Incest Katha Chodampur Ki - Page 37 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

तै का बदन पूरा मूट से चमक गया तब जाकर ताऊजी और अनुज का मूट बंद हुआ, इसके बाद औरतें कैसे पीछे रह जाती, भाभी आगे बड़ी और अपनी मम्मी के चेहरे के आगे थोड़ा झुककर अपनी छूट से सीटी के साथ धार छोड़ी जो तै के चेहरे और चूचियों को भिगोने लगी,

पद्मिनी तै भी अपनी बेटी के मूट का स्वाद लेकर और उत्तेजित हो गयी थी, भाभी के बाद मंजू तै ने भी अपनी संधान को मूट से नहला दिया



अपडेट 223


पद्मिनी तै तो बेचारी पूरी तरह से नाहा चुकी थी, हम लोग भी झड़ने के बाद आराम से बैठ गए, पद्मिनी तै नहाने के लिए घुस गयी वहीं भाभी सबसे पूछने लगी की खाने में क्या बनेगा आज तो तै ने कहा की जो मन हो तेरा वो बनाले,

में- चलो भाई मैं इन्हे बुलाने आया था और यहीं रह गया,

मंजू- अरे तो का हुआ, ये भी तो घर है,

अनुज- अरे पर वो दोनों लैला मजनू तो अंदर घुसे पड़े हैं,

प्रेमा- अरे ते रहने दो भैया लाडो hi समझा देगी अचे से,

मंजू- और का मज़े लेने दो दोनों को,

में- चलो ये भी ठीक है,

सागर और लाडो को वहीं छोड़कर हम दोनों घर आ गए, जहाँ खाना पीना बन चूका था और हमारे आते hi हमें मिल भी गया सबने खाना खाया,

मामी ने मुझसे सागर के बारे में पूछा तो मैंने उनको धीरे से बता दिया की तुम्हारा लड़का बड़ा हो रहा है, जिस पर वो शर्मा गयी,

खैर मैंने देखा की मां सबको कुछ अजीब नज़रों से देख रहे हैं, तो मैंने मौसी से पुछा की मां को क्या हुआ तो मौसी ने जवाब दिया की अपनी बड़ी बहन को छोड़ा है रात भर साथ hi जीजी ने सबकुछ बता भी दिया है,

में- अरे वाह तभी खोये खोये से हैं, बेचारे सीधे साढ़े आदमी को अचानक से बहन छोड़ने को मिल जाये तो ये hi हालत होती है,

मौसी- कहीं सीधा नहीं है तेरा मां, सुबह सो रही थी सोते हुए hi मुँह में लुंड ठूंस दिया था,

में- फिर तो और बढ़िया है जल्दी घुल मिल जायेंगे सबसे, वैसे नाना के क्या हाल हैं?

मौसी- बाबा ने रात भर पेला है अपनी छोटी को, मौसी हंसी दबती हुई बोली,

में- अरे वाह,

मौसी- और इतना hi नहीं सुबह बाबा जीजी को भी बस चढाने वाले थे की बहार से तुम लोग आ गए,

में- अरे वाह मौसी बड़े तेज़ है नाना एक बेटी रात में दूसरी सुबह,

इतने में किरण भी हमारे पास आकर बैठी और बोली- क्या बातें कर रहे हो छुप कर,

मौसी- बताउंगी तू चल मेरे साथ कपडे फैलवा छत पर.

किरण- चलो बुआ,

वो लोग चले गए, इधर अनुज सोने चल दिया क्यूंकि रात भर का जगा हुआ था, खैर नींद तो मुझे भी आ रही थी, तभी मेरा फ़ोन बजा और मैंने उठाया, देखा तो ठेकेदार का था, जो हमारा मकान बना रहा था बाघ में,

उसे कुछ पूछना था तो मैंने रुकने को कहा और फ़ोन काट कर पापा से बोलै की ठेकेदार आया है, तो पापा मौसा बाघ में जाने लगे साथ में मां भी हो लिए तो मौसा ने नाना से भी बोल दिया की बाबा एक बार तुम भी देखलो कोई बात हो तो बताना,

खैर वो सब लोग चले गए और मैं अपने कमरे में बिस्तर पर जाकर सो गया, करीब आधा घंटा hi सो पाया होऊंगा की दोबारा फ़ोन बजा मैंने नींद में देखा किसका है और जैसे hi स्क्रीन पर नज़र गयी तो तुरंत उठ कर बैठ गया, क्यूंकि अंजलि का नाम दिखा रहा था,

मैं तुरंत फ़ोन उठाया,

में - Hello.

अंजलि- कहाँ हो?

में- घर पर...

अंजलि- अभी गाडी लेकर घर आ सकते हो,

में- हाँ बिलकुल.

अंजलि- जल्दी आओ,

इतना कहकर उसने फ़ोन रख दिया और मैं भी तुरंत कपडे बदले और घर से निकल गया, बाघ में जाकर मैंने मौसा से चाभी ली और निकल गया गैंदपुर की और रस्ते भर यही दिमाग में रहा की आखिर अचानक क्यों बुलाया है अंजलि ने,

मैं गैंदपुर के मैं रोड पर पहुँच कर जैसे hi उनकी गली में गाडी मोड़ने वाला hi था की वो उसकी मम्मी पापा सब गली के बहार hi दिख गए, अंजलि ने भी मुझे देख लिए मैंने गाडी रोकी तो वो जल्दी से मेरे बगल में बैठ गयी और पीछे उसके मम्मी पापा भी,

अंजलि- कर्मा गाडी घुमाओ हमें शहर जाना है,

मैंने उसका चेहरा देखा तो समझ गया कुछ गड़बड़ है क्यूंकि उसकी आँखों से आंसू बाह रहे थे साथ hi उसकी मम्मी भी रो रही थी,

मैंने गाडी घुमाई और उससे पूछा - क्या हुआ तुम रो क्यों रही हो? सब ठीक तो है न,

मैंने उसके पापा की और देखते हुए कहा,

अंजलि- वो वो भैया को पकड़ लिए है,

में- मतलब?

मैंने गाडी भागते हुए पूछा,

ससुरा- पियूष को मतलब इसके भाई को पुलिस ने पकड़ लिए है, बहु का फ़ोन आया था कुछ झगड़ा हुआ था किसी से,

में- कौनसे ठाणे में है?

ससुरा- गुलाब नगर के,

में- ठीक है, तुम लोग परेशां न हो सब ठीक हो जायेगा,

मैंने गाडी चलते हुए कहा, गुलाब नगर हमारे पास वाले शहर के 28 किलोमीटर आगे थे तो ज़्यादा समय तो नहीं लगने वाला था फिर भी जाम वगेरा को झेलते हुए हम करीब एक घंटे में पहुँच गए, गुलाब नगर के ठाणे में पहुँच कर मैं भी उनके साथ अंदर गया तो साला एक कांस्टेबल ने झड़प दिया की इतने सरे लोग कहाँ घुसे आ रहे हो, ऐ लड़के क्या काम है,

साला बेइज़्ज़ती कही भी हो जाये बाँदा सह जाये पर साला ससुराल वालो के सामने तो और ज़्यादा लगती है,

मुझे भी लगी, मैंने उसे घूरा, उसने मुझे घूरा इतने में ससुरा बोल पड़ा- भाई साब हमारा बीटा है यहाँ फ़ोन आया था,

इतने में अंजलि भी बोल पड़ी- भाभी और भाग कर एक औरत जो बेंच पर बैठी थी उससे लिपट गयी,

हवलदार- ाचा तो उस लड़ाई वाले कांड में आये हो तुम,

में- हाँ, क्यों बंद किआ है लड़के को?

हवलदार- तू कौन है?

में- उनके घर से हूँ,

हवलदार- तो क्या सर पे चढ़ेगा हमारे, चुपचाप बैठ अभी साहब आते होंगे,

साला हवलदार मुझे चमकाए जा रहा था,

में- बैठ तो जाऊंगा पर क्यों पकड़ा है उसे क्या मामला है कुछ बताओ तो,

हवलदार- बोलै न साहब आके बताएँगे,

में- तुम hi बता दो,

हवलदार- क्यों मंत्री है तू?

में- बन भी सकता हूँ,

हवलदार- तो जब बन जाये तब पूछ लियो अभी बैठ चुपचाप.

ससुरा मुझे चुप करने की कोशिश कर रहा था, और मुझे बैठने को बोल दिया,

मैं ससुरा की बात मान कर बैठ गया, दूसरी बेंच पर अंजलि उसकी माँ और भाभी बैठी थी,

मुझे हवलदार पर खुन्नस आ रही थी,

पर अभी क्या कर सकता था करीब 15 मिनट्स बीत गए ऐसे hi बैठे हुए,

में- कब आएंगे साहब?

हवलदार- ज़्यादा जल्दी है क्या तुझे,

में- जल्दी की बात क्या है? खुद कुछ बता नहीं रहे बस बैठने को बोले जा रहे हो,

हवलदार- तो क्या हो गया, बोलै न बैठ उधर साहब आएंगे तो बुला लूंगा,

मैं उसे बिना कुछ कहे वहां से हैट गया और मौसा को फ़ोन किआ उन्हें पूरी बात बताई, उनकी पुलिस के कुछ अचे अधिकारीयों से जान पहचान थी, मौसा ने थाना पूछा और फिर फ़ोन काट दिया, फिर 5 मिनट बाद मौसा का फ़ोन आया और बोले की जो अभी ड्यूटी पर है उससे बात करा,

मैं तुरंत फ़ोन लेकर हवलदार के सामने पहुँच गया और उसे बोलै- लो बात करो.

पर वो साला भी अलग hi अकड़ में था, बोलता है मैं नहीं करता किसी से फ़ोन पर बात,

मन तो हुआ सेल को पेल दूँ यही, मैंने मौसा को बोलै तो जो अधिकारी उनके साथ लाइन पर था उसने भी सुना, और बोलै- बीटा 5 मिनट दो मैं करता हूँ बात,

इधर फ़ोन कटा और दो मिनट बाद hi हवलदार का फ़ोन बजा, उसने उठाया और बात करने लगा कुछ hi पलों में उसके चेहरे के भाव बदलने लगे, और एक पल को तो चेहरा बिलकुल सफ़ेद सा पद गया, फिर फ़ोन पर hi हाँ साब जी साब करने लगा, ससुरा मुझे थोड़ा हैरानी से देखने लगा,

हवलदार ने फ़ोन काटा और बोलै- कर्मा बीटा आप hi हो?

में- हाँ ग,

तो बत्तीसी निकल कर हँसता हुआ बोलै- अरे बीटा पहले बताते आप बड़े साहब के घर से हो,

में- अरे वो क्या बताना आप उनको भैया को निकालिये न,

हवलदार- हाँ हाँ आओ,

फिर हम सबको उसने बड़े साहब के केबिन में बिठाया कुछ hi देर में पियूष यानि अंजलि के भाई को भी हमारे सामने ले आया.

हवलदार- लो कर्मा बीटा ले जाओ भैया को बाकि साडी लिखा पढ़त मैं देख लूंगा, बाकि अभी क्या मांगों चाय ठंडा?

में- अरे नहीं नहीं बस अब निकलते हैं, बहुत बहुत धन्यवाद् आपका,

हवलदार ने मुझे थोड़ा अलग में आने का इशारा किआ और अलग लेजाकर बोलै - बीटा, वो जो पहले हुआ साहब से मत कहना,

में- अरे बिलकुल नहीं, चिंता मत करो आप,

खैर हम ठाणे से निकल कर बहार आये, अंजलि उसकी मम्मी और भाभी ससुरा सब खुश थे, सब के चेहरे पर अब शांति थी और सब hi मुझे बड़े प्रेम से देख रहे थे,

सविता (अंजलि की मम्मी)- बहुत ाचा किआ बच्चा जो तुम हमारे संग आ गए, नहीं तो हम न जाने कैसे छुड़ाते बेटे को,

रानी( अंजलि की भाभी)- सही में भैया, कल से चक्कर काट काट के परेशां थी, सुन hi नहीं रहा था कोई, सुबह परेशां होकर पापाजी को बताया,

में- अरे कोई बात नहीं भाभी जी, चची जी, हम एक दुसरे के काम नहीं आएंगे तो कौन आएगा,

ससुरा- वो बात तो है बीटा, पर सही में बहुत मदद हो गयी, नहीं तो पुलिस के चक्कर तुम जानते हो न जाने कितना इंतज़ार करवाते, तुम्हारा बहुत धन्यवाद् है इतनी आसानी से इस मुश्किल से निकल लिए,

पहली बार ससुरे को अपने साथ प्यार से बात करते देख दिल खुश हो गया,

में- अरे चाचाजी आप भी, आपके बच्चे की तरह हूँ, वैसे भी जो हुआ सो हुआ, अभी चलते हैं कुछ कहते हैं, भैया ने भी कुछ नहीं खाया होगा,

मैंने अंजलि के भाई पियूष की और इशारा करते हुए कहा,

पियूष- हाँ भाई भूख तो मुझे भी लग रही है,

पियूष ने हँसते हुए बोलै,

फिर हम सब पास के hi रेस्टोरेंट में गए जहाँ सब ने अपनी पसंद का खाना खाया, बीच बीच में मैं अंजलि की और देखता तो वो मुझे अब भी थोड़ा अनदेखा कर रही थी पर उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट ज़रूर थी, खैर खाना खाने के बाद ससुरे ने बिल दिया, उधर गाडी के पास आते हुए अंजलि और भाभी आपस में कुछ हंसी ठिठोली कर रहे थे वो भी मुझे देख देख कर hi, उसी वक़्त मेरा ध्यान भी अंजलि की भाभी पर गया, यार ये घर है या माल गाडी, साला अंजलि जैसा पटाखा, उसकी माँ भी क्या मस्त गदराई हुई और फिर उसकी भाभी भी किसी मामले में काम नहीं थी,

रीना भाभी





भाभी को ताड़ते हुए मैं गाडी तक पहुंचा और फिर सब लोग गाडी में बैठ गए,

सविता- ऐ पियूष बीटा बहु अब तुम लोग भी हमारे साथ घर hi चलो,

पियूष- मम्मी अचानक कैसे,

सविता- अचानक कुछ नहीं अभी चलो अपने कपडे उठाओ और घर चलो दोनों, जो करना गाओं में रहकर करना,

रानी - पर मम्मी जी इनकी नौकरी,

अंजलि- हाँ अचानक से नौकरी कैसे छोड़ सकते हैं,

ससुरा- सब हो सकता है, मैं भी यही चाहता हूँ सब साथ रहे, गाओं में hi कुछ काम कर लेंगे, बस अब अलग नहीं रहना,

पियूष- पर पापा,

ससुरा- कोई पर वॉर नहीं चलो.

फिर क्या था ससुरे ने आदेश दे दिया था तो हम लोग पहले उनके घर गए, घर क्या एक कमरा और हॉल वाला फ्लैट था किराये पर ले रखा था, जहाँ से डुबो ने कपडे पैक किये, बाकि सामान के लिए तय हुआ की बाद में एक दिन आकर ले जायेंगे,

फिर से सफर शुरू हुआ, इस बार सब लोग चहक रहे थे, पियूष और रानी भी खुश थे,

पियूष- पता नहीं सही फैसला है की गलत पर मेरा मन भी यही कर रहा है की गाओं में सबके साथ रहूं,

अंजलि- बिलकुल सही फैसला है भैया,

रानी- मैं भी मानती हूँ, अकेले बड़ी परेशां हो जाती थी मैं,

इसी तरह बातें करते हुए आगे बढ़ रहे थे, रस्ते में पियूष ने पूरा मामला बताया की कैसे रोड पर एक ज़रा सी बात ठाणे तक पहुँच गयी, रास्ते में पेट्रोल पंप पड़ा तो ससुरे ने ज़िद्द करके तेल डलवाया कहने लगा की उनके काम के लिए गया ये हमारा फ़र्ज़ है, खैर थोड़ी देर में hi गाडी उनके घर के सामने थी, सब उतर कर अंदर जाने लगे ससुरा और साला कपड़ों से भरे बैग उतरने लगे, मैं नीचे उतरा तो सासु माँ ने पकड़ लिए और बोली- बीटा तुम्हारा जितना धन्यवाद् करूँ उतना काम है, और अब तुम्हे अपनी मम्मी को लेकर आना hi होगा,

में- बिलकुल चची, और बेटो को धन्यवाद् नहीं करते आशीर्वाद देते हैं,

सासु माँ ने मेरे हाथ पकड़ कर दोनों हथेलियों को चूमा और फिर से मम्मी को लेन की बात बोलकर घर अंदर चली गयी,

अब बस मैं अकेला बचा था और गाडी में बैठा इतने में अंजलि पीछे से आई और बोली- एक छोटा बैग रह गया गाडी में पीछे की तरफ.

मैं उतरा और पीछे वाला दरवाज़ा खोला और देख कर बोलै यहाँ तो कुवह भी नहीं है,

अंजलि- अरे वहीं था,

ये कहते हुए वो भी गाडी के इस और आई और अंदर झांक कर देखने लगी और वाली वो देखो,

मैंने भी उसके बगल में होते हुए सर दाल कर देखा कुछ नहीं दिखा,

में- कहाँ हैउमममममनननहहहहहह.

मैं इतना hi बोल पाया की अंजलि के होंठ मेरे होंठो पर थे और फिर एक पल बाद hi वो अलग हुई और भाग कर घर में घुस गयी मुझे समझ भी नहज आया की अचानक हुआ क्या, पर जो भी हुआ मज़ा आया,

खैर मैं गाडी लेकर घर की और चल पड़ा रस्ते में hi पंहुचा था की फ़ोन बजा देखा की अंजलि का था, मैंने उठाया और बोलै- hello.

अंजलि- हेल्लो,

में- अब भी कुछ रह गया क्या गाडी में?

अंजलि- हाँ रह तो गया.

में- क्या?

अंजलि- ी लव यू....

उससे ये सुनकर मैं सुन्न पद गया मैंने अचानक से ब्रेक मार कर गाडी रोकी, मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या बोलूं?

कुछ पल की ख़ामोशी के बाद वो दोबारा बोली- Hello क्या हुआ ाचा नहीं लगा क्या?

कुछ पल बाद मेरी ज़ुबान बापिस आई तो मैं बोलै- नहीं वो पता नहीं क्या हुआ कुछ बोल hi नहीं पा रहा था मैं,

अंजलि- अच्छा इतना बुरा लगा,

में- अरे नहीं यार छेड़ो मत अभी,

अंजलि- छेड़ कहाँ रही हूँ मुझे तो बुरा लग रहा है की तुम मुझसे प्यार नहीं करते...

में- क्या ऐसा किसने कहा,

अंजलि- तुमने, मैंने तुम्हे ी लव यू बोलै, तुमने कोई जवाब नहीं दिया,

में- मैं भी तुमसे बहुत ज़्यादा प्यार करता हूँ, हद से ज़्यादा सबसे ज़्यादा,

अंजलि- सच्चीईई...

में- muchhhhhiiiiiiiiii,

तभी पीछे से किसी की आवाज़ आई तो वो बोली- सुनो बाद में बात करुँगी थोड़ी देर में घर पहुँच कर मुझे मश्ग कर देना,

में- ठीक है,

अंजलि- Bye लव यू ढेर सारा,

में - लव लव यू तू

अंजलि- मिलती हूँ बाद में.

ये कहके उसने फ़ोन रख दिया, और ाचा hi किआ क्यूंकि मुझे भी थोड़ा समय चाहिए था, जो हुआ उसे अपने अंदर सामने के लिए, मैं ख़ुशी से पागल हुआ जा रहा था,

इधर मेरे जाने के थोड़ी देर बाद मौसा और पापा नाना से बोले- बाबा तुम चाहो तो घर चले जाओ हमें यहाँ समय लगेगा,

नाना तो इसी इंतज़ार में बैठे थे वो जल्दी से अपनी बड़ी बिटिया के साथ रहना चाहते थे,

इधर मां को राजन चाचा अपने साथ ले गए थे कुछ काम निपटने,

मां- जीजा बड़े छुपे रुस्तम निकले तुम बताया नहीं कुछ इतना खेल हो रहा है चोदामपुर में,

मां ने फावड़ा चलते हुए कहा,

चाचा- अरे सेल हर चीज़ का सही समय होता है, अब देखो हमने नहीं बताया तभी तो अपनी बड़ी बहन की छूट मिली तुम्हे. मज़ा आया न?

मां- अरे जीजा बहुत, इतना मज़ा कभी नहीं आया,

चाचा- जानते हैं भाभी जैसा माल पूरे गाओं में नहीं है, क्या छूट क्या कासी हुई गांड है तुम्हारी बहन की

मां- हहहह बताओ तुम हमारी बहन के बारे में ये सब बोल रहे हो हमें ाचा लग रहा है.

चाचा- जब बहन छोड़ बन जाओ तो सब ाचा लगता है जमुना बाबू, खासकर बहन की छूट और उसकी बातें,

मां- सही कह रहे जीजा हेहेहे,

चाचा- और छुपा रुस्तम हम हैं या तुम हो जो चुपचाप अपनी बहन को पेल दिए,

मां- नहीं जीजा छुपे रुस्तम तो तुम hi हो, बताओ हमसे छुपके हमारी बीवी और बिटिया को भी छोड़ दिया तुमने तो,

इस पर चाचा हंसने लगे, इसी तरह बातें चलती रही और खेत का काम चलता रहा,

नाना जल्दी से घर पहुंचे देखा माँ आंगन में बैठी कपडे धो रही थी आंगन में hi पड़ी खत पर बैठ गए और बोले- अरे बोतिया बाकि सब कहाँ हैं?

माँ- कर्मा तो बहार गया है, सागर भी आज गायब hi है बाकि अनुज और किरण सो रहे हैं बाबा,

नाना- चाह, और बहु और छोटी,

माँ- वो दोनों भी सो रही हैं आज पूरे घर में आलस फैला पड़ा है हेहेहे,

नाना ने ये सुना तो उनके कान खड़े हो गए ऐसे hi मौके की तलाश में तो थे नाना जब माँ के साथ अकेले समय मिले और वो सुबह का अधूरा काम निपटा सकें,

नाना तुरंत खड़े हुए और माँ जो अभी कपडे दीवार पर दाल रही थी उन्हें पीछे से पकड़ लिया,

माँ- अह्ह्ह्ह बबआह क्या हुआ, कुछ चाहिए का?

नाना- आह्ह्ह्हह बित्याहहहह हमें तो बस तू चाहिए,

नाना ने माँ के कंधे को चूमते हुए कहा साथ hi उनके हाथ माँ के कामुक बदन पर फिरमे लगे,





माँ- ुहम्म बबाहहह बिटिया के साथ ये सब नहीं करते,

नाना- आह्ह्ह्हह बित्याहहहह तेरे जैसी हो तो बाप को सबसे पहले ये hi करना चाहिए, पिता का हक़ होता है

नाना ने माँ के पल्लू को नीचे कर दिया और नंगे पेट को मसलते हुए बोले.

माँ- बबाहहह पर बित्याहहहह पर उसके पति का हक़ होता है,

माँ भी अपनी गांड नाना के लुंड पर घिसते हुए बोली,

नाना- आह्ह्ह्हह बित्याहहहह पटी का हक़ तो बाद में होताहहह है पहले बाप का होता है,

नाना ब्लाउज के ऊपर से hi माँ की चूचियों को मसलने लगे,

माँ- ुह्ह्ह्ह बबाहहह ताऊ क्यायहहह अब पूराआअह हक़ वसूलोगे,

नाना- हांण बित्याहहहह पूराआअह अब्ब्ब इंतज़ार नाहीइ होताहहह,

माँ- अह्ह्ह्ह कोई आए गयाःह तुह्हः.

नाना- आआ जाने दे बित्याहहहह अब्ब हमसे इंतज़ार नहीं होताहहह,

माँ- अह्ह्ह सच्चीईई सबके सामने अपनी बित्याहहहह के साथ प्यार करोगे?

नाना- हांण बित्याहहहह बिलकुल, सबके सामने hi करूँगा आह, बेटी पर बाप का हक़ सबके सामने भी होताह है,

नाना हर पल उत्तेजित होते हुए माँ का बदन मसलते हुए बोल रहे थे,

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह और कर्मआहह के पापा आ गए टोह्हह्ह,

नाना- तू भी अपना हक़ तो वसूल के hi रहेंगे हम बित्याहहहह...

नाना और उत्तेजित होते हुए बोले साथ hi उन्होंने माँ को वहीं चबूतरे पर लिटा लिए और माँ के बदन को जगह जगह चूमने लगे, कभी उनकी गर्दन चूमते तो कभी पेट, माँ भी अपने बाबा की हरकतों से उनके नीचे लेती हुई मचल रही थी,





माँ- अह्ह्ह्ह बबआह एक अजीब सा एहसास होता है जब तुम छूटे हो तुह्ह्ह्ह,

नाना- यही अह्हह्ह्ह्ह तो बाप बेटीईई क्या प्यार है बिटियाः, अलग तो लगेगा hi...

माँ- तो और प्यार करो न बबाहहह, आज सारा प्यार लुटादो अपनी बिटियाः पर,

नाना- हाँ बित्याहहहह आज पूरा प्यार लुटाहहह कर hi रहेंगी तुझ पर, तू भी अपने बबाहहह को अपना सारा प्यार देगी नाह,

माँ- हाँ बाअबाआहठ बिलकुल तुंहारा हक़ है तो पूरा हक़ ले लो अपनेआहहह,

नाना- सही कहा बेटीई बिलकुल सही कहाहहह, और सबसे पहले तो मैं तेरे इन रसीले होंठो का स्वाद लूंगा,

ये कहकर नाना ने अपना चेहरा आगे कर अपने होंठों को माँ के होंठों पर रख दिया और अपनी बेटी के होंठों को चूसने लगे, माँ भी नाना का पूरा साथ दे रही थी, नाना को अपनी बड़ी बेटी के होंठों को चूसने में एक अलग hi एहसास हो रहा था, बाप बेटी पागलों की तरह एक दुसरे के होंठों को चूस रहे थे, कुछ hi देर के बाद नाना ने अपनी जीभ माँ के मुँह में घुसा दी तो माँ उसे कुल्फी की तरह चूसने लगी, अपने पिता के साथ माँ को भी एक अलग hi आनंद आ रहा था,

कुछ देर जीभ की कुश्ती के बाद अलग हुए तो नाना ने माँ के बदन पर नीचे की और सफर शुरू किया और उनकी गर्दन छाती और पेट को चूमते हुए नीचे बढ़ने लगे,



माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह कहा जाओ आज बितीयआह्ह्ह्ह के बदन को,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh

नाना माँ के पेट को चूमते हुए बोले और फिर अपनी जीभ माँ की नाभि में घुसड़ी जिससे माँ मचलने लगी,

माँ- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हाइये दिया आअह्ह्ह्ह बबआहहह तुम्हे तो साआरीई तरीके पता हैं तडपाआहहहहहने की,

नाना लगातार माँ की नाभि को चूसे जा रहे थे, आंगन में बाप बेटी का ऐसा कामुक खेल चल रहा था जो की बिरला hi कुछ घरों में खेला जाता था,

इधर जैसा की माँ ने कहा था की किरण और अनुज सो रहे थे तो उसमे भी आधी सच्चाई थी, क्यूंकि पहले तो अनुज और किरण एक hi बिस्तर पर सो रहे थे पर दो जवान बदन एक hi बिस्तर पर कितनी देर सो सकते थे, अनुज ने जैसे hi किरण का बदन अपने साथ महसूस किआ वैसे hi खुद को उससे चिपका लिए, और पीछे से हाथ डालकर किरण के पेट पर हाथ फिरने लगा, कुछ पल बाद किरण की टीशर्ट को ऊपर करके अनुज उसके नंगे कोमल पेट पर हाथ फिरने लगा, किरण अब भी थोड़ी नींद में थी तो उसने अनुज की हरकतों पर ध्यान नहीं दिया और सोती रही, अनुज उसके कोमल जवान बदन से आराम से खेल रहा था इस बात से अनजान की आंगन में उसकी माँ के साथ भी कुछ वैसा hi खेल उसके नाना खेल रहे थे,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कीटनाआआआ माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है, अह्हह्ह्ह्ह बहुत्तत्तृत अच्छी से चटटी हो तुम,

माँ ने नाना का सर अपनी जांघों के बीच दबाते हुए कहा, नाना की जीभ माँ की छूट में घुशी हुई थी, माँ की साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठा हुआ था, और नाना ऊपर से नंगे होकर एक बार फिर से अपनी बितीयआह्ह्ह्ह का छूट रास चाट रहे थे उसकी छूट से और माँ उनके नीचे तड़प रही थी





जल्दी hi नाना की ज़ुबान की कारीगरी ने कुछ ऐसा असर दिखाया की माँ का पूरा बदन थरथराने लगा और माँ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करती हुई सिसकियाँ लेकर जल्दी hi झड़ने लगी और नाना के मुँह में अपना काम रास बहाने लगी,

नाना भी बितीयआह्ह्ह्ह की छूट का रास ऐसे चाट गए जैसे जलेबी की चासनी हो,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कितना चाटोगे बिटिया की छूट को,

नाना- तेरी छूट hi इतनी मीठी है बिटिया की पूरे जीवन चाटते रहे हम तो,

नाना ने अपने होंठों को जीभ से चाटते हुए कहा,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबा बहुत लालची होते जा रहे हो,

नाना- जब बिटियाः तेरे जैसी गदराई हुई हो तोह मन में लालच तो आएगा hi, नाना ने पीछे होते हुए माँ की आधी खुली सारी को उनके बदन से अलग करते हुए बोले, साथ hi साड़ी को अलग कर नाना ने अपने कड़क लुंड को भी कच्चा सरका कर बहार निकल लिए, नाना के मन में यही दर था की सुबह की तरह उनके साथ धोखा न हो जाये इसलिए जल्द से जल्द वो अपनी बिटिया की छूट में अपना लुंड घुसा देना चाहते थे,

माँ ने ये देखा तो उठ कर बैठ गयी और नाना को बोली- बबाह अब तुम लेटो हमें तुम्हारी सेवा करने दो,

और माँ ने नाना को अपनी जगह पर लिटा दिया और खुद बगल में बैठ कर नाना के कच्चे को उनके बदन से पूरी तरह अलग कर दिया, नाना अब अपनी बेटी के आगे बिलकुल नंगे थे,

आंगन में माँ ने अपने ब्लाउज के पैट खोल दिए थे और अपनी चूचियों को ब्रा से बहार निकल लिया था, नाना ये सब देख कर hi तड़पने लगे, वहीं माँ ने हाथ बढाकर नाना के कड़क लुंड को पकड़ा तो नाना सिहर उठे और उनके लुंड के टोपे पर रास की बूँदें उभर आई,

माँ- देखो तो बाबा कैसे कड़क करके रखा है इसे बिटिया के लिए,

माँ नाना की आँखों में देखते हुए उनके लुंड को मुठियाते हुए बोली,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तुझे देखते hi ये हाल हो जाता है, अह्ह्ह अब और मत तडपाठ अपने बाप को,

माँ- नहीं बबाह अब नहीं तड़पाऊंगी अपने बाबा को और ना hi उनके लुंड को,

माँ नाना के लुंड क्र टोपे पर अपनी जीभ फिरते हुए बोली,

नाना- ahhhhhhhhhh बितीयआह्ह्ह्ह, अह्हह्ह्ह्ह..

माँ ने टोपा छाता और फिर अपना मुँह पीछे कर लिया और बोली...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बचपन की तरह मैं तुम्हारी गोदी में खेलूं? अह्हह्ह्ह्ह खिलाओगे अपनी बितीयआह्ह्ह्ह को अपनी गॉड में,

नाना बेचारे हर पल तड़प रहे थे क्या बोलते- हाँ बितीयआह्ह्ह्ह बिलकुल khilayenge,ahhhh आजा अपने बाबा की गोदी में,

नाना की बात सुनकर माँ ने बड़े कामुक ढंग से अपने दोनों पेअर नाना की कमर के दोनों और रखे और अपना पेटीकोट फैलाकर नीचे बैठ गयी नाना के ऊपर, बैठते हो दोनों के मुँह से आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,

क्योंकि नाना का कड़क लुंड माँ की जांघों के बीच उनकी छूट के नीचे दान गया था,

नाना अपने लुंड पर बेटी की छूट की गर्मी का एहसास पाकर मस्त होने लगे वही हाल माँ का भी था,

माँ- अह्ह्ह्हह्हह बाबा देखो मैं तुम्हारी गोड़ीई में बैठ गयी, एक बार फिर से बचपन की तरह, कितना ाचा लग रहा है न,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh बहुत अच्छा लग रहा है, एक बाप को ऑरररर क्या चहियेटी,

माँ- बबआहहह पर मुझे चाहिए बताओ डोज क्याहहह??

कमरे में अनुज और किरण की कहानी भी आगे बढ़ चुकी थी और अभी किरण वैसे hi लेती थी जैसे पहले लेती थी अपने सीधे हाथ पर करवट लेकर बस फ़र्क़ इतना था जी की अभी उसकी टीशर्ट उसकी चूचियों से ऊपर थी वहीं एक छुच्छी पर अनुज का हाथ था, जो उसकी नयी जवानी में उभरती हुई चुकी को मसल रहा था, वहीं नीचे उसकी कमर से पजामा गायब था और कच्ची भी घुटनो से नीचे पैरों में थी और उसके पीछे अनुज था जिसका लुंड धीरे धीरे से उसकी जवान छूट ने अंदर बहार हो रहा था,





किरण की आँखें अब भी बंद थी पर उसके होंठ खुले थे जिनस्व बार बार अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह की सिसकियाँ निकल रही थी, किरण की सिसकियों के बीच अनुज को बहार की भी कुछ आवाज़ें सुनाई दे रही थी, और सुनाई देती भी क्यों नहीं बहार आंगन में बाप बेटी का प्यार पूरे जोश से जारी था,

माँ- बस एक चीज़ और करनी है बाबा,

माँ नाना के ऊपर hi धीरे धीरे से अपनी कमर घूमते हुए बोली, जिससे नाना के लुंड से उनकी छूट के होंठ घिस रहे थे और दोनों को hi एक अलग कामुक एहसास मिल रहा था, साथ hi ये एहसास वो सिर्फ महसूस कर प् रहे थे क्यूंकि माँ के पेटीकोट की वजह से सब छुपा हुआ था तो इस कारन इसका मज़ा एक तरह से और बढ़ रहा था..

नाना- हाँ बितीयआह्ह्ह्ह क्या चाहिए सब देंगी तुझे,

नाना अपने लुंड पर माँ की गरम छूट का घिसाव पाकर पागल हो रहे थे उत्तेजना से,

माँ- याद है बचपन में, मैं तुम्हारी गोदी में अह्ह्ह कैसी उछाल उछाल कर खेलती थी, अब भी मुझे वैसे hi खेलनाअहहहह हैईईई,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तो खेल नाहहहह बिलकुल खेल, उछाल अपनी बाबा के ऊपर,

माँ- सच्ची फिरर तो मज़ा आएर्गाः, बस एकककक चीज़ ऑररररर,

माँ ने ये कहते हुए अपना हाथ पेटीकोट के अंदर घुसाया और थोड़ा सा उठकर नाना के लुंड को पकड़ा और सीधा किआ और फिर अपनी छूट के द्वार पर उसका टोपा लगाकर नाना की आँखों में देखते हुए बोली- तैयार हो जाओ babaaaahhhhhhhhhhhhhhh,

ये कहते हुए माँ नीचे हो गयी और नाना का लुंड उनकी छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, कुछ hi पलों में नाना का लुंड जड़ तक उनकी बेटी की छूट में घुसा हुआ था..

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh हाय माहहहह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह कीत्नीईईई गरमममन haiiiiiiiiiii अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह..

नाना ने जैसे hi अपने लुंड पर माँ की छूट को महसूस किआ उनका तो पूरा बदन hi सिहरने लगे, उनका बादब थरथराने लगा, कमर भी खुद बा खुद चलने लगी और जब तक नाना को एहसास होता क्या हो रहा है उनका लुंड माँ की छूट में अपना रास छोड़ने लगा,

नाना माँ की छूट में लुंड घुसकर इतने उत्तेजित हो गए की उनके लुंड ने बेटी की छूट में रास की पिचकारियां मरना शुरू कर दिया, और वो सिर्फ सिसकियाँ लेते रह गए,

माँ को भी ये एहसास हुआ की उनकी छूट उनके बाबा ने अपने रास से भर दी है तो बोली- अह्हह्ह्ह्ह babaaaahhhhhhhhhhhhhhh तुमने बिटिया की छूट को अपने रसससस से भर दिया अह्ह्ह्हह ऐसी hi हक़ चाहिए थाहा न तुम्हे,

नाना जो थोड़े शांत हुए बोले- अह्हह्ह्ह्ह बिटिया ओह्ह्ह पहली बार किसी छूट में लुंड घुसते hi झाड़ा हूँ अह्हह्ह्ह्ह क्या छूट है टेरिइइइइइइइइ,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबा तुम्हारा लुंड भी तो कमाल का है बिटिया की छूट में झड़ने के बाद भी देखो पहले की तरह बिलकुल कड़क है,

नाना ने भी ये एहसास किआ की उनका लुंड बिलकुल कड़क है झड़ने के बाद भी,

नाना- यी सब तेरई छूट का कमाल है बिटिया,

माँ- छूट का कमाल तो अब दिखाउंगी बाबा,

ये कहते हुए माँ ने नाना के लुंड पर उछालना शुरू कर दिया, नाना भी माँ के झटको से सीसीएनए लगे, माँ अपने चूतड़ों को नाना के लुंड पर पटकने लगी तो नाना भी माँ की कमर पकड़ कर नीचे से धक्के लगाने लगे,





नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh ऐसी hi कोउद अह्हह्ह्ह्ह अपनी बाबा के लुंड पर,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन, छोड़ते रहो अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi अब रुकना मत्तत्तत अह्हह्ह्ह्ह,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह अब चाहेंगे तो भी नहीं रुक पाएंगे, अह्हह्ह्ह्ह, अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

माँ- बाबा नंगाहहह करो अपनी बिटिया कोहहह अह्ह्ह अनगनणन में नंगा कर के छोडोऊ खूब,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह हांण बिटिया अभी लिए,

ये कह नाना ने माँ का ब्लाउज और ब्रा पूरी तरह से उनके बदन से अलग कर दिया, और फिर पेटीकोट भी बदन से निकल दिया माँ भी नाना की तरह बिलकुल नंगी हो गयी, इसी बीच माँ का उछालना लगातार जारी था,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह खत पर चलते हैंण्ण्न,

माँ ने नाना के लुंड से उठाते हुए कहा पर उठते हुए भी माँ ने अपने होंठ नाना के होंठों से जोड़ दिए तो दोनों एक दुसरे को चूमते हुए hi खत तक आये और फिर माँ अपनी पीठ पर खत के किनारे लेट गयी इधर नाना ने अपना लुंड माँ की छूट में दोबारा घुसा दिया तब जाकर दोनों के होंठ अलग हुए,

नाना एक बार फिर से अपनी बिटिया की छूट में धक्के लगाने लगे, हर धक्के पर माँ के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी वहीं नाना की नज़र तो माँ की नाचती हुई चूचियों पर थी जो की अद्भुत नज़ारा पेश कर रही थी, फिर नाना ने सोचा की बिटिया का पूरा बदन hi एक सुन्दर कम्यून नज़ारा है और उसे देखते हुए तेज़ी से धक्के लगाने लगे,





नाना मन hi मन खुश हो रहर थे और अपने आप को दुनिया का सबसे भाग्यशाली इंसान मान रहे थे, क्योंकि उन्हें अपनी दोनों गदराई बेटियों को छोड़ने का उनके बदन को भोगने का मौका जो मिल रहा था, साथ hi ऐसा दृश्य बेटी सामने नंगी पड़ी हुई है और वो उसे छोड़ रहे हैं,

छोड़ते हुए hi अचानक से नाना की नज़र एक तरफ गयी तो अचानक से नाना सुन्न पद गए, उनका दिमाग चकराने लगा, उन्हें सब कुछ ख़तम होता दिखाई दिया,



जारी रहेगी
 
छोड़ते हुए hi अचानक से नाना की नज़र एक तरफ गयी तो अचानक से नाना सुन्न पद गए, उनका दिमाग चकराने लगा, उन्हें सब कुछ ख़तम होता दिखाई दिया,

अपडेट 224
नाना ने देखा की उनके सामने उनके बड़े दामाद और छोटे दामाद खड़े हैं, यानि पापा और मौसा, ये देख कर तो नाना की सिटी पित्ती गुल हो गयी मौसा के बगल में hi मैं भी खड़ा था, नाना जैसे थे वैसे रुक गए, उनके चेहरे पर हवाइयन उड़ाती हुई साफ़ नज़र आ रही थी, उन्हें अपनी बेटियों का परिवार टूटता नज़र आ रहा था,

माँ- अह्ह्ह्ह बाबा रुक क्यों गए छोड़ते रहो न,

माँ ने नीचे से कहा, अब नाना बेचारे क्या बोलते वो तो कुछ बोलने की हालत में hi नहीं थे, नाना का कोई जवाब न मिलने पर माँ ने दोबारा बोलै- बबाहहह क्या हुआ, छोड़ो न,

अब नाना के समझ नहीं आ रहा था क्या करें उनका लुंड बेटी की छूट में था और सामने उनके दामाद थे नाती था, वहीं उनकी बेटी बार बार और छोड़ने को कह रही थी, अब तक ये सुनकर नाना फूले नहीं समां रहे थे, अब माँ के मुँह से वो उनके सीने पर गोली की तरह लग रहे थे,

माँ ने दोबारा जवाब न पाकर नाना को देखा और फिर उनकी नज़र का पीछा किआ तो सामने सब को देखा, हमें देख कर माँ मुस्कुराई और बोली- अरे बाबा उन्हें क्या देख रहे हो तुम छोड़ते रहो न, नाना को समझ नहीं आया की माँ बोल क्या रही hai,unhe लगा कहीं माँ का दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है, अभी और छोड़ने को कह रही है, सब सामने हैं फिर भी, दूसरा नाना बेचारे छोड़ते भी कैसे ये सब देखकर उनका लुंड खीरे से छुआरा बन गया था, भयंकर सम्भावनाओ को सोच कर नाना का लुंड सिकुड़ गया था और माँ की छूट से भी बहार आ गया,

माँ ने ये देखा और परिस्थिति समझ गयी हम में से भी कोई अभी तक कुछ नहीं बोलै था, और बस खड़े हुए देखे जा रहे थे, नाना की हिम्मत नहीं हो रही थी किसी को नज़र उठा कर देखने की,

माँ- अरे कर्मा लल्लाहहहह तू इधर आए बाबा बीच में hi रुक गए,

माँ के ये शब्द सुनकर नाना चौंक गए, पर कुछ बोले नहीं, मेरा नाम जैसे hi माँ ने लिया मैं तो तैयार था, अपनी माँ को उनके बाप से छुड़ता देख वैसे hi मेरा लुंड लोहे जैसा हो चूका था, मैंने भी तुरंत अपने कपडे इतने जल्दी उतरे के माँ के पास पहुँचने तक मैं बिलकुल नंगा हो चूका था, वैसे भी अंजलि की वजह से मैं खुश था और माँ की छूट से ज़्यादा अछि चीज़ क्या हो सकती थी ख़ुशी मानाने के लिए तो मैंने बिस्तर के पास पहुँच कर माँ को पकड़ कर अपनी और घुमाया और उनकी टैंगो को फैलाकर खुद बीच में जगह ली और अपना लुंड उनकी छूट के द्वार पर रख कर तुरंत उनकी छूट में घुसा दिया,





और फिर बिना रुके धक्के लगते हुए माँ छोड़ने लगा, माँ भी अपनी चूचियों को दबाये हुए मुझे और उकसाने लगी,

बगल में खड़े हुए नाना ये सब फटी हुई आँखों से देख रहे थे, शायद जो झटका उन्हें थोड़ी देर पहले लगा था ये वाला उससे भी बड़ा था उन्हें समझ नहीं आ रहा था ये हो क्या रहा है, उनकी बेटी उनके सामने पूरे परिवार के सामने अपने पति के सामने अपने बेटे से छुड़वा रही है और कोई उन दोनों को रोक नहीं रहा है, नाना ने पहली बार नज़र उठा कर पापा की और देखा तो पाया पापा की नज़रें नीचे की और थी और जब नीचे नाना ने देखा तो पाया की उनके नीचे मामी यानि उनकी बहु बैठी हुई है और पापा का लुंड चूस रही हैं,

नाना के लिए एक और झटका, बगल मैं hi मौसा का लुंड मौसी चूस रही हैं बैठ कर, नाना को झटके पर झटके लग रहे थे, ये सब देख कर नाना ने बापिस माँ की और देखा जो उन्हें hi देख रही थी,

नाना के मुँह से तबसे लेकर अब तक सिर्फ इतना निकला- ये सब ये सब क्क्क्य हो रहा है बिटिया?

नाना माँ की छूट में से मेरा लुंड अंदर बहार जाता हुआ देख कर बोले,

माँ- अरे बबआहहह अह्ह्ह कर्माहहह हाँ बाबा तुम घबरा क्यों रहे हो, जैसी हम मज़े ले रहे थे वैसे सब ले रहे हैं, एक बार अपने पीछे भी देखो,

नाना तो तुरंत पलट कर देखा तो एक बार फिर से चौंक पड़े, सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था जो उन्होंने सोचा नहीं था खासकर ये तो बिलकुल नहीं,

उन्होंने देखा की उनकी नातिन किरण पूरी नंगी होकर उनके नाती अनुज के लुंड पर बैठी है और अनुज नीचे से लगातार तेज़ तेज़ धक्के अपनी ममेरी बहन की छूट में लगा रहा है,





किरण- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi छोड़ड़ड़ड़ड़ मुझी,

किरण के मुँह से लगातार सिसकियाँ निकल रही हैं, नाना को समझ नहीं आ रहा था की वो सपना देख रहे हैं या ये सच सच है, उनके परिवार को अचानक हुआ क्या है,

इसी बीच उन्हें अपने लुंड पर गरम एहसास हुआ उन्होंने देखा की माँ खिसक कर उनकी और सर करके लेट गयी हैं और उनके सिकुड़े हुए लुंड को मुँह में भर कर चूसने लगी, मैं लगातार माँ को छोड़ रहा था, नाना भी अब धीरे धीरे शांत होने लगे थे और उनके दिल की धड़कनें भी थोड़ी सामान्य हो रही थी और आस पास के माहौल का असर उन पर भी होने लगा था,

नाना ने फिर से नज़र घुमा कर देखा किरण को अनुज के लुंड पर उछालते हुए, फिर उन्होंने दूसरी और देखा और पाया मौसा मामी यानि उनकी बहु को वहीं झुका कर छोड़ रहे हैं, उनके बगल में पापा अपनी साली यानी मौसी को छोड़ रहे थे, नाना ने अपने दामाद को अपनी साली छोड़ते देखा,

फिर नज़र हमारी तरफ की और मुझे माँ को छोड़ते देखा, और फिर माँ के मुँह में अपना लुंड देखा, और कुछ देर के लिए अपनी आँखें बंद की ऐसा लगा जैसे किसी गहन सोच में हो, फिर उन्होंने धीरे से आँखें खोली और फिर माँ की और देखा और उनकी आँखों में देख कर मुस्कुराये फिर थोड़ा आगे झुककर अपना लुंड माँ से चुसवाने लगे, माँ भी मुझसे चुड़ते हुए अपने बाबा का लुंड मस्ती से चूसने lagi,nana भी लुंड चुसवाते हुए माँ की चूचियों को हाथों से सहलाने लगे..





नाना ने फिर पापा की और देखा और बोले- ये सब कबसे चल रहा है दामाद जी,

नाना का अनुभव ये समझ चूका था की ये सब पहली बार नहीं हो रहा था और न hi उनका उनकी बेटियों को छोड़ना कोई किस्मत थी.

पापा- नाना की बात सुन मुस्कुराये और बोले- अरे बबआहहह सब बताएँगे तब तक मज़े लो, एक एक सवाल का जवाब मिलेगा,

नाना को भी ये बात ठीक hi लगी और फिर मेरी और देखा और बोले- कर्मा बीटा कैसी है तेरी माँ की छूट?

में- अहहह्म्म नाना हमेशा की तरह बिलकुल मस्त, आओ तुम खुद hi चख लो,

मैंने माँ की छूट से लुंड निकल कर नाना को आने को कहा और कुछ hi पल में हम दोनों ने एक दुसरे से जगह बदल ली फ्ही और अब नाना माँ को छोड़ रहे थे और मैं माँ से लुंड चुसवाने लगा,

उधर तभीयी एक चीख के साथ किरण अनुज के लुंड पर झाड़ रही थी, किरण के झड़ने तक अनुज उसे छोड़ता रहा और जब वो शांत हो गयी तो अनुज ने अपना लुंड उसके मुँह में दिया और कुछ पल मुँह छोड़ने के बाद अनुज ने किरण के मुँह में अपना रास छोड़ दिया जिसे किरण वहीं बैठे बैठे जातक गयी, इधर मैंने माँ के मुँह से लुंड निकला और नाना को उन्हें अकेले छोड़ने का सुख देने के लिए छोड़ दिया और, खुद मैं मामी और मौसा के पास आ गया, जहाँ मौसा मामी को एक खत पर लिटाकर उनकी टैंगो के बीच बैठकर उनकी गांड मार रहे थे, मैं मामी के चेहरे के पास गया और पहले तो लुंड उनके मुँह की और किआ पर फिर मुझे कुछ और सूझा तो मैंने घूम कर अपने चूतड़ों को उनके मुँह पर टिका दिया और अपनी गांड को उनके मुँह के ऊपर, मामी तुरंत hi अपनी जीभ निकल कर मेरी गांड चाटने लगी,





इधर नाना भी तिरछी निगाहों से ये देख रहे थे और अपनी बहु को भांजे की गांड चाटते देख और उत्तेजित हो गए और अब अपना सारा ध्यान माँ पर लगाकर तेज़ी से माँ को छोड़ने लगे, मौसा मामी के पैरों को उठाकर उनका अंगूठा चूस रहे थे और मामी की उत्तेजना बढ़ा रहे थे, इधर तभी दरवाज़े पर खटखटाहट हुई तो पापा ने अनुज की और देख कर इशारा किआ जो खुद मौसी को घोड़ी बना कर उनकी गांड मर रहे थे, खटखटाहट सुनकर नाना भी एक पल को रुके थे और उन्होंने मुद कर पापा की और देखा तो पापा ने उन्हें सर हिलाकर जारी रखने को कहा, और नाना उनकी बीवी को छोड़ने लगे,

अनुज जल्दी से एक तौलिया लपेट कर दरवाज़े पर गया और फिर कुछ hi देर बाद बापिस आया तो उसके साथ मां राजन चाचा ममता चची और पल्ली भी थे, मां तो आँखें फाड़कर सबको देखने लगे, और ुंगे झटका तो तब लगा जब अपने बाबा यानि नाना को माँ को छोड़ते देखा, मैं मामी के ऊपर से हटा और मैंने पल्ली को पकड़ कर उसकी सलवार नीचे खिसका दी और उसकी छूट में लुंड पेल दिया, अनुज ने ममता चची को पहले नंगा किआ और फिर किरण के बगल में लिटा कर छोड़ने लगा,

मां ने किरण को नंगा देखा फिर अपनी पत्नी को मौसा से गांड मरवाते हुए देखा तो वो भी कुछ देर के लिए इन अद्भुत और अलग अलग नज़रों में खो गए पर उनकी हालत नाना जैसी नहीं हुई क्यूंकि उन्हें सच्चाई पहले से पता थी,

मां की नज़र अपनी नंगी बेटी पर बार बार जाकर अटक रही थी पर उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी उसके और बढ़ने की न जाने क्यों, पर राजन चाचा को तो कोई दिक्कत नहीं थी, राजन चाचा भी अनुज और अपनी बीवी के बगल में पहुँच गए और कपडे उतर कर किरण के ऊपर चढ़ गए, मां को अपनी बिटिया की छूट में चाचा का लुंड घुसता हुआ साफ़ नज़र आया, मां ये सब देखे जा रहे थे कभी अपनी बेटी को देखते तो कभी अपनी बीवी को जो उनके जीजा से गांड मरवा रही थी, उनके बगल में छोटी जीजी बड़े जीजा से गांड मरवा रही थी.

