Incest Katha Chodampur Ki - Page 38 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Katha Chodampur Ki

दोनों बच्चो की तरह एक दुसरे का हाथ पकड़ जार बाथरूम में चली गयी मैं बाल्टी और पूछा लेकर मूट साफ़ करने लगा, फिर जब तक वो नाहा कर आई तब तक सब साफ़ हो चूका था, फिर मैं नहाने घुस गया, बापिस आया तब तक रज्जो चची कपडे पहन कर तैयार थी और जा रही थी, जाने से पहले उन्होंने मेरे और माँ दोनों के होंठों पर चुम्बन दिया और चली गयी, उनके जाते hi मैं और माँ हंसने लगे,

में- नाटक बहुत करती हो माँ तुम,

माँ- अरे मज़ा आता है, ाचा बता चाय पियेगा,

में- बना लो,

माँ चाय बनाने लगी और मैं आंगन में बैठ कर टीवी देखने लगा इतने में धीरे धीरे बाकी लोग भी आने लगे,



अपडेट 231
चोदामपुर



सब लोग धीरे धीरे बापिस आने लगे थे तो माँ ने सबको चाय दी, मैं चाय पीकर अंजलि से बातें करने लगा फ़ोन करके, और बात करते हुए hi बाघ में चला गया, शाम हो चुकी थी तो मज़दूर भी काम कर के जा चुके थे, हमारी बातें ख़तम नहीं हो रही थी,

अंजलि- वैसे मुझे तुमसे जलन हो रही है

में- मुझसे क्यों भाई?

अंजलि- तुम्हारा परिवार कितना प्यारा है, सब लोग इतने प्यार से साथ रहते हैं,

में- हाँ वो तो है, वैसे इसके पीछे का कारन भी तुम्हे पता है,

अंजलि- हाँ पता तो है, वैसे शुरू में मुझे बहुत अजीब लगा, की कैसे और क्यों कोई अपने घरवालों के साथ करना चाहेगा,

में- क्या करना चाहेगा?

अंजलि- अरे चुदाई और क्या,

में- अरे वाह सीधा hi बोल रही हो,

अंजलि- तुम्हे पता है न मैं वैसे शर्मीली लड़की नहीं हूँ जो जाने सब पर शर्माने का नाटक करती रहे, तुमहाते सामने तो खुल के रहूंगी मैं,

में- मैं भी ये hi चाहता हूँ, तुम आगे बताओ न,

अंजलि- हाँ तो पहले अजीब लगता था पर अब तुम्हारे परिवार से मिलकर लगता है की बिलकुल ऐसा हो सकता है और होना भी चाहिए,

में- ाचा सही में,

अंजलि- हाँ यार तुम्हारी मम्मी इतनी सुन्दर और कामुक हैं, उन्हें देख कर तो मेरा मन डोलने लगा था तुम तो फिर भी लड़के हो, अगर मैं उनका लड़का होती तो मैं भी ज़रूर छोड़ती उन्हें,

में- सच्ची वैसे तुम लड़की होकर भी छोड़ सकती हो माँ मन नहीं करेंगी हेहही,

अंजलि- धत्त्त,

में- वैसे मन तो मेरा भी डोला तुम्हारी मम्मी को देखकर, बहुत मस्त हैं वो भी,

अंजलि- मुझे पता था तुम्हारी नियत फिसलेगी मेरी माँ पर,

में- जब मैंने अपनी माँ को नहीं छोड़ा तो तुम्हारी कैसे छोड़ दूँ,

इस पर हम दोनों हंसने लगे,

अंजलि- अरे यार चुदाई की बात से छूट गीली होने लगी मेरी,.

में- मैं आऊं क्या थोड़ी मदद कर दूंगा.

अंजलि- हाँ बिलकुल मदद तो तुम्हे hi करनी पड़ेगी पर अभी मौका नहीं है, जल्दी hi मौका देख कर अचे से मदद करना,

में- अरे उस मौके का मुझे बेसब्री से इंतज़ार है, Anjali-mujhe भी इंतज़ार है उस पल का तो पर अब सुनो अभी मैं जाती हूँ घर का काम करवाती हूँ,

में- ठीक है

अंजलि- ी लव यू

में- लव यू तू,

फ़ोन रखने के बाद मैं हल्का हल्का अँधेरा हो चूका था, मैंने जानवरों को खाना पानी डाला, और फिर घर की और चल दिया, रस्ते में आया hi था की पीछे से सरजू ने आवाज़ दी,

सरजू- और लौंडे कहाँ जा रहा है?

में- घर जा रहा हूँ तू कहाँ बस से आ रहा है?

सरजू- हाँ यार काम भी तो ज़रूरी है,

में- वो तो है hi,

सरजू- पर भेनचोद गर्मी से बुरा हाल है, चल न पेप्सी पीते हैं,

में- चल, जग्गू को भी बुला लेता हूँ,

सरजू- हाँ बुला ले,

मैंने जग्गू को फ़ोन कर दिया तो वो भी सीधा दुकान पर hi आ गया, और तीनो बैठकर पेप्सी पीने लगे,

सरजू- वैसे हमने सुना आज हमारी होने वाली भाभी जी आई थी,

में- हाँ यार आई तो थी,

जग्गू- सही है जल्दी hi घोड़ी चढ़ने वाला है अपना लोंदा,

में- लोढ़ा भेनचोद अभी तो प्रेम कहानी शुरू हुई है, बाकि उसके घरवाले माने न माने,

सरजू- ऐसे कैसे नहीं मानेंगे, बस कोई कमी है क्या लड़के में,

जग्गू- है न, बहुत बड़ा छोड़ू है, लड़की के साथ साथ उसकी माँ भी छोड़ देगा सुहागरात पर,

इस पर हम सब हंसने लगे,

सरजू- बीटा माँ को तो हम भी नहीं छोड़ेंगे,

में- हरामी हो सेल,

सरजू- उसकी भाभी भी तो मस्त माल है यार एक दम पटाखा,

जग्गू- घर है या माल गाडी हेहही..

इतने में सरजू का फ़ोन बजने लगा,

सरजू- लो घर से फ़ोन भी आ गया, चलो देर हो गयी है चलते हैं,

जग्गू- हाँ तेरी माँ की छूट में खुजली हो रही होगी,

सरजू- यार माँ की छूट में हो न हो, पर भेनचोद पूरे दिन काम करने के बाद जब अपनी माँ को छोड़ो न मज़ा hi आ जाता है, साडी थकान मिट जाती है

जग्गू- ये तो सही कहा,

सरजू- साले कर्मा इसके लिए मैं तुझसे हमेशा कर्ज़े में रहूँगा तेरी वजह से hi मुझे मादरचोद बनने का सुख मिला,

में- चल साले अब नाटक मत कर घर चलो,

जग्गू- हाँ चलते हैं,

हम तीनो hi बातें करते हुए अपने अपने घर आ गए, मैं जब तक आया तब तक खाना बन चूका था तो मैंने सबके साथ खाना खाया, फिर सब बैठ कर बतियाने लगे की उन्हें अंजलि और उसका परिवार कैसा लगा, अंजलि सबको बहुत पसंद आई थी, और उसका परिवार भी, माँ ने तो यहाँ तक कह दिया की अब उसे hi घर की बहु बनाउंगी,

वैसे बाकी सब का भी यही मत था, खैर बातें करते करते चुदाई का माहौल भी बनता जा रहा था, इधर सागर माँ को बार बार पकड़ कर उठा रहा था, उसने आज पहले hi कह दिया था की बड़ी बुआ आज मेरे साथ सोयेंगी, और उससे रहा नहीं जा रहा था,

सागर- बुआ चलो न अब और कितनी बातें करेंगे,

माँ- हाँ लल्ला चल अब बातें नहीं करते,

पापा- एक काम करो तुम दोनों राजन वाले घर में चले जाओ, रात में वो घर भी अकेला छोड़ना ठीक नहीं है,

मामी- हाँ ये तो सही कहा जीजा,

सागर- बढ़िया चलो बुआ जल्दी चलते हैं,

माँ- हाँ बीटा चल

नाना- इससे न सबर नहीं होता थोड़ा भी,

मौसी- बाबा होता तो तुमसे भी नहीं है,

इस पर सब हंस पड़े, माँ उठ कर सागर के साथ चली राजन चाचा के घर में,

राजन- अब भाभी और सागर तो गए बाकी सब की क्या योजना है?

अनुज- चुदाई योजना है,

पल्ली- हेहही इसे बस ये hi सूझता है,

अनुज- हाँ जैसे तू और कुक्सह सोच रही थी?

पल्ली- नहीं सोच तो मैं भी वही रही थी,

किरण- मैं भी हेहही,

मौसा- तो कैसे करनी है अलग अलग या साथ में,

नाना- एक साथ hi ठीक रहेगा,

धीरे धीरे सबके कपडे उतरने लगे, और एक दुसरे के बदन को चूसने चाटने लगे सभी,

कुछ hi देर में आँगन का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था और चुदाई ज़ोरो पर चल रही थी,





वहीं दूसरी और घर पहुँच कर सागर ने जल्दी से दरवाज़ा और कुण्डी लगाई और फिर तुरंत माँ को बाहों में भर लिए,

माँ- अरे हाय ढैय्या कितना बेसबारा हो रहा है तू,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह अब रुका नहीं जा रहा बिलकुल भी,

माँ- ाचा चल रुकने को बोल कौन रहा है,

सागर- ऐसे नहीं .

माँ- फिर कैसे?

सागर- ऐसे,

ये कहके सागर ने माँ को अपनी बाहों में उठा लिया और उठाकर चलने लगा,

माँ- हाय ढैय्या लल्ला गिरा मत दियो,

सागर माँ को उठा करले गया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया, और पागलों की तरह उनके चेहरे को चूमने लगा, जल्दी hi उसके होंठ माँ के होंठों से मिल गए तो माँ के होंठों को चूसने लगा, माँ भी अपने भतीजे का पूरा साथ दे रही थी,

कुछ देर होंठों को चूसने के बाद हांफते हुए उसने होंठों को छोड़ा और फिर माँ के गले और सीने को ब्लाउज के ऊपर से hi चूमने लगा, माँ को उसकी उत्सुकता और बेसब्री पसंद आ रही थी,

कुछ hi पलों में वो माँ के गदराये चिकने पेट को चाटने चूमने लगा, माँ भी उसकी हरकतों से सिसकने लगी,





माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi,

सागर तो माँ के पेट कमर को ऐसे चाट रहा था जैसे उसने से रास निकल रहा हो, चाटते हुए उसने अपनी जीभ माँ की नाभि में घुसड़ी और उसे जी भर के चूसने लगा माँ उसके नीचे पड़ी हुई सिहर रही थी,

जी भर के पेट और नाभि को चूसने के बाद सागर ने माँ की साड़ी को खींच कर निकल दिया और फिर माँ के ब्लाउज पर ध्यान लगाया और उसके हुक खोलने लगा, जैसे जैसे ब्लाउज खुलता माँ की चूचियों ब्रा में बहार आने लगी जिन्हे देख वो और उत्तेजित होने लगा, जल्दी hi उसने सरे हुक खोलकर माँ के ब्लाउज को खोल दिया





ब्लाउज खोलने के बाद वो ब्रा के ऊपर से hi माँ की भरी चूचियां हाथों में भर के माँ के होंठों को फिर से चूसने लगा, कुछ पल चूसने के बाद होंठ हटते हुए बोलै- अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh तुम्हारा पूरा बदन बिलकुल अप्सरा जैसा है,

माँ- ुहममम लल्लाहहहह मैं बुद्धि कहाँ से तुझे अप्सरा लग रही है,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh दुनिया के किसी मर्द से पूछ लो जो तुम्ही ऐसे देख लेगा वो यही बोलेगा,

माँ- बहुत बातें बनाने लगा है तू,

सागर- तुम्हे देख कर अपने आप आ रही हैं, ये कहते हुए सागर पीछे हुआ, और उसने अपनी टीशर्ट उतार फेंकी फिर बिस्तर से नीचे खड़ा होकर माँ को भी खड़ा कर लिए और पीछे से ब्रा के ऊपर से hi माँ की चूचियां दबाते हुए उनकी गर्दन चूमने लगा, साथ hi अपना लुंड माँ की गांड में घिसने लगा,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह कितनी मस्त लगती हो तुम अह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है,

माँ- ुहममम लाला मुझी भी अह्ह्ह्ह बहुत, अह्ह्ह्ह ऐसे hi मसल बुआ के बदन को,

सागर ने माँ की छुच्छी को दबाते हुए अपना हाथ उनके पेट पर खिसकाया और फिर कुछ देर पेट को मसलने के बाद उसने हाथ नीचे ले जाकर माँ के पेटीकोट की गांठ भी खोल दी और उसे उतार दिया





ाव माँ उसके सामने सिर्फ कच्ची और ब्रा में रह गयी, सागर फिर से उनके होंठो को चूमते हुए उनकी छुछियां दबाने लगा,

माँ- सागर की हरकतों पर उसके मुँह में आहें भर रही थी,

जहाँ सागर मेरी माँ के बदन से खेल रहा था वहीं यहाँ हमारे घर में उसकी माँ के साथ भी कुछ ऐसा hi हो रहा था, मामी को नाना पापा और राजन चाचा मिल कर तीनो और से छोड़ रहे थे, चाचा नीचे लेते थे और मामी उनका लुंड लेकर उनके ऊपर पीछे से नाना अपनी बहु की गांड मार रहे थे वहीं पापा मामी का मुँह छोड़ रहे थे,

उनके बगल में hi अपनी पत्नी को तीन तीन पुण्ड से छुड़वाते देख मां अपनी बहन यानि मौसी की गांड मार रहे थे, वहीं मौसा उनकी बेटी यानि किरण को अपने लुंड पर उछाल रहे थे, मैं ममता चची की गांड का भुर्ता बना रहा यह है और अनुज पल्ली का, पर बहुत जल्दी जल्दी hi हम लोग अपने साथी बदल रहे थे, और औरतों को बदल बदल कर छोड़ रहे थे,

इधर सागर ने तब तक माँ को नंगा कर लिए था और माँ ने सागर को, अभी सागर खड़ा हुआ था, और आँखें बंद करके लम्बी लम्बी आहें भर रहा था, और उसके नीचे अपने घुटनो पर बैठकर माँ अपने भतीजे का लुंड चूस रही थी,





सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh, बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है, कितना गरम मुँह है तुम्हारा,

माँ बस मज़े से उसका लुंड चूसे जा रही थी,

इधर हमारे घर में कई समीकरण बदल चुके थे और अभी मौसी अपने पिता पति और भाई से एक साथ चुद रही थी, नाना का लुंड मौसी की गांड में था मौसा का छूट में और मां का मुँह में,

मामी को अनुज छोड़ रहा था, वहीं मैं और राजन चाचा मिलकर किरण की दोहरी चुदाई कर रहे थे, मेरा लुंड किरण की गांड में था और चाचा का उसकी छूट में, पापा ममता चची के होंठों को चूसते हुए उनकी गांड मार रहे थे, वहीं पल्ली पापा की गांड चाट रही थी,

दुसरे घर में सागर से और ज़्यादा इंतज़ार नहीं हुआ और उसने माँ को पकड़ कर बिस्तर पर पीठ पर लिटा दिया और खुद माँ की टैंगो के बीच आ गया और तुरंत लुंड को छूट पर रख अंदर धकेल दिया,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh, अह्हह्ह्ह्ह कितनी गरम छूट है तुम्हारी, माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए गया,

माँ- ुहममम लल्लाहहहह अब छोड़ अपनी बुआहहहहह को,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन,

सागर तेज़ी से माँ की छूट में धक्के लगाने लगा, माँ भी अपनी टाँगे फैला कर उसको और तेज़ छोड़ने के लिए उत्साहित कर रही थी,





माँ- ुहममम लल्लाह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़ अपनीईई बाआहहहहहह को,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह हैं न जाने कब्ज़ी तुम्ही छोड़ना चाहता ठाहहह,

माँ- बच्चा आह्हः आअज करले अपनीईई इच्छा पूरी अह्ह्ह छोड़ ले जितना मन्न्नन हूँ, सागर माँ की छूट में दनादन धक्के लगा रहा था और माँ भी हर धक्के पर सिसक रही थी

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह तुम्हारी छूट कितनी गरम और कासी हुई है अंदर से,

माँ- तुझे मज़ा आ रहा है बेताहहह?

सागर- हांण बुआहहहह बहुत्तट्ठ,

सागर ने आगे झुककर माँ की चूचियों को थमते हुए उन्हें छोड़ते हुए कहा,

हमारे घर में मौसी नाना की खास सेवा करते हुए उनकी गांड चाट रही थी, साथ hi पीछे से अनुज उनकी गांड मार रहा था, मैं किरण को अभी भी छोड़ रहा था तो राजन चाचा मामी की गांड में लुंड चला रहे थे, मौसा पल्ली को छोड़ रहे थे तो मां ममता चची की गांड मार रहे थे और पापा उनसे अपना लुंड चुसवा रहे थे,

वहीं रज्जो चची के यहाँ सरजू अपनी मम्मी के ऊपर चढ़कर दनादन धक्के लगा रहा था,

सरजू- आह्हः ये तो बहुत सही हुआ मम्मी की तै ने कर्मा से छुड़वा लिए,

नीतू- हाँ और क्या जल्दी hi उनका परिवार भी हमरो तरह हो जायेगा,

नीतू ने अपने पापा से गांड मरवाते हुए कहा,

दीनू- आह्हः सही में और फिर मुझे शालू को छोड़ने का मौका मिल जायेगा, अह्ह्ह्ह.

रज्जो- देहहकहों तो, बेटीइ की गांड मार रहे हैं पर ध्यान शालू पर है,

बिरजू- गलती पापा की नहीं है मम्मी शालू मौसी हैं भी तो मस्त,

बिरजू ने लाडो से लुंड चुसवाते हुए कहा,

इधर सागर एक बार माँ की छूट को अपने रास से भर चूका था पर इसके बाद भी वो रुका नहीं था या यूँ कहें की माँ ने उसका लुंड चूसकर दोबारा से उसे कड़क कर के चुदाई के लिए तैयार कर दिया था, और इस समय वो वही कर रहा था, माँ और सागर दोनों एक करवट पर लेते हुए थे सागर माँ के पीछे लेटकर उनकी छूट में धक्के लगा रहा था वहीं माँ अपनी टांग उठाकर उसे अपनी गरम छूट का मज़ा एक बार फिर से दे रही थी,





सागर भी पीछे लेटकर माँ की चूचियों को मसलते हुए उनकी गरम छूट का मज़ा अपने लुंड को दे रहा था,

माँ- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लल्लाह तू टूओ कुछ हो दीनू में कितनी मस्त्त चुदाई करना सीख गयाहहह है,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह जब सीखने वाले इतने अचे होंगे तो सिखुन्गाहहह hi बुआहहहह,

सागर ने अपनी गति बढ़ाते हुए कहा,

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चिंता मत कर बेताहहह तुझे सब सीखा देंगे, अह्ह्ह्ह और तेज़,

सागर ने अपनी बुआ का कहना मान और तेज़ धक्के कर दिए, साथ hi माँ की चूचियों को मसलते हुए उनकी गर्दन को चूमने लगा, माँ भी काफी देर से चुड़ते हुए बेहद गरम हो चुकी थी और सागर के इस तिहरे हमले के आगे उन्होंने अपने चरम को छू लिया और माँ झड़ने लगी, झड़ने के बाद सागर ने माँ को घोड़ी बना लिए और पीछे से उनकी छूट मरने लगा, जल्दी hi सागर भी झड़ने के बेहद करीब पहुंचा तो माँ ने ये महसूस किआ और उसका रास अपने मुँह में लेने की इच्छा जताई और सागर ने वैसा hi किआ, और झड़ने से पहले अपना लुंड माँ के मुँह में घुसा दिया, जिसे माँ ने चूसा और कुछ hi पलों में अपना रास माँ के मुँह में छोड़ दिया, माँ भी अपने भतीजे का रास तुरंत जातक गयी, झड़ने के बाद सागर माँ से चिपक कर लेट गया,

माँ- थक गया लल्ला,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह तुम्हे छोड़ना बड़ी म्हणत का काम है, हेहही,

माँ- कोई नहीं अब तू आराम कर ले, मैं भी थक गयी हूँ, छोड़ छोड़ के थका दिया तूने, दोनों hi नंगे एक दुसरे से चिपक कर सो जाते हैं,

इधर घर में हमारी चुदाई भी ख़तम हो चुकी थी और हम सब लोग भी सोने की तैयारी कर रहे थे, बस किरण और पल्ली का प्रोग्राम चल रहा था बस वही देख रहे थे, क्यूंकि दोनों ने hi मर्दों को दो हिस्सों में बाँट कर अपने अपने ऊपर झड़वाया था और सबके झड़ने के बाद दोनों एक दुसरे के चेहरे और चूचियों से रास चाट रही थी, दोनों का प्रोग्राम ख़तम हुआ तो हम लोग भी सब सो गए, वहीं जग्गू के यहाँ भी सब सो चुके थे,

चोदामपुर की एक और सुबह हुई मेरी सुबह बड़ी सुहानी हुई क्यूंकि मेरी जान अंजलि ने अपनी एक प्यारी सी फोटो के साथ गुड मॉर्निंग लिख कर भेजा था, जिसे देखकर मैं खुश हो गया, और मैंने भी जितनी अछि हो सकती थी वैसी फोटो उसे भेज दी अपनी गुड मॉर्निंग लिख कर, फ़ोन रख कर उठा तो देखा लुंड कड़क था जो की सब लड़को का होता hi है चाहे रात को कितनी भी चुदाई कर लो, मैं कमरे से बहार आया और देखा की सब आंगन में बैठे चाय पि रहे हैं, मैं नित क्रिया निपटने बाथरूम में घुस गया, और बहार आकर आंगन में बैठ गया जहाँ पापा मन मौसा नाना चाचा चची मौसी मामी किरण पल्ली अनुज और माँ बैठ कर चाय पि रहे थे सागर अभी भी राजन चाचा के यहाँ सो रहा था, मैं भी आंगन मैं बैठ गया तो किरण ने मुझे चाय लाकर दी, मैंने चाय का कप लिए और साथ hi अपना पजामा नीचे कर लुंड निकल कर बैठ गया,

में- किरण इसे संभल न ज़रा खड़ा है परेशां कर रहा है,

किरण- अभी देखती हूँ भैया,

मैं चाय लेकर बैठ गया और पीने लगा, वहीं किरण नीचे बैठकर मेरा लुंड चूसने लगी, अह्ह्ह मज़ा आ रहा था चाय की चुस्की के साथ लुंड चुसवाने में, मैं चाय पीटा रहा और किरण मेरा लुंड चूसती रही, बाकि सब नए घर की नींव राखी जनि थी उसकी बात कर रहे थे,

पापा- साडी तयारी कर लेना तुम लोग, हम लोग देखते हैं जाकर.

माँ- ठीक है, बस नहाकर आते हैं हम लोग भी,

मौसा- अनुज, ये ले पैसे और जा सागर को और उठा ले और उसे लेकर दुकान से 10 किलो मिठाई करवा ला और साथ hi कुछ कोल्डड्रिंक की बोतलें और समोसा वगेरा ले ाइयो मज़दूरों के लिए,

अनुज- ठीक है मौसा जी अभी लाता हूँ,

मौसी- चलो भाई हम तो चले नहाने,

माँ- हाँ जल्दी जल्दी नहालो सब, गुंजन तुम भी जाओ नहालो,

मामी- हाँ जीजी,

इतने में किरण मेरा लुंड निकल कर बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाहः तुम्हारा तो आज निकल hi नहीं रहा,

बेचारी की चूस चूस कर हालत ख़राब हो गयी थी नूह से थूक टपक रहा था,

ममता चची- अरे किरण बिटिया तू भी नाहा ले जाकर मैं निकल दूंगी इसका,

किरण उठ गयी और चची आकर मेरा लुंड चूसने लगी, खैर चची ने अपना अनुभव दिखाया और मेरे लुंड के साथ साथ मेरी गोलियां भी चूसी और फिर अपनी जीभ मेरी गांड में घुसा घुसा कर गांड चाटने लगी, मैं उनकी जीभ का हमला अपनी गांड में बर्दाश्त नहीं कर पाया और झड़ने लगा तो चची ने अपने मुँह ने लुंड ले लिए और मेरे रास की एक एक बूँद लुंड से निचोड़ के पि गयी,

खैर अभी तो काम का समय था मैं भी जल्दी से नाहा लिया, धीरे धीरे औरतें भी नाहा धोकर निकलने लगी और तैयार होने लगी, माँ ने पल्ली और किरण को बोल्दिया की वो जाकर जग्गू और सरजू के यहाँ भी बोल आएं तो हम तीनो लोग साथ निकल गए, मैं बाघ की और वो दोनों बुलाने,

खैर बाघ में पहुंचा तो देखा की सरे मर्द तुबेल पर नाहा चुके थे,

में- अरे सब लोग यहीं नाहा कर लिए,

मां- और का वहां औरतें समय लगाती तो यही नाहा लिए,

में- सही भी किआ,

इतने में अनुज और सागर भी आ गए मिठाई और कोल्डड्रिंक लेकर, कुछ देर में जग्गू भी आ गया, साथ hi राजपाल ताऊ भी, सरजू बिरजू दीनू चाचा भी, और करीब आधे घंटे बाद औरतें आईं सब मिलकर, मंजू तै रज्जो चची प्रेमा भाभी और पद्मिनी तै भी बाकि साडी लड़कियां सब लोग साथ में hi थी, नींव की ईंट राखी गयी, पूजन हुआ जो की पल्ली किरण और लाडो ने किआ, क्यूंकि लड़कियों से करवाया जाना शुभ माना जाता है, फिर मज़दूरों में और बाकी सब में मिठाइयां बांटी गयी, कोल्डड्रिंक बांटी गयी, सबने खूब हंसी ठिठोली करते हुए ये सब किआ, औरतों का समूह अलग हो गया था, आदमियों का अलग, लड़कों का अलग लड़कियों का अलग,

सबने खूब खाया पिया खूब हंसी ठिठोली हुई, इसके बाद सब अपने अपने घर की और चल दिए, आते आते करीब 2 बज गए थे, औरतें दोपहर का खाना बनाने में लग गयी, मैं अपनी जान अंजलि से बात करने में व्यस्त हो गया, खाना बन गया तो मुझे बुलाया गया, खाना खा कर मैं सो गया और शाम को फ़ोन बजने पर उठा, देखा तो जग्गू का था,

में- हाँ बेटे,

जग्गू- आजा चल मैच खेलने चल रहे हैं,

में- आता हूँ,

हाथ मुँह धोकर मैं खेलने चला गया काफी देर तक खेले, बापिस आते आते अँधेरा हो चूका था, हम लोग बाघ में आये जहाँ अब मज़दूर काम ख़तम करके जा चुके थे, पापा मौसा चाचा थे बाकी लोग भी घर जा चुके थे,

मैं जानवरो को चारा पानी डालने लगा जग्गू मेरी मदद कर रहा था और, इतने में दीनू चाचा और राजपाल ताऊ कुछ योजना बनाते हुए आये,

दीनू- लो मिल गए नीलेश भैया,

पापा- क्या हो गया, कहे ढूंढ रहे थे,

दीनू- अब बोलो न बड़े भैया,

दीनू चाचा राजपाल ताऊ की और देखकर बोले,

राजपाल ताऊ- अरे हम क्या बोलेन, बोलकर तो तुम hi लाये थे यार,

दीनू- अरे दादा आखिर टाइम पर पलटी न मारो.

पापा- अरे बात का है बताओगे, तुम hi बता दो,

राजन- अरे हम बताते हैं का बात है,

मौसा- बताओ,

राजन- लगानी है, हैं न? हेहही,

इस पर दीनू चाचा और राजपाल ताऊ दोनों हंस पड़े,

राजन- देखा हमने बिलकुल सही पकड़ा है,

पापा- पकड़ा तो सही पर हमारी बीवियां जान ले लेंगी हमारी तुम्हे पता है न दारु से कितनी किलसति हैं,

दीनू- अरे भैया रोज़ रोज़ थोड़े hi करते हैं ख़ुशी का मौका है, वैसे भी रज्जो मन नहीं करेगी,

राजपाल ताऊ- पर मंजू तो करेगी,

पापा- हमारी वाली भी करेगी,

राजन- ममता को कोई दिक्कत नहीं है इतनी,

मौसा- फिर कैसे हो पायेगा,

दीनू- कैसे भी करो दादा करो, आज हमें पीनी है,

मैं और जग्गू इन लोगो की बातें सुनकर हंस रहे थे,

राजन- अब तुम्हारी बात सुनकर हमारा भी मन हो रहा है,

राजपाल ताऊ- क्या करें?

