Incest Kamuk Alka - Page 16 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अपडेट-66 (बड़ी माँ के गुलाब जामुन)

मोबाइल में चल रहे फोटोज और सन देख के विशाल का लुंड फटने को होने लगता है…

विशाल को समझ आ गया था की रागिनी को सईद पता नहीं वो किन फोटो के लिए टैरिफ कर रहा है और इस से पहले वो आ के मोबाइल चीन ले वो साडी फोटोज एंड वीडियो अपने फोन में ट्रांसफर कर लेता है और ट्रांसफर कर लेने के बाद पूछता है..

विशाल- बड़ी माँ इनमे से कुछ पिक्स मई ले लू प्लस

रागिनी- हाँ ले ले जो तुझे अछि लगे इसमें पूछने का क्या है बीटा है तू मेरा…

अब आगे

विशाल ेके क कर के रागिनी के सरे डार्क सीक्रेट्स देखता चला गया और हर फोटो पे रागिनी के टैरिफ में दोहरे सब्द का इस्तेमाल कर रहा था और इनसब से बेखबर रागिनी जो अपने कपडे बदल चुकी थी और शीश ेके सामने कड़ी हो के आपने बालो को सवारते हुवे विशाल की बातो का जवाब भी दे रही थी…






विशाल- बहुत राज़ दबाये है बड़ी माँ आपने अपने इस फोन में

रागिनी- हेहेहे मैं क्या राज़ रखूंगी गधे और राज़ होता तो तुझे मोबाइल देती क्या?

विशाल- ये गुलाब जामुन किसे खिला रहे हो बड़ी माँ… ये बात विशाल ने उस फोटो को देख के खा था जिसमे रागिनी किसी को अपने निप्पल चुसवा रही थी….






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रागिनी- गुलाब जामुन खान दिख रहा है तुझे??? शादी वाड़ी की फोटो है क्या??

विशाल- नहीं बूत शादी के बाद की फोटो लग रही है जिसमे दूल्हा दुल्हन खिलते है एक दूसरे को…

रागिनी- किसकी साहड़ी में मई किसे गुलाब जामुन खिला रही मुझे तो यद् भी नहीं रुक मैं अभी आती हूँ फिर दिखाना किस फोटो की बात कर रहा है तू

उसके अगले hi फोटो में रागिनी को कमल काउच पे लेता के तेज़ तेज़ छोड़ रहा था और साथ hi उसके निपल्स को मुँह में भर के चूस रही थी…

विशाल- वाओ बड़ी माँ क्या आम है काश मैं भी एक बाईट ले पाटा… मैं तब खान था बड़ी माँ आम के मौसम में??






रागिनी- आम?? वो अपने बगीचे का होगा और तो हम बहार की ऍम कहते नहीं..

विशाल- हाँ माँ है तो अपने hi बगीचे का माली भी अपने hi बगीचे का है फोटो में..

रागिनी- देखा बिना फोटो देखे बता दिया न

विशाल- हाँ बड़ी माँ और आपको गणना इतना पसंद है आपने कभी बताया नहीं… कितने दिल से चूस रहे हो आप सुगरकाने…

इस पिच में रागिनी अरविन्द के लुंड चूस रही थी याय उन कहो अरविन्द अपने लुंड को रागिनी के मुँह में तेज़ तेज़ पेल रहा था…






रागिनी- ओहो कभी गुलाब जामुन कभी आम कभी गणना रुक मैं देखु किस फोटो का पूछ रहा है तू ऐसे तो मुझे याद भी नहीं और फिर साडी साज सज्जा के बाद रागिनी एक बहुत hi कामुक परफ्यूम अपने बदन पे छिड़कती है जिसके सुगंध से पूरा कर्मा महकने लग जाता है और अब वो वापस से विशाल के करीब आके बैठ जाती है और विशाल के हाथ से मोबाइल ले के देखने लग जाती है और जैसे hi देखती है की विशाल किन फोटोज के बारे में काफी देर से बात कर रहा था ो कोई और नहीं बल्कि रागिनी के उसके हाथो से बनाये उसी के ब्लूएफिल्मस थे जो उसका आशिक़ रिकॉर्ड करता था जब भी उसे छोड़ता था….

चोरी पकडे जाने पे रागिनी का गाला सूखने लगता है और पसीना आने लगता hai…pasina उसके माथे पे तो थी hi साथ hi उसके आर्मपिट पे भी जमा होने लगी थी जो उसके ब्लाउज को गीली कर रही थी और अभी तोड़े देर पहले hi रागिनी ने जो कामुक परफ्यूम लगाया था उसमे घुलने लग जाता है… रागिनी का कामरूप देख के विशाल का लुंड जो के पहले से hi खड़ा हो के पंत में फड़फड़ा रहा था उसके ऊपर उसके शरीर से आती ये मादक खुसबू विशाल को मदहोश करने लग जाता है…

और दूसरी तरफ रागिनी के पास अभी के लिए विशाल के लिए उसके किसी भी बात का कोई उत्तर नहीं था उसका सफ़ेद सफ़ेद पद चुक्का था उसके चेहरे लालिमा फीका पड़ने लगा था ुसंके चेहरे से शर्म और मादकता का भाव एक साथ टपकने लगा था …

उसके आर्मपिट से आती तेज़ परफ्यूम और पसीने की खुशबु मनो विशाल को अपनी और खींच रही थी और वो भी मंत्रमुग्ध हुवे रागिनी के आर्मपिट के तरफ खींचने लगा था और रागिनी भी उसे अपनी तरफ आता देख तो रही थी पर उसका शरीर मनो वही जैम गया था ो कोई प्रतिकिर्या नहीं दे पा रही थी और देखते hi देखते विशाल रागिनी के बगलो में अपना मुँह घुसा देता है,,,






रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है विशु…..

विशाल- ये कौनसा परफ्यूम है बड़ी माँ बहुत अछि है

रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhh तो ऐसे कौन सुघट है bête चल हैट जाने दे दरवाजा भी खुला है कोई आ गया तो क्या सोचेगा…

विशाल- यही की मैं अपने बड़ी माँ से प्यार करता हु..

रागिनी- बड़ी माँ से ऐसे प्यार नहीं करते bête चल चोर…

हलाकि विशाल ने उसे पकड़ा नहीं था ो जा सकती थी पर उसका मुँह चोर्ने को कह रहा था लेकिन वो उठ के जाए के जगह अपने हाथ उठा के उसे अचे से सूंघने में मदद करे लगती है….

विशाल- चोर दूंगा लेकिन एक शर्त पर और विशाल रागिनी के बगल को अब काटने लगता है….

रागिनी- aaaaaaaaahhhhhhhhhh काट क्यों रहा है निशान पद जायेंगे ….

विशाल- सॉरी बड़ी माँ पर ये इतना चिकना है जैसे माखन और इस से आती खूब मुझे मदहोश कर रही है बड़ी माँ

रागिनी- चल चोर अब जाने दे वो आते hi होंगे लंच के लिए

विशाल- हाँ अगर आप मेरी एक बात मनो….

रागिनी- कोण सी बात??? Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh काट मत कुत्ते

विशाल- यही की मुझे भी गुलाब जामुन खिलाओगी अपना

रागिनी- ची किसी बाते कर रहा है मैं तेरी बड़ी माँ हु

विशाल- हाँ तो फिर नहीं चोरता मैं….

रागिनी- उउउउउउउउउफ्फ्फफ्फ्फ़ कसी जिद कर रहा है bête चल हैट उठने दे और विशाल को धकेल के उठ जाती है और तेज़ कदमो से भागने लगती है की तभी विशाल उसे कमरे से निकलने से पहले उसकी साड़ी को मुट्ठी में भर लेता है जिस वजह से रागिनी के बीएड से उठते hi उसकी साड़ी खुल जाती है…..






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साड़ी के कंधे से सरकते hi रागिनी की छाती अब विशाल के बिलकुल सामने थी उसकी धड़कने बहुत तेज़ बढ़ने लगी थी और हर बीट के साथ उसकी दोनों चूचिया पुरे जोर से ऊपर निचे होने लगी thi…Ragini के सपाट पेट पे पसीने की बुँदे चमक रही थी और उसके बालो से बेहटा पसीना अपनी जगह बनाते हुवे रागिनी के दोनों चुचिओ के बिच बने घातिओ में बहने लगा था..

रागिनी- aaaaahhhhhhhhhhh विशु क्या कर रहा है ऐकोर वर्ण बहुत मार खायेगा इतनी शैतानी ठीक नहीं देख मेरी साड़ी उतर दी तूने…

इस्पे विशाल रागिनी के पल्लू को मुट्ठी में भर क ीक बार और खींच लेता है जिस से बाकि की बची साडी जो कही कमर के किसी कोने में फांसी थी अब पूरी तरह से उसके जिस्म से अलग होक वही फर्श पर बिखर जाती है…






रागिनी दीवार के सहारे हफ्ते हुवे चिपक के कड़ी हो जाती है और चोर्ने को बार बार मिन्नतें करने लगती है लेकिन उसकी गरम धसधकते जिस्म और उसके मुँह से निकले शब्दों में कोई तालमेल hi नहीं था…. उसकी आहे मनो कह रही हो आजा इस से आगे तो नहीं जा पाऊँगी आ पकड़ ले अपनी बड़ी माँ को और कर ले अपने मन की खा ले गुलाब जामुन और सारा रास निचोड़ ले अपने बगीचे के आम का जिसके लिए तू तरस रहा है





विशाल बीएड से उठ के दिवार से चिपके रागिनी के करीब जाने लगता है और विशाल को अपने करीब आता देख बिना साड़ी के सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में अपने कामुक बदन को छुपाते हुवे रागिनी दीवार के और ज्यादा चिपक के उसे देखते हुवे हाफने लगती है…

विशाल- अब खान जाओगी…

रागिनी (बड़े कामुक भरे अंदाज़ में)- मत कर bête पाप है ये मई तेरी बड़ी माँ हूँ.. लेकिन ये सिर्फ उसके होठ कह रहे थे उसका मादक शरीर नहीं ये उसकी आँखे बता रही थी विशाल को आता देख वो भी अपने पैरो को मलते हुवे अपने लातो को साइड करते हुवे उसे hi देख रही थी मनो कह रही हो ज्यादा समय नहीं है जल्दी खा ले अपने जामुन…

विशाल एक बार फिर से रागिनी को दबोच लेता है और दीवार से लगा के इस बार निचे झुक के उसके पेट को चूमने लगता है…






विशाल- उफ्फफ्फ्फ़ बड़ी माँ तुम्हारी ये पेट कितनी सूंदर है हाय

रागिनी- सभी की तो होती है bête अब चोर दे न क्यों तड़पा रहा है अपनी बड़ी माँ को बस कर अब बाद में प्यार कर लेना चोर दे बचे…

पर विशाल का इरादा कुछ और hi बन गया था वो अब उठ के रागिनी के गार्डन पे टूट पड़ता है






विशाल रागिनी के गार्डन से टपक रहे पसीने की बूंदो को अपने होठो में दबा के चूस जाता है..

रागिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है पगले चोरता क्यों नहीं अब

विशाल- तुम्हारे तो पसीने में भी खुशबु है बड़ी माँ तभी अलग अलग लोग तुमसे चिपके थे वीडियो और फोटो में भी…

रागिनी- sssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh कीसी को मत बताना bête ये सब पता नहीं तेरे हाथ कैसे आ गया….

विशाल- हाँ अगर मुझे भी अपना गुलाब जामुन खिलाओगी…

रागिनी- उफ्फफ्फ्फ़ कैसा जिद ले के बैठ गया है ये लड़का..

इस पकड़म पकड़ाई में रागिनी की साड़ी उतर जाने से रागिनी बस मैरून ब्लाउज पेटीकोट में थी उसकी धड़कने बढ़ने लगी थी उसका छूट भी पसीजने लगा था लेकिन दिनेश और अरविन्द के आने का भी समय हो रहा था जिस से उसकी घबराहट बढ़ते जा रही थी…

विशाल अगले hi पल रागिनी को घुमा देता है और पीछे से उसके गार्डन को चूमने लग जाता है….






रागिनी भी किसी कठपुतली की तरह विशाल के इशारे पेग हम जाती है और अपने पसीने से भीगे गार्डन को विशाल को सौंप देती है लेकिन गार्डन के साथ रागिनी का एक चीज और विशाल के स्पर्श से पागल होने लगा था ो था उसके गोल गोल चूतड़ और उसके वो बड़ी दरार जिसमे विशाल का लुंड अपनी जगह बनाना सुरु कर दिया था…





लुंड का दबाव चूतड़ों पर पड़ते hi रागिनी कसमसाने लग जाती है…. उसके बड़े बड़े चुत्तड़ जिसकी गहराई में पूरा घर कभी न कभी खो चुक्का है वो चुत्तड़ विशाल के लुंड के लिए एक संकरी दीवार प्रतीत हो रही थी…

पेटिक्ट के पतले कपडे को चीरता फाड़ता विशाल का लुंड रागिनी के छूट के मुहाने पे तो कभी उसके तंग छोटी सी भूरे गांड के बने उस छेद को ठोकर मरने लगा था जहां के छुवन मात्रा से रागिनी के छूट से पानी बहते हुवे उसके जांघो पे बहने लगी थी…

रागिनी (uufuuuuuuuuuuuuffffffffff कितना बड़ा और मोटा लग रहा है इसका लुंड अगर जल्दी नहीं छूट पायी तो माँ छुड़ाने गया दिनेश मैं इसके लुंड पे कूदने न लग जाऊ).-

रागिनी- uuuuuuuuuffffffffffffffff विशु चोर दे bête बहुत प्यार कर लिया अपनी बड़ी माँ को कुछ अपने बड़े पापा के लिए भी चोर दे…

रागिनी के ये शब्द साफ़ जाहिर कर रहा था की वो क्या चोर्ने के लिए कह रही थी लेकिन हाथ में आया खजाना कौन hi चोरता है….






