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स्पेशल अपडेट फॉर देवयानी जी ..........}
अब आगे ........... रात के घने अंधकार में असुरगुरु शुक्राचार्य के आश्रम से कोई चोरी छुपे ऊपर से निचे तक काळा कपड़ो से देखा कोई साक्ष बहार निकला बड़ी हे सावधानी से आश्रम से निकल पूर्व की आवर तेजी से भाड़ रहा था
कुछ आगे जाने पे एक पेड़ के निचे कला घोडा बंधा हुआ था वो काळा लबादे में देखा सकाश उस काळा घोड़े की उस पेड़ से बंदी राशि को खोल उसपे सवार हो जाता है
आवर तेजी से उस अंधकार से भरी रात में घोड़े को पूरी तेजी से दौड़ा देता है
उस से कुछ दुरी पे ुशी फरहा के भेष में कुछ लोग उसका पीछा कर रहे थे ऊपर से निचे पूरी तरह से खुद को उस अँधेरे भरे वातावरण में छुपाये हुए
पैर सायद इनकी किस्मत कहे या उनका दुर्भाग्य कुछ दूर जाने के बाद अचानक उनकी आँखों से वो घोडा जैसे पूरी तरह से हवा में गायब हो गया
नकाबपोश 1 ...... ये क्या हुआ वो कहा गया सभी लोग डंडो उसे वो हमारी आँखों से ओझल नहीं हो सकता
कुछ देर उदार उदार देखते रहने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिला उदार ये लोग उस घुड़सवार को डंडो रहे थे ठीक ुशी समय
आश्रम से एक साक्ष आवर निकला जो दिखने में बिलकुल पहले घुड़सवार के जैसा हे प्रतीत हो रहा था बस फरक इतना था की इस घुड़सवार की आँखे साफ साफ देखि जा सकती थी
आश्रम से कुछ दुरी पे उसे ुशी तरह के वस्त्रो में कुछ लोग आवर मिले
चारो तरफ अच्छे से देखने के बाद घुड़ सवार इंसान उन सभी के पास जाता है
जिसे देख बाकि सभी उसके सामने आदाब से अपना सर जुखा लेते है
तभी आश्रम से काफी दूर दूसरी आवर से एक रौशनी आकाश में एक दमके की आवाज के साथ ब्लास्ट होती है
जिसे देख उस घुड़सवार की खूबसूरत आँखे चमक उठी
आवर उसने अपने चेहरे से वो कला लबादा हटा दिया उस लबादे के पीछे जिस साक्ष का चेहरा था वो कोई आवर नहीं असुरगुरु शुक्राचार्य पुत्री राजकुमारी देवयानी जी थी
देवयानी जी ......... तुम सब ने बहुत अच्छा काम किया सेविकाओं अभी तुम कड़ी हो सकती हो
सेविका ...... शुक्रिया राजकुमारी जी आपने हमें सेवा का मौका दिया
देवयानी जी ....... हमने जो सामान आपको लेन को कहा था क्या वो आप ले आये
सेविका ....... जी राजकुमारी जी जैसा आपका आदेश था हमने ुशी के अनुकूल सब व्यवस्था की है राजकुमारी जी
देवयानी जी ....... ठीक है अब तुम लोग जा सकती हो आवर आश्रम की हर गति विधि पे दूर से नजर बनाये रखना अगर तुम लोगो को लगे की मेरे लिया कोई आवशयक सुचना है तब मेनका तुम मुझसे सम्पर्क कर सकती हो अगर मुझसे सम्पर्क न हो तो फ़ौरन व्योमासुर को इस्थिति से अवगत करवा देना
मेनका ( जो सभी दसियो में सबसे खूबसूरत आवर सायद देवयानी जी पिरया दासी थी ) ..... जी राजकुमारी जी जैसा आप कहे हम वैसा हे करेंगे
देवयानी जी ....... क्या हुआ मेनका कुछ आवर कहना चाहती हो
मेनका .....जी जी वो राजकुमारी जी वो क्या आप पहले से जानती थी की कोई आश्रम पे नजर रखे हुए है आवर इतने बहु मूल्य उपहार किस इंसान को भेंट करने की आपको क्या आव्सय्कता ाँ पड़ी
देवयानी जी ........ है माहे पूर्व से हे संदेह था की कोई हमारे बिच रह कर हमारी सुचना किसी को भेज रहा है पुर रही बात इन बहुमल्य उपहारों की तो न तो ये हमारे लिया बहु मूल्य है आवर न उसके लिया जिसे हम ये भेंट स्वरुप दे रहे है अब तुम सभी जाओ आवर हमने जो आदेश दिया है उसे बिना किसी चूक के पूरा करो
मेनका ..... .... जी जी राजकुमारी जी
मेनका अपना साथ आये 4.5 दसियो को ले वह से हवा की तरह गायब हो गई आवर देवयानी अपनी मंत्र सकती का प्रयोग कर वह से मेनका द्वारा लाये संदूक को ले कर गायब हो गई ......