ताऊ ने पापा की तरफ देखकर कहा,

पापा- अब हम क्या बताएं समझ नहीं आ रहा, देखो अगर पिएंगे तो जमुना और ससुरजी को भी साथ लेना पड़ेगा,

मौसा- हाँ ये तो सही कहा, उनके बिना करना गलत होगा,

पापा- पर तुम्हारी भाभी मानेगी नहीं, वो बाबा को पिलाने के बिलकुल खिलाफ हो जाएगी,

राजन चाचा- कुछ तो दिमाग लगाना पड़ेगा न,

मौसा- अरे कर्मा तेरा दिमाग ज़्यादा चलता है, तू hi कुछ बता न,

में- मैं नहीं बता रहा कुछ, अगर माँ या तै को पता चली तो मैं फँसूँगा,

मौसा- अरे तू क्यों फंसेगा जब पिएंगे हम लोग तो,

राजन चाचा- देख ले तेरा ब्याह हमें hi करवाना है,

दीनू- अरे बीटा इतना नहीं करेगा अपने चाचा के लिए,

जग्गू- देख तो कैसे गिड़गिड़ा रहे हैं पीने के चक्कर में, हेहही,

राजपाल ताऊ- बीटा जब तुम्हारे ब्याह हो जायेंगे न तो पता चलेगा तुम्हे पत्नियों का दर,

पापा- कुछ सोचा है कर्मा,

में- अरे सीधा तो है, जैसे किसी एक घर में रखलो प्रोग्राम, वहीं सब इकठ्ठे हो जाओ,

मौसा- पर ये बोलेन कैसे क्या वजह दें,

में- देखो बिलकुल झूठ मत बोलो, क्यूंकि बाद में पता चलेगा तो दिक्कत होगी इससे अच्छे सही सही बतादो,

दीनू- अरे इससे तो फंस जायेंगे,

मौसा- नहीं सही कह रहा है, अगर बाद में पता चली तो फंसेंगे,

में- और क्या बोल्दो आज ख़ुशी का दिन है सरे मर्द एक साथ बैठकर मज़े लेना चाहते हैं,

राजपाल ताऊ - ठीक है हमारे यहाँ बैठ जाते हैं, पर फिर भी दिक्कत है,

दीनू- क्या दिक्कत?

राजपाल ताऊ - अरे तुंहारी भाभी है न वो सुनती रहेगी पीछे से, मज़ा ख़राब कर देगी,

में- तो ऐसा करो न जग्गू और तै आज हमारे यहाँ सो जायेंगे,

मौसा- हाँ ये ठीक रहेगा,

राजन- बहु और संधान रह जाएँगी,

जग्गू- नहीं पद्मिनी तै गाओं गयी हैं कुछ काम आ गया था,

राजपाल ताऊ- अरे जग्गू अपनी माँ और भाभी दोनों को hi लेकर चला जइयो, बहु को भी नहीं पसंद दारु वगेरा,

जग्गू- ठीक है ले जाऊंगा,

में- अब ये हो गया तो औरतें जिन्हे कोई परेशानी नहीं उन्हें अपने साथ ले जाना,

मौसा- हाँ ये भी सही है.

दीनू- मतलब

में- चाचा मतलब जैसे रज्जो चची, ममता चची और जो भी आना चाहे उन्हें अपने साथ ले जाना जिससे दो फायदे होंगे,

राजपाल ताऊ- कौनसे दो फायदे,

में- अरे पीने के बाद चुदाई भी तो करोगे hi उसके लिए, और दूसरा फायदा की अगर औरतें साथ रहेंगी तो माँ या मंजू तै को भी इतनी दिक्कत नहीं होगी,

दीनू- अरे यार मन गए कर्मा बिलकुल सही सोचा है,

मौसा- हैं,

राजपाल ताऊ- अरे पर बाबा और जमुना का क्या वो रहेंगे तो कैसे होगी चुदाई,

राजन- अरे सब हो जायेगा वो भी हमारी तरह हैं, ममता और पल्ली ने दोनों को अपना स्वाद चखा दिया है,

राजपाल ताऊ- अरे वाह सच में, फिर तो मज़ा आ जायेगा,

दीनू- पर मेरी एक परेशानी है,

पापा- अब तुम्हारी क्या है?

दीनू- रज्जो तो मान जाती है पर सरजू और नीतू बहुत बवाल करते हैं पीने के नाम पर वो नहीं जाने देंगे,

Me-are तो रज्जो चची को बोलना वो उन्हें समझा देंगी और या तो उन्हें भी ले जाना साथ, सरजू बिरजू को एक एक डोज तो साडी बात मानेंगे,

दीनू- अरे उन्हें अपने साथ पिलायेंगे का?

राजन- अरे बच्चे बड़े हो गए हैं

मौसा- और जब साथ में चुदाई कर सकते हो थोड़ी पि नहीं सकते,

दीनू- ये बात भी ठीक है, फिर मैं तैयार हूँ,

मौसा- ये हुई न बात तो जल्दी घर चलते हैं, और प्रोग्राम बनाते हैं अपने अपने घर बात करलो,

राजपाल ताऊ- हाँ भाई चलो जल्दी जल्दी,

सब निकल जाते हैं

जग्गू- सही प्रोग्राम बना दिया तूने सबका,

में- अरे बढ़िया है न हम भी कुछ बना लेंगे अपना, हेहही ,

जग्गू- वो तो मुझे पता था बिना अपना बनाये तू कैसे मान जायेगा,

खैर सब लोग घर आ गए पापा मौसा चाचा वगेरा अपना प्रोग्राम बनाने में लग गए, पापा माँ को मानाने लगे तो माँ ने आज बिना किसी रोक टोक के हाँ कह दिया, मौसी ने भी हाँ कह दिया पर उन्होंने बोलै की वो भी उनके साथ चलेंगी, मौसा ने भी सोचा मन करे इससे तो ाचा hi है वैसे भी ममता चची और रज्जो चची होंगी hi वहां, मौसा ने मां को बताया और पापा ने नाना को तो वो तुरंत राजी हो गए, मां ने मामी से अनुमति ली तो मामी बोली जब सब जा रहे हैं तो तुम्हे क्यों रोकूंगी बस थोड़ा संभल कर पीना,

मां- अरे जीजा और बाबा भी जा रहे हैं कोई दिक्कत नहीं होगी मैं बस थोड़ी सी hi लूंगा,

तो कुल मिलकर सब कुछ योजना अनुसार चल रहा था, मैंने भी सोचा की चलो जब सब रात को खास बना रहे हैं तो मैं भी बनता हूँ, और मैंने अनुज और सागर को बुलाया और उन्हें कुछ करने को कहा, वो तुरंत काम पर लग गए,

जल्दी hi जग्गू प्रेमा भाभी कुर मंजू तै को लेकर घर आ गया,

और यहाँ से नाना, पापा, मौसा, राजन चाचा, मां, मौसी, ममता चची, पल्ली और किरण भी ज़िद्द करके पल्ली के साथ चली गयी,



जारी रहेगी,
 
तो कुल मिलकर सब कुछ योजना अनुसार चल रहा था, मैंने भी सोचा की चलो जब सब रात को खास बना रहे हैं तो मैं भी बनता हूँ, और मैंने अनुज और सागर को बुलाया और उन्हें कुछ करने को कहा, वो तुरंत काम पर लग गए,

जल्दी hi जग्गू प्रेमा भाभी कुर मंजू तै को लेकर घर आ गया,

और यहाँ से नाना, पापा, मौसा, राजन चाचा, मां, मौसी, ममता चची, पल्ली और किरण भी ज़िद्द करके पल्ली के साथ चली गयी,



अपडेट 232

चोदामपुर

पल्ली किरण को लेकर निकली तो थी पर सब के साथ जग्गू के घर न जाकर वो रज्जो चची के यहाँ पहुँच गयी जहाँ से रज्जो चची बस निकल hi रही थी, और वहां पहुँच कर पल्ली ने नीतू को अकेले में लेजाकर कुछ समझाया तो उन सब का प्रोग्राम hi बदल गया, वैसे चारों बच्चे जग्गू के यहाँ जाने वाले थे, पर आपस में कुछ सलाह हुई और फिर नीतू ने कह सिर्फ अपनी मम्मी रज्जो को भेज दिया ये कहके वो सब आज घर पर hi मज़े करेंगे, इसके पीछे बहुत बड़ा कारन पल्ली का किरण को अपने साथ लाना था और उसी की वजह से बाकि सब लोग भी रुकना चाहते थे,

अब कुल मिलकर तीन गट में सब लोग बाँट चुके थे, एक गट रज्जो चची के घर था जिसमे सरजू, बिरजू, लाडो, नीतू पल्ली और किरण थे, वहीं दूसरा गट जो जग्गू के घर रुका हुआ था दारु के लिए उसमे सब बड़े बड़े hi थे, जैसे नाना, पापा, मां, चाचा, मौसा, दीनू चाचा और राजपाल ताऊ और औरतों में शालू मौसी, ममता चची और रज्जो चची थी,

वहीं तीसरा गट मेरे घर पर था, जिसमे माँ, मामी मंजू तै और प्रेमा भाभी औरतें थी, और मैं, जग्गू, सागर और अनुज थे,

खैर सब जगह का प्रोग्राम शुरू हो चूका था कहीं बोतलें निकल रही थी तो कहीं कुछ खेलने का सोचा जा रहा था तो कहीं औरतों की गप्पे लगने लगी थी,

सरजू के यहाँ सब ने तय किआ की कोई बड़ा नहीं है तो हम बच्चे मिलकर कोई खेल खेलते हैं,

सरजू- पर खेलेंगे क्या?

पल्ली- अंताक्षरी खेलें?

किरण- नहीं यार,

लाडो- हाँ अंताक्षरी नहीं.

बिरजू- अरे वो खेलते हैं न जिसमे नाटक करना होता है,

नीतू- मतलब,

बिरजू- अरे जीजी वो कुछ कुछ होता है मैं नहीं खेलते, फिल्म का नाम नाटक करके बताते हैं,

किरण- हाँ वो इशारों वाला खेल,

नीतू- हाँ उसमे मज़ा आएगा,

पल्ली- तो दो टीम बना लेते हैं,

लाडो- हाँ ऐसा करो जीजी तुम और सरजू भैया चुन लो अपने अपने साथी.

सरजू- ठीक है मैं तैयार हूँ

नीतू- मैं भी, मैं चुनु पहले,

सरजू- हाँ चुनले,

नीतू- मैं चुनती हूँ किरण को,

सरजू- तो मुझे पल्ली चाहिए,

नीतू- तो मैं बिरजू को चुनती हूँ,

सरजू- लाडो मेरी तरफ हो गयी,

किरण- चलो फिर खेलते हैं मज़ा आएगा,

इधर इन बच्चों का खेल शुरू हो गया था, तो राजपाल ताऊ के यहाँ बड़े भी खेल शुरू कर रहे थे, आंगन में एक बड़ा सा बिस्तर लगा दिया गया था जिसपर सब मर्द लोग घेरा बना कर बैठे थे, दीनू चाचा ने बोतल खोल ली थी और सबके गिलास में पूरी ईमानदारी के साथ बाँट रहे थे, खूब हंसी मज़ाक चल रहा था,

इतने में पीछे से मौसी ने एक थाली बीच में रखते हुए कहा, लो भाई प्याज़ के पकोड़े भी तैयार हैं, बाकी और सिक रहे हैं,

राजपाल ताऊ- अरे थोड़े बहुत और सेक्लो अपने लिए और तुम लोग भी गर्मी में क्यों रसोई में परेशां हो रहे हो,

पापा- अरे नमकीन वगेरा लाये तो हैं फिर क्यों ये सब बना रही हो,

दीनू- हाँ एक काम करो बस ये जो बन गया सो बन गया अब रहने दो,

मां- सही में

मौसी- ाचा ठीक है जो कढ़ाई में हैं बस वो तो निकल लें आगे नहीं बनाएंगे, मैं रज्जो और ममता जीजी को मन कर देती हूँ,

नाना- हाँ बोल दे दोनों को,

मौसी गयी और जो पकोड़े कढ़ाई में थे उतने hi सेक कर तीनो औरतें भी आँगन में hi आकर बैठ गयी, राजन चाचा ने तीनो को कोल्डड्रिंक के गिलास भर के दिए ठंडा होने के लिए और बातों के साथ इन लोगो का प्रोग्राम भी शुरू हो गया था,

मेरे घर पर सबके जाने के बाद जग्गू प्रेमा भाभी और मंजू तै आ चुके थे, मैं अनुज और सागर के साथ एक कमरे में रात के प्रोग्राम की तयारी कर रहा था क्यूंकि मैंने सोचा था की आज कुछ अलग किया जाये, माँ बर्तन वगेरा धो रही थी तो प्रेमा भाभी ने आते hi उनसे ज़िम्मेदारी ले ली और उन्हें हटा कर खुद बर्तन धोने लगी,

मंजू- अरे बन्नो करने दे बहु को, आजा बैठ तब तक,

माँ- ये फायदा होता है बहु का, बस कर्मा को भी बिलकुल प्रेमा बहु जैसी मिल जाये तो जीवन सुखी है, आओ जीजी कमरे में हवा में बैठते हैं,

माँ ने प्रेमा भाभी के माथे को चूमते हुए कहा फिर तै के साथ अपने कमरे में बिस्तर पर जाकर बैठ गयी.

माँ- हाँ जीजी अब बताओ, क्या कह रही थी बहु के बारे में,

मंजू- अरे हम कह रहे थे की कर्मा की बहुरिया अब देख तो ली है, आज आई भी थी, कैसी लगी बन्नो?

इतने में जग्गू भी इधर उधर झांकता हुआ आकर माँ के बगल में बैठ गया और बोलै- कर्मा कहाँ है चची?

माँ- अरे वो तीनो और गुंजन छपने वाले कमरे में बंद हैं न जाने क्या कर रहे हैं, अनुज तो बोल कर गया है की बीच में कोई बुलाये न जब उनका काम हो जायेगा तब वो खुद बुला लेंगे सबको,

मंजू- ये बच्चे भी न,

जग्गू- ऐसा क्या कर रहे हैं?

मंजू- अरे जब हो जायेगा तब पता चल hi जायेगा न, खैर बन्नो तुम लड़की के बारे में बताओ न कछु,

माँ- अरे जीजी लड़की तो बहुत सुन्दर है, कर्मा के साथ उसकी जोड़ी बहुत जैम रही थी,

मंजू तै- अरे सच में वैसे ऐसी hi होनी चाहिए अपना कर्मा काम थोड़े hi है किसी से,

जग्गू ने दोनों की बातें सुनते हुए अपना हाथ माँ की कमर पर रख दिया और सहलाने लगा, जबसे दोनों ने अपनी माओं को साथ में छोड़ा था तबसे जग्गू भी माँ के सामने थोड़ा खुल गया था साथ hi माँ ने उसका लुंड भी चूसा था, तो उसका आगे बढ़ना स्वाभाविक था, तो जग्गू अपना हाथ माँ की कमर से लेकर पेट तक फिरते हुए उनके मांसल पेट को मसलने लगा,

माँ ने भी उस पर कुछ ध्यान नहीं दिया और अपनी बातें जारी राखी,

मंजू- और परिवार कैसा है, हमने सुना नीतू के संग पड़ी है,

माँ- ुहममम हाँ जीजी नीतू की सहेली है, और परिवार हमें तो बहुत सही लगा हमारे जैसे hi लोग हैं, बाप मास्टर है,

इधर इनकी बातें चल रही थी और जग्गू माँ के बदन पर हाथ फिरते हुए उत्तेजित होता जा रहा था, उसने माँ का पल्लू नीचे सरका दिया था, और खुलकर माँ के पेट को मसल रहा था, माँ भी उसके सर पर हाथ फिरते हुए तै से बातें कर रही थी,

मंजू तै- और माँ कैसी है, क्यूंकि माँ पर hi जाती है बेटी,

माँ- माँ देखने में तो बहुत सुन्दर है, उसे देखकर hi सरे मर्द लार टपकने लगे थे, बाकी सभ्य भी है और वो क्या कहते हैं आजकल नयी सोच वाली को लल्ला?

माँ ने जग्गू के सर पर हाथ फिरते हुए पूछा..

जग्गू- मॉडर्न कहते हैं चची,

जग्गू ने ये कहकर माँ को पीछे की और झुककर दीवार से टिका दिया, और माँ के पल्लू को पेट से हटा दिया और माँ के पेट को फिर से मसलने लगा,

माँ- अहम हाँ जीजी वही मॉडर्न है पर बड़ी शालीनता से बात करती है,

मंजू तै- अरे वाह ऐसी hi संधान ठीक रहेगी तेरे लिए, तुझे भी मादन बना देगी थोड़ा,

माँ- हेहही अरे कहाँ जीजी, पता है उसने साड़ी भी नाभि से तीन इंच नीचे बंधी होगी काम से काम, तभी तो ये सरे लार टपका रहे थे,

जग्गू थोड़ा झुका और उनकी बातें सुनते हुए अपने होंठ माँ के पेट पर रख दिए और चाटने लगा, जिससे माँ की सिसकी निकल गयी, जग्गू माँ के पेट को पागलों की तरह चाटने चूमने लगा और माँ भी उसकी हरकतों से आहें भरने लगी,





मंजू तै- अरे तीन इंच नाभि से तो थोड़ा और नीचे होती तो चोदामपुर से छुड़वाए बिना नहीं जाती, हेहही,

इस पर दोनों लोग हंसने लगे, पर माँ ठीक से हंस भी नहीं पा रही थी क्यूंकि जग्गू माँ की नाभि को जीभ डालकर चाट रहा था और माँ तड़प रही थी,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh लल्लाहहहह, अरे जीजी, हमें तो यही दर है आगे रिश्ता हुआ तो ये मर्द बिना चोदे छोड़ेंगे ऐसी संधान को, हेहैजे,

मंजू तै- अरे तो का हुआ, संधान पर तो समधी का हक़ होता है,

माँ- ुहममम हक़ हो न हो ये लोग ले ज़रूर लेंगे,

मंजू तै- ये तो सही कहा तूने बन्नो,

जग्गू तबसे माँ की नाभि चाट रहा था और फिर उसने अपने होंठ हटाए तो माँ का पूरा पेट उसके थूक से गीला था, उसने अपना ध्यान फिर माँ के होंठों पर लगाया और अपने होंठ माँ के होंठों पर रखने hi वाला था की इतने में hi दरवाज़ा खुला और अनुज मैं और सागर अंदर आये, हमें देख कर जग्गू और मंजू तै हैरान रह गए, क्यूंकि हम तीनो hi बिलकुल नंगे थे,

में- चलो सब तैयार है,

जग्गू- अबे पर तुम लोग तीनो नंगे क्यों हो?

जग्गू कभी हमें देखता तो कभी माँ की और, इतने में उनकी हैरानी और बड़ी जब प्रेमा भाभी भी बिलकुल नंगी होकर हमारे पीछे से आई,

माँ- अरे तू भी नंगी घूम रही है इनसब के साथ,

प्रेमा भाभी- हाँ चची काम ख़तम हो गया तो कर्मा भैया ने बोलै नंगे हो जाओ,

भाभी ने हँसते हुए कहा, फिर तभी पीछे से मामी की आवाज़ आई- अरे भाई क्या बातें हो रही हैं तबसे,

मामी भी हमारे साथ घुसी तो उन्हें देखकर तो जग्गू और तै दोनों का मुँह खुला रह गया क्यूंकि वो भी बिलकुल नंगी थी, मामी का भरा हुआ नंगा बदन देख जग्गू तो क्या तै के मुँह में भी पानी आने लगा,

मंजू तै- अरे ये सब क्या हो रहा है?

तै ने हैरानी से पूछा,

में- अरे तै सब समझ आ जायेगा तुम पहले कपडे उतरो और हमारी तरह हो जाओ, तू भी उतर बे,

मेरी बात सुनकर तै अपनर कपडे उतारने लगी और जग्गू भी तुरंत कपडे उतर कर नंगा हो गया,

माँ ने भी सबकी देखा देखि कपडे उतर दिए, अब हम सब नंगे थे,

माँ- ले लल्ला अब हो गए सब नंगे अब बता क्या करना है,

में- हाँ तो तै, जग्गू भाभी और बाकि सब, इतना समझ लो की हमें आपस में कुछ भी छुपाने की ज़रुरत नहीं है, सब कुछ खुल चूका है,

जग्गू- क्या सही में,

में- हाँ,

प्रेमा- है न ख़ुशी की बात,

मंजू तै- हाँ ख़ुशी की बात तो है,

जग्गू- फिर अब क्या करना है,

जग्गू जे उत्साहित होकर पूछा,

सागर- अब सब लोग हमारे साथ चलो.

में- बाकि सरे कमरों के दरवाज़े वगेरा बंद करदे अनुज और लाइट वगेरा भी,

अनुज वो करने गया तो मैंने बहार का दरवाज़े पर कुण्डी लगाडी और फिर हम लोग अपने कमरे के बहार थे,

में- देखो अगर रात को किसी को बहार जाना हो कमरे से तो ये दरवाज़े के बहार जो चैपालें राखी हैं इन्हे hi पहन कर जाये,

जग्गू- अरे अब अंदर तो चल क्या है देखने दे,

में- हाँ चलो,

मैंने दरवाज़ा खोला और सब लोगों को अंदर लिए पीछे से अनुज ने दरवाज़ा बंद कर दिया,

माँ- हाय ढैय्या ये क्या कर रखा है तुम लोगो ने,

माँ ने कमरे को चारो और से देखते हुए कहा, हममे कमरे की चरों दीवारों को नीचे से करीब 6 फुट तक ट्रिपल से धनकड़ दिया था जिससे अनाज को बारिश से बचते हैं, साथ hi वैसी hi प्लास्टिक की चादर ज़मीन पर भी बिछी हुई थी और यहाँ तक की कमरे के एक पर हमने खातों को मिलकर बिछा दिया था लम्बा लम्बा और उनपर भी वह प्लास्टिक की चादर पड़ी हुई थी,

मंजू तै- हाँ बिलकुल बच्चों के खिलोने जैसा बना फिया है

जग्गू- तुमंर पूरे कमरे को ये प्लास्टिक की चादर से क्यों ढँक दिया बे,

अनुज- अभी पता चलेगा भैया,

ये कहकर अनुज ने नीचे राखी बोतलें उठाई और उन्हें दबाकर माँ मामी और भाबी और तै पर मरने लगा यही मैंने और सागर ने किआ, पर बोतलों से पानी या रंग नहीं बल्कि तेल निकल रहा था जो जहाँ पद रहा था वहीं से चमक रहा था,

में- समझ गए आज तेल से मज़े करेंगे,

जग्गू- अरे हाँ यार मज़ा आएगा ऐसे तो,

ये कह उसने भी एक बोतल उठाई और तेल की धार दूसरों पर मरने लगा,

माँ मामी तै और भाभी भी हंस भी रही थी पर उन्हें भी मज़ा आ रहा था,

मंजू तै- अरे ये बच्चे भी न नए नए ाटम्बर खोजते रहते हैं,

माँ- अरे इनके बचपने में hi हमारा भी बचपन याद आ जाता है ,

मामी- ये तो सही कहा जीजी, मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा है,

मामी ने तेल को हाथों में लेकर माँ की और उछालते हुए कहा,

भाभी- सही में मामी बड़ा मज़ा आ रहा है, कुछ hi देर में हम सब और साथ hi लगभग कमरा भी तेल से सराबोर हो चूका था सबके बदन तेल में चमक रहे थे, औरतों के भरे हुए बदन तेल में नहाकर और कामुक लग रहे थे,

हम सब लड़को के लुंड तो पहले hi इतने कड़क थे, अब रुकना और मुश्किल होता जा रहा था, मैंने मेरे बगल में मामी थी तो मैंने मामी को पकड़ा और उनको पीछे से पकड़ कर उनकी चिकनी छुछियां मसलने लगा,

मामी- अह्ह्ह्ह बाअबूउउउउठ्हहह तेल की वजह से तो और मज़ा आ रहा है न,

में- अभी तो बहुत मज़ा आएगा मामी बस देखते जाओ,

मैंने अपने लुंड को उनके चूतड़ों के बीच में घिसते हुए कहा और फिर उनके होंठ चूसने लगा जिसमे मुझे तेल का स्वाद भी आ रहा था, इधर जैसे मैंने मामी को पीछे से पकड़ रखा था वैसे hi जग्गू भी कबसे माँ की घात में था और मौका मिलते hi उसने भी माँ को पीछे से पकड़ लिया और अपना लुंड माँ की चिकनी गांड की दरार में घुसते हुए माँ की छुछियां मसलने लगा,

जग्गू- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह चाची इस पल के लिए बहुत इंतज़ार किआ है मैंने,

माँ- ुहंममहहाआनं बेताहहह ऐसे hi दबा. चची की छुछियां,

माँ भी उत्तेजित होकर अपनी छूट सहलाते हुए बोली,

जग्गू- uhmmmhaaaaaaaaaaaaa चायक्भःहीीी,

जग्गू के मन में भी हर लड़के की तरह अपने दोस्त की माँ के लिए जो कामुक विचार होते हैं वो सब थे, और उसे आज उन्हें पूरे करने का मौका मिल रहा था तो वो क्यों पीछे रहता,

वहीं उसकी खुद की माँ यानि मंजू तै को सागर ने देर न करते हुए अपने लुंड पर झुका दिया था और तै सागर का लुंड गले तक ले लेकर चूस रही थी वहीं सागर पीछे से उनकी गांड में उंगली अंदर बहार कर रहा था,

उनके बगल में hi अनुज बिस्तर पर आधा लेता हुआ था और भाभी उसकी जाँघों पर बैठी हुई थी और अनुज नीचे दे धक्के लगा कर भाभी को छोड़ रहा था,





प्रेमा- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अनुजजज्जज अह्ह्ह्हह क्याःह्ह्ह छोड़ताआहहहह है तू अह्ह्ह्ह लल्लाह,

तेल की वजह से चुदाई में और मज़ा आ रहा था क्यूंकि चिकनाई की वजह से बदन और लुंड दोनों hi आराम से चल रहे थे,

अनुज- अह्ह्ह्ह माहहहह ओह्ह्ह्हह्ह भाआआअआभीीीी अह्हह्ह्ह्ह किटनीय मस्त्त्त छूट है तुम्हारीईई अह्ह्ह्हह्हह बिलकुल तुम्हारी माहहह की तरह,

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुम्हे मेरी माँ की बहुत याद आ रही है,

मंजू तै- अरे इसने hi सबसे ज़्यादा छोड़ा है बहुरिया तेरी माँ को,

तै ने सागर का लुंड मुँह से निकल कर कहा,

अनुज- हेहही अब वो थी hi ऐसी, सही में भाभी तुम्हारी कोई बहन अह्ह्ह होती तो मैं ब्याह कर लेता,

प्रेमा- देखो चची माँ और हमें छोड़ने के बाद बहन की कमी रह गयी इनको,

माँ- इसको कमी hi रहेगी बहुरिया कितनी भी छूट ला दो तुम, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,

माँ ने सिसकते हुए कहा क्यूंकि जग्गू अपनी दो उंगलियां माँ की छूट में घुसाए हुए अंदर बहार कर रहा था, माँ कुछ पल बाद उसके आगे से हटी और उसे खत पर लिटा कर उसके लुंड को हाथ में लेकर मुठियाने लगी, वहीं उनके बगल में hi उनके पीछे की और मैं नीचे बैठकर मामी को अपने लुंड पर उछाल रहा था,





मामी- अह्ह्ह्ह हॉँण्णन बाअबूउउउउठ्हहह ओह्ह्ह्ह माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है,

में- मामंमी मुझेयहहह भीई अह्ह्ह्ह ऐसे hi उछलती राहु अह्ह्ह,

मैंने हाथ ऊपर करके उनकी छुछियां मसलते हुए कहा..

मामी- अह्ह्ह्ह हॉँण्णन बाअबूउउउउठ्हहह मेरा बस्स्स चली तो जीवन भर ऐसे हीईई तुम्हारे लुंड पर उछलती रहूं आठ,

मेरे बगल में hi माँ जग्गू के लुंड को सहला रही थी मैंने एक हाथ मामी की चुकी से हटाया और माँ के चूतड़ों को मसलने लगा, तेल में एक अलग थिरकन आ गयी चूतड़ों में,

इधर माँ ने थोड़ी देर जग्गू के लुंड हाथ से सहलाने के बाद माँ ने उसे टाँगे लटका कर बिस्तर पर बैठा लिया और खुद झुकककर उसका तेल में भीगा लुंड मुँह में भरकर चूसने लगी,





जग्गू के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी,

जग्गू- अह्ह्ह्ह ुघठ अह्ह्ह्ह छछियईईई ohhhhhhhhhh हानंन्न aiseeeeeeeeee होई,

मेरी माँ उसका लुंड चूस रही थी तो वहीं उसकी माँ सागर से अपनी गांड मरवा रही थी, सागर तै को घोड़ी बनाकर उनकी कमर थामे दनादन उनकी गांड में धक्के लगा रहा था,

मंजू तै- अह्हह्ह्ह्ह ऐसाःठ्ठ माज़आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बच्चा थोक्ताःह रह बाआहहहहहह की गांडडडड,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह तुम्हारी गंडड मरने का अलग hi माज़आह्ह्ह्ह है,

दूसरी और अनुज और भाभी की जोड़ी अभी भी तगड़ी चुदाई कर रही थी अनुज भाभी की छूट में दनादन धक्के पेल रहा था, और भाभी की आहें बता रही थी थी की दोनों को कितना मज़ा आ रहा था,

इधर लुंड चुसवाने के बाद जग्गू ने माँ को बिस्तर पर लिटा रखा था और खुद उनके पैरों के बीच आकर अपना लुंड माँ की छूट में घुसा कर लम्बे लम्बे धक्के लगा रहा था,





जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह चच्ची अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ गयाहहहह अह्हह्ह्ह्ह क्याहहह छूट है तुम्हारिई,

माँ- छोड़ ले बेटाःह्ह्ह बहुतत्त मुठ मारी है न तूने इसी चुत के लिए, अह्ह्ह छोड़ ले अपने दोस्त को माँ की छूट,

माँ उसकी उत्तेजना और बढ़ा रही थी,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन चायःहची अह्हह्ह्ह्ह कर्माह टेरिइइइइइइइइ मायआ छोड़नी में मज़ाआ आ राहाहहह है,

उसने जोश में आते हुयी कहा,

मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह वो टेरिइइइइइइइइ मायआ छोड़ी अह्ह्ह या तू उसकी अह्ह्ह तुम सब hi हमारे लिए एक बराबर हो अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह सागरररर ऐसी हीई,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह मन करता है तुम्हारी गांड मारता जौंन अह्हह्ह्ह्ह.

