Incest kahani - Shikari Ki Bimari - SexBaba
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Incest kahani - Shikari Ki Bimari

hotaks

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दोस्तों बहुत दिनों से इस स्टोरी को शुरू करने की कोशिस कर रहा था लेकिन खुद या तो बिजी था या तो लिखने का मन hi नहीं था ..

अब जाकर ये नयी स्टोरी शुरू कर रहा हु ..

ये एक इन्सेस्ट स्टोरी होगी , जिसमे थोड़ा फंतासी , रोमांस , सस्पेंस और थ्रिल का तड़का होगा ..

आगे आप लोग पढ़ कर समझ hi जाओगे :अप्प्रोवे:

तो एन्जॉय आईटी :)
 
अपडेट 1
आँखों के सामने घाना अँधेरा छाया हुआ था ,कुछ आवाजे अभी भी मेरे कानो में आ रही थी ,कुछ रोने की आवाजे ,कुछ चिल्लाने की आवाजे, मैं अपनी आंखे खोलकर इन सबको देख पाने में असमर्थ था ,मेरे सरे शरीर में इतने घाव पद चुके थे की मुझे इनके दर्द का अहसास भी होना बंद हो चूका था ,धीरे धीरे मैं बेसुध हो गया ………

मैं सपनो की एक नयी दुनिया में खो चूका था ,जंहा मेरे पिता हाथो में लम्बी सी चमकदार तलवार लिए खड़े हुए दिखाई दिए ,उनका पूरा शरीर चमक रहा था ,माँ उनके बांहो में रक्षा का धागा बांध रही थी ,उनकी मूंछे पुरे सबाब में उठी हुई थी ,मर्दानगी उनके जिस्म से hi नहीं बल्कि उनके रोम रोम से फुट रही थी ,वो गर्व से भरे हुए नजर आ रहे थे ,इतनी भीड़ और शोर शराबे में भी उनके चेहरे में एक शिकन तक नहीं थी ,मरने का कोई दर कही भी दिखाई नहीं दे रहा था ,आँखों में चमक थी और उनकी नजरे मेरे उप्पेर गई उनके चेहरे की मुस्कान और भी गाडी हो गई जैसे वो मुझसे कह रहे हो की आने वाले दिन में उनकी ये जगह मुझे लेनी है …….

“नर्स तुरंत इंजेक्शन बनाओ इसकी धड़कन धीमी हो रही है “

मेरे कानो में ये आवाज आयी ,मुझे अभी ये खबर hi नहीं थी की मैं अभी कहा था ,कुछ देर पहले मेरे जिस्म में ना जाने कितने वॉर किये गए थे ,तलवारो से मेरे पिता जी मेरे दोनों चाचा और मुझे चिर दिया गया tha,pta नहीं शायद मैं भी कुछ hi देर का मेहमान था ……..

ये सब किसने किया था ???

मुझे उसका नाम कुछ कुछ सुनाई दे रहा था जब पिता जी ने उसे ललकारा था …सुलभ सिंह ..

साहनपुर के मुखिया का भाई …

घुघर का मैदान ,और हमारे परिवार का एक बहुत hi महत्वपूर्ण दिन ,घुघर का मैदान दो गांवो के बिच में था, एक था साहनपुर तो दूसरा था लखनपुर ,दोनों गांवो में ना जाने कितने ज़माने से दुश्मनी का माहौल था ,और दोनों hi गांवो के बिच था घुघर गांव ,घुघर गांव पहले शिकारियों का गांव होता था ,शिकारी जो अपनी कला को लेकर प्रसिद्ध तो थे hi साथ hi साथ और भी कई अजीबो गरीब प्रथाओं के लिए प्रसिद्धः थे ,यही गांव था साहनपुर और लखनपुर के बिच की दुश्मनी का कारण ,घुघर के मैदान में बानी शिकारियों के देवता का मंदिर, हर 10 सालो में यंहा मेला होता था ,मेला भी कोई ऐसा वैसा नहीं बल्कि इसे खुनी मेला कहा जाता था, खुनी मेला इसलिए क्योकि यंहा खून की होली खेली जाती थी ,वो भी बस 2 परिवारों के बिच लखनपुर और साहनपुर के मुखिया के परिवारों के बिच ये दोनों परिवार सालो से एक दूसरे के कट्टर दुशमन थे ,और दुशानि की वजह थी घुघर के मैदान में बने शिकारी के मंदिर पर अधिकार ,इसके लिए एक मेले का आयोजन किया जाता था जिसमे दोनों परिवारों के लोगो के बिच एक जंग होती थी खुनी जंग, जो जित जाता उसे मिलता था 10 सालो के लिए पूजा का अधिकार ..

मैं भी उसी परिवार में से एक का सदस्य था, मई लखनपुर के चौधरी परिवार के इस पीडाही का इकलौता मर्द था ,मेरे पिता जी लखनपुर के मुखिया थे और उनके 2 और भाई थे ,मेरा नाम है अजय ,मेरे पिता विनय चौधरी की लड़ाई आज साहनपुर के मुखिया तरसिंघ से होने वाली थी ,दोनों hi परिवार दांतो में उंगली दबाकर बैठे हुए तमाशा देख रहे थे ,सबको पता था की दोनों में से एक hi जीतेगा और दूसरा या तो 10 सालो तक पराजय की आग में जलेगा या फिर वही अपनी जीवन लीला को समाप्त कर देगा ..

इतने बैर होने के बाद भी दोनों गांव के लोगो में एक नियम था की महिलाओ और बच्चो पर कोई हाथ नहीं उठता था, एक दूसरे से लड़ने वाले की और उसके मौत की भी इज्जत की जाती थी ,इस मंदिर में ऐसा क्या खास था ये तो अभी मेरे नौजवान दिमाग के बहार था ,लेकिन मैं अपनी माँ और चाचा- चहियो और बहनो के साथ बैठा हुआ उत्सुकता से पिता जी को जीतते हुए देखना चाहता था ..

सामने तारा सिंह का परिवार बैठा हुआ था ,उसका भाई सुलभ सिंह बहुत hi उत्तेजित दिखाई पद रहा था ,साथ hi एक मेरे hi उम्र की कन्या पर मेरा धायण जैम गया ,ये थी तारा सिंह की बेटी रिद्धिमा ..हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा उठे क्योकि हम एक hi क्लास में पड़ते थे ,कभी बात नहीं की थी लेकिन एक दूसरे को देखा करते थे ,जी है तीनो गांव के बच्चे एक hi स्कूल ,एक hi कॉलेज में पढ़ते थे ,एक hi मंदिर में पूजा किया करते थे ,एक hi बाजार से सामान लिया करते थे ,और तीनो चीजे एक hi जगह पर थी वो था घुघर गांव ..बस कॉलेज 3no गांवो से थोड़े दूर बादलखेड़ा शहर में था जंहा मैं मेरी बहन (चहका की लड़की) शिरीन और रिद्धिमा पढ़ते थे, लेकिन बादलखेड़ा जाने का रास्ता भी घुघर से होकर hi गुजरता था …

अजीब बात थी की लड़ाई तो 10 सालो में एक बार hi होती थी लेकिन दुश्मनी हमेशा hi बरकरार रहती थी …

लड़ाई शुरू हो चुकी थी मेरी माँ ने पिता जी की पूजा की ,बांहो में एक धागा बंधा और एक चमचमाती हुई तलवार उन्हें दी ,पिता जी का विशाल मजबूत देह तेल लगने से चमक रहा था ,वो सिर्फ एक धोती पहने हुए थे ,साइन में उगे हुए घुंघराले बल , चौड़ी छाती और विशाल भुजाये उनके मर्दानगी की गवाही चीख चीखकर दे रहे थे..

मंदिर की घंटी बजने लगी और साथ hi नंगाड़ों की आवाज भी आने लगी थी मतलब युद्ध का समय आ चूका था और मैं और सभी की सांसे जैसे रुक सी गयी थी , एक बार मेरी नजर फिर से रिद्धिमा पर गयी , हम जवान थे एक दूसरे के क्लास में पढ़ते थे , कभी कभी नजन भी मिल जाया करती थी, हमारे बिच वो दुश्मनी की दिवार नहीं थी जो हमारे परिवारों के बिच थी लेकिन फिर भी हमारे घर वालो ने हमें बात करने से मन कर रखा था , लेकिन यौवन की भूख क्या चाहता है , एक छोटी सी ख्वाहिस हम दोनों के दिलो में थी नौजवान जिस्मो और मन की एक प्यारी सी भूख … शायद दोस्ती की भूख या शायद प्रेम की भूख ???