उदार सूर्यगढ़ से बहुत दूर एक विशाल जंगल जो की पूर्ण चांदनी रात के बावजूद भी घने विशाल पढ़ो के चलते चाँद की रौशनी जंगल में बहुत काम मात्रा में जमीं को स्पर्श कर प् रही थी चारो तरफ जानवरो जिव जन्तुओ की डरावनी आवाज इस घने जंगल के संत वातवर को आवर भी डरावना बना रहे थे सामान्य इंसान तो इन आवाजों को सुन हृद्यगत से हे अपने प्राण त्याग दे
अनछनाक वह कुछ अजीब होता है जहा पहले जंगल बुरी तरह अँधेरे में दुभा हुआ था वह अचानक से हलकी लाल सफ़ेद रौशनी होने लगती है देखते हे देखते रौशनी काफी भाड़ जाती कुछ देर यही रौशनी का आवरण बना रहने के बाद अचानक पूरी रौशनी गायब हो जाती है आवर वह एक बेहद खूबसूरत लड़की नजर आती है जो महज 24 ,25 साल की लग रही थी
बेहद गोरा रंग जैसे अभी अभी चाँद की सफ़ेद शीतल रौशनी में नाहा कर सवरग से कोई दिव्या सौन्दर्य की देवी धरती लोक भ्रमण को उत्तरी हो
उसका वो चन्द्रमा सामान दमकता खूबसूरत चेहरा उसकी वो झील से गहरी लम्भी पलकों के बिच छुपी काली आँखे हलकी उठी हुई सुत्व नाक जिसमे पहनी खूबसूरत हिरे की नाथ जिसपे पड़ती चाँद की रौशनी से भरपूर किरणे उसकी चमक आवर बढ़ा रही
वो पतले पतले गुलाबी होंठ जो मनो अभी अभी तजा खिले गुलाब की पंखुडिया हो होंटो के बिच कभी कभी चमकते मोतियों सामान सफ़ेद दन्त वो पतली सुराहीदार गर्दन किसी योगी महापुरुष का तप भांग करने के लिया पर्याप्त थे गर्दन से निचे का विधा अभी भी काळा कपडे से छुपाये गया था जो गले बंदी दूर से उस खूबसूरत हुसैन मलिका के यौवन को छुपाने में सक्षम नहीं था
वो खूबसूरत यौवना चारो आवर अपनी खूबसूरत आँखों से नजर डालती है
लड़की ........ ये कोनसा स्थान है क्या हम उचित स्थान पे आये है
कही भूल वश किसी गलत स्थान पे तो नहीं आ गए है
तभी वो अपने खूबसूरत होंटो से कुछ बुदबुदाती है अगले हे पल उसके हाथ में हलकी रौशनी होती है आवर महज 5 सेकंड बाद गायब हो जाती पैर अब उस खूबसूरत हाथ की उंगलियों ने कुछ चमकती हुई चीज़ को थामे हुए थी
ये कुछ आवर नहीं था ये एक मोबाईल था जैसे हे उस लड़की ने अपनी उंगलिया उस मोबाइल पे फिरै उसकी स्क्रीन लाइट से जगमगा उठी
तभी उस लड़की से करीब 2 कम दूर एक बड़ी से पहाड़ी पे किसी इंसान का आगमन हुआ उसकी बेहद तेज आँखे खुद से 2 कम दूर उस विशाल डरावने जंगल बिच में कड़ी उस बेहद खूबसूरत लड़की पे हे थी
उस इंसान ने अपनी आँखे बंद की अच्चानक से उसका पूरा शरीर बदलने लगा उसके सीने पे अलग हे तरह के वस्त्रो दिखाई देने लगे जो देखते हे देखते उसके पुरे शरीर को कवर कर लेता है उसके सर पे हुदी नुमा टोपी से आ गई साथ हे उसके हाथ में एक चमकती हुई तलवार जिसे उसने फ़ौरन गायब कर इस लड़की की आवर देखते हुए आसमान की आवर छलांग लगा दी
अगले 10 सेकंड में वो उस खूबसूरत लड़की के सामने खड़ा था
अचानक से अपने सामने बिना किसी आवाज के किसी के आ जाने पे वो खूबसूरत लड़की हड़बड़ा कर पीछे हाथ जाती है आवर अगले हे सेकंड में उसके खूबसूरत हाथो में चमचमति तलवार आ जाती है वो लड़की डरने की बजाय किसी वीर वीरांगना की भाटी अपने हाथ में पकड़ी तलवार को अपने सामने खड़े साक्ष के सीने सहज 2 इंच की दुरी पे बिलकुल हृद्या के स्थान पे अपना निशाना लिया कड़ी थी पैर जैसे हे लड़की का ध्यान उस साक्ष के चेहरे पे गया उसने फ़ौरन अपनी तलवार पीछे कर ली
लड़की ........ निर्भयासुर आप यहाँ पैर
निर्भया ......... जी देवी देवयानी जी मुझे माफ कीजिये सायद मैंने आपके सामने इस तरह से आ कर आपको डरा दिया था मुझे पहले सचेत करना चाइये था न की इस तरह अच्चानक से आपके सामने आना चाइये था
ये दोनों कोई आवर नहीं सूर्य आवर देवयानी जी हे थे जो दोनों अलग अलग भेष में थे जहा सूर्य निर्भयासुर के भेष में था वही देवयानी जी किसी आवर रूप में वो अपने वास्तविक रूप में नहीं थी
देवयानी जी ....... कोई बात नहीं पर आपने हमें इतनी जल्दी डुंडा कैसे हम तो यहाँ अभी अभी आये है क्या आपको पहले से पता था की हम यही आने वाले है
निर्भया ........ आपके हाथ में जो यन्त्र है वो मोबाइल है आपके पार्थवी लोक में कदम रखते हे मुझे आपके यहाँ होने की जानकारी मिल गई थी इस लिया बिना समय व्यर्थ किया मैं आपसे मिलने चला आया
देवयानी जी ......... क्या ये मोबाइल नुमा यन्त्र किसी भी स्थान का पता बता देता है
निर्भया ......... हाहाहा है ऐसा हे कुछ समझ लीजिये इसके बहुत से प्रयोग है खेर अभी हमें यहाँ से चलना चाइये हम किसी आवर स्थान पे आराम से बात करेंगे ये स्थान उचित नहीं है आपके लिया वैसे आप इस रूप में इन वस्त्रो में बेहद खूबसूरत लग रही है देवयानी जी मनो देव लोक से अप्सरा से देव अप्सरा डर्टी लोक में आ गई हो
( अब स्त्री कोई भी क्यों न हो किसी भी लोक की अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन्ना सभी को पसंद आता है आवर वो बस यही चाहती है की सामने वाला उसकी खूबसूरती की जी भर के तारीफ करे )
ऐसा हे हाल कुछ कुछ देवयानी जी का भी था निर्भया के मुँह से अपनी खूबसूरती की तुलना देव अप्सरा के सामान सुन देवयानी के खूबसूरत होंटो पे दिलकश मुस्कान तैर गई एक पल तो निर्भया भी उनकी मुस्कान से मंत्र मुग्धा हो उठा पैर जल्दी हे संभल गया
देवयानी जी ........ सूर्य कहा है क्या वो हमसे मिलने नहीं आये
निर्भया अपनी आँखे बंद कर देवयानी जी को आवर आस पास के इलाके को सन करता है सब कुछ ठीक होने पैर सूर्य ने अपना वास्तविक रूप दर्जन कर लिया किन्तु देवयानी के अलावा अगर कोई भी चुप कर सूर्य को देखता है तब उसे सूर्य के स्थान पे निर्भया हे नजर आता
