Incest Katha Chodampur Ki - Page 7 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

मैं हँसते हुए उनके ऊपर से हैट गया और फिर हम बहुत थक गए थे तो नंगे hi एक दुसरे की बाहों में सो गए....अब आगे..

अपडेट 36

रात को काफी लेट सोने की वजह से मैं काफी देर तक सोता रहा.... सुबह मुझे किसी ने हिलाकर जगाया... आँखें खुली तो देखा रिमझिम दीदी thi...wo बिलकुल नाहा धोकर तैयार thi...unke गीले बाल , उनके बदन से आती हुई खुशबु उन्हें और खूबसूरत बना रही थी... मैंने जब उनकी तरफ देखा तो वो शर्मा gayi....jaise मेरी बीवी हो .. मुझे बहुत प्यार आया उन पर और उन्हें पकड़ कर अपने ऊपर गिरा लिए...

में- तो मेरी जान पहले से उठी हुई है और मुझे जगाया भी नहीं...

रिम- तुझे जागकर अपनी जान नहीं निकलवानी थी दोबारा...

में- जान तो मैं अभी भी निकल सकता हूँ...

ये कहते हुए मैंने हाथ उनकी कमर पर रख लिए और दबाने लगा...

रिम- अभी चची ऊपर आने वाली हैं नीचे से आवाज़ दे रही थी तुझे अभी यहाँ देखेंगी तो पूछेंगी...

मैंने कुछ नहीं बोलै और अपने होंठ उनके रसीले होंठों पर टिका diye...subah सुबह hi ऐसा मीठा नाश्ता मिल जाये तो बात hi क्या है... मैं उनके होंठो के रास को पीने laga..wo भी मेरा साथ दे रही थी... तभी फिर से बुआ की आवाज़ आई और वो मुझसे अलग हो गयी....

मेरा हाथ खींच कर मुझे उठाने लगी... मैंने भी उठना सही समझा और खड़ा हुआ और अपने कपडे पहने और गेट के बहार निकलने लगा रिमझिम बिस्तर ठीक करने lagi...main गेट के बहार निकला तो बुआ ऊपर आ gayi...mujhe रिमझिम के कमरे से निकलता देख मुस्कुराने लगी....

बुआ- अब उठा है तू लगता है रात अपनी रिमझिम दीदी से ज़्यादा hi बातें कर ली तूने...

में- हाँ वहीं बातें जैसी तुमने अपने विनीत बेटे के साथ की रात को...

बुआ शर्मा गयी

बुआ- बहुत बेशरम हो गया है tu...or रिम्मी कहाँ है उसे चलने लायक तो छोड़ा है न हफ्ते भर में शादी है उसकी...

में- बुआ आपके खंडन की है वो भी उछाल उछाल के लुंड लेती है लगता hi नहीं पहली बार चूड़ी है...

बुआ- क्या पहली बार था रिम्मी का हे भगवान् क्या लड़की है अपने पति की जगह तुझसे सील तुड़वाली...

में- उनकी मर्ज़ी थी bua....unhe जिसमे ख़ुशी मिली उन्होंने वो किआ...

बुआ- उसकी ख़ुशी पता नहीं तेरी ख़ुशी ज़रूर थी और ये ककहकार उन्होंने मेरे खड़े लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ लिए और दबाने लगी...

में- ाःह bua...waise भी खड़ा है तुम्हे hi दिक्कत हो जाएगी अभी...

तभी पीछे से रिमझिम दीदी के गेट बंद करने की आहात हुई तो बुआ ने छोड़ दिए और बोली- आठ तैयार हो गयी रिम्मी तू चल नीचे जाकर नाश्ता करले और ये ऊपर hi सोया tha...kya...

रिमझिम बुआ की बात सुनकर थोड़ा घबरा गयी- वो हननननन चची ये रात यहीं...

Me-haan बुआ नीचे नींद नहीं आई तो मैं ऊपर दीदी से बातें करने चला आया था और फिर यहीं सो गया ...

बुआ- रिम्मी इसने रात में परेशां तो नहीं किआ...

रिम- वो नहीं चची कोई परेशानी नहीं हुई...

रिमझिम मेरी तरफ देख कर शर्माने लगी...

रिम- चची मैं नीचे जा रही हूँ नाश्ते में पूर्वी की मदद कर देती हूँ...

बुआ- ठीक है बीटा जा...

रिमझिम नीचे चली जाती है...

Bua-dekh तो कैसे शर्मा रही थी जैसे तू पति हो इसका..

में- काम तो मैं पति वाले hi करता हूँ और अब आपकी बरी है बुआ वाले काम करने की..

Bua-kaisa काम..

मैं उन्हें पकड़ कर कमरे के अंदर ले गया और गेट बंद कर दिए...

में- भतीजे के खड़े लुंड को शांत करने का काम.. और ये कहकर मैंने अपना लोअर नीचे खिसका कर लुंड को बहार निकल लिया और उन्हें नीचे झुका दिए...

बुआ- कर्मा सब घर में hi हैं किसी ने देख लिए तो गड़बड़ हो जाएगी...

में- तो जल्दी करो न फिर..

और मैंने अपना लुंड उनके मुँह पर लगा diya...unhone भी जल्दी से मुँह में लिए और चूसने लगी... बड़ा मज़ा आ गया बुआ जे मुँह में लुंड जाते hi...bua चूसने में भी एक्सपर्ट थी...

पर ज़्यादा टाइम नहीं था तो लुंड के गीले होते hi मैंने उनके मुँह से निकल लिए और कमरे के कोने में राखी टेबल को पकड़ कर बुआ को झुका दिए और उनके पीछे आकर उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर दिए जिससे उनकी बड़ी गांड नंगी हो गयी पर टाइम की कमी को देखतर हुए मैंने अपने लुंड को उनकी छूट पर रखा और धक्क्क मार कर ा अंदर दाल दिए...

बुआ- आअह्ह्ह बछ्ह ह्म्म्मम्म्म्म

और मैं बुआ की कमर पकड़ कर उन्हें तेज़ तेज़ छोड़ने लगा





मैंने ऐसे hi बुआ की चुदाई करने लगा और बुआ हलकी सी अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह करती रही....

उसी पोजीशन में मैंने बुआ को करीब अगले 10 मिनट्स तक छोड़ा और फिर उनकी छूट में झाड़ गया फिर बुआ और मैंने अपने कपडे ठीक किये और हम लोग नीचे आ gaye...neeche देखा तो सब लोग बैठे थे फूपाजी और बड़े फूपाजी शादी का कार्ड लेकर बैठे the..or आपस में बात कर रहे थे... बड़ी बुआ पूर्वी दीदी के बच्चे को लेकर बैठी थी वहीं पूर्वी और रिमझिम दीदी किचन में नाश्ता बना रही thi..bua किचन में चली gayi...or मैं फ्रेश होने चला गया थोड़ी देर में आया तो सब नाश्ता खा रहे थे... पूर्वी दीदी ने मुझे भी नाश्ता दिए...

बड़े फूपाजी- अरे बीटा कर्मा एक काम करना है आज तुझे...

में- ग फूपाजी..

बी फूपाजी- विनीत तू मेरे साथ chalega...aaj जो कुछ कार्ड बच गए हैं वो बी दे आते हैं बाकि हलवाई वगेरा को भी बोल आएंगे एक बार और..

विनीत- ठीक ताऊ जी...

फूपाजी- मैं जा रहा हूँ मज़दूर पकड़ कर खेत खली करवा देता हूँ टेंट के लिए...

बी फूपाजी- कर्मा हाँ तू एक काम कर मेरी मोटरसाइकिल ले जा और ये रिम्मी के मां के घर चला जा लखनपुर mein...uska मां तो शादी तक आ नहीं पायेगा to...mami और गया को ले आ....

में- ठीक है फूपाजी आप पता लिखवा दो मैं चला जाऊंगा...

मैं मन में सोचने लगा कहाँ फंसा रहे dia....ab लखनपुर जाना padega..socha था आज रिमझिम से मज़े लेता पूरे din...khair मन तो कर नहीं सकता tha...isliye हाँ बोल्दिए...

बी फूपाजी- और वहीं टेंट वाले को भी डीओ एक बार और बाद में कोई दिक्कत न हो...

तभी मैंने देखा की बड़े फूपाजी बास्त करते हुए कहीं और देख रहे थे मैंने नज़र का पीछे किआ तो देखा बुआ झुक कर कोई काम कर रही थी तो उनकी साड़ी का पल्लू नीचे हो गया था तो उनके बड़े छूछे ब्लाउज में बहार दिख रहे थे बड़े फूपाजी की नज़र वहीं पर तिकी हुई थी...





मैंने मन में सोचा की ये बुआ को आँखों से hi छोड़ denge...par सोचा जब सब एक दुसरे को छोड़ रहे हैं तो इसमें इनका क्या दोष...

में- फूपाजी ठीक है किस टाइम जॉन वहां ममी को लेने....

बी फूपाजी- haannnn...acha वहां चला जा अभी तैयार hokar...jitni जल्दी हो आएगा उतना ाचा है...

में- ठीक है फूपाजी मैं निकल जाऊंगा...

फिर सब अपने काम में लग गए बड़े फूपाजी बुआ को अब भी ताड रहे थे...

और बुआ को भी शायद ये सब पता चल रहा था तो वो भी जान कर अपना पल्लू ठीक नहीं कर रही thi...Main अपनी प्लेट किचन में रखने के लिए उठा वहां पूर्वी दीदी बर्तन धो रही थी...

में- कैसा लगा अपने पापा का प्यार पूरी रात?

पूर्वी- (शर्मा गयी फिर बोली) बदमाश है तू बहुत... बेशर्म कहीं का...

में- अपने पापा से पूरी रात चुदाई तुमने करवाई और बेशरम मैं hun...ye तो अन्याय है...

पूर्वी- धत्तत्त ऐसे बात करता है कोई दीदी से...

में- ाचा दीदी मज़ा आया की नहीं...

पूर्वी - सच बताऊँ मज़ा तो बहुत आया...

में- हाय मेरी पापा की beti...sharma भी रही ho....acha दीदी अब पापा से प्यार हो गया हो तो थोड़ा भाई को भी करलो..

पूर्वी- क्यों रिमझिम ने मन कर दिया...

मैं चुनते हुए..

में- रिमझिम मतलब...

पूर्वी- बीटा दीदी हूँ तेरी सब पता रहता है कहाँ तू मुँह मार रहा है और कहाँ लुंड...

में- दीदी तुम्हे पता hi तो है हाँ रात को रिमझिम दीदी के साथ चुदाई की...

पूर्वी- बता न मुझे भी शुरू से...

में- यहीं अभी कैसे?

पूर्वी- अरे देख रहा है कितने बर्तन पड़े हुए hain..tu जब तक बताएगा तब तक ये भी धूल जायेंगे...

फिर मैंने पूर्वी दीदी को अपनी और रिमझिम की कहानी पूरी sunai...didi और मैं दोनों hi सुनकर गरम हो गए...

में- दीदी बर्तन तो धूल गए अब कुछ करो न लुंड बिलकुल टाइट हो गया है...

Poorvi-wo तो मुझे साफ़ नज़र ा रहा है... सब यहीं घर में क्या karun...ek काम कर तू ऊपर वाले बाथरूम में जा नहाने के bahane...main आती हूँ..

फिर मैं दीदी के कहे अनुसार अपने कपडे वगेरा लेकर ऊपर वाले बाथरूम में घुस gaya...or वेट करने लगा कुछ देर बाद पूर्वी दीदी की गेट के बहार से आवाज़ आई तो मैंने गेट खोला और वो अंदर घुस गयी....

आते hi मैंने उन्हें अपनी बाँहों में जकड लिए और अपने होंठों को उनके होंठो से भिड़ा दिया... और चूसने laga...par समय का अभाव और सिचुएशन को देखते हुए मैंने जल्दी करने का सोचा... फिर मैंने उन्हें नीचे बिठा दिए और वो मेरा लुंड बहार निकल कर चूसने लगी....





दीदी ने अपने हाथो से खुद hi अपना ब्लाउज ऊपर खिसका दिए और अपने बड़े बड़े बूब्स बहार निकल liye...bra बच्ची को दूध पिलाने की वजह से उन्होंने पहनी नहीं thi...maine कुछ देर उनसे लुंड चुसवाने के बाद दीदी को खड़ा कर दिए और साड़ी और पेटीकोट को खींच कर निकल दिए क्यूंकि मुझे उन्हें नंगा देखना था फिर पंतय भी निकल दी पर ब्लाउज वैसा hi रहने दिए पर फिर दीदी को एक दीवार के सहारे झुका दिए और अपनी उंगलिओ को गीला कर दीदी की छूट पर लगाया तो दीदी की सिसकी निकल गयी फिर मैंने उंगलिओ को हटाकर लुंड का टोपा छूट के द्वार पर लगाया और झटके मारा तो लुंड अंदर घुस गया

Poorvi-ahhhh मुम्ममय.... Ahhhhhhhhhhh

में- मुम्ममय को भी छोड़ दिए सुबह hi अब बेटी की बरी है...

पूर्वी- एक बछ्ह निकल दिए इस चुत से , अपने बाप से तक छुड़वा लिए... पर तेरा लुंड लेते हुए अब भी दर्द होता है...

में- तेरी छूट hi टाइट है इतनी मेरी जान

और मैं दीदी को छोड़ने लगा...





दीदी बस दीवार पकड़ कर अपनी गांड पीछे निकल कर कड़ी थी और मैं उन्हें अचे से छोड़ रहा था..

पूर्वी- आह्ह्ह्ह हैं हैं हैं हैं आह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhh माहहह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह करमाआहहह छोड़ अपनी दीदी को अह्ह्ह्हह्हह...

में- हॉँण्णन दीदी आआह्ह्ह टाइट है....

ऐसे hi खड़े खड़े माइनर दीदी को अगले 5 मीन्स तक छोड़ा फिर दीदी ने बोलै कर्मा मेरी गांड में खुजली हो रही है गांड में दाल तो मैं दीदी को थोड़ा पीछे किआ और बाथरूम के बीच में कपडे रखकर उसपर झुका लिए और फिर लुंड को उनकी छूट में से निकला जो उनके चुत रास में भीगा हुआ था तो मैंने लुंड को दीदी की गांड के छेड़ पर रखा और धक्का दिए तो मेरा लुंड दो इंच पूर्वी दीदी की गांड में घुस gaya...maine दीदी के मुँह पर हाथ रख लिए जिससे दीदी की चीख वहीं डाब गयी दो तीन झटको में hi मैंने अपना पूरा लुंड उनकी गांड में घुसेड़ दिए और गांड मरने लगा दीदी आह्ह्ह्हह कर रही थी और मुझे और तेज़ मरने को बोलकर उकसा रही थी....





मैं तूफानी झटको से दीदी की गांड मर रहा था और फिर ऐसे hi दीदी की गांड में अगले 15 मिनट्स तक लुंड पेलता रहा तो दीदी झाड़ गयी और मैं भी उनके साथ hi गांड में झाड़ गया.... फिर दीदी ने मुझे बहार जाने को बोलै पर मैं नहीं माना और उनके साथ hi नहाया दीदी ने मुझे अचे से रगड़ रगड़ कर नहलाया... खासकर मेरे लुंड को खूब चूस चूस कर साफ़ kia...mere होंठों को चूसा और मैंने उनकी छूछीयो को और फिर जब नहाना ख़त्म हुआ तो दोनों ने अपने अपने कपडे पहन लिए और पहले दीदी निकल गयी और थोड़ी देर बाद main...neeche जाकर देखा तो हॉल में कोई नहीं tha...badi बुआ अपने कमरे में नज़र आ रही थी... बड़े फूपाजी की आवाज़ भी उनके कमरे से आ रही थी तो मैं उनके कमरे में गया और उन्होंने एड्रेस और पैसे फ़ोन नंबर वगेरा दिए...

मैं उनके कमरे से निकल कर सोचा बुआ को बता कर निकलता हूँ तो उनके कमरे में गया तो देखा गेट अंदर से बंद था मुझे लगा इस टाइम गेट बंद कुछ तो ज़रूर सन है ....तो मैं बाथरूम के अंदर से गेट चेक किआ तो वो खुला था उसे खोल के जब मैं अंदर घुसा तो क्या नज़ारा tha...dekhte hi लुंड खड़ा हो gaya...andar विनीत बीएड पर लेता हुआ tha...or बुआ उसका लुंड अपनी छूट में लिए हुए थी वहीं उनके पीछे से फूपाजी उनके पति उनकी गांड में लुंड डालकर उनकी गांड मार रहे थे...





बुआ जी दोनों बाप बेटे के बीच में thi...bete का लुंड छूट में वहीं पति का गांड... ज़िन्दगी में मैंने पहली बार ऐसा दृषिअ देखा tha....mera लुंड फटने जैसा हो gaya...meri अपनी बुआ अपने पति और बेटे को ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सुख दे रही thi...bahut ज़िम्मेदारियाँ होती हैं एक माँ की एक पत्नी की और बुआ उन दोनों भूमिकाओं को क्या बखूबी निभा रही thi...bete और पति दोनों को एक साथ सुख दे रही थी... बाप और बेटे की ऐसी साझेदारी देखकर मेरा लुंड लोहे का हो गया tha....kapde के नाम पर बुआ के कमर में लिप्त हुआ उनका एक पेटीकोट था.. बड़की दोनों बाप बेटे मादरजात नंगे होकर अपनी माँ और पत्नी के दोनों छेड़ो को खोदने में लगे हुए थे...

मुझसे ये दृश्य बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने भी झट से अपने कपडे उतर फेंके और बुआ के सामने जाकर खड़ा हो गया... विनीत और फूपाजी ने मुझे देखा तो थोड़े हैरान हुए पर फिर मुस्कुराने लगे मैंने भी उन्हें मुस्कुरा kar...jari रखने का इशारा kia...bua ने आँखें खोली तो सामने मुझे नंगा खड़ा dekha...maine भी देर न करते हुए उनका सर पकड़ कर अपना लुंड उनके मुँह से लगा दिया...





बुआ ने भी बिना देरी किये लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी मेरे लुंड को जैसे सुकून मिल गया...

बुआ अब तीन तीन लुंड को अपने बदन में समाये हुए thi...or तीनो का सुख भोग रही थी... औरत के तीन छेड़ hi होते हैं जिनका सुख आदमी भोग सकता है बुआ के तीनो छेड़ इस समय भोगे जा रहे थे वो भी एक hi समय पर तीन अलग अलग लोगो dwara...or अगर तीनो hi अपने hi परिवार के हो क्या बात hai..bua के साथ भी ऐसा hi था ऊपर पति नीचे बीटा और सामने भतीजा.... तीनो के लुंड बुआ के छेड़ो से अंदर बहार हो रहे the...or बुआ उत्तेजना के सातवे आस्मां पर उड़ रही thi...or बुआ जब इस उत्तेजना के तूफ़ान को नहीं झेल पाई तो झड़ंने lagi...bua के झड़ने पर सबकी गति काम हुई तो फूपाजी ने जगह बदलने का प्रस्ताव रखा जिसे हमने मान लिए अब फूपाजी नीचे लेते हुए थे और बुआ उनकी तरफ पीठ करके उनका लुंड गांड में लेकर बैठी और फिर हाथ पीछे टिका लिए वहीं मैं उनके पैरों के बीच आ गया और अपना लुंड उनकी छूट पर लगा कर धक्का मारा तो लुंड छूट में घुस gaya...maine दो तीन धक्के और मर कर अपना लुंड पूरा बुआ की छूट में भर dia...mere लुंड पर फूपाजी का लुंड बुआ के दुसरे छेड़ में महसूस हो रहा tha...mera लुंड बुआ की छूट में और फूल gaya...ek पति के साथ उसकी पत्नी की चुदाई karna...wo भी अपनी बुआ की बहुत hi उत्तेजित करने वाली बात है.... विनीत ने बुआ का मुँह बंद करने का ज़िम्मा संभाला और अपना लुंड अपनी मुम्ममय क मुँह में दाल dia...bua भी बेटे का लुंड लोल्लयपोप की तरह चूसने लगी....





