Incest Kamuk Alka - Page 5 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

जल्दी जल्दी ये वाला पढ़ लो और अपना फीडबैक दो तभी मैं एक और नया धमाकेदार अपडेट पोस्ट करूँगा
 
अपडेट- 28

अक्सर हम कहानियो में पढ़ते है की बाप में डैम नहीं होता और बेटे में बहुत डैम होता है जो अपनी माँ को वो सुख देता है जो उसे उसका बाप कभी नहीं दे पाया…. पर यहां वैसा न मिले सायद आप सभी ko…ashok का लुंड बेशक विशाल जितना बड़ा न हो लेकिन मोती में वो विशाल का बाप hi था जब बीटा माँ को बीएड पे रुला देता है तो यह जो अभी उसकी माँ छोड़ने वाला सख्स था ो उसका बाप था और बाप बाप hi होता है… यूँ hi नहीं उसने अलका की जवानी को 40 साल तक बहकने से रोका होगा कुछ बात रही होगी अशोक में भी… वो तो इन दिनों नशे में अलका के कदम बहक गए और कदम बहका बह ऐसा की अब उसे इसी में मजा आने लगा है… तो फिर से ज्यादा बोर न करते हुवे सीधा अलका के घर चलते है और देखते है वहां क्या हो रहा है….

डिनर फिनिश कर के अशोक अपने रूम में चला जाता है और विशाल अपने कमरे में लेकिन अलका की बेचैनी बढ़ी हुई थी उसकी दिल की धड़कने उसके कण्ट्रोल में नहीं था.. आने वाले पल के लिए काफी ज्यादा उत्तेजित हो रही थी कैसे वो अपने bête के सामने अपने पति का लुंड अपनी छूट में लेगी….?

अशोक घोड़ी बनाया तो?

अशोक ने लुंड चूसने को खा तो ?

अशोक को छूट चाहत ता देख विशाल क्या सोचेगा… या हर बार की तरह अशोक अगर कुछ नया करने लगा तो…. ये साडी बाटे उसके दिमाग क कौंध रही thi…aur इन्ही बातो और कश्मकश में अलका किचन के काम को समेत रही थी और उधर अशोक अलका का वेट कर रहा था….

काम फिनिश कर के अलका अपने कमरे में चली जाती है जहां उसका पति अशोक उसी का hi इंतजार कर रहा था..

कमरे में अभी वो एंटर की hi थी की विशाल का मश्ग आता है

विशाल- hello माँ होप यू रेमेम्बेर माय रिक्वेस्ट

अलका- विशु नहीं हो पायेगा मुझसे

विशाल- माँ आपने मेड्रिड में स्ट्रिप किया था फिर ये भी हो जायेगा

अलका- हाँ बूत वो नशे में हो गया था एंड वो अनजान सहर था लेकिन यहां तुम्हारे सामने तुम्हारे पापा के साथ सेक्स इतस वीयर्ड

विशाल- ने अपने लुंड की फोटो भेजते हुवे खा….





मुझपे न सही इस्पे तो तरस खाओ… आपकी छूट तो मिल नहीं रही है काम से काम वो तो दे दो जिस से काम चल जाये…

विशाल का ये इमोशनल ड्रामा काम कर गया और वो उसकी बातो में आने लगी…

अलका- ठीक है ी विल तरय.. तब तक तू ये देख जो तेरे बाप ने मेरे लिए लाया है आज रात के लिए..

इस ड्रेस में अलका की आधी चूचिया बहार थी जिसे देख विशाल अपना लार टपकने लगता है..

विशाल- uuuuuuuuuufffffffffffffffff माँ सो हॉट आज तो पापा कुछ ज्यादा रोमांटिक मूड में है..

अलका- हाँ है तो एंड शो देखना है तो रेडी रहना मैं दूर खुला चोर दूंगी और तू हॉल की लाइट ऑफ कर के आना वर्ण पकडे गए तो मैं भी नहीं बचा पाऊँगी…

विशाल- ok माँ no वोर्री

और इसके बाद अलका बीएड की और जाने लागत है जहां अशोक उसे अपने बहो में भर लेता है और अलका फिसल के उसके बहो में पिघलने लगती है….

अशोक अपने होंठ अलका के होंठो पे रख उसके होंठो को चूमना सुरु कर देता है जिसमे अलका भी उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी…





अशोक अलका के होंटो को चूसने के साथ साथ उसके चूतड़ों को भी अपनी मुट्ठी में भर के मसल रहा था…

अलका- कुछ ज्यादा hi उतावले लग रहे हो आज तुम

अशोक- इतने दिनों से दूर रहा हु तुम्हे अब भी ये मेरा उतावला पैन hi लग रहा है…

अशोक बिना समय गवाए ेके क कर के अलका के सरे कपड़ो को उसके बदन से आज़ाद कर देता है.. और अब अलका कमरे में बिलकुल नंगी thi..jise अशोक जी भर के अपनी आँखों में भरने लगता है…

अलका हसने लगती है- ऐसे क्या देख रहे हो……?

अशोक- तुम्हारे हुस्न को मेरी जान… तुम पहले से ज्यादा नशीली लग रही ho…jra एक वाक तो दो सडके में माय लव…

अलका अशोक की बातो को सुन नंगी hi कमरे में मटक मटक के चकने लगती hai…uski मोती भरव्दार गांड और उछलते चुचो को देख अशोक की हालत ख़राब होने लगती है…

अलका भी अशोक को ज्यादा उत्तेजित करने के लिए नंगी hi शीश ेके साणे कड़ी हो के अपनी गांड बहार को निकल के कड़ी हो जाती है…





अशोक- uuuuuuffffffffff मेरी जान तुम तो आज मार hi dalogi…tumhai ये गांड पहले से ज्यादा hi भर गयी है और ये तुम्हारी चिकनी भरी हुई पीठ ufffffffffffff

अलका फिर वापस पलट के अशोक की तरफ आने लगती hai..aur बड़े नज़ाकत से पूछती है…

अलका- ड्रिंक?

अशोक- वैसे आज तो बस तुम्हारे इन कठोर चुचो और ये जोग लैब की पंखुडिओ जैसी तेरी छूट है उसका पानी पीना है…

अलका- हैट बेशरम रुको मैं ड्रिंक लती हु…

ड्रिंक तो बहाना था उसे विशाल को अपने चुदाई का न्योता देना था…

अलका तो विशाल- शो देखना है तो थोड़ी देर में आ जाना मैंने दूर नहीं बंद किया है सिर्फ तेरे लिए खुला चोर रही hun..and don’t फॉरगेट तहत लाइट्स ऑफ कर के aana…itna कह के अलका ड्रिंक ले के अश्क के पास जाने लगती है…

वो एक गिलास अशोक को देती है और वही उसके गॉड में बैठ के वाइन के घुट लगाने लगती है






अशोक भी ड्रिंक करने के साथ साथ अलका के अंगूर जैसे तने निप्पल को अपने कुटकिओ में भर के मसलने लगता है….

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh जणू

अशोक- आज बहुत दिनों बाद तुम्हारा ये रूप देख रहा हु मेरी जान

अलका- मैंने भी तुम्हे बहुत विश किया है बेबी आज मेरे सरे प्यास बुझा दो बहुत तदपि है तुम्हारी अलका तुम्हारे लिए….

अशोक अलका को बीएड पे बिठा के अपने जुबान उसके छूट पे लगा देता है






अलका- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh सूचक माय पुसी बेबी डीपर मोरे डीपर

अशोक भी अपनी बीवी के छूट में अपनी जीभ फेरने लगता hai…aur अलका भी अपने हाथो को अपने पति अशोक के सर पे फेरना लगती है…

अशोक अलका के मादक जिस्म पे शराब गिरा के उसे चाटने लगता है पहले इसके पतले सुराही जैसे गार्डन फिर उस से गिरती बुँदे जो उसकी छाती और छाती से होते हुवे निप्पल पे टपक रही थी उसपे जीभ फिरते हुवे शराब की बुँदे पिने लगता है.. सायद अलका के जिस्म में शराब से ज्यादा नशा था जिसे महक से hi अशोक बेकाबू होने लगता है..

अशोक अलका को अपने गॉड में उठा के दीवार से टिका देता है और खुद घुटनो के बलबैठ के उसकी छूट चाटने लगता है..






अलका भी अपने पति अशोक के साथ इस सफर में निकल चुकी थी और उसे खुद भी बहुत मजा आ रहा था दो रात की प्यास उसकी बुझने वाली थी वो अशोक को और ज्यादा कामातुर करने के लिए शराब की बोतल अपने ऊपर उड़ेलने लगती है जिस से हिरता शराब उसकी गोरी छोड़ी छाती और उसके लटकती कासी हुई चूचियों से होते हुवे उसके गहरे नाभि और फिर पेट से बहते उसके छूट तक पहुंच रही थी जो आगे जा के अशोक के मुँह में गिर रहा था और जो बुँदे उसके मुँह में न गिर के शरीर के दूसरे भाग में फैलता था उसे अशोट अपने गरम खुरदरे जुबान से चाट के साफ़ कर देता था…





अलका माहौल को और ज्यादा गरम करने के लिए खुद से उतर जाती है और शराब को अपने पैरो पे गिरा के अपने पति को पिलाने लगती है…. अशोक भी मनो किसी गुलाम की तरह उसके पैरो से बह रही शराब की धार को पिने लगता है…

अशोक- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मेर जान तेरे बदन को छू लेने के बाद ये शराब और नशीली हो गयी है…. शराब से गाला भीगा लेने के बा डाब बरी थी अलका के जिस्म पे बह रही शराब की ेके क बून्द को पि जाने का जिसे अशोक बखूबी करना जनता था ो ऊपर को आता है और अलका के गोल कासी चुचिओ पे चेरीनुमा निप्पल्स को अपने मुँह में भर के चूसने लगता है…






अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अशोक

अशोक उसकी चुचिओ को ऐसे मसल रहा था मनो उसके चुचिओ से hi शराब बहार आ रहा हो…

अलका- khhhhhaaaaaaaaaaaaaaaaa jaaaaaaaaaaoooooooooooo pppppppiiiiiiiiiiiiiiiiiiii jjjjjjjjaaaaaaaaaaaaoooooooooo मेरे चुचो के सरे रास को aaaaaaaaaahhhhhhhhhh और निचोड़ो इन्हे

अशोक- हाँ मेरी जान आज तेरा सारा रास पि जाऊंगा बहुत दिनों बाद हाथ लगी है तू इतना कहते hi अशोक उठ के ालमिरह से कुछ निकलता है...

अलका भी अशोक के जाने पे दरवाजे की तरफ विशाल को ढूंढने के लिए अपनी निगाहे दौड़ती है तो पति है उसका बीटा उसे उसके बाप के बहो में नंगा देख अपने लुंड को मसल रहा है….






अलका को ये दृश्य काफी ज्यादा उत्तेजक लगती है पहले उसे शर्म तो आती है बूत वासना में तो आप सभी जानते है वो पागल hi हो जाती है और ठीक वैसा hi होता है अपने bête को अपने रूम में झांकता देख वो और बेशरम बनने की सोचती है

Alka-(tujhe बड़ा सूख है न अपनी माँ की चुदाई देखने का फिर आज दिखती हु तुझे तेरी असली रंडी माँ अब चुदती है तो कैसी हो जाती है ) ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह अशोक कहाँ चले गए तुम मेरे छूट को तड़पता चोर के….

अशोक कुछ नै कहता बस हस्ता हुआ आता है और उसके हाथो में कुछ होता है जिसे देख अलका कहती है……..

अलका- अब क्या नया फंतासी ले आये तुम? तुम हर बार विदेश से कुछ नया ले की एते हो और यहां कचूमर मेरा निकलता है uuuuuuuuuuuuuuuufffffffffff ये मेरी छूट की aaagggggggggg बुझाओ इसे जणू (ये सब वॉक यह तो अशोक से रही थी पर सुना विशाल को रही थी)






अशोक उसके पैरो में कफ लगता है और उसे बांध देता है…

अलका- oohhhhhhhhhho डार्लिंग क्या इरादा है तुम्हारा आज का….. लगता है तुम मेरे छूट का कबाड़ा बना ने के इरादे से आये हो……. Uuuuuuuuuuuufffffffffffff मैं तो अभी से सिहर राहु हु…… मेरी छूट पसीज रही है कुछ करो अशोक…

अशोक- बस थोड़ी देर और फिर तेरी छूट की आग शांत कर दूंगा मई

और उसके बाद अशोक उसके आँखों में ब्लाइंड फोल्ड बांध देता है






और इसके साथ hi एक कफ उसके हाथो को पचे कर के बांध देता है.. अलका को अब कुछ भी नहीं दिखने वाला था उसके साथ क्या होने वाला है वो विशाल को अपनी छूट में लुंड लेते हुवे देखना चाहती थी … वो देखना चाहती थी की विशाल के चेहरे की चमक कैसी होगी जब कोई और उसके सामने उसकी माँ छोड़ रहा होगा पर अशोक ने तो सब कुछ मनो बेकार कर दिया था उसके आँखों में पट्टी बांध के…

अलका- uuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff अशोक ये क्या कर रहे हो मुझे कुछ नहीं दख रहा है….

अशोक- बस बेबी थोड़ी देर और बर्दाश्त कर लो

अलका की सांसे किसी बुलेट ट्रैन की तरह तेज राफ्तेर से भाग रही थी…. उसका जिस्म अशोक भोग रहा था पर उसका दिल और दिमाग दरवाजे पे खड़े bête के लिए ज्यादा उत्तेजित हुआ पड़ा था

Alka-(uuuuuuuuuuuuffffffffffff देख विशु तेरा बाप तेरी माँ को कैसे कैसे डिज़ाइन से छोड़ता है…. सिख ले आज तू bête ये तेरे काम आएगा अपनी माँ ो खुश करने के लिए….. हाय अशोक को भी ये साडी फंतासी आज hi करनी थी जब उसका बीटा बहार खड़ा सब देख रहा ho….uuuuuuuuuuufffffffff मैं क्या करू उसकी मौजूदगी मुझे खुलने नहीं दे रही है और अशोक की हरकते मुझे मेरे कण्ट्रोल खोने में विवस कर रही है…… कैसी मुसीबत में फंस गयी तू अलका….) अभी अलका इन सब जद्दोजेहद में फांसी हुई थी की उसे उसके कोमल बदन पे अशोक के हाथ का स्पर्श महसूस होता है…..






अशोक अपनी बिच की उंगलिया अलका के छूट पे फेरने लगता है वो फेरता कुछ इस अंदाज से है की उंगलिया अंदर तो नहीं जाती बस उसके छूट के होंठो को सेहला रही होती है….

अलका- uuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhh

अलका का हाथ और पेअर बंधा हुआ था जिसके वजह से वो चटपटा hi पा रही पर वो भी ज्यादा खुल के नहीं… उसके बेबसी उसके हवस को और ज्यादा बढ़ा रही थी…

अशोक भी तो मांझा हुआ खिलाडी था उसे पता था की अलका को अपने काबू में करना है तो उसके छूट में लुंड डालने से पहले काम से कामे क बार उसके काम रास को बहार निकलना hi होगा वर्ण जितनी आग उसमे भरी है वो अशोक के लुंड को निचोड़ लेगी इन्ही बातो को ध्यान में रखते हुवे अशोक एक के बाद अपने प्रहार अलका के छूट पे करने लगता है… और अलका उसके हर प्रहार पे जल बिन मछली की तत्रह चटपटा के अपनी सर और टंगे पटक रही thi….jiska एक सबसे बड़ा कारन बहार खड़ा विशाल था…






अब अशोक धीरे से अपनी जुबान अलका के छूट में डालके उसके छूट में बढ़ रहे सेंसेशन को और बढ़ने लगता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh अशोक काम से काम मेरे हाथ या पेअर खोल दो मुझसे रहा नहीं जा रहा है ये क्या नया खेल खेल रहे ह तुम???

अशोक- क्यों बेबी मजा नहीं आ रहा है क्या?