मां ने नज़र घुमा कर दूसरी और देखा जहाँ उनकी बड़ी जीजी को उनके बाबा दुमदार धक्कों से छोड़ रहे थे, नाना ने जोश में माँ के पैरों को सर के पास मोड़ रखा था और ऊपर से दनादन धक्के लगा रहे थे





उनके धक्कों से लग रहा था की नाना ज़्यादा दूर नहीं हैं अपने चरम से, और हुआ भी कुछ ऐसा hi जल्दी hi नाना ने माँ की छूट को फिर से अपने रास से भर दिया, और हांफते हुए उनके बगल में खाट पर लेट गए,

पापा के लिए भी ये पल उत्तेजित करने वाला था अपनी पत्नी को उसके पिता से चुड़ते हुए देखना, ये देख पापा भी जो इतनी देर से मौसी की गांड मार रहे थे उन्होंने मौसी की गांड को रास से भर दिया मौसी भी पापा के साथ hi झड़ने लगी, और उनके बगल में मौसा का भी यही हाल था और उनके नीचे मामी का भी, मामी कुछ ज़्यादा hi उत्तेजित थी अपने ससुर और पति के सामने छोड़ने की वजह से और जल्दी hi वो झड़ने लगी, उनके झड़ते hi मौसा ने भी उनकी गांड कक अपने रास से भर दिया,

मैं अनुज और राजन चाचा अब भी पल्ली, चची और किरण को छोड़ hi रहे थे, मां अब भी खड़े हुए अपना लुंड सहला रहे थे,

इतने में पापा बोले की यहाँ गर्मी है सब बरामदे मरीन चलो

ये सुनकर हम लोग भी चुदाई छोड़ कर अलग हुए और सब के साथ में बरामदे में पहुँच gaye,.jahan खाट डालकर मैंने और अनुज ने सब बड़ों के लिए जगह की, और हम बच्चे बीच में चादर बिछा कर बैठ गए,

माँ- पल्ली किरण सबको वो पेप्सी पड़ी है न फ्रिज में वो पीला तो सही,

किरण पल्ली और ममी ने सबको एक एक गिलास कोल्डड्रिंक दी तो कुछ ठन्डे घूँट लगाने के बाद पापा नाना से बोले- हाँ बाबा अब तुम्हारे सवालों का जवाब देने की बारी है,

नाना- हाँ दामाद जी तबसे दिमाग घूम रहा है सब सोच सोच कर,

मां- हेहेहे जीजी को छोड़कर भी शांत नहीं हुआ बाबा,

मां ने अपने बाबा के सामने खुलने की कोशिश की, तो नाना बोले- अरे वो तो प्यास शांत हुई दिमाग नहीं,

पापा- खैर दिमाग हम शांत किये देते हैं,

इसके बाद पापा ने नाना को शुरू से लेकर अंत तक साड़ी बातें बताई, जिस जिसकी बात होती नाना उसे ध्यान से देखते, वहीं उनका लुंड बिलकुल अकड़ कर खड़ा हो चूका था और सिर्फ उनका क्या हम सब का वही हाल था, सब के लुंड अकड़े हुए थे तो छूटें गीली हो रही थी,

नाना- वही तो हमें अजीब लगा की हम अपनी बेटियों को इतनी आसानी से छोड़ प् रहे हैं,

नाना पापा की बात सुनकर बोले...

मौसी- मज़ा तो आया न बाबा?

नाना- इससे ज़्यादा कभी नहीं आया..

अनुज- तो नाना तुम्हे कोई परेशानी नहीं है की हमारे परिवार में ये सब होता है, इससे?

नाना- नहीं बीटा परेशानी तो तब होती जब तुम लोग हमें शामिल नहीं करते, अब तुम सब बच्चों के साथ ज़िन्दगी बड़ी अछि बीतेगी,

मामी- ये तो सही कहा बाबा तुम्हारी सेवा करना तो हमारा फ़र्ज़ है hi,

अनुज- अरे अब कब तक बातें करोगे यहाँ लुंड का बुरा हाल हो रहा है,

इस पर सब हंसने लगे,

माँ- तो तुझे रोका किसने है तू शुरू कर,

अनुज- ये भी सही कहा,

ये कह अनुज उठा और उसने माँ के आगे आकर उनके hi मुँह में लुंड घुसा दिया,

मामी- ये लो, जो बताये वो झेले, हेहही,

नाना- अरे बहु तू इधर आ, दोनों. बेटियों को तो चख लिए अब बहु को भी चख लें,

नाना ने मामी से कहा, तो मामी तुरंत उठ कर नाना के पास आकर उनकी गॉड में बैठ गयी, और नाना ने अपनी बहु के चूतड़ों पर अपने हाथ जमा दिए और ममी ने अपने होंठ अपने ससुर के होंठों से मिला दिए और ससुर बहु का प्यार शुरू हो गया,

मां यहाँ आने से पहले चाचा के यहाँ अपनी ममता जीजी को छोड़ने वाले थे तो उन्होंने तुरंत ममता चची को पकड़ लिए और उनके ऊपर लेट कर उन्हें चूमने लगे,

मौसा ने फिर पल्ली को पकड़ लिए और बोले आजा बिटिया रानी अपने मौसा से छुडवायेगी,

पल्ली- बिलकुल मौसा, घुसा दो अपना लोढ़ा मेरी छूट में,

मौसा- पहले चूस के गीला कर दे बीटा,

पल्ली तुरंत झुक कर उनका लुंड चूसने लगी, मैंने किरण को अकेला देखा तो उसे पकड़ कर अपने पास बुला लिए खींच लिए और उसके होंठों को चूसने लगा, अब बची मौसी जिन्हे पापा और राजन चाचा ने अपने बीच में ले लिया और उनसे अपने अपने लुंड चुसवाने लगे,

अब पूरे बरामदे में hi चुदाई का खेल शुरू हो चूका था, पूरा परिवार एक दुसरे के सामने पूरी तरह से खुक चूका था और एक दुसरे से हवस मिटने को आतुर था,

मामी अपने ससुर यानी नाना के ऊपर झुक कर उनके मोठे लुंड को अपने मुँह में भर कर चूस रही थी, और नाहा भी अपनी बहु की गर्मी पाकर आहें भर रहे थे, मामी पूरी लगन से ससुर जी की सेवा कर रही थी,





नाना- आह्ह्ह्हह बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह बहुउउ aiseeeeeeeeee hi,

मामी- ुहममम, gugggggggggggggg ुघ्हहहहहाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

माँ- कैसा लग राहाहहहह है बबाहहह बहुउउउ से लुँड्ड्ड चुसवा कर,

नाना- आह्ह्ह्हह बित्याहहहह बहुत्तट्ठ अच्छाआ, अब्ब्ब्ब सब बायत खुल hi गयी है तो बताहहहह hi देते हैं.

मामी- कौनसीई बायत बाबा?

मामी ने नाना का लुंड मुँह से निकलते हुए कहा और फिर से मुँह में भर लिआह,

नाना- आह्ह्ह्हह बहुउउउउठ्हब यहीइ बात कीई हमने तेरे नाम की कई मुठी मारी हैं, अह्हह्ह्ह्ह.

मामी- क्याहहह सही में बाबा,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह हाँ बहुउउ, तू है hi इतनी गडराइइइइ हुई और तुझी अह्ह्ह घर में काम करते देखते थे तो खुद्द्द को रोक hi नहीं पाते थे,

किरण- अह्ह्ह्हह्हह सही में बबआहहह तुमममम तो बडी टीज़ज़्ज़ज़्ज़ निकली,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह क्या करता अह्ह्ह,

मां- अह्हह्ह्ह्ह babaaaahhhhhhhhhhhhhhh अगर हमें पटाहहह होता तो कब काअह्ह्ह छुड़वा देते तुमसे तुम्हारिई बहु कुआहहहहहह,

माँ- तब वैसा मुश्किल था नाहहहह अह्ह्ह्ह अनुज आराम से.

में- हॉँण्णन अभी खुल गए हैं हमेशा से थोड़े hi थे,

मैंने किरण को घोड़ी बनाकर उसकी गांड मारते हुए कहा,





पापा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पीछे की बातें छोडो अब तो कोई दिक्कत नहीं है जिसे जितनी बार जैसे छोड़ना हो छोड़ना,

मौसा- और क्या अब कोई परेशानी hi नागि है,

मां- सही कह रहे हो जीजा, हमने तो सपने में भी नहीं सोचा था की हम अपनी बहनों को छोड़ पाएंगे,

मां ने ममता चची की छूट में धक्के लगते हुए कहा,

चची- अरे सोचा तो हमने भी नहीं ठाहहह, जमुना अब भेनचोद बन गया है तो अचे से छोड़ अपनी जीजी कोह्ह्ह्ह,

मां- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh..

मां झुककर ममता चची के होंठों को चूसते हुए उनकी छूट में धक्के लगाने लगे,

वहीं उनके बगल में hi मौसा ने पल्ली को नीचे लिटा रखा था और खुद उसकी छूट में लुंड पेल रहे थे,





मौसा- हाय क्या छूट है टेरिइइइइइइइइ पल्ली कितनी बार भी छोड़ लूँ मन नहीं भारतआह्ह्ह्हह्ह.

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह मौसाहहह बेटियुओंणन की छूट से भी किसी का मन भारतआह्ह्ह्हह्ह है क्याहहह,

मौसा- सहीई कहा मन करता है तुझे जीवन भर छोड़ताआआ राहूणं,

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह मौसाहहह जीवन भर नाहीईईई अह्ह्ह ब्याहहह करके अपनी ससुराल भी तो जनाः है मुझे,

इस पर सब हंसने लगे,

माँ- देखू तो इसे चुड़ते हुए भी ब्याहहह की पड़ी हैई,

अनुज- पर तुझसे ब्याह करेगा कौन,

माँ- ऐ ऐसी क्यों बोलताहहह हीी इतनी प्यारी है वो लाइन लग जाएगीइ उसके लिए ताऊ,

पल्ली- ऑर्डर क्यायहहह सहीई कहा तैई, ब्याह होगआह्हः बच्चे होंगीइ तभी तो तुंहारी तरह अपनी बेटी से गांड मरवाउंगी मैं...

माँ- कमीनी अह्ह्ह्हह इतना आगे का सोचायआ है िसनीये,

माँ ने अनुज से गांड मरवाते हुए कहा, माँ खत के किनारे लेती थी और अनुज नीचे खड़े होकर उनकी गांड मार रहा था, माँ साथ में अपनी छूट भी सहला रही थी,





अनुज- अह्ह्ह्ह माहहहह ये आएगी का नहीं अपने पीछे वाले छेड़ का सोच रही है हेहही,

पल्ली- तू गंदे जोके मत मार अपनी माँ की गांड मार, हेहही

पल्ली ने मौसा जी से चुड़ते हुए कहा

में- ये ाचा था पल्ली,

पल्ली- है नाहहह भइयाझ इससे अचे जोके मरती हूँ मैं,

किरण- ारी तुम दोनों अपने जोके बंद कारु अह्ह्ह देखो मेरी माँ चुद गयी,

सबने किरण की और देखा और फिर जिधर वो इशारा कर रही थी उधर और फिर सबकी हंसी छूट गयी, क्यूंकि वैसे जो उसने कहा था वो सही hi था पर उसके कहने के तरीके से सब को हंसी आ गयी,

क्यूंकि नाना ने मामी को अपने ऊपर बिठा लिए था और अब नीचे से धक्के लगा कर अपनी बहु को छोड़ रहे थे,





ममी भी अपने ससुर जी से चुड़ते हुए उत्तेजित होकर अपनी बड़ी बड़ी चूचियां मसल रही थी,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह babaaaahhhhhhhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह छोड़ते राहूऊ अह्हह्ह्ह्ह अपनीईईई बहुउउउ को अह्ह्ह क्या छोड़ते हो..

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बहुउउ हैं बहुत्तत्त मज़ेदार छूट है टेरिइइइइइइइइ अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है हमें,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह ताऊ छोड़ती राहु बबाआअह साडी कसार निकल लो,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह हांण बहु अब तुझीीी छोड़ता hi राहूंगाःह,

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह नानाआअह्हह्ह्ह्ह अभी तूऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह बहुत्तट्ठ सी छूटें बायकी हैं तुंहरे लुंडडडड के लिएएएएए, सिरफफफ मामी की hi छोड़ती रहोगी,

मौसी- ीीीहठ तो सहीईई कहा पल्ली नीबी अह्हह्ह्ह्ह क्युंनंन बबआहहह,

नाना- कीत्नीईईई भी बाआकीीी होओओओ बितीयआह्ह्ह्ह अब सारी छोड़ुंगाःह, अब इस बूढ़े का एक hi काम्म्म है अह्हह्ह्ह्ह छुडाआईई,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह babaaaahhhhhhhhhhhhhhh जैसे छोड़ रहीये होओओओओ, बिलकुल बूढ़े नाहीईई हुए हो तुम बबआहहह,

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन और अभी तो तुम्हे मेरिइइइइ छूट का रास भी पीना है,

तभी पीछे से आवाज़ आई और मेरिइइइइ भीईई जो की किरण की थी, जिसकी गांड में मेरा लुंड धंसा हुआ था,

मौसी- और का सबका नंबर लगाएंगे बबआहहह अभी तो बेटियों ओह्ह्ह और बहुउउउ को hi तो चखा है,

मौसी ने दो दो लुंड से छुड़वाते हुए कहा, मौसी पापा के लुंड पर लेती थी उनका लुंड अपनी गांड में लेकर वहीं राजन चाचा ऊपर से उन्हें छोड़ रहे थे,





मौसी की हालत दोहरी चुदाई से ख़राब हो रही थी और उन्हें देख कर लग रहा था वो कभी भी झाड़ सकती हैं,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह dekhooooooooooooohhhhhhhhhhhh दोनों जीजाआठ मिलकर तुम्हारी छोटी को कइसेस छोड़ड़ड़ रहे हैं अह्ह्ह,

नाना और बाकि सब भी उनकी बातें सुन उत्तेजित हो रहे थे,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह चूकःह चुड़क्कड़ मा की चुड़क्कड़ बितीयआह्ह्ह्ह हीी, तुझे टूओ दो लुंड चाहिए hi,

नाना मामी की छूट में धक्के लगते हुए बोले, अब तो नाना भी पूरी तरह से खुलकर सबकी बातों में सुर लगाकर बोल रहे थे,

पापा- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या अम्मा भी चुड़क्कड़ थी,

पापा मौसी की गांड मरते हुए अपने ससुर से बोले

नाना- अह्हह्ह्ह्ह दामाद जी और इन बेटियों को कामुकता कहांण से मिलीइ है, सबकर सामने तुम्हारी सास बहुत संस्कारी बनती थी, पर मेरे सामने कुछ अलग hi रूप ठाहहह उसका अह्ह्ह्हह्हह,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह सहीईई में क्याहहह बबाह और बताओ नाहः,

माँ ने अपने बेटे से गांड मरवाते हुए अपने पापा से अपनी माँ के बारे में पूछा,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह आरईईएई बहुत्तत्त बड़ी चुड़क्कड़ थी तेरी माहहहह बितीयआह्ह्ह्ह, गाओं के मर्दों को जान कर तड़पाती थी, और न जाने कितने गाओं वाले उसके नाम पर हिलाते थे,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह तभीयी हम भी इतनी बड़ीईई चुड़क्कड़ हैंन अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ब जेजाहहहह,

मौसी दोहरी चुदाई ज़्यादा सह नहीं पाई और अपनी अम्मा की बातें सुनते हुए झड़ने लगी, मौसी के झड़ने के बाद चाचा और पापा ने उन्हें एक और लिटा दिया, और खुद उठ कर अपने अगले शिकार ढूंढने लगे,

चाचा तो सीधे अनुज के पास गए और माँ के चेहरे के सामने अपना लुंड फहरा दिया, माँ ने उसे तुरंत मुँह में भर लिए, वहीं पापा नाना के पास गए और अपना लुंड मामी के मुँह में घुसा दिया,

नाना अपने दामाद के साथ अपनी बहु को छोड़ने में थोड़े पहले असहज हुए पर पापा ने उन्हें जल्दी hi बिलकुल आराम से कर दिया,

मां- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वैसी हम्म्म्म जब्ब छोटे थी ताऊ हमारे सामने दुसरे चाचा वगेरा अम्मा के बारे में खून गन्दी गन्दी बातें करते थे,

अनुज- अह्ह्ह्ह माहहहह वही बातें मेरे स्कूल में तुम्हारे लिए होती हैं,

में- अह्हह्ह्ह्ह वो तो सिर्फ बातें करते हैंण्ण्ण्न पर ये सोच हमें वो सब सच में करने को मिल रहा है,

अनुज- ये तो सही कहाहहह भैयाहः,

राजन- आह्हः अनुज जगह बनाः हमें भी भाभी के मज़े लेने दे..

अनुज- हाँ चाचा लूओ,

इधर नए आसान बनने लगे तो मेरे बगल में आज मां तो ममता चची के पीछे पद गए थे और उन्हें चोदे जा रहे थे, मां ने चची को बड़ी चूचियों को थाम रखा था और तेज़ी से उनकी छूट में लुंड पेल रहे थे,





चची- अह्ह्ह्ह जमुनाहहहह भैइयूयाहहहहह अह्हह्ह्ह्ह aiseeeeeeeeee हीईईई छोड़ताआहहहह रहहहहहह,

मां- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीईजीईउह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह हुमसीएई खुड़ड़ड़ रुक्काआआआ नाहीइइइइइइ जाए राहाआअह्ह्ह्ह

मां दनादन चची की छूट में धक्के लगते हुए बोले,

चची- तुह्हः मत रोकक नाआह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह भैयाहः मत्तत्त रोककककक खुद्द्द को छोड़ताआहहहह रह अपनीईई बहन कोऊ अह्ह्ह्ह,

मां की नज़र चची को छोड़ते हुए सामने की और पड़ी और कुछ देख कर उनके झटके और तेज़ हो गए और वो नज़ारा था जिसे देख कर मां के झटके तेज़ हो गए था भी बेहद कामुक,

उनके सामने उनकी बड़ी बहन यानि मेरी माँ उनके सामने घोड़ी बानी हुई थी और उनके ऊपर राजन चाचा चढ़े हुए थे, राजन चाचा का लुंड माँ की मखमली गांड में था वहीं उन दोनों के पीछे अनुज था जिसका लुंड माँ की रसीली छूट में अंदर बहार हो रहा था





राजन चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अनुज टेरिइइइ माँ से मस्त्त्त गंडड दुनिया में कोइइइइइइ नाहीइइइइइइ,

अनुज- जनता आह्हः हुण्णनं चचवाह्ह्ह इतनी मखमली गांड haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh माआहहहह कीई,

माँ- अह्ह्ह्ह तो दोनोंओओओओओआठहह चाचआ भतीजे मिल कर चोदूहह दोनों छेदों कोऊ,

अनुज- हैं आह्हः मा चचवाह्ह्ह का पुण्ड महसूस हो राहाआअह्ह्ह्ह है मुझे तुम्हारी गांड में,

राजन- आह्हः मुझीऐ भी बेताहहह तेरा लुंड भाभीई की छूट में महसूस हो रहा है,

दूसरी और सिर्फ माँ hi ऐसी नहीं थी जिनके अंदर दो लुंड घुसे हुए थे, पापा अपने ससुर जी को दोहरी चुदाई कैसे करते हैं, कैसे ले बनाते है ये सब बड़े आराम से सीखा रहे थे, और नाना भी एक अचे शिष्य की तरह पापा की बातों को सुनकर जैसा वो बता रहे थे वैसा hi कर रहे थे, और इन की हरकतों का असर मामी को हो रहा था, जो अपने ससुर और बहनोई के बीच में फांसी हुई दोनों के लुंड पर तंगी हुई थी, और उत्तेजना के भवर में गोते लगा रही थी,

पापा नीचे लेते होते थे और उनका लुंड मामी की गांड में था वहीं नाना का लुंड मामी की छूट में समाया हुआ था, और दोनों hi ले बनाकर मामी के छेदों में अंदर बहार कर रहे थे





मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह बबाहहह अह्ह्ह्हह मर गयी haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh...

दूसरी और से मां भी अपनी बीवी की दोहरी चुदाई अपने बाप और जीजा से होते देख गरम हो रहे थे,

मां- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीजाः छोड़ो aiseeeeeeeeee hi अह्ह्ह बबआह मारो अपनी बहु की छूट, गुंजन ऐसी hi सेवा करनी है तुझे सब्कीयी,

मां ममता चची को दनादन छोड़ते हुए बोले,

मामी- अह्ह्ह्ह हॉँण्णन किरण की पापाठ अब्बब्बब करती रहूंग़ीीी अह्ह्ह्हह्हह मररररररररर gayiiiiiiiiii ओह्ह्ह्हह्ह,

मामी के लिए अपने ससुर से और बहनोई से एक साथ छुड़वाना वो भी सबके सामने खासकर अपने पति के काफी ज़्यादा हो गया और वो जल्दी hi झड़ने लगी, पर उनके झड़ते hi नाना भी खुद को रोक नहीं पाए और अपनी बहू की छूट में अपने रास की पिचकारियां छोड़ने लगे,

झड़ने से ममी की गांड पापा के लुंड पर भी कसने लगी थी ऊपर से ये एहसास की वो अपने ससुर जी के साथ चुदाई कर रहे हैं उनको भी चरम तक पहुंचा गया, पर उन्होंने मामी की गांड को भरने की जगह उनके मुँह में अपना रास दिया जिसे मामी जातक गयी,

अपनी पत्नी को झाड़ता देख मां भी खुद को रोक नहीं पाए और ममता चची की छूट में झड़ने लगे जो उनकी चुदाई से पहले hi एक बार झाड़ चुकी थी और अब उनके साथ दूसरी बार भी झाड़ गयी,

अब मैं किरण, मौसा पल्ली और चाचा अनुज और माँ hi बाकि थे,

मैंने किरण को उठाया और गांड में लुंड घुसाए हुए hi उसे पल्ली के ऊपर लिटा दिया जिसकी गांड मौसा मार रहे थे, अब दोनों सहेलियां एक दुसरे की छूट चाटते हुए गांड मरवा रही थी, मैं और मौसा दोनों जवान कासी हुई गांड का आनंद ले रहे थे, कुछ पल बाद मैंने और मौसा ने जगह बदली और मैं पल्ली की गांड मरने लगा और मौसा किरण की,





वो दोनों लगातार एक दुसरे की छूट चाट रही थी और इसी दोहरे हमले के कारण गांड में लुंड और छूट में जीभ होने से दोनों hi ज़्यादा देर टिक नहीं पाई और दोनों hi झड़ने लगी, पहले किरण झड़ी तो उसके कुछ पल बाद पल्ली पर मैंने और मौसा ने उन दोनों को उठने नहीं दिया और तब तक दोनों की गांड मरते रहे जब तक हमने उनकी गांड को न भर दिया, फिर हम लोग भी बाकि की तरह आराम करते हुए बीच में चल रही माँ की दोहरी चुदाई देखने लगे जिसे देख कर लग रहा था की वो भी समाप्त hi होने वाली है,

चाचा और अनुज दोनों के झटके बेहद तेज़ और आक्रामक हो चुके थे वहीं माँ के मुँह से भी अब शब्दों की जगह सिर्फ आहें निकल रही थी और कुछ hi पलों में माँ के मुँह से एक अह्ह्ह निकली और उनका बदन कंपनी लगा, और वो झड़ने लगी... माँ के स्खलन के दौरान अनुज और चाचा लगातार माँ को छोड़ते रहे और जैसे hi माँ का झड़ना ख़तम हुआ तो दोनों ने तुरंत माँ की छूट और गांड से अपने लुंड निकले और माँ के चेहरे की और आ गए,

चाचा ने माँ के चेहरे के बगल में जगह ली तो अनुज माँ के सीने के ऊपर आ गया और दोनों अपने अपने लुंड मुठियाने लगे लगभग एक साथ hi अनुज और चाचा के लुंड ने धार छोड़ी और माँ के चेहरे और गर्दन से लेकर चूचियों तक भीगने लगी, जल्दी hi दोनों ने अपने लुंड रास की एक एक बूँद माँ के ऊपर उढेल दी तो माँ भी दोनों के लुंड को बारी बारी चूस कर साफ़ करने लगी,





जब माँ अपने काम से संतुष्ट हुई तो उन्होंने दोनों को छोड़ा और फिर वो भी हमारी तरह hi एक और बैठ कर हांफने लगे, नाना माँ को ऐसे देख हैरान भी थे और खुश भी,

माँ- ऐसे क्या देख रहे हो बाबा?

नाना- बस यही की हम हमेशा से चाहते थे हमारे बच्चे खुश रहे, और अब अंदाज़ा हो गया है की इससे ज़्यादा ख़ुशी और क्या होगी बस वही देख कर मन खुश हो रहा है हमारा,

पापा- ये तो सही कहा बाबा, समाज चुदाई को बुरा मानती है परिवार में चुदाई तो पाप मानी जाती है, पर यही चुदाई परिवार को कितने करीब ले आती है ये कोई नहीं जनता,

माँ- बिलकुल सही कहा, हमारे परिवार को hi देखलो न आपस में कोई द्वेष न कलेश,

अनुज- बस खाओ पियो और चुदाई करो मस्त जीवन है,

इस बात पर सब हंसने लगे,

नाना- वैसे ये सब किआ हुआ कर्मा का hi है न,

माँ- हाँ, इसी की बदौलत है आज हम सब ऐसे बैठे हैं,

किरण- हाय करना भैया इसके लिए तो तुम्हे ाचा वाला धन्यवाद् बोलूंगी मैं.

में- अरे पगली धन्यवाद की ज़रुरत नहीं, हम सब का साथ होना hi मेरे लिए बहुत है,

अनुज- सब कहाँ हैं, सागर तो है hi नहीं,

किरण- हाँ अब वो hi एक लौटा भाई बचा है जिससे मैं चूड़ी नहीं हूँ,

मां- अरे बिटिया अभी तो तू अपने पापा से भी बची हुई है,

किरण ये सुन कर उठी और अपने पापा की गॉड में बैठ गयी और अपने होंठ अपने पापा के होंठों से लगा दिए और चूसने लगी, मां भी बेटी का साथ पाकर मस्त होने लगे,

माँ- अरे पहली बार बेटी के साथ करेगा तो जा अंदर कमरे में ले जा आराम से बाप बेटी एक दुसरे से प्यार करना,

मां- ये बात तो सही कही जीजी,

ये कहकर मां ने किरण को गॉड में उठाया और अंदर कमरे में ले गए,

मौसी- और किसी को भी जाना है भाई अकेले में और बाकि सब की क्या योजना है,

इस पर नाना बोले- ममता बिटिया चल तू हमारे साथ चल कमरे में,

ममता- हाँ चाचा चलो न,

माँ- बबाहहह से भी न बिलकुल बर्दाश्त नहीं हो रहा,

नाना- तुम सब का बदन देखा है, किस्से बर्दाश्त होगा,

ये कहके नाना और चची मेरे और नाना वाले कमरे में निकल गए,

ममी- लो जीजा तुम्हारी बीवी को तो बाबा ले उड़े,

राजन चाचा- तो क्या हुआ हम तुम्हे ले चलते हैं क्यों चलोगी हमारे साथ?

मामी- अरे इसमें क्या पूछना जीजा, जहाँ चाहो वहां ले चलो,

चाचा- फिलहाल तो कमरे में चलो सलहज जी,

ये कहकर चाचा और ममी भी चले गए अब आंगन में मैं अनुज पापा माँ, और मौसा मौसी और पल्ली रह गए थे,

माँ- अब बस एक कमरा खली बचा है जाना है किसी को तो चले जाओ,

अनुज- मैं जाऊंगा पर चुदाई करने नहीं सोने,

अनुज के बोलते hi मौसी और पल्ली भी बोल पड़े हाँ भाई हम लोग भी सोयेंगे,

मौसा- भाई साब इन लोगो को सोने दो हम चल कर देखते हैं क्या काम आगे बढ़ा,

पापा- हाँ चलो, नहीं तो ससुरे सब समय ख़राब करते रहेंगे,

पापा और मौसा भी कपडे पहनकर निकल गए, अनुज मौसी पल्ली अंदर चले गए थे सोने, आंगन में बस मैं और माँ बचे थे,

मैं माँ से चिपक कर लेट गया तो माँ प्यार सर पर हाथ फिरते हुए बोली, तेरे चाचा और भाई ने रास से पूरा मुँह चिपचिपा कर दिया है, नहाने चलें?

में- हाँ चलते हैं मुझे भी गर्मी लग रही है,

मैं और माँ बाथरूम में नहाने घुस गए,

नहाते हुए मैंने माँ की चूचियों और चूतड़ों से लेकर पूरे बदन पर अचे से मसल मसल कर साबुन लगाया, और वहीं माँ ने भी मेरे लुंड और गांड को अचे से चाट कर साफ़ किआ, खूब मस्ती करते हुए हम माँ बीटा नहाये, और नहाकर बहार निकले hi थे की मेरा फ़ोन बजा, देखा तो जग्गू का था,

मैं उसका फ़ोन देखते hi समझ गया वो किस बारे में पूछेगा, मैंने कुछ सोचा और उसका फ़ोन उठा कर थोड़ी देर में करने को बोल दिया, माँ कपडे पहन रही थी, तो मैंने उन्हें पीछे से बाहों में भरते हुए पूछा- माँ उस दिन जग्गू वाली बात बताई थी न,

माँ- हाँ.

में- फिर उसका क्या करें,

माँ- जैसा तुझे ठीक लगे,

में- नहीं माँ तुम्हे ठीक लग्न चाहिए न,

माँ- अरे अगर मेरे साथ तू है तो मुझे ठीक hi लगता है लल्ला,

में- बढ़िया फिर उसे बोल देता हूँ,

माँ- हाँ बोल दे तब तक मैं कपडे पहन लेती हूँ,

में- ठीक है,

उसके बाद मैंने जग्गू को फ़ोन किआ

में- हाँ सुन जगह कौनसी रखेगा,

जग्गू- घर hi ठीक है,

में- बाकि सब?

जग्गू- अरे पापा बहार गैर हैं खेत पर भाभी और तै सरजू के यहाँ गए हैं सागर और लाडो के साथ,

में- ठीक है आते हैं फिर,

जग्गू- सच में,

में- हाँ,

इतना कहकर मैं फ़ोन रख देता हूँ, और माँ को से पूछता हूँ- माँ चलें?

माँ- हाँ चल,

माँ ने मेरे पास आते हुए कहा...

जारी रहेगी,
 
कहानी की चौथी वर्षगांठ पर सभी पाठकों को बहुत बहुत बधाई, और उससे भी कहीं ज्यादा धन्यवाद जो आप लोग इतने लंबे सफर में साथ बने रहे, कभी पैंट में हाथ डाल कर तो कभी बिना कपड़ों के ही हर स्तिथि में आप चोदमपुर के सफर पर गए और अभी तक घूम रहेंहैं, जब शुरू की थी तब सोचा नहीं था कि ये सफर इतना लंबा होगा साथ ही आप सब का इतना प्रेम मिलेगा, कुछ ही दिन पहले कहानी हज़ार पेज की संख्या को पार कर आगे बढ़ी,

एक अलग संयोग ये भी देखिए की आज चौथी वर्षगांठ पर ही कहानी 1 करोड़ व्यूज का जादुई एवं मेरे लिए तो असंभव सा आंकड़ा छूने जा रही है, इस सब के लिए आप लोगों का कहानी के प्रति प्रेम ही है जिसने इसे यहां तक पहुंचाया, अंत में इतना ही कहूंगा, साथ बने रहिए जब तक ये सफर है तब तक।

बहुत बहुत धन्यवाद।
 
जग्गू- अरे पापा बहार गैर हैं खेत पर भाभी और तै सरजू के यहाँ गए हैं सागर और लाडो के साथ,

में- ठीक है आते हैं फिर,

जग्गू- सच में,

में- हाँ,

इतना कहकर मैं फ़ोन रख देता हूँ, और माँ को से पूछता हूँ- माँ चलें?

माँ- हाँ चल,

माँ ने मेरे पास आते हुए कहा...


अपडेट 225
इधर जहाँ हम लोग अपने अपने कामो में व्यस्त थे वहीं लाडो आज सागर को अपने परिवार से अचे से मिला रही थी और लगभग लगभग अपने और हमारे बारे में जितना वो जानती थी सब बता चुकी थी, सागर को भी काफी चीज़ें समझ आ गयी थी और जब लाडो उसे अपने घर लेकर आई तो तबसे वो पूरी तरह से खुल चूका था और समझ चूका था की चोदामपुर में कुछ भी हो सकता है, और इस समय तो उसे इस बात का यकीन पूरी तरह से हो चूका था, क्यूंकि वो अभी हमारी प्यारी रज्जो चची को उनके hi घर में सबके सामने बिलकुल नंगा करके छोड़ जो रहा था, और चची भी अपनी बेटी के आशिक़ से लेट कर आराम से अपनी छूट की प्यास मिटा रही थी,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह कितनी मस्त्त्त हो तुमममममझहह और तुम्हारीईई चूऊउत्तत्त

रज्जो- ऐसी हीईई छूवोड्ढड्डड़ बेटाहः तेराआह्ह्ह लुंड भी बहुत्तत्त माज़ी देताह हीी,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआनं बाआहहहहहह, तुम्हारी छुछियां कितनी मस्त हैंण्ण्न अह्ह्ह्ह,

सागर ने चची की भरी भरकम चूचियों को मसलते हुए कहा,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह बच्चा अह्हह्ह्ह्ह टेरिइइइ मा की भी तो ीत्नीईई बड़ीईई हैंण्ण्न,

सागर- हैं बुआहहहह मममममिययययययय की भी बहुत बड़ी और मस्त हैं,

चची ने महसूस किआ की अपनी मम्मी का नाम आते hi उसके भाव में और धक्कों में भी बदलाव आया, चची समझ गयी की ये भी सबकी तरह अपनी माँ का आशिक़ है,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह तू अपनी मम्मी को भी ऐसी hi छोड़ना चाहता है लल्लाह?

सागर- अह्ह्ह्हह्हह हॉँण्णन बाआहहहहहह, छोड़ना भी चाहतआह्हः हुन्न्न और सबसे छुड़वाना भीई जैसे तुम और मंजू बुआ भाभी लाडो सब छुड़वाते हैं,

सागर ने बगल में देखते हुए कहा, जहाँ प्रेमा भाभी और उनकी मम्मी मिलकर दीनू चाचा को खुश कर रहे थे, भाभी चाचा के लुंड पर उछाल रही थी और पद्मिनी तै चाचा से अपनी मोती मोती चूचियां चुसवा रही थी,

ये सुनकर तो चची के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और बोली- अह्ह्हम्म्म तुझे लाडो पसंद है बबुआए,

ये सुनकर सागर थोड़ा शर्मा गया,

रज्जो- ारी उसकी माँ छोड़ रहा है उसके सामने और शर्मा रहा है,

सागर- अह्ह्ह्हह्हह हॉँण्णन बाआहहहहहह अछि लगती है,

उसके इतना बोलते hi तभी लाडो की चीख दोनों के कानो में पड़ी और दोनों ने hi उसकी और देखा, लाडो अपनी बड़ी बहन नीतू के चेहरे के ऊपर थी, और नीतू अपनी छोटी लाड़ली बहन की छूट चाट रही थी, क्यूंकि अभी घर पर दोनों भाइयों में से कोई नहीं था इसलिए दोनों बहनें hi एक दुसरे को शांत कर रही थी, उसके चीखने की वजह ये थी की नीतू की छूट चूसै से वो इतनी उत्तेजित हो गयी की उसकी छूट का बांध खुल गया था और वो चीखते हुए अपनी बड़ी बहन के चेहरे पर मूतने लगी,

सागर ने जब ये देखा तो हैरान और उत्तेजित दोनों हो गया, नीतू का पूरा चेहरा लाडो के मूट से तर था, इसके बाद नीतू उठी और मुस्कुरा कर लाडो को देखा और लाडो तो नीतू पर कूद पड़ी और अपने मूट से साणे हुए उसके चेहरे को चाटने लगी, सागर ये देख मुस्कुराने लगा....

रज्जो- देखा इसे hi पसंद करता है तू लल्लाह,

चची ने सागर से चुड़ते हुए पूछा,

सागर- अब तो और करने लगा हूँ बुआहहहह,

ये कहकर सागर रज्जो चची की छूट में तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा, चची भी उसकी चुदाई की धुन में थिरकते हुए आहें भरने लगी, सागर ुनहु छोड़ते हुए सोच रहा था अभी बहुत कुछ देखना बाकी hai,Idhar मैं और माँ जल्दी hi जग्गू के घर पहुंचे जहाँ सिर्फ वो आउट तै थी, तै ने दरवाज़ा खोल कर हमें अंदर किआ..

तै- आजा बच्चा, आ मेरी बन्नो,

माँ- और जीजी का हो रहा है?

माँ ने अंदर आते हुए पूछा,

तै- अरे कपडे धोकर सूखने दाल कर निपटे हैं अब,

में- जग्गू कहाँ गया ताई,

तै- अरे वो अंदर कमरे में है वहीं चलो पंखे में गर्मी से राहत मिलेगी,

माँ- हाँ जीजी गर्मी ने तो हालत ख़राब कर दी है,

हम लोग कमरे में पहुंचे जहाँ जग्गू पहले से लेता हुआ था, वैसे तो हम सब बहुत खुल चुके थे पर माँ के सामने वो थोड़ा असहज हो रहा था,

वैसे थोड़ी असहजता तो सब में hi थी, खैर हम चारो लोग बैठ गए एक बिस्तर पर मैं और माँ तो दुसरे पर जग्गू और तै एक दुसरे के सामने,

तै- चाय वगेरा लाएं का बन्नो?

माँ- अरे नहीं जीजी कछु नहीं चाहिए,

इसके बाद कमरे में कुछ पल का अजीब सा सन्नाटा पसर गया जो मैंने सोचा ऐसे कुछ नहीं होगा, कुछ न कुछ तो करना पड़ेगा, किसी को तो पहल करनी hi पड़ेगी,

में- मुझे तो गर्मी बहुत लग रही है,

ये कह कर मैं उठा और मैंने अपनी टीशर्ट उतार दी, मेरी देखा देखि जग्गू भी यही बोलै- और t-shirt उतार कर ऊपर से मेरी तरह नंगा हो गया,

माँ- गर्मी तो है hi इतनी की दुखी कर रखा है,

मंजू तै- सही कहा बणणो, ज़रा सा काम करलो तो पूरा पसीना में नाहा जाते हैं,

में- तो माँ और तै तुम लोग भी कपडे उतर लो न थोड़ा आराम मिलेगा,

मंजू तै- अरे कह तो सही रहा है तू, लल्ला.

ये कह कर तै ने तुरंत खड़े होकर अपनी सारी उतर दी,

में- माँ तुम भी उतार दो,

माँ- अरे रहने दे न, फिर दोबारा बांधने का झंझट,

माँ ने जानकार थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, जैसा हम दोनों ने पहले से hi सोचा हुआ था ताकि ये न लगे की हम माँ बेटे पहले से इतने खुले हुए हैं,

में- अरे उतार लो माँ 2 मिनट तो लगते हैं, पहनने में,

ये कहकर मैं माँ की साड़ी का पल्लू पकड़ के खींचने लगा, माँ ने भी थोड़ा न नुकुर का नाटक करते हुए अपनी साड़ी खुलवा ली,

माँ- ले उतार दी अब ठीक,

मंजू तै- सही किया बन्नो क्यों गर्मी में परेशां होती है,

ताई ने माँ के पेटीकोट और ब्लाउज में भरे हुए बदन को देखते हुए कहा, वहीं जग्गू भी ध्यान से माँ को निहार रहा था,

मैंने तै को माँ की नज़र बचाकर आगे बढ़ने का इशारा किया, तो ताई ने कुछ सोचा और बोली- हमें तो ये ब्लाउज भी बड़ा काट रहा है,

और इतना कहकर तै ने अपने ब्लाउज को खोलना शुरू कर दिया और फिर कुछ hi देर में अपना ब्लाउज उतार कर अलग फ़ेंक दिया, माँ नाटक करते हुए बोली - अरे जीजी ये क्या कर रही हो बच्चो के सामने नंगी होगी क्या?

ऐसा माँ ने इसलिए बोलै क्यूंकि तै ने ब्लाउज के नीचे ब्रा नहज पहनी थी, और ब्लाउज उतारते hi उनकी बड़ी छुछियां सामने आ गयी,

मंजू तै- अरे तो क्या हुआ, बच्चे hi तो हैं, इनके सामने नंगे होने में का शर्म क्यों बच्चो?

में- बिलकुल तै मुझे तो कोई शर्म नहीं जग्गू से पूछ के देखो कहीं वो शर्माए तो,

जग्गू- हॉट मैं क्यों शर्माने लगा चची और मम्मी से,

मंजू तै- वही तोह देखो बच्चे भी मानते हैं,

माँ- हाँ मान तो रहे हैं, पर.

मंजू तै- अरे बन्नो पर वॉर छोड़ और कपडे खोल कर गर्मी से राहत ले ले,

माँ- पर जीजी..

मंजू तै- अरे तुझे बच्चों का लग रहा है न, बच्चों? एक काम करो तुम लोग दिखाओ की तुम बिलकुल नहीं शर्मा रहे तभी बन्नो भी मानेगी.

में- पर कैसे?

मंजू तै- जिस काम के लिए तेरी माँ शर्मा रही है वो करके,

में- ाचा बस इतनी सी बात,

ये कह कर मैं खड़ा हुआ और तुरंत अपना पजामा और साथ hi कच्चा नीचे खिसका कर बिलकुल नंगा होकर खड़ा हो गया,

माँ- कर्मा ये क्या कर रहा है तू बेशरम.

माँ ने नाटक करते हुए कहा,

इतने में मुझे देख जग्गू भी पूरा नंगा हो गया और बोलै- मैं भी बिलकुल नहीं शर्मा रहा,

इससे माँ की बात बीच में hi काट गयी,

हम दोनों के कड़क लुंड बिलकुल अकड़े हुए थे, माँ ने जग्गू की और देखा और अपना मुँह फेर लिया,

माँ- तुम लोग ये क्या कर रहे हो?

मंजू तै- अरे बन्नो तू भी न कितना शर्मा रही है, जब बच्चे नहीं शर्मा रहे तो तू काहे इतनी शर्म दिखा रही है,

में- सही तो कह रही हैं ताई माँ, क्यों बेकार की शर्म कर रही हो,

मैंने माँ के पीछे उन्हें बाहों में भरते हुए कहा,

और साथ hi उनके ब्लाउज के हुक भी खोलने लगा,

माँ से जितना हो प् रहा था उतना ाचा नाटक कर रही थी झिझक और शर्म का, पर माँ ने मुझे ब्लाउज खोलने से नहीं रोका, और जैसे hi ब्लाउज का आखिरी हुक खुला तो तै और जग्गू दोनों की आँखों में चमक आ गयी, इधर माँ शर्माने का नाटक करने लगी पर मैंने उनका ब्लाउज उनके कंधो से सरका कर उतार दिया, माँ की मोती चूचियां सपाट पेट सामने था,

मंजू तै- अरे बन्नो हम मानते हैं तुम्हारा शर्माना जायज है, पर तू hi देख कालक गाओं में जो कुछ हुआ, उसके बाद तो सही कहें तो हम माँ बीटा खुद को एक दुसरे से दूर नहीं रख पाए,

माँ- समझती हूँ जीजी,

मैंने माँ के पीछे बैठकर ब्रा के ऊपर से hi उनकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया, वही मेरी देखा देखि जग्गू भी मेरी तरह तै के पीछे बैठ कर उनकी चूचियों को मसलने लगा, वहीं तै थी जो माँ से लगातार बातें किये जा रही थी, जैसे कुछ हो hi नहीं रहा,

दोनों माँ एक दुसरे के सामने बैठी थी और उनके बेटे पीछे से उनकी भरी हुई चूचियों को मसल रहे थे, फ़र्क़ बस इतना था की माँ की चूचियों के ऊपर ब्रा थी जो की उनकी चूचियों को छुपाने में असफल हो रही थी,

मंजू तै- अहहग आराम से लल्ला, अब तुम hi देखो बन्नो दोनों कितने खुश हैं अपनी माओं का लाड पाकर,

माँ- ये तो सही कह रही हो जीजी,

माँ का ये कहना था की मैंने माँ की ब्रा को पीछे से खोल दिया और फिर उनके बात करते हुए hi उनके सीने से हटाकर अलग फ़ेंक दिया, इस बार माँ ने कोई ज़्यादा विरोध नहीं किआ पर तै और जग्गू की आँखें चौड़ी हो गयी माँ की नंगी कामुक भरी हुई चूचियों को देखकर,

मैंने दोबारा से माँ की नंगी चूचियों को हाथो में भर लिए और मसलने लगा,

मंजू तै- तभी तो वहां से आने के बाद हम माँ बेटे और भी करीब आ गए हैं, हर तरीके से.

तै ने जग्गू से अपनी चूचियां मसलवटे हुए कहा.

माँ- ाचा जीजी ये तो बढ़िया बात है न पर हर तरीके से मतलब,

में- हाँ तै हर तरीके से कैसे,

मैंने भी माँ की चूचियों को दबाते हुए पूछा,

मंजू तै- हर तरीके से मतलब ऐसे,

ये कहके तै ने अपनी एक छुच्छी जग्गू के मुँह की और करदी तो जग्गू उसे तुरंत चूसने लगा,

में- अरे वाह माँ, वैसे हम भी ऐसा कर सकते हैं न,

माँ- हम? पर,

में- अरे माँ अब मत रोको,

ये कहकर मैंने माँ को पीछे की और लिटा दिया और अपने होंठों को उनकी चुकी पर टिका दिया और चूसने लगा, जिससे माँ के मुँह से एक सिसकी निकल गयी जिसे सुनकर तो तै और जग्गू और खुश हो गए,

माँ- अह्ह्ह्ह जीजी देखो कैसे दोनों बिलकुल बच्चों की तरह दूध पि रहे हैं,

मंजू तै- सही कहा बन्नो, ऐसा लगता है कल की बात है ये दोनों इतने इतने से हमारा दूध पिया करते थे गॉड में,

माँ- हाँ जीजी, पर देखो दूध की भूख अब भी नहीं मिटी इनकी, अह्ह्ह्ह हमेशा hi बच्चे रहेंगे हमारे लिए तो ये,

माँ ने मेरे सर पर हाथ फिरते हुए कहा, अब दोनों माँ अगल बगल में लेती हुई अपने अपने बेटे को अपनी चूचियां का रास पान करवा रही थी,

मंजू तै- वो बात तोहह है बन्नो पर हमारे बच्चे अब बच्चे भी नहीं रहे,

तै ने मेरे लुंड की और इशारा करते हुए माँ से कहा, तो माँ ने मेरे लुंड को देखा और तै के सामने शर्माने का नाटक करने लगी,

तै ने फिर माँ को चौंकाया और अपना हाथ बढाकर जग्गू का लुंड हाथ में थाम लिया और उसे मुठियाने लगी, जिस पर माँ ने आँखें बड़ी कर उन्हें न करने का इशारा किया, वहीं जग्गू तो बिना किसी भी प्रतिक्रिया के छुछियां चूसने में लगा रहा,

मंजू तै माँ को भी मेरे लुंड की और इशारा करके उसे पकड़ने के लिए कहने लगी, पर माँ नाटक करके ना में सर हिला रही थी, पर फिर तै के कई बार कहने पर और हमारी बात के अनुसार माँ ने भी मेरा लुंड अपनी मुठी में भर लिया तो तै के चेहरे पर मुस्कान आ गयी,

माँ और तै मेरा और जग्गू का लुंड मुठियाते हुए अपनी छुछियां चुसवा रही थी, तै लगातार माँ का हौसला बढ़ने की कोशिश कर रही थी, इसी बीच कुछ देर बाद तै उठी और उन्होंने उठ कर अपने बदन पर जो एक मात्रा कपडा था पेटीकोट उसे भी उतार फ़ेंक दिया क्यूंकि कच्ची उन्होंने अंदर पहनी नहीं थी अब तै हमारे सामने मेरे और जग्गू की तरह पूरी तरह से नंगी थी, माँ तै को हैरानी का नाटक करते हुए देख रही थी,

माँ- अरे जीजी तुम तो बिलकुल नंगी हो गयी, बच्चों की तरह,

तै- अरे बन्नो नंगे होने में hi तो मज़ा है,

ये कह कर तै ने हाथ आगे बढ़ाया और माँ को पकड़ कर उठा लिए माँ भी उनके हाथ के सहारे उठ कर कड़ी हो गयी तो तै ने माँ को अपनी बाहों में भर लिए, दोनों की मोती मोती चूचियां आपस में डाब गयी,

तै- बन्नो मज़ा आ रहा है न?