मंजू तै- टोह्हह्ह्ह्हह्हह मरता रह बेटाःह्ह्ह रोका किसने है,

तेल की वजह से चुदाई करने में एक अलग hi घरसँ और मज़ा मिल रहा था जिससे जल्दी hi ऐसा लगने लगा जैसे मैं झड़ने के करीब हूँ पर मैं इतनी जल्दी झड़ना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने इसका तरीका सोचा की ज़्यादा देर तक एक छेड़ में नहीं रहना और बदल बदल कर चुदाई करनी है, और इसलिए मैंने मामी की चुत से लुंड निकला और मामी को छोड़ा और मंजू तै के पास जाकर उनके मुँह में अपना लुंड घुसा दिया जिससे वो चुप हो गयी अब सागर उनकी गांड मार रहा था और मैं उनका मुँह छोड़ने लगा,

अनुज मेरे बगल में hi था तो मैं उसे ये समझा दिया जिसे देख उसने भी प्रेमा भाभी की गांड से लुंड निकला और कुछ पल मामी के साथ चुम्मा छाती के बाद उन्हें बिस्तर पर लिटा कर खुद उनके बगल में पेट उनका पेअर अपने कंधे पर रख कर उनकी छूट में लुंड पेलने लगा,





प्रेमा भाभी बगल में बैठ कर अपनी छूट रगड़ते हुए उन दोनों की चुदाई देखकर आहें भर्त्र हुए दोनों का उत्साह बढ़ा रही थी,

प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह मामी कैसा लग रहा है तेल में सना हुआ भांजे का लुंड तुम्हारी छूट का बाजा बजा रहा है,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह बहुरिया, मामी की छूट तो होती है भांजे के खेलने के लिए और अगर भांजा ऐसे बजने वलाहहह हो तो हम दिन भर बजवाते hi रहे,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह मामी तुम्हाराहहह बाजा इतना श्रीला है की मैं खुद दिन भर बजता रहूँगा,

अनुज ने मामी की छूट में धक्के लगते हुए कहा,

इधर मैंने देखा की सागर के धक्के भी तै की गांड में तेज़ होते जा रहे हैं तो मैंने उसे रोका और उसे भी तरीका बताया,

सागर- सही कहा भैया तेल की वजह से इतना चिकना हो गया है की रुका hi नहीं जाता, ाचा हुआ रोक लिए नहीं तो झाड़ जाता मैं अभी,

उसने अपना लुंड तै की गांड से निकलते हुए कहा,

में- कोई नई कुछ पल सांस ले और फिर लगजा काम पर,

मैंने तै के मुँह में धक्का लगते हुए कहा, तै के मुँह से थूक बाह कर नीचे गिर रहा था जो उन्हें और कामुक बना रहा था, इधर मैंने सबको तो बता दिया था की कैसे करना है क्या तरीका है साला जग्गू रह गया, कुछ तेल की वजह से तो कुछ माँ को छोड़ने की उत्तेजना में वो खुद को रोक नहीं पाया और वो कंपते हुए झड़ने लगा, तेज़ धक्के लगाने के चक्कर में उसका लुंड भी माँ की छूट से निकल गया और वो माँ की छूट और पेट पर झड़ने लगा, झड़ने के बाद वो हांफते हुए पीछे बैठ गया और फिर उठ कर दरवाज़े के पास राखी बोतल से पानी पीने लगे, पानी पिके हटा तो मैंने उसे समझाया की क्या करना है, वैसे भी उसका लुंड लगभग खड़ा hi था फिर भी वो कुछ पल रुक कर सांस लेने लगा,

इधर भाभी ने माँ की छूट को खली देखा तो उनके सामने जाकर झुककर अपना मुँह माँ की छूट पर लगा दिया और चाटने लगी,

माँ भी उनका सर दबाते हुए आहें भरने लगी,

सागर भी अब संभल चूका था और उसने भाभी के उठे हुए चूतड़ देखे तो बिना मौका गंवाए उसने पीछे जाकर अपना लुंड भाभी की गांड में घुसा दिया और पीछे से उनकी गांड मरने लगा वहीं भाभी, लगातार माँ की छूट चाट रही थी,





माँ- अह्ह्ह्ह प्रेमाआहहहहहहह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh चायततततत मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट ohhhhhhhhhh लल्लाह और तेज़्ज़ज़ माअररर इस रनडीई की गांड आह्हः फाड़ दे,

माँ सागर का हौसला बढ़ाते हुए बोली, भाभी की जीभ को अपनी छूट पर महसूस करते हुए,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह हॉँण्णन आझ रनडीई भाआआअआभीीीी को अह्ह्ह्ह रनडीई की तरह hi छोड़ुंगाःह,

माँ- ुहंममहहाआनं लल्लाह मार इसकी गांडडडड जितनी तू मारेगा इस रनडीई की जीभ उतनी तेज़्ज़ज़ तेरी बुआए की छूट पर चलेगीइ,

सागर भी माँ का पूरा कहना मानते हुए लम्बे लम्बे धक्के भाभी की गांड में लगा रहा था,

उनसे थोड़ा आगे मैंने लुंड तै के मुँह से निकला और दुसरे बिस्तर पर अपने पेअर लटका कर बैठ गया और ताई को अपने ऊपर आने का इशारा किआ, ये देख माँ भी भाभी के सामने से उठी और हमारे पास आ गयी और आकर पहले मेरा लुंड मुँह में भर के चूसा और फिर तै के होंठों को चूमा, फिर माँ ने मेरा लुंड पकड़ा और बोली- बैठो इस पर जीजी,

तै ने भी बिना देरी करते हुए मेरे ऊपर जगह ली और माँ ने मेरा लुंड तै की गांड पर रख दिया जिसे तै ने नीचे होकर गांड में ले लिए, माँ ने अपना हाथ लुंड से हटाया और तै की छूट सहलाने लगी, तै अपनी छुछियां मसलते हुए लुंड पर ऊपर नीचे होने लगी,





वहीं हमारे पीछे माँ के हटने के बाद सागर ने भाभी की गांड से लुंड निकला और माँ जहाँ लेती थी उसी जगह बैठ कर भाभी को अपने ऊपर आने को कहा, भाभी भी तुरंत उसके ऊपर चढ़ कर उसका लुंड गांड में लेकर उछलने लगी,

माँ- हाँ जीजी अह्हह्ह्ह्ह ली लूओ मोटा लुंड अपनी गांड में पूरा अह्ह्ह्ह उछाल उछाल कर दिखाओ कितनी बड़ी रैंड हो तुम,

मंजू तै- हाँ बंनुह्ह्ह्ह तेरे बेटी का लोढ़ा अह्ह्ह्ह बिलकुल मूसल है अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह गड्ड्ढड भर जाती है,

माँ- जानती हुऊ जीजी तभी टूउठ्ह माँ होती हुयी भी गंड़द मरवाती हुन्न्न बेटे सीए,

ये कहकर माँ तै के होंठों को चूमने लगी और साथ hi उनकी छूट भी सहला रही थी, मैं नीचे से तै की गांड में धक्के लगा रहा था,

सास बहु दोनों एक साथ गांड मरवा रही थी, इधर अनुज को जब मामी की छूट में कुछ ज़्यादा hi मज़ा आने लगा तो उसने खुद को झड़ने से रोकने के लिए मामी की छूट से लुंड निकल लिए, जग्गू के लिए माँ के अलावा मामी hi ऐसी थी जिसका स्वाद उसने नहीं चखा था इसलिए उसने तुरंत अनुज के हटते hi उसकी जगह ली और मामी के होंठों को चूमते हुए अपना लुंड उनकी छूट में घुसा दिया और उन्हें छोड़ने लगा, मामी की छूट को बस दो पल का आराम मिला की फिर से दनादन उसकी चुदाई होने लगी, अनुज वहीं कुछ पल बैठकर खुद को शांत करने लगा,

इधर सागर से गांड मरवाते हुए भाभी चिकनाहट की वजह से उसके लुंड से नीचे गिर गयी और गिरकर बिस्तर से टिक कर हंसने लगी, भाभी के हटने के बाद सागर उठा और मेरे और तै के बगल से माँ को पकड़ कर अपनी और खींचा और फिर जहाँ खुद बैठा था माँ को वहीं टांगें फैला कर लिटा दिया, और अगले hi पल माँ की छूट में लुंड घुसा कर दनादन पेलने लगा, उनके बगल में hi बैठी हुई भाभी उनकी चुदाई देख कर अपनी छूट में उंगली कर रही थी,





माँ- ुहंममहहाआनं लल्लाह aiseeeeeeeeee हीई अह्हह्ह्ह्ह ऑर्डर गहरी धक्के मार अह्ह्ह बाआहहहहहह की छूट में,

माँ सागर को उत्तेजित करते हुए बोली,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह हाआनं लुओ अह्ह्ह्ह तुम्हारीईई चुत गरमममम होती जाए रहीए है,

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाहः तुमहारी रनडीई बाआहहहहहह आईसीई hi haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh, कुटिया को जितना छोड़ो उतना गरम होती है,

ये कहते हुए भाभी उठी और अपनी छूट माँ के मुँह पर रख दी जिसे माँ तुरंत चाटने लगी,

सागर थोड़ा आगे झुक कर भाभी के होंठों को चूमते हुए माँ को छोड़ रहा था,

जग्गू ने आसान बदल कर मामी को घोड़ी बना लिए था और उनकी कमर को पीछे से थम कर दनादन उनकी छूट में लुंड पेल रहा था, मामी के चूतड़ हर धक्के पर लहार रहे थे और जग्गू उन्हें देख उत्तेजित हो रहा था,

इधर अनुज ने भी अपना लुंड घोड़ी बानी मामी के आगे कर दिया तो मामी ने तुरंत उसे मुँह में भर लिए और चूसने लगी,

इधर मैंने तै को पीछे की और गिरा कर खुद से चिपका लिया था और नीचे से दनादन उनकी गांड में लुंड अंदर बहार कर रहा था,

मंजू तै- हाँ लल्लाह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़ अपनीईई ताई की गांड आए मादरचोड़ड़ड़ड़ड़ अह्ह्ह ऐसे होई,

दूसरी और भाभी माँ के मुँह से उठी और सागर के पीछे गयी जो माँ की छूट में धक्के लगा रहा था और झुककर सागर के चूतड़ों को अपने हाथों से फैलते हुए उन्होंने अपनी जीभ सागर की गांड पर फिराई तो सागर बिलकुल बिलबिलाने लगा और वो कुछ सोच पाटा इससे पहले तो इस एहसास से उसका लुंड माँ झटके मरने लगा, उसने खुद को झड़ने से रोकने के लिए लुंड माँ की छूट से निकला पर तब तक देर हो चुकी थी और उसका लुंड पिचकारी मरने लगा जो माँ के बदन पर गिरने लगी, माँ ने जब ये देखा तो तुरंत उठ कर उसके लुंड को मुँह में भर लिए और उसका बचा हुआ रास अपने मुँह में hi निचोड़ लिए, सागर झड़ने के बाद बगल में बिस्तर पर पसर गया तो भाभी माँ के बदन से उसका रास चाटने लगी,

भाभी और माँ को खाली देख अनुज ने अपना लुंड मामी के मुँह से निकला और उनके पास जा पहुंचा,

अनुज ने भाभी को वहीं लिटा दिया और खुद उनके पीछे लेटकर अपना लुंड उनकी छूट में घुसा कर उन्हें छोड़ने लगा, माँ भी वहीं बैठी थी माँ ने भाभी का सर अपनी गॉड में रख लिए तो भाभी नीचे से माँ की लटकती बड़ी बड़ी चूचियों को चूसने लगी वहीं माँ भी भाभी की चूचियों को मसलते हुए उन्हें अनुज से चुड़ते देख रही थी,





माँ- ुहममम बहुरिया अह्ह्ह चूस ऐसी hi अपनीई चच्ची की छुछियां अह्ह्ह्हह,

भाभी तो बस उननननमम करके जवाब दे पा रही थी,

इधर अनुज ने माँ के पेअर खुले देखे तो अपना मुँह तिरछा कर उनकी छूट में घुसा दिया और अपने जन्मस्थान को चाटने लगा, अनुज एक साथ माँ और भाभी दोनों की आहें निकलवाने लगा, भाभी की लुंड से माँ की जीभ से,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh लल्लाहहहह ओह्ह्ह्हह्ह,

माँ उसके सर पर हाथ फिरते हुए उसके चेहरे को अपनी छूट पर घिसने लगी,

दूसरी और मुझे भी अब तै की गांड में लग रहा था की मैं ज़्यादा नहीं टिक पाउँगा तो मैंने अपना लुंड उनकी गांड से निकल लिए उसी समय जग्गू ने भी मामी की छूट से लुंड निकला खुद को शांत करने के लिए, मैंने तै को पकड़ा और उन्हें मामी के ऊपर 69 के आसान में लिटा दिया और दोनों तुरंत एक दुसरे की छूट चाटने में लग गयी, और हम दोनों को थोड़ा सँभालने का मौका मिल गया, क्यूंकि आज रात मैं चाहता था लम्बी चले,

झड़ने के बाद थोड़ा सा आराम मिलने के बाद सागर फिर से चुदाई के लिए तैयार था और उसने अपनी मम्मी यानि मामी और तै को 69 के आसान में देखा तो उसने जाकर तेल की बोतल उठाई और पिचकारी से तेल दोनों के ऊपर उड़ेलने लगा, साथ hi ढेर सारा अपने लुंड पर भी उढेल लिए और फिर अपनी मम्मी यही मामी के चूतड़ों की तरफ जगह लेकर अपना लुंड कुछ पल तै के मुँह में डालकर फिर निकला और फिर मामी की गांड में घुसा दिया और अपनी माँ की गांड मरने लगा, मामी ने भी तक की छूट चाटते हुए सिसकी ली पर मुँह छूट से पल भर भी हटने नहीं दिया,

इधर मैंने देखा अनुज को माँ की छूट चाटते हुए तो मैंने माँ को उसके सामने से उठाया और पीछे बिस्तर पर खुद बैठ कर माँ को अपने ऊपर आने का इशारा किआ, माँ भी तुरंत चढ़कर मेरे दोनों और टंगे कर लुंड को छूट में भर कर बैठ गयी और अपने चूतड़ों को घूमने लगी, साथ hi आगे झुककर माँ ने अपने होंठो को मेरे होंठों से मिला दिया और कुछ पल चूसने के बाद होंठों को छोड़ कर अपने चूतड़ पर हाथ लगाकर मेरे लुंड पर पटकने लगी,





में- अहहह्म्म ैसाआह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए राहाहहह है माहहहह, ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह,

माँ- ुहममम लल्लाहहहह तेराअहहह लुंडडडड लेकर मुझे हमेशा मज़ाहहह ाताः है,

मेरी और सागर की देखा देखा देखि जग्गू ने भी अपनी मम्मी यानी तै के पीछे जगह ली और अपना लुंड उनकी गांड में घुसा दिया और उनकी गांड मरने लगा, मामी और तै एक दुसरे की छूट चाट रही थी और दोनों अपने अपने बेटों से गांड मरवा रही थी,

इधर अनुज प्रेमा भाभी की छूट के दाने को मसलते हुए उनकी छूट में धक्के लगा रहा था और भाभी लगातार चीख रही थी, जल्दी hi अनुज के लुंड की मार से भाभी की छूट रोने लगी और अपना पानी बहा दिया,

इधर तै और मामी के लिए भी दोहरा हमला सहना मुश्किल होता जा रहा था, गांड में बेटों के लुंड चल रहे थे तो छूट में एक दुसरे की जीभ, जल्दी hi दोनों की छूट ने एक साथ एक दुसरे के मुँह में पानी छोड़ दिया तो दोनों झाड़ कर ढीली हो गयी,

सागर और जग्गू ने अपने अपने लुंड अपनी माँ की गांड से निकले तो तै और मामी एक दुसरे से अलग हुई, पर सागर ने मामी को ज़्यादा आराम नहीं करने दिया और उसने उन्हें उठाया और मेरे बगल में बिलकुल मेरी तरह बैठ गया और मामी ने भी माँ की तरह hi अपने बेटे के लुंड को छूट में लिए और उछलने लगी, सागर भी नीचे से उनकी छूट धक्के मरने लगा, मैं और सागर अगल बगल में अपनी अपनी माँ छोड़ने लगे,





माँ और मामी दोनों hi हर झटके पर आहें भर रही थी और सिसक रही थी,

इतने में जग्गू भी तै को लेकर मेरे दूसरी तरफ आ गया और बिलकुल हमारी hi तरह तै को अपने ऊपर बिठा लिए और छोड़ने लगा, अब हम तीन माँ बेटे की जोड़ी बिलकुल एक hi आसान में एक दुसरे के बगल में चुदाई कर रहे थे,

मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म ऐसे एक साथ अपने अपने बेटों से छुड़वाने में माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है,

माँ- हॉँण्णन जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह तीनो माओं की छूट में बेटों के लुंड हैं.

मामी- सही कह रहियी हूऊऊआआआह्ह्ह्ब जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह, ैसाआह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है पूछो मत,, एक साथ तीन तीन माँ चुद रहीए हैंण्ण्ण्न,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन मम्मी अह्हह्ह्ह्ह अपनीईईई माँ छोड़ने में बड़ा माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आता है,

जग्गू- उससे भी ज़्यादा मज़ाआ हो जाता है जब दुसरे माँ बेटे के साथ मिलकर चुदाई कारु तो,

जग्गू ने इतना बोलै था की माँ की एक तेज़ आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी और निकलती भी क्यों नहीं क्यूंकि अनुज भाभी के झड़ने के बाद उनकी छूट से लुंड निकल कर उन्हें वैसे hi लिटा कर हमारे पास आ गया था और पीछे से माँ की गांड में लुंड घुसा दिया था, तेल की वजह से लुंड आराम से घुसता भी चला गया, मैंने अनुज को देख माँ को आगे की और झुका लिए जिससे उसे सही से जगह मिल जाये, कुछ hi पलों में हम दोनों ले बना कर माँ की दोहरी चुदाई करने लगे,

अब कमरे का दृश्य कुछ ऐसा था की सबसे पहले मामी अपने बेटे सागर के लुंड पर उछाल रही थी उनके बगल में माँ अपने दोनों बेटों के लुंड अपनी छूट और गांड में लेकर दोहरी चुदाई करवा रही थी और हमारे बगल में जग्गू के ऊपर उसकी मम्मी उसके लुंड पर उछाल रही थी, दृश्य बेहद कामुक और उत्तेजित करने वाला था,

वो भी इतना की मैं और अनुज माँ हर बढ़ते पल के साथ माँ की छूट आउट गांड में धक्क्कों की गति बढ़ाते गए, और जल्दी hi उन धक्को की मार से माँ झड़ने लगी, उनका बदन कंपनी लगा और थरथराने लगा, कंपनी की वजह से उनका चिकना बदन मेरे ऊपर से फिसल गया और वो बगल में नीचे सरक गयी, मेरा और अनुज भी झड़ने के बेहद करीब थे और अपने लुंड माँ के ऊपर मुठियाने लगे, ये देखकर आराम करती हुई भाभी भी उठ कर आई और माँ से चिपक कर हमारे रास का इंतज़ार करने लगी,

मैंने दोनों के चेहरों के ऊपर लुंड हिलना जारी रखा और कुछ hi पलों में मेरे लुंड से पिचकारी निकल कर माँ और भाभी के चेहरे पर गिरने लगी, और उनके चेहरे को भीगने लगी दोनों अपना अपना मुँह खोल कर रास मुँह में लेने की कोशिश करने लगी





झड़ने के बाद मैं हैट कर बैठ गया, तो अनुज ने मेरी जगह ली और उसने भी भाभी और माँ के चेहरे को रास से भीगा दिया, और वो भी हैट कर लेट गया, माँ और भाभी हम दोनों के रास के एक दुसरे के चेहरे से चाटकर एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी, और तब तक चाटती रही जब तक चेहरे से रास हैट न गया हो,

दूसरी और सागर और जग्गू भी अपनी अपनी माँ को चोदे जा रहे थे और खुद को रोकने के इरादे में भी नहीं थे तो जल्दी hi दोनों ने भी अपनी अपनी माँ की छूट को अपने अपने रास से भर दिया, और फिर हमारी तरह hi नीचे लेट कर सांस लेने लगे,

चुदाई का एक दौर पूरा हो चूका था, सब अपनी अपनी जगह बैठ कर थोड़ी सांसें ले रहे थे,

माँ- अनुज पानी ले आ बीटा,

अनुज ने उठ कर पानी की बोतलें उठाई और माँ को और तै को उनके पीने के बाद सबने पानी पिया,

सागर- मज़ा आया न तेल की चुदाई में,

मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह सहीई में, इतना तो हम कभी नहीं थकते इतनी जल्दी, जितना इसमें थक रहे हैं, बदन इतना फिसलता है चुड़ते हुए,

मामी- हाँ जीजी पर मज़ा भी बहुत आ रहा है न, लुंड छूट में गांड में ऐसे जा रहा है सटासट,

प्रेमा भाभी- हाआनंनंन्न मामी, इतनी तेज़ अंदर बहार हो रहा है मशीन की तरह,

जग्गू- तभी तो लगने लगता है अब झड़े कब झड़े,

माँ- हाँ, पर बदन से बदन घिसने में मज़ा आ रहा है,

में- तभी तो आज ये प्रोग्राम रखा माँ,

अनुज- और का,

मंजू तै- ऐसे कभी कभी अलग अलग तरीके से करनी चाहिए मज़ा बढ़ जाता है,

माँ- सही पकडे हैं,

इस पर सब हंसने लगे, सागर और अनुज ने कुछ आराम के बाद तेल की बोतलों को उठा लिया और फिर से सब पर तेल की पिचकारी मरने लगे और पहले से तेल में साणे बदन को और तेल से लबालब कर दिया,

सबके लुंड दोबारा कड़क हो चुके थे, मंजू तै उठी और सरकते हुए आगे आकर मेरा लुंड चूसने लगी मैं बिस्तर से पीठ टिका कर नीचे बैठा था, तै ने कुछ पल मेरा लुंड चूसा फिर मुझे उठ कर बिस्तर पर बैठने को कहा मैं बैठ गया, तै मेरे पैरों के बीच आई और मेरी दोनों जांघो को पीछे की और कर दिया मैं सोचने लगा तै आखिर करना क्या छह रही हैं फिर अगले hi पल मैं समझ गया जब तै की जीभ मेरे गांड के छेड़ से टकराई, तै मेरी गांड चाट रही थी, और मैं उनकी जीभ के एहसास से सिहरने लगा,

तै झुकी हुई थी तो उनकी गांड उठी थी इसका फायदा सागर ने उठाया और वो पीछे से आया और अपना लुंड तै की गांड में घुसा diya,lund घुसने के बाद तै और आक्रामकता से मेरी गांड चाटने लगी, दूसरी और जग्गू खड़ा था और भाभी उसका लुंड चूस रही थी, साथ hi माँ उसके बगल में थी और जग्गू उनकी चूचियों को दबाते हुए उनके होंठो को चूस रहा था वहीं माँ के नीचे बैठ कर मामी माँ की छूट चाट रही थी साथ hi उनके बदन पर हाथ फिरा रही थी, तभी अनुज जो बहार मूतने गया था वो कमरे में आया तो उसे ये नज़ारा दिखा,





अनुज भी माँ के बगल में आ कर खड़ा हो गया तो माँ उसके होंठो को चूसने लगी वहीं मामी ने भी अपना मुँह माँ की छूट से हटाया और अनुज का लुंड चूसने लगी, अब भाभी जग्गू का लुंड चूस रही थी, मामी अनुज का और माँ अनुज और जग्गू दोनों के बीच थी और दोनों hi माँ की चूचियों से खेल रहे थे वहीं माँ का एक हाथ भाभी के सर के पीछे था तो दूसरा मामी के और दोनों के चेहरों को वो लुंड पर दबा रही थी,

इधर तै सागर से गांड मरवाते हुए मेरी गांड चाट रही थी और मुझे एक अलग hi एहसास हो रहा था, मेरा लुंड झटके पर झटके मार रहा था, मैंने उसके आगे रुकना hi सही समझा और तै के आगे से हैट गया तो तै ने अपना ध्यान अपनी गांड चुदाई पर लगाया,

उधर अनुज का लुंड मुँह से निकल कर मामी ने अनुज और जग्गू को अपनी दोहरी चुदाई करने की इच्छा जताई अब जग्गू और अनुज कैसे मन कर सकते थे तो अनुज तुरंत नीचे बैठ गया और मामी ने उसके ऊपर जगह लेकर उसका लुंड अपनी छूट में लिए और कुछ बार अपने चूतड़ों को घूमने के बाद आगे हो गयी तो जग्गू ने अपना लुंड मामी की गांड के छेड़ पर रखा और अंदर सरका दिया, मामी की एक गहरी आह्हः निकल गयी, अनुज और जग्गू को वैसे भी काफी अनुभव था और दोनों कुछ hi पलों में ले बनाकर मामी की दोहरी चुदाई करने लगे और मामी की सिसकियाँ निकलवाने लगे,

तै के सामने से हटने पर मैंने देखा की माँ और भाभी खाली है तो मैं उनके पास पहुंचा और दोनों मेरे पहुँचते hi नीचे बैठकर मेरा लुंड चूसने लगी, कुछ देर लुंड चूसने के बाद माँ ने मुझे लेटने को कहा तो मैं वहीं लेट गया और माँ मेरे ऊपर आकर अपनी पीठ मेरी और करके मेरे लुंड को छूट में लेकर ऊपर नीचे होने लगी,





में- हाँ माहहहह ऐसी hi माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है करती रहो,

माँ- अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह लल्लाहहहह अह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह.

माँ सीसियते हुए बोली, वहीं भाभी माँ को मेरे ऊपर उछालते देख अपनी छूट सहलाने लगी तो मैंने उन्हें अपने ऊपर आने का इशारा किआ और भाभी तुरंत मेटि बात समझ कर मेरे मुँह पर अपने चूतड़ टिका कर बैठ गयी, मैं उनकी रसीली गरम तेल से चिकनी छूट पर जीभ फिरने लगा,

उधर मामी की तगड़ी दोहरी चुदाई चल रही थी और उन्हें कितना मज़ा मिल रहा था ये उनकी सिसकियों और बातों से पता चल रहा था.