रिद्धिमा ने मुझे आल था बेस्ट वाला इशारा किया , उसने अपना अंगूठा उठाकर ये इशारा किया था, जवाब मैंने भी उसे वही दिया .. हमें नहीं पता था की ये कोई खेल नहीं था ये अभिमान की लड़ाई थी , और एक छोटे से इंसान जिसकी इस दुनिया में कोई भी वैल्यू नहीं है उसके अभिमान की कीमत उसके लिए सबसे ज्यादा होती है …

मेरे पिता और तरसिंग अपनी चमचमाती हुई तलवार लिए मैदान में थे , सारा गांव चिल्ला रहा था उधर साहनपुर वाले भी चिल्ला रहे थे बिच में बैठे हुए शिकारी वाले गांव घुघर के लोग भी चिल्ला उठे थे , वंहा भी मेरे कई दोस्त थे जो मुझे देख रहे थे कुछ जाने पहचाने चेहरे जिनके साथ मैं रोज पढ़ने जाया करता था ..

लेकिन मैदान का नजारा कुछ अलग hi था मेरे पिता और तारा सिंह भी एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे , दोनों hi दिखने में बलसाली थे, भुवाजो की ताकत साफ़ साफ़ पता चल रही थी , एक शंख जोरो से बजाय गया , नंगाड़े बज उठे और दोनों hi एक दूसरे पर टूट पड़े , जो ध्यान इधर उधर भटका था वो सब अब मैदान पर आ गया था , चारो तरफ बस शांति छ गयी थी , तलवारो की टक्कर से पूरा माहौल hi गूंज उठा था …

“इसकी धड़कन वापस आ रही है ..”डॉ. की आवाज फिर से मेरे कानो में पड़ी ,

“माँ ..” मेरे मुँह से पहला शब्द निकला था एक इंजेक्शन मेरे साइन में लगाया गया था और मेरी सांसे फिर से चलने लगी थी ,

“मैं यही हु बीटा तुझे कुछ नहीं होगा “ मेरी रोटी हुई माँ की आवाज मेरे कानो में पड़ी ..

मैं फिर सपनो के शहर में शेर कर रहा था …

तलवारो की छोट से लोगो के मुँह से निकली हुई आह ..

दोनों hi एक दूसरे को काट डालने को तैयार थी और पूरी ताकत लगा रहे थे , मेरे पिता के बाजु को तारा सिंह की तलवार ने काट दिया था ..

“नहीं ….” मेरी माँ बोल उठी थी लेकिन मेरे पिता के चेहरे पर अभी भी को शिकन तक नहीं था ..

“भाभी डरो नहीं भैया जित जायेंगे “ मेरे चाचा ने कहा कहा , मेरे दोनों चाचा और चचिया भी वही अपने मुँह में उंगली दबाये हुए बैठे थे , मेरी तीनो बहने मेरे पिता की चोट से बस सुबकने लगी थी ..

“पापा मारो उसे ..” आया बोल उठी , आया मेरी दीदी थी मुझसे 2 साल बड़ी थी

“बड़े पापा जित जायेंगे ..” ये बोलने वाली शिरीन और ऋतू थी ये दोनों मेरे चाचा की बेतिया थी , दोनों hi मुझसे छोटी थी

ऋतू मेरे कंधे पर अपना हाथ रखे उछाल रही थी , इधर मेरे पिता जी भी पूरी म्हणत कर रहे थे , युधः पुरे शबाब पर पहुंच चूका था ..

अचानक तारा सिंह की तलवार चली और मेरे पिता के कंधे में जा लगी , वो जख्मी हो चुके थे , सारा लखनपुर शांत हो चूका था वही साहनपुर वाले जोश में चीला उठे थे , मैं भी आंखे फाडे ये सब देख रहा था ..

“पिता जी घुमा कर मारिये “ मैं खड़ा होकर चिल्ला उठा , मेरे पिता ने एक बार प्यार भरी निगाहो से मुझे देखा और एक बार पूरा घूमकर तलवार चला दी …

तलवार सीधे तारा सिंह के गले में जा लगी , खून का एक फुहारा फुट पड़ा था जो साहनपुर वाले अभी जोश में भरकर चिल्ला रहे थे वो सभी अचानक से शांत हो चुके थे ,, सभी शांत हो चुके थे ये वार hi ऐसा था की सबको चुप करवा दे ..

तारा सिंह लड़खड़ाता हुए निचे बैठ गया था , उसके गले से खून की धार बाह गयी थी , मेरे पिता को भी जैसे गलती का अहसास हुआ वो तारा सिंह के पास जाकर बैठ गए , वो उससे पूछ रहे थे की क्या वो ठीक है ..

तारा सींग का जिस्म कमजोर हो चूका था लेकिन इरादे नहीं, उसने एक बार मेरे पिता को देखा और मुस्कुरा उठा ..

“चौधरी आज या तो तू जिन्दा जायेगा या फिर मैं “तारा सींग जोरो से लेकिन मुस्कुराते हुए बोल उठा , मेरे पिता ने भी उसके हिम्मत की कदर की और उसे हाथ बढाकर उठा लिया , क्या प्यारी सी दुश्मनी थी जो एक दूसरे के हिम्मत की भी इज्जत करते थे ..

“तारा आज तेरी भी इक्छा पूरी कर देता हु , देखते है की सीकरी बाबा के मंदिर में आज दिया कौन जलाता है “ मेरे पिता ने उसे उठाते हुए कहा ..

वार गले में किया गया था खून बाह रहा था लेकिन तारा ने एक हाथो से अपने गले को दबा कर खून का बहकना काम कर रखा था और दूसरे हाथो से फिर से तलवार सम्हाल ली थी

“हार मान जा तारा तू लड़ने की हालत में नहीं है ..”

मेरे पिता ने उसकी हालत देख कर कहा

“अगर हार कर चला गया तो पूरा गांव ठु ठु करेगा “तारा ने अपनी बात राखी

“हम दोनों बचपन के दोस्त है मैं कैसे तुझे मार दू “

मेरे पिता की धीमी आवाज मेरे कानो में आ गयी , मेरे पिता शांत हो चुके थे लेकिन तारा मुस्कुराया था

“अगर दोस्त मंटा है तो चला दे तलवार , मुझे इज्जत की मौत दे दे , “ तारा सींग ने मेरे पिता को एक अजीब hi नजरो से देखा था , मैंने अपने पिता को इतना कमजोर कभी नहीं पाया , आज उनके हाथ काँप रहे थे

“बहुत हुई दुश्मनी तारा मैं तुझे नहीं मार सकता , इसे यही ख़त्म करते है ,मान ले अपनी हार छोड़ दे जिद 10 साल बाद हम फिर यही होंगे , अगर तुझे अभी इलाज नहीं मिला तो तू नहीं बच पायेगा , ये मुझसे क्या गलती हो गयी मैंने तुझे कहा मार दिया “

पहली बार मेरे पिता के आँखों में एक अफ़सोस सा दिखाई दिया , गांव वाले चिल्ला रहे थे लेकिन मैं अब भी उन दोनों की आँखों में छिपे उस प्रेम और सम्मान को देख प् रहा था जो शायद सिर्फ मुझे दिखाई दे रहा था ..

“नहीं विजय ये कोई खेल नहीं है , ये परंपरा है हमारे और तुम्हारे परिवारों के बिच शादियों से चली आ रही परंपरा , हम्मे इतनी हिम्मत नहीं की हम इसे तोड़ पाए .. शायद हमारे बच्चे इसे तोड़ पाए ..”

तारा ने एक बार मुझे देखा और एक बार रिद्धिमा को ..

“अगर हम इसे दोस्त होकर नहीं तोड़ पाए तो ये कैसे तोड़ेंगे “

मेरे पिता की आँखों में एक गीलापन ुबाहर आया था

तारा सींग का खून बहुत hi बाह चूका था वो और भी कमजोर हो रहा था

“मैं हार नहीं मानूंगा “

तारा सींग ने अपने को मुश्किल से खड़ा रखते हुए कहा

“ऐसा मत कर मान ले हार , देख तू लड़ने के काबिल भी नहीं रहा “

मेरे पिता ने उसे देखते हुए कहा था

“चला दे तलवार मार दे मुझे , मेरा भाई मुझे नामर्द समझे इससे तो अच्छा है की तेरे हाथो मारा जाऊ “

तारा के आँखों में एक चमक आ गयी थी , उसने एक बार अपने छोटे भाई सुलभ की और देखा .. जो की गुस्से से भरा हुआ मेरे पिता को देख रहा था ..

