पता कर रहा हम कुछ समय पहले मुझे यहाँ पे उपस्थित ऊर्जा का पता चला आज जब यहाँ पहुंच कर उस ऊर्जा के विषये पता कर रहा था तब मुझे वयोम की ऊर्जा का ाबश हुआ आवर हमने इसे कैद करने की कोशिश की यहाँ मौजूद ऊर्जा के मुख्या स्त्रोत के लिया

वयोम ...... तब इन्होने मुझे यहाँ कैद करने की कोशिश की यहाँ से निकलने के लिया मैंने हे इनके साथियो पे वॉर किया

इनमे इनकी गलती नहीं है मानसी

काल ......आप उन ऊर्जा स्थार्थ का पता क्यों कर रहे है गुरुवार

असुरगुरु ....... क्युकी मुझे महाकाल अंश का पता करना है जिनका जनम परतविलोक पे हुआ है

गुरुदेव के खुलाशे को सुन कर मानसी सूर्य को देखने लगती है आवर वयोम भी पैर दोनों की सोच अलग अलग थी

काल ...... आपको ज्ञात है की कोण है महाकाल का वो दिव्या अंश जिसे आप ढूंढ़ने का प्रयाश कर रहे है

असुरगुरु ....... मुझे उसका वास्तविक परिचय ज्ञात नहीं पैर बहुत जल्द ज्ञात हो जायेगा

सूर्य ........ मुझे आपसे एकांत में बात करनी है अपने शिष्यों को यहाँ से भेज दीजिये उनकी तामसिक ऊर्जा मेरे ड्रैगन को क्रोधित कर रही है

असुरगुरु के इसरा करते हे उनके शिष्य वह से गायब होने जाते है

सूर्य ...... आप नरकासुर के लिया ये सब कर रहे है न गुरुवार

असुरगुरु ......है पैर ये पूर्ण सत्य नहीं है पुत्र काल आवर मुझे क्षमा करना पुत्री तुम्हारे भाई पे हमला करने के लिया

मानसी ......क्या आप बाबा को सत्य बताएंगे

सूर्य ........ तुम क्या चाहती हो मानसी क्युकी ये सत्य जितना काम किसी को ज्ञात हो उतना सब के लिया अच्छा है

तुम्हारे बाबा को सत्य बता सकता हूँ किन्तु असुरगुरु को नहीं क्षमा करे गुरुवार

असुरगुरु ......पुत्री मानसी पुत्र काल उचित कह रहा है तुम्हारा बाबा होने के साथ साथ मुझपे असुरगुरु पढ़ की भी जिम्मेदारी है

पुत्री मानसी तुम्हारी ऊर्जा दिनपर्ती दिन भड़ती जा रही है

मानसी .....बाबा आप मेरे ड्रैगन से मिलेंगे

असुरगुरु .........तुम्हारा ड्रैगन आवर पुत्र काल तुम भी पहले से आदिक ऊर्जावान वह सक्तिसाली परतीत हो रहे हो मुझे

मानसी .......जी बाबा ब्लैक ड्रैगन सामने आओ

मानसी के कहते हे ब्लैक ड्रैगन वह सबके सामने आ जाता है

असुरगुरु ...... ये तो बहुत हे विशालकाय है

आवर दिव्या भी

सूर्य ......है गुरुवार मानसी इसकी दरक है अब आप समाज हे गए होंगे

असुरगुरु ....... है पुत्र काल पुत्री मानसी की ऊर्जा में आये बदलाव की बझा है ब्लैक ड्रैगन

सूर्य ......गुरुवार आपसे निवेदन है की फिर से आप किसी आवर ऊर्जा की तलाश में किसी पे हमला नहीं करेंगे क्युकी यहाँ जो भी ऊर्जा अंश मौजूद है वो सभी मुझसे जुड़े है

आपको कुछ भी जानना हो मुझसे सम्पर्क कीजिये वयोम मानसी का हे नहीं मेरे लिया भी बड़े भाई सामान है आपके स्तन पे कोई अन्य होता तो सायद अभी तक अपनी मृत्यु सेक्स पे लेता होता

आप जिस अंश की तलाश में है उस तक उसकी इच्छा के बिना नहीं पहुंच सकते है

असुरगुरु ........क्या तुम जानते हो पुत्र काल उसे

सूर्य .......बहुत अच्छी तरह से गुरुवार समय आने पे आपसे भी उसकी भेट होगी अब आज्ञा दीजिये

असुरगुरु .......उचित है पुत्र

सूर्य वयोम मानसी तीनो असुरगुरु को परनाम कर वह से चले जाते है

कुछ समय पश्चात असुरगुरु भी अपने मन में कई सवाल लिया वह से निकल जाते है ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स.........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
 
अपडेट. 181

असुरगुरु ........क्या तुम जानते हो पुत्र काल उसे

सूर्य .......बहुत अच्छी तरह से गुरुवार समय आने पे आपसे भी उसकी भेट होगी अब आज्ञा दीजिये

असुरगुरु .......उचित है पुत्र

सूर्य वयोम मानसी तीनो असुरगुरु को परनाम कर वह से चले जाते है

कुछ समय पश्चात असुरगुरु भी अपने मन में कई सवाल लिया वह से निकल जाते है ...........

अब आगे ........

सूर्य वयोम मानसी जब तीनो सूर्यगड़ हवेली पहुंचे वह सकती अदिर्ता से वयोम सूर्य की प्रतीक्षा में था


सकती ......वयोम तुम ठीक तो हो न अच्चानक से तुम्हारा कुछ भी पता नहीं चला

वयोम ...... सकती तुमने उचित समय पे सूर्य को भेज कर बचा लिया भाई

सकती ......क्या मतलब वयोम

वयोम वह घटित घटना का विवरण सकती जुली पायल प्रीती मेनका जी को बताता है क्युकी उस वक़्त कक्ष में यही सब लोग मौजूद थे

जुली .....इतना सब होने के बाद भी आपने उन्हें जिन्दा क्यों जाने दिया

वयोम ...... क्युकी वो असुरगुरु थे उन्हें दण्डित करना पाप होता आवर दूसरी बात वो मानसी के बाबा थे उन्हें सूर्य कैसे दण्डित करता

मानसी .....पैर अगली बार कोई भी इस तरह का घ्रणित कार्य करे तो आप बिना दंड दिया उन्हें जाने नहीं देंगे फिर चाइये वो इंसान कोई भी क्यों न हो भले मेरा बाबा हे क्यों न हो आपके के कर्त्तव्य के बिच कोई नहीं आएगा जो गलत करेगा वो दंड भोगेगा

वयोम ......मानसी उचित कह रही है सूर्य मेरा दिल कह रहा भविष्य में फिर ऐसा होगा जहा किसी न किसी अपने से जुड़ा फिर प्रतिद्वंदी के रूप में खड़ा होगा

मेनका जी ......वयोम सही कह रहा बीटा तुम्हे इस बारे में सोचना चाइये सामने अगर हमारा अपना हे गाला करने के लिया चाकू ( नाइफ ) लिया खड़ा हो तो उसे सामने अपनी गर्दन परोश्ना गलत होगा

वयोम ......वैसे सकती तुमने समय रहते सूर्य से सम्पर्क कर अच्छा किया असुरगुरु तो मेरी गर्दन उड़ने हे वाले थे

सकती .....नहीं वयोम तुम्हारे यहाँ से जाने के कुछ देर बाद हे सूर्य यहाँ आ पंहुचा था मैं सम्पर्क करता उस से पहले हे

सूर्य .....वो मुझे फूफा जी से मिलने जाना था तो सोचा यही सब से मिलता हुआ चालू आवर जुली को भी घर दिखाना था यहाँ पहुंचने पे सकती से तुम्हारे विषय में पताचला तो वह पहुंच गया

मेनका जी ......हमें चलना चाइये सूर्य वह पहुंचते पहुंचते बहुत समय लग जायेगा

सूर्य .....मैंने तो कहा था ऐसे हे चलते है

पायल .....नहीं फ्लाइट से जायेंगे वापिस जैसे आपकी मर्जी हो

सूर्य ......OK मैं चलता हूँ सकती वयोम आगे से ध्यान रखना अगर कोई भी संदेहजनक या खतरे वाली बैठी

ो तो सावधानी से काम लेना दुबारा ऐसा नहीं होना चाइये फिर से

कुछ देर बाद मानसी सूर्य जूलिया पायल प्रीती आवर मेनका जी जैसलमेर के लिया निकल गया वह से फ्लाइट के जरिये दिल्ली

दिल्ली से u.s.a की फ्लाइट बुक थी

असुरगुरु जब गुफा में पहुंचे तो वह पहले से मौजूद उन्ही के शिष्य उनका हे इन्तजार कर रहे थे

शिष्य 1 .....परनाम गुरुदेव

असुरगुरु ......कल्याण हो पुत्र

शिष्य 1 ......गुरुदेव आपके लिया असुरलोक से सन्देश आया है असुरराज ने आपको याद किया है

असुरगुरु .......उचित है हम असुरलोक हो कर आते है

शिष्य 1 .....क्षमा करे गुरुदेव पैर वो कोण था आवर आपने उसे ऐसे हे जाने दिया हमें अपने लक्ष्य के कितने नजदीक थे हम उसे भी तो बंदी बना कर जानकारी ले सकते थे

असुरगुरु ...... उसका नाम काल है पुत्र आवर ऐसी मूरखता कभी मत करना वो कोई सदर्न मानव नहीं है हम जानते है उसके विषय में हम आज तक ये भी ज्ञात नहीं कर पाए की वो मानव है या अन्य किसी लोक से

शिष्य 2 .....गुरुदेव आपके लिया ये उसके बारे में जानने का कार्य कठिन तो नहीं है न फिर आप

असुरगुरु ......इतना आसान भी नहीं है पुत्र आवर फिर हम वचनबद्ध है की हम उसके विषय में कुछ भी जानने की कोशिश नहीं करेंगे

तुम में से भी कोई उसके रस्ते में कोई नहीं आएगा आज हमारी वजह से उसने तुम सभी को जीवित छोड़ दिया अन्यथा तुम सभी मृत्यु को प्राप्त होती चुके होते

शिष्य 2 .....जैसा आपका आदेश गुरुदेव

असुरगुरु .....हम अभी असुरलोक के लिया परस्थान करते है रात्रि तक हम लौट आएंगे

असुगुरु वह से असुरलोक के लिया लौट गए

वही असुरगुरु के जाने के बाद उन 6 शिष्य में काल को ले कर बहुत देर चर्चा होती है जिसमे शिष्य 1 फैसला करता है की बिना ादुगुरु को बताये वह काल के वास्तविक सत्य तक पहुंचेगा

शिष्य 2 इस से सहमत नहीं था पैर बाकि चारो के सहमत होने पे उसे भी मून स्वीकारती देनी पड़ी

असुरलोक ......

कंटकासुर साम तक विश्राम करने के पश्चात

सैम को द्वारिका से भेट करने उसके कक्ष में जाता है जहा द्वारिका ुशी का इन्तजार कर रही थी

द्वारिका .....आओ पुत्र कंटकासुर

कंटकासुर .......न आप द्वारिका जो आवर न मैं आपका पुत्र

द्वारिका ......बुलो नहीं अभी तुम किस स्थान पे हो मुझे तो समाज नहीं आता महामहिम ने तुम में ऐसा क्या देखा जो इस कार्य हेतु तुम्हे चुना आवर अपनी सकतिया तुम्हे सौंप रहे है

कंटकासुर .......इस विषय को यही विक्रम दो आवर नगीना आवर विसुद्धि के विवाह के विषय में सोचो की कैसे उन दोनों को इस विवाह के लिया त्यार करना है

द्वारिका .....तुम्हे उन्हें इस विवाह का सत्य बता देना चाइये की विवाह भले हे दोनों मायावी असुरो से होगा किन्तु भोग तुम हे करोगे उनका

कंटकासुर .......ये सब इतना आसान नहीं है

असुरराज भी इसके लिया त्यार होने तभी ये संभव है

द्वारिका ......उसकी चिंता नहीं है महामहिम ने पहले हे उसका मार्ग निकल रखा है

नरकादुर को अपनी दोनों पुत्रियों के लिया विशेष असुर महायोद्धा चाइये वर के रूप में

कनकसुर ....... आप असुरराज को त्यार कीजिये मैं किसी तरह दोनों को त्यार करता हूँ

द्वारिका ...... किन्तु तुम्हे विवाह के पश्चात कुछ समय महल से दूर रहना होगा दोनों के साथ तभी महामहिम के अंश को दोनों दर्जन कर पाएंगी तुम्हारे माध्यम से

कनकसुर ........ आवर वातापी का क्या वो यही रहेगी

आवर असली द्वारिका कहा है कही उसे ....

द्वारिका .....वो महामहिम की कैद में है सुरक्षित है उस से तुम्हे किसी तरह का कोई खतरा नहीं होगा बहुत जल्द तुम्हारी भेट उस से होगी

कनकसुर कुछ देर आवर मायावी द्वारिका से बात कर विसुद्धि आवर नगीना से मिलने उनके कक्ष की आवर भाड़ जाता है इस बात से अनजान की वातापी द्वारिका आवर कनकसुर के बिच जो चर्चा हुई उसे सुन चुकी है

द्वारिका ......पुत्री वातापी तुम्हे छुपने की आव्सय्कता नहीं है

सामने आ सकती हो

वातापी के भीतर आते हे ककसक का द्वार अपने आप बंद होने जाता है

वातापी ......कोण है आप आवर असली माता श्री द्वारिका कहा है

द्वारिका .....हहहहए माता श्री या द्वारिका हम तुम्हारे सम्बन्दो के विषय में जानते है वातापी न तो तुम द्वारिका की पुत्रबधु हो आवर न द्वारिका कनकसुर की माता

ये एक आवर जतका था वातापी के लिया

वाटीपी ....... इस सत्य को आप कैसे जानती है आवर आप है कोण क्या वास्तविक परिचय है आपका

द्वारिका .....माया भरम चलवा जो कहना है कह सकती हो मेरा अस्तित्व नहीं है फिर भी मैं हूँ

वातापी ......आप ये सब क्यों आवर जिसके लिया कर रही है

द्वारिका ......अपने स्वामी अपने मालिक आवर तुम्हारे स्वामी के लिया जिसे सर्वसक्तिमान असुरराज बनना है

वातापी ......अगर इस सत्य का ज्ञात किसी को हुआ तो जो विनाश होगा उसका क्या

द्वारिका ...... महामहिम की इच्छा के ादिन है सब कुछ जो वो चाहेंगे वही होगा आवर अपने पिता ससुर से इस विषय में कोई चर्चा नहीं करोगे अन्यथा अपने स्वामी कनकसुर को फिर कभी देख नहीं पाओगे

जब तक इस विषय पे मून रहोगी कंटकासुर की सांसे चलती रहेंगी

वातापी छह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी

क्युकी वो जान चुकी थी की ये जो द्वारिका है वो जो कह रही है वह करने से चुकेगी भी नहीं

वही कनकसुर जब नगीना विसुद्धि के कक्ष में पंहुचा तो कनकसुर को देखते हे विसुद्धि आवर नगीना ने अपना मुँह कंटकासुर से फेर लेती है

( कंटकासुर ......अब इन दोनों को क्या हुआ है पहले तो एकांत में देखते हे मुझसे चिपक जाती थी आवर अभी नकरे दिखा रही है )

कंटकासुर ...... क्या हुआ तुम दोनों को क्रोधित हो क्या मुझपे

नगीना ......अब आप यहाँ क्यों आये है जाइये उनके पास जिन्हे प्यार से सीने से लगाए हुए थे

कंटकासुर आगे भाड़ नगीना को अपनी बहो में भर उसके होंटो का रसपान करने लगता है

जैसे जैसे कंटकासुर के मरदाना हाथ नगीना की ुनत वक्षो वह नितम्बो पे गम रहे थे

वैसे वैसे नगीना का गुस्सा हवा होता गया आवर सरीर में सिहरन आवर कामवासना की चिंगारी जलने लगती है

कंटकासुर नगीना की कामज्वाला भड़का कर विसुद्धि को अपने बहुपस में भर यही किर्या दोहराने लगता है

कुछ देर विसुद्धि कंटकासुर के बाहुपाश में छटपटाती है पैर अपने सरीर पे मरदाना हाथो के अहसास को मह्सुश कर जल्दी हे कंटकासुर का साथ देने लगती है

कंटकासुर ......अभी भी मुझसे क्रोधित हो क्या तुम दोनों

नगीना ....... आज आप में कुछ परिवर्तन मह्सुश हुआ पैर अच्छा भी लगा

कनकसुर महामहिम से मिली सकती का प्रयोग कर एक अबिद्या सुरक्षा कवच का निर्माण करता है

जिस से महल में किसी को कुछ ज्ञात न होने पाए की इस कक्ष में क्या होगा रहा

कनकसुर नगीना आवर विसुद्धि को ुशी कक्ष में एक बार हम कर भोगता है जिस से दोनों बहुत खुश होती है

नगीना विसुद्धि ......भाई आज आपके साथ सम्भोग करने में परम सुख प्राप्त हुआ आज से पहले ऐसा कभी कभी हे सुख प्राप्त हुआ था

कंटकासुर....... मेरा पास तुम दोनों के लिया एक प्रस्ताव है जिस से हम तीनो को इस परम सुख का प्रतिदिन सुख प्राप्त हो सकता है

नगीना .......ऐसा क्या प्रस्ताव है भाई

कंटकासुर ....... विवाह

विसुद्धि ......हम किसी आवर से विवाह नहीं करेंगी आवर आपसे विवाह पिता श्री आवर माता श्री होने देंगी नहीं

कंटकासुर ....... मैं जनता हूँ किन्तु यही एक मार्ग है हमारे पास

नगीना ......अगर आप का मन हमें भोग कर भर चूका है तो साफ साफ बोल दीजिये पैर किसी आवर से विवाह करना संभव नहीं

कंटकासुर .......पहले बिस्तर से मेरी बात सुनो अगर तुम्हे लगे की मैंने अनुचित प्रस्ताव रखा है तो तुम मन कर सकती हो मैं तुम दोनों से प्रेम करता हूँ नगीना विसुद्धि इस लिया मुझे ये मार्ग निकलना पड़ा ताकि हम तीनो साथ रह सके

विसुद्धि .....नगीना एक बार इनका प्रस्ताव तो जानना चाइये हमें अगर इस प्रस्ताव से हम साथ रह सकते है तो उचित हे होगा हमारे लिया

कंटकासुर ....... देखो नगीना विसुद्धि आज नहीं तो कल हमारा भेद किसी न किसी के समकक्ष आ हे जायेगा अगर ऐसे हे हम सम्भोग करते रहे तो

इस लिया मैंने दो मायावी असुरो का निर्माण किया है जिनसे तुम्हारा विवाह होगा

किन्तु ये विवाह केवल असुर समाज के नजरो में तुम दोनों को विवाहित दिखने के लिया हे होगा

विवाह के पश्चात तुम दोनों यहाँ से कही दूर चले जाना

यहाँ से मैं अपनी सकतिया बचने का तप करने का बोल कर तुम लोगो के पास आ जाऊंगा

जहा हम ऐसे परनाम सुख का आनंद प्रतिदिन लेंगे

नगीना .....किन्तु पिता श्री हमें यहाँ से जाने की आज्ञा नहीं देंगे

कंटकासुर ......वो कार्य तुम उन दोनों मायावी असुर योद्धाओ पे छोड़ दो बस जब इस विषय पे चर्चा हो तो तुम दोनों को भी उनका साथ देना होगा

विसुद्धि ...... किन्तु अगर वो मायावी असुर विवाह के पश्चात हमें भोगने की कोशिश की तो

कंटकासुर ....... ऐसा कभी नहीं होगा विसुद्धि क्युकी उनका निर्माण मैंने ऐसे किया है की उनका कामास्त्र सम्भोग करने योग्य हे नहीं है

नगीना ......हमें कुछ वक़्त दीजिये हम आपको जल्दी हे बता देंगे

कंटकासुर .......देखो ज्यादा समय नहीं अभी तुम एक बार उनसे मिल लो कल फिर वो अपने तरीके से पिता श्री से भेट करेंगे

कंटकासुर के बुलाने पे दोनों मायावी असुर नगीना के कक्ष में प्रकट होते जिनका चेतन जैसा बलिस्त सरीर छोड़ी छथि देख एक बार तो नगीना विसुद्धि को यकीं हे नहीं हुआ की इनका कामास्त्र भोग करने योग्य नहीं है

विसुद्धि ......हमें इनका कामास्त्र देखना है

दोनों असुर योद्धा कंटकासुर को देखते है जिसने है में इसरा करने पे दोनों अपने लिंग पे से वस्त्र हटा कर अपना कामास्त्र दिखते है जो की किसी नवजात असुर सिसु के जैसा था

दोनों को कब यकीं हो गया तो कंटकासुर ने उन्हें कुछ समजा कर वह से वापिस भेज दिया

नगीना ......हमें आपका प्रस्ताव स्वीकार है भाई

कंटकासुर .....पिता श्री के सामने ये सत्य नहीं खिलना चाइये बाकि मैं संभल लूंगा

परीलोक .......

साम का समय ज्यादा तर लड़किया अपना अपना ग्रुप बना कर गॉसिप में लगी हुई थे

वही महिलये भी किसी कक्ष में लगी हुई थी

दादा जी .......शिव हम हविले कब चल रहे है बीटा बहुत समय हो चूका है यहाँ आये हुए

पता नहीं वह पीछे से क्या क्या हुआ होगा

शिव ......है पापा मेरा भी बिज़नेस पता नहीं किस हल में होगा हम सब यहाँ है तो पीछे से कोई प्रॉब्लम हुई तो

जोरावर. .......मैंने तो पार्टी हाई कमांड को कोई सुचना भी नहीं दी यहाँ आने से पहले

दादा जी .......सूर्य के आते हे हम यहाँ से चलते है

गुरुदेव अंदर आते हुए

गुरुदेव ........आप सबको चिंता करनी की कोई आव्सय्कता नहीं है

आपकी अनुपस्थिति में भी सभी कार्य सुचारु रूप से चल रहे जैसे पहले चलते थे

दादा जी .......क्या मतलब गुरुदेव हम सब तो यहाँ है फिर वह

गुरुदेव ...... क्युकी वह आप के स्थान पे आपके अंश मौजूद है हमें ज्ञात था यहाँ काफी समय लग सकता है इस लिया हमने वह आप सभी के अंश छोड़ दिया ताकि आपके विषय में किसी को कोई सन्देश न हो

दादा जी ......फिर भी गुरुदेव हमें यहाँ आये काफी समय hi चूका है अब हमें लौटना चाइये

गुरुदेव ......है लौटने का समय तो जो गया है किन्तु

दादा जी .......किन्तु क्या गुरुदेव

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण का विवाह योग 7 रौशनी के बाद का है आज से ठीक 8 वे दिन दोनों का विवाह होना तय हुआ है परबु महाकाल आवर माँ महाकाली की इच्छा से

दादी जी ......ये तो बहुत ख़ुशी की बात है गुरुदेव

गुरुदेव ......पुत्र जोरावर तुम्हारी जो इच्छा थी उसे हम पूरा अवश्य करते किन्तु इस से एक बहुत बड़ा खतरा आने के सम्भावना है

किन्तु एक पिता के अपने पुत्री के लिया प्रेम को देखते हुए

तुम्हारी ीचा की पुत्री किरण की डॉली सूरजगढ़ हवेली से निकले कुछ हद तक पूरी हो सकती

जोरावर ......कैसा खतरा गुरुदेव आवर

गुरुदेव ......अगर पुत्र सूर्य का विवाह पुत्री किरण से परतविलोक में होता है तो परीलोक जिनलोक के साथ साथ प्रेतलोक नागलोक से में मेहमान इस विवाह में सम्लित होंगे जिस से नरकासुर को सूर्य के विषय में ज्ञात हो सकता है

क्युकी नरकासुर ने सभी लुक पे एप गुप्तचर लगा दिए है सूर्य की खोज में जब एक स्थान पे इतनी दिव्या सकतिया उपस्थित होंगी तो नरकासुर को ज्यादा समय नहीं लगेगा जानने में की जिसको तलाश वो कर रहा है वो सूर्य ठाकुर परतविलोक पे हे मौजूद है

इस लिया सूर्य आवर पुत्री किरण के साथ साथ अन्य कन्याओ का विवाह भी समय आने पे यही होगा किन्तु तुम्हारी इच्छा का मन रखते हुए पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण का विवाह परतविलोक पे भी होगा

दादा जी ......ये कैसे संभव होगा गुरुदेव जबकि आपने हे तो कहा की ऐसा करने पे नरकासुर को पता चल सकता है

गुरुदेव ...... है किन्तु ये तो नहीं कहा न की पुत्री किरण वह पुत्र सूर्य कहो विवाह परतविलोक पे होगा वो वास्तविक पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण होगी वह जो विवाह होगा वो पुत्र सूर्य वह पुत्री किरण के परतविलोक पे मौजूद दोनों के अंश का होगा

जोरावर ......मुझे कोई आपत्ति नहीं है गुरुदेव मैं बस सबके सामने यही लाना चाहता था की मेरी बची का विवाह सबकी नजरो के सामने हो उसे किसी से अपने रिश्ते को छुपाना न पड़े की उसका विवाह किस से हुआ है

गुरुदेव ........फिर ये तय रहा की ुशी दिन परतविलोक पे दोनों के अंश का विवाह होगा जो की समाज के लिया होगा

दादा जी .......फिर आज से हे विवाह की त्यार सुरु कर देनी चाइये

शिव जा कर सभी को इसकी खबर दे दो ताकि अपने तरीके से सभी इस पीढ़ी के पहले विवाह की तयारी करे

शिव ......जी पापा जैसा आप कहे मैं अभी सभी को खबर करता हूँ

गुरुदेव ......आप सब तयारी कीजिये मैं परतविलोक हो कर आता हूँ

शिव वह से जा कर सभी को सूर्य आवर किरण के विवाह की खबर देता है जिस से सभी लड़किया ख़ुशी से नाचने लगती है

क्क्युकी इस विवाह के बाद उनका भी तो no. लगने वाला था

रानी पारी ने तो पुरे परीलोक को सजाने का आदेश हे पारित कर दिया था

परीलोक में घोषणा करवा दी गई थी के जब तक विवाह नहीं हो जाता तब तक हर दिन उत्सव मनाया जाये परीलोक में

सभी लड़किया स्वीटी को घेर चुकी थी आवर स्वीटी भी अपने विवाह के विषय में सुन कर सरम वह ख़ुशी से पुरे ललाम लाल हुए जा रही थी .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..............
 
