Incest Kamuk Alka - Page 8 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka





बे रेडी फॉर नेक्स्ट सेंसेशंस गाइस
 
अपडेट 45



विशाल अब बेसब्री से सारिका का वेट कर रहा था… और अगले एक घंटे में उसका ये इंतजार का फल उसे मिल जाता है सारिका विशाल के फह पे आ जाती है सामने उसकी नज़र विशाल पे पड़ती है जो बिलकुल नंगा खड़ा हो के उसका इंतजार कर रहा था… विशाल पेन अजर पड़ते hi सारिका के गाल कश्मीरी सेब किट रह लाल होने लगता है वो शरमाते हुए कहती है.

सारिका- बेशरम नंगा खड़ा है शर्म नहीं आती

विशाल- टब hi तो नंगी होने hi आयी है मासी फिर क्या शर्म की बाटे कर रही है..

विशाल की बाटे सुन सारिका अपने होंठ काटने लगती है दरसल उसे विशाल की यही खुली बाटे तो आकर्षित करती है.

विशाल बिना समय गवाए सारिका को बहो में भर लेता है और उसे चूमने लगता है…









सारिका- क्या कर रहा है अंदर तो आने दे

विशाल- अंदर तो आज मैं तेरे आऊंगा मासी और पागलो की तरह सारिका को चूमे जा रहा था और बी सारिका भी विशाल का पूरा पूरा सात देने लगती है…

सारिका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ारराममम से कमीने

विशाल- मासी तू क्या माल है एक डैम माखन जी करता हु खा hi जाऊ तुझे और तू आराम का कह रही है..

और देखते hi देखते विशाल सारिका को पूरी तरह से नंगी कर देता है जिस से की उसका लुंड सारिका के गड में चुभने लगता है.. सारिका भी पैसा हाथ बढ़ा के विशाल के लुंड को अपने मुठी में भर लेती है









एक और विशाल सारिका को चूमे जा रहा था तो वही सारिका भी विशाल के लुंड को मुठिया रही रही थी..

विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मासी तेरे हाथ में जादू है

सारिका- कितना सख्त और मोटा है रे तेरा l..(sarika लुंड बोलते बोलते रुक जाती है)

विशाल- क्या सख्त है मसि….?

सारिका- यही तेरा हथ्यार

विशाल- हथ्यार का कुक नाम है मेरी चिनार मासी

सारिका- ची बद्तमीज़ कही का गली क्यों देता है (पर सारिका को गली सुनने में मजा भी आता है)

विशाल- चुदाई ा मजा तो बदतिमीज़ी में hi है मासी अब जल्दी बोल क्या सख्त है..

सारिका- बोलै तो तेरा हथ्यार

Vishal-Sali रांड नखरे करती है… छुड़वाने आ गयी है पर बोलने में शर्म आती है तुझे मादरचोद randi….itni शर्म आ रही है तो चली जा वापस और ये कह के वो सारिका को अपने से अलग कर के गार्डन से अपने घर के नादेर जाने लगता है…

सारिका ऐसे hi नंगी कड़ी उसे जाते हुवे देखती रहती है… उसकी छूट लुंड मांग रही थी पर जिस लुंड के लिए वो आयी थी वो तो नाराज हो के जाने लगा था की तभी वो विशाल को मानाने के लिए उसके पीछे भगति है और उसके गले लग जाती है…

सारिका- नाराज क्यों होता है…

विशाल- तो तू नखरे मत किया कर मुझे नहीं पसंद

सारिका- ाचा बाबा नहीं करती जैसे तू चाहे बोल गालिया दे मैं नहीं रोकती तुझे खुश….??? और इतना कहते hi साइका झुक के विशाल का लुंड पे अपना जीभ फेरने लगती है…









विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मासी

सारिका- बहुत कड़क लुंड है तेरा… और ये कहते हुवे सारिका विशाल की आँखों में देखते हुवे उसके बॉल्स और लुंड को चाट के गीला करने लगती है

विशाल- ऐसे मत देख मासी बिलकुल रांड लगती है तू ऐसे देखती है तो…

सारिका- हाँ तो रैंड hi बन के आयी हु ऐसे छोड़ अपनी मासी को जैसे किसी रंडी को छोड़ रहा हो…

विशाल- फिर तो इसे अचे से चूस मेरी रांड फिर मैं तेरे छूट का कचूमर निकलता हु…

सारिका दुबारा से कोई गलती न कर दे और विशाल फिर से गुस्सा हो जाये इस दर से किसी गुलाम की तरह विशाल को खुश करने में लग जाती है और विशल का कला मोटा गधे जैसा लम्बा लुंड धीरे धीरे कर के पूरा जातक जाती है…









विशाल का लोढ़ा इतना बड़ा था की वो सारिका के छाती तक पहुंच जा रहा था.. और सारिका की आंखे भी लाल होने लगी थी लेकिन वो किसी भी तरह विशाल को दुबारा नाराज़ नहीं करना छह रही थी इसलिए पूरा का पूरा लुंड वो अपने गले में उतर ले रही thi..sarika बार बार लुंड अपने मुँह के अंदर बहार कर रही थी जिसे देख विशाल सारिका का मुँह पूरा अपने लुंड पे दबा देता है..









इस से सारिका की सांसे अटकने लगती है और वो जीभ निकल निकल के साँस लेने की कोशिश करती है पर विशाल उसे न तो अपना लुंड निकलने देता है और न hi उसके सर के ऊपर से अपने दबाव को काम करता hai…dekhte hi देखते सारिका का डैम घुटने लगता है वो सर हिला के छटपटाने लगती है किन्तु विशाल उसपे कोई दया नहीं करता और अपने बाजुओं का पूरा जोर लगते हुवे उसके सर को दबा देता है … सरिएक बार बार जीभ निकल के साँस लेने की कोशिश करती है पर फिर भी साँस नहीं ले पाती….

काफी देर तक यही सारिका को तड़पने के बाद विशाल अपना लुंड सारिका के मुँह से निकल लेता है…









लुंड का मुँह के बहार आते hi जैसे मनो सारिका के जान में जान आती है उसके मुँह से सिर्फ विशाल का लुंड नहीं बल्कि देहेर सारा लार और थूक भी निकल आता है.. वो तेज़ तेज़ खस्ने लगती है और सांस लेने लगती है…

सारिका- कमीने मार डालेगा क्या?? ऐसे मुँह में कौन डालता है uuuuuuuuuffffffffff मेरी तो जान hi चली गयी थी थोड़ी देर और न निकलता तो मैं तो मर hi जाती आज … हाय माँ कितना जालिम है तू….

विशाल- ऐसे कैसे मरने दूंगा तुझे मेरी जान आज तो तुझे पुरे फार्म हाउस पे दौड़ा दौड़ा के छोडूंगा

विशल के इस बात पे सारिका की हसी निकल जाती hai..per सारिका का इस तरह हसना विशाल को ाचा नहीं लगता उसे लगता है सारिका उसके ऊपर है रही है.. फिर क्यात है विशाल के अंदर का हैवान जागजाता है और वो सारिका के मुँह में अपना लुंड दाल के बुरी तरह से छोड़ने लगता hai..is बिच सारिका कई बार विशाल को नाखुनो से नोचती है मरती है पर विशालता जो रुकने का नाम नहीं ले रहा था..









सारिका की इतनी बत्तर हालत कभी नहीं हुई थी उसके आंखे मनो फैट के बहार hi आ गयी थी उसका पूरा चेहरा उसी के थूक से सं गया था गोरा चमकता चेहरा बी लाल पद जाता है अउ सारिका बेजान सी हो गयी थी विशाल ने कुछ इस क़दर उसके मुँह पे अपने लुंड से जुर्म ढाया था..

फिनॉय अब विशाल अपना लुंड सारिका के छूट से निकल लेता है और सारिका गुस्से में विशाल को घूरे जा रही थी…

सारिका- सारा डैम मुँह पे निकल देगा तो यहां का क्या करेगा?

विशाल- साली रांड बोलै न कोड वाले लांग में मत बोलै कर

सारिका- सारा डैम मुँह पे निकल देगा तो मेरी छूट का क्या करेगा???? खुश अब ??

विशाल- तेरी छूट का भी यही हाल करूँगा मेरी जान . और विशाल सारिका को बीएड पे लिटा के उसकी दोनों टंगे फैला देता है और अपनी जीभ सारिका के दहकती छूट पे रख के उसकी छूट चाटने लगता है..









विशाल सारिका के दोनों टैंगो को हवा में फैला के उसकी छूट के अंदर तक अपनी जुबान से उसकी छूट छोड़ रहा था…

सारिका- hhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeeeee मममममममअअअअअअअ जादू है तेरे जुबान में भी ऐसे hi चाट vivviiiiiiiiiiiiisssssssssssssssuuuuuuuuuuuuuuu

विशाल- उसके दानो पे अपने दन्त गाड़ने लगता है…….

सारिका- iiiiiiiiiiiiissssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh kkkkhhhaaaaaaaaaaaaaaaa जायेगा क्या aaaaaaaaaaaaaajjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjj

विशाल- haaaaaaaaaaaan aaajjjjjjjjjjjj तेरे इस रासमली जैसे छूट को खा जाऊंगा

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmaaaaaaaaaaa टट्टूवूऊऊ kkkkhhhhaaaaaaaaaa lllllleeeeeeeeeeeeeee इसी के लिए तो आयी हूँ तेरे पास मेरे बेटे

विशाल- टेंसन न ले मेरी जान आज तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh निकल दे bête दाल दे अपना लुंड मेरे छूट में अब रहा नहीं जा रहा मेरे से भी…

तभी विशाल सारिका के छूट को आज़ाद कर देता है और तेज़ हफ्ते हुवे सारिका की और देखता है जहां सारिका भी उसे सवालिया नज़रो से घर रही थी और आँखों hi आँखों में पूछ रही हो की क्या हुआ ???

विशाल भी सारिका के नज़रो की भसह को समझने लगा तह वो सारिका के दोनों टंगे हवा में फैला के उसके गीली बह रही छूट पे अपना लुंड मसलने लगता है…

सारिका इतनी उतावली हो जाती है की खुद से विशाल का लुंड पकड़ के अपने छूट के अंदर पेलने लग जाती है









सारिका अपने गीले गदराये छूट के दीवारों पे विशाल के लोहे जैसे सख्त लुंड के स्पर्श मात्रा से सारिका की आंखे बंद होने लगती है और वो अंदर तक सिहर जाती है उसके मुहे से एक गरम सिसकारी निकल पड़ती है..

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

लेकिन विशाल के मन में सायद कुछ और hi चल रहा था ो सारिका को और तड़पना छह रहा था जिस से की वो लुंड के लिए पागल हो जाये और किसी बाजारू गस्ती की तरह गिड़गिड़ाए अपनी चुदाई करवाने के लिए… और अपने इसी मक़सद को अंजाम देते हुवे विशाल एक बार फिर से एक दो धक्को के बाद hi सारिका के छूट से अपना लुंड बहार निकल लेता है…

विशाल के ऐसा करने से सारिका की आंखे खुल जाती है और वो देखती है विशाल सामने अपने हाथोसे अपना लुंड मसलते हुवे सारिका की तरफ hi देख रहा था…

सारिका- क्या हुआ निकला क्यों दाल न अंदर

विशाल- क्या दालु मासी?

सारिका- uuuuuuuuufffffffffffff अपना लुंड दाल मेरे छूट में और छोड़ना सुरु कर… अब नहीं रहा जा रहा मेरे से…

विशाल- ये बात हुई न मेरी जान पर आज मैं तुझे नहीं छोडूंगा…

सारिका- क्या मतलब?

विशाल आज तू मुझे छोड़ेगी मेरे लुंड पे उछल उछल के अपनी गर्मी आज तू खुद शांत करेगी … दिखा तो सही कितनी बेचैन है तेरी छूट…

सारिका- uuuuuuuuuuuffffffffffff विशाल जो मर्जी करवा ले पर अभी धक्के मार जल्दी से मेरे से और नहीं रहा जाता…

विशाल सारिका के अंदर की आग को भड़कते हुवे उसके छूट पे तेज़ तेज़ लुंड रगड़ता है…

सारिका- uuuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff कितना तड़पाएगा अब दाल दे मादरचोद… छोड़ भी दे भड़वे

विशाल- अभूत आग भड़क रही है तेरे छूट में न तुझे ऐसे तड़पता देख ाचा लगा मुझे मेरी रांड़ी मासी

सारिका- अब रंडी बोल hi दिया है तो छोड़ अपने इस raan…aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa मममममममममअअअअअअअररररररररर gaaaaaaaaayyyyiiiiiiiiiiiiiiiiiiii इस से पहले की सारिका अपनी बात पूरी करती विशाल अपना लुंड सारिका के छूट में पेल देता है…









अब विशाल सारिका के गार्डन को दबोच के तेज़ तेज़ झटके मरने लगता है… विशाल का हर झटका इतना तेज़ होता है की सारिका की पूरी कमर चरमरा जाती है.. उसकी हड्डिया बजने लगती है और उसके छाती पे लटकी उसकी दूध की थैलिया ऊपर निचे कूदने लगती है…

सारिका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ममममायआ तूने मेरी कमर तोड़ दी ऐसे hi झटके लगा तेज़ तेज़ उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ माआआ छोड़ ऐसे hi bête फाड़ दे मेरी छूट को uuuuuuuuuffffffffffff कितना मोटा और लम्बा है रे तेरा मेरे बच्चेदानी को ठोकर मार रहा है….

विशाल- और चीख कुटिया यहां कोई नहीं सुने वाला तुझे चिल्ला कितना चिल्लायेगी आज तुझे इतना छोडूंगा की तेरी छूट फैट के लाल हो जाएगी…

सारिका- haaaaaaaaaaaaaaaaaa छोड़ ऐसे hi फाड़ दे मेरी छूट भड़वे तूने अपने जैसा मुझे बना दिया देख मैं भी गालिया देने लगी uuuuuuuuuffffffffffff क्या जादू कर दिया है तूने मुझपे विशु मैं अपने काबू में नहीं aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh

विशाल पुरे राफ्तेर से सारिका की छूट में अपना लुंड अंदर बहार कर रहा था,,. सारिका की छूट के गीले पैन से पूरा कर्मा फच फच की आवाज़ से गूंजने लगा था….