व्- आह्ह्ह्ह मुम्ममय ahhhhhhhhhhh ऐसे hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii....

बुआ के मुँह से बस ममममममम हम्म्म गुस्सस्गपपपप की आवाज़ें आ rahi...thi.

मैं ऐसे दृषिअ को देख कर बहुत उत्तेजित हो गया था तो बुआ की छूट में तेज़ी से लुंड अंदर बहार करने laga....wohin फूपाजी भी अपनी बीवी को अपने बेटे और उसके भतीजे से छुड़ता देख गरम होकर नीचे से अपना लुंड बुआ की गांड में पेल रहे थे....

फूपाजी- हानंन्न shashiiiiiiiiiiii साली रंडी ऐसा मज़ा कभी नहीं aaya.....bete और कर्मा के साथ तुझे बांटने में और उनके साथ छोड़ने से मैं भी इतना गरम हो रहा hun....aahhhhh तेरी गांड....

Bua-mmmmmmmmmmmgjmm sluppppppppppppppppppppppppppppppp..

में- बाआआ की गांड hi कुछ ऐसी है.... phoopaji..har उम्र का लुंड खड़ा कर देती है..... अह्हह्ह्ह्ह बड़े फूपाजी भी लुंड मसलते हैं बुआ को देखकर ...

व्- हॉँण्णन पापा ताऊ जी तो मुट्ठी मरते हैं मुम्ममय की गांड देख देख कर.....

फूपाजी की ये सुनते hi गति और बढ़ गयी...

फूपाजी- भैया भी मेरी बीवी को छोड़ना चाहते hain......sali क्या रैंड है तू... शशि सरे लुंड तो खा चुकी घर ke...ahhhhh पति और बेटे से चुद रही है और जेठ छोड़ने को तैयार है...

फूपाजी खुद के मन में ये सब सोचकर उत्तेजित हो गए और फिर बुआ की गांड में पूरा लुंड अंदर तक दाल दिया और झड़ने लगे... अपने रास की धार बुआ की गांड में छोड़ने लगे... उधर विनीत का भी ये hi हाल था वो अपनी मुम्ममय के बाल पकड़ कर उनका मुँह छोड़ रहा था पूरा लुंड गले तक पहुंच रहा था बुआ की आँखों से आंसू आ रहे थे और फिर विनीत अपनी मुम्ममय के मुँह में झाड़ गया जिसे बुआ एक एक बूँद जातक गयी और जब विनीत ने लुंड बहार निकला तो बुआ खांसने lagi...unka हाल बुरा कर दिया था उनके बेटे ने.... मैंने अपना लुंड बुआ की छूट से बहार निकला और हैट गया तो बुआ बीएड पर साइड में गिर गयी... फूपाजी नीचे से उठे और अपना लुंड बुआ के मुँह पर रख दिए बुआ ने उसे भी मुँह में ले lia...or अपनी गांड से निकले हुए लुंड को जिसपर फूपाजी का रास और बुआ की गांड का रास मिक्स होकर लगा हुआ था उसे चाट चाट कर साफ़ कर दिए... उधर बुआ फूपाजी का लुंड साफ़ कर रही थी इधर मैंने उनके पीछे लेटकर एक बार फिर से बुआ की छूट में लुंड पेल dia....or छोड़ने laga...jab फूपाजी का लुंड साफ़ हो गया तो वो हस्त गए और अपने कपडे पहनने लगे और विनीत भी अपने कपडे पहनने लगा... मैंने बुआ को कास कर पकड़ लिए और छोड़ने लगा





में- ाःह बुआ बुआ बुआ aahhhhhhhhhhhh माँ... विनीत आज एक साथ अह्हह्ह्ह्ह चुदाई का प्लान कैसे बन गया....

व्- भाई कुछ नहीं वो ताऊ जी के साथ जाना है तो मैंने सोचा जाने से पहले एक बार लुंड शांत करलु... पूर्वी दीदी नहाने गयी थी तो मुम्ममय के कमरे में आ गया यहाँ मुम्ममय पापा पहले से लगे हुए थे... मुझे देखकर मम्मी ने मुझे भी बुला लिए...

Bua-aaahhh कर्मा. हम्म्म्म और मैंने बुला लिए या देखते hi लुंड बहार निकल के हिलने laga....to बुलाना hi पड़ा....

में- दोनों माँ बेटे एक नंबर के छोड़ू हो...

व्- यार भाई पापा और तेरे साथ माँ को छोड़कर बड़ा मज़ा aaya...mera लुंड फिरसे न खड़ा हो jaye...hr हे हे...

Phoopaji-ab बातों में मत लग चल ताऊजी इंतज़ार कर रहे होंगे..

व्- ठीक है पापा जा रहा हूँ...

फूपाजी- तू भी निकलेगा कर्मा...

में- हाँ बस बुआ की चुदाई केबाद निकल hi रहा हूँ... और ये सुनकर फूपाजी और विनीत कमरे से निकल गए वहीं मैं बुआ को छोड़ रहा था...

में- अह्हह्ह्ह्ह बुआ मेरी रंडी बुआ कैसा लगा आज तीन लुंड एक साथ लेकर....

बुआ- हनमन ऐसे hi bachhhaaaaaaaaaaaa....chodddddd बुआ को.... अरे बच्चा ऐसे चुदाई कभी नहीं हुई मेरी आह्ह्ह्हह्ह एक साथ तीनो लुंड लेने का सुख मैं बता नहीं सकतीअ अह्हह्ह्ह्ह बच्चा....

में- साली रायणनंदददद...

बुआ- अह्ह्ह्ह बीटा अह्ह्ह्ह एक साथ अपने बेटे और पति से छोड़ने का सुख मिला मुझे आह्ह्ह्हह इससे ज़्यादा एक औरत को कुछ नहीं चाहिए...

में- मेराआआ. लुंड नहीं चाहिए बाआ....

Bua-ye तो मेरा हिस्सा है re....aisa लगता है ऐसी hi इसे अपने अंदर रखे rahun....ahhhhhhhhhhhhhhh

में- अह्ह्ह्ह क्या छूट है तेरी buaaaa.....jitna भी छोड़ो मज़े hi देती है.....

बुआ- hnnnnnnnnnnnnnn.. बीटा तेरी बुआ रंडी है.... अह्ह्ह्ह छोड़ रंडी बुआ को....

में- बुआ किसी दिन मैं पापा और अनुज मिलकत छोड़ें तुम्हे और विनीत और फूपाजी देखे तो कैसा लगेगा तुम्हे...

Bua-sawal क्र बारे में सोचकर hi इतनी उत्तेजित होगयी के सवाल का जवाब तो नहीं दिए पर झड़ने lagi....main लगातार उन्हें छोड़ता जा रहा था...

Bua-aaahhh आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह बछ्ह ahhhhhhhhhhhhhhhhhh madarchoooooooooodddddddd mainnnnnnnnnnnngayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii... और बुआ के झड़ते hi मैंने अपना काबू भी खो बैठा और भर भरा कर बुआ की छूट में रास भर diya...maine अपने पूरे रास को बुआ की टंकी मेइब भर दिया mmmmmmmmmmm...

बुआ और मैं ऐसे hi लेते लेते साँसों के नार्मल होने का इंतज़ार करने lage...or फिर बुआ बोली....

बुआ- क्या ज़िन्दगी hai...mere तीनो छेड़ो में से रास बाह रहा है..

एक में बेटे का एक में पति का और एक में भतीजे ka....ahhhh...beta मज़ा आ गया आज to....tum लोगो ने तो जान hi ले ली मेरी...

में- तुम खुश हो न बुआ...

Bua-bahut खुश और ये सब तेरी वजह से है... मेरा राजा बीटा...

में- ाचा अब चलता हूँ बुआ जाना भी है...

Bua-ruk

और बुआ ने झुककर मेरा लुंड पकड़ लिए...

Bua-aise जायेगा रिश्तेदारों के यहाँ लुंड तो साफ़ करवले..

और फिर बुआ ने मेरा लुंड चूसकर साफ़ किआ फिर वो नंगी hi चादर ऊपर दाल कर बीएड पर लेट गयी आँखें बंद karke.....waise भी एक साथ तीन लुंड से छुड़वाने के बाद आराम तो चाहिए होता है ...उन्हें ऐसे लेता हुआ छोड़कर मैं भी कपडे पहन कर दोबारा तैयार हुआ और बहार निकल कर मोटरसाइकिल लेकर निकल गया....

मोटरसाइकिल चलते हुए बहुत साडी बातें चल रही थी दिमाग mein...ki जबसे मैं यहाँ आया हूँ ये परिवार कितना बदल गया hai.....kya मैं हूँ इस सब की वजह पर अगर ऐसे hi ये खुश हैं तो गलत क्या hai...asali ख़ुशी तो अपनो के साथ चुदाई करके मिलती hai...jo इन्हे मिल रही है तो कर्मा तू सब सही कर रहा hai...ye सब बातों में मैं शहर की और चलता गता...

करीब 2 घंटे बाद मैं लखनपुर पहुंचा... पहले टेंट वाले के पास gaya...use जैसा फूपाजी ने बताया था बोलकर... फूपाजी ने जो एड्रेस दिए था उस पर पहुंच गया...

बाइक रोक कर साइड में कड़ी करके मैंने गेट khatkhataya....ek बार और खटखटाया तो अंदर से आवाज़ aai...aaati हुण्णनं....

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में आप सब इसी तरह पढ़ते रहिये और कमैंट्स करते रहिये ... शुक्रिया....
 
नई चरक्टेर्स अरे किंग तो यू गाइस विल अपडेट सून
 
करीब 2 घंटे बाद मैं लखनपुर पहुंचा... पहले टेंट वाले के पास gaya...use जैसा फूपाजी ने बताया था बोलकर... फूपाजी ने जो एड्रेस दिए था उस पर पहुंच गया...

बाइक रोक कर साइड में कड़ी करके मैंने गेट khatkhataya....ek बार और खटखटाया तो अंदर से आवाज़ aai...aaati hunnnnn....ab आगे....

अपडेट 37

थोड़ी देर बाद गेट खुला तो एक औरत सामने thi....us औरत ने कुछ मैक्सी जैसा पहन रखा था... ज़्यादा उम्र की नहीं लग रही थी फिगर भी ाचा था कुछ देर तक मैं उसके शरीर मि बनावट को ध्यान से देखने लगा तो उसने मेरी तरफ सवालिए नज़रों से देखा तो मैंने बोलै- नमस्ते ममी ग... मैं Karma...wo फू....

मेरी बात ख़त्म होने से पहले hi वो बोल पड़ी...

ममी- अरे नमस्ते कर्मा बीटा आ गया... आजा आजा अंदर आजा.. और बता कैसा है tu...koi तकलीफ तो नहीं हुई आने में....

में- नहीं ममी ग कोई तकलीफ नहीं hui....main ठीक हूँ आप कैसे हो...

हम हॉल में पहुंच गए तो उन्होंने मुझे सोफे पर बिठा दिया...

ममी- मैं भी ठीक हु beta...(kamre की तरफ मुँह करके) गया बीटा बहार आ और भैया को पानी देदे...

तभी एक लड़की फ्रॉक पहने हुई बहार aai...or मेरी तरफ देखकर एक बार ममी की तरफ देखा फिर मुझे नमस्ते किआ और पानी लेने चली गयी...

ममी- बीटा तू भी थक गया होगा तू तब तक आराम करले थोड़ा मुझे भी तैयार होने में टाइम लगेगा...

में- कोई नहीं ममी ग मैं इंतज़ार कर लूंगा आप आराम से हो जाएं तैयार ...

तब तक गया पानी ले आई और मैंने पानी पिया...

Mami-baith तू beta...main चाय रख देती hun....tab तक...

में- नहीं ममी ग चाय की कोई ज़रुरत नहीं है...

ममी- ऐसे कैसे ज़रुरत नहीं है और तेरे बहाने मैं भी पि लुंगी....

में- ठीक है ममी g...phir तो ज़रुरत hai...hehhe हे..

Mami-theek है आराम कर तू यहाँ मन न करे तो रूम में चले जाना...

में- नहीं ठीक है ममी यहीं पर..

ममी- अरे शर्मा mat...apane घर में भी कोई शर्माता है क्या..

और ये ककहकार हंस कर वो चली गयी ...

( आप लोगो को इन लोगो का इंट्रो दे देता हूँ...

ये फॅमिली है रिमझिम के मां यानि सावित्री बुआ के इकलौते भाई की जिसमे तीन लोग हैं..

संजय मां- आगे -42..

एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं...

चारु ममी आगे - 32

ये मां की दूसरी पत्नी हैं पहली पत्नी बीमारी की वजह से नहीं रही तो उनकी छोटी बहन से उनकी शादी करवा दी जो की चारु हैं...

गांड और छुछियां भरी हुई.. सपाट पेट... सुन्दर घरेलु chehra...baki का अंदाज़ा आप पिक्चर देख कर लगा सकते हो...

ये हैं चारु ममी..





अब आते हैं इस घर के आखिरी सदस्य पर

गया...... आगे-19

चुलबुली सी लड़की है कॉलेज में पढ़ती hai...masoom और प्यारा chehra...nayi नयी उभरती jawani...chhote छोटे उभरते chuchhe....bahar को निकलते chutad...kul मिलकर लुंड को खड़ा करने वाला shareer...upar से एक खूबसूरत chehra...bachpane से भरा हुआ...

गया





गया की माँ की मौत जब वो 8 साल की थी तब hi हो गयी थी तब से उसकी मौसी चारु ने hi उसे पला और ये उसे hi अपनी माँ समझती है और मुम्ममय कहकर hi बुलाती है...)

मैं वहीं बैठा बैठा उनका इंतज़ार करने लगा...

थोड़ी देर बाद चारु ममी चाय लेकर आई और मेरे साथ बैठ कर पीने लगी... और मुझसे बातें करने लगी... घर के बारे में, पढाई के बारे में पुछा... चारु ममी काफी हंस मुख और मिलान सर lagi...phir थोड़ी देर बाद जब चाय ख़त्म हुई तो उन्होंने बोलै तू आराम करले मैं बस तैयार होकर आती hun...maine भी ठीक है बोल diya...or फिर वहीं पर थोड़ी देर बैठ कर उनका वेट करने लगा... करीब आधा घंटा बैठने के baad...Gia तैयार होकर बहार आ गयी... मैंने उसे देखा तो वो बहुत सुन्दर लग रही thi...usne सूट पहना हुआ था शायद वो भी समझती थी की गाओं में कैसे कपडे पहनने होते हैं... मैं उसकी तरफ देख कर मुस्कुराया तो उसने भी एक जबरदस्ती वाली मुस्कराहट दी... वो शायद मुझसे शर्मा रही थी... मैंने उससे पुछा बाथरूम कहाँ है तो उसने bataya....ke हॉल के उस तरफ hai...main उठ कर बाथरूम में गया और जब निकला तो मेरी नज़र राइट में एक कमरे में गयी...

वहां चारु ममी दिखी वो तैयार हो गयी थी अब साड़ी में thi...par वो अभी एक सेल्फ से कुछ उतरने की कोशिश कर रही थी जो उनकी हाइट से ऊपर थी....





जिस वजह से उनकी चिकनी कमर और गहरी नाभि.. पेट ... ये सब मुझे दिख रहा tha.....or नज़र पड़ते hi मेरा लुंड टाइट होने laga....kya चिकना पेट था unka...ek डैम मखमल की तरह लग रहा था मन कर रहा था की अभी जाकर अपने हाथों में लेकर मसल dun...apani जीभ से chaatun....or उनकी नाभि में अपनी जीभ डालकर चूस लूँ... खैर मैंने अपने आपको समझाया कर्मा रिश्तेदार है... कण्ट्रोल kar...maine वहीं से पुछा...

में- ममी ग कुछ हेल्प करूँ क्या?

चारु ममी- अरे Karma...ye चूड़ियां रखीं हैं ऊपर वो उतर रही थी पहुंच hi नहीं रही...

में- मैं उतर देता हूँ...

चारु म- ठीक बीटा तू hi उतार दे...

मैं कमरे के अंदर चला गया पर ममी अपनी जगह से नहीं हटी तो मुझे उनके पीछे खड़ा होना पड़ा और जब मैंने चूड़ियां लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो मेरा शरीर आगे होगया और मेरा सीना ममी की पीठ से टच हो gaya...par जब एक और चीज़ के टच होने का एहसास हुआ तो मेरी गांड फैट gayi....maine नीचे देखा तो मेरा लुंड पंत के अंदर पूरी तरह टाइट था और वो ममी की पर्थ के निचले हिस्से से टच हो रहा था....

मैं लुंड के खड़े होने के बारे में तो भूल hi गया और मैं चूड़ियां पकड़ कर तुरंत पीछे हो गया... मेरे पीछे हटते hi ममी भी पीछे मुड़ी और मैंने उन्हें चूड़ियां दे di...unke चेहरे पर एक मुस्कान थी जिससे मुझे थोड़ा चैन आया की चलो इन्हे बुरा नहीं लगा...

में- ममी और कोई हेल्प?

चारु म- नहीं बीटा अगर चाहिए होगा तो तुझसे hi करवाउंगी...

Me-to मैं बहार बैठ कर वेट करता हूँ आपका...

चारु म- अरे यहीं बैठ न बस हो गया मेरा काम भी

तो मैं वहीं बीएड पर बैठ gaya...or ममी मेरे सामने बैठ कर चूड़ियां पहनने lagi...par मेरी नज़र बार बार उनकी कमर पर जा रही thi...jisse मेरा लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा tha...unke बड़े बड़े ब्लाउज में भरे हुए छूछे कहर ध रहे the...main किसी तरह से लुंड को उनकी नज़र से छिपाने की कोशिश में लगा हुआ था....

चारु म- और बता कर्मा तेरी गर्लफ्रेंड कैसी है?

मैं सुनकर चौंक गया..

में- मेरी तो कोई गर्लफ्रेंड नहीं है ममी ग..

चारु म- अरे दर मत किसी को नहीं बताउंगी.... मैं समझती हूँ ये सब नार्मल है आजकल...

में- नहीं ममी ग छुपा नहीं raha...par है hi nahi...apko तो पता है गाओं में कहाँ गर्लफ्रेंड बनती है बस डायरेक्ट शादी कर देते हैं...