अलका- मजा तो बहुत आ रहा है पर मई रियेक्ट नहीं कर पा रही ह ऐसे बंधे होने से

अशोक फिर मजे लो मेरी जान और इतना कह के वो किसी कुत्ते की तरह चपड़ चपड़ अलका की छूट चाटने लगता है…






हाथ और पेअर के बंधे होने से अलका अपनी छाती उठा पा रही थी बस और फिर वो भी बीएड पे गिर जा रही थी अलका की हालत बहुत hi ख़राब होने लगती है…. काश उसका हाथ खुला होता तो वो अशोक का सर अपने छूट पे दबा पाते पर वो बेबस थी बस छटपटाने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं था…

अलका- oooooooooohhhhhhhhhhhh अशोक खा जाओ मेरे छूट को मसल दो इसके दानो को बहुत सही जाए रहे हो मेरी जान खान से सीखा कही विदेशी औरते तो नहीं छोड़ने लगे मेरे गैरमौजूदगी में…. Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh छोड़ो मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता बस ऐसी चीजे सिख के आओ और मेरे मजे को दोगुना कर दो aaaaaaaaaaaaahhhhhhh

अलका छह रही थी की वो अपना पेअर उठा के अशोक के कंधे पे रख उसके सर को अपने छूट पे दबा दे पर वो ये भी कर पा रही थी हाय मेरी अलका को आज कितना तड़पना पद रहा था uuuuuuuuuuffffffffffffff उसकी जवानी की आग शांत होने की जगह कुछ ज्यादा hi भड़क रही थी…..

अशोक अलका की तड़प को देखते हुवे उस की छूट के दानो पे अपना अंगूठा रख उसे मसलने लगता है…






अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaa मैं गयी मैं गयी उउउउउउउठ्हहहह आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह मममममअअअअ मैं गयी मेरी छूट बह रही है अह्ह्ह अशोक थोड़ा हार्ड करो प्लस आअह्ह्ह्ह माआआआ अशोक अशोक मेरे खसम अपनी खा जाओ मेरे छूट को तुम्हारी अलका गयी आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह





अशोक भी अलका की कामाग्नि को भड़कते हुवे तेज़ तेज़ ऊँगली करने लगता है… जिसका स्वागत अलका अपनी गांड उठा ुर्था के कर रही थी

Alka-uuuuuuuuffffffffffffffff mmmmaaaaaaaaaaaa मैं गयी अशोक आआह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह

Aaaaaaaaaaaasssssssssssssohhhhhhhhhhhooooooookkkkkkkkkkkkkk और एक तेज़ चीख के साथ अलका अपने छूट का पानी चोर देती है….

छूट से निकला पानी अलका के पुरे बदन पे फ़ैल जाता है जांघो पे उसके छूट का पानी मोती की बूंदो की तरह चमक रहा होता है जिसे उठा के वो चाटने लगती है...

रत का माहौल था जहां हर तरफ शांति थी मगर अलका के कमरे में उसके तेज़ धड़कनो ो साफ़ सुना जा सकता था जो अभी अपने पति के हाथो मिले ओर्गास्म के वजह से आया था…. इसी के साथ hi उसके तेज़ हाफने की आवाज़ पुरे कमरे में गूंज रही थी……….

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh क्या जादू है तुम्हारे उंगलियों में मैंने पुरे 2 साल इसका इंतजार किया है…. वो अशोक क किश करने के लिए उठती है पर उठ नहीं पति वो ओर्गास्म में ये भूल hi गयी थी की उसके हाथ पेअर और आंखे अब भी बंधे हुवे है…

अशोक अपनी बीवी की जरुरत को समझते हुवे उसके करीब जाता है और उसके होंटो को चूमने लगता है जिसमे अलका भी उसका पूरा साथ दे रही थी …

अब बरी अलका किट hi अशोक के लुंड से खेलने की हिसके लिए वो अपने सांसो पे काबू पाने की कोशिस कर राइ थी उसे अब इस बात की परवाह नहीं थी की विषा देख रहा है… वो बस इस पल को जीना छह रही थी

अशोक अलका की टंगे खोल देता है और उसे गॉड में उठा के अपने रूम में बने टेबल की आगे खड़ा कर देता hai…aur खुद उसके पीछे चला जाता है..

अलका- अब क्या करने वाले हो जणू uuuuuuuuuuuuuffffffffff तुम जाने क्या के करोगे और मैं देख भी नहीं पा रही हु अशोक पट्टी खोलो न बेबी

पर अशोक उसकी बातो को अनसुना कर देता और पीछे से जा के अलका को टेबल पे झुका देता है जिस से उसकी छाती टेबल पे और उसकी गांड हवा में लहराने लगती है…






और फिर अशोक वापस से उसके छूट के साथ खिलवाड़ करने लगता है….. अभी अलका झड़ी थी उसकी छूट अभी अभूत hi नाजुक हालत में थी और अभी उसकी ये गुलाबी नरम छूट दूसरे हमले के लिए सायद तैयार भी नहीं थी…. पर बेचारी करे भी क्या उसके हाथ बंधे है आँखों पे पट्टी है..

अशोक के चुने मात्रा से अलका की छूट में बिजली दौड़ जाती है और वो किसी नगीन की तरह अपनी कमर को बालकहने लगती है….

अलका- aoooooooooooooocccccccccccchhhhhhhhhhhhhhhhhhhh बेबी

अशोक वापस से झुक के उसके छूट के पानी को चाटने लगता है…

अशोक- yuyyyyyyyyyyuuuuuuuuuuuummmmmmmmmm तुम्हारे छूट का रास तो पहले से भी टेस्टी हो गया है मेरी जान

अलका- तुम्हारे म्हणत का फल है तटस्य तो होना hi चाइये …. लेकिन अब मुझे मेरा हक़ दो तुम

अश्क- कौनसा हक़

अलका- क्यों तुम्हे नहीं पता कौनसा

अशोक- उसकी गांड पे हाथ फेरते हुवे उसके छूट में जुबान फेरते हुवे कहता है…

अलका- तुम मेरे आँखों से पट्टी खोलो और हाथ भी फिर बताती हूँ कौनसा हक़

अशोक- वो तो अभी नहीं खुल्न वाला

अलका- बेबी तड़पाओ नहीं न प्लस

अशोक अलका को उसी टेबल पे लिटा देता है और उसके चेहरे के पास कड़ा हो के अपना लुंड उसके होंटो पे रगड़ते हुवे पूछता है






Ashok-Kahi तुम इस हक़ की तोबाट नहीं कर रही हो???

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh कितना मोटा हो गया है ये तुम्हारा ये लोढ़ा हर बार मोटा होते जा रहा है uuuuuuuuuffffffffff मेरी छूट का भोसड़ा न बना दे आज्ज

अशोक उसके होंटो पे लुंड और छूट पे हाथ मॉल रहा था जिसे अलका पूरा पूरा एंजोये कर रही थी…

अशोक छूट को सहलाते ेहलाते एक डैम से अपनी 1.2.फिर 3 उंगलिया अंदर पेल देता है जिस से अलका चिहुँक उठतु है

अलका- aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अलका का मुँह खुला hi था की अशोक उसमे अनल ुण्ड पेल देता है… अशोक के इस दोहरे हमले से अलका के छूट में ऊँगली डलने से जो दर्द हुवा था और इस से पहले वो चीख पति अशोक के मोठे तगड़े लुंड ने अलका के आवाज़ को उसके गले में hi घोट दिया और अलका बस ggggggggggguuuuuuuuuuuuu ggggggggggguuuuuuuuuuuu कर के रह गयी…..

वाकई में अशोक का लुंड इतना मोटा था की अलका का पूरा मुँह फैट गया था उसकी आंखे बड़ी बाद होने लगी थी जिस से अशोक को और मजा आ रहा था..

अशोक अलका की सांसे घुटता देख अपना लुंड बहार खींच लेता है… लुंड के बहार आते hi ढेर सारा लार उसके लुंड के साथ होते हुवे उसके होंठो पे फ़ैल जाता है






अलका के होंठ और अशोक का लुंड दोनों hi अलका के लार में सं के कुछ ज्यादा hi चमकने लगता है….

अलका- बहार क्यों निकला?

अशोक- मुझे लगा तुम्हारा डैम घुट रहा हो

Alka-(tumhare bête ने अब इसकी आदत लगा दी है) हाँ तो अब बहार मत निकलना मुझे

Ashok-are यू सूरे???

अलका- यस चोक में डैडी

अशोक वाओ तुम तो पहले hi वाइल्ड थी अब और ज्यादा हो गयी हो और इतना कहते hi अशोक अपना लुंड अलका के मुँह में डालने को होता hi है की अलका खुद लपक के उसके लुंड को अपने मुँह में भर लेती है…






अशोक- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh फूकिंग बीच

अलका- यस ी ऍम बीच ी ऍम फूकिंग बीच फ़क में डैडी फ़क में लिखे ा व्होरे आआआआहहहहह यू डिक इस सो हार्ड एंड थिक ooooooooooooohhhhhhhhhhhh

अशोक भी अलका के बातो से उत्तेजित होने लगता है और उसके मुँह को छोड़ना शुरू कर देता है….

अलका- क्या हुआ अशोक बुड्ढे हॉग ए क्या ??? लुंड में डैम नहीं बची तुम्हरे ???

अशोक- डैम तो आज तुझे दिखता हु मेरी रानी तेरी गर्मी तेरे छूट से बह बह के निकलेगी…

अलका- तो निकल न भड़वे ये धीरे धीरे क्या हिजड़ो की तरह छोड़ रहा है मर्द बन

अलका अशोक को ललकार रही थी की वो उसे किसी गश्ती की तरह चोदे और उसका अशोक पे हने लगता है

वो अलका के पेअर पकड़ के निचे खींच देता है जिस से उसकी गद्दी दर गांड सीधे जमीन पे गिरती है…

अलका- aaaaaaaaaaaauhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर आहे हो

अशोक- अब तू देख बहन की लोदी तुझे पूरी रात माँ माँ न चिलवाया तो मैं अशोक नहीं और अलका के मुँह में अपना लुंड पेल देता है






अलका अभी इस हमले के लिए तैयार भी नहीं थी पर ये जो भुगतान उसे भुगतना पद रहा था उसकी वजह भी वो खुद थी… अशोक अलका के पुरे चेहरे को अपने पंजो में दबोच लेता है जिसमे उसकी नाक भी बंद होने लगती है और वो किसी सस्ती बाजारू रंडी की तरह उसके मुँह में अपना लुंड झटको के साथ उतरने लगता है…

अलका- गग्गूउऊउउउ गगगगगगगगगगगगग गगगगगगग गूग्गूगगुग्गु

अशोक – aaaaaaaaaaaah अब चूस इसे रंडी मैंने गली देना तुझे सिखाया और तू मुझे hi गली दे रही है साली मदिर्चड

अलका का डैम घुटने लगता है वो गार्डन झटकने लगती है दोनों बंधे हाथ भी पटकने लगती है अपर अशोक अपना लुंड नहीं निकलता

अशोक- चोक में डैडी हननननन?????????? अभी चोक हुआ या और करू ये ले मादरचोद






और अपने लुंड को तो वो स्थिर रखता है पर अलका के सर को उसके बालो से पकड़ इ आगे पीछे करने लगता है… अलका के गले के दर्द के साथ उसके गार्डन में भी दर्द होने लगता है.. वो जितना पीछे होना चाहती है ताकि लुंड बहार निकल जाये और वो साँस ले सके अशोक उतना अंदर अपने लुंड कोप ेल देता है…

जब अलका की हालत मरे जैसी हो जाती है तब वो अपना लुंड बहार निकल लेता है… पर चुदाई में अलका सच कोई रंडी को भी पीछे चोर दे … जहां इस जोरदार मुँह चुदाई से अचे ाचो की जान निकल जाये अलका अभी भी है रही थी

Alka—yes that’s लिखे माय डैडी ी ऍम लोविंग आईटी

Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अशोक और छोड़ो मेरे मुँह को अपने इस तगड़े लुंड से और इनसब में जाने कब अलका का हाथ खुल जाता है….. अब उसका हाथ आज़ाद था बस आँखों पे पट्टी बंधी थी अलका बिना देरी किये अशोक के लुंड को वापस से मुँह में भरने लगती है






अशोक- बहुत प्यासी लग रही हो……?

अलका- हाँ बहुत ज्यादा आज सारा रास निचोड़ लुंगी तुम्हे इस लोडे का

अशोक- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh फिर तुम्हे छोडूंगा कैसे?

अलका- वो तुम्हारी प्रॉब्लम है मुझे तो बस इसका रास पीना है गरमागरम गधा रास….

बहार खड़ा विशाल अपनी माँ की बातो को सुन के लुंड हिलने के अलावा कुछ नहीं कर एकता था….

अलका भी जानती थी विशाल पुरे फिल्म खत्म होने से पहले नहीं जायेगा इसलिए वो भी उत्तेजित हुवे जा रही थी ये सोच सोच के की जब उसका बाप उसकी माँ को छोड़ेगा तो जय होगा काश उस वक़्त मेरे आँखों में पट्टी न हो और मैं उसे देख पाव…..

अलका अशोक के लुंड को बहार निकलती है और वापस से पूरा लुंड अपने गरम गरम गले में उतरने लगती है..






जिस लुंड से अशोक ने अछि अछि विदेश की हालत ख़राब कर दी थी उस लुंड को उसकी पत्नी अलका बड़े hi आराम से पूरा निगल ले रही thi….jis से अशोक इस नतीजे पे नहीं पहुंच पा रहा था की असली रंडिया वो थी जिसे उसने छोड़ा है या उसकी बीवी अलका जो की एक घरेलु औरत है… पर उसे क्या पता उसकी घरेलु और तब किसी भी बाज़ारू को टक्कर देना तो चोरो हरा भी दे तो कोइतअज्जुब की बात नहीं…

अलका के गरम गरम लार और उसका ये वेहसि रूप देख अश्क भी अपना आप खोने लगता है और वो अलका के सर को पकड़ के उसके मुँह में अपना लुंड पेलने लगता है






अशोक का किया हर हमला इतना जोरदार था की जिस से अलका की दोनों चूचिया पानी में भरे गुब्बारे की तरह थिरक रही थी…

रात के सन्नाटे में पूरा कर्मा अलका के मुँह में अशोक के लुंड से दबी आवाज़ गूंज रही थी

अलका- ggggggggggguuuuuuuuuuuu guggggggggggggggg guuuuuuuuuuuuuggggg uuuuuuuuuuuuggggggggggggggghhhhhhhhhhh

अलका की सांसे उखड़ने लगती है पर वो रुकने का नाम नहीं ले रही थी उसके मुँह से निकलता लार उसके पुरे छाती पे फैलने लगा था…

अशोक भी अलका के सर को बालो से खींच खींच के उसमे अपना लुंड दाल रहा था…






जहां एक और अलका का मुँह उसे बाप के लुंड को पिघला रहा था वही उसकी गोल गुम्बद जैसी गांड उसके bête को उसकी मनाज़िल के करीब ले आयी थी… सच में कुछ तो खास है इस औरत में जो एक साथ बाप बीटा दोनों का पानी निकल दिया वो भी एक को बिना चुवे…

अशोक भी अब अपने मंजिल के बहुत करीब था वो किसी भी वक़त अपना लावा अपनी बीवी अलका के मुँह में उगल सकता था….

अशोक- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अलका मेरा होने वाला है..

अशोक की ये बात सुन अलका और ज्यादा कास के उसके लुंड को अपने मुँह में दबा लेती है जिसका मतलब साफ़ था किवो लुंड बहार नहीं निकलने दें चाहती है






लुंड के पड़े दबाव के कारन उसके मुँह से बेहटा हुआ लार उसके नक् से बहने लग जाता है जो ये दिखा रहा था की ये कितना मुहचुड़ै कितना ददनाक था और फिर भी अलका इसमें डटी हुई थी या सायद दर्द में उसे ज्यादा मजा आता है…

अशोक- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhh mmmyyyyyyyyyyy ggggggggoooooooooooooddddddddddddddddd

अलका- uuuuuuuuuuuuggggggggggggjjhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuughhhhhhhhhhh

और फिर अशोक तेज झटके मरते हुवे उसका कमर अकड़ जाता है और उसके लुंड अपना लावा अलका के मुँह में hi उगलने लगता hai..jis से अलका का पूरा मह भर गया था और और लुंड जो अभी कुछ ज्यादा hi फूल गया था के मुँह में होने से वो पानी जातक भी नहीं पा रही थी उसकी सांसे भरी हो गयी थी तभी अशोक अपना लुंड अलका के मुँह से बहार खिश लेता है और लुंड के बहार आते hi पानी लार और लुंड के पानी का मिला जुला शरबत उसके मुँह से भलभला के गिरने लगता है..