विशाल- कितनी भरी पड़ी है तू चिनार बहुत पानी बहा रही है तू uuuuuuuuuuuuufffffffff ऐसा लग रहा है गरम माखन में लुंड पैर अहा हु,,,,,

सारिका- hhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaannnnnn ऐसे hi छोड़ मैं आने वाली हु uuuuufffffffffff छोड़ bête तेज़ तेज़ आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह mmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaa









और एक तेज़ चीख के साथ सारिका झड़ने लगती है और उसके छूट के पानी विशाल के लुंड के साथ बहार आने लगती है विशाल का पूरा लुंड चमक रहा था और सारिका के छूट की चिकनाहट से विशाल का लुंड कुछ ज्यादा hi तेज़ी से अंदर बहार होने लगता hai..sarika जो की झाड़ चुकी थी लेकिन विशाल के द्वारा अभी भी उसी तरह लगातार पेले जाने से सारिका की सिसकारी अब चीख में बदलने लगी थी….

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh रुक जा bête अब मेरे छूट में जलन हो रही है रुक्खक्क ज bête uuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffff और नहीं ले पाऊँगी मैं रुक जा

पर विशाल रुकने की बजाये और तेज़ तेज़ छोड़ने लगता है,,, सारिका की छूट इतनी ज्यादा जलने लगती है की वो उसे अपने ऊपर से धकेल के गिरा देती है और तेज़ तेज़ हाफने लगती है…

पर विशाल उसे वापस पकड़ के पलट देता है और घोड़ी बना देता hai….wo जैसे hi सारिका के छूट में अपना लुंड डालने जाता hi की उसकी नज़र सारिका के गोल गोल गांड और उसमे क़ैद भूरे छेद पे पड़ती है और एक बार अलका की गांड मरने के बाद उसे गांड मरने का चस्का भी लग hi गया था इसलिए वो सारिका को घोड़ी बना देता है और अपनी जीभ सारिका कैग एंड पे लगा देता है…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है वो गन्दा आता है मुँह हटा वह से अपना…

विशाल- आज मत रोक मासी आज ज ओहो रहा है होने दे …

सारिका- खान रोक रही हूँ छोड़ तो रहा है पीछे कई घंटो से और क्या चाइये तुझे

विशाल- तेरी गांड चाइये मेरी रैंड

सारिका- क्या गांड??? नहीं नहीं मैं गांड में नहीं ले पाऊँगी

विशाल- क्यों दर रही है मसि आज यहां कोई नहीं है तुझे सुनने और रोकने वाला आज मुझे ये गांड छाए

सारिका- नहीं bête समझ बात को..

विशाल बहुत कोशिश करता है मन्नने की बूत सारिका नहीं मान रही थी… लेकिन विशाल के द्वारा लगातार उसके जिस्म से खेलने और उसके छूट और गांड को चाटने की वजह से वोट क बार दुबारा से तैयार हो गयी थी और उसकी छूट दुबारा से विशाल का लुंड मांग रही थी पर विशाल को छूट नहीं गांड चाइये था..

सारिका- तू जितनी मर्जी मेरी छूट मार ले फाड् के भोसड़ा बना दे मैं नहीं रोकूंगी पर गांड नहीं bête..

विशाल- जा फिर बहन की लोदी तेरी छूट भी नहीं चाइये… और विशाल वहां से उठ जाता है..

सारिका जिसकी छूट में लाखो कीड़े एक साथ रेंगने लगे थे जिसकी खुजली उसके बर्दाश्त के बहार हो रही थी वो विशाल के इस रवैये से एक डैम से परेशां हो जाती है उसे समझ नहीं आता वो क्या करे कैसे विशाल को मनाये.. क्यूंकि विशाल उसकी गांड मरने पे तुला हुआ था..

काफी देर विशाल को मनाने की नाकाम कोशिश के बाद आखिर में सारिका अपना हथ्यार विशाल की आगे दाल देती है और विशाल की आगे जा के घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड फैलते हुवे कहती है..









सारिका- नाराज नाह ो मेरे राजा… यही चाइये न तुझे ले मर ले अपनी मासी की गांड ले खोल दिए अपनी गांड तेरे लिए फाड़ दे इसे भी आजा छोड़ अपनी चिनार मासी को

विशाल के चेहरे पे जीत की मुस्कान साफ़ देखि जा सकती थी वो अपने कुटिल मुस्कान के साथ सारिका को उठता है और खड़े खड़े hi अपना लुंड सारिका के छूट में दाल देता है..









सारिका अचानक हुवे इस हमले से पूरी तरह तिलमिला जाती है खड़े होने से उसकी छूट पहले से ज्यादा टाइट हो गयी थी जिसमे विशाल का लुंड उसके छूट को फाड़ते हुवे अंदर प्रवेश कर जाता है,, सारिका दर्द के मरे घोड़ी बनने की कोशिश तो करती है पर विशाल उसे झुकने नहीं देता बल्कि अपनी और खींच के और खड़ा किये किये लुंड नादेर पेलने लगता है… सारिका के छूट में हो रहे इस दर्दनाक पेली से उसके पेअर कंपनी लगते है उसकी मोती मांसल जंघे थरथराने लगती है और दर्द के मरे आगे बढ़ती जाती है पर विशाल बिना रुके उसे अपने बहो में जकड छोड़ते जाता है.

सारिका- uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaa मर दिया इस मादरचोद ने फाड़ दी मेरी छूट बचाओ मुझे इस हैवान से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

सारिका की चीख कुए घर में गूंज रही थी और उसकी ेके क चीख विशाल के अंदर जोश भर रही थी… इसी तरह खड़े खड़े पेलते हुवे विशाल सारिका को बीएड के करीब ले जा के एक जोर का झटका मरता है जिस से सारिका बीएड पे गिर जाती है…

विशाल- चल मेरी रांड अब तेरी गांड में घुसने का समय आ गया… जल्दी से अपनी गांड फैला कुटिया की तरह…

सारिका भी कीसी पालतू कुटिया कहो या रंडी की तरह अपने मालिक की आज्ञा मानते हुवे अपने दोनों चूतड़ों को फैला लेती है…









सारिका की गांड को देखते hi विशाल के अंदर उसकी हवस और हैवानियत एक साथ हावी होने लगती है और वो सारिका के गांड के सुराख़ पे अपना लुंड घिसने लगता है.. पहले तो सारिका को भी ये रगड़ना ाचा लगने लगता है लेकिन साथ hi अगले पल होने वाले अपने गांड की चुदाई से दर भी रही थी वो अपने दोनों हाथ से चादर को कास के पकड़ के होने वाले हमले के लिए खुद को तैयार करने लग जाती है और इधर विशाल भी अपना लुंड का दबाव सारिका कैग एंड पे बढ़ने लगता है…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh आराम से करना विशु मुझे बहुत दर लग रहा है…

विशाल- दर मत मेरी रांड आज तुझे मैं पूरी तरह से औरत बना दूंगा जोट एरा पति और बीटा अभी तक नहीं बना पाया है… ये कहते हुवे उसके चूतड़ों पे थप्पड़ बरसाने लग जाता है…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh औरत रंडी जो भी बनाना है बना ले आज ये तेरी मासी तेरी है अब और मत तड़पा दाल दे अंदर और फाड़ दे मेरी गांड को जैसे मेरी छूट फड़ी है uuuuuuuuuuuuuffffffffffff

विशाल भी सारिका के उतावले पैन को देखते हुवे अपना लुंड सारिका कैग एंड में घुसाने लगता है पर गांड इतनी टाइट थी की सिर्फ टोपा hi जा पता है और वो भी उसके गांड के मुहाने में hi फास जाता है.,, और इस तरह सारिका कैग एंड में विशाल का लुंड प्रवेश कर चुक्का होता है जिसके दर्द से सारिका की चीख से पूरा फार्महाउस गूंज जाता जाता है….

Sarika-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaadddddddddddddeeeeeeeeeerrrrrrrrrrcccccchhhhhhhhhhhhoooooooooooooooooooddddddddddddddddddd rrrrrrrrrrraaaaaaannnnnnnnndddddddddiiiiiiiiiiiii kkkkkkkkiiiiiiiiiiiii oooooooooooollllllllaaaaaaaaaaaaaaadddddddddddddddd mmmmmmmmmerrrrrrriiiiiiiiiii gggggggaaaaaaaaannnnnnnnnnnndddddddddddd ffffffffffffaaaaaaaaddddddddddddd dddddddddiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

विशाल- चीख मादरचोद जितना चीखना है यहां तेरी चीख सुनने वाला कोई नहीं और चिल्ला क्युकी अभी तो सिर्फ टोपा hi गया हाईल ुण्ड का घुसना बाकि है……

सारिका- निकल ले विशौ मैं नहीं ले paungiiiiiiiiiiiii बहुत बड़ा है मेरी कुंवारी गांड बहुत छोटी है uuuuuuuuuuffffffffffff बहुत जलन हो रह है मेरे गांड में निकल ले bête…

विशाल की नजर्र जब अपने लुंड पे पड़ती है तो उसमे सारिका कैग एंड का खून लगा हुआ था जो की अलका कैग एंड मरने के वक़्त भी नहीं िक्ला था… यानि सारिका की गांड अलका के गांड से भी टाइट थी….









सारिका पूरी तरह से रो और गिड़गिड़ा रही थी और छूटने और भागने की कोशिस करने लगती है अपर विशाल उसे भागने नहीं देता… बल्कि अपने बाकि बचे लुंड को भी मौका देख के पूरा दाल देता है जिस से सारिका के शिरर से मनो उसकी आत्मा hi निकल जाती hai…uski दोनों आंखे दर्द से बहार को निकल आती है वो विशाल से चोर्ने की मिन्नतें कर रही थी.,, पर विशाल पुरजोश में पेलने लगता है…

सारिका का पूरा शरीर थार थार कैंप रहा था मनो उसकी जान hi निकला गयी हो और उसकी ये हालत देख विशाल को अपने मर्दानगी पे गर्व हो रहा था जिसका ये नतीजा था की वो और ज्यादा बेरहमी दिखने लगा था…

Sarika(adhmari हालत में)- बस कर निकल ले मई मर जाउंगी उउउउउउउउउफ्फ्फफ्फ्फ़ मेरे गांड फाड़ दी तूने मेरे से सहा नहीं जाता निकल ले bête और ये कहते हुवे वो बेहोश सी होने लगती hai..uska शिरर ऑलमोस्ट ढीला पद जाता hai..ye देख विशाल अपना लुंड सारिका कैग एंड से बहार निका लेता है और सारिका को सिद्ध पीठ के बॉल एटा के उसके ऊपर आ के उसके होंठो को चूमने लगता है जिसका कोई खास जवाब सारिका के साइड से नहीं मिल रहा था…

विशाल ने सच में सारिका की हालत ख़राब कर दी थी वो ऑलमोस्ट बेहोश थी या सायद अपनी बची खुची ताकत इकठा कर रही थी…

विशाल के तरफ से लगातार उसके होंठ उसके छाती उसके निप्पल चूसने से थोड़ी hi देर में सारिका नार्मल होने लगती hai…aur उसके अंदर वासना की आग एक बार फिर से भड़क उठती है जिस से की वो अपने हाथो से अपनी छूट मसलने लग जाती है जिसे देख विशाल वापस से सारिका की टैंगो को हवा में उठा देता है.. और एक बार फिर से अपना लोहे जैसा लुंड सारिका के गांड में पेल देता है..









सारिका जो की पिछले हमले से अभी उबरी भी नहीं थी और अपनी बची खुची ऊर्जा इकठा कर hi रही थी की विशाल के इस जोरदार हमले ने उसे रोने पे मजबूर कर दिया… उसकी गांड की जलन उसके मुँह से निकल रही थी…

सारिका- chchhhhhhhhhhhhhhhooooooooooooorrrrrrrrrrr cccccccccchhhhooooooorrrrrrrr डीई मदरहोड़ फाड् दी मेरी गांड अब तो चोर दे मेरे गांड में जैसे मिर्ची दाल दी हो ऐसे जलन हो रही है निकल ले अपने लोडे को मेरी छूट मर ले जितनी मर्जी पर मेरे गांड से निकल ले..

पर विशाल सारिका की एक नहीं सुनता न और लगातार साइका की गांड में लुंड पेलने लगता है…. इस पोजीशन पे काफी देर पेलने के बाद विशाल सारिका को अपने ऊपर ले लेता है और खुद सारिका के निचे आ जाता hai…par इस बिच वो अपना लुंड एक बार को भी सारिका के गांड से नहीं निकलता









सारिका के अंदर इतनी जान भी नहीं बची थी की वो विशाल का किसी तरह का विरोध कर सके विशाल उसके शरीर को किसी गुड़िया की तरह किसी बही तरीके से कभी उठा ले रहा था तो कभी मरोड़ मरोड़ के छोड़ रहा था और सारिका बेजान सी अपनी चुदाई के दर्द को झेल रही थी..

विशाल का लुंड अब किसी पिस्टन की तरह सरीके कैग एंड के अंदर बहार हो रही थी और सारिका की आंखे अब पलटने लगती है आज उसने विशाल को अपनी गांड दे के मनो सबसे बड़ी गलती कर दी हो.. लेकिन सारिका भी एक कामुक और भड़काऊ औरत है वो ज्यादा देर तक इस तरह मूर्छित रहने वाली थी नहीं.. वो बस इस भयंकर दर्द को अपने काबू में करने की कोशिश कर रही थी जो एक बार काबू में आजाये तो विशाल जैसे 2-4 लुंड को निचोड़ ले इतनी गर्मी है उसकी छूट में और बी तो उसकी गांड भी खुल गयी है…

लगातार हो रहे इस दर्दनाक चुदाई से और सारिका जैसी भरी औरत को काफी देर से अपने ऊपर उछलने से विशाल के कमर में भी दर्द होने लगा था जिस से उसकी पकड़ एक पल को ढीली हो जाती है जिसका फायदा उठा के सारिका तुरंत विशाल के लुंड से उठ के बीएड के निचे कूद जाती hai…ki तभी विशाल वापस से सारिका को पकड़ता है और वही बीएड के कोने में उसे दबोच लेता है और गालिया देने लगता है..