“ऐसे मत कर तारा “मेरे पिता ने फिर से कहा लेकिन तारा ने अपनी तलवार गुमा दी , मेरे पिता बच गए लेकिन तारा ने फिर एक जानलेवा हमला कर दिया

“या तो तू या मैं .. आज तो कोई एक hi जिन्दा जायेगा , फैसला तू कर ले “ तारा ये बोलते हुए फिर से मेरे पिता पर वार कर गया , उसके वार कमजोर थे लेकिन फिर भी मेरे पिता को बचाव करना पड़ा

“इतने दिनों की दोस्ती में बस एक चीज मांगूंगा , एक वार कर दे और मुझे ख़त्म कर “तारा बोलै और फिर से उसने तलवार चला दी , इस बार मेरे पिता की तलवार चल गयी जो सीधे तारा के गले से जा लगी , और तारा सींग का गाला हवा में उड़ गया …

“नहीं …” सैकड़ो लोग एक साथ चिल्ला उठे थे जिसमे एक रिद्धिमा भी थी …



मेरे पिता अपने घुटनो के बल बैठ चुके थे उनकी आँखों में आंसू था लेकिन उनके सरे गांव वाले उनकी जित पर चिल्ला उठे थे ………
 
अपडेट 2
मेरे आँखों के आगे अब भी रिद्धिमा का वो चेहरा घूम रहा था ,जो चिल्ला कर रो रही थी उसकी माँ वही बेहोश हो चुकी थी , तारा के भाई सुलभ का चेहरा घूम रहा था जो पागलो की तरह चिल्ला रहा था और भागता हुआ आकर तारा के जिस्म से लिपट गया था , उसने तारा की तलवार उठा कर मेरे पिता पर वार कर दिया था लेकिन तब तक मेरे दोनों चाचा वंहा पहुंच चुके थे और भी कई लोगो ने आकर बिच बचाव किया था ..

तभी वंहा गजराज आ पंहुचा , गजराज की उम्र मेरे पिता जीतनी hi थी और वो भी मेरे पिता और तारा सींग का अच्छा दोस्त था , गजराज शिकारियों के गांव घुघर का मुखिया था …

“रुक जाओ सुलभ , ये हमारी पूर्वजो की प्रथा है विजय चौधरी ने केवल उसी का पालन किया है जो हमारे पूर्वज न जाने कितने सालो से करते आये है … और तुम्हे भी पता है की मैं विजय और तारा कितने अच्छे दोस्त थे लेकिन इन गांवो की दुश्मनी की वजह से तारा हमारे बिच नहीं रहा .. क्या तुमने देखा नहीं की विजय खुद भी तारा को नहीं मरना चाहता था “

गजराज की बात सुनकर सुलभ थोड़ा शांत जरूर हुआ लेकिन अभी भी गुस्सा उसकी आँखों से फुट रहा था

“मैं इसे और इसके पुरे खानदान को मिटा दूंगा गजराज , इसने मेरे भाई की हत्या की है “ सुलभ चिल्लाया

“तुम्हे अगर ये हार बर्दास्त नहीं तो 10 साल बाद आना इसी राण भूमि में मैं तुम्हारे साथ लडूंगा “

इस बार मेरे छोटे चाचा विनय चौधरी चिल्ला उठे , सुलभ ने एक बार उन्हें गुस्से से देखा और वंहा से चला गया ………

जित के बाद भी मेरे पिता के चेहरे में दुःख hi था , हम अब घर के लिए जा रहे थे , रात हो चुकी थी और पूरा गांव पहले से hi जा चूका था , हमारे परिवार को प्रथा के अनुसार शिकारी बाबा के मंदिर में पूजा करनी थी , पूजा करके हम सभी 3 कार से वंहा से निकल गए ..

लेकिन हमें क्या पता था की सुलभ सींग न सिर्फ गुस्से में इतना बड़ा कदम उठा लेगा ..

जंगल के रिश्ते में hi हमारे कार पर अटैक किया गया, वो कोई 50 लोग थे सभी के हाथो में या तो बंधुखे थी या चमचमाती हुई तलवारे ..

मुझे याद आया की कैसे सुलभ ने पहले सभी को उतार कर मेरे पुरे परिवार के सामने मेरे पिता को तलवार से काट दिया और फिर मेरे दोनों चाचाओं को मार दिया ..

मेरी माँ , मेरी बहाने, मेरी चचिया बस ये देख कर रोटी रह गयी थी …

“मैं पुरे चौधरी खानदान को hi मिला दूंगा, तेरे घर का कोई मर्द जिन्दा नहीं रहेगा “

सुलभ चिल्लाते हुए मेरी और बढ़ा था , उसके लोग हाथो में मसाले लिए हुए मेरे परिवार को घेरे हुए खड़े थे

“नहीं नहीं ये तो अभी बच्चा है इसे कुछ मत करो “

मेरी माँ ने मुझे अपनी बांहो में भर लिया , सभी की आँखों में आतंक नाचने लगा था ..

“सामने से हैट जाओ वर्ण मुझे परम्परा को तोड़कर एक ायरत को भी मारना पड़ेगा “

सुलभ की बात का जैसे माँ पर कोई असर नहीं हुआ वो मुझसे जकड़ी रही , मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था की मेरे आँखों के सामने मेरे परिवार के सभी मर्दो को मार दिया गया और मैं अभी भी बस देखि hi रहा था , शायद मेरे आँखों का गुस्सा सुलभ को भी समझ आ गया था , वो हँसाने लगा

“क्यों बच्चे मुझ पर गुस्सा आ रहा है , मुझे मरने का मन कर रहा है , ऐसा hi गुस्सा मुझे भी आया था जब मैंने अपने भाई को अपनी आँखों के सामने मरते हुए देखा था , ले .. ले ये तलवार और आ .. आ लड़ मुझसे “

उसने अपनी तलवार मेरे सामने फेक दी , मेरे रगो में भी चौधरी का खून था जो अपनी शान के लिए जान की फ़िक्र नहीं करते थे , मैं माँ के बाजुओं से आजाद होकर उस तलवार की और बढ़ गया ..

“नहीं नहीं अजय ऐसा मत करो “माँ ने बड़ी मुश्किल से कहा , लेकिन तब तक मैंने तलवार उठा ली थी , सुलभ भी दूसरी तलवार लिए मेरे सामने खड़ा था ..

उसके होठो में एक कामिनी सी मुस्कान थी , वो ताकत और हुनर दोनों में hi मुझसे बहुत जयदा था , मैं उसके सामने एक बच्चा hi था लेकिन मेरे पास भी मेरा हौसला था ..

मैंने पूरी ताकत से उसपर वार किया , वो बड़ी hi आसानी से बच गया और मुझपर हँसाने लगा

“बच्चे तुझे तड़फा तड़फा कर मरने में मुझे बड़ा मजा आएगा “ सुलभ मेरे ऊपर हंसने लगा था,

मैं गुस्से पर उसपर वार करता और वो आसानी से बच कर मुझपर हँसता जिससे मेरा गुस्सा और भी बढ़ रहा था , उसने अपनी तलवार गुमाई और

“नहीं .. “ मेरे माँ, बहाने और चचिया चीख पड़ी , तलवार सीधे मेरे गले के पास लगी थी और मेरे कंधे में एक गहरा घाव छोड़ चुकी थी ..

मैं लड़खड़ाया तो था लेकिन फिर से सम्हालते हुए खड़ा हुआ , सुलभ ने फिर से एक वार किया और तलवार मेरे पेट में घुस गयी , खून के फुहारे फुट पड़े थे , मेरा परिवार मेरी और दौड़ने के लिए हुआ लेकिन सुलभ के लोगो ने उन्हें पकड़ रखा था ..

मैंने अंतिम कोशिस की तलवार चलाई लेकिन सुलभ तक नहीं पहुंच पाया था वो बस जोरो से हँसता रहा और फिर उसने अंतिम वार किया फिर से मेरे पेट में तलवार घुसा दिया और मुझे वही तड़फता हुआ छोड़ कर वंहा से चला गया ..

तलवार अभी भी मेरे पेट में घुसी हुई थी , सब कुछ धुंधला सा हुआ जा रहा था , मुझे मेरे परिवार के रोने की आवाजे आ रही थी जो मुझे घेरे हुए थे ..