माँ- मज़ा तो आ रहा है जीजी पर,

माँ इससे आगे बोलती की उन्हें अपना पेटीकोट अपनी कमर से नीचे गिरता हुआ महसूस हुआ, जब तक माँ उसे पकड्पाती तब तक तो वो नीचे गिर चूका था, तै ने कब पेटीकोट की गांठ खोल दी थी माँ को पता hi नहीं चला था, माँ के पेटीकोट के उतारते hi तै और जग्गू हैरान हो गए क्यूंकि माँ ने भी पेटीकोट के नीचे कच्ची वगेरा नहीं पहनी थी और माँ पूरी तरह से नंगी सबके सामने थी,

माँ- अरे ये क्या किआ जीजी, हमें भी पूरा नंगा कर दिया बच्चों के सामने,

तै- अरे बन्नो नंगे होने में hi तो मज़ा है,

ये कहके तै माँ के चूतड़ों को मसलने लगी हाथ नीचे लेजाकर और माँ को कास के खुद से चिपका लिया, दोनों गदराई माओं को ऐसे चिपका देख कर हम दोनों बेटों के लुंड झटके मार रहे थे, मैं माँ के पीछे की और बैठा था वहीं जग्गू अपनी मम्मी के,

माँ- अह्ह्ह्ह जीजी कैसा मज़ा है नंगा होने में?

माँ ने थोड़ा गरम होते हुए कहा तो तै खुद हो गयी की वो सफल हो रही हैं,

तै- तुझे लेने हैं मज़े बन्नो?

माँ ने सर हिलाकर हाँ में जवाब दिया, तो ताई फूली नहीं समाई और कास कास के माँ के चूतड़ों को मसलने लगी, साथ hi तै ने अपना चेहरा माँ के कान के पास किआ और बोली- तो बन्नो बस मेरा साथ देती जा, ऐसा मज़ा दिखाउंगी की तू भूल नहीं पायेगी,

माँ- अह्ह्ह्ह हाँ जीजीईई,

माँ ने भी तै के मोठे चूतड़ों को थाम लिया, और उन्हें मसलने लगी, तै ने माँ के कंधे पर सर रखे हुए hi मेरी और देखा और बोली- अह्ह्ह कर्मा देख तो तेरी माँ के चूतड़ कितने मोठे मोठे हैं, ये देख कितने मअस्सल मोठे चूतड़ हैं, तेरी माँ के,

तै मुझे माँ के चूतड़ों को मसल कर दिखाइते हुए बोली, तो माँ गरम होते हुए आहें भरने लगी, साथ hi माँ के हाथ भी तै के चूतड़ों को मसलने लगे,

तै- अह्ह्ह्हह्हह बच्चा आजा पास से देख बच्चा,

तै ने मुझे पास आने को कहा तो मैं खिसक कर तुरंत माँ के बिलकुल पीछे बैठ गया और मेरा चेहरा ठीक माँ के चूतड़ों के सामने आ गया जिन्हे तै मसल रही थी,

तै- अब ठीक से दिख रहा है बच्चुआ?

में- हॉँण्णन ताई...

तै- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म देख ध्यान से ये तेरी माँ की गांड का छेड़ दिख रहा है,

में- हाँ तै दिख रहा है, मैंने गरम होते हुए कहा,

माँ- अह्ह्ह्ह जीजी का कर रहीइइइइइइ हो, मेरी बेटे को hi मेरिइइइइ गांड का छेड़ दिखा रहीए हो,

माँ भी गरम होते हुए बोली...

तै- हाँ बन्नो ज़रा बेटे को देखने दो न अपनी माँ का छेड़, कैसा है कर्मा तेरी माँ का गांड का छेड़,

तै ने माँ के दोनों चूतड़ों को फैलते हुए मुझे दिखा कर पूछा,

में- बहुत प्यारा है तै, छोटा सा भूरा सा,

तै- तुझे पसंद आया,

में- हाँ ताई बहुत प्यारा है माँ की गांड का छेड़,

तै- पता है तेरी माँ की गांड का छेड़ जितना प्यारा दिख रहा है उतना hi ाचा स्वाद है इसका, तू चखेगा?

में- हाँ ताई, हाँ.

तै- क्यों बन्नो अपने बेटे को अपनी गांड चखाओगी?

माँ- ुहममम जीजी मुझे शर्म आती है,

तै- अरे बन्नो इसमें कैसी शर्म बीटा hi तो है उसे भी तो चखने दो अपनी गांड का स्वाद,

माँ- अह्ह्ह्ह जीजी पर,

तै- कर्मा चखले अपनी माँ की गांड का स्वाद कैसा है,

ये कहते hi मैंने तुरंत अपनी जीभ माँ की गांड के छेड़ पर टिका दी और चाटने लगा,

माँ के मुँह से आह्ह्ह्हह निकल गयी एक तेज़्ज़ज़ मैं पागलों की तरह माँ की गांड को चाटने लगा,

माँ- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह लल्लाह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh,

तै- क्यों बन्नो कैसा लग रहा है,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह सही कहूं तो बहुत्तट्ठ अलग्ग सा एहसास हो राहाहहह है,

तै- मज़ा आह आ रहा है,

माँ- हमम्माह्ह्ह हानंन्न जीजी तुम भी चटवाओ अपनीइ जग्गू से..

तै- जैसी हमने तुम्हारी छतवई तुम भी हमारी चटवाओ.

माँ- जग्गू लल्लाह,

जग्गू जो इतनी देर से ये कामुक खेल चुपचाप बैठे हुए देख रहा था अपना नाम पुकारे जाने पर तुरंत बोलै - हाँ चची,

माँ- आजा तू भी अपनीइ मम्मी की गांड चाट ले,

माँ ने तै के चूतड़ों को फैलाकर बोलै,

जग्गू ने तुरंत बिना समय गंवाए आएगी आकर अपना मुँह तै के मोठे चूतड़ों के बीच घुसा दिया,

तै ने माँ के चूतड़ों से हाथ हटा लिया और मैंने उनकी ज़िम्मेदारी अपने हाथों में ले ली, वही माँ ने भी ऐसा hi किया, तै अपने हाथ अब माँ के बदन पर घुमाने लगी और बोली- कैसा लग रहा है बन्नो?

माँ- मज़ा तो बहुत आ रहा है जीजी, पर,

तै- पर वार्डर छोडो अब खुल के माज़ी लूओ,

ये कहके तै ने तुरंत अपने होंठ माँ के होंठों से भिड़ा दिए

तो माँ ने भी अब और नाटक न करते हुए तुरंत तै का साथ देने लगी और उनके होंठो को चूसने लगी, दोनों hi बड़ी कामुकता से एक दुसरे के होंठों को चूस रही थी



दोनों hi एक दुसरे के रसीले होंठों का रास पीते हुए एक दुसरे के कामुक गदराये बदन पर हाथ फिरा रही थी इसी बीच तै ने अपने हाथ माँ की चूचियों पर जमा लिए तो माँ ने भी तै की चूचियों को थाम लिया, अब दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने के साथ साथ एक दुसरे की चूचियों को भी मसल रही थी, कंरव में मौजूद सभी के मुँह अभी किसी न किसी काम में व्यस्त थे तो कोई कुछ नहीं बोल सकता था, जल्दी hi होंठों के रस्ते तै की जीभ भी माँ के मुँह में घुस गयी जिसका स्वागत माँ ने अपना मुँह खोल कर किआ और तै की जीभ चूसने लगी, वहीं कुछ देर बाद तै ने भी माँ की जीभ को इसी तरह से चूसा, दोनों औरतों के होंठ जब अलग हुए तो दोनों hi बुरी तरह से हांफ रही थी, हम दोनों बिना किसी रुकावट के अपनी अपनी माँ की गांड जा रास पि रहे थे,

होंठों के बाद तै ने माँ के गले और सीने को चूमना शुरू किया और नीचे बढ़ाते हुए जल्दी hi चूचियों के सामने भी आ गयी, और अगले hi पल माँ की एक चुकी को मुँह में भर लिए, तो माँ के मुंह से एक कामुक सिसकी निकल गयी, वहीं माँ उनका सर अपनी चूचियों पर दबाने लगी,

तै दूसरी चुकी को अपने हाथों से मसलने लगी, एक को चूसते हुए, वहीं तै का दूसरा हाथ नीचे ले जाकर माँ की छूट पर रख दिया, और माँ की छूट की गर्मी और गीलापन देख तै जान गयी की माँ कितनी उत्तेजित हैं, तै का हाथ छूट पर पाकर माँ भी सिसकियाँ लेने लगी, और उनका सर अपनी चूचियों पर दबाने लगी, तै भी बदल बदल कर माँ की चूचियों को चूसने लगी,

तै ने माँ का गीलापन देख कर अपनी दो उंगलियां एक साथ माँ की छूट में घुसा दी, जिससे माँ तो तड़प उठी वहीं ताई दोनों उंगलियां माँ की छूट में धीरे धीरे चलने लगी, माँ के मुँह से लगातार सिसकियाँ निकलने लगी, माँ पर अब तिहरा हुम्ला हो रहा था, गांड में मेरी जीभ छूट में तै की उंगलियां और चूचियों पर ताई का मुँह,

माँ इस हमले से सिहर रही थी, और उनका बदन झटके खा रहा था,

माँ के अलावा हम तीनो का hi मुँह बंद था, और उनका मुँह भी कुछ पल बाद खुला का खुला रह गया और वो इस तिहरे हमले को सह नहीं पाई और थरथराते हुए झड़ने लगी, माँ तो झड़ते हुए गुर hi जाती पर मैंने और ताई ने उन्हें संभाला, और हमने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया जहाँ लेटकर वो तेज़ी से हांफने लगी,

तै ने एक पल मुझे मुस्कुरा कर देखा पर फिर बिना किसी देरी के वो भी बिस्तर पर चढ़ गयी और अपना मुँह माँ की छूट पर रख दिया, और छूट से निकलते रास को चाटने लगी, माँ जो की झड़के शांत हुई थी उन्होंने अपना सर उठाकर देखा और तै को अपनी छूट चाटते देखा वो मुस्कुरा कर फिर से अपना सर पीछे काट आहें भरने लगी.

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह आजजज तो जाएं लेकर hi मानोगी मेरी,

तै ने कुछ कहा नहीं बस अपनी जीभ का दबाव माँ की छूट पर बढ़ा दिया, मैं और जग्गू अपने अपने लुंड मुठियाते हुए अपनी माओं का कामुक खेल देख रहे थे,

इसी बीच तै ने मुझे इशारा करके बिस्तर पर बुलाया और जैसे hi मैं आगे आया तो उन्होंने मेरा लुंड थाम लिया, और मुझे ऊपर की और धकेलने लगी मैं उनके अनुसार बिस्तर पर ऊपर की और खिसक गया जल्दी hi मुझे तै की योजना समझ आई वो मेरा लुंड माँ के चेहरे के सामने करना छह रही थी तो मैंने वैसा hi किआ, और अपने लुंड को माँ के गाल पर टिका दिया, माँ ने जैसे hi आँखें खोलकर देखा मेरा लुंड अपने गाल पर उन्होंने तुरंत लुंड को पकड़ के मुँह में भर लिए और चूसने लगी,

ये देख कर तो तै और साथ hi जग्गू के चेहरे पर ख़ुशी दौड़ गयी उन्हें लगा की गरम होकर माँ ने मेरा लुंड चूस लिए है पर माँ के लिए ये रोज़ का काम था, पर ये बात भी थी की माँ सच में काफी उत्तेजित हो गयी थी, अब तै माँ की छूट चूस रही थी और ना मेरा लुंड, तै ने जग्गू को अपनी छूट की और आने का इशारा किआ, उनकी छूट भी काफी गरम हो चुकी थी और लुंड मांग रही थी, जग्गू ने अपनी मम्मी के झुके हुए चूतड़ों के पीछे जगह ली और अपना लुंड उनकी गरम छूट में घुसा दिया,

इधर माँ पूरी लगन से मेरा लुंड चूस रही थी, वहीं तै माँ की छूट को उसी जोश से चूस रही थी, और जग्गू उनके पीछे से अपनी मम्मी को छोड़ने लगा,

में- हॉँण्णन माहहहह ऐसी हीई चूसो ओह्ह्ह,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह मम्मी बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है, यार सच में हमारी मम्मियां बड़ी मस्त हैंण्ण्न,

माँ ने ये सुनकर मेरा लुंड अपने मुँह से निकल कर सर उठा कर देखा तो पाया जग्गू तै को छोड़ रहा है, शायद ये अब तक माँ नहीं देख पाई थी, ये देखकर तो माँ और जोश से भर गयी और बोली- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह तुम बेटों के लुंड भी तो इतने मस्त हैं जिनसे तुम्हारिई मम्मियां मस्त हो जाती हैं,

माँ ने ये कहके मेरा लुंड दोबारा मुँह में भर लिया,

तै- अह्ह्ह्हह्हह बिलकुल सहीई कहा बन्नूवाह्ह्ह जग्गू ऐसी hi करारे धक्को से छोड़ अपनी मम्मी को,

तै ने अपना मुँह माँ की छूट से हटते हुए कहा, और माँ की छूट को उँगलियों से सहलाने लगी,

में- हॉँण्णन माहहहह ऐसी हीईईई, अह्ह्ह्हह कितना गरम मुँह है तुम्हारा,

तै- अह्ह्ह्हह्हह लल्लाहहहह अपनी मा की छूट देखेगा तो मुँह की गर्मी भूल जाएगा,

में- क्या सच में ताई आह्ह्ह्हह्ह,

तै- हाँ, अरे बन्नूवाह्ह्ह क्या कहती है अपने लल्ला को भी दिखा दे उसकी माँ की छूट की गर्मी,

माँ ने ये सुनकर मेरा लुंड मुँह से निकला और तै की और देखा तो तै ने मुस्कुरा कर आगे बढ़ने को कहा, माँ ने भी मुस्कुरा कर जल्दी से पीठ पर लेट कर बिस्तर के किनारे जगह ली और लग भाग तै के बगल में hi नीचे लेट गयी, मैंने भी बिस्तर के किनारे आते हुए माँ के पैरों के बीच में जगह ली और अपना लुंड उनकी छूट पर रखा तो एक पल को तै और जग्गू दोनों hi रुक कर देखने लगे, मैब माँ को रोज़ छोड़ता था पर उनके लियु तो कालक के बाद आज मैं अपनी माँ की छूट दोबारा मरने वाला था इसी सोच से दोनों बड़े ध्यान से देखने लगे,

मैंने भी दोनों की आँखों में देखा तो मुझे उत्सुकता दिखी...

तै- ओह्ह्ह्ह लल्ला अब रुका क्यों है, घुसा दे न अपनी माँ की गरम छूट में अपना लोढ़ा,

मैंने भी देर नहीं की और धक्का देकर अपना लुंड माँ की छूट में फंसा दिया,

हम चारो की आह्ह्ह्हह्ह एक साथ निकल गयी, मैं धीरे धीरे धक्के लगाकर माँ को छोड़ने लगा,



माँ का सर तै के चूचियों के नीचे था तो माँ ने तै की चुकी को मुँह में भर लिए वहीं तै भी माँ को मोती छुच्छी को दबाते हुए उन्हें अपने बेटे से चुड़ते हुए देखने लगी,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह कैसा लग रहा है, तुझे पूरा मादरचोद बनकर,

में- अह्हह्ह्ह्ह बहुत मज़ेदार यार माहहहह की छूट से बढियाहहह कुछ नाहीइ,

तै- अह्ह्ह्हह्हह सहीई कहा लल्लाहहहह और बन्नो कैसाह है बेटे काअह्ह्ह लोदाः,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह लगता है, बेटे का लुंड बनाए hi माँ की चुदाई के लिए होता हैआह्ह्ह्ह,

तै- बिलकुल सहीई कहा बन्नूवाह्ह्ह अब खुद को मत्तत्त रोकना आह्हः रोज़ छुड़ाना अह्ह्ह बेटे के लुंडडडड से,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन जीजीई अब तूऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह एकककक दिन भी नाहीई जॉनर दूंग़ीईईईई,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह चच्ची मुझे बहुत्तट्ठ अच्छा लग राहाहहह है कीईई तुम भीई हमारे सठह हो गयीईइ,

में- तुझे तो ाचाहहहह लगेगाआ हीई तुझे तेरा जन्मदिन का तोहफा जो मिल गयाहहहह अह्ह्ह्हह माहहह,

मैंने माँ की छूट में धक्के लगते हुए कहा,

माँ- कौनसे तोहफे की बाटत हो रहियी हैआह्ह्ह्ह, तेरा जन्मदिन ताऊ निकल गयाहहहह जग्गू,

माँ ने सब जानते हुए कहा,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह चच्ची मेरिइइइइ इच्छा थी की हम दोनों दोस्त अपनी अपनी मम्मियों को एक साथ छोड़ें,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह तुह्ह्हह्ह ये सबब्ब आज उसी की वजह से हूँ रहा है?

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन चायःहची, जब बचपन से हमने सबब्ब कुछ साथ किआ है तो चाहता था अपनी अपनी मम्मी की छूट का स्वाद भी साथ में लें,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बढियाहहह हीी लल्लाहहहह टेरिइइइ इच्छआह्हः से सबकोऊ माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मिल रहा है,

तै- अह्ह्ह्हह्हह वोहियी तुह्ह्हह्ह बन्नो हम तो याहीईई चाहती थे की जोऊ कालक में हुआअह्ह्ह वो बस एक बार की चीज़ न बन कर रह जाईए,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह जीजी अब नाहीईईई रहेगी, अह्हह्ह्ह्ह इसकी वजह से hi तो तुमहारी मोती छुछियां चूसने को मिल रही हैं,

माँ ने तै की चुकी को मुँह में भरते हुए कहा,

वहीं जग्गू पीछे से लगातार तै की छूट में धक्के लगा रहा था, मैं माँ को बिस्तर पर लेटकर छोड़ रहा था, जिससव माँ की छुछियां हर झटके पर नाच रही थी





तै- मुझी भी ताऊ तुम्हारा नंगा बदन चखनी का मौका मिला बन्नो, हाय कबसे देखती थी मोती गांड लिए मोती छुछियां लिए फिरती थी, अह्हह्ह्ह्ह अहह,

तै माँ की छुछियां थमते हुए बोली,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह तुम्हारी ताऊ मुझसे भी बड़ीई हैं जीजी, इनमे इंसान क्याहहह गढ़ी का लुंड भी समा जाए, हमनी देखा है कैसे गाओं के मर्द तुम्हे देख कर लुंड रगड़ते हैं,

तै- अह्ह्ह्हह्हह बन्नूवाह्ह्ह गाओं का कोई मर्द ैसाआह्ह नाहीईईई होगा आह्हः जिसने तेरी मोती गांड की सोच कर अपना पानी नहीं गिरैयाजह होगाआहहह,

उन दोनों की बातें सुन सुन कर मैं और जग्गू उत्तेजित हो रहे थे, और तेज़ तेज़ धक्के दोनों की छूट में लगा रहे थे,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह चच्ची मम्मी ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तुम दोनुहठ को hi सोच कर पुराहहह गाओं मुठियाता है अह्ह्ह्ह,

में- और क्याहहह जब तुम्हारे खुद्द के बच्चे नहीं रोककक पाती, तो गाओं वाले क्याहहह hi rukengeeeab....Tai- अह्ह्ह्हह्हह जैंतीई हुण्णं बचुआ अह्हह्ह्ह्ह आरईईएई ये तो हम बहानुवोः की छेड़ छड़ चलती रहती है,

तै ने झुक कर माँ के होंठों को चूमते हुए कहा,

माँ- अरे जीजी अह्ह्ह ये बच्चे हैं इन्हे का समझ, अभी आह्ह्ह्ह हमारी बातों की,

में- ाचाहहहह माहहहह अब बच्चे कितने बड़े हो गए हैं ये तो अभी दिखाते हैं,

मैंने जग्गू को इशारा किआ और हम दोनों ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगे अपनी अपनी माओं की छूट में, अगले कुछ मिनट्स तक दोनों के मुँह से सिर्फ आएहों के अलावा और कुछ नहीं निकला और कुछ hi देर में दोनों hi झड़ने लगी, झड़ते हुए ताई तो बिलकुल माँ के ऊपर गिर गयी, वहीं माँ भी बुरी तरह हांफ रही थी,

में- क्यों माँ और तै अब भी बच्चे लगते हैं हम दोनों तुम्हे?

मैंने माँ की छूट से लुंड निकल कर खड़े होते हुए कहा,

तै- अह्ह्ह्हह्हह बच्चा रहोगे तुम हमारे बच्ची hi, जिन छूटों को छोड़ कर इतना उछाल रहे हो, उन्ही से निकले हो तुम,

माँ- हांण जीजीई जिस माँ ने तुम्हे छूट से निकल दिया उसके लिए तुम्हारा लुंड क्या चीज़ है,

तै- और का, अपनी बीवियों को दिखाना अपने लुंड का घमंड,

में- अरे मज़ाक कर रहे थे तुम दोनों तो बुरा मान गयी ताई और माँ,

माँ- हेहही अरे हम भी मज़ाक कर रहे हैं,

तै- तभी तो कहा था न तुम बच्चे हो हमारी बातें नहीं समझ पाओगे, हेहही क्यों बन्नो,

में- देख रहा है जग्गू, दोनों मिलकर हमारा मज़ाक उदा रही हैं,

जग्गू- हाँ यार क्या कर सकते हैं,

में- कर क्या सकते हैं दोनों की मोती गांड छोड़ते हैं दुमदार तरीके से, तब चिल्लायेंगी,

तै- तुम क्या ये गांड तुम्हारे बापों को भी झेल चुकी,

जागहु- तो अब बच्चों को भी झेलो,

जग्गू ने तै को सीधा किआ और उनके पैरों के बीच आकर अपना लुंड उनकी गांड में घुसा दिया,

माँ अपने आप hi तै के ऊपर 69 के आसान में चढ़ गयी और अपने चूतड़ों को ताई के सर के ऊपर टिका दिया, और अपनी मोती गांड को हिलाते हुए मुझे बुलाने लगी, मैंने भी अपने लुंड पर थूकते हुए माँ के पीछे जगह ली और अपने लुंड को माँ की गांड के छेड़ पर रख कर अंदर धकेल दिया, जिसके घुसते hi माँ की एक दबी हुई सिसकी निकली, दबी हुई इसलिए क्यूंकि उन्होंने अपना मुँह तै की छूट में घुसा दिया था और चाटने लगी थी, वहीं मेरे नीचे से भी तै भी माँ की छूट चाटने लगी थी, दोनों एक दुसरे की छूट चाटते हुए अपने अपने बेटों के लुंड से गांड मरवा रही thi,Maine और जग्गू ने एक दुसरे की और देखा और खुश होकर अपनी अपनी माँ की गांड मरने लगे,

मेरा लुंड माँ की गांड में अंदर बहार हो रहा था और उसके बिलकुल नीचे hi तै की जीभ माँ की छूट पर चल रही थी, मेरी गोलियों ताई के माथे से बार बार टकराती थी जिन्हे तै बीच बीच में जीभ निकल कर चाट भी रही थी, वहीं जग्गू भी माँ की जीभ को तै की छूट में चलता देख तै की गांड मार रहा था, माँ की जीभ भी बीच बीच में तो उसके लुंड से सिर्फ कुछ hi दूर रह जाती थी, माँ को भी तै की गांड में से अंदर बहार होते लुंड का बेहद ाचा दृश्य मिल रहा था,

तै तो खुल कर माँ की छूट से जीभ हटाकर मेरी गोलियां चूस लेती और फिर बापिस माँ की छूट चाटने लगती, बीच में मैंने खुद से माँ की गांड से लुंड निकल कर तै के मुँह में घुसा दिया, उन्होंने अचे से चूस चाट कर दोबारा माँ की गांड पर रख दिया, दूसरी और जग्गू भी तेज़ी से तै की गांड मर रहा था उसके लिए उत्तेजना तो वैसे hi थी क्यूंकि अपने दोस्त के साथ मिलकर अपनी अपनी माँ को छोड़ने की उसकी इच्छा जो पूरी हो रही थी, उसी जोश में तगड़े धक्के लगते हुए उसका लुंड तै की गांड से निकल गया और कमर आगे करते hi तै की छूट में घुस गया, पर जग्गू ने बहार नहीं निकला और छूट में hi धक्के लगाने लगा, माँ की जीभ भी तै की छूट पर चल रही थी तो अब उनकी जीभ तै की छूट के साथ साथ जग्गू के लुंड पर भी घिस रही थी जिस एहसास से जग्गू और उत्तेजित हो गया, और उसके धक्के भी तेज़ हो गए, मैं भी तेज़ी से माँ की गांड में धक्के लगा रहा tha...Me- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्याहहह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए राहाहहह है माँ तुम्हारी गांड में...

जग्गू- हाँ यार सहिई कह रहा है, अह्हह्ह्ह्ह,

हम दोनों बेटे बात कर रहे थे जबकि हमारी माओं के मुँह एक दुसरे की छूट में घुसे हुए थे, इसी बीच जग्गू कुछ ज़्यादा hi उत्तेजित हो रहा था और उसका लुंड एक बार फिर से तै की छूट से निकल कर सीधा माँ की जीभ से टकराया और उसे धकेलता हुआ सीधा माँ के मुँह में घुस गया, ये इतनी जल्दी हुआ की माँ और जग्गू दोनों को hi पता नहीं चला, जग्गू ने नीचे देखा और अपना लुंड माँ के मुँह में घुसा पाया तो वो अपने दोस्त की माँ के मुँह में लुंड पाकर सिहर उठा, माँ ने भी जग्गू का लुंड अपने मुँह में पाकर उसे हाथ से पकड़ कर बहार निकला, और फिर जग्गू को उत्तेजित करते हुए उसके टोपे को दोबारा मुँह में भर कर चूस लिया और फिर जीभ पूरे लुंड पर ऊपर से नीचे तक फिरै और दोबारा से लुंड को तै की गांड पर रख दिया और जग्गू जो इतना उत्तेजित हो चूका था माँ से लुंड चुसवाने पर की अपनी माँ की गांड में कुछ धक्के लगाने के बाद झाड़ गया,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह चच्ची मम्मी ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन आह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए गया,

झड़ने के बाद जग्गू ने अपना लुंड तै की गांड से निकला और कुछ सोच के माँ के होंठों के करीब किआ तो माँ ने भी तुरंत उसे अपने मुँह में भर के चाट के साफ़ किआ और फिर निकल कर बापिस अपना मुँह तै की छूट में लगा दिया, पीछे से मैं लगातार माँ की गांड मारे जा रहा था, माँ की म्हणत कुछ पल बाद रंग लाइ और तै ने भी माँ के मुँह में अपनी छूट का रास बागा दिया जिसे माँ ने जातक लिए, अब एक माँ बेटे की जोड़ी तो थक चुकी थी एक बाकी थी,

मैंने तुरंत hi माँ को वैसे hi गांड में लुंड डाले हुए उठाया और खुद नीचे बैठ कर उन्हें अपने ऊपर ले लिए, और नीचे से माँ की गांड मरने लगा, माँ भी उत्तेजित होकर उछाल उछाल कर गांड मरवाने लगी, जग्गू और तै हम दोनों को देख रहे थे सामने बैठ कर,

मैंने अपना हाथ आगे लेजाकर दो उंगलियां और माँ की छूट में घुसा दी और माँ की छूट और गांड एक साथ छोड़ने लगा,





माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी हीई छोड़ड़ड़ड़ड़ अपनीई माँ को, अह्हह्ह्ह्ह,

में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन माआआअह्ह्ह,

जग्गू और तै हमें ध्यान से देख रहे थे, मैं और माँ दोनों hi अपने अपने चरम के करीब थे, और जल्दी hi माँ मेरी उँगलियों पर अपना पानी बहाने लगी, वहीं माँ के झड़ते hi मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और माँ की गांड में झड़ने लगा,

झड़ने के बाद हम दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे और वैसे hi एक दुसरे के बगल में गिर गए, तै उठ कर आई और उन्होंने मेरा लुंड माँ की गांड से निकल कर अपने मुँह में लेकर चाट कर साफ़ किआ और फिर अपना मुँह माँ की गांड से लगाकर उसे भी चाटने लगी और जब अपने काम से संतुष्ट हो गयी तो वो भी बैठ गयी,

में- अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आया,

जग्गू- अरे यार पूछ मत बहुत आया,

माँ- चलो तेरा जन्मदिन का तोहफा था तुझे तो मज़ा आना hi चाहिए था,

तै- और का वैसे भी अब ऐसा मज़ा मिलता रहेगा,

माँ- बिलकुल, वैसे जीजी हमारे लिए भी तो वही बात हुई न,

तै- कैसी बात,

माँ- इन दोनों की दोस्ती से पहले से हमारी दोस्ती है न, और हमने अपने अपने बेटों से एक दुसरे के सामने छुड़वाया तो देखा जाये हमारे लिए भी खास दिन है,

तै- हाहाहा ये तो बिलकुल सही कहा बन्नो, हमारी दोस्ती इनके पैदा होने से पहले की है,

ऐसे hi बातें चल रही थी की इतने में दरवाज़े पर खटखटाहट हुई तो जग्गू तुरंत कपडे पहन कर दरवाज़ा खोलने गया तब तक माँ और तै और मैंने भी कपडे पहनने लगे, जब तक हम कमरे से बहार आये तो देखा की ताऊजी थे खेत से आ चुके थे, उन्हें देख कर माँ ने तुरंत सर पर पल्लू किआ और जाकर उनके पेअर छुए, ताऊ जी माँ को आशीर्वाद देकर नहाने चले गए, तो माँ और तै रसोई में घुस गयी चाय बनाने, हम दोनों बातें करने लगे, कुछ hi देर में चाय पीकर मैं और माँ अपने घर आ गए,



1 हफ्ता पहले कायमगंज



रेनू- अरे मैं तो अब भी कह रही हूँ इसे ले जाना ज़रूरी है क्या?

प्रीती- मम्मी, अब बीच में मत बोलो यार पहले hi बात हो चुकी है न,

पंकज- अरे कोई बात नहीं मम्मी जाने दो न अगर उसका मन है तो, दो दिन की तो बात है,

पंकज अपने कमरे में जाते हुए बोलै,

प्रीती- और क्या इतने दिन से गयी भी नहीं हूँ, क्या हो जायेगा अगर घूम आउंगी तो,

पूर्वी- अरे ठीक है तू जा कोई नहीं रोक रहा तुझे, मम्मी जाने दो न,

प्रीती- हाँ भाभी समझाओ न मम्मी को,

रेनू- ठीक है मैं कौनसा रोक रही हूँ, मैं तो बस ये कह रही थी की बिना बात के परेशां होगी,

रेनू- और कल जब तेरे पापा आएंगे उन्हें क्या बोलूंगी,

प्रीती- अरे वो तुम्हारी ज़िम्मेदारी है मम्मी और मम्मी मैं बिलकुल परेशां नहीं होउंगी न hi भैया को hi करुँगी,

पूर्वी- चलो ठीक है अब जाकर सो जा सुबह जल्दी निकलना है,

प्रीती- ठीक है भाभी जाती हूँ तुम कितनी प्यारी हो, गुड नाईट.

प्रीती ख़ुशी से उछलती हुई अपने कमरे में चली गयी,

रेनू- ये लड़की भी न, बच्ची hi रहेगी,

पूर्वी- नहीं मम्मी, बच्ची तो बिलकुल नहीं रही अपनी प्रीती सीने पर बोझ देखा है,

रेनू- हट कमीनी कैसी बातें करती है मेरी बेटी के बारे में,

रेनू अपनी बहु पर झूठा गुस्सा दिखते हुए बोली,

पूर्वी- अरे ऐसा क्या गलत बोल दिया, वैसे ये तो होना hi था,

रेनू- क्या होना था?

पूर्वी- उसके सीने पर इतना बोझ तो होना hi था,

रेनू- क्यों होना था बता ज़रा,

पूर्वी- बेटी माँ पर जाती है, अब तुम्हारे सीने का बोझ hi देखलो उससे दोगुना होगा,

पूर्वी अपनी सास के ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों पर हाथ लगाकर उसे छेड़ते हुए बोली,

रेनू- हट कुटिया, तेरी छिनार माँ से तो काम hi है, उसकी छातियां देखि हैं बिलकुल दुधारू भैंस जैसी,

पूर्वी- देखि भी हैं मम्मी और खूब पि भी हैं, मैं तो कहती हूँ तुम भी मेरे पापा को मौका दो तुम्हे भी दुधारू भैंस बना देंगे,

पूर्वी बर्तन धोते हुए बोली,

रेनू- पहले अपनी माँ को लेकर आ न अपने समधी और दामाद की सेवा करे,

रेनू दूध गरम कर रही थी रात को पीने के लिए,

पूर्वी- वो तो खूब करती हैं मम्मी जब भी ये जाते हैं, इस बार तुम भी चलना तुम्हारी भी कर देंगी,

रेनू- हॉट कुटिया जा पहले अपने पति की सेवा कर,

पूर्वी- वो तो रोज़ करती हूँ, अभी भी करवा लुंगी क्या परेशानी है,

रेनू- hi दिया तभी तो बीटा सूखता जा रहा है, सारा रास तो तू निचोड़ लेती है,

पूर्वी- अरे मम्मी तुंहरे बीटा इतना ठरकी है न, छोड़ता hi नहीं बस मौका मिला नहीं की चढ़ जाते हैं.

रेनू- तेरे hi अंदर इतनी खुजली है जो बिना चढ़वाये मंती नहीं होगी,

पूर्वी- नहीं मम्मी, वो तो इतने ठरकी हैं की मैं क्या तुम भी मिल जाओ न तो तुम्हे भी बिना सोचे समझे बजा देंगे,

अपने बेटे से छोड़ने की बात सुनकर रेनू की छूट में कुछ तरंगे उठी पर उसनर सम्हालते हुए बोलै- तेरा भाई बजता होगा अपनी माँ को,

पूर्वी- हाँ बजता है, माँ hi क्या बहन को भी बजता है, वैसे मम्मी कल प्रीती और ये जा रहे हैं, दो दिन काम नहीं होते भेनचोद बनने के लिए,

रेनू- हॉट कमीनी कहीं की जा ले दूध ले जा और बन जा कुटिया,

पूर्वी- हाँ बिलकुल पूरी नंगी होकर बनूँगी,

पूर्वी दूध पकड़ते हुए बोली,

रेनू- अब जा जल्दी,

पूर्वी- सुनो मम्मी,

रेनू- हाँ बोल,

पूर्वी- आंगन वाली खुदकी खुली रखूंगी मन करे तो देख लेना आके अपने बेटे का ठरकपन आधे घंटे में,

पूर्वी ये कहकर जल्दी से भाग गयी, और रेनू सर हिलाकर हंसती रह गयी और मन hi मन बोली- कुटिया,

रेनू भी अपने कमरे में आ कर बिस्तर पे लेट गयी और सोचने लगी,

दोनों सास बहु का रिश्ता बिलकुल अलग सा था, शुरू में तो दोनों hi साधारण सास बहु की तरह रहते थे लार पिछले लगभग 6-8 महीने में उनका रिश्ता पूरी तरह बदल गया था, और उसकी वजह भी थी पूर्वी उसकी बहु, धीरे धीरे वो मज़ाक करते हुए अपनी सास के करीब आने लगी, रेनू को भी उसके साथ ऐसे गंदे मज़ाक करना बहुत भाता था, उसे लगता था बहु के रूप में उसे कोई सहेली मिल गयी है, दोनों एक दुसरे को ऐसे खूब छेड़ते थे खासकर कामुक मामलो में और रेनू को बहु के साथ ये सब बातें करने में बहुत मज़ा आता था, उसे अपनी बहु की ये बात अछि लगती थी की वो किसी बात का बुरा नहीं मानती थी, रेनू कहती तेरी माँ दो से चुदती है तो पूर्वी कहती मुँह क्यों खली रखना, तीन तीन से चुदती है, और ऐसी बातों में रेनू को बहुत मज़ा आता था, पूर्वी की वजह से hi उसका कामुक जीवन भी बदल गया था, अक्सर पोता पोती होने के बाद तो सम्भोग का विषय न के बराबर रह जाता है, पर पूर्वी ने उसे इतना आतुर और कामुक बना दिया था की अब वो खुद कभी कभी पंकज के पापा का लुंड निकलकर उसे मुँह में भर लेती थी, और पंकज के पापा भी इस बदलाव से बहुत खुश थे,

खैर आज की रात तो वो रिश्तेदारी में गए थे तो उसे अकेले hi सोना था, तभी रेनू को पूर्वी की बात याद आई जो उसने बोलै था की खिड़की खुली रहेगी, मन करे तो देख लेना,

उसके मन में बार बार जाने की लालसा जागने लगी, उसका मन समझाता की ये गलत है पर दूसरा मन कहता देखने में क्या बुराई है, बीटा और बहु हैं तो क्या हुआ कर तो चुदाई hi रहे हैं, काफी देर की मन में उथल पुथल के बाद रेनू खुद को रोक नहीं पाई और अपने कमरे से दबे पाऊँ निकल पड़ी, बदन पर ब्लाउज और पेटीकोट था, जैसे पूर्वी ने कहा था उसी खिड़की के पास पहुंची तो आवाज़ें सुनकर hi उनकी छूट में नमी आने लगी, एक बार फिर उनके मन ने उन्हें रोका की ये गलत है पर जिसे कामुकता चढ़ जाये उसके लिए सही गलत कुछ नहीं होता, रेनू ने आखिर खिड़की से अंदर झाँका तो उसकी आँखें सामने का नज़ारा देख बिलकुल उसी पर टिक गयी,

उसने देखा की उनका बीटा बिस्तर पर लेता हुआ है, बहु उसके ऊपर है और बेटे का लुंड बड़ी तेज़ी से बहु की गांड में अंदर बहार हो रहा है,





बहु के गोल मटोल चूतड़ों के बीच आता जाता हुआ बेटे का लुंड देख कर रेनू की तो सांसें चढ़ने लगी, दोनों का hi चेहरा रेनू की और नहीं था इसलिए बिना किसी दर से वो ये सब देखने लगी,

हर झटके के साथ रेनू को अपनी छूट और गीली होती महसूस हो रही थी उसे लग रहा था जैसे की उसके बदन में लाख चींटियां रेंग रही हैं, बेटे का लम्बा लुंड देख अचानक मन में आया की काश ये अभी मेरे अंदर होता, पर फिर खुद को hi अचानक कोसने लगी की ऐसा कैसे सोच सकती है, पर जितना बेटे और बहु की चुदाई देखती उतना hi सही गलत का बोध ख़तम हो जा रहा था, अपने बदन पर कपडे अब रेनू को बोझ की तरह लग रहे थे वो भी बेटे और बहु की तरह नंगी होना चाहती थी, बेटे के लुंड के साथ साथ रेनू की नज़र बहु के बदन पर भी उतनी hi थी, एक महिला होकर भी उसे पूर्वी का बदन बेहद आकर्षक लग रहा था, उसकी बहु बिलकुल कामुकता की मूरत नज़र आती थी, तभी रेनू को पूर्वी की एक बात ध्यान आई जो उसने उसकी चूचियों के बारे में बोली थी, रेनू में तुरंत अपना ब्लाउज खोल लिए और अपनी ब्रा को नीचे कर अपनी दोनों बड़ी बड़ी चूचियों को बहार निकल लिया





और चूचियों को बेरहमी से दबाने लगी, अंदर बेटे और बहु की चुदाई लगातार जारी थी, रेनू ने ब्लाउज खोलकर अंदर दोबारा झाँका तो दृश्य थोड़ा बदल चूका था बदलाव सिर्फ इतना था की पूर्वी जो अब तक पीठ उसकी और करके छूट मरवा रही थी उसका चेहरा अब खिड़की की और था और वो अपने पति के लुंड पर कूद रही थी,

बदला हुआ आसान देख कर तो रेनू को और उत्तेजना हुई क्यूंकि इस आसान में वो अपने बेटे का लुंड बहु की छूट में आता जाता हुआ और अच्छे से देख पा रही थी वहीं बहु का कामुक बदन उसकी चूचियां छूट चिकना सपाट पेट देख कर भी रेनू को बेहद उत्तेजना होने लगी, तभी उसके कानो में. कुछ ऐसा पड़ा जीसर सुनकर तो उसकी छूट से समझो पानी निकल गया,

जारी रहेगी
 
बदला हुआ आसान देख कर तो रेनू को और उत्तेजना हुई क्यूंकि इस आसान में वो अपने बेटे का लुंड बहु की छूट में आता जाता हुआ और अच्छे से देख पा रही थी वहीं बहु का कामुक बदन उसकी चूचियां छूट चिकना सपाट पेट देख कर भी रेनू को बेहद उत्तेजना होने लगी, तभी उसके कानो में. कुछ ऐसा पड़ा जिसे सुनकर तो उसकी छूट से समझो पानी निकल गया, अब आगे,



अपडेट 226

लुंड की मार अपनी छूट में लेते हुए अपने छूट के दाने को रगड़ती हुई रेनू की बहु पूर्वी अंदर hi अंदर जो बड़बड़ा रही थी उसे सुन कर तो रेनू की छूट जो अब तक बाह रही थी उसने मानो पिचकारी hi छोड़ दी, पेटीकोट में.. पूर्वी उछालते हुए बोल रही थी- अह्ह्ह्हह्हह बेटाःह्ह्ह छोड़ अपनी मम्मी की छूट को अह्हह्ह्ह्ह अपने मोठे लुंड से, सालों पहले इसी से निकला था न अह्ह्ह्हह घुसजै उसी छूट में दोबारा,

रेनू तो ये सुनकर बिलकुल चकराने hi लगी, ये क्या हो रहा है, क्यों उसकी बहु अपने hi पति को बीटा कह रही है और खुदको उसकी माँ, क्या? क्या? ये मुझे अपने hi बेटे से छुड़वाने का नाटक कर रही है?

रेनू के दिमाग में लगातार ये सवाल चल रहे थे और छूट में उंगलियां, इसी बीच दूसरी आवाज़ उसके कानो में उसके बेटे पंकज की पड़ी- हाँ मेरी मम्मी अह्हह्ह्ह्ह क्या गरम छूट है तुम्हारी अह्हह्ह्ह्ह बचपन से hi तुम्हारी छूट के लिए लुंड हिलता आया हूँ, आज जी भर के छोडूंगा,

रेनू ने जब ये सुना तो उसकी टाँगे काँप गयी, उसे लगने लगा की वो अब अपने पैरों पर कड़ी नहीं रह पायेगी, उसका खुद का बीटा उसे छोड़ने की इच्छा रखता है, वो भी बचपन से, ये सोच कर hi उसकी छूट का नारियल पानी बहकर उसकी जाँघों को भीगने लगा,

वहीं अंदर पूर्वी और पंकज दोनों hi योजना के अनुसार सब कर रहे थे, पंकज जबसे अपनी बीवी और उसके परिवार के साथ पारिवारिक चुदाई में शामिल हुआ था उसके मन में इच्छा जग गयी थी अपने परिवार में भी ऐसा hi माहौल बनाने की, इसीलिए दोनों पति पत्नी ने योजना बनाई और धीरे धीरे से पूर्वी अपनी सास से घुलती चली गयी, आज ससुर के न होने से उन्हें एक सुनहरा मौका भी मिल गया था रेनू की आग को भड़काने का, हुआ भी वैसा hi, रोज़ अगर रेनू पूर्वी की बातों से गरम भी होती थी तो पति से जाकर छुड़वा लेती थी, आज तो पति भी नहीं था, साथ hi ये पता चलना की बीटा उसे छोड़ना चाहता है ये सोच कर hi रेनू की हालत ख़राब हो रही थी, पूर्वी और पंकज दोनों जानते थे की रेनू इस समय खिड़की पर है और उसकी उत्तेजना को भड़काने का हर प्रयास कर रहे थे,

रेनू किसी तरह से खिड़की को सहारा बना कर पकडे हुए अंदर झांक रही थी,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बेटाःह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ब अब पूरी कर लिए अह्हह्ह्ह्ह अपनी साड़ी हसरतें अपनी मम्मी की छूट के साथ,

पंकज- हनन मम्मी अह्हह्ह्ह्ह अब नाहीईईई छोड़ुंगाःह तुम्हारीई चुत और गाणंदड़ को अह्हह्ह्ह्ह क्या मस्त पापीती जैसे चुतड़ड़ हैंन तुम्हारे,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह क्याह करुणं तेरे बाआप ने मार मार के बड़ी कर दी है मेरीए गांड,

पंकज- अब्ब्ब्ब मैं भी पापा के साथ मिलकर माज़ी लूंगा तुमहाती गांड के, अह्हह्ह्ह्ह लोगी न दोन्यू लुंडडडड एक साआठठ,

रेनू तो पति और बेटे से एक साथ छुड़ाने की बात सुनकर बिलकुल पागल सी हो गयी, उसके बदन से सारा नियंत्रण ख़तम हो गया, उसकी छूट से रास और मूट बहकर गिरने लगा, उसका बदन संतुलन खो बैठा और वो वही खिड़की के पास नीचे गिरती चली गयी, पर उसे अभी गिरने का भी कोई बोध नहीं हुआ क्यूंकि स्खलन के उन्माद में वो इतनी खो चुकी थी की अभी किसी और चीज़ का कोई होश hi नहीं था,

पंकज और पूर्वी दोनों का hi ध्यान अपनी चुदाई के साथ साथ खिड़की पर भी था और कनखियों से जब पूर्वी ने अपनी सासु माँ को नीचे सरकते देखा तो उसने तुरंत अपने पति की जांघ पर हाथ मार कर उसे चेताया और खुद भी उसके लुंड से तुरंत उठ कड़ी हुई, पंकज भी पत्नी के पीछे पीछे खड़ा हुआ, दोनों दबे पाऊँ दरवाज़े पर आये और फिर हलके से दरवाज़ा खोल कर बहार निकले तो देखा उनकी सम्माननीय माँ रेनू ज़मीन पर पड़ी हुई है आँखें बंद हैं ब्लाउज के पैट खुले हुए चूचियां बहार हैं, पेटीकोट कमर पर इकठा है जिसे कमर से नीचे बिलकुल नंगी हैं और छूट से पानी निकल रहा है नीचे की ज़मीन पर उनकी छूट का पानी के साथ मिश्रित मूट पड़ा हुआ बता रहा है की उनके स्खलन का वेग क्या था, कमर तो अब भी झटके खा रही है, पूर्वी और पंकज दोनों ने hi अपने जीवन में किसी को ऐसे झड़ते हुए नहीं देखा था, दोनों hi एक पल को घबरा गए की कहीं रेनू को कुछ हो तो नहीं गया, पर कमर के झटको ने बता दिया की क्या मामला है,

पूर्वी ने तुरंत आगे का सोचा और अपने पति को लुंड से पकड़ते हुए आगे ले गयी, पंकज भी पूर्वी को इशारे में पूछने लगा की वो क्या करना चाहती है, दोनों दबे पाऊँ रेनू के करीब पहुँच गए पर रेनू को अभी कोई खबर नहीं थी, पूर्वी ने पंकज को इशारा किआ तो पंकज हैरान रह गया, क्यूंकि उनकी योजना तो यही थी की दोनों मिलकर धीरे धीरे रेनू को गरम करके अपने वासना के खेल में शामिल कर लेंगे, पर अभी पूर्वी के दिमाग एक नयी बात आ गयी थी, वही पंकज की नज़र भी अपनी अधनंगी लेती हुई माँ और उसकी गीली तड़पती हुई छूट पर से हैट नहीं रही थी, इसीलिए कहीं न कहीं उसे भी अपनी पत्नी का सुझाव सही लग रहा था जो उसने इशारे में hi कह दिया था, फिर भी इतना बड़ा कदम उठाने के लिए वो हिम्मत नहीं जूता प् रहा था, तो पूर्वी ने उसको आगे धकेला, पंकज आगे अपनी माँ की टैंगो के बीच जाकर बैठ गया, उसकी माँ इन सब से अनभिज्ञ आँखें बंद किये तेज़ी से हांफ रही थी, पूर्वी ने ब्बि पंकज के पीछे जगह ली और पीछे से हाथ आगे लेजाकर उसका लुंड पकड़ कर बहुत धीरे से उसके कान में फुसफुसाई- इससे ाचा मौका कभी नहीं मिलेगा,

पंकज भी जनता था, उसने अपने नीचे देखा अपनी टंगे फैलाये गीली तड़पती छूट के साथ उसकी माँ लेती है, बहती हुई छूट जैसे उसे बुला रही है, अब इससे ज़्यादा निमंत्रण और कब मिल सकता है, पंकज ने पूर्वी की और देख सर हिलाया और उन पलों को याद किया जबसे वो अपनी माँ को छोड़ना चाहता था, एक पल में hi उसने ठान लिया और अपनी माँ की टैंगो के बीच बड़ी सावधानी से जगह ली, और ये ध्यान रखा की वो अपनी माँ को डरा न दे, पूर्वी भी पंकज के पीछे से हटकर उसके बगल में आ गयी और अपने पति को देखने लगी, पंकज ने हाथ में अपने गरम कड़क लुंड को थामा और पूर्वी की आँखों में देखा तो उसने आगे बढ़ने का इशारा किया,

पंकज ने फिर अपनी मम्मी के बदन को देखा जो मानो उससे चुदाई की भीग मांग रहा था, पंकज ने अपने लुंड को अपनी मम्मी की गीली छूट के द्वार पर टिकाया तो रेनू को तब ये आभास तो हुआ की उसकी छूट पर कुछ गरम है पर उसके बदन में पिछले कुछ समय में इतने एहसास हुए थे उसकी छूट से इतना गरम पानी निकला था उसे यही लगा अब भी वही है, पंकज ने छूट के मुहाने लुंड का टोपा रखकर फिर एक धक्का कमर का हलके से लगाया तो उसकी मम्मी की गीली चिकनी गरम छूट ने होंठ फैलाकर बेटे के लुंड के लिए रास्ता बना दिया और पंकज के लुंड का टोपा उसकी माँ की छूट में घुस गया,

रेनू को भी अब ये एहसास हुआ अपनी छूट में गरम लोहे जैसे टोपे के घुसने का तो उसकी आँखें खुली उसने तुरंत गर्दन उठाकर सामने देखा तो चौंक गयी, टांगो के बीच बीटा है, उसका लुंड छूट में फंसा हुआ है और बहु उसके बगल में बैठी है, रेनू के दिमाग में जैसे hi ये सब आया उसके मन में लाख ख्याल आ गए, जिनमे से एक सही गलत का भी था, उसने तुरंत अपने बेटे को रोकना चाहा और बोली- बेटा naaahhiiiuiiahjhhhhhhhhhhhhhh,

बेचारी इतना hi बोल पाई थी की पंकज ने अपनी मम्मी की कमर को थाम लिया और लगातार दो तीन धक्के लगाकर पूरा लुंड जड़ तक अपनी माँ की छूट में ठूंस दिया,

लुंड पूरा समाते hi रेनू की आँखें और मुँह दोनों खुले के खुले रह गए, जो भी ख्याल उसके दिमाग में आये थे वो गायब हो गए, उसके बेटे के लुंड से तरंगे निकल कर उसकी छूट में एक अजीब सा एहसास करवाने लगी, उसकी छूट जो अभी झाड़कर शांत हुई थी उसमे फिर से एक अलग प्रकार की गर्मी आ गयी, उसका पूरा बदन दुबारा कामोत्तेजना से भर गया,

रेनू ने तुरंत खुद को कोहनी के बल उठाया और अपने बेटे के लुंड को अपनी छूट में जड़ तक समाया देख न जाने क्यों उसकर चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उसने मुस्कुरा कर अपने बेटे को देखा और फिर बगल में बैठी बहु को, पंकज के लिए ये इशारा काफी था, उसने अपनी माँ की कमर को थाम कर उसकी छूट में धक्के लगाने शुरू किये, और ऐसा नहीं लग रहा था वो अपनी माँ को छोड़ रहा था, उसके धक्क्के ऐसे थे जैसे वो सालों की कसार अपनी माँ की छूट पर निकल रहा हो,

रेनू भी अपने बेटे के झटको से हिलने लगी उसकी आँखें दोबारा बंद हो गयी, पूरा बदन हर झटके पर नाच रहा था, आँखें बंद कर उसके मन में ख़याल आया की शाम तक वो एक आदर्श सास, पत्नी और माँ थी और अभी अपने hi मूट में लेती हुई अपने बेटे से छुड़वा रही है, अपनी बहु के सामने और सबसे बड़ी बात उसे ऐसा मज़ा जीवन में कभी नहीं आया था,

उसकी आँखें तब खुली जब उसे अपने होंठों पर एक गरम सांस का एहसास हुआ, आँखें खोल कर देखा तो चेहरे के बिलकुल पास पंकज का चेहरा था, अगले hi पल पंकज ने अपने होंठो को उसके होंठों से मिला दिया, रेनू ने भी तुरंत होंठ खोल दिए और माँ बेटे पागलों की तरह एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे, रेनू की टंगे अपने आप hi बेटे की कमर पर कास गयी, पंकज भी माँ के रसीले होंठों को चूसते हुए दनादन उसकी छूट में धक्के लगाने लगा, रेनू को तो लग रहा था की वो लगातार झड़े hi जा रही है, उसकी छूट से लगातार पानी निकल रहा था,

पूर्वी बगल में बैठ कर अपनी छूट मसलते हुए अपने पति को अपनी सास की चुदाई करते हुए देख रही थी, वो जान गयी थी की अब से उसके ससुराल में भी मायके की तरह खुल के चुदाई का पहला पड़ाव पद चूका है, कुछ देर में जब दोनों के होंठ अलग हुए तो पंकज सीधा होकर तेज़ी से मम्मी की छूट छोड़ने लगा, उसके धक्के देख कर लग रहा तह वो ज़्यादा दूर नहीं है अपने चरम से,

पंकज के हटते hi पूर्वी ने अपने होंठो को अपनी सास के होंठों पर रखा तो रेनू थोड़ी हैरान हुई पर अगले hi पल अपनी बहु का साथ भी देने लगी, अपनी माँ और पत्नी को एक कामुक चुम्बन में देख कर पंकज और जोश से भर गया और कुछ धक्के मार कर अपनी माँ की छूट में झड़ने लगा, रेनू भी उसके साथ झाड़ रही थी वो तो भूल चुकी थी की अब तक कितनी बार वो झाड़ चुकी थी, उसने महसूस किआ की झड़ने के बाद भी बेटे का लुंड उसकी छूट में कड़क hi है, पंकज का तो मन hi नहीं कर रहा था अपनी मम्मी की छूट से लुंड निकलने का, पूर्वी ने अपनी सास के होंठों से होंठ अलग किये और सीढ़ी हुई, और पंकज का लुंड पकड़ कर उसकी माँ की छूट से निकल दिया जिसपर दोनों का रास लगा हुआ था, पूर्वी ने तुरंत उसे मुँह में भर कर चाट कर साफ़ किआ, और फिर अगले hi पल अपना मुँह अपनी सास की छूट में घुसा दिया, रेनू ये देख हैरान रह गयी पर कुछ hi पलों में पूर्वी की जीभ की ताल पर उसका बदन थिरकने लगा, पहली बार रेनू के बदन से कोई औरत और वो भी उसकी बहु खेल रही थी और उसे अपनी जीभ से इतना मज़ा दे रही थी, रेनू को यकीन नहीं हो रहा था की एक hi रात में उसके साथ क्या क्या हो रहा है, अपने hi मूट में लेते हुए अपने बेटे से चुद गयी अब बहु छूट चाट रही है, और सबसे बड़ी बात उसे ये सबब बहुत ाचा लग रहा है, समाज की नज़र में जो इतना बड़ा पाप है, उसे इसमें मज़ा आ रहा है, वो अपनी मनःस्तिथि को समझ नहीं प् रही थी, खैर अभी ज़रुरत भी नहीं थी अभी तो बस अपने बेटे और बहु की हरकतों का मज़ा लेना था,

पूर्वी ने जी भर के अपनी सास की छूट चाटने के बाद मुँह हटाया और पीछे देखा तो पंकज का लुंड फिर से तैयार था, पूर्वी ने एक हाथ से उसके लुंड को थाम लिए साथ hi आगे होकर अपनी सास के होंठों पर अपने होंठ टिका दिए, रेनू भी तुरंत होंठ खोल कर बहु का साथ देना लगी, उसे पूर्वी के होंठों पर अपनी छूट का स्वाद मिल रहा था, कुछ पल बाद पूर्वी ने होंठ हटाए तो रेनू के होंठों पर उसके बेटे के लुंड का टोपा घिस रहा था, रेनू ने अपने बेटे और बहु दोनों की आँखों में देखा और फिर अपना मुँह खोल कर उसके लुंड को मुँह में भर लिया.