अपडेट. 182

शिव ......जी पापा जैसा आप कहे मैं अभी सभी को खबर करता हूँ

गुरुदेव ......आप सब तयारी कीजिये मैं परतविलोक हो कर आता हूँ

शिव वह से जा कर सभी को सूर्य आवर किरण के विवाह की खबर देता है जिस से सभी लड़किया ख़ुशी से नाचने लगती है

क्क्युकी इस विवाह के बाद उनका भी तो no. लगने वाला था

रानी पारी ने तो पुरे परीलोक को सजाने का आदेश हे पारित कर दिया था

परीलोक में घोषणा करवा दी गई थी के जब तक विवाह नहीं हो जाता तब तक हर दिन उत्सव मनाया जाये परीलोक में

सभी लड़किया स्वीटी को घेर चुकी थी आवर स्वीटी भी अपने विवाह के विषय में सुन कर सरम वह ख़ुशी से पुरे ललाम लाल हुए जा रही थी ..........

अब आगे ............

दिल्ली .......
दोपहर को सूर्य की फ्लाइट दिल्ली लेंड करती है कुछ 2हर बाद की सूर्य की नेक्स्ट फ्लाइट u.s.a के लिया थी

मेनका जी ....... बीटा सूर्य फ्लाइट में अभी काफी वक़्त है

तब तक क्या करे यही बैठे बैठे

प्रीती .......क्या न इतना समय कही गम फिर आये जुली आवर मानसी को भी अच्छा लगेगा

सूर्य ......ठीक है वैसे भी दोपहर हो चुकी है किसी
होटल में चल कर कुछ खाया पिया जाये

सूर्य सभी को ले कर एयरपोर्ट से बहार निकला तो सामने सप साहिबा दीप्ती कड़ी थी

अभी वो किसी महिला से बात कर रही थी सायद किसी रिलेटिव को सी ऑफ़ करने या फिर लेने आये थी

सूर्य को देखते हे दीप्ती उसकी आवर भाड़ जाती है

सूर्य ......hello सप साहिबा आप यहाँ कैसे

दीप्ती सीधा हक़ से सूर्य से गले मिलती है

दीप्ती .....वो सब छोड़ो आप यहाँ आ रहे हो आवर किसी को बताया तक नहीं

सूर्य ......इनसे मिलो ये मेरी बुआ सा है मेनका जी आवर ये मेरी कजिन सिस्टर पायल आवर प्रीती आवर ये है जुली ी मैं जूलिया आवर मानसी मेरी फ्रेंड्स

दीप्ती .....hello बुआ सा आप से मिल कर ख़ुशी आवर आप चारो से भी इनसे मिलिए ये है राधिका भाबी की माँ मधु जी मैं इन्हे हे लेने यहाँ आई थी

सूर्य ......hello आंटी जी हाउ अरे यू

मधु जी ......hello बीटा जी मैं अच्छी हूँ राधिका बिटिया तुम्हारी बहुत टैरिफ करती है जब भी बात होती है

सूर्य .....आप कही बहार से आ रही हो क्या आंटी जी

दीप्ती ......वो आंटी जी कुछ टाइम के लिया u.s.a गई हुई थी अपने बहु आवर बेटे के पास थी

अभी लौट रही है u.s.a से तो मैं छुट्टी पे थे तो भाबी के कहने पे मैं इन्हे लेने यहाँ आ गई आवर देखो आप सब से मुलाकात भी हो गई

मेनका जी ......बीटा हमें अब चलना चाइये

दीप्ती .....आप कही नहीं जा रही है बुआ जी आप सब घर चल रहे है हमारे साथ में

मेनका जी .....नहीं बेटी कुछ देर बाद हमारी u.s.a की फ्लाइट है

दीप्ती अपने मोबाइल में कुछ करती है

दीप्ती ....बुआ जी आपकी फ्लाइट्स में अभी 2 हर का समय है यहाँ से घर चलने में आवर वह से आने में 1 हर लगेगा काम से काम 1 हर तो साथ बिट्स हे सकते है अब आप मन मत कीजिये मैं भी तो आपकी हे बेटी हूँ

मधु जी ...... मन मत कीजिये चलिए न बहन जी

मेनका जी ......ठीक है है जब आप इतना कह रही है तो

सूर्य .......दीप्ती जी घर पे कॉल कर दीजिये नंदिता आंटी जी को सबके लिया खाना त्यार रखे

दीप्ती ........ Don't वोर्री मैंने पहले हे मैसेज कर दिया है माँ को पैर ये नहीं बताया की जिसके लिया खाना बनाना है उनके लिया सरप्राइज है आवर भाबी के लिया भी

सूर्य दीप्ती मेनका जी मानसी मधु पायल प्रीती जुली

सभी 2 कार से सूर्यकांत सर के घर की आवर निकल गए ट्रैफिक काम होने से जल्दी हे सभी सूर्यकांत सर के घर के बहार थे

दीप्ती ने दुर्बल बजे तो गेट राधिका ने खोला जिसको नजर सबसे पहले अपनी माँ पे पड़ती है साथ कुछ नए चेहरे देख राधिका उन्हें पहचानने की कोशिश भी करती है

दीप्ती ......भाबी नहीं पहचान पाओगी इन्हे आप

राधिका .....माँ कोण है ये सब

मधु जी ......तुम्हारी बुआ सास है बाकि तुम पता करलो

सूर्य मधु जी के पीछे से निकल कर राधिका के सामने खड़ा हो जाता है

सूर्य ......क्या भाबी जी फ़ोन पे तो कितना कुछ बोलती है

आप आवर अभी देखो गेट पैर हे रोले रखा है

राधिका सूर्य का मजाक में कान पकड़ कर अंदर खींचती है

राधिका ......बड़े आये भाबी जी वाले बता नहीं सकते थे की तुम आ रहे हो

दीप्ती .......न न ये आये नहीं है इन्हे तो मैं ले कर आई हूँ जनाब तो एयरपोर्ट से हे u.s.a निकल रहे थे वो तो अच्छा हुआ मैंने देख लिया इन्हे आवर यहाँ ले आई

नंदिता जी ......दीपू बीटा ( दीप्ती निक नाम ) कोण आया है

दीप्ती ......माँ आपका लाडला आया है जरा बहार तो आये

नंदिता जी अपने रूम से बहार आती जहा मधु जी के साथ सूर्य मेनका जी आवर बाकि सभी को देख कर एक पल को तो हैरान होती है की इतने लोग कोण आ गए अनजान चेहरे वाले

सूर्य आगे भाड़ नंदिता जी के चरण स्पर्श करता है

नंदिता जी .....जीते रहो बीटा कैसे हो तुम बीटा सूर्य

कहते हुए अपने गले से लगा लेती है

सूर्य का अनुसरण करते हुए पायल प्रीती आवर जूलिया मानसी भी नंदिता जी के चरण स्पर्श करती है

सूर्य ......आंटी जी सर ड्यूटी पे है क्या

दिखाई नहीं दिए

दीप्ती .....पापा सहर से बहार है कल साम तक आएंगे

भाबी सभी के लिया खाना लगाए क्युकी इनकी फ्लाइट्स है तो इन्हे जल्दी हे निकलना होगा आप सब हाथ मुँह धो लीजिये

दीप्ती मानसी जूलिया पायल प्रीती को अपने रूम में ले जाती है

वही मधु जी आवर मेनका जी को नंदिता जी साथ ले जाती है

राधिका .....क्या बात है देवर जी आप तो अपनी गोपियों को साथ लिया गम रहे हो हर जगह

सूर्य ......हाहाहाहा ऐसा कुछ नहीं है दो मेरी कजिन sister's है आवर दो मेरी फ्रेंड्स है आवर वो लेडी मेरी बुआ सा है मेनका जी

राधिका सूर्य का हाथ पकड़ किचन में ले जाती है

राधिका .....अब आप हे खाना लगवाने में हेल्प कीजिये पैर पहले हाथ वाश कर लीजिये

सूर्य वही किचन में हाथ साफ करता है

राधिका अपनी साड़ी का पलु सूर्य को हाथ पोछने को देती है जिसे देख सूर्य मुस्कुराते हुए हाथ पिंच लेता है

सूर्य .....वैसे खाने की खुसबू तो बहुत अच्छी आ रही है

राधिका ......पता होता की देवर जी तसरीफ ला रहे है तो हम आवर तयारी. कर लेते

सूर्य राधिका दोनों मिल कर खाना लगते है

इतने में बाकि सब भी हाथ बगेरा वाश कर आ जाते है

मधु जी .....बीटा राधा अपने देवर से कोई काम करवाना अच्छी बात नहीं है

सूर्य ......इसमें बुरा भी क्या है आंटी जी भाबी की हेल्प देवर नहीं करेगा तो कोण करेगा आवर वैसे भी हमारा रिस्ता देवर भाबी के साथ साथ दोस्ती का भी है

क्यों भाबी जी

राधिका ......बिलकुल सही कहा आपने देवर जी वैसे भी भाबी की हेल्प देवर नहीं करेगा तो कोण करेगा

सभी हंशी मजाक करते हुए लंच करते है

कुछ समय बिताने के बाद दीप्ती सूर्य को एयरपोर्ट ड्राप करने निकल जाती है

नंदिता जी ......बहन जी आपने भी लसंबा सफर तय किया है

आप भी तक गई होंगी अभी आप आराम कीजिये मेरा भी दोपहर में आराम करना जरुरी है

राधिका .....मम्मी जी आप आराम कीजिये आवर माँ आप भी मेरे रूम में चल कर आराम कीजिये मैं अभी काम फिनिश करके आती हूँ

नंदिता जी अपने रूम की तरफ निकल जाती है

वही मधु जी किसी विचारो में खोये हुए राधिका के रूम में चली जाती है

राधिका सभी जूते बर्तन उठा कर सिंक में दाल देती है

राधिका .......माँ आप क्या सोच रही है आपकी जॉब चिंता है मैं जानती हूँ

इस लिया हे आपको बुलाया है अच्छा हुआ आप भी सूर्य से मिल चुकी है अब आपको कन्वेनैंस करने में ज्यादा प्रॉब्लम नहीं होगी

कुछ देर बाद राधिका भी अपने रूम में चली जाती है

जहा मधु जी अपने विचारो में खोई हुई थी

राधिका .....क्या हुआ माँ कहा खोये हुए है आप आपको तो आराम करना चाइये इतना लम्बा सफर कर के आती है आप

मधु जी ........गेट लॉक कर के यहाँ बेथ मेरे पास बीटा

राधिका ठीक से गेट लॉक कर खुद को अपनी माँ के सवालो के लिया त्यार करने लगती है

राधिका ....... जी माँ कहिये क्या कहना चाहती है आप

मधु जी .......देख बेटी लड़का तो अच्छा है पैर क्या वो इन सबके लिया त्यार होगा

मैं अभी भी कहती हूँ बेटी ..िवफ ..के जरिये तुम्हारी प्रॉब्लम सोल्वे हो सकती है

राधिका ...... माँ आप जो कह रही है वो सब ठीक है पैर बात फिर वही पे आ कर रूकती है

क्युकी इनका स्पर्म काउंट 0 है उस एक्सीडेंट ने इनकी मर्दानगी पूरी तरह से चीन ली है

आवर मैं किसी अनजान मर्द के स्पर्म से माँ बनना नहीं चाहती हूँ

मधु जी .....सूर्य भी तो अनजान है न फिर तुम त्यार कैसे हो गई

राधिका ......माँ आप सामजी नहीं मेरा मतलब है की जिस इंसान के स्पर्म से मैं माँ बनु काम से काम मुझे ये तो पता हो की जिसे अंश को मैं जनम दे रही हूँ वो कोण है कैसा उसका वयक्तित्व है

मधु जी ......बेटी तुम्हारी अभी उम्र हे क्या है

राधिका ........ प्लेसेस माँ फिर से वही पुराण टॉपिक नहीं माँ भले हे इन्होने अपनी मर्दानगी खो दी पैर मैं आज भी उन्हें इतना हे प्यार करती हूँ जितना सदी से पहले करती थी

कल को अगर फिर से सदी करती भी हूँ तो क्या उसकी गारंटी आप दे सकती है की कल को उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी माँ जो भाग्य में लिखा होता है उसे कोई बदल नहीं सकता है

मधु जी .......ठीक है बेटी तेरी ख़ुशी में हे हमारी ख़ुशी है मैं तेरे हर फैसले में तेरे साथ हूँ पैर सूर्य से इस बारे में बात की क्या तुमने

राधिका ......नहीं माँ आज तीसरी बार तो उनसे मुलाकात हुई है मेरी पैर जल्दी हे हम सब कुछ समय के लिया सूर्यगड़ जायेंगे पापा के साथ वही बात करूंगी उनसे

मधु जी .....संभल कर बेटी कोई गड़बड़ न होने पाए नहीं तो तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी

राधिका ......माँ मैंने उनसे सूर्य के बारे में बात की है वो मेरी ख़ुशी के लिया त्यार है

जरुरत पड़ी तो वह खुद बात करेंगे सूर्य से

मधु जी ......चल ठीक है मैं भी अब थोड़ा आराम करती हूँ वैसे इस बारे में किस किस को पता है

राधिका ......आप आवर दीप्ती को हे पता है की वो बाप बनने की ताकत खो चुके है

मधु जी .....दीप्ती को कैसे पता चला बेटी

राधिका .....वो माँ उसने गलती से उनकी रिपोर्ट्स देख ली थी


पैर आप चिंता न करे दीप्ती मेरे साथ है माँ

मधु जी ........देख ले बीटा मुझे दर है की कही कल तुम्हे हे सब गलत न समजे

क्युकी ये रास्ता गलत है पैर सब की ख़ुशी के लिया मैं तेरे साथ हूँ

हिमालय ऋषि दूर्वा आश्रम....

संध्या के समय गुरुदेव परीलोक से हिमालय में िस्थित ऋषि दूर्वा के आश्रम पहुंचे

ये वही आश्रम था जहा ऋषि दूर्वा आवर बाकि 5 ऋषि अपने शिष्यों के साथ निवेश करते थे जिन्होंने मानसी का सुधिकरण यज्ञ में भाग लिया था वह परीलोक में महाकाल पूजा की थी

ऋषि दूर्वा ......ज्येष्ठ गुरु भ्राता आप यहाँ

गुरुदेव ..... है ऋषि दूर्वा आपकी इच्छा पूर्ण होने का समय आ चूका है ुशी के लिया आपसे भेट करने यहाँ आना पड़ा

ऋषि दूर्वा गुरुदेव के लिया वही जमीं पे आसान लगा देते है जो की घास पुश से बना हुआ था

ऋषि दूर्वा ......विराजिया भ्राता श्री आवर हमें सेवा का अवसर प्रदान करे

गुरुदेव ....... ये पुत्र सूर्य वह पुत्री किरण की जनम कुंडली है 7 दिवश बाद दोनों का विवाह है

ऋषि दूर्वा ......ये तो बहुत हे परसन
ता का अवसर है हमें उम्मीद नहीं थी ये शोभाग्य पूर्ण अवसर हमें इतनी सिगरा प्राप्त होगा

गुरुदेव ...... आपकी ीछापरबु ने सिगरा हे पूरी कर दी ऋषि दूर्वा विवाह की सभी विधि आपको पूर्ण करवानी है

ऋषि दूर्वा ...... ये तो हम सभी के लिया शोभाग्य की बात है गुरु भ्राता ऐसा सुअवसर तो कड़े तप के पश्चात भी बहुत काम दिव्या आत्माओ को प्राप्त होता है

गुरुदेव ......विवाह परीलोक में होना तय हुआ है परन्तु विवाह परतविलोक के नियमो वह विधि अनुसार होगा

ऋषि दूर्वा .....हम सिगरा हे परीलोक पहुंचते है किन्तु परीलोक में विवाह करने की कोई महत्वपूर्ण वजह

गुरुदेव ......असुरराज नरकासुर है वो वजह जब तक उचित समय नहीं आता सूर्य आवर नरकासुर का सामना नहीं होना चाइये

नरकासुर को अगर अभी पुत्र सूर्य के विषय में सत्य ज्ञात हुआ तो वह अवश्य कुछ न कुछ सडयंत्र करेगा दूसरा कारन है पुत्री मानसी

ऋषि दूर्वा ......पुत्री मानसी अथार्त

गुरुदेव ...... पुत्री मानसी नरकासुर की ज्येष्ठ पुत्री है ऋषि दूर्वा नरकासुर वह पुत्री मानसी इस सत्य से अवगत नहीं है

भविष्य में होने वाले महायुद्ध में पुत्री मानसी वह पुत्री जीनत से मिलान के पश्चात जो सुरक्षा कवच सूर्य को प्राप्त होगा वो काली सक्तियो से पुत्र सूर्य को अभेद्य बना देगा

ऋषि दूर्वा ......पुत्र सूर्य अभी से अभेद्य है फिर उसे इस सुरक्षा कवच की क्या आव्सय्कता है

गुरुदेव ......आव्सय्कता है ऋषि दूर्वा अभी वास्तविक सत्रु परेड के पीछे है

जब वह सामने आएगा आप भी जान जायेंगे की क्यों सूर्य को ये अभेद्य कवच की आव्सय्कता है

ऋषि दूर्वा ....... उचित है भ्राता श्री जब भी हमारी सेवा की आव्सय्कता हो हमें अवश्य अवसर प्रदान करे

गुरुदेव .....इस लिया तो हम यहाँ उपस्थित हुए है

आपको पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण के अंश का विवावह भी करवाना है जो परतविलोक पे हे होगा ये दायित्व भी आपका है आप सभी ऋषियों में ये दायित्व किसी सौंपना चाहते है ये आप पे है

ऋषि दूर्वा ....... ऋषि सात्विक ( ऋषि 5 )ये दायित्व हम आपको सौंपते है

उम्मीद है आपको इस से कोई आपत्ति नहीं होगी

ऋषि सात्विक ......भ्राता श्री मुझे कोई आपत्ति नहीं है ये मेरा शोभाग्य होगा की आपने इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिया मुझे चुना

गुरुदेव ......फिर आप सूर्यगढ़ चलने की तयारी कीजिये कल प्रातकाल हम आपको लेने आएंगे

ऋषि सात्विक ......जी जीएस्ट गुरु भ्राता श्री

गुरुदेव ......अब हमें आज्ञा दे ऋषि दूर्वा

कुछ देर पश्चात गुरुदेव परीलोक लौट जाते है

वही सूर्य मेनका जी पायल प्रीती मानसी जूलिया

सभी दोपहर को u.s.a में लेंड करते है

(9.हर 30 मिनट्स टाइम डिफरेंस इंडिया तो u.s.a )

मेनका जी .....बीटा सूर्य इस वक़्त तो तुम्हारे फूफा जी ऑफिस में होंगे हमें घर पे चलना चाइये

सूर्य ......बुआ सा फूफा जी को मैंने चलने से पहले हे कॉल कर दिया था वो बहार हमारा वेट कर रहे है

पायल प्रीती दोनों तेजी से एयरपोर्ट स्व बहार की तरफ निकलती है

जहा विजय जी कुछ सिक्योरिटी के साथ इन्हे लेने के लिया आये थे

पायल प्रीती दोनों दौड़ कर अपने पापा से गले मिलती है

वही मेनका जी के माथे पे कुछ चिंता की लकीरे उभर आई थी इतनी सिक्योरिटी देख कर

सूर्य ......बौ सा मैं हूँ न आप चिंता न करो चलिए फूफा सा हमारा इन्तजार कर रहे है

मेनका जी ......कैसे है आप

विजय. जी ....... अभी तक तो कुछ अच्छा नहीं था पैर अभी बहुत अच्छा हूँ कहते हुए विजय जी मेनका जी को गले से लगा कर गालो को चुम लेते है जिस से मेनका जी सरम से पानी पानी हो जाती है

सूर्य .....परनाम फूफा जी

विजय जी .....जीते रहो बीटा कैसे होगा तुम आवर साथ में ये दो प्यारी प्यारी बछिया कोण है

पायल .....पापा ये मानसी है आवर ये जूलिया बाकि आप सूर्य से पूछो

मेनका जी ......वो सब घर पे पूछना आप

आवर ये इतनी सिक्योरिटी किस लिया है जी आपके साथ में

विजय जी ....... चलो कार में बैठो घर पे बताता हूँ मैं मेनका

सूर्य ......आप लोग चलो मैं आता हूँ फूफा जी

विजय जी ....नहीं बीटा अभी नहीं पहले घर चलो

सूर्य बाकि सभी के साथ कार में बेथ जाता है आवर सभी सिक्योरिटी के साथ एयरपोर्ट से निकलते है

इनके कार के निकलते हे इनके पीछे से 2,3 कार्स आवर भी निकलती है जिनमे कुछ अफ्रीकन फाइटर जैसे हेट काटे लोग हतियारो के साथ बैठे थे

सूर्य ....... फूफा जी कुछ कार्स हमारा पीछा कर रही है

विजय जी ......कोई बात नहीं बीटा करने दो उन्हें पीछा तुम चिंता न सिक्योरिटी उन्हें संभल लेगी

विजय जी सूर्य को चिंता न करने को बोल तो रहे थे पैर वो खुद हे अंदर से गबराये हुए थे

कुछ 40 मिनट्स के बाद एक बड़े से बंगलो के सभी कार्स एंटर करती है जहा इतनी हे सिक्योरिटी आवर मौजूद थी

विजय जी ......लो बीटा हम घर पहुंच गए है तुम सब फ्रेश होने कर रेस्ट करो साम को कॉफ़ी पे बात करते है

सूर्य ......पैर फूफा जी

विजय जी ....... बीटा मैं जनता हूँ तुम बहुत कुछ पूछना चाहते हो पैर अभी मैं कुछ नहीं बता सकता हूँ ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
अपडेट. 183

विजय जी ......कोई बात नहीं बीटा करने दो उन्हें पीछा तुम चिंता न सिक्योरिटी उन्हें संभल लेगी

विजय जी सूर्य को चिंता न करने को बोल तो रहे थे पैर वो खुद हे अंदर से गबराये हुए थे

कुछ 40 मिनट्स के बाद एक बड़े से बंगलो के सभी कार्स एंटर करती है जहा इतनी हे सिक्योरिटी आवर मौजूद थी

विजय जी ......लो बीटा हम घर पहुंच गए है तुम सब फ्रेश होने कर रेस्ट करो साम को कॉफ़ी पे बात करते है

सूर्य ......पैर फूफा जी

विजय जी ....... बीटा मैं जनता हूँ तुम बहुत कुछ पूछना चाहते हो पैर अभी मैं कुछ नहीं बता सकता हूँ ...........

अब आगे ........

मेनका जी हाउस u.s.a......


