Incest Katha Chodampur Ki - Page 4 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

लास्ट अपडेट में अपने देखा कैसे कर्मा के पापा अपनी बहिन को बाघ में छोड़ रहे होते हैं और कर्मा वहां पहुंच जाता है अब आगे...

अपडेट 18

पापा उनकी गांड बहुत तेज़ी से मार रहे थे और मैं उन्हें देखकर अपना लुंड हिला रहा था... तभी मेरे मन में आया के मेरा इतना ठरकी होना... अपनी माँ जैसी ममता चाची को chodna...behan सामान पल्ली को pelna..or अपनी माँ को छोड़ने की इच्छा रखना गलत नहीं है बल्कि बिलकुल जायज़ hai...mere ठरकी होने के पीछे की वजह मेरे पापा है... मुझे ठरक और हवस उनसे hi मिली है ये मेरे खून में hai...isi वजह से मैं इतना बड़ा छोड़ू hun...wo अपनी सगी बहिन की यहाँ खुले में गांड मार सकते हैं तो मैं अपनी माँ क्यों नहीं छोड़ सकता...

ये सोच रहा था के मसरा ख्याल बापिस उन पर गया अब उन्होंने पोजीशन चेंज कर ली थी अब पापा नीचे लेते थे और बुआ उनके ऊपर थी उनकी तरफ पीठ करके उन पर लेती हुई थी और लुंड पर उछाल रही थी...





बुआ अपनी गांड लुंड पर पटक रही थी उनकी आँखों में एक अलग hi जोश था, पापा उनके चूतड़ पकड़ कर उन्हें अपने लुंड पर उछाल रहे the...bua के छूछे बहुत तेज़ी के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे...

बुआ- भैया भर दो मेरी गांड आअह्ह्ह्ह भैया तुमसे गांड मरवाने का अलग hi मज़ा hai...aaahhhh... कैसी लग रही है अपनी बहिन की गांड भैया....

पापा- तेरी गांड हमेशा की तरह माखन से भरी हुई है behna...man करता है बस पूरी ज़िन्दगी तेरी गांड में लुंड घुसेड़ कर रखूं... आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह..

मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मेरे लुंड ने वहीं पर पिचकारी छोड़ di...but लुंड अभी भी खड़ा था और मैंने उसे हिलना जारी rakha...itne कामुक नज़ारे को देखकर शायद hi कोई लुंड शांत बैठे... मैंने देखा इस बार पापा फिर से पोजीशन चेंज कर रहे है..

उन्होंने बुआ को खड़ा किआ और पेड़ के सहारे झुका दिए अब बुआ की बड़ी गांड उभर गयी और बड़ी लग रही थी मेरा मन तो हुआ के अभी भाग कर जाऊं और अपना लुंड घुसेड़ दू बूत रुका रहा.. फिर पापा ने पीछे से एक बार फिर अपना लुंड बुआ की गांड में घुसेड़ dia...or उनकी कमर पकड़ कर तेज़ी से उनकी गांड मारने लगे...



उनके धक्के अब बहुत तेज़ होते जा रहे थे बुआ और पापा दोनों hi बस आठ अह्ह्ह करके सिसकिया भर रहे थे बूत कुछ बोल नहीं रहे the....or हर मिनट के बाद उनके धक्के तेज़ होते जा रहे थे बस थप थप थप की आवाज़ आ रही थी के तभी एक बुआ की ाः हुई और वो झड़ने लगी और उसी समय पापा भी हनणननणम करके बुआ की गांड से बिलकुल चिपक गए और झड़ने लगे... उन्होंने अपना सारा रास बुआ की गांड में उढेल dia....or कुछ मिंटो बाद उन्होंने अपना लुंड बुआ की गांड से निकला बुआ वही घुटनो पशर बैठ गयी और हांफ रही थी उनकी गांड से पापा का रास बाह कर बहार आ रहा tha...or फिर पापा ने बुआ के मुँह की तरफ अपना लुंड किआ तो बुआ ने जल्दी से उसे मुँह में ले लिए और चूस चूस कर साफ़ करने लगी ..





बुआ तब तक पापा का लुंड चूसती रही जब तक वो बिलकुल साफ़ न हो गया हो और फिर दोनों अपने कपडे पहनने लगे बुआ ने अपनी ब्रा फिर ब्लाउज फिर पंतय और पेटीकोट और फिर साड़ी पहनी ...इतने में पापा भी अपने कपडे पहन चुके थे मैंने सोचा अब मुझे यहाँ से निकलना chahiye...to मैं वहां से निकला और सीधा घर आ गया और जाकर अपने रूम में लेट गया विनीत अब ही सो raha...tha...maine उसे देखा और मन में सोचा के सेल तू यहाँ सो रहा है ोमोर वाहन मेरे पापा ने तेरी माँ छोड़ दी है और गांड भी मारी hai..tu बस लुंड हिला सो kar...phir मैं जो बी मैंने देखा उसके बारे में सोचने लगा और मैं इस निष्कर्ष पर पंहुचा के मेरा माँ को छोड़ना चाहना बिलकुल जायज है और अब मैं माँ को छोड़ने का हर संभव प्रयास करूँगा और अब चाहे जो बी होगा वो मेरे लुंड का स्वाद चखेगा hi chakhega...pahla तो बुआ को पटना है क्या मस्त माल है इतनी मस्त होकर चुदवाती hai...mujhe भी छोड़ना है बुआ को कैसे bhi...ye सब सोचकर बहार निकला अपने रूम से तो मेरी माँ हॉल में बैठी थी कुछ सोच रही थी ..मैंने उनकी तरफ एक नज़र देखा और जैसे hi उनकी आँखें मेरी तरफ आई मैंने नज़रें हटा ली और किचन में चला gaya...or पानी पीने laga...maa की नज़र मुझपर hi thi...kal रात से hi मेरी और उनकी कोई बात नहीं हुई thi....maine सोचा तुम मुझे नखरे दिखा रही हो वहां पापा अपनी सगी बैगन को छोड़ रहे hain...halanki मैं चाहता तो पापा और बुआ के बारे में माँ को बताकर उसके करीब जा सकता था बूत मैं ये कभी नहीं चाहता था ke..mere माँ पापा के बीच कोई झगड़ा हो... इसलिए मैंने चुप रहना hi बेहतर samjha...or वैसे भी मैं पापा को दोषी नहीं मान रहा था और न hi बुआ को... मुझे खुद चांस मिलता तो मैं खुद भी बिना सोचे अपनी बेहेन को छोड़ देता तो पापा ने क्या गलत kia...phir में सोचा मैं आजकल बस ये hi करता हूँ या तो चुदाई नहे तो उसके बारे में सोचना अब मुझे पढ़ना चाहिए काफी टीम हो गया है पहड़े हुए और फिर मैं पढाई करने लग गया.. ऐसे hi शाम से रात हो गयी तो खाने का टाइम हो गया फिर मैंने सबके साथ जाकर खाना खाया बुआ और पापा बिलकुल नार्मल नज़र ा रहे थे जैसे कुवह हुआ hi नहीं ho...vineet अब भी माँ और बुआ की गांड और छूछीयो पर नज़र गदा रहा tha...Anuj भी एक दो बार मुझे बुआ की गांड की तरफ देखता हुआ दिखा.... मैंने सोचा सब लुंड पेलना चाहते हैं बुआ मैं to...phir खाना खाके मैं छत पर टहलने laga...or थोड़ी देर में नीचे आया तो देखा सब सोने जा रहे हैं तो मैंने बुआ से बोलै...

बुआ- मैं आपके साथ सो जॉन... आपसे बातें करने का मन है और बुआ ने तुरंत बोलै.

बुआ-- अरे बीटा मुझे भी बड़ा ाचा लगेगा आजा tu....aaj हम बुआ भतीजा बहुत साडी बातें करेंगे और ये सुनकर मैं खुश गया और उनके room.mein घुस गया और उसके आगे क्या हुआ वो सब अगली उपदस्ते में

तो क्या करेगा कर्मा अब आगे ये जानने के लिए अगली उपदटेस पढ़ें और कमैंट्स देते रहे फीडबैक देते रहहिं.... शुक्रिया
 
लास्ट अपडेट में अपने देखा के कर्मा पापा और बुआ की चुदाई देखता है और फिर बुआ से कहता है की वो उनके साथ सोयेगा aaj....ab आगे

अपडेट 19

मैं बुआ के कमरे में जा कर बैठ gaya...or बुआ से बातें करने laga...maine एक निक्कर और टी शर्ट पहन राखी thi...or बुआ ने साड़ी....

में- बुआ कितना टाइम हो गया न आप को देखे हुए...

बुआ- तुझे hi याद नहीं आती बुआ ki...ye नहीं टाइम निकलकर मिल जाया करे....

में- अरे बुआ मैं तो ा जॉन पर ये पढाई और कॉलेज है न छुट्टी मिले तो न और एक दो मिलती है वो पापा के साथ काम में लग जाती है...

बुआ- ये तो और ाचा है बीटा तू पापा की मदद करता hai...aage तुझे hi तो संभालना है वो बेचारे कब तक म्हणत करेंगे...

में- हाँ बुआ पापा जहाँ जहाँ म्हणत करते हैं मैं उन सब जगहों पर म्हणत करूँगा...

ये बात मैंने बुआ के बड़े बड़े छूछीयो को देखते हुए बोली....

में- बुआ मैं तो आपको दोपहर में भी ढूंढ रहा tha...ke अपनी प्यारी बुआ से बातें करूँ बूत आप पता नहीं कहाँ थी...

बुआ सुनकर थोड़ा सोचते हुए बोली- अरे तब वो मैं तेरे पापा के साथ बाघ में घूमने गई थी...

में- तो मज़ा आया पापा के साथ...

बुआ- क्या

Me-are बुआ बाघ घूमने में..

बुआ- हाँ क्यों नहीं आएगा बाघ है hi इतना ाचा...

में- बूत मैं चाहता था के मैं घुमाऊं आपको...

बुआ- तू भी घुमा लिओ beta...tujhe किसने रोका है...

ये कहके बुआ की नज़र गेट पर पड़ी तो मैंने भी मुद कर देखा तो माँ दूध का गिलास लिए हुए कड़ी थी





माँ साड़ी में बहुत सेक्सी लग रही thi...unki कमर.. साड़ी के पीछे से झांकता navel...mera लुंड थोड़े ठुमके मारने laga...kal रात के बाद अब मैंने माँ को सीधे देखा tha...ek पल के लिए तो मैं भूल hi गया के मैं उनसे गुस्सा hun...phir मैंने न चाहते हुए भी अपनी नज़रें उनसे हटाई और बापिस बुआ की और देखने लगा...

Bua-are भाभी आओ ...

माँ- मैं इसे इसके रूम में ढूंढ रही थी दूध क liye....par ये यहाँ आपके साथ है

बुआ- हाँ आज मेरा लाडला बीटा मेरे साथ सोयेगा....

ये सुनकर माँ ने मुझे एक बार घूर कर देखा

Maa-are ये तो बहुत अछि बात hai...bua भतीजा खूब बातें करेंगे आज तो....

माँ ने गिलास लेकर रख दिए और मेरी तरफ देखे बिना बोली...

माँ- पि लेना गरम hai...acha तुम लोग बातें करो मैं चलती हूँ...

Bua-are भाभी बैठो कहाँ भाग रही हो.

माँ- अरे वो इसके पापा के सर में थोड़ा दर्द है तो मालिश करने को बोल रहे हैं...

बुआ- अरे ज़्यादा तो नहीं दर्द दवाई वगेरा दे दो...

माँ- नहीं बोल रहे हैं मालिश कार्डो ठीक हो jayega...acha अब मैं चलती हूँ

ये कहकर माँ ने मेरी तरफ एक बार देखा और फिर वो चली गयी.....

फिर मैं और बुआ काफी देर बातें करते रहे मज़ाक करते रहे फिर बुआ का फ़ोन आ गया तो वो बात करने लगी... तो मैंने सोचा के बाथरूम हो आता हूँ तब tak...or रूम से बहार आ gaya...phir मैंने अपने रूम के पास वाले रूम में टॉयलेट की और बापिस बुआ के रूम की तरफ आया तो देखा माँ पापा के रूम का गेट खुला था...

मैंने सोचा पापा के सर दर्द कैसा है पूछ लेता हूँ और माँ भी दिख जाएगी कुछ पता चल जायेगा के उनका मूड कैसा hai...to मैं उनके रूम में घुस गया तो देखा पापा तो नहीं हैं मुझे लगा बाथरूम गए होंगे माँ सर पर हाथ रखे लेती थी और शायद सो रही थी... मेरा ध्यान उनके नंगे पेट पर गया वो बहुत सेक्सी लग रही थी उनकी navel..unki नंगी और कामुक kamar...dekh कर एक बार फिर मेरा लुंड टाइट होने लगा....





बुआ और पापा की चुदाई से मैं पहले hi बहुत उत्तेजित था और फिर माँ को इस रूप में dekhkar...main गरम हो gaya..or अपने आप hi मैं उनके बीएड के पास पहुंच gaya...or उनकी कमर और पेट पर ध्यान से देखने laga...kitni सेक्सी है मेरी maa...haaye और फिर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने अपना हाथ धीरे धीरे बढ़ाया और उनकी कमर पर रख दिए... और सहलाने लगा... हाय ऐसा लग रहा था जैसे मैं पहली बार उनकी कमर को छू रहा hun...man में एक दर भी था के कहीं पापा ने देख लिए to...ya माँ कोई और आ गया to..or शायद दर की वजह से और उत्तेजित हो रहा था मैं करने के लिए फिर मैंने हाथो से सहलाते हुए hi उनकी सारी साइड में कर दी और फिर न जाने मुझे क्या हुआ मैंने अपना चेहरा आगे बढ़ा कर अपने होंठ माँ के पेट पर रख दिए और चूमने laga...chatne laga...poore पेट पर जीभ फिरा कर उसे गीला कर रहा tha...or फिर उनकी नाभि में जीभ डालकर उसे चूसने laga....main बिना किसी परवाह के अपनी जीभ उनके पेट पर फिरा रहा था तभी चतत्त की आवाज़ आई और मैं तुरंत खड़ा हो गया वो आवाज़ बाथरूम क गेट की कुण्डी खुलने की थी जो पापा ने खोली थी और फिर कुछ सेकण्ड्स में पापा बहार आ गए मैंने पापा की तरफ देखने के बाद बापिस माँ की और देखा तो एक और झटका laga...maa की आँखें खुली हुई थी और वो एक तक मुझे देख रही थी... मुझे लगा था माँ सो रही hai...par पता नहीं कितनी देर से वो जाएगी हुई थी और कबसे मुझे देख रही थी पर पापा ने मुझे देखा और बोले...

Papa-Karma क्या hua...nind नहीं ा रही क्या...

में- नहीं पापा वो आपके सर में दर्द था न तो पूछने आया था के अब कैसा है...

Papa-Are तुम लोग भी न ज़रा सा सर भरी tha...tum इतना घबरा जाते ho....teri माँ ने मालिश करदी और फिर नहलीअ main...bilkul फ्रेश हो गया...

में- फिर ठीक है पापा.

पापा- हाँ अब जाके सो जा तू भी..

Me-theek पापा आप भी सो जाओ

और ये कहकर मैं उनके रूम से निकल गया और बापिस बुआ के रूम में आ gaya...or बीएड पर बैठ गया बुआ की बात भी ख़तम हो गयी थी...

बुआ- कहाँ गया था?

में- बाथरूम गया था बुआ..

बुआ- चल अब गेट बंद करदे...

मैं उठा और गेट बंद कर dia...or बापिस आकर बीएड पर बैठ gaya....phir बुआ कड़ी हुई और अपना पल्लू नीचे गिरा दिए... मैं हैरान हो गया उन्हें देखकर...

बुआ- अरे इतनी गर्मी hai..saree में सोना मेरे बस की तो nahi...tujhe कोई परेशानी तो नहीं....

मैं तो कुछ बोल hi नहीं प् रहा था... बस बुआ को साड़ी उतरता हुआ देख रहा था और मैंने उनके जवाब में ना में सर हिला दिए bas...mera लुंड एक डैम टाइट हो गया था... फिर बुआ ने अपनी साड़ी उतर कर साइड में रखड़ी और मैं उनके बदन को देखता hi रह गया... पेटीकोट और ब्लाउज में बुआ इतनी कामुक लग रही थी.... उनका नंगा पेट गहरी नाभि मन किआ अभी जीभ से चाट लूँ...





मुझे लगा आज इन औरतों ने मुझे मार डालने का hi सोच लिए hai...blouse में कसु हुई बुआ जी की छुछियां.. मन कर रहा था अभी ब्लाउज फाड़ कर उन्हें आज़ाद करा दूँ... फिर बुआ बीएड पर लेट गयी सीधे होकर और बोली..

बुआ- तू भी अपनी टी शर्ट उतर दे कहाँ गर्मी में पहने hai...or लाइट भी बंद करदे......

मैं झट से उठा और t-shirt निकल के फ़ेंक दी और लाइट बंद करके बुआ के पास लेट गया... फिर बुआ चुप हो गयी मुझे लगा सोने लगी hain...par मेरी आँखों में नींद कहाँ thi...main तो बीएस अँधेरे ने भी उनकी नंगी कमर देखने की कोशिश कर रहा tha...phir मैंने अपनी करवट उनकी तरफ ली वो अभी भी सीढ़ी लेती थी तो मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उनके पेट पर रख दिए और बिक्कुल स्थिर हो gaya...main देखना छह रहा था के बुआ का क्या रिएक्शन होता है... पर बुआ ने कुछ नहीं किआ तो मुझे लगा बुआ सो रही हैं तो धीरे धीरे मैंने अपना हाथ उनके पेट पर हिलना चालू kia...mujhe उनके चिकने पेट पर बड़ा आनंद मिल रहा tha...mera लौड़ा मेरे निक्कर में तम्बू बना चूका tha...tabhi बुआ की आवाज़ आई और मैं दर गया...

Bua-tu बिलकुल नहीं बदला रे कर्मा...

मेरी गांड फैट गयी कहीं बुआ गुस्सा तो नहीं है... ये सोचकर मैंने हाथ हटा लिए.....

बुआ- जब तू छोटा था तब भी सोते हुए मेरे पेट पर हाथ फेरता रहता था... बिना पेट पर हाथ पहिराए सोता hi नहीं था तू ...कभी भाभी तो कभी मेरे यही करता था और आज भी तेरी वही आदत है...

और इतना कहकर बुआ ने मेरा हाथ पकड़ कर बापिस अपने पेट पर रख दिए और मुझे हाथ फिरने पर महसूस हुआ के उन्होंने अपनी साड़ी भी काफी नीचे कर्ली hai...ab मैंने उनकी नाभि के काफी नीचे तक हाथ ले जा प् रहा था .... मुझे तो जैसे खुली छूट मिल गयी हो बुआ के पेट के साथ खेलने की...

में- ाचा बुआ और क्या करता था मैं जब छोटा था तो..

मैं अब उनके पेट को थोड़ा मसलते हुए तो कभी उनकी नाभि में उंगली डालते हुए बात कर रहा था...

बुआ- अह्ह्म्म तू बड़ा शरारती था... मुझे और भाभी को तंग करता tha.....mujhe याद है के विनीत का जन्म तेरे से कुछ महीने बाद हुआ था तो एक टाइम पर आके भाभी का दूध आना बंद हो गया था तो मैं जब यहाँ होती थी तो तू मेरा दूध पीटा tha..or दूध पीते पीते पेट सहलाता था और कभी कभी दूध पर काट भी लेता था.....

में- अरे बुआ कितना ाचा होता होगा न तब तो मैं आपका दूध पिता था आपसे इतना करीब था और अब सब बदल गया है...

बुआ- कुछ भी तो नहीं बदला देख तू आज भी मेरे पेट को सेहला रहा है...

में- बूत बुआ दूध तो नहीं पि रहा न...

बुआ मेरी बात सुनकर हंस दी और मेरे हाथ पर एक हलकी सी चपत लगाई

बुआ- चल badmash...abhi भी तू उतना hi बदमाश है... चल अब सो जा कल सामान लेने जाना है...

Me-theek है बुआ

इतना कहकर बुआ फिर सोने लगी बूत मैं उनके पेट और कमर को सहलाता रहा नाभि से खेलता रहा बूत मैं कुछ और करना चाहता था मेरा लुंड भी बिलकुल खड़ा था तो मैंने धीरे धीरे हिम्मत करके... ब्लाउज के ऊपर से hi उनके छूछीयो को सहलाना शुरू किआ कुछ देर तक बुआ का कोई रिएक्शन न देखने के बाद मैंने अपना दूसरा हाथ भी प्रयोग में लिए और बड़े आराम से उनके ब्लाउज के हुक खोलने lga...main बहुत सावधानी से ये काम कर रहा था और काफी देर की म्हणत के बाद बुआ का ब्लाउज खुल गया और मैं भाग कर गया और छोटा वाला बल्ब जला दिए और मेरे सामने बुआ की ब्रा और उसमे कैद उनकी बड़ी छुछिया आ गयी...





मैं तो बस देखता hi रह गया मैं अब कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा था और मैंने अपना लुंड बहार निकल lia...bua की आँखें अब भी बंद थी ....मैंने सोचा इसी. में फायदा है अगर बुआ कुछ न करें तो मैं अपना काम बिना किसी रुकावट के कर सकता हूँ और मैं फिर ब्रा के ऊपर से hi बुआ की बड़ी बड़ी छूछीयों को दबाने lagaa...bua का मुँह थोड़ा सा खुला था बूत कोई आवाज़ नहीं aai...i मुझे समझ नहीं ा रहा था के बुआ जाग रही है या सो रही hai...phir मैंने कुछ देर तक बुआ के पपीता को दबाता रहा और मज़े लेता रहा फिर मैंने उनकी ब्रा को भी नीचे करने का सोचा और एक एक करके उनके दोनों बड़े बड़े चुच्चो को बहार निकल लिए ोे उन पर टूट पड़ा.... आअह्ह्ह्हह क्या छुछिया है बुआ की इतनी बड़ी और naram...main मस्त उन्हें दबा रहा tha...maine उन्हें एक बार देखा खुला ब्लाउज उसमे ब्रा के ऊपर से निकले हुए पापीती जैसी छुछियां बुआ को और कामुक बना रहे थे..





