Incest Katha Chodampur Ki - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Katha Chodampur Ki

फिर उसके बाद फूपाजी ने अपना लुंड गांड से निकला और वहीं विनीत ने मुँह से और रिमझिम को खड़ा किआ जिससे बड़े फूपाजी का लुंड भी उसकी छूट से निकल गया... रिमझिम भी लड़खड़ाती हुई कड़ी हुई ...

अपडेट 56
फूपाजी ने अपनी भतीजी को सहारा दिया और अपनी और घुमा लिए और झुक कर उसकी चूचियों को चूम लिए... रिमझिम दीदी की आँखें अब भी बंद थी और साँसे बहुत तेज़ चल रही थी... कुछ पल बाद उन्हें थोड़ा होश आया hi था की तब तक बड़े फूपाजी ने फिर से अपनी बेटी को पीछे से कमर में हाथ डालकर अपनी और खींच लिए और अपने ऊपर बिठा लिए रिमझिम को अपनी गांड पर अपने पापा का लुंड महसूस हुआ... जिसे बड़े फूपाजी ने थोड़ा रिमझिम को उठाकर लुंड के टोपे को अपनी बेटी के सबसे कामुक और कैसे हुए छेड़ यानि गांड के छेड़ पर टिका दिया जो की अभी भी चाचा द्वारा किये गए हमले की वजह से थोड़ा खुला हुआ tha...aur फिर लुंड के गांड पर सेट होते hi रिमझिम को नीचे खींच लिए जिससे बड़े फूपाजी का लुंड सरसराता हुआ बेटी की मख्खन जैसी गांड में पूरा घुसता चला गया और थप की आवाज़ के साथ रिमझिम अपने पापा के ऊपर बैठ गयी... और दोनों बाप बेटी के मुँह से aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh की सिसकारी निकल गयी... वहीं हम सब भी इस कामुक दृषिअ को देखकर बहुत उत्तेजित हो गए थे... मेरा लुंड भी फटने को हो रहा था तो मेरे बगल में चारु ममी थी तो मैंने उनके सर को अपने लुंड की तरफ दबा दिया जिसे वो समझ गए और तुरंत मुँह खोलकर लुंड मुँह में भर लिए और फिर चूसने लगी...

उधर बड़े फूपाजी बेटी की गांड में लुंड के होने का एहसास का आनंद ले रहे थे...

बड़े फूपाजी- रिम्मी betaaaaaaaaaaaaahhhh क्या गरम और मख्खन जैसी गांड है तेरी हाआआआंनंन्न... तेरे पापा का लुंड पिघल रहा है तेरी गांड में आह मेरी प्यारी गुड़िया...

रिम- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापाआआअह हाआआआंनंन्न लल्लूऊओ अपनी betiiiiiiiiiiiiiiiii की गांण्ड्ड्ढड को bhiii.....mera आखिरी छेड़ भी अब तुम्हारा hua....teeno छेद भर दिए अपने लुंड से....

और इसके साथ hi रिमझिम ने अपने पापा के ऊपर बैठ कर उछालना शुरू कर dia...thap थप की आवाज़ आने lagi...jo ये बता रही थी की एक बाप अपनी बेटी की गांड मार रहा है...

रिम- पापाआआअह ऐसा प्यार आज तक नहीं दिया अपने मुझे..... mainnnnnnnnnnnn तो चाहती हु हर बेटी को अपने बाप से ऐसा प्यार मिले... अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह पापाआआअह...

बड़े फूपाजी- रिम्मी बीटा हाँ ऐसे hi ले पापा का लुंड अपनी रसीली और कासी हुई गांड mein....aahhh मज़ा आआ रहा है.. काश पहले भर दिए होते मैंने ये तेरे तीनो छेड़...

रिमझिम फिर से काफी गरम हो गयी थी...

Rim-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापाआआअह... Vineeeeeeeeeeeeeet तू क्या खड़ा देख रहा hai...idhar आ और घुसेड़े अपना लुंड मेरी छूट mein...ek बहन को तो छोड़ लिए अब दूसरी को भी छोड़...

विनीत तो जैसे इसी इंतज़ार में था और अगले hi पल वो रिमझिम दीदी की टैंगो के बीच में था तो रिमझिम दीदी ने उछालना बंद किआ और फिर विनीत ने अपने लुंड के टोपे को रिमझिम दीदी की छूट के मुँह पर लगाया और फिर दीदी की आँखों में देखते हुए एक करारा धक्का मारा और उसका लुंड 3 इंच छूट को चीरता हुआ अंदर चला गया...

रिमझिम- आअह्ह्ह Vineeeeeeeeeeeeeet मेरे bhaaaaiiiiiiiiiiii...

कुछ देर रुकने के बाद विनीत ने हलके हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये बड़े फूपाजी नीचे अभी बिलकुल रुके हुए थे और अपनी बेटी की गांड की कसावट का मज़ा ले रहे थे जो झटको की वजह से थोड़ी हिल रही थी फिर जब विनीत का लुंड पूरा दीदी की छूट में समां गया तो फिर नीचे से बड़े फूपाजी ने भी अपने कूल्हे हिलने शुरू किये और फिर कुछ hi पल में विनीत के साथ ताल मिलकर वो अपनी betiiiiiiiiiiiiiiiii की गांड मरने लगे...





विनीत- ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii कब से मेरा सपना था ये तुम्हारी छूट में apanaaaaaaaaaa लुंड घुसेड़ कर तुम्हे छोड़ने का... aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh आअज पूरा हुआआ hai...aaahhhhhh क्या मस्त छूट है दीदी तुम्हारी...

रिमझिम- तो छोड़ लेता पहलीबीए hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii और बन जाता बहनणनननष्हूऊओऊडड़ड़ आह्हः पापा ऐसे hi मारो मेरी गांड कोई रहम मत khao.....aah भाई छोड़ अपनी बहन को ऐसे hi...

बड़े फूपाजी- हाँ विनीत बीटा कास के छोड़ ise...sari प्यास मिटानी है हमें इसकी आह्हः...

वहीं पास खड़े हुए फूपाजी से और देर देखना बर्दाश्त नहीं हुआ तो उन्होंने भी आगे बढ़कर अपना लुंड रिमझिम दीदी के चेहरे के पास कर दिया और उनके चेहरे पर मरने lage....aur पगिर जिसे देखकर रिमझिम दीदी ने अपना मुँह खोल दिया और लुंड मुँह में भर लिए तो फूपाजी उनके सर को पकड़ कर उनका मुँह छोड़ने lage...ek बार फिर से रिमझिम तीन लुंड से एक साथ छोड़ने लगी...





रिमझिम के मुँह से सिर्फ घ्हुउउउउउउ की आवाज़ आ रही थी क्यूंकि उसके प्यारे चाचाजी का लुंड उसके मुँह में घुसा हुआ था वहीं उसकी छूट में उसके भाई का और गांड में बाप का लुंड अंदर बहार हो रहा था...

कमरे में बाकी लोगो का भी हाल ये सब देखकर काफी बुरा हो गया tha...maine थोड़ी देर ममी से लुंड चुसवाने के बाद उन्हें तुरंत घुमा दिया और उनकी गांड में अपना लुंड घुसा दिया...

Charu-shhhhhhhhhhhh hmmmmmmmmmmmm Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh बीटा चुड़ड़ड़ड़ड़ दे बीटा अपनीई ममी को आअह्ह्ह्ह गांड फाड़ दी तूने तो meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आअह्ह्ह्हह

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी ममी क्या गांड है तुम्हारी देखते hi मन करता है की लुंड घुसा दूँ...

और मैं बुरी तरह से ममी की गांड मरने लगा... गया ने मुझे अपनी मम्मी की गांड मरते हुए देखा और हमारे पास आ गयी और झुककर पहले अपनी मुम्ममय के होंठों को चूसा हुए फिर मेरे होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने lagi...aur कुछ पल बाद hi उसकी जीभ भी मेरे मुँह में थी...





Mami-ahhmmmmmmmmmm meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii गाआआनंनंड्डड़ आअह्ह्ह्हह्ज कितना बड़ा है रे teraaaaaaaaaaa ये musalm..andar तक hilaaaaaaaaaaaaa देता है....

मैं और गया होंठों में खोये हुयव थे तो बस अम्मम्म ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह करके उनकी बात का जवाब दिया...

कमरे के दूसरी तरफ चुदाई का खेल पूरे ज़ोरो पर था.... रिमझिम दीदी के तीनो छेदों मैं लुंड अंदर बहार हो रहे थे... होंठो के साइड से थूक टपक रहा था जो चाचा के लुंड की वजह से बहार आ गया था...

बड़े Phoopaji-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh इतनी गरम गांड है छोटे इसकी तू सही कह रहा था....

फूपाजी- हाँ भैया बहुत hi गरम और क्या लुंड चूसती है रिमझिम बिटिया आह्ह्ह्हह बेटी ऐसे hi चूसो अपने चाचा का लुंड ...

विनीत- taujiiiiiiiiiiiiiiii चुत तो और भी गरम है आअह्ह्ह्ह didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mazaaaaaaaaaa आए रहा hai...mera पूरा लुंड निचोड़ रही है तुम्हारी choooooooooot...

बड़े फूपाजी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh हर बाप का सपना होता है की बेटी की शादी हो जाये और वो अपने पति के सअअअअअतः ख़ुशह रहे.... और अब मुझे यकीन हो गया की तेरा पति तो हमेशः खुश रहेगा tujhse....aaahhh

मैंने ये सुनकर मज़ाक करते हुए बोलै- हाँ बड़े फूपाजी अब तो रखेगी hi आप का आशीर्वाद जो मिल रहा है दीदी को पीछे से...

मेरी बात सुनकर सब मुस्कुराने लगे..

सिवाय रिमझिम दीदी के क्यूंकि मुँह में लुंड जो घुसा हुआ था...

उधर पूर्वी दीदी बड़ी बुआ और बुआ सब दरखकते हुए एक दुसरे को सुख दे रही thi...sath hi साथ पूरे कमरे में क्या हो रहा था उस पर भी नज़र बनाये हुए थी...





पूर्वी दीदी अपनी पीठ पर लेती थी वहीं बड़ी बुआ उनके मुँह पर बैठ कर अपनी छूट चटवा रही थी अपनी भतीजी से और साथ hi अपनी देवरानी यानि बुआ के होंठों को चूसते हुए उनकी छूट में उंगली कर रही थी....

तीनो औरतों के मुँह से ममममममममम ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh ऐसी hi आवाज़ें आ रही थी क्यूंकि तीनो के मुँह किसी न किसी काम में लगे हुए थे....

इधर मेरे होंठों को चूसने के बाद गया नीचे बैठ गयी और फिर अपनी मुम्ममय के चेहरे को चूमा और चूमते हुए नीचे की तरफ आने lagi...chehra पर फिर कंधे पर फिर पीठ पर हुए फिर चारु ममी के बड़े बड़े चूतड़ों को चाटने लगी जिनके बीच में मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा tha...jise गया बड़े ध्यान से अपनी मम्मी की गांड से अंदर बहार होता हुआ देख रही thi...aur साथ hi साथ अपनी मुम्ममय के चूतड़ों को जीभ निकल कर चाट भी रही थी मुझे ये दृश्य बड़ा hi कामुक लग रहा था की माँ की गांड में मेरा लुंड है और बेटी उसे ध्यान से अंदर बहार होता हुआ देख रही है...

मैं और तेज़ झटके ममी जी गांड में मरने लगा और फिर कुछ झटको के बाद अचानक से लुंड ममी की गांड से निकल लिए और गया के मुँह की तरफ कर दिया जिसे गया ने तुरंत मुँह खोल कर मुँह में भर lia...wohi लुंड जो कुछ पल पहले माँ की गांड में tha...Gia मेरे लुंड पर लगे अपनी मुम्ममय की गांड के रास को चख रही थी... मैंने फिर गया के मुँह से लुंड निकला और ममी की खुली गांड में दाल दिया जिसे ममी की ाः फिर से निकल गयी... और दो तीन झटको के बाद लुंड गांड से निकल कर फिर से गया के मुँह में दाल दिया...





गया फिर से मेरा लुंड चूसने लगी... मुझे ये काफी उत्तेजित कर रहा था की माँ की गांड से निकला हुआ लुंड बेटी से चुसवाना हुए फिर दोबारा गांड में दाल dena...main इसी तरह बार बार ममी की गांड में लुंड डालता और फिर निकल कर गया के मुँह में दाल देता जिसे वो पूरी शिद्दत से चूस लेती..

वहीं कमरे के दूसरी और से आवाज़ आई तो हमारा ध्यान उस तरफ गया तो देखा रिमी दीदी के मुँह से फूपाजी का लुंड निकल गया है और वो बड़ी तेज़ तेज़ आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh vineeeeeeeeeeeeeet... paaaaaaaaaapaaaaaaaaaaaa की आवाज़ निकल रही थी....

साथ hi बड़े फूपाजी भी बेटी की गांड तगड़े धक्को से मार रहे थे और गुर्रा रहे थे...

बड़े फूपाजी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh ह्म्म्मम्म्म्म maaaaaaaaaaa uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हम्म

और फिर कुछ पल बाद hi रिमी दीदी का जिस्म अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी और फिर पीछे अपने पापा की और गिर गयी जिससे विनीत का लुंड भी उनकी छूट से निकल गया और फिर बड़े फूपाजी भी खुद को रोक नहीं पाए और बेटी की गांड में लुंड को जड़ तक गाड़ दिया और फिर उनकी गांड में अपने रास से सिंचाई करदी और गांड को वीर्य से भर दिया.....

कुछ देर तक सब यूँ hi रहा और फिर बुआ उठी और रिमझिम दीदी और बड़े फूपाजी के पैरों के बीच बैठ गयी पहले तो अपने जेठ जी के लुंड को भतीजी की गांड से निकला और मुँह में भर लिए और चूस चूस कर साफ़ कर दिया जो की अब झड़ने के बाद मुरझा भी गया tha...bade फूपाजी के लुंड को छोड़ने के बाद बुआ ने अपना मुँह रिमझिम दीदी की गांड पर लगा दिया जहाँ से उसके पापा का रास बहकर बहार आ रहा था बुआ उनकी गांड से रास चूसकर निकलने लगी...





फूपाजी तो आँखें बंद किये हुए लेते हुए थे वहीं रिमझिम दीदी को ये तो एहसास था की कोई उनकी गांड चाट रहा है पर कौन ये नहीं पता था और न hi उनकी इतनी हिम्मत थी की वो उठ कर देखें की कौन है वो बस उसकी जीभ का आनंद ले रही thi...aur कुछ hi देर में बुआ ने रिमझिम दीदी को गांड को चाट ओर साफ़ कर दिया पर बुआ ने सारा रास पिया नहीं था जो रिमझिम दीदी की गांड से निकला था बल्कि कुछ अपने मुँह में बचा कर रखा था जिसे वो जल्दी से उठकर गयी और अपनी जेठानी यानि बड़ी बुआ के होंठों को होंठो से मिलकर उनके साथ बांटने लगी... बड़ी बुआ ने भी ख़ुशी से मुँह खोल कर अपनी बेटी की गांड से निकले हुए अपने पति के रास का स्वाद चखने लगी जो पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट हो गया था.....

दोस्तों आएगी की कहानी अगली अपडेट mein...maaafi चाहूंगा देर से अपडेट करने के लिए बूत अगली अपडेट बहुत जल्दी देने की कोशिश करूँगा...
 
बड़ी बुआ ने भी ख़ुशी से मुँह खोल कर अपनी बेटी की गांड से निकले हुए अपने पति के रास का स्वाद चखने लगी जो पहले से ज़्यादा स्वादिष्ट हो गया था.....

अपडेट 57

रास के ख़तम होने के बाद भी बड़ी बुआ और बुआ एक दुसरे के होंठों को और जीभ को काफी देर तक चूसती रही... शायद hi किसी देवरानी और जेठानी में इतना प्यार होगा kahin....khair काफी देर बाद वो एक दुसरे से अलग हुई... तब तक रिमझिम को भी थोड़ा होश आ गया था तो वो भी अपने पापा के ऊपर से उठ कर साइड में बैठने hi वाली थी की फूपाजी ने उसे पकड़ लिए और खुद सोफे पर बैठ गए और उसे अपने ऊपर बिठा लिए... और नीचे से अपना लुंड को पकड़ा और भतीजी की गरम छूट के छेड़ पर रख दिया और कमर पकड़ कर नीचे खींच लिए जिससे रिमझिम दीदी की छूट में उनका लुंड एक बार और घुस गया...

रिम- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh chachaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh छहःछहूऊऊडड़ड़ लोओओओओओ अपनी betiiiiiiiiiiiiiiiii kooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापाआआअह देखो chachaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh भी choooooooooot फायआडडडडडडडड रहे हैं meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii तुम्हारी betiiiiiiiiiiiiiiiii कीइइइइइइ...

फूपाजी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh रिम्मी बेटा क्या choooooooooot है तेरी... इतनी गरम आआह्ह्ह्ह... कभी सोचा नहीं थाआआ की जिस गॉड में तू खेलती थी उसी में लुंड अपनी छूट में लेकर उछलेगी...

बड़े फूपाजी- हाँ छोटे अचे से छोड़ इसे... कोई शिकायत न रह जाये इसको ससुराल जाने से पहले इसके मन में....

कोई कुछ और बोलता इससे पहले hi रिमझिम दीदी की एक और चीख निकली वजह था विनीत जिससे और बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो भी रिमझिम और अपने पापा के पैरो के बीच आया नीचे से फूपाजी ने भी अपने बेटे की मदद की और रिमझिम को अपने ऊपर झुका लिए जिससे दीदी की गांड और खुल गयी विनीत ने अपने लुंड को रिमझिम दीदी की गांड के छेड़ पर लगाया और उनकी कमर को पकड़कर उनका उछालना रोका और अपना लुंड दीदी की मखमली गांड में घुसा दिया... क्यूंकि दीदी की गांड अभी उनके चाचा और पापा ने मरी थी तो विनीत का लुंड आसानी से अंदर घुसता चला गया... दोनों बाप और बेटे का लुंड रिमझिम के छेदों मैं घुसे हुए थे.... और अगले hi पल दोनों ताल मिलकर रिमझिम की चुदाई करने लगे...





Rim-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh vineeeeeeeeeeeeeet bhaaaaiiiiiiiiiiii ऐसी hi maaaaaaaaaaaaaaarrrr अपनी didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii की गांड..... Mazaaaaaaaaaaa आआ राहाआआ है chachaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh आअह्ह्ह्ह

फूपाजी- विनीत सुनी अपणीइइइइइइ दीदी की बाआत आअह्ह्ह्ह अचे से भर गांड को और choooooooooot को मैं संभालता हूँ...

विनीत- ग पापा..... आयजहह Didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii जैसाअअअअअ अआप बोलूऊऊ

और विनीत ने अपने झटको की गति को और बढ़ा diya...wohin बेटे की रफ़्तार को देखकर फूपाजी भी नीचे से दीदी की छूट में तेज़ झटके मरने लगे....

रिमझिम दो लुंड एक साथ लेकर मज़े से दोहरी होती जा रही थी...