विशाल अब निचे झुक के रागिनी के नंगे कमर पे चूमियो के बौछार कर देता है साथ hi उसके कोमल मक्काहान जैसे चर्बीदार मगर सपाट पेट को अपने दोनों हाथो में भर के मसलने लग जाता है…

विशाल- बड़े पापा तो करते hi है बड़ी माँ आज मुझे प्यार करने दो न कितनी अछि खुसबू आ रही है तुम्हारे बदन से मेरा चोर्ने का तो दिल hi नहीं हो रहा है… ये बात विशाल रागिनी के पेट को लगातार मसलते हुवे बोल रहा था….






Ragini-bas कर विशु अब मुझे भी कुछ होने लगा है अब जाने से मुझे वर्ण पाप करवा देगा तू मुझसे और इतना कह के रागिनी विशाल से छूटे हुवे एक बार फिर से घूम जाती है और बी विशाल का लुंड रागिनी के चूतड़ों से आज़ाद हो चुक्का था जो थोड़ी देर पहले उस गहरी घाटी में फसा हुआ था…

रागिनी के घूम जाने से अब दोनों एक बार फिर से आमने सामने हो जाते है रागिनी की तेज़ धड़कने और आँखों में भरी वासना की चमक उसके चेहरे पे तैरने लगा था…. दोनों की नज़रे आपस में मिल जाती है रागिनी की प्यास उसके आँखों में साफ़ नज़र आने लगा था वो कभी अपने होठो को अपनी गार्डन आगे कर के विशाल के होठो से मिलाने की कोशिश कर रही थी तो अगले hi पल जैसे कुछ था जो उसे रोक रहा था और वो अपने को रोक लेती थी लेकि उसके होठ अब विशाल के होठो से मिलने के लिए मनो तड़पने लगी थी जिसकी सुरुवात उस से नहीं हो पा रहा था…






रागिनी की आँखों में तड़प और वासना दोनों भर भर के मनो अब उसके आँखों से छलकने लगा था ो विशाल को खुद को सपने के लिए तैयार थी उसके होठ विशाल के होठो से मिलने से तरस रहे हो लेकिन एक औरत वो भी रिश्ते में बड़ी माँ ये कदम उठाये तो उठाये कैसे हाँ अगर उसका बीटा विशाल कुछ किया तो वो नहीं रोकेगी और सईद रागिनी अब विशाल के सुरु करने का इंतजार हो और विशाल का भी हल कुछ यही था अब तक जॉब hi किया उसमे उसे रागिनी से नजरे नहीं मिलनी पद रही थी लेकिन आँखों में आंखे दाल के चूमना पहली बार में थोड़ा हिम्मत का काम तो tha..par जॉब hi हो अब पीछे का कोई रास्ता नहीं था और देखते hi देखते दोनों के गरम सुलगते होठ आपस में मिल जाते है….





और देखते hi देखते बड़ी माँ और बीटा का वो पवित्र रिश्ता सईद अब इसी चूमियो के साथ टूट चुक्का था अब ये दो गरम जिस्म एक दूसरे में मिल जाना छह रहे हो रागिनी भी अब विशाल को अपने होठ नहीं अपने गरम सुलगते जिस्म सौंप दी थी..

रागिनी- uuuuuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmuuuuuuuuuuuu

विशाल अब अपने हाथ रागिनी के चुचिओ पे ले जा के उसे मसलने लग जाता है वो वही रागिनी भी विशाल के होठो को चूसते हुवे उसके बलिष्ठ मर्दाने चौड़ी छाती पे हाथ फेर के मनो उसके मर्दानगी का जायज़ा ले रही थी…

काफी लम्बे चले चुम्बन के बाद रागिनी अपने होठो को आज़ाद करते हुवे तेज़ तेज़ हाफने लगती है

रागिनी- आआआआह्ह्ह्ह ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uffffffffffffffff

Vishal-wow बड़ी माँ क्या नरम होठ है तेरे

रागिनी- चुप कर आखिर कर लिया न अपने मन की…

विशाल- अभी खान बड़ी माँ अभी तो कुछ भी नहीं kiya…aur एक बार फिर से रागिनी के चेहरे को पकड़ के उसके तेज़ चल रहे सांसो पे काबू पाने से पहले वापस से उसके होठो को अपने होठो से दबा लेता है…






रागिनी भी विशाल के चूमीओ का जवाब ज्यादा भड़काऊ औरत बन के देने लगी थी जो बता रही थी की उम्र जॉब hi हो उसमे आग बहुत है और वो विशाल को अपने आग में झुलसा सकती है…

विशाल भी लगातार रागिनी के होठो का रास अपने होठो से निचोड़ते हुवे निचे उसके मखमली पेट को बड़े जोरो शोर से मसल रहा था जिसका रैंड गोर पैन से लाल हो चला था…

रागिनी अब विशाल के चुम्बन का जवाब निचे से अपने छूट का दबाव विशाल के लुंड पे बढ़ा के देने लगी थी सीधे शब्दों में कहु तो रागिनी विशाल के ुण्ड पे अपने छूट से झटके लगाने लगी थी जैसे वो विशाल को छोड़ रही हो…

विशाल भी रागिनी के बढ़ते कामवासना को देखते हुवे उसके कमर में अपने दोनों हाथ दाल के अपने से कास लेता है और अगले hi पल घुमा के बीएड पे पटक देता है…

Ragini-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

रागिनी बीएड पे बैठ के अपने दोनों हाथ पीछे टिका के और पैरो को बीएड से निचे लटका के विशाल को देखने लग जाती है मनो पूछ रही हो अब क्या???






विशाल एक बार फिर से रागिनी को अपने बहो में भर लेता है और सके छतियो को चूमने लग जाता है…

विशाल उसके छतियो पे हाथ फेरते हुवे पहले उसके गलो को चूमते हुवे उसपे अपनी गरम सांसो की बौछार करने लग जाता है रागिनी एक कामुक गरम औरत बड़े मुश्किल से खुद को अब तक रोके राखी थी उसका बांध भी अब कभी भी टूट सकता था रागिनी विशाल के बाप अशोक का लुंड तो खाया की नहीं पता नहीं लेकिन लगता है उसके bête का लुंड आज जैसे खा hi लेगी…

विशाल अब रागिनी को बीएड पे लेता के उसके ऊपर आ जाता है और उसके पेट गार्डन और छतियो को पुरे जोश में चूमने चाटने लग जाता है…






रागिनी अब छटपटाते हुवे अपने सर को दये बाये पटकने लगती है उसकी सांसे बेकाबू होने लगी थी और उसके हाथ विशाल के सर पे जोर जोर से चलने लग जाता है… विशाल भी उसके ऊपर लेते लेते पेटीकोट के ऊपर से hi अपने लुंड का दबाव उसके छूट पे बनाने लगा था मनो बता रहा हो देख बड़ी माँ कितना दमदार लुंड तेरे अंदर घुसने वाला है जो तेरी छूट की धज्जिया उदा देगा ठीक वैसे hi जैसे तेरी बेटी की उदा के आया है और वो मरे हालत में अपने रूम में पड़ी है..

रागिनी भी लगातार अपने ऊपर विशाल के द्वारा हो रहे प्रहार से पिघलने लगी थी. उसका दी लैब आगे बढ़ने का होने लगा था पर वही कश्मकश जहां वो खुद पहले बढ़ना नहीं छह रही थी लेकिन विशाल को रोकती भी नहीं…






विशाल अब रागिनी के पैरो को तो उसके पिंडलियों से होते हुवे हुवे उसके पेटीकोट को उठाते हुवे उसके जांघो पे जुबान फेरना लगा था और जांघो को छत्ते हुवे उसे बिच बिच में काट भी रहा था

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh चोर दे bête अब तो इतना कुछ कर लिया बस कर अब (या ले ले अपने गुलाब जामुन मैं नहीं रोकती इस से पहले की दिनेश आ जाये)

विशाल- क्यों बड़ी माँ आपको ाचा नहीं लग रहा मेरा आपको प्यार करना

रागिनी अब कैसे बोले की वो जो कर रहा है वो प्यार नहीं हवस है जिसके अंधी में उनका पवित्र रिश्ता तबाह हो जाएगगा वो मन hi मन लुंड के लिए तड़पने लगी थी वो दुआ करने लगी या तो दिनेश आ के उसे इस परिस्थिति से बचा ले या विशाल आगे बढ़ के कर ले ज करना है बस ऐसे बिच में रहने से उसकी तड़प उसकी जान ले रही थी… उसका गाला सूखा जा रहा ता और सूखे भी क्यों न गले का पैनिक हूत से जॉब बह रहा था…

कोई और होता तो सईद रागिनी को अब तक छोड़ चुक्का होता लेकिन विशाल को औरत को तड़पा के छोड़ने में मज आता है जिसमे वो खुद लुंड मांगे जैसे उसकी देवरानी अलका होय ा उसी के छूट से निकली उसकी बेटी ऋचा..

रागिनी की आग अब और ज्यादा उस से संभाल पाना मुश्किल होने लगा था ो तड़पते हुवे अपने दोनों पैरो को विषा के गार्डन पे रख उसे खींच के अपने छूट पे उसके चेहरे को दबा लेती है…

विशाल भी रागिनी की बढ़ती बेचैनी को देख अपने जीत की और एक कदम बढ़ते हुवे पेटीकोट के ऊपर से hi उसके छूट पे जैसे hi हाथ रखने वाला था की गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ आती है जिसे सुनते hi रागिनी जो थोड़ी देर पहले विषा को अपने पैरो में जकड के अपने छूट पे दबा रही थी वही रागिनी अपने उसी पेअर से विषा के छाती पे मरते हुवे अपने से अलग करने लगती है…

रागिनी की दुआ भगवान ने सुन लिया था और उसकी इज़त तार तार होने से बचने के लिए उसके पति दिनेश को घर बिलकुल सही समय पर भेज दिया tha……lekn सईद रागिनी को दिनेश का इस समय आना बिलकुल भी पसंद नहीं आया था..






दोनों बड़े बेमन से बहार की तरफ देखने लग जाते है विशाल का हाथ अब भी रागिनी के कमर पर hi था और रागिनी का हाथ भी अभी तक विशाल के कंडे और छाती पे था....

दिनेश के कदमो की आहात आने के बावजूद भी विशाल मनो रागिनी को चोर्ने को राजी नहीं था और वो दिनेश के पास आने की परवाह किये बिना उसके बीवी को उसी के कमरे में अपने बहो में भर के चुम रहा था...

विशाल- मुझे गुलाब जामुन कहने है बड़ी माँ






रागिनी- चल अब तो चोर दे तेरे ताऊ आ गए बहुत कर लिए प्यार तूने अपनी बड़ी माँ को अब जा जल्दी वो आते hi होंगे..

विशाल- और मेरा गुलाब जामुन??

रागिनी- वो मौका तो तूने गवा दिया हेहेहे

विशाल- नहीं मुझे चाइये पहले बोलो डोज की नहीं वर्ण मैं यही रहूँगा ऐसे hi और आपको भी नहीं जाने दूंगा

रागिनी- ओहो विशु अभी जा फिर कभी देखते है

दिनेश की आवाज़ अब सुनाई देने लगी थी जिसका मतलब था ो कमरे के करीब आने लगा था

विशाल भी जल्दी से उठ के वहां से जाते हुवे रागिनी को देख के बोलते हुवे जाता है…

विशाल- गुलाब जामुन तो मैं खा के रहूँगा बड़ी माँ और अपने मोबाइल का स्क्रीन दिखते हुवे जाता है जिसका मतलब था की आपके काळा कारनामे मैंने अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लिया है…

रागिनी विशाल के इस तरह से धमकाना रागिनी को बुरा नहीं लगा बल्कि वो और लाड प्यार से विशाल को वही बीएड पे बैठे बैठे देख रही थी






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रागिनी वही पेटीकोट और ब्लाउज में बीएड पे बैठे बैठे अपने bête के सामान के भतीजे को जाता देख रही थी… वही भतीजा जो पिछले 1-2 घंटे से रागिनी को उसी के बिस्टेर पर रगड़ रहा था और अगर दिनेश थोड़ी देर और न आता तो सईद उसकी बवि रागिनी उसी के बैडरूम में उसी के बिस्टेर पे अपने छोटे भाई के bête से चुद जाती…. और यही सब ख्याल ने रागिनी के अधरों पे मुस्कान ला दिया था लेकिन दिनेश अब किसी भी वक़्त कमरे में आ सकता था इसलिए वो जल्दी से उठ के अपने फर्श पे बिखरे सरे को उठाने लगती है और तेज़ी से पहनने लगती है…





दिनेश कमरे में घुसते hi देखता है उसकी बीवी साड़ी लप्पेट रही है जो इस वक़्त अधनंगी थी और उसकी नज़रे निचे थी जिस से वो दिनेश को आता नहीं देख पायी थी पर ऐसा दिनेश को लगता था क्युकी दिनेश के आने की खबर तो उसे कब का लग गया था…

दिनेश- अरे भाग्यवान ये क्या दिन दहाड़े नंगी हो रही है रात तक का तो सब्र कर लेती.. मैं तो बस रोटी खाने आया था और तू पूरा भट्टी खोल के बैठी है

रागिनी- चुप करो हर वक़्त तुम्हे यही सूझता है.. मैं बस कपडे बदल रही थी खाना बनते हुवे साड़ी गन्दी हो गयी थी… चलो खाना लगाती हु विशाल और ऋचा को भी आवाज़ दे दो

दिनेश- सिर्फ विशाल ऋचा और अलका खा गयी?

रागिनी- उगाई होगी किसी काम से मार्किट वगैरह..

दिनेश- ठीक है ठीक है तू खान लगा और दिनेश एंड रागिनी खाने के मेज की तरफ चल देते है….


