Incest Katha Chodampur Ki - Page 34 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट 206


उन दोनों का प्रोग्राम लम्बा चलने वाला था आखिर सागर को चुदाई के सरे गन सीखने वाला था अनुज तो मैंने सोचा अपने प्यार का भी कुछ किया जाये और ये सोचकर नीतू को फ़ोन लगाया जिसने नहीं उठाया फिर जैसे मैंने जेब में रखा उसका बापिस आ गया.

नीतू- हाँ मेरे राजा...

में- कहाँ है मेरी रानी?

नीतू- घर पर हूँ,

में- मेरे काम का क्या हुआ.?

नीतू- कौन सा काम?

में- भूल गयी क्या? भाई का लुंड मिलते hi?

नीतू- अरे भाई तो तुम भी हो और लुंड तो तुम्हारा भी मिला है.

में- बातें मत बना बता न,

नीतू- हाय मन तो नहीं कर रहा, की उससे तुम्हारी बात आगे बाधाओं?

में- क्यों भाई?

नीतू- फिर उसके साथ भी तुम्हारा लुंड बाँटना पड़ेगा मुझे,

में- चल पागल, ऐसा थोड़े hi होता है... तेरे लिए तो मेरा हमेशा तैयार रहता है,

नीतू- रखना hi पड़ेगा, और उससे पहले मेरा हक़ है समझे?

में- हाँ बीटा समझ गया, तू hi नेरे लिए पहले है.

नीतू- ठीक है वैसे मैंने तुंहारा काम पहले hi कर दिया है कल जाना है तुम्हे तो अचे से बन कर जाना, और सुनो अब समय मत गंवाना कल ाचा सा मौका देख कर अपने दिल की बात बता देना उसे...

में- अरे यार कल hi?

नीतू- और क्या, जितना देर करोगे उतना पछतओग

में- ठीक है, कोशिश करता हूँ,

नीतू- कोशिश नहीं, और फिर ऐसा मौका मैं भी बार बार नहीं निकल सकती..

में- चल ठीक है... कल करता हूँ,

नीतू- अभी कहाँ हो?

में- बाघ में..

नीतू- तुंहरे मां ममी आये हैं न?

में- हाँ नाना मां ममी उनके बच्चे सब.

नीतू- हाँ सुना मैंने बढ़ आई है न वह, चलो मिलती हूँ उनसे आकर.

में- ठीक है..

ये कहकर मैंने फ़ोन रख दिया और कल के बारे में सोचने लगा की कैसे कहूंगा अंजलि से मन की बात, कहीं बुरा न मान जाये.. ये सब सोचते हुए मैं घर की और आने लगा,

इधर किरण पल्ली और लाडो में भी अछि बन रही थी तीनो एक दुसरे के साथ खूब मस्तिया रही थी, और साथ hi मोठे मोठे गन्ने चूस रही थी,

लाडो- क्या बात है किरण बड़े मोठे गन्ने खाने की आदत है तुम्हे?

लाडो ने पल्ली को आँख मरते हुए किरण को चिढ़ाते हुए कहा,

किरण - अरे गन्ने तो मोठे hi खाने में मज़ा आता है जो रास से भरे हो?

पल्ली- अरे तू रास भी निगल जाती है सारा,

किरण- और क्या, तो होता hi पीने के लिए.

लाडो- हाँ ये बात तो सही कही, रास तो पीने के लिए hi होता है चाहे ऊपर के होंठों से पियो या नीचे के होंठों से..

ये कहकर पल्ली को ताली मरकर हंसने लगी,

किरण कक भी ये बात एक पल बाद समझ आई तो उसने आँखें बड़ी और मुँह बनाते हुए पर हँसते हुए बोलै- धत्त लाडो बड़ी वो है तू...

लाडो- देख तो पल्ली हमारी किरण कितनी भोली है..

किरण- भोली नहीं हूँ पर तू बहुत शैतान है

पल्ली- अरे ठीक है, ाचा किरण सही सही बता कोई लड़का पटाया या नहीं?

किरण- नहीं तो,

लाडो- पर तेरा बदन तो सही भर रहा है लग रहा है की कोई खूब मसलता है इन संतरो को.

लाडो ने गन्ने से hi किरण के सूट से उसकी चूचियों को छूटे हुए बोलै.

किरण- आइए सूट ख़राब हो जायेगा, और कोई नहीं मसलता मेरी..

लाडो- ाचा फिर ये इतनी भर कैसी रही हैं.

किरण- भर तो तुम दोनों की मुझसे भी ज़्यादा रही हैं तुम किनसे मसलवटी हो... तुम्हारा कोई है आशिक़?

पल्ली- अरे तुझे तो पता है गाओं में सब भाई लगते हैं तो आशिक़ कौन hi होगा,

किरण- हाँ ये तो है यार गाओं क्या आसपास के गाओं तक ये hi हाल रहता है..

लाडो- तभी तो हम तो एक दुसरे की सेवा कर लेते हैं.

किरण- मतलब

लाडो- मतलब ये की हम एक दुसरे से मसलवा लेते हैं,

किरण- अरे तुम लोग आपस में कैसे तुम दोनों तो लड़की हो न फिर कैसे.

पल्ली- अरे तो क्या हुआ मन हमारे पास लड़को की तरह लुंड नहीं है पर बाकि सब तो है, दबाने चुसवाने का मज़ा तो मिल hi जाता है,

किरण- अरे तुम दोनों तो बड़ी तेज़ हो और देखो तो कैसे लल्ल वो साफ़ साफ़ बोल रही है बेशरम,

लाडो- अरे बेशरम क्या इसमें लुंड को लुंड नहीं बोलेन तो क्या छूट बोलेंगे,

किरण इस बात पर हंस पड़ी और बोली- बात तो सही है, वैसे लड़की से दबवाने ने क्या मज़ा आता होगा मैंने सुना है असली मज़ा तो मर्द के हाथों से hi आता है,

किरण का इतना बोलना था की पल्ली ने उसे पीछे से पकड़ लिए और अपने हाथ उसकी चूचियों पर रख कर उन्हें सूट के ऊपर से hi दबाने लगी...

किरण- अह्ह्ह्हह हैए क्या कर रही है पललीई अह्ह्ह्हह्हह ुहहममम

पल्ली- अरे क्यों फड़फड़ा रही है बस मज़े ले और देख मज़ा आता है की नहीं,

किरण- अरे पर,

किरण को भी पल्ली के हाथों से मसलवाने में एक नए तरह का मज़ा आ रहा था तो वो भी थोड़ा शांत हो गयी,

इधर लाडो भी कब तक अलग रहती और वो भी किरण के सामने आई और घूम कर अपनी पीठ किरण की और करके अपना पिछवाड़ा उसके बदन से घिसने लगी साथ hi किरण के हाथ पकड़ कर अपने सीने पर लाकर अपनी चूचियों पर रख दिए और हाथों से दबवाने लगी, किरण जो की पल्ली से चूचियों को मसलवटे हुए हंस भी रही थी और उत्तेजित भी हो रही थी, जब उसके हाथ में लाडो के छुड़छे आये तो उसे भी एक अलग सा एहसास हुआ और वो भी कुछ पल बाद खुद से hi दबाने लगी, तीनो की hi मस्ती चल रही थी की किसी के आने का एहसास उन्हें हुआ तो तीनो झट से अलग हो गयी, इतने में hi अनुज की आवाज़ आई जो उन्हें घर चलने के लिए बुला रहा था, तीनो जल्दी hi खेत से बहार आई और घर की और चल दी,

किरण- सही है बीटा तुम दोनों ऐसे hi लगी रहती होगी,

पल्ली- अरे तो हम तीनो लगी रहेंगी, तुझे भी पूरे मज़े देंगी.

किरण- हाँ ले लिए मज़े मैंने भी मसलवाने के.

लाडो- अरे ये तो कुछ भी नहीं है अभी तो बहुत कुछ देखना बाकि है मेरी गुड़िया रानी,

किरण- बाप रे और क्या क्या करती हो तुम दोनों.

पल्ली- धीरे धीरे सब पता चल जायेगा गुड़िया रानी..

उधर ये तीनो खुसर पुसार करती हुई चल रही थी तो वहीं सागर अनुज के कान खाये जा रहा था ख़ुशी के मरे,

सागर- भाई चुदाई करने में जितना सोचा था उससे भी ज़्यादा मज़ा आता है, हाय मेरे जीवन की पहली चुदाई की मैंने वो भी तेरी वजह से ये एहसान रहेगा तेरा हमेशा.

अनुज- अरे बस न अब शांत भी हो जा,

सागर- अरे कैसे शांत हो जॉन यार मैंने आज पहली बार चुदाई की है, अब तक सिर्फ मुठिया hi था, यार क्या चूचियों थी तै की पापीती से भी बड़ी, और क्या लुंड चूसती हैं.

अनुज- जनता हूँ सेल कई बार छोड़ चूका हूँ मैं और धीरे बोल कोई सुन लेगा.

सागर- यार सबसे बड़ी बात तो गांड भी मरने दी उन्होंने यार सही बताऊँ तो गांड मरने में तो छूट मरने से भी ज़्यादा मज़ा आता है, अब तो जिसे भी छोडूंगा उसकी गांड ज़रूर मारा करूँगा.

anuj-sale चुप हो जा नहीं तो मैं तेरी गांड मार लूंगा,

सागर उसके आगे जाकर झुक गया और बोलै- जो तूने दिलाया है उसकी लिए तो मैं तुझे गांड भी दे दूँ..

अनुज- सेल नौटंकी बाज़. ये कहते हुए अनुज हंसने लगा, दोनों इसी तरह मस्ती करते हुए घर आ गए,

खैर तब तक मैं नाहा धो चूका था और तभी मेरा फ़ोन बजा तो अंजलि का फ़ोन था, मैं खुश हो गया,

उसने फ़ोन पर बोलै की वो तुम्हे फिर से परेशां कर रही है पर उसे और नीतू को कल कुछ काम भी है तो साथ चल लेना, और उसने प्लीज ऐसे बोलै की मैं उसे किडनी भी बिना हिचकिचाहट के दे देता ये तो बस घूमने का था, मैं समझ गया यर सब प्लान नीतू का है, मैंने भी हाँ बोल कर उसे समय पूछकर तय कर दिया, और फिर कल मिलने को बोलकर उसने फ़ोन रख दिया, मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही थी साथ hi दर भी लग रहा था की कल क्या होगा क्या बोलूंगा मैं उससे,

खैर ये सब सोच रहा था की खाने का बुलावा आ गया मैं सबके साथ मिलकर खाना खाया और खा पि कर थोड़ा टहलने को निकला, रस्ते में hi सरजू मुझसे टकरा गया

सरजू- अरे तुझे hi बुलाने वाला था मैं,

में- क्यों आज कौनसी झड़ी में ले जायेगा.

सरजू- अबे चल पेप्सी पिलाता हूँ तुझे,

में- आज ऐसा क्या हो गया सेल बड़ा मेहरबान हो रहा है..

सरजू- अबे तुझे पीनी है की नहीं,

में- ाचा चल चलते हैं,

हम दोनों जल्दी hi पेप्सी और चिप्स लेकर एक पेड़ के नीचे बैठे थे और पि रहे थे.

में- और बता तुझे मंज़िल मिली की नहीं?

सरजू- कौनसी मंज़िल.

में- तेरी माँ की छूट.

सरजू- सेल गली क्यों दे रहा है.

में- अबे यही तो मंज़िल है न तेरी, कहाँ तक पहुंची बात,

सरजू- कहाँ यार.

में- कुछ नहीं हुआ अभी तक?

सरजू- नहीं ज़्यादा नहीं बस परसो रात तीन बार छोड़ा है..

में- क्या?

सरजू मुस्कुराया और बोलै- हाँ यार खूब छोड़ा मम्मी को..

वो खुश होकर बोलै..

में- सही है साले मज़े कर दिए तूने तो, कैसा लगा?

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह यार क्या बताऊँ सही कहूं तो अपनी माँ छोड़ने जैसा मज़ा दुनिया में कहीं नहीं है.

में- सही है यार तूने तो मज़े hi बांध दिए, वैसे हुआ कैसे पूरी बात तो बता..

उसके बाद उसने मुझे शुरू से अंत तक सब बता दिया, सुनने के बाद मेरा मन हुआ की सेल को उसकी बहनो और माँ के और अपने बारे में बता दूँ फिर सोचा अभी नहीं, और थोड़ा मज़े लेने दो क्या पता चची खुद hi बता दें, किसी तरह से.

में- सेल तेरी बात सुनकर तो लुंड खड़ा हो गया, वैसे तुझे अपना वादा याद है न मेरा काम कब करवाएगा.

सरजू- हाँ हरामी पता है तू भी मेरी माँ छोड़ने के पीछे पड़ा है, पर यार समझ नहीं आ रहा वो कैसे मानेगी..

में- ाचा वो मान जाएं तो तुझे तो कोई दिक्कत नहीं है,

सरजू- नहीं यार पहले तो सोचा बुरा लगेगा पर नहीं सोच कर hi लुंड खड़ा हो रहा है की हम मम्मी को साथ छोड़ेंगे तो कैसा लगेगा,

में- मज़ा hi आ जायेगा यार.

सरजू- वैसे सही में मम्मी बड़ी गरम हैं दो लुंड भी आराम से ले लेंगी,

में- अरे इस उम्र में आके औरत की प्यास बढ़ जाती है बदन गदरा जाता है छूट भी बच्चे निकलने के बाद प्यासी रहने लगती है, सही कहूं तो जवान लड़कियों से ज़्यादा प्यासी हो जाती हैं औरतें इस उम्र में.

सरजू- सही कह रहा है यार, मैं तो कह रहा हूँ तू भी चची पर कोशिश कर न, क्या पता बात बन नए दोनों भाई मादरचोद बन जायेंगे.

में- यार सही कहूं तो ऐसा नहीं की सोचा नहीं मैंने, अभी तेरी बात सुनकर भी सोच रहा हूँ की कोशिश करूँगा, पर यार मेरी माँ से फटती बहुत है तुझे पता है उनका गुस्सा.

सरजू- हाँ यार चची वैसे बड़ी अछि हैं पर उनका गुस्सा सही में ख़राब है मुझे भी बड़ा दर लगता है उनसे.

में- वही तो,

सरजू- अरे पर तू कोशिश तो कर, ाचा हमने सोचा था क्या की मम्मी मान जाएँगी पर देख मानी न क्या पता तेरा भी काम बनजाये, वैसे भी तेरी योजना hi काम आई तो तेरे भी काम आ सकती है.

में- ठीक है कोशिश करूँगा, ाचा ये बता चची लुंड कैसा चूसती हैं?

सरजू- बड़ा मस्त यार, रोकना पड़ता है खुद को झड़ने से,

में- चल यार जुगाड़ लगवा मेरा भी..

इतने में पेप्सी भी ख़तम हो गयी थी तो हम लोग बापिस चल दिए घर की तरफ रस्ते में जा hi रहे थे की जग्गू ने मुझे पीछे से बुलाया तो मैंने सरजू को घर जाने को बोलै और जग्गू के पास चला गया..

जग्गू - क्या बात है सरजू से बड़ी यारी चल रही है तेरी.

में- और क्या दोस्त है मेरा पकक्का वाला..

जग्गू- बढ़िया है फिर मैं क्या हूँ.

में- तू चूतिया है.

जग्गू- ाचा तो जा घुसजै उसकी गांड में पक्के वाले दोस्त की.

में- देख तो कैसे लड़कियों की तरह झांटे सुलग रही हैं तेरी.

जग्गू- नहीं नहीं जा अपने पक्के दोस्त के पास,

में- अरे बस अब और बता कहाँ भटक रहा था,

जग्गू- कहीं नहीं तुझसे hi मिलने आ रहा था किसी काम से पर छोड़ तू..

में- अरे बीटा गुस्सा क्यों हो रहा है परसो तेरा जन्मदिन है मेरा आशीर्वाद लेने आया था न.

ये सुनकर जग्गू की भी हंसी निकल गयी...

जग्गू- साला हरामी. याद था तुझे.

में- अपने बेटे का जन्मदिन कैसे भूलूंगा मैं.

जग्गू- बाप का बोल.

में- प्रोग्राम क्या है फिर.

जग्गू- उसी बारे में बात करनी थी यार इस बार पापा कुछ प्रोग्राम बना रहे हैं बताया नहीं है पर बोल रहे थे चाचा और राजन चाचा से बात भी करेंगे

में- ठीक है फिर क्या दिक्कत है, करने दे न उन्हें,

जग्गू- वो सब छोड़ ये बता सरजू का क्या लफड़ा है,

में- अरे तेरे जैसा hi लफड़ा है.

जग्गू- मेरे जैसा मतलब.

में- उसे भी मादरचोद बनना था,

जग्गू- क्या सही में? कैसे मतलब.

में- अरे शांत हो बताता हूँ, फिर चलते हैं..

फिर मैंने जग्गू को सरजू और उसके परिवार की पूरी कहानी सुनाई शुरू से अंत तक की.

जग्गू- अरे भेंचो, बिरजू और लाडो भी...

में- लुंड और छूट तो उनके पास भी हैं बबुआ,

जग्गू- यार वैसे बड़ा मस्त हो गया है, मेरा भी जुगाड़ लगवा कुछ,

में- सबर कर मिलेगा मेरी शरण में रहेगा सब मिलेगा,

जग्गू- जनता हूँ, यार यकीन नहीं हो रहा Chacha(Nilesh सिंह) ने भी रज्जो चची को छोड़ लिए नीतू को भी, अनुज ने भी नीतू और लाडो दोनों के मज़े ले लिए, लगता है चोदामपुर में चुदाई का नशा चढ़ गया है.

में- बढ़िया है न ऐसा नशा hi हमें ाचा लगता है.

हम लोग बातें करते रहे ऐसे hi और बाघ में आ गए जहाँ अनुज और सागर जानवरों का चारा पानी कर रहे थे, उनके साथ नाना भी आये थे. तो जग्गू ने उनके पेअर छुए. नाना से उसे आशीर्वाद दिया खुश रहो खुश रहो..

में- अरे नाना तुम बाघ में कैसे?

नाना- अरे बच्चा हमसे घर पर नहीं रुका जाता ज़्यादा देर... हमें तो खुले में hi ाचा लगता है,

में- बढ़िया है नाना, सही है चलो तुम्हे बाघ घूमते हैं अपने,

नाना- हाँ चलो.

मैं और जग्गू नाना को बाघ घूमने लगे,

नाना हमें खेतों और पेड़ वगेरा के बारे में बताते जा रहे थे, उनकी बातों से hi लग रहा था की उन्हें खेती कितनी पसंद थी,

चलते चलते हम तुबेल के पास पहुँच गए, में- क्या कहते हो नाना डुबकी हो जाये?

जग्गू- अरे रहने दे न.

नाना- काहे रहने दे, तुबेल के ताज़ा पानी में नहाने से बदन में ताज़गी आती है, चलो नहाते हैं.

बस नाना का इतना कहना था की हम लोगो ने तुरंत अपने कपडे उतर दिए और कच्चे में आ गए नाना ने भी अपना कुरता और धोती उतरी और वो भी हमारी तरह कच्चे में आ गए, एक बात तो थी की पोता पोती इतने बड़े हो गए थे पर नाना का बदन अब भी तंदरुस्त था, ये शायद खेती और शुद्ध जीवन का असर था, खैर हम तीनो लोग जल्दी hi हौदी में थे, और तुबेल के पानी से नाहा रहे थे, कुछ देर नहाने के बाद हम लोग बहार निकल आये, और ऐसे hi हौदी के किनारे बैठ कर कच्चा और बदन से पानी सूखने लगे, नाना हमें बता रहे थे की कैसे वो आज भी सुबह 5 बजे तुबेल के पानी से नहाते हैं,

हमारी बातें hi चल रही थी की अचानक से ममता चची भी वहां आ गयी...

म चची- अरे तुम सब लोग इस टाइम नाहा रहे हो, और चाचाजी तुम भी हो बच्चों के साथ.

नाना- हाँ बिटिया, घर पर आराम करते करते ऊब गए थे सोचा गाओं घूम आएं, तू कैसे यहाँ?

ममता- अरे गोबर सूखा जा रहा था, उपला लगाने आई थी, इतना कहकर चची बहते पानी में अपने हाथ और बाल्टी धोने लगी हम लोग उनके सामने hi हौदी की दीवार पर बैठे थे, बाल्टी और हाथ धोने के बाद वो हौदी की दीवार पर झुककर अपना चेहरा भी धोने लगी, पर तभी न जाने कैसे उनका पिछले पेअर फिसला और वो आगे सीढ़ी हौदी में छपाक से गिर पड़ी, और उन्ह्र बचने के लिए हम तीनो भी बापिस हौदी में कूड़े, जल्दी hi पकड़ के हमने चची को उठा दिया और फिर बहार भी निकल लिए,

नाना- बिटिया लगी तो नहीं?

चची- नहीं चाचा पानी में hi तो गिरे थे कुछ नहीं लगी, बस कपडे सरे भीग गए,

ये कहकर चची अपनी साड़ी का पल्लू पकड़ कर निचोड़ने लगी, जिससे उनका गोरा भरा पेट गोल सुन्दर नाभि और भीगा हुआ ब्लाउज और उसमे बंद बड़ी बड़ी चूचियां उजागर हो गयी, अब मेरे और जग्गू के लिए तो चची का यूँ होना नयी बात नहीं थी क्यूंकि हम दोनों hi चची को न जाने कितनी बार भोग चुके थे, पर समस्या तो नाना को हुई जिनकी नज़र कुछ पल के लिए उस दृश्य पर ठहरी तो उनके बदन में गर्मी बढ़ने लगी पर नाना ने तुरंत hi उस और से अपना चेहरा घुमा लिए, इधर चची बिना किसी फ़िक़र के अपनी साड़ी निचोड़ रही थी, नाना ने कुछ देर तो खुद पर काफी संयम किआ पर खुद को दोबारा देखने से नहीं रोक पाए और नज़र बचाकर फिर से देखने लगे तो नज़ारा और बेहतर दिखा, क्यूंकि ब्लाउज भी भीगने की वजह से बिलकुल पारदर्शी हो गया था और चची ब्रा कभी पहनती नहीं थी तो उनको चूचियां और उसका निप्पल हलके पीले रंग के ब्लाउज में काफी अचे से नज़र आ रही थी, ये देख तो नाना की आँखें hi बढ़ी हो गयी, वहीं उनके बदन पर सिर्फ गीला कच्चा था जो की उनके भी बदन से चिपका हुआ था और अभी इस नज़ारे का असर उनके कच्चे क्र अंदर भी हलचल कर रहा था,

चची- हाय ढैय्या ये नहीं सूखने वाली जल्दी, लगता है ऐसे hi घर जाना पड़ेगा, कर्मा लल्ला आते हुए बाल्टी ले ाइयो..

ये कहते हुए चची ने पल्लू को बापिस अपने सीने पर डाला

में- ठीक है चची ले आऊंगा तुम जाओ.

चची ये कहते हुए मुड़कर जाने लगी, नाना की नज़र उन पर hi थी, और जैसे hi नाना को कुछ और दिखा उनकी आँखें और बड़ी हो गयी कुछ पल देखने के बाद नाना बोले- लल्ला ममता बिटिया को रोक..

में- क्यों क्या हुआ नाना,

नाना- अरे रोक तो सही.

में- चची रुको,

मेरी आवाज़ सुनकर चची रुक गयी,

चची- का हुआ बच्चा,

में- नाना बुला रहे हैं तुम्हे..

मैंने ये बोलै तो नाना मुझे देखने लगे,

चची ये सुन बापिस आई और बोली- हाँ चाचाजी क्या हुआ,

नाना- वो बिटिया वो कछु नहीं बस वो.

चची- कोई बात है क्या चाचाजी,

नाना ने कुछ सोचा और बोले- बिटिया ऐसे कपड़ो में गाओं में जाना ठीक नहीं रहेगा..

इस पर चची ने बापिस खुद को देखा और बोली- क्यों कुछ गड़बड़ है चाचाजी?

नाना- हाँ वो ठीक नहीं लग रहे, कर्मा लल्ला बिटिया के कपडे ले आ घर से,

पहले तो मेरी समझ नहीं आया पर फिर कुछ पल बाद मेरी समझ आ गया की क्यों नाना ने चची को रोका था,

में- अभी लता हूँ चची तुम रुको यहीं.

ये कहते हुए मैं उठा और गीले बदन hi अपने कपडे पहनने लगा मुझे देखा देखि जग्गू भी न जाने क्यों मेरे साथ चल दिया, कुछ hi पालो में हम दोनों तुबेल से घर की और भाग पड़े,

कुछ पल के सन्नाटे के बाद चची बोली- वैसे चाचाजी हुआ क्या था तुमने रोका, कोई खराबी हो गयी थी कपड़ों में,

नाना- वो हाँ बिटिया,

चची दोबारा से अपना पल्लू सीने से हटाकर नीचे देखने लगी जिससे एक बार फिर से वही मस्त नज़ारा नाना के सामने आ गया, पर इस बार नाना ने चेहरा नहीं घुमाया,

चची- कहाँ चाचाजी मुझे तो सब ठीक लग रहा है,

नाना- वो बिटिया वो पीछे से थोड़ा,

चची- पीछे से? पीछे से क्या हुआ.

ये कहकर चची ने घूम कर अपना पिछवाड़ा फिर से नाना के सामने कर दिया जिससे नाना की आँखें फिर से चौड़ी हो गयी,

पर चची को तो जैसे समझ hi नहीं आ रहा था,

नाना- वो बिटिया तेरी सारी वो पीछे से फंस गयी है,

तब जाकर चची को समझ आई,

चची- हाय ढैय्या, ये तो हमने देखा hi नहीं, ये कहकर चची तुरंत घूम गयी और साड़ी और पेटीकोट को अपने चूतड़ों की दरार से बहार निकला जो की चिपक कर चची के चूतड़ों के आकर प्रकार दोनों को साफ़ साफ़ दिखा रहे थे.

चची- हाय ढैय्या चाचा जी ाचा हुआ तुमने रोक लिए नहीं तो हमारी तो आज हंसी हो जाती गाओं भर में.

नाना- वही तो बिटिया बेकार में लोग बातें करते,

चची- ाचा हुआ चाचाजी तुमने रोक लिए.

नाना- अरे बिटिया कोई बात नहीं अभी कर्मा कपडा लाये दिए रहा है फिर चिंता ख़तम.

चची- हाँ बिलकुल chacha....ji.

बोलते बोलते hi अचानक चची की नज़र नाना के कच्चे पर पड़ी जो की बिलकुल तम्बू बना हुआ था और ये देख चची के चेहरे पर एक हलकी सी अंधरुनि मुस्कान आ गयी, वो समझ गयी की उनके बदन का जादू नाना पर भी चल गया है, वहीं नाना को तो खुद खबर नहीं थी की उनके कच्चे में क्या हो रहा है,

चची तो चची थी अब नाना तड़प hi रहे थे तो चची ने सोचा अचे से hi तड़पाया जाये,

चची- चाचाजी थोड़ा घूम जाओ न, अब बच्चे साड़ी ला hi रहे हैं तो ये भीगी साड़ी उतर hi देती हूँ.

नाना अब इस पर क्या कहते, बस इतना बोले- हाँ बिलकुल बिटिया,

और ये कहकर वो घूम कर बैठ गए, चची ने तुरंत साड़ी उतर दी और सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में आ गयी और ब्लाउज भी कैसा जो की लगभग पूरा पारदर्शी होकर उनकी चूचियों को साफ़ साफ़ दिखा रहा था,

नाना के मन में बवाल मच रहा था ये सोचकर की बिना साड़ी के ममता बिटिया कैसी लग रही होगी वहीं मन साँझा रहा था की नहीं ये बहुत गलत है. एक मन कह रहा था घूमकर इस सुन्दर चित्र को आँखों में भरलो न जाने मौका फिर मिले न मिले,

नाना किसी तरह से गर्दन घूमने का कोई तरीका सोचने लगे,

अब नाना की ये इच्छा मैंने पूरी करदी थी क्यूंकि मैं तभी भागते हुए आया और बोलै- चची ये रहे कपडे,

मेरी आवाज़ सुनकर नाना भी पलट गए और एक अचे से नज़र चची पर मार कर उनके बदन को अपनी आँखों में बसा लिए,

नाना- अरे लो बिटिया कर्मा आ गया कपडे लेकर,

चाचा- हाँ चाचाजी आखिर, चलो अब बदल लेती हूँ.

में- चची वहां मोटर वाले कमरे में जाकर बदल लो.

चची- हाँ लल्ला,

चची ने मेरे हाथ से कपडे लिए और चल दी वहीं नाना की आँखें चची के साथ साथ चल रही थी,

मैं नाना से कपडे पहनने को बोलने वाला था की तभी मेरी नज़र नाना के कच्चे पर पड़ी जो की बिलकुल तम्बू की तरह तना हुआ था, मेरे चेहरे पर हैरानी और मुस्कान दोनों आ गयी,

मैंने सोचा लो चची के बदन का जादू नाना पर भी चल गया, पर तभी मैंने सोचा की ये सही मौका है नाना के साथ थोड़ा खुलने का, कोशिश तो कर के देखनी hi चाहिए,

मैं नाना के पास जाकर बैठ गया तब तक चची मोटर वाले कमरे में चली गयी थी,

में- नाना चची कितनी अछि हैं न,

नाना- हाँ ? हाँ लल्ला ममता बिटिया तो बड़ी अछि है बड़ी गुनी है,

में- तुम्हे पसंद आये उनके गन?

नाना - हाँ क्यों नहीं आएंगे गन तो पसंद आने के लिए hi होते हैं लल्ला.

में- नाना वैसे कौनसे गन ज़्यादा अचे लगे? आगे वाले या पीछे वाले, या सरे के सरे?

नाना- अरे गन कहाँ आगे पीछे वाले होते हैं तू कैसी बात कर रहा है लल्ला?

इतने में नाना कक जैसे मेरी बात समझ आई और बोले- ऐ लल्ला क्या कह रहा है तू ये बिटिया के बारे में?

में- मैं तो वही कह रहा हूँ नाना जो की ये छोटे नाना मुझे बता रहे हैं,

मैंने उनके कच्चे की और इशारा करके कहा तो नाना ने मेरे इशारे की और देखा और उनकी हवाइयन उड़ने लगी, नाना के चेहरे का रंग hi उड़ गया,

नाना बिलकुल चल हो गए,

में- अरे नाना क्या हुआ ऐसे चुप क्यों हो गए? कुछ बोलो न.

नाना कुछ नहीं बोले.

मुझे लगा मैंने शायद ज़्यादा hi कर दिया

Me-Nana कुछ बोलो ना ऐसे मुझे ाचा नहीं लग रहा,

नाना- का बोलूं लल्ला इतना बड़ा पाप हो गया हमसे,

में- कौनसा पाप, कैसा पाप?

नाना- ये hi पाप, बता ममता बिटिया को देख कर हम बहक गए, वो हमें अपना पिता सामान मानती hai,chheee छी घिन आ रही है हमें खुद पर.

में- अरे नाना क्यों इतना सोच रहे हो, ऐसा कुछ नहीं है,

नाना- लल्ला ऐसे तो ममता बिटिया ने भी हमारे कच्चे को ज़रूर देखा होगा, न जाने क्या सोच रही होगी हमारे बारे में, अब कभी उससे आँखें मिलाने के लायक नहीं रहे हम.

में- ओह्हो नाना सुनो तो सही तुम.

नाना- क्या सुनूं लल्ला?

में- देखो जैसा तुम समझ रहर हो वैसा कुछ भी नहीं है, न कोई पाप हुआ है,

Nana-par ममता बिटिया ने देखा होगा न जाने क्या सोच रही होगी वो हमारे बारे में,

में- अरे कुछ नहीं सोच रही होंगी, ाचा देखो अभी पता चल जायेगा, अभी चची निकलेंगी कपडे बदल कर अगर उनके बर्ताव में कोई बदलाव हो तो कहना अगर नहीं होगा तो तुम ये पाप वाप का रोना बंद करदोगे और मेरी सुनोगे.

नाना- लल्ला यही होगा बहुत बड़ी गलती हो गयी.

में- अब रुको तो सही..

मेरा इतना कहना hi था की चची बहार आ गयी और फिर हमारे पास आकर बाल्टी उठाई और बोली- लल्ला, चाचाजी अब तुम लोग भी कपडे पहन कर घर को आओ खाने का समय होने को है.

में- आते हैं चची.

ये कहकर चची वहां से चली गयी, और तब तक नाना की नज़र नीचे hi थी,

में- देखा कुछ भी ऐसा लगा उनकी बातों से जैसे कुछ भी अलग हो,

नाना भी अब चची के बर्ताव क्र बाद काफी शांत और हल्का महसूस कर रहे थे और मेरी बात सुनकर बोले- हाँ बिटिया ने कुछ अलग तो नहीं किआ, लगता है उसने देखा hi नहीं था,

में- बेकार में परेशां हो रहे थे.

nana-pareshan होने की तो बात है लल्ला, जो भी हुआ है तो गलत hi न, हमें अपनी बिटिया जैसी ममता को देखकर खुद से काबू नहीं खोना चाहिए था...

अरे नाना तुम भी न ज़्यादा सोच रहे हो, मुझे तो ख़ुशी हो रही है तुम्हे ऐसे देख कर,

नाना- ख़ुशी इसमें ख़ुशी की क्या बात है?

में- ख़ुशी इस बात की मेरे नाना इस उम्र में भी इतने तंदरुस्त हैं की उनका औरतों को देखकर खड़ा हो जाता है, वर्ण कई बुद्धो स्व तो खुद नहीं खड़ा हुआ जाता, लुंड तो दूर की बात है.

नाना इस बात पर थोड़ा सोचे और फिर बोले- छही छी बता ऐसी बातें करते हैं कोई नाती और नाना आपस में.

में- अरे नाना और नाती दोस्त बन जाएं फिर तो कर सकते हैं,

नाना- दोस्त. हम बुढऊ से.

में- हाँ और ऐसे वैसे बुढऊ से नहीं अपने नाना से.

मेरी बातों से नाना धीरे धीरे थोड़ा शांत हो रहे थे और मेरी बातों को मान भी रहे थे,

में- फिर करोगे दोस्ती.

नाना- ठीक कर्ली दोस्ती.

में- तो मिलाओ हाथ इसी बात पर,

मैंने और नाना ने हाथ मिलाया,

नाना- ाचा लल्ला तुझे सही में लगता है की ममता बिटिया ने नहीं देखा होगा,

में- पक्का नहीं पता पर मैं तो चाहता हूँ की देखा हो,

नाना- अरे तू तो दोस्त बनकर दुश्मन वाले काम के रहा है.

में- उनकी ख़ुशी के लिए hi छह रहा हु की देखा हो.

नाना- उसकी ख़ुशी? इसमें उसकी ख़ुशी कैसे है.

में- औरत को ख़ुशी कब मिलती है पता है, ?

नाना- कब?

में- जब उसकी कोई तारीफ करे.

नाना- पर इसमें उसकी कौनसी तारीफ है,

में- ाचा उन्हें देख कर उनका बदन देख करउनके बाप की उम्र के आदमी का लुंड खड़ा हो रहा है ये उनके लिए तारीफ hi तो है.

मेरी बात सुनकर नाना मुस्कुरा पड़े, और बोले- बड़ा समझदार दोस्त बनाया है हमने बातें घूमने वाला,

में- वो तो है, वैसे सही में नाना परेशां होने की कोई बात hi नहीं है, तुम प्रकर्ति को समझते हो?

नाना- हाँ?

में- ाचा हम पौधा लगते हैं तो वो बड़ा क्यों होता है?

नाना- क्यूंकि उसकी प्रकृति है बढ़ा होना, बढ़ कर पेड़ बनना,

में- वैसे hi लुंड की भी प्रकृति है खड़ा होना, ये रिश्ते नाते तो सब बाद में आते हैं पहले तो प्रकर्ति hi आती है न, चची बहुत सुन्दर औरत हैं बहुत कामुक भी, अगर उन्हें देखकर लुंड न खड़ा हो तो गलत होगा.

नाना- समाजग नहीं आ रहा हम तेरे नाना हैं या तू हमारा,

में- हम दोस्त हैं नाना.

में- और सही बताऊँ तो चची को देख कर मेरा भी खड़ा हो गया था जबकि मेरे लिए भी तो वो माँ जैसी हैं.

नाना- अरे पर तू बच्चा है. गलती कर सकता है.