विशाल- भाग खान रही है चिनार अभी तेरी चुदाई बहुत लम्बी चलने वाली है आज तेरी वो हाल करूँगा की सोते हुवे भी तेरे छूट और गांड में तुझे मेरा लुंड महसूस होगा मादरचोद कुटिया…

ये कह के उसी छोटे से कोने में विशाल सारिका को उछाल उछाल के छोड़ने लगता है.. सारिका भी अब कण्ट्रोल में आने लगी थी और वो खुद भी अब विशाल पे कूदने लगी थी उसके गांड का दर्द अब उसे मजा देने लगा था…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh तो छोड़ न बहदवे देखु कितना खिलाया है तेरी माँ ने आजा फाड़ मेरी गांड uuuuuuuuuffffffffffffff आज तेरी ये मासी तेरा लुंड निचोड़ लेगी मादरचोद

सारिका को जोश में देख विशाल वापस से सारिका को घोड़ी बनता है और जैसे hi अपना लुंड सारिका कैग एंड में घुसता है सारिका के छूट से उसका गरम पानी मूत बन के बहने लगती है..









विशाल मन में (दोनों बहने चुदाई में मूतना सुरु कर देती है)- मासी तू तो मूतने लगी..

सारिका- मूत नहीं ये मेरे छूट की गर्मी निकल रही है मेरे bête uuuuuuuuuuuuffffffffffff तूने निढाल कर दिया मुझे मई गुलाम हो गयी तेरे लुंड की और तेज़ तेज़ झटके मार मेरा कभी भी निकल सकता है

विशाल- मेरा बी होने वाला है मासी

सारिका- तो छोड़ फिर जोर जोर से घुस जा मेरे अंदर इतना जोर का झटका मार दिकः अपना डैम और फाड़ दे अपनी मासी की गांड जिसके लिए तू दीवाना हुआ फिर रहा था…

सारिका दर्द और वासना के मरे कुछ भी बोल रही थी सायद ये सरे शब्द उसने कभी न बोले हो पर खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है वही काम विशाल ने सारिका के साथ किया था/…

काफी लम्बी चुदाई के बाद विशाल का लुंड अपना लावा सारिका के छूट में उगलने के लिए तैयार था और सारिका की छूट भी अब रह रह के बाह रही थी

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmeeeeeerrrrrrrrriiiiiiiiiiiiii rrrrrraaaaaaannnnnnnnnnddddddddddiiii मैं गया

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मैं भ्ही गयी रे मादरचोद रंडी की oladdddddddddd

और विशाल सारिका के गांड में hi अपना अपना पानी भर देता है…









वो सारिका की कमर को पूरा ऊपर उठा देता है और उसके गांड से निकल रहे पानी को उसकी छूट से होते हुवे उसके मुँह में गिराने लगता है जिसे सरीका भी मुँह खोल के पिने लगती है..

इस तरह चुदाई का पहला राउंड समाप्त होता है लेकिन सारिका की छूट की जो आग विशाल ने भड़कायी थी उसे अभी शांत करना बाकि था… उधर अलका के ओफ्फ्स में हुवे झमेले के चक्क्र में अलका का वहां से निकलना मुश्किल लग रहा था इसलिए वो अलका अशोक को फार्म पे जाने को कहती है क्युकी विशाल अकेला था और अलका जो की एक माँ भी थी उसे विशाल की चिंता होना लाजमी tha..par अशोक अलका को अकेले ऐसे मुसीबत में चोर के जाने को राजी नहीं था और उसने खुद जाने के जगह कारन को टेम्परोरी भेजने का सुझाव देता hai…khair जॉब hi हो अशोक जाये या कारन दोनों hi हालत में सारिका का पोल तो खुलने hi वाला है

तो देखते है आगे क्या होता है सारिका कारन के हाथ आती है या अशोक के

 
अपडेट 46-ा

काफी लम्बे चले घनघोर चुदाई के बाद विशाल सारिका कैग एंड में hi अपना पानी भर देता है और सारिका के बगल में लेट के तेज़ तेज़ हफ्ते हुवे कहता है..

विशाल- मजा आ गया मेरी जान तेरी गांड मार के

सारिका- मजा तो तुझे आया मेरे लिए तो सजा थी….

विशाल- क्यों तुझे मजा नहीं आया क्या??

सारिका- सेल भड़वे आ तेरे गांड में बेलन डालती हु फिर तू बताना मजा आया या नहीं… छूट मरवाने आयी थी तूने मेरी गांड hi फाड़ दी अभी तक जलन हो रही है…

विशाल- कोई नहीं मेरी जान तेरी छूट की आग भी शांत किये देता हु थोड़ा साँस तो लेले..

सारिका- हाँ bête आज ऐसा छोड़ की मेरी छूट की खुजली मिट जाये फाड़ दे मेरे छूट को भर दे अपना गरम पानी uuuuuuuuufffffffffffff गांड मरवाने से तो मनो इसमें सेंकडो चीटिया एक साथ रेंगने लगी है और मेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा …

सही तो कह रही थी अलका उसकी छूट की आग तो शांत होने की जगह और ज्यादा बहादक गयी थी जिसे एक दमदार चुदाई hi शांत कर सकती hai…sarika इतना कंटूर हो जाती है की उस से और इंतजार नहीं हो पता और वो खुद hi विशाल के लुंड को अपने हाथो में भर के मसलने लगती है और साथ hi विशाल को किश करना शुरू कर देती है…






विशाल भी उसके किश का पूरा पूरा जवाब दे रहा था पर उसके अभी अभी शांत हुवे लुंड को दुबारा से खड़ा होने में सायद थोड़ा समय चाइये था और सारिका के अंदर जो आग लगी थी उसे एक पल भी बर्दाश्त कर पाना सारिका के लिए मुश्किल होने लगा था इसलिए वो आज पहली बार अपनी साडी आश्रम हाय को चोर किसी रंडी की तरफ विशाल के लुंड को तैयार करने में लग जाती है…





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सारिका पुरे शिद्दत से विशाल के लोड को सेहला रही थी मनो आज उसे उखड hi डालेगी

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh साली कुटिया उखड लेगी क्या…

सारिका- हाँ उखड लुंगी और उखड़ के अपने छूट में घुसा लुंगी हमेसा के लिए फिर तू मुझे नहीं तड़पा पायेगा….

विशाल- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh मासी आज तू कुछ ज्यादा hi भड़क रही है

सारिका- तूने hi करा है मेरा ये हाल की अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है… पागल हो रही हूत ेरे लुंड को अपने छूट में सामने के लिए….

विशाल- पागल नहीं रंडी हो गयी है मेरी सारिका

सारिका- हाँ रंडी hi हो गयी हु और तू मादरचोद हो गया है आज मुझे छोड़ा है कल अलका को भी छोड़ देगा तेरा क्या भरोसा..

Vishal-(teri बहन को तो सबसे पहले छोड़ा है) आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मासी फिर तो तुम दोनों बहनो को एक साथ एक hi बिस्टेर पे छोडूंगा…

सारिका- तो क्या सच में तू अलका को छोड़ना चाहता है…

विशाल- हाँ मासी अगर तुझे छोड़ सकता हु तो तेरी बहन को क्यों नहीं…

सारिका- तू तो सच का मादरचोद निकला,,, चोर जब तुझे अलका को छोड़ना होगा छोड़ लेना उसे अभी मेरी आग शांत कर…. ये कहते हुवे सारिका विशाल के ऊपर लेट जाती है और अपनी गांड उसके लुंड पे रगड़ने लगती है…






सारिका इतना कामुक और गरम अंदाज़ की आगे विशाल का लुंड ज्यादा देर सो नहीं पता और जल्दी hi करवट लेने लगता है जिसकी चुभन अलका को अपने गांड पे महसूस होने लगती है और उस छुवन से सारिका के मुँह से एक आअह्ह्ह्हह निकल पड़ती है..

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh तेरे लुंड ने अंगड़ाई लेनी सुरु कर दी है मेरे बचे ….

विशाल- तेरी जैइसी गदराई औरत के सामने ज्यादा देर सो भी कैसे सकता है कोई भी लुंड…

सारिका- सोयेगा तो उसे वो कैसे मिलेगा जिसके लिए वो बना है..

विशाल- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaassssssssssiiiiiiiiiiiiiiii आज तू मुझे पागल कर रही है..

सारिका- मैं चाहती हु तू पागल हो और फि कास के रगड़े मुझे मई बहुत तड़प रही हु इस लुंड को भोगने के लिए…

इतना कह के सारिका उठ कड़ी होती है और अपनी दोनों टंगे विशाल के गार्डन के दोनों तरफ रखते हुवे अपनी भरी भरकम गांड को विशाल के मुँह पे रख देती है और अपनी छूट को आगे पीछे करते हुवे विशाल के मुँह पे घिसने लगती है…






सारिका- aaaaaaaaaaaaahhhhh जुबान चलना hi है तो यहां चला मादरचोद बातो में मत चला.. uuuuuuuuuffffffffffff कछ्छछ्छःहाआआततततततत ऐसे hi khhhhhaaaaaaaaajjjjjjjjjjjaaaaaaaaaaaa मेरे इस छूट koooooooooooooooooo मेरे से काबू नहीं हो रहा ये और इसकी गर्मी uuuuuuuuuuuuffffffffffff कौन सी आग लगा दी तूने …..

विशाल भी अब पुरे जोश में सारिका के छूट को अपने जीभ से कुरेदने लगता है… सारिका मस्ती में इतना पागल होने लगी थी की उसका उसपे कोई बस hi नहीं था अभी वो अपनी छूट विशाल के मुँह पे बैठ के चटवा रही थी तो अगले hi पल वो 69 पोसितों में आते हुवे उसके लुंड को अपने मुँह में भर के चूसने लगती है






सारिका पुरे जोश में थी और पूरी पागल इतना ज्यादा उत्तेजित की विशाल न चोदे तो वो किसी कुत्ते से भी छुड़वा ले… सारिका के अंदर की सरीफ औरतब मनो मर गयी थी और उसने अपने अंदर जो एक चिनार को दबा रखा था ो अब उसपे पूरी तरह से हावी थी.. जिसे किसी भी हालत में बस लुंड चाइये था…

विशाल- तू तो एक डैम पागल हो रही है कुटिया साली मेरा लुंड hi काटने लगी है…

सारिका- जल्दी खड़ा कर विशु मेरे से नहीं रुका जा रहा है और… ये खड़ा नहीं हुआ तो मैं पागल हो जोगी…

लेकिन सारिका के इतने म्हणत से आखिर विशाल का लुंड अपने असली रूप में आ hi जाता है और फिर इसे देख सारिका के चेहरे पे चमक आ जाती है…

विशाल- चल मेरी रैंड तैयार हो जा अगले राउंड के लिए..

सारिका- मई तो तैयार hi हु तू दिखा अपना डैम अब… कह के सारिका इस बार न घोड़ी बनती है न hi अपनी टंगे खोल के विशाल के लुंड का इंतजार करती है बल्कि खुद विशाल के लुंड को अपने छूट पे रखते हुवे उसपे बैठने लग जाती है…..






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सारिका इतनी कामुक हो गयी थी की वो बिना कुछ बोले बस विशाल के लुंड पे जोर जोर से उछाल रही थी…

सरिएक- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मफ्फफ्फुफूऊऊऊक्कककककककक

विशाल- और जोर से कूद साली पूरा ले इसे अंदर आधे में क्यों उठ जाती है …

सारिका- इतना बड़ा है ये मेरे नाभि को चुने लगी है पूरा बैठूंगी तो मुँह से न निकल आये ..

विशाल हस्ते हुवे उसके छाती पे थप्पड़ मरते हुवे उसके छूछीया नोचने लगता है जिस से सारिका दर्द में चीख पड़ती है

सारिका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है उखड लेगा क्या…

विशाल अब निचे से झटके लगते हुवे सारिका कैग एंड में ऊँगली पेल देता hai..aur ऊँगली को अंदर बहार करने लगता है..






सारिका भी इस दोहरे हमले से और पागल होने लगती है और जोर जोर से अपने आप hi अपने चूतड़ों पे थप्पड़ बरसाने लगती है…

सारिका- छोड़ सेल विशु छोड़ एक नहीं दो दो ऊँगली दाल मेरे गांड में फाड़ दे मेरी छूट मेरी गांड को सुजा दे इसे छोड़ छोड़ के .. ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा तुझे अपनी मासी को छोड़ने का आज पूरा कसार निकल के छोड़…

विशाल- हाँ मसि सही कह रही है तू और आज टब hi कुछ ज्यादा hi जंगल हो रही है कह कारन की कमी तो नहीं महसूस कर रही है साली chinar…ek दिन तुझे तेरे bête के सामने छोडूंगा कुटिया और तू उसके सामने ऐसे hi उछलेगी मेरे लुंड पे…

सारिका- छोड़ लेना मैं तो कहती हु तुम दोनों साथ मिल के मुझे छोड़ो अब और फाड् दो मेरी छूट की दो टेक की रंडी की तरह

सारिका वासना में अंधी हो के क्या बोल रही थी सायद उसे इस वक़्त नहीं पता था ो बस कैसे भी अपनी छूट की आग को शांत करने की कोशिश में थी फिर चाहे कीमत कोई भी हो..

सारिका के इस पागलपन को देखते हुवे विशाल अपनी कमर हिलना धीरे का देता है क्यूंकि सारिका hi पुरे जोश में अब विशाल के ऊपर कूद रही थी..






सारिका अपनी गांड फैला के अपने चूतड़ों को नोचते हुवे कूड़े जा रही थी… इस समय सारिका का जंगलीपन कोई भी देख लेता तो उसके कामवासना का दीवाना हो जाता और सायद आज सारिका का ये रूप अलका को भी पीछे चोर चुकी thi…aur विशाल भी सारिका के इस रूप से हैरान था क्यूंकि सारिका इतनी वाइल्ड होगी इसका अंदाज़ा उसे न tha…aaj सारिका का पूरी तरह से विशाल पे डोमिनेशन था..

सारिका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh विशु मर धक्के भड़वे निकल मेरी गर्मी शांत कर मेरे छूट को…. तू ढीला तो नहीं पद गया आज सेल नामर्द कही के…

विशाल- बहन की लोदी चिनार मुझे नामर्द कहती है रुक दिखाऊ तुझे तेरी जगह निकलता हु तेरी गर्मी…






इतना कह के विशाल सारिका को अपने ऊपर से उतर देता है और उसे घोड़ी बना देता है.. सारिका भी घोड़ी बने अपने छूट में लुंड के जाने का इंतजार करने लगती है…

विशाल सारिका के छूट के ऊपर लुंड रगने लगता है और फिर अगले hi पल अपना लुंड उसके छूट में पेल देता है…

सारिका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh mmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaa मर गयी…

अभी विशाल एक दो झटके लगाया hi था की बहार से घंटी बजने की आवाज़ आती है

सारिका घबराते हुवे- अभी कौन आया होगा?