अलका की आँखों से गिरता आंसू और मुँह से निकलता उसके लार के साथ अशोक के लुंड का पानी उसके पुरे बदन पे फल रहा था... उसकी हालत देखते बन रही थी पर उस औरत की आग मनो ऐसे जुर्म सेह के hi बुझती है वो वासना में इतना लिप्त हो जाती है की सामने वाला बेशक उसपे तरस खा ले वो खुद पे नहीं कहती जब तक उसे उसकी मंज़िल न मिल जाये ... ये बहते लार ये लाल आंखे चेहरे पे फैला काजल सब उसी की निशानी है

दोनों जोड़े का झाड़ जाना पुरे कमरे में उनके कामर्स की खुसबू फ़ैल गयी थी दोनों तेज़ तेज़ हफ्ते हुवे वही फर्श पर ढेर हो जाते है….





और उधर दरवाजे पे खड़ा उनका लाडला भी उनके साथ अपना पानी बहा देता है .....

पर ये तो पहला राउंड था रात अभी बाकि थी शवाब और अलका की जवानी अपने चरम पेट hi जिसे आज अशोक किसी गुलाब की पंखुडिओ की तरह निचोड़ देने वाला है… और उस से निकलता रास का एक एक बून्द से अपनी प्यास बुझाने वाला है….
 
गाइस अपडेट आ गया है शेयर योर लव सो तहत मई एक तड़कता भड़कता चुदाई वाला पोस्ट शेयर करू.....
 
गाइस मई पूरी कोशिश करता हु हर किसी के कमेंट का रिप्लाई करू बूत फिर भी अगर किसी का रिप्लाई न दे पाव तो उसके लिए माफ़ी पर एक बात जरूर कहूंगा की मई कमेंट आप सभी के पढता हु एक भी नहीं चोरता सो प्लस आप अपना प्यार अपने कमैंट्स के जरिये बनाये रखे आपके फीडबैक hi कहानी का मोटिवेशन है

थैंक यू आल
 
इतने म्हणत से लिखे अपडेट पे बस इतना थोड़ा कमेंट लगता है लोगो को ये वाला अपडेट सायद पसंद नहीं आया या मेरे राइटिंग में कोई कमी रह गयी😒😒
 
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आधी रात बिट चुकी थी पर नींद मनो तीनो के आँखों से कोसो दूर हो आज न बाप सोने वाला थान ा बीटा और माँ अक जागना तो बनता hi था आखिर ये सारा खेल उसी के इर्द गिर्द तो घूम रहा है…

अलका के कमरे में एक शांति फैली हुई थी जिसमे बस दोनों मिया बीवी के हाफने और भगते हुवे सांसो की आवाज़ दूध रही थी.. ये शांति कोई आम शांति नहीं थी बल्कि ये तूफ़ान के आने के पहले वाली शांति थी जिसके बाद एक ऐसा तूफ़ान आने वाला था जिसमे एक माँ अपने hi bête के सामने किसी रंडी की तरह उसके बाप से छोड़ने वाली थी वैसे बीवी का अपने पति से छोड़ना कोई गलत या बड़ी बात तो नहीं है यकीन यहां जो बड़ी बात थी वो ये थी की एक माँ अपने bête को अपनी चुदाई का लाइव देखने का इंतजाम कर के आयी थी…. खेल के सुरुवात में तो अलका के आँखों में पट्टी बंधी थी उसे कुछ दिख नहीं रहा था लेकिन अब तो उसकी पट्टी उतर चुकी थी अब देखना ये है की वो कैसे अपने bête के आँखों में आंखे दाल के अपने छूट में अपने पति ा लुंड लेती है..

अशोक का लुंड पानी चोर चुक्का था और बी वो दोनों नंगे बीएड पे पड़े अपनी सांसे इकठा कर रहे थे अगले राउंड के लिए…






अशोक के लुंड से बेहटा पानी अलका के चुचिओ पे भी फ़ैल रहा था और हमारी कामुक अलका अपने उंगलिओ से अशोक के मुरझाये लुंड को जगाने के लिए उसपे उंगलिया फेरने लगती है…

अलका जैसे कामुक औरत के बारे में जहां सोचने मात्रा किसी का लुंड खड़ा हो जाता है और यह तो वो साक्षात् नंगी लेती है फिर ऐसे में अशोक का लुंड ज्यादा देर मुरझाया हुआ कैसे रह सकता था bhala…alka के जरा सा उंगलिओ के इशारे मात्रा से अशोक का लुंड में हरकत करना शुरू कर देता है….

अशोक- तुम तो पहले से ज्यादा वाइल्ड हो गयी हो यार

अलका- अभी तुमने वाइल्ड अलका को देखा hi खान है मर अशोक

अशोक- फिर आज दिखा दो

अलका- हाँ पर उसके लिए तुम्हे अपना ये लोढ़ा खड़ा करना पड़ेगा

अशोक- वो तो तुम कर hi डौगी ी कण्व ये तुम्हारे चुटकी का काम है

अलका- क्यों नहीं जणू और इतना कहते वो उठ के अशोक के लुंड को मुठी में भर के सहलाने लगती hai…aur अशोक के लुंड को पकड़ के अपने गलो पे मरने लगती है….






अलका- uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh अभी इस रबर को मैं लोहा बना दूंगी uuuuuuuuuuuufffffffffff कितने दिनों बाद मिला है तुम्हारा ये लुंड मुझे आज तो इसे खा hi जौंग कहते हुवे मुँह में भर लेती hai….aur धीरे धीरे उसका पूरा लुंड एक बार फिर से अलका अपने गले में उतर लेती है जैसे कोई अजगर निगल रही हो….

अलका अशोक के लुंड को पुरे जोश में चूसना जारी रखती है जिसके वजहसे अश्क का लुंड जल्दी hi अपनी औकात में आ जाता है…

अशोक- तेरा छूट तो छूट तेरे मुँह में भी जादू है मेरी जान आआआह्ह्ह्हह्ह ज्यादा देर रुकने नहीं देता देख मेरा लुंड तैयार हो गया है फिर से तेरे छूट में घुसने के लिए…

अलका- इसी लिए तो म्हणत कर रही हु न की तुम आज रात मेरी छूट फाड़ दो अपने इस मोठे लुंड se…ye बा तवो कह hi रही थी की दरवाजे पे खड़ा विशाल उसे दिख जाता है.. अलका को विशाल आंख फाडे देख रहा था उसकी नजरे मनो कह रही हो माँ मुझे भी बुला लो मैं भी तुम्हे छोड़ना चाहता हु ….. पापा का लुंड चोर के मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लो मैं बहुत देर से तड़प रहा हु तुम्हारे अंदर आने के लिए…

अलका- अशोक मैं पानी रखना तो भूल hi गयी मुझे प्यास लग रही है….

अशोक – तुम रुको में ले के आता हु…

अलका- no बेबी मई आती हु पि के और विशाल को भी देख लुंगी एक बार वो क्या कर रहा है

अशोक वो क्या कर्जा सो गया होगा रात के 1 बज रहे है अभी तक क्या करेगा जग के???

Alka-(uski माँ चुद रही है उसे खान नींद आने वाली है आज) हाँ बूत पानी तो पि औ काम से काम..

और वो बीएड पे पड़े अपने गाउन उठाने लगती है तभी अशोक कहता है

अशोक- इसकी क्या जरुरत ऐसे hi जाओ पानी पि की ा जाना

अलका- तुम पागल हो घर में जवान बीटा है और मैं नंगी जाऊ किचन में

अशोक- अरे तेरा जवान बीटा सो गया होगा तुम पानी पि आओ जाओ मैं भी तुम्हारी नंगी मतवाली चल देख लूंगा इसी बहाने..

अलका- अशोक मुझे अजीब लग रहा है

अशोक- अरे मेरी जान मैं हूँ न तुम जाओ

अलका- अगर विशाल जगा हुआ और उसने मुझे इस हालत में देख लिया तो

अशोक- तो समझ जायेगा उसका बाप उसकी माँ छोड़ रहा था

अलका- शट उप अशोक कुछ भी

अशोक- अरे जवान लड़का है थोड़ा हाथ फेर लेगा ज्यादा से ज्यादा .. वैसे भी तुम जितनी हॉट हो मन में तो वो तुम्हे कई बार नंगी सोच के छोड़ भी दिया होगा…

अलका- (मन में क्यों छोड़ेगा सच में छोड़ा है तुम्हारे bête ने तुम्हारे गेहाज़र में) ये तुम क्या बोले जा रहे हो जोश जोश में शर्म भी भूल गए.

अशोक- ाचा जाओ तुम पानी पि के जल्दी आओ वर्ण ये फिर से सोने लग जायेगा…

अलका- सोयेगा तो मैं उठा दूंगी don’t वोर्री और अभी आती हु…

ये कह के अलका बिलकुल नंगी बैडरूम से निकल जाती hai….pani तो बहाना था उसे विशाल से मिलने जाना था पति के चुदाई से ज्यादा वो विशाल के छुवन (टच) को मिस कर रही थी…

वो कमरे से जैसे निकलती है विशाल उसे दबोच लेता है और धीरे से कण में कहता पानी तुझे मैं पीलूँगा आज बहुत तड़पा हु तेरे लिए…






और बहन की लोदी तू मुझे सुना सुना के चुद रही है

अलका- हस्ते हुवे विशाल से कहती है अभी चूड़ी खान हु अभी तो सिर्फ लोड चूसा है छोड़ना तो बाकि है वो भी पूरी रात छोड़ने के मूड में है तेरे बाप

विशाल उसके गाल पे एक थप्पड़ लगा देता है साली रांड मुझे जला रही है और यूँही उसे घसीटते हुवे किचन में ले के चला जाता है

अलका- क्या कर रहा है ऐकोर तेरा बाप देख लिया तो मेरे साथ तेरी गांड भी मार लेगा

विशाल- मरने दे लेकन पहले तू निचे जा मादरचोद

अलका- uuuuufffffffffff तू पागल हो गया है

विशाल- हाँ पागल हो गया हु कहते हुवे अपना लुंड उसके मुँह में दाल देता है






अलका भी उसके लोड पे अपना जुबान फेरने लगती है…

अलका- विशाल मत कर अभी तेरा बाप थक के सो जायेगा फिर आती हंट ेरे पास

पर विशाल कुछ भी सुनने के मूड में नहीं था वो अलका के मुँह को छोड़ने लगता है… विशाल इतना उतावला हो जाता है की मनो इसी एक पल में मनो सब कर लेना छह रहा था

वो अलका को किचन के प्लेटफार्म इ लिटा के अपना लुंड पीछे से उसकी छूट में पेल देता है… छूट के गीला होने से लुंड के अंदर जाने में कोई परेशनी नहीं होती






अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मत कर मैं पागल हो जाती हु तेरे लुंड के लिए और तेरा बाप जग रहा है अभी के लिए जाने दे प्लससससससससस

विशाल वापस से उसे जमीन पे पटक देता है और उसके ऊपर आ के उसके छूट मरने लगता है…






अलका अजीब कश्कश में फास गयी थी जहां एक और जिद्दी बीटा था तो दूसरी और उसका सालो बाद आया पति

अलका- uuuuuuuuufffffffffff चोर दे मादरचोद इतनी जल्दी नहीं होता तेरा… जल्दी जाने दे तो आ पौंजी वर्ण आज सिर्फ अपनी माँ को छुड़ता देखता रह जायेगा और हिलता रहेगा मेरी छूट में लुंड जाता देख….

जब बहुत कहने पे भी विशाल नहीं मंटा तो वो उसे धक्का दे के उठ जाती है और फ्रिज से बोतल निकलने लगती है की तभी विशाल पीछे से पकड़ के उसके छूट में अपना लोढ़ा उतर देता है






अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ममममममअअअअअअ मत कर मैं जा रही हु देखना है टी आजा वर्ण मैं दूर एंड लाइट दोनों बंद कर दूंगी कह के तेज़ी से जाने लगती है और विशाल भी उसके पीछे पीछे जाने लगता है…

कमरे में पहुंचते hi अलका पानी की बोतल अशोक की तरफ बढ़ा देती है विशाल के द्वारा किये गए जबरदस्ती के वजह से वो वहां तो पानी पि नहीं पति सो यह अशोक को पिलाने के बाद बाकि का बोतल वो जातक जाती है…

अशोक का लुंड जो थोड़ी देर पहले खड़ा था वो वापस से सिकुड़ गया था..

अलका- ये किया ये तो सिकुड़ गया

अशोक कोई बात नहीं अब खड़ा कर दो

अलका- वो तो मई करुँगी hi…aur ये कहते हुवे वापस से अशोक के लुंड को मुँह में भर के चूसने लगती है…






अलका पुरे शिद्दत से अशोक का लुंड चूस के उसे खड़ा करने में लग जाती है…

अशोक- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh आराम से काट लोगी क्या

अलका- ssssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhh और फिर से अपने काम में लग जाती है

लुंड वापस से खड़ा हो जाता है और अशोक के अंदर ऊर्जा भी वापस से पैदा हो जाती है..

वो पुरे जोश में अलका का सर अपने लुंड पे दबा देता है और एक दो झटके लगा के लुंड बहार निकल लेता है क्यों की अब बरी मुँह चुदाई की नहीं असली चुदाई की थी…






वो अलका के दोनों जांघो के बिच हाथ दाल के उसके कमर को पकड़ता है और किसी हलकी गुड़िया की तरह उठा के बीएड के दूसरी तरफ पटक देता है..

अलका अब पेट के बल लेती थी और उसकी गांड ऊपर को थी… वो गौर से दरवाजे को देखती है तो विशाल अब भी वही खड़ा था ..






अलका की आँखों में उसकी बेबसी दिख रही थी मनो वो अपने नज़रो से hi कह रही हो..

बीटा आज तो तेरी माँ तेरा बाप hi छोड़ेगा तू सो जय ा फिर बस देख देख के हिलता reh….par तुझे तेरी अलका की छूट नहीं मिलने वाली uuuuuufffffffffff तेरी ये नजरे मुझे और ज्यादा कामुक बना रही है…

मैं तेरे सामने कैसे अपनी टंगे खोलू तू जाता क्यों नहीं है यहां से कितना बेशरम है अपनी माँ की चुदाई देख रहा है… आज अपने बाप के साथ तो कल किसी और के साथ भी देखने की ज़िद करेगा क्या… हाय राम ये मैं क्या सोच रही हु,…. उफ्फ्फ ये विशाल जब तक यहां रहेगा मेरा मन मेरे काबू में नहीं रहने वाला……

अलका अपने इन्ही ख्यालो में खोटी होती है की अशोक पीछे से उसके गांड के छेद पे जीभ रख देता है और उस तंग भूरी सुराख़ को अपने जीभ से कुरेदते हुवे उसकी जुबान अलका के छूट पे पहुंच जाती है…






जिसका स्वागत अलका अपनी गांड उठा के करती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अशोक प्लस

अशोक- क्या प्लस???

अलका- कुछ करो अब नहीं रहा जा रहा है कितना चाटोगे अब घुसा भी दो…

अलका विशाल के होने के वजह से खुल के बोल भी नहीं पा रही थी पर इन सब से अनजान अशोक तो खुल के सेक्स चाहता था…

अशोक- क्या मेरी जान खुल के बोलो तुम ऐसे कब से शर्माने लगी…

अलका- (तेरा बाप है की खुले बिना डालेगा नहीं और तू जाने वाला नहीं फिर मैं क्या करू….? अब तू देख मेरी बेशर्मी यही देखने को खड़ा है तो दे कह बीटा अपनी माँ की बेह्स्रमि) uuuuuuffffffffffoooooo अशोक अपना लुंड डालो मेरे छूट में और छोड़ो mujhe…faad दो मेरी छूट औरबुझा लो अपनेदो सालो की pyas…..uuuuuuuuffffffffffff मझसे नहीं रहा जाता अब और…

अशोक- ये हुई न बात और ये कहते हुवे वो अलका के दोनों कूल्हों के बिच लुंड रख के घिसने लगता है अलका भी अपनी गांड उठा के उसके लुंड का मस्सगे अपने चूतड़ों से करने लगती है






अशोक का लुंड अब अलका कैग एंड और छूट पेग हिज रहा था और अलका अपने कूल्हों को आगे पीछे कर के उसका पूरा आनंद ले रही थी…..

