Incest Kamuk Alka - Page 11 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

गाइस सबसे पहले तो कहानी में बहुत बड़ी गैप हो गयी है मेरे साइड से जिसके लिए मई आप सब से माफ़ी चाहूंगा बूत देय तो सम पर्सनल रीज़न मई थोड़ा बिजी हु फॉर नेक्स्ट फ्यू डेज बूत आते hi मई अपडेट देने की पूरी कोशिश karunga..tab तक के लिए म सॉरी
 
म रियली रियली सॉरी भाइयो ी कण्व बहुत टाइम हो गया है मैंने. अपडेट नहीं दिया बूत गाइस मैं इनदिनों बहुत बिजी हो गया हु एंड अपडेट मैंने अभी 2 पेज hi लिखे है उसे कपलत करने का टाइम hi नहीं मिल रहा है.... जैसे टाइम मिलता है मई अपडेट कर के पोस्ट क्र दूंगा अभी मैं बस आपलोगो से सॉरी बोलने आया हु जो मेरी वजह से इंतजार करना पड़ा है आपलोगो को
 




हैप्पी होली तो आल ऑफ़ यू गाइस ,...गॉड ब्लेस्स ु आल



 
मेरे बहुत से भाइयो ने अपडेट के लिए मश्ग किया है बूत देय तो लेक ऑफ़ टाइम ी ऍम नॉट अबले तो रिप्लाई सेपरटेली तो एवरीवन इसलिए मई एक साथ सभी से माफ़ी मांगता हु और जल्द hi नए अपडेट के साथ हाज़िर होता हु तब तक के लिए टेक केयर फ्रंड्ज़ एंड लव यू आल🫡
 
वेट इस ओवर गाइस बे रेडी फॉर टुनाइट फॉर ा सेंसुअल अपडेट
 
Hello मेरे प्यारे रीडर भाइयो फर्स्ट ऑफ़ आल थैंक यू आल फॉर योर पेशेंस मई इतने समय तक अपडेट नहीं दे पाया फिर भी आप सब पोस्ट पे आते रहे और अपडेट के लिए अपना कंसर्न दिखते रहे उसके लिए रहे दिल से धन्यवाद् आज मई आप सब के वेट का इनाम जरूर दूंगा एक्चुअली जिसे पढ़ के आप के मुँह और lund/chut दोनों में पानी आ जाये सो बे रेडी... वो धुरंधर 2 का डायलाग है न

लेडीज एंड जेंटलमेन यू अरे स्टिल नॉट रेडी फॉर थस..
 
अरे भाई सब अभी hi जान लोगे तो लिखने का क्या फायदा
 
अपडेट - 50स



मेरे इस ऐडा से हैरी की हालत तो बिगड़ hi गयी थी उधर रोनी का लुंड तो फटने को होगया था वो तेज़ी से लुंड पे हाथ मरने लगा की तभी मैं लुंड चूसते हुवे घोड़ी बन जाती हूँ जिस से की मेरी गांड रोनी के ऊपर बिजली गिरने लगती है...

मैं रोनी को इतना उकसाना छह रही थी की वो खुद चल के आये और मुझे छोड़ना सुरु कर दे..

अब आगे

मेरा गोरा बदन जो की कामाग्नि में अब लाल हो गया था मेरे अंदर चुदाई का नशा चढ़ने लगा था उसके ऊपर ये दो दो गोर गोर कड़क लुंड को देख मेरे मु और छूट दोनों में पानी आ गया tha..main चाहती थी की ये कामाग्नि किसी भी तरह शांत हो क्यूंकि जो आग हैरी ने मेरे अंदर भड़का दिया था उस आग के साथ तो मेरा यहां से होटल तक जाना बड़ा hi मुश्किल था अगर विसाहल साथ में होता तो जरूर मैं रस्ते में टैक्सी में hi उसके साथ सेक्स नहीं भी तो छूट में लगे इस आग को शांत करवा लेती जो की होने पिछली रात को भी किया ता पर इस जलती छूट के साथ होटल जाना मेरे लिए बहुत hi मुश्किल भरा टास्क था और वैसे भी ईटा कुछ हो गया था की बाकि तो कुछ बचा नहीं था और मुझे कौनसा इनलोगो से दुबारा मिलना था इसलिए मैं यहां से निकलने से पहले एक बार तबियत से अपनी चुदाई करवा लेना चाहती थी….