Me-are तो लुंड तो लुंड है न बड़े का हो या बच्चे का वो तो अपना काम करेगा hi, चाहे सामने माँ हो या बेटी.

नाना- मेरी बात सुनकर कुछ पल खामोश रहे फिर मुस्कुरा कर बोले- चल अब घर चलते हैं नहीं तो तू हमें न जाने क्या क्या सीखा देगा आज hi.



में- हाँ चलो न...

जारी रहेगी.
 
में- और सही बताऊँ तो चची को देख कर मेरा भी खड़ा हो गया था जबकि मेरे लिए भी तो वो माँ जैसी हैं.

नाना- अरे पर तू बच्चा है. गलती कर सकता है.

Me-are तो लुंड तो लुंड है न बड़े का हो या बच्चे का वो तो अपना काम करेगा hi, चाहे सामने माँ हो या बेटी.

नाना- मेरी बात सुनकर कुछ पल खामोश रहे फिर मुस्कुरा कर बोले- चल अब घर चलते हैं नहीं तो तू हमें न जाने क्या क्या सीखा देगा आज hi.



में- हाँ चलो न...


अपडेट 207
मैं और नाना ऐसे hi बतियाते हुए घर आये मैंने रस्ते भर उन्हें समझने की पूरी कोशिश की और उन पर थोड़ा बहुत असर भी हुआ वैसे ये तो मैं भी समझ रहा था की थोड़ा बहुत समय तो लगेगा hi खुलने में,

खैर खाने का समय हो गया था तो हमने सबने खाना खाया, माँ ने आज नाना के लिए खास उनकी पसंद का खाना बनाया था, नाना को माँ के बनाये मैथी के परांठे बहुत पसंद थे,

माँ- अरे बाबा और लो न अभी क्या हुआ है.

नाना- हाँ बिटिया ले रहे हैं ये तो खाने दे,

मौसी- कुछ भी हो बाबा तुम्हारा जीजी के बनाये मैथी के परांठो से मन नहीं भर सकता.

नाना- सही में गुड़िया...

नाना मौसी को हमेशा से गुड़िया hi कहते थे और माँ को बिटिया या बड़की..

मौसा- बाबा वैसे इतने क्यों पसंद हैं भाभी के हाथ के परांठे ये तो बताओ.

नाना- अरे क्या है की बड़की बिलकुल इसकी अम्मा की तरह बनती है वही स्वाद, वही खुशबु ...

पापा- अरे वाह चलो इसी बहाने हमें भी अंदाजा हो गया की अम्मा कैसा खाना बनती होगी.

वहीं नाना की बात सुनकर माँ और मौसी थोड़ी भावुक सी हो गयी थी अपनी अम्मा को याद करके.

मां- अरे जीजी अब भावुक मत हो ख़ुशी से सब खा रहे हैं तुम भी खुश रहो.

माँ- हम तो खुश hi हैं गुल्लू, ये तो बस ख़ुशी से आँखें भर आई थी.

अनुज- अरे माँ पेट भरो मस्त खाना से आँखें नहीं.

इस पर सब हंसने लगे, खैर इसी तरह हंसी मज़ाक में खाना हुआ खाने के बाद सब आंगन में hi बैठ कर बातें कर रहे थे मैं उठा और अपने खाने का बर्तन लेकर रसोई में रखने गया, जहाँ मामी बर्तन धो रही थी,

में- अरे मामी कितना काम करोगी छोडो ये सब वहां सबके साथ बैठो.

मामी- अरे बाबू, बातें भी हो जाएँगी बर्तन निपटा दूँ बस,

में- बताओ तुम वहां भी काम करती थी यहाँ भी?

मामी- तो क्या हुआ वो भी मेरा घर था और ये भी, और यहाँ तो जीजी की वजह से काम जी करने को मिलता है,

में- मिलता है मतलब ऐसे बोल रही हो जैसे काम करना पसंद है तुम्हे.

मामी- सही में पसंद है बाबू.

में- काम करना किसे पसंद हो सकता है,

मामी- अरे बाबू ये हमारे लिए काम नहीं है, हमारे लिए परिवार की सेवा है और हमें अपने परिवार की सेवा करना ाचा लगता है.

में- अरे वाह मामी ऐसा तो मैंने कभी सोचा नहीं.

मैं वहीं मामी के पास सिंक पर बैठ गया और हाथ में एक कपडा ले लिया, और उनके धोये हुए बर्तन पोंछने लगा,

मामी- यही तो बाबू सोच सोच का अंतर है, वैसे ये क्या कर रहे हो तुम.

में- तुम्हारी तरह परिवार की सेवा,

इस पर मामी हंस दी

मामी- ाचा पर बाबू तुम्हे सेवा कुछ और तरीके से करनी होगी.

में- कैसे?

मामी- एक अच्छी सी बहु लाओ वो हमारी सेवा करे तुम उसकी सेवा करो.

में- ये कैसे हो सकता है.

मामी- क्यों नहीं हो सकता,

में- जिसे मैं बहु बनाना चाहता हूँ उसकी शादी हो चुकी है पहले hi,

मामी- हाय ढैय्या सही में कौन है कहाँ की है.

में- तुम hi हो,

मामी- अरे हम तो हैं hi बाबू तुम्हारी दुल्हिन, पर एक खुद भी ब्याह कर लाओ न जो हमारी सेवा कर सके.

में- पर मुझे तो बिलकुल तुम्हारे जैसी अछि सी बहु चाहिए वो कहाँ मिलेगी, जिसकी सोच इतनी अछि हो,

मामी- अरे मिल जाएगी, सही से ढूंढो तो सही,

में- मैं तो कहता हूँ मां का दूसरा ब्याह करवा देते हैं और तुमसे मैं ब्याह कर लेता हूँ.

मामी- अरे ढैय्या इतना लम्बा सोच लिए तुमने तो,

मामी ने हँसते हुए कहा,

में- सोचना पड़ता है अछि बहु के लिए,

मामी- अरे तुम hi करो ब्याह, कहाँ मां को इस उम्र में नयी बहु का सुख दे रहे हो, तुम नयी बहु लाओ और साथ hi हम तो हैं hi तुम्हारी दुल्हिन,

में- वैसे तुम मेरी दुल्हन हो तो मेरी सेवा तो करती नहीं हो.

मामी- अरे बताओ क्या सेवा करनी है.

में- वही जो तुम दुल्हन अपने दूल्हे की करती है,

मामी- अरे बाबू बताओ तो हम कर देंगे सेवा जैसी तुम चाहो,

में- सही में जैसी मैं चहुँ.

मामी- और क्या बताओ, क्या चाहते हो..

ममी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा,

में- अरे बस इतना बोल दिया हो गयी मेरी सेवा.

मामी- लो शर्मा गए दूल्हे राजा खुद hi.

में- शरमाया नहीं हूँ.

मामी- तो बताओ कैसी सेवा करवानी है,

में- वही जो पति पत्नी करते हैं, एक दुसरे की सेवा.

मामी- तो करके दिखाओ न पति तुम हो...

मैं तुरंत उछाल कर खड़ा हुआ और मामी को पीछे से बाहों में भर लिए,

मामी- अरे ये क्या कर रहे हो बाबू?

में- ऐसी hi तो सेवा करवाते हैं पत्नी से,

मैंने ये कहकर हाथ उनके पेट पर रख लिए, ममी के गदराये बदन की गर्मी से मैं उत्तेजित होने लगा साथ hi मेरा लुंड भी सर उठाने लगा,

मामी- ओह्हो बड़े चालाक हो लल्ला, ऐसी सेवा तो जो नयी बहु आये उसी से करवाना..

में- क्यों तुम भी तो बहु हो, तुम क्यों नहीं कर सकती...

मामी- अरे वो सुन्दर होगी जवान होगी तुंहारी तरह..

में- जवान तो तुम भी हो मामी, और सुन्दर भी बहुत हो...

मामी- बाबू तुम्हारे जितनी जवान नहीं हूँ न, वैसे तुम्हारी जवानी तो मुझे भी महसूस हो रही है अभी,

मामी ने मेरा कड़क लुंड अपने पिछवाड़े के ऊपर महसूस करते हुआ,

में- वो जब आएगी तब आएगी तब तक तो तुम्ही से सेवा करवाऊंगा..

मामी कुछ बोलती इससे पहले hi पीछे से माँ आ गयी.

माँ- बड़ा प्यार आ रहा है तुझे अपनी दुल्हिन पर.

मामी- देखलो जीजी, अब बाबू का ब्याह करवा दो इन्हे बहु से सेवा करनी है.

में- माँ मैं तो बोल रहा हूँ मामी से यही मेरी दुल्हन है तो इनसे hi सेवा करवा लूँ.

माँ- अभी तो तू उसे आराम करने दे कबसे बेचारी काम में लगी है बाद में करा लिओ सेवा.

मामी- कहाँ जीजी, बस बर्तन hi तो धोये हैं, खाना तो तुमने hi बनाया.

माँ- तो क्या हुआ चलो आराम करलो तुम भी. और कर्मा जा नाना का बिस्तर लगा दिया है तू भी सो जा.

Me-theek है माँ. चलो बाद में मिलता हूँ मेरी बीवी.

इसके बाद मैंने मामी के गाल को चूमा और भाग गया,

मामी- अरे जीजी देखलो अपने बेटे को कितनी जवानी आ रही है,

माँ- अब तुम मामी भांजे की बात तुम hi जानो, वैसे उसकी गलती नहीं है कोई.

माँ ने ममी के बाल ठीक करते हुए कहा.

मामी- गलती नहीं मतलब.

माँ- मतलब उसकी दुल्हन है hi इतनी सुन्दर की जवान क्या बुद्धों के भी अरमान जाग जाएँ...

मामी- धत्त जीजी सुन्दर तो तुम हो, तभी तो जीजा जी छोड़ते नहीं है रात रात भर,

माँ- एक बार जीजाजी को अपने जलवे दिखा दो गुंजन रानी तुम्हे तो दिन में नहीं उठने देंगे बिस्तर से,

मामी माँ और मौसी का रिश्ता hi ननद भाभी का था तो आपस में हमेशा हर तरह के मज़ाक चलते रहते थे,

मामी- हमें कोई परेशानी नहीं है जीजी हम तो जीजा की सेवा कर देंगे तुम अपने भैया के बिस्तर थोड़ा गरमा देना,

माँ- ाचा हम तो भैया का जुगाड़ कर देंगे पर यहाँ अकेले जीजा नहीं हैं तो और जीजा हैं उन्हें भी संभालना पड़ेगा,

माँ ने अब मामी को बाहों में भर लिए सामने से और बोली, मामी भी कहाँ पीछे रहने वाली थी उन्होंने भी अपने हाथ माँ के पीछे लेजाकर उनके चूतड़ दबाते हुए बोली

मामी- तो क्या हुआ जीजी जब तुम अभी तक तीनो को संभल रहीं थी तो हम भी संभल लेंगे,

माँ- देखना कहीं तुम्हारी मुनिया फैट न जाये...

मामी- हाँ भाई हमारी तो फैट hi जाएगी, हमने तीन तीन नहीं लिए न कभी एक साथ, पर इनमे बड़ी जान है लगता है पूरे गाओं के भी खा जाएं.

मामी ने माँ के चूतड़ों को दबाते हुए कहा...

माँ- तुम्हे भी पूरे गाओं का स्वाद चखा दूँ चुदड़ो रानी हाँ तो करो,

माँ ने अब मामी के चूतड़ों को मसलते हुए कहा, मामी कुछ कहती इससे पहले hi मौसी भी रसोई में आ गयी,

मौसी- अरे ये ननद भाभी में बड़ा प्यार हो रहा है.

मामी- प्यार नहीं हो रहा जीजी की मुनिया में खुजली मच रही है अपने भैया के डंडा के लिए,

माँ- अरे नहीं शालू हमारी भाभी को अपने तीनो जीजा के डंडे लेने हैं एक साथ, बस इसीलिए साली की रसभरी भह रही है,

मौसी कैसे ननद भाभी के मज़ाक से दूर रहती, मौसी ने मामी को दूसरी और से घेर लिया और उनके पिछवाड़े पर ऐसे धक्के लगाने लगी जैसे उन्हें छोड़ रही हो और boli-are जीजी ऐसा गदराया माल देख कर तो तीनो इन्हे कई रातो तक सोने नहीं देंगे,

मामी- ये लो एक चुदड़ो ननद काम थी जो दूसरी भी आ गयी, मामी ने हँसते हुए कहा.

माँ- हम चुदड़ों हो न हो, पर तुम्हे चोदामपुर से महा चुदड़ो बनाकर भेजेंगे,

माँ भी मौसी की तरह सामने से मामी की छूट पर धक्के लगाने लगी और मामी दोनों बहनो के बीच दबने लगी, दोनों ऐसे धक्के लगा रही थी जैसा मामी को दोनों तरफ से छोड़ रही हैं.

मामी- अरे रांड नदियों इतनी अह्ह्ह्ह हाहाहा गर्मी आ रही है तुम्हारी छूटों में जाओ अपने भाई और बाप का लुंड ले लो अपनी छूट में हेहेहे...

मौसी- लगता है ससुर का भी चख लिए तुमने अपना,

मामी- अरे कहाँ ससुर जी को तो अपनी गुड़िया की hi ररस भरी चाहिए,

माँ- तुम अपनी दिखा दो एक बार रानी,

माँ ने और आगे बढ़ते हुए मामी के गाल को चूमते हुए कहा, इस पर मामी ने माँ की कमर पर चिकोटी काट ली तो माँ उनसे अलग हुई, माँ के हटते hi मामी उछाल कर मौसी की पकड़ से भी निकल गयी, हँसते हुए,

मामी- अरे चूमना hi है तो अपने भाई का लुंड चूमो न जीजी.

माँ- आज तो बच गयी रानी, आगई बार नंगा करके घुमाऊँगी घर में फिर देखना खुद का बीटा चढ़ जायेगा,

मामी- तुम्हारे तो दो दो हैं सांड जैसे देखना कहीं जहाँ से निकले हैं वहीं न घुस जाएं हेहेहे..

मज़ाक चल hi रहा था की बहार से मां की आवाज़ आई तो तीनो शांत हो गए और ऐसे hi मज़ाक करते हुए अपने अपने कमरों में चले गए,

मैं नाना के कमरे में पहुंचा तो पता चला अनुज और सागर आज छत पर सोने वाले थे जिसकी वजह अनुज ने बताई की सागर को चुदाई की वीडियो जो देखनी हैं, वैसे तो मेरा भी मन काफी हो रहा था चुदाई का पर नाना के होते हुए कहीं जाना मुश्किल था इसलिए मैं भी बिस्तर पर लेट गया,

मुझे लगा नाना सो गए हैं तो मैं फ़ोन निकल कर चलने लगा फिर मुझे याद आया तो मैंने अंजलि को मश्ग किया की कल किस टाइम निकलना है वो मुझे कन्फर्म कर दे,

वो अभी ऑफलाइन थी तो जवाब नहीं आया, उसके बाद मैंने नीतू को भी मश्ग कर दिया किआ कल की योजना पक्की है न, वो भी ऑफलाइन थी, और हो भी क्यों न क्यूंकि उसके कमरे में कुछ ज़रूरी काम जो चल रहा था, कमरा बंद था और पिछली रात की तरह hi नीतू, लाडो और बिरजू एक साथ थे, तीनो के hi बदन पर कपडे का कोई निशान तक नहीं था

अभी नीतू और लाडो अपनी पीठ पर एक दुसरे के बगल में लेती हुई थी बिस्तर के किनारे वहीं बिस्तर के बगल में बिरजू खड़ा हुआ था जो की अपनी बड़ी बहन के पैरों के बीच था और अपना लुंड नीतू की छूट में अंदर बहार कर रहा था





वहीं लाडो बगल में लेते हुयी अपने भाई और बहन की चुदाई देखते हुए अपनी छूट को मसल रही थी साथ hi, अपनी बरी का भी इंतज़ार कर रही थी,

Birju-ahhhhhh जीजी कितनी गरम छूट है तुम्हारी आह्ह्ह्हह ुहम्म्म्म बड़ा मज़ा आ रहा है..

नीतू- हहनननन भाई ऐसे hi छोड़ अपनी बहन को, ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म और तेज़्ज़.

लाडो- अहहह्राम से छोड़ बिरजू अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीजी की छूट में hi मत झाड़ जइयो मेरी छूट भी प्यासी है..

बिरजू- हाँ अह्ह्ह चिंता मत कर ओह्ह्ह तुझे छोड़ कर hi झाड़ूंगा,

जहाँ ये तीनो चुदाई के मज़े ले रहे थे वहीं उनके बड़े भाई यानि सरजू के लिए आज की रात कुछ अलग थी, आज उसने पूरी रात तड़पने से बचने के लिए पहले hi एक उपाय खोज लिए था और अभी उस उपाय पर hi काम कर रहा था,

अभी उसकी गदराई हुई मम्मी उसके सामने घोड़ी बानी हुई थी उनकी साड़ी कमर से ऊपर थी और सरजू का लुंड उसकी मम्मी की छूट के अंदर बहार हो रहा था,





सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी अह्हह्ह्ह्ह ुहममम माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है.

रज्जो- अरे लल्लाहहहह जल्दी कर तेरे पापाः इंतज़ार कर रहे हैं.

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हानंन्न मम्मी बस थोड़ी देर और अह्ह्ह्ह नहीं तो मुझे पूरी रात तड़पना पड़ेगा, आह्ह्ह्हह्ह..

रज्जो- ुहम्म बेटाः पर तू भी समझ तेरे पापा को शक हो गया तो गड़बड़ हो जाएगी.

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी क्याःह्ह्ह करूँ दिन में सब होते हैं समय नहीं मिलता आह्ह्ह्हह्ह और रात में तुम पापा के पास होती है अह्हह्ह्ह्ह कुछ मेरव लुंड का भी सोचो नाआहहह.

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह इतनी hi तड़प है तो अपनी बहनो को hi पता कर छोड़ ले नाआहहह.

सरजू तो ये सुन के चौंक hi गया, वहीं उसका लुंड भी फूलने लगा...

सरजू- ये क्याःह्ह्ह बोल रही हो मम्मी, नीतू, लाडो को?

रज्जो- क्यों माँ छोड़ सकता है बहनो को नाहीई ुहममम? जैसे मादरचोद बना है वैसे भेनचोद भी बंजाहहह..

अपनी मम्मी से इतना सुनने के बाद सरजू खुद को रोक नहीं पाया और उसका लुंड ठुमके मरने लगा,

सरजू- अह्हह्ह्ह्ह मम्मी मेरा निकलने वाला है,

ये सुनते hi रज्जो आगे हो गयी और सरजू का लुंड छूट से निकल कर घूम गयी और लुंड को मुँह में भर लिए मुँह में पहुँचते hi सरजू का लुंड पिचकारी मरने लगा जिसे रज्जो चची गटकने लगी,

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी अह्हह्ह्ह्ह ुहममम अह्हह्ह्ह्ह

गुर्राते हुए सरजू अपनी मम्मी के मुँह में झाड़ गया तो चची ने बेटे का अचे से छठा और फिर बहार निकल diya..aur कड़ी होकर कपडे ठीक करने लगी.

रज्जो- देर करवादी तूने तेरे पापा पूछेंगे अब.

सरजू- मम्मी तुम वो लाडो और नीतू के बारे में जो बोल रही थी वो ?

रज्जो- हाँ सही तो बोल रही थी छोड़ ले अपनी बहनो को..

सरजू- पर वो कैसे?

रज्जो- अरे बीटा जवान लड़किया हैं, चुदाई की प्यास मुझसे ज़्यादा होगी उनमे? और तू नहीं छोड़ेगा तो कोई और छोड़ेगा...

सरजू- तुम्हे कोई दिक्कत नहीं है मम्मी?

रज्जो- मुझे क्या दिक्कत होगी बीटा, जवान लड़कियां हैं छुडवाएंगी तो हैं hi, और क्या पता अभी चुदवाती भी हो तो तू भी कोशिश कर के देख ले,

ये कहकर रज्जो चची चली गयी अपने कमरे में, वहीं सरजू सोच में पद गया उसका लुंड तो दोबारा खड़ा हो गया था अपनी बहनो के बारे में सोच कर वो सोचने लगा- यार मम्मी ने तो मेरे मन की बात खड़ी, मम्मी को क्या पता दोनों के लिए कितनी मुठी मारी है मैंने, दर तो मम्मी का hi था, अब उनका भी साथ मिल गया है तो कोशिश तो करूँगा hi, नीतू थोड़ी मुश्किल है लाडो से शुरुवात करनी होगी,

सरजू ये सब सोचते हुए लुंड मुठियाने लगा और फिर हाथ झटकते हुए बोलै- क्या मुठिया रहा है यार घर में इतनी मस्त मस्त छूटों के होते हुए तुझे हाथ से हिलना पड़े तो क्या फायदा.

वहीं दुसरे कमरे में तो प्रोग्राम तुरंत शुरू हो गया था रज्जो के जाते hi दीनू ने उसे नंगा कर दिया था और अभी रज्जो पति का तन्नाया हुआ लुंड चूस रही थी,





दीनू- अह्ह्ह्हह्हह बड़ी देर कर दी अह्हह्ह्ह्ह साली कबसे इंतज़ार कर रहा था,

रज्जो ने मुँह से लुंड निकला और बोली- तो बुला लेते अपनी रैंड बहन रूपा को, वो बड़े अचे से रखेगी ख्याल अपने भैया के लुंड का.

ये कहकर लुंड बापिस मुँह में भर लिए..

दीनू तो ये सुन और उत्साहित हो गए और अपनी बीवी का मुँह अपने लुंड पर दबाने लगे,

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह साली रांड अह्हह्ह्ह्ह मेरी बहन hi छुडवायेगी मुझसे?

रज्जो- ुहममम हानंन्न छोड़ोगे न, अह्ह्ह्ह लुंड चुसवाओगे अपनी बहन से,

दीनू आआँख बंद कर एहसास करने लगे की उनकी बहन उनका लुंड चूसेगज तोह कैसा लगेगा- अह्ह्ह हैं

अपने आप hi मुँह से निकल गया,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह भैय्या कितना गरम लुंड है तुम्हारा ओह्ह्ह्म्म्म देखो कितना ाचा लग रहा है मुँह मेंननं..

दीनू अपनी पत्नी के इस नाटक से तो और उत्तेजित हो गए,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हाँ रूपा चूस ऐसे hi भैया का लुंड आअह्ह्ह...

रज्जो- सलरपपपपू सलरपपपप ुहम्म्म्म हाँ भैया, आह्ह्ह्हह्ह भैया, भाभी से ाचा चूस रही हूँ न...

दीनू- ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म हैं मेरी रानी बहन, अह्हह्ह्ह्ह बहुत अछ्हाआअह्ह्ह्हह..

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh भैया रानी नहीं रंडी बहन हूँ मैं तुम्हारी,

दीनू- हाँ मेरिइइइइइइइइ रनडीईईई बहन, चूस साली अपने भाई का कड़क लुंड, आअह्ह्ह्ह

अब दीनू भी पूरे जोश में आ चुके थे, और बुरी तरह से अपनी बहन समझ कर रज्जो का गाला छोड़ने लगे...

रज्जो- ुघ्हहह्ह्ह्हह्हह ुघ्हहह्ह्ह्हह्हह ुघ्हहह्ह्ह्हह्हह,

और फिर रज्जो ने अपना मुँह पीछे कर पति का लुंड निकल दिया और सांस भरते हुए बोलीः- ुहममम भइयाझ आह्हः अब छोड़ो अपनी बहन को अह्हह्ह्ह्ह छोड़ो बहन की गरम छूट और बन जाओ बहनचोद....

दीनू तो बिलकुल तैयार थे जैसे और तुरंत रज्जो को बिस्तर पर घोड़ी बनाया और उसके पीछे आकर अपना लुंड घुसा दिया उसकी छूट में.. और दनादन छोड़ने लगे





रज्जो को भी अपने पति का ये रूप पसंद आ रहा था और चुदाई का ये अंदाज़ भी,

वहीं दीनू तो भूल hi चुके थे की वो अपनी पत्नी को छोड़ रहे हैं उनकी कल्पना में वो अपनी बहन रूपा को hi छोड़ रहे थे, रज्जो का चेहरा दूसरी और होने से उन्हें ये कल्पना और अछि लग रही थी वो ये hi मान रहे थे की उनका लुंड उनकी बहन की छूट में hi अंदर बहार हो रहा है..

सिर्फ दीनू hi नहीं थे जो की अपनी बहन को छोड़ने की कल्पना कर रहे थे उनका बड़ा बीटा सरजू भी अपनी दोनों बहनो को छोड़ने के सपने देख रहा था और योजनाएं बना रहा था वहीं उनका छोटा बीटा उनसे दो कदम आगे था और सच में अपनी सगी बहनो को छोड़ रहा था, और अभी अपनी छोटी बहन लाडो की गांड मार रहा था,

सरजू के मन में बार बार बस अपनी बहनो का ख्याल आ रहा था, और उन्ही ख्यालों में वो अपने कमरे से निकल गया, उसकी नींद तो बिलकुल उड़ चुकी थी, और उन्ही ख्यालों में छत पर चला गया छत पर उसने जाकर देखा की बिरजू का बिस्तर लगा हुआ है पर खली था उसने सोचा की शायद मूतने गया होगा, इसलिए वो उसके बिस्तर पर बैठ कर आगे का सोचने लगा,

सोचते सोचते उसे कुछ देर हो गयी तो उसे ख्याल आया की ये बिरजू नहीं आया इतनी रात को ये कहाँ गायब है, ये देखने वो बापिस नीचे आया और बाथरूम जाकर देखा तो उसे बंद दिखा और उसके अंदर की बत्ती भी जल रही थी, उसे लगा अब भी बिरजू बाथरूम में है और ये सोच कर वो बापिस मुद कर अपने कमरे की और जाने लगा जैसे hi कमरे के दरवाज़े पर पहुन्ह्चा तभी उसे बाथरूम के दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आई और फिर दरवाज़ा खुला तो अंदर की रौशनी बहार बिखर गयी और उसी के बीच एक साया बहार आया, सरजू ने सोचा था ये बिरजू होगा पर जैसे hi साया दरवाज़े से बहार निकला सरजू की आँखें फैल गयी, उसने कुछ ऐसा देखा जिसकी उम्मीद तक उसने नहीं की थी, सामने उसकी बहन नीतू बाथरूम से निकल रही थी पर हैरानी की बात ये नहीं थी, हैरानी की बात ये थी की वो बिलकुल नंगी थी, ये देख कर तो सरजू के दिल की धड़कन बढ़ गयी और लुंड फनफनाने लगा, पर अगले hi पल नीतू ने बहार लगा स्विच दबाकर बाथरूम का बल्ब बंद कर दिया तो सरजू के लिए उसकी बहन का नंगा बदन छिप सा गया,

नीतू बाथरूम से निकल कर आगे बढ़ी उसे शायद अंदाज़ा भी नहीं था की उसका बड़ा भाई उसे देख रहा है, सरजू बूत बना दरवाज़े के पीछे से उसे देख रहा था,

नीतू नंगी hi अपने और लाडो के कमरे की और गयी और फिर दरवाज़ा खोल कर अंदर घुस गयी, उसके अंदर जाते hi सरजू सोचने लगा ये क्या है, नीतू रात को ऐसे बिलकुल नंगी क्यों घूम रही है घर में, वो अपने कमरे से दबे पाऊँ निकला और बिना आवाज़ किये नीतू और लाडो के कमरे के बहार पहुँच गया, उसने दरवाज़े पर कान लगाया तो उसे आवाज़ें आई जिन्हे सुनकर उसके कान खड़े हो गए और दिल की धड़कन तेज़ हो गयी, क्यूंकि उन आवाज़ों से साफ़ पता चल रहा था की अंदर क्या हो रहा है,

सरजू का दिल तेज़ी से धड़क रहा था उसके मन सैकड़ों ख्याल आ रहे थे, वो किसी तरह से अंदर देखना चाहता था, उसे पता था की कमरे में कोई खिड़की ऐसी नहीं है जिससे अंदर देखा जा सके बस दरवाज़ा hi एक मात्रा तरीका है, उसने बड़ी सावधानी से दरवाज़े को धक्का देने की कोशिश की जिससे पता चल जाये की दरवाज़ा बंद है या खुला, पर उसकी किस्मत इतनी अछि नहीं थी क्यूंकि दरवाज़ा अंदर से बंद था, वो निराश हो गया पर कान लगा कर सुनता रहा करीब 5 मिनट्स आवाज़ आणि बंद हुई और उसे कुछ हलचल भी महसूस हुई वो जल्दी आंगन के दूसरी और जाकर छिप गया और देखने लगा कुछ पल बाद hi दरवाज़ा खुला और उसमे से कोई निकला, उसे देखते hi सरजू समझ गया ये बिरजू है और जैसे hi उसे ये समझ आया उसका सर घूमने लगा,

क्या सच में सरजू नीतू के साथ? क्या जो मैं सोच रहा था ये लोग कर भी रहे थे? अगर ये लोग कर रहे थे तो लाडो कहाँ है क्या उसे सब पता है, उसके मन में बहुत से प्रश्न आ रहे थे जिनका उसके पास कोई जवाब नहीं था,

इधर उसने देखा की बिरजू कमरे से निकल कर बाथरूम में गया और फिर कुछ hi पल में बाथरूम से निकल कर छत की और, सरजू यूँ hi बैठा हुआ सोच में पद गया, क्या हो रहा है उसके घर में, उसका भाई और बहन आपस में चुदाई पर गलत क्या है मैं भी तो मम्मी के साथ करता हूँ, काफी देर तक सरजू वहीं बैठा हुआ सोचता रहा की उसे आगे क्या करना चाहिए क्या नहीं, काफी देर के सोच विचार के बाद सरजू उठा और फिर अपने कमरे की और बढ़ा, और दरवाज़े पर जाकर अचानक से रुक गया, और फिर बापिस मुदा, और नीतू लाडो के कमरे की और बढ़ गया..

सरजू ने दरवाज़े के पास जाकर देखा दरवाज़ा आधा खुला hi था, बड़ी सावधानी से बिना किसी आवाज़ के साथ वो अंदर घुस गया, अंदर पूरा अँधेरा था तो उसने पाजामे से फ़ोन निकला और फ़ोन की स्क्रीन से कमरे ने देखने लगा उसने देखा उसकी दोनों बहनें, सो रही हैं लाडो ने t-shirt और पजामा पहना है वहीं नीतू ने एक मैक्सी पहन राखी थी,

सरजू- देखो तो कितनी शराफत से सो रही है मैक्सी पहन कर अभी नंगी घूम रही थी, एक भाई से चुदवाती है,

सरजू नीतू की और देख कर सोच रहा था, सरजू कुछ पल यूँ hi खड़ा खड़ा उसे देखता रहा और फिर कुछ सोच कर बड़े आराम से बिस्तर पर चढ़ गया और अपना एक हाथ नीतू के घुटने पर रखा जो की मैक्सी के बहार निकला हुआ था, उसने हाथ ऊपर सरकना शुरू कर दिया तो मैक्सी भी उसके साथ ऊपर जाने लगी, हालाँकि अँधेरे के कारन उसे दिख कुछ नहीं रहा था पर बहन की चिकनी जांघो का स्पर्श पाकर hi उसके बदन में करंट दौड़ गया, वो उत्तेजना से भर गया, एक पल को उसने नीतू की जांघ से हाथ हटाया और कुछ hi पलों में वो पूरा नंगा अपनी बहनो के बिस्तर पर बैठा था इस ख्याल से hi उसे एक अजीब तरह का उत्साह हो रहा था, अपना हाथ नीतू की जांघ पर बापिस रख उसने फिर से मैक्सी को ऊपर सरकना शुरू कर दिया,

इस सब से बेखबर नीतू सो रही थी,

सरजू की आँखों से नींद गायब थी, उसके हाथ नीतू की जांघो पर चल रहे थे उसका लुंड बिलकुल लोहे की तरह सख्त हो गया था, उसने महसूस किआ अब मैक्सी नीतू के चूतड़ों तक पहुँच गयी है और ऊपर नहीं जा रही तो उसने हाथ आगे लेकर टटोलते हुए महसूस किआ आगे से मैक्सी नीतू के पेट तक ऊपर हो सकती थी जो की सरजू ने कर दी, अब सरजू का एक हाथ नीतू के पेट पर था और दूसरा अपने लुंड पर, उसने लुंड को दो तीन बार मुठिया और फिर अपने हाथ में ढेर सारा थूक लेकर लुंड पर लगा लिए, और एक पल को अपने फैसले पर फिर से सोचा और अगले hi पल नीतू के पैरों के बीच. जगह ली अपना लुंड पकड़ा और बहन की छूट पर लगाया और ऊपर नीचे कर उसके होंठों को महसूस किआ और फिर धक्का लगाकर अपना लुंड नीतू की छूट में फंसा दिया,

नीतू नींद में hi कसमसाने लगी, वहीं सरजू तो जैसे जन्नत में था उसने हलके हलके दो तीन धक्के और लगाए और अपना पूरा लुंड नीतू की छूट में घुसा कर धक्का मारा तो नीतू के मुँह से आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,

लाडो बिरजू और नीतू क्र साथ चुदाई का खेल खेलने के बाद थक कर सोइ थी, नींद भी अछि खासी आ रही थी, पर अचानक से उसकी नींद खुली, उसने महसूस किआ की बिस्तर बार बार हिल रहा है और उसकी बहन भी हलकी हलकी सिसकियाँ ले रही है उसे लगा कहीं बिरजू बापिस तो नहीं आ गया, वो टटोलते हुए बिस्तर से उठी और उसने दीवार पर लगे स्विच को दबाकर कमरे की बत्ती जल्दी और बिस्तर पर उसने जो देखा वो उसके लिए चौंकाने वाला था

बिस्तर पर उसकी बहन नीतू की मैक्सी उसके सीने से ऊपर थी उसकी चूचियां झोऊल रही थी, एक चुकी पर एक हाथ था जो उसे मसल रहा था , नीचे नीतू की दोनों फैली हुई टैंगो के बीच एक मर्द था जिसका लुंड उसकी छूट में अंदर बहार हो रहा था, और जब लाडो की नज़र उसके चेहरे पर पड़ी तो वो बिलकुल चौंक गयी, और उसकर मुँह से निकला- भैया....







जारी रहेगी...
 
अपडेट 208


नीतू और अंजलि को मश्ग करने के बाद मैं फ़ोन चला hi रहा था की नाना की आवाज़ आई- सोया नहीं.

में- बस सोने hi जा रहा हूँ नाना तुम नहीं सोये,

नाना- नींद नहीं आ रही अभी...

में- क्यों ममता चची का भीगा बदन याद आ रहा है,

नाना- हट अपने नाना से कोई ऐसी बातें करता है क्या?

में- करता है अगर नाना दोस्त हो तो.

नाना- ाचा अगर तू दोस्त है तो अपना बता, तूने कोई लड़की पाते की नहीं,

में- अरे देखो तो दोस्ती होते hi सीधा लड़की बाज़ी पर आ गए.

नाना- क्यों लल्ला हम नहीं पूछ सकते, एक hi तरफ़ा दोस्ती है का?

में- पूछ सकते हैं बिलकुल पूँछ सकते हैं और मैं दोस्तों से कुछ छुपता भी नहीं,

नाना- तो बता,

में- अरे पाते तो नहीं है अभी पर पटाने की कोशिश चल रही है, और कल तो उससे मिलने भी वाला हूँ.

Nana-are वाह बड़ा तेज़ है तू कल मिलने भी वाला है, कहाँ की है?

में- बगल में गाओं है न गैंदपुर वहां रहती है, नीतू है न रज्जो चची की बड़ी बिटिया उसकी सहेली है,

नाना- अच्छा ये तो और सही है बरात बगल के गाओं में hi जाएगी.

में- क्या नाना लड़की पति नहीं है तुम ब्याह तक पहुंच गए,

नाना- अरे तुझे क्यों मन करेगी कोई, क्या खराबी है हमारे नाती में.

में- मुझमे कोई खराबी नहीं पर नाना वो बहुत सुन्दर है, दिखाऊं तुम्हे?

नाना- हाँ बिलकुल दिखा,

मैंने फिर फ़ोन में नाना को अंजलि की फोटो दिखाई एक दो अपने साथ और अकेले भी.

नाना- सच में लड़की तो बहुत सुन्दर है, और तेरे साथ जोड़ी जाँच भी रही है इसकी.