अशोक- आआआआह अब तो मुझसे भी नहीं रहा जायेगा.. कहते हुवे वो अलका को पलट के पीठ के बल लिटा देता है और अपना मोटा कला तगड़ा लुंड उसके छूट के मुहाने पे रख कैद हिरे से एक धक् दे मरता है..






छूट गीली होने के वजह से लुंड अंदर जाने लगता है पर वो इतना मोटा था खास कर के उसका आलूबुखारा जैसा टोपा की वो छूट के मुँह पे hi फास गया था..

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh fuckkkkkkkkkkkkkk

अशोक लुंड को एक बार खींचता है और दुबारा से उसे अलका के छूट में पेल देता है इस बार लुंड अलका की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस जाता है..

अलका- aaaaaaaaaaaaah मर gayi……dhire बहुत मोटा है तुम्हारा…

अशोक- उसके होंटो को चूमने लगता है जिसमे अलका भी खो जाती है और थोड़ी देर हंतो को चूसने के बाद अशोक अपने लुंड को बहार खींच क ीक जोर का धक्का लगता है जिस से पूरा का पूरा लुंड उसकी बुरा को फाड़ते हुवे अंदर अपनी जगह बनाने लगता है

अलका- uhuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh hggggggggguuuuuuuuuuuuuuuu क्यूंकि अशोक अब भी सके होंटो को चुम रहा है जिस वजहसे अलका चीची तो थी पर उसकी आवाज उसके मुँह और गले में hi डाब के रह gayiii’…..Aur फिर देखते hi देखते अशोक अपना लुंड अंदर बहार करने लगता है…






8-10 धक्को में hi अशोक का लुंड अलका की छूट में अपनी जगह बना लेता है और अलका भी उसके लुंड को अपना गांड उठा उठा के पूरा लेने अगति है…..

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ऐसे hi छोड़ो मुझे आह्ह्ह्ह अशोक बहुत दिनों बाद ये गर्माहट मिली है मेरे छूट को आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मममममअअअअ

अशोक भी अपने धक्के जारी रखता है

अलका- थोड़ा तेज़ कर uuuuuuuuuugggggggggggggghhhhhhhh

अलका का ध्यान एक बार फिर से दरवाजे पे जाता है तो वो विशाल को अब भी वही पति है…






अलका विशाल को उकसाने के लिए अब अपने बेशर्मी पे आने लगती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh अशोक क्या जादू है तुम्हारे लुंड में मैं कितना तदपि हु इसके लिए uffffffffffffff ऐसे hi फाड् डालो मेरी छूट को aaaahhhhhhhhhhh

अशोक- धीरे बोल रंडी अभी तुझे विशाल की फ़िक्र थी अब ऐसे चिल्ला रही है सच में जग जायेगा…

अलका- ooooooooooohhhhhhhhhhh अशोक जग जाने दो उस मादरचोद को व भी देख लेगा उसका बाप कितनी दमदार चुदाई करता है उसकी माँ की aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh

अशोक अपनी टैरिफ सुन के अपने आप को मर्द समझते हुवे तेज़ धक्के मरने लगता है पर उसे क्या पता ये साडी चल तो विशाल के लिए था…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh देख विशाल तेरी माँ चुद रही है देख तेरे बाप का फौलादी लुंड तेरी माँ के छूट का भोसड़ा बना रहा है…. Uuuuuuuuuuuuuuufffffffffff अशोक तुम मुझे चोर के क्यों जाते हो …

अशोक- तुम वासना में अंधी हो जाती हो और कुछभी बोलने लगती हो….

अलका- क्या हुआ जणू तुम्ही ने तो ये सब सिखाया है….

अशोक- उसके गांड पे झापड़ लगा देता है,,,… कही विशाल सच में आ गया तो

अलका- आए जाने दो मुहे कोई परवाह नहीं तुम साथ हो तो में किसी से क्यों daru….tez धक्के लगाओ अशोक मेरा आने वाला है…






अशोक भी धक्को की स्पीड बढ़ा देता है और तेज़ तेज़ छोड़ने लगता है पर अलका का मन और तेज़ धक्के खाने का था.. जिसके लिए वो अशोक को गालिया देने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अशोक जोर से छोड़ अपनी बवि को नहीं तो बगल में लेता तेरा बीटा छोड़ देगा उसकी छूट aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh तेरे लुंड में डैम नहीं बचा लगता है..

Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh विशाल आज्ज्जा मेरे bête देख तेरी माँ की छूट बहने वाली है पिजा इसके रास को…. दूध तूने बहुत पिया है आज छूट का रास भी पि ले…

बेचारा ये सरे हमले विशाल अपना लुंड हिलाते हुवे झेल रहा था…

अशोक- तू पक्का रंडी हो गयी है ऐसे चिल्ला रही और बुला रही है सच में आ गया तो..

अलका- आ जाने दो तुम्हारे लुंड में डैम नहीं बचा वही छोड़ लेगा मुझे

कोई मर्द इतनी बात कैसे सुन सकता है यही बात अशोक के लिए भी थी वो भी अब चुदाई की स्पीड डबल कर देता है






वो पुरे राफ्तेर से अलका की छूट में अपना लोड पेलने लगता है….

अलका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh मर गयी फाड् ड्डी तुमने मेरी छूट आआअह्हह्ह्ह्ह मैं गयी.. ऐसे hi धक्के मारो uuuuuuuuuffffffffffff छोड़ो मुझे अशोक जोर जोर से छोड़ो फ़क में

और एक तेज़ चीख के साथ अलका अपना पानी चोर देती है…






अलका- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmaaaaaaaaaa

पर अशोक का अभी नहीं हुआ था और वो अपनी धक्को को जारी रखता है छूट से गिरता फवारा और उसमे समता अशोक का पुरे कमरे में थप ताहप की आवाज़ आने लगती है अलका जो की पानी निकल जाने के बाद निढाल हो जाती है तो वही अशोक अपनी कर्मा उठा उठा के उसके छूट में धक्के लगा रहा था..






अशोक- चल मेरी रांड अब कुटिया बन जाए

अलका- एक मिंट अशोक साँस तो लेने दो

अशोक क्यों क्या हुआ अभी तो तुझे मेरे लुंड में डैम नहीं लग रहा था और अब थक गयी तू साली चिनार… तेरे छूट में अब वो बात नहीं रही रंडी…

अशोक की बात अलका के बदन में आग लगा देती है क्यूंकि ललकारने का काम अलका का था और उसका वही हथ्यार किसी ने उसपे चला दिया था…

अलका- बस है के उसके तरह हफ्ते हुवे देखती है और कुछ नहीं कहती बल्कि थकी होने के बावजूद अभी अभी छूट का कामर्स बहाने के बाद झा उसे थक के निढाल हो जाना चाहिए था वही वो बड़े hi कामुक अंदाज़ में कुट्टी बन के अपनी गांड अशोक की तरफ घुमा देती है..






अलका- आजा देखु कितना डैम है तेरे में निचोड़ लुंगी तुझे भड़वे मादरचोद…

अब अलका को इस बात का कोई फ़र्क़ नहीं था की बहार कौन खड़ा है अब उसे अपनी आग शांत करनी थी फिर उसके लिए जॉब hi कीमत चुकानी पड़े

अशोक- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh क्या गांड है साली तेरे उउउउउउफफ्फफ्फ्फ़ और एक छठा उसके गांड पे लगा देता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhh और जोर से मार

अशोक- और तेज़ छठा लगता है….

अलका- बस इतना hi डैम बचा है तेरे में..

अशोक भी जैसे पागल हो के थपडो की बरसात कर देता है जिसके दर्द में अलका रोने तो लगती है लेकिन वो हर मन ने की जगह और मरने को कहती है






अलका की गोरी चिकनी गांड अब बिलकुल लाल हो चुकी थी पर अलका जाने किस मिटटी की बानी थी..

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhh यस स्लैप में स्लप्प्प ों माय अस्स डैडी फ़क में यू मोथेरफुकेर

अशोक भी ाको को डोगग्य बना के पीछे से लुंड पेल देता है और साथ hi थप्पड़ मरता रहता है…






Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh अशोक छोड़ो मुझे बेबी फाड् दो मेरी छूट बहुत मजा आ रहा है मेरे गांड को अपने दांतो से काटो न चबाओ मेरे इन गोर गोर चुत्तड़ो को जिसे तुमने लाल कर दिया है…

अशोक भी किसी आज्ञाकारी पति की तरह अलका के चूतड़ों पे अपने दांतो के निशान चोर्ने लगता है..

दोनों मिया बीवी चुदाई के चरम पे थे जहां अशोक का लुंड कभी भी पानी चोर सकता था तो वही अलका भी एक बार फिर से अपने छूट का पानी बहाने को तैयार थी…

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ऐसे hi धक्के मारो तेज़ तेज़ आआआआअह्ह्ह मायआ

अशोक- हाँ मेरी जान ये ले

अलका का पानी एक बार फिर से निकल जाता है और वो थक के गिरने को होती है की तभी अशोक उसे वापस से खींच लेता है और धक्के मरने लगता है…






अलका के पैरो में मनो बिलकुल भी जान नहीं बची थी वो तो बस अशोक के सहारे कड़ी थी या घोड़ी बानी thi…..ya ये कहना ज्यादा सही होगा की वो उसके बहो में झूल रही थी...

पुरे कमरे में फच फच की एवज गूंज रही होती है….. और फिर एक गुर्राहट के साथ अशोक भी अपना पानी अलका के छूट में बहाने लगता है..

अशोक- ooooooooooooooohhhhhh maiaiiiiiiiiiiiinnnnnnnnnnn भी गया






अशोक अपना गरम गरम पानी अलका के छूट के ऊपर उड़ेलने लगता है… अलका भी आंखे बंद किये बस तेज़ तेज़ सांसे लेते हुवे हांफ रही थी…. अशोक अपने लुंड के बचे पानी को अलका के मुँह में उड़ेलने लगता है पानी की सुगंध नाक में जाते hi अलका जो आंखे बंद किये हांफ रही थी उसकी आंखे खुल जाती है और वो कामुक मुस्कान के साथ अपना मुँह खोल के अशोक के लुंड को मुँह में भर के उसके पानी को गटकना सुरु कर देती hai..lund का पानी अलका के लिए मनो कोई एनर्जी ड्रिंक हो जिसका टास्ते जुबान पे आते hi उसमे ताज़गी आ जाती है फिर चाहे वो कितनी भी भीषण और दर्दनाक चुदाई से गुज़री हो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता….





दोनों मिया बीवी अपने चरमसुख को प्राप्त कर चुके थे और बहार खड़ा विशाल भी अपने लुंड को मसलते हुवे अपनी नंगी माँ के कामुक बदन को देख रहा था….

चुदाई का खेल पुरे 2 घंटे चला था रात के 3 बज रहे थे और परिवार क्र तीनो सदस्य वासना में लिप्त थे जहां अशोक को उसकी मंजिल मिल गयी थी तो वही अलका के छूट ने भी 3-4 बार पानी बहा दिया tha…par विशाल को न छूट मिली न अलका… उसे मिला तो बस एक गर्मागर्म चुदाई प्रोग का लाइव शो….

अशोक- मुझे लगता है तुम फि से तैयार हो रही हो फॉर थे नेक्स्ट राउंड????

अलका- हाँ अशोक मेरा जी नहीं भरा है अभी मुझे और छोड़ना है तुमसे मेरे ान गैंग तोड़ दो ऐसा छोड़ो मुझे… मेरे बुर पे अपने लुंड से ऐसे प्रहार करो की मैं सुबह चल भी न पाव……

Ashok-bahut जान है तेरे में मेरी जान ….

अलका- तो तुम निकल दो मेरी जान कह के उसके लुंड को दन्त से काट लेती है…






वासना में अंधी अलका अशोक के लुंड को कुछ ज्यादा hi जोर से काट लेती है जिसके वजह से अशोक की चीख निकल जाती है और चीख काफी जोरदार tha…aur दर्द में उसका हाथ खुद hi अलका के गाल पे चला जाता है..





थप्पड़ इतना जोरदार था की पूरा कमरा गूंज जाता है और अलका का गोरा कोमल गाल एक डैम से लाल हो जाता है...

अशोक- क्या कर रही हो चबा जाएगी क्या साली रांड…

अलका- मुझे इस रस्ते पे लेन वाले भी तुम hi अशोक मुझे रंडी तुम्हारे नए नए फंतासी ने hi बनाया है तो अब इस रणदीपाने को तुम्हे hi संभालना होगा… ये कहते hi अलका अशोक को बीएड पे धकेल देती है और खुद उसके मुँह पे आ के बैठ जाती है….






अशोक अपनी जुबान दाल के अलका के छूट चूसने लगता है पर वो सायद कुछ कहना छह रहा था लेकिन अलका का उसके मुँह पे बैठने के वजह से वो बोल नहीं पा रहा था..





अलका के छूट से निकलता पानी जो उसके लुंड और अलका के छूट से मिला जुला कॉकटेल था वो अशोक के मुँह में भरने लगता है… अशोक भी अलका की गांड और चूचियों को दबाते हुवे उसके छूट से निकलते रास को पिने लग रहा tha…pura मुँह भर जाने के बाद वो अक को धक्का मर के अपने उपरसे उतर देता है और अपना मुँह अलका के मुँह पे रख देता है..

और अपने मुँह में भरा दोनों का रास उसके मुँह में उड़ेलने लगता है..






अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अशोक तुमने तो मुझमे फिर से जान दाल दिया





कमरे का दृश्य बड़ा कामुक था अलका एक बार फिर से गरम होने लगती है. उसके गर्मी मनो उसके रोम रोम से निकल रही हाउ ो कुछ इस कदर लाल हो गयी thi…lagatar एक दूसरे के मुँह से कामर्स चूसते हुवे और एक दूसरे के बदन को मसलते हुवे काफी देर हो चुक्का था..

अब अलका अपने आप को अशोक से चुदती है और खुद अशोक के मुरझाये लुंड पे बैठ के उसपे अपनी गांड पटक पटक के तो कभी छूट रगड़ के उस नाग को जगाने की कोशिस करना सुरु कर देती है….






अलका- क्या हुआ अशोक ये खड़ा क्यों नहीं हो रहा है तुम सच में बुड्ढे तो नहीं हॉग ए….

ऐसा हुआ तो मेरी जवानी कौन संभालेगा??????

कौन मेरी गर्मी शांत करेगा?????? कौन तुम्हारी अलका के छूट की आग बुझायेगा असगोक???

कुछ करो जल्दी से वर्ण तुम्हारी बीवी सच की रंडी बन के किसी के निचे अपनी टंगे खोल देगी…

ये साडी बाटे अलका अनायास hi अपने मुँह से निकल रही थी जिसका एक वजह तो उसके शरीर की बढ़ती गर्मी थी बूत सबसे बड़ी वजह दरवाजे पे खड़ा उसका बीटा विशाल था जो अब भी दांते हुवे था मनो पूरी फिल्म देख के hi जायेगा…






अलका का इस तरह से हुमिलिएशन अशोक के लिए नया नहीं था वो दोनों चुदाई में एक दूसरे को भरपूर हुमिलियते करते है जिस से उनकी वासना बढ़ती है और वो खुल के चुदाई कर पते है…

अशोक- बस मेरी जान अभी ऐसे hi अपनी गांड रगड़ इस्पे ये जल्दी hi अपनी औकात पे आ जायेगा..

अलका भी पुरे ताक़त से म्हणत कर रही थी ुर अपने कमर को हिला हिला के अपनी छूट और गांड अशोक के लुंड पर रगड़ रही थी लेकिन अशोक का लुंड अब खड़ा होने का नाम नहीं ले रहा था… और अलका की गर्मी बढ़ते जा रही थी सामने विशाल था जो उसकी गर्मी मिटा सकता था पर अशोक के होते वो जा नहीं सकती थी… अलका अपने शरीर के गर्मी से पागल हो रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे






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अलका- अशोक कुछ करो वर्ण मैं तुम्हारे सामने तुम्हारे bête से छोड़ने चली जाउंगी मादरचोद हिजड़े…

अशोक- आआआआआसस्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह थोड़ा साँस तो लेने दे रंडी साली चिनार

अलका- मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा है तुम जल्दी से मेरी गर्मी शांत करो बेबी.. तुम्हारे लिए तब तक ड्रिंक बनाऊ???

तुम्हे टाइम मिल जायेगा और पिने से तुम ज्यादा पागल हो के मुझे छोड़ते हो uuuuuuuuffffffffff ये मेरी छूट कब शांत होगी….