साम को सभी हॉल में बैठे कॉफ़ी की चुस्किया ले रहे थे

सभी की दृस्टि विजय जी पे थी क्युकी सभी जानना चाहते थे की आखिर यहाँ हो क्या रहा है

बहार इतनी सिक्योरिटी क्यों है कोण है जिस के दर से इतनी हायर सिक्योरिटी लगाई है है

विजय जी ...... मैं जनता हूँ आप सबकी नजरे जो पूछना चाहती है

मेनका जी .....विजय तुमने एयरपोर्ट पे कहा घर पे सब बताओगे

घर पे अस कर साम का बनाना कर दिया अभ कोई आवर बहाना नहीं चलेगा आपका मुझे सब कुछ जानना है

सूर्य पायल प्रीती मानसी जूलिया ...... हमें भी जानना है

विजय जी ...... मैं तुम सभी को इस प्रॉब्लम से दूर रखना चाहता था इस लिया किसी को कुछ भी नहीं बताया उस प्रॉब्लम का नाम है यहाँ u.s.a का मफ्फिए बॉस D.D

सूर्य ...... मतलब मैं कुछ समजा नहीं एक मफ्फिए डॉन की भला आपसे क्या दुश्मनी फूफा जी

विजय जी ...... तुम्हे केवल यही पता है की प्रॉपर्टी रिलेटेड बिज़नेस करता हूँ

पैर साथ हे
में शेयर मार्किट में भी इन्वेस्ट करता हुन्न अभी कुछ दिन पहले हे एक बड़ी कंपनी में मैंने इन्वेस्ट किया था जो मेडिसिन मैन्युफैक्चरिंग करती है

जब मैं उस कंपनी के ओनर से मिला जिसका नाम डेविड था मुझे वो अच्छा इंसाने लगा पैर यही पे मुझसे चूक हुई आवर मैंने शेयर मार्किट के जरिया पैसा न लगा कर डायरेक्टली उस से मीटिंग की जहा मैंने उस कंपनी में 45 % पार्टनरशिप कर्ली मैंने अभी तक जो कमाया था उसका 80 % पैसे 45% शेयर खरीदने में लगा दिया


मेनका जी ....... आपने इतना सब कुछ कर दिया आवर हमें एक बार बताने तक की जहमत नहीं की मुझे आपसे ये उम्मीद तो कटाई नहीं थी विजय

सूर्य ....... बुआ सॉ आप संत हो जाइये पहले फूफा जी की पूरी बात तो सुन लीजिये

विजय जी ..... सॉरी मेनका सॉरी बीटा पायल प्रीती

पायल प्रीती ........ It's OK पापा हमारे लिया पैसा मायने नहीं रखता है हमारे लिया बस आप सबसे इम्पोर्टेन्ट है पापा

कहते हे पायल वह प्रीती विजय जी को दोनों तरफ से हूजे कर लेती है

सूर्य .....आगे बताये फूफा जी फिर क्या हुआ की नौबत यहाँ तक आ गई

विजय जी ....... जैसे जैसे मेरा कंपनी में रूचि लेंस सुरु हुआ तो वह हो रही इललीगल एक्टिविटी मेरे शामे आने लगी

दरशल डेविड कंपनी में नकली मेडिसिन के साथ साथ कंपनी में ड्रग्स को टेबलेट के रूप में कंपनी के नाम से मेडिसिन की आड़ में ड्रग्स सप्लाई करता था

सूर्य ....... आपने उसे रोका नहीं क्युकी अब आप भी इस कंपनी में हिसेदार थे

विजय जी ..... मैंने उसे रोका पैर वो नहीं मन जब मैंने अपनी पार्टनरशिप ख़तम कर अपने पॉज मैनेज तो उसने जबरदस्ती मुझसे वो 45% शेयर फिर से अपने नाम करवा लिया जब मैंने पुलिस कम्प्लेन की आवर ड्रग सप्लाई के बारे में पुलिस को कंपनी में जाँच करने की मांग की तो वह काफी मात्रा में नकली दवा आवर ड्रग्स टेबलेट मिली क्युकी कंपनी के 100%शेयर डेविड के नाम पे थे तो मुझे कोई तो कोई प्रॉब्लम नहीं हुई आवर न हे मेरा उस केस में कबि नाम आया पैर मेरी म्हणत की कमाई मैं खो चूका था

कुछ दिन बाद हे डेविड जेल से फरार हो गया कुछ कैदिओ के साथ जब पुलिस ने उसका पीछा लिया तो पुलिस फायरिंग में डेविड मारा गया

सूर्य ...... अगर हे डेविड मारा जा चूका है तो फिर जो हमारा पीछे कर रहे थे वो कोण थे

विजय जी .... डेविड के बड़े भाई D.D के लोग थे वो D.D का मन्ना है की उसका भाई डेविड मेरी वजह से मारा गया इस लिया वो मुझे आवर मेरे परिवार को ख़तम करना चाहता है

2 बार कोशिश भी कर चूका है

सूर्य ....... तो ये बात है आप चिंता न करो फूफा जी अब आपको कंपनी भी मिलेगी 100 % मालिकाना हक़ के साथ आवर D.D को उसके लिया का कर्मफल भी मिलेगा वैसे हे D.D मिलेगा कहा कुछ अंदाजा है आपको

पायल ......मैं भी चलूंगी आपके साथ मुझे देखना है की कोण है वो जिसने अपनी मौत बुलाई है पापा को परेशान करके

विजय जी ....... कोई कही नहीं जायेगा समाज गए तुम लोग जानते हे क्या हो उसके बारे में वो यहाँ का मफ्फिए डॉन है

प्रीती ...... चील कीजिये पापा आप आवर उन्हें जाने दीजिये

मानसी ...... मैं भी चलूंगी फिर तो

प्रीती ........ मानसी दी आप मैं आवर जूलिया दी शॉपिंग पे चलते है उन्हें जाने दीजिये आप

विजय जी ...... तुम सब पागल तो नहीं हो गई हो यहाँ इतनी प्रॉब्लम है आवर तुम ऐसे बात कर रही हो जैसे हे मामूली बात है

मेनका जी ......सूर्य प्रीती बीटा दिन्नेर्स से पहले लौट आना तुम सब ठीक है

मेनका जी की बात सुन विजय जी उन्हें वाइज देखते है जैसे वो उनकी वाइफ मेनका नहीं कोई बूथ प्रेत हो

सूर्य ....... ठीक है बुआ सा हम जल्दी हे लौट आएंगे तब तक आप लोग भी एन्जॉय कर आओ बुआ सा मैं क्या कहता आप भी गम आओ फूफा जी के साथ इतने दिनों बाद मिले हो थोड़ा बहुत एन्जॉय करना तो बनता है हाहाहाहा

सूर्य पायल को ले कर बहार जाने लगता है तभी विजय जी उसके शामे अस खड़े होते है

विजय जी .....सूर्य बीटा मेरी बात सुनो मुझे कुछ नहीं चाइये हम लोग आज हे इंडिया चलते है

तुम्हे कुछ हुआ तो बाकि सब क्या योग कुछ उनके बारे में भी सोचो बीटा शालिनी उन्हें क्या जबाब दूंगा मैं

सूर्य ....... बाद इतनी से बात एक मिनट्स रुकिए आप

सूर्य अपना फ़ोन निकल कर no. डायल करता है

कुछ हे पालो में शामे से शालिनी जी कॉल उठती है

( सूर्य जिन शालिनी से बात कर रहा है ये परीलोक में मौजूद शालिनी जी है )

सूर्य ......hello माँ कैसी है आप

शालिनी जी .....मैं अच्छी हूँ बीटा तुम कैसे हो आवर जल्दी से लौट आओ तुम यहाँ तुम्हारे लिया सरप्राइज है

सूर्य ...... माँ फूफा जी आपसे बात करना चाहते है

सूर्य फ़ोन विजय जी को सौंप देता है

विजय जी ...... Hello शालिनी जी कैसी है आप

शालिनी जी .....नन्दोई सा मैं अच्छी हूँ आप कैसे है

विजय जी ......शालिनी जी आप हे संजय सूर्य को ये मेरी बात तो सुन नहीं रहा है

शालिनी जी ....... क्यों क्या हुआ विजय जी

विजय जी सूर्य की जिद को ले कर दद से जुडी है बात शालिनी जी को बताता है

विजय जी ....... ान आप हे बताये मैं क्या कृ अब आप हे इस हे रोकिये

शालिनी जी ....... आप जरा फ़ोन को लाउड पे कीजिये मैं बात करती हूँ सूर्य से

विजय जी जल्दी से फ़ोन को लाउड स्पीकर पे करता है

विजय जी ........ लो अपनी माँ से बात करो

सूर्य ....... Hello माँ बोलिये

शालिनी जी ....... तुम क्या करोगे जैसे करोगे मैं नहीं जानती उनमे से कोई भी कल का सूरज नहीं देखना चाइये मैं ये इस लिया नहीं कह रही हूँ की उन्होंने विजय जी को परेशान लिया या उनपे हमले किये

बल्कि जो जहर वो समाज में गइला रहे है उनकी सजा यही है दद के अलावा जो की भी है समाज में ऐसा जहर फ़ैलाने वेक उन सभी का अंत ऐसा हे होन्स चाइये

सूर्य ....... यस माँ वो लोग कल सुबह का सूरज नहीं देखेंगे

विजय फ़ोन चीन कर

शालिनी जी ......ये आप क्या कह रही है सब कुछ जानते हुए भी मुझे लगा आप इन दोनों को रोकेंगी

शालिनी जी ......दूसरा कोण जा रहा है

सूर्य ......पायल जा रही है माँ

शालिनी जी ..... ठीक है पायल का ख्याल रखना अगर उसे एक खरोच भी आई तो तुम्हारी कैर नहीं

सूर्य ...... OK माँ लव यू कल मिलता हूँ bye

शालिनी जी ....लव यू बीटा
अपना ख्याल रखना bye

सूर्य ......पायल चले आवर प्रीती तुम लोग हमारे जाने के कुछ डिअर बाद जानना

सूर्य अपने जेब से गुरुदेव द्वारा दिया स्मरति ( यदि ) बॉक्स विजय जी को देता है

सूर्य .....इसमें आपके लिया बहुत हे खाश वास्तु है

मेनका जी ......तुम लोग जाओ बच्चो उन्हें मैं देहटी हूँ

सूर्य पायल का हाथ थम कर बहार निकल जाता है

घर से कुछ हे दूरिंग पे कुछ हतियार बंद नकाबपोश पायल सूर्य को घेर लेते है आवर दोनों के चेहरे पे नकाब डील कर उन्हें गाड़ी में दाल कर निकल जाते है ......

वही विजय जी जब उस बॉक्स को खोलते है तो उस बॉक्स में मौजूद ऊर्जा सिदा विजय जी के सात में समाहित होने लगती है जिस से विजय जी को अपना सर भरी भरी लगने लगता है

मेनका जी विजय को थम कर मानसी की मदद से उन्हें रूम में ले जार कर आराम से लिटा देती है

मेनका जी ......अब तुम लोग भी जाओ गमो फिरो मस्ती करो पैर एक दूसरे का ख्याल रखना समाज गए न आवर जब तक जरुरत न पेस अपनी सकती का इस्तमाल नहीं करना बीटा

प्रीती .....OK माँ bye

प्रीती जूलिया मानसी एक कार से निकल जाती है

मन करने के बावजूद एक सिक्योरिटी कार भी इनके पीछे पीछे जाती है सुरक्षा के लिया ....

छत्तीसगढ़ ......


गीता ठाकुर आवर अजय ठाकुर साम को छत्तीसगढ़ के रायपुर एयरपोर्ट पे लेंड करते है

अजय ......बड़ी मम्मी मैं जरा उस no. पे कॉल कर पता करता हूँ की कहा आना है

गीता ठाकुर ....... ठीक है अजय तुम पता करो वैसे भी साम होने को आई है अगर ज्यादा दूर है तो यही किसी होटल में रुकते है

फिर सुबह को चलेंगे क्युकी यहाँ का कुछ भी पता नहीं है ऊपर से यहाँ पे चोरी चाकरी लूट मार ज्यादा होती है नक्सली एरिया जो है

अजय ......बड़ी मम्मी नक्सली एरिया यहाँ से काफी दूर है

पैर ये एच है की पैसो के साथ रात में सफारी करना खतरनाक हो सकता है

पता नहीं विक्रम भाई सा यहाँ किस लिया आये थे

गीता ठाकुर ...... ये तो विक्रम हे जाने पैर मेरी बात याद है न तुम्हे उसे यहाँ पे सूर्य के बारे में कुछ भी नहीं बताना समाज गए न तुम एक बार विक्रम को सक्तिपुर ले चले फिर वह मैं उसे खुद हे सब बता दूंगी

अजय ....... ठीक है बड़ी मम्मी लो कॉल भी लग गया मैं बात करता हूँ

अजय ......hello भाई साहब हम लोग रायपुर पहुंच चुके है अब कहा आना योग

सामने से ...... आप लोग वह से बाद पकड़ कर क्सक्सक्स सिटी आ जाइये यहाँ से किसी को भी पूछने पे आपको क्सक्सक्स क्सक्सक्स हॉस्पिटल के बारे में पता चल जायेगा

अजय ......ठीक है वैसे यहाँ से कितना टाइम लगेगा वह पहुंचने में कुछ अंदाजा है आपको

सामने से .... बस से 1,30 हर के वास् पास कार से तुम लोग जल्दी अस सकते हो अगर वह से कोई कार किराये पे लेते हो तो

अजय ......ठीक है वह पहुंच कर आपको कॉल करता हूँ

फोन कट

गीता ठाकुर ......क्या कहा उसने

अजय ....... बड़ी मम्मी यहाँ से 1,30 का सफर है वह तक का बस का

गीता ठाकुर ......ये तो काफी टाइम लग जायेगा हमें 6पं तो यही हो गए है आवर है का भी पता नहीं मिलेगी भी या नहीं आवर टास्ते में कुछ प्रॉब्लम हुई तो क्या होगा

अजय ......फिर आप हे बताये क्या करे

गीता ठाकुर .......एक काम करो देखो यहाँ रेंट पे कोई अच्छी कार मिल सकती है क्या क्युकी फ्लाइट्स की वजह से मैं भी थक गई हूँ

अजय .......फिर क्यों न है कल सुबह जल्दी निकले बड़ी मम्मी

गीता ठाकुर .......थीं है फिर उसके बोल दो की हम कल सुबह आएंगे आवर कोई होटल देखो जहा रात को आराम कर सके हम दोनों

अजय कॉल कर सुबह आने का बोल देता है

एयरपोर्ट से पता कर पास के हे होटल के लिया कार बुक कर वह से निकल जाते है

अजय दो रूम बुक करता है जिसमे से एक की चाबी गीता ठौर को देता कर दूसरे रूम में जा कर फ्रेश होने लगता है

वही गीता ठाकुर रूम में पहुंचते हे अपने बैग से कपडे निकल बाथरूम में गेस जाती है

अपने सरीर को अच्छे से साफ करने के बाद हलके कपडे दाल कर ऐसे हे लेट जाती है

कुछ हे देर में गीता ठाकुर की आँख लग जाती है

दूसरे रूम में अजय नहाने के बाद रूम सर्विस को कॉल कर दारू मीट मटन का ऑर्डर्स दे देता है कुछ हे देर में

रूम सर्विस अपना आर्डर पूरा कर वह से निकल जाता है

अजय एक एक कर पेग लगता गया मीट मटन का मज़ा लेते हुए कब नशे में चूर हो ऐसे हे अजय लेट जाता है

असुर लोक ........

असुर महल में इस समय असुरगुरु पहुंचे हुए थे जो इस वक़्त कुछ अन्य असुरो के साथ अग्निमुखासुर भी वही मौजूद था

अग्निमुखासुर ...... असुरगुरु आपको कुछ ज्ञात हुआ उस अंश के विषय में

असुरगुरु ...... नहीं पुत्र अग्निमुखासुर अभी तक तो ऐसा कुछ भी परतविलोक में घठित नहीं हुआ जिस से हमें लगे की महाकाल अंश पार्थवी लोक पे मौजूद हो

नरकासुर .......गुरुदेव हमने पुत्र अग्निमुखासुर के विचार से सहमत हो कर गुप्तचरों को अन्य लोको में महाकाल अंश का पता करने भेज दिया है

आप परतविलोक पे मौजूद थे इस लिया अभी तक वह हमने किसी गुप्तचर को अभी तक नहीं भेजा है आपका इस विषय पे क्या विचार है गुरुदेव

असुरगुरु ....... जहा तक मुझे ज्ञात है पूर्व जनम में महाकाल अंश का जनम परतविलोक पे हे हुआ था किन्तु साथ हे साथ वह परीलोक जिनलोक आवर प्रेतलोक से भी जुड़ा था

नरकासुर ...... परीलोक में कोई भी गुप्तचर प्रवेश नहीं कर सकता है गुरुदेव

असुगुरु ...... हम जानते है ये बात क्युकी वह सभी सुध ऊर्जा से परिपुर है

अग्निमुखासुर ........ किन्तु आप तो परीलोक में प्रवेश कर सकते है न असुरगुरु वो भी बिन्स किसी के शामे आये

नरकासुर ....... है किन्तु ये असुरगुरु पढ़ की गरिमा को दुर्मिळ करना होगा क्यों गुरुदेव

असुरगुरु ....... उचित कहा असुरराज आपने

अग्निमुखासुर ....... फिर क्या मार्ग शह है जिस से हम परीलोक पे अपनी दृस्टि बनाये रखे

असुरगुरु ....... अभी तो कोई मार्ग नहीं है पुत्र अग्निमुखासुर हम देखते है इस विषय में कोई मार्ग निकलता है की नहीं

नरकासुर ......गुरुदेव परतविलोक के लिया आप हे इन विशेष गुप्तचरों में से चयन कीजिये की परतविलोक पे किसी भेजना चाइये

असुरगुरु .....वैसे तो इसकी आव्सय्कता नहीं है क्युकी हम कुछ समय परतविलोक पे हे रह कर सवयं पता करने की कोशिश कर रहे है फिर भी आप भेजना चाहते है तो अपनी इच्छा अनुसार आप स्वयं इन गुप्तचरों में से इनकी योग्यता अनुसार इनका चुनाव कीजिये

नरकासुर के इसारे पे वह मौजूद 8 ,10 गुप्तचरों में से 4 गुप्तचर शामे आते है

नरकासुर .......तुम चारो को परतविलोक पे महाकाल अंश का पता करना है केवल दूर रह कर पता करना है उसके सामने जाने की गलती मत करना परतविलोक से जुडी हर बात सर्वपार्ट्म हम तक पहुँचाओगे तुम

चारो गुप्तचर नरकासुर असुरगुरु ो आवर अग्निमुखासुर को परनाम कर वह से निकल जाते है परतविलोक के लिया अपने कार्य को पूरा करने के लिया ये अपने कार्य में सफल होते है या उन्हें मृत्यु प्रतप्त होती है ये तो भविष्य में पता चलना था ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एंजोये फ्रेंड्स ...........
 
अपडेट 184

नरकासुर के इसारे पे वह मौजूद 8 ,10 गुप्तचरों में से 4 गुप्तचर सामने आते है

नरकासुर .......तुम चारो को परतविलोक पे महाकाल अंश का पता करना है केवल दूर रह कर पता करना है उसके सामने जाने की गलती मत करना परतविलोक से जुडी हर बात सर्वपार्ट्म हम तक पहुँचाओगे तुम

चारो गुप्तचर नरकासुर असुरगुरु ो आवर अग्निमुखासुर को परनाम कर वह से निकल जाते है परतविलोक के लिया अपने कार्य को पूरा करने के लिया ये अपने कार्य में सफल होते है या उन्हें मृत्यु प्रतप्त होती है ये तो भविष्य में पता चलना था ............

अब आगे ...........

(.. U.s.a स्पेशल )

सूर्य पायल को पकड़ने के बाद दोनों के चेहरों पे नकाब दाल दद के आदमी वह से निकलने में कुछ एक जानते बाद सिटी से बहार एक बड़े से जंगल टाइप एरिया में पहुंचे हे कोई जंगल नहीं तहत पैर ईयर सहर से बहार होने की वजह से काफी हरा भरा इलाका था

कार में सवार उन्ही नकाबपोश लोगो में से एक किसी को कॉल कर सूर्य वे पायल की जानकारी किसी को देता है

जहा सामने से उसे कोई आर्डर मिला तो बाकि सभी को सूर्य आवर पायल को ले कर अपने पीछे आने का इसरा किया

सूर्य नकाब में अंदर से सबकुछ स्टाफ साफ देख प् रहा था

बहुत से हतियार बंद लोगो के बिच से पायल वे सूर्य को ले कर हॉल नुमा रूम में पहुँचते है

जहा दोनों को चेयर से बंद दिया जाता है







वह आवर भी काफी लोग मौजूद थे जिनका किडनैप किया गया था

जिनमे ज्यादातर लड़किया थी जिन्हे बंद कर रखा हुआ था





दोनों को अच्छे से बाँड्ने के बाद पायल आवर सूर्य के मुँह पे से नकाब हटाया जाता है

इस वक़्त रूम में 10.12 अफ्रीकन नेसल के लोगो के साथ वाइट लोग भी मौजूद थे

सूर्य .......कोण हो तुम लोग आवर हमें किडनैप क्यों किया गया है

तभी वह कुछ आवर लोग भी आते है

पैर सबसे आगे जो थे वो कुछ खाश थे क्युकी उन्हें अंदर आते हे सभी मुस्तैद हो जाते है







दोनों हे तगड़े बलिस्त सरीर के मालिक थे

ऐसे हे 6 ,7 काळा सांड जैसे लोग दोनों के पीछे खड़े हो जाते है

पायल की नजर एक लड़की पे पड़ती है जिसे देख पायल बोले बिना नहीं रह पायी

पायल ........ जेएनय तुम यहाँ कैसे

सूर्य .......तुम जानती हो उसे पायल

पायल .....है वो मेरी कॉलेज फ्रेंड जेनी है सूर्य

तभी वह मौजूद गुंडों में से एक अपने गन पायल पे तानते हुए उसे चिप रहने की दमकी देता है





दोनों मैं गुंडे वही राखी चेयर पैर बेथ जाते है

सूर्य ........ आखिर बाद पूछ रहा हूँ हमें किडनैप क्यों किया गया है

आदमी 1 ....hi माइसेल्फ डिएगो डेविड बरोथेर एंड हे इस माय पार्टनर एंड बरोथेर डिनायल हे एंड में दद

सूर्य .......हमसे क्या चांटे हो तुम लोग

डिनायल ....... ी वांट विजय फॅमिली

सूर्य ...... भूल जाओ उन्हें आवर उनकी फॅमिली को तुम दो बाद उनपे हमला कर पहले हे हे अपनी लाइफ लाइन बहुत छोटी कर चुके हो

डिएगो ...... उसकी वजह से मेगा बरोथेर मारा गया उसे आवर उसको फॅमिली को मरना होगा तभी मेरे बरोथेर को जस्टिस मिलेगा

सूर्य ....... हाहाहाहा सोचा था तुम सबको जीने का एक मौका देना चाइये पैर सब को मरने की कुछ ज्यादा हे जल्दी है

विजय जी की फॅमिली को या उन्हें मरना तो दूर जो तुम्हारे सामने बैठी है वो उनकी बड़ी बेटी है उस से तो बीच कर दिखाओ

डिनायल ...... उसकी बेटी यहाँ है तो उसे भी गुथनो के बल यहाँ आना योग

डिनायल अपने फ़ोन पे no. दिल करने लगता है

पायल ....... पापा को कॉल कर रागे हो क्या Mr.denial

डिनायल .......यस अन्य लास्ट मैसेज फॉर योर डैड

पायल ......अपने फ़ोन को लाउड पे करो मुझे भी सुन्ना है

तभी सामने से कॉल पीफ होता है

डिनायल ....... Hello मर .विजय

सामने ....... मिस मेनका सिंह हेअर ों थिस साइड

डिनायल ......मिस मेनका योर दौघतेर्स वास् किडनैप बी मफ्फिए बॉस दद

मेनका जी ........ क्या सच में कुछ आवर भी न्यूज़ देनी है क्या

पायल ...... माँ आप चिंता न करो हम जल्दी हे अस रहे है डिनर रेडी रखना

मेनका जी ......OK बीटा आवर सूर्य कहा है

सूर्य ......जी बुआ जी यही पे हूँ मैं भी हम कुछ देर में निकलते है

मेनका जी ......थिंक है बीटा bye

पायल ....... सूर्य ज्यादा टाइम लगाया तो डिनर पे लेट योग

डिएगो जो काफी देर से पायल को गुर रहा था

वो अपनी चेयर से उठा आवर पायल की तरफ बढ़ा

सूर्य ......पायल तुमने इतने समय में क्या क्या सीखा उसे आजमाने का वक़्त अस गया है सुरु हो जाओ