में- बस नाना आशीर्वाद दो ये पैट जाये.

नाना- आशीर्वाद तो है hi लल्ला पर अब मैं तुझसे कह रहा हूँ, इसे hi इस घर की बहु बनाना.

में- बिलकुल नाना, वैसे ये तो रही मेरी बात तुम बताओ तुमने जवानी में कितनी लड़कियां पाते थी,

नाना- अरे कहाँ लल्ला, जब तक इनसब चीज़ों का ज्ञान होता तब तक तो तेरी नानी से ब्याह हो गया हमारा, उस समय जल्दी hi हो जाते थे न,

में- फिर नानी के साथ सुहागरात की कहानी hi बतादो.

नाना- तुझे बड़ा मज़ा आता है इन बातों में..

में- बढ़ता बच्चा हूँ, ऐसी hi बातें करूँगा न..

नाना इस बात पर हंसने लगे और फिर अपनी और नानी की बात बताने लगे,

इधर हमारे घर के दुसरे कमरे में मौसा मौसी सब से छुपकर माँ पापा के कमरे में चले आये थे और मिलकर चुदाई का मज़ा लूट रहे थे,





अब्बी मौसा माँ के पीछे लेटकर उनकी चूचियों को दबाते हुए पीछे से छोड़ रहे थे वहीं मौसी पापा के लुंड की सवारी करने के लिए उनके ऊपर चढ़ रही थी, दोनों hi अपनी अपनी सालियों के गदराये बदन का मज़ा ले रहे थे,

वहीं सरजू के लिए ये रात सबसे ज़्यादा अछि जा रही थी पहले अपनी माँ और फिर नीतू और अब लाडो से वो लुंड चुसवा रहा था,

लाडो ने जैसे hi बिजली जलाकर अपने भाई और बहन को चुदाई करते देखा तो वो समझ गयी की और वैसे भी लाडो इन मामलो में काफी तेज़ थी, तुरंत अपना पजामा उतर कर वो नीतू के चेहरे पर बैठ गयी फिर क्या था, सरजू को नीतू और लाडो ने साडी बात बताई वहीं सरजू ने दोनों बहनो को सुबह तक छोड़ा..

अगली सुबह हुई तो थोड़ा देर से उठा क्यूंकि रात नाना से काफी देर तक बातें होती रही थी, उठकर फ्रेश होकर फ़ोन देखा तो अंजलि का मश्ग था जिसके उसने समय बताया था, खैर मैं बिस्तर से निकला और कमरे से बहार गया नाना पहले से hi कमरे में नहीं थे, सब आंगन में थे, मैं भी सबके साथ हो गया और चाय नाश्ता किआ, अभी घर में इतने लोग थे तो और ाचा लगता था इतनी चहल पहल, घर का माहौल काफी ाचा था, खैर नाश्ता वगेरा करने के बाद मैं तैयार हुआ और मौसा से गाडी मांगी, तो उन्होंने सुनाया की अपनी चीज़ के लिए मुझसे मत पूछा कर, खैर मैं जितना ाचा दिख सकता था उससे भी ाचा बन कर गाडी लेकर निकल गया, सीधा गैंदपुर के अड्डे पर जहाँ मेरे सपनो की रानी पहले से कड़ी होकर मेरा इंतज़ार कर रही थी,





खैर मैंने उसके सामने जाकर गाडी रोकी और उतर कर उसके लिए दरवाज़ा खोला वो मुस्कुराते हुए बैठ गयी, मैं भी आकर गाडी में बैठा.. और मैंने गाडी शहर की और घुमड़ि.

अंजलि- वैसे कार बहुत अछि है तुम्हारी, काफी स्पेस है और आरामदायक भी है,

में- वो बस ऐसे hi मौसा जी को पसंद आई तो उन्होंने ले ली.

अंजलि- हाँ, वैसे देखो नीतू ने कैसे आखिरी समय पर धोखा दे दिया.

में- हाँ, बिलकुल अभी आकर मन किआ मुझे भी,

ये नीतू और मेरी योजना थी , मुझे अंजलि के साथ अकेले भेजने की.

अंजलि- तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं है? क्यूंकि वो नहीं आ रही,

में- नहीं नहीं मुझे क्या परेशानी होगी, थोड़ी उसकी बकबक से छुट्टी मिलेगी,

अंजलि- हाववव ऐसे बोलते हो तुम उसके बारे में देखना उसे बताउंगी.

में- अरे बाबा नहीं, मार डालेगी वो मुझे,

खैर ऐसे hi बातें करते हुए हम शहर पहुँच गए जहाँ उसे कुछ फॉर्म वगेरा जमा करने थे वो सब किआ और फिर फ्री होकर बोली- अब बताओ क्या करें घर चलें या कुछ और,

में- जैसा तुम्हे तुम चाहो,

अंजलि- ाचा जैसा मैं चहुँ?

में- हाँ जैसा तुम चाहो,

अंजलि- तुम मानोगे मेरी बात,

में- हाँ बिलकुल

अंजलि - ठीक है पर देख लेना, मन मत करना,

में- नहीं करूँगा पक्का.

अंजलि- ाचा तो चलो मॉल चलते हैं, मैं तुम्हे कुछ मस्त सा खिलाती हूँ अपनी पसंद का.

में- ठीक है चलते हैं,

जल्दी hi हूँ मॉल में थे जहाँ उसने मुझे कई साडी चीज़ें खिलाई, अपनी पसंद की, कभी नूडल्स तो कभी पिज़्ज़ा, उसके बाद हमें मॉल में hi भूतिया घर दिखा तो वो बोली- चलो चलते हैं न इसमें.

में- सही में तुम्हे दर नहीं लगेगा.

अंजलि- लगेगा तो पर तुम हो न मुझे सँभालने के लिए.

में- हाँ ये तो है,

हम भूतिया घर में गए जहाँ शुरू में hi अँधेरा होते hi वो एक चीख आते hi मुझसे चिपक गयी और मेरा रोम रोम खुल गया, मैंने उसे एक और से बाहों में भर लिए, और धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा, हर डरावनी चीज़ के साथ वो चीख रही थी और मुझे कास के पकड़ रही थी वहीं मुझे बहुत ाचा लग रहा था, वो भूतिया घर मुझे बड़ी hi प्यारी जगह लग रहा था, खैर जल्दी hi हम भूतिया घर से बहार आये तो वो दर से पारणा पसीना थी,

अंजलि- यार कितना दर लग रहा था मुझे.

में- सच्ची पर मुझे तो मज़ा आया.

अंजलि- अच्छा तुम्हे दर नहीं लगा.

में- नहीं तुम थी न मेरे साथ इसलिए.

इस बात पर हम दोनों hi हंसने लगे,

अंजलि- अब क्या करना है, टाइम तो काफी है हमारे पास.

में- तुम बताओ आज तुमने बोलै है सब कुछ तुंहारी पसंद का होगा.

अंजलि- हाँ वो तो होगा hi और अब हम मूवी देखेंगे.

में- ठीक है,

जल्दी से जाकर हमने सबसे तुरंत के शो की टिकट ली और उसने खाने की तरह hi ज़िद्द करके खुद पैसे दिए, उसका कहना था की आज की साडी चीज़ वो करवाएगी मुझे बस उसके साथ घूमना था,

खैर एक रहसयमयी फिल्म थी, जिसे हम देख रहे थे, और जब तक हम टिकट लेकर पहुंचे थे तो शो शुरू हो चूका था तो मैं अँधेरे में उसका हाथ पकड़ कर उसे सीट तक ले गया और बैठ गए, फिल्म की कहानी काफी रोमांचक थी तो वो और मैं दोनों hi फिल्म में लग गए हाँ पर एक बात थी की फिल्म पूरी होने तक उसका हाथ मेरे हाथ में रहा, क्यूंकि इंटरवल में हम उठे नहीं पहले इतना खा लिए था,

फिल्म ख़तम हुई हम बहार आये तो वो बोली- मुझे ऐसी hi फिल्म पसंद हैं थोड़ी रोमांचक, रहस्यमयी,

में- हाँ यार फिल्म तो सच में अछि थी,

अंजलि- प्यार मोहब्बत की फिल्म तो बस एक hi हीरो की अछि लगती है.

में- मुझे पता है किसकी.

अंजलि- किसकी.

मैंने उसे हाथ फैलाकर दिखा दिया तो वो खुश होते हुए बोली - तुम्हे भी सरक पसंद है.

में- अब तक तो नहीं था पर अब है,

अंजलि- ाचा चलो एक फैन और बड़ा सरक का, अब रुको मैं बाथरूम से आती हूँ,

वो ये कहकर चली गयी तो मैंने फ़ोन निकल कर देखा जिसमे नीतू का मश्ग था की दिल की बात कही की नहीं,

जिसे पढ़ कर मैं चिंता में पढ़ गया की अब क्या करूँ कैसे कहूं उससे.

ये सब सोच hi रहा था की वो बापिस आ गयी उसका चेहरा देख कर मैं फिर से प्यार में पद गया उसके, सोचा यार आज बात करनी hi पड़ेगी.

खैर हम नीचे पार्किंग में आये और गाडी में बैठे मेरे दिमाग में यही चल रहा था की उससे कैसे बात करूँ.

अंजलि- क्या हुआ क्या सोच रहे हो, पेट्रोल तो है न गाडी में,

वो हँसते हुए बोली.

में- नहीं यार तुम्हे धक्का लगाना पड़ेगा,

मैंने जवाब दिया तो वो खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली- मैंतो इसे एक फ़ीट न हिला पौन.

में- ाचा सुनो जाने से पहले मुझे तुमसे कुछ बात करनी है,

अंजलि- हाँ बोलो न..

वो थोड़ा गंभीर होते हुए बोली.

में- ऐसा चेहरा मत बनाओ की मुझे दर लगने लगे.

अंजलि- ाचा मैं डरावनी लगती हूँ तुम्हे,

में- अरे नहीं नहीं तुम तो बहुत..

अंजलि- बहुत क्या डरावनी?

में- अरे नहीं यार क्यूट.

अंजलि ये सुन शर्मा गयी और बोली - क्यूट तो तुम भी हो,

में- तुमसे काम.

अंजलि- अरे अब जो बात थी वो तो बताओ.

मैं थोड़ा शांत हुआ और फिर गहरी सांस लेकर बोलै - देखो पर मेरी बात सुनने के बाद तुम गुस्सा मत करना तुम्हे पसंद न आये तो बता देना मैं चुप हो जाऊंगा

अंजलि- अरे तुम बोलो तो तभी तो पता चलेगा मुझे पसंद है की नहीं.

में- देखो अंजलि मुझे नहीं पता तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो, पर एक सच है जो मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ,

अंजलि- क्या,

में- मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ, तुमसे प्यार करने लगा हूँ, तुम्हारी हर चीज़ मुझे बहुत पसंद है हर चीज़ से प्यार हो गया है,

मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, वो ये सुनकर बिलकुल चुप हो गयी, और गंभीर भी हो गयी,

कुछ देर वो सामने देखती रही चुप चाप.

मैंने कुछ सोचा और बोलै- देखो अगर तुम ऐसा नहीं सोचती या जवाब नहीं देना चाहती तो भी कोई बात नहीं,

अंजलि इस बात पर भी खामोश रही और फिर मेरी आँखों में देखा और बोली- इधर आओ,

ये कहकर वो मेरी और झुकी और मेरे गले लग गयी तो मैंने भी उसको बाहों में भर लिए, उसके गले लगने से क्या सुकून मिला बता नहीं सकता ऐसा लगा की अब कुछ नहीं चाहिए ज़िन्दगी में...

कुछ देर हम चुप चाप गले लगे रहे फिर उसने अपना चेहरा कंधे से हटाया और मेरी आँखों में देखने लगी हम अब भी बिलकुल करीब थे, मेरी आँखों में देखते हुए उसने एक बार फिर से अपना चेहरा आगे किआ अपने होंठ बिलकुल मेरे होंठों के पास लाइ और बोली- कर्मा तुम्हे सच में लगता है ये प्यार है?

में- हाँ, मैं सच में तुमसे प्यार करता हूँ...

ये सुनकर वो एक पल को रुकी और फिर उसने अपने होंठ धीरे से मेरे होंठों पर रख दिए, मेरा तो पूरा बदन सिहर गया, मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज़ चल रही थी, उसने सिर्फ अपने होंठ मेरे होंठों पर रखे थे कुछ कर नहीं रही थी और न hi मुझमे हिम्मत थी की मैं बदन का एक कटरा भी हिला सकूँ.

कुछ पल बाद उसने अपने होंठ हिलाये और मेरे होंठों को चूसना शुरू किआ, पहले तो मैंने उसे जो वो कर रही थी करने दिया फिर अचानक से मेरे बदन में बिजली दी सऊदी और मैं भी उसके होंठो को चूसने लगा, उसके रसीले नरम होंठों को चूसने में वो मज़ा आ रहा था जो शब्दों में बयां नहीं कर सकता, मेरे हाथ उसकी कमर और पीठ पर फिरने लगे तो उसके हाथ मेरे सर पर थे,

हम दोनों पूरे आवेग में एक दुसरे के होंठों को चूस रहे थे





कभी वो मेरा निचला होंठ चूसती तो मैं उसका ऊपर वाला फिर इसका उल्टा, पता hi नहीं चला हम कितनी देर तक एक दुसरे को चूसते रहे, ाचा था पार्किंग में अँधेरा था और कोई नहीं था आस पास.

खैर आखिर हमारे होंठ अलग हुए तो वो मुझे देख कर मुस्कुराई और फिर मेरे बालों में हाथ फिरते हुए बोली- इससे तुम्हे ये तो अंदाज़ा हो गया होगा की मैं भी तुम्हे बहुत पसंद करती हूँ, मुझे तुम बहुत अचे लगते हो, आकर्षक भी बहुत हो, और किश भी बहुत ाचा करते हो.

वो हँसते हुए बोली पर मैं थोड़ा हैरान था तो वो मेरी आँखों में देख कर शायद समझ गयी और बोली- मैं समझ सकती हूँ तुम कंफ्यूज हो, पर सही कहूं तो मैं भी हूँ.

में- मतलब.

अंजलि- देखो मैं तुम्हे पसंद करती हूँ, मेरे मन में भी तुम्हारे लिए फीलिंग्स हैं, मैं तुम्हारी और बहुत आकर्षित हूँ, तुम बहुत अचे हो,

में- फिर कन्फूसिओं क्या है?

अंजलि- प्यार को लेकर.

में- क्यों मतलब क्या कोई और है तुम्हारी ज़िन्दगी में,

अंजलि- नहीं, अगर होता तो मैं तुम्हारे साथ क्यों आती.

में- तो क्या कन्फूसिओं है, मुझे तुमसे प्यार है तुम्हे मुझसे.

अंजलि- यही तो कर्मा मेरी सोच न प्यार को लेकर थोड़ी अलग है, प्यार मेरे लिए बहुत बड़ी चीज़ है, मेरे मन को विश्वास नहीं हो रहा की तुम जो मुझसे करते हो वो प्यार है सिर्फ आकर्षण नहीं.

उसकी इस बात पर तो मैं भी सोच में पद गया, कहीं वो सच तो नहीं कह रही, क्या ये सिर्फ आकर्षण है. पर मैं जनता था जैसा उसके लिए मैं महसूस करता था वैसा किसी और के लिए नहीं, आकर्षण के लिए और भी कई लड़कियां है नीतू से लेकर पल्ली लाडो, और भी पर फिर भी इसकी एक झलक के लिए मन पागल रहता है तो सिर्फ ये आकर्षण तो नहीं होगा,

में- मुझे नहीं पता यार कैसे समझों, पर जैसा तुम्हारे लिए महसूस करता हूँ आज तक किसी के लिए नहीं किआ, ये सिर्फ आकर्षण नहीं हो सकता, इतना पक्का कह सकता हूँ उससे कहीं ज़्यादा है.

अंजलि- हो सकता है तुम बिलकुल सही हो, पर तुम hi बताओ मैं अपने मन को कैसे यकीन दिलों.

में- तुम बताओ मैं क्या करूँ तुम्हे यकीन दिलाने के लिए मैं सब करने को तैयार हूँ,

अंजलि- सबसे पहले तुम मुझे जान लो, फिर अपने मन से पूछना की तुम्हे मुझसे प्यार है या नहीं,

में- मुझे प्यार है.

अंजलि- कर्मा मैं वर्जिन नहीं हूँ, कुंवारी नहीं हूँ.

में- तो क्या हुआ मैं भी नहीं हूँ.

वो मेरी बात सुन थोड़ा सोच में पड़ी और बोली- अब थोड़ी देर सिर्फ मेरी सुन्ना.

मैंने हाँ में सर हिलाया

अंजलि - देखो मेरे घर में, मम्मी पापा, मेरा बड़ा भाई भाभी और मैं हूँ, मेरे पापा टीचर हैं तुम जानते hi हो, पर हमारे परिवार का कोई रिश्तेदार नहीं है, क्यूंकि मेरे पापा और मम्मी ने भाग कर शादी की थी, इसलिए दोनों के hi घरवालों ने दोनों से रिश्ता तोड़ दिया, मेरे भैया ने भी लव मैरिज की है, और वो भाभी के साथ शहर में रहते हैं,

वहीं पर मैं भी अपने कॉलेज की पढाई कर रही थी, जहह नीतू अपने मां के यहाँ रहती थी, इसी तरह हूँ दोनों मिले फिर पता चला हम दोनों के गाओं कितने पास पास हैं, और हमारी दोस्ती हो गयी,

में- ाचा,

अंजलि- ये सब तो हुई बाहरी बातें, पर अब कुछ अंदर की बातें, मुझे फिल्में देखना बहुत पसंद है, घूमना फिरना, नयी नयी चीज़ें खाना, पर इनसब से भी ज़्यादा कुछ और चीज़ें पसंद है.

में- ाचा क्या?

अंजलि ने एक लम्बी सांस ली और कुछ सोचा जैसे वो कुछ फैसला कर रही हो मन hi मन फिर बोली- सेक्स की बातें और सेक्स,

मैं ये सुनकर चौंक गया, उसने मेरा हैरानी भरा चेहरा देखा और बोली- ऐसा चेहरा ममत बनाओ मैं भी तो इंसान hi हूँ,

में- हाँ हाँ नहीं कोई चेहरा नहीं बना रहा.

अंजलि- फिर ठीक है सुनो, मुझे सेक्स की बातें करना, गन्दी गन्दी बातें करना बहुत पसंद है, कभी कभी गन्दी फिल्म देखना और फिर उन्हें देखते हुए खुद को शांत करना.

उससे ये सब सुनकर मैं हैरान हो रहा था ये सुनकर नहीं, की वो ये सब करती है, क्यूंकि सब hi ऐसा करते हैं पर वो मुझे ऐसे अपने बारे में बता क्यों रही है ये सोच कर हैरान हो रहा था,

अंजलि- तुम्हे पता है मेरी और नीतू की दोस्ती इतनी अछि कैसे है इसी वजह से हम बहुत च सेक्स की बातें करते हैं. ाचा तुम पूरा खुल के सुन्ना चाहोगे या ऐसे hi?

में- पूरा खुलकर.

अंजलि मुस्कुराई और बोली- हम दोनों मतलब मुझे और नीतू को चुदाई की बातें करना गन्दी गन्दी बहुत पसंद है.

उसके मुँह से चुदाई शब्द सुनकर तो मेरा लुंड hi सिहरने लगा,

अंजलि- और हमने साथ भी गन्दी फिल्में देखि हैं, और एक दुसरे के सामने अपने अपने को शांत भी किआ है, अरे खुल के बोलना है न, हाह अपनी अपनी छूट को शांत किआ है,

मैं उसे देखकर मुस्कुराने लगा,

अंजलि - मुझे पता है तुम्हे थोड़ा अजीब लग रहा होगा क्यूंकि तुम नीतू को बहन मानते हो पर मेरे लिए बताना ज़रूरी है सब,

में- बताती रहो तुम.

अंजलि- हम दोनों ने साथ खूब मज़े किये हैं, जैसे गन्दी फिल्में देखना गन्दी बातें करना और एक दुसरे के सामने छूट में उंगली करना, और..

में- और ?

अंजलि - और एक दुसरे के साथ लेस्बियन सेक्स भी किआ है.

मैंने कुछ सोचा और बोलै- तुम तो खुल कर बोलने वाली थी न,

अंजलि मुस्कुराई और बोली- लेस्बियन चुदाई की है, एक दुसरे की छूट गांड सब छाती है, और खूब मज़ा किआ है बहुत मज़ा आता है उसके साथ, उसी ने मुझे खीरा और गाजर इस्तेमाल करना सिखाया है.

ये कहकर वो हंसने लगी फिर बोली- तुम्हारी बहन जितनी सीढ़ी लगती है उतनी है नहीं, वैसे एक बात बताउंगी तो तुम्हारे कहीं भाव न बढ़ जाएं?

में- कौनसी बात.

अंजलि- यही की तुम्हे सोचकर भी मैंने कई बार उंगली की है अपनी छूट में,

मैंने ये सुना और खुश हो गया, मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी,

अंजलि- अरे वाह शर्माना तो देखो, वैसे इससे भी बड़ी बात एक और है..

में- इससे बड़ी बात क्या?

अंजलि- तुम्हारी नीतू ने भी तुम्हे सोच कर मेरे सामने उंगली की है अपनी छूट में,

में- अरे,

Anjali-kaha था न तुम्हारी बहन इतनी भी सीढ़ी नहीं है, वैसे तुम्हारे लिए तो ख़ुशी की बात होनी चाहिए की इतनी सुन्दर लड़की तुम्हे सोच कर छूट में ऊँगली कर रही है,

मैंने ये सुनकर मुस्कुरा कर हाँ में सर हिलाया..

अंजलि- ये थी मेरी साडी कहानी, अब तुम्हारे मन में ये सवाल होगा की मैंने तुम्हे ये सब क्यों बताया है न.

में- हाँ,

अंजलि- इसका जवाब भी वही है जो तुम्हारे प्यार वाली बात का है.

में- मतलब.

अंजलि- मतलब ये की मैं तुमसे प्यार करती हूँ, मेरे मन में भी तुम्हारे लिए फीलिंग्स हैं.

ये सुनकर तो मैं गड गड हो गया लगने लगा की साडी दुनिया मिल गयी है, मैंने आगे झुक कर उसे बाहों में भर लिए तो वो भी मुझसे चिपक गयी, हम काफी देर यूँ hi गले मिले रहे फिर अलग हुए.

में- मई. बता नहीं सकता की तुम्हे पाकर मैं कितना खुश हूँ लग रहा है की मुझे हर ख़ुशी मिल गयी है, सब मिल गया है.

अंजलि ने ये सुनकर मेरा हाथ थामा और बोली- कर्मा मैं तुमसे प्यार करती हूँ, ये सच है पर हम मिल गए हैं ऐसा अभी कहना गलत होगा.

में- मतलब,

मैंने हैरानी से पूछा,

अंजलि- मतलब ये की मैं तुमसे प्यार करती हूँ, पर क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?

में- हाँ बहुत करता हूँ, तुम सोच भी नहीं सकती उतना.

अंजलि- देखो कर्मा प्यार को लेकर न मेरी सोच थोड़ी अलग है, जैसे दुनिया मान लेती है मेरा मन नहीं मानता, मुझे मेरे मन को यकीन नहीं होता तो मैं तुम्हारे साथ भी नहीं आ सकती चाहे मैं तुमसे कूटना भी प्यार कर लूँ.

में- कैसे यकीन दिलों तुम्हारे मन को बताओ न कोई तरीका होता दिखने का तो ज़रूर दिखा देता.

अंजलि- तुम्हे पता है मैंने अपने बारे में वो सब अजीब सी बातें अपने रहस्य क्यों बताये, ये सब क्यों बताया जो अक्सर लोग छुपा कर रखते हैं.

में- क्यों?

अंजलि- क्यूंकि मेरे लिए प्यार यही है, मेरे लिए प्यार का मतलब है सच, जिससे प्यार करते हो वो तुम्हे शीशे की तरह जाने कुछ न छुपा हो, कोई छिपी हुई बात नहीं कोई झूठ नहीं सिर्फ सच और प्यार,

मैं उसकी बात सुन चुपचाप उसे देखने लगा,

अंजलि- इसीलिए मैंने तुम्हे अपने बारे में सब कुछ बता दिया बिना इस दर से की सुनने के बाद तुम मेरे बारे में क्या सोचोगे, कहीं गलत तो नहीं समझने लगोगे, कहीं मुझसे प्यार तो दूर की बात है कहीं सुनकर बात भी न करो,

इन सब के बाद भी मैंने तुम्हे सब बताया क्यूंकि मेरे लिए सच और प्यार दोनों बराबर हैं, मैं तुमसे बहुत प्यार करते हुए भी सच तुमसे दूर रह सकती हूँ, पर झूठ बोलकर बात छिपा कर तुम्हारे साथ नहीं,

मैं उसकी बात सुन पूरा हिल गया था, मैंने अपने होंठ उसके होंठों से पल भर को मिलाये और फिर बोलै- तुम बहुत अछि हो अंजलि और दूर जाना तो दूर मेरे मन में तुम्हारे लिए प्यार और सम्मान दोनों और बढ़ गए हैं.

अंजलि- तुम भी बहुत अचे हो और इसीलिए मुझे तुमसे प्यार है, पर अब ये प्रश्न तुमसे है क्या तुम्हे मुझसे प्यार है,

में- हाँ बिलकुल है,

अंजलि- पर कैसे कह सकते हो, की ये प्यार है सिर्फ आकर्षण नहीं, आकर्षण भी तो हो सकता है,

उसकी बात सुन मैं सोच में पद गया और सोचने लगा क्या ये सही बोल रही है, कहीं अंजलि को लेकर मेरे मन में सिर्फ आकर्षण तो नहीं... मैंने कुछ सोचा और बोलै- की नहीं सिर्फ आकर्षण नहीं है, जैसा तुम्हारे बारे में महसूस करता हूँ आज तक कभी किसी के बारे में नहीं किआ, दुनिया में बहुत आकर्षक लड़कियां हैं, पर मेरे लिए तुमसे सुन्दर कोई नहीं है. और सच ने ये प्यार है आकर्षण नहीं.

अंजलि- ावववववव, पर ये फ़िल्मी बातों से मैं नहीं मैंने वाली, ये सब सुनने में बहुत ाचा लगता है पर इसमें वो नहीं है जो मेरे लिए प्यार जितना hi ज़रूरी है.

में- क्या, ाचा तुम hi बताओ, कैसे तुम्हे मैं अपनी बात बता सकता हूँ, कैसे यकीन दिला सकता हूँ की मेरा प्यार सच्चा है,

अंजलि- बहुत आसान है, सच बताकर, जैसे मैंने तुम्हे अपने जीवन के बारे में सब कुछ सच सच बता दिया तुम भी मुझे बतादो..

उसकी बात सुनकर तो मैं पूरा हिल गया, मेरा दिमाग घूमने लगा की अब क्या बोलूं, कैसे सच बता दूँ? क्या क्या सच बता दूँ?

मुझे चुप देख कर वो बोली- मुझे पता है इतना आसान नहीं होगा, पर कर्मा मेरे लिए प्यार यही है की हमारे बीच कुछ भी छुपा न हो, अछि बुरी सब बातें एक दुसरे को पता हो, अगर तुम ये कर सकते हो, तो मैं तुम्हारे साथ हूँ, अगर नहीं तो हम दोस्त रह सकते हैं,

इसके बाद भी मैं कुछ नहीं बोलै और सोचने में लगा रहा:

अंजलि- तभी कहते हैं प्यार करना बहुत आसान होता है, सच्चाई से प्यार निभाना बहुत मुश्किल... पर करना मुझे सिर्फ सच चाहिए, अभी तुम मुझसे कोई भी कहानी बना कर बोल्दो की ये सच है तो मैं अभी तुम पर यकीन भी कर लुंगी, पर जिस दिन मुझे कुछ ऐसा पता चला की तुमने मुझसे कुछ छिपाया या झूठ बोलै उस दिन से समझना की अंजलि तुम्हारे लिए है hi नहीं, और यही तुम्हारे लिए भी है अगर तुम्हे मेरे बारे में कुछ ऐसा पता चले जो मैंने नहीं बताया या छुपाया तो तुम मुझे अपनी ज़िन्दगी से निकल देना.

मैं उसकी बात सुनकर हैरान भी था परेशां भी और उसके लिए प्यार भी बढ़ रहा था.

अंजलि- और मैं तुम्हारे साथ जबरदस्ती नहीं कर रही की तुम सच बोलो hi, मैंने बस अपने मन की बात बताई क्या प्यार क्या है मेरे लिए और उससे काम में मैं नहीं रह सकती तो अगर चाहो तो हम घर चल सकतव हैं. अगर तुम अभी तैयार नहीं हो तो कोई बात नहीं, समय लो और जब ठीक लगे तो बता देना और कभी नहीं भी बता सको तो भी कोई बात नहीं,

ये कहकर उसने मेरी होंठों को चूम लिए पर इस बार मैं उसके चूमने का जवाब भी नहीं दे पाया,

अंजलि- मैं तुमसे प्यार करती हूँ, करती रहूंगी, अब घर चलें.

मैंने सर हिलाकर हाँ में जवाब दिया और गाडी लेकर निकल गया, रस्ते भर हमारी ना के बराबर hi बात हुई, उसके अड्डे पर पहुँच कर मैंने गाडी रोक दी तो उसने मुझे गले से लगाया और मुस्कुरा कर चली गयी, जैसे जैसे उसे जाता देखा मेरा मन भरी होता चला गया, साला समझ नहीं आ रहा था क्या हुआ क्या करूँ और क्या होगा, जब वो आँखों से ओझल हुई तो गाडी मोदी और सीधा बाघ में आया और गाडी कड़ी कर घर जाने का मन नहीं हुआ तो सीधा तुबेल के पास गया कपडे उतरे और तुबेल चालू कर उसके नीचे बैठ गया, ठंडा पानी बदन को तो ठंडा कार्नर लगा पर मन ने जो इतना तूफ़ान आया था वो शांत नहीं हो रहा था, मैं नाहा hi रहा था तो मौसा और पापा आये उन्होंने कुछ बात की तो माइनर जवाब दिया पर शायद उन्हें भी समझ आ गया की शायद कुछ बात है मेरे मन में, पर उन्होंने भी ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया, मैं अकेले में काफी देर बैठे बैठे सोचता रहा पर कुछ नतीजा hi नहीं निकल प् रहा था न कोई जवाब निकलता,

इतने में नीतू का फ़ोन आया और बोली - कहाँ हो तुम?

में- बाघ में.

नीतू- अकेले में मिलो कहीं.

में- यहीं पीछे तुबेल पर आजा कोई नहीं है .

कुछ देर बाद नीतू आई और मुझे बैठा देखा और बोली- क्या हुआ अंजलि के साथ.

में- कुछ नहीं यार,

नीतू- कुछ तो हुआ होगा, सही सही बताओ, मैंने अंजलि से पूछा तो उसने बोलै की तुमसे बात करूँ तुम्हे मेरी ज़रुरत है.

में- यार नीतू बहुत गड़बड़ हो गयी है,

नीतू- क्या हुआ पूरी बात बताओ...

मैंने उसे अंजलि और अपने बीच हुई पूरी बात बतादि,

नीतू- अरे ये कैसी उलझन है, अब क्या होगा.

में- वही तो समझ नहीं आ रहा क्या करूँ, तुझे पता है कैसा सच है हमारा, सुनकर वो क्या करेगी यार बात तो दूर शकल भी न देखे.

नीतू- कोई नई थोड़ा समय लेकर कुछ सोचते हैं अव्हे से.

में- हाँ.

नीतू- अगर मुझसे बात करनी हो या कुछ और काम हो तो बुला लेना.

में- ठीक है,

इसके बाद वो घर चली गयी और मैं वहीं बैठा रहा, सोचता रहा देखते देखते शाम हो गयी माँ का फ़ोन आया- कहाँ है पूरा दिन बीत गया कुछ खाया भी नहीं,

मैंने उन्हें बोलै- आता हूँ, और फिर घर चला गया,

घर पर भी मैं ज़्यादा तर शांत रहा जिस पर घरवालों ने भी ध्यान दिया, खाना पीना हुआ और उसके बाद मैं छत पर जाकर टहलने लगा,

इतने में hi कोई छत पर आया, मैंने सोर घुमाकर देखा तो मौसा थे, मेरे पास आये और बोले- क्या हुआ तुझे जबसे आया है बुझा बुझा सा है.

में- नहीं नहीं कुछ नहीं मौसा जी ऐसे hi,

मौसा- अब मुझसे भी छुपायेगा, मन में कोई बात है बता, बात करने से मन हल्का हो जाता है.

में- अरे बस मौसा ऐसे hi थोड़ा सा मन उदास है बस और कुछ नहीं..

मौसा- तो क्यों उदास है क्या बात हुई है वो बता न, दोस्त समझ मुझे अपना,

मैंने भी सोचा अब परिवार से छुपा कर क्या hi होगा, और मैंने उन्हें अपनी पूरी परेशानी बताई,

मौसा ने बात सुनी और फिर कुछ सोच कर बोले - तू सच में इस लड़की से बहुत प्यार करता है?

में- हाँ मौसा, उसके बारे में जैसा महसूस होता है आज तक नहीं हुआ, अगर सिर्फ आकर्षण होता तो चुदाई के लिए कितनी लड़कियां हैं पर इसके लिए मन से कुछ और hi भाव आते हैं.

मौसा- हाँ फिर तो प्यार hi है मैं पक्का बता सकता हूँ.

में- तभी तो फंस गया हूँ न मौसा समझ नहीं आ रहा क्या करूँ.

मौसा- वैसे एक बात कहूं, तुझसे सुनकर ये तो पता चल रहा है की लड़की बहुत अछि और सुलझी हुई है, और सच्ची भी,

में- यही तो उसकी सच्चाई hi तो दुश्मन बानी पड़ी है, या हमारी चुदाई.

मौसा- देख बीटा अब हमारा परिवार जैसा है वैसा है सबसे अलग है पर देखता है सब कितने खुश हैं कितना प्यार है सबके बीच, अब ये चुदाई की वजह से है तो चुदाई hi ठीक, तेरी मौसी को इतना खुश कभी नहीं देखा और सही कहूं तो मैं भी बहुत खुश हूँ. चुदाई से तूने सबको कितना जोड़ दिया है.

में- वही तो मौसा, मुझे भी परिवार ऐसे hi पसंद है.. यकीन नहीं हो रहा.

मौसा- क्या?

में- यही की जिस चुदाई से इतने अचे से लोग जुड़े वही चुदाई मेरे प्यार के बीच आ जाएगी.

इतने में पीछे से मां आ गए तो हम लोगो ने विषय बदल दिया और फिर ऐसे hi उनसे बातें करते हुए नीचे आ गए,

सब लोग अपने अपने कमरों में चले गए और मैं भी बिस्तर पर लेता था, आज नाना से भी बात नहीं हुई और वो भी सो चुके थे, तभी मेरे फ़ोन पर मौसा का मश्ग आया की अगर जाग रहा है तो अपने मम्मी पापा के कमरे में आ.

मैं उठा देखा नाना सो रहे हैं तो उठकर कमरे से निकला और दरवाज़ा फेर कर फिर आंगन से होकर मम्मी पापा के कमरे का दरवाज़ा धकेला तो खुल गया मैंने अंदर जाकर दरवाज़ा बंद काट दिया, देखा सब लोग बिस्तर पर बैठे थे, पर हैरानी की बात ये थी की सबने कपडे पहने हुए थे और कुछ नहीं कर रहे थे, नहीं तो रात को बंद कमरे में बहुत कुछ होता होता है.

माँ- आ लल्ला बैठ..

माँ ने अपने पास बिस्तर पर इशारा किआ तो मैं बैठ गया.

पापा- देख तेरी परेशानी के बारे में शैलेश बाबू ने हमें बताया.

में- अरे तुम सब लोग बेकार में इतने परेशां हो रहे हो सब ठीक है.

मौसी- ाचा सब ठीक है तो तेरा मुँह क्यों उतरा है.

मौसा- अरे वैसे उसकी फोटो तो दिखा कैसी दिखती है...

मैंने सबको फोटो दिखाई तो सब बड़े खुश हुए उसे देखकर..

पापा- लड़की तो बड़ी सुन्दर है.