हैरी जो की लगातार मेरे मुँह में झटके मार रहा था ो जोर जोर से मेरे मुँह को छोड़ने लगता है उधर रोनी भी मेरे भरव्दार गांड को देख ज्यादा देर खुद को अलग नहीं रख पता और अपने लोडे को मसलते हुवे मेरे करीब आने लगता है जो मैं अपनी तिरछी नज़रो से देख पा रही थी…

इधर मैं हैरी के लुंड को मुरे शिद्दत से चूसने में लगी हुई थी की तभी पीछे से मुझे वो एहसास मिलता जिसके लिए मैं काफी देर से तड़प रही थी…









रोनी एक डैम से आके अपनी जुबान से मेरे छूट के दीवारों को ऐसे चाट रहा था मनो कैनवास पे कोई ब्रश चला रहा हो… मेरे छूट की छोटी बड़ी साडी नसों में एक साथ खून की राफ्तेर बढ़ने लगी थी मेरी छूट ऐसे फुदकने लगी थी मनो उसमे धड़कने आ गयी हो… ये पहली बार था जब दो मर्द एक साथ मेरे कामुक शरीर को चुवा ho..idhar हैरी मेरे मुँह में तो रोनी मेरे छूट में अपना जादू दिखने लगा था जैसे दोनों hi मेरे जिस्म को जीतना छह रहे हो और इनदोनो में जो जीतेगा वो आज मुझे अपने निचे रगड़ने वाला hai…main सयैद इस खेल में नयी थी पर ये दोनों काफी शातिर थे ये मुझे इन दोनों को अपना बदन सौंप देने के बाद पता चला.. खैर जो भी अब खेल आगे बढ़ चुक्का था और यहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं था जब तक की खिलाडी आउट न हो जाये…

हैरी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अलका यू अरे सो हट बेबी अउ अंदर लो इसे टेक मोरे डीपर यू अरे सुच ा व्होरे….









रोनी जो की मेरे पीछे था वो अब मेरे निचे आ जाता है और मेरे छूट को पूरा खोल के चूसने लगता है… मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगी थी…. जिस तरह से हैरी मेरे छूट के दानो को मसलने के साथ चूस रहा था वैसा आज तक न विशाल न उसके पापा ने चूसा था.. वोट क तरफ जहां अपने होंठो से तो कभी दांतो से मेरे छूट के दानो को काट रहा ता तो वही अपनी जीभ मेरे छूट के अंदर दाल के किसी मथनी के तरह मेरे छूट को अपने जीभ से मैथ रहा था…

मैं तो मनो हवा में उड़ने लगी थी अपने दोनों जांघो से मैंने रोनी के मुँह को भींच लिया था मैं इतना कंटूर होने लगी थी की उसे चेहरे पे अपनी छूट को जोर जोर से घिसने लगती हूँ…

मेरी छूट की गर्माहट को रोनी के जीभ की ठंडक से मनो अंदर भूचाल लेन लगा था मेरी छूट अपनी धार भने को तैयार थी मेरी आंखे बंद होने लगी थी की तभी हरामियों को जाने क्या सुझा एक ने मेरे मुँह से अपना लुंड खींच लिया तो दूसरे ने जुबान हतः ली… मैं बड़े प्यासे नज़रो से दोनों को देखने लग जाती हूँ मनो पूछ रही थी की क्यों हटाया अपने मुँह को मेरे छूट se…par मुझे और मेरे उखड़ती सांसो को देख दोनों हसने लगते है और मुझे उठा के अपने बिच फसा लेते है मनो सैंडविच…







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रोनी आगे और हैरी पीछे से मेरे जिस्म को अपने पंजो में भर भर के मसलने लगा था… मुझे चुम रहा था यहां तक की अब काटने भी लगा था… मुझे इसमें भी मजा आने लगता है…

इधर अलका की कहानी सुन के सारिका की पंतय गीली होने लगती है उसके बदन की गर्मी भी मनो उसी के गोर चमड़े को जलने लगी थी अलका की आप बीती सुन के वो इतना कामातुर होने लगती है की छूट और चुचिओ को मसलते हुवे वो अपने कपडे को अपने जिस्म से अलग करने लगती है हलाकि पूरी तरह से उतर के फेंकती नहीं है…