विशाल- अरे पोस्ट वगैरह होगा मैं अभी उसे भेज के आता हु तू घोड़ी बानी रह हिलना नहीं ..

सारिका- हाँ जा जल्दी भेज के आ उसे मैं ऐसे hi तेरा वेट कर रही हु ….

फिर विशाल दूर गेट की तरफ बढ़ जाता है और दरवाजे के पास जाते hi उसकी नज़र एक दरवाजे पे खड़े सख्स पे पड़ती है जिस से उसके अंदर उत्तेजना का प्रसार होने लगता है उसे समझ नहीं आता की अब वो क्या करे…….

क्या लगता है दोस्तों कौन होगा???
 
अपडेट 46-बी

कमरे में विशाल के आने की आहात सुनते hi सारिका जो पहले से घोड़ी बने विशाल के लुंड का इंतजार कर रही थी वो अपनी गांड हिलने लगती है…

विशाल- तो मेरी रांड रेडी है अपने छूट में मेरा लुंड लेने के लिए..

सारिका- हाँ bête अब दाल भी दे बहुत देर लगा दी तूने पहले hi पता नहीं कौन भड़वा आ जाता है बिच चुदाई में..

विशाल भी अब देरी न करते हुवे अपना लुंड सारिका के छूट में दाल के छोड़ने लगता है जिसका पूरा मजा सारिका अपनी गांड को पीछे धकेल के ले रही थी…






सारिका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ऐसे hi छोड़ आअह्ह्ह्हह aaaaaaaaaaahhhhhh

सारिका की आग फिर से भड़कने लगी थी और वो पागलो की तरह अपनी गांड विशाल के लुंड पे धकेल के उसका पूरा लुंड अपनी गांड में लेने की कोशिश कर रही थी… विशाल भी सारिका के कमर को पकड़ तेज़ी से झटके लगाने लगता है पूरा कमरा विशाल और सारिका के जांघ और चूतड़ों के टकराने से थप थप थपप्पपपपपपप बज रहा था तो कभी उसके गीले छूट में लुंड के अंदर बहार होने से फच फच की आवाज़ उसपे सारिका की कामुक सिसकारी विशाल को बेकाबू करने के लिए काफी था… चुदाई करते करते अचानक से विशाल अपना लुंड बहार निकल लेता है.. जिस से सारिका एक बार फिर से झुंझलाने लगती है और इस से पहले की वो पीछे मुद के विशाल को कुछ कहती एक बार फिर से उसके छूट की गहराई में लुंड महसूस होने लगता है…






ढका इतना करारा था की सारिका सिद्ध बीएड पे गिर जाती है.. उसके चेहरे का भाव बता रहा था की ये धक्का उसे कितना सुकन दिया था…

सारिका- oooooooooouuuuuuuuuuucccccccccccccccccchhhhhhhhhhhhhh एक hi बार में पूरा दाल दिया कमीने uuuufffffffffffffffff

पर पीछे से कोई आवाज़ नहीं आती बल्कि चुदाई की गति जारी रहती है.. काफी देर इसी तरह चुदाई करते हुवे सारिका के कमर में दर्द होने लगता है और वो एक बार को जो लगातार गार्डन निचे किये चुदाई का आनंद ले रही थी वो अपने सिरहाने देखती है तो विशाल उसके सामने लुंड लिए खड़ा था…

सारिका एक डैम से शॉकेड हो जाती है अगर विशाल यह है तो इतनी देर से उसकी चुदाई कौन कर रहा है??? विशाल ने सारिका को किसके निचे लिटा दिया और सरोका कोप ता क्यों नहीं चला??? वो एक डैम से पलटने को होती है पर पीछे खड़ा सख्स जो काफी देर से उसे छोड़ रहा था उसे पलटने नहीं देता बल्कि उसके चेहरे को बीएड पे दबा देता है जिस से वो हिल भी पति…






अब सारिका में छटपटाहट बढ़ने लगती है वो किसी भी तरह से उसके चंगुल से निकलना छह रही थी पर उसकी पकड़ से छूट नहीं पति है और पीछे खड़ा वो सख्स लगातार सारिका की छूट में अपना लुंड तब तक पेलता रहता है जब तक उसका पानी नहीं निकल गया…

पानी के निकलते hi जैसे वो सारिका के बगल में गिरता है और सारिका पलटती है दोनों की नज़रे आपस में मिलते hi दोनों का खून सुच जाता है..

सारिका- तुम?????????

उनकंवण- माँ???

जी हाँ वो ुंवन सख्स कोई और नहीं कारन था जो लगातर अपनी माँ को जाने कब से पीछे से छोड़ रहा था…

सामने खड़ा विशाल लुंड हिलाते हुवे हस्ते हुवे करीब आता है और पूछता है…

विशाल- कैसा लगा तुम दोनों माँ bête का मिलान???

कारन गुस्से में विशाल की तरफ बढ़ता hai..aur उसका गाला पकड़ लेता है…

कारन- ये क्या करवा दिया तूने विशाल??? और इसका मतलब तू मेरी माँ को मेरे पीछे छोड़ रहा था??

सारिका जो अब किसी सदमे में चली गयी थी उसे समझ नहीं आ रहा था ये सब अचानक कैसे हो गया और वो अब इसे कैसे मैनेज करे??? हलाकि वो दोनों से चुदती आ रही थी पर ये बात दोनों कोप ता तो नहीं था

विशाल- ये बात तुझे छोड़ने से पहले सोचना था अब सब कर के सरीफ मत बन

कारन उसके गाल पे थप्पड़ मार देता है- मई तुझे भाई समझता था और तू ये सब किया और मुझसे भी करवा दिया…

काफी देर तक ये मेलोड्रामा चलता रहा और जब विशाल को कोई चारा नहीं दिखा तो वो कारन को साइड में ले गया और वो वीडियो दिखा दिया जिसमे कारन सारिका की चुदाई कर रहा था और विशाल ने उसे रिकॉर्ड कर लिया था…

कारन के ऊपर ये दूसरा बिजली का झटका था…

विशाल- अब भी कुछ कहना चाहेगा?

कारन अब कुछ भी बोलने के लायक नहीं था फिर भी वो पूछता है/

कारन- तो तुझे तब से ये सब पता है मतलब तुम दोनों का भी तभी से चल रहा है??

विशाल- नहीं ऐसा नहीं है और ये सब बात हम फिर कभी भी कर सकते है अभी मम्मी पापा के आने तक मजे कर ले ड्रामा कर के कोई फायदा नहीं है…

कारन- ठीक है फिर तुझे मुझसे एक वायदा करना होगा

विशाल- कैसा वडा??

कारन- आज तू मेरी माँ की ले रहा है तो मई जब तेरी माँ की लूंगा तू मुझे नहीं रोकेगा

विशाल पहले तो सोचता है फिर उसके मन में आता है माँ इसे हाथ लगने देगी तब न और तब का तब देखेंगे फ़िलहाल कमरे में जो माल पड़ी है उसे लूट लू और यही सोच के वो ok बोल्ड एटा है…

और फिर दोनों भाई कमरे में चल पड़ते है जहां सारिका अभी भी नंगी खुद को चादर में छुपाये रो रही थी…

कहानी में आगे बढ़ने से पहले उस पल में षाले है जब विशाल कारन को अपने इस खेल में शामिल करता है…

(दरवाजे की तरफ जाने से पहले विशाल कक्तव में देखता है तो शॉक हो जाता है क्यूंकि दरवाजे पे कोई और नहीं बल्कि कारन था. उसके मन में ख्याल आता है की अभी तो सारिका से खा था उसके bête के सामने उसे छोड़ेगा और इतनी जल्दी उसका बीटा आ भी गया उसकी चुदाई देखने …. पर वो यहां आया कैसे ??? उसे यहां का कैसे पता लगा??? विशाल इसी उधेड़ बन में था की उसके मन में ख्याल आता है क्यों न वो दरवाजा सारिका से खुलवाए अपनी माँ को इस हालत में देख के क्या करता है कारन….. कुछ होगा तो वो कारन को उस दिन की वीडियो दिखा hi देगा जब वो अपनी माँ सारिका ो छोड़ रहा tha…lekin फिर वप ता नहीं क्या सोच के खुद hi दूर ओपन करने चला जाता है…


विशाल- तू यह???

कारन- हाँ मौसा का फोन आया था बोले की उन्हें देर होगी तो मैं आ जाऊ तेरे पास

विशाल- पर मुझे तो कोई फोन नहीं आया

कारन- तो मुझे कैसे पता होता तेरे यहां होने का…? और तू इतना हाफ क्यों रहा है और पसीने से लाल हुआ पड़ा है क्या बात है??

विशाल- कुछ खास नहीं बैठ

कारन- यहां?? कमरे में चलते है न गेम वगैरह खेलेंगे और कमरे की तरफ बढ़ने लगता है

अब विशाल कैसे बताये कमरे में उसकी माँ घोड़ी बानी हुई लुंड का इंतजार कर रही hai…isliye वो उसका रास्ता रोकते हुवे बोलता है

विशाल- ककककक कक्केमरे में क्यों यह बैत के मूवी देख सकते है

कारन- तू इतना घबरा क्यों रहा है और कमरे में जाने से क्यों रोक रहा है???

विशाल- मैं खान घबराया हु मैं तो ठीक हु

कारन- तो जाने दे मुझे अंदर अब तो मुझे जाना hi है

विशाल- अरे रुक मेरे भाई अंदर नहीं जा सकता

कारन- क्यों?

विशाल- समझ बात को

कारन- तो ये वजह से तेर इस पसीने का और हाफने का

विशाल- हसने लगता है..

कारन- पर तेरी तो गफ हैं नहीं फिर रंडी बुलाई है क्या??

और विशाल से यही ब्लंडर हो जाता है और वो कुछ ऐसा hi समझ बोल्ड एटा है..

कारन- फिर तो मैं भी लूंगा उसकी..

विशाल- अबे वो नहीं देगी तुझे और दो लोगो को देख के वो मुझे भी नहीं देगी…

कारन- तो एक काम कर तूने ले ली न अभी मुझे जाने दे फिर तू आ जाना तब वो मन भी नहीं कर पायेगी

विशाल (मन hi मन)- सेल अंदर तेरी माँ hi लेती है और जाने क्या उसके मन में आता है वो ok बोल्ड एटा है…

विशाल- ठीक है पर कपडे उतर के मेरे पीछे आ और जब मैं उसे घोड़ी बना के छोड़ रहा होऊंगा तू पीछे से दाल देना मैं निकल लूंगा..

कारन- ये ठीक है चल

विशाल- अबे कपडे तो उतर दे यही पर


और फिर कारन हस्ते हुवे कपडे उतर लेता है और चुदाई का शौनक के उसका लुंड तुरंत तूफ़ान मचाने लगता है)

अब आगे

कारन और विशाल कमरे में आते है तो देखते है सारिका का चेहरा बिलकुल पीला पद गया था वो विशाल को सवालिया नज़रो से देख रही थी मनो पूछ रही हो तुमने ऐसा क्यों किया???

विशाल कमरे में आते hi हस्ते हुवे सारिका से कहता है मासी घबराने की जरुरत नहीं है कारन अब हमारे साथ है.. और कहते हुवे सारिका के चादर खींच के उसे एक बार दुबारा से नंगी कर देता है और उसके पेअर पकड़ के अपनी और खींच लेता है…

सारिका जो अभी भी इनसब से शॉक में थी वो बस इतना hi बोल पति है

सारिका- पर

की तभी कारन बोल पड़ता है पर वॉर चोरो मम्मी अभी जिसके लिए आयी हो उसे ख़तम करो इस से पहले की मासी मौसा आ जाये…

और फिर विशाल सारिका को अपनी और लेट हुवे उसकी तंग ीक बार फिर से खोल देता है.. सारिका उसका न सहयोग देती है न विरोध करती है बस जो हो रहा था उसे रोके बिना विशाल के हाथो की कठपुतली बन गयी थी..






विशाल जो काफी देर से कामातुर था ो अब सारिका के छूट में लुंड पेल के उसे छोड़ना सुरु कर देता है और सारिका उसे एक तक देखे जा रही थी मनो उसके हिम्मत और कुटिलता को दाद दे रही हो की कैसे उसने अभी एक bête से उसकी माँ को छुड़वा दीया और फिर उसे अपने साथ मिला भी लिया और बी उसी के सामने उसकी माँ को छोड़ रहा है बिना किसी दर के…

विशाल- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या हुआ मेरी जान तू ठंडा क्यों पद गयी अभी तो बड़ी आग उगल रही थी तेरी ये छूट

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh विशु मुझसे नहीं हो पायेगा ऐसे में….

सारिका का इतना कहना था की विशाल सारिका के गाल पे एक थप्पड़ लगा देता है..






विशाल- चुप साली चिनार तब से नखरे कर रही है… आज तुम हम दोनों भाइयो की रखैल है समझी मादरचोद और फिर राफ्तेर के साथ छोड़ने लगता है…

सारिका बेबस वाली नज़रो से कारन की तरफ देखने लगती है लेकिन कारन को भी इस खेल में मजा आने लगा था वो कहता है

कारन- ऐसे hi छोड़ विशाल इस रंडी को बड़ी आग है इसके छूट me…mera लुंड काम पद रहा था जो तुझसे भी छुड़वाने लगी और छुड़वाने के लिए इतना दूर ताका ा गयी साली कुटिया…

सारिका को कारन से इस बात की उम्मीद नहीं थी वो कभी कारन को तो कभी विशाल को देखती और फिर सारिका भी बोल पड़ती है

सारिका- सेल भड़वे तेरी वजह से hi हो रहा है जॉब ह हो रहा है हर बार घर में घुसते hi चढ़ जाता है मेरे ऊपर अगर उस दिन दरवाजा बंद कर देता तो आज मेरा ये हाल न होता.. और तू मुझे रांड बुला रहा है तो दिखती हु तुझे अपना रन्दिगीर अब तू देख मादरचोद अपनी माँ को चुड़ते हुवे

दोनों माँ bête की बहस में मजा तो विशाल को hi मिलने वाला था…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh विशु छोड़ मुझे आआआअह्हह्ह्ह्हह ऐसे hi जोर जोर से फाड़ दे मेरी छूट… इतना छोड़ की इसके नसीब में भोसड़ा बचे बस…. Uuuuuuuuufffffffffff

विशाल- हाँ मेरी रांड आज देख मैं तेरा क्या हाल करता हु…






और विशाल सारिका के गार्डन को पकड़ के पुरे जोश में पेलने लगता है और सारिका भी विशाल का पूरा साथ दे रही थी माहौल बिलकुल गर्माता जा रहा था जिसे देख कारन के लुंड में फिर से हलचल होने लगती है और वो आगे आ के सारिका के मुँह में अपना लुंड पेलने चला जाता है





विशाल का हर ठोकर बहुत जोरदार था जो सारिका के छूट पे पड़ता और उसकी चूचियों पे उसका असर दिख रहा था सारिका छटपटाहट में अपने bête कारन का लुंड पकड़ के मसलने लगती है.. उसके छूट की दीवारों में लगातर हो रहे घर्षण से उसका छूटे क बार फिर से झड़ने लगता है लेकिन विशाल हमेशा की तरह सारिका पे बिना कोई रहें दिखाए अपना लुंड पेले जा रहा था…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh मैं गयी विशु मेरा हो गया रुक जाए

विशाल- पर मेरा तो नहीं हुआ न मेरी जान फिर कैसे रुक जाऊ अभी तो तेरी छूट में ितं गर्मी थी अभी से रुकने को बोलने लगी है तू…

सारिका- बस एक बार रुक जा फिर दुबारा से दाल लेना ….