माँ- हाँ, इतनी प्यारी है और जैसा बताया की अपने कर्मा से प्यार भी करती है,

मौसी- अगर ये बहु बनकर आएगी तो बड़ा ाचा होगा.

मौसा- अरे यहाँ इतना परेशां है ये तुम हो की बहु बना रही हो.

मौसी- अरे कर्मा और हम सब यही चाहते hain...ki यही बहु बने इस घर की.

पापा- अगर उसकी तरफ से देखा जाए तो वो बिलकुल सही है, वो प्यार करती है पर उसे पता है सिर्फ प्यार से जीवन नहीं बीत सकता, उसमे दो लोगो के बीच सच्चाई होनी चाहिए.

माँ- सबसे अछि बात उसने सामने से सब कुछ कहा और इसके लिए हिम्मत चाहिए,

मौसी- सही में ऐसी जीवन साथी कर्मा को मिलेगी तो इसका जावन बन जायेगा,

मौसा- अरे माना लड़की अछि है बहुत अछि है पर अपनी परेशानी तो देखो, हमारा कर्मा कितनी दुविधा है तुम लोग तो उसकी तारीफ़ करके इसे और परेशां कर रहे हो,

में- नहीं मौसा जी ऐसा नहीं है वो तारीफ लायक है इसलिए हो रही है उसकी तारीफ़,

Mausi-phir अब क्या करें?

में- करना क्या है कुछ नहीं,

माँ- लल्ला देख अगर तुझे अंजलि hi चाहिए तो हम ये सब बंद कर सकते हैं, बिलकुल आम परिवार की तरह रह लेंगे जैसे पहले रहते थे,

पापा- हाँ तेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी.

मौसा- ये सही कहा, जितना प्यार तू उससे और वो तुझसे करती है उससे ज़्यादा हम लोग तुझसे करते हैं और तू खुश रहे इसके लिए सब करने को तैयार हैं

मौसी- बिलकुल सही...

में- अरे नहीं, मौसी माँ पापा मौसा माना मैं उससे प्यार करता हूँ पर मेरे लिए तुम लोग दुनिया में सबसे पहले हो, तुम लोगो की ख़ुशी, प्यार सब कुछ hi मेरे लिए दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण है, सिर्फ उसके लिए मैं तुम सबकी ख़ुशी को नहीं त्याग सकता.

मौसी- लल्ला पर हमसे तू उदास नहीं देखा जाता, हम चाहते हैं तू खुश रहे.

में- मौसी मैं खुश हूँ, अगर तुम लोग खुश हो तो मैं खुश हूँ, बस तुम लोग वो करो जिससे तुम्हे ख़ुशी मिलती है,

मौसी- पक्का,

में- हाँ,

मौसी- अब तू खुद से बोल रहा है तो ठीक है फिर वही करती हूँ.

ये कहकर मौसी ने मेरा पजामा नीचे खिसका कर मेरा लुंड बहार निकल लिए जो की अभी सोइ अवस्था मैं था और उसे सहलाते हुए बोली- मेरी ख़ुशी तो ये है...

मौसी की इस बात पर सब हंसने लगे और मेरे चेहरे पर भी हंसी बिखर गयी,

मौसी मेरा लुंड चूसने लगी,

पापा- अरे तुम भी थोड़ा अपनी ख़ुशी पर ध्यान दे दो,

पापा ने अपने लुंड की और इशारा करते हुए माँ से बोलै तो माँ भी पापा का लुंड चूसने लगी.

मौसा के सामने उनकी पत्नी का पिछवाड़ा था तो मौसा ने मौसी की साड़ी कमर तक उठादि और अपना चेहरा उनके चूतड़ों के बीच घुसा कर चाटने लगे,

मैं सबको देखने लगा, मौसी की म्हणत से मेरा लुंड भी पूरा तन के खड़ा हो चूका था, मैंने पूरे कमरे में आँखें फिरा कर देखा और सोचने लगा, कितना प्यार करते हैं ये लोग मुझसे, और सिर्फ अपनी ख़ुशी या अंजलि के लिए मैं इनकी ख़ुशी को नहीं नकार सकता, ये लोग मेरे लिए सबसे पहले हैं, चाहे इसके बदले मुझे अंजलि को hi न भूलना पड़े, मैंने सोचा अब लुंड खड़ा hi है और यही करना है तो क्यूना अचे से ख़ुशी से किआ जाये...

खैर मौसी ने मेरा लुंड मुँह से निकला और बोली- जा अब घुसा दे इसे अपनी माँ की गांड में...

कुछ देर बाद कमरे का नज़ारा कुछ ऐसा था मैं पूरा नंगा था बिस्तर पर एक करवट पर लेता था और मेरे आगे माँ भी पूरी नंगी थी मेरा लुंड माँ की गांड में अंदर बहार हो रहा था, बगल में पापा खड़े थे और माँ उनका लुंड चूस रही थी.





इधर मौसा अपनी बीवी को घोड़ी बनाकर उनकी गांड मार रहे थे, माँ की गरम गांड मुझे हमेशा की तरह hi जन्नत जैसा सुख दे रही थी और मैं सोच रहा था मैं इस आनंद को कैसे छोड़ सकता हूँ, इस मज़े को कैसे भुला सकता हूँ.

वैसे मज़े में सिर्फ मैं hi नहीं था, पास hi के घर में अपने बिस्तर पर लेते दीनू चाचा भी थे, जो की अपनी पत्नी का इंतज़ार कर रहे थे की आज उनकी पत्नी क्या नया खेल खिलाएगी उन्हें, उनका इंतज़ार भी जल्दी ख़तम हो गया जैसे hi रज्जो चची सिर्फ एक पेटीकोट और ब्लाउज पहनकर अंदर घुसी,

घुसते hi उन्होंने दरवाज़ा फेरा और फिर ब्लाउज और पेटीकोट को वहीं उतर कर पूरी नंगी हो गयी, दीनू चाचा ये देखकर खुश हो गए, रज्जो बिस्तर पर आई और उनके बगल में लेटकर इनका लुंड पकड़ कर मुठियाते हुए बोली- अब बोलो राजा..

दीनू- हाय तुम बोलो न क्या खेल है आज का..

रज्जो- जो तुम चाहो मेरे राजा, खिलाडी तो तुम हो.

दीनू- हम तो बस खिलाडी हैं बॉल तो तुम्हारे पास हैं न,

दीनू ने रज्जो की चूचियां दबाते हुए कहा,

रज्जो- तो करो न अपने इस डंडे से चोट बॉल पर..

दीनू- आज मूड में लग रही हो.

रज्जो- मूड में तो इसे देखते hi आ जाती हूँ.

रज्जो ने लुंड मुठियाते हुए कहा

दीनू- वैसे आज का कोई प्रोग्राम नहीं है क्या?

रज्जो- ये पूछना छह रहे हो न की आज किसे छुड़वाने वाली हूँ तुमसे.

दीनू- अब तुम तो हमारी बात बिना कहे समझ जाती हो.

रज्जो- कल अपनी बहन छोड़ने में मज़ा आया?

दीनू- हाँ बहुत ज़्यादा तभी तो आज का प्रोग्राम पूछ रहे हैं.

रज्जो- आज का प्रोग्राम तुम्हारी पसंद पर है जिसे तुम चाहो उसे ले आएंगे.

दीनू- अरे नहीं तुम अपनी मर्ज़ी से करती हो तो मज़ा आता है,

रज्जो- ाचा आज कुछ अलग पूछती हूँ तुमसे.

दीनू- हाँ पूछो न.

रज्जो- अब तक तुमने जो भी पसंद बताई वो सब बड़ी बड़ी मतलब हमारे उम्र की औरतें हैं, तुम्हे जवान में कोई नहीं पसंद?

दीनू- पसंद हैं बिलकुल पसंद है.

रज्जो- कौन कौन तनिक बताओ तो .

दीनू- अरे वो लाला की बहु है न दुकान वाले की, बड़ी गदराई है यार.

रज्जो- अरे हाँ दूध दिखा दिखा कर सामान बेचती है.

दीनू- वही वाली.

रज्जो- और?

दीनू- और मंजू भाभी की बहु, वो. भी बड़ी मस्त है.

रज्जो- ाचा उसके चाचा ससुर लगते हो तुम.

दीनू- तो क्या हो गया, बहु का तो फ़र्ज़ है ससुर की सेवा करना,

रज्जो- हाँ ये तो है, ाचा और लड़कियों में, जवाब कुंवारी लड़कियों में कौन पसंद है?

दीनू- जवान में तो चोदामपुर में बहुत कच्ची कलियाँ हैं.

रज्जो- तुम्हे किस काली पर बैठना है ये बताओ.

दीनू- कई पसंद हैं एक वो सत्तू की बहन उस पर बड़ी जवानी चढ़ रही है सही जगह स्व भर रहा है उसका बदन.

रज्जो- और?

दीनू- और कजरी भी बड़ी सही थी पैट वो तो चली गयी ब्याह करके.

रज्जो- और कोई...

दीनू- अरे हाँ पल्ली भी तो बड़ी मस्त है, उसका बदन भी भर गया है बहुत.

रज्जो- उसके बाप जैसे हो tum.chod पाओगे?

दीनू- हाँ बिलकुल और क्या हुआ यार जवान लड़की का बदन कितना मस्त होता होगा यार, वो भी पल्ली जैसी भरे बदन वाली हो तो क्या hi कहने.

रज्जो- ाचा अगर जवान लड़की हो पल्ली की तरह मस्त तो तुम उसे छोड़ लोगे चाहे वो कोई भी हो,

दीनू- बिलकुल यार क्यों नहीं, जवान लड़की को छोड़ने का मौका कोई पागल hi जाने देगा, मैं तो उसे खूब मज़े से लिटा लिटा कर छोडूंगा,

रज्जो- ठीक है फिर आज तुम्हे जवान लड़की का hi स्वाद चखती हूँ बस आँखें बंद करो थोड़ी देर, ऐसा करो कम्बल से सर धक्लो पर पेट से नीचे के हिस्से को खुला छोड़ दो.

दीनू- ठीक है मेरी जान, जल्दी लाओ आज तो जवान छूट का मज़ा मिलेगा,

रज्जो- हाँ पर ये देख कर की कौन है वो चौंक कर पीछे न हैट जाना,

दीनू- अरे नहीं लुंड एक बार घुस गया तो फिर काम करके hi निकलेगा,

रज्जो- ठीक है तो चलो अपना चेहरा कम्बल से धक् लो और जब तक मैं न बोलूं हटाना मत...

दीनू- अरे यार चेहरा ढांकना पड़ेगा.

रज्जो- जवान छूट चाहिए की नहीं.

दीनू- ठीक है ढंकता हूँ.

दीनू ने चादर से चेहरा ढँक लिए बाकि बदन पूरा नंगा था, उन्हें कमरे में थोड़ी हरकत होती हुई लगी, रज्जो कुछ कर रही थी कुछ पल बाद फिर उन्हें बिस्तर पर हरकत महसूस हुई और फिर उनके लुंड पर एक गरम जीभ का एहसास हुआ, वो सिहर उठे, और फिर उनका लुंड गुप्प से मुँह में था, उन्हें मुँह की गर्मी में मज़ा आने लगा, पर ये मज़ा ज़्यादा देर नहीं चला क्यूंकि कुछ पल बाद hi लुंड को मुँह से निकल लिए गया और फिर से उन्हें बिस्तर पर थोड़ी हरकत महसूस हुई और फिर से अपने लुंड पर हाथ, अगले hi पल टोपा किसी गरम चीज़ से छुआ तो वो समझ गए की ये छूट है, वो सिहर ने लगे और चेहरे से चादर हटाने को हुए तो रज्जो ने उन्हें रुकने को कह दिया, उन्हें फिर अपने लुंड पर छूट का दबाव महसूस हुआ और उनके लुंड का टोपा छूट में घुस गया, और फिर बस वहीं रुक गया,

दीनू तो मज़े से सिहरने लगे, और सोचने लगे सच में रज्जो आज कुछ नया hi खेल खेल रही है, छूट भी बिलकुल कासी कासी लग रही है, बहुत मज़ा आ रहा है, नया नया सा एहसास हो रहा है,

दीनू- यार अब तो चादर हटाने दो,

रज्जो- हाँ हटालो.

दीनू ने तुरंत चेहरे से चादर हटाई और जो देखा उसे देख कर उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी, उनके ऊपर उनकी छोटी बेटी लाडो पूरी नंगी बैठी है उनके लुंड का टोपा उसकी छूट में समाया हुआ है, उनका तो सर चकराने लगा ये क्या हो रहा है वो कभी लाडो को देखते तो कभी उसकी छूट में फंसे अपने लुंड को और फिर बगल में बैठी रज्जो को, वो कुछ बोलना छह रहे थे पर मुँह से शब्द निकल hi नहीं रहे थे, उनका गाला सूख रहा था, अपने पति की हालत देख रज्जो बोली- देखलो राजा तुम्हारा लुंड एक मस्त जवान छूट के द्वार में घुसा हुआ है, अब सब तुम्हारे ऊपर है लेना है जवान छूट का स्वाद या नहीं,

दीनू- पर रज्जो ये तो लाडो....

इतने में लाडो अपनी पापा की आँखों में देखते हुए बोली- पापा कितना गरम लुंड है तुम्हारा अह्ह्म्म अब छोड़ो न...

दीनू लाडो से ये सुनकर बिलकुल स्तब्ध रह गए और चुप हो गए कुछ देर कोई कुछ नहीं बोलै, न रज्जो, न लाडो न hi दीनू, लाडो वैसे hi सिर्फ अपने पापा के लुंड का टोपा लिए हुए उनके ऊपर बैठी रही, चाहती तो वो नीचे होकर पूरा लुंड ले सकती थी पर आगे बढ़ने का फैसला वो अपने पापा के ऊपर छोड़ना चाहती थी,

दीनू कुछ देर शांत रहे फिर लाडो को अपनी नंगी कमर पर उसके पापा के हाथ महसूस हुए और अगले hi पल नीचे से एक धक्का और उसके पापा का लुंड आधा उसकी छूट में समां गया,

लाडो- अह्हह्ह्ह्ह पापाहहहहहहह ुहममम.

दीनू- लाडुआहहह.

ये कहते हुए दीनू ने धक्का लगाकर पूरा लुंड बेटी की छूट में घुसा दिया,

रज्जो ने भी देखा की उनके पति का लुंड उनकी बेटी की छूट में पूरा समां गया है तो उनकी छाती को सहलाते हुए बोली- ले लो मेरे राजा जवान छूट का मज़ा, बेटी की जवान छूट से बढ़िया किसका स्वाद होगा,

दीनू- ुहम्म्म्म हॉँण्णन अह्ह्ह्हह्हह ...

ये कहते हुए दीनू नीचे से धक्के लगते हुए अपनी बेटी को छोड़ने लगे, लाडो अपने पापा के हर धक्के पर सिसक रही थी,

लाडो- ओह्ह्ह पापा अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है, ुहम्म्म्म कितना गरम लुंड है तुम्हारा,

दीनू भी अब थोड़ा खुल चुके थे और बेटी का साथ देते हुए बोले- अह्हह्ह्ह्ह बिटिया तेरी छूट भी कितनी गरम है,

दीनू बेटी के चिकने बदन पर हाथ फिरते हुए बोले बात बेटी की चुदाई देख रज्जो अपनी छूट मसल रही थी, कभी लाडो अपने चूतड़ों को अपने पापा के लुंड पर घूमती तो कभी दीनू नीचे से सटासट धक्के लगते हुए बेटी को छोड़ते





रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह छोड़ो अपनी बेटी की गरम कासी हुई छूट को, आज नहीं जवान छूट का स्वाद मिला है मेरे राजा खुल कर लो..

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न मेरी लाडो मेरी बिटिया यह सोचा नहीं था की कभी ये मौका भी आएगा आह्ह्ह्ह पर मज़ा आ रहा है,

लाडो- अह्हह्ह्ह्ह पापाहहहहहहह मुझे भी अह्हह्ह्ह्ह पापा मुझे ऐसे hi लाड करूऊ अह्ह्ह्ह,

लाडो अपने पापा के बदन पर आगे झुक गयी और फिर दीनू अपनी बेटी के होंठों को चूसने से रोक नहीं पाए, और बड़ी कामुकता से बाप बेटी एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे,

दीनू अपनी बेटी जैसी जवान और सुन्दर लड़की को छोड़ते हुए जन्नत का मज़ा लूट रहे थे और उन्हें यकीन नहीं आ रहा था की वो सगी बेटी को छोड़ रहे हैं जो उनके मज़े को दोगुना बढ़ा रहे थे, इस मज़े और उत्तेजना को दीनू ज़्यादा देर सह नहीं पाए और अपनी उत्तेजना के शिखर पर पहुँच गए और झड़ने लगे, बेटी की छूट को अपने रास से भरने लगे, वहीं लाडो भी पापा के लुंड पर झाड़ रही थी, झड़ते हुए वो अपने पापा के सीने पर गिर गयी तो दीनू ने भी उसकी पीठ को सहलाते हुए उसे खुद दे चिपका लिया.

चुदाई का तूफ़ान शांत हुआ तो दीनू ने नज़रें ुरः कर रज्जो को देखा जो उन्हें hi देख रही थी और बोले- ये क्या करवा दिया तुमने हमसे, पाप हो गया.

रज्जो- क्यों बेटी की जवान छूट में मज़ा नहीं आया,

दीनू- यही तो दर है रज्जो.

रज्जो- कैसा दर?

दीनू- यही की मज़ा आया और अब बिना इसे चोदे रह भी बही पाउँगा, देखो झड़ने के बाद भी हमारा लुंड खड़ा हुआ है,

रज्जो- ाचा तो फिर दर कैसा रोज़ छोड़ना बिटिया को.

लाडो- हाँ पापा रोज़ छुडवाउंगी अब मैं तुमसे.

दीनू- मेरी प्यारी बिटिया रोज़ छुडवायेगी पापा से, दीनू ने लाडो को बाहों में भरते हुए कहा,

तभी एक आवाज़ आई जिसे सुनकर दीनू बिलकुल चौंक गए,


जारी रहेगी
 
अपडेट पर काम स्टार्ट करूँगा फर्न्स थोड़ा टाइम लगेगा तब तक Mass ने नई स्टोरी स्टार्ट की है उसे पढ़कर सपोर्ट करें
 
रज्जो- क्यों बेटी की जवान छूट में मज़ा नहीं आया,

दीनू- यही तो दर है रज्जो.

रज्जो- कैसा दर?

दीनू- यही की मज़ा आया और अब बिना इसे चोदे रह भी बही पाउँगा, देखो झड़ने के बाद भी हमारा लुंड खड़ा हुआ है,

रज्जो- ाचा तो फिर दर कैसा रोज़ छोड़ना बिटिया को.

लाडो- हाँ पापा रोज़ छुडवाउंगी अब मैं तुमसे.

दीनू- मेरी प्यारी बिटिया रोज़ छुडवायेगी पापा से, दीनू ने लाडो को बाहों में भरते हुए कहा,

तभी एक आवाज़ आई जिसे सुनकर दीनू बिलकुल चौंक गए,


अपडेट 209


पीछे से आवाज़ आई- पापा सारा प्यार लाडो के लिए hi है क्या?

दीनू ने चौंक कर सर को उठा कर देखा तो एक और झटका लगा क्यूंकि बिस्तर के नीचे उनके बाकी तीनो बच्चे यानि सरजू, बिरजू और नीतू खड़े थे वो भी पूरे बिलकुल नंगे थे, तीनो hi मुस्कुरा रहे थे पर तीनो hi थोड़े असहज भी नज़र आ रहे थे शायद पहली बार अपने पापा के सामने यूँ जाने का असर था,

दीनू तो बस तीनो को देखे जा रहे था और खासकर अपनी बड़ी बेटी के बदन को, उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या हो रहा है ये वहीं बाकि सब दीनू के चेहरे को देख रहे थे,

रज्जो ने कुछ देर तक अपने पति के भाव को देखा और लगा की वो कहना बहुत कुछ चाहते हैं पर कह नहीं पा रहे तो वो खुद hi बोली- बच्चों इधर आओ, बिस्तर पर बैठो, लाडो, तू भी पापा के ऊपर से हैट अभी कुछ देर के लिए,

सबने अपनी मम्मी के कहे अनुसार किआ और बिस्तर पर आकर बैठ गए वहीं दीनू भी लाडो के उठने के बाद उठकर सिरहाने से टिक्कर बैठ गए, और तब जाकर उनके मुँह से पहले शब्द निकले- ये सब क्या है रज्जो?

रज्जो- जानती हूँ की तुम्हारे मन में बहुत से सवाल हैं इसीलिए सबसे पहले सरे सवालों का जवाब मिलेगा फिर आगे का सोचेंगे,

दीनू- हाँ ये सब क्या है मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा, बच्चे इस तरह.

रज्जो- सब बताती हूँ, और शुरू से सब सच सच बताते हैं, हो सकता है तुम्हे कुछ बात अछि न लगे पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से पहले पूरी सुन लेना,

दीनू- हाँ.

बच्चे अपनी मम्मी का चेहरा देखते तो कभी पापा का इसी बीच रज्जो ने बताना शुरू किआ कैसे उसे नीतू और कर्मा को लेकर शक था, और उसी चक्कर में पात पूजा वाली शाम को पहली बार उसके और कर्मा के बीच चुदाई हुई, ये सुनकर बच्चे और दीनू सब चौंक गए खासकर सरजू जो दबी आवाज़ में बोलै- हरामी कर्मा...

रज्जो ने उसे मुस्कुरा कर देखा फिर बोली- कैसे उसने नीतू और कर्मा को रोकने के लिए बुआ के यहाँ जाने पर तबियत ख़राब का बहाना बनाया था, और फिर कैसे उस दिन किस्मत पलटी और दोनों माँ बेटी एक साथ बाप बेटे से चूड़ी साथ में,

ये सुनकर तो सरजू बिरजू और लाडो साथ hi दीनू की तो आँखें चढ़ गयी,

दीनू- तुम तुम दोनों कर्मा और नीलेश भाई साब से एक साथ चूड़ी मुझे तो यकीन नहीं हो रहा,

नीतू- पापा गुस्सा मत करना पहले पूरी बात सुनलो फिर चाहे जो सजा डोज हम मान लेंगे,

दीनू इस पर खामोश रहे, और रज्जो ने आगे बोलना शुरू किया और बताया कैसे उसकी और सरजू की चुदाई हुई जिस पर सरजू ने भी बताया की कैसे उसके मन में अपनी मम्मी को छोड़ने की इच्छा जाएगी और उसमे कर्मा का कितना हाथ था, दीनू उसे देख कर भी चुप रहा, फिर बारी आई बिरजू और लाडो की जिनकी कहानी सुनकर सब और हैरान थे की ये दोनों तो जब कुछ नहीं हुआ था तबसे एक दुसरे के साथ चुदाई करते थे, और फिर कैसे कर्मा ने पल्ली और उन दोनों को पकड़ा फिर कर्मा अनुज और बिरजू ने मिलकर नीतू लाडो और पल्ली को छोड़ा रात भर,

रज्जो- और फिर सरजू ने पिछली रात बिरजू और दोनों बहनो को पकड़ा और फिर छोड़ा भी और ये बात इसने मुझे दिन में बताई तो मैंने सोच लिए की अब आगे जो होगा सब तुम्हे सच बता कर होगा, हम लोग मानते हैं की हमसे गलती हुई है हमने तुमसे बहुत कुछ छुपाया या यूँ कहें तो धोखा दिया, मुझमे हिम्मत होती तो पहले दिन hi तुम्हे सब बता दिया होता पर नहीं कर पाई पर अब बच्चो का साथ मिलने पर हिम्मत हुई तो आज सब तुम्हारे सामने है. अब जो तुम चाहोगे वो होगा.

नीतू- हाँ पापा हमसे गलती हुई है हम उसके लिए माफ़ी मांगते हैं पर सही कहूं तो हमारे लिए सबसे पहले तुम हो, उत्तेजना में बहक कर हमसे गलतियां हुई हैं.

सरजू- हाँ मैंने भी अपनी सगी माँ के साथ वो सब किआ जो सोचना भी पाप होता है, गलती तो हम सब से hi हुई हैं...

लाडो- पापा कुछ बोलो न तुम्हारा चुप रहना मुझे ाचा नहीं लग रहा है.

लाडो ने उदास सुर में बोलै.

दीनू ने एक बार सबकी और देखा और फिर लाडो को देख कर बोले - तू चाहती है मैं कुछ बोलूं,

लाडो ने हाँ में सर हिलाया

दीनू- तुम सब वो करोगे अब से जो मैं चहुँ बिना झूठ बोले या छुपाये?

सबने हाँ बोलै.

दीनू- अगर मैं कहूं की अब से ये सब बंद कर दो बिलकुल पहले की तरह हो जाओ तो?

रज्जो- जैसा तुम चाहोगे वैसे hi होगा.

नीतू- हाँ पापा, सब पहले की तरह hi हो जायेगा,

सरजू बिरजू लाडो ने भी हाँ में हाँ मिलाई

दीनू ने सबको देखा और फिर अचानक से बोले- तो फिर अब तक जो जो मैंने नहीं देखा है वो मुझे सामने से देखना है. और करना भी है.

रज्जो- मतलब.

दीनू ने उसकी और मुस्कुरा कर देखा और कहा- मतलब ये की नीतू बिटिया पापा का लुंड चूस के दिखा कैसे चूसती है,

ये सुनकर न सिर्फ नीतू के बल्कि बाकि सबके चेहरे पर भी हंसी दौड़ गयी,

नीतू जल्दी से आगे झुकी और पापा का लुंड मुँह में भर लिए वहीं बेटी के होंठों का स्पर्श लुंड पर महसूस करते hi दीनू के मुँह से आह निकल गयी,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह बित्याहहहह..

बाकि सब दीनू के चेहरे पर उभरते भावों को देख कर मुस्कुरा रहे थे और खुश हो रहे थे, वहीं नीतू अपने पापा को खुश करने के लिए अपना सारा अनुभव और जोश को एक साथ लुंड चूसने में लगा रही थी और कुछ hi पालो ने दीनू का पूरा लुंड जड़ तक उनकी बड़ी बिटिया के मुँह में था, दीनू की आँखें मज़े से बंद हो रही थी,

दीनू- अह्ह्ह्ह बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी uhiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. चूऊऊऊऊस्सस्स ले पापा आह्हः का लोदाहहहहह

पापा की ऐसी आहें सुनकर तो नीतू का और जोश बढ़ गया और उसने चूसने की गति बढ़ा दी, बिरजू और सरजू अपनी बहन का कौशल देख कर अपना लुंड मुठिया रहे थे, पर लाडो से और नहीं देखा गया और वो उठ कर कड़ी हो गयी और अपनी छूट को अपने पापा के मुँह पर रख दिया, दीनू ने आँखें खोल कर देखा और तुरंत बेटी की छूट चाटने लगे, दोनों बेटियों का संग पाकर दीनू तो जन्नत में थे और उनके आनंद का सबूत नीतू को मिला जब उसके पापा का लुंड उसके मुँह में भरते हुए झड़ने लगा, दीनू ने लाडो की छूट से मुँह हटाया और गुर्राने लगे उनका लुंड बेटी के मुँह में पिचकारियां मरने लगा, पापा का रास नीतू के मुँह से बहार गिरने लगा,





ये जब लाडो ने देखा की उसके पापा का रास व्यर्थ हो रहा है तो तुरंत झुककर वो भी अपनी बहन का साथ देने लगी और अपने पापा की गलियों और जांघ से उनका रास चाटने लगी, दीनू ने आँखें खोली और अपनी दोनों बेटियों को अपनी सेवा करते देखा और दोनों के सर पर हाथ फेरते हुए रज्जो की और देखा जो की ख़ुशी से उन्ही को देख रही थी.

दीनू- हाय रानी क्या बेटियां पैदा की हैं तूने, ऐसी बेटियों को न छोड़ता तो जीवन बेकार था,

रज्जो- अभी बड़ी का स्वाद कहाँ चखा है ग तुमने?

दीनू- अभी रात बाकी है,

ये कहते हुए दीनू ने अपने दोनों बेटों को देखा जो लुंड थामे हुए सब देख रहे थे,

दीनू- अरे तुम दोनों क्यों खली बैठे हो, बगल में नंगी गदराई माँ बैठी है चढ़ जाओ, मैं भी तो देखूं माँ बेटे की चुदाई,

बस बिरजू और सरजू के लिए इतना कहना बहुत था दोनों लगभग इसी इंतज़ार में बैठे थे अगले hi पल रज्जो अपने बेटों के हाथों में गुड़िया की तरह इधर उधर हो रही थी इससे पहले कुछ समझ पाती उसके मुँह में सरजू का लुंड घुस चूका था और पीछे से उसकी छूट और गांड का उसका छोटा बीटा सहला रहा था, रज्जो ने जब ये देखा तो वो भी सब भूल बेटे का लुंड चूसने लगी,





वहीं ये नज़ारा देख बिस्तर के सिरहाने बैठे उनके पति का लुंड दो बार झड़ने के बाद भी फिर से सर उठाने लगा था, वैसे उसका शहरिया दोनों बेटियों की सेवा को भी जाता था, जिन्होंने अपने पापा के लुंड को अचे से साफ़ कर दिया था और अभी पापा की दोनों और बैठ कर अपनी मम्मी और भाइयों का प्रोग्राम देख रही थी,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह क्या मस्त नज़ारा है माँ बेटे का लुंड चूस रही है, रज्जो ये सब हमने पहले क्यों नहीं किआ?

रज्जो ने सरजू का लुंड मुँह से निकला और बोली- जो बीत गया वो सब छोडो ग, अब से पूरे मज़े लो....

दीनू- हाँ अह्हह्ह्ह्ह अब तो पूरे मज़े लूंगा हर चीज़ देखनी है मुझे. बिरजू देख क्या रहा है लल्ला छोड़ अपनी मम्मी को,

बिरजू ये सुन खुश हो गया और उसने अपने पापा के आदेश को तुरंत मन और अपना लुंड पकड़ कर अपनी मम्मी की छूट के द्वार पर लगाया और फिर एक धक्के में अंदर घुसा दिया.

बिरजू- ओह्ह्ह मममममिययययययय अह्हह्ह्ह्ह.

रज्जो- uhmmmhaaaaaaaaaaaaa

रज्जो ने भी सरजू का लुंड मुँह में भरे हुए आह्हः भरी.

नीतू- पापा मम्मी कितनी मस्त लगती हैं न चुड़ते हुए...

नीतू ने पापा का लुंड मसलते हुए कहा जो की दोबारा खड़ा हो रहा था,

दीनू- सही कहा बित्याहहहह मुझे बड़ी उत्तेजना हो रही है तेरी मम्मी को चुड़ते देख कर...

दीनू भी एक हाथ से नीतू की एक चुकी तो दुसरे से लाडो की मसलते हुए बोले

लाडो- मुझे भी बहुत मस्त लग रही है मम्मी चुड़ते हुए,

लाडो ने अपनी छूट मसलते हुए कहा...

दीनू- कर्मा और नीलेश भाई साब से छुड़ई देखना और मज़ेदार होगा,

नीतू- सही में पापा तुम अपने सामने मम्मी को उनसे छोड़ने डोज,

दीनू- और क्या अब जब चुदाई की नहर में डुबकी लगा hi दी है तो पीछे क्या हटना, अब वो सब करूँगा जो मन करेगा,

नीतू- ये हुई न बात, और क्या क्या करोगे पापा?

दीनू- अपनी बहन रूपा को छोडूंगा.

नीतू- एते वाह बुआ का भी सोच रखा है तुमने तो,

दीनू- और क्या सिर्फ मेरे बेटे hi अकेले भेनचोद क्यों बनें...

नीतू को अपने पापा की बातें सुन बहुत मज़ा आ रहा था और उत्तेजना भी हो रही थी इसी उत्तेजना में आगे बढ़ते हुए वो लाडो से बोली- लाडो इधर आ तो ज़रा..

नीतू ने लाडो को इशारा किआ तो लाडो बिना कहे समझ गयी आउट नीतू के चूतड़ों को फैलाकर अपना मुँह उसकी छूट में घुसा कर नीतू की छूट और गांड चाटने लगी,

नीतू अपनी बहन की जीभ महसूस कर सिहरने लगी वहीं अपनी बेटियों का प्यार देख कर दीनू का लुंड एक बार फिर से तन गया, जिसपर नीतू की नज़र पहले से थी और उसने अपने पापा के लुंड को एक बार फिर से मुँह में भर लिए और चूसने लगी वहीं पीछे से लगातार उसकी छूट और गांड चाट रही थी,

बिस्तर के दूसरी और तो बेहद सुन्दर दृश्य था जहाँ सरजू अपनी मम्मी की छूट में लम्बे लम्बे धक्के लगाकर उन्हें छोड़ रहा था वहीं बिरजू अपनी मम्मी के गरम मुँह की गर्मी अपने लुंड पर महसूस कर आहें भर रहा था,





बिरजू- ओह्ह्ह मममममिययययययय अह्हह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा है ऐसी hi चूऊऊऊऊस्ससोऊ,

सरजू- अह्हह्ह्ह्ह मज़ा तो मुझे भी आ रहा है अह्ह्ह्ह सबको ऐसे देख कर ुहममम मम्मी की गरम छूट सबके सामने मार कर...

दीनू- हांण बीटा दोनों छोड़ो अपनी मम्मी को, अह्ह्ह्ह मैं तो अपनी माँ को छोड़ नहीं पाया पर तुम लोगो को देख कर hi सुख मिल रहा है.

सरजू- पापा तुम भी दादी को छोड़ना चाहते थे.

दीनू- हाँ बेटाझ बड़ी मस्त थी तेरी दादी बड़ी बड़ी चूचियां उतनी hi बड़ी गांड, उनके बगल में सोता था तो लुंड खड़ा हो जाता था, पर सबकी नज़र में पाप था इसलिए ये बात मन में hi राखी.

रज्जो- माँ नहीं सही ग पर तुम्हारी बहन की छूट तो तुम्हे दिलवा के रहूंगी.

रज्जो ने बिरजू का लुंड मुँह से निकल कर कहा,

दीनू- बिलकुल मादरचोद न सही बहनचोद तो बन कर hi रहूँगा,

नीतू- उससे पहले पापा बेटीचोद तो बन जाओ,

नीतू ने ऊपर उठकर अपने पापा के ऊपर आते हुए कहा, और उनका लुंड लाडो ने पकड़ ली अपनी बहन के लिए जिस पर नीतू ने जल्दी hi अपनी छूट तिकड़ी और फिर नीचे होकर लुंड छूट में भर लिए,

दीनू- अह्ह्ह्हह्हह बित्याहहहह क्या गरम छूट है तेरी,

ये कहते हुए दीनू ने आगे झुक कर नीतू को खुद से चिपका लिया और अपनी बेटी के रसीले होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगे जिससे नीतू की सिसकी उसके मुँह में hi घुट गयी...

नीतू ने नीचे होते हुए अपने पापा का पूरा लुंड अपनी छूट में समां लिए और उनके होंठों को चूसने में साथ देने लगी, जल्दी hi बाप बेटी की जीभ एक दुसरे मुँह में अठखेलियां कर रही थी, दीनू को तो यकीन नहीं हो रहा था आपने आप पर की इस उम्र में वो एक जवान लड़की को भोग रहे हैं वो भी अपनी सगी बेटी को, ये सोचकर तो उनके अंदर और जोश भर गया और वो अपने दोनों हाथों से बेटी की संतरे जैसी चूचियों को मसलते हुए उसकी जीभ चूसने लगे, लाडो दोनों के पैरों के बीच बैठी हुई दोनों की चुदाई देख रही थी, लाडो हमेशा से hi जिज्ञासु और उत्साहित रहने वाली लड़की थी, जिज्ञासा में hi वो चुप चुप कर फ़ोन पर चुदाई वाली वीडियो देखने लगी और फिर उत्सुकता में उसने पल्ली को पता लिए और फिर अपने भाई बिरजू के साथ भी शामिल हो गयी, उसकी खासियत ये थी की जो भी उसने वीडियोस में देखा था या देखती थी उसे करने में सकुचाती नहीं थी और उसी का अगला उदहारण उसने दिया जब आगे झुककरकर अपने पापा की गलियों को चाटने लगी साथ hi अपनी एक उंगली नीतू की गांड में भी घुसा दी जिससे नीतू और उसके पापा दोनों का hi आनंद और बढ़ गया,

बिस्तर के दूसरी और बिरजू ने अपने बड़े भाई से विनती की अब उसे मम्मी की गरम छूट मरने दे तो सरजू ने तुरंत उसे अपनी जगह दे दी वहीं उसने लाडो की छूट और गांड खली देखि तो वो उसके पीछे आ गया और अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया,

लाडो अपने भैया का लोढ़ा अपनी छूट में पाकर सिहर उठी साथ hi अपने पापा की गोलियों को मुँह में भर के चूसने लगी...

