Incest Kamuk Alka - Page 9 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अलका अपने मेड्रिड के ऑफिस जाती हुई..... मेड्रिड तो याद होगा न आप सभी को?? जल्दी hi उस राज़ से पर्दा हटने वाला है



 
अपडेट 48-स (रंगीन रात-3, पिक्चर अभी बाकि है मेरे दोस्त)

आज अलका और सारिका दोनों को एक न्य एक्सपेरन्स मिला था जिसमे वो दोनों hi खो गए थे और उन्दोनो को hi अपने बेटो का कोई ख्याल नहीं था इधर विशाल और कारन को इसका बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था की ये दोनों बहने इस क़दर एक दूसरे में खो जायेंगे और दोनों इस सोच में पद गए की अगर ये अलग नहीं होंगी वो उनका आगे का प्रोग कैसे बढ़ेगा..

दोनों के पागलपन को देखते हुवे विशाल hi आगे बढ़ता है और अलका के गांड को मसलते हुवे उन्दोनो का ध्यान अपनी और आकर्षित करने के मक़सद से बोलता है..

विशाल- तुम दोनों के अंदर जो आग भाड़ा रही है वो ऐसे शांत नहीं होगी.. उसके लिए तुम्हे इसकी जरुरत पड़ेगी…






सारिका के नज़र जब विशाल और उसके विशालकाय लुंड पे पड़ती है तो वो बौखला सी जाती है.. और वो अनजान बनते हुवे बोल पड़ती है…

सारिका- omg इतना बड़ा….? इंसान का है या गधे का मैंने इतना बड़ा कभी नहीं dekha..sarika की बात सुन अलका भी अनजान बनते हुवे

अलका- फ़क विशु तुम कहना क्या चाहते हो??? यू वन फ़क उस?? अपनी माँ को छोड़ने का प्लान है तुमलोगो का??

इस पर विशाल कुछ बोलता उस से पहले कारन अलका के मुँह में लुंड पेल देता है..






कारन- अब ड्रामे बंद करो मासी.. कब से हमारे सामने एक दूसरे के साथ लेस्बियन कर रहे हो और हमारे सामने अनजान भोली बनने का ड्रामा करते हो.. और इतना कह के अपना लुंड अलका के मुँह में पेलने लगता है और अलका भी बड़े जोश में विशाल का लुंड चूसने लगती है…

विशाल भी आग में थोड़ा और घी डालने का सोचता है और वो अलका के छूट पे अपनी गरम सांसो को चोरते हुवे उसे किसी कुत्ते के पिल्लै की तरह चाटने लगता है…






अलका इस दोहरे हमले से बिलकुल hi बेकाबू हो जाती है वो कभी कारन के लुंड को मुँह में भर के चुस्ती है तो कभी उसे निकल के उसे अपने हाथो से मालने लगती है.. अलका वासना की आग में पूरी तरफ से जल रही thi…uska जिस्म बिलकुल लाल सा पद गया था…

इधर विशाल भी अक के दोनों टैंगो को पूरा खोल देता है और अपना मुँह अलका के छूट में रगड़ने लगता है तो कभी उसके छूट के लिप्स को अपने होंठो में भर कर खींच लेता तो कभी उसके दानो को दन्त से काट रहा tha…aur ऊपर से कारन लगातार अलका के मु को छोड़ रहा था.. अलका बिलकुल किसी पोर्नस्टार की तरह इस दोषरे हमले का मजा ले रही थी वह भी अपनी टंगे पूरी खोल देती है…

सारिका ये सब देख के पागल होने लगती है वो फ़ौरन अलका के मुँह से विशाल का लुंड निकल लेती है और खुद उसे अपने मुँह में भर के चूसने लगती है..






और कारन जो अभी तक अलका के मुँह में झटके मार रहा था ो अब अपनी माँ सारिका के मुँह को छोड़ने लगता है…

अलका के मुँह से कारन का लुंड निकलते hi वो जोर जोर से हाफने लगती है .. विशाल अलका को खड़ा कर के उसके होंटो को चूमने लगता है…






जिसे देख कारन भी सारिका को खड़ा कर देता है और बी सारिका एंड अलका बिच में हो जाती है और कारन और विशाल को चुम रही होती है साथ hi उनके लुंड को मसलने लगती है… और दोनों बहने आपस में अपनी गांड भी रगड़ रही थी जिसे देख विशाल और कारन ज्यादा hi उत्तेजित होने लगते hai..kafi देर खड़े खड़े एक दूसरे को चूमने चाटने के बाद अलका बोलती है…

अलका- तुम्हारा लुंड तो पत्थर जैसा सख्त है विशु…

विशाल- तो इसे चूस के नरम बनाओ माँ,,, दिखाओ अपने इस मुँह का जादू






अलका- हाँ क्यों नहीं और फिर अलका विशाल को और सारिका कारन का मुँह में लुंड भर के पुरे शिद्दत से चूसने लगती है

लुंड के मुँह में जाते hi कारन और विशाल दोनों के मुँह से एक साथ aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhh की आवाज़ निकल पड़ती है… जिसे सुन दोनों औरते है पड़ती है और फिर पुरे जोश में अपने अपने बेटो का लुंड मुँह के अंदर बहार करने लगती है… मनो दोनों में कोई कम्पेतितों लगा हो…

कारन- aaaaaahhhhhhhhhhhh माँ क्या मजा आ रहा है

काफी लम्बी मुँह चुदाई के बा बरी आती है उस काम को अंजाम देने की जिसके लिए ये सारा चक्रव्यूह रचा गया था एंड क्यूंकि आज की टारगेट अलका थी इसलिए दोनों भाई अलका को दबोचने से पहले सारिका को हल्का कर देने का सोचते है जिस से सारिका आराम से सो जाये और वो अलका को तसल्ली से फाड़ सके और दूसरा फायदा ये था की सारिका को चुड़ते देख अलका की आग और भड़क जाती तो उसे छोड़ने में और भी मजा आएगा…

लेकिन कोई कुछ बोलता उस से पहले सारिका कारन का लुंड अपने मुँह से निका देती है और बीएड पे खुद hi उछाल के लेट जाती है और अपनी टंगे फैलते हुवे बोलने लगती है…






सारिका- अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता मुझे जल्दी से छोड़ के मेरे छूट को शांत करो…

कारन- पर माँ आप ये बोल किस से रहे हो मुझे या विशाल को??

सारिका- जिसका मन हो आ जाओ बस मेरे छूट में अपना लुंड दाल के इसे शांत कर दो बहुत खुजली होने लगी है…

सारिका की उत्सुकता देख अलका अपने bête विशाल से बोलती है जा विशु पहले उसकी खुजली शांत कर दे फिर मुझे तसल्ली से छोड़ना पूरी रात

और विशाल को भी तो यही चाइये था इसलिए वो फ़ौरन सारिका के पास जाता है और उसके छूट मिलूण्ड सेट कर क ीक करारा झटका देता है.. जिस से सारिका की तेज़ चीख कमरे में गूंज उठती है

और कारन अब अपना खड़ा लुंड लिए अलका के करीब जाता है और उसके बालो को पकड़ के उसके मुँह में अपना पूरा लुंड पेल देता है…






अब माहौल कुछ ऐसा था की कारन विशाल के माँ का मुँह छोड़ रहा था और विशाल उसकी माँ की छूट..

विशाल का हर धक्का सारिका के बच्चेदानी को ठोकरे मार रहा जिस से सारिका किसी जलीं मछली किट रह मचलने लगी थी और अपने कमर और गांड उठा उठा के उसके लुंड को लेने लगती hai..aur विशाल भी अब तेज़ी से झटके लगते हुवे सारिका को छोड़ रहा था जिसकी चीख कमरे में गूंज रही थी.. और उस चीख को सुन के कारन और ज्यादा जोश में अलका के मुँह को छोड़ने लगता है और फिर कारन अलका को उठा के उसे उसकी बहन के बगल में लिटा देता है और फिर अपना लुंड अलका के छूट पे रखते हुवे एक जोरदार झटके के साथ पूरा का पूरा लुंड एक hi बार में अलका के छूट में उतर देता है…






ये एक बड़ा hi दुर्लभ दृश्य था जहां दो माये अपने hi बेटो से एक साथ चुदाई करवा रही थी और अपने शरीर की गर्मी अपने bête के लुंड से निकलवा रही थी…

अब सारिका और अलका दोनों के होंठ एक बार फिर से एक दूसरे से मिल जाते है और वो अपने bête से चुदाई के सात साथ एक दूसरे के होंठो को चुम रही थी..