सूर्य देवयानी जी को साथ लिया ुशी पहाड़ी की आवर चल दिया जल्दी हे दोनों वह पहुंचने गए
देवयानी जी ने पहाड़ पैर से जंगल को देखा जहा का पूरा नजारा साफ साफ नजर आ रहा था वो जहा प्रकट हुई थी वो स्थान भी
सूर्य ने अपने हाथ के इशारे से एक स्थान पे बैठने आवर कुछ आग का पर बंद कर दिया साथ हे अपनी ऊर्जा का प्रयोग कर दोनों के आस पास का स्थान पूरी तरह से सुरक्षा घेरे से सुरक्षित कर दिया था
घेरे के बहार से देखने पर न तो वह सूर्य नजर आ रहा था न देवयानी जी जैसे वह पहाड़ के अलावा कुछ भी नहीं हो
सूर्य ........ देवयानी जी अब आप आपके यहाँ आने के विषय में निश्चिन्त हो कर बात कर सकती है यहाँ किसी को भी हमारे होने का पता नहीं चल सकता चाहे फिर कोई भी क्यों न आये
देवयानी जी ........ क्या हम तुमसे मिलने बिना किसी कार्य के अपनी इच्छा से नहीं आ सकते है क्या सूर्य
सूर्य ........... हमारा वो मतलब नहीं था देवयानी जी आप जब चाहे तब आप हमसे मिलने आ सकती है आखिर आप बाबा ( व्योमासुर जी ) की गुरु बहन है इस नाते आपका आवर मेरा एक अलग रिस्ता है
देवयानी जी .......... मैं असुर कुल से हूँ तुम जानते हो न जहा रिश्ते नाते केवल अपने लाभ के लिया होते है
कही मुझसे रिस्ता जोड़ कर बाद में तुम्हे पछतावा न हो
सूर्य ....... भविष्य में क्या होगा किसी को कुछ नहीं मालूम अगर नियति ने ऐसा कुछ मेरे भविष्य में लिखा होगा तो उसे बदलने वाला मैं कोण आवर अगर ऐसा कुछ नहीं तो फिर कोई कितनी कोशिश कर ले नियति के समक्ष उसे जखन हे होगा
देवयानी जी सूर्य की बात सुन कुछ देर चुप रही वो एक तक सूर्य को देखती रही जैसे वो सूर्य के भीतर झाँख कर देखना चाहती हो की क्या सूर्य जो बोल रहा है वो सच या झूट
देवयानी जी .......... सूर्य पहले तो मैं तुमसे क्षमा मांगती हूँ जो कुछ भी तुम्हारे विवाह के समय पारी लोक में हुआ उसके लिया किन्तु साथ हे मैं ये भी कहना चाहती हूँ की जो भी तुम्हारे विवाह में हुआ उसके पीछे मैं या व्योमासुर में से किसी का कोई सडयंत्र नहीं था
सूर्य .........आपको माफी मांगने की जरुरत नहीं है देवयानी जी मैं जनता हूँ की इस घटना के पीछे आप या बाबा में से कोई भी नहीं है सम्भवता बाबा आवर सुक्रलोक का इस सडयंत्र में शतरंज के एक मोरे के रूप में प्रयोग किया गया है
देवयानी जी .......... ये तुम कैसे कह सकते हो सूर्य क्या तुम इस घटना के पीछे छुपे सूत्रधार तक पहुंच चुके हो
सूर्य ....... हम्म्म कुछ कुछ ऐसा हे समाज लीजिये आप फ़िलहाल मेरे पास इसका कोई साक्ष्य नहीं है जिस से मैं मेरे अनुमान को सत्य साबित कर सकू
देवयानी जी ........ मैं जानती हूँ ये सब सूर्य इस घटना का मुख्या सूत्रधार असुर लोक असुर महल से जुड़ा हुआ है किन्तु .......
देवयानी जी अपनी बात कहते हुए सूर्य के चेहरे को पढ़ने की कोशिश भी रही थी साथ साथ में पैर असुर लोक असुर महल का नाम सुनने के बाद भी सूर्य ने कोई पर्तिकिर्या नहीं दी तो देवयानी जी बोलते बोलते रुक कर सूर्य के कुछ कहने का इन्तजार करने लगी
सूर्य ....... किन्तु यही न की आपके पास भी कोई साक्ष्य नहीं है जो असुर महल को इस घटना का जिम्मेदार ठहरा सके आवर आप ये भी जानती है की क्यों इसमें सुक्रलोक आवर बाबा को शतरंज के मोरे के रूप में प्रयोग किया गया है
देवयानी जी ....... क्या मतलब मैं कुछ समझी नहीं सूर्य आप कहना क्या चाहते है
सूर्य ......... वैसे आप सब जानने के बाद भी अच्छा अभिनय कर लेती है देवयानी जी खेर जब आप मेरे मुँह से सब सुन्ना चाहती है तो मैं हे बता देता हूँ की क्यों बाबा आवर सुक्रलोक का किसी मोरे की तरह इस षड़यंत्र में उपयोग किया गया है
देवयानी जी चुप चाप सूर्य को देख रही थी सूर्य ने एक पल देवयानी को देखा आवर फिर बोलना सुरु किया
सूर्य ........ आप ये तो अच्छे से जानती होगी हे की जिस तरह से आपके गुप्तचर असुर लोक में फैले हुए है ुशी तरह असुर महल के गुप्तचर भी सुक्रलोक में आवर सायद आपके आश्रम में भज फैले होंगे जब मैं अपनी दोनों पत्नियों के साथ गुरुदेव शुक्राचार्य जी के निमंतरण पे सुक्रलोक आया तब निर्भयासुर द्वारा नरकासुर के असुर सैनिक निर्भया के हाथो मरे गए तो उसने इसकी जाँच भी करवाई होगी गुप्त रूप में या किसी के माध्यम से उसे हमारा सुक्रलोक आने का पता चल गया तब उसने अपने गुप्तचर आश्रम पे नजर रखने के लिया लगाए होंगे आवर जब मेरे आवर परिधि के विवाह की बात बाबा ने आपके आश्रम में चलाई होगी तो असुरमहल के गुप्तचरों तक बात पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा आवर इसकी खबर असुर महल पहुंच गई
वही से इस सडयंत्र की रचना हुई आवर यक्षिणी की बाबा के पीछे लगा दिया. जिसका अनुमान बाबा को भी समय रहते पता नहीं चला इस से अंदाजा लगाया जा सकता की इस खेल का खिलाडी कोई मामूली असुर नहीं है बल्कि बेहद चालक आवर तंत्र मंत्र में महारथ हासिल किया हुआ है
उसने एक तीर से दो जिसने लगाने की कोशिश की
देवयानी जी ....... मतलब
सूर्य ....... मतलब ये की उसने बहुत हे चालाकी से यक्षिणी का प्रयोग कर सुक्रलोक आवर परीलोक के साथ साथ मेरे आवर बाबा के बिच भी दुश्मनी की दिवार कड़ी करने की कोशिश की ताकि हम एक दूसरे से उलझे रहे आवर वो अपने उद्देश्य में कामयाब हो जाये जब इस सब में सुक्रलोक का नाम जुड़ जाता तब आपका ध्यान भी असुर लोक से कुछ समय के लिया हैट जाता