“बीटा .. कोई मेरे बेटे को बचा लो “ मेरी माँ की वो आवाज मेरे कानो में गूंज गयी

“शिकारी बाबा ?? बाबा मेरे बच्चे को बचा लो बचा लो “

ये कौन था मुझे नहीं पता लेकिन मेरी धुंधली होती आँखे के सामने एक शख्स का चेहरा उभरा , बड़ी बड़ी दाढ़ी और जातवो वाला वो शख्स जिसके हमने बस किस्से hi सुने थे की वो होता भी है , और इन्ही जंगलो में पाया जाता है , अपनी किसी बीमारी की वजह से सभ्य समाज से दूर रहता है , शिकारी बाबा का मंदिर उसके hi पूर्वजो का मंदिर है, जिसे 3no गांव के लोग पूजते है …

मुझे देख कर उसके चेहरे में एक मुस्कान सी आ गयी ..

“इसे तो मैं बचा लूंगा लेकिन इसकी कीमत बहुत hi बड़ी चुकानी पड़ेगी ??”

उसने कहा

“जो भी कीमत होगी हम देंगे , हम अपनी जान भी देव पर लगा देंगे लेकिन इसे बचा लो बाबा , इसके अलावा हमारे परिवार में है की कौन जो हमारे वंस को आगे बढहायेगा “ मेरी माँ रट हुए बोली

“इसे उसी बीमारी से गुजरना पड़ेगा जो बीमारी मेरे पूर्वजो को मिली थी , जिसके कारन हमें जंगलो में रहना पड़ता है , असीम ताकत होते हुए भी हम कमजोर रह जाते है “

उसकी बात सुनकर एक बार के लिए सभी चुप हो गए लेकिन फिर मेरी माँ ने हिम्मत करके कहा

“मेरे बच्चे के लिए मुझे ये शर्त भी मंजूर है बाबा , वो शिकारी की बीमारी के साथ hi अपना जीवन बिताएगा , हम उसे सम्हालेंगे “

माँ की बात सुनकर वो जोरो से हंसा था ..

“तुम सम्हालेगी .. अपने बेटे की वासना को ..?? अगर ये बात है तो फिर ठीक है “



उसने अपनी झोली से कुछ निकला और मेरे मुँह में दाल दिया , धीरे धीरे मेरे आँखों के सामने बस अँधेरा hi अँधेरा छ गया था …..
 
पहली बात ये टाइम्स नई रोमन नहीं है , और ॅरिअल बोल्ड ऐसा दीखता है , मैं जो लिखता हु वो जॉर्जिया फॉण्ट है और मुझे ये बहुत पसंद है , इसमें थोड़ा आर्ट भी है और मेरे हिसाब से तो ये पढ़ने में जयदा अच्छा लगता है ,

दूर दूसरी बात रोमन में लिखने की तो भाई अभी एक दो स्टोरी मुझे माफ़ करो , मेरे पास अभी देवनागरी में लिखने वाला कोई टूल्स hi नहीं है , ऑनलाइन लिखता हु तो गूगल िनपुर या और किसी वेबसाइट से तो वो मेरा टाइपिंग स्पीड hi मैच नहीं कर पते ,और रुक रुक कर लिखने में मुझे दिक्कत होती है मेरा फ्लो hi ख़त्म हो जाता है ,बड़ा बोर लग जाता है अभी यूएससी में एक स्टोरी देवनागरी में डाली थी , मैं जनता हु की मेरे लिए कितना मुश्किल हो गया था ... :अप्प्रोवे:

मैं जो पहले करता था मोबाइल में कईबोर्ड दाल कर गूगल कए ों करके टाइप करता था लेकिन अभी मेरा कईबोर्ड पुराण हो गया है और मोबाइल उसे एक्सेप्ट नहीं करता तो मुझे लेप्य से वर्ल्ड में टाइप करना पड़ता है :नू:

अभी कईबोर्ड लेने में मुझे पुरे महीने लगेंगे अब एक विरलेस वाला कईबोर्ड लूंगा ताकि साला उसब का झंझट hi ख़त्म हो जाए .. लेकिन दिक्कत ये है की एक महीने मैं अपनी खुलली को तो रोक नहीं सकता न :डी

लिखना तो था hi इसलिए अब थोड़ा इसे भी झेल hi लो :lol:
 
:थैंक्स: धन्यवाद जॉन भाई :)

भाई मैं सभी कमैंट्स का पर्सोनली रिप्लाई करने वाला आदमी मुझे , और मुझे ये पसंद आता है की मैं अपने दोस्तों से सीधे बात करू और उनकी स्टोरी को लेकर कोई भी समस्या हो तो उसके बारे में बात करू :अप्प्रोवे: जैस अभी आपसे कर रहा हु , तो पेजेज बढ़ hi जाते है , आप पेज मत देखो आप स्टोरी का कंटेंट और मेरा इनोसेंट वाला दिल देखो :इनोसेंट:

ऐसे फिस्ट पेज में इंडेक्स भी बना हुआ है आप चाहे तो सीधे वही से स्टोरी पढ़ सकते है :अप्प्रोवे:
 
:थैंक्स: धन्यवाद मुसाफिर भाई :)

वेलकम तो स्टोरी :वेलकम1:

है बीआरओ सभी लोग बोल रहे है की इस मूवी का सन है या उस मूवी का सन है लेकिन मैं जब इसे लिख रहा था तो मेरे दिमाग में वही बात चल रही थी की आपके रीडर्स इसे पकड़ लेंगे :डी

आपकी hi स्टोरी के एक सन से ये मैच कहती है , जिसमे खुनी खेल होता है मंदिर के लिए दोनों गांवो के बिच में :डी

भैया भी अभी तक नहीं पकडे ये ताज्जुब्ब की बात है ?
 
अपडेट 3
जब मुझे होश आया तो मैं हॉस्पिटल में एक बिस्तर में पड़ा हुआ था , मुहे में ऑक्सीजन लगा हुआ था , हाथो में ग्लूकोस की बोतल ,मेरी सबसे छोटी और सबसे प्यारी बहन ऋतू अभी अपना सर मेरे पैरो के पास रखे सो रही थी ..

मेरे शरीर में हलचल हुई .. और ऋतू जग गयी

“आप उठ गए .. “ उसके आँखों से जैसे शैलाब hi बाह निकला था , उसने मुझे कसकर जकड लिया ..

“आह ..” मेरे होठो से दर्द से भरी हुई आवाज निकल आयी , ऋतू ने मेरे जांखो को दबा दिया था

“ओह्ह सॉरी सॉरी .. भैया उठ गए , भैया को होश आ गया “ वो चिल्लाते हुए कमरे से बहार भाग गयी थी …….

थोड़ी hi देर में मेरे परिवार के और भी कई लोग आते गए , उनसे मुझे पता चला की मैं पुरे एक महीने से बेहोश पड़ा हु , इन एक महीने में सुलभ सींग और उसके साथियो को जेल भेजा जा चूका है ,मेरा पूरा गांव बस मेरे hi होश में आने की प्रतीक्षा कर रहा है , और हर जगह बस मातम का माहौल है..

“इस साल कही कोई त्यौहार नहीं मनाएगा “ मेरी माँ ने हलकी आवाज में कहा था ..

लखनपुर अपने मुखिया मेरे पिता जी की मौत से दुखी था , वही सदियों से चले आ रहे चौधरी परिवार के आखरी चिराग की इस हालत के सुधरने की प्रार्थना कर रहा था , वही साहनपुर का हाल और भी बुरा था , मुखिया तारा सींग चल बेस थे , उसके बाद जिसे मुखिया की गद्दी सम्हालनी थी वो जेल में था , मर्द के नाम पर उस परिवार में बस रिद्धिमा का छोटा भाई कमल hi था लेकिन वो अभी इस लायक नहीं था की मुखिया बनाया जा सके इसलिए वंहा की और साथ hi साथ लखनपुर की साडी भागदौड अभी गजराज के हाथो में hi आ गयी थी , जब तक कोई दूसरा गद्दीदार नहीं मिल जाता तब के लिए गजराज hi तीनो गांवो का मुखिया था ……

दिन बिताते गए और मेरी हालत में लगातार सुधर होता गया , इस बिच hi मुझे कुछ अजीब सा महसूस होने लगा था , कुछ अजीब सा जो मेरे साथ कभी नहीं होता था , मेरे लिंग में कुछ जयदा hi अकड़न सी होती थी , ऐसे अगर ये एक नौजवान इंसान बोले तो कोई अजीब बात नहीं है लेकिन फिर भी ये अकड़न बिना किसी कारन के या छोटे मोठे करने से hi होने लगी थी , और फिर मैं रत रत भर तडफता रहता ..

मुझे लगने लगा था की शायद ये कोई दवाई का रिएक्शन होगा , क्योकि कही न कही मुझे कोई अब्नोर्मलिटी जैसी फीलिंग हो रही थी , वही शरीर को मैं रोज hi और भी ताकतवर पता था, मैं बहुत hi जल्दी रिकवर कर रहा था जिससे मेरे डॉ. भी थोड़े हैरान परेशां थे , लेकिन कोई भी मुझसे कुछ नहीं कहता ..