पायल ......थैंक यू ुम्मम्हा

पायल अपने होंटो को पॉट बना कर सूर्य को हवा में हे किश भेजती है है

जैसे हे डिएगो पायल को चुने के लिया हाथ बढ़ाया पायल अपने हाथो पे बंदी राशि को तोड़ कर डिएगो के सामने कड़ी हो जाती है

सूर्य ..... पायल तुम उन्हें सम्भालो मैं बाकि का कचरा साफ कार्य हूँ पैर याद रहे डिनायल आवर डिएगो मरने नहीं चाइये OK

पायल .....OK सूर्य

डिएगो एक लड़की को अपने सामने इस तरह बेखौफ देख कर घुसे में पायल को चांटा मरने के लिया हाथ उठता है पायल ुशी हाथ को पकड़ कर डिएगो को गुमा कर दिवार पे दे मरती है

डिएगो का भरी भरकम सरीर दीवार से टकरा कर निचे परेश पे दल चाटने लगता है

किसी को यकीं हे नहीं हुआ की अच्चानक से इतना सब कुछ कैसे हो गया

ये मरियल सी दिखने वाली लड़की डिएगो जैसे भरी भरकम सांड को किसी खिलोने के जैसे दिवार पे कैसे दे मारा

पायल ......ज्यादा वक़्त नहीं है मेरे पास जिसको आना है आवो अपनी मौत से गेम मिलने

वही सूर्य हॉल से बहार निकलते हे अपने काल रूप में काल बंद सभी पे टूट पड़ता है

जहा से भी काल गुजरता वह पीछे टुकड़ो में गुंडों के निर्जीव सरीर पेस मिलते

सूर्य उन्हें उनके पाप अनुसार सजा देता हुआ आगे भाड़ रहा था

वही गुंडे अपनी गन्स का मुँह सूर्य पे किये हुए

अंडदंड गोलिया बरसाने में लगे हुए थे

उन्हें कोण बताये की गोलिया सदर्न इंसानो पे काम करती है

मौत पे इनका कोई असर नहीं होता

जब उनकी गोलिया ख़तम हो जाती तब किसी न किसी हतियार को ले काल का साम्बा करने आते पैर सूर्य के सोर्ड से टकराते हे चटकदो टुकड़ो में जमीं पे नजर आते

डिनायल अपने भाई की हालत देख खड़े खड़े हे पायल पे जम्प कार्य है डिनायल का पेअर इस एंजेल में था जैसे वो पायल के सीने को अपना निशाना बनाये हुए था

पायल को डिनायल अपनी तरफ बहुत हे स्लोमोशन में आता हुआ नजर आता है

पायल अपनी जगह से हैट जाती है आवर जैसे हे डिनायल की बॉडी पायल के सामने आती है

पायल डिनायल के बाजु की पसलियों में अपनी मुठी को गुस्से में बदल कर पसलियों पे वॉर करती है

कुछ काट काट की आवाज के साथ हे डिनायल के मुँह से जोरदार चीख निकलती है आवर वे भी डियागो के तरह दिवार से जंगल टकराता है

तभी एक बार फिर से वही गुंडा जिसने पायल पे गन तन कर चिप रहने की दमकी दो थी वह आगे बढ़ा





पायल ने ुशी की गन चीन कर उसके माथे में 9मम का हॉल बना दिया

पायल ......बहुत चिलता है ान नहीं चिलायेगा

तभी पायल को जेनी की चीख सुनाई देती है

पायल बिना सोचे सामने सामने जो भी आता है उसे गन से शूट कर देती है इस दौरान पायल पे काफी गोलिया चाक जो उसकी बॉडी से टच होते हे जमीं पे गिर जाती

एक तो पायल का सरीर ध्यान की वजह से काफी स्ट्रांग हो चूका था दूसरा सूर्य ने निकलने से पहले वह मौजूद सभी किडनेप किये लोगो के साथ साथ पायल की भी सुरक्षा शील्ड से कवर कर दिया था कोई भी हतियार उन्हें कोई नुकसान नहीं पंहुचा सकता था

इस बिच डिनायल जेएनय के हाथ खोल कर उसके मुँह को बंद कर अपनी ढाल बनाने में कामयाब हो जाता है





डिनायल ........हमें जाने दो वर्ण तुम्हारी फ्रेंड की गर्दन तोड़ दूंगा मैं

पायल की नजर जब जेनी पे पड़ती है तो उसे डिनायल पे गुस्सा आवर भाड़ जाता है क्युकी चीन जप्ती में जेएनय का सीना निर्वस्त्र हो चूका था

पायल ......जेनी को जाने दो वार्ना मैं तुम इतनी दर्दनाक मौत दूंगी की तुम्हारी रूह तक कैंप उठेगी

वही बहार होने रही फायरिंग की आवाज सुन आस पास में मफ्फिए के जो लोग छुपे हुए थे वो सब भी ीदार आने लगे

सूर्य सभी को ख़तम कर उस जगह को सन करता है

जिस से सूर्य को वह बहुत आदिक मात्रा में ड्रग्स आवर हतियारो के साथ साथ बहुत कुछ इलीगल मिलता है काफी मात्रा में ब्लैक मनी भी

सूर्य वह से पूरी ब्लैक मोंमोनी गायब कर देता है

आवर पुलिस की यहाँ की जानकारी देता है

सूर्य जब वापिस हिल में आता है तो डिनायल का हाल देख सूर्य को आगे भाड़ पायल को रोकना पड़ता है

सूर्य .....रुक जाओ पायल

सूर्य के आवाज सुन पायल के साथ बाकि सभी की नजर सूर्य के काल रूप पे पड़ती है

जिसे देख पायल को छोड़ सभी दर जाते है

काल ....... तुम सब जाओ यहाँ से तुम्हारा फ्रेंड सूर्य तुम लोगो का वेट कर रहा जय पुलिस यहाँ कभी भी पहुंचे सकती है

पायल सूर्य का इसरा समाज जाती है की सूर्य अपनी वास्तविक पहचान छुपाना चांटा है

काल ....... यहाँ जो कुछ भी हुआ किसी को कुछ पता नहीं चलना चाइये तुम लोगो ने किसी को यहाँ नहीं देखा

पायल सभी को वह से ले कर निकल जाती है बहार

काल .....ब्लैक ड्रैगन सामने आओ

तभी वह ब्लैक सूर्य के सामने आता है

जिसे देख कर डिनायल आवर डिएगो दोनों का पिसाब निकल जाता है

ब्लैक ड्रैगन ...... जी क्या आज्ञा है मेरे लिया

सूर्य ....... लगता है मानसी अभी भी नाराज है तुमसे

ब्लैक ड्रैगन ..... मालिकिन नाराज नहीं है है पैर मैं नहीं छठा की मुझसे वो नाराज हो

सूर्य .....अच्छा है तुम्हारे यहाँ बहुत सी बुरी ात्मय है भोजन के लिया सभी को अपने ादिन कर लो

ब्लैक ड्रैगन ...... जैसा आप कहे

सूर्य आगे भाड़ डिएगो आवर डिनायल के मंद से पूरी जानकारी ले कर इन दोनों को ब्लैक ड्रैगन के सामने फेंक देता है आवर वह से गायब हो जाता है

पायल जब सभी किडनैप लड़के लडिकयो को ले कर वह से निकलती है तो कुछ दूर पे उसे सूर्य नजर आता है कार सूर्य के पास रोक कर ड्राइविंग सीट सूर्य को सौंप देती है आवर खुद सूर्य की गॉड में स्वर हो जाती है

सूर्य कार आगे बढ़ा देता है कहा सामने से पुलिस की अनगिनत गाड़िया आती हुई नजर आती है

आवर कुछ कार की चेकिंग भी चल राखी थी





सूर्य की कार को बिना किसी रोक थम के आगे जाने दिया

पायल एक बाद सूर्य को देखती है फिर उसके होंटो से अपने होंटो डाटा कर ग्लैड में बे थे हुए किश करने लगती है

बगल में अगली सीट पे बैठी जेएनय ये सब देख कर मुस्कुरा रही थी

उसका अपने ऊपर कोई ध्यान नहीं था

जेनी .....पायल अपने रोमांस को ब्रेक लगाओ उसे ड्राइव करने दो वार्न्स एक्सीडेंट हो जायेगा हम सिटी में एंटर करने वाले है

जेएनय की बात सुन पायल सूर्य के ग्लैड में आराम से बेथ जाती है

पायल ......सूर्य ये मेरी कॉलेज फ्रेंड जेनी है जेएनय ये है मेरा सूर्य

जेनी .......तुम्हारे सूर्य hello सूर्य थैंक्स हमें बचने के लिया

सूर्य ....... Hi जेएनय नीस तो मीट यू आप से मिल कर ख़ुशी हुई

तभी सूर्य के नजर जेएनय के लेफ्ट सीडेनिप्पल्स पे पड़ती है

क्युकी जेएनय ने निचे कोई ब्रा नहीं डाली हुई थी आवर डिनायल के साथ हुई जदप में उसके ऊपर के बटन टूट चुके थे

पायल ......वह क्या देख रहे हो गधे कही के आवर जेएनय तुम अपने इनको छुपा नहीं सकती क्या

जेनी .....सॉरी मुझे मालूम नहीं था

पायल .......जेनी तुम भी हमारे साथ चलो घर पे वैसे तुम्हारे डैड का पता चलना सॉरी

जेएनय ......it's OK पायल

सूर्य सभी को सिटी में उतर देता है सबको हिदायत के साथ की जो भी वह हुआ किसी को कुछ न कहे

कार वही मार्किट में छोड़ जेएनय के लिया कुछ कपडे परचेस कर सूर्य पायल वह जेएनय को ले कर निकल जाता है तहत की तरफ

सूर्य पायल जेएनय जब घर पहुंचे तो मानसी जुली प्रीती शॉपिंग कर गम फिर कर लौट आई थी

विजय जी अभी भी सोये हुए थे बुआ जी टीवी पे न्यूज़ देख राखी थी जिसमे डिनायल आवर डिएगो के साथ साथ बाकि सभी के कटे फाटे सरीर दिखाए जा रहे थे

मेनका जी सूर्य देखते हे गेम लगा कर उसका माथा चुम लेती है

मेनका जी ....... कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुई न बीटा

सूर्य ......छोटी से काम में कैसी प्रॉब्लम बुआ जी

पायल ......माँ आपको पता है आज मैंने भी बहुत से गुंडों को मारा वो तो वह काल अस गया तो उसने रोक दिया वर्ण उस डिनायल की तो मैं...

मेनका जी .....ये डिनायल कोण है आवर तुम कैसे हो बेटी जेनी तुम इन लोगो के साथ कैसे बेटी

जेएनय ......मैं थिंक हूँ आंटी जी थोड़ी थैंक हुई हूँ है

पायल ....... माँ जेनी का भी किडनैप हुआ था ये पहले से वह मौजूद थी वैसे उन्होंने तुम्हारा किडनैप क्यों किया था जेएनय ी don't क्नोव पायल उन्हें किसी पेण्ड्रीवे की तलाश थी इनका मन्ना था की वो गलती से मेरे पास आ गई थी

सूर्य ...... बुआ जी फूफा जी कहा है

मेनका जी ......बीटा वो अभी रेस्ट कर रहे है उस बॉक्स की वजह से

सूर्य .....ठीक है उन्हें रेस्ट करने दो मैं फ्रेश हो कर आता हूँ आवर वो सब कहा है

मेनका जी .....अपनी अपनी शॉपिंग की हुए ड्रेस तरय कर राखी है रूम में

सूर्य ........ मेरा रूम कोनसा है बुआ जी आवर ये लीजिये मेडिसिन कंपनी के डाक्यूमेंट्स जो फूफा जी के नाम पे है ान पूरी कंपनी उनकी है

मेनका जी ...... हम तो इंडिया जा रहे है ान उन्हें कोण संभालेगा यहाँ कल हे सेल्ल के लिया न्यूज़ देती हूँ

सूर्य ......नहीं बुआ जी वैसे जेएनय तुम एक मेडिकल स्टूडेंट हो न

जेएनय ......आपको कैसे पता

पायल .....वो मैंने बताया था उन्हें

सूर्य ......बुआ जी मेरे ख्याल से कंपनी जेनी को हेंडओवर कर देनी चाइये बाकि फूफा जी से बात कर लीजिये

जेनी .......no no मैं कोई कंपनी हेंडल नहीं कर सकती हूँ ी ऍम मेडिकल स्टूडेंट

पायल ......वो सब बाद में देखना चाक पहले फ्रेश हो जाओ आवर अपना ड्रेस चेंज करलो सूर्य तुम मेरे रूम में रहोगे

मेनका जी .......बच्चो तुम सब फ्रेश हो आप आवर प्रीती मानसी जुली को भी खाने का बोल दो मैं डिनर लगाती हूँ

पायल जेनी सूर्य को अपने रूम में ले कर जाती है

पायल ..... ये लीजिये आपके कपडे साइड वाला रूम खाकी है उस में फ्रेश हो जाइये तब तक हम यहाँ फ्रेश हो लेते है

सूर्य वह से कपडे ले कर दूसरे रूम में नहाने के बाद कपडे बदल कर निचे चलना जाता है

कुछ देर बाद सभी डिनर पे मौजूद थे

विजय जी को भी बुआ जी उठा दिया था

विजय जी ..... बीटा सूर्य क्या वो सब सच था

सूर्य ......जी फूफा जी वो सब सच था आवर बाकि आपको बुआ जी बता देगी या कल जब सब चैलेंज तो पता चलना जायेगा इसी लिया माँ ने मुझे नहीं रोका

विजय जी ........ मतलब तुम सब काम ख़तम कर आये हो

मेनका जी ....... बीटा किसका है आप तो वाइज हे दर रहे थे आपकी कंपनी के डाक्यूमेंट्स बे ले कर आता है साथ में ान पूरी कंपनी आपकी है

वैसे सूर्य कहा रहा है की हम तो इंडिया जा रहे है

ऐसे में कंपनी बेचनी पड़ेगी पैर सूर्य चांटा है की कंपनी जेनी को हेंडओवर कर दे ताकि वो कंपनी सम्भालो सके

विजय जी ..... पैर इतना जल्दी सब कैसे होगा मुझे सूर्य की बात से कोई प्रॉब्लम नहीं है पैर अभी तो कंपनी पे केस है वो क्या

सूर्य ......वो सब हैट चूका है कल से कंपनी स्टार्ट कर सकते है आप जब चाहे जेनी को कंपनी चलने की परमिशन दे सकते है कंपनी आपके नाम पे हे रहेगी कंपनी में जो प्रॉफिट होगा उसका 25% जेएनय का बाकि 50 % आपका

विजय जी .....आवर 25 % उसका क्या

सूर्य .....25% जो बाकि बचता है वो ओल्ड आगे होम वह अनाथ ालयो के लिया होगा

विजय जी .....ठीक है बीटा मैं काम हे इस हिसाब से पेप्पेर्स त्यार करवाता हूँ बीटा जेएनय तुमने तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न

जेएनय .......आप ये सब क्यों कर रहे है मेरे लिया अंकल

मेनका जी .....क्युकी तुम भी मेरे लिया मेरी बेटी हो जेनी तुम्हारी माँ बहुत पहले हे चल बाशी आवर अब तुम्हारे डैड भी नहीं रहे

कल को तुमने किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े कोई तुम्हारा हालत फायदा न उठाये इस लिया आवर अगर तुम है नहीं करोगी तो वैसे भी कंपनी सेल्ल करनी पड़ेगी

प्रीती .....मन भी जाओ जेनी दी आवर वैसे भी इंडिया कोई दूर थोड़े है हम भी आपसे मिलने आते रहेंगे न आवर आप भी तो वह अस सकती है न

जेएनय ........ मुझे कुछ समाज नहीं अस रहा है मैं आपकी सुबह आंसर दूँ तो

विजय जी ......कोई बात नहीं बेटी तुम कंपनी सम्भालो सकती हो बहुत अच्छे से इस लिया हे सूर्य ने तुमने चुना है वर्ण ये नहीं तुम्हारा नाम सुग्गेस्ट नहीं कार्य अब डिनर करो डिनर ठंडा हो रहा है

सभी मज़े से डिनर फिनिश करते है कुछ देर गुप् सुप करने के बाद सभी रूम की आवर निकल जाते है सोने के लिया पायल सूर्य को अपने साथ हे सुलाना चाहती थी पैर सूर्य ने पायल को जेनी के साथ वक़्त बिताने को कहा आवर खुद दूसरे रूम में सम चला जाता है ........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............

u.s.a का कुछ भाग अभी शेष है जो नेक्स्ट अपडेट में आएगा ........
 
अपडेट. 185

प्रीती .....मन भी जाओ जेनी दी आवर वैसे भी इंडिया कोई दूर थोड़े है हम भी आपसे मिलने आते रहेंगे न आवर आप भी तो वह अस सकती है न

जेएनय ........ मुझे कुछ समाज नहीं अस रहा है मैं आपकी सुबह आंसर दूँ तो

विजय जी ......कोई बात नहीं बेटी तुम कंपनी सम्भालो सकती हो बहुत अच्छे से इस लिया हे सूर्य ने तुमने चुना है वर्ण ये नहीं तुम्हारा नाम सुग्गेस्ट नहीं कार्य अब डिनर करो डिनर ठंडा हो रहा है

सभी मज़े से डिनर फिनिश करते है कुछ देर गुप् सुप करने के बाद सभी रूम की आवर निकल जाते है सोने के लिया पायल सूर्य को अपने साथ हे सुलाना चाहती थी पैर सूर्य ने पायल को जेनी के साथ वक़्त बिताने को कहा आवर खुद दूसरे रूम में सम चला जाता है ........

अब आगे ..............


रात में जेनी वह पायल काफी समय तक सूर्य को में कर अपनी कॉलेज लाइफ को में कर बात करती रहती है

वही दूसरे रूम में कुछ आवर हे सीन बाबा हुआ था

विजय जी मेनका के लाभों को चूमते हुए हुए

उनके सुडोल स्तनों का मर्दन करनेमे लगे हुए थे

पैर मेनका जी को जैसी आज इन सब में कोई मज़ा नहीं आ रहा तहत

विजय जी ........ क्या हुआ मेनका तुम इतने दिन बाद मिली हो पैर अभी भी तुम यहाँ हो कर भी नहीं हो क्या हुआ है तुम्हे

मेनका जी ...... विजय जी आपको सब याद आ गया है आपको हे भी पता है की सूर्य कोण है आवर हमारा उस से रिस्ता क्या है

विजय जी .....देखो मेनका जो कहना है साफ साफ कहो

तुम्हे इतने सालो से जनता हूँ मैं तुम कह कुछ आवर रही हो आवर कहना कुछ आवर चाहती हो

मेनका जी ...... बात हे है अभी हम सब सूर्य के साथ इंडिया में नहीं रहते है कुछ दिनों से हम सब परीलोक में है

विजय जी ....... फिर जिस से में रोज बात करता था वो कोण थी

मेनका जी ..... वो भी मैं हे थी हम सब यहाँ से इंडिया नहीं परीलोक जा रागे है क्युकी सूर्य आवर किरण की सदी फिक्स हो है है पैर आप हे बात सूर्य किसी आवर को अभी मत बताना

विजय जी ....... क्या हे किरण वही है किरण है आवर क्या सूर्य को सदी का पता है

मेनका जी ........ है हे वही किरण है आवर सूर्य को अभी सदी का पता नहीं है वह चलने के बात उसे खुद से पता चलने दीजिये आप

विजय जी ......... क्या अभी भी हम सभी को राधा द्वारा मिला श्राप कायम है या फिर हम उस श्राप से मुक्त हो चुके है

इस दौरान विजय जी निर्वस्त्र मेनका जी के अंगो के साथ खेल भी रहे थे

विजय मेनका के नग्न तराशे हुए सरीर पे निचे आते हुए चूमने लगते है

मेनका जी....... क्या आपको दर है क्या की कही आपका जमाई आपकी बीबी को न ले ुढे

विजय मेनका की बात सुन मेनका को गर्ने लगता है

विजय जी ......कोण जमाई किसकी बात कर रही हो मेनका तुम

मेनका जी ....... आवर किसकी ुशी की जिसको देखते हे आपने पायल के लिया पसंद लिया था ुशी सूर्य की बात कर रही हूँ पायल आवर प्रीती दोनों उसे प्यार करती है साथ जूलिया आवर मानसी भी जो दोनों यहाँ आई हुई है

विजय जी चौंकते हुए

विजय .......क्या तुम सच कर रही हो मेनका देखो अगर ये मज़ाक है तो थिंक नहीं होगा

मेनका जी .......विजय ये कोई मज़ाक नहीं है

बाकि सभी की तरह पायल आवर प्रीती की सदी सूर्य से हे होगी गुरुदेव का यही आदेश है आवर मैं भी सहमत हूँ इस बात से मुझे मेरी बेटियों की ख़ुशी चाइये इसमें मैं आपकी भी नहीं सुनुँगी बता देती हूँ

विजय मेनका जी की बाल रहित योनि को मुँह में भर कर चुम लेता है

विजय ......मैं क्यों भला एतराज करूंगा मेरी बच्चियों से बढ़ कर मेरे लिया कुछ भी नहीं मैं वह जाते हे शिव शालिनी से बात करूंगा

वैसे किस किस की सदी सूर्य से होने वाली है

विजय जी अपने अकड़े हुए लॉन्ग को मेनका जी के योनि डिअर से डाटा कर अंदर कर देता है

जिस से मेनका जी के मुँह से कमुख मिश्रित सिसकारी चुत जाती है

आवर मेनका जी अपनी कमर उचका कर विजय के 6 इंच लम्बे लिंग को पूरा अपनी योनिकुंड में खिंच लेती है

मेनका जी .......उम्मम्मम अह्ह्ह्हह जितनी भी लड़किया है हमारे परिवार में उम्म्म्म अह्ह्ह्ह िस्स्सस्स आप अपना काम सुरु करो सभी की सदी सूर्य से होगी किरण सपना कोमल राधा पायल प्रीती अलीना जिनिशा पारिजात रिद्धि जीनत जूलिया मानसी सब की सब

विजय जी ......क्या कहा इतनी लड़किया आवर ये अलीना तो वही है न रुस्सियन लड़की

मेनका जी .......... आप देखे लगाए अलीना कोई आवर नहीं हमारी प्रिय है आवर जो कमल है वो आपको याद होगा नागलोक की राजकुमारी कोमल है

विजय जी 6,7 मिनट्स ुशी पोज़ में देखे लगाने के बाद मेनका जी के झड़ने से कुछ पल पहले हे अपना वीर्य मेनका जी की योनि में दाल कर उनपे पसर जाते है

मेनका जी झलती हुई उन्हें अपने ऊपर से हटा कर अपनी योनि को रगड़ने लगती है 5,7बार अपनी योनि के को रगड़ते हे मेनका जी की योनि में रुका हुआ कमरष बहने लगता है

विजय जी तो लेट जाते है पैर मेनका जी वह से उठ कर बाथरूम में जा कर अच्छे से अपनी योनि को साफ करती है

आवर नहाने के बाद बिना उंडेर्गारमेंट के निघ्त्य दाल कर लेट जाती है

सूर्य सुबह अपने समय पे उठा फ्रेश हो कर वह बंगले के बहार बैंक लोने में ध्यान में बेथ जाता है

कुछ देर ध्यान करने के बाद सूर्य की आँखे अच्चानक से खुल जाती है

क्युकी उसके शामे असुरगुरु द्वारा भेजा रकत सन्देश था

सूर्य ........ ओह्ह तो तुम हो कुछ समय रन नहीं सकते थे क्या

रकत सन्देश ........ जिस कार्य के लिया मेरी उत्पति हुई है मैं वही कर रहा हूँ असुरगुर का सन्देश है आपके लिया

सूर्य ......हम्म्म क्या सन्देश है

( यहाँ रकत सन्देश जो कहेगा वह असुरगुरु के सबद होंगे )

असुरगुरु ...( rakat.s .) पुत्र काल तुम्हारा लिया असुर महल से एक सुचना प्राप्त हुए है

नरकासुर अपने कुछ विशेष गुप्तचरों को बाकि लोको के साथ साथ परतविलोक पे भी भेज चूका है महाकाल अंश के विषय में ज्ञात करने हेतु

अभी तो परतविलोक पे उनसे कोई संकट नहीं है किन्तु तुम्हारा द्वारा की है किसी असदारन घटना के चलते वो तुम्हारे पीछे आ सकते है महाकाल अंश समाज कर इस लिया सावधान रहना पुत्र काल

मैं उन्हें तुम्हारा विषय हस्तक्षेप नहीं कर सकता क्युकी मैं वचनवद्ध हूँ अन्यथा मैं उन्हें रोक लेता

asurlok..asurguru

सूर्य .....धन्यवाद गुरुवार आपका जो आपने मुझे गुप्त सन्देश भेज कर समय रहते सावधान कर दिया

आप मेरी चिंता न करे मैं सावधान रहूँगा अगर आप अनयथा न ले तो मुझे बाकि लुक के विषय में सुच आईटी करे कहा नरकासुर द्वारा गुप्तचर भेजे गए है आवर आप भी सावधान रहे परनाम गुरुवार.