पंकज- अह्ह्ह्हह्हह मम्मी ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

पूर्वी अपनी सास के बदन से बचे कूचे कपडे भी निकलने लगी,

रेनू को बेटे के लुंड का स्वाद बहुत भ रहा था, बिलकुल कुल्फी की तरह ऊपर से नीचे तक जीभ से चाटती और फिर सूपड़ा मुँह में भर कर चूस लेती,

पंकज- अह्ह्ह्हह्हह मम्मी कीटनाआआआ माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है,

इधर पूर्वी ने तब तक अपनी सास को पूरा नंगा कर दिया था, पंकज ने एक हाथ अपनी मम्मी की मोती चुकी पर रखा तो रेनू की कसावट उसके लुंड पर और बाद गयी,

पंकज- अह्ह्ह्हह्हह मम्मी कितनी मस्त चूचियां हैब तुंहारी अह्ह्ह्हह्हह इन्ही का दूध पि पीकर बढ़ा हुआ हूँ मैं,

रेनू कक ये अपने बेटे से यर सुनकर एक अजीब उत्तेजना भी हो रही थी और शर्म भी आ रही थी,

पूर्वी अपनी सास का नंगा सुन्दर कामुक बदन देख बोली- सुनो मम्मी को अंदर ले चलो,

पंकज ने भी हाँ में सर हिलाया,

रेनू अपने बेटे का लुंड मुँह से निकल कर उठी, उसका पूरा बदन उसके मूट और पसीने से गीला था, पूर्वी ने उसके गंदे कपडे उठा लिए और तीनो कमरे में आ गए पूर्वी उसके गंदे कपडे बाथरूम में डालने चली तो रेनू बोली,

रेनू- हाँ चलो मैं भी नाहा लेती हूँ,

पूर्वी- अरे नहीं मम्मी रहने दो नैन सुबह चादर धो दूंगी, अभी तो और भी गन्दी होनी है,

ये सुन रेनू शर्मा गयी, पंकज ने उसे धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया, और खुद अपनी माँ के ऊपर चढ़ गया, एक बार फिर से उसके होंठो को चूसने लगा, कमरे की रोशनी में रेनू का नंगा बदन और कामुक लग रहा था, जिसे पंकज भोग रहा था, पूर्वी बाथरूम से आकर बिस्तर के किनारे बैठ कर माँ बेटे का प्यार देख रही थी,

खुद को ज़्यादा वो भी नहीं रोक पाई और उन दोनों के बगल में लेटते हुए अपनी सास की गर्दन चूमने लगी, रेनू की उत्तेजना दोहरी हो गयी, होंठो को बीटा चूस रहा था और गर्दन को बहु, पंकज ने होंठो को छोड़ा तो पूर्वी ने अपने होंठो में फंसा लिए, पंकज गर्दन चूमने लगा, दोनों के बीच में रेनू उत्तेजना में मचल रही थी,

दोनों hi धीरे धीरे नीचे की और बढ़ने लगे और जल्दी hi दोनों के मुँह में रेनू की सक एक मोती चुकी थी जिन्हे दोनों पूरी लगन से चूस रहे थे और रेनू जल बिन मछली की तरह उनके नीचे मचल रही थी, तड़प रही थी,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बेटाःह्ह्ह, अह्हह्ह्ह्ह,

चूचियों को अच्छे से चूसने के बाद दोनों और नीचे फिसले और दोनों ने hi रेनू की गहरी सुन्दर नाभि को खूब बरी बरी से चूसा, पंकज चूसने के बाद नीचे खिसक कर अपनी मम्मी की छूट के सामने पहुँच गया जिसे उसने अभी छोड़ा था,

पंकज- अह्ह्ह्हह्हह मम्मी तुम्हारी छूट कितनी प्यारी है, कितनी सुन्दर है,

रेनू अपने बेटे से ये सुनकर शर्मा गयी,

पूर्वी जो अब भी अपनी सासु माँ की नाभि को चूस रही थी उसने उनका शर्माना देखा तो बोली- देखो तो कैसे नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही है,

रेनू ने आँखें दिखाकर झूठे गुस्से से पूर्वी की तरफ देखा पर कुछ कहती इससे पहले उसके मुँह से आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी क्यूंकि पंकज ने अपनी जीभ उसकी छूट पर फिरा दी थी,

अगले कुछ मिनट्स तक रेनू चादर को मुठी में भींच कर सर को इधर उधर पटक कर बिस्तर पर तड़पती रही उसकी बहु और बीटा उसकी नाभि और छूट को चूसते रहे और एक बार उसने फिर से अपनी छूट का पानी बहा दिया जो की इस बार उसके बेटे ने सारा चाट लिए, पूर्वी तो सास की नाभि का सारा रास बिना रुके चूसे जा रही थी, रेनू के झड़ने के बाद पूर्वी और पंकज एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे रेनू अपनी बहु और बेटे का चुम्बन हांफते हुए देख रही थी, दोनों ने एक दुसरे को चूमने के बाद रेनू की और देखा और तीनो मुस्कुराने लगे,

पूर्वी ने आगे बढ़ने का प्रोग्राम बताया,

पूर्वी- मम्मी जी चलो तुम भी अपनी बहु का स्वाद ले लो,

ये कहकर अपनी छूट लेकर पूर्वी बिना रेनू का जवाब सुने उसके मुँह पर बैठ गयी, रेनू ने पहली बार किसी औरत की छूट को इतने पास से देखा था, वो भी अपनी बहु की, और उसके मन पूर्वी की छूट देख कर ये hi ख्याल आया की सचमुच उसकी बहु हर और से सुन्दर है जैसे जैसे पूर्वी की छूट करीब आई रेनू के होंठ अपने आप खुलते चले गए, और कुछ hi पलों नै उसकी जीभ अपनी बहु की छूट पर थी, रेनू को शुरुआत में पूर्वी की छूट का स्वाद थोड़ा अजीब लगा पर फिर कुछ hi पलों में उसे मज़ा आने लगा, उसे लगने लगा जैसे उसने अब तक छूट न चाटकर बहुत कुछ खोया है अपने जीवन में वो पूर्वी की छूट को पूरी लगन से चाटने लगी,

पंकज ने अपनी माँ को अपनी बीवी की छूट चाटते देखा तो वो भी जोश में आ गया, और अपना लुंड एक बार फिर से अपनी मम्मी की छूट में उतर दिया, अब रेनू दोनों और से गहिरु हुई थी, नीचे बीटा ताबड़तोड़ धक्के लगा रहा था और वो बहु की छूट चूस रही थी,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi चूसो, कैसी लग रही है अपनी मममममिययययययय की गरम छूट,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह ऐसाःठ्ठ माज़आह्ह्ह्ह किसी छूट में नाहीई जो अपनीई मा की छूट में haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh,

पूर्वी- आह्हः तो आज ले लूओ माज़आह्ह्ह्ह अपनी मम्मी की गरम छूट का, अह्ह्ह और तेज़ छोड़ू.

पंकज -अह्ह्ह अब तो रोज़ लुन्गाहहह एक भी दिन नहीं जाने दूंगा बिना चोदे,

नीचे लेती रेनू भी अपने बेटे और बहु की उसके बारे में बातें सुन गरम हो रही थी,

पूर्वी- मैं कहती थी नाहहहह एक बार तुम्हारी मम्मी की छूट में लुंड गया न तुह्ह्ह्ह सरे संस्कार भूल कर खुल कर छुडवायेगी,

पंकज- सहिई कहतियइहु, अह्ह्ह्ह मुझे पता होताहहह तो न जानी कब काआहहह छोड़ लेताहहहह.

पूर्वी- मेरिइइइ माआहहहह और अपनीईई महहहह डुबो को छोड़ड़ड़ड़ चुके तुम, किस्मे ज़्यादा आ मज़ा ही,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह तुम्हारी मम्मी भी बड़ी मस्त छुडवाआती है, पर बेटे के लिये माँ से मस्त कोइई नाहीइइइइइइ हो सकती,

रेनू ये सुन हैरान रह गयी, उसे लगता था पूर्वी मजआक में कहती है की उसकी माँ अपने दामाद से चुदवाती है, पर ये तो सच निकला था ये सोच के रेनू की छूट पंकज के लुंड पर और कसने लगी,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह मम्मी जीई ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसी हीईईई मेरी मम्मी की छूट भी चायत्नाःह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्ह चटोगीई ना संधान की छूट और गांड, अह्हह्ह्ह्ह,

रेनू क्या बोलती बेचारी संधान के साथ छूट चटाई का सोचकर hi उत्तेजित हो रही थी तो उसने छूट चूसै और तेज़ कर दी,

पंकज- संधान क्याहहह समधी भीईई तो छोड़ेंगे मम्मी कोऊ और विनीत भी कहाँन छोड़ने वाला है,

रेनू तो ये सुनकर बिलकुल बिलबिला गयी की उसका अपना बीटा उसे अपनी सगी माँ को अपने ससुर और साले से छुड़वाने की बात कर रहा है,

रेनू ने ये सुनकर अपनी जीभ पूर्वी की छूट में घुसा कर उसकी छूट को होंठों से ऐसा खींचा की पूर्वी ने अपना पानी अपनी सास के मुंह में छोड़ दिया इधर रेनू इतनी उत्तेजित हो गयी थी की एक बार फिर से झड़ने लगी थी,

पंकज ने अपनी मम्मी को झड़ते महसूस किआ साथ hi पूर्वी भी सास के मुँह पर झाड़कर एक और लेट गयी, पंकज ने अपनी मम्मी के बदन को घुमा दिया और उसे घुटनो और कोहनी के बल घोड़ी बना दिया अब पंकज के सामने उसकी माँ की फैली हुई गांड थी, दो पतीले जैसे मोठे मांसल चूतड़ जो इतने भरे हुए थे की गांड की दरार hi नहीं दिखती थी , पंकज ने डुबो चूतड़ों को फैलाकर देखा तो सामने उसकी माँ की गांड का भूरा छेड़ था बेहद प्यारा लग रहा था, पंकज के मुँह में उसे देख कर पानी आ गया, पंकज ने दोनों चूतड़ों को दोनों और फैलाया और अपना मुँह मम्मी की गांड के छेड़ पर लगा दिया तो रेनू को जैसे hi ये एहसास हुआ उसने पंकज को रोकना चाहा, पर जैसे hi पंकज की जीभ ने उसकी गांड के छेद को छुआ, रेनू के सरे इशारे बदल गए, उसके पूरे बदन में करंट दौड़ गया वो ये सोचकर मचलने लगी की उसका बीटा उसकी गांड चाट रहा है, एक माँ का ऐसा छेड़ जो बेटे को कभी भी नहीं देखना चाहिए आज मेरा बीटा मेरा वही छेड़ चाट रहा है, एक औरत का सबसे गुप्त अंग होता है उसकी गांड का छेड़ और आज वही छेड़ रेनू का बीटा चाट रहा था उससे खेल रहा था,

रेनू - अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ब ुहम्म्म्म नाहुयी अह्हह्ह्ह्ह,

पंकज बिना सुने बस अपने काम में लगा था, पूर्वी ने कुछ पल बाद अपनी साँसों को ठीक करते हुए दोनों को देखा और उठ गयी, अपनी सास के उठे चूतड़ों और पति को गांड चाटते देख वो समझ गयी पति की मंशा क्या है वो सीधे पंकज के पास जाकर झुक कर उसका लुंड मुँह में लेकर चाटने लगी और गीला करने लगी,

जब अपने काम से खुश हो गयी तो अपनी सास के चेहरे के पास जाकर उसका चेहरा दोबारा अपनी छूट में घुसा दिया, अब रेनू भी कोई झिझक के बिना सब कर रही थी और तुरंत पूर्वी की छूट चाटने लगी, इतने में पंकज सीधा हुआ और उसने अपने चिकने लुंड को पकड़ा साथ hi पूर्वी को देखा,

पूर्वी ने अपना सर हाँ में हिलाया और फिर अपनी सास के सर को अपनी छूट से उठा लिया और उसके होंठो को चूसने लगी, होंठों को कीच पल चूसने के बाद छोड़ा, और फिर अपनी सास की आँखों में देखते हुए बोली- मम्मी hi तैयार हो?

रेनू- किस लिए आअह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

रेनू जी की बात पूरी नहीं हो पाई की पंकज ने अपना लुंड अपनी माँ की गांड पर रखकर धक्का देकर अंदर घुसा दिया, जिससे रेनू की चीख निकल गयी,

पूर्वी को अपनी सास के चेहरे पर बदलते भाव बड़े अचे लगे और बोली- अपने बेटे से गांड मरवाने के लिए,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह साली कुटिया पहले नाहीईई बता सकतीई थी अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह तू भीई बता कर नहीं दाल सकता था,

रेनू ने दोनों से शिकायत करते हुए कहा,

पंकज- अह्ह्ह्हह्हह मम्मी बता कर डालने में इतना मज़ा नहीं आता,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह रंडी सासु माँ, नखरे तो ऐसे कर रहियी हो जैसे कुंवारी हो, न जाने कितने लोडे ले चुकी होगी ये गांड, क्यों सासु माँ,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कुटियाहहह टेरिइइइइइइइइ मायआ जैसीईईई रनडीईई नाहीई हूँ मेंनननन,

पूर्वी- तभी अपने बेटर से गांड मारा रही हो मम्मी,

पंकज अपनी माँ और बीवी की मीठी कामुक नोकझोंक सुन और जोश में आ रहा था, और उसने धीरे धीरे अपनी माँ की गांड में धक्को की गति को बढ़ाना शुरू कर दिया,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह टोह्हह्ह्ह्हह्हह क्याहहह हुआअह्ह्ह मेराअहहह बेटाःह्ह्ह हैईईई अपनीईई मा की गांड पारर पूरा हक़ है उसकाअह्ह्ह, और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ मार बेटाःह्ह्ह अपनीईईई माहहहह की केसीई हुई गांड अह्हह्ह्ह्ह मार,

अब रेनू भी पूरे जोश में आए चुकी थी, और खुद बेटे को उत्साहित करते हुए बोली,

पूर्वी- ईई हुई नाआ बात मेरिइइइइइ रैंड सासु माआहहहह,

पूर्वी ने रेनू के होंठों को चूसते हुए कहा,

पंकज को तो ऐसा लग रहा था जो उसने जीवन भर माँगा था वो मिल चूका था, वो पागलों की तरह अपनी मम्मी की गांड मार रहा था, उसकी जांघों और रेनू के चूतड़ों के टकराने की आवाज़ लगातार मधुर संगीत की तरह पूरे कमरे में गूँज रही थी,

पूरी रात ऐसी आवाज़ें कमरे में गूंजती रही, पंकज और पूर्वी ने रेनू के बदन को तब तक निचोड़ा जब तक वो बिलकुल थक कर धराशाई नहीं हो गयी, रेनू का ऐसा कोई छेड़ नहीं था जिसमे पंकज ने अपने लुंड का रास न छोड़ा हो, पूर्वी ने भी अपनी सास का रास कई बार खुद पिया तो कई बार उसे पिलाया भी, रेनू की जीभ भी पूर्वी की छूट और गांड से अचे से परिचित हो चुकी थी, और सिर्फ पूर्वी hi क्यों, उसने तो रेनू को उसके बेटे यानी पंकज की गांड से भी परिचित करा दिया था, अंत में पूरे बदन पर रास और पसीने का मिश्रण लिए रेनू दोनों के बीच सो गयी थी, पंकज और पूर्वी भी दोनों सो गए,

सुबह तेज़ दरवाज़ा पीटने की आवाज़ से पूर्वी की आँख खुली, थोड़ा इधर उधर देख कर समझा तो जाना की प्रीती उसका दरवाज़ा बजाकर चिल्ला रही है- भाभी, भैया उठे नहीं अभी आज जाना है भूल गए क्या,

पूर्वी उठी और एक चादर से अपने बदन को धक् लिया, एक बार बिस्तर पर देखा तो माँ बीटा बिलकुल नंगे एक दुसरे से चिपक कर सो रहे थे,

पूर्वी दरवाज़े तक गयी और दरवाज़ा थोड़ा सा खोल के बोली- क्या हुआ क्यों चिल्ला रही हो ननद रानी,

प्रीती ने अपनी भाभी को चादर में लिपटे देखा साथ hi उसकी लगभग नंगी चूचियां देख कर प्रीती मुस्कुराने लगी.

प्रीती- हौव्व भाभी कुछ तो शर्म करो, नंगी hi घूम रही हो,

पूर्वी- एक बार तुम भी ये मज़ा चख कर देखो प्रीती तुम भी शर्म भूल जाओगी.

प्रीती- धत्त्त भाभी, और ये क्या तुम्हे पता था न मुझे और भैया को जाना है, एक रात बिना करे रह नहीं सकती थी,

पूर्वी- क्या करे?

प्रीती- वही जिसकी वजह से तुम्हे नंगा होना पड़ा,

पूर्वी- हम तो रह लेते, पर तुम्हारे भैया नहीं रह पाते.

प्रीती अपने भाई के बारे में ये सुनकर थोड़ा शर्मा गयी,

प्रीती- वो सब छोडो भैया को उठाने दो अब,

पूर्वी- ठीक है उठा लो पर पहले hi बता दूँ वो भी ऐसे hi सो रहे हैं मेरी तरह जाओ उठालो,

पूर्वी की ये बात सुन प्रीती थोड़ा झिझकी और बोली- तुमने न भैया को बिगड़ दिया है भाभी, जाओ जल्दी से जगा कर भेजो,

पूर्वी- मैं तो तुम्हे भी बिगड़ना चाहती हूँ ननद रानी,

पूर्वी ने प्रीती के करीब आते हुए कहा, तो प्रीती धत्त्त भाभी कहते हुए भाग गयी,

पूर्वी भी दरवाज़ा बंद करके सोचने लगी क्या होता अगर प्रीती अपने भाई और माँ को आइए देख लेती हो तो, खैर जल्दी hi उसने पंकज को जगाया और पंकज और प्रीती तैयार होकर गाओं के लिए निकल गए,



चोदामपुर

मैं और माँ जग्गू के यहाँ से घर पहुंचे तो शाम का समय हो चूका था, धीरे धीरे सब लोग जो बहार थे लौट रहे थे,

इससे पहले मां ने अपनी बिटिया किरण को कमरे में लेजाकर उसके बदन का अचे से स्वाद लिए था, मां तो किरण को देख इतना ललचा गए थे की कुछ hi समय में बिटिया की छूट और गांड दोनों का सुख भोग लिए था, किरण की कासी गांड के तो वो दीवाने हो गए थे, और खूब मारी थी, किरण भी अपने पापा के इतने करीब आकर बहुत खुश थी, अपने ममेरे भाइयों, फूफाओं से छुड़वाने के बाद उसे उसके पापा के साथ छुड़वाना अलग सुख दे रहा था, कहतर हैं न बेटी के लिए बाप की जगह कोई नहीं ले सकता ऐसा hi कुछ किरण के साथ था, अपने बाप के लुंड को मुँह में भर कर खूब प्यार से चूसा तो फिर अपनी छूट और गांड में लेकर खूब उछली, आउट अभी दोनों बाप बेटी नंगे एक दुसरे की बाहों में सो रहे थे,

दुसरे कमरे में नाना ने आज ममता चची के साथ भरपूर चाचा भतीजी का खेल खेला था, शुरुआत में नाना को सबसे ज़्यादा चची ने hi उत्तेजित किआ था तो आज नाना ने अपनी पूरी उत्तेजना चची पर निकली थी, चची भी कहाँ पीछे रहने वालों में से थी, उन्होंने भी नाना के लुंड को पहले अपनी गरम छूट की सैर करवाई, फिर लुंड चूस चूस कर खड़ा किआ, फिर अपनी मोती गांड मरने दी, चची को नाना से छोड़ने के में एक मज़ा और आ रहा था क्यूंकि उन्हें लग रहा था वो अपने पापा से छुड़वा रही हैं, जो की अब दुनिया में नहीं थे, तो उन्हें याद करके नाना से छुड़वाना उनके लिए काफी ख़ास था,

बगल के कमरे में चची के पति यानि हमारे राजन चाचा ने भी मामी की मोती छूछीयों को थाम कर खूब छोड़ा, मामी भी चाचा के लुंड पर बार बार झाड़ रही थी, और कोई मामी को नंगा देखे और उनकी गांड न मारे ऐसा होना मुश्किल था, चाचा ने भी मामी की गांड भी तबियत से मारी,

वैसे तो अनुज मौसी और पल्ली सोने गए थे पर एक एक बार छुड़वाने से खुद को रोक नहीं पाए थे, खैर शाम हो चुकी थी सब घर लौट चुके थे, सागर भी आज बहुत खुश था उसे यकीन नहीं हो रहा था की चोदामपुर आना उसके लिए इतना सुखद होगा, कल रात से अब तक वो भाभी, तै, पद्मिनी तै, लाडो, रज्जो चची और नीतू जैसी मस्त छूटें छोड़ने को मिल गयी थी, घर पहुंचते ही उसने मौका देख कर अनुज और मुझको पकड़ लिया और छत पर ले जाकर हमें पूरे दिन की कहानी उत्सुकता से सुनाने लगा, हूँ दोनों भी उसके चेहरे की ख़ुशी देख कर हंस रहे थे,

अनुज- बढ़िया है मज़े आ गए तेरे तो,

सागर- पर भैया अनुज तुम दोनों बड़े बेकार हो, अगर ये सब पहले से होता था तो पहले क्यूब नहीं बताया तुमने,

में- अभी तो तुझे बहुत कुछ जानना है,

सागर- क्या?? अब इसके अलावा भी कुछ रह रहा है. जानने को,

सागर आँखें चौड़ी करते हुए बोलै,

अनुज- अभी तो पिक्चर बाकी है मेरे दोस्त,

सागर- यार बताओ न क्यों गांड जला रहे हो मेरी,

में- आज के लिए तू बहुत चुदाई कर चूका अब कल करियो न,

सागर- देखलो भैया लुंड अब भी खड़ा है तुमने बोलै कुछ और भी हसि तो सुन कर खड़ा हो गया,

वो पाजामे के ऊपर से लुंड पकड़ कर दिखने लगा, पर अचानक से उसने लुंड से हाथ झटक लिया और मुद गया क्यूंकि मामी छत पर आई थी कपडे उतरने के लिए,

में- खड़ा तो मेरा भी है पर तू छुपा क्यों रहा है,

वो कनखियों से इशारा करके फुसफुसाते हुए बोलै- मरवाओगे क्या पीछे देखो मम्मी हैं,

मैंने मुस्कुराया और बोलै- मामी इधर आओ न,

मामी- हाँ बाबू का हुआ,

मामी ने पास आते हुए कहा,

सागर का तो चेहरा सफ़ेद पड़ने लगा की न जाने अब क्या होने वाला है कहीं मैं मामी को कुछ बता न दूँ, ये सोच उसके माथे पर पसीना आने लगा,

में- मामी नीचे बैठो न,

मामी- अरे अभी लो बैठ गयी बाबू,

मामी हमारे सामने अपने घुटनो पर बैठ गयी, अब मामी को और सागर दोनों को चौंकाते हुए मैंने अपना लुंड बहार निकलना और उसे मामी के चेहरे के सामने कर दिया, जिससे मामी चौंक गयी, हालाँकि वो पूरी तरह से हमारे साथ खुल चुकी थी पर अब भी अपने बेटे के सामने उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ था इसलिए अचानक से ये सब होने पर मामी थोड़ी हैरान हुई और मेरी और देखा, मैंने आँखों hi आँखों में उन्हें इशारा किआ तो उन्होंने भी सोचा आज नहीं तो कल ये भी होना hi था साथ hi बेटे के सामने ौसा कुछ करने का सोच कर hi मामी की छूट पनियाने लगी, मामी ने तुरंत मुँह खोल कर मेरा लुंड मुँह में भर लिया और चूसने लगी,

सागर तो अपनी माँ को लुंड चूसते देख बिलकुल हैरान रह गया, वो यथा हिल गया की पीछे दीवार से टिक गया जाकर, मामी भी बीच बीच में उससे नज़रें मिला कर मेरा लुंड चूसने लगी, मुझे देख अनुज ने भी अपना लुंड मामी के आगे कर दिया तो मामी ने उसे भी एक हाथ में पकड़ लिए और अब बारी बारी से लुंड चूसने लगी, सागर की हैरानी जब ख़तम हुई तो उसका ध्यान लुंड पर गया जो बिलकुल अकड़ कर खड़ा हुआ था,

मैंने मुस्कुरा कर उसे पास आने का इशारा किया वो आगे आया तो मैंने मामी के मुँह से लुंड खींच लिया और उन्हें सागर की और इशारा किआ, मामी ने सागर की आँखों में देखा और बड़े प्यार से बोली- मम्मी से लुंड चुसवायेगा लल्ला,

सागर इसके जवाब में क्या बोलता, मामी ने तुरंत उसका कच्चा ाहर पजामा नीचे खिसकाया तो पहली बार बेटे का खड़ा लुंड उनके सामने था, जिसे देख कर मामी खुश हो गयी, क्यूंकि बेटे का लुंड ाचा खासा तगड़ा था जो की किसी भी औरत को खुश कर सकता था,

मामी ने अपनी जीभ सागर के लुंड पर फिरै तो सागर अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मम्मी करने लगा,

में- मम्मी hi तो चूस रही है तेरी, मज़े ले अपनी मम्मी के गरम मुँह के,

सागर- अह्ह्ह्हह्हह हॉँण्णन भैयाहः, ये कह सागर ने अपनी मम्मी के मुँह को छोड़ना शुरू कर दिया, मामी भी उत्तेजित होकर अपने बेटे का लुंड चूसने लगी, शाम की ढलती धुप जो छत पर पद रही थी उसमे बेटे का लुंड चूसती हुई माँ बेहद प्यारी लग रही थी, सागर की उत्तेजना का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है की कुछ hi पलों में उसने अपना रास अपनी माँ के मुँह में छोड़ दिया था, मामी ने भी बेटे के रास की एक बूँद भी ख़राब नहीं होने दी और सारा जातक गयी, तभी नीचे से माँ की आवाज़ आई जो मामी को बुला रही थी, मामी जल्दी से उठी और कपडे उतारकर नीचे चली गयी, सागर तो उनके जाने के बाद भी सदमे में था, वो तो जो हुआ उसे पचा hi नहीं पा रहा था,

अनुज- अबे अब क्या गन्दा सा मुँह बना कर खड़ा हुआ है, अपनी मम्मी से लुंड चुसवा कर मज़ा नहीं आया क्या?

सागर- यार ये सब हो क्या रहा है,

अनुज- भैया इसे सब समझाना hi पड़ेगा नहीं तो ये ऐसे hi रहेगा,

में - लाडो ने तुझे कितना बताया है,

सागर- बहुत कुछ,

अनुज- तो उसके आगे का सुन, और सुन उसने उतना hi बताया है जितना उसे पता है पर तुझे बता रहे हैं इसका मतलब ये नहीं तू सब गए दे उसके आगे,

सागर- नहीं नहीं मैं क्यों बोलूंगा उसके आगे?

अनुज- क्यूंकि वो तेरा सच्चा प्यार जो है,

अनुज ने चिढ़ाते हुए कहा,

सागर- अरे नहीं भाई, कुछ भी हो परिवार की बातें थोड़ी hi नहीं बताऊंगा उसे,.

में- अब आया न दिमाग में,

इतने में मेरा फ़ोन बजा तो देखा मेरे प्यार का था, तो मैं छत के एक कोने में अंजलि से प्यार भरी बातें करने लगा, अनुज सागर को अपने परिवार की साड़ी बातें बता रहा था, सुनते हुए सागर के चेहरे के बदलते भाव और लुंड को बार बार खुजाना साफ़ नज़र आ रहा था, करीब घंटे भर तक मेरी और अंजलि की प्यार भरी बातें चली उसने अपने दिल की बहुत सी बातें कहीं और मैंने भी, प्यार के अलावा हम दोनों की एक चीज़ थी जो बहुत मिलती थी वो थी हवस, उसकी बातों से जाहिर हो गया था की वो भी बहुत गरम थी, और जल्दी hi मैं उसके बदन की गर्मी में तपना चाहता था, चूंकि उसे मेरे और मेरे परिवार के बारे में पता था तो बीच में वो मज़ाक भी कर रही थी की तुम्हे मेरी क्या ज़रुरत तुम्हारे पास तो तुम्हारी मम्मी से लेकर मामी तक सब हैं, और वो मेरी बातों को बहुत उत्सुकता से सुन भी रही थी,

खैर अंत में उसकी मम्मी के बुलाने पर उसे फ़ोन रखकर जाना पड़ा, और मैं भी नीचे आ गया अनुज और सागर पहले hi आ गए थे,

अँधेरा हो चूका था, ऐसे hi सब बैठ कर बातें कर रहे थे, पापा और मौसा कह रहे थे की कल से नए घर की नींव पड़नी शुरू हो जाएगी, तो कल जाकर पूजन करना पड़ेगा, जिसके लिए सुबह सबको जल्दी उठकर जाना था,

अनुज ने सबको बताया की अब सागर को भी सब कुछ पता है, तो सब खुश हुए की अब कोई भी नहीं रह गया है,

मौसी- पर ये सागर है कहाँ,

नाना- अरे हाँ दिख नहीं रहा कहीं?

मां- इसके पेअर नहीं टिकते एक जगह,

तभी रसोई में अचानक से कुछ गिरने की आवाज़ आई तो माँ गयी देखने और कुछ पल बाद बापिस आई तो उनके साथ सागर और मामी थे, हम समझ गए की मामला क्या है,

माँ- तुम माँ बीटा आराम से अंदर जाओ ुहमममममहहहह.

माँ की बात पूरी होती इससे पहले सागर ने उन्हें भी चूम लिया,

माँ भी उसका साथ देने लगी और जब चुम्बन ख़तम हुआ तो माँ बोली- एक काम कर अभी तू अपनी माँ को कमरे में लेजा और उससे जितना चाहता है उतना प्यार कर हम लोग खाना बना लेंगे, और रही बात बाकि सबकी तो हम सब यही हैं एक एक करके तू सबके साथ मज़े कर पायेगा,

किरण- सिर्फ मुझे छोड़के, मैं इसे नहीं करने दूंगी कुछ भी अपने साथ,

मां- तुम लोगो की लड़ाई ख़तम नहीं होती,

सागर- ठीक है बुआ,

ये कहके सागर अपनी मम्मी को लेकर जाने लगा,

नाना- अरे तो इसके लिए अंदर क्या जाना? यहीं कर बीटा, मुझे भी पोते और बहु की चुदाई देखनी है,

मामी- ठीक है बाबा जैसी तुम्हारी मर्ज़ी,

जारी रहेगी,
 
ये कहके सागर अपनी मम्मी को लेकर जाने लगा,

नाना- अरे तो इसके लिए अंदर क्या जाना? यहीं कर बीटा, मुझे भी पोते और बहु की चुदाई देखनी है,

मामी- ठीक है बाबा जैसी तुम्हारी मर्ज़ी,



अपडेट 227

कायमगंज



पंकज और प्रीती जल्दी hi मोटरसाइकिल से गाओं के लिए निकल गए, गर्मी का दिन था तो प्रीती ने एक क्रीम कलर का स्लीवलेस सूट पहना हुआ था और दुपट्टे से सर धक् कर अपने आप को धुप से बचा रही थी, पंकज ने तो हमेशा की तरह hi एक टीशर्ट और नीचे पंत पहनी हुई थी, कुछ देर hi चले थे की गर्मी से दोनों का बुरा हाल होने लगा, लू की चपेटें ऐसे लग रही थी मनो कोई गरम करके चांटे मार रहा है, एक बार को तो प्रीती सोचने लगी की उसने कहीं गलत ज़िद्द तो नहीं पकड़ ली थी,

खैर अब तो निकल आये थे,

पंकज के मन में तो रात को अपनी मम्मी को छोड़ने के दृश्य hi चल रहे थे, और सोच कर अब भी उसका लुंड बार बार खड़ा हो रहा था, वैसे तो उसका मन था आज भी पूरे दिन मम्मी को छोड़ने का पर गाओं आना भी ज़रूरी था, वैसे भी तय हो चूका था, कायमगंज से करीब 80 कम दूर था उसका गाओं सैंधापुर, ज़्यादा बड़ा गाओं नहीं था पंकज को याद था उसका बचपन यहीं बीता था बाद में उसका परिवार शहर में जा बसा था पर उनकी ज़मीन पुराण मकान खेत अब भी थे, खेत उसने बताई पर दे रखे थे जिसमे कोई और उसके खेतों पर खेती करता और फिर जो फसल होती उसका हिस्सा बाँट लिया जाता, उसी के हिसाब के लिए आज उसे गाओं आना था, घर तो बंद रहता था पर महीने में एक दो बार उसके मम्मी पापा आकर साफ़ सफाई करवा जाते थे,

पंकज अपनी मम्मी की छूट की यादों में खोया था की प्रीती ने उसे टोका- भैया प्यास लग रही है कहीं कुछ मिले तो रोकना,

पंकज- ले अभी से परेशां हो गयी, मम्मी सही कह रही थी गर्मी में बेकार आई न तू,

प्रीती- ओह्हो भैया अब तुन भी मम्मी की तरह शुरू मत हो जाओ,

पंकज- अरे नहीं हो रहा, रुक शिकंजी पिलाता हूँ तुझे,

पंकज ने थोड़ा आगे जाकर एक शिकंजी वाले के पास मोटरसाइकिल रोकी और दो गिलास बनवाये, ठंडी शिकंजी का घूँट भर कर प्रीती को राहत मिली,

पंकज भी शिकंजी का आनंद ले रहा था तो उसकी नज़र शिकंजी वाले पर गयी जो नज़र बचाकर बार बार प्रीती को देख रहा था,

पंकज ने भी धीरे से मुद कर देखा वैसे तो कुछ अलग नहीं था वो जनता था उसकी बहन का बदन hi ऐसा है जो लोग नज़र भर के देखते ज़रूर है, पिछले कुछ महीनो में उसके चुके भी कुछ ज़्यादा hi उभर आये थे, जो सूट में बिलकुल कास के आते थे और अब्बी भी एक मनमोहक नज़ारा पेश कर रहे थे, क्यूंकि दुपट्टा तो प्रीती में सर पर रखा हुआ था तो चूचियां तो अभी खुली थी, तो हलकी झलक सबको दिख रही थी और वही झलक काफी भी थी लुंड अकड़वाने के लिए,

पंकज दूसरो को क्या कहता वो तो न जाने कब से अपनी बहन की जवानी को चखना चाहता था, आज अपने साथ प्रीती को लाने के पीछे का कारन भी यही था की कुछ हो सके उसके और उसकी बहन के बीच, जबसे पंकज ने अपने साडू रमन की बहन ख़ुशी का स्वाद चखा था और उसे अपने भाइयों से छुड़वाते देखा था तबसे तो पंकज ने सोच लिए था की अपनी बहन को भी ज़रूर अपने लुंड पर बिठा के मानूंगा,

ख़ुशी और प्रीती में हालाँकि अंतर था पर सिर्फ उम्र का, ख़ुशी जहाँ एक ज़्यादा परिपक्वा, कॉलेज में जाने वाली लड़की थी वहीं प्रीती तो अभी स्कूल में hi थी, पर प्रीती का बदन ख़ुशी से किसी भी मामले में काम नहीं रह गया था, छुछियां और गांड तो बिलकुल नहीं,

ऐसा नहीं था की शिकंजी वाले की नज़रों को सिर्फ पंकज ने hi देखा था, देखा तो प्रीती ने भी था, और सिर्फ शिकंजी वाले hi क्यों उसने अपनी भैया को भी अपने जोबन को ताड़ते हुए देखा था, प्रीती के चेहरे पर ये देख एक हलकी मुस्कान आ गयी जिसे उसने गिलास के पीछे छुपा लिए था, शिकंजी ख़तम हुई तो दोनों भाई बहन दोबारा मोटरसाइकिल पर बैठ कर चल दिए, शिकंजी वाले ने भी जाते हुए प्रीती के ढंके हुए दुसरे पाजामे पर भी नज़र मारली, जब वो दोनों तरफ पेअर करके मोटरसाइकिल पर बैठ गयी तो उसके फैले हुए चूतड़ों की झलक hi बेहद कामुक थी, प्रीती ने शिकंजी पीकर अपना गाला तो ठंडा कर लिए पर बेचारे शिकंजी वॉर की गर्मी बढ़ा गयी,

प्रीती को भी अब सब बातों का ज्ञान था, उसे आदत थी लोगो के उसे घूरने की, उसे बुरा भी नहीं लगता था बल्कि वो जान कर अनजान बनते हुए लोगो को तड़पाती थी, मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे हुए वो यही सोचने लगी की कैसे पिछले एक साल में उसके मन और तन दोनों का विकास हुआ था, जिसके पीछे दो कारण थे एक उसकी सहेली ऋतू और दूसरा इंटरनेट,

ऋतू ने hi उसका परिचय कामुक बातों से करवाया था दोनों सहेलियां घंटों तक साथ में बंद कमरे में अपनी जिज्ञासा शांत करती, प्रीती तब भी थोड़ा शर्मा जाती ऋतू बिलकुल बेबाक थी, कुछ hi दिनों में दोनों की जिज्ञासा ने दोनों को एक दुसरे के करीब ला दिया था और दोनों ने एक दुसरे की छूट को सुख देना शुरू कर दिया, पहले उँगलियों से तो फिर जीभ से, फिर तो ऐसा आलम हो गया की जो भी वो देखती वो एक दुसरे के साथ करती, इसी वजह से तो प्रीती के बदन में अचानक इतना बदलाव गया, कहाँ एक साल पहले की पतली सी लड़की, अब जवानी से भरपूर गदराई घोड़ी बन गयी थी, जिसकी बस सवारी की जाने की ज़रुरत थी,

पर प्रीती के लिए एक मुसीबत तब आई जब साल पूरा होते hi ऋतू को अपने परिवार के साथ किसी और शहर में जाना पड़ा, उसके पापा का ट्रांसफर जो हो गया था,

दोनों hi बड़ी उदास हुई पर जो होना था वो तो हुआ hi, दोनों की अब भी बातें होती थी, पर फ़ोन पर वो वाला मज़ा कहाँ, ऊपर से ऋतू ने नए शहर में किसी को पता भी लिए था अब वो उसके साथ व्यस्त रहती थी, जब बात होती तो अपनी और उसकी बातें बताकर प्रीती का दिल और जलती, साथ hi ऋतू उसे सलाह ब्बि देती की वो भी किसी को पता ले, और अपनी जवानी के मज़े ले, पर प्रीती के लिए ये मुश्किल था वो ऐसे hi किसी को अपनी जवानी का तोहफा नहीं देना चाहती थी, वो चाहती थी की जो भी हो वो कोई ख़ास हो, पिछले कुछ समय से वो देखती थी की उसके भैया की नज़र भी उसके बदन पर रहती थी शुरू में तो उसे ये सब अजीब लगा, पर फिर उसे ाचा लगने लगा, इंटरनेट पर उसने भाई बहन की कई साडी कहानिया पढ़ कर खूब पानी बहाया अपनी छूट का, अब हालत ये थी की वो छूट में उंगली करते हुए ज़्यादातर अपने भैया को hi याद करती थी, वो सोचती थी की उसके भैया थोड़ी हिम्मत दिखा कर कुछ करें और उसके बदन से खेलें पर कुछ नहीं होता था,

आज भी वो इसलिए आई थी की भैया और उसे अकेले में समय मिलेगा तो शायद भैया की हिम्मत बढे, ये सोचते हुए वो पीछे बैठी हुई आगे बढ़ी जा रही थी, हालाँकि उसकी भी हिम्मत नहीं होती थी की कुछ करे, दर उसे भी लगता था अपने भैया से,

पंकज और पूर्वी ने भी प्रीती के लिए बहुत सी योजनाएं बनाई थी, पर पंकज की हिम्मत नहीं होती थी, आज का आना भी उसी योजना का हिस्सा था पर अब क्यूंकि पंकज ने अपनी मम्मी को छोड़ लिए था तो एक अलग प्रकार की हिम्मत उसमे आ गयी थी, वो ये सोच रहा था की इस मौके का तो फायदा उठाना hi पड़ेगा,

इसी तरह के सोच विचार में आधा सफर तय हो चूका था, पंकज अपना पूरा दिमाग लगा कर कोई न कोई तरकीब सोच रहा था अपनी बहन के करीब आने की, इसी में थोड़ा और समय बीत गया और वो लोग गाओं के पास पहुँच गए अब एक कच्चा रास्ता था जो की लगभग 2 कम का था पंकज ने आखिर कुछ सोचते हुए दो तीन बार झटका देकर मोटरसाइकिल को बंद कर दिया,

प्रीती- क्या हुआ भैया, झटके क्यों ले रही है,

पंकज- पता नहीं क्या हुआ, शायद कुछ खराबी आ गयी है,.

प्रीती- अरे यार, ये भी अभी होना था,

पंकज- अरे एक चीज़ सही है गाओं के पास तो हैं यहाँ से तो पैदल का रास्ता hi रह गया है बस,

प्रीती- हाँ ये तो सही बात है,

प्रीती मोटरसाइकिल से उतर जाती है, और पंकज भी उतारकर मोटरसाइकिल को खींचकर चलने लगता है,

एक किलोमीटर चलते hi दोनों पसीना पसीना हो जाते हैं, पंकज अपनी बहन को देखता है, उसका सूट फिटिंग का तो था hi, अब पसीने से भीगकर हलके रंग का होने के कारण बिलकुल पारदर्शी हो जाता है, पंकज को अब प्रीती के बदन के सरे कटाव दिखने लगते हैं, क्यूंकि ठीक दोपहर थी तो रास्ता बिलकुल सूनसान था, पंकज का लुंड प्रीती को यूँ देखकर हिचकोले मरने लगता है, थोड़ा आगे चलते हैं तो आम का बाघ आ जाता है जो उन्ही का था,

पंकज वहीं मोटरसाइकिल को खींचकर घुसा देता है और कड़ी कर देता है, दोनों भाई बहन गर्मी से परेशां पसीना पसीना हो रहे होते हैं,

प्रीती- अरे भैया आज तो हालत ख़राब हो गयी,

पंकज- हाँ यार गर्मी इतनी है, मुझसे तो रहा नहीं जा रहा,

प्रीती- मुझसे भी नहीं,

पंकज- एक मिनट रुक,

ये कहके पंकज बाघ के कोने पर जाता है जहाँ तुबेल लगा हुआ था, तुबेल एक कमरे में लगा था और उसका मुँह दीवार में छेड़ करके बहार निकल रखा था जिसका पानी हौदी में गिरता था, पंकज देखता है तुबेल तो बंद है, प्रीती भी तब तक उसके पीछे आ जाती है,

प्रीती- क्या देख रहे हो भैया,

पंकज- देखने आया था तुबेल चल रहा होता तो ठन्डे पानी में नाहा लेता, मज़ा आ जाता,

प्रीती- अरे वाह, मज़ा आएगा भैया,

पंकज- अरे पर बंद है न,

प्रीती- फिर अब?

पंकज- एक मिनट,

जैसे पंकज को कुछ याद आता है वो झोपडी के दरवाज़े के ऊपर छप्पर में कुछ टटोलने लगता है, और कुछ पल बाद उसमे से चाबी निकल कर प्रीती को दिखा कर हँसता है,

प्रीती- अरे ये कहाँ से मिली?