वहीं कमरे के दूसरी तरफ भी यही हाल था गया नीचे लेती हुई थी वहीं चारु ममी उसके ऊपर 69 में उसकी छूट चाट रही थी और मैं चारु ममी की गांड मार रहा था





दोनों माँ बेटी एक दुसरे की छूट चाटने में लगी हुई थी बीच बीच में मैं अपना लुंड ममी की गांड से निकल कर गया के मुँह में दाल देता जिसे गया चूसती और फिर बापिस अपनी मुम्ममय की गांड में घुसा deti...charu ममी भी छूट और गांड पर हो रहे हमले से उत्तेजना में डूब रही थी और ज़्यादा देर तक वो दोहरे हमले को झेल नहीं पाई और अपनी बेटी के मुँह में झड़ने लगी... गया भी अपनी मुम्ममय की छूट से निकलता हुआ सारा रास पि गई और जब ममी का झड़ना बंद हुआ तो मैंने उनकी गांड से लुंड निकला जिसे गया ने अपने मुँह में भर लिए... उधर चारु ममी उठ गयी गया के ऊपर से और साइड में लेट गयी ममी के हटते hi पूर्वी दीदी गया के पैरों के बीच आ गयी और गया की गांड पर अपनी जीभ लगाडी जिसके लगते hi गया थोड़ी उछाल गयी... और मेरा लुंड मुँह से निकल कर नीचे देखा और बोली- ाःह Didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii अच्छाआ

वो इतना hi बोल पाई की मैंने अपना लुंड उसके मुँह में दाल दिया...

दूसरी तरफ चुदाई एक डैम ज़ोरदार तरीके से चल रही थी... ऐसा लग रहा था की आज रिमझिम दीदी की छूट और गांड के चीथड़े न उड़ जाएं...

पर दीदी कहाँ काम थी वो तो अपने चाचा और भाई को और उकसा रही थी छोड़ने के लिए वहीं बड़े फूपाजी अपनी बेटी को रणदीव की तरह चुड़ते हुए देख रहे थे ...

रिम- हांण और तेज़ मादरचोद chachaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh...faad दो मेरी चुत साआईईए

फूपाजी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh ले साली रंडी..... Teriiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot भर diiiiiiiiiiiiiii लुंड से...

विनीत- आह्हः आह्हः आअह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह taujiiiiiiiiiiiiiiii क्या मस्त गांड है दीदी कीइइइइइइ aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापा Didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii रंडी नाहीईई है इतनी मज़ेदार गांड दुनिआ की किसी रनडीईईई आअह्ह्ह्ह की नहीं होगी...

तीनो के हाव भाव से पता चल रहा था की तीनो अपने शिखर के करीब hi हैं और किसी भी वक़्त बाँध टूट सकता है और हुआ भी ऐसा hi अचानक से रिमझिम दीदी की चीख निकली और उनका शरीर अकड़ गया और उनकी कमर झटके खाने लगी और वो झड़ने लगी.... वो अपने चाचा के ऊपर गिर गयी पर वो दोनों अब भी उसकी छूट और गांड की ठुकाई करने में लगे हुए the...par उनकी रफ़्तार भी काफी तेज़ हो चुकी थी और वो कभी भी झाड़ सकते थे...

तभी अचानक बुआ ने अपने पति और बेटे को रुकने को बोलै और दोनों रुक गए...

बुआ- अपने अपने लुंड बहार निकालो... रिम्मी के अंदर मत झड़ना...

फूपाजी- क्यों क्या हुआ

Bua-are जो बोल रही हूँ वो तो सुनो

तो फिर दोनों ने न चाहते हुए भी लुंड बहार निकले विनीत ने गांड से लुंड निकला तो गांड का छेड़ कुछ देर खुला hi रहा वही हाल छूट का tha...pahle विनीत हटा फिर फूपाजी ने रिमझिम को अपने ऊपर से उठाकर साइड में लिटा दिया और बुआ ने बगल में से एक कटोरी उठाई तबतक और बोलै- तुम दोनों लोग अपना रास इस कटोरी में गिरना...

सब बुआ को सवाल भरी नज़रो से देख रहे थे की न जाने उनके मन में क्या चल रहा है

Bua-are सब पता चल जायेगा पहले करो तो

और फिर बुआ ने खुद hi आगे बढ़कर विनीत यानि अपने बेटे के लुंड को पकड़ कर अपने मुँह में भर लिए जो की भतीजी की गांड से निकला था और चूसने लगी साथ hi उसकी गोलिओ को सहलाने लगी विनीत जो झड़ने की कगार पर hi था उसका लुंड अपनी माँ के मुँह में बिलकुल टाइट होकर फूल गया जिसका एहसास होते hi बुआ ने लुंड को मुँह से निकाल दिया और कटोरी को आगे कर दिया और विनीत आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह maaaaaaaaaaa uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हम्म ऐसी आवाज़ें करते हुए झड़ने लगा... और बुआ उसका सारा रास कटोरी में भर्ती रही जब विनीत का झड़ना बंद हुआ तो वो लम्बी साँसे लेते हुए साइड में लेट गया... विनीत के हटते hi फूपाजी की बरी आ गयी जिनके साथ भी बुआ ने वही प्रक्रिया दोहराई और उनका रास भी कटोरी में भर लिए... इसके बाद एक बार अपने पति के लुंड को मुँह में भर कर साफ़ किआ इसके बाद बुआ और फूपाजी दोनों hi साथ में बैठ गए.. सरे लोग झाड़ कर aràm कर रहे थे बस मैं गया और पूर्वी दीदी लगे हुए थे... गया मेरी गोलिओ को चाट रही थी वहीं पूर्वी की 2 उंगलियां गया की छूट में थी और जीभ गांड से अंदर बहार हो रही थी...

फिर अचानक से गया ने मेरी गोलिओ को छोड़ा और फिर छूट से दीदी की उंगलियां भी निकल दी और पलट कर मेरी तरफ पेअर करके अपनी टंगे फैला कर लेट गयी मैं समझ गया की अब ये छोड़ना चाहती hai...aur मैंने भी अपने लुंड पर थूक लगाया और उसकी छूट पर रख दिया तभी गया ने मेरे लुंड को पकड़ लिए और छूट से हटाकर अपनी गांड के छेड़ पर रख दिया... मैंने चौंक कर उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसने हाँ मैं सर हिलाया और मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया और अपना हाथ लुंड से हटाकर अपनी टंगे और ऊपर की तरफ कर्ली जिससे उसकी गांड और खुल गयी मेरे सामने... पूर्वी दीदी ने भी मेरी तरफ देखा और आगे बढ़ने को kaha...hum तीनो के अलावा और किसी को नहीं पता था सब सोच रहे थे की मैं गया को फिरसे छोड़ने जा रहा हूँ ... मैंने लुंड को गांड के छेड़ पर सेट करके धक्का लगाया पर वो अंदर नहीं गया क्यूंकि गया की गांड बेहद टाइट थी पर पूर्वी दीदी के चाटने के वजह से चिकनी थी ..मैंने लुंड हटाकर थोड़ा और थूक गांड पर गिरा दिया और उंगली से उसे अंदर भी कर diya...meri उंगली अंदर होते hi गया सिसक पड़ी...

मैं भी सोचने लगा उंगली इतनी कसके जा रही है लुंड कैसे जायेगा... मैंने फिर भी लुंड को छेड़ पर लगाया और गया की तरफ देखा तो उसने अपने हाथो से पैरों को अपने कन्धों के पास पकड़ लिए जिससे गांड थोड़ी और खुल गयी... मैंने भी सोचा जो होगा देखा जायेगा और धीरे से दबाव बढ़ाते हुए टोपे को अंदर धकेलने लगा हर पल के साथ गया के चेहरे के भाव भी बदलने लगे... पर थोड़ी सी म्हणत के बाद मेरे लुंड का टोपा गया की गांड में घुस गया...





मुझे उम्मीद थी के अब गया चीखने लगेगी की बहार निकालो दर्द हो रहा है ये सब bolegi...par हैरानी की बात तो ये थी की वो न चीखी और न hi उसने मुझसे रुकने को कहा वो बस लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए मेरे तरफ देख rahi..par हाँ उसकी आँखों से आंसू ज़रूर बाह रहे थे जो उसकी तकलीफ बयां कर रहे थे. मैं भी गया की हिम्मत का कायल हो गया और खुद को वहीं रोक कर आगे झुककर उसके होंठों को चूम लिए साथ hi छूछीयो को भी दबाने और सहलाने लगा जिससे उसका ध्यान थोड़ा दर्द से हेट क्यूंकि मुझे पता था की उसे दर्द तो बहुत हो रहा था...

कुछ पल बाद उसने अपनी कमर को थोड़ा हिलना शुरू किआ तो मैं समझ गया की शायद अब ये तैयार है और मैं सीधा हो गया और अपनी कमर को धीरे धीरे आगे धकेलने लगा जिससे मेरा लुंड और गया की गांड में घुसने laga...ab तक न गया ने कोई आवाज़ निकली थी न मैंने पूर्वी दीदी हैरानी भरी नज़रों से गया को और मुझे देख रही थी...

बाकि के लोग या तो बैठ कर आराम कर रहे थे या आपस में कुछ बातें पर मेरा ध्यान अभी सिर्फ गया की गांड पर था... करीब 5 मिनट्स की और म्हणत के बाद मेरा पूरा लुंड गया की गांड में था और मेरी गोलियां उसके चूतड़ों से चिपकी हुई थी मुझे ऐसा लग रहा था की अब लुंड मेरे शरीर का हिस्सा hi नहीं hai...Gia की गांड इतनी गरम और कासी हुई थी की मेरे लुंड में मेरे खून का दबाव भी काम होता हुआ महसूस हो रहा था, ऐसा लग रहा था की मेरे लुंड को निचोड़ रही है उसकी मखमली gand...wohin गया की आँखें बंद थी साँसे अब भी काफी तेज़ थी फिर उसने आँखें खोली और एक बहुत प्यारी सी मुस्कान के साथ मुझे देखा और अपनी कमर को हिलाकर झटका दिया मैं समझ गया की वो क्या चाहती है तो मैंने भी लुंड को आधा खींचा और फिर धक्का देकर अंदर दाल दिया और एक ठप्प की आवाज़ आई उसी के साथ गया के मुँह से भी आवाज़ निकली पहली बार- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa...

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी जान.... और इसी के साथ मैंने धीरे धीरे गया की गांड पिलाई शुरू कर di....aur जो गया अब तक बिलकुल शांत थी ज़ोरो से चिल्लाने और चीखने लगी पर मुझे भी उसकी गांड मरने में बेहद मज़ा आ रहा था... साथ hi ख़ुशी भी थी की एक और गांड की सील मैंने खोली और साथ hi गया पर प्यार भी आ रहा था की उसने अपने दोनों छेदों को खोलने का मौका मुझे दिया... और उसी प्यार से मैंने वो किआ जो गया और मैं दोनों चाहते थे मैं अब खूब तगड़े धक्को से गया की गांड मरने लगा...





Gia-aaahhhh आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa ऐसे hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii फायआडडडडडडडड दो meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii गाआआनंनंड्डड़..... ाःह मुम्ममय dekhoooooooooooooooooo कैसे कर्मा bhaiyaaaaaaaaaaaaaaa तुम्हारी बेटी की कुंवारी गाआआनंनंड्डड़ को फ़ायद रहे हैंण्ण्न... पहलीबीए तुम्हारीई maaaaaaaariiiiiiiiiii अब्ब्ब meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...

गया की आवाज़ सुनकर सबका ध्यान हमारी तरफ आ गया और सब लोग उठ कर हमारे चारो तरफ इकठ्ठा हो गए...

चारु ममी तुरंत हमारे बगल में आकर बैठी उनके चेहरे पर चिंता थी...

चारु ममी- कर्मा कर्मा बीटा इसी छोड़ दे अभी गांड मत मार तेरा लुंड बहुत बड़ा है. ये बच्ची है अभी... कर्मा निकल ले बहार..

मैं कुछ बोलता उससे पहले hi गया बोल पड़ी...

गया-. मुम्ममय nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मैंने hi aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa को बोलै था गांड मरने को.... मुझे भी आपकी तरह गांड में लुंड लेना था और मुझे कर्मा bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa से ाचा और कोई nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii लगाआआआ. Aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh mummmmmmmmmmmmmyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy बहुत mazaaaaaaaaaaa आआ राहाआआ है...

बड़ी बुआ- चारु तेरी बेटी भी तेरी तरह है... तेरी क्या हम सब की तरह है... लुंड की प्यासी... लेने दे इसे लुंड कुछ नहीं होगा...

रिम- हांण ममी किस्मत वाली है जो इतनी जल्दी ये सब मिल रहा है मेरी तरह इंतज़ार नहीं कर रही ...

बुआ- हाँ कर्मा मार इसकी गांड और दिखा दे कितना मज़ा आता है गांड मरवाने में...

बड़े फूपाजी- कर्मा बीटा आराम se...dekhna कही इसे तकलीफ न हो..

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह maaaaaaaaaaa uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हम्म जितनी takleeeeeeeeeeeef होनी थी हो चुकी फूपाजी अब तो बास मज़े haaaaaaannnnn..aaap भी तरय करके देखना....

विनीत- मैं भी मरूंगा गया की गांड...

चारु- हाँ सब मारना जब मेरी बेटी को कोई तकलीफ नहीं तो मैं भी खुश... और हाँ तू मेरी तरह है रंडी माँ की रंडी बेटी और ये कहकर इन्होने गया के होंठों को चूम लिए

पूरे कमरे में थप थप थप की आवाज़ें आ रही थी.... मैंने चारु ममी के सर को पकड़ा और अपने लुंड और गया के गांड के ऊपर रख दिया जिससे वो पास से मेरे लुंड को अपनी बेटी की गांड में आता जाता देख रही थी...

Gia-Mummmy आअह्ह्ह्हह कितना aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh बड़ाआआआ है bhaaaaiiiiiiiiiiiiyyyyyyyyyyyyyyyaaaaaaaaaaa का lunddddddddddddddddddd aaahhhhhhhhhhh मेरिइइइइइइइ गाआआनंनंड्डड़ bhaaarrrrrrrrrrrr गयी पुरीईईई...

में- इतनीईईईई केसीईईई हुइइइइइइइइ गाआआनंनंड्डड़ है Teriiiiiiiiiiiiiiiiiii जिआआआआ अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ीएडीईई leeeeeeeeeeeeeee राहाँदददद साआईईई.

मैंने धक्क्को की गति और बढ़ा di...sath hi ममी ने अपनी जीभ छूट के डेन पर टिका दी गया के और उसे छूड़ने लगी...

Gia-haan मुम्ममय aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa ऐसे hi छहःछहूऊऊडड़ड़ लोओओओओओ अपणीइइइइइइ beeeetiiiiiiiiiiiiiii kooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

और इसी के साथ गया का शरीर अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी पूरा शरीर झटके खाने लगा मैंने फिर भी धक्के लगाने जारी रखे और जब वो झाड़ कर बापिस पीछे की तरफ आँखें बंद करके लेट गयी तो मैंने अपना लुंड गया की गांड से निकला और चारु ममी के मुँह में दाल दिया





मेरे लुंड को चारु ममी मुँह खोल कर चूसने लगी जब गया को अपनी गांड में खली पैन का एहसास हुआ तो उसने आँखें खोल कर देखा और बोली-

गया- मुम्ममय तुम भी कितनी बड़ी रंडी हो अपणीइइइइइइ betiiiiiiiiiiiiiiiii की गांड से निकला हुआ लुंड चूस रही हो..... आअह्ह्ह्ह ऐसे hi मेरी randiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii माआआआ...

ममी हूउउउउउ हूउउउउउ करके लुंड चूसने में व्यस्त थी... अगले 2 मिनट्स बाद मैंने लुंड उनके मुँह से निकला और दोबारा गया की गांड में दाल दिया जिससे गया के मुँह से aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa की सिसकी निकल गयी पर कुछ 10-12 झटके क्र बाद मैंने फिर लुंड गांड से निकल कर उसकी माँ के मुँह में दे दिया.... और इसी तरह मैं कई बार किआ और ममी को अपनी बेटी की गांड का रास चखाया कई बार...

इसके बाद मैंने ममी को पकड़ा और झुककर घोड़ी बना दिया और फिर गया को पकड़ा और उसे ममी के ऊपर उल्टा लिटा दिया जिसे अब दोनों की गांड ऊपर नीचे थी मेरे सामने नीचे ममी के ऊपर गया के...

मैंने ममी की गांड पर लुंड टिकाया और धक्का देकर अंदर घुसेड़ दिए तो ममी के मुँह से आह निकल गयी और मैंने ममी की गांड में धक्के लगाने शुरू कर diye...sath hi उनके ऊपर लेती गया के चूतड़ों को भी मसल रहा था और फिर 5 मिनट्स के बाद ममी की गांड से लुंड निकला और ऊपर गया की गांड पर रखकर धक्का दिए और अंदर घुसेड़ दिया जिसे गया की भी चीख निकल गयी और फिर मैं बिना रुके गया की गांड मरने लगा...

गया- आह्ह्ह्हह भैया maaaaaaaaaaa uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मारो माँ बेटी की गांड एक साथ मार रहे हो मैंने काभीई sochaaaaaaaaaaa भीइइइइइइइ nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii था ैसाअअअअअअअ काभीई होगा मेरे सअअअअअतः ाः.... मुम्ममय....

मैंने ऐसे hi कसके गया की गांड कुछ देर मरी और फिर लुंड निकल कर ममी की गांड में दाल दिया और एक धक्का दिया और फिर निकल कर गया की गांड में दाल दिया





और फिर गया की गांड से निकल कर ममी की गांड में...

मैं ऐसे hi लुंड को कभी बेटी की गांड में डालता तो कभी माँ की ऐसे बदल नडाल कर एक साथ माँ बेटी की गांड मरने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और साथ hi मैं बहुत उत्तेजित भी हो रहा था... करीब अगले 10 मीन्स तक और ैसर hi माँ बेटी की गांड बादप बदल कर मरने के बाद मैं भी उत्तेजना के शिखर पर पहुंच गया मुझे अपने लुंड पर दबाव बनता हुआ महसूस हुआ वहीं साथ में ममी और गया भी झड़ने लगी जिस कारन मेरा लुंड बिलकुल फटने लो हो गया और जैसे hi मुझे लगा अब मेरा निकलने वाला है मैंने गया की गांड से लुंड निकला और जल्दी से मुद कर बुआ की कटोरी उठाई और फूपाजी और विनीत के रास के साथ अपना रास मिला दिया... और थक कर बैठ गया... वही. गया और ममी भी एक दुसरे के ऊपर से हटकर साइड में लेट गयी...

फूपाजी- अरे शशि अब तो बतादे ये रास का अब क्या करेगी कटोरी में ले तो लिए है...

बुआ कुछ नहीं बोली और कटोरी उठाई और बहार चली गयी सब एक दुसरे को देख रहे थे की किसी को कुछ पता है की ये क्या हो रहा है...

कुछ मिनट्स बाद बुआ बापिस आई तो उनके हाथ में अब भी वो कटोरी थी और वो उसमे अपनी उंगलियों को घुमा रही थी....

बड़े फूपाजी- अरे बहु अब बता भी दे क्या करने वाली है तू...

बुआ- भाई साब कल रिम्मी की हल्दी की रस्म है जिसमे इसको हल्दी lagegi..haldi इसलिए लगाई जाती है की चेहरे पर चमक आये दुल्हन ke...par मेरे हिसाब से लुंड के रास से ज़्यादा ाचा कुछ नहीं होता त्वचा के लिए तो क्यों न दोनों मिला दिए जाएं...

बुआ ने कटोरी में रास में हल्दी को मिला दिया था जिससे एक गीला पेस्ट बन गया tha....sab लोग बुआ की तरफ मुस्कुरा कर देख रहे थे..

बड़े फूपाजी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh बहु रानी क्या सोचा है ज़रूर लगाओ.... और ये कहकर बड़े फूपाजी अपना लुंड सहलाने लगे जो की आधा खड़ा होने की स्थिति में था...