~ काल ~

सूर्य ......रकत सन्देश अब तुम जा सकते हो समय रहते सन्देश पहुंचने के लिया शुक्रिया रकत सन्देश

सूर्य के कहते हे रकत सन्देश वह से गायब हो जाता है

सूर्य फिर से ध्यान में भेट जाता है जो काफी लम्बा ध्यान चला कहा आज ध्यान करते समय सूर्य की कुछ डुंडले डुंडले दृश्य भी नजर आये जो आने वेक समय को डुंडली तस्वीरें थे या किसी अन्य स्थान पे वो घटना घटित हो चुकी थी

छत्तीसगढ़ रायपुर .......

सुबह गीता ठाकुर जल्दी हे उठ है थी क्युकी कल रात थकावट की बझा से बिना कुछ खाये पिए हे वह जल्दी सो है थी

इस लिया जल्दी हे नीड पूरी हो है आवर कुछ वजह भूख की थी जिसके चलते जल्दी आँखे खुल है

गीता ठाकुर इतने के साथ हे फ्रेश हो कर कपडे चेंज कर अजय के रूम में कॉल लिया पैर 3,4 बार कॉल करने पे भी अजय की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो

गीता ठाकुर अपने कपडे पीक कर अजय की रूम की तरफ निकल गई

वैसे भी कुछ देर बाद उन्हें यहाँ से निकलना हे था

दो तीन बात निक करने के बाद अजय ने नींद में हे रूम खोला आवर वापिस जा कर लेट गया

गीता ठाकुर जब रूम के अंदर पहुंची तो वह सराह की स्मेल आ रही थी जो बोतल भी बीएड पे हे पड़ी गीता ठाकुर को नजर आ गई थी

गीता ठाकुर ......अजय उठो आवर ये सब क्या है क्या यही सब करने यहाँ आते थे तुम जल्दी से खड़े हो कर त्यार हो जाओ

अजय .....सॉरी बड़ी मम्मी मेल अभी साफ करता हूँ

गीता ठाकुर ......ये सराह की बोतल आवर ये चिकन उठा के रख दो आवर जल्दी से फ्रेश हो जाओ तब तक मैं नास्ते का आर्डर देती हूँ

अजय फटाफट सब सामान उठा कर साइड में रख देता है आवर कपडे ले कर बाथरूम में गुस्स जाता है

ीदार गीता ठाकुर कॉल कर एक्स्ट्रा नास्ते का आर्डर दे देती है

कुछ हे देर बाद रूम बॉय नास्ता लगा कर वह से चला जाता है

गीता ठाकुर ......अजय जल्दी करो नास्ता ठंडा हो रहा है

अजय .....आया बड़ी मम्मी

2,4 मिनट्स बाद अजय अपने कपडे दाल कर बहार आता है आवर चुपचाप नास्ता करने लगता है

15 मिनट्स में दोनों नास्ता वगेरा फिनिश कर

वह से अपना समाज ले काउंटर पे पहुंचते है कहा दोनों रूम की के मैनेजर को सौंपते है

गीता ठाकुर ....... अजय इनसे पूछो की क्या हमें कोई कार रेंट पे मिल सकती है क्या

अजय .......बड़ी मम्मी कोनसी कार के लिया पुछु इनसे

गीता ठाकुर ......तू रहने दे मैं पूछती हूँ

hello मैनेजर जी क्या हमें यहाँ कोई अच्छी आरामदायक कार रेंट पे मिल सकती है जसपुर के लिया

मैनेजर ......मैडम कार तो मिल जाएगी आपको कोनसी कार चाइये

गीता ठाकुर ......कोई भी कार जो आरामदायक हो

मैनेजर .......वही तो मैं पूछ रहा आपको गुमने के लिया कार चाइये या किसी आवर काम के लिया

गीता ठाकुर ......वो जसपुर के हॉस्पिटल में मेरा बीटा एडमिट है उसका कुछ दिन पहले एक्सीडेंट हुआ था उसे यहाँ लेन के लिया कोई आरामदायक अच्छी कर रेंट पे चाइये थे

मैनेजर .......OK मैडम आप कुछ देर वेट कीजिये मैं आपके लिया अच्छी इनोवा बुक कर देता हूँ ड्राइविंग जानती है क्या आप

अजय .....ड्राइवर नहीं चाइये मैं अच्छे से ड्राइव करना जनता हूँ

मैनेजर ......... OK आप 10 ,15 मिनट्स वेट कीजिये

मैनेजर किसी को कॉल कर उस हिसाब से होटल के तरु कार बुक करता है

मैनेजर .....मैडम 10 मिनट्स में कार के आपको मिल जाएगी आपको अपनी ईद फ़ोन no. आवर 5000 रस मां करवाना होगा

गीता ठाकुर अपनी ईद फ़ोन no.our 5000 रस मैनेजर के पास मां करवा देती है

कुछ फॉर्मेलिटी के बाद ईद वापिस गीता ठाकुर को दे देता है

इतने में एक लड़का ाक कर के कार के मैनेजर को देता है

मैनेजर .........मैडम ये कीजिये आपकी कार के आप चेक कर कीजिये आपके लिया थिंक है की नहीं कार

मैनेजर गीता ठाकुर आवर अजय को बहार ले जाता है जहा एक टोयटा ब्लैक इन्नोवा कार कड़ी थी

मैनेजर .......मैडम यही कार है देख कर अच्छे से चेक कर लीजिये

अगर पसंद न हो तो दूसरी अर्रंगे कर देंगे

अजय दूर खोल कर अच्छे से चेक करता है आवर एक छोटा सा राउंड टेस्ट ड्राइव करता है

अजय ........ बड़ी मम्मी कार बिलकुल ठीक है भाई के लिया इसमें भाई को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी

गीता ठाकुर .....थैंक यू मैनेजर जी ये लीजिये

कहते हुए गीता ठाकुर ने 500 ,500 के 2 नॉट मैनेजर को दिए जिसे बड़ी ख़ुशी के साथ मैनेजर ने मुस्कुराते हुए जेब में रख लिया

अजय मैनेजर से जसपुर के लिया रास्ता पूछ कर गीता ठाकुर को ले कर वह से निकल जाता है जसपुर के लिया

परीलोक ....... चारो तरफ ख़ुशी आवर उत्साह का माहौल तो परीलोक में हमेशा हे रहता है

पैर आज कुछ ज्यादा हे खूबसूरत माहौल बना हुआ था परीलोक में

चारो तरफ परिया अपनी मैजिक स्टिक लिया परीलोक में गम रही थी अपने मैजिक की मदद से परीलोक को आवर भी खूबसूरत बनाने में लगी हुई थी

वही परिमहल भी अपनी खूबसूरत आभा लिया चमक रहा था

सभी महिलाये वह पुरुष साध्याय महल के मुख्या हॉल में सुसज्जित आसनो पे विराज मन थे

रानी पारी ..........पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण के सुबह विवाह परतविलोक के विधि अनुसार होना तय किया है गुरुदेव ने तो हमें विवाह की तयारी भी ुशी हिसाब से करनी होगी

दादी जी ...... है बेटी आपने ठीक कहा दोनों की सदी पुरे रीती रिवाज वह नियमो से होगी मैं अपने बेटे सूर्य की तरफ से शामिल रहूंगी आप सब अपना अपना देख लो किसकी वर पक्ष से शामिल होना है किसकी को वधु पक्ष से

गुरुदेव. ........ रैंक पारी विवाह के लिया एक महल आवर त्यार करना होगा वर या वधु पक्ष के लिया क्युकी परतविलोक के नियम असुरसर वर वधु की सभी रीती रिवाज अलग अलग स्थान पे होंगे

रानी पारी. ........पुत्री किरण की विवाह विधि परिमहल से हे होगी गुरुदेव

वर पक्ष के लिया हम नए महल का निर्माण कार्य आपको सौंपते है आप अपनी इच्छा अनुसार सूर्य महल का निर्माण कीजिये जो पूर्ण सवर्ण से निर्मित हो

दादा जी ......माफ कीजिये रानी पारी आप बेसक नए महल का निर्माण करवाए किन्तु सवर्ण महल नहीं

सवर्ण के मोह से तो ज्ञानी विद्वान् दसानन रवां भी नहीं बच पाया

गुरुदेव ....... आपने उचित कहा ठाकुर जी मेरा भी यही विचार है सवर्ण का प्रयोग उचित स्थान पे हो तो बेहतर है

रानी पारी ......उचित है फिर आप अपनी इच्छा अनुसार महल को रूप दे सकते है गुरुदेव है मेरी बाकि सभी पुत्रिया अपना अपनी अपनी इच्छा अनुसार नए महल के लिया अपनी इच्छा जाहिर कर सकती है आखिर रहना तो इन सभी को है उस महल में हेहेहे

शालिनी जी ......इसका मतलब आप भी स्वीटी की आवर से विवाह में शामिल होंगी रानी पारी

रानी पारी .......है शालिनी जी परीलोक की मान्यता हे यही है यहाँ पुत्र से आदिक महत्वता पूरी को दी जाती है भले हे पुत्र सूर्य हमारे लिया सभी पुत्रियों से भाड़ कर है किन्तु हम माँ के साथ साथ परीलोक की रैंक भी है जहा पुत्रियों का मन सामान पुत्र से आदिक लिया जाता है

गुरुदेव ......आपने उचित कहा किन्तु हम पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण दोनों के गुरु है इस लिया हमें तो दोनों तरफ से शामिल होना होगा

दादा जी ......आपको हे तो दोनों के विवाह के मंत्र पढ़ने है गुरुदेव

गुरुदेव ....... ये शोभाग्य हमें नहीं किसी आवर को मिला है ठाकुर जी

दादा जी .......किसी आवर को कोण है वो गुरुदेव

गुरुदेव ......परतविलोक के हिमालय में स्थित सिद्ध ऋषि ऋषिवर दूर्वा आवर उनके अनुज भ्राता ऋषिगण उन्हें पुत्री किरण वह पुत्र सूर्य के विवाह का दायित्व मिला है

दादा जी ......ये वही रिद्धि है न गुरुदेव जो सूर्यगढ़ हविले पधारे थे

गुरुदेव ........ है ये वही रिद्धि है परतविलोक में पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण के अंश का जो विवाह होने वाला है उसका दायित्व ऋषि सात्विक को मिला है आज सुबह हे सूर्यगढ़ वह सूरजगढ़ में इसकी चर्चा हो चुकी है

नानी जी .....गुरुदेव दोनों बच्चो की सगाई का मुहूर्त कब का है

गुरुदेव .......तीसरे दिवश को दोनों की सगाई है आप सभी अपनी तरफ से तयारी कर लीजिये मैं महल निर्माण कार्य सुरु करता हूँ

कुछ देर चर्चा करने के बाद गुरुदेव वह से निकल जाते है

बाकि सभी सगाई से जुडी अपनी अपनी तयारी देखने लगते है .........

मेनका होश u.s.a.... ....

सूर्य अपने ध्यान के बाद भी नहीं लोने में काफी देर बीटा अपनी हे सोच में डूबा हुआ था

तभी मेनका जी वह आती है

मेनका जी ......क्या हुआ सूर्य तुम यहाँ क्यों बे थे हो इस तरह

मेनका जी की आवाज सुन सूर्य का ध्यान मेनका जी की आवर जाता है

सूर्य ......कुछ नहीं बुआ जी बाद आइडे हे बैठा हुआ हूँ अभी अभी ध्यान लिया है तो यही बेथ गया

मेनका जी ........ ये लो कॉफ़ी पियो आवर बताओ बात क्या है

सूर्य ........ बुआ जी अगर हमें पता हो की कोई किसी के साथ कुछ गलत करने वाला है तो उस गलत करने वाले को अभी सजा देनी चाइये या हमें इंतजार करना चाइये

मेनका जी ....... बीटा बिना क्राइम के किसी को सजा नहीं दी जा सकती है भले हे हमें ज्ञात हो की कोई कुछ क्राइम करने वाला है

है हम अपनी तरफ से जिसके साथ गलत होने वाला हो उसके साथ गलत न हो हे सुनिश्चित भले हे कर सकते है

बिना पाप के दंड देना मतलब खुद पाप करना पैर तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो

आवर किसके साथ गलत होने वाला है

सूर्य ......कुछ नहीं बुआ जी है वाइज हे पूछ लिया

मेनका जी ......मां की मैं तुम्हे अपने कोख अस जनम नहीं दिया पैर प्यार तो उतना हे करती हूँ न जितना शालिनी करती है अब बता भी दे

सूर्य .......... आप अपना हाथ आगे कीजिये बुआ जी

मेनका जी को लगा सूर्य मजाक कर रहा है

पैर सूर्य के सीरियस चेहरे को देख बिना खुश बोले मेनका जी अपना हाथ आगे कर देती है

सूर्य अपनी मुठी बंद कर अपनी आँखे बंद कर मन हे मन मंत्र उच्चारण करता है

कुछ पल बाद सूर्य जब अपनी आँखे खोलता है तो उसकी आँखे हलकी सुनहरी हो चुकी थी

सूर्य मेनका जी हाथ थम कर बंद मुठी उनकी हथेली पे खोलता है जिसमे एक गोल्ड चैन थी जिसमे ों का पेन्डेन्ट था

मेनका जी ों पेन्डेन्ट को देख कर माथे से लगाती है

मेनका जी ......... ये किसके लिया है क्या वो इंसाने में हूँ

सूर्य .......... हाहाहा मेरे होते हुए आपको कुछ होने दे सकता हूँ क्या भला

ये एक सुरक्षा कवच है बुआ जी बुराई से बचने के लिया

मेनका जी ....... मेरे लिया नहीं है तो किसके लिया है ये सुरक्षा कवच सूर्य

सूर्य ......... जेनी के लिया है बुआ जी

मेनका जी ......क्या जेनी के लिया तुम्हारा मतलब है वो सकाश जेनी बेटी है जिसके साथ कुछ गलत होने वाला है

सूर्य ........ है बुआ काल साम दद के यहाँ जो हुआ है उस से जेनी पे खतरा आ सकता है ऐसा मुझे लग रहा है इस लिया आप उसे ये लॉकेट खुद अपने हाथो से पहनना बिना मेरा नाम लिया वो आपको मां नहीं करेगी आवर उसे भी सच नहीं बताना है की ये किस लिया है

मेनका जी ........ ठीक है बीटा जैसा तुम कहो मैं जेनी को खुद अपने हाथो से पहनाऊँगी पैर अगर उसे गलती से कही खो दिया तो

सूर्य ......ऐसा नहीं होगा बुआ जी एक बार ये पहन लिया किसी ने तो फिर खुद भी वो सकाश उसे उतर नहीं सकता है छह कर भी फिर भी उसे आप कह देना उसे उतरने की कोशिश न करे

मेनका जी .......चल अंदर चलते है नास्ता करलो फिर अपने फूफा जी के साथ तुम भी चलने जाना एक बार कंपनी में उनके साथ

सूर्य ........ठीक है बुआ जी

सूर्य .....मेनका जी के साथ वह स अंदर चला देता है

सूर्य आवर मेनका जी को जो सकाश ऊपर से देख रहा था वह भी खिड़की से हैट जाता है

सभी मिल कर नास्ता करते है

मेनका जी .......बेटी जेनी यहाँ आना जाता मेरे पास

जेनी मेनका जी के पास जाती है तो मेनका जी उसे वो पेन्डेन्ट पहना देती है

मेनका जी ......बेटी ये हमारे गॉड का सिंबल है उसे कभी उतरन नहीं ये तुम्हारा हमसे रक्षा करेगा एक माँ का प्यार है बेटी के लिया इसमें

जेनी ....... जी आंटी उसे मैं खुद से कभी अलग नहीं करूंगी गॉड प्रॉमिस

फूफा जी ......बेटी जेनी रेडी हो जाओ हमें कंपनी चलना है

मेनका जी .....जाओ बेटी त्यार हो जाओ तुम अपनी कंपनी में जा रही हो तो सबसे खूबसूरत तुम्ही लगनी चाइये वह पे आवर तुम भी त्यार हो जाओ सूर्य

सूर्य ......OK बुआ जी

कुछ देर बाद सूर्य विजय जी जेनी तीनो 2 कार से कंपनी की आवर निकल गए

बार बार जेनी सूर्य को देख रही थी

सूर्य ......क्या हुआ जेनी आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हो

जेनी ........ आंटी जी को ये गोल्ड पेन्डेन्ट आपने दिया था न

आप खुद भी तो मुझे दे सकते थे अगर इतनी हे पसंद हूँ मैं आपको तो

सूर्य .......किसी को चिप चिप कर देखना बाद हैबिट्स होती है जेनी

जेनी ........ हेल्ली मर .मैंने चिप कर नहीं देखा

वो तो वह बालकनी से आप दिख गए कही खोये उसे फिर आंटी जी वह आपके साथ बात करने लगी बस वही देख रही थी

सूर्य .......OK no प्रॉब्लम इस पेन्डेन्ट को हमेशा पगन कर रहना जेनी

जेनी .......उम्मम्मम्हा थैंक्स मर.

जेनी सूर्य के होंटो को चुम कर अपनी सीट पे बेथ जाती है

सूर्य ........ ये क्या था जेनी

जेनी ........कल मेरी जान बचने के लिया

थैंक्स कहा है मैंने

सूर्य ........ वो तो पायल ने बचाई थी मैंने थोड़े हे आवर अभी थैंक्स कहा तो फिर नाईट में क्या था

जेनी ...... नाईट से क्या मतलब

सूर्य ......... सूर्य तुम्हे क्या लगा मेरे रूम में कोई आएगा आवर मुझे किश करने चला जायेगा आवर मुझे पता भी नहीं चलेगा

जेनी .......यू मैं तुम जग रहे थे

सूर्य .......दूर खुलते हे जग गया था मैं तो है देख रहा था तुम क्या करती हो सोया हुआ समाज कर

जेनी ......... फिर नाईट को बताना चाइये था तुम्हारा बाद लक तुमने अच्छा चांस मिस कर दिया

सूर्य .......क्या वाकई में तुम्हे लगता है मुझे इस से फरक पड़ता है

नाईट में तुम जो कर रही थी वो तुम्हारा सेक्स हार्मोन्स की वजह से था न के लव या लिखे इमोशंस थे

जेनी .......यू अरे राइट मर. लास्ट नाईट ी वास् वैरी हॉर्नी

रात को जब तुम्हारे रूम में आई तुम्हे किश किया उस वक़्त तक मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती थी बूत जैसे हे तुम्हे किश किया मैं शॉकेड हो गई

सूर्य ......... क्या मतलब शॉकेड हो गई ऐसा क्या हुआ

जेनी ........तुम्हे किश करते हे में रिलीज़ हो गई मुझे खुद समाज नहीं आ रहा है की ये हुआ कैसे

सूर्य ........अरे यू वर्जिन जेनी

जेनी ......... हाहाहा ये u.s.a है मर .यहाँ 70% गर्ल्स 17 इयर्स में वीरगिनती लूज़ कर देती है

ी ऍम नॉट वर्जिन बूत ी हैवे no रियल सेक्स एक्सपीरियंस

सूर्य ....... फिर कैसे

जेनी ......... सेक्स टॉयज सायद यही कंपनी है जहा हमें पहुंचना था

सूर्य .......हम्म्म

जेनी ........ कैन यू फ़क में फॉर रियल फन सूर्य

सूर्य .......हम्म्म no बेटर लक नेक्स्ट टाइम

जेनी ......... मुझे इन्तजार रहेगा नेक्स्ट टाइम का उम्म्म्मः

जेनी सूर्य को किश कर कार से उतर जाती है सूर्य कार पार्क्स कर जेनी को साथ ले building's में एंटर कर जाता है ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................

दोस्तों कल सायद कोई अपडेट नहीं आएगा

कुछ काल आ गया है जल्दी पूरा हुआ तो कोशिश करूंगा अपडेट देने की ........
 
आप सभी को जो परेशानी हुई उसके लिया माफी चाहता हूँ

अपडेट साम तक पोस्ट करूंगा दोस्तों

दोस्तों आप सभी से रिक्वेस्ट है की किसी को आगे स्टोरी रिलेटेड कुछ भी बुरा लगे तो आप मुझसे साफ साफ कहो की आपके इस अपडेट में इस पोस्ट से मुझे प्रॉब्लम है मैं उसे हटा दूंगा या चेंज कर दूंगा ........
 
अपडेट. 186

सूर्य ........अरे यू वर्जिन जेनी

जेनी ......... हाहाहा ये u.s.a है मर .यहाँ 70% गर्ल्स 17 इयर्स में वीरगिनती लूज़ कर देती है

ी ऍम नॉट वर्जिन बूत ी हैवे no रियल सेक्स एक्सपीरियंस

सूर्य ....... फिर कैसे

जेनी ......... सेक्स टॉयज सायद यही कंपनी है जहा हमें पहुंचना था

सूर्य .......हम्म्म

जेनी ........ कैन यू फ़क में फॉर रियल फन सूर्य

सूर्य .......हम्म्म no बेटर लक नेक्स्ट टाइम

जेनी ......... मुझे इन्तजार रहेगा नेक्स्ट टाइम का उम्म्म्मः

जेनी सूर्य को किश कर कार से उतर जाती है सूर्य कार पार्क्स कर जेनी को साथ ले building's में एंटर कर जाता है ............

अब आगे ..........