विशाल- पहले बोल तू मेरी रंडी हाँ मेरी रखैल है.. (विशाल जानबूझ कर कारन के सामने सारिका को बेइज़त कर के छोड़ रहा था)

सारिका- uuuuuuuuuuuufffffffffffff हाँ हूँ मई तेरी रखैल तेरा रांड और तू और ये मादरचोद अब चोर…

विशाल वैसे कभी अलका कहने पे तो इस तरह लुंड बिच में लुंड नहीं निकला था पर आज जाने क्यों सारिका के कहने पे लुंड निकल लेता है.. इधर सारिका भी अपने छूट का मुआयना लेने ले लिए हाथ निचे ले जाती है और कुछ देख या समझ पति उस से पहले विशाल अपना लुंड सारिका के फाटे हुवे गांड में दाल देता है जिसका खून अभी भी सूखा नहीं था है एक बार फिर से विशाल का लुंड घुसते hi सारिका की आंख ीक बार फर से बहार आ जताई है वो दर्द से बिलबिला उठती है






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सारिका की इस तरह की दर्दनाक चीख कारन कभी न निकलवा पाया थान ा सुन पा था ो सारिका के तरफ उसका रोटा हुवा चेहरा देख रहा होता है की तभी विशाल बोल पड़ता है देखने आया है या छोड़ने दाल अपना लुंड इस रांड के मुँह में और बंद कर इसकी चीख…

कारन भी कुछ वैसा hi करता है मनो अपने उस्ताद के आज्ञा का पालन कर रहा हो…

सारिका अब दर्द से छटपटाने लगती है वो हाथ पेअर पटक पटक के अपने दर्द बयां कर रही थी पर न कारन अपना लुंड निकलने को राजी थान ा hi vishal..dono जानवरो के बिच फांसी अपनी हिरणी सी कोमल सारिका का पूरा बदन उसके अंदर से निकल रहे गर्मी की वजह से लाल हो जाता है..

वो खुद को चुराने के लिए कभी विशाल के जांघो पे मारती तो कभी कारन के छाती को नाखुनो से कुरेदती थी पर दोनों की आगे उस बेचारी की एक नहीं चल रही थी….

कारन- विशाल अब हैट मैं इस रंडी की छूट में लुंड डालूंगा..

विशाल- दाल ले भाई कब से खली है इस रंडी की छूट भर दे तू उसमे अपना लुंड..

कारन- खली है मेंस ??? तू

विशाल- मैं तेरी माँ की गांड मार रहा हु bête आज तू इसकी छूट में पेल दे अपना लुंड

सारिका- नहीं नहीं मैं एक साथ नहीं ले पाऊँगी मुझे चोर दो..

पर विशाल उसके जांघो को पुरे मजबूती से पकड़ लेता है जिस से वो चटपटा तो रही थी पर निकल नहीं पा रही थी…

सारिका- कारन अगर तूने इसकी बात मणि और मेरे छूट में अपना लुंड डाला तो मई तुझे फिर कभी नहीं दूंगी…

कारन फिर विशाल की तरफ देख रहा होता है…

विशाल- अबे देख क्या रहा है तू आजा दाल इस रंडी ke….aur मासी तू नखरे मत कर बस मजे ले

सारिका- मादरचोद मैं कोई रंडी नहीं हु जो ऐसे दो दो मोठे लुंड एक साथ ले लू

विशाल- आज से तो तू अपने आपको हमारी रंडी hi समझ ले चिनार सारिका…

कारन अब जो काफी देर से ये सब देख सुन रहा था उस से भी रहा नहीं जाता और वो आ जाता है अपना लुंड ले के सारिका के छूट के सामने…

सारिका- दर के मरे कंपनी लगती है वो गिड़गिड़ाते हुवे नहीं कारन नहीं कारन कर रही थी,,, पर कारन अपना लुंड सारिका के छूट के मुहाने पे रख के उसपे अपना लुंड घिसने लगता है…

सारिका- कारन bête मई तेरे हाथ जोड़ रही हु इस मादरचोद के बात में मत आ तुम एरा बीटा है प्लस अपनी माँ एप तरस खा..

पारा हवस और वासना में अंधे इंसान को कोई रिश्ता खान सुनता hai…aur आखिर में अपनी माँ किन ा सुन के अपने वासना की आवाज़ सनटैन है और फिर वही होता है जिसके सोच मात्रा से सारिका के रोंगटे खड़े हॉग ए थे… कारन लगातार अपना लुंड सारिका के छूट में रगड़ते रगड़ते अंदर पेल देता है…






ये दर्द पीछे हर दर्द से कई गुना ज्यादा बड़ा था जिसे शी पाना किसी खेली खली रैंड के बस की भी नहीं होती फिर यहां तो एक घरेलु औरत थी जिसे आज उसी के bête और बहनजी ने रंडी बना दिया था और न सिर्फ बनाया था बल्कि रंडी की तरह hi बेरहमी से छोड़ रहा था..

सारिका- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa fffffffffffffffffffffffaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaddddddddddddddddddd dddddddddiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmmeeeeeeeeeerrrrrrrrrrrrrriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii cccccccccchhhhhhhhhhhuuuuuuuuu आआआआआउर ggggggggggaaaaaaaaaaannnnnnnnddddddddd इन मादरचोदो ने मैं मर गयी कोई बकहो मुझे इन हैवानो से.

पर आज कारन को सारिका कोई रंडी hi लग रही थी सायद वो बिना किसी बात के परवाह किये सारिका को छोड़ने लगता hai..aur निचे से विशाल उसकी गांड मार रहा था…

सारिका के छूट और गांड के बिच एक पतली सी झिल्ली hi थी जो दोनों लुंड के बिच दीवार का काम कर रही थी और जब एक साथ दोनों लुंड अंदर या बहार होते तो ये झिली और ज्यादा घर्षण मचा रही थी…

सारिका रट हुवे गिड़गिड़ाते हुवे चोर्ने को कहती रही पर कोई उसकी सुनने को राजी न था…






वो मनो दो ब्रेड के बिच पनीर हो यानि की दोनों के बिच सैंडविच बानी चुदाई का दर्द झेल रही थी.. कोई उपाय न पाने पिउ ो अपने हाथ से अपने चूतड़ को फैला लेती है पर उसका कुछ खास असर नहीं दीखता… दर्द और वासना में सारिका आज जाने कितनी बार जहर गयी थी और उसकी छूट अब एक भी झटका बर्दाश्त करने के हालत में नहीं थी

सारिका एक डैम मरे हालत में- चोर दे मुझे मई मर जाउंगी … खान फास गयी मैं aaaaaaajjjjjjjjjjj mmmmmmaaaaaaaaaaaaa cccccccchooooooooooooddddddddd ddddddddddddiiiiiiiii tuuuuuuuuuunmmmmmm दोनों ने मेरी i=uuuuuuuuuufffffffffffff






पर उसे चोर्ने के बजाय विशाल उसके ऊपर चढ़ के उसकी जबरदस्त ताबड़तोड़ चुदाई करने लगता है…. और निचे से कारन के धक्को से सारिका की जान hi निकल जाती hai….koi आज रुकने का नाम नहीं ले ारः था

विशाल- ले साली रांड मुझे नामर्द बोल रही थी न अब देख मेरी मर्दानगी आज तू घर कैसे जाएगी मैं देखता हु..

सारिका- जाने लायक तूने छोरा खान है.. छोड़ छोड़ के मेरी जान निकल दी अब मेरे अंदर बिलकुल भी जान नहीं बची हैईईई uuuuuuuuuuuuufffffffffffff

कारन- अभी जान नहीं बची है साली चिनार बहुत सूख है न तुझे बहार आ के छुड़ाने का आज तेरा ये सूख पूरा हो जायेगा मादरचोद साली कुटिया






इसी तरह दोनों सारिका को अपने बिच में फसाये छोड़ते रहे सारिका का पूरा शरीर मनो टूटने लगता है उसकी हड्डिया चोरो उसकी नसों की चर्चारहाट की आवाज़ भी आने लगी थी दोनों ने कुछ इस कदर राउंड रहे टिया सारिका को.. सारिका लाख कोशिह के बाद भी निकल नहीं पा रहे थी और निर्जीव के तरह दोनों के बिच फांसी अपनी चुदाई ख़तम होने का इंतज़ार करने लगती है…

सारिका से दर्द बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था वो कहती है बीटा मुँह में दाल दे अब छूट नहीं झेल पा रही है तुझे प्लस मान जा रहम कर अपनी माँ तरस खा मेरे बचे.. फिर तू जैसा कहेगा मैं करुँगी

कारन रुक जा बहन की लोदी कब से रो रही है मेरा बस होने वाला है रुक दो mint…ye सुन के अलका के जान में जान आ जाती hai…aur अगले hi पल कारन गुर्राता हुआ अलका के छूट में अपना पानी भरने लगता है जिसकी गर्माहट अलका को अपने छूट में महसूस होने लगती है






लुंड का पिचकारी निकलते hi कारन अपना लुंड निकल के सारिका के मुँह की तरफ भागता है और अपना लुंड सारिका के मुँह में दाल के उसके मुँह को अपने लुंड पे दबा देता है सारिका भी गगगगगगगगगगगगगगगगगगगग कर के उसके लुंड को अपने गले में महसूस कर रही होती है और साथ hi उसके लुंड का निकलता लावा सिद्ध उसके गले में गिर रहा था जिसकी गर्माहट मनो उसके गले की सिकाई कर रही हो……

इधर कारन का हथ्यार डालते hi विशाल का भी मंजिल करीब आ गया था वो पुरे जोर से और जोश में सारिका के छूट को मसलने लग जाता है






सारिका को विशाल के इस तरह छूट मसलने से सारिका को मजा भी आ रहा था और जलन भी हो रही थी,,,,, आज उसको बहुत कुछ नया अनुभव करने का मौका मिल रहा था ो साडी चीजे हो रही थी जो उसने सपने में भी नहीं सोचा था… वो वसन के चरम पे पहुंच गयी थी.. उसकी छूट आज जाने कितने बार अपनी पानी बहा चुकी थी और कह रही हो की अब हमारे पास और पानी नहीं बचा hai…par ये बात विशाल को कौन समझाए वो एक के बाद एक बिजली सारिका पे गिरा रहा था





विशाल के झटके अब सारिका के छूट का लावा न सही तो उसके मूट को बहाने लगा था सारिका का पूरा जिस्म अब कंपनी लगा था उसके शिरर में विशाल और कारन ने इतनी जान नहीं छोड़ी थी की वो कड़ी रह पाए…





सारिका अगले hi पल जमीं पे गिरने लगती है पर विशाल अपने मंज़िल के करीब आया था.. अपने मंजिल पे नहीं आया था…

सारिका कांपते आवाज़ में गिड़गिड़ाने लगती है- अब तो चोर दे पूरा निचोड़ लिया तूने मेरे छूट में अब बस पेशाब बची है वही रह रह के गिर रही है.. अब और झटके नहीं ले पायेगी तेरी मासी मुझे बक्श दे uuuuuuuuffffffffff बहुत जल रही है मेरी छूट चोर दे मुझे जाने दे…

विशाल- बस मासी मेरा भी हो गया थोड़ी देर और साथ दे दे uuuuuuuuuuuuuuuufffffff

सारिका- कितना छोड़ेगा और मादरचोद… सच में रंडी hi बना दिया तूने आज मुझे …

विशाल- रंडी hi है तू साली ufuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffff और ये कहते हुवे विशाल अपने पानी से सारिका के गांड को भरने लगता है






अपने गांड में विशाल के पानी से मिल रहे गर्माहट से सारिका को राहत मिलती है उसे अंदाज़ा लग जाता है की अब उसे और टॉर्चर नहीं सहना पड़ेगा अब उसके छूट और गांड को आराम मिलेगी…

विशाल अपना लुंड सारिका के छूट से निकल के वापस से उसके मुँह में भर देता है और उसके मुँह को छोड़ने लगता है…






सारिका की छूट का आज सच में दोनों ने भोसड़ा बना दिया था उसकी छूट बिलकुल फैट गयी थी और उसके छूट के दोनों होंठ अलग अलग हो के फ़ैल गए थे… उसकी गुलाबी छूट अब गुलाबी नहीं लाल और भूरी हो गयी थी जिसमे से लगातार पानी बह रहा tha…chut के ऊपर की उसकी काली काली झांटे और जो विशाल और कारन के पानी से सं गे था अब वो कला नहीं बल्कि चंडी की तरह चमकने लगा tha...kul मिला के दोनों भाइयो ने आज सारिका को वो दर्द दिया है जिसके बाद सायद hi वो अगले एक सप्ताह किसी को हाथ भी लगाने दे...

सारिका हफ्ते हुवे- मर डाला तुम दोनों ने आज मुझे और बात पूरी होने से पहले hi वो बेहोशी की हालत में चली गयी….

विशाल ने सारिका को जगाया और उसे जूस एंड चोकलत वगैरह दिया खाने को पर सारिका का वैसा कुछ मन नहीं था

विशाल- खा ले मासी थोड़ी एनर्जी मिलेगी

सारिका- पहले साडी जान निकल लिया अब एनर्जी दे रहा है..