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh fuccccccccccckkkkkkkkkkkk uuuuummmmmmmmmmmmmmm uuummmmmmmmmmmmm

सारिका- और तेज़ झटके लगा विशाल मेरा आने वाला है ऐसे हइच छोड़ अपनी मासी को फाड़ दे मेरी छूट uuuuuuuuuuufffffffffffffffff और नहीं रुका जाता जोर जोर से झटके लगा…

और फिर सारिका अपने पुरे चरम पे पहुंच जाती है और वो तेज़ सीत्कारी के साथ झड़ने लगती है.. उसके छूट से सईद hi पहले कभी इतना पानी निकला होगा वो कांपते पैरो के साथ उसकी छूट पानी बहाने लगती है लेकिन सारिका बेशर्मी की साडी हाडे तब पार कर देती है जब अपनी सफ़ेद पानी से बैठे छूट को अलका के मुँह की तरफ घुमा देती है और सारा का सारा पानी अलका के मुँह पे गिराने लगती है…






उसके छूट का पानी इतना गधा और इतना ज्यादा निकला था की अलका का पूरा मुँह उस पानी से सफ़ेद होने लगा था और अलका भी उसे मुँह खोल के पिने लगती है.. ये उसके जिस्म की गर्मी से सुच रहे गले को गीला कर रही थी या उसकी प्यास और ज्यादा जगाने लगी थी ये कहना मुश्किल था क्यूंकि पानी के मुँह पे गिरते hi वो पागलो की तरह सारिका के छूट को एक बार फिर से कुरेद कुरेद के चाटने लगती है…





इधर अलका के इस तरह सारिका के छूट को कुरेद कुरेद के चाटने से सारिका भी बेचैन होने लगती है और वो अपनी छूट अलका के मुँह पे जोर जोर से घिसने लगती है और साथ hi अपनी चूचिया मसलते हुवे जोर जोर से हवस और वासना में चीख के साथ रोने भी लगती है..





पर सारिका का ये रोना किसी दर्द के वजह से नहीं था बल्कि उस चरमसुख के वजह से था जो वो आज पहली बार महसूस कर रही थी और और जिसे बयान करने के लिए उसकी ख़ुशी की कहर उसके छूट से होते हुवे उसके आँखों और जुबान पे उतर आती है….

सारिका- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhhh अलका मेरी बहन ये क्या कर दिया तूने मैं पागल हो रही हु ऊऊफफफफफ और नहीं सहा जाता मुझसे चोर दे अब मुझे…

सारिका के छूट से बेहटा पानी अब बहना काम हो गया था लेकिन अलका अभी भी उसे पागलो की तरह बेतहासा चुम रही थी जिस से सारिका तड़प के छूटने की कोशिश करती है पर अलका उसके जांघो से पकड़ के वापस अपने मुँह पे बिठा लेती है और उठने नहीं देती…

ये इस बात का संकेत था की अलका अब अपने आप में बिलकुल भी नहीं और आगे वो खुल के चुदाई के मजे लेने और देने वाली है और उसकी ये हरकत देख के विशाल बहुत खुश हो रहा था….






अलका अब सारिका के दोनों पेअर हवा में उठा के उसके गांड में ऊँगली करते हुवे उसके छूट पे चूम्मीओ की झाडिया लगते हुवे जीभ को पूरा अंदर दाल दाल के चूस रही थी और सारिका की मॉनिंग अब चीखो में बदल गयी थी… अभी अभी झड़ने के वजह से उसकी छूट पहले से hi सेंसिटिव थी और उसके ऊपर इतने सरे हमले वो बर्दाश्त नहीं कर पति और जोर जोर से चीखने लगती है…

सारिका- अलका क्या कर रही है रैंड ऐकोर साली मैं मर जाउंगी मुझसे और नहीं सहा जा रहा है..

पर अलका उसके चीखो को सुनने के बजाय उसके मुँह को बंद कर देती है और तेज़ तेज़ ऊँगली और जुबान चलना सुरु कर देती है…

कमरे में सारिका के गीले छूट में ऊँगली के अंदर बहार हने से पपपपपाकछहहहहह fffaaacccchhhhhhhhhhh की आवाज़ गूंज रही थी और उसपे सारिका की घुंटी घुंटी आवाज़ पुरे कमरे का माहौल कामुक हो गया था..

सारिका- गगगगगगगगगगगग करते हुवे पेअर पटकने की कोशिश करती है पर उसके पैरो को अलका ने जकड रखा था…

और अंत में सारिका एक बार फिर से जोरो से चीखते हुवे झड़ने लगती है….






अलका उसके दोनों जांघो को मसलने लगती है और सारिका इतना जोर से चीखती है की खुद से hi उसे अपना मुँह दबाना पद जाता है..

और फिर सारिका के चेहरे पिउ ो शांति थी जो उसे दो लुंड एक साथ ले के भी उसके चेहरे पे नहीं आयी थी उसका शरीर बिलकुल ढीला पद जाता है और आखिरकार सारिका अपना हथ्यार दाल देती है और बीएड पे किसी नागिन की तरह मछल्ने लगी थी..






वो अलका से अब चोर्ने की गुहार लगा रही थी और अलका जैसे खो hi गयी थी की पीछे उसे अपने छूट पे कुछ गरम तगड़ा और मोटा सा महसूस होने लगता hai..jiske एहसास मात्रा से अलका के जिस्म सिहर जाता है और उसके मुँह से aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh फुट पड़ती है और इस से पहले वो कुछ समझती या कोई रिएक्शन देती पीछे से उसकी जांघो को पकड़ के विशाल बड़े बेरहमी से पलट देता है जिस से वो पीठ के बल लेट जाती है और वो अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaaa

विशाल- कारन मुँह बंद कर इस कुटिया का.. और ये सुनते hi कारन अपने खड़े लुंड को अलका के मुँह में दाल देता है…






और फिर दोनों एक साथ अलका के मुँह और छूट को भर देते है… उधर सारिका लगातार दो बार झड़ने से अपने बेकाबू हुवे सांसो पे कण्ट्रोल कर रही थी और छूट की गर्मी निकल जाने से वो नींद की आगोश में चली गयी.. यानि मैदान साफ़ था अब इस रणभूमि में सिर्फ अलका कारन और विशाल the…aur यही तो कारन को चाइये था की वो भी अलका को वैसे hi चोदे जैसे विशाल उसकी माँ सारिका को छोड़ता है उसके hi सामने…
 
अपडेट 48-डी (रंगीन रात-4, एन्ड गेम)

सारिका लगातार दो बार झड़ने से अपने बेकाबू हुवे सांसो पे कण्ट्रोल कर रही थी और छूट की गर्मी निकल जाने से वो नींद की आगोश में चली गयी.. यानि मैदान साफ़ था अब इस रणभूमि में अब सिर्फ अलका कारन और विशाल the…aur यही तो कारन को चाइये भी था की वो भी अलका को वैसे hi चोदे जैसे विशाल उसकी माँ सारिका को छोड़ता है उसके hi सामने…

अब आगे

लगातार काफी देर तक अलका के मुँह में लुंड पेलने के बाद कारन अलका को उठा के अपने और विशाल के बिच में बिठा देता है… और अलका के होंठो को चूमने लगता है..






अलका में भी अब किसी तरह की कोई शर्म या संकोच बाकि नहीं बचा था ो एक तरफ कारन के की होंठो को चूमते हुवे अपनी जुबान उसके मुँह में दाल देती है और साथ hi अपने एक हाथ से कारन का तो दूसरे हाथ से अपने bête का लुंड हिला रही थी..

अलका आज दोनों जवान मुस्टंडो के बिच फांसी हुई थी या ये भी कह सकते है की एक नए एक्सपीरियंस के लिए खुद को तैयार कर रही थी… इसी तरह एक लम्बे फोरप्ले के बाद कारन अलका को बीएड पे धकेल के लिटा देता है और अलका भी बड़े कामुक अंदाज़ में लेटते hi कारन की और देखते हुवे अपनी टंगे हवा में उठा के खोल लेती है.. और फिर कारन भी अलका के ऊपर आ के उसके छूट में अपना लुंड पेल देता है..






कारन जिसने सुबह भी एक बार अलका की चुदाई किट hi बूत अलका का छूट अपना रास बहा पते उस से पहले कारन ढेर हो चुक्का था और उसके बॉस इतने देर से हो रहे इस खेलवाड़ से अलका चुदाई की आग में जल रही थी.. उसकी छूट आज आग उगलने लगी थी जिसमे मनो वो सब जला डालने वाली थी.. कारन के तेज तेज झटको से अलका पागलो की तरह अपनी गड उठा उठा के उसका साथ दे रही थी और पूरा लुंड अपने छूट में लेने की कोशिश कर रही थी…

अलका- कारन मेरे पैरो में दर्द होने लगा है बीटा निचे करने दे मुझे मेरे पेअर ऊऊफफफफ और ऊपर नहीं रकह जाता मेरे से..

कारन चुदाई में विशाल जितना निर्दयी नहीं बन पता था की जब उसकी माँ दर्द में हो तो उसे अनसुना कर दे और फिर उसके दर्द को और बढ़ा दे इसके उल्टा कारन फ़ौरन अलका को पेअर निचे कर देता है और उसे घोड़ी बना के उसे पीछे से पेलने लगता है…






अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कारन क्या कर दिया आज तूने उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ मैं पागल हो रही हु छोड़ ऐसे hi अपनी मासी को छोड़ सेल…

कारन- हाँ मासी बहुत दिनों से तड़प रहा हु मैं आज तुझे छोड़ छोड़ के तेरी छूट फाड़ दूंगा uuuuuuuuuuffffffffffffff कितनी गरम है तू मासी तेरी छूट आग उगल रही है…..