मामी- हाँ ahhhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मसरसहहोदड़दूँण आअह्ह्ह आजजज छोड़ड़ड़ छोड़ की मेरी जान ली लोऊऊह्ह्ह ,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह माआआम्मीईई अहहहहजहहहहज जान नाहीईई गाणंदड़ और चुत ताऊ छोड़ेंगी नाहीई,

मामी- आह्ह्ह्हह्ह टूवू छोड़ड़ड़ड़ो नाआआअह्ह्ह्हह भैंचोड़ो, मादरचोदूओ अह्हह्ह्ह्ह दिखाई क्याआअह खाकर पैदा कीयआह्ह्ह्ह है तुमममम दोन्यू को इन रंडियों ने,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह सआईईईई ली रनडीईई अह्हह्ह्ह्ह क्याआअह गाणंदड़ है, अह्ह्ह्ह अनुजजज्जजज चलल दिखाआते हैं इस रनडीईई को हुमारी रंडी माओं की छूट की ताकत को,

ये कहके उसने मामी की गांड और तेज़ मरना शुरू कर दिया वहीं अनुज ने भी उसकी गति पकड़ ली, इधर जग्गू सागर की माँ की गांड मार रहा था तो सागर उसकी माँ की गांड भी उतनी hi बेरहमी से मार रहा था, और हर धक्के पर तै की सिसकी निकलवा रहा था,

मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह बाछआहहह अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन,

इधर मैं माँ को अपने ऊपर बैठा कर नीचे से उनकी छूट में धक्के लगा रहा था वहीं भाभी माँ की छूट सहलाते हुए उनके छूट के दाने से खेल रही थी,





माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन लल्लाहहहह छोड़ता रह ऐसे हीई अह्हह्ह्ह्ह बहुउउउरिया,

भाभी माँ की छूट सहलाते हुए झुककर उनकी छुछियां भी बदल बदल कर चूसने लगी और माँ की उत्तेजना को बढ़ा रही थी, कुछ पल यूँ hi छोड़ने के बाद माँ मेरे लुंड से उठ गयी और अपनी जगह भाभी को बिठा दिया और मैं नीचे से भाभी को छोड़ने लगा,

मैं भाभी को आगे झुककर उनकी छूट में धक्के मरने लगा, माँ मेरे और भाभी के पैरों के बीच आकर झुककर अपनी जीभ भाभी की गांड पर चलने लगी और भाभी की गांड के छेड़ को चाटने लगी, कुछ देर चाटने के बाद माँ ने सागर को अपने पास बुलाया तो सागर तै की गांड से लुंड निकल कर सरकते हुए माँ के पास आया माँ ने झुककर उसका लुंड मुँह में भर लिए और कुछ पल चूसने के बाद भाभी की गांड पर रखते हुए कहा - चल अपनी भाभी की गांड मार अब,

उधर तै को गांड मरै से कुछ पल का आराम मिला तो हांफते हुए सांस लेने लगी, माँ ने तै को अकेले देखा तो उनके ऊपर लेटकर उनके होंठो को चूसने लगी, इधर मैं और सागर मिलकर भाभी की दोहरी चुदाई करने लगे, सागर इस खेल में नया ज़रूर था पर वो सीख बहुत जल्दी रहा था,

मैं और सागर मिलकर भाभी की चीखें निकलवा रहे थे तो उधर अनुज और जग्गू ने छोड़ छोड़ कर मामी की हालत ख़राब कर दी थी, मामी एक बार झाड़ चुकी थी पर वो फिर भी नहीं रुके थे और अब मामी दोबारा से झड़ी तब जाकर दोनों ने उन्हें छोड़ा, मामी तो बिलकुल पास्ट होकर लेट गयी, अनुज और सागर के लुंड निकलते hi,

माँ ने तै के होंठों को छोड़ा और मामी की और इशारा करते हुए कहा- देखलो जीजी साली कुटिया कह रही थी की रंडियों ने क्या खा कर पैदा किआ है दिखाओ तो अब खुद की माँ चुद गयी, हेहही,

मंजू तै- सही कहा बन्नो, देखो कैसी पड़ी है रंडी, आज हमारे बेटों में सही सबक सिखाया कुटिया को,

मामी दोनों की बातें सुन ज़रूर रही थी और मन hi मन हंस भी रही थी पर अभी उनकी कुछ बोलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी,

माँ- जीजी बच्चों ने तो सबक सीखा दिया अब हमारी बारी है,

मंजू तै- और क्या ऐसे थोड़े hi छोड़ देंगे रंडी को,

दोनों खिसकते हुए मामी जहाँ लेती थी वहां पहुंचे, जग्गू और अनुज मुस्कुराते हुए अपनी माँ की हरकतें देख रहे थे, अनुज और जग्गू भी इतनी तगड़ी चुदाई के बाद बैठ कर अपनी सांसें ठीक कर रहे थे,

तै और माँ दोनों ने मामी को दोनों और से घेर लिए और बोली- अब उठ जा रंडी नहीं तो तुझे क्या तेरी अम्मा भी छोड़ देंगे,

मामी भी अब थोड़ी सांसें ले चुकी थी और आँखें खोल कर मुस्कुराते हुए बोली- तुम दोनों रंडियों की गांड में इतना दम है तुम हमारी अम्मा के बारे में बोल सको,

मंजू तै- बन्नो ये ऐसे नहीं मानेगी इसे सबक सीखना पड़ेगा,

माँ- इसे तो मैं बताती हूँ,

ये कहकर माँ मामी की छुछियां मसलने लगी और वहीं तै ने अपनी उंगलियां मामी की छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगी,

मामी फिर से सिसकने लगी, इधर माँ अपनी छूट मामी के ऊपर रख कर बैठ गयी और मामी उसे चाटने लगी,

माँ- कुटिया छूट नहीं गांड चाट रंडी,

मामी ने अपनी जीभ माँ की गांड में घुसा दी,

इधर मैं और सागर मिलकर भाभी की छूट और गांड का भुर्ता बना रहे थे, भाभी लगातार सिसकियाँ लिए जा रही थी पर हम दोनों फिर भी उन्हें दबाये हुए लगातार चोदे जा रहे थे, अंत में भाभी से और सहन नहीं हुआ और थरथराते हुए झड़ने लगी, उनका पूरा बदन कंपनी लगा, जिस वजह से हमारे लुंड भी उनकी छूट और गांड से निकल गए, भाभी की कमर झटके खा रही थी और फिर अचानक झटके कहते हुए hi उनकी छूट से एक धार निकली जो मेरे बदन को भीगने लगी, चुड़ते चुड़ते भाभी का मूट निकल गया था, हर झटके के साथ भाभी का मूट मुझे भीगा रहा था क्यूंकि मैं उनके नीचे जो था, खैर उनका मूतना बंद हुआ तो वो बगल में बेजान होकर गिर गयी,

इधर जग्गू और अनुज ने काफी देर आराम कर लिए था अब वो भी चुदाई के लिए तैयार थे तो जग्गू उठा और उसने माँ को मामी के चेहरे से उठाया और उन्हें बिस्तर पर हाथों और घुटनो पर झुका दिया और खुद माँ के पीछे जगह ली और अपने लुंड को पकड़ कर माँ के चूतड़ों की दरार में ऊपर नीचे घिसने लगा,

जग्गू- अह्ह्ह्ह चाची कैसा लग रहा है?

माँ- ुहंममहहाआनं लल्लाह ाचा लग रहा है अब घुसा भी दे नाह,

जग्गू ने माँ की बात मानी और अपना लुंड माँ की गांड के छेड़ पर रखा और धक्का देकर अंदर घुसा दिया,

माँ- ुहंममहहाआनं लल्लाह,

जग्गू- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छाआआअह्ह्ह्छःठीीी ओह्ह्ह्हह्ह,

जग्गू ने सीसियते हुए अपना पूरा लुंड माँ की गांड में घुसा दिया,

माँ- ओह्ह्ह्हह्ह बेटाहः,

जग्गू- अह्ह्ह्ह चायक्भःहीीी तुम्हारीईई चूऊउत्तत्त तो गजब थीईई अह्ह्ह्हब पर गड्ड्ढड के क्या कहनी अह्ह्ह,

माँ- कुछ कह मत लल्लाह अब लुंड घुसा दिया है तो मुँह से नहीं लुंड से बात कर,

जग्गू ने भी यही किआ और माँ की कमर थाम कर तेज़ी से माँ की गांड में धक्के लगाने लगा,





माँ- ुहंममहहाआनं लल्लाह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़ अपनीईई चची की गाडडडड,

अनुज ने और सागर ने मिलकर तै को पकड़ लिए और अब दोनों मिलकर उनकी छूट और गांड में लुंड पेलने लगे, तै की चीखें और सिसकियाँ पूरे कमरे में गूंजने लगी, जग्गू अपनी मम्मी की चुदाई देख कर मेरी माँ की गांड मार रहा था,

मैं खाली था मैंने मामी को उठाया तो बोली- बाबू थोड़ी देर रुक जाओ अभी हमारी हिम्मत नहीं हो रही,

में- कोई नहीं मामी तुम आराम करो, ये कहके मैं माँ के सामने जा कर बैठ गया, माँ ने मेरा लुंड अपने सामने देखा तो तुरंत मुँह में भर लिए और चूसने लगी, जग्गू पीछे से लगातार माँ की गांड में तेज़ तेज़ धक्के लगा रहा था, माँ मेरा लुंड चूसने में लगी हुई थी,

उधर मंजू तै की दनादन चुदाई जारी थी, और वो लगातार चीख रही थी, इधर जग्गू भी माँ की गांड की गर्मी में तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए उत्तेजित होने लगा और उसे जैसे hi एहसास हुआ की अगर रुका नहीं तो झाड़ जायेगा तो उसने अपने आप को रोका और माँ की गांड से लुंड निकल लिए, जैसे hi माँ की गांड से जग्गू का लुंड निकला तो माँ आगे आकर मेरे लुंड पर बैठ गयी और उछलने लगी, वहीं जग्गू भी अपनी जगह बैठ कर अपने आप को शांत करने लगा,

अनुज और सागर दनादन धक्के लगाकर मंजू तै को चोदे जा रहे थे बेचारी एक बार झाड़ गयी थी फिर भी दोनों छोड़ नहीं रहे थे, इधर माँ मेरे लुंड पर उछाल रही थी, जग्गू हमारे बगल में बैठ कर अपना लुंड मुठियाते हुए अपनी माँ की चुदाई देख रहा था, साथ hi उसके पीछे मामी थी जो अभी अभी मूट कर आई थी और तै की चुदाई देख रही थी





में- आजजज ताई की ाची सेवाआआअह्ह्ह्ह कर दी दोनों नई अह्हह्ह्ह्ह,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh लल्लाहहहह है भी तो तेरी ताईईई चुड़क्कड़ आईसीई hi सेवाआआअह्ह्ह्ह चाहती हैं वूऊह्ह्हह्ह,

माँ ने मेरे ऊपर उछालते हुए कहा,

इधर जग्गू इतने में फिर से तैयार था तो वो माँ के पीछे आया और मेरे पैरों के बीच जगह बनाई, अपना लुंड माँ के चूतड़ों में घिसते हुए बोलै- अह्हह्ह्ह्ह तैयार हो चाची?

माँ- बेटाःह्ह्ह अपने बच्चों लुन्डों के लिए तो तुम्हारी छाछी हमेशा तैयार है,

ये कहकर माँ ने अपना उछालना रोका और आगे झुककर जग्गू के लिए और जगह बनाई,

जग्गू ने फिर बिना वक़्त गंवाए अपना लुंड माँ की गांड में दोबारा घुसा दिया,

माँ- ुहममम लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह, अब्ब्ब्ब छोडोऊ दोनुहठ दोस्त मिलकररर,

में- हाँ माहहहह, अह्ह्ह्हह्हह,

मैंने माँ की कमर थामकर नीचे से झटके लगते हुए कहा, वहीं जग्गू भी माँ की गांड में धक्के लगाने लगा, हम दोनों hi एक साथ दोहरी चुदाई बहुत बार कर चुके थे तो तुरंत हमने ले पकड़ ली और माँ को दोनों और से छोड़ने लगे, इधर हमने ले पकड़ी थी तो उधर तै एक बार फिर से झड़ने लगी थी, पर तै अकेले नहीं बल्कि अनुज और सागर को भी अपने छेदों में झड़वा कर hi हारी थी, अब तीनो एक दुसरे के बगल में पड़े हुए हांफ रहे थे, सब की नज़रें हमारी चुदाई लार थी,

माँ की सिसकियाँ हर बढ़ते पल के साथ तेज़ी होती जा रही थी क्यूंकि हमारी गति भी हर पल के साथ बढ़ रही थी,

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह छोड़ते rahoooooooooooo दोनोंओओओओओआठहह अह्ह्ह्हह कर्मआहह बेटाझ छोड़ड़ड़ड़ अपनीई माँ की छूट, अह्ह्ह्ह जग्गू अपने दोस्ट्त की माहाहहहहह की गांडडडड मारता रह अह्ह्ह्हह.

जग्गू- अह्ह्ह्ह ुघठ अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छाआआअह्ह्ह्छःठीीी ओह्ह्ह्हह्ह बहुत्तट्ठ गरमममम होओओओओ तुमममममझहह,

जग्गू माँ की गांड मरते हुए बोलै, जल्दी hi माँ दोहरी छुड़ाए के आगे हार मान gayiiiiiiiiii और झड़ने लगी पर उनके साथ साथ जग्गू ने भी अपना रास मा की गांड में छोड़ दिया, और फिर लुंड निकल कर पीछे लेट गया, झाड़ तो माँ भी चुकी थी और आगे मेरे बदन पर गिरी हुई थी, पर मैं अभी रह रहा था तो मैंने अपना लुंड घुसाए हुए hi माँ को उठाया और पलट कर उन्हें नीचे लिटा कर खुद ऊपर आ गया और दनादन बिना रुके उन्हें छोड़ने लगा,





माँ के मुँह से लगातार अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ें निकल रही थी,

मैं भी आज बहुत उत्तेजित हो चूका था और तेज़ी से माँ की छूट मार रहा था,

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह मेरे राजा छोड़ड़ड़ड़ अपनीईई माहाहहहहह को अह्ह्ह्ह घुसजै बापिस्सस इसी छूट में, मादरचोड़ड़ड़ड़ड़

...

माँ मुझे उत्तेजित करने के लिए खुद भी गरम होते हुए बोली,

में- हाँ साआआईईई कुटिया ली अपनी बेटे का लुँड्ड्ड अपनीईई चुत में रनडीई, अह्ह्ह्हह्हह,

माँ- ुहंममहहाआनं टूओ डीई नाआ, अपनी रनडीई माहाहहहहह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़,

में- अह्हह्ह्ह्ह छोड़ताआहहहह रहूँगाआहठ्ह सआईईई कुटियाःहहहह,

हम दोनों माँ बेटे एक दुसरे को गालियां देकर छोड़ रहे थे और बाकी लोग हमें देखते हुए आराम कर रहे थे,





भाभी तो हमारे बगल में hi बैठ कर छूट सहला रही थी बाकी लोग भी पीछे बैठे कुछ सोने लगे थे तो कुछ बैठ कर आराम कर रहे थे, मैंने कुछ देर और माँ की छूट में धक्के लगाए और फिर खुद को रोक नहीं पाया और उनकी छूट में झड़ने लगा, मैंने अपने रास से माँ की छूट को भर दिया, और माँ के ऊपर लेट गया, माँ में मुझे अपने सीने से चिपका लिए, खैर कुछ पल बाद मैं माँ के होंठों को चूम कर उनके ऊपर से उठा और फिर देखा सब आराम कर रहे थे तो मैं भी आँखें बंद करके लेट गया, वैसे तो सबने सोचा था रात भर नहीं सोयेंगे पर थकने के कारन सबको hi नींद आ रही थी,

कुछ आवाज़ों के कारण मेरी नींद खुली तो आँखें मलते हुए इधर उधर देखा तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी,

देखा की भाभी अपनी गांड उठा कर झुकी हुई हैं और अनुज उनकी गांड मार रहा है, वहीं मामी अपना सर भाभी के चूतड़ों पर टीकाकार अनुज के लुंड को भाभी की छूट के अंदर बहार होता देख रही हैं,





मैंने ये देखा तो मेरा मन भी मचलने लगा, मैंने बाकी तरफ नज़र दौड़ाई तो जग्गू तै सागर और माँ सो रहे थे,

में- तुम लोग कब उठे,

मेरी आवाज़ सुन कर सबने मेरी और देखा, मामी तो उठ कर अपने घुटनो पर सरकती हुई आई और सीधा मेरा लुंड मुँह में भर लिए,

अनुज और भाभी ने ये देखा तो हंसने लगे,

अनुज- अभी कुछ hi समय हुआ होगा भैया, नींद खुल गयी तो भाभी की गांड देख कर रुका नहीं गया,

प्रेमा- और जब इसने गांड में लुंड घुसा दिया तो मुझसे रुका नहीं गया,

मामी- और मैं इन दोनों की आवाज़ से जाग गयी,

मामी ने मेरा लुंड मुँह से निकलते हुए कहा,

में- कोई नहीं अच्छे काम के लिए hi जागे हो,

मामी- अरे बाबू गांड में बहुत खुजली हो रही है मिटादो न,

मामी ने मेरा लुंड मुठियाते हुए प्यार से कहा, अब मैं कैसे मन कर सकता था, मैंने उन्हें बिस्तर के किनारे करके पीठ पर उनके पैरों को मोड़ कर लिटा दिया जिससे उनकी गांड खुल कर बहार आ गयी,

मैंने अपना लुंड पकड़ा और उनकी गांड के छेड़ पर घिसते हुए पूछा- तैयार मेरी रैंड,

मामी- हाँ मेरे छोड़ू राजा छोड़ो,

मैंने बिना देरी किये नीचे धक्का लगाया और लुंड मामी की गांड में समां गया, और धीरे धीरे मैं मामी की गांड मरने लगा,





दूसरी और अनुज भाभी की गांड दनादन मार रहा था, मैं भी धीरे धीरे गति बढ़ाते हुए उसी गति से मरने लगा, मामी और भाभी दोनों hi आहें भरने लगी, खैर आवाज़ों को सुनकर जल्दी hi माँ की भी आँख खुल गयी दूसरी तरफ से जग्गू भी सर उठाकर देख रहा था,

हमें चुदाई करते देख माँ भी गरम होने लगी जग्गू का भी मन करने लगा था, माँ अपनी छूट को सहलाते हुए उठी और जग्गू के ऊपर जाकर उसका लुंड अपनी छूट में लेकर बैठ गयी, और धीरे धीरे ऊपर नीचे होते हुए अपनी छूट मरवाने लगी,

अब सिर्फ तै और सागर hi सो रहे थे पर वो भी बेचारे ज़्यादा देर नहीं सो पाए, पहले तै की आँखें खुली तो उन्होंने कमरे में देखा और सबकी और देखककर बोली- तुम लोग दोबारा चालु हो गए,

और ये कहकर वो बहार मूतने चली गयी, इतने में सागर ज की आँख भी खुल गयी उसने भी इधर उधर सब और देखा और पाया की एक और अनुज भाभी की गांड मार रहा है, तो एक तरफ मैं उसकी मम्मी की गांड मार रहा हूँ, वहीं बगल में hi उसकी बुआ यानी हमारी माँ जग्गू के लुंड पर उछाल रही है,





जग्गू नीचे से माँ की छूट में धक्के लगा रहा है, इतने में दरवाज़ा खोल कर मंजू तै अंदर आ गयी और उन्होंने सागर को देखा और बोली- चल बच्चा ाचा हुआ तू भी उठ गया, बता का मरेगा छूट या गांड,

ये सुनकर हम सब की हंसी छूट गयी, खैर पूरी रात इसी तरह हम चुदाई करते रहे, बीच बीच में आराम करते फिर चुदाई करते और तब तक करते रहे जब तक कर सकते थे फिर थक कर सो गए,


जारी रहेगी
 
थैंक्यू सो मच फॉर थे अप्प्रेसिअशन
 
जग्गू नीचे से माँ की छूट में धक्के लगा रहा है, इतने में दरवाज़ा खोल कर मंजू तै अंदर आ गयी और उन्होंने सागर को देखा और बोली- चल बच्चा ाचा हुआ तू भी उठ गया, बता का मरेगा छूट या गांड,

ये सुनकर हम सब की हंसी छूट गयी, खैर पूरी रात इसी तरह हम चुदाई करते रहे, बीच बीच में आराम करते फिर चुदाई करते और तब तक करते रहे जब तक कर सकते थे फिर थक कर सो गए,



अपडेट 233

चोदामपुर



एक और जहाँ पर कर्मा के यहाँ सबने खुल कर तेल में डूब कर मज़े लिए थे तो दूसरी और जग्गू के घर पर भी माहौल फीका नहीं रहा था, धीरे धीरे दारु असर करने लगी थी और जैसे जैसे नशा चढ़ रहा था उत्तेजना भी चढ़ रही थी, तीनो औरतें तो कोल्डड्रिंक पि कर छत पर चली गयी थी, और बोल गयी थी की वो लोग छत पर टहलने जा रहे हैं तुम्हारा पीना ख़तम हो जाये तो बुला लेना,

क्यूंकि लोग ज़्यादा थे तो किसी को इतनी दारू नहीं मिली की धुत्त हो जाये पर इतनी हो गयी थी की सब सुरूर में थे,

पापा- लो भाई दारु तो ख़तम अब औरतों को बुलाओ यार,

पापा ने बेशर्मी से अपना लुंड पाजामे के बहार निकलते हुए कहा,

जिसे देख राजपाल ताऊ थोड़ा ठिठके और पापा को नाना और मां की तरफ इशारा करके बताने लगे,

मौसा- अरे राजपाल भाई साहब, बाबा और जमुना के पास भी लुंड hi हैं इनसे क्या शर्माना,

मां को तो वैसे भी चढ़ गयी थी उन्होंने ये सुना और तुरंत पजामा नीचे खिसका कर अपना खड़ा लुंड बहार निकलते हुए बोले- हाँ ये रहा,

इस पर सब हंसने लगे,

दीनू- रुको मैं औरतों को बुलाता हूँ,

ये कहके दीनू चाचा आवाज़ लगते हैं तो कुछ पल बाद धीरे धीरे तीनो औरतें नीचे आने लगती हैं, पर जैसे hi सबकी नज़र तीनो पर पड़ती है तो चौंक जाते हैं क्यूंकि तीनो hi बिलकुल नंगी सीढ़ियों से उतर रही थी,

ऊपर जाकर औरतों ने तय किआ था की अंत में होना यही है तो क्यों बेकार में बातों को घूमना फिरना, छत पर नंगी होकर तीनो एक दुसरे के बदन के साथ खेलकर गरम हो चुकी थी और बुलाने पर नंगी hi नीचे आ गयी, राजपाल ताऊ और दीनू चाचा शालू मौसी को नंगा देख खुश हो गए, और दोनों एक साथ उनपर टूट पड़े, इसी तरह मां और नाना ने रज्जो चची को पकड़ लिए, और इस तरह शुरू हुई चुदाई,

रात भर सब मर्दों ने मिलकर तीनो औरतों को भोगा, मौसी मां नाना के शामिल होने से बाकी सब बेहद खुश थे, खासकर राजपाल ताऊ और दीनू चाचा और दोनों ने रात भर मौसी के दोनों छेदों का भरपूर स्वाद लिए, नाना मां ने भी रज्जो चची को खूब रगड़ रगड़ के छोड़ा, रज्जो चची भी अपने पिता सामान नाना से छोड़कर बेहद उत्तेजना महसूस कर रही थी साथ hi जमुना मां उन्हें जीजी hi कहते थे तो रज्जो चची को ये hi लगा की वो अपने बाप और भाई से चुद रही हैं जो उनके लिए बिलकुल नया एहसास था, एक बार को सबने इच्छा जताई बाप बेटी और भाई की चुदाई देखने की तो नाना और मां ने मिलकर मौसी को छोड़ा, जिससे सबको पूरा विश्वास हो गया की हमारे घर में भी चुदाई खुल के होने लगी है, खैर जब तक थके नहीं तब तक सब चुदाई करते रहे और फिर थक कर सो गए,

इधर सरजू के यहाँ भी सब बच्चों ने मिलकर इशारों के खेल शुरुआत की थी पर कुछ बाज़ी खेलने के बाद पल्ली ने सुझाव रखा की जो हारेगा उसे अपना एक कपडा उतरना होगा, ये सुन किरण ने भी सहमति जताई तो बाकी सब के लिए तो ख़ुशी की बात थी खैर हर बाजी पर कपडे उतरने लगे, और किरण को नंगा देख सरजू बिरजू से रहा नहीं गया, पहले सरजू ने किरण के बदन का स्वाद चखा तो बाकि लड़किया बिरजू के साथ लगी और फिर इसका उल्टा हुआ, क्यूंकि लड़के बस दो hi थे और लड़कियां 4 तो लड़कियों ने एक दुसरे की छूट और गांड से भी खूब प्यार जताया, बाकि सरजू बिरजू दोनों भाइयों के मज़े थे, दोनों ने चारो को खूब छोड़ा, एक बार तो दोनों ने मिलकर बारी बारी से चारों की दोहरी चुदाई की फिर सब मिलकर सो गए,

खैर चोदामपुर की अगली सुबह थी तीनो hi घरों में लोग थोड़ी देरी से उठे थे, मेरे घर में भी हम सब उठे और औरतें अपने घर के काम पर लग गयी मैं अनुज सागर और जग्गू बाघ में निकल गए जानवरो का चारा पानी करने के लिए, मंजू तै और भाभी घर चली गयी क्यूंकि उन्हें भी सफाई करनी थी, घर जाकर तै ने दरवाज़ा खटखटाया तो बदन पर साड़ी लपेटे हुए मौसी ने खोला,

मंजू तै- अरे बन्नो अब उठ भी जाओ लगता है सरे जीजाओं ने खूब रगड़े की रात को,

तै ने अंदर आते हुए कहा उनकर पीछे भाभी भी आ गयी,

मौसी- अब साली का तो काम hi होता है रगड़वाना जीजी,

प्रेमा- अरे यहाँ तो सोता पड़ा है मम्मी,

भाभी ने आँगन में सबको नंगे सोते हुए देखा,

मंजू- रात भर सबने खूब म्हणत की है लगता है,

मौसी- हाँ जीजी म्हणत तो खूब हुई है,

मौसी ने साड़ी पीछे फ़ेंक कर फिर से नंगे होते हुए कहा, मौसी का नंगा बदन देख कर दोनों सास बहु की आँखों में चमक गयी,

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह्ह मौसी तुम्हे देख कर तो हमारा मन डोलने लगा,

मौसी- और मेरा तुझे देख कर, तेरा स्वाद भी तो चखना है,

प्रेमा- ज़रूर मौसी बस थोड़ा रुक जाओ, चाय चढ़ा दूँ तो सबको उठा कर पीला दूंगी,

मंजू- हाँ बीटा चाय चढ़ा दे पहले,

प्रेमा- हाँ अभी रखती हूँ,

मौसी- रखने जा पर सुन तो,

प्रेमा- हाँ मौसी,

मौसी- ऐसे नहीं जाएगी,

ये कहकर मौसी भाभी की साड़ी खोलने लगी और कुछ hi पलों में भाभी को पूरा नंगा कर दिया और बोली- अब जा बना ले चाय,

प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह मौसी तुम भी न,

भाभी हँसते हुए चली गयी, तो मौसी ने अपना ध्यान मंजू तै की और किआ, और उन्हें बाहों में भरते हुए उनके होंठो को चूसने लगी, तै भी मौसी का पूरा साथ देने लगी, दोनों ने कुछ देर एक दुसरे के होंठों को चूसा और फिर अलग हुई तो मौसी उनके कपडे उतरने लगी जिसमे तै ने भी साथ दिया और जल्दी hi बिलकुल नंगी हो गयी,

तै मौसी के पीछे आकर उनकी चूचियां दबाते हुए सबको देखते हुए बोली- मर्दों को तो छोड़ इन दोनों रंडियों को देख कैसे सो रही हैं,

तै ने रज्जो और ममता चची की और दिखते हुए कहा, रज्जो चची नाना और मां के बीच थी, तो ममता चची पापा और मौसा के,

मौसी- हाँ देखो तो कितना समय हो गया उठा hi नहीं जा रहा,

मंजू- वही तो,

मौसी- हेहही जीजी एक मस्त तरीका है उठाने का करें क्या?

मंजू- कौनसा तरीका?

मौसी ने तै के कान में कुछ कहा जिसे सुनकर तै की मुस्कान और बड़ी हो गयी और वो मौसी को बोली- कमीनी,

मौसी- करें??