अशोक- हाँ ये सही रहेगा….

फिर अलका शराब लेने के लिए बहार बने बार की और जाने लगती hai…baar हाल के पास था तो वहां विशाल का मिलना तो तय था…






अशोक अलका को जाते हुवे एक तक उसकी मटकती गांड देखे जा रहा था और मन में कहता है… उफ्फ्फ्फ़ उम्र के साथ ये तो और गरम होते जा रही है और मेरा ये लुंड है जो की मेरा साथ नहीं दे रहा है क्या करू मैं??? पहले पता होता की ये दो राउंड में भी शांत नहीं होगी तो वियाग्रा ले लेता पर अब भी ले सकता हु ये सोच कर अशोक ालमिरह से वियाग्रा लेने को उठता है तभी उसे वाइब्रेटर भी दिख जाता है जिसे वो उसे कर के अलका की गर्मी निकल सकता tha..wo जल्दी से वियाग्रा खा लेता है और वाइब्रेटर भी उठा के सिरहाने रख देता है..

उधर अलका को आता देख विशाल फिर से उसे दबोचने लगता है की तभी अलका कहती और कब तक जागेगा सजा ये तो पता नहीं कब तक चलेगा सजा बेटे..

विशाल- क्यों मेरे सामने होने से तुझे छोड़ने में मजा नहीं आ रहा है साली रंडी

अलका- ऐसी बात नहीं है बेटे तेरे सामने होने से तो मेरा जोश और डबल हो गया है पर तेरी ये तड़प मेरे से देखि नहीं जा रही है...

िशाल- तो कुछ करो न माँ देखो मेरे लोडे को फटने को हो रहा है..

अलका- क्या करू कैसे करू तेरा बाप 2 साल स भूका बैठा है...

विशाल- उस से ज्यादा तो तू भुकी है मेरी रानी

अलका एक कामुक समयले कर देती है पर कुछ कहती नहीं क्यूंकि कही न कही ये सच भी था..

alka-acha मैं कुछ तरय करती हु तब तक तू थोड़ा बर्दाश्त कर ले मुझसे तेरी ये हालत देखि नहीं जा रही है मैं तेरे बाप को मोठे मोठे पेग पीला के आती हूँ तेरे पास अभी के लिए तोडा बर्दाश्त कर ले मेरे लाल…. और ये कहते हुवे उसके होंटो को चुम लेती है….






साथ hi उसके लुंड को मुठियाने लगती है..

अलका- अब से छोड़ रहा है तेरा बाप मुझे पर मुझे सटिस्फैक्शन तो अब तेरे लुंड से hi मिलती है uuuuuuuuuuuufffffffffffffff teraaaaaaaaaa ये जवान तगड़ा लुंड मैं इस से दूर नहीं रह पति हु..

विशाल- तो कुछ करो न माँ देखो मेरी क्या हालत हो गयी है… और तुम्हारी जरूरत यहां नहीं निचे है कहते हुवे अलका को निचे बिठा देता है और अपना लुंड अलका के मुँह में दाल देता है..






अलका भी कुछ हिसाब से बैठी थी की उसकी बड़ी एप्पल शेप गांड फ़ैल के और ज्यादा कामुक लग रही थी उसका चिकना पीठ और लम्बी सुराहीदार गार्डन पीछे अलका किसी कामदेवी का रूप लग रही थी… अलका का कमर जितनी पतली थी उसकी गांड उतनी hi बड़ी और सुडौल जिसपे अगर कोई चाहे तो शराब की बोतल बह रख दे तो वो गिरेगी नहीं इतने कमल के भरे बदन की मालकिन है अलका... विशाल भी अपने पूरा पंजा अलका के पीठ पे बड़े hi ताक़त के साथ चला रहा था…

विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhh mommmmmmmmmmmmm

इधर अलका विशाल के लुंड को चूसने में खो गयी थी तो उधर अशोक उसके आने का वेट कर रहा tha….ab देखना ये है की कौन किसके पास पहले पहुँचता है....

1) अलका अशोक के पास या ....

2) अशोक अलका के पास

स्टे तूने गाइस...
 
गाइस अपने प्रेडिक्शन कमेंट करो क्या होने वाला है....
 
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विशाल जो के काफी देर से उत्तेजित था अलका के हाल में आते hi उसपर टूट पड़ता है और अपना लुंड अलका के मुँह में दाल के अलका के मुँह को छोड़ना सुरु कर देता है…





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अलका भी विशाल के लुंड को जितना अंदर हो सकता था ले रही थी वो जानती थी विशाल काफी उत्तेजित है और अगर वो अपने कामुक प्रहार कर देगी तो विशाल ज्यादा देर टिक नहीं पायेगा यही सोच के अलका जोर जोर से विशाल के लुंड को अपने गले में उतरे लगती hai…vishal भी अलका के सर को अपने दोनों हाथो से पकड़ के पुरे जोश में उसके मुँह में अपना लुंड पेलने लगता hai…alka का अपने रूम से काफी समय हो गया था उसे डार्ट है की कही अशोक उसे देखने यह न आ जाये या किसी फंतासी के चक्केर में हॉल में न पहुंच जाये इसलिए वो जल्दी से जल्दी विशाल को फ्री करने में लग जाती है… और आखिर में अलका की चल काम कर जाती है. और विशाल अपना लावा अलका के मुँह में गिराने लग जाता है..





विशाल के लुंड से काफी ज्यादा पानी निकलता है जिस से अलका का पूरा फेस धक् जाता है और चिनार अलका उसके पुरे पानी को अपने चेहरे से पॉच पॉच से खा जाती है….

अलका- चल हैट हो गया न तेरा अब जाने दे वर्ण तेरा बाप आ जायेगा..

विशाल- आप जल्दी निपटाओ न उन्हें..

अलका- जाने देगा तब न तू चोर पहले मुझे ये कह के वो विशाल से अलग होती है और शराब की बोतल और दो गिलास ले के अपने रूम की और जाने लगती है..

विशाल भी जाते हुवे अपनी माँ के मोठे गांड को घर रहा था… सच hi तो खा था अलका ने जब bête कोप ता हो उसकी माँ चुद रही है तो ऐसे में कोई बीटा कैसे सो सकता है.. विशाल का हाल भी कुछ ऐसा hi था … जहां अशोक और अलका अपने मस्त चुदाई का आनंद ले रहे थे ये बेचारा सिर्फ देखने के लिए रात से जगा हुआ है…

अलका भी रूम में एंटर होते hi अशोक को आवाज़ देती है..

अलका- अशोक देखो में ले आयी तुम्हारी दवाई अब क्कोई बहाना नहीं चलेगा…

अशोक- बड़ा टाइम लगाडिया कहाँ रह गयी थी..

अलका- डार्लिंग मैं वाइन लेने गयी थी बूत फिर मैं विंडो के पास थोड़ी देर हवा लेने लगी थी …

अशोक- कहो तो विंडो कीटजी हवा के साथ hi तेरी चुदाई कर दू?

अलका- हाँ क्यों नहीं सुबह होने को है पडोसी मॉर्निंग वाक पे निकलेंगे और तुम्हारी बीवी को नंगा चुड़ते देखेंगे …

Ashok-timhe मजा नहीं आएगा?

अलका- आएगा सायद लेकिन पहले तुम ये पेग लगाओ फिर हम देखेंगे की हमे खा चुदाई करनी है..

इतना कह क ीक गिलास उसे देती है और दूसरा खुद ले के रूम में बने काउच पे बैठ जाती है…






अलका कुछ इस तारा से बैठी थी जहां से उसे दूर साफ़ दिख रहा था इसलिए वो जान बुझ के इस जगह बैठी थी और बैठने का अंदाज़ भी कुछ ऐसा था जैसे वो जान बुझ के अपना अंग प्रदर्शन करना छह रही हो…

उसकी एक तंग निचे तो दूसरी ऊपर थी और वो भी मुड़ी हुई जिस के वजह से उसकी चूड़ी हुई छूट जिसमे से अशोक का पानी निकल रह था वो साफ दिखाई दे रहा था…

अशोक भी शराब कैग हूत लगाने लगता है और पिटे पिटे कहता है… क्या बात है शराब से जयदा नशीली तो ुम लग रही हो.. शराब की जगह तुम्हे hi पि जाऊ ऐसा लग रहा है

अलका भी उठ कड़ी होती है और कहती है क्यों नहीं तुम मुझे hi पि जाओ अपनी अलका को और इतना कहते hi वो वाइन की बोतल अपने आप पर उड़ेलने लगती है…






अलका- आओ अशोक पि जाओ मुझे आज तुम्हारी शराब बह मैं हूँ और चखना भी ेके क बून्द चूस लो आओ न मेरे राजा… वहां बैठ के गिलास से पिने में वो मजा नहीं आएगा जो मेरे इस नंगे बदन से खेलने में इसे मसलने में और मेरे रोम रोम में जो शराब समां गया है उसे चूस चूस के पिने में आएगा……

आओ अशोक पि जाओ चबा जाओ अपनी अलका को वो वेह्शीपन दिखाओ जो तुम जवानी में दिखते थे जैसे मुझे तोडा करते थे छोड़ छोड़ कर आओ आज फिर वही रात है .. तुम्हारी कामुक बीवी तुम्हारे सामने नंगी कड़ी है छोड़ोगे नहीं इसे…

इतने कामुक शब्द वो भी अलका जैसी कामुक औरत के मुख से कोई कैसे बर्दाश्त कर पाए… इधर वियाग्रा ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया था अशोक के मुरझाये लुंड में धड़कने आ गयी thi….wo उठ के अलका की तरफ जाने लगता है ..

अलका भी हिरणी की तरह बलखाती हुई काउच पे लेट जाती है और अपनी दोनों टंगे हवा में लहरा के अशोक को अपने छूट का न्योता दे रही थी…






ये सरे शब्द बेशक अशोक के लिए निकला जा रहा था पर इसका असर अशोक के साथ बहार खड़े उसके bête पे भी होने लगता है जिसके लुंड से पानी निकले अभी 10 मिंट भी नहीं हुआ था…

अशोक को अपनी और अत देख अलका के अंदर भी रोमांच आने लगता है उसकी नज़र अशोक के लुंड पे पड़ती है तो उसे भी तोडा शोक होता है की इसमें जान आ गयी मतलब विशाल का चांस कैंसिल hai….par खिलाडी जॉब hi हो बाप या बीटा अलका को तो आज अपने छूट में लुंड लेने से मतलब था जो उसे किसी भी हल में मिल hi जाता..

अशोक अलका के करीब आते hi अपने हाथ उसके जिस्म पे फेरना लगता hai…jis से अलका के अंदर जल रही आग को हवा मिल रही थी वो अपनी दोनों टंगे खोल के अशोक को अपने छूट पे सत्ता लेती है और अशोक भी उसके छूट पे अपना जीभ रख के उसे चेतना शुरू कर देता है…






अशोक अलका के सुलगते जिस्म से शराब की बुँदे चाटने लगता है वो उसके छूट को चाट तो रहा hi था [arc hut se upar uski sunahre chote chote baal jise jhant kehte hai usme fase sharab ki bundo ko bhi kisi resedar fal ki tarah chus chus ke wha fase shara ko pi raha tha..alka bhi ppin ke machli ki tarah tadap rahi thi.. uska pura sharir kisi nageen ki tarah machal rahi thi..





कमरे का दृश्य इतना कामुक और भड़काऊ था की स्वयं काम देव भी मनो इन दोनों की कामक्रीड़ा देखने रुक गए हो.. जहां एक और अश्क अलका के छूट के पानी से शराब और उसके छूट कपनी पि रहा था तो साथ hi वो अलका के चुचिओ को भी बराबर मसल रहा था.. अलका को भी वसना में लिप्त बड़े कामुक अंदाज़ में मोअन कर रही थी.. उसके अंग अंग में मनो वासना की ज्वाला जल रही हो… उसे समझ नहीं आ रहा था की वो छूट चटाई पे रियेक्ट करे या अपने चुचिओ के मसले जाने पे दोनों hi जगह पे हो रहे हमले से वो आनंद की चरम सीम एप जा पहुंची थी…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अशोक ऐसे hi बेबी ऐसे hi aaaaaaaaaaaaaghhhhhhhhhhhhhhh और अंदर डालो अपनी जीभ …. ऊँगली भी दाल दो अपना बहुत सही जा रहे हो aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मैं मर hi न जाऊ आज्ज

अशोक भी अपनी बीवी के भड़कते आहे को देखते हुवे छूट में जीभ के साथ साथ अपनी ऊँगली डालने की सूझता है की वो ऊँगली छूट की जगह अलका के तंग गालिओ में उसके भूरे सुराख़ यानि उसके गांड में पेल देता है….






अलका- पे ये दोहरा असर मनो उसे अंदर तक झकझोर देता hai..wo अंदर तक कैंप जाते है और अशोक के सर को जोर जोर से अपने छूट पे दबाने लगती है…

अशोक भी अपनी बीवी अलका के ताल में ताल मिलते हुवे पुरे जोश में जीभ चलने लगता है लेकिन उस से भी ज्यादा जोश में और तेज़ी से उसकी उंगलिया चल रही थी…

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh अशोक मादरचोद क्या कर दिया तूने मैं पागल हो जाउंगी मई मर गयी aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh खा जा भड़वे मेरी छूट को घुस जा इसके अंदर जैसे अपनी बहन कामिनी के छूट में घुसा था उसके शादी वाले din…ye कह के अलका जोर जोड़ से अपनी छूट चल रही थी और ास्जक का सर अपने छूट पे दबा रही थी..

अशोक अलका के इस बात को सुन कुछ ज्यादा hi जोश में आ जाता है और वो अलका के छूट को चाटने के साथ काटने भी लगता है…

अलका इस वक़्त सच में बिकुल बेकाबू हो गयी थी.. उसका उसपे कोई बस नहीं था वो कुछ भी बड़बड़ये जा रही थी..

अलका- क्या हुआ भड़वे बहन का नाम सुन के मेरी छूट काट रहा है काट मदिर्चड काट आआआआआह मैं गयी मैं गयी … इतना कहते hi अलका अशोक के चेहरे को साइड कर के कड़ी सी हो जाती है और तेज़ सैलाब उसके छूट से फुट फाड़ती है..






अलका का ओर्गास्म इतना ज्यादा और तेज़ था की वो मूतने hi लगी थी और वो मूत की धार सिद्ध दरवाजे की और जाए रही थी मनो वो यह से विशाल को अपना मूत पिलाना छह रही ho…lekin अभी अभी अलका ने अशोक को उसके बहन कामिनी के नाम से जो उकसाया था ो अब अशोक के ऊपर असर करने लगा था अलका जहां उठ के पेशाब कर रही थी तो वही अशोक ने मजबूत गिरफ्त से पकड़ के उसे वापस लिटा दिया और अपना मुँह उसके छूट पे लगा के उसके छूट का पानी पिने लगता है..





अलका के छूट से बहती धार मनो ख़तम होने का नाम hi न ले रही हो अशोक का पूरा मुँह अलका के मूत से भर गया था जिसे वो गाठ गाठ गटकता जा रहा था.. बहार खड़ा उनका बीटा अपने माँ बाप का ये घिनोना खेल देख रहा था और एक शब्द जो उसके कानो में गूंज रही थी वो था उसके कामिनी बुआ का नाम……

खैर कामिनी की बात हम फिर कभी करेंगे आज इन दोनों की कामलीला देखते है और देखते है की ये क्या क्या कर गुजरेंगे आज की रात….

अलका का पानी निकल के उसका शरीर हल्का हो गया था और उसके पेशाब से पूरा कर्मा और काउच गिला हो जाता है इसलिए अलका अब वापस से बीएड पे जाती hai….aur बीएड पे उसका चढ़ने का अंदाज़ भी मनो किसी क उकसाने से काम न था…






वो चाहती तो सिद्ध चल के भी बीएड पे चढ़ सकती थी लेकिन वो किसी कुटिया की तरह अपनी गांड हिलाते हुवे चढ़ती है जिस से उसके गोल मटोल वैक्स किया हुआ चिकना चिकना गांड अशोक को ललचाने लगता है… गांड पे अभ अलका के छूट का पानी फैला हुआ था और चिकनी गांड के होने से पेशाबब की बुँदे भी मनो सितारों की तरह अपनी चमक दिखा रही हो.. कामुक आउट के ऊपर ये साडी चीजे उसे और ज्यादा कामुक बना देती है कुछ वही हाल अलका के साथ भी था… जहँ पहले hi उसके सौदर्यता का बखान करने के लिए शब्द काम पड़ते है वहां इस तरह से पेसाहब जैसी चीजे भी उसकी सुंदरता को बढ़ा रही थी..