पंकज- नुझे याद था, सत्तू चाचा चाभी यहीं ठूंस कर घर चले जाते हैं,

प्रीती- बड़े लापरवाह हैं चाचा, कोई चोरी कर ले तो,

पंकज- अरे यर गाओं है यहाँ कोई चोरी नहीं करता, वैसे भी तुबेल चुराकर कैसे ले जायेगा,

पंकज ने दरवाज़ा खोलते हुए कहा,

प्रीती- हाँ ये बात तो है,

पंकज- और ाचा हुआ न की चाभी मिल गयी तभी तो ठन्डे पानी का मज़ा मिल पायेगा,

पंकज ने जल्दी hi तुबेल चला दिया, और प्रीती को भाग कर झोपडी से बहार हौदी के पास आ गयी जहाँ कुछ hi देर में तुबेल से पानी गिरने लगा और कुछ hi सेकंड में हौदी भर गयी, प्रीती के पीछे पंकज भी आया और तुरंत अपने कपडे उतरने लगा और जल्दी hi सिर्फ कच्चे में आ गया और हौदी में घुस गया, बेचारी प्रीती तो सिर्फ हौदी के किनारे बैठ कर सिर्फ पेअर लटकाये देखती hi रह गयी, पंकज ने तो अपना सर तुरंत तुबेल की धार के नीचे मारा और ठन्डे पानी से तर हो गया, प्रीती की नज़र अपने भाई के कच्चे में और उसके उभार पर पड़ी हो गीला होकर साफ़ लुंड का अकार दर्शा रहा था,

प्रीती- भैया मुझे भी नहाना है,

पंकज- तो नाहा ले न.

प्रीती- पर मेरे कपडे?

पंकज- अरे तो थोड़ी धुप में रहेगी या हवा लगेगी सूख जाएंगे,

प्रीती- हाँ ये तो है, मज़ा आएगा,

प्रीती तुरंत दुपट्टे को एक और फ़ेंक कर हौदी में घुस गयी और ठन्डे पानी में बैठ गयी, सच में ठन्डे पानी में घुस कर उसे बहुत सुकून मिला, वहीं पंकज तो सीधा तुबेल की धार को अपने शरीर पर लेकर नाहा रहा था, जो लोग तुबेल में नहाये हैं उन्हें पता होगा उसकी गति और धार कितनी तेज़ होती है,

प्रीती कुछ देर यूँ hi ठंडी होती हुई अपने भैया को देखती रही, और फिर बोली- हटो भैया मुझे भी धार से नहाना है,

पंकज- रहने दे तेज़ है कहीं गिर गयी तो,

प्रीती- अरे नहीं गिरूँगी भैया, करने दो न,

पंकज- ले मेरी माँ आ जा, पंकज पीछे होकर हौदी से पीठ टीकाकार बैठ गया, प्रीती कड़ी होकर आगे आई और जहाँ पंकज था वहां तुबेल की और मुँह करले कड़ी हो गयी, क्यूंकि पंकज पीछे होकर बैठा तो उसके सामने एक बेहद सुन्दर नज़ारा आ गया, वो था उसकी बहन के चूतड़ों का, उसकी सलवार सूती की थी और और वो भी सफ़ेद, जो की अभी गीली होकर उसके चूतड़ों और जाँघों से चिपकी हुई थी, और बिलकुल पारदर्शी हो चुकी थी, पंकज को उसकी बहन के काली पंतय में क़ैद चूतड़ साफ़ दिख रहे थे, वो साफ़ देख पा रहा था की कैसे प्रीती की कच्ची बस चूतड़ों को आधा धक् रही हैं और उसके आधे चूतड़ बहार हैं, ये देख पंकज का लुंड बिलकुल कड़क हो गया, तभी प्रीती झुकी अपने सर को धार के नीचे लाने के लिए जिससे उसका पिछवाड़ा थोड़ा और बहार की और खुल गया और उससे एक चीज़ और हुई उसकी कच्ची का कपडा सिकुड़ कर दोनों और से प्रीती के चूतड़ों की दरार में घुस gaya,Pankaj के सामने अब उसकी बहन के समझो पूरे नंगे चूतड़ थे सिर्फ उनके बीच की दरार कैसे से ढंकी हुई थी,

पंकज का लुंड झटके मारने लगा, वहीं प्रीती तुबेल की धार को सँभालने की कोशिश कर रही थी, सर पर तो उसने किसी तरह से झेल ली पर जैसे hi वो सीढ़ी हुई तुबेल की धार सीधा उसके सीने पर पड़ी और वो अपना संतुलन खो बैठी और धार के ज़ोर से पीछे की और गिरी पंकज की और, पंकज ने भी अपनी बहन को अपनी और आते देखा और उसने हाथ भी फैलाये उसे पकड़ने के लिए पर तब तक तो छपाक से वो पीछे की और गिर चुकी थी और सीधा पंकज के सीने से जा कर चिपक गयी, प्रीती गिरने के बाद तेज़ी से हंसने लगी,

पंकज- तुझे लगी तो नहीं,

पंकज ने चिंता जताते हुए पूछा,

प्रीती- नहज भैया ाचा हुआ तुम यहीं थे नहीं तो पक्का मेरा सर हौदी की दीवार से लगता,

पंकज- मैंने बोलै था न की तेज़ धार है लगेगी पर मानती कहाँ है,

प्रीती- अरे भैया यहाँ मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा है तुम दांत रहे हो,

पंकज- ाचा ठीक है नहीं दांत रहा, ठीक है न तू,

पंकज ने उससे पूछा जबकि पंकज का भी बुरा हाल था क्यूंकि प्रीती के चूतड़ों के नीचे पंकज का लुंड भी डाब गया था पर सीधे की जगह तिरछा जिससे उसे भी दर्द हो रहा था,

प्रीती- हाँ भैया तुम्हारी वजह से बच गयी,

पंकज- अच्छा बस्सस एक मिनट थोड़ा साहहहह उठ,

पंकज ने अपने लुंड को आज़ाद करने के लिए प्रीती को उठाने के लिए उसको कमर से पकड़ कर उठाना चाहा, और जैसे hi पंकज ने अपना हाथ प्रीती की कमर पर स्पर्श कराया एक झटका दोनों को लगा, क्यूंकि, जहाँ पंकज ने सोचा था की उसके हाथ में प्रीती का सूट होगा पर उसका स्पर्श प्रीती की नंगी कमर से हुआ, प्रीती भी अपने भाई की उंगलियां नंगी कमर पर पाकर सिहर सी गयी,

दोनों की hi नज़र तभी सूट पर पड़ी जो उसके गिरने के कारन ऊपर हो गया था और सतह पर तैर रहा था,

प्रीती ने तुरंत ऐसे जताया जैसे कुछ हुआ नहीं और भैया के हाथ के सहारे थोड़ा उठने लगी पर उठने के लिए उसे अपने हाथ का भी सहारा लेना पड़ता तो उसने अपना पिछवाड़ा उठाकर पीछे हाथ टिकाया तो उसका हाथ सीधा अपने भैया के अकड़े हुए लुंड पर पद गया, जैसे hi दोनों को इसका एहसास हुआ दोनों के बदन में बिजली दौड़ गयी, अभी पंकज के हाथ प्रीती की नंगी कमर पर थे वहीं प्रीती के हाथ में उसके भाई का लुंड था हालांकि कच्चे के अंदर था, पर उसका कड़कपन अकार गर्मी वो सब महसूस कर पा रही थी, दोनों भाई बहन ज्यों के त्यों अटक गए, बहन की कमर को हाथों पर और उसका हाथ अपने लुंड पर महसूस कर पंकज का लुंड उत्तेजना में और कड़क हो गया और प्रीती के हाथ में झटके मरने लगा,

प्रीती को भी अपने हाथ में भैया का लुंड झटके मरता हुआ महसूस हुआ तो उसकी छूट भी बहाने लगी, दोनों को hi समझ नहीं आ रहा था क्या करें, पंकज को लगा की अगर उसका लुंड कुछ पल और प्रीती के हाथ में रहा तो वो झड़ने लगेगा, इसलिए पंकज ने पहल करते हुए प्रीती को बापिस नीचे खींचा उसकी कमर पकड़ कर

पंकज- अब नीचे हो जा प्रीती.

प्रीती ने भी पंकज की बात सुनी और अपना हाथ उसके लुंड से एक झटके में हटाया, उसके झटके की वजह से पंकज का लुंड जो अब तक कच्चे के अंदर था वो तंग वाली जगह से बहार आ गया और जैसे hi प्रीती बापिस बैठी उसकी चूतड़ों की दरार के बीच में फंस गया, प्रीती को भी अपने भैया के कड़क लुंड का एहसास अपने चूतड़ों के बीच हुआ, जिसका अहसास वो अपने हाथ में लेकर भी कर चुकी थी, प्रीती का बदन अब ठन्डे पानी में भी गरम होने लगा, उसे लगने लगा जैसे उसकी छूट में न जाने कितनी चीटियां एक साथ रेंग रही हैं, वहीं प्रीती की सांसें भी तेज़ हो गयी,

पंकज का भी वही हाल था, पर वो साथ hi ये देख रहा था की कहीं प्रीती को बुरा तो नहीं लग रहा,

पंकज- अब तो गर्मी नहीं लग रही तुझे?

पंकज ने चुप्पी को ख़तम करते हुए कहा, पर उसके हाथ अब भी प्रीती की नंगी कमर पर hi थे,

प्रीती- ुहममम न नहीं भैया,

प्रीती भी बोली, अब वो कैसा कहती के बदन के अंदर कितनी गर्मी बाद गयी थी,

पंकज- मुझे तो यहाँ बहुत ाचा लग रहा है,

पंकज ने अपने हाथों को उसकी कमर पर हल्का सा दबाते हुए कहा, और अपने मन की बात खड़ी की उसे प्रीती के साथ ऐसे बैठना ाचा लग रहा था, प्रीती भी अब इतना तो समझती hi थी, उसने भी अपने चूतड़ों को हल्का सा लुंड पर दबाते हुए बोलै- भैया मुझे भी बहुत ाचा लग रहा है,

पंकज को ये सुनकर ख़ुशी हुई की उसकी बहन को अब्बी तक तो कोई दिक्कत नहीं है, साथ hi उसने प्रीती की साँसों से ये अंदाज़ा लगा लिए की प्रीती भी गरम हो रही है जो उसके लिए बहुत ख़ुशी की बात थी, पंकज सोचने लगा इस मौके का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठाना पड़ेगा, भले hi थोड़ा रिस्क hi क्यों न उठाना पड़े,

पंकज- अब तो तुझे भूख लगने लगी होगी,

पंकज ने अपने हाथ से उसकी नंगी कमर को सहलाते हुए कहा तो प्रीती भी अपने भैया की उंगलियां बदन पर महसूस

प्रीती- नहीं इतनी तो नहीं भैया,

पंकज- मुझे तो लग रहो है,

प्रीती- ाचा तो क्या खाओगे भैया खाना तो हम लेकर नहीं आये,

पंकज- मेरा मन तो तरबूज़ खाने का कर रहा है,

पंकज ने जब ये कहा तो प्रीती को अपने भाई का लुंड अपने चूतड़ों के नीचे से हल्का सा उठता हुआ महसूस हुआ जिससे प्रीती समझ गयी की भाई कौनसे तरबूज़ खाने की बात कर रहे हैं, उनका इशारा तो उसके तरबूज़ों से है,

ये सोचकर hi उसकी सांसें तेज़ चलने लगी, वहीं पंकज भी अब जोश में आते हुए अपने हाथ को प्रीती की कमर से लेकर पेट तक चलने लगा था, प्रीती भी अपने भाई की हरकतों से गरम हो रही थी, वो तो अपने भाई का स्पर्श पाकर पानी में भी पिघल सी रही थी, पंकज का नंगा लुंड उसके चूतड़ों के बीच उसे एक ऐसा एहसास दे रहा था जो आज तक नहीं मिला, वहीं दूसरी और भैया के हाथ उसके पेट और कमर पर चलते हुए उसे तड़पा रहे थे,

प्रीती ने भी मन hi मन सोचा प्रीती यही सही समय है, अब मत रोक खुद को, अगर ऐसा मौका भी चला गया तो हो सकता है दोबारा भैया इतनी हिम्मत कभी नहीं दिखा पाएं, तुझे भी उनका साथ देना होगा,

प्रीती- पर भैया मेरा मन तरबूज खाने का नहीं है,

पंकज- तो फिर क्या खाने का है,

प्रीती- मेरा मन तो मजबूत रसीला सा गणना खाने का है,

प्रीती ने अपने चूतड़ों को पंकज के लुंड पर दबाते हुए कहा जो की पंकज के लिए साफ़ इशारा था,

पंकज- ाचा, हमारे खेत में बड़े मस्त और मोठे मोठे गन्ने हैं मैं तेरे लिए तोड़ कर लाऊंगा, तू खायेगी न मेरा गणना?

पंकज ने उसके पेट पर अब पूरी तरह हाथ चलते हुए कहा, अपनी बहन का नरम पेट अपने हाथों ने महसूस कर अब पंकज होश खोने लगा था,

प्रीती- हाँ भैयाहः तुम्हारा मोटा रसीला गणना मैं ज़रूर खांहि, पर खाने से पहले अचे से चूसूंगी,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह तुझे मज़ा आ जायेगा प्रीती मेरा गणना खाकर,

प्रीती- भैया बस तुम तरबूज़ hi खाओगे, आम नहीं चूसोगे?

प्रीती ने अपने हाथ अपने सीने पर रखते हुए बोलै तो पंकज की तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा,

पंकज- अरे आम तो मुझे बहुत पसंद हैं मन करता है बस चूसता hi रहूं,

पंकज को समझ आ रहा था प्रीती गरम है और उसका साथ दे रही है, वो इस मौके का अब अचे से फायदा उठाने के करीके सोचने लगा, एक चीज़ अछि थी तुबेल बाघ के कोने पर था तो और कोई इधर नहीं आता था सिवाए सत्तू काका के, और आज सत्तू काका कहीं गए हुए थे ये बात सुबह hi पंकज को पता चल गयी थी फिर भी वह प्रीती को लेकर इसीलिए आया था ताकि उसे अलग से समय मिल सके अपनी गदराई बहन के साथ,

पंकज- प्रीती तुझे और नहाना है?

प्रीती- हाँ भैया मेरा तो पानी से निकलने का मन नहीं कर रहा,

पंकज- वो तो ठीक है पर ऐसे hi रहेगी तो तेरे कपडे कैसे सूखेंगे,.

प्रीती- फिर क्या करें भैया, मेरा मन तो और नहाने का है,

पंकज- या तो एक काम कर अपने कपडे उतार के सूखा दे और ऐसे hi नहले जब तक नहाएगी तब तक कपडे सूख जायेंगे,

पंकज ने बड़ी हिम्मत से ये बात बोली थी, क्यूंकि इसपर प्रीती की प्रतिक्रिया कुछ भी हो सकती थी,

पर प्रीती ने तो जैसे आज कुछ ठान hi लिया था, वो तुरंत कड़ी हुई और बोली- भैया तुम बहार निकलो मैं तुम्हे कपडे देती हूँ तुम निचोड़ कर सूखने दाल देना,

पंकज को तो ये सुनकर जैसे यकीन नहीं हुआ और वो तुरंत उठ खड़ा हुआ और हौदी से बहार आ गया,

पंकज के उठते hi प्रीती बापिस बैठ गयी, और बैठे हुए hi अपना सूट उसने अपने हाथ ऊपर करके निकल दिया, पंकज को उसके सीने से ऊपर का हिस्सा पानी में साफ़ दिख रहा था, प्रीती ने तुरंत सूट उसके हाथों में पकड़ा दिया, जिसे पंकज ने लिया और अचे से निचोड़ कर पेड़ की दाल पर लटका दिया, और लटका के जैसे hi हौदी के पास आया तो प्रीती ने उसे अपनी सलवार भी पकड़ा दी, पंकज को यकीन नहीं हुआ की उसकी बहन उसके सामने खुले बाघ में सिर्फ ब्रा और कच्ची में नाहा रही है,

पंकज ने सलवार ली और उसे भी सूट के बगल में लटका दिया, और लटका के जैसे hi मुदा तो हैरान रह गया क्यूंकि प्रीती के हाथ में उसकी ब्रा और कच्ची थी जिन्हे वो तुबेल के पाइप पर hi तंग रही थी, और प्रीती ने अपने बदन पर अपना दुपट्टा लपेटा हुआ था, पंकज का लुंड तो कच्चे में उछाल कूद करने लगा, उसे यकीन नहीं हो रहा था उसकी बहन उसके सामने पूरी नंगी सिर्फ एक सूती से दुपट्टे को लपेटकर कड़ी है जो छुपा काम दिखा ज़्यादा रहा था, और उसके गीले बदन से बिलकुल चिपक गया था, दुपट्टे में वो लगभग नंगी hi दिख रही थी, दुपट्टा उसकी चूचियां पर चिपक गया था और पंकज को प्रीती के निप्पल और उसका भूरा घेरा भी साफ़ दिख रहा था,

प्रीती- लो भैया ये भी दाल दिए अब आ जाओ नहाते हैं आराम से,

पंकज कक यकीन नहीं हुआ ऐसी हालत में वो उसे अपने साथ नहाने को बुला रही थी, पंकज ने सोचा जब प्रीती इतनी खुल रही है तो उसे भी पीछे नहीं रहना चाहिए, और पंकज ने बगल में पड़ी पंत की जेब से अपना रूमाल निकला और उसे लेकर हौदी में आ घुस गया,

प्रीती की नज़र पंकज पर और उसके कच्चे में बने तम्बू पर थी,

प्रीती- अरे भैया ये रुमाल किस लिए,

पंकज- अरे वो बस इसलिए ये कहकर पंकज पानी में बैठ गया, और प्रीती ने देखा उसके हाथ पानी के अंदर चल रहे हैं और अगले hi पल उसने देखा भैया का हाथ पानी से बहत आया और उसमे उनका कच्चा था , प्रीती ये देख चौंक गयी की भैया अब बिलकुल नंगे हैं पंकज ने रुमाल को अपनी गॉड में रख लिया था,

पंकज- ले प्रीती इसे भी तंग दे उधर,

पंकज ने अपना कच्चा प्रीती की और बढ़ाते हुए कहा,

प्रीती ने हाथ बढाकर ऊसर पकड़ लिए, प्रीती के पूरे बदन में अब एक अजीब सी सिहरन हो रही थी ये सोचकर की उसके भैया और वो एक हौदी में बिलकुल नंगे हैं, प्रीती ने अपने भैया के कच्चे को पकड़ कर निचोड़ा तो उसमे से गिरते पानी को देखकर उसका मन हुआ इसे अपने चेहरे पर निचोड़े पर कैसे भी उसने खुद को रोका, प्रीती ने पंकज का कच्चा भी अपनी ब्रा और कच्ची के बगल में टांग दिया, पंकज पहले जहाँ बैठा था वहीं दोबारा बैठ गया दीवार से टिक कर,

प्रीती उसके सामने आई और तुबेल की और मुँह कर के घूम गयी तो पंकज के सामने दुपट्टे में से झांकते उसके चूतड़ थे, दुपट्टा दोनों चूतड़ों पर बिलकुल चिपका हुआ था, वो देख प् रहा था की सच में उसकी बहन की जवानी किस कदर भर के आई है, तरबूज जैसे चूतड़ थे बिलकुल गोल मटोल, उनके बीच को दरार जिसमे दुपट्टा फंसा हुआ था,

प्रीती मुद कर दोबारा से तुबेल की धार के नीचे अपना सर घुसकर नहाने लगी, और एक बार फिर से जैसे hi कड़ी हुई छाती पर धार पड़ी और फिर से पीछे की और गिरी पर इस बार सिर्फ गिरी hi नहीं, धार के वेग से लपेटा हुआ दुपट्टा भी ऊपर से खुल गया,

और जैसे hi पीछे को गिरी पंकज ने दोबारा उसे बचने के लिए अपनी बाहें खोल दी, प्रीती का दुप्पटा तो खुलकर पानी के ऊपर तैरने लगा और वो बिलकुल नंगी होकर अपने भैया के ऊपर गिरी, पंकज का रुमाल तो उसके हाथ हटते hi बाह गया,

पंकज- अरे संभल के, पंकज ने उसकी कमर को पकड़कर उसे नीचे खींचते हुए कहा, और उसे जैसे पहले बैठी थी वैसे hi बिठाने लगा,

प्रीती भी पंकज का इशारा पाकर अपने चूतड़ों को थोड़ा उठाई और पीछे होकर अपने भैया के सीने से पीठ टिका कर नीचे हो गयी पर इस बार पहले जैसे हालात नहीं थे, दोनों भाई बहन नंगे थे जैसे hi प्रीती नीचे हुयी नीचे से पंकज का खड़ा लुंड सीधा उसकी छूट से टकराया तो दोनों की आह्ह्ह्हह निकल गयी,

प्रीती और पंकज दोनों ज्यों के त्यों वैसे hi रुक गए, प्रीती को अपनी छूट के द्वार पर भैया के लुंड का गरम सूपड़ा महसूस कर गंगना उठी, वहीं पंकज भी लुंड पर बहन की छूट की गर्मी महसूस कर तड़प उठा, दोनों में से कोई न कुछ बोल रहा था और न hi हिल रहा था, दोनों को समझ नहीं आ रहा था क्या करें, प्रीती अब्बी भी आधी उठी हुई थी पंकज के हाथ उसकी कमर पर थे उसका लुंड उसकी छूट के होंठों में लगा हुआ था

कुछ पल बाद पंकज ने थोड़ा होश संभाला और प्रीती की कमर को नीचे की और दबा दिया तो उसका लुंड का टोपा खछ से बहन की छूट के होंठों को चीरता हुआ अंदर घुस गया,

प्रीती के मुँह से एक अह्ह्ह्ह निकल गयी,

प्रीती- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाहः, ुहममम..

उसको दर्द का एहसास अपनी छूट में हुआ, पंकज ने हाथ कमर से हटाकर प्रीती को बाहों में भर कर खुद से चिपका लिए,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह प्रीती ओह्ह्ह्हह्ह, बहुत्तट्ठ गरमममम है टूउउउउ,

प्रीती- अह्ह्ह्ह भैयाहः ड़ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा है,

पंकज- ये दर्द तो बस्सस कुछ देर का है बहन,

ये कहते हुए पंकज उसकी छुछियां सहलाने लगा प्रीती और मस्तियाने लगी,

पंकज ने धीरे धीरे से उसे और नीचे खिसकना शुरू कर दिया और फिर एक बार तगड़ा धक्का लगाकर अपना लुंड जड़ तक अपनी बहन की छूट में घुसा दिया,

प्रीती- अह्ह्ह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मार दियाहहहहहह अह्हह्ह्ह्ह फाड़ डीइइइइइइइ अपनीई बहन की छूट ओह्ह्ह्हह्ह भेनचोद,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह ऎसी चुत कभी नाहीईई देखीयी मेरी बहन नं आआह्ह्ह्हह्ह ले लिए अपने भाई का लौदाअहह, .

प्रीती को दर्द भी हो रहा था साथ hi बेहद उत्तेजना भी, उसके भैया का लुंड उसकी छूट में था, उसका कुंवारा पैन उसके भैया ने मिटा दिया था, हालाँकि उसकी छूट की झिल्ली तो वो खुद hi गाजर से पहाड़ चुकी थी, पर असली कुंवारापन तो एक लुंड hi तोड़ता है जो अभी उसके भैया का था,

पंकज को तो ऐसा लग रहा था की वो जन्नत में है ठन्डे पानी के अंदर भी उसे लग रहा था उसका लुंड किसी गरम भट्टी में hai,itni गरम और कासी हुई छूट थी उसकी बहन की,

प्रीती को धीरे धीरे दर्द से आराम मिलने लगा, अब उसे अपने अंदर फंसा हुआ भैया के लुंड की गर्मी से पूरे बदन में सिहरन होने लगी, उसकी कमर खुद से hi धीरे धीरे घूमने लगी तो पंकज भी समझ गया की उसकी बहन चुदाई के लिए तैयार है, पंकज ने उसकी कमर को पकड़ कर उसे अपने लुंड पर उछालना शुरू कर दिया,

पंकज - अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह बहनआह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह प्रीती क्या गजब की कासी हुई छूट है तेरी,

प्रीती- अह्ह्ह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुंहारा लुँड्ड्ड भी बहुत्तत्त माज़आह्ह्ह्ह दे राहाआअह्ह्ह्ह है, आज तक ऐसाःठ्ठ माज़आह्ह्ह्ह नाहीइइइइइइ मिलाआहहहह,

पंकज अपनी बहन के मुँह से लुंड सुनकर और उत्तेजित हो गया, और नीचे से तगड़े धक्के लगाने लगा, दोनों की चुदाई का गवाह बनता हुआ पानी लगातार छपाक छपाक हो रहा था,

प्रीती- आह्हः भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह मेंनननन gayiiiiiiiiii,

प्रीती तो अपनी पहली चुदाई ज़्यादा देर नहीं सह पाई थी और अपने भैया के लुंड पर झड़ने लगी थी, वहीं पंकज भी अपनी बहन की छूट की गर्मी से पिघल रहा था, पंकज ने प्रीती की छूट में कुछ तगड़े धक्के लगाए और फिर अपना रास अपनी बहन की छूट में भर दिया, प्रीती तो झाड़ कर बिलकुल बेजान सी होकर पीछे अपने भैया से टिक कर लेती थी वहीं पंकज भी अपनी सांसें थमने लगा, उसका लुंड अब भी कड़क था और प्रीती की छूट में समाया हुआ था,

प्रीती- ुहम्म भैयाहः,

पंकज- हाँ प्रीती,

प्रीती- तुम्हारा ये तो अब भी खड़ा है,

पंकज- तेरे जैसी बहन की छूट में रहेगा तो ये कैसे बैठ सकता है,

प्रीती- तोह और प्यार करोगे अपनी बहन को?

पंकज- अभी तो शुरू hi हुआ है बहना,

ये कहकर पंकज उठा साथ hi प्रीती को भी उठाया उसका लुंड भी प्रीती की छूट से निकल गया, और उसका रास भी प्रीती की छूट से बहकर बहार आने लगा तो प्रीती ने अपनी छूट को धार के आगे कर सब बहा दिया,

पंकज प्रीती को पकड़ कर हौदी के बहार लाया और उसे बगल में पड़े पत्तो पर लिटा दिया, बाघ में बिलकुल नंगी लेती उसकी बहन सचमुच कामुकता की मूरत लग रही थी, प्रीती लेते हुए उसे देख मुस्कुरा रही थी,

प्रीती- आ जाओ भैया कब तक खड़े होकर देखते रहोगे,

अब अगर कोई बहन नंगी होकर किसी को बुलाये तो वो कैसे मन कर सकता है, यही पंकज के साथ हुआ वो तुरंत अपनी बहन के ऊपर झुकता चला गया, और अपना बदन प्रीती के ऊपर बिछा दिया, खुद को अपनी कोहनी के बल पर रोक अपना चेहरा ठीक प्रीती के चेहरे के सामने ले आया,

प्रीती की सांसें फिर से गरम हो रही थी, उसका बदन रक बार फिर से उत्तेजना की आग में तपने लगा था,

पंकज- हाय प्रीती तेरे होंठ कितने मीठे और रसीले लग रहे हैं,

प्रीती- भैया तुम इन होंठों का रास पीना चाहते हो?

पंकज- तू पिलाएगी?

प्रीती- अपने भैया को नहीं पिलाऊंगी तो किसे पिलाऊंगी,

बस प्रीती का इतना कहना था की पंकज ने अपने होंठ अपनी बहन के होंठों से मिला दिए और उसके होंठों को चूसने लगा, प्रीती भी उसका पूरा साथ देने लगी, दोनों भाई बहन एक दुसरे के होंठों को ऐसे चूस रहे थे जैसे खा जायेंगे,

प्रीती के हाथ अपने भैया की पीठ पर घूम रहा थे, खैर काफी देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो पंकज ने उसके गाल और पूरे चेहरे को चूमा, चेहरे को चूमने के बाद पंकज नीचे खिसका और उसकी गर्दन को चाटने चूमने लगा, प्रीती अपने भाई की हरकतों पर आहें भर रही थी, गर्दन और छाती को चूमते हुए पंकज नीचे प्रीती की छूछीयों के सामने आ गया जिनकी सुंदरता देख उसके मुँह से पानी गिरने लगा, प्रीती की चूचियां हालाँकि पूर्वी और उसकी मम्मी से छोटी थी पर उसकी उम्र के हिसाब से काफी भरी हुई थी ऊपर से भूरे रंग के गोले के बीच में सख्त निप्पल सचमुच hi बनाने वाले ने प्रीती को बहुत म्हणत से बनाया था, पंकज का मुँह अपनी बहन की एक चुकी पर झुकता चला और जैसे hi उसने एक चुकी को मुँह में भरा प्रीती के मुँह से आह्ह्ह्हह भैयाहः निकल गया,

पंकज ने जितना हो सकता था उतना मुँह खोल कर अपनी बहन की छुच्छी को मुँह में भरा और चूसने लगा, वहीं प्रीती तो उसके नीचे मचलने लगी, उसका सीना ऊपर उठ गया, उसके हाथ पंकज के सर के पीछे आकर उसे अपनी छुच्छी पर दबाने लगे,

पंकज तो पागलों की तरह अपनी बहन की छुच्छी पर टूट पड़ा साथ hi दूसरी चुकी को दुसरे हाथ से दबाने लगा, प्रीती की छुच्छी उसके हाथ में पूरी भर कर आ रही थी इससे अंदाज़ा लग सकता था की वो कितनी भरी हुई थी, अगले 20 मिनट्स तक पंकज अपनी बहन को छूछीयों को बदल बदल कर पीटा रहा और प्रीती उसके नीचे लेती अह्हह्ह्ह्ह करती हुई तड़पती रही, चूचिओं के बाद पंकज प्रीती के पेट और कमर को चाटने लगा, कोई भी हिस्सा वो अपनी बहन का बिना चखे छोड़ना नहीं चाहता था, पंकज ने जब प्रीती की नाभि चूसी तो प्रीती तो पागल सी हो गयी और अपनी कमर उछलने लगी थी, माना अभी बेहोश हो जाएगी,

नाभि के बाद पंकज ने प्रीती की टांगो के बीच जगह ली और फिर अपनी बहन की प्यारी छूट को देखा, एक दरार दो चिपके हुए होंठ, बिलकुल गीले और रसीले, जिनमे से रास अब भी बहार आ रहा था, पंकज ने तुरंत अपने होंठ अपनी बहन की छूट पर लगा दिए और अगले कुछ देर तक प्रीती नीचे पड़ी झात्पटती रही कभी अपनी छूछीयों को मसलती तो कभी पंकज को पकड़ कर अपनी छूछीयों पर दबाती, पंकज कक तोह जैसे बरसो के बाद कुछ खाने को मिला था ऐसे प्रीती की छूट को चाटता गया, जल्दी hi प्रीती का पूरा बदन अकड़ने लगा वो बुरी तरह से मचलने लगी उसकी कमर ने अकड़ के एक धनुस का अकार ले लिए और फिर उसकी कमर ने झटके मरना शुरू कर दिया, उसकी छूट से रास के साथ साथ मूट की धार भी निकल कर पंकज के मुँह में भरी और फिर उसके चेहरे को भीगने लगी, पंकज अपनी बहन की छूट का शरबत जितना हो सकता था उतना पी गया, झड़ने के बाद प्रीती दोबारा से बिलकुल बेजान सी हो कर गिर गयी, उसको कूट से अब भी मूट की धार निकक रही थी, पंकज समझ गया की झड़ते हुए मूतने की ये कला ज़रूर उसके अंदर उसकी माँ से आई है, क्यूंकि रात में उसकी मम्मी भी झड़ते हुए आपने मूट बहा रही थी,

पंकज ने अब अपना ध्यान अपने तपते हुए लुंड पर लगाया और उसे पकड़कर प्रीती की छूट के मुहाने रख दिया, प्रीती ने अपनी छूट पर लुंड को महसूस कर हांफते हुए आँखें खोली और बोली- घुसा दो भैया, अह्ह्ह्ह छोड़ दो अपनी बहननाआअह्ह्ह,

प्रीती की बात पूरी होते hi पंकज ने अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया और इस बार बिना इंतज़ार किये ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा, हर धक्के पर प्रीती की मोती छुछियां उसकी छाती पर नाच रही थी, पंकज दोनों चूचियों को पकड़ कर उन्हें मसलते हुए दनादन छोड़ने लगा, चुदाई की आवाज़ तुबेल की आवाज़ के साथ मिल रही थी,

प्रीती- आह्हः भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ो अपनीईई बहन को आह्ह्ह्हह भेनचोद बनने का सुख ले लो,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न प्रीती इससे बड़ाआहहह सुखहहह कोई नाहीईई जो अपनीई बहनंन को छोड़ने में. है, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या गरम छूट है टेरिइइइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कितनी केसीई हुई है,

प्रीती- अह्हह्ह्ह्ह तो छोड़ छोड़ कर इसी ढीली कार्डो भैया, अपने मोठे लुंड के अकार की बनायहहह दोऊ, अह्हह्ह्ह्ह कित्नाःह्ह्ह मज़ाआहहह आता है छुड़ाए में,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह बहुत्तट्ठ ज़्यादा आह्ह्ह्हह खासकर अपनीईई बहन को छोड़नी में, अह्हह्ह्ह्ह,

प्रीती- मैंन तो कब्ज़ी तदपपपप रहीए थी भैयाहः तुमहारी लुंड के लिए,

प्रीती ने अपनी छूट में धक्के लेते हुए अपनी टाँगे पंकज के पीछे कस्ते हुए कहा,

पंकज- अह्हह्ह्ह्ह सचहहह में? तड़प तो मैं भी रहा था तुझे छोड़ने के लिए, अह्ह्ह न जाने कबसे,

पंकज ने प्रीती की कमर को थाम लिए और सटासट धक्के लगते हुए बोलै

प्रीती- अह्हह्ह्ह्ह भैयाहः फिर क्यों इतना टाइम निकल दियाहहहहहह छोड़ देते अपनी इस बहन की प्यासी छूट को अह्हह्ह्ह्ह,

पंकज- गलती हो गयी मेरी प्यारी बहनआह्ह्ह्ह पर अब सी तो तुझी बिना चोदे एक दिन भी नाहीई जाने दूंगाःह्ह्ह,

प्रीती- अह्ह्ह्ह हॉँण्णन भैयाहः रोज़ छोड़ना मुझीऐ अह्ह्ह्ह, परररर भाभी को पता चल गया ताऊ,

पंकज- वो तो खुद्द्द मेरा लुंड पकड़ कररर तेरई छूट में डालेगी, वो और मैं मिलकर तुझे छोड़ने की योजना बनाते थी, अह्हह्ह्ह्ह

प्रीती- अरे वाह अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ, मज़ाआ आएगा भाभीईईई के साथ,

प्रीती और उत्तेजित होकर बोली, और तेज़ी से छोड़ने को कहने लगी, पंकज भी हर बढ़ाते पल के साथ और उत्तेजित होकर अपनी बहन की छूट में धक्के लगा रहा था और करीब 20 मिनट्स की चुदाई के बाद सक बार फिर से उसका रास छूटने को हुआ तो इस बार उसने अपना लुंड प्रीती की छूट से निकल लिए और अपने रास की धार प्रीती के पेट और छाती पर मारकर उन्हें अपने रास से भर दिया, प्रीती भी एक बार और अपने भैया के साथ झाड़ गयी थी और हांफ रही थी, कुछ पल बाद उसने अपने पेट से पंकज के रास को उंगली पर उठाया और सूंघने लगी और फिर अपने मुँह में उंगली डालकर चाट लिए और बोली- ये तो मस्त है भैया, अगली बार सीधा मुँह में चाहिए मुझे,

पंकज अपनी बहन की बातें सुन हंसने लगा, उसे लगा नहीं था की उसकी बहन इतना खुल जाएगी पर जो हो रहा था उससे वो बेहद खुश था,

प्रीती जल्दी hi अपने पेट और चूचियों से अपने भाई का रास उठा कर चाट गयी, दोनों भाई बहन एक दुसरे के बदन से खेलते हुए एक बार फिर से नहाये और तब तक प्रीती के कपडे भी थोड़े सूख गए थे तो उन्हें पहन कर वो तैयार हो गयी क्यूंकि कब तक बाघ में रहते, पंकज ने भी तुबेल बंद किआ और चाभी वैसे hi रखड़ी जहाँ से उठाई थी

जल्दी hi दोनों मोटरसाइकिल के पास थे,

प्रीती- भैया ये तो ख़राब है न,

पंकज- ाभ्ही सही हो जाएगी, पंकज ने झुककर तेल के बटन को घूमते होते कहा,

प्रीती- मतलब तुमने जानकार मोटरसाइकिल ख़राब होने का नाटक किआ था, क्यों?

पंकज- नाटक किआ तभी तो ये सब हुआ,

पंकज ने मोटरसाइकिल स्टार्ट करते हुए कहा,

प्रीती- अरे भैया नाटक की ज़रुरत hi नहीं थी तुम एक बार कहते तो ऐसे hi छूट खोल कर लेट जाती,

प्रीती ने अपने भैया के पीछे मोटरसाइकिल पर बैठते हुए कहा,

पंकज- पहले पता नहीं था न,

दोनों घर की और निकल गए, चाबी से टाला खोलकर घर के अंदर आये पंकज ने मोटरसाइकिल भी अंदर कर दी, अभी तो सत्तू चाचा थे नहीं तो पंकज के लिए कोई काम था नहीं, प्रीती तो जाकर एक खाट पर पसर गयी किस्मत से बिजली आ रही थी तो पंकज ने भी अपनी बहन के बगल में जगह ले ली,

पंकज ने एक हाथ बढाकर प्रीती की चुकी पर रख लिए तो प्रीती बोली- भैया बड़ी थकावट हो गयी है थोड़ा आराम करने दो न,

पंकज- बिलकुल वैसे थक तो मैं भी गया हूँ,

प्रीती- हाँ थोड़ा आराम कर लेते हैं,

और दोनों आँखें बंद करके लेट जाते हैं,

करीब 15 मिनट्स बाद का दृश्य

दोनों भाई बहन बिलकुल नंगे होकर एक दुसरे के साथ 69 के आसान में होते हैं पंकज नीचे से बहन की छूट चाट रहा था वहीं प्रीती भाई का लुंड किसी आइसक्रीम जी की तरह चूस रही थी,

वैसे वासना का खेल सिर्फ यहीं नहीं चल रहा था, इनके घर पर कायमगंज में भी कुछ ऐसा hi हाल था पूर्वी नीचे लेती हुई थी और रेनू उसके मुँह पर बैठकर अपनी छूट को सेवा बहु से करवा रही थी और जल्दी hi झड़ते हुए पूर्वी के मुँह में अपने मूट कक धार मरने लगी, जिससद पूर्वी को अपनी सास के मूट का स्वाद तो मिला hi साथ में आप उनके मूट से अपना चेहरा भी बईगा के और उत्तेजित हो गयी,

रेनू झड़ने के बाद बहु के मुँह से हटकर बगल में लेट गयी, और हांफने लगी कुछ पल बाद पूर्वी उठी और अपनी छूट अपने सास के मुँह पर रखड़ी तो रेनू ने नहीं अपनीइ बहु की छूट चेतना शुरू करने के लिए मुँह खोला, पर इससे पहले वो चाट पाती पूर्वी की छूट से एक धार उसके मुँह में सीढ़ी पड़ी जैसे जी रेनू को एहसास हुआ की ये बहु का मूट है उसके बदन में एक अलग सी उत्तेजना जाएगी की वो अपनी बहु का मूट में नाहा रही हैऔर वो तुरंत अपनी बहु का मूट मुँह में भरवाने लगी बाकी सारा उसके मुँह से होते हुए उसके चेहरे और छाती पर गिर रहा था, पूर्वी का मूतना बंद हुआ तो उसने अपनी सास को देखा मुँह चूचियां तक पूरी मूट से भीगी हुई, मुँह अब भी खुला हुआ और उसमे अब भी मूट भरा हुआ था,

उसकी सास ने मुँह बंद किआ और मूट को मुँह में भरे हुए hi पूर्वी के चेहरे पर मुँह से पिचकारी मरने लगी, पूर्वी अपनी सास के मुँह से अपना hi मूट अपने मुँह में पकड़ने लगी, जब थोड़ा सा मूट बचा तो सास बहु उसे hi एक दुसरे के मुँह उड़ेलते हुए उससे खेल रही थी,

खैर ये खेल ख़तम हुआ तो दोनों मूट से नहीं हुई सास बहु एक दुसरे से चिपक कर लेट गयी, रेनू- अह्ह्ह बहु क्या से क्या बना दिया tune,bara आज मैं अपनी बहु का मूट पिने वाली सास बन गयी,

पूर्वी- क्यों मम्मी तुम्हे मज़ा नहीं आ रहा?

रेनू- मज़ा नहीं आता तो तेरा मूट क्यों मुँह में लेती, ाचा वो सब छोड़ ये बता,

पूर्वी- क्या?

रेनू- किस किस से चूड़ी है तू, और टेरर घर में क्या क्या होता है क्या राज़ जैन हैं तेरे परिवार के,

पूर्वी ये सुन कर मुस्कुराई और रेनू को आँखों में देखा, और मुस्कुराई...

जारी रहेगी
 
ये कहके सागर अपनी मम्मी को लेकर जाने लगा,

नाना- अरे तो इसके लिए अंदर क्या जाना? यहीं कर बीटा, मुझे भी पोते और बहु की चुदाई देखनी है,

मामी- ठीक है बाबा जैसी तुम्हारी मर्ज़ी,



अपडेट 228

चोदामपुर

अपने ससुरजी की बात मान कर मामी ने तुरंत अपने कपडे निकले और नंगी हो गयी, वहीं सागर भी बिलकुल फुर्ती में नंगा हुआ, हम सब घेरा बनाकर चारो और बैठे थे, और मामी सागर हमारे बीच वाली खत पर थे और नंगे होकर एक दुसरे पर टूट पड़े, सागर अपनी मम्मी के रसीले होंठो को पागलों की तरह चूसने लगा तो मामी भी उसका साथ देते हुए उसके लुंड हाथों में लेकर सहला रही थी,

मां अपनी पत्नी और बेटे को वासना का खेल खेलते हुए उत्तेजित हो रहे थे, और साथ hi अपने लुंड को सहला रहे थे, किरण भी अपने माँ और भाई को देखकर अपनी छूट रगड़ रही थी, और भले hi उसने मन किआ हो पर वो जानती थी जल्दी hi उसके भाई का लुंड उसकी छूट की सैर भी करेगा,

मां- दिखा दे बीटा आज अपनी माँ को की उसने क्या मर्द पैदा किआ है,

मां जोश में आते हुए बोले,

मौसी- अरे बिलकुल दिखायेगा अभी देखना तेरी बीवी की चीखें निकलवा देगा,

नाना- जिस छूट से निकला है उसी में दोबारा जाने का मौका हर किसी को नहीं मिलता,

मां- जैसे मुझे नहीं मिला,

राजन चाचा- पर अपनी दोनों बहनो की छूट में तो खूब घूम लिए न, ये मौका भी नहीं मिलता लोगो को,

मौसा- हाँ हमें तो ये भी नहीं मिला,

पल्ली- पर तुम्हे मेरी और किरण जैसी जवान छूटों का तो मज़ा मिला है मौसा,

मौसा- ये तो है साथ hi, ममता भाभी और बड़ी भाभी (सभ्य) जैसी रसीली छूटें भी तो मिली हैं जी भर के,

ममता चची- और का भैयाहः तुम्हारे लिए तो हमेशा टांगें खुली हैं हमारी, आ जाओ और घुस जाओ,

नाना- हाय ऐसा परिवार शायद hi दुनिया में कहीं होगा, इससे ज़्यादा ख़ुशी हमें कब्जी नहीं हो सकती,

पापा- परिवार ख़ुशी के लिए hi तो होता है बाबा,

पल्ली- अरे बातें तो कर रहे हो पर चुदाई पर भी तो ध्यान दो,

हम सबका ध्यान चुदाई की और खींचते हुए कहा, जहाँ सागर अब मामी की चूचियां कास कास के मसलते हुए चूस रहा था और मामी सिसकियाँ भर रही थी,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह चुसस्स लिए आअज साराआआअ दूध पीजा अपनी माँ का,

माँ- बचपन से इसी दूध को पीकर बड़ा हुआ है, इन्ही चूचियों पर चिपका रहता था और आज भी चिपका हुआ है,

पापा- अह्हह्ह्ह्ह सही में जो मादरचोद बनने का नसीब बड़ी किस्मत से मिलता है,

उनकी चुदाई देख कर बाकी सब भी उत्तेजित हो रहे थे, मैं भी अपने लुंड को धार लगा रहा था,

सागर और मामी की उत्तेजना भी साफ़ दिखाई दे रही थी, चूचियों को चूसने के बाद सागर अपनी मम्मी के पैरों के बीच आया और अपना लुंड पकड़ कर मामी की छूट से लगा दिया,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह बाबेताहहह अब्बब्बब मत तडपाठ घुसा दे अपनी मम्मी की छूट में अपना गरम लोढ़ा,

मामी बे उत्तेजित होते हुए कहा,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआनं मम्मी, कितनी गरमममम चुत है तुम्हारी मुझे बहार सही गर्मी महसूस हो रही है,

मां- हाँ बेटाः तेरी माँ की छूट बहुत गरम रहती है, शायद बेटे के लुंड से उसकी गर्मी शांत हो जाये,

माँ- शांत भी हो सकती है और भड़क भी सकती है,

मामी- अरे बातें बाद में करना, तेरी माँ टंगे फैलाये लेती है नंगी तेरे सामने अब जल्दी घुसा दे और बंजा मादरचोद,

सागर इस पल को खुल के जीना छह रहा था, उसके लिए जीवन का सबसे खास पल hi था, वो अपनी माँ को छोड़ने वाला था और उसमे इतने सरे लोग उसके परिवार वाले रिश्तेदार सब उसका साथ दे रहे थे, उसके खुद के पापा उसका उत्साह बढ़ा रहे थे ऐसा रोज़ नहीं होता ना hi सबके साथ होता है,

सागर ने ये hi सोचते हुए वहां मौजूद सबकी नज़रों में एक बार देखा जैसे कह रहा हो तुम लोग साक्षी हो इस अद्भुत पल के और फिर अपनी माँ की आँखों में देख कर एक धक्का लगाया तो माँ बीटा दोनों के मुँह से एक साथ अह्ह्ह्ह निकली, और उनके साथ साथ हम सबकी भी, सागर का आधा लुंड मामी की छूट में घुस गया, मामी बिना पलकें झपकाए सागर को देखती हुई बोली- बन गया मेरा बीटा मादरचोद,

सागर- और तुम बीटा छोड़,

सागर ने एक धक्का और लगाकर पूरा लुंड मामी की छूट में घुसा दिया,

मामी- अह्ह्ह तो अब अच्छे से छोड़ अपनी माँ को बेटा,

हम सबने भी ख़ुशी मन कर उनका साथ दिया और मामी और सागर का हौसला बढ़ाया, इधर सागर तो मामी का इशारा पाते hi मामी की छूट में दनादन धक्के लगाने लगा, अब हम लोगो के लिए भी रुकना थोड़ा मुश्किल होता जा रहा था,

और धीरे धीरे घर में एक सामूहिक चुदाई का माहौल बनता जा रहा था, राजन चाचा ने तो मौसी को अपने नीचे बिठा कर अपना लुंड उनके मुँह में भी घुसा दिया था, नाना भी जबसे खुले थे तो पूरे खुल चुके थे और अब हर तरह का और हर किसी का मज़ा लेना चाहते थे, और नाना ने पल्ली को अपने पास बुलाया गॉड में बैठने को कहा, तो पल्ली उनके पास आई पर गॉड में बैठने से पहले अपने सरे कपडे उतर कर नंगी हो गयी और नाना की गॉड में चढ़ गयी, नाना उसकी समझदारी देख बड़े खुश हुए और उसकी छुछियां मसलते हुए उसके होंठ चूसने लगे,

होंठ तो किरण भी चुसवा रही थी पर मुझसे, मैं और किरण एक लम्बे चुम्बन में खोये हुए थे, वो भी बिलकुल नंगे होकर, उसके रसीले कोमल होंठों को चूसने में बेहद मज़ा आ रहा था, जब हमारे होंठ अलग हुए तो मैंने और उसने एक साथ मामी और सागर को देखा जो की सं भूल कर एक दुसरे में खोये हुए थे,, सागर झुककर मामी के होंठों को चूसते हुए उन्हें छोड़ रहा था, किरण ने अपने भाई और माँ को देखा फिर नेरा लुंड पकड़ कर नीचे बैठ गयी और मारा लुंड चूसने लगी,

लुंड तो माँ भी नीचे बैठकर चूस रही थी और वो भी पापा और मां के, मां को अपने जीजा के सामने अपनी बहन से लुंड चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था, उनकी बहन उनका लुंड अपने पति के सामने चूस रही है इस एहसास से मां का बदन सिहर रहा था, पापा भी अपनी पत्नी को उसके भाई के साथ बांटकर ख़ुशी से लुंड चुसवा रहे थे,

मां- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीईजीईउह्ह्ह ओह्ह्ह जीजा क्यायहहह लुंड चूसती है नाहहह जीजी,

पापा- हाँ रे जमुना तेरी बहन का चुदैई के मामले में कोई तोड़ hi नहीं है, जो करती है मज़ा आ जाता है,

मां- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुम्हारे जैसे जीजा जीजी पाकर भाहहःगगगगग खुल गए मेरे तो,

पापा- अरे अब नौटंकी मत कर और माज़व ले,

पापा ने उन्हें चिढ़ाते हुए कहा,

मां- अरे जीजा तुम भी,

माँ नीचे बैठी अपने पति और भाई की बातें सुनते हुए दोनों के लुंड को चूस चूसकर मज़े ले रही थी और दोनों की सेवा कर रही थी,

उनके बगल में hi अनुज और मौसा भी पापा और मां की तरह सिहर रहे थे क्यूंकि उनके लुंड ममता चची बदल बदल कर चूस रही थी और दोनों की सिसकियाँ निकलवा रही थी,

इधर सागर ने अपनी मम्मी के पीछे अब जगह लेली थी और मामी की एक टांग उठाकर ताबड़तोड़ धक्के उनकी छूट में लगा रहा था,

मामी- अह्ह्ह्ह uhmmmhaaaaaaaaaaaaa हांण बताहहहह ऐसी होई,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मममममिययययययय नाहहहह जानीयी कीतनीई बहार एई सोच कर मैनीई मुठ्ठ मारी थी, की मैं तुम्हे छोड़ रहा हूँ,

मामी- हैं बेटाझ अच्छाः हुआए हम अह्ह्ह यहाँन आये तू तेरी इच्छा पूरी हुई और मुझे भी मेरे बेटे काअह्ह्ह लुंदड़ मिला,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चोदामपुर में आकर माज़आह्ह्ह्ह आ गया,

किरण- अह्हह्ह्ह्ह क्याहहह बातें होऊ रहियी हैं माँ बेटी में,

किरण ने उनके बगल में लेटते हुए पूछा और मैंने किरण के पीछे जगह ली और किरण को बिलकुल वैसे hi तंग उठाकर छोड़ने लगा जैसे सागर अपनी मम्मी को छोड़ रहा था,

दोनों माँ बेटी बिलकुल एक दुसरे के सामने से चिपक गयी दोनों की चूचिया भी चिपकी हुई थी आपस में, मैंने पीछे से किरण की छूट में धक्के लगाने शुरू किये इधर से सागर मामी की छूट में लगा रहा था दोनों माँ बेटी एक दुसरे को पकड़ कर आहें भरते हुए एक साथ चुद रही थी, किरण ने आगे बढ़कर अपनी मम्मी के के होंठों को मुँह में भर लिए, मामी भी उसका साथ देने लगी,

मामी के नीचे वाले होंठों में बेटे का लुंड थातो ऊपर वालों में बेटी के होंठ, अपनी बहन को बगल में छुड़वाते देख सागर और उत्तेजित होकर अपनी मम्मी को छोड़ने लगा,

पल्ली अब नाना की गॉड में नहीं बल्कि उनके सामने लेती थी और नाना उसकी छूट में अपनी जीभ चला रहे थे और उसकी छूट को मज़े से चाट रहे थे,

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह नानाआअह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह तुम्हारिई खुरदरी जीभह बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दे रही है,

नाना ने सुना और तेज़ी से छूट चाटने लगे, तभी पल्ली को अपने मुँह पर एक रसीली छूट आती हुई दिखी तो पल्ली का मुँह अपने आप खुल गया और अगले hi पल मौसी अपने चूतड़ों को पल्ली के ऊपर टिका कर बैठ गयी, और फिर आगे झुक kar.Palli के ऊपर 69 में आ गयी मौसी और नाना दोनों को जीभें पल्ली की छूट पर चलने लगी, इधर पल्ली ने मौसी की छूट चाटते हुए देखा की उसके पापा भी उसके सर के पीछे आ गए हैं और उन्होंने अपना लुंड पल्ली के मुँह में घुसा कर दो चार बार चटवाया फिर पल्ली को इशारा किआ तो पल्ली ने खुद अपनर मुँह से लुंड निकल कर मौसी की गांड पर लगा दिया और चाचा ने बिना देरी किये अंदर भी घुसा दिया, नाना ने भी अपनी जीभ को पल्ली की छूट से अलग किया और फिर सीधा होकर अपना लुंड पल्ली की छूट के पास लाये तो मौसी ने उसे चूस कर पल्ली की छूट में घुसा दिया,

नाना- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह Palliiiiiiiiii बिटियाः ओह्ह्ह्हह्ह क्या गरम जवान छूट पाई है तूने,

पल्ली और मौसी दोनों के hi मुँह बंद थे, तो राजन चाचा ने जवाब दिया,

राजन- सहिई कहा बाबाःह्ह्ह्हह्ह, ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी बितीयआह्ह्ह्ह की छूट बड़ी गरम है,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह जैसे हुमारी बितीयहह की गांड भी गरम है,

राजन- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह बिलकुल सही कहा, बहुत्तट्ठ गरम गांड है तुम्हारी बितीयआह्ह्ह्ह की,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह हम दोन्यू अह्ह्ह बाप मिलकर एक दुसरे की बितीयआह्ह्ह्ह को छोड़ रहे हैं एक दुसरे के सामने अह्हह्ह्ह्ह क्या दृश्य है ये भी,

राजन- अह्हह्ह्ह्ह सही में बबआहहह, बहुत मज़ा आ रहा है,

दूसरी और जहाँ बाप बेटी नाना और मौसी के साथ व्यस्त थे तो माँ यानि हमारी प्यारी ममता चची अनुज से अपनी गांड मरवा रही थी, अनुज चची को कुटिया की तरह झुककर ऊपर चढ़ कर उनकी गांड मार रहा था,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह मेरी रंडी कुटिया चायःहची अह्हह्ह्ह्ह क्याहहह गांड है तेरी,

चची- अह्हह्ह्ह्ह तो और जोर से छोड़ न अपनी कुटिया को मेरे कुत्ते, अह्हह्ह्ह्ह घुसा दे पूरा लोढ़ा,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह लुह्हह्ह छाछी,

चची- अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi अपनी रनडीईई माँ की तरह छोड़, अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माहहहह और तुम में क्या फ़र्क़ ही छाछी दोन्यू hi मस्तट्ठत चुड़क्कड़ घोड़ियां हो,

अनुज ने लम्बे लम्बे धक्के लगते हुए कहा, वैसे माँ की बात हो रही थी पर माँ अभी काफी व्यस्त नज़र आ रही थी,

माँ पापा मौसा और मां के बीच थी, जहाँ माँ नीचे लेती हुई थी और मां अपनी बहन के पैरों के बीच थे और उनका लुंड बहन की छूट में अंदर बहार हो रहा था, वहीं माँ पापा और मौसा के लुंड को बारी बारी से चूस रही थी,





मां- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है क्याहहह मस्त छूट है तुम्हारी...