मुझसे रुका नहीं गया और मैंने आगे बढाकर उनके एक छूछे को मुँह में भर लिया और चूसने laga...or दुसरे को दबाने लगा.... बुआ का अब भी कोई रिएक्शन न पाकर मैं हैरान था के बुआ आखिर छह क्या रही hai....but मुझे क्या मैं तो उनकी छूछीयो को चूसने में बिजी था... और मेरा लुंड भी खुश था और लोहे की तरह हो गया था... मैंने सोचा दिन में बाप आपको मसल रहा था और अब beta...pahle भाई से छुछियां मसलवाई और अब भतीजे से क्या किस्मत है बुआ की... और मेरी bhi...maiin बुआ के बड़े पपीतों को चूसे जा रहा tha...kabhi एक तो कभी दूसरा... मेरा लुंड लेकिन अब फटने की हालत में आ गया था मुझसे रहा नहीं गया और मैं उनके बगल में घुटनो पर ा गया और उनके छूछीयो को दबाते huye...ek हाथ से लुंड हिलने laga...dheere धीरे मेरा दबाब छूछीयो पर थोड़ा बड़ा और मेरी स्पीड अपने लुंड पर भी तेज़ हो gayi...meri आँखें बंद हो gayi...main हाथ में बुआ के छूछे का एहसास हो रहा tha...meri आँखों के सामने पापा को बुआ को chodna...phir उनकी गांड marna...phir माँ की कमर को चेतना और फिर बुआ के साथ ये सब करना ये hi तस्वीरें घूम रही थी और फिर अचानक से मेरे हाथ बहुत तेज़ होकर धीरे हो गए मैं आँखें बंद किये हुए tha...or मेरे लुंड ने अपनी पिचकारी छोड़ना चालू किआ ...हर पिचकारी के साथ मुझे सुकून मिल रहा tha...mera बहुत सा स्पर्म निकल रहा था... शायद आज मैं ज़्यादा एक्ससिटेड था तो कुछ पिचकारियां छोड़ने के बाद मेरी धीरे से आँखें खुलने लगी लुंड अभी भी रास की धार छोड़ रहा था... जब मेरी आँखें खुली पूरी तरह तो जो मैंने देखा मैं शॉकेड रह गया और दर भी गया मेरे लुंड से निकलती धार सीधे बुआ के चेहरे पर पद रही thi...unka पूरा चेहरा मेरे रास से भीगा हुआ था... उनकी आँखें अब भी बंद thi...muh खुला हुआ था जिससे कुछ रास उनके मुँह में भी चला गया था...





उनका चेहरा बेहद कामुक लग रहा था मेरे रास में भाग kar...phir जब मुझे पता भी चल गया की मैं उनके मुँह पर झाड़ रहा hu.tab भी मैं खुद को रोक नहीं पाया और मैंने धार का निशाना उनके मुँह के अंदर और कर दिए और उनके मुँह में. भी रास को छोड़ dia...or करीब एक दो मिनट बाद मेरा झड़ना बंद हुआ तो देखा बुआ के चेहरे से लेकर छूछीयो तक बस मेरा रास hi रास है... मैंने देखा बुआ अब भी नहीं हिली थी मैंने सोचा बहुत बड़ी रैंड है बुआ तो.... पर अब अगर वो नहीं हिल रही तो मैं भी कुछ नहीं करूँगा और फिर मैं भी लेट गया बुआ वैसी hi लेती रही और फिर कब मुझे नींद ा गयी पता hi नहीं chala.....or मैं सो gaya...iske बाद जब सुबह उठा तो क्या हुआ वो अगली अपडेट में...

आप लोग प्लीज पढ़ते रहिये और रेविएवस देते रहिये... और हौसला बढ़ाते रहे.... शुक्रिया...
 
लास्ट अपडेट में अपने देखा की कर्मा ने रात में बुआ की छूछीयो को चूसा और फिर उनके चेहरे पर झाड़ के सो gaya...ab आगे

अपडेट 20
मैं सुबह थोड़ा लेट उठा तो देखा मैं बीएड पर अकेला hun...bua कहीं नहीं दिख रही thi...maine t-shirt पहनी और रूम से बहार आया और बाथरूम चला gaya...phir फ्रेश होकर आया तो सब लोग हॉल में the...bua भी नहाकर दूसरी साड़ी पहन कर बैठी thi...mujhe देखते hi बोली आ गया मेरा राजा बीटा...

मैं थोड़ा हैरान था के रात जो हुआ उसके बाद भी बुआ के बेहेवियर में कोई बदलाव नहीं आया था... मैं खुश भी था इसका मतलब बुआ को बुरा नहीं लगा और मैं आगे बढ़ सकता hun...phir माँ ने चाय और नाश्ता मेरे पास लाके रख दिए और मैखाने laga..sab पहले से hi खा रहे the...Vineet अब भी चुप था और नाश्ता कर रहा था बूत उसकी नज़रें अब भी घूम रही thi...kabhi माँ के ऊपर तो kabhi...bua के... मैं उसे देखकर मुस्कुराने लगा और उसने एक बार मुझे देखा फिर थोड़ा हड़बड़ा सा गया और नाश्ता करने लगा प्लेट में देखते huye....phir पापा बोले

Papa-Are कर्मा जल्दी तैयार हो जा शहर जाना है सामान लेने...

Me-are हाँ तो कौन कौन जा रहा है...

पापा- मैं तू विनीत और shashi...anuj बाघ का काम संभल लेगा...

Me-theek है चलते हैं थोड़ी देर में और य

ये कहकर मैंने नाश्ता ख़त्म किआ और फिर थोड़ी देर बाद हम लोग शहर के लिए निकल gaye...poora दिन सामान लेने और लाने में निकल gaya...sath में बुआ थी तो उन्हें देख कर लुंड भी खड़ा हो जाता था पर कुछ नहीं कर सकता था तो बस मसल देता था और एडजस्ट kardeta...bahut सा सामान था आप तो जानते हैं के शादी के लिए कितना सामान होता hai...phir सारा सामान लेकर बापिस गाँव आते आते हमें शाम हो gayi..samaan सारा घर के सामने utardia...ghar आके माँ ने सबको शरबत पिलाया और वो hi बातें हो रही थी के कितने का पड़ा वगेरा wagera...phir अनुज मेरे पास आया और चुपके से बोलै भैया suno...maine बोलै हाँ बोल..

अनुज- भैया एक खुशखबरी है आज चाचा अपने खेत पर सोने वाले हैं पानी चल रहा है उनके खेत में तो चची ने हमें बुलाया hai...abhi पल्ली को पढ़ने के बहाने और उन्होंने माँ से भी पूछ लिए है...

मैं सोचने लगा थका हुआ भी बहुत था बूत लुंड कहाँ मंटा है और वैसे भी पूरा दिन ऐसे hi बीत गया था छूट मर इ का मन तो मेरा भी था तो मैंने बोल्दिए चल ठीक हैं चलते हैं...

फिर थोड़ा आराम करने के बाद हम दोनों ममता चची के घर की और निकल gaye...gate खटखटाया तो पल्ली ने खोला और हम अंदर घुस गए और पल्ली ने गेट बंद किआ और गेट बंद होते hi वो मुझपर टूट पड़ी और मेरे होंठो को चूसने लगी...

करीब 5 मीन्स तक उसने मेरे होंठो को चूसा और फिर जाकर छोड़ा...

पल्ली- क्या भैया जब से मैं वहां से आई हूँ एक बार भी नहीं आये आप मेरे पास...

में- जान टाइम नहीं मिला सही...

पल्ली- हाँ मेरे लिए टाइम नहीं मिला और माँ को लेजाकर वहां बाघ में छोड़ आये...

Me-acha जानेमन अब तो आ गया हूँ अब साडी खुजली मिटा दूंगा तेरी...

ये सुनते hi वो खुश हो गयी उधर चची और अनुज भी हमें देख कर मुस्कुरा राहु the..phir हम लोग जाकर खत पर बैठ गए और मैंने बिना वक़्त गंवाए पल्ली का टॉप नीचे करके उसके छूछीयो को बहार निकल लिए और चूसने लगा इधर मुझे देखकर अनुज ने भी चची की छूछीयो को ब्लाउज से बहार निकल लिए और चूसने लगा...





दोनों माँ बेटी बगल मैं बैठी हुई हूँ दिनों भाइयों से अपने छूछे चुसवा रही थी फिर पल्ली ने चची के होंठो पर अपने होंठो को रख दिए और चूसने लगी.. चची भी पल्ली का साथ देने lagi...hum उनके चुच्चू चूसने में मस्त थे फिर

अनुज ने चची की साड़ी निकल दी और पेटीकोट कमर तक कर दिए और उनकी पंतय को साइड करके उनकी छूट चाटने laga...maibe भी पल्ली के लोअर को निकल दिए और पंतय साइड करके छूट चाटने laga...sach में दोस्तों जितना कामुक नज़ारा एक माँ और बेटे की चुदाई का होता है वैसा hi जब एक माँ और बेटी साथ में चुदती है तो उतना hi कामुक और उत्तेजित करने वाला होता है...





फिर हम दोनों उनकी छूट चाटने में. लगे थे उनके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी... पल्ली चची के बड़े रसीले ामो को मसल रही थी और फिर अपने चेहरे को आगे बढाकर चूसने भी lagi...ab मुझसे सहना थोड़ा मुश्किल हो गया तो मैं खड़ा हो गया और अपना लुंड बहार निकल लिए तो तुरंत पल्ली घुटनो पर आ गयी और अगले hi पल मेरा लुंड उसके मुँह में था

..मैंने अनुज और चची की तरफ देखा तो वो भी शामे पोजीशन में थे चाची अनुज का लुंड चूस रही thi....maine अपने सरे कपडे निकल दिए और अनुज ने भी बस उसने शर्ट खुली हुई उसके कंधे पर थी...





पल्ली बहुत ज़ोरो से मेरा लुंड चूस रही फ्ही और मुझे बहुत सुखद आनंद मिल रहा tha...phir मैंने अपने हाथ उसके सर पर लगा दिए और लुंड थोड़ा और अंदर घुसा के कमर के झटके मरने लगा वो गु गु करने लगी मैं ऐसे लुंड दाल रहा था उसके मुँह में जैसे उसके मुँह को छोड़ रहा hun...meri आँखें बंद thi...lekin एक आह की आवाज़ से आँखें खुली तो देखा अनुज और चाची अब बिलकुल नंगे थे और चची अनुज की तरफ पीठ करके उसके ऊपर बैठी थी और उसका लुंड छूट में लेकर उछाल रही थाई मैंने भी देखा के अब मुझे भी आगे बढ़ना चाहिए मेरे लुंड को भी छूट चाहिए थी तो मैंने पल्ली को उठाया और खाट पर लिटा दिए और उसकी टैंगो के बीच आ गया और लुंड के सुपडे को उसकी छूट के छेद पर रखा और थोड़ा घिसने लगा वो आह करने लगी

Palli-ahhh भैया क्यों तड़पा रहे हो घुसेड़ दो न..

मैंने भी देर नहीं की और एक झटका लगाया और लुंड का टोपा उसकी टाइट छूट में फँस गया और फिर मैंने धीरे धीरे उसकी छूट में झटके मरते हुए अपना पुअर लुंड घुसेड़ dia....aahhhhhh क्या सुकून कील रहा था मेरे लुंड को उसकी टाइट छूट में ghuske......main उसे छोड़ने लगा





पल्ली- ओह्ह्ह्ह भैया कितना बड़ा लुंड है तुम्हारा... छूट को अंदर तक फाड़ देता है....

ममता च- आह्हः नसीब वाली है तू बेटी की अभी से तुझे ये लुंड मिक गए छुड़वाने के लिए... आअह्ह्ह्हह और ये तेरी क्या तेरी माँ की छूट भी फाड़ देते hain....aaahhhh अज्ज मेरा बछ्ह फाड़ अपनी चची की छूट को अह्ह्ह....

ऐसे hi कुछ देर छोड़ने के बाद हमने जगह बदल ली अब मैं चाची को छोड़ रहा था और अनुज पल्ली को.... मैं चची को छोड़ते हुए उनके चूतड़ों को मसल रहा था वहीं पल्ली पीछे hokar...mere निप्पल्स चूस रही थी और अनुज पल्ली की छूट में लुंड के प्रहार कर रहा था... फिर अनुज ने बोलै तो हमने एक बार फिर से जगह बदली माँ बेटी को बदल बदल छोड़ने में हम दोनों भाइयो को बड़ा मज़ा ा रहा था फिर...

अब मैं लेता हुआ था पल्ली मेरा लुंड छूट में लेकर उछाल रही थी वहीं चाची मेरे बगल में लेती थी और अनुज उनकी छूट उनकी टंगे के बीच खड़े होकर मार रहा था





चाची ने अपने होंठों को आगे बढाकर मेरे होंठों पर रख दिए और हम एक दुसरे को होंठो को चूसने लगे फिर हम दोनों को अपने होंठो पर जीभ महसूस हुई तो देखा पल्ली हमारे होंठों पर जीभ फिरा रही है और फिर हम तीनो hi जीभ भर निकल कर एक दुसरे की जीभ चूसने lage...phir थोड़ी देर बाद ये hi शामे चीज़ उन दोनों ने अनुज के साथ भी की....

फिर हमने जगह बदली तो अब मैंने जाकर ममता चची को घोड़ी बनाया और उनकी छूट में लुंड दाल दिए और दो चार झटके मारे और लुंड उनकी छूट से निकल के उनकी गांड में दाल dia...or गांड मरने लगा चाची आआह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह करने लगी उधर अनुज ने भी पल्ली की गांड को भेद दिए था वो भी चिल्लाने लगी...

पल्ली- अह्ह्ह मा .मेरी गांड पहात गयी आअह्हह्ह्ह्ह देखो माँ कैसे दोनों भाई मिलकर हम दोनों माँ बेटी को गांड में अपना मुसल घुसेड़ रहे हैं...

ममता च- हाँ बेटी मरवा ले अपनी गांड ाः बंजा की रैंड अपनी माँ की तरह....

और मैंने हाथ लेजाकर चची के छूट के डेन को मसलने लगा वो और गरम हो gayi...ek तरफ गांड में इतना बड़ा लुंड ऊपर से छूट के डेन का मसले जाना वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ने lagi...jaise hi वो झड़ी मैंने अनुज से इशारा किआ जगह बदलने के लिए अब मैं पल्ली के पीछे आया और अपना लुंड उसकी गांड में घुसेड़ दिए वो उईईईईई माँ कर गयी क्यूंकि मेरा लुंड अनुज से बड़ा था तो उसे थोड़ी तकलीफ hui...udhar चाची के मुँह से भी निकला हाँ बच्चा डालदे और अनुज ने अपना लुंड चची की गांड में घुसेड़ दिए था हम दोनों माँ बेटी की गांड मरने लगे





दोनों माँ बेटी एक दुसरे के सामने गांड मरवा रही thi...dono का चेहरा एक दुसरे से टच हो रहा था और बीच में वो एक दुसरे को होंठो को चूस भी रही थी फिर मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और तेज़ी से पल्ली की टाइट गांड में लुंड को अंदर बहार करने लगा और पल्ली चिल्लाते हुए झड़ने लगी तो चची ने उसके मुँह पर अपना मुँह रख दिए और पल्ली की आवाज़ बंद हो गयी... फिर मैंने लुंड पल्ली की गांड से निकला और अनुज ने चची ki...maine चची और पल्ली को 69 में एक दुसरे के ऊपर लिटा dia...chachi नीचे थी पल्ली ऊपर चची की गांड खत के बहार की तरफ थी मैं खत के किनारे पर गया ोड पल्ली चची की छूट चाट रही थी तो मैंने उसके चेहरा पर अपना लुंड से ठोकर मारी तो उसने मेरा लुंड मुँह में भर किआ और चूसने लगी फिर उसने मेरा लुंड अपने मुँह से निकला और लुंड के टोपे को अपनी माँ के गांड के छेद पर रख दिए और मैंने झटका लगा कर लुंड पेल दिए और पल्ली फिरसे चची की छूट चाटने lagi...udhar अनुज पल्ली के पीछे जाकर उसकी गांड में लुंड पेल रहा था ...और चची पल्ली की छूट चाट रही थी और अपनी बेटी की गांड में अनुज का लुंड आता जाता हुआ देख रही thi...anuj के ाँद चाची के माथे से टकरा रहे थे...

इस पोजीशन में दोनों माँ बेटी को दोहरा मज़ा मिल रहा tha...ek तरफ गांड में लुंड और तो दूसरी तरफ दोनों माँ बेटी एक दुसरे की छूट चाट रही thi...kaafi कामुक दृश्य था ye....jisse देखकर मैं और अनुज भी काफी गरम हो गए और बहुत तेज़ गांड मरने lage....phir पहली चीख पल्ली की निकली और वो दोबारा से झड़ने lagi...or चची के ऊपर से साइड में लुढ़क गयी उधर चची भी झटके नहीं सह पाई और झड़ने लगी .... मैं और अनुज भी झड़ने के करीब थे जब तो जैसे hi चची और पल्ली की साँसे थोड़ी ठीक हुई तो मैंने फिर से पल्ली को पकड़ा और गांड में लुंड दाल के तेज़ तेज़ धक्के लगाए और करीब 10- 15 झटको में hi मैंने पल्ली की गांड को अपने रास से भर dia...udhar अनुज ने भी चची की छूट में अपनी मलाई उढेल di...or हम दोनों भाई बैठ कर उन्हें देखने लगे....

पल्ली ने झट से अपना मुँह चची की छूट से लगा दिए और छूट से बहते हुए अनुज के रास को चाटने lagi.....or फिर खुद चची को लिटा कर अपनी गांड उनके मुँह पर रखड़ी और मेरा रास पल्ली की गांड से निकल कर चची के मुँह पर गिरने laga...jise चची पीने lagi...main उन्हें देखते हुए सोचने लगा के ये माँ बेटी वासना में कितनी आगे निकल गयी hain...par चुदाई का अगर माज़व लेना है तो ऐसा hi होना पड़ता है खुद पर रोक लगा कर क्या मज़ा जो पसंद आये वो सब कुछ करो.. फिर मैंने और अनुज ने कपडे पहने और हूँ उन दोनों को बोलकर अपने घर आ गए...

घर आये तो काफी लेट हो गया था माँ ने खाना लगाया तो हमने खा lia...meri और माँ की अब भी कोई बातचीत नहीं hui...maa ने खाने के साथ hi दूध भी दे dia...main खाना खा कर बुआ के कमरे की तरफ गया और गेट को धक्का दिए तो वो बंद था मुझे भी लगा शायद थके होने की वजह से सो गयी होंगी और मैं भी आज पूरे दिन काम कर के और अब चुदाई करके थक गया था तो मैंने भी सोना hi ठीक समझा और अपने कमरे में गया तो देखा विनीत भी सो चूका था तो फिर मैं भी सो गया...

अगली सुबह मैं जाएगा तो ख्याल आया हमें आज बुआ के यहाँ जाना hai.Hum सब लगन के लिए जाने वाले इसलिए कल hi पापा ने राजन चाचा को बाघ की और भैंसो वगेरा की देखभाल के लिए बोल्दिए था...

उठ कर मैं फ्रेश हुआ और हॉल में आया तो वहां सब लोग मौजूद थे फिर माँ ने सबको नाश्ता dia...Bua ने मुझे अपने पास बिठा लिए और मेरे सर में हाथ फेरने lagi...maine नाश्ता किआ और बुआ ने भी मेरे साथ अनुज और पापा और विनीत ने भी कर lia...tabhi पापा बोले...

पापा- तुम लोग जल्दी तैयार हो जाना सरे मैंने टैम्पो और गाडी वाले को बोल्दिए hai...or जोगिन्दर भाई साब की गाडी भी ले ली hai...tampo वाला 11 बजे तक आ जायेगा...

Me-theek है पापा, हम लोग सामान चढ़ा कर hi नाहा लेंगे नहीं तो बेकार में फिर से गंदे हो जायेंगे...

Papa-theek है मैं गाडी लेकर आता हूँ तुम लोग तैयार हो जाओ ...

फिर माँ और बुआ ने घर का सारा काम निपटाया और मैं और अनुज बाघ में जो काम था वो ख़त्म कर के आये विनीत पापा के साथ गया था गाडी lene...bapis आते आते 11 बज गए हम लोगो को तो पहुंच कर 10 मीन्स आराम किआ तो पापा और विनीत गाडी लेकर आ गए साथ में टैम्पो भी ा गया...

हम लोगो ने जो भी बड़ा सामान था वो टैम्पो में चढ़ा दिए... जैसे बीएड, फ्रिज , अलमारी, और भी तो वो पूरा भर गया फिर भी बहुत सा छोटा सामान बच gaya...fruits के टोकरी, कपडे, टीवी, किचन का samaan....to पापा ने बोलै के इसे गाडी में डाल्दो जब जायेंगे तो एडजस्ट करके बैठ जायेंगे... जब सामान कैसे भी कर के कई बार लगा कर देखा तो गाडी करीब करीब पूरी भर गयी. गाडी क्षुव थी जिसमे पीछे भी बैठ सकते hain..tampo वाले को हमने पहले hi भेज दिए था अब दिक्कत थी की सरे लोग और सामान गाड़ी में कैसे आएगा ... फिर भी जैसे तैसे लगाके हम लोग नहाने चले गए और तैयार हो gaye...bapis आकर एक बार और कोशिश ki..but वो hi हुआ जगह ड्राइवर की सीट को छोड़कर बस 3 लोगो की बच रही thi..or हम लोग थे 5 ... मैंने बोलै आप लोग निकल जाओ मैं और अनुज बस से आ जायेंगे बूत बुआ बोली नहीं सब साथ में hi jayenge..mere बच्चे पीछे नहीं रहने chahiye...to अनुज मज़ाक में बोल पड़ा..

अनुज- हम लोग एक दुसरे की गॉड में बैठके जा सकते hain....he हे हे ..

में- अनुज मज़ाक मत कर अभी...

बुआ- मज़ाक क्या सही तो कह रहा है थोड़ी थोड़ी देर बैठते रहेंगे बदल बदल कर और रुक रुक कर जायेंगे तो आराम से पहुंच जायेंगे...

पापा को भी ये आईडिया ठीक लगा थोड़ा

पापा- देखलो भाई मैं तो गाडी चलाऊंगा मुझे तो कोई परेशानी नहीं है बाकी तुम बिठा सकते हो तो देखलो...

माँ- अरे हो जायेगा ऐसे कोई पीछे रह कर बाद में आये वो भी ाचा नहीं है...

बुआ- हाँ तो ठीक है थोड़ी देर की बात है करलेंगे एडजस्ट... कर्मा ाचा हुआ तूने पजामा hi पहना है वहां जाकर बदल लिओ ये hi पहने रख जीन्स वगेरा में दिक्कत होगी...