फूपाजी- हाँ भैया क्या कामुक उपाय है...

बड़ी बुआ- तुम्हारी बीवी है hi रंडी एक नंबर की ऐसे उपाय उसे hi सूझेंगे

ये सुनकर सब हंसने लगे...

और फिर बुआ ने कहा साडी औरते और लड़कीअ आओ और रिम्मी को अपने हाथो से हल्दी लगाओ... रिमझिम दीदी को बीएड के बीच में बिठाया गया और सब लोग उनके आस पास खड़े हो गए..

तो पहले बड़ी बुआ आई और कटोरी में उंगली डुबोई और थोड़ा सा वीर्य और हल्दी के लेप को अपमी उंगलियों पर लेकर अपनी बेटी के माथे पर लगाया और फिर माथे को चूम लिए.... वहीं फिर बुआ ने खुद थोड़ा लिए और रिमझिम दीदी के राइट गाल पर लगा दिया... ये देखने में जितना सरल और सीधा दृश्य लग रहा था असल में उससे कहीं अधिक कामुक और अजीब था... एक शादी होने वाली लड़की को उसकी माँ और परिवार की औरतें हल्दी लगा रही हैं पर वो हल्दी परिवार के मर्दो के लुंड से निकले हुए रास में घुली हुई है...

फिर पूर्वी दीदी उठी और उन्होंने लेप लिए और लेफ्ट गाल पर लगा दिया साथ hi रिमझिम दीदी के होंठों को चूम लिए और फिर पीछे हो गयी इसके बाद चारु ममी ने लेप लिए और होंठों पर से लेकर गर्दन तक पूरे में लगा दिया...

रिमझिम दीदी का पूरा चेहरा पीला हो गया था वीर्य और हल्दी के लेप से और वो मुस्कुरा कर सबको देख रही thi...par इस समय वो इतनी कामुक लग रही थी की उनके चेहरे को देखते hi मेरा लुंड फिर से तन गया मैंने नज़र घुमा कर देखा तो बाकि मर्दो के लुंड भी करीब करीब खड़े hi थे... लास्ट में बरी आई गया की जिसने कटोरी से सारा लेप अचे से पांच कर अपने हाथो में ले लिए और फिर दोनों हाथो से अचे से दीदी की छूछीयो पर लगा दिया.... अब दीदी का चेहरा और छुछियां पीली हो गयी थी... बुआ ने दीदी से बोलै के वो ये धोये न और सुबह तक लगा कर रखें दीदी ख़ुशी ख़ुशी मान गयी...

पर अब सब के लुंड तन के खड़े थे वहीं छूटें भी गीली थी छोड़ने के लिए तो फूपाजी ने बोलै की अब सब अपने अपने साथी चुनलो और अपने अपने कमरे में जाकर चुदाई करो और सो भी jana..sab लोग इस बात पर सहमत हुए...

बड़े फूपाजी ने एक बार फिर अपनी बेटी को छोड़ने की इच्छा जताई और रिमझिम दीदी को अपने साथ लिए... विनीत ने गया और बड़ी बुआ यानि अपनी तै जी को चुना... तो फूपाजी ने गया की मुम्ममय यानि चारु ममी को... और मेरे साथ मेरी प्यारी बुआ और पूर्वी दीदी मतलब एक और माँ बेटी की जोड़ी... और सब लोग एक दुसरे से विदा लेकर अपने अपने कमरों में आ गए...

एक कमरे में बड़े फूपाजी ने एक बार और अपनी प्यारी बेटी के तीनो छेदों को नापा और फिर उसकी छूट में अपना रास गिरा कर सो गए...

दुसरे कमरे में फूपाजी ने भी चारु ममी की छूट और गांड को खून छोड़ा और फिर अपना रास उनको पिलाया और दोनों एक दुसरे की बाहों में सो गए...

तीसरे कमरे में विनीत ने पहले तो गया की गांड मरी फिर अपनी तै जी की गांड मरी और फिर दोनों की छूट मरी और फिर अंत में गया की गांड में झाड़ गया जिसका रास उसकी तै जी ने गया की गांड से निकल कर पि लिए और अंत में सब सो गए...

चौथे कमरे में मैंने बुआ और पूर्वी दीदी दोनों माँ बेटी की बदल बदल कर छूट मरी और फिर गांड... और फिर दोनों को 69 में एक दुसरे के ऊपर लीटडिया वो दोनों छूट चाटती रही हुए मैं बदल बदल कर दोनों माँ बेटी की गांड मरता रहा और अंत में पूर्वी दीदी के चूतड़ों पर झाड़ गया जिसे बुआ ने चाट चाट कर साफ़ कर दिए और फिर मुँह में भरकर बेटी को पिलाया और अंत में तीनो लोग थक कर सो गए...

तो दोस्तों अगले दिन और शादी में क्या होगा कैसे होगी रिमझिम की शादी सब अगली अपडेट में आप लोग प्लीज कमैंट्स करते रहिये शुक्रिया...
 
लास्ट अपडेट में आपने देखा कैसे सबने पहले साथ में और फिर अपने अपने कमरों में जाकर चुदाई की और फिर सब सो गए अब आगे...

अपडेट 58
रात को लेट सोने की वजह से मैं काफी देर तक सोता रहा.. और जब आँख खुली तो देखा की मैं बिस्तर पर अकेला था बुआ और पूर्वी दीदी पहले hi उठ चुकी थी.. और रात को मैं पूरा नंगा सोया था जबकि अभी मेरे बदन पर पजामा था... मैंने सोचा की बुआ ने या दीदी ने मुझे पजामा क्यों पहना दिए और मुझे पता भी नहीं चला... मैंने सोचा चलो बहार चल कर देखते हैं ...घडी में टाइम देखा तो 12:30 हो रहे थे मतलब दोपहर hi हो चुकी थी t-shirt पहन कर बहार आया तो थोड़ा हैरान हो गया घर में काफी चहल पहल थी और कुछ नए चेहरे भी मुझे देखने को मिल रहे थे.. मुझे बुआ दिखी तो मैंने उनसे जाकर पुछा कौन हैं ये लोग..

बुआ- मेहमान हैं बीटा दो दिन बचे हैं शादी को तो मेहमान तो आएंगे hi... पूर्वी के ससुराल से भी आ गए हैं तेरे जीजाजी और पूर्वी की सास... रिमझिम की मौसी और उनके बच्चे भी आ गैर हैं... और भी कई रिश्तेदार हैं तो अब संभल कर रहना और कुछ ऐसा मत करदेना की कुछ गड़बड़ हो जाये सबको समझा दिया है मैंने तू भी सुनले..

में- ग बुआ कोई गड़बड़ नहीं होगी... पर मुझे चाय तो दे दो सर भरी लग रहा है...

बुआ- लेट तक सोने की वजह से होगा बीटा अभी देती हु चाय जा तू तबतक ब्रश वगेरा करले..

Me-theek है बुआ

और फिर मैं फ्रेश हुआ चाय वगेरा पि और मेहमानो से मिला और काम वगेरा किये और फिर इन्ही सब में लगे लगे शाम हो गयी... घर में इतनी साडी औरतों को देखकर लुंड भी खड़ा हो रहा था पर इतने सरे लोगो के बीच कुछ कर भी नहीं सकता था... ऊपर से इतना सारा काम कुछ भी नहीं कर प् रहा था था बस तड़प के घूम रहा था और कोई चांस ढूंढ रहा था की किसी की रो छूट मिले...

खैर ऐसे इंतज़ार करते करते करीब आधे घंटे बाद मुझे गया कहीं बहार की तरफ जाती हुई दिखाई दी.. मैं भी उसके पीछे पीछे चल दिए पर गेट के बहार hi रिमझिम दीदी की मौसी और उनके बच्चे भी गया के साथ चलने लगे... मैंने सोचा लो ये मौका भी गया हाथ से पर भी मैं देखने लगा की ये लोग जा कहाँ रहे हैं गया ने एक शर्ट और एक स्कर्ट पहन राखी थी जो उसके घुटनो तक थी वहीं मौसी ने साड़ी खैर .. मैं पीछे पीछे चलने लगा और कुछ देर बाद फूपाजी के खेत पर पहुंच गए जिसमे कई साडी सब्ज़ियां थी... खेत के बगल में hi एक बाघ था जो काफी घाना था तो मौसी खेत में से सब्ज़ियां देखने लगी की कौनसी पाकी हैं और देख कर तोड़ने लगी वहीं उनके बच्चे खेत में खेलने lage...main बाघ के अंदर से चुपके उन्हें देख रहा था और छह रहा था की एक बार गया मुझे देख ले तो मैं उसे इशारा करके इधर बुलालून पर गया देख hi नहीं रही थी फिर गया ने मौसी से कुछ कहा और मौसी ने सर हिलाया और मुद कर गया बाघ के अंदर की और आने लगी...

मुझे तो जो चाहिए था मिल गया मई भी धीरे धीरे अंदर की और बढ़ा और जिअ की तरफ जाने लगा और फिर पेड़ के पीवी खड़ा हो गया और फिर जैसे hi गया आई मैंने उसे पकड़ लिए... वो अचानक पकड़ने से दर गयी और चीखने वाली थी पर मैंने उसका मुँह अपने हाथो से दबा लिए था फिर. मुझे देखकर वो थोड़ी शांत हुई...

Gia-bhaiya तुमने तो डरा hi दिए मुझे यहाँ क्या कर रहे हो?

में- तुझे छोड़ने आया हूँ कबसे लुंड खड़ा है कोई मिल hi नहीं रहा...

गया- पर भैया यहाँ कैसे मौसी है सतब और मैं बस सुसु का बोलकर आई हूँ उनसे..

में- तो फिर जल्दी करना और इतना कहकर मैंने उसे झट से घुमा दिए... और झट से उसकी स्कर्ट उसके चूतड़ों से उठाई और और उसकी पंतय नीचे खिसका दी... और दुसरे वो हाथ से अपना पजामा नीचे खिसका दिया जिसके नीचे होते hi लुण्ड्राज फन उठा कर बहार आ गए और अगले hi पल मैंने उसे बिल में घुसा दिया..

मैंने सब कुछ इतनी जल्दी किआ की 20 सेकण्ड्स के अंदर मेरा लुंड गया की छूट के 3 इंच अंदर था गया ने अपना हाथ मुँह पर रखकर अपनी चीख को रोका. और मैं उसे पेड़ से लगाकर पीछे से छोड़ने लगा





गया- अह्ह्ह्ह भैया गीला तो करलेते सूखा hi घुसा दिया...

में- इतना टाइम नहीं है जान कबसे तड़प रहा हु मैं छूट के लिए...

गया- आठ bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था पर मौका hi नहीं मिला... आह्हः पर भैया जल्दी करो मौसी कहीं आ न जाएं...

Me-Aaaahhhhhhhhh मेरी जान कर रहा हूँ आअह्ह्ह्ह क्या सुकून देती है तेरी छूट लुंड को... कितनी गरम और रसीली hai..aaahhhhhhh आअह्ह्ह्ह

और मैं उसकी कमर पकड़ कर तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा वहीं उसके मुँह अपनी तरफ करके उसके होंठों को चूसने लगा फिर हम दोनों एक दुसरे की जीभ को चूसने लगे और हर बीते पल के साथ मेरे धक्क्के और तेज़ होते जा रहे थे क्यूंकि मैं मुकर की नज़ाकत को समझ रहा था की ज़्यादा देर लगाना ठसक नहीं होगा... इसीलिए मैं जल्द से जल्द जबदना चाहता था.... फिर भी करीब 5 मीन्स और मैं गया को छोड़ता रहा मेरा लुंड भी बहुत कड़क हो गया था और मुझे अपना रास अपने लुंड में आता हुआ महसूस हुआ की तभी बहार से आवाज़ aai-Gia बीटा... कहाँ है तू...

गया- भैया मौसी aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa मौसी बुलाआ रही है जल्दीईई करूऊऊऊओ और फिर अचानक से गया कंपनी लगी और वो झड़ने लगी उसके झड़ने स्व उसकी छूट थोड़ी सिकुड़ने लगी जिससे मेरा लुंड और घिसने लगा आउट मैंने भी अपनी पिचकारी शुरू कर दी और गया की छूट में hi झाड़ गया... और उसकी छूट को रास से भर दिया और हांफते हुए अपना लुंड निकला और उसने भी झट से अपनी पंतय ऊपर कर लिए और स्कर्ट भी नीचे करके अपने चूतड़ों को धक् दिया और अपनी सांसो को ठीक करने लगी तभी किसी के आने की अआहत हुई तो मैं वहां से निकल कर दुसरे पेड़ के पीछे खड़ा हो gaya..kuch hi देर में वहां मौसी आई और गया से पुछा क्या हुआ बीटा इतनी देर कैसे लग रही है...

Gia-kuch नहीं वो मैं पेड़ देखने लगी थी की अमरुद अभी कच्चे हैं या पक्के?

मौसी- रुक मैं देखती हूँ और वो अमरुद देखने लगी तो मैंने वहां से निकल न hi ठीक समझा और आराम से पीछे चलता हुआ बहार निकल आया और फिर बापिस आ गया... घर आकर देखा तो मैं खुश हो गया क्यूंकि सामने अनुज बैठा था... वो मुझे देखकर मुस्कुरया और मुझसे बोलै- मैं भी आ गया भैया..

में- बढ़िया है पर माँ पापा कहाँ हैं?

अनुज- वो कल आएंगे भैया फूपाजी का फ़ोन आया था कुछ सामान लाना था तो मैं लेकर आ गया...

मैं अनुज को मिलकर खुश भी हुआ साथ hi उदास भी की माँ पापा नहीं आये पर सोचा जब इतने दिन गए तो एक और सही...

Me-aur बता तेरी पढाई कैसे चल रही है..?

अनुज- थोड़ा शैतानी भरी मुस्कराहट से बोलै- बहुत मस्त भैया पल्ली और मैं खूब पढ़ते हैं साथ में कभी कभी ममता चची भी पद्धति हैं हमें और ये कहकर हंसने लगा..

में- सुधर जा असली पढाई पर भी ध्यान दे ले नहीं तो पापा तेरे ये hi दांत तोड़ देंगे जो दिखा रहा है...

अनुज- भैया पढता भी हूँ... देखलेना अचे नंबर आएंगे mere...waise एक बात पूछूं..

Me-haan पूछ न

अनुज- भैया तुम इतने दिन कैसे रह लिए बिना छू... वो किये और फिर इधर उधर देखने लगा..

में- किसने कहा की मैं बिना चुदाई के रहा...

अनुज थोड़ा हैरान हो गया- तो फिर यहाँ किसके साथ की आपने कोई गाँव की लड़की है?!

में- अभी बहुत कुछ है बीटा जो तुझे नहीं पता..

अनुज- भैया प्लीज बताओ न प्लीज प्लीज प्लीज...

में- बताऊंगा सबर तो कर पीछे hi पद जाता है... अभी सबसे मिल ले और आराम करले..

अनुज- मिल तो लललल..

अनुज बीच में hi रुक गया और एक जगह देखने लगा मैंने उसकी नज़रो का पीछा किआ तो देखा गया सामने कुछ काम कर रही थी तो उसे hi देख रहा था..

अनुज- भैया ये कौन है...

में- बहन है तेरी... हे हे हे

अनुज- भैया मजआक नहीं न प्लीज बताओ न क्या माल है यार...

Me-sach में बहन है ररिम्मी दीदी की...

अनुज- अरे यार भैया क्या फ़र्क़ पड़ता है.. लुंड तो बस छूट देखता है.. वो तो इसके पास भी होगी... चची को और बहन जैसी पल्ली को तो रोज़ छोड़ता हूँ..

Me-bahut बोलने लगा है तू...

अनुज- भैया तुम्हारे जैसा hi तो हूँ... भैया वैसे यहाँ पर मेरा भी जुगाड़ कराओ न कुछ...

में- करता हूँ सबर कर अभी तू आराम कर..

और बात करते करते hi बीच में मुझे बड़े फूपाजी ने बुला लिए किसी काम के लिए और मैं काम में लग गया काम ख़तम होते होते रात हो गयी खाने का वक़्त हो गया था..

घर पूरा भरा हुआ था क्यूंकि शाम तक और भी मेहमान आ गए थे.. सबने खाना खाया हर तरफ शोर और चहल पहल थी.. घर के सरे लोग किसी न किसी काम में बिजी थे मैं भी काम करने लगा खाना खाने के बाद इतने लोगो का सोने का इंतज़ाम करना था... छत पर और आंगन में गद्दे दाल बिछा दिए बाकि कमरों में भी अलग से गद्दे दाल कर बिस्तर लगा diye...phir बड़े फूपाजी ने फैसला लिए की कमरों में औरतें सोयेंगी और जिनके साथ छोटे बच्चे हैं तो बच्चे भी बाकि मर्द सरे आँगन और छत पर सोयेंगे... फिर आंगन में hi गाना बजाना शुरू हो गया.. मैं साइड में खाट पर बैठ कर फ़ोन चला रहा था वहीं अनुज मुझे पास बैठ कर तंग कर रहा था...

अनुज- भैया कुछ करो न बहुत मन कर रहा है..

Me-chupchaap सो जा जेक...

अनुज- भैया रोज़ ममता चची और पल्ली को छोड़ने की आदत लग गयी है बिना किये नींद नहीं आएगी...

सच बात तो ये थी की उससे ज़्यादा मन तो मेरा कर रहा था पर क्या कर सकता था तो चुपचाप बैठा हुआ था...

में- अबे कुछ होगा तो करवा दूंगा सब लोग हैं अभी कक...

इतना कहते hi मैं रुक गया मैंने देखा बुआ हाथ में सब्ज़ी का कटोरा लिए बहार जा रही हैं मतलब वो बची हुई सब्ज़ी भैंस को डालने जा रही थी...

में- सुन अभी यहीं बैठ 5 मीन्स बाद जहाँ भैंस बंधी हैं न बहार वहां आ जाना...

अनुज- क्या मतलब जुगाड़ हो गया..

वो खुश हो गया...

में- पर जो भी हो चौंक के दर मत जैव तब जल्दी करना पड़ेगा सब..

अनुज- हैं भैया जैसा तुम कहो..

और मैं वहां से निकल गया बहार आया भाग कर और जहाँ भैंस बांधती है वो तीन तरफ से बंद एक झोपडी जैसा था ऊपर छप्पर से ढाका हुआ एक छोटा सा बल्ब जलता रहता था रात को.

खैर मैं भागता हुआ गया और झोपडी में घुस गया... बुआ भैंस के आगे बने उसके खाने की जगह में सब्ज़ी दाल रही थी मैंने अपना पजामा नीचे खिसका दिया और लुंड बहार निकल लिया बुआ सब्ज़ी डालकर जैसे hi मुड़ी मैंने उनके होंठो पर अपने होंठों को रख दिया जिससे उनकी आवाज़ न आये और नीचे से लुंड को उनके पैर पर टक्कर मरने लगा जिसे बुआ ने हाथ से पकड़ लिए और सहलाने लगी.... मैंने बुआ की जीभ को चूसते हुए उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए और जैसे hi आखिरी हुक खुला बॉयज़ अपने आप दोनों तरफ हैट गया और बुआ के बड़े बड़े छूछे बहार आ गए... बुआ ने ब्रा नहीं पहनी thi...main उनके छूछीयो को हाथो से मसलने लगा साथ hi अब वो मेरी जीभ चूस रही थी और फिर हम दोनों के मुँह एक दुसरे से अलग हुए और मैं झुककर उनकी छूछीयो को चूसने लगा..

Bua-aahhhhh कर्मा बीटा कोइइइइइ आए जायेगा क्या कर रहा है...

में- बुआ बहुत मन कर रहा है... और अभी कोई नहीं आएगा...