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह सही कहा साले साहब, अह्हह्ह्ह्ह बहुत नसीब वाले हो जो अपनी बहन जी छूट का स्वाद ले पा रहे हो,

पापा- सही कहा, नसीब वाले तो तुम भी हो शैलेश बाबू, जो हमारे सामने hi हमारी बीवी को भोग रहे हो,

मां- नसीब वाले तो हम सब हैं जीजा, जो हमें ऐसी पत्नियां और बहनें मिली,

मौसा- सही कहा पर अब हटो थोड़ा हमें भी भाभी के छेदों का मज़ा लेने दो,

मां- अह्हह्ह्ह्ह जीजाआठ जीजी की छूट से लुंड निकलने का मन नहीं हो रहा,

मौसा- अरे तो हमने कहाँ रोका है एक मिनट हमारी सुनो तो सही,

कुछ पल बाद मां नीचे लेते थे और उनका लुंड अपनी छूट में भरकर माँ आगे को झुककर पापा का लुंड चूस रही थी वही मौसा माँ के पीछे थे और उनका लुंड माँ की गांड में घुसा हुआ था,

माँ की तीनो और से तबियत से ठुकाई होने लगी जो उन्हें पसंद भी था,

इधर सागर और मैं तगड़े धक्के लगातार मामी और किरण की छूट में लगा रहे थे,

में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह किरणण अह्हह्ह्ह्ह, सागर क्या मस्त है तेरी बहन की छूट, अह्हह्ह्ह्ह मन करता है लुंड निकालूँ hi न,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन भइयाझ छोड़ते रहो अह्हह्ह्ह्ह मैं माँ को छोड़ता हूँ तुम बेटी को अह्हह्ह्ह्ह,

किरण और मामी के होंठ आपस में चिपके हुए थे इसलिए वो दोनों hi चुप थी, सागर को देख कर लग रहा था की वो जल्दी hi अपने चरम पर पहुँचने वाला था और हुआ भी ऐसा hi, उसने अपने लुंड की धार अपनी माँ की छूट में मारनी शुरू कर दी, और अपने रास की एक रक बूँद उनकी छूट में निचोड़ दी,

मामी भी बेटे से छुड़वा कर बुरी तरह हांफ रही थी, सागर भी झड़ने के बाद सीधा लेट गया और हांफने लगा, मैं और किरण अभी भी जारी थे, किरण की सिसकियाँ और आहें बता रही थी की उसे कितना मज़ा आ रहा था, जल्दी hi वो भी झड़ने लगी मेरे लुंड पर, और बेजान सी हो गयी, मैंने उसे आराम करने ले लिए छोड़ा और खत से उठ खड़ा हुआ और इधर उधर देखने लगा, तभी मुझे एक जगह अपने लिए दिखी,

नाना और राजन चाचा एक दुसरे के बगल में एक दुसरे की बेटियों को घोड़ी बना कर छोड़ रहे थे, मैंने जल्दी से जाकर मौसी और पल्ली के चेहरे के बीच अपना लुंड किआ तो दोनों तुरंत मेरे लुंड पर टूट पड़ी और दोनों तरफ से चाटने लगी मैं भी मस्त हो गया, पीछे से नाना और चाचा दोनों की कमर थामे धक्के लगा रहे थे.

नाना- अह्हह्ह्ह्ह कर्मा लल्लाहहहह मज़ा आ रहा है नाह,

में- अह्हह्ह्ह्ह हाँ नाना और तुम्हे,

नाना- हमें तो जीवन में ैसाआह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कभी नाहीईईई ायाह्ह्ह,

राजन- अह्हह्ह्ह्ह एव hi ताऊ चोदामपुर का कमाल है बाबा,

चाचा ने मौसी को छोड़ते हुए कहा,

नाना- चोदामपुर काहहह नाहीई ये सब कर्माह का कमाल है, ये सब इसकी वजह से तो हैआह्ह्ह्ह,

राजन- अह्हह्ह्ह्ह बबाहहह बिलकुल सहिई कहाहहहह इसी ने सब शुरू किआ और आगे भी बढ़ाया, और आज देखो हम कितने सरे लोग हो गए हैं,

में - ारी सब हमारी सोच का कमाल है और अंदर की हवस का,

मैंने पल्ली और मौसी दोनों के मुँह में बारी बारी लुंड घुसते हुए कहा,

मौसी- अब मुझे दो लुंड चाहिए एक साथ...

राजन- आह्ह्ह्हह्ह क्या कहते हो बबाहहहहह छोड़ोगे अपनी बितीयआह्ह्ह्ह को हमारे साथ

नाना- हाँ क्यों नहीं दामाद जी बिलकुल,

नाना ने पल्ली की छूट से लुंड निकलते हुए कहा, मौसी भी मेरा लुंड छोड़ कर सीढ़ी हो गयी, नाना अपनी पीठ पर लेट गए तो मौसी अपने बाबा का लुंड अपनी छूट में लेकर बैठ गयी,

चाचा ने मौसी की गांड में लुंड घुसा दिया,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अब लग रहा है भराह भराह, अह्हह्ह्ह्ह... अह्हह्ह्ह्ह जीजा बबआहहह छोड़ो अब,

चाचा की मदद से नाना भी दोहरी चुदाई के गन सीख कर जल्दी hi अपनी बिटिया को चाचा के साथ छोड़ रहे थे,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह दामादजी, अह्ह्ह ऐसे दोहरी चुदाई में तो बहुत मज़ा आ रहा है,

राजन- अह्हह्ह्ह्ह बबाहहह ये hi तूऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह एक साथ में hi तो मज़ा आता है,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सबसे ज़्यादा मज़ाह तो मुझे आ राहाहहह है, अह्हह्ह्ह्ह एक साथ दोनों छेड़ भरवाने में,

राजन- तुम्हे तो मज़ा आएगा hi शालू अह्ह्ह एक साथ दो दो लुंड से सेवा जो करवा रही हो,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह हाँ जीजाआठ.

कमरे में हर और चुदाई और वासना का तूफ़ान आया हुआ था, मामी और किरण दोनों hi सागर का लुंड चूस कर उसे दोबारा खड़ा कर रही थी, सागर भी अपनी मम्मी और बहन की म्हणत को कैसे बेकार होने देता जल्दी hi उसका लुंड फिर से तैयार होकर खड़ा था, किरण ने भाई का लुंड तैयार देखा तो मामी की और देख बोली- लो मम्मी तुम्हारा घोडा तैयार है,

मामी- आजा तू भी सवारी करले अपने भाई के घोड़े की,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हाँ आजा किरण, तेरे लिए hi तो लोढ़ा तड़प रहा है,

किरण- करुँगी पर पहले मम्मी को तो अचे से सवारी करवा दे भाई,

मामी- हाँ मैं तो करुँगी hi बिटिया,

मामी ने सागर क्र ऊपर आते हुए कहा, और उसके लुंड को अपनी छूट पर घिसने लगी,

किरण- ये नहीं मम्मी ज़रा अपने बेटे को भी अपनी कासी हुई गांड का स्वाद चखाओ,

किरण ने सागर का लुंड पकड़कर अपनी माँ की छूट से घिसते हुए उसकी गांड के छेड़ पर लगा दिया,

सागर तो अपनी माँ की गांड मरने के ख्याल से hi सिहर उठा और अपनी मम्मी की चूचियों को मसलते हुए बोलै- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनं मम्मी गांड भी मारनी है मुझे..

मामी भी बेटे से गांड मरने के ख्याल से उत्तेजित होने लगी और बोली

मामी- मार्ले बीटा तेरी माँ छूट हो या गांड मरने से कहाँ पीछे हटती है.

किरण- बैठ जाओ मम्मी घोडा तैयार है,

ये सुनते hi मामी ने धीरे धीरे नीचे होकर अपने बेटे के लुंड को गांड में घुसाने लगी,

सागर तो मज़े से पागल होने लगा, और कौन नहीं होगा जिसका लुंड उसकी माँ की गांड में घुसता जा रहा हो और माँ भी मामी जैसी गदराई हुई हो,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन मम्मी अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है.

मामी- अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह.

तभी बगल में से किरण के भी सिसकने की आवाज़ आई तो मामी और सागर ने बगल में देखा और पाया की किरण झुकी हुई है और पापा पीछे से उसकी गांड में जीभ घुसा रहे हैं.

किरण- अह्हह्ह्ह्ह फूफाजी uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh.

पापा किरण की गांड में जीभ चलने लगे और वो सिसकियाँ लेने लगी, वहीं मामी भी अब अपने बेटे के लुंड पर उछाल उछाल कर गांड मरवा रही थी, इधर पापा ने भी अपनी जीभ को किरण की गांड से निकला और सीधे हुए और अपने लुंड पर थूक कर उसे किरण की गांड के छेड़ पर रखा,

किरण भी चेहरा घुमा कर पापा की और देख कर बोली- गांड मारोगे फूफाजी,

पापा- हाँ बितीयआह्ह्ह्ह देगी न अपनी गांड मुझे?

किरण- अह्हह्ह्ह्ह बिलकुल तुम्हे पूछने की क्या ज़रुरत है, घुड न, अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन,

किरण ने इतना बोलै hi था की पापा ने उसकी गांड के चले को फैलते हुए अपने लुंड का टोपा उसकी गांड में फंसा दिया,

पापा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बितीयआह्ह्ह्ह कितनी कासी हुई और गरम गांड है टेरिइइइइइइइइ.

किरण- अह्हह्ह्ह्ह फूफाजी तुम्हाराहहह लुंड hi इत्नाह मताः है,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह जित्नाह मोटा लुंड उतना hi मज़ा देता है,

मामी किरण को चुदाई का ज्ञान देती हुई अपने बेटे से गांड मरवाती हुई बोली,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है तुम्हारी गांड मरने में,

इधर पापा भी किरण की गांड को धीरे धीरे पूरा भेद चुके थे और उनका लुंड पूरा किरण की गांड में जड़ तक समाया हुआ था, वो थोड़ा रुके और किरण की छूट को उँगलियों से सहलाते हुए उसे अपने लुंड के लिए अभ्यस्त होने का समय दिया और फिर धीरे धीरे उसकी गांड में अपना अनुभवी लुंड चलने लगे,

दोनों माँ बेटी फिर से एक बार अगल बगल में चुद रही थी, पर इस बार दोनों की गांड में लुंड चल रहा था,

उनकी खाट के पीछे की और भी दृश्य बहुत कामुक था, माँ और चची एक दुसरे के ऊपर 69 के आसान में थे और मां माँ की और मौसा चची की गांड मर रहे थे, और दोनों औरतें एक दुसरे की छूटों की चासनी जीभ से चाट रही थी,

उनके hi बगल में मैं और अनुज पल्ली की दोहरी चुदाई करके उसको एक अलग hi आनंद प्रदान कर रहे थे, पल्ली लगातार चीखें मार रही थी,

उधर चीखें तो मौसी की भी निकल रही थी जो नाना और राजन के लुन्डों के बीच अपने छेदों की ठुकाई करवा रही थी, और झाड़ भी रही थी, पर वो अकेली नहीं झाड़ी अपने साथ साथ चाचा और राजन चाचा को भी झड़ने पर मजबूर कर दिया दोनों ने hi मौसी के दोनों छेदों को अपने अपने रास से भर दिया और फिर तीनो एक दुसरे के बगल में लेट कर हांफने लगे, कुछ पल बाद मौसी उठी और बोली चलो मैं जाती हूँ खाना बनाने,

इधर सागर और पापा दोनों hi मामी और किरण की गांड की ताबड़तोड़ तरीके से सेवा कर रहे थे, सागर के लिए उत्तेजना कितनी थी ये उसके धक्कों से पता चल रहा था, मामी की चूचियां उछाल उछाल कर नाच रही थी बेटों के धक्कों ऐ, वहीं किरण को पापा ने अपने लुंड पर टांग रखा था और उसकी कासी हुई गांड को खोल रहे थे, सागर के लिए अपनी माँ की गांड की गर्मी को सहना साथ hi अपनी बहन को बगल में गांड मरवाते देखना असहनीय हो गया और वो अपनी मम्मी की गांड में झड़ने लगा, वहीं किरण भी पापा के झटको के आगे हार गयी और झड़ने लगी, पापा ने भी खुद को नहीं रोका और अपना रास किरण की गांड में भर दिया, सागर के झड़ने के बाद मामी भी उसके लुंड से नीचे उतर गयी और उन्हें इतने में मौसी जाती हुई दिखाई दी तो बोली- चलो जीजी मैं भी मदद करती हूँ

मामी और मौसी खाना बनाने चली गयी, इधर मां भी माँ की गांड मरते हुए अपने चरम पर पहुँच गए और जैसे hi झड़ने को हुए तो उन्होंने अपना लुंड माँ की गांड से निकल कर चची के मुँह में घुसा दिया और उनके मुँह में सारा रास छोड़ दिया जिसे चची बिना परेशानी के जातक गयी, यही मौसा ने माँ के साथ किआ और अपना लुंड चची की गांड से निकल कर अपना रास माँ को पीला दिया, माँ आउट चची पहले hi एक दुसरे की जीभ पर झाड़ चुकी थी और फिर मर्दों के झड़ने के बाद अलग हो गयी,

माँ बोली मैं तो नहाने जा रही हूँ, चची भी उनके साथ चली गयी,

अब बस मैं और अनुज बचे थे जो की पल्ली को लगातार छोड़ रहे थे, जल्दी hi पल्ली हमारी दोहरी चुदाई के आगे हार गयी और झाड़ गयी, पर हम दोनों भाइयों का झड़ना बाकी था, पल्ली तो बिलकुल बेजान सी होकर मुझ पर गिर गयी तो अनुज न्र उसकी गांड से लुंड निकला और उसे बगल में लिटा दिया,

और उठ कर गया और कुछ पल बाद किरण को अपने साथ लेकर आया और कुछ hi पलों में हम दोनों के लुंड किरण के अंदर थे और हम किरण की दोहरी चुदाई कर रहे थे, करीब 10 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद किरण मैं और अनुज एक साथ झाड़ गए, किरण तो ऐसे झड़ी मानो बेहोश हो गयी हो,

खैर खाने से पहले का चुदाई का तूफ़ान थम चूका था, जल्दी hi सब लोग एक आम परिवार की तरह खाना खा रहे थे. खाने क बाद कौन किसके साथ सोयेगा ये तय होना था,

सागर ने आज इतनी चुदाई की थी की वो तो कहते hi लुढ़क गया था, नाना ने आज अपनी बहु के साथ सोने की इच्छा जताई तो उनकी इच्छा को कौन ताल सकता था, मामी अपने ससुर जी के साथ उनके बिस्तर पर चली गयी, मां ने पल्ली को चुना और उसे लेकर बिस्तर पर चले गए,

मां ने पल्ली को चुना तो राजन चाचा ने उनकी बेटी किरण का स्वाद चखने का फैसला किआ और उसे अपने साथ ले गए.

पापा ने मौसी को चुना तो मौसा को ममता चची ने और चारो एक साथ एक hi कमरे में चले गए,

बचे मैं अनुज और माँ, तो हम दोनों को रात में अपनी प्यारी माँ के साथ सोना था हम भी ख़ुशी ख़ुशी बिस्तर पर चले गए,

जारी रहेगी,
 
सागर ने आज इतनी चुदाई की थी की वो तो कहते hi लुढ़क गया था, नाना ने आज अपनी बहु के साथ सोने की इच्छा जताई तो उनकी इच्छा को कौन ताल सकता था, मामी अपने ससुर जी के साथ उनके बिस्तर पर चली गयी, मां ने पल्ली को चुना और उसे लेकर बिस्तर पर चले गए,

मां ने पल्ली को चुना तो राजन चाचा ने उनकी बेटी किरण का स्वाद चखने का फैसला किआ और उसे अपने साथ ले गए.

पापा ने मौसी को चुना तो मौसा को ममता चची ने और चारो एक साथ एक hi कमरे में चले गए,

बचे मैं अनुज और माँ, तो हम दोनों को रात में अपनी प्यारी माँ के साथ सोना था हम भी ख़ुशी ख़ुशी बिस्तर पर चले गए, अब आगे...



अपडेट 229


रात में सबने अपने अपने साथी या साथियों के साथ खूब मज़ा किआ और सो गए, जैसे नाना ने अपनी बहु की गांड और छूट दोनों का जमकर मज़ा लिए, मां तो पल्ली जैसी जवान लड़की पाकर बेहद खुश थे और पल्ली के बदन को उन्होंने अच्छे से चूमा छठा साथ hi उसके तीनो छेदों का आनंद भी लिया, यही हाल राजन चाचा ने किरण का किआ, और उसे खूब छोड़ा, किरण ने भी दिखा दिया की वो इस खेल में नयी ज़रूर है पर अनादि नहीं है, पापा और मौसा दोनों ने मिलकर मौसी और चची को बारी बारी दोहरी चुदाई का मज़ा दिया और फिर सो गए,

वहीं मैंने और अनुज ने माँ के साथ बहुत मज़ा किआ, माँ ने भी अपने दोनों बेटों के लुंड से रास अपने छेदों में निचोड़ नहीं लिए तब तक उन्हें नींद नहीं आई फिर हम सब लोग नंगे hi सो गए,

चोदामपुर की एक और सुबह हो चुकी थी, हम लोग भी धीरे धीरे उठ रहे थे, मुझे तो मामी ने जगाया चाय के लिए, तब तक बाकि सब भी उठ चुके थे, मैं नित क्रिया निपटा कर पजामा t-shirt पहन कर आंगन में आया चाय नाश्ता चल रहा था, मामी ने मुझे भी चाय दी, पापा मौसा नाना मां चाचा सब नए घर के बारे में बातें कर रहे थे, नक्से को बीच में रखकर उसी पर बातें चल रही थी, इसी बीच मैंने फ़ोन उठाकर देखा तो चेहरे पर मुस्कान आ गयी, अंजलि का मैसेज आया हुआ था, गुड मॉर्निंग सैयां ग,

मुझे ये पढ़ कर हंसी आ गयी, मैंने भी रिप्लाई कर दिया- गुड मॉर्निंग सजनी जी,

कुछ पल बाद उसका मैसेज आया- सुनो मम्मी बोल रही थी तुम अपनी मम्मी पापा को लेकर कब आओगे हमारे घर,

में- अरे पापा थोड़ा व्यस्त हैं वो नया घर बन रहा है न इसलिए, तुम लोग hi क्यों नहीं आ जाते,

अंजलि- हम लोग? पर कैसे, तुम hi ले आओ न मम्मी को hi ले आओ अपनी,

में- एक काम करो, तुम खुद से मम्मी से बोल्दो न, मैं तुम्हारी बात करवाता हूँ,

अंजलि- अरे मैं क्या बात करूँ मुझे थोड़ा दर लग रहा है,

में- अरे डरना कैसा मम्मी hi तो हैं,

अंजलि- ठीक है करवाओ,

मैंने मम्मी को जाकर फ़ोन दिया और बता दिया अंजलि है, वो लोग बातें करने लगे मैं अपना नाश्ता निपटने लगा, नाश्ता निपटानर के बाद मैंने देखा की घर में सब दिख रहे थे सिर्फ सागर नहीं दिख रहा था, मैंने सोचा ये सुबह सुबह कहाँ गायब हो गया, मैं अपने खली बर्तन लेकर रसोई में रखने पहुंचा तो देखा और बापिस आते हुए देखा की मां ममी वाला कमरा बंद है, मैं उसके पास गया और जाकर दरवाज़ा खोल कर देखा तो सामने बिस्तर पर सागर ममता चची के ऊपर लेता हुआ था और दनादन उनकी छूट में लुंड पेल रहा था,

में- तू सुबह सुबह hi शुरू हो गया,

सागर न्र गर्दन घुमा कर देखा और हँसते हुए बोलै- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनं भैया, अब इतनी साड़ी छूटें हैं मेरे छोड़ने के लिए, जब तक सबको न छोड़ लूंगा तब तक चैन नहीं आएगा,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह जवान खून है, इतनी जल्दी चैन आना भी नहीं चाहिए,

सागर- हेहही हॉँण्णन बुआहहहहह अह्ह्ह्हह्हह

में- अरे फिर ठीक है करो तुम लोग मज़े,

ये कहकर मैं बहार आ गया, देखा तो माँ अब भी बातें कर रही थी, मैं सोचने लगा इनकी सही पैट रही है, एक बार बातें शुरू क्या हुई ख़तम hi नहीं हो रही हैं, फिर मैं पापा और बाकि सब के साथ बैठ गया घर की बातों में, बाकि साडी औरतें काम पर लगी हुई थी घर के,

करीब आधे घंटे और बाद माँ ने मुझे फ़ोन दिया और बोलै- सुन मैंने उसकी मम्मी को घर पर बुला लिए है मिलने के लिए तू दोपहर में जाकर उन्हें ले आना,

में- क्या सही में बहुत बढ़िया माँ,

मैंने माँ को बाहों में भरते हुए कहा,

पापा- अरे किसे बुला लिए?

माँ- अरे इसकी अंजलि है न उसे और उसके मम्मी पापा को,

किरण- अरे वाह, मतलब होने वाली भाभी आने वाली हैं,

उसने खुश होते हुए कहा...

मौसा- अरे ये तो बढ़िया बात है हम लोग भी देख लेंगे, अपनी बहु को,

में- अरे तुम लोग न ज़्यादा hi आगे पहुँच गए रिश्ता लेकर नहीं आ रहे वो लोग,

चाचा- अरे आ जाएं रिश्ता तो हो hi जायेगा,

पापा- अरे उनके साथ रिश्ते में बड़ा मज़ा आएगा लड़की की माँ को देखना क्या लगती है,

मौसी- लो ये तो होने वाली अपनी संधान पर अभी से लट्टू हैं,

मामी- तो समधी भी एक बार जीजी को देख ले तो लट्टू हो hi जायेगा,

माँ- तुम लोग बहुत ज़्यादा आगे पहुँच गए हो, चलो अपने अपने काम में लगो साफ़ सफाई करनी है,

किरण- अरे हाँ अब तो सब होगी hi साफ़ सफाई, लड़की वाले जो आ रहे हैं,

सब हंसने लगे तो माँ ने उसे झूठ में मरते हुए कहा- चिंता मत कर सबसे पहले तेरी hi करवाउंगी.

किरण- नहीं बुआ नहीं, मैं नहीं करने वाली ब्याह कभी, ऐसा परिवार छोड़ कर मैं नहीं जाने वाली कहीं,

में- नहीं भाई कब तक खिलाएंगे तुझे, ब्याह कर और अपने पति के घर जइयो जल्दी,

मैंने उसे चिढ़ाते हुए कहा,

माँ- हॉट मेरी बिटिया को कोई नहीं चिढ़ाएगा,

माँ ने उसे गले से लगते हुए कहा, तो किरण मुझे जीभ चिढ़ाने लगी,

पल्ली- किरण चिंता मत कर हम लोग यहीं रहेंगे अभी ये सिवा करते हैं, फिर इनकी बीवियां करेंगी, और फिर इनके बच्चे,

मौसा- लो भाई इसने तो सब सोच रखा है,

नाना- अरे समझदार हैं हमारी बिटियन दोनों,

नाना ने पल्ली के सर पर हाथ फिरते हुए कहा,

पापा- चलो तुम लोग करो अपने घर के काम हम चलते हैं,

मौसा- हाँ चलते हैं कारीगर वगेरा आ गए होंगे, फिर सीमेंट भी मंगवाई है तो कभी भी आ सकती है,

मौसी- अरे सुनो नींव कब पूजेगी?

नाना- अभी तो खुदाई का hi काम चल रहा है, ये हो जाये तो पूजी जाएगी, एक दो दिन लग जायेंगे,

मां- हाँ इतना तो लगेगा hi,

पापा- चलो चलते हैं,

इसके बाद पापा चाचा, मौसा, मां, नाना सब बहार निकल गए, मेरा ऐसा कोई काम नहीं था तो मैं घर पर hi था, तो नहाने चला गया, नहाकर कपडे वगेरा पहने और फिर फ़ोन उठाकर देखा तो उसमे नीतू की दो मिस्ड कॉल थी, मैंने बापिस फ़ोन किआ तो

में- हाँ बीटा फ़ोन किआ था,

नीतू- हाँ कुछ सुनने में आया है मुझे.

में- क्या?

नीतू- यही की आज तुम्हारी ससुराल वाले आ रहे हैं घर,

में- सही सुनने में आया है,

नीतू- ये सब मेरी वजह से हुआ है, मानते हो.

में- बिलकुल मंटा हूँ, मेरी जान,

नीतू- तो मुझे क्या दिला रहे हो?

में- क्या चाहिए तुझे?

नीतू- एक मस्त सूट,

में- मिल जायेगा,

नीतू- सछहि? अरे वाह, फिर कब चलना है लेने?

में- जब तू कहे,

नीतू- ठीक है बताती हूँ,

ये कहकर उसने फ़ोन रख दिया, इधर मैंने फ़ोन रखकर देखा तो रसोई से चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी, मैंने जाकर देखा तो पाया की मामी सागर पर भड़क रही थी, सागर बेचारा नंगा खड़ा होकर दांत सुन रहा था,

में- अरे क्या हुआ मामी क्यों चिल्ला रही हो?

मामी- इसे hi ले जा, ाचा इसे पता चला है तबसे इसे कोई न कोई चाहिए छोड़ने के लिए. अभी ममता जीजी को छोड़ कर हटा है, इतना काम पड़ा है इनको हवस छड़ी है,

सागर- मैं तो मम्मी बस,

मैंने उसे चुप रहने का इशारा किआ तो वो चुप हो गया,

में- अरे मामी तुम काम करो शांत हो जाओ, मैं समझाता हूँ इसे,

मामी- हाँ तुम hi समझाओ बाबू इसे,

मामी भन्नाते हुए चली गयी.

में- चल कपडे पहन बहार चलते हैं,

सागर ने भी दांत से बचने के लिए जल्दी से कपडे पहने और मेरे साथ चल दिया,

में- क्यों बे क्या कर रहा था?

सागर- वो मम्मी को देखा तो मेरा मन करने लगा, मैंने उन्हें पकड़ा तो वो भड़क गयी,

में- देख मन की तेरे लिए सब नया है और तेरा मन भी हो रहा होगा, पर सही समय का इंतज़ार किया कर न,

सागर- पर भैया मन को कैसे रोकूं, लुंड तो देख कर hi खड़ा हो जाता है,

में- अरे मन और लुंड का अपना अपना दिमाग है पर तेरे पास तो अपना दिमाग है न, तुझे उनके बस में नहीं होना है, बल्कि मन को और लुंड को दोनों को अपने बस में रखना होगा,

सागर- पर भैया मैं सोचता हूँ जल्दी जल्दी सब को छोड़ लूँ,

में- अरे पागल रेस थोड़े hi लगी है, और सब अपना परिवार है कोई कहीं भागे थोड़े hi जा रहा है, देख सही समय से करेगा तो मामी या बाकि सब मर्ज़ी से करवाएंगी तो तुझे और भी मज़ा आएगा, ऐसे ज़बरदस्ती करने में न मज़ा और दांत भी पद सकती है,

सागर- कह तो सही रहे हो भैया,

में- चुदाई मज़े के लिए होती है, पर ये भी ध्यान रख की औरत को भी मज़ा आ रहा है या नहीं, सिर्फ अपने मज़े के लिए नहीं,

सागर- समझ गया भैया,

में- और साथ hi थोड़ा रुक रुक कर, जैसे दुसरे काम भी उतने hi ज़रूरी हैं उन्हें भी कर, तभी इंतज़ार के बाद करेगा तो और मज़ा आएगा तुझे, अगर लगातार चुदाई में लगा रहेगा तो मन भर जायेगा, बदन में जान नहीं बचेगी,

सागर- सही कह रहे हो भैया,

हम लोग बात करते करते बाघ तक पहुँच गए थे, फिर वहीं नए घर को बनता देखने लग गए, पापा मौसा चाचा नाना मां सब काफी गंभीरता से एक एक चीज़ देख रहे थे,

दोपहर के करीब माँ का फ़ोन आया की सबको घर भेज दे और तू अंजलि के यहाँ जाकर उन लोगो को ले आ, साड़ी तैयारी हो गयी है,

में- ठीक है, बोलता हूँ माँ,

मैंने फ़ोन काट कर मौसा से कहा की माँ ने बोलै है सब लोग घर पहुँच जाओ, मैं उन लोगो को लेकर आता हूँ,

मौसा- ठीक है, वैसे भी मज़दूर भी खाने पर जा रहे हैं,

में- ठीक है मैं जाता हूँ उन्हें लेने,

मौसा- ठीक है, और सागर सुन, ले ये पैसे पकड़ और ठंडी कोल्डड्रिंक वगेरा की बोतलें लेकर घर पहुँच,

में- बड़ा स्वागत हो रहा है,

मौसा- अरे भाई समधी संधान हैं हमारे,

चाचा- और क्या चोदामपुर में आएंगे तो लग्न चाहिए की कहाँ आये हैं, सागर ले हलवाई से मिठाई का डिब्बा और ले ाइयो,

मौसा- अरे मैं दे तो रहा था पैसे. भैया,

चाचा- हमने दे दिए तो का हुआ, शैलेश बाबू.

मौसा- अरे यार ये चीज़ हमें ठीक नहीं लगती भैया,

पापा- अरे ये लोग भी न, बच्चे बन जाते हैं बिलकुल,

पापा ने नाना को कहा हँसते हुए,

नाना- हमें तो देख कर ख़ुशी हो रही है की सब में कितना भाव है एक दुसरे के लिए, दिल भर आता है,

मां- सही कहा बाबा, हमारी किस्मत खुल गयी जो बहनें ऐसी जगह ब्याही हैं,

पापा- अरे अब भावुक मत हो तुम लोग भी, चलो घर जल्दी नहीं तो वो बहनें hi जान ले लेंगी हमारी,

इस पर सब हंसने लगे, इधर मौसा और चाचा की लड़ाई अब तक चल रही थी,

मौसा- पल्ली के ब्याह में एक फूटी कौड़ी खर्च नहीं करने देंगे तुम्हे,

चाचा- क्यों नहीं हमारी बिटिया है खर्च तो करेंगे hi,

मौसा- हमारी बिटिया है,

पापा- अरे सागर चला गया लेने तुम लोग अब तक लड़ने में hi लगे हो, घर चलो नाहा धो लो, नहीं तो तुम्हारी बीवियां तुमपर बरस पड़ेंगी,

पापा की बात सुनकर दोनों लोग हंसने लगे और घर चल दिए,

मैंने अंजलि को फ़ोन किआ और बोल दिए की मैं आ रहा हूँ, और निकल गया, कुछ hi देर में मैं उनके घर के सामने था, गाडी रुकते hi अंजलि भाग कर बहार आई और मुझे देख मुस्कुराने लगी, पीछे से Sasura(Mahipal सिंह) भी आ गया,

ससुरा- आ गए बीटा, बस दो मिनट रुको आते हैं,

मैंने मन में सोचा इसकी तो जवान hi बदल गयी है उस दिन के बाद और बोलै- ग बिलकुल आराम से चलते हैं,

अंजलि- तब तक आजाओ अंदर बैठ जाओ मम्मी आ hi रही हैं,

अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा,

ससुरा- हाँ हाँ और क्या अंदर आओ,

अब ससुराल में इतने प्यार से बुलाया जाये और बाँदा न जाये, ये कैसे हो सकता है, मैं अंदर उनके पीछे पीछे चल दिया, आंगन में पहुंचा तो ससुरे ने अंजलि से कहा- बीटा पानी वाणी पिलाओ मैं देखता हूँ तुम्हारी मम्मी को बुला के लाता हूँ,

ये कहके वो चले गए तो अंजलि मेरी और शर्मा के देखते हुए बोली- क्या पीना चाहेंगे आप?

में- चाहते तो बहुत कुछ हैं, पर फ़िलहाल जो आप पीला दें,

अंजलि- फिर भी ठंडा या गरम?

में- मीठा,

मैंने उसके होंठों की और इशारा करके कहा तो वो और शर्मा गयी,

अंजलि- धत्त्त,

में- पिलाओगी नहीं?

अंजलि- सामने है, हिम्मत है तो पीलो.

उसने मेरे सामने बैठते हुए कहा, मैंने चारो और नज़र घुमाई और मौका देखकर जैसे hi उसकी और बढ़ा की पीछे से आवाज़ आ गयी, और मैं बापिस बैठ गया,

रानी- अरे मम्मी पापा तैयार नहीं हुए अभी?

अंजलि- बस आ hi रहे हैं,

रानी भी अंजलि के वागल में आ कर कड़ी हो गयी, नीले रंग की सारी में क्या मस्त लग रही थी, ऊपर से साड़ी भी नाभि से दो इंच नीचे थी गहरी नाभि आँख मिचोली कर रही थी, कभी साड़ी में छुपजाति तो कभी दर्शन देती,

रानी - और कर्मा कैसे हो तुम?

मेरा ध्यान उसकी नाभि से ऊपर चेहरे पर गया और बोलै- बिलकुल बढ़िया भाभी ग, आप कैसी हो?

रानी- तो क्या कर रहे थे तुम दोनों मेरे आने से पहले,

ये सुनकर तो मेरा और अंजलि दोनों का चेहरा सफ़ेद पड़ने लगा,

में- कुछ कुछ नहीं,

अंजलि- हाँ कुछ भी नहीं,

रानी- अरे कुछ तो बात कर रहे होंगे न,

में- हाँ बात कर रहे थे ऐसी hi, इधर उधर की,

रानी- हद्द है, तुम लोग भी न,

में- क्या हो गया,

रानी- अरे जवान लड़का लड़की, अकेले हो, और कुछ प्यार वयर की बातों की जगह इधर उधर की बातें कर रहे थे,

अंजलि- भाआआअआभीीीी,

अंजलि ने झूठा सा चिढ़ते हुए कहा,

मैं भी मुस्कुराने लगा,

रानी- ज़्यादा भाभी भाभी मत कर बीटा, सुबह से कैसी खिली हुई है इसके यहाँ जाने का सुनकर मैं नहीं देख रही क्या,

अंजलि- अरे भाभी,

इस पर अंजलि ने अपना चेहरा नीचे कर लिया और रानी के गले लग कर उसके सीने में छुपा लिए शर्मा कर,

रानी- हाय देखो तो अभी से शर्माना,

इसके आगे कुछ बात होती की पीछे से ससुरा और सास आ गए, मैंने सास को नमस्ते किआ और उन्होंने मेरे हाथ चूम लिए,

मैंने सासु को देखा और फिर रानी को तो सोचने लगा की आज घर में सरे मर्दों का बुरा हाल होने वाला है, सास बहु क्या कामुक गदराई घोड़ियां लग रही थी, सासु माँ ने भी साड़ी नाभि से नीचे बंधी थी और उन्हें देखकर समझ आ रहा था की अंजलि को सुंदरता कहाँ से मिली, फिर ससुरे को देखकर सोचने लगा, खड़ूस ससुरे को इतना मस्त माल कहाँ से मिला, खैर हम सब लोग जल्दी hi गाडी में बैठ कर निकल लिए, और कुछ hi देर में मैंने गाडी घर के सामने रोकी, गाडी रुकते hi पापा और चाचा दरवाज़े खोलकर बहार आये और सब का स्वागत किआ, अंजलि ने तो पापा और चाचा के पेअर भी छूने चाहे तो पापा ने उसे रोका और कहा- बीटा हमारे यहाँ बेटी को पेअर नहीं छूने देते पाप लगता है, और उसके सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया, और चाचा ने भी, उसके बाद पापा ससुरे और सासुमा और भाभी रानी से भी मिले सबको नमस्ते कर उनका स्वागत किआ और अंदर ले आये, मैं गाडी एक और लगाकर जब तक आया तब तक सब लोग बैठ चुके थे और मौसी सबको पानी दे रही थी,

पापा ने एक एक करके उनका सबसे परिचय करवाया, सब का आपस में नमस्कार चल रहा था, ससुरे की आँखें हमारे घर की औरतों को देख चमक रही थी, वहीं मर्द भी सासु माँ रानी और अंजलि की सुंदरता देख मन hi मन खुश हो रहे थे,

पापा- अरे भाई पानी से क्या होगा ठंडा वगेरा पिलाओ,

ससुरा- अरे भाई साहब इन सब की क्या ज़रुरत थी,

पापा- अरे भाईसाब इसी बहाने हम भी पी लेंगे,

इस पर सब हंस पड़े,

बीच में टेबल पर कोल्डड्रिंक लगाई गयी और आउट बाकि सब लोग आस पास खातों पर बैठे थे और कुछ कुर्सियों पर, ममता चची और किरण ने सबको कोल्डड्रिंक बांटी, एक खाट पर सासु माँ रानी और फिर अंजलि बैठे थे तो माँ अंजलि के बगल में बैठ गयी, और उसके सर पर प्यार से हाथ फिरते हुए बोली- बिटिया बहुत सुन्दर और प्यारी है आपकी,

अंजलि माँ के प्यार से मुस्कुरा कर सिमट गयी,

सासुमा- बहन ग आपकी आँखों में प्यार है तो आपको प्यारी hi दिखेगी, नहीं तो घर पर देखो इसका शैतानी रूप,

अंजलि- मम्मी,

अंजलि ने हँसते हुए बुरा सा मुँह बनाया,

माँ- अरे नहीं इतनी प्यारी है, इसकी तो शैतानिया भी बहुत प्यारी होंगी,

सासुमा- वैसे बहन ग अपने भी अपने बच्चों को बहुत अचे संस्कार दिए हैं, हमेशा दुसरे की मदद के लिए तत्पर रहते हैं,

ससुरा- बिलकुल सही, भाभी जी उस दिन अगर कर्मा हमारी मदद नहीं करता तो हम तो चक्कर hi काटते रह जाते,

माँ- अरे भाईसाब हमारा बस इतना hi कहना है, किसी के भी काम आ सको इससे ाचा कुछ नहीं, और आप तो परिचित थे तो आपकी मदद कैसे नहीं करता,

ससुरा- यही तो आपके संस्कार हैं भाभी जी और भाई साब,

सासुमा- सही में,

पापा- वैसे बीटा नहीं आया,

ससुरा- अरे हमने उससे कह दिया की अलग नहीं रहना अब से , सब साथ रहेंगे, इसीलिए वो सामान वगेरा लेने और घर खली करने गया है शहर,

मौसा- ये बिलकुल सही किआ भाई साहब, परिवार में असली सुख साथ रहने में hi है, मैं खुद एक नौकरी पेशा आदमी रहा हूँ, जब बहार रहता था मुझे hi पता है कितनी मुश्किल से समय गुज़रता था, रिटायर होने के बाद अब आराम hi आराम है,

पापा- हमारा मन्ना रहा है की जो व्यक्ति परिवार से जुड़ा रहता है, जिसका परिवार आपस में जुड़ा रहता है, वो हर दुःख सह सकता है,

ससुरा- बिलकुल सच्ची बात कही भाई साहब अपने, और सच कहूं आपका भरा पूरा परिवार देख कर सबको साथ देख कर बहुत ख़ुशी हो रही है, इतना प्यार आपस में आज कल काम hi देखने को मिलता है,

मौसा- भाई साहब अगर मन से मनो और मन सच्चा हो तो हर रिश्ता निभाया जा सकता है और मन में hi खोट हो तो खून के रिश्ते भी टूट जाते हैं,

सासुमा- बिलकुल सही भाईसाहब,

मौसा- अब अपनी hi कहूं, तो मेरे सेज भाई मुझे और मेरी पत्नी को खुश नहीं देख सकते उनकी वजह से hi अपना गाओं छोड़ा बचपन का घर छोड़ा, पर यहाँ आकर लगता है सब सही छोड़ा, इस परिवार से ाचा परिवार हमें मिल hi नहीं सकता था,

नाना- ये तो हम भी मानते हैं हमारी दोनों बेटियां इतनी खुश हैं एक साथ हैं ये देखकर hi मन में एक आनंद सा रहता है,

ससुरा- बिलकुल सही चाचाजी, एक बाप तो यही चाहता है उसके बच्चे खुश रहे उनका परिवार खुश रहे,

सासुमा- बस ऊपरवाला इसी तरह आप सबको साथ बनाये रखे,

मौसा- अब तो ये चाहें तब भी हम इनका पीछा नहीं छोड़ने वाले,

इस पर सब हंसने लगे,

पापा- अरे छोड़ने की तो कभी सोची hi नहीं हमने, और न सोचेंगे, इसीलिए तो नया घर बन रहा है ताकि सब साथ में रह सकें,

ससुरा- अच्छा जो आते हुए खुदाई होती दिख रही थी बाघ के किनारे वो?

चाचा- हाँ अभी तो नींव hi खोदी जा रही है देखो शायद कल तक पूजन भी हो जाये,

ससुरा- ये तो बढ़िया है

सासुमा- और क्या जल्दी से घर बनवाओ फिर बहु लाओ कर्मा की,

मौसी- बहन जी ये तो अपने हमारे मुँह की बात छीन ली,

में- अरे मौसी अभी से ब्याह क्या करना?