आखिर तंग आकर मैंने अपने लिंग में आने वाली अकड़ के बारे में डॉ. को बता hi दिया , उन्होंने कुछ चेककुप्स किया और कहा की तुम नार्मल हो घबराने की कोई जरुरत नहीं है , शरीर में बहुत ब्लड लोस्स होने के कारण तुम बेहोश थे और होश में आने के बाद से जल्दी रिकवरी कर रहे हो तो समझो ये तुम्हारे अंदर आने वाली ताकत का hi परिणाम है ..उन्होंने मुझे कुछ दवाई दिया जिससे मेरा लिंग थोड़ा शांत हो गया …

उसी दिन डॉ. ने मेरे घर वालो से बात की और मुझे कुछ दवाई दे कर वंहा से बीड़ा कर दिया ..

करीब 2 महीने के बाद मैं अपने घर में आया था ..

मेरा स्वागत पुरे गांव ने किया , अब मैं उनके लिए वो छोटा अजय नहीं रह गया था बल्कि उनका मुखिया , साहनपुर की सत्ता का गद्दीदार अजय चौदहरी था ..

मेरा सम्मान भी उसी तरीके से किया गया , मेरी माँ ने सभी के सामने घोसना भी कर दी की कुछ hi दिनों के बाद गददीदारी की पूरी प्रक्रिया को पूर्ण किया जायेगा और मुझे मुखिया के रूप में मेरे पिता के स्थान पर बिठा दिया जायेगा …

हर तरफ ख़ुशी का माहौल था , ऐसा लगा जैसे पूरा गांव hi त्यौहार मन रहा हो , सुबह कब रत में बदल गयी मुझे पता hi नहीं चला ,

मैं अपने कमरे की और बढ़ रहा था जो की ऊपर के मंजिल में बना था , लेकिन अपने माँ के कमरे की खिडख़ी से गुजरते हुए मैं रुक गया ,मुझे माँ के रोने की आवाज सुनाई दी , साथ hi मेरी दोनों चचिया रेवती और रानी भी थी और मेरी बड़ी बहन अन्य भी ..

“दीद आप फ़िक्र मत करो मैं और रानी उसे सम्हाल लेंगे “

रेवती चची ने अपने आंसू पोंछते हुए कहा

“नहीं नहीं रेवती ,आखिर कैसे वो तुम्हारा भी तो बीटा है “ मेरी माँ का गाला भरा हुआ था

“दीदी शिकारी बाबा ने तो हमें पहले hi कह दिया था की इसे सम्हालना मुश्किल होगा , लेकिन अगर हमने इसे सम्हाल लिया तो फिर हमारे अजय की ताकत और भी जयदा बढ़ाते जायेगी , ये एक अभिश्राप भी है और वरदान भी .. अजय से hi हमारे कुल का चिराग रोशन है हम उसे नहीं खो सकते , इसके लिए हमें जो भी करना पड़ेगा हम करेंगे … और आज अमावश्या है जैसा की बाबा ने बताया था आज से hi उसके शरीर में हवस की आग सबसे जयदा उत्पन्न होगी और अगर उसे शांत नहीं किया गया तो वो सब जला देगा , पता नहीं जो भी उसके सामने आएगा वो उसके साथ .. नहीं नहीं दीदी मुझे जाना hi होगा “

रेवती चची के बातो में एक इरादे की झलक थी

“लेकिन रेवती तुम लोगो को मैं इस झमेले में कैसे फंसा सकती हु , शिकारी बाबा से अजय की जान की भीख मंगाते वक़्त मैंने उन्हें स्वीकृति दी थी, वचन दिया था की जो भी होगा मैं उसे सम्हालूँगी , तब मैंने तुम लोगो से इसके बारे में पूछा तक नहीं था ,मैं तो अपने पुत्र के मोह में थी और उन्हें हां कह दिया लेकिन अब जब परीक्षा की घडी आयी तो मैं कैसे पीछे हैट सकती हु , उसे तो मुझे hi ….” इतना कहकर माँ जोरो से रोने लगी

मेरी दोनों चाचियों ने उनके कंधे पर अपना हाथ रख दिया

“डॉ. की दवाई का असर से तो वो ठीक रह सकता है माँ “ अन्य दीदी बोल उठी

“है अन्य लेकिन डॉ. ने साफ साफ कह दिया था की दवाइयों का असर कुछ hi समय तक रहेगा तब तक वो शांत रहेगा ,और जयदा दवाई लेने से उसका शरीर कमजोर होता जायेगा , दवाइया हम उसे जयदा नहीं खिला सकते , और बिना दवाई के तो उसका लिंग काबू में नहीं रहेगा और उसके बाद उसे अपना वीर्य निकलना hi पड़ेगा वर्ण उसका लिंग कठोर होते जायेगा, तनाव अजय के बर्दास्त के बहार हो जायेगा और एक समय के बाद नशे फैट जाएँगी जिससे उसकी मौत भी हो सकती है … और आज .. आज तो अमावश्या है जब से उसके अंदर एक शैतान का जन्म होगा जो अपने हवस की आग के सामने कुछ नहीं देखेगा , आज उसके लिंग का तनाव कोई भी दवाई काबू में नहीं रख पायेगी , अगर उसे कुछ नहीं मिला तो या तो वो खुद hi किसी के ऊपर टूट पड़ेगा या फिर उसका लिंग फटने से वो खुद hi मर जायेगा , नहीं नहीं अन्य हम अपने बच्चे को ऐसी हालत में नहीं देख सकते “

रानी चची कहते कहते hi रो पड़ी थी , मेरी दीदी के आँखों में भी आंसू की बुँदे थी

“चची लेकिन इसके लिए हमें अपने रिश्तो की दिवार को गिरना होगा , और इससे अच्छा है की वो खुद hi अपने को शांत कर ले “

अन्य दीदी थोड़ी असहज होते हुए बोली

“हमें डॉ. से इस बारे में भी बात की थी लेकिन उनका कहना है की इससे उसकी उत्तेजना और भी बढ़ जायेगी और हाथो के रगड़ाव से पैदा होने वाली गर्मी की वजह से उसकी नशो के फटने की संभावना जयदा हो जायेगी , उसे स्त्री की योनि hi शांत कर सकती है … सीकरी बाबा ने भी तो यही कहा था की स्त्री का संसर्ग hi उसे आराम देगा या तो वो दवाई जिसे बाबा खुद hi धुंध रहे है “

रानी चची ने फिर से सुबकते हुए कहा

“अगर स्त्री का संसर्ग hi मेरे भाई को इस तकलीफ से आराम दे सकता है तो क्यों न हम बाजारू लड़कियों का प्रबंध करे “

अन्य दीदी बोल उठी

“नहीं , नहीं अन्य ये तुम क्या कह रही हो , चौधरी खानदान में आज तक किसी ने बाजारू ओउरतो की और देखा तक नहीं है “

मेरी माँ जो की अभी तक रो रही थी उनके आँखों में गुस्सा आ गया था

“लेकिन माँ अभी तक किसी को ऐसी परिस्थिति का सामना भी तो नहीं करना पड़ा था …”

अन्य दीदी ने अपनी बात पर जोर दिया, वंहा एक मौन था सभी ने एक दूसरे के चेहरे की और देखा

“दीद अगर ये बात बहार आ गयी तो हमारे परिवार की बहुत बेइज्जती हो जायेगी “

रेवती चची बोल उठी

“है रेवती तू सही कह रही है , उसे हमें hi सम्हालना होगा , तुम लोग आराम करो मैं अपने बेटे को सम्हाल लुंगी “

मेरी माँ के आँखों में एक अजीब सा दर्द उमड़ आया था

“नहीं दीदी हमारे रहते आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे , न hi हमारी बेटियों को हम ऐसा कुछ करने देंगे .. हम दोनों उसकी माँ के जैसी है लेकिन आप .. आप उसकी माँ हो , आपके साथ अगर अजय ने कुछ गलत किया तो क्या वो जीवन में कभी खुद को माफ़ कर पायेगा , वो तो खुद hi इस ग्लानि में जीवन भर जलता रहेगा “ रेवती चची माँ की बातो से दर गयी थी ..

माँ ने एक बार रेवती चची को बड़े hi प्यार से देखा और उसके गलो पर अपने हाथ फेर दिए ..