अशोक का लुंड भी अब टाइट होने लगा है वियाग्रा ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया tha…jhn अशोक ने बिना वियाग्रा के hi अलका को 3-4 बार उसके छूट का पानी निकल दिया था और अभी अभी उसे िटन्स जारदास्त ओर्गास्म दिया की वो उतने hi लग गे थी तो वियाग्रा के बाद तो उपरवाल hi जाने अलका का क्या hoga…khair जॉब hi अलका हार मैंने वाली औरतो में से तो है नहीं….

अशोक भी अब अलका के पीछे पीछे बितर पे चढ़ जाता hai…dono मिया बीवी नंगे सुलगता जिस्म एक दूसरे से चिपक क ीक दूजे के जिस्म के साथ खेल रहे थे अशोक अपने हाथ अलका के चूतड़ों से होते हुवे उसके पीठ गार्डन और कूल्हों पे फेर रहा था तो अलका भी अशोक के खड़े हो रहे लुंड को अपने हाथो का गर्माहट दे रही थी…

अलका उठ के अशोक के लुंड की और बढ़ती है और लुंड का टोपा जो इतना कड़क हो गया था मनो आलूबुखारा और उसपे छोटे से छेद से निकलता उसका प्रेकम






जिसे देख अलका की जुबान ललचाने लगती है और वो उसे छोटे से छेद से निकलता अशोक का पानी को किसी तार की तरह खींच के उसे अपने जीभ से चाट लेती है…………

Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कोई इतना कामुक कैसे हो सकता है…

अशोक- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरी jaaaaaaaaaaaannnnnnnnnnnnnnn आज इरादा क्या है तुम्हारा….

अलका- sssssssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhh यू जस्ट एन्जॉय बेबी…..

और अलका अपने सुर्ख गुलाबी होंठो को खोल के अपना जीभ उसके कड़क लुंड पे फेरना लागतिअ है






अशोक- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh फुक फुक यू बीच……

अलका- हहहह फ़क में मोरे दादी फ़क में मोरे ी ऍम यू बीच डैडी…

अलका जैसी जोई जादूगरनी हाउ ो मिनट से पहले अशोक के लुंड को चाट के तैयार कर देती है hai….aur अशोक का लुंड भी कड़क हो जाता है

अशोक बिना देरी किये तहत है और ालको को धकेल देता है जिस से वो बिस्तर पे गिरने को होती है की तभी वो उसके गार्डन से पकड़ के खींच लेता है और अपना खड़ा मिटा मुसल उसके मुँह में पेल देता है और बड़े बड़े शॉट्स लगाने ला जाता है..






और पुरे जोश में अपना लुंड अलका के मुँह में पेलने लगता है साथ hi अलका का सर अपने लुंड पे दबा देता है.. अशोक का किया दबाव इतना जोरदार था और लुंड मोठे होने के वजह से अलका का मुँह इतना भर गया था की उस से हवा भी जाने की जगह न थी.. अलका का डैम घुटने लगता है वो तेज़ छटपटाहट के साथ हाथ अशोक के जांघ पे मरने लगती है पर अशोक उसके सर को आज़ाद के करने के जगह उसके सर को और झकझोर देता है और उसके नंगे पीठ पे एक जोरदार थपड मरता है जिसकी गूंज कमरे में फ़ैल गयी thi…sans न ले पाने से और डैम घुटने से अलका की आंखे बड़ी बड़ी होने लगती है उसकी छटपटाहट भी बढ़ गयी थी जिसे देखते हुवे अशोक अपना लुंड बहार खींच लेता है ….





अशोक कीचता तो अपना लुंड hi है पर बहार निकलता ढाई अलका का ढेर सारा लार उसकी जान और एक तेज़ खांसी

अलका अशोक की तरफ देखती है मनो उसकी आंखे कह रही हो मज़ा आ गया…

अशोक अब अलका को बीएड पे धकेल देता है जिस से वो गिर जाती है उसे समझते देर नहीं लता की उसकी चुदाई होने वाली है इसलिए वो भी अपनी टंगे फैला लेती है..

असहक अब अलका के छूट के ऊपर अपना लुंड रख के उसे ऊपर निचे करते हुवे उसके छूट पे अपना लुंड रगड़ने लगता है..






अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh दाल भी दो न

अशोक- oooooooooooohhhhhhhhhhhhhh मेरी जान कितनी आग है तेरे में

अलका- तो बुझा दे न भड़वे बाटे क्या छोड़ रहा है सामने मेरी कट पड़ी है वो chod..ya कामिनी की याद आ रही है…

अलका ये साडी बाटे जान बुझ कर बोलती है ताकि अशोक के अंदर आग भड़के और वो उसे जैम कर चोदे और वैसा hi होता भी है… अलका के बातो से वो भड़क जाता है और एक तेज़ झटके के साथ अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है…






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अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhhhhhhh मर गयी…

अशोक धक्को की स्पीड बढ़ने लगता है और पुरे जोश में अलका के छूट मरना शुरू कर देता है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaa हैं ऐसे hi ऐसे hi अशोक और तेज़ छोड़ो मुझे फाड् दो आज पूरी आग बुझा दो मेरे इस निगोड़ी छूट का बहुत परेशां कर्त है ये तुम्हारी अलका को aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh छोड़ो तेज़ तेज़

अशोक- हाँ मेरी जान आज तेरी साडी आग बुझा दूंगा बहन की लोदी

अलका- हाँ मैं बहन की लोदी हु और तू बहन का लोढ़ा मादरचोद … तू तो बहनचोद है… aaaaaaaaaaahhhhhhhhh

अशोक- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अलका कइँती कासी हुई छूट है तेरी…. आअहाहहहहहह

अलका- तो ढीली कर दो फाड् डालो इसे अशोक aaaaaaaaaaaahhhhh

और अशोक तेज़ तेज़ शॉट्स मार के छोड़ रहा था तो वही अलका भी अपना गांड उठा उठा के अशोक का लुंड पूरा पूरा ले रही थी….

और इसी क साथ अलका का बदन एक बार फिर से अकड़ने लगता है और एक बार फिर से अलका अपना पानी छोड़ने लगती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh अशोक मैं गयी मर गयी मैं aaaaaaaaaaaaaaaahhhhh

और अलका छटपटाहट में पलटने लगती है लेकिन अशोक उसके जांघो से पकड़ के उसे पलटने से रोक देता है और अपने झटके बरकरार रखता है…..






अलका के छूट बह जाने से वो बस अशोक के झटके पे हिल रही थी लेकिन कोई पर्तिकिर्या नहीं दे रही रही ..उसकी सांसे काफी चढ़ी हुई थी तेज़ तेज़ हफ्ते हुवे वो बस अपने छूट में लुंड लिए लेती हुई थी…

अशोक- इतनी जल्दी हो गया तेरा अभी तो कह रही थी मुझे छोड़ो मेरा ान गैंग तोड़ दो..

पर अलका इस बात का कोई जवाब नहीं देती वो बस मनो अपने शरीर की बची ऊर्जा को इकठा करने में लगी हो…

अशोक अलका को खींच के बीएड के किनारे ले आता है और दोनों टंगे उठा के उसके छूट को फिर से पेलने लगता है..






अशोक के हर झटके से अलका की चूचिया पानी भरे गुब्बारे की तरह हॉल रह थी

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh धीरे

अशोक- माँ की लोदी अभी तो माने शुरू hi किया है आज तुझे रंडी की तरह न छोड़ा तो मेरा नाम अशोक नहीं साली चिनार..

अलका- अब भी बस अशोक के बातो का जवाब दिए बना लेती लेती चुदाई का मजा ले रही थी…






अशोक के हर झटके से अलका के छूट में अब जलन होने लगती है

अशोक- चल कुटिया बन अब

अलका भी हफ्ते हुवे कुटिया बन जाती है और अपने गांड हवा में लहरा देती है…

अश्क भी पहले पिच से उसकी गांड उसकी छूट छत्ता है है उसके पुरे जिस्म के साथ खेलता है फिर बड़े hi आराम से अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है..






दर्द के मरे अलका अलका की साँस रुक सी जाती है.. (7-8 बार झड़ने पे भी चुदाई में इस तरह से दांते रहना कोई मज़ाक की बात नहीं है जो की अलका कर रही थी)

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh आराम से अशोक मुझे जलन हो रही है

अशोक चुप बहन की लोदी जलन तो तब होगी जब मैं झटके शुरू करूँगा अभी तो सिर्फ डाला hi है.. अभी से रो मत कुटिया…

और इतना कहते hi अशोक एक तेज़ झटका लगता है जिस से अलका का पूरा जिस्म सिहर जाता है वो छटपटाने लगती है गालिया बकने लगती है..

अलका- अशोक मादरचोद साँस तो लेने दे पेले जा रहा है शाम से uuuuuuuuuuuuffffffffffff रंडी नहीं हु मैं मादरचोद…….

इतना कह के वो दर्द के मरे सर झटकने लगती है की तभी…






अशोक उसके बाल पकड़ के खींच देता है और झटके मरना शुरू कर देता है…

अशोक- तू रंडी है मादरचोद आज तेरे सरे हवस मिटा के मानेगा ये अशोक.. 2 साल अलग ारः हु वो सब वसूल लूंगा… माँ की लोदी अलका

अलका अशोक को किश करने के लिए अपनी गार्डन पीछे को घुमा देती है.. और अपने होंठो को उसके होंठो की तरफ बढ़ा देती है..

अलका- अशोक किश में baby….suck माय लिप्स इवेंट तो सूचक योर लिप्स तू स्वीटहार्ट…

अशोक भी अलका को किश करने लग जाता है और अलका को मनो किश करने से hi एनर्जी मिलती है






वो बड़े शांति से अशोक के होंठो को चूस रही थी और अशोक उसके छूट में लोड अपील रहा था पुरे कमरे में फच फच की आवाज़ गूंज रही थी.. की तभी अलका अपनी असलियत पी एते हुवे गुर्राती है..

अलका- आजा अशोक दिखा कितना डैम बचा है तेरे में आज मैं भी देखु बहनचोद और उसे निचे लिटा के खुद उसके ऊपर आ जाती है और अशोक के लुंड पे बैठना शुरू कर देती है…






और पुरे जोश में अपना गांड अशोक के लुंड पे पटक पटक के चुने लगती है…

अशोक- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh

अलका- छोड़ अब मुझे फाड् दाल मेरी छूट फ़क में ोउ ासशोले

अशोक भी निचे से तेज़ तेज़ झटके लगा रहा था …… अलका अशोक के लुंड पे कूदते हुवे जब बहार देखती है तो ुसेविस्वस नहीं होता की विशाल अब भी अपनी माँ की चुदाई देख रहा है..






वो मुस्कुराते हुवे विशाल की तरफ देखती है मनो उसे कहना छह रही हो की बीटा सजा आज तुझे तेरी माँ और उसकी छूट नहीं मिलने वाली…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhh अशोक क्या हुआ थक गया क्या मार झटके बहन के लोडे छोड़ मुझे…..

अलका को लगता है इस तरह से प्रवोक करने से अशोक जल्दी झाड़ जायेगा पर उसे कहाँ पता था अशोक विग्रा ले के उसे छोड़ रह यही….

Ashok-bhi झटकी राफ्तेर बढ़ा देता है.. अशोक का ेके क धक्का अलका के छोटके मुँह क पहले से ज्यादा हॉल दे रहा रहा था ….अलका की छूट इतनी गीली हो गयी थी वो इतना पैन ऐकोर रही थी की प्र कर्मा पांच पांच पांच कर रहा tha..alka अशोक का पानी निकलने के लिए अपने छूट में लुंड लिए अशोक के ऊपर अपनी गांड गोल गोल घूमने लगती है… पर इसका असर उल्टाहोता है और अशोक की जगह एक बार फिर से अलका का छूट अपना पानी बहा देता है…






अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh माँ मर गयी फिर से अशोक aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मेरी छूट

ये वही है था जिसका इंतज़ार अशोक को था जब अलका के छूट से सैलाब बह जाने पिउ ो हाथ जोड़ कर रेहम की भीख मांगेगी और अशोक उसे तब तक तोड़ेगा जब तक उसका लुंड अपना लावा न उगल दे और ये वही घडी आ गयी थी…

अशोक एक बहुत hi कुटिल मुस्कान के साथ अलका को साइड में धक्का देता है जिस से चुद चुद के बेहाल हो चुकी अलका बेजान सी गिर पड़ती है …

अशोक इस बार बिना किसी चेतावनी के अपने लुंड को अलका के छूट में एक hi बार में उतर देता है धक्का बहुत hi जोरदार था जिस से अलका क्या उनका पूरा स्प्रिंग वाला गद्दा हिल जाता है… ईटा जोरदार धक्का बर्दाश्त करने के लिए अलका अभी तैयार न थी






वो बहुत hi जोर से चीख पड़ती है उसे इस बात की परवह थीं ा अशोक को की जो खेल उन्हने रात में शुरू किया था उसे खेलते हुवे अब सुबह होने वाली है और इतनी तेज़ चीख उनका बीटा सुन सकता है…

अशोक एक के बाद एक झटके लगाए जा ारः था जिस से अलका के छूट में तेज़ जलन होने लगती है और वो अशोक के हाथ पे तप करके मनो अपने हार की घोषणाकर रही हो पर उस काम के लिए अब देर हो चुक्का था अब तो ये खेल अशोक के लुंड से पानी निकलने पैर hi रुकने वाला है..

अशोक के झटको के प्रहार से अलका अब रोने लगती है…






अलका- अशोक प्लस रुक जाओ मुझे जलन हो रही है बस करो प्लस aaaaaaaaaaaaaaah मैं मर गयी रुक जाओ

अशोक- अभी खान मेरी रानी अभी तो लम्बा सफर है…

अलका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अशोक नहीं हो पायेगा मुझसे प्लस

अशोक- चुप बहन की लोदी

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh नहीं नहीं प्लस रुक जाओ

अशोक जो है वो रुकने का नाम hi नहीं लेता … अलका खुद को चुराने की कोशिश करने लगती है पर अशोक के मजबूत पकड़ के आए उसकी एक नहीं चलती…

अलका पष्ट हो के गिर जाती है तभी अशोक उसके कमर में हाथ दाल के उसे उठता है और उसे फिर से छोड़ने लगता है






अलका बिलकुल बेजान पड़ी अपनी छूट में शोक के पानी के बहने का इंतजार कर रही थी और अशोक की दरिंदे की तरह उसकी छूट बजा रहा था…

Alka-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अशोक मैं मर गयी रुक जा थोड़ी देर मुझे जलन हो रही है मैं और नहीं ले पाऊँगी रुक जा मादरचोद भड़वे की औलाद मैं तेरी रंडी बहन कामिनी नहीं हु चोर दे मदर छोड़

पर अलका के इन बातो का अशोक पर उल्टा ह असर हो रहा था वो और जोर जोर से छोड़ने लगता है इस बार वो लुंड के साथ साथ 2 ऊँगली भी उसके छूट में पेल देता है और






अलका के छूट के दानो को मसल देता है अलका को मनो जैसे करंट लगा हाउ ो कुछ इस क़दर तड़प उठती है….

अलका भी मैंने अब पागल हो गयी थी अगर उसे इस से छुटकारा पाना था तो अश्क का पानी निकले बिना नहीं ीलता इसलिए वो भी पुरे जोश इ आ जाती है और चिल्लाने लगती है..

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh छोड़ मुझे हाँ छोड़ ऐसे hi डैम लगा के दिखा कितना डैम है तेरे लोडे में मादरचोद फाड् दे दे मेरी छूट ह aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh और जर से मर झटके

अलका की छूट का मनो किसी ने न खोल दिया हाउ ो रह रह के उसके छूट से फरा फूटने लगा था..