मंजू तै- हाँ बिलकुल,

ये कहकर दोनों आगे बढ़ी और संभल संभल के पेअर रखने के बाद तै ने ममता चची के मुंह के ऊपर और मौसी ने रज्जो चची के चेहरे के ऊपर, दोनों ने जगह लेकर एक दुसरे को देखा और मुस्कुराई और फिर इशारा किआ आगे बढ़ने का, और कुछ पल बाद hi दोनों ने थोड़ा ध्यान सा लगाया और अगले hi पल दोनों की छूट से मूट की धार निकली और ममता और रज्जो चची के चेहरे पर पड़ने लगी, जिसके पड़ते hi दोनों हड़बड़ा कर उठी तो सामने देखा छूट और उससे बहता हुआ मूट उनकर मुँह पर गिर रहा है, कुछ पल तक तो समझ hi नहीं आया दोनों को,

उनके चेहरे पर मूट गिरने से मूट के छींटे अगल बगल भी गिरे जिससे बाकि लोग भी उठने लगे, जैसे रज्जो चची के बगल में सो रहे नाना और मां की नींद खुल गयी वहीं पापा और मौसा की भी, और राजन चाचा दीनू चाचा आउट राजपाल ताऊ भी धीरे धीरे आँखें मलते हुए उठने लगे,

नाना ने जब आँखें खोल कर बगल में ये नज़ारा देखा तो बिलकुल हैरान रह गए पर फिर चेहरे पर मुस्कान भी आ गयी, खैर मौसी और तै का मूतना ख़तम हुआ तो सब लोग जाग चुके थे, रज्जो और ममता चची तो पूरी मूट में नहीं हुई थी, खैर मूतना ख़तम हुआ तो तै और मौसी ने अपनी अपनी छूट ममता और रज्जो चची के मुँह पर रख दी जिसे दोनों तुरंत चाटने लगी,

इधर इतना अद्भुत नज़ारा देख नाना और मां का लुंड बिलकुल तन चूका था, वैसे भी दोनों मंजू तै को पहली बार नंगा देख रहे थे और उनका भरा हुआ बदन देख साथ hi उन्हें मोटे देख दोनों का लुंड बिलकुल तैयार हो चूका था, मंजू तै आगे झुक कर अपनी छूट चटवा रही थी ममता चची से

अपने लुंड को मुठियाते हुए नाना उठे और उन्होंने भी रज्जो चची के सीने के ऊपर दोनों पेअर दोनों और करते हुए जगह ली और आगे खिसककर खुद को मंजू तै से पीछे से सताया और अपना लुंड तै की गांड के छेड़ पर रखते हुए अंदर तेल दिया, तै की अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी,

मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म babaaaahhhhhhhhhhhhhhh तुमने तूऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह बिना कहे दाल दिया आह्ह्ह्हह्ह,

रज्जो- हैं जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह जैसी तुम हम पर बता कर मूर्ति थी,

रज्जो चची ने अपना मुँह पल भर के लिए हटते हुए कहा, और फिर से तै की छूट पर लगा दिया,

नाना- Ahhhhhhhhhh बितीयआह्ह्ह्ह क्या करें रुका hi नहीं गया तेरे चूतड़ देखकर,

नाना ने तै की गांड में लुंड चलते हुए कहा,

तै इसका कुछ जवाब देती की उसी पहले hi मां ने अपना लुंड उनके मुँह में घुसा दिया और तै का मुँह बंद कर दिया, तै पर अब तिहरा हमला हो रहा था, इधर राजपाल ताऊ ने अपनी पत्नी को चुड़ते देखा तो उन्होंने भी नाना की तरह मौसी के पीछे जगह ली और अपना लुंड मौसी की गांड में घुसा दिया, और दीनू चाचा ने मौसी के मुँह में, इतने में बिलकुल नंगी प्रेमा भाभी सब के लिए चाय लेकर आई और उन्होंने पापा मौसा चाचा को पकड़े, बाकि सब चुदाई में लगे हुए थे,

ममता चची- अह्हह्ह्ह्ह ला बहुरियाहहह जीजी के मूट के बेस्ड चाय पीने का बड़ा मन है,

ममता चची ने तै और नाना के नीचे से निकलते हुए कहा,

रज्जो- हाँ मैं भी पियूँगी,

रज्जो चची भी राजपाल ताऊ और मौसी के नीचे से निकल गयी भाभी ने उन्हें भी चाय दी, बाकि लोग चाय पीने लगे जो चुदाई नहीं कर रहे थे उन्हें छोड़कर, जो चुदाई कर रहे थे उन्होंने रज्जो चची और ममता चची के हटने के बाद अपने आसान बदले थे, और मां ने नीचे लेटकर मंजू तै को अपने ऊपर बिठाया जिससे उनका लुंड तै की छूट घुस गया और नाना पीछे से तै की गांड मरने लगे और बाप बेटे मिलकर मंजू तै की दोहरी चुदाई करने लगे, इधर अपनी बीवी की दोहरी चुदाई देख राजपाल ताऊ ने भी मौसी के साथ वैसा hi किआ और दीनू चाचा के साथ मिलकर उनकी दोहरी चुदाई करने लगे,

इधर बाकि चाय की चुस्कियां लेते हुए दोनों औरतों की चुदाई देख रहे थे, चाय ख़तम होने पर चाचा ने भाभी को अपने आगे बिठा लिए और भाभी तुरंत उनके सामने बैठ कर उनका लुंड चूसने लगी, रज्जो चची और ममता चची भी चाय ख़तम करके पापा और मौसा के सामने बैठ गयी और उनके लुंड चूसने लगी,

लुंड चुसवाते हुए चाचा ने भाभी को एक पल को रुकने को कहा तो भाभी रुक गयी चाचा ने लुंड को भाभी के मुँह से निकला और फिर पल भर रुकने के बाद उनके लुंड से मूट की धार निकल कर भाभी के चेहरे पर गिरने लगी, भाभी ने भी तुरंत अच्छी बहु की तरह अपना मुँह खोल दिया और अपने मुँह में धार लेने लगी, चाचा लुंड को इधर उधर करके कभी भाभी के चेहरे को भीगते तो कभी उनकी छुछियां, जब चाचा का मूतना ख़तम हुआ तो भाभी पूरी तरह मूट में तर थी, और फिर उनके लुंड को मुँह में भर के चूसने लगी,

अब उठकर मूतने तो पापा और मौसा भी नहीं गए थे तो उन्होंने चाचा को देखा और यही तरीका अपनाया, पापा ने तो रज्जो चची के मुँह से लुंड निकला hi नहीं और चुसवाते हुए hi मूतने लगे, चची को मुँह में भरता मूट गटकना पड़ा पर साथ hi उनके होंठो से मूट निकल कर उनके बदन को फिर से भीगने लगा, कुछ पल बाद पापा ने लुंड को मुँह से निकलना चाहा तो चची ने खुद पकड़ कर बापिस मुँह में घुसा लिए और मूट को अपने मुँह में भरवाने लगी, अंत में पापा का मूतना ख़तम हुआ तो उन्होंने तुरंत चची की घोड़ी बना दिया और पीछे से लुंड उनकी गांड में घुसा दिया और उनकी गांड मरने लगे,

इधर मौसा को भी मूट लगने लगा था तो उन्होंने ममता चची के मुँह से लुंड निकला और बगल में रज्जो चची के मुँह में घुसा दिया और मूतने लगे, रज्जो चची गांड मरवाते हुए मूट गटकने की कोशिश करने लगी,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह के साली रांड मेरा भी मूट पि जा सारा, अह्हह्ह्ह्ह मूट पीना बहुत पसंद है न तुझे,

दीनू चाचा मौसी को छोड़ते हुए अपनी पत्नी को सबका मूट में नहाते हुए देख उत्तेजित हो रहे थे, इधर मौसा ने भी चची के चेहरे और चूचियों को अचे से अपने मूट से भीगा दिया, और फिर बापिस ममता चची को लिटा कर छोड़ने लगे, इधर चाचा का लुंड चूसते हुए भाभी अचानक से उठी और उठ कर सीधा नाना मंजू तै और मां के पास गयी और फिर मां के चेहरे पर खड़े होकर अपने घुटनो को थोड़ा झुकाया और अपनी छूट को अपनी सास यानि मंजू तै के चेहरे के सामने किआ और फिर एक सीटी के आवाज़ के साथ अपनी सास के चेहरे पर मूट की धार मरने लगी, मंजू तै ने भी अपनी बहु के मूट के लिए अपना मुँह खोल दिया, भाभी का मूट तै के चेहरे और मुँह में से मां के चेहरे पर गिरने लगा, वो पहली बार किसी औरत के मूट को अपने चेहरे पर फिर अपनी जीभ पर महसूस कर उत्तेजित होने लगे, पीछे से नाना भी ये अद्भुत और समाज की नज़रों में घिनोना कृत्या देख कर खुद को संभल नहीं पाए और तै की गांड में झड़ने लगे, मां भी तै की छूट को सिसकियाँ लेते हुए अपने रास से भरने लगे,

तै की छूट और गांड में रास भर रहा था तो मुँह में मूट, तै भी ये तिहरा हुम्ला झेलन्हि पाई और सबके साथ hi थरथराते हुए झड़ने लगी, झड़ने के बाद नाना ने तै की गांड से लुंड निकला और पीछे होकर हांफने लगे, तै भी मां के लुंड से हटकर बगल में लेट कर हांफने लगी भाभी ने अपनी मूट की बूँदें मां के चेहरे पर टपकै और फिर बापिस आकर चाचा के लुंड को अपनी छूट में लेकर उछलने लगी,

ये सब देख ममता चची ने भी वही किआ जो भाभी ने किआ था और सीधा अपनी छूट मौसी के मुँह के सामने की और उनके मुँह पर मूट की धार मरने लगी जो उन्हें भीगते हुए दीनू चाचा के चेहरे पर गिरने लगी जिसे वो मुँह खोल कर अपने मुँह में लेने का प्रयास करने लगे, साथ hi उनके धक्के भी मौसी की छूट में तेज़ हो गए, राजपाल ताऊ भी मौसी की गांड की कहावत के आगे हार मानते नज़र आ रहे थे और उन्होंने जल्दी hi अपना रास भाभी की गांड में भर दिया, दीनू चाचा भी ज़्यादा देर खुद को रोक नहीं पाए और झड़ने लगे, झड़ने के बाद राजपाल ताऊ भी पीछे हो गए और लुंड मौसी की गांड से निकल लिए, ये देख ममता चची ने मौसी को दीनू चाचा के ऊपर से उठाकर बगल में पलट कर लिटा दिया और खुद उनके मुँह पर छूट रखकर बैठते हुए आगे झुक गयी और 69 के आसान में एक दुसरे की छूट चाटने लगी, चची मौसी की छूट से दीनू चाचा का रास चाटने निकल कर चाटने लगी,

पापा रज्जो चची की गांड मात रहे थे की उन्हें भाभी ने अपने पास बुला लिए दोहरी चुदाई के लिए, पापा ने रज्जो चची की गांड से लुंड निकला और भाभी और चाचा के पीछे जगह लेकर अपना लुंड भाभी की गांड में घुसा दिया, रज्जो चची भी वहीं गिरकर सांसें भरने लगी, पर ज़्यादा देर नहीं क्यूंकि कुछ hi पल बाद उनके चेहरे पर फिर से मूट की धार गिरने लगी जो की राजपाल ताऊ की थी, चची तुरंत उठकर बैठी और उनका मूट अच्छे से अपने बदन और मुँह में लेने लगी, जहाँ राजपाल ताऊ दीनू चाचा की पत्नी के मुँह पर मूट रहे थे तो दीनू चाचा ने उतनी पत्नी को चुना और अपना लुंड मंजू तै के मुँह में घुसा कर मूतने लगे, तै के होंठों के बगल से मूट बहकर बहार आने लगा, और उनके बदन को भीगने लगा, दोनों ने अपने मूट की आखिरी बूँद एक दुसरे की पत्नी के मुँह में उढेल दी तब जाकर हेट, राजपाल ताऊ के हटते hi रज्जो चची को फिर भी आराम नहीं मिला और राजपाल ताऊ के बाद मां ने उनके ऊपर मूतना शुरू कर दिया, मां ने रज्जो चची को चुना तो नाना मंजू तै के ऊपर मूतने लगे,

तभी दूसरी तरफ एक तेज़ चीख के साथ प्रेमा भाभी पापा और चाचा के लुंड पर झड़ने लगी और उनकर साथ साथ पापा और चाचा ने भी अपना रास उनके छेदों में छोड़ दिया, खैर सब लोग निपट चुके थे, रज्जो चची तो मूट में पूरी सराबोर थी, आखिर सबसे ज़्यादा मोटा भी तो उनके ऊपर गया था, मौसी और ममता चची ने एक दुसरे को चाट चाट कर झाड़ा दिया था, मंजू तै के ऊपर मूतने के बाद नाना ने अपना लुंड उनसे पल भर चुसवाने के बाद अलग कर लिए था, वहीं मां ने रज्जो चची के साथ किआ,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह आअज इतना मूट में नहला दिया सबने मुझे,

रज्जो चची ने उठाते हुए कहा, उनके बदन से मूट टपक रहा था,

मंजू तै- तू है भी तो मूट की प्यासी बन्नो,

तै ने भी उठाते हुए अपने चेहरे से मूट को हाथो से पोंछते हुए कहा,

रज्जो- जीजी तुम भी काम कहाँ हो,

ये कहकर दोनों आपस में गले मिल गयी, और दोनों ने कुछ पल एक दुसरे के होंठों को चूसा, और फिर अलग हुई,

राजपाल ताऊ- अरे भाई अब सब गंदे हो गए हैं तो नहाने का इंतेज़ाम करते हैं,

प्रेमा- पापाजी, पाइप लगादो सब यहीं नाहा लेंगे आँगन में और आंगन धूल भी जायेगा,

पापा- सही कह रही है बहु,

और फिर ऐसा hi हुआ सब एक साथ आंगन में hi नहाये, साथ hi औरतों ने मिलकर आंगन भी साफ़ करा दिया इसके बाद पापा मौसा चाचा ममता चची और मौसी अपने घर चले आये रज्जो चची और दीनू चाचा अपने घर,

इधर तब तक किरण और पल्ली भी घर आ चुके थे, देर से उठने के कारन दोनों hi उठकर जल्दी से चले आये थे, बाघ का काम निपटा कर हम लोग भी घर आ गए थे जग्गू अपने घर चला गया था, हम घर आये तब तक माँ और मामी ने मिलकर वो कमरा भी साफ़ कर दिया था, सबने एक दुसरे के साथ रात की बातें साँझा की साथ hi नाश्ता भी किआ,

नाना बड़ी उत्सुकता से बता रहे थे की कैसे सबने एक दुसरे के ऊपर मोटा और उन्होंने भी मंजू को अपना मूट पिलाया, सब लोग उनकी ख़ुशी देखकर मुस्कुरा रहे थे, नाश्ते के बाद मैंने अंजलि को फ़ोन किआ और उससे थोड़ी देर बात की फिर मैं कुछ देर के लिए सो गया, मेरे साथ साथ बाकि लोग भी अपनी रात की नींद पूरी कर रहे थे, दोपहर के समय जाकर मामी ने हम सबको उठाया खाने के लिए, सोने के बाद सब तरोताज़ा महसूस कर रहे थे क्यूंकि नींद जो पूरी हो गयी थी,

फिर सब ने साथ मिलकर खाना खाया खाना ख़तम होते hi पापा का फ़ोन बजा और वो बात करने लगे, हम बच्चे भी टीवी देख रहे थे, माँ और साडी औरतें भी वहीं बैठी थी,

फ़ोन पर बात करने के बाद ने बोलै - अरे सुनो शशि का फ़ोन था,

माँ- ाचा क्या बोली,

पापा- एक खुश खबरि है, विनीत का रिश्ता पक्का हो रहा है,

माँ- अरे वाह सही में ये तो बड़ी अछि बात है,

मौसी- लड़की कौन है जीजी?

पापा- अरे लड़की उन्ही की रिश्तेदारी में है, शशि की जेठानी की लड़की है रिमझिम जिसके ब्याह में गए थे उसी की ननद है,

मामी- अरे वाह ये सही है इनकी लड़की उनके यहाँ उनकी लड़की इनके यहाँ हेहही,

नाना- बढ़िया है पहले से रिश्तेदारी है तो लोग भी जाने पहचाने होंगे कोई दिक्कत परेशानी भी नहीं है,

में- कुछ अचे से hi जाने पहचाने हैं, हेहही,

मां - मतलब.

चाचा- मतलब की उनका परिवार भी हमारे जैसा hi है,

मामी- चाह तो इसीलिए रिश्ता और अचे से जुड़ गया हेहही.

पापा- हाँ, पर दिक्कत ये है की वो बोल रही थी की कल hi शगुन लेकर सब ससुराल जा रहे हैं उनकी तो हम लोग आज hi आ जाएं.

माँ- हाय ढैय्या आज hi, ये शशि ब्यौरा गयी है क्या,

पापा- अरे मैंने भी बोलै की तुरंत ऐसे कैसे हो पायेगा तो बता रही थी की रिमझिम के ससुर ने पंडित वगेरा को दिखाया था फिर कोई मुहूर्त नहीं है अगले दो ढाई महीने का और शशि कह रही इतना नहीं रुकना

माँ- फिर सब इतनी जल्दी कैसे होगा, और मां हो तुम्हारी और से भी कपडे वगेरा सब जायेंगे न शगुन में.

नाना- हाँ और का खली हाथ थोड़े hi जाओगे.

पापा- फिर क्या करें.

मौसा- एक काम करते हैं.

पापा- क्या?

मौसा- लिस्ट बना दो सामान की क्या क्या आना है, मैं और राजन भाई साब चले जाते हैं लेने, तब तक तुम लोग तैयार हो जाना,

नाना- हाँ ये सही रहेगा,

मौसा- पर फिर वहां बाघ में बैठना पड़ेगा किसी को काम देखने के लिए.

नाना- उसमे क्या है हम जा रहे हैं बैठ जायेंगे,

मौसा- भाभी तो लिस्ट बना दो जल्दी से,

माँ- हाँ देती हूँ भैया, पर ये बताओ जायेगा कौन कौन शशि के यहाँ?

मौसी- तुम लोग जाओगे और कौन कौन जायेगा,

पापा- नहीं उसे पता है तुम सब लोग यही हो तो एक आध को और जाना पड़ेगा नहीं तो बाद में तुम्हे झेलना पड़ेगा उसे, और राजन तुंहरे यहाँ से तो जाना hi पड़ेगा,

राजन- हाँ भैया पता है नहीं तो जान ले लेगी वो हमारी,

मामी- तो फिर कैसे करें,

पापा- समझ नहीं आ रहा यहाँ काम भी फैला पड़ा है,

माँ- किरण बिटिया चल तू मेरे साथ लिस्ट बनवा दे,

किरण- हाँ बुआ,

माँ और किरण लिस्ट बनाने लगे,

राजन- एक काम करो भैया, ममता को ले जाओ, हमारा जाना तो मुश्किल हो जायेगा,

पापा- चलेगी ममता,

ममता चची- हाँ हमें का दिक्कत होगी भाईसाब चलो,

पापा- ठीक है फिर ऐसा करते हैं, ममता तू चल ले और पल्ली किरण तुन चलोगे कोई?

पल्ली- ताऊजी मेरी आज से hi माहवारी शुरू हुई है तो मन नहीं कर रहा,

पापा- ाचा फिर रहने दे सफर में परेशां hi होगी,

किरण- मैं चलाऊंगी फूफाजी,

किरण ने लिस्ट बनाते हुए hi कहा,

पापा- ठीक और कोई?

मौसी- नहीं जीजा इतने hi लोग वहुत हैं, वैसे भी यहाँ काम ब्बि है न,

मामी- तुम भी चली जाओ जीजी,

मौसी- नहीं गुंजन जीजी और किरण जा hi रहे हैं, ममता जीजी भी मैं चली गयी तो पूरा घर का काम तुम्हारे लिए आ जायेगा,

ममता चची- हाँ ये तो है, पल्ली का तुम्हे पता है माहवारी में काम बढाती है करती नहीं है,

पल्ली- ओह्हो मम्मी,

पापा- ठीक है फिर जो जो जा रहे हो तयारी करलो,

किरण- ये रही लिस्ट फूफा,

किरण ने लिस्ट मौसा को पकड़ते हुए कहा,

पापा- एक काम करो राजन तुम और जमुना चले जाओ सामान लेने, शैलेश तुम भी चलो हमारे साथ,

माँ- हाँ ये सही रहेगा, और शालू तू भी जमुना और भैया के साथ चली जा साड़ियां वगेरा सही से देख तब भी लेगी,

ममता चची- हाँ ये सही है अब मर्दों का क्या है कुछ भी लेकर चले आएंगे,

पापा- ठीक है फिर जल्दी निकलो तुम लोग, कर्मा की माँ हमारा कार्ड दे देना ज़रा,

माँ- हाँ ले,

माँ ने जल्दी hi चाचा को कार्ड लेकर दिया और फिर चाचा, मां और मौसी निकल गए, साथ hi नाना भी उनके साथ बाघ में चले गए,

माँ- कर्मा अनुज किरण चलो तयारी करलो और अपने अपने कपडे रखलो जो भी ले जाने हैं,

अनुज- हाँ माँ, ऐ किरण मेरे भी रखवा देगी?

किरण- हाँ रखवा दूंगी एक काम बस का नहीं है तेरे,

ममता- जीजी मैं भी आती हूँ तयारी करके,

माँ- हाँ जल्दी से ाइयो, और सुनो तुम नहालो तब तक,

पापा- हाँ जाते हैं, ये कहके पापा नहाने चले गए

मैं भी अपने कपडे कमरे में जाकर ढूंढने लगा, अनुज और किरण भी वहीं थे, मामी मौसा के कपडे निकल रही थी,

पापा नाहा कर निकले और तौलिया लपेट कर अपने कमरे में पहुंचे तो अंदर का नज़ारा देख हैरान रह गए,

अंदर बिस्तर पर माँ लग भाग पूरी नंगी एक करवट पर लेती हुई थी उनके बदन पर सिर्फ पेटीकोट रहा जो कमर ओर इकठा हो रखा था, और उनकी गांड में पीछे से एक लुंड अंदर बहार हो रहा था जो की सागर का था,





पापा- अरे तुम्हे पता है न की जल्दी तैयार होना है,

पापा ने अंदर घुसते हुए कहा,

माँ- ुहंममहहाआनं तुम नहा रहे थी, और ये ज़िद्द करने लगा की बुआहहहह जाने से पहले एक बार गांड मरने दो,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह हॉँण्णन फूफाजी अह्ह्ह मैं मदद करा दूंगा तैयारी में जल्दी से,

पापा- अरे वो कोई नहीं बच्चे का मन था तो सही किआ, अरे हमारे कपडे कहं रखे हैं,

माँ- तुम रुको, गुंजनननननन ऐ गुंजननं,

माँ की आवाज़ सुनकर मामी आई,

मामी- हाँ जीजी, अरे ये क्या हो रहा है,

मामी ने माँ और सागर को देख कर कहा,

मां- अरे अलमारी से अपने जीजा के कपडे तो निकल दे ज़रा, और रही हमारी बात तो सागर का मन था अपनी बुआ की गांड मरने का, हम इसकी इच्छा पूरी कैसे न करते,

माँ ने गांड मरवाते हुए प्यार से उसके चेहरे पर हाथ फिरते हुए कहा,

मामी- इसे भी न जाने कब अकाल आएगी इतना काम पड़ा है निकलने की तयारी करनी है और ये और लेकर बैठ गया, जीजी तुम hi बेकार की ज़िद्द पूरी करके बिगड़ रही हो इसे,

मामी ने अलमारी खोल कपडे निकलते हुए कहा,

माँ- ऐ गुंजन हम बुआ भतीजे कुछ भी करें, हमारे बीच में नहीं बोलना, मार तू लल्ला बुआ की गांड,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआनं बाआहहहहहह, समझती नहीं हैं मम्मी,

मामी- हाँ ठीक है तू जॉनर और तेरी बुआ जाने हम नही बोल रहे कुछ, अह्ह्हम्म्म जीजाः,

मामी ये बोल hi रही थी की पापा ने पीछे से उनकी चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,

माँ- अब तुम उसे क्यों परेशां कर रहे हो निकलने दो कपडे,

पापा- अरे तुम दोनों को देख कर हमारा भी खड़ा हो गया, अह्ह्ह्ह गुंजन,

पापा ये कहके मामी की सारी ऊपर उठाने लगे,

माँ- देखो तो बच्चे तो बच्चे इन्हे भी चैन नहीं है,

मामी- ऐ जीजी हमारे और जीजा के बीच में मत बोलो, हम जो चाहें करें,

मामी ने मुस्कुराते हुए कहा,

माँ- कुटियाःहहहह कहीं की,

मामी- जीजा अब तुंहारी पत्नी ने बोल hi दिया है कुटिया तो लो कुटिया की मार लो न,

मामी पीछे होकर तुरंत अपनी सारे उतरी और फिर पेटीकोट भी उतर कर बिस्तर पर झुककर कुटिया बन गयी, पापा ने भी बिना देरी के अपना तौलिया नीचे गिराया और लुंड मामी की गांड में घुसा दिया और आगे झुककर उनकी चूचियों को मसलते हुए मामी की गांड में लुंड चलने लगे,





मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देखझ लल्लाह तेरे चक्क्र में तेरी माहहहह चुद गयी अह्हह्ह्ह्ह,

मामी सागर को चिढ़ाते हुए बोली,

सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मममममिययययययय कोइइइइइइ बायतत्तत नाहीइइइइइइ तुमममम छोडनीवे की चीएवज़ हूवाह्ह्ह्ह बाआहहहहहह की तरहहहह.

सागर अपना लुंड माँ की गांड में अंदर बहार करते हुए बोलै, इधर पापा उसकी मम्मी की गांड भी अचे से छोड़ रहे थे,

खैर जब तक हमने अपने अपने कपडे रखे तब तक माँ और मामी की गांड मरै चलती रही, और अंत में सागर ने अपना रास माँ की गांड में भर दिया तब जाकर उन्हें छोड़ा तो माँ सीधे नहाने चली गयी, वहीं कुछ देर पापा ने भी मामी की गांड मार मार के अपना रास उनके मुँह में छोड़ा,

मैंने अपने कपडे वगेरा रख कर अंजलि को फ़ोन किआ और उसे साड़ी बात बताई तो उसने वही बोलै जो शायद हर लड़की अपने प्रेमी से बोलती है, अपनी फोटो भेजना अचे से स्मार्ट बनकर रहना,

मैंने भी हर लड़के की तरह हाँ में हाँ मिलादी और लव यू बोलकर फ़ोन रख दिया,

खैर जल्दी hi सब लोग तैयार हो चुके थे और कपडे वगेरा भी पैक हो चुके थे, थोड़ी देर बाद hi चाचा मौसी और मां भी आ गए शगुन के कपडे वगेरा लेकर,

मौसा ने राजन चाचा को सारा हिसाब वगेरा समझा दिया और काम भी की मज़दूरों को कैसे संभालना है, मां और सागर के ऊपर बाकि के काम की ज़िम्मेदारी थी वैसे राजन चाचा थे hi मैंने जग्गू को भी बोल दिया था,

माँ- शालू gunjan,dekhiyo सबको को कोई दिक्कत परेशांनी न हो, और राजन भैया और पल्ली का भी ध्यान रखना,

मौसी- अरे तुम बिना चिंता के जाओ जीजी यहाँ सब संभल जायेगा,

इसी के साथ hi हम लोग गाडी से निकल गए, बुआ के गाओं की और पापा मौसा माँ, ममता चची, किरण मैं और अनुज,

जारी रहेगी
 
ये संदेश आप सभी को सूचित करने के लिए है कि ये सफर यहीं रोका जा रहा है, कथा चोदमपुर की औपचारिक रूप से समाप्त होती है, हालांकि अधूरे में छोड़ने पर आप सभी को अच्छा नहीं लगेगा पर यही जरूरी है, ये सफर यहीं तक था आप सभी को अपने अपने जीवन के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।

(यदि कोई कहानी या किरदारों का उपयोग करना चाहे या कहानी को आगे लिखना चाहे तो उसका स्वागत है।)

।।धन्यवाद।।

TharkiPo
 
आप सभी लोगों का दिल से बहुत बहुत आभार जो आपने इतना सराहा इतना प्यार दिया, आप सब की वजह से ये सफर काफी अच्छा और मजेदार रहा, पर हर सफर की तरह ये भी खत्म होना ही था अब एक और नए सफर की बारी है, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद इतना साथ देने के लिए।

TharkiPo लॉगिंग ऑफ
 
WELCOME BACK

:rock2:

कल चार पऊवा 🍺 पीने के बाद ख्याल आया चलो इस सफ़र को फिर से शुरु करते है ।

माना कि मॉडल अलग है खैर दो-चार हुचहुचा कर चला ही लेंगे इस गाड़ी को भी :D

THARKI BHAI :hug:

जबराफैन - ड्रीममैन

SORRY .... SORRY BHAIYA 🍺

DREAMBOY40

Yeah seriously गाईज्ज्ज

इच्च मी :cool:

SO WELCOME BACK GUYSS :rock1:

ठरकी भाई अपनी आगे की कहानी मुझे हैण्डओवर कर दी है , अफसोस और दुख की बात है हमारा प्यारा गंगाधर अब इस कहानी पर वापस नही आयेगा :verysad:

मगर चिंता की बत्ती बना कर कान खुजाने का

क्योकि अब गाड़ी तुम्हारा भाई चलायेगा :happy:

भले ही गाड़ी जानी पहचानी है मगर एक बार इसका WHOLE ABDOMEN USD करना ही पड़ेगा ।

मिलते है बहुत जल्द ही इस कहानी को एक नये रंग मे रंगने के लिए

कुछ मेरे तो कुछ आपके

और ढेर सारे ठरकी भाई की यादों को साथ लेकर ।

आखिर मे A BIG BIG THANK YOU ठरकी भाई आपने मुझे इस काबिल समझा और भरोसा जताया ।

WE LOVE YOU ALWAYS

WE MISS YOU ALWAYS

:love3:
 
सूचना

:horn:


15 अगस्त के बाद से इस कहानी के नये अपडेट शुरु होंगे

:राइटिंग:




:- DREAMBOY40
 
मौसा ने राजन चाचा को सारा हिसाब वगेरा समझा दिया और काम भी की मज़दूरों को कैसे संभालना है, मां और सागर के ऊपर बाकि के काम की ज़िम्मेदारी थी वैसे राजन चाचा थे hi मैंने जग्गू को भी बोल दिया था,

माँ- शालू gunjan,dekhiyo सबको को कोई दिक्कत परेशांनी न हो, और राजन भैया और पल्ली का भी ध्यान रखना,

मौसी- अरे तुम बिना चिंता के जाओ जीजी यहाँ सब संभल जायेगा,

इसी के साथ hi हम लोग गाडी से निकल गए, बुआ के गाओं की और पापा मौसा माँ, ममता चची, किरण मैं और अनुज,


अपडेट 234
मौसा गाडी चला रहे थे पापा उनके बगल में बैठे थे बीच में माँ, चची और किरण बैठे थे और पीछे मैं और अनुज, करीब दो ढाई घंटे के सफर के बाद हम लोग बुआ के घर के सामने थे, गाडी के पहुंचते hi दरवाज़ा खुल गया और बुआ और बड़ी बुआ सबसे पहले बहार निकली, उनके पीछे पीछे बाकी लोग भी थे, हम लोग भी गाडी से निकल गए, मैंने अनुज से सब के पाऊँ छुए सब लोग आपस में मिल रहे थे,

विनीत मेरे पास आया और बोलै- क्यों मेरे पेअर कौन छुएगा तेरे से बड़ा हूँ मैं.