ममी हंसने lagi...haha ये बात तो है... पर कोई तो पसंद होगी तुझे?

में- नहीं ममी अभी तक तो कोई नहीं..

चारु म- ाचा पर कैसी लड़कियां पसंद हैं तुझे ये तो बता सकता है न...

Me-apke जैसी...

चारु म- मैं लड़की कहाँ हु re...or मेरे जैसी मतलब..

में- आपके जैसी सुन्दर सी...

चारु म- तुझे मैं सुन्दर कहाँ से लगती हूँ .. सुन्दर तो तेरी उम्र की लड़कियां होती हैं...

में- ममी आप उन सब लड़कियों से सुन्दर हो...

चारु म- अपनी ममी से मज़ाक कर रहा है...

में- नहीं ममी सच बोल रहा हूँ ....अपने मेरी पसंद poochi...to मेरी पसंद तो आप हो... मतलब आपके जैसी है..

चारु म- ाचा बीटा ऐसा क्या पसंद आया तुझे मुझमे...

में- पूरी की पूरी आप..

चारु म- फिर तो तू मज़ाक कर रहा hai...koi तो चीज़ होगी जो तुझे अछि लगती हपगी...

में- अरे ममी कैसे kahun...apka सब कुछ ाचा है..

चारु म- सब कुछ मतलब क्या?

में- अरे सब कुछ मतलब वो आपका figure...haan वो..

चारु म- ऐसा क्यों मेरा फिगर तो सब की तरह hi है... मुझे तो मैं मोती लगती हूँ...

में- नही ममी आप और मोती बिलकुल nahi..aap बिलकुल परफेक्ट हो...

चारु म- ऐसा क्यों लगता है तुझे?

में- आपका शरीर भरा हुआ hai...or मुझे बहुत पसंद है ऐसा hi...

ये बोलकर मैं खुद hi शर्मा सा गया...

चारु म- ओह्ह्हो देखो तो कैसे शर्मा रहा है... तेरी मम्मी तो आएँगी न शादी में उनसे बात करुँगी तेरी शादी जल्दी करवाने ki...Ab चलें मेरा काम तो हो गया...

में- हाँ ममी माँ ayengi...or हाँ चलिए न...

फिर हम लोग उठकर हॉल में आ गए ममी ने पहले hi एक बैग तैयार कर रखा tha...hall में गया बैठ कर फ़ोन चला रही thi...maine बैग उठाया और हम लोग बहार चल दिए ममी ने घर लॉक किआ तब तक मैंने बैग को बांध दिए बाइक पर और फिर मैंने बाइक स्टार्ट की और उन्हें बैठने को kaha...pahle गया बैठी दोनों तरफ पेअर करके और फिर ममी एक तरफ मुँह करके बैठ gayi...mami के बैठने से गया को आगे होना पड़ा और वो मेरी पीठ से चिपक gayi...uski ब्रा में कैद छोटी छोटी छुछियां मेरी पीठ पर गड gayi....wo अपनी तरफ से कोशिश कर रही थी मुझे न छुने की पर टीम लोगो की वजह से हम चिपके हुए the..Gia के हाथ मेरे कंधे पर थे और ममी ने सीट के पीछे लाइट स्टैंड को पकड़ रखा था...

मैंने उनसे पूछा चलें तो उन्होंने हाँ कह दिए और हम निकल पड़े... शहर से बहार hi निकले थे के मेरा फ़ोन विबरते करने लगा... मैंने सोचा क्या रोकूं तो गया से बोलै...

में- गया मेरा फ़ोन विबरते हो रहा है निकल कर देखलो कौन है प्लीज..

गया- ok भैया...

गया ने अपना राइट हाथ आगे बढ़ाया और जब तक मैं कुछ बोल पता मेरी कमर से होते हुए मेरी राइट वाली जेब में दाल दिए.. जबकि मेरा फ़ोन लेफ्ट वाली जेब में था.. उसने हाथ डाला और उसकी उंगलिअ सीधा कपडे के ऊपर से hi मेरे खड़े लुंड पर चली गयी जो बार धक्के लगने से उसकी चूचियां मेरी पीठ पर गड रही थी उनकी वजह से पूरी तरह टाइट tha...or अनजाने में उसने उसे hi पकड़ lia...uska स्पर्श होते hi लुंड झटके खाने laga...usne एक दो बार खींचने की कोशिश की तब तक तो लुंड लोहे जैसा हो चूका tha...or जब तक वो समझ पति की ये फ़ोन नहीं कुछ और है तब तक उसने उसे काफी अचे से पकड़ रखा था और जैसे hi ये रीलीज़ हुआ के ये क्या है उसने तुरंत हाथ पीछे खींच लिए...

में- लेफ्ट वाली जेब में है फ़ोन गया..

फिर गया ने बिना कुछ बोले लेफ्ट जेब से फ़ोन निकला तब तक फ़ोन कट चूका था उसने देख कर बताया की बुआ जी की मिस्ड कॉल थी तो मैंने उसे कॉल करने को कहा और चारु ममी ने बात करके बता दिए की वो अभी बाइक चला रहा है और हम लोग निकल गए हैं रस्ते में hain...Gia ने अपनी मुम्ममय से फ़ोन बापिस लेकर मेरी जेब में दाल dia...phir हम लोग चलने लगे... पर पंत में खड़े लुंड के साथ बाइक चलने में मुझे काफी दिक्कत हो रही थी मैंने एक हाथ से एडजस्ट करने की कोशिश भी की पर कोई फायदा नहीं nikala...pant टाइट होने की वजह से वो सही नहीं हो रहा tha..to जब कुछ नहीं हुआ तो आखिर मैंने एक जगह देख कर बाइक रोक दी तो ममी ने पुछा क्या हुआ बीटा...

में- वो ममी टॉयलेट करके आता हूँ...

चारु म- ठीक है बीटा..

फिर ममी और गया बाइक से utari....or मैंने बाइक स्टैंड पर लगाई और उतरा तो देखा दोनों की नज़र मुझ पर hi thi...Gia मेरी तरफ देख कर थोड़ा सा मुस्कुरा रही thi..or फिर मैंने देखा वो नीचे मेरे पंत की तरफ भी देख रही है जिसमे बहार से hi मेरे लुंड का उभर नज़ारा आ रहा था.... ममी की नज़र मेरे चेहरे पर hi thi....main बिना देर करते हुए रोड की साइड में झाड़ियों में चला गया और थोड़ा अंदर जाकर लुंड बहार निकला तो चैन मिला फिर पेशाब की पर समस्या थी लुंड के खड़े होने की मुझस पता था मुठी मरने से तो ये शांत होने से रहा और इतना टाइम भी नहीं hai...phir मैंने कैसे भी करके उसे साइड में एडजस्ट किआ तो अब लुंड मेरी पूरी राइट जेब वाली जगह पर था बहार से दिख भी रहा था तो मैंने अपनी शर्ट को बहार hi रहने दिए पंत के और उससे वो धक् गया....

मैं बापिस आया तो वो दोनों मेरा वेट कर रही thi...Gia ने फिर मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा... और फिर नीचे देखा जैसे शायद वो फिर से कुछ ढूंढने की कोशिश कर रही ho...par मैं जल्दी से बाइक पर बैठ गया और स्टार्ट कर li...or फिर गया और ममी भी पीछे बैठ गए.. और मैं बाइक चलने laga...is बार गया कुछ अलग बर्ताव कर रही थी पहले वो खुद को मुझसे लगने से रोक रही thi...par अब वो मेरी पीठ से अचे से चिपकी हुई thi...uski छुछियां मेरी पीठ पर अचे से गड रही थी और जहाँ उसके हाथ पिछली बार मेरे कंधे पर थे वहीं इस बार मेरी कमर पर the...mera लुंड हमेशः की तरह लड़की का स्पर्श शरीर पर पते hi पूरा तन के खड़ा था ..मैं बाइक चलता रहा थोड़ी देर बाद गया के हाथ मेरी कमर से होते हुए और आगे आ गए और मेरे पेट पर कास गए और उसका चेहरा मुझे मेरे कंधे पर महसूस हुआ.. मैंने सोचा अपनी माँ के सामने मेरे साथ ऐसे चिपक कर बैठी है जैसे मैं इसका यार हूँ यहाँ मेरी हालत ख़राब हो रही है....

तभी पीछे से ममी की आवाज़ aai...are गया तो सो गयी...

मुझे समझ आ गया ाचा तभी ये मुझपर सर टिका कर चिपकी हुई hai..or इसीलिए इसके हाथो ने मुझे जकड रखा है...

में- कोई नहीं ममी ग सोने deejiye...bas आप मत सोना हहै he...nahi तो आप गिर जाओगी..

चारु म- नहीं बीटा मैं नहीं सो rahi...or तेरे होते हुए कहाँ गिरूँगी मैं...

में- फिर ठीक है ममी ग... आप आराम से बैठिये बस कुछ देर की बात hai...koi दिक्कत हो तो बता देना..

चारु म- नहीं बीटा अभी तो सब ठीक है कोई परेशानी होगी तो बता दूंगी...

मैंने फिर ध्यान बाइक चलने में लगाया और थोड़ी देर बाद फ़ोन फिर से विबरते होने laga...to मुझे फिरसे शरारत सूझी की इन्हे भी लुंड पकड़ाया जाये और ममी से बोलै ...

में- ममी वो मेरा फ़ोन बज रहा hai...gia तो सो रही है आप निकल लो...

चारु म- अभी निकलती हु बीटा...

मुझे पता था ममी का राइट हाथ गया की पीठ पर था तो वो पहले उसे hi ले जाएँगी... और जैसा सोचा था उनका राइट हाथ कमर से होता हुआ नीचे आया... और मेरी जीभ में घुस gaya...ghuste hi जैसे उनकी उंगलिअ थोड़ी और अंदर हुई तो लुंड से टकरा गयी... ममी ने भी ध्यान नहीं दिए और फ़ोन ढूंढने की कोशिश करने लगी उनकी उंगलिअ मेरे लुंड पर कास गयी शायद ये देखना छह रही थी की ये क्या है...

मर्रे मुँह से एक अह्ह्ह निकल gayi....or ममी ने पूरा उसको हाथ में कपडे के ऊपर से भर कर देखा तो वो समझ गयी की ये क्या hai...or समझते hi उनकी उंगलियां मेरे लुंड से दूर हो gayi...or फिर कुछ सेकण्ड्स बाद ममी की उंगलिअ बापिस मेरे लुंड पर महसूस हुई और फिर पूरा हाथ मेरे लुंड पर कास गया और दबाने laga...mera लुंड झटके खाने लगा... मेरे मुँह से फिर से आह्ह्ह्हह निकल गयी...

चारु म- बीटा तेरा मोबाइल कहाँ है मिल hi नहीं रहा...

और वो ये कहते हुए लगातार मेरा लुंड सहला रही थी जैसे उसकी लम्बाई नापने की कोशिश कर रही हो...

में- लेफ्ट वाली जेब में है ममी...

चारु म- तो िसवाली में ये क्या है.....?

में- कुछ भी नहीं वो तो खली है...

चारु म- बीटा ये तो पूरी भरी हुई है खली कहाँ है...

में- ममी ध्यान से देखो खली hi है...

चारु म- बीटा ध्यान से hi देख रही hun...or ये कहकर उन्होंने फिर से मेरा लुंड दबा दिए... मुझे भी मज़ा आ रहा था ममी के हाथ से लुंड सहलवा कर...

ममी जानकार मेरे साथ खेल कर रही थी मैं भी उनका पूरा साथ दे रहा tha...tab तक मेरा फ़ोन कट गया और फिर दोबारा विबरते करने लगा... मैंने बोलै ममी फिर से आ रहा है फ़ोन... तो ममी ने अपना हाथ निकला और बापिस ला कर कमर के दूसरी तरफ ले गयी और फिर जेब में हाथ डालकर फ़ोन निकल लिए और बोली फिर से घर से है मैंने बोलै आप बात कर लो... तो ममी ने बात की और फिर फ़ोन कट कर दिए... गया अब भी मस्त होकर सो रही थी मेरे कंधे पर सर रखकर...

चारु म- अब कौनसी जेब में. रख्दु. इसे बीटा..?

में- किसी में भी रखदो ममी ग...

चारु म- ठीक है खली में रख देती हूँ...

ममी ने हाथ बढ़ाया और फिर से मेरी राइट वाली जेब की तरफ लाइ मैंने सोचा इसमें कैसे rakhengi...or ममी फिर भी फ़ोन को उसमे घुसाने लगी पर लुंड की वजह से नहीं जा रहा था...

चारु म- अरे ये तो इसमें जा hi नहीं रहा लगता है जेब बंद हो गयी है खली करनी पड़ेगी..

में- जैसा आपको ठीक लगे ममी...

ममी ने फ़ोन तुरंत दुसरे हाथ में ले लिए और एक बार फिरसे अपना हाथ मेरी जेब में दाल दिया और लुंड को पकड़ लिया और दबाने lagi...mujhe भी ाचा लगा तो एक हलकी सी आह्ह्ह्हह निकल गयी...

मैंने मन hi मन सोचा ममी भी चालू माल hai..beti साथ में है और ये मेरा लुंड पकड़ कर सहला रही hai...par मुझे kya...jab वो तैयार है तो मैं क्यों न मज़े lun...mami अब मेरे लुंड को खूब टटोल रही thi...jaise उसकी लम्बाई और चौड़ाई का पता लगाना चाहती ho.....phir काफी देर तक वो लुंड को इधर उधर करती रही मैं भी मज़े लेते हुए बाइक आराम से चला रहा tha...phir उन्होंने मेरे लुंड को ऊपर की तरफ कर दिए..

चारु म- अब आ जायेगा मोबाइल रख कर देखती हूँ...

Me-theek है ममी ग रखलो...

और ममी ने फिर दुसरे हाथ से मोबाइल लिए और फिर मेरी जेब में घुसेड़ dia...wo लुंड से घिसड़ता हुआ अंदर चला गया....

चारु म- अब ठीक है....

में- रख दिए mami...chalo ाचा है...

और ममी ने अपने हाथ हटा लिए...

फिर कुछ एक दो मिनट बाद ममी बोली

चारु म- बीटा मुझे दर लग रहा hai...kahin तेरा मोबाइल गिर न जाये... अभी इसके पापा का भी कुछ दिन पहले मोटरसाइकिल से hi गिर गया था...

में- हाँ गिर तो सकता है बूत कोई नहीं...

चारु म- ऐसे कैसे बीटा... नुक्सान हो jayega...ruk मैं एक काम करती hun...jeb पर हाथ लगाकर रखती हूँ की कहीं निकले न...

मैंने मन में सोचा हाँ साली अब आई न दिल की बात जुबान पर तुझे फ़ोन की नहीं पड़ी तुझे बस लुंड पकड़ना है...

में- ठीक है ममी ग आपको तकलीफ न हो बस...

चारु म- नहीं बीटा कोई तकलीफ नहीं होगी मुझे काम से काम मोबाइल तो बचा रहेगा

और ये कहकर ममी ने फिर से अपना हाथ मेरी जेब पर रख lia...par अब जेब के अंदर से न डालके बल्कि पंत के ऊपर से hi लुंड को सहला रही थी.. मुझे ाचा लग रहा tha...lund टाइट था ऊपर से इतने मस्त माल के हाथ से सहलाया जाना बाकि मेरी शर्ट के बहार होने से ऊपर से कुछ दिख भी नहीं रहा था...

कुछ देर तक ममी ने ऐसे hi लुंड सहलाया फिर उन्होंने जेब में हाथ डालना chaha..or उंगलिया अंदर घुसेड़ कर लुंड को सहलाने lagi....par फ़ोन की वजह से उनका भठ ठीक से नहीं चल प् रहा tha...ab वो भी खुल कर लुंड पकड़ने की कोशिश कर रही thi..bas अपने मुँह से नहीं बोल रही थी..

जब काफी टाइम तक कोशिश करने के बाद भी ठीक से नहीं हुआ तो ममी ने अपना हाथ बापिस खींच lia...or फिर जीप के पास ले आई और कुछ देर ऐसे hi घूमती रही... और पगिर उन्होंने कुछ हिम्मत दिखाई और अपनी उंगलियां मेरी ज़िप रख di..or उसका हुक पकड़ liya...main सोचने लगा ये अब ज़िप में हाथ डालेगी kya...par जब ये नहीं रुक रही तो मुझे क्या परेशानी हो सकती है तो मैंने कुछ नहीं कहा और जो वो करना चाहतु थी उन्हें करने दिए...

ममी ज़िप से उलझने लगी सिर्फ एक हाथ से जुप खोलना आसान नहीं होता और ऊपर से मैं बैठा हुआ था जिससे ज़िप ऊपर नीचे हो राखी थी... फिर भी ममी ने हार नहीं मानी और थोड़ा थोड़ा करके ज़िप नीचे करने lagi...kareeb 5 मिनट की म्हणत के बाद वो सफल हो गयी और मेरी ज़िप पूरी खुल gai...phir ममी ने अपना हाथ अंदर डाला तो उनकी उँगलियों और मेरे लुंड के बीच एक और बढ़ा आ gayi...mera कछहा.... ममी कच्चे के ऊपर से hi लुंड को सहलाने lagi...phir कुछ देर ऐसे hi सहलाने के बाद उन्होंने फिर से म्हणत करनी चालू की और कच्चे के कपडे को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगी थोड़ा थोड़ा वो नीचे हो रहा था और जब थोड़ा नीचे हुआ तो ममी ने ऊपर थोड़ा हाथ लेजाकर कछू की इलास्टिक में फंसाया और नीचे खींच दिए और लेजाकर मेरे ाँद के नीचे फंसा दिए अब मेरा लुंड नंगा था... ममी की उंगलिया बापिस ऊपर आई तो मेरे लुंड से टच होने लगी... उनकी उँगलियों का मेरे नंगे लुंड पर स्पर्श पते hi मेरे शरीर में झटके से लगने lage...mami ने उसे दो उंगलिओ से थाम lia...mere मुँह से आह्ह्ह्हह ममी निकल gaya..mami ने फिर मेरा लुंड ज़िप के बहार निकल लिए... लुंड के बहार आते hi मुझे सुकून मिला ऐसा लगा जैसे पिंजड़े में कैद परिंदे को आज़ादी मिल गयी हो... मेरा लुंड और मैं दोनों बहार की हवा खाकर खुश थे लुंड अपनी ख़ुशी पूरी अकड़न के साथ ज़ाहिर कर रहा tha...par ये आज़ादी ज़्यादा देर की नहीं रहिऐक कैद से आज़ाद हुआ तो दूसरी गिरफ्त में चला gaya...mere लुंड को ममी ने अपनी मुठी में भर lia..unke मुँह से मैंने हलकी सी आवाज़ में सुना

चारु म- आह्ह्ह्हह कितना मोटा hai...or लम्बाई तो जैसे ख़त्म hi नहीं hoti...hmmm

मोटा तो था hi उनकी उंगलिअ भी लुंड के चारो तरफ ठीक से बंद नहीं हो प् रहीथी.... और फिर ममी ने अपने हाथ को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिए... उन्होंने मेरे लुंड को मेरे पेट की तरफ कर लिए था जिससे उसका मुँह ऊपर था और ममी शर्ट के नीचे से लुंड को मुठिया रही थी..