“ठीक है रेवती मेरा बीटा अब तुम दोनों के हवाले है , मैं तुम दोनों की ये क़ुरबानी कभी नहीं भूलूंगी “ ये कहते हुए माँ रेवती चची से लिपट गयी थी …… सभी एक दूसरे से लिपटे हुए रो रहे थे ..

मेरे दिमाग में अब सब कुछ क्लियर था , मैंने बचपन से जो कहानिया शिकारी की बीमारी के बड़े में सुन राखी थी वो सच थी और अब मैं खुद उस बीमारी से ग्रसित था ..

लेकिन सवाल ये था की क्या मेरी चचिया मुझे शांत कर पायेगी ..

मेरी नजर खिडख़ी से hi रेवती चची के ऊपर गयी , साड़ी में लिपटा हुआ उनका बदन जो की कसाव के साथ साथ भरा हुआ था ..

गोर रंग के शरीर में उन्होंने पिले रंग की साड़ी पहन राखी थी और उनके बड़े बड़े साइन से निचे उनके खुले स्थान से झांकते हुए उनके पेट के हिस्से को देखकर मेरे लिंग में एक सिरसुरी सी दौड़ गयी ..

मैंने दवाई कुछ देर पहले hi खाई थी लेकिन शायद दवाई ने अपना असर दिखना ख़त्म कर दिया था लिंग में अजीब सी अकड़ होने लगी थी, मेरी सांसे तेज हो रही थी मैं भागता हुआ अपने कमरे में चला गया , चची का जिस्म और उनकी बाटे अभी भी मेरे मन में नाच रही थी , मई वासना से भर चूका था रिश्तो की मर्यादा अब मेरे लिए किसी मतलब की नहीं रह गयी थी , मैंने अपने सरे कपडे निकाल दिए और सीधा बाथरूम में शावर चला कर निचे जा खड़ा हुआ ..



ठन्डे पानी की बूंदो ने मुझे थोड़ा आराम दिया , मैं बहुत देर तक यु hi खड़ा हुआ अपने शरीर की आग को शांत करने की कोशिस कर रहा था , मेरा मन एक उधेड़बुन में था तभी मेरे दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई ……….
 
नहीं भाई हवा में नहीं उदय हु मैं , असल में अभी अभी भैया से इसी बारे में बात हो रही थी पं में तो आपका कमेंट पढ़कर थोड़ा स्माइल तो आ hi गया था मेरे चेहरे पर .. :अप्प्रोवे:

लेकिन मेरा प्लान थोड़ा अलग है स्टोरी को लेकर :अप्प्रोवे:

और रिप्लाई छोटा इसलिए भी हो जाता है की मेरे पास बोलने के लिए कुछ होता भी नहीं , कोई सवाल करे तो जवाब दे सकता हु लेकिन संभावना वयक्त करे तो फिर क्या बोलू सोचिये न ?
 
अपडेट 4
ठन्डे पानी की बूंदो ने मुझे थोड़ा आराम दिया , मैं बहुत देर तक यु hi खड़ा हुआ अपने शरीर की आग को शांत करने की कोशिस कर रहा था , मेरा मन एक उधेड़बुन में था तभी मेरे दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई ……….

“अजय अजय ..” ये रेवती चची hi थी

उनकी आवाज सुनकर मेरा सोया लिंग फिर से फुंकार मरने लगा , मैं परेशां था , अपने घर की ओउरतो की ये हालत देखकर मेरे मन में एक दुःख जरूर आया था लेकिन जीवन में पहली बार मैं नारी के जिस्म की कल्पना में खोया हुआ था ..

बड़ी मुश्किल से मैंने खुद को सम्हाला और एक टॉवल लपेट कर दरवाजा खोल दिया ..

सामने चची कड़ी थी आंखे के आंसू अभी अभी सूखे हुए लग रहे थे , लग रहा था जैसे अभी अभी उन्होंने अपना चेहरा धोया होगा ..

“अभी नाहा रहे थे ?? “ उन्होंने मुझे ऊपर से निचे तक देखा , और निचे देखते hi जैसे उनकी सांसे hi रुक गयी , मेरा लिंग अपने पुरे तनाव में खड़ा हुआ था और टॉवल ने इसे छिपाने में असमर्थ था ..

“जी चची आइये न ..” मैंने उन्हें राष्ट दिया वो आकर सीधे मेरे बिस्तर में बैठ गयी , उनके चेहरे में नर्वस्नेस तो थी लेकिन फिर भी उनकी नजर बार बार मेरे लिंग पर पद रही थी , मैं भी उनकी इस दशा को समझ सकता था, मैं जनता था की वो यंहा क्यों आयी है लेकिन न hi मैं कुछ बोल प् रहा था न hi वो ..

“आप यंहा कैसे “ मैंने हमारे बिच फैले इस सन्नाटे को चीरते हुए कहा

“क्यों मैं तुम्हारे कमरे में नहीं आ सकती क्या “

उन्होंने हलकी मुस्कान अपने होठो में लाते हुए कहा

“नहीं नहीं चची क्यों नहीं आप बैठिये मैं कपडे बदल लू “

मई फिर से बाथरूम की और जाने लगा उन्होंने कुछ भी नहीं कहा था , उन्हें देख कर मेरा लिंग और भी बेकाबू हो रहा था मैं क्या करू मुझे समझ भी नहीं आ रहा था .. मैं बाथरूम में जाने की बजाय अपने सेफ से अपनी दवाइया निकाल ली ..

“रुको अजय अब तुम्हे इन्हे खाने की जरुरत नहीं है , इन्हे तुम तब खाना जब तुम्हे इसकी जरुरत होगी “

रेवती चची के आवाज में एक संकल्प था

“लेकिन चची .. मैं मर रहा हु , मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा “

लिंग में आती हुई अकड़ ने मुझे बुरी तरह से डरा दिया था ऐसा लग रहा था जैसे ये फटने वाला है , चची मेरे पास आयी और उनके जिस्म की खुसबू ने मुझे और भी पागल बना दिया ..

मैं इतना तड़फ गया की मेरे आँखों में आंसू आ गए थे

“नहीं चची मुझे इन्हे खाना hi होगा “ मैंने रट हुए कहा लेकिन चची ने मेरे हाथो को थाम लिया और वो दवाइया फिर से उसी शीशी में दाल दी , उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिस्तर में बिठा दिया था ..

“अजय मैं यंहा तुम्हे आराम देने hi आयी हु “ उनके आँखों में आंसू आ गए थे ,,

ये वही थी जिन्होंने मुझे बचपन से अपने गॉड में खिलाया था , माँ के सामान प्यार दिया था ,मैंने भी कभी अपनी चाचियों को अपनी माँ से काम नहीं मन था लेकिन ये जिस्म की आग और भावनाओ का शैलाब दोनों मिलकर जैसे मुझे पागल hi बना रहे थे ..

“मैंने आप लोगो की बात सुन ली चची आप लोगो को ये करने की जरुरत नहीं है , मैं शादी कर लूंगा “

मैंने रट हुए hi कहा , चची भी रट रट hi हंस पड़ी थी , इस हंसी में भी एक दुःख था

“बीटा एक कुवारी लड़की तुझे नहीं सह पायेगी और शादी तक तू क्या करेगा …और आज तो अमावस्या है , आज hi से तेरे अंदर का सीकरी जागेगा, अच्छा hi हुआ की तूने हमारी बात सुन hi ली वर्ण मैं तुझसे ये सब कैसे कह पति , अब मुझे मेरा काम करने दे बीटा , यही हमारा भगाया है “

इतना कहकर उन्होंने मेरे टॉवल को खोल दिया , मेरे लिंग में जैसे स्प्रिंग लगा हो , वो उछलने लगा था एक एक नशे खून से भरी हुई थी ,खून का परवाह तेज था , सांसे तेज हो रही थी ,पूरा शरीर अभी अभी नहाने के बाद भी जला जा रहा था..

मैं भी अपनी भावनाओ से लड़ रहा था मैं नहीं चाहता था की मेरे कारन मेरी चची को ये सब करना पड़े लेकिन मेरे जिस्म की चाहत कुछ अलग hi थी, दिल और दिमाग का द्वन्द नहीं ये मेरे अंदर उबाल रहे वासना और मेरी भावनाओ का द्वन्द था और मुझे बार बार वासना की जित होती दिखाई दे रही थी , न चाहते हुए भी मेरा मन कर रहा था की मैं अपना पूरा लिंग चची के नरम नरम गुलाबी होठो में भर दू , उसे उनके गलो में रगड़ दू , उन्हें बिस्टेर में लिटा कर नंगा कर दू , मरोड़ दू तोड़ दू ,निचोड़ कर रख दू , फिर भी किसी तरह मैं खुद को काबू किये हुए था …

चची की नज़ारे भी लिंग पर जा तिकी थी वो बस उसे अजीब निगाहो से घर रही थी , और उन्होंने अपने आंसू पोंछ लिए और मेरे लिंग को अपनी मुठ्ठी में भर लिया ..