बुआ भी गरम हो गयी थी तो वो भी साथ पूरा दे रही थी तो मैंने छूछीयो को छोड़ा और उन्हें नीचे बैठने का इशारा किआ और बुआ नीचे बैठ गयी और मेरा लुंड उनके चेहरे जे सामने आ गया जिसे अगले hi पल उन्होंने अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी....

लुंड उनके मुँह में जाते hi मुझे सुकून मिल गया उनका गरम मुँह मेरे लुंड पर जादू करने लगा... मेरे हाथ खुद बा खुद बुआ के सर पर पहुंच गए और मैंने उनके सर को अपने लुंड पर और दबाया जिससे मेरा पूरा लुंड बुआ के मुँह में घुस गया और मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया... मैं बुआ के मुँह में लुंड अंदर बहार करने लगा...





Me-aaahhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह ऐसे hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii पूरा aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh लुंड लो meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii प्यारी randiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii buaaaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh...

बुआ के मुँह से बस घ्हुउउउउउउ हूउउउउउ की आवाज़ आ रही थी...

मैंने अपना चेहरा घुमा कर देखा तो अनुज वहीं खड़ा था मैं उसके बारे में भूल hi गया की उसे भी बुलाया था मैंने...... वो आँखें फाड़ कर हमें देख रहा था... शायद उसने ये कभी नहीं सोचा होगा की मैं बुआ के साथ ये सब कर रहा होऊंगा... माइनर उसे रुकने का इशारा किआ और बुआ के गले तक एक बार और लुंड को घुसेड़ा और फिर निकल लिए मेरे लुंड के साथ साथ थूक भी बहार निकला बुआ के मुँह से फिर मैंने बुआ को उठाया और घुमा कर झुका दिया और पीछे से उनकी सारी और पेटीकोट को कमर ओर चढ़ा दिया पंतय वो घर में पहनती नहीं थी तो उनके बड़े नंगे चूतड़ सामने आ गए मैंने बिना देर किये अपने लुंड को उनकी छूट पर सेट किया और एक hi झटके में आधे से ज़्यादा लुंड अंदर दाल दिया...

Bua-Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh आराम से बीटा.....

और फिर एक और झटका दिया और मेरा लुंड पूरा अंदर था... और फिर मैं सटासट बुआ को छोड़ने लगा...

बुक- अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह betaaaaaaaaaaaaahhhh आह्हः हॉँण्णन ऐसी hi maaaaaaaaaaaaaaarrrr अपनी बुआ कीइइइइइइ आअह्ह्ह..

मैंने अनुज की तरफ ददखा और उसे आने का इशारा kia..wo हमसे राइट साइड में खड़ा था थोड़ा पीछे की और जिससे बुआ नहीं देख पा रही थी उसे...

मुझे लगा अनुज अब आ कर बोलेगा की बुआ ये सब क्या कर रही हो आप लोग एयर फिर बुआ और मैं उसे अपने साथ शामिल कर लेंगे... पर ऐसा कुछ नहीं हुआ..

मेरा इशारा मिलते hi अनुज आगे बढ़ा और साथ hi साथ अपना पजामा नीचे खिसका दिया और लुंड बहार निकल लिए जो की पोइरा तना हुआ था और फिर अचानक से बुआ के सामने गया और शायद बुआ ने उसे देख भी नहीं पाया की उससे पहले उसने अपना लुंड उनके मुँह में घुसेड़ दिया.. बुआ ने भी ज़्यादा नहीं सोचा उन्हें लगा घर का hi कोई होगा और लुंड चूसने लगी फिर चूसते हुए उन्होंने नज़र उठा कर चेहरे की और देखा तो थोड़ा चौंक गयी अनुज को देखकर पर उन्होंने लुंड को मुँह से बहार नहीं निकला और फिर आँखों से hi उसको देखते हुए थोड़ा मुस्कुराई और फिर लुंड चूसने लगी...

Anuj-ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh buaaaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh क्याआ मस्त चूसती हो तुम...... मैंने न जाने कितनी बहार तुम्हारे बारे में सोचकर मुठी मरी है बुआ आआह्ह्ह आअज सच में मिली हो....

में- आराम से बोल कोई सुन न ले...

मैं बुआ को लगातार तगड़े धक्को से चोदे जा रहा था... मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.. बुआ की छूट ऐसी थी की चाहे जितना भी छोड़लो हर बार मज़ा उतना hi आता था...

Anuj-bhaiya बहुत मज़ा आ रहा haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii... मान गए तुम्हे .बुआ को भी छोड़ दिया एयर आअज तुम्हारीई वजह से मैं भी छोड़ पाउँगा....

हम दोनों भाई बात कर रहे थे वहीं हमारे लुंड से बुआ के दोनों छेड़ भरे हुए थे..





Me-aahhhhh अह्ह्ह्हह बुआए क्या रसीली choooooooooot है तुम्हारी....

अनुज- हॉँण्णन भैया और मुँह भी काम नहीं है आह्ह्ह्हह क्या चूसती हो बुआ..

बुआ का ब्लॉउस और उनकी बड़ी बड़ी छुछियां हर झटके के साथ झूल रही थी वहीं अनुज बुआ के सर को पकड़े हुए उनके मुँह से लुंड अंदर बहार कर रहा था... मैं भी लम्बे लम्बे धक्को के साथ अंदर तक लुंड की चोट कर रहा था और कुछ देर ऐसे hi छुड़वाने के बाद अचानक से बुआ कंपनी लगी और मुझे उनकी छूट मेरे लुंड पर सिकुड़ती हुई महसूस हुई मैं समझ गया बुआ झाड़ गयी और फिर उनकी छूट के रास नव मेरे लुंड को भीगा दिए और फिर बुआ नीचे घुटनो पर गिर गयी जिससे मेरा लुंड और अनुज का लूँ भी उनकी छूट से निकल गए... बुआ बुरी तरह हांफ रही थी वहीं हम दोनों भाइयों का अभी नहीं हुआ था ..

Anuj-bhaiya मुझे भी छूट मारनी है अब बुआ की..

मैंने उसे कुछ न बोलते हुए बगल में पड़े भैंस के चारे के ढेर पर बैठने का इशारा किआ और वो तुरंत अपनी पंत और नीचे करके बैठ गया.. मैंने जल्दी से बुआ को पकड़ कर उठाया और फिर धक्का देकर अनुज की और ले गया और बाकि काम बुआ ने खुद कर दिया और तुरंत अनु के दोनों तरफ अपने पेअर करके उसके ऊपर बैठी और अनुज की आँखों में देखते हुए उन्होंने अनुज के लुंड को पकड़ा और अपनी छूट के द्वार पर लगाया और फिर नीचे बैठ गयी जिससे अनुज का पूरा लुंड बुआ की छूट में समां गया..

Anuj-haannnnn बाआहहह aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhhmazaaaa आए गयाआआआआ इतनी गरम छूट haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...

बुआ- हाँ अनुज बीटा छोड़ अपनी बाआ कोऊ कर्मा ने तो छोड़ छोड़ कर भोसड़ा बना दिया है मेरी छूट को... अब तू भी छोड़ अपनी रंडी बुआ को...

अनुज- इस पल का तो न जाने कब से सपना देखा था बुआ मैंने की तुम मेरे लुंड पर उछाल रही हो... आज वो पूरा हुआआआआ भैया सब तुम्हारी वजह से इतनी मस्त छूट छोड़ने को मिल रही है...

मैं बुआ और अनुज को चुदाई करते हुए देख रहा था पर मेरा लुंड भी रोड की तरह खड़ा था क्यूंकि अभी मैं भी नहीं झाड़ा था और फिर मुझे बुआ की सबसे प्यारी चीज़ नज़र आई और मेरा लुंड अपने आप फुंकारने लगा मैंने जल्दी से अपने लुंड पर थूक लगाया और बुआ और अनुज की टैंगो के बीच आ गया और बुआ के चूतड़ों को पकड़ा और अपना लुंड बुआ के प्यारे से गांड के छेड़ पर रख दिया और एक झटका दिया जिससे मेरा लुंड बुआ की गांड में घुस गया...

Bua-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh बीटा मार डाला..... aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh तुम दोनों bhaiiiiiiiiiiiii तो जाआआआं nikaaaaaaaaaaaaaaallllllllll लोगे meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...

अनुज- बहुत्तत्ततत्तत्त बढ़िया bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa अब साथ में छोड़ेंगे बुआ को...

Me-bua तुम्हारी गांड ऐसी है की रोक hi नहीं पाया खुद को... आअह्हह्ह्ह्हह

फिर मैं और अनुज ताल मिलकर बुआ के दोनों छेदों की गहराई नापने लगे...





बुआ दो लुँडो की चुदाई से बिलकुल मज़े के सागर में डूब रही थी... हालाँकि मैंने बुआ को कई बार ऐसे विनीत या फूपाजी के साथ मिलकर छोड़ा था पर अनुज के साथ छोड़ने में अलग hi मज़ा आ रहा था और हम दोनों तगड़े धक्को से बुआ की चुत और गांड को बजा रहे थे...

अनुज ने बुआ का सर अपनी और खींचकर उनके होंठो को चूसने लगा बुआ भी उसका पूरा साथ दे रही थी... और दोनों एक दुसरे की जीभ और होंठों को लगातार चूस रहे थे पर साथ में hi अनुज नीचे से काफी तगड़े धक्के बुआ की छूट में लगा रहा था जिससे बुआ ऊपर की और आती और मेरा लुंड उनकी गांड में और अंडे तक घुस जाता... ऐसे hi करीब 5 मीन्स तक और छोड़ने के बाद अनुज की पकड़ बुआ पर और कास गयी वहीं उसके धक्के भी काफी तेज़ हो गए थे मुझे महसूस हुआ के वो अपने चरम पर है वहीं बुआ भी बेहद उत्तेजित हो गयी थी...

Bua-haan अनुज betaaaaaaaaaaaaahhhh आह्हः हॉँण्णन Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh ऐसईईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ऑरररररररर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ चुड़ड़ड़ड़ड़ अपणीइइइइइइ buaaaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh को.... Randiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii की तरह

मैंने हाथ से बुआ का मुँह दबा लिए क्यूंकि वो अब काफी तेज़ चिल्ला रही थी और कोई भी सुन सकता था वो तो ाचा है घर में गीत चल रहे थे... इसलिए आवाज़ का पता नहीं लग रहा था और फिर मेरी कमर भी अपने आप तेज़ हिलने लगी और मुझे भी अपने लुंड में वीर्य दौड़ता हुआ लगा... और फिर जैसे किसी ने बटन दबा दिया हो हम तीनो एक साथ झड़ने लगे मैंने अपने रास की पिचकारियां बुआ की गांड में भरदी वहीं अनुज ने बुआ की छूट को अपने वीर्य से भर दिया और बुआ भी थरथराती हुई काँप रही थी... और फिर अनुज के ऊपर hi गिर गयी झड़ने के बाद मैंने बुआ की गांड से लुंड निकला तो लुंड निकलने के बाद बुआ की गांड का छेड़ खुला नज़र आ रहा था और मेरा रास बहार निकल रहा था तभी बुआ अनुज के लुंड से भी उठ गयी और अपने चूतड़ों को फ़ैलकसर देखने लगी उनकी छूट से अनुज का रास बहकर बहार आ रहा था... दोनों छेड़ो से दोनों भाइयों का वीर्य बहकर बहार आ रहा था





बुआ ने फिर अपने चूतड़ों को छोड़ा और सीढ़ी कड़ी हुई और अपनी साड़ी और ब्लाउज ठीक किआ और फिर बोली.

बुआ- आज तो तुम दोनों भाइयो ने अपनी बुआ की जान hi लेली पर संतुष्ट भी कर दिया ...मेरे प्यारे बच्चो चलो अब मेरे मन में ये भी नहीं रहेगा की एक को ज़्यादा प्यार दिया एक को काम..

और फिर बुआ ने हम दोनों को होंठों पर प्यार से चूमा और फिर नीचे झुककर पहले अनुज के लुंड को चूसकर साफ़ किआ और फिर मेरे...

Bua-waise ये तुम दोनों की मिली भगत थी न.. पर कोई नई मुझे ख़ुशी है की अब मेरे सरे बच्चे मुझे छोड़ते हैं.. और कर्मा सीधा पूछलता तू तब भी मैं मन नहीं करती. चलो अब मैं न चलती हूँ तुम दोनों भी आ जाना और सो जाना थक गए होंगे...

Me-theek मेरी प्यारी बुआ..

अनुज- ग बुआ और फिर बुआ जब लगी तो अनुज ने उनके चूतड़ों को मसल दिया

बुआ- बदमाश हो गया है तू...

और बुआ चली गयी तो फिर मैंने अपनी पंत ऊपर की और मुदा तो अनुज मुझे सवाल भरी नज़रो से देख रहा था...

Me-ab क्या हुआ तुझे...

Anuj-bhaiya हो तो कमाल चीज़ आप... बताओ बुआ को भी पता lia..par ये सब हुआ कैसे...

Me-abhi तो तुझे कुछ पता नहीं छोटू... जब पूरी बात पता चलेगी तो मेरे पेअर धो के पि लेगा तू...

Anuj-kya बात है पूरी भैया और क्यों फेंक रहे हो सीधे सीधे बतादो न..

में- तुझे फेंकना लगता है तो नहीं बता रहा...

Anuj-bhaiya प्लीज मज़ाक कर रहा था प्लीज बताओ न प्लीज प्लीज....

में- ाचा रुक तो सही बता रहा हूँ पहले बिस्तर पर चलते हैं वहां बात करेंगे...

Anuj-wahan सब होंगे

me-nahi बे अभी जब तक गीत हो रहे हैं कोई नहीं आएगा chal..a

और फिर हम लोग छत पर आ गए वहां बैठ कर मैंने उसे शुरू से लेकर अब तक साडी कहानी बतादि..

इसके बाद अनुज का रिएक्शन क्या होता है ये जान्ने के लिए अगली अपडेट पढ़ें और प्लीज कमैंट्स करके बताएं कैसी लगी अपडेट और अपने सुझाव दें... शुक्रिया
 
में- ाचा रुक तो सही बता रहा हूँ पहले बिस्तर पर चलते हैं वहां बात करेंगे...

Anuj-wahan सब होंगे

me-nahi बे अभी जब तक गीत हो रहे हैं कोई नहीं आएगा chal..a

और फिर हम लोग छत पर आ गए वहां बैठ कर मैंने उसे शुरू से लेकर अब तक साडी कहानी बतादि.. अब आगे

अपडेट 59

मैं उसे साडी पिछली बातें बताता जा रहा था और वो आँखें फाड़े देखे जा रहा tha...aur जब मेरी बात पूरी हुई तो वो एक दम हैरान था साथ hi उसके मन में कई सवाल थे..

अनुज- भैया क्या सच में विनीत भैया बुआ के साथ मतलब उनको छोड़ते हैं. वो तो उनकी मम्मी हैं फिर भी..

में- तो क्या हुआ अगर किसी को परेशानी नहीं है तो... सबसे ज़रूरी बात है की दोनों को ख़ुशी मिलनी चाहिए वो मिलती है तो फिर क्या फ़र्क़ पड़ता है...

अनुज( मन में कुछ सोचते हुए)- हाँ भैया ...और फूपाजी भी पूर्वी दीदी को छोड़ते हैं...

Me-haan भाई हाँ

अनुज- ये सब सुनकर मेरा लुंड तो दोबारा खड़ा हो गया... भैया कोई जुगाड़ नहीं हो सकता क्या अब..

Me-chupchap सो जा अब... देख रहा है न घर में कितने लोग हैं... अब बुआ की दुलवाड़ी न सो जा...

अनुज- खड़े लुंड के साथ नींद कैसे आएगी .

Me-to हिला कर सो जा...

अनुज- भैया अब हिलाकर कुछ नहीं होता मज़ा hi नहीं आता चुदाई की आदत दाल दी है ममता चची और पल्ली ने

Me-dekh अभी तो कुछ नहीं हो सकता होगा तो ज़रूर बताऊंगा..

फिर वो भी चुप हो कर लेट गया और मैं भी पर शायद आज किस्मत हम पर ज़्यादा मेहरबान थी या छूटों में भी ज़्यादा खुजली हो रही थी क्यूंकि करीब आधे घंटे बाद hi.. मुझे कुछ लोगो के ऊपर आने की आवाज़ आई मैंने देखा तो कुछ पल बाद पूर्वी दीदी और एक दो औरतें और थी...

पर जैसे hi मेरी नज़र दीदी पर पड़ी मैं तो बस देखता hi रह गया... उन्होंने एक रेड कलर की साड़ी और ब्लू ब्लाउज पहन रखा था... और वो उसमे इतनी कामुक और खूबसूरत लग रही थी की शब्दों में बताया जाना मुश्किल है.. साड़ी और ब्लाउज के बीच में से झांकती हुई उनकी गोरी हुए चिकनी कमर और साड़ी के पल्लू के पीछे से मुझसे चुपम छुपाई खेलती हुई नाभि पर जब मेरी नज़र पड़ी तो मेरा लुंड अगले 5 सेकंड में पूरा तन कर खड़ा हो गया...





मैं समझ नहीं पाया की ये इतनी रात को इतनी सज संवर के क्यों घूम रही हैं पर उससे भी क्या फ़र्क़ पड़ता था फ़र्क़ तो बस इस बात का था की वो इतनी कामुक दिख रही थी की नुझ्से रुका नहीं जा रहा था... तभी मेरे साइड से भी आवाज़ आई

Anuj-kya माल लग रही है दीदी भाई इनकी दिलादो कैसे भी..

मेरा ध्यान अनुज की बातों पर बिलकुल नहीं था सिर्फ और सिर्फ दीदी की चिकनी कमर पर था... मैं उन्हें hi देखता रहा.. थोड़ी देर बाद उनके साथ जो ोारतें थी वो नीचे जाने लगी और जैसे hi वो सीढ़ियों के अंदर गयी मैं खड़ा हो गया और दीदी की तरफ चलने लगा फिर दीदी भी नीचे जाने के लिए सीढ़ियों की तरफ जाने hi लगी थी की मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और फिर दीदी की साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया और पीछे से उनसे चिपक गया मेरा खड़ा लुंड उनकी बड़े चूतड़ों के बीच फंस गया जिसका एहसास दीदी को भी हुआ...

पूर्वी- ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh कर्मा क्या कर रहा है सब लोग है अभी मत कर...

में- अह्ह्म्म दीदी बहुत मस्त लग रही हो देखते hi लुंड खड़ा हो गया आह्ह्ह्हह.. रोक नहीं पा रहा...

पूर्वी- पर भाई समझा कर कोई आ jayega...aaj तो तेरे जीजाजी और मेरी सास भी हैं घर पर अगर देख लिए न तो मारे जायेंगे..

मैंने जवाब नहीं दिया बल्कि दीदी की चिकनी कमर पर हाथ फिरने लगा और उसका एहसास अपने हाथो पर ले रहा था..

अनुज दूर से हमारी हरकतों को देख रहा था मैंने ध्यान से देखा तो उसका पजामा नीचे था और वो लुंड बहार निकल कर अपने हाथ को उसपर चला रहा था पर शायद दीदी ने अभी तक अनुज को नहीं देखा था...

मैं दीदी की चिकनी कमर को छेड़ रहा था





दीदी की साँसे भी थोड़ी गरम होने लगी थी वहीं मेरा बुरा हाल था पर दीदी लगातार मुझे मन भी कर रही थी ऐसा करने को...

पूर्वी- आह्हः कर्मा अब रहने de...babu समझा कर किसी ने देख लिए तो गड़बड़ हो jayegi...abhi रहने दे मान जा.. कोई आ जायेगा...