में- ाःह ममी.... अह्हह्ह्ह्ह...

चारु म- क्या हुआ बीटा...

में- कुछ नहीं ममी...

चारि म- ठीक hai...or ममी मेरे लुंड को सहलाने लगी और मैं मज़े लेकर बहुत आराम से बाइक चला रहा tha....mami मेरे पूरे लुंड को नाप रही थी हाथ पूरा नीचे ले जाती और फिर बापिस टोपे तक लेकर टोपे पर उंगली फिरती आने जाने वालो को शर्ट से ढाका होने की वजह से नहीं दिख रहा था ... ऐसे hi ममी लुंड के साथ खेलती रही कभी स्पीड तेज़ कर देती तो कभी आराम से sahlati...kareeb 10 मीन्स तक हम बिना कुछ बोले मज़े लेते रहे फिर अचानक से गया ने अपना सर मेरे कंधे से उठाया तो ममी ने झटसे अपना हाथ पीछे खींच lia...main भी दर गया के ममी ने तो फंसा दिए कहीं ये मेरा नंगा लुंड न देखले अब क्या karun....ye सोच hi रहा था तभी..

गया- अभी हम पहुंचे नहीं...

चारु म- बस कुछ देर में पहुंच जायेंगे...

Gia-mummmy मुझे टॉयलेट जाना है...

में- अभी रोकता हूँ कोई जगह देखकर..

पर मेरे अंदर दर भी था कहीं उतारकर इसने लुंड देख लिए तो... एक काम हो जायेगा ये जैसे hi जाएगी मूतने तभी लुंड को बापिस अंदर दाल लूंगा...

मैंने थोड़ी आगे बढाकर झाड़ियों के पास बाइक रोक di...mami उतर गयी और फिर गया भी...

गया- मुम्ममय तुम चलो न यार मुझे खेत में जाने में दर लगता है...

चारु म- अरे बीटा इसमें क्या दर हम यहीं है न और कोई प्रॉब्लम हो तो आवाज़ दे डीओ...

गया- नहीं मुम्ममय चलो न प्लीज बहुत तेज़ ा रही है अकेले नहीं jaungi...aap थोड़ी दूर कड़ी रहना देखना कितनी झाड़ियां है डरावनी सी.....

चारु म - बीटा मैंने साड़ी पहन राखी है झाड़ियों में गन्दी हो जाएगी और फँस भी सकती है समझा कर....

गया- मुझे नहीं पता मैं अकेले नहीं जाउंगी...

चारु म- हे भगवान् ये लड़की भी न... कर्मा बीटा एक काम कर तू चला जा इसके साथ थोड़ी दूर खड़ा हो जैव मुँह फेरकर...

मैं सोचने लगा ममी पागल हो गयी हैं क्या मेरा लुंड बहार है और उसके साथ जाने को बोल रही hai...usne देख लिया तो क्या होगा..

Me-main कैसे ममी wo...aap...

चारु म- बीटा तू hi मांजा ये तो मैंने से रही...( गया से) कर्मा के साथ तो चली जाएगी न...

गया कुछ सोचते हुए- हाँ कोई तो चलो जल्दी....

चारु म- जा बीटा नहीं तो ये जीने नहीं देगी...

मैं बेचारा मरता क्या न करता बड़ी मुश्किल से शर्ट को नीचे रखे हुए उठा फिर भी लुंड का उभर उसमे साफ़ नज़र आ रहा था... फिर भी लुंड का मुँह पेट पर होने की वजह से इतना नहीं दिख रहा tha...main बाइक से उतरा और उसको आगे चलने को कहा तो वो मेरा एक हाथ पकड़ कर चलने lagi.ek हाथ से अब ज़िप नहीं लग सकती thi....ek परेशानी और आ गयी हवा भी चलने लगी जिससे मेरी शर्ट बार बार ऊपर उठ रही thi...wohin मेरे आगे चल रही गया का सूट भी पीछे से उड़ रहा था और उसकी टाइट पजामी में कैद उसके चूतड़ों के दर्शन हो रहे थे जिससे लुंड और टाइट हो रहा था... खैर मैं अपनी शर्ट को पकडे हुए उसके पीछे झाड़ियों को पार कर रहा था अचानक से एक नेवला या कुछ वैसा hi भाग कर gaya...to वो दर गयी और अचानक से रुक गयी और नवले की वजह से थोड़ी आगे को झुक गयी मैं भी उसके अचानक रुकने से उससे पीछे से टकरा गया और वो गिर न जाये इसलिए एक हाथ से उसकी कमर को पकड़ कर उसे संभाला वो भी दर की वजह से पीछे हो गयी और मुझसे चिपक गयी... उसके पीठ मेरे सीने से लग gayi...or मेरा लुंड उसके चूतड़ों में चुभने laga...uska सूट और मेरी शर्ट दोनों hi हवा से ऊपर थे... अचानक जब उसका दर थोड़ा काम हुआ तो उसे उसक गांड पर कुछ चुभता महसूस हुआ तो उसने तुरंत मुद कर देखा और मेरा नंगा लुंड देखा तो चौंक गयी और तुरंत अपना मुँह सामने की तरफ कर lia....aur वो ऐसे hi वहीं बूत बन गयी मेरा लुंड अभी भी उसके चूतड़ों पर चुभ रहा था पर वो एक इंच भी आगे नहीं hui..mera लुंड उसके चूतड़ों की गर्मी से बिलकुल लोहे जैसा हो गया tha..itani देर से ममी की छेड़ छड़ और अब उसकी गांड की गर्मी ने मेरा हाल बुरा कर दिए और जब मैंने देखा की वो हैट नहीं रही तो मैं भी उसकी पजामी के ऊपर से hi लुंड को उसके चूतड़ों में घिसने लगा.. उसकी कमर पकड़ कर मैं अपने लुंड से उसकी गांड पर ठोकर मरने लगा





उसने अपना एक हाथ मुँह पर रख लिए पर अब भी न आगे बढ़ने की कोशिश की न hi hati...or न hi मुझे रुकने को bola...phir मुझे क्या टेंशन थी जब वो खुद अपनी मर्ज़ी से करवा रही थी तो मैं भी आँखें बंद करके रगड़ने लगा लुंड उसकी गांड par....aahhh उसके सॉफ्ट चूतड़ों के बीच मेरे लुंड कपडे के ऊपर से hi मज़ा ले रहा tha...aise hi कुछ देर तक करते रहने क्व बाद मैं उसके चूतड़ों क मुलायम स्पर्श को और नहीं सह पाया और झड़ने laga...mere लुंड से रास की धार निकल कर उसकी पजामी पर गिरने lagi...or देखते hi देखते मैंने पूरा रास उसकी पजामी पर गिरा दिए उसकी पजामी भी मेरे रास से पीछे से पूरी तरह से गीली हो गयी थी.......

मेरा जब झड़ना बंद हुआ तो मैंने अपना लुंड बापिस अपने कच्चे में डाला और पंत की ज़िप बंद ki...wo अब भी वैसे hi कड़ी thi..maine उसको बोलै पेशाब करलो..

तो जैसे उसको कुछ याद आया हो और वो आगे बढ़ गयी और एक झड़ी के पीछे चली गयी और जहाँ से मैं उसे नहीं देख सकता था फिर कुछ पल बाद वो बापिस aai...or मेरी तरफ न देखते हुए सीढ़ी चली गयी उसके सूट से ढके होने की वजह से उसकी गीली पजामी नहीं दिख रही thi..maine सोचा चलो अकह hai...main भी उसके पीछे पीछे चल दिए रोड पर पहुंचकर देखा तो ममी बेसब्री से हमारा इंतज़ार कर रही थी...

चारु म-- कितना टाइम लगा दिए... अब तो ठीक है न सब गया...

गया- हाँ मुम्ममय.

और फिर मैं बाइक पर बैठ gaya...or बाइक स्टार्ट कर्ली... मेरे पीछे गया बैठ गयी उसके हाथ मेरी कमर पर कास gaye..or उसने फिर अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया.... मैंने सोचा क्या लड़की hai...abhi लग रहा था जैसे गुस्सा है और अब ऐसे बैठी है जैसे मेरी गर्लफ्रेंड हो...

मैं सोचने लगा क्या सफर है ये माँ ने लुंड हिलाया और बेटी की तो गांड पर hi झाड़ gaya...or अब वो मेरे रास भीगी हुई पजामी लेकर अपनी माँ के बगल में बैठी hai...par मुझे मज़ा ा रहा था...

गया के जगे रहने की वजह से ममी ने भी कुछ नहीं किआ आगे और हम फिर घर आ गए...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में आप लोग प्लीज कमैंट्स करते रहिये और स्टोरी को ाचा बनाते रहिये.. शुक्रिया
 
सॉरी गाइस बिजी टुडे.... अपडेट देने में थोड़ा लेट हो जायेगा
 
मैं सोचने लगा क्या सफर है ये माँ ने लुंड हिलाया और बेटी की तो गांड पर hi झाड़ gaya...or अब वो मेरे रास भीगी हुई पजामी लेकर अपनी माँ के बगल में बैठी hai...par मुझे मज़ा ा रहा था...

गया के जगे रहने की वजह से ममी ने भी कुछ नहीं किआ आगे और हम फिर घर आ गए...


अपडेट 38
घर पहुंचते पहुंचते हमें शाम हो गयी thi...Mami और गया को घर पहुंचते hi पूर्वी, रश्मि और बड़ी बुआ ने घेर लिए... विनीत भी उनसे बात करने laga...Mujhe बुआ कहीं नज़र नहीं aai...main भी फ्रेश हुआ हाथ मुँह धोकर और कपडे चेंज किये तब तक रश्मि दीदी चाय लेकर आ गयी और मुझे देदी मैं उसे पीने laga...maine बाकि लोगो की तरफ देखा तो गया ने कपडे बदल लिए the...wajah तो मुझे भी पता थी क्यों... चारु ममी बड़ी बुआ से बातों में लगी हुई थी... गया रश्मि और पूर्वी दीदी से बातें कर रही थी और बीच बीच में मुझे देख रही थी...

में- पूर्वी दीदी बुआ कहाँ हैं दिख नहीं रही....

पूर्वी- वो दुकान गयी हैं कुछ सामान लाना था...

में- विनीत तू चला जाता बुआ को भेजा...

V-bhai ताऊजी के साथ बापिस आके मैं सो गया था.. किसी ने उठाया hi नहीं और मुम्ममय पहले hi चली गयी उठाने से...

में- चल कोई नई...

मैंने सोचा आ जाएँगी दुकान पर hi तो गयी hain...phir मेरे दिमाग में आया दूकान पर तो बड़े फूपाजी होंगे और बुआ भी वहीं hain...jis तरह से वो आज बुआ को देख रहे थे कुछ न कुछ तो ज़रूर हो रहा hoga...ya हुआ hoga..main सोचते सोचते चाय की चुस्कियां ले रहा था tabhi...mere फ़ोन बजा तो उठा कर देखा अनुज का था तो मैं छत की तरफ चला गया उससे बात करने....

अनुज- भैया कैसे हो तुम? अभी फ्री हो बात करने के लिए...

में- हाँ बिलकुल फ्री hun...ghar पर सब ठीक माँ पापा....

अनुज- हाँ भैया वो सब ठीक hain...wo एक बात बतानी thi...isliye...

में- हाँ बता न

अनुज- भैया एक गलती हो गयी hai...(kisi और ने उससे फ़ोन ले लिए)

Me-Kya गलती बता तो..

पल्ली- Hello.. भैया मैं पल्लवी.

Me-are पल्ली कैसी है तू...

Palli-main ठीक hu..bhaiya तुम तो भूल hi गए...

Me-nahi मेरी बहना... तुझे कैसे भूल सकता hun...or ये क्या गलती की बात कर रहा है...

पल्ली- हाँ भैया वो सब मैं आपको शुरू से बताती हूँ....

में- ठीक है बता...

पल्ली- भैया जब तुम वहां रुक गए और बाकि सब बापिस आ gaye....to फिर अनुज पढाई का बहाना कर जब दिन में पापा खेत पर जाते थे तो घर आ जाता था और मुझे और मुम्ममय को छोड़ता tha...hum भी खुश थे और मम्मी bhi...sab अचे से चल रहा था एक दो दिन to...par आज पापा के जाने के बाद अनुज आ gaya...or मुम्ममय पापा वाले कमरे में वो मुम्ममय को नंगा करने लगा और खुद भी नंगा हो gaya...or फिर इनकी चुदाई शुरू हो गयी...

मैं तभी बाथरूम से नाहा कर निकली thi...maine कमरे में झांक कर देखा तोह...





अनुज मम्मी के पीछे लेटकर उनको छोड़ रहा tha...maine बोलै मैं भी बस कपडे डालकर आती हूँ..

और फिर मैं आंगन में कपडे डालने लगी पर तभी मुझे गेट के बहार से पापा आते दिखे वो घर में पहुंचने hi वाले the...main दर गयी भैया के अगर पापा आ गए तो वो मम्मी और अनुज को इस हालत में देख lenge...or इन दोनों को बताउंगी तब तक तो बहुत देर हो jayegi...mujhe कुछ समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करूँ...

पापा गेट के करीब पहुंचते जा रहे थे और मैं बूत बानी हुई कड़ी thi...phir जब मुझे कुछ नहीं सूझा तो मैंने जो t-shirt पहनी थी वो तुरंत उतर दी और साथ में अपना लोअर नीचे खिसका कर उतर dia...jaldi से उतर कर मैं सिर्फ ब्रा पंतय में आ गयी और पापा जैसे hi गेट के अंदर घुसी मैं उनसे जाकर चिपक गयी...

पापा मुझे उस हालत में देख कर चौंक gaye...aur उन्होंने झट से गेट बंद कर दिए...

राजन च- क्या हुआ पल्ली.... तू तू इस हालत में....

पल्ली- पापा मेरे कपड़ो में कोई कीड़ा घुस गया वो काट रहा है खुजली भी हो रही है......

पापा मेरे आधे नंगे शरीर से नज़र नहीं हटा प् रहे the...or मेरे उनके चिपके रहने से उनके हाथ मेरे नंगे पेट और पीठ पर थे...

राजन च- तो बीटा चल जाकर जल्दी पानी से धो ले.....

पल्ली-- पापा मुझे दर लग रहा है बहुत खुजली भी हो रही hai....ttum साथ चलो..

और ये कहकर मैं रोने लगी...

तो पापा ने मुझे बाहों में उठा लिए और बाथरूम में ले gaye...or वहां जाकर खड़ा कर दिए...

राजन च- कहाँ खुजली है बीटा अब धो ले...

उनकी आँखें अब भी मेरे ब्रा और पंतय में कैद बदन पर थी...

पल्ली-- यहाँ papa...kapdo में....

राजन Ch-kapdo में कहाँ बीटा...

पल्ली- मेरे इन में

और ये कहकर मैंने अपनी ब्रा को छूछीयो के ऊपर कर दिया...





मेरी छूछीयो के बहार आते hi पापा की तो जैसे नज़रें उन पर hi जैम gayi...wo बिना कुछ बोले बस बूत बने मेरी छूछीयो की तरफ देखे जा रहे the..maine नीचे देखा तो उनके पंत में तम्बू बना हुआ tha..wo अपनी hi बेटी की छूछीयो को देखकर उत्तेजित हो गए थे और उनका लुंड खड़ा हो गया था... मैंने फिर से उनका बोलै - पापा इनमे...

तो पापा को थोड़ा होश आया और बोले- क्या करें लगता हैं इन्हे धोना पड़ेगा दोबारा से और ये ककहकार बिना मेरे जवाब का इंतज़ार किये पानी मेरी चूचियों पर दाल dia...or फिर एक बार हाथ लेजाकर अपनी पंत में बने तम्बू को एडजस्ट किआ और फिर अपने हाथ ऊपर उठाये तो उनके हाथ धीरे धीरे कांपते हुए ऊपर आ रहे the....or फिर कांपते हाथो से उन्होंने अपने हाथो को अपनी बेटी की मुलायम और बड़ी छूछीयों पर रख दिए...

Palli-Ahmmmm पापा....

मेरे मुँह से अह्ह्ह निकल गयी पर पापा का तो जैसे गाला hi सूख गया था वो अपने हाथो से मेरी चूचियों को सहला रहे थे और उन पर नज़र गदा राखी थी जैसे ऐसा कुछ उन्होंने कभी पहले देखा hi न ho..phir थोड़ी देर बाद वो थूक गटकते हुए बोले...

राजन च- अहंम ब्ब्ब्बत कैसा लग रहा है...

पल्ली- अह्ह्ह्हह पापा थोड़ा और टाइट से साफ़ करो अभी भी खुजली है...

पापा तो जैसे ये hi सुन्ना चाहते थे और अपनी बेटी की नरम छूछीयो को अपने सख्त हाथो से मसलने lage....mujhe भी अब बहुत मज़ा ा रहा था और मैं भी अपने पापा के हाथों का स्पर्श पाकर गरम होती जा रही थी.. पापा के हाथो से छुछियां मसलवाने में बहुत सुख मिल रहा tha...phir मैंने अपनी अगली चाल चली...

पल्ली- पापा मेरी कच्ची में bhi...khujli...

एक बार तो पापा ने सुना hi नहीं वो मेरी चूचियों में इतना खोये हुए थे...

पल्ली- पापा मेरी कच्ची में भी खुजली हो रही hai...papaaa...ahhh....

राजन च- क्या बीटा कछहि में bhi...ruk tt..tuuuuuu एक काम कर इसे भी उतार दे यहाँ भी धोना पड़ेगा...

पल्ली- पापा मैं कैसे ....वो nangi....sharam आती है आपके सामने...

राजन च- बीटा मुझसे क्या शर्माना... और खुजली बढ़ जाएगी अगर कुछ नहीं किआ तो...

पल्ली- पापा मैं...

राजन च- तू रुक मैं कर डेटा. हूँ और ये कहकर पापा ने अपना हाथ मेरी कछहि की इलास्टिक में फंसाया और नीचे सरका दी और फिर नीचे बैठ कर पेअर उठाकर पूरी तरह उतर दी....

अब मैं अपने पापा के सामने बिलकुल नंगी थी... मेरी गीली छूट रास बहा रही thi..mera शरीर उत्तेजा में अपने आप कांप रहा था...





पापा नीचे बैठकर मेरी छूट ध्यान से देखने लगे ....और जिस कारन मेरी छूट ने पानी बहाना चालू कर दिए और मेरी छूट में अब सचमुच की खुजली मचने लगी... पर ये खुजली छूट के अंदर ज़्यादा मच रही थी ..पापा की आँखें मेरी छूट को भेद रही thi...ek बाप अपनी बेटी की छूट को निहार रहा था....

पल्ली- अह्ह्ह्ह पापा कुछ करो न आआह्ह्ह..