में- बीटा चेले हो तुम मेरे बड़े आये पेअर छुवने वाले,

मैंने उससे गले लगते हुए कहा,

विनीत- ाचा बीटा ज़्यादा बोलेगा तो ब्याह में नहीं बुलाऊंगा,

में- ब्याह में बुला मत बुला सुहागरात में बुला लियो,

विनीत- हरामी माणूस.

में- चल अब मेहमान हूँ सेवा कर और सामान उतार,

बड़े सब लोग अंदर चले और हम तीनो ने गाडी से सारा सामान निकल कर घर में रखा, फिर गाडी को घर के पीछे बानी जगह पर कड़ी कर के आये तब तक सब लोग आँगन में बैठ चुके थे, हमारे अंदर आते hi बुआ ने अनुज को सीने से लगाया और फिर मुझे,

बुआ- हाय हमारे बच्चे आ गए हम बड़े खुश हैं.

बुआ के बाद बड़ी बुआ ने भी हमारे हाथों को चूमा और हमारे चेहरे को अपनी चूचियों में घुसा कर प्यार किआ, उधर माँ और चची ने भी विनीत को भी उसके हाथ चूम कर और सीने से लगा कर आशीर्वाद दिया.

इतने में रसोई से पूर्वी दीदी हाथ में कोल्डड्रिंक लेकर निकली, और कोल्डड्रिंक नीचे रख कर मेरे सीने से लगी और फिर अनुज के और फिर पापा की गॉड में प्यार से बैठ गयी.

पूर्वी- मां मेरे मामा.

पापा ने उन्हें भी गले से लगा लिए

बुआ- लो भैया इसे तो मिल गए इसके मां.

फूफाजी- अरे बचपन से hi इसे इसके मां मिल जाएं फिर और कुछ नहीं चाहिए.

पापा- हमारी प्यारी भांजी है इसके जितना शायद hi गॉड में कोई खेला हो हमारे.

पापा ने दीदी की पीठ सहलाते हुए बोलै,

बुआ- ये जमुना भैया की बिटिया है न, क्या नाम है बिटिया तुम्हारा?

किरण- बुआ किरण,

बड़ी बुआ- अरे बहुत सुन्दर हो बिटिया तुम तो, हमारी नज़र न लगे आजा बैठ हमारे पास,

बड़ी बुआ किरण को बड़े लाड से अपने पास बैठा लेती हैं.

बड़े फूफाजी- अरे जमुना के लड़का भी है न एक.

मौसा- हाँ जीजा सागर नाम है अभी चोदामपुर में hi है,

बड़े फूफाजी- ाचा बड़ा समय हो गया जमुना को देखे, शायद बच्चे छोटे थे तभी मिले थे.

माँ- जीजा आओगे तभी तो मिलोगे, तुम्हारा तो मन hi नहीं करता निकलने का.

माँ ने उनकी गॉड से पूर्वी दीदी के बेटे को लेते हुए कहा और उसे गॉड में लेकर खिलने लगी.

बुआ- लो भाई साहब अब दो जवाब.

बड़े फूफाजी- अरे बहु का बताएं काम धंधे निकलने hi नहीं देते.

चची- काम धंधे या जीजी, क्यों जीजी काहे नहीं छोड़ती जीजा को.

बड़ी बुआ- अरे हमने कौनसा इन्हे पकड़ रखा है, कहीं घूमें कहीं जाएँ, उल्टा इनकी वजह से हम और नहीं घूम पाते.

पापा- मतलब साड़ी जिम्मेदारी जीजा की है.

बड़े फूफाजी- अरे तो हम कहाँ तुम्हे रोकते हैं तुम तो जाओ खूब घूमो.

चची- अब तुम्हारे बिना जीजी कैसे घूमेगी जीजा उन्हें नींद hi नहीं आती होगी.

इस पर सब हंसने लगे.

बड़ी बुआ- नहीं ममता रानी सही कहें हमें बहुत अछि नींद आती है.

इस पर और तेज हंसी दौड़ती है.

फूफाजी- अरे ममता भाभी, राजन भैया को नहीं लाइ.

चची- इस बार भैया नहीं आये भाभी से hi काम चला लो नन्दोई जी,

फूफाजी- अरे भाभी तुमसे तो काम चलेगा नहीं दौड़ेगा.

चची- और का दो दो सलहज छोड़ कर तुम्हे साले की याद सत्ता रही है.

माँ- लगता है नन्दोई को साले hi भाते हैं.

इस बात पर सब हंस पड़े,

बड़ी बुआ- लो भाई इस बार दोनों सलहजें मिली हैं अब जीतना मुश्किल है देवर जीफुफज़ई- अरे सलहजों से कहीं जीता जाता है उनसे तो हरने में hi भलाई,

बड़े फूफाजी- अरे एक पुराणी कहावत है,

जब सताए लुगाई, बोललो उसका भाई,

जब सातवे लुगाई का भाई, तो बचाएगी सेल की lugai.Ye सुनकर तो और सब हंस पड़े,

चची- जीजा देखलो हम तुम्हे बचने आये हैं बताओ कसुन सताता है तुम्हे.

फूफाजी- अरे वो भी बताएँगे भाभी पहले कुछ नाश्ता वगेरा कर लो,

फिर सब कोल्डड्रिंक के साथ साथ गरम गरम समोसे का नाश्ता करते हैं.

पूर्वी- अरे सब लोग कपडे वगेरा बदल लो फिर खा पि कर गण बजाना करेंगे,

किरण- अरे वाह दीदी मजा आएगा,

बुआ- हाँ सब करना पर पहले खाना पीना बना लें,

पूर्वी- हाँ मम्मी तुम लोग बनाओ चल किरण हम लोग तैयारी करते हैं ढोलक वगेरा की.

किरण- चलो चलो,

बाकी लोग कपडे बदल कर थोड़ा आराम में लग गए तो वहीँ माँ बुआ और चची मिलकर खाना बनाने लगी, जल्दी hi खाना बनकर तैयार था और पहले सब मर्दों और बच्चों को खिलाया गया, फिर औरतों ने जब तक खाया तब तक पूर्वी दीदी के कहने अनुसार हमने आँगन में से खत वगेरा हटा कर चादर बिछा दी थी और पूर्वी दीदी और किरण तो ढोलक लेकर बैठ गए थे. दीदी ने सबको चिल्ला चिल्ला कर बैठा लिया, ढोलक बजने लगी और औरतें लोक गीत गाने लगी, पहला गीत ख़तम हुआ.

फूफाजी- अरे गाना तो सही है पर जब तक ठुमके न देखने को मिलें तो क्या फायदा.

चची- आओ तो फिर लगा दो जीजा तुम hi दो चार ठुमके.

फूफाजी- अरे हम भी लगाएंगे, पर भांजे का रोका होने जा रहा है मामी को पहले लगाने चाहिए,

चची- अरे मामी तो ख़ुशी से लगाएंगी और बोलो. तुम अपनी बात करो.

फूफाजी- अरे तुम्हारे सामने हमारी बात कहाँ हो सकती है भाभी.

मौसा- आज टक्कर के लोग मिले हैं,

बुआ- अरे हमारी ममता भाभी के टक्कर में कहाँ ये.

पूर्वी- चलो मामी शुरू हो जाओ,

किरण- हाँ बुआ.

ममता चची भी सबके कहने से कड़ी हुई और ढोलक पर थाप दोबारा पड़ी तो बड़ी बुआ ने गीत शुरू कर दिया बाकी औरतें भी उनके साथ गाने लगी. ममता चची भी धीरे धीरे गाने के बोल को पकड़ कर नाचने लगी,



उनकी गदराई कमर झूलती हुई कामुक लग रही थी, वैसे तो उनका पूरा बदन hi ऐसा था, फूफाजी बड़े फूफाजी और विनीत तो चची का नाच देख आहें भरने लगे, हम सब लोग भी ख़ुशी से ताली बजा रहे थे तो कभी सीटी मरते चची के लिए,

फूफाजी तो ख़ुशी से उठे और जेब से पैसे निकल कर चची के सर पर घुमाये और फिर किरण को दे दिए और बापिस बैठने चल दिए पर चची उन्हें कहाँ जाने देने वाली थी, उन्होंने फूफाजी को पकड़ लिए और उन्हें भी नाचने के लिए बोलने लगी,

फूफाजी बेचारे शर्मा रहे थे और बोल रहे थे की हमें कहाँ नाच आता है भाभी,

पर चची कहाँ मानने वाली थी तो हार कर फूफाजी को भी जैसे तैसे ठुमकने पड़ा, बाकी थोड़ी मदद उनकी चची ने करदी चिपक चिपक कर नाच कर,

खैर गाना ख़तम हुआ और हम सबने ताली और सीटियों से दोनों लोगो का उत्साह बढ़ाया. चची आकर बैठ गयी वही फूफाजी भी जल्दी से अपनी जगह बैठ गए,

पूर्वी- चलो ममता मामी का तो हो गया बड़ी मामी की बारी,

माँ- नहीं नहीं हमें रहने दो.

बड़ी बुआ- अरे ऐसे कैसे रहने दो भांजे की ख़ुशी में ठुमके तो लगाने पड़ेंगे.

फूफाजी- हमारी ख़ुशी के लिए hi लगादो भाभी..

बुआ- भाभी दिखाओ तो अपनी गदराई कमर के लटके झटके.

माँ- तुम लोग भी न,

माँ भी शरमतर हुए सबके कहने से कड़ी हुई, बुआ ने गण शुरू कर दिया और माँ भी उससे ले मिलकर अपनी कमर के ठुमके लगाने लगी,



माँ की कामुक बलखाती कमर देख कर भी लोगों का बुरा हाल हो रहा था, थोड़ी देर नाचने के बाद माँ ने भी चची की तरह hi किआ और माँ ने बड़ी बुआ और बड़े फूफाजी को पकड़ कर उठाने लगी, बड़ी बुआ और बड़े फूफाजी ने भी माँ की ज़िद्द के आगे हार मान ली, और वो लोग भी माँ के साथ जितना हो सकता था नाचने lage,bade फूफाजी को नाचते देख सब हंस रहे थे वो अपने हाथ उठाकर बड़े अजीब तरीके से नाच रहे थे और सबको उन्हें देख हंसी आ रही थी, बड़े फूफाजी तो बैठ गए पर माँ और बड़ी बुआ हाथों में हाथ डाले गण ख़तम होने तक नाचते रहे,

जब गण ख़तम हुआ तो माँ और बड़ी बुआ आकर बैठ गए..

बुआ- वाह भाभी और जीजी कमाल की जोड़ी लग रही थी तुम्हारी,

माँ- हमारी जोड़ी तो हो गयी अब तुम्हारी बारी है ननद रानी,

चची- और क्या जब तक माँ न नाचे तब तक कैसी ख़ुशी.

बुआ को भी सब लोगो ने बोल बोल कर खड़ा करवा hi दिया और माँ ने इस बार गाने की पहल की और सब उनके साथ गाने लगे बुआ भी अपना पल्लू नीचे साडी में घुसा कर अपने गदराये बदन को झूलते हुए अपनी कमर को घूमने लगी



मौसा तो बुआ को एक तक देखे जा रहे थे, और देखते क्यों नहीं बुआ का गदराया बदन hi ऐसा था साथ hi उनकी मोती छुछियां तो लग रहा था निकल कर बाहर hi आ जाएँगी... बुआ को यूँ नाचते देख तो मेरे लुंड में भी सिहरन होने लगी, और वैसे मेरे जैसा हाल सभी मर्दों का था, बुआ के तुमको पर हम लोग खूब सीटी मार रहे थे बुआ ने भी माँ और चची की तरह अकेले नहीं नाचा बल्कि मौसा को पकड़ कर खड़ा कर लिया, मौसा ने शुरुआत में थोड़ी हिचकिचाहट ज़रूर दिखाई पर फिर वो भी नाचने लगे, सबने ताली मार कर उनका जोश बढ़ाया. बुआ ने तो उनके हाथ पकड़ कर अपनी कमर पर लपेट दिए तो उनका जोश अपने आप बढ़ गया और वो बुआ से चिपक चिपक कर नाचने lage.Khair गण ख़तम हुआ तो दोनों लोग आकर बैठ गए मौसा के पाजामे में उभार साफ़ पता चल रहा था,

चची- ला ढोलक मुझे दे पूर्वी बिटिया, अब तू भी लटके झटके दिखा दे,

पूर्वी- उसमे क्या है अभी लो. मैं नहीं शर्माती बेकार में.

पूर्वी दीदी तुरंत कड़ी हुई और गण चची ने hi ढोलक बजटर हुए शुरू किया, गाने के बोल सुनकर दीदी ने अपने सर पर पल्लू दाल लिए और कमर मटकाने लगी.



दीदी का गोरा पेट और नाभि देख साथ hi ब्लाउज में भरी हुई चूचियां देखकर तो मेरा लुंड कड़क होने लगा और मैं ये सरे मर्दों के लिए कह सकता था की सबका हाल वो यही कर रही थी, थोड़ी देर नाचने के बाद hi दीदी ने पापा को पकड़ कर उठा लिया, पापा भी जानते थे मन करके कोई फायदा है नहीं तो वो भी अपनी भांजी का साथ देने लगे, दीदी भी खूब पापा के गले लग लग कर नाच रही थी..

दोनों के लिए भी खूब तालियां बजी और दोनों hi गण ख़तम होकर आ कर बैठ गए,

बड़ी बुआ- लो भाई इसने नाच गाने में भी अपने मां को नहीं छोड़ा.

पूर्वी- अरे मां को कैसे छोड़ दूँ ताई, इतने दिनों बाद मिले हैं.

बुआ- नहीं नहीं तू अपने मां को hi पकड़ के रख. अब किरण बिटिया तू hi बची है औरतों में,

किरण - अरे बुआ नहीं मैं वो.

पूर्वी- अरे वो क्या कर रही है चल नाच न,.

किरण- ठीक है पर एक मिनट मैं भी साड़ी पहन कर नाचूंगी. अभी आई.

ये कह कर किरण ने रस्सी पर पड़ा दुपट्टा उठाया और कमरे में चली गयी.

चची- देखो तो लड़की को बोल रही साड़ी पहन कर नाचूंगी और ले कर दुपट्टा गयी है

बुआ- अरे भाभी करने दो क्या पता कोई नया फैशन सीखा दे तुम्हे,

कुछ hi देर में किरण सबके सामने आई तो सब उसे देखने लगे वहीँ मर्दों की तो आँखें hi चौड़ी हो गयी,

किरण ने अपनी टीशर्ट उतार दी थी और दुपट्टे को hi नीचे पाजामे में घुसकर और ऊपर उसे पल्लू की तरह सीने पर दाल लिए था पतला सा दुपट्टा उसके गोर पेट सुन्दर नाभि और पीली ब्रा में छुपे मोठे मोठे चूचियों का अचे से दर्शन करवा रहा था, उसका ये रूप देख तो मर्दों के लुंड अकड़ना स्वाभाविक hi था, वो सामने आई और गण शुरू करने का इशारा दिया, पूर्वी दीदी ने गण शुरू किया और किरण हलके हलके गाने पर ठुमके लगते हुए शुरू हो गयी,



किरण का नाच भी कामुकता से लबालब भरा हुआ था जैसे वो अपनी छाती हिला रही थी देख कर hi मर्दों क्या औरतों के मुँह में भी पानी आ रहा था, पर बाकी की तरह उसने भी अकेले नहीं नाचा और विनीत को फिर साथ hi मुझे और अनुज को भी खड़ा कर दिया, हम तीनो के बीच वो अकेली लड़की नाचने लगी, ये देख पूर्वी दीदी भी उठ कर आ गयी और हमारे साथ नाचने लगीं, अब हम पाँचों बच्चे साथ में नाच रहे थे,

विनीत की नज़र तो किरण के बदन से नहीं हैट रही थी, और वो उससे चिपक चिपक कर नाच रहा था किरण भी उसका पूरा साथ दे रही थी और विनीत के गले में बाहें दाल कर नाच रही थी,

ये गाना ख़तम हुआ तो पूर्वी दीदी बोली- मज़ा आ रहा था यार,

में - विनीत एक काम कर,

विनीत ने किरण को छोड़ा और मेरे पास आया मैंने उसे अपना उपाय सुझाया तो उसे ठीक लगा और हम दोनों तुरंत उसके कमरे में गए और कुछ hi पलों में उसके कमरे में लगा हुआ स्पीकर ले आये और उसे टेबल पर रखा और फिर उसे फ़ोन से कनेक्ट कर दिया.

पूर्वी- अरे वाह अब फ़िल्मी गांव पर नाचेंगे.

किरण- अरे वाह मज़ा आएगा,

मैंने जल्दी hi एक भोजपुरी गण बजा दिया और हम सब बच्चे लोग नाचने लगे, बड़े सब तालियां बजा कर हमें ख़ुशी से देख रहे थे पर तभी पूर्वी दीदी ने गण गाने को रोका और बोली- अरे ये क्या हम लोग hi नाचेंगे क्या सब लोग नाचते हैं एक साथ, चलो चलो उठो सब लोग.

दीदी और किरण ने मिलकर सब मर्दों को खड़ा किआ तो विनीत ने माँ और चची को, वहीँ मैंने और अनुज ने बुआ और बड़ी बुआ को उठा लिए, गण फिर से चालू हुआ और सब लोग एक साथ नाचने लगे, सबके साथ नाचने से मज़ा आ रहा था, चची बड़े फूफाजी को हाथ पकड़ कर नचा रही थी तो दीदी मौसा के साथ ठुमके लगा रही थी, विनीत माँ के साथ नाच रहा था तो बड़ी बुआ पापा के साथ, किरण फूफाजी को नचा रही थी, मैं और अनुज बुआ के साथ नाच रहे थे, वैसे तो सब साथ में hi थे तो कभी कोई सामने आ जाता तो कभी कोई,

एक गण ख़तम हुआ तो दूसरा लग गया सब नाचते हुए गर्मी से पसीना पसीना हो रहे थे, पूर्वी दीदी ने जल्दी hi इसका समाधान ढूँढा और अपना पल्लू नीचे कर अपनी कमर में hi लपेट लिया अब ऐसा लग रहा था ऊपर से उन्होंने सिर्फ ब्लाउज पहना है , ये किरण में देखा तो उसने भी दुपट्टा हटा दिया और ब्रा और पाजामे में नाचने लगी तो उसकी मोती छुछियां उछालते देख सबके लुंड खड़े होने लगे, पूर्वी दीदी उसकी छाती से छाती मिलकर कामुक तरीके से नाचने लगी जिससे और सबको मस्त करने लगी

तभी बच्चे के रोने की आवाज़ पता लगी तो मैंने गाना रोक दिया, पूर्वी दीदी का लड़का उठ गया था शोर की वजह से,

माँ- अरे भाई बंद करो ये शोर बताओ लल्ला को उठा दिया,

बुआ ने उसे गॉड में ले लिया और चुप करवाने लगी,

सब लोग पसीने और गर्मी से हांफ रहे थे,

किरण- बड़ा मज़ा आया, है न दीदी.

किरण ने हांफते हुए कहा. उसकी साँसों के कारण उसकी चूचियां ब्रा में ऊपर नीचे हो रही थी,

बड़े फूफाजी- अरे भाई सांस फूल गयी हमारी तो गर्मी से,

बुआ - अरे पूर्वी बिटिया जा न सबके लिए नीम्बू पानी बना ले,

माँ- अरे बिटिया तू बैठ हम बना के लेते हैं.

माँ उठ कर रसोई में चली गयी,

बाकी सब बैठ कर बातें करने लगे, गर्मी से पसीना पसीना हो रखे थे मैंने भी अपनी टीशर्ट उतार दी और ऊपर से नंगा हो गया,

बुआ- अरे पूर्वी इसे दूध पिलदे थोड़ा देख चुप hi नहीं हो रहा,

पूर्वी- अरे मम्मी अभी तो पिलाया था थोड़ी देर पहले, अब नहीं पीला रही मैं, सारा पि लिए इसने,

बुआ- अरे देख ले लल्ला कैसी मम्मी हैं तेरी दूध भी नहीं पीला रही, हाँ,

बुआ लल्ला को खिलते हुए बोली और फिर उसे गॉड में रखे हुए अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगी पूरे हुक खुलते hi बुआ का ब्लाउज आगे से खुल गया और उनकी दोनों बड़ी बड़ी छुछियां ब्रा में लटक पड़ी, बुआ ने ब्रा के कप को नीचे किआ और अपनी एक छुच्छी को बहार निकलते हुए कहा,

बुआ- माँ नहीं पीला रही तो क्या हुआ ले तू नानी का पि...

और ये कह बुआ ने लल्ला के मुँह में अपना निप्पल घुसा दिया जिसे मुँह में लेकर लल्ला चूसने लगा और चुप हो गया, एक छुच्छी के बाद दूसरी छुच्छी तो अपने आप hi ब्रा से बहार निकल पड़ी और सबके सामने थी,

बुआ की बड़ी बड़ी चूचियों को देख वैसे तो सबका hi बुरा हाल था पर मौसा का कुछ ज़्यादा hi बुरा हाल था क्यूंकि वो पहली बार जो देख रहे थे,

किरण- बुआ तुम्हे अभी भी दूध आता है क्या?

बुआ- अरे नहीं बिटिया इसको दूध चूसने को दे दो उसी में चुप हो जाता है,

चची- मर्दों की आदत hi ये होती है बचपन से लेकर बुढ़ापे तक मुँह में दूध डालो और वो खुश,

इस पर सब हंसने लगे,

पूर्वी- ये बात तो सही कही मामी बच्चे हो या बूढ़े बस मोठे मोठे दूध दिख जाएं तो लार टपकने लगते हैं. क्यों मौसाजी?

दीदी ने मौसा को चिढ़ाते हुए कहा जो बुआ की चूचियों को देख कर लार टपका रहे थे, मौसा तो इतना खोये हुए थे की उन्होंने तो ठीक से सुना भी नहीं दीदी ने क्या बोलै.

बड़ी बुआ- अरे लगता है भैया को भी अपना बचपन याद आ गया,

इस पर मौसा शर्मा गए जब उन्हें एहसास हुआ सब उन्हें चिढ़ा रहे हैं.

चची- अरे शर्मा काहे रहे हो, बोलो अपनी बहन से तुम्हे भी पीला देगी.

बुआ- बिलकुल पीला दूंगी तुम्हारी तरह थोड़े hi भाभी की तुम्हारे होते हुए भी मर्द प्यासा रह जाये. आ जाओ भैया.

मौसा फिर भी हिचक से बैठे रहे,

पूर्वी- अरे जाओ न मौसा.

मौसा ने ये सुनकर एक बार सबकी और देखा और फिर बुआ की तरफ सरक गए और सीधा जाकर बुआ की एक छुच्छी को पकड़ कर मसलने लगे, बुआ के मुँह से भी हलकी सी आह्हः निकल गयी,

वैसे तो मौसा को पता था की यहाँ भी सब आपस में खुले हैं वो बस शुरुआत करने से थोड़ा कटरा रहे थे, जब शुरू हो गए तो उनकी भी शर्म खुलने लगी अगले hi पल उन्होंने अपने होंठों को बुआ के होंठों से मिला दिया और चूसने लगे, बुआ भी लल्ला को दूध पिलाते हुए मौसा का पूरा साथ दे रही थी. होंठों को चूसने के बाद मौसा ने झुककर बुआ की चुकी को मुँह में भर लिया, और चूसने लगे, बुआ भी सिसकने लगी, और एक हाथ से उनके सर को सहलाने लगी,

विनीत इतने में उठा और बोलै- अब गाना तो बजेगा नहीं तो ये हटा देता हूँ,

ये कह वो स्पीकर उठा कर चल दिया, पूर्वी दीदी भी उठी और उठ कर बुआ की गॉड से लल्ला को लिए- आजा लल्ला अब नाना को दुद्दू पीने दो आजाओ,

बच्चे को उठाकर वो चली और पापा से बोली - चलो मां तुम्हे भी नींद आ रही होगी.

पापा भी मुस्कुरा कर उनके पीछे पीछे चल दिए, बच्चे के हटते hi मौसा जी को और खुलने का मौका मिल गया और वो दूसरी चुकी को मसलने लगे,

अपनी पत्नी को गैर मर्द से चूचियां चुसवाते देख फूफाजी पाजामे के ऊपर से hi लुंड मसल रहे थे, जिस पर किरण का ध्यान गया तो वो उठ कर उनकी और चल दी,

इसी बीच मेरा फ़ोन बजा, मैंने देखा तो अंजलि का था, मैंने फ़ोन उठाया और छत पर जाकर बात करने लगा, उससे ऐसे hi थोड़ी देर बातें की फिर उसने कहा मैं सोने जा रही हूँ, तो उसे गुड नाईट बोलकर मैं नीचे आ गया, नीचे आकर आँगन में देखा तो आँगन खाली था, मैंने सोचा सब लोग अपने अपने अपने कमरे में चले गए लगता है, मैंने सोचा यार लुंड खड़ा है मैं भी कुछ जुगाड़ देखता हूँ ऐसे तो नींद आने से रही, मैं इसीलिए इधर उधर खोज में लग गया सबसे पहले बड़ी बुआ के कमरे में झाँका तो सामने का नज़ारा देख कर चेहरे पर मुस्कान आ गयी

सामने बिस्तर के किनारे पर ममता चची घोड़ी बन कर झुकी हुई थी चची की सारी पेटीकोट समेत उनकी कमर ओर इकठा थी उनके गोर गोल मटोल चूतड़ बाहर नंगे निकले हुए थे उनके पीछे बड़े फूफाजी बिस्तर के नीचे खड़े थे और बड़े फूफाजी का लुंड चची के डुबो चूतड़ों के बीच उनकी छूट में अंदर बहार हो रहा था,





बड़े फूफाजी चची की कमर को थामे दनादन धक्के लगा रहे थे.

बड़े फूफाजी- अरे अह्हह्ह्ह्ह ममताजहठ बहुउउउ ahhhhhhhhhhh क्याहहह गरमममन छूट पाई है तुने अह्ह्ह मज़ाआ आए रहा हैहहह..

चची- ओह्ह्ह्हह्ह जीजा तुम्हारे कड़क लुंडडडड का भी क्या कहना अह्ह्ह्हह्हह छोड़ो अपनी सलहज को अह्ह्ह्हह,

बड़े फूफाजी- ओह्ह्ह्हह्ह सलहज तुझपर तो कब्ज़े नज़र थिई मेरिइइइइइ.

इतने में पीछे से एक और आवाज़ आई तो मैंने उस और देखा,

बड़ी बुआ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi,m

मैंने उधर झांक कर देखा तो पाया की एक पीदे पर अनुज बैठा हुआ था और उसके ऊपर बड़ी बुआ बैठ कर उसके लुंड पर उछाल रही थी, अनुज भी बड़ी बुआ के बदन को मसलते हुए उनकी छूट में धक्के लगा रहा था,





अनुज- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह तुमहारी चुत भी टूवाह्ह्ह्ह हर बार ऑर्डर मस्त हो जाती है....

बड़ी बुआ- ओह्ह्ह्ह छोड़ता रह बेटाःह्ह्ह ये छूट गांड सब तेरे लुंडडडड के लिए hi फदकककक रही हैंन.