“आह्ह्ह्ह “ मेरे मुँह से अनायास hi निकल गया था

चची ने एक बार मेरी और देखा , मैं उनसे नजरे मिलाने के काबिल नहीं था लेकिन उन्होंने एक मुस्कान दी ,

“कोई बात नहीं अजय तू ठीक हो जायेगा “ उनका गाला भरा हुआ था और उन्होंने मेरे लिंग को अपने मुँह में ले लिया ..

“ाः चची , अअअअअ “ वह क्या मजा था ये ,जलते हुए बदन में ठंडक का पहला अहसास था ये , गिला गिला सा ाशस मेरे लिंग पर हो रहा था उनकी थूक की ठंडक के कारन मुझे बड़ा hi आराम मिल रहा था लेकिन मेरी उत्तेजना और भी बढ़ रही थी , वो लगातार अपने मुँह से मेरे लिंग को सहला रही थी, उन्होंने मेरे वर्जिन लिंग की चमड़ी को थूक लगा लगा कर ऊपर के हिस्से से अलग किया मैं पागलो जैसे चिल्ला रहा था ..

मेरे हाथ ने चची के कंधे से उनकी साड़ी को उतार दिया था और मेरे हाथ उनके ब्लाउज में घुस गए थे , उन्होंने खुद अपने ब्लाउज के बटन्स को खोल दिया ताकि मेरे हाथ आसानी से उनके यौवन से भरे हुए वक्षो से खेल सके ..

मैं उन्हें मसल रहा था और वो मेरे लिंग पर अपने होठो को जोरो से चला रही थी , कभी कभी मैं उनके बालो से खेलता निचे होकर मैं उनके गलो को चूमने की कोशिस करने लगा ..

मेरी उत्तेजना शांत होने की बजाय और भी बढ़ चुकी थी , आखिर चची ने मेरे लिंग को अपने मुँह से निकाल hi लिया उनकी सांसे बहुत तेज हो चुकी थी , वो साँस hi नहीं ले पा रही थी ..

वो हांफने लगी ..

वो मुझ hi देख रही थी उनकी आंखे लाल हो चुकी थी ..

“बीटा झड़ने के करीब है क्या ??”

उन्होंने हांफते हुए कहा

लेकिन जैसे मुझे उनके ये शब्द सुनाई hi नहीं दिए हो , मैंने उन्हें उठा कर सीधे hi बिस्तर में फेक दिया , अब मैं अपना आप खो चूका था मेरे अंदर हवस नाचने लगा था ,मैंने उस भरी भरकम सी महिला को ऐसे उठा कर फेका था जैसे वो कोई गुड़िया हो , मैं एक दरिंदे की तरह उनके ऊपर टूट पड़ा ,

मैंने एक एक करके उनके शरीर को कपड़ो से आजाद कर दिया , वो मेरे निचे मचलने लगी थी , मैं किसी भूखे भेड़िये की तरह उनके जिस्म को चाट रहा था , मेरे दन्त उनके शरीर पर जगह जगह गाड़ने लगे थे ..

“अजय आराम से बीटा मैं मर जाउंगी “ वो रो रही थी या उत्तेजना में सिसकिया ले रही थी मुझे नहीं पता न hi मुझे इसकी कोई फ़िक्र hi थी , मैंने बस उनकी योनि में अपने लिंग को सहलाना शुरू कर दिया

“आह्हः अजय बीटा .. रुक जा “ उन्होंने मुझे धक्का लगाया और इससे पहले मन कुछ कर पाव तुरंत hi अपने साथ लायी एक क्रीम को मेरे लिंग में मसलना लगी , उस चिपचिपी क्रीम के कारण मेरा लिंग फीळं से भर गया था , मुझसे अब कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया था मैंने उन्हें फिर से बिस्टेर में खींच दिया और अपने लिंग को उसकी जगह पंहुचा कर एक जोर का धक्का लगाया ..

“आठ दिया मर गयी ..” उनकी आँखों से एक आंसू की बून्द टपक गयी ..

मेरा लिंग पूरी तरह उनकी योनि के अंदर था , क्रीम के चिपचिपे पैन के कारन लिंग आसानी से अंदर बहार हो रहा था , मैं किसी कुत्ते की तरह उनके ऊपर कूदने लगा था ..

“मुझे माफ़ कर दो चची लेकिन मैं पागल हो चूका हु “ जब मेरी हवस थोड़ी शांत हुई तब जाकर मैंने बोलै

“कोई नहीं बीटा अबसे अपनी पूरी हवस अपनी चची के ऊपर hi अंदर hi निकलना .. आह है दिया “

वो सिसकिया ले रही थी और मैं पुरे जोश में धक्के लगा रहा था ,

थोड़ी hi देर में ऐसा लगा जैसे चची का पेशाब निकल आया हो और वो मेरे पीठ में अपने नाखुनो को गदति हुई निढाल हो गयी ..

उनका जिस्म ऐसे लग रहा था जैसे वो मर चुकी हो , मैंने अब भी अपनी रफ़्तार काम नहीं की ,

कैसा सुकून था , क्या मजा था , मेरा लिंग जो योनि की गर्मी से भीग रहा था उसके आनंद में मैं डूब रहा था , मेरे लिंग की चमड़ी का योनि की दिवार में वो रगड़ें मुझे एक अलग hi दुनिया में पंहुचा रहा था , मैं गिरना चाहता था अपने अंदर की साडी ताकत वही दाल देना चाहता था , मैं अपने वीर्य से चची की योनि को भिगो देना चाहता था लेकिन मजबूरी में मैं मनो रो रहा था, चिल्ला रहा था पूरी ताकत लगा कर मैं धक्के लगा रहा था लेकिन वीर्य था की जैसे सुख hi गया हो , वीर्य के न गिराने से मैं और भी बेचैन सा हो रहा था , मुझे मजा तो पूरा आ रहा था लेकिन एक बेताबी एक पागलपन ने मुझे घेर लिया था ..

थोड़ी hi देर हुए थे की चची फिर से सिसकिया लेने लगी

“आआह्ह्ह बीटा अब जहर भी जा मार hi डालेगा क्या अपनी चची को “

चची ने ये कहते हुए बड़े hi प्यार से मेरे बालो को सहलाया , मैं जैसे एक पल के लिए अपने हवस के संसार से उभर कर वापस आ गया मैंने चची के चेहरे पर मेरे लिए वो प्यार देखा , उनके आँखों में एक संतुष्टि का भाव देखा मुझे उनके ऊपर इतना प्यार आया की मैंने उनके होठो को अपने होठो से भर दिया ..

वो भी मेरे बालो को सहलाते हुए मेरा साथ देने लगी थी ..

मेरे धक्को की गति अब काम हो चुकी थी लेकिन वो अब जयदा गहरी हो गयी थी , चची की तो जैसे सांसे hi अटक गयी ..

“आठ बीटा …”

“चची आपने जो मेरे लिए किया ..” मैं कुछ और बोल पता उससे पहले hi उन्होंने मेरे होठो पर अपने होठो को रख दिया और बड़े hi प्रेम से उसे चूसने लगी , मेरा लिंग अब भी वैसा hi अकड़ा हुआ था लेकिन फिर भी होठो के इन चुम्बनों ने मेरी हवस की आग को थोड़ा शांत कर दिया था ,

“तेरे लिए मेरी जान की भी क्या कीमत है बीटा , तू तो घर का इकलौता चिराग है ..”

उनके आँखों में एक आंसू खेलने लगा था मैंने बड़े hi प्यार से उनके आँखों से वो आंसू अपने होठो में भर दिया ..

और उसके साथ hi उन्हें पलट दिया , मैंने उनके उठे हुए नितम्भो से घसीटता हुआ अपने लिंग कोई उनके योनि में दाल दिया ..

“आठ वाह्ह्ह “ क्या मजेदार अहसास था ये , वो चची के गद्देदार कूल्हे जो मेरी कमर से टकराकर बज उठाते थे और साथ hi चची के योनि से रिसता हुआ वो यौवन का रास जो पांच पांच की धवनि बिखेर रहा था ..

कमरे में उत्तेजक स्वर और आवाजे गूंज रही थी , उनकी योनि बहुत hi गीली हो चुकी थी और साथ hi मेरे लिंग में लगा वो क्रीम भी अपना असर दिखा रहा था ..