सारिका की चूचिया उसके ब्लाउज से आज़ाद हो चुकी थी और साड़ी का वो गांठ जो कमर में बंधा होता है वो भी खुल के कही बेतरतीब से फैली हुई थी जिसका उसे जरा भी परवाह नहीं था उसकी आंखे बंद होने लगती है और हाथ उसके छूट को छेड़ने पे विवास हो जाता है…

सारिका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh अलका तेरी बाटे सुन के मेरी छूट बहने लगी है तो तेरा क्या हुआ होगा तू तो हुड वहां मौजूद थी…. Uuuuuuuuffffffffffffffff

अलका- बस पूछ मत तेरा इतना में hi ये हाल हो गया मैं तो पूरा पागल हो गयी थी उन दो जानवरो के बिच फास के

सारिका- तू आगे की कहानी बता वर्ण मई hi तुझे पेल दूंगी आज….

अलका सारिका के इस बात पे हसने लगती है और कहानी दुबारा से जारी करती है…

मैं उन्दोनो के बिच किसी सैंडविच कीतरह फांसी हुई थी और वो दोनों जैसे मुझे निचोड़ डालना छह रहे हो कुछ ऐसे मेरे जिस्म को मसल रहे थे हॉकी मुझे दर्द हो रहा था पर मजा उस से कई गुना ज्यादा आ रहा था…









मैं भी दोनों के है रंग पे हाथ फेरती तो कभी उनके बालो को सेहला के उन्हें उत्तेजित कर रही thi…mujhe जल्दी से एक जोरदार चुदाई की िक्षा हो रही थी पर उन्दोनो का सईद कुछ और hi इरादा था जिसका मुझे कोई अंदाज़ा तो नहीं था और इसी वजह से मैं उनके हर चल में बहती जा रही थी… रोनी ने मुझे अपनी गॉड में बिठा लिया था जिस से उसका सख्त लुंड मेरे छूट से ले कैग एंड के सुराख़ तह को टटोल रहा था मनो वो उसके अंदर घुसने से पहले उन दरारों का जायज़ा ले रहा हो… मुझे भी अपने मुहणो पे उसके लोहे जैसे सख्त लुंड और उसके ऊपर कठोर पत्तह्र जैसे सुपड के छुवन से बहुत मजा आ रहा था मैं पागल हुवे जा रहित hi अपनी चुदाई के लिए जी छह रहा था खुल के कह दू की अब मुझे छोड़ना सुरु करू दिखाओ अपनी मर्दानगी.. पर चुदाई की खुमारी होने के बावजूद मेरे अंदर एक झिझक अभी भी बाकि थी और ये वही झिझक hi था जिसके वजह से मैं छह के भी उसे लुंड डालने को नहीं बोल पा रही thi…kafi देर तक रोनी अपने गॉड में बिठा के मेरे दोनों नाजुक छेड़ो को अपने लुंड से छेड़ता रहा मेरे गार्डन मेरे कान को चुम रहा था हैरी सामने से मेरे होंठो को तो कभी मेरे चुचुईओं को चुम चाट रहा था. जिसका ऐन बह भरपूर जवाब देने लगी थी मैं उसे चुम्बन में खोने लगी थी की फिर हरमिओ ने फ्लो को तोड़ते हुवे मुझे इस बात पीठ के बल बिस्टेर पे लिटा दिया .. उनके इस हरकत से मैं झुंझला जाती हु और इस से पहले की मैं अपनी नाराज़गी दिखती









रोनी मेरे छूट को तो हैरी मेरे चुचिओ को चूसने लग जाता है… मैं बैचेनी से अपनी दोनों टंगे हवा में लहरा देती हु मनो रोनी के लिए ये खुला निमंतरण हो की वो आये चूसे मेरे छूट को अहं चूसे या फिर चूसे hi क्यों घुस जाये उसमे मेरे छूट की आग और ज्यादा बहड़कने लगती है…









मैं उसके बालो को मुठी में भींच के अपने छूट पे दबाने लग जाती हूँ उधर हरी मेरे ओंठो पे टूट पड़ा था मनो मेरे होंठो से सेहद टपक रहा हो जिसे ये भणवा पूरा पि जाने वाला था.