मैंने सोचा यहाँ चुदाई चलने दो और मैं धीरे से दरवाज़े के पीछे हो गया और वहां से चल दिया, मैंने फिर सोचा बुआ और फूफा के कमरे में जाता हूँ, उनके कमरे के बाहर तक आहें सुनाई दे रही थी तो मैंने फिर से धीरे से दरवाज़े को हल्का सा खोला और अंदर झाँक कर देखा, यहाँ भी बहुत मनोहर दृश्य चल रहा था, बिस्तर पर किरण पूरी नंगी होकर अपनी पीठ पर लेती हुई थी और फूफाजी उसकी टांगों के बीच बैठकर उसकी जवान रसीली गरम छूट में अपना लुंड अंदर बाहर करते हुए उसे छोड़ रहे थे





किरण की संतरे जैसी चूचियां हर झटके पर झूम रही थी जिन्हे देख कर फूफाजी को और मस्ती चढ़ रही थी,

फूफाजी- ओह्ह्ह्हह्ह बितीयआह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह कितनी सुन्दर है चूऊउआहह्हह्ह्ह्ह, मैं तो धन्या हो गया तेरी चुदैई करके,

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह फूफाजी अह्हह्ह्ह्ह बेटियां तो होतियई hi हैंण्ण्ण्न सेवाआआअह्ह्ह्ह के लिए अह्हह्ह्ह्ह,

फूफाजी किरण के मुँह से ये सुनकर उसके ऊपर झुक गए और उसके रसीले होंठों को चूसते हुए उसे छोड़ने लगे, उनके हाथ उसकी चूचियों को मसलने लगे,

मैंने यहाँ तक देखा तो मेरा लुंड और कड़क हो गया, मैंने सोचा फूफाजी और किरण पहली बार चुदाई कर रहे हैं करने देता हूँ, और मैं वहां से निकल लिया, मैंने सोचा विनीत को देखता हूँ क्या कर रहा है उसके कमरे में जा कर देखा तो वहां विनीत तो नहीं था बल्कि उसकी मम्मी यानि हमारी प्यारी बुआ थी वो भी मौसा के साथ, बुआ बिस्तर पर पीठ के बल लेती थी और मौसा उनके ऊपर चढ़ कर बुआ की दोनों चूचियों को मसल रहे थे मौसा के बदन पर सिर्फ बनियान थी नीचे से नंगे थे, बुआ भी आंखें बंद करके अपनी चूचियों के मर्दन का आनंद ले रही थी.





मैं जैसे hi अंदर आया तो दोनों की नज़र मुझ पर पड़ी दोनों ने hi बिना अपना काम रोके मेरी और देखा.

बुआ- का हुआ कर्मा बीटा क्या ढूंढ रहा है.

में- विनीत को ढूंढ रहा था बुआ,

बुआ- अरे आ जायेगा वो, आजा बुआ से प्यार नहीं करेगा.

मैं अंदर आता हूँ.

में- अरे आज तुम मौसा को प्यार दो, पहली बार मिल रहे हो दोनों लोग.

मौसा- अरे कोई बात नहीं बीटा, साथ में और मज़ा आता है, वैसे भी तेरी बुआ के लिए हम दोनों का प्यार ज़्यादा नहीं पड़ेगा, क्यों.

बुआ- बिलकुल सही भैया, जितना प्यार मिले उतना काम है.

में- मैं भी बुआ तुम्हे जितना प्यार करूँ उतना काम है,

ये कहकर मैं उनके होंठों को चूसने लगता हूँ बुआ भी मेरा साथ देने लगती हैं, थोड़ी देर होंठो को चूसने के बाद मैं अलग होता हूँ

में- मैं अपना चार्जर लेकर आता हूँ तब तक तुम लोग प्यार करो.

मौसा- ठीक है तब तक तेरी बुआ को अपना प्यार दिखता हूँ, वैसे भी मुझे इंतज़ार नहीं हो रहा तेरे पापा की बहन छोड़ने का.

ये सुनकर मैं और बुआ दोनों हंसने लगे,

मौसा ने तुरंत बुआ की सारी को ऊपर किआ और उनकी टांगो को मोड़ दिया और तुरंत hi अपना कड़क लुंड बुआ की छूट में पिरो diya,dono के मुँह से एक बार आह निकल गयी. मौसा बुआ की टांगो को पकड़ कर छोड़ने लगे.





मैं उन्हें उसी हालत में मज़े लेते छोड़ जल्दी से आँगन में रखे हुए अपने बैग से चार्जर निकल कर बापिस बुआ और मौसा वाले कमरे में आ गया और अपना फ़ोन चार्जिंग पर लगा दिया, और अपने कपडे उतर कर पूरा नंगा हो गया और बिस्तर पर चढ़ गया.

मेरा कड़क लुंड बुआ ने तुरंत अपना हाथ बढाकर पकड़ लिया,

बुआ- हाय अह्हह्ह्ह्ह इस लुंड के लिए तो मैं पागल हूँ,

में- तो बुआ इसे थोड़ा चूसकर दिखाओ न पागल पैन.

बुआ- आजा न मेरे ऊपर मुँह छोड़ अपनी रंडी बुआहहहहह काठ,

में- ये तो और बढ़िया है, पर मौसा रंडी बुआ को पूरा नंगा करो तो और मज़ा आएगा छोड़ने में,

मौसा- सही बोलै तूने,

ये कहकर मौसा ने उनकी छूट से लुंड निकाल लिए और वो बुआ की सारी और पेटीकोट वगेरा निकलने लगे तो मैंने बुआ का ब्लाउज और ब्रा उनके बदन से अलग कर दी अब बुआ हमारे सामने बिलकुल नंगी थी हमारी तरह hi.

मौसा ने दोबारा उनकी टांगो के बीच आकर अपना लुंड उनकी छूट में घुसा दिया, और मैं उनके सर के ऊपर आ गया और अपना लुंड बुआ के मुँह में घुसा दिया, बुआ भी उसे बड़े चाव से चूसने लगी,





मौसा बुआ को छोड़ते हुए उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को भी मसल रहे थे.

मौसा - अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह कर्माह टेरिइइइइइइइइ buaaaaahhhhhhhhhh टूओ कमाललळ की चीज़ है अह्ह्ह्हह्हह,

में- मैंने तो पहले hi बोला था मौसा एक बार बुआ को चख लोगे तो मज़े में झूमने लगोगे,

हम दोनों बुआ के बारे में बातें कर रहे थे पर बुआ बेचारी कुछ नहीं बोल सकती थी क्यूंकि उनके मुँह में मेरा लुंड जो जड़ तक समाया हुआ था,

मौसा- सहिई कहा तूने, अह्ह्ह्ह तभी भाई साहब भी नहीं रोक पाए खुद को अपनी बहन छोड़ने से,

में- और क्या हमारी चुदाई तो अभी से हुई है पापा और बुआ तो मेरे जनम से hi छोड़ रहे हैं एक दुसरे को,

मौसा- हैं शशि?

बुआ ने मुँह में लुंड लिए हुए hi सर हिलाकर इशारा किया,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह काश नेरी भी बहन होती,

बुआ ने ये सुनकर मेरा लुंड मुँह से निकल दिया और बोली- अरे मैं भी तो तुम्हारी बहन हूँ भैया, अपनी छूट दे दी तुम्हे और क्या देगी बहन.

ये सुन मौसा हंसने लगे और बुआ बे बापिस मेरा लुंड मुँह में भर लिए,

में- सब कुछ है हमारे पास मौसा कुछ कमी hi नहीं है,

मौसा- ये बात तो सही कही तूने बीटा, अपने ोास सब कुछ है कुछ ऐसा भी जिसके लिए लोग जीवन भर तरसते रहते हैं,

में- वही तो,

मौसा- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह सालियी क्याहहह चुत है तेरी बहनाहहह अह्ह्ह्ह लग रही है लुंड निचोड़ लेगी,

मौसा ने ये कहकर अपना लुंड निकल लिया

में- क्या हुआ मौसा रुक क्यों गए,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह एक तो शशि की छूट ऐसी मस्त है ऊपर से बहन बानी है नयी नयी, मैं तो झड़ने वाला था इसलिए खुद को रोका,

में- सही किया अभी तो रात भर बहन की चुदाई करनी है तुम्हे.

बुआ- चिंता मत करो भैया तुम्हारे लुंड को अचे से निचोड़कर hi मानेगी तुंहारी ये बहन.

बुआ ने मेरा लुंड निकल कर कहा.

बुआ- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अब तू hi घुसा दे अपना लोढ़ा बुआ की छूट में देख कैसे बिन लुंड के फड़क रही है.

में- बिलकुल बुआ आ जाओ और करो लोडे की सवारी,

ये कह मैं बिस्तर पर टांगें लटका कर बैठ गया और बुआ भी तुरंत मेरी और पीठ करके मेरा लुंड अपनी छूट में फंसकर बैठ गयी, मुझे जैसे hi बुआ की छूट में टोपा घुसने का एहसास हुआ मैंने दो करारे झटके लगा कर लुंड जड़ तक उनकी छूट में पेल दिया,





बुआ- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कैसा बेदर्दी लोढ़ा है तेरा, बुआहहहहह की छूट को दर्द देताआहहहह है.

में- ओह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh तुम्हारी छूट hi आईसीई है की रहा नहीं जाता,

मैं नीचे से धक्के लगा लगा कर बुआ को छोड़ने लगा, मौसा बगल में बैठ कर हमें देख कर खुद को शांत कर रहे थे पर ज़्यादा देर वो खुद को रोक नहीं पाए और खड़े होकर अपना लुंड बुआ के मुँह में घुसा दिया, बुआ के लिए एक से भले दो वाली बात थी वो मौसा के लुंड को चाव से कुल्फी की तरह चूसने लगी.

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह शशि मेरी बहना अह्ह्ह्हह चूस अपने भाई का लुंड ऐसे hi अह्हह्ह्ह्ह चूस अपने बहनचोद भाई के लोडे को.

मौसा बुआ को बहन मानकर छोड़ते हुए बहुत उत्तेजित हो रहे थे. शायद उनके मन में भी ये विचार या कल्पना थी की उनकी बहन होती जिसे वो छोड़ पाते, आज उनकी कल्पना पूरी होते देख वो अधिक उत्तेजित हो रहे थे,

बुआ भी उनके कहे अनुसार खूब मज़े से उनका लुंड चूस रही थी कभी लुंड को निकल कर मौसा की गोलियों को मुँह में भर कर चूसने लगती, मैं नीचे से लगातार उनकी छूट में धक्के लगाकर छोड़ रहा था, बुआ ने कुछ देर और मौसा के लुंड को चूसा और फिर मुँह से निकल कर बोली- अह्ह्ह्हह्हह मुझे अब दो लुंड से छोड़ना है एक साथ, भैया छोड़ोगे अपनी बहन को दोनों और से.

बुआ ने कामुकता से मौसा की आँखों में देखते हुए कहा तो मौसा भी उत्तेजित होकर कहने लगे- हाँ बहनाहहह ज़रूर तेरा कहना नहीं मानूंगा तो किसका मानूंगा,

बुआ मेरे लुंड से कड़ी हुई और फिर घूम कर मेरी और अपना चेहरा कर दोबारा मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर बैठ गयी, और फिर मौसा ने बिना कहे उनके पीछे जगह ली और झुक कर अपना मुँह बुआ के मोठे चूतड़ों के बीच घुसा दिया, और जीभ से बुआ के गांड के छेड़ को कुरेदने लगे, बुआ इस हमले से आहें भरने लगी मैं अपना चेहरा उठा कर बुआ की चूचियों को चूसने लगा,

कुछ देर गांड चाटने के बाद मौसा ने थूक से बुआ के गांड के छेड़ को अच्छे से चिकना कर दिया और फिर तुरंत जगह बनाई अपने लुंड को पकड़ कर बुआ की गांड के छेड़ पर टिकाया तो बुआ सिसकते हुए बोली- आह्ह्ह्हह्ह भैयाहः घुसादो अपना लोढ़ा मेरी गांड में,

बुआ का इतना कहना था की मौसा ने लुंड ने लुंड अंदर घुसा दिया, बुआ मौसा आउट मेरी तीनो की सिसकी निकल गयी, गांड में हमला होने पर उनकी छूट भी मेरे लुंड पर कास गयी और मेरा लुंड निचोड़ने लगी,

बुआ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह ये hi टूओ ही माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्ह अब छोड़ू दोनों मिलकर.

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह शशि ये गरमममन गांड बिना चोदे कोई रह भी नहीं सकता आह्ह्ह्ह

मैंने और मौसा ने बुआ की दोहरी चुदाई करनी शुरू कर दी





शुरुआत में हमने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किया और फिर कुछ देर में मैंने और मौसा ने ले पकड़ ली, वैसे भी हम दोनों साथ में इतनी चुदाई कर चुके थे की ाचा खासा अनुभव था दोहरी चुदाई करने का, ले पकड़ने के बाद तो हम दोनों के लुंड बुआ की छूट और गांड में ऐसे चलने लगे जैसे सिलाई मशीन की सुई चलती है,

बुआ की आहें और चीखें तेज हो गयी जो की बहार तक सुनी जा सकती थी,

मैं बुआ की छुछियां थामे नीचे से धक्के लगा रहा था वहीँ मौसा उनकी कमर थाम कर पीछे से,

काफी देर तक गति को बढ़ा और घटाकर हम दोनों बुआ को छोड़ते रहे बुआ दो बार झाड़ चुकी थी और अभी तीसरी बार भी उनका करीब लग रहा था पर इस बार मैं और मौसा भी अपने चरम के करीब थे और जल्दी hi हम तीनो लोग साथ में झड़ने लगे और मैंने और मौसा ने बुआ की छूट और गांड को अपने अपने रास से भर दिया,

झड़ने के बाद मौसा मैं और बुआ बिस्तर पर लेट कर हांफने लगे,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह शशि मज़ा आ गया पहली बार अपनी बहन छोड़कर.

बुआ- अरे भैया अभी तो रात बाकी है और भी मज़ा बाकी है,

(अस 3रद पर्सन)

इधर कर्मा विनीत को ढूंढते हुए कमरे में आया था और उसकी माँ को मौसा के साथ मिल कर छोड़ने लगा था पर असल में विनीत था कहाँ ये देखते हैं,

विनीत ने स्पीकर ले जा कर कमरे में रखा और फिर बापिस आँगन की और चलने को हुआ तो उसे रसोई से गुनगुनाने की आवाज़ आई थी, वो आवाज सुनते hi समझ गया की ये उसकी मामी यानि सभ्य की आवाज़ है,

वो रसोई की और बढ़ गया रसोई में घुसकर देखा तो सभ्य पानी घोल रही थी, विनीत ने ऊपर से नीचे तक पीछे से उसे निहारा, अपनी मामी का भरा बदन उसे हमेशा से पसंद था और जब उसे पता चला था की उसके मां का परिवार भी उसके परिवार की तरह घरेलु चुदाई के खेल में शामिल हो गया है तो सबसे ज़्यादा ख़ुशी उसे इसी बात की हुई थी की आज नहीं तो कल उसे अपनी प्यारी मामी के साथ भी समय बिताने का मौका मिलेगा.

विनीत ने आगे बढ़ कर सभ्य को पीछे से बाहों में भर लिया, सभ्य ने थोड़ा चौंक कर पीछे देखा और विनीत को पाकर मुस्कुराने लगी

सभ्य- अरे तूने तो मुझे डरा hi दिया विनीत.

विनीत- डराया नहीं तो, मैंने तो बस मामी को गले से लगाया,

विनीत अपने हाथों को सभ्य के पेट पर चलते हुए बोलै,

सभ्य- ाचा, बहुत प्यार आ रहा है मामी पर.

विनीत- मामी इतनी प्यारी हो तो प्यार तो आएगा hi,

सभ्य- ठीक है कर लेना प्यार पर अभी नीम्बू पानी तो बनाने दे,

विनीत- अरे छोडो मामी कोई नहीं पी रहा पानी सब अपने अपने काम में लग रहे हैं, पूर्वी दीदी तो मां से प्यार करने गयी हैं और मुझे नहीं लगता और लोग भी ज़्यादा देर रुकेंगे.

विनीत ने सभ्य के हाथ से घोल लेकर एक और रख दिया,

सभ्य- ाचा पूर्वी मां के पास गयी है इसीलिए तू मामी के पास आ गया.

विनीत- हाँ मैंने सोचा मैं अपनी प्यारी मामी का साथ देता हूँ.

विनीत सभ्य के गदराये पेट को सहलाते हुए बोलै. सभ्य का पल्लू भी उसके कंधे से नीचे सरक गया,

सभ्य- ाचा और कैसे देगा मामी का साथ,

इस पर विनीत मुस्कुराया और सभ्य की कमर को थाम कर उसे घूमते हुए रसोई की दीवार से लगा दिया,





विनीत- ऐसे दूंगा साथ और प्यार भी बहुत सारा करूँगा.

विनीत सभ्य की आँखों में देखते हुए बोलै.

सभ्य- ाचा अपनी मामी को प्यार करेगा तुझे शर्म नहीं आएगी.

विनीत- ऐसी मामी को प्यार नहीं किआ तो जीवन भर खुद को कोसूंगा.

सभ्य- अरे इतनी चाह है तुझे अपनी ममी को प्यार करने की,

विनीत- पूछो मत मामी कबसे तुम्हारे इस बदन के लिए तरस रहा हूँ मैं.

विनीत ने ये कह कर बिना इंतज़ार किये अपने होंठों को सभ्य के होंठों से मिला दिया, सभ्य भी अपने भांजे का तुरंत साथ देने lagi,dono मामी भांजे एक दुसरे को उत्तेजित होकर होंठों को चूसने लगे, सभ्य के हाथ विनीत के सीने और कन्धों पर घूम रहे थे तो विनीत के सभ्य की नंगी कमर पर.





विनीत अपनी मामी के रसीले कोमल होंठों का स्वाद पाकर रास अपने होंठों से पिए जा रहा था, वो अपनी मामी के बदन के लिए काफी तरसा था और आज जब ये मौका आया था तो वो इसका भरपूर आनंद लेना चाहता था,

होंठों को चूसने के बाद विनीत की जीभ जल्दी hi अपनी मामी के मुँह में प्रवेश कर गयी और सभ्य के मुँह के अंदर अठखेलियां करने लगी, सभ्य ने भी भांजे की जीभ का स्वागत अपना मुँह खोल कर किआ और उसकी जीभ को चूसने लगी, कुछ पल बाद सभ्य की जीभ विनीत के मुँह में थी और विनीत अपनी मामी की जीभ चूस रहा था, ये सब करते हुए दोनों के हाथ लगातार एक दुसरे के बदन पर चल रहे थे, कुछ देर तक एक दुसरे की जीभ और होंठों से खेलने के बाद दोनों हांफते हुए अलग हुए, विनीत की हालत तो ऐसी थी जैसे बच्चे को एक साथ सरे मनपसंद खिलोने मिल गए हो उसे समझ नहीं आता की किस्से पहले खेला जाये, अपनी साँसों को थामते हुए वो सभ्य की गर्दन को चूमते हुए नीचे बैठ गया और उसके सामने उसकी मामी का गदराया गोरा पैर गहरी नाभि आ गए जिसे देख वो खुद को रोक नहीं पाया और उसने अपने होंठों को सभ्य के पेट पर लगा दिया और चाटने लगा, साथ hi उसके हाथों ने ब्लाउज के ऊपर से hi सभ्य की मोती चूचियों को थाम लिए था, विनीत सभ्य के पेट को चूमने लगा,





सभ्य भी अपने भांजे के होंठों को अपने पेट पर महसूस कर आहें भर रही थी,

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह विनीईईइततततर अह्ह्ह्हह

सभ्य विनीत के सर पर हाथ फिरते हुए सिसक रही थी. विनीत पर तो जैसे सभ्य के पूरे बदन का स्वाद लेने का भूत सवार था वो सभ्य के पेट और कमर हर हिस्से को अपने होंठों और जीभ से चाट रहा था वो नहीं चाहता था की सभ्य के पेट और कमर का कोई भी हिस्सा रह जाये जिसपर उसके होंठो की छाप न पड़ी हो. पेट को चूमते हुए वो सभ्य की कमर को और फिर पीठ को चूमने लगा, ब्लाउज में सभ्य की पीठ को चूमते चाटते हुए उसने सभ्य के ब्लाउज की डोरी जो पीछे बब्धि थी वो खोल दी जिससे ब्लाउज ढीला हो गया, उसके बाद वो खड़ा हुआ और एक बार फिर से अपनी मामी को पीछे से बाहों में भर लिए, बाहों में भरने के बाद विनीत के हाथ सभ्य की मोती चूचियों पर आ गए. उसने ब्लाउज जो की ढीला हो चूका था उसे सभ्य की चूचियों से ऊपर उठाना शुरू कर दिया





विनीत का लुंड कड़क होकर पाजामे के अंदर से hi सभ्य के चूतड़ों पर दस्तक दे रहा था.

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई तुम्हारी चूचियों के लिए तो न जाने कितनी मुठ मारी है मैंने,

विनीत ने सामने आती सभ्य की मोती चूचियों को देखते हुए कहा,

सभ्य- अब तक जो मार ली सो मारली लल्लाहहहह अब मत मारियो, मामी की चूचियों से जितना प्यार करना हो कर ले.

विनीत- बिलकुल मामी अब तो मैं इन्हे छोडूंगा नहीं,.

सभ्य- याद है तुझे एक बार गाडी में भी चोदामपुर से यहाँ आते हुए मैं और तू बहक गए थे,

विनीत- अरे मामी उस बात को मैं कैसे भूल सकता हूँ, पहली बार मैंने तुम्हारी चूचियों को छुआ था.

सभ्य- हाँ वो भी सबके होते हुए,

विनीत- पर अफ़सोस था की सिर्फ छुआ hi था वो भी ब्लाउज के ऊपर से hi,

सभ्य- तो आज सारा अफ़सोस साड़ी इच्छाएं पूरी करले.

विनीत- हाँ मामी इसीलिए सबसे पहले तुम्हारा ब्लाउज बीच में से हतौं,

ये कह विनीत ने कुछ hi पलों में सभ्य का ब्लाउज उतार दिया और सभ्य ऊपर से सिर्फ ब्रा में उसके सामने थी, विनीत ने फिर से अपने हाथों को उसके बदन पर चलना शुरू किआ, सभ्य की कमर और कामुक पेट को सहलाते हुए उसके हाथ सभ्य की चूचियों पर पहुँच गए और वो ब्रा के ऊपर से hi उन्हें मसलने लगा





सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi, निचोड़ अपनी मामी की चूचियों को,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई तुम्हारी छुछियां का अहसास hi ऐसा है की हाथ में आके मस्ती छ रही है,

सभ्य- तेरे हाथों से भी मेरा बदन गरम होता जा रहा ही लल्लाहहहह, अह्हह्ह्ह्ह.

विनीत- सच कहूं मामी आज तक तुम्हारे जैसा मस्त बदन मैंने किसी का नहीं देखा,

सभ्य- अरे लल्लाहहहह मेरे बदन में क्या है अब तेरी बीवी आने वाली है, तेरी बहन है किरण हैं इनके बदन बाई मस्त तो,

विनीत- नहीं मामी तुम नहीं समझोगी तुम्हारे जैसे गदराये बदन की बराबरी कोई लड़की नहीं कर सकती, पर एक मिनट,

सभ्य- क्या हुआ.

विनीत- मैंने कहा मैंने आज तक तुंहरे जैसा बदन नहीं देखा पर अभी मैंने पूरा बदन देखा hi कहाँ है, अब देखूंगा

ये कहकर विनीत ने सभ्य की सारी को खोलना शुरू कर दिया और साड़ी के उतारते hi पेटीकोट भी खोल कर पैरों के नीचे सरका दिया





सभ्य ने भी विनीत का पूरा साथ दिया अपने कपडे उतरने में अब सभ्य विनीत के सामने सिर्फ ब्रा और पंतय में थी, पेटीकोट को पैरों से निकल कर विनीत ने अपनी टीशर्ट और पजामा भी उतार फेंका और फिर सभ्य के सामने फिर से बैठ गया और सभ्य के पेट चाटने लगा तो कभी उसकी चूचियां ब्रा के ऊपर से hi मसलने लगता





सभ्य विनीत की हरकतों से पहले hi बहुत गरम हो चुकी थी और अभी हो रही थी,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई मेरा वश चले तो हमेशा मैं तुम्हे ऐसे hi रखूं,

सभ्य- ाचा तू चाहता है तेरी मामी को सब कच्ची बनियान में देखें,

विनीत- तभी तो मज़ा है दुसरे देख कर चलें और मैं तुंहरे इस मस्त बदन को भोगूं,

सभ्य- लोगो को जलने के लिए तू अपनी मामी को सबके सामने नंगा करेगा,

विनीत- क्या हर्ज़ है, मेरी मामी का बदन hi ऐसा है तो दिखा दिखा कर लोगो को तड़पने में मज़ा आएगा.

विनीत ये कहते हुए खड़ा हो जाता है और सभ्य की चूचियों को मसलने लगता है,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह जब लोग तेरी मामी को नंगा देख कर अपने अपने लुंड मसालेंगे तो,

सभ्य हाथ नीचे लेजाकर कच्चे के ऊपर से hi विनीत का लुंड मसलने लगी..

जिससे विनीत भी सिहरने लगा

विनीत- तो मैं उन्हें और तड़पाऊंगा और उनके सामने तुम्हारे मदमस्त बदन को मसल मसल कर भोगूँगा.

विनीत ने सभ्य की एक मोठे केले के तने जैसी जांघ को अपनी जांघ पर चढ़ा लिया और फिर उसकी चुकी को मसलते हुए बोलै..





सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह कैसे भोगेगा अपनी मामी के बदन को,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई पहले तो मैं तुम्हारी इन मोती चूचियों को सबके सामने नंगा करूँगा,

ये कहते हुए विनीत ने सभ्य की ब्रा को खोल दिया और फिर अगले hi पल उसे सभ्य के बदन से अलग कर दिया, ब्रा के हटते hi सभ्य की गोरी मोती छुछियां उसके सामने आ गयी जिन्हे देख कर उसके मुँह में पानी आने लगा उससे रुका नहीं गया और उसने तुरंत एक छुच्छी को मुँह में भर लिए और दूसरी को मसलने लगा,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह विनीईईइतततत अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi कहा जा अपनी मामी की चूचियों को,

विनीत तो पागलों की तरह अपनी मामी की चूचियों पर टूट पड़ा था और कभी निप्पल को चूसता तो कभी जीभ से चाटता तो कभी जितनी हो सके उतनी अपने मुँह में भरने की कोशिश करता, कभी जोश में आकर काट भी लेता, सभ्य उसकी हरकतों पर आहें भर रही थी,

काफी देर तक विनीत सभ्य की चूचियों को बदल बदल कर चूसता चाटता रहा और जब वो संतुष्ट हो गया तो उसने जाकर चूचियों को छोड़ा और नीचे सरकते हुए उसके पेट और जांघों को चूमने लगा, विनीत के हटते hi सभ्य ने अपनी चूचियों को पकड़ लिया जिनका विनीत ने मसल मसल कर बुरा हाल कर दिया था और दर्द कर रही थी, सभ्य उन्हें धीरे धीरे सहलाते हुए आराम देने की कोशिश करने लगी.





वहीँ विनीत अपने अगले कदम के लिए तैयार था, और उसने बैठे हुए hi अपनी उंगलियों को सभ्य की कच्ची में फंसाया और धीरे धीरे नीचे खींचने लगा, उसके सामने उसकी मामी की सुन्दर छूट धीरे धीरे आने लगी, जल्दी hi सभ्य की कच्ची उसकी जाँघों में थी और विनीत आँखें फाड़े उसकी छूट देख रहा था,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई कितनी रसीली छूट है तुम्हारी इसे तो देख कर hi मुँह में पानी आ रहा है,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह तो चखले ना बेटाःह्ह्ह सारा रास पीजा अपनी मामी की छूट का,

सभ्य का इतना कहना था की विनीत ने अपना मुँह उसकी छूट पर लगा दिया और जीभ घुमा घुमा के चाटने लगा, सभ्य भी उसकी जीभ के वार से कांपते हुए सिसकने लगी,

विनीत का लुंड उसके कच्चे में ठुमक रहा था हर पल विनीत के लिए सहना मुश्किल होता जा रहा था, पर उसका सभ्य की छूट से मुँह हटाने का भी मन नहीं कर रहा था, वो लगातार अपनी मामी की गरम छूट में जीभ घुसा घुसा कर चाट रहा था, उसकी आक्रामक छूट चटाई के आगे सभ्य की छूट ने हार मानते हुए पानी छोड़ दिया जिसे उसने बड़े चाव से जातक लिया,


झड़ने के बाद सभ्य दीवार के सहारे खुद को रोके हुए हांफ रही थी, मामी का छूट रास पीने के बाद विनीत खड़ा हुआ और अपने छूट रास से साणे होंठों को सभ्य के होंठों पर लगा दिया और सभ्य को भी उसकी छूट के रास का साद दिया, कुछ पल होंठों को चूसने के बाद विनीत ने सभ्य के होंठों को छोड़ा,

विनीत- चलो मामी आएगी का प्रोग्राम कमरे में करते हैं.

सभ्य- हाँ चल मैं भी सोच रही थी तू अपनी मामी आज रसोई में hi छोड़ देगा.