Me-theek कह रही हो बुआ आप..

और ऐसे करके बुआ ने सबको मन लिए... मैंने अनुज और विनीत ने फिर से अचे सामान लगाया तो 3 सीट्स निकली एक तो ड्राइवर के वागल वाली पैसेंजर सीट तो बुआ ने बोलै

बुआ- अनुज बीटा तू ये बैग पकड़ कर आगे बैठ जा ...

अनुज भी खुश हो गया के आराम से आगे बैठ कर जाऊंगा...

बची दो seat...ek बीच वाली सीट पर और एक पीछे वाली पर बीच वाली सीट पर पेअर रखने की जगह पर एलसीडी और भी कई आइटम्स के डिब्बे रखे थे to...wo आगे से बिलकुल ब्लॉक हो गया tha...matlab पापा और अनुज अपनी सीट के पीछे नहीं देख सकते थे और जो बीच वाली सीट पर बैठेगा उसे अपने पेअर ऊपर करके और अपनी पीठ खिड़की पर टिका के बैठना था क्यूंकि नीचे पेअर रखने की जगा नहीं thi....halanki सीट पर दो एक आदमी से थोड़ी सी ज़्यादा के लिए जगह thi...ab पीछे वाली सीट पर बस एक बन्दे की जगह थी और बीच में सामान होने की वजह से सिर्फ गर्दन को थोड़ा साइड लेजाकर खिड़की की तरफ बैठो तो hi बीच वाली सीट दिख रही थी...

अब ये डीडे करना था क कौन कहाँ बैठेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी बुआ ने ली और और बोली

बुआ- मैं तो अपने लाल के साथ पीछे जा रा रही हूँ.. क्यों कर्मा थोड़ी देर तो अपनी बुआ का वजन उठा hi सकता है न...

में- बुआ थोड़ी देर क्या आप जब तक चाहो आप तो बहुत हलकी हो..

मेरी बात सुनकर सब हंसने लगे तो बुआ ने मुझे एक हलकी सी चपत लगाई

बुआ- चल बदमाश अब बोल मत और चल अंदर...

मैं चढ़ा और पीछे बैठ गया फिर उसके बाद बुआ भी मुश्किल से आई और मेरे ऊपर बैठ गयी... मुझे कोई दिक्कत नहीं hui...bua के बैठने se...maine जितना सोचा था बुआ उससे काफी हलकी thi...phir माँ चढ़ी और दोनों पेअर सीट के ऊपर रखकर बैठ गयी उनकी पीठ विंडो की तरफ थी लुफ्त wali...or मैं पीछे राइट में बैठा था तो मैंने सर आगे कर के देखा तो मुझे उनका पूरा सामने का हिस्सा दिख रहा था... फिर उनके पीछे विनीत भी घुस गया... पर उनके लिए एक चीज़ अछि थी के माँ को विनीत के ऊपर नहीं बैठना पड़ा बस साथ में बैठे the...jab वो बैठ गए तो बुआ ने उन्हें बिना देखे hi बोलै...

बुआ- विनीत देखना ममी को कोई परेशानी न हो और भाभी जब दिक्कत हो तो बोल्डेन और आप यहाँ या अनुज की जगह पर बैठ जाना..

माँ- नहीं अभी तो सब ठीक hai..aap लोग अचे से बैठे हैं...

बुआ- हाँ कर्मा को तो वैसे भी मैं हलकी लगती हूँ तो कोई दिक्कत hi नहीं है...

ये सुनकर सब हंसने lage...or पापा ने गाडी स्टार्ट की और चल diye...maine अपना सर राइट विंडो से टिका लिए और बुआ ने अपनी लेफ्ट साइड में तक ले li..or हम आराम से चल दिए...

करीब 150 कम जाना था सफर तो बस दो घंटे का था पर गाँव के रस्ते वैसे hi थे उबड़ खाबड़ तो गाड़ी भी उछाल उछाल कर चल रही थी...

शुरू के 10 मिनट्स तो सब ठीक रहा बूत फिर उबड़ खाबड़ रास्तों की वजह से जो गाडी उछाल रही thi...to बुआ भी उछाल रही थी मेरी गॉड में और उनके बड़े बड़े चूतड़ मेरी गॉड में इधर उधर हो रहे the...mera लुंड उनकी गांड के स्पर्श से जीवित होने लगा और अपना कद बढ़ने laga...phir मुझे ख्याल आया के मैं लुंड के बारे में तो भूल hi gaya..upar से ये pajama..jeans में तो दबा रहता पाजामे में कैसे दबेगा... अगले 5 मीन्स में लुंड पूरी तरह से टाइट होगया और बुआ की गांड उसके ऊपर उछाल रही thi...unhe भी कुछ चुभा तो बुआ ने मेरी तरफ एक बार देखा और कोई रिएक्शन नहीं दिए.... पर मेरे लिए तो मुश्किल होता जा रहा tha...unke चूतड़ों से दबने से लुंड में दर्द भी हो रहा था तो मेरे हाथ खुद बा खुद बुआ की कमर पर पहुंच गए जिससे थोड़ा सा वेट लुंड पर से काम ho...bua को भी पता चल रहा था शायद तो उन्होंने एक सेकंड के लिए अपने चूतड़ उठाये और फिर थोड़ा हिल कर बापिस बैठ गयी पर उससे ये हुआ के अब मेरा लुंड उनकी गांड की दरार में सेट था और हिलने की वजह से आगे पीछे हो रहा था जिससे मुझे थोड़ा ाचा लग रहा था और मैं भी गरम होता जा रहा था....

पर मुझे ये दर भी था के रात को तो बुआ ने कुछ नहीं बोलै पर अभी तो यहाँ हम सब है में किसी को भी पता चला तो क्या होगा और कहीं बुआ hi न कुछ करदे या बोलदे गुस्से में..... पर मैं कुछ नहीं कर सकता tha...kyunki बुरी तरह फंसा हुआ था लुंड भी और मैं bhi...phir मैंने नोटिस किआ जे जब रोड पर कोई गाढा नहीं था बुआ तब भी एक रदम में अपनी गांड आगे पीछे हिला रही hain...or उन्होंने अपनी आँखें बंद कर्ली थी और ऐसे तिकी हुई थी जैसे सोने की कोशिश कर रही ho..par उनकी गांड हिल रही थी और उनकी साँसे तेज़ होने की वजह से उनके बड़े बड़े छूछे भी ऊपर नीचे हो रहे थे...

मुझे लगा लगता है लुंड के रगड़ने से बुआ भी गरम हो रही हैं पर फिर भी मैं यहाँ कुछ नहीं कर सकता रिस्क बहुद बड़ा thA..poori फॅमिली है गाडी में पर लुंड था के बिलकुल टाइट हो चूका था और मैं भी बहुत एक्साइट हो रहा tha...pazame के अंदर होने से थोड़ा दर्द भी हो रहा था लुंड पर....

अचानक से एक झटका लगा शायद किसी गड्ढे का तो बुआ के चूतड़ उठे और बापिस मेरे लुंड पर गिरे जिससे मुझे दर्द हुआ और मेरे हाथ अपने आप hi उनकी कमर पर चिपक गए और उन्हें थोड़ा दबा dia....bua को भी शायद थोड़ा समझ आया के क्या हुआ तो उन्होंने मेरे चेहरे की और देखा तो मेरे चेहरे पर दर्द के भाव the....to बुआ ने अपनी गांड फिर से थोड़ी उठाई जिससे मैं लुंड को सेट karlun...par मुझे दर्द इतना हक़ के मैं तुरंत उनके पिछवाड़े के उठाते hi पजामा थोड़ा सा खिसका कर लुंड बहार निकल lia...ke इतना दर्द क्यों हो रहा है पर जब तक मैं अंदर डालता बुआ बापिस बैठ gayi...to अब मेरा लुंड नंगा उनकी साड़ी से टच हो रहा था और उसे गांड की दरार में फंसा रहा tha...bua ने भी फिर से अपनी गांड आगे पीछे करनी चालू kardi...but अचानक से उन्होंने मेरी और देखा उन्हें भी शायद अंदाज़ा हो गया था के मेरा लुंड पाजामे के बहार hai...wo थोड़ी हैरान लगी बूत फिर उन्होंने आँखें बंद कर्ली और गांड फिर से हिलने lagi...ab मुझे बहुत ाचा लग रहा था पाजामे के बहार होने की वजह से दर्द भी नहीं था ऊपर से बुआ के चूतड़ों में फंसे होने की वजह से और हार्ड भी हो गया था और उनकी गांड की दरार में घिस रहा था... मैं अब खुद को रोक नहीं प् रहा था और मैंने अपने हाथ उनकी कमर ोर्पेट पर चलने शुरू कर दिए ..बुआ ने कोई एक्सप्रेशन नहीं दिए और आँखें बंद करके बैठी रही.. मैंने इसको आगे बढ़ने का इनविटेशन समझा और हाथ ऊपर लेजा कर उनका पल्लू गिरा dia....main बेफिक्र था क्योंकि बुआ को कोई नहीं देख सकता था जब तक वो मेरी तरफ न आये बिलकुल राइट साइड में और वो विनीत या माँ के लिए मुमकिन नहीं था...

मैंने बुआ का पल्लू गिरा दिए और आराम से उनके पेट और कमर को सहलाने लगा और दबाने लगा...





बुआ अब भी अपने चूतड़ों को आँखें बंद करके मेरे लुंड पर घिसे जा रही thi......or मुझे मज़ा ा रहा tha...gaadi में सब इस समय शांत the...koi किसी से बोल नहीं रहा tha...par पीछे की सीट पर काफी गरमा गर्मी थी...

मैं बुआ का पेट मसलता तो उनका मुँह थोड़ा सा खुल jata...jaise आह्हः कर रही हो बूत बिना आवाज़ ke...bua को गरम देख कर मैंने भी लुंड से सोचना चालू kia...waise भी बहुत काम दर था के कोई हमें देख सकता था तो maine...or आगे बढ़ते हुए अपने हाथ बुआ के पपीता पर रख दिए ब्लाउज के ऊपर से hi...jinhe मैंने रात hi चूसा था पर उन्हें दबाने में मज़ा ा रहा था...

मैं फिर देर न करते हुए बुआ के ब्लाउज के हुक्स खोलने lga...bua ने फिर सेमेरी तरफ देखा और आँखें बंद कर ली और गांड का हिलना जारी rakha...ek एक करके मैंने बुआ के ब्लाउज के सरे हुक खोल्दिए ो रबुआ का ब्लाउज सामने से खुल गया... और उनके न ब्रा में कैद बड़े बड़े छूछे बहार ा गए...





मैंने बुआ की छूछीयो को हाथो में पकड़ lia...bra के ऊपर से hi और मसलने laga...bua के मुँह से हलकी सी आअह्ह्ह्ह निकल gayi...tabhi

पापा- सब ठीक तो है न पीछे

बुआ- अह्ह्म्म हाँ भैया सब ठीक है कोई परेशानी नहीं है...

में- हाँ पापा मैंने बुआ को अचे से पकड़ रखा है और ये बोलकर मैंने उनके छूछीयो को और दबा दिए...

पापा-- बीच में कैसा है सब...

माँ- ठीक है अभी तक तो कोई परेशानी हुई तो बताउंगी ....

फिर पापा ने गाने के वॉल्यूम को बढ़ा diya....bua की गांड अब मेरे लुंड पर ज़्यादा दबाब के साथ घिस रही thi...main भी उनके छूछीयो को मसल रहा था फिर मैंने उनकी छूछीयो को ब्रा के बहार निकल लिए एक एक करके और दबाने लगा....





बुआ के बड़े बड़े पपीतों से मैं मसल मसल के खेल रहा tha...bua की भी आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह निकल रही thi...or बुआ अपनी गांड अब मेरे लुंड पर पूरी तरीके से घिस रही थी...





मैं मज़े से सराबोर हो रहा tha..main जितना इसके बारे में सोचा ा मुझे उतना hi मज़ा आ रहा था और लुंड टाइट हो रहा था सोचके...

मेरे दोनों हाथ मेरी सगी बुआ के नंगे चुचो पर हैं और वो अपनी गांड मेरे नंगे लुंड पर घिस रही हैं जबकि पूरी फॅमिली उनके बीटा भी इसी गाडी mein...ye सव सोचकर मैं बहुत एक्साइट हो रहा था ...और बुआ के छूछीयो को ज़ोर से मसल रहा था मेरा लुंड अब फटने की हालत जैसा हो गया था तो मैंने बुआ के चुच्चो से हाथ हटाया और उनकी जांघ पर रख दिए...

हाथ रख कर मैं थोड़ा सा फिरने लगा और फिर धीरे धीरे उनकी साड़ी को ऊपर खींचने की कोशिश करने laga....par उनके बैठे होने की वजह से साड़ी ज़्यादा ऊपर नहीं हो रही थी बूत अब बुआ भी बहुत गरम हो चुकी थी तो उन्होंने खुद अपनी गांड उठाई और अपनी सारी को कमर तक उठा dia...panty में कासी हुई गांड की मुझे एक झलक dikhi...maine तुरंत पंतय को पकड़ कर थोड़ा नीचे खिसका दिए और बुआ बापिस बैठ गयी....

अह्हह्ह्ह्ह क्या फीलिंग thi...mera लुंड बुआ की नंगी गांड की दरार में घुसा हुआ था और घिस रहा था मेरे. लुंड के टोपे पर कुछ गीला महसूस हुआ तो फिर मुझे समझ आया की बुआ कितनी गरम हो चुकी है ...और बुआ ने अपनी कमर का हिलना जारी रखा और मैंने उनकी छूछीयो को दबाना.... आआह्ह्ह्हह क्या मज़ा ा रहा tha...mera लुंड उनके बड़े चूतड़ों के beech...bua तो जैसे अब एक नशे में थी और मेरे लुंड को फील कर रही थी bas....phir जब मुझसे और नहीं रुका गया तो मैंने लुंड को बुआ की छूट में डालने की कोशिश की तो बुआ तुरंत आगे की तरफ खिसक gai....main बुआ के चेहरे की तरफ हैरत से देखा तो उन्होंने मेरी आँखों में देखकर ना मैं सर हिला dia....munhe अजीब लगा के इतना टाइट हो गया है लुंड और छोड़ने को मन कर रही hai....mera लुंड इतना तड़प रहा hai....par मन क्यों???? मैंने एक बार दोबारा कोशिश की तो बुआ ने दोबारा वही kia...main चीड़ गया बुआ की इस हरकत पर बूत कुछ बोलै नहीं और क्या कर भी सकता tha...to ऐसे hi शांत बैठा रहा बूत मेरा लुंड फूलता जा रहा था बुआ ने भी अब कमर हिलना बंद कर दिए tha...ke तभी अचानक से पूरी गाड़ी uchali...bua भी मेरे ऊपर से उठी गद्दे की वजह se....main भी थोड़ा uchala...or जब हम बापिस गिरने लगे सीट पर तो मेरा लुंड सीधा हो गया और जब बुआ गिरी तो उनकी छूट का छेड़ बिलकुल लुंड पर आ गया और लुंड बुआ की छूट को चीरा ता हुआ घुस gaya....or बुआ की चीख निकल गयी....

बुआ-- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

Papa-kya हुआ shashi...tu ठीक तो है na...gaadi रोकू मैं...

माँ- इतनी तेज़ चीखी क्यों सब ठीक है..

बुआ कुछ बोलने की हालत में नहीं थी पर हिम्मत जूता के बोली..

Bua-nahi bhaiyaaaaaaaaaaaaaaa मत रोको मैं ठीक हूँ बस्सस वोऊ उछलने की वजह से दर लगा इसलिए चीख निकल गयी......

Papa-karma कोई परेशानी तो नहीं..

Me-nahi पापा मैं तो बिलकुल परफेक्ट जगह हूँ... अब तो बिलकुल कम्फर्टेबले हूँ...

ये कहकर मैंने कमर का थोड़ा सा झटका जितनी मैं उनके नीचे रहकर हिला सकता यह दिए बुआ की छूट में....

पापा-- ठीक है फिर आराम से बैठो

और फिर म्यूजिक बढ़ा dia....bua ने मेरी तरफ थोड़ा गुस्से से देखा बूत मुझे अब कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था मेरा लुंड बुआ की छूट में tha...or अब मैंने नीचे से अपनी कमर हिलनी शुरू की ...जितनी तेज़ में कर सकता था मैं करने लगा और बुआ को छोड़ने laga...main बहुत खुश था जिस बुआ के पीछे इतना पागल था आअज मेरा लुंड उसकी छूट में है वो भी तब जब उसका बीटा कुछ hi दूरी पर बैठा hai.....bua की साँसे बहुत तेज़ चल रही थी बुआ अपनी जीभ से बार बार अपने होंठों को चाट रही थी और फिर बुआ ने अपनी कमर हिलनी शुरू ki....main बहुत हक्के हलके जहतजो से बुआ की छोड़ रहा था ...बुआ भी अब मेरे लुंड के मज़े ले रही thi......phir मैंने बुआ को थोड़ा साइड की तरफ धकेल दिए जिससे थोड़ी सी जगह बने और मैं बुआ की छूट में लुंड पेलने लगा....





वो भी अपनी कमर हिलाकर मज़े ले रही thi....mai भी उनके बड़े बड़े पपीता को दबाते हुए छोड़ने laga.....main बुआ को बुरी तरह से छोड़ना चाहता था ...पर अनहि इससे ज़्यादा तेज़ धक्के नहीं मार सकता था ... मेरा लुंड बुआ की छूट में जाकर बाहर खुश था ...उनकी छूट बहुत गरम थी.... और मेरे लुंड को निचोड़ रही thi....main हलके हलके झटको से बुआ की छूट को खुश कर रहा tha....ye नज़ारा और सिचुएशन hi इतनी कामुक थी एक बुआ अपने भतीजे से चुद रही थी.. पूरी फॅमिली के होते huye...uske छूछे बहार the.....kareeb 5 मंद बाद जब बुआ मेरे झटको को सह नहीं पाई ोड झड़ने lagi....bua पीछे को तरफ मेरी ऊपर गिर गयी और सांसे आराम में आई उनकी तो मैं बुआ को अब भी छोड़ रहा था.... मैंने सोचा कोई देख तो नहीं रहा और सब ठीक है ये देखने के लिए मैंने साइड में सर किया और आएगी देखा तो जो देखा उसे देखते hi मेरे लुंड से रास की पिचकारियां छूटने लगी और बुआ. की छूट में भर dia....meri नज़र हैट नहीं रही थी मेरे सामने के सन से और इधर मैं बिलकुल बुआ की बॉडी से चिपक गया और अपना लुंड जड़ तक बुआ की छूट में. पेल दिया और बचा कुछ रास भी उनकी छूट में छोड़ दिए .....

इसके बाद कर्मा ने क्या देखा जो वो झाड़ gaya...or आगे सफर में क्या क्या होता है वो सब अगली अपडेट mein...aaap प्लीज पढ़ते रहिये और कमैंट्स कोफ्ते रहिये....

शुक्रिया
 
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लास्ट अपडेट में अपने देखा के कैसे कर्मा गाड़ी में पिछली सीट पर बुआ को छोड़ता hai...or फिर झाड़ जाता है कुछ देखते हुए अब आगे...

अपडेट 21

मैंने बुआ की छूट में लुंड जड़ तक घुसेड़ दिए और उनकी छूट उपजे रास से भरदी और मैं उनकी बॉडी से पीछे से पूरी तरह से चिपक गया हम दोनों hi अभी सीट के ऊपर उठे हुए the...par मुझे कोई ध्यान नहीं था के क्या हो रहा है क्यूंकि मेरी आँखें तो अपने सामने जैम सी गयी thi....main समझ नहीं प् रहा था ये क्यों और कैसे हो रहा है....

मैंने देखा की माँ अपनी पीठ विनीत के सीने से टिका कर बैठी है और उनका ब्लाउज आगे से पूरा खुला हुआ hai...unki ब्रा नज़र ा रही है और विनीत का सर माँ के कंधे पर है और वो माँ के नंगे पेट और ब्रा के ऊपर छूछीयो पर हाथ चला रहा hai...main ये देख कर बिलकुल शॉकेड रह गया और थोड़ी जलन भी हुई... बूत मेरा लुंड झड़ने क बाद भी लोहे की तरह टाइट tha...maa की आँखें बंद थी और विनीत के हाथ माँ के बदन पर आगे पीछे रेंग रहे थे tabhi..mujhe एहसास हुआ के कोई कुछ बोल रहा hai...mujhe तो कुछ समझ नहीं ा रहा था फिर मुझे किसी ने चेहरे पर हाथ लगाया तो मैंने मुद कर देखा तो बुआ बोल रही थी धीरे धीरे से...

बुआ- कर्मा सीधा हो जा भैया गाड़ी रोक रहे हैं...

तो मुझे उनकी आवाज़ से थोड़ा होश आया और मुझे समझ आया वो आवाज़ पापा की थी और वो कह रहे थे की इस ढाबे पर रुक कर चाय वगेरा पीते हैं थोड़ा आराम भी मिल jayega...humein एक घंटा हो गया है...

ये ख्याल आते hi तुरंत मैं नीचे बैठा और मेरा लुंड बुआ की छूट से निकल gaya...par बुआ की छूट से मेरा रास बहकर बहार ा रहा tha...bua ने जल्दी से अपनी पंतय ऊपर की और अपने कपडे ठीक kiye...tab तक गाडी रुक चुकी thi...or जब माँ और विनीत निकल गए तो बुआ भी निकलने lagi...maine भी बड़ी मुश्किल से लुंड को पाजामे में एडजस्ट kia...or बहार आया तो सब लोग एक टेबल पर बैठे थे.... बुआ वाशरूम गयी थी पापा ने बताया..

मुझे समझ भी aaya...maine चाय ली और पीते पीते सोचने laga..ye जो भी गाडी में हुआ क्या tha...main खुश भी हूँ के मैंने बुआ को छोड़ लिए हाँ अचे से नहीं छोड़ पाया पर छोड़ तो लिए hi...or जब एक बार हो गया है तो दोबारा भी होगा him..par जो माँ का सन था उनका ब्लाउज खुला होना और विनीत उनके पेट पर और ब्रा के ऊपर छूछीयो पर हाथ फेर रहा था क्या माँ भी उसमे साथ थी क्या वो सो रही thi...mujhe समझ नहीं आ रहा था एक तरफ तो मुझे जलन भी हो रही थी विनीत से बूत एक और से देखा जाये तो मैं भी तो उसकी माँ को छोड़ रहा था तो उसने अगर कुछ किआ मेरी माँ के साथ तो गलत तो नहीं था पर फिर भी मुझे थोड़ी सी जलन हो रही थी बूत मेरा लुंड अपोजिट hi था और इस पर भी वो टाइट tha...mujhe समझ नहीं आ रहा था क्या किआ. Jaye...tabhi बुआ भी आकर बैठ gayi...or चाय पीने लगी

पापा- कर्मा और विनीत तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं हुई न....