मेरे चीखने से पापा फिर होश में aaye...or पानी लेकर मेरी छूट पर मारा... ठन्डे पानी के पड़ते hi मेरी छूट की आग और बाधक gayi....or मेरे नूह से आह्ह्ह्ह निकल गयी... फिर पापा के कांपते हाथ मेरी छूट की तरफ बड़े तो मेरा तो जैसे सर घूमने laga....meri छूट में एक अलग प्रकार की गर्मी लग रही thi...unke हाथ मेरी तरफ बढ़ता जा रहे थे और मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही thi....wo ज़रा सी दूरी मुझे आज बहुत ज़्यादा लग रही थी कुछ पालो का इंतज़ार सालो जैसा लग रहा था और फिर वो हुआ जिसकी कल्पना शायद hi कभी मैंने की होगी...

पापा की उंगलियां मेरी छूट के पास टकराई और जैसे hi उनकी एक उंगली मेरी छूट के होंठों पर padi...meri आँखें बंद हो गयी और मैं झड़ने lagi...meri छूट से रास की नदियां बहने लगी मुझे ऐसा लगा मेरी साडी ताकत छूट के रस्ते मेरे शरीर से बहार निकल रही hai...or मैं जब खुद के शरीर का बोझ नहीं संभल पाई तो नीचे गिर gayi...papa जब तक मुझे सँभालते मैं बाथरूम में नीचे लेती हुई थी आँखें बंद थी छूट से रास बाह रहा था...

मैं कुछ देर तक ऐसे hi पड़ी rahi...phir जब कुछ होश आया तो आँखें खोली तो देखा मेरे पापा बिलकुल नंगे होकर मेरे सामने खड़े hain...meri नज़र उनके लुंड पर टिक गयी जो बिक्कुल तन कर खड़ा था.. और मेरे नीचे से देखने की वजह से और भयानक लग रहा tha....maine पापा की आँखों में देखा तो वो खुद hi बोल बैठे..

राजन च- बीटा तुझे नहलाना था न तो मेरे कपडे गंदे हो जाते... इसलिए निकल दिए...

मैं कुछ नहीं boli...bas उनकी तरफ तो कभी उनके लुंड की तरफ देखे जा रही थी.....

मैंने अब खुद को वहीं ढीला छोड़ diya...papa ने मुझे लेते लेते hi मेरी छूट पर फिर से हाथ टिका diye...choot पर हाथ लगते hi मेरे अंदर फिर से एक करंट सा दौड़ गया...

राजन च- बीटा यहाँ अचे से साफ़ करना होगा की खुजली फिर से न हो...

पल्ली- ओह्ह्ह्ह पापा haannnnnn...aise hi...

राजन च- मैं साफ़ कर दूंगा बीटा चिंता मत कर....

और ये कहकर पापा मेरी छूट को सहलाने लगे मेरी तो जैसे जान hi मेरी छूट में अटकी हुई thi...or मेरी आँखें फिर से बंद हो गयी ...और मैं फिर से हवस और काम के समंदर में डूब गयी..... कुछ देर बाद ऐसा एहसास हुआ के समुद्र में तूफ़ान आया है जो मुझे अपने अंदर खींच रहा है और मैं उसमे खींचती चली जा रही hun...or उस तूफ़ान के मुझसे टकराते hi मेरी आँखें फिर से खुली तो जो देखा उसे देखकर मेरे पूरे शरीर में तूफ़ान आ गया...

मैंने देखा के पापा के होंठ मेरे छूट के होंठों से मिले हुए थे और उनकी जीभ मेरी छूट के अंदर जा रही thi...meri कमर अपने आप hi हिल रही थी और मेरी छूट तो जैसे एक नदी बन गयी थी जो पानी बहाये जा रही थी और पापा उस रास को अमृत समझ कर पिटे जा रहे the...or जैसे hi पापा की जीभ का एहसास दोबारा मुझे मेरी छूट में हुआ मैं फिर से झड़ने लगी... एक बार फिर मेरा शरीर अकड़ा और मैं फिर से वहीं ढेर हो gayi...papa ने मेरा सारा रास पि lia....phir अपना मुँह हटाया तो उनका पूरा चेहरा मेरे रास से भीगा हुआ था. .पर उनके चेहरे पर मुस्कान थी...

राजन च- बीटा अब तो खुजली नहीं हो रही न...?

मैं कुछ बोलने की हालत में नहीं thi...bas सर को हल्का सा ना में हिला दिया...

राजन च- बीटा पर अब मुझे खुजली हो रही है ?

मैंने उनकी तरफ सवाल भरी नज़रो से देखा तो वो उठ गए और मुझे उनका फूला हुआ लुंड dikha...wo बिलकुल फूला हुआ लग रहा tha...shahad अपनी बेटी के साथ हवस का खेल खेलने की वजह से उनकी ये हालत थी... उसे देखकर मेरा हाथ अपने ऊपर उसपर चला gaya...use छ्होटे hi मेरे शरीर में एक करंट सा दोबारा दौड़ gaya...ye वो hi लुंड है जिससे कभी मैं बानी थी... और आज ये मेरे सामने बिलकुल नंगा गरम kathor..meri उंगलियों में hai...mere अपने पापा का lund.....or फिर मैंने वो किआ जो इस समाज के नियमो के अनुसार एक बेटी को कभी नहीं करना chahiye...or ऐसा सोचना तक पाप hai...mera चेहरा अपने आप आगे बढ़ता चला गया और मेरा मुँह सूखता चला गया... मेरे होंठों बिलकुल लुंड के नज़दीक पहुंच गए और फिर वो पल आ hi गया मेरे होंठ मेरे पापा के लुंड के टोपे से टकरा गए उस गरम टोपे को मेरे होंठों ने अपने अंदर छुपा लिए तो पापा की एक चीख सुनाई दी aaahjjjjjjjjhhhhhhhhhhhhhhhhhhh और उसके साथ hi उनके टोपे के बीच के छेड़ से एक के बाद एक रास की धार निकली जो मेरे मुँह में गिरने लगी... जब रास मुँह में ज़्यादा हो गया तो मेरा चेहरा अपने आप पीछे हो गया और पापा के रास की धार मेरे चेहरे पर गिरने लगी.... उनके वीर्य की बूंदे मेरे चेहरे को भीगने लगी.... मैं अपने मुँह के सरे रास को जातक gayi...wohi रास जिससे कुछ साल पहले मैं बानी thi...jo मेरे होने की वजह था आज मेरे अंदर जा रहा था मेरी जीभ पर उसका स्वाद tha...jise मैं महसूस कर रही थी...

उधर पापा ने भी अपने रास की धारो को रोक दिए था तो मैंने बापिस उनके लुंड को मुँह में भर लिए और उसके टोपे पर अपनी जीभ फिरने लगी और लुंड को चूसकर उसकी एक एक बूँद निचोड़ ली...





पापा के वीर्य की बूंदे जो मेरे चेहरे पर थी टपक कर नीचे गिरने लगी.. और फिर मैंने उनके लुंड को छोड़ dia...jab वो होश में आये तो उन्हें हालात की सच्चाई समझ आई के आज उन्होंने हवस और काम के जोश में आकर अपनी hi बेटी की छूट छाती है और उससे लुंड चुसवाया... शायद पापा को इस बात से आत्मग्लानि हुई और वो तुरंत झुक कर अपने कपडे उठाने लगे और झट से पहनकर बिना मेरी तरफ देखे बहार निकल गए... मैं वहीं बाथरूम में वैसे hi बैठी thi..muh पर अपने पापा के वीर्य को रखे huye...thodi देर बाद मुम्ममय और अनुज अंदर आये उन्होंने मुझसे पुछा तो मैंने उनसे सब बता दिए... मुझे लगा ये सब सुनकर मम्मी गुस्सा करेंगी या डाँटेंगी पर जैसर hi मैंने उन्हें पूरी बात बतानी ख़त्म की उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठो में भर लिए और चूसने lagi...chhat छत कर पापा का वीर्य मेरे चेहरे से साफ़ करने लगी वही हालत अनुज की भी thi....usne अपना लुंड एक बार फिर बहार निकल लिए और मेरी टैंगो के बीच आकर मेरी छूट के ऊपर रख कर एक झटके में अंदर घुसेड़ दिया.... मैं तो वैसे भी लुंड के लिए तरस रही थी और मेरी िछहहहआ पूरी हो गयी.... मुम्ममय ने भी अपनी साड़ी कमर तक उठा di...or अपनी नंगी छूट को जिसमे से अनुज का रास बहकर बहार ा रहा था मेरे मुँह पर टिका dia...main भी मुम्ममय की छूट को चाटने लगी अभी कुछ देर पहले पापा का लुंड मुँह में था और अब मम्मी की choot....or साथ ने अनुज का लुंड छूट में अंदर बहार हो रहा tha....or इसी तरह हम तीनो ने एक दुसरे को शांत किआ...

पल्ली- ( फ़ोन पर) भैया ये सब हुआ aaj...ab हमें समझ नहीं आ रहा क्या किया जाये...

में- तू ये बता तू चाचा के साथ करना चाहती है...

पल्ली- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा bhaiya..par अगर पापा ने कुछ किआ तो मैं रोक भी नहीं पाऊँगी खुद को...

में- तू जो हो रहा है होने दो बाकि अनुज और ममी और तुम ध्यान से करो आज जैसा दोबारा न हो जाये इस बात का ध्यान रखो नहीं तो बहुत बदनामी होगी....

Palli-Theek है भैया..

में- छल ठीक है बाकि सब मैं वहां आकर संभालता hun...theek है bye...

और ये ककहकार मैंने फ़ोन कट कर दिया... और छत से नीचे आने लगा मन. में बस पल्ली की बताई बात घूम रही थी... मैं सोचने लगा ये हवस अभी और क्या क्या करवाएगी... पर पल्ली और चाचा की कहानी सुनकर मैं गरम भी बहुत हो गया था और लुंड भी बहुत टाइट हो गया tha..mujhe किसी छूट या गांड में लुंड डालना था...

तभी पीछे से आवाज़ आए की कर्मा बीटा...

इसके आगे क्या हुआ ये सब अगली उपदटेस में आप प्लीज पढ़ते रहिये और कमैंट्स करते रहिये शुकरिअ...
 
और ये ककहकार मैंने फ़ोन कट कर दिया... और छत से नीचे आने लगा मन. में बस पल्ली की बताई बात घूम रही थी... मैं सोचने लगा ये हवस अभी और क्या क्या करवाएगी... पर पल्ली और चाचा की कहानी सुनकर मैं गरम भी बहुत हो गया था और लुंड भी बहुत टाइट हो गया tha..mujhe किसी छूट या गांड में लुंड डालना था...

तभी पीछे से आवाज़ आए की कर्मा beta...ab आगे...



अपडेट 39
देखा तो बुआ thi...mere पास आकर बोली...

बुआ- आ गया था न आराम se...koi दिक्कत तो नहीं हुई थी...?

में- नहीं बुआ कोई दिक्कत नहीं हुई आप बताओ कहाँ घूम रही थी...

बुआ- कुछ नहीं दूकान गयी thi..mehmaan आने लगे हैं तो सोचा थोड़ा सामान ले आती हूँ ज़रुरत का...

में- वो तो मुझे पता है किसकी ज़रुरत का क्या सामान आया होगा...

Bua-kya बोल रहा है तू...?

में- दूकान पर बड़े फूपाजी तो होंगे na...vineet ने बताया वो भी कबसे बापिस आ गए थे..

बुआ- हाँ थे उन्ही के तो साथ गयी थी मैं...

में- तो ऐसा तो हो नहीं सकता की उन्होंने आपको अकेली पाकर भी कुछ न किआ हो..

बुआ- चल बदमाश हर वक़्त तुझे वो hi सूझता रहता hai...jeth हैं वो मेरे..

Me-acha मुझसे छुपाओगी?

बुआ- छल छत पर चल कपडे उतरने में मेरी मदद कर..

में- मुझे. क्यों बुला रही ho...bulalo अपने जेठ जी को...

बुआ- बहुत बोलने लगा है tu...chal जल्दी ऊपर...

Me-theek है चलो...

फिर मैं और बुआ छत पर आ गए...

में- अब तो बतादो न बुआ क्या हुआ था...

बुआ- होगा क्या इस घर के सरे मर्दों को बस छूट चाहिए होती hai...mere पीछे तो ऐसे पड़े हैं जैसे प्यासा पानी के पीछे..

आज सुबह hi तुम तीनो ने मिलकर मेरा कचूमर बना दिए था...

में- अरे बुआ सही से बताओ na...kya क्या हुआ था...

बुआ - तो सुन..

जब तू चला गया तो घर पर बस हम औरतें रह गयी thi...phir करीब दो तीन घंटे बाद विनीत और तेरे बड़े फूपाजी बापिस आ gaye...teri बड़ी बुआ कपडे धो रही thi..or रिमझिम और पूर्वी अपने कमरे में thi...to विनीत तो आकर लेट गया... तेरे बड़े फूपाजी मुझसे बोले...

बड़े फूपाजी- अरे शशि बहु ज़रा चाय मिल जाएगी क्या..?

में- अभी लाइ भाई साब.. आप बैठो तब तक मैं बना कर लाती हूँ...

बड़े फूपाजी- ठीक है...

मैं रसोई में जाकर चाय बनाने लगी.. चाय बना hi रही thi...ki तभी भाई साब रसोई के बहार से मुझे घूरने lage...mujhe सब पता चल रहा था की वो मुझे देख रहे हैं पर मैंने ऐसा दिखाया की मैं अनजान hun...phir मुझे एहसास हुआ की वो थोड़ा रसोई की तरफ बाद रहे hain..main फिर भी अपने काम में लगी rahi....unki नज़र मेरी साड़ी में नंगी दिखती पीठ और कमर पर thi...mujhe भी थोड़ा गर्मी का एहसास होने लगा था...





वो रसोई में आकर खड़े हो गए और मेरे चूतड़ों, कमर और पीठ को निहारने लगे...

मैंने काफी देर तक ऐसा दिखाया की मुझे पता नहीं की वो मेरे पीछे खड़े हैं...

मुझे फिर कप उतरने के लिए पलटना पड़ा तो वो मेरे सामने hi थे...

बुआ- भाई साब आप yahan...main ले आउंगी चाय... आप यहाँ क्यों कोई काम था?

बड़े फूपाजी- नहीं बहु... वो मैं दूध देखने आया था तुम्हारा... मेरा मतलब है की दूध कितना दाल रही ho...wo मुझे दूध ज़्यादा पसन् हैं na...to थोड़ा ज़्यादा डालना...

मैं उनकी डबल मीनिंग बातों को समझ रही थी तो मैंने भी वैसे hi जवाब दिए

बुआ- बिक्कुल भाई साहब मेरे पास दूध की क्या कमी है जितना चाहोगे उतना दाल दूंगी...

बड़े फूपाजी- बहु मेरा तो मन है की तुम्हारा सारा दूध hi डलवा लूँ...

बुआ- भैया फिर पूर्वी के पापा और विनीत और कर्मा के लिए क्या bachega..unhe भी तो दूध पिलाती hun...unhe भी दूध पीना बहुत पसंद है...

बड़े फूपाजी- बहु फिर तो मेरे साथ ये बड़ा गलत कर रही हो तुम..

बुआ- क्या hua..maine क्या गलत किआ भाई साब?

बड़े फूपाजी- सबको दूध पिलाती हो मुझे तो पिलाया नहीं...

बुआ- भाई साब मुझे तो लगा दीदी आपको दूध पीला देती होंगी...

बड़े फूपाजी- वो तो पिलाती है और मैंने पिया भी है बहुत पर अब मुझे तो तुमसे दूध पीना है bahu...tumhare से भी चख कर देखूंगा की कैसा लगता है..

बुआ- ठीक है भाई साब अबसे मैं आपको भी दूध pilaungi...par अभी तो आप चाय पी leejiye...chai बन गयी है...

बड़े फूपाजी- वैसे मन तो दूध का था पर कोई नहीं अभी चाय पि लेते हैं..

मैंने उनके हाथ में एक कप थमा दिए और खुद एक ट्रे में बाकि लोगो के लिए चाय रखली और जाने के लिए mudi...bhaisaab की नज़र अब भी मुझपर hi तिकी हुई थी..

बड़े फूपाजी- बहु रुको वहीं?

बुआ- क्या हुआ भाई साब?

बड़े फूपाजी- तुम्हारे शरीर पर कीड़ा है एक...

मुझे पता था वो झूठ बोल रहे हैं पर मैंने भी ड्रामा करते हुए कहा..

बुआ- क्या... कहाँ भाई साब...

बड़े फूपाजी- रुको बस ऐसे hi कड़ी raho...main पकड़ता hun...hilna मत काफी ज़हरीला कीड़ा लग रहा है काट लगता गड़बड़ होजायेगी....

बुआ- नहीं भाई साब मैं नहीं हिल रही जल्दी से हटाओ कीड़ा मुझे दर लग रहा है...

बड़े फूपाजी- अभी हटाता हूँ बहु तुम बस ऐसे hi कड़ी रहो...

और फिर भाईसाब मेरे पास आकर खड़े हो गए और अपनी चाय का कप स्लिप पर रख diya...or अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ने lage...meri धड़कने तेज़ हो गयी...

बड़े फूपाजी- कहाँ गया ये कीड़ा और ये ककहकार उन्होंने अपनी उंगलिओ को मेरे नंगी पीठ पर टच कर dia....mere मुँह से एक आह्हः निकल गयी... उनके हाथ मेरी पीठ पर रेंगने lage..meri पीठ का एहसास अपणीइइइइइइ उंगलिओ पर लेने lage...phir धीरे धीरे उनके हाथ मेरी कमर पर आ gaye...or वो मेरी नंगी चिकनी कमर को सहलाने लगे....

बुआ- आअह्ह्ह भाईसाब मिला नहीं कीड़ा...

बड़े फूपाजी- ढूंढ रहा हूँ बहु लगता है आगे की तरफ चला गया..

और फिर उनके हाथ आएगी आ गए और मेरे पेट पर रेंगने lage...mere हाथों में चाय की ट्रे होने से मैं कुछ नहीं कर प् रही थी और वो अपने छोटे भाई की बीवी के शरीर के साथ खेल रहे थे...

मेरे पूरे नंगे पेट पर अब उनके हाथ चल रहा the...alag अलग जगह पेट को मसल रहे थे तो कभी.... मेरी नाभि को छेड़ते और वो पीछे से बिलकुल मुझसे सात गए the...unka लुंड खड़ा होकर मेरे चूतड़ों पर दस्तक दे रहा tha...or वो अपनी कमर को हिला हिला कर उसकी ठोकर मेरे चूतड़ों पर मार रहे थे....

बुआ- आअह्ह्ह ह्म्म्मम्म्म्म भाई साब निकल गया keeda...chai ठंडी हो रही है...

बड़े फूपाजी- मिला hi नहीं bahu...pata नहीं कहाँ गया चलो चाय hi पि लेते हैं....

और ये कहते hi मैं उनसे छूट कर वहां से निकल gayi...phir सब को चाय दी और मैंने भी पि भाई साब भी मेरे और दीदी के पास आकर बैठ gaye...kareeb आधे घंटे बाद तेरी बड़ी बुआ बोली साबुन वगेरा नहीं रहा घर में मेहमान भी आने लगे है तो सम्मान माँगा लो दूकान से... मैंने बोलै विनीत तो सो रहा है...

बड़ी बुआ- तो मैं चली जाती हूँ.. सोने दो उसे थक गया होगा बच्छा...