नेक्स्ट अपडेट में देखते है विशाल को गुलाब जामुन मिलता है या अभी और सब्र करना होगा.???? उधर दिनेश को टाइम पे घर भेज के ऊपर वाले ने भी रागिनी को एक मौका दिया है खुद को बचने का पर क्या वो खुद को बचाएगी या लेट जाएगी विशाल के निचे ये वक़्त hi बताएगा…
 
आपलोग एक बात सच सच बताना कोई मेरा ऐसा भी रीडर है क्या जो सीधा गूगल पे मेरी स्टोरी का नाम दाल के साइट खोलता है राथेर थान की पहले साइट खोला एंड स्टोरी सर्च किया...
 
गुलाब जामुन प्रेप इन फुल स्विंग बी बड़ी माँ गाइस. स्वीट क्रेविंग्स सॉर्टेड.



 
अपडेट-66 (विशाल मेरी गांड मरेगा...)

पिछले episode में हमने देखा की कैसे दिनेश की ा जाने से रागिनी विशाल के हाथ में आते आते बच गयी थी.. और दिनेश जो की लंच के टाइम पे आया था सो रागिनी उसे खान ेके टेबल पे बिठा के खुद किचन में चली जाती है… उधर दिनेश भी ऋचा और विशाल को खान ेके लिए आवाज़ देता है जिसे सुन विशाल तो आ जाता है पर ऋचा नहीं आती, वो अभी भी अपने कमरे में hi थी जिसपे किचन के अंदर से hi रागिनी ऋचा को गालिया देने लगती है दरसल वो गालिया नहीं होती बस ऋचा के लिए वो ओवरप्रोटेक्टीवे थी और उसे पता था की घर में क्या चल रहा होता है ऐसे में कोई भी माँ अपने बेटी को इस सामूहिक चुदाई में तो धकेलें नहीं hi चाहेगी वो बह तब तक जब तक की उसकी शादी न हो जाये….

ऋचा के साइड से कोई आवाज़ न आने पे वो खुद जाती है कमरे में बुलाने जिसपे विशाल रागिनी को रोकते हुवे खुद ऋचा को बुलाने उसके कमरे में जाता है…

विशाल जैसे hi कमरे में घुसता है की सामने बीएड पे बैठी ऋचा उसे देख के रोने लग जाती है…






विशाल ऋचा को ऐसे रोटा देख थोड़ा परेशां हो जाता है इसलिए वो ऋचा के करीब जा के पूछता है क्या हुआ जिसपे ऋचा रट हुवे बताती है…

मुझे बहुत जोरो की सुसु आयी है विशु पर मेरे से उठा नहीं जा रहा है मुझे सुसु करा दे मेरे भाई…

विशाल ऋचा के मासूमियत पे हसने लगता है- बस इतने के लिए रो रहे हॉ हेलो मैं ले चलता हु और फिर विशाल ऋचा को टॉयलेट करने ले जाता है..

ऋचा सीट पे बैठ के सुसु कर के जैसे hi उठ के फ्लश करने जजती है उसकी नज़र कमोड पे पड़ती है जिसमे से निकले पेशाब का रंग सफ़ेद या पीला होने के जगह लाल था






ये देख के ऋचा और भी ज्यादा रोने लग जाती है…

विशाल- अब क्या हुआ अब क्यों रो रहे हो आप जल्दी चलो बड़ी माँ खाने पे बुला रही है…

ऋचा- क्या हुआ??? ये देख तूने क्या किया है और फिर ऋचा अपने स्कर्ट को गिरा के अपने अपनी तंग खोल के अपने गड और छूट के दर्शन विशाल को करने लगती है….






ऋचा- ये देख अभी तक रिस रिस के पानी के साथ खून आ रहा है ये किया है तूने मेरे से उठा नहीं जा रहा है इतनी जलन हो रही है बहार गयी तो माँ एक मिनट में पहचान लेगी की उसकी बेटी चुद के आयी है, बता मैं कैसे निकलू बहार और अंदर टॉयलेट सीट देख मूतने गयी थी पेशाब में भी ब्लीडिंग हो रही है…. तूने छोड़ा नहीं है फाड़ के रख दिया है दर्द हो रही वो अलग

रात को जो ऋचा एक प्रोफेशनल रंडी को भी पीछे चोर दे वो रूप धारण कर चुकी थी तो वही ऋचा रात के हुवे चुदाई के दर्द से रो रही थी... रोटी हुई ऋचा बहुत hi मासूम और क्यूट लग रही थी जिसे देख कोई भी उसके प्यार में गिर जाये फिर इतनी मासूम और क्यूट सी दिखने वाली लड़की को कोई भला इतनी बेरहमी से कैसे छोड़ सकता है...

जवाब है छोड़ सकता है हाँ जब क्यूट सी दिखने वाली लड़की के अंदर एक रैंड समां जाये तो उसे ऐसे hi छोड़ना पड़ता है..

विशाल- पर दीदी आपने hi खा था सब करने को…. आपने खा था आपको बड़ी माँ से भी बड़ी रांड बनना है और मेरी माँ अलका से भी..

ऋचा- हाँ खा था पर मुझे क्या पता था की इतना दर्दनाक चुदाई करेगा तू…

दोनों भाई बहन इसी बहस में लगे थे की दिनेश की आवाज़ एक बार फिर से उन्हें बुलाने के लिए सुनाई देती है…

ऋचा- पापा आ गए क्या???

विशाल- हाँ बड़े पापा आ गए और टेबल पे है तुम्हे बुला रहे है… अब कैसे चलोगी आप इस हालत में..

ऋचा- माँ को बोल देना दीदी को क्रैम्प आ रहे है वो समझ जाएगी फिर नहीं बुलाएगी..

विशाल ज्यादा बहस किये इना शामे तो शामे जा के बहार रागिनी को बता देता है फिर रागिनी हीट बैग और खाना ले के कमरे में जाती है और उसे खाना एंड बैग दे के दुलार के वापस अपने पति के सेवा में आ जाती है….

दिनेश- विशु तू क्यों नहीं खा रहा है…

विशाल रागिनी की तरफ देखते हुवे- मैं अब नहीं खा सकता बड़े पापा, बड़ी माँ को मेरी कोई फिककर नहीं मैं खो या भूका राहु

दिनेश- अरे ऐसा क्यों बोल रहा है ??? क्या हुआ कुछ खा रागिनी ने तुझे?

रागिनी- अरे मैंने क्या किया क्यों मुझे दन्त सुनवाने पे तुला है

विशाल- बड़े पापा मैंने बड़ी माँ से जो खाने को माँगा वो देती hi नहीं अपने मन का चलती है बस

दिनेश- क्या माँगा इसने ??? और देती क्यों नहीं मेरे bête को

विशाल- गुलाब जामुन पापा बड़ी माँ ने गुलाब जामुन देने से मन कर दिया

दिनेश- क्यों न दे रही चोरे ने गुलाब जामुन?

रागिनी- अरे पर है खा घर में गुलाब जामुन जो दू इसे

दिनेश- हाँ भाई यो बात भी सही घर में गुलाब जामुन कोणी तू खाऊंगा कैसे

विशाल- है बड़े पापा मैंने देखा है पर बड़ी माँ बोल रही थी की मेरे लिए नहीं है

यहां गुलाब जामुन का मतलब विशाल रागिनी के चुचिओ पे सजे उसके निप्पल को कह रहा था पर दिनेश इस बात से अनजान था..

दिनेश- अरे तुम ताई भतीजा आपस में निपट लो एक कहती है नहीं है एक कहता है है…. और रागिनी जो मांग रहा है मेरा बीटा उसे कैसे भी मंगवा के दे घर में न है तो बाजार से मंगवा दे

विशाल- क्या बड़े पापा बाजार से खाना होता तो मैं बड़ी माँ से क्यों मांगता मुझे इनके हाथ से खाना है

विशाल के इस तरह बिंदास दोहरे शब्दों के खेल को देख रागिनी चौंक सी गयी थी ये सिद्ध सा दिखने वाला लड़का कितना हरामी है की एक पति से उसके पत्नी की चुचिअ मांग रहा है…

दिनेश- ठीक है फिर रागिनी तू इसने बना के दे दे,,,

रागिनी- पर…..

दिनेश- अरे ये पर वॉर क्या है गुलाब जामुन hi तो माँगा है तू बना नहीं सकती क्या चुप से इसे खिला देना शाम तक मैं जो रात तक औ तो फिर ये महरा छोरा मुँह लटकाया न मिले

रागिनी- ाजी सुन तो लो….

दिनेश- अपने मर्दाने टोन में सुनने का टाइम नहीं रागिनी बाजार जाना है अरविन्द के साथ वो बहार म्हारा वेट करता होगा…

और फिर वो खाना खात्मा कर के जल्दी जल्दी हाथ धोते हुवे विशाल से जाते जाते कह जाता है

dinesh-chal ये बना के दे देगी अभी के लिए जो है खा ले ठीक है

विशाल हस्ते हुवे- जी बड़े पापा एक आप hi हो जिसका मेरा ख्याल है… थैंक यू बड़े पापा

दिनेश- देख रागिनी बचे को नर्ज़ न करना रात ताका अउ तब विशाल की नाराज़गी ख़तम हो जनि चाइये

और इतना कह के वो चला जाता है बिना ये जाने की अनजाने में उसने क्या देने को कह दिया था रागिनी को

दिनेश के जाते hi विशाल दुबारा से रागिनी पे झपट पड़ता है

विशाल- क्यों बड़ी माँ अब तो ताऊ जी ने भी कह दिया है ले लेने को अब तो डौगी न

रागिनी- तेरे ताऊ कोप ता है तू किस गुलाब जामुन की जिद कर रहा है?? अगर मालूम चला तो वो तेरा ये गणना तोड़ के तेरे गांड में दाल देंगे

रागिनी फ्लो फ्लो में क्या बोल गयी ये उसे बोलने के बाद एहसास होता है..

विषा- हाय बड़ी माँ आपके मुँह से ऐसे शब्द भी कितने अच्छे लगता है…

इधर विशाल और रागिनी के बिच गुलाब जामुन और केले को ले के नोकझोक चल रही थी तो उधर कमरे में सिसक रही ऋचा हीट बैग से अपने बदन के हर उस कोने को सेंक रही थी जिसे कल रात विशाल ने बड़े बेदर्दी से तोडा था और सेंकते सेंकते वोट क बार फिर से कल शाम बिताये कॉटेज में अपने दर्दनाक चुदाई को याद करने लग जाती है और उसके लिए हमे भी रिसोर्ट में hi चलना hoga…to षाले है ऋचा के साथ उस शाम में वापस और देखते है दोनों बही बहन ने और क्या क्या कारनामा किया था..


चुदाई का एक दौर इधर रिसोर्ट में समाप्त हो चुक्का था और आज ऋचा को सही मायने में जा के असली चुदाई और लुंड के दर्द का अनुभव हुआ था ऋचा जो की बिलकुल hi बेहाल हो गयी थी वो अपने सांसो पे काबू पाने की कोशिश करने लग जाती है लेकिन आज साँस वो सिर्फ नाल से याम यह से नहीं बल्कि उसकी छूट भी ले रही थी…. विशाल ने पहली hi चुदाई में ऋचा के छूट का वो हाल कर दिया था की हाव् अक झका भी उसके छूट से हो कर गुज़रता तो ऋचा के पुरे तन बदन में सिहरन दौड़ उठती hai…richa को अपने छूट पे चिपचिपा सा लगने लगा था जिसे वो पास में पड़े नैपकिन से पोछने के लिए अपना हाथ निचे ले जाती है और जैसे hi नैपकिन उसके छूट को छूटे है उसे एक तेज़ झनझनाहट के साथ दर्द महसूस होता हो मनो जले को जैसे चुने से होता hai..jaise तैसे ऋचा अपने छूट से रिस रहे पानी को टिश्यू से साफ़ करती है तो दीखता है टिश्यू में सिर्फ पानी नहीं बल्कि पानी के साथ खून भी सं के आया था…





टिश्यू में लगे खून को देख ऋचा को समझ आ जाता है की आज उसकी छूट के झिल्ली को उसके भाई ने फिरफ फाड़ा hi नहीं है बल्कि फाड़ के उसके छूट को रौंदा और उसी में वापस बो दिया है..

ऋचा- hhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeee विशु मेरी छूट की क्या हाल कर दी तूने कुत्ते फाड् दी तूने अपने बहन की छूट मादरचोद…

विशाल- तूने तो खा था रंडी की तरह छोड़..

ऋचा- हाँ पर मुझे क्या पता मेरा भोला दिखने वाला भाई ईटा वहसि है…. फिर ऋचा अपनी नज़र एक बार अपने फाटे छूट की तरफ डालती है मनो चुदाई के बाद जायज़ा ले रही हो तो जो उसने देखा उसकी छूट से ज्यादा आंखे खुल जाती है…






उसके छूट से निकला खून उसके चुत्तड़ और उसके गांड और जांघो तक फ़ैल गया था जिसे देख ऋचा के होश hi उड़द गए हो जैसे..

ऋचा- हाय चुड़ते वक़्त तो पता hi नहीं चला तूने ये हाल कर दिया एक hi बार में भोसड़ा बना दिया मेरे छूट का…. इतना बुरा हाल तो मेरा बर्फ पीछे 3 साल से छोड़ के नहीं कर पाया

विशाल- नल्ला होगा तेरा बर्फ मर्द होता तो तेरी छूट कब की फैट गयी होती..

ऋचा- वैसे कह तो तू सही रहा है उसका तो लुल्ली है तेरे सामने…

विशाल- अब अंदर कमरे में चलना है या यही नंगी लेते रहोगी…

ऋचा- चलना है मेरे भाई पर तूने जो मेरा हाल किया है थोड़ा सुस्ता तो लेने दे…

ऋचा थोड़ी देर आरा करने के बाद अपने शरीर का पूरा जोर लगा के उठने की कोशिश करती है पर टैंगो के बिच हुवे तेज़ जलन और लगातार 3-4 बार छूट के पानी के बहने से उसके टैंगो में इतना डैम नहीं बचा था की उसी के शरीर के भर को संभल सके और ऋचा अगले hi पल उस काउच पे गिर जाती है

ऋचा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh विशु मेरे पेअर कैंप रहे है मैं नहीं चल पाऊँगी

विशाल- कोई नहीं मैं उठा लेता हु न और इतना बोल के विशाल ऋचा को किसी मामूली बची की तरह उठा के अपने कंधे पे पेट के बल उठा लेता है यानि रिच अक पेट विशाल के कंधे पर और बाकि शरीर हवा में था..