असुरलोक .......... असुरराज नरकासुर इस वक़्त अपनी राजसभा में अपने असुर सिंघासन पे बैठे हुआ था

वही कुछ आवर असुरो के साथ साथ कंटकासुर वज्रासुर भयासुर नीलसूर वह असुरगुरु भी असुर सभा में मौजूद थे

असुर गुरु की दृस्टि बार बार कंटकासुर पे जा कर रुक जाती

कंटकासुर इस बात से भली भाटी परिचति था की उसके पिता असुरगुरु बार बार उसे देख रहे है

नरकासुर ........ गुरुदेव पुत्र कंटकासुर ने राजकुमारी विसुद्धि वह राजकुमारी नगीना के विवाह हेतु असुर वीरो में से 2 असुरवीरो का चुनाव किया है

असुरगुरु ........ असुरराज दोनों राजकुमारिया विवाह योग्य हो चुकी है एक भाई होने के नाते पुत्र कंटकासुर ने उचित निर्णय लिया है किन्तु क्या दोनों वर राजकुमारियों के लिया उचित है

नरकासुर ........ यही जानने के लिया हमने उन्हें यही आमंत्रित किया है असुरगुरु आपसे अनुरोध है की आप उनकी परीक्षा ले की वो दोनों राजकुमारियों के योग्य है की नहीं हम जानते है आपको बहुत से कार्य है आपको परतविलोक भी लौटना है

असुरगुरु ....... जैसा आप कहे असुरराज हम कुछ समय पश्चात परतविलोक लौट जायेंगे आप चिंता न कीजिये

नीलसूर ......असुरगुरु हमने सुना है की परतविलोक पे आज भी दिव्यास्त्र मौजूद है जिनका प्रयोग महाभारत काल में हुआ था

असुरगुरु ...... है पुत्र नीलसूर परतविलोक में आज भी बहुत से दिव्यास्त्र मौजूद है जिनका प्रयोग अनेको बार हुआ है फॉर चाहे वो कौरव वह पांडवो का योध हो या फिर राम आवर रवां का योध हो इन योद्धा में जो वीर योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए थे उनके कुछ दिव्यास्त्र आज भी परतविलोक में गुप्त स्थानों पे सुरक्षित है

नीलसूर ........ क्या उन्हें प्राप्त करने का कोई मार्ग है असुरगुरु

असुरगुरु ........ मार्ग तो वही है पुत्र जो पहले से तुम जानते हो है अगर कोई दिव्यास्त्र अपनी इच्छा से किसी को अपना दरक चुनता है तो बिना तप के दिव्यास्त्र प्राप्त किया जा सकता है किन्तु उसके लिया सवयं दिव्यास्त्र अपने दरक की परीक्षा लेता है की वो इस दिव्यास्त्र योग्य है की नहीं

असुरगुरु ....... पुत्र कंटकासुर उन्हें आपने में विलम होगा क्या

कंटकासुर ........असुरगुरु अभी उन्हें कुछ समय आवर लगेगा

असुरगुरु ......असुरराज कुछ समय के लिया आज्ञा चाहता हूँ मैं कुछ समय में लौट आऊंगा

नरकासुर ......आप कहा जा रहे है गुरुदेव

असुरगुरु ....... किसी विशेष कार्य हेतु मुझे जाना होगा कुछ समय पश्चात मैं लौट आऊंगा

नरकासुर .....जैसा आप उचित समजे गुरुदेव

असुरगुरु वह से निकल रहे थे तभी उनका सामना द्वारिका वह नगीना विसुद्धि से होता है

नगीना .......परनाम गुरुदेव

विसुद्धि .......परनाम गुरुदेव

असीरगुरु ........कल्याण हो पुत्री विसुद्धि पुत्री नगीना

द्वारिका ......परनाम गुरुदेव आप कही जा रहे है क्या

असुरगुरु द्वारिका के परनाम करने पे उन्हें बड़े हे गौर से देखते है

असुरगुरु ........ जी महारानी जी किसी कार्य हेतु बहार जा रहा हूँ

द्वारिका ........ गुरुदेव पुत्री विसुद्धि आवर पुत्री नगीना के विवाह हेतु वर का चुनाव हो रहा है आवर आप है की महल से जा रहे है

असुरगुर ....... हम सिगरा हे लौट आएंगे महारानी द्वारिका ( इन तीनो से ये कैसी ऊर्जा निकल रही है पापयुक्त विनाशकारी हमें इसका पता करना होगा पुत्र कंटकासुर से भी यही ऊर्जा हमने मह्सुश की थी आखिर असुर महल में हो क्या रहा है )

द्वारिका मुस्कुराते हुए असुरगुरु को देखती

द्वारिका ....... गुरुदेव क्या आप हमें हमारे द्वारा किये गेट अपमान को भुला कर हमें क्षमा नहीं करेंगे हमने अपने असुरलोक महारानी होने के अहंकार में वसीभूत हो कर आप जैसे दिव्या तेजस्वी गुरु का अपमान किया हमें क्षमा कर दे गुरुदेव

द्वारिका के के बाद एक जटके असुरगुरु को दे रही थी

द्वारिका की बात सुन असुरगुरु का यकीं आवर भी पका हो रहा था की जरूर कुछ बहुत बड़ा सडयंत्र रचा जा रहा है

असुरगुरु ....... आपने कस्मा मांग ली हमने आपको क्षमा किया महारानी द्वारिका हम अभी जल्दी में है आपसे जल्द मुलाकात होगी

असुरगुरु आगे कुछ भी सुने बिना वह से गायब अपनी उस गुफा में पहुंचते है जहा मानसी के साथ उन्होंने काफी समाया बिताया था

असुरगुरु ........... ये हमारा भरम नहीं हो सकता है कुछ तो ऐसा सडयंत्र रचा जा रहा असुरमहल में जिससे हम अनभिज्ञ है या हमारी नजरो से चुपैआ जा रहा है हमें यही असुरलोक में रह कर हमें इसकी तह तक पहुंचना होगा

द्वारिका के सवभाव में अच्चानक से परिवर्तन आना हमें किसी बहुत बड़े सडयंत्र के आसार लग रहे है

किन्तु कैसे है माँ पहल भैरवी हे हमें कोई मार्ग सुजा सकती है

तभी असुरगुरु के सामने रकत सन्देश प्रकट होता है

रकत सन्देश ....... असुरगुरु के लिया काल का सन्देश

असुरगुरु ........ क्या सन्देश है पुत्र काल का

रकत सन्देश सूर्य ( काल ) का सन्देश असुरगुरु को देता है

असुरगुरु ....... पुत्र काल को अन्य लुक में स्थित असुर गुप्तचरों के विषय में क्यों जानना है

उसे इसकी क्या आव्सय्कता ाँ पड़ी खेर अभी ये विषय इतना महत्व पूर्ण नहीं है

असुरगुरु रकत सन्देश को बाकि लोको में स्थित असुर गुप्तचरों के विषय में जानकारी देते है

रकत सन्देश वह से गायब हो जाता है

असुरगुरु वही गुफा में मौजूद एक गुप्त मायावी कक्ष में चले हेट है

जहा माँ पहल भैरवी की सवर्ण पार्टमा सुसज्जित थी

असुरगुरु वही माँ पहल भैरवी के समक्ष बेथ कर ध्यान करने लगते है

वही असुरमहल से असुरगुरु के ंजकलते हे कंटकासुर वह द्वारिका दोनों असुर महल से निकल कर गायब हो गुफा में पहुंचते है

द्वारिका ....... कंटकासुर तुम्हारे पिता को हम पे संदेह हो चूका है उन्हें रोकना होगा अनयथा तुम कभी असुरराज नहीं बन पाओगे न तुम्हे महामहिम की असीम सकतिया प्राप्त होंगी

कंटकासुर ........ ये आप क्या कहा रही है पिता श्री मुझे असुरराज बनने से क्यों रोकेंगे

द्वारिका....... मूरखता मत करो कंटकासुर तुम भूल रहे हो तुम्हारे पिता असुरगुरु भी है जिन्होंने अपनी पत्नी की हत्या के परतशोद तक को बुला दिया था अपने असुरगुरु पढ़ के लिया

क्या तुम नहीं जानते तुम्हारी मैट्स का वध असुरराज नरकासुर द्वारा हुआ था जिन्हे तुम्हारे पिता ने क्षमा कर दिया था

वो तुमसे कही ज्यादा अपने पढ़ के पार्टी वफादार है

द्वारिका कंटकासुर को भर्मित करने में कामयाब हो जाती है

कंटकासुर ........ आप उचित कह रही है हमें पिता श्री को सत्य पता नहीं चलने देना है

द्वारिका ........ फिर इन्हे इसी गुफा में कुछ समय के लिया कैद कर दो विवाह के पश्चात ये स्वयं मुक्त हो जायेंगे ( एक बार महामहिम को अपना उद्देश्य पूर्ण होने दो फिर तुम्हारी भी उन्हें जरुरत नहीं होगी न तुम्हारे पिता से कोई खतरा होगा )

कंटकासुर ....... किन्तु वो मेरे पिता है उन्हें किसी तरह की पीड़ा नहीं होनी चाइये आवर असुरराज ने उन्हें महल आने को कहा था फिर वो कैसे वह उपस्थित होंगे

द्वारिका ........उन्हें कोई पीड़ा नहीं होगी आवर वो असुरमहल में भी उपस्थित होंगे जब महामहिम मुझे नकली द्वारिका बना सकते है तो मायावी असुरगुरु बनाना कोई कठिन कार्य नहीं है (असुरगुरु को तो ज्ञात भी नहीं होगा कुछ पहले भी तो उनके साथ ऐसा हो चूका है तुम्हे इस मार्ग पे पहुंचने वाले महामहिम थे न की तुम्हारे पिता असुरगुरु हेहेहे )

द्वारिका .....कुछ मंत्रो का जप कर गुफा को सुरक्षा घेरे में कैद कर देती है

कंटकासुर ........क्या पिता श्री की ये सुरक्षा घेरा कैद में रख पायेगा

द्वारिका ........ है क्युकी ये मायावी कैद महामहिम की ऊर्जा से बानी है असुरगुरु के लिया असंभव नहीं तो आसान भी नहीं है यहाँ से मुक्त होना

द्वारिका आवर कंटकासुर कुछ समय पश्चात वह से महल के लिया लौट गेट उनके जाते हे गुफा के बहार मायावी असुरगुरु प्रकट होता है

एक बार गुफा पे नजर डालने के पश्चात वह भी असुरमहल की आवर भाड़ चला

असली असुरराज गुफा में कैद हो चुके तो इस सडयंत्र से अनजान वो माँ पटल भैरवी के पूजा ध्यान आदि में लीं थे ...........

सूरजगढ़ ...........

गुरुदेव के आदेश पे ऋषि सात्विक सूरजगढ़ उनके साथ हे पहुंच चुके थे आवर दोनों पक्षों ( दादा जी नाना जी ) के सामने विवाह वह सगाई की तिथि पे चर्चा हो चुकी थी

सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ दोनों हवेली में विवाह की तयारिया सुरु हो चुकी थी

कुछ लोग इस विवाह के पक्ष में नहीं थे जो सामने से तो मुँह पे कुछ कहते नहीं पैर पीठ पीछे दोनों परिवार की बुराई भी कर रहे थे

ऐसा होना लाज़मी भी था क्युकी वर बधु का रिस्ता हे ऐसा था रिश्ते में दोनों भाई बहिन जो लगते थे

संजय ........ पापा कुछ लोग इस रिश्ते से खुश नहीं है

उनका मन्ना है की दोनों भाई बहन है

जोरावर ( ज. मां जी ) ........ मुझे किसी से कोई मतलब नहीं है संजय भाड़ में जाये वो लोग जो इस रिश्ते से न खुश है

मुझे मेरी बेटी की कृषि प्यारी है आवर कुछ नहीं

मैं वो बाप नहीं बन सकता जो अपनी बेटी की खुशियों के साथ उसका गाला घोट दे

मेरी दोनों बेतिया मेरा अभिमान है उनकी ख़ुशी के लिया किसी के सामने अपना सर जुखा सकता हूँ आवर जरुरत पड़ी तो उनकी ख़ुशी के लिया किसी का सर काट भी सकता हूँ

संजय ........भाई सा ऐसी बात नहीं है

j.mama जी ...... तुम विवाह की तयारी करो संजय बाकि ऐसे बातो पे ध्यान मत दो जिसको जो बोलना मुझसे आ कर बोले मैं दूंगा जबाब उन्हें

नाना जी ........ बीटा संजय जोरावर ठीक कह रहा है

प्रेम के चलते तो अर्जुन ने सुभद्रा से विवाह किया था

रिस्ता तो उनका भी भाई बहिन का था फिर इस समाज ने उन्हें भी तो स्वीकार किया था

लोगो का काम है कुछ न कुछ कहना हमें अपना करम करना चाइये उन्हें उनका करम करने दो जोरावर सब संभल लेगा आवर है बच्चो के सदी में कुछ भी कमी नहीं होने चाइये आसपास में पहले ऐसे सदी न किसी ने की होगी न किसी देखी होगी ऐसी होनी चाइये ये सदी

j.mama ....... आप चिंता न करो पापा मैंने सब देख लिया है क्या करना है कैसे करना है

सदी हे नहीं सगाई भी बहुत दम डैम से करूंगा मई

नाना जी ........ ठीक है बीटा जोरावर अपनी सभी िछाये पुत्री कर बतातुमहे कोई नहीं रोकेगा

संजय ....... ठीक है पापा मैं विजय को कॉल कर देता हूँ कुछ टाइम के लिया वो भी चुटी ले कर आ जायेगा

जरवर ....... मैंने पांडेय जी को कॉल कर दिया है वो कल तक अपने परिवार के साथ यहाँ होंगे विजय भी कल आएगा मैं सबको ले कर सहर जा रहा हूँ पापा सभी की शॉपिंग के लिया आवर बाकि सभी जरुरी सामान के ऑर्डर्स आज हे दे देता हूँ

नाना जी ....... ठीक है बीटा संजय तुम भी जाओ मैं जरा सूर्यगढ़ हो कर आता हूँ अपने समधी से मिल कर

j.mama जी ......रुकिए पापा मैं भी चलता हूँ

संजय ....... आप तो सहर जा रहे थे न

J.mama जी ........ सहर हे जाऊंगा वह से भी तो लोग जायेंगे सदी की शॉपिंग के लिया तो दोनों परिवार साथ में शॉपिंग करने चले जाये तो आवर ज्यादा ाचा रहेगा

नाना जी .......है बीटा तुमने सही सोचा इस तरह शॉपिंग भी हो जाएगी आवर बचे खुल कर अपनी पसंद की शॉपिंग कर लेंगी वह कोमल है राधा है अलीना मेर्री आवर भी है दोनों को अच्छा लगेगा वह

j.mama जी...... जी पापा आप वह कॉल करने सभी को त्यार होने कबूल दिज्ये मैं बाकि लोगो को बताता हूँ

j.mama जी ....... बैठक से अंदर की आवर चल दिए नाना जी हवेली no. मिलाने लगते है

वही सूर्यगढ़ में भी महल ऐसा था साइड की तयारी यहाँ भी जोर शोर से की जा रही थी सभी बहुत खुश थे इस पीढ़ी की पहली सदी जो थी

दादा जी ...... सुनती हो ठकुराइन जल्दी हे दादी सास बैनर वाली है आप

दादी जी ...... बहु नहीं पोती घर आ रही है समजे आप अपने ये ख़याली फुलाव पकाना बंद कीजिये आवर सदी की तयारी कीजिये

दादा जी ........ तुम तो सचमुच ठकुराइन बन आर्डर देने लगी

शिव ......... ठकुराइन भी तो आपने हे बनाया है पापा माँ सा को अब ऑर्डर्स तो लेना हे पड़ेंगे

दादा जी .......तुम सब मिले हुए हो है एक सूर्य हे है मेरा कायाक बीटा आने दो उसे फिर तुम सबकी लाइन लगवाता हूँ

दादी जी ....... कही वो उल्टा आपकी न लगा दे लाइन उसे अभी तक किसी ने नहीं बताया है सदी के बारे में

शिव ......... बताना भी नहीं माँ सा उसे यहाँ आने दो उसके बाद बताना कुछ

अभी ये लोग बात कर रहे थे की दादा जी के रूम में रखा लाड़लिने फ़ोन बजने लगता है

शिव आगे भाड़ फ़ोन रेसिवेद करता है

शिव .......hello पापा जी कैसे है आप

नाना जी .......कोण शिव बीटा मैं अच्छा हूँ हवेली पे सब कैसा चल रहा है

शिव .......वही सब सदी की तयारी में लगे है पापा जी

नाना जी .....अच्छा शिव बीटा वो यहाँ से सब शॉपिंग के लिया जा रहे है तो वह भी बच्चियों को बोल दो सब त्यार रहे

शिव ......ठीक है पापा जी आप लोग यही आ जाइये हम भी साथ चलते है

शिव बात करने के बाद कॉल डिसकनेक्टे कर देता है

शिव ......पापा जी सूरजगढ़ से कॉल था वो लोग सदी की शॉपिंग के लियाजा रहे है तो वो चाहते है की सभी एक साथ चले आप क्या कहते है

दादी जी ........ इसमें कहना क्या है सभी बचो को त्यार होने का बोल दो सब साथ जायेंगे तो आवर भी अच्छा होगा महेंद्र को बोलो की आज मॉल बाकि लोगो के लिया बंद करवा दे किसी को कोई परेशानी नहीं होने चाइये समाज गेट

शिव .......जी माँ सॉ समाज गया

दादा जी .....तो जाओ भरखऊडर खड़े क्यों हो ठकुराइन का आर्डर नहीं सुना क्या

शिव मुस्कुराते हुए हॉल की आवर भाड़ चला

उनके पीछे पीछे दादा जी बहार लोने में निकल जाते है

आवर दादी जी भी मुस्कुराते हुए हॉल में चली जाती

शिव ....... पापा जी का कॉल आया था शॉपिंग के लिया सभी को एक साथ जाना है तो आप सब त्यार हो जाओ

रेखा जी ......क्या अभी शॉपिंग के लिया

दादी जी ........ रेखा बेटी सगाई में ज्यादा समय नहीं है हमारे पास तो जो भी करना है जल्दी हे करना पड़ेगा आवर अभी सिर्फ सगाई के कपडे गहने आवर बाकि जो सगाई में जरुरत हो वही शॉपिंग करनी है

बाकि सदी के लिया महेंद्र को बोल देना नया अच्छा स्टॉक मंगवा ले

रेखा जी ....... जी माँ सा आवर उन्हें आप हे बोलिये आपकी बात वो जल्दी मन जायेंगे

वैसे भी आप भी तो चल रही है शॉपिंग के लिया आप वही पे उन्हें बता देना कैसा क्या मंगवाना है

दादी जी ........ठीक है तुम सब त्यार हो जाओ आवर बचो को भी बोल दो वो लोग आते हे होंगे

दिल्ली .......

वही कल दोपहर में सूर्य को एयरपोर्ट ड्राप करने के बाद

दीप्ती एयरपोर्ट से सीधा माया सानिया से मिलने उनके हॉस्टल की आवर निकल जाती है

दीप्ती पहले भी हॉस्टल अस चुकी थी आवर पुलिस कार देख कर वैसे भी उसे कोई रोकता नहीं

दीप्ती हॉस्टल के पार्किंग में कार पार्क कर सीधा हॉस्टल में सानिया के रूम के सामने जा पहुंची

दो तीन बार निक करने पे रूम का दूर सानिया ने खोला

सानिया .......दीप्ती दीदी आप यहाँ वो भी इस वक़्त

दीप्ती ......... दूर पे हे खड़ा रखेगी क्या अंदर तो आने दे कितनी गर्मी है बहार

सानिया ......सॉरी दीदी आइये अंदर आये

दीप्ती रूम में आ कर एक की ठंडी हवा में रहत की साँस लेती है

आवर वही सानिया के बीएड पे लम्बी हो जाती है

सानिया........ क्या बात है दी आज आप ड्यूटी पे नहीं है क्या

दीप्ती ......है सानिया आज मैं ऑफ डे लिया हुआ था आवर अच्छा हे हुआ ड्यूटी पे नहीं गई तो अभी एयरपोर्ट से लौट रही थी तो सोचा तुम सब के साथ थोड़ा टाइम सपेद कर लूँ

सानिया ....... ऐसा क्या अच्छा हो गया है आज दीदी जो आप इतनी खुश है कही कोई मिल तो नहीं गया है एयरपोर्ट पे

दीप्ती ......है ऐसा हे कुछ वैसे ये मायावी कहा है नहीं रही है यहाँ पे

सानिया ......... आप बात मत गुमाये बताये कोण है वो जिससे मिल कर आप इतनी खुश है आवर माया बाथरूम में है वो नाहा रही है अभी कॉलेज से आये है न तो

दीप्ती .......वो क्या है की राधिका भाबी की माँ को लेने एयरपोर्ट गई थी तो वह सूर्य आवर उसकी बुआ सावह बहनो से मुलाकात हो गई थी

सानिया ....... कहा है सूर्य क्या वो भी आपके साथ आया है

दीप्ती ....... नहीं सानिया वो u.s.a निकल गया अभी उसे हे ड्राप कर ीदार आई हूँ

सानिया ....... क्या वो बिना मिले हे चला गया

दीप्ती ........ उसे सायद जल्दी थी सानिया वो तो बड़ी मुश्किल से मैंने उसे मनाया की जब तक फ्लाइट का टाइम बाकि है घर चलो तहत पे भी बस कुछ देर रुकने के बाद वो चले गेट

तभी बाथरूम से माया बहार निकलती है गुनगुनाते हुए

माया ......कोण आया है सानिया....





माया की आवाज सुन दीप्ती की नजर बाथरूम से निकलती माया पे पड़ती है जो की बिंदास ब्रा पंतय में बाथरूम से बहार गुनगुनाते हुए निकली थी

दीप्ती .......क्या बात है माया हॉस्टल लाइफ के पुरे मज़े किये जा रहे है

माया .......क्या दीदी यहाँ हम दोनों के अलावा कोण रहता है कभी कबर आप या फिर संधि यहाँ आती है

वैसे भी गर्मी बहुत है बहार दीदी

दीप्ती ........ मुझे तो तुम्हारे अंदर गर्मी कुछ ज्यादा लग रही है बहार की गर्मी से

माया वही अपने बीएड पे राखी मिनी निघ्त्य दाल कर मुस्कुराते हुए दोनों को ज्वाइन करती है

माया ........ आज आप ड्यूटी नहीं है दीदी

दीप्ती ....... नहीं यार तभी तो इस वक़्त मिलने चली आयी वैसे खुद को काफी फिट रखा है माया तुमने

माया ........थैंक्स दीदी आवर तुम्हारे चेहरा क्यों उतरा हुआ है सानिया कोई प्रॉब्लम हुई है क्या

सानिया ........ कुछ नहीं है ऐसे हे माया

दीप्ती ......... मैं बताती हूँ सूर्य इस से मिले बिना चला गया न इस लिया ये उदाश है

माया .......वो कब आये यहाँ

सानिया ......... आया भी आवर आ कर के u.s.a चला भी गया हुन्न

दीप्ती ......सानिया ऐसे नाराज नहीं होते उसके वाकई में काम था आवर फिर उसके साथ उसकी बुआ आवर बहने भी तो थी

कुछ देर हंसी मजाक के बाद डेरी डेरी सानिया का मूड भी ठीक हो गया कुछ 2 हे का समय बीती कर दीप्ती हॉस्टल से घर को निकल जाती है

माया ......... यार सानिया अब नहीं रुका जाता कुछ कर न यार

सानिया ....... क्या कृ यार तुम तो जानती हो वो यहाँ आता नहीं हम वह जा नहीं प् रहे है

माया ........ कोई प्लेन बना न यार वो यहाँ नहीं आ सकता है तो क्या हुआ हम चलते है वह

सानिया ........ मुझे तो कुछ समाज नहीं आ रहा तुम हे सोचो कुछ मैं तुम्हारे साथ हूँ

माया ......... ठीक है फिर मैं हे कुछ प्लान करती हूँ

चल एक राउंड करते है यार

सानिया ......अभी मूड नहीं है नाईट में करना अभी दोने दे

माया अपनी माइटी उतर पंक्ति है आवर सानिया के होंटो को चूमने अगति है

कुछ देर न नुकुर के बाद दोनों का सरीर पुत्री तरह नग्न अवस्था में नाग नागिन के जैसे एक दूसरे से चिपके हुए थे





कुछ डिअर बाद माया सानिया को वही पास में रखे सोफे पे लेता कर उसकी बाल विहीन छोटी से मुनिया को अपनी मच में भाड़ कर चाटने लगती है





सानिया ........ उम्मम्मम्म इस्स्स्सस्स माया तुम नहीं मानोगी न पता नहीं तुम्हारे अंदर कितनी आग है

हर वक़्त छूट में खुजली मशीन रहती है

कुछ देर माया सानिया की छूट के लिप्स को अच्छे से चुस्ती है

जिस से खुश हो कर सानिया माया को अपने सुपर आने का इसरा करती है

माया को यही तो चाइये था माया ख़ुशी ख़ुशी अपनी रसभती छूट सानिया के गुलाबी होंटो पे रख कर सानिया चित पे अपनी कलाकारी दिखने लगती है





दोनों इस मज़े के आलम में डूबती जा रही थी

निरन्तर दोनों के मच से मैडम कमउम सिसकारियां निरंतर निकल रही थी

माया ने डेरी डेरी सानिया के गुदाद्वार को अपने नाखुनो से कुरेदना सुरु किया तो माया को अपनी योनि पे सानिया की गतम जुबान तेजी से चलती मह्सुश हुई

सानिया ने माया को पलट कर निचे किया आवर खुश सुपर आ कर माया की चित में अपनी जुबान गुस्सा दी





कुछ हे देर में माया का सरीर आकद जाता है आवर कुछ बुँदे जो माया की योनि से निकली थी सानिया उन्हें चाट कर साफ कर देती है

सानिया ........तुम्हारा तो हो गया अब मेरा क्या हद बार मेरी छूट में आग लगा कर लुढ़क जाती हो





माया सानिया को वही सोफे पे लेता कर अपनी उखड़ी हुई सांसो के साथ सानिया की योनि को चाटने लगती है

सानिया ...... उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह माया जल्दी कर यार

माया ......मेरी बुलबुल अभी तो मां कर रही थी अभी जल्दी करने को कह रही है





सानिया ......उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह एमी उस वक़्त उम्. मेरा मन नहीं था पैर तुम नहीं मणि

अब मुझे गरम कर के ये कह रही हो ये हुवा वो हुआ

माया ने जैसे हे अपनी जुबान को तीखा कर सानिया की योनि में गुस्सा या तो सानिया के सरीरी में कपकपी की लहार से दौड़ गई

सानिया के मुँह से निरंतर सिसकारियां तेज होती गई

कुछ हे पालो में एक तेज पिचकारी सानिया की योनि से तरल की निकली आवर सीधा माया के चेहरे पे गिरी

माया .......यार सानिया कभी कभी तो मुझे यकीं नहीं होता की हम दोनों कुछ दिन पहले इन सब से कितने देय थे आवर अभी देखो

सानिया ......हूँ ये सब तेरे करम हुहा है हर बार तू मुझे गरमा कर छोड़ देती थी

माया .......कुछ भी बोल यार पैर इसका मज़ा भी बुरा नहीं है

सानिया .......है पैर उस जैसा नहीं जब वो अंदर जाता है तब वो फाइलिंग कैसी होगी यार

माया .......तभी तो कहती हूँ कुछ कर टेकिंग पता तो चले की असली सेक्स में क्या मज़ा है

सानिया .....इस बार मिलने दे उसे कुछ भी करने अपनी सील तुड़वानी हे है मुझे

माया ....... मुझे मत भूल जाना हम दोनों साथ में एक हे बाद पे सील तुड़वाएंगे वो भी एक दूसरे के सामने

सानिया ....... अब तुमसे क्या छुपाना पैर उसे भी तो मंजूर होना चाइये

माया ........ आने तो दो इस बार आपने एरिया में उसे

दोनों कुछ देर बात करने के बाद जहा कर बापदे बदल कर अपनी स्टडी में लग जाती है

इन दोनों के बिच जो सरम थी जो दिवार थी वो बहुत पहले हे गिर चुकी थी ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................
 