और फिर इसी तरह बड़बड़ाते हुवे अलका की नज़र विशाल पे पड़ती है तो देखती है विशाल का लुंड आज पहले से ज्यादा विकराल और भयंकर लग रहा था सईद पहली बार अपनी माँ को अपने सामने किसी और का लुंड लेता देख उसका ये हाल था… उसका टोपा मनो आलूबुखारा बन गया हो.. और इतने कड़क और भयानक लुंड देखते hi अलका के मुँह में पानी आने लगता hai.wo इतनी ज्यादा गरम और जंगली हो जाती है की वो कारन को hi उठा के बीएड पे पटक देती है और खुद उसके ऊपर चढ़ के उसका लुंड अपने गरम मखमली छूट में समां लेती है और अपनी मोती बड़ी गांड उसके कमर पे रगड़ रगड़ के उसका उसके लुंड का मजा लेने लगी thi…aur साथ hi अलका विशाल की तरफ देख रही थी..






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अलका विशाल को इतने कामुक अंदाज़ में देखती है की मनो आँखों hi आँखों में कह रही हो देख तेरी माँ को कोई और छोड़ रहा है और तू सेल खड़ा हो के लुंड हिला रहा है.. आजा मेरी गांड पीछे से खली है तू चाहे तो उसमे अपना लुंड उतर के छोड़ दाल अपनी माँ को अपने hi भाई के साथ मिलके…

इतना कामुक नज़ारा देख के तो बूढ़े का भी बर्दाश्त का बांध टूट जाता जहां अपनी hi माँ अपने कजिन से गांड उठवा उठवा के चुद रही हो और नज़रे bête के लुंड पे हो और वही हाल विशाल का भी हो रहा था पर विशाल भी पक्का खिलाडी था ो अलका को इतना गरम और प्यासी कर देना चाहता था की वो खुद रंडी की तरह लुंड की भीख मांगे और उछाल उछाल के चुदाई करवाए..

अंत में विशाल भी अपनी माँ का ये रंडी जैसे अंदाज देख के मनो पागल hi हो जाता है और वो आगे बढ़ते हुवे अलका के करीब जाता है…

अलका भी विशाल के लुंड को एक बार फिर से मुँह में भरने के लिए खुद को तैयार करने लगी थी और वो विशाल को देखते hi अपने बाल झटक के साइड करती हुई मुँह खोल के जीभ निकल लेती है लेकिन सईद विशाल का कुछ और hi इरादा था.. वो अलका के पीछे जाता है और उसके पीठ को अपने होंठो से चुम चुम के गिला कर देता है चुदाई में बड़ा से निकलते गर्मी को अगर bête के होठो का ठंडक मिल जाये तो अलका जैसी कामुक औरत मनो हवाओ में सैर करने लगती है और कुछ ऐसा hi हाल इस वक़्त अलका का था जिसका नतीजा ये था की वो और ज्यादा जोर से कारन के लुंड पे कूदने लगती है.. पर ये खुसी उसके चेहरे पे ज्यादा देर रुक नहीं पति क्यूंकि अगले hi पल विशाल अपनी माँ अलका के कैसे हुवे गांड को देख इतना पागल हो जाता है की वो बिना किसी चेतवानी के उसमे अपना गरम कड़क आलूबुखारा पूरा जोर लगते हुवे एक hi बार में घुसा देता है…






विशाल जनता था की अगर वोट क बार में चूक गया तो दुबारा मौका उसे अलका नहीं देने वाली इसलिए वो पहली बार में hi पूरी हिमत के साथ लुंड को जितना अंदर जा सकता था पेल देता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaddddddddddeeeeeeeetttttttttrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrccccccccccccccccchhhhhhhhhhhhhoooooooooooooooooodddddddddddddddddddddddddddd ययय्ययएईएएएए kkkkyyyyyyyyyyyyyyaaaaaaaaaa kkkkkkkkkkiiiiiiiiyyyyyyyyyyyaaaaaaaaa bhhhhhhhhhadweeeeeeeeeeeeee fffffaaaaaaaaaaddddddddddd दी मेरी chuttttttttttt और ganddddddddddddd eeeeeeeeeekkkkkkkkkkkkkkk ssssssssaaaaaaaaaaathhhhhhhhh तुम दोनों मादरचोदो neeeeeeeeeeeeee

अलका जो इस हमले के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं थी.. न hi उसे इस बात का जरा भी अंदाज़ा था की आज उसे एक साथ 2-2 लुंड लेने पड़ेंगे वो इस हमले से इतना जोर का चीखती है की सारिका की नींद भी खुल जाती है…

चीख की गूंज से जब सारिका का ध्यान अलका की तरफ जाता है तो वो देखती है सारिका दोनों ुस्टंडो के बिच फांसी हुई है और उसके आंसू उसके आँखों से बह रही है ुर उसकी आँखे बिलकुल लाल मनो उसमे खून उतर आया हो…






अलका की आंखे पलटने लगती है उसके दोनों पेअर थार थार कैंप रहे थे पूरा जिस्म उसका लाल पद गया था और उसकी जीभ भी बहार निकल आयी थी कुल मिला के उसका बहुत बुरा हाल हो गया था पर अभी तो विशाल का आधा लुंड hi उसकी गांड में गया था.. एक आखरी झटका तो झेलना बाकि hi था और अगर विशाल बिना रुके ये झटका लगा देता तो सईद अलका की गांड में लुंड जाती मगर मुँह से उसकी जान निकल जाती…

अलका- निकालो इसे मई मर जाउंगी…. किस से पूछ के तुमने एक साथ मेरे दोनों छेद में अपना लुंड डाला है भनचोड़ो मैं कोई रंडी हु क्या निकल मादरचोद भड़वे विशाल तेरी माँ की छूट…

पर विशाल अलका को जरा भी सेरियस नहीं लेता और उसके पीठ को चूमते हुवे उसे शांत करने की कोषसिंह करने लगता है..

विशाल- बस माँ हो गया बस और दर्द नहीं होगा आपको…

अलका- मादरचोद तुमने मेरी गांड फाड़ के कहता है दर्द नहीं होगा चोर मुझे उतर निचे पर कारन अलका को जोर से जकड रखा था… अपनी बहन को दर्द में देख आखिर सारिका उसके करीब आती है और उसके होंठो को चूमने लगती है…






और साथ hi सारिका अलका के चुचिओ को दबाने और चूमने लगती है जल्दी hi अलका सारिका के किश का रेस्पोंस देने लगती है और उसके होंठो को अपने मुँह में भर के चूस रही थी… अभी हुवे इस दर्दनाक हमले से अलका की साँस अभी भी छड़ी हुई थी उसका पूरा बदन अभी भी कैंप रहा था और इस एक झटके ने hi उसके अंदर इतनी उत्तेजना भर देता है की वो पसीने से लथपथ हो गयी थी.. अगर सारिका उसे इस तरह सेहला के सेंट्र्ल में ना लती तो सईद वो आज मर hi जाती. और अभी वो थोड़ा कण्ट्रोल में आने लगी थी पर उसे क्या पता था की आगे आने वाला पल उसे इतना दर्दनाक होने वाला था की जिसे वो सईद hi बर्दाश्त कर पायेगी..

अभी अलका ठीक से अपने सांसो को काबू कित्या भी नहीं था की विशाल अपना लुंड खींचते हुवे एक जोर का झटका लगता है और एक hi बार में अपना पूरा लुंड अलका की गांड में चीरता हुवा हुआ देता है…






झटका इतना दर्दनाक और जोरदार था की उसके छूट से उसके पेशाब की धार निकल जाती है.. उसकी चीख जो सारिका के होंठ अंदर होने से डाब रही थी वो सारिका के होंठो को जोर से काट लेती है जिस से की सारिका के होंठो से खून बहना सुरु हो जाता है..

अलका दर्द से चटपटा रही थी… उसका कांपता बदन जो अब बिलकुल लाल हो गया था वो पसीने से चकने लगा था… पूरा कर्मा अलका के चीख से नहीं बल्कि उसके रोने की आवाज़ से गूंज रहा था..

उसका शरीर बेजान बन के कारन के ऊपर hi गिर जाता हैए वो रट रट बेहोश hi हो गयी थी… हलाकि विशाल पहले hi अलका कैग एंड को खोल चुक्का था पर वो हादसा हुवे काफी समय हो गया था और इस तरह की दर्दनाक चुदाई जिसमे पहले से hi एक लुंड अलका के छूट में था और दूसरा गांड में घुसते hi अलका कैग एंड का सील एक बार फिर से टूट चुक्का था जिसका साबुत था उसके गांड से निकलता खून जिसे विशाल का लुंड भीगने लगा था….






विशाल का लुंड अलका के छूट से निकलते पेशाब और खून से सं गया था… उसे जरा भी अंदाज़ा नहीं था की अलका की ये हालत होने वाली है.. क्यूंकि उसे तो पता था उसकी माँ बहुत चूड़ाकड है जो घंटो छुड़वा सकती है पर ये अंदाज़ा नहीं था की दो लुंड एक साथ लेने से उसका क्या हाल होगा..

अलका के इस तरह बेजान पड़ने से कारन अलका को चूमने लगता है उसके गाल थपथपाने लगता है और पीछे से विशाल भी अलका के गार्डन और पीठ को चुम रहा था..

कारन तो एक बार को लुंड निकलने लगता है जिस से की अलका को आराम मिले पर विशाल उसे रोक देता है..