विशाल ऋचा को अपने कंधे पे उठा के अपने कमरे की और चल देता है ऋचा जो अब विशाल के कंधे पेट hi लेकिन विशाल के बड़े लुंड ने उसके छूट का hi नहीं बल्कि उसके पेट का भी मंथन कर दिया था जिस से छूट के साथ साथ उसके पेट में भी एक मीठा मीठा दर्द का एहसास होने लगता है अउ रेज में काढ़े के दबाव पड़ने से ऋचा के मुँह से एक aaaaaaaaaaaaah फुट पड़ती है…

ऋचा के गार्डन पीछे होने से वो जाते जाते उस जगह को घूरते जा रही थी जहां अभी थोड़ी देर पहले उसके भाई ने उसे रौंदा था काउच पे पड़े कम्फर्ट एंड पतले गद्दे की सिलवाते उस भीषण चुदाई हाल बयान कर रही थी

जल्दी hi विशाल और ऋचा अपने कमरे में पहुंच जाते है जहां ऋचा थोड़े हिम्मत कर के स्टीम शावर लेने का सोचती है पर विशाल ने उसके लिए कुक और hi सोच रखा था ो ऋचा को बीएड पे लिटा के बाथटब में गरम पानी भर देता है और फिर ऋचा को ले जा के उसमे लिटा देता है

चुदाई से थके ऋचा के शरीर को गरम पानी के इस सिकाई ने मनो फिर से जिन्दा करना सुरु कर दिया था उसे अपने बदन पे पानी की ये बुँदे मनो उसके रोम रोम में समां क ीक नयी जान और ऊर्जा भर रही हो… वो विशाल को बड़े प्यार और उम्मीद वाले नज़रो से देखते हुवे अपना हाथ उसकी और बढाती है विशाल भी ऋचा का हाथ पकड़ के बाथटब में उसके साथ hi घुस के बैठ जाता और फिर अब विशाल को अपने पास पा के ऋचा बाथटब में उठ कड़ी होती है और विशाल के गॉड में बैठ के अपने गार्डन पीछे ले जा के उसे किश करने लग जाती है..






ऋचा के बढ़ते इस आग को ये बाथटब का पानी शांत नहीं कर सकता था उसे शांत बस विशाल के लुंड से निकले पानी के द्वारा hi शांत किया जा सकता था और ठीक वैसे hi ऋचा के सुच रहे गले की प्यास भी अब साधारण पानी नहीं बल्कि विशाल के मरदाना पानी की ज़रूरत थी जो की ऋचा के प्यास को बुझा सके/…

सुलगते होठो की पास में मिलते hi चूमीओ का दौर एक बार फिर से शुरू हो जाता है और ये काफी देर तक चलता है विशाल के गॉड में बैठे ऋचा को अब उसका लुंड ठीक ऋचा के तंग और भूरे गांड के छेद को कुरेदने लग गया था..

ऋचा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh विशु तेरा लोढ़ा तो फिर से तैयार हो गया तेरी बहन के छूट में जाने के लिए बहनचोद भाई

विशाल- तो क्या तुम फिर से छूट में तुम ये लुंड लेने के लिएतैयार हो मेरी रंडी बहन ???

ऋचा- छूट नहीं पर मैं चूस के तेरा निकल दूंगी और इतना कह के ऋचा बाथटब से निकल के विशाल के सामने मुँह खोल के बैठ जाती है और विशाल भी अब बाथटब से निकल के अपना लुंड ऋचा के मुँह और होठो पे रगड़ने लग जाता है जिसे लुंडखोर और ने नयी रैंड बानी ऋचा बिना सेक् गवाए मुँह में भर लेती है..






ऋचा पुरे जोरो शोर से विशाल का लुंड चूसना सुरु कर देती है और और पुरे जोश में अपने मुँह में भरने और निकलने लग जाती है

विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ऐसे hi चूस मेरी रैंड uuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff

ऋचा- ीूऊऊह्ह्हुग्गगगगगहुहुद्धड़ुहुफुहूफुफह

विशाल- साली छूट से ज्यादा गरम तो तेरा मुँह है रंडी चिनार

ऋचा भी अपनी टैरिफ सुन के और अचे से लुंड को चूसने लग जाती है..






ऋचा विशाल के लुंड को मुँह में भर के जोर जोर से चूस रहीथी और तब तक अपने मुँह से नहीं निकलती है तब तक विशाल का लुंड अपना गरम पानी ऋचा के मुँह में नहीं निकल deta…uska पानी ऋचा के पुरे चहेरे पे फ़ैल गया था लेकिन ऋचा को फिक्र थी तो उस आखरी बून्द की जो विशाल के लुंड के छिद्र पर चमक रहा था और ऋचा उसे जीभ फेर के चाट जाती है





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ऋचा भी विशाल के लुंड के निकले पानी को चूस चूस के पूरा जातक जाती है…

विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मेरी रांड क्या लोढ़ा चुस्ती है जैसे किसी कोठे की सस्ती रांड

ऋचा- हाँ मैं वही चाहती हु अपने भाई को ऐसा खुश कर दू जैसे कोई कोठे की रांड भी न कर पाए..

विशाल- तू आलरेडी उनसब से आगे है मेरी चनर बहन.

फिर दोनों नहाके बहार निकल आते है रिच अक आज एक पल के लिए भी कमरे से निकलने का मन नहीं हो रहा होता है वो ज्यादा से ज्यादा समय इस बंद कमरे में विशाल एक साथ बिताना छह रही थी..

डिनर के बाद दोनों एक दूसरे से लिपट के सोने लग जाते है विशाल कोप ता था उसने जो हाल आज रिच अक कर दिया है अब वो दूसरे राउंड के लिए आज तो तैयार नहीं हो पायेगी इसलिए वो सोने का सोच के उस से चपक के उसके गार्डन को चूमते हुवे सोने लगा था….

रात के कोई 10 भी नहीं बजे होंगे उधर विशाल को अपने हाथो पे ऋचा के हाथो का एहसास होने लगता है वो जैसे hi आँखे खोलता है तो पता है ऋचा उसके हाथो को पकड़ के अपने छूट के ऊपर बढ़ाने लगती है…






विशाल- क्या हुआ दीदी नींद नहीं आ रही है क्या?

ऋचा- नहीं विशु फिर से खुजली होने लगी है…. चीटिया रेंग रही हो जैसे एक बार हाथ लगा के देखना कही कोई चिति तो नहीं घुस गया है मेरे छूट में…

इतना कह के ऋचा विशाल के हाथ अपने छुटड़ो पे रख लेती है जिसे विशाल भी कपडे के ऊपर से hi ऋचा के गोल बड़े गयम में म्हणत कर के दिए गए भरव्दार शेप वाली गांड को सहलाने लगता है..

ऋचा- ऐसे कपड़ो के ऊपर से पता नहीं चलेगा रुक में इसे उठा लेती हु इतना कह के ऋचा अपने ड्रेस को कमर तक सरका लेती है और बी ऋचा की गांड और छूट बिलकुल खुला खुला विशाल के आँखों के सामने परोस देती है…






विशाल अब ऋचा के जांघो से होते हुवे उसके छूट और गांड के को सहलाने लगता है जिसमे रिच अक शरीर एक बर्र फिर से विशाल के छुवन मात्रा से उसके आगोश इ जाने के लिए मचलने लग जाता है.. ऋचा भी अपनी गांड पीछे करते हुवे घुमा घुमा के मचल रही थी…

विशाल- कैसा लग रहा है दीदी

ऋचा- ाचा लग रहा है विशु ऐसे hi मसल अपनी दीदी के जांघो को थोड़ा जोर se…aur वो अब अपनी गांड और ज्यादा पीछे कर लेती है…

विशाल- तेरी चीटिया हाथो से नहीं मारेगी रंडी

ऋचा- फिर कैसे मारेगी मेरे भाई

विशाल- उसे अंदर से पेस्ट कण्ट्रोल करना पड़ेगा जोट ेरे उफनती जवानी को शांत कर सके

ऋचा- तो कर दे न देख कितना मचल रही है तेरी बहन…

बहुत जोर से हो रही है अब मुझसे रहा भी नहीं जा रहा है इ बार दुबारा से अपना लुंड दाल के छोड़ जोर जोर से uuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff

इतना कह के ऋचा घूम के सिद्ध पीठ के बल लेट जाती है और अपनी टंगे मोड़ के अपनी छूट अपने भाई विशाल को परोस देती है….

विशाल भी ऋचा के भड़कते आग को देखते हुवे अगले hi पल अपनी पंत कमर से निचे खिसका के अपना अजगर यानि अपने फनफनाते लुंड को निकल के ऋचा के छूट पे रगड़ने लगता है…






अभी उसके लुंड का सिर्फ टोपा hi अंदर गया था की रिच अक पूरा शरीर में एक तेज़ सिहरन दौड़ने लगती है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh दर्द हो रहा है लेकिन ाचा भी लग रहा है … अब और मत तड़पा मेरे भाई पेल दे पूरा लुंड और छोड़ अपने बहन को.

विशाल जो की लुंड को घसते हुवे ऋचा के कामवासना को भड़का रहा था और अपने भड़के वासना में ऋचा भी अपनी गांड उठा के लोड को छूट में सामने के लिए मरी जा रही थी जिसके तड़प को देखते हुवे विशाल अपने लुंड का दबाव होल होल ऋचा के छूट पे बढ़ने लग जाता है और देखते hi देहते विशाल का लुंड ऋचा के छूट में जगह बनाते हुवे अंदर प्रवेश करने लग जाती ै…

ऋचा के कोमल मखमली छूट जो पानी से पूरी तरह से लबालब थी वो विशाल के लुंड के गर्माहट पते hi अपनी जकड़न उसके लुंड पे बनाने लग जाती है जिसके दबाव से अपने कमर के ताक़त को दिखते हुवे विशाल एक जोर का झटका मरता है अउ रस्क लुंड ऋचा के छूट को फाड़ते हुवे दुबारा से उसकी नाभि को सहलाने लग जाता है.






ऋचा की पैन ऐकोर रही छूट जो की विशाल के लुंड के जकड़े हुवे थी उसके मरदाना ताक़त और इस करारे धक्के से खुद hi उसके लुंड को जगह देते हुवे अंदर तक खींच लेती है

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मर गयी uffffffffffffffuuuuuuuuuuuuuuuuu

ऋचा अब अपनी दोनों टंगे उठा के वशाल के लुंड को अंदर लेने की पूरी कोशिश करने लग जाती हैऔर विशाल भी तेज ते धक्को के साथ अपनी बहन ऋचा को छोड़ने लगा था…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh पुरे छूट को झकझोर दिया है तेरा ये मोटा लोढ़ा uuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff कितना दर्द देता है और साथ में मजा भी हाय aaaaaaaaaaaiiiiiii

ऐसे hi छोड़ विशु मेरे छूट की साडी चीटिया मर दे अपने लुंड से छोड़ अपनी चिनार बहन को ये ले मैंने पूरी टंगे खोल ली अब दाल जोर जोर से

ऋचा की छूट पिछले चुदाई से पहले hi बहुत सेंसिटिव हो गयी थी और उसके बाद इस तरह से चोदे जाने से की ऋचा पागल हुवे जा रही थी

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh माँ मार डालेगा क्या uuuuuuuffffffffffffff अंदर तक झनझनाहट हो रही है uuuuuuuuuuuuufffffffffffffff तेरे लुंड की दीवानी हो गयी मई एक hi रात में..

विशाल- अभी रात ख़तम खा हुई है मेरी जान अभी तो पूरी रात बाकी है

ऋचा- तो क्या आज पूरी रात छोड़ने का इरादा है मेरे भाई का अपने बहन को नहीं नहीं अपने रंडी बहन को…

विशाल- अब रंडी है तो छुड़ेगी hi न और हाँ पूरी रात तेरी छूट का बजा बजेगा आज साली चिनार..

ऋचा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh तो बजाओ न बजा मेरे भाई मैं खान रोक रही हु uuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffffffffff मेरी छूट जैसे सरिया घुसा दिया तूने इसमें… hayyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaa रागिनी किसे चुदती है इतने लोगो से मेरे तो एक ने hi फाड् के रख दिया….

विशाल- जब कभी रागिनी को छोडूंगा तो जरूर पूछूंगा की उसकी बेटी जानना चाहती है वो इतने लोदो से कैसे चुदती है….

ऋचा- hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaa

और फिर विशाल ऋचा के बातो से जोश में आ क ीक करारा प्रहार करता है जो ऋचा के बच्चेदानी तक को हिला देता है और इस झटके से चिहुँकती हुई ऋचा अपने छूट के पानी के साथ साथ पेशाब की धार भी बहाने लग जाती है…






ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaa mainnnnnnnnnnnnnn गयी विशु मेरे भाई uuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffff कैसे छोड़ रहा है कुत्ते अपनी बहन को मुता मुता के पेल रहा है हरामज़ादे अलका रंडी के bête…

विशाल ऋचा की हालत देख के मुस्कुराने लग जाता है और अपने लुंड को उसके छूट पे थपथप्ने लग जाता है जिसके हरे क थपेड़े से ऋचा की मूत निकल जाती है….