विशाल- हाँ मेरी मासी खा ले तभी तो अगला राउंड के लिए तैयार हो पायेगी..

ये सुनते hi सारिका की गांड फैट जाती है वो डरे सहमे आवाज में कहती है.. अब चुना बी नहीं हाथ भी नहीं लगाने दूंगी तुम दोनों हैवानो ko…aur खुद को चादर में समेत लेती है

विशाल- अरे मासी मज़ाक कर रहा था चल जल्दी से ये खा पि ले फिर थोड़ी देर आराम कर लेना या सो जाना…


सारिका- मज़ाक????? ये देख तुम दोनों ने मेरा क्या हाल किआ है.... सारिका की गांड का होल विशाल ने इतना बड़ा कर दिया था





मनो उसके होल से उसका पेट दिख जायेगा और वही हाल उसके छूट का भी था...

विशाल- सॉरी मासी वो तो बस जोश जोश में

सारिका- बेटे जोश जोश में तुम दोनों ने मेरी जान ले ली थी आज मरते मरते बची हु.. यमराज दिख गया था आज मुझे

अजीब है न जो हाल आज अलका का होने वाला था वो सारिका का हो गया...? सच्ची खा गया है जैसे डेन डेन पे लिखा होता है खाने वाले का नाम वाइज hi छूट छूट पे लिखा होता है छोड़ने वाले का नाम

और कहानी चाहे जो भी हो लेकिन आज एक बात तो तय हो गयी की सारिका की ज़िन्दगी आज से अब बिलकुल बदल जाने वाली thi...par आगे क्या होगा वो तो वक़्त hi बता सकता है...
 
गाइस आज के आज 3 अपडेट दे चूका hu..so प्लस अपना प्यार और सपोर्ट दिखाए और कमेंट करे ...

सॉरी तो से बूत अगर आप कमेंट में कंजूसी करोगे मई अपडेट में करने लग जाउगा
 
अपडेट 47



हादसे में अलका के ऑफिस का काफी ज्यादा नुकसान हो जाता है जिसे वापस से ओर्गनइजे करने में कई दिन निकल जाते.. ार इसी बिच अशोक का एक वीक भी ख़तम हो जाता है जिसके वजह से उसे शिप पे वापस जाना पड़ता है और उसकी प्लानिंग पूरी भी नहीं हो पति…

उधर अलका के बिजी होने से विशाल पूरी तरह से सारिका के उप्पेर दीवाना हो गया था जिसकी भनक किसी को भी नहीं लगती और विशाल & कारन मिलके साइका को हर तरीके से और इतना छोड़ते है की जो सारिका शर्मीली थी उसकी शर्म उसके छूट के पानी के साथ hi मनो बह गयी थी.. घर में ज्यादा तर वो नंगी hi रेने लगी थी क्युकी उसे 2-2 लुंड का ख्याल रखना पद रहा था और कभी कभी दोनों का एक साथ भी रखना पद जाता hai…isi तरह सभी के दिन गुज़र रहे थे और शादी का दिन भी नज़दीक आने लगा था पर शादी से पहले होली थी और होली से पहले कारन का बड़े जिसे लेकर कारन काफी कुछ प्लानिंग कर रहा था और उस प्लानिंग में उसे जरूरत थी विशाल की जिसके लिए वो विशाल से बात करने की सोचता है अउ रेज hi एक दिन कॉलेज में बैठे बैठे कारन विशाल से इस बारे में बात करने की सोचता है…

कारन तो विशाल

कारन- विशाल एक बात बोलू

विशाल- हाँ बोल

कारन- यार मम्मी को बहुत दिनों से छोड़ रहे है अब कोई नया आइटम मिल जाये तो मजा आ जाये..

विशाल- हाँ यार कह तो तू सही रहा है..

कारन- फिर मेरे दिमाग में एक सख्स है अगर तू राजी हो जाये…

विशाल- मैं तो राजी hi हु टब ता कौन है वो???

कारन- तेरी माँ अलका….

Vishal-kya??

कारन- देख हमारे बिच इस बात को ले कर पहले hi क्लियर हो गया है अब इस पे कोई बहस नहीं होनी चाइये…

विशाल- अबे हाँ पता है मैं उसके लिए नहीं बोल रहा हु..

कारन- फिर की दिक्कत है?

विशाल- माँ नहीं मन्नेगी

कारन- अबे सेल डायरेक्ट बोलेंगे की मासी मई और विशाल आपको छोड़ना चाहते है तो डेफिन्टलय नहीं मानेगी.. उसके लिए तो उनको पातिना पड़ेगा न

विशाल- ाचा और पटायेंगे कैसे?

कारन- उसी के लिए तो तेरी हेल्प चाइये न

विशाल- ठीक है फिर तू सोच और मैं भी सोचता हु…. और फिर दोनों घर को चले जाते

विशाल के अंदर इस बात की बेचैनी बढ़ने लगी थी की कैसे कारन अलका को छोड़ेगा… और क्या अलका कारन को हाथ लगाने देगी…? अगर लगाने दे दिया तो?? सारिका की जगह अलका का थ्रीसम सोच सोच के विशाल के लुंड में हलचल होने लगी thi..ki तभी उसके फोन पे नोटिफिकेशन आता hai..msg कारन के साइड से था जिसे देखते hi विशाल के अंदर एक बेचैनी बढ़ने लगती है… वो सोचने लगता है जाने क्या कहने के लिए कारन मश्ग कर रहा है…

कारन- विशाल मैं ीक रास्ता निकला है

विशाल- क्या?

कारन- दो दिन बाद मेरा बड़े है उस दिन हम कुछ कर सकते है???

विशाल- आईडिया तो बुरा नहीं है पर करेंगे क्या और कैसे???

कारन- वो तो सोचा नहीं है पर तुम दोनों आ जाओगे तो कुछ फिगुरौत कर लेंगे

विशाल- आईडिया तो ाचा है चल तरय करते है..

कारन- ठीक है तू रेडी रहना मैं मासी को इन्विते कर दूंगा

विशाल- ठीक है

नेक्स्ट डे कारन कॉलेज न जा के अलका के घर चला जाता है अपने बड़े का इनविटेशन dene..use पता था की विशाल कॉलेज के लिए निकल गया होगा और इस वक़्त अलका घर पे अकेली होगी इसलिए वो तेज़ी से बाइक चलते हुवे अलका के घर पहुंच जाता hai…door बेल्ल बजते hi अलका गेट खोलती है…

अलका- कारन तू इस वक़्त??? कॉलेज नहीं गया?

कारन कोई जवाब देने के बजाय सिद्ध अलका के होंठो को चूमने लगता है..

अलका- चोर मुझे ये क्या कर रहा है मुझे ओफ्फ्स के लिए निकलना है मैं लेट हो रही हु…

पर कारन अलका को चोर्ने के बजाये उसके उसके स्कर्ट को पंतय सहित उतर देता है जिस से अलका अगले hi पल निचे से नंगी हो जाती है.. और उसके बाद अलका ने जो वाइट शर्ट पहना था वो सामने से पकड़ के एक झटके में फाड् देता है जिस से उसके बटन टूट के जमीं पे गिर जाती है और अलका अगले hi पल कारन के आगे नंगी थी…









कारन का इस तरह का बेहवे देख अलका भी अपना संयम खोने लगती है और विशाल का किश में साथ देना सुरु कर देती है.. अलका जो अभी ओफ्फ्स के लिए लेट हो रही थी वो अगले hi पल कारन के बहो में पिघलने लगी थी और अपने भांजे कारन के किश का जवाब अपने जीभ को उसके मुँह में दाल के देने लग जाती है.. कारन भी अलका को किश करते हुवे उसके नंगी गांड को मसल रहा था..

किश करते करते अलका भी कारन के पंत के ज़िप फिर उसके बेल्ट को खोल क ईगल hi पल उसके पंत उतर के उसे भी निचे से नंगा कर देती है.. और बाकि बचे शर्ट को कारन खुद hi उतरने लगता है..









अब अगले hi पल दोनों मासी भांजा बिलकुल नंगे और कामातुर थे.. विशाल मनो आज अलका को खा hi जायेगा और अलका भी आज बहुत दिनों बाद कारन से मिली थी अशोक के चले जाने से और विशाल का सारिका की तरफ ध्यान जाने से और फिर पिछले कुछ दिनों से चल रहे स्ट्रेस क वजह से वैसे भी वो कोई जिस्मानी सुख का मजा नहीं ले पा रही thi..uske ऊपर कारन आ के उसकी आग को भड़का देता है ऐसे में अपने आप पे काबू रखती भी तो कैसे… अभी जहां अलका को ओफ्फ्स के लिए लेट हो रहा था वही अब वो कारन के होंठो को चूसने की जगह चबाने लगी थी….

अलका- मुझे एक जरुरी मीटिंग के लिए निकलना है पर तू ऐसे तो निकलने नहीं देगा इस लिए जॉब hi करना है जल्दी जल्दी कर ले…

कारन भी मौके के नज़ाकत को समझते हुवे… ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझता और अलका को उठा के पास पड़े सोफे पे पटक देता है और उसके ऊपर आ जाता है…

कारन- दालु मासी??

अलका- हम्म दाल न जल्दी कर….

फिर कारन अलका को चूमते हुवे अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है…









अलका की छूट पहले hi इतना पैन ऐकोर रहा था की लुंड के अंदर जाने में ज्यादा तकलीफ नहीं होती और फिर वो खुद hi कमर ऊपर उठा उठा के अपनी चुदाई करवाने लगती है…

कारन भी अब पुरे जोश में अलका की छूट छोड़ने लगता है और अलका भी कारन का पूरा पूरा साथ देते हुवे उसका लुंड अपने छूट में निगलने लगती है…

कारन- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मासी कितने दिनों बाद हाथ आयी है तू बहुत तड़पाया है तूने मुझे

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh तो मिटा ले अपनी तड़प छोड़ अपनी मासी को बुझा ले अपनी प्यास छोड़ ऐसे hi..









कारन के झटको से अलका की चूचियों की हलचल देख कारन और जोश में आने लगता है और वो तेज़ तेज़ छोड़ने लगता है …

कारन- मासी मेरा होने वाला है

अलका- ooooooooooohhhhhhhhh इतनी जल्दी हो गया तेरा ?????? थोड़ी देर और रुक जा bête मेरा भी हो जायेगा…… uuuuuuuufffffffffffff

लेकिन कारन अलका के छूट की गर्मी नहीं झेल पता और अलका के छूट में hi अपना पानी बहाने लगता hai…chut में कारन के पानी की गर्माहट पा के अलका समझ जाती है की कारन का हो गया की तभी वो चिल्लाते हुवे बोलती है..

अलका- अंदर मत निकलना कारन प्रोब हो जाएगी…

कारन- सॉरी मासी अब तो निकल गया ….

अलका- (कारन का पहले हो जाने से और अलका का नहीं हुआ था इस वजह से वो कारन पे चिढ सी जाती है और चिढ़ते हुवे बोलती है..) मन किया था तुझे

कारन- सॉरी मासी

अलका की नज़र घडी पे पड़ती है तो देखती है उनकी चुदाई कोई 20 मिंट चली होगी क्यूई वो 20 मं पहले ओफ्फ्स के लिए निकलने वाली थी..

अलका- चल हैट अब जल्दी से मुझे फिर से शावर लेना होगा मैं पहले hi लेट हो रही थी…

कारन अलका के ऊपर से हैट जाता और अलका टेबल पे पड़े नैपकिन उठा के उस से अपनी छूट साफ़ करने लगती है जिस से कारन का पानी बह रहा था…









वो अपनी छूट साफ़ करते करते पूछती है…

अलका- ये बता किसी काम से आया था या सिर्फ मेरी लेने आया था????

कारन- अरे हाँ मासी काम से आया था

अलका- तो वो कब बताने वाला था तू??? छूट के चक्क्र में काम hi भूल जा तू गधे..

कारन- सॉरी मासी तुम आईटी दिन बाद अकेले मिली तो रहा नहीं गया…

अलका है देती है- हहहहहह ाचा अब बता काम अपना

कारन- वो मासी कल मेरा बड़े है तो आप और विशाल आ जाना घर पे

अलका- वो तो मुझे पता hi है गधे ये भी कोई बताने की चीज है क्या आ जाउंगी चल अब तू जा और मैं भी चलती हु…

ये कह के अलका रेडी हो के ओफ्फ्स और कारन अपने घर चला जाता hai…ghar जा के वप सारिका को बड़े पे अलका को इन्विते का बताता है और फिर विशाल को इन्फॉर्म करता है…



शाम को कारन और विशाल मिलते है और पार्टी का सारा सामान इकठा करने लगते है यानि दारु स्नैक्स केक……. इसी तरह आज का दिन निकल जाता है और अगले दिन कारन का बड़े था जिसकी तयारी कारन और विशाल ने अपने मक़सद को अंजाम देने के लिए किया था….
 
अपडेट 48-ा (रंगीन रात )

नेक्स्ट डे अलका को सारिका का फ़ोन आता है और वो उसे ओफ्फ्स से जल्दी आने को कहती है और अलका भी अपनी बहन की बात मानते हुवे ओफ्फ्स से जल्दी निकल जाती है… रस्ते में वो पार्लर भी जाती है और वैक्स वगैरह करवाती है अब ये वैक्सिंग विशाल के लिए था या कारन के लिए ये तो वही जाने पर वो पार्लर से hi रेडी हो के घर पहुँचती है जहां उसे बस अपना ड्रेस चंगे करना था और वो बिलकुल रेडी थी…

अलका घर आ के विशाल को रेडी होने का बोल के खुद भी अपने रूम में चली जाती है और ओफ्फ्स के कप्पड़े बदलकर वो साड़ी पहन लेती है… बाकि मेकअप तो उसने पारलर में hi करवा लिया था तो उसे तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता … इधर विशाल भी जल्दी से रेडी हो इ हॉल में अलका का वेट कर रहा होता है की तभी अलका के रूक का दरवाजा खुलने की आवाज़ आती है… और सामने से अलका हॉल की तरफ आने लगी थी






online keyboard

लाल साड़ी में अलका का जिस्म भी मनो सोने की तरह चमक रहा था … उसके लम्बे सुनहरे खुले बाल होंठो पे लाल लिपस्टिक आँखों में काजल और उसके पतले सुराहीनुमा गार्डन पे एक सोने का नेकलेस.. उस से निचे आओ तो उसके छतियो पे बने उसके दो उभर जिसे उसने ब्लाउज में बहुत मुश्किल से क़ैद कर रखा था… ब्लाउज इतना लोकत भी नहीं था पर इतना टाइट था की मनो उसकी चुचिओ को उसमे घुटन हो रही हो और वो अपनी आज़ादी के लिए बगावत कर रही ho…chati से नज़र जरा निचे ले जाये तो अलका की पतली कमर और सपाट मगर हलकी चर्बीनुमा पेट पे उसकी गोल गहरी नाभि aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh





अलका का ये कामुक रूप जो किसी को भी घायल कर दे अउ कोई भी अपना कण्ट्रोल खो दे .. इस तरह सामने कामदेवी अलका को देख विशाल की नज़रे भी अलका के जिस्म से hi चिपक सी गयी थी और उसका मुंह खुला ा खुला रह जाता है…

अलका- ऐसा क्या देख रहा है??