विनीत- नहीं मां जी...

Me-nahi पापा कोई परेशानी नहीं है बहुत आराम से आया मैं अब तक और इतना कहकर मैं बुआ की और देखकर मुस्कुरा दिए...

बुआ ने कोई रिएक्शन नहीं दिए और दूसरी तरफ देखने लगी तो मैंने नज़र घुमाई तो देखा माँ की नज़र मुझपर hi thi...or मुझे माँ की आँखों में थोड़ा गुस्सा दिखा...

Papa-to चाय वगेरा तो हो gaya...ab चलें...

में- हाँ चलते हैं...

माँ- शशि मैं पीछे बैठ जॉन कर्मा के पास वो मेरे पेअर थक गए थे सीधे किये किये...

ये सुनकर विनीत का चेहरा थोड़ा उतर gaya...bua का भी रिएक्शन कुछ समझ नहीं आया

बुआ- हाँ भाभी क्यों नहीं... बैठ जाओ.. मैं आगे बैठ जाउंगी...

और फिर हम गाडी की तरफ आ gaye...main अपनी सीट पर जाकर बैठ gaya...phir माँ आई और कुछ सोचते हुए मेरे ऊपर अपने बड़े बड़े चूतड़ रख कर बैठ gayi...phir बुआ और विनीत आगे बैठ गए और गाडी चलने लगी...

मेरा लुंड जो की पहले से खड़ा था माँ की गांड का स्पर्श पाते hi और कड़क हो गया... और माँ को भी गांड में चुभने laga...maa ने मेरी तरफ देखा और कुछ नहीं कहा फिर आगे देखने लगी... पर मुझे फिरसे गर्मी चढ़ने लगी तो मैंने अपने हाथ माँ की कमर पर रख लिए और गाडी के हिलने के साथ मैं उनकी कमर को दबाने laga...or अपना हाथ आगे पीछे ले जाने लगा पर अब भी मेरे हाथ साड़ी के ऊपर से माँ की कमर पर थे मैं तो उनके नंगे बदन को छूना छह रहा tha....maa मेरी बात बिन कहे hi समझ गयी और धीरे से मेरे कान में फुसफुसाते हुए बोली...

माँ- पल्लू hatade...waise भी तुझे तो यही चाहिए न...

मुझे उनकी ये बात ताने जैसे लगी और मैंने अपने हाथ उनकी कमर से हटा liye....or कुछ नहीं बोलै..

माँ- अभी क्यों झिझक रहा है रात में पेट पर चाटने में तो तुझे कोई परेशानी नहीं हुई...

मैं ये सुनकर चौंक गया और इस बात का मेरे पास कोई जवाब भी नहीं था तो मैं चुप hi बैठा रहा...

माँ- अब बोल क्यों नहीं रहा kuch...ab नहीं करना तुझे कुछ मेरे साथ...

मैंने भी गुस्से में कह दिए....

में- हाँ मुझे नहीं करना कुछ भी तुम्हारे साथ...

माँ- हाँ क्यों करेगा अब मेरे साथ तेरी बुआ है न अब तो उसी के साथ करेगा सब... मुझे सब पता चलता है कर्मा ...माँ हूँ मैं तेरी...

मैं ये सुनकर शॉकेड रह गया के माँ की बुआ और मेरे बारे में कैसे पता चल गया और मैं थोड़ा दर भी gaya...par थोड़ी हिम्मत जूता कर बोलै...

में- वो हाँ तो क्या hua...aapne करने नहीं दिए तो उनके साथ कार्लिअ उन्होंने मुझे चांटा भी नहीं मारा...

माँ मेरी बात सुनकर थोड़ा सोच में पद गयी और बोली..

माँ- ऐसा क्या कर दिए उसने जो मैंने नहीं करने दिए तुझे....

में- तुम्हे जानकर क्या करना है

माँ- तू मेरी और उसकी तुलना कर रहा है तो मुझे भी तो बता क्या क्या किआ उसने तेरे लिए.. एक एक चीज़ जननी है मुझे...

ये बोलते हुए माँ की आँखों में गुस्सा tha..main समझ गया के अब माँ को जो चाहिए वो दे दो नहीं तो मेरी खैर नहीं....

में- उन्होंने मुझे प्यार करने दिए..

माँ- कैसे करने दिए मुझे बता सब कुछ...

में- मैंने उनकी कमर को सहलाया पेट पर हाथ फेरा...

माँ- वो तो तूने मेरे साथ भी किआ hai...usne क्या ऐसा अलग किआ एक काम कर तू मुझे करके बता एक एक चीज़...

मैं समझ नहीं प् रहा था के माँ को क्या हो गया है क्या करूँ मैं अब माँ को बताऊँ या nahi...par मेरे पास और कोई ऑप्शन भी नहीं था..

तो मैंने ोहिर से हाथ माँ की कमर पर रख दिए और सहलाने लगा...

Maa-saree के ऊपर से सहलाया था उसे?

Me-nahi

Maa-to जैसे उसके साथ किआ वैसे hi कर बिलकुल..

Me-theek है..

मैंने माँ का पल्लू नीचे गिरा दिए माँ का नंगा चिकना माखन जैसा पेट खुल गया.. और मैं उस पर हाथ फिरने लगा





माँ के चिकने पेट पर हाथ फिरा के मुझे हमेशा से hi मज़ा आता tha....or अभी भी बहुत ा रहा tha...or इसका पता माँ को उनकी गांड के नीचे कठोर होते लुंड से चल रहा tha...main अचे से उनके पेट और कमर को मसलने laga...or उनकी सांसे भी तेज होने लगी तभी मैंने उनके काम में एक मिनट उठाने को बोलै तो उन्होंने अपने चूतड़ मेरी गॉड से उठाये और मैंने तुरंत अपने लुंड को पाजामे की गिरफ्त से आज़ाद कर lia...or बहार निकल दिए और माँ को कमर पकड़ कर बिठा लिए और अचे से अपना लुंड उनकी गांड की दरार में सेट कर दिए और फिर बोलै माँ अपने ये चूतड़ हिलाओ न आगे पीछे...

माँ मेरी तरफ देखने लगी...

Me-bua ऐसे hi कर रही थी...

तो माँ ने कुछ सोचा और फिर उनकी गांड मेरे लुंड पर घिसने शुरू हो gayi..mujhe मज़ा आने laga...maa के बड़े बड़े तरबूज़ों के बीच मेरा लुंड घिस रहा था था और फिर माँ को शायद ये एहसास हुआ के मेरा लुंड पाजामे से बहार है और उनकी गांड पर घिस रहा hai....unki साँसे भी अब गरम होने लगी thi...lund छूट और गांड पर लगातार घिस रहा था...

मैंने अब हाथों को और काम दिए और ब्लाउज के ऊपर से hi माँ के छूछीयो को सहलाने दबाने लगा...

Maa-tune उसके ब्लाउज के ऊपर से hi दबाये थे?

में- नहीं ब्लाउज खोल कर...

तो माँ ने मेरी तरफ देखा और झट से अपने ब्लाउज के सरे हुक्स खोल दिए और ब्रा सामने आ गयी....





मैं भी अब बहुत गरम हो गया था तो मैंने अब माँ के पेट पर हाथ फिरते हुए उनकी ब्रा में कैद छूछीयो को भी हाथों में थम लिया और दबाने laga...maa के मुँह से एक दबी हुई आअह्हह्ह्ह्हह निकल गयी... मैं माँ के चिकने और सेक्सी बदन से खेल रहा था और माँ अपनी गांड मेरे लुंड पर चला रही थी... मेरा लुंड बहुत टाइट हो गया था लगता hi नहीं था क मैं अभी कुछ देर पहले बुआ की छूट में झाड़ा hun...main माँ को मसले जा रहा था तभी मेरे दिमाग में कोई बात आई और

में- माँ तुम मुझसे तो सब पूछ रही हो बूत तुम भी तो विनीत के साथ क्या क्या कर रही थी...

माँ ये सुनकर थोड़ी चौंक गयी...

Maa-kya किआ मैंने...

में- तुम्हारा ब्लाउज खुला था और विनीत के हाथ तुम्हारे बदन पर थे ...वो क्या था कैसे हुआ....

माँ थोड़ी साँस भरते हुए...

माँ- मुझे एक तो पूरा शक था के तुम दोनों के बीच कुछ तो रहा tha..maine तुम दोनों की थोड़ी बहुत आवाज़ और शशि की आह्ह्ह्ह सुनी थी इसलिए तो ये जानकार मैं थोड़ी गरम हो गयी थी पर मैंने किआ कुछ नहीं विनीत ने पहले मेरी कमर पर हाथ रख दिए मैं सोने की कोशिश कर रही थी तो मेरी आँखें बंद थी तो शायद उसे लगा मैं सो रही hun...phir वो सहलाने लगा कब पल्लू हटा मुझे पता hi नहीं chala...phir मैं तेरी और तेरी बुआ के बारे में सोच रही थी तो पता नहीं क्यों मुझे उसके हाथो का स्पर्श ाचा लगा लेकिन फिर भी मैंने उसे रोकने की कोशिश तो की बूत फिर उसने ब्लाउज भी खोल दिए धीरे से तो मुझे फिर ाचा लगने लगा उसका हाथ फिरना और तब तक. तेरे पापा ने गाड़ी रोक di...phir तो तुझे पता hi hai...or विनीत आगे कुछ न कर पाए इसीलिए तो मैं तेरे साथ बैठी hun...aake..

मैं माँ की साडी बात समझ गया था और थोड़ा उत्तेजित भी हो गया और मैंने माँ की छूछीयो को दबाते हुए उन्हें ब्रा से बहार निकल लिए और दबाने लगा... मुझे बड़ा मज़ा ा रहा था





और अब माँ भी बहुत गरम हो गयी थी और अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह कर. रही थी जैसे जैसे मैं उनके छूछीयो को दबा रहा tha...mere लुंड का हाल भी बेहाल था मैं अपनी गर्दन आगे करके माँ को गर्दन पर चूमने लगा चाटने laga...or फिर माँ ने भी अपना चेहरा मेरी तरफ करके अपने होंठो को मेरे होंठों से मिला दिए और हम दोनों एक दुसरे को होंठो को चूसने lage....mere लुंड में अब उत्तेजना से दर्द होने लगा था मैं माँ को किश करते हुए उनकी छूछीयो को मसल रहा था फिर जैसे hi हमारे होंठ अलग हुए... मैंने माँ के चूतड़ों को पकड़ कर उठा दिए और उनकी साड़ी और पेटीकोट को उठाने लगा तो उन्होंने खुद अपनी साड़ी कमर पर पकड़ li...maa की पंतय में फँसी बड़ी सी गांड सामने आ गयी तो मैंने झट से हाथ पंतय की साइड में फंसाया और उसे उनकी गांड से नीचे खिसका दिए और माँ के बड़े चूड़ादो वाली गांड मेरे सामने ा गयी... मैं उसकी. सुंदरता को निहार hi नहीं पाया और माँ बापिस बैठ गयी...

माँ- (मेरे कान में धीरे से) ये सब भी किआ था शशि ने?

में- हाँ माआ अह्हह्ह्ह्ह

अब हम दोनों के लिए hi बड़ा गंभीर समय था मेरा लुंड नंगा माँ की नंगी गांड की दरार में फँस रहा था... मेरे दोनों हाथ कभी छूछीयो को दबाते तो कभी माँ के बड़े बड़े चूतड़ों को... माँ की गांड आगे पीछे होने की वजह से मेरा लुंड अब उनकी छूट के मुँह से लेकर गांड तक रगड़ रहा था... मुझे लुंड गीला महसूस हो रहा था जो की माँ की छूट के गीले होने की वजह से था... मैं ये जानकार के माँ की छूट मेरी वजह से गीली हो रही है अपना रास बहा रही है और उत्तेजित हो गया और मैंने हाथ ऊपर करके माँ की छूछीयो को मसालदिअ और माँ के होंठों को चूसने laga..hontho को चूसते चूसते मैंने उनके कंधे से ब्लाउज को उतर दिए और फिर एक hi झटके में ब्रा को भी निकल दिए अब माँ ऊपर से बिलकुल नंगी थी उनकी सारी और ब्लाउज कमर पर the...meri माँ ऊपर से बिलकुल नंगी होकर अपने hi बेटे के नंगे लुंड पर अपनी नंगी गांड घिसते huye...uske होंठ चूस रही थी जबकि उसके पति और दूसरा बीटा कुछ hi दूरी पर थे और साथ में ननद और भांजा भी tha....aisa कामुक दृश्य की कल्पना करके hi..lund और छूट अकड़ जाएं और हमारे साथ तो ये सच में हो रहा tha...maa ने मेरे उनके ब्लाउज और ब्रा उतरने पर कोई ऐतराज़ नहीं किआ बल्कि मेरी मदद की जिससे साफ़ पता चल रहा था के माँ कितनी गरम हो चुकी हैं... मैं भी उत्तेजना के चरम पर था मेरा लुंड फटने को हो रहा था बूत आज मैंने सोच रखा रहा के कुछ किये बिना नहीं jhadunga...maine हाथो से माँ की जांघो को फैलाया और फिर जैसे hi मेरे लुंड का टोपा माँ की छूट के द्वार पर आया मैंने अंदर घुसेड़ने की कोशिश की बूत माँ आगे हो gayi...main झुंझला गया के ये दोनों hi मुझे परेशां कर रही हैं पहले बुआ और अब maa....maine माँ के छूछीयो को दबाता और फिर से एक हाथ से माँ के चूतड़ों को उठा कर अपनी गांड का नीचे से धक्का लगाया तो मेरे लुंड का टोपा माँ की छूट के द्वार में लग gaya....naa hi वो अंडे था और न hi बहार





मेरे और माँ दोनों के मुँह से hi दबी हुई सिसकारियां निकलने लगी माँ का मुँह तो खुला hi रह गया थोड़ी देर के liye....hum दोनों जैसे एक hi जगह jam.gaye ho...na माँ हिल रही थी और न hi main...achanak माँ ने पुछा

माँ- आह्ह्ह्ह क्या शशि ने ये भी किआ था ....

में- ह्म्मम्म्म्म

ये बोलके मैंने सर हिला दिए ...

Maa-kya ाचा ..आह्ह्ह्ह पर बीटा मैं नहीं कर सकती अब रुक जाते हैं बहुत आगे आ गए हम....

और ये कहकर माँ फिर उठाने लगी मेरे लुंड से....

पर मैं इस बार खड़े लुंड पर धोखा खाने के मूड में बिलकुल भी नहीं था और न hi मेरा lund.....mere लुंड को छूट चाहिए थी...

जैसे hi माँ ये बोलकर उतने को हुई तो मैंने उनकी कमर पकड़ कर नीचे की तरफ धक्का लगाया और अपनी कमर का ऊपर की तरफ.... जिससे वो हो गया जो किसी भी बेटे का एक ुंकाः सपना होता hai....jiske लिए शायद मैं जी रहा tha...or जो अब तक की मेरे जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी थी.....

मेरा लुंड माँ की छूट को चीरता हुआ आधा उनकी छूट में घुस gaya...or माँ की एक तेज़ चीख निकल गयी....





चीख सुनके सबका ध्यान हम पर गया...

Papa-kya हुआ सब ठीक तो है न....

माँ की आँखें बंद थी वो मुझे बोलने की हालत में नहीं लग रही थी मैं भी होश में नहीं था फिर भी सिचुएशन को सँभालते हुए बोलै..

Me-kuch नहीं पापा वो माँ की उंगली डाब गयी थी सामान से इसलिए सब ठीक है...

पापा- तेरी माँ ने तो डरा hi दिए...

अनुज- हाँ इतनी तेज़ चीखी माँ...

पर बुआ और विनीत कुछ नहीं बोले मेरा ध्यान भी नहीं गया....

मेरा ख्याल बापिस अपने लुंड पर आया के मेरा लुंड मेरी सपनो की रानी मेरी माँ की छूट में hai...or ये सोचकर मेरा लुंड माँ की छूट में और फूल gaya...maa की आँखें अब भी बंद thi...par फिर माँ की बॉडी अचानक से नीचे मेरी गॉड में गिरी और मेरा लुंड माँ की छूट में पूरा घुस gaya....mujhe आजतक ऐसा सुकून किसी छूट में नहीं मिला था और नहीं इतनी गर्मी.... मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने सब पा लिए ho...maa ने अचानक अपनी आँखें खोली और पीछे मुड़कर मेरी आँखों में देखा कुछ नहीं बोली और कमर को थोड़ा सा उठाया जिससे लुंड कुछ इंच बहार निकला और माँ फिर से बैठ गयी और फिर वो पीछे मुझ पर गिर gayi...unki नंगी पीठ मेरे पेट और सीने पर थी उनका सर मेरे कंधे पर था और उनकी कमर अचानक से झटके खाने lagi...or माँ की बॉडी अकड़ सी गयी और तब मुझे समझ आया की माँ क्जद रही है मेरे लुंड पर... अपने बेटे के लुंड par...aahhhhhhhh और ये ख्याल आते hi मैंने एक बात फिर अपनी गांड का झटका मारा मेरा पूरा लुंड जड़ तक माँ की छूट में घुस gaya...main माँ के चूतड़ों से चिपक गया और फिर मेरे लुंड ने भी अपने रास की पिचकारियां माँ की छूट में छोड़ दी... मेरा रास ख़त्म होने का नाम hi नहीं के ले रहा tha....bas निकले जा रहा था और एक आरसे के बाद हम दोनों का झड़ना बंद हुआ तो दोनों वैसे hi बैठ गए माँ बिलकुल मेरे से तिकी हुई आँखें बंद करके पड़ी थी मेरा लुंड अभी भी माँ की छूट में था पर हैरानी की बात थी की अब भी टाइट था...

तो कर्मा का टाइट लुंड आगे क्या गुल खिलायेगा जान्ने के लिए पड़ते rahiye...or कमैंट्स करते रहिये.... शुक्रिया
 
लास्ट अपडेट में अपने देखा के कर्मा के साथ पीछे माँ बैठ्जाति है और आखिर में कर्मा अपनी माँ की छूट में लुंड घुसेड़ hi देता है अब आगे...

अपडेट 22
मैं माँ की गांड से चिपका हुआ था और मेरा लुंड पूरी तरह से माँ की छूट में जड़ तक घुसा हुआ था... हम दोनों hi झाड़ चुके थे मेरा लुंड अब भी टाइट tha...maa तो जैसे बिकुल बेजान हो गयी थी... और साइड के सामान पर आँख बंद करके तिकी हुई thi...uski साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी... बड़ी बड़ी छुछियां ऊपर नीचे हो रही thi...maine भी अपना सर आगे वाली सीट पर टिका दिए और थोड़ा साँसों को कण्ट्रोल करने लगा... मैंने फिर कुछ मीन्स बाद सोचा एक बार आगे भी देखलूं कोई प्रॉब्लम न हो जाये चेक कर लेता हूँ माँ वैसे भी नंगी हैं ऊपर से बिलकुल...

तो मैंने फिर से सीट के साइड गर्दन निकली तो सामने क्या नज़ारा था उसे देखते hi मेरा लुंड माँ की छूट में फूलने लगा... और मेरे हाथ माँ के चूतड़ों पर अपने आप कास gaye...or मैं कमर मैं झटका भी देने laga...jisse माँ ने थोड़ी हरकत की और वैसे रहते हुए hi अपनी कमर गोल गोल घूमने lagi...pichli सीट पर चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था तो बीच वाली सीट पर भी गर्मी कुछ काम नहीं थी...

मैंने जब देखा तो पाया के बुआ का ब्लाउज खुला हुआ है और उनके दोनों बड़े बड़े पापीती ब्रा के बहार हैं और विनीत अपनी माँ के पपीता को मसल रहा है...





Bua ka muh thoda aahahhh ke sath khul raha tha wohin vineet ke chehre par sirf vaasna thi...wo bas bua ke chuchhiyo ki taraf dekh kar unhe masal raha tha...apani maa ke badan se khelne mein usko masalne ka sukh hi alag hota hai or wo hi sukh vineet ke chehre par tha...

Ye dekh kar mujhse bhi raha nahi gaya or main maa ki choot mein dhakke lagane lagaa...jisee maa. Ki aankhein khul gayi...or maine aage dekhte huye hi maaa ko chodna chalu kar dia...phir maine ek baar maa ki taraf dekha to wo mujhe hi dekh rahi thi... Or unhone apana chehra aage badha dia or mainr bhi hum dono ke honthon ka milan ho gaya ab maa bhi apani kamar hila. Hila kar mera poora sath de rahi thi but hum dheere se hi kar sakte the nahi to pakde jane ka dar bhi tha... phir humare honth alag huye or maine ek baar phir beech wali seat par dekha to bua or Vineet kiss ksr rahe the. Or Vineet ke hath ab bhi bua ke nange chuchho par chal rahe the.....maa mujhe dekh rahi thi or isharo mei poocha kya hua...maine naaa mein sir hila dia but maa ne apani gardan aage karli or dekhne lagi...or maa ne aage Kuch der dekhne ke baad hairat bhari Nazaron se mujhe dekha...mujhe maa ki choot apane lund par tight hoti hui mahsoos hui...or ab maa apani Choot main mere lund lekar zor zor sse uchalne lagi...ek hi din mein itne sare jhatke pahle Vineet ka maa ke badan par hath chalana phir mera unko chodna or ab bua or Vineet ki ye Rasleela dekh kar maa ki choot buri tarah bah rahi thi...maine bhi kaskar unke chuchhiyo ko masalte huye unhe neeche se chodne laga...

Gaadi mein sachmuch jaise kisi ne vaasna ka mantra phoonk dia ho...ek seat par ek beta apani maa ki nangi chuchhiyo ko masal kar maze le Raha tha to wohin doosri or ek beta apani maa ki choot mein lund daalkar use chod raha tha...dono ke beech kuch foot ka fasla tha wohin ek maa ka pati or doosra beta bhi kuch hi doori par tha to ek maa ka bhai or uski family aas paas thi... Aise samay mein aisi Rasleela jitni riski thi usse kahin zyada kamuk thi... Maa mere lund par apani gaand ghuma rahi thi। Or lund ko aage peeche kar rahi thi...mere hath maa ke kamar to kabhi unke chuchhiyo ko masal rahe the...