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh विशु मैं पागल हुवे जा रही हु लुंड अंदर बर्दाश्त नहीं हो रहा और बहार निकलने का मन भी नहीं हो रहा है uuuuuuuuuuufffffffffffffffff mainnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn maaaaaaaaaarrrrrrrrrr न जाऊ आज रात तेरे लोडे से

ऋचा चीखते छीलते जा रही थी और विशाल उसे अपने लुंड का स्वाद दे रहा था…

विशाल- चल मेरी कुटिया जरा अपने बड़े बड़े चुचिओ को उछलते हुवे मेरे लुंड पे कुद्द बहुत आराम कर लिया तूने

ऋचा- यस डैडी प्लस फ़क योर सिस्टर लिखे ा व्होरे

और फिर ऋचा अपने गीले छूट और बड़े गांड को फैलते हुवे विशाल के लुंड पे बैठने लग जाती है और देखते hi देखते विशाल का लुंड ऋचा के छूट में सामने लग जाता है…

मर्द का लुंड कितना भी बड़ा और भयंकर क्यों नाह ो एक औरत उसे पूरा का पूरा निगल जाने की हिम्मत रखती है और ऋचा ने भी वही किया वो विशाल के छूट पे सिसकते हुवे बैठती जरूर है लेकिन अगले hi पल विशाल का लुंड उसके छूट में ऐसे खोता है जैसे उसका लुंड कभी था hi नहीं…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh फैट गयी मेरी छूट hhhhhhhhhhhhhhoooooooooooooo गधे का लुंड ले के पैदा हुआ है बहनचोद.






विशाल- गधे का न होता तो तेरे इस गरम आग उफनती जवानी को शांति कैसे मिलती बहन की लोदी ऋचा मादरचोद और एक थप्पड़ उसके गांड पे मार देता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh और मार थोड़ा तेज़

विशाल एक के बाद एक कई थप्पड़ ऋचा कैग एंड पे बरसाने लग जाता है… अब ऋचा को छोड़ते हुवे विशाल को उसकी माँ अलका याद आने लग जाती है… रागिनी का तो पता नहीं पर अलका को ऐसी चुदाई hi पसंद है जिसमे उसके शरीर को अचे से रगड़ा जाये सिर्फ चुदाई नहीं उसे अचे से पलंगतोड़ चुदाई शांति देती है और ऋचा भी कुछ वैसी hi बन रही थी जिसे मार खाने में मजा आने लगा था

विशाल ऋचा को छोड़ते हुवे उसके गांड के तंग छेद को सहलाने लग जाता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है

विशाल- कुछ नहीं तेरे गांड को देख के रहा नहीं जा रहा है और फिर विशाल एक ऊँगली उसके गांड में पेल देता है…






ऋचा- uuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiii मायआ निकल अपनी ऊँगली वहां मेरी ऊँगली नहीं जाती तेरी तो ऊँगली भी किसी लुंड के तरह मोती मोती है बहार कर कुत्ते

पर विशाल ऋचा की कोई बात नहीं सनटैन और लगातार ऊँगली अंदर बहार करने लग जाता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh क्यों कर रहा है मत कर न फिर मेरे गांड में खुजली होने लग जाएगी

विशाल- तो गांड मरवा लेना न रंडी इस लुंड से तेरे हर जगह की खुजली मिट जाएगी

ऋचा- सच में गांड भी छोड़ेगा मेरी uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff इतना मोटा लुंड कैसे ले पाऊँगी तू मेरी छूट का hi बजा बजा चुक्का haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

विशाल ऋचा के मुँह में उसके गांड से निकले ऊँगली को दाल देता है जिसे ऋचा बड़े hi नशे में चूसने लग जाती है

ऋचा- iuuuuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm

विशाल- कैसा लगा मेरी रांड????????????

ऋचा- तेरे तो उंगलिओ में भी स्वाद है

ऋचा- ये स्वाद मेरे उंगलिओ का नहीं तेरे गांड का था और फिर विशाल उन्ही उंगलिओ को अपने मुँह म इ भर के चूसने लग जाता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahahhhhhhhhhhhhhhh कितना कुत्ता है तू मुझे मेरे गांड चुसवा रहा है hayyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee में फिर से गयी uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffff mmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaajjjjjjjjjjjjjjj तेरी बेटी सच में रंडी बन गयी रागिनी hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhooooooooohhhhhhhhhhhhh

और यूँही चीखते हुवे ऋचा एक बार फिर से झड़ने लग जाती है पर विशाल उसे चूर्ण ेके बजाये उसका कंधे पेदबाव बनाते हुवे अपने लुंड पे बिठाये रखता है और निचे से धक्का लगाने लग जाता है…

ये धक्का पीछे बाकि के धक्को से ज्यादा खलबली मशीन लगी thi………………..richa को अब उसका लुंड भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था फिर धक्को को कैसे शी पति वो जोर जोर से चिखटटे हुवे निकलने को कहती है पर विशाल उसे अनसुना करते हुवे छोड़ता रहता है और जिसका परिणाम ऋचा की छूटे से एक बार फिर से पेशाब की धार फुट पड़ती है…






ऋचा का पूरा जिस्म थरथराने लगा था उसके जिस्म की थरथराहट से चूतड़ों में कंपन आ गयी थी.. वो चीखने चिल्लाने लगी थी विशाल के चटीओ को नोचने लगी थी उसे समझ नहीं आता वो इसे कैसे बर्दाश्त करे चीख और चिल्लाहट से बेबस ऋचा झुक के विशाल के छाती को जोर से काट लेती है… दर्द से वाल जब तड़पता है तब जा के ऋचा के छूट से उसका लुंड निकलता है और ऋचा के छूट से तेज़ दर उसके लुंड और पेट कमर पे बहने लगती है…

ऋचा जोर से हफ्ते हुवे- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh आज कितना मुतुंगी मैं विशु uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffff

विशाल- साली चिनार कटती है कुटिया मादरचोद रंडी की औलाद और इतना कह के उसके गांड पे थप्पड़ बरसाने लगता hai,,….chal बहन की लोदी कुटिया बन जल्दी से

ऋचा- रुक जा कुत्ते तेरा नहीं हुआ मेरा 4 बार हो गया जान नहीं बची मेरे पेअर कैंप रहे है रुक

विशाल- अब नहीं रुक सकता मैं चल जल्दी से कुटिया बंद बहन की लोदी और फिर विशाल उसे कुटिया बना देता है…

ऋचा में सच में इतनी जान नहीं बची थी की वो घुटने के बल कुटिया बन सके उसके पेअर हाथ बेजान हो के कैंप रहा था पर विशाल उसे कमर से पकड़ के झुका देता हैए और पीछे से लुंड सत्ता के जैसे hi झटका लगता है ऋचा एक बार फिर से मूतने लग जाती है…






विशाल का लुंड अब वोट क सेकंड के लिए भी बर्दास्त नहीं कर पा रही थी लेकिन अब जब तक विशाल का नाह ो जाये वो ऋचा को खान चोर्ने वाला था….

लेकिन रिच अक जिस्म अब उसका साथ नहीं दे पा रहा था उसका गोरा बदन गोर से गुलाबी और गुलाबी से लाल हो चला था लेकिन विशाल की मंजिल अभी भी दूर थी

ऋचा- अब नहीं ले पाऊँगी मैं मेरे छूट में झनझनाहट होने लगी है मत कर मैं बेहोश हो जाउंगी मेरी आंखे बंद होने लगी है…

इस्पे विशाल उसके बालो को मुट्ठी में भरते हुवे एक छठा उसके गाल पे रसीद देता है..






और ऋचा जो की बेहोश होने लगी थी वो फ़ौरन होश में आ जाती है विशाल अब उसके बालो को पकड़ के छोड़ने लग जाता है….

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaa maaaaaaaaaaannnnnnnnnnn jjjjjjjjjjjjjaaaaaaaaaaaaaaaaaaa मत कर अब नहीं शी पाऊँगी मैं तेरे लुंड को…..

विशाल ने ऋचा के चुदाई के रवैये को देख के अंदाज़ा लगा लिया था की ऋचा चुदाई में अलका के जैसी hi है और अगर वो अलका के जैसी है तो बहुत जल्दी तैयार हो जाएगी बस इसके बदन को थोड़ा दर्द चाइये जो इसके अंदर के चिनार को जगा दे.. और विशाल का अंदाज़ा साहिब hi निकलता है बेहोश होने वाली ऋचा एक बार फिर से से विशाल को टक्कर देने के लिए तैयार हो गयी थी…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मादरचोद रुक जा थोड़ी देर फिर बताती हु में तुझे चूतिये

ऋचा एक बार फिर से विशाल के लुंड पे स्वर हो के कूदना सुरु कर देती hai…aur विशाल भी एक हाथ से ऋचा के बालो को पकड़ लेता है और दूसरे हाथ से ऋचा के हर उठक बैठक के साथ उसके गलो पे छठा मरते हुवे उसे छोड़ रहा था…






छूट को छोड़ते छोड़ते विशाल एक बार फिर से ऋचा कैग एंड में ऊँगली दाल के उसे घूमना सुरु कर देता है…

ऋचा जो चुदाई के खुमारी में बिलकुल पागल हो गयी थी जिस बेदर्द चुदाई के लिए अलका भी शराब का सहारा लेती आयी थी वो ऋचा बिना की नशे का सहारा लिए विशाल को बिस्टेर पे बराबर टक्कर देने लगी थी…






ऋचा- गांड में ऊँगली मत कर बहनचोद कितनी बार बोलू फिर मेरे गांड में सुरसुरी होने लग जाएगी..

विशाल- तो तेरे गांड के सुरसुरी मिटने वाला हथ्यार है न मेरे पास मेरी रंडी…

ये बात विशाल लगातार ऋचा कैग एंड में ऊँगली पेलते हुवे कर रहा tha…..aur ऊँगली का जादू और चुदाई की खुमारी रिच एप होने लगी थी

ऋचा- एक hi रात में क्या सब छोड़ लेगा कुछ तो चोर दे बाद के लिए

विशाल- बाद में भी छोड़ लूंगा तेरे गांड को आज इतना ाचा मौका है क्यों न उद्घाटन कर दू…

Richa-aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaa मैं एक बार फिर से gayoiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii hhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeee

विशाल- इस बार मैं भी आया मेरी जान uuuuuuuuuufffffffffffff तेरी गरम छूट

ऋचा- फिर जोर लगा के धक्के मार फाड़ दे अपने बहन की छूट को….






और ऋचा एक बार फिर से कांपते हुवे झड़ने लगती है और इस बार उसके साथ उसका भाई विशाल भी अपने लुंड का पानी बहाने लग जाता है….





लुंड के छूट से निकलते hi दोनों के अंदर उफान रहे गर्मी का मिला जुला रूप ऋचा के छूट को सराबोर करते हुवे बहार बहने लगा था… कमरे में दोनों की तेज़ चली सांसे गूंज रही थी.. ऋचा आंखे बंद किये अपने भाई के साथ हुवे इस धुँवाधार चुदाई का आनंद लेते हुवे उसके गरम पानी की गर्माहट अपने छूट में महसूस कर रही थी…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhh तूने तो मेरी जान hi निकल दी

विशाल- तू चीज hi ऐसी है मेरी जान जिसे प्यार से नहीं रगड़ के छोड़ने में मजा आता है…

ऋचा- ाचा जी रगड़ के छोड़ने में

विशाल- हाँ मेरी रांड

ऋचा फिर जा के एक शोवे लेती है और बिस्टेर पी ा के नंगी hi लेट जाती है…. लगातार 5 बार झड़ने से और उसके ऊपर शावर लेने से उसे बहुत ाची नींद आ गयी थी उसकी आंख लग जाती है और वो सो भी जाती है उधर विशाल भी ऋचा को सोता देखा अकेला बंदा क्या करे सोचा कर सईद सो गया था…

रात के दूसरा पहर बिता होगा की ऋचा को बेचैनी सताने लग जाती है वो पीछे मुद के देखती है तो विशाल उसी के तरफ मुँह कर के सोया था उसकी बेचैनी निचे होने लग थी इस रांड के छूट को 5 बार चुद के भी शांति नहीं मिली थी ये अभी और छोड़ना छह रही थी….

ऋचा एक बार फिर से विशाल के हाथ को पकड़ लेती है और अपने छूट के ऊपर सताने लग जाती है….






विशाल का लुंड विशाल से पहले hi जग गया था उसका लुंड सख्त होने लगा था और ऋचा के छूट की गर्माहट पा के उसमे मिल जाने को तैयार भी हो गया था… ऋचा जब विशाल को जगता हु महसूस नहीं करती तो उसके लुंड को नाखुकर्णो से कुरेदने लग जाती हाईल ुण्ड पे पड़े नाख़ून के दबाव से देखते hi देखते विशाल की नींद खुल जाती है….

विशाल- क्या हुआ मेरी रैंड फिर से

ऋचा- हाँ विशु फिर से खुजली होने लगी है कह के उसके लुंड को छूट में घुसाने लग जाती है….

विशाल- फिर तुझे अब असली चुदाई चाइये तभी तेरी छूट शांत होगी

ऋचा- असली चुदाई??? तब से हम क्या कर रहे थे??? और खुजली छूट में नहीं हो रही है

विशाल- फिर???

ऋचा शरमाते हुवे अपने विशाल के आँखों में आंखे दाल के बोलती है- गांड में

विशाल- क्या???

ऋचा- हाँ विशु मेरे गांड में खुजली हो रही है.. मेरी गांड मरेगा???? मैं अब तुझसे अपनी गांड मरवाना चाहती हु…

इस्पे विशाल ऋचा को झपट के बहो में भर लेता है और पागलो की तरह चुने लग जाता hai…Richa भी विशाल का पूरा साथ दे रही थी और एक लम्बे किश के बाद ऋचा विशाल से अलग होती है और बीएड से उतर जाती है और जा के पास रखे चेयर पे घुटने के बल बैठ जाती है और अपने जुड़े को बांधते हुवे अपनी गोल गांड की उभर विशाल की तरफ कर के उस से बोलती है…






ऋचा- विशाल बहुत ऊँगली कर ली तूने मेरी गांड में अब इसमें अपने लुंड को दाल के आज इसे भी फाड़ दे बोल मरेगा न अपनी बहन की गांड??? मेरे गांड में बहुत खुजली होने लगी है तेरे ऊँगली करने से अब और मत तड़पा आजा जल्दी से खोल दे मेरे गांड के छेद को अपने लुंड से….