मैं बेकाबू होने लगती हु तेज़ तेज़ सांसे और पेअर पटकने लग जाती हु पर रोनी मेरे छूट को चोर्ने के इरादे से बलकुल भी नहीं था..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmaaaaaaaaa

मेरे उतावलेपन को देखते हुवे हैरी भी अब मेरे कमर के निचे आ गया था मुझे एक पल को दर भी लगने लगा था की ये दोनों निचे क्यों जा रहे है एक साथ उफ्फ्फ्फ़ पर मेरी कामवासना ने मुझे कमजोर बना दिया था मैं वसन के बेड़ियों में जकड़ी हुई थी तभी वो हुआ जिसकी मैंने कल्पना भी नै किट hi…

हैरी मेरे गांड में हाथ डालते हुवे एक डैम से मुझे पलट देता है और ढेर सारा थूक मेरे गांड पे थूक देता है और पहले एक ऊँगली मेरे गांड में दाल के गोल गोल घूमने लगता है और उधर रोनी मेरे छूट को चूसना नहीं चोरता… मैं पूरी तरह से सिहर जाती हु मुझे बहुत दर लगता है कही ये मेरी गांड तो नहीं मरने की सोच रहा है और मेंउसका विरोध करने की सोचती हु की तभी वो अपनी मुक्ति खुरदरी जुबान मेरे गांड के छेद से भिड़ा दता है और की पिल्लै की तरह चाटने लगता है…









ये अंदाज़ बिलकुल नया और उत्तेजित कर देने वाला था दो मुस्टंडे एक साथ मेरे कामुक सरीर को मैथ रहे थे एक मेरी छूट तो एक मेरी गांड को चाट रहा था उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhh myyyyyyyyyyyyy गगगगगगुओस्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह मैं उन्हें हिंदी में गालिया देने लगती हु.. मादरचोदो पागल कर डोज क्या uuuuuuuuuuuuuffffffffff कहाँ कितना मजा आ रहा है खा जाओ बहदवो

और इस दोहरे हमले को मेरी छूट झेल नहीं पति और मैं जोर से चीखते हुवे झरने लगती हूँ….









पानी बेशक मेरे छूट ने बहाया था पर साँस मनो मेरी गांड की बढ़ गयी थी वो कुछ इस क़दर खुलने और बंद होने लगी थी…

इधर मेरे छूट के बहते पानी को रोनी आखरी बून्द तक चाट जाता है और जो बून्द उसके मुँह से बच के मेरे गांड के पतली सी लकीर के सहारे निचे जाती थी उसे हैरी चाट लेता tha..dono ने मुझे इतना पागल कर दिया था की मैं बस कुछ भी करवा ले मैं कर देती सईद मन न कर पति और सईद यही वो अवस्था थी जहां वो मुझे लाना छह रहे थे और आखिर कर मैं आ भी गयी थी…

रोनी- होप यू एंजोयेड

मैं कुछ नहीं कहती बस एक मुस्कान के साथ उसे देखती हु फिर नज़रे फेर लेती हूँ…

रोनी- तुम इंडियन औरतो की यही खास बात है जो हमे उकसाती है .. अन्य्वयस नाउ इतस योर टर्न और वो दोनों अपने मोठे तगड़े लुंड को ले के मेरे मुँह के सामने आ जाते है…









रोनी के लुंड में एक तेज़ गंध थी जो बहुत hi अजीब थी जिसके स्मेल मेरे नाक में जाते hi मेरे छूट में झुरझुरी सामने लगती hai…main उन्दोनो के लुंड को अपने दोनों हाथो में पकड़ के अंदाज़ा hi लगा रही थी की किसका बड़ा है की तभी मुझे अपनी छूट में कुछ मोटा और हार्ड फील होने लगता है जैसे hi मेरे नज़रे निचे जाती है मैं देखती हु रोनी अपने उन्गलो से मेरे छूट कुरेद रहा था…. Omg इसकी उंगलिया भी मनो किसी देसी लुंड जैसा hi है मोटा मोटा…

अलका- uuuuuuuuuuuuuuuuufffffffff थस इस सो बिग एंड ी हव ँवरे दोने थस बिफोर सो प्लस ओने बी ओने….