चची- ब्याह तो करना पड़ेगा बचुआ, अब तुम्हारी मर्ज़ी से या हमारी मर्ज़ी से,

सासुमा- अरे गलत क्या कह रही है तुम्हारी मौसी बीटा, आज नहीं तो कल करना hi है, कोई लड़की पसंद हो तो बता दो,

इस पर अंजलि मुझे आँखों से इशारा किया की बता दो न,

में- अब जो सब को पसंद होगी वो मुझे भी पसंद होगी,

इतने में पीछे से किरण बोल पड़ी चिंता मत करो भैया तुम्हारे लिए लड़की मैं hi पसंद करुँगी,

पल्ली- और क्या हम hi चुनेंगे अपनी भाभी को,

चाचा- अरे अब तुम लोग तो बेचारे के पीछे hi पद गए, जब होगी तब करना, तब तक तो चैन लेने दो उसे,

मां- सही बात है, उसके बाद कहाँ चैन मिलता है,

सब एक बार फिर से हंस पड़े,

पापा- चलो भाईसाब तुम्हे अपना बाघ और नया घर दिखा लाएं,

ससुरा- हाँ ज़रूर चलिए,

सासुमा- ठीक भी है तब तक मैं भी कुछ सहेलियां बना लुंगी यहाँ पर,

और ऐसा hi हुआ मर्द लोग बाघ में निकल गए, औरतों ने एक साथ जोड़ी बना ली वहीं, रानी अंजलि किरण और पल्ली के साथ हो गयी,

सासुमा की भी बाकि साड़ी औरतों से खूब पैट रही थी वहीं अंजलि को तो यकीन नहीं हो रहा था की इतनी जल्दी किरण और पल्ली उससे घुल मिल गयी थी, रानी भाभी भी खूब मज़ाक कर रही थी तीनो के साथ, इसी तरह बातें करते हुए साडी औरतों ने मिलकर खाना बनाया, वैसे भी औरतों को बातें करने के लिए बातें मिल hi जाती हैं,

खाना तैयार हुआ तो सबको घर बुलाया गया, सबने हँसते मज़ाक करते हुए खाया, देख कर लग रहा था अंजलि और उसके परिवार को भी बहुत मज़ा आ रहा था, सब एक दुसरे से बिलकुल घुल मिल गए थे,

खाने पीने के बाद वो लोग माँ पल्ली और किरण के साथ नीतू के यहाँ भी चले गए उनसे मिलने, और फिर कुछ देर वहां बैठने के बाद बापिस आ गए, और फिर जब जाने को हुए तो सबसे मिलते हुए ससुरा बोलै- आप सब से मिलकर बहुत hi ख़ुशी हुई मन से कह रहा हूँ, लगा hi नहीं की मैं आपसे किसी से पहली बार मिल रहा हूँ,

पापा- पर अब इतना समय नहीं लगाना आते रहिएगा गाओं है hi कितनी दूर,

ससुरा- बिलकुल भाई साहब, पर अब आपको भी हमारे यहाँ आना होगा सबके साथ,

पापा- बिलकुल भाई साहब समय मिलते hi,

मौसा- चलिए भाई साहब, उस सुझाव पर कुछ बात करते हैं, और आगे बढ़ाते हैं,

ससुरा- बिलकुल आप को जो ठीक लगे मुझे बताना,

इधर औरतों का भी मिलना जारी था, सासुमा सबसे गले मिल रही थी, माँ से मिलते हुए बोली- ये समय मैं नहीं भूलूंगी कभी, बहुत प्यारा परिवार है तुम्हारा बहन जी,

माँ- तुम लोग भी सब बहुत अचे हो इसीलिए हम अचे लग रहे हैं,

सासुमा- तुम भी जल्दी आना मिलने,

सासुमा के बाद अंजलि भी माँ से गले मिली, माँ ने उसका माथा चूमा और उसके हाथ में कुछ पैसे दिए जिसके लिए वो मन करने लगी तो माँ बोली- बीटा आशीर्वाद है मेरा ये मन नहीं करते,

इस पर अंजलि ने ख़ुशी ख़ुशी ले लिए और दोबारा माँ के गले लग गयी, फिर पापा को भी नमस्ते किआ साथ hi अनुज सागर किरण पल्ली सबसे प्यार से विदा ली, सबके विदा लेने के बाद मैंने सबको गाडी में बिठाया और चल दिया और जल्दी hi हम लोग उनके घर के सामने थे, वो लोग गाडी से उतरे और मैं भी, पापा ने उनके लिए एक करते आम की भिजवाई थी मैंने गाडी से वो उतारी और उसे उठा कर उनके साथ साथ अंदर ले आया, करते को आंगन में रखा तो ससुरा bola-sach में बड़े अचे हैं सब लोग तुम्हारे यहाँ बताओ इतने सरे आम भिजवा दिए भाई साहब ने,

ससुरे ने आंगन में बैठते हुए कहा,

में- जी ये तो बस कुछ नहीं है, जो है वो भिजवा दिया,

सासुमा- कुछ नहीं ये प्यार है तुंहरे परिवार का जो बहुत प्रेम से वो बरसते हैं,

वो भी वहीं बैठ गयी,

रानी- मम्मी मैं बोलती हूँ अब कर्मा आ hi गया है तो इसे मैं बिना चाय पिलाये नहीं जाने दूंगी,

अंजलि- हाँ मम्मी,

सासुमा- और क्या बिलकुल अब चाय पिके hi जाना,

में- अरे पर चाय की क्या ज़रुरत है,

मैंने सबको देखकर कहा,

ससुरा- भाई मुझे मत देखो, घर में तो जो औरतों ने बोल दिया वही होता है, हाहाहा,

में- ठीक है,

रानी- अरे अंजलि तू तब तक कर्मा को घर दिखा न अपना मैं चाय रखती हूँ,

सासुमा- हाँ और क्या, जा बीटा,

ये सुनकर तो मन किआ की रानी भाभी के होंठ चूम लूँ,

अंजलि- आओ दिखती हूँ घर,

मैं उठकर अंजलि के पीछे पीछे चल दिया, अंजलि ने पहले नीचे के कमरे दिखाए क्यूंकि नीचे सासु माँ और ससुरा सब देख सकते थे इसलिए मैं दूर hi रहा,

फिर वो मुझे ऊपर ले जाने लगी और जैसे hi हम सीढ़ियों पर ऊपर चढ़े और उनकी आँखों से ओझल हुए मैंने उसे दीवार से सत्ता दिया, और उसके चेहरे के करीब जाकर आँखों में देखने लगा,

अंजलि- शठ छोडो मुझे कोई देख लेगा,

वो फुसफुसाते हुए बोली,

में- मैं देख तो रहा हूँ, वैसे भी तुमने hi तो बोलै दिखती हूँ,

अंजलि- मैंने घर दिखने को बोलै था,

वो शरमाते हुए और मुस्कुरा कर बोली,

में- मेरा घर तो तुम hi हो,

इस पर वो मुस्कुरा गयी और बोली- ाचा ऊपर तो चलो देख लेना अचे से,

में- ठीक है,

मैं उसका हाथ पकडे हुए ऊपर गया जहाँ उसने एक दो कमरे दिखाए और फिर एक कमरे के पास आकर बोली- ये मेरा कमरा है,

में- ाचा चलो दिखाओ तो,

ये कहकर मैं उसे लेकर उसके कमरे में घुस गया, और उसे अंदर जाकर अपनी बाहों में भर लिया, वो भी मुझसे बिलकुल चिपक गयी, कुछ देर हम यूँ hi एक दुसरे से चिपके रहे,

अंजलि- कितना ाचा लग रहा है न,

में- ऐसा कभी नहीं लगा,

अंजलि- सच्चीईई

में- मुछ्छःहीईईईई,

अंजलि- एक बात कहूं,

में- हाँ कहो न,

अंजलि- पक्का,

में- हाँ,

अंजलि- मैं तुमसे न,

में- हाँ? मुझे क्या?

अंजलि- तुमसे बहुत ज़्यादा प्यार करने लगी हूँ, आज तुम्हारे परिवार से मिलकर तो ये प्यार और कई गुना बढ़ गया है,

में- मैं बता नहीं पाउँगा की मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ पर हाँ इतना जनता हूँ की मेरे लिए मेरे परिवार के अलावा सबसे ज़्यादा कोई महत्वा रखता है तो वो तुम हो, कोई मेरी ज़रुरत है तो वो तुम हो,

अंजलि ये सुन कर मेरी आँखों में देखने लगी, और ऐसे देखते हुए hi कब हमारे होंठ आपस में जुड़ गए पता hi नहीं चला, अह्ह्ह्हह्हह उसके होंठो का स्पर्श पाकर ऐसा लगा जैसे सब कुछ रुक सा गया हो, कितने रसीले और मुलायम होंठ थे उसके, ऐसा लग रहा था उसके होंठों से चासनी मेरे मुँह में घुल रही है,

वो भी पूरी तरह से मेरे होंठों को चूसने में मगन थी, मेरे हाथ उसकी कमर पर थे तो उसने अपनी बाँहों का घेरा मेरे गले में डाला हुआ था, तभी अचानक से पीछे से कुछ आवाज़ आई और हम दोनों अलग हुए और मुद कर देखा तो सुन्न रह गए,

सामने रानी भाभी कड़ी थी,

रानी- अरे तुम लोगो ने तो मेरी बात को कुछ ज़्यादा hi गंभीरता से ले लिए, मैंने बातें करने को कहा था,

हम दोनों उनसे आँखें बचते हुए इधर उधर देखने लगे,

रानी- अरे अब ज़्यादा शर्माओ मत ठीक है, तुम लोगो को थोड़ा समय मिले साथ में इसीलिए चाय के लिए बोलै मैंने नीचे पर तुम दोनों बिलकुल hi बेवकूफ हो, दरवाज़ा तक बंद नहीं किआ,

अंजलि- वो वो भाभी मैं ये hi पकड़ कर ले आये,

में- ध्यान ध्यान नहीं रहा भाभी..

रानी- कोई बात नहीं, चलो लो चाय पि लो,

भाभी ने चाय देते हुए कहा और हम लोग बिस्तर पर hi बैठ गए,

में- बहुत अछि बानी है चाय भाभी,

रानी- बस बस ज़्यादा मस्का मत लगाओ, और देखा ननद रानी तुमने बताया नहीं फिर भी मैंने जान लिए की तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है,

अंजलि- हाँ भाभी, पर मैं कैसे बताती शर्म आ रही थी,

अंजलि ने हँसते हुए कहा,

रानी- हाँ हाँ देखि माइनर शर्म कैसे एक दुसरे को सांस दे रहे थे तुम दोनों,

इस पर अंजलि ने हँसते हुए चेहरा छुपा लिए,

में- भाभी तुम तो समझती होंगी, भैया भी तो कभी कभी ऐसे hi करते होंगे,

रानी- अरे अपनी प्रेम कहानी पर रहो, हमारी पर क्यों आ रहे हो,

में- तुम भी तो अपनी hi हो भाभी,

रानी- हाय देख रही हो, कितनी प्यारी बातें कर रहे हैं, बचा के रखो ननद रानी नहीं तो हमारा मन न दोल जाये,

अंजलि- कोई नहीं भाभी, डोलने दो न, तुम्हारे साथ प्यार बाँट लुंगी अपना,

रानी- धत्त दोनों hi बड़े बातें बनाते हो तुम, लोग, वैसे सही कह रही हूँ, इसे जल्दी बाँध लो पल्लू में नहीं तो ऐसे लड़के जल्दी दिन कुंवारे नहीं बचते,

अंजलि- अरे भाभी मैं कैसे बांध लूँ,

रानी- अरे और कौन बंधेगा,

में- मतलब बँधवाओगी तो तुम hi,

रानी- अरे वाह ये होती है जोड़ी, एक दुसरे की बात कितनी जल्दी समझ जाते हो तुम, चिंता मत करो तुंहारी जोड़ी तो मैं बनवा के रहूंगी,

में- बस तुम्हारा hi सहारा है भाभी, ाचा अब चाय ख़तम हो गयी मैं चलता हूँ,

मैंने कप रखते हुए कहा,

रानी- अरे और रुक जाते थोड़ी और हवा भर लेते एक दुसरे को,

में- बिलकुल फिर कभी,

मैंने निकलने से पहले अंजलि की और हाथ बढ़ाया मिलने के लिए तो उसने शर्मा के मुझे धक्का दे दिया और मैं उसकी जगह भाभी से जा लगा, भाभी ने भी शायद बचने के लिए, मुझे अपनी बाहों में भर लिया, और एक तरह से हम गले लग गए,

रानी- ये थोड़ा गलत जगह लाइन नहीं जोड़ दी तुमने कर्मा,

में- लाइन तो सही है जैसे जिससे जुड़ जाये,

अंजलि- हौव्व भाभी कर्मा शर्म नहीं आती तुम लोगो को,

अंजलि पीछे से चिढ़ाते हुए बोली, तो हम अलग हुए और मैंने और भाभी ने इशारा किआ और दोनों ने उसे दबोच लिए और दोनों और से दबा लिए, वो अपनी हंसी दबाकर हंसने लगी,

खैर हँसते हुए हम अलग हुए फिर नीचे आये और सबसे विदा लेकर मैं चला आया, बाघ में देखा तो सब लोग वहीं थे तो गाडी जगह पर लगा कर वहीं रुक गया, थोड़ी देर बाद मज़दूरों के लिए चाय नाश्ता लेकर मौसी ममता चची और मामी आ गयी, पर उन लोगो को जब पास आने पर देखा तो मैं थोड़ा चौंक गया और मेरे साथ साथ बाकी मर्द भी क्यूंकि तीनो ने hi सारी कुछ अलग से पहनी हुई थी, मैंने देखा की तीनो की hi सारी पहले की अपेक्षा में काफी नीचे बंधी हुई थी, और उनकी नाभि और कमर का हिस्सा काफी ज़्यादा दिखाई दे रहा था, मैंने ध्यान दिया की मज़दूरों की नज़र भी चाय पीते हुए उन पर hi थी, वैसे हो भी क्यों न एक साथ तीन तून गदराई औरतें इतनी कामुक बन कर सामने हो तो,

मज़दूर जब चाय लेकर चले गए तो मौसा ने hi पूछ लिए क्यूंकि फिर सब हम hi लोग बचे थे,

मौसा- अरे तुम्हे क्या हुआ सबको ये अचानक साड़ी ऐसे क्यों बंधी है?

चची- क्यों शैलेश भैया पसंद नहीं आई का,

चाचा- अरे पसंद का तो मजदूरों से पूछो सेल धोती के ऊपर से hi रगड़ रहे हैं तुम लोगों को देख देख कर,

मौसी- हेहेहे अरे जीजा, वो आई थी न तुम्हारी होने वाली संधान और उनकी बहु, तो उन्होंने भी तो ऐसे hi पहनी हुई थी सारी,

चची- और तुम सब लोग उन्हें देख कर लार टपका रहे थे,

मामी- तो हमें लगा हम भी सब कोशिश करके देखते हैं क्या नतीजा निकलता है,

मौसी- और नतीजा पसंद आ रहा है, मर्दों को रिझाना बहुत आसान है,

पापा- हम तो पहले से hi रीझे हुए हैं तुम सब से,

चची- अरे बातें छोडो चलो न खेत घूम कर आते हैं,

में- वैसे माँ कहाँ हैं,

मामी- जीजी भी हमारे साथ आ रही थी, पर फिर रस्ते में रज्जो जीजी मिल गयी तो वो hi ले गयी उन्हें अपने साथ,

में- तो अभी घर पे कोई नहीं है?

मामी- नहीं घर hi गए हैं वो, उन्हें कुछ चाहिए था,

में- चलो मैं भी कपडे बदल लेता हूँ फिर घर जाकर,

मैं सबको बोलकर घर आया तो दरवाज़ा रज्जो चची ने hi खोला- लो आ गया कर्मा,

में- कैसी हो चची,

मैंने अंदर आकर दरवाज़ा लगते हुए कहा,

रज्जो- मैं तो बड़ी खुश हूँ, आज तेरी ससुराल वाले जो आये थे,

चची ने अंदर चलते हुए कहा,

में- ओह्हो चची तुम भी न, बस मिलने आये थे,

रज्जो- अरे जा हमें न चलाओ, हमें सब पता है बिटुआ, अम्मा हैं तुम्हारी हम,

में- अरे पता है तुम्हे सब मेरी जान पर आज बस मिलने आये थे रिश्ता तो तुम hi करवाऊंगी,

मैंने उन्हें पीछे से बाहों में भरते हुए कहा,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह हाँ वो तो है hi मैं नहीं करवाउंगी तो कौन करवाएगा,

तब तक हम लोग माँ पापा के कमरे के बहार पहुँच गए थे, और फिर दरवाज़ा खोल के अंदर,

अंदर माँ अपनी अलमारी से कुछ निकाल रही थी, उन्होंने चेहरा घुमा के मुझे देखा और बोली- आ गया उन्हें छोड़ कर?

में- हाँ माँ, तुम क्या कर रही हो?

रज्जो- अरे बच्चा एक ब्लाउज चाहिए था हमें वो hi निकल रही हैं जीजी,

में- चलो मैं कपडे बदल कर आता हूँ,

मैं अपने कमरे में आया और कपडे उतर कर एक पजामा पहन लिए ऊपर बनियान थी, बापिस चची और माँ के पास कमरे में पहुंचा तो देखा चची एक ब्लाउज पहन कर देख रही थी, उनके ब्लाउज के पैट खुले हुए थे, और सबस्व बड़ी बात अंदर ब्रा नहीं थी रो चूचियों बहार थी,

मुझे देखते hi चची अपनी चूचियों को छुपाने का नाटक करने लगी आउट अपने हाथ सीने पर लगा लिए,

माँ- अरे का कर रही हो रज्जो बच्चा hi है तुम्हारा, इससे काहे की शर्म,

मैंने भी चची को आँख मार के इशारा कर दिया, तो चची तो और तेज़ तुरंत समझ गयी,

रज्जो- हाँ सही कह रही हो जीजी, हमें तो लगा कोई और है,

मैं हामी पाकर बिस्तर पर बैठ कर दोनों की बातें सुनने लगा,

माँ- ाचा कैसा आ रहा है? सही है ब्लाउज?

रज्जो- कैसा हुआ है थोड़ा छाती पर,

माँ- कैसा तो होगा hi, तुम्हारे थान जो इतने बड़े हैं दुधारू भैंस जैसे,

माँ ने चची को छेड़ते हुए कहा,

रज्जो- हाय ढैय्या देखो तो कैसे बोल रही हो बिटुआ के सामने,

माँ- अरे बिटुआ को नहीं दीखता का,

रज्जो- हमसे बड़े तो तुम्हारे हैं जीजी, लगता है अब भी रोज़ चुस्वाति हो,

चची ने पलटवार करते हुए कहा, मुझे दोनों की मीठी नोकझोंक सुनकर मज़ा आ रहा था,

माँ- हमसे बड़े तुम्हारे हैं रज्जो रानी तभी तो हमारा ब्लाउज नहीं आ रहा,

रज्जो- ये तो ब्लाउज hi छोटा है इसलिए.

माँ- ाचा मानोगी नहीं की तुम्हारे बड़े हैं हमसे,

रज्जो- हम क्यों मानें,

माँ- चलो कर्मा से hi पूछ लो, किसके बड़े हैं,

माँ से ये सुनकर तो चची हैरान हो गयी साथ hi उन्हें ख़ुशी हुई की माँ उनके सामने इतना खुल रही हैं,

रज्जो- हाँ अभी पूछ लेते हैं,

चची ने अपने ब्लाउज के दोनों पाटों को अलग करते हुए ब्लाउज को अपनी बाजुओं से पकड़ कर पूरी तरह से उतार दिया और ऊपर से नंगी हो गयी और बोली- अब बता बचुआ हमारे बड़े हैं या तुम्हारी माँ के,

में- ुहममम

मैं उन्हें ध्यान से देखने की कोशिश करने लगा तो इतने में चची बोली- अरे पर ऐसे कैसे बताएगा हमारे तो सामने हैं तुम्हारे ब्लाउज से छुपे हुए हैं,

माँ- तो इसमें कौनसी बड़ी बात है ये लो,

ये कहते हुए माँ ने कुछ hi पालो में अपना ब्लाउज उतार दिया, और ब्रा उन्होंने भी नहीं पहनी थी और वो भी चची की तरह ऊपर से नंगी हो गयी,

चची तो हैरान रह गयी उन्होंने सोचा नहीं था की माँ इतनी आसानी से अपना ब्लाउज उतार देंगी वो भी अपने बेटे के सामने, रज्जो चची की आँखों में ये देख कर चमक आ गयी,

माँ- अब बता कर्मा किसके बड़े हैं मेरे या तेरी चची के,

माँ और रज्जो चची दोनों एक दुसरे के बगल में खड़े होकर मुझे अपनी अपनी भरी हुई चूचियां दिखते हुए बोली,





अब बात मुझपर थी तो मैं कैसे इतनी आसानी से बता देता, तो मैंने भी बात को खींचा,

में- चची ऐसे दूर से तो देखने में तुम्हारे बड़े लग रहे हैं, पर,

माँ- देखा, हमने कहा था न,

रज्जो- अरे उसकी बात तो पूरी होने दो जीजी, पर क्या बचुआ?

में- पर सिर्फ देखकर थोड़े hi पता चलता है, हाथ में किसके कितने भर कर आते हैं तभी सही से पता चल सकता है,

मैंने मुस्कुराते हुए कहा तो तै ने सोचा कर्मा सही कह रहा है साथ देती हूँ जीजी नंगी तो हो hi गयी है क्या पता कुछ और के लिए राज़ी हो जाएं और एक बार ये मान गयी तो मज़े hi मज़े हैं,

रज्जो- अच्छा तो देख ले क्या परेशानी है, क्यों जीजी,

चची ने थोड़ा झिझकते हुए कहा साथ hi माँ के चेहरे को भी ध्यान से देख रही थी की उनकी प्रतिक्रिया कैसी है,

माँ- हाँ ठीक है पर इससे होगा क्या,

रज्जो- मतलब,

माँ- मतलब अगर तुम्हारे बड़े निकले तो? कोई शर्त वगेरा लगाओ रज्जो रानी,

चची समझ गयी की माँ अभी थोड़े अचे मूड में है और उसका पूरा फायदा उठाना चाहिए,

रज्जो- हाँ लगा लेते हैं शर्त जीजी, बताओ क्या शर्त लाएं,

मुझे दोनों की बातों में बड़ा मज़ा आ रहा था,

माँ- अरे अब ये मैं क्या बताऊँ, तुम hi बोलो,

में- मैं बताऊँ,

माँ- हाँ तू hi बता,

में- ये रखो की जिसकी बात सच होगी मतलब जिसके चुके छोटे होंगे वो जीतेगा, और जीतने वाला हरने वाले से थोड़ी देर तक कुछ भी करवा सकता है, अपनी मर्ज़ी से,

रज्जो- ठीक है मुझे मंज़ूर है,

माँ- तो फिर मुझे भी,

में- तो ठीक है अभी देख कर बताता हूँ किसके बड़े हैं,

मैं पहले रज्जो चची के पीछे गया और पीछे से उनकी दोनों चूचियां हाथों में भर ली और उन्हें दबाने लगा मसलने लगा,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह लल्लाहहहह आराम से,

माँ- क्या हुआ अभी से ाः करने लगी रज्जो.

माँ उनके सामने बैठकर अपनी चूचियों पर हाथ फिरते हुए बोली,

रज्जो- हाँ जीजी, है तो मर्द का हाथ hi, और ये जब बदन को मसलता है तो आह्हः तो निकल जाती है,

माँ- ये तो सही कहा रज्जो रानी,

मैंने कुछ देर अच्छे से चाची की चूचियों को आते की तरह गूंथा और फिर छोड़ कर बोलै- माँ अब तुम्हारी बारी,

और माँ के पीछे आ गया,

रज्जो- अब देखते हैं जीजी तुम्हारी आह्ह्ह्हह्ह निकलती है या सिसकी,

माँ- तुम्हे बहुत इंतज़ार है हमारी सिसकी सुनने का,

इतने में मैंने माँ के पीछे जगह ली और उनकी चूचियों को हाथ में थाम लिए,

रज्जो- इंतज़ार तो है जीजी,

मैंने फिर धीरे धीरे से माँ की चूचियों को भी उसी तरह दबाना और मसलना शुरू किआ और माँ के मुँह से बेहद कामुक सिसकियाँ निकलने लगी, जो की शायद वो चची को उत्तेजित करने के लिए और बढ़ा कर निकल रही थी,

रज्जो चची भी एक माँ को बेटे से चूचियां मसलवटे देख उत्तेजित होने लगी और खुद hi अपनी चूचियों को मसलने लगी, मेरा लुंड भी अब पाजामे में बिलकुल अकड़ चूका था, मैंने उतनी hi देर माँ की चूचियों को भी मसला और फिर अलग हुआ तो दोनों मेरी और देखने लगी.

रज्जो- तो बताओ किसके ज़्यादा बड़े हैं थान,

में- नापने और देखने दोनों के बाद मैं यही कह सकता हूँ की तुम्हारे बड़े हैं चची,

रज्जो- धत्त तेरे की,

माँ- अरे वाह अब आएगा मज़ा रज्जो रानी,

रज्जो- बहुत खुश हो रही हो जीजी,

माँ- खुश क्यों न होऊं शर्त जो जीती हूँ,

रज्जो- हाँ ठीक है बताओ क्या करना है,

माँ- वैसे कुछ भी करवा सकती हूँ?

माँ ने मेरी और चची की और देखते हुए कहा,

रज्जो- हाँ करवा तो सकती हो जीजी,

माँ ने कुछ सोचा फिर बोली- ाचा चलो तो रज्जो रानी अपनी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दो.

रज्जो- हैं? क्या बोल रही हो जीजी नंगा करवा के मानोगी का?

चची ने हँसते हुए कहा,

माँ- अब शर्त हारी हो जो चाहे करवा सकती हूँ,

रज्जो- पर यहाँ कर्मा के सामने कैसे?

माँ- अरे अभी तो बोलै तुमने अपना बच्चा है तो उससे कैसी शर्म,

रज्जो- मतलब उतरने hi पड़ेंगे,

चची ने मेरी और देखते हुए कहा तो मैंने भी हाँ में सर हिलाकर उन्हें आगे बढ़ने का इशारा किआ, चची ने फिर थोड़ा हिचकिचाने का नाटक करते हुए सारी उतर दी और फिर अपना पेटीकोट का नारा खोल कर जैसे hi नीचे सरकाया मेरी और खासकर माँ की आँखें चौड़ी हो गयी क्यूंकि अंदर कच्ची तो थी नहीं तो चची हमारे सामने पूरी नंगी हो गयी थी, माँ चची के बदन को लगातार देखे जा रही थी,

रज्जो- लो जीजी उतार दिए अब खुश,

माँ- हाय रज्जो रानी क्या बदन है तुम्हारा, तुम्हे ऐसे कोई भी देखले तो बूढ़े बच्चे सबके अरमान जाग जाएँ,

रज्जो- कहाँ जीजी अब हमारी तो उम्र हो चली, बच्चे जवान हो रहे हैं,

माँ- अरे अभी कहाँ, अभी तो तुम न जाने कितने क़तल कार्डो अपने बदन से,

रज्जो- अरे रहने दो जीजी अब इतना भी मत चढ़ाओ,

माँ- ाचा मेरी बात नहीं मान रही तो कर्मा से पूछ ले, क्यों कर्मा कैसी लगी चची,

में- अरे माँ पूछो मत चची के आगे तो आजकल की लड़कियां कुछ भी नहीं,

रज्जो- धत्त्त कुछ भी बोलता है,

में- अरे सही में चची, ये भरी हुई छुछियां, भरा हुआ बदन, मोठे चूतड़ हाय मुझसे तो खुद से रुका नहीं जा रहा,

मैंने जानकार गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया ताकि उत्तेजना और बढे वैसे भी दोनों को hi छोड़ चूका था तो कैसा दर,

रज्जो- हाय ढैय्या देखो जीजी, कैसे बोल रहा है बेशरम,

माँ- पर कह तो सही रहा है रज्जो, अगर हम लड़का होते तो अब तक तुम पर चढ़ गए होते,

में- अरे उसमे लड़का होने की क्या ज़रुरत ऐसे भी चढ़ सकती हो माँ,

रज्जो- देखो तो इसे,

माँ- वैसे बात सही है, ाचा रज्जो तुम्हे देखना है तुम्हारे बदन का असर,

रज्जो- मतलब कैसे देखूं असर समझी नहीं

माँ ने मेरी और इशारा किआ, और बोली- जाओ कर्मा का पजामा उतार के देख लो,

रज्जो- धत्त्त,

माँ- अरे धत्त क्या, शर्त हारी हो पूरी करो और देखो क्या पता कुछ पसंद आये,

रज्जो- हम कुछ ज़्यादा नहीं कर रहे जीजी,

माँ- बिलकुल नहीं, अब सोचो मत, और जो कहा है वो करो,

मैंने भी चची को इशारा किआ तो चची मुस्कुराते हुए मेरे पास आई और झुकी और मेरे पाजामे की लास्टिक में उँगलियों को फंसाया और नीचे सरका दिया, और मेरा लुंड स्प्रिंग की तरह बहार आ गया, चची ने उसे हैरानी से देखा और फिर माँ को देखा और फिर मेरा पजामा पूरी तरह से पैरों से निकल दिया,

रज्जो- जीजी बचुआ बड़ा हो गया है हमारा,

माँ- बड़ा तो हो गया है, रज्जो इतना बड़ा की तुम्हारी खुजली मिटा सके,

रज्जो- मतलब,

माँ- अरे अब बनो मत, खड़ा लम्बा कड़क लुंड सामने है इसे देख कर कुछ नहीं करोगी तुम,

रज्जो- कर तो बहुत कुछ सकते हैं जीजी पर,

माँ- पर वॉर छोडो और मज़े लो यहाँ कौन है देखने वाला,

बस माँ ने इतना कहा की चची ने मेरा लुंड हाथ में थाम लिए और उसे मुठियाने लगी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह जीजी कितना बड़ा है हाय मोटाई भी देखो, अह्ह्ह कितना कड़क और गरम है तुम्हारे बेटे का लुंड,

चची मेरा लुंड मुठियाते हुए माँ की और देख कर बोली और वो इसलिए ताकि माँ को उत्तेजित कर सकें,

माँ- हम्म्म तो फायदा उठा न इस मोठे लुंड का रज्जो, सिर्फ मुठियायेगी का?

माँ अपनी छूछीयों को मसलते हुए बोली,

रज्जो- ुहममम बिलकुल नहीं जीजी आज तो इस मोठे लुंड के पूरे मज़े लुंगी, अह्ह्ह्ह क्याःह्ह्ह लुंड है, ुहममम

चची अपना चेहरा मेरे लुंड के पास लेकर लुंड को चेहरे पर घिसते हुए बोली,

माँ- ुहममम अह्ह्ह्ह

चची एक नज़र माँ पर भी बनाये हुई थी, और जब देखा उन्होंने की माँ भी उत्तेजित हो रही हैं तो बोली- जीजी हम दोनों तो नंगे हो गए पूरे तुम भी अपनी सारी पेटीकोट निकल दो न, अपने बेटे को अपना बदन दिखाओ,

माँ ने ये सुना और उठी और दरवाज़ा बंद किआ फिर मुस्कुराते हुए चची को देखकर अपनी साड़ी उतरने लगी, आउट सारी के बाद अपना पेटीकोट भी खोल दिए और जैसे hi नीचे गिरा तो चची की आँखें चमक गयी क्यूंकि उनकी तरह hi माँ भी नीचे से नंगी थी और पूरी नंगी हो गयी,

चची मेरे लुंड को मुठियाते हुए बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीजी क्या बदन है तुम्हारा अह्ह्ह देख कर्मा अपनी नंगी माँ को,

में- हाँ चची, कितनी मस्त गांड है माँ की अह्हह्ह्ह्ह कितने मस्त चूतड़ हैं,

माँ नंगी होकर फिर से बिस्तर पर बड़ी कामुक ढंग से तंग फैलाकर बैठ गए जिससे हम दोनों को hi उनकी गीली छूट साफ़ दिखने लगी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह जीजी तुम्हे देखकर तो कर्मा का लुंड मेरे हाथ में और फूल रहा है, अपनी नंगी माँ को देखकर बेटे का लुंड और कड़क हो रहा है,

माँ- अह्ह्ह्ह सच्चीईई,

रज्जो- हांण जिज्जी अब मुझसे तो रहा नहीं जा रहा,

ये कहके उन्होंने मेरे लुंड को मुँह में भर लिए और आक्रामक तरीके से चूसने लगी पर मेरे लुंड को चूसते हुए चची लगातार माँ को देखे जा रही थी,

में- अह्हह्ह्ह्ह चाची ओह्ह्ह्हह्ह,

चची खूब गहराई और आक्रामकता से मेरा लुंड छूसराही थी उनका थूं मुँह से टपक कर लुंड पर गिर रहा था, पर चची की नज़रें लगातार माँ पर थी,

चाची ने मेरा लुंड मुँह से निकल कर उसे मुठियाते हुए बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीईजीईउह्ह्ह क्या लुंड है तुम्हारे बेटे का अह्ह्ह्ह, देखो कैसे फूल रहा है मेरे हाथों में,

माँ- ुहममम हाँ तगड़ा है बहुत,

रज्जो- ओह्ह्ह्हह्ह जीजीईई ऐसा लुंड हो तो खुद को रोकना नहीं चाहिए चाहे फिर वो अपने बेटे का हो या किसी भाई काह,

चची मेरे टोपे पर जीभ फिरते हुए बोली,

माँ- पर बेटे का कैसी,

रज्जो- ओह्ह्ह्हह्ह जीजी छूट और लुंड में रिश्ते नहीं देखे जाते, अह्ह्ह्ह एक बार थोड़ा पास आ कर तो देखो,

चची के कहने पर माँ पास खिसक कर आ गयी और बिलकुल मेरे बगल में बैठ गयी अब एक और चची थी और दूसरी और माँ, चची अपने मुँह से लुंड निकल कर माँ को दिखते हुए बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीजी देखो कितना कड़क और गरम है, हाय इसे देख कर hi मेरी छूट पनिया रही है,

माँ- ुहममम हाँ बहुत लम्बा और मोटा है,

माँ झिझकने का नाटक करते हुए बोली,

रज्जो- अरे ऐसे क्या पता चलेगा जीजी एक बार छूकर तो देखो,

माँ- पर मैं कैसे?

रज्जो- अरे जीजी तुम्हारा बीटा hi तो है, बचपन में न जाने कितनी बार नंगा नहलाया होगा तब भी तो छुआ होगा,

माँ- पर तब की बात अलग थी अभी,

रज्जो- अरे जीज्ज इतना मत सोचो, एक बार इसको हाथों में तो ले कर देखो,

ये कहकर चची ने खुद से माँ का हाथ पकड़ कर मेरे लुंड पर रख दिया, माँ भी पूरा नाटक करते हुए हाथ में मेरा लुंड आते hi सिसक पड़ी, अब मेरे लुंड पर माँ और चची दोनों के हाथ थे, चची अपना हाथ ऊपर नीचे करने लगी तो माँ का भी उनके साथ चलने लगा,

रज्जो- कैसा है जीजी, कैसा लग रहा है बेटे का लुंड,

माँ- ुहममम बहुत hi कड़क है और गरम भी, अहम और मोटा भी कितना है,

रज्जो- वही तो जीज्ज, और जितना कड़क और गरम है अह्ह्ह इसका स्वाद भी उतना hi मस्त है, ahhhhhhhh,ummmmm,

चची माँ को दिखते हुए मेरा लुंड मुँह में भरते हुए बोली, माँ का हाथ अब भी मेरे लुंड पर था, माँ ने चची को चूसते हुए देखा तो अपना हाथ हटा लिया पर चची ने उनका हाथ पकड़ कर मेरी गोलियों पर रख दिया और फिर लुंड निकल कर बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीजी देखो इन रास की भरो गोलियों को, पूरी रास से भारी हुई हैं, अह्ह्ह जब लुंड इतना स्वादिष्ट है तो इसका रास कितना स्वादिष्ट होगा,

Maa-uhmm हाँ पूरी तरह से भरी हुई हैं, ुहम्म इसकी मलाई भी बड़ी स्वादिष्ट होगी,

माँ ने मेरी गोलियों को उँगलियों से सहलाते हुए कहा, ये देख चची खुश हो गयी और बोली- अह्ह्ह जीजी ऐसे hi सहलाओ हम दोनों मिलकर इसकी मलाई निकलते हैं,

ये कहकर चची ने मेरा लुंड मुँह में भर लिए, और चूसने लगी, माँ ने गोलियों को सहलाते हुए मेरी और देखा और बोली- कैसा लग रहा है बीटा?

में- अह्हह्ह्ह्ह माँ बहुत मज़ा आ रहा है,

मैंने माँ को अपनी और खींचते हुए कहा और उनका चेहरा मेरे चेहरे के बिलकुल करीब आ गया पर माँ ने अपनी उंगलियां मेरी गोलियों से नहीं हटने दी और लगातार सहलाना जारी रखा साथ hi वो अपने होंठों को मेरे होंठों के पास लाकर मुझे तड़पने लगी, नीचे चची लगातार मेरा लुंड चूस रही थी





माँ- ुहममम देख तेरी चची कितने अच्छे से तेरे कड़क लुंड को चूस रही है, कैसा लग रहा है तुझे,

में- ओह्ह्ह्हह्ह माँ बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है, कितना गरम मुँह है चची का, अह्हह्ह्ह्ह क्या मस्त चूसती है,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह तेरा लुंड hi इतना मस्त है की मन करता है चूसती hi रहूं,

माँ- तो रोका किसने है चूसती जाओ रज्जो रानी,

माँ ने फिर से नीचे खिसककर चची और मेरे लुंड की तरफ आते हुए कहा,

रज्जो- ुहंमंमह हाँ जीजी अब तो कहोगी तब भी नहीं छोडूंगी,

माँ- इतना पसंद आ गया कर्मा का लुंड,

रज्जो- अरे जीजी खुद hi देखो ऐसा लुंड किसे पसंद नहीं आएगा, ज़रा पास से देखो,

माँ भी चची की बात सुनकर थोड़ा और पास आई और मेरे लुंड को देखने लगी, माँ के चेहरे पर उत्तेजना साफ़ दिखाई दे रही थी जो चची भी देख रही थी,

चची ने माँ को दिखते हुए मेरा लुंड ऊपर से नीचे तक छाता और फिर मुँह में भर कर चूसने लगी, माँ भी अपनी जीभ को होंठों पर फेरकर जताने लगी की वो कितनी उत्तेजित है, चची माँ की हरकतों पर लगातार नज़र बनाये हुई थी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह जीजी तुम भी चख कर देखो न एक बार अपने बेटे के लुंड का स्वाद,

माँ- मैं?? नहीं मैं कैसे?

रज्जो- अरे जीजी कुछ नहीं होगा इस लुंड को ध्यान से देखो क्या तुम नहीं चूसना चाहोगी इसे, सच सच बताओ,

माँ- ुह्हह्हं हाँ चाहती तो हूँ, पर

रज्जो- पर क्या जीजी लुंड सामने है, देखो ऐसा मौका फिर मिले न मिले,

चची मेरा लुंड पकड़ कर माँ को दिखते हुए बोली,

माँ का चेहरा भी मेरे लुंड के करीब था पर वो खुद को रोक रही थी और चची के सामने नाटक कर रही थी, चची मेरा लुंड दिखा दिखा कर माँ को ललचा रही थी,

रज्जो- जीजी मन कर रहा है तो स्वाद ले लो कुछ नहीं होगा,

चची ने ये कहकर मेरा लुंड मुँह में भरकर चूसा और फिर मुँह से निकल कर माँ की और किआ, मेरा लुंड माँ के होंठों से कुछ इंच hi दूरी पर था, माँ कभी मेरे लुंड को देखती तो कभी चची की आँखों में,

रज्जो- अरे जीजी अपना मुँह खोलो और इस मोठे लुंड का स्वाद लो,

माँ ये सुन थोड़ा मुस्कुराई और फिर मुँह खोल कर मेरे लुंड की और बढ़ाया, चची ने उन्हें आगे बढ़ने का इशारा किआ और माँ ने मेरा लुंड मुँह में भर लिए, और तुरंत hi बहुत जोश से चूसने लगी,





ये देख चची तो ख़ुशी से फूली नहीं समाई और मेरे मुँह से भी आह्ह्ह्हह निकल गयी, माँ बिना रुके मेरा लुंड चूसे जा रही थी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह जीजी अह्ह्ह्ह आखिर ले hi लिया तुमने अपने बेटे का मोटा लुंड मुँह में, अह्ह्ह्ह कितनी प्यारी लग रही हो,

माँ सिर्फ हम्म्म की आवाज़ के साथ लगातार पागलपन के साथ मेरा लुंड चूसे जा रही थी,

में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह माहाहहहहह aiseeeeeeeeee होई,

रज्जो- ओह्ह्ह कर्मआहह कैसा लग रहा है अपनी संस्कारी माँ से अपना लुंड चुसवा कर,

में- अह्हह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है छछियईईई ohhhhhhhhhh क्या मस्त एहसास है,

रज्जो- माँ के मुँह की बात hi अलग होती है बेटाः,

में- सही कह रही हो चाची, अह्ह्ह्ह,

रज्जो- ऐसे hi चूसो जीजी अहहहजज दिखाओ अपने बेटे को उसकी माँ बिस्तर पर कितनी चुड़क्कड़ औरत बन सकती है,

माँ भी जैसे रज्जो चची को पूरी तरह चढाने पर आतुर थी और उनके कहे अनुसार मेरा लुंड गले तक ले कर चूसने लगी और तब निकला जब उन्हें सांस लेना मुश्किल हो गया,

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बेटे के साथ ये सब करना जितना गलत है उल्टा hi मज़ेदार,

माँ ने लुंड निकलकर हांफते हुए कहा,

रज्जो- सही कहा jeeejii,ahhhh ुहंममहग्घहहहहह,

माँ के लुंड निकलते hi चाची ने अपने मुँह ने भर लिए और फिर चूस कर निकल के बापिस माँ को दे दिया जिसे माँ फिर से चूसने लगी, और चची मेरी गोलियां मुँह में भर कर चूसने लगी,





मैं तो जन्नत में था, दोनों कामुक औरतें एक साथ मेरी सेवा कर रही थी, मेरी लगातार आह्हः निकल रही थी, माँ लुंड पर जलवे दिखा रही थी तो चची गोलियां बदल बदल कर चूस रही थी,

में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह माहाहहहहह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh छछियईईई ohhhhhhhhhh,

माँ और चची के होंठ बदल बदल कर नेरे लुंड पर चल रहे थे और जल्दी hi दोनों के होंठ आपस में भी जुड़ गए और दोनों एक बेहद कामुक ढंग से दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी, मेरा लुंड उन्हें देख कर ठुमके मारने लगा, दोनों एक दुसरे के होंठों को ऐसे चूस रही थी जैसे खा जाएँगी, जल्दी hi दोनों की जीभ भी एक दुसरे के मुँह में कुश्ती कर रही थी,

मैं सबसे ाचा दर्शक बन कर ये देखे जा रहा था, कुछ देर बाद दोनों हांफते हुए अलग हुए और चची ने अब आक्रामक होते हुए माँ को पीछे धकेला और उन्हें घुमा कर मेरे चेहरे पर बिठा दिया, माँ की छूट सीधा मेरे होंठो पर आ गयी, इस बार चची माँ को हिचकिचाने का भी मौका नहीं देना चाहती थी,

मैंने भी मुँह पर माँ की छूट आते hi अपना काम शुरू कर दिया और चाटने लगा,

मेरी जीभ महसूस करते hi माँ सिसकने लगी, और माँ को सिसकता देख चाची बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जीजी तुमने तो बेटे का लुंड चख लिए अब उसे भी अपनी माँ की छूट की चासनी चाटने दो,

माँ- uhmmmhaaaaaaaaaaaaa आज क्यायहहह क्याःह्ह्ह करवाऊंगी तुम रज्जो,

रज्जो- बस माज़ी दिलवाऊंगी जीजी, तुम बस बेटे की जीभ का मज़ा लो,

माँ- ुहममम हांबन,

रज्जो- कर्मा आज स्वाद ले ले अपनी माँ की छूट का, इसी से सालों पहले तू निकला था, अह्ह्हह्ज बापिस घुसजै और इसका स्वाद महसूस कर,

चची मुझे उत्साहित करते हुए बोली, और फिर नीचे होकर मेरे लुंड को मुँह में भर लिए, जिससे मेरी जीभ माँ की छूट पर और तेज़ी से चलने लगी, अब नज़ारा कुछ ऐसा था की माँ मेरे मुँह पर थी, मैं उनकी छूट चाट रहा था, चची मेरा लुंड चूस रही थी,





चची की नज़र बार बार माँ की छूट और मेरी जीभ पर थी और वो माँ को मुझसे छूट चतवता देख उत्तेजित हो रही थी,

तभी उन्होंने मेरा लुंड मुँह से निकला और कुछ पल बाद मुझे माँ की एक आह्ह्ह्हह्ह सुनाई दी, साथ hi उनकी टांगें मेरे सर पर कास गयी, वहीं मुझे मेरी कमर पर चची के चढ़ने का एहसास हुआ और कुछ hi पल बाद मेरे लुंड को चची की गरम छूट ने अपने अंदर समां लिए, और फिर चची ने मेरे लुंड पर धीरे धीरे आगे पीछे होना शुरू किआ, और फिर थोड़ा आगे होकर अपनी कमर घूमने लगी,

मैं माँ के सिसकने की वजह समझ गया था, चची ने अपनी जीभ माँ की गांड के छेड़ पर फिरनी शुरू कर दी थी, कमरे में बेहद hi कामुक दृश्य बन गया था, मैं नीचे लेता था, माँ मेरे मुँह पर थी और मैं उनकी छूट चाट रहा था, रज्जो चची मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर चुड़ते हुए माँ की गांड चाट रही थी, माँ दोहरे हमले से पागल हो रही थी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माहहहह अह्हह्ह्ह्ह राजहजूऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह कर्माहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

मैं और चची माँ की सिसकियों से और उत्तेजित होकर उनकी छूट और गांड चाट रहे थे, चची जीभ नुकीली कर माँ की गांड को भेद रही थी, और मैं उनकी छूट को, माँ ये दोहरा हमला ज़्यादा देर सह नहीं पाई और मेरे मुँह में झड़ने लगी, कांपते हुए माँ ने अपना रास मेरे मुँह पर छोड़ दिया और झाड़कर मेरे मुँह से हटकर एक और गिर गयी,

उनके हटते hi रज्जो चची मेरे मुँह को चाट कर माँ की छूट का रास चाटने लगी, साथ hi मेरे होंठों को भी चूसने लगी, मैं नीचे से कमर पकड़ कर उनकी छूट में दनादन धक्के लगा रहा था, चची मेरे होंठों को चूसते हुए लगातार सिसक रही थी, कुछ देर इसी आसान में छोड़ने के बाद चची घूम कर दोबारा मेरे लुंड को छूट लेकर बैठ गयी और अपनी गांड मेरी और कर के छोड़ने लगी, मैं भी नीचे से लगातार उनकी छूट में धक्के लगा रहा था, अब तक माँ भी अपने स्खलन के नशे से बहार आ चुकी थी और हमारे बगल में आ कर बैठ गयी और रज्जो चची को मुझसे छुड़ता देख अपने होंठ उनके होंठो से दोबारा मिला दिए, और दोनों दोबारा से एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी,





मैं नीचे से लगातार धक्के लगाए जा रहा था, और चची की मस्त छूट को पेल रहा रहा, चची अपनी छूट को सहला कर अपनी उत्तेजना और बढ़ा रही थी, जल्दी hi दोनों के होंठ अलग हुए,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह राजहजूऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह कैसा लग रहा है मेरे बेटे का लुंड लेकर,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह पूछो मत्तत्त इस एहसास को बताह नाहीई सकती और नाआह्ह्ह्ह hi तुममम समझ पाओगईई जब तक खुद्द्द अपनी छूट में नहीं लोगीइ,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह अपनी बेटे का लुंड अपनीई छूट में कैसी ले लूँ रज्जो,

रज्जो- अरे जीजी ीसीईई चुत से तो निकला है कर्मा आज बापिस घुस जाने दो उसे,

माँ- अह्ह्ह्हह्हह सच में?

माँ ने अपनी छूट सहलाते हुए कहा, और साथ hi वो चची की छाती और गर्दन को चूमने लगी और चची और गरम होने लगी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनंन्न जीजी, एक बाअररर्र ली लूँगी तो ज़िन्दगी भर खुश रहोगी,

माँ- पर अपनी hi बेटे से कैसे चुद जॉन?

माँ ने गर्दन को चूमते हुए कहा,

मैं दोनों की बातें सुनते हुए नीचे से चची को छोड़ रहा था,

रज्जो- हाँ जीजीई पर अपनी बेटे से छोड़ने में जो माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह है वो कही नाहीई,

माँ- बोल तो ऐसे रही होऊ जैसे तुमने अपने बेटो से न जाने कितनी बार छुड़वाया है,

रज्जो चची ने कुछ सोचा और बोली- हॉँण्णन जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह छुड़वा चुकी हूँ, और वो भी दोनों बेतुओं से अह्ह्ह्ह तभी बोल रही हूँ,

माँ ने इस पर हैरान होने का ाचा नाटक किआ जैसे उन्हें ये बात पहली बार पता चली है,

माँ- क्या सच में? तुम सरजू बिरजू के साथ?

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनंन्न जीजी, आज सुबह hi दोनों ने एक साथ मिलकररर हमारी ठुकाई की हाउ,

माँ ने ये सुनकर चची की चूचियों को चूसना शुरू कर दिया, माँ ने उनकी चूचियों को हाथ से पकड़ा और एक को मुँह में भर लिए, और चूसने लगी, नीचे से मेरे धक्के लगातार जारी थे,





रज्जो- हाँ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तुम माआहहहह बेटाःह्ह्ह मिलकर आअज मेरीए जान लोगी,

में- जाएं नहीं चची जो लेना है वो तो ले hi रहे हैं, और वो हैं तुम्हारे मज़े,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन लेली बेटाःह्ह्ह अपनीईईई चायःहची की छूट के माज़ी फिर अपनीईईई माहहहह के भी लेनाःह्ह्ह,

माँ ये सुनते हुए चाची की छुछियां और मसल मसल कर चूसने लगी,

चची भी उत्तेजना से पागल हो रही थी माँ का एक हाथ उनकी छूट के दाने को भी छेड़ रहा था, जल्दी hi इसका नतीजा ये हुआ की चची मेरे लुंड पर झड़ने लगी और झड़ते hi थरथराते हुए पीछे मेरे ऊपर लेट गयी, माँ के मुँह से उनकी चूचियां निकल गयी तो माँ झुककर मेरे लुंड और उनकी छूट पर जीभ फिरने लगी, फिर हाथ से मेरा लुंड चची की छूट से निकला और उसे चूसने लगी,

चची लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी, और फिर धीरे से उठ कर बैठ गयी और माँ को मेरा लुंड चूसते हुए देखने लगी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह जीजी लगता है तुम्हे बेटे का लुंड भा गया है,

माँ- ुहममम

माँ ने बिना लुंड मुँह से निकले बस इतना किआ, चची उठ कर माँ के बगल में बैठ गयी और उनके सर को मेरे लुंड पर दबाने लगी, मेरा लुंड जड़ तक माँ के मुँह में चला गया और माँ के गले गग्गूऊऊऊ गग्गूऊऊऊ की आवाज़ आने लगी साथ hi उनके मुँह से थूक भी मेरे लुंड पर गिरने लगा, चची ने माँ का सर तब हटाया जब वो झटपटाने लगी, और जैसे hi माँ के मुँह से लुंड निकला माँ ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने लगी, चची ने माँ को वैसे hi धक्का देकर बिस्तर पर पीछे गिरा दिया, और उनके ऊपर चढ़ कर उनके होंठो को चूसने लगी, दोनों औरतें एक बार फिर से एक कामुक आक्रामक चुम्बन में व्यस्त हो गयी,

कुछ पल बाद जब दोनों के होंठ अलग हुए तो चची ने माँ की आँखों में देखते हुए कहा- बेटे का लुंड लेने को तैयार हो,

माँ ने कुछ जवाब नहीं दिया, तो चची ने हाथ नीचे लेजाकर माँ की छूट को सहलाने लगी, और उसका गीलापन अपनी उँगलियों पर महसूस कर बोली- इसने तो अपना जवाब दे दिया है, चची उठ कर बैठ गयी और माँ के सर की और आ गयी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह आजा कर्मा अपनी माँ की छूट छोड़ेगा?

में- हाँ चच्ची आह्ह्ह्हह्ह,

मैंने लुंड मुठियाते हुए माँ के पैरों के बीच तुरंत जगह लेते हुए कहा,

रज्जो- जीजी तैयार हो, अपने बेटे से छोड़ने के लिए, जिस को सालों पहले इसी छूट से निकला था उसे बापिस अपनी छूट में समां लेने के लिए,

माँ- ुहंममहहाआनं,

में- अह्हह्ह्ह्ह माहाहहहहह तम्हारिई छूट कितनी गरम है,

मैंने अपना लुंड माँ की छूट के ऊपर घिसते हुए कहा, ये देख चची और माँ दोनों की आह्ह्ह्हह निकल गयी,

रज्जो- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बेटाझ अब्ब्ब देर मत कर, और घुसा दे अपनी माँ की छूट में अपना लुंड,

में- अह्हह्ह्ह्ह हाँ.