बिरजू को मम्मी की छूट नसीब हुई तो फूला नहीं समाया और उनकी टैंगो को उठाकर

को पकड़ कर दनादन धक्के लगाकर छोड़ने लगा





रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह बिरजू अह्ह्ह्हह्हह ऐसे hi छोड़ बच्चा अपनी मम्मी कोआआह्ह्ज बहन की छूट का तो मज़ा खूब चख लिए अब्ब्ब्ब मम्मी की छूट का स्वाद ले ले आह्ह्ह्ह छोड़ ऐसे होई लल्ला...

बिरजू- ओह्ह्ह मममममिययययययय अह्हह्ह्ह्ह सोचा नहीं था कभी तुम्हे छोड़ पाउँगा, आह्ह्ह्हह कितनी बार मुठी मारी है तुम्हारे लिए...

रज्जो- ओह्ह्ह्हह्ह लल्ला तू मुझे छोड़ने का पहले से सोच्ताआ था अहह?

बिरजू- हैं मम्मी अह्ह्ह्हह जब बहन को छोड़ सकता हु तो मम्मी को छोड़ने में कोआआह्ह्ज परेशानी,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह बिलकुल सही कहा बीटा अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह. छोड़ अपनी मम्मी को अचे से अह्ह्ह्ह देख तेरी बहन कैसे उछाल रही है मेरे लुंड पर,

नीतू- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह हाँ बिरजू अह्ह्ह्ह छोड़ मम्मी को, घुसजै बापिस इसी चुत में जिससे सालों पहले निकला था,

बिरजू ने नीतू जी की बात सुनकर उसकी और देखा तो पाया की नीतू उसके पापा को लिटा कर खुद उनके ऊपर थी और अपनी कमर घुमा हिमकर बेहद कामुक और आक्रामक तरीके से पापा को छोड़ रही थी,





दीनू- अह्ह्ह्ह बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी uhiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत बहुत माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है...

नीतू- हाँ अह्हह्ह्ह्ह पापा पहली बार तुम्हारा लुंड मिला haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh ाहजहजह पूरा निछोड लुंगी,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी uhiiiiiiiiiiiiiiii निछोड ले पापा के लोडे को apaniiiiiiiiiiiii गरम छूट में,

बिरजू अपने पापा और बहन की चुदाई देख साथ hi उनकी बातें सुन और जोश में आ गया और तेज़ी से अपनी मम्मी की गरम गरम छूट में धक्के लगाने लगा...

वही सरजू ने अपनी छोटी बहन को अपने पापा और नीतू के पास से उठाकर अलग कर लिए था और अब उसे बिस्तर के बगल में पड़ी कुर्सी पर झुका लिए था और वहीं पीछे आकर अपना लुंड अपनी सबसे छोटी बहन की छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगा





लाडो- ावहहह ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह कितना मस्त लग रहा है तुम्हारा कड़क लुंड मेरी छूट में,

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह हाँ मेरी प्यारी बहनाआहहह अह्ह्ह तेरी छूट भी कितनी गरम और कासी हुई है ाभः लुंड को निचोड़ रही है, अह्ह्ह्हह्हह माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है,

लाडो- अह्ह्ह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi लम्बे लम्बे धक्को से छोड़ो अपनी रंडी बहनन को अह्ह्ह दिखादो की भाई के लुंड में कितनी ताकत होती है,

लाडो ने जोश में आते हुए कहा..

सरजू- अह्ह्ह्हह्हह लो अह्हह्ह्ह्ह लिए साली आठ चुड़क्कड़ बहना..

सरजू ने भी अपना लुंड तेज़ी से अपनी बहन की छूट में चलते हुए कहा,

लाडो- ावहहह ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ो ऐसी हीईई भेनचोद अह्हह्ह्ह्ह,

लाडो के मुँह से गाली सुन सिर्फ सरजू का hi नहीं सबका जोश और बढ़ गया, बिरजू पर थोड़ा संसय में था अपने बाप के सामने लाडो को गाली देता देख तो वो अपने पापा के भावों को देखने लगा,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह तू क्या उधर देख रहा है लल्ला अह्ह्ह्ह माँ की छूट पर ध्यान लगा मादरचोद,

बिरजू का ध्यान अपनी और बापिस खींचते हुए रज्जो ने कहा, जिसे सुनकर न सिर्फ बिरजू का ध्यान आया बल्कि उसके धक्के और तेज़ हो गए,

बिरजू- आह्हः हाँ मम्मी आह्ह्ह्हह माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है मादरचोद बनकर...

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह क्याआ चुड़क्कड़ बेटी पैदा की है तूने ऋ रज्जो अह्हह्ह्ह्ह,

दीनू पीछे से नीतू के चूतड़ों को अपने ऊपर उछालते हुए बोले..

नीतू- चुड़क्कड़ माँ की चुड़क्कड़ बेटी हूँ पापाआआअह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi पातको मेरी छूट को अपने लोडे पर ाः...

इधर बिरजू कुछ ज्यादा hi जोश में आ गया था अपनी मम्मी की छूट पाकर और जिसका नतीजा जल्दी hi उसके लुंड के फूलने से हुआ और जल्दी hi वो झड़ने के करीब पहुँच गया, पर उससे भी पहले उसकी मम्मी का बदन अकड़ रहा था और वो झाड़ रही थी, रज्जो अपने बेटे के लुंड पर झड़ते हुए शांत हुई तो उसने महसूस किआ की बिरजू भी झड़ने वाला है,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह लल्ला मम्मी के मुँह में दे अपना रास..

बिरजू ने सुनते hi अपना लुंड मम्मी की छूट से निकला और आगे जाकर उसके मुँह में घुसा दिया रज्जो ने भी तुरंत मुँह खोल कर उसका स्वागत किआ और बेटे का लुंड चूसने लगी कुछ hi पालो में उसके मुँह में बेटे के रास की धार भरने लगी जिसका स्वाद उसकी जीभ पर आने लगा और वो उसे गटकने लगी.

बिरजू- आह्हः मम्मी ओह्ह्ह्हह्ह मम्मी, ओह्ह्ह्हह्हहब.

बिरजू गुर्राते हुए लुंड की पिचकारी मम्मी के मुँह में छोड़ रहा था, रज्जो ने भी अचे से चूस चूस कर बेटे के लुंड से रास की एक एक बूँद निचोड़ ली और फिर जाकर उसका लुंड मुँह से निकला,

बिरजू के झड़ने के बाद सरजू पर भी असर हो रहा था क्यूंकि लाडो की जवान गरम छूट उसके लुंड को कुछ ऐसे सहला रही थी की उसकी उत्तेजना हर पल बढ़ती जा रही थी, वहीं लाडो जो खुद अपने चरम के नज़दीक थी गरम हो कर आहें भर्ती या अपने भाई को और तेज़ छोड़ने को कह रही थी,

लाडो- ावहहह ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह और तेज़ ज़ज़ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़सदो भेंछहूऊऊड्ड्ढड

सरजू- अह्ह्ह्हह ुहममम हानंन्न लीईई बहनाआहहह,

खैर कुछ hi पालो में दोनों भाई बहन साथ झड़ने लगे तो सरजू ने अपना लुंड लाडो की छूट से निकका और उसके मुँह में देकर उसे अपना रास पिलाने लगा, लाडो ने भी मुँह खोल कर अपने भाई के रास को बड़े स्वाद से अपने मुँह में निकलवाया और फिर उसे जातक गयी.. झड़ने के बाद दोनों भाई बहन अपनी मम्मी और भाई के पास बैठ गए और अपने पापा और नीतू की चुदाई देखने लगे,

दीनू जो पहले hi दो बार झाड़ चुके थे उसी कारन अभी काफी देर तक ठीके हुए थे पर इस बार भी नीतू की छूट हर पल उन्हें चरम के करीब पहुंचा रही थी, बेटी की छूट की गर्मी के आगे उनका लुंड पिघल रहा था वहीं नीतू भी अपने पापा से छोड़कर एक अलग आनंद का अनुभव कर रही थी,





दोनों hi इस आनंद के अनुभव को ज़्यादा देर तक ताल नहीं पाए दीनू ने अपने लुंड की पिचकारी अपनी बेटी की छूट में छोड़नी शुरू कर दी, अपने पापा का रास छूट में गिरता हुआ महसूस कर नीतू ने भी खुद को ढीला छोड़ दिया, दीनू धार के बाद धार छोड़कर अपनी बेटी की छूट को भरने लगे और फिर जब झड़ना ख़तम हुआ तो वहीं बेटी के बगल में बिस्तर पर लेट गए और नीतू को बाहों में भर लिए और उसके होंठों को चूमते हुए बोले- अह्ह्ह बिटिया मज़ा आ गया ऐसा आनंद कभी नहीं मिला,

नीतू- मुझे भी पापा, अपने बाप से छोड़ने का मज़ा सबसे अलग है,

दीनू ने सर उठा कर देखा तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी क्यूंकि उन्हें देखते हुए बाकि सब को नींद लग गयी थी और चरों hi एक दुसरे से चिपक कर सो रहे थे, दीनू ने भी नीतू को खुद से चिपकाया और दोनों hi सोने लगे...

मम्मी की गांड चुदाई के बाद मैं मम्मी को खुदसे चिपका कर लेता हुआ था वहीं मौसी, पापा और मौसा के बीच में लेती हुई थी, अभी दोनों ने जमकर मौसी की दोहरी चुदाई जो की थी,

अभी सब थक कर आराम कर रहे थे, माँ मेरे सर पर प्यार से हाथ फेर रही थी,

माँ- खुश रहा कर देख कितना ाचा लग रहा है.

में- मैं खुश hi हूँ माँ तुम सब लोगो के होते हुए मैं दुखी रह hi नहीं सकता,

मौसी- और क्या तुम लोगो की ख़ुशी के लिए hi तो अपने छेदों का भरता बनवाते हैं हम लोग हेहही.

मौसा- ाचा जैसे तुझे तो मज़ा आता hi नहीं,

मौसी- आता है हमें भी थोड़ा बहुत,

पापा- ाचा बस थोड़ा बहुत,

मौसी- हाँ जीजा वही थोड़ा नहीं बहुत,

में- अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह और तेज़ और तेज़ जीजा आह्ह्ह्हह माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है फाड़ दो मेरी छूट आह्ह्ह्हह कर्मा के मौसा छोड़ो अपनी रंडी बीवी की गाछबड़ददद...

मैंने मौसी की नक़ल उतारते हुए कहा- अभी कुछ देर पहले ये कौन बोल रहा था,?

इस पर सब हंसने लगे और मौसी बोली- कमीने तुझे बताउंगी मैं.

मौसा- वैसे नक़ल बिलकुल ज़बरदस्त की,

मौसी- तुम्हे बड़ा मज़ा आ रहा है,

पापा- सब साथ हैं तो मज़ा तो आएगा hi.

मौसी- ये तो सही बात कही... अरे जीजी एक बात तो बताओ.

माँ- हाँ कौनसी बात?

मौसी- याद है वो वाली बात जब शादी से पहले मैंने तुम्हे और बाबा को उस रात ऐसे देखा था वो पूरी बात बताओ...

मौसा- भाभी तुम्हारी और ससुरजी की कौनसी बात है,

पापा- अरे शादी से पहले की है.

मौसी- जीजा तुम्हे भी पता है?

माँ- और क्या इनसे कुछ छुपाया है मैंने कभी.

में- माँ मुझे नहीं पता बताओ न, क्या हुआ था

मौसी- हाँ जीजी बताओ.

माँ- अरे तुझे याद है अम्मा गुजर गयी थी तो बाबा उस टाइम कभी कभी दारु पीने लगे थे.

मौसी- हाँ याद है,

माँ- तो ऐसे hi एक रात वो पीकर आये थे, हम सब लोग तो सो चुके थे, जब आये तो बाबा ने हम लोगो को देखा सोते हुए, तो हुआ क्या था की सोते हुए तेरी फ्रॉक ऊपर उठ गयी थी पेट से भी ऊपर...

मौसी- हाय ढैय्या.

माँ- हाँ मेरी नींद खुली तो मैंने देखा था की बाबा तेरी खत के बगल में खड़े हुए धोती से अपना लुंड बहार निकल कर मुठिया रहे थे और तुझे देख रहे थे, मैंने तुझे देखा तो तेरी फ्रॉक तेरे पेट से भी ऊपर थी और तेरा नंगा पेट कच्ची सब दिख रहा था चांदनी में, और बाबा तुझे देखते हुए लुंड हिला रहे थे,

मौसी- अरे....

माँ- तो ये देख मैं घबरा गयी और मेरे मुँह से निकल गया बाबा, ये क्या कर रहे हो?, बाबा ने नेरी और देखा और शायद घबरा गए या पता नहीं क्या हुआ, उनके लुंड ने पिचकारियां छोड़ना शुरू कर दिया जो की तेरे पर गिरने लगी ये देख कर मैं तुरंत उनकी और लपकी ताकि तू जाग न जाये नहीं तो क्या होगा, ये सोच मैं लपकी और बाबा को तेरे ऊपर से घुमा ने की कोशिश की, जिससे रास तेरे ऊपर न गिरे और उसी में न जाने कैसे उनको घूमते हुए उनका लुंड मेरे हाथ में आ गया और उनके रास की धार मेरे ऊपर भी बड़ी, ये महसूस कर मैं तो बिलकुल सुन्न सी हो गयी और उसी समय तेरी आँख भी खुल गयी और तूने हमें ऐसे देखा.

मौसी- हाय ढैय्या ऐसा हुआ था उस दिन, मैं सोचती थी तुम्हारे और बाबा के बीच कुछ था.

माँ- नहीं बन्नो, अरे वो सब मेरे लिए भी कुछ ऐसा था की किसी से बात नहीं कर सकती थी, यहाँ तक बाबा को भी बहुत पछतावा हुआ था, अगले कुछ दिन तक तो वो घर भी नहीं आते थे खेत पर hi खाना मंगाते वहीं खाते, वो तो मैंने उनके सामने बिलकुल साधारण व्यवहार किआ तो काफी समय बाद वो ठीक हुए और उस बात को भूले...

मौसा- अरे बेचारे बाबा की किस्मत, थोड़ी हिम्मत दिखते तो शायद बेटी की छूट मिल जाती.

मौसा ने मौसी की छूट मसलते हुए कहा.

मौसी- ाचा वो हिम्मत दिखते तो तुम्हे कुंवारी छूट नहीं मिलती.

में- मैं तो सोच रहा हूँ अगर अब्बी नाना मौसी को ऐसे देख लें तो?

सब हंसने लगे

मौसी- धत्त तू बहुत बोल रहा है,

में- अरे पर अभी तुम फ्रॉक क्यों पहनोगी हेहही.

मौसा- वैसे भाई साब क्यों न बाबा को एक आध पेग लगवाया जाये,

पापा- हाँ सही कह रहे हो.

माँ- नहीं कोई ज़रुरत नहीं है, अब इस उम्र में दारु उन्हें नुकसान करेगी.

मौसी- हाँ और तुम लोग भी नहीं पीना.

पापा- अरे एक आध पेग की बोल रहे हैं बोतल नहीं गाटाक्वा रहे.

माँ- फिर भी रहने hi दो.

मौसा- अरे हम तो सोच रहे थे फिर से वही दृश्य दोबारा देखते, इस बार बाबा कैसी प्रतिक्रिया देखेंगे.

में- हाँ देखने में मज़ा आएगा,

मौसी- वैसे सच कहूं तो देखना तो मैं भी चाहती हूँ.

माँ- तू भी?

मौसी- और क्या जीजी? तुम नहीं चाहती?

माँ ये सुन मुस्कुराई और बोली- पर बिना दारु के नहीं हो सकता?

में- हो सकता है वैसेकल जो हुआ उसके बाद तो...

माँ- क्या हुआ कल?

फिर मैंने सबको तुबेल वाली बात बताई कैसे ममता चची को देख नाना का खड़ा हो गया था.

मौसा- ये हुई न बात,

मौसी- चलो बाबा इस उम्र में भी सही हैं ये तो ख़ुशी की बात है,

पापा- आदमी और घोडा और उसका लोढ़ा कभी बूढ़ा नहीं होता..

माँ- मैं तो सोच रही हूँ अब अगर उन्हें ममता भ hi गयी है तो उसे hi क्यों न बोल दूँ अचे से सेवा के लिए.

मौसी- हाह जीजी बहुत सही सोचा है,

मौसा- ममता भाभी तो उनकी सेवा भी कर देंगी और उन्हें अचे से खोल भी देंगी...

माँ- चलो बात करती हूँ कल hi,

पापा- चलो भाई अब सो जाओ सब काफी समय हो गया है,

माँ- हाँ कर्मा तू भी जा कहीं बाबा उठ गए तो बेकार में सवाल पूछेंगे.

में- मौसी वैसे चलना चाहो तो अभी चलो न,

मौसी- अभी कहाँ???

में- मेरे साथ सो जाना, क्या पता नाना को आज hi दर्शन हो जाएं.

मौसी- अरे नहीं नहीं.

माँ- वैसे उपाय बुरा भी नहीं है,

मौसा- सही में सुबह बाबा उठेंगे तो कुछ तो दिखेगा hi,

मौसी- ाचा और फिर पूछा की मैं वहां क्यों सो रही हूँ कर्मा के साथ तो?

में- बोल देना न. की मौसा खर्राटे ले रहे थे नींद नहीं आ रही थी तो यहाँ आ कर सो गयी...

माँ- हाह बिलकुल सही है.

मौसी- नहीं जीजी. मुझसे नहीं होगा.

मौसा- भाभी तुम जाओगी?

माँ- मैं?

मौसी- हाँ जीजी तुम चली जाओ न,

पापा- हाँ प्रतिक्रिया hi तो देखनी है तो तुम hi चली जाओ.

में- हाँ चलो माँ,

माँ- चल ठीक है,

इसके बाद मैं और माँ मेरे कमरे में आकर बिस्तर पर सो गए नाना खत पर सो रहे थे क्यूंकि उन्हें बीएड पर नींद नहीं आती थी तो खत भी बिटर के पास hi बिछाई हुई थी, बीएड पर हम लड़के सो जाते थे, खैर थकावट से मैं और माँ जल्दी hi एक दुसरे से चिपक कर सो गए..

खैर चोदामपुर की अगली सुबह हुई, सूरज नहीं निकला था पर नाना अपनी आदत अनुसार सूरज से भी एक घंटा पहले उठ चुके थे, और उठ कर जब उन्होंने आस पास देखा तो उनकी आँखें थोड़ी चौड़ी हो गयी क्यूंकि बिस्तर पर नज़ारा hi कुछ ऐसा था, उनकी बड़ी बेटी अपने बेटे के बगल में सो रही थी, दोनों माँ बीटा बिलकुल चिपक कर सोये हुए थे, मैं माँ से बिलकुल चिपक कर इनके पेट पर हाथ रख कर सोया हुआ था,

नाना के लिए थोड़ी आँखें खोलने वाली बात ये थी की माँ का गदराया पेट गोल मटोल नाभि उनके सामने थी और उसे देखकर वो न चाहते हुए भी बहकने लगे, मन में आया- सच में बड़की कितनी सुन्दर है, बदन देखो कैसे गदराया हुआ है, और कर्मा को देखो कितना भगवाला है कैसे चिपक कर लेता हुआ है, देखो कैसे अपनी माँ के मस्त बदन से चिपक कर लेता हुआ है, अरे हम भी क्या सोच रहे हैं हमारी बिटिया है, कर्मा उसका बीटा है.... पर बड़की यहाँ कब आई सोने..

ये सब सोचकर नाना ने अपनी नज़र फिरा ली, पर उनका मन नहीं मान रहा था.. अरे क्या हुआ कुछ गलत थोड़े hi है बस पेट और नाभि hi तो है फिर से देखो भी लेंगे तो क्या हो जायेगा, ये सोचते हुए नाना ने दोबारा से चेहरा घुमा कर आँखें माँ पर जमा दी...





ये नज़ारा देख नाना के अंदर भी उत्तेजना होने लगी, वो जितना माँ को देखते उतना hi उनको और कामुक ख्याल आते, और उन्हें खबर hi नहीं हुई की उनका लुंड तन कर खड़ा हो गया, जब उन्हें ये एहसास हुआ तो थोड़ी ग्लानि हुई की छीटे ये सब क्या हो रहा है, अपनी बिटिया को देखकर ऐसे ख्याल ठीक नहीं है, पर छह कर भी वो अपनी आँखें माँ के बदन से हटा नहीं पा रहे थे, वहीं इस सब से बेखबर होकर मैं और माँ गहरी नींद में थे, अब जब नाना जितना देख रहे थे उतना hi उनको उत्तेजना बढ़ रही थी, और कुछ hi पालो में उनका हाथ अपने लुंड को सहला रहा था, धीरे धीरे उनके ऊपर उत्तेजना हावी होने लगी और वो अपने लुंड को बहार निकल कर माँ को देखते हुए मुठियाने लगे, कुछ hi पालो में वो माँ को देखते हुए पूरे जोश में लुंड हिला रहे थे, अपनी बेटी के बारे में ऐसा सोचना hi उनके लिए एक अलग उत्तेजना का विषय था और उसी कारन जल्दी hi वो अपने चरम पर थे, और कुछ hi पलों में उनका लुंड पिचकारी छोड़ने लगा जिसे उन्होंने अपनी धोती से ढँक लिया और सारा रास धोती पर छोड़ दिया,

खैर झड़ने के बाद तुरंत उन्हें ग्लानि ने घेर लिए और वो तुरंत hi कमरे से बहार निकल गए, अपने करे हुए पर पश्चाताप करते हुए....


जारी रहेगी
 
अपनी बेटी के बारे में ऐसा सोचना hi उनके लिए एक अलग उत्तेजना का विषय था और उसी कारन जल्दी hi वो अपने चरम पर थे, और कुछ hi पलों में उनका लुंड पिचकारी छोड़ने लगा जिसे उन्होंने अपनी धोती से ढँक लिया और सारा रास धोती पर छोड़ दिया,

खैर झड़ने के बाद तुरंत उन्हें ग्लानि ने घेर लिए और वो तुरंत hi कमरे से बहार निकल गए, अपने करे हुए पर पश्चाताप करते हुए....



अपडेट 210


चोदामपुर में अगली सुबह हुई और धीरे धीरे पूरा गाओं उठने लगा था, मैं भी उठा मामी के उठाने से,

मामी- उठो बाबू रात को कहाँ हल चला रहे थे जो नींद नहीं खुल रही,

मामी ने हाथ में चाय पकड़ते हुए कहा,

मामी की बात से मुझे रात की माँ और मौसी की चुदाई याद आ गयी, मैंने चाय की एक चुस्की लेते हुए जवाब दिया,

में- अरे मामी तुम सोने hi नहीं देती रात भर...

मामी- हाय ढैय्या बाबू हमने कब नहीं सोने दिया,

में- रात को सपने में आती हो दुल्हन बन कर हमारी और जगा कर रखती हो,

मामी- अरे इसके लिए सपना क्या देखना बाबू हम तो सच में तुम्हारी दुल्हन हैं.

में- नहीं मामी सपने में ज़्यादा ाचा है वहां तुम हमारे साथ सोती हो और..

मामी- और क्या बाबू?

में- रहने दो मां ने सुन लिया तो पीछे पद जायेंगे मेरे.

मामी - ाचा ऐसा क्या करते हो जो मां पीछे पद जायेंगे.

में- अपनी दुल्हन को प्यार,

मैंने चाय की चुस्की भरते हुए कहा.

मामी- अरे वाह और क्या क्या करते हो प्यार में.

मामी ने खत पर बैठते हुए कहा

में- वो बताने वाली चीज़ नहीं करके दिखने वाली हैं मामी.

मामी- तो कर के दिखा दो बाबू, हम भी तो देखें क्या होता है तुम्हारे सपने में,

Me-sach में दिखा दूँ,

मामी- हाँ कौन रोक रहा है,

में- फिर थोड़ा पास आओ,

मैंने चाय के कप को नीचे रखते हुए कहा.

मामी- पास क्यों?

में- तो करके कैसे दिखाऊंगा बिना पास आये,

मामी- हमारे साथ hi करके दिखाओगे?

में- दुल्हन तुम हो, देखना तुम्हे हैं तो और किसके साथ करके दिखाऊं?

मामी इसके आगे कुछ बोलती की किरण पीछे से आ गयी,

किरण- भैया जग्गू भैया आये हैं.

में- ओह तेरई मर गया, ध्यान से निकल गया आज उसका जन्मदिन है, चल भागते हैं.

मामी- ाचा और दिखने वाली बात?

में- बाद में दिखता हूँ मामी.

मैं कहते हुए कमरे से निकला तो जग्गू आंगन में मम्मी पापा सबके पेअर छूकर आशीर्वाद ले रहा था,

माँ- जीता रह जग्गू, जल्दी से ब्याह हो सुन्दर सी दुल्हन आये तेरी,

माँ ने उसे आशीर्वाद और पैसे देते हुए कहा,

जग्गू- अरे चची अब मैं बड़ा हो गया हूँ इन सब की क्या ज़रुरत है.

मौसी- माँ के लिए बच्चे छोटे hi रहते हैं, चुप चाप रखले.

जग्गू ने ऐसे hi सबके पेअर छुए और मां ममी को नमस्ते किआ, सबने उसे ढेर सारा आशीर्वाद दिया,

में- अरे मेरे पेअर तो छू. आशीर्वाद नहीं लेगा?

जग्गू- हाँ आ न अभी छू लेता हूँ.

मौसी- लो हो गयी शुरू इन दोनों की.

खैर हम दोनों इसी तरह से हंसी मज़ाक करते हुए बहार निकले, बाघ में पहुंचे,

जग्गू- क्या दे रहा है तोहफे में?

में- यार एक बड़ी चीज़ है पर सोच रहा हूँ दूँ या न दूँ?

जग्गू- अरे बड़ी चीज़ दे न बिलकुल de...kya है?

में- चल ठीक है फिर बता कहाँ लेगा मुँह में या गांड में.

ये कहकर मैं हंसने लगा और वो मुझे गालियां सुनाने लगा,

जग्गू- बता रहा है की नहीं?

में- अरे अजीब लालची है तू, तोहफा जब मिल जाये जो मिल जाये ले लेना चाहिए, भीख मानगो की तरह मांगना नहीं चाहिए.

जग्गू - हरामी साला.

में- प्रोग्राम क्या है ये तो बता, ना दावत न कुछ, तोहफा चाहिए.

जग्गू- अरे बताया तो था प्रोग्राम में वही है खाना पीना, सब पापा कर रहे हैं उन्हें hi पता है,

में- ाचा वैसे अब तूने तोहफे का बोल hi दिया है तो तुझे क्या चाहिए?

जग्गू- अरे कुछ भी दे दियो सब चलेगा,

में- साले महान मत बन और मैंने ये बोलै तुझे क्या चाहिए ये नहीं बोलै की दे hi दूंगा,

जग्गू- यार मेरी न एक इच्छा है... बहुत टाइम से..

में- क्या?

जग्गू- अरे थोड़ी अलग और मुश्किल है.

में- बताएगा ?

जग्गू - मैं और तू हमेशा से पक्के यारी हैं हर चीज़ साथ साथ की है तो मन में अब ये ख्याल आता है की....

इधर रात भर की पारिवारिक चुदाई के बाद दीनू चाचा का परिवार थोड़ा देर से उठा था और फिर सुबह के काम निपटा कर सब नाश्ता कर रहे थे, पर बातें अभी भी चुदाई की hi चल रही थी, क्यूंकि ये चीज़ hi ऐसी है,

दीनू- वैसे यकीन नहीं होता की कर्मा और भाई साब एक साथ चुदाई कर लेते हैं,

रज्जो- हाँ पहली बार मुझे भी लगा था पर सच है ये,

बिरजू- और मम्मी अनुज और कर्मा भैया भी,

दीनू- तीनो बाप बेटे काफी खुले हुए हैं आपस में,

इस पर नीतू का भी दिमाग थोड़ा चला और कुछ याद करते हुए बोली- और मुझे लगता है कहीं न कहीं पल्ली को भी वो दोनों पहले से छोड़ते हैं,

लाडो- हाँ उस दिन लगा hi नहीं था की पल्ली दोनों से पहली बार छुड़वा रही हो.

नीतू- बिलकुल सही.

दीनू- कहीं न कहीं कई साड़ी बातें अभी छुपी हुई हैं,

रज्जो- हाँ और तुम सब भी ध्यान रखना की हमारे बीच जो हो रहा है वो किसी गलत आदमी को पता चल गया तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.

सरजू- हाँ मम्मी हम सब इतने तो समझ दार हैं hi, किसी को क्यों बताएँगे.

दीनू- हाँ पर इसके साथ साथ ये भी देखो की इन सब में और कौन कौन है,

नीतू- समझ रही हूँ पापा, पल्ली के लिए जीभ लपलपा रही है तुम्हारी...

दीनू- अब जब अपनी बिटिया को छोड़ लिए है तो पल्ली को कैसे छोड़ देंगे.

दीनू ने हँसते हुए कहा.

सरजू- अरे हाँ कुछ जुगाड़ लगाओ पल्ली का तुम दोनों.

सरजू ने अपनी बहनो से कहा,

लाडो- हो जायेगा भैया वो इतना मुश्किल नहीं करेगी, उस दिन नहीं देखा कितनी आसानी से बिरजू से चुद गयी थी हैं न जीजी.

नीतू- हाँ.

रज्जो- सही है और क्या पता उससे कुछ बातें भी पता चल जाएं...

दीनू- हाँ वैसे तुम भी कोशिश करना..

रज्जो- हम? हम कैसे?

दीनू- क्यों अब से नीलेश भाई या कर्मा के साथ बंद?

रज्जो- वो तो तुम बताओगे,

दीनू- हम क्या बताएं हमारी तरफ से कोई दिक्कत नहीं है बस हमारे लिए भी जुगाड़ करवाती रहो.

इस पर सब हंस पड़े.

रज्जो- तुम्हे बुरा नहीं लगेगा? मैं या बिटिया बहार किसी से छुडवाएंगी तो.

दीनू- देखो पहले भी चाहते न चाहते हुए सब हो चूका है तो अब रोक कर भी क्या हो जायेगा, इससे ाचा है तुम भी खुश रहो हमें भी रखो.

नीतू- ये हुई ना बात पापा...

लाडो- सही में.

सरजू- और क्या जो हो गया उसे सोचकर परेशां होने से ाचा है जो हो रहा है उसके मज़े लो.

रज्जो- अरे दिया कितनी अछि बात की सरजू तूने.

नीतू- अरे मम्मी ये सरजू भैया ने बस दोहराई है कहता कोई और है.

रज्जो- कौन?

सरजू- कर्मा..

लाडो- ाचा कर्मा भैया की लाइन चुरा के चिपका दी यहाँ भैया..

सरजू- हाँ वो भी काम हरामी नहीं है, बताओ मम्मी को खुद छोड़ रहा था और मुझे तरीके बताता था.

सरजू ने हँसते हुए कहा,

दीनू- कर्मा छोटे से hi थोड़ा अलग रहा है उसकी सोच सबसे अलग है हमेशा से

नीतू- हाँ ये तो है.

बातें चल hi रही थी की दरवाज़े पर खटखट हुई तो लाडो ने जाकर दरवाज़ा खोला, और सामने मंजू तै और उनकी बहु प्रेमा भाभी थी.

लाडो- तै नमस्ते आओ आओ.

दोनों अंदर आई.

दीनू- अरे आओ भाभी, बड़े दिनों बाद आयी हो.

रज्जो- हाँ बहु से सेवा करवाती रहती हो पूरे दिन जीजी जो घर से निकलती hi नहीं. बैठ बहु,

मंजू तै- अरे कहाँ रज्जो काम से hi फुर्सत नहीं मिलती पूरे दिन बा बहु को न हमको.

दीनू- ऐसा का काम करती रहती हो भाभी.. ?

रज्जो- अरे वो सब छोडो भैया आज शाम को खाना पीना नहीं बनाना जग्गू का जन्मदिन है तो सबका वहीं बनेगा,

सरजू- अरे मैं तो भूल hi गया वो मरेगा मुझे,

ये कहकर जग्गू तुरंत भागा, बाकि सब उसे हँसते हुए देख रहे थे,

मंजू- लो ये लोग कितने बड़े हो जाएं रहेंगे ऐसे hi,

रज्जो- अरे सही भी है जीजी, ऐसे hi अचे लगते हैं, जग्गू कर्मा सरजू सब एक साथ hi बड़े हुए हैं.

मंजू- हैं दोस्ती ऐसे hi बानी रहे,

दीनू- भग्गू कहाँ है भाभी कुछ दिन से दिख नहीं रहा,

दीनू ने थोड़ा गंभीर होते हुए कहा. क्यूंकि उसके बारे में सब hi जानते थे .

मंजू- अरे वो परसो hi गया है बहु के मां की किसी जान पहचान की जगह नौकरी की बात हुई है. तो उसी के लिए.

रज्जो- चलो ये तो बहुत ाचा हुआ, वो एक बार जैम जाये तो सब बढ़िया हो जायेगा.

मंजू- हैं बस यही प्रार्थना है. रज्जो, खैर छोडो तुम लोग आ जाना जल्दी hi खाना पीना बनवाना भी है.

रज्जो- हाँ बिलकुल जीजी. बस नाहा धोकर आ जायेंगे.

दीनू- भाभी खैर के साथ पीना भी है.

रज्जो- ये देखो बच्चे यही हैं पर इन्हे एक चीज़ दिखाई देती है.

मंजू- अब उसका अपने भैया से पूछो हमारी ज़िम्मेदारी में बस खाना hi है.

मंजू ने हँसते हुए कहा,

रज्जो- अरे रहने दो जीजी इनको न बस कुछ भी हो पीने को मिल जाये,

Deenu-to क्या हुआ भाभी ख़ुशी का मौका hai.thodi पी लेंगे तो क्या हो जायेगा...

इधर इनकी नोकझोंक सुन बच्चे और प्रेमा हंस रहे थे.

मंजू- अरे अब तुम लोग शुरू मत हो, भैया तुम्हे पीनी हो तो भैया से बात करो अपने,

रज्जो- इन सब मर्दों को पता नहीं क्या मिलता है पीने में.

मंजू- तू छोड़ न रज्जो, अरे अब चलते हैं, ममता और सभ्य को भी बोलना है

रज्जो- ठीक है जीजी.

मंजू- तुम आ जाना समय से नीतू लाडो तुम लोग भी.

Neetu-haan ताई हम तो मम्मी से पहले hi आ जायेंगे.

इसके बाद वो लोग चले गए और लाडो दरवाज़ा बंद करके आई.

रज्जो- क्यों मन भर गया देख कर.

Neetu-kise देख कर मम्मी?

रज्जो- अरे तेरे पापा का? इन्हे प्रेमा बहु बड़ी पसंद है..

लाडो- ओह्हो पापा बड़े रंगीन हो रहे हो..

सरजू- रंगीन क्या? प्रेमा भाभी हैं भी तो क्या गजब की.

दीनू- अरे वैसे मैं सोच रहा हूँ की क्या इनके परिवार से भी कोई सम्बन्ध हो सकता है क्या कर्मा पल्ली वगेरा का.

रज्जो- ओह्हो अरे बस करो तुम्हे बस एक hi चीज़ दिख रही है सब में.

नीतू- नहीं मम्मी हो भी सकता है, कर्मा और जग्गू की बहुत बनती भी है तो कुछ न हो या जग्गू को पता न हो ऐसा मुश्किल है.

रज्जो- हाँ जो भी है धीरे धीरे सामने आ जायेगा तब तक घर के बहार थोड़ा सावधानी से,

नीतू- हाँ मम्मी हम ध्यान रखेंगे...