हैरी- शुतुप यू व्होरे

और इतना कहते hi हैरी अपना लुंड मेरे मु में पेल देता है









मैं एक तरफ हैरी के लुंड को चूसने लग जाती हूँ तो वही दूसरी तरफ रोनी के लुंड को मुठियाने लगती हु दोनों के लुंड मनो लोहे की भट्टी से निकला कोई रोड हो इतना गरम और इतना सख्त… इनके छुवन मात्रा से मेरी छूट पसीजने लगी थी… दोनों का जादू इस तरह चने लगा था की कल तक जो मैं अपने बदन को किसी को चुने भी नहीं देती थी आज किसी रंडी की तरह दोनों के लुंड को एक साथ चूस और हिला रही थी..









मुझे इस हालत में कोई भी देख लेता तो एक सस्ती बाजारू रैंड hi समझता.. भला किस भले घर की औरत दो मर्दो की आगे नंगी आती है और तो और दोनों के लुंड के साथ इस तरह का खिलवाड़ करती है.. ये तो सिर्फ एक बाज़ारू hi कर सकती है और जिस्म की प्यास ने मुझे बाज़ारू hi बना दिया tha..main बिना किसी बात के परवाह किये दोनों के लुंड को पुरे जोश में मसलने और चूसने लगी थी… की तभी हैरी के साथ रोनी भी अपना लुंड मेरे मुँह में डालने की कोशिश करने लगता है…











यहां एक का लुंड hi बड़े मुश्किल से ले पा रही थी और दोनों का एक साथ कैसे झेल पायेगी मेरी ये छोटा muh….par उन्दोनो को इस बात की कोई परवाह खान थी वो तो बस मुझे आज रात निचोड़ डालना छह रहे थे और ये सईद उसकी सुरुवात थी…

अलका की कही ेके क बात सारिका के शरीर में झुरझुरी बाहरणे लगी थी ब्लाउज तो उसने पहले hi उतर फेंका था पर कहानी इतनी कामुक और गरम मोड़ पी ा गयी थी की कब उसने अपने तन पे लिपटी साड़ी को भी उतर फ़ेंक दिया था उसे इस बात की खबर नहीं लगती है…









एक तरफ जहां कहानी में अलका नंगी थी और अपने छूट को अपने आज रात के आशिक़ो पे रगड़ राइ थी तो इधर हकीकत में सारिका बिलकुल नंगी हो अपनी छूट के निचे तकिया दबा के उसपे अपनी छूट को रगड़ते हुवे कहानी का आनंद ले रही थी…

ये चूसै और चटाई का सिलसिला जो पिछले काफी देर से चल रहा था जिसके वजह से अब मेरी छूट लुंड मांगने लगी थी मैं बोलना छह रही थी की बहुत हो गया अब मुझे छोड़ो तुम दोनों ये लुंड चूसने से मेरे छूट का इलाज नहीं होने वाला मेरे छूट की गर्मी तो तभी शांति होगी जब ये सरिया मेरे छूट में घुसा के इसे पलोगे.. मैं अपने मन में यही सब बोल रही थी की तभी रोनी बोल पड़ता है नाउ इतस टाइम तो प्ले थे रियल गेम अरे यू रेडी अलका???

मैं कुछ नहीं बोलती बस बीएड पे जा के लेट जाती हु और अपनी टंगे खोल लेती हूँ पर साथ hi मैं उन्हें चेतावनी भी दे देती हु की दोनों एक साथ की सोचना भी नहीं कोशिश करने की तो दूर की बात है… हैरी हस्ते हुवे कहता don’t राइ जो भी होगा तुम्हारी मर्जी से होगा.. और लुंड डेन से पहले एक बार फिर से मेरी छूट को चाट के गिला करने लगता है उधर रोनी वापस से मेरे सर के साइड चल जाता है…









उसकी जुबान की टिप मेरे छूट पे जाते hi मेरी आंखे बंद होने लगती है मैं वासना के सागर में गोते खाने लगती हु की तभी मेरा हाथ नयास hi पीछे लेते रोनी के लुंड पे चला जाता है और उसका लुंड इतना बड़ा था की मेरे दोनों हाथ लगाने पद रहे the,,…main लुंड को मसलते हुवे उसे मुँह में भर लेती hu…aur चूसना सुरु कर देती हु इसका एक कारन ये भी था की अगर इसका लुंड मेरे मुँह में रहेगा तो ये दोनों एक साथ मेरी चुदाई नहीं कर पाएंगे…