बड़े फूपाजी- अरे तुम जाओगी तो ज़रूर कुछ न कुछ भूल jaogi...jab पुरे घर का राशन बहु hi देखती है तो उसे अचे से पता होगा...

बड़ी बुआ- हनन ये भी ठीक hai...shashi तू hi चली जा ऋ...

भाई साब ने फिर एक बार चाल चल दी thi...wo मुझे अकेले ले जाना चाहते the...par मेरे पास भी कोई कारण नहीं था जिससे मन कर saku...to मैंने हाँ बोल दिए...

फिर थोड़ी देर बाद मैं और भाई साब दूकान के लिए निकल gaye...main आगे चल रही थी और भाई साब मेरी गांड को निहारते हुए मेरे पीछे... दुकान पर पहुंचकर भाई साब ने शटर उठाया और हम लोग अंदर गए दुकान के....

और अंदर होते hi भाई साब ने शटर दोबारा डाउन कर दिया...

बुआ- क्या हुआ भाई साब शटर क्यों नीचे कर दिए...

बड़े फूपाजी- अरे अभी टाइम नहीं हुआ दूकान खोलने का तुम चली जाओगी तो फिर आराम से खोल lunga...main नहीं चाहता की हम दोनों के काम में कोई अड़चन आये...

मैं कुछ नहीं बोली और सामान लेने lagi...bhai साब अपनी कुर्सी पर बैठ गए...

और मेरे बदन को हवस भरी निगाहों से ताड़ने लगे...

मैं फिर साबुन उठाने लगी पर वो काफी ऊपर रखा था जहाँ मेरे हाथ नहीं पहुँच रहे थे मैंने फिर भी कोशिश की और अपना हाथ ऊपर बढ़ा रही थी तभी मेरे पीछे मुझे भाई साहब के होने का एहसास हुआ और अगले hi पल वो मुझसे पीछे से चिपक गए...

बड़े फूपाजी- अरे बहु मुझे बता दिए होता मैं उतर देता...

Bua-nahi भाई साब आपको क्यों तकलीफ दूँ...

उन्होंने साबुन उतर कर नीचे रख दिए पर अब भी मुझसे चिपके हुए खड़े थे...

बड़े फूपाजी- बहु एक बात कहूं..

Bua-haan भाई साब...

बड़े फूपाजी- तुम बड़ी खूबसूरत हो... पुष्पेंदर के तो भाग हैं जो तुम उसे मिली...

बुआ- आप भी भाई साब बच्चो के बच्चे हो गए हैं अब कहाँ खूबसूरत अब तो बुढ़ापा आ गया है....

बड़े फूपाजी- अरे नहीं बहु अभी भी तुम जवान हो तुम्हारा शरीर देखकर ये कोई नहीं कह सकता की तुम इतने बड़े बच्चो की माँ हो...

और ये कहकर भाई साब ने अपने हाथ मेरे कंधे पर रख दिए और सहलाने लगे...

बुआ- कहाँ भाई साब आप तो ऐसे hi तारीफ कर रहे हैं...

बड़े फूपाजी- नहीं बहु सच कह रहा हूँ मैं...

और ये बोलकर उन्होंने मेरे कंधे से सारी पल्लू को गिरा दिए और उनके हाथ धीरे धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगे...

बड़े Phoopaji-tumhari त्वचा इतनी चिकनी और मुलायम hai...man करता है बस सहलाते raho....unke हाथ ये कहते हुए मेरी कमर पर आ गए तो मैंने थोड़ा उनसे दूर होने की कोशिश की तो उन्होंने मेरे पेट पर हाथ डालकर मुझे खुद से चिपका लिए...





उनका लुंड फिर से मेरी गांड की दरार में घुसने laga....bhai साब का हाथ अब खुल कर मेरे पेट को मसल रहा था... उन्होंने अपना सर आगे बढाकर अपने होंठों को मेरे कंधे पर रख दिया... मैं भी थोड़ा गरम होने लगी...

अगर आज सुबह hi मेरी ऐसी चुदाई न हुई hoti..tum तीनो द्वारा तो शायद तब मैं अब तक तो भाई साब के लुंड पर उछाल रही hoti...par मैंने खुद को काबू में रखा था पर भाई साब बिलकुल काबू में नहीं थे...

बुआ- आअह्ह्ह ह्म्म्मम्म्म्म भाई साब क्या कर रहे ho...samaan लेकर घर जाना है...

बड़े Phoopaji-kuch नहीं बहु बस तुम्हे बता रहा हूँ की तुम कितनी खूबसूरत हो...

बड़े Phoopaji-chali जाना bahu...itni भी क्या जल्दी है...

और उन्होंने मुझे घुमा दिया अब मेरी पीठ दिवार से लग रही थी और वो मेरे सामने थे.. मेरा पल्लू नीचे होने की वजह से मेरे ब्लाउज से बहार झांकती छुछियां और मेरा नंगा पेट, नाभि कमर सब उनके सामने थे शर्म से मेरी नज़रें नीचे झुकी हुई thi...wo मेरे सामने नीचे घुटनो पर बैठ गए और अचानक से उनके होंठ मेरे पेट से takraye....mere मुँह से आह्ह्ह्हह निकल gayi....wo मेरे पेट और नाभि पर चाटने लगे चूसने lage...meri छूट में चीटियां रेंगने लगी और छूट गीली हो गयी... उनके होंठ के पेट पर रखते hi मेरी आह्ह्ह्हह निकल जाती...





मेरी आँखें बंद थी और मैं आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह करके सिसक रही थी.... मेरी हर सिसक भाई साब के जोश को और बढ़ा रही thi...or वो मेरे पूरे पेट को चाट रहे थे और साथ में हाथो से मसल भी रहे the...wo काफी देर तक मेरे पेट को चाट और चूसते रहे जब तक पेट का कोई हिस्सा बिना कहते न बच गया हो..

जब उनका पेट चेतना बंद हुआ तो ऊपर की तरफ बढ़ने lage....blouse के ऊपर से hi जीभ से किश करने lage....or मेरी सिसक और निकलने लगी.... थोड़ी देर बाद मुझे उनके चेहरे का दूर होने का एहसास हुआ तो आँखें खोल कर मैंने dekha...to वो मेरे सामने मुझसे थोड़ा दूर खड़े हो गए और फिर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे दुकान के बीच में ले आये और फिर उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ा और साड़ी उतरने लगे....

बुआ- भईईई साबबबब ये क्या कर रहे होओओओओ आआप... मेरी सारी..

बड़े फूपाजी- सब समझ आ जायेगा bahu....thodi देर रुक्जाओ ....

बुआ- अह्हह्ह्ह्ह भाई साब नहीं... मुझे घर जाना है...

मेरा मुँह तो उनका विरोद कर रहा था पर मेरे शरीर में कोई विरोध नहीं था... वो माँ की गुडिअ की तरह मुझे घुमा कर मेरी साड़ी उतर रहे थे





और देखते देखते मेरी साड़ी मेरे बदन से दूर हो गयी.... अब मैं एक बंद दुकान में अपने जेठ के सामने सिर्फ साड़ी और पेटीकोट में थी....

मुझे ऐसा देखकर भाई साब तो जैसे पागल हो गए और मुझे खुदसे चिपका lia...or मुझे पागलो की तरह चूमने लगे.... कभी गर्दन पर तो पीठ पर और फिर कभी पेट पर फिर मेरी नाभि को चूसने लगे... मेरी साँसे भी अब बहुत तेज़ चलने लगी thi...mera अपने आप पर काबू काम होता जा रहा था तो मैंने भाई साब को दूर करने की कोशिश की....

बुआ- भाई साब छोड़िये mujhe...ye ठीक नहीं hai...mujhe जाने दीजिये..

बड़े फूपाजी- नहीं बहु आज नहीं बहुत तड़पा हूँ तेरे खूबसूरत बदन के लिए आज मुझे इसे अपनी आँखों में बसा लेने दे....

बुआ- भाई साब ये सही नहीं है मैं आपके छोटे भाई की बीवी हूँ...

बड़े फूपाजी- मुझे सब पता है पर क्या करूँ बहु तेरा बदन hi ऐसा है के नहीं रोक सकता खुद को...

भाई साब ने मुझे फिरसे दबोच लिए और अब अपने लुंड को मेरी गांड की दरार में पेटीकोट के ऊपर टिका dia....or मेरे ब्लाउज के ऊपर से hi छूछीयो को दबाने लगे...

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह भईईईई सअअअअअअब्बब्बब्बब nahiiiiiiiiiiiiiii

बड़े फूपाजी- आअह्ह्ह्हह बहु क्या छुछियां हैं तेरी अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आए रहा hai....kabse देखकर तड़पता था जब इन दूध की थैलिओ को ब्लाउज में रखकर घूमती थी...

मैं भी उन की बातो से गरम होने लगी thi...upar से मेरी छूट जो बहे जा रही थी... फिर भी मैं अपनी उत्तेजना को छुपाने की कोशिश कर रही थी...

फिर भाई साब ने मेरे ब्लाउज के हुक्स को खोलना शुरू किआ और एक एक करके सरे हुक्स खोल दिए.... ब्लाउज खुलते hi मेरे बड़े बड़े छूछे ब्रा मैं कैद बहार आए गए ब्रा उन्हें सँभालने में असफल thi...or आधे से ज़्यादा हिस्सा बहार दिख रहा tha...or फिर उन्होंने ब्लाउज को दोनों बाज़ुओं से निकल कर उसे भी अलग कर दिए अब मैं सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में उनके सामने कड़ी thi...or अब वो दो कदम पीछे खड़े हो gaye....or मुझे ध्यान से देखने lage...mujhe भी समझ नहीं आया ये क्या कर रहे हैं ...अभी तो चिपक रहे थे और अब दूर खड़े हैं...

बड़े फूपाजी- बहु मेरा एक काम karde....main तुझे पूरी नंगी देखना चाहता हूँ..

बुआ- इतना तो कर दिए है भाई साब अब और बचा क्या है?

बड़े फूपाजी- बहु मैं चाहता हूँ की तुम खुद अपने आप बाकि के कपडे utaro...or मैं देखूं....

Bua-bhai साब आप भी न मैं खुद से kaise...nahi...

बड़े फूपाजी- अरे करदेना bahu....ab और ना मत कर..

मैंने भी सोचा जब नंगी होना hi है तो ये करे या नैन खुद करूँ क्या फ़र्क़ padega....or मैंने उनकी आँखों में देखते हुए ब्रा उतरनी शुरू kardi...ab मेरी आँखों से भी शर्म चली गयी थी और उसकी जगह हवस ने लेली thi.....maine पीछे हाथ लेजाकर ब्रा का हुक खोल दिए और फिर उसे उतरने लगी...





ब्रा के खुलते hi मैंने उसे हटा दिया और मेरव बड़े बड़े नंगी छुछियां भाई साब के सामने आए gayi...bhai साब तो बस मेरी चूचियों को आँखें पहाड़ के देखे जा रहे rhe....unki जीभ बार बार उनके होंठों पर घूम रही थी और उनका हाथ बार बार उनके पाजामे में जाकर उनके लुंड को सहला रहा tha...maine सीधा खड़ा होकर उन्हें अपनी दूध की थैलिओ का अचे से दर्शन करवाया... वो बस बेसब्री से देखे जा रहे the....phir थोड़ी देर बाद मैंने अपने हाथ पेटीकोट के नारे में फंसाये और उसे खोल दिए उसके खोलते hi पेटीकोट मेरी टैंगो में गिर gaya.....tujhe तो पता hi है पंतय मैं पहनती नहीं तो अब मैं भाई साब के आगे पूरी नंगी कड़ी thi....maine पेटीकोट को उठाकर बाकि कपड़ो के पास रख दिया और... मेरे चूतड़... मेरी गीली छूट मेरी गांड ये सब नंगे भाई साब के सामने थे और मैंने भी कपडे रखने के बहाने उन्हें झुक कर अचे से अपनी छूट और गांड का दर्शन karwaya...phir भाई साब अचानक से खड़े हो गए और अपने कपडे उतरने लगे और देखते hi देखते वो पूरे नंगे हो gaye....or उसके बाद आते बड़े मेरी तरफ....

उसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट mein...aaap लोग पढ़ते रहिये और प्लीज कमेंट करके बताते रहिये... शुक्रिया...
 
मेरे चूतड़... मेरी गीली छूट मेरी गांड ये सब नंगे भाई साब के सामने थे और मैंने भी कपडे रखने के बहाने उन्हें झुक कर अचे से अपनी छूट और गांड का दर्शन karwaya...phir भाई साब अचानक से खड़े हो गए और अपने कपडे उतरने लगे और देखते hi देखते वो पूरे नंगे हो gaye....or उसके बाद आते बड़े मेरी taraf....ab आएगी...

अपडेट 40

भाई साब मेरी तरफ बढ़ते जा रहे थे... और मेरा दिल उतनी hi तेज़ी से धड़क रहा tha...main अपने जेठ के सामने बिलकुल नंगी कड़ी thi...unke शरीर पर भी कोई कपडा नहीं tha...unka लुंड पूरी तरह टाइट था और मेरी तरफ घूर रहा tha....bhai साब ने फिर मुझे अपने शरीर से चिपका lia...hum दोनों के नंगे शरीर एक दुसरे से रगड़ने lage...meri छुछिया उनके सीने से दबी हुई thi...mera पेट उनके पेट से चिपका हुआ था...

उनका लुंड मेरी छूट पर घिस रहा था जो हर पल और गीली होती जा रही थी... उनके हाथ मेरे पूरे शरीर को मसल रहे the....mere बड़े बड़े चूतड़ों को गूंथ रहे थे...

फिर उन्होंने अपने सर को नीचे करके मेरी एक छुच्छी को मुँह में भर लिए...

Bua-aaahhh ह्म्म्मम्म्म्म bhaaaaiiiiiiiiiiii सायबबबबबबबबब ह्म्मम्म्म्म आअह्ह्ह्हह...

मैं अब पूरी तरह उत्तेजित हो गयी thi.....or उनका सर पकड़ कर अपनी छूछीयो पर दबा रही thi...wo भी अपना मुँह पूरी तरह खोल कर जितना हो सके उतना छूछीयो को मुँह में भरकर चूस रहे थे...

उनका एक हाथ मेरी दूसरी छूछे को मसल रहा था और दूसरा मेरे चूतड़ों को गूंथ रहा था और सरकते हुए मेरी गांड के छहद और छूट को भी कुरेद रहा tha...or फिर उन्होंने अपना हाथ सीधा मेरी छूट पर रख दिया और मेरी कमर तो जैसे अपने आप झटके खाने lagi.....unki उंगलिया मेरी छूट को सहला रही थी... मेरा हाथ अपने आप उनके सख्त लुंड पर पहुंच गया..... और उसे दबाने lagi...mere हाथ के लुंड पर स्पर्श से उनकी सिसकी निकली आआह्ह्ह्ह bahu.....or इतना कहकर उन्होंने दोबारा से मेरी चुकी को मुँह में भर लिए.... और चूसने लगे साथ hi उनकी एक उंगली मेरी छूट में घुस gayi....or मेरी कमर अपनी छूट में जेठ की उंगली प् कर तड़प उठी और कंपनी lagi...main ये सोचकर उत्तेजित होती जा रही थी की मैं हवस में कितनी आगे निकल चुकी hun....subah hi अपने बेटे अपने पति और भतीजे से एक साथ चूड़ी हूँ और अब अपने जेठ से छुछियां चुसवा रही hun...unki उंगली मेरी छूट में है और लुंड मेरे हाथ में..... मैं रिश्तो की हवस में पागल हो गयी thi...or मेरा कोई इरादा नहीं था इस सब को रोकने का ... क्यूंकि रिश्तो में चुदाई एक अनोखा सुख देती hai...jo पहले मैंने सिर्फ अपने भैया के साथ अनुभव किआ था पर अब तुम सब के साथ मेरी भूख और बढाती जा रही थी....

भाई साब की एक और उंगली छूट में घुसने पर मैं अपने खयालो से बहार nikali...wo दोनों उंगलिओ को मेरी छूट से अंदर बहार कर रहे the...mere छूट के रास से उनकी उंगलियां पूरी तरह भीग चुकी thi...or अब अंदर बहार होते hi सुप्प सुपपपपपप की आवाज़ें आ रही थी... भाई साब ने मेरी छूछीयो को चूसकर लाल कर दिए tha...main दोनों तरफ के हमले से बुरी तरह तड़प रही थी... जहाँ छूछीयो पर उनकी जीभ कमल दिखा रही थी वहीं छूट में उनकी उंगलिअ तेज़ी से अंदर बहार होती जा रही thi...phir उन्होंने आखिर अपना चेहरा चूचियों से हटाया और ऊपर मेरी आँखों में देखते हुए तेज़ी से अपनी उंगलियां चलने lage...meri हालत तो ख़राब थी उनकी उँगलियों से और उसके भाव साफ़ साफ़ मेरे चेहरे पर दिख रहे थे जिन्हे देखकर भाई साब को और मज़ा आ रहा tha....jise वो कबसे पाना चाहते थे आज वो उनकी उँगलियों पर पानी बहा रही hai...or भाई साब ने अपना चेहरा आगे कर अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख dia....meri सिसकिया मेरे मुँह में hi दबने lagi...or वो मेरे होंठो को चूसने lage..bhale hi उनकी उंगलिअ मेरी छूट में थी और मैं उनके सामने नंगी थी पर अपने जेठ के द्वारा होंठो का चूसे जाना मेरे लिए एक बहुत उत्तेजक बात थी और मैं बिलकुल अपने चरम पर पहुंच गयी और उनके होंठो को चूसने लगी फिर उन्होंने अपनी जीभ को मेरे मुँह में दाल दिए तो मैं ये प्रहार बर्दाश्त न कर पाई और उनकी उंगलिओ पर झड़ने लगी... मेरी कमर झटके खाने लगी और मेरी छूट ने अपने रास से उनकी उंगलिओ को नहला दिए.... उनके होंठों का मेरे होंठों के ऊपर होने से मेरी सिसकिया मेरे मुँह में hi दबकर रह gayi...wo मेरी जीभ को आपने मुँह में लेकर चूस रहे the...mera झड़ना जब बंद हुआ तो उन्होंने अपनी उंगलियां मेरी छूट से बहार nikali...or मेरे मुँह से होंठों को हटाया और अपने छोटे भाई की बीवी की छूट के रास को अपनी उंगलिओ से चाटने लगे... मेरे हाथ में अब भी उनका लुंड झटके मार रहा था तो मैं अब बिना किसी शर्म के नीचे बैठ गयी और वो मेरे सामने आ गया....

भाई साब का लुंड नार्मल था न छोटा न bada...unke टोपे पर उनके रास की कुछ बूंदे अटकी हुई थी... मैंने अपने अंगूठे को उनके टोपे लार फिराया और उनके रास को टोपे पर फैला दिया जिससे वो चमकने लगा...

बड़े Phoopaji-ahhhhhhhhh बहु अछाअअअअ...