इधर मैं जग्गू के साथ घूम रहा था वहीं घर पर नाना थोड़े बेचैन हो रहे थे तो अनुज और सागर के साथ बाघ में चले आये थे पर यहाँ भी उनके मन में वही सब चल रहा था, जो सुबह हुआ, कैसे अपनी hi बेटी को देख कर उन्होंने मुठ मारी थी, ये ख्याल बार बार उन्हें परेशां कर रहा था, वो अपने आप को इतना दोषी मान रहे थे की अनुज से नज़रें मिलाने में भी कटरा रहे थे, ये सोचकर की अपने नाती की माँ अपनी बेटी के बारे में मैंने इतना गलत सोचा, अनुज भैंसो का और सागर बाघ का काम निपटा रहा था वहीं नाना बाघ में एक किनारे बैठ ये सब सोच रहे थे... की तभी पीछे से मौसा ने उन्हें पुकारा- क्या हुआ बाबा बड़े शांत शांत लग रहे हो कोई बात है क्या?

नाना- अरे दामाद जी नहीं नहीं बस ऐसे hi बाघ की शांति का मज़ा ले रहे थे.

मौसा- अरे बाबा अगर समय न काट रहा हो तो हमारे साथ चलो शहर घुमा लाते हैं

नाना- शहर क्यों दामाद जी कोई काम था क्या?

मौसा- हाँ वो जग्गू के जन्मदिन की दावत है न तो उसी का कुछ सामान मंगाया है उसके पापा ने.

नाना- हम तो खली hi हैं, चलो इसी बहाने घूम लेंगे,

मौसा- बहुत बढ़िया चलो फिर...

दोनों लोग बाघ से बहार आके गाड़ी में बैठ कर निकल लिए..

मौसा- ाचा गाओं की याद तो नहीं सत्ता रही..

मौसा ने गाडी चलते हुए कहा,

नाना- अब याद तो आती है पर यहाँ सरे बच्चे तुम सब लोग एक साथ हो तो यहाँ भी ाचा लग रहा है.

मौसा- फिर ठीक है बाबा, और कोई परेशानी हो कमी हो तो हमसे कह सकते हो.

नाना - नहीं दामाद क्या परेशानी होगी हमें कुछ भी नहीं, इतना ाचा परिवार है, इतना प्यार सम्मान देने वाले बच्चे मिले अब हमें कोई कमी नहीं है...

मौसा- वो तो है बाबा पर कुछ कमी ऐसी भी होती है जो परिवार से भी नहीं कही जा सकती...

ये सुनकर नाना के चेहरे के थोड़े भाव बदले जो की मौसा ने भी देखा और मौसा समझ गए, दरअसल नाना को मौसा के साथ ले जाने की योजना पापा की hi थी, ताकि वो अकेला न महसूस करें, मौसा से नाना पापा की तुलना में ज़्यादा खुले हुए थे,

नाना- नहीं दामाद जी ऐसा तो कुछ नहीं है.

नाना ने खुद को सम्हालते हुए कहा जिस पर मौसा ने कर्मा का सिखाया हुआ पत्ता फेंका और बोले- बाबा देखो मैं जनता हूँ, माना पूरा परिवार है तुम्हारे चरणों और पर अम्मा नहीं हैं और न hi कोई तुम्हारी उम्र का जिसे अपने हिसाब से बातें कर सको, कोई दोस्त जैसा तो इसीलिए मैं कहता हूँ मुझे अपना दोस्त Hi समझो और खुल के बात करो.

नाना मौसा की ये बात सुनकर थोड़े हैरान हुए और उन्हें ाचा भी लगा,

नाना - अरे दामाद जी ऐसा नहीं है हमारे लिए तुम लोगो का प्यार hi काफी है अब इस उम्र में दोस्ती कहाँ...

मौसा- इस उम्र का क्या मतलब बाबा, अभी भी बिलकुल हट्टे काटते हो तुम,

नाना- वो तो बस गाओं का खान पैन ाचा है,

मौसा- बाबा खान तो ठीक है पैन की ज़रुरत तो नहीं?

नाना- मतलब?

मौसा- मतलब वो जो सामान लेने जा रहे हैं न, वो वही है.

नाना- क्या, अरे तुम भी न दामाद जी ये सब क्यों,

मौसा- अरे बाबा दावत है, इतना तो चलता है न.

नाना- अरे पर किसी को पता चला की हम तुम्हारे साथ ये लेने गए थे तो क्या सोचेंगे सब. बिटिया क्या सोचेंगी.

मौसा- अरे कुछ नहीं सोचेगा कोई बाबा, बेकार की चिंता करते हो, सब समझते हैं.

नाना- पर ये पीना ज़रूरी है क्या, घर में कलेश होती है.

मौसा- बाबा हम सब समझते हैं और कोई भी रोज़ नहीं पिता ना hi किसी को लत है, बस ऐसे hi कभी कभी ख़ुशी के मौके पर, आउट वो भी उतनी की जो मज़ा आये ये नहीं की औंधे मुँह पड़े हैं.

नाना इस बात पर हंस पड़े.

नाना- ऐसे लोग तो हमें चूतिया लगते हैं जिनसे झिलती नहीं पर लगा लेते हैं.

मौसा- वही तो, वैसे बाबा तुम्हारे लिए कितनी रखनी है?

नाना- अरे दामाद जी हमारे लिए रहने दो.

मौसा- अरे बाबा दोस्त समझो दामाद नहीं... अब बताओ कितनी..

इस पर नाना मुस्कुरा दिए..

में- साले ये इच्छा थोड़ी मुश्किल नहीं है तेरी?

जग्गू- है तो और मैं कौनसा कह रहा हूँ की आज hi पूरी हो जाये, जब तक तू कर पाए, पर सोच अगर हो जाये तो मज़ा आएगा न.

में- मज़ा तो आएगा, चल पक्का नहीं कह सकता पर कोशिश पूरी करूँगा.

जग्गू- अरे इतना तो भरोसा है तुझपर, तू कोशिश करेगा तो पक्का होगा hi.

में- चल टट्टे मत चाट अब, बोलै न कोशिश करूँगा,

जग्गू- सेल जन्मदिन वाले दिन तो इज़्ज़त से बात कर मुझसे.

में- ाचा भैया, और कुछ चाहिए आपको.

जग्गू- हरामी,

इतने में hi सरजू भाग कर आया आउट जग्गू को गले लगाकर बोलै- जन्मदिन की शुभकामनाये दोस्त, मेरे यार मेरे भाई.

जग्गू- हाँ हाँ बड़ी जल्दी याद आ गया,

सरजू- अरे याद तो था बस थोड़ा व्यस्त था,

जग्गू- कहाँ गांड मरवा रहा था,

सरजू- बीटा जन्मदिन है तुम्हारा आज तुम्हारी गाली भी माफ़.

में- सरजू बीटा इतनी भी छूट मत दे कहीं तेरी गांड न मांगले,

सरजू- तो क्या हुआ फे दूंगा, दोस्ती से बड़ी थोड़ी है गांड भेनचोद.

जग्गू- दारु चाहिए तुझे?

सरजू- ये होती है पक्की दोस्ती bhenchod,bina कहे बाँदा समझ गए,

में- अबे कोई भी समझ जायेगा जब तू गांड गिरवी रखने को तैयार हो जायेगा तो..

सरजू- फिर बता न कहाँ है पिरोगराम?

जग्गू- शाम को है, बड़े लोगो का चलेगा उसी टाइम निकल दूंगा तेरे लिए.

सरजू- तुम दोनों नहीं पियोगे,

जग्गू- पियूँगा.

सरजू- कर्मा तू?

में- मैं नहीं.

सरजू- अरे आज एक पेग लगा लिओ, बड़ा हो जायेगा,

में- मेरा पहले से hi बड़ा है,

Sarju-are थोड़ा सुरूर का अपना मज़ा है,

में- अबे मुझमे पहले से बहुत नशा है अब और मर कर.

जग्गू- बहस मत करो चलो तब तक पेप्सी पिलाता हूँ तुम लोगो को,

हम लोग निकल गए दुकान की और...

इधर पापा को आज सुबह से hi राजपाल ताऊ ने घेरा हुआ था शाम की दावत के लिए न जाने क्या योजना बन रही थी दोनों के बीच,

मां को आज राजन चाचा अपने साथ ले गए थे उनके खेत का काम बचा हुआ था जिसकी मदद के लिए मां गए थे वही दोनों की बातें हो रही थी और खूब जैम रही थी, काम निपटा कर दोनों पेड़ की छाओं में बैठे आराम कर रहे थे,

चाचा- अरे यार गुलाब ाचा हुआ तुन चले आये काम निपट गता जल्दी से.

मां - अरे जीजा, ये क्या बोल रहे हो ये कोई कहने को बात थोड़े hi है. ये हमारा काम था हम तो जह रहे थे तुम बैठो हम कर देंगे सारा.

चाचा- अरे ऐसे कैसे, ाचा और बताओ कुछ नयी पुराणी अपनी.

मां- का बताएं जीजा, बस काट रही थी अछि खासी फिर गाओं डूब गया,

मां हँसते हुए बोले.

चाचा- यार तुम बढ़िया आदमी हो गाओं डूब गया और तुम हंस कर बता रहे हो.

मां- जीजा हंस के बताएं या रो के डूबतो गया hi.

चाचा- वो बात तो है, खैर ये सब छोडो ये बताओ मन लग रहा है यहाँ?

मां- हाँ बिलकुल गाओं जैसा तो नहीं है पर लग hi जायेगा धीरे धीरे.

चाचा- अरे बीटा अगर लग गया न तो अपना गाओं भूल जाओगे.

मां - ाचा ऐसा क्या है यहाँ जीजा.

चाचा- बताएँगे, अरे बताएँगे क्या दिखाएंगे पर पहले एक जुबान दो.

मां - क्या.

चाचा- यही की जो हम दिखाएंगे या बताएँगे वो अपनी जीजी को जाकर नहीं बता डोज,

मां- अरे ऐसा क्या है,

चाचा- अब जानना है तो जुबान दो.

मां- ठीक है दी जुबान जीजा,

चाचा- आओ तुम्हे जलेबी खिलते हैं.

मां- जलेबी पर जीजा तुम तो कुछ दिखने वाले थे न.

चाचा- अरे दिखाएंगे थोड़ा सबर तो करो, ये कहते हुए चाचा और मां आगे बढ़ चले...

थोड़ी देर बाद दोनों हलवाई के दुकान के सामने थे चाचा ने दो पत्ते जलेबी ली और बगल में बानी दीवार पर बैठ कर खाने लगे,

चाचा- कैसी है, रसीली है न?

मां- हाँ जीजा रसीली और करारी भी हमें ऐसी hi जलेबी भाटी है.

चाचा- अरे हम जलेबी की नहीं पूछ रहे.

Mama-phir?

चाचा ने आँखों से एक और इशारा किआ तो मां ने भी उस और देखा और देखकर आँखें चौड़ी हो गयी दुकान के बगल में hi एक औरत अपनी साड़ी घुटनो तक उठाये बर्तन धो रही थी, पल्लू अस्त व्यस्त था, और झुकने के कारन उसके रसीले पापीती ब्लाउज से आधे झांककर सांस ले रहे थे, और ग्राहकों को लुभा रहे थे





नज़ारा देख कर मां को भी ाचा लगा पर बहन की ससुराल थी तो खुद को सँभालते हुए बोले- अरे जीजा तुम भी न,

चाचा- क्यों क्या हुआ अछि नहीं लगी.

मां- वो बात नहीं है जीजा, पर गलत है ऐसे किसी की औरत को देखना.

चाचा- अरे हमारे सामने ये महात्मा मत बनो, मर्द हम भी हैं और तुम भी खुल के बोलो.

मां- क्या hi बोलेन जीजा तुम तो फांस्वा डोज.

चाचा- अरे ऐसे कैसे फंस जाओगे न हम किसी को बता रहे न तुम, बस नैन सुख hi तो ले रहे हैं, और जीजा हैं तो उस लिहाज से बनो मत, खुल के रहो.

मां- ठीक है जीजा, तुम कहो तो सेक लेते हैं आँखें,

मां ने भद्दी हंसी हँसते हुए कहा..

चाचा- देखो तो हम कहें तो, जैसे खुद का नान नहीं कर रहा,

मां- अब सामने ऐसी रसीली मिठाई हो तो मन तो कर hi जाता है न.

चाचा - सही कहा गुलाब, साला जलेबी में ज़्यादा रास है या हलवाईं में समझ नहीं आता.

मां- इसके लिए तो दोनों को चख कर देखना पड़ेगा.

इस पर दोनों ताली मार के हंस पड़े,

चाचा- अरे अब तो चखना hi पड़ेगा ऐसी मिठाई को.

मां- जीजा तुम तो भावनाओ में बाह रहे हो, जीजी को खबर हो गशयी न तो सारा रास निचोड़ लेंगी.

चाचा- अरे जीजी को कौन बता रहा है, न हम न तुम, मर्दो की बात मर्दों में रहती है,

मां- ये भी ठीक है,

चाचा- अरे तुम अपना बताओ गाओं में कोई जुगाड़ है क्या, या फिर सलहज को hi परेशां करते हो.

मां को ऐसे सवाल की उम्मीद नहीं थी पर सोचा जब जीजा खुक के बात कर रहे हैं तो हर्ज़ hi क्या है.

मां- गाओं में नहीं जीजा बगल वाले गाओं में हैं.

चाचा- ाचा कैसी है?

मां- सास बहु हैं, दोनों पिलवाती हैं.

चाचा- अरे वाह ये थोड़ी अजीब जोड़ी लगी,

मां- अरे क्या हुआ औरत का लड़का शहर गया नौकरी करने वहां उसने दूसरी ब्याह ली तो उसकी घरवाली बदले में बहार छुड़वाने लगी, सास को पता चला तो कुछ करना तो दूर धीरे धीरे खुद भी करवाने लगी, वैसे भी घर का खर्चा चलना था,

चाचा- अरे वाह सही है समाज सेवा भी कमाई भी.

इस पर दोनों हंसने लगे.

मां- अरे जीजा हमारी बातें आपस में hi रखना बड़े jeeja(karma के पापा) को नहीं पता लगें, उनसे हमारी फटती है.

चाचा- अरे सेल साब, डरना क्या, वो भी हमारी तुम्हारी तरह hi हैं,

मां- मतलब.

चाचा- मतलब अगर वो भी यहाँ होते तो वो भी नैन सुख ले रहे होते जी भर के.

मां- सही में? बड़े जीजा?

चाचा- अरे चौंक तो ऐसे रहे हो जैसे न जाने क्या बोल दिया हो, भाई मर्द को चूचिया दिखेगी तो वो तोड़ेगा hi न.

मां- हाँ ये तो है.

चाचा - फिर? और तुम्हे एक चीज़ बताएं.

मां - हाँ बताओ,

चाचा- ऐसी चीज़ों के लिए तो तुम्हारी जीजी भी मन नहीं करती, कभी कभी तो खुद कहती हैं देख लो अचे से, किसी के बड़े दीखते हैं तो.

मां- क्या जीजा तुम भी न जीजी के बारे में ऐसे मत बोलो हमारे सामने.

चाचा- अरे जीजी है तो क्या हुआ है तो औरत hi न, तो ऐसे बुरा मत मानो, हमारा एक मन्ना है, ज़िन्दगी झांट जितनी है, तो फालतू के चूतियापे छोडो और खूब चुदाई करो खुश रहो,

मां इस पर ठहाके लगते हुए हंस पड़े और कहा, ये तो सही कहा जीजा.

इसी तरह बातें करते हुए दोनों घर की और चल दिए,

किरण पल्ली और लाडो ने आज फिल्म लगा ली थी और उसे देख रहे थे, भाई लड़कियां हो और शाहरुख़ खान की फिल्म न लगे ऐसा कैसे हो सकता है,

सागर अनुज का चेला बन गया था जबसे अनुज ने उसे उसकी पहली छूट दिलवाई थी, खैर अभी तो दोनों के साथ बिरजू था और तीनो पेड़ पर बैठ छूट और गांड की बातों में लगे हुए थे, बिरजू सोच समझ कर बोल रहा था जिससे कुछ गलत न निकल जाये उसके मुँह से.

औरतें तैयार हो कर सब मंजू तै के यहाँ पहुँच गयी दोपहर से hi खाने की तयारी में और खूब मज़ाक चल रहे थे आपस में,

ऐसे hi शाम हुई मौसा और नाना भी सामान लेकर लौट चुके थे, और इस सफर के बाद दोनों hi काफी आपस में खुल चुके थे, सब लोग तैयार होकर जग्गू के यहाँ पहुँच चुके थे, शहर वालो की तरह हमारे यहाँ जन्मदिन पर कोई केक वगेरा नहीं काटते थे बस बड़ों का आशीर्वाद और और दावत ये hi सब होता था...

जग्गू को सब बड़े आशीर्वाद के तौर पर कुछ पैसे या तोहफे दे रहे थे, मैंने भी सेल को एक जीन्स दी, खैर ये सब हुआ तो मैं सरजू अनुज सागर बिरजू जग्गू हम सब लग गए सबको खिलने पिलाने में क्यूंकि ज़्यादा लोगो को नहीं न्योता था कुल दो चार घर hi थे आपस के तो सबको आंगन मेइब hi बिठा कर खिला रहे थे वहीं, राजपाल ताऊ ने पीने वालो का इंतेज़ाम छत पर कर रखा था, पहले सब आदमियों को खिलाया गया फिर औरतों लड़कियों को, जिस जिस को पीनी थी वो धीरे धीरे ऊपर खिसक रहे थे, मौसा बहला फुसला कर नाना को भी मन लिए थे पर नाना ने कहा की गुलाब और बड़े दामाद जी होंगे वहां तो उनके सामने नहीं पि पाएंगे, इसलिए मौसा ने एक कमरे में जग्गू से कह कर उनका इंतेज़ाम करवा दिया था,

सबका खाना ख़तम हुआ तो मैंने पल्ली और नीतू ने मिलकर आँगन साफ़ किआ वहीं जग्गू सरजू और बिरजू अनुज सागर घर के पीछे थे जहाँ जग्गू बच्चों का इंतेज़ाम कर रहा था जिसमे सरजू बिरजू सागर तीनो को बियर अनुज के लिए रेडबुल थी ये सब मिलकर वहीं अपना अपना सामान निपटा रहे थे, मैंने लड़कियों के साथ मिलकर आंगन साफ़ करके एक स्पीकर लगा दिए और उस पर गाने बजा दिए, पल्ली और लाडो नाचने लगी और उन्होंने फिर किरण को भी खींच लिए, किरण ने नीतू को और नीतू ने प्रेमा भाभी को, और फिर प्रेमा भाभी ने मुझे, बाकि औरतें हमें देख खूब ताली पीट रही थी, मैंने फिर मंजू तै को भी पकड़ लिए और उनसे ठुमके लगवाने लगा तो तै ने अपनी संधान यानि भाभी की मम्मी को उठा लिए, भाभी ने ममता चची को हुए चची ने माँ को माँ ने रज्जो चची को फिर ऐसे hi करीब करीब सभी औरतें नाच रही थी, मैं गाओं के लोकगीत चला रखे थे जो सबको थिरकने पर मजबूर कर रहे थे,

पापा वगेरा की टोली जाम लगते हुए छत से नीचे देख रही थी और औरतों के नाच का मज़ा उठा रही थी





कुछ hi देर में बाकि लड़के भी आंगन में आ गए और गांव पर कूदने लगे,

नाना कमरे में बैठकर hi सबका मज़ा ले रहे थे, सबको धीरे धीरे दारु सुरूर चढ़ा रही थी नीचे लड़के भी बियर पी के मस्त हो रहे थे, मैं और अनुज hi सूखे थे बस हम फिर भी पूरे मज़े में थे..

नाना कमरे के अंदर से झांक झांक कर देख रहे थे बीच बीच में, गदराई औरतों का नाच सबको भ रहा था साथ hi दारु का सुरूर तो नाना भी खुद को रोक नहीं पा रहे थे, और यही हाल बाकी सरे मर्दों का भी था...

लड़के तो नाचते हुए चिपका चिपकी में थोड़े बहुत मज़े भी ले रहे थे, सरजू की नज़र पल्ली पर थी उसने जबसे किस्से सुने थे तबसे hi उसको भोगने की तलाश ने था, सागर भी लाडो को ताड़ रहा था और कोई जुगाड़ लगाने की सोच रहा था, पर इतने लोगो के बीच सिर्फ देखा देखि के कुछ नहीं हो सकता था...

इसी बीच नीतू ने सबको थोड़ा थोड़ा पीछे किआ और भाभी को बिलकुल बीच में खड़ा कर दिया.

नीतू- अरे देवर का जन्मदिन है भाभी की और से एक मस्त डांस तो होना चाहिए,

इस पर सब हाँ हाँ करने लगे, अब इतने लोगो का दिल भाभी नहीं तोड़ने वाली थी और उन्होंने नाचना शुरू किआ तो बाकि सब भी हौसला बढ़ने लगे,





भाभी का गदराया बदन थिरकता देख सब के hi अरमान जाग रहे थे, खैर इसी तरह जे शोर शराबे के बीच गण और नाच ख़तम हुआ तो खूब तालियां बजी.. इसके बाद धीरे धीरे मर्द लोग भी नश्र में झूमते हुए नीचे आने लगे तो औरतें वहां से हटने लगी, और एक और हो गयी, मर्दों का नशेड़ी नाच कुछ देर चला जिसे देख खूब हंसी मज़ाक हुआ, एक मौके पर तो दीनू चाचा दुपट्टा ोड कर औरत बन कर नाच रहे थे तो वहीं राजपाल ताऊ और राजन चाचा उनके आशिक़ बने हुए थे, मां ने भी खूब अचे से पि ली थी उनके हाव भाव से पता चल रहा था, इसी बीच किरण ने मुझे कहा की पापा यानि मां को ले चलें ऐसी हालत में नाना ने देख लिए तो गुस्सा करेंगे,

तो मैं किरण और माँ मां को पकड़ कर घर लाने लगे मामी और मौसी भी हमारे साथ चल दिए, इधर सागर भी बियर पि के मस्त हो गया था की वो बिरजू से लड़ने लगा, तो अनुज उसे खींचते हुए घर ले आया और हमारे पीछे पीछे वो भी आ गया उसने चुपके से सागर को छत पर लिटा दिया सागर भी बड़बड़ता हुआ सो गया, अनुज बापिस जग्गू के घर की और भाग गया, क्यूंकि पापा ने बोलै था की आज की रात उसे और मुझे वहीं रहना था

मां को भी मैंने और माँ ने मिलकर उनके कमरे में लिटा दिया, मां को लिटा कर मैं तो बापिस चला गया जग्गू के घर...

किरण- कितनी बॉस आ रही है दारु की मैं नहीं सोने वाली आज यहाँ,

माँ- अरे तू मेरे पास सो जइयो,

मामी- सोऊंगी तो मैं भी नहीं इनके साथ.

मौसी- तुम हमारे साथ सो जाना..

मामी- रात को जीजा आये तो?

मामी ने मुस्कुराते हुए कहा.

मौसी- तो क्या हुआ उन्हें भी सुला लेंगे,

मौसी ने मज़ाक करते हुए कहा,

मामी- धत्त.

माँ- अरे अब वो लोग न जाने कब आएंगे और आएंगे भी तो बहार आंगन में hi सो जायेंगे, या गुलाब वाले कमरे में,

ये सब बातें चल hi रही थी की आंगन से नाना की आवाज़ आई,

तो सब लोग बहार आ गए

मौसी- बाबा तुम भी आ गए.

नाना- हाँ हमने तुम लोगो को देखा तुम लोग दिखे नहीं तो हम भी चले आये और देर भी हो रही थी.

माँ- सही किआ बाबा, चलो बिस्तर लगा देती हूँ आराम करलो..

नाना- हाँ बिटिया, हम होकर आते हैं.

इधर नाना टॉयलेट में घुस गए वहीं माँ उनका बिस्तर लगाने लगी..

नाना टॉयलेट कर के जब अपने कमरे में पहुंचे तो माँ झुक कर उनका बिस्तर सही कर रही थी पर माँ को देख कर नाना के मन में एक बार फिर से वही ख्याल आने लगे, माँ का गदराया बदन देख कर नाना खुद को रोक नहीं पाए खुद के मन में आये ख्यालों को रोकने से.





नाना सोचने लगे सच में बड़की का बदन कितना मस्त है बिलकुल कैसा हुआ भरा हुआ, बिलकुल अपनी अम्मा की झलक है इसमें, नाना दरवाज़े पर खड़े खड़े माँ के बदन को घूरे जा रहे थे, उनका नशा उन्हें अपनी hi बेटी के लिए बहकाने में और मदद कर रहा था, सिर्फ इतना सा देखने भर से hi नाना का लुंड धोती में तन के खड़ा हो गया था,

माँ ने बिस्तर को ठीक किआ और मुद कर नाना को देखा तो बोली- लो बाबा अब सो जाओ आराम से.

नाना - ठीक है बिटिया तू भी सो जा अब.

माँ- ठीक है बाबा,

ये कहकर माँ तो चली गयी वहीं नाना ने बत्ती बुझाई और बिस्तर पर लेट गए, उनकी आँखों के सामने से माँ का बदन हैट hi नहीं रहा था और ये hi सोचते हुए एक बार फिर से उनका हाथ उनके लुंड पर चलने लगा...

मैं बापिस जब पहुंचा तो शोर शराबा हो रहा था, अंदर जाकर देखा तो दीनू चाचा को चढ़ गयी थी और वो चिल्ला चिल्ला कर सबसे बातें कर रहे थे, ज़्यादा लोग भी नहीं बचे थे, सिर्फ दीनू चाचा का परिवार, राजन चाचा का और जग्गू का और हम लोग, दीनू चाचा को ज़्यादा चढ़ गयी थी और वो रज्जो चची को पकड़ कर नचा रहे थे जबरदस्ती, जिस पर चची मन कर रही थी, सरजू, बिरजू भी अपने पापा की हरकतों को देख रहे थे पर वो दोनों खुद नशे में थे, वहीं नीतू लाडो उन्हें अलग करने की कोशिश कर रही थी,

नशे में तो खैर सरे hi थे पापा मौसा राजन चाचा राजपाल ताऊ, सबका यही हाल था. ये चारो एक साथ बैठे थे और बातें कर रहे थे,

राजन चाचा रज्जो चची को देखते हुए पापा से बोले- भैया कुछ भी करो पर आज रज्जो भाभी की दिलादो हमें तुमने तो मार ली है.

इस पर राजपाल ताऊ ने पापा को सवालिया नज़रों से देखा जिस पर पापा ने हाँ में सर हिलाया तो ताऊ मुस्कुराने लगे, ताऊ और पापा के बीच काफी कुछ बातें खुल चुकी थी, क्यूंकि ताऊ को वैसे भी सब कुछ पता चल hi गया था

पापा- अरे तो जा आज से ाचा मौका नहीं मिलेगा नाचते हुए दबोच ले....

इधर रज्जो चची दीनू चाचा से परेशां थी जो बार बार नशे में उन्हें नचा रहे थे.

रज्जो- जीजी अरे इनके नशे का कुछ करो इन्होने परेशां कर दिया.

मंजू तै- अरे रुको अभी इनका सारा नशा उतरती हूँ.

ये कहके तै उठी फिर रुक गयी और सब औरतों को बोली सिर्फ एक का क्यों सबका hi उतर दें.

ममता चची - मतलब?

मंजू तै- अभी बताती हूँ.

इधर मर्द लोग इस योजना स बेखबर बातों में लगे हुए थे की अचानक से hi सब पर एक साथ पानी की बरसात हो गयी, सब ऊपर से नीचे तक तर थे हम सब बच्चे छत से ये सब देख हंस रहे थे, वैसे हमारा प्लान था की सब मिलकर कोई खेल वगेरा खेलेंगे अंताक्षरी जैसा, पर अभी नीचे इतना कुछ हो रहा था,

राजपाल - अरे ये क्या किआ तुमने सारा भीगा दिया सबको.

ताऊ बिगड़ते हुए बोले तै को...

जिसका जवाब तै ने नहीं दिया बल्कि उनकी संधान यानि भाभी की मम्मी ने दिया- क्यों समधी जी ऐसे कैसे नशे की गर्मी जो एक बाल्टी पानी में बाह गयी.

इस बात पर तो मर्दों का जोश वैसे hi जाग जाता है तो पापा भी बोल पड़े - संधान जी ये चोदामपुर है यहाँ के मर्दों की गर्मी एक बाल्टी में शांत नहीं होने वाली,

संधान - हमें तो शांत hi लग रही है समधी जी, कोई जोश hi नहीं दिख रहा.

पापा- लगता है जोश दिखाना hi पड़ेगा संधान को...

ये कह पापा खड़े हुए और साथ hi मौसा भी और भाभी की मम्मी की और लपके जो उन्हें आता देख कर अंदर की और भागी पापा और मौसा उनके पीछे...

इधर राजन चाचा का लक्ष्य अभी भी रज्जो चची थी तो उन्होंने भी मौके का फायदा उठाया और वो रज्जो चची की और लपके तो रज्जो चची भैंसों के बढ़ने वाली जगह की और भागी और चाचा उनके पीछे, ये देख दीनू चाचा को भी जोश आया और वो मंजू तै की और लपके मंजू तै उन्हें गाली देती हुई पीछे भागने लगी.

दीनू चाचा भाभी भाभी कहते हुए उनके पीछे,

आंगन में बस राजपाल ताऊ और ममता चची रह गयी थी ताऊ के बदन से टपकते पानी को देख चची बोली - भाईसाहब कपडे बदल लो, बता दो मैं निकल देती हूँ कहाँ हैं?

राजपाल ताऊ - मेरे वाले कमरे की अलमारी में हैं बहु चल दिखा देता हूँ..

ताऊ भी चची को लेकर कमरे में चले गए, अब छत पर हम बच्चे बचे हुए थे, जिसमे मैं, जग्गू, अनुज, सरजू, बिरजू, और लड़कियों में पल्ली, लाडो और नीतू थी,

लाडो- क्या खेलना है भैया? बताओ.

में- अरे तुम लोग hi बताओ न कुछ,

हम सब बात तो खेलने की कर रहे थे पर सबके hi दिमाग पर चुदाई थी, सरजू बिरजू और जग्गू तो नशे में भी थे, इसलिए वो कुछ ज़्यादा hi उतावले हो रहे थे...

सरजू मुझे इशारे से एक और ले गया और बोलै- देख कर्मा मुझे तेरे और मम्मी यहाँ तक की उस रात तेरे नीतू लाडो पल्ली अनुज और बिरजू के बीच क्या हुआ सब पता है.

मैं उसकी बात सुन हैरान तो हुआ पर मुझे पता था की आज नहीं कल बात सामने आणि hi है और नशे में hi सही उसने खुद से बोल दिया तो और ाचा है.

में- यार अचव हुआ तुझे पता चल गया मुझे भी तुझसे छुपा के बुरा लग रहा था,

सरजू- चल सेल ड्रामे मत कर, और मेरी बात सुन.

में- बोल.

सरजू- मुझे पल्ली को छोड़ना है, कुछ जुगाड़ करवा जल्दी.

में- भड़वे सेल मुझे दल्ला समझा है क्या जो ऐसे बोल रहा है.

सरजू- अरे वैसे नहीं, देख तू अनुज यहाँ तक की बिरजू तो चुदाई कर hi चुके हो उसकी ,मैं छोड़ लूंगा तो क्या हो जायेगा.

उसकी बात सुन मेरा माथा ठनका

में- तू नीतू और लाडो को छोड़ चूका है न सही सही बता?

सरजू ने एक गहरी सांस ली और बोलै- हाँ,

में- अब साडी बात बता दे बीटा.

सरजू ने फिर बोलना शुरू किआ, और अपने परिवार के सरे राज़ खोल दिए ये भी की कैसे रात भर उनके परिवार ने एक साथ चुदाई की,

में- बस फिर क्या दिक्कत है आजा फिर तो खुल के चुदाई करेंगे,

सरजू- पर ये.

सरजू ने जग्गू की और इशारा करके कहा,

में- अबे वो मेरा जैदी है तुझे लगता है वो इन सब से अलग होगा,

इस पर सरजू मुस्कुराया और बोलै- सेल हरामी.

में- आजा अब.

फिर मैं और सरजू सब के पास पहुंचे, और मैंने सबका ध्यान अपनी और खींचा और कहा,

में- सुनो मुझे पता है की आगे क्या क्या करना है?

सबने मेरी और देखा..

लाडो- क्या करना है भैया?

मैं सबको देख मुड़कुड़ाया और बोलै- चुदाई,

इस पर सब एक दुसरे के कारन थोड़ा नाटक करने लगे,

में- देखो बनो मत हम सब एक hi जैसे हैं,

नीतू- कैसे?

फिर मैंने सबको एक दुसरे के बारे में बताया खुल कर के जग्गू और पल्ली के घर में भी खुल के चुदाई होती है, जैसे तुम लोगो ने अभी अभी करनी शुरू की है,

नीतू- पर तुम्हारे मौसा,

मैंने इस सवाल पर सिर्फ मुस्कुरा दिया तो सब समझ गए,

में- अब सरजू नीतू तुम लोग बताओ दीनू चाचा सबके साथ जुड़ना चाहेंगे या नहीं क्या लगता है,

नीतू- बिलकुल चाहेंगे, उन्होंने तो खुद बोलै था की कैसे भी सबके बारे में पता करो और मम्मी को तो बोलै था ताऊजी से करने को, बस बदले में उन्हें भी सबका स्वाद मिलता रहे...

अनुज- अरे वाह.

जग्गू- फिर देर किस बात की करते हैं न शुरू,

जग्गू नीतू और लाडो को देख लार टपकते हुए बोलै.

में- बस ये सोच रहा हूँ की सबको मिला कर एक साथ करें या हम लोग आपस में hi रहे.

लाडो- सबके साथ मज़ा आएगा,

अनुज- एक काम करते हैं, आंगन में चुदाई करते हैं हम लोग जो देखेगा आता जायेगा,

नीतू- ये भी सही है, चलो फिट.

हम सब लोग नीचे आ गए और शुरू हो गए, जग्गू ने नीतू को पकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगा वहीं हाथ भी एक दुसरे के बदन पर हाथ चल रहे थे, दूसरी और सरजू ने पल्ली को पकड़ा जिसके लिए वो कब से परेशां था अब रह गए हम तीन लड़के और अकेली लाडो वो मेरे बिरजू और अनुज के बीच घुटनो पर बैठ गयी हम तीनो ने भी अपने अपने पंत उतर दिए और लाडो बारी बारी तीनो के लुंड चाटने लगी.

बगल में जग्गू तो नीतू को आज जैसे खा जाने वाला था वैसे इतना मस्त माल मिले तो कौन नहीं खायेगा, जल्दी hi उसने नीतू को नंगा कर दिया था और उसकी चूचियों को चूस रहा था, दूसरी और सरजू और पल्ली उनसे काफी आगे थे, और दोनों 69 में एक दुसरे को सुख दे रहे थे, बिरजू हमारे पास से हटकर अपने भाई और पल्ली की और चला गया जहाँ दोनों 69 क्र आसान में थे और उसने अपना मुँह पल्ली जो की ऊपर थी उसकी गांड में घुसा दिया और चाटने लगा,

पल्ली के लिए दोगुना मज़ा आने लगा, दोनों भाइयों से चटवा कर, वहीं लाडो हम दोनों भाइयों को खुश करने की पूरी कोशिश कर रही थी... वो मेरा लुंड चूस रही थी वहीं अनुज ने तो पीछे से उसकी छूट में लुंड भी घुसा दिए था और छोड़ने लगा था, मेरा मन हो रहा था की सबको देखूं क्या कर रहे हैं तो मैंने लाडो के मुँह से लुंड निकला और कमरों की और बढ़ गया, पहले अंदर जाकर देखा तो पाया...

जारी रहेगी...
 
दोस्तों आगे बढ़ने से पहले एक जगह थोड़ी सी असमंजस में हूँ, जिस आईडिया को लेकर कहानी लिखी गयी है उसके अनुसार कुछ बिसेक्सुअल दृश्य भी शामिल होने हैं तो उसी को लेकर थोड़ी कन्फूसिओं है की बिसेक्सुअल केटेगरी को कहानी में इन्क्लुडे किआ जाये या नहीं,

जिसको समझने में थोड़ी दिक्कत हो रही है तो उनके लिए एक पिछ भी दाल रहा हूँ, नीचे दी हुई पिक्चर जैसे सन होंगे अगर हम उस और जाते हैं तो.

अपनी राइ जल्द से जल्द दें ताकि कुछ आगे सोचा जा सके...