और फिर हैरी अपना लुंड मेरे छूट के मुहाने पे रख के रगड़ने लगता है… मेरे पुरे शरीर में गुदगुदी की लहार दुड्ने लगी थी आज मई एक पराये मर्द से छोड़ने वाली थी जिसे अब कोई नहीं रोक सकता था uuuuuuuuuuffffffffff ये कैसी आग लगने लगी है मेरी छूट में इनदिनों हाय मैं क्या होते जा रही हूँ … ये सब मेरे मन में च hi रहा था की हैरी ने एक झटके में लुंड अंदर पेल दिया..









मेरी आँखों के निचे मनो अँधेरा hi च गया हो मैं बड़े जोर से चीख पड़ती पर चिखु भी तो केस ीक सैंड तो मेरे मुँह में अपना लुंड भर के मेरी चीख को मेरे गले में hi दबा दिया है… मैं गगगगगगगगूग कर के रह जाती हूँ…

अगले hi पल देखते hi देखते हैरी स्पीड बढ़ने लगता है और इधर रोनी भी मेरे सर को उठा के उसमे लुंड पेले जा रह था.. मुझे मजा और दर्द दोनों का एहसास एक साथ होने लगा था मैं चीखना छह के भी चीख नहीं पा रही थी…







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अगले कुछ पल मेरी छूट की चुदाई करते हुवे हैरी मेरी एक तंग को पूरा हवा में उठा देता है और झटके लगाना जारी रखता है तो वही रोनी भी अब मनो मेरे मुँह में लुंड दाल रहा था जैसे पुछुप कर रहा हो और दोनों hi थकने का नाम नाह ले रहे थे इस बिच मैं एक बार फिर से झाड़ गयी थी… झड़ते वक़्त मैंने रोनी के लुंड को थोड़ा काट भी लिया था पर उसे आज जो मिलने वाला था उस खजाने को पाने के लिए ये दर्द कुछ नहीं था… इसी तरह मेरी चुदाई तोड़ी देर और चली फिर दोनों ने अपना पोजीशन बदला और बी रोनी मेरी छूट में लुंड डालने वाला था..

रोनी मुझे घोड़ी बनने को बोलता है मैं भी बिना देर किये अपनी गांड हवा में लहराते हुवे घोड़ी बन जाती हूँ… जिस से की रोनी ललचायी नज़रो से मेरी गांड को देखता है और फिर अपना लुंड मेरी छूट में दाल देता है झटका इतना जोरदार था की मैं को गिरने लगती हु पर वो कमीना हैरी वो मुझे सहारा देने की जगह मेरे मुँह में अपना लुंड पेल देता है









अब मेरे दोनों छेद में एक साथ पिस्टन की तरह लुंड अंदर बहार होने लगा था दोनों बड़ी तेज़ी से मुझे चोदे जा रह थे और मैं भी किसी सस्ती बाज़ारू रैंड की तरह दोनों के लुंड को एक साथ निगल रही थी…

उन दोनों का लुंड भी इतना बड़ा था की एक मेरी नाभि को तो दूसरा मेरे गले को खरोसे मर रहा था uuuuuuuuufffffffffff मैं बता नहीं सकती सरु मेरी क्या हालत हो रही थी लेकिन मजा भी दोगुना आ रहा था..









ये पहली बार था जब मैं दो दो मुस्टंडो से चुद रही थी मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचता था क मैं ये करुँगी… इसी तरह चले लम्बी चुदाई के बाद आखिर कर दोनों के लुंड भी अब जवाब देने लगा था

और देखते hi देखते दोनों मेरे मुँह पे अपना गरमा गरम पानी गिराने लगते है और में भी मुँह खोल के उनके गरमागरम पानी का स्वागत करने लगती हूँ









यहां अलका की पहले राउंड की कहानी थी जिसे सुन के सारिका का बुरा हाल होने लगा था… उसके बदन पे सिर्फ एक पतली सी पंतय बची थी जिसे वो आगे hi पल उतर फेंकती है..