Me-ahhmm दीदी कोई नहीं आएगा थोड़ी देर बस्सस.

पूर्वी- karmmmmmmmmmmhbhhhhhjhjhbh

दीदी कुछ बोलने hi वाली थी की मैंने उनका मुँह बंद कर दिए अपने होंठो को उनके होंठो पर चिपका दिया और चूसने लगा..

पूर्वी- ahhmmmmmmmmmmmmmmm

दीदी ने मेरी पीठ को कास कर पाकर लिए और वो भी मेरा साथ देने लगी... मैंने उनके मुँह में अपनी जीभ घुसेड़ दी जिसे वो चूसने लगी और फिर मैं उनकी जीभ को चूसने लगा... कुछ देर तक उनकी जीभ और होंठों को चूसने के बाद मैंने अपने मुँह को हटाया तो हम दोनों hi हांफ रहे थे पर मैंने बिना देरी किये नीचे बैठ गया और दीदी के पेट को चूमने लगा ... आह्ह्ह्ह वो जाना पहचाना मक्खन जैसा एहसास फिर मेरे होंठों को होने लगा मैं उनके पूरे पेट को जीभ से चाटने लगा तो वहीं दीदी मेरे बालो में अपने हाथ फिरा रही थी और लम्बी लम्बी साँसे लेकर मेरा जोश और बढ़ा रही थी...

खुले आसमान के नीचे यूँ छत पर ऐसे दीदी के मखमली बदन का आनंद लेने का अलग hi मज़ा था...

मैंने दीदी के पूरे पेट को चाट चाट कर अपने थूक से गीला कर दिया और फिर अपनी जीभ उनकी गहरी नाभि में घुसा दी... मेरी जीभ नाभि में पड़ते hi दीदी की सिसकारी निकल गयी..

पूर्वी- ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या क्र राहाआआ है

मैं तो दीदी की नाभि में जीभ दाल कर चूसने लगा ऐसा लग रहा था की कोई मीठा सा रास उसमे से निकल रहा है और मैं उसे चूस चूस कर अपनी प्यास बुझा रहा हूँ.....





मैं दीदी के नाभि की गहराइयों में खोता जा रहा था...

पूर्वी- आह्ह्ह्हह bhaaaaiiiiiiiiiiii ऐसी hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ऑरररररररर कररररररर

अब दीदी भी पूरी मदहोश हो चुकी थी और खुल कर मेरा साथ दे रही थी...

उनके हाथ नेरे सर को सहला रहे थे..

और मेरे हाथ उनकी कमर को मसल रहे थे तो कभी पीच जाकर उनके बड़े बड़े चूतड़ों को थाम लेते और उन्हें मसल रहे थे.... मेरे हाथो का सफर उनकी नंगी चिकनी कमर से उनके तरबूज़ों तक लगातार जारी था...

हालांकि दीदी को मैंने बहुत बार छोड़ा था.. हर एक आसान में हर एक छेड़ में पर अभी उन्हें इस सारी में देखकर मुझ पर जैसे हवस का भूत सवार हो गया था... मेरी राइ में तो साड़ी दुनिया की सबसे कामुक और उत्तेजित करने वाली ड्रेस है...

मैं अब सूद बुध खोकर आँखें बंद करके दीदी की नाभि को चूसे जा रहा था... मैं जितना चूसता मुझे उतना hi और मन करता चूसने ka...uska रास ख़त्म होने का नाम hi नहीं ले रहा था...

ना जाने और कितनी देर मैं दीदी की नाभि को चूसता रहा दीदी की हलकी हलकी आवाज़ मेरे कानो में पड़ी तो मैं बापिस होश में आया

पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hmmmmmmmmmm मज़ाहा bhaaaaiiiiiiiiiiii.. ऐसईईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

मैंने आँखें खोली और नज़र उठा कर ऊपर की और देखा तो नज़ारा और भी ज़्यादा कामुक था..

दीदी का ब्लाउज के चार बटन खुले हुए थे.. उनकी ब्रा के कप नीचे की और थे और उनके बड़े बड़े रसीले आम उनकी गोरी गोरी छुछियां ब्लाउज के बहार थी और दो हाथ उनको निचोड़ रहे थे मैंने थोड़ा ठीक से देखा तो मैं हैरान रह गया क्यूंकि दीदी के पीछे अनुज खड़ा था और वो अपने दोनों हाथो से दीदी की छूछीयो को बहार निकल कर मसल रहा था...





मुझे पता भी नहीं चला कब अनुज दीदी के पीछे आ गया और उनका ब्लाउज भी खोलकर उनकी छूछीयो को मसलने लगा और दीदी ने भी कुछ नहीं किआ न hi कोई विरोध किआ बड़े प्यार से उससे अपनी छुछियां मसलवा रही थी...

पर मेरे लिए तो और ाचा था की दीदी को उसके साथ होने से कोई परे शनि नहीं थी... मैंने बापिस सर झुककर अपनी जीभ उनकी नाभि में घुसड़ी...

और चाँद पल hi बीते थे की सीढ़ियों पर किसी के आने की आहात हुई हम तीनो hi दर गए और मैं उठकर सीधा खड़ा हो गया... दीदी और अनुज को तो जैसे सांप सूंग गया था अनुज का हाथ अब भी दीदी की छूछीयो पर जमा हुआ था दोनों में से कोई हिल नहीं रहा था...

मैंने सोचा अगर यु hi खड़े रहे तो ज़रूर पकड़े जायेंगे...

मैंने कुछ सोचते हुए जल्दी से उन दोनों का हाथ पकड़ा और हमारे बिलकुल पीछे जो छत वाला बाथरूम था उसमें घुस गया और वो दोनों भी अंदर आ गए... और मैंने झट से अंदर से गेट लगा लिया...

वो दोनों डरे डरे मेरी और देख रहे थे पर मेरे साथ एक अलग hi चीज़ हो रही थी जितना पकड़े जाने का दर बढ़ रहा था

मेरा लुंड उतना hi कठोर होता जा रहा था... मेरी उत्तेजना और बढाती जा रही थी...

शायद पकड़े जाने का दर वो अपनी बहन के साथ ऐसा करते हुए इसी का एहसास... की ये इतना गलत है फिर भी हम कर रहे हैं ये सब मेरी उत्तेजना को चरम पर ले जा रहे थे मेरे लुंड में दर्द होने लगा तो मैंने अपना पजामा नीचे खिसका दिया और लुंड को बहार निकल लिए...

पूर्वी दीदी और अनुज मेरी तरफ हैरानी से देखने लगे की ये कहीं पागल तो नहीं हो गया है पर मैं तो अलग hi उलझनों में खोया हुआ था.. एक तरफ लुंड का दर्द तो वहीं दूसरी और मैं बहार की आवाज़ भी सुनने की कोशिश कर रहा था... पर अभी तक तो कोई ऐसी आवाज़ नहीं आई थी तो मैंने अपना ध्यान अंदर दिया और दीदी के के चेहरे को पकड़ा और उनके होंठो पर एक लम्बा चुम्बन दे दिया उसके बाद उन्हें नीचे की और धकेल कर अपने लुंड की और झुका diya.didi कमर से झुक गयी और उन्होंने सपोर्ट के लिए मेरी कमर को पकड़ लिए... उनके चेहरे के सामने मेरा लुंड आ गया...

दीदी भी मेरा लुंड देखकर बाकि का दर भूल गयी और जीभ निकल कर मेरे टोपे को चाट लिया पर मेरा हाल बुरा था मुझे सिर्फ चाटने से चैन नहीं मिलने वाला था तो मैंने दीदी के चेहरे को पकड़ा और अपना लुंड उनके मुँह में घुसेड़ दिया... मेरा लुंड दीदी के मुँह में 2-3 इंच घुसा हुआ था और दीदी उसे चूसने लगी पर मुझे उतने से भी चैन नहीं मिला मैंने दीदी ले सर को पकड़ा और अपने लुंड पर दबा दिया और देखते hi देखते मेरा पूरा लुंड दीदी के मुँह से होता हुआ गले तक चला गया....





दीदी के मुँह से घ्हुउउउउउउ हूउउउउउ ली आवाज़ आ रही थी मेरा पूरा लुंड उनके मुँह में चला गया मेरे ाँद उनकी थोड़ी से चिपके हुए थे मैंने थोड़ी देर उन्हें ऐसे hi अपने लुंड पर दबा कर रकगा...

फिर दीदी झटपटाने लगी उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो मैंने अपना लुंड बहार निकला उनके मुँह से तो लुंड के साथ साथ एक थूक का धागा भी निकला जो मेरे लुंड से दीदी के होंठों तक चिपका हुआ था...

फिर दीदी ने थोड़ा खाँसा और फिर लम्बी लम्बी सांस लेने लगी और करीब 1-2 मिनट बाद hi दीदी ने खुद hi मेरे लुंड को बापिस मुँह में ले लिए और फिर से पूरा अपने गले में उतार लिए...

में- आह्ह्ह्हह दीदी कितनी बड़ी वाली रंडी हो तुम अभी मन कर रही थी और अब देखो कैसे चूस रही गले तक लुंड लेकर....

दीदी ने जवाब देते हुए एक बार और पूरा अंदर तक ले लिया... वहीं दूसरी तरफ अनुज भी बहुत उत्तेजित हो गया था हमें देखकर और उसका दर भो शायद काम हो गया था तो उसने नीचे से दीदी की साड़ी उठाई और ऊपर खींचने लगा धीरे धीरे दीदी की टंगे दिखी फिर जांघ और फिर कुछ पल बाद दीदी के नंगे तरबूज़ सामने आ गए जो इस बात का सबूत थे की दीदी कितनी बड़ी रैंड है जो इतना सजने के बाद भी उन्होंने पंतय नहीं पहनी thi...anuj ने दीदी की साड़ी एयर पेटीकोट उठा कर उनकी कमर पर चढ़ा दिए और दीदी के नंगे बड़े बड़े पटेलों को देखने लगा फिर उसने अपना हाथ बढ़ाया और दीदी की गांड और छूट को सहलाने लगा और फिर देरी न करते हुए उनकी छूट में उंगली घुसेड़ कर अंदर बहार करने लगा जिससे दीदी मेरे लुंड को और ज़ोरो से चूसने लगी...





उधर अनुज उनकी छूट में उंगली कर रहा था और इधर दीदी मेरा लुंड पूरी शिद्दत के साथ चूस रही थी...

तभी अचानक से बहार से किसी की आवाज़ आई- पूर्वी पूर्वी तुम अंदर हो क्या...???

हम तीनो लोग दर गए. ....इसके बाद क्या हुआ जानिये अगली अपडेट में... और दोस्तों मैं जनता हूँ के अपडेट जल्दी जल्दी नहीं दे प् रहा पर अब से मैंने सोचा है की मुझे जितना भी टाइम मिला करेगा उतने में hi लिख कर पोस्ट कर दिया भले hi अपडेट छोटी hi क्यों न हो.... बाकि इंतज़ार करवाने के लिए माफ़ी चाहता हूँ आप लोग प्लीज इसी तरह अपना प्यार जताते रहे अपने कीमती फीडबैक और सुग्गेस्टियन्स देते रहे... आप लोगो की वजह से hi ये स्टोरी है... शुक्रिया
 
थैंक्यू सो मच गाइस प्लीज कीप योर सुग्गेस्टियन्स एंड फीडबैक किंग...
 
उधर अनुज उनकी छूट में उंगली कर रहा था और इधर दीदी मेरा लुंड पूरी शिद्दत के साथ चूस रही थी...

तभी अचानक से बहार से किसी की आवाज़ आई- पूर्वी पूर्वी तुम अंदर हो क्या...???

अपडेट 60

हम तीनो की तो जैसे जान hi अटक गयी और पूर्वी दीदी को जैसे hi ये समझ आया की आवाज़ किसकी है वो तो बिलकुल सुन्न पद गयी...

बहार और कोई नहीं बल्कि दीदी के पति यानि पंकज जीजाजी थे... जीजाजी ने फिर एक बार आवाज़ लगाई पूर्वी बोलो न...

मैंने झट से दीदी के मुँह से लुंड निकला और दीदी को थोड़ा हिलाया की कुछ बोले वो तो दीदी मेरी तरफ देखने लगी.. उनके चेहरे पर दर साफ़ दिख रहा था पर मैंने उनके कान में धीरे से कहा कुछ बोलो दी ...हाँ तो बोलो... फिर दीदी ने जल्दी से अपने कपडे सही कर्रे करते बोलै

पूर्वी- ह्ह्हह्ण हाआनंनं मैं अंदर हूँ....

प जीजाजी- अरे कितनी देर से अंदर हो क्या हुआ तबियत तो ठीक है न...

मैं और अनुज अपनी साँसे रोके खड़े थे वहीं दीदी परेशां thi...ki क्या बोलू और इस मुसीबत से कैसे निकालें?..

पूर्वी- नहीं नहीं सब ठीक है बस थोड़ा पेट ख़राब लग रहा था इसलिए आई thi...aaap यहाँ क्या कर रहे हो...?

दीदी ने अपने कपडे ठीक कर किये थे वहीं हम दोनों ने भी अपने पाजामे ऊपर खिसका लिए थे

प जीजाजी- अरे जब से आये हैं तुमसे ठीक से मिल भी नहीं पाए इतनी भीड़ है और अभी अपनी बीवी को इतना सुन्दर देखा तो खुद को रोक नहीं पाए... और ऊपर चले आये...

उनकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर थोड़ी मुस्कराहट आ गयी... वहीं अब दीदी भी थोड़ी नार्मल लग रही थी वो इतना दर नहीं रही थी पर चिंता अभी भी ये थी की यहाँ से निकालें तो निकालें कैसे... अनुज बस हम दोनों को देखे जा रहा था...

प जीजाजी- वैसे तुम्हे पता है न की एक ख़ास बात और है...

पूर्वी- हाँ मैं जानती हूँ तभी तो आज इतना सजी thi...ye कैसे भूल सकती हूँ मैं...

और दीदी ये सब बोलते हुए शर्मा रही थी... मुझे और अनुज को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या बात हो रही है ये...

प जीजाजी- हाँ हमारी शादी की सालगिरह... यकीन नहीं हो रहा की दो साल कितनी जल्दी बीत गए... तुम्हारे साथ... आअज से ठीक दो साल पहले तुम पत्नी बानी थी मेरी...

ये सुनकर मुझे भी ाचा लगा और एक मुस्कान आ गयी की जीजाजी कितने अचे पति हैं और दीदी को प्यार करते हैं.. वहीं दीदी थोड़ी भावुक भी हो रही थी...

पूर्वी- ग मैं कैसे भूल सकती हूँ वो खूबसूरत दिन जब मैंने आपको अपना सब मान लिए था और इन दो सालो में आपने मुझे इतना प्यार दिया है जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था...

मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था की दीदी कितनी प्यार भरी बातें कर रही है जीजाजी से जबकि अपने ममेरे भाइयों के साथ वाशरूम में अधनंगी है... और अभी कुछ देर पहले hi मेरा लुंड चूस रही थी... और ये सब सोचते हुए मेरा लुंड फिर फुंकारने लगा... जबकि ये दोनों मिया बीवी अपने प्रेम प्रसंग में लगे हुए थे ..

प जीजाजी - तो अब तुम अंदर क्यों हो बाबर आओ न जान तुम्हे ठीक से देख तो लूँ थोड़ा प्यार तो करलु. कितने दिन हो गए हैं तुम्हे अपनी बाहों में तक नहीं लिए...

दीदी ये सुनकर शर्मा रही थी वहीं हमारे होने की वजह से जवाब देने में भी हिचक रही थी मुझे समझ नहीं आया की जब वो हमसे चुद चुकी है तो ऐसी नार्मल बातों के लिए क्या शर्माना पर औरत को कौन जान पाया है...

पूर्वी- ाचा तो इसलिए याद आ रही है आपको मेरी...

प जीजाजी- अरे ऐसा नहीं है मेरी रानी बस तुम्हे बाँहों में लेने का मन है...

पूर्वी- ाचा सिर्फ बाहों में लेने का मन है या कुछ और

प जीजाजी- अरे तुम बहार तो आओ आज तो स्पेशल मौका है आज तो मत तड़पाओ...

बात तड़पने की जीजाजी कर राहु थे पर तड़प मैं रहा था ... मेरा लुंड अब पूरा टाइट हो चूका था पर मैं असमंजस में था की अभी कुछ करूँ या न करूँ... क्यूंकि हालत मेरे अनुकूल नहीं थे... पर मैंने कब दिमाग से सोचा है जब सोचा है लुंड से सोचा है और फिर एक बार मैंने लुंड की बात hi मान ली और फिर दीदी के पीछे खड़ा हो गया और उनके पेट पर हातब फेरने लगा...

दीदी ने मुड़कर मुझे आँखें दिखाई और न करने को बोलै पर मैं कहाँ मानने वाला था..

प जीजाजी- चुप क्यों हो गयी रानी कुछ बोलो...

पूर्वी- हाननमम वो कुछ नहे सोचने लगी थी की मैं कितनी लकी हूँ जो आप मिले मुझे...

प जीजाजी- अरे खुशनसीब तो मैं हूँ रानी आज भी जब वो पल याद करता हूँ तो रोम रोम खुश हो जाता है...

पूर्वी- कौनसा पल ग...

उधर जीजाजी अपनी पत्नी से प्रेम की बातें कर रहे थे वहीं मैं उनकी पत्नी के अधनंगे जिस्म को अपने हाथों से भोग रहा था जिससे मुझे और मज़ा मिल रहा था...

प जीजाजी- वो पल जब मैं सुहागरात को कमरे में आया था और तुम दुल्हन के लाल जोड़े में सजी हुई बीएड पर बैठी थी... कितनी प्यारी लग रही थी... वैसे आज भी तुम वैसी hi लग रही हो...

मैंने ये सुनकर दीदी को जवाब देने का इशारा किआ...

पूर्वी- हाँ मुझे भी याद है मैं दरी हुई सी बीएड पर बैठी थी और आप मुस्कुरा कर मेरे करीब आते जा रहे थे...

फिर जीजाजी हंसने लगे...

मैं अनुज और दीदी तीनो थोड़ा हैरान हो गए की इनको क्या हुआ...

प jeejaji-are याद है तुम्हे की कैसे मेरे बीएड पर बैठते hi तुम बीएड से उठ कर कड़ी हो गई थी...

पूर्वी- अच्छा हाँ हाँ हाँ तो और क्या करती मैं इतनी दरी हुई जो थी...

वैसे तो हम तीनो लोग अभी भी फंसे हुए थे पर बाथरूम का माहौल थोड़ा रिलैक्स हो गया था ... खैर मैं तो दीदी के पीछे खड़ा hi था पर अब अनुज भी काफी रिलैक्स नज़र आ रहा था वहीं दीदी भी और वो मेरी बाहों में थी जबकि बात अपने पति से कर रही थी...

प जीजाजी- हाँ फिर मैं तुम्हारे करीब गया खड़ा होकर भी तो तुम पीछे होने लगी थी पर अगले hi पल मैंने कदम बढाकर तुम्हे पकड़ लिए था... सच कहूं तो मुझे यकीं नहीं हो रहा था उस वक़्त के मुझे इतनी खूबसूरत बीवी मिली है और मैं तुम्हे देखकर रोक भी नहीं पा रहा था खुद को...

पूर्वी- हाँ मुझे याद है...

प जीजाजी- और फिर मैंने तुम्हे अपनी और खींच लिए था और तुम मेरी बाहों में सिमट गयी thi...aaahhhh दिल को कैसा सुकून मिला था... तुम्हे गले से लगाकर बता नहीं सकता मेरी रानी...