दोनों साथ में जल्दी hi जहाँ सभ्य और नीलेश रुके थे उस कमरे में आ गए और कमरे में आते hi विनीत ने सभ्य को बिस्तर पर पीठ पर लिटा दिया, और खुद अपना कच्चा उतार कर अपने कड़क लुंड को हाथ में लेकर बिस्तर पर चढ़ गया, सभ्य कभी उसकी आँखों में तो कभी उसके कड़क लुंड को देखती, विनीत ने सभ्य की जांघों को फैलाया और खुद उनके बीच जगह ली,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई देखो कैसे तुम्हारी छूट के लिए मेरा लुंड कैसा अकड़ गया है,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह तो मिलादे इसे अब अपनी मामी की छूट से लल्ला,

विनीत ने लुंड को सभ्य की छूट पर रखा तो दोनों hi सिसक पड़े, सभ्य की गरम छूट का एहसास पाकर तो विनीत का लुंड झटके मारने लगा. विनीत ने और देर नहीं की और अपने लुंड के टोपे को सभ्य की छूट में फंसा दिया, जिसके साथ hi दोनों के मुँह से एक आह निकल गयी,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह क्याआअह मस्त्त्त एहसास है,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह लल्लाहहहह अब रुक मत और छोड़ अपनी मामी को,

सभ्य ने अपनी जांघें ऊपर चढ़ाते हुए कहा जिससे विनीत के सामने उसकी छूट और खुल गयी

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई,

विनीत ने धक्का देकर लुंड अंदर घुसा दिया और फिर बिना रुके अपनी कमर चलने लगा, सभ्य भी अपनी जाँघों को थामे आँखें बंद कर के आहें भरते हुए अपने भांजे से छोड़ने लगी,





विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई तुम्हारी छूट जैसी सोचा था उससे भी मस्त है,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह लल्लाहहहह तेराअहहह लुंडडडड भी बहुत मज़ा दे रहा है,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह अब हुआअह्ह्ह्ह बराबर मैंन कर्माह के, उसने बहुतत्त बार मेरिइइइइइ मा छोड्दिई अब मैं उसकीय मा छोड़ रहा हूँ,

कहते हुए विनीत हंसने लगा,

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह तू हो या कर्माह दोनों hi मादरचोद हो,

विनीत- तुम और मम्मी भी तो चुड़क्कड़ बेटा छोड़ मायें हो मामी.

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन ईई तो सच हैईईई, अब छोड़ अपनीईईई चुड़क्कड़ मामी कुआहहहहह,

विनीत- हॉँण्णन माम्म्मीईई अह्ह्ह्हह, मामी कर्मा ने बताया है तुमममम लुंडडडड की सवारी मस्त करतीय हो, मेरे लुंड की भी करूओ न,

विनीत ने लुंड निकाल कर सभ्य के बगल में लेट कर कहा,

सभ्य- तुम दोनों आपस में ऐसी hi बातें करते हो, किसकी माँ कैसे ाचा चुदवाती है,

सभ्य ने उठकर विनीत के लुंड के ऊपर बैठते हुए कहा,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई हम दोनों की माँ hi ऐसी हैं की और कोई बात करने का मन hi नहीं करता,

सभ्य- अब तो तूने भी उसकी माँ को छोड़ लिए है अब तो बातें और बढ़ जाएँगी..

सभ्य ने विनीत के लुंड को अपनी छूट में लगाकर उसपर बैठते हुए कहा,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह अब्ब्ब्ब बातें नहीं चुदाई बढ़ेगी मामी,

सह्य ने भी अपने चूतड़ों को उसके लुंड पर उछालना शुरू कर दिया, विनीत को इस आसान में बड़ा मज़ा आ रहा था शभ्य अपनी कमर उसके लुंड पर ऐसे घुमा रही थी की उसकी आहें निकल रही थी, उसकी छूट विनीत के लुंड को ऐसे निचोड़ रही थी जिसका अनुभव पाकर विनीत मज़े से झूम रहा था, विनीत के आगे उसकी मामी की मोती छुछियां लटक रही थी जिनपर अभी भी उसके दांतों के निशान नज़र आ रहे थे विनीत ने उन्हें आराम देने के लिए चाटना शुरू कर दिया, शभ्य का मज़ा और उत्तेजना और बढ़ गयी, नीचे सभ्य जी की छूट उसके लुंड पर जादू कर रही थी, विनीत की उत्तेजना को हर पल बढ़ा रही थी, विनीत को अपना रास अपने लुंड की और बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था वो खुद को रोकना छह रहा था पर रोक नहीं पा रहा था, बल्कि उसका उल्टा हो रहा था उसकी कमर नीचे से और तेज़ धक्के लगा रही थी, अंत में उसने खुद को रोकना छोड़ दिया और फिर अपने हाथों से सभ्य के चूतड़ों को थामा और फिर नीचे से दनादन धक्के लगाने लगा.





और कुछ hi धक्कों के बाद उसनर अपना रास सभ्य की छूट में भर दिया,

हर धार के साथ विनीत ऐसे गुर्रा रहा था मानो उसकी जान निकल रही हो, झड़ने के बाद विनीत शांत हो गया और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए गया,

उसने हांफते हुए कहा.

सभ्य- मुझे भी लल्लाहहहह बड़ा मज़ा आ रहा है,

सभ्य ने उसके लुंड से उठाते हुए कहा और उठ कर बगल में बैठ कर उसका लुंड देखने लगी जो की अभी भी सख्त hi था और दोनों के रास से सना हुआ था, सभ्य ने झुककर उसे अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी, और अपने और विनीत के रास का स्वाद लेने लगी,

विनीत की तो आह्हः सभ्य के मुँह में लुंड के जाते hi निकल गयी थी, वो सभ्य के चूतड़ों को सहलाते हुए अपना लुंड सहलाने लगा, सभ्य ने कुछ देर लुंड और चूसा फिर मुँह से निकल कर विनीत की और देखा और बोली- तैयार है,

विनीत ने मुस्कुरा कर सर हिला दिया तो सभ्य फिर से उसके ऊपर आई पर इस बार उसके चेहरे की और पीठ करके और फिर से विनीत का लुंड अपनी छूट में फंसा दिया, और पीछे होकर अपने हाथ विनीत की छाती के दोनों और रख दिए, विनीत समझ गया की उसे क्या करना है, और उसने सभ्य की कमर को थामा और नीचे से धक्के लगाना शुरू कर दिया,





सभ्य की आहें फिर से कमरे में गूंजने लगी.

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह छोड़ड़ड़ड़ ऐसी हीई बहुत्त दिन सीई पीछे था मेरिइइइ छूट की अब दिखा कितना दम हैईईई तेरे लोडे में मदारचोड़ अह्ह्ह्हह छोड़ड़ड़ड़ड़ साले,

अपनी सुशिल संस्कारी मामी के मुँह से पहली बार गाली सुनकर विनीत को हैरानी भी हुई पर साथ hi उत्तेजित भी हुआ, उसकी उत्तेजना उसके झटकों पर भी दिखी जो की और तगड़े हो गए,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह साली दम अह्हह्ह्ह्ह दिखायताःह हूँ अभीयी मामी, अह्ह्ह्ह टेरिइइइइइइइइ छूट को आजजज छोड़ छोड़ कर रुला दूंगा,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह फिरररर दिखा नाहहहह और छोड़ बहा दे मेरी छूट का रास मैं भी तो देखूं तेरी रैंड माँ के दूध में कितना दम हैईईई,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह सआईईईई अभियई दिखाता हूँ मेरिइइइ रैंड माँ के दूध की ताकत.

ये कहकर विनीत बिना लुंड निकाले hi सभ्य को अपने साथ लेकर पलट देता है, और उसे घोड़ी बना लेता है खुद पीछे होकर उसकी कमर थाम लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगता है,





हर धक्के पर सभ्य के मुँह से सिसकी निकल रही थी, विनीत भी हर धक्के पर गुर्रा रहा था,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई रनडीईई सआईईईई ली रनडीईई अपनी भांजे काहहह लुंडडडड अपनी छूट में, अह्हह्ह्ह्ह दिखा दीव आज कितनी बड़ी रांड है तू,

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह रांड हूँ तभीई तो तुझसे छुड़वा रही हूँ मादरचोद अह्ह्ह्ह,

विनीत- ये सुन और कास कास के अपनी मामी की छूट में लगाने लगता है जिससे सभ्य जल्दी hi झड़ने लगती है, सभ्य को झड़ते पाकर विनीत को भी अपना लुंड फूलता हुआ महसूस होता है,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह माम्म्मीईई मेरा भी होने वाला है,

ये सुन सभ्य तुरंत उसके सामने से हैट जाती है और घूम कर उसका लुंड मुँह में भर लेती है, और तेजज से मुँह आगे पीछे कर चूसने लगती है साथ hi विनीत को गोलियों को सहलाने लगती है, जल्दी hi विनीत का लुंड सभ्य के मुँह में फूलने लगता है और विनीत के लुंड से धार निकलकर सभ्य के मुँह में भरने लगती है जिसे सभ्य गटकने लगती है, और तब तक गटकती रहती है जब तक रास की एक एक बूँद निचोड़ नहीं लेती. विनीत झड़ने के बाद एक और थक कर गिर जाता है सभ्य भी उसके बगल में लेट जाती है तो विनीत उसे अपने पास खींचता है और अपने होंठों को उसके होंठो से मिला देता है, दोनों एक धीमा चुम्बन करते हैं,

विनीत- अहह मामी सच में बहुत मज़ा आया तुम जितना सोचा था उससे भी कहीं ज़्यादा कामुक हो,

सभ्य- और तू भी मस्त चुदाई करता है जैसा मैंने सोचा था,

विनीत- ये तो बस मम्मी और तै की ट्रेनिंग है.

इस पर दोनों हंसने लगते हैं,

सभ्य- फिर अभी क्या करना है सोना है?

विनीत- तुम बताओ, मुझे तो नींद नहीं आ रही,

सभ्य- मुझे भी नहीं आ रही, चल दूसरो के कमरे में देखें कौन क्या कर रहा है,

विनीत- हाँ चलो,

दोनों उठाते हैं और नंगे hi कमरे से बाहर निकल जाते हैं,


जारी रहेगी.
 
विनीत- अहह मामी सच में बहुत मज़ा आया तुम जितना सोचा था उससे भी कहीं ज़्यादा कामुक हो,

सभ्य- और तू भी मस्त चुदाई करता है जैसा मैंने सोचा था,

विनीत- ये तो बस मम्मी और तै की ट्रेनिंग है.

इस पर दोनों हंसने लगते हैं,

सभ्य- फिर अभी क्या करना है सोना है?

विनीत- तुम बताओ, मुझे तो नींद नहीं आ रही,

सभ्य- मुझे भी नहीं आ रही, चल दूसरो के कमरे में देखें कौन क्या कर रहा है,

विनीत- हाँ चलो,

दोनों उठाते हैं और नंगे hi कमरे से बाहर निकल जाते हैं,


अपडेट 235
कुछ देर पहले

पूर्वी अपने प्यारे मां को कमरे में लाइ और उन्हें बिठा कर पहले बच्चे को सुलाया करीब 15-20 मिनट्स लगे उसे सुलाने में, इसी बीच कर्मा भी उनके कमरे में झाँक गया था, खैर बच्चे को पलने में सुला कर पूर्वी अपने मां के पास बिस्तर पर आकर बैठ जाती है,

पूर्वी- लो अब बच्चे को तो दूध पीला दिया, तुम क्या पियोगे मां?

पूर्वी मुस्कुराते हुए कहती है,

नीलेश उसकी बात का जवाब नहीं देते बल्कि उसकी और देखते रहते हैं.

पूर्वी- ऐसे क्या देख रहे हो मां टुकुर टुकुर?

नीलेश- यही देख रहा हूँ तू कितनी सुन्दर है, अभी कल की बात लगती है जब दूध पीती बच्ची थी तू.

पूर्वी- और अब मैं खुद दूध पिलाती हूँ, हेहही.

पूर्वी ने अपने पल्लू को नीचे गिरते हुए कहा जिससे नीलेश के सामने पूर्वी का गदराया चिकना गोरा पेट आ गया,

नीलेश भी खुद को रोक नहीं पाए और अपने हाथ को पूर्वी के नंगे पेट पर रख उसे मसलते हुए बोले- वही तो बिटिया, अब तेरा बदन इतना भर गया और कामुक हो गया है.





अपने मां का हाथ अपने पेट पर महसूस कर पूर्वी का बदन सिहरने लगा,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह माअम्माह्ह्हह्ह

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तेरा बदन तो बिलकुल माखन जैसा है,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह माअम्माह्ह्हह्ह तुम्हे तो मक्खन हमेशा से hi पसंद है...

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह पसंद है और हमेशा रहेगा, आह्हः आज तेरे इस बदन का स्वाद अचे से लूंगा,

नीलेश ने उठ ते हुए पूर्वी के पेट को अचे से मसलते हुए कहा, साथ hi अपने होंठों को उसके होंठों से मिला दिया और दोनों hi एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे. होंठों को चूसते हुए नीलेश ने पूर्वी को बिस्तर पर पीछे की और झुका दिया और उसके ऊपर झुककर उसके होंठों को और फिर जीभ को चूसने लगे. कुछ देर बाद जब दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों hi हांफ रहे थे, नीलेश ने होंठों को छोड़ा और नीचे आते हुए अपने होंठों को पूर्वी के चिकने पेट पर टिका दिया, और उसे चूमने चाटने लगे,





पूर्वी सिसकियाँ भरते हुए अपने मां की हरकतों और पेट पर चलते हुए होंठों और जीभ का आनंद लेने लगी.

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह माअम्माह्ह्हह्ह हाँ खा जाओ अपनी भाँजिई के बदन को अह्ह्ह,

नीलेश ने भी कुछ ऐसा hi सोच रखा था और पूर्वी जैसे बदन की औरत सामने हो तो कोई और सोच भी क्या सकता है, नीलेश पागलों की तरह उसके गोर चिकने पेट को हर जगह चूमने चाटने लगे, कुछ hi पलों बाद अपनी जीभ नाभि में घुसा कर चूसने लगे,

पूर्वी बेतहाशा सिसक रही थी, पूर्वी के लिए भी ये उत्तेजित करने वाला पल था क्यूंकि अब तक वो लगभग अपने सभी करीबियों के साथ चुदाई का ये खेल खेल चुकी थी, बस सिर्फ मां बचे थे जिनके साथ बचपन से वो काफी करीब रही है, आज मां से भी मिलान होने का सोच उसकी उत्तेजना चरम पर थी,

पेट को चूमने के बाद नीलेश ने पूर्वी को बिस्तर पर hi उठाया और उसके पीछे की और आकर उसकी गर्दन को चूमते हुए अपने कड़क लुंड का एहसास पाजामे के ऊपर से hi पूर्वी की गांड पर घिसने लगे. पूर्वी भी अपने मां के सख्त लुंड को महसूस कर मचलने लगी,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह माअम्माह्ह्हह्ह तुम्हारा हथियार तो कुछ ज़्यादा अहह hi कड़क हो रहा है,

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तेरा बदन देख कर तो मुर्दे का भी हथियार उठ जाये मेरा लुंड क्या है.

नीलेश ने एक बार फिर से पूर्वी के मखमली पेट को मसलते हुए कहा...





पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मामाहहह ऐसे hi खेलो अपनी भांजी के बदन से अह्हह्ह्ह्ह मसल्ल डालो न.

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह बिना मसाले अब तेरे मामा को चैन भी नही ायेगाहहह,

पूर्वी- आने भी मत देना मामाहहह जब तक अपनी लाड़ली भांजी के बदन का अंग अंग न मसल दो.

नीलेश ने जोश में आते हुए फिर से पीछे से पूर्वी को बाहों में भर लिए और पीछे से उससे चिपक गए. पूर्वी भी अपने मां की बाहों में मचलने लगी, नीलेश के हाथ जल्दी hi पूर्वी के पेट से ऊपर सरकते हुए उसकी चूचियों तक आ गए और वो ब्लाउज के ऊपर से hi पूर्वी की मोती मोती छुछियां दबाने लगे,





साथ hi उसकी गर्दन को चूमते हुए उसकी उत्तेजना और बढ़ा रहे थे,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह माअम्माह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसी हीईई.

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह क्या चूचियां हैं टेरिइइइइइइइइ अह्ह्ह्हह्हह इतनीई बड़ी बड़ी पर कितनी नरम है अह्हह्ह्ह्ह मन करता है इनका सारा दूध पि जाऊं.

पूर्वी- तो पि जाओ नाहहहह मामाहहह सब तुंहरे लिए है,

नीलेश तो चूचियों को महसूस कर खुद को रोज नहीं पाए और ब्लाउज के ऊपर से hi पूर्वी की चूचियों को चूमने लगे,





पूर्वी को अपने मां का उतावला पैन ाचा लगा और वो भी अपनी छाती उठाकर अपनी चूचियों को अपने मां के मुँह पर रगड़ने लगी,

नीलेश के लिए अब और सहना मुश्किल होता जा रहा था, इसलिए नितेश बिस्तर से नीचे आये और अपनी शर्ट उतार फेंकी इसके बाद पूर्वी के पल्लू को पकड़ कर खींचने लगे तो पूर्वी ने भी नीचे उतर कर अपनी सारी उतरने में मदद की, साड़ी के तुरंत बाद hi नीलेश ने पेटीकोट के नाड़े को पकड़ कर खींच दिया और फिर पेटीकोट को भी नीचे बैठकर उसके पैरो से निकल दिया

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह क्या केले के तने सी जांघें हैं तेरी बिटिया, और ये कच्ची भी तेरी छूट ने आगे से गीली कर दी है,

नीलेश अपना हाथ पूर्वी की जाँघों और उसकी कच्ची के ऊपर चलते हुए बोले.





नीलेश का हाथ अपनी छूट पर छूटे hi पूर्वी का बदन मचलने लगा, नीलेश तो वहीँ बैठे बैठे पागलों की तरह कभी उसकी छूट को कच्ची के ऊपर से सूंघते तो कभी उसके पेट और जाँघों को चूमते.

पूर्वी के बदन को चूमते हुए hi नीलेश बापिस ऊपर आये और पूर्वी के होंठों को चूमते हुए उसके ब्लाउज खोलने लगे, जल्दी hi ब्लाउज भी पूर्वी के बदन से अलग हो चूका था और पूर्वी उसके मां के सामने सिर्फ ब्रा पंतय में थी, अपनी भांजी के मादक गदराये बदन को देख नीलेश ने फिर से उसे अपनी बाहों में भर लिया और अपना हाथ ब्रा के अंदर दाल कर पूर्वी की चूचियों को मसलने लगे





पूर्वी तो मस्त होने लगी, और आहें भरने लगी, साथ hi उसने हाथ पीछे लेजाकर पाजामे के ऊपर से hi नीलेश के लुंड को सहलाना शुरू कर दिया, नीलेश ने भी ब्रा के अंदर से हाथ निकला और पीछे से ब्रा के हुक खोल दिए और फिर उसे पूर्वी के बदन से अलग कर दिया, पूर्वी की नंगी चूचियों को देखते hi नीलेश उन पर टूट पड़े और पागलों की तरह चूसने लगे,

एक को मसलते तो दुसरे को चूसते, वहीँ पूर्वी का हाथ अब भी अपने मां के लुंड पर था, चूचियों को अचे से चूसने के बाद नीलेश ने पूर्वी की कच्ची भी उतार फेंकी और खुद भी पूरे नंगे हो कर अपना मुँह पूर्वी की छूट में घुसा दिया, और पागलों की तरह उसकी छूट चाटने लगे,

पूर्वी ने भी अपने मां का सर अपनी छूट में घुसा दिया और उनकी जीभ का आनंद अपनी छूट में लेने लगी, नीलेश की जीभ ने जल्दी hi अपना कमाल दिखाया और पूर्वी की छूट की प्यास को और भड़का दिया और इस कदर बेकाबू कर दिया की पूर्वी उठी और नीलेश को धक्का देकर बिस्तर पर लिटा कर खुद उनके ऊपर आई और अपने मां की कमर के दोनों और पेअर करके नीचे बैठी और उनका लुंड अपनी छूट के द्वार पर लगा कर बैठ गयी,

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह माअम्माह्ह्हह्ह तुम्हारा लुंड बड़ा मज़ेदार है यार,

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह पर तेरी छूट से मज़ेदार नहीं अह्ह्ह, क्या मस्त मखमली छूट है तेरी.

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह अब अपनी बिटिया को सवारी करने दोऊ,

ये कहके पूर्वी नीलेश के लुंड पर उछलने लगी, नीलेश तो भांजी की गरम छूट का सुख पाकर वासना के सागर में गोते लगा रहे थे,

और इसी बीच जैसे hi पूर्वी की गति हलकी हुई तो नीलेश ने उसे आगे झुककर उसके दोनों चूतड़ों को थामकर फैलाते हुए नीचे से तगड़े धक्के लगाना शुरू किआ,





पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह माअम्माह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह अब्बब्बब पता आह्हः छलाहाभ्ह्ह की मेरिइइइइ माहहहह ने अपनी भाईईईई से क्यों छुड़वाया सबसे पहली अह्हह्ह्ह्ह,

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तू भी टेरिइइइइइइइइ माहहहह माआहहहह से काम नाहीई हीी किसी भी तरह से.

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह रैंड माँ की चुड़क्कड़ बेटी हूँ मैं मामा,

नीलेश पूर्वी की ये बातें सुनकर और उत्तेजित होकर उसे छोड़ने लगे. उतना hi मज़ा पूर्वी को आ रहा था,

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह अब मैं तुझे कुटिया की तरह छोडूंगा, चल झुक जल्दी से.

पूर्वी ने नीलेश का कहना सुना और तुरंत hi बिस्तर पर अपने हाथों और घुटनो पर झुक कर अपनी गांड नीलेश के आगे कर दी,

नीलेश ने उसके पीछे जगह ली और उसके चूतड़ों को थमते हुए पीछे से लुंड एक बार फिर से उसकी छूट में पेल दिया, और फिर से उसे छोड़ने लगे,





दोनों मांसल चूतड़ों को थामे पूर्वी को छोड़ने में नीलेश को बहुत मज़ा आ रहा था, साथ hi पूर्वी के गांड का अद्भुत दृश्य भी दिख रहा था, इसी का फायदा उठाते हुए कुछ hi पलों में नीलेश ने पूर्वी के गांड के छेड़ पर थूका और फिर अपना अंगूठा उसकी गांड के छेड़ में चलने लगे, पूर्वी के लिए तो दोहरा हमला और मज़ा देने वाला हो गया और वो और तेज़ सिसकने लगी,

नीलेश भी अंगूठे से अपनी भांजी की गांड छोड़ते हुए उसकी छूट में करारे धक्के लगा रहे थे, हर धक्के पर पूर्वी के चूतड़ लहराते जिसे देख उन्हें और मज़ा आता, बचपन में जिस पूर्वी को गॉड में खिलाया था आज उसे hi छोड़ते हुए नीलेश को बड़ी उत्तेजना हो रही थी, जो की उनके धक्कों में भी दिखाई दे रही थी, हर पल बढाती उत्तेजना के साथ धक्के तेज़ हो रहे थे पूर्वी के लिए दोहरा हमला संभालना कठिन होता जा रहा था जिसे वो ज़्यादा देर नहीं सह पाई और अपने मां के लुंड पर झड़ने लगी, पूर्वी के झड़ने से उसकी छूट भी नीलेश के लुंड पर कसने लगी तो नीलेश ने भी खुद के रास को छोड़ दिया और भांजी की छूट में भर दिया, दोनों हांफते हुए एक दुसरे के बगल में लेट गए और एक दुसरे के होंठों को चूमते हुए साँसों को ठीक करने लगे.

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह मां मस्त छोड़ते हो तुम.

नीलेश- तेरे जैसी माल छोड़ने को मिले तो सब ऐसे hi छोड़ेंगे मेरी बिटिया रानी.

पूर्वी- सब का पता नहीं, पर अभी रात बाकी है और मेरे छेड़ भी..

जिसे सुन्नर नीलेश हंसने लगे,

इधर विनीत और सभ्य कमरे से निकले थे तो और आँगन में आये,

सभ्य- विनीत मैं पेशाब करके आती हूँ तू देख इधर उधर.

विनीत- ठीक है मामी.

सभ्य मूतने चली जाती है तो विनीत दुसरे कमरों में झाँकने लगता है, सबसे पहले अपने ताऊजी के कमरे में देखता है तो अलग hi माहौल बना हुआ था. जहाँ उसकी तै को अनुज और शैलेश मिलकर एक साथ छोड़ रहे थे, शैलेश जो की पहले कर्मा के साथ मिलकर शशि को छोड़ रहे थे, झड़ने के बाद पानी पीने रसोई में आये थे, रसोई में पानी पीने के बाद, कमरे से आती हुई आहों का पीछा करते हुए कमरे तक पहुँच गए थे, और दरवाज़ा खोल कर देखा तो अनुज सावित्री के पीछे लेट कर उनकी गांड मार रहा था, दूसरी और विनीत के ताऊजी सूजन सिंह ममता की गांड उसे बिस्तर पर लिटाकर मार रहे थे, सावित्री के बड़े लटकते चुके और भरा बदन देख शैलेश का लुंड ठुमके मारने लगा, और वो खुद को अंदर जाने से और अंदर जाकर सावित्री के आगे अपना लुंड कर दिया जिस पर सावित्री की नज़र जैसे hi पड़ी तो उसने उसे मुँह में भर लिया और चूसने लगी, इसी नज़ारे पर विनीत की नज़र पड़ी कमरे में घुसते hi.





वहीं विनीत ने फिर दूसरी और देखा तो पाया उसकी ममता मामी बिस्तर पर पीठ पर लेती हुई है और उसके ताऊजी ममता की टांगों के बीच हैं और अपना लुंड ममता की गांड में चला रहे हैं, विनीत उन्हें देख hi रहा था की ममता की नज़र भी उस पर पद गयी.

ममता- अह्ह्ह बाबू अह्हह्ह्ह्ह खड़े का हो इधर आओ अपनी मामी के पास..

अब विनीत ऐसे निमंत्रण को कैसे ठुकराता तो वो आगे बाद गया, ममता के पास जाते hi ममता ने उसके लुंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी,

विनीत- अह्हह्ह्ह्ह बड़ी गरम हैं न मामी ताऊजी?

विनीत ने अपने ताऊजी से कहा जो की बड़ी सावधानी और आनंद से ममता की गांड में लुंड पिरो रहे थे,

सूजन सिंह - अह्हह्ह्ह्ह सहिई कहा बेटाः तेरी ममता मामी की गांड तो मानो बिलकुल जलती हुई भट्टी है अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है.

ममता का मुँह तो विनीत के लुंड से बंद था पर उसकी घुटी हुई आहें सुनाई दे रही थी, दोनों ताऊ भतीजे मिलकर ख़ुशी दे ममता जैसी गदराई औरत को भोगने लगे,





विनीत- अह्हह्ह्ह्ह शैलेश मां तुम तो शायद मम्मी के साथ थे न.

विनीत ने ममता का मुँह छोड़ते हुए पूछा,

शैलेश- हाँ मैं और कर्मा दोनों तेरी मम्मी को छोड़ रहे थे बीटा, मैं तो रसोई में पानी पीने आया था फिर यहाँ की आवाज़ें सुनी तो यहाँ आ गया,

सूजन सिंह- सही किआ शैलेश बाबू, कैसी लग रही है हमारी बीवी?

शैलेश- बहुत मस्त और गदराई हुई हैं, अह्हह्ह्ह्ह इतना गरम मुँह है,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह मौसा एक बार बड़ी बुआ की गांड मार के देखो मुँह की गर्मी भूल जाओगे.

शैलेश- आजा फिर गांड का भी स्वाद चख लेता हूँ.

दोनों ने फिर जल्दी hi आसान बदले और अनुज ने सावित्री को अपने ऊपर लिए और अपने लुंड को सावित्री की छूट पर टिकाया और सावित्री ने नीचे होकर उसे छूट में भर लिया, वहीँ शैलेश ने तुरंत सावित्री के पीछे जगह ली और अपना लुंड उसकी गांड के छेड़ में फंसा दिया,

जिसके साथ hi सावित्री की आह्हः निकल गयी, शैलेश और अनुज धीरे धीरे ले बनाकर सावित्री की दोहरी चुदाई करने लगे,

सावित्री की दोहरी चुदाई देख ममता ने भी विनीत का लुंड मुँह से निकला और बोली- अह्ह्ह अब मुझे भी दोनों एक साथ छूट और गांड में चाहिए.

विनीत- तुम्हारी इच्छा सर आँखों पर मामी, ताऊजी ज़रा आसान बदलना तो,

सूजन सिंह- अहह आजा अब तू गांड मार अपनी मामी की मैं छूट मारूंगा,

ये कहते हुए सूजन ने अपना लुंड ममता की गांड से निकल लिया,

विनीत- ठीक है, आ जाओ मामी.

विनीत ये कहते हुए बिस्तर पर लेट गया तो ममता ने विनीत के ऊपर आकर उसका लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी, लुंड गांड में घुसते hi सूजन सिंह ने उसके पैरों के बीच जगह ली और अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, और दोनों ताऊजी और भतीजा धीरे धीरे ले बनाने लगे ममता की दोहरी चुदाई की, और उसे दोनों और से छोड़ने लगे,





ममता भी हर झटके पर आहें भरते हुए चिल्ला कर उनका उत्साह बढ़ने लगी,


जारी रहेगी.
 
Back
Top