विशाल ऋचा के द्वारा दिए इस ऑफर को कैसे ठुकरा सकता था… सामने एक हुस्न की पारी जिसके कामुक अंगो की जितनी टैरिफ करो काम है अगर अलका जवान होगी तो पक्का ऐसी hi दिखती होगी यूँ कह सकते है की विशाल को आज जवान अलका की गांड मरने मौका है क्युकी उम्र के जिस पड़ाव में अलका है उसमे तो उसने ऑलरेडी उसकी गांड फाड़ दी है और बी उसक मिलता जुलता रूप उसे एक बार फिर से अपनी गांड सपने के लिए राजी है…

ऋचा का कामुक बदन पे हाथ फेर दो तो किसी को शीघ्रपतन हो जाये कोई साधारण लुंड तो उसके बड़े गोल चूतड़ों में hi फास के अपना दम तोड़ दे ऋचा की चूचिया जितनी बड़ी और गोल है उसके दोनों चुत्तड़ भी उतने hi कैसे हुवे गोल और भरे बहरे बहार की और निकला हुआ tha…….us कामुक औरत की छूट के बाद गांड छोड़ने का मौका विशाल को मिला है…

विशाल ऋचा की गांड मरने से पहले उसके जिस्म की आग को और ज्यादा भड़कते हुवे उसके मादक शरीर के हर अंगो को भरपूर चुस्त और छत्ता है…

ऋचा- uuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm छोड़ दे न मेरे से और नहीं रुका जा रहा है…

जब लड़की बार बार मिन्नते कर रही हो तो ज्यादा विलम्ब करना भी ठीक नहीं और फिर विशाल ऋचा को पास में पद ीक काउच पे लिटा देता है ऋचा को भी पता था क्या होने वाला है इसलिए वो लेटने के बजाये अपनी गांड उठा के विशाल के सामने परोस देती है,…






विशाल भी अपने लुंड को ऋचा कैग एंड के टांड कंसीरन छेद के पास फसा के रगड़ना चालू कर देता है…

रिहा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh इतना मोटा लुंड कैसे जाएगी मेरे इस छोटे से छेद में……………. उफ़ आअज मेरी कुंवारी गांड का आखरी दिन है आज ये भी फैट जाएगी aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh विशु जल्दी दाल दे भाई बहुत तेज़ खुजली होने लगी है छोड़ मेरी गांड फाड् बहनचोद क्या सोच रहा है

विशाल ऋचा के उतावले पैन को देखते हुवे अपने लुंड को ऋचा कैग एंड में धकेलने लगता है लेकिन गांड की छेद इतनी छोटी और तंग थी की लुंड बार बार फिसल जा रहा था…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

आखिर कर विशाल ढेर सारा थूक अपने लुंड पे लगता है और ऋचा कैग एंड में धकेलने लग जाता है…

पर लुंड था की जाने का नाम hi नहीं ले रहा था और ऋचा कैग एंड की खुजली जो बढ़ते जा रही थी साथ hi दर्द का अनुभव भी होने लगा था…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा हाउ अचे से दाल न

विशाल- तू पलट जा एक बार पहले

ऋचा- ठीक है और फिर ऋचा पलट के अपनी तंग उतना उठा लेती है जिस से उसके गांड की छेद विशाल के सामने हो जाये,,,,,

विशाल अब अपने लुंड के टोपे को पकड़ के ऋचा के गांड के तंग छेद पे सताते हुवे उसका दबाव उसके गांड पे बढ़ने लगता है जैसे मनो ड्रिल मशीन से ड्रिल कर रहा हो






ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा हाउ कुत्ते

विशाल- तेरे छोटे छेद में जगह बना रहा हुए क बार जगह बन जाये फिर दिखता हु तुझे…

विशाल मन में सोचता है इतना टाइट तो माँ की गांड भी नहीं थी उसके थोड़े म्हणत के बाद चला गया था इसमें तो जाने का नाम hi नहीं ले रहा है …

फिर बड़ी मसहकात के बाद विशाल पुरे जोर से एक झटका मरता है जिस से उसका लुंड ऋचा की गांड को चीरते फाड़ते हुवे उसके गांड में घुस जाता है….

ऋचा इतने जोर से चीखती है की सईद hi कोई होगा जिसे उसकी आवाज़ सुनाई न दी होगी.. ऋचा कैग एंड में एक तेज़ जलन होने लगी थी मनो एक गरम चाकू किसी माखन के मटके में पेल दिया जा रहा हो और वो गरम काकू मनो माखन के उस बर्तन में धुवा उड़ाते हुवे और अपनी जगह बनाते हुए अंदर प्रवेश करता जा रहा था…

ऋचा की आंखे बहने लगी थी उसकी आंखे मनो पलट के उसके निचे अँधेरा चने लगा था पुरे सरीर में एक तेज़ कंपन उसकी हालत देख विशाल को भी दर लगने लगा कही उसने जल्दी तो नहीं कर दी….

विशाल अपना लुंड ऋचा कैग एंड से निकल के उसके छूट में दाल देता है और हलके हलके धक्के लगाने लग जाता है साथ hi वो अपने उंगलिओ को उसके मुँह में दाल देता है और ऋचा भी मस्ती और दर्द में खोयी उसके उंगलिओ को लोल्ली पॉप की तरह चूसने लगती है….






ऋचा को कोई होश न था ो मदहोशी की लम में खो चुकी थी गांड में हुवे उस मुसल लुंड के प्रहार ने जहां उसे ऑलमोस्ट बेहोश hi कर दिया था तो वही लगातार रास बहा रही छूट में लुंड अंदर बहार होने से और मुँह में उंगलिओ के अंदर बाहर कर के विशाल उसे बेहोश भी नहीं होने दे रहा था… ऋचा इस वक़्त हवाओ में उड़ने लगी थी उसका उसपे कोई बस hi नहीं था ो बस मदहोशी में अपने भाई के लुंड का मजे ले रहा थी

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मर डाला तूने uuuuuuuuffffffffffffffffff फाड् दी मेरी गांड भी aajjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjj

विशाल भी अब अपने दोनों हाथो से ऋचा के दोनों गलो को फैलते हुवे उसके मुँह को खोल देता है और उसमे थूकते हुवे अपने दोनों हाथो से उसके गाल को थपथपाते हुवे कहता है//…






विशाल- अभी खान फड़ी है अभी तो एक hi झटके ने तुझे तेरी माँ याद दिला दी साली कुटिया जल्दी से तैयार होजा अभी तुझे पुरे रात अपनी छूट और गांड फडवणी है बहन छोड़…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh तेरा थूक भी कितना टेस्टी है विशु ऐसे hi जलील कर के छोड़ो मुझे बहुत आग है तेरे बहन में आज साडी आग बुझा देना hayyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeeeeeeeee मेरी गांड में जलन हो रही पर मुझे तेरा लुंड अब वही चाइये….

विशाल- ऐसा है तो तैयार हो जा मेरी रांड अपनी गांड फिर से फड़वाने के लिए… ऋचा भी अपने छूट मसलते हुवे विशाल के बातो का जवाब देते हुवे कहती है.

ऋचा- हाँ तेरी रांड बिलकुल तैयार है फाड़ दे मेरी गांड बड़ा कर दे छोड़ छोड़ के आज इसे.. कोई दया मत कर बस छोड़ बेरहमी से अपनी दीदी को……

ऋचा पे मनो कोई फुट सवार हो गया हो जो किसी भी दर्द के परवाह किये बिना आज बस विशाल को पूरी तरह पा लेना चाहती थी..

विशाल अब ऋचा के कमर में तहत दाल के उसके दोनों कूल्हों को उठा देता है और रिच अक सिर्फ कन्धा और सर hi बीएड पे होता है बाकि उसका पूरा जिस्म हवा में विशाल के पंजो के सहारे झूल रहा था… छोड़ छोड़ के विशाल ने पहले hi उसके शरीर की जान निकल दी थी अब जॉब hi बचा था वो वासना की आग थी जिसे जब तक बुझाया न जाये ये दोनों ऐसे hi इस आग में झुलसते रहेंगे…

विशाल एक बार फिर से अपने लुंड को ऋचा के छूट से निकल के उसके गांड के छोटे छेद पे रगड़ने लग जाता है..






वलूंड ऋचा के पानी से भीग के चमकने लगा था और सईद इस बार गांड इ आसानी से चली जाये तो वही ऋचा भी अपने छूट को मसलते हुवे अपनी गांड पे अपने भाई विशाल के लुंड के खुरदरे टकराव से एक बार फिर से पिघलने लगी थी…

ऋचा- aaaaaaaahhhhhhhhhhhh तेरा लोढ़ा कियतना भयंकर लग रहा है रे कुत्ते aaaaaahhhhhhhhhhhhhh

विशाल- तो क्या दर गयी अभी से hi???

ऋचा- चल बसड्क डरे तेरी चिनार माँ अलका बहनचोद चल डाल दे अब अंदर छोड़ मेरी गांड फाड् दे इसे रौ तो भी न रुकना इस बार मेरी चीख पुरे रिसोर्ट में सुनाई दे ऐसे छोड़ अपनी रंडी को…

और हुवा भी वैसा hi विशाल ने ऋचा के छूट के पानी से सराबोर और चमक रहे अपने लुंड को ऋचा के छूट पे उसका दबाव बढ़ाते हुवे एक धक्के में अपना आधा लुंड उतर देता है…

लुंड के अंदर जाते hi ऋचा एक बार फिर से पुरे जोर से चीख पड़ती है उसके ऐसे बार बार चीखने से उसके कमरे के बहार कुछ ाह्ते सुनाई देने लग जाती है सईद कोई स्टाफ या कोई 3रद पर्सन हो लड़की के ऐसे बार बार चीखने से और वो देखना छह रहा रहा हो लेकिन सभी कोप ता है इस वक़्त यहां लड़की क्यों चीख रही होगी जिसमे बचाओ शब्द का कऊई प्रयोग नहीं था अगर कुछ था तो बस चीखने और चिल्लाने की आवाज़े…

कमरे के बहार की आहत सुन विशाल ऋचा के मुँह को दबा देता है..






विशाल- चीख मत बहन की लोदी पुरे रिसोर्ट कोप ता चल जायेगा तेरी गांड फैट रही है…

ऋचा- चलने दे पता मुझे कोई डरा नहीं मैं तो चीख चीख के छोडूंगी और ऋचा उसका हाथ अपने मुँह से हटा के चीखने लगती है..

ऋचा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे ह छोड़ो मुझे फाड् दो मेरी गांड hhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeee mmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaa मई मर गयी मेरी छूट के साथ आज गांड भी फैट गयी छोड़ मुझे मादरचोद फाड् दे मेरी छूट बहन के लोडे हरामी के पिल्लै..

ऋचा ये सब इतना जोर जोर से चिल्ला रही थी मनो दरवाजे पे खड़े लोगो को hi सुना रही हो की वोट क मर्द के बहो में है और उसे किसी और की जरूरत नहीं….






विशाल अब ऋचा के बालो को मुट्ठी में भर के जोर जोर से उसके गांड में अपना लुंड पेलने लग जाता है ऋचा भी उसे देखते हुवे और सिसकते हुवे अपने गांड को फड़वा की बी बस चुदाई का आनंद ले रही थी…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरी गांड भी फाड् दी तूने विशु uuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffff मैं तेरे इस चुदाई की गुलाम हो गयी मेरे भाई aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh कितना बेरहम चुदाई करता है तू uuuuuuuuuuufffffffffff रागिनी देख तेरी बेटी भी एक मर्द से अपनी गांड फड़वा चुकी hai…..dekh दिनेश तू जिसकी माँ छोड़ता है उसका बीटा तेरी बेटी की छूट और गांड सब फाड़ दिया aajjjjjjjjjjjjjjjjj






विशाल काफी देर तक ऐसे hi ऋचा की गांड में लुंड अंदर बहार करते हुवे उसे लगभग अधमरा कर दीया था इस बिच उसकी छूट ने इतना पानी बहा दिया था मनो उसके शरीर में अब पानी hi न बचा हो





ऋचा की हालत बिलकुल मरे जैसी हो गयी थी लेकिन विशाल था जो बिना रुके उसे चोदे जा रहा था…

ऋचा- विशाल अब और नहीं शी पाऊँगी मेरे भाई जल्दी निकल मेरे छूट और गांड दोनों में जलन होने लगी है तू बहनचोद शाम से hi छोड़ रहा है मुझे पुरे गांड को सुजा दिया और छूट का भोसड़ा बना दिया है अब बस कर मई गिर जाउंगी…

विशाल- बस मेरी जान हो गया…

ऋचा- हो गया तो गांड में hi बहा देना अपनी गरम लावे को uuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffffffffff

और फिर देखते hi देखते विशाल अपने पानी से ऋचा कैग एंड को भरने लग जाता है…






अपने फैट चुकी गांड पे विशाल के पानी के गर्माहट को पा के ऋचा एक बार फिर से मदमस्त होने लगती है.. उसका ान गैंग आज तृप्त हो चुक्का था ो अपने गांड को उठए उसके पानी के गर्माहट का आनंद लेने लग जाती है…

ऋचा जो आंखे बंद कर के मस्ती के सागर में गोते खा रही थी विशाल अपने पानी से साणे लुंड को उसके होठो पे थपथाने लग जाता है..






विशाल के लुंड से निकला पानी अब ऋचा कैग एंड के बाद उसके चेहरे को भिगोने लगा जाता है ऋचा भी बंद आँखों से hi अपने होठो को खोल उसके लुंड को अपने मुँह में भर लेने की पूरी कोशिश कर रही थी…

ऋचा के गांड में बह रहे विशाल के पानी को ऋचा एक बार अपने भाई की तरफ मुँह कर के दिखने लग जाती है..