अपडेट. 187

माया .......कुछ भी बोल यार पैर इसका मज़ा भी बुरा नहीं है

सानिया .......है पैर उस जैसा नहीं जब वो अंदर जाता है तब वो फाइलिंग कैसी होगी यार

माया .......तभी तो कहती हूँ कुछ कर टेकिंग पता तो चले की असली सेक्स में क्या मज़ा है

सानिया .....इस बार मिलने दे उसे कुछ भी करने अपनी सील तुड़वानी हे है मुझे

माया ....... मुझे मत भूल जाना हम दोनों साथ में एक हे बाद पे सील तुड़वाएंगे वो भी एक दूसरे के सामने

सानिया ....... अब तुमसे क्या छुपाना पैर उसे भी तो मंजूर होना चाइये

माया ........ आने तो दो इस बार आपने एरिया में उसे

दोनों कुछ देर बात करने के बाद जहा कर बापदे बदल कर अपनी स्टडी में लग जाती है

इन दोनों के बिच जो सरम थी जो दिवार थी वो बहुत पहले हे गिर चुकी थी ...............

अब आगे ...........

u.s.a ....... विजय जी बे साम तक सभी फॉरमिलती पूरी करने के बाद अपनी कंपनी की बागडोर जेनी को सौंप चुके थे

जेनी इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने से थोड़ी भी नर्वस थी

आवर खुश भी थी जेनी का नर्वस होना जायज भी था क्युकी अच्चानक से इतनी बड़ी कंपनी का भर जो उसके कंधो पे अस पड़ा था

सूर्य ........ जेनी मैं जनता हूँ तुम अभी थोड़ी नर्वस हो तुम

जेनी ....... सूर्य मुझे इन सब का कोई एक्सपीरियंस नहीं है कोई गड़बड़ हुई तो लाखो का नुकसान हो जायेगा आवर कंपनी की बदनामी होगी सो अलग

सूर्य ........ इसका एक रास्ता है जेनी अभी मुझे जल्दी नहीं होती तो मैं खुद तुम्हारी हेल्प कर देता बूत मुझे सैम को निकलना है

तुम जिस सोल्लगे से मेडिकल स्टडी कर रही हो वह से किसी अच्छी लेडी प्रोफेसर को अपनी सेक्रेटरी अपॉइंट करो डिग्री डिग्री तुम कंपनी आओगी तो तुम्हे भी समाज अस जायेगा

बस किसी भी पीपर वर्क रिलेटिव डाक्यूमेंट्स को अच्छे से रीड करने में बाद हे अपना डिस्कशन लेना ऐसा हे कोई भी मेडिसिन कंपनी से बहार जाये तो उसको वेरीफाई करना की उसमे कोई साइड इफेक्ट्स या कोई आवर प्रॉब्लम तो नहीं यहाँ पैसे से ज्यादा लोगो की हेल्थ जरुरी है

जेनी ........ मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगी की हमारी कंपनी से किसी की हेल्थ को कोई नुकसान न हो

विजय जी ........ चलो बच्चो घर चले यहाँ का काम पूरा हुआ अब से बेटी जेनी यहाँ की ओनर है

सूर्य .......जी फूफा जी चलिए चलो जेनी

विजय जी अपनी कार में बेथ घर की तरफ निकल पड़ते है

पीछे पीछे जेनी आवर सूर्य भी निकल गए थोड़ी बहुत मस्ती करने के बाद तीनो घर पहुंचते है

मेनका जी ......कैसा रहा कंपनी में सब कुछ

विजय जी ......सब अच्छा था किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं हुई आवर लीगली जेनी कंपनी की हेड है

मेनका जी .......आप तीनो फ्रेश हो जाइये मैं आप सब के लिया कॉफ़ी बनती हु

सूर्य ....... बाकि सब कहा है बुआ जी

मेनका जी .....अपने रूम में अभी अभी बहार से लौटी है

विजय जी ....... मेनका सब को रेडी होने का बोल दो हम लोग को इंडिया के लिया निकलना है

सूर्य अपने रूम की तरफ भाड़ गया जेनी पहले हे जा चुकी थी

मेनका जी ......आप फ्रेश हो जाये जा कर मैं उन्हें पैकिंग करने को बोलती हूँ

कुछ देर बाद सूर्य अपने रूम से त्यार हो कर बहार निकलता विजय जी भी फ्रेश हो कर कॉफ़ी के मज़े ले रहे थे

मेनका जी .....बीटा सूर्य कॉफ़ी पियो तब तक मैं तुम्हारे पैकिंग कर देती हम

सूर्य ......बुआ मेरी पैकिंग हो चुकी है आप बाकि सब की देखो

कुछ देर बाद एक एक करके के सभी लड़किया अपने सामान के साथ त्यार हो निचे आती है

पायल ......माँ हम सब रेडी है

मेनका जी ...... एक बार फिर से अपना सब समाज चेक कर लो कुछ जरुरी सामान रह तो नहीं गया है

पायल ........माँ सब चेक करने के बाद हे पैकिंग की है

सूर्य .......ठीक है मैं सामान कार में रख देता हूँ

सूर्य समाज में कर बहार निकलता है तो जेनी भी उसके पीछे पीछे निकल पड़ती है

( पायल ....... अब हे जेनी कहा जा रही है )

पायल जेनी के पीछे जाती है तो सामने जेनी सूर्य को किश करते हुए दिखाई देती है

( पायल ....... तो हे सब भी सुरु होने गया क्या इनका इतनी जल्दी मुझे लगा हे था )

पायल वही से वापिस लौट जाती है

कुछ देर बाद सूर्य आवर जेनी भी अंदर चले जाते है

सूर्य ........बुआ जी सब सामान एयरपोर्ट के लिया भेज दिया है अब हमें भी निकलना चाइये

मेनका जी ....... ठीक है बीटा सूर्य जेनी बीटा हे लो घर के के आज से यही तुम रहोगी चाहो तो अपने एक दो फ्रेंड्स के अपने साथ रख सकती हो इतने बड़े घर में अकेले तुम बोर हो जाओगी

जेनी .......आंटी जी मेरा अपना घर है मैं. वही रह लुंगी

मेनका जी ......... नहीं तुम यही पे रहोगी तो नाम भी घर को ले कर चिंता नहीं होगी पायल आवर प्रीती की पसंद का घर है हे तो उसे सेल्ल नहीं कर सकती बेटी किसी आवर को रखा तो घर का ख्याल अच्छे से नही रखा जायेगा

विजय जी...... बेटी रख लो हमें भी ख़ुशी होगी

जेनी ....... ठीक है अंकल जी पैर आपको प्रॉमिस करना होगा आप लोग मुझसे मिलने आते रहोगे

विजय जी ......OK बीटा प्रॉमिस आवर हे इंडिया का एड्रेस है तुम भी वह आना जब भी फ्री टाइम हो

जेनी .......OK अंकल जी आंटी जी

जेनी दोनों से गेम लग कर मिलती है

सूर्य ......अपना ख्याल रखना जेनी कल से तुम्हारे लिया सिक्योरिटी भी आ जाएगी

सभी लोग कार से एयरपोर्ट की आवर निकल लेते है

जेनी भी साथ आना चाहती थे एयरपोर्ट तक पैर मेनका जी बे उसे मां कर दिया

ीदार सूर्य सभी को में कर परीलोक के लिया गायब हो जाता है

परीलोक ..............

दोपहर के भोजन के बाद सब लोग gup_sup मेलगे हुए थे

काम तो कुछ था नहीं यहाँ करने के लिया

सपना किरण अपने रूम में लेते हुए थी तभी वह राधा आती है

राधा ......क्या कर रही हो सपना स्वीटी

किरण ........ कुछ नहीं दीदी आइये बैठिये यहाँ वैसे भी कुछ करने को तो है नहीं

राधा ....... है हे तो तुमने सही कहा स्वीटी ये जादुई लाइफ भी बोरिंग लगने लगती है कभी कभी तो

सपना...... क्यों न हम लोग आज जिनलोक हो कर आये

राधा ...... आईडिया तो अच्छा है पैर कोई जाने नहीं देगा वह क्युकी स्वीटी की सदी की तयारी जो चले रहे है

सबसे छोटी है पैर no. सबसे पहले लग रहा बनो रानी का

किरण ........ क्यों दीदी हद बार मुझे लास्ट में रखने का इरादा था क्या आपका

राधा .......हेहेहे देखो तो अपनी सदी को ले कर कैसे उतावली हो रही है

किरण ....... आप नहीं होती क्या आपका no. भी जल्दी लगने वाला है

सपना ........ भले हे no. देर से लगे पैर मैं बहुत खुश हूँ स्वीटी तुम्हारे लिया जिसके सपने तुमने जनम के साथ देखना सुरु किया था आज वो पुरे होने जा रहे है

राधा ........ अपनी दुलहाल तो यहाँ है दूल्हा कब आ रहा है कुछ पता चला

किरण ....... दीदी वो साम को आएंगे कुछ देर पहले उनका सन्देश आया था

वैसे उन्हें अभी तक बुआ ने सदी के बारे में नहीं बताया है

वही रिद्धि अपने कक्ष में अकेले बैठी हुई किसी गहरी सोच में दुभि हुई थी

तभी वह गुरुदेव आते है

वो रिद्धि को इस तरह खोया हुआ देख कर चिंतित हो जाते है

तभी उनकी नजर रिद्धि की गॉड में राखी तस्वीर पे पड़ती है

गुरुदेव आगे भाड़ रिद्धि की गॉड से वो तस्वीर उठा लेते है

रिद्धि ......... पिता श्री आप कब आये

गुरुदेव अपनी पुत्री रिद्धि के सर को प्यार से सहला कर उसके बगल में बेथ जाते है

गुरुदेव ........ जब मेरी पुत्री अपनी माता को याद कर उदाषभाव से कही खोये हुए थी

जनता हूँ पुत्री मैंने तुम्हे जो प्रेम अपने पिता से मिलना चाइये था वो कभी दे नहीं पाया मैंने सदैव पिता होने के दरम से ऊपर राजदराम को विशेष महत्व दिया जिसके चलते तुम्हारे साथ पिता पुत्री के सम्बंद को भी पूर्ण निस्ता से निभा नहीं पाया

रिद्धि .......आप ऐसा न कहे पिता श्री मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है की आपने मुझे अपने राजकार्य के चलते समय नहीं दिया

आप पे मुज अकेली का दायित्व नहीं था आप पे पुरे परीलोक का दायित्व था आपको पता है पिता श्री परतविलोक जाने से पूर्व मेरे विचार भी ऐसे हे थे

मुझे आप पे क्रोध था मैं हमेशा यही सोचती थी की आपने ऐसी कोनसी भूल की जिसका दंड आपको इतना कठोर मिला मेरे विचार तब बदले जब आपने मुझे परतविलोक साध्वी के रूप में जाने का आदेश दिया जहा मेरी भेट सूर्य से हुए

जब मैं सूर्य से पहली बार मिली तब मुझे आपके आदेश पे संदेह हुआ मुझे सूर्य से भेट कर इतना तो ज्ञात हो चूका था की सूर्य सदर्न इंसान नहीं है

फिर आपने वयोम आवर सकती को सूर्य को सभी योध कलाओ में प्रशिक्षित करने के लिया भेजा

तब भी मुझे समाज नहीं आया की ऐसा क्या है सूर्य में जिसके लिया आपने मुझे सकती वयोम पृथ्वीलोक भेजा फिर जैसे जैसे सूर्य अपने पांच तत्वों को जागृत करने लगा मुझे यकीं नहीं हुआ की सूर्य इतनी सिगरता से पांच महबूतो को जागृत कैसे कर प् रहा है

जबकि हमें जनम से दिव्या सकतिया प्राप्त होती है

किसी भी तत्वा को जागृत करने के लिया हमें एक लम्बे समय तक ध्यान आदि करना पास्ता है तब जा कर हम किसी एक तत्वा को जागृत कर पते है

फिर वो समय आया जब सूर्य का अग्नि तत्वा जागृत हुआ

सूर्य ध्यान में इतनी गहराई में जा चूका था की उसके ध्यान से उत्पन हो रहे तप हमारे लिया भी सहन करना मुश्किल जो गया था

वो तो उचित समय पे आपने हमें सूर्य को ध्यान से बहार निकलने का मार्ग सुजय ानयता है उस दिवश परतविलोक पे परचंड विनाश होना निश्चित था

जब हम ध्यान के माध्यम से सूर्य से जुड़े तब हमें सूर्य के वास्तविक तेज का समाज पाए पैर ये भी हमारी अज्ञानता सिद्ध हुई

क्युकी वो तो केवल सूर्य के तेज का अंश मात्रा था

गुरुदेव ....... उस वक़्त सूर्य अग्नि तत्वा के ादिन था पुत्री अगर सूर्य उस समय ध्यान में सूर्यदेव तक पहुंच जाता तो बहुत बड़ा संकट परतविलोक पे आ सकता था आवर सायद हम सूर्य को एक बार फिर खो देती

रिद्धि ...... फिर जब आपसे हमें ज्ञात हुआ की सूर्य का वास्तविक परिचय क्या है

तब हमें खुद से घिरना होने लगी की हमने आपको हमेशा गलत समजा आप पे कितना बड़ा दायित्व है हमें उस दिवश ज्ञात हुआ पिता एग्री क्यों आप इतना कठोर प्रायश्चित कर रहे थे क्यों एक इंसान हो कर सूर्य आपके लिया इतना महत्वपूर्ण था जब हमने सूर्य को उसके 18 बे जनम दिवश पे आपने द्वारा बताया स्थान तक पहुचाये था तब हमारे मन में जो भी गलत भावनाये थे उनसे हम मुक्त हुए पिता एग्री

गुरुदेव .......इस्वर जो भी करता है हमारे अच्छे के लिया हे करता है पुत्री बस हम हे अगयनतावश इस्वर की लीला को समझने में असमर्थ रहते है

रिद्धि अपने पिता से अपनी माँ की तरविर ले कर प्यार से उनके चेहरे पे हाथ फिरने लगती है

गुरुदेव ....... अपनी माता की याद आ रही है पुत्री रिद्धि

रिद्धि ......... है पिता श्री कुछ समय से हमें माता श्री की बहुत यार आती है उनके साथ बाईट वो बचपन के दृश्य जब आँखों के सामने आते है तब तो बहुत ख़ुशी होती है किन्तु एकांत में वही हमारी ुदशी का कारन बन जाते है

गुरुदेव ....... हम जानते है पुत्री तुम्हारी वयथा को किन्तु तुम इस तरह उदाश रहोगी तो हमें भी अच्छा नहीं लगेगा पुत्री आवर फिर इस्वर ने तुमसे एक माता चीनी तो देखो आज तुम्हे कितनी माता मिल गई है

रिद्धि ........क्या मतलब हम समजे नहीं पिता श्री

गुरुदेव ....... पुत्री हम जानते है की आप सूर्य से प्रेम करती है हमें ुशी दिन पता चला गया था जब महाकाल पूजा में हमने वो मोली बंदी थी तुम्हारे हाथ में हमारी भी यही इच्छा थी की तुम्हारा विवाह सूर्य जैसा तेजस्वी वर से हो परबु ने सूर्य जैसा नै सूर्य हे वर के रूप में सौंप दिया

जितना प्रेम सूर्य के हृद्या में पुत्री उतना हे पुत्री शालिनी रेखा प्रिय सन्ति मेनका के हृद्या में है पुत्री

ररिधि ......हम जानते है पिता श्री पैर आप हमें ये सब क्यों बता रहे है

गुरुदेव ......पुत्री तुम्हे जब भी अपनी माता की याद सताया पुत्री शैली या पुत्री रेखा से जा कर मिलो या रानी पारी से तुम्हे अच्छा लगेगा

रिद्धि .....जी पिता श्री

गुरुदेव ......पृथ्वीलोक की रीती है पुत्री की विवाह के पश्चात वर की माता को बधु अपनी माता का स्थान प्रेम सामान देती है

मैं चलता हूँ पुत्री तुम जाओ शालिनी पुत्री ले पास तुम्हे अच्छा लगेगा

रिद्धि ......जी पिता श्री

कुछ समय बाद रिद्धि अपने कक्ष से निकल कर शालिनी जी के कक्ष की आवर भध जाती है

जैसे हे रिद्धि कक्ष के पास पहुंची ुशी वक़्त शिव कक्ष से निकल कर बहार आते है

शिव .......रिद्धि बीटा आप यहाँ कुछ काम था क्या

रिद्धि ......वो शालिनी जी से मिलना था

शिव ........ जाओ वो अंदर हे है पैर बेटी अब उन्हें माँ कहने की आदत दाल लो क्युकी सदी के बाद वो तुम्हे बहु के रूप में नहीं बल्कि बेटी के रूप में अपनाएगी है मुझे ससुर जी कह सकती हो जब तक तुम्हारे दिल करे

शालिनी जी ......क्या हुआ किस से बात कर रहे है आप दूर पे खड़े खड़े

शिव ......... तुम्हारी बहु रिद्धि आई है मिलने तुमसे

शालिनी जी ........ अरे रिद्धि बेटी वह क्यों कड़ी हो अंदर आओ यहाँ

शिव ......जाओ बेटी मैं भी निकलता हूँ

शालिनी जी ........क्या बात है बेटी आज ये चाँद मुरझाया हुआ सा क्यों है कुछ दिनों से देख रही हूँ तुम कुछ उदाश सो रहती हो

रिद्धि .......वो माँ की बहुत यार आती है

शालिनी जी .......बेटी जो चले गए है वो लौट के नहीं आते है

रह जाती है उनके साथ बिताये हुए खुशियों के पल हमें उन्हें पालो को याद कर के खुश होना चाइये न की दुखी ीदार आ आवर यहाँ लेट जाओ

शालिनी जी अपनी पीठ बीएड से टिका कर रिद्धि का सर अपनी गॉड में रख लेती है आवर प्यार से उसके बालो में हाथ फिरने लगती है

जिस से रिद्धि को बहुत सुकून मिलता है जैसे वो शालिनी जी के गॉड में नहीं बल्कि अपनी माता की गॉड में वॉर रख सोई हो

शालिनी जी ........ जब भी तुम्हे अपनी माता की कमी मह्सुश हो तो बेझिजक अपनी इस माँ के पास चली आना बेटी अगर फिर से मुझे मेरी इस बेटी के चेहरे पे ुदशी दिखी तो मैं समझूंगी तुमने मुझे पराया कर दिया

रिद्धि ....... आप ऐसा न बोलिये माँ क्या मैं आपको माँ कह सकती हूँ

शालिनी जी .......नहीं अभी मैं इतनी भी बूढी नहीं हुई हूँ तो माँ कहना कैंसिल है चाहो तो माँ या मम्मी कह सकती हो हेहेहे

चल अब सरम से लेट जा तुम्हे अच्छा लगेगा

शालिनी जी के निरंतर अपने सर में घूमते हाथ से कब रिद्धि मीठे सपनो में खो गई उसे भी पता नहीं चला

शालिनी जी ....... माँ आवर बेटी का सम्बंद भी बड़ा मधुर होता है

फिर चाहे बेटी के रूप में पारी हे क्यों न हो उम्र में भले हे मुझसे बड़ी हो बेटी तुम पैर तुमने माँ का स्थान दे कर माँ की ममता का मान बढ़ाया है आज से तुम भी मेरी बेटी हो आवर हमेशा इस माँ के दिल में तुम्हारे स्थान एक बेटी का हे होगा

जहा तुम्हे फिर कभी अपनी माँ को यार कर दुखी नहीं होना होगा उन्हें जब भी यार करोगे तुम्हे चेहरे पे ख़ुशी होगी

वही गुरुदेव ध्यान में बे थे इस दृश्य को देख कर बहुत खुश हो रहे थे

गुरुदेव .......धन्य हो पुत्री शालिनी महाकाल अंश ने आपको अपनी माता के रूप में क्यों चुना ये तो मैं नहीं जनता पैर आपके विसुअल हृद्या बसे निऱ्स्वार्थ प्रेम को नमन करता हूँ

आज आपने एक पुत्री को अपना ममता मई प्रेम दे कर माता के प्रेम आभाव के वियोग से मेरी पुत्री को मुक्ति दी है आपका ममता मई मर्तृवा का सेक्स सभी पुत्रियों पे सदैव बना रहे यही महाकाल से इच्छा है मेरी जय जय महाकाल ......

सक्तिपुर .......

रुक्मणि विधि गायत्री अभी हाल में बैठे हुए थे तभी रुक्मणि का फ़ोन रिंग करने लगता है

रुक्मणि फ़ोन उठा कर जब देखती है तो कॉल गीता ठाकुर का था

रुक्मणि .......hello दीदी कैसी है आप आवर कहा तक पहुंचे

गीता ठाकुर ........ सुन छोटी हम लोग विक्रम को ले कर दिल्ली आ गए है यहाँ हमने उसे डॉक्टर को चेक करवा लिया अभी मैं आवर अजय विक्रम को ले कर एयरपोर्ट पे आये कुछ देर बाद की फ्लाइट है लेट नाईट तक हम लोग सक्तिपुर पहुंच जायेंगे तुम विक्रम का रूम त्यार करवा देना आवर राणा को बोल कर कुछ सामान मंगवा लेना जिस से विक्रम को परेशानी न हो मैंने कॉल किया था पैर इसका फ़ोन लगा नहीं

रुक्मणि ........ आप चिंता न करे दीदी विक्रम का रूम त्यार है मैं रहा को बोल कर उसके लिया नए सरम दायक गद्दा सहर से माँगा लेती हूँ आवर कुछ आराम दायक कपडे भी फिर उसे जैसलमेर एयरपोर्ट भेज देती हूँ आप सबको लेन के लिया

गीता ठाकुर ....... है ये ठीक रहेगा नहीं वाली कार भेज देना जिस से सफारी में प्रॉब्लम नहीं होगी

रुक्मणि ....... जी दीदी आप सरम से ाजैये यहाँ हम सब तयारी करके रखेंगे

गायत्री .......चची जी मम्मी ने कहा कहा कहा पहुंचे वो लोग

रुक्मणि .......बेटी वो लोग दिल्ली एयरपोर्ट पे है कुछ देर बाद वो लोग यहाँ के लिया फ्लाइट पकड़ने वाले है

गायत्री ....... वो कुछ सामान के लिए कह रहे थे वो सब क्या था

रुक्मणि ....विक्रम के पेअर में प्लास्टर है न बेटी उसके लिया कुछ आरामदायक कपडे वे आरामदायक गद्दे के लिया बोलै है दीदी ने

विधि ......माँ आपने सोचा है की भाई को हम लोग क्या बताएंगे जब उन्हें सूर्य के बारे में पता चलेगा

रुक्मणि ........ मतलब

विधि ........ ी मैं की विक्रम भाई सा को जब पता चलेगा की उनके जाने के बाद बड़ी माँ आवर आपने सब गलत टास्ते छोड़ कर सूर्य से दुश्मनी ख्याल कर ली है तो उन्हें हम कैसे समझायेंगे

रुक्मणि .......जब तक वो ठीक नहीं होता हमें किसी न किसी तरह उस से सब छुपाना होगा डेरी डेरी उसे समझायेंगे की दुश्मनी में हमने क्या क्या खोया है

इस दुश्मनी से किसी का भला नहीं है पैर तुम दोनों थोड़ी सावधान रहना सूर्य का जीकर तुम दोनों के मुँह से नहीं होना चाइये तुम दोनों का सूर्य को ले कर जो रिस्ता है इसका तो बिलकुल भी पता नहीं चलना चाइये विक्रम को

गायत्री ........ठीक है चची जी हम इस बात का ध्यान रखेंगे

ीदार सर्यग्रह में सभी तयारिया रिद्धि सात्विक के देख देख में पूर्ण हो रहे थी

देखते हे देखते तयारी पूर्ण हो गई इन सब कार्य में सगाई का दिन भी निकट आ गया था

अगले दिन सूर्य आवर किरण की सगाई होनी थी सूरजगढ़ हवेली में

जहा लगभग सभी तयारी बड़े हे दम डैम से की थे जोरावर जी ने सगाई का माहौल भी किसी सदी से काम नहीं था चारो तरफ रंग बिरंगी लाइट्स सामियाने से पूरी हवेली को हे दुल्हन के जैसे सजाया हुआ था सभी को बस ित्नत्जर था तो कल होने वाली सगाई का ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..............