मैं भी जीजाजी की बातें सुन कर उत्तेजित होने लगा था वहीं दीदी भी मेरी बाहों में कसमकस रही थी तो मैंने भी जैसा जीजाजी ने बताया वैसे hi दीदी को घुमाया और अपने गले से लगा लिए जैसे उन्होंने सुहागरात में अपनी बीवी को अपनी बाहों में समाया हुआ था अब उनकी बीवी मेरी बाहों में उसी तरह थी और उनसे बात कर रही थी





पूर्वी- आह्ह्ह्हह...

प jeejaji-kya हुआ....?

पूर्वी दीदी ने मेरी तरफ एक बार देखा और बोली...

पूर्वी- कुछ नहीं ाचा लगा याद करके अआप आगे बताएं न...

प जीजाजी- तुम्हे तो सब पता hi है आगे क्या हुआ...

पूर्वी- नहीं ाचा लग रहा है आप बताओ न प्लीज...

प जीजाजी- पर तुम बहार तो आओ न...

पूर्वी- नहीं नहीं ऐसे hi बताओ... और अगर आप मेरी बात मानोगे तो आपको एक स्पेशल चीज़ मिलेगी..

प जीजाजी- तुम्हारी स्पेशल चीज़ के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ

पूर्वी- तो बताओ न

प जीजाजी- हाँ सुनो तो फिर तुम अचानक से शर्मा गयीऔर अलग होकर घूम गयी और अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया... पर इस सब में तुम्हारा पल्लू नीचे गिर गया और मुझे पीछे से तुम्हारी चिकनी कमर नज़र आ गयी जिसे देख कर मैं खुद पर काबू खो बैठा... और पीछे से hi तुम्हारी नंगी कमर पर हाथ रख लिए... क्या एहसास था वो भी...





तुम मेरी बाहों में पिघल सी गयी मेरा हाथ तुम्हारी कमर पर पड़ते hi...

मैंने भी जीजाजी की बात सुनकर दीदी को घुमा दिया और फिर पीछे से अपने हाथ उनकी कमर पर रख दिए और कमर को मसल दिया...





पूर्वी- अह्ह्ह्ह ...... फिर????

प jeejaji-phir मैं तुम्हारी कमर और पेट को अपने हाथो से सहलाने लगा.... कितने सुन्दर और चिकनी है तुम्हारी कमर

मैं भी वैसे hi दीदी की कमर और पेट पर हाथ फिरने लगा... जीजाजी की मजूदगी में दीदी के साथ ये सब करने में एक अलग hi उत्सुकता हो रही थी और दीदी भी थोड़ी गरम होने लगी थी...

प जीजाजी- ोहिर मैंने हाथ फिरते हुए hi तुंहारा चेहरा अपनी और किआ और तुम्हारे होंठो को चूसने लगा...

मैं भी देरी न करते हुए दीदी के होंठों पर होंठ रख दिए और चूसने laga...mujhe देखकर अनुज भी अब हमारे पास आ कर खड़ा हो गया और वह भी दीदी के पेट पर हाथ फिरने लगा... कहाँ जीजाजी अपनी पत्नी को सुहागरात की कहानी बता रहे थे वहीं कुछ फ़ीट दूर उनकी पत्नी को दो दो लड़के भोग रहे थे...

पूर्वी- ुहम्म्म्म

फिर दीदी ने मुझसे होंठ अलग किये और बोली- फिर...

दीदी. इतना hi बोल पायी की अनुज ने उनके होंठो को अपने होंठों में भर लिए और चूसने लगा...





मैंने दीदी की गर्दन को चूमना चेतना शुरू कर दिया... दीदी जीजाजी की मजूदगी में और भी ज़्यादा गरम हो रही थी...

प जीजाजी- काफी देर तक मैं तुम्हारे रसीले होंठों का रास पीटा रहा और जब हम अलग हुए तो हांफ रहे थे दोनों hi.. और फिर मैंने तुम्हारी गर्दन को चूमा तुम्हारे सीने के ऊपर हिस्से को चूमा...

अनुज भी समझ गया था की उसे क्या करना है जैसे hi जीजाजी ने आगे बोलै उसने दीदी के होंठों को छोड़ दिया और उनके ब्लाउज के ऊपर सीने पर जो खुली जगह होती है उससे चाटने लगा वहीं मैं गर्दन को चूम रहा था... दीदी भी अपने हाथ हम दोनों परफिरा रही थी और कामुक आवाज़ में बोली- फिररररर....

प jeejaji-phir पहले मैंने तुम्हारी ब्लाउज के बहार निकली नंगी पीठ को चूमा और फिर हाय... तुम्हारे चिकने कमर और पेट को नाभि में जीभ घुसा कर उसे भी चूसा... क्या एहसास था वो...

मैं और अनुज तुरंत नीचे हो गए मैंने अपने होंठ दीदी की पीठ पर टिका दिए तो अनुज ने उनके पेट पर... और हमदोनो दीदी के बदन को चाटने लगे..





अनुज पहली बार दीदी के बदन को चूम रहा था तो बहुत hi शिद्दत से हर एक हिस्से को चाट रहा था... मैं भी दीदी की पूरी पीठ को चाट रहा था... फिर अनुज ने अपनी जीभ दीदी की नाभि में घुसड़ी तो दीदी के मुँह से सिसकारी निकल गयी..

पूर्वी- ahhmmmmmmmmmmmmmmm

प jeejaji-kya हुआ..

पूर्वी- कुछ नहीं मज़ा आ रहा है आप आगे बताओ...

प jeejaji-acha तो मेरी जान गरम. हो रही है तो सुनो...

फिर मैंने अपने कांपते हुए हाथ तुम्हारे ब्लाउज पर रखे और ब्लाउज के ऊपर से hi तुम्हारे दो मुलायम रुई जैसे संतरो को महसूस करने लगा उन्हें दबाने लगा... आह्हः क्या बताऊ कैसा लग रहा था उस वक़्त..

मैंने भी अपने हाथ दीदी की छूछीयो की और बढ़ा दोए तो पाया एक छुच्छी पर अनुज का हाथ पहले hi था तो मैं दूसरी को पकड़ कर ब्लाउज के ऊपर से hi दबाने लगा.... दोनों छूछीयो के दबाने से दीदी और गरम हो गयी..

पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फिर..

प जीजाजी- फिर मैंने कांपते हाथों से तुम्हारे ब्लाउज के हुक्स को खोला और ऊपर के कुछ हुक्स खोलने के बाद मुझे तुम्हारी छूछीयो की झलक दीखते hi मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने बिना पूरा ब्लाउज खोले hi तुम्हारी कोमल छूछीयो को बहार निकल लिए... बेहद hi मुलायम.. ऐसा लग रहा था की इनसे खूबसूरत कुछ है hi नहीं दुनिया में.. और मैं जैसे अपने आप hi खोया हुआ झुकता चला गया और तुम्हारी छूछीयो पर अपने होंठों को टिका दिया...

जीजाजी की बात सुनते hi मैंने भी पूर्वी दीदी के ब्लाउज के ऊपर के कुछ हुक्स खोल कर उनकी छूछीयो को बहार निकल लिए और फिर मैंने और अनुज ने अपना मुँह एक एक छुच्छी पर रख दिया और चूसने लगे...

बहार जीजाजी अपनी सुहागरात याद कर रहे थे यहाँ हम उनकी बीवी के साथ सुहागरात मन रहे थे.





पूर्वी- ाःह ममममममममम ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh फिररररर????

प जीजाजी- लगता है रानी ज़्यादा hi गरम हो रही हो कहो तो अंदर आ जॉन?

पूर्वी - ननणणनायहठीय आएगी बताओ आप..

मैं और अनुज लगातार दीदी की छूछीयो को चूस रहे थे वहीं दीदी आँखें बंद करके मज़े में डूबी हुई थी...

प जीजाजी- मेरा लुंड तो बिलकुल लोहे जैसा बन गया था ..तुम्हारे जिस्म को भोग कर ऐसा लग रहा था मैं जन्नत में हूँ... काफी देर तक छूछीयो का रास पीते पीते hi मैंने तुम्हारी साड़ी को खोल कर निकल दिया... और फिर एक hi झटके में तुम्हारे पेटीकोट का नारा भी खोल दिया और पेटीकोट तुम्हारे पैरो के बीच में गिर गया.. अब तुम सिर्फ एक पंतय और ब्लाउज में थी... फिर तुमने मेरी तरफ देखते हुए शरमाते हुए अपना ब्लाउज पूरी तरह उतर दिया.. तुम अब सिर्फ एक ब्रा और पंतय में मेरे सामने थी...





प jeejaji-kitni खूबसूरत लग रही थी तुम और तुम्हारे बड़े बड़े चूतड़ों को देखकर तो मैं होश hi खो बैठा और तुरंत तुम्हारीई पंतय को नीचे सरका के अपना मुँह उनके बीच में घुसा दिया आअह्हह्ह्ह्हह क्या मज़ा आया था..

जीजाजी की बात सुनकर मैंने और अनुज ने भी दीदी की साड़ी पेटीकोट और ब्लाउज को उतर दिया पंतय दीदी ने पहनी नहीं थी तो अब हमारे सामने सिर्फ एक ब्रा में थी और मैंने तुरंत अपना मुँह उनके गद्देदार चूतड़ों के बीच घुसा दिया और जीभ निकल कर चाटने लगा.. मैं चाट रहा था तो अनुज कहाँ पीछे रहने वाला था उसने भी अपना मुँह आगे बैठकर उनकी छूट पर लगा diya..ab हम दोनों भाई दीदी को. दोनों तरफ से अपनी जीभ से सुख देने लगे..





दीदी तो उत्तेजना में उड़ रही थी... छूट और गांड दोनों को एक hi समय पर दो भाई चाट रहे थे कुछ फ़ीट दूर पति tha.kitna गलत पर साथ में उतना hi कामुकता से भरा दृश्य था ये... दीदी बस ये सोचकर hi गरम होती जा रही थी..

बहार खड़े जीजाजी अपनी सुहागरात को याद कर रहे थे इस बात से अनजान के उनकी पत्नी के साथ जो जो वो बोल रहे हैं वो सब हो रहा है और वो भी एक साथ दो दो लड़को के बीच में फांसी हुई है उनकी प्यारी बीवी...

पूर्वी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh ह्म्म्मम्म्म्म ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh ऐसईईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ऑरररररररर छाअअअअअअअततततततताउओ......

प jeejaji-kya कर रहे हो जान.... मेरे होते हुए खुद से खेल रही हो...

पूर्वी दीदी थोड़ा होश सँभालते हुए... और हम दोनों के सर को अपने हैजो से और अंदर की और दबाते हुए...

पूर्वी- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii अआप आगे बताएं न...

प जीजाजी- आगे क्या था मैं लगातार तुम्हारी छूट और गांड को चाट रहा था तुम अपनव चूतड़ों को मेरे मुँह पर दबा रही थी मेरी जीभ तुम्हारी छूट में घुसी हुई थी... क्या रास निकल रहा था उसमे से ऐसा रास मैंने कभी नहीं पिया था...

वही रास इस समय हम दोनों भाइयों की जुबान पर था...

प जीजाजी- फिर क्या हुआ की कुछ पल बाद तुम्हारा शरीर कंपनी लगा...

जीजाजी का इतना कहना था की दीदी मेरे और अनुज के मुँह पर झड़ने लगी उनकी छूट से रास बाह रहा था जिसे अनुज पी रहा था... इधर मैंने उनके चूतड़ों को कास कर पाकर रखा था और अपनी जीभ उनकी गांड में घुसा राखी थी..... उनकी गांड का छेड़ मेरी जीभ के किनारे बंद हो रहा था फिर खुल रहा था...

पूर्वी- आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhh marrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइइ आआह्ह्ह्हह आयजहह maaaaaaaaaaa.....

प jeejaji-kyaaa हुआ रानी तुम ठीक तो हो...

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह हांण वो मेरा पानी निकल गया याद करते करते..

प jeejaji-to अब मेरा पानी भी निकलवा दो ..ककब तक तडपाओगी..

पूर्वी- पहले पूरी कहानी तो बतादो ..

प jeejaji-aaj तो पूरी जान लेकर मानोगी तुम चलो फिर सुनो...

जह तुम झाड़ गयी तो मुझसे तो बिलकुल रुका नहीं जा रहा था तो मैंने तुम्हे झट से अपनी बाहों में भर लिए और तुमने भी अपने पेअर मेरी कमर पर लपेट लिए..... मेरा लुंड तुम्हारी छूट के द्वार पर टक्कर मार रहा था... जिससे हम दोनों hi तड़प रहे थे...

अनुज बे ये सुनते hi दीदी को अपने ऊपर कर लिए और दीदी ने भी अपने पेअर उसकी कमर से लपेट लिए .. मैंने भी पीछे से दीदी को पकड़ लिए और दीदी ने अपना हाथ मेरी गर्दन में फंसा दिया सपोर्ट के लिए अब दीदी हवा में थी हम दोनों भाइयों के बीच... अनुज का लुंड पूर्वी दीदी की छूट पर टक्कर मार रहा था वहीं मेरा उनकी गांड के छेड़ को चूम रहा था....

पूर्वी- हननननन daaaaaalllllllllllll दोऊ आआआजी...

प जीजाजी- क्या ???

पूर्वी - वो वो आगे बताओ ना मज़ा आ रहा है...

प जीजाजी- फिर मैं अपना एक हाथ तुम्हारे चूतड़ों के नीचे ले गया और अपना लुंड पकड़ा और तुम्हारी छूट के द्वार पर रख दिया... और फिर तुम्हारी आँखों में देखा और हम दोनों के होंठ आपस में अपने आप मिल गए कुछ देर एक दुसरे के होंठ चूसने के बाद अलग हुए...

मैंने और अनुज ने भी बारी बारी से पूर्वी दीदी के होंठों को चूसा...

प जीजाजी- और फिर आया मेरी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल... मैंने लुंड को दोबारा तुम्हारी छूट पर लगाया और तुम्हारे वजन को थोड़ा ढीला छोड़ दिया तो मेरा लुंड का टोपा तुम्हारी छूट के अंदर घुस गया और हम दोनों के मुँह से एक आह्ह्ह्हह निकल गयी...

पूर्वी-- Ahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh maaaaaaaaaaa

तभी पूर्वी दीदी की सच में चीख निकल गयी क्यूंकि मैंने और अनुज ने भी अपने अपने लुंड एक साथ दीदी की छूट और गांड में दाल diye..hum दोनों के लुंड एक साथ घुसाने से दीदी की चीख बिकल गयी जिसे जीजाजी ने सुना और भी लोग सुनते अगर गीत नहीं चल रहे होते तो...

प जीजाजी- क्या हुआ जान...

पूर्वी दीदी ने थोड़ा संभल ते हुए बोलै- वो आप इतने अचे से समझा रहे हो की लगा सच में कुछ घुस गया है अंदर..

वैसे इसमें लग्न क्या था सच में hi दीदी के अंदर दो बड़े बड़े लुंड घुसे हुए थे..

प जीजाजी- बहार आ जाओ रानी सच में घुसा दूंगा....

पूर्वी- आअह्ह्ह्ह आप आगे बताओ न..

प जीजाजी- आगे क्या फिर मुझसे कहाँ सबर होने वाला था छोटे छोटे झटके देकर पूरा लुंड अंदर घुसा दिया और तुम्हे उछलने लगा अपने लुंड पर तुम्हारी आँखें बंद थी और तुम लूँ पर झूल रही थी...

वहीं अभी दीदी मेरे और अनुज के लुंड पर झूल रही थी हम दोनों. दीदी को अपने लुंड पर उछाल रहे थे... एक साथ दो इतने बड़े लुंड लेकर दीदी तो वासना के सागर में डूब रही थी और पति की मजूदगी में चुद रही थी...





मैं और अनुज भी बहुत उत्तेजित हो कर दीदी की चुदाई कर रहे थे... जीजाजी के होते हुए उनकी बीवी की चुदाई कर रहे थे.. बहुत मज़ा आ रहा था... दीदी की गांड में मेरा लुंड बहुत कसके जा रहा था.. जिससे मुझे बहुत ाचा लग रहा था लुंड पर दीदी की गांड घिस रही थी..

वहीं अनुज भी दीदी को बड़ी उत्सुकता से छोड़ रहा था... क्यूंकि वो दीदी को पहली बार छोड़ रहा था तो उसे एक अलग ख़ुशी मिल रही थी जो उसके चेहरे पर भी दिख रही थी...

पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hmmmmmmmmmm छोड़ो ऐसईईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ऑरररररररर tezzzzz....m

प jeejaji-haan ऐसे hi तुम चिल्ला रही थी जब मैं तुम्हे छोड़ रहा था.... और फिर जब मैं थक गया तो तुम्हे लेकर बीएड पर लेट गया और तुम खुद से उछलने लगी मेरे लुंड और मैं तुम्हारे उछालते हुवी छूछीयो को दबाने लगा...

सुनते hi अनुज नीचे लेट गया और दीदी उसका लुंड अपनी छूट में लेकर बैठ गयी और मैंने पीछे आकर लुंड गांड में दाल दिया और फिर से दोनों दीदी को छोड़ने लगे...





हम दोनों दीदी को बड़े मज़े से छोड़ रहे थे दीदी भी दोनों लुंड लेकर बहुत hi ख़ुशी से चुद रही थी...

पूर्वी- आअह्ह्ह बहुत mazaaaaaaaaaaa आआ राहाआआ है aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh

प जीजाजी- हॉँण्णन जानेमन बहुत मज़ा आ रहा था और उसी मज़े की वजह से मैं ज़्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाया और तुम्हारी छूट को भर दिया...

और जहाँ जीजाजी ने छूट को भरने की बात कही hi थी की मैं अनुज और पूर्वी दीदी भी नहीं रुक पाए और झड़ने lage..maine और अनुज ने बड़ी मुश्किल से खुद की आवाज़ को रोका क कहीं बहार जीजाजी न सुन लें...

मैंने अपने वीर्य से दीदी की गांड को तो अनुज ने दीदी की छूट को भर दिया... वहीं दीदी ने भी अपना रास छोड़ दिया...





प जीजाजी- जान अब तो सहा नहीं जा रहा... अब प्लीज अंदर आने दो...

पूर्वी- नहीं नहीं अंदर nahi...ummmmm आप नीचे जाओ और भैंस वाली झोपडी में इंतज़ार करो मैं आती हूँ..

प जीजाजी- यहाँ क्या दिक्कत है...

पूर्वी- नहीं यहाँ कोई भी आ सकता है... आप जाओ न आती हूँ मैं...

प jeejaji-theek है जल्दी आना...

फिर जीजाजी चले गए तो दीदी ने हम दोनों के लुंड को बरी बरी से चाट कर साफ़ किआ... अनुज बेहद खुश था दीदी को छोड़ कर वहीं दीदी ने अपने कपडे पहने और ठीक होकर गेट से बहार निकल गयी... मैं और अनुज भी अपने कपडे पहन कर बहार आ गए...

इसकेआगे की कहानी ऊगली अपडेट में प्लीज अपने कमैंट्स और सुझाव ज़रूर दें... शुक्रिया
 
फिर जीजाजी चले गए तो दीदी ने हम दोनों के लुंड को बरी बरी से चाट कर साफ़ किआ... अनुज बेहद खुश था दीदी को छोड़ कर वहीं दीदी ने अपने कपडे पहने और ठीक होकर गेट से बहार निकल गयी... मैं और अनुज भी अपने कपडे पहन कर बहार आ गए...