साथ हे अगर यक्षिणी वह से बच कर निकलने में सफल हो जाती तो उसके माध्यम से उसे जो चाइये था वो प्राप्त हो जाता
देवयानी जी ....... आपने बिलकुल उचित कहा हमें भी असुर महल सड़ जोड़े लोगो पे संदेह है हमने अपने गुप्तचर लगा रखे है जो जल्दी हे किसी न किसी जानकारी को हम तक जरूर भेजेंगे
सूर्य ....... ये अच्छा है तब तक मैं भी विवाह कार्य से फ्री हो जाऊंगा
देवयानी जी ....... क्या हमें अपने परिवार के विवाह में शामिल होने के लिया आमंत्रित नहीं करेंगे
सूर्य ....... अगर ऐसा नहीं होता तो भला मैं यहाँ क्यों आता आपको लेने ये बाते तो मैं सन्देश के माध्यम से भी बता देता आपको
सूर्य की बात सुन देवयानी मुस्कुरा देती है
सूर्य ....... रात काफी हो चुकी है अब हमें चलने चाइये ताकि थोड़ा विश्राम किया जा सके कल विवाह है बाकि बाते हम विवाह के बाद करेंगे
सूर्य अपनी आँखे बंद कर कुछ मंत्र बुदबुदाती है सूर्य के माथे से एक रौशनी निकल देवयानी जी के सर में समाहित हो जाती है
देवयानी जी की आँखे बंद हो जाती है आवर उसकी बंद आँखों के सामने बहुत कुछ चलने लगता है करीब 10 मिनट्स बाद देवयानी जी ने आँखे खोली
देवयानी जी ...... थैंक यू सूर्य
सूर्य ...... हाहाहा आप तो बहुत जल्दी सब शिख गई अच्छा है अभ सब आपको पार्थवी वाशी हे समझेंगे
देवयानी जी ...... अब मैं भी यहाँ खुल कर एन्जॉय करूंगी सदी में
सूर्य ....... जी बिलकुल अब हमें चलना चाइये पैर आपको ध्यान रखना है की आप अपनी सकती यो का इस्तेमाल नहीं करेंगी बिलकुल भी
देवयानी जी ...... Don't वोर्री सूर्य मैं पहले भी पार्थवी लोक बहुत बार आ चुकी हूँ मैं जानती हूँ पार्थवी लोक में मैजिक का प्रयोग नहीं होता
सूर्य अपने वाइट ड्रैगन का आह्वान करता है जो उनसे कुछ दुरी पे जगा पेड़ बहुत काम था वह उतरना है
देवयानी जी ने ड्रैगन पहले भी देखा था इस लिया वो जानती थी की ये ड्रैगन सूर्य का हो सकता है ( इस से पहले मानसी के ड्रैगन से देवयानी जी मिल चुकी थी )
सूर्य ........ आपको कोई एतराज तो नहीं होगा न देवयानी जी मेरे पिरया वहां की सवारी करने पैर आप जैसे खूबसूरत अप्सरा अगर मेरे साथ मेरे वहां की सवारी करेंगी तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी
देवयानी जी ......... ( मुस्कुराते हुए ) हमें आपके साथ आपके ड्रैगन की सवारी कर पर्शान्ता होगी सूर्य
सूर्य अपना हाथ देवयानी जी की आवर भाड़ा देता है देवयानी जी थोड़ी झिझक के साथ
सूर्य का हाथ थम लेती है
सूर्य को अपने हाथ में कोमल सा अहसास हुआ पैर सूर्य ने बिना अपने भाव प्रकार किये बिना किसी पर्तिकिर्या के देवयानी जी का हाथ थम एक हलके से जम्प के साथ वाइट ड्रैगन पे आ खड़ा हुआ
सूर्य ने पहले हे दोनों के बैठने के लिया ड्रैगन पे ासननुमा आराम दायक स्थान बनाया हुआ था
देवयानी जी आगे आवर सूर्य उनकी बगल में ठीक दोनों पंक के बिच के स्थान पे बेथ चूका था सूर्य के बैठने के तुरंत बाद ड्रैगन वह से उड़न भर लेता है
आवर करीब आधे घंटे बाद ड्रैगन सूर्य आवर देवयानी जी को सूर्यगढ़ के पास वाले जंगल में पहुँचता है सूर्य ड्रैगन को वापिस अपने अंदर ले लेता है
देवयानी जी ....... ये कोनसा जहा है सूर्य
सूर्य ........... ये सूर्यगढ़ है देवयानी जी आवर आप वडा कीजिये आप किसी को भी यहाँ या फिर मेरे घर या परिवार की बारे में किसी को भी नहीं बताएंगी
देवयानी जी ...... चिंता न करो मैं तुम्हारी परेशानी समझती हूँ मैं तुम्हे वचन देती हूँ तुमसे जुडी कोई भी बात मेरी जुबान पे नहीं आएगी हमेशा मेरे सीने में दफ़न रहेगी
सीने में दफ़न रहने वाली बात सुनते हे सूर्य की नजर be-khayali में देवयानी जी की समथिंग 36 साइज के सीने पे जा रुकी
देवयानी जी ने भी ये देख लिया था उसे अजीब भज लग रहा था आवर सरम भी आ रही थी
देवयानी जी ..... हुन्न हुन्न देख लिया हो तो चले अब
सूर्य ....... है है सॉरी वो मैं ी ऍम रियली सॉरी पता नहीं कैसे
देवयानी जी ......कोई बात नहीं आगे से ध्यान रखना
सूर्य देवयानी जी को ले कर सीधा हवेली की छठ पे पंहुचा आवर मानसी को छठ पे बुलाता है
मानसी जो शार्ट निघ्त्य में सोये हए थे वो ुशी तरह उठ कर सूर्य आवर देवयानी की सामने आ कड़ी हुई
मानसी ...... ( नींद में हे ) आपने मुझे बुलाया कुंवर जी
कहते हुए सूर्य की बाजु पकड़ कंडे पर सर रख फिर से खड़े खड़े आँखे बंद कर ली
सूर्य ......... मनु अपनी आँखे खोलो आवर देखो तो हमसे मिलने देवयानी जी आई है सुक्रलोक से
सूर्य की बात सुनते हे मानसी की आँखे फ़ौरन खुल जाती है
मानसी ...... आप आप इस समय यहाँ
सूर्य ...... अब आप आप क्या कर रही हो इन हे रूम में ले जाओ बुआ है तुम्हारी
मानसी देवयानी ........ क्या मतलब बुआ
सूर्य ....... मेरा मतलब देवयानी जी बाबा की गुरु बहन है न तो रिश्ते में तुम्हारी बुआ हे हुई न अब किसी न किसी रिश्ते से सुबह इनका परिचित सभी से कर वह होगा न
मानसी ....... है ये तो है
सूर्य ...... ठीक है इन हे अपने रूम में ले जाओ आवर आराम करो अभी टाइम है थोड़ा सुबह होने में
मानसी सूर्य के गाल चुम कर गुड नाईट बोल देवयानी जी का हाथ थामे निचे चल देती है
सूर्य वह से जीनत के रूम में जाता है आवर उसे बहो में भर कर लेट जाता है पैर नींद जैसे सूर्य की आँखों से गायब हो चुकी थी
वही देवयानी जज भी अपने अंदर एक अलग हे बदलाव मह्सुश कर रही थी जब से उसने वाइट ड्रैगन पे बेथ कर सूर्य के साथ उसकी सवारी की तब से .................