मैं और माँ जितनी तेज़ चुदाई कर सकते थे कर रहे थे... और बीच बीच में बुआ और विनीत को भी झांक झांक कर देख रहे थी की तभी बुआ ने अपनी सारी ऊपर की और पेटीकोट को भी कमर तक कर दिए और अपनी पंतय साइड करके अपनी उँगलियों से छूट को सहलाने लगी विनीत ने जैसे hi ये देखा वो भी पागल सा हो गया था मेरा और माँ का भी बुरा हॉल हो गया tha..or चुदाई की स्पीड बढ़ा di...hum दोनों जितनी तेज़ और अचे से चुदाई करना चाहते थे कर नहीं प् रहे the..upar से बुआ और विनीत की रासलीला और उत्तेजित कर रही थी... तभी मैंने और माँ ने देखा की विनीत का हाथ भी अपनी माँ की छूछीयो से हटकर धीरे धीरे नीचे की तरफ आ रहा है और फिर विनीत ने अपना हाथ उनके पेट पर पगिराते huye...bua की छूट पर रख dia...or अपनी माँ की छूट को महसूस करते hi उसका मुँह खुला और आँखें बंद हो gayi...vineet कस हाथ खुद hi बुआ की छूट पर टाइट हो gaya...vineet के चेहरे से पता लगा के वो अपनी माँ की छूट को छूने से झाड़ गया है... और अपने पंत में hi धार मरने laga...udhar जैसे hi विनीत का हाथ बुआ की छूट पर टाइट हुआ बुआ भी सह नहीं पाई और झाड़ gayi...or सर पीछे टिका दिए विनीत के ऊपर और कमर हिलने lagi...or खुद को शांत रखने की कोशिश कर रही thi.....ye देखकर माँ और मई भी बहुत उत्तेजित हो गए और मैं उनके छूछे दबाते हुए उन्हें बहुत तेज़ और छोटे झटको से छोड़ने लगा





माँ ने भी आवाज़ न निकलते हुए बस मुँह खोल रखा था और अपने बेटे से चुद रही थी और फिर मेरा बाँध टूट गया और एक झटका मैंने मारा और लुंड को अंदर तक माँ की छूट में भर dia...or फिर अपनी पिचकारियां एक बार फिर माँ की छूट में भरने laga....mujhe यकीं नहीं हो रहा था कहाँ मैं माँ की छूट के लिए तरसता था और अभी कुछ hi देर में मैं माँ की छूट में दो बार झाड़ चूका hun...maa भी और नहीं टिक पाई और मेरे साथ झड़ने lagi...maa बेटे का एक साथ jhadna...ek दुसरे के लुंड और छूट पर सच में एक बड़ा कामुक दृश्य होता hai....mera रास माँ की छूट में भरता जा रहा tha....or माँ का भी बहार बाह कर ा रहा था और मेरे. तत्तो को गीला कर रहा tha...phir अगले कुछ मीन्स तक हम ऐसे hi बेजान से पड़े रहे लेकिन फिर माँ ने अपना पिछवाड़ा उठाया तो मेरा लुंड धीरे धीरे उनकी छूट से निकलने लगा दोनों के रास में पूरा भीगा hua...or बहार आ गया माँ की छूट से रास बहकर बहार ा रहा था





फिर माँ ने जल्दी से अपनी पंतय उठाई और टैंगो ओर चढ़ा ली और पहन ली मेरे उनकी गांड के दर्शन बंद हो gaye...phir माँ ने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी नीचे कर लिए और ठीक किआ फिर मुझसे ब्रा उठाने का इशारा किआ मैंने वो di...or फिर माँ ने अपना ब्लाउज पहन लिए और खुद को बिलकुल ठीक कर लिए उधर मैंने झांककर देखा तो बुआ और विनीत बिलकुल एक आदर्श माँ बेटे की तरह बैठे थे बुआ के कपडे भी ठीक थे ..इधर मैंने भी अपना लुंड पाजामे में डालिए और माँ भी बिक्कुल ठीक होकर बैठ गयी थी...

माँ और बुआ को देखकर लग hi नहीं रहा था ये दोनों hi अभी अपने अपने बेटो के साथ रासलीला कर रही थी.... मैंने माँ को देखा और मुझे उनपर बहुत प्यार आ. रहा था मैंने उनको पकड़कर उनके होंठो को चूस लिए उन्होंने भी साथ दिए फिर मैंने उनको अपनी बाहो में जकड lia...or गले से लगा lia...maa मुस्कुराते हुए मेरे बालों में हाथ फेर रही थी...

Me-papa कितनी देर लगेगी अभी...

पापा- बस बीटा थोड़ी देर और 10-15 मीन्स में पहुंच जायेंगे....

Me-theek पापा कोई परेशानी नहीं है...

माँ-( मेरे कान में फुसफुसा कर) क्यों माँ का वजन उठ नहीं रहा तुझसे...

Me-nahi माँ मैं तो ये छह रहा हूँ ये सफर कभी ख़तम hi न हो इसने तो मुझे वो दिए hai..jiske सपने मैं न जाने कबसे देखता था...

Maa-to तू मुझे छोड़ने का प्लान पहले से बना कर बैठा है..

मैं माँ के मुँह से छोड़ना सुनकर हैरान हो गया फिर याद आया के माँ चुदाई के बाद गरम होकर ऐसे hi बोलती है मैंने माँ पापा की चुदाई के टाइम भी देखा tha...or अपनी माँ के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मुझे भी अच् लग रहा था...

में- हाँ माँ तुम चीज़ hi ऐसी हो के मन करता था अभी पटक कर छोड़ डालूं...

माँ- तो छोड़ लेना बीटा ...

Me-haan माँ मुझे आपको अचे से छोड़ना hai...ye गाडी जैसे नहीं खुल कर आपकी छूट को बजाना है...

माँ- बजा लेना बीटा अब तुझे नहीं रोकूंगी कभी...

Me-maa मुझे माफ़ कार्डो मैं आपके साथ ऐसे पेश ा रहा था...

Maa-nahi बीटा तेरी कोई गलती नहीं है मैं खुद उलझन में thi...jab तू मेरे साथ कुछ करता था तो मुझे बड़ा ाचा लगता था बूत बाद में थोड़ा बुरा भी के मैं अपने बेटे के साथ ये सब क्यों करती hun..apne पति को धोखा दे रही hun...pat जब तू सामने आता था तो तुझे रोक भी नहीं पाती thi...or खुद hi तुझसे चिपक जाती थी... फिर जब उस दिन मैंने तेरा लुंड देखा तो मैं खुद को रोक नहीं paai...or उसे थाम लिए उस्वक़्त मेरी खुद से hi जुंग चल रही थी खुद को hi बोल रही थी के ये गलत है और खुद को रोक नहीं प् रही थी.....

फिर जब तूने मेरी छूट पर हाथ रखा तो मैं पागल सी हो gayi...agar थोड़ी देर और क्र कुछ होता तो शायद तब hi मैं तेरा कुंड छूट में ले लेती इसलिए तुझे मैंने रोकने के लिए चांटा मार दिए...

सच कहूं तो बीटा उस दिन के बाद बहुत पछतावा हो रहा था तुझसे बात करने की कोशिश भी की पर तू मेरी तरफ देख भी नहीं रहा था....

ये सुनकर मैं थोड़ा भावुक हो गया...

में - मुझे माफ़ करदे माँ आज के बाद ऐसा कभी नहीं होगा...

माँ- बीटा अबसे मैं भी न खुद को रोकूंगी और न hi तुझे...

में- माँ वैसे मैंने सुना है चुदाई के लिए तो वो तरसती हैं जिन्हे उनके पति नहीं छोड़ते या फिर जिनके पति बहार ho...par पापा तो आपको रोज़ छोड़ते हैं तो आप इतनी गरम कैसे हो गयी थी ...

माँ- बीटा मुझे भी नहीं pata..doosri ोर्टो की नहीं होती इसलिए वो तड़पती हैं मेरे साथ अलग परेशानी है मैं जितनी चुदाई करवा लेती हूँ मुझे उतना hi और मन करता hai...kabhi मन भरता hi nahi...ek माँ को ऐसी बात अपने बेटे से नहीं करनी चाहिए पर सच बीटा तेरी माँ की छूट बहुत छुडासी रहती है...

में- तो क्या हुआ माँ मेरा लुंड भी हमेशा खड़ा hi रहता है अबसे मैं और पापा दोनों hi तुम्हारी छूट को शांत रखा karenge...or ये कहकर मैंने फिर से उनके होंठों को चूसने लगा....

तभी गाडी धीरे हो गयी और पापा की आवाज़ आई लो भाई पहुंच gaye...main और माँ अलग हुए एक दुसरे से...

हम सब गाडी से उतर गए ...विनीत जाकर गेट खटखटाने लगा.....

पापा- सब ठीक तो हो भाई...

Bua-haan भैया सब ठीक hain...bas थोड़ा थकने वाला रहा सफर ...

और ये कहकर बुआ मेरी तरफ देख कर muskurai...maine बदले में मुस्कुरा दिए...

गेट बुआ की लड़की पूर्वी दीदी ने खोला....

( यहाँ आगे बढ़ने से पहले मैं बुआ के ससुराल वालो से आपका परिचय करवा dun...bua और विनीत से आप मिल hi चुके हैं

फूपाजी- प्रदीप

आगे - 46

डेरी है अपनी...

शरीर से भी ठीक ठाक टिपिकल गाँव के मर्द..

पूर्वी दीदी..

बुआ जी की लड़की, विनीत की बहिन

आगे- 24 मैरिड

दो साल पहले शादी हुई थी 5 मंथ का बच्चा है...

बच्चा होने के बाद छूछीयो का साइज और गांड का साइज बढ़ गया है...





पंकज- पूर्वी दीदी के पति..

आगे-27

गाँव के स्कूल में टीचर हैं..

इनका करैक्टर भी आगे पता चलेगा...

फूपाजी के बड़े भाई- शशि बुआ के जेठ- सुजान सिंह

आगे- 49

थोड़ी तोंद निकली hui..gaanv में जनरल स्टोर चलते हैं...

शशि बुआ की जेठानी- सावित्री

आगे 46

थोड़ी मोती हो गयी hain...par हैं एक नंबर का छोड़ने लायक माल..





रिमझिम

आगे -26

सरला और प्रेमसिंघ की एकलौती लड़की जिसके लगन में हम आये हैं... एक दम ितों जिसको भी मिलने वाली hai...kismat वाला है...

साइज पिछ में देख कर इमेजिन कर लीजिये...





तो ये हुआ बुआ के ससुराल वालो का इंट्रोडक्शन)

तो जब पूर्वी दे ने गेट खोला तो मैं तो उन्हें देख कर दांग रह gaya...wo तो पहले से बहुत गदरा गयी थी... छूछीयो का साइज काफी बढ़ गया tha...gaand भी बहार को आ गयी थी.. प्रेग्नेंट होने का बिक्कुल सही जगह असर हुआ था उन par...maine जाकर दीदी के पेअर छू लिए और मुद कर देखा तो पापा और अनुज भी दीदे को मेरी तरह hi घूर रहे हैं दीदी माँ के गले लग रही थी.....

फिर मैं अनुज और विनीत गाडी में से सामान निकलने lage...or बाकि लोग अंदर चले gaye...samaan निकल कर हम लोग अंदर आये तो देखा घर मेहमानो से भरा हुआ tha...kahin बच्चे रो रहे हैं तो कहीं औरतें मज़ाक कर रही हैं मैं एक कुर्सी खली देखकर उस पर बैठ gaya...to अचानक से मेरे सर पर पीछे से हाथ महसूस हुआ और मैंने मुद कर देखा तो बुआ की जेठानी थी Savitri...maine उठकर उनके पेअर छुए..

सावित्री- जग जग जिओ हमार bachha....bahut दिन बाद देखा आज tujhe...kaise दुबला गया है.....

में- नहीं बुआ ठीक तो hun...aap कैसी हो..

सावित्री- अरे बचुआ हमरी तो पूछना इतना काम हॉट है शादी वाले घर माँ क का hi bataun...tujhe कुछ दिए चाय पानी वगेरा

Me-nahi बुआ जी कोई ज़रुरत न...

सावित्री- ऐसे कैसे naahi...batao बचुआ कबसे आया है कोई चाय बी नहीं poocha..sara काम हम hi dekhein...are poorvi...dekh इधर आ ...ीे बचुआ को चाय तो दे ...कबसे आया है थक गया होगा...

पूर्वी दी की आवाज़ aai...aaai तै जी...

और फिर सावित्री जी को किसी ने बुला लिए और चली गयी.. मैंने चैन की साँस ली क्या औरत है ये भी...

तभी पूर्वी दी आई उनकी गॉड में उनका बच्चा था ...और उनके आते hi मैं खड़ा hi गया और बोलै दीदी baitho..m

पूर्वी- अरे भाई तू बैठ न थक गया होगा..

बच्चे को आगे करके देख ये कौन है कर्मा मां...

मैं भी बच्चे को खिलने लगा...

पूर्वी- तू पहली बार देख रहा है बच्चे को?

में- हाँ

पूर्वी- बच्चा क्या मैं. Hi तुझे शादी के बाद अब देख रही hun...kitna बदल गया है तू re...bada हो गया और देख तो कितना लम्बा हुआ है खम्बे जैसा

हम दोनों दी की बात पर हंसाने लगे...

Me-aap भी तो बहुत बदल गयी di..pahle कितनी पतली और नाज़ुक सी थी और अब तो क्या कहना..

पूर्वी- मैं मोती लागरी हूँ तुझे...

में- अरे दी मोटा नहीं.. शरीर भर गया है आपका और ज़्यादा सुन्दर हो गयी हो.. लगता है जीजाजी बहुत अचे से ख्याल रखते हसीन आपका..

Poorvi-hat बदमाश फिर से मज़ाक शुरू हो गए tere...are अरे बातों में भूल hi गयी कर्मा तू बच्ची को खिला.. मैंने चाय चढ़ाई थी कहीं निकल न गयी हो...

मैंने उनके हाथ से बच्चा ले लिए और वो मुद कर किचन की तरफ चली gayi...main उनकी गांड को देख रहा था सोचा क्या माल हो गयी है पूर्वी दीदी to...kaash इनकी मिल जाये एक बार..

फिर मैं बच्चे को खिलने laga...or दी ने चाय दी वो पि और फिर तैयार होने चला गे बीच बीच में माँ, बुआ पापा अनुज विनीत सब दीखते पर सब कोई किसी न किसी काम में बिजी tha..mujhe भी तैयार होने को बोलै गया तो मैं ऊपर चला गया... उनके घर में टोटल 6 कमरे थे 4 नीचे और 2 ऊपर ... नीचे दो बाथरूम थे और ऊपर एक नीचे के दोनों बिजी थे तो विनीत ने बोलै ऊपर वाले में चला ja...main ऊपर गया और ऊपर भी बाथरूम बिजी था तो एक कमरे का गेट खुला दिखा मैं अंदर गया तो कोई नीली साड़ी पहने खिड़की के पास कड़ी थी साड़ी में बहुत सेक्सी लग रही थी उसकी गोरी चिकनी कमर नज़र ा रही थी ब्लाउज में दिखती पीठ मैं कुछ देर तक तो देखता hi रह gaya..phir मैंने होश में आते हुए दरवाज़े पर नॉक किआ तो वो पलटी तो पता चला वो रिमझिम दीदी थी जिनकी लगन में हम आये hain..par क्या लग रही थी वो...





मेरी नज़र उनसे हटने का नाम नहीं ले रही थी.. उन्होंने मुझे देखा और खुश हो गयी...

रिम- अरे कर्मा तू.... आजा अंदर aa...kitna टाइम हो गया रे तुझे dekhe...kitna बदल गया hai....tu तो भूल hi गया था अपनी दीदी को...

मैंने उनके पेअर छू लिए जाकर...

Me-are नहीं दीदी पूर्वी दीदी की शादी में तो मिले the...phir आपको भी कहाँ याद आई meri...ek भी बार अआप आई...

रिम- देखो तो कैसे बातें बना रहा hai...acha बता कैसा है तू...

Me-dekhlo दीदी आपके सामने हूँ...

रिम- ममी और बाकि सब आये हैं...?

Me-haann क्यों नहीं बुलाना था...

रिम- हॉट बदमाश और ये कहते हुए उन्होंने मुझे हलके से मार दिए...

में- दी कपडे चेंज करने हैं सरे बाथरूम तो बिजी हैं..

Rim-to यहाँ करले न...

Me-theek है और उनकी तरफ देखने लगा...

रिम- क्या हुआ!? कर न और जाकर गेट बंद करदे

Me-aap जाओगी nahi...apke सामने hi करूँ,?

मैंने गेट लगा दिए......

रिम- हाँ तो क्या हुआ भूल गया टूबवेल में मैं hi तुझे नहलाती thi...tab शर्म नहीं आई आज कपडे बदलने में शर्मा रहा है...

में- ाचा ठीक है दीदी मैं कर लेता हूँ और ये कहकर मैं कपडे चेंज करने लगा t-shirt उतर कर दूसरी शर्ट पहन ली दीदी मुझे hi देखे जा रही थी मैंने फिर कोई रिएक्शन नहीं दिए और फिर लोअर नीचे खिसका दिया तो ाचा हुआ लुंड अभी खड़ा नहीं था बूत फिर भी कच्चे में काफी बड़ा दिख रहा था...

रिम- बड़ा तो तू हो गया है कर्मा...

ये कहकर दी मुस्कुरा दी...

Me-haan दी मैंने बोलै था न बड़ा हो गया hun...or अपनी पंत पहन ली...

कपडे बदलकर मैं दी के सामने खड़ा हुआ तो बोली...

रिम- वाह कर्मा हीरो लग रहा है एक डैम...

और मेरे पास आकर मेरे बाल ठीक करने लगी...

में- दी एक बात कहूं...

रिम- बाल ठीक करते huye...hn बोल न

Me-saree में आप बहुत सुन्दर लग रहे हो...

रिम- कुछ चाचिये तुझे जो दीदी की झूठी तारीफ कर रहा है...

Me-nahi दी सच mein...mujhe भी आपके जसीडी बहु चाहिए...

रिम- आये हाय देखो तो कैसे शर्मा रहा hai...kaafi बड़ा हो गया है tu..baat करुँगी अभी ममी से...

में- बूत होने आपके जैसी hi चाहिए...

रिम- ाचा तुझे क्या ऐसा दिख गया मुझमे...

Me-are दीदी सच कहूंगा तो आप गुस्सा हो जाओगी...

Rim-acha ऐसा क्या है बता मुझे

Me-nahi आओ गुस्सा हो जाओगे...

Rim-nahi होंगी बता तो...

में- तो सुनो जब मैं इस रूम में घुसा न तो आप उधर की तरफ चेहरा क्र के कड़ी तो जब मैंने आपको पीछे से साड़ी में देखा तो मैं बस सब भूल गया tha...itani मस्त लग रही थी आप क्या bataun...ek पल को मैं फ़िदा हो गया था आप par..par जैसे hi आप पलटी मेरे सारे सपने टूट गए....

रिम- तो तुझे मेरा चेहरा पसंद नहीं आया...

में- दी चेहरा तो आपका बहुत सुन्दर है बस प्रॉब्लम ये हो गयी के आप मेरी सिस्टर हो न...

रिम- ाचा तो मैं तेरी सिस्टर हूँ ये प्रॉब्लम है...

Me-are दी आप समझ hi नहीं rahi...agar आप मेरी दी न होती तो मैं आपसे hi शादी कर लेता...

रिम- चल पागल कुछ भी बोलता hai...aisa क्या पसंद आ गया तुझे मुझमे...

में- दी क्या नहीं है आपमें पसंद आने वाला...

रिम-. तू बता अव्हे से क्या पसंद है?

Me-didi आपकी आँखें, आपकी स्माइल आपके होंठ...

Rim-acha और?

में- आपका फिगर...

Rim-figure क्या कुछ डिटेल में बता...

में- वो आपकी कमर और पेट...

मैंने डरते डरते बोलै....

Rim-acha और...

में- बाकि और मैंने देखा नहीं ठीक se...baki का तो जीजाजी hi देखेंगे..

ये बात सुनते hi दीदी थोड़ी निराश सी हो गशयी और बीएड पर बैठ गयी कुछ सोचते हुए boli-haan अब तो वो hi देखेंगे...

(मैं समझ गया दीदी क्यों उदास hain...baat ये थी की दीदी किसी से प्यार करती थी और वो भी दीदी से सब कुछ ाचा चल रहा था दीदी ने शादी के लिए घर पर बात की तो घरवाले भी मान गए the...or उसके घरवाले bhi..unki शादी की डेट भी फिक्स हो गयी thi...poori दी की शादी से भी काफी पहले बूत शादी के 15 दिन पहले hi वो लड़का किसी और लड़की के साथ भाग gaya..di का रो रोकर बुरा हाल हो गया tha...tsb दी ने फैसला किआ था के वो शादी नहीं करेंगी बड़ी मुश्किल से दीदी इस शादी के लिए मानी thi...par अभी फिर से याद आने पर उदास हो गयी...)

मैं दी के साथ बैठ गया और उनका हाथ पकड़ लिए और बोलै दीदी आप ऐसे बिलकुल अछि नहीं lagti....is सुन्दर से चेहरे पर आंसू अचे नहीं लगते...

रिम- तो क्या ाचा लगता है?

में- ख़ुशी दी ख़ुशी... और इन आँखों में प्यार ाचा लगता है पछतावा nahi...or ये होंठ रोने केलिए नहीं बने ये तो छु....

इतना कहकर मैं चुप हो गया...

रिम- क्या बता न चुप क्यों हो गया किसलिए बने हैं होंठ...

में- हंसने के लिए दीदी...

Rim-karma सेक्सः बोल जो तू बोलने वाला था...

में- डरते हुए- दी वो च चूमने क liye..or ये बोलकर मैंने आँखें नीचे कर्ली....

फिर पता नहीं अगले hi पल क्या हुआ के रिमझिम दीदी ने अपने होंठ आगे बढ़ा कर मेरे होंठों पर रख दिए....

हाय क्या मीठे और रसीले होंठ थे उनके मैं तो सुन्न पद गया और उन्होंने मेरे होंठो को चूसना चालू कर dia...mujhe जब थोड़ा होश आया तो मैं.. भी दीदी के होंठो को चूसना शुरू kia...kya मज़ाआ आ रहा tha...maine सोचस दीदी ऐसा क्यों कर रही है वो सब बाद में सोचूंगा अभी तो इतना मस्त माल है मज़े lo...kya दिन है आज का भी.. शुक्रिया ऊपर wale...phir उनके होंठो को चूड़तर चूसते मेरे हाथ भी चलने लगे और मसिने उनका पल्लू नीचे गिरा दिए और अपने हाथ उनकी कमर पर रख कर सहलाने लगा....