घुटनो के बल आते hi ऋचा कैग एंड से विशाल का पानी एक पतली धार बन के बहने लगती है जिसे ऋचा विशाल को दिखते हुवे केहतीह है…

ऋचा- देख विशु क्या हाल किया है तूने मेरे गांड का फाड़ के पूरा सफ़ेद पानी से लबालब भर गया है और सच में ऋचा थोड़ा hi जोर लगाती है की एक तेज़ धार उसके गांड से फुट पड़ती है…

ऋचा अपने दोनों चूतड़ों को फैलते हुवे विशाल को दिखा के कहती है..






ऋचा- देख सेल कुत्ते क्या हाल कर दिया तूने मेरे गांड का थोड़ी देर पहले टेक क ऊँगली नहीं जाती थी अब फाड् के रख दिया uuuuuuuuuuuffffffffffff ऐसा लग रहा है हवाओ को भी मेरी गांड पसंद आ गयी है आज साली इसी में घुसे जा रही है और ये कह के ऋचा अपने गांड को मलने लगती है…

ए.बी.ए. एते है वर्तमान में यानि घर में जहां ऋचा अपने कमरे में रत के हुवे घटना में खोयी अपने बदन में हो रहे उथल पुथल को अपने माँ से छुपाने की कोशिह कर रही थी…

रात और सुबह तो जैसे तैसी काट ली थी लेकिन दिन होते hi उसके दर्द और सूजन बढ़ने लगी थी वो जब एक नज़र अपने छूट पे मरती है तो वो सूज के बिलकुल पावरोटी की तरह हो गयी थो लाल इतनी जैसे अभी अभी उसपे किसी ने एनजाइना कहते मरे हो…






ऋचा- uuuuuuuuuuuuufffffffffffffff विशु ये की हां कर दिया तूने मेरी छूट का ऐसे कोई छोड़ता ै अपनी दीदी को हाय रह रह के पेशाब आने लगी है और जलन के सात दर्द भी पर सच में इस दर्द में मीठा मीठा मजा भी है.. एक बार ये ठीक हो जाये फिर से इसमें अपने भाई का लुंड भर लुंगी….

Hayeeeeeeeeeeeeeeeeee ऋचा तू सच में रैंड hi हो गयी है पहला जखम शांत नहीं हुआ तू दूसरे की तयारी में लग गयी कुट्टी……………..

उधर विशाल जो रागिनी के गुलाबजामुन और आम के पीछे पद गया था वो पुरे दिन आज रागिनी के इर्द गिर्द भँवरे की तरह मंडराने लगा था और अपने आस पास भरे को मंडराता देख रागिनी भी मंद मंद मुस्कुराते हुवे अंगड़ाई ले ले के उसे अपने तने हुवे वक्ष सपाट चर्बीदार पेट और उभरे गांड को दिखा के ललचाये जा रही थी....






थॉट्स आल फॉर टुडे गाइस
 
ाचा लास्ट अपडेटेड यानि अपडेट 66 में कुछ जगह हमने देखा की ऋचा चुदाई में आपका पे गयी है या यूँ कहो अलका से भी एक हाथ आगे निकल गयी है... वो फ़िलहाल वैसी hi दिखती है जैसी सईद जवानी में अलका दिखती होगी ..

इतनी सिमिलॅरिटी के पीछे कोई राज़ तो नहीं,.....🤔🤔

क्या लगता है दोस्तों कोई हिंट है या जस्ट कहानी का फ्लो एंड करैक्टर hi वैसी है
 
बहुत दिन हो गए अलका और विशाल का एक साथ गुथम्गुत्थि हुवे क्या कहते हो एक राउंड किया जाये या पहले बड़ी माँ को निपटाया jaye...aur आपका को अभी किसी और के साथ hi मस्ती करने दे फॉर नेक्स्ट फ्यू डेज...

अपने सुग्गेस्टियन्स दो फिर मई नेक्स्ट अपडेट डालता हु अक्सोर्डिंगली
 
अपडेट-67 (ये पाप है बेटे)

दोपहर के खान ेके बाद रागिनी के पास करने को कुछ खास काम नहीं था इसलिए वो बैडरूम और किचन में टाइम पास करने लग जाती hai….wo किचन में शेल्फ पे लगे डब्बो की सफाई और फिर उसे रिफिल कर रही थी तो वही विशाल भी मिठाई पे लगे माखी की तरह रागिनी के इर्द गिर्द अपना लुंड मसलते हुवे मंडरा रहा था जिसे देख रागिनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी..





तभी रागिनी विशाल के बेचैनी को और बढ़ाने का सोचती है और विशाल को आवाज़ देती है..

रागिनी- विशु जरा वो घी का डब्बा उतर दे मेरे हाथ नहीं जा रहे

विशाल- जी बड़ी माँ अभी उतरत देता हु… और विशाल को भी तो इसी तरह के किसी मोके की तलाश थी…

रागिनी भी विशाल को आता देख प्लेटफार्म के बिलकुल सामने चिपक जाती है और विशाल उसके पीछे से शेल्फ पे रखे जार को उतरने लग जाता है…






जार उतरने के चक्कर में विशाल का खड़ा लुंड सिद्ध रागिनी कैग एंड से जा भिड़ता hai..aur रागिनी के छत जो अभी भी उसके पानी से सराबोर थी वोट क बार फिर से अपने कामर्स को बहाने लग जाती है… रागिनी के मुँह से एक हलकी सी सीकरी फुट पड़ती है..

रागिनी- aaaaahhhhhhhhhhhhhhhh

विशाल भी अपने साइड से कोई जल्दबाजी नहीं दिखता और अचे से रागिनी के गांड में अपने ुण्ड का दबाव बढ़ने लगता है जिसका जवाब रागिनी प्लेटफार्म पे झुक के अपनी गांड को और बहार निकल के दे रही थी…

और विशाल भी लगातार साड़ी के ऊपर से hi अपनी बड़ी माँ की मोती गांड के बिच बने उस बड़ी खायी में अपने लुंड को फसते हुवे लुंड ऊपर निचे करते हुवे रगड़ने लग जाता है…






रागिनी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है जार उतरने को खा था इतना टाइम लगता है क्या..

विशाल- हाथ मेरा भी नहीं जा पा रहा है बड़ी माँ मैं कोशिश कर रहा हु..

रागिनी- थोड़ा और आगे आ के कोशिश कर तो हो सालता है और अंदर चला जायेगा

विशाल- क्या अंदर चला जायेगा बड़ी माँ

रागिनी (तेरा लुंड चूतिये)- तेरा हाथ बीटा और क्या जायेगा थोड़ा जोर लगा aaaaaaaahhhhhhhhhh ये बात रागिनी विशाल के लुंड का दबाव बढ़ने के लिए सईद उसके हाथो का सहारा ले के दोषरे शब्दों में कह रही थी..

विशाल भी मोके का फायदा उठाते हुवे अपने लुंड को पंत के ऊपर से एडजस्ट कर के सिद्ध रागिनी के दोनों कूल्हों के बिच फसा क ीक जोर का धक्का मरता है जिस से उसका सूपड़ा सिद्ध रागिनी कैग एंड के भूरे छेद को ठोकर मरने लग जाता है..

रागिनी के तो जैसे साँस hi अटक गया हाउ ो मनो उसके साड़ी न होती तो उसके गांड में लुंड उतर गया होता और रागिनी साड़ी के ऊपर से भी ये अचे से महसूस कर पा रही थी की विशाल के लुंड में कितना दम है…

विशाल- बस बड़ी माँ अब उतर जायेगा मेरा हाथ पहुंच गया है और इतना कह के वो दुबारा से रागिनी के ऊपर पूरा झुक जाता है और रागीणी भी मनो स्लैब पे सो hi चुकी थी और उसकी गांड हवा में विशाल के लुंड को फसाये अपने पकड़ में जकड़े हुवे थी…

अब जब घी का डब्बा विशाल के हाथ में आ जाता है तो वो शेल्फ से जैसे hi बहार निकलता है उसके ढक्कन के खुला होने से सारा घी रागिनी के ऊपर hi गिर पड़ता है…

रागिनी- ये क्या किया गधे सारा घी मेरे ऊपर hi गिरा दिया अब फिर से नहाना पड़ेगा तूने काम और बढ़ा दिया…






और फिर रागिनी घी से साणे अपने कपड़ो को साफ़ करने लग जाती है… पर घी उसके पुरे बदन पे फ़ैल चुक्का था जो उसेक साड़ी पेटीकोट से होते हुवे उसके छूट की तरफ बढ़ने लगा था…

रागिनी- uuuuuuufffffffffff पूरा शरीर घी घी कर दिया और इतना कह के रागिनी अपने साड़ी को उतर के फेंक देती है…






विशाल रागिनी के कामुक सरीर को पहली बार इतने करीब से नंगा देखने जा रहा था… रागिनी एक पंजाबी जट्टी भरे बदन की औरत गोरी इतनी जैसे सफ़ेद गुलाब तभी तो ऋचा भी इतनी गोरी गयी है अपनी माँ रागी पर

विशाल- सूर्य बड़ी माँ मुझे गलती से गिर गया मेरा ध्यान नहीं रहा की ढक्कन खुला है और..

रागिनी- ध्यान खान से रहेगा सारा टाइम तो गुलाब जामुन में लगा है…

पर अभी विशाल ने नहीं रागिनी ने hi गुलाब जामुन का जिक्र किया tha…ispe विशाल हस्ते हुवे रागिनी के करीब आता है और कहता है

विशाल- पर बड़ी माँ मैंने तो अभी गुलाब जामुन का खा भी नहीं… तो क्या आप खिलाना चाहते हो???

रागिनी- परे हैट सारा काम बढ़ा दिया अउ राइज गुलाब जामुन खाना है…

विशाल- बड़ी माँ साड़ी तो उतर दिया आपने पर घी तो आपके पीछे ज्यादा फैला है

रागिनी- पीछे खान??

विशाल- पहले आँखों से उसके कमर और गांड की तरफ इशारा करता है पर रागिनी भी भोली बानी पूछे जा रही थी

रागिनी- अरे मुँह से बोल ले ऐसे इशारे क्या कर रहा है इस्पे विशाल अपने हाथ को रागिनी के पेटीकोट के अंदर ले जा के उसके चूतड़ों को सहलाते हुवे कहता है..






विशाल- यहां बड़ी माआ

रागिनी- aaaaaaaahhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है इधर भी कोई हाथ डालता है की चल निकल

विशाल- वाओ बड़ी माँ आपके ये तो माखन से भी मुलायम है और इतना कह के विशाल रागिनी के चूतड़ों से खेलने लग जाता है…

रागिनी भी प्लॅटफॉर को मुट्ठी में जोर से पकडे अपने सांसो पे काबू करने लग जाती है लेकिन विशाल के इस तरह उसके गांड से कर रहे खेलवाड़ से वो भी पिघलने लग गया थी वो अपने आप पर काबू करने की पुरे कोशिश में थी की तभी विशाल अपने 2 उंगलिओ को रागिनी के गांड के छेद पे तो कभी रागी के गीली छूट को ऐसे मलने लगता है जैसे गांड धोते हुवे मलते है…






रागिनी एक बार को बेकाबू होने लग जाती है वो अपने पैरो के उंगलिओ को आपस में रगड़ते हुवे अपने सांसो पे नियन्तण करने की पूरी कोशिश कर रही थी पर विशाल मनो उसक मुँह से आह सुन के hi रुकने के मुद में था इसलिए जब रागिनी के सब्र का बंद उसके उंगलिओ से गांड के छेद को मलने से नहीं टूटी तो विशाल अपने बिच वाले ऊँगली को रागिनी कैग एंड के तंग भूरे छेद को अपने नाखुनो से कुरेदने लग जाता है…





रागिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या कर रहा है पागल हाथ निकल…

विशाल- घी निकल रहा हु बड़ी माँ बहुत अंदर तक चली गयी है.. आप कहो तो पि जाऊ सारा घी

विशाल के मुँह से घी पि जाऊ सुन के रागिनी के पुरे शरीर में झुरझुरी सामने लग गयी थी उसे अचे से समझ आ रहा था की कैसे घी और कौनसा घी पीना छह रहा है उसका भतीजा.

रागिनी- आआआआहहहहहहह नहीं bête हाथ निकल वहां से बस कर मैं साफ़ कर लुंगी..

इस्पे विशाल रागिनी कैग एंड के छेद को कुरेदना छोड़ देता है हलाकि रागीणी को भी विशाल का उसके गड से छेद चढ़ ाचा लग रहा था उसे जरा भी अंदाज़ा नहीं था की उसके एक बार कहने से विशाल उसके गांड को चोर देगा इसलिए वो बड़े प्यासी और बेबस नज़रो से विशाल के तरफ देखने लगती है और विशाल भी उसके नज़रो को पहचानते हुवे बिना देरी किये अपनी ऊँगली रागिनी के गांड में दाल देता है..






रागिनी की गांड बहुत hi ज्यादा तंग थी एक डैम टाइट उसमे ऊँगली बहुत hi मुश्किल से जा रही थी विशाल को समझते देर नहीं लगा की ऋचा की तरह उसकी माँ रागिनी की गांड भी वर्जिन है यानि उसे एक और गांड को फाड़ने का मौका मिलेगा और इसी ख़ुशी में वो और जोर से ऊँगली रागनी कैग एंड में पेल देता है.

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh दर्द होता है मत कर निकल वहां से

इस्पे विशाल थोड़ी देर उसके गांड से खेलने के बाद रागिनी के चुचिओ को अपने मुट्ठी में भर के मसलने लग जाता है…






रागिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh धीरे जालिम

विशाल- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh बड़ी माँ कितने सख्त है आपके

रागिनी- बस कर विशु कोई देख लेगा

विशाल- कौन देखेगा बड़ी माँ कोई भी है घर में

रागिनी- ऋचा तो है..