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
स्पेशल अपडेट फॉर देवयानी जी ..........}
अब आगे ........... रात के घने अंधकार में असुरगुरु शुक्राचार्य के आश्रम से कोई चोरी छुपे ऊपर से निचे तक काळा कपड़ो से देखा कोई साक्ष बहार निकला बड़ी हे सावधानी से आश्रम से निकल पूर्व की आवर तेजी से भाड़ रहा था
कुछ आगे जाने पे एक पेड़ के निचे कला घोडा बंधा हुआ था वो काळा लबादे में देखा सकाश उस काळा घोड़े की उस पेड़ से बंदी राशि को खोल उसपे सवार हो जाता है
आवर तेजी से उस अंधकार से भरी रात में घोड़े को पूरी तेजी से दौड़ा देता है
उस से कुछ दुरी पे ुशी फरहा के भेष में कुछ लोग उसका पीछा कर रहे थे ऊपर से निचे पूरी तरह से खुद को उस अँधेरे भरे वातावरण में छुपाये हुए
पैर सायद इनकी किस्मत कहे या उनका दुर्भाग्य कुछ दूर जाने के बाद अचानक उनकी आँखों से वो घोडा जैसे पूरी तरह से हवा में गायब हो गया
नकाबपोश 1 ...... ये क्या हुआ वो कहा गया सभी लोग डंडो उसे वो हमारी आँखों से ओझल नहीं हो सकता
कुछ देर उदार उदार देखते रहने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिला उदार ये लोग उस घुड़सवार को डंडो रहे थे ठीक ुशी समय
आश्रम से एक साक्ष आवर निकला जो दिखने में बिलकुल पहले घुड़सवार के जैसा हे प्रतीत हो रहा था बस फरक इतना था की इस घुड़सवार की आँखे साफ साफ देखि जा सकती थी
आश्रम से कुछ दुरी पे उसे ुशी तरह के वस्त्रो में कुछ लोग आवर मिले
चारो तरफ अच्छे से देखने के बाद घुड़ सवार इंसान उन सभी के पास जाता है
जिसे देख बाकि सभी उसके सामने आदाब से अपना सर जुखा लेते है
तभी आश्रम से काफी दूर दूसरी आवर से एक रौशनी आकाश में एक दमके की आवाज के साथ ब्लास्ट होती है
जिसे देख उस घुड़सवार की खूबसूरत आँखे चमक उठी
आवर उसने अपने चेहरे से वो कला लबादा हटा दिया उस लबादे के पीछे जिस साक्ष का चेहरा था वो कोई आवर नहीं असुरगुरु शुक्राचार्य पुत्री राजकुमारी देवयानी जी थी
देवयानी जी ......... तुम सब ने बहुत अच्छा काम किया सेविकाओं अभी तुम कड़ी हो सकती हो
सेविका ...... शुक्रिया राजकुमारी जी आपने हमें सेवा का मौका दिया
देवयानी जी ....... हमने जो सामान आपको लेन को कहा था क्या वो आप ले आये
सेविका ....... जी राजकुमारी जी जैसा आपका आदेश था हमने ुशी के अनुकूल सब व्यवस्था की है राजकुमारी जी
देवयानी जी ....... ठीक है अब तुम लोग जा सकती हो आवर आश्रम की हर गति विधि पे दूर से नजर बनाये रखना अगर तुम लोगो को लगे की मेरे लिया कोई आवशयक सुचना है तब मेनका तुम मुझसे सम्पर्क कर सकती हो अगर मुझसे सम्पर्क न हो तो फ़ौरन व्योमासुर को इस्थिति से अवगत करवा देना
मेनका ( जो सभी दसियो में सबसे खूबसूरत आवर सायद देवयानी जी पिरया दासी थी ) ..... जी राजकुमारी जी जैसा आप कहे हम वैसा हे करेंगे
देवयानी जी ....... क्या हुआ मेनका कुछ आवर कहना चाहती हो
मेनका .....जी जी वो राजकुमारी जी वो क्या आप पहले से जानती थी की कोई आश्रम पे नजर रखे हुए है आवर इतने बहु मूल्य उपहार किस इंसान को भेंट करने की आपको क्या आव्सय्कता ाँ पड़ी
देवयानी जी ........ है माहे पूर्व से हे संदेह था की कोई हमारे बिच रह कर हमारी सुचना किसी को भेज रहा है पुर रही बात इन बहुमल्य उपहारों की तो न तो ये हमारे लिया बहु मूल्य है आवर न उसके लिया जिसे हम ये भेंट स्वरुप दे रहे है अब तुम सभी जाओ आवर हमने जो आदेश दिया है उसे बिना किसी चूक के पूरा करो
मेनका ..... .... जी जी राजकुमारी जी
मेनका अपना साथ आये 4.5 दसियो को ले वह से हवा की तरह गायब हो गई आवर देवयानी अपनी मंत्र सकती का प्रयोग कर वह से मेनका द्वारा लाये संदूक को ले कर गायब हो गई ......