सॉरी दोस्तों ये अपडेट उम्मीद अनुसार नहीं दे पाया ..........
 
अपडेट. 188

गायत्री ........ठीक है चची जी हम इस बात का ध्यान रखेंगे

ीदार सर्यग्रह में सभी तयारिया रिद्धि सात्विक के देख देख में पूर्ण हो रहे थी

देखते हे देखते तयारी पूर्ण हो गई इन सब कार्य में सगाई का दिन भी निकट आ गया था

अगले दिन सूर्य आवर किरण की सगाई होनी थी सूरजगढ़ हवेली में

जहा लगभग सभी तयारी बड़े हे दम डैम से की थे जोरावर जी ने सगाई का माहौल भी किसी सदी से काम नहीं था चारो तरफ रंग बिरंगी लाइट्स सामियाने से पूरी हवेली को हे दुल्हन के जैसे सजाया हुआ था सभी को बस ित्नत्जर था तो कल होने वाली सगाई का ..........

अब आगे ..........

परीलोक ......... इस वक़्त सूर्य वह गुरुदेव के साथ साथ परबु मंदिर में प्रेतराज जकिंग भी मौजूद थे

सूर्य ....... गुरुदेव असुरगुरु के कहे अनुसार असुरगुप्तचर जिनलोक में मौजूद है नागलोक में भी ऐसे में हमें क्या करना चाइये

गुरुदेव ....... मैं जनता हूँ पुत्र इस विषय में कुछ समय से असुरगुप्तचर परीलोक में प्रवेश करने का प्रयाश कर रहे है

प्रेतराज ........ अगर वो इस प्रयाश में सफल हुए तब हमारे लिया इसम परस्थितिया उत्पन हो सकती है पुत्र सूर्य वह पुत्री किरण के विवाह में कोई समस्या न उत्पन हो जाये गुरुदेव

गुरुदेव .......... ऐसी कोई स्थिति उत्पन नहीं होगी पुत्र सूर्य वह पुत्री किरण के विवाह में कोई भी असुर परीलोक में प्रवेश नहीं कर सकता है न उन्हें ज्ञात होगा की यहाँ परीलोक में क्या घटना गठित हो रही है

ज .किंग ...... गुरुदेव किन्तु किसी अन्य व्यक्ति विशेष के माद्यम से तो उन्हें ज्ञात हो सकता है न

सूर्य ......... इसका एक मार्ग है गुरुदेव किन्तु क्या वो उचित होगा

गुरुदेव. ....... हम जानते है पुत्र सूर्य तुम्हारा संकेत किश आवर है किन्तु समय आवर स्थिति की मांग यही है पुत्र जब तक तुम्हारा विवाह पुत्री जीनत मानसी पारिजात रिद्धि जिनिशा कोमल से नहीं होता तब तक तुम्हारा वास्तविक सत्य नरकासुर को ज्ञात होने से किसी भी तरह रोकना होगा क्युकी उसे तुम्हारे वास्तविक सत्य पता चलते हे वह अपने सडयंत्र रचना सुरु कर देगा

सूर्य ........ क्या अभी भी मैं नरकासुर के सडयंत्र को वाइटल करने योग्य नहीं हूँ गुरुदेव

गुरुदेव ........ पुत्र तुम नरकासुर का सामना करने योग्य हो किन्तु जब सामने वाला चाल कपट सडयंत्र को हे अपनी योध मंटा हो तो ऐसे सत्रु से सदैव सावधान रहना चाइये

योध भूमि में केवल सरीरी वह मानसिक बल हे नहीं बूढी बल का प्रयोग भी ुशी ेककर्ता के साथ करने वाला हमेशा विजय प्राप्त करता है

प्रेतराज ....... गुरुदेव उचित कह रहे है सूर्य सत्रु को कभी भी सयम से सक्तीविहीन नहीं समझना चाइये हमें अपनी आवर से ऐसा कोई भी अवसर अपने सत्रु को नहीं देना चाइये जिस से हमेहे हानि पहुंचे

गुरुदेव. .......प्रेतराज j.King आप दोनों के जो भी मुख्या लोग आपके लोक सेइस विवाह में समलित होने वाले है उन्हें बिन्स किसी को ज्ञात हुए आप लोग ले कर आएंगे बिना असुरगुप्तचरो नजरो में आये हम नागलोक जा रहे है नागराज महावीर महारानी पूर्वी को लेने पुत्र सूर्य ान तुम भी जाओ आवर विश्राम करो कल का सूर्यौदय तुम्हारे जीवन के विशेष पालो का साक्षी बनने वाला है संध्या समय हो चूका है

सूर्य ......जी गुरुदेव आज्ञा दे परनाम परनाम प्रेतराज j.King

गुरुदेव ......विजयी भाव पुत्र सभी की मनोकामना पूर्ण करो

सूर्य ......क्या

गुरुदेव .......जाओ पुत्र सभी तुम्हारी प्रतीक्षा में है

सूर्य ....जी गुरुदेव ( ये गुरुदेव ने आशीर्वाद देने के बात किसकी मनोकामना पूर्ण करने को कह रहे है कुछ समाज नहीं आया )

प्रेतराज ......... गुरुदेव हमें समाज नहीं आया आपका संकेत

गुरुदेव ....... कभी कभी भविष्य में चुकपे सत्य को देखना भी दुखदायी होता प्रेतराज

प्रेतराज ....... ऐसा कोनसा सत्य है गुरुदेव जिस के चलते आपके मूक मंडल पे चिंता की लकीरे उभर आई

गुरुदेव ......पुत्री मानसी का सत्य प्रेतराज

प्रेतराज .......ऐसा कोनसा सत्य है गुरुदेव मानसी से जुड़ा जिस से हम सब अनजान है

गुरुदेव ......... समय आने पे आप सभी को सत्य ज्ञात होगा जायेगा अभी वो समय नहीं आया है

उदार सूर्य जब महल में पंहुचा तो सामना मेर्री जी से हुआ सभी से नजरे बचा कर मेर्री जी सूर्य को अपने कक्ष में खिंच ले जाती है

पैर इस दौरान मेनका जी वह रेखा जी की नजरे मेर्री जी आवर सूर्य पे पद जाती है

रेखा जी ........ ये मेर्री सूर्य को इस तरह अपने रूम में क्यों ले कर गई है दीदी

मेनका जी ........ मैं भी तो आपके साथ हे हूँ भाबी सा मुझे क्या मालूम

ीदार मेर्री जी को सायद कुछ ज्यादा हे जल्दी थी जो उन्होंने गेट को ठीक से लॉक तक नहीं किया

सूर्य ....... ये क्या कर रही हो ममी जी कोई भी आ सकता है इस वक़्त यहाँ

मेर्री जी सूर्य के शर्त के सभी बटन खोल कर सूर्य के सीनो को सहलाने लगती है





मेर्री जी ....... जानती हूँ इस सूर्य पैर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है

कहते हे मेर्री जी अपना लॉन्ग स्कर्ट उतर फेंकती है

सूर्य के हाथ अपने कमर से हैट्स कर अपने मखमली खुले पे रख कर दबाने लगती है

सूर्य ......अभी इन सब के लिया वक़्त नहीं है नाईट में आपकी इच्छा पूरी कर दूंगा अभी खुद पे कण्ट्रोल कीजिये ममी जी ुम्मम्हा





ीदार रूम का लॉक हल्का सा घूमते हे खुल जाता है

जहा से रेखा जी आवर मेनका जी दोनों साफ साफ सूर्य आवर मेर्री जी की गतिविधि देख प् रही थी

दोनों के मुँह खुले हुए थे आवर आँखे छोड़ी hi चुकी इस दृषिया को देखकर

मेनका जी जो पहले हे दोनों के इस सम्बंद को जानती थी उन्होंने डेरी से गेट फिट से सत्ता कर रेखा जी का हाथ ताम कर उन्हें अपने रूम में ले गई

रेखा जी ......... मुझे तो यकीं हे नहीं हो रहा दीदी की मेर्री आवर सूर्य के बिच ऐसा समबन्द भी है

मेनका जी ...... इसमें यकीं न करने वाली कोनसी बात है भाबी सा वो भी जवान लड़की है सूर्य से दिल लगा बैठी होगी

रेखा जी ......... मुझे नहीं लगता दीदी बात यही तक सिमित है

मेनका जी ......है दोनों के शारीरिक सम्बंद है पहले मुझे भी शक था पैर एक बार हवेली में छठ पे बने रूम में दोनों को सम्बंद बनते देख चुकी हूँ आवर मुझे नहीं लगता इसमें कुछ भी गलत है

रेखा जी ......... ये आप कैसी बात कर रही है दीदी सूर्य किरण की सदी होने वाली है ऐसे में इस तरह के सम्बंद

मेनका जी ......जहा तक मैं जानती हूँ सूर्य को तो वो स्वीटी से कुछ नहीं छुपता इसमें जरूर किरण की सहमति है

रेखा जी ......फॉर भी दीदी मुझे ये रिस्ता गलत लगता है

मेनका जी ........ कुछ गलत नहीं है भाबी सा इंसान को जहा ख़ुशी नजर आती है उसका उस आवर जाना सव्भाविक है आवर फिर आप खुद सोचो जहा इतनी लड़किया सूर्य से प्यार करती है तो भला मेर्री की क्या गलती है हो गया होगा उसे भी प्यार सूर्य से आवर बन गेट सम्बंद आपसे क्या छुपाना भाबी सा मैं खुद सूर्य की आवर आकर्षित हूँ जब से मुझे मेरी पुराणी यदि मिली है विजय जी से सम्बंद बनाने के बाद भी ादुरपन लगता है

उनके साथ बिस्तर में सरीर तो होता है पैर आत्मा जैसे साथ छोड़ देती है

मेनका जी की बाते सुन रेखा जी विजिट नजरो से मेनका जी को देखने लगती है

मेनका जी ......जानती हूँ आप सोच रही होंगी की मैं कैसी ोुरत हूँ जो अपने बेटे के लिया ऐसा सोचती है

पैर ये सच है भाबी सा जब भी विजय से समबन्द बनती हूँ तो आँखों के सामने सूर्य के चेहरा गुमने लगता है भले हे पिछले जनम में हमारे शारीरिक सम्बंद की नीव राधा के श्राप ने राखी थी किन्तु वो पल बुलाये नहीं भूले हेट जिसमे कोई इंसान आपके सरीरी के साथ साथ आपकी आत्मा तक को प्यार से अपना बना ले

रेखा जी ........ क्या इस जनम में भी सूर्य वैसा हे है ी मैं आप समाज रही है न

ये बात कहते वक़्त रेखा जी के फुल्ले हुए गाल सरम से लाल होने लगते है

मेनका जी ......हेहेहे आपका मतलब सूर्य से है या उसके.....

रेखा जी ......मुझे कुछ नहीं जानना मैं चलती हूँ

मेनका जी रेखा जी का हाथ पकड़ कर वही बीएड पे बेथ जाती है

मेनका जी ........ देखो भाबी सा हमारा रिस्ता मजाक आवर दोस्ती वाला है

मैं जानती हूँ आप कहना कुछ आवर चाहती है आउच कुछ आवर रही मुझसे कैसे सरम भाबी सा

सूर्य अभी भी वैसा हे है या पहले से भी ज्यादा खाश है उस खाश अंग से भी आवर उस कार्य में भी

रेखा जी ....... चाइये चलते है खाने का वक़्त हो गया है

मेनका जी ......वो सब तो ठीक है पैर पहले जा कर फ्रेश हो जाइये आपके पेअर कैंप रहे है

रेखा जी .....क्या मतलब है आपका

मेनका जी ....... हेहेहे भाबी सा मैं भी औरत हूँ जानती हूँ आपकी सरीरक जरुरत भाई सा पूरी नहीं कर पते है आप जल्दी एक्ससिटेड होना जाती है ऐसी बातो से इस लिया पहले जा कर फ्रेश हो जाये मैं भी फ्रेश हो कर आती हूँ

रेखा जी बेथ से उठ कर बहार जाने लगी तभी मेनका जी फिर से हस्ते हुए रेखा जी की तंग खिचाई करती है

मेनका जी ......... भाबी सा अच्छे से चेक करना साफ सफाई करते वक़्त कही कपडे न ख़राब कर दिए हो आपने

रेखा जी जल्दी से वह से निकलती है मेनका जी रेखा जी के चाल को देख मुस्कुराते हुए रूम लॉक कर अपने सभी कपडे उतर बाथरूम में गेस जाती है आवर शावर ों कर नहाने लगती है





कुछ देर नहाने के बाद मेनका जी अपने बॉडी पे सौंप (साबुन सेम्पु) लगते हुए अपनी गीली योनि के साथ खेलने लगती है 4,5 मिनट्स में मेनका जी की योनि से निकला तरल सौंप में मिक्स हो जाता है





कुछ देर बाद मेनका जी अच्छे नहाने के बाद एक खूबसूरत साड़ी पहन कर रूम से निकल जाती है

वही ऐसा हे नजारा दूसरे रूम में था जहा रेखा जी अपनी आँखे बंद किये हुए अपनी योनि के आगरा भाग को सहलाते हुए महेंद्र जी के अंग को यात करते हुए उनके नाम पे सिसकारियां छोड़ रही थी

काफी देर पर्यटन करने के बाद रेखा जी जब अपनी चरम पे थे तभी उनकी आँखों के सामने सूर्य का बलिस्त निर्वस्त्र सरीर गुमने लगता है

रेखा जी सूर्य का नाम लेते हुए दिवार का सहारा ले कर झड़ने लगती है काफी टाइम तक रेखा जी के ुनत भरी उभर उनकी तेज चलती सांसो के साथ सुपर निचे होते रहा

इस वक़्त अगर कोई रेखा जी के उभारो को इस अवस्था में सुपर निचे होता देखता खड़े खड़े सिगरप्तन का सीकर हो जाता

सभी भोजन करने के पश्चात कुछ समय वही एक दूसरे से कल के विषय में चर्चा करते है

सूर्य खाना खाने के बाद अपने रूम की आवर निकल जाता है कुछ देर बाद सभी अपने अपने रूम की आवर निकल हेट है

वही पुरुष मण्डली में विजयजी महेंद्र जी शिव j.mama जी एक रूम की आवर निकल जाते आवर परीलोक की मदिरा के साथ सभी चर्चा में लग जाते है

कुछ दो जानते बाद सूर्य अपने कोमल के माथे को चुम कर कोमल वह प्रीती पे चादर दाल कर मेर्री जी के रूम की तरफ भाड़ जाता है

जहा मेर्री जी के साथ एक राउंड करने के बाद सूर्य कुछ देर बात करता है आवर मेर्री जी के रूम से बहार निकल जाता है

जहा माध्यम अंदर में से एक साया निकलता है आवर सूर्य को पकड़ कर एक रूम में गुस्स जाता है ..........

सक्तिपुर हवेली ......... विधि अपने रूम में लेती हुई थे उसकी आँखों से आंसू बाह रहे थे

देखने से हे लग रहा था की विधि बहुत ज्यादा उदाश थी रो रो कर उसकी आँखे लाल हो चुकी थी

गायत्री ........ विधि ये कैसी हालत बना राखी है तुमने अपनी चल उठ देख मैं टेरेलिया तेरी पसंद का खाना ले कर आई हूँ उठ आवर खुश क्या ले साम से तुम बस रूम को बंद कर रोये जा रही होंगी

विधि ........ मुझे भूख नहीं है दीदी प्लेसेस मुझे अकेला छोड़ दो

गायत्री ....... कैसे छोड़ सकती हूँ तुम्हे अकेला तू जिस दर्द से गुजर रही है ुशी दर्द से मैं गुजर रही हूँ क्या रोने से खाना पीना छोड़ देने से सब ठीक हो जायेगा

अगर ऐसा है तो मैं भी खाना पीना छोड़ देती हूँ

गायत्री की बात सुन अभी तक विधि अंदर हे अंदर खुद को संभाले हुए थे उसका सबर जबाब दे देता है

आवर विधि फुट फुट कर रोने लगती है

अपनी बहन को इस तरह टूट कर रट देख गायत्री जो खुद को किसी तरह मजबूत रखे हुए थे उसका भी सबर जबाब दे देता है

गायत्री विधि को अपने सीने से लगा कर रोने लगती है

खिड़की से रुक्मणि जो ये सब देख रही थी उसकी आँखे भी नाम hi चुकी थी उस से इस तरह अपनी बेटी को गूथ गूथ कर रोटा नहीं रेखा गया आवर वह अपने रूम में जा कर रूम को लॉक कर दुस्यंत सिंह की तस्वीर जो दिवार पे लगी हुई थी उसे देखती है

रुक्मणि ......... अब तो खुश हो तुम तुम्हारे पापो की सजा आज मेरी बची बुगट रही है

तुम्हारे आवर तुम्हारे भाइयो के किया कुकर्मो की वजह से मेरी दोनों बेतिया जीते जी नरक जैसे जिंदगी जीने को मजबूर तुम्हारी किये कर्मो ने मेरी जिंदगी तो बर्बाद की हे आज तुम्हारे किये पापो का कला साया मेरी बची की खुशियों के बिच आ खड़ा हुआ है

तुम्हारे भाई ने सर्यग्रह से दुश्मनी न की होती तो आज मैं अपनी बेटी को ऐसे सूर्य के लिया टूट कर भिखरता नहीं देखती उसकी ख़ुशी के लिया फिर चाहे मुझे सूर्यगढ़ के सामने अपनी झोली हे क्यों न फैलानी पड़ती

रुक्मणि गुस्से में आगे भाड़ दुस्यंत ठाकुर की तस्वीर दीवार से उतर के फर्श पे दे मरती है

रुक्मणि ......... दुस्यंत ठाकुर ये एक माँ का श्राप है तुम्हे

आज मेरी विधि गायत्री सूर्य के लिया तड़प रही है उस से हजार गुना तुम आवर तुम्हारे भाई नरक की आग में तड़पोगे तब भी तुम अपने पापो से मुक्त नहीं हो पाओगे

रुक्मणि दुस्यंत की तस्वीर को देख देख कर न जाने कितनी गालिया कितने श्राप दुस्यंत आवर उसके भाइयो को देती आवर वही गुथनो के बल बेथ कर रोने लगती है

उदार विधि के रूम में दोनों बनने जी भर कर रोने के बाद

गायत्री किसी तरह खुद को सँभालते हुए बड़ी बहन होने का फ़र्ज़ निभाते हुए 2,4 निवाले विधि को सूर्य की कसम दिला कर खिला देती है

विधि भी जब अपनी भीगी हुई आँखों से गायत्री के उतरे हुए चेहरे को देखती है तो वह समाज जाती है की गायत्री ने भी कुछ नहीं खाया है

विधि ........ दीदी आपने मुझे तो उनकी कसम दे कर खिला दिया पैर आप भी तो भूखी है

विधि अपने हाथ से छोटा सा निवाला बना कर गायत्री के मुँह की आवर करती है

गायत्री एक बार विधि की आँखों में देखती है जहा मून निवेदन था की दीदी मेरी खातिर आप भी खुश क्या लीजिये

गायत्री बिना किसी विरोध के विधि द्वारा भदए निवाले को मुँह में भर लेती है

गायत्री ........ विधि मैं जानती तुम मुझसे कही ज्यादा सूर्य से प्यार करती हो उसकी सगाई का सुन कर तुम बहुत दुखी हो पैर क्या खाना पीना छोड़ देने से सूर्य तुम्हे या मुझे मिल जायेगा

विधि ........ दीदी मैं क्या कृ जब से उनकी सगाई का पता चला है तब से मेरे जीने की इच्छा हे ख़तम हो गई ऐसे लगता है जैसे मुझसे कोई मेरे जीने की वजह चीन ले जा रहा है

गायत्री ........ ऐसा नहीं सोचते विधि उसने तो पहले हे कहा था की वो जीवन भर साथ देने का वडा नहीं कर सकता है प्यार वो भी करता है पैर उसे पता था सायद की जीवन भर हमारा आवर उसका साथ नहीं हो सकता हमें तो इसमें भी खुश होना चाइये की कुछ वक़्त कुछ लम्हे हे सही हमें उसका साथ तो मिल रहा है

विधि .......आप जो कह रही है वो ठीक है दीदी कल तक मैं इतने में खुश थी पैर आज जब उनकी सगाई का पता चला तो बहुत दर लग रहा

दीदी मुझे उनसे मिलना है प्लेसेस दीदी

गायत्री ......ये संभव नहीं है विधि विक्रम भाई सा को पता चला तो

विधि ....... प्लेसेस दीदी फिर आपसे कभी खुखुछ नहीं मांगूगी मेरी आखरी ीचा समाज कर हे मिलवा दीजिये....

गायत्री जल्दी से विधि के मुँह पे हाथ रख उसे आगे बोलने से रोक देती है

तभी किसी ने विधि के रूम के दूर को नॉक किया

विधि गायत्री जल्दी से अपने अपने आंसू पांच कर खुद को ठीक करती है

गायत्री ........ तू सरम कर मैं दूर खोलती हूँ विधि

गायत्री जब दूर खोलती है तो सामने रुक्मणि कड़ी थी

रुक्मणि रूम के अंदर आ कर लॉक करती आवर फिर वो खुले हुए खिड़की भी मिस से कुछ देर पहले गायत्री आवर विधि को देखा था रोटी हुए

विधि .....माँ आप यहाँ आप सोये नहीं

रुक्मणि ....... एक माँ कैसे चैन से सो सकती है जब उसे पता हो की उसकी बेतिया दर्द तकलीफ से गुजर रही है

रुक्मणि विधि के पास जा कर लेट जाती है

रुक्मणि .......गायत्री बेटी तुम भी आ जाओ यही बीएड पे आज मैं तुम दोनों के साथ हे सोऊंगी

गायत्री बीएड से बचा हुआ खाना टेबिल पे रख हाथ मुँह दो कर रुक्मणि के साथ लेट जाती है

एक तरफ विधि दूसरी तरफ गायत्री आवर बिच में रुक्मणि

रुक्मणि विधि आवर गायत्री के वॉर के निचे से हाथ दाल दोनों को अपने सीने से लगा कर उनके सर सहलाने लगती है

रुक्मणि ........ कल तुम दोनों तयारी रहना सुबह हम लोग सर्यग्रह जायेंगे

रुक्मणि की बात सुन दोनों को जतका लगता है आवर दोनों अपने सर उठा कर रुक्मणि को देखती है

जैसे उन्हें रुक्मणि के कहे सब्दो पे यकीं न हुआ हो

विधि ........ आपने सूरजगढ़ जाने की बात की मम्मी अभी अभी या ये मेरा वहां था

रुक्मणि ......उम्म्म्मः ुम्मम्हा तुम्हारा कोई वहां नहीं था बेटी तुम दोनों ने वही सुना जो मैंने कहा है

तुम्हे सूर्य से मिलना था न अब मिल लेना तुम्हे कोई सूर्य से अलग नहीं करेगा मैं खुद सूर्य से बात करूंगी बहुत हुआ समाज नियम ये जूठी सानो सकत मुझे इन सब से कोई मतलब नहीं तुम दोनों की ख़ुशी से ज्यादा नहीं है ये सब मेरे लिया कल तक मैं इस सानो सकत को हे सब समझती थी पैर मैं गलत थी

गायत्री .......चची जी विक्रम भाई सा को पता चल गया तो

रुक्मणि ........ मुझे कोई फरक नहीं पड़ता विक्रम क्या सोचता है या क्या करता है बस तुम दोनों तयारी रहना हम कल सूर्य की सगाई में चैलेंज बस अब दोनों चुप चाप लेट जाओ आवर जब तक तुम्हारी मम्मी रुक्मणि तुम लोगो के साथ है तुम्हारे लिया हद वो कोशिश करेगी जिस से तुम लोगो को ख़ुशी मिले

विधि ......... थैंक यू माँ ी लव यू माँ आप बहुत ैवहि है

गायत्री ......... सच में चची जी आप बहुत प्यारी है थैंक यू

रुक्मणि ......बस बस ज्यादा मास्क्स लगाओ आवर सो जाओ कल तुम दोनों सबसे खूबसूरत आवर प्यारी लगनी चाइये ये उदाश चेहरे देखते तो सूर्य से मिलना कैंसिल चाक सो जाओ गुड नाईट

विधि ......सुभ्रातृ माँ सुभ्रातृ दीदी

गायत्री ......ुम्मम्हा गुड नाईट विधि गुड नाईट चची जी ....................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................

दोस्तों कल सायद कोई अपडेट नहीं आएगा कल घर पे मेहमान आने वाले है तो टाइम मिला तो अपडेट पोस्ट करूंगा नहीं तो वेट मत करना अपडेट का .............
 
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