ये कहके मैंने लुंड को माँ की छूट के छेड़ पद टिकाया और एक धक्का लगाकर अंदर घुसा दिया, इस धक्के के बाद हम तीनो hi सिसकने लगे,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह जीजी देखो तुम्हारर बेटे का मोटा लुंड तुम्हारी छूट में घुस गया है, अह्हह्ह्ह्ह कर्मा तू अब मादरचोद बन गया है,

चची खुश होते हुए बोली, क्यूंकि उनके हिसाब से उनकी योजना जो सफल हो गयी थी,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh हाय माहहहह दैयाहः,

में- अहहह्म्म ैसाआह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह नाहीईईई आगया कभी,

रज्जो- ये होई तो माँ की छूट का माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह है बीटा,

में- अहहह्म्म सही कहा चच्ची,

मैंने माँ की छूट में धक्के लगाने शुरू किया और उन्हें दनादन छोड़ने लगा, माँ भी हर धक्के पर सिसकने लगी, चची हम दोनों का उत्साह बढ़ाते हुए अपनी छूट मसल रही थी, चची ने सीधे होकर मेरी आँखों में देखते हुए पूछा- कैसा लग रहा है बेटाःह्ह्ह,

में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह चाची बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है,

ये सुन चची आगे होकर मेरे होंठों को चूमने लगी, वहीं चची के झुकने से उनकी छूट माँ के सामने आ गयी तो माँ उनकी छूट को उँगलियों से छेड़ने लगी, चची मेरे होंठों में hi सिसकने लगी, और सिसकते हुए माँ की छूट के दाने को सहलाने लगी,





तीनो hi एक दुसरे से जुड़े हुए थे और वासना के नशे में थे, मैं लगातार माँ को छोड़ रहा था, माँ भी अब पूरे जोश में थी और धीरे धीरे उनका नाटक काम होता जा रहा था, चची की छूट सहलाते हुए आहें भर्त्र हुए बड़बड़ा रही थी,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh कर्माह छोड़ड़ड़ अह्हह्ह्ह्ह अपनीईईई माहहहह को रज्जो के सामनेई अह्हह्ह्ह्ह दिखादे कितना बड़ा मादरचोद ही तू, और तेरी माहहहह कितनी चुड़क्कड़ है,

मैं और चची उनकी बातें सुन कर उत्तेजित हो रहे थे, माँ ने कुछ पल बाद चची के चूतड़ों को पकड़ कर अपने मुँह पर खींच लिए और उनकी छूट को चाटने लगी, मैं माँ को छोड़ रहा था वो चाची की छूट चाट रही थी, चची भी खूब सिसक सिसक के छूट चटवा रही थी,

कुछ देर यूँ hi छोड़ने और चटवाने के बाद हमने आसान बदले, और माँ मुझे नीचे लिटाकर मेरे लुंड की सवारी करने लगी, मैं माँ के चूतड़ों को पकड़ कर मसलते हुए अपने ऊपर उछलने लगा वहीं चची मेरे सर के पास थी तो माँ झुक कर उनकी छूट चाटने लगी,





चाची का मज़े से बुरा हाल था और वो अपनी कमर उठा उठा कर माँ के चेहरे पर घिस रही थी बीच बीच में, माँ भी पूरी लगन से चाची की छूट चाट रही थी, और मुझे तो माँ की छूट में हमेशा की तरह जन्नत का मज़ा मिल रहा था,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनंन्न जीजी ओह्ह्ह्हह्ह सोचा आअह्ह्ह्ह नहीं था तुमममम एक दिन में इत्नाह खुल जाऒगीई, अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है,

में- सहीईई कह रहीए हो छाछी, बहुत मज़ा आ रहा है,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह आएर्गाः होई बेटाःह्ह्ह अपनीईईई माहहहह जो छोड़ राहाहहह है, अह्ह्ह्हह्हह जैसी तेरा लुंड चुदाई करने के लिए बनाः है वैसी hi जीजी का बदन hi छुड़ाए के लिए बनाः है,

में- तभीयी तो अपनी बेटे के लुंड पर उछाल रही है माहहहह अपनी गरम छूट में मेरा लुंड लेकर, साथ hi तुम्हारी छूट की चासनी भी चाट रहीए है,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनंन्न अब्ब्ब्ब जीजी कोई चुदाई की शुरुवात हो चुकी है अब रोकना मत, जीजी अब छुड़वाते राहाहहह,

में- हाँ छाछी अब किस्से छुडवायेगी माहहहह अपने बेटे से तो छुडवाहहह लीआहठ्ह, अब क्या भाई और बाप से भी छुडवायेगी,

रज्जो चची तो माँ को नाना से और मां से छोड़ने का सुनकर hi इतनी उत्तेजित हुई की माँ के मुँह पर झड़ने लगी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनंन्न जीजी अह्हह्ह्ह्ह मैंनं गयी ओह्ह्ह मर्डर गयीईइ,

चची थरथराते हुए झड़ने लगी, और झाड़ कर वहीं बगल में पसर गयी, उनके झड़ते hi मैंने माँ को उठाया और बिस्तर के बगल में झुका कर पीछे से उनकी छूट में लुंड पेल कर उन्हें छोड़ने लगा,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh हैं कर्माहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह छोड़ अपनी चुदड़ो माहहहह कोऊ, अह्हह्ह्ह्ह छोड़..

मैं भी तगड़े लम्बे लम्बे धक्के लगा रहा था,

में- हाँ ओह्ह्ह्हह्ह माहहहह लुओ अपने बेटे काअह्ह्ह लुंदड़ छूट में,

कुछ देर में रज्जो चची भी उठ गयी और माँ के और मेरे पैरों के बीच आकर बैठ गयी और मेरे लुंड को माँ की छूट में अंदर बहार होता देखने लगी, साथ hi बीच में माँ की छूट के दाने को भी चाटने का प्रयास करती, मैंने जब ये देखा तो धक्के धीरे किये और फिर अपना लुंड माँ की छूट से निकल कर उनके मुँह में घुसाया फिर उनके मुँह से बापिस माँ की छूट में और ोहिर उनके मुँह में,





ऐसे hi मैं लगातार माँ की छूट और चची के मुँह में बदल बदल कर लुंड कुछ देर डालता रहा और फिर माँ की छूट में घुसा. कर उनकी कमर पकड़ कर तेज़ी से उन्हें छोड़ने लगा, अब मुझे अपना रास भी लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था, और माँ तो मेरे धक्कों की वजह से जैसे पागल हुयी जा रही थी, रही सही कसार नीचे से चची उनकी छूट पर जीभ चलकर पूरी कर रही थी, और एक पल तो चची ने माँ की छूट के दाने को मुँह में भर कर तेज़ी से चूस लिए तो माँ की कमर थरथराने लगी, उनका बदन कंपनी लगा, पर तभी चची ने उनके चूतड़ों को कसकै पकड़ कर अपना मुँह माँ की छूट पर लगा दिया और उनका रास चाटने का इंतज़ार करने लगी, माँ झाड़ रही थी, पर छाछी ने माँ की छूट के रास की उम्मीद लगाई थी पर अचानक से माँ की छूट से मूट की धार निकली और चची के मुंह में भरने लगी, पहले तो छाछी चौंकी पर फिर संभल कर उसे भी गटकने का प्रयास करने लगी, पर धार इतनी तेज़ थी माँ के मूट की चची सिर्फ कुछ hi मुँह में भर प् रही थी बाकी उनके मुँह से चालक कर उनके चेहरे और बदन को भीगा रहा था, माँ का मूट जब ख़तम हुआ तो चची बिलकुल भीग चुकी थी और माँ तो बिलकुल बेजान सी होकर ज़मीन पर hi गिर कर लेट गयी, मैंने चची को देखा जो माँ के मूट में नहीं हुई मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी,

मैंने उन्हें वैसे hi उन्हें नीचे लिटा दिया और उनके ऊपर आकर अपना लुंड उनकी छूट में डालकर तेज़ी से धक्के लगाने लगा, साथ hi झुककर मैंने अपने होंठ उनके होंठो से लगा दिए और उनके होंठो पर से माँ के मूट को चाटने लगा, चाची भी पागलों की तरह मेरा साथ देने लगी, वो भी ये देख कर उत्तेजित थी की मैं उनके चेहरे से अपनी माँ का मूट चाट रहा था,

मैं भी अब उत्तेजना के शिखर पर hi था और जल्दी hi झड़ने के करीब पहुंचा तो मैंने उनकी छूट से लुंड निकला और फुर्ती में माँ के चेहरे के पास पहुंचकर अपने लुंड को मुठियाने लगा, चची भी मेरे पीछे पीछे आ गयी और मेरे हाथ मेरे लुंड से हटाकर खुद मुठियाने लगी कुछ hi पलों में मेरे लुंड से रास की पिचकारियां निकलने लगी जो माँ के चेहरे गर्दन और चूचियों पर गिरने लगी, चची मेरे लुंड को हिलाकर मेरे रास की पिचकारियां माँ के चेहरे के अलग अलग हिस्से पर मार रही थी, माँ पड़ी हुई आँखें बंद किये हुए ये देख मुस्कुरा रही थी,

मेरा झड़ना ख़तम हुआ तो माँ का चेहरा मेरे रास से सना हुआ था जिसे देख चची ने मेरा लुंड छोड़ा और माँ के ऊपर चढ़ कर उसे चाटने लगी , पहले मेरे रास को जीभ से मुँह में इकठा करती और फिर माँ के होंठों से होंठ लगा देती और दोनों मेरे रास को एक दुसरे के साथ बाँट बाँट कर निगल रही थी, बहुत hi कामुक दृश्य था, जिसे देख कर मेरे मन में एक और ख्याल आया, और मैं घुटनो पर आ गया,

माँ और चची एक दुसरे के होंठों आउट चेहरे को चूसने और चाटने में लगी थी इसी बीच एक धार दोनों के होंठों से टकराई, जिसके पड़ते दोनों ने नज़र उठाकर मेरी और देखा वो मेरे मूट की धार थी जो मैं दोनों के होंठों के बीच मार रहा था, ये महसूस होते hi चची और माँ दोन्यू hi मुँह खोल कर मेरे मूट की अपने मुँह में भरने की कोशिश करणे लगी मैं धार हिलाकर दोनों का चेहरा भी भीगा रहा था, चची के चेहरे से टकराकर मूट माँ के चेहरे के ऊपर गिर रहा था, जल्दी hi मेरा मूट ख़तम हुआ, माँ का मुँह खुला हुआ था और उसमे मूट होंठों तक भरा था और माँ ऐसे hi रुकी हुई थी, मूट तो चची के मुँह भी था, उन्होंने अपना मुँह खोला और मूट कक माँ के चेहरे पर गिरा दिया और फिर अपनी जीभ लम्बी कर माँ के मूट भरे खुले मुँह में डूबने लगी, और फिर अपने होंठ माँ के होंठों से लगा कर दोनों मूट को एक दुसरे के मुँह में उड़ेलते हुए जातक गयी,

इसके बाद हम तीनो hi हांफ रहे थे,

माँ- हाय ढैय्या पूरा कमरा गन्दा हो गया मूट से,

माँ उठाते हुए बोली,

में- अरे मैं साफ़ कर देता हूँ माँ,

चची- और का गन्दा भी तुम बेटे ने किया है साफ़ भी करो, चची भी उठकर हँसते हुए बोली,

माँ- आजा रज्जो रानी हम लोग नहाने चलते हैं,

चची- अरे साथ नहाने में और मज़ा आएगा,

दोनों बच्चो की तरह एक दुसरे का हाथ पकड़ जार बाथरूम में चली गयी मैं बाल्टी और पूछा लेकर मूट साफ़ करने लगा, फिर जब तक वो नाहा कर आई तब तक सब साफ़ हो चूका था, फिर मैं नहाने घुस गया, बापिस आया तब तक रज्जो चची कपडे पहन कर तैयार थी और जा रही थी, जाने से पहले उन्होंने मेरे और माँ दोनों के होंठों पर चुम्बन दिया और चली गयी, उनके जाते hi मैं और माँ हंसने लगे,

में- नाटक बहुत करती हो माँ तुम,

माँ- अरे मज़ा आता है, ाचा बता चाय पियेगा,

में- बना लो,

माँ चाय बनाने लगी और मैं आंगन में बैठ कर टीवी देखने लगा इतने में धीरे धीरे बाकी लोग भी आने लगे,

जारी रहेगी,
 
पूर्वी- क्यों मम्मी तुम्हे मज़ा नहीं आ रहा?

रेनू- मज़ा नहीं आता तो तेरा मूट क्यों मुँह में लेती, ाचा वो सब छोड़ ये बता,

पूर्वी- क्या?

रेनू- किस किस से चूड़ी है तू, और टेरर घर में क्या क्या होता है क्या राज़ जैन हैं तेरे परिवार के,

पूर्वी ये सुन कर मुस्कुराई और रेनू को आँखों में देखा, और मुस्कुराई...



अपडेट 230


कायमगंज

पूर्वी ने अपने घर की साड़ी कहानी साथ hi रिम्मी के ससुराल की भी अपनी सास को चाय पीते हुए बताई, रेनू देवी के चेहरे के भाव हर चुस्की के साथ बदल रहे थे,

रेनू- सही में बहुत बड़ी रंडियां हो तुम सब तो एक साथ सब एक दुसरे से छुड़वा लेते हो,

पूर्वी- ओह्ह्ह्हो देखो तो बोल कौन रहा है, जो रात में गांड उठा उठा कर बेटे के लुंड पर कूद रही थी,

पूर्वी ने अपनी सास को छेड़ते हुए कहा,

रेनू- कमीनी मौका नहीं छोड़ती सुनाने का,

पूर्वी- बहु किसकी हूँ,

ये कहके पूर्वी ने अपनी सास के होंठों को चूम लिए,

रेनू- ये सब तो ठीक है पर जब तेरे पापाजी और प्रीती आ जायेंगे तो हमें संभल कर रहना होगा,

पूर्वी- वैसे जहाँ तक है प्रीती के सामने कोई चिंता नहीं,

रेनू- कोई चिंता नहीं मतलब?

पूर्वी- मतलब मुझे पूरा विश्वास है की तुम्हारे लादले बेटे, मादरचोद के साथ साथ अब तक भेनचोद भी बन गए होंगे,

रेनू- हैं, सच में नहीं नहीं प्रीती के साथ, पंकज ये कैसे हो सकता है,

पूर्वी- अरे मम्मी सीरियल की सास की तरह नाटक क्या कर रही हो, होने को तो माँ बेटे में भी नहीं हो सकता पर हुआ न, तो भाई बहन कैसे पीछे रह सकते हैं,

रेनू ये सुनकर कुछ सोचने लगी, और फिर बोली - तुझे पक्का यकीन है की ऐसा होगा,

पूर्वी- लो तुम्हारे लाल से hi पूछ लेते हैं,

ये कहकर पूर्वी ने तुरंत पंकज को फ़ोन लगाया स्पीकर पर जिसे दो तीन बार बजने पर पंकज ने काट दिया, जिस पर रेनू के थोड़े भाव बदले- अरे कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गयी,

पूर्वी- नहीं गड़बड़ तो नहीं होनी चाहिए ऐसी कोई,

रेनू- कहीं प्रीती न मानी हो और कुछ ऐसा हुआ हो तो,

पूर्वी- अरे क्या पता लुंड छूट में घुसा हुआ हो और हमने बीच में फ़ोन कर दिया हो,

रेनू- हॉट तुझे भी यही सब सूझता है,

पूर्वी- तुम चिंता मत करो मम्मी अब काटा है तो खुद hi करेंगे जल्दी hi अभी तुम ब्लाउज खोली

रेनू- क्यों? ब्लाउज क्यों?

पूर्वी- अपनी माँ की छुच्छी बहुत चूसी हैं अब सासु माँ की भी चूस लूँ,

ये सुनकर रेनू के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उनके हाथ ब्लाउज के बटन खोलने लगे और जल्दी hi दोनों पत् अलग कर ब्लाउज के छुछियां बहार निकल ली,

रेनू- आजा फिर,

पूर्वी ने बिना देरी किये अपना सर अपनी सास की गॉड में रखा और एक छुच्छी को मुँह में भर कर चूसने लगी, और दूसरी चुकी को मसलने लगी, रेनू के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी, रेनू ने अपना सर पीछे कर लिए और आँखें बंद कर अपनी बहु के मुँह कक आनंद लेने लगी

तभी पूर्वी के फ़ोन पर मैसेज की टोन बजी, पूर्वी ने छुच्छी को चूसते हुए hi फ़ोन को उठा कर देखा तो पंकज का मैसेज था व्हाट्सप्प पर, पूर्वी ने उसे खोला तो एक छोटी सी वीडियो थी कुछ सेकंड की जिसे देख कर hi पूर्वी के मुँह पर मुस्कान आ गयी और उसने तुरंत अपनी सास की चुकी से मुँह हटा लिए और बोली- लो मम्मी तुम्हारी चिंता का हल भी भेज दिया तुम्हारे बेटे ने,

रेनू- ाचा क्या भेजा है दिखा तो,

पूर्वी ने तुरंत फ़ोन को सास के सामने कर दिया और वीडियो चला दो, कुछ hi पलों की वो वीडियो देखकर रेनू की आँखें फटी की फटी की रह गयी, वो बिलकुल हैरान हो गयी और हो भी क्यों न वीडियो hi कुछ ऐसी थी





प्रीती नंगी लेती हुई थी उसके चेहरे पर उसके भाई का रास था, जो की लग रहा था अभी अभी ताज़ा उसके भाई ने उसके चेहरे पर बरसाया है वहीं प्रीती अपने भाई के लुंड को मुँह में लेकर साफ़ कर रही थी.

रेनू को तो यकीन नहीं हुआ की ये प्रीती hi है, उसकी खुद की मासूम सी बेटी कैसे अपने भाई के आगे बिलकुल रंडी की तरह लेती है,

पूर्वी- क्यों मम्मी जी कैसी लगी भाई बहन की जोड़ी, रेनू कुछ सोचकर बोली- तू पूछ मत और मेरी छूट चाट,

पूर्वी ने तुरंत सास की बात मानी और पेटीकोट सारी को कमर तक कर अपना मुँह उनकी छूट में घुसा दिया वहीं उंगलियां गीली कर गांड में वो जानती थी की इस समय उसकी सास कितनी उत्तेजित होगी,

रेनू ने छूट चतवते हुए अपनी नज़रें फ़ोन की स्क्रीन पर लगाडी, और बार वीडियो देखते हुए अपनी बहु से छूट और गांड चटवाने लगी और कुछ देर में बहु के मुँह में पानी भी छोड़ दिया, झड़ने के बाद रेनू ने प्यार से अपनी बहु के मुँह को छाता hi था की दरवाज़े की घंटी बज गयी

रेनू- लगता है प्रीती के पापा आ गए, जा तू चेहरा वगेरा धो ले मैं दरवाज़ा खोलती हूँ,

पूर्वी- ठीक है मम्मी,

रेनू दरवाज़ा खोल कर अपने पति को अंदर लेती है, और वो आकर बैठते हैं,

इतने में पूर्वी उन्हें पानी का गिलास लेकर देती है और उनके पेअर छूती है,

Prakash(Pankaj के पिता)- अरे जग जग जिओ बीटा,

प्रकाश पानी पीते हुए आशीर्वाद देते हैं,

तभी पूर्वी का बच्चा रोने लगता है,

प्रकाश- अरे हमारा लल्ला भी उठ गया हमारे आते hi, बहु लाना तो,

खैर इसी तरह आगे समय निकल जाता है,

इधर पंकज और प्रीती तो चुदाई कर कर के थक कर सो चुके थे, पंकज की आँख खुलितो उसने देखा शाम हो गयी करीब 8 बज गए हैं, उसने प्रीती को सोने दिया और खुद बहार जा कर बाजार से खाना ले आया, जब तक लौटा तब तक प्रीती उठ चुकी थी, फिर दोनों ने मिलकर खाना खाया, साथ hi अपने घर भी बात की, खैर फिर रात हुई और रात भर दोनों ने हर आसान में चुदाई की, पंकज का लुंड जहाँ अपनी बहन की जवानी को देख कर बार बार खड़ा हो जाता था तो वहीं प्रीती भी काम नहीं थी और अपने भैया के खड़े लुंड को कभी छूट तो कभी मुँह में लेकर निचोड़ लेती थी, रात करीब 3 बजे दोनों सोये.

इधर उनके घर में भी रात का खाना बन के खाया जा चूका था और रसोई में सफाई करते हुए सास बहु घुसार पुसार कर रही थी,

रेनू- मुझे तो यकीन नहीं हो रहा की हमारा परिवार अचानक से कितना बदल गया है,

पूर्वी - यही होता है मम्मी जब अंदर दबी हुई इच्छाएं बहार निकलती हैं तो,

रेनू- पर मुझे प्रीती के पापा के लिए बुरा लग रहा है वो बेचारे इस सब से अनजान हैं,

पूर्वी- कोई बात नहीं तो जा कर बतादो,

रेनू- धत्त्त इतना आसान है क्या? गुस्सा हो गए तो पूरा घर बर्बाद,

पूर्वी- आसान hi है मम्मी थोड़े जलवे दिखाओ अपने, औरत चाहे तो मर्द से क्या नहीं करवा सकती,

रेनू ये सुन कर मुस्कुराने लगी और बोली- ये तो है,

पूर्वी- फिर क्या है जाओ, बहार hi हैं,

रेनू- अभी?

पूर्वी- और कब इससे ाचा मौका कब मिलेगा? और कोई है भी नहीं घर पे, मैं जाती हूँ पहले लल्ला को लेकर सुलाने उसके बाद तुम शुरू हो जाना,

रेनू- मुझसे नहीं होगा.

रेनू शरमाते हुए बोली,

पूर्वी- अभी लुंड मिलेगा न तो खूब उछालते हुए छुडवाओगी, ज़्यादा शर्मीली मत बनो,

रेनू- कभी कभी समझ नहीं आता मैं तेरी सास हूँ या तू मेरी,

पूर्वी- क्या फ़र्क़ पड़ता है, ाचा सुनो आज आंगन में hi सब करना,

रेनू भी आंगन में अपने पति के साथ सम्भोग के ख्याल से उत्तेजित होने लगी, और हंस कर सर हिला दिया,

पूर्वी अपनी साड़ी से हाथ पोंछते हुए रसोई के दरवाज़े तक गयी और फिर बापिस आई और बोली- एक मिनट मम्मी,

रेनू- हाँ, क्या हुआ.

पूर्वी- एक कमी रह गयी,

ये कहकर पूर्वी ने अपनी सास का पल्लू गिराया और ब्लाउज खोलने लगी,

रेनू- ये क्या कर रही है,

पूर्वी- अरे रुको तो मम्मी,

पूर्वी ने रेनू का ब्लाउज खोल दिया और फिर उसे निकल दिया और रेनू ऊपर से सिर्फ ब्रा में रह गयी, वहीं फिर पूर्वी ने अपनी सास की सारी भी खोल दी, और कुछ देर में hi रेनू ब्रा और पेटीकोट में सामने कड़ी थी,

पूर्वी- ऐसे जाना, और जो जो बताया है बिना शर्माए करना,

रेनू- मुझसे नहीं होगा,

पूर्वी- फिर अछि वाली रंडी सास कैसे बनोगी मम्मी जी,

रेनू- तू न पता नहीं क्या करवा के मानेगी,

पूर्वी- तुम्हारी चुदाई, हेहही,

ये कहकर पूर्वी रसोई से चली गयी, रेनू कड़ी कड़ी सोचने लगी की क्या होगा, कैसे करूँ पर साथ hi वो ऐसे जाने में उत्तेजित भी बहुत महसूस कर रही थी, खैर लम्बी सांस लेकर उसने अपने अंदर हिम्मत भरी और बहार निकली जहाँ प्रकाश उसके पति अभी भी टीवी देख रहे थे, रेनू धीरे धीरे चलती हुई हाथ में दूध का गिलास लेकर उनके पास पहुंची और बोली- लो जी दूध पि लो,

प्रकाश की नज़र जैसे hi टीवी से हटकर अपनी पत्नी पर पड़ी तो आँखें फैल गयी, सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में आंगन में कड़ी होकर वो उन्हें दूध दे रही थी, प्रकाश कुछ पल तो सिर्फ देखते hi रहे तो रेनू दोबारा बोली- अरे क्या हुआ लो न दूध,

तो प्रकाश ने तुरंत दूध पकड़ा और टेबल पर रख दिया, रेनू वहीं कड़ी कड़ी कामुकता से उन्हें देख रही थी,

प्रकाश - तुम ऐसे कपड़ो में आंगन में?

रेनू- क्यों जी तुम्हे पसंद नहीं आया,

प्रकाश- अरे नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है, वो तो बस पहली बार देखा न, कमरे से बहार,

रेनू- तुम्हे पसंद आया?

प्रकाश- अरे हम तो चाहते हैं तुम घर में ऐसे hi रहा करो,

रेनू- ाचा जी, अभी तो प्रीती और पंकज नहीं हैं पर वो लोग आ गए तो उनके सामने भी,

रेनू ने बैठकर उनकी लुंगी के ऊपर से hi जांघों को सहलाते हुए कहा,

प्रकाश- तो क्या हुआ बच्चे हैं वो तो, साथ hi उन्हें भी पता चले उनकी माँ कितनी सुन्दर है,

प्रकाश ने एक हाथ रेनू के पेट पर रख कर सहलाते हुए कहा,

रेनू- ाचा बच्चे हैं, एक का खुद का बच्चा है और दूसरी ब्याह लायक है,

प्रकाश- तो क्या हुआ, बड़े हैं तो और जल्दी समझेंगे,

रेनू- अगर मैं ऐसे रहूंगी तो तुम ऐसे hi मेरा बदन छेड़ोगे सिर्फ देखकर रुक जाओगे,

प्रकाश- बिलकुल नहीं, तुम्हे ऐसे देखकर कौन रुक सकता है,

प्रकाश ने अपनी पत्नी की गर्दन को चूमते हुए कहा,

रेनू- तो फिर बच्चों के सामने hi उनकी माँ को छोड़ोगे क्या?

रेनू जानकार अश्लील बातें करते हुए अपनी और पति की उत्तेजना बढ़ने की कोशिश करते हुए बोली साथ hi लुंगी के ऊपर से पति का लुंड भी पकड़ लिए, प्रकाश भी पत्नी की हरकतों और बातों से आहें भरते हुए बोले- अह्हह्ह्ह्ह तो क्या हुआ, वो लोग भी कुछ सीख जायेंगे हमें देख कर,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह ाचा तुम्हे क्या लगता है जवान बच्चे सिर्फ देखने भर पर रुक जायेंगे,

रेनू ने लुंगी और कच्चे के अंदर से लुंड को पकड़ कर बहार निकाल लिए, और फिर उसे मुठियाते हुए बोली, जो की पहले hi उसकी बातों से तन चूका था,

प्रकाश- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह लगताहहह तो नाहीई,

रेनू- फिर क्याह करेंगे,

ये कहकर रेनू आगे को झुकती चली गयी और प्रकाश के लुंड के टोपे पर जीभ फिरते हुए बोली,

प्रकाश तो बिलकुल पागल हो गए कहाँ उसे रेनू को मानना पड़ता था लुंड मुँह में लेने के लिए वो अब खुद से टोपे को चाट रही थी,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है,

रेनू ने फिर उनके टोपे को मुँह में भर और दो तीन बार ऊपर नीचे चूसकर निकलते हुए बोली- बताओ न फिर क्या करेंगे, अगर देखने भर से नहीं रुके तो,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह फिर क्याह करना है, वो भी हमारे सामने करेंगी हुमारीय तरह,

प्रकाश अपनी पत्नी की पीठ पर हाथ फिरते हुए उसके मुँह की गर्मी का मज़ा उठाते हुए बोले,

रेनू- अच्छह्ह्ह हमारी तरह अह्ह्ह या हमारे साथ?

रेनू ने प्रकाश के लुंड को बापिस मुँह में भरते हुए पूछा,

वहीं प्रकाश तो बच्चों के साथ ये सब करने के ख्याल से hi बिलकुल बिलबिला उठे, उनका लुंड उनकी पत्नी के मुँह में झटके मरने लगा,

प्रकाश- बच्चों के साथ अह्ह्ह कैसे?

रेनू- कैसे क्याहहह जैसे अभी हम कर रहे हैं, अह्हह्ह्ह्ह मैं अपनी बेटी काअह्ह्ह लुण्ड़ चूसूंगीयी, अह्ह्ह्हह ऐसी,

ये कहके रेनू ने दोबारा प्रकाश का लुंड मुँह में भर लिए और चूस कर दिखने लगी, वहीं प्रकाश का तो हाल बुरा हो गया बस ये सुनकर की उनकी पत्नी उनके बेटे का लुंड चुस्ने की बात कर रही है, प्रकाश ने रेनू का सर अपने लुंड पर दबा दिया और लुंड उसके गले तक घुसा दिया और उनका लुंड पिचकारियां मरने लगा, पत्नी के गले में, जिसे रेनू को गटकना hi पड़ा, झड़ने के बाद प्रकाश की पकड़ उसके सर से ढीली हुई तो रेनू ने अपने मुँह से प्रकाश का लुंड निकला और हांफते हुए खांसने लगी, प्रकाश ने भी पत्नी का चेहरा देखा तो पाया की दोनों आँखों से आंसू बाह रहे हैं ... मुँह से थूक के साथ ु नाउ रास भी बहार लटक रहा है,

प्रकाश को अपनी पत्नी का ये रंडियों जैसा रूप बहुत ाचा लग रहा था, वहीं रेनू भी आज कुछ अलग hi सोच में थी, झड़ने के बाद प्रकाश का लुंड थोड़ा ढीला पड़ने लगा था, जिसे रेनू ने हाथ में पकड़ा और मुठियाने लगी, वहीं अपने पति की आँखों में देखते हुए उनकी गोली को मुँह में भर कर चूसने लगी,

प्रकाश तो ये महसूस कर फिर से आहें भरने लगे उनका लुंड भी दोबारा कड़क होने लगा, पर रेनू ने अगले hi पल कुछ ऐसा किआ जिससे प्रकाश बिलबिला उठे, रेनू पति की गोलियों को चूसने के बाद अपनी जीभ को थोड़ा और नीचे ले गयी और उनकी गांड के छेड़ पर जीभ फिरने लगी, प्रकाश तो ये महसूस कर पागल से होने लगे, उनका लुंड बिलकुल कड़क हो गया साथ hi मुँह से अह्ह्ह्हह रेनू अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की सिसकियाँ निकलने लगी,

रेनू ने कुछ पल उनकी गांड को अचे से छाता, और फिर सीढ़ी होकर अपने कपडे उतर कर पूरी नंगी हो गयी, और फिर सोफे पर तुरंत उनके बगल में टांगें फैलाकर लेट गयी,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह आ जाओ अब मेरे राजा, छोड़ो अपनी रांड को,

प्रकाश तो पत्नी का ऐसा रूप देख ऐसी बातें पागल हो रहे थे, और उन्होंने तुरंत खड़े होकर अपने कपडे उतरे और पूरे नंगे होकर रेनू की टांगों के बीच जगह ली, वो ये भी भूल चुके थे की घर पर बहु अब भी है,

उन्होंने अपना लुंड पकड़ा और जगह पर आते हुए रेनू की गीली गरम छूट पर रखा और धक्का लगाने hi वाले थे की रेनू ने उनका लुंड पकड़ लिए और उसे पकड़ कर थोड़ा खिसककर अपनी गांड के छेड़ पर रख दिया और मुस्कुराते हुए बोली- अब मारो मेरे राजा,

प्रकाश को तो झटके पर झटके लग रहे थे, जिस गांड के लिए उन्हें कितनी मिन्नतें करनी पड़ती थी आज वो खुद से मिल रही है,

प्रकाश - आज तो तुमने खुश कर दिया,

रेनू- तुम्हे खुश करना तो इस रैंड की ज़िम्मेदारी है मेरे छोड़ू राजा,

प्रकाश - अह्हह्ह्ह्ह ऐसी रैंड पाकर तो मैं धन्य हो गया,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह तो अब घुड न अपना लोड़ाआहहह अपनी रांड की गांड में,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह ये लिएहहह रनडीईई,

प्रकाश ने धक्का देकर लुंड गांड में घुसा दिया तो दोनों एक साथ सिसक पड़े, प्रकाश धीरे धीरे से लुंड को गांड में चलते हुए घुसाने लगे,





रेनू - अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह प्रीति के पापाहहह ऐसी hi पूरा घुसायदो,

प्रकाश ने पत्नी की बात सुनी और दो चार तगड़े धक्के लगाए और लुंड को जड़ तक गांड में ठोंक दिया,.

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए गया क्याहहह गांड है तेरी रंडी,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह टोह्हह्ह्ह्हह्हह मारो ना राजा खूब हचक कर पेलो अह्हह्ह्ह्ह पहाड़ दो अपनी रनडीईई की गांड,

प्रकाश भी जोश में आते हुए ताबड़तोड़ धक्के लगते हुए गांड मरने लगे,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi

प्रकाश- ले साली आज तेरी गांड का भुर्ता बना दूंगा आह्ह्ह्ह,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह बनाः दो मेरे पास राजा, फाड़ दो अपनी रंडी की गांड , साड़ी खुजली मिटाआहहह दो,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह साली पहात जाएगी तो मरवायेगी क्याहहह, मेरा लुंड खड़ा रह जाएगाःह,

प्रकाश ने ऊपर झुककर गांड में तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए कहा,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह तुमहारी रआआंदददद तुम्हारे लुंड के लिए चुत और गांड की कमी नहीं होने देगी मेरे सैयां,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह जब खुद की पहात जाएगी तो कैसे कमी नहीं होने देगी,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह तुमहारे सामनेई एक से एक गांड और छूट परोस डूंगीए ,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह किसकी,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह तुमहारे सामनेई hi हैं घर में तुम्हारी बहू की, खूब मरना रंडी की,

बहु की गांड मरने की बात सुनकर तो प्रकाश का लुंड फूलने लगा, उन्हें यकीन नहीं हुआ की उनकी खुद की पत्नी उन्हें बहु की गांड मरने की बात कहेगी कभी,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह पर बहुउउ क्यों छुडवायेगी अह्हह्ह्ह्ह मुझसे,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह ससुरररर हो तुम उसकी अह्ह्ह क्यों नहीं छुडवायेगी, ससुर की सेवा करना उसका काम है,

रेनू ने अपनी छूट को सहलाते हुए कहा,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह पर बेटे को बुराह नाहीइ लगेगा,

रेनू- अह्हह्ह्ह्ह उसे क्यों बुराह लगेगाआ उसे अपनी गांड दूंगी, अह्ह्ह माँ की गांड में लोढ़ा घुसायेगा तो बीवी को भूल जायेगा फिर तुमममम खूब छोड़ना रंडी को,

प्रकाश का तो दिल ज़ोरों से धड़क रहा था ये सुनकर की उसकी पत्नी परिवार में hi चुदाई की बात कितने आराम से कर रही है,

प्रकाश - अह्ह्ह्ह मेरा तो लुंड फूलता जा रहा है,

रेनू- अह्ह्ह तुम्ही कैसा लगेगाहहह तुम बहु की गांडडडड माहहहरूओं और बेटाहः मेरिइइइ, एकक दुसरे के सामने,

प्रकाश के लिए तो ये सब बिलकुल सपने जैसा था, वो तेज़ी से गांड में धक्के लगते हुए बोले- अह्ह्ह्ह माज़आह्ह्ह्ह hi आ जायेगा अह्ह्ह फिर तू अह्ह्ह्ह,

रेनू- आह्हः सच में बहुउउ की गांडडडड बड़ीई मस्त्त haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh,

प्रकाश- सच में अह्हह्ह्ह्ह बड़े मस्त चूतड़ हैं, साली के.

रेनू- मज़ा देगी तुम्हे छुड़वाने में

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह काश ये सब हो पाटा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,

रेनू- अरे क्यों नाहीई हो सकता तुम बताओ तुम्हे मारनी है अपनी बहु की गांड?

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह मेरे चाहने से क्या मिलजाएगी?

रेनू- तुम बताओ न अभी अगर तुम्हे बहु की गांड मरने को मिले तो मारोगे बिना झिझक के,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह क्यों नहीं मारूंगा अह्ह्ह मिलेगी तो पूरी रात छोडूंगा नहीं,

प्रकाश ने जोश में आते हुए कहा, पर तभी उन्हें हैरान करते हुए रेनू ने कुछ ऐसा किआ जिसकी कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी,

रेनू ने पूर्वी को आवाज़ लगाई- पूर्वी बीटा ज़रा इधर तो आह्हः,

प्रकाश तो ये सुन हैरान रह गए, और सोचने लगे की ये आज हो क्या रहा है, और रेनू को बोलने लगे- अरे क्याकर रही हो बहु जाग जाएगी, अभी पकडे जायेंगे हम दोनों,

वो इतना बोल hi रहे थे की पीछे से आवाज़ से बिलकुल सुन्न हो गए और हो भी क्यों न ये आवाज़ उनकी बहु को थी,

पूर्वी- हाँ मम्मी जी बुलाया तुमने,

प्रकाश को समाज नहीं आ रहा था क्या करें खुद को छुपाए या कुछ और, उनका लुंड उनकी पत्नी की गांड में घुसा हुआ है, और बिलकुल नंगे हैं, वह भी अपनी बहु के सामने,

रेनू- अह्ह्ह हैं बीटा बुलाया, वो तेरे पापाजी तेरी गांड मरना चाहते हैं,

प्रकाश का तो सर फटने को हो गया ये सुनकर उन्हें लगा किआज तो गया पूरा परिवार, पर अगले hi पल उनको हैरान करते हुए उनकी बहु पूर्वी आगे आई और उनके बगल में hi अपनी सारी और पेटीकोट को कमर तक उठाकर सोफे को पकड़ कर झुक गयी और बोली- लो पापा जी मार्लो न,

रेनू ने भी आगे होकर अपनी गांड से पति का लुंड निकल दिया और मुद कर बोली- लो जी अब बहु बुला रही है, मार लो उसकी गांड,

प्रकाश कभी अपनी बहु की नंगी मस्त गांड को देखते तो कभी रेनू के चेहरे को,

रेनू ने अपने पति को झिझकते देखा तो खुद hi उनका लुंड पकड़ा और उन्हें बहु के पीछे खड़ा किआ और लुंड को चूसकर गीला करके बहु की गांड के छेड़ पर टिका दिया और बोली - क्या रुके हुए हो इतनी मस्त गांड सामने है, मारो,

ये कहके रेनू ने पीछे से उनके चूतड़ों में धक्का लगाया तो प्रकाश का लुंड पूर्वी की गांड को फैलता हुआ अपनी बहु को गांड में घुस गया, प्रकाश तो मानो इस एहसास से पागल हो गए जैसे hi लुंड पर बहु की गांड की गर्मी मिली प्रकाश ने फिर जोश में आते हुए, पूर्वी की कमर को थमा और दनादन धक्के उसकी गांड में पेलने लगे,





पूर्वी- आह्हः अह्हह्ह्ह्ह ऐसाःठ्ठ पापाआआअह्ह्ह जीईई ओह्ह्ह्हह्ह,

रेनू बगल में बैठकर अपनी छूट सहलाते हुए ससुर बहु की गांड चुदाई देख रही थी, कुछ देर तक प्रकाश ने जितनी तेज़ हो सकता था पूर्वी की गांड मारी और फिर उसकी गांड में hi अपना रास छोड़ दिया, जो को समझने लायक था, झड़ने के बाद वो हांफते हुए पीछे होकर सोफे पर लेट गए, रेनू ने उनका रास से सना हुआ लुंड तुरंत मुँह में भर कर चाट कर साफ़ किआ, प्रकाश तो जो कुछ अभी हुआ उसे hi धीरे धीरे अपने दिमाग में समझने की कोशिश कर रहे थे, उन्होंने अभी अभी अपनी बहु की गांड मारी थी, वहीं रेनू ने उनका लुंड साफ़ करने के बाद तुरंत अपना मुँह अपनी बहु के चूतड़ों के बीच घुसा दिया और उसकी गांड चाटने लगी,

पूर्वी- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह मम्मी हम्म्म्म,

प्रकाश ने जब ये देखा तो उनका बदन सिहरने लगा,

प्रकाश- भाई ये सब हो क्या रहा है, हमारा तो सर घूम रहा है,

रेनू- क्यों बहु की गांड मार कर मज़ा नहीं आया?

रेनू ने अपना मुँह पूर्वी की गांड से हटते हुए बोलै,

प्रकाश- नहीं ऐसी बात नहीं है, पर अचानक से सब कुछ ऐसा कुछ समझ नहीं आ रहा,

रेनू- इसमें समझना कैसा तुम्हारी इच्छा थी, तुम्हारी बहु ने पूरी कर दी,

पूर्वी- हाँ पापाजी, और भी कुछ इच्छा हो तो बताओ,

पूर्वी ने खड़े होकर अपने कपडे उतारते हुए कहा, प्रकाश बेचारे क्या बोलते उनकी आँखें तो बहु के नंगे होते बदन पर जैम गयी थी,

रेनू- देखो तो इनका सर घूम रहा है पर बहु का नंगा बदन देख लुंड में फिर से जान आ रही है,

ये कहकर रेनू लुंड को फिर से चूसने लगी, पूर्वी भी नंगी होकर अपने ससुर के पास आई और झुककर उनके होंठो से होंठों को मिला दिया, प्रकाश के लिए आज की रात एक अविस्मरणीय रात बनती जा रही थी, वो भी बहु के रसीले होंठो को जी भर के चूसने लगे, होंठों को चूसने के बाद पूर्वी ने अपनी सास का साथ दिया और दोनों मिलकर प्रकाश के लुंड पर टूट पड़ी,





प्रकाश दो बार झड़ने के बाद भी सिहरने लगे, वो समझ गए थे आज ये दोनों उन्हें निचोड़ कर hi छोड़ेंगी, और हुआ भी कुछ ऐसा hi, देर रात तक सास बहु और ससुर एक साथ रंग रैलियां मानते रहे,

अलग अलग आसनो ने सास और बहु दोनों ने छुड़वाया



















देर रात तक तीनो की चुदाई चलती रही जिसमे प्रकाश ने अपनी पत्नी और बहु दोनों की छूट की प्यास बुझाने का भरसक प्रयास किआ, वहीं सास बहु ने एक दुसरे की छूट और गांड चाट कर भी खूब साथ दिया, खैर करीब 3 बजे के करीब तीनो लोग कमरे में आकर नंगे hi चिपक कर सो गए,

अगली सुबह की शुरुआत हो चुकी थी, गाओं में भी पंकज की नींद पहले खुली, बगल में सोती हुई नंगी बहन को देखा तो पंकज से रहा नहीं गया और उसने अपना लुंड अपनी बहन की छूट में घुसकर उसे जगाया, प्रीती को भी भैया का ये अंदाज़ बहुत पसंद आया,

पंकज ने धीरे धीरे प्यार भरे धक्कों से काफी देर तक प्रीती को छोड़ा





काफी देर की ऐसी hi उत्तेजित और गरम चुदाई के बाद दोनों ने एक साथ पानी छोड़ दिया, कुछ देर आराम करने के बाद दोनों उठ गए, पंकज नाहा कर तैयार होकर बहार से नाश्ता ले आया, तब तक प्रीती भी नाहा चुकी थी, नाश्ते के बाद पंकज ने हिसाब वगेरा का काम करने चला गया तो प्रीती ने रात की नींद की कमी पूरी की खैर कुछ घंटो बाद दोनों hi मोटरसाइकिल पर बैठकर शहर की और चल पड़े थे, प्रीती सोच रही थी की कैसे एक दिन के इस सफर ने उनकी ज़िन्दगी बिलकुल बदल दी थी वहीं पंकज के मन में था की प्रीती को जब साड़ी सच्चाई पता चलेगी तो कितना मज़ा आएगा,

वैसे सच्चाई तो सुबह उठकर चाय के साथ प्रकाश को भी पता चल रही थी, पूर्वी और रेनू ने दोनों ने मिलकर उन्हें सब बता दिया था साथ hi ये भी की गाओं जाकर बेटी और बेटे के बीच कैसा रिश्ता पनपा है, पूर्वी ने जब पंकज द्वारा भेजी हुई वीडियो प्रकाश को दोखै तो बेटी का ये रूप देख प्रकाश सिहर उठे, उनके मन में भी अपनी बेटी के साथ प्यार करने की, उसके बदन के साथ खेलने की एक गहरी इच्छा उभारने लगी,

प्रकाश- अह्हह्ह्ह्ह बहु ज़रा फ़ोन लगा के पूछ तो कहाँ पहुँच गए,

रेनू- हाँ बहु पूछ ले इनसे रहा नहीं जा रहा अब बेटी के लिए,

प्रकाश- अरे मैं तो ऐसे hi पूछ रहा हूँ तुम भी न,

रेनू- अरे अब मत छुपाओ, तुम्हारी लुंगी बता रही है सब,

इस पर प्रकाश हंस पड़े, वहीं पूर्वी ने फ़ोन किआ और काट के बोली- आधा घंटा और लगेगा उन्हें,

रेनू- चलो ठीक है, आ जायेंगे फिर जल्दी hi,

पूर्वी- पापा मम्मी क्यों न हम उन दोनों को चौंकाएं थोड़ा?

प्रकाश- चौंकाएं पर कैसे?

इस पर पूर्वी ने उनकी और मुस्कुरा कर देखा,

गर्मी को झेलते हुए पंकज और प्रीती घर पहुंचे, मोटरसाइकिल कड़ी करके दरवाज़े पर पहुंचे तो देखा की दरवाज़ा खुला हुआ है, दोनों को hi इस पर थोड़ी हैरानी हुई, अंदर आकर दोनों ने दरवाज़ा बंद किआ, आंगन में कोई नहीं दिखा,

प्रीती- कहाँ गए सब,

पंकज- कमरे में होंगे शायद,

पंकज ने सोफे पर थैला वगेरा रखते हुए कहा, तभी उन्हें एक हलकी सी चीख की आवाज़ आई दोनों तुरंत अपने मम्मी पापा के कमरे की और लपके और भाग कर जल्दी से दरवाज़े के अंदर झाँक कर देखा तो दोनों ने सामने जो देखा उसे देखकर दोनों की आँखें फटी की फटी रह गयी,

सामने बिस्तर के बगल में उनके पापा नंगे बैठे थे और उनके ऊपर उनकी बहु अपने ससुरजी का लुंड छूट में लेकर उछाल रही थी, और पीछे से उनकी माँ अपने पति की पीठ सहलाते हुए दोनों का हौसला बढ़ा रही थी,





प्रीती ने देखा की जहाँ उसके पापा बिलकुल नंगे थे वहीं भाभी के बदन पर एक ब्रा थी, और उसकी मम्मी ने अभी भी ब्रा पंतय पहनी हुई थी,

पंकज भी पहले ये सब देख हैरान हुआ पर उसे समझ आ गया की लगता है उसकी पत्नी ने अपना जादू चला दिया है, उसे ख़ुशी हुई की उसका परिवार अब पूरी तरह खुल जायेगा, पंकज ने तुरंत hi अपनी पंत को वही खोल दिया और उतर कर कमरे के अंदर चला गया और सीधा जाकर अपना लुंड अपनी मम्मी के मुँह में घुसा दिया,

प्रीती अभी भी दरवाज़े पर कड़ी ये सब देखे जा रही थी, पंकज की हरकत से वो और हैरान रह गयी, उसे समझ नहीं आ रहा था की उसके घर में हो क्या रहा है,

तभी उसकी नज़र उसके पापा से मिली जिन्होंने उसे अंदर आने का इशारा किआ, धीरे धीरे कदम बढ़ाते हुए वो उनके पास पहुंची,

प्रकाश- अपने कपडे उतार दे बिटिया,

प्रकाश ने ये कहा तो प्रीती जैसे उनकी बात मैंने को बाध्य सी हो गयी और तुरंत अपने कपडे उतरने लगी, प्रकाश अपनी बहु को छोड़ते हुए धीरे धीरे नंगे होते अपनी बेटी के बदन को देखे जा रहे थे, जल्दी hi प्रीती पूरी नंगी सबके सामने कड़ी थी, उसे यर भी नहीं पता था की वो ये सब कर क्यों रही थी, पर उसके नंगे होते hi पूर्वी अपने ससुर के ऊपर से उठ गयी और उसने प्रीती को पकड़ लिए,

पूर्वी- आह्हः ननद रानी अब आई हो पकड़ में, ये कह कर वो प्रीती को जगह जगह चूमने लगी और फिर उसके होंठों को भी, थोड़ी देर होंठों को चूसने के बाद पूर्वी ने छोड़ा और बोली,

पूर्वी- तुम्हारा स्वाद बाद में लुंगी अभी तो पापाजी को चखाओ अपना बदन,

ये कहके पूर्वी ने उसे उसके पापा की और धकेल दिया, प्रकाश ने तुरंत उसे अपनी बाहों में समां लिए, वो भी प्यार से अपने पापा के नंगे बदन से चिपक गयी, अपने पापा का नंगा गरम बदन उसे एक नया एहसास दे रहा था, अपने भाई से छुड़वाने के बाद अपने पापा के साथ ये सब करने के ख्याल से hi वो सिहर रही थी,

प्रकाश- पापा को प्यार करेगी बिटिया,

इस पर प्रीती ने मुस्कुरा कर हाँ में सर हिला दिया, प्रकाश ने अपने तपते होंठ अपनी बेटी के नरम रसीले होंठो से मिला दिए और बाप बेटी का एक गहरा चुम्बन शुरू हो गया,

अपने पापा के साथ प्रीती को कुछ अलग hi महसूस हो रहा था, जो की हर बेटी को होता है पर हर बेटी अपने बाप के साथ इस तरह वासना का खेल नहीं खेलती है थी, दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसते हुए रक दुसरे के बदन पर हाथ सहला रहे थे, प्रकाश अपनी बेटी का चिकना बदन महसूस कर पागल हो रहे थे, दूसरी और तो पंकज पूर्वी और उसकी मम्मी की बात काफी आगे बढ़ चुकी थी, पंकज नीचे लेता था इसकी मम्मी उसके लुंड पर बैठज थी वहीं पूर्वी अपने पति और सास से अपनी छूट और गांड स ाहटवा रही थी





पंकज नीचे से अपनी मम्मी की छूट में धक्के लगा रहा यह है.

जारी रहेगी
 
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