उदार सूर्यगढ़ से बहुत दूर एक विशाल जंगल जो की पूर्ण चांदनी रात के बावजूद भी घने विशाल पढ़ो के चलते चाँद की रौशनी जंगल में बहुत काम मात्रा में जमीं को स्पर्श कर प् रही थी चारो तरफ जानवरो जिव जन्तुओ की डरावनी आवाज इस घने जंगल के संत वातवर को आवर भी डरावना बना रहे थे सामान्य इंसान तो इन आवाजों को सुन हृद्यगत से हे अपने प्राण त्याग दे
अनछनाक वह कुछ अजीब होता है जहा पहले जंगल बुरी तरह अँधेरे में दुभा हुआ था वह अचानक से हलकी लाल सफ़ेद रौशनी होने लगती है देखते हे देखते रौशनी काफी भाड़ जाती कुछ देर यही रौशनी का आवरण बना रहने के बाद अचानक पूरी रौशनी गायब हो जाती है आवर वह एक बेहद खूबसूरत लड़की नजर आती है जो महज 24 ,25 साल की लग रही थी
बेहद गोरा रंग जैसे अभी अभी चाँद की सफ़ेद शीतल रौशनी में नाहा कर सवरग से कोई दिव्या सौन्दर्य की देवी धरती लोक भ्रमण को उत्तरी हो
उसका वो चन्द्रमा सामान दमकता खूबसूरत चेहरा उसकी वो झील से गहरी लम्भी पलकों के बिच छुपी काली आँखे हलकी उठी हुई सुत्व नाक जिसमे पहनी खूबसूरत हिरे की नाथ जिसपे पड़ती चाँद की रौशनी से भरपूर किरणे उसकी चमक आवर बढ़ा रही
वो पतले पतले गुलाबी होंठ जो मनो अभी अभी तजा खिले गुलाब की पंखुडिया हो होंटो के बिच कभी कभी चमकते मोतियों सामान सफ़ेद दन्त वो पतली सुराहीदार गर्दन किसी योगी महापुरुष का तप भांग करने के लिया पर्याप्त थे गर्दन से निचे का विधा अभी भी काळा कपडे से छुपाये गया था जो गले बंदी दूर से उस खूबसूरत हुसैन मलिका के यौवन को छुपाने में सक्षम नहीं था
वो खूबसूरत यौवना चारो आवर अपनी खूबसूरत आँखों से नजर डालती है
लड़की ........ ये कोनसा स्थान है क्या हम उचित स्थान पे आये है
कही भूल वश किसी गलत स्थान पे तो नहीं आ गए है
तभी वो अपने खूबसूरत होंटो से कुछ बुदबुदाती है अगले हे पल उसके हाथ में हलकी रौशनी होती है आवर महज 5 सेकंड बाद गायब हो जाती पैर अब उस खूबसूरत हाथ की उंगलियों ने कुछ चमकती हुई चीज़ को थामे हुए थी
ये कुछ आवर नहीं था ये एक मोबाईल था जैसे हे उस लड़की ने अपनी उंगलिया उस मोबाइल पे फिरै उसकी स्क्रीन लाइट से जगमगा उठी
तभी उस लड़की से करीब 2 कम दूर एक बड़ी से पहाड़ी पे किसी इंसान का आगमन हुआ उसकी बेहद तेज आँखे खुद से 2 कम दूर उस विशाल डरावने जंगल बिच में कड़ी उस बेहद खूबसूरत लड़की पे हे थी
उस इंसान ने अपनी आँखे बंद की अच्चानक से उसका पूरा शरीर बदलने लगा उसके सीने पे अलग हे तरह के वस्त्रो दिखाई देने लगे जो देखते हे देखते उसके पुरे शरीर को कवर कर लेता है उसके सर पे हुदी नुमा टोपी से आ गई साथ हे उसके हाथ में एक चमकती हुई तलवार जिसे उसने फ़ौरन गायब कर इस लड़की की आवर देखते हुए आसमान की आवर छलांग लगा दी
अगले 10 सेकंड में वो उस खूबसूरत लड़की के सामने खड़ा था
अचानक से अपने सामने बिना किसी आवाज के किसी के आ जाने पे वो खूबसूरत लड़की हड़बड़ा कर पीछे हाथ जाती है आवर अगले हे सेकंड में उसके खूबसूरत हाथो में चमचमति तलवार आ जाती है वो लड़की डरने की बजाय किसी वीर वीरांगना की भाटी अपने हाथ में पकड़ी तलवार को अपने सामने खड़े साक्ष के सीने सहज 2 इंच की दुरी पे बिलकुल हृद्या के स्थान पे अपना निशाना लिया कड़ी थी पैर जैसे हे लड़की का ध्यान उस साक्ष के चेहरे पे गया उसने फ़ौरन अपनी तलवार पीछे कर ली
लड़की ........ निर्भयासुर आप यहाँ पैर
निर्भया ......... जी देवी देवयानी जी मुझे माफ कीजिये सायद मैंने आपके सामने इस तरह से आ कर आपको डरा दिया था मुझे पहले सचेत करना चाइये था न की इस तरह अच्चानक से आपके सामने आना चाइये था
ये दोनों कोई आवर नहीं सूर्य आवर देवयानी जी हे थे जो दोनों अलग अलग भेष में थे जहा सूर्य निर्भयासुर के भेष में था वही देवयानी जी किसी आवर रूप में वो अपने वास्तविक रूप में नहीं थी
देवयानी जी ....... कोई बात नहीं पर आपने हमें इतनी जल्दी डुंडा कैसे हम तो यहाँ अभी अभी आये है क्या आपको पहले से पता था की हम यही आने वाले है
निर्भया ........ आपके हाथ में जो यन्त्र है वो मोबाइल है आपके पार्थवी लोक में कदम रखते हे मुझे आपके यहाँ होने की जानकारी मिल गई थी इस लिया बिना समय व्यर्थ किया मैं आपसे मिलने चला आया
देवयानी जी ......... क्या ये मोबाइल नुमा यन्त्र किसी भी स्थान का पता बता देता है
निर्भया ......... हाहाहा है ऐसा हे कुछ समझ लीजिये इसके बहुत से प्रयोग है खेर अभी हमें यहाँ से चलना चाइये हम किसी आवर स्थान पे आराम से बात करेंगे ये स्थान उचित नहीं है आपके लिया वैसे आप इस रूप में इन वस्त्रो में बेहद खूबसूरत लग रही है देवयानी जी मनो देव लोक से अप्सरा से देव अप्सरा डर्टी लोक में आ गई हो
( अब स्त्री कोई भी क्यों न हो किसी भी लोक की अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन्ना सभी को पसंद आता है आवर वो बस यही चाहती है की सामने वाला उसकी खूबसूरती की जी भर के तारीफ करे )
ऐसा हे हाल कुछ कुछ देवयानी जी का भी था निर्भया के मुँह से अपनी खूबसूरती की तुलना देव अप्सरा के सामान सुन देवयानी के खूबसूरत होंटो पे दिलकश मुस्कान तैर गई एक पल तो निर्भया भी उनकी मुस्कान से मंत्र मुग्धा हो उठा पैर जल्दी हे संभल गया
देवयानी जी ........ सूर्य कहा है क्या वो हमसे मिलने नहीं आये
निर्भया अपनी आँखे बंद कर देवयानी जी को आवर आस पास के इलाके को सन करता है सब कुछ ठीक होने पैर सूर्य ने अपना वास्तविक रूप दर्जन कर लिया किन्तु देवयानी के अलावा अगर कोई भी चुप कर सूर्य को देखता है तब उसे सूर्य के स्थान पे निर्भया हे नजर आता