Vishal-(wo उठने के लायक नहीं है)- उनकी तबियत खराब है वो नहीं आएगी बड़ी माँ मुझे मेरा गुलाब जामुन खाने दो न प्लस.






रागिनी- नहीं bête बहुत हो गया अब चोर दे वर्ण गलत हो जायेगा

विशाल- कुछ गलत नहीं होगा बड़ी माँ प्लस

रागिनी- uuuuuuuuuuufffffffffffffff कितना जिद्दी है तू जाने दे अपनी बड़ी माँ को वर्ण मेरे कदम भी बहक जायेंगे चल चोर इतना काफी है आज के लिए

पर विशाल इस मोके को जाने नहीं देना चाहता था ो रागिनी को कास के पकड़ते हुवे अपने लुंड को उसके गांड पे लगातार रगड़े जा रहा था और फिर एक जोर का झटका मरता है जिस से रागिनी फ्रिज से जा टकराती ै और फ्रिज पे रखा सामान गिरने लग जाता है…






रागिनी विशाल के इस दमदार हमले से पूरी पागल सी हो जाती है लेकिन अभी भी उसने खुद के ऊपर से कण्ट्रोल नहीं खोया था और विशाल लगातार रागिनी कैग एंड चुचिओ को अपने कब्जे में भर के उसे रगड़ा और मसल रहा था,,,

रागिनी- uuuuuuuuuuuuffffffffffffffff बस कर दे कुत्ते मत कर अब जाने दे शाम जाने को है और मुझे नहाना भी है..

पर विशाल चोर्ने के जरा भी मूड में नहीं था पर सईद आज उसके हाथ में रागिनी की चुदाई नहीं थी क्युकी इस से पहले रागिणी बहक पति अंदर से रिच के कराहने की आवाज़ आती है और वो अपनी माँ रागिनी से पानी और हीट बैग मांग रही थी..

रागिनी- देखा खा थान ा तू मरवाएगा च लैब हैट देखने दे उसकी तबियत ज्यादा तो नहीं बिगड़ रही मेरे बची की और इतना कह के वो जैसे hi जाने को होती है विशाल टोकता है

विशाल- ऐसे जाओगे क्या?

जब रागिनी की नज़र खुद पे पड़ती ै तो वो पति है की वो ऑलमोस्ट नंगी है..






रागिनी- uuuuuuuuuufffffffffffff नालायक तूने तो मुझे पूरा नंगा hi कर दिया

विशाल- अभी खा किया है बड़ी माँ अभी तो ये बाकि है विशाल उसके बॉटम ड्रेस की तरफ इशारा करते हुवे कहता है की तभी ऋचा एक बार फिर से आवाज़ लगती है

विशाल- आप कपडे पहन लो मैं दीदी को देख के आता हु और फिर वो ऋचा के कमरे की तरफ पानी और बैग ले के चला जाता है…

अंदर जा के देखत है तो ऋचा बेहाल हुवे रट हुवे उसे hi देख रही थी

ऋचा- बहुत दर्द हो रहा है विशु जोश जोश में कर तो लिया अब ये दर्द सहा नहीं जा रहा है तू मेरे लिए पेनकिलर ले आ प्लस

विशाल- ठीक है दीदी आप तब तक आराम करो मैं ले आता हु आपके लिए दवाई और इतना कह के वो ऋचा को सुला के वापस रागिनी की तरफ चल देता है…

रागिनी इसवक्त किचन में अपनी साड़ी ठीक करते हुवे अपने शरीर पे लगे घी को साफ़ कर रही थी जिसके खुसबू से उसका पूरा बदन महकने लगा था..

रागिनी- उफ्फ्फफ्फ्फ़ पूरा शरीर महक रहा हैए अब फिर से नहाना पड़ेगा तेरे चक्क्र में में

विशाल- कोई नहीं बड़ी माँ आप नहा लो मई फिर से आपको आपके कपडे दे दूंगा मेरा तो है hi हेल्पफुल नेचर विशाल के इस बात पे रागिनी हसने लगती है

रागिनी- हाँ देख रही हूत एरा हेल्पफुल नेचर और फिर वो अपने कमरे की तरफ जाने लगती है और पीछे पीछे वशाल भी चल देता है…

सुबह से विशाल के लुंड का ठोकर अपने छूट और गांड पे खा खा की बी रागिनी के छूट में भी कुलबुलाहट होने लगी थी.. और ईसिस बेचैनी में रागिनी अपने कमरे में आ जाती है जहां पीछे पीछे उसका भतीजा भी आ गया था मनो आज उसने रागिनी के छूट में अपने बीज से भर देने की कसम खायी हो…

विशाल के लुंड का अनुमान रागिनी को भी लग hi चुक्का था ो बार बार विशाल के लुंड को अपने इमेजिनेशन में सोच सोच के अपने छूट को मसल आरही थी वो सोच रह थी इस लुंड को अपने छूट में एक बार भर लिया तो मैं स्वर्ग के hi दर्शन कर लू कपडे के ऊपर से इतना जानदार है अगर कपडे के बहार निकला तो मेरे छत के परखचे उदा देगा इसका जवान मोटा lund…ragini का मन होने लगता है की वो बेशरम बन के जाये और विशाल का लुंड अपने मुट्ठी में भर के उसे मसल डेल और अहले अपने मुँह फिर अपने छूट म भर के उसपे इतना कूड़े की उसकी छूट निहाल हो जाये,,,,, hhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyeeeeeeeeeeeeeee और फिर वो साड़ी के ऊपर से hi छूट मसलने लग जाती है…

रागिनी का मन भी अब मचलने लगा था बस रिश्तो की डोर ने उसे कही बांध रखा था वर्ण वो अब तक विशाल क खुद कह देती आ विशाल छोड़ अपनी बड़ी माँ को फाड् दे उसकी छूट… ऊँगली नहीं bête अपना मोटा लुंड दाल इसमें और छोड़ अपनी बड़ी माँ को//….

विशाल को कमरे में आने की आहत सुन रागिनी अब अगला देव चलने की सोचती hai…wo जान बुझ कर विशाल के सामने hi कपडे बदलने की सोच अपनी साड़ी उतरने लगती है…






साड़ी उतारते हुवे वो विशाल की तरफ ध्यान दिए बिना अपने आप को नंगा करने में मशरूफ थी मनो उसे पता hi नाह ो की विशाल कमरे में hai…lekin विशाल की नज़रे रागिनी के ऊपर hi मनो जैम गयी थी..

रागिनी के ब्लाउज में मुश्किल से क़ैद उसकी गोल गोल बड़ी बड़ी चूचिया और सपाट पेट जीपे गिरे हुवे घी से उसके बढ़ाने में चमक आ गयी थी…

अभी विशाल रागिनी के पहले प्रहार से उबरा भी नहीं था की रागिनी अपने ब्लाउज के बटन को खोलने लग जाती है…






रागिनी का एक एक वॉर विशाल के ऊपर मनो बिजली गिरा रही थी विशाल का गाला सूखने लग जाता है उसकी बड़ी माँ रागिनी उसके सामने hi नंगी होने के कगार पर थी उसकी साड़ी जो उसके चटीओ से उतर कर निचे फर्श पर रेंग रही थी और बी ब्लाउज के भी खुल जाने से रागिनी की चुचिअ बिलकुल नंगी विशाल के आँखों के सामने आ जाती है…





साड़ी और ब्लाउज के उतर जाने से रागिनी अब ऊपर से बिलकुल hi नंगी हो चुकी थी पर निचे अभी भी साड़ी का बचा हुआ हिस्सा और पेटीकोट का उतरना बाकि था जिसके उतरते hi रागिनी सम्पूर्ण नंगी हो जाने वाली थी /

विशाल भी प्यासी और हवस भरी नज़रो से रागिनी के नंगे गोर बदन को घूरे जा रहा था…

रागिनी को भी मनो विशाल को अपने कामुक अंगो के दर्शन करने में मजा आने लगा था अब वो विशाल के सामने hi अपने पेटीकोट उतरने लग जाती है…






रागिनी पेटीकोट का नाडा खींच के उसके क्नॉट को खोल देती है और जानबूझ कर अपने पेटीकोट को चोर देती है जिस से वह उसके कमर और मखमली जांघो से सरकते हुवे सिद्ध फर्श पे जा गिरती है…





अब रागिनी विशाल के आँखों के सामने सिर्फ एक पंतय में होती है लेकिन आज रागिनी को अपने जिस्म पे ये पंतय भी बहुत भरी लगने लगा था.. वो अपने भतीज विशाल को अपना ेके क अंग बिलकुल नंगा दिखा देना चाहती थी वो चाहती थी की उसके कामुक अंग को देख के विशाल इतना मजबूर हो जाये की रागिनी के लाख मन करने पर भी उसे उसी के बिस्टेर पर पटक पटक के चोदे…





और फिर रागिनी विशाल क तरफ अपनी गांड निकल के अपने पंतय को उतर के पूरी तरह से नंगी हो जाती है और अपने गांड को सहलाते हुवे उसे मसलने लगती है..

विशाल अपनी बड़ी माँ रागिनी के कामरूप को देख देख के पागल हो रहा था जाने क्यों रागिनी के इतने आगे बढ़ जाने पे भी वो आगे बढ़ने के बजाय रागिनी को देखने में hi व्यस्त हो गया और सईद यही बात रागिनी को भी समझ नहीं आयी thi…isliye वोट क कामुक प्यासी नज़रो से विशाल क देखती है






रागिनी बिलकुल नंगी घोड़ी बानी हुई विशाल की तरफ पहली बार अपनी नज़रे उठा के देखती है और विशाल भी अपने बड़ी माँ को देख के अपने लुंड को अपने पंत के ऊपर से hi मसलने लग जाता hai…jispe रागिनी उसकी तरफ देख के मुस्कुरा देती ै और अपनी गांड मटकते हुवे बाथरूम की तरफ चल देती है… और बाथरूम के दरवाजे पे जैसे hi पहुँचती है रागिनी एक बार फिर से विशाल को बड़े hi प्यासे नज़रो से एक बार फिर से देखती है...





पर विशाल अब भी कोई रिएक्शन देने के बजाये रागिनी के कामुक बदन को hi घूरे जा रहा था... अब तक जिस बदन को पाने के लिए विशाल सुबह से तड़प रहा था वो ऐसे उसके सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी लेकिन विशाल को जाने क्या हुआ वो वही जैम के बैठ गया उस से हिला भी न गया और फिर रागिनी बाथरूम के नादेर घुस जाती है...

अंदर जा के रागिनी शावर चला के नहाने लग जाती है… पर वो नाहा नहीं रही थी बल्कि अपने जिस्म के आग को बुझाने की कोशिश कर रही थी…






आअह्हह्ह्ह्ह विशु कितना गरम कर दिया तूने मुझे कुत्ते और गरम कर के खुद शांति से अपने बड़ी माँ को नानी होता देख रहा था हरामजादे…. छोड़ क्यों नहीं दिया अपनी रंडी बड़ी माँ को… तेरे सामने कपडे उतर के नंगी तो हो गयी थी मैं और कितने इशारे दू तुझे गधे….

रागिनी को अपने छूट में जल रहे आग पे लगे पानी की बुँदे मनो भाप बन के उड़ने लग जाती है वो अपने कामवासना के आग में बुरी तरह से जल रही थी उसका मन हो रहा था ो विशाल को अंदर बुला ले पर किस बहाने से बुलाये..

उधर विशाल रागिनी के कामुक बदन देख के पागल हुवे जा रहा था ो भी इतना ज्यादा बेकाबू होने लगा था की रागिनी के बीएड पे लेट के अपने लुंड को निकल के मसलने लग जाता है…






विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh बड़ी मा कितनी हॉट हो आप और आपके गुलाब जामुन uuuuuuuuuuffffffffffffffffff कब तक तड़पाओगे बड़ी माँ अब रहा नहीं जाता मेरे से मैं क्या करू….

विशाल इसी तारा जोर जोर से अपने लुंड को मसलते हुवे रागिनी के नाम पे मुठ मार रहा था और अंदर रागिनी भी अपने कामाग्नि में जलते हुवे अपने छूट को अपने उंगलिओ से मसल रही थी…

कामवासना में जल रहे तो चीची भतीजा अंदर जाना छह रहे थे पर पहल कौन करे इस बात पे सारा खेल रुका हुआ था.. विशाल अपने लुंड को अपनी बड़ी माँ के नाम पे जोर जोर से मसल रहा था बिना किसी दर के की कही कोई आ गया और उसे ऐसा करते देख लिए तो क्या hoga….wo तो बस अपने आप को शांत करने की कोशिश में लगा हुआ था उसे अभी कोई सुध बुध न था की तभ उसके कानो में एक आवाज़ आती है…

विशु—






लुंड मसलते हुवे जैसे hi आवाज़ की दिशा में वो गार्डन उठा के देखता है तो उसकी बड़ी माँ रागिनी बिलकुल नंगी बाथरूम के दरवाजे पे कड़ी हो के उसे आवाज़ दे रही थी…

That's आल फॉर टुडे गाइस कीप रीडिंग
 
अपडेट-68 (ज़रा मेरे पीठ में साबुन लगा दे बेटे)

सन-1

Ragini-Han ऐसे hi अचे से साबुन लगा दे

विशाल- हाँ बड़ी माँ अचे से मॉल मॉल के साबुन लगाऊंगा



 
सन-2



रागिनी- ुउउइइइइइइइइ माआ ये तू क्या कर रहा है विशु

विशाल- साबुन लगा रहा हु बड़ी माँ और विशाल अपने झाग से भरे उंगलिओ से रागिनी के गांड के छोटे और तंग भूरे छेद को कुरेद कुरेद कर उसके आग को और जयदा भड़काने की कोशिश कर रहा था तो वही दूसरी तरफ शावर के निचे कड़ी रागिनी अपने बेकाबू होते सांसो को काबू में करने की नाकाम कोशिश कर रही थी....




 
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