इतनी चिकनी कमर मैंने आज तक नहीं टच की thi..main उनके होंठो को चूस रहा था और उनकी कमर और पेट को सहला रहा था जब जैसे hi उन्होंने अपने होंठो को अलग किआ मैं नीचे बैठ गया और उनके पेट को चूमने लगा मेरे होंठों के टच होते hi उनके मुँह सी आह्हः निकल गयी ...





वो मेरे बालो में हाथ चलने लगी और मैं उनके पेट और कमर पर अपनी जीभ और होंठों को चला रहा था.... क्या टेस्टी और मुलायम पेट था दीदी ka...main पागलो की तरह चूमे और छाते जा रहा था दीदी आह आठ कर रही थी और मेरे बालो में हाथ भी फेर रही thi...main फिर खड़ा हुआ और उन्हें किश करने laga...wo भी मेरा पूरा साथ दे रही थी मैं और वो फिर बीएड पर बैठ गए मैं उन्हें किश करते करते उनके ब्लाउज के हुक्स खोलने लगा और ऊपर के दू हुक खोल दिए और उनके सॉफ्ट सॉफ्ट छूछीयो को दबाने laga...mujhe बड़ा मज़ा आ रहा था ...





दीदी का हाथ भी मेरी तइस पर चल रहा tha....maine फिर उनके बैठे बैठे hi पीछे गया और गर्दन को चूमने लगा दीदी ाः करने लगी मैंने बकौसे के एक दो बटन और खोल दिए और उन्हें बढ़ानेबलाग़ा दीदी को चूमते हुए





दीदी की ब्रा दिखनी शुरू हो gayi...maine दीदी. की पीठ को चूम रह था और उनका ब्लाउज कंधे तक कर दिए था मेरा लुंड फिर से टाइट होने लगा tha...tabhi पीछे से आवाज़ आई.... रिमझिम ओह्ह्ह रिमझिम...

मेरे मुँह से निकला satyanash....di भी मुझसे अलग होकर अपना ब्लाउज ठीक करने लगी और मुस्कुराने लगी फिर हम दोनों ने कुछ नहीं बोलै और मैं नीचे आ गया.....

मैंने सोचा क्या दिन है आज ka...pahle बुआ को छोड़ा और फिर अपनी सगी माँ को और ाव रिमझिम दीदी के साथ ये.... और मेरा लुंड जो टाइट था उसे एडजस्ट करते हुए सोचा की क्या खाकर पैदा किआ है मेरी माँ ने... लुंड खड़ा hi रहता hai...abhi दो बहार माँ की छूट में और एक बार बुआ की में झाड़ा हूँ और ये फिर खड़ा हो रहा hai....but अब मेरा मन दीदी ने बहका दिए था और मुझे छूट चाहिए थी... मैंने माँ को देखा तो वो भी बिजी थी आस. पास कई औरतें थी... बुआ भी बिजी थी फिर किसी ने मुझे कोई काम बता दिए और मैं काम में लग गया खड़ा लुंड लेकर hi...

इसके आगे बुआ के घर कर्मा और क्या क्या करता है सब कुछ अगली अपडेट mein...aap लोग प्लीज एन्जॉय करते rahiye...or प्लीज कमैंट्स करते रहिये... शुक्रिया
 
लास्ट अपडेट में अपने देखा कैसे कर्मा रिमझिम दी के साथ किश करता है बूत कोई आता है तो बहार आ जाता है अब आगे..

अपडेट 23
मैं लगन के लिए जो भी काम था वो करवाया और फिर हम कुछ लोग लगन लेकर लड़के वालो के यहाँ निकल gaye...sab थे छोटे और बड़े.. phoopaji..main पापा, विनीत अनुज और भी कई log...wahan वो hi पूजा पथ हुआ और फिर खाना तो वहां एक से एक माल थी मेरा लुंड तो वैसे भी किसी को छोड़ने के लिए तरस रहा था वहां पार्टी में इतनी मस्त लड़कीओ को देखकर और बुरा हाल हो gaya..par दीदी का ससुराल है कुछ भी करना खतरे से खली नहीं था तो शरीफ बनकर घूमता रहा और फिर जब हम घर लौटे तो करीब रात के 11 बज गए the...ghar आकर देखा तो वो hi जो शादी के दौरान होता है घरो में लेडीज गाने गए रही थी ढोलक बजा बजा kar...main छत पर चला गया सोचा रिमझिम दीदी मिल जाये पर सब वहीं thi...main छत से hi उन्हें गाते बजाते देखने laga...maa, बुआ सब वहीं thi....mera लुंड छूट में जाने को बेचैन tha...or मिल कोई नहीं रहा था मेरी समझ नहीं ा रहा था क्या करूँ..

मैं छत से hi खड़ा हो कर नीचे आंगन में देखने laga...ke शायद माँ या बुआ मुझे देखले और कुछ जुगाड़ हो जाये छूट ka...but काफी देर तक उनके गाने चलते rahe...phir मैंने देखा के बुआ कहीं उठकर जा रही hain..wo बहार की तरफ जाने को हुई मैं समझ गया के बुआ बाथरूम जा रही hai...gate के पास घुसते hi बाथरूम था टॉयलेट वगेरा के लिए लोग उसे hi उसे करते the...par वहां अँधेरा रहता tha...mujhe लगा ये सही मौका है दबोच लेता हूँ बुआ को जाकर वहां अँधेरा भी रहता है तो कोई देख भी नहीं payega...main घूमकर जल्दी से और बिना शोर मचाये सीढ़ियों से नीचे आया और बाथरूम की तरफ चला gaya...wahan करीब पहुंच कर देखा तो कुछ दिखा तो नहीं पर किसी के पेशाब करने की आवाज़ ा रही thi...main समझ गया बुआ टॉयलेट करने आई hain...or मैं धीरे धीरे बिलकुल करीब पहुंच गया... वैसे तो बहुत अँधेरा था बूत थोड़ा बहुत मेरी आँखें अँधेरे में एडजस्ट हो गयी थी तो थोड़ा बहुत दिख रहा था के आउटलाइन बता सकता था के सामने कोई खड़ा hai...bathroom में गेट तो था नहीं बस एक पर्दा tha...mujhe मूट की आवाज़ आणि बंद hui...main झट सा. अपना लुंड बहार निकला और बाथरूम में घुस gaya...to बुआ बस कड़ी हुई थी और उनकी साड़ी और पेटीकोट कमर पर था बस नीचे करने hi वाली थी क मैंने उनके मुँह पर हाथ रखकर उन्हें झट से आएगी थोड़ा झुका दिए और अगले hi पल लुंड का टोपा छूट के द्वार पर रखकर एक झटका मार दिए जिससे लुंड आधा अंदर घुस gaya...bua की चीख मेरे हाथ से डाब गयी...

मैं दोपहर से hi छूट के चक्कर में था बुआ और माँ को गाडी में ठीक से नहीं छोड़ पाया था तो अभी मैं ढंग से झटके मर कर छोड़ना चाहता tha...to मैंने एक और झटका. मार के पुरा लुंड छूट में घुसेड़ दिए... बुआ ने एक बार फिर से चीखना चाहा पर नहीं सफल हो पाई और अब मैं अपनी कनार आगे पीछे करके बुआ को छोड़ने लगा पहले तो बुआ छूटने की कोशिश कर रही थी पर अब मज़े लेकर चुद रही थी...





मैंने उन्हें छोड़ना जारी रखा और अब उनके मुँह से हाथ हटा lia...unki सांसो की चलने की आवाज़ ा रही थी तेज़ tez...mere धक्के भी तूफानी the...aaj पूरे दिन मैंने किसी को अचे से नहीं छोड़ा था तो उसकी कसार में बुआ की छूट में निकल रहा था....

Me-aah बुआ क्या मस्त छूट है tumhari....mazaa आ रहा hai...aaahhhhh कबसे इंतज़ार कर रहा था के मैं तुम्हारी छूट में लुंड दाल दाल कर तुम्हारी छूट की चटनी बना दूँ...

बुआ की फुफुसाते हुए आवाज़ निकली---- आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Karma...tu

मैं तो बस चोदे जा रहा tha...tabhi पीछे से आवाज़ आई... कहाँ रह गई दीदी.....

मैंने ध्यान नहीं दिए और तेज़ झटको से छोड़ने लगा... तभी फिर से आवाज़ आई ओह्ह्ह्ह दीदी...

मेरा दिमाग में अचानक से ख्याल आया के ये आवाज़ to....ye आवाज़ तो बुआ की है अगर बुआ वहां है तो यहाँ कौन hai...mere दिल की धड़कन तेज़ थी और तेज़ हो gayi...meri गांड फटने lagi...ke ये कौन हो सकता है जिसे मैं छोड़ रहा हूँ पर ये सब सोचने के साथ साथ मेरे धक्के भी चले जा रहे थे मेरे लुंड का जैसे अलग hi दिमाग था उसे बस छूट से मतलब था जिसे वो चोदे जा रहा था यहाँ मैं टेंशन में था... इसने अभी मेरा नाम भी लिए मतलब ये मुझको पहचान गयी है अब क्या होगा मैंने इसको बुआ कहा मतलब ये जान जाएगी की मैं बुआ को छोड़ने आया था...

तभी उस औरत की फुफुसाते हुए आवाज़ aai...ruko.. बहार चलो...

मैं उसकी बात मन्ना छह रहा था पर मेरा लुंड था जो छूट से निकलने को राज़ी नहीं था...

तो औरत ने एक बार और रुको कहा और आगे हो गयी जिससे मेरा लुंड निकल gaya...mujhe बड़ी बेचैनी सी हुई अभी और छोड़ने का मन था पर उस औरत का हाथ मुझे लुंड पर महसूस हुआ और वो मुड़कर बाथरूम से निकलने लगी साथ में लुंड को ऐसे पकड़ा हुआ था जैसे हाथ पकड़ के ले जा रही हो...

मैं उसके पीछे पीछे चल दिए वो घर के अंदर जाने की bajaaye...gate के बहार ले आई और गेट से बहार hi राइट साइड में एक तबेला टाइप का बना है जिसमे उनकी भैंसे रहती हैं और चारा भी पड़ा रहता है उसके अंदर से रौशनी ा रही थी एक छोटा बल्ब उसमे जल रहा tha...wo मुझे उसी में ले जाने lagi...jab तबेले में पहुंचे तो मुझे झटका लगा उस औरत का चेहरा देखकर के या कर दिए तूने कर्मा...

वो औरत कोई और नहीं बुआ की जेठानी सावित्री thi...mujhe कुछ समझ नहीं ा रहा था इससे क्या bolu..gand भी बहुत फैट रही thi...phir सोचा अगर इससे गुस्सा करना होता तो यहाँ अकेले में क्यों लाती वहीं chillati...abhi मज़े लेता हूँ जो होगा वो बाद में देखा जायेगा...

तबेले में एक तरफ चारे का ढेर पड़ा हुआ था सावित्री मुझे वहां ले गयी... और मुझे वहीँ बिठा dia...or तुरंत मेरे सामने बैठ gayi...or जीभ निकल जार मेरे लुंड को चाटने lagi...meri आअह्ह्ह्ह निकल gayi...maine सोचा ये तो बड़ी रैंड निकली कहाँ इसे मैंने अचानक से छोड़ दिए ये तो मज़े ले रही है... गुस्सा तो दूर की बात है... और फिर उसने अपना मुँह खोला और लुंड के टोपे को मुँह में ले लिया और चूसने lagi..mere हाथ अपने आप उनके बालो में चले gaye...or उनका सर पकड़ कर अपने लुंड पर दबाने लगा वो भी आधे से ज़्यादा लुंड मुँह में भरकर चूस रही thi...mujhse रहा नहीं गया और मैंने उनका सर पकड़ लिए और उन्हें अपने लुंड पर आगे पीछे करने लगा जैसे मैं उनका मुँह छोड़ रहा hun..har झटके में लुंड और अंदर सरक जाता था ..

उनके मुँह से गऊ गऊ की आवाज़ ा रही थी फिर मैंने अपना लुंड उनके मुँह से निकल लिए तो वो खांसी लगी और मेरी तरफ देख रही थी मैंने आगे झुककर उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए और उनकी ब्रा में कैद बड़े बड़े छूछे सामने आ gaye...maine उन्हें भी ब्रा से बहार निकल लिए बहुत बड़े बड़े the..or मैंने उन्हें हाथ में लेकर दबाने लगा वो आअह्ह्ह करने लगी और जब उनका खाँसना बंद हुआ तो मैंने अपने ाँद की तरफ इशारा किआ तो वो समझ गयी और मेरे ांडो को मुँह में भरकर चूसने lagi...or हाथ से मेरा लुंड हिला रही थी...

फिर मैंने सोचा अभी ज़्यादा टाइम नहीं है जल्दी से करना चाहिए कोई ढूंढता आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी....

मैंने उन्हें उठा कर चारे के ढेर पाए लिटा दिए और साड़ी और पेटीकोट को कमर तक चढ़ा दिए... उनकी छूट मेरे सामने thi...khule हुए honth...poori भीगी हुई... मैंने झुक कर अपना मुँह छूट पर लगा दिए और जीभ निकल कर चाटने लगा... सावित्री बुआ आअह्हह्ह्ह्हह abhhhhhhhhhh करने lagi...maine वक़्त की नज़ाक़त को समझते हुए मुँह हटाया और फिर खड़ा होकर लुंड को उनकी छूट पर रख कर घिसने लगा....

सावित्री- आअह्हह्ह्ह्ह काहे तड़पा रहा है रे कर्मा घुसेड़ दे अपने लुंड को मेरे भोसड़े में... तूने तो आज मेरी छूट की आग को भड़का hi दिए बचुआ... अह्ह्ह्ह छोड़ न मादरचोद...

मैं गली सुनकर एक्साइट हो गया और सोचा मादरचोद तो मैं हूँ hi.. ...और लुंडको छूट के मुँह पर रखकर एक तेज़ झटका मारा लुंड आधे से ज़्यादा ghusgaya....wo aaahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh करने लगी....

Savitri-ahhhh मर गयी.... छूट फैट गयी meri....itana बड़ा लौड़ा तो मैंने आजतक नहीं देखा कहाँ से लाया है re...ahhh छोड़ बचुआ आआह्ह्ह्ह छोड़ दे आज बुआ को मिटादे मेरी प्यास....

मैंने अब उनकी कमर पकड़ कर तेज़ तेज़ छोड़ने लगा... तबेला थप थप की आवाज़ों से भर gayaa....bhainse अपनी मालकिन की चुदाई देख रही थी... मैंने आगे बढाकर उनके छूछीयो को थम लिए और दम लगाकर छूट में लुंड पेलने laga...poora ोुब्द छूट में घुसता फिर आधे से ज़्यादा बहार निकलता और फिर तेज़ी के साथ अंदर tak...har झटके के साथ वो आह्ह्ह्हह कर रही thi.....wo बहुत गरम हो गयी थी...

सावित्री- आह्ह्ह्ह कर्मा क्या लोढ़ा है तेरा आअह्हह्हं छोड़ दे आज आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

मादरचोद अपनी माँ की छूट समझ कर तरस मत kha...chatni बना दे आअह्ह्ह्हह भोसड़ा बना दे....

मैं अब पूरी ताकत के साथ चुदाई कर रहा था छूट में झटके तगड़े भी थे और टेक्स भी... उसकी जगह कोई जवान लड़की होती तो छूट फैट चुकी होती और लड़की behosh...ye तो खेली खाई थी इसी छूट से बच्चा पैदा कर चुकी थी तो बर्दाश कर गयी...

Me-haan ले ले साली रैंड खा जा मेरा पूरा lund...kitni चुड़क्कड़ है साली बेटी की शादी है और तेरी छूट में खुजली हो रही hai...ye तो उसके छोड़ने का टाइम hai...kya माआल है वो bhi.....aaahhhh मन करता है पटक पटक कर छोड़ू...

Savitri-aahhhh कर्मा अह्हह्ह्ह्ह तो क्या हुआ मेरी छूट भी अभी जवान है और बेटी तो वैसे भी जाकर छुड़ेगी hi...or तू माँ को तो छोड़ hi रहा है अब तेरी नज़र बेटी पर भी hai.....aaahhhh सेल कितना कमीना है रे तू...

Me-jab माँ बेटी तुम दोनों जैसी हो तो कौन कमीना नहीं बनना चाहता....

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

मैं अपने चरम पर पहुंचने वाला था और मेरे झटके भी वैसे hi हो गए थे सावित्री बुआ का शरीर अकड़ रहा था वो अपनी गांड उठा कर मेरे लुंड को और अंदर लेने की कोशिश करने लगी और ज़ोर से अपनी छूछीयो को भींचते हुए झड़ने lagi...unki कमर झटके खा रही थी वो कुछ बोल नहीं प् रही थी मुँह खुला हुआ था पर कोई आवाज़ नहीं निकल रही thi...or फिर उनका शरीर ढीला पद गया पर मेरे झटके नहीं रुके और कुछ 2-3 मीन्स के बाद मई इ अपनी रसमलाई उनकी छूट में उढेल di......main काफी देर तक उनकी छूट में झाड़ता रहा... और फिर उनके ऊपर गिर गया... लुंड उनकी छूट में hi था... उन्होंने मेरे होंठो को अपने होंठो में कैद कर लिए और चूसने lagi...bade प्यार se...phir मेरे मुँह में जीभ घुसेड़ दी और मेरी जीभ को choosa...phir मैं उनके ऊपर से हैट कर बगल में लेट गया वो उठी और अपने कपडे ठीक करती हुई बोली... तूने मुझे छोड़ने का कैसे सोचा ..

मैंने सोचा इन्हे क्या bolun...bua समझ कर छोड़ने आया tha...to मैंने बोलै मुझे आप अछि लगती हो बहुत आपकी गांड और chuchhiyan....bada मन था आपको छोड़ने का और जब आपको आज मोटे हुए सुना तो खुद को रोक नहीं paya...wo मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई और फिर झट से झुक कर मेरा लुंड मुँह में ले लिए और छत चाट कर साफ़ करने lagi....or जब साफ़ हो गया तो बोली मैं जा रही हूँ... तू थोड़ी देर बाद घर ाँ ja...sath में जाना ठीक नहीं है और वो ये कहकर निकल गयी....

मैं वहां लेते लेते सोचने लगा... क्या किस्मत है रे karma...aaaj hi के दिन में तीन टीमलं छूटों को भोगा है तूने... जिसमे एक तेरी सगी बुआ है दूसरी उनकी जेठानी और तीसरी तो तेरी अपनी maa......maine अपने लुंड की तरफ देखा और मुस्कुरा पड़ा और पुछा क्यों बे छोड़ूमल खुश है na.....or फिर आँखें बंद करके लेट गया...

और फिर थोड़ी देर बाद लुंड को पाजामे में

दाल कर घर में चला गया और बिस्तर पर जाकर लेट gaya...or कल का इंतज़ार करने लगा ना जाने कल की सुबह क्या लेकर आती है अपने साथ....

तो आगे क्या हुआ वो सब अगली अपडेट में आप सब प्लीज कमैंट्स करते रहिये और अपने सुझाव देते रहे... शुक्रिया

.
 
थक गया था के सोया तो सीधा सुबह hi utha...uthkar फ्रेश होने जाना था तो देखा के एक एक करके सरे बाथरूम में कोई न कोई घुसा हुआ है... मुझे फूपाजी ने पुछा क्या हुआ कैसे परेशां है...

Me-phoopaji तीनो बाथरूम में कोई न कोई है क्या करूँ फ्रेश होना था...

पुष्पेंद्र पह- मेहमान ज़्यादा हैं न बीटा तू एक काम कर वो बोतल उठा और खेत में chalaja...yahan कब तक खड़ा रहेगा...

मेरे पेट में भी गुमड़ गुमड़ हो रही थी तो मैंने सोचा चले जाना chahiye...tabhi विनीत भी वहीं ा गया और हाथ में बोतल देख कर बोलै कहाँ कर्मा खेत में जा रहा है क्या?

में- हाँ यार सरे बाथरूम में कोई न कोई है..

विनीत- चल मैं भी चलता हूँ...

में- ये तो और बढ़िया है चल..

और विनीत ने भी एक बोतल उठाई और चल दिए मेरे sath...raste में चलते हुए मैं उससे बात करने लगा...

में- और विनीत बानी कोई बात?

विनीत- कैसी बात?

Me-are वो hi कोई छूट मिल?

विनीत- नहीं yaar...kismat hi ख़राब है..

मैं एक खेत की तरफ मुड़ने लगा तो विनीत ने रोक दिए अबे उधर मत जा उधर गाओं की औरतें आती हैं karne...mardo को सड़क पार करके जाना पड़ता है..

में- ाचा चलो भाई सड़क पार hi चल लेते hain...kya कह रहा था तू किस्मत ख़राब है?

विनीत- हाँ वो छूट के मामले में यार मिलती hi नहीं..

Me-abe किस्मत वगेरा सब ठीक है तुझे लेनी नहीं ा रही... घर में hi देख कितने मेहमान आई हैं किसी को hi पकड़ लेता..

विनीत- पागल है क्या पापा पीट पीट के भरता बना देंगे और बदनामी अलग से...

में- अबे तू डरता बहुत hai...or पीटेंगे तब जब उन्हें पता चलेगा...

विनीत- तुझे बड़ा आसान लगता है सब...

में- अबे तुझे छूट चाहिए न मैं तुझे आज hi दिला दूँ...

विनीत- भाई सच कह रहा है तू?

में- हाँ बिलकुल sach...par तू सही बाँदा नहीं है...

विनीत का मुँह लटक गया..

विनीत- क्यों भाई क्या किआ मैंने ऐसे क्यों बोल रहा है...

Me-wo इसलिए की तू छुपता है सब kuch...khoya खोया रहता है..

विनीत- भाई मैं डरता हूँ बस इसलिए और कुछ नहीं की अगर किसी को पता चला तो क्या होगा...

Me-chal सब कुछ chhod...mujhse सच बोल सकता है?

विनीत- हैं हैं भाई बिलकुल..

में- तो देख मैं तेरी छूट का जुगाड़ करदूंगा बूत मेरी शर्त ये है के तुझे सब कुछ बताना होगा सच सच की तू किसको छोड़ना चाहता hai..kispar तरय किआ है और किसपर nahi...sab कुछ जानना है मुझे...