विशाल- नान ा निकलना मत वर्ण दुबारा डालने नहीं देगी.. अगर डबल मजा लेना है तो इसे थोड़ा कण्ट्रोल में आने दे फिर देख क्या मजा आएगा ता तक के लिए इसे चुम चाट गिला करता रहा… वो सारिका को भी अलका के छूट और गांड चाटने को कहता है जिस से अलका को सईद ाचा लगे.. और सारिका भी अपने कटे होंठो से अपनी बहन अलका की छूट को चाटने लगती है…






अपने गेट हुवे गांड और छूट पे सारिका के कोमल होठो का स्पर्श पा के सारिका को ाचा लगने लगता है वो थोड़ा होश में आने लगती है और आते hi दो मोठे मोठे पत्थर जैसे लुंड को अपने दोनों छेड़ो यानि गांड और छूट में पा के फिर से चीख के रोने लगती है…

अलका- मुझे बचा ले सरु मैं मर गयी फाड् दिया इन भनचोड़ो ने मेरे दोनों छेड़ो को मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है बहुत जलन हो रही है कुछ कर मुझे निकल इन हरामियों के चंगुल से..






सारिका- बस मेरी रानी कण्ट्रोल कर बड़ा मजा आएगा

अलका- साली रंडी तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तू रोज 2-2 लुंड लेती है जो मजा आएगा कह रही है..

सारिका उसके बाटे का कोई जवाब नहीं देती.. अब वो कैसे बताये की वो तो कब से इनदोनो का लुंड एक साथ झेल रही है और इतना झेल रही है की उसे अब इनदोनो को एक साथ लेने में hi शांति मिलत है…..

आखिर एक लम्बे अंतराल के बाद अलका नार्मल होने लगी थी और कारन एंड विशाल भी अब धीरे धीरे अपना लुंड आगे पीछे लड़ने लगे the…lekin अलका की जंघे अभी भी कैंप रही थी.. उसका पूरा गार्डन पसीने से भीग गया था जिस से उसके kesh(baal) भी गीली हो गयी थी जो अलका को और ज्यादा कामुक बना रहा था

विशाल कारन को एक बार फिर से अलका को कास के जकड़ के पकड़ने को कहता है ताकि वो अपना आखरी देव खेल सके और कारन भी वैसा hi करता है.. फिर विशाल दुबारा से अलका के बाल को पकड़ के अपना लुंड खींच के अलका के गांड में शुरू के 3-4 धीरे धीरे झटके मरते हुवे फिर से पूरा लुंड पेल देता है..






अलका- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh fuckkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkk मर गयी मैं चोर दे मुझे ेके क कर के आओ सालो माँ अक दूध पिया है तो..

अलका के इस बात पे विशाल और कारन हसने लगते है और फिर दोनों स्लो स्लो अलका को छोड़ने लगते hai…is बिच अलका की छूट रह रह के अपने पेशाब की धार फैक्चछहहह फ़फ़फ़फ़ासछछःह कर के बहा रही थी… जिस से बिस्तर का सफ़ेद चादर सफ़ेद से मटमैला और खून के फैलने से लाल होने लगा था…

अलका अब खुद hi अपनी छूट कारन के लुंड पे हिलने लगी थी जिसका जवाब कारन भी अपना लुंड के ठोकरे मरते हुवे देने लगा था… कारन के निचे से झटका मरने से विशाल का लुंड खुद बा खुद अलका कैग एंड में घुस के हलचल मचा रहा था.. अब अलका का दर्द भी काम हो के खुजली में बदलने लग जाता है….. और अलका एक कामुक नज़र के सात विशाल की और देखती है मनो कह रही हो अब और दर्द दे मुझे…

इस तरह अलका के देखने से विशाल भी अलका के होंटो को चुम लेता है और अपना लुंड जो बड़े hi एआरएम से अंदर बहार कर रहा था वो एक डैम से तेज़ी से पेलने लगता है…






एक बार फिर से अलका के ऊपर do-tarfa हमला होना सुरु हो जाता है जिस से एक बार फिर से उसका मुँह और गांड एक साथ फैट के खुल गया था..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuucccccccccccchhhhhhhhhhhhhh ाहिष्ते बचो पहली बार है मेरा तोडा आराम से

कारन- अब तो तू इसकी आदत दाल ले मासी अब तुझे रोज 2-2 लुंड मिलेंगे ऐसे hi एक साथ..

अलका- uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffffff maaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr गयी तेरी मासी अपनी माँ को आदत लगा 2-2 लुंड की वो देख कितने प्यासी नज़रो से देख राइ है..

और दोनों भाई मिलके अलका कैग एंड और छूट का कचूमर निकल देते है अलका की चीख से पूरा घर गूंज रहा था उसकी कमर की हड़िया इस दोहरे दबाव से चिटकने लगी थी,…

अलका- अब मुझे निचे उतरो मेरा कमर सुन्नन पद गया है उतरो मुझे निचे ….

और एक लम्बी चुदाई के बाद दोनों पोजीशन बदलने के लिए कारन जैसे hi अलका को उतरने को हाथ लगता है विशाल वापस से अलका के पीठ पे दबाव बनाते हुवे उसे कारन पे दबा देता है और अपना लुंड अलका कैग एंड से निकल के उसके छूट में घुसा देता है…






अलका बेचारी अभी अभी तो अपने गांड के फटने के दर्द को भुला भी नहीं पायी थी की विशाल उसके छूट में कारन के लुंड के साथ अपना लुंड भी उतर देता है…. अलका पे मनो बिजली पहाड़ सब एक साथ गिर गया था वो अपने दोनों हाथ पेअर पटक पटक के छटपटने लगती hai..wo दर्द के सिखर पे पहुंच गयी थी जहां उसकी चीख सईद बहार सड़क तक जा रही हो तो कोई चोकने की बात नहीं होगी और उसे इतना दर्द देने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका अपना सागा बीटा था..

अलका- mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrrrrrrr dddddddddddddaaaaaaaaaaaaaalllllllllllllllll vvvvvvvvvvviiiiiiiiiiisssssssssshhhhhhhhaaaaaaaaallllllllllll mmmmmadddddddddeeeerrrrrrrrcccccccccohoooooddddddddddddd म्मम्मा हूँ तेरी कोई सड़कछाप रंडी नहीं थोड़ा तो रहें कर बीटा मैं दो- दो लुंड नहीं ले पा रही हु और तुम दोनों कभी गांड तो कभी छूट में पेल दे रहे हो….

कारन जो तब से बड़े hi डेंटली अलका को छोड़ रहा था मनो वो उसे कोई दर्द न देना छह रहा हो पर जब विशाल उसका सागा बीटा उसकी माँ को रंडी की तरह छोड़ने पे तुला हुआ था तो फिर पीछे क्यों रहे और क्यों न वो भी फुल मजे ले आज इस गदरायी जवानी से लबालब औरत के जो रिश्ते में उसकी मासी है..

कारन अलका को उसी पोजीशन में उसके छूट में लुंड डेल हुवे hi उसके कमर में हाथ दाल के पलट देता है और जिस से अलका विशाल के ऊपर और कारन अलका के ऊपर आ जाता है.. इस तरह उसके शरीर के साथ खेलवाड़ हो रहा था मनो उसमे कोई जान hi न हो और छूट में दो दो लुंड के होते हुवे इस तरह उठा कैग ह्यूमेन से उसके छूट में हो रहे दर्द में कई गुना इजाफा हो जाता है और वोट क बार फिर से चीख पड़ती है और रट हुवे गालिया देने लगी थी..

अलका- mmmmmmmmmmmaaaaaaaaddddddeeeeeeerrrrrrrrrccccchooooooooodddddoooooooo rannndddddddddddiiiiiiiiiiiii की ोलाआआअआदडदूऊऊओ तुम पागल हॉग ए हो क्या???? कही भागी नहीं जा रही मैं आराम से क्यों नहीं करते कोई वैश्य नहीं हु मैं…

पर अब अलका के दर्द और चीखो की परवाह किसे थी खरबूजे को देख खरबूजा रैंड बदल चुक्का था और जो कारन अभी तक थोड़ा तरस खा रहा था अब वो अलका को इतनी बेरहमी से छोड़ने लगता है की विशाल को भी पीछे चोर देता है..






वो अलका के कोमल भीगे केशो को अपने मुट्ठी में भर के उसेक सर को कास के पकड़ के अपने लुंड को पुरे रस्तर से अलका के छूट में अंदर बहार करने लगा था और उसके हरे क परहरा और झरके से अलका की आह निकल जाती है..

अलका- baaassssssssssss करो ेके क कर के कर लो प्लस मैं हाथ जोड़ती हु

कारन- चुप साली रंडी बहुत देर से नखरे कर रही है आज तो तू रंडी hi है हमारी और आज तेरी छूट और गांड सब फाड् के भेजूंगा तुझे तेरे घर मादरचोद साली कुटिया और एक छठा उसके कोमल लाल गलो पे लगा देता है…

कारन को सईद ये पता नहीं था की अलका का इंजन बस गरम होने में टाइम लेता है और जो एक बार गरम हो जाये वो कारन जैसे खिलोने को कब निगल जाएगी उसे पता भी नहीं चलेगा.. और देखते hi देखते वो घडी आ गयी थी जब अलका के ऊपर हो रहे ये सरे जुर्म ये दर्द अब उसे मजा देने लगा था…………






लगातार मिल रहे घर्षण से उसकी छूट की खुजली अब बढ़ने लगी थी और वो अपनी छूट मसलते हुवे फिर विशाल जो काफी देर से शांत बैठा था उसको ललकारते हुवे कहती है..