एक लम्बी जुंग के बाद अशोक का ुण्ड भी जवाब देने लगा था उसका पानी किसी भी समय निकल सकता था. इधर अलका बिलकुल बेजान हो गयी थी अब उसका मुँह भी नहीं खुल रहा था …सच में अशोक ने उसे पूरा निचोड़ लिया था

और एक जोरदार झटके को अपना आखरी झटका बनाते हुवे अशोक अलका के छूट में hi झाड़ जाता है…






अशोक के लुंड से एक जोरदार फवारा निकलता है जो सीधे अलका के मुँह पे जा गिरता है जिसके गर्माहट से चुदाई के दर्द से बेहाल अलका की आंखे खुल जाती है और वो हफ्ते हुवे उस पानी के गर्माहट को अपने बदन पे ेहसुस करते हुवे हाफने लगती है… ा

अलका के शरीर में जान जैसा कुछ नहीं बचा था वो बस हांफ रही थी उसकी छूट सूज के लाल हो गयी थी जिसमे से उसका और अशोक का पानी बह रहा था.... लेकिन इतने के बाद भी जब अशोक अपने लुंड को उसके होंटो पे माला है तो वो मुँह खोल के उसका स्वागत करती है और जितनी बह जान उसमे बची थी वो सब समेत के अशोक का लुंड चूसने लगती है...






जो खेल उन्होंने रात के 10 बजे शुरू किया था उसे ख़त्म होते होते सुबह के 5 बज गए थे….

पर जो भी हो अलका के छूट को संतुष्टि तभी मिलती है जब उसके छूट से उसका पेशाब बहने लगता है और फिर आज अशोक ने तो ऐसे कई मोके लाये जब अलका चुदाई के दौरान hi मूतने लगती hai..ashok आज भी अलका को संतुष्ट करने का डैम तो रखता है और वो उसने साबित कर diya...par ये तो अशोक और अलका का hi खेल था आज विशाल ने भी देख लिएअपने माँ का असली रूप जो आगे आने वाले दिनों में उसके काम आ सकता है.... साथ hi आज उसे एक और राज का पता चला की उसकी बुआ कामिनी अपने hi है यानि उसके बाप अशोक की रखैल है...
 
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अशोक और अलका ने जो खेल सुरु किया था उसे ख़तम होते होते सुबह हो गयी थी.. और दोनों के शरीर में अब बिलकुल भी जान नहीं बची थी.. बीएड भी उनके कॉमर्स और अलका के छूट से निकले फवारे से बिलकुल गीली हो गयी thi..bistar के हालत को देख के कोई बी बता सकता था की रात जॉब hi औरत इस्पे सोई होगी उसका क्या हाल हुआ होगा…

दिन चढ़ गया था सूरज की तेज़ किरणे अब अलका के कमरे में प्रवेश करने लगती है… चेहरे पे पड़ती धुप से अलका की नींद टूट जाती है… वो अभी भी अपने आप क बिलकुल नंगी अशोक के बाँहों में पति hai…ashok भी बिलकुल नंगा अलका को अपने आगोश में भरे सोया हुआ था…









अलका उसका हाथ हतः के बीएड से उठती hai..use बहुत जोर की पेशाब आ रही होती है पर जो हाल अशोक ने उसकी रात में किट hi उसका ख्याल न होने के वजह से वो जैसे hi बीएड से उठती है उसके पेअर एक डैम से मनो जान hi न हो और वो वही गिर जाती hai…alka खुद को सँभालते हुवे वापस उठती है और वाशरूम में जा के अपने छूट से पेशाब की गरम धार बहाने लगती है…









रात भर कुटाई के बाद छूट से निकलता ये गरम पानी उसे कितना रहत दे रहा था ये तो उसके चेहरे का भाव hi बता रहा था,,…

अलका फ्रेश हो के कमरे में आती है तो रत के घमसान चुदाई के वजह से कमरे की बिगड़ी हालत देख सोचने लगती hai..chudai में तो पागल हो जाती है अलका पर अब ये सारा काम उफ्फफ्फ्फ़ वो अशोक को उठाने जाती है पर अशोक उठता नहीं है वो दुबारा से आवाज़ देती है उसके बाद भी अशोक के साइड से कोई जवाब न पा कर वो अशोक को हिलती है तो पति है अशोक बशोष हुआ पड़ा है वो जल्दी से विशाल को मदद के लिए बुलाती है और अशोक को गाड़ी में बिठा के हॉस्पिटल ले जाती hai…ashok के कंडीशन को देखते हुवे उसने फोन पे hi अपने फॅमिली डॉ. (डॉ. अरोरा) से अपॉइनमेंट ले क्युकी थी..

हॉस्पिटल पहुंचते hi अशोक का इलाज प्रिजरती बेसिस पे होने लगता है क्यूंकि डॉ अरोरा न सिर्फ डॉ अशोक का दोस्त भी था…

अरोरा ने अशोक को कुछ इंजेक्शन दिए और ड्रिप लगाया.. देखते hi देखते अशोक को थोड़ी देर में होश आ जाता है..

इस बिच अलका की हालत बहुत गंभीर हो गयी थी वो अपने पति के हालत देख के काफी चिंतित थी

डॉ. – घबराने की बात नहीं है अशोक अभी बिलकुल ठीक है..

अलका- पर डॉ उन्हें हुआ क्या है?

अरोरा- माइनर सा स्ट्रोक था नाउ हे इस फाइन…

अलका- पर स्ट्रोक ….?

अरोरा- भाभी जी अब मन क्या बोलू उसे ठीक होने दीजिये मैं तभी समझा दूंगा

अलका- आप मुझे क्यों नहीं बताते

अरोरा- भाभी घबराने की बात नहीं है ट्रस्ट में एक बार उसे डिस्चार्ज होने दीजिये मैं उसी वक़्त उसे समझा दूंगा आप भी चाहो तो उस वक़्त साथ में रहना तो आप भी समझ जाओगे..

अलका बड़े भरी मन से – ठीक है भैसहाएब

देखते देखते अशोक को एक दिन के ऑब्जरवेशन के बाद छुट्टी मिल जाती है और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाता है…

डिस्चार्ज के बाद वो डॉ से मिलने उसके केबिन में जाता है..

अरोरा- अशोक ये क्या बचपना है तुम्हे पहले भी मन किया गया है वियाग्रा लेने से फिर तुमने क्यों लिया??

अशोक- यार बहुत टाइम बाद लिया था

अरोरा- उसके ऊपर तुमने शराब भी पि है… हाई अमाउंट ऑफ़ अल्कोहल मिला है तुम्हारे ब्लड से

अशोक- यार बहुत टाइम बाद घर आया था तो वो बूत यू don’t वर्य मैं आगे से ख्याल रहूँगा..

बगल में बैठी अलका ये सब सुन के शर्मा रही थी… वियाग्रा लिया है बोलने का मतलब hi थी की दोनों सेक्स के बारे में बात हो रही थी..

अरोरा- देख मेरे भाई आगे से मत लेना वर्ण इसके मल्टीप्ल इफेक्ट्स हो सकते है तुम्हे हार्ट अटैक आ सकता है तुम परलैस हो सकते हो या फिर सायद हमेशा के लिए नपुंसक…

अशोक- क्या??

अरोरा- हाँ मेरे बातो का ध्यान रखना… एंड भाभी जी आप पूछ रही थीं ा तो ये था कारन इसलिए माने खा था अशोक साथ होगा तभी बता पाउँगा..

अलका- जी धन्यवाद भाईसाहब

अरोरा- वो सब तो ठीक है आपकी परसनल लाइफ है मैं क्या बोलू लेकिन आगे से आपको भी ध्यान रखना होगा…

अलका अरोरा के बात से शर्मा जाती है और झेपते हुवे बस जी भयाहेब hi बोल पति है और दोनों हॉस्पिटल से सिद्ध घर को चल जाते है..

घर पहुंच कर अलका और अशोक में एक बहस हो जाती है वियाग्रा के बात को ले के अशोक आखिर में सूर्य बोल के बात को खत्म करना hi सही समझा…

इसी तरह दिन गुज़रते गए अशोक की एक रात के मजे ने उसे मरीज बना दिया अब वो बस कड़वी कड़वी दवाइया खा रहा था और चुदाई तो दूर अलका उसे चुने भी नहीं दे रही थी

अलका- जब तक पूरी तरह ठीक न हो जाओ no सेक्स

इसी तरह दिन गुज़र रहे थे पर अशोक के घर होने से अलका और विशाल का मिलन हो नहीं पा रहा था और अशोक खुद भी इस हालत में नहीं था की अलका को छोड़ सके… एक दिन अशोक गार्डन में बैठा फोन पे बात कर रहा था और अलका किचन में काम कर रही थी की तभी विशाल मौका पा कर कीतचन में चला जाता है और अलका को पीछे से पकड़ के उसके गार्डन को चूमने लगता है…

अलका- चोर क्या कर रहा है तेरा बाप कभी भी आ जायेगा

विशाल- आने दो मेरी जान बहुत दिन हो गए अब और नहीं रुका जायेगा मेरे से

अलका- हैट बदमाश कही का चोर मुझे ..

पर विशाल अलका को चोर्ने की जगह अपना लुंड बहार निकल के अलका कैग एंड में घिसने लगता है

अलका को अपने गांड के छेद पे सिद्ध सिद्ध ये प्रहार महसूस हो रहा था.. वो च्चती तो थी की विशाल उसे चोदे पर ये समय सही नहीं था अशोक कभी भी आ सकता था… अभी वो विशाल को इसके लिए मन hi कर रही थी की विशाल अलका को अपनी तरफ घुमा लेता है और अपने सुलगते होंठो को अलका के गुलाब जैसे रसेले कोमल होंटो पर रख देता है… जिसका सुरु में तो अलका विरोध करती है पर विशाल के तरफ से होरहे लगातार प्रहार की आगे अब उसकी एक नहीं छाती और वो भी विशाल का साथ देने लग जाती है..

विशाल अलका के टॉप को अपने दोनोहाथो से पकड़ता है और पुरे ताक़त के साथ उसके दो टुकड़े कर के आपला के बदन से आज़ाद कर देता है…









अलका- ये तूने क्या किया तेरे पापा आ जायेंगे तो??

विशाल- आने दो माँ अब वो वैसे भी तुझे छोड़ने लाक नहीं रहा …. जितनी तेरी आग है वो मैं hi शांत कर सकता हु…

अलका- शर्म कर अपने पापा के बारे में ऐसी बाते कर रहा है

विशाल- सहरम भी कर लूंगा पहले पापा की बीवी को वो तो दे दू जिसके लिए वो 15 दिनों से प्यासी है..

अलका- ऐन किसके लिए प्यासी हूँ???

विशाल अलका को उठा के काउंटर पे बिठा देता है और अपना लुंड उसके छूट में दाल के धक्के लगाने लगता है









विशाल की शॉर्ट्स उसके घुटनो में फांसी हुई थी और अलका के टॉप फैट जाने से वो इस वक़्त बिल्कल नंगी थी जिस के वजह से विशाल बीए किसी परेहनी के अपनी माँ के बुर में अपना लुंड पेल रहा था…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh बड़े दिनों बाद तुझे अंदर लिया है

विशाल- मुझे या मेरे लुंड को???

अलका- एक hi बात ही

विशाल अपने धक्के बरकरार रखते हुवे अलका के गोल चुचिओ को मसलने लगता है…









चुदाई के वासना में पागल माँ bête कब पुरे नंगे हॉग ए उन्हें कहहुद भी पता नहीं चला.. उन्हें इस बात से भी अब फ़र्क़ नाह पद रहा था की बहार उसका बाप और पति बइहा है जो कभी भी आ सकता है

अलका- तेज़ तेज़ झटके मार विशु..

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मेरी जान कितना कामुक बदन है तेरा ufffffffffffff

अलका- तेरा hi है bête… अब जोरजोर से छोड़ नहीं तो तेरा बाप कभी भी आ जायेगा..

फिर तुझे अम्रे में जा के मुठ मरना होगा…

विशाल- ाचा मैं मुठ मर लूंगा और तू क्या करेगी

अलका- मैं क्या करुँगी फिर से तड़पुँड़ी तेरे इस लुंड के लिए

विशाल- और तू मुठ नहीं मरती है क्या जब लंड न मिले तो??

अलका- नहीं bête हम औरते मुठ नहीं मरती

विशाल- फिर क्या करती हो??

ये कहते हुवे विशाल अलका को पलट देता हैए ुर पीछे से अपना लुंड उसके छूट में दाल के तेज़ तेज़ पेलने लगता है…









अलका का पेअर जमीन पेट है तो दूसरा हवा में जिसे विशाल ने पकड़ रखा था… अलका का सरीर हर झटके के साथ मचल रही थी..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh और तेज़ कर जल्दी जल्दी

विशाल- लगता है तेरा होने वाला है

अलका- बोल मत बस मार झटक्के

अभी विशाल अपना लुंड बहार खींच के झटका लगाने hi वाला था की अशोक ने अलका सारिका के फोन पे होने की बात कहता है

अशोक की आवाज़ सुन के अलका तुरंत खुद को विशाल से अलग करने की कोशिश करती है लेकिन यहां अलका के साथ विशाल भी अपने मंज़िल के करीब था इसलिए वोट क डैम से अलग न हो के अलका के छूट में झटके लगाए जाता है और अपना पानी अलका के छूट में चोरड एटा है… लुंड से अपनी निकलने से विशाल की पकड़ ढीली पद जाती है जिसके वजह से अलका विशाल को खुद से अलग करती है









लुंड का छूट से निकलते hi अलका के छूट से विशाल के लुंड का पानी एक धार बन के बहने लगती है…

अलका- हो गया तेरा…. चल चोर अब जाने दे

अलका का अभी नहीं हुआ था ो बस अपने मंज़िल के करीब आयी थी और इसी वजह से वो चिड़चिड़ी हो गयी थी और अपने रोम में भाग के जाने लगती है क्यूंकि जो ड्रेस उसने पहन रखा था उसे विशाल ने फाड़ दिया था…

अलका कपडे बदल के अशोक के पास जाती है और फोन ले के अपनी बहन सारिका से बात करने लगती है जिसमे कुछ खास नहीं बस घरेलु बाते हो रही थी अलका का दिल आज अपनी hi बहन से बात करने का नहीं हो रहा था ो जल्दी जल्दी में फोन रखा देती है है और वापस किचन में अपने बाकि बचे काम को समेटने चली जाती है..

काम ख़तम कर के अलका अपने ऑफिस चली जाती है.. आज ऑफिस के बैग में किसी चीज को ढूंढ़ते हुवे उसे वो विजिटिंग कार्ड मिली जो उसे अमन ने अपने बार में दिया था.. अलका कार्ड में लिखा नंबर अपने फोन में सेव करती है और फिर व्हाट्सप्प पे उसे hi लिख के सेंड करती है

डप पे लगे अलका के फोटो को देख अमन के आँखों की चमक बढ़ा जाती है..

अमन- hi कैसे हो बहुत वेट करवाया आपने

अलका- मैं ठीक हूँ तुम कैसे हो?

अमन- मैं कैसा होऊंगा एक खूबसूरत हसीं हमेसा धोका दे रही है

अलका- ाचा ….. कौन है वो हसीना

अमन- है कोई बहुत खास और आज पहली बार मैसेज किया है उसने अभी उसी से बात कर रहा हु

अलका- ओहो फ्लिर्टिंग

अमन- नहीं नै फ़्लर्ट तो नै वैसे कब आ रहे हो आप वापस अमन सपकल पिने?

अलका- न बाबा न तुम हरा सपकल बहुत गज़ब का होता है मैं होश hi खो बैठती हु

अमन- कोई बात नहीं इस बार कुछ और पिलाऊंगा

अलका- बनाते है कभी प्लान अभी तो हुब्बी आये हुवे है तो उसी में बिजी हूँ…

अमन- ोहक

अलका- ोहक सी यू सोन ब्बये

ये कहते हुवे अलका वापस से अपने काम में लग जाती है और फिर रात को वापस अपने घर और डिनर की तयारी में लग जाती है…



काम पे तो फिर भी ठीक था पर घने आने से अलका का मन होर्नेय होने लगता है खासकर के जब उसे पता हो की विशाल घर पर है… वो इस बात से भी रोमांचित होते रहती है की अब न जाने कौन सी शरारत कर देगा ये लड़का और अलका बस उसके हाथो की कठपुतली बन उसके ऑर्डर्स फॉलो करती रह जाएगी
 
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दिन तो जैसे तैसे गुजर hi गया लेकिन रात की ये घडी जो हमेशा hi अलका पे भरी पड़ती है.. आज फिर से अलका पे भरी पड़ने लगी थी.. विशाल ने जो अलका के साथ कीतचन में किया था उसने अलका की प्यास बुझाई नहीं बल्कि और बढ़ा दी थी.. अशोक की तबियत अभी इतनी भी अछि नहीं हुई थी की वो अलका के गर्मी को शांत कर से और ऊपर से ये कड़वी और हैवी दवाइया लेने से वो जल्दी hi नींद की आगोश में चला गया था..