विनीत- भाई तू समझ नहीं raha...main नहीं बता सकता...

में- क्यों नहीं बता सकता..

विनीत- भाई वो

में- ठीक है तो छूट भूलजा...

और फिर हम खेत में पहुंच गए मैं भी अपना पजामा नीचे खिसका कर बैठ गया और वो भी थोड़ी देर बाद वो बोलै...

व्- ठीक है कर्मा मैं बताऊंगा तुझे सब कुछ बूत तू वादा कर मुझे गलत नहीं समझेगा...

Me-ye हुई न बात और मैं तुझे गलत नहीं samjhunga...or क्या पता तू गलत हो hi न...

विनीत- ठीक भाई मैं bataunga...tujhe तो पता है मुझे मैरिड औरतें पसंद हैं...

में- हाँ पता है तो तू कौन है जिसे छोड़ना चाहता है...

विनीत- भाई वो main...main मम्मी को

विनीत ये बोलकर चुप हो गया और नीचे की तरफ देखने लगा...

में- मुझे पता hi था... बुआ हैं भी तो ऐसी चीज़....

व्- क्या भाई तुझे पता था... बूत कैसे मैंने किसी को नहीं bataya...or क्या तुझे ये बिलकुल गलत नहीं lagta...ki मैं अपनी माँ के साथ hi ये सब...

Me-sale ऐसे जब ऐसे अपनी माँ की गांड को ताड़ेगा तो किसी को पता नहीं chalega...or इसमें क्या गलत तेरे पास लुंड है और उनके पास choot...rahi बात समाज की to...jab किसी को पता नहीं चलेगा तो कुछ गलत नहीं hai...or बुआ जैसा माल हो और फिर भी तू न छोड़ना चाहे तो तू गे हुआ...

मेरी बात सुनकर वो हंसने लगा...

व्- अरे वो तो भाई.... तू बिलकुल सही कह रहा है मैं सोच कर डरता रहता था के मैं गलत हूँ.... मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए वगेरा वगेरा...

में- और सबसे बड़ी बात लुंड की sun...jise देखकर खड़ा हो दाल de...chahe वो माँ बी क्यूँ न हो...

वो हंसने लगा

Me-or उनकी तो तूने ले ली hogi...gaadi में तो खूब रगड़ रहा था...

विनीत चौंक गया... क्या भाई तूने वो भी देखा tha...or कुछ भी देखा था तूने?

वो उसकी और माँ की बात कर रहा था बूत मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता था तो मैंने बोल दिए और क्या??? तो ये सुनकर वो थोड़ा रिलैक्स हो गया..

Me-haan सब देखा था और जब बात इतनी आगे बाद gayi..to फिर बुआ पर तरय क्यों नहीं किआ तूने....

विनीत- भाई एक तो इतनी भीड़ है घर में माँ अकेली मिलती hi नहीं एक बार मिली भी तो मेरा हाथ झटक दिए उन्होंने ..मैंने कमर पकड़ने की कोशिश की तो...

मैंने मन में सोचा बुआ के भी नखरे बहुत हैं...

Me-koi नहीं तू मेरी बात मंटा जा तुझे छूट ज़रूर milegi...par याद रखिओ कुछ छुपाना नहीं...

विनीत- ठीक है bhai...pakka अबसे कुछ नहीं छिपाऊँगा..

Me-chal ठीक है फिर...

फिर हमने अपनी गांड dhoi...or बापिस चल दिए विनीत अब काफी खुश और रिलैक्स लग रहा था...

जब हम बापिस आये तो मैं फिर से उसी खेत की तरफ मुड़ने लगा... विनीत ने फिर मुझे टोका...

Me-abe चलते हैं न क्या पता किसी की गांड देखने को मिल जाये..

और मेरे चेहरे पर कामिनी मुस्कान आ गयी... विनीत भी मुझे देखकर मुस्कुराने लगा...

व्- भाई तू बहुत बड़ा ठरकी है...

Me-tharki होने में hi मज़ा है...

और हम चल दिए तो देखा तो एक आदमी खेत में तेज़ तेज़ चलता हुआ जा रहा hai...mujhe तो समझ नहीं आया कौन है बूत विनीत ने बोलै ये ताऊ जी कहाँ भागे जा रहे हैं...

Me-tauji मतलब ये बड़े फूपाजी (प्रेमसिंघ) हैं क्या??

व्- हाँ वो hi हैं...

Me-chal पीछे चल के देखते हैं...

व्- अबे कहीं देख लिया तो दांत न दे...

Me-phir डरने लगा tu...chup चाप चल पीछे पीछे...

और फिर हम उनका पीछा करने लगे चुप चुप kar...bade फूपाजी दो खेत पार कर गए और हम भी उनके पीछे पीछे the..phir एक खेत था जिसकी... बाउंड्री पर बड़ी बड़ी झाड़ियां थी ताऊ जी उन झाड़ियों में घुस gaye...phir तो हमें भी दिखने बंद हो गए...

में- अबे ये फूपाजी कहाँ गए...

व्- भाई पता नहीं तू कहे तो बापिस चलें...

Me-abe पागल है क्या चल झाड़ियों के अंदर चल दूर से चुप चाप...

और हम झाड़ियों के दूसरी तरफ से चुप चाप घुस गए... झाड़ियां काफी ऊँची थी इसीलिए कोई हमें आसानी से नहीं देख सकता था शायद इसीलिए फूपाजी भी नहीं दिख रहे थे Humein....kaafi देर इधर उधर देखने के बाद एक जगह थोड़ी हलचल मालूम हुई तो वो दिखे humein...or हम उन्हें देख कर बिलकुल चौंक गए...

बड़े फूपाजी की लुंगी खुली हुई थी और वो अपने हाथ में अपना लुंड पकड़ कर मुठ मार रहे थे पर उनकी नज़र सामने जमी हुई thi...kareeb 5-6 इंच को रगड़े जा रहे थे...

Me-dekh इतनी उम्र में भी इन्हे जवानी छड़ी है और तेरी गांड फटी रहती है...

व्- अरे वो सब छोड़ बूत ये देख कहाँ रहे हैं...

हमें ये नहीं दिख रहा था की वो क्या देख रहे हैं क्यूंकि हमारे सामने झाड़ियां काफी घनी thi...maine विनीत से बोलै के चल कोने की तरफ वहां से दिख jayega...or हम धीरे धीरे कोने में खिसक liye...or जाकर देखा तो खेत में दो औरतें हगने के लिए बैठी थी उनकी नंगी गांड दिख रही thi....waaah क्या मस्त माल थी यार दोनों hi...ek की गांड बड़ी थी तो एक की भी बहुत मस्त और कासी hui..par हमें उनका चेहरा नहीं दिख रहा था...

में- अबे ये बड़े फूपाजी तो बड़े ठरकी हैं sale...yahan नंगे चूतड़ों को देखकर मुठ मार रहे हैं...

व्- हाँ यारर पर ये दोनों हैं कौन...

मेरे मन में उनके कपडे देखते हुए एक ख्याल aaya...ek मिनट्स कहीं ये वो hi तो नहीं...

Me-chal विनीत आगे चल थोड़ा और तो चेहरा दिख जायेगा तो हम थोड़ा और आगे पहुंचे और हमें साइड से चेहरा दिख gaya...jise देखकर हम पूरी तरह से चौंक गए वो दोनों कोई और नहीं बल्कि विनीत की माँ यानि बुआ ji...or उसकी बहन यानी पूर्वी दीदी thi...unki गांड देखकर hi जो मेरा लुंड तना रहा अब पूरी तरीके से टाइट हो gaya...maine एक बार विनीत की और देखा तो वो बस बूत बना हुआ अपनी माँ और बहिन की नंगी गांड को देखे जा रहा था और उसका हाथ पाजामे के ऊपर से hi लुंड को सहला रहा tha...or देखे भी क्यों न याररर क्या गांड थी दोनों की hi...humari और बुआ जी बैठी थी और उनके गोर बड़े चूतड़ हमें साफ़ दिख रहे थे...





विनीत इन्हे घूरे hi जा रहा tha..or उनसे थोड़ी दूर और पूर्वी दीदी भी बैठी थी...





मेरी नज़र पूर्वी दीदी की गांड से हैट hi नहीं रही थी क्या मस्त गांड थी दीदी ki....haaye मन कर रहा था अभी पीछे से जाकर लुंड घुसा du...aise चूतड़ देखमे के लिए hi फूपाजी यहाँ आये the...isme उनका क्या dosh...inhe तो जो देखले भूल न paye...maine साइड में देखा तो विनीत ने अपना लुंड बहार निकल लिए था और मुठ मार रहा था अपनी बहिन और माँ की गांड को देखते huye....lund तो मेरा भी पूरी तरह टाइट हो चूका था पर मैं मुठ नहीं मरना चाहता tha...main बस उनकी गांड की छवि को आँखों में उतर रहा tha...lekin तभी इस कामुक दृश्य का अंत हो गया उन्दोनो ने अपने चूतड़ों को पानी से साफ़ किआ और अपने कपड़ो से अपनी अपनी गांड को धक् लिए... उनके उठाते hi मैंने भी विनीत को बोलै चलने को वो थोड़ा खोया हुआ सा tha...par मेरी आवाज़ से होश में आया जल्दी से लुंड अंदर किआ और हम घर की तरफ भागने lage....ghar के बहार आकर हाथ dhoye...hath धोते हुए विनीत कहने लगा....

व्- यार ताऊजी इतने बड़े ठरकी निकलेंगे सोचा नहीं tha...meri मम्मी और बहिन की गांड देखकर मुठिया रहे थे....

में- अबे सब ठरकी होते hain...or जब गांड पूर्वी दीदी और बुआ जैसी हो तो लुंड तो किसी का भी कड़क हो जाये.....

व्- पर भाई वो उनकी भतीजी और छोटे भाई की बीवी hai...wo उनके बारे में गलत कैसे सोच सकते हैं...

में- ाचा वो तेरी भी तो माँ है तू उन्हें क्यों छोड़ना चाहता hai...or जब तूने बुआ और दीदी की गांड देखि तो तेरा लुंड क्यों खड़ा हो गया था... तू क्यों मुठियाने लगा था...

व्- भाई वो मैं...

में- मैंने बताया न तुझे उनके पास छूट और गांड है और हमारे पास lund...or सबसे बड़ी बात की रिश्तो की चुदाई जिसे समाज न मंटा हो वो hi लुंड को ज़्यादा सुख देती hai...dekha नहीं बुआ और दीदी को देखकर क्या हाल हुआ था...

तुझे किसी और औरत को छोड़ने में ज़्यादा मज़ा आएगा या अपनी माँ को?

व्- मम्मी ko....bhai मैं तेरी बात समझ गया... और जब जब मुझे ये ख्याल आता है के ताऊजी मेरी माँ बहन की गांड को देखकर मुठ मसर रहे थे और उन्हें छोड़ना चाहते hain...to मेरा लुंड और कड़क हो रहा है...

में- ये hi तो मेरे bhai...rishto की चुदाई लुंड को ज़्यादा सुख देती है... इसलिए तो देख तेरा लुंड ये सोचके hi खड़ा हो जाता है...

व्- कर्मा भाई अब मैं सब समझ गया hun....tu बिलकुल सही कह रहा है...

में- और देख बुआ को मैं भी छोडूंगा कहीं बाद में तू बोले के बताया नहीं tha...or तुझे ाचा न lage..or चांस मिला तो पूर्वी दीदी को भी...

व्- भाई तू छोड़ न जिसे चाहे chod...bas मुझे भी छूट दिलाता रहिओ...

में- अब समझा है तू सच में....

फिर हम दोनों ने ब्रश किआ नीम की लकड़ी को तोड़ कर और घर आये तो सब लोग the...bua और पूर्वी दीदी भी ा गयी thi...maa पापा अनुज ... छोटे फूपाजी... बड़े फूपाजी... बड़ी बुआ और भी कई लोग.....

मुझे आते देखकर hi छोटे फूपाजी बोल पड़े....

छोटे फूपाजी- लो आ गया कर्मा भी इससे hi पूछ लेते हैं...

में- क्या पूछना है फूपाजी..

बुआ- अरे बच्चा ये तेरे पापा तो जाने की बोल रहे hain...aaj hi...waise वहां का काम भी ज़रूरी है तो मैं बोल रही हूँ क तेरी तो छुट्टियां चल रही हैं तो तू रुक जाता शादी tak....main तो अनुज को भी रोकलुन पर उसकी परीक्षा हैं कुछ वो बोल रहा है...

में- मैं क्या बोलूं बुआ अब इसमें...

मैं माँ की तरफ देखने laga...maa ने भी मुझे देखा और बस आँखों से hi शांत रहने का इशारा किआ...

माँ- पर वहां बाघ का काम वगेरा..

बड़ी बुआ- अरे सब हो जायेगा कुछ दिनों की बात hai...ye घरमे रहेगा तो बहुत काम संभल जायेगा.. शादी वाला घर hai...kya कहते हो नीलेश भाई तुम्ही बताओ..

पापा- दीदी कर्मा आपका भी लड़का है और आपकी मर्ज़ी हम सब को मंज़ूर है... कर्मा तू यहीं रुकजा शादी तक...

सब खुश हो गए इस बात se...par मैं और माँ दुखी थे... मैं तो जल्दी से यहाँ से जाकर माँ को प्यार करना चाहता tha...unhe अभी ठीक से छोड़ा भी नहीं था मैंने और अब यहाँ rukna...maa का रुकने का कोई चांस नहीं tha...to मैं काफी दुखी हो गया पर ऊपरी मन से मैंने ठीक है बोल दिए... और माँ की आँखों में देखा वो मुझे hi देख रही थी जैसे कह रही हो बीटा बस थोड़ा सबर करले...

फिर तभी कोई चाय ले आया सबने चाय वगेरा पि नाश्ता kia...phir मैं उठकर ऊपर छत पर ा गया...

मेरा मूड ख़राब हो गया tha....main माँ से दूर नहीं रहना चाहता था पर इनसब की वजह से रुकना छह रहा tha....tabhi थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रहने के बाद मैं छत पर बने रूम में चला गया... ये रिमझिम दीदी के वागल वाला रूम था वो रूम खली था बीच में एक खाट पड़ी थी उस पर जाकर आँख बंद कर के लेट गया तो थोड़ी देर बाद किसी के आने की आहात हुई तो मैंने देखा वो माँ thi.....unhone आते hi झट से गेट बंद kia...or मेरे पास आकर बैठ गयी और मुझे गले से लगा लिए...

माँ- उदास हो गया मेरा laal...haaye राम

Me-maa मुझे तुम्हारे साथ रहना था...

Maa-haan बीटा जानती हु और मैं भी चाहती थी की तू चले ghar...par बीटा सब कुछ हमारे हिसाब से तो नहीं होता न...

Me-Maa ठीक से छोड़ा भी नहीं था मैंने तुम्हे...

माँ- बीटा मैं भी जानती है ये बात और जितना इंतज़ार तुझे hai...utna hi मुझे भी है पर अभी ये कुछ दिन गुज़र le...ye समझ के ये मेरे लिए तेरा गिफ्ट hai...or रही बात मुझे छोड़ने की तो बीटा मेरी छूट अब हमेशा तेरे लिए खुली है... कुछ दिन बाद जितना चाहे उतना छोड़ lena...abhi उदास मत हो और बस कुछ दिन रुकजा...

उनके मुँह से ये सब सुनकर मेरा लुंड टाइट होने लगा...

Me-theek है maa...tum सही कह रही हो मैं इंतज़ार कर लूंगा तुम्हारे लिए थोड़ा...

माँ- मेरा लाल कितना समझदार है और ऐसी लटकी हुई सूरत मत बना कर रहना अब खुश रहना...

Me-jaisa मेरी प्यारी माँ बोले और ये कहकर मैंने उन्हें हंसकर गले लगा लिए...

Maa-mera प्यारा bachhha..or ये कहकर माँ ने मेरे होंठों को पहले एक बार चूमा और फिर चूसने लगी मैं भी उनका साथ देने लगा और उनकी बॉडी पर हाथ भी फिरने लगा....

फिर माँ ने किश तोड़ी और बोली ाचा अब मैं भी चलती हूँ nahane...uske बाद जाना भी है....

में- माँ मेरा लुंड खड़ा हो गया है एक बार अभी करलें?

माँ- नहीं बीटा ये अभी नहीं कर सकते... बहुत रिस्की भी है और टाइम भी नहीं है कोई भी आ सकता है....

Me-par माँ इसका क्या करूँ.. और ये कहकर मैंने खड़े होकर अपनी लोअर नीचे खिसका di...or लुंड बहार आकर झूलने laga...maa की नज़र भी उस पर पड़ी...

माँ- इसको भी अभी खड़ा होना था...

में- माँ तुम सामने हो और खड़ा न हो ऐसा कैसे हो सकता है

ये सुनकर माँ थोड़ी मुस्कुराई

फिर माँ कुछ सोचते हुए बोली रुक कुछ करती hun...or मेरे सामने आकर बैठ gayi...or मेरे लुंड को हाथो में लेकर हिलने लगी अपने हाथ आगे पीछे करने लगी फिर मेरे टोपे पर अपना मुँह आगे लेकर जीभ फिरने लगी....

मुझे मज़ा आने laga...maa की जीभ टोपे से टच होते hi मैं सिहर pada...maa की जीभ मेरे लुंड पर कमाल कररही थी और मेरा लुंड टाइट होता जा रहा tha...phir माँ ने अपना मुँह खोला और मेरे लुंड को चूसने लगी... मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच gaya...maa के मुँह के अंदर मुझे गरम गरम लग रहा tha...or ऐसा लग रहा था जैसे माँ मेरे लुंड को अंदर की तरफ खींच रही हैं...





अपनी माँ से मिली पहली लुंड चूसै का मैं मज़ा ले रहा tha...maa मेरा लुंड पूरे शिद्दत से चूस रही thi...or क्या चूस रही thi...mera लुंड तो बिलकुल अकड़ गया thA...par मुझे पता था के मैं इतनी जल्दी नहीं jhadunga...par माँ तो जैसे जल्द से जल्द मेरा रास पीना चाहती थी... और बुरी तरह से मेरा लुंड छूसराही thi...phir माँ ने कुछ ऐसा किआ जिससे मुझे भी नहीं पता क्या हुआ पर मेरा लुंड फटने को हो gaya...unhone अपना एक हाथ मेरी गांड के पीछे लेजाकर मेरी दरार में उंगली phirai...mere लुंड ने जैसे उनके मुँह ने एक ठुमका maara...or फिर माँ अपनी उंगलिओ से मेरी गांड की दरार को रब करने लगी और फिर जब उनकी उंगली मेरे गांड के छेड़ तक आती तो मेरी गांड टाइट हो जाती और लुंड और तन jata..maa लगातार इसके साथ साथ लुंड को चूस भी रही thi...phir अचानक से माँ एक उंगली को मेरे गांड के छेड़ पर रखा और अंदर घुसाने लगी और गांड के छेड़ पर ज़ोर पड़ा तो मेरा बाँध टूट गया और मैं माँ के मुँह में पिचकारी छोड़ने laga....maa मेरा रास पीने लगी बूत रास इतना सारा था की कुछ उनके मुँह से बहार आ रहा था फिर मैंने लुंड निकला और जो बची पिचकारियां थी उनके चेहरे पर छोड़ दी..





मुझे बड़ा सुकून मिला झड़ने के बाद माँ ने मेरा लुंड जीभ से साफ़ किआ और फिर माँ ने अपना चेहरा ठीक किआ फिर वो और मैं रूम के बहार आये माँ नहाने के लिए घुस गई और मैं नीचे चला गया..

फिर सबने खाना khaya...or जो काम थे वो हुए लेकिन तब तक माँ पापा के जाने का टाइम हो गया तो माँ ने मुझे बोलै खुश रहना bas...maine भी माँ को देखकर मुस्कुराने लगा.... पापा ने बोलै बुआ की बात maanio...or अचे से रहना... अनुज ने बोलै चुपचाप भाई कोई नहीं जब आप आ जाओगे तो पढ़ा देना .. मैंने उसकी और देखा और मुस्कुराया ..फिर माँ पापा अनुज सब से विदा लेकर चले गए और मैं घर की तरफ बापिस मुद गया... और सोचने लगा देख कर्मा कैसे बीतेंगे तेरे दिन यहाँ बुआ के यहाँ ...

इस जानकारी को सेव रखना ध्यान से
 
तो दोस्तों लास्ट अपडेट में अपने देखा कर्मा के घरवाले बापिस चले जाते हैं अपने घर और कर्मा बुआ के यहाँ रुक जाता hai...ab आगे..

अपडेट 25
माँ को जाते हुए देखना बिलकुल भी ाचा नहीं लग रहा था फिर खुद को समझाया की अबे कुछ दिनों की बात है क्या बच्चो की तरह रोटा है और यहाँ इतनी छूटें हैं ये दिन कहाँ निकल जायेंगे पता hi नहीं चलेगा... फिर मैं इधर उधर की बातों में लग गया थोड़ी देर पूर्वी दीदी के लड़के को khilaya...socha था थोड़ा रिमझिम दीदी से मज़े ले लूंगा पर उनके साथ कोई न कोई tha....par बाकी के मेहमान भी अब जा चुके थे और दोपहर होते होते बस बुआ के घरवाले और मैं बचे...

पुष्पेंद्र फूपाजी और बड़े फूपाजी भी अपनी दुकानों पर निकल gaye...main अभी भी पूर्वी दीदी के बच्चे को खिला रहा था तो विनीत मेरे पास आया...

व्- क्या कर्मा भाई तुझे अपना वडा तो याद है न...

में- कौनसा वडा...

थोड़ा मुँह बनाते हुए विनीत बोलै..

व्- क्या भाई तू ऐसे मत कर yaar...mera लुंड फटने को हो रहा hai...kuch जुगाड़ कर na...maa न सही कोई भी दिलादे फ़िलहाल तो...

में- अबे सेल मेरे पास छूटें बाँट थोड़े hi रही हैं... मैंने बोलै था की मदद कर दूंगा पूरी दिलाने में बूत म्हणत करनी पड़ती है...

व्- हाँ भाई तो करते हैं न म्हणत जो तू चाहे मैं वो करूँगा...

में- पक्का पीछे तो नहीं हटेगा...

व्- बिलकुल नहीं bhai...jubaan है..

में- ाचा अभी घर में कौन कौन है और क्या कर रहा hai..ye पता करके बता मुझे और ये बच्चे को दीदी को दे आ..