अलका- तेरा क्या हुआ विशु तू थक गया क्या और नहीं छोड़ेगा अपनी माँ को आजा दिखा अपनी मर्दानगी अब मैं भी देखु तुम दोनों के लुंड में कितना दम hai..aur ये कह के वो खुद दोनों के लुंड को पकड़ के अपने छूट में घुसाने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh छोड़ो मुझे फाड् दो मेरी chuttttttttttt uuuuuuuuuuffffffffffffffff अब जा के मजा आने लगा है तुम दोनों ने मेरी छूट फैला दी छोड़ छोड़ के ऐसे hi छोड़ो सालो फेडो मेरी छूट इसे भोसड़ा बना दो aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh mmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

इतना कहते hi अलका का छूट अपना पानी बहाने लगता है इनदोनो जवान लुंड ने अलका के छूट को आज निचोड़ के रख दिया था और जाने कितनी बार hi उसके छूट ने पानी छोरा था ो अलका को मिल रहे दर्द की आगे किसी का ध्यान hi नहीं गया…

उधर अलका की हो रही इस दर्दनाक चुदाई को देख के सारिका भी अपने छूट को मसलने लगती है.. और वो अलका के मुँह के पास अपना छूट सत्ता के घिसने लगती है..

विशाल जो काफी देर से पहले सारिका और फिर अलका की चुदाई कर रहा था और इस तरह अलका के छूट में दोनों के एक साथ घुसने और उसकी छूट का धज्जिया उदा देने के बाद उसके लुंड का भी पानी अब उसके मुँह पे आ चुक्का था जो कभी भी अलका के पेट को भर सकता था…






और फिर देखते hi देखते विशाल का पानी अलका के छूट को भर देता है और उसका लुंड ढीला पद के अलका के छूट से निकल जाता है…

सारिका की नज़र जब विशाल के चमकते लुंड पे पड़ती है तो किसी कुटिया की तरह जीभ निकले विशाल के लुंड की तरफ बढ़ने लगती है… विशाल का कला भयंकर लोढ़ा अलका के छूट के पानी और अपने hi लोड के निकले पानी से मिल के चमकने लगा था जिसकी चमक सारिका को अपनी और खींच ले आती है और सारिका आज की दूसरी रंडी विशाल के लुंड को मुँह में भरके उसपे लगे पानी को चाटने और पिने लगती है…






विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मममममममममआयएएससीईई

सारिका का पूरा मुँह विशाल के लुंड से निकल रहे पानी से भरने लगता है जिसकी कुछ बुँदे उसके होंठो पे लग जाती है और वो उसे भी अपने उंगलिओ से लप्पेट समेत के खाने लगती है …. सारिका के इन अदाओ से विशाल एक डैम से पागल होने लगता है..

विशाल- uuuuuuuuuuuuufffffffffffffff maaasssiiiiiiiiii तू भी काम नहीं है पूरी की पूरी रैंड है uuufffffffffffffff

सारिका- आज तो रांड तेरी माँ है देख कैसे कारन उसे छोड़ रहा है… उसकी हालत बता रही है की वो अगले कुछ दिन लुंड का मूतने से भी डरेगी…

सारिका की ऐसी बात सुन के जब विशाल नज़र घुमा के अलका और कारन की तरफ देखता है तो उसकी आंखे फटी की फटी रह जाती है…

नज़ारा कुछ ऐसा था की विशाल लेता हुआ था और सारिका उसके लुंड से छटपटाते हुवे उठती है और उसके छूट से एक बहुत तेज़ धार निकलती है जैसे कोई बांध टूट गया हो…






कारन ने आज अलका की बस करवा दी थी अलका पूरी बेजान सी हो गयी थी पहले do-do लुंड अब घंटो चले लम्बी चुदाई के बाद जिसमे अलका जाने कितने बार जहर चुकी थी जिस से की अब वो मूतने पी ा गयी थी पर कारन जाने आज क्यों रुकने का नाम नहीं ले रहा था वो बिना रुके अलका को चोदे जा रहा था अलका का जांघो में अब जरा भी ताक़त नहीं बची थी की वो और कारन के ऊपर बैठ के कूद सके इसके बावजीद कारन उसके कंधे पे दबाव बनाते हुवे उसे फिर से अपने लुंड पे बिठा लेता hai…alka में इतनी जान भी नहीं बची थी की वो विरोध कर सके और कारन के इस तरह दबाव बनाना से वो धड़ाम से कारन के खड़े क़ुतुबमीनार से लुंड पे बैठ जाती है… लुंड चीरता हुआ अलका के बच्चेदानी को ठोकरे लगा देता है और अलका के मुँह से एक बार फिर से चीख निकल पड़ती है..

कारन- तेरे bête ने बहुत छोड़ है मेरी माँ को वो भी मेरे hi सामने आज उसके सामने उसकी माँ की छूट फाड़ दूंगा साली रंडी….

आखिर कारन ने जोश जोश में आ के अपनी चुदाई का राज़ खोल देता है पर इस वक़्त उसके बातो पे किसी का ध्यान नहीं जाता क्युकी सब का ध्यान तो अलका के हो रहे धुँवाधार चुदाई पेट है..

अलका दर्द से बिलखने और रोने लगी थी पर उसका असर कारन पे जरा भी नहीं पड़ता वो बिलकुल बेलगाम घोड़े की तरह सवारी के मजे ले रहा था…

कारन अब अलका के थरथरे पेअर को और तकलीफ देते हुवे उसे एक दस्त के सहारे झुका के खड़ा कर देता है अलका के पैरो में सच में इतनी जान नहीं थी की वो टेबल के शेयर भी खड़ा हो सके पर कारन आज किसी और hi मूड में था वो अलका को उसी पोजीशन में खड़ा कर पीछे से अपना लुंड पुरे ताक़त के साथ अलका कैग एंड में उतर देता hai…alka की गांड जो पहले से hi फैट के खून से लथपथ थी उसमे कारन के लुंड के जाते hi वो बोखला सी जाती है… उसके छूट से पानी की धार बहने लगती है और मुँह से ढेर सारा थूक और लार… बदन दर्द के मरे पसीने से तरबतर और मुँह से लगातार गिर रहे लार उसकी बेबसी बयां कर रही थी..






वो बहुत जोर जोर से रो और गिड़गिड़ा रही थी छोड़ दो मुझे अब और मत करो मुझे छोड़ दो पर कारन लगातार पेल रहा था..

अलका बड़े आस भरे नजरो से विशाल की तरफ देखती है.. उसकी बेबसी उसके आँखे और बहते आंसू बयां कर रहे थे मनो वॉक यह रही हो देख आज तूने अपनी माँ की क्या हालत कर di…tere सामने कोई कैसे तेरी माँ को रंडी की तरह छोड़ रहा है…

अलका के जांघो की कपकपाहट उसे बार बार गिरा दे रही थी और कारन बार बार उसे उठा इ पेल रहा था…

कारन- बस मासी हो गया मेरा मैं आने hi वाला हु थोड़ा सा और

अलका- तूने मेरी पूरी जान निकल दी खड़ा नहीं हुआ जार अहा फिर भी खड़ा कर के छोड़ रहा है और मासी बोलता है मादरचोद सेल भड़वे अपनी माँ को छोड़ना अब के बाद..

कारन फिर अलका को बीएड पे लिटा देता है और अपना लुंड जो उसी के छूट के पानीसे सं गया था ो अलका के मुँह में दाल के उसके मुँह को छोड़ने लगता है… अलका के मुँह की गर्माहट पा के जल्दी hi कारन का पानी अलका के मुँह में hi गिरने लग जाता है और और उसी गिरते पानी के साथ एक बार फिर से बड़े बेदर्दी के साथ अलका के मुँह को छोड़ रहा था जिस से पूरा पानी अलका के चेहरे पे फ़ैल जाता है…






और अलका भी अपने म्हणत के इनाम को बड़े hi प्यार से चाटने और पिने लग जाती hai….chudai का ये कार्यकर्म जो रात में सुरु हुआ था वो आज सूरज की पहली कीतरन के साथ ख़तम हुई थी… यानि इनकी चुदाई पूरी रात चली जिसे ख़तम होते होते सुबह हो चुक्की थी ….

रात हुवे अपने इस धुवेदार चुदाई के बाद अलका के शरीर में न जान थी न होश और वो बीएड का कोना पकड़ के सो जाए है लेकिन जब दिन के उजाले में सृका का ध्यान बीएड पे बिछे चादर पे जाती है तो उसके रोंगटे खड़े कर देता है.. ये चादर इस बात क बयान कर रही थी की रात के अँधेरे में उसके बहन पे क्या जुल्म हुवे है और उसने कितना कुछ बर्दाश्त किया है...