विशाल- माँ आप कमल लग रही हो… अगर कारन के यहां जाना न होता तो मैं अभी तुम बिना चोदे चोर्ने वाला नहीं था..

विशाल की बात सुन के अलका की हसी निकल जाती है वो पेंट के ऊपर से hi विशाल के लुंड को दबाते हुवे कहती है कोई बात नहीं वहां से आ के अपनी ये हसरत पूरी कर लेना.. और फिर उसे आंख मार देती है…

तैयार हो के दोनों माँ बीटा कारन के घर की और चल देते है.. उधर कारन बड़े बेशब्री से अलका और विशाल का वेट कर रहा था… और आखिर उसकी इंतज़ार की घडिया तब समाप्त हुई जब अगले कुछ पल में अलका और विशाल उसके घर पहुंच जाते hai…jo हाल अभी थोड़ी देर पहले विशाल का था वही हाल अभी कारन का हो गया था… वो अलका के हुस्न में खो hi जाता है..

अलका- हैप्पी बड़े कारन…

कारन- थैंक यू मासी

विशाल भी कारन के गले मिलता है और उसे विश करता है… हॉल में ौज़े सुनते हुवे सारिका भी किचन से निकल के हॉल में आ जाती है और जब विशाल की नज़र सारिका पे पड़ती है तो उसका दिमाग चक्र जाता है.. उसे समझ नहीं आता की ज्यादा सेक्सी एंड हॉट कौन है….






सारिका ने भी आज साड़ी hi पहनी थी उसपे उसका स्लीवलेस ब्लाउज इतना डीप था की चुके आधे से भी ज्यादा बहार hi थे.. दोनों चुचिओ के बिच बानी घाटियों में विशाल की नज़र एक बार से क़ैद हो गयी थी.. अलका भी सारिका को ऐसे बोल्ड अंदाज़ में देख के मुस्कुराते हुवे उसके गले लगा लेती है…

मिलने मिलाने का सिलसिला ख़तम होता है और फिर धीरे धीरे कारन के कुछ कॉलेज फ्रेंड्स आते है और सब की नज़रे अलका और सारिका के मादक जिस्म पे hi तिकी thi..ye देख विशाल और कारन एक दूसरे को समयले करते है मनो कह रहे हो हमारी माये इन कॉलेज के फुलझड़ियो से बहुत ज्यादा हॉट एंड सेक्सी है…

देखते hi देखते कारन के सरे फ्रंड्ज़ आ जाते है और फिर सब मिलके केक kat-te है.. पार्टी पुरे जोरो शोर से चल रही थी पर कारन और विशाल का मन पार्टी में नहीं लग रहा था.. क्यूंकि पार्टी वाले भीड़ भाड़ में वे लोग अपने प्लान को अंजाम नहीं दे सकते the…isliye वो जल्दी hi स्नैक्स और डिनर का प्रोग बनाते है जिस से गेस्ट डिनर कर के अपने अपने घर को चले जाये और ये दोनों अपने मक़सद को अंजाम दे सके, और फिर होता बी वैसा hi है.. डिनर करने के बाद ेके क कर के सभी अपने अपने घर निकलने लगते है और बी घर में सिर्फ अलका सारिका विशाल और कारन रह गए थे….

मेहमानो के जाने के बाद अलका भी थोड़ी देर के बाद जाने का कह के उठने लगती है की तभी कारन अलका को रोकते हुवे कहता है…

कारन- क्या मासी आप आज नहीं जाओगे आज तो यही रुको

अलका- अरे अब हम रुक के क्या करेंगे तेरा बड़े मनाने आये थे मना लिया तो अब हमे चलना chaiye..baki गेस्ट भी छे गए

कारन- तो आप गेस्ट थोड़े न हो एंड आज मेरा बड़े है तो जो मैं कहूंगा वो करोगे आप

कारन की ऐसे बचो वाली जिद को देख अलका हसने लगती है.. और फि सारिका भी अलका से रुकने का कहने लगती है की आज यही रुक जा कल चली जाना

हलाकि पहले तो अलका बहुत मन करती है पर कारन के मासूमियत और सारिका के रेक पैर रुक जाती है..

अलका- ाचा बाबा रुक जाती हु पर मैं नाईट ड्रेस नहीं लायी हु और साड़ी में बहुत भरी है तो सारिका उसे अपना नाईट ड्रेस ऑफर करती है

सारिका- तू मेरे साथ मेरे कमरे में चल और जो तुझे फ़ीट आये पहन ले

अलका भी सारिका की बात मानते हुवे उसके कमरे में चली जाती है और उसके दिखाए कपड़ो में से एक निकल के पहा लेती है…

इधर हॉल का माहौल कारन और विशाल ने एक डैम रोमांटिक सा बना दिया था निचे hi गद्दे लगा दिए लाइट को हलके पिली रौशनी वाला ों कर दिया और बिच में स्नैक्स और शराब रख देता है…

दोनों बहने जब वापस हॉल में आती है तो कमरे का बदला रंग देख के चौंक जाती है.. दोनों के बेटे ने इतनी जल्दी इतना सब कुछ कैसे कर लिया.. और क्यूंकि दोनों बहने अपने hi bête और वहाँजे से चुदाई करवा भी चुकी थी बस इन दोनों को hi आपस में पता नहीं था तो इस बात का दर भी दोनों को सताने लगा की कही ये दोनों मिलके रात कोई गड़बड़ न कर दे और ये दर सारिका को खास कर के था क्यूंकि सारिका विशाल और कारन का ये रूप पहले भी देख चुकी है…

अलका- ये क्या है इतने सरे इंतजाम कब कर लिया तुम लोगो ने..

पर आज विशाल कुछ नहीं बोलता बल्कि कारन जवाब देते हुवे बोलता है

कारन- आज मेरा दिन है सो मैं जो बोलूंगा वही होगा और आप सब को मेरी बात माननी होगी

सारिका- हाँ हाँ ठीक है मान तो रहे है अब और क्या करना है तुझे…

Karan-aaj पूरी रात पार्टी करेंगे मूवी देखने और गेम खेलेंगे….

विशाल- हाँ ये ठीक है वर्ण रुकने का क्या फायदा अगर अपने अपने कमरे में जा के सोना hi है तो..

विशाल के इस बात ने बाकि सब के सवाल यही ख़तम कर दिए और सभी अपने अपने जगह पकड़ के बैठ जाती है और मूवी का प्लान सुरु होता है

अरेंजमेंट ऐसी थी की सारिका और अलका बिछे में बैठी थी और पहले विशाल अलका के साथ बैठता है पर कारन जिद कर के अलका के साथ बैठ जाता है और विशाल को सारिका के पास भेज देता है..

कारन- नहीं नहीं विशाल आज मासी के साथ मैं बैठूंगा तू तो रोज hi बैठता है..

सारिका हस्ते हुवे- आज विशु तू मेरे पास बैठ जा ये पागल हो गया है अपने बड़े की ख़ुशी में.. और फिर विशाल सारिका के बगल में बैठ जाता है…

फिर कारन उठ के सब को ेके क पेग सर्वे करता है और स्नैक्स सामने रख के सबको एन्जॉय बोल के मूवी के मजे लेने के लिए अलका से चिपक के बैठ जाता है…

अलका के जिस्म से आती उसके बदन और परफ्यूम की मिली जुली खुसबू इतनी मादक थी की उसका जादू कारन के दिमाग पे हावी होने लगता है… अलका जैसी सूंदर कामुक औरत के तो पसीने से भी मनो इतर की खुसबू आती हो और वही ित्तर अपना जादू दिखने लगी थी वैसे hi थोड़ी देर पहले अलका ने काफी डांस भी किया था जिसके वजह से वो पसीने में भीग भी गयी थी और बी वही पसीना परफ्यूम के साथ मिल्क ीक नया और कामुक फ्रेग्रेन्स बना रहा था…

अभी मूवी आधे पे भी नहीं पहुंची थी की विशाल और कारन ने दोनों बहनो को आधी बोतल शराब पीला दी थी क्युकी दोनों अपने जिस मक़सद को अंजाम देना छह रहे थे वो सायद होश में तो नहीं दे पते…

अचानक विशाल बोल पड़ता है यार मूवी में मजा नहीं आ रहा है क्यों न कोई गेम khele…sarika भी विशाल के हाँ में हाँ मिलते हुवे कहती है

सारिका- सही कह रहा है विशु मुझे ये फिल्मे समझ नहीं आती कुछ गेम खेलते है फन भी हो जायेगा

फिर उसमे बाकि दोनों यानि कारन और अलका की भी हामी मिल जाने से मूवी के जगह चारो गेम के लिए तैयार हो जाते है..

विशाल- गेम ये रहेगा की हम सर्किल बना के बैठेंगे और बिच में बोतल घुमाएंगे फिर जिसके साइड बोतल जायेगा उसे वो टास्क करना पड़ेगा जो बाकि के लोग बोलेंगे

सारिका और अलका आने वाले खतरे से बिलकुल अनजान थी उन्हें बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था की ये दोनों आज क्या प्लान बना के बैठे है और दोनों हाँ बोल देती है… और फिर निया के अनुसार चारो एक सर्किल बना के बैठ जाती है…

विशाल- कारन तेरा बड़े है न तो तू पहले घुमा बोतल वर्ण फर से रोटा फिरेगा..

विशाल के इस बात पे सभी है देते है और फिट कारन भी अपने बचाव में हाँ ठीक है ठीक है बोल के बोतल हाथ में उठा लेता है और बिच में हुआ देता है..

पहले hi बार में बोतल कारन की तरफ आ जाती है इस से सभी की हसी निकल जाती है और बेचारा कारन झेप जाता है..

कारन- हसने की बात नहीं टास्क बताओ

विशाल- मासी आप बताओ इसे क्या करना है पर प्लस बीटा समझ के फवौर न करना मजा खराब हो जायेगा..

सारिका- ाचा बाबा ठीक है.. कारन तू हमे डांस कर के दिखायेगा… और फिर कारन डांस करने लगता है..

अब फिर से बोतल घुमाई जाती है इस बार बोतल अलका की तरफ जाता है..

कारन- आपका टास्क ये है की उसके ग्लास में थोड़ी और शराब दाल के कहता है इस ीक शिप में पीना होगा..

अलका जिसे शराब पीना वैसे hi पसंद था ो बोलती है बस?? और एक घूंट में गिलास खली कर देती है..

अगली बरी में बोतल सारिका के तरफ जाती है और टास्क विशाल देता है…

विशाल- मम्मी ने गिलास खली किया था न मासी आपका टास्क है ये बोतल मुँह में भरो और एक साँस में पि जाओ..

सारिका- bête ये बहुत ज्यादा है…

विशाल- कोई बात नहीं मासी जितना पि सको टास्क फन की तरह लो और थोड़ा डेरिंग भी तो होनी चाओये..

सारिका डरे की बात सुन के बोतल सिद्ध मुँह में भर लेती है और घुट गटकते हुवे ऑलमोस्ट 20-30% खली कर देती है…

गेम अब अपने पुरे चरम पे पहुंचने लगा था सारिका और अलका जिसपे शराब ने अपना जादू करना शुरू कर दिया था.. उसके आवाज़ में भारीपन और लड़खड़ाहट आने आने लगी थी..

एक बार फिर से बोतल घूमता है और बी की बार बरी विशाल किट hi अलका भी विशाल को डांस करने का कहती है जिसपे सारिका अपना मसाला लगते हुवे कहती है रुक रुक ये सिंपल डांस नहीं चलेगा..

विशाल- तो???

सारिका- एक मिंट रुक अभी आती हु… और वो अपने बैडरूम में जाने के लिए जैसे उठती है लड़खड़ाते हुवे गिरने को हो जाती है जिसे विशाल भाग के सहारा देता है और उसकी चुचिओ को मसल देता है..

सारिका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh लगता है मुझे नशा होने लगा है..

और फिर वो अपने कमरे में जाती है और कुछ ले के आती है और विशाल को पकड़ा देती है..

सारिका- ये ले अपनी शर्त उतर और ये पहन के नाच.. सारिका ने विशाल को एक डीप नैक चोली दिया था

चोली को हाथ में पकड़ विशाल फैलते हुवे देखता है और सारिका एंड अलका की तरफ देखते हुवे कहता ये पह्नु??? जिसपे सभी लोग हसने लगते है

कारन- ये सही है अब कर डांस .. तब से सभी को टास्क दे रहा था अब सही टास्क दिया है तुझे मुम्मा ने…

और फिर कारन अपनी शर्त उतर के चोली पहन लेता है और डांस करना शुरू कर देता है सभी तालिया बजने लगते है और माहौल पूरा रंगीन सा हो गया था.. और सईद सारिका ने यह विशाल को चोली पहना के उसके लिए आगे का रास्ता साफ़ कर दिया था…

आपको एक बात बताता चालू की गेम के दौरान जब भी मौका मिलता कारन और विशाल दोनों के जिसमे के साथ खेलने का कोई मौका नहीं चोरते थे जिस से उन दोनों के अंदर भी कामवासना भड़कने लगी थी और शराब का नशा आग में घी का काम कर रही थी जिसके वजह से सईद सारिका ने ये करने की हम्मत दिखाई थी

बोतल एक बार फिर से घूमता है और बदकिस्मती से इस बार बोतल के तरफ सारिका बैठी thi..sabhi की हसी एक बार फिर से कमरे में गूंजने लगती है.. कारन और अलका एक साथ बोल पड़ते है..