अपडेट 61

बहार आकर अनुज जहाँ बिस्तर की तरफ चल दिया तो मैं नीचे आ गया... पता नहीं क्यों मेरा बहुत मन कर रहा था की पूर्वी दीदी और जीजाजी को साथ देखूं... मैंने देखा जीजाजी अभी बहार नहीं गए थे किसी से बात कर रहे थे.. तो मैंने सोचा यही सही मौका है मैं पहले hi जाकर कोई अछि सी जगह देख कर चुप जाता हूँ... और मैं बहार आ गया.. और झोपडी की दीवार के पीछे चिप गया..

काफी देर तक बैठ कर इंतज़ार करता राजा पर न तो दीदी आई और न hi जीजाजी... फिर मुझे मूट आने लगा तो मैंने सोचा ये तो आ नहीं रहे मैं मूट hi आता हूँ... तो मैं वहां से थोड़ा आगे बाद गया और करीब 50 मीटर दूर एक पेड़ के पीछे मूतने लगा और मूतने के बाद मैं बापिस आबे लगा तो मैंने देखा गेट से कोई बहार निकल रहा है मैं चुपके से आगे बढ़ने लगा ध्यान से देखा तो वो जीजाजी थे और जैसे hi वो झोपडी के पास पहुंचने hi वाले थे की लाइट चली गयी सब तरफ अँधेरा हो गया... मैं भी किसी तरह थोड़ी बहुत रौशनी में टटोलते हुए अपनी जगह पर पंहुचा... झोपडी के बहार तब बी थोड़ा बहुत उजाला था पर झोपडी के अंदर बिलकुल अँधेरा हो गया था... मैंने देखा जीजाजी किसी तरह अंदर पहुंचे हैं.. मैंने झोपडी के बीच में नज़र गदा कर देखा तो झोपडी के अंदर एक साया और दिखा... मैंने सोचा लगता है जब मूतने गया दीदी आ गयी तभी... कुछ ध्यान से तो नहीं दिख रहा था बस कुछ कपड़ो के इधर उधर होने की और चूड़ियों के खनखनाने की आवाज़ आ रही थी थोड़ी थोड़ी... और फिर जीजाजी की एक आवाज़ aai-ahhmmmmmmmmmmmmmmm...

अचे से तो नहीं दिख रहा था मुझे भी कुछ पर एक आकृति समझ आ रही थी जिससे पता लग रहा था की दीदी चारे के गठर पर झुकी हुई हैं और जीजाजी पीछे से उन्हें छोड़ रहे हैं... थप थप की हलकी हलकी आवाज़ आ रही थी.... मैं थोड़ी देर तक उन्हें ऐसे hi देखता रहा तभी मुझे गेट के पास कोई dikha...maine सोचा लो कोई इन्हे आराम से चुदाई भी नहीं करने देगा.. मुझे hi कैच करना होगा... और मैं झोपडी जे पीछे से चुपचाप घुमते हुए गेट के करीब पंहुचा तो देखा तो एक दो बच्चे थे साथ में कोई औरत थी जिन्हे मैं नहीं जनता तो मैं किसी तरह बच्चों को बहला फुसला कर अंदर ले गया तो वो औरत भी पीछे पीछे अंदर आ गयी... मैंने सोचा चलो दीदी जीजाजी अब अचे से चुदाई कर payenge..aur फिर मैं घर में आकर रसोई में गया और पानी पीने लगा... पानी पीकर जैसे hi मुदा तो मैं चौंक गया

सामने पूर्वी दीदी बच्चे को हाथ में लेकर गाओं की किसी औरत से बात कर रही थी...

मैं सोच में पद गया अगर पूर्वी दीदी यहाँ हैं तो बहार जीजाजी किसे छोड़ रहे हैं... मैं जल्दी से घर से निकला और फिर से चिपटे छिपाते हुए झोपडी के पीछे पंहुचा और अंदर देखने लगा तो जैसा छोड़ा था नज़ारा वैसा hi था जीजाजी पीछे से खड़े होकर चुदाई कर रहे थे पर किसकी ये समझ नहीं आ रहा tha...par अब जीजाजी के मुँह से कुछ आवाज़ें निकल रही थी... जीजाजी- आह्हः हॉँण्णन रानी क्या गाआआनंनंड्डड़ है Teriiiiiiiiiiiiiiiiiii..... आअह्ह्ह्ह कितनी कासी हुई है मेरी jaaaaaaan...meri रैंड बीवी आह्हः

जीजाजी की बातों से तो ये लग रहा था की वो उस औरत को अपनी बीवी यानि पूर्वी दीदी समझ कर hi उसकी गांड में लुंड पेल रहे हैं और फिर उन्होंने अपनी गति और बाधादि और ज़ोरो से चुदाई करने लगे





और फिर कुछ hi देर में उनके गुर्राने जैसी आवाज़ आई तो मैं समझ गया की जीजाजी झाड़ रहे हैं... पर औरत की तरफ से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी.... और फिर जीजाजी शांत हो गए... और उनके धक्के बंद हो गए...

जीजाजी- रानी फिर तो आज स्पेशल बनता है न स्पेशल डे है तो चलो घूम के बैठ जाओ अब...

जीजाजी के ये कहने के बाद भी वो औरत उठी नहीं बल्कि ऐसी hi झुकी रही...

जीजाजी- अरे रानी आज नखरे मत करो आज तो खास दिन है...

और ये बोलकर जीजाजी ने पीछे से लुंड निकला और औरत के सामने चारे के गठर पर बैठ गए .. पर वो औरत अब भी वैसे hi झुकी हुई thi...par बैठने की वजह से जीजाजी का लुंड औरत के चेहरे के सामने था... जीजाजी ने कमर आगे बढाकर अपना लुंड उसके चेहरे के और पास कर दिया और फिर सर के पीछे हाथ रखकर लुंड पर दबा दिया और फिर उस औरत ने भी लुंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी... वही लुंड जो उसकी गांड में था अभी कुछ पल पहले hi.. पर वो औरत पूरी शिद्दत से लुंड को चाट चाट कर साफ़ कर रहे थी... और फिर अचानक से जीजाजी ने लुंड मुँह से निकला और खड़े हो गए वो औरत ऐसे hi घुटनो पर बैठी रही और फिर जीजाजी थोड़ा पीछे हुए और बोले- रानी तो मेरे स्पेशल गिफ्ट की बरी है अब... तैयार हो जाओ...

मैं सोचने लगा अब कौनसा स्पेशल गिफ्ट बचा है मैं ध्यान से देखने लगा... जीजाजी ने अपने हाथ से लुंड पकड़ा और फिर एक आवाज़ आई कुछ सेकण्ड्स तक तो मैं समझ नहीं पाया ये क्या हो रहा है पर जैसे hi समझ आया मैं हैरान रह गया वहीं मेरा लुंड बिलकुल लोहे जैड़ा हो गया एक hi पल में... जीजाजी सामने खड़े होकर जो औरत सामने बैठी थी जिसे वो अपनी पत्नी समझ रहे थे उसके ऊपर पेशाब कर रहे थे... मैं देख कर दांग रह गया और जिस हिसाब से जीजाजी के लुंड का टोपा था उससे मूट की धार सीधे सीधे औरत के चेहरे पर जा रही थी... मेरा लुंड ये देखकर लोहे जैसा हो गया... मेरा हाथ खुद बा खुद लुंड तक पहुँच गया और मैंने लुंड को बहार निकल लिए... उधर जीजाजी अपनी पेशाब से उस औरत को नहलाये जा रहे थे





और फिर कुछ देर बाद वो कभी न ख़त्म होने वाली धार रुकी और जीजाजी ने आगे बढ़कर एक बार फिर से अपना लुंड उस औरत के मुँह में दाल दिया और फिर एक दो झटके देकर बहार निकला अपना लुंड पंत के अंदर डालते हुए बोले- आज तो मज़ा आ गया मेरी रानी ऐसे खुले में करने में जाओ अब नाहा लो जाकर..

और ये कहकर जीजाजी झोपडी से निकल गए वो औरत अभी वैसी hi बैठी हुई थी... मैं ये सोच रहा था की आखिर कौन होगी ये... जीजाजी घर के गेट तक hi पहुंचे होंगे की लाइट आ गयी जिससे सब जगह रौशनी फ़ैल गयी... और झोपडी में भी इतनी रौशनी आ रही थी जिससे सब कुछ दिख रहा था और जब मेरी नज़र झोपडी के अंदर बैठी पेशाब से भीगी हुई औरत पर गयी तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी... वो औरत कोई और नहीं बल्कि मेरी बुआ यानि पूर्वी दीदी की मम्मी थी... जो अपने hi दामाद से छोड़कर उसके पेशाब में नहाये हुए बैठी थी... मैं उठकर अंदर गया... मुझे देखते hi बुआ पहले तो चौंकी फिर शांत हो गयी...

में- क्या बात है मेरी प्यारी बुआ हमारे लुंड क्या काम पद गए थे जो दामाद से भी छुड़वा लिया...

बुआ अपने पेशाब से भीगे हुए बालों को पीछे करते हुए बोली- नहीं रे सब तेरी वजह से हुआ है

में- मेरी वजह से मतलब?

बुआ- तुझे गेट के बहार आता देखा तो और मुझे भी बड़ा मन कर रहा था छुड़वाने का तो सोचा तुझे बहार hi पकड़ लुंगी और चुदाई करेंगे मैं बहार यहाँ झोपडी में आई तुझे देखने लगी तभी पीछे से किसी ने झुका दिए आगे की और मुझे लगा तू है तो मैंने भी बिना किसी आवाज़ क्र आगे झुक गयी और फिर साड़ी उठी और अगले hi पल एक लुंड छूट में था.. बाद में जब एहसास हुआ की वो तू नहीं है दामाद जी है तब तक बहुत देर हो चुकी थी... अगर मैं कुछ बोलती तो पकड़े जाते और बवाल हो जाता तो चुप रहना hi बेहतर समझा... और जो उसने चाहा करने दिया... छूट मरी फिर गांड में भी लुंड पेल दिया... और तो और हरामी ने पेशाब से भीगा भी दिया कितना कमीना है मेरा दामाद भी... मेरी बेटी के ऊपर मोटा भी है.....

में- बेटी क्या अब तो माँ के ऊपर भी मूट लिया...

बुआ- हाँ पूरा भीगा दिया... मेरा शरीर महक रहा है...

में- वैसे कैसा लगा बुआ दामाद से छुड़वाकर...

बुआ- बीटा अब तुझसे क्या छुपाना... मुझे जब ये एहसास हुआ के मैं अपने दामाद से चुद रही हूँ.. तो इसी एहसास से एक बार मैं झाड़ गयी... और जब अभी उसके मूट की धार मेरे चेहरे से टकराई तो दोबारा झाड़ गयी...

में- क्या रंडी बुआ पाई है मैंने bhi...jitne भी लुंड मिले सब ले लेती है...

बुआ- हाआआआंनंन्न बीटा तेरी बुआ रणबबबबबब

बुआ इतना hi बोल पाई की मैंने अपना लुंड उनके मुँह में घुसा diya...jo बिलकुल सख्त हो गया था... बुआ भी सँभालते हुए उसे चूसने लगी

मेरा लुंड बुआ और जीजाजी की चुदाई देखकर बहुत सख्त हो चूका था जिसे बुआ के मुँह में जाकर आराम मिल रहा था...... मैं कमर के झटके देकर बुआ के मुँह को छोड़ रहा था...





तभी पीछे से मुझे आवाज़ आई- कर्मा.. मुम्ममय आप लोग यहाँ क्या कर रहे हो... कर्मा तुझे तो पता है न यहाँ ये आने वाले हैं... वैसे भी मुज्जे देर हो गयी...

में- दीदी देर तो हो गयी तुम्हे और आपके ये आकर अपना काम निपटा कर चले भी गए..

पूर्वी- क्या मतलब...

जहाँ दीदी और मैं बायत कर रहे थे तो बुआ बिना रुके मेरा लुंड चूस रही थी...

मैंने फिर दीदी को पूरी बात बताई तो दीदी हैरान रह गयी

पूर्वी- मुम्ममय पक्का न उन्हें कोई शक तो नहीं हुआ उन्हें ये hi लगा न की मैं हूँ...

बुआ ने मेरा लुंड बहार निकला और बोली- हाँ बेटी लगता तो यही है की दामाद जी को कुछ पता नहीं चला...

पूर्वी- मुम्ममय क्या सच में उन्होंने आपके ऊपर मूट दिया...

बुआ- हाँ बीटा देख न पूरा गीला कर दिया...

पूर्वी- उनकी आदत है ये सुधरेगी नहीं..

जब तक बुआ दीदी से बात कर रही थी मैंने पूर्वी दीदी को पकड़ा और बुआ के पीछे बिठा दिया और उन्हें आगे झुकादिया और पीछे से उनकी साड़ी उठाकर पीछे से अपना लुंड दीदी की छूट में घुसा दिया... और छोड़ने लगा उधर दीदी के चेहरे के सामने उनकी मुम्ममय की बड़ी सी गांड थी जिसे दीदी आगे बढ़कर चाटने लगी और इधर मैं पीछे से उन्हें छोड़ने लगा...





मैं बेटी को छोड़ रहा था बेटी अपनी माँ की गांड से अपने पति का रास चूसकर चूसकर पी रही थी

तभी एक और आवाज़ आई जिसे सुनकर हम तीनो hi चौंक गए....

कौन था वो जिसकी आवाज़ आई जानने के लिए अगली अपडेट padhein...bahut बहुत शुक्रिया
 
गाइस ी ऍम नॉट अबले तो अपलोड गिफ्स ी ऍम उप्लोअडिंग थम बूत it's नॉट शेविंग हेरे.. अन्य सुग्गेस्टियन्स
 
मैं बेटी को छोड़ रहा था बेटी अपनी माँ की गांड से अपने पति का रास चूसकर चूसकर पी रही थी

तभी एक और आवाज़ आई जिसे सुनकर हम तीनो hi चौंक गए...

अपडेट 62

जब हमने मुड़कर देखा तो कुछ रहत मिली... सामने बड़े फूपाजी यानि पूर्वी दीदी और विनीत के ताऊजी और विनीत दोनों खड़े हुए थे..

बी फूपाजी- अरे तुम लोग यहाँ खुले में क्या कर रहे हो कोई देख लेगा तो क्या होगा....

पर बड़े फूपाजी ये बोलते हुए अपनी धोती के ऊपर से लुंड मसल रहे थे वहीं विनीत ने अब तक अपना लुंड बहार भी निकल लिया tha.....bade फूपाजी थोड़ा पास आकर खड़े हो गए...

में- वो फूपाजी एक लम्बी कहानी है...

बी फूपाजी- क्या लम्बी कहानी और बहु तू ऐसे गीली क्यों है...

मैं लगातार पूर्वी दीदी को चोदे जा रहा था... और छोड़ते हुए hi मैंने जवाब देना शुरू किआ...

में- आह्ह्ह्हह वो फूपाजी हुआ ये की

और फिर मैंने उन्हें पूरी कहानी सुना दी जब तक बात ख़त्म हुई थी तब तक वो दोनों इतने गरम हो चुके थे की विनीत ने तो आएगी बढ़कर अपना लुंड अपने माँ के मुँह में घुसा दिया था और बुआ अपने बेटे का लुंड चोप्स रही थी वहीं बड़े फूपाजी भी अपना लुंड मसलते हुए आगे आये और बुआ के पास खड़े हप गए बुआ अब घुटनो पर बैठी थी...

बी फूपाजी- वैसे यहाँ दर तो है पर मन तो मेरा भी कर रहा है... चलो जल्दी से करलो जो करना है...

बुआ ने भी बरी बरी से अपने जेठ और बेटे का लुंड चूसना शुरू कर दिए





व्- ुहंममम हननननन मुम्ममय ऐसे hi चूसो...

बी फूपाजी- बहु मेरा लुंड भी चूस आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.... क्या मुँह है तेरा... हाय क्या लुंड चूसती है तेरी रंडी माँ विनीत...

पूर्वी- हाँ टाआज्जजीईईई रंडी तो है मुम्ममय अपने दामाद के पेशाब में नहाकर अपने जेठ और बेटे का लुंड चूस रही है.....

में- रंडी तो तुम भी काम नहीं हो दीदी पति के बगल में दो दो लुंड से चुद रही थी... जैसी माँ वैसी बेटी..

Bua-uhmmmmmmmm ुग्ग्ग्घहजहहहहह ुग्ग्ग्घहजहहहहह

बी फूपाजी- कर्मा अनुज को समझा दिया है न की किसी को पता न चले कैसे भी...

Me-haan फूपाजी समझा दिया है कुछ नहीं होगा...

फिर विनीत ने अपना लुंड बुआ के मुँह से निकला बुआ की गीली साड़ी और सरे कपडे उतरवा दिए जिससे बुआ पूरी नंगी हो गए और फिर अपनी माँ को वहीं चारे के ढेर पर लिटा दिया और टैंगो के बीच आ कर अपने सख्त लुंड को अपनी मुम्ममय की छूट के ऊपर रखकर घिसने लगा... बड़े फूपाजी भी अपना लुंड बुआ के मुँह की तरफ क्र दिया जिसे बुआ ने तुरंत मुँह में भर लिए उधर विनीत भी काफी उत्तेजित हो गया था तो उसने और देर न करते हुए अपना लुंड बुआ की यानि अपनी मुम्ममय की रसीली छूट में पेल दिया...

Bua-ahgghhhhhhggghhhhuuuuuuuuuuuuuppppp

व्- आआह्ह्ह mummmmmmmmmmmmmyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy बहुत mazaaaaaaaaaaa आआ राहाआआ है तुम्हारी choooooooooot में.. .

852-1000

बी Phoopaji-bahu ऐसे hi चूओस ाः विनीत छोड़ अपनी मा को...

में- आराम से बोलो सब कोई भी आ सकता है...

और फिर सब चुदाई में लग गए... पूर्वी दीदी घोड़ी बानी हुई थक गयी थी तो मुझसे बोली लेटने को मैं वहीं दुसरे गट्ठर पर लेट गया पूर्वी दीदी मेरे कमर के दोनों तरफ पेअर करके बैठ गयी और मेरा लुंड पकड़ा और अपनी गांड के छेड़ पर सेट करके नीचे होती चली गयी और मेरा लुंड उनकी गांड में समता चला गया ...दीदी आगे झुक कर अपनी गांड मेरे लुंड पर पटकने लगी और मैं अपना सर आगे उठकर उनकी छूछीयो को चूसने लगा साथ hi नीचे से कमर उठा कर दीदी की गांड में भी लुंड पेल रहा था...

जहाँ बेटी मुझसे गांड मरवा रही थी तो वहीं माँ अपने सेज बेटे से चुद रही थी.. और साथ hi अपने जेठ का लुंड अंदर तक लेकर चूस रही थी... कुछ पल बाद बड़े फूपाजी ने बुआ के मुँह से लुंड निकला और फिर अपनी भतीजी यानि पूर्वी के मुँह की और कर दिया जिसे पूर्वी ने मुँह में भर लिए और चूसने लगी...

उधर विनीत लगातार अपनी मुम्ममय की कमर पकड़ कर उन्हें छोड़ रहा था और साथ hi अपनी बहन को छुड़ाते हुए डेल्ह रहा tha...jisse और जोश बढ़ रहा तौल.....

फिर विनीत ने अपनी मुम्ममय की रस्वेलि छूट से लुंड निकला और मेरे बगल में मेरी तरह hi लेट गया और बुआ अपने बेटे के कमर क दोनों तरफ पेअर करके लुंड को अपनी छूट पर सेट करके बैठ गयी और लुंड छूट में घुस गया और एक बार फिर माँ बीटा चुदाई में लग गए... इधर थोड़ी देर लुंड चुसवाने के बाद बड़े फूपाजी ने लुंड पूर्वी दीदी के मुँह से निकला और फिर साइड में घूम कर विनीत के पैरों के बीच गए और अपने लुंड को हाथ में पकडे हुए पीछे से बुआ की छूट जिसमे उसके बेटे का लुंड अंदर बहार हो रहा था उसके ऊपर उनकी गांड के बेहद कैसे हुए भूरे छेड़ पर लगा दिया और एक धक्का मार कर टोपे को अंदर घुसा दिया...