सफ़ेद चादर अलका के गांड और छूट से निकले खून से लाल हो गया था.. मनो कल यह कोई दो बच्चे की माँ नहीं बल्कि नयी नवेली दुल्हन चूड़ी ho...in दो जालिमो ने उसके छोटी बहन को किसी रंडी की तरह रगड़ रगड़ के छोड़ा था जिस से उसकी बहन बेहोशी की हालत में नंगी पेअर फैलाये सोई हुई थी.. ध्यान से देखने पे वो देखती है की उसकी छूट और गांड दोनों सूज के लाल हो चूका था...





उसमे अभी भी कारन और विशाल के लुंड का गधा सफ़ेद पानी उसके छूट से बाहर रिस रिस के गिर रहा tha...jiski खबर अलका को बिलकुल भी न थी... वो तो बेचारी अपने साथ हुवे इस धोके वाली चुदाई के दर्द में बेहोश पड़ी थी...





उसके छूट और गांड की हालत बता रही थी अगला कुछ दिन उसकेलिये बहुत दर्दनाक गुज़रने वाला है जिसमे उसे खड़ा होने के लिए भी सईद सहारे की जरुरत पड़े... लेकिन कुछ भी कहो अलका यूँ सोते हुवे इतनी प्यारी लग रही थी की इंसान सोचने पे मजबूर हो जाये की इतनी प्यारी और नाज़ुक औरत का ये हाल कोई कैसे कर सकता है??? कोई इतना निर्दयी कैसे हो सकता है की इस फूल सी औरत को मसल दे.. पर मसलने वाला यह कोई और नहीं उसका अपना सागा बीटा था...

अलका की ये हलात देख के सारिका का छूट भी रिसने लगा था.. वो भी मन hi मन बड़बड़ने लगती है

सारिका- ऐसे hi दोनों मेरी चुदाई कब करेंगे जब दो दो लुंड एक साथ मेरी छूट में और गांड में दाल के किसी रंडी की तरह चोदे........... uuuuuuuuuuuuuffffffffffff अलका तेरी ये हालत देख के मेरे छूट में खुजली होने लगी है....
 
दोस्तों आपके इंतजार को ख़तम करते हुवे इस रंगीन रात को 4 भागो में आज कपलटली पोस्ट कर दिया आप इसे पढ़े और कंत कर के जरूर बताये आपको कैसा लगा.. एंड आप आगे क्या देखना चाहते है वो भी कमेंट कर के बता सकते हो.. मैं आने वाले उपदटेस में उन बातो का ध्यान रखूँगा
 
अपडेट 49- नयी सुबह

किंग सून ...
 
Update-49A (नयी सुबह या दर्दनाक सुबह)

रात को हुई उस दर्दनाक और धुवेदार चुदाई के बाद कमरे में सूरज की किरणे अपने साथ नयी सुबह इ के आयी थी और ये सुबह पहले की तरह नहीं था.. रात जो खेल इन चारो ने खेला था वो इनके रिश्तो को पूरी तरह से बदल देता है.. कमरे में रात भर की चीख और कामुक सिसकारियों के बाद एक तेज़ सन्नाटा पसरा हुआ था.. अलका अभी भी बीएड क ीक कोने में सिमटी हुई अपने नींद के आगोश में थी और उस से चिपक से सोया हुआ था karan..dono hi इस वक़्त पुरे नंगे थे और करण का लुंड सुबह की अंगड़ाई की साथ एक बार फिर से अलका के गड और छूट के मुहाने पे दस्तक देने लगा था..





दोनों मसि भांजा ऐसे चिपक के सोये थे मानो वो मासी भांजा नहीं कोई नवविवाहित जोड़ा हो जिसने अभी अभी अपनी पहली सुहागरात मनाया हो… कारन नींद में hi हलके हाथो से अलका के चुचिओ को मलरहा होता है और अलका उसके जांघो को सेहला रही थी.. इस वक़्त ये चुदाई या वासना नहीं बल्कि एक दूसरे के जिस्म को राहत दे रहे थे प्यार दे रहे थे…

पुरे कमरे में एक ख़ामोशी पसरी हुई थी की अचानक एक तेज़ चीख गूंजती है और पूरा कर्मा एक साथ जग जाता है.. अलका जो नींद में थी और कारन भी वोट क डैम से उठ के बैठ जाते है और सामने देखते है तो उनके आगे एक भयावह नज़ारा था…






विशाल सारिका के दोनों पैरो को आपस में जोड़ क ीक रस्सी से बांध देता है और उसे कुछ इस तरह से लिटाया था की उसका सिर्फ कन्धा बीएड पेट है और बाकि पूरा जिस्म हवा में और इस तरह से उसके पुरे शरीर का भर सारिका के कंधे पेट है.. अउ रेज में विशाल सरिक की गांड जो बिलकुल 90 डिग्री के एंगल में हवा में थी उसमे जोर जोर से अपना मुसल पेलने लगा था… विशाल अपना लुंड इतनी जोर से पेल रहा था की सारिका की ेके क हडियो से चिटकने की आवाज़ आने लगी थी याय उन कहे विशाल ने उसका नस नस खोल दिया था….

कारन जब अपनी माँ को इस अवस्था में रट हुवे चुदाई करवाते देखता है तो उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है क्युकी दो लुंड से चुदाई एक तरफ लेकिन इस तरह का पोजीशन तो उसने कभी सोचा भी न था….

विशाल- जग गया कारन………???? तैयार हो जा अब इसके छूट की खुजली मिटानी है….

ये टी विशाल का सारिका के साथ दर्दनाक चुदाई का दृश्य है पर वो यहां ताका ए कब और कैसे इसके लिए हम थोड़ा पीछे षाले है……..

चुदाई का पहला राउंड ख़तम होते hi अलका में इतनी जान नहीं बची थी की वो आँख भी खोल सके …. टंगे खोलने की तो दूर की बात थी और वही हाल कारन का भी था सो वो दोनों मासी भांजा चिपक के सो जाते है…. लेकिन अपना हीरो विशाल उसका नहीं हुआ था… और न hi सारिका को लुंड वाला सुच मिला था जो उसके अंदर जल रही आग को शांत कर सके…

अलका की हुई दर्द नाक चुदाई को देख सृका तो दरी हुई थी hi पर उसके अंदर कामवासना की चिंगारी अब जवाला बन चुकी थी.. सैकड़ी नहीं लाखो चीटिया उसके छूट में रेंगने लगी थी उसे किसी दमदार लुंड से कूट कूट के hi मारा जा सकता था वर्ण ये चीटिया सारिका को सोने नहीं देने वाली थी….

इधर विशाल के आँखों के सामने सारिका का वो कांपता पेअर और बेबस चेहरा बार बार आ रहा था..






किसे उसकी माँ अलका बड़ी मजबूर हो के दर्द और उम्मीद भरे निगाहो से उसकी तरफ देख रही थी.. कैसे उसका पूरा जिस्म कैंप रहा था और फिर भी कारन उसको पेलता गया बिना किसी रहें के और विशाल बदले में कुछ भी न कर सका… हालाँकि विशाल जब भी अलका को छोड़ता है तो सईद इस से भी बुरी हालत कर देता है लेकिन यहां सवाल ये है की उसके होते उसके सामने कोई और कर gaya...aur विशाल भी सईद अब सारिका के साथ कुछ ऐसा hi करने की टाक में था की तभी उसे खुद सारिका चाक इ वो मौका दे देती है….

विशाल नींद में था ो अपने ख्यालो में था और अपनी माँ अक बदला लेने के लिए मौके की तलाश में था की तभी उसके अपने लुंड पे कुछ जेल गीला लगने लगता hai…use पहचानते देर नहीं लगती की ये गिलपन का एहसास किस चीज का है..






जब उसकी नज़र निचे जाती है तो वो देखता है उसकी मासी सारिका कामवासना में जल रही थी वो विशाल के लुंड को नहीं उसके ाँद को चूस रही थी और उसके आधे मुरझाये लुंड से अपने गलो को थप थापा रही thi..uske थूक से कमरे की हलकी रौशनी में भी विशाल का लुंड मनो 0 वात के बल्ब की तरह चमक रहा था.. विशाल जिस आग में जल रहा था मनो उस आग ने उसके लुंड को एक नया आकर दे दिया था जिसका अंदाज़ा इस तरह लगाया जा सकता था की जब सारिका उसे अपने गाल पे मल्टी या तप्तजापति तो उसका गाल विशाल के लुंड से चुप जा रहा था….

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कितना बड़ा और मोटा लग रहा है तेरा ये लुंड vishal…lagta है अपनी माँ की चुदाई का सोच सोच के ये और ज्यादा फूल गया है… जैसे तूने अलका को छोड़ा है वैसे hi अपनी मासी की प्यास बुझा दे मेरे bête… बुझायेगा न????