 
पल्ली के लिए दोगुना मज़ा आने लगा, दोनों भाइयों से चटवा कर, वहीं लाडो हम दोनों भाइयों को खुश करने की पूरी कोशिश कर रही थी... वो मेरा लुंड चूस रही थी वहीं अनुज ने तो पीछे से उसकी छूट में लुंड भी घुसा दिए था और छोड़ने लगा था, मेरा मन हो रहा था की सबको देखूं क्या कर रहे हैं तो मैंने लाडो के मुँह से लुंड निकला और कमरों की और बढ़ गया, पहले अंदर जाकर देखा तो पाया...





अपडेट 211


मैं आंगन से पहले ताऊ तै के कमरे की और गया मुझे इतना तो पक्का यकीन था की इस कमरे में कोई न कोई तो आया होगा और कुछ ज़रूर हो रहा होगा, धीरे धीरे मैं आगे बढ़ा और दरवाज़े के पास जाकर दरवाज़े को हल्का सा धक्का देकर अपनी नज़र कमरे के अंदर दौड़ाई तो अंदर का नज़ारा बड़ा कामुक था अब क्यूंकि मुझे किसी का चेहरा नहीं दिख रहा था तोह मैं थोड़ा कमरे के अंदर की और आया और फिर देखा की अंदर राजपाल ताऊ और ममता चची थी, राजपाल ताऊ नंगे होकर अपनी पीठ पर लेते थे वहीं ममता चची ने अपनी साड़ी कमर तक उठा राखी थी और अभी राजपाल ताऊ के ऊपर बैठी हुई उनके लुंड पर उछाल रही थी उसमे में बात ये थी की ताऊ का लुंड चची की गांड में अंदर बहार हो रहा था...





इसी बीच ताऊजी की नज़र मुझ पर पड़ी तो वो बिना किसी हिचकिचाहट के बोले- अरे कर्मा आजा बीटा, ममता बहु अपनी गांड का स्वाद चखा रही थी मुझे, अह्ह्ह्ह क्या कासी हुई गांड है रे तेरी बहु... आह्ह्ह्हह

में- सही है ताऊजी सीधे सीधे गांड में hi घुस गए,

ममता चची- अरे लल्लाह भाई साब बोले की इन्हे मेरे चूतड़ और गांड बहुत पसंद थे, तो मैंने कहा पहले वो hi मार लो,

मैं थोड़ा आगे बढ़ा और अपना पजामा नीचे खिसका कर लुंड को चची के मुँह की और किआ तो चची चूसने लगी,

में- वैसे आह्हः सही है, बेकार में इधर उधर की बातों में समय गंवाए बिना सीधा मुद्दे पर आ जाओ,

राजपाल ताऊ- और क्या बीटा अब दोनों परिवार इतने खुल चुके हैं तो क्यों तमीज छोड़ना,

में- हाँ सीधे सीधे छूट छोड़ो.

इस पर ताऊ तेज़ी से हंसने लगे उनके साथ खुल कर ऐसे बातें करने में मज़ा आ रहा था,

ताऊजी- बिलकुल सही कहा बीटा अहह...

में- वैसे बहार आंगन में भी कुछ नया और तगड़ा प्रोग्राम चल रहा है चाहो तो वहां जाकर भी देख सकते हो .

ताऊजी- क्या आंगन में किसका?

में- देख लो जाकर खुद hi, वैसे चची की गांड का मज़ा ले लो फिर आ जबा.

ताऊजी- कुछ भी हो लल्ला अब बहार तभी जाऊंगा जब ममता बहु की गांड भर न दूँ.

में- हाँ वही तो, चलो अब मैं चलता हूँ. तुम लोग लगे रहो.

मैंने चची के मुँह से लुंड निकलते हुए कहा.

ताऊ- कहाँ चल दिया, आजा बहु के साथ मज़े करेंगे, जग्गू के साथ तो बहुत मज़े मरे हैं तूने हमारे साथ नहीं करेगा,

में- मरूंगा ताऊजी, पर अभी तुम चची की गांड से परिचय कराओ अपना फिर बहार आना मज़े मरेंगे.

ताऊजी- चल ठीक है.

मैं उन्हें कमरे में छोड़कर निकल गया, ताऊजी ने अपना पूरा ध्यान चची की गांड में लगाया, आखिर न जाने कबके अरमान थे ताऊजी के मन में चची को लेकर,

उनके कमरे से निकल कर मैंने सोचा कहाँ जॉन तो सोचा जग्गू का कमरा देखता हूँ, और उसके बहार hi पहुंचा के अंदर से तेज़ तेज़ आवाज़ें आ रही थी जिन्हे सुन कर कोई भी बता सकता था की अंदर क्या हो रहा है, मैंने उत्सुकता वश अंदर झांक कर देखा तो थोड़ा हैरान रह गया क्यूंकि अंदर बिस्तर पर एक नहीं दो जोड़े चुदाई में लगे हुए थे,





मुझे ये तो पता चल गया की पापा और मौसा थे और ये भी की मौसा के ऊपर प्रेमा भाभी उनके लुंड को छूट में लेकर उछाल रही थी पर पापा के नीचे कौन थी ये नज़र नहीं आ रहा था,

यही देखने के लिए मैं बिस्तर के पास पहुंचा और उसका चेहरा देखा तो हैरान रह गया, वो और कोई नहीं बल्कि भाभी की माँ यानि भग्गू की सास पद्मिनी तै थी, जो पूरी नंगी होकर अपनी बेटी के बगल में छुड़वा रही थी,

मुझे बिस्तर के बगल में खड़े हुए सबने देख लिए, साथ hi मेरे चेहरे पर आये हुए हैरानी के भाव को भी,

भाभी- कैसे परेशां हो लल्ला, आह्हः मौसा जी और तेज़्ज़ज़...

में- भाभी तुम्हारी मम्मी?

मैंने भाभी को उनकी मम्मी की और इशारा करते हुए कहा जिन्हे के पापा लगातार तगड़े धक्कों से छोड़ रहे थे, वैसे भी नयी छूट मिली थी तो पूरा फायदा उठाना बनता है न.

भाभी- हाँ भैया हमारी मम्मी hi हैं, और तुम्हारे पापा से छुड़वा रही हैं,

भाभी ने मज़ाक करते हुए कहा,

पद्मिनी तै- अरे अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह क्यों सत्ता रही है बबुआ को, अह्ह्ह्हह्हह समधी जी अह्हह्ह्ह्ह बड़ी दुमदार चुदाई करते हो तुम...

पापा- अरे संधान अह्हह्ह्ह्ह मेहमान हो सेवा तो दुमदार तरीके से hi करनी पड़ेगी अह्ह्ह्हह.

में- अरे पर ये हुआ कैसे?

पापा- वो सब बाद में पूछियो लल्ला अभी तो संधान के मज़े ले, क्या गदराया बदन है..

अब मैं कहाँ पीछे रहने वाला था मैंने भी तुरंत बिस्तर पर पेअर रख अपना लुंड उनके मुँह के आगे कर दिया तो पद्मिनी तै ने भी तुरंत मुँह में भर कर चूसने लगी.

में- अह्ह्ह्ह तै अह्हह्ह्ह्ह क्या गरम मुँह है तुम्हारा आह्ह्ह्हह..

मैं उनके मुँह में लुंड के धक्के लगते हुए बोलै.

भाभी- कैसी लगी मेरी मम्मी लल्ला???

भब्बी मौसा जी से चुड़ते हुए अपनी चूचियां चुसवाते हुए बोली

में- बहुत मस्त हैं भाभी, अब पता चला तुम्हे कामुकता और ये मस्त बदन तै से hi मिला है.

पापा- ये बात तो सही कही बीटा तूने अह्ह्ह्ब बिलकुल तुंहरे जैसा hi बदन पाया है संधान जी प्रेमा ने.

पद्मिनी तै- अह्हह्ह्ह्ह समधी जी तभी तो दोनों माँ बेटी एक साथ चुद रही हैं अगल बगल में...

पद्मिनी तै ने मेरा लुंड मुँह से निकल कर हाथों से मुठियाते हुए बोलै...





मौसा- अह्ह्ह्हह्हह ये तो हमारी किस्मत है समाधान जी जो हमें ये मौका मिल रहा है,

में- अह्ह्ह्ह पर भाभी अब भी मुझे समझ नहीं आया की तै इन सब में शामिल कैसे हुई.

भाभी- अरे भैया सही कहूं तो सबको यूँ देख कर मेरे मन में ख्याल आता था की मम्मी मेरे सामने छोड़ेंगी तो कैसा लगेगा,

में- वो तो आना जायज है.... अह्ह्ह्ह

तै ने मेरा लुंड बापिस मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,

भाभी- फिर एक दिन चुदाई करते हुए पापाजी ने भी बोल दिया की कितना मज़ा ायर अगर संधान को भी छोड़ पाते, हालांकि उन्होंने मज़ाक में कहा पर मुझे ये बात सही लगी तो मैंने किसी तरह से मम्मी को यहाँ बुला लिए, फिर पहले तो धीरे धीरे खुद पटाया और दो रात तो जमकर एक दुसरे की छूट छाती, फिर तीसरी रात मम्मी जी से मिलवा दिया और फिर अगली सुबह hi समधी ने इनकी छूट से लुंड को मिलवा दिया, फिर क्या था ये शामिल हो गयी इन्हे सब पता है हमारे बारे में. और ख़ुशी ख़ुशी देखो कैसे छुड़वा रही हैं

में- अरे वाह ताई ये बहुत ाचा किआ... हमारे बीच शामिल होकर.

पद्मिनी तै- ुह्मा हाँ बबुआ शुरू में तो हमें बहुत अजीब लगा, लगा कुछ पाप हो रहा है हमसे फिर जैसे जैसे चुदाई का नशा चढ़ता गया वैसे वैसे बाकि सब भूलते गए,

में- ये नशा hi ऐसा है तै जी, पापा मुझे भी तै जी के छेदों की सैर करनी है.

मैंने पापा से बोलै तो वो मेरी बात समझते हुए तै के ऊपर से हेट और खुद नीचे लेट गए, मैंने तै को उनका लुंड तै की छूट में लेकर बैठा दिया, फिर अपना लुंड तै के मुँह में दे दिया, साथ hi भाभी को इशारे से पूछा तो भाभी ने मुस्कुरा कर हाँ में सर हिला दिया बस फिर क्या था, मैंने तै के मुँह से उनके थूक से साणे हुए लुंड को निकला, पापा और तै के पैरों के बीच जगह ली और फिर अपने लुंड को तै के भूरे गांड के छेड़ पर रख कर अंदर घुसाया तो तै की एक चीख निकल गयी..

पद्मिनी तै- अह्हह्ह्ह्ह बबुआ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब घुसा hi दिया है तो अह्ह्ह्ह अटकाए क्यों हो अह्ह्ह पूरा तेल दो...

में- अह्ह्ह्ह मम ये लो तै अह्ह्ह्ह.

ये कहकर मैंने पूरा लुंड तै की गांड में घुसा दिया तो उधर मौसा भी उनकी बेटी की गांड में अपना झंडा गाड़ रहे थे,

खैर इधर मैं और पापा भी ले बनाकर धीरे धीरे पद्मिनी तै की दोहरी चुदाई करने लगे.





पद्मिनी तै- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह aahhhhhhhhhhh बित्याहहहह टेरिइइइइ ससुराल आलूओं ने तेरी मा छोड़ दी... अह्ह्ह्ह

उनकी बातें सुन मैं और पापा और जोश से छोड़ने लगे,

प्रेमा भाभी- ओह्ह्ह्हह्ह मा तुम्हारे haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh जैसीईई हो तू छोड़ना बिलकुल ज़रूरी है अह्हह्ह्ह्ह

पद्मिनी Tai-ahhhhhh बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी हीई..

इधर भाभी ने आगे खिसक कर मौसा का लुंड अपनी गांड से निकल दिया और बोली- मौसा जी मम्मी को चखाओ न मेरी गांड का स्वाद, घुड अपना लुंड मेरी रंडी छिनाल चुड़क्कड़ माँ के मुँह ने और इसके तीनो छेड़ बंद कार्डो,

भाभी से यव सुनकर सब hi जोश में आ गए और मौसा ने उठकर अपना लुंड पद्मिनी तै के मुँह में दे दिया और अब वो वक साथ टिहरी सेवा करवा रही थी...

Mausa-ahhhh ले संधान चाट apaniiiiiiiiiiiii ाभः बेटीई की गांड का रससससस,

मौसा अपना लुंड चुसवाते हुए बोले,

हम तीनो मिलकर पद्मिनी तै की तगड़ी चुदाई करने लगे,

भाभी- वैसे लल्ला तुम कैसे नंगे घूम रहे थे बहार डेल्हा नहीं किसी ने.

इसके जवाब में मैं उनकी और देख मुस्कुरा दिया...

(कुछ देर पहले)

दूसरी और हमारे दीनू चाचा आज किसी से पीछे नहीं रहे थे, मंजू तै उन्हें अपने पीछे भागते हुए भग्गू और प्रेमा भाभी के कमरे में घुस गयी तो दीनू चाचा भी उनके पीछे घुस गए,

दीनू- अब कहाँ बचोगी भौजी?

मंजू तै- तुमसे बचना कौन चाहता है, देवर जी,

दीनू- बदला तो लेना पड़ेगा देखो पूरा भीगा दिया तुमने..

मंजू तै- कैसा बदला लोगे देवर जी हमें भी भिगाओगे क्या?

दीनू- भिगाएँगे नहीं भाभी पर छोड़ेंगे भी नहीं,

ये कह दीनू चाचा आगे कूड़े और मंजू तै को लेकर बिस्तर पर कूद पड़े,

मंजू तै- हाय ढैय्या गिरा कहे दिया, देवर जी,

दीनू- उठ सकती हो तो उठ जाओ भाभी.

चाचा बे मज़ाक करते हुए उन्हें दबाते हुए कहा,

मंजू तै- अरे उठ जाओ न देवर जी,

दीनू- देवर भाभी के ऊपर गिरे और सूखा उठ जाये ये कैसे हो सकता है.

मंजू तै- फिर कैसे उठोगे,

इस पर दीनू चाचा मुस्कुरा दिए,

(अभी)

तै बिस्तर पर बिलकुल नंगी थी और बिस्तर के नीचे पूरे नंगे hi दीनू चाचा खड़े थे और तै की मोती मोती जांघो को थम कर अपने लुंड से उनकी छूट की पिटाई कर रहे थे





मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह भाभी अह्हह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है, अह्ह्ह कबसे सपने देखे थे छोड़ने के.

मंजू तै- अह्हह्ह्ह्ह तो आज छोड़ लो न अह्हह्ह्ह्ह तेज़्ज़ज़...

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह हानंन्न भाभी लो और आह्हः...

दोनों की चुदाई तगड़ी चल रही थी,

वहीं थोड़ी देर पहले रज्जो चची राजन चाचा से बचने के लिए भैंसो के छापर की और भागी थी पर ज़्यादा देर बच नहीं पाई थी और चाचा ने उन्हें पकड़ hi लिया, और पीछे से बाहों में भर लिए...

चाचा- ओह्ह्ह्हह्ह भौजी कहाँ दौड़ लगा रही हो,

रज्जो- अरे आह्हः भैयाहः छोडो न कोई देख लेगा,

चाचा - तो क्या देख लेने दो देवर भौजी मज़ाक भी नहीं कर सकते,

चाचा ने उन्हें खुद से चिपकते हुए कहा, तो रज्जो चची को चाचा का खड़ा लुंड अपने चूतड़ों में चुभता हुआ महसूस हुआ,

रज्जो- ुहहममम बच्चे भी यही हैं छोडो न,

चाचा- ऐसे कैसे छोड़ दें भाभी, थोड़ा खेलने तो दो.

चाचा ने अपने हाथ रज्जो चची के पेट पर चलते हुए कहा, उनका पल्लू तो भागते हुए hi नीचे गिर गया था,

रज्जो- नहीं भैया अह्ह्ह ऐसे मत करो हमें कुछ नहीं खेलना...

चाचा समझ गए ये ऐसे मैंने वाली नहीं हैं.

चाचा- क्यों भाभी नीलेश भैया के साथ तो खूब खेलती हो हमारे साथ मन कर रही हो,

रज्जो चची की ये सुनकर आँखें चौड़ी हो गयी,

रज्जो- क्या मतलब?

चाचा- मतलब भाभी हमें सब पता है,

चाचा के हाथ अब रज्जो चची के ब्लाउज के बटन खोलने लगे थे पर चची को अब्बी उस पर कोई ध्यान नहीं था.

रज्जो- तुम्हे किसने बताया भाई साब ने?

चाचा- अरे हम दोनों के बीच कोई बात छुपी है क्या...

चची सोचने लगी मतलब शक सही था राजन भैया भी कर्मा और भाई साहब के बारे में जानते हैं, रज्जो यही सही मौका है, जितनी बातें निकलवा सकती है निकलवा ले इनसे, वैसे भी नशे में हैं,

रज्जो- ाचा भैया बड़ी गहरी दोस्ती है तुम्हारी...

चाचा- दोस्ती तो गहरी hi की जाती है भाभी, हमारी तरह,

चाचा ने तब तक चची के ब्लाउज के सरे बटन खोल दिए थे और उनके ब्लाउज के पाटो को अलग कर फैला दिया,

चची को भी ये एहसास हुआ की उनका ब्लाउज खुल चूका है तो उन्होंने अपने हाथ चाचा के हाथों पर लाते हुए उनकी और देखते हुए कहा,

रज्जो- भैया हमसे दोस्ती नहीं करोगे?

चाचा ने रज्जो चची की और देखा और मुस्कुरा पड़े...

(अभी)

रज्जो चची भैंस के छप्पर में एक पुराणी चादर के ऊपर पीठ के बल लेती थी जिसे राजन चाचा ने अभी बिछा दिया था उनका ब्लाउज खुला हुआ था बड़ी बड़ी चूचियां ब्रा से बहार थी और लगातार नाच रही थी क्यूंकि उनकी टैंगो के बीच राजन चाचा थे जो उनकी छूट में अपने लुंड के दनादन धक्के लगाकर उन्हें छोड़ रहे थे,





चाचा- अह्ह्ह्ह भहानही अह्ह्ह्ह तुम्हे छोड़ने की तमन्ना बहुत पुराणी थी दिल में aahhhhhhhhhhh तुम्हारी ये उछलती चूचियां बहुत सूंदर लग रही हैं.

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम भैया तब हमारी दोस्ती नहीं हुई थी न अब हो गयी है तो अह्हह्ह्ह्ह खूब मज़े लो मेरी छूट के..

चाचा- अह्ह्ह्ह काश ये दोस्ती पहले हो गयी होती..

रज्जो- हमने तोह दोस्ती कर्ली है पक्की वाली भैयाहः और अपनी छूट का तोहफा भी दे दिया है.

चाचा - ओह्ह्ह्हह्ह भाभी ऐसा तोहफा आठ बड़ी किस्मत वालो को मिलता है अह्ह्ह्हह्हह माज़आह्ह्ह्ह आ गया.

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह मुझे भी भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पर तुम ब्बि दोस्ती का फ़र्ज़ निभाना अब.

चाचा- हाँ बिलकुल भाभी तुम्हारे लिए कुछ भी अह्ह्ह्हह्हह.

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह तो मैं भी ये समझूँ की भाईसाहब की तरह अब तुम हमसे भी कुछ नहीं छुपाओगी,

चाचा- हाँ बिलकुल भाहहहहहहहहबबी.

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह फिर हुई पक्की वाली दोस्ती uhiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाहः हमारा होने वाला है.

चाचा- हम भी तुम्हारी छूट को भरने वाले हैं भाभी

रज्जो- भरदो अह्ह्ह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह इ...

रज्जो चची चाचा के लुंड पर झड़ने लगी वहीं चाचा भी कुछ देर में चची की छूट में अपनी धार छोड़ने लगे.

दोनों झड़ने के बाद शांत हुए और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगे साथ hi आगे झुककर चाचा रज्जो चची के होंठों को चूसने लगे, कुछ देर होंठों को चूसने के बाद अलग हुए तो चची उनके सीने पर हाथ फिरते हुए बोली- भैया कर्मा अनुज और भाईसाब के बारे में पता था तुम्हारा भी चल गया और कौन कौन शामिल है तुम्हारे इस चुदाई के खेल में,

इस पर चाचा ने कुछ सोचा और बोले - भाभी बताने से ाचा है दिखा hi दूँ, किस्मत अछि हुई तो देखने को मिल जाएगा, पर उससे पहले एक बात.

रज्जो चची तो देखने की बात से खुश हो गयी और बोली- कौनसी बात?

चाचा- यही की अगर तुम ये जानना चाहते हो इस खेल में कौन शामिल हो तो देखने के बाद तुम्हे शामिल होने में तो कोई दिक्कत नहीं होगी?

रज्जो- लो, हमें क्या दिक्कत होगी हम तो खुद चाहती हैं.

चाचा- तो आओ चलो phir,iske बाद दोनों ने अपने अपने कपडे ठीक किये और घर के अंदर की और आने लगे, आँगन के पास आटे hi उन्हें आवाज़ें सुनाई दी जिसे सुन कर चची और चाचा ने एक दुसरे को मुस्कुरा कर देखा, और लपक कर चलते हुए अंदर की और आये उन्होंने सबसे पहले आंगन में देखा पर वहां तो कोई नहीं था फिर आगे बड़े तो बरामदे में देखा और जो देखा उसे देखकर दोनों की आँखें चौड़ी हो गयी,

रज्जो चची के तो होश उड़ गए ये सब देख कर क्यूंकि ऐसा नज़ारा ऐसा दृश्य उन्होंने जीवन में कहीं नहीं देखा था, वो बस आँखें फाड़े देखे जा रही थी, सामने हो रहे चुदाई के इस खेल को,





उन्होंने देखा की बगल में पड़े बिस्तर पर प्रेमा बहु उनके बेटे बिरजू के लुंड पर उसकी और मुँह करके बैठी थी और उछाल रही थी, वहीं उसके पीछे उनकी बेटी नीतू जग्गू के लुंड पर उसकी और पीठ करके उछाल रही थी, जिससे नज़रें मिली तो नीतू ने उसे एक प्यारी सी मुस्कान दी, मुँह से निकलती सिसकियों के बीच,

बीच में पड़ी हुई खाट पर प्रेमा की मम्मी अपनी बेटी के ससुराल में पूरी नंगी होकर अपने चूतड़ों को फैलाकर अनुज के मौसा के लुंड पर उछाल रही थी,

उनके ठीक पीछे उसी खत पर घोड़ी बनकर उनकी संधान यानि जग्गू की मम्मी को उनका बड़ा बीटा सरजू छोड़ रहा था, पीछे दीवार के सहारे एक खत पड़ी थी वहां उन्हें अपने पति दिखे जो की राजन की बेटी यानि पल्ली को अपने लुंड पर उछाल रहे थे,

रज्जो चची जहाँ देखने में व्यस्त थी तो चाचा ने उनके कपडे उतरने शुरू कर दिए वैसे भी रज्जो चची को कोई ध्यान नहीं था की वो नंगी हो रही हैं, होता भी तो क्या होता यहाँ सब नंगे थे, खैर जल्दी hi वो नंगी हो चुकी थी और चाचा भी नंगे हो गए थे, खैर राजन चाचा ने उन्हें तरंडा से निकला और उनका हाथ पकड़ बरामदे के एक और खींचने लगे तो चची का ध्यान टूटा और उन्हें एहसास हुआ की वो पूरी नंगी हो चुकी हैं ये सोच चची के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, लेकिन अगले hi पल ये मुस्कान गायब हो गयी क्यूंकि जहाँ चाचा उन्हें लेकर आये थे वहां जो उन्होंने पाया उसे देखकर, उन्होंने देखा की एक और उनकी प्यारी सबसे छोटी बेटी लाडो बिस्तर पर झुकी हुई थी और उसके पीछे कर्मा खड़ा था जो की लाडो की गांड इतनी बेरहमी से मार रहा था की हर झटके पर उसकी छूट से मूट की पिचकारी निकल रही थी





चची की आँखें ये देख फटी रह गयी उन्होंने देखा की कर्मा के पीछे उसके पापा थे जो अपना लुंड मुठियाते हुए अपनी बरी का इंतज़ार कर रहे थे,

इसी बीच राजन चाचा ने रज्जो चची को खींचा तो उनका ध्यान उन पर गया,

चाचा ने रज्जो चची को खींच कर दूसरी खत पर ले गए और पापा से बोले- आओ भाई साहब तब तक माँ के मज़े ले लो,

इतना सुनने पर पापा आये और बिस्तर पर बैठ गए तो चाचा ने रज्जो चची को इशारा किआ चढ़ने का चची भी जल्दी से पापा के लुंड को छूट में लेकर बैठ गयी, और फिर अगले hi पल उन्हें अपनी गांड में राजन चाचा का लुंड घुसता हुआ महसूस हुआ तो उनकी आह्हः निकल गयी जल्दी hi उनकी दोहरी चुदाई शुरू हो गयी जिससे उनका बदन सिहरने लगा, पापा उनकी मोती चूचियों को चूसते हुए छोड़ रहे थे वहीं चाचा तो चची की मोठे चूतड़ों को फैलते हुए उनमे लुंड पेल रहे थे,

चाचा का ध्यान अपनी बेटी लाडो की चुदाई पर भी था जो हर पर चरम की नयी ऊंचाइयों को छू रही थी तभी उन्हें बिस्तर पर कुछ हरकत महसूस हुई तो उन्होंने देखा और अपने बगल में राजपाल ताऊ यानि जग्गू के पापा को बैठा पाया, उन्हें देख वो थोड़ी संकुचाई की कैसी प्रतिक्रिया दें, जेठ थे वो उनके वो भी सबसे बड़े पर अभी परिस्थिति ऐसी थी की वो भी नंगे थे और रज्जो भी नंगी होकर दो दो लुंड से छड़ रही थी, ताऊजी ने रज्जो चची को देखा और उनकी सकुचाहट को देख कर बोले- हैरान मत हो बहु, आनंद लो ख़ुशी से..

इसके बाद चेहरा आगे कर उन्होंने अपने होंठ भी चची के होंठों से मिला दिए तो रज्जो चची की साडी शर्म चली गयी और वो भी चुम्बन में साथ देने लगी इसी बीच उन्हें और हरकत महसूस हुई तो होंठों को अलग करके देखा तो उनकी देवरानी और जो देवर उनकी गांड मार रहे थे उनकी पत्नी ममता राजपाल ताऊ के लुंड को छूट में लेकट उन्ही की तरह बैठ गयी और बैठी hi थी की अगले पल hi पीछे से अनुज ने उनकी गांड में लुंड घुसा दिया, अब रज्जो और ममता दोनों चची एक hi तरह से एक दुसरे के बगल में बैठी थी दोनों के hi अंदर दो दो लुंड घुसे हुए थे,

दोनों की आँखें मिली और दोनों की hi मुस्कान निकल गयी,

ममता - अह्ह्ह्ह जीजी मज़ा आ रहा है?

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह हम्म्म बहुत, अह्ह्ह्ह देखो न तुम्हारे पति हमारी गांड का भुर्ता बनाने ाः पर तुले हैं.

ममता- नयी नयी गांड मिली है जीजी उन्हें अभी तो कई लुंड इंतज़ार में होंगे तुम्हारे...

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम हमें भी इंतज़ार है सबका...

ममता- जे बाआआअह्ह्हत जीजी, अह्हह्ह्ह्ह हमें बहुत ाचा लग रहा है की तुम भी इसमें शामिल हो गयी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम हमें भी बन्नो इतना माज़आह्ह्ह्ह कभी नहीं आयाह.

राजन चाचा- एक बात तो है अह्हह्हं चाहे इनकी गांड में लुंड हो या छूट में औरतों की बातें ख़तम नहीं होती..

इस पर सब हंसने लगे





ममता चची- ओह्ह्ह जीई तुम बातों पर नाहीइइइइइइ अह्ह्ह्हह जीजी की सेवा पर ध्यान दो...

पापा- ुहममम सेवा तो बहु की कर hi रहे हैं अचे से...

अनुज- मैं भी चची की गांड की मस्त सेवा कर रहा हूँ...

चची- अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न लल्लाह बहुत अचे ऐसे hi मारताआहःहः रह....

रज्जो- अनुज लल्लाह ममता के बाद मेरिइइइ भी से आआह्ह्ह्हह्ह करेगा नाहहहह.

अनुज- हांण छाछठीीी ज़रूर... तुंहारी गांड मरने की राह देख रहा हूँ मैं तो अह्ह्ह्ह.

ममता- जीजी बड़ी लालची हो तुम दो दो लुंड घुसवा कर भी तीसरे पर नज़र है

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह बेटो की सेवा आह्ह्ह्ह का मज़ा hi अलग होता है रआईईई अह्ह्ह्हह्हह देवर hi आराम से.. ुहममम

रज्जो चची के होंठों को पापा चूसने लगे तब जाकर दोनों की बातें रुकी वहीं राजपाल ताऊ ने भी ममता चची के साथ यही किआ.

राजन चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये तरीका है इनकी बातें रोकने का...

राजन चाचा ने हँसते हुए कहा... तभी उनका ध्यान बगल में गया जहाँ लाडो एक तेज़ चीख के साथ झाड़ रही थी झड़ने के बाद तो वो बिलकुल बेजान सी हो गयी तोह मैंने उसे वहीं बगल में लिटा दिया और खड़ा होकर बरामदे में चल रहे खेल को देखा....



जारी रहेगी
 
और भाइयों आपस में बहस मत करो न कोई एक दुसरे की गांड को गिफ्ट करो 😄, एक सुग्गेस्टिव माँगा था बस बाकी मुझे आईडिया है की क्या करना है सभी का धन्यवाद्, अपडेट पोस्ट कर दिया है पढ़ो और हिलाओ पर बिना रिव्यु किये कोई गया तो आगे से सरे चरक्टेर्स गे बना दूंगा😆
 
राजन चाचा ने हँसते हुए कहा... तभी उनका ध्यान बगल में गया जहाँ लाडो एक तेज़ चीख के साथ झाड़ रही थी झड़ने के बाद तो वो बिलकुल बेजान सी हो गयी तोह मैंने उसे वहीं बगल में लिटा दिया और खड़ा होकर बरामदे में चल रहे खेल को देखा....

अपडेट 212


बरामदे में चुदाई का खेल पूरे जोश में चल रहा था और मुझे पता था ये रात लम्बी जाने वाली थी, बगल में रज्जो चची और ममता चची की दोहरी चुदाई हो रही थी, लाडो बगल में ऐसे लेते हुए थी, जैसे उसकी जान निकल गयी हो पर चेहरे पर संतोष था, मैंने सोचा की अब आगे देखते हैं अपने अगले शिकार को, और मैं बाकि सब की और पहुँच गया,

सुबह होने तक या हूँ कहें जब तक जो थका नहीं तब तक चुदाई करता रहा, पूरी कहानी सुनाऊंगा तो एक रात और सिर्फ बताने में hi लग जाएगी, हाँ पर कुछ तसवीरें भी ली गयी थी इस रात की यादों को संजो कर रखने के लिए उनको देखने से आप सब को अंदाज़ा हो जायेगा इस रात के बारे में.

दीनू और राजन चाचा ने एक दुसरे की बेटी का स्वाद चखा





पल्ली को जहाँ दीनू चाचा छोड़ रहे थे तो वहीं राजन चाचा के लुंड पर नीतू उछाल रही थी और लाडो अपनी बहन की छूट सहलाते हुए उसकी उत्तेजना और बढ़ा रही थी...

ममता चची की छूट का स्वाद सरजू ने भी चखा और उन्हें अपने रास से नहलाया भी

9bj8n8u7idw91.gif


चची भी नए नए लुंड पाकर खुश थी..

पद्मिनी तै को देख कर लग hi नहीं रहा था की ये उनकी पहली सामूहिक चुदाई है देखो कैसे अनुज और बिरजू के लुंड को एक साथ संभल रही हैं.



अनुज और बिरजू भी पदमिनी तै जैसी औरत को बिना भोगे कैसे छोड़ने वाले थे,

राजपाल ताऊ ने भी ममता चची के बाद अपना निशाना रज्जो चची को बनाया और उनके पति और बच्चों के सामने उन्हें छोड़ा,



मंजू तै मेरे लुंड पर उछालते हुए मौसा का लुंड चूस रही थी, उनके भरे हुए छूछे बेहद कामुक लग रहे थे उछालते हुए..





सबकी इच्छा को पूरा करते हुए अपने जन्मदिन के अवसर पर जग्गू ने सबके सामने अपनी मम्मी की चुदाई करके दिखाई



बाकि सब लोग भी माँ बेटे का ये मिलान देख काफी उत्तेजित और उत्साहित हो गए,

माँ बेटे की hi बात चली थी तो सरजू ने भी सबके सामने झुका कर अपनी मम्मी की गांड मार्के सबको अपने मादरचोद होने का सबूत दिया...



लाडो नीतू पल्ली को एक साथ झुककर पापा जग्गू और राजपाल ताऊ छोड़ते हुए,





जगपाल ताऊ और जग्गू नयी नयी छूटों को पाकर बेहद खुश नज़ार आ रहे थे

हमारी प्यारी मदमीनी तै की मैंने अनुज ने और सरजू ने मिलकर एक साथ खातिरदारी की..





जिसे पद्मिनी तै ने भी बहुत अचे से आनंद लिया...

नीतू लाडो और रज्जो चची तीनो माँ बेटी को एक साथ झुका कर तीनो की एक साथ गांड मरी, मौसा, पापा और राजपाल ताऊ ने





उसी समय उधर दीनू चाचा, सरजू और बिरजू एक साथ पल्ली, प्रेमा भाभी और ममता चची की गांड मर रहे थे





पद्मिनी तै मेरे और जग्गू के लुन्डों को एक साथ अपने मुँह में घुसंड की कोशिश कर रही थी





उन्हें देख कर एक बात तो कह सकता था की उनके जैसे लुंड चूसने की कला मैंने आज तक नहीं देखि थी, ऐसा लग रहा था उनका जनम चुदाई के लिए hi हुआ है,

तो उनकी संधान भी दो लुंड एक साथ संभल रही थी पर तरीका थोड़ा अलग था





अनुज और राजन चाचा ने मिलकर मंजू तै की गांड और छूट को एक साथ भरा और जमकर दोहरी चुदाई की...

दोहरी चुदाई तो मैंने और जग्गू ने भी की मिलकर और किसी और की नहीं बल्कि हमारी प्यारी नीतू की





ये रात की आखिरी चुदाई थी क्यूंकि लगभग सभी लोग बुरी तरह थक चुके थे और सब जहाँ जैसे जगह मिली पढ़ कर सो गए,

एक नए दिन का नया सूरज उदय होने वाला था, देखने लायक होगा की आज रात जो हुआ उसके बाद ये नया दिन चोदामपुर वासियों के जीवन में कितने बदलाव लेन वाला था.

वही दूसरी और कर्मा के घर पर किरण अपनी बुआ के कमरे में उनके साथ गयी उनके साथ जो सोने वाली थी, सभ्य ने कमरे का दरवाज़ा लगाया किरण अपने फ़ोन में लग गयी,

सभ्य जैसे hi साड़ी उतरने वाली थी तो किरण ने रोका..

किरण- बुआ रुको रुको..

संध्या- अरे क्या हुआ.

किरण- अरे इतनी सुन्दर दिख रही हो, एक दो फोटो तो करवालो.

सभ्य- धत्त्त मैं कहाँ सुन्दर, सुन्दर तो तू है मेरी गुड़िया रानी,

किरण- नहीं बुआ रुको न,

Sabhya-acha ले रुक गयी तू भी न ज़िद्दी हो गयी है.

किरण- हाँ बस ऐसे hi, रुको...

किरण फोटो खींचती है और सभ्य को दिखती है,





किरण- देखि बुआ कितनी सुब्दर लग रही हो, बिलकुल हीरोइन.

सभ्य- बिलकुल पागल है तू हम इस उम्र में हीरोइन, अरे हीरोइन तो तू है,

किरण- अरे नहीं बुआ सही में तुम भी उनकी तरह कपडे पहनो साजो, तो उनसे भी सुन्दर लगोगी, वो सब तो मेक उप से सुन्दर हैं तुम ऐसे hi लगती हो.

सभ्य- हट ऐसा कुछ नहीं है,

किरण- सही बोल रही हूँ बुआ.