व्- अभी आया

और वो ये कहकर मेरे हाथो से बच्चा लेकर चला gaya...main सोचता रहा क्या प्लान banaun...choot तो मुझे भी मारनी है कौन दे देगी इतनी जल्दी...

तभी विनीत आ गया..

व्- भाई माँ और पूर्वी दीदी सो रही hain..maa के रूम में... रिमझिम दीदी अपने रूम में सो रही हैं और तै जी अपने रूम में हैं कुछ कपडे वपड़े निकल रही हैं...

वो ये सब एक सांस में बोल गया...

में- विनीत तू सच में कर पायेगा न बाद में पीछे हटा तो देख lio...ke इनके बारे में तो मैंने कभी सोचा hi नहीं भाई वगेरा वगेरा कहीं ज्ञान छोड़ने lage...choot छोड़ लिओ ज्ञान नहीं...

व्- भाई तू एक बार भरोसा करके तो देख..

में- ठीक है तो चल बड़े फूपाजी से हिसाब बराबर करते हैं...

व्- मतलब...

में- अबे उन्होंने तेरे माल पर नज़र डाली हम उनका माल छोड़ेंगे...

व्- ( चौंकाते हुए) मतलब तू सच बोल रहा है...

में- सुन अब करना क्या hai...koi ऐसा रूम है घर में जिसमे दो गेट हो...

व्- एक तो ऊपर वाला है रिमझिम दीदी के वागल वाला और एक तै जी वाला है..

में- सच में बड़ी बुआ के रूम में दो गेट हैं...

व्- हाँ भाई एक हॉल में खुलता है और एक बाथरूम में और बाथरूम का बहार...

में- तो हो गया काम मेरी बात सुन अब तुझे करना क्या है...

और मैंने उसे वो hi पुराण सा प्लान बता दिए मुझे पता था ये काम कर jayega...phir मैं उठ कर बड़ी बुआ के कमरे की तरफ चला गया और कमरे में जाकर देखा तो बड़ी bua...kuch नए पुराने कपडे अलग कर रही थी...

में- क्या बुआ जी आप फिर से काम में लग गयी...

और घुस कर गेट को अंदर से बंद कर दिए...

उन्होंने मेरी तरफ देखा और कुछ सोचने सा लगी फिर नार्मल होते हुए जवाब दिए...

सावित्री- क्या करें बच्चा काम तो करना hi पड़ता है..

में- कल भी आपने इतना सारा काम किआ था और आज भी

ये कहकर मैं मुस्कुरा दिए उन्हें कल रात की बात याद दिलाते हुए...

सावित्री- अरे बच्चा मैं तो काम चलता hi रहेगा तू जा और जाके आराम करले थोड़ा...

में- बुआ मैं यहाँ आराम करने के लिए नहीं रुका हूँ....

सावित्री- तो किसलिए रुका है रे..

में- आपका काम करने के लिए...

मेरी बात का मतलब समझ कर वो थोड़ा शर्मा गयी

सावित्री- हट करमजले बुआ से hi मज़ाक करता है....

में- अरे बुआ मज़ाक नहीं लाओ मैं तुम्हारे कंधे की मालिश करदूँ...

savitri-nahi बछ्ह रहने दे मुझे अचे से पता है तू क्या मालिश करेगा और कहाँ करेगा..

में- अरे बुआ करने दो न क्यों परेशां हो रही हो

और इतना कहकर मैं बिना उनके जवाब को सुने उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपने हाथ उनके कंधे पर रख दिए और दबाने laga...bua न न न करने लगी पर फिर कुछ पल बाद hi शांत हो gayi...or मैं कंधे दबाने laga...main फिर कंधो पर उंगलियां चलने लगा और उंगलियां ब्लाउज के अंदर तक ले jata..bua कुछ नहीं बोली तो मैंने ब्लाउज को कंधे से नीचे की और खिसका दिए उनकी ब्रा दिखने लगी..

सावित्री- क्या कर रहा है रे...

Me-bua ब्लाउज की वजह से ठीक से कर नहीं प् रहा था इसलिए साइड कर दिए और फिर दबाने लगा...





एक हाथ से कंधे दबाते हुए एक हाथ मैं उनकी भरी हुई कमर तक ले गया और उसे सहलाने laga...or कंधे वाला hath..blouse के ऊपर से छूछीयो पर टच करने laga...or साथ में पेट को सहला और मसल रहा था बड़ी बुआ अब गरम होने लगी थी शायद वो भी ये जानती थी की मैं यहाँ उन्हें छोड़ने आया hun...to उन्होंने भी बेकार के नखरे नहीं किये और मुझे उनके शरीर के साथ खेलने दे रही थी...

मैंने उनकी तरफ से कोई विरोध न देखते हुए झट से उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्लाउज उतर दिए और उनकी छूछीयो को ब्रा के ऊपर निकल लिए..





उनकी आँखें बंद थी और मैं उनके बड़े बड़े खरबूजों को हाथ से मसल रहा tha...wo आअह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह बच्चा की आवाज़ें निकल रही thi...maine फिर आगे बढ़कर उनके एक छुच्छी को मुँह में भर लिए और चूसने लगा और दूसरी को दबाने laga....bua पूरी तरह से गरम हो गयी थी जो कसार रह गयी थी वो मेरा खड़ा लुंड उनकी गांड पर घिस घिस कर पूरी कर रहा था... मैंने टाइम ज़्यादा न लेते हुए उनकी साड़ी का चोर पकड़ा और उसे खोल दिए साड़ी निकलते hi मैंने पेटीकोट का नैरा भी खोल कर पेटीकोट भी नीचे गिरा dia...ab बुआ सिर्फ ब्रा और पंतय में थी जिसमे उनकी छुछियां ब्रा से बहार थी मैं अपन लुंड उनकी गांड में तेज़ी से घिसने laga...wo मेरे लुंड से पूरी तरह गरम हो गयी thi...phir बुआ को मैंने नीचे की तरफ धक्का दिए और वो नीचे बैठ gayi...or उन्होंने तुरंत hi मेरी ज़िप खोलकर मेरे लुंड को बहार निकल लिए...

और हाथ में पकड़ कर हिलने lagi...unke हाथ लगते hi मुझे लुंड पर ाचा सा laga...phir उन्होंने देर न करते हुए मेरा लुंड तुरंत अपने मुँह में ले lia...or चूसने लगी...





मेरी आँखें बंद हो गयी मज़े से... और मैं लुंड चूसने का मज़ा लेने लगा.... क्या लुंड चूस रही थी wo...lund को मुँह में लेकर अंदर hi टोपे पर जीभ फिरती और साथ में मुँह आगे पीछे करके चूसती bhi....sali को बहुत एक्सपीरियंस लगता hai...aahhh ये तो मेरी बुआ से भी बड़ी रैंड hai...lagta hai...aaahhhhhh पर मैं ज़्यादा देर नहीं रुक सकता था तो मैंने उनके मुँह से अपना लुंड निकला और मैंने उन्हें खड़ा किआ और बीएड पर झुका dia...or पीछे से उनकी बड़ी गांड को मसलने लगा ...और फिर उनकी पंतय को उतर दिए कल रात तो नहीं देख पाया था ठीक से बूत क्या मस्त गांड थी यार बड़ी बुआ ki...itane बड़े चूतड़ उनके बीचे में भूरा गांड का छेड़ और उसके नीचे रसीली choot...maine तुरंत मुँह आगे करके उनकी छूट पर लगा दिए और चाटने laga...wo आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कर्मा... kya...aahhh कर रहा है.... बछ्हः आह्ह्ह्हह करने लगी...

उनकी छूट बहुत गीली thi...or मैंने उसमे जीभ डालकर उसे चाट रहा tha...wo मज़े से अपना सर इधर उधर पटक रही thi...maine कुछ देर और छूट छाती फिर खड़ा हुआ और लुंड उनकी छूट के मुँह पर रखा और कमर पकड़ कर धक्का lagaya...lund सरसराता हुआ छूट में घुसगया.... वो aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh कर्मा मा... ऐसे करके सिसकिया देने लगी...

छूट की गरम गरम दीवारें मेरे लुंड को पकड़ने लगी और मुझे एक आनंद मिल रहा था... मैंने देर न करते हुए एक और झटका मारा और पूरा लुंड उनकी छूट में समां गया और बुआ की एक ahhhhhhhhhhhh और निकली और फिर मैंने लुंड को अंदर बहार करना चालू कर दिए.... मेरे हिप्स उनके चूतड़ों से टकरा रहे थे और थप थप की आवाज़ ा रही thi...har झटके के साथ बुआ के चूतड़ जेली की तरह hilte...main लम्बे और तगड़े झटके मार रहा था बुआ की छूट में...

बी बुआ- आअह्ह्ह बीटा छोड़ ऐसे hi....haaaAnmm आआअह्ह्ह बुझदे इस छूट की प्यास आअह्ह्ह्ह...

में- आअह्हह्ह्ह्ह बुआ क्या माखन सी छूट है तुम्हारी.... आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह maaaaaaaaaaa...

और मैंने धक्के और तेज़ कर दिए छोड़ते छोड़ते मैंने अपने पीछे बाथरूम की गेट की तरफ देखा तो जैसा बोलै था विनीत वहीं खड़ा था और छिपकर हमारी चुदाई देख रहा tha...maine उसे इशारे से अंदर आने को बोलै तो वो चुपचाप अंदर aaya...wo साला पहले से hi पूरी तैयारी में tha...or पूरा नंगा था... वो मेरे पास आकर खड़ा हो गया और मैं बड़ी बुआ को कसके छोड़ रहा tha...wo बीएड पर झुकी हुईं आँखें बंद करके छुद्रहि thi...tez तेज़ झटको से अगले 5 मीन्स में वो बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो gayi...or मुझे लगा वो झड़ने की कगार पर hain..to मैंने झट से लुंड निकल दिए उनकी छूट से.... और साइड हैट gaya..Mere हटते hi बुआ- आअह्ह्ह्ह ककककककयण कर्मा... बापिस दाल न..... जल्दी दाल मादरचोद...

पर मैं तुरंत साइड हुआ और विनीत मेरी जगह आ gaya...or जल्दी से उसने अपना लुंड अपनी तै की छूट पर रखा और झटका दिए और उसका पूरा लुंड बड़ी बुआ की छूट में समां गया.. और वो बिना किसी देरी के उनकी कमर पकड़ कर ताबरतोड़ तरीके से बुआ को छोड़ने लगा... मैंने ये समय इसलिए चुना था क्यूंकि गरम होकर बुआ झड़ने के टाइम कुछ भी मन नहीं karegi....main तुरंत t-shirt उतर कर नंगा हुआ और बुआ के मुँह की तरफ गया वो आँखें बंद करके विनीत से चुद रही थी उन्हें पता भी नहीं था...

मैंने अपना लुंड लिए और उनके होंठों से लगा दिए एक सेकंड बाद उन्होंने अपनी आँखें खोली और मुझे देखा फिर कुछ ख्याल आया उन्हें और मुद कर देखा विनीत को जो उनकी छूट में लुंड डालकर उन्हें बजा रहा था और उन्होंने कुछ रिएक्शन नहीं दिए और चेहरा मेरी तरफ करके मेरा लुंड गुप् से मुँह में ले लिए और चूसने लगी





और फिर अगली hi पल मुँह हटा लिए और एक चीख... के साथ बुआ झड़ने lagi...unki कमर झटके खाने lagi...or वो विनीत के लुंड पर झड़ने lagi...unki पूरी बॉडी अकड़ रही थी कमर में झटके लग रहे थे पर विनीत भी बुरी तरह से उन्हें चोदे जा रहा था और फिर शायद छूट मिलने की एक्ससिटेमेंट थी या फिर अपनी तै जी को छोड़ने का सुख के विनीत भी खुद को रोक नहीं पाया और बुआ की छूट में झड़ने लगा....

दो चार झटके मार कर वो उनकी गांड से बिलकुल चिपक गया और झाड़ गया...... और उनके ऊपर गिर सा गया बुआ भी बीएड पर गिरी हुई thi...phir थोड़ी देर baad...bua ने अपना सर उठाया और मेरी आँखों में देखा....

सावित्री- बना दिए तूने मुझे पूरी raand...apane भतीजे से छुड़वा कर....

और ये कहकर उन्होंने मेरे खड़े लुंड को मुँह में ले लिए विनीत बगल में लेता हुआ हमें देख रहा था...

में- तुम हो भी तो रांड बुआ... तुम्हे मज़ा आया या नहीं...

सावित्री- मममममममहहह्म्म्मम्म्म्म

मेरा लुंड चूसते हुए बस इतना hi कहा...

मैंने विनीत को बोलै

में- अबे उठ चुदाई करने आया है या लेटने चल बुआ की छूट और गांड चाट...

विनीत झट से उठा और अपनी तै जी के पीछे जाकर अपनी जीभ छूट पर राखी... और चाटने लगा उधर अपने भतीजे की जीभ छूट पर पड़ते hi बुआ का मुँह मेरे लुंड पर और कहर ढाने लगा... विनीत बुआ की छूट ऐसे चाट रहा था न जाने कब से भूखा हो और छूट hi उसका खाना ho...bua को भी बहुत मज़ा ा रहा था और वो hi मज़ा वो मुझे मेरा लुंड चूस कर दे रही थी.... फिर विनीत ने जीभ छूट से निकली और गांड पर फिरने लगा और फिर गांड के छेड़ को चाटने लगा... बुआ की तो हालत ख़राब हो गयी जैसे.... विनीत जीभ को नुकीला कर के उनकी गांड में घुसा रहा था बुआ को बहुत मज़ा ा रहा था... पर अब मैं कुछ और करना चाहता था तो मैंने बुआ के मुँह से लुंड निकला और बीएड पर सीधा लेट गया और बुआ को अपने ऊपर आने को बोलै... बुआ मेरी तरफ मुँह करके बैठने लगी तो मैंने उन्हें घूमकर बैठने को बोलै अब उनकी पीठ मेरी तरफ thi...bua अपने पेअर मेरी दोनों तरफ रखकर लुंड को हाथ में पकड़ा और छूट पर सेट किआ और बैठ gayi...lund छूट को चीरता हुआ अंदर चला gaya...or फिर उनकी गांड मेरे पेट से टकरा gayi...mera पूरा लुंड उनकी छूट में घुस gaya...or वो aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh कर के लुंड पर उछलने lagi...phir कुछ झटके बाद मैंने उनकी कमर पकड़ कर उन्हें ऊपर उठा दिए जिससे मेरा लुंड निकल गया फिर मैंने बापिस छूट पर सेट किआ और फिर अंदर दाल dia..phir दो तीन झटके के बाद मैंने दोबारा किआ और दोबारा लुंड के छूट पर पड़ते hi बुआ बापिस बैठ gayi...tabhi विनीत बुआ के सर की तरफ आ गया और अपना लुंड उनके मुँह पर करदिअ ...बुआ ने भी एक सेकंड की भी झिझक किये बिना विनीत का लुंड मुँह में ले लिए और चूसने लगी... विनीत का लुंड दोबारा से खड़ा हो रहा था... मैंने दो तीन झटके फिरसे मरे बुआ की छूट में ऑर्डर फिर से उठा दिए लुंड फिर उनकी छूट से निकल गया... बूत इस बार जवब बुआ के चूतड़ दोबारा नीचे आये तो मैंने अपने लुंड का टोपा उनकी छूट की जगह गांड के छेद पर रख dia..mera लुंड छूट की वजह से गीला था और बुआ अपने वजन के साथ बापिस बैठने लगी जिससे मेरा लुंड उनकी गांड से टकराया और फिर एक चीख आई aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh और मेरा लुंड बुआ की गांड के अंदर दो िन्छ घुस gaya....bua जैसे इस हमले के लिए तैयार नहीं thi..or लुंड जब गांड में घुसा तो उनके मुँह से आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी माँ मार dia...itna मोटा लोढ़ा गांड में घुसा दिए.... और मैंने उनकी कमर को पकड़ कर एक और नीचे से झटका मारा तो मेरा आधे से ज़्यादा लुंड उनकी गांड में चला गया...

बुआ- मदर छोड़ो जाकर अपनी माँ को chodo...meri गांड और छूट फाड़ के रख di...aaahhh.

में- में आअह्ह्ह्ह क्या मस्त गांड है बुआ tumhsri....isse पहले नहीं मरवाई क्या....

बुआ- मरवाई है पर अपने लुंड को देख इतना बड़ा है मेरी गांडीर के रख दी... विनीत ने अपना लुंड तुरंत बुआ के कुछ में घुसेड़ दिए और बुआ उसे चूसने लगी मैंने बुआ के ध्यान न होने का फायदा उठाया और फिर कमर को पकड़ा बुआ की और नीचे खींच दिए जिससे मेरा अब पूरा लुंड बुआ की गांड में...

विनीत का लुंड भी उनकी गांड में में मेरा लुंड देख कर तन गया था...... विनीत ने बुआ का मुँह पकड़ा और अपना लुंड उनके मुँह में दाल दिए और बुआ चूसने lagi....bua का ध्यान इधर न होने पर मैंने एक और नीचे से झटका मारा और मेरा पूरा लुंड बुआ की गांड में घुस gaya...or बुआ मेरे पेट पारर गिरते hi रुक gayi...or उनका मुँह विनीत के लुंड से हैट गया और तेज़ तेज़ सांस लेने लगी.....

सावित्री- आअह्हह्ह्ह्ह मेरी गांड पहात gayi.....aahhhh मा मेरी गांड...

मैंने तभी गेट के बहार की तरफ कुछ आहात suni...phir सोचा शायद मेरा वहां होगा और मैं सोचने लगा कैसे बुआ को और गरम करूँ..

मैंने आगे हाथ लेजाकर उनकी छूट के डेन पर रखा और रब करने लगा फिर थोड़ी देर बाद बुआ थोड़ी ठीक हुई तो खुद hi अपनी गांड उछाल उछाल कर गांड मरवाने lagi...or फिर बुआ ने विनीत का लुंड भी मुँह में ले lia...or चूसने लगी और इधर मुझे ुबकि गांड मरने में बहुत मज़ा आ रहा tha...bahut गरम गांड थी उनकी और काफी टाइट bhi...wo पूरी शिद्दत से विनीत का लुंड चूस रही थी और अपनी गांड मेरे लुंड पर पटक rahi...thi...





बुआ हम दोनों को hi अपने दो छेड़ो से खुश काट रही thi....vineet के लुंड को चूसती हुई मेरे लुंड को गांड में जन्नत का मज़ा दे रही thi.....aisa लग रहा था मैं गरम चॉकलेट में लुंड दाल कर अंदर बहार का ररः था.... कुछ देर बाद विनीत ने मेरी तरड़ देख और बोलै के मुझे भी छोड़ना है..

में- हाँ तो छोड़लेना ... देख छूट तो खली है बुआ की....

बुआ ये बात सुनकर चौंक गयी और शायद थोड़ा विनीत भी पर मेरी बात तो उसे माननी hi thi...par बुआ बोली...

सावित्री- नहीं बछ्ह नहीं छूट में अब नहीं एक एक करके मार lo...humne कभी नहीं लिए छूट और गांड में एक साथ.....

मैं लगातार बुआ की गांड मरता जा रहा था...

में- बुआ इससे पहले कभी अपने भतीजे से भी चुसवाया नहीं न सब कुछ. पहली बार होता hai....or ाचा भी होता है...

बुआ- आअह्ह्ह बछ्ह मैं झेल नहीं पाउंगी....

में- सब हो जायेगा बुआ और मैंने विनीत को िस्गारा किआ के अपना लुंड दाल छूट में ... विनीत हम दोनों की टैंगो के बीच आया बुआ ने दर से अपनी आँखें बंद karli...phir विनीत ने अपने लुंड का टोपा बुआ की छूट पर रखा और ेल झटका मारा और उसका लुंड 2-3 इंच बुआ की छूट में घुस gaya....bua का मुँह फटा का फटा hi रह gaya....or कुछ नहे बोली.. मुझे एक बार फिर ऐसा लगा जैसे कोई है गेट के बहार पर नैन यहाँ सर हिलना भी नहीं चाहता था मैंने मैंने अपना लुंड गांड में पेले हुए वेट करता raha....mujhe भी विनीत का लुंड घुसेड़ने से बुआ की गांड थोड़ी टाइट होती lagi...thodi देर रुकने पर बुआ की साँसे नार्मल हुई ोड उन्होंने खुद से कमर थोड़ा थोड़ा हिलना स्टार्ट कर दिए तो अब हम दोनों भी अपनी कमर हिला हिला कर बुआ को एक साथ छोड़ने लगे....





बड़ा hi कामुक दृषिअ था, एक भतीजा अपने मां के लड़के के साथ मिलकर अपनी तै की छूट और गांड एक साथ मार रहे the...mujhe ग्रुप सेक्स में बहुत मज़ा आता था जो की अभी आ रहा था और अब हम दोनों के hi झटके बहुत तेज़ हो गए थे... और बुआ भी अब खूब मज़े लेकर चुद रही थी...

Savitri-aaahhhhhh Ahhhhhhhhhhh हांमं कर्मा फाड़ दे अपनी बुआ की choot.....aaaah विनीत छोड़ अपनी तै ko...mere सामने पैदा हुए दोनों बच्चे अपने मुसलो से मेरी पिटाई कर रहे hain...aaaahhhhhh विनीत.... karma...aaaaahhhhh...

ऐसे hi कुछ देर और हमने ताबड़ तोड़ तरीके से बुआ को choda....or फिर बुआ की बॉडी एक बार फिर अकड़ी और बुआ झड़ने लगी.... काफी देर तक वो अपना सर पीछे किये आँखें बंद किये झड़ते रही और फिर थक कर गिर gayi....maine भी बुआ की गांड से लुंड निकल लिए और विनीत ऊपर से हैट gaya..main बीएड से खड़ा हुआ और बोलै अभी टॉयलेट करके आता hun...bua ने कुछ नहीं बोलै बस लेती रही सीढ़ी... विनीत ने हाँ मैं सर हिलाया और फिर दोबारा अपनी तै जी के पैरो के बीच आकर दोबारा लुंड छूट में दाल दिए और छोड़ने लगा...

मेरा टॉयलेट करना एक बहाना था मैं बस अपना वहां मिटाना चाहता था की कोई गेट के बहार था या नहीं......

सो आगे क्या कर्मा का वहां सच था या उसके मन का khayal...ye सब जानिए अगली अपडेट में तब तक प्लीज पढ़ते रहिये और कमैंट्स करते रहिये.... शुक्रिया...
 
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