पंतय के उतारते hi सारिका अब पूर्णरूप से नंगी हो गयी थी और अब वो अपनी दोनों टैंगो को फैला के कभी अपने छूट को अपनी मुठी में भर के मसल देती तो कभी उसके दोनों फैंको को फैला के उसमे उंगलिया फेरने लगती hai…Alka के दो लुंड की चुदाई की कहानी सुने सारिका का छूट अब उसके कण्ट्रोल में नहीं था…









अपनी छूट के साथ खिलवाड़ करते हुवेसरीका अपनी छोटी बहन अलका की तरफ प्यासी निगाहो से से देखते हुवे कहती है फिर उसके बाद तू घर आ गयी थी???

अलका- नहीं ये तो बस सुरुवात थी जिस खेल को मैंने सोचा था जल्दी निपटा दूंगी किसी टी20 की तरह पर ये दोनों टेस्ट मैच खेलने के मूड में थे जिसकी मुझे तनिक भी भनक न थी…

सृका- ok तो फिर आगे का क्या???

(हलाकि सारिका अब कहानी सुन ने मूड में नहीं थी बल्कि उस कहानी को जीना छह रही थी पर उसकी ऐसी किस्मत खान…)

अलका- हम तीनो का पानी निकल चुक्का था और मैं अब वापस होटल का निकलने का सोचती हु और थोड़ी देर खुद को रिलैक्स करने के बाद मैं बीएड से उठ के कपडे पहनने के लिए अपने कपडे ढूंढने लगती हु की तभी रोनी मुझे और रुकने को कहता है जिसपे मैं उसे मन करती हूँ और सच भी यही था की अब मैं और यहां रुकना नहीं चाहती थी अब मैं वापस अपने bête विशाल के पास जाना छह रही थी जो बेचारा जाने कब से मेरा वेट कर रहा था और मैं यही सोच के उसे मन कर की आगे बढ़ती हु की तभी वो कुछ कहने को आर्डर करता है और कहता है प्लस ॉल्स डिनर कर के जाओ डिनर ा टाइम भी हो गया है तू वैसे जाओगी तो हम ाचा नहीं लगेगा…

मैं चाहती तो नै थी पर काफी इंसिस्ट करने से मान जाती हूँ और हम डिनर करने लगते मैं थोड़ा hi कहती हु क्युकी मैं विशाल के साथ डिनर करने का सोह रही थी यह तो बस इनका माँ रखने के लिए इन्हे ज्वाइन कर लिया था…. अभी डिनर फिनिश hi हुआ था की रोनी एक वाइन की बोतल खोलता है और हम तीनो को सर्वे करता मैं मना करती हूँ लेकिन वो बहुत ज़िद्दी था मेरी एक नहीं सुनता है और जबरदस्ती मुझे 2-3 पेग पीएलए देता है.. मुझपे नशा सा चढ़ने लगा था पर मैं इतने नशे में भी नहीं थी की होटल न जा सकू.. सब ख़तम करने के बाद मैं उठ के अपने कपडे पहनने के लिए आगे बढ़ती hi हूँ की रोनी मुझे पकड़ के अपनी तरफ खींच लेता है और मैं सिद्ध उसके गॉड में जा गिरती हूँ…









मैं छूटने की कोशिश तो करती हूँ पर वो मजबूती से मुझे जकड लेता है और मुझे किश करने लगता है जिसका मैं विरोध करने लगती हूँ और अपना मुँह झटकते हुवे उसे चोर्ने को कहने लगती हूँ पर मेरे जैसी औरत को जो अभी अभी दो दो लोदो से चुद के फ्री हुई है और अभी पूरी रात बाकि है ऐसे में कोई कैसे जाने देने वाला था???? यहां मेरे साथ भी कुछ ऐसा hi होता है…

मुझे मेरे छूट पे उसके सख्त हो चुके लुंड की चुभन महसूस होने लगती है मैं छूटना छह रहे थी पर वो मुझे किश करने लगता है और किश करते हुवे मेरे मुँह में कुछ तो डालता है जिसका मुझे जब तक पता चलता है वो मेरे गले से उतर चुक्का था क्युकी वो बहुत छोटी सी गोली टाइप थी..