उनके मुँह से सिसकारियां निकल गयी फिर मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने अपनी जीभ निकलकर उनके टोपे को चाट लिए... उनकी कमर झटके देने लगी और लुंड और टाइट होता महसूस hua...maine ऊपर देखा तो वो अति कामुक भाव से मेरी और hi देख रहे थे... मैंने उनकी आँखों में देखते हुए उनके लुंड को मुँह में भर लिए... और चूसने लगी





उन्होंने मेरी आँखों में देखा नीचे उनके छोटे भाई की पत्नी नंगी बैठी हुई उनका लुंड चूस रही thi...or ये सोचकर उनकी आँखें बंद हो गयी और फिर उनकी कमर झटके लेने लगी उनके हाथ मेरे सर पर आए गए और फाई वो अपनी कमर हिला के अपने लुंड को मेरे मुँह से अंदर बहार करने lage...aur कुछ hi झटको के बाद उन्होंने मेरे सर को अपने लुंड पर दबा dia...or पूरा लुंड मुँह में घुसेड़ दिए ोरफिर उनके लुंड ने मेरे मुँह में पिचकारियां छोड़ di...unka रास मेरे मुँह में गिरने लगा उन्होंने मेरा सीर कसकर दबा रखा था जिससे मैं पीछे न हो सकूँ और मुझे उनका रास अपने गले में उतरना पड़ा.. वो तब तक मेरे सर को पकड़े रहे जब तक उनका लुंड पुरी तरह से खली न हो gaya...jab लुंड ने पिचकारियां छोड़नी बंद की तो मैंने जीभ फिरा कर उसे साफ़ कर दिए वहीं भाई साब की पकड़ भी थोड़ी ढीली हो गयी और फिर उनका लुंड मेरे मुँह से निकल गया.... वो थक कर पीछे कुर्सी पर बैठ गए...

Bua-ab तो खुश हैं न आप अपने छोटे भाई की बीवी से अपना लुंड चुसवा कर उसे अपना रास पिलाकर...

भाई साब ने कुछ जवाब नहीं दिए बस मुस्कुराने लगे मैंने भी उठ कर अपने कपडे उठाये और पहनने लगी... वो मुझे कपडे पहनते हुए घूरे जा रहे थे... मैंने जल्दी जल्दी सरे कपडे पहने और सामान uthaya...wo अब भी कुर्सी पर नंगे hi बैठे the...phir मैंने सत्तर उठाया और दूकान से निकल गयी.... और घर आए गयी....

तो बस ये सब हुआ दूकान में...

में- आह्ह्ह्हह बुआ मेरा लुंड फटा जा रहा hai.tumhari कहानी sunkar...apane जेठ कलुण्ड आखिर चूस hi लिए apane....par अभी मुझे छूट में अपना लुंड डालना है....

Bua-karma गरम तो मैं भी हूँ पर अभी इतने सरे लोगो के बीच कैसे...

में- बुआ कुछ भी करो न मुझसे रुका नहीं जा रहा अब

मेरी बात पूरी होने से पहले hi नीचे से बड़ी बुआ की आवाज़ आई वो बुआ को बुला रही थी... बुआ भी आई दीदी कहकर चली गयी मैं अपने खड़े लुंड के साथ रह गया...

तो इसके बाद क्या करता है कर्मा अपने खड़े लुंड को शांत करने केलिए सब जानने के लिए पढ़ते रहिये और कमैंट्स करते रहिये... शुक्रिया
 
गाइस वे रीछेड टिल अपडेट 40 प्लीज गिव योर रेविएवस टिल नाउ... आप लोगो को कैसी लग रही है story....aur भी सुझाव दें जो आपके मन में हो.... और जो साइलेंट रीडर्स हैं वो भी अपने विचार व्यक्त करें...
 
में- बुआ कुछ भी करो न मुझसे रुका नहीं जा रहा अब

मेरी बात पूरी होने से पहले hi नीचे से बड़ी बुआ की आवाज़ आई वो बुआ को बुला रही थी... बुआ भी आई दीदी कहकर चली गयी मैं अपने खड़े लुंड के साथ रह gaya...ab आगे...




अपडेट 41

मैं परेशां सा छत पर खड़ा tha...lund लोहे की तरह सख्त हो चूका tha...pahle पल्ली और चाचा की कहानी और अब बुआ और बड़े फूपाजी ki...par साडी औरतें या तो किसी काम में लगी हुई थी या किसी के साथ थी... फिर मैं नीचे आ कर बैठ गया... मेरी नज़रें किसी न किसी को ढूंढ रही थी... एक बार नज़र गया से मिली वो मुझे बिना किसी भाव के साथ देख रही थी साथ में रिमझिम दीदी से बात भी कर रही थी...

मैंने सोचा यहाँ भी कुछ नहीं हो सकता फिर मैंने देखा की बड़ी बुआ कहीं बहार की तरफ जा रही हैं... मैंने सोचा अगर ये अकेली मिल जाएं तो काम बन सकता hai...main भी चुपचाप घर से निकल लिए और उनके पीछे चलने लगा...

बड़ी बुआ खेतो की तरफ जा रही थी मैं भी पीछे पीछे चले जा रहा tha....phir मुझे याद आया इधर फूपाजी का एक खेत था जो एक बार विनीत ने मुझे दिखाया था उसमे एक टूबवेल भी लगा था एक झोपडी भी पड़ी हुई thi...maine सोचा अब काम बन सकता hai...or मेरा लुंड तो जैसे छूट के ख्याल से hi फटने को हो gaya...pazame के अंदर मुझे दर्द होने लगा तो मैंने लुंड को बहार निकाल लिए ...अस पास नज़र घुमा कर देखा कोई नज़र नहीं आ रहा tha...hum गाओं से थोड़ी दूर थे... मैं लुंड को बहार निकले चल रहा था जो मेरे हर कदम के साथ झूल रहा था और इतना सख्त हो चूका था जैसे कोई लोहे की रोड को मैंने अपनी कमर पर बांध रखा हो...

बड़ी बुआ खेत के नज़दीक पहुंच गयी थी मैंने भी सोचा ये सही मौका hai...lund तो मेरा बहार था hi मैंने बाकि के कपडे भी उतर दिए और खेत में बिलकुल नंगा हो gaya...uttezana में मैं इतना अँधा हो गया था के मुझे इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा के मैं अभी खेत में hun..or फिर पीछे बुआ की और भगा और बड़ी बुआ को पकड़ा उनकी साड़ी और पेटीकोट को कमर तक उठाया और अपना लुंड उनकी छूट में फंसा dia.ye सब काम मैंने सीसफ 5-10 सेकंड में kia..jab तक वो कुछ समझ पाती तब तक तो मेरा लुंड उनकी छूट में घुस चूका था





बड़ी बुआ बहुत बुरी तरह से दर गयी थी पर जब उन्होंने पलट कर मुझे देखा तो जान में जान आई और बोली- कर्मा बचुआ तूने तो डरा hi दिया रे.... ahhhhhhhhhhhhhhhh पुरा घुसेड़ दिया मार डाला...

मैं बायत करने के मूड में नहीं था और उन्हें छोड़े लगा सटासट...

बड़ी बुआ- अह्ह्ह्हह बछ्ह कुछ तो शर्म कर खेत में बिलकुल नंगा होकर बुआ को छोड़ रहा है कोई देखलेगा तो गजब हो जायेगा....

में- कोई नहीं देख रहा. बुआ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मज़ा आ रहा है तुम्हारी टाइट छूट mein...aaahhhh...aaaahhh

बड़ी बुआ भी अब गरम होने lagi...or गांड पीछे कर करके छूट मरवाने lagi...maine हाथ आगे लेजाकर बुआ का ब्लाउज ऊपर कर dia...or उनकी छूछीयो को बहार निकल लिए और उन्हें मसलते हुए उन्हें छोड़ने laga....bua हुक कर एक पेड़ को पकड़े हुए अपनी छूट मरवा रही थी....





मैं पहली बार ऐसे खुले में चुदाई कर रहा था जिससे मेरा मज़ा और बढ़ता जा रहा tha...khule आसमान के नीचे हरे भरे खेतो के बीच मेरा लुंड बड़ी बुआ की छूट को चीयर रहा tha...mere धक्के काफी तेज़ और दुमदार the....is खुले वातावरण से मेरा लुंड और फूल गया था और खुले में चुदाई का दर किसी से पकडे जाने का दर इस उत्साह को और बढ़ा रहा था... और मैं बस मज़े से उन्हें चोदे जा रहा था....

बड़ी bua-hannn बछ्ह ऐसे hi तू कितना आअह्ह्ह्ह बेशर्म हूऊऊ गया है रे.... खेत में पूरा नंगा हो gaya......or बाआआ को छहःछहूऊऊडड़ड़ रहा है...

में- हम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह बुआ तुम्हे भी बेशरम बना देता हूँ....

और ये ककहकार मैं बुआ के ब्लाउज को निकलने लगा और कुछ hi पालो में ब्लाउज के साथसाथ ब्रा को भी निकल Diya...ab बड़ी बुआ ऊपर से पूरी नंगी थी...

बड़ी bua-ahhhhhhh बीटा मत कर कोई आ jayega...kapde रहने दे....

पर मैंने बुआ की बात नहीं सुनी मुझे ऐसे खुले मैं नंगे हो कर चुदाई करने में बहुत अलग तरह का सुख मिल रहा tha...phir मैंने बुआ की साड़ी को पकड़ कर उसे भी खोल दिए साथ hi पेटीकोट का नैरा खींच दिए और फिर दोनों को पकड़ कर उनके सर के ऊपर से निकल dia...ab बड़ी बुआ भी पूरी नंगी thi....or शायद वो भी ऐसे खुले मैं चुदाई और नंगे होने से काफी गरम हो गयी thi...unki छूट भी बहुत गीली हो चुकी थी जो इस बात का सबूत थी...

बड़ी bua-hannn बछ्ह ऐसे hi आअह्हह्ह्ह्ह छहःछहूऊऊडड़ड़ अपनी बुआ को फाड़ दे मेरी छूट.... आअह्ह्ह्ह पुरा नंगा करके ऐसे hi खुले में... कुटिया की तरह छोड़ड़ड़ आह्ह्ह्हह्ह कर्मा क्या खा कर जाना था तेरी रंडी माँ ने तुझे जो ऐसा घोड़े जैसा लुंड है tera...ahhhh...

में- साली randiiiiiiiiiiiiiiiiiii दो दिन बाद बेटी की शादी है और तू यहांनंन चुद रही है नंगी hokar....aaahhhhh मन तो करता है तेरी बेटी को भी यही ले आऊं दोनों माँ बेटी को एक साथ पूरे खेत में नंगा दौड़ा के छोडुनंनंन अह्हह्ह्ह्ह क्या गरम माल है साली.....

मैं खुद अपनी बात से उत्तेजित हो गया और फिर बड़ी. बुआ को छोड़ते huye..unke हाथ पेड़ से हटाए और उन्हें छोड़ते हुए hi आगे बढ़ने लगा....

बड़ी बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह कर्मा kyaaaaaaaaaaaahhhh कर रहा है....

में- साली रैंड तुझे पूरे खेत में घुमा घुमा कर छोडूंगा...

और मैं बुआ को धक्का देकर आगे चलने लगा और पीछे से उनकी छूट मरने लगा...





मैं कुछ कदम बुआ को लेकर चलता और फिर उनकी छूट में धक्क्के लगता..... फिर थोड़ा चलता और फिर उन्हें chodta....lund बड़ी बुआ की छूट से बहार नहीं निकलने दे रहा था...

उन्हें भी ऐसी चुदाई में बड़ा मज़ाआ आ रहा tha...aur वो मुझे और तेज़ चुदाई करने को उकसा रही थी.... मेरे धक्के भी मेरी उत्तेजना के साथ तेज़ होते जा रहे थे फिर कुछ पल बाद hi बुआ मेरे झटके नहीं झेल पाई और उनकी छूट ने पानी छोड़ दिए... और उनका शर्रेर ढीला पद gaya..unki छूट के रास से मेरा लुंड पूरा भीग gaya....maine उन्हें साइड में लेजाकर टूबवेल का टब जिसमे पानी गिरता है उसकी दीवार पकड़ कर झुका दिए और फिर लुंड उनकी छूट से निकला तो वो पूरी तरह से उनकी छूट रास से गीला था...

बड़ी बुआ झुककर अपनी सांसे ठीक कर रही थी जो झड़ने से चढ़ गयी थी मैंने अपने गीले लुंड को बुआ की छूट के ऊपर दोबारा लगाया और एक झटका मार के अंदर kia....badi बुआ की फिर से एक आह्ह्ह्ह निकल गयी पर फिर मैंने लुंड को पुरा बहार निकल लिए और फिर उनकी गांड के भूरे छहद पर रखकर एक धक्का मारा तो मेरा लुंड चिकना होने की वजह से उनकी गांड को चीरता हुआ अंदर घुस गया...

बड़ी bua-aaahhhh बचुआ हमरी तो पहात gayi.....mar गयी तेरी बाआआअह्हह्ह्ह्ह आराम से बछायआ आराम से कर....

मैंने बुआ की कमर को पकड़ा और दो तीन झटको में पूरा लुंड गांड में घुसेड़ दिया... और फिर गांड मरने laga...badi.bua फिर से गरम होकर अपनी गांड मरवाने lagi...unki गांड के छेड़ की झिल्ली मेरे लुंड के चारो or...chipki हुई थी और मेरे लुंड के अंदर बहार होते हुए घिस रही थी...

उनकी गांड के छेड़ में मेरा मोटा लुंड आता जाता देखते हुए मुझे बड़ा ाचा लग रहा था...

फिर मैंने बड़ी बुआ की कमर को pakada..or फिर तेज़ी से उनकी गांड मरने लगा..





बड़ी बुआ की मखमली गांड मेरे लुंड को टाइट से पकड़ रही थी जिससे गांड मरने में और मज़ा मिल रहा tha...main ताबड़तोड़ धक्को से उनकी गांड मरने laga....or बड़ी बुआ तो जैसे पागल hi हो गयी थी...

बड़ी बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhh हांमं पहाड़ दे मेरी गांड सेल मादरचोद क्या लुंड है तेरा अह्ह्ह्हह रंडी बनके छोड़ड़ड़ रहा है मुझे खुले में.... आअह्ह्ह.... Aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh

में- साली तू रैंड है hi तो वैसे hi chodunga...ghar के हर मर्द से छुड़वा चुकी है छ्हिनल tu....par फिर भी लुंड खाने को राज़ी रहती है.... आअह्हह्ह्ह्ह तेरी गांड..

मैं और बड़ी बुआ एक दुसरे को गली देकर उत्साह बढ़ने lage...or फिर मैं भी काफी उत्तेजित हो गया और फिर तूफानी धक्को से बुआ की गांड मरते हुए उनकी गांड में hi झाड़ gaya...maine अपने रास से उनकी गांड को भर दिए मेरी रास की धार गांड में महसूस करते hi बड़ी बुआ की कमर भी झटके खाने लगी और वो भी झड़ने lagi....maine अपना लुंड पुरा झड़ने तक उनकी गांड में hi रखा और फिर बहार निकला तो उनकी गांड का छहद खुला हुआ नज़र आया और उसमे से मेरा रास बहकर बहार आ रहा tha....lund के निकलते hi बुआ पलट कर मेरे सामने बैठ गयी और मेरा लुंड अपने मुँह में भर लिए और चाट चाट कर साफ़ करने lagi...main सोचने लगा क्या कमाल की रांड हैं इस घर की औरतें bhi....apani गांड से निकले लुंड को चाट कर साफ़ कर रही hai...apani गांड के रास को मेरे लुंड पर से छत कर उसका स्वाद ले रही है.... मुझे भी ऐसी hi औरत पसंद है जो चुदाई का मज़ा le...har चीज़ के लिए मन न kare....or चुदाई का मज़ा भी तब है जब उसमे ाचा गन्दा सब भूल कर की जाये...

खैर मैं जब तक अपने खयालो में डूबा हुआ था तब तक बुआ ने मेरा लुंड बिलकुल साफ कर दिए tha...or फिर उठ कर कड़ी हो गयी और फिर अपने बिखरे हुए कपडे उठाने लगी...

बड़ी बुआ- तू भी कपडे पहन ले बच्चा अब कब तक नंगा rahega...apane मन की तो कर्ली न तूने...

में- मन की तो तब होगी बुआ जब तुम्हे और रिमझिम दीदी को साथ में छोडूंगा...

बड़ी बुआ अपने कपडे पहनते हुए मेरी तरफ देखने लगी और मैं भी अपने कपडे पहनने लगा...

बड़ी बुआ- माँ से पेट नहीं भरा तेरा जो बेटी को भी छोड़ना चाहता hai...or वो भी मेरे सामने...

Me-kyun पूर्वी दीदी और बुआ को भी तो छोड़ा है न एक sath...to तुम्हे और रिमझिम दीदी को क्यों नहीं छोड़ सकता...

बड़ी बुआ- बीटा उसकी शादी hai...uski छूट अभी कुंवारी hai...uski छूट पर उसके पति का हक़ है...

तब तक हम दोनों ने hi अपने अपने कपडे पहन लिए the...badi बुआ ने भैंसो को खिलने का चारा जो लेने वो यहाँ आए थी वो उठाया तो मैंने उनके हाथों से ले लिए और हम घर की तरफ निकल पड़े... काफी सोचने के बाद मैंने बड़ी बुआ से बोलै

में- बुआ अगर रिमझिम दीदी कुंवारी नहीं होती या उनकी छूट की सील टूटी हुई होती तो तुम्हे कोई परेशानी नहीं होती उनके दत्त छोड़ने में...

बड़ी बुआ- बीटा परेशनी क्यों नहीं होती एक माँ को बेटी के साथ में छोड़ने को बोल रहा है मतलब दोनों को hi अपनी लाज शर्म त्यागनी पड़ती तभी ऐसा हो पता...

में- तुम चुद पाओगी रिमझिम दीदी के सामने...?

बड़ी bua-dekh बीटा अगर ये सवाल कभी और पुछा गया होता तो मेरा जवाब हमेशः ना hota...par जिस हिसाब से घर के हालात हैं बेटी बाप से चुद रही है माँ बेटे se.....bhabhi देवर se...bua भतीजे se....taai भतीजे से... तो अब तो मुझे कुछ मुश्किल नहीं लगता.....

में- बुआ आपको फिर कुछ बातें ऐसी हैं जो पता होनी चाहिए...

बड़ी बुआ- कैसी बातें बछ्हः?

फिर मैंने बड़ी बुआ को अपने और रिमझिम दीदी की पूरी कहानी बता di...ye सब सुनते हुए बड़ी बुआ का चेहरे पर चौंकाने वाले भाव थे वो बस मेरी बात सुनती रही कुछ नहीं boli...or ये सब बताते हुए घर भी आए गया तो गेट पर पहुँच कर बड़ी बुआ बिना मेरी तरफ देखे घर के अंदर चली gayi....main सोचने लगा कहीं इनको बताकर कुछ गलत तो नहीं किआ maine....kahin ये रिमझिम दीदी को तो कुछ नहीं bolegi....kya बड़ी बुआ गुस्सा हैं इस बात से... अगर हैं भी तो गलत भी नहीं hai...shadi के चार दिन पहले hi उनकी कुंवारी बेटी को छोड़ दिया जाये तो उनका गुस्सा होने का पूरा हक़ बनता hai....main इन्ही सब खयालो में डूबा हुआ tha...tabhi पीछे से फूपाजी आये और मुझे अपने साथ घर के अंदर ले आये...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में आप लोग पढ़ते रहे और कमैंट्स करते रहे.... शुक्रिया...
 