Bua-mmmmmmhjmmmmmmmm

बुआ को चीखने से रोकने के लिए विनीत ने अपनी मुम्ममय के मुँह को हाथो से दबा दिया ... पर बड़े फूपाजी अब रुकने के मूड में नहीं थे और फिर पीछे से धक्के लगाकर पूरा लुंड बुआ की संकरी गांड में भर दिया...

अपनी मुम्ममय की गांड में ताऊजी का लुंड घुसते हुए विनीत को भी महसूस हुआ.. उसे अपनी मुम्ममय की छूट थोड़ी और टाइट होती हुई महसूस हुई... और साथ में ताऊजी का लुंड घिसता हुआ भी महसूस हुआ... विनीत के और बड़े फूपाजी का लुंड और अपने लुंड के बीच में बस एक मास की पतली दीवार थी... और वो दीवार भी उसके माँ के सबसे निजी अंग की थी.. जो की अब बिलकुल निजी नहीं था बल्कि दो दो लुंड अब उन निजी गुफाओं में घुस पैठ कर रहे थे... माँ को बीटा और जेठ छोड़ रहे थे तो बेटी मेरे ऊपर उछलकर गांड में लुंड ले रही थी..





साथ hi अपने ताऊजी के चूतड़ों को दबाकर अपनी मुम्ममय की गांड और तेज़ मरने के लिए उकसा रही थी....

ताऊ भतीजा दोनों मिलकर बुआ की छूट और गांड का बाजा बजा रहे थे....

बी फूपाजी-( फुसफुसाते हुए) अह्ह्ह्ह बहु क्या मस्त और गरम गांड है तेरी... पूर्वी, vineeeeeeeeeeeeeet देखू कैसे मेरा लुंड घपाघप तुम्हारी माँ की गांड में जा रहा है....

Poorvi-mummmy की गांड छूट सब छोड़ने के लिए hi बानी है ताऊजी.. मैं भी इन्ही पर गयी हु तभी तो हर वक़्त मेरी गांड और छूट लुंड के लिए खुजाती रहती है...

में- सही कहा दीदी तुम रंडी चुड़क्कड़ माँ की रंडी बेटी हो... ह्म्म्मम्म फूपाजी विनीत कास कास के छोड़ो साली रंडी को.. अभी कुछ देर पहले अपने दामाद से चूड़ी है...

विनीत- आह्ह्ह्हह्ह ताऊजी आअह्ह्ह्हह मुम्ममय ले ये ले रैंड अपने बेटे का लुंड अपनी छूट में... मारो ताऊजी मेरी रंडी मुम्ममय की गांड मेरे साथ मिलकर....

Bua-haan पूरा बदन तोड़ दो सालो mera...aahhhh मादरचोदो दिखाओ अपने लुंड का दम मुझे... छोड़ो आह्हः जेठ जी भरदो मेरी गांड को अपने मोठे लुंड से bhardo...vimeet मेरे बेटे बंजा मादरचोद पक्का वाला और छोड़ अपनी माँ को...

मैं और दीदी भी बुआ की बातों से और गरम हो गए और तेज़ तेज़ चुदाई करने लगे... मैं दीदी की गांड मरते हुए उनके छूट के डेन से खेलने लगा दीदी के होंठोंह को मैंने अपने होंठों में भर लिए और अपनी जीभ उनके मुँह में घुसेड़ दी और दीदी की गांड और तेज़ी से मरने laga...udhar बड़े फूपाजी ने बुआ की गांड से अपना लुंड निकला और दीदी और मेरे पैरों के बीच आ गए.. और फिर दीदी के चूतड़ों को पकड़ कर थोड़ा उठाया जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड से निकल गया और निकलते hi मुझे अपने लुंड पर किसी का हाथ महसूस हुआ और अगले hi पल मेरा लुंड फिरसे छेड़ में घुस गया... पर मुझे थोड़ा अलग लगा तो मैं समझ गया की मेरा लुंड दीदी की छूट में है.. और फिर तभी मुझे दीदी की गांड में कुछ घुसने का एहसास हुआ मैं समझ गया की बड़े फूपाजी ने अपबा लुंड अपनी भतीजी की गांड में दाल दिया है.... अब मैब और बड़े फूपाजी मिलकर दीदी की गांड और छूट को बजने लगे





दीदी अपनी गांड घुमा घुमाकर हम दोनों के लुंड अंदर बहार कर रही थी दीदी की इस कला से तो हम दोनों hi जन्नत में थे... मैं और बड़े फूपाजी दोनों रुके हुए थे सारा काम दीदी की गांड अपने आप कर रही थी....

बी Phoopaji-fusfusate हुए- आह्ह्ह्हह मेरी गुड़िया क्या मस्त गांड है तेरी आअह्ह्ह्ह ऐसे hi हिलाकर अपने प्यारे ताऊजी के लुंड को सुख दे...

विनीत- हाँ ताऊजी मारिये मेरी रंडी बहन की गरम गांड को.... तब तक मैं अपनी रंडी मुम्ममय की खुजली मिटाता हूँ..

और ये कहकर विनीत ने अपना लुंड बुआ की छूट से निकला और तुरंत गांड में घुसा दिया.....

बी फूपाजी- हाँ बीटा हमारे घर की साडी ोारतें hi रंडी हैं एक नंबर की हमेशा छूट और गांड खोलकर तैयार रहती है

Bua-are अब बातें बंद करो और अचे से जल्दी जल्दी छोडो बहुत टाइम हो गया है... और ये बोलकर बुआ अपनी गांड को अपने बेटे के लुंड के ऊपर पटकने लगी...





वहीं मैंने और बड़े फूपाजी ने पूर्वी दीदी के छेदों को और ज़ोर से पेलना शुरू कर दिया... जिसका नतीजा ये हुआ की पूर्वी दीदी कुछ पल बाद hi भरभरा के झड़ने लगी ... और उनका शरीर कंपनी लगा जिसे मैंने पकड़ कर खुद से चिपका लिया और लगातार धक्के लगता रहा उनकी गरम छूट mein...mere लुंड पर मुझे उनकी छूट का रास बहता हुआ महसूस हो रहा था... उधर अपनी बेटी को झाड़ता हुआ देखकर बुआ भी खुद को रोक नहीं पाई और बेटे से गांड मरवाते हुए अपना रास बहाने लगी... और फिर जब झड़ना बंद हुआ तो विनीत के ऊपर से उठकर साइड में लेट गयी.... बुआ को लेता देखकर बड़े फूपाजी ने पूर्वी दीदी की गांड से लुंड निकला और सीधा बुआ के बगल में जाकर लेट गए और बोले- बहु आ ऊपर मेरे लुंड पर बैठ...

बुआ को भी तबतक थोड़ी सांस आए गयी थी तो वो उठी अपने दोनों घुटने मोड़ कर फूपाजी के दोनों तरफ किये और फिर लुंड छूट में लेकर बैठ गयी... और अपनी गांड उछाल उछाल कर अपने जेठ से छोड़ने लगी... बड़े फूपाजी बुआ की बड़ी बड़ी छूछीयो को मसलते हुए नीचे से झटके दे रहे थे...

पूर्वी दीदी झड़ने के बाद थक गयी थी तो मेरे ऊपर से उतर गयी और लेट गयी पर विनीत ने उन्हें ज़्यादा देर आराम नहीं करने दिया और अपना लुंड अपनी बहिन के मुँह में घुसेड़ दिया... पूर्वी दीदी भी थकावट भूल कर भाई का लुंड चूसने लगी... तो मैं खली था तो उठा और बड़े फूपाजी और बुआ के पैरों के बीच में बैठ गया मुझे देखकर बड़े फूपाजी समझ गए और बुआ को आगे अपने सीने से चिपका लिए जिससे बुआ की गांड और खुल गयी जिसमे बिना किसी देरी के मैंने अपने लुंड को पकड़ कर बुआ की गांड के छेड़ पर लगाया और फिर एक करारा धक्का देकर अंदर घुसेड़ दिया...

Bua-ahhhh Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh हाँ मार अपनी बुआ की गांड बीटा... ऐसे hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii... जेठ जी ऑरररररररर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ छुड़ड्डड्डड़ईओओओओओ

बी फूपाजी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh बहु आराम से कोई सुनलेगा... अहंम क्या मस्त छूट है तेरी जितना छोड़ो उतना और छोड़ने का मन करता है

में- हाँ फूपाजी बुआ जैसी रंडी औरत नसीब वालो के घर में होती है... आह्हः बुआ की गांड में लुंड को सुकून मिलता है....





मैं और बड़े फूपाजी मिलकर बुआ के दोनों छेदों में अपने अपने लुंड से खुदाई कर रहे थे तो विनीत ने अपनी बहन से लुंड चुसवाने के बाद खुद लेटकर उसे अपने ऊपर आने का इशारा किआ और दीदी भी तुरंत अपने भाई के ऊपर उसके लुंड को छूट में लेकर बैठ गयी और अपने चूतड़ों को उछाल कर छोड़ने लगी...

विनीत ने दीदी को अपनी तरफ झुका लिए और उनकी बड़ी बड़ी छूछीयो को मसलते हुए अपनी बहिन के होंठो को चूसने लगा... दीदी भी अपने भाई का पूरा साथ दे रही थी.. और कब उनकी जीभ एक दुसरे के मुँह में जाकर सैर करने लगी उन्हें भी पता नहीं चला... दोनों एक दुसरे से मुँह चिपका कर दिखा रहे थे की भाई बहिन में कितना प्यार है... साथ hi नीचे बिना रुके लगातार लुंड और छूट का खेल भी चल रहा था विनीत का लुंड अपनी बहिन की गरम छूट में जाकर खलबली मचा रहा था.. वहीं दीदी खुद अपनी गांड घुमाकर भाई का लुंड पूरा अंदर तक ले रही थी ... एक तरफ दोनों भाई बहन का प्यार परवान चढ़ रहा था तो बगल में hi उन दोनों की जननी उन्हें इस दुनिया में लेन वाली अपने दोनों छेदों में लुंड के होने के सुख को अनुभव कर रही थी एक साथ दो लुंड से छोड़ने का अनुभव बहुत hi काम औरतों को मिलता होगा उनके जीवन में पर इस घर की औरतों के लिए ये आम बात थी... बुआ छूट में जेठ के लुंड को निचोड़ रही थी तो वहीं गांड से मेरे... मैंने पिछले कुछ दिनों. में काफी चुदाई की थी जिससे एक बात पर मेरा ध्यान गया की बुआ या इस घर की बाकी औरतों की छूट यया गांड छोड़ने के बाद ढीली नहीं पड़ती बल्कि जितना छोड़ो उतना hi मज़ा और देती है... वो hi मज़ा बुआ की गांड मुझे दे रही थी जो कुछ देर पहले hi अपने बेटे के लुंड को अपने अंदर समय हुई थी...

खैर चुदाई का खेल दोनों तरफ काफी ज़ोरो से चल रहा था हमारे न चाहते हुए भी थप थप थप की आवाज़ आ रही थी...

विनीत ने अपनी बहिन को उठाकर अब घोड़ी बना लिए था और पीछे से अपनी प्यारी बहिन की प्यारी सी गांड में लुंड दाल कर अंदर बहार कर रहा था... इसमें गलती विनीत की नहीं थी... पूर्वी दीदी की गांड थी hi ऐसी की अगर एक बार जो देखले वो बिना गांड में लुंड घुसाए बिना रह न paaye...aisi गांड थी दीदी की..





विनीत बिना किसी रहम के अपनी दीदी की गांड में लुंड पेले जा रहा था उसके झटको से लग रहा था की वो चरम सुख के काफी करीब है... वही हाल इधर भी था बड़े फूपाजी की साँसे और झटके भी यही दास्ताँ कह रहे थे की वो भी शिखर से दूर नहीं हैं और मैं भी काफी देर से देख रहा था और फिर चुदाई भी काफी देर से कर रहा था तो मैं भी झड़ने की और था... तभी वागल से गुर्राने की आवाज़ आई और मैंने देखा की विनीत ने अपना लुंड जड़ तक अपनी बहिन की गांड में गाड़ रखा है और आँखें बंद हैं और लम्बी लम्बी साँसे ले रहा है मतलब विनीत झाड़ रहा था और जब उसने अपनी बहिन की गांड को अपने रास से भर दिया.. और जब रास निकलना बंद हुआ तो उसने अपना लुंड बहार निकला जिसे दीदी ने घूमकर तुरंत अपने मुँह में भर लिए और चाट चाट कर साफ़ करने लगी ये दिखता था की वो अपने भाई के रास की वक बूँद भी जाया नहीं होने देना चाहती थी... उनके झड़ने के बाद फूपाजी भी नीचे से तगड़े झटके मरते हुए झड़ने लगे... उन्होंने बुआ को अपने सीने से चिपका लिए और अपना रास अपने छोटे भाई की बीवी की छूट में भर दिया... उनके झड़ते hi बुआ आगे को होकर बैठ गयी जिससे हम दोनों के लुंड निकल गए बुआ ने झुककर बड़े फूपाजी के लुंड को मुँह में ले लिए और चाट कर साफ़ कर दिया और फिर नीचे बैठकर मेरा लुंड चूसने लगी... बुआ अपनी जीभ से टोपे और पीछे की खाल के बीच कुरेदने लगी जिससे मेरा लुंड तुरंत और फूल गया और सारा रास ाँद से मेरे लुंड में आकर भर गया जैसे hi मुझे लगा मेरा निकलने वाला है तो मैंने. अपना लुंड बुआ के मुँह से निकला और उनके चेहरे पर अपने रास की धार छोड़ने लगा





एक धार उनके गाल और आँख पर गिरी तो फिर दूसरा निशाना मैंने दुसरे गाल पर साधा वहां भी छाप छोड़ कर मैंने लुंड बापिस बुआ के मुँह में घुसेड़ दिया और फिर बाकि का रास बुआ के मुँह में छोड़ दिया जिसे बुआ पि गयी और फिर लुंड को साफ़ करके बहार निकल दिया मेरे हटते hi पूर्वी दीदी आगे आई तब तक उन्होंने अपनी साड़ी वगेरा ठीक से पहन ली थी... और अपनी मुम्ममय के चेहरे से मेरा रास चाट कर साफ़ करने लगी उधर बड़े फूपाजी और वजनीत ने भी अपने कपडे पहन लिए थे और खड़े हुए हमारी तरफ देख रहे थे... पहले तो मैं अपना पजामा पहनने लगा पर फिर अचानक से कुछ ख्याल मेरे मन में आया जब वो दोनों एक दुसरे को चूम चाट रही थी तो मैंने अपने लुंड को पकड़ा और थोड़ा आगे बढाकर अपने लुंड का मुँह बुआ और पूर्वी दीदी की तरफ किआ और फिर सररर से एक धार निकली मेरे लुंड से हो सीढ़ी बुआ के चेहरे से टकराई और फिर पूर्वी दीदी के जब तक वो कुछ समझ पाती तब तक दोनों के चेहरे भीग चुके थे पर तभी मैंने तुरंत अपनी धार को रोक लिया दोनों मेरी तरफ हैरानी से देख रही thi...itane में मेरे बगल में मुझे एक तरफ बड़े फूपाजी और दूसरी और विनीत के होने का एहसास हुआ वो दोनों कभी मेरी तरफ तो कभी बुआ और पूर्वी की तरफ देख रहे थे और फिर अचानक से एक धार और बुआ के चेहरे को भीगने लगी वो मैंने देखा तो विनीत था जो अपनी माँ को अपने पेशाब से नहला रहा था वहीं दूसरी और पूर्वी दीदी के चेहरे पर भी मूट की धार पड़ने लगी जो बड़े फूपाजी की थी जो अपनी भतीजी के ऊपर मूट रहे थे और फिर दोनों थोड़ा निशाना बदल बदलकर मूतने लगे हुए दोनों पूर्वी दीदी और बुआ के चेहरों को भीगने लगे मैंने भी दोबारा मूतना शुरू कर दिया और दोनों को भीगने लगा... मूट चेहरे पर गिरकर थोड़ा उनके मुँह मैं जा रहा था तो बाकि बहकर नीचे आ रहा था और सरे शरीर को भीगा रहा था... कुछ पल बाद फूपाजी और विनीत की धार ढीली पड़ी और फिर बंद हो गयी मेरा भी खत्म होने वाला था तो मैंने अपना लुंड बुआ के मुँह में दाल दिया और मूतने लगा जिसे बुआ पीने की कोशिश करने लगी पर नाकाम रही और बहुत सारा मूट उनके मुँह से बहार आने लगा और अंत में उन्हें लुंड बहार निकल कर मेरा मूट गटकना पड़ा





बुआ के मुंह से निकलने के बाद मैंने तुरंत पूर्वी दीदी के मुँह में घुसेड़ दिया और दीदी कहाँ अपनी माँ से पीछे थी... वो बी मेरा मूट शरबत की तरह पीने लगी.. और फिर मेरा लुंड चूस चूसकर एक एक बूँद निचोड़ ली फिर लुंड को छोड़ा...

फिर लुंड को दीदी से निकलवा कर मैं पीछे हुआ तो देखा दोनों माँ बेटी पेशाब में नहायी हुई बैठी थी बुआ जहाँ पूरी नंगी थी और उनके हर अंग से बूंदे टपक रही थी तो वहीं दीदी पूरे कपडे पहने हुए थी उनकी साड़ी पेशाब से गीली होकर उनके शरीर से चिपकी हुई थी बाकि कपड़ो का भी यही हाल था...

मैं पर मन hi मन सोच रहा था की कहीं ये दोनों गुस्सा न करें की बिना पूछे माइनर उनपर मूतना शुरू कर दिया था और कोई भी औरत ऐसी हरकत से गुस्सा हो सकती थी पर जब मैंने उनके चेहरे को देखा तो हैरान हो gaya...dono माँ बेटी के चेहरे पर एक कामुक मुस्कान थी.. मैंने हैरानी से बड़े फूपाजी की और देखा तो वो भी मुड़कुड़ाये और बोले- मुझे पता है कर्मा तू क्या सोच रहा है... टेंसन मत ले इस घर की औरतें रंडियों से भी आगे हैं...

मैंने भी मुस्कुरा कर सर हिला दिया वहीं विनीत भी अपनी सगी माँ और बहिन को पेशाब में नहाये हुए देख कर मुस्कुरा रहा था...

विनीत,- क्या रंडी माँ और बहन हैं मेरी... रंडी भी क्यों वो भी काम होगी उनसे... सच में कर्मा एक महीने में तूने सब कुछ बदल दिया....

में- अबे मज़े कर इतना मत सोचा कर...

इतने में बुआ ने अपने गीले कपडे वाहन लिए थे या कहो लपेट लिए थे और बोली- तुम लोग देखो बाथरूम टाक रास्ता साफ़ है की नहीं फिर हम लोग चलने लगे हुनर पीछे पीछे बुआ और दीदी चल रही थी बाथरूम तक कोई नहीं मिला और फिर बुआ और पूर्वी दीदी एक साथ बाथरूम में घुस गयी... और हम तीनो भी मुस्कुरहट के साथ अलग हो गए और अपने अपने बिस्तर की और बढ़ गए....

इसके आगे उगली अपडेट में कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट... शुक्रिया
 
Back
Top