कारन- विशाल तू भी बदला लेना मम्मी से और ये कहते हुवे वो अपने हाथो से अलका कैग एंड सेहला रहा था जिसे विशाल अचे से देख रहा था पर वो बोले भी तो क्या ये सब तो प्लान का हिस्सा hi था

अलका- लो विशाल तुम्हे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा अपने बदले के लिए aaaaahhhhhhhhhh और उसकी एक आह भी निकल पड़ती है…

विशाल- मासी आपने मुझे नंगा किया था न अब आपका टास्क ये है की आप भी अपनी ये निघ्त्य उतर की आगे का गेम खेलोगे..

किसी को ये उम्मीद नहीं थी की विशाल इतना डेरिंग दिखा देगा कमरे का माहौल एक डैम से बदल गया और हसी की गूंज एक सन्नाटे में लेकिन कारन अपना काम जारी रखता है यानि अलका कैग एंड को मसलने का..

सारिका- ये कैसा टास्क है विशाल मई तुम सब के सामने???

विशाल- तो क्या हुआ मैं भी तो हुआ न..

सारिका- हाँ पर तुम लड़के हो…

विशाल- तो क्या लड़को की इज़त नहीं होती ??? मैंने भी टास्क कम्प्लट किया आपको भी यही करना होगा..

सारिका- नहीं नहीं ये मुझसे नहीं होगा//

विशाल- ठीक है फिर गेम यही बंद करते है क्युकी आप हमसे लड़का लड़का बोल के करवा लोगे और खुद औरत का हवाला दे के नाह करोगे तो क्या फायदा ऐसे गेम ka…aur विशाल नाटक करते हुवे उठने लगता है..

तभी कारन टोकते हुवे.. कयों मम्मी गेम खराब मत करो आपने िन्नेर्स तो पहने होंगे न सो प्लस छॉंट करो कितना मजा आ रहा है एंड ी प्रॉमिस मैं भी अलका मासी के कपड़े उतरवा के इसका बदला विशाल से जरूर लूंगा..

अलका- तुम दोनों अपने अपने बदले में हमारे कपडे क्यों उतरवाओगे और हसने लगती है और इस बात पे फिर बाकि के लोग भी हसने लगते है…

सारिका- पर ये बहुत ावक्वर्ड है…

कारन- कोई ावक्वर्ड नहीं है विशाल भी तो चोली पहन के नचा था और हम सब फॅमिली है ये बात यह से जाएगी भी नहीं न किसी को पता चलेगा सो प्लस गेम स्पोइल न करो इतना मजा आ रहा है… एक काम करो एक पेग और पि लो आपको हिम्मत मिलेगी…

सारिका भी कामवासना में जल hi रही थी पर इस तरह से सभी के जोर देने से और शराब क ीक और पेग पि के अपनी साडी हिमत इकट्ठा करते हुवे वो अपना गाउन उतरने लगती है…






type tieng viet

गाउन के उतरते hi सारिका के ब्लाक एंड पिंक कलौरे की ब्रा में क़ैद उसकी बड़ी बड़ी चूचिया सब के सामने आ जाती है और सारिका टास्क को एक स्टेप आगे बढ़ते हुवे गाउन उतर के विशाल के मुँह पे फेंक देती है..

सारिका- ये ले इसे hi उतरना छह रहा थान ा अब तू hi पकड़ और फिर सिर्फ ब्रा पंतय में बैठ जाती है.. जिस से उसकी छूट की लाइन कमरे के हलकी रौशनी में बी विज़िबल थी…

अलका अपनी बहन सारिका के मोठे मोठे चुके पहली बार देख रही थी जिसे देखते hi उसके मुँह में पानी आने लगा tha…aur वो बगल में पड़े शराब के गिलास में बचे दारू को एक hi झटके में पि जाती hai…aur सारिका को कॉम्प्लीमेंट देते हुवे बोलती है..

अलका- वाओ सारिका काफी माल छुपा रकः है तुमने…. ये अलका नहीं उसपे हावी हो रहे शारब के नशे ने उस से बुलवाया था…

(अगर आप सभी को याद होगा तो बताता चालू की अलका एक बार अमन के कहने पे उसके बार में एक लड़की को किश किया था जिसमे वॉक हो सी गयी थी और तब तक उसको किश करती रही जब तक बाकिओ का ध्यान उसपे नै गया और लोग तालिया और सिटी बजने लगे थे)

सारिका अलका के बातो से झेंप सी जाती है और बोतल को पकड़ते हुवे बोलती hai..ab ये गेम नहीं रुकेगा न किसी का कोई बहन चलेगा मेरे कपड़े उतरने है तो बाकिओ के भी उतरने चाइये.. ये बात उसने अलका और विशाल को देखते हुवे बोलै था…

बोतल एक बार फिर से घूमता है और एक बार फिर बोतल अलका के साइड hi जाता है… एक बार फिर से अलका और विशाल हसने लगते है साथ hi हसने लगता है कारन मगर सारिका की हसी तब गायब होती है जब विशाल उसे उसका टास्क देता है… सारिका को लगता है की विशाल अब कोई और टास्क देगा कपडे तो उतरवा hi चुक्का है अब इस से ज्यादा क्या उतरवायेगा..

विशाल- क्या बोलै था मासी गेम नहीं रुकनी चाइये सब के कपड़े उतरने चाइये…

सारिका- हकलाते हुवे हाँ हाँ उतरने चाइये..

विशाल- ठीक है मासी अब आपका टास्क ये है की आप कारन का पंत उतरो…

अब क्यूंकि सारिका ने hi खा था सभी के कपड़े उतरने चाइये तो फिर वो कैसे मना कर सकती थी वो भी कारन के पास जा के उसके पंत के नाड़े को खोलने लहटी है..






नदी को खोलते हुवे उसकी हसी और उत्तेजने उसके चेहरे पे साफ़ झलक रही थी.. एक माँ अपने hi बहन और उसके bête के सामने ब्रा पंतय में जो मुश्किल से उसके गांड और चुचिओ को छुपा पा रहा था .. में अपने bête का पेंट उतर रही थी… और देखते hi देखते सारिका कारन का पंत उतर देती है…

सारिका गेम के मनो परसनली लेने लगी थी और कारन से कहती है bête इनदोनो माँ बेटो ने हमे नंगा कर दिया है अब हमारी बारी है..

कारन- हाँ मम्मी बस अब तुम देखती जाओ

अलका- अरे मैंने कुछ भी किया है ये तुम तीनो ने hi किया है आपस में मुझे क्यों फसा रही हो..

कारन- अब तो आप फास गयी हो मासी अब कोई फायदा नहीं और पीछे हटने का भी कोई रास्ता नहीं है… चलो माँ अब तुम्हारी बारी है बोतल घूमने की

और सारिका बोतल घूमती है और जिसका सारिका को था उसे वो hi मिल जाता है बोतल अलका की तरफ रुकी थी इस बार … बोतल तो रुक गयी थी पर आने वाले टास्क का सुन अलका की धड़कने दौड़ने लगी थी…

सारिका- चल बहन बहुत तमाशा देख रही थी अब तू उतर अपने कपडे…

जो काम कारन और विशाल करने वाले थे वो अब सारिका करने लगी थी जिस से उन्दोनो का काम आसान होने लगा था…

अलका को भी पता था बहस का कोई फायदा तो है नहीं इसलिए वो बिना बातो में टाइम जाया किये अपने कपडे उतरने के लिए उठ जाती है…






और अगले hi पल वो सिर्फ ब्रा और पंतय में बड़े नज़ाकत के साथ अपने जिस्म की नुमाईश करते हुवे सब का ध्यान अपनी और आकर्षित कर लेती hai…alka की यही अदाए उसे बाकिओ से अलग बनती थी.. यूँ तो कपडे सारिका ने भी उतरे थे पर अलका कपडे भी कुछ इस अंदाज़ से उतरती है की कोई एक पल के लिए भी अपनी नज़रे उस से हटा न सके..

अलका- सारिका की बची इनलोगो के किये का बदला तू मुझसे ली है न अब देख तू मैं क्या करती हु..

और बोतल स बार अलका घूमती है और फिर से सारिका जाल में फास जाती है… सारिका का मुँह लटक जाता है..

सारिका- ये साला हर बार मैं hi क्यों फास जाती हु.. उसके इस बात पे सभी हसने लगती है…

अलका- अब रोने का कोई फायदा नहीं सुरु अब तू अपने डरे के लिए तैयार रह

सारिका- हाँ ठीक है मैं तैयार हूँ

अलका- ok तो रिमूव योर ब्रा..

ये सुनते hi कारन और विशाल एक दूसरे को देखने लगते है… मनो आँखों hi आँखों में इशारे से कह रहे हो हम कुछ नहीं करना पड़ेगा ये औरते खुद hi एक दूसरे को नंगा कर देगी..

अलका के इस टास्क से सारिका का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है.. वो हकलाते हुवे बोलती है

सारिका- क्या?? तू सच में ये चाहती है???

अलका – हाँ तुमने भी मेरे कपडे उतरवाए अब तेरी बरी और थैंक यू बोल की सिर्फ ब्रा उतरवा रही ह उतेरी पंतय nahi….jyada नखरे किये तो वो भी उतरवा लुंगी

सारिका- नहीं नहीं मई उतरती हु…






maths symbols in tamil

इस तरह सारिका अपने ब्रा को उतर देती है और साइड रख hi रही होती है की अलका टोकते हुवे बोलती है.. जब कपडे तूने विशाल पे फेंके थे तो ब्रा ऐसे साइड में क्यों रख रही है इसे कारन के मुँह पे फेंक..

सारिका- तू पागल हो गयी है… और वो कारन के ऊपर न फेंक के फिर से विशाल पे hi फ़ेंक देती है

अब कमरे का माहौल ये था की विशाल ऊपर से नंगा जबकि कारन निचे से सिर्फ चड्डी में सारिका सिर्फ पंतय में और अलका ब्रा और पंतय में थे… पूरा कमरा उनके बदन की गर्मी से गरम सा होने लगा था ऊपरवाला hi जाने अगली बार कौन नंगा होआ पर इतना तो तय था की आज कोई बचने वाला नहीं था….

बोतल एक बार फिर से घूमती है और इस बार वो इंसान फास्ट है जिसने ये सब शुरू किया था यानि की विशाल और टास्क सारिका को देना था ो तो जैसे अपने बजती का बदला लेने के लिए कब से इंतजार कर रही थी.. बोतल विशाल की तरफ रुकते hi वो बोल पड़ती है..

सारिका- चल bête तू अब आया है जा में बहुत नंगा करवाने का सूख है न शर्ट तो तू पहले से उतर चुक्का है तो चल अब अपनी पेंट उतर.

विशाल- मई क्यों मासी आप hi उतर के अचे से ले लो अपना बदला…

सारिका- ये भी ठीक है और पास जा के उसके पंत को उतरने लगती है पर जाने क्या होता है वो पंत चड्डी सहित उतर देती है..






विशाल- ये क्या बात सिर्फ पंत उतरने की हुई थी आपने चड्डी क्यों उतरी…

सारिका हस्ते हुवे बिना कुछ बोले अपने सीट पे जा बैठती है…

विशाल- ठीक है अब देखो मैं क्या करता हु..

वोटले विशाल घूमता है और इस बार कारन फास्ट है

विशाल- कारन तू मासी के चुचिओ को मैलेगा..

कारन- क्या?? (वैसे वो तो कब से इस मोके की तलाश में था फिर भी नाटक करते हुवे कहता है)

विशाल- हाँ

सारिका- करने दे कारन आजा ये दोनों भी फसेंगे तब मैं डरे दूंगी तू देखना

कारन भी जा के सारिका के चुचिओ को मसलने लगता है..






सारिका की चूचियों को पिछले कुछ दिनों में दबा दबा के इनदोनो ने इतना बड़ा और भरी कर दिया था जो मुश्किल से hi कारन के हाथ में आ रहा था,, सारिका आँख बंद किये अपने चुचिओ पे हो रे दबाव को एन्जॉय कर रही थी अब उसपे वासना इतनी हावी हो गयी थी की गेम रोक के कारन उसकी चुदाई करने को कहता तो वो सईद मना नहीं करती बल्कि खुद कारन के लुंड पे बैठ जाती पर आज का शिकार सारिका नहीं अलका थी इसलिए कारन सारिका को चोर के फिर अपने सीट पे बैठ जाता है जब उसके कान में अलका की आवाज़ जाती है..

अलका- चोर दे bête गेम का तू सबसे ज्यादा फायदा उठा रहा है…

अब बरी कारन किट hi और फस्ती अलका है..

कारन- जब माँ नंगी है तो आप कपडे में अचे नहीं लग रहे हो आप भी अपनी ब्रा पंतय उतरो और विशाल की तरफ अपनी गड कर के त्वरक करो..

(गांड… ये शब् पहली बार आज किसी ने उसे किया था और बजाए उसे टोकने और रोकने के अलका अपने टास्क को करने में लग जाती है,, सईद इस गरमा गर्मी का असर उसपे भी होने लगा था)

अलका- ठीक है अब जब सभी ऐसे अधनंगे है तो मैं क्यों शर्मो..






और फिर अलका अपनी ब्रा उतरती है फिर अपनी पंतय को आधे अपनी जांघो तक फसा के अपनी गांड विशाल की तरफ कर की आगे पीछे करते हुवे मटकने लगती है… ये बात तो साफ़ हो गया था की खेल खेल में ये लोग बहुत आगे निकल चुके थे जहां से वापसी नहीं थी… जहां सिर्फ एक मंज़िल उनलोगो का इंतज़ार कर रही थी और वो मज़िल थी इन चारो का मिलान….





अलका- सिर्फ विशाल hi क्यों ले कारन तू भी देख ले अपनी मासी की गांड और जल्दी तुझे तेरी माँ की भी दिखेगी... अब तू रेडी होजा अपनी माँ को देखने के लिए...
 
क्या अपडेट दू भाई कोई कमेंट वगैरह आता hi नहीं इतना कुछ लिखने के बाद भी सिर्फ एक दो कमेंट आने से मेरा मूड ऑफ हो जाता है
 
हाँ तो भाई आप सब के लिए hi लिख भी रहा हु आप हो गए और Pk8566 भाई हो गए जिनका कमेंट मई अपने हर पोस्ट पैर देखता हु
 
ठीक है भाइयो मई पोस्ट कर दूंगा आज hi बूत टाइम लगेगा आप चेक कर लेना रात में
 
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