विशाल तो पहले से hi इस मोके की तलाश में यह वो फ़ौरन सारिका के बालो को मुठी में भर की उसके मुँह को अपने लुंड के ऊपर निचे करना सुरु कर देता है…






लुंड सारिका के मुँह को बिलकुल फैला दिया था उसे दर्द का एहसास से ुन्सी आंखे पलटने लगी थी,, पर ये तो बस सुरुवात है आज सारिका को बहुत कुछ झेलना बाकि था…

सारिका- गगगगगगगगगगगगग uuuuuuuuuuggggggggggg aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhh

विशाल- क्यों नहीं मेरी रांड आज तुम दोनों बहनो के छूट और गांड का मिलान करवा दूंगा… तू बस ऐसे hi चूस चूस के मेरा लुंड तैयार कर अपने छूट में लेने के लिए…

सारिका की हालत विशाल ने खराब करना सुरु कर दिया था ो उसके मुँह को बेरहमी से छोड़ रहा था और इतने से उसका मन नहीं भरता की वो उठ खड़ा होता है और सारिका को बिठाते हुवे उसके मुँह में एक hi झटके में अपना पूरा लुंड उसके गले को चीरते हुवे अंदर तक पेल देता है…






इतनी गहराई तक वो भी एक hi झटके में सारिका ने कभी भी नहीं लिया था उसकी सांसे अटक जाती है उसे बहुत जोरो की घुटन होने लगती है वो छटपटाते हुवे पीछे को भाग रही थी पर विशाल के पंजे में किसी घोड़ी की लगाम की तरह इसका बाल क़ैद था,… विशाल के तेज़ गिरफ्त से वो छूट नहीं पा रही थी और इस बेरहमी से वो साँस भी ले पा रही थी वो चटपटे हुवे हुवे निचे गिरने लगती है की विशाल और जोर लगाके उसके पूह पे अपने पुरे शरीर का भर लगा देता है.. सईद कुछ सेक् और रुक गया तो सारिका का बचना मुश्किल हो जायेगा उसकी ाह्खे फैट के बहार आ गयी थी आंसुओ की धरा और मुँह से बेहटा लार बता रहा था की वो कितना दर्द में hai…akhir कर सारिका अपने सहरीर का पूरा जोर लगते हुवे जैसे तैसे अपने मुँह से उसके लुंड को आज़ाद करती है और जोर जोर से हसफे लगती है….

विशाल- क्या हुआ मेरी रांड अभी से हालत बिगड़ गयी तेरी तो…

सारिका- सेल मादरचोद ऐसे तो तू मेरी जान ले लेगा जानवर है क्या आराम से अनहि कर सकता उउउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ पूरा गाला फाड़ दिया… यह सारिका की आवाज़ भी बदल गयी थी उसकी सुरीली आवाज़ अब किसी कौवे की आवाज़ लग रही थी यानि सच में विशाल के लुंड ने उसके गले का बजा बना दिया था…

विशाल- तेरी मुँह की गर्माहट पागल कर देती है मासी फिर मैं कण्ट्रोल में नहीं रह पता

सारिका- सारा कण्ट्रोल यही खो देगा तो इसे कैसे शांत करेगा… ये बात सारिका ने विशाल को अपनी छूट की तरफ इशारा करते हुवे बताया था…

विशाल- इसके लिए तो मेरे अंदर अलग से एनर्जी बचा के रखा हु

सारिका- तो चल फिर बहुत मुँह में दाल लिया अब वहां दाल जहां के लिए इसे बनाया गया है और इतना कह के वो विशाल को बीएड पे धक्का दे के लिटा देती है और खुद उसके लुंड पे बैठ जाती है पर लुंड को छूट के अंदर नहीं लेती बल्कि अपने छूट के दोनों पंखुडिओ के बिच फसा के उसपे अपने छूट को घिस रही थी..






सारिका का छूट इतना पैन ऐकोर रहा था की मनो उसकी छूट विशाल के लुंड की ऑइलिंग कर रहा हो…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh विशु कितना सख्त है ये एक डैम पत्र की तरह ये पतहर आज मेरे कोमल कोमल छूट के परखचे उदा देगा रईईए hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyeeeeeeeee मममममअअअअअअअ मई कितना तड़प रही हु इसे अंदर लेने के लिए…

विशाल- mmmmmmmmmmaaaaashhiiiiiiiii तेरी छूट तो आज आग उगल रही है… इतना गरम पहले कभी महसूस नहीं हुआ ….

सारिका- तेरी मा की चुदाई देखने के बाद ये मेरी बुर बेकाबू हो रही है विशु… आज मुझे इतना छोड़ की मेरी जान निकल दे सब फाड़ दे ये बुर ये गांड ये मेरा मुँह एक डैम सस्ती रंडी की तरह छोड़ मुझे… की हफ्ते बाद भी कोई देखे तो उसे मालूम पद जाये की की इसकी बेरहमी से चुदाई हुई है…

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh मासी तेरी बाटे मुझे और ज्यादा गरम कर रही है…

सारिका- बोल छोड़ेगा न अपनी मासी को…… फाड़ेगा न मेरी बुर…. मुझे अपनी रंडी बना ले आज के लिए कोई रहें मत कर मेरे ऊपर बस छोड़ मुझे मेरी चीख इस पुरे घर में गुंजनि चाइये… अपनी मर्दानगी दिखा… उठ मादरचोद अब फाड़ मेरी बुर को…

सारिका के इस तरह गरमागरम बाटे बोलने से विशाल पुरे जोश में आ जाता है और सारिका के अपने ऊपर से उतर के खुद खड़ा हो जाता है.. उसका लुंड इतना सख्त लग रहा था मनो दीवार को ठोकर मारा तो दीवार भी तोड़ देगा फिर आज तो सारिका की छूट की बरी थी वो भी कोमल कोमल मखमली छूट…

विशाल अब सारिका को बेल बे कुटिया बनने को कहता है और सारिका भी किसी पालतू कुटिया की तरह अपने मालिक का बात मानते हुवे कुटिया बांके अपनी गांड विशाल की तरफ कर देती है.. सारिका की बड़ी बड़ी गोरी गांड देख विशाल बेकाबू होने लगता हैए ुर वो कारन की बेरहमी को याद करते हुवे मन hi मन कहता है तेरा बीटा मेरे से बड़ा जानवर तो नहीं बन सकता… और इतना कह के वो अपना लुंड सारिका के छूट के मुहाने पे रगड़ने लगता है….






सारिका की छूट जो पहले भी दो बार झाड़ चुकी थी और रात से hi लुंड लेने के लिए तड़प रही थी वो विशाल के मोठे तगड़े लुंड का दस्तक अपने छूट पे महसूस करते hi मुहबन्द कर के अपनी चीख दबाने की कोशिश करने लगती है और आने वाले हमले और दर्द के लिए खुद को लाबी लम्बी सांसे लेते हुवे तैयार कर रही थी… सारिका की बढ़ती सांसे और बेचैनी से उसकी गांड के छेद खुलने और बंद होने लगता है.. उसके छूट की कसावट बढ़ने लगती है और उसका गोरा गोरा पिता वासना की आगे में लाल गुलाबी होने लगा था… विशाल अगला हमला बड़ी तेज़ी से करता है और पूरा का पूरा लुंड सारिका के बुर को फाड़ते हुवे अंदर घुसा देता hai…sarika दर्द से बेचैन हो के खुद पे काबू नहीं रख पति और बीएड पे hi गिर जाती है.. पर अब खेल सुरु हो चुक्का था और वापसी का कोई सवाल नहीं था … सारिका के बीएड पे गिरने का विशाल पे कोई असर नहीं पड़ता और वो उसी अवस्था में सारिका के छूट में अपना लुंड पेलने लगता है…





सारिका अपनी चीख को दबाने के लिए अपने दन्त से दन्त पिस्टे हुवे विशाल के हर झटके को सहने की पूरी कोशिश कर रही थी और विशाल मनो आज उसके अंदर कोई दैत्य सवार था ो सारिका कैग एंड को पकड़ के उसे चोदे जा रहा था…

सारिका को इस वक़्त न पेट के सहारा मिल रहा थान ा पीठ का और न hi घोड़ी बानी थी जिस से उसे पंजे और घुटनो का सहारा मिल पता… विशाल ने आज अलग तरीके से hi छोड़ने की मनो कसम खायी थी.. उसका एक पेअर बीएड पेट है दूसरा हवा में… उसका चूतड़ बीएड और दूसरा विशाल के पंजे में क़ैद था और इन सब के बिच विशाल के लुंड का तेज़ तेज़ jhtka…kafi देर तक इसी तरह छोड़ते रहने से सारिका की छूट अपना लावा बहाने लगती है और वो एक गरम सिसकारी के साथ झाड़ जाती है…

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh विशु ये कैसे छोड़ रहा है आज तू uuuuuuuufffffffffffff मैं गयी aaaaaaaaaah तेज़ तेज़ छोड़ ऐसे hi मेरा होने वाला है निकल दे मेरे छूट का पानी फाड् दे इस और जोर जोर से bête छोड़ अपनी मासी को uuuuuuuuuffffffffff ममममआ….

विशाल- हाँ मेरी रानी अभी मासी अभी रंडी बनेगी तू मेरिट ु बस देखती जा आज तेर क्या हाल होने वाला है….

सारिका- जो मन करे कर अपने इस रांड का बस ऐसे hi छोड़ते रह निकलना नहीं बहुत मजा आ रहा है hhhhaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeee मैं मर न जाऊ ाजजज vvvvvvvvvvvvvvvvviiiiiiiiiiiiiiiisssssssssssssssshuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu कहते हुवे सारिका झड़ने लगती है….






विशाल भी सारिका के छूट से निकलते गरम गरम पानी को अपने छूट पे महसूस करने लगता है और वो एक पल को अपना लुंड बहार निकल लेता है और सारिका के छूट से बह रहे रास को अपने लुंड पे लप्पेट के सरिएक के मुँह के पास ले जाता है और सारिका को गॉड में उठा के बीएड पे सिद्ध पटक के लिटा देता है और उसके hi छूट के पानी से साणे लुंड को सारिका के मुँह में पेल के छोड़ने लगता है….