गोली ने शरीर में जाते hi अपना असर दिखाना सुरु कर दिया था मुझे अभूत जोर की गर्मी लगने लगी थी मनो मेरा शरीर जलने लगा था अभी जो मैं छूटने की कोशश कर रही थी वहां मैं ढीली पड़ने लगती हु और इसी मोके का फायदा उठा के रोनी अपना लुंड मेरे छूट में पेल देता है..









अब रोनी मुझे चोर चुक्का था मैं उसके चंगुल से आज़ाद थी मैं चाहती तो उठ के जा सकती थी पर अब आगे जो लिखा था वो तो होना hi tha…ye जाने कौनसा ड्रग था जिसने मेरी छूट की खुजली को कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया था मनो लाखो चीटिया एक साथ रेंगने लगी हो.. अभी जो मैं छुड़ा के भागने वाली थी अब खुद उसके लुंड पे कूदने लग जाती हूँ…

मौके की नज़ाकत को देखते हुवे हैरी भी आ जाता है और मैं बिना एक सेक् गवाए उसके लुंड को मुठी में भर के रोनी के लुंड पे कूदने लगती हूँ..







यहां से मैं अपने जिसमे को उन दो हैवानो को सौंप देती हूँ याय उन कहो मेर अंदर जो ड्रग ने अपना जादू चलाया था उसने मुझे मजबूर कर दिया था ऐसा करने को और उसके बाद वो हुआ जिसके वजह से मई अगले दो दिन बीएड से उठ नहीं पायी…

सारिका भी अपने ऊपर से अब सेंट्र्ल खोने लगती है और वो बड़े कामुक निगाहो से अपनी बहन अलका को देखने लग जाती है…


अलका इस नज़र से अनजान नहीं थी उसे अछि तरह से समझ आ रहा था की सारिका की इन नशीली और कामुक आंखे क्या धुंध रही है. पर आज अलका अपने मन का बोझ अपनी बहन को बता के हल्का कर ऐना छह रही थी लेकिन सारिका ने तो कुछ और hi सोच लिया था और अपनी सोच को अंजाम देने के लिए वो अलका की तरफ बढ़ती है और बड़े कामुक अंदाज़ में अलका के ड्रेस में हाथ दाल के उसके छूट को सहलाते हुवे बड़े भरी और टूटी आवाज़ में कहती है





सारिका- तेरी आगे की कहानी बाद में सुन लुंगी अभी जो आग तूने मेरे अंदर भड़का दी है उसे शांत करने दे और इतना कहते hi सारिका जो की पहले से नंगी थी वो अलका के भी कपडे उतर देती है और देखते hi देखते दो कामवासना से लबालब भरी औरते एक डैम नंगी एक दूसरे को खा जाने वाली नज़रो से देख रही होती है... और इस बात की पहल सारिका hi अलका के छूट को सहलाते हुवे करती है..

सारिका- तेरी छूट तो पूरी गीली हो गयी है अलका

अलका- uuuuuuuuuuufffffffffffffffffff aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh

अलका इसका कोई जवाब नहीं दे पति बल्कि वो सीधा सारिका के चूतड़ों को अपने पंजो में भीचते हुवे उसे कास के अपनी और खींच लेती है और दोनों की गरम सांसे टकराने लगती है माहौल काफी गरम और मादक हो चला था दोनों की नज़रे एक बार फिर से एक दूसरे से टकराती है और एक सेक् के पॉज के बाद दोनों एक दूसरे पे टूट पड़ती है...






किश इतना जोरदार होता है जिसकी शोर पुरे हॉल पे गूंजने लगती है.. कमरे का सन कुछ ऐसा था मनो दो नागिन एक दूसरे से लिपटी हो दोनों की चुचिओ के निप्पल किसी सुई की तरह तानी हुई थी छूट ऐसे पसीज रहा था मनो सैलाब निकल रहा हो जिसे चुने मात्रा से उंगलिया जल जाये..





अब दोनों बहने चुम नहीं रही थी मनो एक दूसरे को खा जाने के भाव से लिपट चिपट रही हो... जब दो भरे बदन की औरते बिलकुल नंगी इस तरह से छूट से छूट और मुँह से मुँह भिड़ा के कामवासना में लिप्त खुद को ठंडा करने के लिए मगन हो वो दृश्य स्वयं कामदेव के लुंड का पानी भी निकल दे और इस वक़्त सारिका के कमरे का दृश्य कुछ ऐसा hi था...
 
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