रात के इस सन्नाटे में अलका के अंदर उसकी बदन की गर्मी और उसके अंदर का हवस शोर मशीन लगती है.. उसे ये समझ नहीं आ रहा था क्या करे कैसे शांत करे खुद को की तभी उसके फ़ोन पे ेल बीप की आवाज़ आती है स्क्रीन पे अमन के नाम का नोटिफिकेशन था..

अमन- hiiiiiiiiiii

अलका- hello इस टाइम?

अमन- हाँ इस वक़्त कोई परशान करने वाला नहीं होता न.. बस आप फ्री हो तो?

अलका- फ्री तो नहीं सोने जा रही थी बूत तुम बात कर सकते हो..

अमन- ठनक यू

अलका- फॉर्मल होने की जरूरत नहीं

अमन- हाँ वो तो है.. और बताओ क्या चल रहा है आज कल?

अलका- कुछ खास नै वर्कलोड बढ़ गया है और हुब्बी भी आये हुवे है तो एक्स्ट्रा काम..

अमन- तो अभी आपके हुब्बी कही गए हुवे है क्या?

अलका- नहीं नहीं वो तो सो गए

अमन- क्या??? इतनी हॉट बीवी जग रही है और बाँदा सो गया… क्या यार ये तो वही बात हो गयी की हेरे की क़दर नहीं

अलका- अब क्या करे सब तुम्हारी तरह जोहरी नहीं है न हहहहह

अमन- वो तो है मैं होता तो न सोता न सोने देता…

अलका- ाचा जी ऐसा क्या करते तुम होते तो?

अमन- पलंगतोड़ प्यार हाहाहा

अलका- वो तो ये भी करते है बस इनदिनों थोड़ी तबियत ख़राब चल रही है..

अमन- पर मेरी तबियत बिलकुल ठीक है क्या बोलती हो?

अलका- किस बारे में?

अमन- एक काम जो तुमने अधूरा छोरा है उसे पूरा करने के बारे में…

अलका- वो तो तुमने हाथ से गवा दिया अब कब हो क्या पता..

अमन- अलका ऐसा न करो मैं कब से तड़प रहा हु तुम्हारे लिए..

अलका को भी अब इस कन्वर्सेशन में मजा आने लगता है.. अमन की कही बाते उसे वो सरे सीन्स याद दिलाने लगती है जो उन्होंने नई ईयर और वाशरूम में किया था. अलका जो पहले से hi छुडासी हो राखी थी अमन की बातो से उसके छूट में मनो ठंडी हवा की लहार तैरने लगी हो.. उसका छूट पसीजना सुरु हो जाता है kitna…..jis से अलका भी बोल पड़ती है..

अलका- कितना?

अमन- इतना









अलका- ये क्या कर रहे हो अरे यू माध…?

अमन- तुमने hi तो पूछा था कितना अब देख लो

अलका- हाँ तो ये दिखने क थोड़े न कहा था…

अमन- तुम्हे पसंद नहीं आया?

अलका बनावटी गुस्सा दिखते हुवे- नहीं बिलकुल भी नहीं..

आमना को लगता है उसने ज्यादा जल्दी कर दी..

अमन- ok ok सॉरी

अलका- सॉरी की जरुआत नहीं है…

अमन- तुम बताओ तुम क्या कर रही हो..

अलका- तुमसे बात कर रही हूँ..

Aman-alka तुम कब मिलोगी अब..

अलका- (मिल तो अभी लूँ और ये मोटा लुंड जातक जाऊ पर कैसे milu)kya करना है मिलके?

Aman-nathng जस्ट कॉफ़ी

अलका- कफ बस

अमन- बाकि कुछ शॉर्टआउट कर hi लेंगे तुम जब साथ रहोगी

अलका- तुम्हारी कोई गफ नहीं है क्या???

Aman-gf तो है लेकिन अब तुम्हे देखने के बाद सब फीकी लगने लगी है…

अलका- ाचा ऐसा क्या?

अमन- हाँ वैसे एक बात पुछु..

अलका- हाँ पूछो

आमना- क्या पह्मा है अभी तुमने..

अलका- निघ्त्य

अमन- क्या में तुम्हे देख सकता हूँ????

अलका- अभी??? मुझसे शर्म आ रही है??..

अमन- क्या अलका मुझसे किसी शर्म मैंने तो सब देख रखा है..

अलका- हाँ बूत वो सिचुएशन कुछ और थी ..

अमन- प्लस स्वीटहार्ट…

अलका- स्वीटहार्ट???

अमन- सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा तो.. पर मैं तुम्हे देखना छह रहा हु… दिखाओ

अलका जो इस वक़्त एक शार्ट और वाइट क्रॉप टॉप में थी जिसके अंदर न तो ब्रा थान ा पंतय थी… उसकी बड़ी बड़ी चूचिया इस छोटे से टॉप में समां नहीं पा रही thi..uski चूचिया मनो दूध से लबालब कभी भी टॉप फाड़ के बहार आने को चटपटा रही थी…









अमन- uuuuuuuuuuuuffffffffffffff मार hi डालोगी लगता है…

अलका- हाहाहा इसमें मरने जैसा क्या hai…dress में हु नेकेड नहीं हु( ये बोलने के अलका सोच में पद जाती है ये मैंने क्या बोल दिया… पर अब तो उसने बोल hi दिया था जो वापस नहीं जा सकता था..)

अमन- वैसे हो जाओ तो कुछ बुरा नहीं hai…aur इसी बहाने मैं अपना फव प्लेस देख लूंगा…

अलका- कौनसी प्लेस?

अमन- तुम्हारी गांड और ये दूध से भरी लबालब चूचिया..

अलका- शुतुप मेरे हस्बैंड बगल में है ुर तुम चाहती हो मैं नंगी हो जाऊ??

अमन- हाँ हो जाओ न नंगी

अलका- तुम्हे क्या मिलेगा तुम तो वैसे भी इतनी दूर हो मुझसे

आमना- इतनी दूर से मेरा ये हाल बना दिया पास होती तो जाने क्या होता

अलका- क्या करते पास होती तो…?

अमन- प्यार करता

अलका जो अब कामुक हो गयी थी और उसे अमन के बातो में मजा आने लगा था ो धीरे से अपनी टॉप के ऊपर से hi अपने चुचिओ को मसलने लगती है..

अलका- ाचा जी और वो कैसे…

Aman-sabse पहले तो ये टॉप उठा देता..

अलका- hhhhhhhhhhhhhhuuuuuuuuuuuuu और फिर

अमन को अलका के साइड से इस जवाब की उम्मीद न थी पहले वो दर रहा था पर अलका के साइड से इस जवाब के मिलते hi उसकी हिमत बढ़ जाती है और वो वीडियो कॉल कर देता है..

अलका- वीडियो कॉल क्यों?

अमन- ैप्ट करो न प्लस

अलका बिना बहा किये ैप्ट कर लेती है क्यूंकि कैसे भी उसे अपने छूट का रास अपने छूट से बहाना था,…

अमन अलका को स्क्रीन पे देखते hi.. वाओ

Alka-kya हुआ

अमन- तुम बहुत हॉट लग रही हो…

अलका- थैंक यू

अमन- ये बूब्स तुम्हारे टॉप के लिए नहीं है ये आज़ादी मांग रही है

अलका- मदहोश होते हुवे…. तो कर दो न आज़ाद…

अमन- अपने टॉप को उतर दो मुझे तुम्हारे चुचिओ को पीना है..

अलका- तुम खुद उतर दो और पिलो …ये कहते हुवे अलका अपने टॉप को ऊपर कर लेती है









अमन- uuuuuuuuuuuuufffffffffffffff qayamat…..tumhari ये चूचिया मुझे पागल कर देती है…

अलका- पूछती देख लिया जो देखना छह रहे थे अब हो गए न खुश… अब मैं रखती hun.(ye अलका ने ऊपरी मन से कहा था आखिर थी तो वोट क औरत hi और इतना करना भी कोई आम बात तो है नहीं)

अमन- नहीं नहीं अभी खा.. अभी तो मैंने अपना फव स्पॉट देखा भी नहीं और तुम जाने की बात करती हो?

अलका- अब क्या रहा गया?

अमन- तुम्हारी गांड….

अलका के दिल अमन के इस बात पे जोरो से धड़कने लगता है… ये क्या बोल दिया अमन ने बिना किसी हेसिताशन के

Alka-kya?

अमन- हाँ प्लस बहुत देर से तरसा रही हो मुझे अब और मत तड़पाओ देहो मेरा क्या हाल हो रहा है… कहते हुवे अमन एक बार फिर से अपना लुंड अलका को दिखने के लिए कैमरा अपने लुंड की तरफ कर देता है…









अलका- ये नहीं हो पायेगा मुझसे प्लस अमन समझो.

अमन अपनी बात मनवाते हुवे थोड़ा और जोर देता hai..aur कहता है काश मैं वह होता तप तुम्हारी ये शर्म हाय एक पल में हटा देता

अलका- तुम पास होते तो और बात होती पैरों कैमरा थोड़ा वीयर्ड है प्लस smjho..waise अगर पास होते तो कैसे मेरी हाय मिटते?

अमन- पास होने पे मैं तुम्हारे इन रसीले होंठो क ेरस पि jata…aur अपना ये लुंड तुहारी इस छोड़ी भरी गांड में रगड़ता

अलका- uuuuuuuuufffffffffff firrrrrrrrrrrr

अमन- फिर तुम्हरे चुचिओ को मसलता तुम्हारे ये सपाट पेट और उसकी गहरी नाभि को अपने जीभ से छोड़ता… और तुम्हे नंगी कर देता…

अलका- उसके बाद… ये कहते हुवे अलका अपने हाथो से अपने बूब्स मसलने लगती है जो अमन vc(video कॉल) पे साफ़ देख पा रहा था.. उसे ये पता लग गया था की आग भड़क चुकी है बस इसमें थोड़ा पेट्रोल दाल के भड़काना पड़ेगा…

अमन- चलो न अब नखरे बंद करो और कैमरा थोड़ा नीस करो न…

अलका थोड़ा इतराते हुवे- क्यों क्या देखना बक है अब??

अमन- अभी तो सब बाकि है पर मैं उन उंगलिओ को देखना छह रहा हु जो ुम अपने छूट के अंदर बहार कर रही हो..

अमन के इतना कहते hi अलका सकपका जाती है और घबराते हुवे पूछती है??

अलका- ये क्या बकवास कर रहे हो…. और तुम्हे कैसे पता चाक ी मैंनं?

अमन- अब चोरो भी नखरे और दिखाओ न…

अलका मोबाइल को सामने रखती है और और खुद बीएड पे इस क़दर लेट जाती है की उसकी नंगी चूचिया जो पहले से hi अमन को ललचा रही थी उसके साथ वो हाथ भी दिख जाता है जो इस वक़्त वो अपने छूट के अंदर बहार कर रही थी…









अलका- लो देख लो यही चाहते थे न..

अमन- उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ काश मैं वह होता तो तुम्हे इन उंगलिओ की जरूरत नै पड़ती..

अलका- क्यों

अमन- मैं अपना ये लुंड तुम्हारी छूट में दाल देता..

अलका- uuuuuuuuffffffffff ये क्या कह रहे हो?

अमन- क्यों तू नहीं छति मैं अपना ये लुंड तुम्हारी छूट में दालु?

अलका- हाँ चाहती हूँ अमन दाल दो और छोड़ो मुझे….

अमन- तो फिर ये बाकि के कपडे भी उतर दो अलका…

अलका भी अपने कपडे उतर के बिलकुल नंगी हो जाती hai…lo अमन आज एक बार फिर से मैं तुम्हारे आगे नंगी हो गयी कर लो अपने मन की जॉब hi करना चाहते हो…









ये कहते हुवे अलका अपनी छूट में जोर जोर से ऊँगली फिरने लगती है इधर अमन भी अपने लुंड को मसलने लगता है..

अमन- उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ तुम्हारा ये बदन कितना कैसा हुआ कितना मादक है…. मुझसे बर्दाश्त कर पाना मुश्लकिल हो रहा है …

अमन- क्या तुम घोड़ी बन सकती हो?

अलका- हम्म्म्म और इतना कहते hi अलका अमन के कहु अनुसार अपनी गांड कैमरा की तरफ घुमा देती है..









अमन- ऐसे नहीं अपनी दोनों चूतड़ों को फैला के अपनी गांड के छोटी ुसराख दिखाओ न…

अलका अब जो की अपने जिस्म की गर्मी के हाथो मजबूर हो चुकी थी.. अब वो बिना किसी विरोध के अमन के हाथो की कठपुतली बन चुकी थी और वो उसके इशारो पे नाचने लगी थी..









अलका अपने हाथो से अपनी दोनों कूल्हों को फैला के अपनी दोनों चूतड़ों के बिच फांसी उसकी तंग छोटी सी भूरी सुराख़ अमन को दिखने के लिए खोल देती है..

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhh अमन देखो इसी के दीवाने हो न तुम अचे से देहो तुम्हारे सामने है आज ये…

अलका के इतने कामुक शरीर की प्रहार को अमन ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पता और उसका लुंड पिचकारी चोरड एटा है..

अमन- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh









अलका- ये क्या हो गया तुम्हारा?

अमन- शर्मिंदा होते हुवे.. तुम्हारे जिस्म की गर्मी की आगे मैं ढेर हो गया और शर्मिंदा हो के उसने कॉल काट दिया..

अलका- मादरचोद बड़ी बड़ी बाटे छोड़ता है सिर्फ और कॉल पे hi ढीला पद गया सामने से क्या खाक ठंडा करेगा मुझे ये हिजड़ा…

Ufffffffffffffffff मेरी छूट aaaaaaaaaaaaaahhhhhh अब मुझसे नहीं रुका जायेगा अब मुझे विशाल के पास जाना hi होगा मैं कब तक रोक पाऊँगी इसे कुछ करना hi पड़ेगा... इतना कहते hi अलका विशाल के कमरे की तरफ बढ़ जातिअ है..

औरत के अंदर की हवस जब हद से आगे बढ़ जाये तो न वो किसी शर्म को देखती है न उसे कोई दीवार रोक पायेगी… जिसका उद्धरण था की पति के होते हुवे भी अलका अपने bête के कमरे में बिलकुल नंगी अपने छूट की आग शांत करवाने के लिए निकल पड़ती है…

अमन अभी अपने कमरे में बैठा गेम खेल रहा था की तभी उसके दरवाजे के खुलने की आहात आती है वो सामने दरवाजे की तरफ नजर डालता है तो उसे अपने आँखों पे भरोसा नहीं होता… सामने उसकी कामदेवी माँ कामुक बदन की मालकिन अलका बिक्लुल नंगी कड़ी थी…







वैसे तो विशाल के लिए अलका को नंगी देखना कोई नयी बात नहीं थी लेकिन वो हमेसा विशाल hi अपनी माँ अलका को नंगी करता था... पर आज तो कुछ यूँ हुआ की अलका खुद चल कर विशाल के पास आयी है वो भी बिलकुल नंगी चुदाई का न्योता ले के ... हाँ ये चुदाई का न्योता hi तो था वर्ण वो ऐसा नंगी खून आती ..

विशाल- माँ तुम ऐसे?

अलका- क्यों पहले कभी अंगी नहीं देखा है मुझे

विशाल- देखा है पर ये कुछ ज्यादा रोमांचक लग रहा है.... और पापा?

अलका- तेरे पापा सो रहे है और आज तू उसकी बीवी को सोने मत देना... ये कहते हुवे वो अब भी उसी जगह पे कड़ी थी








अलका की चूचिया कुछ ज्यादा तानी हुई थी उसकी क्लीन शेव छूट से उसका काम रास बह रहा था जो टीवी की हलकी रौशनी में उसके मखमली जांघो पे चमकता हुआ नज़र आ रहा था..

अलका अपने एक पेअर से दूसरे पेअर को रगड़ते हुवे कहती है- कर पायेगा न या दर लग रहा है?

 
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