सारिका किसी 18-20 साल की लड़की की तरह विशाल की बहो में झूलते हुवे बीएड पे गर जाती है उसे चोट तो लगता है पर इस वक़्त चोट और दर्द की किसे परवाह थी और वो दर्द बताती भी तो किसे और कैसे??? क्युकी दर्द देने वाला बड़ा बेरहमी से उसके मुँह की चुदाई कर रहा था….

सारिका- uguugguguggugugugugugggggggggggg ुग्गुगुउउउउगुगु

विशाल- जल्दी से अपने छूट का पानी टास्ते कर ले मेरी रांड आज बहुत पानी निकलने वाला है तेरे इस मखमली छूट से मादरचोद kutiya….aur फिर इसी तरह विशाल थोड़ी देर तक सारिका के मुँह को छोड़ के वापस निचे चला जाता है और सारिका की दोनों टैंगो को पूरा खोल के हवा में लहराते हुवे अपना लुंड उसके छूट में दाल के तेज़ी से बिना रुके छोड़ने लगता है…






सारिका जो अभी अभी झड़ी थी उसे एक पल की भी राहत नहीं मिलती है और विशाल ताबड़तोड़ चुदाई सुरु कर देता है.. उसकी छूट में अब जो चीटिया रेंग रह थी वो तो रेंगना बंद कर देती है लेकिन जो ड्रिल विशाल ने चलना सुरु कर दिया था ो सारिका की हालत ख़राब करने लग जाता है..

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh रुक जा साँस तो लेने दे…

विशाल- साँस मुँह से ले बहन की लोदी छूट में आज सिर्फ तू लुंड लेगी मादरचोद और उसके ऊपर hi थूक देता है….






सारिका के लिए चुदाई के दौरान चेहरे पे थूकना एक न्य एहसास था वो पहले तो उसे मुँह से उगलने लगती है पर विशाल जब उसके गाल पे दो थप्पड़ लगा के आर्डर सेठा है

विशाल- बहनचोद रैंड तू रखैल है मेरी और मैं तुझपे थुकु याम ुतु तुझे पीना होगा samjhi..dubara फेंका तो सड़क पे ले जा के छोडूंगा बिच चौराहे में… और दुबारा से थूक देता है…

इस बार सारिका सच में किसी रखैल की तरह उसके थूक को पि जाती hai…aur जो थोड़ा अपने चेहरे या होंठो पे महसूस कर रही थी उसे अपने जीभ निकल के चाट जाती है… इसे देख विशाल बड़ा खुश होता है..






विशाल- ये हुई न बात मेरी पालतू कुतियया अगली बार से नाटक किया तो तेरे साथ तेरी माँ भी छोड़ दूंगा साली चिनार समझी….

सारिका- हाँ समझ गई

विशाल- क्या समझा तूने????

सारिका- यही की मैं तेरी रैंड हु रखैल हूँ मेरा काम है अपने मालिक विशाल को खुश रखना उसका थूक भी पि जाउंगी और मूत भी मैं प्यासी कुटिया हु,,,

सारिका की बाटे विशाल को और ज्यादा जोश दिलाने लगी थी.. वो दुबारा से सारिका को उसी पोसिओं में एक तरफ़ा लिटाते हुवे जिस से उसकी गीली छूट भी अपने hi जांघो के दबाव से टाइट हो गयी थी उसमे विशाल फिर से एक hi झटके में उतर जाता है…






इस तेज़ झटके से सारिका की चीख निकल पड़ती है और और अगले कुछ झटको में उसकी चीख उसकी रुलाई में बदल जाती है…

सारिका- किसी और तरीके से छोड़ न इस से मुझे बहुत जलन हो रही है ….. बस कर रहम कर मुझपे मेरी छूट सुजा दिया तूने छोड़ छोड़ के प्लस मुझे कुट्टी बना के छोड़ अब या मैं तेरे लुंड पे उछलती हु पर ऐसे नहीं हो पयेगा…

पर अपने विशाल को तो मजा hi तब आता है जब सामने वाला दर्द से बिलक बिलक के रोये और गिड़गिड़ाए माफिया मांगे….

यहां विशाल भी उसी पोजीशन में छोड़ छोड़ के तक गया था इस लिए अब वो पोजीशन बदलने के लिए साइका को चोरता है और खुद बीएड से उत्तर के कुछ ढूंढ़ने लगता है..






सारिका वैसे hi नंगी हालत में पलट के हफ़तेहुवे उस से पूछती है क्या धुंध रहा है…

विशाल- तू बस अगले राउंड के लिए अपनी पूरी सांसे इकठा कर के रद्द हो जा मादरचोद सवाल मत कर..

सारिका- अपने छूट को सहलाते हुवे बस घर के हाल को देख रही थी तो कभी विशल को ….बगल में उसका bête उसके सगी बहन के साथ नंगा सोया हुआ था इस बात से बेखबर की जिसके माँ के साथ वो लेता है उसका बीटा उसकी माँ की चुदाई कर के हालत खराब कर चुक्का है और अभी भी थका नहीं है जाने क्या hi करेगा आज सारिका का…

विशाल को आखिर वो मिल जाता है जिसे वो धुंध रहा था और वो देखता है सारिका अपने छूट में ऊँगली करते हुवे उसे सहला रही थी..

विशाल- साली 3-4 बार झाड़ के भी तेरी खुजली शांत नहीं हुई है लगता है पर टेंसन न ले अब तेरी खुजली मिट जाएगी इसके बाद तेरी चीखो से पूरा घर गूंजेगा..

सारिका विशाल के इस बात से शर्मा जाती है और चीखो का घर में गूंजने की बात से उसकी रोंगटे खड़े हो जाते है.. वो अपनी भीगी उंगलिओ को अपने मुँह में दबा के छत्ते हुवे उसकी तरफ देख रही थी..

तभी विशाल उसके पैरो को बांध के उसके गंद को उसके कमर के सहारे उठा देता hai..pairoke आपस में बांधने से उसकी गांड बिलकुल सीलपैक टाइट हो जाती है …जिसे देख विशाल दीवाना हो जाता है और वो उसे अचे से साफ़ कर के बिलकुल ड्राई कर देता है

सारिका अपने गांड के साथ हो रहे इस खेलवाड़ से सेहम जाती है.. उसे अंदाज़ा लग जाता है की अगली बरी उसकी गांड की है.. गांड तो वो पहले भी मरवा चुकी थी पर सुखी गांड के दर्द का उसे न अंदाज़ा थान ा उसने कल्पना किट hi की ऐसा कुछ हने वाला है..

विशाल अब सारिका के बिलकुल सुखी गांड पे अपना लुंड को भी अचे से साफ़ कर के सूखा देता है और फिर उसके गांड के मुहाने पे रख क ीक करारा झटका लगा देता है..

ये झटका एक साथ दो लुंड के घुसने से भी ज्यादा बड़ा था सारिका की मनो जान hi निकल जाती है वो पुरे शरीर का जोर लगा के चीख पड़ती है. और उस चीख से पूरा घर जग जाट hai….uske गांड पे लगा झटका इतना जोरदार था की आंसू उसके आंख के साथ साथ उसके छूट भी बहाने लगती hai...yani सारिका की छूट से पेशाब की तेज़ धार फुट पड़ती है...

दर्द के मरे सारिका धड़ाम से वही गिर जाती है और सर कटे मुर्गी की तरह फड़फड़ने लगती है..






उसकी छूट सूज के लाल हो चूका था जसिके अंदर का मांस तक दिख रहा था और वही हाल इस एक झटके ने उसके गांड का कर दिया था... उसकी छूट से लगातर पेशाब की धार बह रही थी और उसका हाल बेहाल tha...par अभी तो ये कहानी बहुत दूर तक जाएगी और अभी इंटरवल भी नहीं हुआ है...
 
वायदे की हिसाब से मैंने अपडेट दे दिया है और अब मिलते है 125 पेज पे.. जितनी जल्दी आप वहां पहुँचाओगे अपडेट उतनी जल्दी मिल जायेगा...

क्यूंकि अभी सारिका का हिसाब होना बाकि है क्या कारन ज्वाइन करेगा अपनी माँ की ऐसी हालत देखने के बाद भी??? ये जवाब 125 पे मिलेगा दोस्तों तब तक के लिए एन्जॉय....
 




ऐसे जंगल और खंडहर में अलका को देखना चाहेगा क्या कोई...?

अपना ओपिनियन दो फिर मई स्टोरी ब्रेक करता हु ऐसे किसी सीनरी पे
 
@देसिजुत मेरे लिए आप सब के कमैंट्स शामे इम्पोर्टेंस रखते है आप सब मेरे भाई हो इसलिए आप का खा भी मई उतना hi कंसीडर करूंगा जितना बाकिओ का... किसी से कहलवाने की जरूरत नहीं बस थोड़ा वेट करो एक सन से दूसरे सन में जाने का क्युकी चरक्टेर तभी ऐड होंगे यूँ बिच में nhi...baki लिख जरूर मई रहा हु पर ये आपकी अपनी कहानी है एन्जॉय कीजिये
 
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