सूर्य देवयानी जी को साथ लिया ुशी पहाड़ी की आवर चल दिया जल्दी हे दोनों वह पहुंचने गए
देवयानी जी ने पहाड़ पैर से जंगल को देखा जहा का पूरा नजारा साफ साफ नजर आ रहा था वो जहा प्रकट हुई थी वो स्थान भी
सूर्य ने अपने हाथ के इशारे से एक स्थान पे बैठने आवर कुछ आग का पर बंद कर दिया साथ हे अपनी ऊर्जा का प्रयोग कर दोनों के आस पास का स्थान पूरी तरह से सुरक्षा घेरे से सुरक्षित कर दिया था
घेरे के बहार से देखने पर न तो वह सूर्य नजर आ रहा था न देवयानी जी जैसे वह पहाड़ के अलावा कुछ भी नहीं हो
सूर्य ........ देवयानी जी अब आप आपके यहाँ आने के विषय में निश्चिन्त हो कर बात कर सकती है यहाँ किसी को भी हमारे होने का पता नहीं चल सकता चाहे फिर कोई भी क्यों न आये
देवयानी जी ........ क्या हम तुमसे मिलने बिना किसी कार्य के अपनी इच्छा से नहीं आ सकते है क्या सूर्य
सूर्य ........... हमारा वो मतलब नहीं था देवयानी जी आप जब चाहे तब आप हमसे मिलने आ सकती है आखिर आप बाबा ( व्योमासुर जी ) की गुरु बहन है इस नाते आपका आवर मेरा एक अलग रिस्ता है
देवयानी जी .......... मैं असुर कुल से हूँ तुम जानते हो न जहा रिश्ते नाते केवल अपने लाभ के लिया होते है
कही मुझसे रिस्ता जोड़ कर बाद में तुम्हे पछतावा न हो
सूर्य ....... भविष्य में क्या होगा किसी को कुछ नहीं मालूम अगर नियति ने ऐसा कुछ मेरे भविष्य में लिखा होगा तो उसे बदलने वाला मैं कोण आवर अगर ऐसा कुछ नहीं तो फिर कोई कितनी कोशिश कर ले नियति के समक्ष उसे जखन हे होगा
देवयानी जी सूर्य की बात सुन कुछ देर चुप रही वो एक तक सूर्य को देखती रही जैसे वो सूर्य के भीतर झाँख कर देखना चाहती हो की क्या सूर्य जो बोल रहा है वो सच या झूट
देवयानी जी .......... सूर्य पहले तो मैं तुमसे क्षमा मांगती हूँ जो कुछ भी तुम्हारे विवाह के समय पारी लोक में हुआ उसके लिया किन्तु साथ हे मैं ये भी कहना चाहती हूँ की जो भी तुम्हारे विवाह में हुआ उसके पीछे मैं या व्योमासुर में से किसी का कोई सडयंत्र नहीं था
सूर्य .........आपको माफी मांगने की जरुरत नहीं है देवयानी जी मैं जनता हूँ की इस घटना के पीछे आप या बाबा में से कोई भी नहीं है सम्भवता बाबा आवर सुक्रलोक का इस सडयंत्र में शतरंज के एक मोरे के रूप में प्रयोग किया गया है
देवयानी जी .......... ये तुम कैसे कह सकते हो सूर्य क्या तुम इस घटना के पीछे छुपे सूत्रधार तक पहुंच चुके हो
सूर्य ....... हम्म्म कुछ कुछ ऐसा हे समाज लीजिये आप फ़िलहाल मेरे पास इसका कोई साक्ष्य नहीं है जिस से मैं मेरे अनुमान को सत्य साबित कर सकू
देवयानी जी ........ मैं जानती हूँ ये सब सूर्य इस घटना का मुख्या सूत्रधार असुर लोक असुर महल से जुड़ा हुआ है किन्तु .......
देवयानी जी अपनी बात कहते हुए सूर्य के चेहरे को पढ़ने की कोशिश भी रही थी साथ साथ में पैर असुर लोक असुर महल का नाम सुनने के बाद भी सूर्य ने कोई पर्तिकिर्या नहीं दी तो देवयानी जी बोलते बोलते रुक कर सूर्य के कुछ कहने का इन्तजार करने लगी
सूर्य ....... किन्तु यही न की आपके पास भी कोई साक्ष्य नहीं है जो असुर महल को इस घटना का जिम्मेदार ठहरा सके आवर आप ये भी जानती है की क्यों इसमें सुक्रलोक आवर बाबा को शतरंज के मोरे के रूप में प्रयोग किया गया है
देवयानी जी ....... क्या मतलब मैं कुछ समझी नहीं सूर्य आप कहना क्या चाहते है
सूर्य ......... वैसे आप सब जानने के बाद भी अच्छा अभिनय कर लेती है देवयानी जी खेर जब आप मेरे मुँह से सब सुन्ना चाहती है तो मैं हे बता देता हूँ की क्यों बाबा आवर सुक्रलोक का किसी मोरे की तरह इस षड़यंत्र में उपयोग किया गया है
देवयानी जी चुप चाप सूर्य को देख रही थी सूर्य ने एक पल देवयानी को देखा आवर फिर बोलना सुरु किया
सूर्य ........ आप ये तो अच्छे से जानती होगी हे की जिस तरह से आपके गुप्तचर असुर लोक में फैले हुए है ुशी तरह असुर महल के गुप्तचर भी सुक्रलोक में आवर सायद आपके आश्रम में भज फैले होंगे जब मैं अपनी दोनों पत्नियों के साथ गुरुदेव शुक्राचार्य जी के निमंतरण पे सुक्रलोक आया तब निर्भयासुर द्वारा नरकासुर के असुर सैनिक निर्भया के हाथो मरे गए तो उसने इसकी जाँच भी करवाई होगी गुप्त रूप में या किसी के माध्यम से उसे हमारा सुक्रलोक आने का पता चल गया तब उसने अपने गुप्तचर आश्रम पे नजर रखने के लिया लगाए होंगे आवर जब मेरे आवर परिधि के विवाह की बात बाबा ने आपके आश्रम में चलाई होगी तो असुरमहल के गुप्तचरों तक बात पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा आवर इसकी खबर असुर महल पहुंच गई
वही से इस सडयंत्र की रचना हुई आवर यक्षिणी की बाबा के पीछे लगा दिया. जिसका अनुमान बाबा को भी समय रहते पता नहीं चला इस से अंदाजा लगाया जा सकता की इस खेल का खिलाडी कोई मामूली असुर नहीं है बल्कि बेहद चालक आवर तंत्र मंत्र में महारथ हासिल किया हुआ है
उसने एक तीर से दो जिसने लगाने की कोशिश की
देवयानी जी ....... मतलब
सूर्य ....... मतलब ये की उसने बहुत हे चालाकी से यक्षिणी का प्रयोग कर सुक्रलोक आवर परीलोक के साथ साथ मेरे आवर बाबा के बिच भी दुश्मनी की दिवार कड़ी करने की कोशिश की ताकि हम एक दूसरे से उलझे रहे आवर वो अपने उद्देश्य में कामयाब हो जाये जब इस सब में सुक्रलोक का नाम जुड़ जाता तब आपका ध्यान भी असुर लोक से कुछ समय के लिया हैट जाता