सभ्य- ाचा ठीक है अब खींच लिए तूने फोटो, अब कपडे बदल लूँ,

किरण- अभी कहाँ ये तो सिंपल था, अभी कुछ और खींचूंगी मस्त मस्त.

सभ्य- अब नहीं गुड़िया अब थक गयी हूँ मैं.

किरण- अरे बुआ मान जाओ न,

सभ्य- ठीक ले कर ले तू अपने मन की.

किरण- ये हुई न बात अब रुको मैं करती हूँ तुम्हे बिलकुल हीरोइन की तरह तैयार.

किरण उठ कर आई और अपनी बुआ की साड़ी अपने हिसाब से करने लगी

सभ्य- तू भी न पगला गयी है, हमें तैयार करके क्या होगा,

किरण- अरे फूफाजी को दिखाउंगी देखना चौंक जायेंगे. ाचा अब ऐसे रुको...

सभ्य- अरे ऐसे पल्लू थोड़े hi होता है,

किरण- बुआ मुझे करने दो जो कर रही हूँ तुम बस पोज़ देती रहो.

सभ्य- ले भाई तू करले हम कुछ नहीं कर रहे,

किरण ने ऐसे करके अलग अलग पोज़ में कई साडी तसवीरें निकली अपनी बुआ की,

Sabhya-ab हो गयी तेरी फोटो?

किरण- हाँ बुआ अब हो गयी.

सभ्य- चल अब मैं कपडे बदल लेती हूँ ये कहके सभ्य वहीं अपनी सारे ब्लाउज और पेटीकोट उतर दी किरण एक नज़र से बुआ को देख रही थी और ब्रा पंतय में बुआ का गदराया बदन उसे बहुत सुन्दर और कामुक लगा तो न जाने उसे क्या सूझा वो चुपके से सभ्य के कपडे पहनते हुए की वीडियो बनाने लगी, सभ्य को इसकी कोई खबर नहीं थी, खैर सभ्य ने कपडे पहन लिए तो किरण ने वीडियो बंद कर दी, और फिर सभ्य भी किरण के बगल में बिस्तर पर आकर लेट गयी,

किरण को न जाने क्यों अपनी बुआ के पास लेटने के बाद बदन में एक गर्मी एक उत्तेजना का एहसास हो रहा था, शायद जो उसने बुआ की वीडियो बनाई थी उस कारन पर उसके मन में कुछ हो रहा था, वैसे भी पल्ली और लाडो ने जबसे उसके चुके मसले थे उसे अंदर से एक अलग भाव आ रहा था, उसने लेती हुई बुआ के सीने पर नज़र मारी तो देखा की बुआ की चूचियां कितनी बड़ी थी कितनी प्यारी लग रही थी, इन्हे दबाने में कितना मज़ा आता होगा न,

किरण- बुआ सो गयी क्या?

सभ्य- नहीं तू बता तुझे नींद नहीं आ रही.

किरण- नहीं बुआ तुमसे बात करने का मन कर रहा है.

सभ्य- अरे मेरी प्यारी बिटिया, आ इधर आ,

ये कहकर सभ्य ने उसे अपने से चिपका लिए तो किरण भी ख़ुशी ख़ुशी उससे चिपक गयी और अपने हाथ को सभ्य के पेट पर और पेअर को उसके पैरों पर रख लिए..

किरण- मेरी प्यारी बुआ...

सभ्य- बड़ा प्यार आ रहा है बुआ पर.

किरण- आएगा hi तुम हो hi इतनी प्यारी.

ये कहकर किरण ने सभ्य को गाल पर चूम लिए.

सभ्य- अरे पर तू सबसे प्यारी है ..

और जवाब में सभ्य ने किरण के माथे को प्यार

से चूम लिए...

किरण- हेहेहे ाचा लग रहा है.

सभ्य- लगेगा hi पता है तू जब छोटी थी तब भी ऐसे hi सोती थी,

किरण- हैं तभी तो इतना ाचा लग रहा है.

सभ्य- ाचा बता तेरी पढाई ठीक चल रही है.

किरण- ठीक चल रही है बुआ पर पढाई के बारे में मत पूछो इतना ाचा लग रहा है तुम पढाई बीच में ला रही हो.

सभ्य- अरे अरे हाहाहा ठीक है मेरी माँ नहीं करते पढाई की बात, ाचा फिर बता किस बारे में बात करें तेरे ब्याह के बारे में.

किरण- छही मैं नहीं करने वाली ब्याह वगेरा..

सभ्य- अरे क्यों नहीं करेगी..

किरण- बस ऐसे hi मेरा मन नहीं है.

सभ्य- कहीं कोई लड़का तो पसंद नहीं,

किरण- क्या बुआ तुम भी मुझे नहीं पसंद कोई लड़का,

सभ्य- अरे कोई हो तेरे स्कूल में या बहार.

किरण- नहीं बुआ कैसी बात कर रही हो.

Sabhya-are शर्मा मत देख जब बेटी बड़ी हो जाती है तो वो बेटी नहीं सहेली बन जाती hai,to तू मुझे सहेली समझ और कुछ मत छुपा मुझसे.

किरण- ाचा तुम मेरी सहेली हो,?

किरण ने हँसते हुए कहा.

सभ्य- हाँ...

किरण- अरे वाह तो मैं तुम्हे बुआ बुलाऊँ या सहेली.

Sabhya-jo तेरा मन करे,

किरण- फिर तो मैं तुम्हे बुलाऊंगी सेक्सी बुआ, हेहही

सभ्य- हॉट ये कैसा नाम है,

किरण- सहेली का दिया हुआ नाम है.

सभ्य- ाचा तो बता कोई लड़का है पसंद तुझे.

किरण- नहीं मेरी सेक्सी बुआ, मेरी सहेली कोई नहीं पसंद मुझे.

सभ्य- कोई बात नहीं मैं तेरे लिए बहुत ाचा लड़का ढूंढूंगी.

किरण- मुझे नहीं करना ब्याह.

सभ्य- क्यों?

Kiran-acha ठीक है करुँगी पर मेरी एक शर्त है.

सभ्य- क्या?

Kiran-tum मेरी सहेली hi तो हो जो मैं पूछूँगी सच सच बताना पड़ेगा...

सभ्य- ऐसा क्या पूछने वाली है तू?

किरण- शर्त मंज़ूर है या नहीं.

सभ्य- चल मंज़ूर है, अब तू ब्याह को मन नहीं करेगी.

किरण- नहीं करुँगी सेक्सी बुआ, वैसे ब्याह के बाद अगर तुम्हारे जैसी सेक्सी हो जाउंगी तो ज़रूर करुँगी.

सभ्य- मतलब.

किरण- मतलब ब्याह करके अगर तुम्हारे जितनी सुन्दर और कामुक लगने लगूंगी तो ज़रूर करुँगी.

सभ्य- तू भी न कुछ भी बोलती है, और तू मेरे जितनी नहीं मेरे से भी ज़्यादा सुन्दर लगेगी.

किरण- और कामुक?

सभ्य- वो तो तेरा पति तुझे जितना प्यार करेगा उस पर निर्भर करता है.

सभ्य ने शरमाते हुए कहा.

किरण- आये हाय बुआ तुम्हारा शर्माना. वैसे मतलब फूफाजी बहुत प्यार करते हैं तुमसे डेली डेली, बस आज जी की रात रह गया.

सभ्य- हट कैसी बातें कर रही है,

सब्या ने झूठा गुस्सा दिखातर हुए कहा.

किरण- अभी तुमने hi बोलै हम सहेली हैं तो सहेली तो ऐसी hi बातें करती हैं.

सभ्य- है दिया तुझसे बातों में नहीं जीत सकते हम.

किरण- ाचा बुआ शादी के पहली रात की कहानी सुनाओ न.

सभ्य- धत्त्त,

किरण- अरे बुआ सुनाओ न सहेलियों में सब चलता है,

सभ्य ने कुछ सोचा मन hi मन की अगर ये सुन्ना hi छह रही है तो क्या हर्ज़ है, जवान है पल्ली की उम्र की है इसका मन तो करता होगा न.

सभ्य- ठीक है पर तू सहेली है इसीलिए बताती हूँ, पर ये बात सहेलियों तक रहनी चाहिए किसी को पता नहीं लग्न चाहिए.

किरण- बिलकुल नहीं,

सभ्य- तो सुन, सभ्य ने थोड़ा मसाला और लगाकर अपनी सुहागरात की कहानी बतानी शुरू कर दी, जिससे माहौल और दोनों के बदन गरम होने लगे,

किरण की उत्तेजना उसकी साँसों से पता चलने लगी जो हर पल भरी होती जा रही थी... ये बात सभ्य जैसी अनुभवी औरत कैसे न जान पाती.. सभ्य ने थोड़ा और हवा देना सही समझा और बात आगे बधाई.

कुछ पल बाद किरण का गाला सूख रहा था और वो अपना थूक जातक रही थी, बदन की गर्मी का हाल ऐसा था की उसका बदन पसीना पसीना हो रहा था,

किरण- अरे बुआ बहुत गर्मी लग रही है मैं तो पसीना पसीना हो गयी,

सभ्य- हाँ गर्मी हो रही है देख तो मुझे भी पसीना आ रहा है,

पर गर्मी लगने के बाद भी किरण सभ्य से चिपकी हुई थी जिसका मतलब सभ्य भी समझ रही थी,

किरण- वही तो बुआ देखो न पंखा चल रहा है फिर भी,

सभ्य- अरे तो कपडे उतरले न क्यों ये भरी भरी कपडे पहन रखे हैं.

किरण- हाँ बुआ तुम भी उतर दो,

Sabhya-haan, जा कुण्डी लगा दे दरवाज़े की

ये कहकर सभ्य ने जहाँ अपनी सारी उतरी तो किरण ने अपनी सलवार और कमीज उतारदी, और उतारते हुए उसे बेहद उत्तेजना का एहसास हो रहा था अपनी बुआ के सामने भी,

सभ्य ने सारे के बाद थोड़ा बहादुरी दिखते हुए ब्लाउज भी निकल दिया, अपने कपडे उतारते हुए सभ्य की नज़र किरण के बदन पर भी थी उसका जवान बदन देख कर सभ्य के मुँह में भी पानी आ रहा था और सोच रही थी की इसके ऊपर घर के मर्दों की नज़र पद गयी तो ज़्यादा दिन नहीं बच पायेगी, पर ऐसी जवानी बचनी भी नहीं चाहिए जितनी मसली जाएगी उतनी hi और खिलेगी. पर देखना होगा की आखिर इसके मन में क्या है, सभ्य ने किरण के कामुक बदन को निहारते हुए सोचा,





सभ्य उसे देखते हुए अपनी साड़ी और ब्लाउज उतर चुकी थी और अभी सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थी,





वैसे छुप छुप के सिर्फ सभ्य hi नहीं बल्कि किरण भी अपनी बुआ के बदन को निहार रही थी, नंगा गदराया पेट, ब्रा में क़ैद बड़ी बड़ी चूचियां हाय सच में बुआ का बदन बड़ा मस्त है यार,

सभ्य बिस्तर पर चढ़कर जैसे hi लेटने को हुई, तो किरण बोल पड़ी- बुआ ये तो गलत बात है,

सभ्य- क्या हुआ गुड़िया क्या गलत है?

किरण- मैं सिर्फ ब्रा पंतय में हूँ तुमने पेटीकोट भी पहना है सहेली हो तो बराबर करो.

सभ्य- अरे तू भी ब्यौरा गयी है, न जाने क्या क्या करवा के मानेगी आज.

किरण- मेरी दोस्ती इतनी आसान नहीं है सेक्सी बुआ,

सभ्य- ाचा ठीक है ले उतर दिया पेटीकोट भी अब खुश,

ये कहकर सभ्य ने अपने पेटीकोट का नाडा खोला और उसे भी अपने पैरों से निकल दिया,

ले अब तो खुश है न तू?

सभ्य पेटीकोट को अलग टांगते हुए बोली...

वहीं किरण के मुँह से तो कुछ नहीं निकल रहा था क्यूंकि उसकी नज़र तो अपनी बुआ के कामुक बदन पर थी कच्ची मैं से बहार झांकते चौड़े चूतड़, ब्रा में से आधी बहार निकलती हुई चूचियां, हाय क्या बदन है बुआ का, किरण के दिमाग में यही सब चल रहा था, सभ्य को देखते हुए





सभ्य बिस्तर पर जा कर लेट गयी और बोली- अरे क्या हुआ कड़ी hi रहेगी क्या?

तब जाकर किरण को होश आया तो वो भी बिस्तर पर चढ़ कर लेट गयी पर अब उसे थोड़ी हिचकिचाहट थी की अब सिर्फ ब्रा पंतय पहन कर उसका बुआ से चिपकना अजीब तो नहीं होगा कहीं बुआ को गलत लगे..

पर इसका जवाब उसे खुद मिल गया जब सभ्य ने बिलकुल पहले की तरह hi हाथ खोल कर उसे बुलाया- आजा गुड़िया.

किरण ख़ुशी से जल्दी से बुआ से चिपक कर लेट गयी इस बार उसका हाथ बुआ के नंगे पेट पर था, वहीं उसके पेअर बुआ के नंगे पैरों के बीच, सभ्य को भी ाचा लगा अपने हाथों को किरण के जवान बदन पर फिरते हुए,

किरण खुद से hi सभ्य के पेट को सहलाने लगी तभी उसे जैसे कुछ समझ आया और शरारत सूझी

किरण- बुआ वैसे बड़े रंगीन मिजाज़ की हो तुम.

सभ्य- क्यों भाई ऐसा क्या कर दिया मैंने.

Kiran-tumhari कच्ची तो देखो कितनी मस्त है बिलकुल डिज़ाइन वाली,

सभ्य- अरे ये, ये तो तेरे फूफा लाये थे शहर से हमारे लिए.

किरण- ाचा फिर पहन कर दिखाई फूफाजी को..

सभ्य- अरे बिना दिखाए मैंने वाले कहाँ थे, देखि भी और फिर उतार... धत्त तू भी न हमसे कुछ भी बुलवा रही है.

किरण- तो क्या हुआ हम तो सहेली हैं न,

सभ्य- हाँ सहेली बन कर साडी बातें पूछले तू,

किरण- वैसे फूफाजी ने गलत नहीं किया सेक्सी बुआ, तुम्हारा बदन hi ऐसा है की कपडे इस पर अच्छे नहीं लगते...

सभ्य- ाचा तभी तूने उतरवा लिए, सरे.

किरण- मैंने भी तो उतरे हैं न.

सभ्य- हाँ मेरी गुड़िया रानी,

किरण- पूरी बात बताओ न ये कच्ची ब्रा में देखकर फूफाजी ने क्या किआ?

सभ्य- तुझे बड़ा मन हो रहा है जानने का,

किरण- हो तो रहा है,

सभ्य- जब तेरा पति लेकर देगा न उससे जानना फिर.

किरण- बुआ बताओ न बताओ न,

सभ्य- ाचा ठीक है तू भी न.

किरण- अछि बुआ ये कहकर किरण सभ्य से और चिपक गयी और अपना सर उसके सीने पर रख लिए.

सभ्य को भी उत्तेजना हो रही थी एक तो सुबह से चूड़ी नहीं थी ऊपर से भतीजी का कामुक बदन बिलकुल चिपका हुआ,

सभ्य- ाचा सुन तो पहले तो उन्होंने मुझे कच्ची और ब्रा में जी भर के देखा घुमा घुमा कर.

किरण- हेहेहे फिर?

सभ्य- फिर मेरे पास आये और मुझे गोदी में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया..

किरण- हाय अब बढ़ी थोड़ी गर्मी, फिर?

सभ्य- फिर वो मेरे ऊपर चढ़े और मुझे प्यार से देखने लगे,

किरण- काश मैं फूफाजी की जगह होती,

सभ्य- अभी तू उन्ही की जगह है गुड़िया देख उन्ही के बिस्तर पर उनकी अधनंगी बीवी के साथ लेती हुई है चिपक कर, हाहाहा.

किरण - हहहह ये बात तो सही कही बुआ, तो फिर मैं फूफाजी बन जॉन तुम्हे भी सोचने में बताने में आसानी रहेगी,

सभ्य- तू सब बन जाएगी आज hi, सहेली भी पति भी..

किरण- अरे मैं तो तुम्हारे लिए hi कह रही हूँ की तुम्हे आसानी होगी और याद नहीं आएगी, तुम तो मुझे डांटने lagi,huh.

सभ्य- अरे मेरी गुड़िया तेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी, तुझे जो सही लगे वो कर,

किरण- सच्ची?? तो बताओ फूफाजी कहाँ थे उस टाइम? तुम्हारे ऊपर?

सभ्य- हाँ ऊपर आके ध्यान से देख रहे थे और फिर झुक कर मेरे पेट और नाभि को चूमने लगे,

ये सुन किरण थोड़ी मुस्कुराई पर फिर सभ्य और खुद को हैरान करते हुए उसने झुककर अपने होंठ अपनी बुआ के नंगे गदराये पेट पर लगा दिए, इस स्पर्श से hi सभ्य की अह्ह्ह्हह्हह निकल गयी और इस कामुक आह्ह्ह्हह्ह से किरण को बड़ा ाचा लगा, की वो अपनी बुआ को खुश करके उन्हें सिसकियाँ दिलवा रही है, वहीं बुआ के पेट की त्वचा का स्वाद पाकर उसके खुद के बदन में करंट दौड़ने लगा, उसकी छूट पनिया चुकी थी और उसे लग रहा था की थोड़ी बहुत उसकी कच्ची भी गीली हो चुकी थी पर अभी उसका ध्यान सिर्फ बुआ पर था...

किरण ने एक पल को सभ्य के पेट से होंठों को हटाया और बोली- फिर???

सभ्य- फिर ुहममम फिर तेरे फूफाजी मेरे पूरे पेट को पागलों की तरह चूमने चाटने लगे,

सभ्य के मुँह से ये निकलते hi किरण को तो जैसे छूट मिल गयी और वो सभ्य के पेट को बुरी तरह से चाटने लगी, चूमने लगी, और सभ्य की आहें लगातार निकलने लगी हो उसे और उत्तेजित करने लगी,

सभ्य- फिर वो अपनी जीभ को मेरी नाभि में डालकर उसे चूसने लगे,

किरण ने भी वैसा hi किआ और इस बार सभ्य के मुँह से सबसे बड़ी अह्हह्ह्ह्ह निकली... किरण को बुआ का गदराया बदन बहुत स्वादिष्ट लग रहा था उसे लग रहा था नाभि से कोई रास उसके मुँह में घुल रहा है, किरण काफी देर तक सभ्य की नाभि को चूसती रही और सभ्य सिसकती रही, फिर जब किरण ने अपना मुँह सभ्य की नाभि से हटाया तो उसके चेहरे पर एक वादी मुस्कान थी, वहीं सभ्य भी उत्तेजना पर सवार थी,

किरण- फिर

सभ्य- ुहमममफिर वो ऊपर आये और मेरे ऊपर लेट गए और मेरी गर्दन गालों को चूमने लगे.

किरण ने भी वही किआ और तुरंत बुआ के ऊपर लेट गयी और सभ्य की गर्दन को चूमने लगी, सभ्य फिर से सिसकने लगी, सभ्य के हाथ किरण के अधनंगे बदन पर फिरने लगे, अपने पेट पर किरण के पेट का स्पर्श सभ्य को बहुत ाचा लग तहा था और उतना hi किरण को भी.

सभ्य- ुहममम अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न ुहममफिर गर्दन और गालों को चूमते चाटते हुए उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों से मिलपप्पूःमममममम

किरण ने सभ्य की बात पूरी हो उससे पहले hi अपने होंठों को उसके होंठो पर रख दिया और चूसने लगी सभ्य भी तुरंत उसका साथ देने लगी अब जैसे दोनों hi एक दुसरे के होंठों को खा जाना चाहती थी ऐसे चूस रही थी, सभ्य चूमते हुए उठ गयी और उसे पलटकर खुद ऊपर आकर किरण को चूमने लगी,





दोनों hi बुआ भतीजी के बीच अब कोई नाटक नहीं रह गया था बल्कि सिर्फ हवस थी और उसी का उदहारण दोनों दे रहे थे,

सभ्य के हाथ लगातार किरण के बदन को छेड़ रहे थे कभी नाभि को उंगली से कुरेदते तो कभी पेट को मसलते... पर उन दोनों के होंठ अलग नहीं हो रहे थे, सभ्य ने अपनी जीभ अपनी भतीजी के मुँह में घुसा दी थी जिसे वो बड़े चौ से चूस रही थी...

सभ्य ने एक हाथ ऊपर लेकर धीरे से किरण की ब्रा में घुसा दिया और उसकी चूचियों को छेड़ने लगी तो किरण तो जैसे पागल सी होने लगी...





सभ्य ब्रा के अंदर hi किरण की कड़क चूचियों को कभी मसल रही थी तो कभी उमेठ देती जिससे किरण की सिसकियाँ उसके मुँह में घूंट के रह जाती,

काफी देर तक एक दुसरे के होंठों का रास पीने के बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो किरण ने शरमाते हुए अपनी बुआ को देखा तो बुआ ने मुस्कुरा कर उसे देखा पर उस मुस्कराहट में किरण को समझ आ गया की रात अभी बाकी थी, मुस्कुराते हुए सभ्य अपने हाथ अपनी पीठ पर ले गयी और अपनी ब्रा खोल दी अगले hi पल सीने से भी अलग करदी तो किरण की आँखें अपनी बुआ की मोती मोती चूचियां देखकर फ़ैल गयी पर सभ्य इतने पर hi नहीं रुकी और बिस्तर पर hi खड़े होकर अपनी कच्ची को भी नीचे सरका दिया तो किरण का सर चकराने लगा उसे लगने लगा आज न जाने क्या होकर रहेगा, कच्ची के उतारते hi किरण की नज़र अपने आप बुआ की दोनों टैंगो के बीच जिज्ञासा वश गयी, लालसा थी बुआ की रसभरी छूट देखने की जिसकी झलक तो मिली पर अगले hi पल ओझल हो गयी क्यूंकि बुआ बापिस बिस्तर पर बैठ गयी, अपने कपडे उतरने के बाद सभ्य ने किरण को मुस्कुरा कर देखा... और अपना हाथ उसकी और बढ़ाया जिसे किरण ने अपने आप पकड़ लिए सभ्य ने किरण को उठा कर बिठा लिए और फिर उसके पीछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा खोलने लगी तो किरण के मन में और नया जोश आने लगा, अगले hi पल किरण की ब्रा खुल गयी तो उसे सभ्य ने उसके सीने से हटा कर अलग फ़ेंक दिया, ब्रा के बाद अगला हमला सीधा किरण की कच्ची पर हुआ जिसे उतरने में किरण ने अपने चूतड़ों को उठाकर मदद की,

अब दोनों बुआ और भतीजी बिलकुल नंगी थी एक दुसरे के सामने, सभ्य ने किरण के नंगे बदन पर हाथ फिरना शुरू कर दिया, कभी उसकी जांघों को सहलाती तो कभी चूचियों को किरण को भी बुआ की हरकतें बहुत भ रही थी, इसी को दिखते हुए किरण भी बुआ के बदन पर हाथ फिरते हुए उसे चूमने लगी,





दोनों के अंदर की हवस और प्यास साफ़ नज़र आ रही थी, कुछ पल चूमने के बाद सभ्य ने किरण को धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और अपना ध्यान उसकी संतरो की आकर की चूचियों पर लगाया, और उन्हें मसलते हुए चूसने लगी,

किरण की जवानी का ये पहला मौका था जब कोई उसकी गदराई हुई चूचियों को चूस रहा था उसके पूरे बदन में सिरहन हो रही थी जो उसने आज तक महसूस नहीं की थी, उसकी ुनचुइ चूचियों को चूसने का पहला मौका उसकी बुआ को मिलेगा उसने कल्पना भी नहीं की थी, इधर सभ्य को भी अपनी भतीजी की कुंवारी जवानी के साथ खेलने में एक अलग आनंद मिल रहा था,

किरण- ुहम्म buaaaaahhhhhhhhhh... ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह...

किरण की सिसकियाँ नहीं रुक रही थी, इसी बीच सभ्य ने मन भर के चूचियों को चूसने और मसलने के बाद नीचे की और सरकना शुरू किआ पेट को चूमते चाटते हुए नाभि के रास को अपनी जीभ दाल दाल कर निकला और फिर थोड़ा सा और नीचे खिसक कर जैसे hi किरण की कुंवारी छूट के पास आई तो किरण का बदन तो उत्सुकता में अकड़ने लगा, उसके नितम्भ खुद उछाल उछाल कर सभ्य को छूने की कोशिश करने लगे,

सभ्य ने भी अचे से प्यार से जी भर के किरण की सुन्दर कुंवारी छूट को निहारा और फिर उसकी आँखों में देखते हुए बोली- बहुत प्यारी और गरम छूट है तेरी.. देख कैसे रास बहा रही है..

बुआ के मुँह से ये सुनकर किरण को अजीब एहसास हुआ, बुआ के मुँह से छूट सुन्ना एक नया अहसास था पर अभी उसे अपनी छूट की प्यास का एहसास ज़्यादा हो रहा था उसे लग रहा था की उसकी छूट गर्मी से जल जाएगी, लाख चीटिया उसकी छूट में रेंग रही थी वो चाहती थी उसकी बुआ कुछ करे उसे इस प्यास से इस खुजली से रहत दिलाये,

पर सभ्य उसे तड़पा रही थी इतनी पास होने के बाद भी अब तक छूट को छुआ भी नहीं था, अंत में जब किरण से नहीं सहा गया तो बोल पड़ी- ओह्ह्ह्हह्ह बुआ कुछ करूओणआ मेरी चूऊत्त में बहुत खुजली हो रहियी है बुआ कुछ करो न.

किरण ने गिड़गिड़ाते हुए कहा तो सभ्य को भी भतीजी पर दया आ गयी और उसने अपना मुँह तुरंत उसकी छूट पर लगा दिया,

जिसके लगते hi किरण का मुँह खुला का खुला रह गया उसमे से न आवाज़ निकली न कुछ बस मुँह खुला रह गया और उसका बदन अकड़ने लगा,

इधर सभ्य ने अपना काम शुरू कर दिया और भतीजी की छूट का स्वाद लेने लगी, और भतीजी तो बुआ की जीभ पर नाचने लगी, सभ्य जैसे जीभ चलती किरण का बदन वैसे hi नाचने लगता, किरण की उत्तेजना बड़ी तो उसने अपने हाथ से सभ्य के बाल पकड़ लिए और उसके मुँह को अपनी छूट पर घिसने लगी या यूँ भी कह सकते हैं की अपनी छूट. को उसके मुँह पर घिसने लगी.





किरण की इस प्रतिक्रया से hi पता चल रहा था की वो अभी उत्तेजना की किस ऊँचाई पर है जल्दी hi, उत्तेजना के शिखर पर पहुँच गयी और झड़ने लगी, उसकी छूट से रास बहने लगा जिसे व्यर्थ न करने की ज़िम्मेदारी सभ्य ने ली और चाटने लगी , किरण अपनी आवाज़ को अपने हाथों से दबाते हुए अपनी बुआ के मुँह में झाड़ रही थी, उसकी छूट से शायद hi अभी तक इतना रास निकला होगा जितना अभी निकल रहा था पर उसकी बुआ सारा चाट कर जा रही थी, कुछ पलों बाद किरण का झड़ना बंद हुआ तो वो बिस्तर पर बेजान सी पसर गयी, सभ्य ने उसकी छूट से मुँह हटाया और उसको देखने लगी, एक पल को तो उसे चिंता हुई की ये ठीक तो है न.

सभ्य- गुड़िया तू ठीक है न?

किरण ने कुछ जवाब नहीं दिया.

सभ्य- गुड़िया??? ओह बिटिया. तू ठीक है?

किरण अचानक से उठी और सभ्य से चिपक गयी, किरण- हाय बुआ इतना बढ़िया तो मैं कभी नहीं हुई,

सभ्य- तूने तो मुझे डरा hi दिया.

किरण- डरना नहीं था बुआ कुछ और करना था, ये कहकर किरण ने सभ्य को धक्का देकर बिस्तर पर पीछे की और लिटा दिया और उसके होंठो को चूसने लगी, सभ्य भी तुरंत उसका साथ देने लगी बुआ भतीजी का प्यार देखते hi बन रहा था,





किरण ने अब बुआ के बदन पर अपना सफर शुरू किआ और सबसे पहले दोनों पर्वतों की और कुछ किआ और उन पर चढ़ाई कर दी,

एक को हाथ से मसलती तो दुसरे को मुँह में लेकर चूसती, कभी सिर्फ निप्पल को छेड़ती तो कभी पूरी चुकी को मुँह में भरने का असफल प्रयास करती, सभ्य उसके बालों पर हाथ फिरते हुए आहें भरते हुए उसको और उत्साहित कर रही थी, किरण ने खूब जी भर के बुआ की चूचियों का स्वाद लिए और फिर नीचे का सफर शुरू किआ बुआ के गदराये पेट को खूब मसलते चूमते चाटते हुए उसका भी पूरा स्वाद लिए,

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह मेरी गुड़िया अह्हह्ह्ह्ह uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh...

किरण के पास तो अभी बोलने या सोचने तक का समय नहीं था वो अपनी बुआ के बदन को अपनी ज़ुबान से चख लेना चाहती थी.. जल्दी hi वो अपनी बुआ की रसभरी छूट के सामने थी पर बुआ की तरह तड़पने की जगह उसनर अपना मुँह तुरंत उनकी रसभरी में घुसा दिया और चाटने लगी, किरण के छूट चाटने का हुनर और जोश देख सभ्य भी हैरान रह गयी , किरण वो सब कर रही थी जो उसे करना चाहिए था तो सभ्य भी उसका उत्साह बढ़ाये बिना नहीं रह सकीय,





सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह गुड़िया ऐसे hi बुआ की छूट चाट अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह चाट ले सारा रससससस.

किरण बुआ की बातों से और जोश में आ रही थी और जोश में चाट रही थी, कुछ hi देर में किरण की म्हणत रंग लाती दिखी जब उसके मुँह में बुआ की छूट का रास गिरने लगा, किरण को बड़ी ख़ुशी हुई की वो अपनी बुआ को झड़ने में कामयाब हुई,

खैर दोनों थोड़ा शांत हुए तो फिर जो भी कुछ हुआ उस पर विचार होने लगा, सभ्य बारीकी से किरण को देख रही थी की अब उसकी क्या प्रतिक्रया होगी वहीं किरण के मन में भी ऐसी hi चिंता थी,

खैर सभ्य यूँ hi बिस्तर पर नंगी hi लेती रही और कुछ पल बाद उसने अपना हाथ फैलाकर किरण को बाहों में आने का इशारा किआ तो किरण ख़ुशी से उससे चिपक गयी जिससे दोनों को hi अपने अपने सवाल का जवाब मिल गया,

सभ्य ने किरण की पीठ सहलाते हुए बोलै- तो अब तो दोस्ती पक्की हो गयी हमारी.

किरण- हाँ बिलकुल पक्की वाली सेक्सी बुआ,

किरण सभ्य के निप्पल से खेलती हुई बोली.

सभ्य- तो अब जो मैं पूछूं उसका सही सही जवाब देगी,

किरण- हाँ बुआ पूछो न.

सभ्य- तुझे मज़ा आया?

किरण- हाँ बहुत िःस्व ज़्यादा मज़ा मुझे कभी नहीं आया,

सभ्य- तूने ये सब पहले किया है किसी के साथ?

किरण- नहीं तो.

सभ्य- पक्का?

किरण- तुम्हारी कसम बुआ,

सभ्य- पर जैसे तू कर रही थी लगा नहीं पहली बार है.

किरण- अरे बुआ किआ नहीं है पर देखा बहुत है,

सभ्य- मतलब.

किरण- मतलब फ़ोन में बुआ, बहुत साडी गन्दी फिल्में देखि हैं अलग अलग तरह की तो सब जानती हूँ मैं.

सभ्य- कमीनी पढ़ाई की जगह इसी. में लगी रहती होगी.

किरण- फिर से दोस्त छोड़कर बुआ मत बनो.

सभ्य- ाचा ठीक है, वैसे मैं तेरी बुआ हूँ तुझे झिझक भी नहीं हुई मेरे साथ करते हुए,

किरण- हाँ हुई तो नहीं.

सभ्य- क्यों नहीं हुई वही तो पूछ रही हो बिटिया.

किरण- इसका जवाब भी वही है बुआ, फ़ोन,

सभ्य- मतलब.

किरण- मतलब बुआ सच बता रही हूँ तुम्हे अपना रहस्य खोल रही हूँ.

सभ्य- हमने तेरे लिए टंगे खोल दी तू रहस्य खोल दे. हाहाहा

किरण- हेहेहे, हाँ फ़ोन पर न चुदाई की बहुत कहानिया मिल जाती हैं इंटरनेट पर उसमे भी ऐसी भी होती हैं जो परिवार के सदस्यों के बीच में चुदाई की भी होती हैं.

सभ्य- हैं सच्ची??

किरण- हाँ बुआ , जैसे माँ बेटे की चुदाई, बाप बेटी की, भाई बहन की, चची भतीजा, बहु ससुर, और कोई कोई तो पूरे परिवार की भी.

सभ्य का दिमाग ये सब सुनकर चलने लगा,

सभ्य- अरे इतना सब, सच्ची होती हैं ये कहानिया?

किरण - कुछ सच भी होती हैं कुछ लोगो की कल्पना भी.

सभ्य- तुझे लगता है ये सब सच में होता होगा,?

किरण- हाँ बुआ मैं तो मानती हूँ होता होगा क्यूंकि लिखने वाले भी हम में से hi हैं और पढ़ने वाले बी तो होता भी होगा,

सभ्य- अगर तेरे सामने ये सब हो तो तुझे बुरा नहीं लगेगा?

किरण- बुरा नहीं बल्कि मुझे तो ाचा लगेगा बुआ.

सभ्य - ाचा तू ये सब पढ़ती है गन्दी फिल्में देखती है तो तेरा मन नहीं हुआ कभी चुदाई के लिए?

किरण- बहुत हुआ बुआ, और सही कहूं तो अभी तुंहरे पास लुंड होता तो तुमसे चुद जाती,

ये बोलकर किरण हंसने लगी,

सभ्य- अगर मेरे पास लुंड होता तो इतनी देर तुझे नैन छोड़ती hi नहीं. पर बता न अब तक तेरी ये मुनिया कुंवारी कैसे है, सभ्य ने उसकी छूट सहलाते हुए कहा.

किरण- दर लगता है बुआ, गाओं में तो हमेशा पापा और. बाबा का दर, ऊपर से कोई पसंद भी तो आना चाहिए.

सभ्य - तूने तो कहानिया पड़ी हैं तो कभी अपने पापा, भाई या बाबा का ख्याल नहीं आया तुझे?

किरण- सच कहूं बुआ तो आया बहुत बार आता है अब भी पर दर लगता है की किसी को मेरे दिमाग की बातें चली तो न जाने क्या होगा,

सभ्य- ाचा छोड़ना भी है पर दर भी है,

किरण- हाँ बुआ, छोड़ना तो है, मैं भी महसूस करना चाहती हूँ एक लम्बा लुंड अपने अंदर घुसते हुए.

सभ्य- अगर मैं तेरी ये इच्छा पूरी कर दूँ तो?

किरण- क्या सच में बुआ मज़ा आ जायेगा,

सभ्य- अब सहेली बानी हूँ, अपनी सहेली को कुंवारी कैसे रहने दूंगी.

किरण- हेहेहे ये तो है सेक्सी बुआ, पर एक मिनट पर किसके साथ?

सभ्य- वो तू मुझ पर छोड़ दे,

किरण- मुझे पसंद न आया तो?

सभ्य- तो मन कर डीओ. अब बता अगर चाहती है तो मैं कुछ करूँ आगे.

किरण ने कुछ सोचा और बोली- हाँ चाहती हूँ बुआ बस मुझे तुमसे एक वादा चाहिए.

सभ्य- कैसा वादा?

किरण- जब मेरा पहली बार होगा तो तुम वहीं मेरे पास होगी और.

सभ्य- और?

किरण- और मेरे साथ साथ तुम भी उस लुंड से चुड़ोगी.

किरण की ये बात सुनकर सभ्य थोड़ा सोच में पद गयी फिर अगले hi पल किरण को मुस्कुरा कर देखा...

जारी रहेगी,
 
Back
Top