क्या बड़ी बुआ गुस्सा हैं इस बात से... अगर हैं भी तो गलत भी नहीं hai...shadi के चार दिन पहले hi उनकी कुंवारी बेटी को छोड़ दिया जाये तो उनका गुस्सा होने का पूरा हक़ बनता hai....main इन्ही सब खयालो में डूबा हुआ tha...tabhi पीछे से फूपाजी आये और मुझे अपने साथ घर के अंदर ले aaaye...ab आगे...

अपडेट 42

( अस 3रद पर्सन)

यहाँ कर्मा अपने मन की उथल पुथल में लगा हुआ tha...wohin यहाँ से दूर एक गाओं में एक घर के आंगन में एक करीब 50 साल का आदमी खाट पर बैठा है और हुक्का पीते हुए धुआं छोड़ रहा hai...Chehre से किसी गहरी सोच में लग रहा है... एक सफ़ेद कुरता पहने हुए... पर कमर के नीचे से वो बिलकुल नंगा hai...or उसकी टैंगो के बीच दो 26-28 साल की औरतें बिलकुल नंगी बैठी हैं hain...ek उस आदमी का लुंड चूस रही है तो दूसरी उसके ाँद को मुँह में लेकर चूस रही hai...or साथ hi अपने एक एक हाथ से एक दुसरे की छूट सहला रही हैं...





तभी सामने से एक आवाज़ आती है क्या हुआ बाबूजी क्या सोच रहे हो?

जिस आदमी ने ये बोलै उसकी आगे करीब 30 की होगी और वो वहीं सामने एक सोफे पर पूरा नंगा बैठा था उसकी गॉड में अधेड़ उम्र की औरत जो करीब 48 की होगी उसका सर था जो उसका लुंड चूस रही thi...wo औरत सोफे पर साइड होकर लेती हुई थी और उसके पीछे से एक जवान सा आदमी उस औरत की गांड में लुंड अंदर बहार कर रहा था.....





उसके मुँह से बस गु गु की आवाज़ निकल रही थी... पीछे वाला आदमी काफी तेज़ धक्को से उसकी गांड मार रहा था....

तभी पास hi पड़े एक और सोफे पर से आवाज़ आए.. हाँ बाबूजी बहुत सोच में लग रहे हैं आज..... अह्ह्ह्ह क्या बात है... ये आदमी भी पूरी तरह से नंगा था और सोफे पर लेता हुआ था और उसके ऊपर एक 26 साल औरत उसकी तरफ पीठ करके उसके लुंड को छूट में लेकर उछाल रही थी..





और वो आदमी नीचे से धक्का लगा कर उसकी छूट में लुंड पेल रहा था...

कुल मिलकर चुदाई का नशा पूरे उफान पर tha...poore घर में बस थप थप थप और सलरपप स्लुर्प की आवाज़ें आ रही थी...

वो शख्स अभी भी किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था... फिर अचानक से उसने सामने जो जवान आदमी उस औरत की गांड मार रहा था उससे पुछा...

बाउजी- जो तुझे पता करने को बोलै था वो पता किआ?

जवान आदमी- ग बाउजी पता कर लिए hai....sab बिलकुल पहले जैसा hi चल रहा है...

दूसरा आदमी- बाउजी अभी कब तक और इंतज़ार करोगे आप?

बाउजी नीचे से एक औरत को पकड़ कर उठता है और उसे अपने लुंड पर बिठा लेता है वो औरत लुंड पकड़ कर अपनी छूट पर रख देती है और लुंड छूट में घुसता हुआ चला जाता hai...aur वो औरत बाउजी के लुंड पर उछलने लगती है





बाउजी हाथ आगे बढ़ा कर उस औरत की बड़ी बड़ी कठोर छूछीयो को मसलने लगता है...

वहीं जो दूसरी औरत जो बाउजी के ाँद चूस रही थी वो उठ कर सामने के सोफे पर जहाँ वो दो आदमी एक अधेड़ उम्र की औरत को छोड़ रहे थे वहां चली जाती hai...wahan भी पोजीशन चेंज हो चुकी थी और अब वो दोनों मिलकर उसकी छूट और गांड एक साथ मार रहे थे...





जवान औरत उठ कर आती है और अपनी छूट को जो आदमी लेट कर उस अधेड़ उम्र की औरत की छूट मार रहा है उस पर रख देती है और वो आदमी उसकी छूट चाटने लगता है...

बाउजी- अब समय आ गया hai...mere अंदर की आग को शांत करने ka...aur उसके तड़पने का...

जवान औरत- बाबूजी इतना समय बीतने के बाद भी आप अब भी उतना hi गुस्सा हैं उससे?

बाबूजी- ये गुस्सा नहीं है ये बदले की आग है मेरे अंदर जो हर पल के साथ बढ़ रही hai..or ये तब hi जा कर बुझेगी जब वो रंडी मेरे लुंड के नीचे hogi....use तो इतना तड़पाऊंगा की वो अपने लिए मौत mangegi...bahut नाज़ है उसे अपनी इज़्ज़त ka....poore गाओं के सामने नंगा कर के छोडूंगा उसे और फिर सबसे छुडवाउंगा... रखेल बनकर रहेगी वो.... उसने मुझसे मेरी सबसे प्यारी चीज़ चीनी hai..main उसकी जीने की चाहत छीन लूंगा...

आदमी- पर बाउजी हम ये करेंगे कैसे..?

बाउजी- तुम लोग जो मैं कहता हूँ करते jao...bahut जल्द हम सब मिलकर उस रंडी को छोड़ रहे होंगे...

आदमी- हमने अबतक भी वैसा hi किआ है बाउजी और आगे भी ऐसा hi करेंगे....

तभी साइड वाले सोफे से एक चीख आती है...

औरत- अह्हह्ह्ह्ह jeeeejaji...main gayi...or वो औरत झड़ने लगती है...

इसके बाद वहां चुदाई का दौर पूरी तरह से शुरू होता है सब एक दुसरे को बदल बदल कर छोड़ने लगते हैं





थपप्पल ठप्प्प और सिसकियाँ बस ये hi आवाज़ें पूरे घर में गूंजने लगती hain....poora परिवार चुदाई के नशे में डूब जाता है.... कोई भी लुंड किसी भी छूट या गांड में घुस रहा होता है... शायद hi ऐसा प्रेम किसी परिवार में hoga...phir से बदलाव का दौर आता है और साथी और आसान बदल दिए जाते हैं





बाउजी की आँखों में अब भी वही गुस्सा और बदले की आग जलती दिखती है न जाने क्या है ये पूरा माजरा कौन है ये parivaar....kaun है ये bauji...kisse बदला लेना चाहता है ye...kis को अपनी रंडी बनाना चाहता है ोे क्या है उसकी सबसे प्यारी चीज़ जो इससे चीन ली गयी... और क्या कोई सम्बन्ध है इनका कर्मा से ये सब तो ये खुद hi जानते होंगे और शायद हमें भी बाद में hi पता chalega...to तब तक के लिए इन्हे चुदाई का आनंद लेने देते हैं और हम चलते हैं अपने दोस्त कर्मा के पास...

( अस कर्मा)

मैं फूपाजी के साथ अंदर आया पर मन में कई सवाल अब भी तैर रहे the...maine फिर वही किआ जो मैं हमेशा किसी भी मुश्किल के लिए करता हूँ ....जो होगा देखा जायेगा और सब के साथ बातों में लग gaya...badi बुआ अब भी मुझसे नज़रें नहीं मिला रही thi...main चारु ममी से बात करने लग गया वो बिलकुल नार्मल लग रही थी जैसे हमारे बीच कभी कुछ अजीब हुआ hi nahi...bua , रिमझिम और पूर्वी कुछ कपड़ो को लेकर बात कर रहे the...yahi सब देखते हुए मेरी नज़र गया पर gayi...wo भी सब के साथ बात कर रही थी पर अब भी तिरछी नज़रों से मुझे देख रही thi...Maine उसकी तरफ देख कर मुस्कुराया तो उसने अपनी नज़र फेर ली....

मैं सोचने लगा क्या लड़की है साली...

तभी विनीत मुझसे बोलै चल भाई थोड़ी देर घूम कर आते hain...bahar....

में- ठीक है चल चलते हैं...

और मैं और विनीत बहार खेतो में घूमने निकल जाते हैं....

व्- भाई मुझे नहीं पता कैसे kahun....par thank-you...

Me-kis लिए?

व्- जो भी सब अब हो रहा hai...aisa लगता है सब सपने सा है... आज हम ने मिलकर मुम्ममय को choda...aisa कभी सपने में भी नहीं सोचा था की मैं तू और पापा मिलकर ऐसे एक साथ मुम्ममय को छोड़ेंगे और मुम्ममय ख़ुशी ख़ुशी छुडवायेगी...

में- अबे ज़्यादा मत सोच और मज़े ले तू...

व्- सच में भाई कहाँ मैं एक छूट के लिए तरसता tha..ab घर में hi सब मिल रहा है .. मुम्ममय के साथ साथ पूर्वी दीदी और तै जी bhi...or ये सब तेरी वजह से...

में- जितना तेरा फायदा है उतना hi मेरा भी hai...mujhe भी तो इतनी साडी छूट और गांड मरने को मिल रही hain...or सबसे बड़ी बात बस ये ध्यान रख के वो मर्ज़ी से ये सब करती हैं जो सबसे ज्यादा ज़रूरी hai...baki इस बात का ध्यान रखना की तू उन्हें किसी चीज़ के लिए जबरदस्ती न करे....

V-bhai जैसा तू चाहता है वैसा hi रहेगा...

में- शाब्बाश मेरे लाल...

और ऐसे hi मज़ाक करते हुए हम लोग थोड़ी देर घूमे फिर घर बापिस आने लगे... घर जब पहुंचे तब तक सूरज ढल चूका था और अँधेरा हो चूका था... मैं और विनीत घर पहुंचे तो साडी औरतें खाना बनाने के काम में लगी हुई थी... पूर्वी दीदी रिमझिम दीदी और गया बच्चे के साथ खेल रही thi...main और विनीत भी वहीं उनके साथ बैठ gaye...Jahan गया मुझे देखकर बापिस बच्ची में लग gai...to रिमझिम दीदी मुझसे ऐसे शर्मा रही थी जैसे वो मेरी नयी नवेली बीवी हो... पूर्वी दीदी बिलकुल नार्मल बेहवे कर रही थी लग hi नहीं रहा था उन्हें देखकर की ये वो hi लड़की है जो अपने भाइयों से और अपने बाप से खूब उछाल उछाल कर चुदवाती hai...unke चेहरे की मासूमियत देखकर लुंड उठाने लगता था.... तभी पूर्वी दीदी बच्चा गया को देते हुए मुझसे बोली... कर्मा चल मेरे साथ बहार घेर से उपले लेकर आने हैं...

Me-theek है चलो दीदी...

फिर मैं और पूर्वी दीदी घेर में गए और वहां पहुंचते hi मैंने पूर्वी दीदी को पीछे से दबोच लिए और उनकी गांड पर लुंड घिसने लगा...

Poorvi-aahhhh कर्मा फिर खड़ा हो गया तेरा लुंड...

Me-didi तुम साथ हो तो ये बैठता hi कब है... और फिर मैं उनके सामने बैठ गया और उनके पेट पर से उनकी सारी का पल्लू हटाया... और उनके पेट पर अपने होंठ रख दिए उनके मखमली और चिकने पेट को चाटने लगा और साथ hi हाथ पीछे लेजाकर उनके बड़े चूतड़ों को मसलने लगा...

दीदी की स्किन इतनी मुलायम थी की मन कर रहा था की उनके पेट से ऐसे hi चिपका रहूं...

पूर्वी- कर्मा लेट हो रहा है जल्दी चल अभी टाइम नहीं है...

मैंने भी सोचा दीदी सही कह रही हैं.. अभी इस सब के लिए टाइम नहीं है तो मैं उठ गया

Me-didi अपने होंठों के रास को तो पीने दो थोड़ा सा..

और ये ककहकार मैंने दीदी के होंठों को अपने मुँह में भर लिए और. चूसने लगा दीदी भी मेरा पूरा साथ दे रही thi...mera लुंड पूरी तरह खड़ा हो गया करीब 5 मीन्स तक उनके होंठों और जीभ को चूसने के बाद मैंने उन्हें छोड़ा तो वो हांफ रही thi...or मेरी आँखों में देखती हुई बोली...

पूर्वी- काश तू मेरा भैया नहीं सय्यिन होता...

में- काम तो सरे सय्यिन वाले करता hi hun..meri जान...

Poorvi-ab बात मत बना और उपले उठा....

में- जो आज्ञा जानेमन...

और फिर हम दोनों उपले लेकर घर आए गए....

फिर खाने का प्रोग्राम चालू हुआ सब ने एक दुसरे से मज़ाक करते हुए खाना khaya...khana खाने के बाद फूपाजी और बड़े फूपाजी के साथ शादी के काम वगेरा की बात करने laga...uske बाद घर में गाओं की कुछ औरतें आ गयी....

पूर्वी दीदी ढोलक ले आई और घर की साडी औरतें और वो सब मिलकर गाना बजाना करने लगी जो भी शादी से पहले घरो में होता है...

औरतें गाने बजने में लग गयी और मर्द लोग सब अपने अपने कमरों में या बिस्तर पर...

मैं कुछ देर बिस्तर पर लेता पर गाने और ढोलक की वजह से नींद तो आने से rahi...to मैं किचन में पानी पिने चला गया...

वहां जाकर देखा तो चारु ममी रसोई में थी और कुछ बना रही थी...

उन्हें देखते hi मुझे दोपहर वाला सन याद आ गया और पीछे से साड़ी में उनकी गांड देखकर मेरा लुंड फन उठाने लगा...

में- अरे ममी क्या बात है आप अभी रसोई में....

चारु म- अरे कर्मा बीटा वो साडी औरतों को जागना है तो सब के लिए चाय बना रही थी...

में- मुझे भी पिलाओगी ?

चारु म- क्या??!

Me-chai....

चारु म - हाँ बिलकुल pilaungi...nind नहीं ा रही तुझे...

में- नहीं ममी नींद कहाँ अब... नींद तो अपने कब से उदा दी..

चारु म- क्या मतलब?

में- आप लोगो के गाने बजने ने

चारु म- देखले ये सब होता है शादी में तेरी में भी होगा तो अभी से प्रैक्टिस करले...

में- मेरी शादी कहाँ से हो पायेगी अब..

चारु म- कहांसे हो पायेगी क्या मतलब है लड़की से हो पायेगी...

में- अपने तो मां ग से कर्ली na...main किस्से karun...aap होती तो आपसे कर लेता...

चारु म- बदमाश ममी से मज़ाक...

में- मज़ाक नहीं ममी सच में बहुत सुन्दर हो aap...dekhte hi मन करता है की..

चारु म- क्या मन करता है?

में- की की वो आपसे शादी करलूं...

चारु म- इतना सोच कर बोल रहा है ज़रूर कोई बात है...

Me-nahi ममी सचमें बीवी हो तो आपके जैसी...

चारु म- वैसे जो भी तेरी बीवी होगी खुश रहेगी..

में- क्यों ममी ऐसा क्यों?

चारु म- औरत को सुख देने की साडी चीज़ें हैं तेरे पास और अछि खासी हैं...

मैं समझ गया की ये मेरे लुंड की बात कर रही hain...mera लुंड भी पूरी तरह खड़ा हो चूका था उनके बड़े बड़े चूतड़ों को देख कर मैंने सोचा ममी पर तरय करके देखता hun....kya पता कुछ बात बन जाये और जब ममी खुद हिंट दे रही हैं तो मई. पीछे क्यों हतुं?

में- आप किस चीज़ के बारे में बात कर रही हो ममी?

और ये ककहकार मैं उनके पीछे जाकर खड़ा हो gaya...main उनसे अब बस कुछ कदम की दूरी पर था...

चारु म- तू बड़ा भोला बनता है re...phir भी तू इतना समझले की तू अपनी बीवी को बड़ा खुश रखेगा...

में- जब बीवी को खुश रख सकता हूँ तो फिर आपको भी?

चारु म- नहीं बीटा मुझे खुश करने की ज़िम्मेदारी तेरे मां की hai...wo hi करते हैं...

में- पर थोड़ी ख़ुशी अगर अलग से मैं दे दूँ तो क्या बुराई है...

और ये ककहकार मैं ममी के पीछे चिपक कर खड़ा हो गया और मैंने हाथ आगे बढाकर उनका पल्लू बभी नीचे गिरा दिया...





मेरा लुंड उनके चूतड़ों के बीच रगड़ने लगा... ममी एक पल को चौंक गयी

चारु म- अह्ह्ह क्या कर रहा है ये कर्मा कोई देखलेगा तो क्या सोचेगा...

में- आपको खुश कर रहा हूँ...

और मेरे हाथ उनके नंगे पेट पर पहुंच गए और मैंने उन्हें खुद से चिपका लिए....

मेरा लुंड अब पूरी तरह से उनकी गांड की दरार में घुस रहा tha...or मेरे हाथ उनके नंगे चिकने सपाट पेट पर घूम रहे थे...

चारु म- कर्मा छोड़ मुझे ये सही नहीं बीटा किसी ने देख लिया तो बदनामी हो जाएगी...

में- क्यों ममी मेरी चीज़ आपको अछि नहीं लगी और ये ककहकार मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने पाजामे के ऊपर से hi लुंड पर रख दिए..

चारु म- आअह्ह्ह्हह Karma...matttttttt करररररर...

पर उन्होंने अपना हाथ मेरे लुंड से नहीं हटाया बल्कि पाजामे के ऊपर से hi मेरे लुंड को सहलाने lagi...unke हाथो का एहसास होते hi लुंड थोड़ा और मोटा हो गया...

मैं उनकी गर्दन और कंधे पर चूमने laga...har पल के साथ ममी का विरोध काम होता जा रहा tha...mere हाथ उनकी कमर और पेट को मसल रहे the...phir मैं उनकी गर्दन को चूमते हुए उनकी पीठ पर आया और नंगे हिस्से पर चूमने लगा तभी मेरी नज़र ब्लाउज पर पड़ी तो देखा वो पीछे से खुलने वाला था मैंने पीठ पर चाटते हुए hi एक हाथ लेकर उनके ब्लाउज की पीठ पर बंधी डोरी को खोल दिया





उनकी ब्लाउज की डोर खुलते hi ममी की पीठ नांगहो गयी और मैं पागलो की तरह उसे चाटने लगा...

चारु म- आअह्ह्ह्हह क्या क्र रहा है बीटा nahi....koi आ जायेगा...

उनका मुँह न बोल रहा था और उनका बदन कुछ और बोल रहा tha....main पेट को मसलते हुए उनकी पीठ को चाट रहा था जिससे ममी की हलकी सिसकिया ले रही थी....

तभी किसी के आने की आहात हुई और वो और मैं दर गए....

इसके बाद क्या हुआ सब अगली अपडेट mein...aap लोग कमैंट्स करते रहे और बताते रहहिं... शुक्रिया...
 
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