मैं बहुत hi तेज हो गया था इतना की थोड़ी hi देर में चची ने फिर से अपना झरना बहा दिया ..

लेकिन मुझे कहा सुकून था … मैं तो बुरी तरह से धक्के लगाए hi जा रहा था ..

“बीटा एक मिनट रुक जा “ उन्होंने पलटते हुए एक कपडे से अपनी योनि को पोंछ दिया और फिर से कुटिया बने हुए अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लिंग को अपनी योनि में प्रवेश करवा दिया ..

इस बार रगड़ें का मजा थोड़ा जयदा आने लगा था , मैं फिर से अपनी स्पीड में आ चूका था …

और इस रगड़ें का hi नतीजा था की मैंने एक जोर दार धार उनके योनि में छोड़ दी ..



मैं हांफता हुआ उनके ऊपर hi गिर गया था ………..
 
अपडेट 5
इधर साहनपुर में तारा सींग के जाने के बाद से hi हालत बिगड़ रहे थे ,लोग अपने मुखिया की मौत का मातम मन hi रहे थे की सुलभ ने जो किया उससे पूरा साहनपुर hi दहल गया , ये नियम के विरुद्ध था , घुघर के अखाड़े का फैसला आखरी होता था लेकिन सुलभ ने इस फैसले को ना मान कर नियम तोड़ दिया था ..

लोग इसलिए भी डरे हुए थे की सुलभ के इस अपराध की सजा कभी उन्हें न भुगतनी पड़े , इसका कारण था और इसका कारन था की लोगो तक ये बात पहुंच चुकी थी की शिकारी बाबा ने अजय को अपनी दवाई से बचाया है , इसका मतलब था की अजय के पास अब ताकत का खजाना होगा , और अगर वो सुलभ के अपराध का बदला लेने पर टूल गया तो उसे रोकने वाला कोई भी नहीं होगा …

ये केवल कहानिया hi थी की शिकारियों में जिसे भी ये बीमारी लग जाती है वो जंगलो में रहता है , अभी तक कोई ऐसा नहीं था जो गांव में रहे , जंगलो में चुड़ैलों की जाट भी पाई जाती थी जो की इंसानो के दिल को खाने के लिए मसहूर थी , वही चुड़ैल hi होती थी जो शिकारियों की वासना को शांत कर पाती लेकिन चुड़ैल हमेशा hi शिकारियों से बचकर रहती थी क्योकि अगर एक बार दोनों का सम्बन्ध बन गया तो फिर वो सदा के लिए उस शिकारी की गुलाम बनकर रह जाती .. एक अलग hi किस्म का युधः जंगलो के अंदर चल रहा था जिससे सामान्य इंसान दूर hi रहते थे ..

लेकिन अब इस बीमारी को लेकर अजय गांव में रहने आ रहा था इस बात से साहनपुर वालो में एक अलग hi खौफ छ गया था , एक तो अजय के पिता और दोनों चाचा को जिस तरह से सुलभ ने मारा था उससे साफ़ था की कभी न कभी तो इसका बदला लेगा , और दूसरी और किसी शिकारी ने उसे अपनी जड़ीबूटी पीला दी थी जिससे वो मौत से तो बच गया और साथ hi साथ अब ताकत का भण्डार होने वाला है , अब इसे कोई रोक सकता था तो केवल कोई चुड़ैल … क्योकि शिकारियों का मुकाबला केवल चुड़ैल hi कर सकते थे , लेकिन फिर उस चुड़ैल के लिए भी खतरा काम न था …

वो खतरा था की कही वो शिकारी के आकर्षण में ना फंस जाए और अगर वो शिकारी के आकर्षण में फंस कर सम्भोग कर बैठे तो फिर वो चुड़ैल हमेशा के लिए शिकारी की गुलाम बन जायेगी ..

बाटे हो रही थी और वही रिद्धिमा अपने परिवार को सम्हालने में लगी हुई थी .

रिद्धिमा की माँ मनो पागल सी हो गयी थी वही एक छोटा भाई था जो की अभी इतना समझदार नहीं था की पुरे गांव की बागदौड को सम्हाल सके , एक चाचा थे जो तारा के बाद गद्दी के हकदार थे लेकिन वो अभी जेल में थे , अब सारा दारमदार रिद्धिमा के कंधे पर hi आ गया था ..

एक शाम गुहार के प्रधान गजराज रिद्धिमा के घर आये , जो अभी तक कार्यवाहक प्रधान के रूप में दोनों गांवो के मसलो को सम्हाल रहे थे ..

“बेटी अब सबकुछ तुम्हे hi सम्हालना होगा , अजय को भी अब होश आ गया है कुछ दिनों में वो घर भी आ जायेगा ,मैं अब तुम दोनों को तुम्हारी जिम्मेदारी सूप देना चाहता हु “

रिद्धिमा बस उनकी बात सुन रही थी ..

“काका क्या ये जिम्मेदारियां सरपंच काका नहीं उठा सकते “

जी है इन तीनो गांवो में सरकारी प्रधान सरपंच hi था लेकिन असली मुखिया तो वो 3 परिवार थे जिनकी लोगो के नजर में एक इज्जत थी , वो जिसे चुनाव में खड़ा कर दे वही सरपंच बन जाता था ..

इन तीनो परिवारों के पास न जाने कितनी जमीने थी और धन दौलत से सभी सम्पन थे ..

“नहीं बीटा , ये जिम्मेदारी तो हमारे पूर्वजो से चली आ रही है , परिवार का कोई सदस्य hi इस गद्दी का गददीदार होता है , तुम्हारे परिवार में अब तुम hi हो जो नयी मुखिया बन सकती हो “

“लेकिन काका पूरा गांव डरा हुआ है की कही अजय अपने पिता और चाचा के क़त्ल का बदला न ले “

“नहीं बीटा इसकी फ़िक्र मत करो अजय को मैं समझाऊंगा उसकी माँ समझाएगी , जो हुआ वो सुलभ की गलती थी न की पुरे गांव की , मेरी उसके माँ से बात हो गयी है गांव वालो को डरने की कोई भी जरुरत नहीं है “

“लेकिन काका मैंने सुना है की अजय की जान शिकारी बाबा ने बचाई है और अब उसे भी शिकारी की बीमारी लग गयी है जिसके बारे में हम केवल कहानियो में सुना करते थे “

रिद्धिमा की बात सुनकर गजराज हँसाने लगा

“बीटा ये सब तो केवल कहानिया hi है “

“क्या सच में ?? क्या सच में शिकारी और चुड़ैल की कहानिया महज कहानिया hi है “

रिद्धिमा ने घर कर गजराज को देखा , वो जैसे रिद्धिमा से नज़ारे चुरा रहा था

“बताइये काका “

रिद्धिमा ने जोर दिया

“मुझे नहीं पता बीटा लेकिन मुझे इतना जरूर पता है की अजय को सुलभ ने जिस तरह से मारा था उसका बचना नामुमकिन था लेकिन वो बच गया , उसकी माँ ने कहा की किसी शिकारी ने उसे बचाया है , हम जिस शिकारी बाबा के मंदिर में पूजा करते है वही सभी शिकारियों के गुरु है ,हम उनकी पूजा इसलिए करते है क्योकि उन्होंने hi शिकारियों को गांव से दूर रहने का आदेश दिया था और तब से कोई शिकारी कभी गांव में नहीं आया उनका निवास जंगल के अंदर है जंहा जाने की हमें कभी जरुरत hi नहीं पड़ती , लेकिन अगर ये सच होगा तो फिर एक बड़ी मुसीबत सामने आ जायेगी , अजय के अंदर शिकारियों वाली ताकत होगी जिसका कोई आम इंसान मुकाबला नहीं कर सकता , और शिकारी वाली वासना भी वो बढ़ते hi जायगी जब तक वो किसी चुड़ैल के संपर्क में नहीं आ जाये , सिर्फ चुड़ैल hi ऐसी जाट है जो की शिकारियों को शांत रख सकती है लेकिन फिर शिकारी के आकर्षण से बच पाना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है और अगर …”

वो इतना hi बोल कर चुप हो गए , रिद्धिमा ने भी हां में सर हिला दिया

“इसका कोई इलाज है काका “

“पता नहीं बीटा , कहते है की शिकारी खुद hi इसके इलाज के लिए भटकते रहते है ताकि वो भी आम जिंदगी जी सके “



दोनों ने hi गहरी सांसे छोड़ी , लेकिन रिद्धिमा के मन में कई तूफ़ान एक साथ मंडरा रहे थे उसे अब भी अपने गांव वालो की और अपने परिवार की चिंता सत्ता रही थी ……..
 
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