साथ हे अगर यक्षिणी वह से बच कर निकलने में सफल हो जाती तो उसके माध्यम से उसे जो चाइये था वो प्राप्त हो जाता
देवयानी जी ....... आपने बिलकुल उचित कहा हमें भी असुर महल सड़ जोड़े लोगो पे संदेह है हमने अपने गुप्तचर लगा रखे है जो जल्दी हे किसी न किसी जानकारी को हम तक जरूर भेजेंगे
सूर्य ....... ये अच्छा है तब तक मैं भी विवाह कार्य से फ्री हो जाऊंगा
देवयानी जी ....... क्या हमें अपने परिवार के विवाह में शामिल होने के लिया आमंत्रित नहीं करेंगे
सूर्य ....... अगर ऐसा नहीं होता तो भला मैं यहाँ क्यों आता आपको लेने ये बाते तो मैं सन्देश के माध्यम से भी बता देता आपको
सूर्य की बात सुन देवयानी मुस्कुरा देती है
सूर्य ....... रात काफी हो चुकी है अब हमें चलने चाइये ताकि थोड़ा विश्राम किया जा सके कल विवाह है बाकि बाते हम विवाह के बाद करेंगे
सूर्य अपनी आँखे बंद कर कुछ मंत्र बुदबुदाती है सूर्य के माथे से एक रौशनी निकल देवयानी जी के सर में समाहित हो जाती है
देवयानी जी की आँखे बंद हो जाती है आवर उसकी बंद आँखों के सामने बहुत कुछ चलने लगता है करीब 10 मिनट्स बाद देवयानी जी ने आँखे खोली
देवयानी जी ...... थैंक यू सूर्य
सूर्य ...... हाहाहा आप तो बहुत जल्दी सब शिख गई अच्छा है अभ सब आपको पार्थवी वाशी हे समझेंगे
देवयानी जी ...... अब मैं भी यहाँ खुल कर एन्जॉय करूंगी सदी में
सूर्य ....... जी बिलकुल अब हमें चलना चाइये पैर आपको ध्यान रखना है की आप अपनी सकती यो का इस्तेमाल नहीं करेंगी बिलकुल भी
देवयानी जी ...... Don't वोर्री सूर्य मैं पहले भी पार्थवी लोक बहुत बार आ चुकी हूँ मैं जानती हूँ पार्थवी लोक में मैजिक का प्रयोग नहीं होता
सूर्य अपने वाइट ड्रैगन का आह्वान करता है जो उनसे कुछ दुरी पे जगा पेड़ बहुत काम था वह उतरना है
देवयानी जी ने ड्रैगन पहले भी देखा था इस लिया वो जानती थी की ये ड्रैगन सूर्य का हो सकता है ( इस से पहले मानसी के ड्रैगन से देवयानी जी मिल चुकी थी )
सूर्य ........ आपको कोई एतराज तो नहीं होगा न देवयानी जी मेरे पिरया वहां की सवारी करने पैर आप जैसे खूबसूरत अप्सरा अगर मेरे साथ मेरे वहां की सवारी करेंगी तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी
देवयानी जी ......... ( मुस्कुराते हुए ) हमें आपके साथ आपके ड्रैगन की सवारी कर पर्शान्ता होगी सूर्य
सूर्य अपना हाथ देवयानी जी की आवर भाड़ा देता है देवयानी जी थोड़ी झिझक के साथ
सूर्य का हाथ थम लेती है
सूर्य को अपने हाथ में कोमल सा अहसास हुआ पैर सूर्य ने बिना अपने भाव प्रकार किये बिना किसी पर्तिकिर्या के देवयानी जी का हाथ थम एक हलके से जम्प के साथ वाइट ड्रैगन पे आ खड़ा हुआ
सूर्य ने पहले हे दोनों के बैठने के लिया ड्रैगन पे ासननुमा आराम दायक स्थान बनाया हुआ था
देवयानी जी आगे आवर सूर्य उनकी बगल में ठीक दोनों पंक के बिच के स्थान पे बेथ चूका था सूर्य के बैठने के तुरंत बाद ड्रैगन वह से उड़न भर लेता है
आवर करीब आधे घंटे बाद ड्रैगन सूर्य आवर देवयानी जी को सूर्यगढ़ के पास वाले जंगल में पहुँचता है सूर्य ड्रैगन को वापिस अपने अंदर ले लेता है
देवयानी जी ....... ये कोनसा जहा है सूर्य
सूर्य ........... ये सूर्यगढ़ है देवयानी जी आवर आप वडा कीजिये आप किसी को भी यहाँ या फिर मेरे घर या परिवार की बारे में किसी को भी नहीं बताएंगी
देवयानी जी ...... चिंता न करो मैं तुम्हारी परेशानी समझती हूँ मैं तुम्हे वचन देती हूँ तुमसे जुडी कोई भी बात मेरी जुबान पे नहीं आएगी हमेशा मेरे सीने में दफ़न रहेगी
सीने में दफ़न रहने वाली बात सुनते हे सूर्य की नजर be-khayali में देवयानी जी की समथिंग 36 साइज के सीने पे जा रुकी
देवयानी जी ने भी ये देख लिया था उसे अजीब भज लग रहा था आवर सरम भी आ रही थी
देवयानी जी ..... हुन्न हुन्न देख लिया हो तो चले अब
सूर्य ....... है है सॉरी वो मैं ी ऍम रियली सॉरी पता नहीं कैसे
देवयानी जी ......कोई बात नहीं आगे से ध्यान रखना
सूर्य देवयानी जी को ले कर सीधा हवेली की छठ पे पंहुचा आवर मानसी को छठ पे बुलाता है
मानसी जो शार्ट निघ्त्य में सोये हए थे वो ुशी तरह उठ कर सूर्य आवर देवयानी की सामने आ कड़ी हुई
मानसी ...... ( नींद में हे ) आपने मुझे बुलाया कुंवर जी
कहते हुए सूर्य की बाजु पकड़ कंडे पर सर रख फिर से खड़े खड़े आँखे बंद कर ली
सूर्य ......... मनु अपनी आँखे खोलो आवर देखो तो हमसे मिलने देवयानी जी आई है सुक्रलोक से
सूर्य की बात सुनते हे मानसी की आँखे फ़ौरन खुल जाती है
मानसी ...... आप आप इस समय यहाँ
सूर्य ...... अब आप आप क्या कर रही हो इन हे रूम में ले जाओ बुआ है तुम्हारी
मानसी देवयानी ........ क्या मतलब बुआ
सूर्य ....... मेरा मतलब देवयानी जी बाबा की गुरु बहन है न तो रिश्ते में तुम्हारी बुआ हे हुई न अब किसी न किसी रिश्ते से सुबह इनका परिचित सभी से कर वह होगा न
मानसी ....... है ये तो है
सूर्य ...... ठीक है इन हे अपने रूम में ले जाओ आवर आराम करो अभी टाइम है थोड़ा सुबह होने में
मानसी सूर्य के गाल चुम कर गुड नाईट बोल देवयानी जी का हाथ थामे निचे चल देती है
सूर्य वह से जीनत के रूम में जाता है आवर उसे बहो में भर कर लेट जाता है पैर नींद जैसे सूर्य की आँखों से गायब हो चुकी थी
वही देवयानी जज भी अपने अंदर एक अलग हे बदलाव मह्सुश कर रही थी जब से उसने वाइट ड्रैगन पे बेथ कर सूर्य के साथ उसकी सवारी की तब से .................
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
